MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 23 Mahan Vibhuti Danvir Doctor Sir Hari Singh gor Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 23 Mahan Vibhuti Danvir Doctor Sir Hari Singh gor Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 23 Mahan Vibhuti Danvir Doctor Sir Hari Singh gor Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 23 महान विभूति: दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर प्रश्न उत्तर

महान विभूति: दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
अभाव = कमी, अलंकार में स्थायी भावों से रहित; अक्षय = अनश्वर, अपरिवर्तनशील; अद्वितीय = अतुल्य, अकेला; अर्जित = कमाया हुआ; विभूति = शक्ति, धन, सम्पन्नता; विदुषी = शिक्षित स्त्री, विद्वान स्त्री, विधिवेत्ता = विधि विशेषज्ञ, कानून के जानकार; रूढ़िग्रस्त = परम्परावादी।

प्रश्न 2.
पाठ के आधार पर सही जोड़ी बनाइए-.
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 23 महान विभूति दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर 1
उत्तर
(क) → (2), (ख) → (3), (ग) → (4), (घ)→ (1)

प्रश्न 3.
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए(क) डॉ. हरिसिंह गौर का जन्म कब और कहाँ हुआ ?
उत्तर
डॉ. हरिसिंह गौर का जन्म 26 जनवरी, सन् 1870 ई. में शनीचरी टौरी, सागर (म. प्र.) में हुआ था।

(ख) डॉ. गौर कौन-कौन से विश्वविद्यालयों में उपकुलपति रहे?
उत्तर
सन् 1921 ई. से सन् 1936 ई. तक वे दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्थापक उपकुलपति रहे। इसके बाद दो वर्ष तक वे नागपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति रहे।

(ग) डॉ. गौर को ‘सर’ की उपाधि से किसने विभूषित किया है ?
उत्तर
जनवरी, सन् 1925 में अंग्रेज सरकार ने डॉ. गौर को शिक्षा के क्षेत्र में ‘सर’ की उपाधि प्रदान की।

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(घ) उन्होंने किस प्रशासकीय पद से त्याग-पत्र दिया था ?
उत्तर
उन्होंने सेण्ट्रल प्रॉविंस कमीशन में अतिरिक्त सहायक आयुक्त के पद से त्यागपत्र दिया।

(ङ) सागर विश्वविद्यालय की स्थापना कब, क्यों और और किसने की थी ?
उत्तर
18 जुलाई, सन् 1946 को सागर नगर के निकट मकरोनिया की पथरिया पहाड़ी पर डॉ. हरिसिंह गौर ने हजारों व्यक्तियों की उपस्थिति में सागर विश्वविद्यालय की विधिवत् स्थापना की और उन्होंने इस विश्वविद्यालय में प्रथम कुलपति का पद थी सुशोभित किया।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(क) डॉ. गौर के विद्यार्थी जीवन पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उनका बाल्यकाल अभावों में बीता। माँ ने बड़े संघर्ष के साथ उनका पालन-पोषण किया था। उन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा सागर में और इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा पहले जबलपुर, बाद में नागपुर में पूरी की। आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने नागपुर के हिसलप कॉलेज में प्रवेश लिया। उस समय वे अंग्रेजी और अर्थशास्त्र में ऑनर्स करने वाले पहले छात्र थे। अठारह वर्ष की आयु में वे इंग्लैण्ड चले गए, जहाँ उन्होंने डाउनिंग कॉलेज और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में एम. ए. और कानून की उपाधि प्राप्त की।

(ख) डॉ. गौर को कुशल और सफल अधिवक्ता के रूप में क्यों जाना जाता है ?
उत्तर
डॉ. हरिसिंह गौर ने चालीस वर्ष से अधिक समय तक अखिल भारतीय स्तर पर वकालत की। उन्होंने प्रिवी कौंसिल में भी कई मुकद्दमे लड़े और वहाँ भी अपनी सफलता के झण्डे गाड़े। वे हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सभापति और हाईकोर्ट बार कौंसिल के सदस्य भी रहे। अत: डॉ. गौर विधिवेत्ता, प्रसिद्ध अधिवक्ता और दानवीर के रूप में अविस्मरणीय विभूति हैं। वे आज भी हम सबके लिए प्रेरणा पुंज हैं।

(ग) डॉ. गौर भामाशाह क्यों कहलाए?
उत्तर
राष्ट्रहित के लिए जिस प्रकार भामाशाह ने अपना संचित धन महाराणा प्रताप को सहर्ष सौंप दिया था, उसी प्रकार भारत माँ के लाड़ले सपूत डॉ. हरिसिंह गौर ने परिश्रमपूर्वक अर्जित धन विश्वविद्यालय स्थापना के लिए दान कर दिया। इस कार्य के लिए उन्होंने आरम्भ में बीस लाख रुपये दिए। 18 जुलाई, सन् 1946 ई. को सागर नगर के निकट मकरोनिया की पथरिया पहाड़ी पर हजारों व्यक्तियों की उपस्थिति में सागर विश्वविद्यालय की विधिवत स्थापना हुई। डॉ. गौर ने इस विश्वविद्यालय में प्रथम कुलपति का पद भी सुशोभित किया।। उन्होंने अपनी अन्तिम साँस लेने से पूर्व अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई में से लगभग दो करोड़ रुपये की धन-सम्पत्ति सागर विश्वविद्यालय को अर्पित कर दी। सम्पूर्ण एशिया में किसी एक व्यक्ति मात्र के दान से स्थापित यह विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश . का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है। अतः राष्ट्रहित के लिए किये गये इस पुण्य कार्य के लिए डॉ. गौर भामाशाह कहलाए।

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(घ) डॉ. गौर ने शिक्षा जगत में बहुत सेवाएँ की हैं, इस कथन को उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
सन् 1921 ई. से सन् 1936 ई. तक डॉ. गौर दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्थापक उपकुपति रहे। इसके बाद दो वर्ष तक उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति का दायित्व संभाला। दिल्ली एवं नागपुर विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें डी. लिट. की मानद् उपाधि से सम्मानित किया गया। डॉ. गौर ने 18 जुलाई, सन् 1946 ई. को सागर नगर के निकट मकरोनिया की पथरिया पहाड़ी पर हजारों व्यक्तियों की उपस्थिति में सागर विश्वविद्यालय की विधिवत् स्थापना की। डॉ. गौर ने इस विश्वविद्यालय में प्रथम कुलपति का पद भी सुशोभित किया।

वह अपूर्व बुद्धि और अद्भुत वाशक्ति वाले अधिवक्ता के रूप में प्रसिद्ध थे। उनकी अद्वितीय प्रतिभा, मौलिक सूझबूझ, तीव्र स्मरणशक्ति उनके प्रत्येक शब्द में आत्मविश्वास के साथ झलकती थी। न्यायालय में उनका परिवाद प्रस्तुत करने का ढंग ओजस्वी, अनोखा एवं रोचक होता था। डॉ. हरिसिंह गौर का गहन विश्वकोषीय ज्ञान, अनुभव और दूरदर्शिता अपूर्व थी। उनका अंग्रेजी भाषा पर पूर्ण अधिकार था। लेखन प्रतिभा से युक्त उनकी ख्याति में उस समय और भी वृद्धि हुई जब वे कानून की पुस्तकों के लेखक के रूप में सामने आए। मात्र बत्तीस साल की आयु में ही उनकी ‘लॉ ऑफ ट्रांसफर ऑफ प्रापर्टी एक्ट’ पुस्तक प्रकाशित हुई। इसके बाद उन्होंने ‘भारतीय दण्ड संहिता की तुलनात्मक विवेचना’ और ‘हिन्दू लॉ’ पर पुस्तकें लिखी जो आज भी विधि की महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में गिनी जाती हैं। उनके विधि क्षेत्र में अर्जित व्यापक अनुभव को देखते हुए उन्हें भारतीय संविधान सभा का उप सभापति भी चुना गया। डॉ. हरिसिंह गौर ने कानून शिक्षा, साहित्य, समाज सुधार, संस्कृति, राष्ट्रीय आन्दोलन, संविधान निर्माण आदि में स्मरणीय योगदान दिया।

प्रश्न 5.
‘सरस्वती लक्ष्मी दोनों ने दिया तुम्हें सादर जयपत्र’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
डॉ. गौर का बाल्यकाल अभावों में बीता था परन्तु फिर भी उन्होंने 18 वर्ष की आयु में इंग्लैण्ड के डाउनिंग कॉलेज
और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में एम. ए. और कानून की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सन् 1905 ई. में डी. लिट. की पहली उपाधि लंदन विश्वविद्यालय और फिर ‘ट्रिनिटी’ कॉलेज, डब्लिन से प्राप्त की। इस प्रकार माँ सरस्वती’ की महान अनुकम्पा से शिक्षा जगत में महान ख्याति अर्जित हुई। परिणामस्वरूप उन्हें परिश्रमपूर्वक धन भी अर्जित हुआ जिसको उन्होंने राष्ट्रहित में सागर विश्वविद्यालय की स्थापना में दान किया। तब राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने उनकी दानवृत्ति को देखकर बहुत ही सटीक कहा

“सरस्वती-लक्ष्मी दोनों ने दिया, तुम्हें सादर जय-पत्र।
साक्षी है हरिसिंह तुम्हारा, ज्ञान-दान का अक्षय सत्र”।

महान विभूति: दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए
शिक्षाविद्, विभूति, अधिवक्ता, औपचारिक।
उत्तर
शिक्षाविद्-डॉ. हरिसिंह गौर महान शिक्षाविद् थे। . विभूति-डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम भारत की महान । विभूति हैं। – अधिवक्ता-भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पेशे से अधिवक्ता थे। औपचारिक-आज हमारे विद्यालय में क्रिकेट मैदान की औपचारिक घोषणा की गई।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों का समास विग्रह करते हुए उनके समासों के नाम लिखिए
लालन-पालन, कानून-शिक्षा, सरस्वती-लक्ष्मी, सांध्यवेला, देश-विदेश।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 23 महान विभूति दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर 2

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में प्रयुक्त उपसर्ग और प्रत्यय पहचान करके अलग लिखिए-
अक्षय, उपकुलपति, सपूत, सहर्ष, सफलता, दूरदर्शिता, ऐतिहासिक, कार्यक्षमता।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 23 महान विभूति दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर 3

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों के लिए एक-एक शब्द लिखिए।
उत्तर
वाक्य – एक शब्द
वकालत – करने वाला वकील
जो थोड़ा जानता हो – अल्पज्ञ
जो कभी न हो सके – असम्भव
जिसके आर-पार देखा – पारदर्शी या
जा सके – पादर्शक
विद्या अध्ययन करने वाला – विद्यार्थी

प्रश्न 5.
निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए
झण्डा गाड़ देना, लोहा मानना, घी के दीये जलाना, आँख का तारा होना। ….
उत्तर
झण्डा गाड़ देना-अधिकार जमा लेना।
प्रयोग-भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्वकप के फाइनल मैच में भारत का झण्डा गाड़ दिया।
लोहा मानना-प्रभुत्व स्वीकार करना। .
प्रयोग-महाराणा प्रताप की वीरता का मुगल लोहा मानते
घी के दीये जलाना-खुशियाँ मनाना।
प्रयोग-हाईस्कूल की परीक्षा में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने पर गोपाल के घर में घी के दीये जल रहे थे।
आँख का तारा होना-बहुत प्रिय होना।
प्रयोग-रमेश अपने माता-पिता की आँख का तारा है।

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प्रश्न 6.
नीचे लिखे गद्यांश को पढ़कर उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए
इस संसार में सबसे अमूल्य वस्तु है ‘समय’। इस संसार में सभी वस्तुओं को घटाया-बढ़ाया जा सकता है। पर समय नहीं। समय किसी के अधीन नहीं रहता। न रह सकता है और न किसी की प्रतीक्षा करता है। विद्यार्थी जीवन में समय का अपना महत्व है। समय का सदुपयोग करने वाला व्यक्ति सदैव सफल होकर एक श्रेष्ठ नागरिक बनता है। समय का सदुपयोग तो केवल उद्यमी और कर्मठ व्यक्ति कर सकता है। आलस्य समय का सबसे बड़ा शत्रु है। विद्यार्थियों को इस शत्रु से सावधान रहना चाहिए।
(क) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
(ख) समय का सबसे बड़ा शत्रु कौन है ?
(ग) कौन-सा व्यक्ति श्रेष्ठ नागरिक बन सकता है ?
(घ) समय का सदुपयोग कौन-सा व्यक्ति कर सकता
उत्तर
(क) उपयुक्त शीर्षक है ‘समय का महत्व’।
(ख) आलस्य समय का सबसे बड़ा शत्रु है।
(ग) समय का सदुपयोग करने वाला व्यक्ति श्रेष्ठ नागरिक बन सकता है।
(घ) समय का सदुपयोग उद्यमी और कर्मठ व्यक्ति कर सकता है।

महान विभूति: दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) वह अपूर्व बुद्धि और अद्भुत वाकशक्ति वाले अधिवक्ता के रूप में प्रसिद्ध थे। उनकी अद्वितीय प्रतिभा, मौलिक सूझबूझ, तीव्र स्मरणशक्ति उनके प्रत्येक शब्द में आत्मविश्वास के साथ झलकती थी। न्यायालय में उनका परिवाद प्रस्तुत करने का ढंग ओजस्वी, अनोखा एवं रोचक होता था। डॉ. हरिसिंह गौर का गहन विश्वकोषीय ज्ञान, अनुवभव और दूरदर्शिता अपूर्व थी।

शब्दार्थ-अद्वितीय = अतुल्य, अकेला; अपूर्व = अनुपम, अनोखा; परिवाद = दावा; शिकायत; ओजस्वी = प्रभावशाली, शक्तिमान।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के पाठ ‘महान विभूति : दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर’ से अवतरित है।

प्रसंग-इस गद्यांश में डॉ. हरिसिंह गौर के प्रतिभाशाली व्यक्तित्व को समझाया गया है।

व्याख्या-डॉ. हरिसिंह गौर एक विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उनमें तार्किक बुद्धि, सोचने की अद्भुत शक्ति, वाक्पटुता, समरण रखने की असीम क्षमता और आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरे हुए थे। अत: कानून के क्षेत्र को उन्होंने अपना व्यवसाय चुना। न्यायालय में अपने पक्ष को सरल एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत करते थे। इसीलिए डॉ. गौर प्रसिद्ध अधिवक्ता और विधिवेत्ता के रूप में अविस्मरणीय विभूति हैं। शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. गौर को विश्वकोश का ज्ञान, कार्य करने का अनुभव और उसके परिणाम को जानने की अनोखी दूरदर्शिता थी।

MP Board Class 8 Hindi Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 10 Amir Khusro Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 10 Amir Khusro Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 10 Amir Khusro Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 10 अमीर खुसरो प्रश्न उत्तर

प्रश्न अभ्यास

MP Board Class 8 Hindi Chapter 10 प्रश्न 1.
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 10 अमीर खुसरो 1
उत्तर
(अ) 4, (ब) 3, (स) 5, (द) 1, (ई) 2

(ख) सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(अ) खुसरो के पिता ……………. थे। (मालदार, जागीरदार)
(ब) अमीर खुसरो पर ……………. संस्कारों का प्रभाव था। (विदेशी, भारतीय)
(स) पिता की मृत्यु के बाद खुसरो अपने … के घर आकर रहने लगे। (नाना, दादा).
(द) खुसरो ने ……………. में काव्य रचा। (मातृभाषा, लोकभाषा)
(ई) अमीर खुसरो का परिवार …………… देश से आकर भारत में बसा था। (तुर्की, पुर्तगाल)
उत्तर
(अ) खुसरो के पिता जागीरदार थे।
(ब) अमीर खुसरो पर भारतीय संस्कारों का प्रभाव था।
(स) पिता की मृत्यु के बाद खुसरो अपने नाना के घर आकर रहने लगे।
(द) खुसरो ने लोक भाषा में काव्य रचा।
(ई) अमीर खुसरो का परिवार तुर्की देश से आकर भारत में बसा था।

Class 8 Hindi Chapter 10 MP Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न

(अ)अमीर खुसरो का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
(ब) खुसरो के गुरु कौन थे?
(स) अमीर खुसरो के मन को छूने वाले गीत कौन-से हैं?
(द) अमीर खुसरो को वैराग्य कब हुआ?
(ई) सूफी मत के अनुसार ईश्वर-प्राप्ति का क्या मार्ग है?
उत्तर
(अ) जागीरदार
(व) भारतीय
(स) नान
(द) लोकभाषा
(ई) तुर्की।

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Hindi Chapter 10 Class 8 MP Board प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न

(अ) खुसरो की कृतियाँ हमें क्या शिक्षा देती हैं?
उत्तर
खुसरो की कृतियाँ हमें धर्म-निरपेक्षता, देश-प्रेम और इंसानी बराबरी की शिक्षा देती हैं। ते परस्पर नफ़रत नहीं, अपितु मेल-मिलाप और सच्चे हिन्दुस्तानी की तरह रहने की भी शिक्षा देती हैं।

(ब)
भारत देश की प्रशंसा अमीर खुसरो किस रूप में करते हैं?
उत्तर
भारत देश की प्रशंसा अमीर खुसरो ने माँ के रूप में करते हैं। वे भारत को अपने वतन के रूप में वर्णित करते हुए खूब प्रशंसा करते हैं।

(स)
खुसरो की रचनाओं में कौन-कौन से दर्शन समाहित हैं?
उत्तर
खुसरो की रचनाओं में वेदान्त, बौद्ध और इस्लाम दर्शन समाहित हैं।

(द)
‘मुकरी’ का उदाहरण देते हुए उसका अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
मकरी-‘मुकरी’ शब्द मकरना से बना है। मकरना का अर्थ है-कहकर बदल जाना या वादा करके बाद में कही गई बात से इनकार करना। मुकरी ऐसी पद्य रचना है जिसमें ‘हाँ’ कहकर ‘न’ कहा जाता है। जैसे’बह आवे तो शादी होय, उस बिन दूजा ओर न कोय। मीठे लागे बाके बोल, क्यों सखि साजन, ना सखि ढोला’ ऐसा लगता है जैसे सखि के साजन आ रहे हैं, किंतु कवि उसे साजन मानने से इनकार करता है और कहता है ‘साजन नहीं’ ढोल आ रहा है।

(ई)
खुसरो की अंतिम रचना कौन-सी थी, वह किस घटना से संबंधित थी?
उत्तर
खुसरो की अंतिम रचना थी
गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस।
चल खुसरो घर आपने, रेन भई चहुँ देस।।
खुसरो की यह अंतिम रचना उनके गुरु के निधन
से उत्पन्न दुखद घटना से संबंधित थी।

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भाषा की बात

MP Board Class 8th Hindi Chapter 10 प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिए
आत्मीय, कुशात्र, साहित्यिक, समन्वय, धर्मनिरपेक्षता, अश्रुधारा, वैराग्य।
उत्तर:
आत्मीय, कुशाग्र, साहित्यिक, समन्वय, धर्मनिरपेक्षता, अश्रुधारा, वैराग्य।

Class 8 Chapter 10 Hindi MP Board प्रश्न 2.
नीचे दिए शब्दों की वर्तनी सुधारिएप्रसतुत, गुरू क्रपा, ननीहाल, जलवायू, अनुयाई।
उत्तर
प्रस्तुत, गुरुकृपा, ननिहाल, जलवायु, अनुयायी।

Class 8 MP Board Hindi Chapter 10 प्रश्न 3.
नीचे दिए वाक्यों में उपयुक्त विराम चिह लगाइए
(क) गांधी जी ने कहा था सदा सत्य बोलो
(ख) राम मोहन सौरभ और कमल घूमने गए
(ग) झूठ बोलना पाप की जड़ है शिक्षक ने कहा
(घ) बाजार से सब्जी ले आए इन्हें डलिया में रख दो
उत्तर
(क) गांधी जी ने कहा था, “सदा सत्य बोलो।”
(ख) राम, मोहन, सौरभ और कमल घूमने गए
(ग) “झूठ बोलना पाप की जड़ है” शिक्षक ने कहा
(घ) बाजार से सब्जी ले आए। इन्हें इलिया में रख दो।

Class 8th Hindi Chapter 10 MP Board प्रश्न 4.
नीचे दिए विग्रह पदों के साभासिक शब्द बनाइए
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 10 अमीर खुसरो 2

MP Board Solution Class 8 Hindi Chapter 10 प्रश्न 5.
विलोम शब्दों की सही जोड़ी बनाइए
उत्तर-
प्रशंसा – निन्दा
रुचि – अरुचि
प्रेम – घृणा
नारी – पुरुप
प्रभावित – अप्रभावित

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MP Board Class 8 Chapter 10 Hindi प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों में शब्दों को सही क्रम में लिखिए
(क) एक जागीरदार थे पिता के खुसरो।
(ख) खुसरो ने काव्य रचा लोकभाषा में।
(ग) अंतिम रचना थी उनकी यह।
(घ) गुरु के संपर्क में आए वे यहीं।
(ङ) खुसरो भी मत अनुयायी इसी के बन गए।
उत्तर
(क) खुसरो के पिता एक जागीरदार थे।
(ख) खुसरो ने लोकभाषा में काव्य रचा।
(ग) उनकी यह अंतिम रचना थी।
(घ) वे यहीं गुरु के सम्पर्क में आए।
(ङ) खुसरो भी इसी मत के अनुयायी बन गए।

प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएं

1. “परमात्मा जब मुझसे पूछेगा कि तुम मेरे लिए क्या लाए हो, तो मैं खुसरो को पेश कर दूंगा।” ये उद्गार प्रसिद्ध संत हजरत निजामुद्दीन औलिया के अपने शिष्य के प्रति थे। गुरु कहा करते ये-“अगर कब्र में दो लोगों को दफन किया जाता, तो मैं चाहता कि खुसरो को मेरे साथ ही दफन किया जाए। ऐसी आत्मीय गुरुकृपा के पात्र थे अमीर खुसरो।

शब्दार्थ:
पेश-प्रस्तुत। उद्गार विचार। आत्मीय अपने लोग।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिन्दी सामान्य) भाग-8′ के पाठ-10 ‘अमीर खुसरो’ से ली गई हैं।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने अमीर खुसरों की महान्ता को बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या:
अमीर खुसरो के गुरु महान् और प्रसिद्ध सत हजरत निजामुद्दीन औलिया थे। वे खुसरो के प्रति अपार और एकमात्र प्रेमभाव रखते थे। इससे सस्पष्ट करने के लिए उन्होंने एक बार कहा भी था-जब वे परमात्मा के पास जायेंगे और परमात्मा उनसे पूछेगा कि वे उसके लिए क्या लायेंगे, तो वे उससे यही कहेंगे कि वे खुसरो को उसके लिए लाये हैं। गुरु संत हजरत निजामुद्दीन औलिया का प्रेमभाव और अपनापन खुसरो के प्रति एकमात्र भरा हुआ था। वे इसे सुस्पष्ट रूप से कहा करते थे-‘यों तो एक कब्र में एक ही आदमी को ही दफ़न किया जाता है। अगर एक ही जगह दो आदमियों को दफन किया जाना संभव हो तो ये चाहेंगे कि उनके साथ ही खसरो को भी दफ़न कर दिया जाए। इससे यह सिद्ध होता है कि खुसरी अपने गुरु के अनन्य एकमात्र सबसे बड़ा कृपा-पात्र थे।

विशेष:

  • खुसरो की बेजोड़ विशेषता बतलायी गयी है।
  • भाव आकर्षक है।

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 7 Ham bhi Sikhe Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 7 Ham bhi Sikhe Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 7 Ham bhi Sikhe Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 7 हम भी सीखें प्रश्न उत्तर

प्रश्न-अभ्यास

अनुभव विस्तार

MP Board Class 8 Hindi Chapter 7 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) सूरज हमें रोशनी देता – 1. निर्मल जल दिन-रात बहाते
(ब) बिन अभिमान पेड़ देते हैं – 2.अन्न उगाती धरती प्यारी
(स) गहरी नदियाँ, निर्झर नाले – 3. बीज, फल, फूल, ठण्डी छाया
(द) सबका पालन करने वाली – 4. तारे शीतलता बरसाते
उत्तर-
(अ) – 1
(ब) – 2
(स) – 3
(द) – 4

(ख) दिए गए विकल्पों से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए-
(अ) अपने लिए सभी जीते हैं …………………………………. मरना सीखें। (औरों के हित, दूसरों के हित)
(ब) चाँद बाँटता …………………………………. सबको, बादल वर्षा जल दे जाते। (अमृत, चाँदनी)
(स) ऊँचे-नीचे …………………………………. ही तो, इन सोतों के जनक कहाते। (पहाड़, पर्वत)
(द) ऐसे ही त्यागी बनकर हम, बूंद-बूंद कर …………………………………. सीखें। (घटना, झरना।)
उत्तर-
(अ) औरों के हित,
(ब) अमृत,
(स) पर्वत,
(द) झरना।

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Class 8 Hindi Chapter 7 MP Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) कुदरत हमें क्या सिखाती है?
(ब) तारे हमें क्या देते हैं?
(स) धरती क्या कार्य करती है?
उत्तर-
(अ) कुदरत हमें परोपकार करना सिखाती है।
(ब) तारे हमें शीतलता देते हैं।
(स) धरती सबका पालन-पोषण करती है।

MP Board Class 8th Hindi Chapter 7 प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न

(अ) पर्वतों को सोतों का जनक क्यों कहा गया है?
उत्तर-
पर्वतों से बड़ी-बड़ी गहरी नदियाँ निकलती हैं। पर्वतों से कई प्रकार के छोटे-बड़े झरने निकलते हैं। यही नहीं पर्वतों से ही कई प्रकार के छोटे-बड़े नाले निकलते हैं। इन नदियों, झरनों और नालों में रात-दिन स्वच्छ जल बहता रहता है। इस प्रकार पर्वतों से नदियों, झरनों और नालों के निकलने के कारण पर्वतों को इनका जनक कहा गया है।

(ब) पेड़ों को दधीचि क्यों माना गया है?
उत्तर-
पेड़ हर युग में अपना सब कुछ न्यौछावर परोपकार के लिए करते रहते हैं। चाहे कोई मौसम अर्थात् कठिन समय क्यों न हो, वे परोपकार करने से पीछे नहीं हटते हैं। चूँकि इनका त्याग – बलिदान महर्षि दधीचि के ही समान होता है। इसलिए उन्हें महर्षि दधीचि माना गया है।

(स) जुगनू से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर-
यद्यपि जुगनू आकर-प्रकार में बहुत ही छोटा होता है। फिर भी हमें रोशनी थोड़ा-थोड़ा करके ही सही, देने से कभी पीछे नहीं हटता है। इस प्रकार वह अंधकार को दूर करके हमें प्रकाश देने में लगा रहता है। फलस्वरूप हमें उससे यह सीख मिलती है कि परोपकार करने के लिए बड़े-छोटे का महत्त्व नहीं होता है। दूसरी बात यह कि हमें जितना भी हो सके, परोपकार करते ही रहना चाहिए।

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भाषा की बात

Hindi Chapter 7 Class 8 MP Board प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएकुदरत, अमृत, दधीचि, निर्मल, पर्वत, त्यागी।
उत्तर-
कुदरत, अमृत, दधीचि, निर्मल, त्यागी।

Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 7 प्रश्न 2.
सही वर्तनी वाले शब्दों पर गोला लगाइए
1. सिखती, सखाती, सिखाती, सीखाति
2. वरषा, वरीषा, वर्षा, वार्ष
3. जुगनू, जुगन, जुगुन, जूगनू,
4. अंधकर, अंधाकार, अंधकार, अधंकारा।
उत्तर-
सही वर्तनी
1. सिखाती,
2. वर्षा,
3. जुगनू,
4. अंधकार।

Class 8 MP Board Hindi Chapter 7 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में उचित स्थान पर अनुनासिक के चिह्न () का प्रयोग कीजिए

माग, टाग, जाच, तागा, ऊट, नदिया, बाटना।

उत्तर-

माँग, टाँग, जाँच, ताँगा, ऊँट, नदियाँ, बाँटना।

Chapter 7 Hindi Class 8 MP Board प्रश्न 4.
कोष्ठक में दिए गए शब्द की आवृत्ति से शब्द बनाकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
…………………………… चलता भैया। (आगे)
…………………………… आई गया। (पीछे)
…………………………… लो घास खिलाई। (हरी)
…………………………… उसने वह खाई। (खुशी)
उत्तर-
आगे-आगे – चलता भैया।
पीछे-पीछे – आई गैया।
हरी-हरी – लो घास खिलाई।
खुशी-खुशी – उसने वह खाई।

Class 8 Chapter 7 Hindi MP Board प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों के विपरीतार्थी शब्द लिखिएअग्रज, सुगंध, आदि, आदान।
उत्तर-
शब्द – विपरीतार्थी शब्द
अग्रज – अनुज
सुगंध – दुर्गंध
आदि – अंत
आदान – प्रदान

Class 8th Hindi Chapter 7 MP Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों में ‘अभि’ उपसर्ग का प्रयोग करते हुए नए शब्द बनाइए-
ज्ञान, नंदन, यान, रूचि, नेता, मत
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 7 हम भी सीखें 1

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♦ प्रमुख पद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1.

कुदरत हमको रोज सिखाती, जग-हित में कुछ करना सीखें।
अपने लिए सभी जीते हैं, औरों के हित मरना सीखें।

शब्दार्थ-कुदरत-प्रकृति। जगह-हित-संसार की भलाई। औरों-दूसरों। हित के लिए।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) के भाग-8 के पाठ-7 ‘हम भी सीखें से ली गई हैं। इन पंक्तियों के कवि श्री गोपाल कृष्ण कौल हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने प्रकृति से प्रेरणा लेने का उपदेश देते हुए कहा है कि

व्याख्या-प्रकृति हमें यह रोज-ही-रोज पाठ पढ़ाती रहती है कि हम संसार में एक खास उद्देश्य से आए हैं। वह यह कि हम इस संसार के लिए कुछ करना सीखें। यह तो हम जानते हैं कि अपनी भलाई के लिए तो सभी कछ-न-कछ करते रहते हैं। लेकिन दूसरों की भलाई के लिए शायद ही कोई कुछ करता है। इसलिए हमें प्रकृति की तरह दूसरों की भलाई के लिए अपने जीवन को लगाना चाहिए।

विशेष-

  • परोपकार करने की सीख दी गई है।
  • तुकांत शब्दावली है।

2.

सूरज हमें रोशनी देता, तारे शीतलता बरसाते,
चाँद बाँटता अमृत सबको, बादल वर्षा-जल दे जाते।
जुगनू ज्यों थोड़ा-थोड़ा ही, अंधकार हम हरना सीखें।

शब्दार्थ-रोशनी-प्रकाश। शीतलता-ठंढ़क, आनंद। संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने सूरज, तारे, चाँद, बादल और जुगनू से परोपकार करने की प्रेरणा लेने की सीख देते हुए कहा है कि-

व्याख्या-सूरज हमें रोशनी (प्रकाश) देकर जीवन प्रदान करता है, तो तारे हमें शीतलता प्रदान करते हैं। इसी प्रकार चाँद अपनी किरणों से हमें अमृत प्रदान करता है, तो बादल जल की बरसा कर हमारी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। जुगनू भले ही थोड़ी-थोड़ी और कहीं-कहीं रोशनी करता है, फिर भी वह अंधकार को दूर करने में लगा ही रहता है। इस प्रकार प्रकृति के इन स्वरूपों से प्रेरणा लेकर हमें भी परोपकार करना चाहिए।

विशेष-

  • परोपकार करने की सीख आकर्षक रूप में है।
  • उदाहरण शैली है।

3.

बिन अभिमान पेड़ देते हैं, बीज, फूल, फल ठण्डी छाया।
ये दधीचि बनकर हर युग में, न्यौछावर कर देते काया।।
मौसम चाहे कैसा भी हो, तरु की तरह निखरना सीखें।

शब्दार्थ-अभिमान-घमंड। बिन-बिना, अकारण। न्यौछावर -त्याग। काया-शरीर। एक पौराणिक कथा के अनुसार दधीचि ऋषि ने अस्त्र बनाने के लिए अपनी हड्डियाँ तक देवताओं को दान कर दी थीं। इन हड्डियों से वज्र बनाया गया जिससे इंद्र ने राक्षसों को परास्त किया।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने प्रकृति की ही बिना किसी घमंड करके परोपकार करने की सीख देते हुए कहा है कि

व्याख्या-हम यह रोज ही देखते हैं कि पेड़-पौधे बिना किसी घमंड के ही हमें बीज, फूल और फल देते रहते हैं। यही नहीं वे बड़ी सुखद ठंडी छाया भी हमें देते रहते हैं। इसी प्रकार वे महर्षि दधीचि की तरह हरेक समय में अपना सब कुछ परोपकार में लगाते रहते हैं। मौसम चाहे जो कुछ भी बुरा और खराब क्यों न हो हमें तो पेड़ की तरह ही परोपकार करना नहीं भूलना चाहिए।

विशेष-

  • पेड़-पौधों की तुलना महर्षि दधीचि से की गई है।
  • लय और संगीत का सुंदर मेल है।

4.

गहरी नदियाँ, निर्झर, नाले, निर्मल जल दिन-रात बहाते।
ऊँचे-नीचे पर्वत ही तो, इन सातों के जनक कहाते।
ऐसे ही त्यागी बनकर हम, बूंद-बूंद कर झरना सीखें।

शब्दार्थ-निर्झर-झरने। निर्मल-स्वच्छ। स्रोतों-झरनों। जनक-पिता, जन्म देने वाला।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने गहरी नदियों, नालों और झरनों के त्याग को बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या-बड़ी-बड़ी नदियाँ, नाले और झरने रात-दिन दूसरों के लिए ही साफ और सुंदर जल बहाते रहते हैं। इनको जन्म देने वाले बड़े-बड़े ऊँचे-ऊँचे पर्वत ही तो हैं। इनकी तरह त्यागी-बलिदानी बनकर हम दूसरों को सुख और जीवन देने के लिए अपने जीवन-रस की एक-एक बूँद को टपकाते रहना चाहिए।

विशेष-

  • हमेशा ही परोपकार करते रहने की सीख दी गयी है।
  • भाषा सरल है।

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5.

सबका पालन करने वाली, अन्न उगाती धरती प्यारी।
उथल-पुथल खुद ही सह लेती, महकाती जीवन फुलवारी।
जीवन देती प्राणवायु बन, चारों ओर विचरना सीखें।।

शब्दार्थ-उगाती-पैदा करती। उथल-पुथल-उलट-पुलट,. हेर-फेर। महकाती-सुगंध देती। प्राणवायु-संजीवनी। विचरना-घूमना, फिरना।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने धरती को माँ के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा है कि-

व्याख्या-धरती सचमुच में प्यारी माँ की तरह है। यह सबका पालन-पोषण करने के लिए ही तरह-तरह के अनाज को पैदा करती है। जब कभी कोई उलट-फेर अर्थात् कठिन और दुखद घटना होती है, उसे यह स्वयं ही सह लेती है। लेकिन सबके जीवन की फुलवारी को सुगंधित करने से नहीं रुकती है। इस प्रकार यह सबको हमेशा ही संजीवनी देती रहती है। हमें चारों ओर स्वतंत्र रूप से विचरने-घूमने की शिक्षा इससे अवश्य लेनी चाहिए।

विशेष-

  • धरती को प्यारी माँ की तरह महत्त्व दिया गया है।
  • यह अंश उपदेशात्मक है।

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 17 Vasiyatnama Ka Rahasya Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 17 Vasiyatnama Ka Rahasya Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 17 Vasiyatnama Ka Rahasya Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 17 वसीयतनामे का रहस्य प्रश्न उत्तर

 वसीयतनामे का रहस्य बोध प्रश्न

Class 8 Hindi Chapter 17 MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
दूरदर्शी-दूर तक की बात सोचने वाला; न्यायप्रियन्याय (इन्साफ) चाहने वाला; निष्पक्ष = बिना भेदभाव के; विवाद – झगड़ा; जटिल = कठिन; जायदाद = सम्पत्ति; वसीयत = वसीयत सम्बन्धी लिखित आदेश।

MP Board Class 8 Hindi Chapter 17 प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
(क) वसीयतनामे का अर्थ समझाइए।
उत्तर
सम्पत्ति के बँटवारे का लिखित आदेश वसीयतनामा कहा जाता है।

(ख) गाँव का वयोवृद्ध व्यक्ति किस विशिष्ट कार्य के लिए प्रसिद्ध था ?
उत्तर
गाँव का वयोवृद्ध व्यक्ति अपनी बुद्धिमानी, दूरदर्शिता व न्यायप्रियता के लिए प्रसिद्ध था। वह झगड़ों और विवादों का निपटारा निष्पक्षता से करता था। वह एक न्यायप्रिय पंच के रूप में चारों ओर प्रसिद्ध था।

(ग) वसीयतनामे में जायदाद कितने पुत्रों को बाँटने का संकेत था?
उत्तर
वसीयतनामे में जायदाद के तीने हिस्से करके उसे तीन भाइयों (पुत्रों) में बाँट दिया जाय, परन्तु उस वसीयतनामे में यह नहीं लिखा था कि किस भाई को (पुत्र को) हिस्सा न दिया जाए।

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(घ) बँटवारे का अन्तिम निर्णय किसने किया ?
उत्तर
बँटवारे का अन्तिम निर्णय महाराजा ने किया।

(ङ) राजा के प्रथम दो महलों में जो दो लोग मिले, वे कौन थे?
उत्तर
राजा के प्रथम दो महलों में जो दो लोग मिले, उनमें क्रमश: सत्रह-अठारह वर्ष का एक युवक और उन्नीस-बीस वर्षीय अद्वितीय सुन्दर कन्या थी।

(च) पंचों को किस बात की शंका थी?
उत्तर
पंचों को इस बात की शंका थी कि वृद्ध किसान के तीन बेटे असली है व एक बेटा उसका नहीं है। तभी तो उसने अपनी जायदाद के तीन हिस्से करने की बात वसीयत में लिखी है।

(छ) वसीयतनामे में क्या लिखा था ?
उत्तर
वसीयतनामे में दो बातें लिखी हुई थीं। पहली सम्पूर्ण जायदाद के तीन हिस्से कर उसे तीन भाइयों में बाँट दिया जाए, लेकिन यह नहीं लिखा था कि किस भाई को हिस्सा न दिया जाए। दूसरी-जो पंच इस बात का फैसला करे उसके साथ बेटी का विवाह कर दिया जाए।

Bhasha Bharti Class 8 Chapter 7 प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए(क) झगड़े का कारण क्या था?
उत्तर
चारों भाई जायदाद के बँटवारे को लेकर आपस में झगड़ने लगे। जायदाद के तीन हिस्से थे और हिस्सेदार थे चार। तीन हिस्से को चार भाइयों में किस प्रकार विभाजित किया जाए। उन चार भाइयों में से कोई एक भाई अपना हिस्सा छोड़ देता तो न्याय हो जाता परन्तु कोई भी अपना हक छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। बुद्धिमान पिता ने इस तरह की वसीयत क्यों लिखी ? इसमें कोई न कोई रहस्य अवश्य होगा।

(ख) गाँव वालों को वसीयत के बारे में जानकर आश्चर्य क्यों हुआ?
उत्तर
गाँव वालों को जब वसीयतनामे के बारे में जानकारी हुई तो उन्हें आश्चर्य हुआ क्योंकि वसीयतनामे में जायदाद का बँटवारा तीन हिस्सों में किया था जबकि उस वृद्ध किसान के चार पुत्र थे। जायदाद का बँटवारा तो चारों पुत्रों में बराबर ही होना चाहिए था। गाँव वाले लोग सोचने लगे कि इतने बुद्धिमान व्यक्ति ने इस तरह की वसीयत क्यों लिखी अवश्य ही इसमें कोई रहस्य की बात होगी। अत: गाँववासियों ने विवाद को बहुत ही कठिन समझा। इसलिए उन्होंने उन चार भाइयों को वसीयतनामे के रहस्य को समझने के लिए गाँव में पंचायत बुलाने की सलाह दी।

(ग) गाँव के वृद्ध व्यक्ति ने राजा से कौन-सी दो बातें पूछीं?
उत्तर
गाँव के वृद्ध व्यक्ति ने राजा से दो बातें बड़ी विनम्रता से पूर्थी

  1. पहली बात यह कि अब वे महल के पास से गुजर रहे थे तो उन्हें एक युवक मिला था। उस युवक से जब आपके (राजा के) बारे में पूछा तो उस युवक ने उन्हें बताया (गाँव के वृद्ध व्यक्ति को बताया) कि राजा को मरे हुए तीन साल हो गए हैं।
  2. दूसरी बात यह कि जब वे दूसरे महल के पास से गुजर रहे थे तो वहाँ उन्हें एक रूपवती कन्या मिली। उसने उन्हें (गाँव के वृद्ध व्यक्ति को) बताया कि आप (राजा) अन्धे हो गए हैं। उपर्युक्त दोनों की बातों का क्या रहस्य है ?

(घ) राजा ने तीनों भाइयों को अलग-अलग ले जाकर क्या कहा ?
उत्तर
राजा तीनों भाइयों को अलग-अलग ले गये और हर एक को अपनी तलवार देकर कहा कि वह शेष तीनों की हत्या उसकी तलवार से कर सकता है परन्तु इन तीनों ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया। वे अपने-अपने हिस्से की जायदाद छोड़ने के लिए तैयार हो गये।

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(ङ) क्या तीनों भाई राजा के प्रस्ताव से सहमत थे?
उसर
तीनों भाई राजा के प्रस्ताव से सहमत नहीं थे। वे जमीन जायदाद के लालच में अपने भाइयों की हत्या करना नहीं चाहते थे। वे अपने इस फैसले पर अडिग थे। वे सभी अपने हिस्से की जायदाद को अपने अन्य भाइयों के लिए छोड़ने के लिए तैयार थे। उनके अन्दर त्याग की भावना उच्च स्तर की थी और वे अपने भाइयों को आपस में फलता-फूलता देखना चाहते थे।

(च) चौथा भाई राजा के द्वारा दिए गए प्रस्ताव से क्या सोचकर सहमत हो गया ?
उत्तर
महाराजा चौथे भाई को किसी एकान्त कमरे में ले गए। राजा ने उसे अपनी तलवार दे दी और सलाह दी कि वह अपने शेष तीन भाइयों को उनकी तलवार से कत्ल कर दे। वह चौथा भाई अपने तीन भाइयों को कत्ल करने के लिए तैयार हो गया क्योंकि उसने सोच लिया था ऐसा अवसर, जो उसे हाथ लगा है कि उसके लिए बहुत ही शुभ है। वह शीघ्र ही धनवान हो जायेगा। अपने भाइयों का कत्ल करके उसे पूरी जायदाद मिल जाएगी। इसके अतिरिक्त उसका विवाह भी महाराजा की सुन्दर बहन से हो जाएगा। इस तरह के विचारों को सोचकर चौथा भाई राजा के द्वारा दिए गए प्रस्ताव से सहमत हो गया।

(छ) राजा ने समस्या का निदान कैसे किया ?
उत्तर
धनवान होने तथा महाराजा की सुन्दर बहन के साथ विवाह होने के रंगीन सपने देखते हुए उस चौथे भाई को महाराजा | ने जेल में डाल दिया। महाराजा बाहर निकलकर आए। उन्होंने उनके साथियों को पूरी बात बतलाई तथा उन्हें समझा दिया। सभी लोग इस निर्णय से बहुत ही प्रसन्न थे । वे सभी सोचने लगे कि छोटा भाई अपने पिता को इसी तरह कष्ट देता होगा। इसलिए ही उन्होंने (उनके पिता ने) अपनी जायदाद के तीन हिस्से किए थे। तीन भाइयों ने अपने-अपने हिस्से की जायदाद प्राप्त कर ली और समस्या का निदान बड़ी चतुराई से कर दिया।

Class 8 Hindi Chapter 17 प्रश्न 4.
सही विकल्प चिह्नित कीजिएवसीयतनामे के विषय में जानकर पंचों को शक था
(1) वसीयतकर्ता मूर्ख था
(2) भूल से उससे गलती हो गई
(3) तीन बेटे असली हैं और एक बेटा उसका नहीं है।
उत्तर
(3) तीन बेटे असली हैं और एक बेटा उसका नहीं है।

 वसीयतनामे का रहस्य भाषा-अध्ययन

Class 8 Chapter 17 Hindi प्रश्न 1.
जायदाद विदेशी शब्द है, इसके स्थान पर मानक हिन्दी शब्द सम्पत्ति होता है। इसी प्रकार इस पाठ में प्रयुक्त निम्नलिखित शब्दों के मानक हिन्दी शब्द लिखिए
वसीयतनामे, हिस्सा, हिस्सेदार, हक, राहगीर, शानदार, फैसला, मामला, गुजर, राज, होशियार।
उत्तर
वसीयतनामे सम्पत्ति का लिखित आदेश; हिस्सा भाग; हिस्सेदार = भागीदार; हक अधिकार; राहगीर = पथिक शानदार = चमकीला, तेज; फैसला = न्याय; मामला = विषय; गुजर = व्यतीत राजरहस्य होशियार = चतुर, सावधान।

Class 8 Bhasha Bharti प्रश्न 2.
इस पाठ में आने वाले विभिन्न कारकों के उदाहरण छाँटकर लिखिए।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 17 वसीयतनामे का रहस्य 1

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 8 प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों में से साधारण वाक्य, मिश्रित वाक्य और संयुक्त वाक्य अलग करके लिखिए
(क) एक गाँव में एक किसान रहता था।
(ख) जायदाद के तीन हिस्से थे और चार हिस्सेदार थे।
(ग) यदि एक भाई अपना हिस्सा छोड़ देता तो न्याय हो जाता।
(घ) वे सोचने लगे कि इतने बुद्धिमान व्यक्ति ने ऐसी वसीयत क्यों लिखी?
(ङ) एक दिन पंचायत लगी थी।
(च) महाराजा हंसते हुए बोला और उठकर खड़ा हो गया।
उत्तर
(क) साधारण वाक्य
(ख) संयुक्त वाक्य
(ग) मिश्रित वाक्य
(घ) मिश्रित वाक्य
(ङ) साधारण वाक्य
(च) संयुक्त वाक्य।

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 5 प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्द,शब्द युग्म हैं या पुनरुक्त ? उनके सामने लिखिए
(क) दूर-दूर, (ख) तरह-तरह, (ग) राम-राम, (घ) सत्रह-अठारह, (ङ) युवक-युवती, (च) उन्नीस-बीस, (छ) अपना-अपना, (ज) एक-दो।
उत्तर
(क) पुनरुक्त
(ख) पुनरुक्त
(ग) पुनरुक्त
(घ) शब्द युग्म
(ङ) शब्द युग्म
(च) शब्द युग्म
(छ) पुनरुक्त
(ज) शब्द युग्म।

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Vasiyatnama Ka Rahasya प्रश्न 5.
पाठ में दिए गए प्रसंग के अनुसार सही जोड़े (विशेषण-विशेष्य)  बनाइए।
वर्ग (क) – वर्ग (ख)
(1) दूसरा – (अ) मामला
(2) अद्वितीय – (ब) स्वर
(3) शान्त – (स) महल
(4) पूरा – (द) कन्या
(5) रंगीन – (य) सुन्दरी
(6) रूपवती – (२) सपने
उत्तर-(1)→ (स), (2) → (य), (3) + (ब), (4)+ (अ),(5)+ (र),(6)→(द)

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 7 प्रश्न 6.
उदाहरण की तरह शब्दों के रूप परिवर्तित कीजिए
उदाहरण-दुकान-दुकानें, कपड़ा-कपड़े। बहन, भाई, युवक, युवती, महल, सपना, मामला, राहगीर।
उत्तर

  1. बहनें
  2. भाइयों
  3. युवकों
  4. युवतियाँ
  5. महलों
  6. सपने
  7. मामलों
  8. राहगीरों।

कक्षा 8 हिंदी पाठ 17 के प्रश्न उत्तर प्रश्न 7.
शिक्षक की सहयता से इस पाठ के कुछ महत्त्वपूर्ण वाक्यों को अनुतान के साथ (भिन्न-भिन्न ढंग से)
पढ़िए और उनके बोलने से होने वाले अर्थ परिवर्तन को समझिए।
उत्तर
विद्यार्थी आदरणीय गुरुजी की मदद से स्वयं अभ्यास करें।

 वसीयतनामे का रहस्य परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) एक दिन पंचायत लगी हुई थी। तभी वहाँ से एक राहगीर निकला। उसने पंचों से राम-राम की और बैठ गया। पंचों ने राहगीर को पूरा मामला समझाया और सहायता करने को कहा। राहगीर को भी आश्चर्य हुआ। उसने पंचों को समझाया कि मामला इतना जटिल है कि इसका फैसला केवल महाराजा ही कर सकता है। उसने उन्हें महाराजा का पता भी बता दिया।

शब्दार्थ-पंचायत लगी हुई थी = पंचायत जुड़ी हुई थी; तभी = उसी समय; राहगीर = पथिक; राम = राम की = अभिवादन किया; आश्चर्य = अचम्भा; मामला = समस्या; जटिल = कठिन, उलझी हुई; फैसला = न्याय।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘वसीयतनामे का रहस्य से अवतरित है। इसके लेखक डॉ. परशुराम शुक्ल हैं।

प्रसंग-इस गद्यांश में पिता द्वारा की गई वसीयतनामे की कठिन समस्या के विषय में एक राहगीर के द्वारा उपाय बताया गया है।

व्याख्या-वसीयतनामे के रहस्य को (छिपी बात को) समझने के लिए एक दिन पंचायत बुलाई गई थी। पंचायत में सभी पंच उस वसीयतनामे की भाषा के अर्थ को समझ कर निर्णय करने का उपाय कर रहे थे परन्तु उन पंचों की समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था। उसी समय वहाँ से एक पथिक अपने मार्ग से चला जा रहा था। उसने समस्या को सुलझाने के लिए जुटी पंचायत के सदस्यों को राम-राम कहकर अभिवादन किया और इसके बाद वहाँ चुपचाप बैठ गया। पंचायत के सदस्यों ने उस राहगीर को समस्या के विषय में समझाया तथा उससे प्रार्थना की कि वह भी उनकी (पंचायत के सदस्यों की) सहायता करे जिससे वसीयतनामे में लिखी भाषा के अर्थ को पूर्ण रूप से स्पष्ट समझा जा सके और सम्पत्ति का बँटवारा उसके अनुसार किया जा सके।

जब पथिक को भी वसीयतनामे में लिखी भाषा का अर्थ समझाने के लिए सभी पंचों ने कहा तो वह भी अचम्भे में पड़ गया। उसने कोशिश की परन्तु वह भी वसीयतनामे में लिखित भाषा के अर्थ को नहीं समझ पाया, इसलिए उस पथिक ने अपना मत स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका फैसला (न्याय) तो महाराजा ही कर सकते हैं, कोई साधारण आदमी नहीं। उस पथिक ने उन पंचों को महाराजा का पता भी बता दिया कि वे महाराजा के पास उस पते पर मिल सकते हैं।

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(2) महाराजा बड़े निर्भीक, साहसी और निडर थे। उन्होंने अपनी रक्षा के लिए एक भी सैनिक नहीं रखा था। वह हमेशा प्रजा के सुख और आराम के लिए ही कार्य करते थे। उनके पास दूर-दूर से एक से एक जटिल मामले आते जिन्हें वह कुछ ही पलों में इस बुद्धिमानी से हल – कर लेते कि लोग देखते रह जाते।

शब्दार्थ-निर्भीक = निडर, भय रहित; साहसी = हिम्मत वाले; सैनिक = सेना का जवान; प्रजा = अपने राज्य के लोगों के लिए: जटिल-कठिन, उलझी हुई; मामले समस्याएँ कुछ ही पलों में = कुछ ही क्षणों में बुद्धिमानी- समझदारी; हल कर लेते = सुलझा लेते; देखते रह जाते = अचम्भे में रह जाते थे, चकित रह जाते।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-महाराजा की बुद्धिमानी के विषय में बताया जा

व्याख्या-राहगीर पंचायत के सदस्यों को बताने लगा कि महाराजा बहुत ही निडर हैं। उनमें किसी भी समस्या का सामना करने की बड़ी हिम्मत है। वे किसी से भी नहीं डरते थे। वे अपनी सुरक्षा के लिए भी चिन्ता नहीं करते थे, अत: उन्होंने कोई भी सैनिक (सेना का सिपाही) अपनी रक्षा करने के लिए नियुक्त नहीं किया था। वे सदैव अपने राज्य की जनता के सुख की चिन्ता। करते थे। प्रजा के आराम के लिए ही कार्य करते थे। वे सदा उन लोगों से घिरे रहते थे जो अपनी कठिन समस्याओं को लेकर उनको सुलझाने के लिए उनके पास आते थे। उन लोगों की उन समस्याओं को बहुत कम समय में ही सुलझा देते थे। वे बहुत ही चतुर थे। उनके समस्याओं को सुलझाने के तरीके को देखकर सभी लोग अचम्भे में पड़ जाते।

MP Board Class 8 Hindi Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 6 Hira kuni Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 6 Hira kuni Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 6 Hira kuni Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 6 हीरा-कुणी प्रश्न उत्तर

प्रश्न अभ्यास

अनुभव विस्तार

MP Board Class 8 Hindi Chapter 6 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क)सही जोड़ी बनाइए
(अ) बछिया भूखी रह जाती थी
1. दूध के लिए तरसती रहती थी।
(ब) हीरा मन-ही-मन रो-रोकर कहने लगी
2. राजा दूध पीकर मौज मनाता था।
(स) राजा के पत्थर दिल पहरेदार ने द्वार नहीं खोला
3. काश, मुझे पंख मिल जाते।
(द) बछिया अपनी माँ को नहीं पा सकती थी
4. बालक को दूध पिलाने के लिए माँ की छाती फटने लगी।
उत्तर-
(अ) 2
(ब) 3
(स) 4
(द) 1

Class 8 Hindi Chapter 6 MP Board प्रश्न 2.
दिए गए विकल्पों में से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(अ) वह दूध दुहकर बेचने के लिए राजा के ………………….. में चली जाती थी। (घर, किले)
(ब) राजा कुणी ………………….. का दूध पीकर आनंद मनाता था। (गाय, बकरी)
(स) ………………….. का फाटक बंद कर दिया गया। (किले, भवन)
(द) राजा ने हीरा से सारी ………………….. सुनी। (कविता, कहानी)
उत्तर-
(अ) किले,
(ब) गाय,
(स) किले,
(द) कहानी।

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Class 8 Chapter 6 Hindi MP Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) ग्वालिन का नाम क्या था?
(ब) दूध दुहने के समय कुणी गाय रह-रहकर किसे पुकारती थी?
(स) हीरा किले से वापिस कब लौट आती थी?
(द) राजा ने हीरा को जागीर में क्या दिया?
उत्तर-
(अ) ग्वालिन का नाम हीरा था।
(ब) दूध दुहने के समय कुणी गाय रह-रहकर अपनी बछिया को पुकारती थी।
(स) हीरा किले से वापस रात होने से पहले ही लौट आती थी।
(द) राजा ने हीरा को जागीर में एक गाँव दे दिया।

Hindi Chapter 6 Class 8 MP Board प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) दूध दुहते समय हीरा बछिया के साथ कैसा व्यवहार करती थी?
उत्तर-
दूध दुहते समय हीरा बछिया के साथ बड़ा ही कठोर व्यवहार करती थी। बछिया दौड़कर दूध पीने के लिए आती तो हीरा उसे लौटा देती। इससे बछिया अपनी माँ का दूध नहीं पा सकती थी। फलस्वरूप वह अपनी माँ का दूध पीने के लिए तरसती और बिलखती रहती थी। लेकिन हीरा उधर कभी देखती भी नहीं।

(ब) किले का फाटक बंद होने पर हीरा पहरेदार से क्या बोली?
उत्तर-
किले का फाटक बंद होने पर हीरा पहरेदार से बोली-

“द्वार खोलो! मेरा मुन्ना भूखा है, तुम्हारे पैर पड़ती हूँ, फाटक खोल दो। अरे भाई, एक बार द्वार खोल दो।”

(स) राजा का मन क्यों पिघला?
उत्तर-
राजा ने हीरा से यह सारी कहानी सुनी कि किस प्रकार वह स्वयं के जीवन को संकट में डालकर, अपने बच्चे के पास जा पहुंची थी। उससे राजा का मन पिघल गया।

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भाषा की बात

MP Board Class 8th Hindi Chapter 6 प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएमहाराष्ट्र, रायगढ़, कोषाध्यक्ष, पत्थर, चट्टानों।
उत्तर-
महाराष्ट्र, रायगढ़, कोषाध्यक्ष, पत्थर, चट्टानों।

Class 8 MP Board Hindi Chapter 6 प्रश्न 2.
सही वर्तनी वाले शब्दों पर गोला लगाइए
(अ) कुणी, कूणी, कुणि, कूणि
(ब) बछिया, बछीया, बाछिया, बछिय
(स) पेहरदार, पहेरदार, पेहारदार, पहरेदार
(द) ग्वलिन, ग्वालीन, गवालिन, ग्वालिन
उत्तर-
(अ) कुणी,
(ब) बछिया,
(स) पहरेदार
(द) ग्वालिन।

Class 8th Hindi Chapter 6 MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित गंद्याश को ध्यान से पढ़कर व्यक्तिवाचक, जातिवाचक और भाववाचक संज्ञाएँ छाँटकर लिखिए-
“विवेकानंद को कौन नहीं जानता? वे महान् विचारक, दार्शनिक और धार्मिक व्यक्ति थे। उनके विचार समाज का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उनके भाषणों में मधुरता, गंभीरता, मानवीयता और राष्ट्रीयता कूट-कूटकर भरी होती थी। भारत के महान् सपूतों “दयानंद सरस्वती, राजाराम मोहन राय” तथा ‘महात्मा गांधी’ जैसे महापुरुषों की सूची में उनकी गणना होती है।
उत्तर-

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा – विवेकानंद, भारत, दयानंद सरस्वती, राजाराम मोहन राय, महात्मा गाँधी
  • जातिवाचक संज्ञा – सपूत, महापुरुष
  • भाववाचक संज्ञा – मधुरता, गंभीरता, मानवीयता, राष्ट्रीयता।

MP Board Class 8 Chapter 6 Hindi प्रश्न 4.
विलोम शब्दों की सही जोड़ी बनाइए
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 6 हीरा-कुणी 1
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 6 हीरा-कुणी 2

MP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 6 प्रश्न 5.
रेखांकित संज्ञा शब्दों के स्थान पर नीचे दिए गए सर्वनामों में से उचित सर्वनाम शब्द चुनकर भरिए (वह, उसकी, उसके)
(अ) गाय का नाम था कुणी। गाय की एक महीने की बछिया थी।
(ब) हीरा के मन में बछिया के लिए दया नहीं जागती थी।
(स) राजा गाय का दूध पीकर आनंद मनाता था। राजा दयालु नहीं था।
उत्तर-
(अ) गाय का नाम था कुणी। उसकी एक महीने की बछिया थी।
(ब) उसके मन में बछिया के लिए दया नहीं जागती थी।
(स) राजा गाय का दूध पीकर आनंद मनाता था। वह दयालु नहीं था।

Class 8 Hindi MP Board Chapter 6 प्रश्न 6.
निम्नलिखित क्रियाओं के पूर्वकालिक क्रिया रूप बनाइए ण्ढ़ना, लिखना, हँसना, देखना, जागना, पीना, लाना।
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 6 हीरा-कुणी 3

MP Board Solutions

♦ प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. सूरज छिप गया। पक्षी पंख फैलाकर अपने बसेरों की ओर उड़ चले। किले के मध्य भाग में देव मंदिर के ऊपर साँझ का तारा दिखने लगा। हीरा रोकर मन-ही-मन कहने लगी-“काश, मुझे पंख मिल जाते और मैं अपने लाल के पास पहुँच जाती। वह दूध पिए बिना बिलख रहा होगा।”

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) के भाग-8 के पाठ-6 ‘हीरा-कुणी’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों के लेखक श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने ‘हीरा’ नामक ग्वालिन के वात्सल्य-भाव पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि-

व्याख्या-किले के अंदर बंद ‘हीरा’ अपने बच्चे के लिए तड़पने लगी। उस समय सूरज डूबना था। सभी पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौटने लगे थे। चारों ओर अंधेरा बढ़ने लगा था। हीरा ने किले के बीच में स्थित एक देव मंदिर देखा। उसने यह भी देखा कि उस मंदिर के ऊपर साँझ का तारा चमकने लगा है। इससे उसने यह समझ लिया कि अब रात हो रही है। फलस्वरूप अब अपने घर पहुँचना असंभव-सा है। वह मन-ही-मन यह अफसोस करने लगी कि उसके पास उड़ने के पंख नहीं हैं। यदि वे होते तो वह तुरंत ही यहीं से उड़कर अपने घर पहुँच जाती। फिर दूध पीने के लिए बिलख रहे अपने बेटे को दूध पिलायकर फूले नहीं समाती।

विशेष-

  • हीरा का वात्सल्य-भाव बिल्कुल स्वाभाविक और सही है।
  • भाषा की शब्दावली सरल है।

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 15 Maheshwar Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 15 Maheshwar Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 15 Maheshwar Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 15 महेश्वर प्रश्न उत्तर

महेश्वर बोध प्रश्न

Class 8 Hindi Chapter 15 Maheshwar प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोष से खोजकर लिखिए
उत्तर
संस्कृति = आचरणगत परम्परा, प्राचीन सभ्यता; पुराविद् = प्राचीन इतिहास आदि विषयों की जानकारी रखने वाला; सर्वतोन्मुखी = सभी तरह का प्रागैतिहासिक = इतिहास लिखे जाने से भी पहले के इतिहास से सम्बन्धित फलकपटल, तख्ता; अलंकरण = सजावट, पुरातात्विक = पुरातत्व सम्बन्धी उत्तरदायित्व-जिम्मेदारी; पाषाण पत्थर खननखुदाई: अवशेष = शेष भाग, वह जो बचा रहे।

MP Board Class 8 Hindi Chapter 15 प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
(क) महेश्वर का प्राचीन नाम क्या है?
उत्तर
महेश्वर का प्राचीन नाम माहेश्वरी अथवा माहिष्मती

(ख) महेश्वर मध्य प्रदेश के किस जिले में स्थित है?
उत्तर
महेश्वर मध्य प्रदेश के इन्दौर जिले में स्थित है। यह इन्दौर से लगभग 105 किलोमीटर दूर है।

(ग) महेश्वर की खुदाई में किस प्रकार की वस्तुएँ प्राप्त
उत्तर
महेश्वर की खुदाई में पुरातात्विक महत्त्व की अनेक वस्तुएँ और अवशेष प्राप्त हुए हैं।

(घ) हैहय साम्राज्य की स्थापना किसने की थी?
उत्तर
हैहय साम्राज्य की स्थापना कीर्तिवीर्य सहस्रार्जुन ने की थी।

(ङ) नर्मदा के तट पर किला और शिव का मन्दिर किसने बनवाया था?
उत्तर
नर्मदा के तट पर किला और शिव का मन्दिर महारानी अहिल्याबाई ने बनवाया था।

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Class 8 Hindi Chapter 15 MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(क) सहस्त्रार्जुन के वध का क्या कारण था ?
उत्तर
महेश्वर नगर को सूर्यवंशी राजा मान्धाता ने बसाया था। उनके बाद इस नगर पर कीर्तिवीर्य सहलार्जुन ने अपना आधिपत्य जमा लिया था। उसका साम्राज्य हैहय कहलाया और इस नगर को अपने साम्राज्य की राजधानी बनाया था। सहस्त्रार्जुन ने परशुराम जी के पिता ऋषि जमदग्नि का वध कर दिया। इसका बदला लेने के लिए भगवान परशुराम ने सहस्रार्जुन का अन कर दिया। इसके बाद यह स्थान इतिहास के गर्त में खो गया।

(ख) महारानी अहिल्याबाई के किन-किन कार्यों से । महेश्वर प्रसिद्ध हुआ?
उत्तर
इन्दौर की महारानी अहिल्याबाई ने महेश्वर को एक बार फिर से प्रसिद्धि प्रदान की। उन्हें यह स्थान बहुत ही प्रिय था।
उन्होंने इस स्थान पर नर्मदा के तट पर एक किला और भगवान शिव का विशाल मन्दिर बनवाया। यहाँ स्थित पवित्र शिवलिंग महेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है। मन्दिर में महारानी अहिल्याबाई द्वारा प्रज्वलित अखण्डदीप में यहाँ आने वाला प्रत्येक दर्शनार्थी घी डालकर स्वयं को धन्य समझता है। महेश्वर धार्मिक, पौरानिक, पुरातात्विक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सम्पदा से सम्पन्न है। महारानी अहिल्याबाई ने मराठों के शासनकाल में यहाँ सुन्दर घाटों, मन्दिरों, धर्मशालाओं तथा भवनों का निर्माण कराया। इस काल में महेश्वर का सर्वतोन्मुखी विकास हुआ। यह नगर रेशमी – साड़ियों के निर्माण के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है।

(ग) महारानी अहिल्याबाई को ‘लोकमाता’ के रूप में क्यों याद किया जाता है?
उत्तर
महारानी अहिल्याबाई ने महेश्वर नगर का सर्वतोन्मुखी विकास कराया। उन्होंने ही इसे प्रसिद्धि प्रदान करने के लिए महान् से महान् कार्य किए। नर्मदा के तटों पर सुन्दर घाटों का और मन्दिरों का निर्माण कराया। यहाँ का किला और शिवमन्दिर बहुत ही विशाल है। इस मन्दिर में दीप ज्योति निरनार जलती रहती है। इस दीप को महारानी अहिल्याबाई ने स्वयं प्रज्ज्वलित किया था। यहाँ पर देवदर्शन के लिए आने वाला प्रत्येक दर्शनार्थी परम शान्ति का अनुभव करता है। लोग प्रात: व सायं पवित्र जल वाली नर्मदा में स्नान करके नर नारी आरती की मधुर ध्वनि’ॐ नमः शिवाय:’ के मन्त्र में डूब से जाते हैं। यहाँ का वातावरण पवित्र है। यह प्राकृतिक सौन्दर्य से भरा है एवं मनोहारी है। इस सबके लिए वे महारानी अहिल्याबाई के ऋणी हैं। इसलिए उनें लोग ‘लोकमाता’ के रूप में मानते हैं।

(घ) पाषाणकालीन सभ्यता के लोग अपना जीवन किस प्रकार व्यतीत करते थे?
उत्तर
नर्मदा नदी की घाटी में पाषाणकालीन सभ्यता के पत्थर से निर्मित औजार मिले हैं। प्रागैतिहासिक काल के पुरा-अवशेषों से पता चलता है कि उस समय यहाँ के लोग घास-फूस के झोंपड़ों में या पेड़ों पर बने घरों में रहते थे। उस समय की पाई गई वस्तुओं में लाल और काले रंग के मिट्टी के बर्तनों और घड़ों के टुकड़े प्रमुख हैं। सम्भवतः वे अपनी सुरक्षा की दृष्टि से पेड़ों पर या ऊँची जमीन पर अपने घर बनाते थे। यह भी सत्य है कि पापणकाल के लोग नदियों, तालाबों आदि के किनारे ही असते रहे हैं, क्योंकि इन स्थानों पर उनकी आवश्यकता की सारी वस्तुएँ आसानी से प्राप्त हो जाती थी।

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Bhasha Bharti Class 8 Chapter 15 प्रश्न 4.
रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्दों द्वारा कीजिए
नर्मदा, रेशम, पुरातात्विक, महेश्वर।
(क) महेश्वर की खुदाई में ……. महत्व की वस्तुएँ
(ख) महारानी अहिल्याबाई ने ……… में किला और शिव मन्दिर बनवाया था।
(ग) महेश्वर की बनी ….. की साड़ियाँ प्रसिद्ध हैं।
(घ) महेश्वर ……….. नदी के किनारे बसा है।
उत्तर
(क) पुरातात्विक
(ख) महेश्वर
(ग) रेशमी
(घ) नर्मदा

महेश्वर भाषा-अध्ययन

Hindi Chapter 15 Class 8 MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और वाक्यों में प्रयोग कीजिए
आशीवाद, सहस्रार्जुन, संस्कृति, ऋषि, जमदग्नि, दर्शनार्थी, प्रज्ज्वलित, पुरातात्विक।
उत्तर
विद्यार्थी उपर्युक्त शब्दों को वीक-ठीक पढ़कर उनका शुद्ध उच्चारण करने का अभ्यास करें।
वाक्य-प्रयोग-

  1. देवदर्शन करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
  2. सहस्त्रार्जुन ने ऋषि जमदग्नि का वध कर दिया था।
  3. भारतीय संस्कृति पूरे संसार में अपना प्रभाव जमाए
  4. ऋषि धौम्य महान् त्यागी और लोकरंजक थे।
  5. जमदग्नि, भगवान परशुराम के पिता थे।
  6. शिव मन्दिर में दर्शनार्थियों की भीड़ लगी रहती है।
  7. गाँवों में सायंकाल को घर-घर में दीप प्रज्ज्वलित किए जाते हैं।
  8. महेश्वर पुरातात्विक महत्त्व का नगर है।

Lesson 8 Maheshwar Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह करके, उनके सामने समास का नाम लिखिए.
लोकमाता, मधुर ध्वनि, नर-नारी, विशाल मन्दिर, अखण्ड दीप, महारानी।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 1
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 2

Maheshwar Ka Prachin Naam Kya Hai प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्ग छाँटकर लिखिए
अखण्ड, अवशेष, प्रसिद्ध, अनुशासन, विज्ञान।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 3

भाषा भारती कक्षा 5 Solutions Chapter 15 प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के सन्धि-विच्छेद कीजिए और उनके सामने सन्धि का नाम लिखिए
महेश्वर, मनोहर, आशीर्वाद, दर्शनार्थी।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 4

Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 15 प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों में से उद्देश्य और विधेव छाँटकर लिखिए
(क) इन्दौर की महारानी अहिल्याबाई ने सुन्दर घाटों, मन्दिरों और धर्मशालाओं का निर्माण कराया था।
(ख) पाषाणकालीन सभ्यता के औजार नर्मदा के घाटों को खुदाई में मिले हैं।
(ग) महेश्वर की सिल्क साड़ियाँ बहुत प्रसिद्ध है।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 5
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 6

Class 8th Hindi Chapter 15 प्रश्न 6.
सही जोड़ी बनाइए
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 7
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 8
उत्तर
(क) → (2), (ख) → (3), (ग) → (5), (घ)→ (1), (ङ)→(4)

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Maheshwar Kis Jile Mein Hai प्रश्न 7.
प्रधानाध्यापक को एक पत्र लिखिए, जिसमें महेश्वर दर्शनीय स्थल पर भ्रमण-दल ले जाने का अनुरोध कीजिए।
उत्तर
विद्यार्थी स्वयं लिखें।

महेश्वर परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या  

(1) महेश्वर धार्मिक, पौराणिक, पुरातात्विक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सम्पदा से सम्पन्न है। यहाँ नर्मदा – घाटी में पाषाणकालीन सभ्यता के औजार मिले हैं। प्रागैतिहासिक काल के पुरा-अवशेषों से पता चलता है कि उस समय यहाँ के लोग घास-फूस के झोंपड़ों में या पेड़ों पर बने घरों में रहते थे। उस समय की पाई गई वस्तुओं में लाल और काले रंग के मिट्टी के बरतनों और घड़ों के टुकड़े प्रमुख हैं। ईसा पूर्व की चौथी सदी से लेकर पहली सदी तक का समय महेश्वर के इतिहास में महत्त्वपूर्ण है। इस समय के भवनों के अवशेष यहाँ मिले हैं। इन भवनों में ईंटों का प्रयोग किया गया

शब्दार्थ-पुरातात्विक पुरातत्व सम्बन्धी ऐतिहासिक इतिहास सम्बन्धी; सम्पदा = सम्पत्ति; सम्पन्न – युक्त, सहित; प्रागैतिहासिक = लिखित इतिहास से पहले के इतिहास से सम्बन्धित काल-युग,समय;पुरा-प्राचीन काल के अवशेष = वह जो बचा रहे, शेष भाग;
प्रमुख = मुख्य भवनों = घरों।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के पाठ ‘महेश्वर’ से अवतरित है।

प्रसंग-नर्मदा घाटी के महेश्वर नगर की प्रागैतिहासिक संस्कृति के विषय में वर्णन किया गया।

व्याख्या-महेश्वर नगर धर्म और पुराण सम्बन्धी सम्पदा से युक्त स्थान है। यह पुरातत्व सम्बन्धी, प्राचीन आचार-विचार सम्बन्धी एवं इतिहास से सम्बन्ध रखने वाली सम्पत्ति से भरपूर स्थान है। यह नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। इस नदी की घाटी में पत्थर के युग (पाषाण युग) की सभ्यता से सम्बन्ध रखने वाले औजार प्राप्त हुए हैं। इतिहास लिखे जाने की पद्धति से भी पूर्व के इतिहास सम्बन्धी समय (युग) के अति प्राचीन शेष भाग से ज्ञात होता है कि उस समय में वहाँ के रहने वाले लोग घास और फंस से बनाए गए झोंपड़ों में रहते थे अथवा वे लोग उन घरों में रहते थे जो पेड़ों पर बनाए जाते थे। ये स्थान वे हैं जब लोग अपनी सुरक्षा के लिए पेड़ों पर अपने निवास बनाते थे। नगरीय सभ्यता या गाँवों में सामूहिक रूप में रहने की सभ्यता का उस समय तक विकास नहीं हुआ था। उस युग की पाई जाने वाली वस्तुओं में लाल और काले रंग के मिट्टी के बरतन तथा घड़ों के टुकड़ें मुख्य हैं। महेश्वर नगर का इतिहास ईसा पूर्व की चौथी सदी से लेकर पहली सदी तक अति महत्त्वपूर्ण है। उस काल के भवनों के खण्डहर अभी तक अवशेष के रूप में प्राप्त हुए हैं। इन भवनों का निर्माण ईंटों से किया गया है। .

(2) मराठों के शासनकाल में महारानी अहिल्याबाई ने यहाँ सुन्दरघाटों, मन्दिरों, धर्मशालाओं तथा भवनों का निर्माण कराया। उनके काल में महेश्वर का सर्वतोन्मुखी विकास हुआ। एक बार तो मैं भूला ही जा रहा था। यहाँ की बनी रेशमी साड़ियाँ महेश्वरी साड़ियों के नाम से प्रसिद्ध हैं। महेश्वर के बारे में जितना भी लिखू कम

शब्दार्थ-निर्माण कराया = बनवाये; सर्वतोन्मुखी = सभी तरह का; विकास = बढ़ोत्तरी।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-महारानी अहिल्याबाई के द्वारा महेश्वर नगर में कराए गए विकास कार्यों के बारे में बताया गया है।

व्याख्या-मराठों के शासन काल में जो निर्माण कार्य यहाँ किया गया है, वह बेजोड़ था। महारानी अहिल्याबाई ने नर्मदा नदी के घाटों, मन्दिरों तथा धर्मशालाओं का निर्माण कराया। इसके अलावा यहाँ बहुत ही अच्छे भवनों का निर्माण किया गया। महेश्वर नगर में अपने शासन काल में सभी तरह के विकास का कार्य किया गया। लेखक यहाँ बताना नहीं भूला है कि यहाँ पर रेशम की बनी साड़ियाँ बहुत अच्छी होती हैं। इन साड़ियों को महेश्वरी साड़ियाँ कहते हैं। महेश्वर नगर के विषय में जितना भी | लिखा जाय, वह कम ही है।

MP Board Class 8 Hindi Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 8 Madhya Pradesh ke Gaurav Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 8 Madhya Pradesh ke Gaurav Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 8 Madhya Pradesh ke Gaurav Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 8 मध्य प्रदेश के गौरव प्रश्न उत्तर

प्रश्न अभ्यास

अनुभव विस्तार

Class 8 Hindi Chapter 8 MP Board प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) मध्यप्रदेश की दो – 1. भोपाल की गुलियादाई गली विभूतियाँ। में जन्में।
(ब) डॉ. शंकर दयाल शर्मा – 2. डॉ. शंकर दयाल शर्मा, अटल का जन्म बिहारी वाजपेयी।
(स) अटल बिहारी वाजपेयी – 3. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से विधि में पी-एच. डी. की।
(द) डॉ. शंकर दयाल – 4. ग्वालियर जिले में हुआ। शर्मा ने
उत्तर-
(अ) – 1
(ब) – 2
(स) – 3
(द) – 4

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MP Board Class 8 Hindi Chapter 8 प्रश्न 2.
दिए गए विकल्पों से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(अ) डॉ. शंकर दयाल शर्मा का जन्म …………………………………. ई. को हुआ था। (19 अगस्त 1918, 29 अगस्त 1928)
(ब) डॉ. शर्मा तैराकी में …………………………………. के चैम्पियन रहे थे। (विक्रम विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय)
(स) अटल बिहारी वाजपेयी की माताजी का नाम …………………………………. था। (कृष्णा देवी, राधा देवी)
(द) अटल जी के विशेष कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें …………………………………. से अलंकृत किया। (पद्मश्री, पद्मभूषण)
उत्तर-
(अ) 19 अगस्त, 1918,
(ब) लखनऊ विश्वविद्यालय,
(स) कृष्ण देवी,
(द) पद्मभूषण।

MP Board Class 8th Hindi Chapter 8 प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) डॉ. शर्मा लोगों से किस प्रकार मिलते थे?
(ब) डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने भारत के किस गरिमामय सर्वोच्च पद को सुशोभित किया था?
(स) अटल जी ने किन-किन पत्रों का संपादन किया?
(द) अटल बिहारी वाजपेयी प्रथम बार प्रधानमंत्री कब बने?
उत्तर-
(अ) डॉ. शर्मा लोगों से अपने परिवार के सदस्य की तरह मिलते थे?
(ब) डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने भारत के राष्ट्रपति गरिमामय सर्वोच्च पद को सुशोभित किया था।
(स) अटल जी ने ‘राष्ट्रधर्म’, ‘स्वदेश’, ‘पाञ्चजन्य’ और ‘वीर अर्जुन’ का संपादन किया।
(द) अटल बिहारी वाजपेयी प्रथम बार 1996 में प्रधान मंत्री बने।

Hindi Chapter 8 Class 8 MP Board प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न(अ)डॉ. शंकर दयाल शर्मा की शिक्षा के बारे में लिखिए।
उत्तर-
डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने अपने यशस्वी जीवन की शैक्षिक यात्रा में स्वयं को मेधावी छात्र के रूप में निरंतर प्रमाणित किया। आपने हिन्दी, अंग्रेजी और संस्कृत साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधियाँ प्रथम श्रेणी में प्राप्त की। लखनऊ विश्वविद्यालय से एल.एल.एम. तथा कैंब्रिज विश्वविद्यालय से कानून में पी-एच. डी. की उपाधि प्राप्त की।

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(ब) डॉ. शर्मा ने किन-किन पुस्तकों की रचना की?
उत्तर-
डॉ. शर्मा ने ‘प्रतिष्ठित भारतीय’, ‘हमारे चिंतन की मूलधारा’ और ‘देश-मणि’ पुस्तकों की रचना की।

(स) डॉ. शंकर दयाल शर्मा जन समान्य से कब मिलते थे?
उत्तर-
डॉ. शंकर दयाल शर्मा जन समान्य से प्रातः 9 बजे से अपराह्न 1:30 तक प्रतिदिन मिलते थे।

(द) अटल जी की काव्य-सृजन में रुचि कैसे जागृत हुई?
उत्तर-
अटल जी के पिता श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी अध्यापक एवं कवि थे। अपने पिता की रचनाएँ पढ़ते-पढ़ते अटल जी तुकबन्दी करने लगे। उनकी रचनाओं की प्रशंसा होने लगी तो हिन्दी साहित्य सभा की गोष्ठियों में जाने लगे। उन दिनों घनाक्षरी और सवैया छंद विशेष पसंद किए जाते थे। अटल ने ब्रजभाषा में रचनाएँ कीं।।

(ई) अटल जी की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर-
‘मेरी इक्यावन कविताएँ’, ‘कैदी कविराय की कुंडलियाँ’, ‘न दैन्यं न पलायनम्’, ‘मेरी संसद यात्रा’ आदि अटल जी की प्रमुख रचनाएँ हैं।

भाषा की बात

Class 8 Chapter 8 Hindi MP Board प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएप्रतिनिधि, विश्वविद्यालय, स्वतंत्रता-संग्राम, सर्वोच्च।
उत्तर-
प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय, स्वतंत्रता-संग्राम, सर्वोच्च।

Class 8 MP Board Hindi Chapter 8 प्रश्न 2.
सही वर्तनी वाले शब्दों पर गोला लगाइए
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 8 मध्य प्रदेश के गौरव 1
उत्तर-
साहित्य, उत्तीर्ण, राष्ट्रपति, ग्वालियर।

Class 8th Hindi Chapter 8 MP Board प्रश्न 3.
नीचे दिए वाक्यों में क्रिया विशेषण के शब्द छाँटकर लिखिए
1. वे धूप में बाहर बैठे थे। ………………………….
2. वह थोड़ा लुढ़क गया। ………………………….
3. लड़की जोर-जोर से चीख रही थी। ………………………….
4. राम अपनी बहन को बहुत सता रहा था। ………………………….
उत्तर-
1. बाहर,
2. थोड़ा,
3. जोर-जोर से,
4. बहुत।

MP Board Class 8 Subject Hindi Chapter 8 प्रश्न 4.
उदाहरण के अनुसार नीचे लिखे शब्दों में से मूल शब्द और प्रत्यय अलग कीजिए।
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 8 मध्य प्रदेश के गौरव 2

♦प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. डॉ. शर्मा देश के स्वाधीनता संग्राम के अग्रणी योद्धा और साक्षी रहे हैं। आपने अपने राजनीतिक जीवन से भारत के महान व्यक्तियों की गौरवशाली परंपरा को सार्थक बनाया। आप जिन सार्वजनिक पदों पर आसीन हुए, आपने उनमें आध्यात्मिक और लौकिक मूल्यों का साहसिक संतुलन बनाए रखा। डॉ. शर्मा ने जब भी जहाँ भी राजनीति में नैतिक मूल्यों का क्षरण होते देखा, वहाँ अपना विवेकपूर्ण हस्तक्षेप अवश्य किया। आपने अवमूल्यित राजनीति के संदर्भ में सदैव वैचारिक जिज्ञासा, सांस्कृतिक आत्मविश्वास तथा सृजनात्मक विमर्श के प्रतिमानों को अनेक मंचों से अभिव्यक्ति प्रदान की।

शब्दार्थ-सर्वोच्च-सबसे ऊँचा। अग्रणी-आगे चलने वाले। साक्षी-गवाह। गौरवशाली-महत्त्वपूर्ण। आसीन-पद पर नियुक्त। संतुलन-मेल। नैतिक-नीति संबंधी। क्षरण-कमजोर। अवमूलित-मूल्य में कमी हुई। जिज्ञासा-जानने की इच्छा। सृजनात्मक-रचनात्मक। विमर्श-विवेचन, तर्क, ज्ञान। अभिव्यक्ति-प्रकाशन।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिन्दी सामान्य) भाग-8 के पाठ-8 ‘मध्य-प्रदेश के गौरव’ से ली गई हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा की महान् विशेषताओं के बारे में कहा है कि-

व्याख्या-डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने देश की आजादी के लिए किए गए संघर्षों में बहुत बड़ी भूमिका निभायी। इसके वे आगे चलने वाले एक महान योद्धा और गवाह थे। यही नहीं उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन से भी अपनी एक अलग ही पहचान कायम की। इसके द्वारा उन्होंने स्वयं को भारत के महान् राजनेताओं की चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाने में अपना महान् योगदान दिया। इसी प्रकार वे सार्वजनिक रूप में भी लोकप्रिय हुए। इसके लिए वे जिन-जिन सार्वजनिक पदों के अधिकारी बने, उनमें आपने आध्यात्मिक और साहसिक संतुलन बनाने में अपनी कोई कसर नहीं छोड़ी। जहाँ-जहाँ उन्होंने राजनीतिक मूल्यों में नैतिक मूल्यों को कमजोर पड़ते हुए देखा, वहाँ-वहाँ उन्होंने अपने बुद्धि-बल से उसे संमुलित बनाने की पूरी-पूरी कोशिश की। इस प्रकार उन्होंने राजनीतिक मूल्यों के घटते स्तर को बड़ी गंभीरता से देखा और समझा। फिर उसे दूर करने के लिए अपने विचारों, सांस्कृतिक आत्मविश्वासों और रचनात्मक ज्ञान-तर्क के द्वारा बार-बार प्रयास किया।

विशेष-

  • डॉ. शंकर दयाल शर्मा को प्रेरक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  • शब्द-प्रयोग कठिन हैं।

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 3 Ahinsa ki Vijay Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 3 Ahinsa ki Vijay Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 3 Ahinsa ki Vijay Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 3 अहिंसा की विजय प्रश्न उत्तर

प्रश्न-अभ्यास

अनुभव विस्तार

MP Board Class 8 Hindi Chapter 3 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) मगध की राजधानी – 1. श्रावस्ती
(ब) कोसल की राजधानी – 2. राजगृह
(स) महात्मा बुद्ध का शिष्य – 3. अंगुलिमाल
(द) डाकू का नाम – 4. प्रसेनजित
उत्तर-
(अ) 2,
(ब) 5,
(स) 4,
(द) 3

(ख) दिए गए विकल्पों से सही शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूरि कीजिए।
(अ) महात्मा बुद्ध ने ……………… को धीरज बँधाया। (राजा, प्रजा)
(ब) अंगुलिमाल ……………. डाकू था। (सीधा-सादा, भयंकर)
(स) महात्मा बुद्ध ने अँगुलिमाल डाकू से ………………. कहा। (प्रेमपूर्वक, शान्तिपूर्वक)
उत्तर-
(अ) राजा,
(ब) भयंकर,
(स) प्रेमपूर्वक।

Class 8 Hindi Chapter 3 MP Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) राजा प्रसेनजित क्यों चिंतित थे?
(ब) महात्मा बुद्ध ने डाकू को कैसे पहचाना?
(स) ‘ठहर जा’ किसने किससे कहा था?
(द) महात्मा बुद्ध के चेहरे पर सदैव मुस्कान क्यों रहती थी?
उत्तर-
(अ) राजा प्रसेनजित डाकू अँगुलिमाल के अत्याचार से चिंतित थे।
(ब) महात्मा बुद्ध ने डाकू को उसके भयंकर रूप से पहचाना।
(स) ‘ठहरा जा’ डाकू अँगुलिमाल ने महात्मा बुद्ध से कहा था।
(द) महात्मा बुद्ध के चेहरे पर सदैव मुस्कान अपने ज्ञान से रहती थी।

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MP Board Class 8th Hindi Chapter 3 प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) डाकू का नाम अंगुलिमाल क्यों पड़ा?
उत्तर-
(अ) अंगुलिमाल ने हजार आदमियों की हत्या करने की प्रतिज्ञा कर रखी थी। परंतु वह कितने आदमी मार चुका, इसका हिसाब रखना उसके लिए कठिन काम था। इसके लिए उसने एक युक्ति निकाली। वह जब भी किसी का वध करता तो उसकी एक अँगुली काट लेता। इस प्रकार उसके पास अँगुलियों की एक माला-सी बनती जा रही थी जिसे वह गले में डाले रहता। इसी कारण उसका नाम ‘अँगुलिमाल’ पड़ गया था।

(ब) पहरेदार के रोकने पर भी महात्मा बुद्ध जंगल में क्यों प्रवेश कर गए?
उत्तर-
(ब) पहरेदार के रोकने पर भी महत्मा बुद्ध जंगल में प्रवेश कर गए। यह इसलिए कि

  • उनका हृदय संसार के कष्टों को देखकर दुखी था।
  • उन्हें आत्मज्ञान हो गया। फलस्वरूप उन्हें किसी की चिंता नहीं थी और न उन्हें कोई डर ही था।

(स) महात्मा बुद्ध जंगल में जाते समय क्या विचार कर रहे थे?
उत्तर-
(स) महात्मा बुद्ध जंगल में जाते समय विचार कर रहे थे

“आदमी आदमी को क्यों मारता है? जीव, जीव को देखकर प्रसन्न क्यों नहीं होता?

(द) अँगुलिमाल का हृदय-परिवर्तन कैसे हुआ?
उत्तर-
(द) महात्मा बुद्ध ने अँगुलिमाल को शान्ति, दया और प्रेम का उपदेश दिया। इससे उसकी आँखें खुल गईं। उसके मन का अंधकार दूर हो गया। उसने अँगुलियों की माला तोड़ दी और कटार फेंक दी। उसने हिंसा का जीवन हमेशा के लिए छोड़ दिया। इस तरह उसका हृदय-परिवर्तन हुआ और वह महात्मा बुद्ध का शिष्य बन गया।

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भाषा की बात

Class 8 MP Board Hindi Chapter 3 प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएप्रतिभा, त्रस्त, त्राहि-त्राहि, युक्ति, निशस्त्र।
उत्तर-
प्रतिभा, त्रस्त, त्राहि-त्राहि, युक्ति, निशस्त्र।

Hindi Chapter 3 Class 8 MP Board प्रश्न 2.
सही वर्तनी पर गोला लगाइए
(अ) परसेनजित, प्रसेनजित, प्रसेनजत।
(ब) वर्तमान, वरतमान, वतर्मान।
उत्तर-
(अ) प्रसेनजित,
(स) वर्तमान।

Chapter 3 Hindi Class 8 MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिएधीरज, सावधान, चीख-पुकार, चिंता, दृष्टि, प्रेमपूर्वक
उत्तर-
वाक्य-प्रयोग
शब्द – वाक्य
धीर- हमें विपत्ति में धीरज रखना चाहिए।
सावधान – सावधान होकर पढ़ो।
चीख-पुकार – दुर्घटना में चीख-पुकार होती है।
चिंता – महँगाई ने गरीबों की चिंता बढ़ा दी।
दृष्टि – हमें दया की दृष्टि रखनी चाहिए।
प्रेमपूर्वक – प्रेमपूर्वक रहने में ही आनंद है।

MP Board Hindi Class 8 Chapter 3 प्रश्न 4.
विपरीतार्थी शब्दों की जोड़ी बनाइए-
जन्म – दुखी
सुखी – अशांति
हिंसा – कठिन
सरल – मरण
शांति – अहिंसा
उत्तर-
विपरीतार्थी शब्दों की जोड़ी
जन्म – मरण
सुखी – दुखी
हिंसा – अहिंसा
सरल – कठिन
शांति – अशांति

Class 8th Hindi Chapter 3 MP Board प्रश्न 5.
समानार्थी शब्द पर गोला लगाइए
(1) पेड़ – वृक्ष, पानी, आग, जंगल
(2) राह – राजा, तरू, रास्ता, हवा
(3) आँख – सागर, नदी, नभ, नेत्र।
उत्तर-
समानार्थी शब्द
(1) पेड़ – वृक्ष
(2) राह – रास्ता
(3) आँख – नेत्र।

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Class 8 Hindi MP Board Chapter 3 प्रश्न 6.
निम्नलिखित पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए और संज्ञा, विशेषण और क्रिया छाँटकर तालिका में लिखिए-
महात्मा बुद्ध रुक गए। तुरंत ही घनी झाड़ियाँ चीरती हुई एक विकराल मूर्ति आ खड़ी हुई। ऊँचा कद, काला शरीर, भयानक चेहरा, लाल आँखें, बिखरे बाल, बड़ी-बड़ी मूंछे, लंबी मजबूत भुजाएँ चौड़ा सीना, हाथ में कटार।
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 3 अहिंसा की विजय 1

प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. ‘आदमी आदमी को मारता क्यों है? जीव, जीव को देखकर प्रसन्न क्यों नहीं होता?’ इन्हीं बातों पर विचार करते हुए महात्मा बुद्ध जंगल की राह बढ़े जा रहे थे कि अचानक उन्हें कोई कठोर और भारी आवाज़ सुनाई दी, ‘ठहर जा।’

शब्दार्थ-जीव-प्राणी। राह-रास्ता।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) भाग-8 के पाठ-3 ‘अहिंसा की विजय’ से ली गई है। इसके लेखक श्री भगवतशरण उपाध्याय हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने हिंसा के प्रति महात्मा बुद्ध के विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-महात्मा बुद्ध को अँगुलिमाल डाकू के अत्याचारों को सुनकर के बड़ी चिंता हुई। वे बार-बार यह सोचने लगे कि एक आदमी दूसरे से मिलकर रहने की बजाय उसे क्यों कष्ट पहुँचाता है। वह उसे क्यों मारता है? एक प्राणी को दूसरे प्राणी को देखकर प्रसन्न होना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होता है, क्यों? इस तरह सोचते-विचारते हुए महात्मा बुद्ध अँगुलिमाल डाकू की ओर जंगल में आगे बढ़ रहे थे। उसी समय उन्हें एक भयंकर और भारी आवाज में रोकते हुए कहा, “ठहर जाओ। अब और आगे न बढ़ो।”

  • सांसारिक कष्टों को बड़े ही सटीक रूप में व्यक्त किया गया है।
  • भाषा-शैली आकर्षक है।

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2. महात्मा बुद्ध ने उस पर अपनी दृष्टि डाली। उनकी नज़र में भय न था, प्यार था। उन्होंने प्रेमपूर्वक उस भयानक डाकू से कहा- “मैं तो ठहर गया, भला तू कब ठहरेगा?”

शब्दार्थ-दृष्टि-नज़र। भय-डर।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-इन पंक्तियों में लेखक ने महात्मा बुद्ध की दया-दृष्टि पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि
व्याख्या-जब अंगुलिमाल डाकू ने महात्मा बुद्ध को अपनी भयंकर और कठोर आवाज़ में रोकते हुए कहा, तब उन्होंने उसे बुरा नहीं माना। उन्होंने तो उसे अपनी दया दृष्टि से ही देखा। दूसरी बात यह कि वे उससे तनिक भी नहीं डरे। इस प्रकार उन्होंने उसे बड़े प्यार से यह प्रश्न किया, “अब तो मैं ठहर गया हूँ, लेकिन अब तुम मुझे यह बतलाओ कि तुम कब ठहरोगे?”

विशेष-

  • यह अंश प्रेरक है।
  • वाक्य प्रभावशाली है।

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 13 Na Yeh Samjho Ki Hindustan Ki Talwar Soi Hai Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 13 Na Yeh Samjho Ki Hindustan Ki Talwar Soi Hai Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 13 Na Yeh Samjho Ki Hindustan Ki Talwar Soi Hai Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 13 न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है प्रश्न उत्तर

न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है बोध प्रश्न

Class 8 Hindi Chapter 13 MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
दहलती = थरांती, डर के मारी काँपती; विसर्जन = त्याग करके, छोड़ करके; संवत्सर = वर्ष, सम्वतः कर हाथ; लहू = खून; नारीत्व – स्त्री की शक्ति, नारीपन; लोलुप = लालची, तेग = बड़ी तलवार, सिहरती = रोमांचित; रण= युद्ध; मुक्ति = आजादी; हुंकार = गर्जना; पुरुषत्व = पुरुष की शक्ति; चरणाघात = पैरों की चोट; क्षार = राख; रण बाँकुरी = युद्ध करने में बहुत ही तेज।

Class 8th Hindi Chapter 13 MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
(क) किस भारतीय की वीरता को सुनकर सिकन्दर की छाती दहलती थी?
उत्तर
राजा पुरु की वीरता को सुनकर सिकन्दर की छाती दहलती थी।

(ख) नव संवत्सर किस राजा ने प्रारम्भ किया था ?
उत्तर
महाराज विक्रमादित्य ने नव संवत्सर प्रारम्भ किया था।

(ग) शिवाजी ने किसके विरुद्ध तलवार उठाई थी?
उत्तर
शिवाजी ने मुगल शासक औरंगजेब के विरुद्ध अपनी तलवार उठाई थी।

(घ) विश्व को शान्ति का सन्देश देने वाले किन्हीं दो महापुरुषों के नाम बताइए।
उत्तर
विश्व को शान्ति का सन्देश देने वाले दो महापुरुष स्वामी विवेकानन्द और पं. जवाहरलाल नेहरू थे।

(ङ) सिकन्दर कौन था ?
उत्तर
सिकन्दर यूनान के सिकन्दरिया का रहने वाला लुटेरा शासक था।

MP Board Class 8 Hindi Chapter 13 प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(क) ‘तलवार सोई है’ से क्या आशय है?
उत्तर
‘तलवार सोई है’ इस कविता से यह आशय है कि देश के वीर सैनिकों ने अपनी उस तलवार को उठाकर रख दिया है, जिसे वे हिन्दुस्तान की शान, वान और मान की रक्षा के लिए हर समय उठाये रहते थे। क्या वह तलवार वास्तव में सो गई है? ऐसा नहीं है। भारत के वीर सपूतों की तलवार ने सदा ही शत्रु आक्रमणकर्ताओं का मुकाबला किया है और उन्हें भयभीत करके देश की सीमाओं से बाहर खदेड़ दिया है। सिकन्दर और बाबर दोनों ही हमारे देश पर आक्रमण करने वाले विदेशी लुटेरे थे। वीर हिन्दुस्तानी सैनिकों के रणकौशल से भयभीत होकर वे उल्टे पैर लौट पड़े। भारतीय युद्धवीरों की तलवार की आवाज से-शत्रुओं की फौजें बिखर जाती थी, अर्थात् युद्ध छोड़कर लौट पड़ती थी। वे शत्रु भय से रोमांचित होकर पीठ दिखा जाते थे। – ऐसे उन भारतीय वीरों की तलवार कभी भी सोई हुई नहीं रही है।

(ख) हर्ष इतिहास में क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर
हर्षवर्द्धन ने हिन्दुस्तान की सीमाओं को सुरक्षित किया। विदेशी आक्रमणकर्ताओं-हूण, शक आदि आक्रान्ताओं को वहाँ से खदेड़ दिया। देश की प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाया और मजबूत सैनिक बल के हौसले बुलन्द किए। प्रजा पर विश्वास जमाया। देश के अन्दर शिक्षा, उद्योगों और कृषि को उन्नत बनाया। शिक्षा केन्द्रों को सहायता दी। देश में आम लोगों के सुख-समृद्धि की ओर ध्यान दिया। वे प्रति पाँचवें वर्ष प्रयोग में गंगा संगम पर अपना सर्वस्व (पूरा खजाना) विद्वानों, भिक्षुकों, गुरु-आश्रमों को दान कर जाते थे। वे बौद्ध मत में दीक्षा प्राप्त करके अहिंसा का पालन करते थे। प्रजा से कर के रूप में बहुत कम धन लेकर, उसकी कई गुना वृद्धि करके राज्य के कल्याण में सारा धन लगा देते थे। अपने महान् कार्यों के लिए हर्ष प्रसिद्ध थे।

(ग) यदि किसी ने हमारी स्वतन्त्रता छीनने का प्रयास किया, तो हम क्या करेंगे?
उत्तर
भारतवर्ष एक महान् और विस्तृत गणतन्त्र राष्ट्र है। प्रभुसत्ता सम्पन्न देश अपनी चारों ओर की सीमाओं की रक्षा बड़ी तत्परता से कर रहा है। सीमा सुरक्षा बलों की अकुत शक्ति पर देश के प्रत्येक नागरिक को पूर्ण भरोसा है। वे किसी भी दशा में विदेशी शत्रुओं के द्वारा किए आक्रमण को असफल करने में पूर्णत: सक्षम हैं।

वैसे हम शान्ति के दूत और अहिंसा के पुजारी हैं। हम दूसरे देश की मान-मर्यादा पर आक्रमण करने वाले नहीं रहे हैं, परन्तु यदि किसी ने भी (किसी भी शत्रु ने देश ने) हमारी आजादी को ललकारा अथवा हमारे राष्ट्र की सीमाओं को तोड़ा अथवा अपनी कुदृष्टि से देश को आघात पहुँचाया तो हमारे रणबांकुरे वीर सैनिक हुँकार भर उठेंगे। उस आक्रमणकारी शत्रु को सब प्रकार से नष्ट करके खदेड़ देंगे, देश के सम्मान की रक्षा के लिए भयंकर युद्ध करेंगे। देश की स्वतन्त्रता की रक्षा के लिए हम प्रलय ढा देंगे।

(घ) ‘चित्तौड़ का जौहर’ क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर
चित्तौड़ का जौहर इस बात के लिए प्रसिद्ध है कि युद्ध में वीर भारतीय रणबांकुरों ने देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दे दी। जब वे शत्रु का मुकाबला अपने प्राणों की आहुति देकर भी किया करते थे, तब उनके इस महान् बलिदान की खबर पाकर राजपूत स्त्रियाँ भी शत्रुओं से अपनी लाज बचाने के लिए जलती हुई आग में सामूहिक रूप से कूदकर स्वयं को जला देती थीं। यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है। उन राजपूत वीर क्षत्राणियों के लोमहर्षक इस महाबलिदान की परम्परा कई वर्षों तक जीवित रही।

(ङ) इस कविता से हमें क्या सन्देश मिलता है?
उत्तर
इस कविता से यह सन्देश मिलता है कि भारतीय – वीर सैनिक प्रतिपल देश की सीमाओं, आजादी तथा उसके
सम्मान की रक्षा के लिए तैयार हैं। हर्षवर्द्धन का त्याग और वीरता, विक्रमादित्य का शिक्षा-प्रेम और भारतीय संस्कृति के विकास की स्मृति हमें सन्देश देती है कि हमें सदैव ही अपनी सांस्कृतिक विरासत को सम्पन्न बनाकर उसकी रक्षा करनी है। देश के ऊपर विदेशी आक्रान्ताओं से अन्तिम श्वास तक लड़ते – हुए अपनी आजादी की रक्षा का सन्देश प्राप्त होता है। स्त्री और पुरुष दोनों ने ही देश के लिए अपने प्राणों का त्याग किया है। हम युद्ध प्रिय नहीं हैं लेकिन प्रिय राष्ट्र की रक्षा के लिए महान् से महान् त्याग करने से पीछे नहीं हटते। हम भारतीयों ने कभी भी विस्तारवादी नीति नहीं अपनाई है। दूसरे देशों पर आक्रमण नहीं किया है लेकिन जिस किसी ने भी देश की आजादी, उसकी सीमाओं को कुचला तो हम उसको मुँहतोड़ उत्तर देंगे।

Class 8 Bhasha Bharti Chapter 13 प्रश्न 4. निम्नलिखित पंक्तियों का सन्दर्भ सहित अर्थ लिखिए
(क) लहू देंगे मगर इस देश की माटी नहीं देंगे।
किसी लोलुप नजर ने यदि हमारी मुक्ति को देखा,
उठेगी तब प्रलय की आग जिस पर क्षार सोई है।

(ख) किया संग्राम अन्तिम श्वास तक राणा प्रतापी ने,
किया था नाम पर जिसके कभी चित्तौड़ ने जौहर,
न यह समझो कि धमनी में लहू की धार सोई है।
उत्तर
भारत देश के हम नागरिकों ने अपने देश की – सीमा को विस्तृत करना कभी नहीं चाहा है। साथ ही, हमने किसी अन्य देश की धन सम्पत्ति पर भी अपना कब्जा जमाने की इच्छा नहीं की है, लेकिन बिना किसी चूक के यह बात करने से नहीं रुकेंगे तथा कभी रुके भी नहीं हैं कि हम खून दे सकते हैं. लेकिन अपने प्रिय राष्ट्र (भारत) की जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं देंगे। यदि किसी लालच भरी दृष्टि वाले देश ने इस पर आक्रमण करने की अथवा हमारे देश की आजादी को कुचलने , की कोशिश की भी तो तत्काल ही विनाश की आग फूट पड़ेगी ‘यद्यपि युद्ध की आग राख के अन्दर छिपी हो सकती है। कहने ‘ का तात्पर्य यह है कि हमारे अपने प्रिय देश पर किसी लालची दृष्टि वाले शत्रु-देश ने आक्रमण करने की कुचेष्टा की तो उस समय विनाश लीला की अग चारों ओर फैल जायेगी यद्यपि हम युद्ध नहीं चाहते। हम तो सदैव से शान्ति दूत रहे हैं।

यह हिन्दुस्तान वह देश है जिसके अंश से ही महाराज हर्षवर्द्धन और विक्रमादित्य ने जन्म लिया था। आज तक बीते हुए वर्षों से क्रमश: इसकी प्रशंसा के गीत गाये जाते रहे हैं। हिन्दुस्तान के नाम पर ही अर्थात् हिन्दुस्तान की लज्जा बचाने के लिए ही महाराज शिवाजी ने अपनी तलवार खींच ली थी अर्थात् युद्ध करके हिन्दुस्तान के गौरव की रक्षा की थी। इसके लिए ही मेवाड़ के राणा प्रताप ने भी अन्तिम श्वास तक (मृत्यु पर्यन्त) भीषण युद्ध किया था तथा चित्तौड़ ने भी हिन्दुस्तान के नाम पर जौहर की परम्परा चलाई थी। हे शत्रुओ ! तुम्हें भी यह नहीं समझ लेना चाहिए कि भारतवर्ष के वीरों की धमनियों के अन्दर बहने वाली रक्त (लहू) की धारा सो गई है।

Hindi Chapter 13 Class 8 MP Board प्रश्न 5.
निम्नलिखित पंक्तियों का आशय समझाइए
(अ) हुई नीली कि जिसकी चोट से आकाश की छाती।
(आ) रहे इंसान चुप कैसे कि चरणाघात सहकर जब ।
(इ) न सीमा का हमारे देश ने विस्तार चाहा है।
(ई) न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है।
उत्तर
कवि कहता है कि हिन्दुस्तान की तेज तलवार सो गई है। ऐसा किसी भी शत्रु को नहीं समझ लेना चाहिए। तलवार से युद्ध करने में चतुर योद्धाओं की कहानी सुनकर सिकन्दर की छाती (दिल) भी डर से काँप उठती थी। उस तलवार से किए जाने वाले युद्ध की भयंकरता के विषय में सुनते ही बाबर के हाथों से उसकी तलवार छूट कर गिर पड़ती थी। भारतीय योद्धाओं की तलवार के कठोर प्रहारों के विषय में सुनकर शत्रुओं की सेना भी तितर-बितर हो जाती थी और भय से रोमांचित हो उठती थी। त्याग की शरण लेने वाली डूबती नौकाएँ भी उद्धार प्राप्त कर लेती थीं। अर्थात् युद्ध करना छोड़ करके शरण में आए हुए शत्रु की डूबती नैया उद्धार प्राप्त कर लेती थी। हिन्दुस्तानी वीर रण-बांकुरों की तेज तलवार की चोटों से आकाश की छाती भी नीली पड़ी हुई है। किसी को भी यह न समझ लेना चाहिए कि युद्ध में हिन्दुस्तानी वीर सैनिकों की हुँकार (गर्जना) सो चुकी है।

कवि यह बताते चलते हैं कि हम हिन्दुस्तानियों ने ही सदैव संसार को शान्ति का सन्देश दिया है तथा अहिंसा का उपदेश देकर मन, कर्म और वचन से सत्य का आचरण करने के लिए पूरे संसार को सलाह दी है। इसका यह अर्थ नहीं लगा लेना चाहिए कि हम अहिंसा का आचरण अपनाकर वीरता का त्याग कर देंगे और कायर बन जायेंगे और इसका यह अर्थ भी नहीं लगा लेना चाहिए कि हम नारीपन (स्त्रीत्व) के लिए किए गये अपमान को सह लेंगे। हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि धरती पर पैरों के नीचे दबी कुचली धूल भी पैरों की ठोकर खाने पर आकाश में उमड़कर चारों ओर छा जाती है। वह (स्त्री रूपी धूल) किसी वजह से अपनी लाचारी की दशा में अपनी शक्ति को पहचानती नहीं रही है। यह उसकी सुप्त अवस्था थी, अज्ञानता थी, उसकी अशिक्षा थी।

भारत देश के हम नागरिकों ने अपने देश की – सीमा को विस्तृत करना कभी नहीं चाहा है। साथ ही, हमने किसी अन्य देश की धन सम्पत्ति पर भी अपना कब्जा जमाने की इच्छा नहीं की है, लेकिन बिना किसी चूक के यह बात करने से नहीं रुकेंगे तथा कभी रुके भी नहीं हैं कि हम खून दे सकते हैं. लेकिन अपने प्रिय राष्ट्र (भारत) की जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं देंगे। यदि किसी लालच भरी दृष्टि वाले देश ने इस पर आक्रमण करने की अथवा हमारे देश की आजादी को कुचलने , की कोशिश की भी तो तत्काल ही विनाश की आग फूट पड़ेगी ‘यद्यपि युद्ध की आग राख के अन्दर छिपी हो सकती है। कहने ‘ का तात्पर्य यह है कि हमारे अपने प्रिय देश पर किसी लालची दृष्टि वाले शत्रु-देश ने आक्रमण करने की कुचेष्टा की तो उस समय विनाश लीला की अग चारों ओर फैल जायेगी यद्यपि हम युद्ध नहीं चाहते। हम तो सदैव से शान्ति दूत रहे हैं।

न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है भाषा-अध्ययन

Class 8 Chapter 13 Hindi MP Board प्रश्न 1.
इस कविता से पाँच आगत शब्द छाँटकर उनके हिन्दी शब्द लिखिए।
उत्तर
आगत शब्द-फौजें, लहू, इंसान, लाचार, मगर। हिन्दी शब्द-सेनाएँ, रुधिर, मनुष्य, असहाय, यद्यपि।

MP Board Class 8 Chapter 13 Hindi प्रश्न 2.
निम्नलिखित (पाठ्यपुस्तक में दी गई) वर्ग पहेली से आकाश, रण और लहू के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर

  1. आकाश-नभ, व्योम।
  2. रण-संग्राम, युद्ध।
  3. लहू-रुधिर, रक्त।

Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 13 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के वाक्य प्रयोग, उनके विलोम शब्दों के साथ लिखिए
अहिंसा, अर्थ, शान्ति, आग।
उत्तर

  1. अहिंसा का भाव हिंसा से स्पष्ट हो जाता है।
  2. अर्थ और अनर्थ दो विरोधी शब्द हैं।
  3. शान्ति की स्थापना अशान्ति के बाद होती है।
  4. आग को पानी से बुझा दिया जाता है।

MP Board Class 8th Hindi Chapter 13 प्रश्न 4.
नारी में ‘त्व’ प्रत्यय जोड़कर नारीत्व तथा पुरुष में ‘त्व’ प्रत्यय जोड़कर पुरुषत्व बना है। इसी प्रकार तीन और शब्द बनाइए।
उत्तर

  1. सती + त्व = सतीत्व
  2. मनुष्य + त्व = मनुष्यत्व
  3. देव + त्व = देवत्व।

Ncert Hindi Class 8 Chapter 13 प्रश्न 5.
इस पाठ में तुकान्त स्थिति समझकर तुक मिलाने वाले शब्द छाँटकर लिखिए।
उत्तर

  1. छाती सिकन्दर की, तेग बाबर की
  2. सिहरती थी, उभरती थी।
  3. हर्ष और विक्रम, संवत्सरों का क्रम।
  4. शिवाजी ने, राणा प्रतापी ने।
  5. जग को, जग को, विस्तार चाहा है, अधिकार चाहा है।
  6. न चूकेंगे, नहीं देंगे।

MP Board Class 8th Hindi Solution Bhasha Bharti प्रश्न 6.
“न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है” कविता में कौन-सा रस है ? नाम लिखकर स्थायी भाव भी लिखिए।
उत्तर
“न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है”, = इस कविता में वीर रस है। वीर रस का स्थायी भाव ‘उत्साह’ होता है।

न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है।
जिसे सुनकर दहलती थी कभी छाती सिकंदर की,
जिसे सुनकर कि कर से छूटती थी तेग बाबर की,
जिसे सुन शत्रु की फौजें बिखरती थीं, सिहरती थीं,
विसर्जन का शरण ले डूबती नावें उभरती थीं।
हुई नीली कि उसकी चोट से आकाश की छाती,
न यह समझो कि अब रण बाँकुरी हुँकार सोई है।
न यह …………… “

शब्दार्थ-सोई है नींद में है; दहलती- थर्राती, डर के मारे काँपती; कर से = हानि से; तेग बड़ी तलवार; बिखरती थीं = तितर-बितर हो जाते थे, सिहरती थीं = भय से रोम खड़े हो जाते थे, रोमांचित होती; विसर्जन = त्याग देना, छेड़ देना; उभरती = जल से ऊपर आकर दीखती हुई, रणबाँकुरी = युद्ध करने में बहुत ही तेज; हुँकार = वीरता की ऊँची आवाज, गर्जना।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘ भाषा-भारती के पाठ ‘न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई हैं से अवतरित है। इसके रचयिता रामकुमार चतुर्वेदी ‘चंचल हैं।

प्रसंग-इस पद्यांश में कवि ने भारतीय सैनिकों की वीरता और युद्ध करने की कला का वर्णन किया है।

व्याख्या-कवि कहता है कि हिन्दुस्तान की तेज तलवार सो गई है। ऐसा किसी भी शत्रु को नहीं समझ लेना चाहिए। तलवार से युद्ध करने में चतुर योद्धाओं की कहानी सुनकर सिकन्दर की छाती (दिल) भी डर से काँप उठती थी। उस तलवार से किए जाने वाले युद्ध की भयंकरता के विषय में सुनते ही बाबर के हाथों से उसकी तलवार छूट कर गिर पड़ती थी। भारतीय योद्धाओं की तलवार के कठोर प्रहारों के विषय में सुनकर शत्रुओं की सेना भी तितर-बितर हो जाती थी और भय से रोमांचित हो उठती थी। त्याग की शरण लेने वाली डूबती नौकाएँ भी उद्धार प्राप्त कर लेती थीं। अर्थात् युद्ध करना छोड़ करके शरण में आए हुए शत्रु की डूबती नैया उद्धार प्राप्त कर लेती थी। हिन्दुस्तानी वीर रण-बांकुरों की तेज तलवार की चोटों से आकाश की छाती भी नीली पड़ी हुई है। किसी को भी यह न समझ लेना चाहिए कि युद्ध में हिन्दुस्तानी वीर सैनिकों की हुँकार (गर्जना) सो चुकी है।

(2) कि जिसके अंश से पैदा हुए थे हर्ष और विक्रम,
कि जिसके गीत गाता आ रहा संवत्सरों का क्रम,
कि जिसके नाम पर तलवार खींची थी शिवाजी ने,
किया संग्राम अन्तिम श्वास तक राणा प्रतापी ने,
किया था नाम पर जिसके कभी चित्तौड़ ने जौहर,
च यह समझो कि धमनी में लहू की धार सोई है।
ने यह……”

शब्दार्थ-हर्ष = राजा हर्षवर्द्धन; विक्रम = विक्रमादित्य; संवत्सरों का क्रम = अनेक संवतों से (वर्षों से) लगातार; संग्राम = युद्ध; अन्तिम श्वास तक मरने तक राणा प्रतापीमहाराणा प्रताप; जौहर = आत्म सम्मान की रक्षा हेतु स्त्रियों द्वारा किया गया सामूहिक आत्मदाह (यह राजपूतों की एक परम्परा रही है); लहू = खून, रक्त।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह। प्रसंग-पूर्व की तरह।

व्याख्या-यह हिन्दुस्तान वह देश है जिसके अंश से ही महाराज हर्षवर्द्धन और विक्रमादित्य ने जन्म लिया था। आज तक बीते हुए वर्षों से क्रमश: इसकी प्रशंसा के गीत गाये जाते रहे हैं। हिन्दुस्तान के नाम पर ही अर्थात् हिन्दुस्तान की लज्जा बचाने के लिए ही महाराज शिवाजी ने अपनी तलवार खींच ली थी अर्थात् युद्ध करके हिन्दुस्तान के गौरव की रक्षा की थी। इसके लिए ही मेवाड़ के राणा प्रताप ने भी अन्तिम श्वास तक (मृत्यु पर्यन्त) भीषण युद्ध किया था तथा चित्तौड़ ने भी हिन्दुस्तान के नाम पर जौहर की परम्परा चलाई थी। हे शत्रुओ ! तुम्हें भी यह नहीं समझ लेना चाहिए कि भारतवर्ष के वीरों की धमनियों के अन्दर बहने वाली रक्त (लहू) की धारा सो गई है।

(3) दिया है शान्ति का सन्देश ही हमने सदा जग को,
अहिंसा का दिया उपदेश भी हमने सदा जग को,
न इसका अर्थ हम पुरुषत्व का बलिदान कर देंगे।
न इसका अर्थ हम नारीत्व का अपमान सह लेंगे।
रहे इंसान चुप कैसे कि चरणाघात सहकर जब,
उमड़ उठती धरा पर धूल, जो लाचार सोई है।
न यह ……………..”

शब्दार्थ-जग को = संसार को; अहिंसा = मन, वचन और कर्म से किसी को भी चोट न पहुँचाना; नारीत्व = स्त्रीत्व; अपमान = बेइज्जती; इंसान- मनुष्य; चरणाघात = पैरों से पहुँचाई गई चोट को; लाचार = उपाय रहित, असहाय।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि बताता है कि पद-दलित धूल भी अपनी लाचार दशा में आहत होकर भी जमीन से ऊपर उठती है।

व्याख्या-कवि यह बताते चलते हैं कि हम हिन्दुस्तानियों ने ही सदैव संसार को शान्ति का सन्देश दिया है तथा अहिंसा का उपदेश देकर मन, कर्म और वचन से सत्य का आचरण करने के लिए पूरे संसार को सलाह दी है। इसका यह अर्थ नहीं लगा लेना चाहिए कि हम अहिंसा का आचरण अपनाकर वीरता का त्याग कर देंगे और कायर बन जायेंगे और इसका यह अर्थ भी नहीं लगा लेना चाहिए कि हम नारीपन (स्त्रीत्व) के लिए किए गये अपमान को सह लेंगे। हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि धरती पर पैरों के नीचे दबी कुचली धूल भी पैरों की ठोकर खाने पर आकाश में उमड़कर चारों ओर छा जाती है। वह (स्त्री रूपी धूल) किसी वजह से अपनी लाचारी की दशा में अपनी शक्ति को पहचानती नहीं रही है। यह उसकी सुप्त अवस्था थी, अज्ञानता थी, उसकी अशिक्षा थी।

(4) न सीमा का हमारे देश ने विस्तार चाहा है,
किसी के स्वर्ण पर हमने नहीं अधिकार चाहा है;
मगर यह बात कहने में न चूके हैं न चूकेंगे।
लहू देंगे मगर इस देश की माटी नहीं देंगे।
किसी लोलुप नजर ने यदि हमारी मुक्ति को देखा
उठेगी तब प्रलय की आग जिस पर क्षार सोई है।
न यह………..”

शब्दार्थ-विस्तार = बढ़ावा देना, विस्तृत करना; चाहा है = इच्छा की है; स्वर्ण = धन-दौलत; माटी = मिट्टी, जमीन ! का छोटा सा टुकड़ा भी; लोलुप – लोभी; नजर = दृष्टि; मुक्ति आजादी: प्रलय = नाश; क्षार = राख; सोई है छिपी हुई

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि ने बताया है कि हम जो भारत राष्ट्र के वासी हैं, उन्होंने कभी भी विस्तारवादी नीति को नहीं अपनाया है।

व्याख्या-भारत देश के हम नागरिकों ने अपने देश की – सीमा को विस्तृत करना कभी नहीं चाहा है। साथ ही, हमने किसी अन्य देश की धन सम्पत्ति पर भी अपना कब्जा जमाने की इच्छा नहीं की है, लेकिन बिना किसी चूक के यह बात करने से नहीं रुकेंगे तथा कभी रुके भी नहीं हैं कि हम खून दे सकते हैं. लेकिन अपने प्रिय राष्ट्र (भारत) की जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं देंगे। यदि किसी लालच भरी दृष्टि वाले देश ने इस पर आक्रमण करने की अथवा हमारे देश की आजादी को कुचलने , की कोशिश की भी तो तत्काल ही विनाश की आग फूट पड़ेगी ‘यद्यपि युद्ध की आग राख के अन्दर छिपी हो सकती है। कहने ‘ का तात्पर्य यह है कि हमारे अपने प्रिय देश पर किसी लालची दृष्टि वाले शत्रु-देश ने आक्रमण करने की कुचेष्टा की तो उस समय विनाश लीला की अग चारों ओर फैल जायेगी यद्यपि हम युद्ध नहीं चाहते। हम तो सदैव से शान्ति दूत रहे हैं।

MP Board Class 8 Hindi Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 12 Yachak Aur Data Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 12 Yachak Aur Data Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 12 Yachak Aur Data Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 12 याचक और दाता प्रश्न उत्तर

याचक और दाता बोध प्रश्न

Class 8 Hindi Chapter 12 Yachak Aur Data प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए।
उत्तर
याचक-माँगने वाला; धरोहर = वह वस्तु या द्रव्य जो कुछ समय के लिए दूसरे के पास इस विश्वास से रखी जाए कि माँगने पर उसी रूप में मिल जाए;  वात्सल्य = बच्चों के प्रति प्रेम हतप्रभ = निस्तेज, शिथिल, आश्चर्यचकित; गुहार = पुकार; शंका= सन्देह जिजीविषा-जीवित रहने की इच्छा; निस्तब्ध + बिना हिले-डुले; सानुभूति = हमदर्दी, संवेदना।

Class 8 Hindi Chapter 12 Mp Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए.

(क) वृद्धा मन्दिर के पास क्या काम करती थी?
उत्तर
वह बूढ़ी औरत मन्दिर के पास उसके दरवाजे पर फूलों की माला बेचा करती थी।

(ख) सेठ बनारसीदास के यहाँ किन लोगों की भीड़ लगी रहती थी?
उत्तर
सेठ बनारसीदास के यहाँ जरूरतमन्दों की भीड़ लगी रहती थी।

(ग) वृद्धा सेठजी से क्या माँगने गई थी?
उत्तर
वृद्धा सेठजी से अपनी जमा की गई हौड़ी से कुछ रुपये मांगने के लिए गई थी। वह अपने बीमार बच्चे का इलाज डॉक्टर को दिखाकर करा लेना चाहती थी।

(घ) सेठजी ने अपने बच्चे की पहचान कैसे की?
उत्तर
वृद्धा ने बच्चे को बहुत गम्भीर दशा में देखा। उसने पता नहीं, क्या सोचा ? अचानक वह उठी और बच्चे को अपनी गोद में उठाकर सेठ के घर की ओर चल पड़ी। बच्चे का शरीर ज्वर से तप रहा था। उधर वृद्धा का कलेजा भी क्रोध से जल रहा था। वह बच्चे को लेकर सेठजी के घर पहुँची और धरना देकर बैठ गई। नौकर ने सेठजी के आदेश पर भगा देना चाहा। लेकिन, वह टस-से-मस नहीं हुई। सेठजी स्वयं आए, उन्हें क्रोध आ रहा था लेकिन जैसे ही बच्चे को देखा तो उनका चेहरा निस्तेज हो गया। बच्चे का चेहरा, उनके पुत्र मोहन से मिलता-जुलता था। मोहन खो गया था। सात वर्ष पहले खोये हुए मोहन की जाँघ पर लाल चिन्ह को देखकर सेठजी ने अपने पुत्र मोहन को पहचान लिया।

(ङ) बच्चा फिर से बीमार क्यों पड़ गया ?
उत्तर
वृद्धा उस बच्चे को सेठजी को न चाहते हुए देकर अपनी झोपड़ी में आकर शान्त लेटी हुई थी। उसके आँसू बह रहे थे। उधर वह बच्चा दवाओं के प्रभाव से होश में आने लगा। उसने अपनी आँखें खोली और बोला-‘मौ’। माँ, उसके पास नहीं थी। वह रोने लगा। उसकी हालत फिर से बिगड़ने लगी। ममतामयी वृद्धा माँ के बिना वह बच्चा फिर से बीमार पड़ गया।

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भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 12 प्रश्न 3.
उपयुक्त शब्दों का चयन कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
जिजीविषा, ममत्व, निस्तब्ध, हतप्रभ, मकरन्द
(क) वृद्धा …………… टाट पर लेटी हुई आँसू बहा रही थी।
(ख) असहाय बच्चे को देख माँ का ………..जाग उया।
(ग) आँसुओं में फूलों का …………… और ममता की गंध थी।
(घ) सेठजी बच्चे को देखकर …………….. रह गए।
(ङ) वात्सल्य की तड़प ने वृद्धा की …………….. बढ़ा दी थी।
उत्तर
(क) निस्तब्ध
(ख) ममत्व
(ग) मकरन्द
(घ) हतभ
(छ) जिजीविषा।

MP Board Class 8 Hindi Chapter 12 प्रश्न 4.
सही जोड़ी बनाइए.
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 12 याचक और दाता 1
उत्तर
(क) + (3), (ख) → (1), (ग) + (2), (घ) → (5), (छ)→ (4).

Class 8 Hindi Chapter 12 Yachak Or Data प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(क) वृद्धा को उसकी मंजिल किस तरह मिल गई थी?
उत्तर
कोई बच्चा अपने माता-पिता से भटक गया। उसने देखा कि वह बच्चा असहाय था और रो रहा था। उस वृद्धा ने उस बच्चे को अपनी गोद में बिठाया और उस रोते बच्चे को शान्त करने की कोशिश करने लगी। बच्चे को माँ की ममता मिल गई। उसे माँ का आँचल मिला, वह अब सब कुछ भूल चुका था। वह वृद्धा के पास रहने लगा। उस वृद्धा में वात्सल्य की तड़प बढ़ने लगी। इस तरह वह चाहने लगी कि वह काफी लम्बे समय तक जीवित रहे। अब वह पहले से अधिक मेहनत करती थी। बच्चे की वजह से वह अपने घर शीघ्र लौटने लगी। बच्चा माँ के प्यार को प्राप्त करके बहुत ही प्रसन्न था। वृद्धा अपनी झोपड़ी में गाड़कर रखी हाँडी में दिनभर की मेहनत से कमाये पैसे बचत करके रखती थी, क्योंकि उसे उस बच्चे के भविष्य की चिन्ता थी। उसकी चिन्ता में एक सुखद भविष्य की चिन्ता छिपी थी। वह उस बच्चे को अच्छे-से-अच्छा खिलाती, पिलाती और पहनाती थी। वह उसे हर तरह खुश रखना चाहती थी। इससे उसे लग रहा था कि मानो उसे उसकी मंजिल मिल गई हो। दिन भर मन्दिर के दरवाजे पर फूल बेचती और शाम को घर आकर बच्चे को अपने हृदय से लगा लेती थी। यह बच्चा मानो उसकी फुलवारी थी जिसे पोषित करके प्रेम के जल से सींचकर सेवा कर रही थी।

(ख) मोहन कौन था ? वह वृद्धा के पास कैसे आया?
उत्तर
मोहन किसी नगर के सेठ बनारसीदास का बेटा था। वह छोटी उम्र में ही अपने घर से बिछुड़ गया। उसे वृद्धा ने अपने पास रख लिया। वृद्धा का सहारा पाकर, दुलार से वह रहने लगा। माँ की ममता पाकर वह अपने माता-पिता को भूल गया। उस वृद्धा ने बड़े वात्सल्य से उसका पालन-पोषण और परवरिश की। वृद्धा भी अब बच्चे के बिना एक क्षण नहीं रह पाती थी। इस तरह वृद्धा के पास वह बच्चा आया और रहने लगा।

(ग) मोहन ज्वर से कैसे मुक्त हुआ?
उत्तर
मोहन को एक दिन ज्वर ने आ दबोचा। उसके बढ़ते प्यर को भौंपकर वृद्धा बेचैन हो गई। वृद्धा माँ ने वैध को दिखाया। उसकी दवा से कोई लाभ नहीं हुआ। वह वृद्धा सेठ बनारसीदास के पास अपनी हांडी में से कुछ धन माँगने के लिए गयी जिससे वह बच्चे का इलाज किसी डॉक्टर से करा सके, लेकिन सेठजी ने उसे यह कहते हुए लौटा दिया कि उसके पास उसने कोई धन जमा नहीं कराया है। क्रोधित वृद्धा लौट आई। बच्चे का ज्वर तेज होता देखकर वह एक दिन जाने क्या सोचते हुए. बच्चे को गोद में उठाकर सेठजी के पास पहुँची। उसने कुछ धन फिर से मांगा। मुनीम ने उसे फटकार दिया। सेठजी स्वयं उसके पास आये और उस बच्चे के पैर पर लाल चिह्न देखकर पहचाना कि वह बच्चा तो उसी का है जो आज से सात वर्ष पहले खो गया था। वृद्धा ने उस बच्चे को देने से ना-नुकर किया लेकिन सेठजी ने बच्चे को प्राप्त कर लिया। वृद्धा वहाँ से चली गई। उसका अच्छे डॉक्टर से इलाज कराया। दवा के प्रभाव से कुछ होश आने पर बच्चे ने ‘माँ’ को पुकारा। बच्चे की हालत फिर से खराब हो गई। सेठजी वृद्धा के घर पहुँचे, वृद्धा को अनुनय-विनय से लाये। माँ के ममता भरे हाथ का स्पर्श पाकर बालक सचेत हुआ और उस बालक को ज्वर से मुक्ति मिली।

(घ) ‘सेठ याचक था और वह दाता’, इस वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
वृद्धा ने सेठजी के घर जाकर मोहन के माथे पर हाथ फेरा। मोहन ने हाथ को पहचान लिया; उसने अपनी आँखें तुरन्त खोल दी। कहने लगा,’माँ’, तुम आ गई। वृद्धा कहने लगी, “हाँ बेटा, तुम्हें छोड़कर कहाँ जा सकती हूँ। उसने मोहन का सिर गोद में रखा, थपथपाया। मोहन की नींद आ गईं। कुछ दिन बाद मोहन
स्वस्थ हो गया। जो काम दवाइयाँ, डॉक्टर और हकीम नहीं कर सके, वह काम वृद्धा माँ की ममता ने कर दिखाया।” – अब वह वृद्धा माँ वापस लौटने लगी तो सेठजी ने उससे कहा कि वे मोहन के ही पास रुक जाएँ, लेकिन वे नहीं मानी। सेठजी हाँडी के रुपये न देने के लिए क्षमा माँगने लगे और वह हाँडी लौटाने लगे तो वृद्धा ने कहा कि यह तो मैंने मोहन के लिए जमा किये थे। उसी को दे देना।

वृद्धा ने सेठजी की धरोहर (मोहन) ईमानदारी से लौटा दो। अब वह उसे यहाँ छोड़कर अपनी लाठी का सहारा लेकर चलती हुई अपनी झोपड़ी में लौट गई। उसके नेत्रों से आँसू बह रहे थे, परन्तु यह आँसू फूलों के पराग से, ममता की महक से महक रहे थे। वृद्धा माँ का ममत्व सेठ बनारसीदास के धन से अधिक गरिमावान सिद्ध हुआ। इस तरह सेठजी याचक थे और वृद्धा माँ दाता के रूप में महान और उदारता की साक्षात् मूर्ति सिद्ध हुई।

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(छ) सेठजी और वृद्धा के चरित्र में से किसका चरित्र आपको अच्छा लगा ? उसकी कोई तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर
सेठजी और वृद्धा के चरित्र में से वृद्धा का चरित्र प्रशंसनीय है, महान् है। वृद्धा के चरित्र में जो गम्भीरता, ममता का भाव, किसी भी भेदभाव से रहित दीखता है, उसका सेठजी के चरित्र में पूर्णतः अभाव ही है। वृद्धा बच्चे का पालन-पोषण बिना किसी स्वार्थ से करती है, वह बच्चे में अपनी ममता उड़ेल देती है। उसे अपने आँचल की छाया प्रदान करती है। वह उस बच्चे के पालन-पोषण के लिए जीवित रहने की इच्छा करती है। वृद्धा के चरित्र की तीन विशेषताएँ निम्नलिखित हैं जो सभी पाठकों को प्रभावित करती हैं। उनमें उत्साह और त्याग का भाव भर देती हैं।

  1. वात्सल्यमयी माँ का ममत्व-वृद्धा में बच्चे के प्रति प्रेम और उसकी ममता भरी हुई है।
  2. सेवा परायणता-वृद्धा बच्चे की हर तरह से परवरिश करती है। विपरीत परिस्थिति में भी अपने ध्येय में लीन होकर उत्तरदायित्व को निभाती है।
  3. त्याग और भेदभाव से रहित-वृद्धा त्याग की साक्षात् मूर्ति है। इकट्ठे किये गये हौड़ी के धन को सेठ को ही सौंपकर धन्य होती है। सेठजी के बच्चे का पालन-पोषण अपने-तेरे को भावना से ऊपर उठकर करती है।

याचक और दाता भाषा-अध्ययन

Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 12 प्रश्न 1.
इस कहानी में ऐसे पाँच वाक्य लिखिए जहाँ अवतरण चिह्न का प्रयोग किया गया है।
उत्तर

  1. दर्शन करने वालों को वृद्धा पुकारती, और कहती-“ये फूल चढ़ावा तो लेते जाओ।”
  2. वृद्धा ने हाँडी सेठजी को सरकाते हुए कहा-“सेठजी, इसे जमा कर लें। मैं इसे कहाँ रखती फिरूंगी।”
  3. सेठजी ने मुनीम से कहा-“इसे बहीखाते में इसके नाम में जमा कर लो।”
  4. वृद्धा ने विनम्र भाव से कहा-“मेरा बच्चा बहुत बीमार है। मेरी जमा हाँडी से मुझे कुछ रुपये मिल जाएँ तो मैं डॉक्टर को दिखाकर उसका इलाज करा लूँ।”
  5. वृद्धा ने कहा-“सेठजी अभी दो वर्ष पहले ही तो मैंने हाँडी में जमा पूँजी आपके यहाँ जमा की थी।”

Bhasha Bharti Class 8 Chapter 12 प्रश्न 2.
निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्यों में प्रयोग कीजिए
टस से मस न होना, हाथ-पाँव फूल जाना, चंगुल में दबाना, ताँता बाँधना, जान में जान आना।
उत्तर

  1. टस-से-मस न होना-एक स्थान से न हटना।
    वाक्य-प्रयोग-धरने पर बैठे शिक्षक, धरना स्थल से टस से मस नहीं हुए। .
  2. हाथ-पांव फूल जाना-घबरा जाना।
    वाक्य-प्रयोग-पिताजी के मूलित हो जाने पर, हमारे हाथ-पाँव फूल गये।
  3. चंगुल में दबाना-वश में (कब्जे में) कर लेना।
    वाक्य-प्रयोग-शत्रु सैनिकों को चंगुल में दबाने के लिए। पूरा-पूरा जोर लगाना पड़ा।
  4. तांता बाँधना-लगातार बढ़ते जाना।
    वाक्य-प्रयोग-शत्रुओं पर आक्रमण करने के लिए। भारतीय सैनिक ताँता बाँधकर आगे ही आगे बढ़ते गये।
  5. जान में जान आना-चैन पड़ना।
    वाक्य-प्रयोग-ऑपरेशन के बाद मरीज जैसे ही होश में आया तो उसके घर वालों की जान में जान आई।

MP Board Class 8th Hindi Chapter 12 प्रश्न 3.
‘याचक’ एवं ‘दाता’ शब्दों के क्रिया रूप लिखकर संज्ञा और क्रिया रूपों के वाक्य बनाइए।
उत्तर
याचक और दाता शब्दों के क्रिया रूप याचना तथा दान देना होता है।
संज्ञा रूप में वाक्य प्रयोग –

  1. याचकों का तांता लग जाता है।
  2. याचक याचना करते हैं।
  3. दाता याचकों में भेद नहीं करता।
  4. दानी लोग प्रतिदिन दान देते हैं।

Hindi Chapter 12 Class 8 Mp Board प्रश्न 4.
‘दुखिया’ शब्द के दुख शब्द में ‘इया’ प्रत्यय लगा है-दुख + इया = दुखिया। इसी प्रकार ‘इया’ एवं ‘वाला’ प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए।
उत्तर

  1. दुख + इया-दुखिया सुख+इया – सुखिया; बन + इया – बनिया; लख + इया – लखिया; लिख + इया – लिखिया, धन + इया – धनिया।
  2. दूध + वाला-दूधवाला, फल + वाला – फलवाला, पान + वाला = पानवाला, दुकान + वाला = दुकानवाला, घर + वाला-घरवाला।

Class 8 Chapter 12 Hindi Mp Board प्रश्न 5.
‘अ’ और ‘वि’ उपसर्ग लगाकर शब्द बनाइए।
उत्तर

  1. अ+शुभ-अशुभ;अ+शुद्ध-अशुद्ध;अ+ पवित्र = अपवित्र अ + पावन = अपावन अ+ चल-अचल।
  2. वि+कार-विकार; वि+नाश = विनाश वि+लीन -विलीन; वि+लाप – विलाप; वि + लेप- विलेप।

Class 8 Mp Board Hindi Chapter 12 प्रश्न 6.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए
एक दिन सिद्धार्थ बगीचे में बैठे हुए थे। अचानक उनके सामने एक घायल, एक तीर से बिंधा हुआ हंस आ गिरा। सिद्धार्थ ने उसे प्यार से उठाया, घाव पर मलहम लगाया। तभी उनका चचेरा भाई देवदत्त आ पहुँचा। उसने हंस मांगा। सिद्धार्थ ने हंस देने से मना कर दिया। विवाद राजा के दरबार तक जा पहुंचा। देवदत्त का कहना था कि उसने हंस का शिकार किया है, इसलिए हंस उसका है। सिद्धार्थ ने कहा कि मैंने हंस के प्राणों की रक्षा की है, इसलिए हंस पर मेरा अधिकार है। राजा ने न्याय करते हुए कहा कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। अतः हंस पर सिद्धार्थ का अधिकार बनता है। राजा ने सिद्धार्थ को हंस दे दिया।
(अ) इस गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए
(आ) घायल हंस को किसने उठा लिया था ?
(क) देवदत्त हंस को क्यों मांग रहा था?
(ई) राजा ने क्या कहते हुए हंस सिद्धार्थ को सौंप दिया ?
(उ) राजा, दिन, तीर, प्यार के दो-दो समानार्थी शब्द लिखिए।
उत्तर
(अ) उपयुक्त शीर्षक-‘हंस और सिद्धार्थ
(आ) घायल हंस को सिद्धार्थ ने उठा लिया था।
(इ) देवदत्त हंस को इसलिए मांग रहा था क्योंकि उसने हंस को तीर से घायल कर दिया था। उसका कहना था कि घायल किये जाने से हंस पर उसका अधिकार है।
(ड) राजा ने हंस सिद्धार्थ को सौंप दिया। राजा का कहना था कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है।
(ज) समानार्थी

  1. राजा = नृप, भूप।
  2. दिन = दिवस, वासर।
  3. तीर = बाण, सायक।
  4. प्यार = प्रेम, स्नेह।

याचक और दाता परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) सुबह से शाम तक वह उसी तरह सबका जीवन महकाती
और रात्रि को मन ही मन भगवान को प्रणाम कर लाठी टेकती, झोंपड़ी की राह पकड़ती। झोंपड़ी के समीप आते ही दस वर्षीय बालक उछलता-कूदता उससे लिपट जाता। वृद्धा उसे टटोलती, दुलारती और माथे को चूमकर जैसे पूरा प्यार उड़ेलने का प्रयास करती।

शब्दार्थ-महकाती = सुगन्ध से भर देती; राह = मार्ग, रास्ता; पकड़ती = चली जाती; समीप = पास; वर्षीय = वर्ष का; वृद्धा – बूढ़ी औरत; दुलारती = प्रेम करती; चूमकर = पुचकारते हुए।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा-भारती” के पाठ ‘याचक और दाता से अवतरित है। इसके लेखक रवीन्द्रनाथ ठकुर है।

प्रसंग-एक बूढ़ी औरत की ममता और उसके प्रतिदिन के कार्य का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-वह बूढ़ी औरत रोजाना सन्दिर के दरवाजे पर प्रात:काल से लेकर सायंकाल तक आने वाले दर्शनार्थी लोगों के जीवन को खुशबू से भर देती थी। रात्रि होने पर मन ही मन भगवान को नमस्कार करके मन्दिर के दरवाजे से लौट पड़ती। उसके हाथ में लाठी होती थी। उसका सहारा लिए हुए, अपने निवास, उस झोंपड़ी की ओर जाने वाले मार्ग पर लौट पड़ती। जैसे ही वह अपनी झोपड़ी के पास आती, तो एक दस वर्ष का बालक उछल-कूद करता हुआ उसके पास आता और प्रेमपूर्वक उससे लिपट पड़ता था। उस समय वह बूढ़ी औरत उस बालक के शरीर पर हाथ फेरती हुई उसके पूरे अंगों को टटोलती, देखती कि कहीं कुछ कमजोरी तो नहीं आ गई है। इस प्रकार, वह उससे बहुत-सा प्यार करती। उसके मस्तक पर बार-बार चुम्बन लेती। इस तरह वह उसके ऊपर अपने अन्दर के असीम अतौल प्यार को उड़ेल देती थी।

(2) असहाय और रोते बच्चे को वृद्धा ने अपनी गोद में बिठाया और उसे चुप कराने का प्रयास करने लगी। ममता का आँचल पाकर बच्चा सब कुछ भूल गया था। इस तरह वह वृद्धा के पास रहने लगा। वात्सल्य की तड़प ने वृद्धा की जिजीविषा बढ़ा दी। अब वह पहले से ज्यादा श्रम करती और शीघ्र लौटने की कोशिश करती। बच्चा माँ के स्नेह को पाकर प्रसन्न था।

शब्दार्थ-असहाय =बिना सहारे वाला; वृद्धा = बढ़ी औरत ने; चुप कराने का शान्त कराने का प्रयास = कोशिश; ममता का आँचल = प्यार और लगाव की शरण या आश्रय; वात्सल्य = सन्तान के प्रति प्रेम तड़प = खिंचाव, आकर्षण; जिजीविषा = जीवित रहने की इच्छा; श्रम = मेहनत; स्नेहप्रेम प्रसन्न = खुश।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-बालक उस बूढ़ी औरत के प्रेम को प्राप्त करके बहुत खुश था।

व्याख्या-यह बालक अपने माता-पिता से बिछुड़ा हुआ बालक था। उस बालक से सभी अपरिचित थे। सन्ध्या का समय था। उस बूढी औरत ने उस बिछुड़े बालक को अपनी गोद में बिछाया। उस रोते बालक को शान्त कराने की, उस बूढ़ी औरत ने बड़ी कोशिश की। बच्चा रोने से शान्त हुआ। उसे प्यार और माँ के प्रेम का आँचल (छाया, शरण) मिल चुकी थी। वह, अब, अपने वास्तविक माता-पिता को भूल गया था। यह सब उस बूढ़ी औरत के प्यार और आकर्षण के कारण ही सम्भव हो सका। वह बूढ़ी औरत ही उसके लिए सब कुछ थी। उसके पास रहकर सब कुछ भूल गया। इधर, उस बूढ़ी औरत के अन्दर सन्तान के प्रति प्रेम के खिचाव ने जीवित रहने की इच्छा प्रबल कर दी। वह यह समय था जब उसे पहले से भी अधिक मेहनत करनी पड़ रही थी क्योंकि उसे पाये हुए उस बालक के पालन का उत्तरदायित्व निभाना था। अब वह मन्दिर के दरवाजे से पहले की अपेक्षा जल्दी लौटकर आने की कोशिश करती थी। माँ का प्यार इस बच्चे को मिला, इस कारण वह बहुत ही खुश था।

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(3) सेठजी वृद्धा के पाँवों में गिरकर बच्चे की जान बचाने वी याचना करने लगे। वे बोले-“ममता की लाज रख लो।” माँ का ममाव जाग उठा। वह बीता हुआ सब कुछ भूल गई और सेठजी के साथ चल पड़ी। घर पहुँचते ही वृद्धा ने मोहन के माथे पर हाथ फेरा । हाश्व पहचानते ही मोहन ने तुरन्स आँखें खोल दीं। माँ, तुम आ गई। वृद्धा ने कहा, “हाँ बेटा, तुम्हें छोड़कर कहाँ जा सकती हूँ।” उसने मोहन का सिर अपनी गोद में रखकर थपथपाया और मोहन को नींद आ गई। कुछ दिन बाद मोहन बिल्कुल स्वस्थ हो गया। जो बाम दवाइयों, डॉक्टरों और हकीमों से न हो पाया वह वृद्धा माँ की ममता ने ममता- माँ के प्यार की; ममत्व-माँ के प्यार की भावना; बीता हुआ-जो घटना घटी उस सबको; बिल्कुल- पूर्ण रूप

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-माँ की ममता के महत्त्व को बताया गया है।

व्याख्या-सेठजी वृद्धा की झोंपड़ी पर आये। उसके पैरों पर गिर गये, वे प्रार्थना करने लगे कि उसके पुत्र के प्राणों की रक्षा तुम ही कर सकती हो। सेठ ने आगे कहा कि तुम्हें एक माँ के प्यार की, ममता की लाज रखनी है। माँ की ममता जागृत हो उठी। वह यूढ़ी औरत अब वह सब कुछ भूल गई,जो भी कुछ अभी तक घटित हुआ। वह तुरन्त ही सेठजी के साथ चल पड़ी। वह बूढ़ी औरत सेठजी के घर पहुँच गई। वहाँ पहुँचते ही मोहन के सिर और माथे पर अपना हाथ फेरने लगी। मोहन ने उसके (बड़ी औरत के) हाथ को पहचान लिया और एकदम से अपनी आँखें खोल दी। मोहन ने पुकारते हुए कहा कि माँ, तुम आ गई। उस | बूढ़ी औरत ने कहा-बेटा, मैं आ गयी हूँ। मैं तुम्हें छेड़कर कहाँ । जा सकती हूँ। अर्थात् मैं तुम्हें नहीं छोड़ सकती। उस बूढ़ी औरत ने मोहन के सिर को अपनी गोद में रख लिया। उसे धपकियाँ देने लगी, इस प्रकार मोहन सो गया। अब धीरे-धीरे मोहन के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। किसी भी डॉक्टर और हकीम की दवाइयों ने । कोई भी लाभ उसे नहीं पहुँचाया परन्तु बूढी माँ के प्यार ने, उसकी – ममता ने इसे पूर्णतः स्वस्थ कर दिया।

(4) “वृद्धा, सेठजी की धरोहर ‘मोहन’ को सेठजी के यहाँ छोड़कर, लाठी टेकती हुई, झोंपड़ी में लौट आई। उसके नेत्रों से आँसू बह रहे थे, पर आज इन आँसुओं में फूलों का मकरन्द और ममता की गंध थी। वह आज सेठ बनारसीदास से महान् हो गई थी। सेठ याचक था और वह दाता।”

शब्दार्थ-धरोहर = वह वस्तु या द्रव्य जो कुछ समय के लिए दूसरे के पास इस विश्वास से रखी जाए कि मांगने पर उसी रूप में वापस मिल जायेगी; मकरन्द = पराग; गंध-महक; महान् = बड़ी हो गई थी बन गई थी; याचक-भिखारी दाता= दान देने वाली।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह। प्रसंग-बूढ़ी औरत की विशेषताओं का उल्लेख किया गया

व्याख्या-उस ममता भरौ बूढ़ी औरत ने सेठ बनारसीदास के पुत्र मोहन को उसके वास्तविक माता-पिता के पास छोड़ दिया। मोहन वास्तव में सेठजी की धरोहर थी, उसे तो लौटाना ही था। वह अपनी लाठी के सहारे, वहाँ से (सेठजी के घर से) लाठी टेकते-टेकते अपनी झोपड़ी में लौटकर आ गई। उसकी आँखों में फूलों का पराग था। उन आँसुओं में माँ के गहरे प्रेम की महक थी। आज वह अपने ममत्व और सेवाभाव के साथ त्याग की महिमामयी मूर्ति थी। सेठ बनारसीदास को भी अपने महान् व्यक्तित्व से पीछे छोड़ दिया। उस दशा में सेठ बनारसीदास एक भिखारी थे जबकि वह एक उदार दानदाता के समान थी।

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