Opportunity for Youth Question Answer Class 10 English The Spring Blossom Chapter 13 MP Board

Class 10 English The Spring Blossom Chapter 13 Opportunity for Youth Questions and Answers

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Opportunity for Youth Class 10th Question Answer

Word Power

A. Match the words with their meanings.
(सुमेलित की जिए।)
MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 13 Opportunity for Youth 1
Answer:
1. → (b)
2. → (C)
3. → (d)
4. → (a)

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B. Use the following words in sentences of your own.
(निम्न शब्दों को वाक्यों में उपयोग कीजिए)
Answer:
dependent – They hate being dependent on their parents.
refuge – It was raining too heavily so I took refuge under the nearby shade.
credit – Your account has been credited with the amount owed.
invention – Invention of electricity changed our way of living.
setback – Falling share prices are a setback for the troubled economy.

C. Use the suffix ‘graphy’ and make five words.
(प्रत्यय ‘graphy’ से पाँच नये शब्द बनाओ)
Answer:

  1. Geography
  2. Autobiography
  3. Histography
  4. Pictography
  5. Cryptography.

D. Fill in the blanks using the suitable words from brackets.
[protect, instinctive, autobiography, inner, integration]

  1. An ………. is the story of a person’s life written by himself.
  2. People have the right to ……… themselves, if somebody attacks them.
  3. The actions which happen automatically in order to protect ourselves, are known as ……… actions.
  4. Happiness is an …….. state of mind.
  5. ……… of personality can be achieved through co-ordination of thoughts.

Answer:

  1. autobiography
  2. protect
  3. instinctive
  4. inner
  5. Integration.

How Much Have I Understood?

Answer these questions. (One or two sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Why did Pt. Nehru write ‘The Discovery of India’?
(व्हाय डिड पं. नेहरू राईट ‘द डिस्कवरी ऑफ इण्डिया’?)
पण्डित नेहरू ने ‘डिस्कवरी ऑफ इण्डिया’ क्यों लिखी?
Answer:
Pt. Nehru wrote ‘Discovery of India’ because he wanted a proper reconciliation between his activity and his thought. He was engaged in the quest long before he wrote the book.
(पण्डित नेहरू रोट ‘डिस्कवरी ऑफ इण्डिया’ बिकॉज ही वॉण्टेड अ प्रॉपर रिकन्सिलिएशन बिटवीन हिज़ एक्टिविटी एण्ड हिज थॉट। ही वॉज़ एंगेज्ड् इन द क्वैस्ट लाँग बिफोर ही रोट द बुक।)
पण्डित नेहरू ने ‘डिस्कवरी ऑफ इण्डिया’ पुस्तक लिखी क्योंकि वे अपने कार्यों व विचारों में सामंजस्य लाना चाहते थे। वे पुस्तक लिखने से बहुत पहले उसकी खोज में लगे थे व उसका विचार कर चुके थे।

Question 2.
What is the role of action and thoughts in our happiness?
(व्हॉट इज़ द रोल ऑफ एक्शन एण्ड थॉट्स इन अवर हैप्पिनेस?)
हमारी खुशी में हमारे कार्यों व विचारों की क्या भूमिका है?
Answer:
Happiness is achieved when thought and action are co-ordinated. Then there is no inner conflict between wish to do something and inability to act, or between thinking one way and acting in another.
(हैप्पिनेस इज़ अचीव्ड् व्हेन थॉट एण्ड एक्शन आर कोऑर्डिनेटिड। देन देयर इज नो इनर कॉन्फ्लिक्ट बिटवीन विश टू डू समथिंग एण्ड इनेबिलिटी टू एक्ट, और बिटवीन थिंकिंग वन वे एण्ड एक्टिंग इन अनअदर।)
खुशी विचार व कर्म के सामंजस्य से मिलती है। तब किसी कार्य को करने की इच्छा व उसे न कर पाने का अन्तर्द्वन्द्व नहीं होता, या एक प्रकार की सोच व दूसरे प्रकार का कार्य नहीं होता।

Question 3.
Who is the happiest man according to Pt. Nehru?
(हू इज द हैप्पिएस्ट मैन एकॉर्डिंग टू पं. नेहरू?)
पं. नेहरू के हिसाब से सबसे खुश व्यक्ति कौन है?
Answer:
According to Pt. Nehru, the happiest man is he whose thinking and action are co-ordinated.
(एकॉर्डिंग टू पं. नेहरू, द हैप्पिएस्ट मैन इज़ ही हूज थिंकिंग एण्ड एक्शन आर को-ऑर्डिनेटिड।)
पं. नेहरू के हिसाब से सबसे खुश व्यक्ति वह है जिसकी सोच व कार्य में सामंजस्य है।

Question 4.
What is needed to achieve the integration of personality?
(व्हॉट इज़ नीडेड टू अचीवद इन्टिग्रेशन ऑफ पर्सनैलिटी?)
व्यक्ति के समन्वय के लिए क्या आवश्यक है?
Answer:
Co-ordination of one’s thought and action is needed to achieve the integration of personality.
(को-ऑर्डिनेशन ऑफ वन्स थॉट एण्ड एक्शन इज़ नीडेड टू अचीव द इन्टिग्रेशन ऑफ पर्सनैलिटी।)
व्यक्ति के विचारों व कार्यों का सामंजस्य उसके व्यक्तित्व के समन्वय के लिए आवश्यक है।

Question 5.
What is the folly in which the people of every country indulge?
(व्हॉट इज़ द फॉली इन व्हिच द पीपल ऑफ एवी कण्ट्री इन्डल्ज?)
सभी देशों के लोग क्या मूर्खता करते हैं?
Answer:
People in every country indulge in the folly that their country is the greatest because they are born there.
(पीपल इन एव्री कण्ट्री इन्डल्ज इन द फॉली दैट देयर कण्ट्री इज द ग्रेटेस्ट बिकॉज़ दे आर बॉर्न देयर।)
हर देश के लोग यह सोचने की मूर्खता करते हैं कि उनका देश महान् है क्योंकि वे वहाँ जन्मे हैं।

Question 6.
What is appropriate, to seek evil in others or to find good in them? Why?
(व्हॉट इज़ एप्रॉप्रिएट, टू सीक इविल इन अदर्स और टू फाइण्ड गुड इन देम? व्हाय?)
क्या सही है, दूसरों में बुराई या अच्छाई देखना? क्यों?
Answer:
It is appropriate to find good in people rather than seeking evil in them because by this the other people would try to be good and they would feel ashamed in doing something wrong. It would therefore be profitable to ourselves as well as others.
(इट इज़ एप्रोप्रिएट टू फाइण्ड गुड इन पीपल रादर दैन सीकिंग ईविल इन दैम बिकॉज़ बाइ दिस द अदर पीपल वुड ट्राइ हूं बी गुड एण्ड दे वुड फील अशेम्ड् इन डूइंग समथिंग राँग। इट वुड देयरफोर बी प्रॉफिटेब्ल् टू अवरसेल्व्स एज़ वेल एज अदर्स।)
दूसरे व्यक्तियों में अच्छाई देखना ज्यादा अच्छा है क्योंकि इससे वे अच्छे होने का प्रयास करेंगे और कुछ बुरा करने में शर्मिन्दगी महसूस करेंगे। अतः यह हमारे व दूसरे दोनों के लिए फायदेमन्द होगा।

Question 7.
What is reading?
(व्हॉट इज़ रीडिंग?)
पढ़ना क्या है?
Answer:
Reading is getting other people’s thought. Any reading that makes one to think is useful reading.
(रीडिंग इज गेटिंग अदर पीपल्स थॉट। एनी रीडिंग दैट मेक्स वन टू थिंक इज़ यूज़फुल रीडिंग।)
पढ़ना दूसरों के विचारों का लेना है। जो पढ़ने से व्यक्ति सोचने पर मजबूर हो जाये वह ही उपयोगी है।

Question 8.
Which type of people were not liked by Pt. Nehru?
(व्हिच टाइप ऑफ पीपल वर नॉट लाइक्ड बाइ पं. नेहरू?)
किस प्रकार के लोग पं. नेहरू को पसन्द नहीं थे?
Answer:
Pt. Nehru did not like people who have no pride and ambition and are just sloppy people.
(पं. नेहरू डिड नॉट लाइक पीपल हू हैव नो प्राईड एण्ड एम्बिशन एण्ड आर जस्ट स्लॉपी पीपल्।)
पं. नेहरू को वे लोग पसन्द नहीं थे जिनमें गौरव व महत्वाकांक्षा नहीं होती तंथा वे सिर्फ लापरवाह व्यक्ति होते हैं।

Question 9.
What is the silliest pride?
(व्हॉट इज द सिलिएस्ट प्राईड?)
सबसे मूर्खतापूर्ण गर्व कौन-सा है?
Answer:
Pride of getting money is the silliest pride.
(प्राइड ऑफ गेटिंग मनी इज़ द सिलिएस्ट प्राईड।)
पैसा पाने का गर्व सबसे मूर्खतापूर्ण गर्व है।

Question 10.
What makes us great?
(व्हॉट मेक्स अस ग्रेट?)
हमें क्या महान् बनाता है?
Answer:
The mere act of aiming at something great makes one great.
(द मिअर एक्ट ऑफ एमिंग एट समथिंग ग्रेट मेक्स वन ग्रेट।)
सिर्फ महान् बनने का लक्ष्य ही व्यक्ति को महान् बनाता है।

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B. Answer these questions. (Three or four sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Describe the views of Pt. Nehru about calling a country good or bad?
‘(डिस्क्राइब द व्यूज ऑफ पं. नेहरू अबाऊट कॉलिंग अ कण्ट्री गुड और बैड।)
पं. नेहरू के किसी देश को अच्छा या बुरा कहने के विषय में विचारों का वर्णन कीजिए।
Answer:
Pt. Nehru thought that everybody likes one’s own country but it is wrong to imagine that one’s country is the best in the world. Every country and every people have something admirable in them. They have great achievements and also have bad periods so nobody is perfect.

(पं. नेहरू थॉट दैट एवीबडी लाइक्स वन्स ओन कण्ट्री बट इट इज़ राँग टू इमैजिन दैट वन्स कण्ट्री इज द बेस्ट इन द वर्ल्ड। एव्री कण्ट्री एण्ड एव्री पीपल् हैव समथिंग एडमिरेबल इन देम। दे हैव ग्रेट अचीवमेन्ट्स एण्ड ऑल्सो हैव बैड पीरिअड्स सो नोबडी इज़ परफेक्ट।)

पं. नेहरू सोचते थे कि हर व्यक्ति अपने देश को पसन्द करता है। मगर यह सोचना गलत है कि व्यक्ति का अपना देश दुनिया में सबसे अच्छा है। हर देश व उसके नागरिकों में कुछ-न-कुछ सराहनीय होता है। उनकी महान् उपलब्धियाँ होती हैं व बुरा समय भी होता है। अतः कोई भी सबसे अच्छा नहीं है।

Question 2.
Which quality of Mahatma Gandhi is described by Pt. Nehru? What did Mahatma Gandhi do?
(व्हिच क्वालिटी ऑफ महात्मा गाँधी इज़ डिस्क्राइब्ड बाइ पं. नेहरू? व्हॉट डिड महात्मा गाँधी डू?)
पं. नेहरू ने महात्मा गाँधी के कौन-से गुण का वर्णन किया है? महात्मा गाँधी ने क्या किया?
Answer:
Pt. Nehru described that Mahatma Gandhi had the quality of drawing out the good in another person. He somehow spotted the good in a person and laid emphasis on it. The result was that the man would try to be good and would feel ashemed on doing wrong.

(पं. नेहरू डिस्क्राइब्ड दैट महात्मा गाँधी हैड द क्वॉलिटी ऑफ ड्राइंग आऊट द गुड इन अनअदर पर्सन। ही समहाउ स्पॉटेड द गुड इन अ पर्सन एण्ड लेड एम्फसिस ऑन इट। द रिजल्ट वॉज दैट द मैन वुड ट्राइ टू बी गुड एण्ड वुड फील अशेम्ड् ऑन डूइंग राँग।)

पं. नेहरू ने महात्मा गाँधी के दूसरे में अच्छाई जाग्रत करने के गुण का वर्णन किया। वे किसी तरह एक व्यक्ति में अच्छाई ढूँढ लेते थे व उस पर जोर देते थे। परिणामतः व्यक्ति अच्छा बनने की कोशिश करता था व कुछ बुरा करने में शर्मिन्दगी महसूस करता था।

Question 3.
What should we think about according to Pt. Nehru?
(व्हॉट शुड वी थिंक अबाऊट एकॉर्डिंग टू पं. नेहरू?)
पं. नेहरू के हिसाब से हमें किस विषय पर विचार करना चाहिए?
Answer:
According to Pt. Nehru we should think of the vast opportunities that the world offers to those who are keen of mind, strong of character and fleet of foot. We should also think of the opportunities that India offers.
(एकॉर्डिंग टू पं. नेहरू वी शुड थिंक ऑफ द वास्ट अपॉर्च्युनिटीज दैट द वर्ल्ड ऑफर्स टु दोज़ हू आर कीन ऑफ माइन्ड, स्ट्राँग ऑफ कैरेक्टर एण्ड फ्लीट ऑफ फुट। वी शुड ऑल्सो थिंक ऑफ द अपॉर्च्युनिटीज़ दैट इण्डिया ऑफर्स।)
पं. नेहरू के हिसाब से हमें विश्व के उन विशाल अवसरों के बारे में सोचना चाहिए जो उन लोगों को उपलब्ध हैं जो दिमाग से तेज हैं, चरित्रवान तथा द्रुतगामी हैं। हमें उन अवसरों के विषय में भी सोचना चाहिए जो भारत हमें प्रदान करता है।

Question 4.
How should our engineers and other technicians be trained?
(हाउ शुड अवर एन्जिनियर्स एण्ड अदर टेक्निशियन्स बी ट्रेन्ड?)
हमारे अभियान्त्रिकों व तकनीकी विशेषज्ञों को किस प्रकार प्रशिक्षित किया जाना चाहिए?
Answer:
Our engineers and technicians need to be trained in two ways. They must be trained in mind, and have some vision and understanding of the world picture. Then they must be trained in particular jobs which they can do well, whether it be science or engineering or medicine or education.

(आवर एन्जिनियर्स एण्ड टेक्निशियन्स नीड टू बी ट्रेन्ड इन टू वेज़। दे मस्ट बी ट्रेन्ड इन माइन्ड, एण्ड हैव सम विज़न एण्ड अण्डरस्टैण्डिंग ऑफ द वर्ल्ड पिक्चर। देन दे मस्ट बी ट्रेन्ड् इन पर्टिक्यूलर जॉब्स व्हिच दे कैन डू वेल, वैदर इट बी साइन्स और एन्जिनियरिंग और मेडिसिन और एजुकेशन।)

हमारे अभियान्त्रिकों व तकनीकी विशेषज्ञों को दो प्रकार से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। उन्हें मानसिक रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए व उनमें दुनिया की समझ होनी चाहिए। उसके पश्चात उन्हें किसी कार्य विशेष में प्रशिक्षित करना चाहिए जिसमें कि वे निपुण हो सकें चाहे वह विज्ञान हो, अभियान्त्रिकी हो, चिकित्सा हो अथवा शिक्षा हो।

Question 5.
Discuss the importance of pride and ambition in youth.
(डिसकस द इम्पॉर्टेन्स ऑफ प्राइड एण्ड एम्बिशन इन यूथ।)
जवानों में गर्व व महत्वाकांक्षा के महत्व की चर्चा कीजिए।
Answer:
Pride and ambition in youth is important to do something worthwhile and big. Pride should consist in doing a job in the best possible manner and one can become great if he has great ambition. Aiming at something big makes one big.

(प्राईड एण्ड एम्बिशन इन यूथ इज इम्पॉर्टेन्ट टू डू समथिंग वर्थव्हाइल एण्ड बिग। प्राईड शुड कन्सिस्ट इन डूइंग अ जॉब इन द बेस्ट पॉसिब्ल मैनर एण्ड वन कैन बिकम ग्रेट इफ ही हैज़ ग्रेट एम्बिशन। एमिंग एट समथिंग बिग मेक्स वन बिग।)

गर्व व महत्वाकांक्षा जवानों के लिए महत्वपूर्ण है। उसी के कारण वे कुछ बड़ा व महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं। अपने कार्य को सबसे बेहतर तरीके से करना ही गर्व को दर्शाता है व कोई व्यक्ति महान् तभी बन सकता है जब उसकी वैसी ही महत्वाकांक्षा हो। कोई बड़ी महत्वाकांक्षा ही बड़ा बना सकती है।

Question 6.
How have the people who have achieved greatness become so? Explain.
(हाउ हैव द पीपल हू हैव अचीव्ड ग्रेटनेस बिकम सो? एक्सप्लेन?)
जो व्यक्ति महान् हैं वे वहाँ कैसे पहुंचे हैं? समझाइए।
Answer:
The people who have achieved greatness became so because apart from having some virtue and ability they had some ambition and pride. They had high ambition and tried to do big things.
(द पीपल हू हैव अचीव्ड् ग्रेटनेस बिकेम सो बिकॉज़ अपार्ट फ्रॉम हैविंग सम वर्दू एण्ड एबिलिटी दे हैड सम एम्बिशन एण्ड प्राइड। दे हैड हाइ एम्बिशन एण्ड ट्राइड टू डू बिग थिंग्स।)
जिन व्यक्तियों ने महानता हासिल की है वह इसीलिए क्योंकि उनमें काबिलियत के अलावा महत्वाकांक्षा व गर्व भी था। उनमें उच्च महत्वाकांक्षा थी और उन्होंने बड़े कार्य करने की कोशिश की।

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Language Practice

Put the verbs in present perfect or past simple as required.
(रिस्त स्थान भरो।)

  1. I was very tired, so I ………. down on the bed and went to sleep. (lie)
  2. Anuj ………. me his address but I’m afraid 1 ……… it. (give, lose).
  3. Is Abhilasha still here? No, she ……… out. (just go)
  4. (a)Look! somebody ……… (spill) coffee on the carpert.
    (b) Well, it ……….(not/be) me. I ………. it. (not/do)
  5. What do you think of my English? Do you think I ……? (improve)
  6. I wanted to phone Pallav last night but I ……… (forget).

Answer:

  1. lied
  2. gave, lost
  3. just went
  4. (a) has spilled, (b) is not, have not done
  5. have improved
  6. forgot

Listening Time

The teacher will read aloud the following words with proper pronunciation and the students will repeat them
(निम्न शब्दों को दोहशओ।)
Answer:
MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 13 Opportunity for Youth 2

The teacher will read the given passage and students will listen to it. There are two columns under the passage. Students will tick (✓) the words that they listen.
(गद्यांश में आये शब्द चिह्नित करे।)
Answer:
MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 13 Opportunity for Youth 3

Speaking Time

You visited a fair last month. Describe to the class.
Answer:
I visited my village fair last month. My village is near Indore. I visited there during my summer holidays in June. There were a great variety of shops of toys, clothes, sports etc. All kinds of toys were available. There were also showrooms of electrical and electronics items. There were also shops of vehicles at discount rates and modern variety of furniture was also available. There were a large number of swings and merry-go-rounds. Children were enjoying there a lot. We also sat on a swing. It was an enjoyable ride. There was also a magic show by a renowned magician. There was large crowd in it. Children were clapping and shouting on his magic tricks. There were many stalls of snacks and various other eatables. They were quite clean, covered and hygienic. Also, the taste of the eatables was too good. I liked the fruit chat and bhelpuri a lot. The fruits were too fresh and the chat was spicy. I really enjoyed the fair and didn’t want to come home.

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Writing Time

Read the given passage and make notes in your notebook.
(दिये गये गद्यांश को पढ़ो व नोट्स बनाओ।)
Answer:
Law-making in Britain
1. Proposal of Laws :

  1. Start in House of Lord or Commons
  2. Proposed by Govt.

2. Passing of Bill :

  1. Proposal of bill
  2. Act of Parliament
  3. Bill rejected govt. resigns
  4. No Vote-Committee stage
  5. Reported to the House
  6. Report stage
  7. Passed Bill to Other House

3. Royal Assent of passed Bill
4. Becomes law

Things to do

Find out how Bills are introduced in the Indian Parliament and finally become law. Write all the stages in your project file and develop a flow chart. Take the help of your teacher of social studies.
Answer:
Law-making in India

The basic function of Parliament is to make laws. All legislative proposals have to be brought in the form of Bills before Parliament. A Bill is a statute in draft and cannot become law unless it has received the approval of both the Houses of Parliament and the assent of the President of India.

The process of law making begins with the introduction of a bill in either House of Parliament. A bill can be introduced either by a minister or a member other than a minister. In the former case, it is called a government bill and in the latter case, it is known as a private member’s bill.

A bill undergoes three readings in each House, i.e., the Lok Sabha and the Rajya Sabha before it is submitted to the President for assent.

After a bill has been finally passed by the Houses of Parliament, it is submitted to the President for his assent. After a bill has received the assent of the President, it becomes the law.

Flow Chart :
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Opportunity for Youth Difficult Word Meanings

MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 13 Opportunity for Youth 5

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Opportunity for Youth Summary, Pronunciation & Translation

You know that I once wrote a book called The Discovery of India. I was engaged in that quest long before I wrote that book. It was not mere curiosity that led me to that quest. I was engaged in many activities and I wanted a proper reconciliation between my activity and my thought. Thought without action is abortion. Action without thought is folly.

Of course, we sometimes act on some impulse or irrepressible urge. If suddenly you throw a brick at me and my hand goes up to protect myself, it is an automatic, instinctive action and not a result of deliberate thought. Our living is conditioned by a series of automatic actions from morning till night. Anything we do outside that common range of actions, however, has to be preceded by some measure of thinking. The more action and thought are allied and integrated, the more effective they become and the happier you grow. There will then be no inner conflict between wish to do something and inability to act, or between thinking one way and acting in another. The happiest man is he whose thinking and action are co-ordinated.

(यू नो दैट आई वन्स रोट अ बुक कॉल्ड द डिस्कवरी ऑफ इण्डिया. आई वॉज एन्गेज्ड इन दैट क्वेस्ट लॉन्ग बिफोर आई रोट दैट बुक. इट वॉज़ नॉट मेअर क्यूरिऑसिटी दैट लेड मी टू दैट क्वेस्ट. आई वॉज एन्गेज्ड इन मैनी एक्टिविटीज़ ऐण्ड आई वाण्टिड अ प्रॉपर रीकन्सिलिएशन बिटवीन माई एक्टिविटी ऐण्ड माई थॉट. थॉट विदाऊट ऐक्शन इज़ अबॉरशन. ऐक्शन विदआऊट थॉट इज फॉली.

ऑफ कोर्स, वी समटाईम्स ऐक्ट ऑन सम इम्पल्स ऑर इरेप्रिसिबल अर्ज. इफ सडन्ली यू थ्रो अब्रिक ऐट मी ऐण्ड माई हैण्ड गोज अप टू प्रोटेक्ट माईसेल्फ, इट इज ऐन ऑटोमेटिक, इन्सटिंक्टिव ऐक्शन ऐण्ड नॉट अ रिजल्ट ऑफ डेलिबरेट थॉट. आवर लिविंग इज कन्डीशन्ड बाई ऐक्शन्स फ्रॉम मॉर्निंग टिल नाईट. एनीथिंग वी डू आऊटसाइड दैट कॉमन रेंज ऑफ ऐक्शन्स, हाऊएवर, हैज टू बी प्रिसीडिड बाई सम मैजर ऑफ थिंकिंग. द मोर ऐक्शन ऐण्ड थॉट आर एलाईड ऐण्ड इंटिग्रेटिड, द मोर इफेक्टिव दे बिकम ऐण्ड द हैप्पियर यू ग्रो. देयर बिल देन बी नो इनर कन्फ्लिक्ट बिटवीन विश टू डू समथिंग ऐण्ड इन्ऐबिलिटी टू ऐक्ट, और बिटवीन थिंकिंग वन वे ऐण्ड ऐक्टिंग इन अनदर. द हैप्पियस्ट मैन इज़ ही हूज थिंकिंग ऐण्ड ऐक्शन ऑफ कोऑर्डिनेटिड।

अनुवाद :
तुम्हें मालूम होगा कि मैंने एक पुस्तक लिखी थी ‘भारत की खोज’. वो पुस्तक लिखने से काफी पहले से मैं इस खोज में लगा था। और इस खोज का कारण केवल जिज्ञासा नहीं थी। मैं कई प्रकार के क्रियाकलापों में व्यस्त था और मैं : अपने क्रियाकलापों एवं विचारों में एक उचित सामंजस्य चाहता था। बिना क्रिया के विचार निष्फल होता है और विचार के बिना क्रिया मूर्खता।

यह सत्य है कि हम कभी-कभी क्षणिक आवेग में या किसी तीव्र न दबाए जा सकने वाले इच्छा के अनुसार कार्य करते हैं। यदि अचानक तुम मेरी तरफ कोई पत्थर फेंको तो मेरा हाथ स्वतः ही स्वयं को बचाने से लिए उठेगा। यह एक स्वाभाविक सहज-ज्ञान प्रेरित क्रिया है, किसी सोचे-समझे विचार का परिणाम नहीं। सुबह से रात तक प्रतिदिन हम कितनी ही ऐसी स्वाभाविक क्रियाएँ करते हैं। इन साधारण स्वाभाविक क्रियाओं से इतर यदि हम कुछ भी करते हैं तो उससे पूर्व उसमें कुछ मात्रा में सोच-विचार अवश्य होता है। जितना अधिक कार्य एवं विचार सम्बद्ध व एकीकृत होंगे उतना ही अधिक असरकारक होंगे और आप उतने ही खुश। तब किसी प्रकार का अन्तर-विरोध नहीं होगा किया कार्य को करने की आपकी इच्छा में और उसको कार्य रूप में परिणत करने की अक्षमता में या फिर सोच और क्रिया में अन्तर होने पर। सबसे प्रसन्न व्यक्ति वो है जिसके विचार एवं क्रियाएँ समन्वित हैं।

Happiness, after all, is an inner state of mind. It is little dependent on outside environment. Happiness has very little to do, for instance, with whether you are rich or not rich. Some of the most miserable persons I have come across in my life are the rich people. It is true that poverty makes one miserable in a very acute way. But my point is that it is not wealth but co-ordination of one’s thought and action which removes inner conflicts. It is in that way that integration of personality is achieved.

(हैप्पिनेस, आफ्टर ऑल, इज ऐन इनर स्टेट ऑफ माईण्ड., इट. इज लिटल डिपेण्डेण्ट ऑन आऊटसाइड एन्वायरमेण्ट. हैप्पिनेस हैज़ वेरी लिटल टू डू, फॉर इन्स्टेन्स, विद वेदर यू आर रिच ऑर नॉट रिच. सम ऑफ द मोस्ट मिजरेबल पर्सन्स आई। हैव कम अक्रॉस इन माई लाईफ ऑर द रिच पीपल. इट इज ट्र दैट पॉवर्टी मेक्स वन मिज़रेबल इन अ वेरी एक्यूट वे. बट माई पॉईण्ट इज दैट इट इज़ नॉट वेल्थ बट कोऑर्डिनेशन ऑफ वन्स थॉट ऐण्ड ऐक्शन व्हिच रिमूव्ज़ इनर कन्फ्लिक्ट्स इट इज़ इन दैट वे दैट इण्टिग्रेशन ऑफ पर्सनैलिटी इज़ अचीव्ड.)

अनुवाद :
प्रसन्नता आखिर हमारे मन की एक आन्तरिक स्थिति है। यह बाहर के हालात पर निर्भर नहीं है। उदाहरण के लिए प्रसन्नता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप धनी हैं या नहीं। कुछ सबसे ज्यादा दयनीय दुखी व्यक्ति जो मेरे सामने मेरे जीवन में आए वे धनी लोग थे। यह सत्य है कि गरीबी किसी को बहुत ही ज्यादा दयनीय, दीन स्थिति में ला देती है। परन्तु मेरा आशय है कि धन नहीं वरन विचारों एवं क्रियाओं का समन्वय हमारे अन्तर विरोधों को दूर करता है। इस तरह से ही हमारे व्यक्तित्व का एकीकरण हो पाता है।

We were engaged, as you know, in a very great movement in India. Because that movement was intimately concerned with the freedom of India, I was led to wonder what exactly India is. I knew, of course, the geography of India. I knew many other odd facts about India, too. I was not prepared to accept it on faith that because I was born in India, therefore India was the greatest country in the world. That is the kind of folly in which the people of every country indulge.

There are quite enough people in India who think that India is obviously the greatest country. In the days when we were politically subject and could not take much pride in our political condition, we prided ourselves on our spiritual greatness. Having nothing else to get hold of we took refuge in spirituality.

(वी वर एन्गेज्ड, ऐज़ यू नो, इन अ वेरी ग्रेट मूवमेण्ट इन इण्डिया. बिकॉज दैट मूवमेंट वॉज़ इंटिमेटली कन्सर्ट्स विद द फ्रीडम ऑफ इण्डिया, आई वॉज़ लेड टू वण्डर व्हॉट एक्जैक्टली इण्डिया इज. आई न्यू, ऑफ कोर्स, द ज्यॉग्राफी ऑफ इण्डिया. आई न्यू मैनी अदर ऑड फैक्ट्स अबाउट इण्डिया, टू. आई वॉज़ नॉट प्रिपेअर्ड टू एक्सेप्ट इट ऑन फेथ दैट बिकॉज़ आई वॉज़ बॉर्न इन इण्डिया, देयरफोर इण्डिया वॉज़ द ग्रेटेस्ट कंट्री इन द वर्ल्ड. दैट इज़ द काईण्ड ऑफ फॉली इन व्हिच द पीपल ऑफ एवरी कंट्री इन्डल्ज।

देयर आर क्वाईट एनफ पीपल इन इण्डिया हू थिंक दैट इण्डिया इज़ ऑबविअसली द ग्रेटेस्ट कंट्री. इन द डेज़ व्हेन वी वर पॉलिटिकली सब्जेक्ट ऐण्ड कुड नॉट टेक मच प्राइड इन आवर पॉलिटिकल कन्डीशन, वी प्राइडिड आवरसेल्व्स ऑन आवर स्पिरिचुअल ग्रेटनेस. हैविंग नथिंग एल्स टू गैट होल्ड ऑफ वी टुक रिफ्यूज इन स्पिरिटुएलिटी.)

अनुवाद :
हम लोग बहुत महान आंदोलन में व्यस्त थे। क्योंकि वह आंदोलन भारत की आजादी से बहुत घनिष्ठ रूप से संबंधित था, इससे मैं इस सोच में पड़ गया कि भारत आखिर है क्या। मैं भारत का भूगोल तो जानता था। इसके अतिरिक्त मैं और भी बहुत से तथ्य जानता था भारत के बारे में। मैं केवल आस्था के आधार पर यह स्वीकार करने को तैयार नहीं था कि क्योंकि मैं भारत में जन्मा हूँ इसलिए भारत दुनिया का महानतम देश है। इस प्रकार की गलती या मूर्खता सभी देशों के लोग करते हैं। भारत में काफी सारे लोग हैं जो यह सोचते हैं कि भारत निश्चित रूप से दुनिया का महानतम देश है। जिन दिनों हम राजनैतिक रूप से पराधीन थे और अपनी राजनैतिक दशा पर गर्व नहीं कर पाते थे, उन दिनों में हम अपनी आध्यात्मिक श्रेष्ठता पर गर्व करते थे। कुछ और न होने पर हमने आध्यात्मिकता में आश्रय ढूँढ़ा।

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If you go to other countries. I shall not name them as I do not wish to cause offence-you will find the people there think that their country is the chosen country, the torch bearer of civilization, the most advanced country, the most revolutionary country, the country with the biggest buildings, the country with something unique, some mission or the other. It is natural for one to like one’s own country and one’s own people. It would be unnatural not to do so. It is good to be a little proud of one’s own country. But it is wrong to start imagining that we are the highest and the best in the world. The fact is that every country and every people have admirable points about them; they have great achievements to their credit, and they have also bad periods in their history. This applies not to countries only but to individuals also. Nobody is perfect; he has weaknesses and failings. Nobody is thoroughly bad either. We are all mixtures of good and evil. But we should try to further the good in ourselves and in others.

(इफ यू गो टू अदर कन्ट्रीज-आई शैल नॉट नेम देम ऐज़ आई डू नॉट विश टू कॉज ऑफेन्स-यू विल फाइण्ड द पीपल देयर थिंक दैट देयर कंट्री इज द चोज़न कंट्री, ट टॉर्च बीयरर ऑफ सिविलाइजेशन, द मोस्ट एडवान्स्ड कंट्री, द मोस्ट रिवोल्यूशनरी कंट्री, द कंट्री विद द बिगेस्ट बिल्डिंग्स, द कंट्री विद समथिंग यूनीक, सम मिशन और द अदर। इट इज़ नैचुरल फॉर वन टू लाइक वन्स ओन कंट्री ऐण्ड वन्स ओन पीपल. इट वुड बी अननैचुरल नॉट टू डू सो. इट इज़ गुड टू बी अ लिटल प्राउड ऑफ वन्स ओन कंट्री। बट इट इज़ रॉन्ग टू स्टार्ट इमैजिनिंग दैट वी आर द हाईएस्ट एण्ड द बेस्ट इन द वर्ल्ड. द फैक्ट इज दैट एवरी कंट्री ऐण्ड एवरी पीपल हैव एडमिरेबल पॉईण्ट्स अबाउट दैम, दे हैव ग्रेट अचीवमेण्ट्स टू देयर क्रेडिट एण्ड दे हैव ऑल्सो बैड पीरियड्स इन देयर हिस्ट्री. दिस अप्लाईज़ नॉट टु कंट्रीज़ ओनली बट टू इंडिविजुअल्स ऑल्सो. नोबडी इज़ परफैक्ट; ही हैज वीकनेसेस एण्ड फेलिंग. नोबडी इज थॉरोली बैड आईदर. वी आर ऑल मिक्सचर्स ऑफ गुड एण्ड ईविल. बट वी शुड ट्राय टू फर्दर द गुड इन आवरसेल्व्ज ऐण्ड इन अदर्स.)

अनुवाद :
यदि आप अन्य देशों में जाएँ-मैं उन देशों का नाम नहीं लूंगा। क्योंकि उनका अपमान करना मेरा उद्देश्य नहीं है-आप वहाँ पाएँगे कि लोग सोचते हैं कि उनका देश है चुना हुआ (ईश्वर द्वारा या प्रकृति द्वारा), सभ्यता के ध्वज वाहक या पथ प्रदर्शक सबसे प्रगतिशील देश, सबसे क्रान्तिकारी बदलावों का देश, सबसे बड़ी, ऊँची इमारतों का देश, ऐसा देश जिसमें कुछ विशेष बात है जिसका कुछ ध्येय या मिशन है। किसी के लिए भी अपने देश और उसके लोगों को पसन्द करना स्वाभाविक है। परन्तु यह सोचना कि हम सबसे उच्च, सबसे श्रेष्ठ हैं, गलत है। सच्चाई यह है कि सभी देशों में सभी लोगों में कुछ न कुछ प्रशंसनीय बात होती है, महान उपलब्धियाँ होती हैं एवं बुरा समय भी होता है उनके इतिहास में। और यह सिर्फ देशों पर ही लागू नहीं होता वरन व्यक्तियों पर भी। कोई भी दोषहीन परिपूर्ण नहीं होता। उसमें कमजोरियों एवं कमियाँ होती हैं। कोई भी पूरी तरह से बुरा भी नहीं होता। हम सभी अच्छाई व बुराई का मिश्रण है। परन्तु हमारी कोशिश अपनी व और लोगों की अच्छाइयों को बढ़ाने की होनी चाहिए।

Most of you probably did not see Gandhiji at close quarters. He had amazing qualities. One of these qualities was that he managed to draw out the good in another person, The other person may have had plenty of evil in him. But he some how spotted the good and laid emphasis on that good. The result was that the poor man had to try to be good. He could not help it. He would feel a little ashamed when he did something wrong.

(मोस्ट ऑफ यू प्रोबैबली डिड नॉट सी गाँधीजी ऐट क्लोज क्वॉटर्स. ही हैड अमेजिंग क्वालिटीज़. वन ऑफ दीज़ क्वालिटीज़ वॉज़ दैट ही मैनेज्ड टू ड्रॉ आउट द गुड इन अनदर पर्सन. द अदर पर्सन मे हैव हैड प्लेण्टी ऑफ ईविल इन हिम. बट ही समहाऊ स्पॉटिड द गुड ऐण्ड लेड एम्फैसिस ऑन दैट गुड. द रिज़ल्ट वॉज़ देट द पूअर मैन हैड टू ट्राई टू बी गुड. ही कुड नॉट हैल्प इट. ही वुड फील अ लिटल अशेम्ड व्हेन ही डिड समथिंग रॉन्ग.)

अनुवाद :
आप में से ज्यादातर लोगों ने गाँधीजी को पास से नहीं देखा उनमें गजब की खूबियाँ थीं। ऐसी ही एक उनकी खूबी थी कि वे किसी दूसरे के भीतर से उसकी अच्छाई को बाहर निकाल लाते थे। दूसरे में बेशक बहुत-सी बुराईयाँ होंगी। परन्तु गाँधीजी किसी-न-किसी प्रकार उसकी अच्छाई को पहचान लेते गे थे और फिर उसी को महत्व देते थे। परिणाम यह होता था कि दूसरे को अच्छा होने का प्रयत्न करना ही पड़ता था। उसके पास और कोई चारा नहीं होता था। कुछ गलत कर देने पर शर्मिन्दा भी होता था।

People who always seek evil in others find it. This applies to nations as well as individuals. Go to a foreign country. You are likely to find many things that you do not like. Are you going to spend your time finding out the evil in other countries, or rather in finding out the good in them, and profiting yourself and others by your contact?

We are all much too apt to look at the evil in other individuals and countries rather than the good. Perhaps some of you know the saying in the Bible about the person who could not see the beam in his own eye and saw the mote in the other’s eye. I am sorry if you think I am rambling. But this is, I might inform you in secret, a very clever attempt to get behind your mind. I am at least being frank with you.

(पीपल हू ऑलवेज़ सीक ईविल इन अदर्स फाइण्ड इट. दिस अलाईज टू नेशन्स ऐज़ वैल ऐज़ इंडिविजुअल्स. गो टू अ फॉरन कंट्री. यू आर लाइक्ली टू फाइण्ड मैनी थिंग्स दैट यू डू नॉट लाइक. आर यू गोइंग टू स्पेन्ड यॉर टाईम फाइण्डिंग आऊट द ईविल इन अदर कंट्रीज, ऑर रादर इन फाइण्डिंग आउट द गुड इन दैम, एण्ड प्रॉफिटिंग यॉरसेल्फ ऐण्ड अदर्स बाई यॉर कॉण्टेक्ट?

वी आर ऑल मच टू एप्ट टू लुक ऐट द ईविल इन अदर इंडिविजुअल्स ऐण्ड कंट्रीज रादर दैन द गुड. परहैप्स सम ऑफ यू नो द सेइंग इन द बाईबल अबाऊट द पर्सन हू कुड नॉट सी द बीम इन हिज़ ओन आई ऐण्ड सॉ द मोट इन द अदर्स आई. आई ऐम सॉरी इफ यू थिंक आई ऐम रैम्बलिंग बट दिस इज़, आई माईट इन्फॉर्म यू इन सीक्रेट, अ वेरी क्लेवर अटेम्प्ट टु गैट बिहाइण्ड यॉर माईण्ड. आई ऐम ऐट लीस्ट बीईंग फ्रेंक विद यू.)

अनुवाद :
जो लोग हमेशा दूसरों में बुराइयाँ ढूँढ़ते रहते हैं उन्हें बुराई मिल जाती है। यह देशों व व्यक्तियों दोनों पर लागू होता है। किसी दूसरे देश में जाइए। आपको वहाँ अनेक ऐसी चीजें मिलने की सम्भावना है जो आपको पसन्द नहीं होंगी। क्या आप अपना समय यह जानने में लगाएंगे वहाँ की बुराइयाँ क्या हैं अथवा यह पता लगाने में वहाँ अच्छाइयाँ क्या हैं, और स्वयं भी लाभान्वित हों और अन्य को भी लाभ पहुँचाएँ जो आपके सम्पर्क में आएँ?

हम दूसरे व्यक्तियों और देशों की बुराइयाँ ढूँढ़ने में कुछ अधिक ही योग्य हैं बजाए उनकी अच्छाइयों के। शायद आप में से कुछ बाइबल की उस उक्ति के बारे में जानते होंगे उस व्यक्ति के बारे में जो अपने नेत्रों में सहतीर नहीं देख पाता था परन्तु दूसरे की आँख में पड़ा धूल का कण उसे दिखाई दे जाता था। मुझे क्षमा करना यदि आपको लगे कि मैं अनर्गल प्रलाप कर रहा हूँ। परन्तु मैं आपको गुप्त रूप से जानकारी दे दूँ कि यह आपके मन में झाँकने का एक चतुर प्रयास है। मैं कम से कम आपसे स्पष्ट कह रहा हूँ।

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Having got the larger frame, I looked more closely at my own country and wrote The Discovery of India. In it I concentrated on my country’s past and the story of its development.

I am trying to explain to you how my thinking developed in these matters. The more I thought and the more I learnt the more I saw how little I knew and how much more there was to learn. One of my regrets today is that I have no time to pursue these studies properly by reading or thinking or writing, because writing for me is essentially an aid to thinking. In trying to write, one has to think more concisely than otherwise.

(हैविंग गॉट द लार्जर फ्रेम, आई लुक्ड मोर क्लोज़ली ऐट माई ओन कंट्री ऐण्ड रोट द डिस्कवरी ऑफ इण्डिया. इन इट आई कन्सनेट्रैटिड ऑन माई कंट्रीज पास्ट ऐण्ड द स्टोरी ऑफ इट्स डेवलपमेंट।

आई एम ट्राईंग टू एक्स्प्ले न टू यू हाउ माई थिंकिंग डेवलप्ड इन दीज़ मैटर्स. द मोर आई थॉट ऐण्ड द मोर आई लर्ट द मोर आई सॉ हाऊ लिटल आई न्यू ऐण्ड हाऊ मच मोर देयर वॉज़ टु लन. वन ऑफ माई रीग्रेट्स टुडे इज़ दैट आई हैव नो टाईम टु परस्यू दीज़ स्टडीज़ प्रॉपर्ली बाई रीडिंग ऑर थिंकिंग ऑर राइटिंग, बिकॉज़ राईटिंग फॉर मी इज़ एसेन्शियली ऐन एड टू थिंकिंग. इन ट्राईंग टू राईट, वन हैज़ टू थिंक मोर कन्साईज़ली दैन अदरवाईज.)

अनुवाद :
वृहद सोच रखने के कारण मैंने अपने देश का ही बहुत बारीकी से अध्ययन किया और ‘भारत की खोज’ पुस्तक लिखी। इसमें मैंने अपनी लेखनी को अपने देश के इतिहास एवं उसके विकास की कहानी पर केन्द्रित किया है।

मैं आपको यह समझाने का प्रयास कर रहा हूँ कि इन मामलों में मेरी सोच कैसे विकसित हुई। जितना अधिक मैंने सोचा उतना ही अधिक मैंने जाना और उतना ही अधिक मैंने देखा कि मैं कितना कम जानता था और कितना कुछ है जानने के लिए। आज मेरा एक खेद इस बात को लेकर है कि मेरे पास अब समय नहीं है इन खोजों को ठीक से जारी रखने का पठन, मनन एवं लेखन द्वारा क्योंकि मेरे लिए लेखन असल में मनन की सहायक हैं। लिखते समय व्यक्ति को कहीं अधिक स्पष्ट रूप से सोचना पड़ता है।

I suppose I must not complain of my present lot. What I would like you to do first of all is to think. Thinking is something which does not come automatically to a person. Gossiping with a neighbour is not thought. If you repeat something which somebody else has said, it is not thought. I do not expect all of you to become mighty thinkers, though some of you may. But I would like all of you to think and to develope the art of thinking.

Nothing is more helpful to thinking than reading, that is, reading intelligently, because thereby you get other people’s thoughts, and by weighing them you can think yourself. I have often said that it is very unfortunate that people think and read so little nowadays, especially in India. I do not call newspaper-reading · But any reading which makes you think is useful reading, even if it is a very good novel. Great novels always make one think, because they are pictures of life painted by great minds.

(आई सपोज़ आई मस्ट नॉट कम्प्लेन ऑफ माई प्रेजेण्ट लॉट. व्हॉट आई वुड लाइक यू टू डू फर्स्ट ऑफ ऑल इज़ टू थिंक. थिंकिंग इज़ समथिंग व्हिच डज़ नॉट कम ऑटोमैटिकली टु अ पर्सन, गॉसिपिंग विद अ नेबर इज नॉट थॉट. इफ यू रिपीट समथिंग व्हिच समबडी एल्स हैज सेड, इट इज़ नॉट थॉट आई डू नॉट एक्सपेक्ट ऑल ऑफ यू टू बिकम माईटी थिंकर्स, दो सम ऑफ यू मे. बट आई वुड लाइक ऑल ऑफ यू टू थिंक ऐण्ड टू डेवलप द आर्ट ऑफ थिंकिंग.

नथिंग इज़ मोर हैल्पफुल ट्र थिंकिंग दैन रीडिंग, दैट इज़, रीडिंग इन्टेलिजेण्टली, बिकॉज़ देयरबाई थू गैट अदर पीपल्ज़ थॉट्स, ऐण्ड बाई वेईंग दैम यू कैन थिंक यॉरसेल्फ. आई हैव ऑफन सेड दैट इट इज़ वेरी अनफॉरचुनेट दैट पीपल थिंक ऐण्ड रीड सो लिटल नाओअडेज़, एस्पेशियली इन इण्डिया. आई डू नॉट कॉल न्यूज़पेपर रीडिंग. बट एनी रीडिंग व्हिच मेक्स यू थिंक इज़ यूज़फुल रीडिंग, ईवन इफ इट इज़ उन वेरी गुड नॉवल. ग्रेट नॉवल्स ऑलवेज मेक वन थिंक, बिकॉज दे आर पिक्चर्स ऑफ लाइफ पेण्टिड बाई ग्रेट माईण्ड्स.)

अनुवाद :
मुझे लगता है कि अपने भाग्य पर शिकायत नहीं करनी चाहिए। मैं सर्वप्रथम आप सब लोगों से यह अपेक्षा करता हूँ कि आप विचार करें, मनन करें। विचार करने, मनन करने की कला किसी में स्वाभाविक रूप से विद्यमान नहीं होती। पड़ोसी से गपशप सोचना-विचारना नहीं है। यदि आप किसी की कही हुई बात दोहराते हैं तो यह विचार नहीं है। मैं आप सब लोगों से प्रकाण्ड विचारक बनने की अपेक्षा नहीं करता, हालांकि आप में से कुछ हो भी जाएँगे। परन्तु मैं यह चाहूँगा कि आप सब सोचे-विचारें और विचार करने की कला विकसित करें।

इस कार्य में पठन से अधिक कुछ भी सहायक नहीं है अर्थात् बुद्धिमतापूर्ण पठन, क्योंकि पढ़ने से ही आपको दूसरों के विचार पता चलते हैं और उनको तोलकर आप स्वयं सोच सकते हैं। मैंने यह अक्सर कहा है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजकल लोग इतना कम सोचते हैं और पढ़ते हैं विशेषकर भारत में। मैं अखबार पढ़ने को पढ़ना नहीं मानता। परन्तु कोई भी पठन जो आपको सोचने पर मजबूर करे उपयोगी पढ़ाई है यहाँ तक कि कोई अच्छा उपन्यास भी। श्रेष्ठ उपन्यास हमेशा व्यक्ति को सोचने पर मजबूर करते हैं क्योंकि वे श्रेष्ठ मस्तिष्कों द्वारा चित्रित जीवन के चित्र हैं।

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If you think about the Five-Year Plans, you will find what a vital part the engineer plays in them. We shall require tens of thousands of engineers and hundreds of thousands of overseers, mechanics, and other technicians for our Plans. The whole world is becoming more and more a world of trained people. They need to be trained in two ways. They must be trained in mind, and have some vision and understanding of the world picture. Then they must be trained in particular jobs which they can do well, whether it be science or engineering or medicine or education. Such are the skills which will build India.

ड्रफ यू थिंक अबाऊट द फाइव-यीअर प्लान्स, यू विल फाइण्ड व्हॉट अ वाईटल पार्ट द इंजीनियर प्लेज़ इन दैम. वी शैल रिक्वायर टैंन्स ऑफ थाऊजेण्ड्स ऑफ इंजीनियर्स एण्ड हन्ड्रेड्स ऑफ थाऊजेण्ड्स ऑफ ओवरसीअर्स, मैकेनिक्स, ऐण्ड अदर टेक्निशियन्स फॉर आवर प्लान्स. द होल वर्ल्ड इज़ बिकमिंग मोर एण्ड मोर अ वर्ल्ड ऑफ ट्रेण्ड पीपल. दे नीड टू बी ट्रेण्ड इन टू वेज़. दे मस्ट बी ट्रेण्ड इन माइण्ड, ऐण्ड हैव सम विजन ऐण्ड अण्डरस्टैण्डिंग ऑफ द वर्ल्ड पिक्चर. देन दे मस्ट बी ट्रेण्ड इन पर्टिकुलर जॉब्स, व्हिच दे कैन डू वैल, वेदर इट बी साइंस और इंजीनियरिंग और मेडिसिन ऑर एजुकेशन. सच आर द स्किल्स व्हिच विल बिल्ड इण्डिया.)

अनुवाद :
यदि आप पंचवर्षीय योजनाओं के बारे में सोचें, आप पायेंगे कि अभियंता (इंजीनियर) इनमें कितना महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। हमें हजारों की संख्या में अभियन्ताओं की आवश्यकता होगी, लाखों में निरीक्षकों की, मिस्त्रियों (मैकेनिक) एवं तकनीशियनों की हमारी इन योजनाओं के लिए। पूरा विश्व अधिक से अधिक प्रशिक्षित लोगों का विश्व बनता जा रहा है। उनको दो प्रकार से प्रशिक्षित किये जाने की आवश्यकता है। उन्हें मानसिक रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि उनमें दूरदर्शिता का विकास हो एवं बदलते विश्व परिदृश्य के प्रति सचेत हों। फिर उनको कार्य विशेष के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए जो वे बेहतर कर सकते हों मसलन विज्ञान या अभियांत्रिकी या चिकित्सा या शिक्षा। इसी प्रकार के कौशलों से भारत का निर्माण होगा।

Frankly, the job of the politician will not build India, although I speak as a politician. A politician is a useful person in his own way, though it is conceivable that in a perfect society the politician will fade away. But it is not conceivable that the experts will fade away. There will always be need for the engineer and the scientist. They cannot fade away even if the politician may fade away. However, I do not think the time is near when the politician will fade away.

You are young. I should like you to have the pride of youth and the ambition of youth to do something worthwhile and big. All of you may not be geniuses, but some of you might yet do worthwhile things in some department of human activity or the other. I do not like people who have no pride and ambition and are just sloppy people.

(फ्रक्ली, द जॉब ऑफ द पॉलिटीशिन्यस विल नॉट बिल्ड इण्डिया, ऑल्दो, आई स्पीक ऐज़ अ पॉलिटीशियन्स. अ पॉलिटीशियन इज़ अ यूज़फुल पर्सन इन हिज़ ओन वे, दो इट इज़ कन्सीवेबल दैट इन अ पर्फेक्ट सोसायटी द पॉलिटीशियन विल फेड अवे. बट इज नॉट कन्सीवेबल दैट द एक्सपर्ट्स विल फेड अवे. देयर विल आलवेज़ बी नीड फॉर द इंजीनियर ऐण्ड द साइन्टिस्ट. दे कैननॉट फेड अवे ईवन इफ द पॉलिटीशियन मे फेड अवे, हाउएवर आई डू नॉट थिंक द टाईम इज नीयर व्हेन दे पॉलिटीशियन विल फेड अवे।

यू आर यंग. आई शुड लाइक यू टू हैव द प्राइड ऑफ यूथ एण्ड द ऐम्बिशन ऑफ यूथ टू डू समथिंग वर्थव्हाइल ऐण्ड बिग. ऑल ऑफ यू मे नॉट बी जीनियसिस, बट सम ऑफ यू माईट यट डू वर्थव्हाईल थिंग्स इन सम डिपार्टमेण्ट ऑफ ह्यूमन ऐक्टिविटी ऑर द अदर, आई डू नॉट लाइक पीपल हू हैव नो प्राइड ऐण्ड ऐम्बिशन एण्ड आर जस्ट स्लॉपी पीपल.)

अनुवाद :
स्पष्ट रूप से कहूँ तो राजनीतिज्ञों के कार्यों से भारत का निर्माण नहीं होगा। हालांकि मैं स्वयं यह बात एक राजनीतिज्ञ के रूप में कह रहा हूँ। राजनीतिज्ञ अपने आप में एक उपयोगी व्यक्ति होता है हालांकि यह भी कल्पनीय है कि एक परिपूर्ण समाज में राजनीतिज्ञ लुप्त हो जाएगा। परन्तु यह कल्पनीय नहीं है कि अलग-अलग विधाओं के विशेषज्ञ लुप्त हो जायेंगे। अभियन्ताओं और वैज्ञानिकों की आवश्यकता हमेशा रहेगी। वे लुप्त नहीं होंगे चाहे राजनीतिज्ञ एक बार को लुप्त हो जाएँ। फिर भी, मैं नहीं सोचता कि राजनीतिज्ञों के लुप्त होने का समय निकट है।

तुम युवा हो। मैं यह चाहता हूँ कि तुम में युवावस्था का अभिमान हो और महत्वाकांक्षा हो कुछ बड़ा कुछ महत्वपूर्ण करने की। तुम में से सभी अपूर्व प्रतिभाशाली तो शायद नहीं हो, परन्तु तुम में से कुछ लोग ऐसा कुछ कर सकते हैं किसी क्षेत्र में जो महत्वपूर्ण हो। मुझे ऐसे लोग पसन्द नहीं हैं जिनमें न अभिमान हो न महत्वाकांक्षा एवं आलसी हों।

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I am not using the words ‘pride’ and ‘ambition’ in small personal sense. I do not mean the pride of getting money, which is the silliest of all types of pride. Pride should consist in doing your job in the best possible manner. If you are a scientist, think of becoming an Einstein, not merely a reader in your university. If you are a medical man, think of some discovery which will bring healing to the human race. If you are an engineer, aim at some new invention. The mere act of aiming at something big makes you big.

If my colleagues and I and others who function on the public stage today appear big leaders to you, look back on how we became so. We may have had some virtue and some ability, but essentially we became what we were because we had some ambition and pride, because we hitched our wagon to a star, because we tried to do big things and in so trying our stature increased a little.

(आई एम नॉट यूजिंग द वर्ड्स ‘प्राईड’ एण्ड ‘ऐम्बिशन’ इन अ स्मॉल पर्सनल सेन्स. आई डू नॉट मीन द प्राइड ऑफ गैटिंग मनी, व्हिच इज़ द सिलिएस्ट ऑफ ऑल टाईप्स ऑफ प्राइड. प्राइड शुड कन्सिस्ट इन डूइंग यॉर जॉब इन द बेस्ट पॉसिबल मैनर. इफ यू आर अ साइन्टिस्ट, थिंक ऑफ बिकमिंग ऐन आईन्स्टीन, नॉट मेअरली अ रीडर इन यॉर यूनिवर्सिटी. इफ यू आर अ मेडिकल मैन, थिंक ऑफ सम डिस्कवरी व्हिच विल ब्रिग हीलिंग टू द ह्यूमन रेस. इफ यू आर ऐन इंजीनियर, एम ऐट सम न्यू इन्वेन्शन. द मिअर ऐक्ट ऑफ एमिंग ऐट समथिंग बिग मेक्स यू बिग.

इफ माई कलीग्ज़ एण्ड आई एण्ड अदर्स हू फंक्शन ऑन द पब्लिक स्टेज टुडे अपीयर बिग लीडर्स टू यू, लुक बैक ऑन हाऊ वी बिकेम सो. वी मे हैव हैड सम वयूं ऐण्ड सम एबिलिटी, बट एसेन्शियली वी बिकेम व्हॉट वी वर बिकॉज़ वी हैड सम ऐम्बिशन ऐण्ड प्राइड, बिकॉज वी हिच्ड आवर वैगन टू अ स्टार, बिकॉज वी ट्राईड टू डू बिग थिंग्स ऐण्ड इन सो ट्राईंग आवर स्टेचर इन्क्रीस्ड अ लिटिल.)

अनुवाद :
मैं इन शब्दों ‘अभिमान’ एवं ‘महत्वाकांक्षा’ का प्रयोग किसी क्षुद्र निजी इच्छा के संदर्भ में नहीं कर रहा हूँ। मैं धन। के अभिमान की बात नहीं कर रहा हूँ जो कि सबसे मूर्खतापूर्ण अभिमान है। अभिमान अपने कार्य को सबसे अच्छे ढंग से निष्पादित करने का होना चाहिए। यदि तुम एक वैज्ञानिक हो। तो अल्बर्ट आइन्स्टीन जैसा बनने की सोचो न कि केवल अपने विश्वविद्यालय के प्रवक्ता भर। यदि तुम चिकित्सा के क्षेत्र में हो तो ऐसी कोई खोज करने की सोचो जिससे मनुष्य जाति का भला हो, रोग या रोगों का उपचार हो। यदि तुम अभियंता (इंजीनियर) हो तो किसी नए आविष्कार को अपना लक्ष्य बनाओ। सिर्फ अपना लक्ष्य बड़ा करने की क्रिया मात्र ही तुम्हें बड़ा बना देती है।

यदि मेरे सहयोगी, सहकर्मी और मैं व अन्यं जो आज सार्वजनिक मंच पर कार्य कर रहे हैं तुम्हें बड़े नेता प्रतीत होते हैं तो थोड़ा पीछे नजर डालो कि हम ऐसे कैसे बने। हम सब में कुछ गुण एवं क्षमताएँ रही होंगी परन्तु हकीकत में हम ऐसे बन पाए क्योंकि हमारे भीतर कुछ अभिमान था कुछ महत्वाकांक्षाएँ थी, क्योंकि हम सफलता प्राप्त करने हेतु सफल लोगों के सम्पर्क में रहे, क्योंकि हमने बड़े कार्य करने के प्रयास किये और इस कोशिश में हमारा कद थोड़ा बढ़ गया।

It is not what you say that matters, but what you do. Think therefore of the vast opportunities that the world offers to those who are keen of mind, strong of character and fleet of foot. Think of the opportunities that India offers. I know better than you of the difficult problems of India, the suffering and misery of numberless people. We are trying to meet those problems and solve them, not by magic but by strong will and hard work.

There is no magic in this world except the occasional magic of human personality and the human mind. It takes time and perseverance to do big things. It will not do to be faint-hearted. One meets with failure occasionally, but one has yet to go on. Success does not come suddenly or without setbacks. So you have these great opportunities in India. Prepare yourself for them; grow strong in mind and body. Have that inner urge to do big things and I have no doubt that you will do big things. (Abridged)

(इट इज नॉट व्हॉट यू से दैट मैटर्स, बट व्हॉट यू डू. थिंक देयरफोर ऑफ द वास्ट ऑपरचुनिटीज़ दैट द वर्ल्ड ऑफर्स टू दोज़ हू आर कीन ऑफ माइण्ड, स्ट्रॉन्ग ऑफ कैरेक्टर ऐण्ड फ्लीट ऑफ फुट. थिंक ऑफ द ऑपरचुनिटीज दैट इण्डिया ऑफर्स. आई नो बैटर दैन यू ऑफ द डिफिकल्ट प्रॉब्लम्स ऑफ इण्डिया, द सफरिंग ऐण्ड मिज़री ऑफ नम्बरलैस पीपल. वी आर ट्राईंग टु मीट दोज़ प्रॉब्लम्स ऐण्ड सॉल्व दैम, नॉट बाई मैजिक बट बाई स्ट्रॉन्ग विल एण्ड हार्ड वर्क.

देयर इज़ नो मैजिक इन दिस वर्ल्ड एक्सेप्ट द अकेज़नल मैजिक ऑफ ह्यूमन पर्सनैलिटी ऐण्ड द ह्यूमन माइण्ड. इट टेक्स टाइम एण्ड परसिवरेन्स टू डू बिग थिंग्स. इट विल नॉट डू टू बी फेण्ट-हार्टिड. वन मीट्स विद फेल्यर अकेज़नली, बट वन हैज़ यह टू गो ऑन। सक्सेस डज़ नॉट कम सडन्ली ऑर विदाऊट सैटबैक्स. सो यू हैव दीज़ ग्रेट ऑपरचुनिटीज़ इन इण्डिया. प्रिपेयर यॉरसेल्फ फॉर दैम; ग्रो स्ट्रॉन्ग इन माइण्ड एण्ड बॉडी. हैव दैट इनर अर्ज टू डू बिग थिंग्स ऐण्ड आई हैव नो डाऊट दैट यू विल डू बिग थिंग्स (एब्रिज्ड)।

अनुवाद :
महत्व तुम जो कहते हो उसका नहीं वरन तुम जो करते हो उसका है। इसलिए उन असंख्य अवसरों के बारे में सोचो जो यह दुनिया प्रदान करती है उनको जो तीव्र बुद्धि के हैं, दृढ़ चरित्र के हैं और चपल हैं। भारत में जो अवसर हैं उनके बारे में सोचो। मैं भारत की मुश्किल समस्याओं और अनगिनत लोगों की पीड़ाओं व दुर्भाग्य को तुमसे बेहतर जानता हूँ। हम लोग उन समस्याओं का सामना करने की व उनका निदान करने की कोशिश कर रहे हैं, जादू से नहीं वरन् दृढ़ इच्छाशक्ति व कठोर श्रम से।

यदा-कदा दिखने वाले मानव व्यक्तित्व और मानव मस्तिष्क के जादू के अलावा अन्य कोई जादू नहीं है दुनिया में। बड़े कार्य करने में समय, धीरज व दृढ़ता की जरूरत होती है। कमजोर-दिल व इच्छाशक्ति होने से काम नहीं चलता। बीच-बीच में असफलता भी मिलती है परन्तु हमें निरन्तर आगे बढ़ना होता है। सफलता अचानक नहीं मिल जाती न बिना बाधाओं के। तो तुम्हारे पास यह महान अवसर है भारत में। स्वयं को इनके लिए तैयार करो, मन व शरीर से मजबूत बनो। अपने भीतर बड़े. कार्य करने की तीव्र इच्छा रखो और मुझे कोई सन्देह नहीं है कि तुम बड़े-बड़े कार्य करोगे। (संक्षिप्त रूप)।

MP Board Class 10th English Solutions

The Spring Blossom Textbook General English Class 10th Solutions

Light the Lamp of Thy Love Question Answer Class 10 English The Spring Blossom Chapter 1 MP Board

Class 10 English The Spring Blossom Chapter 1 Light the Lamp of Thy Love Questions and Answers

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Light the Lamp of Thy Love Class 10th Question Answer

Word Power

A. Match the following words with their correct meaning.
(सुमेलित कीजिए)
MP Board Class 10th English The Spring Blossom Textbook Solutions Chapter 1 Light the Lamp of Thy Love 1
Answer:
1. → (e)
2. → (a)
3. → (b)
4. → (d)
5. → (C)

B. Give antonyms of the following words:
(विलोम शब्द लिखिए)
Answer:
light – dark
external – internal
senior – junior
evil – good

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How Much Have I Understood?

A. Answer these questions. (One or two sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
What do you mean by ‘In my house’ in the poem?
(निम्न प्ररनों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए)
Answer:
By In my house’ the poet means his own body, soul and heart.
(बाइ ‘इन माइ हाऊस’ द पोऍट मीन्स हिज़ ओन बॉडी, सोल एण्ड हार्ट।)
‘मेरे घर में’ से कवि का तात्पर्य उसके स्वयं के शरीर, आत्मा व हृदय से है।)

Question 2.
What does the speaker want the Lord to do at first?
(व्हॉट डज़ द स्पीकर वॉण्ट द लॉर्ड टू डू ऐट फर्स्ट?)
वक्ता ईश्वर से सर्वप्रथम क्या करवाना चाहता है?
Answer:
The speaker wants the Lord to light the lamp of his love in his heart and soul.
(द स्पीकर वॉन्ट्स द लॉर्ड टू लाइट द लैम्प ऑफ हिज़ लव इन हिज़ हार्ट एण्ड सोल।)
वक्ता चाहता है कि ईश्वर उसके हृदय व आत्मा में अपने प्रेम का दीपक जलाए।

Question 3.
What kind of lamp is it in the poem?
(व्हॉट काइन्ड ऑफ लैम्प इज इट इन द पोऍम?)
कविता में किस प्रकार के दीपक के विषय में कहा गया है?
Answer:
The lamp mentioned in the poem is transmuting. Its rays have the power of transformation.
(द लैम्प मैन्शन्ड इन द पोऍम इज़ ट्रान्सम्यूटिंग। इट्स रेज़ हैव द पावर ऑफ ट्रान्सफॉर्मेशन।)
कविता में चर्चित दीपक बदलाव लाने वाला है। उसकी किरणों में परिवर्तन करने की क्षमता है।

Question 4.
What does ‘darkness’ stand for in the poem?
(व्हॉट डज़ ‘डार्कनेस’ स्टैण्ड फॉर इन द पोऍम?)
कविता में अन्धकार का क्या तात्पर्य है?
Answer:
The ‘darkness’ means the ignorance and evil present in the heart.
(द डार्कनेस मीन्स द इग्नोरेन्स एण्ड ईविल प्रेजेन्ट इन द हार्ट।)
अन्धकार से तात्पर्य हृदय में व्याप्त अज्ञानता व बुराई से है।

Question 5.
What does ‘light’ stand for in the poem?
(व्हॉट डज़ लाइट स्टैण्ड फॉर इन द पोऍम?)
कविता में प्रकाश से क्या तात्पर्य है?
Answer:
‘Light’ means knowledge that can distinguish between evil and good, right and wrong.
(लाइट मीन्स नॉलेज दैट कैन डिस्टिंग्विश बिटवीन ईविल एण्ड गुड, राईट एण्ड राँग।)
उजाले का तात्पर्य ज्ञान से है जो बुराई और अच्छाई व सही और गलत में फर्क कर सके।

Question 6.
What are the senses compared to?
(व्हॉट आर द सेन्सेज़ कम्पेअर्ड टू?)
इन्द्रियों की तुलना किससे की गई है?
Answer:
The senses are compared to lamps.
(द सेन्सेज़ आर कम्पेअर्ड टू लैम्प्स।)
इन्द्रियों की तुलना दीपों से की गई है।

MP Board Solutions

B. Answer the questions. (Three or four sentences)
(निम्न प्रश्नों के तीन या चार वाक्यों में उत्तर दीजिए।)

Question 1.
Why does the poet want God to light the lamp?
(व्हाय डज़ द पोऍट वॉण्ट गॉड टू लाइट द लैम्प?)
कवि ईश्वर से दीपक क्यों जलवाना चाहता है?
Answer:
The poet wants God to light the lamp because only he has the power to transform evil into good and ignorance into knowledge.
(द पोऍट वॉन्ट्स गॉड ट्र लाइट द लैम्प बिकॉज़ ओनली ही हैज़ द पावर टू ट्रान्सफॉर्म ईविल इन्टू गुड एण्ड इग्नोरेंस इन्टू नॉलेज।)
कवि ईश्वर से दीपक जलवाना चाहता है क्योंकि सिर्फ ईश्वर ही बुराई को अच्छाई व अज्ञानता को ज्ञान में परिवर्तित करने की क्षमता रखते हैं।

Question 2.
What does the ‘door of the soul’ suggest?
(व्हॉट डज़ द डोर ऑफ़ द सोल सजेस्ट?)
आत्मा के द्वार से क्या तात्पर्य है?
Answer:
The ‘door of the soul’ suggests poet’s inner self and heart. He wants God to light the lamp of His love within him.
(द ‘डॉर ऑफ द सोल’ सजेस्ट्स पोऍट्स इनर सेल्फ एण्ड हार्ट। ही वॉन्ट्स गॉड टू लाइट द लैम्प ऑफ हिज़ लव विदिन हिम)
‘आत्मा के द्वार’ का तात्पर्य कवि के अन्तर्मन व हृदय से है। वह चाहते हैं कि ईश्वर अपने प्रेम का दीपक उनमें प्रज्ज्वलित करे।

Question 3.
What should we pray for?
(व्हॉट शुड वी प्रे फॉर?)
हमें क्या प्रार्थना करनी चाहिए?
Answer:
We should pray to God to drive away ignorance and evil from our heart by the lamp of his love.
(वी शुड प्रे टू गॉड टू ड्राईव अवे इग्नोरेंस एण्ड ईविल फ्रॉम आवर हार्ट बाइ द लैम्प हिज़ लव।)
हमें ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि वे हमारे हृदय से अज्ञानता व बुराई को अपने प्रेम के दीपक से हटाएँ।

Question 4.
Why does the speaker want the Lord to touch him once?
(व्हाइ डज़ द स्पीकर वॉन्ट द लॉर्ड टू टच हिम वन्स?)
वक्ता यह क्यों चाहता है कि ईश्वर उसे एक बार स्पर्श करे?
Answer:
The speaker wants the God to touch him once so that he may change. He believes that by His touch his body of clay would turn into gold, like that of God and all his worries would fade away.
(द स्पीकर वॉन्ट्स द गॉड टू टच हिम वन्स सो दैट ही मे चेन्ज। ही बिलीव्स दैट बाइ हिज़ टच हिज़ बॉडी ऑफ क्ले वुड टर्न इन्टू गोल्ड, लाइक दैट ऑफ गॉड एण्ड ऑल हिज़ वरीज़ वुड फेड अवे।)
वक्ता चाहता है कि ईश्वर उसे एक बार स्पर्श करे जिससे कि उसमें परिवर्तन आये। उसे विश्वास है कि ईश्वरीय स्पर्श से उसका मिट्टी का शरीर ईश्वर के समान स्वर्णिम हो जायेगा व उसकी समस्त चिन्ताएँ विलोप हो जायेंगी।

Question 5.
What is the message of the poem?
(व्हॉट इज़ द मैसेज ऑफ द पोऍम?)
कविता क्या सन्देश देती है?
Answer:
the poem says that instead of asking for worldly comforts we should pray to God to light our soul with His knowledge and love and drive away all the evil from our heart.
(द पोऍम सेज़ दैट इन्स्टैड ऑफ आस्किंग फॉर वर्ल्डली कम्फर्ट्स वी शुड प्रे टू गॉड टू लाइट आवर सोल विद हिज़ नॉलेज एण्ड लव एण्ड ड्राइव अवे ऑल द ईविल फ्रॉम आवर हार्ट।)
कविता यह सन्देश देती है कि हमें ईश्वर से सांसारिक ऐशो-आराम की वस्तुओं के लिए प्रार्थना न करके उससे यह प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमारी आत्मा को प्रेम व ज्ञान से प्रकाशित करे और हमारे हृदय से बुराइयों को दूर करे।

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Listening Time

A. The teacher will read out the following words and the students will repeat them. (निम्न शब्दों को दोहराओ।)
Answer:
MP Board Class 10th English The Spring Blossom Textbook Solutions Chapter 1 Light the Lamp of Thy Love 2

B. Complete the following stanza.
(निम्न पद्यांश को पूरा करिए।)
Answer:
In my house with Thine own hands
Light the lamp of Thy love!
The transmuting lamp entrancing,
Wondrous are its rays.
Change my darkness to Thy light, Lord!

Speaking Time

Speak out four sentences of your own as to what the poet prays to God.
(कवि की प्रार्थना के चार वाक्य लिखिए।)
Answer:

  1. The poet prays to God to change his darkness into His light.
  2. The poet prays to God to turn his evil into good.
  3. The poet prays to God to change him from clay to gold.
  4. The poet prays to God to free him from worries.

Writing Time

Paraphrase the poem in prose form by filling the blanks with suitable words from the box.
(रिक्त स्यान भरो)

(the lamp, body, love, happy, attitude, change, please, magical, golden, darkness, noble, remove, vices, make, touch, become, senses, mentor and guide, slavery free.)

Answer:
My Lord! Please light the lamp of Your love in my body. Your love can change me and my attitude and make me happy. Your love has magical power. It can remove all the darkness in me. Please remove the evil in me and make me noble.
O Almighty! please touch me with your golden hand.
My body is full of vices. Please make it sublime. My Lord! I have become a slave to my senses. Please free me of this slavery and be my mentor and guide.

Things to do

Collect any other poem of Tagore on a similar theme. Write it in your project file. Learn it by heart and recite it in your class.
(टैगोर की कोई अन्य कविता ढूँढ़कर लिखो व याद करके अपनी कक्षा में सुनाओ।)
Answer:
Students can do themselves.
(छात्र स्वयं करे)

Light the Lamp of Thy Love Central Idea of the Poem

The poem is the poet’s prayer to God to light the lamp of his (God’s) love in his heart and remove its darkness of ignorance. He believes that the wonderful rays of the lamp would transform his evil into good, clayey body into gold and would free him from all the worries and tensions of life.

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Light the Lamp of Thy Love Difficult Word Meanings 

Thine (दाइन)-(old use) yours (here related to God) (तुम्हारा), (यहाँ ईश्वर से सम्बन्धित); Thy (दाइ) -(old use) your (here related to God) (तुम्हारा), (यहाँ ईश्वर से सम्बन्धित); Transmute (ट्रान्सम्यूट)-to change something in something different (बदलाव करना); Entrancing (एन्ट्रेन्सिग) – capable of making somebody feel great pleasure and admiration so that they give somebody/something all their attention (सम्मोहित मन्त्रमुग्ध कर देना); Wondrous (वन्डरस)-wonderful, fascinating (अदूभुत); Darkness (डाकनेस) – ignorance, evil (अज्ञानता बुराई); Light (लाइट)-knowledge (ज्ञान), Evil (ईविल)-a force that causes bad things to happen (बुराई); Clay (क्ले) (here) the human body supposed to be build out of clay (यहाँ मानव शरीर मिट्टी का बना हुआ माना गया है); Sense lamps (सेन्स लैम्प्स)-the five senses of eyes (sight), ears (hearing), nose (smell), tongue (taste) and skin (touch) (पाँच इन्द्रियाँ); Sooted (सूटिड)-with soot (carbon), darkened (कालिख लगा हुआ); Light Thy resurrecting lamp (लाईट दाइ रिसरेक्टिंग लैम्प) – the radiant grace of God illuminating the poet’s life (ईश्वरीय तेज से कवि की जिन्दगी भी रोशन हो गई है)।

Light the Lamp of Thy Love Summary, Pronunciation & Translation

In my house, with Thine own hands,
Light the lamp of Thy Love!
Thy transmuting lamp entrancing,
Wondrous are its rays.

(इन माई हाऊज, विद दाईन ओन हैण्ड्स,
लाइट द लैम्प ऑफ दाय लव!
दाय ट्रांसम्यूटिंग लैम्प एन्ट्रैन्सिंग,
वन्डरस आर इट्स रेज़)

अनुवाद :
हे प्रभु! मेरे घर में स्वयं अपने हाथों से
अपने प्रेम का दीप प्रज्ज्वलित करो
अपना परिवर्तित कर देने वाला मनोहर दीप
चमत्कारिक है किरणें जिसकी।

विशेष :
इस कविता में कवि ईश्वर को सम्बोधित कर रहा है। इसे स्पष्ट करने के लिए ही ‘हे प्रभु’ सम्बोधन जोड़ा गया है।

Change my darkness to Thy light, Lord!
Change my darkness to Thy light,
And my evil into good.

(चेंज माई डार्कनेस ट्रदाय लाइट, लॉर्ड!
चेंज माई डार्कनेस टू दाय लाइट,
ऐण्ड माई ईविल इन्टू गुड.)

अनुवाद :
मेरे अज्ञान के अँधेरे को स्वयं के (ज्ञान के) प्रकाश में परिवर्तित कर दो हे प्रभु! मेरे अज्ञान के अँधेरे को. स्वयं के (ज्ञान के) प्रकाश में परिवर्तित कर दो, और मेरी बुराइयों को अच्छाइयों में।’

MP Board Solutions

Touch me but once and I will change,
All my clay into Thy gold
All the sense lamps that I did light
Sooted into worries
Sitting at the door of my soul,
Light Thy resurrecting lamp!

(टच मी बट वन्स ऐण्ड आई विल चेंज,
ऑल माई क्ले इन्टू दाय गोल्ड
ऑल द सेंस लैम्प्स दैट आई डिड लाइट
सूटेड इन्टू वरीज
सिटिंग ऐट द डोर ऑफ माई सोल,
लाइट दाय रिसरैक्टिंग लैम्प!)

अनुवाद :
हे प्रभु! सिर्फ एक बार छू लो मुझको तो बदल डालूँगा।
मेरे मन का समस्त कीचड़ (मैल) तुम्हारे प्रेम और ज्ञान के स्वर्ण में
अपनी समस्त इन्द्रियों को जो मैंने उद्दीप्त कर रखी हैं। चिन्ता (इच्छाओं) की कालिख से।
मेरी आत्मा के द्वार पर बैठकर हे प्रभु!
अपने पुनर्जीवनदायी (अमरत्व प्रदान करने वाले) ज्ञान के प्रकाश वाला दीप प्रज्ज्वलित करो।

The Spring Blossom Textbook General English Class 10th Solutions

Anger Question Answer Class 10 English The Spring Blossom Chapter 7 MP Board

Class 10 English The Spring Blossom Chapter 7 Anger Questions and Answers

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Anger Class 10th Question Answer

Word Power

A. Write rhyming words for these words from the poem.
(समान लय के शब्द लिखिए।)
Answer:
face – place
years – tears
wing – king
tries – wise

B. Match the following words with their synonyms.
(सुमेलित कीजिए)
MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 7 Anger 1
Answer:
1. → (b)
2. → (a)
3. → (d)
4. → (c)

C. Arrange the words given below in the columns according to the qualities they represent.
(अच्छे व बुरे गुणों को अलग-अलग कीजिए।)
(anger, ugly, fair, selfish, hostile, spoil, sorrow peace, frank, warm, conquer, noble, brave, wise, envy.)
Answer:
Positive qualities :
fair, hostile, peace, frank, warm, conquer, noble, brave, wise

Negative qualities :
anger, ugly, selfish, spoil, sorrow, envy

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How Much Have I Understood?

A. Answer these questions. (One or two sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
How does the poet describe anger in the first stanza?
(हाउ डज द पोएट डिस्क्राइब एंगर इन द फर्स्ट स्टैन्जा?)
कवि प्रथम पद्यांश में क्रोध का किस प्रकार वर्णन करता
Answer:
In the first stanza the poet describes anger as an ugly thing that spoils the facial expression of a person. He also describes it like a rainy cloud in sunny place.
(इन द फर्स्ट स्टैंज़ा द पोएट डिस्क्राइब्स एंगर एज एन अगली थिंग दैट स्पॉइल्स द फेसियल एक्सप्रेशन ऑफ अ पर्सन। ही ऑल्सो डिसक्राइब्स एट लाइक अ रेनी क्लाऊड इन सनी प्लेस।)
प्रथम पद्यांश में कवि गुस्से को बुरा व चेहरे के भाव को खराब करने वाला कहता है। वह धूप वाले चमकदार स्थान में बादल के समान है।

Question 2.
Who is greater than a king?
(हू इज ग्रेटर दैन अ किंग?)
राजा से ज्यादा महान् कौन है?
Answer:
A person who stops and keeps his anger in control is greater than a king.
(अ पर्सन हू स्टॉप्स एण्ड कीप्स हिज एंगर इन कन्ट्रोल इज ग्रेटर देन अ किंग।)
वह व्यक्ति जो अपने गुस्से को काबू में रखता है, राजा से भी ज्यादा महान् है।

Question 3.
Who is noble, brave and wise?
(हू इज़ नोब्ल, ब्रेव एण्ड वाइज?)
कौन श्रेष्ठ, बहादुर व चतुर है?
Answer:
The person who firmly tries to keep his temper and rule himself is noble, brave and wise.
(द पर्सन हू फर्मलि ट्राइज टू कीप हिंज टैम्पर एण्ड रुल हिमसेल्फ इज नोब्ल, ब्रेव एण्ड वाइज।)
वह व्यक्ति जो अपने गुस्से पर काबू व खुद पर नियन्त्रण रखने का पूर्ण रूप से प्रयास करता है वह श्रेष्ठ, बहादुर व चतुर है।

Question 4.
Describe ‘anger’ in your own words.
(डिस्क्राइब ‘एंगर’ इन योर ओन वर्ड्स।)
‘क्रोध’ को अपने शब्दों में वर्णित करो।
Answer:
Anger is a harmful expression. It not only snatches facial beauty but also does harm that is to be repented.
(एंगर इज अ हार्मफुल एक्सप्रेशन इट नॉट ओनलि स्नैचेज फेशियल ब्यूटी बट ऑल्सो डज़ हार्म दैट इज़ टू बी रिपेन्टिड।)
क्रोध एक हानिकारक भाव है। यह चेहरे की सुन्दरता को तो छीनता ही है और ऐसा नुकसान पहुंचाता है जिसके लिए पछतावा हो।

Question 5.
Give three characteristics of peace.
(गिव थ्री कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ पीस।)
शान्ति की तीन विशेषताएँ बताइए।
Answer:
Peace is frank, warm and soft.
(पीस इज फ्रैंक, वॉर्म एण्ड सॉफ्ट।)
शान्ति स्पष्टवादी, गर्म व मुलायम है।

B. Answer the following questions. (Three or four sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
What are the disadvantages of being angry?
(व्हॉट आर द डिसएडवेंटेजिज़ ऑफ बीइंग एंग्री?)
क्रोध से होने वाली हानियाँ क्या हैं?
Answer:
Anger has several disadvantages. It spoils the beauty of a person and also his relations. It takes away wisdom of a person so the words said in the state of anger sometimes do such a harm that cannot be corrected and there is nothing left except repentance.

(एंगर हैज सैवरल डिसएडवेंटेजिज़। इट स्पॉइल्स द ब्यूटी ऑफ अ पर्सन एण्ड ऑल्सो हिज रिलेशन्स। इट टेक्स अवे विज़डम ऑफ अ पर्सन सो द वर्ड्स सेड इन द स्टेट ऑफ एंगर समटाइम्स डू सच अ हार्म दैट कैननॉट बी करेक्टिड एण्ड देयर इज़ नथिंग लेफ्ट एक्सेप्ट रिपेन्टैन्स।)

क्रोध से कई हानियाँ हैं। यह व्यक्ति की खूबसूरती व उसके रिश्तों को हानि पहुँचाता है। यह व्यक्ति के विवेक को हर लेता है। इसी कारण गुस्से में कहे गये शब्द कई बार कुछ ऐसा नुकसान पहुँचाते हैं जो ठीक नहीं किया जा सकता और व्यक्ति के पास पछतावे के अलावा और भी कुछ नहीं रहता।

Question 2.
Why do we repent for a long time?
(व्हाय डू वी रिपेन्ट फॉर अ लाँग टाइम?)
हम काफी समय तक पछताते क्यों रहते हैं?
Answer:
We repent for a long time because the harm that is done by anger cannot be corrected in any way. No matter how many tears we shed.
(वी रिपेन्ट फॉर अ लाँग टाइम बिकॉज द हार्म दैट इज डन बाइ एंगर कैननॉट बी करैक्टिड इन एनी वे। नो मैटर हाउ मैनी टीयर्स वी शेड।)
हम काफी समय तक पछताते रहते हैं क्योंकि जो हानि क्रोध के द्वारा होती है वह किसी भी प्रकार ठीक नहीं हो सकती। हम चाहे कितने भी आँसू क्यों न बहायें उसके लिए।

Question 3.
Compare peace with anger.
(कम्पेअर पीस विद एंगर।)
शान्ति की क्रोध से तुलना कीजिए।
Answer:
Anger is a harmful expression that has the consequences which end in repentance. Peace is always pleasant. It drives away anger and helps to conquer it.
(एंगर इज अ हार्मफुल एक्सप्रेशन दैट हैज द कॉन्सिक्वेन्सेस व्हिच ऍन्ड इन रिपेन्टेन्स। पीस इज़ ऑल्वेज़ प्लेज़ेन्ट। इट ड्राइव्स अवे एंगर एण्ड हैल्प्स् टू कॉन्कर इट।)
क्रोध एक हानिकारक भाव है जिसके परिणामस्वरूप पछतावा ही होता है। शान्ति हमेशा मनोरम होती है। वह क्रोध को दूर भगाती है व उस पर काबू पाने में मदद करती है।

Question 4.
How can anger be conquered?
(हाउ कैन एंगर बी कॉन्कर्ड?)
क्रोध पर हम किस प्रकार नियन्त्रण रख सकते हैं?
Answer:
Anger can be conquered if one tries hard for it. By maintaining peace one can keep his temper in control.
(एंगर कैन बी कॉन्कर्ड इफ वन ट्राइज हार्ड फॉर इट। बाइ मेन्टेनिंग पीस वन कैन कीप हिज टैम्पर इन कन्ट्रोल।)
अगर कोई अत्यधिक प्रयत्न करे तो वो अपने क्रोध पर नियन्त्रण रख सकता है। शान्ति बनाए रखने से भी क्रोध नियन्त्रित रहता है।

MP Board Solutions

Listening Time

A. Complete the following lines.
(निम्न पंक्तियों को पूरा कीजिए।)
Answer:
The hand of peace is frank and warm,
And soft as ring dove’s wing;
And he who quells an angry thought
Is greater than a king.
Ever remember in thy youth,
That he who firmly tries
To conquer and to rule himself
Is noble, brave and wise

B. The teacher will read out the following words and students will repeat them.
(निम्न शब्द को दोहराओ।)
Answer:
MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 7 Anger 2

Speaking Time

Students will fill up their identity cards. They will come forward and introduce themselves to the class.
(छात्र अपने परिचय-पत्र भरें व खुद को प्रस्तुत करें।)
Answer:
Students should fill up their identity cards themselves and then tell about them.
(छात्र स्वयं अपना परिचय-पत्र भरें व स्वयं के विषय में बताएँ)

Writing Time

Write a paragraph on these topics:
(निम्न पर एक गद्यांश लिखिए।)

1. When I got angry.
2. Bad effects of anger.
Answer:
1. When I got Angry
One day I was unable to find my Maths class notebook. My younger brother usually hid my notebooks and then gave back to me afterwards. Next day was my test and I needed it urgently. I thought that he had hid it and beated him in anger. Soon I found it hidden under my pillow. I felt very guilty for my deed but there was nothing. I could do except to repent.

2. Bad Effects of Anger
Anger is always harmful as it takes away wisdom. Words said in the state of anger cannot be taken back and they not only hurt the other person but also adversely affect our relations. So we have nothing else left except repentance. It also drives our facial beauty and affects our health. So anger should always be avoided.

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Things to do

You know anger is very harmful for the human being. Swearing, abusing and scolding are some bad habits that affect us bitterly. Ask your teachers and parents the safeguards against it.
(अपने शिक्षकों व माता-पिता से क्रोध से बचने के उपाय जानिए।)
Answer:
Students can ask their teachers and parents about the safeguards against anger.
(छात्र अपने शिक्षकों/माता-पिता से क्रोध से बचने के लिए उपाय जानें।)

Anger Central Idea of the Poem

Anger is a bad thing. It snatches away the charm of a face as clouds obstruct the sun lighting a part of the earth. The acts done in state of anger are always repented. The harm caused can never be undone.

Hence one should try to control his anger. A young man who keeps his temper silent is noble, brave and wise.

Anger Difficult Word Meanings

MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 7 Anger 3

Anger Summary, Pronunciation & Translation

Oh! anger is an ugly thing,
And spoils the fairest face;
It cometh like a rainy cloud
Upon a sunny place.

(ओह! ऐंगर इज ऐन अगली थिंग,
ऐण्ड स्पॉईल्स द फेयरेस्ट फेस;
इट कमेथ लाइक अ रेनी क्लाउड
अपॉन अ सनी प्लेस.)

अनुवाद :
ओह! क्रोध है एक भद्दी (बुरी) चीज,
और खूबसूरत चेहरे को भी कुरूप कर देता है;
(अच्छा इन्सान भी क्रोध आने पर बुरा हो जाता है।)
वो आता है जैसे वर्षा भरे बादल आए
खिली हुई धूप वाले स्थान पर।

MP Board Solutions

One angry moment often does
What we repent for years;
It works the wrong we ne’er make right
By sorrow or by tears.

(वन ऐंग्री मोमेण्ट ऑफन डज़
वॉट वी रिपेण्ट फॉर यीअर्स;
इट वर्क्स द रॉन्ग वी नेवर मेक राईट)
बाई सॉरो ऑर बाई टीयर्स.)

अनुवाद :
क्रोध का एक क्षण हमसे ऐसा कुछ करवा देता है अथवा क्रोध के एक क्षण में ऐसा कुछ हो जाता है
जिसके लिए हम वर्षों तक पछताते हैं
वो हमसे ऐसी भूल करा देता है जिसे हम कभी सही नहीं कर पाते
न दुख से न आँसुओं से

The hand of peace is frank and warm,
And soft as ring dove’s wing;
And he who quells an angry thought
Is greater than a king.

(द हैण्ड ऑफ पीस इज फ्रैंक ऐण्ड वार्म,
ऐण्ड सॉफ्ट ऐज रिंग डब्ज विंग;
ऐण्ड ही हू क्वेल्स ऐन ऐंग्री थॉट
इज ग्रेटर दैन अ किंग.)

अनुवाद :
शान्ति का हाथ है उदार और तपन लिए हुए और नर्म जैसे वलय कपोत के पंख
(शान्ति का सम्बन्ध है प्रेम, उदारता एवं सहृदयता जैसे भावों से),
और जो अपने किसी क्रोधपूर्ण विचार का दमन कर लेता है
वो किसी राजा से भी महान है।

Ever remember in thy youth,
That he who firmly tries
To conquer and to rule himself
Is noble, brave and wise.

(एवर रिमेम्बर इन दाय यूथ,
दैट ही हू फर्मली ट्राईज़
टू कॉन्कर ऐण्ड टू रूल हिमसेल्फ
इज नोबल, ब्रेव ऐण्ड वाईज)

अनुवाद :
अपने यौवन काल में हमेशा याद रखना कि जो दृढ़ता से करता है प्रयास
स्वयं को जीतने का और (क्रोध को जीतने का) स्वयं पर राज करने का
वही कुलीन है, निडर है और ज्ञानी है।
वलय कपोत :
कबूतर या फाख्ता जिसके गले पर अंगूठी जैसा निशान हो।

The Spring Blossom Textbook General English Class 10th Solutions

Torch Bearers Question Answer Class 10 English The Spring Blossom Chapter 17 MP Board

Class 10 English The Spring Blossom Chapter 17 Torch Bearers Questions and Answers

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Torch Bearers Class 10th Question Answer

Word Power

A. Match the words with their meanings.

MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 17 Torch Bearers 1
Answer:
1. → (d)
2. → (c)
3. → (a)
4. → (e)
5. → (b)

B. Derive five new words by rearranging the letters of each new word given below.
(दिये गये शब्दों से पाँच नये शब्द बनाओ।)
Answer:

  1. inhospitable – hospital, table, pitiable, tin, shoe.
  2. flame – meal, male, leaf, lame, fame.
  3. disconsolate – consolate, late, console, cool, lost.
  4. straight – right, sight, trait, gait, tight.

MP Board Solutions

How Much Have I Understood?

A. Answer the following questions. (One or two sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
What did the old merchant decide about his money?
(व्हॉट डिड द ओल्ड मर्चेन्ट डिसाईड अबाऊट हिज़ मनी?)
बूढे व्यापारी ने अपने धन के विषय में क्या निश्चय किया?
Answer:
The old merchant decided to give all his money to that son who proved himself to be cleverer of the two.
(द ओल्ड मर्चेन्ट डिसाइडेड टू गिव ऑल हिज़ मनी टू दैट सन हू प्रूव्ड हिमसेल्फ टू बी द क्लेवरर ऑफ द टू।)
बूढ़े व्यापारी ने निश्चय किया कि वह अपना सारा धन दोनों में से उस बेटे को देगा जो ज्यादा चतुर होगा।

Question 2.
Why did the old merchant give his sons a test?
(व्हाय डिड द ओल्ड मर्चेन्ट गिव हिज़ सन्स अ टेस्ट?)
बूढ़े व्यापारी ने अपने बेटों का इम्तिहान क्यों लिया?
Answer:
The old merchant gave his sons a test because he wanted to find out which of his two sons was cleverer.
(द ओल्ड मर्चेन्ट गेव हिज़ सन्स अ टेस्ट बिकॉज़ ही वॉन्टेड टू फाइन्ड आऊट व्हिच ऑफ हिज़ टू सन्स वॉज़ क्लैवरर।)
बूढ़े व्यापारी ने बेटों का इम्तिहान लिया क्योंकि वो यह जानना चाहता था कि उसके दोनों बेटों में से कौन ज्यादा चतुर है।

Question 3.
What was the test given to the two sons by the old merchant?
(व्हॉट वॉज़ द टेस्ट गिवन टू द टू सन्स बाइ द ओल्ड मर्चेन्ट?)
दोनों बेटों को बूढ़े व्यापारी ने परीक्षण के लिए क्या कार्य दिया?
Answer:
The old merchant gave one rupee to each son and asked them to go out separately and buy something which may fill the house.
(‘द ओल्ड मर्चेन्ट गेव वन रूपी टू ईच सन एण्ड आस्क्ड देम टू गो आऊट सेपरेट्लि एण्ड बाइ समथिंग व्हिच मे फिल द हाऊस।)
बूढ़े व्यापारी ने अपने दोनों बेटों को एक-एक रुपया दिया व उन्हें कहा कि वे उससे कुछ ऐसा खरीदकर लायें जिससे पूरा घर भर जाये।

Question 4.
How much time was given to the two sons by the old merchant?
(हाउ मच टाइम वॉज़ गिवन टू द टू सन्स बाइ द ओल्ड मर्चेन्ट?)
दोनों बेटों को बूढ़े व्यापारी ने कितना समय दिया?
Answer:
The old merchant gave the two sons a couple of days.
१द ओल्ड मर्चेन्ट गेव द टू सन्स अ कपल ऑफ डेज़।)
बूढ़े व्यापारी ने दोनों बेटों को दो दिनों का वक्त दिया।

Question 5.
What did the first son buy for a rupee?
(व्हॉट ड्डि द फर्स्ट सन बाइ फॉर अ रूपी?)
पहले बेटे ने एक रुपये से क्या खरीदा?
Answer:
The first son bought a load of hay for a rupee.
(द फर्स्ट सन बॉट अ लोड ऑफ हे फॉर अ रूपी।)
पहले बेटे ने एक रुपये में घास का गट्ठर खरीदा।

Question 6.
How did the second son spend his rupee?
(हाउ डिड द सैकण्ड सन स्पेन्ड हिज रूपी?)
दूसरे बेटे ने अपना रुपया कैसे खर्च किया?
Answer:
The second son spent his rupee in buying candles.
(द सैकण्ड सन स्पेन्ट हिज़ रूपी इन बाइंग कैण्डल्स।)
दूसरे बेटे ने अपने रुपये से मोमबत्तियाँ खरीदी।

Question 7.
What should we do if we love our country?
(व्हॉट शुड वी डू इफ वी लव आवर कन्ट्री?)
अगर हम अपने देश से प्यार करते हैं तो हमें क्या करना चाहिए?
Answer:
If we love our country we should try to be good citizens.
(इफ वी लव अवर कण्ट्री वी शुड ट्राइ. टू बी गुड सिटिजन्स।)
अगर हम अपने देश से प्यार करते हैं तो हमें अच्छा नागरिक बनाना चाहिए।

Question 8.
Why did Guru Nanak spend the night in the open?
(व्हाय डिड गुरु नानक स्पैण्ड द नाईट इन द ओपन?)
गुरु नानक ने रात खुले में क्यों बिताई?
Answer:
Guru Nanak spent the night in the open because the villagers were rude and inhospitable and did not let him stay anywhere in the village.
(गुरु नानक स्पेन्ट द नाईट इन द ओपन बिकॉज़ द विलेजर्स वर् रूड एण्ड इन्हॉस्पिटेबल एण्ड डिड नॉट लेट हिम स्टे एनीव्हेयर इन द विलेज।)
गुरु नानक ने रात खुले में बिताई क्योंकि गाँव वाले रूखे थे व आतिथ्य भाव वाले नहीं थे व उन्होंने उन्हें गाँव में रहने नहीं दिया।

Question 9.
How did the villagers of the first village treat Guru Nanak?
(हाउ डिड द विलेजर्स ऑफ द फर्स्ट विलेज ट्रीट गुरु नानक?)
पहले गाँव के लोगों ने गुरु नानक के साथ कैसा व्यवहार किया?
Answer:
The villagers of the first village were rude and inhospitable with Guru Nanak.
(द विलेजर्स ऑफ द फर्स्ट विलेज वर् रूड एण्ड इन्हॉस्पिटेबल विद गुरु नानक।)
पहले गाँव के लोगों का व्यवहार गुरु नानक के साथ रूखा व आतिथ्य भाव वाला नहीं था।

Question 10.
What is our responsibility towards our country?
(व्हॉट इज़ अवर रिस्पॉन्सिबिलिटी टुवर्ड्स अवर कण्ट्री?)
हमारा अपने देश के प्रति क्या दायित्व है?
Answer:
Each one of us has the responsibility towards our country of being a good citizen.
(ईच वन ऑफ अस हैज़ द रिस्पॉन्सिबिलिटी टुवर्ड्स अवर कण्ट्री ऑफ बीइंग अ गुड सिटीज़न।)
एक अच्छा नागरिक होना ही हम सबका अपने देश के प्रति दायित्व है।

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B. Answer the following questions. (Three or four sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Why was the old merchant very pleased with his second son?
(व्हाय वॉज़ द ओल्ड मर्चेन्ट वेरी प्लीज़्ड विद हिज़ सेकण्ड सन?)
बूढ़ा व्यापारी अपने दूसरे बेटे से बहुत खुश क्यों था?
Answer:
The old merchant was very pleased with his second son because he had shown true wisdom. In one rupee he bought candles and lighted the whole house. He was therefore worthy for his wealth.
(द ओल्ड मर्चेन्ट वॉज़ वेरी प्लीज्ड विद हिज़ सेकण्ड सन बिकॉज़ ही हैड शोन टू विज़डम। इन वन रूपी ही बॉट कैण्डल्स एण्ड लाइटेड द होल हाऊस। ही वॉज़ देयरफोर वर्दी फॉर हिज़ वैल्थ।)
बूढ़ा व्यापारी दूसरे पुत्र से खुश था क्योंकि उसने अपने विवेक का प्रदर्शन किया था। एक रुपये में उसने मोमबत्तियाँ खरीदी जिसने पूरे घर को रोशन कर दिया। अतः वह ही उसकी जायदाद के लायक था।

Question 2.
Which type of citizens does a country need?
(व्हिच टाइप ऑफ सिटिजन्स डज़ अ कण्ट्री नीड?)
एक देश को किस प्रकार के नागरिक चाहिए?
Answer:
A country needs good citizens. Only good citizens can serve their country. The greater the number of good citizens in a country, the more enlightened is the country.
(अ कण्ट्री नीड्स गुड सिटीजन्स। ओनलि गुड सिटिजन्स कैन सर्व देयर कण्ट्री। द ग्रेटर द नम्बर ऑफ गुड सिटीजन्स इन अ कण्ट्री, द मोर एनलाइटिन्ड इज द कण्ट्री।)
एक देश को अच्छे नागरिकों की जरूरत है। सिर्फ अच्छे नागरिक ही देश की सेवा कर सकते हैं। किसी देश में जितने ज्यादा अच्छे नागरिक होंगे वो देश उतना ही प्रबुद्ध होगा।

Question 3.
What did Guru Nanak pray for people of the second village?
(व्हॉट डिड गुरु नानक प्रे फॉर पीपल ऑफ द सैकण्ड विलेज?)
गुरु नानक ने दूसरे गाँव के लोगों के लिए क्या प्रार्थना की?
Answer:
Guru Nanak prayed for the people of second village that they may not remain in their village, but may be scattered throughout the country.
(गुरु नानक प्रेड फॉर द पीपल ऑफ सैकण्ड विलेज दैट दे मे नॉट रिमेन इन देयर विलेज, बट में बी स्कैटर्ड श्रूआऊट द कण्ट्री।)
गुरु नानक ने दूसरे गाँव के लोगों के लिए प्रार्थना की कि वे उस गाँव में न रहें वरन् पूरे देश में बिखर जायें।

Question 4.
What is the responsibility of a student when he/she leaves the school?
(व्हॉट इज़ द रिस्पॉन्सिबिलिटी ऑफ अ स्टूडेण्ट व्हेन । ही/शी लीव्स द स्कूल?)
जब एक छात्र विद्यालय से बाहर निकलता है तो उसका क्या दायित्व होता है?
Answer:
The responsibility of a student when he/she leaves the school is to carry his flame of knowledge and skill and pass it on to others. These he passes on by using them in the service of his country.
(द रिस्पॉन्सिबिलिटी ऑफ अ स्टूडेन्ट व्हेन ही/शी लीव्स द स्कूल इज़ टू कैरी हिज़ फ्लेम ऑफ नॉलेज एण्ड स्किल एण्ड पास इट ऑन टू अदर्स। दीज़ ही पासेज़ ऑन बाइ यूजिंग देम इन द सर्विस ऑफ हिज़ कण्ट्री।)
जब एक विद्यार्थी विद्यालय से बाहर निकलता है तो उसका यह दायित्व होता है कि वह अपनी ज्ञान व क्षमता की ज्योति को दूसरों में बाँटे। यह वह अपने देश की सेवा में इस्तेमाल करके फैलाता है।

C. Answer these questions. (about 80-100 words)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर 80-100 शब्दों में दीजिए।)

Question 1.
How did the old merchant come to know that his younger son was cleverer than the elder?
(हाउ डिड द ओल्ड मर्चेन्ट कम टू नो दैट हिज़ यंगर सन वॉज क्लेवर दैन द एल्डर?)
बूढ़े व्यापारी को यह कैसे पता चला कि उसका छोटा बेटा बड़े से ज्यादा चतुर है?
Answer:
The old merchant has asked his sons to buy such a thing in a rupee that may fill the whole house. The candles brought by the younger son lighted the whole house and removed its darkness while the hay bought by the elder son was not enough to cover even the floor of a room and was of no use. This made the old merchant understand that the younger son was cleverer than the elder.

(द ओल्ड मर्चेन्ट हैड आस्क्ड हिज़ सन्स टू बाय सच अ थिंग इन अ रूपी दैट मे फिल द होल हाऊस। द कैण्डल्स ब्रॉट बाइ द यंगर सन लाइटेड द होल हाऊस एण्ड रिमूव्ड इट्स डार्कनेस व्हाइल द हे बॉट बाइ द एल्डर सन वॉज़ नॉट इनफ टू कवर ईवन द फ्लोर ऑफ अ रूम एण्ड वॉज़ ऑफ नो यूज़। दिस मेड द ओल्ड मर्चेन्ट अण्डरस्टैण्ड दैट द यंगर सन वॉज़ क्लैवरर दैन द एल्डर।)

बूढ़े व्यापारी ने अपने बेटों से एक रुपये में ऐसी वस्तु खरीदने को कहा था जिससे कि पूरा घर भर जाये। छोटे बेटे द्वारा लाई गई मोमबत्तियों से पूरा घर रोशन हो गया जबकि बड़े बेटे द्वारा लायी गयी घास एक कमरे की जमीन पर भी पूरा न आ सकी व किसी काम की न रही। इससे बूढ़े व्यापारी ने यह समझ लिया कि छोटा बेटा बड़े से ज्यादा चतुर है।

Question 2.
‘A chain is as strong as its weakest link’. Explain.
(‘अ चेन इज़ एज़ स्ट्राँग एज़ इट्स वीकेस्ट लिंग।’ एक्स्प्ले न।)
‘एक चेन अपने कमजोर जोड़ की तरह ही प्रबल होती है।’ समझाइए।
Answer:
It means even the weakest link in the chain affects its strength. Each one of us is a link in the chain that is our country. If we are weak and poor then our country will suffer. So, each person makes a difference in a country.

(इट मीन्स ईवन द वीकेस्ट लिंक इन द चेन अफैक्ट्स् इट्स् स्ट्रेन्थ। ईच वन ऑफ अस इज़ अलिंक इन द चेन दैट इज़ अवर कण्ट्री। इफ वी आर वीक एण्ड पुअर् देन अवर कण्ट्री विल सफर। सो, ईच पर्सन मेक्स अ डिफ्रेन्स इन अ कण्ट्री।)

इसका अर्थ है कि एक चेन में एक कमजोर जोड़ भी उसकी प्रबलता को प्रभावित करता है। इसमें से हरएक एक चेन की तरह है जो कि हमारा देश है। अगर हम कमजोर व गरीब हैं तो हमारा देश भी उससे प्रभावित होगा। अतः हर व्यक्ति देश को प्रभावित करता है।

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Language Practice

Punctuate the given paragraph with appropriate capitalization and rewrite:
Answer:
The children were happy during the month of August, especially when it began to get near the twenty-third. It was on this day that the great silver spaceship carrying Professor Hugos interplanetary zoo settled down for its annual six-hour visit to the Chicago area.

Listening Time

Each of the following sentences will be read out twice making use of only one of the options given. Listen carefully and put a tick mark (✓) against the word you hear :

(a) The farmer could not buy a mill/meal anywhere.
Answer:
The farmer could not buy a mill anywhere.

(b) The fisherman pulled/pooled the net.
Answer:
The fishermen pooled the net.

(c) They dried the nets/nuts in the sun.
Answer:
They dried the nuts in the sun.

(d) My uncle owns a big farm/firm.
Answer:
My uncle owns a big firm.

(e) He is fit/feet for the job.
Answer:
He is fit for the job.

(f) Sit/Seat on the chair.
Answer:
Sit on the chair.

(g) He is feeling pain/pen on his knee.
Answer:
He is feeling pain on his knee.

(h) Don’t try to fool/full me.
Answer:
Don’t try to fool me.

Speaking Time

Do it yourself.
(स्वयं करो।)

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Writing Time

Write any two stories in your own words in not more than 80 words.
(कोई भी दो कहानियाँ अपने शब्दों में लिखो (80 शब्दों से ज्यादा नहीं।)
Answer:
1st Story :
Once there was a rich, old merchant. He decided to give his property to the cleverer of his two sons. He gave them a rupee each and asked to spend, it cleverly such that whole house gets filled. First son bought hay from it which could not cover even a floor while the second bought candles which enlightened the whole house. The merchant thus gave his money to the younger son who had proved his cleverness.

2nd Story :
Guru Nanak and his disciple Mardana went to a village. The villagers of the village were inhospitable and rude and did not allow them to stay there. Guru Nanak thus prayed that those villagers should always remain in the same village. The next night they reached another village where they were welcomed, given dinner and shelter. He now prayed that they should scatter throughout the country. He told his disciple that he prayed so, so that people of second village may spread their light to other places also.

Things to do

1. Collect pictures of some great men from magazines and newspapers and paste them in your project book. Preferably, these personages should have contributed to human betterment in diverse fields.
(कुछ महान् व्यक्तियों के चित्र अखबारों व किताबों में से काटो व अपनी पुस्तिका में चिपकाओ। इन व्यक्तियों ने विभिन्न क्षेत्रों में मनुष्यों के विकास में कार्य किया होगा।)
Answer:
Students can collect the pictures of some great men themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

Torch Bearers Difficult Word Meanings

MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 17 Torch Bearers 2

Torch Bearers Summary, Pronunciation & Translation

Part-I
(भाग-I)

Once upon a time, many centuries ago, there lived an old merchant. All his life he had toiled hard, buying and selling, with the result that he had made a lot of money. As the years went by, he laid by more and more riches. But the day came when he felt that he had not long to remain in this world. He began to wonder what he should do with his money.

Now, he had two sons. He made up his mind that he would not divide his money between them, but that he would give it all to the one who proved himself to be the cleverer of the two. The problem to be solved was that of finding out which of the two sons was the cleverer. He decided to solve this problem by giving them a test.

(वन्स अपॉन अ टाईम, मैनी सेन्चुरीज़ अगो, देयर लिब्ड ऐन ओल्ड मर्चेण्ट. ऑल हिज़ लाईफ ही हैड टॉयल्ड हार्ड, बाईंग ऐण्ड सेलिंग, विद द रिज़ल्ट दैट ही हैड मेड अलॉट ऑफ मनी. ऐज़ द यीअर्स वेण्ट बाई, ही लेड बाई मोर ऐण्ड मोर रिचस. बट द डे केम व्हेन ही फेल्ट दैट ही हैड नॉट लॉना द रिमेन इन दिस वर्ल्ड. ही बिगैन टू वण्डर व्हॉट ही शुड डू विद हिज़ मनी.

नाऊ, ही हैड टू सन्स. ही मेड अप हिज़ माईण्ड दैट ही वुड नॉट डिवाईड हिज़ मनी बिटवीन देम, बट दैट ही वुड गिव इट ऑल टू द वन हू प्रूव्ड हिमसेल्फ टू बी द क्लेवरर ऑफ द टू. द प्रॉब्लम टू वी सॉल्व्ड वॉज़ दैट ऑफ फाईण्डिंग आऊट व्हिच ऑफ द टू सन्स वॉज़ द क्लेवरर. ही डिसाईडिड टू सॉल्व दिस प्रॉब्लम बाई गिविंग देम अ टेस्ट.)

अनुवाद :
एक बार की बात है, कई शताब्दियों पूर्व एक व्यापारी था। अपना पूरा जीवन उसने क्रय-विक्रय में कठिन श्रम किया था जिसके फलस्वरूप उसने बहुत धन कमाया था। जैसे-जैसे वर्ष बीतते गए वह और धनी होता गया। परन्तु एक दिन आया जब उसे यह लगा कि अब वह इस दुनिया में और ज्यादा समय तक नहीं रहेगा। वह सोच में पड़ गया कि उसे अपने धन का क्या करना चाहिए।

अब, उसके दो पुत्र थे। वह यह निश्चय कर चुका था कि वह अपना धन दोनों पुत्रों में बाँटेगा नहीं, वरन् वह उन दोनों में से जो स्वयं को ज्यादा अक्लमंद सिद्ध करे उसको देगा। समस्या, जिसका समाधान होना था वो यह कि दोनों पुत्रों में से कौन ज्यादा अक्लमंद था। उसने इस समस्या का समाधान एक परीक्षा द्वारा करने का निर्णय लिया।

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Calling the young men, he said to them, “Here are two rupees. I want you to take one rupee each, and then to go out separately and buy something which will fill this house. You are not to spend more than one rupee.”

The two sons looked at him as if he had taken leave of his senses. “How can we possibly buy enough of anything to fill the house with only one rupee?” They asked themselves. And they were reluctant to pick up the rupees. But the old man insisted on their doing as he told them. “Off you go,” he said, “and don’t take too long over the business. I expect you back in a couple of days.”

(कॉलिंग द यंग मेन, ही सेड टू देम, “हेयर ऑर टू रूपीज़. आई वॉण्ट यू टू टेक वन रूपी ईच, ऐण्ड देन गो आऊट सेपरेट्ली ऐण्ड बाय समथिंग व्हिच विल फिल दिस हाऊज़. यू आर नॉट टू स्पेण्ड मोर दैन वन रूपी.”

द टू सन्स लुक्ड ऐट हिम ऐज़ इफ ही हैड टेकन लीव ऑफ हिज़ सेन्सिस, “हाऊ कैन वी पॉसिबली बाय एनफ ऑफ एनीथिंग टू फिल द हाऊज़ विद ओन्ली वन रूपी ?”दे ऑस्क्ड देमसेल्ब्ज़. ऐण्ड दे वर रिलक्टैण्ट टू पिक अप द रूपीज़. बट द ओल्ड मैन इन्सिसटिड ऑन देयर डूईंग ऐज़ ही टोल्ड दैम. “ऑफ यू गो,” ही सेड, “ऐण्ड डोण्ट टेक टू लॉन्ग ओवर द बिज़नेस. आई एक्सपेक्ट यू बैक इन अ कपल ऑफ डेज़.’)

अनुवाद :
दोनों युवकों को बुलाकर उसने उनसे कहा, “यह दो रूपये हैं। मैं चाहता हूँ तुम दोनों एक-एक रूपया ले लो और फिर अलग-अलग बाहर जाओ और कुछ ऐसा खरीदकर लाओ जो पूरा घर भर दे। तुम्हें एक रुपये से ज्यादा नहीं खर्च करना है।”

दोनों पुत्रों ने उसकी तरफ ऐसे देखा मानों वह पागल हो चुका हो। “यह कैसे सम्भव है कि हम एक रुपये में कोई चीज़ खरीदें जिससे पूरा घर भर जाए?” दोनों ने अपने आप से पूछा। और वे लोग रुपया उठाने के लिए अनिच्छुक थे। परन्तु उनके पिता ने जैसा वह कह रहे हैं वैसा करने के लिए ज़ोर डाला “अब तुम जाओ,” उसने कहा, “और इस कार्य में बहुत ज्यादा समय नहीं लगाना। मैं दो दिनों के भीतर तुम्हारी वापसी की आशा करता हूँ।”

So each young man took up a rupee and went out. The first one wandered through the bazaar all day long. But nothing could he find which would, in any way, serve his purpose. He became more and more certain that something had gone wrong with his father. He was about to give up his search in despair when he saw a bullock cart with a load of hay. “That looks hopeful,” he thought, “I wonder how much hay I can get for a rupee.”

He went up to the driver of the cart and enquired about the price of the hay. There was a good deal of haggling over the price, but, in the end, he was able to buy the load of hay for a rupee. (In those days a rupee would buy a great deal more than it will buy now.)

(सो ईच यंग मैन टुक अप अ रूपी ऐण्ड वेण्ट आऊट. द फर्स्ट वन वॉण्डर्ड श्रू द बाज़ार ऑल डे लॉन्ग. बट नथिंग कुड ही फाईण्ड व्हिच वुड, इन ऐनी वे, सर्व हिज़ पर्पस, ही बिकेम मोर ऐण्ड मोर सर्टन दैट समथिंग हैड गॉन रॉन्ग विद हिज़ फादर. ही वॉज़ अबाऊट टू गिवं अप हिज़ सर्च इन डिस्पेयर व्हेन ही सॉ अ बुलक कार्ट विद अ लोड ऑफ हे, “दैट लुक्स होपफुल,” ही थॉट, “आई वण्डर हाऊ मच हे आई कैन गैट फॉर अ रूपी.”

ही वेण्ट अप टू द ड्राईवर ऑफ द कार्ट ऐण्ड एन्क्वायर्ड अबाऊट द प्राईस ऑफ द हे. देयर वॉज़ अ गुड डील ऑफ हैगलिंग ओवर द प्राईस, बट, इन द एण्ड, ही वॉज़ एबल टू बाय द लोड ऑफ हे फॉर अ रूपी. (इन दोज़ डेज़ अ रूपी वुड बाय अ ग्रेट डील मोर देन इट विल बाय नाऊ)

अनुवाद :
तब फिर दोनों युवक एक-एक रुपया उठाकर बाहर चले गए। पहला पत्र पूरा दिन बाजार में भटकता रहा। परन्तु वह कुछ भी ऐसा नहीं ढूँढ़ पाया जो किसी प्रकार भी उसका उद्देश्य पूरा करे। उसको और भी अधिक यह लगने लगा कि उसके पिताजी को कुछ हो गया है। वह पूर्णतया निराश होकर अपनी खोज बंद करने ही वाला था जब उसे एक भूसे से लदी बैलगाड़ी दिखाई दी। “यह कुछ आशाजनक है,” उसने सोचा, “पता नहीं एक रुपये में कितना भूसा मुझे मिल सकता है।”

वह बैलगाड़ी वाले के पास गया और भूसे का दाम पूछा। उसके बाद काफी देर तक मोल-भाव हुआ परन्तु अन्त में वह पूरा भूसा एक रूपये में खरीदने में सफल हुआ। (उन दिनों एक रूपये में बहुत सारा सामान खरीदा जा सकता था आज के मुकाबले।)

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So the young man led off the cart with the hay to his father’s house. Hopefully he piled it into the house. But when it was all in, he found that there was not enough to cover even the floor, let alone fill the whole house.

When the second son went out with his rupee, he did not go straight away to the bazaar. Instead of doing that, he sat down and began to think. For a long time he sat thinking about what he could possibly buy. In the evening, an idea struck him. Taking his rupee, he walked quickly down the bazaar till he came to a shop where candles were sold. He spent his rupee on candles, of which he got quite a number. Then, taking his candles with him he made his way back to his father’s house. When he got there his brother was standing disconsolately looking at the hay spread out on the floor.

It was now getting dark. Quickly the second son stood two or three candles in each room. Then he lit them. At once the house was filled with light.

(सो द यंग मैन लेड ऑफ द कार्ट विद द हे टू हिज़ फादर्स हाऊज़ होपफुली ही पाईल्ड इट इण्टू द हाऊज़. बट व्हेन इट वॉज़ ऑल इन, ही फॉऊण्ड दैट देयर वॉज़ नॉट एनफ टू कवर ईवन द फ्लोर, लेट’अलोन फिल द होल हाऊज़.

व्हेन द सेकण्ड सन वेण्ट आउट विद हिज़ रूपी, ही डिड नॉट गो स्ट्रेट अवे टू द बाज़ार, इन्स्टेड ऑफ डूइँग दैट, ही सैट डाऊन ऐण्ड बिगैन टू थिंक. फॉर अ लॉन्ग टाईम ही सैट थिंकिंग अबाऊट व्हॉट ही कुड पॉसिबली बाय. इन द ईवनिंग, ऐन आईडिया स्ट्रक हिंम. टेकिंग हिज़ रूपी, ही वॉक्ड क्विक्ली डाऊन द बाज़ार टिल ही केम टू अ शॉप व्हेअर कैन्डल्स वर सोल्ड। ही स्पेण्ट हिज़ रूपी ऑन कैन्डल्स, ऑफ व्हिच ही गॉट क्वाईट अ नम्बर, देन, टेकिंग हिज़ कैन्डल्स विद हिम ही मेड हिज़ वे बैक टू हिज़ फादर्स हाऊज़. व्हेन ही गॉट देयर हिज़ ब्रदर वॉज़ स्टैण्डिंग डिसकॉन्सोलेटली लुकिंग ऐट द हे स्प्रेड आऊट ऑन द फ्लोर.

इट वॉज़ नाऊ गैटिंग डार्क. क्विक्ली द सेकण्ड सन स्टुड टू ऑर थ्री कैन्डल्स इन ईच रूम देन ही लिट देम. ऐट वन्स द हाऊज़ वॉज़ फिल्ड विद लाईट.)

अनुवाद :
तब फिर वह युवक (प्रथम पुत्र) भूसे वाली बैलगाड़ी को अपने पिता के घर ले गया। फिर आशान्वित होकर उसने भूसे को घर में भरा। परन्तु जब वह पूरा भूसा भर चुका तो उसने पाया कि वह इतना भी नहीं था कि फर्श को पूरी तरह से ढक सके, पूरा घर भरना तो बहुत दूर की बात थी।

जब द्वितीय पुत्र अपना रुपया लेकर निकला तो वह सीधे बाज़ार नहीं गया। ऐसा करने के बजाए वह एक स्थान पर बैठ गया वह सोचने लगा। बहुत देर तक वह बैठा सोचता रहा कि वह क्या खरीद सकता है। शाम को उसे एक विचार सूझा। अपना रुपया लेकर वह तेज़ कदमों से चलकर बाज़ार में उस दुकान पर पहुँचा जहाँ मोमबत्तियाँ मिलती थीं। उसने अपने एक रुपये से मोमबत्तियाँ खरीद ली जो कि उसे काफी संख्या में मिलीं। फिर मोमबत्तियाँ लेकर वह अपने पिता के घर की तरफ वापस चल दिया। जब वह वहाँ पहुँचा उसका भाई बड़े निराशापूर्ण ढंग से फर्श पर बिखरे भूसे को देख रहा था।

अंधेरा होने लगा था। शीघ्रता से द्वितीय पुत्र ने प्रत्येक कक्ष में दो या तीन मोमबत्तियाँ लगा दी। उसके पश्चात् उसने उन्हें जला दिया। पूरा घर एकदम प्रकाश से भर गया।

His father was very pleased with him and said, “My son, you have shown true wisdom. I am ready to hand over all my money to you.”

Now, we all live in a big house which we call our native country. We have each of us been given, some one rupee, some two rupees, some three and some four. These rupees are not rupees with which we can buy things, but they are different powers we have been given. Each of us has powers of body, powers of mind and powers of character. Each of us has strength, time and intelligence, which can be used. As we leave school and go out into the world, we are tested as to how we are going to use these talents which we possess. Are we going to use them to buy useless hay or are we going to use them to spread light throughout our house, that is, our country? If we are going to be good citizens, then we shall use our powers and abilities to try to spread light into all parts of our country, that is, we shall spend ourselves in the service of our country.

(हिज़ फादर वॉज़ वेरी प्लीज्ड विद हिम ऐण्ड सेड, “माई सन, यू हैव शोन ट्र विस्डम, आई ऐम रेडी टू हैण्ड ओवर ऑल माई मनी टू यू।”

नाऊ, वी ऑल लिव इन अ बिग हाऊज़ व्हिच वी कॉल आवर नेटिव कंट्री. वी हैव ईच ऑफ अस बीन गिवन, सम वन रूपी, सम टू रूपीज़, सम थ्री ऐण्ड सम फोर, दीज़ रूपीज़ आर नॉट रुपीज़ विद व्हिच वी कैन बाय थिंग्स, बट दे आर डिफरण्ट पावर्स वी हैव बीन गिवन. ईच ऑफ अस हैज पावर्स ऑफ बॉडी, पावर्स ऑफ माइन्ड ऐण्ड पावर्स ऑफ कैरेक्टर. ईच ऑफ अस हैज़ स्ट्रेन्थ, टाईम ऐण्ड इन्टेलिजेन्स, व्हिच कैन बी यूज्ड. ऐज़ वी लीव स्कूल ऐण्ड गो आऊट इण्टू द वर्ल्ड, वी आर टेस्टिड ऐज़ टू हाऊ वी आर गोईंग टू न्यूज़ दीज़ टैलेण्ट्स व्हिच वी पज़ेज. आर वी गोईंग टू यूज़ देम टू बाय यूज़लेस हे ऑर आर वी गोईंग टू। यूज़ देम वी। स्प्रेड लाईट श्रूआऊट आवर हाऊज़, दैट इज़, आवर कंट्री? इफ वी आर गोईंग टू वी गुड सिटीजन्स, देन वी शैल यूज़ आवर पावर्स ऐण्ड एबिलिटीज़ टू ट्राय टू स्प्रेड लाईट इण्टू ऑल पास ऑफ आवर कंट्री, दैट इज़, वी शैल. स्पेण्ड आवरसेल्व्ज़ इन द सर्विस ऑफ आवर कंट्री.)

अनुवाद :
उसके पिता उससे बेहद प्रसन्न हुए और कहा, “मेरे पुत्र, तुमने सच्चे ज्ञान का परिचय दिया है। मैं अपना पूरा धन तुम्हें देने को तैयार हूँ।”

अब हम सभी एक बड़े से घर में रहते हैं जिसे हम अपना देश कहते हैं। हम में से प्रत्येक को कुछ न कुछ मिला है, कुछ को एक रुपया, कुछ को दो रुपये, कुछ को तीन और कुछ को चार। ये रुपये ऐसे रुपये नहीं हैं जिनसे हम कुछ खरीद सकते हैं परन्तु यह भिन्न-भिन्न प्रकार की शक्तियाँ हैं जो हमें मिली हैं। हममें से प्रत्येक में शारीरिक, मानसिक एवं चारित्रिक शक्तियाँ हैं। हम में से प्रत्येक के पास बल, समय व बुद्धि है जिनका उपयोग किया जा सकता है। जब हम अपना अध्ययन समाप्त कर दुनिया में जाते है तो हमारी परीक्षा होती है कि हम अपनी प्रतिभाओं का किस प्रकार उपयोग करेंगे। क्या हम उनका प्रयोग व्यर्थ. बेकार भूसा खरीदने में करेंगे या फिर उनका उपयोग पूरे घर को (अर्थात् अपने देश को, रोशन करने में करेंगे? यदि हमें अच्छा नागरिक बनना है, तो हमें अपनी शक्तियों, क्षमताओं एवं प्रतिभाओं का प्रयोग पूरे देश को प्रकाशित करने में करना चाहिए, अर्थात्, हमें अपने देश की सेवा करनी चाहिए।)

Non country can progress unless it has good citizens. So, if we love our country and want to serve it, we should try to become good citizens. We will be training ourselves in citizenship and cultivating the characteristics of good citizens. We will be able to fill our country with the light of good citizenship when we leave our school and home, and go out into different parts of our country.

(नो कंट्री कैन प्रोग्रेस अनलेस इट हैज़ गुड सिटीजन्स. सो, इफ वी लव आवर कंट्री ऐण्ड वॉण्ट टू सर्व इट, वी शुड ट्राय टू बिकम गुड सिटीजन्स. वी विल बी ट्रेनिंग आवरसेल्ज़ इन सिटीज़नशिप ऐण्ड कल्टीवेटिंग द कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ गुड सिटीजन्स. वी विल बी एबल टू फिल आवर कंट्री विद द लाईट ऑफ गुड सिटीज़नशिप व्हेन वी लीव आवर स्कूल ऐण्ड होम, ऐण्ड गो आऊट इण्टू डिफरण्ट पार्ट्स ऑफ आवर कंट्री.)

अनुवाद :
कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता यदि उसके नागरिक अच्छे न हों। इसलिए, यदि हम अपने देश से प्रेम करते हैं तो हमें अच्छे नागरिक बनने का प्रयत्न करना चाहिए। हम स्वयं को नागरिकता में और अच्छे नागरिक के गुणों को विकसित करने हेतु प्रशिक्षित करेंगे। जब हम अपने विद्यालयों व घरों को छोड़कर देश के विभिन्न भागों में जाएँगे तो हम अपने देश को अच्छी नागरिकता के प्रकाश से भरने में सफल होंगे।

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Part-II
(भाग-II)

A story is told of Guru Nanak that, in the course of his travels, he came to a village. Besides him, his disciple, Mardana also came to the village. They wanted to stay there for the night. But the villagers were rude and inhospitable and would not let them stay anywhere in the village. So Guru Nanak and Mardana were forced to spend the night in the open. “As they turned away from the village, Guru Nanak said, “I pray that the people of this village may always stay in this village.” Mardana was somewhat puzzled at this, but said nothing.

(अ स्टोरी इज़ टोल्ड ऑफ गुरु नानक दैट, इन द कोर्स ऑफ हिज़ ट्रैवल्स, ही केम टू अ विलेज. बिसाईड्स हिम, हिज़ डिसाईपल, मर्दाना ऑल्सो केम टू द विलेज. दे वॉण्टिड टू स्टे देयर फॉर द नाईट. बट द विलेजर्स वर रूड ऐण्ड इनहॉस्पिटेबल ऐण्ड वुड नॉट लेट देम स्टे एनीव्हेअर इन द विलेज. सो गुरु नानक ऐण्ड मर्दाना वर फोर्ल्ड टू स्पेण्ड द नाईट इन द ओपन. ऐज़ दे टर्ड अवे फ्रॉम द विलेज, गुरु नानरु सेड, “आई प्रे दैट द पीपल ऑफ दिस विलेज मे आल्वेज़ स्टे इन दिस विलेज.” मर्दाना वॉज़ समव्हॉट पज़ल्ड ऐट दिस, बट सेड नथिंग.)

अनुवाद :
गुरु नानक जी के बारे में एक कहानी कही जाती है। अपनी यात्राओं के दौरान वे एक गाँव में पहुँचे। उनके अलावा, उनका शिष्य मर्दाना भी साथ में आया। वे वहाँ रात में रुकना चाहते थे। परन्तु गाँव वाले बेहद असभ्य थे एवं अतिथि सत्कार करना नहीं जानते थे और गाँव वालों ने उन्हें गाँव में कहीं भी ठहरने नहीं दिया। इसलिए गुरु नानक जी व मर्दाना को रात खुले में काटनी पड़ी। जब वे वहाँ से जाने लगे तब गुरु नानक जी ने कहा, “मैं प्रार्थना करता हूँ कि इस गाँव के लोग हमेशा इसी गाँव में रहें।”। मर्दाना उनकी इस बात से थोड़े हैरान थे परन्तु उन्होंने कुछ नहीं कहा।

The next night they came to another village where they received a very different reception. The villagers welcomed them, treated them kindly, found them a place to stay for the night, and gave them food to eat. In the morning, as Guru Nanak and Mardana were leaving, the Guru said, “I pray that the people of this village may not remain in their village, but may be scattered throughout the country.”

But this was too much for Mardana. He protested. “Why”, he said to the Guru. “do you pray for good things for people who treat us badly, and for misfortunes for those who treat us well ? You should have prayed for those inhospitable villagers to be scattered over the country, and for these good people to remain comfortably where they are.”

(द नेक्स्ट नाईट दे केम टू अनदर विलेज व्हेअर दे रिसीव्ड अ वेरी डिफरण्ट रिसेप्शन. द विलेजर्स वैल्कम्ड देम, ट्रीटिड देम काईण्डली, फाऊण्ड देम अ प्लेस टू स्टे फॉर द नाइट, ऐण्ड गेव देम फूड टू ईट. इन द मॉर्निंग, ऐज़ गुरुनानक ऐण्ड मर्दाना वर लीविंग, द गुरु सेड, “आई प्रे दैट द पीपल ऑफं दिस विलेज मे नॉट रिमेन इन देयर विलेज, बट मे बी स्कैटर्ड श्रूआऊट द कंट्री.”

बट दिस वॉज़ टू मच फॉर मर्दाना. ही प्रोटेस्टेड, “व्हाई” ही, सेड टू द गुरु, “डू यू प्रे फॉर गुड थिंग्स फॉर पीपल हू ट्रीट अस बैडली, ऐण्ड फॉर मिसफॉरचून्स फॉर दोज़ हू ट्रीट अस वैल? यू शुड हैव प्रेड फॉर दोज़ हनहॉस्पिटेबल विलेजर्स टू बी स्कैटर्ड ओवर द कंट्री ऐण्ड फॉर दीज़ गुड पीपल टू रिमेन कम्फर्टेबली व्हेअर दे आर.”)

अनुवाद :
अगली रात वे एक दूसरे गाँव में पहुँचे जहाँ उनकी बहुत अलग प्रकार से अगवानी हुई। गाँववालों ने उनका स्वागत किया, बहुत प्रेम व सहृदयता से उनका सत्कार किया, उनके ठहरने के लिए स्थान का प्रबन्ध किया और भोजन भी दिया। सुबह जब गुरु नानक जी व मर्दाना चलने लगे तब गुरुजी ने कहा, “मैं प्रार्थना करता हूँ कि इस गाँव के लोग इस गाँव में न रहें वरन् पूरे देश में फैल जाएँ।”

परन्तु मर्दाना के लिए अब अति हो गई थी। उन्होंने विरोध किया, “क्यों” उन्होंने गुरुजी से कहा “जिन लोगों ने हमारा तिरस्कार किया आप उन लोगों के भले के लिए प्रार्थना करते हैं और जिन लोगों ने हमारा सत्कार व सम्मान किया आप उनके लिए दुर्भाग्य की कामना करते हैं? आपको उन अतिथियों का तिरस्कार करने वाले गाँववालों के पूरे देश में फैल जाने की प्रार्थना करनी चाहिए थी और इन अच्छे लोगों के लिए जहाँ हैं वहीं आराम से रहने की।”

“No,” replied Guru Nanak, “it is better for those inhospitable and selfish people to stay in one place where they can do harm in one place only. If they went to other places they would have an evil influence all through the country. Now these good people, with whom we put up last night, are too good to be left in one place. They have something which is needed everywhere. Their influence and their character will be of benefit to others, wherever they go. Hence they ought to be scattered so that they can take their light to other places.”

(“नो,” रिप्लाईड गुरु नानक, “इट इज़ बैटर फॉर दोज़ इन हॉस्पिटेबल ऐण्ड सेल्फिश पीपल टू स्टे इन वन प्लेस व्हेअर दे कैन डू हार्म इन वन प्लेस ओन्ली. इफ दे वेण्ट टू अदर प्लेसिस दे वुड हैव ऐन ईविल इन्फ्लूएन्स ऑल धूद कंट्री. नाऊ दीज़ गुड पीपल, विद हूम वी पुट अप लास्ट नाईट, आर टू गुड टू बी लेफ्ट इन वन प्लेस. दे हैव समथिंग व्हिच इज़ नीडेड एवरी व्हेअर. देयर इन्फ्लूएन्स ऐण्ड देयर कैरेक्टर विल बी ऑफ वेनिफिट टू अदर्स, व्हेअरएवर दे गो. हेन्स दे ऑट टू बी स्कैटर्ड सो दैट दे कैन टेक देयर लाईट टू अदर प्लेसिस.”

अनुवाद :
“नहीं”, गुरु नानक ने उत्तर दिया, “यही अच्छा है कि वे स्वार्थी और असत्कारी लोग एक ही स्थान पर रहें ताकि वह सिर्फ एक ही स्थान पर हानि कर सकें। यदि वे अन्य स्थानों पर जाएँगे तो उनका पूरे देश में दुष्प्रभाव होगा। और इस गाँव के जो यह अच्छे लोग हैं जहाँ हम रात में रुके अत्यधिक अच्छे हैं इसलिए उन्हें एक ही स्थान पर नहीं रहना चाहिए। इनके पास कुछ ऐसा है जिसकी हर स्थान पर आवश्यकता है। इनका प्रभाव एवं उनका चरित्र औरों के लिए अच्छा होगा जहाँ भी वे जाएँगे। इसलिए इनको सब तरफ फैल जाना चाहिए ताकि वे अपना प्रकाश अन्य स्थानों पर भी ले जा सकें।”

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Now we have to see to it that we grow into such citizen that people will want the light of our character and our influence everywhere. We do not wish to have the sort of character that will make people want us to stay in one place, and not to mix with others, If we are to be good citizens, who will be able to serve their country. We must be carrying light with us wherever we go, and not darkness. Our influence on others must be for good, and not for bad. Our lives must be such that wherever we go, and wherever we live, other people should feel better for our having been with them. A good citizen is a centre of light wherever he lives, and whatever he does. The greater the number of good citizens in a country, the more enlightened will the country be as a whole.

(नाऊ वी हैव टू सी टू इट दैट वी ग्रो इण्टु सच सिटीजन्स दैट पीपल विल वॉण्ट द लाईट ऑफ आवर कैरेक्टर ऐण्ड आवर इन्फ्लूएन्स एवरीव्हेअर. वी डू नॉट विश टू हैव द सॉर्ट ऑफ कैरेक्टर दैट विल मेक पीपल वॉण्ट अस टू स्टे इन वन प्लेस, ऐण्ड नॉट टू मिक्स विद अदर्स, इफ वी आर टू बी गुड सिटीजन्स, हू विल बी एबल टू सर्व देयर कंट्री. वी मस्ट बी कैरीइिंग लाईट विद अस व्हेअरएवर वी गो, ऐण्ड नॉट डार्कनेस.आवर इन्फ्लूएन्स ऑन अदर्स मस्ट बी फॉर गुड. ऐण्ड नॉट फॉर बैड़ आवर लाईव्ज़ मस्ट बी सच दैट व्हेअरएवर वी गो, ऐण्ड व्हेअरएवर वी लिव, अदर पीपल शुड फील बैटर फॉर आवर हैविंग बीन विद देम. अ गुड सिटीज़न इज़ अ सेण्टर ऑफ लाईट व्हेअरएवर ही लिब्ज़, ऐण्ड व्हॉटएवर ही डज़. द ग्रेटर द नम्बर ऑफ गुड सिटीजन्स इन अ कंट्री, द मोर एनलाईटेन्ड विल द कंट्री बी ऐज़ अ होल.)

अनुवाद :
अब ये हमें देखना है कि हम बड़े होकर ऐसे नागरिक बनें कि लोग हमारे चरित्र का आलोक और हमारा प्रभाव हर ओर चाहें। हम ऐसा चरित्र नहीं चाहते कि लोग चाहें कि हम एक स्थान पर रहें एवं दूसरे से न घुले-मिलें। यदि हमें अच्छा नागरिक बनना है, जो अपने देश की सेवा कर सकें तो हमें जहाँ भी हम जाएँ अपने साथ प्रकाश लेकर चलना चाहिए (अच्छे चरित्र, ईमानदारी एवं सहृदयता का प्रकाश) न कि अन्धकार (दुश्चरित्रता, बेईमानी, दुष्टता आदि अन्धकार का प्रतीक)। औरों पर हमारा प्रभाव अच्छे के लिए होना चाहिए न कि बुरे के लिए। हमारा जीवन ऐसा होना चाहिए कि जहाँ भी हम जाएँ और जहाँ भी हम रहें अन्य लोगों को इस बात से प्रसन्नता होनी चाहिए कि हम उनके साथ हैं। एक अच्छा नागरिक प्रकाश का केन्द्र होता है जहाँ भी वह रहता है और जो भी वह करता है। किसी देश में अच्छे नागरिकों की संख्या जितनी अधिक होगी उतना ही अधिक वह देश प्रबुद्ध होगा सम्पूर्णता में।

A chain is as strong as is weakest link. Each one of us is a link in the chain that is our country. If we are weak and poor citizens, then our country will suffer, even though we may try to comfort ourselves with the false idea that it does not make any difference what one person does in such a large country where so many people live. But if one candle goes out then in that one place there is darkness instead of light. It is only when all the candles burn brightly that the whole house will be full of light.

(अ चेन इज़ ऐज़ स्ट्रॉन्ग ऐज़ इट्स वीकेस्ट लिंक. ईच वन ऑफ अस इज़ अ लिंक इन द चेन दैट इज़ आवर कंट्री. इफ वी आर पीक ऐण्ड पूअर सिटीजन्स, देन आवर कंट्री विल सफर, ईवन दो वी मे ट्राय टू कम्फर्ट आवरसेल्व्ज़ विद द फाल्स आईडिया देट इट डज़ नॉट मेक एनी डिफरेन्स व्हॉट वन पर्सन डज़ इन सच अ लार्ज कंट्री व्हेअर सो मैनी पीपल लिव. बट इफ वन कैण्डल गोज़ आऊट देन इन दैट वन प्लेस देयर इज़ डार्कनेस इन्स्टेड ऑफ लाईट. इट इज़ ओन्ली व्हेन ऑल द कैण्डल्स बर्न ब्राईटली दैट द होल हाऊज़ विल बी फुल ऑफ लाईट.)

अनुवाद :
एक जंजीर उतनी ही मज़बूत होती है जितनी उसकी सबसे कमज़ोर कड़ी। हम में से प्रत्येक देश रूपी जंजीर की एक कड़ी है। यदि हम कमज़ोर एवं घटिया नागरिक हैं तो हमारे देश को भुगतना पड़ेगा, हम चाहें जितना भी स्वयं को तसल्ली दें कि इतने बड़े देश में जहाँ इतने सारे लोग रहते हैं वहाँ एक व्यक्ति के कार्यों से कोई फर्क नहीं पड़ता। परन्तु यदि एक मोमबत्ती बुझ जाती है तो उस एक स्थान पर अंधेरा हो जाता है प्रकाश के स्थान पर। जब सभी मोमबत्तियाँ एक साथ तेज चमक के साथ जलती हैं तभी पूरा घर प्रकाशमय होता है।

Each of us, therefore, has the responsibility of being a good citizen. We must see that our particular link in the chain is not a weak one. When the Olympic Games were held in London in 1948, a flame was carried to London from Greece, where the Olympic Games used to be held in times long ago. This flame was carried by a long relay of runners right across Europe. Each runner, carrying a lighted torch, ran for a certain distance till he came to the place where a fresh runner was waiting for him. The new runner then lit his torch from the one that had been carried to him. As soon as he had done this he set out to run with his lighted torch to where the next runner was waiting. He had a fresh torch, which he, in his turn, lit from the one brought to him. And so from runner to runner the flame was carried till it reached London. From the last torch was lit the fire which burned all the time the games were going on.

(ईच ऑफ अस, देयरफोर, हैज़ द रिस्पॉन्सिबिलिटी ऑफ बीईंग अ गुड सिटीजन. वी मस्ट सी दैट आवर पर्टिकुलर लिंक इंन द चेन इज़ नॉट अ वीक वन. व्हेन द ओलम्पिक गेम्स वर हेल्ड इन लंदन इन नाईन्टीन फॉर्टी ऐट (1948), अ फ्लेम वॉज़ कैरिड टू लंदन फ्राम ग्रीस, व्हेअर द ओलम्पिक गेम्स यूज्ड टु बी हेल्ड इन टाईम्स लॉन्ग अगो. दिस फ्लेम वॉज़ कैरिड बाई, अ लॉन्ग रिले ऑफ रनर्स राईट अक्रॉस यूरोप. ईच रनर, कैरीईंग अ लाईटिड टॉर्च, रैन फॉर अ सर्टेन डिस्टेन्स टिल ही केम टु द प्लेस व्हेअर अ फ्रेश रनर वॉज़ वेटिंग फॉर हिम. द न्य रनर देन लिट हिज़ टॉर्च फ्रॉम द वन दैट हैड बीन कैरिड टू हिम. ऐज़ सून ऐज़ ही हैड डन दिस ही सेट आऊट टू रन विद हिज़ लाईटिड टॉर्च टु व्हेअर द नेक्स्ट रनर वॉज़ वेटिंग. ही हैड अ फ्रेश टॉर्च, व्हिच . ही, इन हिज़ टर्न, लिट फ्रॉम द वन ब्रॉट टू हिम. ऐण्ड सो फ्रॉम रनर टू रनर द फ्लेम वॉज़ कैरिड टिल इट रीच्ड लंदन. फ्रॉम द लास्ट टॉर्च वॉज़ लिट द फायर व्हिच बर्ड आल द टाईम द गेम्स वर गोईंग ऑन.)

अनुवाद :
इसलिए एक अच्छा नागरिक बनना हम में से प्रत्येक की ज़िम्मेदारी है। हमें स्वयं यह देखना चाहिए कि हम जंजीर की कमज़ोर कड़ी न हों। जब लंदन में आधुनिक . ओलम्पिक खेलों का आयोजन हुआ उन्नीस सौ अड़तालीस में (1948) एक मशाल लंदन से ग्रीस ले जाई गई, जहाँ बहुत पहले ओलम्पिक खेल हुआ करते थे। यह मशाल बहुत सारे धावकों द्वारा यूरोप के एक कोने से दूसरे कोने तक ले जाई गई। हर एक धावक हाथ में जलती हुई मशाल लेकर थोड़ी दूरी तक दौड़ता था और वहाँ पहुँचता था जहाँ एक दूसरा धावक उसका इंतज़ार कर रहा होता था। नया धावक फिर अपनी मशाल को पहले वाले धावक की मशाल से जलाता था। जैसे ही उसकी मशाल जल उठती वह दौड़ना शुरू कर देता वहाँ के लिए जहाँ अगला धावक उसका इंतज़ार कर रहा होता था। जिसके पास अपनी एक मशाल होती थी और जिसे वो अपनी बारी आने पर उसके पास लाई गई मशाल से जलाता था और इसी प्रकार लंदन तक मशाल एक धावक से दूसरे धावक तक ले जाई जाती रही। अन्तिम धावक के मशाल से ओलम्पिक खेलों की ज्योति प्रज्वलित की गई जो पूरे खेलों के दौरान जलती रही।

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Although nothing was said about it, and no names were mentioned, at one place there was an accident. One runner, when handing over his torch to a fresh runner, let it go out. How ashamed he must have been! He had let the flame go out. He had broken the chain.

Each one of us, as we leave school, has a flame to carry which we have to pass on to others. We have been given knowledge and skill. These we pass on by using them in the service of our country. If we do not use them, it means that we are letting the flame go out, and none of us wants to do that. But if we are going to be able to keep alight the torch that has been given to us, we have to know how to look after it, and we have to know how to hold it as we run. In other words, we have to train ourselves for citizenship, and for service of our country.

(ऑल्दो नथिंग वॉज़ अबाऊट इट, ऐण्ड नो नेम्स वर मेन्शन्ड, ऐट वन प्लेस देयर वॉज़ ऐन एक्सिडेण्ट. वन रनर, व्हेन हैण्डिंग ओवर हिज़ टॉर्च टू अ फ्रेश रनर, लेट इट गो आऊट. हाऊ अशेम्ड ही मस्ट हैव बीन! ही हैड लेट द फ्लेम गो आऊट. ही हैड ब्रोकन द चेन.

ईच वन ऑफ अस, ऐज़ वी लीव स्कूल, हैज़ अ फ्लेम टू कैरी व्हिच वी हैव टू पास ऑन टू अदर्स. वी हैव बीन गिवन नॉलिज ऐण्ड स्किल. दीज़ वी पास ऑन बाय यूजिंग देम इन द सर्विस ऑफ आवर कंट्री. इफ वी डू नॉट यूज़ देम, इट मीन्स दैटवी आर लेटिंग द फ्लेम गो आऊट, ऐण्ड नन ऑफ अस वॉण्ट्स टू डू दैट. बट इफ वी आर गोईंग टू बी एबल टू कीप अलाईट द टॉर्च दैट हैज़ बीन गिवन टू अस, वी हैव टू नो हाऊ टू लुक आफ्टर इट, ऐण्ड वी हैव टू नो हाऊ टू होल्ड इट ऐज़ वी रन. इन अदर वर्ड्स, वी हैव टू ट्रेन आवरसेल्ब्ज़ फॉर सिटीज़नशिप, ऐण्ड फॉर सर्विस ऑफ आवर कंट्री.)

अनुवाद :
हालांकि इस बारे में कभी कुछ कहा नहीं गया, और नाम भी नहीं बताए गए, एक स्थान पर एक हादसा हो गया था। एक धावक जब अपनी मशाल अगले धावक को दे रहा था तो पहले धावक की मशाल बुझ गई। कितनी शर्मिन्दगी हुई होगी उस धावक को! उसने मशाल की ज्योति को बुझने दिया। उसने जंजीर (कड़ी) तोड़ दी थी।

जब हम अध्ययन समाप्त कर जाते हैं तो हम में से हर एक के पास एक मशाल होती है जिसे हमें दूसरे को देना होता है। हमें ज्ञान और कौशल दिया गया है। देश की सेवा में इनका उपयोग कर हम इन्हें आगे बढ़ाते हैं। यदि हम इनका उपयोग नहीं करते तो इसका अर्थ हुआ कि हम मशाल की ज्योति को बुझने दे रहे हैं और हम में से कोई भी यह नहीं करना चाहता। परन्तु यदि हमें मशाल की ज्योति को प्रज्वलित रखना है जो हमें दी गई है तो हमें यह जानना होगा कि उसकी देखभाल कैसे करें और दौड़ते समय उसे कैसे पकड़ें। दूसरे शब्दों में कहें तो हमें स्वयं को नागरिकता व देश की सेवा हेतु प्रशिक्षित करना है।

MP Board Class 10th English Solutions

The Spring Blossom Textbook General English Class 10th Solutions

The Tribute-I Question Answer Class 10 English The Spring Blossom Chapter 9 MP Board

Class 10 English The Spring Blossom Chapter 9 The Tribute-I Questions and Answers

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The Tribute-I Class 10th Question Answer

Word Power

A. Make antonyms of the words in column (2) by adding appropriate prefixes from column (1)
(सही उपसर्ग जोड़कर विलोम शब्द बनाइए।)
MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 9 The Tribute-I 1
Answer:
1. illegal
2. unusual
3. immoral
4. dissatisfied
5. inappropriate.

B. Give one-word substitute for the following expressions (the first letter is given as clue)
(एक शब्द दीजिए)
Answer:

  1. a child whose parents are dead. (orphan)
  2. the feeling of having lost all hope. (despair)
  3. to take away something quickly from a person, specially by force. (snatch)
  4. to continue to cause problem for someone for a long time. (haunt)
  5. an object that is worn as jewellery. (ornament)

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C. Rearrange the letters to form new words.
(नर्य शब्द बनाइए)
Answer:

  1. complacency – place, lace, come, lay, one, once, play, plane.
  2. retain – rain, train, tea, near, tear, art, ant.
  3. despair – pair, spare, dear, read, spade, pear, pea.
  4. pathetic – path, cap, heap, hat, hate, tea, heat.
  5. ornament – nor, meat, team, tore, tear, rent, near, mate.

How Much Have I Understood?

A. Answer these questions. (One or two sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Why did Babuli shrink within?
(व्हाय डिड बाबुली जिंक विदिन?)
बाबुली अन्दर ही अन्दर क्यों हिल गया?
Answer:
Babuli shrank within for not writing letters home for a long time.
(बाबुली (क विदिन फॉर नॉट राइटिंग लैटर्स होम फॉर अ लाँग टाइम।)
बाबुली लम्बे समय से घर पत्र न लिखने के कारण हिल गया।

Question 2.
What was the routine affair of Babuli in his student days?
(व्हॉट वॉज द रुटीन अफेयर ऑफ बाबुली इन हिज स्टूडेन्ट डेज़?)
बाबुली की अपने विद्यार्थी काल की दिनचर्या क्या थी?
Answer:
In his student days, going to his home in a distant village was a routine affair of Babuli.
(इन हिज़ स्टूडेन्ट डेज़, गोइंग टू हिज़ होम इन अ डिस्टेन्ट विलेज वॉज़ अ रुटीन अफेयर ऑफ बाबुली।)
अपने विद्यार्थी काल में, अपने घर जो कि दूरस्थ गाँव में था जाना, बाबुली की दिनचर्या में शामिल था।

Question 3.
Why did Babuli’s mother complain?
(व्हाय डिड बाबुलीज मदर कम्प्लेन?)
बाबुली की माँ शिकायत क्यों करती है?
Answer:
Babuli’s mother complained for his negligence of writing letters to him.
(बाबुलीज मदर कम्प्लेन्ड फॉर हिज़ नेग्लिजेन्स ऑफ राइटिंग लेटर्स टू हिम।)
बाबुली की माँ ने उसकी उन्हें पत्र न लिखने की लापरवाही के कारण शिकायत की।

Question 4.
Why did Babuli’s mother stop complaining?
(व्हाय डिड बाबुलीज मदर स्टॉप कम्प्लेनिंग?)
बाबुली की माँ ने शिकायत करना क्यों छोड़ दिया?
Answer:
Babuli’s mother stopped complaining because she understood that he was busy and preoccupied.
(बाबुलीज़ मदर स्टॉप्ड कम्प्लेनिंग बिकॉज़ शी अण्डरस्टुड दैट ही वॉज़ बिजी एण्ड प्रीऑक्युपाइड।)
बाबुली की माँ ने शिकायत करना छोड़ दिया क्योंकि वे समझ गयीं कि वो व्यस्त व अपने कार्य में तल्लीन था।

Question 5.
How did Babuli’s elder brother care for him when he was a student?
(हाउ डिड बाबुलीज एल्डर ब्रदर केयर फॉर हिम व्हेन ही वॉज अ स्टूडेन्ट?)
बाबुली के बड़े भाई ने उसकी उसके विद्यार्थीकाल में किस प्रकार सेवा की?
Answer:
When Babuli was a student his elder brother enquired about his well-being. When he used to stay at home he would catch fish for him and would ask his wife to prepare a good dish for him.
(व्हेन बाबुली वॉज अ स्टूडेन्ट हिज एल्डर ब्रदर एंक्वायर्ड अबाऊट हिज वेल-बीइंग। व्हेन ही यूज्ड टू स्टे एट होम ही वुड कैच फिश फॉर हिम एण्ड वुड आस्क् हिज वाइफ टू प्रिपेअर अ गुड डिश फॉर हिम।)
बाबुली के विद्यार्थीकाल में उसके बड़े भाई उसके भले के बारे में पूछा करते थे। जब वो घर पर रहता था तो वो उसके लिए मछली पकड़कर लाया करते थे व अपनी पत्नी से उसके लिए स्वादिष्ट भोजन बनाने के लिए कहते थे।

Question 6.
Why did Babuli’s brother write him a letter?
(व्हाय डिड बाबुलीज़ ब्रदर राइट हिम आ लैटर?)
बाबुली के भाई ने उसे पत्र क्यों लिखा?
Answer:
Babuli’s brother had written to him a letter because their property was to be divided into three parts so his presence was essential.
(बाबुलीज ब्रदर हैड रिट्न् टू हिम अ लैटर बिकॉज़ देयर प्रॉपर्टी वॉज टू बी डिवाइडिड इन्टू थ्री पार्ट्स सो हिज प्रेजेन्स वॉज एसेन्शियल।)
बाबुली के भाई ने उसे पत्र लिखा था क्योंकि उनकी सम्पत्ति का तीन हिस्सों में बँटवारा होना था व उसकी उपस्थिति अनिवार्य थी।

Question 7.
Who was adamant about the division of the property?
(हू वॉज ऐडमन्ट अबाऊट द डिवीजन ऑफ द प्रॉपर्टी?
सम्पत्ति के बँटवारे के लिए कौन दृढ़ था?
Answer:
Babuli’s second brother was adamant about the division of the property.
(बाबुलीज सैकण्ड ब्रदर वॉज ऐडमन्ट अबाऊट द डिवीजन ऑफ द प्रॉपर्टी।)
बाबुली के दूसरे भाई सम्पत्ति के बँटवारे के लिए दृढ़ थे।

Question 8.
How did Babuli’s wife plan to use the money?
(हाउ डिड बाबुलीज वाइफ प्लैन टू यूज द मनी?)
बाबुली की पत्नी ने पैसों के इस्तेमाल की क्या योजना बनाई?
Answer:
Babuli’s wife planned to buy a fridge and a scooter and to put the rest of the money in bank.
(बाबुलीज वाइफ प्लैण्ड टू बॉय अ फ्रिज एण्ड अ स्कूटर एण्ड टू पुट दं रेस्ट ऑफ द मनी इन बैंक।)
बाबुली की पत्नी ने एक फ्रिज़ व एक स्कूटर खरीदने व बचा हुआ पैसा बैंक में रखने की योजना बनाई।

Question 9.
How did Babuli feel listening to his wife’s plan?
(हाउ डिड बाबुली फील लिसनिंग टू हिज वाइफ्स प्लैन?)
बाबुली को अपनी पत्नी की योजना सुनना कैसा लग रहा था?
Answer:
Babuli, while listening to his wife’s plan felt that he was an innocent lamb and butcher was sharpening his knife to tear him to pieces and saying that there is a better life after death.
(बाबुली, व्हाइल लिसनिंग टू हिज वाइफ्स प्लैन फेल्ट् दैट ही वॉज एन इनोसेन्ट लैम्ब एण्ड अ बुचर वॉज़ शार्पनिंग हिज नाइफ टू टीयर हिम टू पीसेज एण्ड सेइंग दैट देयर इज़ अ बैटर लाइफ आफ्टर डैथ।)
बाबुली ने अपनी पत्नी की योजना सुनते हुए महसूस किया कि जैसे वो एक मासूम मेमना है व एक कसाई उसके टुकड़े करने के लिए अपनी छुरी की धार तेज कर रहा है व कह रहा है कि मृत्यु के बाद बेहतर जिन्दगी है।

Question 10.
How much time did Babuli take to become normal?
(हाउ मच टाइम डिड बाबुली टेक टू बिकम नॉर्मल?)
बाबुली ने सामान्य होने में कितना समय लगाया?
Answer:
It took Babuli two days to become normal.
(इट टुक बाबुली टू डेज टू बिकम नॉर्मल।)
बाबुली को सामान्य होने में दो दिन लगे।

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B. Answer these questions. (Three or four sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Describe the changes that occurred in the life of Babuli.
(डिस्क्राइब द चेन्जेज़ दैट ऑकर्ड इन द लाइफ ऑफ बाबुली।)
बाबुली की जिन्दगी में आये बदलावों का वर्णन कीजिए।
Answer:
Several changes occurred in Babuli’s life after he got his job. He did not go to his home even once and also did not write any letter. He became busy in his own life and job.
(सैवरल चेन्जेज़ ऑकर्ड इन बाबुलीज़ लाइफ आफ्टर ही गॉट हिज़ जॉब। ही डिड नॉट गो टू हिज होम ईवन वन्स एण्ड ऑल्सो डिड नॉट राईट एनी लैटर। ही बिकेम बिज़ी इन हिज़ ओन लाइफ एण्ड जॉब।)
बाबुली के कार्यरत होने के पश्चात् उसमें कई बदलाव आये। वो अपने घर एक बार भी नहीं गया व उसने वहाँ एक भी पत्र नहीं लिखा। वह अपने कार्य व अपनी जिन्दगी में व्यस्त हो गया।

Question 2.
What was the effect of the letter on Babuli?
(व्हॉट वॉज़ द इफेक्ट ऑफ द लैटर ऑन बाबुली?)
बाबुली पर पत्र का क्या प्रभाव पड़ा?
Answer:
Babuli felt helpless and orphaned on reading the letter. He became despaired and restless.
(बाबुली फेल्ट हैल्पलेस एण्ड ऑफन्ड ऑन रीडिंग द लैटर। ही बिकेम डिस्पेयर्ड एण्ड रेस्टलेस।)
बाबुली पत्र पढ़ने के पश्चात स्वयं को असहाय व अनाथ महसूस करने लगा। वह निराश व बेचैन हो गया।

Question 3.
What was the reaction of Babuli’s wife when she heard about the division?
(व्हॉट वॉज़ द रिएक्शन ऑफ बाबुलीज़ वाइफ व्हेन शी हर्ड अबाऊट द डिवीज़न?)
बाबुली की पत्नी की बँटवारे की खबर सुनने के पश्चात् क्या प्रतिक्रिया थी?
Answer:
When Babuli’s wife heard about the division she was totally undisturbed. She only asked when was it to take place as if she was totally prepared for it.
(व्हेन बाबुलीज़ वाइफ हर्ड अबाऊट द डिवीज़न शी वॉज टोटली अनडिस्टर्ड। शी ओनलि आस्क्ड व्हेन वॉज़ इट टू टेक प्लेस एज़ इफ शी वॉज़ टोटलि प्रिपेअर्ड फॉर इट।)
जब बाबुली की पत्नी ने बँटवारे के विषय में सुना तो वो जरा भी व्याकुल नहीं हुई। उसने बस इतना ही पूछा कि वह कब होगा मानो वह उसके लिए पहले से ही तैयार थी।

Question 4.
How did Babuli’s elder brother take him home from his tuitions?
(हाउ डिड बाबुलीज़ एल्डर ब्रदर टेक हिम होम फ्रॉम हिज़ ट्यूशन्स?)
बाबुली के बड़े भाई उसे उसके ट्यूशन से घर कैसे लेकर जाते थे?
Answer:
Babuli’s elder brother waited for him in the dark while he was returning home from tuitions. He carried his lantern, bag of books and notes. He sometimes held his hand while walking.
(बाबुलीज़ एल्डर ब्रदर वेटिड फॉर हिम इन द डार्क व्हाइल ही वॉज़ रिटर्निंग होम फ्रॉम ट्यूशन्स। ही कैरिड हिज़ लैन्टर्न, बैग ऑफ बुक्स एण्ड नोट्स। ही समटाइम्स हेल्ड् हिज़ हैण्ड व्हाइल वॉकिंग।)
बाबुली के बड़े भाई उसके ट्यूशन से लौटते समय उसका अँधेरे में इन्तजार करते थे। वे अपना लालटेन, उसकी किताबों का बस्ता उठाया करते थे। वे कभी-कभी चलते समय उसका हाथ पकड़ लेते थे।

Language Practice

A. Fill in the blanks with an infinitive, gerund or a participle.
(रिक्त स्थान भरो।)

  1. Kamini decided ………. alone. (to go/going)
  2. She is thinking of ………. a car. (buying/bought/to buy)
  3. Reshma felt …….. on getting the scholarship. (delighting/delighted/to delight)
  4. He promised …………. the money soon. (returning/to return)
  5. Parents postponed ……….. their daughter’s marriage. (to celebrate/celebrating)

Answer:

  1. to go
  2. buying
  3. delighted
  4. to return
  5. to celebrate.

B. Fill in the blanks with correct alternatives.
(रिक्त स्थान भरिए।)

  1. Shikha refused ………. the doll. (leaving/to leave)
  2. You should avoid …….. mistakes. (making/to make)
  3. I don’t fail ……….. promises. (to keep/keeping)
  4. Would you mind ……… for me? (to wait/waiting)
  5. He has decided ………. smoking. (to give up/giving up)

Answer:

  1. to leave
  2. making
  3. to keep
  4. waiting
  5. to give up

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Listening Time

A. The teacher will read out the following words and the students will repeat them.
(निम्न शब्दों को दोहराओ।)
Answer:
MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 9 The Tribute-I 2

B. Listen to your teacher carefully and complete the following grid. Put a (✓) or an (✗). (Students will draw the grid in their copies.)
(अपने शिक्षक की बात सुनकर निम्न तालिका भरिए।)
Answer:
MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 9 The Tribute-I 3

Writing Time

Study the given paragraph. What is the topic sentence of the paragraph?
Find out the sentence/s which do/es not belong to the paragraph (intruders).
Answer:
Topic sentence :
Carbohydrates, source of energy

Any intruders :
Proteins are body builders. (irrelevant sentence)

Things to do

Make a list of the days and dates on which we pay tribute to our great leaders and freedom fighters and write them in your notebooks.
(कौन से दिनों व तारीखों में हम महान् नेताओं व क्रान्तिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।)
Answer:
We pay tribute to our great leaders and freedom fighters on Independence day-15 August and Republic day-26 January.

The Tribute-I Difficult Word Meanings

MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 9 The Tribute-I 4

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The Tribute-I Summary, Pronunciation & Translation

As I reached my desk in the office, my eyes stopped over a letter. It contained that familiar, petite handwriting of my elder brother. After a very long time he had written to me. I shrank within for not writing letters home, all these days.

In my student days, it was almost a routine affair. I used to go home to that distant village on a rickety bus, caring nothing for the strain of the journey. My home-my village-they used to pull me away from the moribund city life. Now things have changed and I too have changed, a great deal at that! A lot of cobwebs have settled around me. I am swept by that invisible tide of time, and business. I was studying at Bhuvaneswar, where I got my job and now for these two years, I have thought of home not even once. Many a time my mother has written letters complaining about my negligence in writing to her. She has even reminded me of those pre-marriage days of mine.

(ऐज़ आई रीच्ड माई डेस्क इन द ऑफिस, माई आईज़ स्टॉप्ड ओवर अ लैटर इट कण्टेन्ड दैट फैमिलियर, पेटाईट। हैण्डराईटिंग ऑफ माई एल्डर ब्रदर आफ्टर अ वेरी लॉन्ग टाईम ही हैड रिटन टू मी. आई बैंक विदिन फॉर नॉट राइटिंग लैटर्स होम, ऑल दीज डेज़.

इन माई स्टुडेण्ट डेज़, इट वॉज़ ऑल्मोस्ट अ रुटीन अफेयर आई यूज्ड टू गो होम टू दैट डिस्टेण्ट विलेज ऑन अ रिकेटी बस, केयरिंग नथिंग फॉर द स्ट्रेन ऑफ द जर्नी। माई होम-माई विलेज़ दे यूज्ड टू पुल मी अवे फ्रॉम द मोरीबण्ड सिटी लाइफ नाऊ थिंग्स हैव चेन्ज्ड ऐण्ड आई टू हैव चेन्ज्ड, अ ग्रेट डील ऐट दैट! अलॉट ऑफ कॉबबेब्स हैव सेटल्ड अराउण्ड मी. आई ऐम स्वेप्ट बाई दैट इनविजिबल टाईड ऑफ टाईम ऐण्ड बिजनेस. आई वॉज स्टडिंग ऐट भुवनेश्वर, व्हेयर आई गॉट माई जॉब ऐण्ड नाऊ फॉर दीज़ टू यीअर्स, आई हैव थॉट ऑफ होम नॉट ईवन वन्स, मेनी अ टाईम माई मदर हैज़ रिटन लैटर्स कम्प्लेनिंग अबाऊट माई नेग्लिजेन्स इन राइटिंग टू हर. शी हैज ईवर रिमाईन्डिड मी ऑफ दोज प्री-मैरिज डेज ऑफ माईन.)

अनुबाद :
जब मैं दफ्तर में अपनी मेज तक पहुँचा मेरी आँखें एक पत्र पर रुक गईं। उस पर मेरे बड़े भाई की जानी पहचानी खूबसूरत लिखाई थी। काफी समय बाद उन्होंने मुझे पत्र लिखा था। मैं इतने समय से घर कोई चिट्ठी न लिखने के ख्याल से अन्दर-ही-अन्दर सिकुड़ गया।

पढ़ाई के दिनों में यह प्रायः मेरा नियमित कार्यक्रम था। मैं सुदूर गाँव में अपने घर जाया करता था जर्जर खटारा बस में सफर की मुश्किलों की परवाह न करते हुए। मेरा घर मेरा-गाँव वे मुझे अपनी ओर खींचते थे मृतप्रायःशहरी जीवन से दूर। अब चीजें बदल चुकी हैं और मैं भी काफी बदल चुका हूँ। कई प्रकार के जाले मेरे चारों ओर लग चुके हैं। मैं समय और व्यवसाय के अदृश्य ज्वार में बह रहा हूँ। मैं भुवनेश्वर में पढ़ाई कर रहा था, जहाँ मुझे नौकरी मिली और इन दो वर्षों में मैंने एक बार भी घर के विषय में नहीं सोचा था। कई बार मेरी माँ ने उनको पत्र न लिखने की शिकायत करते हुए कई बार मुझे पत्र लिखे। उन्होंने मुझे मेरे विवाह-पूर्व के दिनों की भी याद दिलाई।

Yet I have never been able to break standards of complacency which have coiled around me. I have kept quiet to prove that I am busy and preoccupied. Now she does not complain. Probably, she understand my position.

Usually my elder brother does not write to me. He does not need anything from me. He has never sought a token from me in lieu of his concern for me as an elder brother. In those days when I was a student, the only thing that he enquired about was my well-being. During my stay at home, he would catch fish for me from the pond behind our house and would ask his wife to prepare a good dish, for I loved fish. When the catch was scantly, the dish would be prepared exclusively for me. He would say to his wife. “You must make the dish as delicious as possible, using mustard paste for Babuli.” Even now, he is the same man with the same tone of love and compassion. Nothing has changed him-his seven children, father, mother, cattle, fields, household .responsibilities. He is the same-my elder brother.

(येट आई हैव नेवर बीन एबल टू ब्रेक दोज़ स्टैण्डर्ड्स ऑफ कॉम्प्लेसेन्सी विच हैव कॉइल्ड अराऊण्ड मी आई हैव केप्ट क्वाईट टू प्रूव दैट आई ऐम बिजी ऐण्ड प्रीऑक्यूपाईड नाऊ शी डज नॉट कम्पलेन प्रोबैब्ली, शी अण्डरस्टैण्ड्स माई पोजिशन

यूज्युअली माई एल्डर ब्रदर डज़ नॉट राईट टू मी. ही डज़ नॉट नीड एनीथिंग फ्रॉम मी ही हैज नेवर सॉट अ टोकन फ्रॉम मी इन लियू ऑफ हिज़ कन्सर्न फॉर मी ऐज ऐन एल्डर ब्रदर। इन दोज डेज व्हेन आई वॉज अ स्टुडेण्ट, द ओनली थिंग दैट ही एन्क्वायर्ड अबाऊट वॉज माई वैल-वीइंग ड्यूरिंग माई स्टे ऐट होम, ही वुड कैच फिश फॉर मी फ्रॉम द पॉण्ड बिहाइन्ड आवर हाउज ऐण्ड वुड आस्क हिज वाईफ टू प्रिपेअर अ गुड डिश, फॉर आई लव्ड फिश व्हेन द कैच वॉज स्कैण्टी, द डिश वुड बी प्रिपेअर्ड एक्सक्लूजिवली फॉर मी. ही वुड से टू हिज़ वाईफः “यू मस्ट मेक द डिश ऐज डेलिशियस ऐज पॉसिबल, यूजिंग मस्टर्ड पेस्ट फॉर बाबुली” ईवर नाऊ, ही इज द सेम मैन विद द सेम टोन ऑफ लव ऐण्ड कम्पैशन नथिंग हैज चेन्ज्ड हिम-हिज् सेवन चिल्ड्रन, फादर, मदर, कैटल, फील्ड्स, हाउजहोल्ड रिस्पॉन्सिबिलीटीज. ही इज द सेम-माई एल्डर ब्रदर.)

अनुवाद :
फिर भी मैं अपने इर्द-गिर्द कुंडली मारे आत्मसन्तुष्टि के उन मानदण्डों को कभी तोड़ नहीं पाया। मैं चुप रहा यह जताने के लिए कि मैं बहुत व्यस्त और तल्लीन हूँ। अब वह शिकायत नहीं करतीं। शायद, वो मेरी स्थिति समझती हैं।

आमतौर पर मेरे बड़े भाई मुझे पत्र नहीं लिखते। उन्हें मुझसे कुछ नहीं चाहिए। एक बड़े भाई के रूप में मेरी इतनी चिन्ता करने के एवज में उन्होंने कभी मुझसे किसी भी चीज की अपेक्षा नहीं की। उन दिनों जब मैं छात्र था यदि किसी चीज के बारे में वह पूछते थे तो सिर्फ मेरे हाल-चाल के बारे में। अब छुट्टियों में मैं घर पर होता था तो वह मेरे लिए मछलियाँ पकड़ा करते थे घर के पीछे वाले तालाब से और अपनी पत्नी से कहते कि बहुत अच्छे से बनाए क्योंकि मुझे मछली पसन्द है। जब थोड़ी ही मछलियाँ होती थीं तो फिर सिर्फ मेरे लिए पकाई जाती थीं। वे अपनी पत्नी से कहा करते। “तुम बाबुली के लिए पिसी सरसों के साथ मछली बनाओ जितना स्वादिष्ट तुम बना सकती हो उतना।” वे आज भी वैसे ही हैं वही प्यार, करुणा व संवेदना युक्त व्यक्ति। कुछ भी नहीं बदला-उनके सात बच्चे, पिताजी, माताजी, मवेशी, खेत, घर की जिम्मेदारियाँ वे आज भी वही हैं- मेरे बड़े भाई।

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I handled the letter carefully. He had asked me to come home. Some feud had cropped up. The two sisters-in-law had quarelled. Our paddy fields, the cottage and all the movables and im-movables were to be divided into three parts amongst us. My presence was indispensable.

It was my second brother who was so particular and adamant about the division. He wanted it at any cost.

I finished reading the letter. A cold sweat drenched me. I felt helpless, orphaned. A sort of despair haunted me for a long time. Quite relentlessly, I tried to drive them away yawning helplessly in a chair.

In the evening when I told my wife about the partition that was to take place, I found totally unperturbed. She just asked me: “When?” as if she was all prepared and waiting for this event to take place! “In a week’s time,” I said.”

(आई हैण्डल्ड द लैटर केयरफुली ही हैड आस्क्ड मी टू कम होम. सम फ्यूड हैड क्रॉप्ड अप द टू सिस्टर्स-इन-लॉ हैड क्वारेल्ड. आवर पैडी फील्ड्स, द कॉटेज ऐण्ड ऑल द मूवेबल्स ऐण्ड इम्मूवेबल्स वर टू बी डिवाईडिड इण्टू थ्री पार्ट्स अमंगस्ट अस माई प्रजेन्स वॉज इन्डिस्पेन्सिबल इट वॉज माई सेकण्ड ब्रदर हू वॉज सो पर्टिकुलर ऐण्ड ऐडमेण्ट अबाऊट द डिविजन ही वॉण्टिड इट ऐट एनी कॉस्ट.

आई फिनिश्ड रीडिंग द लैटर अ कोल्ड स्वेट ड्रेन्ड मी. आइ फेल्ट हेल्पलेस, ऑफन्ड. अ सॉर्ट ऑफ डेस्पेअर हॉण्टिड मी फॉर लॉन्ग टाईम. क्वाईट रिलेण्टलेस्ली, आई ट्राईड टू ड्राईव दैम अवे यॉनिग हैल्पलेस्ली इन अ चेयर.

इन द ईवनिंग व्हेन आई टोल्ड माई वाइफ अबाऊट द पार्टिशन दैट वॉज़ टू टेक.प्लेस, आई फाउण्ड हर टोटली अनपर्टर्ड शी जस्ट आस्क्ड मी: “व्हेन?” ऐज इफ शी वॉज आल प्रिपेअरड ऐण्ड वेटिंग फॉर दिस ईवेण्ट टू टेक प्लेस! “इन अ वीक्स टाइम” आई सेड.)

अनुवाद :
मैंने बहुत सावधानी के साथ पत्र को खोला। उन्होंने (बड़े भाई) ने मुझे घर आने के लिए लिखा था, कुछ झगड़ा उठ खड़ा हुआ था। मेरे दोनों भाइयों की पत्नियाँ (देवरानी-जेठानी) आपस में लड़ ली थीं। हमारे चावल के खेत, हमारा मकान और अन्य सभी प्रकार की चल-अचल सम्पत्तियों का बँटवारा हम तीनों के बीच होना था। मेरी मौजूदगी अपरिहार्य थी।

मेरा दूसरा भाई बँटवारे की ज़िद पर अड़ा हुआ था। उसे किसी भी कीमत पर बँटवारा चाहिए था। मैंने पत्र पढ़ लिया। ठण्डे पसीने से मैं भीग गया। मैं अपने आप को असहाय और अनाथ महसूस कर रहा था। बहुत देर तक एक प्रकार की निराशा मुझे घेरे रही। कुर्सी पर असहाय बैठा हुआ मैं लगातार ऐसे विचारों को दूर भगाता रहा।

शाम को जब मैंने अपनी पत्नी को बताया कि बँटवारा होने वाला है तो मैंने उसे बिल्कुल अविचलित पाया। उसने केवल मुझसे पूछा “कब”? जैसे कि वो इसके लिए तैयार हो और इन्तजार कर रही हो होने का। “एक सप्ताह में,” मैंने कहा।

In bed that night my wife asked me all sorts of questions. What would be our share and how much would fetch us on selling it? I said nothing for a while but in order to satisfy her, at last guessed that it should be around twenty thousand rupees. She came closer to me and said, “We don’t need any land in the village. What shall we do with it? Let’s sell it and take the money. Remember, when you, sell it, hand over to me the entire twenty thousand. I will make proper use of it. We need a fridge, you know. Summer is approaching. You need not go to the office riding a bicycle. You must have a scooter. And the rest we will put in a bank. There is no use keeping land in the village. We can’t look after it, and why should others draw benefits out of our land?”

(इन बेड दैट नाईट माई वाईफ आस्क्ड मी ऑल सॉर्ट्स ऑफ क्वेश्चन्स व्हॉट वुड बी आवर शेयर ऐण्ड हाऊ मच वुड फेच अस आन सेलिंग इट? आई सेड नथिंग फॉर अ व्हाईल बट इन ऑर्डर टू सैटिस्फाई हर, ऐट लास्ट गैस्ड दैट इट शुड बी अराउण्ड ट्वेन्टी थाऊसेण्ड रूपीज़ शी केम क्लोजर टू मी ऐण्ड सेड, “वी डोण्ट (डू नॉट) नीड एनी लैण्ड इन द विलेज़ व्हॉट शैल वी डू विद इट? लैट अस सैल इट ऐण्ड टेक द मनी रिमेम्बर, व्हेन यू सैल इट, हैण्ड ओवर टु मी द एन्टायर ट्वेन्टी थाऊसेण्ड आई विल मेक प्रॉपर यूज़ ऑफ इट. वी नीड अ फ्रिज, यू नो. समर इज अप्रोचिंग यू नीड नॉट गो टू द ऑफिस राईडिंग अ बाईसिकल. यू मस्ट हैव अ स्कूटर. ऐण्ड द रेस्ट वी विल पुट इन अ बैंक देयर इज़ नो यूज कीपिंग लैण्ड इन द विलेज़ वी काण्ट (कैन नॉट) लुक आफ्टर इट, ऐण्ड व्हाय शुड अदर्स ड्रॉ बेनिफिट्स आऊट ऑफ आवर लेण्ड?’)

अनुवाद :
उस रात बिस्तर पर मेरी पत्नी ने मुझसे तरह-तरह के प्रश्न पूछे। हमारा हिस्सा कितना होगा और उसे बेचने पर हमें क्या (कितना) मिलेगा? मैं थोड़ी देर तक तो कुछ नहीं बोला पर फिर उसकी संतुष्टि हेतु आखिरकार अन्दाजा लगाया कि लगभग बीस हजार रुपये होंगे। वह मेरे और पास आ गई और बोली “हमें गाँव में किसी जमीन की कोई जरूरत नहीं है। हम क्या करेंगे उसका? उसे बेचकर पैसे ले लेते हैं। याद रखना जब उसे बेच दो तो पूरे बीस हजार रुपये लाकर मुझे देना। मैं उसका सही इस्तेमाल करूँगी। हमें एक फ्रिज की जरूरत है तुम्हें पता है। गर्मियों आ रही हैं। तुम्हें साइकिल चलाकर ऑफिस जाने की जरूरत नहीं है। तुम्हारे पास एक स्कूटर होना चाहिए और बाकी की रकम हम बैंक में डाल देंगे। गाँव में ज़मीन रखना व्यर्थ है। हम उसकी देखभाल कर नहीं सकते और दूसरे क्यों हमारी जमीन का लाभ लें।”

I listened to all this like an innocent lamb looking into the darkness. I felt as if the butcher was sharpening his knife, huming a tune and waiting to tear me into large chunks of meat, and consoling me saying that there is a better life after death.

Gone are those days; gone are those feelings, when the word ‘Home’ filled my heart with emotion. And that affectionate word ‘Brother’! What feeling it had ! How it used to make my heart pound with love! Recollecting all these things, I felt weak, pathetic.

Where is the heart gone? Where are those days? Where has that spontaneity of feeling gone? I just can’t understand how a stranger could all of a sudden become so intimate.

(आई लिसिन्ड टू ऑल दिस लाइक ऐन इनोसेण्ट लैम्ब लुकिंग इण्टू द डार्कनेस. आई फैल्ट ऐज इफ द बुचर वॉज शार्पनिंग हिज नाइफ, हमिंग अ ट्यून ऐण्ड वेटिंग टू टीयर मी इण्ट्र लार्ज चंक्स ऑफ मीट, ऐण्ड कन्सोलिंग मी सेईंग दैट देयर इज़ अ बैटर लाइफ आफ्टर डेथ.)

गॉन आर दोज डेज, गॉन आर दोज फीलिंग्स, व्हेन द वर्ड ‘होम’ फिल्ड माई हार्ट विद इमोशन ऐण्ड दैट अफेक्शनेट वर्ड ‘ब्रदर’। व्हॉट फीलिंग इट हैड। हाऊ इट यूज्ड टू मेक माई हार्ट पाऊण्ड विद लव! रीकलैक्टिंग ऑल दीज थिंग्स, आई फैल्ट वीक, पैथेटिक।

व्हेअर इज़ द हार्ट गॉन? व्हेअर आर दोज़ डेज़? व्हेअर हैज दैट स्पॉन्टनीअटी ऑफ फीलिंग गॉन? आई जस्ट काण्ट अन्डरस्टैण्ड हाऊ अ स्ट्रेन्जर कुड ऑल ऑफ अ सडन बिकम सो इन्टिमेट.)

अनुवाद :
मैं एक निरीह मेमने की तरह यह सब कुछ सुनता रहा अन्धेरे में देखते हुए मुझे ऐसा महसूस हुआ मानो कोई कसाई धुन गुनगुनाते हुए छुरा तेज कर रहा है और इन्तजार कर रहा है मुझे बड़े-बड़े माँस के टुकड़ों में काटने का और साथ में मुझे सान्त्वना दे रहा है यह कहते हुए कि मृत्यु के बाद बहुत बेहतर जिन्दगी है।

वो दिन, वो भावनाएँ सब कहीं खो गए हैं, जब ‘घर’ शब्द मेरे हृदय को उमंग भरी भावनाओं से भर देता था। और वह स्नेहमय शब्द ‘भाई’! कैसा सुखद अहसास था उसमें। कैसे वो मेरे हृदय को प्रेम से जोर-जोर से धड़का देता था। यह सब कुछ याद करते हुए मैं कमजोर और दयनीय महसूस कर रहा था।

कहाँ गया वो हृदय? कहाँ गए वो दिन? वो भावनाओं की स्वाभाविक सहजता कहाँ गई? मैं यह बिल्कुल नहीं समझ पा रहा कि कैसे एक अनजान व्यक्ति अचानक से इतना घनिष्ठ हो जाता है।

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But I became my normal self in two days. I grew used to what had been a shock. Later on, in the market-place, keeping pace with my wife. I enquired about the prices of the different things she intended to buy. Buying a fridge was almost certain. A secondhand scooter, a stereo set and some gold ornaments. I prepared a list of the prices. She kept reminding me about her intentions, and was showing a lot of impatience.

(बट आइ बिकेम माइ नॉर्मल सेल्फ इन टू डेज़ आई ग्रयू यूज्ड टू व्हॉट हैड बीन अ शॉक लेटर ऑन, इन द मार्केट-प्लेस, कीपिंग पेस विद माई वाइफ, आई एन्क्वायर्ड अबाउट द प्राइसेस ऑफ द डिफरेन्ट थिंग्स शी इन्टेन्डिड टू बाय बायींग अ फ्रिज वॉज़ आल्मोस्ट सन. अ सैकण्ड-हैण्ड स्कूटर, अ स्टीरियो सेट एण्ड सम, गोल्ड ऑर्नामेण्ट्स। आई प्रिपेअर्ड अ लिस्ट ऑफ प्राइसेस. शी केप्ट रिमाईन्डिंग मी अबाउट हर इन्टेन्शन्स, ऐण्ड वॉज शोईंग अलॉट ऑफ इम्पेशियन्स.)

अनुवाद :
परन्तु दो दिनों में अपनी सामान्य स्थिति में आ गया। पहले-पहल जो मुझे आघात लगा था मैं उसका आदी हो गया था। बाद में बाजार में, अपनी पत्नी के साथ कदम मिलाते हुए मैंने उन चीजों की कीमत के बारे में पूछा जो वह खरीदना चाहती थी। एक फ्रिज लेना तो लगभग पक्का था। एक पुराना स्कूटर, एक स्टीरियो सेट और कुछ स्वर्ण आभूषण। मैंने सब चीजों की एक कीमत-सूची तैयार की। मेरी पत्नी मुझे याद दिलाती रही कि वह क्या चाहती है और वह काफी अधीर थी।

It was Saturday afternoon. I left for my village. The same bus was there, inspiring in me the old familiar feeling. I rushed to occupy the seat just behind the driver, my favourite seat. In my hurry, I bruised my knee against the door. It hurt me. The brief-case fell off and the little packet containing the prasad of Lord Lingraj’, meant for my dear mother, was scattered over the ground. I felt as if the entire bus was screeching aloud the question: “After how many years? You have not bothered in the least to retain that tender love you had in your heart for your home! Instead you have sold it to the butcher to help yourself become a city Baboo!! Curses be on you!”

(इट वॉज सैटर्डे आफ्टरनून आई लेफ्ट फॉर माई विलेज द सेम बस वॉज देयर, इन्स्पायरिंग इन मी द ओल्ड फैमिलीयर फीलिंग, आई रण्ड टू ऑक्यूपाई द सीट जस्ट विहाइण्ड द ड्राईवर, माई फेवरिट सीट इन माई हरी, आई ब्रूज्ड माई नी अगेस्ट द डोर इट हर्ट मी द ब्रीफकेस फेल ऑफ एण्ड द लिटल पैकेट कन्टेनिंग द प्रसाद ऑफ लॉर्ड लिंगराज’, मैण्ट फॉर माई डीयर मदर, वॉज स्कैटर्ड ओवर द ग्राउण्ड आई फेल्ट ऐज़ इफ द एन्टायर बस वॉज स्क्रीचिंग अलाउड द क्वेश्चन “आफ्टर हाउ मैनी यीअर्स? यू हैव नॉट बॉदर्ड इन द लीस्ट टू रिटेन देट टेण्डर लव यू हैड इन यॉर हार्ट फॉर यॉर होम! इन्स्टेड यू हैव सोल्ड इट टू द बुचर टू हेल्प यॉरसेल्फ बिकम अ सिटी बाबू!! कर्स बी ऑन यू!”

अनुवाद :
शनिवार को दोपहर थी। मैं अपने गाँव के लिए निकला। वही पुरानी बस थी। उसने मेरे अन्दर वही पुरानी सुपरिचित भावनाओं को जगा दिया। मैं जल्दी से ड्राईवर के ठीक पीछे वाली सीट पर बैठने के लिए बढ़ा, मेरी संबसे पसन्दीदा सीट। जल्दबाजी में मेरा घुटना दरवाजे से टकराकर छिल गया। उसमें दर्द हो रहा था। मेरी अटैची गिर पड़ी और छोटी सी थैली में रखा भगवान लिंगराज का प्रसाद जो मेरी प्यारी माँ के लिए था सब तरफ फैल गया। मुझे ऐसा महसूस हुआ मानो पूरी बस जोर-जोर से चीखकर पूछ रही हो। “कितने वर्ष बाद? तुमने अपने घर के लिए जो तुम्हारे हृदय में कोमल प्रेम था उसे कायम रखने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की। उसके बजाए तुमने उस प्रेम को कसाई को बेच दिया। स्वयं को शहरी बाबू बनाने की खातिर!! धिक्कार है तुम पर!”

I boarded the bus, collecting the brief case and the content of the soiled packet, wearing a shameless smile for the cleaner and the conductor of the bus.

It was five in the evening when I got down; I had written beforehand. My elder brother was there to meet me at the bus stop. He appeared a little tired and worn out. “Give that brief case to me. That must be heavy.” He almost snatched it away from me. I forgot even to touch his feet. This had never happened earlier. He was walking in front of me.

We were walking on the village road, dusty and ever the same. I remembered my childhood days.

(आई बोर्डिड द बस, कलैक्टिंग द ब्रीफकेस ऐण्ड द कन्टेन्ट ऑफ द सॉइल्ड पैक्ट, वीयरिंग अ शेमलैस स्माइल फॉर द क्लीनर ऐण्ड द कण्डक्टर ऑफ द बस – इट वॉज़ फाइव इन द ईवनिंग व्हेन आई गॉट डाउन; आई हैड रिटन बिफोरहैण्ड माई एल्डर ब्रदर वॉज़ देयर टू मीट.मी ऐट द बस स्टॉप ही अपीअर्ड अ लिटल टायर्ड ऐण्ड वर्न आउट। “गिव दैट ब्रीफकेस टू मी दैट मस्ट बी हैवी.” ही ऑल्मोस्ट स्नैच्ड इट अवे फ्रॉम मी आई फॉरगॉट ईवन टू टच हिज फीट दिस हैड नेवर हैपन्ड अर्लियर ही वॉज़ वॉकिंग इन फ्रण्ट ऑफ मी

वी वर वॉकिंग ऑन द विलेज रोड, डस्टी ऐण्ड एवर द सेम आई रिमेम्बर्ड माई चाइल्डहुड डेज़.)

अनुवाद :
मैं बस से उतर गया, अपनी अटैची और थैली के बचे-खुचे प्रसाद को लेकर चालक और परिचालक की तरफ बेशर्मी से मुस्कराकर देखता हुआ।

शाम के पाँच बज रहे थे कि जब मैं उतरा। मैंने अपने आने की सूचना पत्र द्वारा दे दी थी। मेरे बड़े भाई मुझे बस अड्डे पर लेने आए थे। वह थोड़े थके हुए और क्लान्त दिख रहे थे। “यह अटैची मुझे दे दो। यह भारी होगी।” उन्होंने मुझसे अटैची लगभग छीन ली। मैं उनके पैर तक छूना भूल गया। ऐसा इससे = पहले कभी नहीं हुआ था। वह मेरे आगे चल रहे थे। हम लोग गाँव की सड़क पर चल रहे थे, धूल भरी हमेशा एक जैसी। मुझे अपने बचपन के दिन याद आ गए।

I was usually crossing the street alone to go to a teacher in the evening for tuition. It was generally late and dark when I returned from my studies. Unfailingly my elder brother would be there to escort me back home lest I should be frightened. He would carry the lantern, my bag of books and notes. I had to follow him to do so. If I lagged behind, he would ask, “Why! you are perhaps tired. Come, hold my hand and walk with me.” He sometimes used to carry me – on his shoulders while going to the fields for a stroll.

(आई वॉज़ यूज़्यूअली क्रॉसिंग द स्ट्रीट अलोन टू गो टू अ टीचर इन द ईवनिंग फॉर ट्यूशन इट वॉज जनरली लेट ऐण्ड डार्क व्हेन आई रिटर्ड फ्रॉम माई स्टडीज़ अनफेलिंली माई एल्डर ब्रदर वुड बी देयर टू एस्कॉर्ट मी बैक होम लेस्ट आई शुड बी फ्राईटेन्ड. ही वुड कैरी द लैण्टर्न, माई बैग ऑफ बुक्स ऐण्ड नोट्स आई हैड टू फॉलो हिम टू डू सो इफ आई लैग्ड विहाईन्ड, ही वुड आस्क, “व्हाई! यू आर परहैप्स टायर्ड कम, होल्ड माई हैण्ड ऐण्ड वॉक विद मी।” ही समटाईम्स यूज्ड टू कैरी मी ऑन हिज़ शोल्डर्स व्हाईल गोईंग टू द फील्ड्स फॉर अ स्ट्रॉल.)

अनुवाद-मैं आम तौर पर शाम को अकेले ही सड़क पार करता था अध्यापक महोदय के यहाँ पढ़ने जाने के लिए। प्रायः लौटते समय अन्धेरा हो जाता था। बिना किसी नागा के मेरे बड़े भाई मुझे लेने के लिए आते थे कि कहीं मुझे डर न लगे। वे मेरी पुस्तकें और लालटेन लेकर चलते थे। मुझे उनके पीछे चलना पड़ता था। यदि मैं ज्यादा पीछे रह जाता था तो वे पूछते, “क्यों क्या हुआ। शायद तुम थके हुए हो। आओ, मेरा हाथ पकड़ो और मेरे साथ चलो।” वह कभी-कभी मुझको अपने कंधे पर बिठाकर खेतों में घूमने जाया करते थे।

MP Board Class 10th English Solutions

The Spring Blossom Textbook General English Class 10th Solutions

Children Question Answer Class 10 English The Spring Blossom Chapter 4 MP Board

Class 10 English The Spring Blossom Chapter 4 Children Questions and Answers

In this article, we will share MP Board Class 10th English Solutions Chapter 4 Children Pdf, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

Children Class 10th Question Answer

Word Power

A. Match the words with their meanings.
(सुमेलित कीजिए।)

MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 4 Children 1
Answer:
1. → (c)
2. → (d)
3. → (a)
4. → (e)
5. → (b)

B. Complete the following lines of the poem.
(निम्न पंक्तियों को पूरा कीजिए।)
Answer:
Come to me, o ye children!
And whisper in my ear
What the birds and the winds are singing
In your sunny atmosphere.

C. Use the following words in your sentences.
(निम्न शब्दों के वाक्य बनाइए।)
Answer:
1. vanish – All difficulties vanish in front of strong determination.
2. eastern – Rahim entered the building through the eastern gate.
3. sunshine – I love to walk in the early morning sunshine.
4. gladness – In the state of gladness my mother embraced me.
5. autumn – I haven’t heard from him since last autumn.

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How Much Have I Understood?

A. Answer the following questions. (One or two sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
What happens when the poet looks at the children playing?
(व्हॉट हैपन्स व्हेन द पोऍट लुक्स एट द चिल्ड्रन प्लेइंग?) कवि जब खेलते हुए बच्चों को देखता है तो क्या होता है?
Answer:
When the poet looks at the children playing all the questions that made him anxious and confused disappear.
(व्हेन द पोऍट लुक्स एट द चिल्ड्रन प्लेइंग, ऑल द क्वैश्चन्स दैट मेड हिम एंक्शियस एण्ड कन्फ्यूज्ड डिसअपीयर।)
जब कवि बच्चों को खेलते हुए देखता है तब वो सारे प्रश्न जो उसे चिन्तित व असमंजस में डालते थे, गायब हो जाते हैं।

Question 2.
Where do the windows open?
(व्हेअर डू द विन्डोज ओपन?)
खिड़कियाँ कहाँ खुलती हैं?
Answer:
Windows open towards east where the sun rises.
(विन्डोज ओपन टुवर्ड्स ईस्ट व्हेयर द सन राइज़ेज़।)
खिड़कियाँ पूर्व की ओर खुलती हैं जहाँ से सूर्योदय होता है।

Question 3.
What lies in the hearts of the children?
(व्हॉट लाइज़ इन द हार्ट्स ऑफ द चिल्ड्रन?)
बच्चों के दिल में क्या है?
Answer:
In the hearts of children there are birds and sunshine.
(इन द हार्ट्स ऑफ चिल्ड्रन देयर आर बर्ड्स एण्ड सनशाइन।)
बच्चों के दिल में चिड़ियाँ व सूर्य की रोशनी है।

Question 4.
What does the poet compare with the caresses of the children and their look?
(व्हॉट डज़ द पोऍट कम्पेयर विद द करेसेस ऑफ द चिल्ड्रन एण्ड देयर लुक्स?)
कवि बच्चों के दुलार व सूरत की किससे तुलना करता है?
Answer:
The poet compares the caresses of the children with the clever plans of contrivings of adults and their looks with the wisdom of books.
(द पोऍट कम्पेअर्स द करेसेस ऑफ द चिल्ड्रन विद द क्लेवर प्लैन्स ऑफ कन्ट्राइविंग्स ऑफ एडल्ट्स एण्ड देअर लुक्स विद द विजडम ऑफ बुक्स।)
कवि बच्चों के दुलार की बड़ों की चतुर योजना व उनके चेहरे की अपनी किताबों के विवेक से तुलना करता है।

Question 5.
Which lines of the poem do you like most and why?
(व्हिच लाइन्स ऑफ द पोऍम डू यू लाइक मोस्ट एण्ड व्हाय?)
कविता की कौन-सी पंक्तियाँ तुम्हें सबसे ज्यादा पसन्द हैं व क्यों?
Answer:
The lines of the poem that I like the most are, “ye are better than all the ballads……….And all the rest are dead.” I liked these lines because it is a truth that the ballads and songs are lifeless but children are living poems and have life.
(द लाइन्स ऑफ द पोऍम दैट आइ लाइक द मोस्ट आर, “ये आर बैटर दैन द बैलड्स……….एण्ड ऑल द रेस्ट आर डेड।” आइ लाइक्ड दीज़ लाइन्स बिकॉज़ इट इज अ ट्रथ दैट द बैलड्स एण्ड साँग्स आर लाइफलेस बट चिल्ड्रन आर लिविंग पोऍम्स एण्ड हैव लाइफ।)
कविता की ये पंक्तियाँ मुझे पसन्द आईं क्योंकि यह सत्य है कि गाने निर्जीव होते हैं मगर बच्चे जीती-जागती कविताओं के समान होते हैं व उनमें जान होती है।

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B. Answer the following questions. (Three or four sentences).
(निम्न प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
When do the problems of the poet end and why?
(व्हेन डू द प्रॉब्लम्स ऑफ द पोऍट ऍन्ड एण्ड व्हाय?)
कवि की परेशानियाँ कब खत्म होती हैं व क्यों?
Answer:
The problems of the poet end when he hears the children playing. This is because children spread joy and he gets relief from all the problems of life.
(द प्रॉब्लम्स ऑफ द पोऍट ऍण्ड व्हेन ही हियर्स द चिल्ड्रन प्लेइंग। दिस इज़ बिकॉज़ चिल्ड्रन स्प्रेड जॉय एण्ड ही गेट्स रिलीफ फ्रॉम ऑल द प्रॉब्लम्स ऑफ लाइफ।)
कवि जब बच्चों को खेलते हुए सुनता है तो उसकी सारी परेशानियाँ खत्म हो जाती हैं। यह इसीलिए क्योंकि बच्चे खुशी बिखेरते हैं और उसे अपनी परेशानियों से निजात मिल जाती है।

Question 2.
How does the poet compare his heart with that of children?
(हाउ डज़ द पोऍट कम्पे हिज़ हार्ट विद दैट ऑफ चिल्ड्रन?)
कवि अपने हृदय की बच्चों से किस प्रकार तुलना करता
Answer:
The poet says that in the heart of children there are birds and the sunshine while in his heart is the wind of autumn. It means children’s heart is full of joy while his is full of tensions.
(द पोऍट सेज दैट इन द हार्ट ऑफ चिल्ड्रन देयर आर बर्ड्स एण्ड द सनशाइन व्हाइल इन हिज़ हार्ट इज़ द विण्ड ऑफ ऑटम इट मीन्स चिल्ड्रन्स हार्ट इज फुल ऑफ जॉय व्हाइल हिज़ इज़ फुल ऑफ टेन्शन्स।)
कवि कहता है कि बच्चों के हृदय में चिड़ियाँ व सूर्य की रोशनी है जबकि उसके हृदय में पतझड़ की आँधियाँ। इसका तात्पर्य है कि बच्चों के हृदय खुशी से परिपूर्ण हैं व उसके हृदय में परेशानियाँ व चिन्ताएँ।

Question 3.
What has the gladness of the children been compared to? Do you agree with the comparison?
(व्हॉट हैज़ द ग्लैडनेस ऑफ द चिल्ड्रन बीन कम्पेयर्ड ट्र? डू यू एग्री विद द कम्पैरिज़न?)
बच्चों की खुशी की तुलना किससे की गई है? क्या तुम इस तुलना से सहमत हो?
Answer:
The gladness of the children has been compared to the wisdom of books. Yes, I agree with the comparsion as happiness is more valuable than wisdom.
(द ग्लैडनैस ऑफ द चिल्ड्रन हैज़ बीन कम्पेयर्ड टू द विज़डम ऑफ बुक्स। यस, आइ एग्री विद द कम्पैरिज़न एज़ हैप्पिनेस इज़ मोर वैलुएब्ल् देन विज़डम।)
बच्चों की खुशी की तुलना पुस्तकों द्वारा प्राप्त विवेक से की गई है। हाँ, मैं इससे सहमत हूँ क्योंकि खुशी विवेक से ज्यादा कीमती है।

Question 4.
Why does the poet say that the children are better than all the ballads?
(व्हाय डज़ द पोएट से दैट द चिल्ड्रन आर बैटर दैन ऑल द बैलड्स?)
कवि यह क्यों कहता है कि बच्चे सभी गीतों से ज़्यादा बेहतर हैं?
Answer:
The poet says that the children are better than all the ballads because ballads are lifeless while children are living poems.
(द पोऍट सेज़ दैट द चिल्ड्रन आर बैटर दैन ऑल द बैलड्स बिकॉज़ बैलड्स आर लाइफलेस व्हाइल चिल्ड्रन आर लिविंग पोऍम्स।)
कवि कहता है कि बच्चे सभी गीतों से बेहतर हैं क्योंकि गीत तो निर्जीव हैं जबकि बच्चे जीती-जागती कविताएँ हैं।

Listening Time

The teacher will read out the following words and the students will repeat them.
(निम्न शब्दों को दोहराओ।)
Answer:
MP Board Class 10th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 4 Children 2

Speaking Time

Read out the lines that have rhyming words.
(तुकान्त शब्दों वाली पंक्तियाँ पढ़ो।)
Answer:
Students should do themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

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Writing Time

Answer the following questions

Question 1.
Have you ever been to a hill station?
Answer:
Yes, I visited Nainital in these summer vacations.

Question 2.
How did you prepare for your journey?
Answer:
Since it is a cool place I took some warm clothes, a pair of boots along with other things.

Question 3.
What was the route and mode of transport to reach the place you visited?
Answer:
From Gwalior I reached Delhi by train and then I reached Kathgodam from Delhi. There was also bus service from Delhi to Kathgodam but since train was more comfortable so I went by train. From Kathgodam to Nainital the mode of transport was either Govt. bus or private taxi. I hired private taxi and reached the place.

Question 4.
How was your journey? Describe it.
Answer:
The journey was quite comfortable since I had already reserved my berth in the train. The roads were also smooth from Kathgodam to Nainital and mode of transport was easily available. People on the way were also very co-operative since it was a new place for me and I visited there for the first time.

Question 5.
Mention some specific spots you visited and describe them.
Answer:
Some spots that I visited there were Mall road. Naini lake, snow view, cave park, dolphin peak and Raj Bhawan. In the Naini lake the water was pure and we did boating there, on Mall road there was a market and shops of different things, from snow view Himalaya range could be seen, in cave park there were caves of different kinds and from dolphin peak whole Nainital could be seen.

Question 6.
Where did you halt?
Answer:
We halted in a hotel on Mall road from where we could get the view of Naini lake.

Question 7.
What did you like most?
Answer:
I liked Naini lake the most because I could do boating in it.

Question 8.
How long did you stay there? What were your feelings at departure?
Answer:
I stayed there for a week. I enjoyed there too much and did not want to come back home but since I had already reserved my berth in the train I had to come back.

Question 9.
Do you think the visit was useful? Why?
Answer:
Yes, it was as I could see so many new spots and observe natural beauty so closely.

Question 10.
Can you suggest some more places you want to visit?
Answer:
Yes, I want to visit Shimla, Manali, Dehradun and Mussoorie.

Now, develop your answers into an essay.
Students can develop an essay on the basis of the above answers themselves.

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Things to do

If you happen to go to, and watch, the river near your village or town, make a list of pollutants. Give some ideas to keep the river free from pollution.
Answer:
Pollutants in the river were industrial effluents, garbage from the city, human excreta, polythene bags, wastage obtained by religious ceremonies, bathing, washing clothes, dead bodies etc. Humans should check the disposal of above mentioned pollutants in the river to keep it free from pollution.

Children Central Idea of the Poem

Children spread joy and relieve us from the tensions of life. Their hearts are free of clever plans and tensions like those of adults. Their careless happy looks are more valuable than the wisdom of books. They are sweetest songs and living poems while everything else is lifeless.

Difficult Word Meanings Children

Perplex (पर्पलेक्स)-to feel confused and anxious because you do not understand something (चकित, भ्रमित); Vanish (वैनिश) – to disappear suddenly (अचानक गायब होना); Swallow (स्वॉलो)-a small song bird (एक छोटी गाने वाली चिड़िया); Brook (ब्रुक)-a small river (एक छोटी नदी); Autumn (ऑटम)-the season of the year between summer and winter (ग्रीष्म व शरद ऋतु के बीच का मौसम); Whisper (feat)- to speak very quietly to somebody so that other people cannot hear what you are saying (बुदबुदाना); Contrivings (कण्ट्राइविंग्स)-clever plans (चतुर योजना); Caress (करेस)-agentle touch or kiss to show you love somebody (प्रमपूर्ण स्पर्श); Ballad (बैलड)-a song or poem that tells a story (गाना या कविता); Ye (ये)-old use, a word meaning ‘you’ (“यू” शब्द का पुराना उपयोग)

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Children Summary, Pronunciation & Translation

Come to me, Oye children!
For I hear you at your play,
And the questions that perplexed me
Have vanished quite away.

(कम टु मी, ओ ये चिल्ड्रन!
फॉर आई हीयर यू ऐट यॉर प्ले,
ऐण्ड द क्वेश्चन्स दैट परप्लेक्स्ड मी
हैव वेनिश्ड क्वाइट अवे.)

अनुवाद :
मेरे पास आओ तुम ओ बच्चो!
मैं तुम्हें खेलते हुए सुन रहा हूँ,
और जो सवाल मुझे हैरान किए हुए थे
सब कहीं गायब हो गए हैं।

Ye open the eastern windows,
That took towards the sun,
Where thoughts are singing swallows,
And the brooks of morning run.

(ये ओपन द ईस्टर्न विन्डोज,
दैट लुक टुवर्ड्स द सन,
व्हेयर थॉट्स आर सिंगिंग स्वैलोज,
ऐण्ड द ब्रुक्स ऑफ मॉर्निंग रन.)

अनुवाद :
तुम पूर्व दिशा की खिड़कियाँ खोलते हो.
जो सूर्य की ओर देखती हैं,
जहाँ विचार गाती अबाबीलें हैं,
और सुबह के सोते दौड़ते हैं।

In your hearts the birds and the sunshine,
In your thoughts the brooklet’s flow,
But in mine is the wind of Autumn
And the first fall of the snow.

(इन यॉर हार्ट्स द ब ऐण्ड द सनशाईन,
इन यॉर थॉट्स द ब्रक्लेट्स फ्लो,
बट इन माईन इज द विन्ड ऑफ ऑटम
ऐण्ड द फर्स्ट फॉल ऑफ स्नो.)

अनुवाद :
तुम्हारे हृदयों में हैं पक्षी और सूर्य का प्रकाशं.
तुम्हारे विचारों में स्रोतों का बहाव,
परन्तु मेरे मन है पतझड़ की हवा
और मौसम की पहली बर्फबारी।

Come to me, Oye children!
And whisper in my ear
What the birds and the winds are singing
In your sunny atmosphere.

(कम टू मी, ओ ये चिल्ड्रन!
ऐण्ड व्हिस्पर इन माई ईअर
वॉट द बर्ड्स ऐण्ड द विण्ड्स आर सिंगिंग
इन यॉर सनी ऐटमॉस्फेयर.)

अनुवाद :
मेरे पास आओ तुम ओ बच्चो!
और मेरे कान में फुसफुसाके बताओ
पक्षी और हवा क्या गा रही हैं
तुम्हारे उजले परिवेश में।

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For what are all our contrivings,
And the wisdom of our books,
When Compared with your caresses,
And the glandness of your looks?

(फॉर वॉट आर ऑल आवर कण्ट्राइविंग्स,
ऐण्ड द विस्डम ऑफ आवर बुक्स,
व्हेन कम्पेअर्ड विद यॉर केअरेसिस,
ऐण्ड द ग्लैडनेस ऑफ यॉर लुक्स?)

अनुवाद :
क्या महत्व है हमारी सारी युक्तियों का,
और हमारी पुस्तकों के ज्ञान का,
तुम्हारे प्यार भरे दुलार,
और तुम्हारी आह्लादित दृष्टि के आगे?

Ye are better than all the ballads
That ever were sung or said,
For ye are living poems,
And all the rest are dead.

(ये आर बेटर दैन ऑल द बैलेड्स
दैट एवर वर संग ऑर सेड,
फॉर ये आर लिविंग पोयम्स,
ऐण्ड ऑल द रेस्ट आर डेड.)

अनुवाद :
तुम सभी प्रेम-गीतों से अच्छे हो
जो कभी गाए या कहे गए,
क्योंकि तुम साक्षात जीवित कविता हो
और बाकी सब मृत।

The Spring Blossom Textbook General English Class 10th Solutions

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 13 Sound

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 13 Sound

MP Board Class 8th Science Sound NCERT Textbook Exercises

Question 1.
Choose the correct answer Sound can travel through:
(a) Gases only
(b) Solids only
(c) Liquids only
(d) Solids, liquids and gases.
Answer:
(d) Solids, liquids and gases.

Question 2.
Voice which of the following is likely to have minimum frequency?
(a) Baby girl
(b) Baby boy
(c) A man
(d) A woman.
Answer:
(a) Baby girl

Question 3.
In the following statements, tick T’ against those which are true, and ‘F against those which are false:

  1. Sound cannot travel in vacuum.
  2. The number of oscillations per second of a vibrating object is called its time period.
  3. If the amplitude of vibration is large, sound is feeble.
  4. For human ears, the audible range is 20 Hz to 20,000 Hz.
  5. The lower the frequency of vibration, the higher is the pitch.
  6. Unwanted or unpleasant sound is termed as music.
  7. Noise pollution may cause partial hearing impairment.

Answer:

  1. True
  2. False
  3. False
  4. True
  5. False
  6. False
  7. True

Question 4.
Fill in the blanks with suitable words.
(a) Time taken by an object to complete one oscillation is called ………. .
(b) Loudness is determined by the ……… of vibration.
(c) The unit of frequency is ………….. .
(d) Unwanted sound is called ………….. .
(e) Shrillness of a sound is determined by the …………….. of vibration.
Answer:
(a) time period
(b) amplitude
(c) Hertz (Hz)
(d) noise
(e) frequency

Question 5.
A pendulum oscillates 40 times in 4 seconds. Find its time period and frequency.
Answer:
Time taken by pendulum to complete 40 oscillations = 4 seconds
Time taken by pendulum to complete 1 oscillation
= \(\frac{4}{40}\)
= \(\frac{1}{\mathrm{1} 0} = 0.1 \mathrm{sec}\)
Time period of pendulum = 0.1 sec
∴ Frequency of pendulum
\(\frac{\text { Oscillation }}{\text { Time }}\) \(\frac{40}{4}\)
= 10 Hz.

MP Board Solutions

Question 6.
The sound from a mosquito is produced when it vibrates its wings at an average rate of 500 vibrations per second. What is the time period of the vibration?
Answer:
Time period is the time taken to complete one oscillation.

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 13 Sound 1

Question 7.
Identify the part which vibrates to produce sound in the following
instruments:
(i) Dholak (ii) Sitar (iii) Flute.
Answer:
(i) Stretched membrane vibrates to produce sound in dholak.
(ii) Stretched string vibrates to produce sound in sitar.
(iii) Air-column vibrates to produce sound in flute.

Question 8.
What is the difference between noise and music? Can music become noise sometimes?
Answer:
Regular vibrations of sound produce music. Music has pleasant sound. Irregular vibrations of sound produce noise.. Noise has unpleasant sound. Sometimes music can become noise. Loud music would become noise. Music at high volume causes noise pollution. It increases nervous tension. It can lead to high blood pressure and heart problems.

Question 9.
List sources of noise pollution in your surroundings.
Answer:
Sources of noise pollution in our surroundings are:

  • Barking dogs.
  • Car horns.
  • Loud music of transistor, T.Vs. and loudspeakers.
  • Household noise and kitchen appliances.
  • Desert coolers and air conditioners.
  • Construction of buildings.
  • Sound of machines if some industry is located near the residential area.

MP Board Solutions

Question 10.
Explain in what way noise pollution is harmful to humans?
Answer:
Noise pollution may cause many health related problems. For example:

  1. Lack of sleep.
  2. Hypertension (high blood pressure)
  3. Temporary or even permanent deafness if a person is exposed to a loud sound of more than 70 decibles continuously.

Question 11.
Your parents are going to buy a house. They have been offered one on the roadside and another three lanes away from the roadside. Which house would you suggest your parents should buy? Explain your answer.
Answer:
I would suggest my parents to buy a house which is three lanes away from the roadside because it will involve less pollution of air and noise. A house near roadside will have more pollution due to vehicles. Road traffic noise is harmful for health of the people living in that area.

Question 12.
Sketch larynx and explain its function in your own words.
Answer:
Larynx is also called the voice box. As the name suggests, it causes (sound) voice in humans It has vocal cords, which have air column vibrating in them, which causes sound in humans.

Question 13.
Lightning and thunder take place in the sky at the same time and at the same distance from us. Lightning is seen earlier and thunder is heard later. Can you explain why?
Answer:
The light travels at the speed of 3 x 108 ms-1, which is very large in comparison to the speed of sound which travels at the rate of 330 ms’1 in the air. That is why lightning is seen earlier and thunder is heard later.

MP Board Class 8th Science Sound NCERT Extended Learning – Activities

Question 1.
Visit the music room of your school. You may also visit musicians in your locality. Make a list of musical instruments. Note down the parts of these instruments that vibrate to produce sound.
Answer:
Some musical instruments are: tabla, guitar, harmonium, piano, banjo, mridangum, drum, manjira, sitar, etc.

Question 2.
If you play a musical instrument, bring it to the class and demonstrate how you play it.
Answer:
Do yourself.

Question 3.
Prepare a list of famous Indian musicians and the instruments they play.
Answer:
Do yourself.

MP Board Solutions

Question 4.
Take a long thread. Place your hands over your ears and get someone to place this thread round your head and hands. Ask her to make the thread taut and hold its ends in one hand. Now ask her to draw her finger and thumb tightly along the thread (Fig. 13.1). Can you hear a rolling sound like that of a thunder? Now repeat the activity while another friend stands near both of you. Can he hear any sound?
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 13 Sound 2
Answer:
Do yourself.

Question 5.
Make two toy telephones. Use them as shown in Fig. 13.2. Make sure that the two strings are taut and touch each other. Let one of you speak. Can the remaining three persons hear? See how many more friends you can engage in this way. Explain your observations.
Answer:
Do yourself.

Question 6.
Identify the sources of noise pollution in your locality. Discuss with your parents, friends and neighbors. Suggest how to control noise pollution. Prepare a brief report and present it in the class.
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 13 Sound 3
Answer:
Vehicles, barking dogs, high volume television, etc. Noise pollution can be minimized by using silencing devices in transport vehicles, industrial machines and home appiliances.

MP Board Class 8th Science Sound NCERT Additional Important Questions

A. Short Answer Type Questions

Question l.
Define amplitude.
Answer:
It is the maximum displacement of a vibrating body on one side.

Question 2.
Define frequency.
Answer:
It is the number of vibrations produced by a vibrating body in one second.

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Question 3.
What are ultrasonic waves?
Answer:
It is the sound of frequencies more than 20000 hertz. We cannot hear such sounds.

B. Long Short Answer Type Questions

Question 4.
Define Hertz.
Answer:
Frequency of a vibration or oscillation is measured in hertz. It is the unit of frequency.

Question 5.
Which nerve sends the signal to the brain?
Answer:
The auditory nerve sends the signal to the brain.

Question 6.
What is reflection of sound?
Answer:
When the sound waves strike against solid surface, they change its direction, this is called reflection of sound. in air (332 m/sec). Thus, the sound reaches through the iron rail earlier than through air. So, to hear a train approaching from far away people put their ears to the track.

Question 7.
What are the musical instruments?
Answer:
Musical instruments are the devices which produce various sounds which are pleasant for our ears and produce soothing effects. The sound produced by these instruments is called music.

Question 8.
What distinguishes the sounds produced by different human beings from each other?
Answer:
Vocal cords in humans are the sound producing parts. When they are vibrated they produce sound. They are held by the muscles and the tightness with which they are held determines the quality of sound. The length of the vocal cords also determines the quality of voice.

Question 9.
If you want to hear a train approaching when it is still far away why is it more successful if you pull ears close to the railway track?
Answer:
As we know that the velocity of sound in iron is more (5100 m/sec) than in air (332 m/sec). Thus, the sound reaches through the iron rail earlier than through air. So, to hear a train approaching from far away people put their ears to the track.

Question 10.
What is an echo? What are conditions necessary for echo formation?
Answer:
An echo is a reflected sound. The human ear can hear two sounds separately and distinctly only if there is an interval of 1/15 of a second between two. Since the speed of the sound in air is about 330 m / s, the distance traveled by sound in l/15th of a second is,
Distance = speed × time
= 330 m/s × 1/15 s
= 22 meter or m.
Therefore, the distance between the sources of a sound and the reflecting surface should be 22/2 = 11 meters.

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 18 माँ

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 18 माँ (कविता, बालकवि बैरागी’ एवं संकलित)

माँ पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

माँ लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विश्व की शुभकामना किसे कहा गया है? (M.P. 2010)
उत्तर:
माँ के वात्सल्य भाव को ही विश्व की शुभकामना कहा गया है।

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प्रश्न 2.
माँ किस राग के गीत गाने का निर्देश देती है?
उत्तर:
माँ भैरवी राग के गीत गाने का निर्देश देती है।

प्रश्न 3.
मुसीबत में किसका नाम लेना चाहिए? और क्यों?
उत्तर:
मुसीबत में माँ का नाम लेना चाहिए।

प्रश्न 4.
पथ पर चलने के लिए प्रतिफल कैसा कदम चाहिए?
उत्तर:
पथ पर चलने के लिए गतिशील कदम चाहिए।

प्रश्न 5.
गुरुता का ज्ञान क्यों अपेक्षित है?
उत्तर:
गुरुता का ज्ञान जीवन में प्रेरणा के लिए अपेक्षित है।

माँ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पंचतत्त्वों के किन गुणों को माँ धारण किए हुए है? (M.P. 2010)
उत्तर:
पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल और वायु पाँच तत्त्व होते हैं। माँ इन सभी गुणों को धारण किए हुए हैं। माँ पृथ्वी का गुण धैर्य, आकाश के गुण चैतन्य अथवा प्रकाश को, अग्नि के गुण तीव्रता, पवन की गतिमयी व्यापकता तथा जल के गुण गंभीरता को धारण किए हुए है।

प्रश्न 2.
माँ किस प्रकार शिक्षा देती है?
उत्तर:
माँ अपनी संतान को जागृत होने की शिक्षा देती है। वह जगाकर संघर्ष का मार्ग दिखताती और जीवन में संघर्ष करने के लिए प्रेरित करती है। इतना ही नहीं वह कर्तव्य निभाने की भी शिक्षा देती है। वह जीवन में होश के साथ कार्य करने की भी शिक्षा देती है।

प्रश्न 3.
कवि माँ से क्या कामना करता है? (M.P.2011)
उत्तर:
कवि माँ से कामना करता है कि वह वरदान स्वरूप ऐसी शक्ति प्रदान करें कि उसके आधार पर जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर सके। वह हार-जीत को समान भाव से ग्रहण कर सके। यही नहीं वह देश की उन्नति-प्रगति के लिए अपने स्वार्थों को त्यागकर समर्पित हो सके।

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प्रश्न 4.
देश की जय के लिए कवि किस भाव का आकांक्षी है?
उत्तर:
देश की जय के लिए कवि अपनी हार, स्वार्थ, त्याग और बलिदान के भाव का आकांक्षी है।

प्रश्न 5.
कवि किस उद्देश्य के लिए जीवन देना चाहता है?
उत्तर:
कवि संसार को खुशहाल जीवन देने के लिए उद्देश्य से अपना जीवन देना चाहता है।

माँ भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
‘मेरी हार देश की जय हो’ का भाव-विस्तार कीजिए।
उत्तर:
कवि चाहता है कि जीवन संघर्ष में बेशक उसकी हार हो जाए, वह जीवन में प्रगति और उन्नति बेशक न कर पाए, किंतु देश सदैव विजयी हो, उसकी संघर्षों में सदैव विजय हो। मेरी व्यक्तिगत समस्याएँ हल हों या न हौं, लेकिन देश अपनी समस्त समस्याओं पर विजय प्राप्त कर, निरंतर उन्नति-प्रगति करता रहे। देश की विजय में ही उसकी स्वतंत्रता, अखंडता और एकता निहित होती है। उसकी विजय से जनता में खुशहाली, सुख और शांति आती है इसलिए व्यक्ति की बेशक हार हो जाए, लेकिन देश की हार नहीं होनी चाहिए।

माँ भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित समोच्चित शब्दों का वाक्य बनाकर अर्थ स्पष्ट कीजिएअनिल-अनल, फाँस-पाश, ह्रास-हास, नीर-नीड़, पवन-पावन।
उत्तर:

  • अनिल – शीतल अनिल शरीर की थकान हर लेता है।
  • अनल – यह तुम्हारी स्वार्थ की अनल तुम्हें जलाकर राख कर देगी।
  • फाँस – मित्र के असत्य वचन मेरे लिए फाँस बन गए हैं।
  • पाश-मोह – माया के पाश में बँधे हो और मुक्ति चाहते हो, कैसे संभव है।
  • हास – जीवन में हास और त्रास मिलते रहते हैं।
  • हास – जीवन में हास (हास्य) को महत्त्व दिया जाना चाहिए।
  • नीर – महादेवी वर्मा ने कहा है, मैं नीर भरी दुख की बदली हूँ।
  • नीड़ – इस वृक्ष पर पक्षी नीड़ों में बैठे विश्राम कर रहे हैं।
  • पवन – प्रातःकाल का शीतल, मंद और सुगंधित पवन स्वान्मावर्धक होता है।
  • पावन – गंगा पावन नदी है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित सामासिक शब्दों का विग्रह सहित नाम लिखिए –
कंटक पथ, दावानल, टालो-संभालो, गिरें-उठे।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 18 माँ img-1

प्रश्न 3.
दिए गए मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
तिल-तिल कर जलना, गिर-गिर कर उठना, कंटक पथ पर चलना, लोरियाँ गाकर सुनाना, भैरवी गीत गाना।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 18 माँ img-2

माँ योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
माँ की आराधना विषयक अन्य गीतों को याद कर कक्षा में सुनाइए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
‘देश की जय’ के लिए अपने प्राणों की बलि चढ़ाने वाले अमर शहीदों की जानकारी संगृहीत कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 3.
‘माँ’ विषय पर अपने विचार लिखिए तथा उसे कथा में सुनाइए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

माँ परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न 1.
‘माँ’ कविता के कवि हैं –
(क) मनमोहन मदारिया
(ख) बालकवि वैरागी
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) कवि सुदर्शन
उत्तर:
(ख) बालकवि वैरागी।

प्रश्न 2.
कवि किससे वरदान माँग रहा है –
(क) ईश्वर से
(ख) दुर्गा देवी से
(ग) माँ से
(घ) भगवान शिव से
उत्तर:
(ग) माँ से।

प्रश्न 3.
संसार को सुखद और सरल बनाने वाला भाव है –
(क) वात्सल्य भाव
(ख) भक्तिभाव
(ग) स्वार्थ भाव
(घ) अहिंसा भाव
उत्तर:
(क) वात्सल्य भाव।

प्रश्न 4.
माँ से व्यक्तित्व में पवन से…… का गुण निहित है –
(क) गंभीरता
(ख) व्यापकता
(ग) धैर्य
(घ) तीव्रता
उत्तर:
(ख) व्यापकता।

प्रश्न 5.
कवि को जीवन का अभिमान चाहिए ताकि वह –
(क) जीवन-मार्ग पर बढ़ता रहे
(ख) वह निराश न हो
(ग) जीवन-संघर्षों से घबराए
(घ) वह जीवन के संघर्षों पर विजय प्राप्त करे
उत्तर:
(घ) वह जीवन-संघर्षों में विजय प्राप्त करे।

प्रश्न 6.
मुसीबत के समय किसे याद करना चाहिए –
(क) ईश्वर को
(ख) माँ को
(ग) मित्र को
(घ) पिता को
उत्तर:
(ख) माँ को।

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प्रश्न 7.
कवि को गुरुता का ज्ञान चाहिए; क्योंकि –
(क) वह जीवन की प्रेरणा बने
(ख) वह जीवन की आशा बने
(ग) वह जीवन का त्याग बने
(घ) वह जीवन की कठिनाई बने
उत्तर:
(क) वह जीवन की प्रेरणा बने।

प्रश्न 8.
जीवन के समस्त स्वार्थ त्यागकर…………के लिए समर्पित होना ही हमारा लक्ष्य है।
(क) मातृ-सेवा
(ख) राष्ट्र-सेवा
(ग) समाज-सेवा
(घ) प्रभु-सेवा
उत्तर:
(ख) राष्ट्र-सेवा।

प्रश्न 9.
कवि किससे वरदान की अपेक्षा करता है? (M.P. 2012)
(क) माँ से
(ख) गुरु से
(ग) प्रभु से
(घ) भाई से
उत्तर:
(क) माँ से।

प्रश्न 10.
‘माँ की भावनाओं में है –
(क) पहाड़ जैसी ऊँचाई
(ख) समुद्र जैसी चौड़ाई
(ग) धरती जैसा विस्तार
(घ) धरती जैसा धैर्य
उत्तर:
(घ) धरती जैसा धैर्य।

II. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर कीजिए –

  1. तिल-तिलकर ………. जले। (मन/तन)
  2. माँ ………. की रचना है। (मैथिलीशरण गुप्त/वालकवि ‘वैरागी’)
  3. बालकवि ‘वैरागी’ ………. हैं। (आलोचक/कवि)
  4. बाल कवि ‘वैरागी’ का जन्म ………. को हुआ था। (1931/1941)
  5. कवि माँ से ………. की अपेक्षा करता है। (वरदान प्यार)

उत्तर:

  1. तन
  2. बालकवि ‘वैरागी’
  3. कवि
  4. 1931
  5. वरदान।

III. निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए –

  1. ‘माँ’ एक निबन्ध है।
  2. ‘माँ’ संघर्ष का मार्ग दिखाती है।
  3. ‘जल-जलकर जीवन’ में अनुप्रास अलंकार है।
  4. बालकवि वैरागी का वास्तविक नाम नन्दरामदास वैरागी है।
  5. मुसीबत में बस माँ का नाम लेना चाहिए।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. सत्य।

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IV. निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए –

प्रश्न 1.
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 18 माँ img-3
उत्तर:

(i) (ङ)
(ii) (घ)
(iii) (ख)
(iv) (क)
(v) (ग)।

V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

प्रश्न 1.
माँ से कवि क्या चाहता है?
उत्तर:
वरदान।

प्रश्न 2.
माँ क्या गाकर सुलाती है?
उत्तर:
लोरियाँ।

प्रश्न 3
मुसीबत आने पर क्या करना चाहिए?
उत्तर:
माँ का नाम लेना चाहिए।

प्रश्न 4.
जीवन के संघर्षों में क्या होना चाहिए?
उत्तर:
होठों पर मुस्कान होनी चाहिए।

प्रश्न 5.
जीवन में क्या स्वाभाविक है?
उत्तर:
काँटों के रास्ते पर गिरना-बढ़ना और हार-जीत।

माँ लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘माँ’ कविता में किसके व्यक्तित्व को अभिव्यक्ति दी है?
उत्तर:
‘माँ’ कविता में माँ के विराट व्यक्तित्व को अभिव्यक्ति दी है।

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प्रश्न 2.
‘माँ’ में पृथ्वी तत्त्व का कौन-सा गुण निहित है? (M.P. 2012)
उत्तर:
‘माँ’ में पृथ्वी तत्त्व का धैर्य गुण निहित है।

प्रश्न 3.
माँ का कौन-सा भाव संसार को सुखद और सरल बनाता है?
उत्तर:
माँ का वात्सल्य-भाव ही संसार को सुखद और सरल बनाता है।

प्रश्न 4.
जीवन-पथ कंटकमय होने पर भी कवि किसकी कामना करता है?
उत्तर:
जीवन-पथ कंटकमय होने पर भी कवि जीवन-मार्ग पर निरंतर गतिशील रहने की कामना करता है।

प्रश्न 5.
कवि किस पर विजय प्राप्त करना चाहता है?
उत्तर:
कवि जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करना चाहता है।

प्रश्न 6.
‘माँ’ संसार की क्या है?
उत्तर:
माँ संसार की शुभकामना है।

प्रश्न 7.
कवि की माँ से एक कामना क्या है?
उत्तर:
कवि की माँ से एक कामना यह है कि उसके पैर हर क्षण गतिमान होने चाहिए।

प्रश्न 8.
उठ-उठकर गिरने और फिर उठने पर कवि को माँ से क्या चाहिए?
उत्तर:
उठ-उठकर गिरने और फिर उठने पर कवि को माँ से गुरुता का ज्ञान होने का वरदान चहिए।

माँ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
माँ के व्यक्तित्व की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
माँ का व्यक्तित्व विराट है। उसके व्यक्तित्व में धैर्य, तीव्रता, व्यापकता और गंभीरता के साथ-साथ ममता, वात्सल्य आदि गुण निहित हैं। उसका व्यक्तित्व केवल स्नेहमयी है, अपितु वह अपनी संतान को जगाती है। संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। वह कर्तव्य मार्ग पर चलने के प्रेरित करने वाली शक्ति है।

प्रश्न 2.
कवि कैसी माँ को अपनी स्मृतियों में बसाने की प्रेरणा देता है? (M.P. 2012)
उत्तर:
कवि धैर्यशाली, तीव्र प्रकाशयुक्त, गतिमयी व्यापकता और गंभीरता से युक्त स्नेहमयी, वात्सल्यमयी, संघर्ष का मार्ग दिखाने वाली तथा कर्तव्य के लिए प्रेरित करने वाली माँ को सदैव अपनी स्मृतियों में बसाने की प्रेरणा देता है।

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प्रश्न 3.
कवि देश और जगत् के लिए क्या-क्या करने के लिए तैयार है?
उत्तर:
कवि देश के लिए अपनी हार स्वीकार करने के लिए तैयार है। वह अपने स्वार्थों को देश-सेवा के लिए त्यागने को तैयार है। जगत् के लिए वह अपना जीवन भी देने के लिए तैयार है।

प्रश्न 4.
कवि को कौन-सा सम्मान चाहिए?
उत्तर:
कवि को अपना स्वार्थ त्यागकर राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित होने का ही सम्मान चाहिए। इस सम्मान के अतिरिक्त उसे कोई अन्य सम्मान नहीं चाहिए। यही सम्मान प्राप्त करना, उसके जीवन का लक्ष्य है। इसी लेंए वह कहता है-‘बस इतना सम्मान चाहिए।’

प्रश्न 5.
माँ का स्वरूप क्या है?
उत्तर:
माँ धरा का धैर्य है। वह आसमान की ज्योति है। वह आग की लपट है। वह हवा तीव्र गति है। वह पानी का गंभीर स्वर है। यही नहीं वह वत्सला है। वह वंदना है, वह जननी है और जन्मदात्री भी है।

प्रश्न 6.
कवि माँ से कब-कब वरदान चास’ है?
उत्तर:
कवि माँ से तब-तब वरदान चाह जब उसका जीवन काँटों से भर जाए, विपदाओं से घिर जाए, उसे हास मिले ना त्रास मिले, विश्वास मिले या फाँस मिले, उसके सामने काल ही आकर क्यों न गरजे, इस प्रकार के संकटमय और दुखमय जीवन में कवि माँ से वरदान चाहता है।

माँ कवि-परिचय

प्रश्न 1.
बालकवि वैरागी का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
श्रीबालकवि वैरागी युगचेतना को ओजस्वी स्वर देने वाले आधुनिक युग के कवियों में सुप्रसिद्ध हैं।
जीवन-परिचय:
बालकवि वैरागी का जन्म मध्य प्रदेश के जिला मंदसोर के नीमच नामक स्थान में 10 फरवरी, सन् 1931 ई० को हुआ था। आपकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालयों में हुई। इसके उपरान्त आपने विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से एम.ए. हिंदी की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इस प्रकार आपने एक मेधावी छात्र होने का परिचय दिया। आपने शिक्षा-समाप्ति के उपरांत साहित्य और राजनीति दोनों में ही दखल देना शुरू कर दिया। आप मध्य प्रदेश के एक सम्मानित विधायक और सांसद होने के साथ साथ आप मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं किंतु आपने साहित्य-सृजन को नहीं छोड़ा। आपकी कविताएँ राजनीतिक क्षितिज से उठकर जन-सामान्य के दुख-दर्द और आशा-आकांक्षाओं से जड़ी रही हैं।

रचनाएँ:
बालकवि वैरागी की रचनाएँ मुख्य रूप से काव्य ही हैं। अब तक आपके कई काव्य-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। आपके निम्नलिखित काव्य-संग्रह हैं –

‘दरद दीवानी’, ‘जूझ रहा है हिन्दुस्तान’, ‘गौरव-गीत’, ‘भावी रक्षक देश के’, ‘दो टूक’, ‘दादी का कर्ज’, ‘रेत के रिश्ते’, ‘कोई तो समझें’, ‘शीलवती आग’, ‘गाओ बच्चों’, ‘पुलिवर’ (पद्यानुवाद), ‘वंशज का वक्तव्य’, ‘ओ अमलतास’ आदि। . इनके अतिरिक्त ‘चटक म्हारा चम्पा’ मालवीय काव्य-संग्रह भी बालकवि ‘वैरागी’ का एक जीवंत और सशक्त प्रकाशित काव्य-संग्रह हैं।

बालकवि वैरागी की कार्यशैली ‘गद्य’ विधा में भी है। कुछ प्रकाशित गद्य रचनाओं के उल्लेख इस प्रकार किए जा सकते हैं-गद्य सरपंच (सहयोगी उपन्यास), ‘कच्छ का पदयात्री’ (यात्रा-संस्मरण), ‘बर्लिन से बच्चू को’ (विदेशी यात्रा के पत्र) आदि।’

भाषा-शैली:
बालकवि वैरागी की भाषा-शैली में एकरूपता है। दूसरे शब्दों में, हम यह कह सकते हैं कि कविवर बालकवि की भाषा और शैली में काव्यात्मकता है। दूसरे शब्दों में, बालकवि वैरागी जी मूलतः कवि हैं, अतएव उनकी भाषा-शैली का काव्यमयी होना स्वाभाविक है। आपकी भाषा-शैली संबंधित निम्नलिखित विशेषताएँ हैं –

1. भाषा:
बालकवि वैरागी की भाषा मध्यस्तरीय काव्यमयी भाषा है। उसमें मुहावरों, कहावतों के प्रयोग आवश्यकतानुसार हुए हैं। इस प्रकार की भाषा में आए शब्द प्रायः तद्भव श्रेणी के हैं। इस प्रकार से यह कहा जा सकता है कि तत्सम शब्द और विदेशी शब्दों की तुलना में प्रयुक्त देशज शब्द बहुत अधिक हैं। इनके बाद ही उर्दू के प्रचलित शब्द प्रयुक्त हुए। इस प्रकार से बने हुए शब्दों से वाच्यार्थ और विषय के प्रतिपादन बहुत अच्छी तरह से हुए हैं।

2. शैली:
बालकवि वैरागी की शैली मुख्य रूप से काव्यमयी है। अतः उसमें अलंकारिता, चमत्कारिता और रसात्मकता जैसे स्वाभाविक और आवश्यक गुण सर्वत्र दिखाई देते हैं। इस प्रकार की शैली में प्रयुक्त हुए अलंकारों में मुख्य रूप से अनुप्रास, रूपक, स्वभावोक्ति और दृष्टांत अलंकार हैं। आपकी रचनाधारा को प्रवाहित करने वाले रस मुख्य रूप से वीररस, करुणरत, रौद्ररस आदि हैं। आपकी कविताओं में संगीतात्मकता और लयात्मकता ये दोनों ही गुण सर्वत्र दिखाई देते हैं।

महत्त्व:
बालकवि वैरागी का आधुनिक हिंदी कविता धारा का राष्ट्रीय तरंगित भावोत्थान में एक विशिष्ट और सुपरिचित स्थान है। राष्ट्र-प्रेम के भावों से भीग-भीगकर राष्ट्र के प्रति अपार प्रेम दिखलाने वाले आप बहुत ऊँचे कवि हैं। कविताओं के अतिरिक्त गद्य-रचना के क्षेत्र में भी आपकी बड़ी शान और मान है। इस प्रकार बालकवि वैरागी आधुनिक हिंदी काव्य-जगत के एक उज्ज्वल और प्रकाशवान रचनाकार हैं। आपका साहित्यिक महत्त्वांकन करके ही आपको राजसभा के मनोनीत सदस्य के रूप में चुना गया। अभी आपसे अनेक साहित्यिक उपलब्धियों की अपेक्षाएँ हैं।

‘माँ’ पाठ का सारांश

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प्रश्न 1.
‘माँ’ कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
‘माँ’ कविता बालकवि वैरागी द्वारा रचित है। इस कविता में कवि ने माँ के विराट व्यक्तित्व को अनुभूति के स्तर पर अभिव्यक्ति दी है। माँ में धरती के जैसा धैर्य, उसमें आकाश ज्योति की तीव्रता है, पवन की गतिमयी व्यापकता है और जल जैसी गंभीरता है। वह वात्सल्य भाव से भरी हुई पूजनीय है। माँ जन्म देने वाली है और वह संसार को सुखद और सरल बनाने वाली है।

कवि कहता है कि माँ का व्यक्तित्व केवल स्नेह का पर्याय नहीं है। वह लोरियाँ गाकर सुलाती है तो वह जगाती भी है और संघर्ष का मार्ग भी दिखलाती है। माँ पालन-पोषण करने वाली शक्ति भी है तो वह कर्तव्य के लिए प्रेरित करने वाली शक्ति भी है। माँ कहती है कि मुझे बहाने बनाकर टालने का प्रयास मत करो, होश से काम लो और जब कभी मुसीबत आए तो तुम केवल माँ को याद करो। तुम ऐसी माँ को सदैव स्मृतियों में बसाकर रखो।

दूसरी कविता ‘माँ बस यह वरदान चाहिए’ है। इस कविता में कवि माँ से वरदान स्वरूप वह शक्ति माँगता है, जिसके आधार पर जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर विजय प्राप्त की जा सके। कवि चाहता है कि उसकी यही इच्छा है कि उसका प्रत्येक पग गतिशील रहे। उसे जीवन में हास मिले या त्रास मिले, विश्वास प्राप्त हो या विश्वासघात प्राप्त हो और चाहे उसके सामने मृत्यु ही क्यों न आ जाए, लेकिन जीवन के इन विरोधों के बीच भी स्वाभिमान जागृत रहे।

कष्टों में भी जीवन की प्रसन्नता बनी रहे। काँटोंभरे रास्तों पर गिरना, चढ़ना और हार-जीत स्वाभाविक हैं, किंतु फिर भी जीवन में बड़प्पन, गंभीरता का भाव बना रहे। हार-जीत को समान भाव से ग्रहण करने का ज्ञान हमारे जीवन की प्रेरणा बने। हम सदा देश की उन्नति के लिए क्रियाशील रहें। इस हेतु जीवन से समस्त स्वार्थ त्यागकर राष्ट्र-सेवा के लिए. समर्पित होना ही हमारा लक्ष्य रहे। यही जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। कवि माँ से ऐसे ही वरदान की अपेक्षा करता है।

माँ संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1.
मैं धरा का धैर्य हूँ
ज्योति हूँ मैं ही गगन की
अग्नि की मैं ही लपट हूँ
तीव्र गति हूँ मैं पवन की
नीर का गंभीर स्वर हूँ,
वत्सला हूँ-वंदना हूँ ,
मैं जननि हूँ-जन्मदात्री
विश्व की शुभकामना हूँ। (Page 86) (M.P. 2011)

शब्दार्थ:

  • धरा – पृथ्वी, जमीन, धरती।
  • ज्योति – प्रकाश।
  • गगन – आकाश।
  • अग्नि – आग।
  • तीव्र – तेज।
  • गति – चाल।
  • पवन – वायु।
  • नीर – पानी, जल।
  • वत्सला – ममतामयी, स्नेहमयी।
  • वंदना – प्रार्थना, पूजन।
  • जननि – जन्म देने वाली।
  • विश्व – संसार।
  • शुभकामना – अच्छी इच्छा।

प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश बालकवि वैरागी द्वारा रचित कविता ‘माँ’ से उद्धृत है। कवि माँ के विराट व्यक्तित्व को अनुभूति के स्तर पर अभिव्यक्त करते हुए कहता है कि-माँ की भावनाओं में धैर्य, तीव्र गति और गंभीरता है। इन्हीं भावों को इस काव्यांश में व्यक्त किया गया है।

व्याख्या:
कवि कहता है कि माँ के लिए विराट व्यक्तित्व में अनेक भावनाएँ निहित हैं। माँ कहती है कि मेरी भावनाओं में धरती के जैसा धैर्य है; अर्थात् मेरे व्यक्तित्व पृथ्वी के समान धैर्य हैं। मैं अत्यंत धैर्यवान हूँ। मैं ही आकाश की ज्योति हूँ। मैं ही आग की लपट हूँ और मुझ में ही वायु की गति व्यापक है। मुझ में ही जल की गंभीरता है। मैं ममतामयी, स्नेहमयी और पूजनीय हूँ। मैं जन्म देने वाली माता हूँ। मेरा वात्सल्य भाव से ही संसार को सुखद और सरल बनाने वाली हूँ। कहने का भाव यह है कि माँ का व्यक्तित्व विराट है। उसके व्यक्तित्व में धरती के समान धैर्य, तीव्रता, पवन की गतिमयी व्यापकता और गंभीरता है। वह स्नेहमयी, पूजनीय और जन्म देने वाली माँ हैं। वह पूजनीय है। उसमें विश्व का कल्याण को चाहने की कामना है।

विशेष:

  1. माँ के विराट व्यक्तित्व का चित्रण किया गया है।
  2. माँ के व्यक्तित्व में अनेक गुणों का समावेश है।
  3. तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है।
  4. तुकांतात्मकता और लयात्मकता है।
  5. ‘मैं धरा का धैर्य हूँ’ में उदाहरण अलंकार है।
  6. ‘वत्सला हूँ-वंदना हूँ’ में अनुप्रास अलंकार है।
  7. रूपक अलंकार है।
  8. विशेषणों का सार्थक प्रयोग किया गया है।

पद्य पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि और कविता का नाम लिखिए।
उत्तर:
कवि-बालकवि वैरागी, कविता-‘माँ’।

प्रश्न (ii)
कविता में किसके व्यक्तित्व का अभिव्यक्ति हुई है?
उत्तर:
कविता में माँ के विराट व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति हुई है।

प्रश्न (iii)
माँ के व्यक्तित्व में क्या निहित है?
उत्तर:
माँ के व्यक्तित्व में पृथ्वी जैसा धैर्य, आकाश की तीव्रता, पवन की गतिमयी व्यापकता और जल जैसी गंभीरता और वात्सल्य भाव निहित हैं।

पद्य पर आधारित सौंदर्य संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत पद्य के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
कवि ने इस पद्य में माँ के विराट व्यक्तित्व को अनुभूति के स्तर पर अभिव्यक्ति दी है। उसके व्यक्तित्व में धैर्य, तेजी, व्यापकता, गंभीरता और वात्सल्य भावना निहित है। वह पूजनीय है।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत पद्य के काव्य-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
काव्य-सौंदर्य:
पद्य की भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है। ‘धरा का धैर्य हूँ’ में उदाहरण अलंकार है। ‘वत्सला हूँ-वंदना हूँ’ में अनुप्रास अलंकार है। छंदबद्ध रचना में तुकांतात्मकता और लयात्मकता है। शांतरस है। पद्य में माँ का विराट रूप साकार हो उठा है। शब्द चयन सटीक और भावानुकूल है। विशेषणों का सार्थक प्रयोग हुआ है।

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प्रश्न 2.
लोरियाँ गाकर सुलाया
अब जगाती हूँ तुम्हें,
भैरवी गाओ-उठो!
रस्ता दिखाती हूँ तुम्हें
मत मुझे टालो-सम्हालो,
होश से कुछ काम लो,
जब कभी आए मुसीबत
सिर्फ माँ का नाम लो। (Page 86)

शब्दार्थ:

  • लोरियाँ – बच्चों को सुलाने के समय गाया जाने वाला गीत।
  • भैरवी – एक राग।

प्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश बालकवि ‘वैरागी’ द्वारा रचित कविता ‘माँ’ से उद्धृत है। कवि माँ के विराट स्वरूप को व्यक्त करते हुए कहता है।

व्याख्या:
कवि कहता है कि माँ का व्यक्तित्व केवल स्नेहमयी, ममतामयी ही नहीं है अपितु माँ अपने बच्चों को गीत गाकर सुलाती है, तो वह जगाती भी है। वह भैरवी राग गाकर, दुर्गा की भाँति उठाती भी है और जीवन में संघर्ष का मार्ग भी दिखाती है। वह कहती है कि तुम मुझे विभिन्न प्रकार बहाने करके टालने का प्रयास मत करो। उठो, और संघर्ष करो। कुछ होश से कार्य करो अर्थात् माँ पालित-पोषित करने वाली ममता है, तो वह कर्तव्य के लिए प्रेरित करने वाली शक्ति भी है। कवि कहता है कि जब भी तुम पर कोई मुसीबत आए, तो तुम केवल माँ को याद करो। उसका नाम लो, तुम्हें संकट से छुटकारा मिलेगा। ऐसी माँ को सदा अपनी स्मृतियों में बसाए रखो।

विशेष:

  1. कवि ने माँ व्यक्तित्व की विशेषताओं का वर्णन किया है।
  2. तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है।
  3. तुकांतात्मकता और लयात्मकता है।
  4. ‘कुछ काम’ में अनुप्रास अलंकार है।
  5. ‘टालो-सम्हालो’ में पद-मैत्री है।
  6. माँ को शक्ति के रूप में चित्रण किया गया है।

पद्य पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि और कविता का नाम लिखिए।
उत्तर:
कवि-बालकवि ‘वैरागी’। कविता-‘माँ’

प्रश्न (ii)
‘माँ’ को किस रूप में चित्रित किया गया है?
उत्तर:
माँ को अपनी संतान का पालन-पोषण करने वाली ममतामयी माता के रूप में तथा कर्तव्य के लिए प्रेरित करने वाली शक्ति के रूप में चित्रित किया है।

प्रश्न (iii)
इस पद्य में कवि ने क्या प्रेरणा दी है?
उत्तर:
इस पद्य में कवि ने माँ को सदा अपनी स्मृतियों में वसाने की प्रेरणा दी है।

पद्यांश पर आधारित काव्य-सौंदर्य संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत काव्यांश का भाव-सौंदर्य लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने माँ के विराट व्यक्तित्व को अभिव्यक्ति दी है। माँ एक ओर अपनी संतान का स्नेहपूर्वक पालन-पोषण करती है। अपनी संतान को लोरी गाकर सुलाती है, तो दूसरी ओर वह उसे जगाती है और संघर्ष का मार्ग भी दिखलाती है। वह ममतामयी भी है तो कर्तव्य के लिए प्रेरित करने वाली शक्ति भी है। हमें ऐसी माँ को सदैव स्मृतियों में बसाए रखना चाहिए।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस पद्यांश की भाषा तत्सम शब्दावलीयुक्त खड़ी बोली हैं। छंदबद्ध रचना है। तुकांतात्मकता और लयात्मकता है। ‘मत मुझे’ ‘कुछ काम’ में अनुप्रास अलंकार है। शब्द-चयन में मितव्ययता और सटीकता है। ‘टालो-सम्हालो’ में पद-मैत्री है।

प्रश्न 3.
माँ बस यह वरदान चाहिए!
जीवन-पथ जो कंटकमय हो,
विपदाओं का घोर वलय हो,
किंतु कामना एक यही बस,
प्रतिपल पग गतिमान चाहिए। (M.P. 2010)

ह्रास मिले या त्रास मिले,
विश्वास मिले या फाँस मिले,
गरजे क्यों न काल ही सम्मुख
जीवन का अभिमान चाहिए। (Page 86)

शब्दार्थ:

  • वरदान – किसी को इष्ट वस्तु देना।
  • जीवन-पथ – जीवन रूपी रास्ता।
  • कंटकमय – काँटों से भरा।
  • विपदाओं – संकटों।
  • वलय – घेरा।
  • कामना – इच्छा, अभिलाषा।
  • हास – हानि।
  • त्रास – कष्ट।
  • विपत्ति – फाँस।
  • काल – मृत्यु।

प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश बालकवि वैरागी द्वारा रचित ‘संकलित’ कविता से उद्धृत है। इस कविता में कवि द्वारा माँ से वरदानस्वरूप वह शक्ति माँगी गई है, जिसके आधार पर जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर विजय प्राप्त की जा सके।

व्याख्या:
कवि माँ से कहता है कि हे माँ! मुझे केवल आपसे यही वरदान चाहिए कि चाहे जीवन रूपी मार्ग काँटों से भरा हो और मेरा जीवन विभिन्न प्रकार के कष्टों और संकटों में क्यों न घिरा हो, फिर भी मेरी यही अभिलाषा है कि मैं समस्त, दुखों, कष्टों और संकटों से संघर्ष करता हुआ हर क्षण नितर आगे बढ़ता रहूँ।

मुझे जीवन रूप मार्ग आगे बढ़ते हुए चाहे हानि प्राप्त हो अथवा कष्टों विपत्तियों का सामना करना पड़े, जीवन में विश्वास प्राप्त हो अथवा मेरी अपघात (विश्वासघात) हो, चाहे मेरे सामने साक्षात् मृत्यु ही क्यों न आ जाए, किंतु ‘सी स्थिति में भी मेरा स्वाभिामान बना रहना चाहिए। कहने का भाव यह कि कवि माँ से ऐसा वरदान चाहता है कि जीवन-मार्ग में आगे बढ़ते हुए आने वाली कठिनाइयों ५ विजय प्राप्त कर ..सके। जीवन के समस्त विरोधों के बावजूद स्वाभिमान जागृत र।

विशेष:

  1. कवि ने माँ से ऐसा वरदान देने की कामना की है जिससे जीवन के कष्टों के बीच भी उसका स्वाभिमान बना रहे।
  2. ‘जीवन-पथ’ में रूपक अलंकार है।
  3. ‘किंतु कामना और प्रतिफल पग’ में अनुप्रास अलंकार है।
  4. ह्रास मिले…या फाँस मिले, में संदेह अलंकार है।
  5. ह्रास और त्रास क्रमशः हानि और कष्ट के प्रतीक हैं।
  6. भाषा तत्सम शब्दावलीयुक्त परिमार्जित खड़ी बोली है।
  7. तुकांतात्मकता और लयात्मकता है।
  8. विशेषणों का सार्थक प्रयोग किया गया है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कविता का नाम लिखिए।
उत्तर:
कविता-‘माँ बस यह वरदान चाहिए’।

प्रश्न (ii)
कवि माँ से क्या चाहता है और क्यों?
उत्तर:
कवि माँ से ऐसा वरदान चाहता है, जिसके द्वारा जीवन में आने वाली समस्त कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर सके।

प्रश्न (iii)
कवि ने माँ से क्या वरदान देने की कामना की है?
उत्तर:
कवि ने माँ से बस ऐसा वरदान देने की कामना की है कि उसे जीवन में चाहे हानि प्राप्त हो या कष्ट, विपत्ति मिले, या फिर विश्वास प्राप्त हो या विश्वासघात प्राप्त हो किंतु जीवन के इन कष्टों के मध्य भी जीवन में स्वाभिमान सदा बना रहे।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
भाव-सौंदर्य-इस कविता में कवि माँ से वरदान प्राप्त करना चाहता है कि जिसके द्वारा वह जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करने में सफल हो। वह यह भी चाहता है कि उसे जीवन के सभी लाभ-हानि, विश्वासघातों, कष्टों, विपत्तियों और विरोधों के बीच स्वाभिमान बना रहे।

प्रश्न (ii)
काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
काव्य-सौंदर्य:
‘जीवन-पथ’ में रूपक अलंकार है। किंतु कामना, प्रतिपल पग में अनुप्रास अलंकार है। ह्रास मिले…फाँस मिले में संदेह अलंकार है। ह्रास और त्रास क्रमशः हानि और कष्ट के प्रतीक हैं। तुकांतात्मकता और लयात्मकता है। विशेषणों का सार्थक प्रयोग है। भाषा तत्सम शब्दावली युक्त परिमार्जित खड़ी बोली है।

प्रश्न (iii)
कवि किससे और क्या माँग रहा है?
उत्तर:
कवि माँ से वरदान स्वरूप ऐसी शक्ति माँग रहा है जिसके बल पर वह जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर सके।

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प्रश्न 4.
जीवन के इन संघर्षों में
दुःख कष्ट के दावानल में
तिल तिलकर तन जले न क्यों पर,
होठों पर मुस्कान चाहिए।

कंटक पथ पर गिरना, चढ़ना,
स्वाभाविक है हार जीतना,
उठ-उठ कर हम गिरें, उठे फिर
पर गुरुता का ज्ञान चाहिए। (Page 87)

शब्दार्थ:

  • दावानल – जंगल की आग।
  • तन – शरीर।
  • मुस्कान – हँसी, प्रसन्नता।
  • गुरुता – बड़प्पन, गंभीरता।

प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश बालकवि वैरागी द्वारा रचित ‘संकलित कविता’ से उद्धृत है। इस काव्यांश में कवि माँ से वरदान स्वरूप ऐसी शक्ति की कामना करता है कि कष्टों में भी जीवन का प्रसन्नता बनी रहे, यह स्पष्ट किया है।

व्याख्या:
कवि माँ से कामना करता है कि वरदान स्वरूप ऐसी शक्ति प्रदान करे कि जीवन मार्ग पर बढ़ते हुए जीवन के संघर्षों में दुख और कष्टों की जंगल की आग में यह शरीर थोड़ा-थोड़ा जलकर क्यों न जले किंतु इन समस्त कष्टों-दुखों में भी जीवन की प्रसन्नता समाप्त न हो। अर्थात् कवि चाहता है कि जीवन में कष्टों और दुखों के कारण यह शरीर धीरे-धीरे नष्ट क्यों न हो जाए किंतु होंठों पर सदा मुस्कान बनी रहनी चाहिए।

मुख पर निराशा या पीड़ा के भाव नहीं आने चाहिए। काँटों और दुखों, विपत्तियों से भरे जीवन मार्ग पर बढ़ते हुए अवनति की ओर जाना और फिर उठकर चढ़ना तथा जीवन में हार-जीत आना तो स्वाभाविक प्रक्रिया है। जीवन-मार्ग पर चलते हुए हम गिरें, उठें और फिर उठें और गिरें। ऐसी स्थिति में भी मन में सदैव गंभीरता बनी रहे। जीवन में हार-जीत तो होती रहती है। किंतु हमें हार-जीत को समान भाव से ग्रहण करने की शक्ति प्रदान करें। हार-जीत को समान भाव से ग्रहण करने का ज्ञान हमारे जीवन की प्रेरणा बने।

विशेष:

  1. कवि चाहता है कि माँ वरदान स्वरूप ऐसी शक्ति प्रदान करें कि कष्टमय जीवन व्यतीत करते हुए भी प्रसन्नता का भाव बना रहे।
  2. कवि हार-जीत को समान भाव से ग्रहण करने की क्षमता चाहता है।
  3. तिल-तिलकर तन में अनुप्रास अलंकार है।
  4. ‘तिल-तिलकर जलना’ मुहावरे का सटीक प्रयोग किया है।
  5. ‘दुख कष्ट के साथ दावानल’ में रूपक अलंकार है।
  6. ‘गिरना’ अवनति का और ‘चढ़ना’ प्रगति, उन्नति का प्रतीक है।
  7. ‘उठ-उठ’ में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।
  8. भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कविता का नाम लिखिए।
उत्तर:
संकलित कविता।

प्रश्न (ii)
कंटक पथ पर गिरना, चढ़ना का प्रतिकार्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘कंटक पथ’ दुखों और कष्टों से भरे जीवन पथ का प्रतीक है, तो ‘गिरना’.. अवनति का और ‘चढ़ना’ उन्नति प्रगति का प्रतीक। कवि कहना चाहता है कि हम दुखों और कष्टों से भरे जीवन मार्ग पर बढ़ते हुए संघर्ष द्वारा जीवन में उन्नति-प्रगति करें, किंतु हम इन्हें समान भाव से ग्रहण करें और हमारे मुख पर कभी निराशा का भाव न आने पाए।

प्रश्न (iii)
कवि को गुरुता का ज्ञान क्यों चाहिए?
उत्तर:
कवि को गुरुता का ज्ञान इसलिए चाहिए, ताकि वह हार-जीत को समान भाव से ग्रहण कर सके और उसमें जीवन की प्रेरणा बनी रहे।

काव्यांश पर आधारित काव्य-सौंदर्य से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
इस काव्यांश में कवि ने जीवन कष्टों में भी प्रसन्नता बनी रहने की कामना व्यक्त की है। इसके साथ ही जीवन में हार-जीत को समान भाव से ग्रहण करने का वरदान माँ से प्राप्त करना चाहता है। उसकी इच्छा है कि उसमें जीवन की प्रेरणा सदैव बनी रहे।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
‘तिल-तिलकर तन’ में अनुप्रास अलंकार है। ‘तिल-तिलकर जलना’ मुहावरे का सटीक प्रयोग किया गया है। ‘दुख-कष्ट के दावानल’ में रूपक अलंकार है। गिरना और चढ़ना क्रमश जीवन में अवनति का और उन्नति प्रगति का प्रतीक है। ‘उठ-उठ’ में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है। भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है।

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प्रश्न 5.
मेरी हार देश की जय हो,
स्वार्थ-भाव का क्षण-क्षण क्षय हो,
जल-जल कर जीवन दूं जग को,
बस इतना सम्मान चाहिए।
माँ बस यह वरदान चाहिए
माँ बस यह वरदान चाहिए! (Page 87)

शब्दार्थ:

  • हार – पराजय।
  • जय – विजय।
  • क्षय – कम होना, नष्ट होना।
  • जग – संसार।

प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश बालकवि वैरागी द्वारा रचित ‘संकलित कविता’ से उद्धृत है। कवि इस काव्यांश में माँ से वरदानस्वरूप ऐसी शक्ति की कामना करता है जिसके द्वारा वह अपने समस्त स्वार्थ त्याग कर राष्ट्र-सेवा के लिए समर्पित हो सके।

व्याख्या:
कवि कहता है कि हे माँ! तुम हमें वरदानस्वरूप वह शक्ति प्रदान करो, जिससे हम सदैव देश की उन्नति और प्रगति के लिए क्रियाशील रहें। इसमें हमारी बेशक पराजय हो लेकिन देश की विजय हो। अर्थात् हम अपने जीवन में उन्नति और प्रगति करें या न करें लेकिन देश की उन्नति और प्रगति हो। हमारे स्वार्थ मानों का हर क्षण क्षय हो भाव यह कि हम अपने समस्त स्वार्थ त्यागकर राष्ट्र सेवा में लगे रहें। हम जल-जल कर जीवन को जग के लिए समर्पित कर दें। हमारा लक्ष्य यही रहे, यही जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। माँ, हमें वरदान स्वरूप यही शक्ति प्रदान करो। इसके अतिरिक्त हमें और कुछ नहीं चाहिए।

विशेष:

  1. देश-सेवा के लिए समर्पित होने का वरदान कवि माँ से चाहता है।
  2. कवि अपनी हार में देश की विजय चाहता है।
  3. ‘स्वार्थ-भाव’ में रूपक अलंकार है।
  4. क्षण-क्षण क्षय, जल-जल में अनुप्रास अलंकार है।
  5. क्षण-क्षण, जल-जल में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।
  6. भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
इस काव्यांश में कवि माँ से क्या वरदान चाहता है?
उत्तर:
इस काव्यांश में कवि सदैव देश की उन्नति और विकास के लिए क्रियाशील रहने का वरदान चाहता है।

प्रश्न (ii)
कवि ने अपना जीवन-लक्ष्य क्या बताया है?
उत्तर:
कवि ने देश की उन्नति और प्रगति हेतु जीवन के समस्त स्वार्थ त्यागकर राष्ट्र-सेवा के लिए समर्पित होना ही अपने जीवन का लक्ष्य बताया है।

प्रश्न (iii)
जीवन का सबसे बड़ा सम्मान क्या है?
उत्तर:
अपने जीवन से समस्त स्वार्थ त्यागकर देश की उन्नति-प्रगति के समर्पित हो जाना ही जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है।

काव्यांश पर आधारित काव्य-सौंदर्य से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस काव्यांश में कवि अपनी जीत की अपेक्षा देश की जीत चाहता है। वह चाहता है कि उसका देश उन्नति और प्रगति करे। इसके लिए वह अपने स्वार्थ त्याग कर राष्ट्र सेवा में जुट जाने का भाव व्यक्त कर रहा है। राष्ट्र सेवा में समर्पित होना ही उसके जीवन का लक्ष्य और सबसे बड़ा सम्मान है। कवि माँ से ऐसे ही वरदान की अपेक्षा करता है।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कवि की राष्ट्र-सेवा की भावना को अभिव्यक्ति मिली है। ‘स्वार्थ-भाव’ में रूपक अलंकार है। ‘क्षण-क्षण-क्षय’, ‘जल-जल’ में अनुप्रास अलंकार है। ‘क्षण-क्षण, जल-जल’ में पुनरुक्तिप्रकाश है। ‘माँ बस यह वरदान’ पंक्ति की पुनरावृत्ति है। काव्यांश की भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है।

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 16 दक्षिण भारत की एक झलक

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 16 दक्षिण भारत की एक झलक (निबन्ध, आचार्य विनय मोहन शर्मा)

दक्षिण भारत की एक झलक पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

दक्षिण भारत की एक झलक लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तमिलनाडु के निवासियों की दृष्टि में सर्वोपरि क्या है?
उत्तर:
तमिलनाडु के निवासियों की दृष्टि में अपनी भाषा और संस्कृति सर्वोपरि है।

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प्रश्न 2.
‘महाश्वेता’ की छवि कौन धारण करता है? यहाँ महाश्वेता का क्या अर्थ है?
उत्तर:
महाश्वेता की छवि केरल की स्त्रियाँ धारण करती हैं। यहाँ महाश्वेता का अर्थ है-सरस्वती देवी।

प्रश्न 3.
कन्याकुमारी में कौन-कौन से समुद्रों का मिलन होता है? (M.P. 2011)
उत्तर:
कन्याकुमारी में हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी समुद्रों का मिलन होता है।

प्रश्न 4.
तमिल कवि की तुलना तुलसी काव्य से क्यों की जाती है?
उत्तर:
तमिल कवि ‘कम्बन’ ने भी तुलसी के समान ही ‘कम्बन रामायण’ की रचना की है।

प्रश्न 5.
पार्वती जी का नाम कन्याकुमारी क्यों पड़ा? (M.P. 2010)
उत्तर:
शिव-पार्वती का विवाह होने वाला था। विवाह का मूहूर्त रात में था। पार्वती उनकी खोज में चली गईं। बारात न पहुँचने के कारण वे उदास होकर अपने निवास में लौट आयीं और तभी से उनका नाम कन्याकुमारी पड़ गया।

दक्षिण भारत की एक झलक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आंध्रवासियों का रहन-सहन कैसा है?
उत्तर:
आंध्रवासियों का रहन-सहन साधारण है। स्त्रियाँ खुली साड़ी पहनती हैं। उन्हें अपने बालों को फूलों से सजाने का चाव है। पुरुष धोती पहनते हैं। पीछे लाँग का छोर झंडी की तरह लहराता दिखाई देता है। वे कॉफी पीते हैं और इडली का नाश्ता करते हैं। यहाँ रामायण का बड़ा प्रचार है। स्त्री-पुरुषों में भावुकता अधिक पाई जाती है। वे समय के अनुसार स्वयं को ढालने में सक्षम हैं।

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प्रश्न 2.
तमिल और आंध्रवासियों की भोजन पद्धति में क्या नवीनता है?
उत्तर:
तमिल और आंध्रवासियों की भोजन पद्धति में विशेष अंतर नहीं है। केले के पत्ते पर भात का ढेर, रसम, दाल, तरकारी, दही, चटनी, मोर (तक्र) परोसा जाता है। खाने वाला भात में सब कुछ मिलाकर लंबे लंबे पिंड बनाकर गटकता जाता है। अय्यर (ब्राह्मण) निरामिष भोजी होता है और ब्राह्मणोत्तर को आमिष भोजन से परहेज नहीं है। भात की इडली ‘छोले’ के समान दोसा और उपमा, चटनी और दही के साथ बड़े प्रेम से खाये जाते हैं। भात में शुद्ध देशी घी का प्रयोग होता है।

प्रश्न 3.
लेखक के अनुसार नारी किस तरह भारतीय एकता का प्रतीक बन रही है?
उत्तर:
हिंदी फिल्मों के प्रभाव के कारण आधुनिक महाराष्ट्र, तमिल और केरल नारी की वेशभूषा समान होती जा रही है। सभी स्त्रियाँ एक जैसी साड़ी पहनती हैं, जिसका एक छोर दक्षिण कंधे से होता हुआ पीछे एड़ी से छूता हुआ झूलता है। उसका सर सदा खुला रहने का रिवाज धीरे-धीरे उत्तर के शिक्षित घरों में भी बढ़ रहा है। इस प्रकार लेखक के अनुसार वेशभूषा में भारतीय नारी एकता की प्रतीक बनती जा रही है।

प्रश्न 4.
केरल के गाँवों की कौन-कौन सी विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
केरल के गाँवों में भोजन के अंत में जीरे से उबाला हुआ कुनकुना पानी पीने के काम में लाया जाता है। वहाँ रहन-सहन का स्तर ऊँचा है। गरीबों के नारियल के अवयवों से बने घर भी बिलकुल स्वच्छ होते हैं। प्रत्येक घर के आँगन में दस-पाँच नारियल, दो-चार केले, कटहल के पेड़ अवश्य होते हैं। गाँव की प्रत्येक गली साफ-सुथरी होती है। अधिकांश गाँवों में बिजली है। पोस्ट ऑफिस, छोटा दवाखाना और स्कूल हैं। दो-चार गाँवों के बीच हाई स्कूल और बीस-पच्चीस गाँवों के बीच कॉलेज की व्यवस्था है। गाँव-गाँव में हिंदी बोलने वाले हैं।

प्रश्न 5.
चेन्नई में हिंदी प्रचार-सभा क्या-क्या कार्य कर रही है?
उत्तर:
चेन्नई में हिंदी प्रचार-सभा हिंदी की विद्यापीठ का कार्य कर रही है। यहाँ से हिंदी के कई सौ अध्यापक-अध्यापिकाएँ प्रतिवर्ष शिक्षा ग्रहण कर दक्षिण के अनेक स्कूल और कॉलेजों में हिंदी अध्यापन का कार्य कर रहे हैं। वे दक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार-प्रसार का महत्त्वपूर्ण काम कर रही हैं।

दक्षिण भारत की एक झलक भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
‘आमिष’ शब्द में निः उपसर्ग लगाकर ‘निरामिष’ विलोम शब्द बनाया गया है। इसी प्रकार उपसर्गों के प्रयोग से निम्नलिखित के विलोम शब्द लिखिए –
प्रशंसनीय, एकता, सजीव, संस्कृति
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 16 दक्षिण भारत की एक झलक img-1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित सामासिक पदों का विग्रह कर समासों के नाम लिखिए –
तमिलनाडु, अनंत-शयनम्, शताव्दी, चौपाटी, शृंगार-काल।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 16 दक्षिण भारत की एक झलक img-2

प्रश्न 3.
‘कृष्णा नदी के दर्शन होते हैं।’ वाक्य में ‘दर्शन’ शब्द एकवचन होकर भी बहुवचन की तरह प्रयुक्त हुआ है। हिंदी के ऐसे ही पाँच वाक्य जिसमें बहुवचन के रूप में शब्द का प्रयोग हुआ हो लिखिए।
उत्तर:

  1. अधिकारी ने चेक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
  2. बीमार वृद्धा के प्राण-पखेरू उड़ गए।
  3. इस मंदिर में भगवान विराजमान हैं।
  4. दुखभरी बातें सुनते ही महिला की आँखों से आँसू बह निकले।
  5. सुमन के बाल लंबे हैं।

दक्षिण भारत की एक झलक भाव विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
प्रकृति पर विजय पाकर ही मनुष्य दम लेता है।
उत्तर:
प्रकृति मनुष्य के मार्ग में अनेक बाधाएँ उपस्थित करती है। समुद्र की लहरों पर मछुआरों की नाव बार-बार ऊपर-नीचे होती है। उन्हें देखकर प्रतीत होता है कि उनकी नावें अब डूबी और तब डूबीं। काफ़ी प्रयास के बाद वे नाव को स्थिर कर पाते हैं। मछुआरे शीघ्र ही समुद्र की सतह पर नाव खेते हुए दिखाई देते हैं। इस प्रकार मनुष्य प्रकृति से हार नहीं मानता, उस पर विजय प्राप्त करके ही दम लेता है। समुद्र की लहरों पर नाव खेना उसके द्वारा प्रकृति पर विजय पाने का ही परिणाम है।

दक्षिण भारत की एक झलक योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
दक्षिण भारतीय छात्रों से सघन मैत्री कर उनके प्रदेशों की विशेषताएँ ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 2.
दक्षिण के उन लोगों की सूची बनाइए जो राजनीति, फिल्म, साहित्य, नृत्य …….. और संगीत में प्रसिद्ध हुए हैं।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 3.
संविधान स्वीकृत कोई अन्य भाषा सीखने का प्रयत्न कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 4.
दक्षिण भारत दर्शन का कार्यक्रम बनाइए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 5.
हिंदी प्रचार सभा (चेन्नई) की तरह हिंदी के विकास के लिए जो संस्थाएँ पत्रिकाएँ कार्य करती हैं, उनकी सूची बनाइए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

दक्षिण भारत की एक झलक परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न 1.
‘दक्षिण भारत की एक झलक’ यात्रा-वृत्तांत के लेखक हैं –
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ख) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
(ग) आचार्य विनय मोहन शर्मा
(घ) आचार्य नरेंद्र देव
उत्तर:
(ग) आचार्य विनय मोहन शर्मा।

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प्रश्न 2.
कृष्णा नदी स्थित है –
(क) तमिलनाडु में
(ख) केरल में
(ग) आंध्र प्रदेश में
(घ) महाराष्ट्र में
उत्तर:
(ग) आंध्र प्रदेश में।

प्रश्न 3.
अय्यर (ब्राह्मण) ……….. भोजी होता है।
(क) निरामिष
(ख) आमिष
(ग) शाकाहारी
(घ) रंजक
उत्तर:
(क) निरामिष।

प्रश्न 4.
अनंत-शयनम् के मंदिर में ……….. पहनकर जाना निषिद्ध है।
(क) सिला हुआ वस्त्र या जूता
(ख) पगड़ी या खड़ाऊँ।
(ग) पैंट-कमीज अथवा धोती
(घ) घड़ी, बेल्ट अथवा चप्पल
उत्तर:
(क) सिला हुआ वस्त्र या जूता।

प्रश्न 5.
विश्व में वह कौन-सा स्थान है, जहाँ सूर्य समुद्र में डूबता है और समुद्र से ही उगता है?
(क) कन्याकुमारी का समुद्र तट
(ख) गोवा का समुद्र तट
(ग) मुंबई का समुद्र तट
(घ) कोलकाता का गंगा तट
उत्तर:
(क) कन्याकुमारी का समुद्र तट।

प्रश्न 6.
त्रिवेन्द्रम का दूसरा नाम है –
(क) त्रावणकोर
(ख) तिरुअनन्तपुरम
(ग) गोपुरम
(घ) तिरुचिरापल्ली
उत्तर:
(ख) तिरुअनन्तपुरम।

प्रश्न 7.
मीनाक्षी मंदिर स्थित है –
(क) मदुरा में
(ख) मथुरा में
(ग) रामेश्वरम में
(घ) मद्रास में
उत्तर:
(क) मदुरा में।

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प्रश्न 8.
काले पत्थर की विशाल हनुमान मूर्ति दक्षिण के किस मंदिर में है?
(क) शुचिन्द्रम मंदिर
(ख) मीनाक्षी मंदिर
(ग) अनन्तशयनम् मंदिर
(घ) कन्याकुमारी मंदिर
उत्तर:
(क) शुचिन्द्रम मंदिर।

प्रश्न 9.
कन्याकुमारी को मंदिर किस देवी का मंदिर है?
(क) सरस्वती
(ख) दुर्गा
(ग) पार्वती
(घ) लक्ष्मी
उत्तर:
(ग) पार्वती।

प्रश्न 10.
तमिल स्त्रियाँ किससे बनी बाल्टी से कुएँ से पानी खींच रही थीं?
(क) लोहे की
(ख) ताड़ के पत्तों की
(ग) नारियल के पत्तों की
(घ) प्लास्टिक की
उत्तर:
(ख) ताड़ के पत्तों की।

प्रश्न 11.
जब पार्वती का विवाह शिव से होने वाला था –
(क) तब शिवजी की बारात वहाँ पहुँच गई।
(ख) कुमारी पार्वती शिवजी से मिल गईं।
(ग) विवाह का मुहूर्त भोर में था।
(घ) शिवजी के न मिलने पर पार्वती अपने निवास स्थान को लौट आईं।
उत्तर:
(घ) शिवजी के न मिलने पर पार्वती अपने निवास स्थान को लौट आईं।

II. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर कीजिए –

  1. त्रिवेन्द्रम का दूसरा नाम ………. है। (तिरुचिरापल्ली/तिरुअनन्तपुरम्)
  2. लेखक ने दक्षिण भारत की यात्रा ………. में की थी। (1853/1953)
  3. बेजवाड़ा ………. का एक प्रमुख नगर है। (आंध्र-प्रदेश/तमिलनाड्)
  4. तेलुगु भाषा में सत्तर प्रतिशब्द ………. के होते हैं। (तमिल संस्कृत)
  5. आंध्र में ………. कृत रामायण का बड़ा प्रचार है। (त्यागराज/तुलसी)

उत्तर:

  1. तिरुअनन्तपुरम्
  2. 1953
  3. आन्ध-प्रदेश
  4. संस्कृत
  5. तुलसी।

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III. निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए –

  1. त्रिवेन्द्रम से कन्याकुमारी तक लगातार बस्ती है।
  2. गोपुरम् मन्दिर के द्वार को कहते हैं।
  3. तमिल का व्याकरण ईसा के आठवीं शताब्दी पूर्व लिखा गया था।
  4. मद्रास को चेन्नई कहते हैं।
  5. श्री रंगम् का मंदिर कावेरी नदी के द्वीप में है।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. सत्य।

IV. निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए –

प्रश्न 1.
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 16 दक्षिण भारत की एक झलक img-3
उत्तर:
(i) (ग), (ii) (घ), (iii) (ङ), (iv) (ख), (v) (क)।

V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

प्रश्न 1.
त्रिवांकुर (त्रावणकोर) जाते समय लेखक ने किसकी झलक देखी?
उत्तर:
त्रिवांकुर (त्रावणकोर) जाते समय लेखक ने आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल की झलक देखी।

प्रश्न 2.
आंध्र का प्रमुख नगर कौन-सा है?
उत्तर:
वेजवाड़ा

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प्रश्न 3.
भक्त कवि त्यागराज किस शताब्दी के थे?
उत्तर:
18वीं शताब्दी के

प्रश्न 4.
अय्यर ब्राह्मण कैसे होते हैं?
उत्तर:
अय्यर ब्राह्मण निरामिष भोजी होते हैं।

प्रश्न 5.
आन्ध्र में क्या-क्या अधिक पैदा होता है?
उत्तर:
आंध्र में काजू, केला और धान अधिक पैदा होता है।

दक्षिण भारत की एक झलक लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आंध्र में हिंदी की किस पुस्तक का बड़ा प्रचार है?
उत्तर:
आंध्र में हिंदी की तुलसीकृत रामायण का बड़ा प्रचार है।

प्रश्न 2.
आंध्रप्रदेश के लोग कौन-सी भाषा बोलते हैं?
उत्तर:
आंध्रप्रदेश के लोग तमिल भाषा बोलते हैं।

प्रश्न 3.
केरल के गरीब लोग क्या खाते हैं?
उत्तर:
केरल के गरीब लोग जंगल से कंद को उखाड़कर उसे भूनकर या उबाल के खाते हैं।

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प्रश्न 4.
त्रिवेन्द्रम में बाजारों में बहुत-से लोग नंगे पैर क्यों चलते हैं?
उत्तर:
त्रिवेन्द्रम में बारहों महीने वर्षा होती रहती है। अतः कीचड़ से बचने के लिए लोग नंगे पैर चलते हैं।

प्रश्न 5.
श्रीरंगम् का मंदिर कहाँ बना हुआ है?
उत्तर:
श्रीरंगम् का मंदिर तिरुचिरापल्ली के निकट कावेरी नदी के द्वीप में बना हुआ है।

प्रश्न 6.
मद्रास का कौन-सा वृक्ष जग-प्रसिद्ध है और क्यों?
उत्तर:
मद्रास का वट-वृक्ष जग प्रसिद्ध है, क्योंकि इसकी लंबाई उत्तर से दक्षिण की ओर 200 फुट और चौड़ाई में पूरब से पश्चिम की ओर 205 फुट है।

प्रश्न 7.
तमिल और आंध्र का मुख्य भोजन क्या है?
उत्तर:
भात का ढेर, रसम, दाल, तरकारी, दही, चटनी, मोटर (तक्र), भात की इडली, डोसा और उपमा तमिल और आंध्र का मुख्य भोजन है।

प्रश्न 8.
समुद्र दर्शन के बाद लेखक कहाँ गया?
उत्तर:
समुद्र दर्शन के बाद लेखक अजायबघर गया।

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प्रश्न 9.
रामेश्वरम् की क्या विशेषता है?
उत्तर:
रामेश्वरम् में विशाल मंदिर है। कई तीर्थ कूप हैं, जिनका पानी मीठा है। यहाँ हिंदी जानने वाले बहुत हैं।

दक्षिण भारत की एक झलक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तमिलानाडु के स्त्री-पुरुषों की वेशभूषा का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
तमिलनाडु के पुरुषों की वेशभूषा में लुंगी, कुरता और आधुनिक बुशर्ट शामिल हैं। स्त्रियाँ खुली साड़ी पहनती हैं। उन्हें हरा रंग अच्छा लगता है। स्त्रियाँ हरा परिधान पहनती हैं।

प्रश्न 2.
लेखक किस व्यावसायिक ईमानदारी से प्रभावित हुआ?
उत्तर:
लेखक ने मद्रास, मदुरा, तिरुचिरापल्ली और रामेश्वरम् आदि स्थानों के होटल में भोजन किया। वहाँ के होटलों में भात पर शुद्ध देशी घी ही डाला गया। होटल वालों की यह ईमानदारी प्रशंसनीय है। दूध के संबंध में वहाँ के दुकानदार बड़े स्पष्टवादी हैं। वे स्पष्ट कहते हैं कि हम शुद्ध दूध नहीं बेचते। हम कॉफी का दूध बेचते हैं, जिसमें पानी मिला होता है। लेखक उनकी इस व्यावसायिक ईमानदारी से बड़ा प्रभावित हुआ।

प्रश्न 3.
लेखक कन्याकुमारी में सूर्यास्त का दृश्य क्यों नहीं देख पाया?
उत्तर:
लेखक सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए कन्याकुमारी के समुद्र तट पर पहुँच गया। बहुत-से सैलानी वहाँ सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए उत्सुक थे, पर बादल सूर्य को रह-रहकर ढाँप लेते थे। लेखक सूर्यास्त की दिशा पर नजरें गड़ाये रहा, पर बादलों ने सूर्य को मुक्त नहीं किया। फलस्वरूप वह सूर्यास्त का दृश्य नहीं देख पाया।

प्रश्न 4.
मीनाक्षी मंदिर की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
मीनाक्षी मंदिर मदुरा में स्थित है। यह बड़ा विशाल मंदिर है। यह कई गोपुरम से घिरा हुआ है। गोपुरम ऊँचा गुंबद के समान द्वार है। इस मंदिर में अनेक मूर्तियों में पौराणिक गाथाएँ अंकित हैं। मंदिर के प्रत्येक खंभे पर हाथी के ऊपर सवार सिंह दिखलाया गया है। मूर्तियाँ बड़ी सजीव हैं। यहाँ एक हजार खंभों वाला हाल है। मंदिर में दक्षिण के 63 संतों की प्रतिमाएँ हैं। मंदिर में इनकी वाणियों का अध्ययन-मनन होता है।

प्रश्न 5.
अनंतशयनम् के मंदिर की क्या विशेषता है?
उत्तर:
अनंतशयनम् मंदिर में सिला हुआ वस्त्र या जूता पहनकर जाना निषिद्ध है। महिलाओं की साड़ी सिला हुआ वस्त्र न होने के कारण मंदिर में प्रवेश पा सकती, हैं। मंदिर में मूर्ति की विशालता दर्शनीय है।

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प्रश्न 6.
मद्रास का जग-प्रसिद्ध वट-वृक्ष कैसा है?
उत्तर:
मद्रास का जग-प्रसिद्ध वट-वृक्ष दर्शनीय है। इसकी लम्बाई उत्तर से दक्षिण की ओर 200 फुट और चौड़ाई पूरब से पश्चिम की ओर 205 फुट है। इसके नीचे एनींबेसेन्ट ने थियोसोफिकल सोसाइटी की अनेक महत्त्वपूर्ण सभाएँ की हैं। यह हजारों दर्शकों का विश्राम-स्थल है।

दक्षिण भारत की एक झलक लेखक-परिचय

प्रश्न 1.
आचार्य विनय मोहन शर्मा का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
आचार्य विनय मोहन शर्मा का जन्म 19 दिसंबर, सन् 1905 में करकबैल मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में हुआ। इनका मूल नाम शुक देव प्रसाद तिवारी ‘वीरात्मा’ था। आपने एम.ए., पी-एचडी., एल.एल.बी., तक शिक्षा प्राप्त की। इन्होंने पत्रकारिता से साहित्य जगत् में प्रवेश किया। ये ‘कर्मवीर’ पत्रिका के सहायक सम्पादक.रहे। सन् 1940 से शिक्षा-जगत् में विभिन्न पदों पर रहकर अध्यापन किया।

ये नागपुर एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और महाकौशल विश्वविद्यालय, जबलपुर में प्राचार्य रहे। इन्होंने केन्द्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के प्रथम निदेशक पद को भी सुशोभित किया। ये सन् 1970 से 1973 तक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अंतर्गत विश्वविद्यालय से भी संबद्ध रहे। 5 अगस्त, सन् 1993 को इनका निधन हो गया।

साहित्यिक-परिचय:
हिंदी को मराठी संतों की देन’ शोध प्रबंध पर आपको अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए। इन्होंने हिंदी, पंजाबी और मराठी संतों का तथा तुलसी काव्यों का तुलनात्मक अध्ययन किया और ‘गीत-गोविंद’ का हिंदी अनुवाद किया। इनकी ‘दृष्टिकोण’, ‘साहित्य कथा पुराना’, शोध प्रविधि-मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कृत की जा चुकी है। विभिन्न शासकीय एवं अशासकीय साहित्य संस्थानों तथा सभाओं द्वारा आपको सम्मानित एवं पुरस्कृत भी किया गया है। पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र द्वारा रचित महाकाव्य ‘कृष्णायक’ की इन्होंने अवधी से खड़ी बोली में रूपान्तरित किया है। हिंदी साहित्य जगत् में निबंधकार, समीक्षक, एवं शोधकर्ता के रूप में इनका विशिष्ट स्थान है।

रचनाएँ:
इनकी हिंदी को मराठी संतों की देन, हिंदी, पंजाबी और मराठी में कृष्ण तथा तुलसी काव्यों का तुलनात्मक अध्ययन, गीत-गोविन्द का हिंदी अनुवाद, दृष्टिकोण, साहित्य कथा पुराना, शोध प्रविधि, कृष्णायन का खड़ी बोली में रूपांतरण आदि रचनाएँ हैं।

भाषा-शैली:
विनय मोहन शर्मा की भाषा प्रौढ़, सशक्त, परिमार्जित खड़ी बोली – है। भाषा में तत्सम शब्दों के अतिरिक्त प्रचलित उर्दू शब्द भी हैं। साधारण विषयों पर इनकी लेखनी सरल और व्यावहारिक भाषा का रूप धारण कर लेती है।

दक्षिण भारत की एक झलक पाठ का सारांश

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प्रश्न 1.
‘दक्षिण भारत की एक झलक’ यात्रा-वृत्तांत का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
दक्षिण भारत की एक झलक’ यात्रा-वृत्तांत में आचार्य विनय मोहन शर्मा ने दक्षिण भारत के सुरम्य स्थानों, रीति-रिवाजों और दृश्यों का वर्णन करते हुए वहाँ की संस्कृति की सजीव झाँकियाँ प्रस्तुत की हैं। शर्माजी कहते हैं कि मुझे 1953 में पहली बार त्रावणकोर जाते हुए आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जाने का अवसर मिला। प्रातःकाल जब उनकी गाड़ी आंध्र प्रदेश के बेजबाड़ा पहुँची तो उन्हें ऐसा लगा मानो किसी नई दुनिया में प्रवेश हो रहा है।

वहाँ की समुद्र से आने वाली वायु तन और मन दोनों को शीतलता प्रदान कर रही थी। वहाँ कृष्णा नदी भी देखी। आंध की स्त्रियाँ खुली साड़ी पहनती हैं और पुरुष धोती पहनते हैं, जिनकी लांग की छोर झंडी की तरह लहराता दिखाई देती है। लोग गोरे रंग के होते हैं और लोग तेलुगू बोलते हैं। यहाँ तुलसीकृत रामायण का बड़ा प्रचार है। 18वीं शताब्दी में भक्त कवि त्यागराज ने भी तुलसी का अनुकरण किया है।

आचार्यजी आंध्र के लोगों के खान-पान के संबंध में बताते हुए कहते हैं कि लोग कॉफी अधिक पीते हैं और इडली का नाश्ता करते हैं। स्त्रियाँ फूलों से केश-सज्जा करती हैं। वहाँ काजू और केले के साथ-साथ धान उत्पन्न होता है। स्त्री-पुरुष भावुक होते हैं। वे स्वयं को समय के अनुरूप ढालने में सक्षम हैं। ‘गुडूर’ से गाड़ी तमिलनाडु में प्रवेश करती है। यहाँ तमिल भाषा बोली जाती है। पुरुष लुंगी, कुर्ता और बुशशर्ट पहनते हैं। यहाँ के लोग रंग के साँवले होते हैं। स्त्रियों को हरा रंग अधिक पसन्द है। तमिल और आंध्र के भोजन में विशेष अंतर नहीं है। वहाँ केले के पत्ते पर भात, रसम, दाल, तरकारी और दही, चटनी, मोर परोसा जाता है।

यहाँ इटली, दोसा, उपमा, चटनी और दही के साथ खाया जाता है। – सुदूर दक्षिण में मिठाइयों की दुकानें नहीं हैं। वहाँ होटल वाले ईमानदार हैं। वे भात में शुद्ध घी का प्रयोग करते हैं परन्तु वे शुद्ध दूध नहीं बेचते। केरल की आबादी सघन है। जमीन हरी-भरी है। गरीब लोग कंद खाते हैं। उसके साथ मछली मिल जाने पर पूरा आहार हो जाता है। नारियल बहुतायत से होता है। अतः लोग उसका कई रूपों में प्रयोग करते हैं। उसका पानी बेंचा जाता है।

केरल में स्त्रियों का पहनावा तमिलनाडु की स्त्रियों से अलग है। वे उजले रंग के वस्त्र पहनती हैं। शहरी स्त्रियों का पहनावा हिंदी फिल्मों के प्रभाव के कारण महाराष्ट्र, तमिल और केरल में एक जैसा है। त्रावणकोर-कोचीन में शिक्षा प्रचार-प्रसार अधिक है। लोगों का जीवन-स्तर ऊँचा है। घर साफ-सुथरे होते हैं। अधिकांश गाँवों में बिजली है। पोस्ट-ऑफिस, दवाखाना, और स्कूल प्रत्येक गाँव में हैं। दो-चार गाँवों के मध्य एक हाई स्कूल और बीस-पच्चीस गाँवों के बीच एक कॉलेज भी स्थापित है। हिंदी का यहाँ बहुत प्रचार है। परीक्षा के लिए हिंदी अनिवार्य है।

त्रिवेन्द्रम से कन्याकुमारी की यात्रा बड़ी रोचक थी। स्त्री-पुरुष बाजारों में नंगे पैर चलते हैं; क्योंकि वर्षा होती रहती है। यहाँ का समुद्र-दर्शन अत्यन्त आकर्षक होता है। समुद्र की आती-जाती लहरों में खड़ा होने में आनन्द आता है। समुद्र में अनेक मछुवारे मछलियाँ पकड़ते दिखाई देते हैं। उनकी नावें समुद्र में तैरती दिखाई देती हैं। वहाँ के अजायबघर में समुद्र की मछलियों, सर्पो, केकड़ों आदि को सुरक्षित रखा गया है। यह अजायबघर भारत में अपनी तरह का एक ही है। वहाँ के अनन्त-शयनम् मन्दिर में सिला हुआ वस्त्र या जूता पहनकर जाना मना है। मन्दिर में मूर्ति की विशालता दर्शनीय है।

त्रिवेन्द्रम से कन्याकुमारी तक इतनी सघन आबादी है कि भारत के किसी भाग में इतनी सघन आबादी नहीं है। तमिल स्त्रियाँ ताड़ की बनी बाल्टी से कुएँ से पानी निकालती हैं। दक्षिण भारत में मामूली स्त्रियाँ सोने के और संभ्रांत स्त्रियाँ हीरे, मोती, जवाहरात के आभूषण पहनती हैं। कन्याकुमारी में सूर्यास्त का दृश्य अत्यन्त भव्य होता है। यहाँ तीन समुद्रों का मिलन होता है। अनेक स्त्री-पुरुष सूर्यास्त का दृश्य देखने को उत्सुक थे, लेकिन बादलों के कारण यह सम्भव नहीं हो सका। संसार में यही स्थान है जहाँ सूर्य समुद्र में डूबता है और समुद्र से ही उगता है।

कन्याकुमारी के मंदिर में पार्वती के दर्शन के लिए गए। इस मंदिर में भी नंगे बदन ही जाना पड़ता था। वहाँ पार्वती विवाह का मुहूर्त निकल जाने के कारण अविवाहित रूप में ही आकर विराजमान हो गई थी। अतः इसीलिए यहाँ का नाम कन्याकुमारी पड़ा है। इसके बाद शुचिन्द्रम के भव्य मंदिर के दर्शन किए। वहाँ पर काले पत्थर की विशाल हनुमान की मूर्ति है। वह मुख्य रूप से शिव-मंदिर है। मंदिर के प्रस्तर स्तंभों की विशेषता है कि उसे हाथ से ठोंकने पर धीमी सुरीली आवाज निकलती है।

त्रिवेन्द्रम और कन्याकुमारी के बीच की भूमि में सुपारी, काजू, केला, नारियल और धान आदि से उर्वरा है। आचार्य कहते हैं कि समय की कमी के कारण मलयालय के कई साहित्यकारों से भेंट नहीं हो पाई। इसके बाद मदुरा का मीनाक्षी मंदिर देखा। वह बहुत विस्तीर्ण है। यह कई गोपुरम से घिरा है। गोपुरम ऊँचा गुम्बद के समान द्वार है। यहाँ की मूर्तियाँ बड़ी सजीव हैं। वहाँ एक हजार खम्भों वाला हॉल है, वहाँ हजारों नर-नारी प्रसाद पा सकते हैं। मदुरा से रामेश्वरम धनुष-कोटि भी गए। रामेश्वरम का मंदिर विशाल है। यहाँ तीर्थयात्री समुद्र में स्नान करते हैं।

यहाँ हिंदी जानने वाले बड़ी संख्या में हैं। तिरुचिरापल्ली का कावेरी नदी के द्वीप पर बना श्रीरंगम का मंदिर दर्शनीय है। त्रिचिन्नापल्ली में सहस्रों सीढ़ियाँ चढ़ने के बाद ऊँचाई पर एक विशाल मंदिर है। यहाँ से । नगर और नदी का दृश्य बड़ा सुन्दर दिखायी देता है। तमिल साहित्य बहुत प्राचीन है। तमिल का व्याकरण आज भी ईसा की चार शताब्दी पूर्व ही लिखा गया व्याकरण है। चेन्नई में भी हिंदी साहित्य में गीत का परिचय मिलता है। वहाँ की हिंदी-प्रचार सभा को दक्षिण में हिंदी की प्रमुख विद्यापीठ का रूप प्रदान कर रही है।

वहाँ से कई सौ अध्यापक-अध्यापिकाएँ प्रतिवर्ष शिक्षा ग्रहण कर दक्षिण के अनेक स्कूल-कॉलेजों दक्षिण भारत की एक झलक में हिंदी पढ़ा रहे हैं। मद्रास में अडयार पुस्तकालय काफी संपन्न है। वहाँ का वटवृक्ष विश्वविख्यात है। वहाँ का समुद्रतट भी बहुत सुन्दर है। वहाँ शाम को सैलानियों का मेला-सा लग जाता है। रात के आठ बजे तक सैलानियों को मद्रास रेडियो स्टेशन का भोंपू कार्यक्रम सुनाता रहता है।

दक्षिण भारत की एक झलक संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

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प्रश्न 1.
सुदूर दक्षिण में उत्तर भारत के समान तरह-तरह की मिठाइयों की दुकानें नहीं हैं। बड़े-बड़े नगरों में उत्तर भारत के एक-दो हलवाई थोड़ी-बहुत मिठाई बनाते हैं। चटपटी, खारी, खट्टी चीजें दक्षिण भारतीयों को बहुत प्रिय हैं। घी की अपेक्षा नारियल के तेल का इस्तेमाल अधिक होता है। परन्तु वहाँ के होटलों में एक बात यह देखी गई है कि जब वे भात पर घी डालते हैं, तो ह शुद्ध घी ही होता है।

होटल वालों की यह ईमानदारी प्रशंसनीय है। मैंने मद्रास, मदुरा, त्रिचिनापल्ली, रामेश्वरम् आदि स्थानों के होटलों में भोजन किया और मुझे हर जगह शुद्ध ताजे घी का स्वाद मिला। दूध के संबंध में भी यहाँ के दुकानदार बड़े स्पष्टवादी हैं। दक्षिण के स्टेशनों पर आपकी आँखों के सामने की पाल (दूध) में वल्लम (पानी) मिलाकर देंगे और कहेंगे शुद्ध दूध हम नहीं बेचते, हम कॉफी का दूध रखते हैं। इस व्यावसायिक ईमानदारी ने मुझे बड़ा प्रभावित किया। (Page 74)

शब्दार्थ:

  • सुदूर – बहुत दूर, बहुत दूर का।
  • प्रशंसनीय – प्रशंसा करने योग्य।
  • स्पष्टवादी – स्पष्ट बोलने वाले।
  • व्यावसायिक – व्यापारिक।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश आचार्य विनय मोहन शर्मा द्वारा रचित यात्रा-वृत्तांत ‘दक्षिण भारत की एक झलक’ से उद्धृत है। लेखक दक्षिण भारत के सुरम्य स्थानों, रीति-रिवाजों और दृश्यों का रोचक वर्णन किया है। इस गद्यांश में लेखक दक्षिण भारत के लोगों की व्यावसायिक ईमानदारी का वर्णन कर रहा है।

व्याख्या:
लेखक ने दक्षिण भारत की कवा के दौरान तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश की यात्रा की। उसने देखा कि बहुत दूर स्थित दक्षिण में उत्तर भारत के समान तरह-तरह की मिठाइयों की दुकानें नहीं हैं। दूसरे शब्दों, जैसे उत्तर भारत में तरह-तरह की मिठाई बनाने वाले हलवाइयों की दुकानें होती हैं, वैसे दुकानें दूरस्थ दक्षिण भारत में नहीं मिलतीं। यहाँ केवल बड़े-बड़े नगरों में ही उत्तर भारत के एक-दो हलवाई ही थोड़ी-बहुत मिठाई बनाते हैं। इसका कारण है दक्षिण भारत के लोगों को मिठाई अधिक रुचिकर नहीं होती है।

दक्षिण भारत के लोगों को मिठाइयों की अपेक्षा चटपटी, मसालेदार, खारी और खट्टी चीजें ही अधिक पसन्द हैं। दक्षिण भारत में लोग घी का कम प्रयोग करते हैं। नारियल के तेल का अधिक इस्तेमाल करते हैं। लेखक यहाँ के होटलों की विशेषता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहता है कि यहाँ के होटलों में एक बात यह देखने में आई कि वे भात पर घी डालते हैं और वह भी शुद्ध देशी घी। भात पर देशी घी डालने के संबंध में उनकी ईमानदारी प्रशंसा करने के योग्य है। वे देशी घी में किसी तरह की मिलावट नहीं करते। वे ईमानदारी से भात पर शुद्ध देशी घी ही डालते हैं।

लेखक बताता है कि उसने दक्षिण भारत के मद्रास, मदुरा, त्रिचिन्नापल्ली, रामेश्वरम आदि स्थानों के होटलों में खाना खाया और उसे हर स्थान पर शुद्ध देशी घी का ही स्वाद मिला। इतना ही नहीं दूध के संबंध में भी यहाँ के दुकानदार बहुत स्पष्ट बोलने वाले हैं। दक्षिण भारत के स्टेशनों पर वे आपके द्वारा दूध माँगने पर आपकी आँखों के सामने ही दूध में पानी मिलाकर देंगे। वे स्पष्ट रूप से कहते हैं कि हम लोग शुद्ध दूध नहीं बेचते। हम कॉफी का दूध रखते हैं। कॉफी के दूध में पानी मिला होता है। लेखक दक्षिण भारतीयों की इस व्यापारिक ईमानदारी से वड़ा प्रभावित हुआ।

विशेष:

  1. दक्षिण भारतीय होटल वालों की ईमानदारी की प्रशंसा की है।
  2. वर्णनात्मक शैली है।
  3. भाषा सरल, स्पष्ट खड़ी बोली है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
उत्तर भारतीय तथा दक्षिण भारतीय लोगों के स्वाद में क्या अंतर है?
उत्तर:
उत्तर भारतीयों को भिठाइयाँ अधिक पसंद हैं, तो दक्षिण भारतीयों को चटपटी, खारी और खट्टी चीजें अधिक पसंद हैं।

प्रश्न (ii)
लेखक दक्षिण भारतीयों की किस स्पष्टवादिता से प्रभावित हुआ?
उत्तर:
दक्षिण भारत के लोग आपके सामने दूध में पानी मिलाकर आपको देंगे और स्पष्ट कहेंगे कि हम शुद्ध दूध नहीं बेचते, हम कॉफी का दूध रखते हैं। लेखक उनकी इस स्पष्टवादिता से प्रभावित हुआ।

प्रश्न (iii)
दक्षिण भारत के होटलों में भात पर किस तरह का घी डाला जाता है?
उत्तर:
दक्षिण भारत के होटलों में भात पर शुद्ध देशी घी डाला जाता है।

गद्य पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
गद्यांश का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर:
दक्षिण भारतीयों की पसंद, ईमानदारी और स्पष्टवादिता की प्रशंसा करना।

प्रश्न (ii)
लेखक ने दक्षिण भारत के किन-किन नगरों के होटल में खाना खाया और उसको क्या अनुभव हुआ?
उत्तर:
लेखक ने दक्षिण भारत के मद्रास, मदुरा, त्रिचिन्नापल्ली, रामेश्वरम आदि चारों होटलों में खाना खाया और उसे हर स्थान पर शुद्ध ताजे घी के स्वाद का अच्छा अनुभव हुआ।

प्रश्न 2.
त्रावणकोर (केरल) में प्रवेश करते ही स्त्रियों की पोशाक के रंग में अंतर दिखाई देने लगता है। यहाँ वे ‘महाश्वेता’ की छवि धारण कर लेती हैं। उन्हें तमिलनाडु की स्त्री के समान हरा-लाल रंग पसन्द नहीं-वे उजले रंग के वस्त्र पहनती हैं। यहाँ एक बात स्पष्ट कर दूं। इस लेख में पोशाक आदि की चर्चा नगर और ग्राम के सामूहिक जीवन को लक्ष्य करके की जा रही है। यों आज महाराष्ट्र, तमिल और केरल राज्यों की ही नहीं, समस्त देश की शहरी स्त्रियों की वेशभूषा प्रायः समान ही होती जा रही है। यह हिंदी चित्रपटों का प्रभाव जान पड़ता है।

आधुनिक महाराष्ट्र की नारी स्वच्छ साड़ी पहनना पसन्द करती है, तमिल और केरल की नारी भी उसी तरह साड़ी पहनती है, जिसका एक छोर दक्षिण कन्धे से होता हुआ पीछे एड़ी से छूता हुआ झूलता है। उसका सर सदा खुला रहने का रिवाज धीरे-धीरे उत्तर के शिक्षित घरों में भी बढ़ रहा है। वेशभूषा में नारी भारतीय एकता का प्रतीक बनती जा रही है। त्रावणकोर-कोचीन में शिक्षा का प्रसार अधिक होने से जनता के रहन-सहन का स्तर अपेक्षाकृत ऊँचा है। गरीबों के घर भी, जो अधिकतर नारियल के विभिन्न अवयवों से बनते हैं, बिल्कुल स्वच्छ रहते हैं।

प्रत्येक छोटे से घर के आँगन में दस-पाँच नारियल, दो-चार केले, कटहल के पेड़ अवश्य दिखाई देंगे। उत्तर के गाँव जहाँ चारों ओर पुरीष से घिरे रहते हैं, वहाँ केरल के गाँव गली-गली स्वच्छ झलकते हैं। यहाँ अधिकांश ग्राम विजली से जगमगाते हैं। पोस्ट ऑफिस, छोटा-सा दवाखाना और स्कूल के बिना तो गाँव बसते ही नहीं, दो-चार गाँवों के मध्य एक हाईस्कूल, बीस-पच्चीस गाँवों के बीच एक कॉलेज आवश्यक समझा जाता है। वहाँ हिंदी का इतना अधिक प्रचार है कि गाँव-गाँव में उसे बोलने-समझने वाले स्त्री-पुरुष मिल जाते हैं। (Page 75)

शब्दार्थ:

  • महाश्वेता – सरस्वती।
  • छवि – सुंदरता, रूप।
  • पोशाक – वेशभूषा।
  • सामूहिक – सामाजिक।
  • चित्रपटों – फिल्मों।
  • स्वच्छ – साफसुथरे।
  • रिवाज – परंपरा।
  • अवयवों – भागों।
  • पुरीष – गंदगी
  • कूड़ा – करकट।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश आचार्य विनय मोहन शर्मा द्वारा लिखित यात्रा-वृत्तांत दक्षिण भारत की एक झलक’ से उद्धृत है। इस गद्यांश में लेखक केरल की स्त्रियों की वेशभूषा, वहाँ के घरों तथा शिक्षा-व्यवस्था के साथ-साथ हिंदी की स्थिति पर प्रकाश डाल रहा है।

व्याख्या:
लेखक कहता है कि केरल राज्य में प्रवेश (दाखिल) होते ही स्त्रियों के पहनावे की पोशाकों के रंग में अंतर स्पष्ट दिखाई देने लगता है। वेशभूषा के संबंध में केरल की स्त्रियाँ सरस्वती का रूप ग्रहण करती दिखाई पड़ती हैं। यहाँ की स्त्रियों को तमिलनाडु की स्त्री की तरह हरा और लाल रंग पसंद नहीं है। वे सफेद (उज्ज्वल) रंग के कपड़े पहनती हैं। लेखक यहाँ एक बात स्पष्ट कर रहा है कि इस लेख में पहनावे आदि की चर्चा नगर और गाँव के सामूहिक जीवन को लक्ष्य करके ही की जा रही है। वैसे तो आज महाराष्ट्र, जमिल और केरल राज्यों में ही नहीं, अपितु देश के समस्त राज्यों के शहरी क्षेत्रों की स्त्रियों के पहनावे में समानता आती जा रही है।

सारे देश के शहरी क्षेत्रों नारियों की वेशभूषा में समानता आने का कारण हिंदी फिल्मों का प्रभाव दिखाई देता है। हिंदी फिल्मों में अभिनेत्रियाँ जो वस्त्र पहनती हैं, वही आजकल नगरों की स्त्रियाँ पहनने लगी हैं। आधुनिक महाराष्ट्रीय स्त्री साफ-सुथरी साड़ी पहनना पसंद करती है तो तमिलनाडु और केरल की स्त्रियाँ भी उसी प्रकार की साड़ी पहनती हैं। उस तरह की साड़ी का एक किनारा दक्षिण कंधे से होता पीछे एड़ी से छूता हुआ लटकता रहता है। दूसरे शब्दों में, सभी स्त्रियाँ उलटे पल्ले की साड़ी पहनती हैं। उनका सर बिना पल्ले के खुला रहता है। यह रिवाज धीरे-धीरे उत्तर भारत के सुशिक्षित घरों की नारियों में भी निरंतर बढ़ता जा रहा है।

इस तरह के पहनावे से भारतीय नारी राष्ट्रीय एकता की प्रतीक बनती जा रही है। त्रावणकोर और कोचीन में शिक्षा-प्रसार अधिक होने के कारण जनता के रहन-सहन का स्तर तुलनात्मक दृष्टि से ऊँचा है। गरीबों के घर भी जो अधिकतर नारियल के विभिन्न भागों में बने होते हैं, बिलकुल साफ-सुथरे होते हैं। प्रत्येक छोटे-से घर के आँगन में भी नारियल के दस-पाँच पेड़, दो-चार केले के पेड़ और कटहल के पेड़ अवश्य लगे होते हैं। उत्तर भारत के गाँवों में चारों तरफ कूड़े-करकट के ढेर लगे होते हैं, वहीं दक्षिण भारत के गाँव की गली-गली साफ-सुथरी होती है। यहाँ के अधिकांश गाँवों में बिजली की व्यवस्था है, जिसके प्रकाश से गाँव बिजली की रोशनी से जगमगाते रहते हैं।

केरल के प्रत्येक गाँव में पोस्ट ऑफिस (डाकखाना), छोटा दवाखाना और प्राथमिक स्कूल हैं। दो-चार गाँवों के बीच हाई स्कूल है। तो 20-25 गाँवों के मध्य एक कॉलेज भी है। इस प्रकार केरल राज्य में शिक्षा की अच्छी व्यवस्था है। केरल में हिंदी का प्रचार-प्रसार बहुत है। यही कारण है कि यहाँ के गाँव-गाँव में हिंदी बोलने और समझने वाले स्त्री-पुरुष मिल जाते हैं। दूसरे शब्दों में, केरल में हिंदी बोलने और समझने वालों की संख्या पर्याप्त है।

विशेष:

  1. लेखक ने केरल की विशेषताओं का वर्णन किया है।
  2. वर्णनात्मक शैली है।
  3. भाषा परिमार्जित खड़ी बोली है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

प्रश्न (i)
लेखक ने हिंदी चित्रपट के किस प्रभाव का वर्णन किया है?
उत्तर:
लेखक ने हिंदी चित्रपट के वेशभूषा के प्रभाव का वर्णन किया है। हिंदी फिल्मों के प्रभाव के कारण सारे भारत के शहरी क्षेत्रों की स्त्रियों में एक ही ढंय से साड़ी पहने जाने लगी है।

प्रश्न (ii)
उत्तर भारत और केरल के गाँवों में क्या अंतर है?
उत्तर:
उत्तर भारत के गाँव चारों ओर से कूड़े-करकट से घिरे रहते हैं, जबकि केरल के गाँव की गली-गली साफ-सुथरी रहती हैं।

प्रश्न (iii)
तमिलनाडु और केरल की स्त्रियों की पसंद में क्या अंतर है?
उत्तर:
तमिलनाडु की स्त्रियाँ पहनावे में हरा और लाल रंग पसंद करती हैं, तो केरल की स्त्रियाँ उजले वस्त्र पहनना पसन्द करती हैं।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्न

प्रश्न (i)
त्रावणकोर-कोचीन में रहन-सहन का स्तर ऊँचा क्यों है?
उत्तर:
त्रावणकोर-कोचीन में शिक्षा का प्रचार-प्रसार अधिक होने के कारण जनता के रहन-सहन का स्तर गाँवों की अपेक्षा अधिक ऊँचा है।

प्रश्न (ii)
केरल के गाँवों की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  1. केरल के गाँवों में बिजली की व्यवस्था है। गाँव बिजली से जगमगाते रहते हैं।
  2. केरल के गाँवों में डाकखाना, दवाखाना और स्कूल हैं।

प्रश्न (iii)
किस राज्य के गाँव-गाँव में हिंदी बोलने और समझने वाले मिल जाते हैं और क्यों?
उत्तर:
केरल राज्य के गाँव-गाँव में हिंदी बोलने वाले और समझने वाले मिल जाते हैं, क्योंकि यहाँ हिंदी का प्रचार-प्रसार बहुत है। यहाँ हिंदी परीक्षा की अनिवार्य भाषा है।

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प्रश्न 3.
त्रिवेन्द्रम से कन्याकुमारी तक लगातार बस्ती होने से ऐसा जान पड़ता है, मानो त्रिवेन्द्रम ही पचास मील तक चला गया हो। इतनी घनी आबादी भारत के किसी भाग में नहीं है। मार्ग में गाड़ी पंचर हो जाने से हम एक निकटवर्ती कुएँ पर गए जहाँ तमिल स्त्रियाँ ताड़ की बनी हुई बाल्टी से पानी खींच रही थीं। उन्होंने हमें प्यासा, अनुमान कर स्वयं पानी पिलाया। उन्हें हम अजनबियों को देखकर कुतूहल होता था और हमें उनके नीचे तक लटके फटे कानों से सोने के कर्णफूल देखकर आश्चर्य होता था। ऐसा जान पड़ता था कि कान अब अधिक भार नहीं सह सकेंगे, फट ही पड़ेंगे। दक्षिण में मामूली स्त्रियाँ सोने के आभूषण पहनती हैं। संभ्रान्त परिवार की स्त्रियाँ हीरे, मोती, जवाहरात को काम में लाती हैं। सोना उनके लिए हल्की धातु है। (Page 76)

शब्दार्थ:

  • आबादी – जनसंख्या।
  • कुतूहल – आश्चर्य।
  • आभूषण – जेवर।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश आचार्य विनय मोहन शर्मा द्वारा रचित यात्रा-वृत्तांत ‘दक्षिण भारत की एक झलक’ से उद्धृत है। लेखक केरल की सघन जनसंख्या और तमिल स्त्रियों की आभूषणप्रियता का वर्णन करता हुआ कर रहा है।

व्याख्या:
लेखक कहता है कि त्रिवेन्द्रम से कन्याकुमारी तक लगातार बस्ती ही बस्ती थी। उस बस्ती को देखकर लमता था, मानो त्रिवेन्द्रम ही पचास मील तक फैला हुआ हो। इतनी अधिक सघन आबादी (जनसंख्या) भारत के किसी भाग में नहीं है जितना त्रिवेन्द्रम से कन्याकुमारी के बीच फैले भाग में है। लेखक कहता है कि कन्याकुमारी की ओर जाते हुए उनकी गाड़ी में पंचर हो गया इसलिए गाड़ी में सवार हम सभी उतरकर पास वाले कुएँ पर चले गए। वहाँ हमने देखा कि तमिल स्त्रियाँ ताड़ के पत्तों से बनी हुई बाल्टी से पानी खींच रही थीं। उन्होंने हम लोगों को प्यासा जानकर अंदाजे से स्वयं ही पानी पिलाया।

उन तमिल स्त्रियों को हम अपरिचितों को देखकर आश्चर्य होता था और हम लोगों को उन स्त्रियों के नीचे तक लटके फटे हुए कानों में सोने के कर्णफूल देखकर आश्चर्य होता था। कहने का भाव यह कि वे तमिल स्त्रियाँ हम अपरिचितों को आश्चर्य से देख रही थीं तो हम लोगों को भी उनके कानों में सोने के कर्णफल नामक आभूषण देखकर आश्चर्य हो रहा था। उन स्त्रियों के कान भी कटे-फटे हुए थे।

उनके कानों की स्थिति देखकर लगता था कि उनके नीचे तक लटके-फटे हुए कान अब अधिक वजन नहीं सह सकेंगे। यदि और थोड़ा वजन अधिक डाला, तो कान फट ही जायेंगे। लेखक बताता है कि दक्षिण भारत में साधारण वर्ग की स्त्रियाँ सोने के जेवर धारण करती हैं और उच्च वर्ग या कुल की स्त्रियाँ हीरे, मोती और जवाहरात के आभूषण पहनती हैं। सोना उनके लिए हल्की वस्तु है; अर्थात् उनके लिए मामूली चीज है।

विशेष:

  1. लेखक ने दक्षिण भारत की सामाजिक स्थिति का वर्णन किया है।
  2. वर्णानात्मक शैली है।
  3. भाषा परिमार्जित खड़ी बोली है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

प्रश्न (i)
तमिल स्त्रियों को क्या देखकर आश्चर्य हो रहा था?
उत्तर:
तमिल स्त्रियों को अजनबियों को अपने गाँव में देखकर आश्चर्य हो रहा था।

प्रश्न (ii)
तमिल स्त्रियों के कटे-फटे कान क्या संकेत कर रहे थे?
उत्तर:
तमिल स्त्रियों के कटे-फटे और लटके कान इस बात की ओर संकेत कर रहे थे कि अपने कानों में वज़नदार आभूषण पहनती होंगी, जिनके कारण कान नीचे तक लटककर फट गए हैं। अब उन कानों में अधिक भार सहने की क्षमता नहीं : रह गई है।

प्रश्न (iii)
तमिल स्त्रियों ने लेखक और उसके साथियों को पानी क्यों पिलाया?
उत्तर:
लेखक और उसके साथी गाड़ी में पंचर होने के कारण गाड़ी से उतरकर एक पास के कुएँ पर गए। वहाँ पानी भरने वाली तमिल स्त्रियों ने समझा कि वे लोग प्यासे हैं और पानी पीने के लिए ही कुएँ पर आए हैं। इसलिए तमिल स्त्रियों ने उन्हें पानी पिलाया।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्न

प्रश्न (i)
दक्षिण में साधारण स्त्रियों और संभ्रान्त स्त्रियों के आभूषणों में क्या अंतर होता है?
उत्तर:
दक्षिण में साधारण स्त्रियाँ सोने के आभूषण पहनती हैं और संभ्रान्त परिवार की स्त्रियाँ हीरे, मोती और जवाहरात के आभूषण काम में लाती हैं।

प्रश्न (ii)
त्रिवेन्द्रम से कन्याकुमारी की आबादी के सम्बन्ध में लेखक ने क्या कहा है?
उत्तर:
त्रिवेन्द्रम से कन्याकुमारी की आबादी के संबंध में लेखक ने कहा कि इतनी घनी आबादी तो भारत के किसी भी भाग में नहीं है। दूसरे शब्दों में केरल के इस क्षेत्र में बहुत सघन जनसंख्या है।

प्रश्न 4.
यहाँ हिंदी साहित्य में गति का परिचय मिलता है। यहाँ की हिंदी प्रचार सभा को दक्षिण में हिंदी की प्रमुख विद्यापीठ का रूप प्रदान कर रही है। यहाँ से हिंदी के कई सौ अध्यापक-अध्यापिकाएँ प्रतिवर्ष शिक्षा ग्रहण कर दक्षिण की अनेक शालाओं तथा विश्वविद्यालय के कॉलेजों में हिंदी-अध्यापन कार्य कर रहे हैं। महात्माजी ने जब मद्रास में हिंदी-प्रचार की नींव रखी तब हृषीकेशजी के साथ-साथ रघुवरदयालजी जो यहाँ के हिंदी प्रेमी जन हैं वे भी सभा में पहुँचे।

तब से आज तक हिंदी को राष्ट्रभाषा का अंग मानकर ये सभा में कार्य कर रहे हैं। दक्षिण भारत में कई अहिंदी भाषा-भाषी सज्जन हिंदी की बड़ी सेवा कर रहे हैं। रघुवरदयाल मिश्र ने बतलाया कि तंजोर पुस्तकालय में मणि-प्रवाल शैली में लिखित बहुत पुराना हस्तलिखित ग्रन्थ है, जिसमें अन्य भाषाओं के साथ-साथ हिंदी में भी रचनाएँ हैं। (Page 77)

शब्दार्थ:

  • गति – प्रगति।
  • महात्माजी – महात्मा गाँधी जी।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश आचार्य विनय मोहन शर्मा द्वारा रचित यात्रा-वृत्तांत ‘दक्षिण भारत की एक झलक’ से उद्धृत है। लेखक इस गाद्यांश में चेन्नई की हिंदी प्रचार सभा के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहता है।

व्याख्या:
लेखक कहता है कि जब वह दक्षिण भारत की यात्रा करते हुए त्रिचिन्नापल्ली से मद्रास पहुँचा, तो उसे यहाँ हिंदी साहित्य की प्रगति की जानकारी प्राप्त हुई। दूसरे शब्दों में, मद्रास में हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार में पर्याप्त प्रगति देखने को मिली। यहाँ स्थापित हिंदी प्रचार सभा दक्षिण में हिंदी की प्रमुख विद्यापीठ के रूप में कार्य कर रही है। यहाँ से हिंदी प्रचार सभा के कई सौ अध्यापक और अध्यापिकाओं को हर वर्ष प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। वे प्रशिक्षण प्राप्त करके दक्षिण भारत के अनेक स्कूलों और विश्वविद्यालय के अनेक कॉलेजों में हिंदी पढ़ा रहे हैं।

महात्मा गाँधीजी ने जब मद्रास में हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की तब हृषीकेशजी के साथ-साथ एक हिंदी प्रेमी सज्जन रघुवरदयाल भी सभा में पहुँचे थे। वे तब से लेकर आज तक हिंदी को राष्ट्रभाषा का अंग मानकर सभा में कार्य कर रहे हैं। लेखक कहता है कि दक्षिण भारत में कई अहिंदी भाषा-भाषी व्यक्ति भी हिंदी की बड़ी सेवा कर रहे हैं; अर्थात् अहिंदी भाषा-भाषी भी हिंदी के प्रचार-प्रसार में जुटे हुए हैं। स्वर्गीय रघुवरदयाल मिश्र ने बतलाया कि तंजोर पुस्तकालय में मणि-प्रवाल शैली में लिखित बहुत पुराना हाथ से लिखा ग्रंथ है, जिसमें अन्य भाषाओं के साथ-साथ हिंदी की रचनाएँ भी सम्मिलित हैं।

विशेष:

  1. मद्रास की हिंदी प्रचार सभा के कार्यों का वर्णन किया गया है।
  2. वर्णानात्मक शैली है।
  3. भाषा परिमार्जित खड़ी बोली है।

गद्य पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
‘हिंदी साहित्य में गति का परिचय मिलता है’ से लेखक का क्या आशय
उत्तर:
इससे लेखक का आशय है कि मद्रास की हिंदी प्रचार सभा के प्रयत्नों से दक्षिण भारत में हिंदी प्रचार-प्रसार में पर्याप्त प्रगति देखने को मिलती है।

प्रश्न (ii)
दक्षिण की हिंदी प्रचार सभा विद्यापीठ के रूप में किस प्रकार कार्य कर रही है?
उत्तर:
दक्षिण की हिंदी प्रचार सभाप्रतिवर्ष कई सौ अध्यापक-अध्यापिकाओं को हिंदी अध्यापन का प्रशिक्षण प्रदान करती है। वे अध्यापक-अध्यापिकाएँ दक्षिण भारत के स्कूल और कॉलेजों में हिंदी-अध्यापन का कार्य कर रहे हैं। इस प्रकार यहाँ की प्रचार सभा हिंदी विद्यापीठ के रूप में कार्य कर रही है।

गद्यांश की विषय-वस्त पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
रघुवरदयाल अहिंदीभाषी होते हुए भी हिंदी प्रचार सभा में कार्य क्या कर रहे थे?
उत्तर:
रघुवरदयाल को हिंदी से प्रेम था। वे दक्षिण की हिंदी प्रचार सभा में उसकी स्थापना से लेकर आज तक कार्य कर रहे हैं। वे हिंदी को राष्ट्रभाषा का अंग मानकर सभा में कार्य कर रहे थे।

प्रश्न (ii)
रघुवरदयाल मिश्र ने लेखक को क्या जानकारी दी थी?
उत्तर:
रघुवरदयाल मिश्र ने लेखक को जानकारी दी थी कि तंजोर पुस्तकालय में मणि-प्रवाल शैली में रचित एक बहुत पुराना ग्रंथ है, जो हाथ से लिखा हुआ है। उस ग्रंथ में अन्य भाषाओं के साथ-साथ हिंदी में भी रचनाएँ हैं।

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The Red Rice Granary Question Answer Class 10 English The Spring Blossom Chapter 16 MP Board

Class 10 English The Spring Blossom Chapter 16 The Red Rice Granary Questions and Answers

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The Red Rice Granary Class 10th Question Answer

Word Power

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1. Disaster means:
(a) a pleasing incident
(b) distantly situated
(c) which brings happiness
(d) an unexpected even that causes loss of lives or wealth
Answer:
(d) an unexpected even that causes loss of lives or wealth

2. Paddy fields are:
(a) fields where rice is grown
(b) big fields
(c) fields where wheat it grown
(d) fertile and big fields
Answer:
(a) fields where rice is grown

3. The bags that she got from the rich people were brimming over with:
(a) useful clothes
(b) junk
(c) precious ornaments
(d) food packets
Answer:
(b) junk

4. The writer of this article was invited to deliver a speech in a:
(a) company
(b) party
(c) village
(d) press conference
Answer:
(a) company

5. The ……….. used to be the superior one.
(a) polished rice
(b) white rice
(c) red rice
(d) yellow rice
Answer:
(b) white rice

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How Much I have Understand?

A. Answer the following questions. (One or two sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)।

Question 1.
Why was the writer invited to Bangalore?
(व्हाय वॉज़ द राईटर इनवाइटिड टू बैंग्लोर?)
लेखक को बैंगलौर आने के लिए न्यौता क्यों मिला?
Answer:
The write was invited to a reputed company in Bangalore to deliver a lecture on Corporate Social Responsibility.
(द राईटर वॉज़ इन्वाइटेड टू अ रेप्यूटिड कम्पनी इन बैंग्लोर टू डिलिवर अलैक्चर ऑन कॉर्पोरेट सोश्यल रिस्पॉन्सिबिलिटी।)
लेखक को बैंगलौर में एक ख्यातिप्राप्त कम्पनी में सामूहिक सामाजिक दायित्व पर भाषण देने के लिए न्यौता दिया गया था।

Question 2.
What was the reaction of the young girls and boys after the writer’s lecture?
(व्हॉट वॉज़ द रिएक्शन ऑफ द यंग गर्ल्स एण्ड बॉयज़ आफ्टर द राइटर्स लैक्चर?)
लेखक के भाषण का जवान लड़के व लड़कियों पर क्या प्रभाव हुआ?
Answer:
The young girls and boys were very emotional after the writer’s lecture. All of them became willing to offer something or the other for donation.
(द यंग गर्ल्स एण्ड बॉयज़ वर् वैरी इमोशनल आफ्टर द राईटर्स लैक्चर। ऑल ऑफ देम बिकेम विलिंग टू ऑफर समथिंग और द अदर फॉर डोनेशन।)
लेखक के भाषण के बाद जवान लड़के व लड़कियाँ भावुक हो गए। सभी दान के लए कुछ-न-कुछ देने के इच्छुक थे।

Question 3.
How did the writer assure the boys and girls?
(हाउ डिड द राईटर एश्योर द बॉयज़ एण्ड गर्ल्स?)
लेखक ने लड़के व लड़कियों को कैसे आश्वासित किया?
Answer:
The writer assured the boys and girls by asking them to send their bags of things to be donated to his office and saying that she would see that they reach the right persons.
(द राइटर एश्योर्ड द बॉयज़ एण्ड गर्ल्स बाइ आस्किंग देम टू सेण्ड देयर बैग्स ऑफ थिंक्स टू बी डोनेटिड टू हिज़ ऑफिस एण्ड सेइंग दैट शी वुड सी दैट दे रीच द राइट पर्सन्स।)
लेखिका ने लड़कों व लड़कियों को आश्वासन दिया कि वे अपने दान करने के लिए बनाये गये थैले उसके दफ्तर भेज दें। वह उन्हें सही व्यक्तियों तक पहुँचा देगी।

Question 4.
How did the grandparents of the writer live?
(हाउ डिड द ग्रैण्डपेरेन्ट्स ऑफ द राइटर लिव?)
लेखिका के दादा-दादी कैसे रहते थे?
Answer:
The grandparents of the writer lived like flowers with fragrance in the forest, enchanting everyone around them, but hardly noticed by the outside world. They did their work wholeheartedly without expecting anything from anybody in their life.

(द ग्रैण्डपेरेन्ट्स ऑफ द राइटर लिव्ड लाइक फ्लावर्स विद फ्रेग्रेन्स इन द फॉरेस्ट, एन्चेंण्टिंग एवीवन अराउण्उ देम, बट हार्डलि नोटिस्ड बाइ द आऊटसाइड वर्ल्ड। दे डिड देयर वर्क होलहार्टिडलि विदाऊट एक्सपेक्टिंग एनीथिंग फ्रॉम एनीबडी इन देयर लाइफ।)

लेखिका के दादा-दादी वन के सुगन्धित फूलों जैसा जीवन व्यतीत करते थे, वे अपने आस-पास हर किसी को आनन्दित रखते थे, मगर बाहर की दुनिया उनसे अनजान थी। वे अपना काम दिल से करते थे बिना किसी से भी किसी प्रकार की उम्मीद रखे।

Question 5.
What question had been bothering the author for a long time?
(व्हॉट क्वैश्चन हैड बीन बॉदरिंग द ऑथर फॉर अ लाँग टाइम?)
लेखिका को लम्बे समय से कौन-सा प्रश्न परेशान कर रहा था?
Answer:
The question that why she and her grandparents ate red rice always at night and give the better quality rice to the poor people bothered author for a long time.
(दे क्वैश्चन दैट व्हाय शी एण्ड हर ग्रॉण्डपेरेन्ट्स एट रेड राइस ऑल्वेज़ एट नाइट एण्ड गिव द बैटर क्वॉलिटी राइस टूद पूअर पीपल बॉदर्ड द ऑथर फॉर अ लाँग टाइम।)
लेखिका को यह प्रश्न कि वह और उसके दादा-दादी रात में लाल चावल खाते थे वह बढ़िया चावल गरीब लोगों को क्यों दान करते थे लम्बे समय से परेशान कर रहा था।

Question 6.
Why didn’t they eat white rice at night?
(व्हाय डिडन्ट दे ईट व्हाइट राइस एट नाइट?)
वे रात में सफेद चावल क्यों नहीं खाते थे?
Answer:
They didn’t eat white rice at night because they donated it to the poor as they thought that they should give anybody the best they have.
(दे डिडन्ट ईट व्हाइट राइस एट नाइट बिकॉज़ दे डोनेटिड इट टू द पूअर एज़ दे थॉट दैट शुड गिव एनीबडी द बेस्ट दे हैव।)
वे रात में सफेद चावल नहीं खाते थे क्योंकि वे उसे गरीबों को दान में दिया करते थे क्योंकि वे यह सोचते थे कि उन्हें किसी को भी अपनी उच्चतम वस्तु देनी चाहिए।

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B. Answer the following questions. (Three or four sentences)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
How did squirrels help Shri Rama during the construction of the bridge between India and Lanka?
(हाउ डिड स्किवरल्स हैल्प श्री राम ड्युरिंग द कन्स्ट्रक्शन ऑफ द ब्रिज बिटवीन इण्डिया एण्ड लंका?)
गिलहरियों ने श्री राम की भारत व लंका के बीच सेतु बनाने में किस प्रकार मदद की?
Answer:
Squirrels helped Shri Rama during the construction of the bridge between India and Lanka by bringing a handful of sand.
(स्किवरलस् हैल्प्ड् श्री राम ड्यूरिंग द कंस्ट्रक्शन ऑफ द ब्रिज बिटवीन इण्डिया एण्ड लंका बाइ ब्रिगिंग अ हैण्डफुल ऑफ सैण्ड।)
गिलहरियों ने श्री राम को भारत व लंका के बीच सेतु निर्माण में एक मुट्ठी रेत लाकर मदद की।

Question 2.
Why did the writer’s initial feeling of pride on receiving the donations in kind turn in shock and surprise on opening the bags containing them?
(व्हाय डिंड द राइटर्स इनिशियल फीलिंग ऑफ प्राइड-ऑन् रिसीविंग द डोनेशन्स इन काइन्ड टर्न इन शॉक एण्ड सरप्राइज़ ऑन ओपनिंग द बैग्स कन्टेनिंग देम?)
लेखिका की गर्व की भावना दान में आये हुए थैलों को खोलने पर सदमे व आश्चर्य में क्यों बदल गई?
Answer:
The writer’s initial feeling of pride on receiving the donations in kind turned into shock and surprise on opening the bags because the bags were full of all kinds of junk. It was apparent that instead of sending the material to a garbage it was transferred to the writer’s office.

(द राईटर्स इनिशियल फीलिंग ऑफ प्राइड ऑन रिसीविंग द डोनेशन्स इन काइन्ड टर्ड इन्टू शॉक एण्ड सरप्राइज़ ऑन ओपनिंग द बैग्स बिकॉज़ द बैग्स वर् फुल ऑफ ऑल काइन्ड्स ऑफ जंक। इट वॉज़ एपरेन्ट दैट इन्स्टैड ऑफ सेन्डिंग द मैटीरियल टू अ गारबेज इट वॉज़ ट्रान्सफर्ड टू द राईटर्स ऑफिस।)

लेखिका को दान की वस्तुएँ पाने के बाद सदमा लगा व अचरज हुआ क्योंकि दान के थैलों में हर तरह का कचरा भरा था। यह स्पष्ट था कि लोगों ने सामान को कबाड़खाने भेजने के बजाय लेखिका के दफ्तर भेज दिया था।

Question 3.
How did people live in the villages during the writer’s childhood?
(हाउँ डिड पीपल लिव इन द विलेजेज़ ड्यूरिंग द राईटर्स चाइल्डहुड?)
लेखिका के बचपन के समय लोग गाँवों में किस प्रकार रहते थे?
Answer:
During writer’s childhood there was no communal divide in the village. People from different communities lived together in peace.
(ड्यूरिंग राईटर्स चाइल्डहुड देयर वॉज़ नो कम्यूनल डिवाइड इन द विलेज। पीपल फ्रॉम डिफ्रेन्ट कम्यूनिटीज़ लिव्ड टुगेदर इन पीस।)
लेखिका के बचपन के समय गाँवों में जातीय विभाजन नहीं था। अलग-अलग समुदायों के लोग एक साथ शान्तिपूर्वक रहते थे।

Question 4.
Write any four lines as quoted by the writer from the vedas.
(राईट एनी फोर लाइन्स एज़ कोटेड बाइ द राईटर फ्रॉम द वेदास।)
वेदों से लेखिका द्वारा लिखित पंक्तियों में से चार पंक्तियाँ लिखो।
Answer:
The four lines from the vedas are :
Donate with kind words.
Donate with happiness.
Donate with sincerity.
Donate only to the needy.

(द फोर लाइन्स फ्रॉम द वेदाज़ आर :
डोनेट विद काइन्ड वर्ड्स।
डोनेट विद हैप्पिनेस।
डोनेट विद सिन्सेरिटी।
डोनेट ओनलि ट्रद नीडी।)

वेदों से चार पंक्तियाँ हैं
मधुर शब्दों के साथ दान दो।
खुशी से दान दो।
ईमानदारी से दान दो।
सिर्फ जरूरतमन्दों को ही दान दो।

Question 5.
How did the writer’s grandparents help the poor people?
(हाउ डिड द राईटर्स ग्रैण्डपेरेन्ट्स हैल्प द.पूअर पीपल्?)
लेखिका के दादा-दादी गरीबों की मदद कैसे करते थे?
Answer:
Writer’s grandparents helped the poor by giving them white rice while they themselves ate poor quality red rice.
(राईटर्स ग्रैण्डपेरेन्ट्स हेल्प्ड् द पूअर बाइ गिविंग देम व्हाईट राईस व्हाइल दे देमसेल्वस् एट पूअर क्वॉलिटी रेड राईस।)
लेखिका के दादा-दादी गरीबों की सफेद चावल दान करके मदद करते थे व वे स्वयं निम्न श्रेणी के लाल चावल खाते थे।

Question 6.
What is the real service to God according to the writer’s grandmother?
(व्हॉट इज़ द रिअल सर्विस टू गॉड एकार्डिग टू द राइटर्स ग्रैण्डमदर?)
लेखिका की दादी के हिसाब से ईश्वर के प्रति असली सेवा क्या है?
Answer:
According to the writer’s grandmother, serving people is the real service to God because He is not there in temple, mosque or church, He is with the people.
(एकॉर्डिग टू द राइटर्स ग्रैण्डमदर, सविंग पीपल इज़ द रीयल सर्विस टू गॉड बिकॉज़ ही इज़ नॉट देयर इन द टैम्पल, मॉस्क और चर्च, ही इज़ विद पीपल्।)
लेखिका की दादी के हिसाब से, लोगों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है क्योंकि वो मन्दिर, मस्जिद या चर्च में नहीं बल्कि लोगों में है।

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Language Practice

A. Make negatives and write them in your notebooks.
(नकारात्मक वाक्य बनाइए।)
1. He is very fat.
Answer:
He is not very fat.

2. I believe in God.
Answer:
I do not believe in God.

3. Kamla learns English.
Answer:
Kamla does not learn English.

4. I went to see the book-fair.
Answer:
I did not go to see the book-fair.

5. Rahim wrote a good article for the school magazine.
Answer:
Rahim did not write a good article for the school magazine.

6. I can speak English now.
Answer:
I can’t speak English now.

B. Make questions as indicated against each sentence.
(प्ररन बनाइए।)

1. The boy was playing (Y/N question)
Answer:
Was the boy playing?

2. Prakash plays tennis. (Wh question)
Answer:
What does Prakash play?

3. They learn English. (Y/N question)
Answer:
Do they learn English?

4. Girls sang sweet songs yesterday. (Wh question)
Answer:
When did girls sing sweet songs?

Listening Time

The teacher will read out the instructions given below and students will try to draw the picture according to the instructions. (Ask the students not to write anything except drawing.)
(सुनो व दिये गये निर्देशों के अनुसार चित्र बनाओ।)

  1. Take a fresh page of your notebook.
  2. Draw a line across the middle of the page.
  3. Draw some waves above the line.
  4. On the left hand corner draw a sailing boat.
  5. In the right hand corner draw a swimmer.
  6. Draw a dotted line from the swimmer to the shore.
  7.  Draw a man lying on the beach in the left hand corner.
  8. The swimmer is shouting help! help! Write help-help in speech bubbles.
  9. Show the quickest way from the man on the beach to reach the swimmer.

Answer:
Do yourself.

Speaking Time

Tell about yourself, when do you wear these things?
(बताइए कि आप निम्न वस्तुएँ कब पहनेंगे?)
(a tie, boots, sandals, gloves, jeans, make-up, a hat, shorts, trainers, glasses.)
Answer:
Students can talk as follows :
I wear a tie when I go to school. I wear boots in rainy season. I wear sandals when I go to a party. I wear jeans occasionally. I never wear make-up. I wear a hat when it’s too hot or raining. I wear shorts and trainers when I go for jogging. I wear glasses when I read newspapers.

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Writing Time

Describe the scenes in not more than 50 words.
(50 शब्दों में निम्न दृश्यों का वर्णन करिए)

1. A flood scene
2. A scene after an earthquake.
Answer:
1. A Flood Scene :
Last year, flood occurred in our village. The whole village drowned in water. The villagers took shelter on the high mountain peaks. Many were drowned. There were household utensils and articles seen floating in the water. There was great loss of life and property. There was chaos all around. Relief packets of food were being thrown down from the aeroplanes sent by the Government.

2. A Scene after an Earthquake :
Last year there was an earthquake in Gujarat. It caused a great loss of life and property. Several high buildings and houses had tumbled down, and several people were burried under them. Only in a few seconds a havoc was created. Several children had become orphan and many had lost their families. Government crew was trying to take out those who were alive from the heap and relief programme was going on.

Things to do

Discuss with your teachers, parents/elders and find out about the natural calamities. Fill up the charts with the information required and write in your project notebook.
(अपने शिक्षकों, माता-पिता/बड़ों से चर्चा कर प्राकृतिक आपदाओं के बारे में जानें। प्राप्त जानकारी को पुस्तक में दिये गये चार्ट में भरें।
Answer:
Students should discuss with their teachers, parents/elders and fill in the information about natural calamities themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

The Red Rice Granary Difficult Word Meanings

Havoc (हैवॉक)-situation in which there is a lot of damage, destruction or disorder (बरबादी, तबाही); Affluent (एफ्लूएन्ट)-having a lot of money and good standard of living (धनाढ्य); Vessel (वैसल)-a container used for holding liquids such as a bowl, cup etc. (बर्तन); Brimming (ब्रिमिंग)to be full of something, to fill something (भरा हुआ); Granary (ग्रेनेरी)-a building where grain is stored (a store room for grain) (भण्डारगृह); Alms (आम्ज)-money, clothes and food that are given to poor people (भिक्षा दान)

The Red Rice Granary Summary, Pronunciation & Translation

Every year, our country has to face natural disasters in some form. It may be an earthquake in Gujarat, floods in Orissa or a drought in Karnataka. In a poor country, these calamities create havoc.

In the course of my work, I have found that after such calamities, many people like to donate money or materials to relief funds. We assume that most donations come from rich people, but that is not true. On the contrary, people from the middle class and lower middle class help more. Rarely do rich people participate wholeheartedly.

(एवरी यीअर, आवर कंट्री हैज़ टू फेस नैचुरल डिज़ास्टर्स इन सम फॉर्म. इट मे बी ऐन अर्थक्वेक इन गुजरात, फ्लड्स इन उड़ीसा ऑर अ ड्रॉट इन कर्नाटका. इन अ पूअर कंट्री, दीज़ कलैमिटीज क्रीयेट हैवक.

इन द कोर्स ऑफ माई वर्क, आई हैव फाऊण्ड दैट आफ्टर सच कलैमिटीज़ मैनी पीपल लाईक टू डोनेट मनी ऑर मैटेरियल्स टू रिलीफ फण्ड्स. वी अज्यूम दैट मोस्ट डोनेशन्स कम फ्रॉम रिच पीपल, बट दैट इज़ नॉट ट्र. ऑन द कॉन्ट्ररी, पीपल फ्रॉम द मिडल क्लास ऐण्ड लोअर मिडल क्लास हैल्प मोर. रेयरली डू रिच पीपल पार्टिसिपेट होलहार्टिली.)

अनुवाद :
प्रत्येक वर्ष हमारे देश को किसी न किसी प्रकार की प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ता है। चाहे वो गुजरात में भूकम्प हो, उड़ीसा में बाढ़ हो या फिर कर्नाटक में सूखा। एक गरीब देश में यह आपदाएँ तबाही मचा देती हैं।

अपने कार्य के दौरान, मैंने पाया कि ऐसी आपदाओं के पश्चात् बहुत से लोग धन व अन्य सामग्रियाँ राहत कोषों को दान देना पसन्द करते हैं। हम यह समझते हैं कि ज्यादातर दान अमीर लोगों से आता है, परन्तु यह सत्य नहीं है। इसके विपरीत मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग के लोग ज्यादा.मदद करते हैं। यदा-कदा ही अमीर लोग पूरे दिल से ऐसे कार्यों में भाग लेते हैं।

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A few years back, I was invited to a reputed company in Bangalore to deliver a lecture on Corporate Social Responsibility. Giving a speech is easy. But I was not sure how many people in the audience would really understand the speech and change themselves.

After my talk was over, I met many young girls and boys. It was an affluent company and the employees were well off and well-dressed. They were all very emotional after the lecture.

(अ फ्यू ईअर्स बैंक, आई वॉज इन्वाईटिड टू अ रेप्यूटिड कम्पनी इन बैंगलोर टू डेलिवर अ लेक्चर ऑन कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी. गिविंग अ स्पीच इज़ ईजी. बट आई वॉज़ नॉट श्योर हाऊ मैनी पीपल इन द ऑडियन्स वुड रीयली अण्डरस्टैण्ड द स्पीच ऐण्ड चेन्ज देम्सेल्ब्ज.

आफ्टर माई टॉक वॉज़ ओवर, आई मेट मैनी यंग गर्ल्स एण्ड बॉयज़. इट वॉज़ ऐन एफ्लूएण्ट कम्पनी ऐण्ड द एम्प्लॉयीज़ वर वैल-ऑफ ऐण्ड वैल-ड्रेस्ड. दे वर ऑल वेरी इमोशनल आफ्टर द लेक्चर.)

अनुवाद :
कुंछ वर्ष पूर्व, मुझे बैंगलोर (बंगलुरू) की एक प्रतिष्ठित कम्पनी में व्यावसायिक समूहों के सामाजिक उत्तरदायित्वों पर व्याख्यान देने हेतु आमंत्रित किया गया था। व्याख्यान अथवा भाषण देना आसान है। परन्तु मैं इस बात के प्रति आश्वस्त नहीं था कि श्रोताओं में से कितने लोग मेरे व्याख्यान को वास्तव में समझेंगे और स्वयं को बदलेंगे।

मेरा व्याख्यान खत्म होने के बाद, मैं बहुत सारे लड़के-लड़कियों से मिला। वह एक समृद्ध कम्पनी थी और उसके कर्मचारी संपन्न थे वह कपड़े भी अच्छे पहने हुए थे। वे सभी मेरे भाषण के बाद बेहद भावुक हो गए थे।

‘Madam, we buy so many clothes every month. Can we donate our old clothes to those people who are affected by the earthquake? Can you co-ordinate and send them?’

Some of them offered other things-
‘We have grown-up children, we would like to give their old toys and some vessels.’

I was very pleased at the reaction. It reminded me of the incident in Ramayana where during the construction of the bridge between India and Lanka, every squirrel helped Shri Rama by bringing a handful of sand.

Please send your bags to my office. I will see that they reach the right persons.”

(‘मैडम, वी बाय सो मैनी क्लोद्स एवरी मंथ. कैन वी डोनेट आवर ओल्ड क्लोद्स टू दोज़ पीपल हू आर अफेक्टिड बाय द अर्थक्वेक? कैन यू को-ऑर्डिनेट ऐण्ड सेण्ड देम?’

सम ऑफ देम ऑफर्ड अदर थिंग्स-
‘वी हैव ग्रोन-अप चिल्ड्रन, वी वुड लाइक टू गिव देयर ओल्ड टॉयज़ ऐण्ड सम वेसल्स.

आई वॉज़ वेरी प्लीज्ड ऐट द रियेक्शन. इट रिमाईण्डिड मी ऑफ द इन्सिडेण्ट इन रामायना व्हेअर ड्यूरिंग द कन्सट्रक्शन ऑफ द ब्रिज बिटवीन इण्डिया ऐण्ड लंका, एवरी स्क्विरल हैल्प्ड श्री रामा बाय ब्रिगिंग अ हैण्डफुल ऑफ सैण्ड.

‘प्लीज़ सेण्ड यॉर बैग्ज़ टू माई ऑफिस. आई विल सी दैट दे रीच द राईट पर्सन्स.’)

अनुवाद :
मैडम, हम हर महीने इतने सारे वस्त्र खरीदते हैं। क्या हम अपने पुराने वस्त्रों को भूकम्प पीड़ितों को दान कर सकते हैं? क्या आप समन्वयक बन उनको भिजवा सकती हैं?’

उनमें से कुछ ने दूसरी चीज़ों की पेशकश की। ‘हमारे बच्चे बड़े हो चुके हैं, हम उनके पुराने खिलौने व कुछ बर्तन देना चाहेंगे।’

मैं उन सब की प्रतिक्रिया पर बेहद खुश थी। मुझे रामायण की वह घटना याद आ गई जब भारत व लंका के बीच समुद्र पर सेतु बन रहा था तब हर एक गिलहरी ने एक मुट्ठी रेत लाकर श्री राम की मदद की थीं।

‘कृपया अपना बैग मेरे दफ्तर भिजवा दीजिएगा। मैं यह सुनिश्चित करूँगी कि आपका दिया सामान सही व्यक्तियों तक पहुँचे।’

Within a week, my office was flooded with hundreds of bags. I was proud that my lecture had proven so effective.

One Sunday, along with my assistants, I opened the bags. What we saw left us amazed and shocked. The bags were brimming over with all kinds of junk! Piles of high heeled slippers (some of them without the pair), torn undergarments, unwashed shirts, transparent, cheap saris, toys which had neither shape nor colour, unusable bed sheets, aluminium vessels, broken cassettes were soon heaped in front of us like a mountain. There were only a few good shirts, saris and usable materials.

(विदिन अ वीक, माई ऑफिस वॉज़ फ्लडिड विद हन्ड्रेड्स ऑफ बैग्ज़. आई वॉज प्राऊड दैट माई लेक्चर हैड प्रूवन सो इफैक्टिव.

वन सण्डे, अलॉन्ग विद माई असिस्टैण्ट्स, आई ओपन्ड द बैग्ज. व्हॉट वी सॉ लेफ्ट अस अमेज्ड ऐण्ड शॉक्ड. द बैग्ज़ वर ब्रिमिंग ओवर विद ऑल काईण्ड्स ऑफ जंक! पाईल्स ऑफ हाईहील्ड स्लिपर्स (सम ऑफ देम विदाऊट द पेअर), टॉर्न अंडरगारमेण्ट्स, अनवाश्ड शर्ट्स, ट्रास्पेरेण्ट, चीप साड़ीज़, टॉयज़ व्हेिंच हैड नीदर शेप नॉर कलर, अनयूज़ेबल बेडशीट्स, अल्यूमीनियम वेसल्स, ब्रोकन कैसेट्स वर सून हीप्ड इन फ्रण्ट ऑफ अस लाईक अ माऊण्टेन. देयर वर ओन्ली अ फ्यू गुड शर्ट्स, साड़ीज़ ऐण्ड यूज़ेबल मैटेरियल्स.)

अनुवाद :
एक सप्ताह के भीतर मेरा दफ्तर सैकड़ों बैगों से भर गया। मुझे गर्व था कि मेरा व्याख्यान इतना असरकारक सिद्ध हुआ।

एक रविवार, अपने सहायकों के साथ मैंने उन बैगों को खोला जो हमने देखा उससे हम हैरान व स्तंभित हो गए। वो बैग ऊपर तक सभी प्रकार की रद्दी कबाड़ से भरे हुए थे। ऊँची एड़ी की चप्पलों के ढेर (कुछ तो एक ही पैर के थे) फटे हुए अन्तः वस्त्र, बिना धुली कमीजें, पारदर्शी सस्ती घटिया साड़ियाँ, आकार व रंगहीन खिलौने, अप्रयोज्य चादरें, एलुमिनियम के बर्तन, टूटे-फूटे कैसटों का शीघ्र ही पहाड़ जैसा ढेर लग गया हमारे सामने। केवल कुछ ही अच्छी कमीजें, साड़ियाँ व प्रयोग योग्य चीजे थीं।

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It was apparent that, instead of sending the material to a garbage or the kabariwala, these people had transferred them to my office in the name of donation. The men and women I had met that day were bright, well travelled, well-off people. If educated people like them behaved like this, what would uneducated people do?

But then I was reminded of an incident from my childhood. I was born and brought up in a village in Karnataka’s Haveri district, called Shiggaon. My grandfather was a retired school teacher and my grandmother Krishtakka never went to school. Both of them had hardly travelled and had never stepped out of Karnataka. Yet they were hardworking people, who did their work wholeheartedly without expecting anything from anybody in their life. Their photographs never appeared in any paper, nor did they go up on a stage to receive a prize for the work they did. They lived like flowers with fragrance in the forest, enchanting everyone around them, but hardly noticed by the outside world.

इट वॉज़ अपेअरेण्ट दैट, इन्स्टेड ऑफ सेण्डिंग द मैटेरियल टू अ गारबेज ऑर द कबाडीवाला, दीज पीपल हैड ट्रांस्फर्ड देम ट्र माई ऑफिस इन द नेम ऑफ डोनेशन. द मेन ऐण्ड विमेन आई हैड मेट दैट डे वर ब्राईट, वैल-ट्रेवल्ड, वैल-ऑफ पीपल, इफ एजुकेटिड पीपल लाईक देम विहेव्ड लाईक दिस, व्हॉट वुड अनएजुकेटिड पीपल डू?

देन आई वॉज़ रिमाईण्डिड ऑफ ऐन इन्सिडेण्ट फ्रॉम माई चाईल्डहुड. आई वॉज़ बॉर्न ऐण्ड ब्रॉट अप इन अ विलेज इन कर्नाटकाज़ हवेरी डिस्ट्रिक्ट, कॉल्ड शिग्गाँव. माई ग्रैण्डफादर वॉज़ अ रिटायर्ड स्कूल टीचर ऐण्ड माई ग्रैण्डमदर क्रिश्टक्का नेवर वेण्ट टू स्कूल. बोथ ऑफ देम हैड हार्डली ट्रैवल्ड ऐण्ड हैड नेवर स्टेप्पड आऊट ऑफ कर्नाटका. यट दे वर हार्डवर्किंग पीपल, हू डिड देयर वर्क होलहार्टिडली विदाऊट एक्स्पेक्टिंग एनीथिंग फ्रॉम एनीबडी इन देयर लाईफ. देयर फोटोग्राफ्स नेवर अपीयर्ड इन एनी पेपर, नॉर डिड दे गो अप ऑन अ स्टेज टू रिसीव अ प्राईज़ फॉर द वर्क दे डिड. दे लिव्ड लाईक फ्लावर्स विद फ्रेगरेन्स इन द फॉरेस्ट, एन्चैण्टिंग एवरीवन अराऊण्ड देम, बट हार्डली नोटिस्ड बाई द आऊटसाईड वर्ल्ड.

अनुवाद :
यह स्पष्ट था कि इन सामानों को कूड़े में फेंकने या कबाड़ी वाले को देने के बजाए इन लोगों ने दान के नाम पर मेरे दफ्तर में भिजवा दिया था। जिन पुरुषों और महिलाओं से मैं उस दिन मिली थी वे सब बड़े सभ्रांत, दुनिया घूमे हुए व संपन्न लोग थे। यदि उनके जैसे पढ़े-लिखे लोग ऐसा बर्ताव करेंगे तो फिर अनपढ़ लोग क्या करेंगे?

परन्तु तभी मुझे बचपन की एक घटना याद आ गई। मैं कर्नाटक राज्य के हवेरी जिले के एक गाँव शिग्गाँव में जन्मी व पली-बढ़ी। मेरे दादाजी एक सेवानिवृत्त विद्यालय के अध्यापक थे और मेरी दादी क्रिश्टक्का कभी विद्यालय नहीं गईं। दोनों ने ही न के बराबर यात्राएँ की थी और उन्होंने कभी कर्नाटक से बाहर कदम नहीं रखा। फिर भी वे कठोर परिश्रमी लोग थे जो अपना कार्य पूरे दिल से करते थे, जीवन में किसी से किसी भी चीज़ की आशा किए बिना। उनके चित्र कभी किसी समाचार पत्र में नहीं छपे, न ही वे कभी किसी मंच पर अपने किए गए कार्य का पुरस्कार लेने के लिए चढ़े। वे जंगल के सुगंधित पुष्पों की भाँति जिए, अपने आस-पास के सभी लोगों को मोहित करते परन्तु बाहरी दुनिया जिनके बारे में अनभिज्ञ रही।

In the village we had paddy fields and we used to store the paddy in granaries. There were two granaries. One was in the front and the other at the back of our house. The better quality rice, which was white, was always stored in the front granary and the inferior quality, which was little thick and red, was stored in the granary at the back.

In those days, there was no communal divide in the village. People from different communities lived together in peace. Many would come to our house to ask for alms. There were Muslim Fakirs, Hindu Dasalahs who roamed the countryside singing devotional songs, Yellamma Jogathis who appeared holding the image of Goddess Yellamma over their heads, poor students and invalid people.

(इन द विलेज वी हैड पैडी फील्ड्स ऐण्ड वी यूज्ड टू स्टोर द पैडी इन ग्रैनरीज़. देयर वर टू ग्रैनरीज़. वन वॉज़ इन द फ्रण्ट ऐण्ड द अदर ऐट द बैक ऑफ आवर हाऊज़. द बैटर क्वालिटी राईस, व्हिच वॉज व्हाईट, वॉज़ आल्वेज़ स्टोर्ड इन द फ्रण्ट ग्रैनरी ऐण्ड द इन्फीरियर क्वालिटी, व्हिच वॉज़ लिटिल थिक ऐण्ड रेड, वॉज़ स्टोर्ड इन द ग्रैनरी ऐट द बैंक.

इन दोज़ डेज़, देयर वॉज़ नो कम्यूनल डिवाईड इन द विलेज. पीपल फ्रॉम डिफरण्ट कम्यूनिटीज़ लिव्ड टुगेदर इन पीस. मैनी वुड कम टू आवर हाऊज़ टू आस्क फॉर आम्स. देयर वर मुस्लिम फकीर्स, हिंदु दसालाहज़ हू रोम्ड द कंट्रीसाईड सिंगिंग डिवोशनल सॉनस, यलम्मा जोगथीज़ हू अपीयर्ड होल्डिंग द इमेज ऑफ गॉडेस यलम्मा ओवर देयर हेड्स, पूअर स्टुडेण्ट्स ऐण्ड इन्वैलिड पीपल.)

अनुवाद :
गाँव में हमारे धान के खेत थे और हम धान को धान्यागार में रखते थे। दो धान्यागार थे। एक सामने की ओर था और दूसरा हमारे घर के पीछे। अच्छी किस्म का चावल जो सफेद होता था हमेशा सामने वाले धान्यागार में रखा जाता था और निम्न किस्म का चावल जो थोड़ा मोटा व लाल होता था पीछे वाले धान्यागार में।

उन दिनों गाँव में किसी प्रकार का साम्प्रदायिक भेद-भाव नहीं था। सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर शान्ति के साथ रहते थे। बहुत से लोग हमारे यहाँ भीख मांगने आते थे। वहाँ मुसलमान फकीर थे, हिंदु दसलाह थे जो भक्ति गीत गाते हुए गाँव-गाँव घूमते थे और यलम्मा जागथी समुदाय के लोग जो देवी यलम्मा की मूर्ति अपने सिर के ऊपर पकड़े दिख जाते थे, गरीब विद्यार्थी एवं अपंग लोग।

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We never had too much cash in the house and the only help my grandfather could give these people was in the form of rice. People who receive help do not talk too much. They would receive the rice, smile and raise their right hand to bless us. Irrespective of their religion, the blessing was always “May God bless you.” My grandfather always looked happy after giving them alms.

I was a little girl then and not too tall. Since the entrance to the front granary was low, it was difficult for grown-ups to enter. So I would be given a small bucket and sent inside. There I used to fill up the bucket with rice and give it to them. They would tell me how many measures they wanted.

(वी नेवर हैड टू मच कैश इन द हाऊज़ ऐण्ड द ओन्ली हैल्प माई ग्रैण्डफादर कुड गिव दीज़ पीपल वॉज़ इन द फॉर्म ऑफ राईस. पीपल हू रिसीव हैल्प डू नॉट टॉकट टू मच. दे वुड रिसीव द राईस, स्माईल ऐण्ड रेज़ देयर राईट हैण्ड टू ब्लैस अस. इररेस्पेक्टिव ऑफ देयर रिलीजन, द ब्लैसिंग वॉज़ आल्वेज़ “मे गॉड ब्लैस यू.” माई ग्रैण्डफादर आल्वेज़ लुक्ड हैप्पी आफ्टर गिविंग देम आम्स.

आई वॉज़ अ लिटल गर्ल देन ऐण्ड नॉट टू टॉल. सिन्स द एन्ट्रेन्स टू द फ्रण्ट ग्रैनरी वॉज़ लो, इट वॉज़ डिफिकल्ट फॉर ग्रोन-अप्स टू एन्टर. सो आई वुड बी गिवन अ स्मॉल बकिट ऐण्ड सेण्ट इनसाईड. देयर आई यूज्ड टू फिल अप द बकिट विद राईस ऐण्ड गिव इट टू देम. दे वुड टेल मी हाऊ मैनी मेज़र्स दे वाण्टिड.)

अनुवाद :
हमारे पास कभी भी बहुत अधिक नकद रुपए नहीं हुआ करते थे घर में और एकमात्र मदद जो मेरे दादाजी इन लोगों को दे पाते थे तो चावल के रूप में होती थी जिन लोगों को मदद मिलती है वे अधिक नहीं बोलते। वे लोग चावल लेते, मुस्कराते और अपना दाहिना हाथ उठाते आशीर्वाद देने के लिए। चाहे वे किसी भी धर्म के हों आशीर्वाद हमेशा “ईश्वर तुम्हारा भला करे।” मेरे दादाजी हमेशा ही बड़े प्रसन्न दिखते थे उनको दान देने के बाद।

मैं उस वक्त एक छोटी लड़की थी और लम्बाई भी अधिक न थी। क्योंकि सामने वाले धान्यागार का द्वार बेहद छोटा व नीचा था, इसलिए बड़े लोगों को उसमें घुसने में दिक्कत होती थी। इसलिए मुझे एक छोटी सी बाल्टी पकड़ा कर अन्दर भेजा जाता। मैं उस छोटी बाल्टी को चावल से भरती और उनको पकड़ा देती। वे मुझे बताते कि कितनी मात्रा उन्हें चाहिए।

In the evening, my grandmother used to cook for everybody. That time she would send me to the granary at the back of the house where the red rice was stored. I would again fill up the bucket with as much rice as she wanted and get it for her to cook our dinner.

This went on for many years. When I was a little older, I asked my grandparents a question that had been bothering me for long.

‘Why should we eat the red rice always at the night when it is not so good, and give those poor – people the better quality rice?’

My grandmother Krishtakka smiled and told me something I will never forget in my life.

(इन द ईवनिंग, माई ग्रैण्डमदर यूज्ड टू कुक फॉर एवरीबडी. दैट टाईम शी वुड सेण्ड मी टू द ग्रैनरी ऐट द बैक ऑफ द हाऊज़ व्हेअर द रेड राईस वॉज़ स्टोर्ड. आई वुड अगेन फिल अप द बकिट विद ऐज़ मच राईस ऐज़ शी वाण्टिड ऐण्ड गैट इट फॉर हर टू कुक आवर डिनर.

दिस वेण्ट ऑन फॉर मैनी यीअर्स. व्हेन आई वॉज़ अलिटल ओल्डर, आई आस्क्ड माई ग्रैण्डपेरेण्ट्स अक्वेश्चन दैट हैड बीन बॉदरिंग मी फॉर लॉन्ग.

‘व्हाई शुड वी ईट द रेड राईस ऑलवेज़ ऐट नाईट व्हेन इट इज़ नॉट सो गुड ऐण्ड गिव दोज़ पूअर पीपल द बैटर क्वालिटी राईस?’

माई ग्रैण्डमदर क्रिश्टक्का स्माईल्ड एण्ड टोल्ड मी समथिंग आई विल नेवर फॉरगेट इन माई लाईफ.)

अनुवाद :
शाम को मेरी दादी सबके लिए खाना बनाती थीं। उस समय वे मुझे घर के पीछे वाले धान्यागार में भेजती थीं जहाँ लाल वाले चावल रखे जाते थे। मैं फिर से उस छोटी बाल्टी को भरती थी जितना वे कहती थीं उतने चावलों से और उनको देती थी हमारे लिए खाना बनाने के लिए। ऐसा वर्षों तक चलता रहा। जब मैं थोड़ी बड़ी हुई तो मैंने अपने दादा-दादी से एक प्रश्न पूछा जो कि बहुत समय से मुझे परेशान कर रहा था।

‘हम लोग हमेशा लाल वाले चावल क्यों खाते हैं रात में जबकि वे कुछ खास अच्छे नहीं हैं, और उन गरीब लोगों को अच्छी किस्म वाले चावल देते हैं?’

मेरी दादी क्रिश्टक्का मुस्कराई और मुझे ऐसा कुछ कहा जिसे मैं अपने जीवन में कभी भूल नहीं सकती।

“Child, whenever you want to give something to somebody, give the best in you, never the second best. That is what I have learned from life. God is not there in the temple, mosque or church. He is with the people. If you serve them with whatever you have, you have served God.’

My grandfather answered my question in a different way.

Our ancestors have taught us in the Vedas that one should:
Donate with kind words.
Donate with happiness.
Donate with sincerity.
Donate only to the needy.

(चाईल्ड, व्हेनएवर यू वॉण्ट टू गिव समथिंग टू समबडी, गिव द बेस्ट इन यू, नेवर द सेकण्ड बेस्ट. दैट एज़ व्हॉट आई हैव लर्ड फ्रॉम लाईफ. गॉड इज़ नॉट देयर इन द टेम्पल, मॉस्क
ऑर चर्च. ही इज़ विद द पीपल. इफ यू सर्व देम विद व्हॉटएवर यू हैव, यू हैव सर्ल्ड गॉड.

माई ग्रैण्डफादर आन्सर्ड माई क्वेश्चन इन अ डिफरण्ट वे. आवर एन्सेस्टर्स हैव टॉट अस इन द वेदाज़ दैट वन शुडः

डोनेट विद काईण्ड वर्ड्स. डोनेट विद हैप्पीनेस. डोनेट विद सिन्सेयरिटी. डोनेट ओन्ली टू द नीडी.)

अनुवाद :
बेटी, जब भी तुम किसी को कुछ देना चाहो तो अपना सर्वश्रेष्ठ देना कभी भी उससे कम वाला नहीं। मैंने यही जीवन से सीखा है। ईश्वर मन्दिर, मस्जिद या गिरिजाघर में नहीं है। वे लोगों में है। यदि तुम लोगों की सेवा करो जो कुछ भी तुम्हारे पास है उससे, तो वो ईश्वर की सेवा होगी।’

मेरे दादाजी ने मेरे प्रश्न का उत्तर अलग प्रकार से दिया।

हमारे पूर्वजों ने वेदों में हमें सिखाया है कि हमें
नम्र सम्वेदनापूर्ण शब्दों के साथ दान देना चाहिए।
प्रसन्नता के साथ दान चाहिए।
नेकनीयती के साथ दान देना चाहिए।
केवल जरूरतमंदों को दान देना चाहिए।

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Donate without expectation because it is not a gift. It is a duty.
Donate with your wife’s consent.
Donate to other people without making your dependents helpless.
Donate without caring for caste, creed and religion.
Donate so that the receiver prospers.

This lesson from my grandparents, told to me when I was just a little girl, has stayed with me ever since. If at all I am helping anyone today, it is because of the teachings by those simple souls; I did not learn them in any school or college.

(डोनेट विदआउट एक्स्पेक्टेशन बिकॉज़ इट इज नॉट अ गिफ्ट. इट इज अ ड्यूटी.
डोनेट विद यॉर वाईफ्स कान्सेण्ट
डोनेट टू अदर पीपल विदाऊट मेकिंग यॉर डिपेण्डेण्ट्स हैल्पलेस.
डोनेट विदाऊट केअरिंग फॉर कास्ट, क्रीड ऐण्ड रिलीजन.
डोनेट सो दैट द रिसीवर प्रॉस्पर्स.

दिस लैसन फ्रॉम माई ग्रैण्डपेरेण्ट्स, टोल्ड टू मी व्हेन आई वॉज़ जस्ट अ लिटल गर्ल, हैज़ स्टेड विद मी एवर सिन्स. इफ ऐट ऑल आई ऐम हैल्पिंग एनीवन टुडे, इट इज बिकॉज़ ऑफ द टीचिंग्स बाई दोज़ सिम्पल सोल्स; आई डिड नॉट लर्न देम इन एनी स्कूल और कॉलेज.)

अनुवाद :
हमें बिना किसी अपेक्षा के दान देना चाहिए क्योंकि यह कोई उपहार नहीं है। यह एक कर्त्तव्य है। हमें अपनी पत्नी की सहमति से दान देना चाहिए। हमें दूसरों को दान देना चाहिए परन्तु स्वयं पर आश्रित लोगों को असहाय स्थिति में लाए बिना। हमें जाति, धर्म, सम्प्रदाय की चिन्ता किए बिना दान देना चाहिए।

हमें दान देना चाहिए ताकि पाने वाले की तरक्की हो, ऊपर उठे। दादा-दादी से मिली यह शिक्षा जो मुझसे तब कही गई थी जब मैं एक छोटी सी लड़की थी मेरे साथ तभी से है। यदि आज मैं किसी की सहायता कर रही हूँ तो उन बेहद सीधी-साधी आत्माओं की शिक्षाओं के कारण। मैंने यह किसी विद्यालय या कॉलेज में नहीं सीखा।

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