MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति

कार्य, ऊर्जा और शक्ति अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 6.1.
किसी वस्तु पर किसी बल द्वारा किए गए कार्य का चिह्न समझना महत्वपूर्ण है। सावधानीपूर्वक बताइए कि निम्नलिखित राशियाँ धनात्मक हैं या ऋणात्मक:

  1. किसी व्यक्ति द्वारा किसी कुएँ में से रस्सी से बँधी बाल्टी को रस्सी द्वारा बाहर निकालने में किया गया कार्य।
  2. उपर्युक्त स्थिति में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य।
  3. किसी आनत तल पर फिसलती हुई किसी वस्तु पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य।
  4. किसी खुरदरे क्षैतिज तल पर एकसमान वेग से गतिमान किसी वस्तु पर लगाए गए बल द्वारा किया गया कार्य।
  5. किसी दोलायमान लोलक को विरामावस्था में लाने के लिए वायु के प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य।

उत्तर:

  1. चूँकि रस्सी का विस्थापन तथा मनुष्य द्वारा लगाया गया बल दोनों ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर दिष्ट हैं। अत: कार्य धनात्मक होगा।
  2. चूँकि गुरुत्वीय बल व बाल्टी का विस्थापन विपरीत दिशा में है। अतः गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।
  3. चूँकि घर्षण बल व बाल्टी का विस्थापन विपरीत दिशा में है। अतः घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।
  4. चूँकि वस्तु पर लगाया गया बल, वस्तु की गति की दिशा में है। अतः कृतं कार्य धनात्मक होगा।
  5. चूँकि वायु का प्रतिरोधी बल सदैव गति के विपरीत दिशा में है अतः कार्य ऋणात्मक होगा।

प्रश्न 6.2.
2 kg द्रव्यमान की कोई वस्तु जो आरंभ में विरामावस्था में है,7N के किसी क्षैतिज बल के प्रभाव से एक मेज पर गति करती है। मेज का गतिज – घर्षण गुणांक 0.1 है। निम्नलिखित का परिकलन कीजिए और अपने परिणामों की व्याख्या कीजिए।

  1. लगाए गए बल द्वारा 10s में किया गया कार्य।
  2. घर्षण द्वारा 10 s में किया गया कार्य।
  3. वस्तु पर कुल बल द्वारा 10 s में किया गया कार्य।
  4. वस्तु की गतिज ऊर्जा में 10s में परिवर्तन।

उत्तर:
दिया है: बल, F = 7 न्यूटन,
m = 2 किग्रा, µ = 0, µk = 0.1
चूँकि गति क्षैतिज मेज पर हो रही है।
अतः घर्षण बल, µkR = µkmg
= 0.1 x 2 x 10 = 2 न्यूटन
अतः पिण्ड पर गति की दिशा में नेट बल,
F1 = F – µkN
= 7 – 2 = 5 न्यूटन
सूत्र F1 = ma से,
त्वरण, a = \(\frac { F_{ 1 } }{ m } \) = \(\frac{5}{2}\)
= 2.5 मीटर/सेकण्डर
अतः 10 सेकण्ड में चली दूरी,
सूत्र S = ut + \(\frac{1}{2}\)at2 से,
S = 0 x 10 + \(\frac{1}{2}\) x 2.5 x 102
= 125 मीटर

1. आरोपित बल द्वारा 10 सेकण्ड में किया गया कार्य,
w1 = F.S cos 0°
= 7 x 125 = 875 जूल

2. घर्षण बल द्वारा 10 सेकण्ड में किया गया कार्य,
w2 = – (µkR).S
= – 2 x 25 = – 250 जूल
चूँकि विस्थापन घर्षण बल के विरुद्ध है। इसी कारण यह कार्य ऋणात्मक है।

3. सम्पूर्ण बल द्वारा कृत कार्य,
W = सम्पूर्ण बल x कुल विस्थापन
= 5 x 125 = 625 न्यूटन

4. कार्य ऊर्जा प्रमेय से,
गतिज ऊर्जा में परिवर्तन,
∆K = सम्पूर्ण बल द्वारा किया गया कार्य
= 625 न्यूटन
यहाँ गतिज ऊर्जा में कुल परिवर्तन बाह्य बल द्वारा किए गए कार्य से कम है। इसका कारण यह है कि बाह्य बल द्वारा किए गए कार्य का कुछ भाग घर्षण प्रभाव को समाप्त करने में कम होता है।

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प्रश्न 6.3.
चित्र में कुछ एकविमीय स्थितिज ऊर्जा – फलनों के उदाहरण दिए गए हैं। कण की कुल ऊर्जा कोटि – अक्ष पर क्रॉस द्वारा निर्देशित की गई है। प्रत्येक स्थिति में, कोई ऐसे क्षेत्र बताइए, यदि कोई हैं तो जिनमें दी गई ऊर्जा के लिए, कण को नहीं पाया जा सकता। इसके अतिरिक्त, कण की कुल न्यूनतम ऊर्जा भी निर्देशित कीजिए। कुछ ऐसे भौतिक सन्दर्भो के विषय में सोचिए जिनके लिए ये स्थितिज ऊर्जा आकृतियाँ प्रासंगिक हों।
उत्तर:
∴ KE. + P.E. = E (constant)
∴ K.E. = E – P.E.
1. इस ग्राफ में x < a के लिए स्थितिज ऊर्जा कुल ऊर्जा से अधिक है; अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक हो जाएगी जो कि असम्भव है।
अतः कण x > a क्षेत्र में नहीं पाया जा सकता।

2. इस ग्राफ से स्पष्ट है कि प्रत्येक स्थान पर P.E. > E
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी जो कि असम्भव है; अतः कण को कहीं भी नहीं पाया जा सकता।

3. 0 E अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी; अतः कण को इन क्षेत्रों में नहीं पाया जा सकता।

4. \(\frac{-b}{2}\) <  x  <  \(\frac{-a}{2}\) <  x  < \(\frac{b}{2}\)
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी इसलिए कण इन क्षेत्रों में नहीं पाया जा सकता।

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प्रश्न 6.4.
रेखीय सरल आवर्त गति कर रहे किसी कण का स्थितिज ऊर्जा फलन V(x) = kx2/2 है, जहाँ k दोलक का बल नियतांक है। k = 0.5 Nm-1 के लिए V(x) व x के मध्य ग्राफ चित्र में दिखाया गया है। यह दिखाइए कि इस विभव के अंतर्गत गतिमान कुल 1 J ऊर्जा वाले कण को अवश्य ही ‘वापिस आना’ चाहिए जब यह x = + 2 m पर पहुँचता है।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 5
उत्तर:
हम जानते हैं कि,
E = KE + PE
∴ E = \(\frac{1}{2}\) mv 2 + \(\frac{1}{2}\)kx 2
[∴ PE = v(x) = \(\frac { kx^{ 2 } }{ 2 } \)
कण उस स्थिति x =xn से लौटना शुरू करेगा जबकि कण की गतिज ऊर्जा शून्य होगी।
इस प्रकार \(\frac{1}{2}\) mv 2 = 0 तथा x = xm पर,
E = \(\frac{1}{2}\) kx2m
दिया है:
E = 1 जूल व k = 0.5 न्यूटन/मीटर
∴ 1 = \(\frac{1}{2}\) × 0.5 × x2m
था \(x^{ 2 }m\) = \(\frac{2}{0.5}\)
= 4
∴ xm = ± 2 मीटर
इस प्रकार कण x = ± 2 मीटर पर पहुँचने पर ही वहाँ से वापस लौटना प्रारम्भ करता है।

प्रश्न 6.5.
निम्नलिखित का उत्तर दीजिए:
1. किसी रॉकेट का बाह्य आवरण उड़ान के दौरान घर्षण के कारण जल जाता है। जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा किसके व्यय पर प्राप्त की गई – रॉकेट या वातावरण?

2. धूमकेतु सूर्य के चारों ओर बहुत ही दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में घूमते हैं। साधारणतया धूमकेतु पर सूर्य का गुरुत्वीय बल धूमकेतु के लंबवत् नहीं होता है। फिर भी धूमकेतु की संपूर्ण कक्षा में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है। क्यों?

3. पृथ्वी के चारों ओर बहुत ही क्षीण वायुमण्डल में घूमते हुए किसी कृत्रिम उपग्रह की ऊर्जा धीरे – धीरे वायुमण्डलीय प्रतिरोध (चाहे यह कितना ही कम क्यों न हो) के विरुद्ध क्षय के कारण कम होती जाती है फिर भी जैसे – जैसे कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के समीप आता है तो उसकी चाल में लगातार वृद्धि क्यों होती है?

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 6

4. चित्र

  1. में एक व्यक्ति अपने हाथों में 15 kg का कोई द्रव्यमान लेकर 2 m चलता है।
  2. चित्र में वह उतनी ही दूरी अपने पीछे रस्सी को खींचते हुए चलता है। रस्सी घिरनी पर चढ़ी हुई है और उसके दूसरे सिरे पर 15 kg का द्रव्यमान लटका हुआ है। परिकलन कीजिए कि किस स्थिति में किया गया कार्य अधिक है?

उत्तर:
1. बाहरी आवरण के जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा रॉकेट की यान्त्रिक ऊर्जा से प्राप्त होती है।

2. धूमकेतु पर सूर्य द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल एक संरक्षी बल है। संरक्षी बल के द्वारा बन्द पथ में गति करने वाले पिण्ड पर किया गया नेट कार्य शून्य होता है। इस प्रकार धूमकेतु की सम्पूर्ण कक्षा में सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा।

3. जैसे – 2 उपग्रह पृथ्वी के समीप आता है वैसे – 2 उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कम होती है। ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती रहती है। अतः उसकी चाल बढ़ती जाती है। कुल ऊर्जा का कुछ भाग घर्षण बल के विरुद्ध कार्य करने में खर्च हो जाता है।

4. चित्र (i) में स्थिति में, व्यक्ति द्रव्यमान को उठाए रखने के लिए भार के विरुद्ध ऊपर की ओर बल लगाता है जबकि उसका विस्थापन क्षैतिज दिशा में है (i.e., 0 = 90) अतः मनुष्य द्वारा किया गया कार्य, W = Fs cos 90° = 0
चित्र (ii) स्थिति में, घिरनी मनुष्य द्वारा लगाए गए क्षैतिज बल की दिशा को ऊर्ध्वाधर कर देती है व द्रव्यमान का विस्थापन भी ऊपर की ओर है (i.e., θ = 0°)
अतः मनुष्य द्वारा किया गया कार्य,
W = mgh cos 0°
= 15 x 20 x 2 = 300 जूल।

प्रश्न 6.6.
सही विकल्प को रेखांकित कीजिए:

  1. जब कोई संरक्षी बल किसी वस्तु पर धनात्मक कार्य करता है तो वस्तु की स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है/घटती है/अपरिवर्ती रहती है।
  2. किसी वस्तु द्वारा घर्षण के विरुद्ध किए गए कार्य का परिणाम हमेशा इसकी गतिज/स्थितिज ऊर्जा में क्षय होता है।
  3. किसी बहुकण निकाय के कुल संवेग-परिवर्तन की दर निकाय के बाह्य बल/आंतरिक बलों के जोड़ के अनुक्रमानुपाती होती है।
  4. किन्हीं दो पिंडों के अप्रत्यास्थ संघट्ट में वे राशियाँ, जो संघट्ट के बाद नहीं बदलती हैं; निकाय की कुल गतिज ऊर्जा/कुल रेखीय संवेग/कुल ऊर्जा हैं।

उत्तर:

  1. घटती है, चूँकि संरक्षी बल के विरुद्ध किया गया कार्य ही स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है।
  2. गतिज ऊर्जा, चूँकि घर्षण के विरुद्ध कार्य तभी होता है जबकि गति हो रही है।
  3. बाह्य बल, चूँकि बहुकण निकाय में, आन्तरिक बलों का परिणामी शून्य होता है एवम् आन्तरिक बल संवेग परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं होते हैं।
  4. कुल रेखीय संवेग तथा कुल ऊर्जा भी जबकि दो पिंडों का निकास वियुक्त है।

प्रश्न 6.7.
बतलाइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य। अपने उत्तर के लिए कारण भी दीजिए।

  1. किन्हीं दो पिंडों के प्रत्यास्थ संघट्ट में, प्रत्येक पिंड का संवेग व ऊर्जा संरक्षित रहती है।
  2. किसी पिंड पर चाहे कोई भी आंतरिक व बाह्य बल क्यों न लग रहा हो, निकाय की कुल ऊर्जा सर्वदा संरक्षित रहती है।
  3. प्रकृति में प्रत्येक बल के लिए किसी बंद लूप में, किसी पिंड की गति में किया गया कार्य शून्य होता है।
  4. किसी अप्रत्यास्थ संघट्ट में, किसी निकाय की अंतिम गतिज ऊर्जा, आरंभिक गतिज ऊर्जा से हमेशा कम होती है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य।

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प्रश्न 6.8.
निम्नलिखित का उत्तर ध्यानपूर्वक, कारण सहित दीजिए:

  1. किन्हीं दो बिलियर्ड-गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट में, क्या गेंदों के संघट्ट की अल्पावधि में (जब वे संपर्क में होती है) कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है?
  2. दो गेंदों के किसी प्रत्यास्थ संघट्ट की लघु अवधि में क्या कुल रेखीय संवेग संरक्षित रहता है?
  3. किसी अप्रत्यास्थ संघट्ट के लिए प्रश्न (a) व (b) के लिए आपके उत्तर क्या हैं?
  4. यदि दो बिलियर्ड – गेंदों की स्थितिज ऊर्जा केवल उनके केंद्रों के मध्य, पृथक्करण-दूरी पर निर्भर करती है तो संघट्ट प्रत्यास्थ होगा या अप्रत्यास्थ? (ध्यान दीजिए कि यहाँ हम संघट्ट के दौरान बल के संगत स्थितिज ऊर्जा की बात कर रहे हैं, ना कि गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा की)

उत्तर:

  1. नहीं, चूँकि संघट्ट काल के दौरान गेंद सम्पीडित हो जाती है। अतः गतिज ऊर्जा, गेंदों की स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
  2. हाँ, संवेग संरक्षित रहता है।
  3. हाँ, दोनों उत्तर उपर्युक्त ही रहेंगे।
  4. चूँकि स्थितिज ऊर्जा केन्द्रों के मध्य दूरी पर निर्भर करती है इसका तात्पर्य यह है कि संघट्ट काल में पिंडों के मध्य लगने वाला संरक्षी बल है। अतः ऊर्जा संरक्षित रहेगी। अतः प्रत्यास्थ संघट्ट होगा।

प्रश्न 6.9.
कोई पिंड जो विरामावस्था में है, अचर त्वरण से एकविमीय गति करता है। इसको किसी । समय पर दी गई शक्ति अनुक्रमानुपाती है।

  1. t1/2
  2. t
  3. t3/2
  4.  t2

उत्तर:
a = नियत, µ =0
∴ बल = ma, अचर होगा तथा = at होगा।
∴ शक्ति P = Fv = ma. at = ma2
∴ P ∝ t
अतः विकल्प (ii) सत्य है।

प्रश्न 6.10.
एक पिंड अचर शक्ति के स्त्रोत के प्रभाव में एक ही दिशा में गतिमान है। इसका t समय में विस्थापन, अनुक्रमानुपाती है।

  1. t1/2
  2. t
  3. t3/2
  4. t2

उत्तर:
शक्ति P = Fv अचर है।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 7
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 7 -1

प्रश्न 6.11.
किसी पिंड पर नियत बल लगाकर उसे किसी निर्देशांक प्रणाली के अनुसार z – अक्ष के अनुदिश गति करने के लिए बाध्य किया गया है जो इस प्रकार है –
F = (\(\hat { -i } \) + 2\(\hat { j } \)+ 3\(\hat { k } \)) न्यूटन
चूँकि विस्थापन z – अक्ष के अनुदिश है। अतः \(\vec { s } \) = 4k मीटर
∴ बल द्वारा किया गया कार्य, W = \(\overline { F } .\hat { S } \quad \)
= (- \(\hat { -i } \) + 2 \(\hat { j } \) + 3 \(\hat { k } \) . (4\(\hat { k } \))
= 12 जूल [∴\(\hat { j } \) . \(\hat { k } \) = 0 व \(\hat { k } \) \(\hat { k } \) =1 इत्यादि]

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प्रश्न 6.12.
किसी अंतरिक्ष किरण प्रयोग में एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन का संसूचन होता है जिसमें पहले कण की गतिज ऊर्जा 10 kev है और दूसरे कण की गतिज ऊर्जा 100 kev है। इनमें कौन – सा तीव्रगामी है, इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन? इनकी चालों का अनुपात ज्ञात कीजिए। (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.11 x 10-31 kg, प्रोटॉन का द्रव्यमान = 1.67 x 10-27 1eV = 1.60 x 10-19) जूल
उत्तर:
दिया है: इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान me = 9.11 x 10-31 किग्रा,
प्रोटॉन का द्रव्यमान mp = 1.67 x 10-27 किग्रा,
1eV = 1.6 x 10-19 जूल
प्रोटॉन की गतिज ऊर्जा,
Kp = 100 KeV = 105 eV
= 10 5 x 1.6 x 10-19 J
इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा
Ke = 10 keV = 104eV
= 104 x 1.6 x 10-19 J
माना कि प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन की चाल क्रमशः
vp व ve हैं।
सूत्र गतिज ऊर्जा, K = \(\frac { 1 }{ 2 }\) mv2 से,
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img t

प्रश्न 6.13.
2 mm त्रिज्या की वर्षा की कोई बूंद 500 m की ऊँचाई से पृथ्वी पर गिरती है। यह अपनी आरंभिक ऊँचाई के आधे हिस्से तक (वायु के श्यान प्रतिरोध के कारण) घटते त्वरण के साथ गिरती है और अपनी अधिकतम (सीमान्त) चाल प्राप्त कर लेती है, और उसके बाद एकसमान चाल से गति करती है। वर्षा की बूंद पर उसकी यात्रा के पहले व दूसरे अर्ध भागों में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा? यदि बूंद की चाल पृथ्वी तक पहुँचने पर 10 ms-1 हो तो संपूर्ण यात्रा में प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
दिया है: वर्षा की बूंद की त्रिज्या, r = 2 मिमी
= 2 x 10-3 मीटर,
प्रारम्भिक ऊँचाईं, h = 500 मीटर
प्रारम्भिक चाल, u =0 पृथ्वी तल पर बूंद की चाल, v = 10 मीटर/सेकण्ड
त्वरण, 8 = 9.8 मीटर/सेकण्ड2
जल का घनत्व ρ = 103 किग्रा प्रति मीटर 3
बूंद का द्रव्यमान, m = (\(\frac{4}{3}\) πr 3) x (ρ)
= \(\frac{4}{3}\) x \(\frac{22}{7}\) x (2 x 10 -3)3 x 10 3
= 3.35 x 10 -5 किग्रा
बूंद पर गुरुत्वीय बल,
F1 = mg = 3.35 x 10-5 x 9.8
= 3.28 x 10-4 न्यूटन
यात्रा के दोनों अर्धभाग समान हैं।
∴ h1 = h2 = \(\frac{h}{2}\)
= 250 मीटर
यात्रा के इन भागों में गुरुत्वीय बल द्वारा कृत कार्य,
W1 = W2 = mgh1
= (3.28×10-4) x 250 = 0.082 जूल
वर्षा की बूँद की गतिज ऊर्जा में कुल वृद्धि,
∆K = K2 – K1
= 1 x 3.35 x 10-5 x (10)2 – 0
= 0.001 जूल
गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कुल कार्य,
Wg = W1 + W2
= 0.082 + 0.082 = 0.164 जूल

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प्रश्न 6.14.
किसी गैस – पात्र में कोई अणु 200 ms-1 की चाल से अभिलंब के साथ 30° का कोण बनाता हुआ क्षैतिज दीवार से टकराकर पुन: उसी चाल से वापस लौट जाता है। क्या इस संघट्ट में संवेग संरक्षित है? यह संघट्ट प्रत्यास्थ है या अप्रत्यास्थ?
उत्तर:
दिया है: θ = 30°, u = 200 मीटर प्रति सेकण्ड दीवार से संघट्ट के बाद चाल,
v = u = 200 मीटर प्रति सेकण्ड
चूँकि प्रत्येक संघट्ट में भी संवेग संरक्षित रहता है। अतः इस संघट्ट में भी संवेग संरक्षित रहता है।
माना अणु का द्रव्यमान m है।
अतः दीवार से टकराते समय निकाय की गतिज ऊर्जा,
K 1 = \(\frac{1}{2}\) mu2 =\(\frac{1}{2}\) m (200) 2 जूल
एवम् संघट्ट के बाद गतिज ऊर्जा,
K2 = \(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) m (200)2 जूल
∴ K1 = K2
अतः यह एक प्रत्यास्थ संघट्ट है।

प्रश्न 6.15.
किसी भवन के भूतल पर लगा कोई पंप 30 m3 आयतन की पानी की टंकी को 15 मिनट में भर देता है। यदि टंकी पृथ्वी तल से 40 m ऊपर हो और पंप की दक्षता 30% हो तो पंप द्वारा कितनी विद्युत शक्ति का उपयोग किया गया?
उत्तर:
दिया है: टंकी की ऊँचाई, h = 40 मीटर
टंकी का आयतन, V = 30 मीटर3
लगा समय, t = 15 मिनट = 15 x 60 सेकण्ड, पम्प की दक्षता, n=30%
जल का घनत्व, ρ = 103 किग्रा प्रति मीटर 3
उठाए गए जल का द्रव्यमान,
m = V x p = 30 x 103
= 3 x 104 किग्रा
पम्प द्वारा टंकी भरने में खर्च की गई शक्ति,
P0 = \(\frac{ω}{t}\) = \(\frac{mgh}{t}\)
= \(\frac { 3\times 10^{ 4 }\times 9.8\times 40 }{ 1.5\times 60 } \)
= 13066 वॉट
माना पम्प द्वारा उपयोग की गई शक्ति P1 है।
∴η = \(\frac { P_{ 0 } }{ P_{ 1 } } \) x 100
या
P1 = \(\frac { P_{ 0 } }{ { η } } \)
= \(\frac{13066}{30}\) x 100
= 43553 वॉट
= 43.55 किलो वॉट।

प्रश्न 6.16.
दो समरूपी बॉल बियरिंग एक – दूसरे के सम्पर्क में हैं और किसी घर्षणरहित मेज पर विरामावस्था में हैं। इनके साथ समान द्रव्यमान का कोई दूसरा बाल बियरिंग, जो आरंभ में V चाल से गतिमान है, सम्मुख संघट्ट करता है। यदि संघट्ट प्रत्यास्थ है तो संघट्ट के पश्चात् निम्नलिखित (चित्र) में कौन-सा परिणाम संभव है?
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 9
उत्तर:
माना प्रत्येक बॉल बियरिंग का द्रव्यमान m है। अतः संघट्ट से पूर्व निकाय की गतिज ऊर्जा,
K1 = \(\frac{1}{2}\) mv2 + 0 + 0 = \(\frac{1}{2}\) mv2
प्रथम स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की गतिज ऊर्जा,
K2 = 0 + \(\frac{1}{2}\) (m + m) (\(\frac{V}{2}\)2)
= \(\frac{1}{2}\) x 2m x \(\frac { V^{ 2 } }{ 4 } \)
= \(\frac{1}{2}\)mv2
अतः k 1 > K2
द्वितीय स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की कुल ऊर्जा,
K2 = 0 + 0 + \(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) mv2
अतः K1 = K2
तृतीय स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की गतिज ऊर्जा,
K2 = \(\frac{1}{2}\) (m + m + m) (\(\frac{V}{3}\)2)
= \(\frac{1}{2}\) x 3m x \(\frac { v^{ 2 } }{ 9 } \)
= \(\frac{1}{6}\) mv2
अतः K1 & gt; K2
प्रश्नानुसार संघट्ट प्रत्यास्थ है। अतः निकाय की गतिज ऊर्जा संरक्षित रहेगी। चूँकि केवल द्वितीय स्थिति में ही गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है अर्थात् केवल यही परिणाम सम्भव होगा।

प्रश्न 6.17.
किसी लोलक के गोलकA को, जो ऊर्ध्वाधर से 30° का कोण बनाता है, छोड़े जाने पर मेज पर, विरामावस्था में रखे दूसरे गोलक B से टकराता है जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है। ज्ञात कीजिए कि संघट्ट के पश्चात् गोलक A कितना ऊँचा उठता है? गोलकों के आकारों की उपेक्षा कीजिए और मान लीजिए कि संघट्ट प्रत्यास्थ है।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 10
उत्तर:
दोनों गोलक समरूप हैं तथा संघट्ट प्रत्यास्थ है; अतः संघट्ट के दौरान लटका हुआ गोलक अपना सम्पूर्ण संवेग नीचे रखे गोलक को दे देता है और जरा भी ऊपर नहीं उठता।

प्रश्न 6.18.
किसी लोलक के गोलक को क्षैतिज अवस्था से छोड़ा गया है। यदि लोलक की लंबाई 1.5 m है तो निम्नतम बिंदु पर, आने पर गोलक की चाल क्या होगी? यह दिया गया है कि इसकी आरंभिक ऊर्जा का 5% अंश वायु प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय हो जाता है।
उत्तर:
निम्नतम बिन्दु P पर, लोलक में केवल स्थितिज ऊर्जा है। बिन्दु B पर, लोलक में केवल गतिज ऊर्जा है। इका अर्थ है कि जब लोलक P से Q पर पहुँचता है, तब स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
अतः बिन्दु Q पर KE = PEV
लेकिन 5% स्थितिज ऊर्जा, वायु प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय हो जाती है।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 11
∴ Q पर गतिज ऊर्जा
= P पर स्थितिज ऊर्जा का 95%
माना लोलक का द्रव्यमान = m
बिन्दु Q पर लोलक की चाल = v
तथा बिन्दु P की Q के सापेक्ष ऊँचाई = h =1.5 मीटर
∴ समी० (1) से,
\(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{95}{100}\) x mgh
अथवा
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 12
= 5.29 मीटर/सेकण्ड
v = 5.3 मीटर।

प्रश्न 6.19.
300 kg द्रव्यमान की कोई ट्राली, 25 kg रेत का बोरा लिए हुए किसी घर्षणरहित पथ पर 27 km h-1 की एकसमान चाल से गतिमान है। कुछ समय पश्चात् बोरे में किसी छिद्र से रेत 0.05 kgs-1 की दर से निकलकर ट्राली के फर्श पर रिसने लगती है। रेत का बोरा खाली होने के पश्चात् ट्रॉली की चाल क्या होगी?
उत्तर:
चूँकि वेग एक समान है व ट्रॉली व रेत का बोरा एक ही निकाय के अंग हैं जिस पर कोई बाह्य बल नहीं लगा है अतः निकाय का रेखीय संवेग नियत रहेगा भले ही निकाय में किसी भी तरह का आन्तरिक परिवर्तन क्यों न हो जाए। इस प्रकार ट्रॉली की चाल 27 किमी प्रति घण्टा ही बनी रहेगी।

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प्रश्न 6.20.
0.5 kg द्रव्यमान का एक कण v = ax2 वेग से सरल रेखीय गति करता है जहाँ a = 5m-1/2s-1 है। x = 0 से x = 2m तक इसके विस्थापन में कुल बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
दिया है: m = 0.5 किग्रा
v = ax3/2
a = 5m-1/2 प्रति सेकण्ड
माना वस्तु पर F बल से d त्वरण उत्पन्न होता है।
∴ F = ma’ = \(\frac{mdv}{dt}\)
∴ माना वस्तु को dx दूरी विस्थापित करने पर किया गया कार्य dw है।
∴ dw = F.dx = m\(\frac{dv}{dt}\).dx
= m.dv.\(\frac{dx}{dt}\) = mvdv
माना वस्तु को x =0 से x = 2 मीटर तक चलाने में किया गया कुल कार्य w है।
∴ समी० (1) से,
W = \(\int { dw } \) = \(\int { mvdv } \)
= \(\frac { mv^{ 2 } }{ 2 } \) = \(\frac { m(ax^{ 3/2 })^{ 2 } }{ 2 } \)
= \(\frac{1}{2}\) ma2x3
= \(\frac{1}{2}\) x 0.5 x 52 x 23
= 50 जूल।

प्रश्न 6.21.
किसी पवनचक्की के ब्लेड, क्षेत्रफल A के वृत्त जितना क्षेत्रफल प्रसर्प करते हैं। (a) यदि हवा वेग से वृत्त के लंबवत् दिशा में बहती है तो t समय में इससे गुजरने वाली वायु का द्रव्यमान क्या होगा? (b) वायु की गतिज ऊर्जा क्या होगी? (c) मान लीजिए कि पवनचक्की हवा की 25% ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित कर देती है यदि A = 30 m2, और v = 36 kmh-1 और वायु का घनत्व 1.2 kgm-3 है तो उत्पन्न विद्युत शक्ति का परिकलन कीजिए।
उत्तर:
दिया है: वायु का घनत्व, ρ = 1.2 किग्रा प्रति मीटर3, वायु का वेग, v = 36 किमी/घण्टा
= 36 x \(\frac{5}{18}\) = 10 मीटर/सेकण्ड
= 30 मीटर2, समय, t = ?

(a) समय में वृत्त से प्रवाहित वायु का आयतन,
V = A x vt
वृत्त से प्रवाहित वायु का द्रव्यमान,
m = vρ = Avtρ

(b) इस वायु की गतिज ऊर्जा,
K = \(\frac{1}{2}\)mv2
= \(\frac{1}{2}\) (Avtρ)v3
= \(\frac{1}{2}\) ρAv2t

(c) इस समय में पवन चक्की द्वारा उत्पन्न विद्युत ऊर्जा, E = वायु की गतिज ऊर्जा का 25%
= (\(\frac{1}{2}\) Aρv3t) x \(\frac{25}{100}\) = \(\frac{1}{8}\) Aρv3t
अतः इस ऊर्जा द्वारा उत्पन्न विद्युत शक्ति,
P = \(\frac{E}{t}\)
= \(\frac{1}{8}\) Aρv3
= \(\frac{1}{8}\) x 30 x 1.2 x 103
= 4.5 किलोवॉट

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प्रश्न 6.22.
कोई व्यक्ति वजन कम करने के लिए 10 kg द्रव्यमान को 0.5 m की ऊँचाई तक 1000 बार उठाता है। मान लीजिए कि प्रत्येक बार द्रव्यमान को नीचे लाने में खोई हुई ऊर्जा क्षयित हो जाती है। (a) वह गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कितना कार्य करता है? (b) यदि वसा 3.8x 107 J ऊर्जा प्रति किलोग्राम आपूर्ति करता हो जो कि 20% दक्षता की दर से यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है तो वह कितनी क्सा खर्च कर डालेगा?
उत्तर:
दिया है: m=10 किग्रा, h = 0.5 मीटर
द्रव्यमान को उठाया गया, n = 1000 बार

(a) 10 किग्रा के द्रव्यमान को 1000 बार उठाने में किया गया कार्य,
W = n x mgh = 1000 x 10 x 9.8 x 0.5
= 49000 = 49 किलो जूल

(b) 1 किग्रा वसा द्वारा प्रदत्त यान्त्रिक ऊर्जा
= 3.8 x 107 जूल का 20%
= 3.8 x 107 x \(\frac{20}{100}\)
= \(\frac{3.8}{5}\) x 107 जूल
इसलिए (\(\frac{3.8}{5}\) x 107) जूल ऊर्जा मिलती है = 1 किग्रा वसा से,
∴ 1 जूल ऊर्जा मिलती है = \(\frac { 5 }{ 3.8\times 10^{ 7 } } [latex] x 49000 किग्रा वसा से,
= 6.45 x 10 -3 किग्रा वसा से

प्रश्न 6.23.
कोई परिवार 8 kW विद्युत – शक्ति का उपभोग करता है। (a) किसी क्षैतिज सतह पर सीधे आपतित होने वाली सौर ऊर्जा की औसत दर 200 Wm-2 है। यदि इस ऊर्जा का 20% भाग लाभदायक विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित किया जा सकता है तो 8 KW की विद्युत आपूर्ति के लिए कितने क्षेत्रफल की आवश्यकता होगी? (b) इस क्षेत्रफल की तुलना किसी विशिष्ट भवन की छत के क्षेत्रफल से कीजिए।
उत्तर:
दिया है: उपभोग की गई विद्युत शक्ति = 8 KW
(a) सौर ऊर्जा की औसत दर = 200 वॉट/मीटर2
उपयोगी विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरण दर = 20%
8 किलो वॉट के लिए आवश्यक क्षे० = ?
प्रति वर्ग मीटर क्षेत्रफल से प्राप्त उपयोगी विद्युत शक्ति
= 200 वॉट का 20%
= 200 x 20 = 40 वॉट
इसलिए 40 वॉट उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है = 1 मी क्षेत्रफल से।
∴ 1 वॉट उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है
= [latex]\frac{1}{40}\)
= क्षेत्रफल से
∴ 8 kw उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है
= \(\frac{1}{40}\) x 8 x 1000 क्षेत्रफल से।

(b) इस क्षेत्रफल की तुलना जटिल घर की छत से करने के लिए माना छत की भुजा a है।
∴ छत का क्षेत्रफल = a x a = a2
∴ a2 = 200
a = \(\sqrt { 200 } \) = 14.14 मीटर
=14 मीटर
अर्थात् आवश्यक क्षेत्रफल 14 मीटर x 14 मीटर आकार के भवन की छत के क्षेत्रफल के समतुल्य है।

कार्य, ऊर्जा और शक्ति अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 6.24.
0.012 kg द्रव्यमान की कोई गोली 70 ms-1 की क्षैतिज चाल से चलते हुए 0.4 kg द्रव्यमान के लकड़ी के गुटके से टकराकर गुटके के सापेक्ष तुरंत ही विरामावस्था में आ जाती है। गुटके को छत से पतली तारों द्वारा लटकाया गया है। परिकलन कीजिए कि गुटका किस ऊँचाई तक ऊपर उठता है? गुटके में पैदा हुई ऊष्मा की मात्रा का भी अनुमान लगाइए।
उत्तर:
दिया है:
गोली का द्रव्यमान, m = 0.012 किग्रा,
गोली की प्रा० चाल, u =70 मीटर/सेकण्ड
गोली की अन्तिम चाल v = 0
लकड़ी के गुटके का द्रव्यमान, m = 0.4 किग्रा
लकड़ी के गुटके की प्रा० चाल, u1 = 0
माना कि संघट्ट के बाद गोली तथा गुटके की अन्तिम चाल । मीटर/सेकण्ड है।
संवेग संरक्षण के नियमानुसार,
संघट्ट से पूर्व गोली तथा गुटके का संवेग = संघट्ट के पश्चात् दोनों का अन्तिम संवेग।
∴mu + mu1 = (m + m) v
∴ 0.012 x 70 + 0.4 x 0
v = \(\frac{0.012 x 70}{0.412}\)
= 2.04 मीटर/सेकण्ड
माना गुटका संघट्ट के बाद h ऊँचाई तक ऊपर उठता है।
∴ संघट्ट से पूर्व गुटके व गोली की KE में कमी = संघट्ट के बाद गुटके व गोली की P.E. में वृद्धि
∴ \(\frac{1}{2}\) (m + m) v2 = (m + m) gh
∴ h = \(\frac{0.012 × 70}{0.412}\)
= \(\frac{2.04 x 2.04}{2 x 9.8}\)
= 0.212 मीटर = 21.2 सेमी
गोली धंसने से उत्पन्न हुई ऊष्मा
= \(\frac{1}{2}\) mu2 – \(\frac{1}{2}\)(m + m)v2
= \(\frac{1}{2}\) x 0.012 x 70 2 – \(\frac{1}{2}\) x 0.412 x 2.042

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प्रश्न 6.25.
दो घर्षण रहित आनत पथ, जिनमें से एक की ढाल अधिक है और दूसरे की ढाल कम है, बिंदु पर मिलते हैं। बिंदु A से प्रत्येक पथ पर एक – एक पत्थर को विरामावस्था से नीचे सरकाया जाता है (चित्र)। क्या ये पत्थर एक ही समय पर नीचे पहुँचेंगे? क्या वे वहाँ एक ही चाल से पहुँचेंगे? व्याख्या कीजिए। यदि 01 = 302, 02 = 60° और h=10m दिया है, तो दोनों पत्थरों की चाल एवं उनके द्वारा नीचे पहुंचने में लिए गए समय क्या हैं?
उत्तर:
AB तथा AC क्रमश: θ1, व θ2, पर झुके दो समतल तल हैं। दोनों पत्थर एक ही समय नीचे नहीं आएंगे।
व्याख्या: माना इन तलों पर इन पत्थरों के भार क्रमशः m1g
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 13
व m2g हैं। m1g तथा m2g के वियोजित घटक चित्र के अनुसार होंगे।
माना पहले व दूसरे पत्थर में उत्पन्न त्वरण क्रमशः a1, व a2 हैं। तब
या
ma1 = m1g sin θ1
a1 = g sin θ1
इसी प्रकार, a2 = g sin θ2
∴ a2 > a1 i.e., a1 = sin 30° = \(\frac{g}{2}\)
तथा a2 = g sin 60° = \(\frac { g\sqrt { 3 } }{ 2 } \)
v = u + at से v = ar
या t = \(\frac{v}{a}\)
यहाँ u = 0, चूँकि प्रारम्भ में दोनों पत्थर विराम में हैं।
या
t ∝ \(\frac{1}{a}\)
t 1 ∝ \(\frac { 1 }{ a_{ 1 } } \) and t 2 ∝ \(\frac { 1 }{ a_{ 2 } } \)
या
\(\frac { t_{ 2 } }{ t_{ 1 } } \) = \(\frac { a_{ 2 } }{ a_{ 1 } } \)
चूँकि a2 > a1, या \(\frac { a_{ 2 } }{ a_{ 1 } } \)
समी० (i) व (ii) से,
\(\frac { t_{ 2 } }{ t_{ 1 } } \) < 1 या t2 < t1
अर्थात् दूसरा पत्थर कम समय लेगा व पहले पत्थर पर जल्दी नीचे पहुँचेगा।
(iii) हाँ, दानों पत्थर एक साथ नीचे पहुँचेंगे।
व्याख्या: बिन्दु A पर तल की ऊँचाई, h = 10 मीटर है। माना दोनों पत्थर, क्रमश: v1 व v 2वेग से नीचे पहुँचते हैं।
ऊर्जा संरक्षण के नियम से, चोटी पर स्थितिज ऊर्जा में क्षय = नीचे गतिज ऊर्जा में वृद्धि
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 14
या
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 15

प्रश्न 6.26.
किसी रुक्ष आनत तल पर रखा हुआ 1 kg द्रव्यमान का गुटका किसी 100 Nm-1 स्प्रिंग नियतांक वाले स्प्रिंग से दिए गए चित्र के अनुसार जुड़ा है। गुटके को स्प्रिंग की बिना खिंची स्थिति में, विरामावस्था से छोड़ा जाता है। गुटका विरामावस्था में आने से पहले आनत तल पर 10 cm नीचे खिसक जाता है। गटके और आनत तल के मध्य घर्षण गणांक ज्ञात कीजिए।मान लीजिए कि स्प्रिंग का द्रव्यमान उपेक्षणीय है और घिरनी घर्षणरहित है।
उत्तर:
दिया है: गुटके का द्रव्यमान, m = 1 किग्रा स्प्रिंग नियतांक,
K = 100 न्यूटन/मीटर,
8 = 10 मीटर/सेकण्ड2
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 16
माना गुटके को छोड़ने पर विस्थापन,
x = 10 सेमी = 0.1 मीटर झुकाव,
θ = 37°
∴ sin 37° = 0.6018 व cos 37° = 0.7996
माना नीचे की ओर x दूरी चलने में किया गया कार्य w है।
∴ W = (mg sin θ – µ mg cos θ) x
लेकिन स्प्रिंग में यह कार्य स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित रहेगा। ‘
∴ PE = \(\frac{1}{2}\) kx2
समी० (1) व (2) से,
\(\frac{1}{2}\) kx2 = mg (sin θ – µ cos θ) . x
∴µ = \(\frac{2mg sin θ – kx}{2mg cosθ}\)
= \(\frac{2 x 1 x 10 x 0.6018 – 100 x 0.1 }{2 x 1 x 10 x 0.7996 }\)
= 0.125

प्रश्न 6.27.
0.3 kg द्रव्यमान का कोई बोल्ट 7 ms-1 की एकसमान चाल से नीचे आरही किसी लिफ्ट की छत से गिरता है। यह लिफ्ट के फर्श से टकराता है (लिफ्ट की लंबाई =3 m) और वापस नहीं लौटता है। टक्कर द्वारा कितनी ऊष्मा उत्पन्न हुई? यदि लिफ्ट स्थिर होती तो क्या आपका उत्तर इससे भिन्न होता?
उत्तर:
दिया है:
बोल्ट का द्रव्यमान, m = – 0.3 किग्रा
लिफ्ट की लम्बाई, h = 3 मीटर
छत पर बोल्ट की स्थितिज ऊर्जा, V = mgh
= 0.3 x 9.8 x 3
= 8.82 जूल
चूँकि बोल्ट लिफ्ट के फर्श से टकराकर बिल्कुल भी ऊपर नहीं उठता है, इसका तात्पर्य है कि फर्श से टकराने पर बोल्ट की सम्पूर्ण स्थितिज ऊर्जा, ऊष्मा में बदल जाती है। अत: बोल्ट के फर्श से टकराने पर उत्पन्न ऊष्मा 8.82 जूल है।लिफ्ट के स्थिर होने पर, यह एक जड़त्वीय निर्देश तन्त्र होता है। चूँकि गुरुत्वीय त्वरण का मान सभी स्थानों पर एक समान होता अर्थात् हमारा उत्तर समान होगा।

प्रश्न 6.28.
200 kg द्रव्यमान की कोई ट्रॉली किसी घर्षणरहित पथ पर 36 km h-1 की एकसमान चाल से गतिमान है। 20 kg द्रव्यमान का कोई बच्चा ट्रॉली के एक सिरे से दूसरे सिरे तक (10 m दूर) ट्रॉली के सापेक्ष 4 ms-1 की चाल से ट्रॉली की गति की विपरीत दिशा में दौड़ता है और ट्रॉली से बाहर कूद जाता है। ट्रॉली की अंतिम चाल क्या है? बच्चे के दौड़ना आरंभ करने के समय से ट्रॉली ने कितनी दूरी तय की?
उत्तर:
दिया है: ट्रॉली का द्रव्यमान, m, = 200 किग्रा,
ट्रॉली की चाल u =36 किमी प्रति घण्टा
= 36 x \(\frac{5}{18}\) = 10 मी/से
बच्चे का द्रव्यमान m2 = 20 किग्रा
बच्चे की ट्रॉली के सापेक्ष चाल, V2 = 4 मीटर/सेकण्ड
माना ट्रॉली की अन्तिम चाल v1 है
∴ बच्चे के दौड़ना प्रारम्भ करने से पूर्व निकाय का संवेग,
Pi = (m1v1 + m2) u1
= (200 + 20) x 10 = 2200 किग्रा मीटर/सेकण्ड
बच्चे के ट्रॉली से कूदते समय निकाय का संवेग,
P1 = m1V1 + m2(v1 – v2)
= 200(v1 + 20 (v1 – 4)
= 200vvt – 80
परन्तु संवेग संरक्षण के नियमानुसार, Pi = Pf
2200 = 220vt – 80
या 220 v1 = 2280
∴v1 = \(\frac{2280}{220}\)
= 10.36 मीटर/सेकण्ड
ट्रॉली में 10 मीटर की दूरी चलने में बच्चे द्वारा लिया गया समय,
image 16 = \(\frac{10}{4}\) = 2.5 सेकण्ड
माना इस समय में ट्राली द्वारा चली गई दूरी x है।
∴ x = v x t = 10.36 x 2.5
= 25.9 मीटर।

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प्रश्न 6.29.
चित्र में दिए गए स्थितिज ऊर्जा वक्रों में से कौन – सा वक्र सम्भवतः दो बिलियर्ड – गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट का वर्णन नहीं करेगा? यहाँ r गेंदों के केन्द्रों के मध्य की दूरी है और प्रत्येक गेंद का अर्धव्यास R है।
उत्तर:
जब गेंदें संघट्ट करेंगी और एक-दूसरे को संपीडित करेंगी तो उनके केन्द्रों के बीच की दूरीr, 2R से घटती जाएगी और इनकी स्थितिज ऊर्जा बढ़ती जाएगी। प्रत्यानयन काल में गेंदें अपने आकार को वापस पाने की क्रिया में एक-दूसरे से दूर हटेंगी तो उनकी स्थितिज ऊर्जा घटेगी और प्रारम्भिक आकार पूर्णतः प्राप्त कर लेने पर (r = 2R) स्थितिज ऊर्जा शून्य हो जाएगी।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 17
केवल ग्राफ (V) की ही उपर्युक्त व्याख्या हो सकती है; अतः अन्य ग्राफों में से कोई भी बिलियर्ड गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट को प्रदर्शित नहीं करता है।

प्रश्न 6.30.
विरामावस्था में किसी मुक्त न्यूट्रॉन के क्षय पर विचार कीजिए n → p + e प्रदर्शित कीजिए कि इस प्रकार के द्विपिंड क्षय से नियत ऊर्जा का कोई इलेक्ट्रॉन अवश्य उत्सर्जित होना चाहिए, और इसलिए यह किसी न्यूट्रॉन या किसी नाभिक के क्षय में प्रेक्षित सतत ऊर्जा वितरण का स्पष्टीकरण नहीं दे सकता (चित्र)।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 18
[नोट : इस अभ्यास का हल उन कई तर्कों में से एक है जिन्हें डब्ल्यू पॉली द्वारा क्षय के क्षय उत्पादों में किसी तीसरे कण के अस्तित्व का पूर्वानुमान करने के लिए दिया गया था। यह कण न्यूट्रिनो के नाम से जाना जाता है। अब हम जानते हैं कि यह निजी प्रचक्रण 1/2 (जैसे e, p तथा n) का कोई कण है। लेकिन यह उदासीन है या द्रव्यमानरहित या (इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान की तुलना में) इसका द्रव्यमान अत्यधिक कम है और जो द्रव्य के साथ दुर्बलता से परस्पर क्रिया करता है। न्यूट्रॉन की उचित क्षय – प्रक्रिया इस प्रकार है: n →p + e + v]
उत्तर:
माना न्यूट्रॉन के प्रोट्रॉन तथा इलेक्ट्रॉन में क्षय होने पर अवनमन (disintegration) द्रव्यमान ∆m है।
उत्सर्जित ऊर्जा, E = ∆mc2
परन्तु ∆m = न्यूट्रॉन का द्रव्यमान – (प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान)
= 1.6747 x 10-24 – (1.6724 x 10-24 + 9.11 x 10-28
= (1.6747 – 1.6733) x 10-24
= 0.0014 x 10-24 ग्राम
∴ E = 0.0014 – 10-24 x (3 x 1010)2
= 0.0126 x 10-4 ऊर्जा
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img A
= 0.79 Mev
पाजिट्रॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान के समान परन्तु आवेश इलेक्ट्रॉन का विपरीत होता है। जब इलेक्ट्रॉन तथा पाजिट्रॉन एक दूसरे के समीप आते हैं तो वे एक दूसरे को समाप्त कर देते हैं। इसके द्रव्यमान आइन्सटीन के समीकरण के अनुसार ऊर्जा में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रकार प्राप्त ऊर्जा गामा किरणों के रूप में उत्सर्जित होती है जो कि निम्नवत् है –
E’ = mc2
= 2 x 9 x 10 -31 x (3 x 108)2
= 1.64 x 10-13 जूल
= \(\frac { 1.64\times 10^{ -31 } }{ 1.6\times 10^{ -19 }\times 10^{ 6 } } \)
= 1.02 Mev

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MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Objective Type Questions

MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Objective Type Questions [Based on Textual Lessons]

Multiple Choice Questions
(बहु विकल्पीय प्रशन)

Question 1.
The real aim of Miss Beam’s school was to:
(A) Be practical
(B) Teach thought
(C) Teach thoughtfulness
(D) Increase memory.
Answer:
(C) Teach thoughtfulness

Question 2.
Those who prepare the matter for advertisements and publicity are called:
(A) Dramatists
(B) Playwrights
(C) Script writers
(D) Copywriters.
Answer:
(D) Copywriters.

Question 3.
J. C. Bose was born in:
(A) Faridabad
(B) Faridkot
(C) Firozpur
(D) Faridpur.
Answer:
(D) Faridpur.

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Question 4.
Kasturba Gandhi was married at an age of:
(A) thirteen
(B) eighteen
(C) twenty one
(D) twenty two.
Answer:
(A) thirteen

Question 5.
The poem ‘Am I a child’ is about:
(A) Child’s disputes
(B) Childhood worries
(C) An adolescent child’s situation
(D) Childhood fantasies.
Answer:
(C) An adolescent child’s situation

Question 6.
For Sudhir what mattered most was that he was:
(A) Back in the field
(B) Winner
(C) Loser
(D) In the team.
Answer:
(A) Back in the field

Question 7.
Chaturbhuj Babu had passed:
(A) M. A.
(B) B.A.
(C) Ph.D.
(D) Inter.
Answer:
(A) M. A.

Question 8.
In the opinion of the wise saint a best friend on the earth is:
(A) His own good sense
(B) His courage
(C) His physical power
(D) His smartness.
Answer:
(A) His own good sense

Question 9.
Ram Prasad Bismil was hanged on:
(A) 18th December 1927
(B) 19th December 1927
(C) 9th August 1925
(D) 19th August 1927
Answer:
(B) 19th December 1927

Question 10.
The moon walks wearing:
(A) Light shoes
(B) White shoes
(C) Silver shoes
(D) Bronze shoes.
Answer:
(C) Silver shoes

Question 11.
The tree described in the poem ‘Woodman spare that Tree’ is:
(A) A Pipal tree
(B) A Banyan Tree
(C) A Neem Tree
(D) An Oak Tree.
Answer:
(D) An Oak Tree.

Question 12.
Bose demonstrated the feelings of:
(A) Plants
(B) People
(C) Fish
(D) Animals
Answer:
(A) Plants

Question 13.
Rani Karnavati had sent Humayun:
(A) A raksha thread
(B) A gift
(C) A pearl
(D) A sword.
Answer:
(A) A raksha thread

Question 14.
Cheemi was called:
(A) Chhoti
(B) Little sparrow
(C) A bird
(D) None of these.
Answer:
(B) Little sparrow

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Fill in the Blanks
(रिक्त स्थान भरो।)

  1. Jumman became ……….. enemy.
  2. Miss Beam’s figure was comforting to a ………. child.
  3. Kasturba Gandhi led the women’s ……….. for which she was imprisoned.
  4. ………… is the pen name of Ram Prasad.
  5. King Vikramaditya was a ruler of ………..
  6. Rani Karnavati sent a message to ……….
  7. J. C. Bose was honoured with the degree of………..
  8. The most deafening place on the earth is a ……….
  9. Akbar was missing ………..
  10. ……….. motivated Sudhir.
  11. Akbar regreted ………… Birbal from the court.
  12. The child will stride into a new world of ………..
  13. Chaturbhuj Babu had brought a ……….. cat with him.
  14. Moon is wearing ……….. shoes.

Answer:

  1. Algu’s
  2. homesick
  3. Satyagraha,
  4. Bismil
  5. Ujjain
  6. Humayun
  7. Doctor of science
  8. Gold factory
  9. Birbal
  10. Baljit
  11. banishing
  12. adult life
  13. Afghan
  14. silver

State True or False
(सत्य असत्य बताइए।)

  1. Kasturba Gandhi was the daughter of a prosperous businessman.
  2. Advertisements can be termed as the backbone of the commerical world.
  3. King Vikramaditya was the ruler of Udaipur.
  4. Kakori train incident took place on 18 December 1927.
  5. In the second match Sudhir was to play in right in position.
  6. Jumman sold his bullock to Samjhu Sahu.
  7. We should do our work today.
  8. During the dumb day, a child has to use his will power.
  9. Parvati Kaki loved Cheemi.
  10. The present day babies are too soft spoken.
  11. J. C. Bose was awarded the fellowship of Royal Society in 1920.
  12. J. C. Bose was also a great writer.
  13. Examination for a royal scribe was to be held at Udaipur University.
  14. Birbal had passed a harmless comment about Akbar’s sense of humour.

Answer:

  1. True
  2. True
  3. False
  4. False
  5. True
  6. False
  7. True
  8. True
  9. False
  10. False
  11. True
  12. False
  13. False
  14. True.

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Match the Columns
(जोड़ी मिलाइए)

(I)
MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Objective Type Questions 1
Answer:
(1) → (ii) to accept and act according to a law
(2) → (iv) an imaginary thing
(3) → (i) an easy chance to score
(4) → (v) extremely hot
(5) → (iii) filled with air

(II)
MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Objective Type Questions 2
Answer:
(1) → (iii) poor orphan
(2) — (i) pen name
(3) → (v) To go from place to place to sell things
(4) → (ii) response in the living and Non-living
(5) → (iv) silver shoon

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MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions पद्य Chapter 2 वात्सल्य भाव

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MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions पद्य Chapter 2 वात्सल्य भाव

वात्सल्य भाव अभ्यास

बोध प्रश्न

वात्सल्य भाव अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सखी प्रातः काल किसके द्वार पर जाती है?
उत्तर:
सखी प्रातःकाल अयोध्या नरेश राजा दशरथ के द्वार पर जाती है।

प्रश्न 2.
बालक राम किस वस्तु को माँगने का हठ करते हैं?
उत्तर:
बालक राम, चन्द्रमा को माँगने का हठ करते हैं।

प्रश्न 3.
बच्चे की आँखों की तुलना किससे की गई है?
उत्तर:
बच्चे की आँखों की तुलना तितली के पंखों से की गई है।

प्रश्न 4.
तुलसीदास जी के मन-मन्दिर में सदैव कौन विहार करता रहता है?
उत्तर:
तुलसीदास जी के मन-मन्दिर में अयोध्या नरेश दशरथ के चारों पुत्र विहार करते रहते हैं।

प्रश्न 5.
ईश्वर ने रोगों को दूर करने के लिए मनुष्य को क्या दिया?
उत्तर:
ईश्वर ने रोगों को दूर करने के लिए मनुष्य को औषधियाँ दी हैं।

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वात्सल्य भाव लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सखी ठगी-सी क्यों रह गई?
उत्तर:
अयोध्या नरेश राजा दशरथ की गोद में भगवान श्रीराम को देखकर सखी ठगी-सी रह गई।

प्रश्न 2.
माताएँ बालक राम की कौन-कौनसी चेष्टाओं से प्रसन्न होती हैं?
उत्तर:
माताएँ बालक राम की चन्द्रमा की माँग करने की, कभी अपनी परछाईं से डरने की और कभी करताल बजाकर नाचने की चेष्टाओं से प्रसन्न होती हैं।

प्रश्न 3.
बालक राम का मुख सौन्दर्य कैसा है?
उत्तर:
बालक राम का मुख सौन्दर्य अरविन्द पुष्प जैसा शोभित हो रहा है।

प्रश्न 4.
बच्चे के रेशमी बालों को कवि अपनी हथेलियों से क्यों स्पर्श करना नहीं चाहता?
उत्तर:
बच्चे के रेशमी बालों को कवि अपनी बिवाईं वाली पथरीली हथेलियों से इसलिए स्पर्श नहीं करना चाहता है क्योंकि उससे बालक को जीवन की कठोरताओं एवं संघर्षों का ज्ञान हो जायेगा और उससे नन्हें शिशु का कोमल मन खिन्न हो जायेगा।

वात्सल्य भाव दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तुलसीदास ने बालक राम के किस स्वभाव का चित्रण किया है?
उत्तर:
तुलसीदास ने बालक राम के स्वभाव की विभिन्न चेष्टाओं का चित्रण किया है। कभी तो राम चन्द्रमा को पाने की हठ करते हैं, कभी अपनी ही परछाईं को देखकर डर जाते हैं, कभी करताल बजाकर नाचते हैं, कभी गुस्सा करके एवं किसी वस्तु को पाने की जिद्द पर अड़ जाते हैं।

प्रश्न 2.
‘तुलसी ने बालहठ’ का स्वाभाविक चित्रण किया है? इस उक्ति को पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
संसार में तीन हठ प्रसिद्ध हैं-बालहठ, त्रियाहठ और राजहठ। बालहठ से अभिप्राय है कि बालक के मुख से जो बात निकल जाती है उसे ही वह पूरा करना चाहता है चाहे वह सम्भव हो या असम्भव। तुलसीदास ने राम की इस हठ को कि मैं तो आकाश में दिखाई देने वाला चन्द्रमा लूँगा। इसी श्रेणी में लिया है। तुलसी ने यह भी वर्णन किया है कि जिसके लिए वे अड़ जाते हैं, उसी को लेकर ही मानते हैं।

प्रश्न 3.
हरिनारायण व्यास ने अपने ‘ख्यालों’ की किन कमियों की ओर संकेत किया है?
उत्तर:
हरिनारायण व्यास ने अपने ख्यालों की इन कमियों की ओर संकेत किया है कि उसके ख्याल दुनियादारी की लपटों से झुलस गए हैं। जैसे कोई नाव पहाड़ों से टकराती है, उसी प्रकार उसके ख्याल भी संघर्ष करते हुए लहूलुहान हो गए हैं।

प्रश्न 4.
निम्नांकित पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए
(अ) पग नूपुर औ पहुँची कर कंजनि ………. तुलसी जग में फलु कौन जिएँ।
उत्तर:
एक सखी दूसरी सखी से कह रही है कि बालक राम के पैरों में घुघरू हैं और हाथों में पहुँची पहने हुए हैं तथा उन्होंने सुन्दर कमलों से बनी हुई तथा मणियों की माला अपने वक्ष स्थल पर पहन रखी है। उन्होंने शरीर पर नीला वस्त्र तथा पीला अँगा पहन रखा है जो अत्यधिक झलक मार रहा है। ऐसे वेशभूषा वाले बालक को गोद में लेकर राजा दशरथ बहुत आनन्द का अनुभव कर रहे हैं। उनका मुख कमल जैसा है तथा रूप मकरंद जैसा और उनके आनन्दित नेत्र रस पान करने वाले भौरे जैसे दिखाई दे रहे हैं। तुलसीदास जी कहते हैं कि ऐसे बालक राम की रूप छवि यदि किसी संसारी मनुष्य के मन में नहीं बसती है तो उसका संसार में जीना व्यर्थ है।
अथवा
कबहूँ ससि माँगत आरि करें …………. तुलसी मन-मन्दिर में विहरैं।
उत्तर:
हे सखी! बालक राम कभी चन्द्रमा को माँगते हुए – उसे लेने की हठ पकड़ जाते हैं और कभी धरती पर पड़ते अपने ही प्रतिबिम्ब (परछाईं) को देखकर डरने लगते हैं। कभी ताली बजा-बजाकर नाचते हैं। सारी अर्थात् तीनों माताएँ-कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा- उनकी इन बाल-क्रीड़ाओं को देख-देख मन ही मन आनन्द से भर उठती हैं। कभी राम गुस्सा होकर हठ करके कोई चीज माँग बैठते हैं और फिर जिस वस्तु के लिए हठ पकड़ जाते हैं, उसे लेकर ही मानते हैं।

तुलसीदास जी कहते हैं कि राजा दशरथ के ये चारों बालक तुलसी के मनरूपी मन्दिर में सदैव विहार करते रहें। कहने का भाव यह है कि तुलसी सदैव उनका ही स्मरण करते रहें।

(ब) ये ख्याल इन दुनियादारी की/लपटों से झुलस गए हैं, पहाड़ों से टकराती नाव हैं, नाकामयाबी की चोट से/ये लहूलुहान हैं।
उत्तर:
कविवर हरिनारायण व्यास कहते हैं कि मेरे विचार आज सांसारिकता की लपटों से बुरी तरह झुलस गए हैं। मेरे विचारों की श्रृंखला पहाड़ों से संघर्ष करती हुई नाव की तरह है तथा जीवन में निरन्तर मिल रही असफलता की चोट से ये खून से लथपथ हो रहे हैं। यदि इन भीषण संघर्षों की गाथा को मैंने तुम पर रोपित करने की चेष्टा की, तो तितली की पंखुड़ियों जैसी तुम्हारी आँखों में उगते हुए उजाले के ये सतरंगी सपने इनमें फँसकर बिखर जाएँगे। उन पर मेरे संघर्षशील विचारों का कोई भी अनुकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। अतः मैंने यह निश्चय कर लिया है कि मैं अपनी बिवाईं से कटी-फटी तथा पत्थर जैसी कठोर हथेलियों से तुम्हारे रेशमी बालों की शैशवी लापरवाही को स्पर्श नहीं करूँगा। कहने का भाव यह है कि कवि अपने जीवन के संघर्षों की कटु अनुभूतियों को शैशव अवस्था के बालकों की भावना पर थोपना नहीं चाहता है। वह तो यह चाहता है कि ये नये शिशु जीवन में कुछ नया भोगें, नया अनुभव करें ताकि उनका जीवन संघर्ष की कठोर यातनाओं की गाथा बनकर न रह जाए।
अथवा
फटी हुई चमड़ी में उलझकर/कोई बाल, कोई रंगीन मनसूबा, कोई कामयाब भविष्य/टूट जायेगा/आने वाला जमाना/मुझे दोषी ठहराएगा।
उत्तर:
कवि कहता है कि फटी हुई चमड़ी में उलझकर किसी बच्चे के रंगीन भविष्य की कोई अभिलाषा अधूरी रह जाएगी अथवा उसके अपने उज्ज्वल भविष्य का स्वप्न टूट जाएगा और इस घटना के पश्चात् आने वाला युग उसे दोषी सिद्ध करेगा। उस समय जीवन का स्वर्णिम भविष्य बच्चे की अलसाई पुतलियों और पलकों पर तैरता हुआ दिखाई देगा।

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वात्सल्य भाव काव्य सौन्दर्य

प्रश्न 1.
रस की परिभाषा देते हुए रस के अंगों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
इसके लिए अध्याय 8 ‘काव्य बोध’ के अन्तर्गत द्वितीय शीर्षक ‘रस’ का अध्ययन करें।

प्रश्न 2.
वात्सल्य रस को परिभाषित करते हुए एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
परिभाषा :
सन्तान के प्रति होने वाला माता-पिता का स्नेह ही वत्सलता कहलाता है। यह वत्सल स्थायी भावही विभाव, अनुभाव तथा संचारी भाव के संयोग से वात्सल्य रस रूप में परिणत होता है। उसमें सन्तान आलम्बन, उनके मोहक क्रियाकलाप आदि उद्दीपन, गाना, पुचकारना, हँसना आदि। अनुभाव तथा हर्ष, गर्व, उत्सुकता आदि संचारी भाव होते हैं।

उदाहरण :
जसोदा हरि पालने झुलावैं।
हलरावैं दुलराइ मल्हावै जोइ सोइ कछु गावें।
मेरे लाल को आव री निंदरिया, काहे न आन सुवावैं।
तू काहे नहिं बेगिहिं आवै, तोकौं कान्ह बुलावै।
कबहुँ पलक हरि नूदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै।
सोवत जानि मौन द्वै रहि, करि करि सैन बतावै।
इति अन्तर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरै गावै।
जो सुख ‘सूर’ अमर मुनि दुर्लभ, सो नँद-भामिनी पावै।

स्पष्टीकरण :
इसमें वत्सल स्थायी भाव है। यशोदा आश्रय और कृष्ण आलम्बन हैं। कृष्ण का पलक झपकाना, होंठ फरकाना उद्दीपन हैं। यशोदा का गीत गाना आदि अनुभाव हैं। इन सबसे पुष्ट वत्सल स्थायी भाव वात्सल्य रस दशा को प्राप्त हुआ है।

वात्सल्य भाव महत्त्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वात्सल्य भाव बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सखी प्रात:काल किसके द्वार पर जाती है?
(क) कृष्ण
(ख) राम
(ग) राजा दशरथ
(घ) नन्द।
उत्तर:
(ग) राजा दशरथ

प्रश्न 2.
सोए हुए बालक को कौन जगाएगा?
(क) सूरज का प्रकाश
(ख) चिड़ियों की चहचहाहट
(ग) बालक की माँ
(घ) वायु के झोंके।
उत्तर:
(क) सूरज का प्रकाश

प्रश्न 3.
बालक राम के दाँतों का सौन्दर्य कैसा है?
(क) बिजली
(ख) पीत वर्ण
(ग) श्वेत वर्ण
(घ) कुंदकली।
उत्तर:
(घ) कुंदकली।

प्रश्न 4.
बच्चे के रेशमी बालों को कवि अपनी हथेलियों से स्पर्श नहीं करना चाहता है, क्योंकि
(क) हथेलियाँ कठोर थीं
(ख) रंगीन सपने देख रहा था
(ग) फटी हुई चमड़ी थी
(घ) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी।

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. लोकनायक तुलसीदास जी ………… के प्रतिनिधि कवि हैं।
  2. तुलसीदास जी ने ‘कवितावली’ में राम की …………. व बाललीला का वर्णन किया है।
  3. ‘रामचरितमानस’ युग-युगान्तर तक समाज को …………. प्रदान करने में सक्षम है।
  4. हरिनारायण व्यास ने बच्चे की आँखों की तुलना ………….. से की है।

उत्तर:

  1. भक्ति काल
  2. बाल छवि
  3. नवजीवन
  4. तितली के पंखों।

सत्य/असत्य

  1. कवि ने सपनों की तुलना इन्द्रधनुष से की है।
  2. तुलसीदास ने सूरदास और रसखान की भाँति वात्सल्य भाव की कविताओं की रचना की।
  3. राम के गले में मूल्यवान मोतियों की माला सुशोभित हो रही थी।
  4. कवि ने सोए हुए बच्चे को सहलाकर जगा दिया।
  5. बालक राम चन्द्रमा को माँगने की हठ करते हैं। (2013)

उत्तर:

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

सही जोड़ी मिलाइए

MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions पद्य Chapter 2 वात्सल्य भाव img-1
उत्तर:
1. → (ख)
2. → (ग)
3. → (घ)
4. → (क)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. तुलसीदास ने मूल रूप में किस प्रकार की भक्ति को स्वीकार किया है?
  2. राम की बाल क्रीड़ा को देखकर कौन प्रसन्न होता है?
  3. कवि सोए हुए बच्चे को स्पर्श नहीं करना चाहता क्योंकि उसकी हथेलियाँ थीं।
  4. हरिनारायण व्यास की शिक्षा कहाँ सम्पन्न हुई?

उत्तर:

  1. दास्य भाव
  2. राम की माताएँ
  3. खुरदरी-पथरीली
  4. उज्जैन,बड़ौदा।

कवितावली भाव सारांश

प्रस्तुत पंक्तियों में तुलसीदास ने बालक राम की मनोहारी छवि का अत्यन्त हृदयस्पर्शी वर्णन किया है। अयोध्या के राजा दशरथ प्रातः बालक श्रीराम को अपनी गोद में लेकर बाहर निकले तो सभी बालक राम का अप्रतिम सौन्दर्य देखकर ठगे से रह गये। उनके काजल लगे नेत्र नीलकमल की शोभा का हरण कर रहे थे। उनके पैरों में पायजनिया और हाथों में कंगन तथा गले में मणियों की माला सुशोभित हो रही थी। उन्होंने सुन्दर पीला झबला पहन रखा था। उनके श्याम शरीर की कान्ति नीलकमलों की और नेत्र कमलों की-सी सुन्दरता को प्राप्त कर रहे थे। उनको दन्तावली उनके सुन्दर श्याम मुख पर दिखलाई देती हुई काले बादलों में विद्युत रेखा की जैसी उपमा प्राप्त कर रही थी। राम कभी माता से चन्द्रमा पाने का हठ करते हैं तो कभी ताली बजाकर नृत्य करते हैं। उनके गालों में लटकती हुई घुघराली लटें उनकी शोभा को इतना अधिक बढ़ा रही थीं कि कवि का मन उन पर न्योछावर हो जाने को चाहता है।

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कवितावली संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

(1) अवधेस के द्वारें सकारें गई सुत गोद कै भूपति लै निकसे।
अवलोकि हौं सोच विमोचन को ठगि-सी रही, जे न ठगे धिक-से॥
तुलसी मन-रंजन रंजित-अंजन, नैनसुखंजन-जातकसे।
सजनी ससि में समसील उभै नवलील सरोरूह-से बिकसे॥

शब्दार्थ :
अवधेस = अवध अर्थात् अयोध्या के राजा दशरथ। सकारें = सबेरे। सुत= पुत्र। भूपति= राजा। अवलोकि = देखकर। सोच-विमोचन = चिन्ता दूर करना। धिक = धिक्कार। मनरंजन = मन को प्रसन्न करने वाले। रंजित-अंजन = काजल लगाये हुए। सुखंजन-जातक = सुन्दर खंजन पक्षी के बच्चे जैसे। सजनी = सखि। ससि = चन्द्रमा। समसील = एक जैसे। उभै = दोनों। सरोरुह – कमल। विकसे = खिले।

सन्दर्भ :
प्रस्तुत पद गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ‘कवितावली’ से लिया गया है।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद में एक सखी दूसरी सखी से राजा दशरथ द्वारा गोद में लिए गए राम के बाल रूप का वर्णन करती हुई कह रही है।

व्याख्या :
आज सबेरे जैसे ही मैं अवध नरेश राजा दशरथ के द्वार पर गयी तो उसी समय राजा दशरथ अपने पुत्र राम को गोद में लिए राजमहल से बाहर निकले। मैं समस्त चिन्ताओं को दूर करने वाले राम के उस रूप को देख ठगी-सी, मन्त्रमुग्ध-सी खड़ी रह गयी। ऐसे रूप को देखकर जो न ठगे गये अर्थात् मन्त्रमुग्ध नहीं हुए, उनका जीवन धिक्कार योग्य है। तुलसीदास
जी कहते हैं कि सखी कह रही है-उस बालक के अंजन लगे हुए सुन्दर नेत्र मन को आनन्द देने वाले और सुन्दर खंजन पक्षी के बच्चे के समान मनोहर थे। हे सखी! उन नेत्रों को देखकर ऐसा लग रहा था मानो चन्द्रमा में समान रूप वाले वे नये नील कमल खिल उठे हों।

विशेष :

  1. इस पद में राम का मुख चन्द्रमा के समान और उनके दोनों नीले नेत्र दो नये खिले कमलों के समान बताये गये हैं।
  2. पद में छेकानुप्रास, उपमा और उत्प्रेक्षा अलंकार।
  3. वात्सल्य रस का वर्णन।

(2) पग नूपुर औ पहुँची कर कंजनि भंजु बनी मनिमाल हिएँ।
नवनील कलेवर पीत सँगा झलकै पुलकैं नृपु गोद लिएँ।
अरविन्दु सो आननु रूप मरंदु अनंदित लोचन भंग पिएँ।
मनमो न बस्यौ अस बालकु जौं तुलसी जग में फल कौन जिएँ।

शब्दार्थ :
पग = पैरों में। नूपुर = धुंघरू। औ = और। पहुँची = हाथ में पहनने वाला कड़ा। कंजनि = कमल। मनिमाल = मणियों की माला। पीत = पीला। पुल = पुलकित होकर। अरविन्दु = कमल। लोचन = नेत्र। भुंग = भौंरा। मनमो = मन में। अस = ऐसा। जिएँ = जीने का। कलेवर = शरीर।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
इस पद में कविवर तुलसी बालक राम की वेशभूषा और साज-सज्जा का वर्णन कर रहे हैं।

व्याख्या :
एक सखी दूसरी सखी से कह रही है कि बालक राम के पैरों में घुघरू हैं और हाथों में पहुँची पहने हुए हैं तथा उन्होंने सुन्दर कमलों से बनी हुई तथा मणियों की माला अपने वक्ष स्थल पर पहन रखी है। उन्होंने शरीर पर नीला वस्त्र तथा पीला अँगा पहन रखा है जो अत्यधिक झलक मार रहा है। ऐसे वेशभूषा वाले बालक को गोद में लेकर राजा दशरथ बहुत आनन्द का अनुभव कर रहे हैं। उनका मुख कमल जैसा है तथा रूप मकरंद जैसा और उनके आनन्दित नेत्र रस पान करने वाले भौरे जैसे दिखाई दे रहे हैं। तुलसीदास जी कहते हैं कि ऐसे बालक राम की रूप छवि यदि किसी संसारी मनुष्य के मन में नहीं बसती है तो उसका संसार में जीना व्यर्थ है।

विशेष :

  1. बालक राम की मनोहारी छवि का वर्णन हुआ
  2. अनुप्रास, उपमा और उत्प्रेक्षा अलंकार।
  3. वात्सल्य रस का वर्णन।

(3) तनकी,दुति स्याम सरोरुह लोचन कंज की मंजुलताई हरैं।
अति सुन्दर सोहत धूरि भरे छवि भूरि अनंग की दूरि धरैं।
दमकैं दतियाँ दुति दामिनि ज्यौं किलक कल बाल विनोद करें।
अवधेस के बालक चारि सदा तुलसी मन-मन्दिर में बिहरैं।

शब्दार्थ :
दुति = आभा। सरोरूह = कमल। कंज = कमल। मंजुलताई = सुन्दरता। हरै = हरण करते हैं। अनंग = कामदेव। दतियाँ = दाँतों की पंक्ति। दामिनि = बिजली। मन-मन्दिर = मनरूपी मन्दिर में। बिहरै = विचरण करते हैं।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
राम के बाल रूप का वर्णन करती हुई एक सखी दूसरी सखी से कह रही है।

व्याख्या :
हे सखी! राम के शरीर की कान्ति नीले कमल के समान मनोहर है और उनके नेत्र कमल के कोमल सौन्दर्य को भी हर लेने वाले अर्थात् कमल से भी अधिक सुन्दर हैं। धूल में लिपटे हुए राम अत्यन्त सुन्दर और मन को मोह लेने वाले लगते हैं। उनके शरीर की छवि अनेक कामदेवों की शोभा को भी दूर करने वाली है अर्थात् उससे भी बढ़कर है। राम की दंत पंक्ति बिजली की चमक के समान चमकती है। कहने का भाव यह है कि जैसे श्याम मेघ में बिजली चमक उठती है, उसी प्रकार राम के हँसने पर उनके श्यामल मुख में उनके सफेद दाँत बिजली के समान चमकते हुए शोभा देते हैं। राम किलकारी मारते हुए सुन्दर। बाल-क्रीड़ाएँ कर रहे हैं। तुलसीदास कहते हैं कि राजा दशरथ के चारों पुत्र मेरे मन-मन्दिर में विहार करते रहते हैं।

विशेष :

  1. राम की सुन्दर रूप छवि का वर्णन किया गया।
  2. उपमा, प्रतीप और रूपक अलंकार।
  3. वात्सल्य भाव का सुन्दर चित्रण।

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(4) कबहूँससि माँगत आरिकरैं कबहूँप्रतिबिम्ब निहारि डरैं।
कबहूँ कर ताल बजाइ कैं नाचत मातु सबै मन मोद भरें।
कबहूँ रिसिआई कहैं हठिकै पुनिलेत सोई जेहिलागि अरैं।
अवधेस के बालक चारि सदा तुलसी मन-मन्दिर में बिहरैं।

शब्दार्थ :
आरि = हठ, जिद्द। निहारि = देखकर। मोद = आनन्द रिसिआई = खिसियाकर। लागि अ = जिस बात की जिद्द पर अड़ जाता है।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
इस पद में एक सखी दूसरी सखी से बालक राम की सुन्दर बाल-क्रीड़ाओं का वर्णन करती हुई कह रही है।

व्याख्या :
हे सखी! बालक राम कभी चन्द्रमा को माँगते हुए – उसे लेने की हठ पकड़ जाते हैं और कभी धरती पर पड़ते अपने ही प्रतिबिम्ब (परछाईं) को देखकर डरने लगते हैं। कभी ताली बजा-बजाकर नाचते हैं। सारी अर्थात् तीनों माताएँ-कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा- उनकी इन बाल-क्रीड़ाओं को देख-देख मन ही मन आनन्द से भर उठती हैं। कभी राम गुस्सा होकर हठ करके कोई चीज माँग बैठते हैं और फिर जिस वस्तु के लिए हठ पकड़ जाते हैं, उसे लेकर ही मानते हैं।

तुलसीदास जी कहते हैं कि राजा दशरथ के ये चारों बालक तुलसी के मनरूपी मन्दिर में सदैव विहार करते रहें। कहने का भाव यह है कि तुलसी सदैव उनका ही स्मरण करते रहें।

विशेष :

  1. इस पद में कवि ने राम की बालकोचित चेष्टाओं को बड़े ही स्वाभाविक रूप में वर्णित किया है।
  2. अनुप्रास एवं रूपक अलंकार।
  3. वात्सल्य रस का वर्णन।

(5) वर दंत की पंगति कुंदकली अधराधर पल्लव खोलन की।
चपला चमकैंघन बीच जगै छवि मोतिन माल अमोलन की।
घुघरारि लटैं लटकै मुख ऊपर कुंडल लोल कपोलन की।
नेवछावरि प्रान करें तुलसी बलि जाऊँलला इन बोलन की।

शब्दार्थ :
वर = श्रेष्ठ। पंगति = पंक्ति। अधराधर = दोनों ओंठ। पल्लव = पत्ते। चपला = बिजली घन = बादल। लोल = सुन्दर। कपोलन = गालों। ल₹ = केश पाश।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद में बालक राम के दाँतों और धुंघराले केशों के सौन्दर्य का वर्णन किया गया है।

व्याख्या :
एक सखी दूसरी सखी से बालक राम के दाँतों और धुंघराले केशों के सौन्दर्य का वर्णन करते हुए कहती है कि हे सखी! राम के सुन्दर दाँतों की पंक्तियाँ कुन्द नामक श्वेत रंग के फूल की कलियों के समान सुन्दर हैं। उनके दोनों ओंठ ऐसे लगते हैं मानो लता के कोमल चिकने पत्ते हिल रहे हों अथवा प्रस्फुटित हो रहे हों। जब राम हँसते हैं तो उनकी दाँतों की पंक्तियाँ ऐसी चमक उठती हैं जैसे बादलों के बीच बिजली चमक रही हो। उन दाँतों की छवि अमूल्य मोतियाँ की माला के समान सुन्दर लगती है। उनके मुख के ऊपर घराली लटें लटकती रहती हैं और कपोलों पर (कान पर पड़े हुए) चंचल कुंडल लहराते रहते हैं।

तुलसीदास जी कहते हैं कि राम के इस सौन्दर्य पर वह अपने प्राण न्योछावर करते हैं और उनकी बातों पर बलिहारी जाते हैं तथा वे उनकी बलैया लेते हैं।

विशेष :

  1. प्रस्तुत पद में बाल स्वभाव की सुन्दर चेष्टाओं का वर्णन किया गया है।
  2. अनुप्रास एवं उत्प्रेक्षा अलंकार।
  3. वात्सल्य रस का वर्णन।

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सोए हुए बच्चे से भाव सारांश

प्रस्तुत कविता में कवि एक छोटे बालक को सोते हुए देखता है। वह उसे अपने विचारों का आशीर्वाद देना चाहता है किन्तु तभी वह सोचता है कि उसके विचार उतने पवित्र, उतने निष्कलंक नहीं रह गये हैं जितना यह सोता हुआ बालक है। यह बालक इस दुनियादारी से पूर्णतया अनभिज्ञ, अबोध और मासूम है। मैं अपने सपने देकर इस पर दुनियादारी का कोई दाग नहीं लगाना चाहता। वह बालक से कहता है कि वह तो अभी तितली की भाँति खुले आकाश में उड़ना चाहेगा इसलिए मैं उसके रेशमी बालों को अपनी पथरीली हथेलियों से सहलाकर उसकी निद्रा को खोलना नहीं चाहता हूँ। बालक की नींद सपनों से भरी सेमल के फूलों सी कोमल है किन्तु लेखक संसार के थपेड़े खा-खाकर लहूलुहान हो चुका है अतः वह उसे छूकर अपावन नहीं करना चाहता। बालक का निष्कलंक सौन्दर्य और पवित्र मुस्कराहट उसे जीवन जीने की प्रेरणा देता है। इसलिए वह कहता है कि जब सूर्योदय होगा तो वह तुम्हें स्वयं ही जगा देगा।

सोए हुए बच्चे से संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

(1) मेरे ख्याल इतने खूबसूरत नहीं हैं,
जिनको मैं फलों-सी खूबसूरत तुम्हारी पलकों को
छुआ दूँ और ये तुम्हारे लिए,
खूबसूरत सपने बन जाएँ।

शब्दार्थ :
ख्याल = विचार। खूबसूरत = सुन्दर।

सन्दर्भ :
प्रस्तुत पद श्री हरिनारायण व्यास द्वारा रचित ‘सोए हुए बच्चे से’ शीर्षक कविता से लिया गया है।

प्रसंग :
इस कविता में कवि ने शिशु की सुन्दरता पर संघर्षों की कठोर छाया न डालने की प्रतिज्ञा की है, उसी का यहाँ वर्णन है।

व्याख्या :
आधुनिक कवि श्री हरिनारायण व्यास जीवन की कठोरता का अनुभव करते हुए कहते हैं कि मेरे विचार इतने सुन्दर नहीं हैं कि मैं इन्हें फूलों-सी खूबसूरत नव पीढ़ी के बालकों की पलकों से छुआ हूँ और मेरे द्वारा ऐसा करने पर मेरे विचार इन बच्चों के लिए मात्र एक खूबसूरत सपना बनकर रह जाएँ। कहने का भाव यह है कि कवि अपने विचारों को, जीवन की कठोरता भोग रहे बच्चों पर लादना नहीं चाहता है।

विशेष :

  1. अनुप्रास एवं उपमा अलंकार।
  2. खड़ी बोली का प्रयोग।
  3. वात्सल्य भाव।

(2) ये ख्याल इन दुनियादारी की
लपटों से झुलस गए हैं
पहाड़ों से टकराती नाव हैं,
नाकामयाबी की चोट से,
ये लहूलुहान है।
तितली की पाँखों-सी
तुम्हारी आँखों से उगते हुए उजाले के इन्द्रधनुष सपने
इनमें फंसकर बिखर जाएँगे।
बिवाई वाली इन पथरीली हथेलियों से
तुम्हारे रेशमी बालों की
शैशवी लापरवाही को स्पर्श नहीं करूंगा।

शब्दार्थ :
दुनियादारी = सांसारिकता। नाकामयाबी = असफलता। लहूलुहान = खून से लथपथ। बिवाई वाली = फटी हुईं। इन्द्रधनुष सपने = सतरंगी सपने।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि संघर्षपूर्ण एवं विपदाग्रस्त विचारों को सुन्दर शिशु के ऊपर नहीं डालना चाहता है, इसी भावना का वर्णन यहाँ किया गया है।

व्याख्या :
कविवर हरिनारायण व्यास कहते हैं कि मेरे विचार आज सांसारिकता की लपटों से बुरी तरह झुलस गए हैं। मेरे विचारों की श्रृंखला पहाड़ों से संघर्ष करती हुई नाव की तरह है तथा जीवन में निरन्तर मिल रही असफलता की चोट से ये खून से लथपथ हो रहे हैं। यदि इन भीषण संघर्षों की गाथा को मैंने तुम पर रोपित करने की चेष्टा की, तो तितली की पंखुड़ियों जैसी तुम्हारी आँखों में उगते हुए उजाले के ये सतरंगी सपने इनमें फँसकर बिखर जाएँगे। उन पर मेरे संघर्षशील विचारों का कोई भी अनुकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। अतः मैंने यह निश्चय कर लिया है कि मैं अपनी बिवाईं से कटी-फटी तथा पत्थर जैसी कठोर हथेलियों से तुम्हारे रेशमी बालों की शैशवी लापरवाही को स्पर्श नहीं करूँगा। कहने का भाव यह है कि कवि अपने जीवन के संघर्षों की कटु अनुभूतियों को शैशव अवस्था के बालकों की भावना पर थोपना नहीं चाहता है। वह तो यह चाहता है कि ये नये शिशु जीवन में कुछ नया भोगें, नया अनुभव करें ताकि उनका जीवन संघर्ष की कठोर यातनाओं की गाथा बनकर न रह जाए।

विशेष :

  1. अनुप्रास एवं उपमा अलंकार।
  2. कवि ने तितली की पाँखों, इन्द्रधनुष सपने, बिवाईं वाली हथेली आदि नये-नये प्रतीक एवं उपमानों का प्रयोग किया
  3. खड़ी बोली का प्रयोग।

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(3) फटी हुई चमड़ी में उलझकर
कोई बाल कोई रंगीन मनसूबा कोई
कामयाब भविष्य
टूट जाएगा
आने वाला जमाना,
मुझे दोषी ठहराएगा।
तुम्हारी पलकों में तैरती
उनींदी पुतलियों पर।

शब्दार्थ :
बाल = बच्चा। मनसूबा = अभिलाषा। कामयाब = सफल। उनींदी = अलसाई।

सन्दर्भ एवं प्रसंग :
पूर्ववत्।

व्याख्या :
कवि कहता है कि फटी हुई चमड़ी में उलझकर किसी बच्चे के रंगीन भविष्य की कोई अभिलाषा अधूरी रह जाएगी अथवा उसके अपने उज्ज्वल भविष्य का स्वप्न टूट जाएगा और इस घटना के पश्चात् आने वाला युग उसे दोषी सिद्ध करेगा। उस समय जीवन का स्वर्णिम भविष्य बच्चे की अलसाई पुतलियों और पलकों पर तैरता हुआ दिखाई देगा।

विशेष :

  1. अनुप्रास की छटा।
  2. खड़ी बोली का प्रयोग।

(4) सेमल की रूई-सी
सुबह की नींद
जागने से पहले की खुमारी
मँडरा रही है
और तुम्हारा मन
आतुर है कुलाँचें भरने।
हम, तुम ही से तो अपनी अहमियत पहचानते हैं
तुम हो, इसीलिए तो हमारी भूख-प्यास
मकसद रखती है।
मैं तुम्हारे गालों को
बीमार आठों की छुअन से नहीं जलाऊँगा
तुम इसी तरह मुस्कुराते सोये रहो
सूरज खुद तुमको जगाएगा।

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शब्दार्थ :
रूई-सी = रूई जैसी। कलाँचें भरने = उछल-कूद करने को। अहमियत = महत्ता। मकसद = मतलब। छुअन = स्पर्श से।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि अपने जीवन के कठोर संघर्षों की परछाईं शिशुओं के मन पर नहीं छोड़ना चाहता है, इसी भाव का इस अंश में अंकन हुआ है।

व्याख्या :
कवि कहता है कि हे शिशुओ! सेमल की रूई जैसी कोमल तुम्हारी सुबह की नींद है, लेकिन तुम्हारे ऊपर जागने से पूर्व की खुमारी मँडरा रही है और तुम्हारा मन वास्तविकताओं से अनजान बनकर कुलाँचें भरने को व्याकुल हो रहा है।

आगे कवि कहता है कि बच्चे ही प्रत्येक समाज के भविष्य हुआ करते हैं। अतः कवि इन बच्चों में ही अपना बड़प्पन देखता है। तुम्हारे भविष्य की उन्नति की आशा में ही तो हम आज अपनी भूख और प्यास की चिन्ता करते हैं।

कवि कहता है कि मेरा दृढ़ निश्चय है कि मैं अपने बालकों के कोमल गालों को अपने बीमार ओठों का स्पर्श नहीं करने दूंगा अर्थात् उनके खुशहाल जीवन को मैं कष्टों में नहीं पड़ने दूंगा।

अंत में कवि कामना करता है कि मेरे देश के भोले-भाले शिशु इसी प्रकार मुस्कराते हुए सोते रहें और समय आने पर स्वयं सूरज ही उन्हें जगाने के लिए आएगा।

विशेष :

  1. कवि शिशुओं का जीवन संघर्षों की कठोरता से बचाये रखना चाहता है।
  2. अनुप्रास एवं उपमा अलंकार।
  3. सेमल की रूई-सी, जागने से पहले की खुमारी, कुलाँचें भरना, बीमार ओठों की छुअन से बचाना आदि का बड़ा ही सटीक एवं प्रभावशाली प्रयोग किया है।

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1

Question 1.
Construct an angle of 90° at the initial point of a given ray and justify the construction.
Solution:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-1

  1. Draw a ray OA and with O as centre and any radius, draw an arc, cutting OA at B.
  2. With B as centre and the same radius draw an arc cutting the arc drawn in step (i) at C.
  3. With C as centre draw another arc with same radius cutting the arc drawn in step (i) at D.
  4. with C as centre and the same radius draw an arc.
  5. With D as centre and the same radius draw an arc, cutting the arc drawn in step (iv) at E.
  6. Draw OE ∴ ∠AOF = 90°

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Question 2.
Construct an angle of 45° at the initial point of a given ray justify the construction.
Solution:

  1. Draw ∠AOF = 90° by following the same steps for constructing a 90° angle.
  2. Draw OG, the bisector of ∠AOF.
  3. ∠AOF= 45°

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-2

Question 3.
Construct the angle of the following measurements:
Solution:

  1. 30°
  2. 22 \(\frac{1}{2}\)°
  3. 15°

1. 30°

  1. Draw a ray OA.
  2. With O as centre and any radius draw an arc which intersect OA at B.
  3. With B as centre and same radius draw an arc cutting the arc drawn is step (ii) at C.
  4. Join OC and produce upward
  5. ∠BOC = 60°
  6. Draw the bisector OD of ABOC.
  7. ∠BOD = ∠COD = 30°

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-3
2. 22 \(\frac{1}{2}\)°

  1. Draw a ray OA.
  2. With O as centre and any radius draw an arc which intersect intersect CM at B.
  3. With B as centre and same radius draw an arc intersecting the arc drawn in step (ii) at C.
  4. With C as centre and same radius draw an arc cutting the arc drawn in step (ii) at D.
    MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-4
  5. With C and D as centres and same radius draw arcs to intersect at E.
  6. Join OE.
  7. ∠AOG – 90°
  8. Draw the bisector OE of ∠AOE, to get ∠AOF = 45°
  9. Draw the bisector OG of ∠AOF.
  10. ∠AOG = 22\(\frac{1}{2}\)°

3. 15°

  1. Draw a ray CM.
  2. With O as centre and any radius draw an arc which intersect CM at B.
  3. With B as centre and same radius draw an arc intersecting the arc drawn in step (ii), at C.
  4. Draw OD as the bisector of ZAOC.
  5. ∠BOD = 30°
  6. Draw the bisector OE of ∠AOD.
  7. ∠AOE = 15°

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-5

Question 4.
Construct the following angles and verily by measuring them by a protractor.

(i) 75°
(ii) 105°
(iii) 135°

Solution:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-6

Question 5.
Construct an equilateral triangle given its side and justify the construction.
Solution:

  1. Draw a ray AY with intial point A.
  2. With centred and radius equal to length of a side of the A draw an arc BY, cutting the ray AX at B.
  3. With centre B and the same radius draw an arc cutting are BY at C.
  4. Join AC and BC to obtain the required A.

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-7

Construction of Triangles:

Example 1:
Construction of a Triangle when its base, a base angle and sum of other two sides are given
Solution:
Step of Construction:

  1. Draw the base PQ.
  2. At point P draw an angle, MPQ equal to the given angle.
  3. Cut a line segment PM equal to sum of sides i.e., (PR + RQ) from point P.
  4. Join MQ.
  5. Draw the perpendicular bisector of MQ which intersect PM at R.
  6. Join QR. PQR is the required triangle.

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-8
Justification:
Mark points S as shown in Fig.
QS = MS (∴ RS is the perpendicular bisector of MQ)
RS = RS (Common)
∠QSR = ∠MSR (Each \({ 90 }^{ \underline { 0 } }\))
∆RSQ ≅ ∆RSQ (By SAS)
and so PQ = RM (By CPCT)
Now PR = PM – RM = PM – RQ
PM = PR + RQ.

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Example 2:
Construct a AABC in which BC = 3.6 cm, AB + AC = 4.8 and A RSM QS – MS RS = RS cm and B = ∠60°.
Solution:
Steps of Construction:

  1. Draw BC = 3.6 cm.
  2. Draw ∠CBX= \({ 60 }^{ \underline { 0 } }\) at B.
  3. From BX, cut off line segment BD = 4.8 cm.
  4. Join DC.
  5. Draw the perpcndicub: bisector ofDC meeting BD at A.
  6. joinAC.
  7. ABC is the required Mangle.

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-9
Justification:
‘A‘ lies on the perpendicular bisector of DC
∴ AD = AC
Now BD = 4.8 cm
⇒ BA + AD = 4.8
BA + AC = 4.8 (∴ AD = AC)

Example 3:
Construction of a Triangle when its Base Angle and the Difference of the other two sides are given.
Solution:
Case I:
Given the base BC, a base angle, say ∠B and AB – AC. Steps of Construction:

  1. Draw the base BC.
  2. At point B draw an angle ∠CBX equal to the given angle.
  3. Cut a line segment BD = AB – AC from point B.
  4. Join DC.
  5. Draw the perpendicular bisector of . DC which intersect BX at A.
  6. Join AC.
  7. ΔABC is the required triangle.

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-10
Justification:
As point A lies on the perpendicular bisector of DC
∴ AD = AC
BD = AB – AD = AB – AC (∴ AD = AC)

Case II:
Given the base BC, a base angle say ∠B and (AC – AB).
Steps of Construction:

  1. Draw the base SC.
  2. At point S, draw an angle, ∠CBX equal to the given angle and extend the arm XB backward.
  3. Cut a line segment BD equal to (AC – AB) from the extended arm.
  4. Join DC.
  5. Draw the perpendicular bisector of DC which intersect BX at A.
  6. Join AC.
  7. ΔABC is the required triangle.

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-11
Justification:
As the perpendicular bisector of DC passes through A.
∴ AD – AC
BD = AD – AB
∴ BD = AC – AB

Example 4:
Construct a ∆ABC in which BC = 3.4 cm, AB – AC = 1.5 cm and ∠B = \({ 45 }^{ \underline { 0 } }\).
Solution:
Steps of Construction:

  1. Draw base BC = 3.4 cm.
  2. Draw ∠CBX = \({ 45 }^{ \underline { 0 } }\).
  3. From BX, cut line segment BD =1.5 cm.
  4. Join DC.
  5. Draw the perpendicular bisector of DC which intersect BX at A.
  6. Join AC.
  7. ABC is the required triangle.

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-12
Justification:
As A lies on perpendicular bisector of DC.
AD = AC
BD = 1.5 cm
⇒ AB – AD =1.5 cm
AB – AC =1.5 cm

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Example 5:
Construct a ∆PQR in which QR = 5.8 cm, PR – PQ = 1.8 cm and ∠Q = \({ 45 }^{ \underline { 0 } }\). Justify your construction.
Solution:
Steps of Construction:

  1. Draw base QR = 5.8 cm.
  2. Draw ∠RQP = \({ 45 }^{ \underline { 0 } }\).
  3. Produce arm XQ backward and cut a line segment QS = 1.8 cm.
  4. Join SR.
  5. bisector of SR which intersect QX at P.
  6. Join PR.
  7. PQR is the required triangle.

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-13
Justification:
As P lies on perpendicular bisector of SR
PS = PR
QS = 1.8 cm
⇒ PS – PQ = 1.8 cm
∴ PR – PQ = 1.8 cm

Example 6:
Construct a ∆ABC in which BC = 5.8 cm, ∠C = \({ 60 }^{ \underline { 0 } }\) and AB – AC = 2.5 cm.
Solution:
Steps of Construction:

  1. Draw base BC = 5.8 cm
  2. Draw ∠ACB = \({ 60 }^{ \underline { 0 } }\)
  3. Produce arm CX backward and cut a line segment CD = 2.5 cm.
  4. Join BD.
  5. Draw perpendicular bisector of BD which intersect CX at A.
  6. Join AB.
  7. ABC is the required triangle.

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-14
Justification:
A lies on the perpendicular bisector of BD.
∴ AB =AD
CD = 2.5 cm
⇒ AD – AC = 2.5 cm
⇒ AB – AC = 2.5 cm

Example 7:
Construct a ∆ABC in which AC – AB = 3.5 cm, BC = 6.2 cm and ∠C = \({ 45 }^{ \underline { 0 } }\).
Solution:
Steps of Construction:

  1. Draw BC = 6.2 cm
  2. Draw ∠ACB = \({ 45 }^{ \underline { 0 } }\)
  3. Cut CD = 3.5 cm from CX.
  4. Join BD and draw the perpendicular bisector of BD which intersect CX at A.
  5. Join AB.
  6. ABC is the required triangle.

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-15
Justification:
As A lies on the perpendicular bisector of BD.
∴ AB = AD
CD = 3.5 cm
⇒ AC – AD = 3.5 cm
∴ AC – AB = 3.5 cm

Example 8:
Construction of a Triangle when its Perimeter and Two Base Angles are given.
Solution:
Given the base angles, ∠B and ∠C and perimeter, i.e., AB + BC + AC.
Steps of Construction:

  1. Draw a line segment, DE equal to AB + BC + CA.
  2. Draw ∠EDM and ∠DEN equal to the base angles ∠B and ∠C respectively.
  3. Draw bisectors of ∠MDE and ∠NED which intersect at A.
  4. Draw the perpendicular bisectors of AD and AE which intersect DE at B and C respectively.
  5. Join AE and AC.
  6. ABC is the required triangle.

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 Constructions Ex 11.1 img-16
Justification:
As B lies on the perpendicular bisector of AD
∴ AB = DB
In ∆ADB
AB = DB
∠ADB = ∠DAB
(∴ Angles opposite to equal sides of a A are equal)
Similarly, AC = CE
and ∠CAE = ∠CEA
Now DE = DB + BC + CE
= AB + BC + AC
In ∆ABD, ∠ABC = ∠DAB + ∠ADB = ∠ADB + ∠ADB = 2∠ADB
In ∆ACE, ∠ACB = ∠CAE + ∠CEA = ∠CEA + ∠CEA = 2∠CEA

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Example 9:
Construct a triangle whose perimeter is 6.4 cm and angles at the base are \({ 60 }^{ \underline { 0 } }\) and \({ 45 }^{ \underline { 0 } }\).
Solution:
Steps of Construction:

  1. Draw line segment DE equal to (AB + BC + CA) = 6.4 cm
  2. Draw ∠EDM = \({ 60 }^{ \underline { 0 } }\) and ∠DEN = \({ 45 }^{ \underline { 0 } }\).
  3. Draw AD and AE as bisectors of ∠MDE and ∠NED which inter sect at A.
  4. Draw the perpendicular bisector of AD and AE which intersect DE at B and C respectively.
  5. Join AB and AC.
  6. ABC is the required triangle.

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MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions पद्य Chapter 1 भक्ति धारा

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MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions पद्य Chapter 1 भक्ति धारा

भक्ति धारा अभ्यास

बोध प्रश्न

भक्ति धारा अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पद में मीठे फल का आनन्द लेने वाला कौन है?
उत्तर:
पद में मीठे फल का आनन्द लेने वाला गूंगा है।

प्रश्न 2.
अवगुणों पर ध्यान न देने के लिए सूरदास ने किससे प्रार्थना की है?
उत्तर:
अवगुणों पर ध्यान न देने के लिए सूरदास ने प्रभु श्रीकृष्ण से प्रार्थना की है।

प्रश्न 3.
पारस में कौन-सा गुण पाया जाता है?
उत्तर:
पारस एक प्रकार का पत्थर होता है जिसमें यह गुण पाया जाता है कि इसके स्पर्श से लोहा सोना हो जाता है।

प्रश्न 4.
जायसी के अनुसार संसार की सृष्टि किसने की है?
उत्तर:
जायसी के अनुसार संसार की सृष्टि आदि कर्तार (भगवान) ने की है।

प्रश्न 5.
ईश्वर ने रोगों को दूर करने के लिए मनुष्य को क्या दिया?
उत्तर:
ईश्वर ने रोगों को दूर करने के लिए मनुष्य को औषधियाँ प्रदान की हैं।

प्रश्न 6.
‘स्तुति खंड’ में जायसी ने कितने द्वीपों और भुवनों की चर्चा की है?
उत्तर:
स्तुति खंड में जायसी ने सात द्वीपों और चौदह भुवनों की चर्चा की है।

प्रश्न 7.
जायसी ने कथा किसका स्मरण करते हुए लिखी है?
उत्तर:
जायसी ने आदि एक कर्त्तार (भगवान) का स्मरण करते हुए कथा लिखी है जिसने जायसी को जीवन दिया और संसार का निर्माण किया।

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भक्ति धारा लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सूरदास ने निर्गुण की अपेक्षा सगुण को श्रेयस्कर क्यों माना है?
उत्तर:
सूरदास ने निर्गुण की अपेक्षा सगुण को श्रेयस्कर इसलिए माना है कि निर्गुण तो रूप रेख गुन जाति से रहित होता है अतः उसका कोई आधार नहीं होता है जबकि सगुण का आधार होता है।

प्रश्न 2.
गूंगा, फल के स्वाद का अनुभव किस तरह करता है?
उत्तर:
गूंगा व्यक्ति फल का स्वाद अन्दर ही अन्दर अनुभव करता है वह उसे किसी को बता नहीं सकता है।

प्रश्न 3.
कुब्जा कौन थी? उसका उद्धार कैसे हुआ?
उत्तर:
कुब्जा कंस की नौकरानी थी। उसका काम कंस को नित्य माथे पर चन्दन लगाना होता था। जब कृष्ण मथुरा में। पहुँचे तो सबसे पहले उनसे कुब्जा का ही सामना हुआ। भगवान। कृष्ण ने कुब्जा के कुब्ब पर हाथ रखा, तो वह अनुपम सुन्दरी बनकर उद्धार पा गई।

प्रश्न 4.
सूरदास ने स्वयं को ‘कुटिल खल कामी’ क्यों कहा है?
उत्तर:
सूरदास ने स्वयं को कुटिल, खल और कामी इसलिए कहा है कि जिसने उसे जीवन दिया उसी भगवान को वह भूल गया और काम वासनाओं में डूब गया।

प्रश्न 5.
जायसी के अनुसार परमात्मा ने किस-किस तरह के मनुष्य बनाए हैं?
उत्तर:
जायसी के अनुसार परमात्मा ने साधारण मनुष्य। बनाये तथा उनकी बढ़ाई की, उनके लिए अन्न एवं भोजन का प्रबन्ध किया। उसने राजा लोगों को बनाया एवं उनके भोग-विलास की व्यवस्था की तथा उनकी शोभा बढ़ाने के लिए हाथी, घोड़े आदि प्रदान किए। उसने किसी को ठाकुर तथा किसी को दास। बनाया। कोई भिखारी बनाया तो कोई धनी बनाया।

भक्ति धारा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सूरदास ने किस आधार पर ईश्वर को समदर्शी कहा है?
उत्तर:
सूरदास ने पारस पत्थर के आधार पर ईश्वर को समदर्शी कहा है। जिस प्रकार पारस पत्थर प्रत्येक लोहे को सोना बना देता है चाहे वह लोहा पूजा के काम में आता हो चाहे बधिक। के घर पशुओं की हत्या के काम आता हो। उसी आधार पर भगवान भी सभी का उद्धार कर देते हैं। चाहे वह व्यक्ति पुण्यात्मा हो अथवा पापात्मा हो।

प्रश्न 2.
निर्गुण और सगुण भक्ति में क्या अन्तर है?
उत्तर:
निर्गुण भक्ति में भगवान का न तो कोई रूप-रंग होता है और न कोई आकार-प्रकार। इस भक्ति में तो भक्त भगवान को अनन्य भाव से उसी में डूबकर भजता है। सगुण भक्ति में भक्त को आधार मिल जाता है। जिस पर वह अपना लक्ष्य निर्धारित कर भगवान की शरण में जाता है।

प्रश्न 3.
ईश्वर ने प्रकृति का निर्माण कितने रूपों में किया है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ईश्वर ने प्रकृति का निर्माण विविध रूपों में किया है। उसने हिम बनाया है तो अपार समुद्र भी। उसने सुमेरू और किष्किन्धा जैसे विशाल पर्वत बनाये हैं। उसने नदी, नाला और झरने बनाये हैं। उसने मगर, मछली आदि बनाये हैं। उसने सीप मोती और अनेक नगों का निर्माण किया है। उसने वनखंड और जड़-मूल, तरुवर, ताड़ और खजूर का निर्माण किया है। उसने जंगली पशु और उड़ने वाले पक्षी बनाये हैं। उसने पान, फूल एवं औषधियों का भी निर्माण किया है।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रंसग व्याख्या कीजिए
(अ) अविगत गति ……………. जो पावै।।
उत्तर:
उस अज्ञात निर्गुण ब्रह्म की गति अर्थात् लीला कुछ कहते नहीं बनती है अर्थात् वह निर्गुण ब्रह्म वर्णन से परे है। जिस प्रकार गँगा व्यक्ति मीठा फल खाता है और उसके रस के आनन्द का अन्दर ही अन्दर अनुभव करता है। वह आनन्द उसे अत्यधिक सन्तोष प्रदान करता है लेकिन उसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता उसी प्रकार वह निर्गुण ब्रह्म मन और वाणी से परे है। उसे तो जानकर ही प्राप्त किया जा सकता है। उस निर्गुण ब्रह्म की न कोई रूपरेखा एवं आकति होती है न उसमें कोई गुण होता है और न उसे प्राप्त करने का कोई उपाय है। ऐसी दशा में उस परमात्मा को प्राप्त करने हेतु यह आलम्बन चाहने वाला मन बिना सहारे के कहाँ दौड़े? वास्तव में इस मन को तो कोई न कोई आधार चाहिए ही, तभी वह उसको पाने के लिए प्रयास कर सकता है। सूरदास जी कहते हैं कि मैंने यह बात भली-भाँति जान ली है कि वह निर्गुण ब्रह्म अगम्य अर्थात् हमारी पहुँच से परे है। इसी कारण मैंने सगुण लीला के पदों का गान किया है।

(ब) अधिक कुरूप कौन …………. फिरि-फिरि जठर जरै।
उत्तर:
सूरदास जी कहते हैं कि जिस किसी पर दीनानाथ कृपा कर देते हैं वही व्यक्ति इस संसार में कुलीन, बड़ा और सुन्दर हो जाता है।

आगे इसी तथ्य को सिद्ध करने के लिए वे अनेक दृष्टान्त और अन्तर्कथाएँ प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि विभीषण रंक एवं निशाचर था पर भगवान ने कृपा करके रावण वध के पश्चात् उसी के सिर छत्र धारण कराया अर्थात् लंका का राजा बनाया। रावण से बड़ा शूरवीर योद्धा संसार में कौन था अर्थात् कोई नहीं, लेकिन चूँकि उस पर भगवान की कृपा नहीं थी। इस कारण वह मिथ्या गर्व में ही जीवन भर जलता रहा। सुदामा से बड़ा दरिद्र कौन था, जिसे भगवान ने कृपा करके अपने समान दो लोकों का पति अर्थात् स्वामी बना दिया।

अजामील से बड़ा अधम कौन था अर्थात् कोई नहीं। वह इतना बड़ा दुष्ट था कि उसके पास जाने में मृत्यु के देवता यमराज को भी डर लगता था, पर भगवान ने कृपा करके उस पापी का भी उद्धार कर दिया। नारद मुनि से बढ़ा वैरागी संसार में कोई नहीं हुआ लेकिन प्रभु कृपा के अभाव में वह रात-दिन इधर-उधर चक्कर लगाया करते हैं। शंकर से बड़ा योगी कौन था अर्थात् कोई नहीं, लेकिन भगवान की कृपा के अभाव में वह भी कामदेव द्वारा छले गये। कुब्जा से अधिक कुरूप स्त्री कौन थी अर्थात् कोई नहीं, लेकिन भगवान की कृपा से उसने स्वयं भगवान को पति रूप में प्राप्त कर अपना उद्धार किया। सीता के समान संसार में सुन्दर स्त्री कौन थी अर्थात् कोई नहीं, लेकिन भगवान की कृपा के अभाव में उन्हें भी जीवन भर वियोग सहना पड़ा।

अंत में कवि कहता है कि भगवान की इस माया को कोई नहीं जान सकता है। न मालूम वे किस रस के रसिक होकर भक्त पर अपनी कृपा की वर्षा कर दें। सूरदास जी कहते हैं कि भगवान के भजन के बिना मनुष्य को बार-बार इस पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ता है और जन्म लेने के कारण उसे अपनी माता की कोख की अग्नि में बार-बार जलना पड़ता है।

(स) कीन्हेसि मानुस दिहिस ……….. अघाइ न कोई।
उत्तर:
कविवर जायसी कहते हैं कि उसी सृष्टिकर्ता ने मनुष्य को निर्मित किया तथा सृष्टि के अन्य सभी पदार्थों में उसे बड़प्पन प्रदान किया। उसने उसे अन्न और भोजन प्रदान किया। उसी ने राजाओं को बनाया जो राज्यों का भोग करते हैं, हाथियों और घोड़ों को उनके साज के रूप में बनाया। उनके मनोरंजन के लिए उसने अनेक विलास की सामग्री बनाईं और किसी को उसने स्वामी बनाया तो किसी को दास। उसने द्रव्य बनाए जिनके कारण मनुष्यों को गर्व होता है। उसने लोभ को बनाया जिसके कारण कोई मनुष्य उन द्रव्यों से तृप्त नहीं होता है, उनकी निरन्तर भूख बनी रहती है। उसी ने जीव का निर्माण किया जिसे सब लोग चाहते हैं और उसी ने मृत्यु का निर्माण किया जिसके कारण कोई भी सदैव जीवित नहीं रह सका है। उसने सुख, कौतुक और आनन्द का निर्माण किया है। साथ ही उसने दुःख, चिन्ता और द्वन्द्व की भी रचना की है। किसी को उसने भिखारी बनाया तो किसी को धनी बनाया। उसने सम्पत्ति बनाई तो बहुत प्रकार की विपत्तियाँ भी बनाईं। किसी को उसने निराश्रित बनाया तो किसी को बलशाली। छार (मिट्टी) से ही उसने सब कुछ बनाया और पुनः सबको उसने छार (मिट्टी) कर दिया।

भक्ति धारा महत्त्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

भक्ति धारा बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सूरदास ने अविगत गति किसकी बतलाई है?
(क) सगुण उपासक की
(ख) निर्गुण उपासक की
(ग) सगुण ब्रह्म की
(घ) निर्गुण ब्रह्म की।
उत्तर:
(घ) निर्गुण ब्रह्म की।

प्रश्न 2.
‘अधम उधारन’ का अर्थ है-
(क) पापियों का संहार करने वाला
(ख) पापियों का उद्धार करने वाला
(ग) पापियों को शरण देने वाला
(घ) पापियों की रक्षा करने वाला।
उत्तर:
(ख) पापियों का उद्धार करने वाला

प्रश्न 3.
ईश्वर अपनी कृपा किस पर करता है?
(क) जिसको वह अपना कृपापात्र बनाना चाहता है
(ख) सुन्दर पर
(ग) कुरूप पर
(घ) पापी पर।
उत्तर:
(क) जिसको वह अपना कृपापात्र बनाना चाहता है

प्रश्न 4.
मीठे फल का आनन्द लेने वाला कौन है? (2009)
(क) बहरा
(ख) गूंगा
(ग) अन्धा
(घ) अपाहिज।
उत्तर:
(ख) गूंगा

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रिक्त स्थानों की पूर्ति-

  1. सूरदास जी ने ………… भक्ति को श्रेष्ठ माना है। (2011)
  2. गूंगे के लिए मीठे फल का रस ……….. ही होता है।
  3. ‘मधुप की मधुर गुनगुन’ से आशय …………. है। (2009)
  4. ईश्वर छार में से सब कुछ बनाकर सबको पुनः ………….. कर देता है।

उत्तर:

  1. सगुण
  2. अन्तर्गत
  3. भौंरों के मधुर गान से
  4. छार।

सत्य/असत्य

  1. सूरदास वात्सल्य रस के सम्राट हैं। (2012)
  2. लोकायतन के रचयिता सूरदास हैं। (2009)
  3. मलिक मोहम्मद जायसी सूफी कवि थे।
  4. शंकर जी को भी कामदेव ने छलने का प्रयास किया।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. सत्य

सही जोड़ी मिलाइए

MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions पद्य Chapter 1 भक्ति धारा img-1
उत्तर:
1. → (ख)
2. → (ग)
3. → (क)
4. → (घ)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. मनवाणी के लिए अगम और अगोचर क्या है?
  2. पूजाघर में रखे हुए लोहे में और बहेलिए के घर में रखे लोहे में कौन भेद नहीं करता?
  3. सूरदास जी के अनुसार ईश्वर का भजन न करने से क्या होता है? (2009)
  4. जायसी के अनुसार ईश्वर की प्रकृति कैसी है?

उत्तर:

  1. निर्गुण ब्रह्म
  2. पारस पत्थर
  3. प्राणी को पुनः पुनः माँ के उदर में आकर जन्म लेना पड़ता है
  4. अनेक वर्ण वाली।

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विनय के पद भाव सारांश

प्रस्तुत विनय के पदों में सूरदास जी ने कहा है कि निर्गुण ब्रह्म की उपासना दुरूह होने के कारण वे सगुण की उपासना करते हैं। निर्गुणोपासक योगी ब्रह्म का अनुभव मन ही मन करके आनन्द प्राप्त कर सकता है किन्तु उसे अभिव्यक्त नहीं कर सकता। जैसे एक मूक व्यक्ति मधुर फल का रसास्वादन मन ही मन करता है किन्तु उसकी अभिव्यक्ति नहीं कर पाता, उसी प्रकार से निर्गुण ब्रह्म रूप व आकार से परे है। इसीलिए सूरदास जी सगुणोपासना को अत्यन्त सरल बताते हैं।

सूरदास जी के अनुसार परमात्मा अत्यन्त दयालु और समदर्शी हैं। वह सभी का कल्याण करते हैं। हम ही उनकी भक्ति से दूर होकर विषय-भोगों की मरीचिका में भटकते फिरते हैं। यदि हम उनकी शरण में जायें तो वह हमारा क्षण भर में उद्धार कर सकते हैं। वह बड़े-बड़े पापियों का उद्धार करने वाले हैं। जिस पर उनकी कृपादृष्टि पड़ती है, वह इस संसार सागर को पार कर जाता है।

विनय के पद संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

(1) अविगत-गति कछु कहत न आवै।
ज्यों गूंगे मीठे फल को रस, अन्तरगत ही भावै।
परम स्वाद सबही सुनिरन्तर, अमित तोष उपजावै।
मन-बानी को अगम अगोचर, सो जानै जो पावै।
रूप-रेख-गुन-जात जुगति-बिनु, निरालंब कित धावै।
सब विधि अगम विचारहि तातें, सूर सगुन पद गावै।।

शब्दार्थ :
अविगत = अज्ञात ईश्वर। गति = दशा। अन्तरगत = हृदय में। अमित = अत्यधिक। तोष = सन्तोष। उपजावै = पैदा करता है। अगोचर = अदृश्य। गुन = गुण। जुगति = मुक्ति। निरालंब = बिना आश्रय के। कित = किधर। धावै = दौड़े। अगम = पहुँच के बाहर। ता” = इस कारण से। सगुन = सगुण भक्ति के।

सन्दर्भ :
प्रस्तुत पद ‘भक्तिधारा’ पाठ के अन्तर्गत ‘विनय के पद’ शीर्षक से लिया गया है। इसके रचयिता महाकवि सूरदास हैं।

प्रसंग :
इस पद में निर्गुण-निराकार ब्रह्म को अगम्य बताकर विवशता की स्थिति में सूरदास सगुण लीला का वर्णन कर रहे हैं।

व्याख्या :
उस अज्ञात निर्गुण ब्रह्म की गति अर्थात् लीला कुछ कहते नहीं बनती है अर्थात् वह निर्गुण ब्रह्म वर्णन से परे है। जिस प्रकार गँगा व्यक्ति मीठा फल खाता है और उसके रस के आनन्द का अन्दर ही अन्दर अनुभव करता है। वह आनन्द उसे अत्यधिक सन्तोष प्रदान करता है लेकिन उसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता उसी प्रकार वह निर्गुण ब्रह्म मन और वाणी से परे है। उसे तो जानकर ही प्राप्त किया जा सकता है। उस निर्गुण ब्रह्म की न कोई रूपरेखा एवं आकति होती है न उसमें कोई गुण होता है और न उसे प्राप्त करने का कोई उपाय है। ऐसी दशा में उस परमात्मा को प्राप्त करने हेतु यह आलम्बन चाहने वाला मन बिना सहारे के कहाँ दौड़े? वास्तव में इस मन को तो कोई न कोई आधार चाहिए ही, तभी वह उसको पाने के लिए प्रयास कर सकता है। सूरदास जी कहते हैं कि मैंने यह बात भली-भाँति जान ली है कि वह निर्गुण ब्रह्म अगम्य अर्थात् हमारी पहुँच से परे है। इसी कारण मैंने सगुण लीला के पदों का गान किया है।

विशेष :

  1. इस पद में निर्गुण ब्रह्म को अगम्य और सगुण ब्रह्म को सुगम माना गया है।
  2. ‘ज्यों गूंगे …………… भाव’ में उदाहरण अलंकार, ‘रूप-रेख-गुन ………….. धावै’ में विनोक्ति तथा सम्पूर्ण में अनुप्रास अलंकार।
  3. शान्त रस।

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(2) हमारे प्रभु औगुन चित न धरौ।
समदरसी है नाम तुम्हारौ, सोई पार करौ।
इक लोहा पूजा मैं राखत, इक घर बधिक परौ।
सो दुविधा पारस नहिं जानत, कंचन करत खरौ।
इक नदिया, इक नार कहावत, मैलौ नीर भरौ।
जब दोऊ मिलि एक बरन गए, सुरसरि नाम परौ।
तन माया ज्यों ब्रह्म कहावत सूर सुमिलि बिगरौ।
कै इनको निरधार कीजिए, कै प्रन जात टरौ॥

शब्दार्थ :
औगुन = अवगुण, दोष। समदरसी = सबको समान समझने वाला। तिहारो = तुम्हारा, आपका। राखत = रखते हैं। बधिक = कसाई। पारस = एक प्रकार का पत्थर जिसके स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है। कंचन = सोना। नार = नाला। बरन = वर्ण, रंग। सुरसरि = देवनदी गंगा। बिगरौ = बिगड़ गया। निरधार = निर्धारण करना, अलग-अलग। प्रन = प्रण, प्रतिज्ञा।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
इस पद में सूर ने भगवान से प्रार्थना की है कि वे उसके अवगुणों पर ध्यान न दें।

व्याख्या :
सूरदास जी भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि हे प्रभु! आप हमारे अवगुणों को अपने मन में मत लाओ। आपका नाम तो समदर्शी है अर्थात् आप सभी मनुष्यों के लिए एक-सा देखने वाले हो। आप यदि चाहें तो मेरा भी उद्धार कर दें। एक लोहा पूजा में रखा जाता है और एक कसाई के घर माँस काटने के काम आता है। पारस पत्थर इस दुविधा को नहीं देखता है कि यह पूजा का लोहा है या कसाई के घर का लोहा है। वह तो दोनों प्रकार के लोहे को खरा सोना बना देता है। इसी प्रकार एक नदी का पानी होता है और एक नाले का पानी होता है लेकिन जब ये दोनों मिलकर एक रंग के हो जाते हैं तो इनका नाम देवनदी गंगा पड़ जाता है। यह शरीर माया है और जीव ब्रह्म का अंश कहलाता है। यह जीवात्मा माया से मिलकर बिगड़ गयी है। हे भगवान्! या तो इनका निर्धारण करके अलग-अलग कर दीजिए, नहीं तो आपकी पतित पावन और समदर्शी होने की प्रतिज्ञा समाप्त हुई जा रही है।

विशेष :

  1. भगवान के समदर्शी नाम का लाभ उठाते हुए सूरदास अपने पापी मन के उद्धार की प्रार्थना करते हैं।
  2. ‘इक लोहा ………… बधिक परौ’-में उदाहरण अलंकार।
  3. सम्पूर्ण में अनुप्रास की छटा।

(3) मो सम कौन कुटिल खल कामी।
तुम सौं कहा छिपी करुनामय, सबके अन्तरजामी।
जो तन दियौ ताहि बिसरायौ, ऐसौ नोन-हरामी।
भरि-भरि द्रोह विर्षे कौं धावत, जैसे सूकर ग्रामी।
सुनि सतसंग होत जिय आलस, विषयिनि संग बिसरामी।
श्री हरि-चरन छाँड़ि बिमुखनि की, निसि-दिन करत गुलामी।
पापी परम, अधम अपराधी, सब पतितनि मैं नामी।
सूरदास प्रभु अधम-उधारन, सुनियै श्रीपति स्वामी।।

शब्दार्थ :
सम = समान। कुटिल = टेढ़ा। खल = दुष्ट। कामी = विषयभोग में डूबा हुआ। करुनामय = भगवान। अन्तरजामी = हृदय की बात जानने वाले। ताहि = उसी को। बिसरायौ = भूल गया। नोन-हरामी = नमक हरामी। वि. कौं धावत = विषय वासनाओं की ओर दौड़ता है। सूकर ग्रामी = गाँव का सूअर। विषयनि संग विसरामी = विषय वासनाओं में डूब जाता है। विमुखिनि = दुष्टों की। नामी = प्रसिद्ध। अधम-उधारन = नीच व्यक्तियों का उद्धार करने वाले। श्री पति स्वामी = भगवान श्रीकृष्ण।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
इस पद में सूर ने अपने आपको कुटिल, खल एवं कामी बताते हुए संसार के सभी पापियों में सबसे बड़ा पापी बताते हुए अपने उद्धार की प्रार्थना की है।

व्याख्या :
सूरदास जी कहते हैं कि हे भगवान! मेरे समान कोई भी कुटिल, खल और कामी नहीं है अर्थात् मैं सबसे बड़ा पापी एवं कामी हूँ। हे भगवान! आप करुणामय हैं तथा सबके हृदय की बात जानते हैं, इसलिए आपसे मेरा क्या छिपा हुआ है? अर्थात् आप मेरे पापों को भली-भाँति जानते हैं। मेरे समान नमक हराम इस संसार में कोई नहीं है जिसने अर्थात् आपने मुझे यह नर शरीर दिया, मैं आपको ही भूल गया और माया, मोह तथा विषय-वासनाओं में डूब गया अत: मुझसे बड़ा नमक हराम अर्थात् कृतघ्न कोई नहीं हो सकता। मैं काम वासनाओं में इतना अंधा हो गया कि बार-बार उन्हीं की ओर मैं दौड़ता रहता हूँ जिस प्रकार कि गाँव का सूअर गन्दगी या विष्टा की ओर बार-बार दौड़ा करता है। मैं कितना गिरा हुआ व्यक्ति हूँ कि सत्संग की जब भी चर्चा होती है तो उसे सुनकर मुझे आलस्य आने लगता है तथा विषय-वासनाओं में मेरा मन आनन्द का अनुभव किया करता है।

मैं भगवान के चरणों को छोड़कर रात-दिन दुष्ट लोगों की गुलामी करता रहता हूँ। मैं महान् पापी हूँ तथा अधम अपराधी हूँ और सब पतितों में बड़ा हूँ। हे करुणामय भगवान श्री कृष्ण! आप तो अधम अर्थात् पतित लोगों का उद्धार करने वाले हैं, अतः हे श्रीपति स्वामी भगवान! मेरी टेर अर्थात् पुकार को सुन लीजिए और मुझ दुष्ट का उद्धार कर दीजिए।

विशेष :

  1. कवि आत्मग्लानि वश अपने सभी पापों को स्वीकारता है तथा भगवान से उद्धार की विनती करता है।
  2. उपमा एवं अनुप्रास की छटा।
  3. नोन हरामी, गुलामी आदि उर्दू फारसी शब्दों का प्रयोग किया है।

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(4) जापर दीनानाथ ढरैं।
सोइ कुलीन बड़ौ सुन्दर सोई, जिहि पर कृपा करे।
कौन विभीषन रंक-निसाचर, हरि हँसि छत्र धरै।
राजा कौन बड़ौ रावन तैं, गर्बहि-गर्ब गरे।
रंकव कौन सुदामा हूँ तै, आप समान करै।
अधम कौन है अजामील तें, जम तँह जात डरै।
कौन विरक्त अधिक नारद तैं, निसि दिन भ्रमत फिरै।
जोगी कौन बड़ौ संकर तैं, ताको काम छरै।
अधिक कुरूप कौन कुबिजा तैं, हरिपति पाइ तरै।
अधिक सुरूप कौन सीता तै, जनक वियोग भरै।
यह गति-गति जानै नहि कोऊ, किहिं रस रसिक ढरै।
सूरदास भगवंत-भजन बिनु, फिरि-फिरि जठर जरै॥

शब्दार्थ :
जापर = जिस किसी के ऊपर। दीनानाथ = भगवान। ढरें = कृपा करते हैं। सोई = वही व्यक्ति। रंक निसाचर = दरिद्र निशाचर। छत्र धरै = छत्र धारण कराया अर्थात् राजा बनाया। रंकव = दरिद्र। अधम = नीच। जम = यमराज। जात डरै = जाने में डरता था। विरक्त = वैरागी। काम छरै = कामदेव ने छल किया। किहिं रस रसिक ढरै = न मालूम किस रस में वे ढलने लगते हैं। जठर जरै = पेट की अग्नि में जलता है, अर्थात् बार-बार जन्म लेता है।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
इस पद में सूरदास जी कहते हैं कि भगवान की माया बड़ी विचित्र है। जिस किसी. पर भगवान की कृपा हो जाती है; वही व्यक्ति कुलीन होता है, वही बड़ा होता है तथा वही सुन्दर होता है।

व्याख्या :
सूरदास जी कहते हैं कि जिस किसी पर दीनानाथ कृपा कर देते हैं वही व्यक्ति इस संसार में कुलीन, बड़ा और सुन्दर हो जाता है।

आगे इसी तथ्य को सिद्ध करने के लिए वे अनेक दृष्टान्त और अन्तर्कथाएँ प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि विभीषण रंक एवं निशाचर था पर भगवान ने कृपा करके रावण वध के पश्चात् उसी के सिर छत्र धारण कराया अर्थात् लंका का राजा बनाया। रावण से बड़ा शूरवीर योद्धा संसार में कौन था अर्थात् कोई नहीं, लेकिन चूँकि उस पर भगवान की कृपा नहीं थी। इस कारण वह मिथ्या गर्व में ही जीवन भर जलता रहा। सुदामा से बड़ा दरिद्र कौन था, जिसे भगवान ने कृपा करके अपने समान दो लोकों का पति अर्थात् स्वामी बना दिया।

अजामील से बड़ा अधम कौन था अर्थात् कोई नहीं। वह इतना बड़ा दुष्ट था कि उसके पास जाने में मृत्यु के देवता यमराज को भी डर लगता था, पर भगवान ने कृपा करके उस पापी का भी उद्धार कर दिया। नारद मुनि से बढ़ा वैरागी संसार में कोई नहीं हुआ लेकिन प्रभु कृपा के अभाव में वह रात-दिन इधर-उधर चक्कर लगाया करते हैं। शंकर से बड़ा योगी कौन था अर्थात् कोई नहीं, लेकिन भगवान की कृपा के अभाव में वह भी कामदेव द्वारा छले गये। कुब्जा से अधिक कुरूप स्त्री कौन थी अर्थात् कोई नहीं, लेकिन भगवान की कृपा से उसने स्वयं भगवान को पति रूप में प्राप्त कर अपना उद्धार किया। सीता के समान संसार में सुन्दर स्त्री कौन थी अर्थात् कोई नहीं, लेकिन भगवान की कृपा के अभाव में उन्हें भी जीवन भर वियोग सहना पड़ा।

अंत में कवि कहता है कि भगवान की इस माया को कोई नहीं जान सकता है। न मालूम वे किस रस के रसिक होकर भक्त पर अपनी कृपा की वर्षा कर दें। सूरदास जी कहते हैं कि भगवान के भजन के बिना मनुष्य को बार-बार इस पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ता है और जन्म लेने के कारण उसे अपनी माता की कोख की अग्नि में बार-बार जलना पड़ता है।

विशेष :

  1. कवि का मानना है कि भगवत् कृपा के बिना कुछ भी सम्भव नहीं है।
  2. इस बात को सिद्ध करने के लिए कवि ने विभीषण, रावण, सुदामा, अजामील, नारद, शंकर, कुब्जा, सीता आदि के जीवन से सम्बन्धित अन्तर्कथाओं की ओर संकेत किया है।
  3. उदाहरण तथा उपमा अलंकारों का सुन्दर प्रयोग।

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स्तुति खण्ड भाव सारांश

निर्गुण भक्ति धारा के प्रेममार्गी सूफी कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने अपने ग्रन्थ ‘पद्मावत’ में लौकिक दाम्पत्य-प्रेम के माध्यम से अलौकिक सत्ता के प्रति प्रेम भावना व्यक्त की है। पाठ्य-पुस्तक के स्तुति खण्ड’ में कवि ने उस करतार’ का स्मरण करते हुए कहा है कि वह उसने प्रकृति को अनेक रूपों में सृजित किया है। अग्नि, जल, गगन, पृथ्वी,वायु आदि सब उसी से उत्पन्न हुए। उसने संसार में वृक्ष, नदी, सागर, पशु-पक्षी और मनुष्य आदि अनेक प्रकार के जीवों की संरचना की। उसने इनके लिए भोजन बनाया। उसने रोग, औषधियाँ, जीवन, मृत्यु, सुख,दुःख,आनन्द, चिन्ता और द्वन्द्व आदि बनाये तथा संसार में उसने किसी को राजा,किसी को सेवक, किसी को भिखारी और किसी को धनी बनाया।

स्तुति खण्ड संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

(1) सँवरौं आदि एक करतारू। जेहँ जिउदीन्ह कीन्ह संसारू॥
कीन्हेसि प्रथम जोति परगासू। कीन्हेसि तेहिं पिरीति कवितासू॥
कीन्हेसि अगिनि पवन जल खेहा। कीन्हेसि बहुतइ रंग उरेहा॥
कीन्हेसि धरती सरग पतारू। कीन्हेसि बरन-बरन अवतारू॥
कीन्हेसि सात दीप ब्रह्मडा। कीन्हेसि भुवन-चौदहउ खंडा।
कीन्हेसि दिन दिनअर ससि राती। कीन्हेसि नखत तराइन पाँती॥
कीन्हेंसि धूप सीउ और छाहाँ। कीन्हेसि मेघ बिजु तेहि माहाँ॥
कीन्ह सबइ अस जाकर दोसरहि छाज न काहु।
पहिलेहिं तेहिक नाउँलइ, कथा कहौं अवगाहुँ।

शब्दार्थ :
सँवरौं = स्मरण करता हूँ। आदि = आरम्भ में। करतारू = कर्त्तार (सृष्टिकर्ता)। जिउ = जीवन। कीन्ह संसारू = संसार की रचना की। परगास = प्रकट किया। पिरीति = प्रीति के लिए। खेहा = मिट्टी। उरेहा = रेखांकन। सरग = स्वर्ग। पतारू = पाताल। बरन-बरन अवतारू = नाना प्रकार के वर्णों के प्राणी बनाए। दीप = द्वीप। दिनअर = सूर्य। ससि = चन्द्रमा। नखत = नक्षत्र। तराइन = तारागणों की। पाँती = पंक्ति। सीउ = शीत। बीजु = बिजली। भाहाँ = मध्य में। दोसरहि = दूसरे को। छाज = शोभा। तेहिक = उसी का। अवगाहु = अवगाहन करता हूँ, वर्णन करता हूँ।

सन्दर्भ :
प्रस्तुत छन्द मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा रचित ‘पद्मावत’ महाकाव्य के ‘स्तुति खण्ड’ से लिया गया है।

प्रसंग :
इस पद में कवि ने ग्रन्थ की रचना में सृष्टि के निर्माता आदि ईश्वर का स्मरण करते हुए कहा है।

व्याख्या :
महाकवि जायसी कहते हैं कि मैं आदि में उस एक कर्ता (सृष्टिकर्ता) का स्मरण करता हूँ, जिसने हमें जीवन दिया और जिसने संसार की रचना की। जिसने आदि ज्योति अर्थात् मुहम्मद के नूर का प्रकाश किया और उसी की प्रीति के लिए कैलास की रचना की। जिसने अग्नि, वायु, जल और मिट्टी का निर्माण किया और जिसने अनेक प्रकार के रंगों में तरह-तरह के चित्रांकन (रेखांकन) किए। जिसने धरती, आकाश और पाताल की रचना की और जिसने नाना वर्ण के प्राणियों को अवतरित किया, जिसने सात द्वीप और ब्रह्माण्ड की रचना की और जिसने चौदह खण्ड भुवनों की रचना की। जिसने दिन, दिनकर, चन्द्रमा और रात्रि की रचना की तथा जिसने नक्षत्रों और तारागणों की पंक्ति की रचना की। जिसने धूप, शीत और छाया का निर्माण किया और ऐसे मेघों का निर्माण किया जिनमें बिजली निवास करती है। उसने ऐसी सम्पूर्ण सृष्टि की रचना की है जो दूसरे किसी को भी शोभा नहीं दे सकी।

अतः सर्वप्रथम मैं उसी कर्ता का नाम लेकर अपनी विस्तृत कथा की रचना कर रहा हूँ।

विशेष :

  1. यह छन्द ईश स्तुति के रूप में जाना जाता है।
  2. स्मरण की यह शैली सूफी प्रभाव से प्रभावित है।
  3. अनुप्रास की छटा।
  4. चौपाई दोहा छन्द है।
  5. अवधी भाषा का प्रयोग।

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(2) कीन्हेसि हेवँ समुंद्र अपारा। कीन्हेसि मेरु खिखिंद पहारा॥
कीन्हेसि नदी नार औझारा। कीन्हेसि मगर मछं बहुबरना॥
कीन्हेसि सीप मोंति बहुभरे। कीन्हेसि बहुतइ नग निरमरे॥
कीन्हेसि वनखंड औ जरि मूरी। कीन्हेसि तरिवर तार खजूरी॥
कीन्हेसि साऊन आरन रहहीं। कीन्हेसि पंखि उड़हि जहँ चहहीं॥
कीन्हेसि बरन सेत औ स्यामा। कीन्हेसि भूख नींद बिसरामा॥
कीन्हेसिपान फूल बहुभोगू। कीन्हेसि बहुओषद बहुरोगू॥
निमिख न लाग कर, ओहि सबइ कीन्ह पल एक।
गगन अंतरिख राखा बाज खंभ, बिनु टेक॥

शब्दार्थ :
कीन्हेसि = निर्माण किया। हेरौं = हिम। मेरु = रेगिस्तान। खिखिंद = किष्किन्धा पर्वत। नार = नाला। झारा = झरना। मछ = मछली। सीप = शुक्ति। निरभरे = निर्मल। जरिमूरी = जड़ और मूल। तखिर = श्रेष्ठ वृक्ष। तार = ताड़ वृक्ष। साउज = जंगली जानवर। आरन = अरण्य में। सेत = श्वेत। बरन = वर्ण। पान = ताम्बूल। ओषद = औषधि। निमिख = पलभर। अंतरिख = अंतरिक्ष। बाज = बिना। खंभ = स्तम्भ। टेक = सहारा।

सन्दर्भ एवं प्रसंग :
पूर्ववत्।

व्याख्या :
कविवर जायसी कहते हैं कि उसी परमात्मा ने हिम तथा अपार समुद्रों की रचना की है। उसी ने सुमेरू तथा किष्किन्धा पर्वतों की रचना की है। उसी ने नदियों, नालों एवं झरनों की रचना की है। उसी ने सीपियों और बहुत प्रकार के मोतियों तथा निर्मल नगों का निर्माण किया है। उसी ने वन खण्ड और जड़ों तथा मूलों का निर्माण किया है। उसी ने ताड़, खजूर आदि तरुवरों का निर्माण किया है। उसी ने जंगली जानवरों का निर्माण किया जो जंगल में रहते हैं। उसी ने पक्षियों का निर्माण किया जो जहाँ चाहते हैं, उड़ जाते हैं। उसी ने श्वेत और श्याम वर्णों का निर्माण किया और उसी ने भूख, नींद तथा विश्राम का निर्माण किया। इन सबकी रचना करने में उसे एक पल भी नहीं लगा और उसने यह सब कुछ पलक झपकते ही कर दिया। पुनः उसी ने आकाश को भी बिना किसी खम्भे और टेक के अन्तरिक्ष में रख दिया।

विशेष :

  1. इस्लाम धर्म के मतानुसार समस्त सृष्टि का निर्माण उसी आदि शक्ति (नूर) ने किया है।
  2. अनुप्रास की छटा।
  3. अवधी भाषा का प्रयोग।

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(3) कीन्हेसि मानुस दिहिस बड़ाई। कीन्हेसि अन्न भुगुति तेंहि पाई॥
कीन्हेसि राजा पूँजहि राजू। कीन्हेसि हस्ति घोर तिन्ह साजू॥
कीन्हेसि तिन्ह कहँ बहुत बेरासू। कीन्हेसि कोई ठाकुर कोइ दासू॥
कीन्हेसि दरब गरब जेहिं होई। कीन्हेसि लोभ अघाइन कोई॥
कीन्हेसि जिअन सदा सब चाहा। कीन्हेसि मीच न कोई राहा॥
कीन्हेसि सुख औ कोड अनंदू। कीन्हेसि दुख चिंता औ दंदू॥
कीन्हेसि कोई भिखारि कोई धनी। कीन्हेसि संपति विपति पुनि घनी॥
कीन्हेसि कोई निभरोसी, कीन्हेसि कोई बरिआर।
छार हुते सब कीन्हेसि, पुनि कीन्हेसि सब छार॥

शब्दार्थ :
कीन्हेसि = किया है। मानुस = मनुष्य। दिहिसि बड़ाई = बड़प्पन प्रदान किया। भुगुति = भुक्ति या भोजन। पूँजहि राजू = जो राज का भोग करते हैं। हस्ति = हाथी। घोर = घोड़ा। बेरासू = विलास की सामग्री। ठाकुर = स्वामी। दासू = दास। दरब = द्रव्य। गरब = गर्व। अघाइ न कोई = कोई तृप्त नहीं होता। जिअन = जीवन। मीचु – मृत्यु। कोड= कौतुक। दंदू = द्वन्द्व। संपति = सम्पत्ति। घनी = बहुत। निभरोसी = निराश्रित। बरिआर = बलशाली। छार = राख, धूल।,

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
इस पद में कविवर जायसी ने ईश्वर द्वारा निर्मित सृष्टि का वर्णन किया है।

व्याख्या :
कविवर जायसी कहते हैं कि उसी सृष्टिकर्ता ने मनुष्य को निर्मित किया तथा सृष्टि के अन्य सभी पदार्थों में उसे बड़प्पन प्रदान किया। उसने उसे अन्न और भोजन प्रदान किया। उसी ने राजाओं को बनाया जो राज्यों का भोग करते हैं, हाथियों और घोड़ों को उनके साज के रूप में बनाया। उनके मनोरंजन के लिए उसने अनेक विलास की सामग्री बनाईं और किसी को उसने स्वामी बनाया तो किसी को दास। उसने द्रव्य बनाए जिनके कारण मनुष्यों को गर्व होता है। उसने लोभ को बनाया जिसके कारण कोई मनुष्य उन द्रव्यों से तृप्त नहीं होता है, उनकी निरन्तर भूख बनी रहती है। उसी ने जीव का निर्माण किया जिसे सब लोग चाहते हैं और उसी ने मृत्यु का निर्माण किया जिसके कारण कोई भी सदैव जीवित नहीं रह सका है। उसने सुख, कौतुक और आनन्द का निर्माण किया है। साथ ही उसने दुःख, चिन्ता और द्वन्द्व की भी रचना की है। किसी को उसने भिखारी बनाया तो किसी को धनी बनाया। उसने सम्पत्ति बनाई तो बहुत प्रकार की विपत्तियाँ भी बनाईं। किसी को उसने निराश्रित बनाया तो किसी को बलशाली। छार (मिट्टी) से ही उसने सब कुछ बनाया और पुनः सबको उसने छार (मिट्टी) कर दिया।

विशेष :

  1. अनुप्रास की छटा।
  2. शान्त रस।
  3. अवधी भाषा का प्रयोग।

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MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 12 उपभोक्ता संरक्षण

MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 12 उपभोक्ता संरक्षण

उपभोक्ता संरक्षण Important Questions

उपभोक्ता संरक्षण लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
शिकायत कौन दायर कर सकता है ?
उत्तर:
निम्नलिखित शिकायत दायर कर सकते हैं –

  1. एक उपभोक्ता
  2. मान्यता प्राप्त उपभोक्ता संघ
  3. एक या अधिक उपभोक्ता (जहाँ अनेक उपभोक्ताओं का समान हित है।)
  4. केन्द्रीय सर
  5. राज्य सरकार

प्रश्न 2.
उपभोक्ताओं के अधिकार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उपभोक्ताओं के अधिकार –

  1. सुरक्षा का अधिकार
  2. सूचना प्राप्त करने का अधिकार
  3. सुनवाई का अधिकार
  4. प्रतियोगी मूल्य पर माल प्राप्त करने का अधिकार
  5. क्षतिपूर्ति या उपचार का अधिकार
  6. उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार
  7. उचित प्रतिफल का अधिकार
  8. स्वच्छ वातावरण का अधिकार
  9. हानिकारक बिक्री को रुकवाने का
  10. अपना पक्ष रखने का अधिकार।

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प्रश्न 3.
उपभोक्ता संरक्षण का महत्व बताइये।
उत्तर:
उपभोक्ता संरक्षण का महत्व निम्न हैं –

  1. उपभोक्ताओं के सामाजिक जीवन में वृद्धि करने के लिए
  2. उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के लिए
  3. सामाजिक दायित्व के प्रति जागरूकता लाने के लिए
  4. परिवेदनाओं, शिकायतों का शीघ्र समाधान करने के लिए।

प्रश्न 4.
भारत में उपभोक्ता संरक्षण के साधनों व तरीकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में उपभोक्ता संरक्षण के साधन व तरीके निम्न हैं –

  1. लोक अदालत – उपभोक्ता अपनी शिकायतों के समाधान हेतु लोक अदालत की शरण ले सकता है जिसमें तुरन्त बहस करके फैसले दिए जाते हैं।
  2. शिकायत निवारण मंच – शिकायत निवारण मंच के अंतर्गत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में त्रिस्तरीय न्याय व्यवस्था सन् 1986 में स्थापित की जिसमें जिला उपभोक्ता फोरम, राज्य फोरम, राष्ट्रीय फोरम की स्थापना की गई।
  3. जनहित में मुकदमा – इसमें निर्धन, अल्पसंख्यक या सामूहिक हित रखने वाले व्यक्तियों अथवा उपभोक्ताओं की ओर से जनहित में सामूहिक मुकदमा भी दायर किया जा सकता है।
  4. मुद्रित साहित्य में उपभोक्ता संरक्षण की दशा में भारत सरकार विभिन्न प्रकार के उपभोक्ता साहित्य प्रकाशित करती है। जैसे-उपभोक्ता जागरण, उपभोक्ता के अधिकार आदि।

प्रश्न 5.
उपभोक्ता संरक्षण अथवा गैर सरकारी संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका (महत्व) पर प्रकाश डालिये।
उत्तर:
उपभोक्ता संरक्षण हेतु गैर सरकारी संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका जिसे निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है –

  1. उपभोक्ता जागरुकता व उपभोक्ता शिक्षा अभियान चलाना।
  2. मिलावट व जमाखोरी के विरुद्ध आवाज उठाना।

प्रश्न 6.
उपभोक्ता संरक्षण के कई तरीके एवं साधन हैं। कोई ऐसे पाँच तरीके लिखें तथा एक उपाय को समझायें।
उत्तर:
उपभोक्ता संरक्षण के कई तरीके हैं। उनमें से पाँच निम्नलिखित हैं –

  1. व्यवसाय द्वारा स्वयं नियमन
  2. व्यावसायिक संगठन
  3. उपभोक्ता जागरुकता
  4. उपभोक्ता संगठन
  5. सरकार

व्यवसाय द्वारा स्वयं नियमन (Self regulation by business) – विकसित व्यावसायिक इकाइयाँ अब यह समझती है कि उपभोक्ता को भली-भाँति सेवा प्रदान करना उनके अपने दीर्घकालीन हित में है। अतः उन्होंने ग्राहकों की भली – भाँति सेवा करने और उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए अपने स्वयं की उपभोक्ता सेवायें एवं शिकायत कक्षों की स्थापना की है।

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प्रश्न 7.
आप कैसे कह सकते हैं कि उपभोक्ता संरक्षण का क्षेत्र विस्तृत है ?
अथवा
उपभोक्ता संरक्षण का क्षेत्र विस्तृत है। टिप्पणी करें।
उत्तर:
विस्तृत क्षेत्र (Wide scope)- उपभोक्ता संरक्षण का क्षेत्र विस्तृत है। निम्नलिखित तथ्य इस बात की पुष्टि करते हैं –

  1. यह उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों तथा दायित्वों की जानकारी देता है।
  2. यह उपभोक्ताओं को अपनी शिकायतों को दूर करवाने में सहायता करता है।
  3. उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिये यह न्यायिक तंत्र की व्यवस्था करता है।
  4. यह उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों को संरक्षित करने तथा उन्हें बढ़ाने के लिये संगठित होने तथा अपने संगठन बनाने के लिये प्रेरित करता है।
  5. यह सभी वस्तुओं तथा सेवाओं पर लागू होता है।
  6. इसमें सभी संस्थायें (निजी, सार्वजनिक, सहकारी) सम्मिलित होती है।

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प्रश्न 8.
उपभोक्ता का अधिकार से क्या आशय है ?
उत्तर:
भारत की तुलना में अमेरिका का उपभोक्ता काफी जागरूक व सावधान रहता है क्योंकि भारत की तुलना में वह अधिक शिक्षित राष्ट्र है। वहाँ के उपभोक्ताओं को भारत की तुलना में अधिक व्यापक अधिकार प्राप्त हैं तथा शिकायत करने पर उपचार अतिशीघ्र प्राप्त हो जाता है। अमेरिका में उपभोक्ताओं के अधिकारों पर सर्वाधिक ध्यान वहाँ के भूतपूर्व राष्ट्रपति कैनेडी ने दिया। उन्होंने सर्वप्रथम निम्न चार अधिकारों का पुरजोर समर्थन किया

  1. सुरक्षा का अधिकार
  2. चुनाव का अधिकार
  3. जानने का अधिकार
  4. सुनवाई का अधिकार

कुछ समय पश्चात् ‘मूल्य का अधिकार’ भी वहाँ के अधिनियम में जोड़ दिया गया। उपभोक्ताओं के संरक्षण के संबंध में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ‘उपभोक्ता संघों का अन्तर्राष्ट्रीय संगठन’ (International organization of consumer union) गठित किया जा चुका है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उपर्युक्त पाँच अधिकारों के साथसाथ निम्न तीन अधिकार और जोड़े गये हैं –

  1. उपचार का अधिकार
  2. शिक्षा का अधिकार
  3. स्वस्थ (स्वच्छ) वातावरण का अधिकार।
  4. उपभोक्ता के संरक्षण हेतु आवश्यक होने पर मुकदमा दायर करना।
  5. विभिन्न व्यावसायिक व उपभोक्ताओं से संबंधित सूचनाओं व आँकड़ों का संकलन करना तथा इन सूचनाओं के प्रयोग द्वारा उपभोक्ता संरक्षण का प्रयास करना।
  6. सरकार को उपभोक्ता संरक्षण संबंधी कार्यों में सहयोग प्रदान करना।

प्रश्न 9.
उपभोक्ता संरक्षण के तरीकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम सन् 1986 में उपभोक्ताओं के विवादों के समाधान के लिए त्रिस्तरीय अर्द्ध-न्यायिक तंत्र (Threetier quasi-Judicial Machinery) की स्थापना की गई है जो निम्नानुसार है –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 12 उपभोक्ता संरक्षण IMAGE - 1
प्रश्न 10.
उपभोक्ता संरक्षण के कई उपायों में से एक उपाय उपभोक्ता जागरुकता (Consumer awareness) है। उपभोक्ता जागरुकता का क्या अर्थ है ? उपभोक्ता जागरुकता के लाभ लिखिए।
उत्तर:
उपभोक्ता जागरुकता (Consumer awareness)- उपभोक्ता जागरुकता से अभिप्राय उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों, दायित्वों तथा उनको उपलब्ध उपचारों के बारे में पूरी जानकारी होना है।
उपभोक्ता जागरुकता केलाभ (Advantages of consumer awarness) –

  1. एक जागरुक उपभोक्ता किसी भी अनुचित व्यापार या बेईमान उत्पादकों और व्यापारियों की दोषपूर्ण कार्यवाहियों के विरुद्ध आवाज उठा सकता है।
  2. अपनी जिम्मेदारियों की समझ से उपभोक्ता अपने हितों की रक्षा कर सकता है।

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प्रश्न 11.
उपभोक्ता तथा व्यापारी उपभोक्ताओं का कई तरीके से शोषण करते हैं। शोषण के ऐसे कोई पाँच तरीके लिखिए।
उत्तर:
शोषण के पाँच तरीके निम्न हैं –

  1. उपभोक्ताओं द्वारा घटिया किस्म या नकली उत्पादों को बेचना।
  2. वस्तुओं का वजन उसके पैकेज पर छपी मात्रा से कम होना।
  3. मिलावटी वस्तुएं बेचना।
  4. वस्तुओं के बारे में मिथ्यापूर्ण विज्ञापन देना।
  5. नकली माल बेचना।

प्रश्न 12.
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत शिकायत के आधारों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
शिकायत के आधार (Grounds for complaints) –

  1. अनुचित/प्रतिबंधित व्यापार व्यवहार
  2. अनुचित व्यापार व्यवहार
  3. दोषयुक्त वस्तुएँ
  4. सेवाओं में न्यूनता
  5. अधिक कीमत लेना
  6. जोखिमपूर्ण वस्तुओं की पूति।

प्रश्न 13.
जिला फोरस की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
जिला फोरम (District forum) – उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अनुसार राज्य सरकार प्रत्येक जिले में एक या अधिक जिला फोरम स्थापित कर सकती है। इसकी विशेषताएँ निम्न हैं

  1. इसमें एक अध्यक्ष सहित तीन सदस्य होते हैं जिनमें से एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य है। इनकी नियुक्ति राज्य सरकार करती है।
  2. जिला फोरम में 20 लाख रुपये से कम मूल्य के विवादों से संबंधित शिकायतों का समाधान किया जाता है।
  3. शिकायत उपभोक्ता अथवा किसी उपभोक्ता संघ द्वारा की जा सकती है।

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प्रश्न 14.
उपभोक्ता शिकायत कहाँ दर्ज कराई जा सकती है ?
अथवा उपभोक्ताओं की शिकायतों का निवारण करने वाली न्यायिक प्रणाली के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
भारत में उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करने की त्रि-स्तरीय न्यायिक प्रणाली स्थापित की गई है।

1.जिला फोरम (District forum)- जिला फोरम में उन शिकायतों को दर्ज कराया जा सकता है जहाँ वस्तुओं या सेवाओं का मूल्य और क्षति के लिए दावे की राशि बीस लाख रुपये तक हो।

2. राज्य आयोग (State commission)- इस आयोग में केवल वही शिकायतें दर्ज कराई जा सकती है जहाँ वस्तुओं या सेवाओं का मूल्य और क्षतिपूर्ति के लिए दावे की राशि बीस लाख से अधिक किंतु एक करोड़ से कम हो। जिला फोरम के विरुद्ध भी अपील की जा सकती है।

MP Board Class 12 Business Studies Important Questions

MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 11 विपणन प्रबंध

MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 11 विपणन प्रबंध

विपणन प्रबंध Important Questions

विपणन प्रबंध लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विपणन क्या है ? वस्तु एवं सेवाओं की विनिमय प्रक्रिया में इसके क्या कार्य हैं ? समझाइए।
उत्तर:
विपणन का अर्थ-विपणन के अंतर्गत वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन से पूर्व की क्रियाओं से लेकर उनके विक्रय के बाद तक की क्रियाएँ शामिल की जाती हैं। इस प्रकार विपणन में वे सभी कार्य सम्मिलित किये जाते हैं। जिनके द्वारा मानवीय आवश्यकताओं को ज्ञात किया जाता है तथा उनकी संतुष्टि के लिए वस्तुओं का नियोजन, मूल्य निर्धारण, संवर्द्धन एवं वितरण किया जाता है।
परिभाषाएँ-

  1. प्रो.पॉल मजूर के अनुसार-“समाज को जीवन-स्तर प्रदान करना ही विपणन है।’
  2. प्रो. मैकनियर के अनुसार-“जीवन स्तर का सृजन करना एवं उसकी पूर्ति करना ही विपणन है ।’

विपणन का मुख्य केन्द्र वस्तुओं व सेवाओं के विनिमय पर होता है । फिलिप कोटलर ने विपणन प्रबंध को इस प्रकार परिभाषित किया है “लक्षित बाजारों का चुनाव करने और प्राप्त करने, प्रबंध के विशिष्ट ग्राहक मूल्यों के संप्रेषण और सुपुर्दगी के सृजन द्वारा ग्राहकों को बनाने और वृद्धि करने की कला और विज्ञान” यदि हम इस परिभाषा को तोड़ते हैं तो हम कह सकते हैं कि विपणन प्रबंध में निम्नलिखित क्रियाएँ शामिल होती हैं

1. विशिष्ट मूल्य का सृजन करना-विपणन प्रबंध प्रक्रिया का अगला चरण प्रतिस्पर्धी के उत्पादों की बजाय अपने उत्पादों को बेहतर बनाने के लिए उत्पादों में कुछ विशिष्ट मूल्य का सृजन करना होता है।

2. एक लक्षित बाजार का चुनाव करना-विपणन प्रबंध की क्रियाएँ लक्षित बाजार को निश्चित करने द्वारा आरंभ होती है, उदाहरण के लिए औषधि निर्माता के लिए लक्षित बाजार, चिकित्सालय, डॉक्टर, दवाई की दुकानें इत्यादि।

3. लक्षित बाजार में ग्राहकों की वृद्धि करना-एक लक्षित बाजार के चुनाव करने के बाद विपणन प्रक्रिया में अगला चरण ग्राहकों की आवश्यकताओं, इच्छाओं और माँग का विश्लेषण करके ग्राहकों की संख्या में वृद्धि करने के लिए कदम उठाना और ग्राहकों की संतुष्टि को महत्व देना होता है।

प्रश्न 2.
विपणन की उत्पाद अवधारणा एवं उत्पादन अवधारणा में अंतर बताइए।
उत्तर:
विपणन की उत्पाद अवधारणा एवं उत्पादन अवधारणा में निम्न अंतर हैं

1. उत्पादन अवधारणा (Production concept) – विपणन की यह एक पुरानी अवधारणा है। यह अवधारणा उस समय प्रचलित थी जब माल का उत्पादन कम होता था और बाजार की स्थिति विक्रेता प्रधान होती थी। माँग अधिक व पूर्ति कम होने से विक्रय की कोई समस्या नहीं थी। उत्पादक यह सोचता था कि जिस माल का वह उत्पादन करेगा वह स्वतः ही बिक जायेगा। फलतः उत्पादक विक्रय के लिये कोई प्रयास नहीं करता था। आज भी तीसरे विश्व (Third World) के कुछ अविकसित राष्ट्रों में जहाँ उत्पादन कम होता है यही विचारधारा प्रचलित है।

2. उत्पाद (वस्तु) अवधारणा (Product concept) – यह विचारधारा वस्तु की किस्म, गुण, डिजाइन आदि पर बल देती है। इस धारणा का मानना है कि ग्राहक केवल वस्तु की किस्म, गुण, डिजाइन व आकर्षकता पर जोर देता है तथा ग्राहक सदैव श्रेष्ठ माल चाहते हैं। अतः सदैव उत्तम किस्म एवं आकर्षक माल तैयार करना चाहिए।

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प्रश्न 3.
‘उत्पाद उपयोगिताओं का समूह होता है। क्या आप इससे सहमत हैं ? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
उत्पाद अवधारणा, शब्द सर्वप्रथम थियोडोर लेविट द्वारा प्रयोग में लाया गया था। उनके अनुसार
“उत्पाद अवधारणा से आशय उपयोगिताओं के योग से है जिसमें विभिन्न उत्पाद विशेषताएँ तथा सेवाएँ सम्मिलित होती है” एक प्रस्तावना को विकसित करते समय एक विपणनकर्ता उत्पाद स्तरों की अवधारणा का अनुसरण कर सकता है

(1) प्रथम स्तर पर मूलभूत लाभ होते हैं अर्थात् आधारभूत या आधारिक लाभ जिसे ग्राहक उस उत्पाद या सेवा से प्राप्त करते हैं जिसे वे क्रय करते हैं । उदाहरण के लिए एक कार द्वारा प्रदान किए जाने वाले मूलभूत लाभ परिवहन सुविधा है।

(2) उत्पाद या सेवा का द्वितीय स्तर ग्राहक उस उत्पाद या सेवा से क्या आशा करता है जिसे वह क्रय कर रहा है। उदाहरण के लिए एक ग्राहक आशा करता है कि कार चलाने में सुविधाजनक हो, बेहतर औसत, अच्छा आकार और शैली इत्यादि हो।

(3) उत्पाद या सेवा का तृतीय स्तर वृद्धि अवधारणा है अर्थात् प्रतिस्पर्धी के उत्पाद से बेहतर कैसे है। वृद्धि का अर्थ है अतिरिक्त विशेषताएँ जिन्हें एक विपणनकर्ता को उत्पाद या सेवा में जोड़ना चाहिए जो ग्राहक की मूलभूत आकांक्षा से अधिक हो, उदाहरण के लिए, कार में विपणनकर्ता मुफ्त बीमा, मुफ्त सीट कवर या विक्रय बाद की सेवा प्रदान कर सकता है।

प्रश्न 4.
औद्योगिक उत्पाद क्या है ? यह उपभोक्ता उत्पादों से किस प्रकार भिन्न है ? समझाइए।
उत्तर:
औद्योगिक उत्पाद का अर्थ-औद्योगिक उत्पाद उपभोक्ताओं के उपभोग हेतु नहीं होते बल्कि कारखानों में उपभोक्ता माल बनाने के काम आते हैं।
परिभाषा –
अमेरिकन मार्केटिंग एसोसिएशन की परिभाषा समिति के अनुसार- “औद्योगिक उत्पाद वे हैं जो मुख्यतः अन्य माल के उत्पादन में अथवा सेवाएँ प्रदान करने में प्रयोग हेतु बनाये जाते हैं। इनमें साज-सामान, संघटक हिस्से, अनुरक्षण, मरम्मत, परिचालन आपूर्तियाँ, कच्चा माल और गढ़ी हुई सामग्रियाँ सम्मिलित हैं।”

औद्योगिक उत्पाद बनाम उपभोक्ता उत्पाद विपणन हैं। औद्योगिक उत्पाद और उपभोक्ता उत्पाद एकदूसरे से भिन्न हैं। औद्योगिक उत्पादों की माँग को प्रायः व्युत्पन्न माँग की संज्ञा दी जाती है। इसके अतिरिक्त उपभोक्ता के संबंध में जानकारी की आवश्यकता के संबंध में भी औद्योगिक और उपभोक्ता के उत्पादों में भिन्नता की जा सकती है। अतः औद्योगिक उत्पादों के संबंध में वैयक्तिक विक्रय पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके विपरीत उपभोक्ता उत्पादों के संबंध में अधिकांश विज्ञापन अवैयक्तिक विक्रय द्वारा किया जाता है।
औद्योगिक उत्पाद एवं उपभोक्ता उत्पाद में भिन्नता
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 11 विपणन प्रबंध IMAGE - 11

प्रश्न 5.
सुविधा उत्पाद एवं प्रतिदिन के उपयोगी उत्पादों में अंतर कीजिए।
उत्तर:
सुविधा उत्पाद-सुविधाजनक उत्पाद वे हैं जिन्हें उपभोक्ता बार-बार ; तुरंत एवं न्यूनतम तुलना करके और बहुत कम क्रय मूल्यों पर खरीदता है जैसे-साबुन, अखबार, माचिस, सिगरेट, बीड़ी, दवाइयाँ इत्यादि। ऐसे उत्पाद टिकाऊ नहीं होते हैं और उपभोक्ता द्वारा इसे शीघ्रता से खत्म कर दिया जाता है। ऐसे उत्पादों को उपभोक्ता द्वारा बार-बार क्रय किया जाता है और इसे प्रायः उपभोक्ता अग्रिम रूप से खरीदकर नहीं रखते हैं।

प्रतिदिन उत्पाद (बिक्रीगत उत्पाद)-प्रतिदिन उत्पाद या बिक्रीगत उत्पाद वे होते हैं जिनका चुनाव और क्रय करने से पूर्व उपभोक्ता उपयुक्तता, किस्म, कीमत और शैली आदि आधारों पर विभिन्न निर्माताओं के उत्पादों से तुलना करता है । इन उत्पादों में फर्नीचर, जूते, बढ़िया चीनी के बर्तनों के सेट, महिला परिधान, कीमती साड़ियाँ आदि को सम्मिलित किया जा सकता है। प्रतिदिन उत्पादों में क्रेता बाजार में घूम-फिर कर विभिन्न भंडारों पर कीमत और किस्म की तुलना करने के पश्चात् ही क्रय करते हैं।

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प्रश्न 6.
उत्पादों के विपणन में लेबलिंग के कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विपणन में लेबलिंग के कार्य- लेबलिंग के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं

1. उत्पाद के प्रवर्तन में सहायता-लेबलिंग का प्रमुख कार्य विक्रय संवर्द्धन करना है। एक आकर्षक लेबल ग्राहकों को उत्पाद खरीदने के लिए अभिप्रेरित करता है। आज लेबलिंग का विक्रय संवर्द्धन का एक महत्वपूर्ण उपाय के रूप में प्रयोग किया जाता है।

2. उत्पाद का विवरण एवं विषय-वस्तु-लेबल पर निर्माता उत्पादन से संबंधित पूर्ण जानकारी प्रदान करता है। लेबल पर दी जाने वाली मुख्य जानकारी इस प्रकार है:

  1. वस्तु किन-किन चीजों को मिलाकर तैयार की गई
  2. इसकी प्रतियोगिता
  3. प्रयोग करने में सावधानियाँ
  4. प्रयोग करते समय ध्यान रखने वाली बातें
  5. उत्पादन तिथि
  6. बैच नंबर आदि।

3. उत्पाद अथवा ब्राण्ड की पहचान कराना-लेबल अनेक वस्तुओं में से किसी एक विशेष वस्तु को पहचानना संभव बनाता है। उदाहरण के लिए एक ढेर में अनेक साबुनें रखी हैं । आप लिरिल साबुन लेना चाहते हैं। लेबल की मदद से इच्छित साबुन को पहचानना संभव होता है।

4. कानून सम्मत जानकारी देना-लेबलिंग का एक और महत्वपूर्ण कार्य कानूनी रूप से अनिवार्य वैधानिक चेतावनी देना है। सिगरेट के पैकेट पर ‘सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तथा पान मसाले के पैकैट पर ‘तंबाकू चबाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।’ लिखा जाना वैधानिक चेतावनी के उदाहरण है।

5. उत्पादों का श्रेणीकरण-जब एक ही उत्पाद की कई क्वालिटी होती हैं तो लेबल ही यह बताता है कि किस पैक में किस क्वालिटी का उत्पाद है। उदाहरण के लिए-हिन्दुस्तान लीवर लिमि. तीन किस्म की चाय बनाती है। प्रत्येक किस्म की चाय की अलग पहचान करने के लिए हरे, लाल व पीले रंग के लेबल का प्रयोग किया जाता है।

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प्रश्न 7.
उपभोक्ता एवं गैर टिकाऊ उत्पादों के वितरण में मध्यस्थों की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गैर टिकाऊ उत्पादों, अस्थायी उत्पादों जैसे-टूथपेस्ट, साबुन, डिटर्जेंट इत्यादि के वितरण के लिए द्वि-स्तरीय माध्यम का प्रयोग किया जाता है। इस माध्यम में उत्पादों को बेचने के लिए फर्मों द्वारा बिचौलियों को शामिल किया जाता है। जैसे इसे निम्न चित्र द्वारा समझा जा सकता है
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 11 विपणन प्रबंध IMAGE - 12
निर्माता थोक विक्रेता को अधिक मात्रा में वस्तुएँ बेचता है और थोक विक्रेता फुटकर विक्रेता को कम मात्रा में बेचता है, फुटकर विक्रेता इन्हें अंतिम ग्राहकों को बेचता है।

प्रश्न 8.
वितरण के माध्यमों के चयन में निर्धारक तत्वों को समझाइए।
उत्तर:
वितरण के माध्यमों के चयन में निर्धारक तत्व-निर्माताओं अथवा उत्पादकों को अपनी वस्तुओं को अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुँचाने के लिए वितरण के किसी उपयुक्त माध्यम का चुनाव करना पड़ता है। वितरण के उपयुक्त माध्यम को निर्धारित करने वाले घटक अग्र हैं –

(I) बाजार अथवा विपणि संबंधी-बाजार संबंधी निम्न बातें वितरण माध्यम के चुनाव पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं।

1. संभावित ग्राहकों की संख्या-यदि वस्तु विशेष का संभावित बाजार विस्तृत (जैसे-कपड़ा, अनाज, साइकिल आदि) है तो मध्यस्थों की सेवाओं का सहारा लेना होगा। इसके विपरीत यदि वस्तु का बाजार देशव्यापी है तो ऐसी स्थिति में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के विक्रय के तरीकों को अपनाना होगा।

2. आदेशों का आकार-यदि आदेश कम किंतु बड़ी मात्रा में आते हैं तो प्रत्यक्ष विक्रय के तरीकों को अपनाना चाहिए। इसके विपरीत यदि आदेश बहुत अधिक आते हैं किंतु आदेशित वस्तुओं की मात्रा कम होती है तो थोक व्यापारियों की सहायता लेनी होगी।
3. ग्राहकों की क्रय करने संबंधी आदतें-ये भी वितरण के माध्यम को प्रभावित करती हैं जैसे-उधार क्रय करने की इच्छा, क्रय के उपरांत की सेवा, व्यय करने की आदत आदि।

(II) वस्तु या उत्पादक संबंधी बातें-वस्तु की प्रकृति तथा निम्न विशेषताएँ वितरण में मध्यस्थों की संख्या आदि को निश्चित वितरण में मध्यस्थों की संख्या आदि को निश्चित एवं प्रभावित करती हैं। इस प्रकार यह वितरण के माध्यमों को प्रभावित करती है

1. वस्तु का स्वभाव-शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुओं के लिए कम-से-कम मध्यस्थों की जरूरत होती है। शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुओं का जल्दी विक्रय करना जरूरी होता है नहीं तो इनके खराब होने का भय होता है। अतः ऐसी वस्तु का फुटकर व्यापारियों द्वारा विक्रय करना ही उचित होता है। जबकि टिकाऊ वस्तुओं का बाजार विस्तृत होता है। इसलिए इसके विक्रय के लिए मध्यस्थों की आवश्यकता होगी।

2. मूल्यवान व भारी वस्तुओं का विक्रय-जैसे कूलर, फ्रीज, पंखे, स्कूटर, मोटर, अलमारी आदि। ऐसे विक्रेता मध्यस्थों को चुनना चाहिए जिनके पास संग्रहालय की सुविधा हो। इनके बिक्री के लिए कम मध्यस्थों की आवश्यकता होती है।

3. सरकारी नियमन-वस्तु के वितरण माध्यम पर सरकारी नियंत्रण होने पर उनके विक्रय के लिए सरकार द्वारा अधिकृत विक्रेताओं की आवश्यकता होगी।

(III) मध्यस्थों संबंधी बातें-मध्यस्थ संबंधी बातें भी वितरण पर प्रभाव डालती हैं जैसे-(1) वितरण की लागत, (2) भावी विक्रय की मात्रा, (3) मध्यस्थों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएँ।

प्रश्न 9.
भौतिक वितरण के घटकों को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर-
भौतिक वितरण के घटक-भौतिक वितरण सेवा प्रदान करने हेतु प्रबंध को मुख्यतः चार निर्णय लेने पड़ते हैं
1. आदेश प्रक्रिया-इस प्रक्रिया से आशय ग्राहक से आदेश प्राप्त करने और आदेशानुसार वस्तुओं की सुपुर्दगी में लगने वाले समय और अपनाई जाने वाली प्रक्रिया से है। सामान्य रूप से आदेश प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण शामिल हैं-

  1. विक्रयकर्ता को आदेश देना
  2. विक्रयकर्ता द्वारा आदेश कंपनी को भेजना
  3. कंपनी द्वारा ग्राहक की साख की जाँच
  4. कंपनी द्वारा स्टॉक मात्रा
  5. आदेश के अनुसार वस्तुओं की सुपुर्दगी करना इत्यादि।

2. परिवहन-परिवहन का आशय है कि उत्पादन के स्थान से वस्तुओं को भौतिक रूप से आवश्यकता वाले स्थान पर पहुँचाना। परिवहन उस स्थान पर, जहाँ वस्तुओं की आवश्यकता होती है, पहुँचाने द्वारा वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि करता है। उदाहरण के लिए चाय का दार्जिलिंग, गंगटोक, असम इत्यादि में उत्पादन किया जाता है परंतु इसका परिवहन पूरे देश में किया जाता है और साथ ही चाय उत्पादन क्षेत्र की तुलना में दूसरे देशों में इसका मूल्य उच्च होता है।

3. भंडारणं-जो भी उत्पादित किया जाता है, उसको तुरंत बेचा नहीं जाता। इसीलिए प्रत्येक कंपनी को निर्मित वस्तुओं को संग्रह करने की आवश्यकता होती है जब तक उन्हें बाजार में बेचा नहीं जाता। कुछ फसलों का संग्रह करना जरूरी होता है क्योंकि उनकी माँग वर्ष भर होती है और इनका उत्पादन भी मौसमी होता है इसलिए इसे पूरे वर्ष आपूर्ति के लिए भंडारण करना आवश्यक होता है। .

4. स्टॉक मात्रा-इससे अभिप्राय वस्तुओं के स्टॉक को रखने या उसके अनुरक्षण से है। स्टॉक को बनाए रखने की आवश्यकता होती है ताकि जब भी वस्तुओं की माँग हो उनकी पूर्ति की जा सके। उचित स्टॉक अनुरक्षण उत्पाद उपलब्धता को सुनिश्चित करता है।

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प्रश्न 10.
विज्ञापन की परिभाषा दीजिए।इसकी मुख्य विशेषताएँ क्या हैं ? समझाइए।
उत्तर:
विज्ञापन का अर्थ-विज्ञापन शब्द दो शब्दों विज्ञापन से मिलकर बना है जिसका आशय क्रमशः विशेष एवं जानकारी देने से लगाया जाता है। इस प्रकार विज्ञापन शब्द से तात्पर्य विशिष्ट जानकारी प्रदान करना है। इसके अंतर्गत उत्पादित वस्तुओं व सेवाओं की जानकारी उपभोक्ता तक पहुँचाना एवं विज्ञापन के माध्यम से ही उपभोक्ता की रुचि व आदत को ज्ञात करना शामिल है।
परिभाषाएँ

1. डॉ. जॉन्स के अनुसार – “विज्ञापन उत्पादन को बहुत बड़ी मात्रा में विक्रय करने की एक मशीन है जो विक्रेता की वाणी और व्यक्तित्व को सहायता पहुँचाती है।”

2. लस्कर के अनुसार – “विज्ञापन मुद्रण के रूप में विक्रय कला है।” विज्ञापन की विशेषताएँ-विज्ञापन की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं

1. अवैयक्तिक संचार – विज्ञापन पूर्णतः अव्यक्तिगत संचार होता है अर्थात् विज्ञापन किसी विशिष्ट व्यक्ति के लिए नहीं किया जाता अपितु यह जनसामान्य के लिए किया जाता है।

2. विज्ञापन प्रकाशन से भिन्न है – विज्ञापन खुला होता है जबकि प्रकाशन बंद रहता है। विज्ञापन व प्रकाशन दोनों के स्वभाव, उद्देश्य अलग-अलग होते हैं।

3. व्यापक संचार – विज्ञापन व्यापक संचार है। पत्र, तार, टेलीफोन, वैयक्तिक विक्रय के साथ-साथ पत्र-पत्रिकाएँ, समाचार पत्र, टेलीविजन, आकाशवाणी आदि के माध्यम से विज्ञापन किया जाता है। अतः विज्ञापन में व्यापक संचार साधनों का प्रयोग किया जाता है।

4. ग्राहक बनाना उद्देश्य – विज्ञापन का एक प्रमुख उद्देश्य है ग्राहक बनाना। नये ग्राहक बनाना, पुराने ग्राहकों को स्थायी ग्राहक बनाकर अपनी वस्तु का अधिकतम विक्रय करना विज्ञापन का उद्देश्य है।

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प्रश्न 11.
विपणन के उद्देश्य लिख़िये।।
उत्तर:
विपणन प्रबन्धक के उद्देश्य-

  1. विपणन कार्यों का नियोजन करना
  2. विपणन व्ययों में कमी लाना
  3. विपणन का उचित संगठन करना
  4. विपणन का उचित नेतृत्व करना
  5. विपणन कार्यों में समन्वय बनाना
  6. विपणन कार्यों का मूल्यांकन करना
  7. रोजगार एवं क्रय शक्ति में वृद्धि करना
  8. सामाजिक जीवन स्तर को बढ़ाना
  9. माँग व पूर्ति के मध्य समन्वय बनाना
  10. माँग का पूर्वानुमान लगाना
  11. नये बाजार की खोज करना।

प्रश्न 12.
विपणन व विक्रयण में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
विपणन व विक्रयण में अन्तर
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 11 विपणन प्रबंध IMAGE - 13

प्रश्न 13.
विपणन के कार्य लिखिये।
उत्तर:
विपणन के कार्य –

(अ) नियोजन सम्बन्धी कार्य –

  1. विपणन अनुसन्धान
  2. वस्तु नियोजन एवं विकास
  3. वस्तु का प्रमापीकरण
  4. पैकेजिंग
  5. वस्तु विविधीकरण।

(ब) वितरण सम्बन्धी कार्य –

  1. क्रय एवं संग्रहण
  2. भण्डारण
  3. परिवहन
  4. बीमा
  5. बाजार वर्गीकरण।

(स) विक्रय सम्बन्धी कार्य –

  1. विज्ञापन
  2. मूल्य निर्धारण
  3. व्यक्तिगत विक्रय
  4. विक्रय शर्तों का निर्धारण
  5. उधार वसूली
  6. विक्रय पश्चात् सेवा।

प्रश्न 14.
विज्ञापन के छः उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
विज्ञापन के उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. नयी माँग उत्पन्न करना
  2. ख्याति में वृद्धि करना
  3. नये ग्राहक आकर्षित करना
  4. विक्रयकर्ता की सहायता
  5. प्रतिस्पर्धा का सामना करना
  6. उत्पादन लागत में कमी करना।

प्रश्न 15.
विपणन मिश्रण को प्रभावित करने वाले तत्वों को समझाइये।
उत्तर:
विपणन मिश्रण को प्रभावित करने वाले तत्व निम्नलिखित हैं

(अ) बाजार संबंधी तत्व –

  1. उपभोक्ता का व्यवहार
  2. प्रतिस्पर्धा
  3. सरकारी नियंत्रण।

(ब) विपणन संबंधी तत्व –

  1. उत्पाद नियोजन
  2. ब्राण्ड नीति
  3. संवेष्ठन नीति
  4. वितरण वाहिकाएँ
  5. विज्ञापन नीति
  6. विक्रय संवर्धन
  7. भौतिक वितरण
  8. बाजार अनुसंधान।

प्रश्न 16.
विक्रय संवर्द्धन से क्या आशय है ? इसके कोई चार उद्देश्य बताइये।
उत्तर:
विक्रय संवर्द्धन-किसी वस्तु के सामान्य विक्रय की मात्रा में वृद्धि करने की क्रियायें विक्रय संवर्द्धन कहलाती हैं । इसके अन्तर्गत कूपन, पोस्टर्स, प्रदर्शनी, प्रसार-प्रचार, संपर्क, ईनामी योजना, मूल्य वापसी, गारण्टी, प्रीमियम एवं प्रतियोगिताओं को शामिल किया जाता है।
उद्देश्य-

  1. नये ग्राहकों को वस्तुओं एवं सेवा के संबंध में जानकारी प्रदान कर क्रय हेतु प्रेरित करना।
  2. आम लोगों में वस्तु को लोकप्रिय बनाना
  3. वर्तमान ग्राहकों को स्थायी बनाना।
  4. उपभोक्ताओं, विक्रेताओं को वस्तु से परिचित कराकर उनका ज्ञान बढ़ाना।

प्रश्न 17.
एक अच्छे पैकेजिंग की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
पैकेजिंग की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. पैकेजिंग एक कला व विज्ञान है।
  2. इसका संबंध उत्पादन नियोजन से है।
  3. इसका उद्देश्य वस्तु को सुरक्षित रखकर उपभोग के योग्य बनाये रखना होता है।
  4. इसके अन्तर्गत लेबलिंग व ब्राण्डिंग की क्रियाएँ स्वतः शामिल हो जाती हैं।
  5. यह विज्ञापन का कार्य करता है।

प्रश्न 18.
अच्छे ब्राण्ड का नाम चयन करते समय किन-किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
अथवा
एक अच्छे ब्राण्ड के आवश्यक तत्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
एक अच्छे ब्राण्ड के लिए अग्रलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए

  1. ब्राण्ड का नाम छोटा व सामान्य होना चाहिए।
  2. नाम का उच्चारण सरल होना चाहिए।
  3. नाम स्मरणीय होना चाहिए।
  4. ब्राण्ड का नाम आकर्षक होना चाहिए।
  5. ब्राण्ड का नाम पंजीकरण योग्य होना चाहिए।
  6. ब्राण्ड के नाम से वस्तु की जानकारी होने का गुण होना चाहिए।

प्रश्न 19.
निम्न को संक्षेप में समझाइये

(अ) लेबलिंग
(ब) विक्रय संवर्धन
(स) विज्ञापन।

उत्तर:

(अ) लेबलिंग-लेबिल शब्द का आशय एक ऐसी पर्ची या पत्र से है जिसमें कुछ सूचना या विवरण दिया रहता है। इस सूचना पत्र में पूर्ण विवरण के साथ उपयोग की विधि, उत्पादक का नाम, कीमत व जीवन अवधि आदि का उल्लेख रहता है।
मैसन एवं रथ के अनुसार -“लेबिल सूचना देने वाली चिट, लपेटने वाला कागज या सील है जो वस्तु या पैकेज से जुड़ी रहती है।”
लेबिल के प्रकार निम्नलिखित होते हैं

1. ब्रांड लेबिल- इस प्रकार के लेबिल में ब्रांड का नाम या चिन्ह या कोई डिजाइन हो सकता है जैसेरेडलेबिल चाय का ब्रांड या बुक ब्रांड इंडिया लिमिटेड आदि।

2. वर्ग लेबिल- इस प्रकार के लेबिल संख्यात्मक होते हैं । वर्ग लेबिल में संख्याएं वस्तु की क्वालिटी या किसी विशिष्ट वर्ग की जानकारी प्रदान करते हैं । जैसे- गेहूँ के बैग में PR-20 K-68 ‘7’ ° clock ब्लेड ग्रेड ए आदि वर्ग आदि वर्ग के लेबिल लगे रहते हैं।

3. विवरणात्मक लेबिल- इस प्रकार के लेबिलों में उत्पाद के संबंध में पूर्ण जानकारी दी जाती है। जैसे- वस्तु का मिश्रण, तैयार करने की विधि, वस्तु के प्रयोग करने का ढंग, वस्तु का अधिकतम दाम, वस्तु की प्रभावी अवधि की जानकारी आदि।

(ब) विक्रय संवर्धन- इसके लिए लघु उत्तरीय प्रश्न क्रमांक 16 देखिये।

(स) विज्ञापन-विज्ञापन शब्द का तात्पर्य विशिष्ट जानकारी प्रदान करना है। वर्तमान में विज्ञापन शब्द काफी विस्तृत अर्थ से लिया जाने लगा है जिसके अंतर्गत उत्पादित वस्तु की जानकारी उपभोक्ताओं तक पहुँचाना एवं उपभोक्ता की रुचि व आदत की जानकारी प्राप्त करता है।
लस्कर के अनुसार- “विज्ञापन मुद्रण के रूप में विक्रय कला है।’
विज्ञापन की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

1. अवैयक्तिक संचार-विज्ञापन पूर्णतः अवैयक्तिगत संचार होता है अर्थात् विज्ञापन किसी विशिष्ट व्यक्ति के लिए नहीं होता अपितु जनसामान्य के लिये किया जाता है।

2. व्यापक संचार-विज्ञापन व्यापक संचार है। पत्र, तार, टेलीफोन, वैयक्तिक विक्रय के साथ-साथ पत्र-पत्रिकाएँ, समाचार पत्र, टेलीविजन, आकाशवाणी आदि के माध्यम से विज्ञापन किया जाता है। अतः विज्ञापन में व्यापक संचार साधनों का प्रयोग किया जाता है।

3. दैनिक व्यावसायिक क्रिया-विज्ञापन व्यवसाय का अंग बन गया है। व्यवसाय की अन्य क्रियाओं की भाँति विज्ञापन भी दैनिक व्यावसायिक क्रिया बन गई है।

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प्रश्न 20.
ब्राण्डिंग तथा ट्रेडमार्क में भेद स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ब्राण्डिंग तथा ट्रेडमार्क में भेद –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 11 विपणन प्रबंध IMAGE - 14

प्रश्न 21.
विज्ञापन की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
विज्ञापन की उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर निम्न विशेषताएँ दी जा सकती हैं

1. व्यापक संचार-विज्ञापन व्यापक संचार है। पत्र, तार, टेलीफोन, पत्र-पत्रिकाओं में, समाचार पत्र, टेलीविजन, आकाशवाणी के माध्यम से विज्ञापन किया जाता है।

2. विज्ञापन व्यय का भुगतान-विज्ञापन व्यय को वह व्यक्ति वहन करता है जिसके द्वारा विज्ञापन कराया जाता है। सामान्यतः विज्ञापन से लाभान्वित पक्ष ही विज्ञापन व्यय का भुगतान करता है।

3. विज्ञापन प्रकाशन से भिन्न है-विज्ञापन खुला होता है जबकि प्रकाशन बन्द रहता है। विज्ञापन व प्रकाशन दोनों के स्वभाव, उद्देश्य अलग-अलग होते हैं।

4. अवैयक्तिक संचार-विज्ञापन पूर्णत: अवैयक्तिगत संचार होता है अर्थात् विज्ञापन किसी विशिष्ट व्यक्ति के लिये नहीं किया जाता अपितु यह जन सामान्य के लिए किया जाता है।

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प्रश्न 22.
विज्ञापन एवं विक्रय सवर्द्धन में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
विज्ञापन एवं विक्रय सवर्द्धन में अन्तर निम्नलिखित हैं
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प्रश्न 23.
मूल्य का अर्थ बताइए एवं उसे प्रभावित करने वाले घटक कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
मूल्य का अर्थ-मूल्य से आशय किसी उत्पाद या सेवा के लिए ग्राहक से वसूल की जाने वाली मुद्रा से है। दूसरे शब्दों में, यह उत्पाद का विनिमय मूल्य है अर्थात् ग्राहक को उत्पाद के बदले में देता है।
परिभाषा – वॉल्टन हैमिल्टन के अनुसार – “मूल्य उन सभी दशाओं का मौद्रिक सार है जो एक उत्पाद को मूल्यन प्रदान करता है।”
मूल्य निर्धारण को प्रभावित करने वाले घटक-मूल्य या मूल्य निर्धारण को प्रभावित करने वाले निम्न घटक हैं

1. उत्पादन लागत-उत्पादन लागत मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे प्रमुख एवं महत्वपूर्ण घटक है। कोई भी व्यवसायी अपने उत्पाद को उत्पादन लागत में जोड़ दिया जाता है।

2. लाभ दर-लाभ की दर भी मूल्य को प्रभावित करती है। व्यवसायी चाहे तो लाभ की अधिक दर निर्धारित कर सकता है अथवा लाभ की कम दर निर्धारित कर सकता है, जैसे-लाभ की 5% दर अथवा 10% दर। इसे भी उत्पाद की लागत में जोड़ दिया जाता है।

3. प्रतिस्पर्धा-बाजार में विद्यमान प्रतिस्पर्धा भी उत्पाद के मूल्य के निर्धारण को प्रभावित करती है। इसमें प्रतियोगी फर्मों के मूल्य पर विचार करना आवश्यक है।

4. अपनाई गई विपणन विधियाँ-विक्रेता द्वारा किसी उत्पाद के विपणन के संबंध में अपनाई जाने वाली विधियाँ भी मूल्य निर्धारण को प्रभावित करती है। इस पर होने वाले व्यय को भी मूल्य में जोड़ दिया जाता है; जैसे-विक्रय के उपरांत ग्राहकों को अर्पित की जाने वाली सेवाओं पर होने वाला खर्च तथा मध्यस्थों की सेवाएँ लेने पर दिया जाने वाला कमीशन।

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प्रश्न 24.
ब्राह्य विज्ञापन से क्या आशय है ? उसके विभिन्न प्रारूपों को समझाइए।
उत्तर:
ब्राह्य विज्ञापन का अर्थ-ब्राह्य विज्ञापन से आशय दीवारों, गली के कोनों, सड़कों के किनारों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैण्डों, चलते-फिरते वाहनों आदि पर विज्ञापन करने से होता है। . ब्राह्य विज्ञापन के प्रारूप- इसके प्रारूप निम्नलिखित हैं

1. पोस्टर्स- पोस्टर्स से हमारा आशय विज्ञापन का संदेश रखने वाले ऐसे छपे हुए कागजों, कार्ड-बोर्डों तथा धातु या लकड़ी की प्लेटों से होता है जो चौराहों, रेलवे स्टेशनों, सड़क एवं गलियों के किनारे तथा दुकानों के बाहर एवं अंदर लगे रहते हैं।

2. विज्ञापन बोर्ड-विज्ञापन बोर्ड को साइन बोर्ड भी कहा जाता है। अपितु साइन बोर्ड वे होते हैं जिन्हें स्टील की चादर पर बड़े-बड़े अक्षरों में आकर्षक ढंग से लिखवाकर चौराहे पर या दुकान के ऊपर टाँग दिया जाता है।

3. बिजली द्वारा सजावट-विज्ञापन बोर्डों को जब बिजली द्वारा सजावट कर दी जाती है तब इसे बिजली द्वारा सजावट के विज्ञापन कहते हैं । इसमें बोर्ड के आसपास झालर या छोटे-छोटे बल्ब, ट्यूब लाइटों के अक्षरों के बोर्ड, जलते-बुझते बल्ब या लाईन से एक के बाद एक जलने वाली सीरीज आदि प्रमुख होते हैं।

4. सैण्डविच मैन विज्ञापन-बाह्य विज्ञापन का एक महत्वपूर्ण व विशिष्ट विज्ञापन माध्यम है। इसमें किसी व्यक्ति को विचित्र व असामान्य कपड़े पहनाकर शरीर पर अद्भुत पोस्टर लगा दिये जाते हैं। साथ ही सिर पर एक लंबी नोक वाली टोपी पहना दी जाती है इस प्रकार इस व्यक्ति को शहर की गलियों में, मेलों में या जहाँ भीड़ हो ऐसे स्थलों पर घुमाया जाता है। साथ में एक ढोल भी रहता है, ढोल की विशिष्ट आवाज व असामान्य व्यक्ति आकर्षण का केंद्र बन जाता है। जैसे बीड़ी, सिगरेट, दवाएँ व अन्य सामग्री के विज्ञापन के लिए यह अच्छी विधि है।

प्रश्न 25.
विपणन की विशेषताएँ बताइये।
उत्तर:
विपणन की विशेषताएँ (Features of marketing)

1. आवश्यकताएँ (Needs) – विपणन प्रक्रिया के द्वारा ग्राहकों को अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ तथा सेवाएँ प्राप्त होती हैं । आवश्यकता से अभिप्राय ग्राहक की मानसिक स्थिति है जिसमें यदि उसकी वह आवश्यकता की पूर्ति न हो तो वह अपने आपको बेचैन महसूस करता है।

2. बाजार में माँगी जाने वाली वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन करना (Creating a market offering) – बाजार में माँगी जाने वाली वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन से अभिप्राय उन वस्तुओं का उत्पादन करना है जो एक निश्चित कीमत पर ग्राहकों द्वारा अपनी चाहतों तथा इच्छाओं की पूर्ति हेतु माँगी जाती हैं।

3. उपभोक्ता मूल्य (Customer value) – उत्पादक कौन-सी वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन करे तथा किन वस्तुओं को उपभोक्ताओं तक पहुँचाए, इस तथ्य का निर्धारण उपभोक्ता करते हैं । उन्हें कौन से पदार्थ से अधिक संतुष्टि मिलती है अथवा उन्हें पहले कौन-सी वस्तु या सेवा की आवश्यकता है इसका निर्णय उपभोक्ता करते हैं। उत्पादक उसी के अनुसार वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन कर ग्राहकों तक पहुँचाते हैं।
4.हस्तांतरण प्रक्रिया (Exchange mechanism) – विपणन का आधार एक्सचेंज प्रक्रिया है। ग्राहक उत्पादकों को उनके द्वारा उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं का मूल्य देते हैं परिणामतः वे ग्राहकों की आवश्यकताओं की संतुष्टि करने का प्रयास करते हैं।

प्रश्न 26.
हस्तांतरण प्रक्रिया की आवश्यक शर्तों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
हस्तांतरण प्रक्रिया की आवश्यक शर्ते (Essential conditions of exchange mechanism) –

  1. दो पक्षों अर्थात् ग्राहक तथा उत्पादकों की आवश्यकता होती है।
  2. दोनों पक्षों में एक-दूसरे की आवश्यकताओं को संतुष्ट करने की क्षमता होनी चाहिए।
  3. दोनों पक्षों में एक-दूसरे से संप्रेषण करने की योग्यता होनी चाहिए। संप्रेषण के अभाव में कोई भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती।
  4. दोनों पक्षों में एक-दूसरे के विचारों को अपनाने या छोड़ने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए।

प्रश्न 27.
विपणन प्रबंध से क्या अभिप्राय है ? इसकी प्रक्रिया लिखिए।
उत्तर:
विपणन प्रबंध (Marketing management)- विपणन संबंधी समस्त क्रियाओं के नियोजन, संगठन तथा नियंत्रण को विपणन प्रबंध कहते हैं।
विपणन प्रबंध की प्रक्रिया (Process of marketing management)-

  1. एक उपयुक्त बाजार का चुनाव।
  2. उस बाजार के ग्राहकों की आवश्यकताओं को भली-भाँति समझकर उनको पूरा करना। 3. अधिक-से-अधिक मात्रा में क्रेताओं को वस्तुएँ तथा सेवाएँ खरीदने के लिए प्रेरित करना।

प्रश्न 28.
विपणन धारणा के कौन-से स्तंभ हैं ?
उत्तर:
विपणन धारणा के स्तंभ (Pillars of marketing concept)-

  1. बाजार अथवा ग्राहकों का पता लगाना जिन्हें विपणन के प्रयासों का लक्ष्य बनाया जा सके।
  2. लक्ष्य वाले बाजार में ग्राहकों की आवश्यकताओं एवं इच्छाओं को समझना।
  3. लक्ष्य वाले बाजार की आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए उत्पादों अथवा सेवाओं का विकास करना।

प्रश्न 29.
ब्रांडिंग में उपयोग होने वाली विभिन्न व्यूह रचनाओं को समझायें।
उत्तर:
विभिन्न प्रकार की व्यूह रचना (Strategy) जिनका ब्रांडिंग में प्रयोग किया जाता है

  1. ब्रांड (Brand)- इसके अंतर्गत प्रत्येक उत्पाद के लिए फर्म द्वारा अलग-अलग ब्रांड का प्रयोग किया जाता है जिससे वह अपने ब्रांड को दूसरी कंपनियों के ब्रांड से अलग रख सके।
  2. ब्रांड को नाम देना (Brand name)- ब्रांड को जिस नाम से पुकारा अथवा बुलाया जाता है उसे ब्रांड का नाम कहा जाता है।
  3. ब्रांड मार्क (Brand mark)- जब ब्रांड के साथ में कोई निशान अथवा मार्क बनाया जाता है उसे ब्रांड मार्क कहा जाता है।
  4. व्यापार चिन्ह (Trade mark)- व्यापार का वह चिह्न जिसे कोई जानी-मानी हस्ती चलाती है, व्यापार चिन्ह कहलाता है। यह सामान्य रूप में एक चिन्ह, प्रतीक, निशान, शब्द या कई शब्द होते हैं । व्यापार चिन्ह उत्पाद को उसी श्रेणी के दूसरे उत्पादों से अलग रखता है।

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प्रश्न 30.
बिक्री संवर्धन के विभिन्न उपायों को बताइये।
उत्तर:
बिक्री संवर्धन के विभिन्न उपाय (Techniques of sales promotion)

  1. मुफ्त नमूने बाँटना (Distribution of free samples) – दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाली वस्तुओं के नमूने विशिष्ट व्यक्तियों में बाँटकर उन्हें लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया जाता है।
  2. कूपन (Coupon)- कूपन एक ऐसी पर्ची है जिसके आधार पर उपभोक्ता वस्तु खरीदते समय कुछ बचत कर सकता है।
  3. प्रीमियम (Premium)- इसका अर्थ है- एक वस्तु क्रय करने वाले को एक अन्य वस्तु मुफ्त देना।
  4. व्यापारिक टिकटें (Trading stamps)- इसके अंतर्गत वस्तु की खरीद पर प्रायः 20 प्रतिशत की दर से टिकटें दी जाती हैं। उपभोक्ता वे टिकटें एकत्रित करता रहता है। जब टिकटें 100 रु. से अधिक की हो जाती हैं तो वह इनके बदले की उतनी राशि की कोई वस्तु निर्धारित दुकान से प्राप्त कर लेता है।
  5. इनामी प्रतियोगिता (Prize contests)- उत्पादक अक्सर प्रतियोगिताएँ आयोजित करते रहते हैं।

प्रश्न 31.
वितरण के माध्यम के कार्य बताइये।
उत्तर:
वितरण माध्यम के कार्य (Functions of distribution channels)

  1. छाँटना (Sorting)- वितरण के माध्यम के द्वारा अलग-अलग वस्तुओं को क्वालिटी, रंग, किस्म इत्यादि गुणों के आधार पर छाँटा जाता है।
  2. एकत्रित करना (Accumulation)- छाँटने के बाद एक गुण वाले सभी पदार्थों को बड़े-बड़े कंटेनर्स अथवा जगहों पर एकत्रित किया जाता है।
  3. छोटे-छोटे वर्गों में बाँटना (Allocation)- एक जैसे पदार्थों को एक जगह पर एकत्रित करने के बाद संभालने के दृष्टिकोण से तथा ग्राहकों में बेचने के लिए तथा लेबलिंग व ब्रांडिंग के दृष्टिकोण से छोटे-छोटे समूहों में बाँटा जाता है।
  4. अन्य पदार्थों को भी साथ में मिलाना (Assortment)- केवल एक पदार्थ को वितरित करने से न उपभोक्ता की आवश्यकताएँ पूरी होती हैं और न ही वितरण के माध्यम अपनी लागत निकालने में सफल होते हैं। अतः वे तीन अथवा चार अधिक वस्तुओं के समूहों को वितरित करते हैं।

प्रश्न 32.
विपणन अवधारणा की विशेषताएँ बताइए। – उत्तर– विपणन अवधारणा की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

1. विपणन धारणा उपभोक्ता मूलक है जिसमें विपणन प्रक्रिया उत्पादन से पहले प्रारंभ हो जाती है और वस्तुओं या सेवाओं के हस्तांतरण के बाद भी चलती रहती है।

2. इसके अंतर्गत उपभोक्ताओं की इच्छाओं तथा आवश्यकताओं का अध्ययन किया जाता है और उन्हों वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन किया जाता है जो माँग के अनुरूप हों। इसलिए आजकल विपणन शोध एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य बन गया है।

3. इस विचारधारा को कार्यान्वित करने के लिए ग्राहक को सर्वोच्च स्थान देना होगा और ग्राहक के दृष्टिकोण से ही समस्त व्यावसायिक क्रियाओं का संचालन तथा समन्वय किया जाना चाहिए। ग्राहक का सृजन एवं संतुष्टि ही व्यवसाय का औचित्य समझा जाता है।

4. विपणन अवधारणा के अंतर्गत विपणन का अर्थ अधिकतम लाभ कमाना नहीं बल्कि उत्पादक या व्यापारी तथा ग्राहक दोनों की संतुष्टि करना है।

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प्रश्न 33.
‘ग्राहक को उत्पाद के अनुसार ढालना’ तथा ‘ग्राहक की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद विकसित करना’ विपणन प्रबंध की दो महत्वपूर्ण अवधारणायें हैं। इन अवधारणाओं की पहचान कर दोनों में अंतर्भेद कीजिये।
उत्तर:
‘ग्राहक को उत्पाद के अनुसार ढालना’ विक्रय अवधारणा है जबकि ‘ग्राहक की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद विकसित करना’ विपणन अवधारणा है।
विक्रय अवधारणा तथा विपणन अवधारणा में अंतर- प्रश्न क्र. 35 का उत्तर देखें।

प्रश्न 34.
पैकेजिंग तथा लेबलिंग अवधारणाओं में अंतर्भेद कीजिये।
उत्तर-
पैकेजिंग तथा लेबलिंग में अंतर- पैकेजिंग का अर्थ है उत्पाद के लिए पात्र या रेपर तैयार करना ताकि उत्पाद को परिवहन, बिक्री और उपयोग के लिये तैयार किया जा सके। पैकेजिंग उत्पाद की रक्षा करती है। इससे वस्तु की पहचान होती है। यह स्वतः विज्ञापन का कार्य करता है। यह एक मूक विक्रयकर्ता के रूप में कार्य करता है। यह वस्तुओं को सुरक्षित रखता है। इसके विपरीत लेबलिंग का अर्थ है पैकेज पर पहचान चिन्ह अंकित करना। यह किसी पैकेज का वह भाग है जो उत्पाद तथा उत्पादक के बारे में सूचनायें देता है।

लेबलिंग उत्पाद को पहचान देता है। इस पर उत्पाद का मूल्य लिखा होता है। यह उत्पाद की विभिन्न श्रेणियों को बताता है।

प्रश्न 35.
“आवश्यकताओं को ढूंढ़िए एवं उनकी पूर्ति कीजिए” तथा “वस्तुएँ बनाइए एवं उनकी बिक्री कीजिये ये विपणन प्रबंध की दो महत्वपूर्ण अवधारणायें हैं। पहचान कर दोनों अवधारणाओं में अंतर्भेद कीजिये।
उत्तर:
“आवश्यकताओं को दूँढ़िए एवं उनकी पूर्ति कीजिए” यह विपणन अवधारणा है तथा “वस्तुएँ बनाइए एवं उनकी बिक्री कीजिये” यह विक्रय अवधारणा है।
विपणन अवधारणा तथा विक्रय अवधारणा में अंतर
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 11 विपणन प्रबंध IMAGE - 16

प्रश्न 36.
विपणन प्रबंध क्या है ? विपणन प्रबंध के विभिन्न उद्देश्यों को बताइये।
उत्तर:
विपणन प्रबंध का अर्थ-विपणन प्रबंधन, प्रबंध की एक शाखा है। विपणन किसी संस्था के विपणन कार्यों को नियोजित, सुव्यवस्थित व नियंत्रित करता है। –
परिभाषा-

1. फिलिप कोटलर के अनुसार-“संगठनात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए बनाये गये विपणन कार्यक्रमों का विश्लेषण नियोजन, क्रियान्वयन एवं नियंत्रण ही विपणन प्रबंध है। ।

2. विलियन जे.स्टैन्टन के अनुसार-“विपणन विचार का क्रियात्मक रूप ही विपणन प्रबंध होता है।’ विपणन प्रबन्ध के उद्देश्य (Objectives of Marketing Management) –
विपणन एक विस्तृत शब्द है जिसमें उत्पादन से लेकर विक्रय व विक्रय पश्चात् सेवा ( Service after sales) भी शामिल है। इन सभी क्रियाओं के लिये उचित संगठन, नियोजन, नियंत्रण, सम्प्रेषण व समन्वय की कार्यवाही प्रबन्ध के अन्तर्गत आती है। विपणन प्रबन्ध के प्रमुख उद्देश्य निम्नांकित हैं

1. विपणन कार्यों का नियोजन करना – विपणन के अन्तर्गत क्रेताओं की खोज करना, उपभोक्ता के अनुकूल वस्तुओं का निर्माण करना, उचित मूल्य निर्धारित करना, उचित परिवहन एवं भण्डारण व्यवस्था करना, वितरण की उचित व्यवस्था करना, बाजार सूचना आदि महत्वपूर्ण कार्य आते हैं । इन सभी कार्यों को एक योजना के तहत् सम्पादित करने के लिये विपणन प्रबन्ध आवश्यक है। अत: विपणन प्रबन्ध का प्राथमिक उद्देश्य विपणन कार्यों को नियोजित ढंग से करना है।

2. विपणन व्ययों में कमी लाना – वर्तमान प्रतियोगी बाजार में वस्तु की लागत कम-से-कम करने का प्रयास किया जाता है। किसी भी वस्तु की कीमत उत्पादन लागत से काफी अधिक होती है क्योंकि उत्पादन के पश्चात् वितरण एवं विक्रय के समस्त व्यय भी जोड़ दिये जाते हैं। अत: इन व्ययों में कमी लाना विपणन प्रबन्ध का महत्वपूर्ण उद्देश्य होता है।

3. विपणन का उचित संगठन करना-बिना विपणन संगठन के विपणन कार्य आसानी से नहीं किया जा सकता है। अत: विपणन के समस्त कार्यों में उचित संगठन व्यवस्था का विकास करना विपणन प्रबन्ध का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

4. विपणन का उचित नेतृत्व करना- खराब नेतृत्व अच्छे से अच्छे संगठन व्यवस्था को नष्ट कर देता है। विपणन कार्यों का निष्पादन सही एवं योग्य व्यक्तियों के द्वारा सम्पन्न कराना विपणन प्रबन्ध का उद्देश्य होता है।

प्रश्न 37.
विपणन के विभिन्न कार्यों को संक्षिप्त में समझाइए।
उत्तर:
विपणन के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं

1. विपणन अनुसन्धान (Marketing research) – विपणन अनुसन्धान के अन्तर्गत, उपभोक्ताओं की संख्या, उनकी रुचि, फैशन, आदत, आवश्यकता व माँग की जानकारी ज्ञात की जाती है ताकि उसी के अनुरूप वस्तुओं का उत्पादन किया जा सके।

2. वस्तु नियोजन एवं विकास (Product planning and development) – उपभोक्ता की सन्तुष्टि व रुचि के अनुरूप वस्तु का विक्रय करने पर ही विक्रेता अधिक लाभ की आशा रख सकता है। वस्तु का निर्माण व विक्रय दो बातों पर निर्भर है, प्रथम-उपभोक्ताओं की पसन्द की वस्तु निर्मित करना और द्वितीय समय-समय पर वस्तु का आकार-प्रकार व रंग में परिवर्तन करना। ये कार्य पूर्व में इंजीनियरिंग व अन्य अनुसंधान विभाग द्वारा किये जाते थे, वर्तमान में इन सभी कार्यों की जिम्मेदारी विपणन की है, अतः वर्तमान में विपणन वस्तु का नियोजन व विकास दोनों कार्य करता है।

3. प्रमापीकरण एवं श्रेणीयन (Standardization and grading) – प्रमापीकरण विपणन का महत्वपूर्ण कार्य है, क्योंकि प्रमाप के आधार पर वस्तु को वर्गीकृत किया जाता है, तत्पश्चात् ही उसका विक्रय सरलतापूर्वक किया जा सकता है। उत्पादक द्वारा विभिन्न ब्रान्ड एवं गुण (Brand and Quality) की वस्तुएँ तैयार की जाती हैं, अतः वस्तु के प्रमाप के अनुरूप उसका वर्गीकरण सम्बन्धी कार्य विपणन द्वारा ही किया जाता है।

4. पैकेजिंग (Packaging) – विक्रय एवं वितरण प्रमापी में अब पैकिंग का विशेष महत्व है अच्छी सी अच्छी वस्तु खराब पैकिंग के कारण कम मूल्य की हो जाती है। इसी कारण वर्तमान में वस्तु की पैकिंग कर उपभोक्ता को देने का एक फैशन चल पड़ा है। वस्तु खराब न हो या उसकी उपयोगिता नष्ट न हो उसके लिए डिब्बों, हार्डबोर्ड, प्लास्टिक की थैलियाँ या पुढे के डिब्बों में पैकिंग कार्य किया जाता है।

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प्रश्न 38.
विक्रय संवर्द्धन एवं वैयक्तिक विक्रय में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विक्रय संवर्द्धन एवं वैयक्तिक विक्रय में अन्तर
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प्रश्न 39.
वैयक्तिक विक्रय की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
वैयक्तिक विक्रय की विशेषताएँ (Characteristics of Personal Selling)

1. प्रत्यक्ष विक्रय (Direct sales) – प्रत्यक्ष विक्रय में विक्रेता स्वयं प्रत्यक्ष रूप से वस्तु का विक्रय करता है स्वयं सामग्री को लेकर क्रेता से मूल्य प्राप्तकर वस्तु की सुपुर्दगी देती है।

2. वैयक्तिक सम्बन्ध (Personal relation) – वैयक्तिक विक्रय में क्रेता व विक्रेता के मध्य सीधे वैयक्तिक सम्बन्ध होते हैं। क्रेता व विक्रेता के मध्य कोई कड़ी (Chain) नहीं होती है। वैयक्तिगत सम्बन्धों में व्यक्तिगत भेंट एवं निजी अनुरोध उसके सार तत्त्व हैं । बर्नाड लेस्टर के अनुसार “यह एक मस्तिष्क से दूसरे मस्तिष्क तक सम्पर्क है (Mind to mind approach)

3. वस्तु का ज्ञान (Knowledge of product)—इसमें विक्रेता को वस्तु के गुणों की सम्पूर्ण जानकारी रहती है। अत: वह वस्तु बेचने तक सीमित न रहकर वस्तु का उपयोग, उसके लाभ आदि जानकारी भी क्रेता को देता है।

4. सृजनात्मक कला (Creative art)-वैयक्तिक विक्रय, विक्रय लक्ष्यों की पूर्ति के लिये नये ग्राहक, नयी माँग, नये बाजारों व नये विक्रय व्यवहारों के सृजन की कला है। इसमें विक्रेता नई-नई आवश्यकताओं व माँग को विकसित करता है।

प्रश्न 40.
उत्पादों में अंतर करने में ब्रांडिंग किस प्रकार से सहायक होती है ? क्या यह वस्तु एवं सेवाओं के विपणन में भी सहायता करती है ? समझाइए।
उत्तर:
ब्रांड एक उत्पादन की पहचान होती है। यह एक नाम चिन्ह या डिजाइन के रूप में हो सकता है। ब्रांड निर्धारण न केवल विक्रेता या उत्पादक को पहचानने के लिए किया जाता है बल्कि आपके उत्पाद को प्रतिस्पर्धी के उत्पाद की तुलना में श्रेष्ठ बनाने के लिए भी किया जाता है।

ब्रांड निर्धारण एक पहचान चिन्ह से कहीं अधिक होता है । यह क्रेता की आशाओं को संतुष्टि प्रदान करने और गुणवत्ता की सुपुर्दगी करने का विक्रेता का वचन होता है। ब्रांड के साथ हम आसानी से पहचान सकते हैं कि विशिष्ट कंपनी से संबंधित सभी उत्पाद कौन से हैं। जब फर्मे किस्म के बारे में अच्छी प्रसिद्धि विकसित करती हैं। तब ब्रांड विश्वस्तता विकसित करने में उनकी सहायता करता है।
ब्रांड वस्तु एवं सेवाओं के विपणन में सहायक

1. उत्पाद में अंतर्भेद करने में सहायक-ब्रांड के कारण विज्ञापन सरल हो जाता है यह न केवल उत्पाद के बारे में जागरूकता फैलाता है अपितु ब्रांड को भी प्रचलित करता है।

2. नये उत्पादों को परिचित करवाना-ब्रांडिंग एक कंपनी के नये उत्पादों को बाजार में परिचित करवाने का काम करता है। यदि एक कंपनी का ब्रांड नाम प्रसिद्ध हो जाए तो वह कंपनी उसी नाम से अपने किसी अन्य उत्पाद को आसानी से बाजार में उतार सकती है। जैसे-Samsung एक सफल ब्रांड है और इसने इसी ब्रांड का प्रयोग अपने अन्य उत्पादों को बाजार में लाने के लिए किया जैसे-LED;A.C., Computer, Washing Machine इत्यादि।

3. विभेदात्मक मूल्य निश्चित करना-प्रसिद्ध ब्रांड नाम के कारण कंपनी अपने उत्पाद का मूल्य अन्य कंपनियों से भिन्न निश्चित कर सकती है। यदि ग्राहक को एक बार आपका ब्रांड पसंद आ जाए तो भविष्य में वह इसका अधिक मूल्य देने में भी संकोच नहीं करेगा।

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प्रश्न 41.
एक अच्छे विक्रेता के गुण बताइए।
उत्तर:
एक अच्छे विक्रेता के आवश्यक गुण निम्नलिखित हैं

1. व्यक्तित्व-एक अच्छे विक्रेता का एक अच्छा व्यक्तित्व होना चाहिए जैसे एक फूल के लिए उसकी खुशबू। व्यक्ति का अच्छा व्यक्तित्व दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। एक आकर्षक व्यक्तित्व हमेशा एक अच्छा प्रभाव बनाता है। इसके लिए अच्छा स्वास्थ्य, आकर्षक स्वरूप और प्रभावशाली आवाज होना चाहिए। उन्हें बाध्यकारी और लंगड़ा आदि जैसे शारीरिक बाधाओं से पीड़ित नहीं होना चाहिए।

2. हँसमुख स्वभाव-उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा होना चाहिए। यह सही कहा जाता है कि मुस्कुराते हुए चेहरे के बिना एक आदमी को दुकान नहीं खोलना चाहिए। ग्राहकों को प्रभावित करने के लिए उन्हें हमेशा हँसमुख और मीठे स्वभाव का होना चाहिए। उचित पोशाक पहनना चाहिए क्योंकि अच्छे पोशाक व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान होती है।

3. सौजन्य-एक विक्रेता को हमेशा अपने ग्राहकों के प्रति विनम्र और सरल होना चाहिए। इसके लिए कुछ भी लागत नहीं लगती है, बल्कि बिक्री के लिए स्थायी ग्राहकों के मन को जीतता है। उन्हें सही – सही विकल्प बनाने या उत्पादों को चुनने में ग्राहकों की सहायता करनी चाहिए।

4. धैर्य और दृढ़ता-एक विक्रेता के पास विभिन्न प्रकार के ग्राहक आते हैं उनमें से कुछ उत्पादों के बारे में अप्रासंगिक प्रश्न पूछकर कुछ भी नहीं खरीदते हैं और समय बर्बाद करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में, उसे गुस्सा नहीं करना चाहिए तथा ग्राहकों की बातें सुननी चाहिए।

प्रश्न 42.
विज्ञापन एवं वैयक्तिक विक्रय में अंतर कीजिए।
उत्तर:
विज्ञापन एवं व्यक्तिगत विक्रय में स्पष्ट अंतर –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 11 विपणन प्रबंध IMAGE - 18

प्रश्न 43.
किसी वस्तु अथवा सेवा की कीमत निर्धारण को प्रभावित करने वाले तत्व कौन-कौन से हैं ? समझाइए।
उत्तर:
वस्तु अथवा सेवा की कीमत निर्धारण को प्रभावित करने वाले तत्व –

1. वस्तु की माँग-किसी वस्तु की माँग पर उसकी कीमत का सीधा प्रभाव पड़ता है अर्थात् जिस वस्तु की माँग अधिक होगी उसकी कीमत भी अधिक होगी। कीमत अधिक रहने पर भी उसकी बिक्री होती रहेगी। जबकि मांग कम या सामान्य रहने पर कीमत भी कम या सामान्य रखना उचित होगा।
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 11 विपणन प्रबंध IMAGE - 19

2. वस्तु की विशेषताएँ – वस्तु की विशेषताओं के अंतर्गत वस्तु का जीवन, वैकल्पिक वस्तु की प्राप्ति, वस्तु की माँग का स्थगन आदि प्रमुख है। यदि वस्तु नाशवान किस्म की है तो उसके सड़ने – गलने या खराब होने के पूर्व कम से कम दाम में विक्रय करना उचित होता है वैकल्पिक वस्तु की प्राप्ति के अंतर्गत यदि एक वस्तु के अन्य विकल्प हैं तो कीमत कम रखना उचित होगा जबकि वैकल्पिक वस्तु न रहने से दाम कितने भी ऊँचे रखे जा.सकते हैं । इसी प्रकार ऐसी कोई वस्तु जिसकी माँग को स्थगित रखा जा सकता है जैसे कार, फ्रिज या टी.वी. खरीदना आदि। इस प्रकार वस्तु की विशेषताएँ भी उसकी कीमत को प्रभावित करती हैं।

3. वस्तु की लागत – किसी वस्तु की लागत प्रत्यक्ष रूप से कीमत को प्रभावित करती है जिस वस्तु की लागत अधिक होगी उस वस्तु की कीमत अधिक होना स्वाभाविक है। यही कारण है कि वर्तमान में उत्पादक वस्तु की लागत कम-से-कम करने के उपाय खोजते रहते हैं।

4. वस्तु के वितरण मार्ग – वस्तु के वितरण मार्ग का स्वभाव उसकी कीमत निर्धारण को प्रभावित करता है। यदि वितरण में मध्यस्थ अधिक है तो उन सभी का लाभ जोड़ते हुए अधिक कीमत निर्धारण करना होगा। जबकि वितरण मार्ग कम रहने पर कीमत कम निर्धारित होगी।

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प्रश्न 44.
वितरण के माध्यम से आप क्या समझते हैं ? वस्तु एवं सेवाओं के वितरण में इनके क्या कार्य हैं ? समझाइए।
उत्तर:
वितरण के माध्यम का आशय-“किसी भी वस्तु का उत्पादन उपभोग करने के लिए किया जाता है। वर्तमान समय में उत्पादन व उपभोग काफी दूर-दूर होने के कारण वस्तु को उपभोक्ता तक पहुँचाने में विभिन्न माध्यमों का सहारा लेना आवश्यक होता है जिसमें वितरक, थोक व्यापारी, फुटकर व्यापारी, प्रतिनिधि आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहता है ये माध्यम या मध्यरूप की वाहिकाएँ कहलाती हैं या इसे वितरण का माध्यम भी कहा जाता है।
वस्तु एवं सेवाओं के वितरण में इनका कार्य-वस्तु एवं सेवाओं के वितरण में ‘वितरण माध्यम’ के निम्नलिखित कार्य हैं

1. छाँटना-मध्यस्थ विभिन्न निर्माताओं से वस्तुएँ उत्पादित करते हैं और तब उसकी छंटाई करते हैं अर्थात् गुणवत्ता, आकार या कीमत के अनुसार उनकी पुनः पैकिंग करना।

2.विविधता-मध्यस्थ विभिन्न प्रकार के वस्तु अपने पास रखते हैं। वे विभिन्न निर्माताओं से वस्तुएँ प्राप्त करते हैं ताकि ग्राहक केवल एक स्थान पर जाकर अपनी आवश्यकता को पूरा कर सके।

प्रश्न 45.
विपणन व विक्रयण में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
विपणन व विक्रयण में अन्तर
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 11 विपणन प्रबंध IMAGE - 20

प्रश्न 46.
विपणन के कार्य लिखिये।
उत्तर:
विपणन के कार्य-

(अ) नियोजन सम्बन्धी कार्य –

  1. विपणन अनुसन्धान
  2. वस्तु नियोजन एवं विकास
  3. वस्तु का प्रमापीकरण
  4. पैकेजिंग
  5. वस्तु विविधीकरण।

(ब) वितरण सम्बन्धी कार्य –

  1. क्रय एवं संग्रहण
  2. भण्डारण
  3. परिवहन
  4. बीमा
  5. बाजार वर्गीकरण।

(स) विक्रय सम्बन्धी कार्य –

  1. विज्ञापन
  2. मूल्य निर्धारण
  3. व्यक्तिगत विक्रय
  4. विक्रय शर्तों का निर्धारण
  5. उधार वसूली
  6. विक्रय पश्चात् सेवा।

प्रश्न 47.
लेबलिंग के लाभ बताइये।(कोई चार)
उत्तर:
लेबलिंग के लाभ निम्नलिखित हैं

  1. वस्तु की जानकारी-लेबलिंग से ग्राहक को उस वस्तु के बारे में जानकारी प्राप्त होती है तथा उसका उपयोग किस प्रकार करना है उसकी जानकारी मिलती है।
  2. ग्राहक के प्रति सेवा-लेबलिंग के माध्यम से ग्राहकों की सेवा की जाती है। यह एक पर्ची या पत्र है जिसमें कुछ सूचना या वितरण दिया रहता है।
  3. गुणवत्ता-लेबलिंग के माध्यम से वस्तु की गुणवत्ता की जानकारी उपलब्ध होती है।
  4. विज्ञापन-लेबलिंग के द्वारा विज्ञापन सरलता से किया जाता है।

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प्रश्न 48.
विक्रय संवर्द्धन की विधियों का वर्णन कीजिये।
अथवा
विक्रय संवर्द्धन विधि की ग्राहक संवर्धन विधि के चार बिन्दु लिखिए।
उत्तर:
विक्रय संवर्द्धन की विधियाँ –

I. ग्राहक संवर्द्धन विधियाँ –

  1. नमूना
  2. कूपन
  3. प्रीमियम
  4. प्रतियोगिताएँ
  5. कम मूल्य पर विक्रय
  6.  प्रदर्शन
  7. मेले एवं प्रदर्शनियाँ
  8. प्रतिभाओं का सम्मान
  9. छूट या रिबेट
  10. उधार या किस्तों में विक्रय
  11. धन वापसी प्रस्ताव
  12. एक्सचेंज ऑफर ।

II. व्यापार संवर्द्धन विधियाँ –

  1. विक्रय प्रतियोगिताएँ
  2. व्यापारियों को सुविधाएँ
  3. विक्रय सामग्री को उपलब्ध करना
  4. विक्रय रैली का आयोजन
  5. उत्पाद मॉडल देना।

प्रश्न 49.
विज्ञापन के माध्यम का चुनाव करते समय ध्यान रखने योग्य घटकों (कारकों) का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
एक विज्ञापनकर्ता को अपनी वस्तु का विज्ञापन करते समय या विज्ञापन करने के पूर्व निम्न बिन्दुओं पर ध्यान देना चाहिये

1. बाजार का स्वभाव – बाजार के स्वभाव से अर्थ है कि वस्तु के ग्राहक किस स्थान पर रहते हैं। अतः विज्ञापन ऐसे साधन से कराया जाना चाहिए कि वह उन तक पहुँच सके। यदि ग्राहक सम्पूर्ण देश में रहते हैं तो विज्ञापन राष्ट्रीय स्तर पर रेडियो, टेलीविजन आदि से कराया जा सकता है।

2. वितरण व्यवस्था – साधन का चुनाव करते समय वितरण व्यवस्था को भी ध्यान में रखना चाहिए। जिन स्थानों पर विज्ञापनकर्ता की वस्तु के बेचने वाले नहीं हैं वहाँ पर विज्ञापन कराना व्यर्थ ही होता है।

3. सन्देश सम्बन्धी आवश्यकताएँ-विज्ञापन सन्देशों को सभी प्रकार के माध्यमों में एक – सा प्रसारित नहीं किया जा सकता है जैसे-यदि किसी विज्ञापन में चित्र दिखाना या प्रदर्शन करना आवश्यक है तो ऐसा विज्ञापन टेलीविजन से करना उचित होगा।

4. वस्तुओं की प्रकृति – वस्तुएँ कई प्रकार की होती हैं। जैसे-खाद्य वस्तुएँ, व्यापारिक वस्तुएँ। इन विभिन्न वस्तुओं के लिए विभिन्न प्रकार के माध्यम प्रभावी एवं उचित रहते हैं। अतः विज्ञापन का चुनाव करते समय वस्तु की प्रकृति को ध्यान में अवश्य रखना चाहिए।

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प्रश्न 50.
विपणन मिश्रण को प्रभावित करने वाले तत्वों को समझाइये।
उत्तर:
विपणन मिश्रण को प्रभावित करने वाले तत्व निम्नलिखित हैं

(अ) बाजार संबंधी तत्व –

  1. उपभोक्ता का व्यवहार
  2. प्रतिस्पर्धा
  3. सरकारी नियंत्रण।

(ब) विपणन संबंधी तत्व –

  1. उत्पाद नियोजन
  2. ब्राण्ड नीति
  3. संवेष्ठन नीति
  4. वितरण वाहिकाएँ
  5. विज्ञापन नीति
  6. विक्रय संवर्धन
  7. भौतिक वितरण
  8. बाजार अनुसंधान।

प्रश्न 51.
विक्रय संवर्द्धन से क्या आशय है ? इसके कोई चार उद्देश्य बताइये।
उत्तर:
विक्रय संवर्द्धन-किसी वस्तु के सामान्य विक्रय की मात्रा में वृद्धि करने की क्रियायें विक्रय संवर्द्धन कहलाती हैं। इसके अन्तर्गत कूपन, पोस्टर्स, प्रदर्शनी, प्रसार – प्रचार, संपर्क, ईनामी योजना, मूल्य वापसी, गारण्टी, प्रीमियम एवं प्रतियोगिताओं को शामिल किया जाता है।
उद्देश्य:

  1. नये ग्राहकों को वस्तुओं एवं सेवा के संबंध में जानकारी प्रदान कर क्रय हेतु प्रेरित करना।
  2. आम लोगों में वस्तु को लोकप्रिय बनाना।
  3. वर्तमान ग्राहकों को स्थायी बनाना।
  4. उपभोक्ताओं, विक्रेताओं को वस्तु से परिचित कराकर उनका ज्ञान बढ़ाना।
  5. प्रतिस्पर्धा में आगे रहना।
  6. किसी विशिष्ट नये बाजार में बिक्री प्रारंभ करना।
  7. मध्यस्थों एवं व्यापारियों को अधिकाधिक माल बेचने के लिए प्रेरित करना।

MP Board Class 12 Business Studies Important Questions

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम

गति के नियम अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 5.1.
निम्नलिखित पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए:

  1. एकसमान चाल से नीचे गिरती वर्षा की कोई बूँद।
  2. जल में तैरता 10 g संहति का कोई कार्क।
  3. कुशलता से आकाश में स्थिर रोकी गई कोई पतंग।
  4. 30 km h-1 के एकसमान वेग से ऊबड़ – खाबड़ सड़क पर गतिशील कोई कार।
  5. सभी गुरुत्वीय पिण्डों से दूर तथा वैद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों से मुक्त, अंतरिक्ष में तीव्र चाल वाला इलेक्ट्रॉन।

उत्तर:

  1. न्यूटन के प्रथम नियमानुसार कोई नेट बल नहीं लगता है।
  2. न्यूटन के प्रथम नियमानुसार कोई नेट बल नहीं लगता है।
  3. न्यूटन के प्रथम नियमानुसार कोई नेट बल नहीं लगता है।
  4. न्यूटन के प्रथम नियमानुसार कोई नेट बल नहीं लगता है।
  5. चूँकि यह वैद्युत चुम्बकीय एवम् गुरुत्वीय बल उत्पन्न करने वाली भौतिक एजेंसियों से काफी दूर है। अत: कोई बल कार्य नहीं करता है।

प्रश्न 5.2.
0.05 kg संहति का कोई कंकड़ ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंका गया है। नीचे दी गई प्रत्येक परिस्थिति में कंकड़ पर लग रहे नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए:

  1. उपरिमुखी गति के समय।
  2. अधोमुखी गति के समय।
  3. उच्चतम बिंदु पर जहाँ क्षण भर के लिए यह विराम में रहता है। यदि कंकड़ को क्षैतिज दिशा से 45° कोण पर फेंका – जाए, तो क्या आपके उत्तर में कोई परिवर्तन होगा? वायु – प्रतिरोध को उपेक्षणीय मानिए।

उत्तर:
चूँकि उपरोक्त तीनों स्थितियों में, वायु के प्रभाव को नगण्य मानते हुए कंकड़ पर केवल एक ही बल (गुरुत्व बल) 0.5 न्यूटन ऊर्ध्वाधरतः, अधोमुखी लगता है यदि कंकड़ की गति ऊर्ध्वाधर की ओर नहीं है तब भी उत्तर अपरिवर्तित रहता है। कंकड़ उच्चतम बिन्दु पर विराम में नहीं है। इसकी समस्त गति की अवधि में इस पर वेग का एकसमान क्षैतिज घटक कार्यरत रहता है।

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प्रश्न 5.3.
0.1 kg संहति के पत्थर पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा निम्नलिखित परिस्थितियों में ज्ञात कीजिए:

  1. पत्थर को स्थिर रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरन्त पश्चात्।
  2. पत्थर को 36 km h-1 के एकसमान वेग से गतिशील किसी रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरन्त पश्चात्।
  3. पत्थर को 1ms-2 के त्वरण से गतिशील किसी रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरंत पश्चात्।
  4. पत्थर 1 ms-2 के त्वरण से गतिशील किसी रेलगाड़ी के फर्श पर पड़ा है तथा वह रेलगाड़ी के सापेक्ष विराम में है। उपरोक्त सभी स्थितियों में वायु का प्रतिरोध उपेक्षणीय मानिए।

उत्तर:

  1. स्थिर रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने पर, पत्थर पर एक मात्र बल उसका भार नीचे की ओर कार्य करेगा। पत्थर पर बल (mg) = 0.1 x 10 = 1 न्यूटन नीचे की ओर।
  2. इस स्थिति में गाड़ी से गिराने के पश्चात् गाड़ी की गति का उस पर कार्य करने वाले बल पर कोई प्रभाव नहीं होगा तथा पत्थर पर बल उसका भार नीचे की ओर कार्य करेगा। अतः पत्थर बल पर = 1 न्यूटन नीचे की ओर।
  3. इस स्थिति में (b) के समान बल नीचे की ओर कार्य करेगा।
  4. पत्थर रेलगाड़ी के सापेक्ष विरामावस्था में है।

∴ पत्थर पर त्वरण = रेलगाड़ी का त्वरण = 1 मीटर/सेकण्ड
∴ पत्थर पर गाड़ी की त्वरित गति के कारण नेट बल।
F = ma = 0.1 x 1 = 0.1 न्यूटन क्षैतिज दिशा में।

प्रश्न 5.4.
l लंबाई की एक डोरी का एक सिरा m संहति के किसी कण से तथा दूसरा सिरा चिकनी क्षैतिज मेज पर लगी खूटी से बँधा है। यदि कण ” चाल से वृत्त में गति करता है तो कण पर (केंद्र की ओर निर्देशित) नेट बल है:

  1. T
  2. T – \(\frac { mv^{ 2 } }{ l }\)
  3. T + \(\frac { mv^{ 2 } }{ l }\)
  4. 0

T डोरी में तनाव है। (सही विकल्प चुनिए)
उत्तर:
विकल्प

  1. सही है।

प्रश्न 5.5.
15 ms-1 की आरंभिक चाल से गतिशील 20 kg संहति के किसी पिण्ड पर 50 N का स्थाई मंदन बल आरोपित किया गया है। पिण्ड को रुकने में कितना समय लगेगा?
उत्तर:
दिया है:
u = 15 मीटर/सेकण्ड,
m = 20 किग्रा, मंदन बल,
F = 50 न्यूटन,
v = 0, समय (t) = ?
गति के द्वितीय नियम से,
a = \(\frac{F}{M}\) = \(\frac{50}{20}\) = 2.5 मीटर/सेकण्ड2
सूत्र, v = u + at से,
0 = 15 + ( – 2.5) x t
∴t = \(\frac{15}{2.5}\)
= 6 सेकण्ड

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प्रश्न 5.6.
3.0 kg संहति के किसी पिण्ड पर आरोपित कोई बल 25 s में उसकी चाल को 2.0 ms-1 से 3.5 ms-1 कर देता है। पिण्ड की गति की दिशा अपरिवर्तित रहती है। बल का परिमाण व दिशा क्या है?
उत्तर:
दिया है:
m = 3 किग्रा,
µ = 2 मीटर/सेकण्ड,
t = 25 सेकण्ड,
v = 3.5 मीटर/सेकण्ड, बल का परिणाम
F = ?, बल की दिशा = ?
न्यूटन के गति विषयक द्वितीय नियम से,
पिण्ड पर लगा बल, F = संवेग परिवर्तन की दर
\(\frac{mv – mu}{t}\) = \(\frac{m(v – u)}{t}\)
= \(\frac{3(3.5 – 2)}{25}\) = \(\frac{3 x 1.5}{25}\)
= 1.8 न्यूटन
बल पिण्ड की गति की दिशा में ही लगेगा।

प्रश्न 5.7.
5.0 kg संहति के किसी पिण्ड पर 8 N व 6 N के दो लंबवत् बल आरोपित हैं। पिण्ड के त्वरण का परिमाण व दिशा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है: m =5 किग्रा,
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 1
F1 = 8 न्यूटन
F2 = 6 न्यूटन
त्वरण = ?, त्वरण की दिशा = ?
बलों के समान्तर चतुर्भुज नियम से,
पिण्ड पर लगने वाला परिणामी बल,
F = \(\sqrt { F_{ 1 }+F_{ 2 } } \)
= \(\sqrt { 8^{ 2 }\quad +\quad 6^{ 2 }\quad } \)
=10 न्यूटन
परिणामी बल द्वारा F, से बना कोण,
θ = tan-1 \(\frac { F^{ 2 } }{ F_{ 1 } }\)
= tan-1 \(\frac{6}{8}\)
= 37°
पिण्ड पर त्वरण,
a = \(\frac{F}{M}\) = \(\frac{10}{5}\)
= 2 मीटर/सेकण्ड2

प्रश्न 5.8.
36 km h-1 की चाल से गतिमान किसी ऑटो रिक्शा का चालक सड़क के बीच एक बच्चे को खड़ा देखकर अपने वाहन को ठीक 4.0s में रोककर उस बच्चे को बचा लेता है। यदि ऑटो रिक्शा बच्चे के ठीक निकट रुकता है, तो वाहन पर लगा औसत मंदन बल क्या है? ऑटो रिक्शा तथा चालक की संहतियाँ क्रमशः 400 kg और 65 kg हैं।
उत्तर:
दिया है: ऑटो रिक्शा की प्रा० चाल, u = 36 किमी/घण्टा =10 मीटर/सेकण्ड
ऑटो रिक्शा की अन्तिम चाल v = 0, t = 4 सेकण्ड औसत मंदन बल, F = ?
कुल द्रव्यमान = ऑटो रिक्शा का द्रव्यमान + चालक का द्रव्यमान
= 400 + 65 = 465 किग्रा
समी० u = y + at से,
θ = \(\frac{v – u}{t}\) = \(\frac{0 – 10}{4}\)
= -2.5 मीटर/सेकण्ड2
अतः मंदन बल, F = ma = 465 x 2.5
= 1.16 x 103 1.2 x 103 न्यूटन

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प्रश्न 5.9.
20,000 kg उत्थापन संहति के किसी रॉकेट में 5 ms-2 के आरंभिक त्वरण के साथ ऊपर की ओर स्फोट किया जाता है। स्फोट का आरंभिक प्रणोद (बल) परिकलित कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
रॉकेट का द्रव्यमान, m = 20,000 किग्रा त्वरण, a = 5 मीटर/सेकण्ड2 माना रॉकेट पर ऊपर की ओर लगने वाला आरम्भिक प्रणोद F है।
यहाँ रॉकेट पर दो बल लगते हैं –

  1. प्रणोद (F) ऊपर की ओर तथा
  2. रॉकेट का भार (mg) नीचे की ओर

चूँकि रॉकेट ऊपर उठ रहा है। अतः रॉकेट पर ऊपर की ओर लगने वाला बल,
F1 = F – mg, F1 = ma
∴ ma = F – mg
∴ F = mg + ma
= m (g + a)
= 20,000 (10 + 5)
= 20,000 x 15
= 300,000 x 3 x 105 न्यूटन।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 2

प्रश्न 5.10.
उत्तर की ओर 10 ms-1 की एकसमान आरंभिक चाल से गतिमान 0.40 kg mg संहति के किसी पिण्ड पर दक्षिण दिशा के अनुदिश 8.0 N का स्थाई बल 30 s के लिए आरोपित किया गया है। जिस क्षण बल आरोपित किया गया उसे t =0, तथा उस समय पिण्ड की स्थिति x = 0 लीजिए। t = – 5 s, 25 s, 100 s पर इस कण की स्थति क्या होगी?
उत्तर:
दिया है: प्रारम्भिक वेग, u = 10 मीटर/सेकण्ड, उत्तर दिशा की ओर
आरोपित बल F = 8 न्यूटन, दक्षिण की ओर
m = 0.4 किग्रा, t = 30 सेकण्ड
t = 0 तथा x = 0 पर बल आरोपित किया जाता है।
t = – 5 सेकण्ड पर,
चूँकि t = 0 से पूर्व पिण्ड पर कोई बल आरोपित नहीं था।
अतः इस समयान्तराल में पिण्ड एकसमान वेग से गतिशील होगा।
सूत्र x = x0 + µx + \(\frac{1}{2}\) x 0 x ( – 5)2
= – 50 मीटर
अतः t = – 5 सेकण्ड पर, पिण्ड x = – 50 मीटर पर है।
t=25 सेकण्ड पर,
चूँकि t = 0 से t = 30 सेकण्ड तक पिण्ड पर बल आरोपित है। अतः पिण्ड त्वरित गति में होगा।
चूँकि बल की दिशा प्रारम्भिक वेग से विपरीत है अतः यह मंदन, उत्पन्न करेगा।
सूत्र F = ma से,
मंदन, a = \(\frac{F}{M}\) = \(\frac{8}{0.4}\) = 20 मीटर/सेकण्डर2
अतः (x)t = 25 = 0 + 10 x 25 x \(\frac{1}{2}\) (- 20) x (25)
= – 6000 मीटर = – 6 किमी पर है।
अतः t = 2.5 सेकण्ड पर, पिण्ड x = – 6 किमी पर है।
t = 100 सेकण्ड
xt = 30 = 0 + 10 x 30 + \(\frac{1}{2}\) (-20) x 302
= – 8700 मीटर
30 सेकण्ड पश्चात् वेग,
v = u + at = 10 + (-20) x 30
= – 590 मीटर/सेकण्ड
t = 30 सेकण्ड बाद F = 0 है। अतः t = 30 सेकण्ड बाद पिण्ड आगे के 70 सेकण्ड तक नियत चाल से चलेगा।
∴ S = vt = – 590 x 70 = – 41300 मीटर
∴t = 100 सेकण्ड पर,
x = (x)t = 30 + xt = 70
= – 8700 – 41300 = – 50000
= – 50 किमी।
अतः t = 100 सेकण्ड पर पिण्ड x = – 50 किमी पर है।

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प्रश्न 5.11.
कोई ट्रक विरामावस्था से गति आरंभ करके 2.0 ms – 2 के समान त्वरण से गतिशील रहता है। t = 10s पर, मीटर/सेकण्ड ट्रक के ऊपर खड़ा एक व्यक्ति धरती से 6 m की ऊँचाई से कोई पत्थर बाहर गिराता है। t = 11s पर, पत्थर का (a) वेग, तथा (b) त्वरण क्या है? (वायु का प्रतिरोध उपेक्षणीय मानिए।)
उत्तर:
दिया है:
u = 0, a = 2 मीटर/सेकण्ड2
सूत्र v = u + at से,
vt = 10 = 0 + 2 x 10 = 20 मीटर/सेकण्ड (क्षैतिज दिशा में)
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 3
इसी समय व्यक्ति ट्रक पर पत्थर छोड़ता है।
पत्थर छोड़ने के पश्चात् ट्रक का त्वरण पत्थर पर कोई प्रभाव नहीं डालता है। लेकिन इस क्षण तक ट्रक तथा पत्थर का वेग समान होगा। इस दशा में पत्थर गुरुत्वीय त्वरण के अधीन मुक्त गति करेगा।
माना पत्थर बिन्दु P पर छोड़ते हैं। बिन्दु P से जाने वाली क्षैतिज एवम् ऊर्ध्वाधर रेखाओं को क्रमश: x व y – अक्ष माना, जबकि P मूल बिन्दु है।
∴ux = 20 मीटर/सेकण्ड, ax = 0
व uy = 0, ay = – g मीटर/सेकण्ड2
∴x – दिशा में वेग, त्वरण शून्य है। इस प्रकार 1 सेकड़ परचाथ क्ष दिशा मे वेग, ux = 20 मीटर/सेकण्ड
∴पत्थर छोड़ने के 1 सेकण्ड बाद वेग,
v = \(\sqrt { u_{ x }^{ 2 }+u_{ y }^{ 2 } }\)
= \(\sqrt { 20^{ 2 }+10^{ 2 } }\)
= \(\sqrt { 500 }\)
= 22.3 मीटर/सेकण्ड
अत:
(a) गति प्रारम्भ के बाद t = 11 सेकण्ड पर पत्थर का वेग = 22.3 मीटर/सेकण्ड
(b) 11 सेकण्ड पर पत्थर का त्वरण, a = g =10 मीटर/सेकण्ड2

प्रश्न 5.12.
किसी कमरे की छत से 2m लंबी डोरी द्वारा 0.1 kg संहति के गोलक को लटकाकर दोलन आरंभ किए गए। अपनी माध्य स्थिति पर गोलक की चाल 1ms – 1 है। गोलक का प्रक्षेप – पथ क्या होगा यदि डोरी को उस समय काट दिया जाता है जब गोलक अपनी –

  1. चरम स्थितियों में से किसी एक पर है, तथा –
  2. माध्य स्थिति पर है?

उत्तर:

  1. चरम स्थिति पर गोलक की चाल शून्य है। अब डोरी काट दी जाए तब वह ऊर्ध्वाधर अधोमुखी गिरेगा।
  2. माध्य स्थिति पर गोलक में क्षैतिज वेग होता है। जब डोरी काट दी जाए तब वह किसी परवलयिक पथ के अनुदिश गिरेगा।

प्रश्न 5.13.
किसी व्यक्ति की संहति 70 kg है। वह एक गतिमान लिफ्ट में तुला पर खड़ा है जो:

  1. 10 ms – 1 की एकसमान चाल से ऊपर जा रही है –
  2. 5 ms – 2 के एकसमान त्वरण से नीचे जा रही है –
  3. 5 ms – 2 के एकसमान त्वरण से ऊपर जा रही है तो प्रत्येक प्रकरण में तुला के पैमाने का पाठ्यांक क्या होगा?
  4. यदि लिफ्ट की मशीन में खराबी आ जाए और वह गुरुत्वीय प्रभाव में मुक्त रूप से नीचे गिरे तो पाठ्यांक क्या होगा?

उत्तर:
दिया है: m=70 किग्रा

1.  चूँकि लिफ्ट एकसमान वेग से गतिमान है। अतः त्वरण a=0
तुला के पैमाने का पाठ्यांक,
R = mg = 70 x 9.8 = 686 न्यूटन

2. लिफ्ट का त्वरण, a = 5 मीटर/सेकण्ड2 (नीचे की ओर)
∴तुला के पैमाने का पाठ्यांक,
R = m (g-a)
= 70 x (9.8 – 5) = 336 न्यूटन

3. लिफ्ट का त्वरण, a = 5 मीटर/सेकण्ड (ऊपर की ओर)
∴ तुला के पैमाने का पाठ्यांक,
R = m (g + a)
= 70 ( 9.8 + 5) = 1036 न्यूटन

4. चूँकि लिफ्ट गुरुत्वीय प्रभाव में मुक्त रूप से गिरती है।
∴ a = g
∴ तुला के पैमाने का पाठ्यांक,
R = m (g – a)
= 70 x 0 = 0

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प्रश्न 5.14.
चित्र में 4 kg संहति के किसी पिण्ड का स्थिति – समय ग्राफ दर्शाया गया है।
(a) t < 0; t > 4s; 0
(b) t = 0 तथाt = 4s पर आवेग क्या है?
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 4
(केवल एकविमीय गति पर विचार कीजिए)
उत्तर:
(a) t < पर, स्थिति – समय (n – t) ग्राफ समय अक्ष के साथ सम्पाती है। अतः पिण्ड पर आरोपित बल शून्य है। t > 4 सेकण्ड के लिए, x – t ग्राफ समय अक्ष के समान्तर सरल रेखा है। अतः पिण्ड विरामावस्था में है तथा पिण्ड पर कार्यरत बल शून्य है।
0 < t < 4 सेकण्ड के लिए, x – t ग्राफ एक झुकी हुई सरल रेखा है अर्थात् इस काल में पिण्ड की मूल बिन्दु से दूरी नियत दर से लगातार बढ़ रही है अर्थात् इस दौरान नियत है व त्वरण शून्य है। अतः पिण्ड पर आरोपित बल शून्य है।

(b) t=0 से पहले पिण्ड का वेग v 1 = 0
t = 0 के पश्चात् पिण्ड का वेग
V2 = ग्राफ OA का ढाल
= \(\frac{3}{4}\) मीटर/सेकण्ड
अतः t = 0 पर, आवेग = संवेग परिवर्तन की दर
= mv2 – mv1
= 4 x \(\frac{3}{4}\) – 4 x 0
= 3 किग्रा मीटर/सेकण्ड
पुनः t = 4 सेकण्ड के ठीक पहले,
वेग v1, = मीटर/सेकण्ड
t = 4 सेकण्ड के ठीक बाद, वेग v2 = 0
∴t = 4 सेकण्ड दर, आवेग = संवेग परिवर्तन
= mv2 – mv1
= – 3 किग्रा मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 5.15.
किसी घर्षणरहित मेज पर रखे 10kg तथा 20kg के दो पिण्ड किसी पतली डोरी द्वारा आपस में जुड़े हैं। 600 N का कोई क्षैतिज बल।

  1. A पर
  2. B पर डोरी के अनुदिश लगाया जाता है। प्रत्येक स्थिति में डोरी में तनाव क्या है?

उत्तर:
दिया है: F = 600 न्यूटन
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 5

1. माना पिण्ड A पर बल आरोपित करने से दोनों पिण्ड त्वरण a, से चलना प्रारम्भ करते हैं एवम् डोरी में तनाव T है। पिण्ड A पर बल F आगे की ओर एवम् तनाव T पीछे की ओर लगेगा।
अतः इस पिण्ड पर नेट बल,
F = F – T
न्यूटन के गति विषयक द्वितीय नियम से,
F1 = m1a
∴m1a = F – T
या 10a = 600 – T
पिण्ड B पर एकमात्र बल, डोरी का तनाव (T) आगे की ओर लगेगा।
∴ T = m2 = 20a
समी० (2) से T का मान समी0 (1) में रखने पर,
10a = 600 – 20a
या 10a + 20a = 600
∴30a = 600
या a = \(\frac{600}{30}\) = 20 मी/सेकण्डर2
a का यह मान समी० (2) में रखने पर,
T = 20 x 20 = 400 न्यूटन

2. इस स्थिति में, पिण्ड B पर नेट बल F2 = F2 – T होगा।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 6
F – T = m2a
या 600 – T = 20a
पिण्ड A पर नेट बल T आगे की ओर होगा।
∴ T = m, a
= 10a
(4) समी० (4) से T का मान समी० (3) में रखने पर,
600 – 10a = 20a
∴ a = \(\frac{600}{30}\) = 20 मीटर/सेकण्डर2
600 = 20 मीटर/सेकण्ड
a का यह मान समी० (4) में रखने पर
T = 10 x 20
= 200 न्यूटन

प्रश्न 5.16.
8 kg तथा 12 kg के दो पिण्डों को किसी हल्की अवितान्य डोरी, जो घर्षणरहित घिरनी पर चढ़ी है, के दो सिरों से बाँधा गया है। पिण्डों को मुक्त छोड़ने पर उनके त्वरण तथा डोरी में तनाव ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना घर्षण रहित घिरनी पर हल्की अवितान्य डोरी से द्रव्यमान m1 व m2 लटकाएँ गए हैं।
∴ m1 =8 किग्रा, m2 = 12 किग्रा
माना डोरी में तनाव T व त्वरण a है। यह त्वरण m2 पर नीचे की ओर तथा m1 पर ऊपर की ओर है। m2 की गति की समी० निम्न होगी
F = 12g -T (नीचे की ओर)
गति के नियम से,
F = m2a = 12a
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 7
∴ 12g – T = 12a
इसी प्रकार m के लिए,
8g – T = – 8a.
∴ ‘समी० (2) को (1) में से घटाने पर,
4g = 20a
∴  a = \(\frac{4 x 10}{20}\)
= 2 मीटर/सेकण्डर2
∴ समी० (1) से डोरी में तनाव,
T = 12 (g – a) = 12 (10 – 2)
= 12 x 8 = 96 न्यूटन

प्रश्न 5.17.
प्रयोगशाला के निर्देश फ्रेम में कोई नाभिक विराम में है। यदि यह नाभिक दो छोटे नाभिकों में विघटित हो जाता है, तो यह दर्शाइए कि उत्पाद विपरीत दिशाओं में गति करने चाहिए।
उत्तर:
माना विरामावस्था में नाभिक का द्रव्यमान = m विरामावस्था में नाभिक का प्रा० वेग, \(\vec { u } \) = 0
माना विघटित नाभिकों के द्रव्यमान m1 व m2 तथा इनके वेग क्रमश: \(\vec { P_{ i } } \) व \(\vec { P_{ t } } \)  है।
माना विघटन से पूर्व तथा बाद में संवेग क्रमशः
\(\vec { P_{ i } } \) व  \(\vec { P_{ t } } \)
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img B
समीकरण (3) से स्पष्ट है कि \(\vec { V_{ 1 } } \) तथा \(\vec { V_{ 2 } } \) विपरीत दिशा में हैं। अतः विघटित नाभिक विपरीत दिशाओं में गति करेंगे।

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प्रश्न 5.18.
दो बिलियर्ड गेंद जिनमें प्रत्येक की संहति 0.05 kg है, 6 ms-1 की चाल से विपरीत दिशाओं में गति करती हुई संघट्ट करती हैं और संघट्ट के पश्चात् उसी चाल से वापस लौटती हैं। प्रत्येक गेंद पर दूसरी गेंद कितना आवेग लगाती है?
उत्तर:
गेंदों का द्रव्यमान m1 = m2 = 0.05 किग्रा
माना पहली गेंद धनात्मक दिशा में चलती है।
∴u1 = 6 मीटर/से
v1 = – 6 मीटर/सेकण्ड
u2 = – 6 मीटर/सेकण्ड
v2 = 6 मीटर/सेकण्ड
सूत्र आवेग = संवेग परिवर्तन से, पहली गेंद का दूसरी गेंद पर आवेग,
= m1v1 – m1u1
= 0.05 x (-6) – 0.05 x 6
= – 0.6 किग्रा मीटर/सेकण्ड
तथा दूसरी गेंद का पहली गेंद पर आवेगा,
=  m2v2 – m2u2
= 0.05 x (-6) – 0.05 x – 6
= 0.6 किग्रा मीटर/सेकण्ड
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 8

प्रश्न 5.19.
100 kg संहति की किसी तोप द्वारा 0.020 kg का गोला दागा जाता है। यदि गोले की नालमुखी चाल 80 ms – 1 है, तो तोप की प्रतिक्षेप चाल क्या है?
उत्तर:
दिया है: तोप का द्रव्यमान, m1 =100 किग्रा
गोले का द्रव्यमान m2 = 0.02 किग्रा
गोले की नालमुखी चाल, v2 = 80 मीटर/सेकण्ड
तोप की प्रतिक्षेप चाल v1 = ?
प्रश्नानुसार विस्फोट से पूर्व तोप एवम् गोला दोनों विरामावस्था में थे।
संवेग संरक्षण के निकाय से,
विस्फोट से पूर्व संवेग = विस्फोट के बाद संवेग
∴m1v1 + m2v2 = 0
∴v 1 = \(\frac { -m_{ 2 }v_{ 2 } }{ m_{ 1 } }\)
= \(\frac{-0.02 x 80}{100}\) = – 0.016 मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 5.20.
कोई बल्लेबाज किसी गेंद को 45° के कोण पर विक्षेपित कर देता है। ऐसा करने में वह गेंद की आरंभिक चाल, जो 54 km/h-1 है, में कोई परिवर्तन नहीं करता। गेंद को कितना आवेग दिया जाता है? (गेंद की संहति 0.15kg है)
उत्तर:
दिया है:
गेंद का द्रव्यमान, m1 = 0.15 किग्रा
प्रा० वेग, u = 54 किमी/घण्टा
= 54 x \(\frac{5}{18}\) = 15 मीटर सेकण्ड
अन्तिम वेग, v = 15 मीटर/सेकण्ड जो कि 4 से 45° के कोण पर है।
माना प्रारम्भिक तथा अन्तिम संवेग क्रमश: \(\vec { P_{ i } } \) व \(\vec { P_{ t } } \)
हैं।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 9
सूत्र आवेग = संवेग परिवर्तन से
\(\vec { I } \) = \(\vec { P_{ t } } \) – \(\vec { P_{ i } } \)
= \(\vec { P_{ t } } \)+ \(\vec { P_{ i } } \)
अतः आवेग दोनों संवेगों का परिणामी है।
∴ \(\vec { I } \) का परिमाण
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 10
= 172 न्यूटन सेकण्ड

प्रश्न 5.21.
किसी डोरी के एक सिरे से बँधा 0.25 kg संहति का कोई पत्थर क्षैतिज तल में 1.5 m त्रिज्या के वृत्त पर 40 rev/min की चाल से चक्कर लगाता है? डोरी में तनाव कितना है? यदि डोरी 200N के अधिकतम तनाव को सहन कर सकती है तो अधिकतम चाल ज्ञात कीजिए जिससे पत्थर को घुमाया जा सकता है।
उत्तर:
दिया है: पत्थर का द्रव्यमान, m = 0.25 किग्रा
पत्थर के पथ की त्रिज्या, r = 1.5 मीटर
पर विक्षेपित घूर्णन आवृत्ति, u = 40 चक्कर/मिनट
= \(\frac{40}{60}\)
= \(\frac{2}{3}\) चक्कर/सेकण्ड
माना डोरी में तनाव T है।
जब पत्थर को वृत्ताकार पथ में घुमाते हैं तो आवश्यक अभिकेन्द्र बल डोरी के तनाव T से प्राप्त होता है।
∴ T = mrω2 = mr(2πv)2
डोरी का अधिकतम तनाव, Tmax = 200 न्यूटन
पत्थर की अधिकतम चाल = ?
सूत्र T = \(\frac { mv^{ 2 } }{ 2 } \) से,
v2max = \(\frac { T_{ max\quad }\times \quad R }{ m } \)
= \(\frac{200 x 1.5}{0.25}\)
= 1200
vmax = \(\sqrt { 1200 } \)
= 34.6 = 35 मीटर/सेकण्ड

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प्रश्न 5.22.
यदि अभ्यास 5.21 में पत्थर की चाल को अधिकतम निर्धारित सीमा से भी अधिक कर दिया जाए, तथा डोरी यकायकं टूट जाए, तो डोरी के टूटने के पश्चात् पत्थर के प्रक्षेप का वर्णन निम्नलिखित में से कौन करता है:

  1. वह पत्थर झटके के साथ त्रिज्यत: बाहर की ओर जाता है।
  2. डोरी टूटने के क्षण पत्थर स्पर्श रेखीय पथ पर उड़ जाता है।
  3. पत्थर स्पर्शी से किसी कोण पर, जिसका परिमाण पत्थर की चाल पर निर्भर करता है, उड़ जाता है।
  4. क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद को लपकते समय अपने हाथ गेंद के साथ पीछे को खींचता है।

उत्तर:

1. चूँकि दिक्स्थान से घोड़ा-गाड़ी निकाय पर कोई बाह्य बल कार्यरत नहीं है। घोड़ा तथा गाड़ी के मध्य पारस्परिक बल (क्रिया प्रतिक्रिया के नियम से) निरस्त हो जाता है। अत: फर्श पर, निकाय व फर्श के बीच सम्पर्क बल (घर्षण बल) घोड़े व गाड़ी को विराम से गति में लाने का कारण होते हैं।

2. यात्री के शरीर का जो भाग गद्दी के सीधे सम्पर्क में नहीं है वह जडत्व के कारण गतिमान, बस के यकायक रुकने पर आगे की ओर हो जाता है परिणामस्वरूप यात्री गिर जाते हैं।

3. घास मूवर को किसी कोण पर बल आरोपित करके खींचा या धकेला जाता है। जब हम धक्का देते हैं तब ऊर्ध्वाधर दिशा में सन्तुलन के लिए, अभिलम्ब बल उसके भार से अधिक होना चाहिए जिसके परिणामस्वरूप घर्षण बल बढ़ जाता है। इस प्रकार मूवर को चलाने के लिए अधिक बल आरोपित करना पड़ता है जबकि खींचते समय इसके विपरीत होता है। इसी कारण लॉन मूवर को खींचना आसान होता है।

4. क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद को लपकते समय अपने हाथ गेंद के साथ पीछे को ओर इस कारण खींचता है कि ताकि खिलाड़ी संवेग परिवर्तन की दर को घटा दे तथा इस प्रकार गेंद को रोकने के लिए आवश्यक बल को कम करने के लिए हाथ को पीछे की ओर खींचता है।

गति के नियम अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 5.24.
चित्र में 0.04 kg संहति के किसी पिण्ड का स्थिति-समय ग्राफ दर्शाया गया है। इस गति के लिए कोई उचित भौतिक संदर्भ प्रस्तावित कीजिए। पिण्ड द्वारा प्राप्त दो क्रमिक आवेगों के बीच समय – अंतराल क्या है? प्रत्येक आवेग का परिमाण क्या है?
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 11
उत्तर:
दिया गया ग्राफ दो समान्तर ऊर्ध्वाधर दीवारों के मध्य एक समान चाल से क्षैतिज गति करती गेंद का ग्राफ हो सकता है जो बार – बार दीवार से टकराकर 2 सेकण्ड बाद दूसरी दीवार से टकराती है। यह प्रक्रिया निरन्तर चलती रहती है अर्थात् प्रत्येक 2 सेकण्ड के पश्चात् पिण्ड का वेग बदलता है।
∴दो क्रमिक आवेगों के बीच समयान्तराल = 2 सेकण्ड
t = 2 सेकण्ड से पहले, वेग v1 = ग्राफ का ढाल
= \(\frac{2}{2}\) = 1 सेमी/सेकण्ड
t = 2 सेकण्ड के बाद वेग V2 = ग्राफ का ढाल
= \(\frac{-2}{-2}\) = -1 सेमी/सेकण्ड
सूत्र आवेग = संवेग परिवर्तन से,
आवेग = Pi = Pt = mv1 – mv2
=m (v1 – v2) = 0.04 [1-(-1)]
= 0.04 x 2 = 0.08 किग्रा सेमी/सेकण्ड
= \(\frac{0.08}{100}\) किग्रा – मीटर/सेकण्ड
= 8 x 10-4 किग्रा – मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 5.25,
चित्र में कोई व्यक्ति 1ms-2 त्वरण से गतिशील क्षैतिज संवाहक पट्टे पर स्थित खड़ा है। उस व्यक्ति पर आरोपित नेट बल क्या है? यदि व्यक्ति के जूतों और पट्टे के बीच स्थैतिक घर्षण गुणांक 0.2 है, तो पट्टे के कितने त्वरण तक वह व्यक्ति उस पट्टे के सापेक्ष स्थिर रह सकता है? (व्यक्ति की संहति = 65 kg)
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 12
उत्तर:
दिया है: पट्टे का त्वरण, a = 1 मीटर/सेकण्ड2
व्यक्ति का द्रव्यमान, m = 65 किग्रा।
चूँकि व्यक्ति पट्टे पर स्थिर खड़ा है। अत: व्यक्ति का त्वरण a =1 मी/सेकण्ड2
सूत्र F = ma से,
व्यक्ति पर नेट बल, F = 65 x 1
= 65 न्यूटन।
पुनः µs = 0.2
चूँकि पट्टा क्षैतिज अवस्था में है। अत: व्यक्ति पर पट्टे की अभिलम्ब प्रतिक्रिया,
N = mg = 65 x 10 = 650 न्यूटन
माना पट्टे का अधिकतम त्वरण amax है। इस स्थिति में पट्टे के साथ गति करने के लिए व्यक्ति को mammy के बराबर बल की आवश्यकता होगी जो उसे स्थैतिक घर्षण से प्राप्त होगा।
∴mamax ≤ µsN
∴amax = \(\frac { \mu _{ sN } }{ m } \)
= \(\frac{0.2 x 650}{65}\)
= 2 मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 5.26.
mसंहति के पत्थर को किसी डोरी के एक सिरे से बाँधकर R त्रिज्या के ऊर्ध्वाधर वृत्त में घुमाया जाता है। वृत्त के निम्नतम तथा उच्चतम बिंदुओं पर ऊर्ध्वाधरतः अधोमुखी दिशा में नेट बल है। (सही विकल्प चुनिए)
निम्नतम बिंदु पर:

  1. mg – T 1
  2. mg + T 1
  3. mg + T 1 – (mv12)/R
  4. mg – T 1 – (mv12)/R

उच्चतम बिंदु पर:

  1. mg + T2
  2. mg – T2
  3. mg – T 2 + (mv22)/R
  4. mg + T2 + (mv22)/R

जहाँ T1 तनाव निम्नतम बिन्दु पर ऊपर की ओर तथा भार mg नीचे की ओर है।
तथा नेट अधोमुखी बल = mg + T2
जहाँ’ T2 तनाव उच्चतम बिन्दु पर तथा भार mg दोनों नीचे की ओर हैं।
अतः विकल्प (i) सही है।

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प्रश्न 5.27.
1000 kg संहति का कोई हेलीकॉप्टर 15 ms-2 के ऊर्ध्वाधर त्वरण से ऊपर उठता है। चालक दल तथा यात्रियों की संहति 300 kg है। निम्नलिखित बलों का परिमाण व दिशा लिखिए:

  1. चालक दल तथा यात्रियों द्वारा फर्श पर आरोपित बल।
  2. चारों ओर की वायु पर हेलीकॉप्टर के रोटर की क्रिया, तथा।
  3. चारों ओर की वायु के कारण हेलीकॉप्टर पर आरोपित बल।

उत्तर:
दिया है: हेलीकॉप्टर का द्रव्यमान,
m1 =1000 किग्रा।
चालक दल व यात्रियों का द्रव्यमान m2 = 300 किग्रा।
हेलीकॉप्टर का ऊर्ध्वाधर त्वरण, a =15 मीटर/सेकण्ड2
गुरुत्व के कारण त्वरण, g = 10 मीटर/सेकण्ड 2

1. माना चालक व यात्रियों द्वारा फर्श पर आरोपित बल R1 हैं।
∴R1 = m2 (g + a) = 300 (10 + 15)
= 7500 न्यूटन। जोकि ऊपर की ओर होगा।

2. माना कि रोटर के कारण वायु पर बल R2 है।
∴ R2 = (m1+ m2) (g + a)
= (1000 + 300) (15 + 10)
= 32500 न्यूटन चूँकि हेलीकॉप्टर इस बल के प्रतिक्रिया स्वरूप ऊपर की ओर चलता है अत: यह बल भी ऊपर की ओर दिष्ट होगा।

3. क्रिया प्रतिक्रिया के नियम से, वायु द्वारा हेलीकॉप्टर पर आरोपित बल भी 32500 न्यूटन होगा।

प्रश्न 5.28.
15 ms-1 की चाल से क्षैतिजतः प्रवाहित कोई जलधारा 10-2m अनुप्रस्थ काट की किसी नली से बाहर निकलती है तथा समीप की किसी ऊर्ध्वाधर दीवार से टकराती है। जल की टक्कर द्वारा, यह मानते हुए कि जलधारा टकराने पर वापस नहीं लौटती, दीवार पर आरोपित बल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है: नली का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल, A = 10-2मीटर 2
जल का वेग, µ = 15 मीटर/सेकण्ड
जल का घनत्व, d = 103 किग्रा/मीटर3/सेकण्ड
जल के कारण दीवार पर लगने वाला बल F = ?
नली से प्रतिसेकण्ड निकलने वाले जल का आयतन
= a x v
= 15 x 10-2मीटर3/सेकण्ड
चूँकि दीवार से टकराकर जल वापस नहीं लौटता है।
अतः आरोपित बल = प्रति सेकण्ड निकलने वाले जल के संवेग में परिवर्तन
= 150 x 15
= 2250 न्यूटन

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प्रश्न 5.29.
किसी मेज पर एक – एक रुपये के दस सिक्कों को एक के ऊपर एक करके रखा गया है। प्रत्येक सिक्के की संहतिm है। निम्नलिखित प्रत्येक स्थिति में बल का परिमाण एवं दिशा लिखिए:

  1. सातवें सिक्के (नीचे से गिनने पर) पर उसके ऊपर रखे सभी सिक्कों के कारण बल,
  2. सातवें सिक्के पर आठवें सिक्के द्वारा आरोपित बल, तथा
  3. छठे सिक्के की सातवें सिक्के पर प्रतिक्रिया।

उत्तर:

1. नीचे से सातवें सिक्के के ऊपर तीन सिक्के रखे हैं।
अतः सातवें सिक्के पर तीनों सिक्कों के भार का अनुभव होगा।
∴सातवें सिक्के के ऊपर के सिक्कों के कारण बल = 3mg न्यूटन

2. आठवें सिक्के के ऊपर दो सिक्के रखे हैं। अत: सातवें व आठवें सिक्के के कारण बल, आठवें व इसके ऊपर रखे दो सिक्कों के भारों के योग के समान होगा।
अतः सातवें सिक्के पर आठवें सिक्के के कारण बल
= 3 x mg
= 3mg न्यूटन

3. सातवाँ सिक्का स्वयं व ऊपर के तीन सिक्कों के भारों के योग के समान बल से छठवें सिक्के को दबाएगा।
अतः छठे सिक्के पर सातवें सिक्के के कारण बल = 4mg न्यूटन।
अत: छठे सिक्के की सातवें सिक्के पर प्रतिक्रिया
= 4mg न्यूटन

प्रश्न 5.30.
कोई वायुयान अपने पंखों को क्षैतिज से 15° के झुकाव पर रखते हुए 720 km h-1 की चाल से एक क्षैतिज लूप पूरा करता है। लूप की त्रिज्या क्या है?
उत्तर:
दिया है: वेग = 720 किमी/घण्टा
θ =15° लूप की त्रिज्या, r =?
सूत्र tan θ = \(\frac { v^{ 2 } }{ gr }\) से,܂
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 14

प्रश्न 5.31.
कोई रेलगाड़ी बिना ढाल वाले 30 m त्रिज्या के वृत्तीय मोड़ पर 54 kmh-1 चाल से चलती है। रेलगाड़ी की संहति 106 kg है। इस कार्य को करने के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल कौन प्रदान करता है? इंजन अथवा पटरियाँ? पटरियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए मोड़ का ढाल-कोण कितना होना चाहिए?
उत्तर:
दिया है: v = 54 किमी/घण्टा
= 54 x \(\frac{5}{18}\)
= 15 मीटर/सेकण्ड
r = 30 मीटर
m = 106 किग्रा, g = 10 मीटर/सेकण्ड2
सूत्र tan θ = \(\frac{v}{rg}\) से,
tan θ = \(\frac { (15)^{ 2 } }{ 30\times 10 }\) = \(\frac{3}{4}\)
∴ θ = tan-1(\(\frac{3}{4}\)) = 40°
अर्थात् पटरियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए पटरियों का झुकाव 40° होना चाहिए।

प्रश्न 5.32.
चित्र में दर्शाए अनुसार 50kg संहति का कोई व्यक्ति 25 kg संहति के किसी गुटके को दो भिन्न ढंग से उठाता है। दोनों स्थितियों में उस व्यक्ति द्वारा फर्श पर आरोपित क्रिया-बल कितना है? यदि 700 N अभिलंब बल से फर्श धंसने लगता है, तो फर्श को धंसने से बचाने के लिए उस व्यक्ति को, गुटके को उठाने के लिए कौन-सा ढंग अपनाना चाहिए?
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 15
उत्तर:
दिया है: व्यक्ति का द्रव्यमान m1 = 50 किग्रा, गुटके का द्रव्यमान m2 = 25 किग्रा
प्रथम स्थिति (स्थिति-ā) में,
व्यक्ति रस्सी पर 25 g न्यूटन का बल लगाकर ऊपर खींचता है तथा प्रतिक्रिया स्वरूप रस्सी भी व्यक्ति पर नीचे की ओर 25 g N का बल लगाती है।
∴ व्यक्ति पर नेट बल,
F = व्यक्ति का भार + गुटके का भार
= 50g + 25g = 75g = 75 x 10
=750 न्यूटन।
चूँकि व्यक्ति फर्श पर खड़ा है अतः व्यक्ति फर्श पर यही बल आरोपित करेगा।
द्वितीय स्थिति (स्थिति – b) में, व्यक्ति गुटके को उठाने के लिए, रस्सी पर 25 g न्यूटन का बल नीचे की ओर लगाता है। अतः रस्सी भी इतना ही बल व्यक्ति पर ऊपर की ओर लगाएगी।
∴ व्यक्ति पर नेट बल
F = व्यक्ति का भार – रस्सी द्वारा लगाया गया बल
=50 g – 25g
= 25 g = 250 न्यूटन।
यही बल व्यक्ति फर्श पर लगाता है।
उपरोक्त वर्णन से स्पष्ट है कि स्थिति a में फर्श धंस जाएगा। अतः इससे बचाने के लिए यह ढंग अनुप्रयुक्त है।

प्रश्न 5.33.
40 kg संहति का कोई बंदर 600 N का अधिकतम तनाव सह सकने योग्य किसी रस्सी पर चढ़ता है (चित्र)। नीचे दी गई स्थितियों में से किसमें रस्सी टूट जाएगी:

  1. बंदर 6 ms-2 त्वरण से ऊपर चढ़ता है,
  2. बंदर 4 ms-2 त्वरण से नीचे उतरता है,
  3. बंदर5 ms-1 की एकसमान चाल से रस्सी पर चढ़ता है,
  4. बंदर लगभग मुक्त रूप से गुरुत्व बल के प्रभाव में रस्सी से गिरता है।
    (रस्सी की संहति उपेक्षणीय मानिए।)

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 16

उत्तर:
माना बन्दर रस्सी पर T बल नीचे की ओर लगाते हुए a त्वरण से ऊपर की ओर चलता है। अतः क्रिया प्रतिक्रिया के नियम से, रस्सी भी बन्दर पर T बल ऊपर की ओर लगाएगी।
∴ बन्दर पर नेट बल,
F = T – mg (ऊपर की ओर)
पुनः सूत्र F = ma से,
ma = T – mg
∴रस्सी पर तनाव, T = mg + ma

1. दिया है: a = 6 मीटर/सेकण्ड2 m = 40 किग्रा, g=10 मीटर/सेकण्डर2
∴ T = 40 x 10 + 40 x 6
= 640 न्यूटन
परन्तु रस्सी पर अधिकतम तनाव 600 न्यूटन है अतः रस्सी टूट जाएगी।

2. दिया है: a = -4 मीटर/सेकण्डर2
∴ तनाव T = 40 x 10 – 40 x 4
= 240 न्यूटन

3. दिया है: a = 0, चूँकि v =5 मीटर/सेकण्ड नियत है।
∴ तनाव, T = 40 x 10 – 40 x 0
= 400 न्यूटन।

4. मुक्त रूप से गिरते हुए, a = – g
∴ तनाव, T = 40 x g – 40 x g
अतः रस्सी केवल प्रथम स्थिति में टूटेगी।

प्रश्न 5.34.
दो पिण्ड A तथा B, जिनकी संहति क्रमशः 5 kg तथा 10 kg है, एक दूसरे के संपर्क में एक मेज पर किसी दृढ़ विभाजक दीवार के सामने विराम में रखे हैं। (चित्र) पिण्डों तथा मेज के बीच घर्षण गुणांक 0.15 है। 200 N का कोई बल क्षैतिजत: A पर आरोपित किया जाता है। (a) विभाजक दीवार की प्रतिक्रिया, तथा (b) A तथा B के बीच क्रिया-प्रतिक्रिया बल क्या हैं? विभाजक दीवार को हटाने पर क्या होता है? यदि पिण्ड गतिशील है तो क्या (b) का उत्तर बदल जाएगा? µs, तथा µk के बीच अंतर की उपेक्षा कीजिए।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 17
उत्तर:
विभाजक दीवार होने पर, पिण्ड विरामावस्था में होंगे।
∴ पिण्डों का त्वरण, a=0
माना कि पिण्ड A, B पर R1 बल आरोपित करता है जबकि पिण्ड B, A पर विपरीत दिशा में R2, बल आरोपित करता है।
चूँकि पिण्ड A स्थिर अवस्था में है। अतः इस पर नैट बल शून्य होगा।
F = 200 न्यूटन
iMP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 18
∴ R1 – R2
∴ R2 = R 1 = 200 न्यूटन
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 21
विभाजक दीवार हटाने पर पिण्ड गतिशील हो जाते हैं एवम् घर्षण बल कार्यशील हो जाते हैं।
इस दशा में पिण्ड A का बल आरेख चित्र में दिया गया है।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 19
मेज की अभिलम्ब प्रतिक्रिया, R = 5g न्यूटन
माना पिण्ड A, त्वरण a से चलना प्रारम्भ करता है तब पिण्ड का गति समीकरण निम्न होगा –
200 – R1 – µR = 59
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 20
∴ R1 – R1 – 5µg = 5a.
पिण्ड B का बल आरेख चित्र के अनुसार है।
∴अभिलम्ब प्रतिक्रिया, R’ = 10g
तथा गति का समीकरण
R1 – µR’ = 10a.
∴R1 – 10µg = 10a
समी० (i) व (ii) को जोड़ने पर,
200 – 15µg = 15a
∴त्वरण a = \(\frac{200 -15µg}{15}\)
=11.83 ~ 12 मीटर/सेकण्ड2
अर्थात् पिण्डों के गतिशील हो जाएंगे ा का मान समीही (२) मे रकने पर,
R1 – 10 x 0.15 x 10 = 10 x 12
∴R1 = 120 + 15 = 135 न्यूटन।
अर्थात् पिण्डों के गतिशील होने पर बाग़ (बी) का अंतर परिवृत्तिथ हो गए है

प्रश्न 5.35.
15 kg संहति का कोई गुटका किसी लंबी ट्राली पर रखा है। गुटके तथा ट्राली के बीच स्थैतिक घर्षण गुणांक 0.18 है। ट्राली विरामावस्था से 20s तक 0.5 ms-2 के त्वरण से त्वरित होकर एकसमान वेग से गति करने लगती है। (a) धरती पर स्थिर खड़े किसी प्रेक्षक को, तथा (b) ट्राली के साथ गतिमान किसी अन्य प्रेक्षक को, गुटके की गति कैसी प्रतीत होगी, इसकी विवेचना कीजिए।
उत्तर:
दिया है: गुटके का द्रव्यमान, m = 15 किग्रा,
स्थैतिक घर्षण गुणांक, µs = 0.18
t = 20 सेकण्ड के लिए, ट्राली का त्वरण,
a1 = 0.5 मीटर/सेकण्ड 2
t = 20 सेकण्ड के पश्चात् ट्राली का वेग अचर है।
चूँकि प्रारम्भ में ट्राली त्वरित गति करती है। अत: यह एक अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र का उदाहरण है।
अतः गुटके पर छद्द बल
F = ma, = 15 x 0.5 = 7.5 न्यूटन बल पीछे की ओर कार्य करेगा।
ट्राली के फर्श द्वारा गुटके पर लगाया गया अग्रगामी घर्षण बल,
F2 = µN = 0.18 x (15 x 10) = 27 न्यूटन
चूँकि घर्षण बल पश्चगामी बल की तुलना में कम है अतः गुटका पीछे की ओर नहीं फिसलेगा व ट्राली के साथ – साथ गतिमान रहेगा।
(a) धरती पर स्थिर खड़े प्रेक्षक को गुटका ट्राली के साथ गति करता प्रतीत होगा।

प्रश्न 5.36. चित्र में दर्शाए अनुसार किसी ट्रक का पिछला भाग खुला है तथा 40 kg संहति का एक संदूक खुले सिरे से 5 m दूरी पर रखा है। ट्रक के फर्श तथा संदूक के बीच घर्षण गुणांक 0.15 है। किसी सीधी सड़क पर ट्रक विरामावस्था से
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 22
गति प्रारंभ करके 2 ms-2 से त्वरित होता है। आरंभ बिंदु से कितनी दूर चलने पर वह संदूक ट्रक से नीचे गिर जाएगा? (संदूक के आमाप की उपेक्षा कीजिए।)
उत्तर:
दिया है: घर्षण गुणांक, µ = 0.15
संदूक का द्रव्यमान = 40 किग्रा
खुले सिरे से दूरी, s = 5 मीटर, ट्रक के लिए µ = 0, त्वरण = 2 मीटर/सेकण्ड2 ट्रक द्वारा तय दूरी (जबकि संदूक गिर जाता है) = ?
चूँकि ट्रक की गति त्वरित है अतः यह एक अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र होगा।
अतः ट्रक के पीछे रखे संदूक पर पीछे की ओर एक छद्म बल (F =ma) होगा।
∴ F = 40 x 2 = 80 न्यूटन
संदूक पर स्थैतिक घर्षण बल (µs,N) आगे की ओर लगेगा।
संदूक पर नेट बल,
F1 = F – usN
= 80 – 0.15 x 40 x 10
= 20 न्यूटन (पीछे की ओर)
अत: ट्रक के सापेक्ष संदूक का त्वरण a1 = \(\frac { F_{ 1 } }{ m }\) = \(\frac{20}{40}\)
= 0.5 मीटर/सेकण्ड2(पीछे की ओर)
माना संदूक 5 मीटर चलने में। समय लेता है।
∴ सूत्र s = ut + \(\frac{1}{2}\) at2 से,
= 0 + \(\frac{1}{2}\) x 2 x 20 = 20 मीटर

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प्रश्न 5.37.
15 cm त्रिज्या का कोई बड़ा ग्रामोफोन रिकॉर्ड 33 – rev/min की चाल से घूर्णन कर रहा है। रिकॉर्ड पर उसके केंद्र से 4 cm तथा 14 cm की दूरियों पर दो सिक्के रखे गए हैं। यदि सिक्के तथा रिकॉर्ड के बीच घर्षण गुणांक 0.15 है तो कौन-सा सिक्का रिकॉर्ड के साथ परिक्रमा करेगा?
उत्तर:
दिया है: पथों की त्रिज्याएँ
r1 = 0.04 मीटर, r2 = 0.14 मीटर
घर्षण आवृत्ति v = 33 \(\frac{1}{3}\)
= \(\frac{100/3}{60}\)
= \(\frac{5}{9}\) चक्र/सेकण्ड
घर्षण गुणांक, v = 0.15
सिक्कों को रिकायी पर धूमने होथु आवश्यक अभिकेंद्र बाल m1r1ω2 व m2r2ω2 शौथिक दर्शन बाल से प्रप्थ होगा
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 23
= 0.12 मीटर = 12 सीमी
पहले सिक्के के लिए, r1 = 0.04 मीटर < r दूसरे सिक्के के लिए,
जबिक r2 = 0.14 मीटर > 0.12
अतः दूसरा सिक्का रिकार्ड से पिसलकर बहार गिर जाएगा

प्रश्न 5.38.
आपने सरकस में ‘मौत के कुएँ’ (एक खोखला जालयुक्त गोलीय चैम्बर ताकि उसके भीतर के क्रियाकलापों को दर्शक देख सकें) में मोटरसाइकिल सवार को ऊर्ध्वाधर लूप में मोटरसाइकिल चलाते हुए देखा होगा। स्पष्ट कीजिए कि वह मोटरसाइकिल सवार नीचे से कोई सहारा न होने पर भी गोले के उच्चतम बिन्दु से नीचे क्यों नहीं गिरता? यदि चैम्बर की त्रिज्या 25 m है, तो ऊर्ध्वाधर लूप को पूरा करने के लिए मोटरसाइकिल की न्यूनतम चाल कितनी होनी चाहिए?
उत्तर:
गोलीय चैम्बर के उच्चतम बिन्दु पर, मोटर साइकिल सवार चैम्बर को अपकेन्द्र बल के कारण बाहर की ओर दबाता है जिसके प्रतिक्रिया स्वरूप चैम्बर भी सवार पर गोले के केन्द्र की ओर प्रतिक्रिया R लगाता है। यहाँ मोटर साइकिल व सवार का भार (mg) भी गोले के केन्द्र की ओर कार्य करते हैं। सवार को वृत्तीय गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल दोनों बल ही प्रदान करते हैं। इसी कारण सवार गिरता नहीं है।
∴इस स्थिति में गति का समीकरण
R+ mg = \(\frac { -m_{ 2 }v_{ 2 } }{ m_{ r } } \)
परन्तु ऊर्ध्वाधर लूप को पूरा करने के लिए उच्चतम बिन्दु पर न्यूनतम चाल होगी।
∴ R = 0 होगा।
⇒mg = \(\frac { -m_{ 2 }v_{ 2 } }{ m_{ r } } \)
∴ v = \(\sqrt { gr }\) = \(\sqrt { 10 x 25 }\) = 15.8 मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 5.39.
70 kg संहति का कोई व्यक्ति अपने ऊर्ध्वाधर अक्ष पर 200 rev/min की चाल से घूर्णन करती 3 m त्रिज्या की किसी बेलनाकार दीवार के साथ उसके संपर्क में खड़ा है। दीवार तथा उसके कपड़ों के बीच घर्षण गणांक 0.15 है। दीवार की वह न्यूनतम घूर्णन चाल ज्ञात कीजिए, जिससे फर्श को यकायक हटा लेने पर भी, वह व्यक्ति बिना गिरे दीवार से चिपका रह सके।
उत्तर:
दिया है: m = 70 किग्रा,
घूर्णन आवृत्ति, v = 200 चक्र/मिनट
= \(\frac{200}{60}\)
= \(\frac{10}{3}\) चक्र/सेकण्ड
त्रिज्या, r = 3 मीटर
घर्षण गुणांक, µ = 0.15
घूर्णन करते समय, व्यक्ति दीवार को बाहर की ओर दबाता है तथा दीवार का अभिलम्ब प्रतिक्रिया आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करती है जो कि केन्द्र की ओर दिष्ट होता है।
∴Fc = mrω2
घर्षण बल, जोकि व्यक्ति के भार को सन्तुलित करता है,
F = mg = µFc
∴ ω2 = µ.mrω2
∴ω2 = \(\sqrt { \frac { g }{ \mu r } }[latex]
= [latex]\sqrt { \frac { 10 }{ 0.15\quad } \times \quad 3 }\)
= 4.72 = 5 रेडियन/सेकण्ड

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प्रश्न 5.40.
R त्रिज्या का पतला वृत्तीय तार अपने ऊर्ध्वाधर व्यास के परितः कोणीय आवृत्ति ω से घूर्णन कर रहा है। यह दर्शाइए कि इस तार में डली कोई मणिका ω ≤ \(\sqrt { g/R } \) के लिए अपने निम्नतम बिंदु पर रहती है। ω = 2g/R के लिए, केंद्र से मनके को जोड़ने वाला त्रिज्य सदिश ऊर्ध्वाधर अधोमुखी दिशा से कितना कोण बनाता है। (घर्षण को उपेक्षणीय मानिए।)
उत्तर:
माना कि किसी समय मणिका R त्रिज्या के गोले में A बिन्दु पर है। A बिन्दु पर, वृत्तीय तार की अभिलम्ब प्रतिक्रिया M नीचे की ओर A0 के अनुदिश होगी जिससे ऊर्ध्वाधर तथा क्षैतिज
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम img 24
घटकों को वियोजित कर सकते हैं। यहाँ N cos θ भार को सन्तुलित करता है जब N sin θ आवश्यक अभिकेन्द्र बल mrω2 प्रदान करता है।
जहाँ 0 = वृत्त का केन्द्र
θ = त्रिज्या सदिश द्वारा ऊर्ध्व AO से बना कोण
N cos θ = mg
तथा N sin θ = mRω2 sinθ
समी० (1) से (2) से भाग देने पर
cos θ = \(\frac { g }{ R\omega ^{ 2 } } \)
मणिका को निम्नतम बिन्दु B पर रखने के लिए
ω = ≤ \(\sqrt { g/R } \) इस सिद्दिम
∴जब ω = \(\sqrt { \frac { 2g }{ R } } \)
समी० (3) से,
cos θ =\(\frac { g }{ R.2g } \) x R = \(\frac{1}{2}\) = cos 60°
θ = 60°

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MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 13 उद्यमिता विकास

MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 13 उद्यमिता विकास

उद्यमिता विकास Important Questions

उद्यमिता विकास वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
उद्यमी उठाता है –
(a) सोची समझी जोखिम
(b) उच्च जोखिम
(c) निम्न जोखिम
(d) सामान्य एवं तय की गई जोखिम।
उत्तर:
(d) सामान्य एवं तय की गई जोखिम।

प्रश्न 2.
अर्थशास्त्र में निम्न में से कौन-सा उद्यमी कार्य नहीं है –
(a) जोखिम उठाना
(b) पूँजी का प्रावधान एवं उत्पादन का संगठन
(c) अभिनवता
(d) दिन-प्रतिदिन के व्यवसाय का संचालन।
उत्तर:
(d) दिन-प्रतिदिन के व्यवसाय का संचालन।

प्रश्न 3.
निम्न में से कौन-सा कथन उद्यमिता एवं प्रबन्ध में अन्तर को स्पष्ट नहीं करता है –
(a) उद्यमी व्यवसाय को ढूँढते हैं, प्रबन्धक उसको चलाते हैं
(b) उद्यमी अपने व्यवसाय के स्वामी होते हैं, प्रबन्धक कर्मचारी
(c) उद्यमी लाभ कमाते हैं, प्रबन्धकों को वेतन मिलता है
(d) उद्यमी एक ही बार का कार्य है, प्रबन्ध निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है।
उत्तर:
(d) उद्यमी एक ही बार का कार्य है, प्रबन्ध निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है।

प्रश्न 4.
किल्बी ने उद्यमी के जिन कार्यों को बताया है उनमें से नीचे कौन-सा राजनैतिक प्रशासन का . पक्ष नहीं है –
(a) सरकारी अफसरशाही से काम निकालना
(b) संगठन में मानवीय सम्बन्धों का प्रबन्धन
(c) उत्पादन के नये-नये उत्पादों को लाना
(d) ग्राहक एवं आपूर्तिकर्ताओं के सम्बन्धों का प्रबन्धन।
उत्तर:
(c) उत्पादन के नये-नये उत्पादों को लाना

प्रश्न 5.
निम्न में से कौन-सा व्यवहार एक सफल उद्यमिता से नहीं जुड़ा है –
(a) अनुसंधान एवं विकास
(b) अपने व्यवसाय को दिन-प्रतिदिन के आधार पर चलाना
(c) निरन्तर नवीनता एवं तात्कालिकता
(d) ग्राहक की आवश्यकतानुसार उत्पादन
उत्तर:
(b) अपने व्यवसाय को दिन-प्रतिदिन के आधार पर चलाना

प्रश्न 6.
भारत में उद्यमिता विकास कार्यक्रम है –
(a) आवश्यक
(b) अनावश्यक
(c) समय की बर्बादी
(d) धन की बर्बादी।
उत्तर:
(a) आवश्यक

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प्रश्न 7.
उद्यमिता विकास कार्यक्रम प्रदान करता है –
(a) बेरोजगारी
(b) रोजगार
(c) बेईमानी
(d) भ्रष्टाचार।
उत्तर:
(b) रोजगार

प्रश्न 8.
उद्यमी –
(a) जन्म लेता है
(b) बनाया जाता है
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) (a) और (b) दोनों

प्रश्न 9.
भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान स्थित है –
(a) अहमदाबाद में
(b) मुम्बई में
(c) नई दिल्ली में
(d) चेन्नई में।
उत्तर:
(a) अहमदाबाद में

प्रश्न 10.
भारत में उद्यमिता का भविष्य है –
(a) अन्धकार में
(b) उज्ज्वल
(c) कठिनाई में
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) उज्ज्वल

प्रश्न 11.
भारतीय विनियोग केन्द्र की स्थापना की गयी थी –
(a) भारत सरकार द्वारा
(b) मध्यप्रदेश सरकार द्वारा
(c) महाराष्ट्र सरकार द्वारा
(d) गुजरात सरकार द्वारा।
उत्तर:
(b) मध्यप्रदेश सरकार द्वारा

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान की स्थापना ………… सरकार द्वारा की गई थी।
  2. राष्ट्र का सामाजिक एवं आर्थिक विकास …………. का परिणाम है।
  3. उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है. ………….।
  4. उद्यमिता …………. पर आधारित क्रिया है।

उत्तर:

  1. गुजरात
  2. उद्यमिता
  3. ICICI
  4. ज्ञान।

प्रश्न 3.
एक शब्द या वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. भारत में किसी एक गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम का नाम बताइए।
  2. उद्यमिता क्या है ?
  3. “उद्यमिता वस्तुतः एक सृजनात्मक क्रिया है।” यह कथन किसका है ?
  4. “उद्यमिता का अर्थ सैद्धान्तिक रूप में भ्रम उत्पन्न करने वाला रहा है।” यह कथन किसका है ?
  5. नव प्रवर्तन के अन्तर्गत कौन-से कार्य आते हैं ?
  6. “उद्यमिता न एक विज्ञान है न एक कला है, यह एक व्यवहार है, ज्ञान इसका आधार है।” यह कथन किसका है ?

उत्तर:

  1. जवाहर रोजगार योजना
  2. उद्यमिता एक कौशल है
  3. शुम्पीटर
  4. सर विलियम बोमॉल
  5. नवीन तकनीक
  6. पीटर एफ. ड्रकर

प्रश्न 4.
सत्य या असत्य बताइये

  1. भारत में उद्यमिता विकास की गति तेज है।
  2. भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद में स्थित है।
  3. भारत में उद्यमिता विकास कार्यक्रम की आवश्यकता है।
  4. उद्यमिता विकास कार्यक्रम पर किया गया समय एवं धन का व्यय राष्ट्रीय बर्बादी है।
  5. उद्यमी पैदा होते हैं और बनाये जाते हैं।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य

प्रश्न 5.
सही जोड़ी बनाइये –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 13 उद्यमिता विकास IMAGE - 1
उत्तर:

  1. (f)
  2. (a)
  3. (b)
  4. (c)
  5. (d)
  6. (e)

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उद्यमिता विकास अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उद्यमी को आर्थिक विकास की धुरी क्यों माना जाता है ?
उत्तर:
उद्यमी को आर्थिक विकास की धुरी इसलिए माना जाता है, क्योंकि उद्यमियों की महत्वपूर्ण क्रियाओं के द्वारा ही राष्ट्र की आर्थिक विकास को गति प्रदान की जाती है। इसलिए उद्यमी को आर्थिक विकास की धुरी माना जाता है।

प्रश्न 2.
उद्यमिता की विशेषताएँ / लक्षण को बताइए।
उत्तर:
उद्यमिता की निम्नलिखित प्रकृति एवं विशेषताएं बताई गयी हैं –

1. ज्ञान आधारित व्यवहार- उद्यमिता ज्ञान पर आधारित क्रिया है। उद्यमिता बिना ज्ञान के अर्जित नहीं होती है एवं बिना अनुभव के उद्यमिता का कोई व्यवहार नहीं होता है।

2. सृजनात्मक क्रिया- उद्यमिता की प्रकृति रचनात्मक होती है। व्यवसाय प्रवर्तन संगठन एवं प्रबन्ध में सदैव रचनात्मक, चिन्तन द्वारा कार्य, संस्कृति एवं गुणवत्ता वृद्धि का सतत् सार्थक प्रयास किया जाता है।

प्रश्न 3.
उद्यमिता की आवश्यकता किन-किन क्षेत्रों में अति आवश्यक है ?
उत्तर:
उद्यमिता की आवश्यकता निम्न क्षेत्रों में अति आवश्यक है –

  1. स्व-रोजगार प्रदायक
  2. तीव्र आर्थिक विकास
  3. मानवीय संसाधन का उपयोग
  4. नये उत्पाद एवं आविष्कारों को बढ़ावा
  5. स्वदेशी उद्यम को बढ़ावा।

प्रश्न 4.
लघु उद्योग विकास संगठन क्या है ?
उत्तर:
लघु उद्योग विकास संगठन की स्थापना 1954 में की गई। इसके अन्तर्गत 27 लघु उद्योग सेवा संस्थान, 31 शाखा संस्थान, 38 विस्तार केन्द्र, 4 क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र, 20 स्थानीय प्रशिक्षण केन्द्र, 4 उत्पादन प्रक्रिया केन्द्र सम्पूर्ण राष्ट्र में अपनी सेवाएं देते हैं।

प्रश्न 5.
प्रबन्धकीय विकास संस्थान कौन-कौन सी हैं ? इसकी स्थापना कब और कहाँ की गई ?
उत्तर:
प्रबन्धकीय विकास संस्थान की 1975 में गुडगाँव में स्थापना की गई। इसका उद्देश्य दिनप्रतिदिन के प्रबन्धकीय कार्यों में गुणवत्ता लाना है। इसके अन्तर्गत मुख्यतः औद्योगिक व बैंकिंग क्षेत्र आते हैं। यह विभिन्न संस्थाएँ जैसे- IAS, ONGC, BHEL, IES आदि।

प्रश्न 6.
अखिल भारतीय लघु उद्योग बोर्ड के कार्य कौन-से हैं ?
उत्तर:
अखिल भारतीय लघु उद्योग बोर्ड की स्थापना 1954 में हुई है। यह बोर्ड लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नीतियों व कार्यक्रमों के बारे में फैसले लेता है। यह एक प्रकार की सलाहकार समिति के रूप में कार्य करता है जिसका अध्यक्ष केन्द्रीय मंत्री होता है।

प्रश्न 7.
उद्यमितीय मूल्य क्या है ?
उत्तर:
उद्यमितीय मूल्य उस मूल्य को कहते हैं जिसमें मूल्य के प्रमाप निश्चित करते हैं जिनके विपरीत व्यक्ति के आचरण का निर्णय किया जाता है। मूल्य व्यक्ति के समूचे व्यक्तित्व का निर्धारण करते हैं एवं उस संगठन का परिचय देते हैं जिसके लिए व्यक्ति कार्य करता है। व्यक्ति में मूल्यों का विकास है कि वह दूसरों का सम्मान करें एवं दूसरों के साथ उचित एवं ईमानदारी का व्यवहार करने से उसके व्यक्तित्व में विकास होता है। अपितु उस संगठन की संस्कृति का निर्माण करता है जिसके लिए वह कार्य कर रहा है। वास्तव में ये विश्वास व्यक्ति में पनपते हैं। अपने परिवार, अपने आदर्श वर्ग, शैक्षणिक संस्थाओं, वातावरण तथा कार्यस्थली द्वारा दिये जाते हैं । मूल्य व्यक्ति तथा संस्थाओं, व्यावसायिक तथा गैर व्यावसायिक दोनों पर लागू होते हैं।

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प्रश्न 8.
उद्यमितीय प्रवृत्ति से क्या आशय है ?
उत्तर:
उद्यमितीय प्रवृत्ति का आशय यह है कि सफल उद्यमी में कुछ विशिष्ट प्रवृत्तियाँ स्पष्ट दिखती ही हैं जिन्हें और निखारकर उद्यमिता को उत्कर्ष पर पहुँचाने का कार्य करती है। इसलिए हम यह कह सकते हैं कि “प्रवृत्तियाँ ऊँचाइयों को निर्धारित करती हैं।”

प्रश्न 9.
क्या अभिप्रेरण एक मनोवैज्ञानिक तत्व है ?
उत्तर:

1. स्टेनले वेन्स के शब्दों के अनुसार, “कोई भी भावना अथवा इच्छा जो किसी व्यक्ति के संकल्प को इस प्रकार अनुकूलित करती है कि वह व्यक्ति कार्य को प्रेरित हो जाये, उसे अभिप्रेरण कहते हैं।”

2. डी.ई. मैकफर लैण्ड के शब्दों के अनुसार, “अभिप्रेरण उस रीति को निर्दिष्ट करती है जिसमें संवेगों, उद्देश्यों, इच्छाओं, आकांक्षाओं, प्रयासों या आवश्यकताओं को मानवीय आचरण के निर्देशन, नियंत्रण एवं स्पष्टीकरण के लिए प्रयोग में लाया जाता है अर्थात् अभिप्रेरण मनुष्य के अन्दर पैदा होती है, बाहर नहीं।”

प्रश्न 10.
उद्यमितीय अभिप्रेरण क्या होती है ?
उत्तर:
वे सब क्रियाएँ जो संगठन के विभिन्न स्तरों पर कर्मचारियों को कार्य करने के लिए अभिप्रेरित करने के लिए की जाती है उद्यमितीय अभिप्रेरण कहलाती है।

MP Board Class 12 Business Studies Important Questions

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

द्रव्य की अवस्थाएँ NCERT अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
30° से. तथा 1 bar दाब पर वायु 500 dm आयतन को 200 dm तक संपीडित करने के लिए कितने न्यूनतम दाब की आवश्यकता होगी?
हल:
स्थिर ताप बॉयल के नियमानुसार,
P1V1 = P2V2,
P1 = 1 bar
V1 = 500 dm3
P2=?
V2 = 200 dm3
\(\quad { P }_{ 2 }=\frac { { P }_{ 1 }{ V }_{ 1 } }{ { V }_{ 2 } } \)
=\(\frac { 1×500 }{ 200}\) = 2.5 bar.

प्रश्न 2.
35° से. ताप तथा 1 – 2 bar दाब पर 120 ml धारिता वाले पात्र में गैस की निश्चित मात्रा भरी है। यदि 35° से. पर गैस को 180 ml धारिता वाले फ्लास्क में स्थानांतरित किया जाता है, तो गैस का दाब क्या होगा?
हल:
दिया है – P1 = 1.2 bar,
V1 = 120 ml,
P2 = ?,
V2 = 180 ml
स्थिर ताप पर बॉयल के नियम से,
\(\quad { P }_{ 2 }=\frac { { P }_{ 1 }{ V }_{ 1 } }{ { V }_{ 2 } } \)
अतः P2 = \(\frac { 1.2 bar × 120mL }{ 180}\) = 0.8bar

प्रश्न 3.
अवस्था-समीकरण का उपयोग करते हुए स्पष्ट कीजिए कि दिए गए ताप पर गैस का घनत्व, गैस के दाब के समानुपाती होता है।
उत्तर:
आदर्श गैस समीकरण के अनुसार,
PV = nRT
P = \(\frac { nRT}{V}\)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 1

= \(\frac { m}{M}\)
P = \(\frac { mRT}{MV}\)
अब घनत्व d=\(\frac { m}{V}\)M रखने पर,
P = \(\frac { dRT}{M}\)}
अतः स्थिर आयतन पर P α d होगा।

प्रश्न 4.
0°C पर तथा 2 bar दाब पर किसी गैस के ऑक्साइड पर घनत्व 5 bar दाब पर डाइनाइट्रोजन के घनत्व के समान है, तो ऑक्साइड का अणु-भार क्या है ?
हल:
घनत्व d = \(\frac { MP}{RT}\), (यहाँ R और T किसी गैस के लिए स्थिरांक है)
N2 के लिए P=5 bar एवं M = 28 g mol-1
dN2 = \(\frac { PM}{RT}\) = \(\frac {5 × 28}{RT}\)

दिये गये गैसीय ऑक्साइड के लिए P = 2 bar एवं M = ?
doxide = \(\frac { PM}{RT}\) = \(\frac {5 × 28}{RT}\)
प्रश्नानुसार, dN2 = doxide
5 × 28 = 2× M
M= \(\frac {5 × 28}{2}\) = 70g mol-1

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प्रश्न 5.
27° से. पर एक ग्राम आदर्श गैस का दाब 2 bar है।जब समान ताप एवंदाब पर इसमें दो ग्राम आदर्श गैस मिलाई जाती है, तो दाब 3 bar हो जाता है। इन गैसों के अणु-भार में संबंध स्थापित कीजिए।
हल:
PV = nRT
गैस A के लिए, PAV = NART ………..(i)
इसी प्रकार, गैस B के लिए, PBV = NBRT ………..(ii)
गैस A के मोलों की संख्या, nA = \(\frac { 1 }{ { M }_{ A } } \) [MA = A का मोलर द्रव्यमान]
गैस B के मोलों की संख्या, nB = \(\frac { 2 }{ { M }_{ B } } \) [MB = B का मोलर द्रव्यमान]
गैस A का दाब, PA = 2 bar
कुल दाब, Pकुल = PA + PB = 3 bar
गैस B का दाब,
PB= Pकुल – PA = 3 – 2 = 1 bar
V, R तथा T दोनों गैसों के लिए समान है।
अतः समी. (i) तथा (ii) से,
\(\frac { { P }_{ A } }{ { P }_{ B } } \) = \(\frac { { n }_{ A } }{ { n }_{ B } } \) = \(\frac { { 1×M }_{ B } }{ { { M }_{ A } }×2 } \)
= \(\frac { { M }_{ B } }{ { M }_{ A } } \) = \(\frac { { 2P }_{ A } }{ { P }_{ B } } \)
= \(\frac { { M }_{ B } }{ { M }_{ A } } \) = \(\frac { 2×2 }{ 1 }\)
MB = 4MA

प्रश्न 6.
नाली साफ करने वाले ड्रेनेक्स में सूक्ष्म मात्रा में ऐल्युमिनियम होता है। यह कास्टिक सोडा से क्रिया कर डाइहाइड्रोजन गैस देता है। यदि 1 bar तथा 20°C ताप पर 0.15 ग्राम ऐल्युमिनियम अभिक्रिया करेगा, तो निर्गमित डाइहाइड्रोजन का आयतन क्या होगा?
हल:
प्रयुक्त रासायनिक समीकरण –
2 AI (2 मोल) + 2NaOH + 2H2O → 2NaAlO2 + 3H2(3 मोल)
= 54 gm
अत: 0-15 g AI से उत्पन्न होने वाले H2 मोल =\(\frac { 3 }{ 54 }\) × 0.15 = 8333×10-3 mol
PV = nRT में P= 1 bar, V = ?, n=8.333 × 10-mol, R=0.083 L atm mol-1K-1 T = 293K रखने पर,
1 × V = 8.33 x 10-3× 0.083 × 293
V=0.202 L या 202 mL.

प्रश्न 7.
यदि 27°C पर 9 dm3 धारिता वाले फ्लास्क में 3.2 ग्राम मेथेन तथा 4.4 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का मिश्रण हो, तो इसका दाब क्या होगा?
हल:
समीकरण, PV = \(\frac {m }{ M}\)RT

मेथेन का दाब –
m = 3.2g, M = 16g mol-1 , T = 300K, V = 9 × 10-3 m-3 R = 8.314 Pa m3K-1mol-1
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 2

CO2 का दाब, –
w = 4.4g, M = 44g mol-1, T = 300K, V = 9x 10-3m3, R= 8.314 Pa m3K-1mol-1 Pa
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 3

मिश्रण का कुल दाब = \({ P }_{ { CH }_{ 4 } }\) + \({ P }_{ { CO }_{2} }\)
= 5-543 × 104Pa + 2.771 × 104 Pa
= 8:314 × 104 Pa.

प्रश्न 8.
27°C ताप पर जब 1 लीटर के फ्लास्क में 0.7 bar पर 2.0 लीटर डाइऑक्सीजन तथा 0.8 bar पर 0.5 L डाइहाइड्रोजन को भरा जाता है, तो गैसीय मिश्रण का दाब क्या होगा?
हल:
समी. P1V1+ P2V2 = P3V3 में,
P1 = 0.8 bar, P2 = 0.7 bar, V1 = 0.5L, V2 = 2L, P3 = ?, V3= 1L रखने पर,
0.8 x 0.5 + 0.7 × 2 = P3 × 1.
∴ P3 = 1.8 bar.

प्रश्न 9.
यदि 27°C ताप तथा 2 bar दाब पर एक गैस का घनत्व 5.46 gdm’ है, तो STP पर इसका घनत्व क्या होगा?
हल:
दी गई गैस के लिए,
\(\frac { { P }_{ 1 } }{ { d }_{ 1 }{ T }_{ 1 } } =\frac { { P }_{ 2 } }{ { d }_{ 2 }T_{ 2 } } \)
d1= 5.46 g/dm3, d2 = ?, P2 = 1 bar, P1 = 2 bar, T1 = 27 + 273 = 300K, T1 = 273 K
∴ \(\frac { 2 }{ 15.46×300 } =\quad \frac { 1 }{ d_{ 2 }×274 } \)
या d2 = 3 g/dm3.

प्रश्न 10.
यदि 546°C तथा 0.1 bar दाब पर 34.05 ml फॉस्फोरस वाष्प का भार 0.0625 g है, तो फॉस्फोरस का मोलर द्रव्यमान क्या होगा?
हल:
PV = nRT
PV = \(\frac { mRT }{ M }\)
(m = फॉस्फोरस का द्रव्यमान (g) तथा M = फॉस्फोरस का मोलर द्रव्यमान)
या M=\(\frac { mRT }{PV}\)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 4
M = 1250.4g mol-1.

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प्रश्न 11.
एक विद्यार्थी 27°C पर गोल पेंदे के फ्लास्क में अभिक्रिया-मिश्रण डालना भूल गया तथा उस फ्लास्क को ज्वाला पर रख दिया। कुछ समय पश्चात् उसे अपनी भूल का अहसास हुआ। उसने उत्तापमापी की सहायता से फ्लास्क का ताप 477°C पाया।आप बताइए कि वायु का कितना भाग फ्लास्क से बाहर निकला।
हल:
प्रथम विधि –
माना 27°C (T1 = 300K) पर फ्लास्क में हवा का आयतन = Vcm3
प्रश्नानुसार, V1 = Vcm3, V2 = ?, T1= 300K, T2 = 750K
\(\frac { { V }_{ 1 } }{ { T }_{ 1 } } =\quad \frac { { V }_{ 2 } }{ { T }_{ 2 } } \)
\(\frac { V }{ 300 } =\frac { { V }_{ 2 } }{ 750 } \quad \)
⇒  300V2 = 750V (कुल आयतन)
∴ V2 = 2.5V
बाहर निकला आयतन = 2.5V-V = 1.5V
बाहर निकली वायु का भाग = \(\frac { 1.5V }{ 2.5V }\)= 0.6

द्वितीय विधि –
PV = nRT
nα\(\frac { 1 }{ T }\).
\(\frac { { n }_{ 1 } }{ { n }_{ 2 } } =\frac { T_{ 1 } }{ { T }_{ 2 } } \quad \) = \(\frac { 300 }{ 750 }\).
\(\frac { { n }_{ 1 } }{ { n }_{ 2 } } \) = 0.4
∴ बाहर निकली वायु का भाग = 0.6.

प्रश्न 12.
3.32 bar पर 5 dm3 आयतन घेरने वाली 4.0 mol गैस के ताप की गणना कीजिए। (R = 0.83 bar dm3 mol-1 )
हल:
प्रश्नानुसार, P= 3.32 bar
आयतन, V= 5 dm3
मोलों की संख्या, n = 4 mol
गैस का नियतांक, R= 0.083 bar dm3 K-1 mol
ताप, T = ?
आदर्श गैस का समीकरण, PV = nRT से
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 5
T= 50K.

प्रश्न 13.
1.4 g डाइनाइट्रोजन गैस में उपस्थित कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
हल:
∴ N2 के मोलों की संख्या =\(\frac { m }{ M }\) = \(\frac { 1.4 }{ 28 }\)=0.05
अणुओं की संख्या = 0.05 × 6.02 × 1023 = 3.01 x 1023
अणु नाइट्रोजन के एक अणु में 14 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
अतः कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 14 × 3.01 × 1023 = 42.14 × 1022

प्रश्न 14.
यदि एक सेकंड में 1010 गेहूँ के दाने वितरित किए जाएँ, तो ऐवोगैड्रो-संख्या के बराबर दाने वितरित करने में कितना समय लगेगा?
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 6

प्रश्न 15.
27°C ताप पर 1 dm3 आयतन वाले फ्लास्क में 8 ग्राम डाइऑक्सीजन तथा 4 ग्राम डाइहाइड्रोजन के मिश्रण का कुल दाब कितना होगा?
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 16
H2 के मोलों की संख्या, \(\qquad { n }_{ { H }_{ 2 } }=\quad \frac { 4 }{ 2 } \) = 2.0mol
कुल मोलों की संख्या = 0.25 + 2.0 = 2.25 mol
प्रश्नानुसार, P = ?, n = 2-25 mol, V = 1 dm3, R = 0.083 bar dm K-1 mol-1
T= 27°C = 273 + 27 = 300K
अतः PV = nRT से,
दाब, P=\(\frac { nRT }{ V } \)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 7
P = 56.025 bar.

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प्रश्न 16.
गुब्बारे के भार तथा विस्थापित वायु के भार के अंतर को ‘पेलोड’ कहते हैं। यदि 27°C पर 10 m त्रिज्या वाले गुब्बारे में 1.66 bar पर 100kg हीलियम भरी जाए, तो पेलोड की गणना कीजिए। (वायु का घनत्व = 1.2 kg m’ तथा R = 0.083 bar dm3 K-1mol-1)
हल:
प्रथम गणना-विस्थापित वायु के भार के लिए
गुब्बारे की त्रिज्या (r) = 10 m, d = 1.2 kg m-3
गुब्बारे का आयतन (V) = \(\frac { 4 }{ 3 }\) πr3 = \(\frac { 4 }{ 3 }\) × \(\frac { 22 }{ 7 }\) × = (10)3
= 4190.5 m3
अतः विस्थापित वायु का भार = गुब्बारे की वायु का आयतन × वायु का घनत्व
= 4190.5 × 1-2 = 5028.6 kg
द्वितीय गणना – गुब्बारे में भरी He का द्रव्यमान
He के मोलों की संख्या (n) = \(\frac { PV }{RT }\).
∴ P = 1.66 bar, V = 4190.5 × 103 dm3, R = 0.083 bar dm3 K-1‘mol-1, T = 300K
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 8
= 279.37 ×103
अतः भरे गुब्बारे का भार = 100 + 1117.48 = 1217.48 kg
तृतीय गणना – पेलोड का भार = विस्थापित द्रव्यमान-भरे गुब्बारे का भार
= 5028.6 – 1217.8
= 3811.8 kg.

प्रश्न 17.
31.1 C तथा 1 bar दाब पर 8.8 ग्राम CO2 द्वारा घेरे गए आयतन की गणना कीजिए। (R = 0.083 bar L mol-1)
हल:
सूत्र,
PV = nRT से,
PV = \(\frac { m }{ M }\)RT
प्रश्नानुसार, P= 1 bar, V = ?, m = 8.8g. M= 44g mol-1 (CO2)
R = 0.083 bar LK-1 mol-1 तथा T= 31.1°C = 273 + 31.1
= 304.1 K
t =-273°C पर,
vt = v0 [1-\(\frac { 273 }{ 273 }\)] = 0
अर्थात् – 273°C पर गैस का आयतन शून्य हो जायेगा तथा गैसों का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा।
8.8 g CO2द्वारा घेरा गया आयतन,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 35
V=5.048 L.

प्रश्न 18.
समानदाब पर किसी गैस के 2.9g द्रव्यमान का 95°C तथा 0.184g डाइहाइड्रोजन का 17°C का आयतन समान है। बताइए कि गैसों का मोलर द्रव्यमान क्या होगा?
हल:
समी. PV=\(\frac { m }{Ml }\)RT
गैस के लिए, m = 2.9, T = 273 + 95 = 368K, M = ?
PV = \(\frac { 2.9 }{M }\) × R × 368 ………….(i)
एवं हाइड्रोजन के लिए, m = 0.184g, T = 273 + 17 = 290, M = 2
PV = \(\frac { 0.184 }{ 2}\) × R × 290 ………….(ii)
समी. (i) एवं (ii) से,
\(\frac { 2.9 }{M }\) × R × 368 = \(\frac { 0.184 }{ 2}\) × R × 290
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 36

प्रश्न 19.
एक bar दाब पर डाइहाइड्रोजन तथा डाइऑक्सीजन के मिश्रण में 20% डाइहाइड्रोजन (भार से) रखा जाता है, तो डाइहाइड्रोजन का आंशिक दाब क्या होगा?
हल:
∴ H2 तथा O2 के मिश्रण में भारानुसार 20% H2 है।
अतः WH2 = 20 g एवं WO2 = 80g
nH2 = \(\frac {20 }{ 2}\) = 10 moles
WO2 = \(\frac {80 }{ 32}\) = 2.5 moles
PH2= XH2 × Ptotla,
PH2 = \(\frac {10 }{ 10 + 2.5}\) × 1 = 0.8bar
Ptotla = 1bar

प्रश्न 20.
PV2T2/n राशि के लिए SI इकाई क्या होगी?
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 34

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प्रश्न 21.
चार्ल्स के नियम के आधार पर समझाइए कि न्यूनतम संभव ताप -273°C होता है।
उत्तर:
चार्ल्स के नियमानुसार,
Vt = V0(1+\(\frac {t}{ 273}\))

प्रश्न 22.
कार्बन डाइऑक्साइड तथा मेथेन का क्रांतिक ताप क्रमशः 31.1°C एवं -81.9°C है। इनमें से किसमें प्रबल अंतर आण्विक बल है तथा क्यों ?
उत्तर:
क्रान्तिक ताप का मान उच्च होने पर गैसों को द्रवित करना आसान होता है अर्थात् उनके अणुओं के मध्य अन्तर आण्विक बल उतना ही प्रबल होता है। चूँकि CO2 का क्रान्तिक ताप CH4 से उच्च है अत: CO2 में अन्तर आण्विक आकर्षण बल का मान CH4 से प्रबल होगा।

प्रश्न 23.
वाण्डर वाल्स प्राचल की भौतिक सार्थकता को समझाइए।
उत्तर:
वाण्डर वाल स्थिरांक ‘a’ का मान गैस के अणुओं के अन्तराणुक बल को दर्शाता है जबकि स्थिरांक ‘b’ गैस के अणुओं का प्रभावी आयतन है। ‘a’ और ‘b’ के उच्च मान होने पर गैस को द्रवित करना आसान होता है।

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द्रव्य की अवस्थाएँ अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

द्रव्य की अवस्थाएँ वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
गैस के घनत्व और विसरण की दर के बीच सम्बन्ध स्थापित किया था –
(a) बॉयल ने
(b) चार्ल्स ने
(c) ग्राम ने
(d) ऐवोगैड्रो ने।
उत्तर:
(c) ग्राम ने

प्रश्न 2.
R का कैलोरी में लगभग मान है –
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 4. 3.
उत्तर:
(b) 2

प्रश्न 3.
परम ताप है –
(a) 0°C
(b) -100°C
(c) -273°C
(d) -373°C.
उत्तर:
(c) -273°C

प्रश्न 4.
गैसों का सामान्य समीकरण प्राप्त करने के लिये किन दो नियमों को संयुक्त किया गया है –
(a) चार्ल्स का नियम और डॉल्टन का नियम
(b) ग्राम का नियम और डॉल्टन का नियम
(c) बॉयल का नियम और चार्ल्स का नियम
(d) ऐवोगैड्रो का नियम और डॉल्टन का नियम।
उत्तर:
(c) बॉयल का नियम और चार्ल्स का नियम

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प्रश्न 5.
स्थिर आयतन पर एक-अणुक गैस का दाब निर्भर करता है –
(a) पात्र की दीवार की मोटाई पर
(b) परम ताप पर
(c) तत्व के परमाणु-क्रमांक पर
(d) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर।
उत्तर:
(b) परम ताप पर

प्रश्न 6.
वास्तविक गैसों का व्यवहार आदर्श गैस के व्यवहार के अधिक समीप होता है यदि –
(a) ताप कम हो
(b) दाब अधिक हो
(c) दाब कम तथा ताप अधिक हो
(d) गैस मोनोएटॉमिक हो।
उत्तर:
(c) दाब कम तथा ताप अधिक हो

प्रश्न 7.
अधिक ऊँचे स्थानों पर जल कम ताप पर उबलने लगता है क्योंकि –
(a) वहाँ पर वायुमण्डलीय दाब कम होता है
(b) वहाँ पर वायुमण्डलीय दाब अधिक होता है
(c) अधिक ऊँचाई पर जल का हाइड्रोजन बन्ध अधिक प्रबल हो जाता है
(d) जल-वाष्प, जल-द्रव से हल्का होता है।
उत्तर:
(a) वहाँ पर वायुमण्डलीय दाब कम होता है

प्रश्न 8.
दो गैसों A तथा B के आण्विक द्रव्यमान क्रमशः 16 और 64 हैं। A और B के विसरण की दरों का अनुपात होगा
(a) 1:4
(b) 4 : 1
(c) 2 : 1
(d) 1 : 2.
उत्तर:
(c) 2 : 1

प्रश्न 9.
उच्च दाब पर गैसें आदर्श व्यवहार से विचलित हो जाती हैं क्योंकि –
(a) उच्च दाब पर अणुओं के संघट्टों (Collisions) की संख्या बढ़ जाती है
(b) उच्च दाब पर अणुओं के मध्य आकर्षण बढ़ जाता है
(c) उच्च दाब पर अणुओं का आकार छोटा हो जाता है
(d) उच्च दाब पर अणु स्थिर हो जाते हैं।
उत्तर:
(b) उच्च दाब पर अणुओं के मध्य आकर्षण बढ़ जाता है

प्रश्न 10.
एक गैस X की तुलना में मेथेन की विसरण की दर दुगुनी है।x का अणु भार है’ –
(a) 64
(b) 32.0
(c) 4.0
(d) 8.0.
उत्तर:
(a) 64

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प्रश्न 11.
वाण्डर वॉल्स समीकरण का वह पद जो वास्तविक गैसों के अन्तराणुक बल का निरूपण करता है –
(a) (V-b)
(b) RT
(c) (P + \(\frac { a }{ { v }^{ 2 } } \))
(d) (RT)-1.
उत्तर:
(c) (P + \(\frac { a }{ { v }^{ 2 } } \))

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिये –

  1. गैसों के अणुगतिक सिद्धान्त के अनुसार किसी गैस की औसत गतिज ऊर्जा उसके …………. ताप के समानुपाती होती है।
  2. किसी गैस के एक मोल की गतिज ऊर्जा ………….. के बराबर होती है।
  3. वर्ग माध्य मूल वेग होता है ………………।
  4. औसत वेग = …………. x ………………. के बराबर होता है।
  5. अणुगतिक समीकरण का सूत्र है …………….।

उत्तर:

  1. परम
  2. 3/2 RT,
  3. \(\sqrt { \frac { 3PV }{ m } } \) या \(\sqrt { \frac { 3RT }{ m } } \)
  4. 0.921, वर्ग माध्य मूल वेग,
  5. PV = \(\frac { 1 }{ 3 }\) mnv2

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प्रश्न 3.
उचित संबंध जोडिए –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 33
उत्तर:

  1. (f) आयनिक क्रिस्टल
  2. (a) आणविक क्रिस्टल
  3. (b) सहसंयोजी क्रिस्टल
  4. (e) अक्रिस्टलीय क्रिस्टल
  5. (d) आणविक क्रिस्टल
  6. (c) धात्विक क्रिस्टल

प्रश्न 4.
एक शब्द / वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. किसी द्रव के बहाव में उत्पन्न प्रतिरोध को क्या कहते हैं?
  2. पृष्ठ तनाव का मात्रक है।
  3. दाब का SI मात्रक लिखिए।
  4. गैस के घनत्व एवं विसरण दर के बीच सम्बन्ध दर्शाने वाले वैज्ञानिक का नाम है।
  5. SI इकाई में गैस स्थिरांक का मान होता है।
  6. 1 पास्कल का मान बराबर होता है।

उत्तर:

  1. श्यानता
  2. डाइन प्रति सेमी
  3. पास्कल
  4. ग्राम
  5. 8.314 JK-1 mo-1
  6. 1Nm2

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द्रव्य की अवस्थाएँ अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी गैस का दाब किसे कहते हैं ?
उत्तर:
गैस को जिस पात्र में रखा जाता है, उसके अणु पात्र की दीवार से टकराते हैं। इस टकराव के कारण गैस पात्र की दीवार पर दाब उत्पन्न करते हैं, “प्रति इकाई क्षेत्रफल पर कार्य करने वाला बल दाब कहलाता है।”
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 9
दाब का S.I. मात्रक न्यूटन/वर्ग मीटर है, इसे पास्कल भी कहते हैं।

प्रश्न 2.
वायुमण्डलीय दाब से क्या समझते हो?
उत्तर:
पृथ्वी के चारों ओर वायु का लगभग 800 km मोटाई का आवरण है। यह वायु पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी की सतह की ओर खिंचती है जिसके कारण पृथ्वी की सतह पर एक दाब उत्पन्न होता है जिसे वायुमण्डलीय दाब कहते हैं तथा एक वायुमण्डलीय दाब उस दाब के बराबर होता है। 760 mm पारा 0°C तथा मानक गुरुत्व जनित्र त्वरण पर डालता है।

प्रश्न 3.
अक्रिस्टलीय ठोस किसे कहते हैं ?
उत्तर:
वे ठोस जिनमें अवयवी कणों की कोई क्रमबद्ध संरचना नहीं होती इसलिये इनकी कोई एक निश्चित ज्यामिति संरचना नहीं होती है। इन्हें अक्रिस्टलीय ठोस कहते हैं। इन्हें आभासी ठोस भी कहते हैं। ये वास्तव में अतिशीतित द्रव होते हैं।

प्रश्न 4.
आयनिक क्रिस्टल किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
वे क्रिस्टलीय ठोस जिनमें अवयवी कण धनावेशित तथा ऋणावेशित आयन होते हैं। ये आयन संपूर्ण क्रिस्टल में निश्चित क्रम में व्यवस्थित होते हैं तथा इन आयनों के मध्य प्रबल स्थिर वैद्युत आकर्षण बल होता है। उदाहरण-Li, NaCl, ZnS इत्यादि।

प्रश्न 5.
सहसंयोजी क्रिस्टल को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
वे क्रिस्टलीय ठोस जिनमें अवयवी कण परमाणु होते हैं तथा आपस में सहसंयोजी बंध द्वारा जुड़े रहते हैं। ये विद्युत् के कुचालक होते हैं तथा इनके गलनांक तथा क्वथनांक उच्च होते हैं। उदाहरण-डायमंड, सिलिका, सिलिकॉन कार्बाइड।

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प्रश्न 6.
आण्विक क्रिस्टल किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
इनमें अवयवी कण अणु होते हैं। इनके मध्य दुर्बल वाण्डर वाल्स आकर्षण बल होता है। इनके mm.p. तथा b.p. निम्न होते हैं, ये क्रिस्टल नर्म होते हैं। उदाहरण-शुष्क बर्फ, बर्फ, आयोडीन।

प्रश्न 7.
गैसों के अणुगतिक सिद्धांत के एक अभिगृहित के अनुसार, ‘गैस के अणुओं के मध्य कोई आकर्षण बल नहीं होता है।’ यह कथन कितना सत्य है ? क्या आदर्श गैस को द्रवीकृत करना सम्भव है ? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
यह कथन केवल आदर्श गैसों के लिए सत्य है। किसी आदर्श गैस को द्रवीकृत करना सम्भव नहीं है क्योंकि आदर्श गैस के अणुओं के बीच अंतर-आण्विक आकर्षण बल नहीं पाया जाता है।

प्रश्न 8.
धात्विक क्रिस्टल को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
इनमें अवयवी कण धनात्मक धात्विक आयन होते हैं। ये धातु आयन गतिशील इलेक्ट्रॉनों के मंडल में बिखरे रहते हैं तथा अवयवी कणों के मध्य धात्विक बंध होता है। ये विद्युत् के सुचालक होते हैं तथा इनके घनत्व उच्च होते हैं। उदाहरण-Cu, Zn, Fe, Ni इत्यादि।

प्रश्न 9.
विषम दैशिकता तथा सम दैशिकता किसे कहते हैं ?
उत्तर:
क्रिस्टलीय ठोस में विभिन्न दिशाओं में उनके भौतिक गुण जैसे-विद्युत् चालकता, अपवर्तनांक, तापीय प्रसार आदि में अंतर होता है, ऐसे पदार्थ विषम दैशिक कहलाते हैं तथा इस गुण को विषम दैशिकता कहते हैं। इसके विपरीत अक्रिस्टलीय ठोस में सभी दिशाओं में उनके भौतिक गुणों में समानता होती है, ऐसे पदार्थ सम दैशिक कहलाते हैं तथा इस गुण को सम दैशिकता कहते हैं।

प्रश्न 10.
परम शून्य ताप की परिभाषा लिखकर इसका मान सेन्टीग्रेड पैमाने पर बताइये।
उत्तर:
वह काल्पनिक ताप जिस पर किसी गैस का आयतन शून्य हो जाता है, परम शून्य ताप कहलाता है। सेन्टीग्रेड पैमाने पर यह मान -273°C होता है। इस शून्य से जो ताप नापा जाता है उसे परम ताप कहते हैं, इसे केल्विन से दर्शाया जाता है। 0°C = 273 K 0°C ताप को परम ताप में बदलने के लिये उसमें 273 जोड़ दिया जाता है।

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प्रश्न 11.
क्रिस्टल की इकाई कोशिका से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
किसी क्रिस्टल में उसके संघटक कणों जैसे-परमाणु, अणु या आयनों के क्रमबद्ध रूप से व्यवस्थित रहने पर जो सूक्ष्मतम इकाई बनती है। उसे क्रिस्टल की इकाई कोशिका या Unit cell कहते हैं।

प्रश्न 12.
क्रिस्टल जालक क्या है ?
उत्तर:
किसी क्रिस्टल की वह ज्यामिति जिसमें इकाई कोशिकाएँ क्रमबद्ध रूप से व्यवस्थित होकर एक बड़ी तथा इकाई कोशिका की आकृति के समरूप क्रिस्टल बनाती हैं तो उसे क्रिस्टल जालक कहते हैं।

प्रश्न 13.
मौसम अध्ययन के लिये छोड़े गये गुब्बारे के ऊपर उठने पर उसका आयतन कैसे बदलता है?
उत्तर:
गुब्बारा जैसे-जैसे ऊपर उठता है वायुमण्डलीय दाब में कमी आती है। लेकिन दाब घटने से गुब्बारे के अंदर का दाब अधिक हो जाता है जिससे उसका आयतन बढ़ने लगता है।

प्रश्न 14.
शीत ऋतु में झील में बर्फ की पर्त जम जाती है लेकिन उसमें उपस्थित मछली तथा जीवजन्तु जीवित रहते हैं, क्यों?
उत्तर:
जल का अधिकतम घनत्व 4°C ताप पर होता है किन्तु 4°C से कम ताप पर घनत्व कम होता है। जब झील का ताप गिरता है तो ऊपर के पृष्ठ का जल अधिक सघन हो जाता है और वह नीचे चला जाता है। यह क्रम तब तक चलता रहता है जब तक कि ताप 4°C तक नहीं पहुँच जाता है। पृष्ठ का ताप यदि 4°C से कम हो तो जल ऊपर की सतह पर ही रहता है और धीरे-धीरे बर्फ में बदल जाता है जबकि नीचे का जल अधिक घनत्व के कारण नीचे ही रहता है और द्रव अवस्था में ही रहता है इसलिये जीव जन्तु तथा मछली इसमें जीवित रहते हैं।

प्रश्न 15.
द्रव अवस्था में HF अणुओं में उपस्थित दो अंतर-अणुक बलों का नाम लिखिए।
उत्तर:
HF ध्रुवीय सहसंयोजी अणु है। द्रव अवस्था में, इनमें अंतर-अणुक द्विध्रुव-द्विध्रुव आघूर्ण तथा H-आबंध उपस्थित होते हैं।

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प्रश्न 16.
पूर्णतः प्रत्यास्थ टक्कर से क्या समझते हो ?
उत्तर:
गैस के अणु सभी दिशाओं में अनियमित रूप से या जिग-जैग गति करते रहते हैं तथा इस गति के दौरान ये अणु आपस में तथा पात्र की दीवार से टकराते रहते हैं। इन टक्करों के दौरान केवल इनकी दिशा में परिवर्तन होता है लेकिन इनकी गतिज ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता है इसलिये इन टक्करों को पूर्णतः प्रत्यास्थ टक्कर कहते हैं।

प्रश्न 17.
ठण्डी गैस की तुलना में गर्म गैस का घनत्व कम क्यों होता है ?
उत्तर:
चार्ल्स के नियमानुसार किसी गैस की निश्चित द्रव्यमान का आयतन उसके परम ताप के समानुपाती होता है। अतः ताप में वृद्धि करने से आयतन में वृद्धि होती है लेकिन आयतन में वृद्धि होने से घनत्व में कमी आती है। इसलिये गर्म गैस का घनत्व ठण्डी गैस की तुलना में कम होता है।

प्रश्न 18.
ऊँचे पहाड़ों पर जाने से जी मिचलाता है तथा साँस लेने में परेशानी होती है, क्यों?
उत्तर:
ऊँचे पहाड़ों पर वायुमण्डलीय दाब में कमी आती है जिससे वायु विरल हो जाती है जिसके कारण वायुमण्डल में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इसलिये जी मिचलाना व साँस लेने में परेशानी का अनुभव होता है।

प्रश्न 19.
क्रान्तिक ताप किसे कहते हैं ?
उत्तर:
क्रान्तिक ताप वह ताप है जिस पर किसी गैस को द्रवित कराया जा सकता है परन्तु इस ताप के ऊपर गैस को उच्च दाब लगाने पर भी द्रवित नहीं कराया जा सकता, इसे TC से दर्शाते हैं। उदाहरण – CO2 का क्रान्तिक ताप 31.1°C है।

प्रश्न 20.
क्रान्तिक दाब तथा क्रान्तिक आयतन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
क्रान्तिक ताप पर किसी गैस को द्रवित कराने के लिये दाब के जिस मान की आवश्यकता होती है उसे क्रान्तिक दाब कहते हैं, इसे Pcसे दर्शाते हैं। क्रान्तिक ताप व क्रान्तिक दाब पर किसी गैस के एक अणु के आयतन को उसका क्रान्तिक आयतन कहते हैं, इसे V. से दर्शाते हैं।

प्रश्न 21.
स्वचालित वाहनों के टायर में ठण्ड की अपेक्षा गर्मी में कम वायु भरी जाती है, क्यों?
उत्तर:
जब स्वचालित वाहन गतिशील अवस्था में होता है तो टायर एवं सड़क के बीच घर्षण के कारण टायर का ताप बढ़ने लगता है जिससे टायर के अंदर भरी वायु के आयतन में वृद्धि होती है जिसके फलस्वरूप टायर पर लगने वाले दाब में भी वृद्धि होती है। गर्मी में ताप में भी वृद्धि होती है, जिससे दाब में भी अधिक वृद्धि होती है जिसके फलस्वरूप टायर के फटने की संभावना अधिक रहती है।

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प्रश्न 22.
PVT In के लिए SI इकाई क्या होगी?
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 10

प्रश्न 23.
चार्ल्स के नियम के आधार पर समझाइए कि न्यूनतम संभव ताप -273°C होता है।
उत्तर:
चार्ल्स के नियमानुसार,
t = -273°C पर
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 11
अत: -273°C पर, गैस का आयतन शून्य हो जाएगा तथा इससे कम ताप पर, आयतन का मान ऋणात्मक होगा जो कि अर्थहीन है।

प्रश्न 24.
बॉयल, चार्ल्स तथा एवोगैड्रो नियम का पालन करने वाली गैस को आदर्श गैस कहते हैं। किन दशाओं में वास्तविक गैस, आदर्श गैस की भाँति व्यवहार करती है ?
उत्तर:
निम्न दाब तथा उच्च ताप पर, वास्तविक गैस आदर्श गैस की भाँति व्यवहार करती है।

प्रश्न 25.
वाष्पन और क्वथन में अंतर लिखिए।
उत्तर:
वाष्पन और क्वथन में अंतर –
वाष्पन:

  • वाष्पन स्वतः होता है तथा सभी तापों पर होता है।
  • वाष्पन पृष्ठीय घटना है।
  • वाष्पन मंद प्रक्रम है।

क्वथन:

  • क्वथन तभी होता है जब द्रव का वाष्प। दाब वायुमण्डलीय दाब के बराबर होता है।
  • क्वथन संपूर्ण द्रव की घटना है।
  • क्वथन तीव्र प्रक्रम है।

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प्रश्न 26.
सम्पीड्यता गुणांक किसे कहते हैं ?
उत्तर:
निश्चित ताप और दाब पर किसी गैस के प्रेक्षित आयतन तथा अवलोकित आयतन (गणना से प्राप्त आयतन) का अनुपात सम्पीड्यता गुणांक कहलाता है, इसे Z से दर्शाते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 12
आदर्श गैस के लिये Z = 1 होता है।

प्रश्न 27.
दाब बढ़ने पर बर्फ के गलनांक में क्या परिवर्तन होता है ?
उत्तर:
दाब के बढ़ने पर अणुओं की गतिज ऊर्जा में अत्यधिक वृद्धि होती है, जिसके फलस्वरूप कम तापक्रम पर ही अणुओं की गतिज ऊर्जा होने के कारण वे स्वतंत्र रूप से गति करने लगते हैं अर्थात् दाब में वृद्धि करने पर बर्फ अपने गलनांक से निम्न ताप पर ही द्रव में परिवर्तित होने लगता है।

प्रश्न 28.
समान ताप पर ईथर तथा पानी अलग-अलग हाथ पर डाले जाते हैं तो ईथर अधिक ठण्डा लगता है, क्यों?
उत्तर
ईथर में उसके अणुओं के मध्य लगने वाला अंतर-अणुक आकर्षण बल जल की तुलना में कम है इसलिये ईथर जल की तुलना में शीघ्रता से वाष्पित होता है तथा वह वाष्पन के लिये आवश्यक ऊर्जा हाथ से ग्रहण करता है इसलिये ईथर ठण्डा लगता है।

प्रश्न 29.
द्रवों में विसरण की दर मंद होती है, क्यों?
उत्तर:
द्रव में अणुओं के मध्य अंतरअणुक आकर्षण बल गैस की तुलना में अधिक होता है तथा इसके अणु एक-दूसरे के साथ इस अंतरअणुक आकर्षण बल के द्वारा गैस की तुलना में दृढ़ता से बँधे रहते हैं । इसलिये द्रव के अणु गैस के अणुओं के समान स्वतंत्र रूप से गति नहीं कर सकते इसलिये द्रव में विसरण की दर गैस की तुलना में मंद होती है।

प्रश्न 30.
गैस में प्रसार असीमित होता है, क्यों?
उत्तर:
गैस के अणुओं के मध्य अंतरअणुक आकर्षण बल नगण्य होता है, इसलिये गैस के अणु सभी दिशाओं में स्वतंत्र रूप से अनियमित रूप से गति करते रहते हैं। इनका कोई निश्चित आकार या आयतन नहीं होता है, जिसके कारण गैसों को जिस भी पात्र में रखा जाता है गैस के अणु फैलकर पात्र के बराबर आकार व आयतन ग्रहण कर लेते हैं।

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द्रव्य की अवस्थाएँ लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्रिस्टलीय ठोस की प्रमुख विशेषताएँ लिखिये।
उत्तर:

  • इनकी संरचना एक निश्चित ज्यामिति वाली होती है।
  • इनकी आंतरिक संरचना में भी कणों का एक निश्चित क्रम रहता है।
  • इनके गलनांक स्पष्ट तथा निश्चित होते हैं।
  • ये कम ऊर्जा वाले होते हैं।
  • ये विषम दैशिकता दर्शाते हैं।
  • अवयवी कणों के मध्य दुर्बल वाण्डर वाल्स, आकर्षण बल या स्थिर वैद्युत आकर्षण बल होता है।

प्रश्न 2.
S.T.P. व N.T.P. से क्या समझते हो?
उत्तर:
गैस की निश्चित मात्रा का आयतन, ताप व दाब के साथ परिवर्तित होता है अर्थात् गैसों के गुण ताप तथा दाब पर निर्भर करते हैं इसलिये विभिन्न गैस के गुणों की तुलना एक निश्चित ताप एवं दाब पर की जा सकती है। इसके लिये 0°C (273 K) ताप तथा एक वायुमण्डलीय दाब (760 mm) को चुना गया है जिसे सामान्य ताप व दाब या N.T.P. कहते हैं N.T.P. पर एक मोल गैस का आयतन 224 लिटर होता है तथा 25°C (298 K) ताप तथा 1 वायुमण्डलीय दाब (760 mm) या 1 बार दाब को मानक ताप व दाब कहते हैं। S.T.P. पर एक मोल गैस का आयतन 22-4 लीटर होता है।

प्रश्न 3.
किसी गैस के संपीड्यता गुणांक Z का मान निम्न होता है –
\(Z=\frac { PV }{ nRT } \)

  1. आदर्श गैस के लिए Z का मान क्या होता है ?
  2. वास्तविक गैस के लिए बॉयल तापमान के ऊपर Z के मान पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?

उत्तर:

  1. आदर्श गैस के लिए, संपीड्यता गुणांक, Z = 1.
  2. बॉयल तापमान से ऊपर, वास्तविक गैसें धनात्मक विचलन प्रदर्शित करती हैं। अत: Z>1.

प्रश्न 4.
आदर्श गैसों के लिए P, V तथा T में संबंध हेतु वाण्डर वाल्स समीकरण निम्न है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 13
जहाँ, a तथा b वाण्डर वाल्स नियतांक है। nb गैस के अणुओं के कुल आयतन के लगभग बराबर हैं। a अंतराण्विक आकर्षण बलों के परिणाम की माप है।

  1. निम्नलिखित गैसों को b के बढ़ते हुए क्रम में लिखिए। कारण भी दीजिए।
    O2,CO2, H2, He
  2. निम्नलिखित गैसों के a के परिणाम के घटते हुए क्रम में लिखिए। कारण भी दीजिए।
    CH4, O2, H2

उत्तर:
1. गैस के अणुओं का मोलर आयतन अणुओं का आकार तथा वाण्डर वाल्स नियतांक ‘b’ गैस के अणुओं का मोलर आयतन प्रदर्शित करता है। अतः ‘b’ का बढ़ता हुआ क्रम निम्न है –
H2 < He<O2<CO2     

2. वाण्डर वाल्स नियतांक ‘a’ अंतराण्विक बलों के परिमाण की माप है। किसी अणु में इलेक्ट्रॉन मेघ का आकार बढ़ने के साथ-साथ अंतराण्विक आकर्षण बलों का परिमाण भी बढ़ता है। अतः दी गयी गैसों के लिए ‘a’ का परिणाम निम्न क्रम में घटेगा –
CH4 > O2> H2
इलेक्ट्रॉन मेघ का आकार जितना बड़ा होगा, अणु की ध्रुवण क्षमता उतनी ही अधिक होगी जिसके फलस्वरूप प्रकीर्णन बल अथवा लंदन बल उतना ही अधिक होगा।

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प्रश्न 5.
बॉयल का नियम क्या है ? इसका गणितीय व्यंजक लिखिए।
उत्तर:
इस नियम के अनुसार, “स्थिर ताप पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन (V) उसके दाब (P) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।”
Pα – \(\frac { 1 }{ V }\)(स्थिर ताप पर)
P= स्थिरांक × \(\frac { 1 }{ V }\)
⇒ PV = स्थिरांक
अतः स्थिर ताप पर किसी गैस की निश्चित मात्रा के आयतन तथा दाब का गुणनफल सदैव एक स्थिरांक होता है।
प्रारंभिक स्थिति में,
P1V1 = K. ………(1)
अंतिम स्थिति में,
P2V2 = K ………(2)
समीकरण (1) और (2) से,
P1V1 = P2V2

प्रश्न 6.
गैस स्थिरांक R की प्रकृति क्या है ?
उत्तर:
सूत्र
PV = nRT से,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 15
अर्थात् R को ऊर्जा प्रति डिग्री प्रति मोल के द्वारा दर्शाया जाता है।

प्रश्न 7.
चार्ल्स का स्थिर दाब का नियम लिखते हुए समीकरण\(\frac { { V }_{ 1 } }{ { V }_{ 2 } } =\frac { { T }_{ 1 } }{ { T }_{ 2 } } \) व्युत्पन्न कीजिये।
उत्तर:
चार्ल्स का नियम-इस नियम के अनुसार “स्थिर दाब पर निश्चित द्रव्यमान की गैस का आयतन परम ताप के समानुपाती होता है।”
Vα T (स्थिर दाब पर)
V= स्थिरांक × T
\(\frac { V }{ T }\) = स्थिरांक
यदि प्रारम्भिक स्थिति में स्थिर दाब पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन V1 तथा ताप T1 है तो
\(\frac { { V }_{ 1 } }{ { T }_{ 1 } }\) = K ……..(1)
यदि अंतिम स्थिति में आयतन V2 तथा ताप T2 है तो
\(\frac { { V }_{ 2 } }{ { T }_{ 2 } }\) = K …….(2)

समीकरण (1) और (2) से,
\(\frac { { V }_{ 1 } }{ { V }_{ 2 } } =\frac { { T }_{ 1 } }{ { T }_{ 2 } } \)

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प्रश्न 8.
चार्ल्स के नियम के आधार पर परम शून्य की धारणा को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
चार्ल्स का नियम:
इस नियम के अनुसार, “स्थिर दाब पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन ताप के 1°C बढ़ने या घटने पर अपने 0°C वाले आयतन \(\frac { 1 }{ 273 }\) वाँ भाग से क्रमश: बढ़ता या घटता है।
यदि 0°C ताप पर किसी गैस का आयतन = V0घन सेमी
1°C ताप पर किसी गैस का आयतन = V0 [1+\(\frac { 1 }{ 273 }\)]
t°C ताप पर किसी गैस का आयतन = v0 [1+\(\frac { t }{ 273 }\)]
-1°C ताप पर किसी गैस का आयतन = v0 [1- \(\frac { 1 }{ 273 }\)]
-t°C ताप पर किसी गैस का आयतन = v0 [1- \(\frac { t }{ 273 }\)]
-273°C ताप पर किसी गैस का आयतन = v0 [1 – \(\frac { 273 }{ 273 }\)]

सि का आयतन = – 273°C चार्ल्स के नियम से स्पष्ट है कि ताप में कमी करने से आयतन में कमी आती है तथा -273°C ताप पर किसी भी गैस का आयतन शून्य हो जाता है। यह न्यूनतम ताप, जिस पर किसी भी गैस का आयतन शून्य हो जाता है, परम ताप कहलाता है तथा इस परम शून्य ताप पर आधारित स्केल को केल्विन स्केल कहते हैं तथा इसे T से दर्शाते हैं।

प्रश्न 9.
गे-लुसाक का नियम क्या है ?
उत्तर:
गे-लुसाक का निय:
इस नियम के अनुसार, “किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन स्थिर रखने पर उसका दाब परम ताप के समानुपाती होता है।”
P α T
P= K × T
\(\frac { P }{ T }\) = K
यदि प्रारम्भिक स्थिति में दाब P1 तथा ताप T1 है तो
\(\frac { { P }_{ 1 } }{ { T }_{ 1 } }\) = K ……..(1)

T इसी प्रकार अंतिम स्थिति में दाब P2 तथा ताप T2 है तो
\(\frac { { P}_{ 2 } }{ { T }_{ 2 } }\) = K …….(2)
समी. (1) और (2) से,
\(\frac { { P }_{ 1 } }{ { T }_{ 1 } } =\frac { { P }_{ 2 } }{ { T }_{ 2 } } \)

प्रश्न 10.
एवोगैड्रो का नियम क्या है ?
उत्तर:
इस नियम के अनुसार-“स्थिर ताप और दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है।”
यदि स्थिर ताप और दाब पर किसी गैस का आयतन v है तो अणुओं की संख्या को एवोगेड्रो संख्या N से दर्शाते हैं।
V α N ………..(1)
स्थिर ताप और दाब पर गैस के मोलों की संख्या n अणुओं की संख्या N के समानुपाती होती है।
N α n
समीकरण (1) से,
V α n
⇒ \(\frac { V }{ n }\) = स्थिरांक
यदि प्रारम्भिक स्थिति में आयतन V1 तथा मोलों की संख्या n1 है तो
\(\frac { { V }_{ 1 } }{ { n }_{ 1 } }\) = स्थिरांक ………..(2)
अंतिम स्थिति में आयतन V2 तथा मोलों की संख्या n2 है तो
\(\frac { { V }_{ 2 } }{ { n }_{ 2 } }\) = स्थिरांक ………..(3)
समीकरण (2) और (3) से,
\(\frac { { V }_{ 1 } }{ { n }_{ 1 } }\) = \(\frac { { V }_{ 2 } }{ { n }_{ 2 } }\)

प्रश्न 11.
गैस समीकरण PV =nRT की स्थापना कीजिये तथा R का मान दो विभिन्न इकाइयों में लिखिए।
अथवा,
आदर्श गैस समीकरण क्या है ? इसकी स्थापना कीजिये।
उत्तर:
यदि गैस की एक निश्चित मात्रा के लिये बॉयल, एवोगैड्रो तथा चार्ल्स नियम का योग करने पर . इनके मध्य एक संबंध स्थापित हो जाता है इसे गैस समीकरण कहते हैं।
बॉयल के नियमानुसार,
V α \(\frac { 1 }{ P }\) (स्थिर ताप पर) ………..(1)
चार्ल्स के नियमानुसार,
V α T (स्थिर दाब पर) ………..(2)
एवोगैड्रो के नियमानुसार,
V α n (स्थिर ताप एवं दाब पर) ………..(3)
समीकरण (1), (2) और (3) से,
V α \(\frac { nT }{ P }\)
V = \(\frac { nRT }{ P }\)
PV = nRT
जहाँ R एक गैस स्थिरांक है।
यदि n = 1 तो PV= RT
\(\frac { PV }{ T }\) = R
यदि प्रारम्भिक स्थिति में दाब P1, आयतन V1, तथा ताप T1, है, तो
\(\frac { { P }_{ 1 }{ V }_{ 1 } }{ { T }_{ 1 } } \) = R ………..(4)
यदि अंतिम स्थिति में दोब P2, आयतन V2 तथा ताप T2, है, तो
\(\frac { { P }_{ 2 }{ V }_{ 2 } }{ { T }_{ 2 } } \) = R ………..(5)
समीकरण (4) और (5) से,
\(\frac { { P }_{ 1 }{ V }_{ 1 } }{ { T }_{ 1 } } \) = \(\frac { { P }_{ 2 }{ V }_{ 2 } }{ { T }_{ 2 } } \)

R का मान विभिन्न इकाइयों में –

  • 0.0821 Litre atm K-1 mol-1
  • 8.314 joule K-1 mol-1

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प्रश्न 12.
एवोगैडो की परिकल्पना क्या है ? इसकी सहायता से कैसे सिद्ध करोगे कि 1 मोल गैस . का N.T.P. पर आयतन 22.4 लीटर होता है ?
उत्तर:
एवोगैड्रो का नियम:
“स्थिर ताप एवं दाब पर विभिन्न गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है।”
V α n
संबंध –
माना गैस का अणुभार M है तो इसका ग्राम अणुभार M ग्राम है।

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 18

1 लीटर गैस का N.T.P पर द्रव्यमान =\(\frac { M ×0.09 }{2.016 }\) = \(\frac { M }{22.4 }\) gm
22.4 लीटर गैस का N.T.P. पर द्रव्यमान = \(\frac { M }{22.4 }\) × 22.4
M gm = 1 मोल
अत: गैस का 1 मोल = 22.4 लीटर।

प्रश्न 13.
किसी द्रव के ताप में वृद्धि का, अणुओं के मध्य लगने वाले अंतर-आण्विक बलों पर क्या प्रभाव पड़ता है ? किसी द्रव के ताप में वृद्धि का इसकी श्यानता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
किसी द्रव का ताप बढ़ाने पर, अणुओं की गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती है जिसके कारण अंतराण्विक बलों का मान घट जाता है। अत: द्रव सरलता से बह सकता है जिसके कारण द्रव की श्यानता घट जाती है।

प्रश्न 14.
आदर्श गैस समीकरण की सहायता से किसी गैस का मोलर द्रव्यमान कैसे ज्ञात कर सकते हैं?
उत्तर:
आदर्श गैस समीकरण से,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 19

प्रश्न 15.
एवोगैड्रो नियम की सहायता से अणुभार तथा वाष्य धनत्व में संबंध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 20
⇒ वाष्प घनत्व = \(\frac { 1 }{2 }\) × गैस का आण्विक द्रव्यमान
अत: आण्विक द्रव्यमान = 2 × वाष्प घनत्व।

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प्रश्न 16.
विभिन्न इकाइयों में R के संख्यात्मक मान लिखिये।
उत्तर:
विभिन्न इकाइयों में R के संख्यात्मक मान निम्नलिखित हैं –

  • 0.0821 litre atm K-1 mol-1
  • 8.31 × 10 erg K-1 mol-1
  • 82.05 atm cm K-1 mol -1
  • 8.31 JK-1 mol-1
  • 62.3 litre mm K-1 mol-1
  • 1.99 cal K-1mol-1
  • 8.31 pa dm K-1 mol-1

प्रश्न 17.
गतिज समीकरण से गैस समीकरण व्युत्पन्न कीजिये।
उत्तर:
अणुगति सिद्धान्त की अभिधारणा के अनुसार, अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा गैस के परम ताप के समानुपाती होती है।
औसत गतिज ऊर्जा = \(\frac { 1 }{2 }\)mnv2
\(\frac { 1 }{2 }\)mnv2 α T
⇒ \(\frac { 1 }{2 }\)mnv2 = KT
⇒ \(\frac { 3 }{2 }\) × \(\frac { 1 }{3}\) mnv2 = KT
⇒ \(\frac { 1 }{3}\) mnv2 = \(\frac { 2 }{3 }\) = KT
⇒ PV = \(\frac { 2 }{3 }\) KT [∵\(\frac { 1 }{3}\) mnv2 = PV]
⇒ \(\frac { PV }{T }\) = \(\frac { 2 }{3 }\) K
⇒ \(\frac { PV }{T }\) = R [ ∵\(\frac { 2 }{3 }\) K = स्थिरांक (R)]
⇒ PV = RT

प्रश्न 18.
डॉल्टन का आंशिक दाब का नियम क्या है ?
उत्तर:
आपस में क्रिया न करने वाली गैसों के मिश्रण के दाब के लिये डॉल्टन ने गैसों का आंशिक दाब का नियम प्रतिपादित किया जिसके अनुसार-“एक निश्चित ताप पर किसी निश्चित आयतन वाले पात्र में दो या दो से अधिक अक्रिय गैसों का मिश्रण लिया जाये तो मिश्रण का कुल दाब गैसों के आंशिक दाब के योग के बराबर होता है। यदि गैसों के मिश्रण का संयुक्त दाब P है तथा इसी ताप पर अवयवी गैसों का आंशिक दाब क्रमश: P1P2 तथा P3 हो, तो
P = P1 + P2+ P3.
नियम का उपयोग:
प्रयोगशाला में गैसें प्रायः जल के ऊपर एकत्रित की जाती हैं, जिनमें नमी उपस्थित रहती है। इस नियम के आधार पर शुष्क गैस का दाब = नम गैस का दाब – जल का वाष्प दाब।

प्रश्न 19.
ग्राहम के विसरण नियम को समझाकर लिखिये।
अथवा
गैसों के विसरण की दर तथा आण्विक द्रव्यमान में संबंध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
ग्राहम का विसरण नियम-इस नियम के अनुसार, “स्थिर ताप एवं दाब पर गैसों के विसरण की दर उनके घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 21
\(r\alpha \frac { 1 }{ \sqrt { d } } \)
यदि r1 तथा r2 गैसों के विसरण की दर हैं और d1 तथा d2  उनके घनत्व हैं, तो
r1 = K \(\frac { 1 }{ \sqrt { { d }_{ 1 } } } \)
r2 = K \(\frac { 1 }{ \sqrt { { d }_{ 2 } } } \)
\(\frac { { r }_{ 1 } }{ { r }_{ 2 } } \) = \(\frac { \sqrt { { d }_{ 1 } } }{ \sqrt { { d }_{ 2 } } } \)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 22

प्रश्न 20.
किसी आदर्श गैस द्वारा अनुभव किए गए दाब (Pआदर्श) तथा प्रेक्षित दाब (Pवास्तविक) के मध्य निम्न संबंध होता है –
Pआदर्श = Pवास्तविक + \(\frac { a{ n }^{ 2 } }{ { V }^{ 2 } } \)
(i) यदि दाब को Nm-2 में, मोलों की संख्या को mol में तथा आयतन को m3 में लिया जाए तो ‘a’ की इकाई ज्ञात कीजिए।
(ii) यदि दाब को atm में तथा आयतन को dm3 में लिया जाए तो ‘a’ की इकाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(i) a = \(\frac { P{ V }^{ 2 } }{ { n }^{ 2 } } \)
प्रश्नानुसार,
P की इकाई = Nm-2, V की इकाई = m3,n की इकाई = mol
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 23
(ii) प्रश्नानुसार, Pकी इकाई = atm, V की इकाई = dm3, n की इकाई = mol
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 24

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प्रश्न 21.
ग्राहम के विसरण नियम के विभिन्न अनुप्रयोग लिखिये।
उत्तर:

  • गैस का घनत्व तथा अणुभार ज्ञात करने में – यदि एक गैस के विसरण का समय तथा घनत्व ज्ञात हो तथा दूसरी गैस के विसरण का समय ज्ञात हो तो इसकी सहायता से दूसरी गैस का घनत्व तथा अणुभार ज्ञात किया जा सकता है।
  • मार्श गैस सूचक – खान में काम करने वाले व्यक्ति इस सूचक की सहायता से विषैली गैसों के रिसाव से सचेत हो जाते हैं।
  • गैसों के पृथक्करण में – गैसों की विसरण की दर में भिन्नता होने के कारण उन्हें उनके मिश्रण से सरलता से पृथक् किया जा सकता है।
  •  दुर्गन्ध – दुर्गन्ध और विषैली गैस वायु में विसरित होने के कारण पृथक् होती रहती है।

प्रश्न 22.
अणुगति सिद्धान्त के आधार पर डॉल्टन के आंशिक दाब नियम की व्युत्पत्ति कीजिये।
उत्तर:
माना किसी गैस A के n1, अणु जिनका द्रव्यमान m1, ग्राम है, एक पात्र में बंद हो जिसका आयतन v है। तो
PAV = \(\frac { 1 }{ 3 }\) m1n1V1
या  PA = \(\frac { 1 }{ 3 } \frac { { m }_{ 1 }{ n }_{ 1 }{ v }_{ 1 }^{ 2 } }{ V } \)
इसी प्रकार, PB = \(\frac { 1 }{ 3 } \frac { { m }_{ 2 }{ n }_{ 2 }{ v }_{ 2 }^{ 2 } }{ V } \)
यदि दोनों गैसों को उसी ताप पर उसी पात्र में बंद कर दिया जाये तो मिश्रण का दाब
P = \(\frac { 1 }{ 3 } \frac { { m }_{ 2 }{ n }_{ 2 }{ v }_{ 2 }^{ 2 } }{ V } \) + \(\frac { 1 }{ 3 } \frac { { m }_{ 2 }{ n }_{ 2 }{ v }_{ 2 }^{ 2 } }{ V } \)
⇒ P = PA + PB
यही डॉल्टन का आंशिक दाब का नियम है।

प्रश्न 23.
काँच के तीक्ष्ण किनारे को ज्वाला में इसके गलनांक तक गर्म करने पर यह चिकना क्यों हो जाता है ? इसके लिए उत्तरदायी द्रव के गुण का नाम लिखिए।
उत्तर:
तीक्ष्ण किनारे वाले काँच को ज्वाला में गर्म करके चिकना बनाया जाता है। क्योंकि गर्म करने पर, काँच पिघलता है तथा द्रव का किनारा गोल आकृति लेने का प्रयास करता है जिसका पृष्ठ तनाव न्यूनतम होता है। इसे काँच का ‘अग्नि-चकास’ कहते हैं।

प्रश्न 24.
‘स्तरीय प्रवाह’ पद की व्याख्या कीजिए। क्या स्तरीय प्रवाह की प्रत्येक कणों का वेग समान होता है ? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
जब द्रव का प्रवाह किसी स्थिर सतह पर होता है, तब द्रव की वह परत जो सतह के संपर्क में होती है, स्थायी हो जाती है। जैसे-जैसे स्थायी परत से ऊपरी परतों की दूरी बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे परत का वेग बढ़ता जाता है। इस प्रकार का प्रवाह, जिसमें एक परत से दूसरी परत का वेग क्रमशः बढ़ता जाता है, स्तरीय प्रवाह कहलाता है। स्तरीय प्रवाह में, सभी परतों में कणों की गति समान नहीं होती है क्योंकि परत अपने से ठीक नीचे वाली परत पर कुछ घर्षण अथवा प्रतिरोधक बल आरोपित करती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 28

प्रश्न 25.
गतिज समीकरण की सहायता से एवोगैड्रो नियम की व्युत्पत्ति कीजिये।
उत्तर:
एवोगैड्रो के नियमानुसार, “समान ताप और दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है।”
हमारे पास यदि दो गैसें हैं, तो
प्रथम गैस हेतु, PV = \(\frac { 1 }{ 3 } \frac { { m }_{ 1 }{ n }_{ 1 }{ v }_{ 1 }^{ 2 } }{ V } \) ………(1)
दूसरी गैस हेतु, PV = \(\frac { 1 }{ 3 } \frac { { m }_{ 2 }{ n }_{ 2 }{ v }_{ 2 }^{ 2 } }{ V } \) ………(2)
समी. (1) और (2) से,
\(\frac { 1 }{ 3 } \frac { { m }_{ 1 }{ n }_{ 1 }{ v }_{ 1 }^{ 2 } }{ V } \) = \(\frac { 1 }{ 3 } \frac { { m }_{ 2 }{ n }_{ 2 }{ v }_{ 2 }^{ 2 } }{ V } \)
\(\frac { { m }_{ 1 }{ n }_{ 1 }{ v }_{ 1 }^{ 2 } }{ V } \) = \(\frac { { m }_{ 2 }{ n }_{ 2 }{ v }_{ 2 }^{ 2 } }{ V } \) ………(3)
यदि दोनों गैसों के ताप समान हैं तो उनकी गतिज ऊर्जा भी समान होगी। अर्थात्
\(\frac { 1 }{ 2 } { m }_{ 1 }{ V }_{ 1 }^{ 2 }=\frac { 1 }{ 2 } { m }_{ 2 }{ V }_{ 2 }^{ 2 }\)
\({ m }_{ 1 }{ { v }_{ 1 }^{ 2 } }={ m }_{ 2 }{ v }_{ 2 }^{ 2 }\) ………(4)
समी. (3) को समी. (4) से भाग देने पर,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 25
n1= n2

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प्रश्न 26.
गैसों के विसरण की दर की तुलना कैसे की जाती है ?
उत्तर:
माना कि दो गैसें A और B जिनके समान आयतन V के विसरण में क्रमशः t1 तथा t2 समय लगता है। तब,
r1 = \(\frac { V }{ { t }_{ 1 } } \)
r2 = \(\frac { V }{ { t }_{ 2 } } \)
\(\frac { { r }_{ 1 } }{ { r }_{ 2 } } =\frac { V }{ { t }_{ 1 } } \times \frac { { t }_{ 1 } }{ V } =\frac { { t }_{ 1 } }{ { t }_{ 2 } }\)
अतः \(\frac { { r }_{ 1 } }{ { r }_{ 2 } } =\frac { \sqrt { { d }_{ 1 } } }{ \sqrt { { d }_{ 2 } } } \)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 26

प्रश्न 27.
आदर्श गैस किसे कहते हैं ? इसकी विशेषताएँ लिखिये।
उत्तर:
आदर्श गैस या वास्तविक गैस:
वह गैस जो गैस नियमों का या गैस समीकरण का प्रत्येक दाब व ताप पर दृढ़ता से पालन करती है तो उसे आदर्श गैस कहते हैं।

विशेषताएँ:

  • स्थिर ताप पर गैस के दाब व आयतन का गुणनफल सदैव स्थिर होना चाहिये तथा स्थिर ताप पर PV तथा P के मध्य खींचा गया ग्राफ एक क्षैतिज रेखा होनी चाहिये।
  • यदि आदर्श गैस को स्थिर दाब पर ठण्डा किया जाये तो इसका आयतन लगातार घटना चाहिये और -273°C ताप पर शून्य होना चाहिये।
  • बिना बाहरी कार्य के इसके प्रसार या संकुचन में कोई ऊष्मीय प्रभाव नहीं होना चाहिये। (4) आदर्श गैस का संपीड्यता गुणांक Z = PV का मान 1 होता है।

प्रश्न 28.
वास्तविक गैस क्या है ? इसकी विशेषताएँ लिखिये।
उत्तर:
वे गैसें जो बॉयल नियम, चार्ल्स नियम तथा आदर्श गैस समीकरण का दृढ़ता से पालन नहीं करतीं, वास्तविक गैस कहलाती हैं।

विशेषताएँ:

  • गैस के अणुओं के बीच आकर्षण बल नगण्य होता है।
  • गैस के कुल आयतन की तुलना में एक अणु के आयतन को नगण्य नहीं माना जा सकता है।
  • -273°C पर इनका आयतन शून्य नहीं होता क्योंकि अधिकांश गैसें ठण्डा करने पर इससे पहले ही द्रव अवस्था में परिवर्तित हो जाती हैं।
  • न्यून ताप व उच्च दाब पर गैसें बॉयल तथा चार्ल्स नियम का पालन नहीं करती हैं।

प्रश्न 29.
आदर्श गैस तथा वास्तविक गैस में अंतर लिखिये।
उत्तर:
आदर्श गैस तथा वास्तविक गैस में अंतर –

आदर्श गैस:

  • आदर्श गैस, आदर्श गैस समीकरण का पालन करती है।
  • गैस के अणुओं का आयतन पात्र की तुलना में में नगण्य होता है।
  • गैस के अणुओं में परस्पर आकर्षण नहीं होता है।
  • किसी आदर्श गैस का अस्तित्व नहीं है।
  • आदर्श गैसों के लिये संपीड्यता गुणांक का मान 1 होता है।

वास्तविक गैस:

  • वास्तविक गैस निम्न दाब और उच्च ताप पर ही आदर्श गैस समीकरण का पालन करती है।
  • गैस के अणुओं का आयतन पात्र की तुलना में नगण्य नहीं होता है।
  • अणुओं के मध्य आकर्षण होता है।
  • सभी गैसें वास्तविक गैसें हैं तथा वे आदर्श गैसों के व्यवहार से कभी धनात्मक तथा कभी ऋणात्मक विचलन दर्शाती हैं।
  • वास्तविक गैसों के लिये सम्पीड्यता गुणांक का मान 1 नहीं होता है।

प्रश्न 30.
अणुगतिक सिद्धान्त के आधार पर बॉयल के नियम को समझाइये।
उत्तर:
किसी भी गैस का दाब उसके अणुओं के पात्र की दीवारों से टकराने के कारण उत्पन्न होता है। अर्थात् दाब का परिमाण टक्करों की आवृत्ति पर निर्भर करता है तथा टक्करों की आवृत्ति अणुओं की संख्या तथा उनके वेग पर निर्भर करती है। यदि गैस का आयतन कम कर दिया जाये तो इकाई आयतन में उपस्थित अणुओं की संख्या बढ़ जायेगी, जिसके फलस्वरूप इकाई समय में दीवार की इकाई क्षेत्रफल पर टकराने वाले अणुओं की संख्या में भी वृद्धि होगी, जिसके कारण दाब में भी वृद्धि होगी।

दूसरी तरफ यदि आयतन में वृद्धि कर दी जाये तो इकाई क्षेत्रफल में उपस्थित अणुओं की संख्या में कमी आयेगी, जिससे इकाई समय में दीवार की इकाई क्षेत्रफल पर होने वाली टक्करों की संख्या में कमी आयेगी, जिससे दाब में भी कमी आयेगी। अतः स्पष्ट है स्थिर ताप पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन उसके दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

प्रश्न 31.
गैसों के अणुगतिक समीकरण की सहायता से चार्ल्स के नियम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
गैस का ताप बढ़ाने पर उसकी गतिज ऊर्जा भी बढ़ती है जिसके फलस्वरूप अणुओं के वेग में वृद्धि होती है और वेग में वृद्धि के कारण अणुओं के मध्य होने वाली टक्करों की संभावना में वृद्धि होती है। जिस बल से वे टकराते हैं उसमें वृद्धि होने लगती है जिसके फलस्वरूप दाब में वृद्धि होने लगती है।

यदि दाब को स्थिर रखना है तो यह जरूरी है कि अणुओं के मध्य होने वाली टक्करों की संभावना में वृद्धि न हो। यह तभी संभव है जब गैस के अणुओं के बीच की दूरी में वृद्धि कर दी जाये अर्थात् आयतन में वृद्धि की जाये । इससे स्पष्ट है कि स्थिर दाब पर गैस की निश्चित मात्रा का आयतन उसके परम ताप के समानुपाती है।

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द्रव्य की अवस्थाएँ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्रिस्टलीय ठोस व अक्रिस्टलीय ठोस में अंतर लिखिये।
उत्तर:
क्रिस्टलीय ठोस व अक्रिस्टलीय ठोस में अंतर –

क्रिस्टलीय ठोस:

  • इनकी कोई निश्चित ज्यामिति नहीं होती है।
  • इनकी आंतरिक संरचना में भी कणों का एक निश्चित क्रम रहता है।
  • इनके गलनांक स्पष्ट तथा निश्चित होते हैं।
  • ये विषम दैशिकता दर्शाते हैं।
  • इन ठोसों को वास्तव में ठोस माना जाता है।
  • इनमें long range order होता है।

अक्रिस्टलीय ठोस:

  • इनकी एक निश्चित ज्यामिति होती है।
  • इनकी आंतरिक संरचना में कणों का कोई निश्चित क्रम नहीं रहता है।
  • इनके गलनांक स्पष्ट तथा निश्चित नहीं होते हैं।
  • ये सम दैशिकता दर्शाते हैं।
  • अक्रिस्टलीय ठोसों को अतिशीतित द्रव माना जाता
  • इनमें short range order होता है।

प्रश्न 2.
गैसों के अणुगतिक सिद्धान्त के प्रमुख अभिगृहीत लिखिये।
उत्तर:
गैसों के अणुगतिक सिद्धान्त के प्रमुख अभिगृहीत निम्नलिखित हैं –

  • प्रत्येक गैस सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है, जिन्हें अणु कहते हैं।
  • एक ही गैस के सभी अणु समान होते हैं लेकिन भिन्न-भिन्न गैसों के अणु भिन्न-भिन्न होते हैं।
  • साधारण दाब पर गैस के अणु इतने छोटे होते हैं कि उनका वास्तविक आयतन गैस द्वारा घेरे गये कुल आयतन की तुलना में नगण्य होता है।
  • किसी गैस के अणु हमेशा तीव्र गति से प्रत्येक दिशा में यादृच्छिक विभिन्न वेग से गतिशील रहते हैं। ये अणु हमेशा सीधी रेखा में गति करते हैं। परन्तु अन्य अणु या पात्र की दीवार से टकराकर उनकी दिशा बदल जाती है।
  • अणुओं के मध्य संघट्ट पूर्णतः प्रत्यास्थ होती है। इसलिये टक्करों के पश्चात् अणुओं की ऊर्जा में कमी नहीं आती है।
  • गैस के अणुओं के मध्य आकर्षण बल नगण्य होता है तथा वह पूर्णतः प्रत्यास्थ पिंड होते हैं।
  • गैस का दाब गैस के अणुओं के आपस में तथा पात्र की दीवारों से टकराने पर उत्पन्न होता है।
  • गैस के अणुओं की गति पर गुरुत्वाकर्षण बल का प्रभाव नगण्य होता है।
  • किसी गैस की गतिज ऊर्जा उसके परम ताप के समानुपाती होती है।

प्रश्न 3.
गैसों के अणुगतिक समीकरण PV = \(\frac { 3 }{ 2 }\)mnv2 को सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
माना एक घनाकार पात्र में कुछ गैस ली गई है, जिसमें प्रत्येक भुजा की लम्बाई = l cm, पात्र में गैस के अणुओं की संख्या = n, गैस के एक अणु की संहति = m, गैस का कुल द्रव्यमान = M, अणुओं के वर्ग माध्य मूल वेग = v. पात्र में n अणु सभी संभावित दिशाओं में गति कर रहे हैं तथा अणु घनाकार पात्र के अंदर तीन अक्षों x, y, z में गति कर रहा है। अतः यह माना जा सकता है कि – अणु किन्हीं दो समान्तर फलकों की ओर गति कर रहा है।

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 29

माना कोई अणु दो फलक A तथा B के बीच गति कर रहा है तथा फलक A पर बार-बार टकरा रहा है। यदि फलक A पर टकराने के पहले अणु का वेग v है तथा टक्कर पूर्णतः प्रत्यास्थ है इसलिये टक्कर के पश्चात् अणु का वेगv होगा। अणु का फलक से टकराने से पहले संवेग = mv अणु का फलक से टकराने के बाद संवेग = – mv अतः प्रत्येक टक्कर लगाने पर संवेग परिवर्तन = mv -(-mv) = 2mv फलक A पर दूसरी बार टकराने के लिये अणु को दूरी तय करनी पड़ेगी = 2l

∴ अणु का वेग है। सेमी / सेकण्ड
∴ सेमी दूरी तय करता है 1 सेकण्ड में
∴ 2l सेमी दूरी तय करेंगे \(\frac { 1 }{v }\) × 2l = \(\frac { 2l }{ v }\) सेकण्ड

फलक A पर \(\frac { 2l }{ v }\) सेकण्ड में अणु टकराता है 1 बार
फलक A पर 1 सेकण्ड में अणु टकराता है = \(\frac { 1 }{ \frac { 2l }{ v } } \) = \(\frac { v }{2l}\)
प्रति सेकण्ड संवेग में परिवर्तन = प्रत्येक टक्कर में संवेग परिवर्तन × 1 सेकण्ड में अणुओं की संख्या × फलक A पर टकराने वाले अणुओं की संख्या
= 2mv × \(\frac { V }{2l }\) × \(\frac { n }{3 }\) = \(\frac { 1 }{3 }\) \(\frac { mn{ v }^{ 2 } }{ l } \)
प्रति सेकण्ड संवेग में परिवर्तन की दर = बल
\(\frac { 1 }{3 }\) \(\frac { mn{ v }^{ 2 } }{ l } \) = F
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 30

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प्रश्न 4.
वाण्डर वाल्स ने गैसों के आदर्श व्यवहार का स्पष्टीकरण करने के लिये गैस समीकरण में क्या संशोधन किया है ?
उत्तर:
अणुगतिक समीकरण के अनुसार गैसों के अणुओं के मध्य आकर्षण बल नगण्य होता है तथा गैस के अणुओं का वास्तविक आयतन कुल आयतन की तुलना में नगण्य होता है। लेकिन ये दोनों अभिधारणाएँ निम्न दाब एवं उच्च ताप पर ही संभव हैं क्योंकि उच्च दाब पर गैस का कुल आयतन बहुत कम हो जाता है।

इसलिये इस स्थिति में वास्तविक आयतन को कुल आयतन की तुलना में नगण्य नहीं माना जा सकता और अणु पास-पास आ जाते हैं इसलिये इनके मध्य आकर्षण बल कार्य करने लग जाता है, जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। इन दोनों दोषों को दूर करने के लिये वाण्डर वाल्स ने आदर्श गैस समीकरण में संशोधन कर नये समीकरण की व्युत्पत्ति की जिसे वाण्डर वाल्स समीकरण कहते हैं।

आयतन संशोधन:
उच्च दाब पर गैस के अणुओं के स्वयं का आयतन, गैस की आयतन की तुलना में नगण्य नहीं होता है। अतः गैस का वास्तविक आयतन (V-b) होगा जबकि b गैस के अणु का स्वयं आयतन है।

दाब संशोधन:
उच्च दाब अथवा निम्न ताप पर गैस का आयतन बहुत कम हो जाता है और अणु एकदूसरे के निकट होते हैं। इस अवस्था में अणुओं के मध्य पारस्परिक आकर्षण बल \(\frac { a }{ { V }^{ 2 } } \) बढ़ जाता है।
गैस का वास्तविक दाब = प्रेक्षित दाब + दाब संशोधन
= P + \(\frac { a }{ { V }^{ 2 } } \)
आदर्श गैस समीकरण में दोनों संशोधन करने पर,
[P + \(\frac { a }{ { V }^{ 2 } }\)] [V – b] = RT
n मोल गैस हेतु,
\(p+\frac { a{ n }^{ 2 } }{ { V }^{ 2 } }\) [V – nb] = nRT

प्रश्न 5.
श्यानता या विस्कासिता से आप क्या समझते हैं ? श्यानता को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं ?
उत्तर:
प्रत्येक द्रव में बहने की एक प्रवृत्ति होती है क्योंकि द्रव में अन्तरअणुक आकर्षण बल कम होता है और ये असंपीड्य होते हैं। कुछ द्रव जैसे-शहद, कैस्ट्रॉल तेल अत्यन्त धीमी गति से प्रवाहित होते हैं जबकि कुछ द्रव जैसे-जल, कैरोसीन आदि में बहने की प्रवृत्ति अधिक होती है। प्रवाह की गति में भिन्नता श्यानता के कारण होती है।

श्यानता वास्तव में द्रव के प्रवाह पर प्रतिरोध है और यह प्रतिरोध अंतरअणुक आकर्षण बल द्वारा प्रभावित होता है। द्रवों को कई पर्तों से मिलकर बना हुआ समझा जाता है। जब कोई द्रव किसी भी सतह पर बहता है ये पर्ते भिन्न-भिन्न वेग से बहती हैं । द्रव की विभिन्न पर्तों में उपस्थित अणु एक-दूसरे द्वारा आकर्षित होते हैं और ये अंतरअणुक आकर्षण बल द्रव के प्रवाह पर प्रतिरोध उत्पन्न करता है।

श्यानता को प्रभावित करने वाले कारक –

  • अंतरअणुक आकर्षण बल – अंतरअणुक आकर्षण बल द्रव में अणुओं के प्रवाह को अवरुद्ध करते हैं । इसलिये अंतरअणुक आकर्षण बल पर श्यानता निर्भर करती है। जितना अधिक अंतरअणुक आकर्षण बल होगा, द्रव की श्यानता भी उतनी अधिक होगी।
  • अणुभार – अणुभार बढ़ने पर श्यानता बढ़ती है।
  • दाब – दाब बढ़ने पर आयतन में कमी आती है जिसके फलस्वरूप अंतर अणुक आकर्षण बल में वृद्धि होती है इसलिये दाब में वृद्धि करने से श्यानता में वृद्धि होती है।
  • ताप – ताप में वृद्धि करने से द्रव के प्रवाह को अवरुद्ध करने वाला ससंजक बल कम हो जाता है जिससे आण्विक गति में वृद्धि होती है। अतः श्यानता में कमी आती है।

प्रश्न 6.
पृष्ठ तनाव क्या है ? इसे प्रभावित करने वाले कारकों का विवरण दीजिए।
उत्तर:
यह द्रव का एक महत्वपूर्ण गुण है, जिसके कारण उसका स्वतंत्र पृष्ठ एक प्रत्यास्थ झिल्ली की तरह व्यवहार करता है तथा वह कम-से-कम क्षेत्रफल घेरने की चेष्टा करता है, पृष्ठ तनाव कहलाता है। पृष्ठ तनाव अन्तराअणुक आकर्षण बल पर निर्भर करता है। द्रव के अंदर स्थित समीपवर्ती अन्य अणु द्वारा सभी दिशाओं में समान रूप से आकर्षित होते हैं किन्तु द्रव की सतह पर स्थित अणु केवल नीचे तथा बाजू में स्थित अणुओं द्वारा आकर्षित होते हैं जिसके फलस्वरूप सतह के अणु अंदर की ओर आकर्षित होते हैं तथा सतह की प्रवृत्ति क्षेत्रफल को कम करने की होती है।

संकुचित होने की प्रवृत्ति के कारण द्रव की सतह तनी हुई झिल्ली के समान कार्य करती है। इस घटना को पृष्ठ तनाव कहते हैं। पृष्ठ तनाव उस कार्य की माप है जो द्रव की सतह को एकांक क्षेत्रफल से बढ़ाने के लिये आवश्यक है। इसका S.I. मात्रक जूल / मीटर या न्यूटन / मीटर है।

पृष्ठ तनाव को प्रभावित करने वाले कारक –
(1) ताप – ताप में वृद्धि करने पर अंतर अणुक आकर्षण बल में कमी के कारण पृष्ठ तनाव में कमी आती है।
(2) विलेय – द्रवों में विलेय मिलाने पर पृष्ठ तनाव प्रभावित होता है।

  • यदि विलेय का पृष्ठ तनाव द्रव के पृष्ठ तनाव के बराबर हो तो द्रव का पृष्ठ तनाव विलेय की मात्रा के समानुपाती होता है। जितना अधिक विलेय मिलाते हैं पृष्ठ तनाव में उतनी वृद्धि होती है।
  • यदि विलेय का पृष्ठ तनाव द्रव के पृष्ठ तनाव से कम हो तो द्रव के पृष्ठ तनाव में कमी आती है।
  • द्रवों का पृष्ठ तनाव सतह को सक्रिय करने वाले पदार्थ जैसे-साबुन, डिटर्जेन्ट मिलाने पर कम हो जाता है।

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प्रश्न 7.
आयनिक, सहसंयोजी, धात्विक तथा आण्विक क्रिस्टल में तुलना कीजिये।
उत्तर:
आयनिक, सहसंयोजी, धात्विक तथा आण्विक क्रिस्टल में तुलना –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 31

प्रश्न 8.
ठोस, द्रव तथा गैस में क्या संरचनात्मक भिन्नताएँ हैं ? लिखिये।
उत्तर:
ठोस, द्रव तथा गैस में संरचनात्मक भिन्नताएँ –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ - 32

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