MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

द्रव्य के तापीय गुण अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 11.1.
निऑन तथा CO2 के त्रिक बिन्दु क्रमशः 24.57 K तथा 216.55 K हैं। इन तापों को सेल्सियस तथा फारेनहाइट मापक्रमों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
दिया है: निऑन का त्रिक बिन्दु, T1 = 24.57 K
CO2 का त्रिक बिन्दु, T2 = 216.55 K
हम जानते हैं कि केल्विन सेल्यिस व फारेनहाइट पैमाने में निम्नवत् सम्बन्ध है –
\(\frac { C-O\quad }{ 100-O } \) = \(\frac { F-32 }{ 212-32 } \)
सेल्सियस पैमाने पर,
\(\frac { C-O\quad }{ 100-O } \) = \(\frac { T-273.15 }{ 100 } \)
या C – T = 273.15
Ne के लिए
1, C = 24.57 – 273.15 = – 248.58°C
CO2 के लिए
2 C = 216.55 – 273.15 = – 56.6°C
फारेनहाइट पैमाने पर,
\(\frac { F-32 }{ 180 } \) = \(\frac { T-273.15 }{ 100 } \)
Ne के लिए,
F1 = (T1 – 273.15) × \(\frac{9}{5}\) + 32
= (24.57 – 273.15) × \(\frac{9}{5}\) + 32
= – 415.26°F
CO2 के लिए,
F2 = (T2 – 273.15) × \(\frac{9}{5}\) + 32
= (216.55 – 273.15) \(\frac{9}{5}\) + 32
= – 56.6 \(\frac{9}{5}\) + 32 = -69.88°F

प्रश्न 11.2.
दो परम ताप मापक्रमों A तथा B पर जल के त्रिक बिन्दु को 200A तथा 350 Bद्वारा परिभाषित किया गया है। T तथा TM में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
माना दोनों का शून्य, परम शून्य ताप से सम्पाती है।
प्रश्नानुसार, प्रथम पैमाने पर परम शून्य से जल के त्रिक – बिन्दु तक के तापों को 200 भागों में एवम् दूसरे पैमाने पर 350 . भागों में विभाजित किया गया है।
∴200A – OA = 350B – OB
= 273.16K – OK
∴200A = 350B = 273.16K
∴IA = \(\frac { 273.16 }{ 200 } \) K व 1B = \(\frac { 273.16K }{ 350 } \)
माना कि इन पैमानों पर किसी वस्तु का ताप क्रमश: TA व TB है।
TA = \(\frac { T\times 273.16 }{ 200 } \) K
तथा TB = \(\frac { T\times 273.16 }{ 350 } \) K
\(\frac { T_{ A } }{ T_{ B } } \) = \(\frac{350}{200}\) = \(\frac{7}{4}\)
TA : TB = 7 : 4
या
TA = \(\frac{7}{4}\) TB

प्रश्न 11.3.
किसी तापमापी का ओम में विद्युत प्रतिरोध ताप के साथ निम्नलिखित, सन्निकट नियम के अनुसार परिवर्तित होता है –
R = R0 [1 + α (T -T0)]
यदि तापमापी का जल के त्रिक बिन्दु 273.16 K पर प्रतिरोध 101.6Ω तथा लैड के सामान्य संगलन बिन्दु (600.5 K) पर प्रतिरोध 165.5Ω है तो वह ताप ज्ञात कीजिए जिस पर तापमापी का प्रतिरोध 123.4Ω है।
उत्तर:
दिया है:
T1 = 273.16 K पर R = 101.6Ω
व T2 = 600.5 K पर R2 = 165.5 माना T0 पर प्रतिरोध R0 है।
तथा T3 ताप पर प्रतिरोध R3 = 123.42 है।
हम जानते हैं कि
R = Ro [1 + 5 × 10-3(T – T0)] …… (i)
101.6 = R0 [1 + 5 × 10-3(273.16 – T0)] … (ii)
तथा 165.5 = R0 [1 + 5 × 10-3(600.5 – T0)] … (iii)
समी० (iii) को (ii) से भाग देने पर,
\(\frac { 165.5 }{ 101.6 } \) = \(\frac { 1+5\times 10(600.5-T_{ 0 }) }{ 1+5\times 10^{ -3 }(273.16-T_{ 0 }) } \)
या 1 + 5 × 10-3 (600.5 – T0)
= 1.629 [1 + 5 × 10-3 (273.16 – T0)
या 1.629 [1 + 1.366 – 0.005 T0)
= 1 + 3.003T0 = -49.67 K
समी० (ii) से,
R0 = \(\frac { 101.6 }{ 1+0.005(273.16+49.67) } \)
= \(\frac { 101.6 }{ 2.614 } \) = 38.87Ω
123.4 = 38.87 [(1+0.005)T -(-49.67)]
या T + 49.67 = (\(\frac { 123.4 }{ 38.87 } -1\)) \(\frac{1}{0.005}\)
या T = 434.94 – 49.67 = 385 K

प्रश्न 11.4.
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए –
(a) आधुनिक तापमिति में जल का त्रिक बिन्दु एक मानक नियत बिन्दु है, क्यों? हिम के गलनांक तथा जल के क्वथनांक को मानक नियत-बिन्दु मानने में (जैसा कि मूल सेल्सियस मापक्रम में किया गया था।) क्या दोष है?
(b) जैसा कि ऊपर वर्णन किया जा चुका है कि मूल सेल्सियस मापक्रम में दो नियत बिन्दु थे जिनको क्रमशः 0°C तथा 100°C संख्याएँ निर्धारित की गई थीं। परम ताप मापक्रम पर दो में से एक नियत बिन्दु जल का त्रिक बिन्दु लिया गया है जिसे केल्विन परम ताप मापक्रम पर संख्या 273.16 K निर्धारित की गई है। इस मापक्रम (केल्विन परम ताप) पर अन्य नियत बिन्दु क्या है?
(c) परम ताप (केल्विन मापक्रम) T तथा सेल्सियस मापक्रम पर ताप tC में संबंध इस प्रकार है –
tC = T – 273.15
इस संबंध में हमने 273.15 लिखा है 273.16 क्यों नहीं लिखा?
(d) उस परमताप मापक्रम पर, जिसके एकांक अंतराल का आमाप फारेनहाइट के एकांक अंतराल की आमाप के बराबर है, जल के त्रिक बिन्दु का ताप क्या होगा?
उत्तर:

(a) चूँकि जल का त्रिक बिन्दु (273.16 K) एक अद्वितीय बिन्दु है जबकि हिम का गलनांक व जल का क्वथनांक नियत नहीं है। ये दाब परिवर्तित करने पर बदल जाते हैं।

(b) केल्विन मापक्रम पर दूसरा नियत बिन्दु परमशून्य ताप है। इस ताप पर सभी गैसों का दाब शून्य हो जाता है।

(c) सेल्सियस पैमाने पर, 0°C ताप सामान्य दाब पर बर्फ का गलनांक है। इसके संगत केल्विन ताप 273.15 K है। अतः प्रत्येक परम ताप (273.16 K), संगत सेल्सियस ताप के 273.15 K ऊँचा है। अतः उक्त सम्बन्ध में 273.15 का प्रयोग किया गया है।

(d) चूँकि 32°F = 273.15 K
तथा 212°F =373.15 K
∴(212 – 32)°F = (373.15 – 273.15) K
या 180°F = 100 K
∴1°F = \(\frac{100}{180}\) K
केल्विन मापक्रम में जल के त्रिक बिन्दु का ताप T = 273.16 K
माना नए परमताप पैमाने पर त्रिक बिन्दु का ताप T’ F है।
T’F – 0F = 273.16 K – 0K
T’F = 273.16 K
T’ × 100 K = 273.16 K
या
T = \(\frac { 273.16\times 180 }{ 100 } \) = 491.69
अतः नए पैमाने पर त्रिक बिन्दु के ताप का आंकिक मान 491.69 है।

प्रश्न 11.5.
दो आदर्श गैस तापमापियों A तथा B में क्रमशः ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन प्रयोग की गई है। इनके प्रेक्षण निम्नलिखित हैं –
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण img 1
(a) तापमापियों A तथा B के द्वारा लिए गए पाठ्यांकों के अनुसार सल्फर के सामान्य गलनांक के परमताप क्या हैं?

(b) आपके विचार से तापमापियों A तथा B के उत्तरों में थोड़ा अंतर होने का क्या कारण है? (दोनों तापमापियों में कोई दोष नहीं है)। दो पाठ्यांकों के बीच की विसंगति को कम करने के लिए इस प्रयोग में और क्या प्रावधान आवश्यक हैं?
उत्तर:
(a) माना सल्फर का गलनांक T है।
हम जानते हैं कि जल का त्रिक बिन्दु
Ttr = 273.16 K
थर्मामीटर A के लिए
Ptr = 1.250 × 105 Pa
P = 1.797 × 105 Pa, T = ?
सूत्र \(\frac { T }{ T_{ tr } } \) = \(\frac { P }{ P_{ tr } } \) से
TA = \(\frac { P }{ P_{ tr } } \) × Ttr
= \(\frac { 1.797\times 10^{ 5 } }{ 1.250\times 10^{ 5 } } \) × 273.16
थर्मामीटर B के लिए,
Ptr = 0.200 × 105 Pa
P = 0.287 × 105 Pa
TB = Ttr × \(\frac { P }{ P_{ tr } } \)
= 273.16 × \(\frac { 0.287\times 10^{ 5 } }{ 0.200\times 10^{ 5 } } \)
TB = 391.98K
To =Tvē

(b) दोनों तापमापियों के पाठ्यांकों में अन्तर होने का यह कारण है कि प्रयोग की गई गैसें आदर्श नहीं हैं। विसंगति को दूर करने के लिए पाठ्यांक कम दाब पर लेने चाहिए जिससे गैसें आदर्श गैस की भाँति व्यवहार करे।

प्रश्न 11.6.
किसी 1 m लंबे स्टील के फीते का यथार्थ अंशांकन 27.0°C पर किया गया है। किसी तप्त दिन जब ताप 45°C था तब इस फीते से किसी स्टील की छड़ की लंबाई 63.0 cm मापी गई। उस दिन स्टील की छड़ की वास्तविक लंबाई क्या थी? जिस दिन ताप 27.0°C होगा उस दिन इसी छड़ की लंबाई क्या होगी? स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक = 1.20 × 10-5 K-1
उत्तर:
दिया है:
T1 = 27°C पर फीते की लम्बाई, L = 100 सेमी
तथा T2 = 45°C पर फीते द्वारा मापी गई छड़ की ल० l = 63 सेमी।
स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक,
α = 1.2 × 10-5 प्रति K
हम जानते हैं कि α = \(\frac { \Delta L }{ L\times \Delta T } \)
∆L = L × ∆T × α
= 1000 × (45 – 27) × 1.2 × 10-5
= 0.0216 सेमी
100 सेमी लम्बाई में वृद्धिं = 0.0216 सेमी
सेमी लम्बाई में वृद्धि = (0.0216/100) सेमी
63 सेमी लम्बाई में वृद्धि = \(\frac { 0.0216\times 63 }{ 100 } \)
= 0.0136 सेमी।
अत: 45°C ताप पर स्टील की छड़ की वास्तविक लम्बाई
= 63 + 0.0136 सेमी।
= 63.0136 सेमी।
तथा जिस दिन ताप 27°C है उस दिन पुन: स्टील की छड़ की लम्बाई 63.0136 सेमी होगी।

प्रश्न 11.7.
किसी बड़े स्टील के पहिए को उसी पदार्थ की किसी धुरी पर ठीक बैठाना है। 27°C पर धुरी का बाहरी व्यास 8.70 cm तथा पहिए के केंद्रीय छिद्र का व्यास 8.69 cm है। सूखी बर्फ द्वारा धुरी को ठंडा किया गया है। धुरी के किस ताप पर पहिया धुरी पर चढ़ेगा? यह मानिए कि आवश्यक ताप परिसर में स्टील का रैखिक प्रसार गुणांक नियत रहता है
α स्टील = 12 × 10-5 K-1
I1 = 8.70 cm
I2 = 8.69 cm
T1 = 27°C = 273 + 27 = 300 K
T2 = ?
स्टील की शॉफ्ट को ठण्डा करने पर, लम्बाई निम्नवत् होती है –
I2 = l1[1 + α(T2 – T1)]
शॉफ्ट को T, ताप पर ठण्डा करने पर 1, =8.69 सेमी०, तब पहिया शॉफ्ट पर फिसल सकेगा।
अतः समी० (1) से,
8.69 = 8.70 [1 + 1.20 × T-5(T2 – 300)]
या T2 = 300 = \(\frac { 8.69-8.70 }{ 8.70\times 1.20\times 10^{ -5 } } \)
या T2 = 300 – 95.78 = 204.22 K
या = 204.22 – 273.15 = – 68.93°C
= – 68.93°C
या T2 = – 69°C

प्रश्न 11.8.
ताँबे की चादर में एक छिद्र किया गया है। 27.0°C पर छिद्र का व्यास 4.24 cm है। इस धातु की चादर को 227°C तक तप्त करने पर छिद्र के व्यास में क्या परिवर्तन होगा? ताँबे का रेखीय प्रसार गुणांक = 1.70 × 10-5K-1
उत्तर:
दिया है:
t1 = 27 °C
t2 = 227 °C
∆t = 227 – 27 = 200 °C
ताँबे के लिए रेखीय प्रसार गुणांक
α = 1.7 × 10-5° C-1
27°C पर छिद्र का व्यास, d1 = 4.24 सेमी
माना कि 227°C पर छिद्र का व्यास = d2
∆d = d2 – d1 = ?
ताँबे के लिए क्षेत्रीय प्रसार गुणांक
β = 2α = 2 × 1.7 × 10-5
= 3.4 × 10-5° C-1
27°C व 227°C पर क्रमश: S1 व S2 है।
S1 = \(\frac { \pi d_{ 1 }^{ 2 } }{ 4 } \) = \(\frac { \pi }{ 4 } \) × (4.24)2
= 4.494 π सेमी 2
या \(\frac { \pi d_{ 2 }^{ 2 } }{ 4 } \) = 4.525 π
या d2 = \(\sqrt { 4.525\times 4 } \) = 4.2544 cm
∆d = d2 – d1 = 4.2544 – 4.24
= 0.0144 cm
या ∆d = 1.44 × 10-2 सेमी

प्रश्न 11.9.
27°C पर 1.8 cm लंबे किसी ताँबे के तार को दो दृढ़ टेकों के बीच अल्प तनाव रखकर थोड़ा कसा गया है। यदि तार को – 39°C ताप पर शीतित करें तो तार में कितना तनाव उत्पन्न हो जाएगा? तार का व्यास 2.0 mm है। पीतल का रेखीय प्रसार गुणांक = 2.0 × 10-5 K-1 पीतल का यंग प्रत्यास्थता गुणांक = 0.91 × 1011 Pa
उत्तर:
दिया है:
I1 = 1.8 m, t1 = 27°C, t2 = – 39°C
∆t = t2 – t1
= – 39 – 27 = – 66°C
t2°C पर लम्बाई = l2
पीतल के लिए α = 2 × 10-50 K-1
Y = 0.91 × 1011 Pa
तार का व्यास d = 2.0 mm
= 2.0 × 10-3 m
माना तार का अनुप्रस्थ परिच्छेद a है।
a = \(\frac { \pi d^{ 2 } }{ 4 } \) = \(\frac { \pi }{ 4 } \) × (2.0 × 10-3)2
= 3.142 × 10 -6m2
माना तार में उत्पन्न तनाव F है।
अतः सूत्र Y = \(\frac { F/a }{ \Delta l/L } \) से
F = \(\frac { Ya\Delta l }{ l_{ 1 } } \)
परन्तु ∆l = l1 α ∆t
= 1.8 × 2 × 10-5 × (-66)
= – 0.00237 m = -0.0024 m
ऋणात्मक चिह्न प्रदर्शित करता है कि समी० (i) में Y, a, ∆l तथा l1, का मान रखने पर लम्बाई घटती है।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण img 2
= 381 N = 3.81 × 102 N

प्रश्न 11.10.
50 cm लंबी तथा 3.00 mm व्यास की किसी पीतल की छड़ को उसी लंबाई तथा व्यास की किसी स्टील की छड़ से जोड़ा गया है। यदि ये मूललंबाइयाँ 40°C पर हैं, तो 250°C पर संयुक्त छड़ की लंबाई में क्या परिवर्तन होगा? क्या संधि पर कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न होगा? छड़ के सिरों को प्रसार के लिए मुक्त रखा गया है।
(पीतल तथा स्टील के रेखीय प्रसार गुणांक क्रमश: = 2.0 × 10-5 K-1, स्टील = 1.2 × 10-5 K-1 हैं।)
उत्तर:
पीतल की छड़ के लिए,
α = 2.0 × 10-5 K-1, l1 = 50 cm, t1 = 40°C
t2 = 250°C
∆t = t2 – t1
= 250 – 40 = 210°C
माना t2°C पर लम्बाई l2, है।
अतः
l2 = l1 (1 + α∆t)
= 50 (1 + 2 × 10-5 × 210)
= 50.21 cm
∆l brass = l2 – l1
= 50.21 – 50 = 0.21 cm
स्टील की छड़ के लिए,
t1 = 40°C, t2 = 250°C, α = 1.2 × 10-5 K-1,
l1 = 50.0 cm
∆t’ = t2 – t1
= 250 – 40 = 210°C
माना 250°C पर स्टील छड़ की ल० l2 है
अतः l2 = l1 ( 1 + α∆t’)
= 50 (1 + 1.2 × 10-5 × 210)
= 50.126 cm
250°C पर संयुक्त छड़ की लम्बाई 250°C = l2 + l2
= 50.21 + 50.126 = 100.336 cm व 40°C पर संयुक्त छड़ की लम्बाई
= l1 + l1 = 50 + 50
= 100 cm
संयुक्त छड़ की लम्बाई में परिवर्तन = 100.336 – 100
= 0.336 cm = 0.34 cm
अतः सन्धि पर कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न नहीं होता है।

प्रश्न 11.11.
ग्लिसरीन का आयतन प्रसार गुणांक 49 × 10-5 K-1 है। ताप में 30°C की वृद्धि होने पर इसके घनत्व में क्या आंशिक परिवर्तन होगा?
उत्तर:
दिया है:
ताप में वृद्धि ∆t = 30°C
माना 0°C पर ग्लिसरीन का प्रा० आयतन V0 है।
माना 30°C पर ग्लिसरीन का आयतन V1 है।
तब V1 = V0 (1 + r ∆t)
= V0 (1 + 49 × 10-5 × 30)
= V0 (1 + 0.01470) = 1.01470 V0
या \(\frac { V_{ 0 } }{ V_{ 1 } } \) = \(\frac{1}{1.01440}\) ……… (i)
अत: प्रारम्भिक घनत्व,
ρ0 = \(\frac { m }{ V_{ 0 } } \)
तथा अन्तिम घनत्व ρ1 = \(\frac { m }{ V_{ t } } \)
जहाँ m ग्लिसरीन का द्रव्यमान है।
\(\frac { \Delta \rho }{ \rho _{ 0 } } \) = घनत्व में भिन्नात्मक परिवर्तन
= \(\frac { \rho _{ t }-\rho _{ 0 } }{ \rho _{ 0 } } \)
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण img 3
यहाँ गुणात्मक चिह्न प्रदर्शित करता है कि ताप में वृद्धि से घनत्व घटता है।
\(\frac { \Delta \rho }{ \rho _{ 0 } } \) = 0.0145 × 10-2
= 1.5 × 10-2

प्रश्न 11.12.
8.0 kg द्रव्यमान के किसी एल्युमीनियम के छोटे ब्लॉक में छिद्र करने के लिए किसी 10 kW की बरमी का उपयोग किया गया है। 2.5 मिनट में ब्लॉक के ताप में कितनी वृद्धि हो जाएगी। यह मानिए कि 50% शक्ति तो स्वयं बरमी को गर्म करने में खर्च हो जाती है अथवा परिवेश में लुप्त हो जाती है। एल्युमीनियम की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = 0.91 Jg-1K-1 है।
उत्तर:
दिया है: m = 8 kg
शक्ति, P = 10 KW = 10 × 103 J/s
समय t = 2.5 मिनट =150 सेकण्ड
विशिष्ट ऊष्मा धारिता S = 0.91 Jg-1K-1
2.5 मिनट में बों द्वारा कम की गई ऊर्जा, E = Pt
= (10 × 103) × 150
= 1.5 × 106 जूल
माना सम्पूर्ण ऊर्जा ऊष्मा में परिवर्तित हो जाती है जिसका 50% बमें द्वारा अवशोषित हो जाता है।
अत: ब्लॉक द्वारा शोषित ऊष्मा,
θ = E का 50%
= 1.5 × 106 × \(\frac{50}{100}\)
= 0.75 × 106 जूल
माना शोषित ऊष्मा से ब्लॉक के ताप में वृद्धि ∆T है।
सूत्र θ = ms ∆T से,
∆T = \(\frac { \theta }{ ms } \) = \(\frac { 0.75\times 10^{ -6 } }{ 8\times 910 } \)
= 103°C

प्रश्न 11.13.
2.5 kg द्रव्यमान के ताँबे के गुटके को किसी भट्टी में 500°C तक तप्त करने के पश्चात् किसी बड़े हिम – ब्लॉक पर रख दिया जाता है। गलित हो सकने वाली हिम की अधिकतम मात्रा क्या है? ताँबे की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = 0.39 Jg2K-1; बर्फ की संगलन ऊष्मा = 335Jg-1
उत्तर:
दिया है: m = 2.5 kg
T1 = 500°C
विशिष्ट ऊष्मा धारिता,
S = 0.39 Jg-1K-1 = 390 Jkg-1K-1
बर्फ की संगलन ऊष्मा,
Lf = 335 Jg-1 = 335 × 103 Jkg-1
प्रश्नानुसार, निकाय का अन्तिम ताप T2 = 0°C
∆T = T1 – T2) = 500°C या 500 K
सूत्र θ = ms ∆T से गुट के द्वारा दी गई ऊष्मा,
θ = 2.5 × 390 × 500
= 48.75 × 107 J
माना कि बर्फ का m’ द्रव्यमान इस ऊष्मा को शोषित कर गल जाता है।
Q = m’Lf
m’ = \(\frac { \theta }{ L_{ f } } \)
= \(\frac { 48.75\times 10^{ 4 } }{ 3.35\times 10^{ 3 } } \) = 1.45 kg

प्रश्न 11.14.
किसी धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के प्रयोग में 0.20 kg के धातु के गुटके को 150°C पर तप्त करके, किसी ताँबे के ऊष्मामापी ( जल तुल्यांक 30.025 kg), जिसमें 27°C का 150 cm जल भरा है, में गिराया जाता है। अंतिम ताप 40°C है। धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता परिकलित कीजिए। यदि परिवेश में क्षय ऊष्मा उपेक्षणीय न मानकर परिकलन किया जाता है, तब क्या आपका उत्तर धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के वास्तविक मान से अधिक मान दर्शाएगा अथवा कम?
उत्तर:
दिया है:
गुटके का द्रव्यमान m = 0.20 kg
ऊष्मामापी का जल तुल्यांक m1 = 0.025 kg
भरे जल का द्रव्यमान m2 = 150 gm = 0.15 kg
गुटके का प्रारम्भिक ताप Ti = 150°C
ऊष्मामापी तथा जल का प्रारम्भिक ताप T’i = 27°C
मिश्रण का ताप, Tf = 40°C
SH2O = 4.18 × 103 Jkg-1°C-1
माना धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता Sm है।
गुटके द्वारा दी गई ऊष्मा,
Q = ms(Ti – Tf)
तथा ऊष्मामापी व जल द्वारा ली गई ऊष्मा
θ = (m1 + m2) SH2O. (Tf -T’i)
परन्तु दी गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा
θ = (m1 + m2) SH2O . (Tf -T’i)
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण img 4
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण img 4a
= 0.43 × 103 JKg -1°C-1
= 0.43 JKg -1°C-1
यदि हम परिवेश में ऊष्मा क्षय को नगण्य न मानकर परिकलित करें, तब उपरोक्त मान वास्तविक विशिष्ट ऊष्मा धारिता से कम मान दर्शाएगा।

प्रश्न 11.15.
कुछ सामान्य गैसों के कक्ष ताप पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं के प्रेक्षण नीचे दिए गए हैं –
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण img 5
इन गैसों की मापी गई मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएँ एक परमाणुक गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं से सुस्पष्ट रूप से भिन्न हैं। प्रतीकात्मक रूप में किसी एक परमाणुक गैस की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता 2.92 cal/mol K होती है। इस अंतर का स्पष्टीकरण कीजिए। क्लोरीन के लिए कुछ अधिक मान (शेष की अपेक्षा) होने से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर:
एक परमाणुक गैसों के अणुओं में सिर्फ स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा होती है परन्तु द्विपरमाणुक गैसों के अणुओं में स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा के अतिरिक्त घूर्णी गतिज ऊर्जा भी होती है। इसका कारण यह है कि द्विपरमाणुक गैसों के अणु अन्तराण्विक अक्ष के लम्बवत् दो अक्षों के परितः भी घूर्णन कर सकते हैं। किसी गैस को ऊष्मा देने पर यह ऊष्मा अणुओं की सभी प्रकार की भुजाओं में समान वृद्धियाँ करती हैं। चूँकि द्विपरमाणुक गैसों के अणुओं की ऊर्जा के प्रकार अधिक होते हैं इसलिए इनकी मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएँ भी अधिक होती हैं। क्लोरीन की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता का अधिक मान यह व्यक्त करता है कि इसके अणु स्थानान्तरीय व घूर्णनी गतिज ऊर्जा के अतिरिक्त काम्पनिक गतिज ऊर्जा भी रखते हैं।

प्रश्न 11.16.
101°F ताप ज्वर से पीड़ित किसी बच्चे को एन्टीपायरिन (ज्वर कम करने की दवा) दी गई जिसके कारण उसके शरीर से पसीने के वाष्पन की दर में वृद्धि हो गई। यदि 20 मिनट में ज्वर 98°F तक गिर जाता है तो दवा द्वारा होने वाले अतिरिक्त वाष्पन की औसत दर क्या है? यह मानिए कि ऊष्मा ह्रास का एकमात्र उपाय वाष्पन ही है। बच्चे का द्रव्यमान 30 kg है। मानव शरीर की विशिष्ट ऊष्मा धारिता जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के लगभग बराबर है तथा उस ताप पर जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 580 cal g-1 है।
उत्तर:
दिया है:
बच्चे का द्रव्यमान, m = 30 kg
ताप में गिरावट,
∆T = \(\frac{5}{3}\)°C
मानव शरीर की विशिष्ट ऊष्मा
C = 4.2 × 103 Jkg-1C-1
वाष्पन की गुप्त ऊष्मा = 580 cal g-1
= 580 × 4.2 × 103 JkgC-1
माना 20 मिनट में बच्चे के शरीर से m ग्राम पसीना उत्सर्जित होता है।
माना आवश्यक ऊष्मा Q है।
अतः Q = m’ L
= m × 580 × 4.2 × 103 J ……….. (i)
माना पसीने के उत्सर्जन के रूप में ऊष्मा ए का ह्रास होता है।
अतः Q = mC∆T
= 30 × 4.2 × 103 × 5 J
= 2.10 × 105 J
समी० (i) व (ii) से,
m’ × 580 × 4.2 × 103 = 2.1 × 105
या m’ = \(\frac { 2.1\times 10^{ 5 } }{ 580\times 4.2\times 10^{ 3 } } \)
= \(\frac{10}{116}\) = 0.0862 kg
पसीने के उत्सर्जित होने की दर
= \(\frac{m’}{t}\) = \(\frac{0.0862}{20}\)
= 0.00431 kg min-1 = 4.31 g min-1

प्रश्न 11.17.
थर्मोकोल का बना ‘हिम बॉक्स’ विशेषकर गर्मियों में कम मात्रा के पके भोजन के भंडारण का सस्ता तथा दक्ष साधन है। 30 cm भुजा के किसी हिम बॉक्स की मोटाई 5.0 cm है। यदि इस बॉक्स में 4.0 kg हिम रखा है तो 6 h के पश्चात् बचे हिम की मात्रा का आंकलन कीजिए। बाहरी ताप 45°C है तथा थर्मोकोल की ऊष्मा चालकता 0.01Js-1m-1K-1 है। (हिम की संगलन ऊष्मा = 335 × 103 Jkg-1)
उत्तर:
दिया है: घन के छह पृष्ठों का क्षेत्रफल
= 6 × 30 × 30 cm2
= 6 × 900 × 10-4 m2
दूरी, d = 5.0 cm = 5.0 × 10-2 m
बर्फ का कुल द्रव्यमान, M = 4 kg
समय t = 6 h = 6 × 60 × 60s
बक्से के बाहर का ताप = Q1 = 45°C
बक्से के भीतर का ताप = Q2 = 0°C
∆θ = θ1 – θ2 = 45 – 0 = 45°C
संगलन की ऊष्मा, L = 335 × 103 Jkg-1
थर्माकोल की ऊष्मीय चालकता गुणांक
= K = 0.01 Js-1m-10K-1
माना बर्फ का m kg द्रव्यमान गलता है
अतः 0°C पर गलन के लिए आवश्यक ऊष्मा,
Q = mL
पुनः = KA \(\frac { \Delta \theta }{ d } \)
\(\frac { 0.1\times 6\times 900\times 10^{ -4 }\times 45 }{ 335\times 10^{ 3 }\times 5.0\times 10^{ -2 } } \) × 6 × 3600
– \(\frac { 6\times 9\times 45 }{ 335\times 5\times 10^{ 2 } } \) × 6 × 36
= 0.313 kg
= 3.687 = 3.7 किग्रा

प्रश्न 11.18.
किसी पीतल के बॉयलर की पेंदी का क्षेत्रफल 0.15 m2 तथा मोटाई 1.0 cm है। किसी गैस स्टोव पर रखने पर इसमें 6.0 kg/min की दर से जल उबलता है। बॉयलर के संपर्क की ज्वाला के भाग का ताप आकलित कीजिए। पीतल की ऊष्मा चालकता = 109 Js-1m-1K-1; जल की वाष्पन ऊष्मा = 2256 × 103 Jk-11 है।
उत्तर:
दिया है:
K =109 Js-1m-1K-1 A = 0.15 m2
d = 1.0 cm = 10-2 θ2 = 100°C
माना बॉयलर के स्टोव के सम्पर्क वाले हिस्से का ताप θ1 है।
अतः
Q = \(\frac { KA(\theta _{ 1 }-\theta _{ 2 }) }{ d } \)
या
Q = \(\frac { 109\times 0.15\times (\theta _{ 1 }-100) }{ 10^{ -2 } } \)
= 1635 (θ1 – 100) Js -1 ……. (i)
जल के, वाष्पीकरण की ऊष्मा,
L = 2256 × 103 Jkg -1
बॉयलर में जल के उबलने की दर, M = 6.0 kg min -1
= \(\frac { 6.0 }{ 60 } \) = 0.1 kg -1s
जल द्वारा प्रति सेकण्ड अवशोषित ऊष्मा, Q = ML
या Q = 0.1 × 2256 × 103 Js-1 …… (ii)
समी० (i) व (ii) से
1635 (θ1 – 100) = 2256 × 102
या
θ1 – 100 = \(\frac { 2256\times 100 }{ 1635 } \) = 138
θ1 = 100 + 138 = 238°C

प्रश्न 11.19.
स्पष्ट कीजिए कि क्यों –
(a) अधिक परावर्तकता वाले पिंड अल्प उत्सर्जक होते हैं।
(b) कँपकँपी वाले दिन लकड़ी की ट्रे की अपेक्षा पीतल का गिलास कहीं अधिक शीतल प्रतीत होता है।
(c) कोई प्रकाशिक उत्तापमापी (उच्च तापों को मापने की युक्ति), जिसका अंशांकन किसी आदर्श कृष्णिका के विकिरणों के लिए किया गया है,खुले में रखे किसी लाल तप्त लोहे के टुकड़े का ताप काफी कम मापता है, परन्तु जब उसी लोहे के टुकड़े को भट्टी में रखते हैं, तो वह ताप का सही मान मापता है।
(d) बिना वातावरण के पृथ्वी अशरणीय शीतल हो जाएगी।
(e) भाप के परिचालन पर आधारित तापन निकाय तप्त जल के परिचालन पर आधारित निकायों की अपेक्षा भवनों को उष्ण बनाने में अधिक दक्ष होते हैं।
उत्तर:
(a) चूँकि उच्च परावर्तकता वाले पिंड अपने ऊपर गिरने वाले अधिकांश विकिरण को परावर्तित कर देते हैं। अतः वे अल्प अवशोषक होते हैं। इसी कारण वे अल्प उत्सर्जक भी होते हैं।

(b) लकड़ी की ट्रे ऊष्मा की कुचालक होती है तथा पीतल का गिलास ऊष्मा का सुचालक होता है। कँपकँपी वाले दिन दोनों ही समान ताप पर होंगे। लेकिन स्पर्श करने पर गिलास हमारे हाथ से तेजी से ऊष्मा लेता है जबकि लकड़ी की ट्रे बहुत कम ऊष्मा लेती है। अतः गिलास ट्रे की तुलना में अधिक ठण्डा लगता है।

(c) चूँकि खुले में रखे तप्त लोहे का गोला तीव्रता से ऊष्मा खोता है तथा कम ऊष्माधारिता के कारण तीव्रता से ठण्डा होता जाता है। इस प्रकार उत्तापमापी को पर्याप्त विकिरण ऊर्जा लगातार नहीं मिल पाती है। जबकि भट्टी में रखने पर, गोले का ताप स्थिर बना रहता है तथा यह नियत दर से विकिरण उत्सर्जित करता है।

(d) चूँकि वायु ऊष्मा की कुचालक है। अतः पृथ्वी के चारों ओर का वायुमण्डल एक कम्बल की तरह व्यवहार करता है तथा पृथ्वी से उत्सर्जित होने वाले ऊष्मीय विकिरणों को वापस पृथ्वी की ओर को परावर्तित करता है। वायुमण्डल की अनुपस्थिति में, पृथ्वी से उत्सर्जित होने वाले ऊष्मीय विकिरण सीधे सुदूर अन्तरिक्ष में चले जाते हैं। एवम् पृथ्वी अशरणीय शीतल हो जाएगी। (e) चूँकि 1 g जलवाष्प, 100°C के 1 g जल की तुलना में 540 cal अतिरिक्त ऊष्मा रखती है। अतः स्पष्ट है कि जलवाष्प आधारित तापन निकाय, तप्त जल आधारित तापन निकाय से ज्यादा दक्ष है।

प्रश्न 11.20.
किसी पिंड का ताप 5 मिनट में 80°C से 50°C हो जाता है। यदि परिवेश का ताप 20°C है, तो उस समय का परिकलन कीजिए जिसमें उसका ताप 60°C से 30°C हो जाएगा।
उत्तर:
80°C व 50°C का माध्य ताप 65°C है।
अतः परिवेश ताप से अन्तर = (65 – 20) = 45°C
सूत्र ताप में कमी/समयान्तराल = K (तापान्तर) से … (i)
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण img 6
= K (45°C )
K(45°C) = 6°C प्रति मिनट ……. (ii)
माना t मिनट में ताप 60° से 30°C हो जाता है।
60°C व 30°C का माध्य ताप 45°C है।
इसका परिवेश ताप से अन्तर (45 – 20) = 25°C
सूत्र (i) से, \(\frac { 60-30 }{ t } \) = K (25°C)
या K (25°C) = \(\frac{30}{t}\)
समी० (ii) को (iii) से भाग देने पर,
\(\frac{K\left(45^{\circ} \mathrm{C}\right)}{K\left(25^{\circ} \mathrm{C}\right)}\) = \(\frac { 6\times t }{ 30 } \)
या t = \(\frac { 30 }{ 6 } \) × \(\frac { 45 }{ 25 } \) = 9 मिनट
625 अतः पिंड के ताप को 60°C से 30°C तक गिरने में 9 मिनट लगते हैं।

द्रव्य के तापीय गुण अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 11.21.
Co2 के P – T प्रावस्था आरेख पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

  1. किस ताप व दाब पर CO2 की ठोस, द्रव तथा वाष्प प्रावस्थाएँ साम्य में सहवर्ती हो सकती हैं?
  2. CO2 के गलनांक तथा क्वथनांक पर दाब में कमी का क्या प्रभाव पड़ता है?
  3. CO2 के लिए क्रांतिक ताप तथा दाब क्या हैं? इनका क्या महत्व है?
    • – 70°C ताप व 1 atm दाब
    • – 60°C ताप व 10atm दाब
    • 15°C ताप व 56 atm दाब

पर CO, ठोस, द्रव अथवा गैस में से किस अवस्था में होती है?

उत्तर:

  1. – 56.6°C ताप व 5.11 वायुमण्डलीय दाब पर।
  2. दाब में कमी होने पर दोनों घटते हैं।
  3. CO, के लिए क्रान्तिक ताप 31.1°C व क्रान्तिक दाब 73 वायुमण्डलीय दाब है।
    • – 70°C ताप व 1 atm दाब पर वाष्प या गैसीय अवस्था में।
    • – 60°C ताप व 10 atm दाब पर ठोस अवस्था में।
    • 15°C ताप व 56 atm दाब पर द्रव अवस्था में।

प्रश्न 11.22.
CO2 के P – T प्रावस्था आरेख पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(a) 1 atm दाब तथा – 60°C ताप पर CO2 का समतापी संपीडन किया जाता है? क्या यह द्रव प्रावस्था में जाएगी?
(b) क्या होता है जब 4 atm दाब व CO2 का दाब नियत रखकर कक्ष ताप पर शीतन किया जाता है?
(c) 10 atm दाब तथा – 65°C ताप पर किसी दिए गए द्रव्यमान की ठोस CO2 को दाब नियत रखकर कक्ष ताप तक तप्त करते समय होने वाले गुणात्मक परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
(d) CO2 को 70°C तक तप्त तथा समतापी संपीडित किया जाता है। आप प्रेक्षण के लिए इसके किन गुणों में अंतर की अपेक्षा करते हैं?
उत्तर:
(a) समतापी सम्पीडन से तात्पर्य है कि गैस को – 60°C ताप पर दाब अक्ष के समान्तर ऊपर को ले जाया जाता है। इसके लिए हम ( – 60°C) ताप पर दाब अक्ष के समान्तर रेखा खींचते हैं। यह रेखा गैसीय क्षेत्र से सीधे ठोस क्षेत्र में प्रवेश कर जाती है तथा द्रव क्षेत्र से नहीं जाती है। अर्थात् गैस बिना द्रवित हुए ठोस में परिवर्तित हो जाती है।

(b) यहाँ पर 4 atm दाब पर ताप अक्ष के समान्तर रेखा खींचते हैं। हम देखते हैं कि यहाँ रेखा वाष्प क्षेत्र से सीधे ठोस क्षेत्रों में प्रवेश करती है। इसका तात्पर्य है कि गैस, बिना द्रवित हुए ठोस अवस्था में संघनित होगी।

(c) यहाँ हम 10 atm दाब व – 65°C ताप से प्रारम्भ कर ताप अक्ष के समान्तर रेखा खींचते हैं। यह रेखा ठोस क्षेत्र से द्रव क्षेत्र तथा बाद में वाष्प क्षेत्र में प्रवेश करती है। इसका तात्पर्य यह है कि इस ताप व दाब पर गैस ठोस अवस्था में होगी। गर्म करने पर यह गैस धीरे – धीरे द्रवास्था में आ जाएगी व पुनः गर्म करने पर गैसीय अवस्था में आ जाएगी।

(d) चूँकि 70°C ताप गैस के क्रान्ति ताप से अधिक है। अतः इसे समतापी सम्पीडन से द्रवित नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार चिर स्थायी गैसों की भाँति दाब बढ़ाते जाने पर इसका आयतन कम होता जाएगा।

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 14 पत्र जो इतिहास बन गए

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 14 पत्र जो इतिहास बन गए (पत्र, महात्मा गाँधी)

पत्र जो इतिहास बन गए पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

पत्र जो इतिहास बन गए लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘बा’ का स्वास्थ्य सुधरने की जानकारी बापू को किसके द्वारा मिली?
उत्तर:
‘बा’ का स्वास्थ्य सुधरने की जानकारी डिप्टी गवर्नर (उपराज्यपाल) द्वारा मिली।

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प्रश्न 2.
बापूजी प्रातःकालीन स्वल्पाहार में किन पदार्थों को ग्रहण करने की सलाह देते थे?
उत्तर:
बापूजी प्रातःकालीन स्वल्पाहार में दूध और साबूदाना ग्रहण करने की सलाह देते थे।

प्रश्न 3.
गाँधी जी ने अक्षर ज्ञान में किन विषयों पर बल दिया है? और क्यों?
उत्तर:
गाँधी जी ने अक्षर ज्ञान में गणित और संस्कृत विषयों पर बल दिया है क्योंकि बड़ी आयु में इन्हें सीखना कठिन होता है।

प्रश्न 4.
गाँधी जी ने अपने पुत्र से व्यय के संबंध में कौन सी सावधानी रखने को कहा है?
उत्तर:
व्यय के एक-एक पैसे का हिसाब-किताब सावधानी से रखने को कहा है।

प्रश्न 5.
गाँधी जी के अनुसार ईश प्रार्थना करने का उपयुक्त समय क्या है?
उत्तर:
ईश प्रार्थना करने का सबसे उपयुक्त समय सूर्योदय से पहले है।

पत्र जो इतिहास बन गए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गाँधी जी का शिक्षा के प्रति क्या दृष्टिकोण था? (M.P. 2009)
उत्तर:
गाँधी जी का शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण था कि जो शिक्षा व्यक्ति में चरित्र-निर्माण की भावना और कर्तव्य की भावना उत्पन्न करे, वही सर्वश्रेष्ठ है। केवल अक्षरज्ञान शिक्षा नहीं है। सच्ची शिक्षा तो चरित्र-निर्माण और कर्तव्य-बोध है।

प्रश्न 2.
माँ की सेवा के माध्यम से अपने पुत्र को गाँधी जी क्या संदेश देना चाहते थे?
उत्तर:
माँ की सेवा के माध्यम से अपने पुत्र को गाँधी जी यह संदेश देना चाहते थे कि माँ की सेवा करना ही सच्ची शिक्षा है। यही तुम्हारा कर्तव्य है।

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प्रश्न 3.
गाँधी जी का ‘आधी शिक्षा’ से क्या अभिप्राय था?
उत्तर:
गाँधी जी का ‘आधी शिक्षा’ से अभिप्राय था-केवल अक्षरज्ञान प्राप्त करना या होना। उनके अनुसार जो शिक्षा व्यक्ति को केवल अक्षरज्ञान कराती हो और उसमें चारित्रिक सद्गुणों और कर्त्तव्य-बोध की भावना उत्पन्न नहीं करती है, वह आधी शिक्षा है।

प्रश्न 4.
गाँधी जी ने अपने पुत्र से अच्छा किसान बनने की अपेक्षा क्यों की?
उत्तर:
गाँधी जी की इच्छा थी कि उनके परिवार में एक किसान हो। वे भविष्य में खेती से ही अपना जीवन-निर्वाह करना चाहते थे इसीलिए उन्होंने अपने पुत्र से ‘अच्छा किसान बनने की अपेक्षा की है।

प्रश्न 5.
समय की पाबंदी के संबंध में गाँधी जी का क्या मत था? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समय की पाबंदी के संबंध में गाँधी जी का मत था कि व्यक्ति को समय की पाबंदी रखनी चाहिए। समय की पाबंदी जीवन में आगे चलकर बड़ी सहायक सिद्ध होती है।

पत्र जो इतिहास बन गए भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्ति का भाव-विस्तार कीजिए –

प्रश्न 1.
‘अमीरी की तुलना में गरीबी अधिक सुखद है।’
उत्तर:
अमीरी की तुलना में गरीबी व्यक्ति को अधिक सुख देती है। अमीरी में व्यक्ति में झूठे प्रदर्शन की भावना के साथ-साथ अभिमान की भावना घर कर जाती है। वह समाज से दूर हो जाता है। लोगों के मन में ईर्ष्या-द्वेष की भावना उत्पन्न हो जाती है। व्यक्ति अधिक से अधिक प्राप्त करने के चक्कर में लगा हुआ सदा असंतुष्ट रहता है। गरीबी में व्यक्ति संतुष्ट रहता है। उसके जीवन आवश्यकताएँ सीमित रहती हैं। वह सुख, शांति का अनुभव करता है। उसे धन की रक्षा की चिंता नहीं सताती।

प्रश्न 2.
‘मैं समझता हूँ कि केवल अक्षर ज्ञान ही शिक्षा नहीं है।’ उत्तर-गाँधी जी की दृष्टि में केवल अक्षरज्ञान प्राप्त करना शिक्षा नहीं है। सच्ची शिक्षा तो व्यक्ति में चारित्रिक सद्गुणों का विकास करती है। इसके साथ ही वह तो व्यक्ति में कर्तव्य पालन की भावना उत्पन्न करती है। उसे उत्तरदायित्व निभाने का बोध कराती है।

पत्र जो इतिहास बन गए भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित का समास-विग्रह कर’ उनके नाम लिखिए –
प्रतिमास, अक्षर-ज्ञान, चरित्र-निर्माण, जीवन-निर्वाह, घर-खर्च।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 14 पत्र जो इतिहास बन गए img-2

प्रश्न 2.
क्या ‘सूर्योदय’ में संधि और समास दोनों हैं? यदि हाँ तो कैसे? इसी प्रकार के तीन अन्य शब्द लिखिए जिनमें संधि और समास दोनों हों।
उत्तर:
सूर्योदय में समास और संधि दोनों हैं।

सूर्योदय में संधि:
सूर्य + उदय। इसमें गुण संधि है। ‘अ’ स्वर के पश्चात् ह्रस्वः ‘उ’ है, अतः दोनों मिलकर ‘ओ’ हो गए हैं।

सूर्योदय में समास:
सूर्य का उदय। सूर्योदय में तत्पुरुष समास है। इसमें सूर्य और उदय मिलाकर समास बनाते हैं। इसमें ‘का’ विभक्ति का लोप हो जाता है।

तीन अन्य शब्द:
अछूतोद्धार, महोत्सव, हितोपदेश।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों का निर्देशानुसार रूपांतरण कीजिए –

  1. कुछ करने का अधिकार मुझे नहीं है। (प्रश्नवाचक)
  2. क्या वह फिर से चलने-फिरने लगी। (विधिवाचक)
  3. मैं पूर्ण रूप से शांति में हूँ। (निषेध वाचक)

उत्तर:

  1. मुझे कुछ करने का अधिकार क्यों नहीं है?
  2. वह फिर से चलने-फिरने लगी है।
  3. मैं पूर्ण रूप से शांति में नहीं हूँ।

प्रश्न 4.
नीचे लिखे वाक्यों के प्रकार बताइए –

  1. मैंने तुम्हें लिखना पसंद किया क्योंकि पढ़ने के समय तुम्हारा ही ध्यान मुझे बराबर रहता था।
  2. मुझे मालूम है कि तुम्हारे कुछ पत्र यहाँ आए हैं।
  3. गरीबी में ही सुख है।

उत्तर:

  1. संयुक्त वाक्य।
  2. मिश्र वाक्य।
  3. सरल वाक्य।

पत्र जो इतिहास बन गए योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
यदि आपके पिताजी ऐसा पत्र तुम्हें लिखें तो क्या उत्तर दोगे, सोचकर लिखिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
आधुनिक कम्प्यूटर युग में ‘ई-पत्र’ लिखे जाते हैं। ज्ञात कीजिए कि उन्हें लिखने की क्या पद्धति है तथा उससे क्या फायदे हैं?
उत्तर:
छात्र अपने साइंस के अध्यापक से जानकारी प्राप्त करें या कंप्यूटर अध्यापक से पूछे।

प्रश्न 3.
विभिन्न महापुरुषों, साहित्यकारों, स्वतंत्रता सेनानियों और जेल यात्रियों ने अपनी संतानों या देशवासियों को प्रेरक पत्र लिखे हैं। उनकी जानकारी अपनी लघु पुस्तिका में लिखें और मनन करें।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 4.
मध्य प्रदेश से प्रकाशित होने वाले हिंदी पत्रों और पत्रिकाओं की सूची बनाइए तथा उनके पतों पर लेख या कविता भेजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

पत्र जो इतिहास बन गए परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न 1.
गाँधी ने पत्र ……….. के नाम लिखा।
(क) कस्तूरबा
(ख) पंडित जवाहरलाल
(ग) पुत्र
(घ) डिप्टी गवर्नर
उत्तर:
(ग) पुत्र।

प्रश्न 2.
गाँधी जी ने अपने पुत्र के नाम पत्र में अपने संबंध में लिखा कि मैं……हूँ।
(क) पूर्णरूप से शांति में
(ख) पूर्णरूप से दुविधा में
(ग) पूर्णरूप से तनाव में
(घ) पूर्णरूप से मौन में।
उत्तर:
(क) पूर्णरूप से शांति में।

प्रश्न 3.
गाँधी जी को डिप्टी गवर्नर की उदारता से ज्ञात हुआ कि –
(क) ‘बा’ का स्वास्थ्य सुधर रहा है
(ख) पुत्र का स्वास्थ्य खराब है
(ग) पुत्र का स्वास्थ्य सुधर रहा है
(घ) पुत्र का स्वास्थ्य गिर रहा है
उत्तर:
(क) ‘बा’ का स्वास्थ्य सुधर रहा है।

प्रश्न 4.
गाँधी जी ने कहा कि ……….. ही शिक्षा नहीं है –
(क) आध्यात्मिक ज्ञान
(ख) पुस्तकीय ज्ञान
(ग) अक्षरज्ञान
(घ) धार्मिक ज्ञान
उत्तर:
(ग) अक्षरज्ञान।

प्रश्न 5.
जीवन में आगे चलकर बड़ी सहायक सिद्ध होगी यह ………..
(क) नियमितता
(ख) शिक्षा
(ग) ईश-प्रार्थना
(घ) आत्म-निर्भरता
उत्तर:
(क) नियमितता।

प्रश्न 6.
गाँधी जी ने अपने पुत्र से एक योग्य ……….. बनने की अपेक्षा की।
(क) डॉक्टर
(ख) सत्याग्रही
(ग) किसान
(घ) राजनेता
उत्तर:
(क) किसान।

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प्रश्न 7.
महात्मा गाँधी ने अपने पुत्र को पत्र तब लिखा, जब –
(क) वे आन्दोलन चला रहे थे
(ख) जब वे दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर थे
(ग) जब वे जेल में थे
(घ) जब वे दाण्डी यात्रा कर रहे थे।
उत्तर:
(ग) जब वे जेल में थे।

II. निम्नलिखित कथनों में सत्य/असत्य छाँटिए –

  1. गाँधीजी अक्षरज्ञान को ही शिक्षा समझते थे। (M.P. 2009)
  2. गाँधीजी को हर माह एक पत्र लिखने का अधिकार मिला था।
  3. गाँधीजी गरीबी की तुलना में अमीरी सुखद समझते थे।
  4. काम की अधिकता से मनुष्य को घबराना नहीं चाहिए।
  5. महात्मा गाँधी ने अपने पुत्र देवदास को पत्र लिखा।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. असत्य।

III. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर कीजिए – (M.P. 2012)

  1. गाँधीजी ने ………. को पत्र लिखा। (पुत्र/पत्नी)
  2. गाँधीजी अपने पुत्र को ………. बनाना चाहते थे। (किसान/वकील)
  3. पत्र में ………. की बीमारी का उल्लेख किया गया है। (बा/पुत्र)
  4. ‘बा’ के स्वास्थ्य की जानकारी ………. से हुई। (जेलर डिप्टी गवर्नर)
  5. ‘पत्र जो इतिहास बन गए’ के लेखक ………. हैं। (मणिलाल गाँधी/महात्मा गाँधी)

उत्तर:

  1. पुत्र
  2. किसान
  3. ‘बा’
  4. डिप्टी गवर्नर
  5. महात्मा गाँधी।

IV. निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए –

प्रश्न 1.
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 14 पत्र जो इतिहास बन गए img-1
उत्तर:

(i) (ङ)
(ii) (ग)
(iii) (ख)
(iv) (घ)
(v) (क)।

V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

प्रश्न 1.
रामदास और देवदास कौन थे?
उत्तर:
महात्मा गाँधी के सुपुत्र।

प्रश्न 2.
गाँधीजी ने किसको पत्र लिखा?
उत्तर:
अपने सुपुत्र मणिलाल गाँधी को।

प्रश्न 3.
‘बा’ कौन थी?
उत्तर:
महात्मा गाँधी की धर्मपत्नी।

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प्रश्न 4.
गाँधीजी ने पुत्र को क्या बनने के लिए कहा?
उत्तर:
किसान।

प्रश्न 5.
प्रार्थना नियमपूर्वक क्यों करनी चाहिए?
उत्तर:
प्रार्थना नियमपूर्वक करनी चाहिए, क्योंकि जीवन में यह बहुत सहायक सिद्ध होती है।

पत्र जो इतिहास बन गए लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यह पत्र किसने किसको कहाँ से लिखा है?
उत्तर:
यह पत्र महात्मा गाँधी ने अपने पुत्र मणिलाल गाँधी को जेल से लिखा है।

प्रश्न 2.
महात्मा गाँधी ने पुत्र को ही पत्र लिखने का क्या कारण बताया है?
उत्तर:
महात्मा गाँधी को जेल में पढ़ते समय अपने पुत्र का ध्यान ही बराबर रहता था।

प्रश्न 3.
महात्मा गाँधी ने यह पत्र किस जेल से लिखा था?
उत्तर:
महात्मा गाँधी ने यह पत्र दक्षिण अफ्रीका की प्रिटोरिया जेल से लिखा था।

प्रश्न 4.
गाँधी जी को जेल में कितने पत्र लिखने और प्राप्त करने का अधिकार था?
उत्तर:
गाँधी जी को जेल में एक मास में एक पत्र लिखने और एक पत्र प्राप्त करने का अधिकार था।

प्रश्न 5.
गाँधी जी गरीबी में क्यों रहना चाहते थे?
उत्तर:
गाँधी जी को लगता था कि गरीबी में अधिक सुख है। इसलिए वे गरीबी में रहना चाहते थे।

प्रश्न 6.
गाँधीजी ने पत्र कहाँ से लिखा?
उत्तर:
गाँधीजी ने पत्र प्रिटोरिया जेल से लिखा।

प्रश्न 7.
गाँधीजी ने पत्र किसे और कब लिखा?
उत्तर:
गाँधीजी ने पत्र अपने सुपुत्र मणिलाल गाँधी को 15 मार्च, 1909 को लिखा।

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प्रश्न 8.
गणित और संस्कृत कब सीखनी चाहिए?
उत्तर:
गणित और संस्कृत छोटी उम्र में ही सीखनी चाहिए। बड़ी उम्र में ये विषय कम समझ में आते हैं।

पत्र जो इतिहास बन गए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गाँधी जी को अपने पुत्र से क्या आशा थी?
उत्तर:
गाँधी जी को अपने पुत्र से आशा थी कि उन्होंने जो जिम्मेदारी अपने पुत्र पर डाली है, वे उनके सर्वथा योग्य हैं और वह उस काम को अच्छी तरह से आनंद से निभा रहे होंगे।

प्रश्न 2.
गाँधी जी ने जेल जीवन में अध्ययन के द्वारा शिक्षा के संबंध में क्या निष्कर्ष निकाला?
उत्तर:
गाँधी जी ने जेल जीवन में अध्ययन के द्वारा शिक्षा के संबंध में निष्कर्ष निकाला कि अक्षर-ज्ञान ही शिक्षा नहीं है। सच्ची शिक्षा तो चरित्र-निर्माण और कर्तव्य का बोध है।

प्रश्न 3.
काम के संबंध में गाँधी जी का क्या दृष्टिकोण था?
उत्तर:
काम के संबंध में गाँधी जी का दृष्टिकोण था कि व्यक्ति को काम की अधिकता से नहीं घबराना चाहिए। उसे यह नहीं सोचना चाहिए कि यह काम कैसे होगा और पहले क्या करूँगा।

प्रश्न 4.
इस पत्र में गाँधी जी ने किन बातों पर बल दिया है?
उत्तर:
इस पत्र में गाँधी जी ने माँ की सेवा, शिक्षा में चरित्र-निर्माण की भावना, गरीबी की महत्ता, किसानी जीवन का महत्त्व, संस्कृत ज्ञान की उपयोगिता, मितव्ययता और ईश्वर की प्रार्थना पर विशेष बल दिया हैं।

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प्रश्न 5.
एक योग्य किसान बनने के लिए क्या-क्या आवश्यक है?
उत्तर:
एक योग्य किसान बनने के लिए यह आवश्यक है कि खेत में घास और गड्ढे खोदने में पूरा समय देना है। सभी औजारों को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। यही नहीं उन्हें सुव्यवस्थित भी रखना चाहिए।

पत्र जो इतिहास बन गए लेखक-परिचय

प्रश्न 1.
महात्मा गाँधी का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
मोहनदास करमचंद गाँधी को विश्व महात्मा गाँधी के नाम से जानता है। प्रत्येक भारतवासी उनके नाम से परिचित है। भारतीय उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ के रूप में जानते हैं। महात्मा गाँधी 20वीं शताब्दी के युगपुरुष हैं। उनका जन्म 2 अक्टबर, 1869 में गजरात के पोरबंदर में हआ था। आपके पिता का नाम करमचंद और माता का नाम पुतलीबाई था। आपकी माता बहुत धार्मिक प्रवृ 1 की थीं। उनका प्रभाव बेटे पर भी पड़ा।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा भारत में हुई। उसके बाद बैरिस्टरी की शिक्षा प्राप्त करने के लिए वे इंग्लैंड चले गए। वे वहाँ से बैरिस्टरी की परीक्षा:पास करके भारत लौटे और वकालत करने लगे। तेरह वर्ष की आयु में कस्तूरबा से उनका विवाह हुआ। पोरबंदर के धनी व्यवसायी दादा अब्दुल्ला शेख के कुछ मुकदमे दक्षिण अफ्रीका में चल रहे थे। उन मुकदमों की पैरवी करने के लिए अब्दुल्ला शेख गाँधी जी को मई 1893 में अफ्रीका ले गए।

वहाँ गाँधी जी ने भारतीयों की दुर्दशा देखी। उन्होंने उनकी दुर्दशा देखकर उनके उद्धार के लिए आंदोलन चलाया। यह आंदोलन बिलकुल नए ढंग का था। यह आंदोलन ‘सत्याग्रह’ के नाम से जाना जाता है। इस आंदोलन के द्वारा उन्होंने भारतीयों के उद्धार करने में सफलता अर्जित की। अफ्रीका से भारतीयों को सत्याग्रह का मंत्र देकर वे भारत लौट आए। यहाँ आकर उन्होंने संपूर्ण भारत का भ्रमण किया और स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन की बागडोर सँभाली। सत्याग्रह आंदोलन, असहयोग आंदोलन तथा भारत छोड़ो आन्दोलन आदि चलाकर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर विवश किया।

इस तरह 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। महात्मा गाँधी की मातृभाषा गुजराती थी। लेकिन उन्होंने अपनी दूरदृष्टि से हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया। उन्होंने हिंदी के महत्त्व को समझते हुए अपने अधिकांश भाषण हिंदी में दिए। वे सन् 1918 के हिंदी साहित्य सम्मेलन के अधिवेशन के सभापति बने। उन्होंने दक्षिण भारत में हिंदी-प्रचार की वृहद् योजना बनाई। वे हमेशा कहते थे, “स्वदेशाभिमान को स्थिर रखने के लिए हमें हिंदी सीखनी चाहिए।” महात्मा गाँधी, राम, कृष्ण, बुद्ध, ईसा, मुहम्मद आदि महान् विभूतियों की परंपरा में थे। 30 जनवरी, सन् 1948 ई० में एक धर्मांध ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।

रचनाएँ:
गाँधी जी के विपुल साहित्य को उनकी मृत्यु के बाद भारत सरकार के प्रकाशन विभाग ने ‘संपूर्ण गाँधी वाङ्मय’ नाम से प्रकाशित किया है। इसके अनेक – भाग अब तक प्रकाशित हो चुके हैं। आपकी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ महत्त्वपूर्ण रचना है। आपने ‘हरिजन’ और ‘इंडिया’ नामक पत्र भी निकाले।

भाषा-शैली:
गाँधी जी की भाषा सरल हिंदी है। उन्होंने अपने विचारों को आम लोगों तक पहुँचाने के तत्सम, तद्भव, देशी-विदेशी शब्दों का निस्संकोच प्रयोग किया। उन्होंने अपने दार्शनिक विचारों को अत्यंत सरल भाषा में अभिव्यक्त किया।

पत्र जो इतिहास बन गए पाठ का सारांश

प्रश्न 1.
‘गाँधी जी का पुत्र के नाम पत्र’ का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
यह पत्र गाँधी जी ने 25 मार्च, 1909 को प्रिटोरिया जेल से अपने पुत्र मणिलाल गाँधी को लिखा था। गाँधी जी ने अपने पुत्र को बताया है कि उन्हें जेल में रहते हुए एक पत्र लिखने और एक पत्र प्राप्त करने का अधिकार मिला है। उन्होंने पुत्र को पत्र लिखने का कारण स्पष्ट करते हुए कहा कि पढ़ते समय उन्हें अपने पुत्र का ही ध्यान रहता है। उन्होंने अपने पुत्र को लिखा कि वह मेरे संबंध में चिंता न करे।

मैं पूर्णरूप से शांति में हूँ। आशा है कि ‘बा’ स्वस्थ हो गई होंगी। डिप्टी गवर्नर की उदारता से ही मुझे ज्ञात हो सका कि ‘बा’ का स्वास्थ्य सुधर रहा है। क्या वह फिर से चलने-फिरने लगी हैं? ‘बा’ और तुम्हें सुबह प्रतिदिन साबूदाने का प्रयोग करना चाहिए। मैंने तुम्हारे ऊपर जो उत्तरदायित्व डाला है, उसे तुम योग्यता से और आनंद से पूरा कर रहे होंगे।

वास्तविक शिक्षा अक्षर ज्ञान नहीं है। सच्ची शिक्षा तो चरित्र-निर्माण और कर्तव्य का बोध है। तुम्हें माँ की सेवा का अवसर मिला है। अपने दोनों भाइयों की भी देखभाल कर रहे हो। तुम्हारी अधूरी शिक्षा इसी से पूरी हो जाती है। तुम्हें याद रखना चाहिए कि हमें आगे गरीबी में रहना है; क्योंकि अमीरी की अपेक्षा गरीबी अधिक सुखद है। तुम्हें योग्य किसान बनना है और सभी औजारों को साफ-सुथरा और सुव्यवस्थित रखने हैं।

तुम्हें गणित, संस्कृत और संगीत में पूरा ध्यान देना चाहिए। तुम्हें हिंदी, गजराती और अंग्रेजी के चुने हुए भजनों एवं कविताओं का संग्रह करना है। काम की अधिकता से आदमी को घबराना नहीं चाहिए। घर-खर्च में जो भी व्यय करते हो, उसका पैसे-पैसे का हिसाब रखना चाहिए। गाँधी जी अपने पुत्र को नियमित प्रार्थना करने के संबंध में भी कहते हैं। उनका विचार है कि इस नियमितता से भविष्य में बड़ी सहायता मिलेगी। वे अपने पुत्र को लिखते हैं-मैं आशा करता हूँ कि पत्र को अच्छी प्रकार पढ़ने और समझने के बाद ही उत्तर दोगे।

पत्र जो इतिहास बन गए संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

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प्रश्न 1.
आशा है कि ‘बा’ अब अच्छी हो गई होंगी। मुझे मालूम है कि तुम्हारे कुलपत्र यहाँ आए हैं, लेकिन वह मुझे नहीं दिए गए। फिर भी डिप्टी गवर्नर की उदारता से मुझे मालूम हुआ है कि ‘बा’ का स्वास्थ्य सुधर रहा है। क्या वह फिर से चलने-फिरनेलगीं? ‘बा’ और तुम लोग सवेरे दूध के साथ साबूदाने बराबर ले रहे होंगे। (Page 66)
प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश महात्मा गाँधी द्वारा लिखित पाठ ‘पत्र जो इतिहास बन गए’ से उद्धृत है। यह पत्र महात्मा गाँधी जी ने अपने पुत्र मणिलाल गाँधी को 25 मार्च, 1909 को प्रिटोरिया जेल से लिखा था। वे इस गद्यांश में अस्वस्थ ‘बा’ के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, साथ ही उन्हें स्वस्थ रहने के लिए साबूदाना खाने की सलाह भी दे रहे हैं।

व्याख्या:
गाँधी जी इसमें आशा व्यक्त कर रहे हैं कि अब कस्तूरबा स्वस्थ हो गई होंगी। वे अपने पुत्र से कहते हैं-तुमने कई पत्र लिखे होंगे और वे पत्र जेल तक पहुँचे भी होंगे, परंतु दक्षिण अफ्रीका सरकार ने वे पत्र मुझे नहीं दिए। लेकिन यहाँ के डिप्टी गवर्नर की उदारता के कारण ही मुझे ज्ञात हो सका कि अब ‘बा’ के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।

यदि वे उदारता न दिखाते तो मुझे ‘बा’ के स्वास्थ्य के संबंध में कछ पता ही नहीं चलता। गाँधी जी जानना चाहते हैं कि ‘बा’ फिर से चलने-फिरने लगी हैं या नहीं। वे अपनी पत्नी कस्तूरबा और पुत्र को सुबह प्रतिदिन दूध के साथ साबूदाना लेने का भी निर्देश दे रहे हैं। कहने का आशय यह है कि जेल में बंद गाँधी जी अपने पुत्र, पत्नी आदि के स्वास्थ्य के प्रति सचेत हैं। वे जेल में रहकर भी उन्हें खान-पान के संबंध में सचेत करते हैं।

विशेष:

  1. गाँधी जी की अपनी पत्नी कस्तूरबा के स्वास्थ्य संबंध में जानकारी प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त हुई है।
  2. भाषा सरल खड़ी बोली है।

प्रश्न 2.
मैं यह जानता हूँ कि तुम्हें अपनी शि के प्रति असन्तोष है। जेल में मैंने यहाँ खूब पढ़ा है। इससे मैं समझता हूँ कि केवल अक्षर-ज्ञान ही शिक्षा नहीं है। सच्ची शिक्षा तो चरित्र-निर्माण और कर्तव्य का बोध है। यदि यह दृष्टिकोण सही है और मेरे विचार. से तो यह बिलकुल ठीक है, तो तुम सच्ची शिक्षा प्राप्त कर रहे हो। अपनी माँ की सेवा का तो अवसर तुम्हें मिला है और उसकी बीमारी के दुःख को जो तुम सहन कर रहे हो, इससे अच्छा और क्याहो सकता है। रामदास और देवदास को भी तुम सँभाल रहे हो। यदि यह काम तुम अच्छी तरह और आनंद से करते हो, तो तुम्हारी आधी शिक्षा तो इसी के द्वारा पूरी हो जातीहै। (Page 66)

शब्दार्थ:

  • असंतोष – संतुष्ट ने होना।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश महात्मा गाँधी द्वारा लिखित पाठ ‘पत्र जो इतिहास बन गए’ से उद्धृत है। महात्मा गाँधी ने यह पत्र अपने पुत्र को उस समय लिखा जब वे दक्षिण अफ्रीका की जेल में थे। इस गद्यांश में गाँधी जी ने माँ की सेवा, शिक्षा में चरित्र-निर्माण की भावना पर बल दिया है।

व्याख्या:
गाँधी जी अपने पत्र में पुत्र को लिखते हैं कि उन्हें ज्ञात है कि तुम्हारे मन में अपनी शिक्षा को लेकर असंतोष की भावना है। अर्थात् तुम्हें जो शिक्षा प्रदान की गई है अथवा दिलवाई गई है, उससे तुम संतुष्ट नहीं हो। गाँधी जी पत्र में लिखते हैं कि उन्होंने जेल में रहते हुए बहुत अध्ययन किया है। इस अध्ययन के आधार पर वे समझते हैं कि केवल अक्षर ज्ञान प्राप्त करना ही शिक्षा नहीं है। सच्ची शिक्षा तो वही होती है, जो व्यक्ति में चरित्र-निर्माण की भावना और कर्तव्य का पालन करने की भावना उत्पन्न करती है। भाव यह है कि गाँधी जी उसी शिक्षा को श्रेष्ठ मानते थे, जो व्यक्ति में चारित्रिक सद्गुणों का विकास करे और उसमें अपने कर्तव्यों को पहचानने और उनका पालन करने की भावना उत्पन्न करें।

गाँधी जी आगे पत्र में लिखते हैं कि यदि शिक्षा के प्रति मेरा यह दृष्टिकोण ठीक है और मेरे विचार में तो शिक्षा के प्रति यह दृष्टिकोण एकदम सही है तो इसमें कोई खराबी नहीं है। कुछ भी अनुचित नहीं है। इस दृष्टिकोण से देखा जाए, तो तुम सच्ची शिक्षा प्राप्त कर रहे हो। तुम्हें अपनी माँ की सेवा का अवसर (मौका) मिला है। तुम अपनी माँ की बीमारी का दुख सहन कर रहे हो, इससे अच्छा क्या हो सकता है? अर्थात् बीमारी में अपनी माँ की सेवा करना, उनके दुख का अनुभव करना, स्वयं दुखी होना और उनके प्रति अपने कर्तव्य का पालन करना सर्वश्रेष्ठ चारित्रिक गुण है। इसके साथ ही तुम अपने दोनों भाइयों रामदास और देवदास की भी देखभाल कर रहे हो। यदि यह काम तुम भली-भाँति कर रहे हो और प्रसन्नता के साथ निभा रहे हो, तो तुम्हारी आधी शिक्षा की पूर्ति, तो इससे ही हो जाती है।

विशेष:

  1. गाँधी जी ने भारतीय जीवन के मूल्यवान पक्षों का उल्लेख करते हुए शिक्षा के प्रति अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है।
  2. भाषा सरल, स्पष्ट परिमार्जित खड़ी बोली है।
  3. विचारात्मक शैली है।

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प्रश्न 3.
अक्षर ज्ञान में गणित और संस्कृत में पूरा ध्यान देना। भविष्य में संस्कृत तुम्हारे लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी। ये दोनों विषय बड़ी उम्र में सीखना कठिन हैं। संगीत में भी बराबर रुचि रखना। हिंदी, गुजराती और अंग्रेजी के चुने हुए भजनों एवं कविताओं का एक संग्रह तुम्हें तैयार करना चाहिए। वर्ष के अंत में, तुम्हें अपना यह संग्रह बहुत मूल्यवान प्रतीत होगा। काम की अधिकता से मनुष्य को घबराना नहीं चाहिए और न ही यही सोचना चाहिए कि वह कैसे होगा और पहले क्या करूँ। शांत चित्त से विचारपूर्वक तुमने यदि सभी सद्गुणों को प्राप्त करने की चेष्टा की, तो तुम्हारे लिए ये बहुत उपयोगी और मूल्यवान प्रमाणित होंगे। तुमसे मुझे यह भी आशा है कि घर-खर्च के लिए जो तुम खर्च करते हो, उसका पैसे-पैसे का हिसाब रखते रहो। (Page 66)

शब्दार्थ:

  • उपयोगी – लाभदायक।
  • उम्र – आयु।
  • मूल्यवान – कीमती।
  • चेष्टा – प्रयास।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश महात्मा गाँधी द्वारा रचित पाठ ‘पत्र जो इतिहास बन गए’ : से उद्धृत है। यह पत्र गाँधी जी ने जेल से अपने पुत्र मणिलाल गाँधी को लिखा है। इस गद्यांश में उन्होंने अपने पुत्र को गणित एवं संस्कृत के ज्ञान की उपयोगिता तथा चारित्रिक सद्गुणों को प्राप्त करने की महत्ता और मितव्ययता पर प्रकाश डालते हुए, इन्हें जीवन में अपनाने पर बल दिया है।

व्याख्या:
गाँधी जी अपने पत्र में अपने पुत्र को सलाह देते हैं कि अक्षर ज्ञान में गणित और संस्कृत विषय के अध्ययन पर पूरा ध्यान देना क्योंकि तुम्हारे आगामी जीवन में संस्कृत अत्यंत लाभदायक सिद्ध होगी। संस्कृत और गणित दोनों विषय ऐसे हैं जिन्हें बड़ी आयु में सीखना कठिन होता है। आयु बड़ी होने पर इन विषयों को नहीं सीखा जा सकता है। इन दोनों विषयों के साथ-साथ संगीत में भी अपनी रुचि बराबर बनाए रखना। तुम्हें हिंदी, गुजराती और अंग्रेजी के चुने हुए भजनों और कविताओं का एक संग्रह तैयार करना चाहिए।

वर्ष के अंत में यह संग्रह तुम्हें बहुत कीमती लगेगा। व्यक्ति को काम की अधिकता से कभी नहीं घबराना चाहिए। काम के संबंध में व्यक्ति को कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि यह काम या इतना काम कैसे होगा और पहले कौन-सा काम करूँ। भाव यह कि गाँधी जी पत्र में अपने पुत्र को सलाह देते हैं कि तुम्हें काम की अधिकता से नहीं घबराना चाहिए और नहीं यह सोचना चाहिए कि यह काम कैसे होगा और पहले कौन-सा काम प्रारंभ करूँ।

वे अपने पुत्र को कहते हैं कि तुमने शांत मन से अच्छी तरह सोच-विचार कर यदि सभी अच्छे गुणों को प्राप्त करने का प्रयास किया तो तुम्हारे लिए ये बहुत लाभदायक और कीमती सिद्ध होंगे। वे आगे लिखते हैं कि पुत्र! मुझे तुमसे यह भी उम्मीद है कि घर-खर्च; अर्थात् घर को सुव्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए जो भी तुम व्यय करते हो, उसका भी पूरा हिसाब-किताब लिखते होगे। घर खर्च का पूरा ब्यौरा रखना उचित है।

विशेष:

  1. गाँधी जी ने अपने पुत्र को कई परामर्श दिए हैं उसके आगामी जीवन के लिए लाभदायक सिद्ध होंगे।
  2. भाषा सरल खड़ी बोली है।
  3. उपदेशात्मक शैली है।

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MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण

तरलों के यांत्रिकी गुण अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 10.1.
स्पष्ट कीजिए क्यों?
(a) मस्तिष्क की अपेक्षा मानव का पैरों पर रक्तचाप अधिक होता है।
(b) 6 km ऊँचाई पर वायुमण्डलीय दाब समुद्र तल पर वायुमण्डलीय दाब का लगभग आधा हो जाता है, यद्यपि वायुमण्डल का विस्तार 100 km से भी अधिक ऊँचाई तक है।
(c) यद्यपि दाब, प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल होता है तथापि द्रवस्थैतिक दाब एक अदिश राशि है।।
उत्तर:
(a) पैरों के ऊपर रक्त स्तम्भ की ऊँचाई मस्तिष्क के ऊपर रक्त स्तम्भ की ऊँचाई से ज्यादा होती है। हम जानते हैं कि द्रव स्तम्भ का दाब गहराई के अनुक्रमानुपाती होता है। इसी कारण पैरों पर रक्त दाब मस्तिष्क की तुलना में अधिक होता है।

(b) पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव के कारण वायु के अणु पृथ्वी के नजदीक बने रहते हैं, अधिक ऊँचाई तक नहीं जा पाते हैं। इस प्रकार 6 किमी से अधिक ऊँचाई तक जाने पर वायु बहुत ही विरल हो जाती है तथा घनत्व बहुत कम हो जाता है। चूंकि द्रव – दाब, द्रव के घनत्व के समानुपाती होता है। इस प्रकार 6 किमी से ऊपर की वायु का कुल दाब बहुत कम होता है। अतः पृथ्वी तल से 6 किमी की ऊँचाई पर वायुमण्डलीय दाब समुद्र तल पर वायुमण्डलीय दाब से आधा रह जाता है।

(c) पास्कल के नियमानुसार, किसी बिन्दु पर द्रव दाब समस्त दिशाओं में समान रूप से लगता है। अतः दाब के साथ कोई दिशा नहीं जोड़ी जा सकती है। अतः दाब एक सदिश राशि है।

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प्रश्न 10.2.
स्पष्ट कीजिए क्यों?
(a) पारे का काँच के साथ स्पर्श कोण अधिक कोण होता है जबकि जल का काँच के साथ स्पर्श कोण न्यून कोण होता
(b) काँच के स्वच्छ समतल पृष्ठ पर जल फैलने का प्रयास करता है जबकि पारा उसी पृष्ठ पर बूंदें बनाने का प्रयास करता है। (दूसरे शब्दों में जल काँच को गीला कर देता है जबकि पारा ऐसा नहीं करता है।)
(c) किसी द्रव का पृष्ठ तनाव पृष्ठ के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता है।
(d) जल में घुले अपमार्जकों के स्पर्श कोणों का मान कम होना चाहिए।
(e) यदि किसी बाह्य बल का प्रभाव न हो, तो द्रव बँद की आकृति सदैव गोलाकार होती है।

उत्तर:
(a) पारे के अणुओं के मध्य संसजक बल, पारे तथा काँच के अणुओं के मध्य आसंजक बल से अधिक होता है। अतः काँच व पारे का स्पर्श कोण अधिक कोण होता है जबकि जल के अणुओं के मध्य संसजक बल, काँच तथा जल के अणुओं के मध्य आसंजक बल से कम होता है। अत: जल व काँच के मध्य स्पर्श कोण न्यूनकोण होता है।
(b) यहाँ पर उपरोक्त कारण लागू होता है।
(c) किसी द्रव के मुक्त पृष्ठ का क्षेत्रफल बढ़ा देने पर उसके तनाव में कोई परिवर्तन नहीं होता है जबकि रबड़ की झिल्ली को खींचने पर उसमें तनाव बढ़ जाता है। अतः द्रव का पृष्ठ – तनाव उसके मुक्त क्षेत्रफल से निर्भर होता है।
(d) अपमार्जक घुले होने पर जल का पृष्ठ तनाव कम हो जाता है, परिणामस्वरूप स्पर्श कोण भी कम हो जाता है।
(e) बाह्य बल की अनुपस्थिति में बूंद की आकृति सिर्फ पृष्ठ तनाव द्वारा निर्धारित होती है। पृष्ठ तनाव के कारण बूंद न्यूनतम क्षेत्रफल वाली आकृति ले लेती है। चूंकि एक दिए गए आयतन के लिए गोले का युक्त पृष्ठ न्यूनतम होता है। अतः बूंद गोलाकार हो जाती है।

प्रश्न 10.3.
प्रत्येक प्रकथन के साथ संलग्न सूची में से उपयुक्त शब्द छाँटकर उस प्रकथन के रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए –

  1. व्यापक रूप में द्रवों का पृष्ठ तनाव ताप बढ़ने पर ………………… है। (बढ़ता/घटता)
  2. गैसों की श्यानता ताप बढ़ने पर ………………………… है, जबकि द्रवों की श्यानता ताप बढ़ने पर ……………………….. है। (बढ़ती/घटती)
  3. दृढ़ता प्रत्यास्थता गुणांक वाले ठोसों के लिए अपरूपण प्रतिबल ………………………. के अनुक्रमानुपाती होता है, जबकि द्रवों के लिए वह ……………………….. के अनुक्रमानुपाती होता है। (अपरूपण विकृति/अपरूपण विकृति की दर)
  4. किसी तरल के अपरिवर्ती प्रवाह में आए किसी संकीर्णन पर प्रवाह की चाल में वृद्धि में ………………………… का अनुसरण होता है। (संहति का संरक्षण/बर्नली सिद्धांत)
  5. किसी वायु सुरंग में किसी वायुयान के मॉडल में प्रक्षोभ की चाल वास्तविक वायुयान के प्रक्षोभ के लिए क्रांतिक चाल की तुलना में ………………………… होती है। (अधिक/कम)

उत्तर:

  1. घटता
  2. बढ़ती, घटती
  3. अपरूपण विकृति, अपरूपण विकृति की दर
  4. संहति का संरक्षण
  5. अधिक।

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प्रश्न 10.4.
निम्नलिखित के कारण स्पष्ट कीजिए।

(a) किसी कागज की पट्टी को क्षैतिज रखने के लिए आपको उस कागज पर ऊपर की ओर हवा फूंकनी चाहिए, नीचे की ओर नहीं।

(b) जब हम किसी जल टोंटी को अपनी उँगलियों द्वारा बंद करने का प्रयास करते हैं, तो उँगलियों के बीच की खाली जगह से तीव्र जल धाराएँ फूट निकलती हैं।

(c) इंजेक्शन लगाते समय डॉक्टर के अंगूठे द्वारा आरोपित दाब की अपेक्षा सुई का आकार दवाई की बहिःप्रवाही धारा को अधिक अच्छा नियंत्रित करता है।

(d) किसी पात्र के बारीक छिद्र से निकलने वाला तरल उस पर पीछे की ओर प्रणोद आरोपित करता है।

(e) कोई प्रचक्रमान क्रिकेट की गेंद वायु में परवलीय प्रपथ का अनुसरण नहीं करती।

उत्तर:

(a) कागज पर ऊपर की ओर फूंक मारने से ऊपर की वायु का वेग अधिक हो जाएगा। अत: बर्नूली की प्रमेय से, कागज के ऊपर वायुदाब, नीचे की अपेक्षा कम हो जाएगा। इससे कागज पर उत्थापक बल लगेगा जो कागज को नीचे गिरने से रोकेगा।

(b) जल टोंटी को उँगलियों द्वारा बन्द करने पर उँगलियों के बीच की खाली जगह से तीव्र जल धाराएँ फूट निकलती हैं। यहाँ धारा का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल टोंटी के अनुप्रस्थ क्षेत्रफल से कम होता है। अतः अविरतता के नियमानुसार, जल का वेग अधिक हो जाता हैं।

(c) अविरतता के नियम से, समान दाब आरोपित किए जाने पर, सुई बारीक होने पर बहि:प्रवाही धारा का प्रवाह वेग बढ़ जाता है। अत: बहिःप्रवाही वेग सुई के आकार से ज्यादा नियन्त्रित होता

(d) किसी पात्र के बारीक छिद्र से निकलने वाला तत्व उस पर पीछे की ओर प्रणोद आरोपित करता है। इसका कारण यह है कि यहाँ उच्च बहि:स्राव वेग प्राप्त कर लेता है। बाह्य बल के अनुपस्थिति में पात्र तथा तरल का संवेग संरक्षित रहता है। अतः पात्र विपरीत दिशा में संवेग प्राप्त करता है। अर्थात् बाहर निकलता हुआ द्रव पात्र पर विपरीत दिशा में प्रणोद लगाता है।

(e) घूर्णन करती गेंद अपने साथ वायु को खींचती है। अतः गेंद के ऊपर व नीचे वायु के वेग में अन्तर आ जाता है। परिणामस्वरूप दाबों में भी अन्तर आ जाता है। इसी कारण गेंद पर भार के अतिरिक्त एक दूसरा बल भी लगने लगता है तथा गेंद का पथ परवलयाकार नहीं रह पाता है।

प्रश्न 10.5.
ऊँची एड़ी के जूते पहने 50 kg संहति की कोई बालिका अपने शरीर को 1.0 cm व्यास की एक ही वृत्ताकार एड़ी पर संतुलित किए हुए है। क्षैतिज फर्श पर एड़ी द्वारा आरोपित दाब ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, F = mg = 50 × 9.8 N = 490 N
d = 1.0cm, r = \(\frac{d}{2}\) = 0.5cm
= 0.3 × 10-2m = 5 × 10-3
फर्श का क्षैतिज क्षेत्रफल जहाँ एड़ी लगती है,
A = πr2 = 3.142 (5 × 10-3)2
= 3.142 × 25 × 10-6 m2
माना एड़ी द्वारा क्षैतिज फर्श पर लगाया गया दाब P है।
अतः P = \(\frac{F}{A}\)
या
P = \(\frac { 490 }{ 3.142\times 25\times 10^{ -6 } } \)
= 6.24 × 106 Pascal
P = 6.24 × 106 Pa

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प्रश्न 10.6.
टॉरिसिली के वायुदाब मापी में पारे का उपयोग किया गया था। पास्कल ने ऐसा ही वायुदाब मापी 984kgm -3 Pa घनत्व की फ्रेंच शराब का उपयोग करके बनाया। सामान्य वायुमंडलीय दाब के लिए शराब स्तंभ की ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना सामान्य ताप पर संगत फ्रेंच शराब स्तम्भ की ऊँचाई h है।
साधारण वायुमण्डलीय दाब
P = 1.013 × 105 पास्कल
माना शराब स्तम्भ के संगत दाब P’ है।
P’ = Hpwg
जहाँ pw = शराब का घनत्व = 984 kgm-3
प्रश्नानुसार, P’ = P
या hpwg =P
या h = \(\frac { P }{ \rho _{ w }g } \)
= \(\frac { 1.013\times 10^{ 5 } }{ 984\times 9.8 } \) = 10.5 m

प्रश्न 10.7.
समुद्र तट से दूर कोई ऊर्ध्वाधर संरचना 109 Pa के अधिकतम प्रतिबल को सहन करने के लिए बनाई गई है। क्या यह संरचना किसी महासागर के भीतर किसी तेल कप के शिखर पर रखे जाने के लिए उपयुक्त है? महासागर की गहराई लगभग 3 km है। समुद्री धाराओं की उपेक्षा कीजिए।
उत्तर:
दिया है: जल स्तम्भ की गहराई, L = 3 किमी
= 3 × 103 मीटर 3
जल का घनत्व, ρ = 103 किग्रा/मीटर 3
माना जल स्तम्भ द्वारा आरोपित दाब P है।
∴ P = hpg
= 3 × 103 × 103 × 9.8
= 30 × 106 = 3 × 107 पास्कल
चूँकि संरचना को महासागर पर रखा गया है अत: महासागर का जल 3 × 107 पास्कल का दाब लगाता है।
चूंकि ऊर्ध्व संरचना पर अधिकतम भंजक प्रतिबल 109 है।
3 × 107 पास्कल < 10 × 9 पास्कल
अतः यह संरचना महासागर के भीतर तेल कूप के शिखर पर रखी जा सकती है।

प्रश्न 10.8.
किसी द्रवचालित आटोमोबाइल लिफ्ट की संरचना अधिकतम 3000 kg संहति की कारों को उठाने के लिए की गई है। बोझ को उठाने वाले पिस्टन की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 425 cm है। छोटे पिस्टन को कितना अधिकतम दाब सहन करना होगा?
उत्तर:
दिया है: बड़े पिस्टन पर अधिकतम सहनीय बल,
F = 3000 kgf = 3000 × 9.8 N पिस्टन का क्षेत्रफल
A = 425 cm2 = 425 × 10-4m2
माना बड़े पिस्टन पर अधिकतम दाब P है।
अतः P = \(\frac{F}{A}\) = \(\frac { 3000\times 9.8 }{ 425\times 10^{ -4 } } \)
= 6.92 × 105
चूँकि द्रव सभी दिशाओं में समान दाब आरोपित करता है। अतः छोटी पिस्टन 6.92 × 105 पास्कल का अधिकतम दाब सहन करना होगा।

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प्रश्न 10.9.
किसी U – नली की दोनों भुजाओं में भरे जल तथा मेथेलेटिड स्पिरिट को पारा एक – दूसरे से पृथक् करता है। जब जल तथा पारे के स्तंभ क्रमश: 10 cm तथा 12.5 cm ऊँचे हैं, तो दोनों भुजाओं में पारे का स्तर समान है। स्पिरिट का आपेक्षित घनत्व ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है: U नली की एक भुजा में जल की ऊँचाई, h1 = 10 सेमी,
ρ1 = ग्राम/सेमी 3
U नली की एक दूसरी भुजा में स्प्रिट की ऊँचाई, h2 = 12.5 सेमी,
ρ2 = ?
माना जल तथा स्प्रिट द्वारा लगाया गया दाब क्रमश: P1 व P2 है।
∴ P1 = h1ρ1g …………. (i)
व P2 = h2ρ2g ……………. (ii)
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण img 1
चूँकि दोनों भुजाओं में पारे का स्तम्भ समान है। अतः
P1 = P2
या h1ρ1g = h2ρ2g
या ρ2 = \(\frac { h_{ 1 }\rho _{ 1 } }{ h_{ 2 } } \)
= \(\frac{10 × 1}{12.5}\) = \(\frac{4}{5}\)
= 0.8 cm -3
स्प्रिट का विशिष्ट घनत्व = \(\frac { \rho _{ 1 } }{ \rho _{ 2 } } \)
= \(\frac { 0.8gcm^{ -3 }\quad }{ 1gcm^{ -3 }\quad } \) = 0.800

प्रश्न 10.10.
यदि प्रश्न 10.9 की समस्या में, U – नली की दोनों भुजाओं में इन्हीं दोनों द्रवों को और उड़ेल कर दोनों द्रवों के स्तंभों की ऊँचाई 15 cm और बढ़ा दी जाए, तो दोनों भुजाओं में पारे के स्तरों में क्या अंतर होगा। (पारे का आपेक्षिक घनत्व = 13.6)।
उत्तर:
माना U – नली की दोनों भुजाओं में अन्तर h है।
माना पारे का घनत्व pm है।
माना समान क्षैतिज पर दो बिन्दु A व B हैं।
∴A पर दाब = B पर दाब
या P0 + hwρwg
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण img 2
= P0 + hsρsg + hmρmg
जहाँ P0 = वायुमण्डलीय दाब
या hwρw = hsρs + hmρm ………. (i)
या hmρm = hwρw – hsρs
दिया है जल स्तम्भ की ऊँचाई,
hs = 12.5 + 15 = 27.5 cm
ρw = 1 g cm-3
ρs = 0.8 cm-3
ρm = 13.6 g cm-3
समी० (i) व (ii) से
hm × 13.6 = 25 × 1 – 27.5 × 0.8
या hm = \(\frac { 25-22.00 }{ 13.6 } \) = 0.2206 cm
= 0.221 cm
या hm = 0.221 cm

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प्रश्न 10.11.
क्या बली समीकरण का उपयोग किसी नदी की किसी क्षिप्रिका के जल – प्रवाह का विवरण देने के लिए किया जा सकता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बर्नूली समीकरण केवल धार-रेखी प्रवाह पर लागू होता है। नदी की क्षिप्रिका का जल-प्रवाह धारा रेखी प्रवाह नहीं होता है। इसलिए इसका विवरण देने के लिए बर्नूली समीकरण का प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न 10.12.
बर्नूली समीकरण के अनुप्रयोग में यदि निरपेक्ष दाब के स्थान पर प्रमापी दाब (गेज दाब) का प्रयोग करें तो क्या इससे कोई अंतर पड़ेगा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बर्नूली समीकरण से,
P1 + \(\frac{1}{2}\)ρv12 + ρgh1
= P2 + \(\frac{1}{2}\)ρv22 + ρgh2
या P1 – P2 = \(\frac{1}{2}\)ρ (v22 – v12) + ρg(h2 – h1) …….. (i)
माना दो बिन्दुओं पर वायुमण्डलीय व गेज दाब क्रमश:
PaP1a व P1, P12 हैं।
P1 = Pa + P2
तथा P2 = P1a + P2
P2 – P2 = (Pa – P’a) + (P’1 – P’2) ~ P’1 – P’2 (∴Pa = P’a)
अतः दोनों बिन्दुओं पर वायुमण्डलीय दाबों में बहुत कम अन्तर होने पर परमदाब के स्थान पर गेज दाब का प्रयोग करने से कोई अन्तर नहीं पड़ेगा।

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प्रश्न 10.13.
किसी 1.5 m लंबी 1.0 cm त्रिज्या की क्षैतिज नली से ग्लिसरीन का अपरिवर्ती प्रवाह हो रहा है। यदि नली के एक सिरे पर प्रति सेकंड एकत्र होने वाली ग्लिसरीन का परिणाम 4.0 × 10-3 kgs-1 है, तो नली के दोनों सिरों के बीच दाबांतर ज्ञात कीजिए। (ग्लिसरीन का घनत्व = 1.3 × 103kgm-3 तथा ग्लिसरीन की श्यानता = 0.83 Pas)
[आप यह भी जाँच करना चाहेंगे कि क्या इस नली में स्तरीय प्रवाह की परिकल्पना सही है।]
उत्तर:
दिया है:
r = 1.0 cm = 10-2 cm
l = 1.5 m
ρ = 1.3 × 102kg m-3
प्रति सेकण्ड ग्लिसरीन का प्रवाहित द्रव्यमान,
M = 4 × 10-3 kgs-1
ग्लिसरीन की श्यानता,
η = 0.83 Pas = 0.83 Nm-2s
माना नली के दोनों सिरों पर दाबान्तर P है।
रेनॉल्ड संख्या NR = ?
माना ग्लिसरीन का प्रति सेकण्ड प्रवाहित आयतन V है।
∴V = \(\frac{M}{ρ}\)
= \(\frac { 4\times 10^{ -3 }kgs^{ -1 } }{ 1.3\times 10^{ 3 }kgm^{ -3 } } \)
= \(\frac{4}{1.3}\) × 10-6m3s-1
पासले सूत्र से,
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण img 3
= 9.7537 × 102 Pa
= 9.8 × 102 Pa
धारा रेखीय प्रवाह की अभिग्रहीति जाँचने के लिए हम रेनॉल्ड संख्या का मान निकालते हैं –
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण img 4
= 3.07 × 10-1 = 0.307 = 0.31
अतः प्रवाह स्तरीय (धारा रेखीय) है।

प्रश्न 10.14.
किसी आदर्श वायुयान के परीक्षण प्रयोग में वायु – सुरंग के भीतर पंखों के ऊपर और नीचे के पृष्ठों पर वायु-प्रवाह की गतियाँ क्रमश: 70 ms-1 तथा 63 ms-1 हैं। यदि पंख का क्षेत्रफल 2.5 m2 है, तो उस पर आरोपित उत्थापक बल परिकलित कीजिए। वायु का घनत्व 13 kgm-3 लीजिए।
उत्तर:
माना वायुयान के ऊपरी व निचली पर्तों की चाल क्रमशः v1, व v2, है तथा संगत दाब क्रमशः P1 व P2, है। दिया है –
v1 = 70 मीटर/सेकण्ड
v2 = 63 मीटर/सेकण्ड
ρ = 1.3 किग्रा/मीटर3
माना पंखों की ऊपरी व निचले पर्ते समान ऊँचाई पर हैं।
h1 = h2
पंख का क्षेत्रफल, A = 2.5 मीटर 2
बरनौली प्रमेय से,
P1 + ρgh2 + \(\frac{1}{2}\) ρv12
= P2 + rogh2 + \(\frac{1}{2}\) ρv22
या P2 – P1 = \(\frac{1}{2}\) ρ(v12 – v22)
यह दाबान्तर ही वायुयान को ऊपर उठाता है।
माना, पंखे पर आरोपित बल है। अतः
F = (P2 – P1) × A
= \(\frac{1}{2}\) ρ (v12 – v22) × 2.5
= \(\frac{1}{2}\) × 1.3 × (702 – 632) × 2.5
= \(\frac{1}{2}\) × 1.3 × 931 × 2.5 = 1512.9N
= 1.5129 × 103N = 1.513 × 103N
= 1.5 × 103N

प्रश्न 10.15.
चित्र (a) तथा (b) किसी द्रव (श्यानताहीन) का अपरिवर्ती प्रवाह दर्शाते हैं। इन दोनों चित्रों में से कौन सही नहीं है? कारण स्पष्ट कीजिए।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण img t
उत्तर:
चित्र (a) सही नहीं है। चूँकि इस चित्र में, नलिका की ग्रीवा में अनुप्रस्थ क्षेत्रफल कम है। अत: अविरतता के सिद्धान्त से, यहाँ वेग अधिक होगा। अर्थात् बर्नूली प्रमेय से यहाँ जल दाब कम होगा जबकि चित्र (a) में ग्रीवा पर जल दाब अधिक दिखाया गया है।

प्रश्न 10.16.
किसी स्प्रे पंप की बेलनाकार नली की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 8.0 cm2 है। इस नली के एक सिरे पर 1.0 mm व्यास के 40 सूक्ष्म छिद्र हैं। यदि इस नली के भीतर द्रव के प्रवाहित होने की दर 1.5 m min-1 है, तो छिद्रों से होकर जाने वाले द्रव की निष्कासन – चाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
A1 = 8 सेमी 2 = 8 × 10-4 मीटर2
छिद्र की त्रिज्या,
r = 0.5 मिमी = 0.5 × 10 -3 मीटर
छिद्रों का कुल क्षेत्रफल = 40 × π(r2)
= 40 × 3.14 × (0.5 × 10-3)2
= 0.3 × 10-4 मीटर2
v1 = 1.5 मीटर/सेकण्ड
= \(\frac{1.5}{60}\) = \(\frac{1}{40}\) मीटर/सेकण्ड
v2 = ?
सातत्यता समीकरण से,
A2v2 = A1v1
v2 = \(\frac { A_{ 1 } }{ A_{ 2 } } \) v1
= \(\frac { 8\times 10^{ -4 } }{ 0.3\times 10^{ -4 } } \) × 0.025
= 9.64 मीटर/सेकण्ड

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प्रश्न 10.17.
U – आकार के किसी तार को साबुन के विलयन में डुबो कर बाहर निकाला गया जिससे उस पर एक पतली साबुन की फिल्म बन गई। इस तार के दूसरे सिरे पर फिल्म के संपर्क में एक फिसलने वाला हल्का तार लगा है जो 1.5 × 10-2N भार (जिसमें इसका अपना भार भी सम्मिलित है) को सँभालता है। फिसलने वाले तार की लम्बाई 30 cm है। साबुन की फिल्म का पृष्ठ तनाव कितना है?
उत्तर:
दिया है: तार की लंबाई,
l = 30
सेमी = 0.3 मीटर
तार पर लटका भार,
w = 1.5 × 10-2 न्यूटन
माना फिल्म का पृष्ठ तनाव S है।
अतः फिल्म के एक ओर के पृष्ठ के कारण तार पर लगने वाला बल,
F1 = s × 1
दोनों पृष्ठों के कारण तार पर बल,
F = 2F1
= 2sl
यह बल (F) ही भार (W) को सन्तुलित करता है।
2sl = w
पृष्ठ तनाव, s = \(\frac{W}{2l}\)
= \(\frac { 1.5\times 10^{ -2 } }{ 2\times 0.3 } \)
= 2.5 × 10-2 न्यूटन प्रति मीटर

प्रश्न 10.18.
निम्नांकित चित्र (a) में किसी पतली द्रव फिल्म को 4.5 × 10-2 N का छोटा भार सँभाले दर्शाया गया है। चित्र (b) तथा (e) में बनी इसी द्रव की फिल्में इसी ताप पर कितना भार संभाल सकती हैं? अपने उत्तर को प्राकृतिक नियमों के अनुसार स्पष्ट कीजिए।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण img u
उत्तर:
तीनों चित्रों में, फिल्म के नीचे वाले किनारे की लम्बाई 40 सेमी (समान) है। (F = 25 l)
इस किनारे पर फिल्म के पृष्ठ तनाव (S) के कारण समान बल लगेगा। यह बल लटके हुए भार को साधता है। चूँकि साधने वाला बल प्रत्येक दशा में समान है। इसलिए चित्र (b) तथा (c) में भी वही भार 4.5 × 10 -2 न्यूटन सँभाला जा सकता है।

प्रश्न 10.19.
3.00 mm त्रिज्या की किसी पारे की बूंद के भीतर कमरे के ताप पर दाब क्या है? 20°C ताप पर पारे का पृष्ठ तनाव 4.65 × 10-1 Nm-1 है। यदि वायुमंडलीय दाब 1.01 × 105 Pa है, तो पारे की बूंद के भीतर दाब – आधिक्य भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
बूंद की त्रिज्या r = 3.0 mm
= 3.0 × 10-3 m
पारे का पृष्ठ तनाव
T = 4.65 × 10-1 Nm-1
बूंद के बाहर दाब, Po = वायुमण्डलीय दाब
= 1.01 × 105 Pa
माना कि बूंद के अन्दर दाब P है तब बूंद के अन्दर आधिक्य दाब निम्नवत् है –
P = Pi – P0 = \(\frac{2T}{r}\)
= \(\frac { 2\times 4.65\times 10^{ -1 } }{ 3\times 10^{ -3 } } \) = 310Pa
Pi = P + P0
= 310 + 1.01 × 105 Pa
= 1.01 × 105 + 0.00310 × 105
= 1.01310 × 105 Pa

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प्रश्न 10.20.
5.00 mm त्रिज्या के किसी साबुन के विलयन के बुलबुले के भीतर दाब – आधिक्य क्या है? 20°C ताप पर साबुन के विलयन का पृष्ठ तनाव 4.65 × 10-1 Nm-1 है। यदि इसी विमा का कोई वायु का बुलबुला 1.20 आपेक्षिक घनत्व के साबुन के विलयन से भरे किसी पात्र में 40.0 cm गहराई पर बनता, तो इस बुलबुले के भीतर क्या दाब होता, ज्ञात कीजिए।
(1 वायुमंडलीय दाब = 1.01 × 105Pa)
उत्तर:
साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव,
T = 2.5 × 10-2 Nm-1
साबुन के घोल का घनत्व = ρ
= 1.2 × 103kg m-3
साबुन के बुलबुले की त्रिज्या = r
= 5.0 mm = 5.0 × 10-3m
1 वायुमण्डलीय दाब = 1.01 × 105 Pa
साबुन के बुलबुले के अन्दर आधिक्य दाब निम्नवत् है –
Pi – P0 = \(\frac{4T}{r}\)
= \(\frac { 2\times 2.5\times 10^{ -2 } }{ 5.0\times 10^{ -3 } } \) = 20 Pa
साबुन के घोल में वायु के बुलबुले के अन्दर आधिक्य दाब –
Pi – P0 = \(\frac{2T}{r}\)
= \(\frac { 2\times 2.5\times 10^{ -2 } }{ 5.0\times 10^{ -3 } } \) = 10 Pa
40 सेमी गहराई पर वायु के बुलबुले के बाहर दाब,
P0 = वायुमण्डलीय दाब + 40 सेमी के कारण दाब
= 1.01 × 105 + 0.4 × 1.2 × 103 × 9.8
= 1.05704 × 105 Pa (∴P = hpg)
= 1.06 × 105 Pa
∴ वायु के बुलबुले के अन्दर दाब
Pi = P0 + \(\frac{2T}{r}\)
= (1.06 × 105 + 10)Pa
= 1.06 × 105 + 0.00010 × 105
= 1.06010 × 105Pa
= 1.06 × 105 Pa

तरलों के यांत्रिकी गुणअतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 10.21.
1.0 m2 क्षेत्रफल के वर्गाकार आधार वाले किसी टैंक को बीच में ऊर्ध्वाधर विभाजक दीवार द्वारा दो भागों में बाँटा गया है। विभाजक दीवार में नीचे 20 cm2 क्षेत्रफल का कब्जेदार दरवाजा है। टैंक का एक भाग जल से भरा है तथा दूसरा भाग 1.7 आपेक्षिक घनत्व के अम्ल से भरा है। दोनों भाग 4.0 m ऊँचाई तक भरे गए हैं। दरवाजे को बंद रखने के आवश्यक बल परिकलित कीजिए।
उत्तर:
दिया है: दोनों ओर भरे द्रवों की ऊँचाई
hw = ha = 4 मीटर
जल का घनत्व pw = 103 किग्रा प्रति मीटर 3
अम्ल का आपेक्षिक घनत्व = \(\frac { \rho _{ a } }{ \rho _{ w } } \) = 1.7
दरवाजे का क्षेत्रफल
A = 20 सेमी2 = 2 × 10-3 मीटर 2
जल की साइड से दरवाजे पर दाब
P1 = Pa + hwρwg
= Pa + 4 × 103 × 9.8
= Pa + 3.92 × 10 4 न्यूटन/मीटर 2
अम्ल की साइड से दरवाजे पर दाब
P2 = Pa + haρag
= Pa + ha \(\frac { \rho _{ a } }{ \rho _{ w } } \) × g × ρw
= Pa + 6.66 × 104 न्यूटन/मीटर 2
अतः दाबान्तर P = P2 – P1 = (6.66 – 3.92) × 104
= 2.74 × 104 न्यूटन/मीटर 2
अतः दरवाजा बन्द रखने के लिए आवश्यक बल F = PA
= 2.74 × 104 × 2 × 10-3
= 54.8
= 55 न्यूटन

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प्रश्न 10.22.
चित्र (a) में दर्शाए अनुसार कोई मैनोमीटर किसी बर्तन में भरी गैस के दाब का पाठ्यांक लेता है। पंप द्वारा कुछ गैस बाहर निकालने के पश्चात् मैनोमीटर चित्र (b) में दर्शाए अनुसार पाठ्यांक लेता है। मैनोमीटर में पारा भरा है तथा वायुमंडलीय दाब का मान 76 cm (Hg) है।
(i) प्रकरणों (a) तथा (b) में बर्तन में भरी गैस के निरपेक्ष दाब तथा प्रमापी दाब cm (Hg) के मात्रक में लिखिए।
(ii) यदि मैनोमीटर की दाहिनी भुजा में 13.6 cm ऊँचाई तक जल (पारे के.साथ अमिश्रणीय) उड़ेल दिया जाए तो प्रकरण (b) में स्तर में क्या परिवर्तन होगा? (गैस के आयतन में हुए थोड़े परिवर्तन की उपेक्षा कीजिए।)
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण img l
उत्तर:
(i) प्रकरण (a) में
गैस का निरपेक्ष दाब = Pa + h
दिया है: h = 20 सेमी पारा व pa = 76 सेमी पारा (वायुमण्डलीय दाब)
निरपेक्ष दाब = 76 + 20 = 96 सेमी (पारा)
लेकिन प्रमापी दाब (मेज दाब) = 20 सेमी (पारा) प्रकरण (b) में
गैस का निरपेक्ष दाब = Pa + h
= 76 – 18 (h = – 18 सेमी)
= 58 सेमी (पारा)
लेकिन प्रमापी दाब (गेज दाब) = – 18 सेमी (पारा)

(ii) जल स्तम्भ के दाब को सन्तुलित करने के लिए बाईं भुजा में पारा ऊपर चढ़ेगा। माना दोनों ओर के तलों का अन्तर h है।
माना h1 = 13.6 सेमी ऊँचे जल स्तम्भ का दाब h’1, ऊँचाई वाले पारे के स्तम्भ के दाब के समान है।
∴h’1 × ρHg × g = h1w.g
∴h’1 = \(\frac { \rho _{ w } }{ \rho _{ ng } } \) × h1
= \(\frac { 10^{ 3 }\times 13.6 }{ 13.6\times 10^{ 3 } } \) = 1 सेमी।
प्रकरण (c) में गैस का निरपेक्ष दाब,
P = Pa + h’ + h’1
58 = 76 + h + 1
h = 58 – 77 = – 19 सेमी।
अतः प्रथम स्तम्भ में पारे का तल दूसरे स्तम्भ की तुलना में 19 सेमी ऊँचा हो जाएगा।

प्रश्न 10.23.
दो पात्रों के आधारों के क्षेत्रफल समान हैं परंतु आकृतियाँ भिन्न – भिन्न हैं। पहले पात्र में दूसरे पात्र की अपेक्षा किसी ऊँचाई तक भरने पर दो गुना जल आता है। क्या दोनों प्रकरणों में पात्रों के आधारों पर आरोपित बल समान हैं। यदि ऐसा है तो भार मापने की मशीन पर रखे एक ही ऊँचाई तक जल से भरे दोनों पात्रों के पाठ्यांक भिन्न – भिन्न क्यों होते है?
उत्तर:
हाँ, दोनों प्रकरणों में पात्रों के आधारों पर आरोपित बल समान है।
माना प्रत्येक पात्र में जल स्तम्भ की ऊँचाई h व आधार का क्षेत्रफल A है।
अतः आधार पर बल = जल स्तम्भ का दाब × क्षेत्रफल
= hpg × A = Ahpg
अत: दोनों पात्रों के आधारों पर समान बल लगेंगे।
भाप मापने वाली मशीन, पात्रों के आधार पर लगने वाले बल को मापने के स्थान पर पात्र तथा जल का भार मापती है।
चूँकि एक पात्र में दूसरे की तुलना में दो गुना जल है। अतः भार मापने की मशीन के पाठ्यांक अलग – अलग होंगे।

प्रश्न 10.24.
रुधिर – आधान के समय किसी शिरा में, जहाँ दाब 2000 Pa है, एक सुई धुंसाई जाती है। रुधिर के पात्र को किस ऊँचाई पर रखा जाना चाहिए ताकि शिरा में रक्त ठीक – ठीक प्रवेश कर सके।
(सम्पूर्ण रुधिर का घनत्व सारणी 10.1 में दिया गया है।)
उत्तर:
दिया है: शिरा में रक्त दाब,
P = 2000 Pa
रक्त का घनत्व ρ = 1.06 × 103 kg m-3
g = 9.8 ms-2
माना कि रक्त के पात्र की सुई से ऊँचाई = h
सूत्र P = hρg से,
h = \(\frac { P }{ \rho g } \)
= \(\frac { 2000 }{ 1.06\times 10^{ 3 }\times 9.8 } \)
= \(\frac { 1000 }{ 106\times 49 } \)
= 0.193 m
या h = 0.2 m

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प्रश्न 10.25.
बर्नूली समीकरण व्युत्पन्न करने में हमने नली में भरे तरल पर किए गए कार्य को तरल की गतिज तथा स्थितिज ऊर्जाओं में परिवर्तन के बराबर माना था।
(a) यदि क्षयकारी बल उपस्थित है, तब नली के अनुदिश तरल में गति करने पर दाब में परिवर्तन किस प्रकार होता है?
(b) क्या तरल का वेग बढ़ने पर क्षयकारी बल अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं? गुणात्मक रूप में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
(a) क्षयकारी बल की अनुपस्थिति में बहते हुए द्रव के एकांक आयतन की सम्पूर्ण ऊर्जा स्थिर रहती है लेकिन क्षयकारी बल की उपस्थिति में नली में तरल के प्रवाह को बनाए रखने के लिए क्षयकारी बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। अतः नली के अनुदिश चलने पर तरल का दाब अधिक तीव्रता से घटता जाता है। इसी कारण शहरों में जल की टंकी से बहुत दूरी पर स्थित मकानों की ऊँचाई टंकी से कम होने पर भी जल उनकी ऊपर वाली मंजिल तक नहीं पहुंच पाता है।

(b) हाँ, तरल का वेग बढ़ने पर तरल की अपरूपण दर बढ़ती है। इस प्रकार क्षयकारी श्यान बल और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

प्रश्न 10.26.
(a) यदि किसी धमनी में रुधिर का प्रवाह पटलीय प्रवाह ही बनाए रखना है तो 2 × 10-3 m त्रिज्या की किसी धमनी में रुधिर-प्रवाह की अधिकतम चाल क्या होनी चाहिए?
(b) तदनुरूपी प्रवाह – दर क्या है? (रुधिर की श्यानता 2.084 × 10-3 Pas लीजिए)।
उत्तर:
दिया है: η = 2.084 × 10-3 Pas,
r = 2 × 10-3 मीटर
(a) माना रुधिर प्रवाह की अधिकतम चाल = vmax
सूत्र रेनाल्ड संख्या, Re = \(\frac { \rho vd }{ \eta } \) = \(\frac { \rho v_{ 2r } }{ \eta } \) से,
vmax = \(\frac { \eta (R_{ e })_{ usb } }{ 2\rho r } \)
= \(\frac { 2.084\times 10^{ -3 }\times 2000 }{ 1.06\times 10^{ 3 }\times 2\times 2\times 10^{ -3 } } \) [∴(Re)max = 2000] = 0.98 मीटर/सेकण्ड

(b) माना तद्नुरूपी प्रवाह दर = प्रति सेकण्ड प्रवाहित रक्त = धमनी का अनुप्रस्थ परिच्छेद × रक्त प्रवाह की दर
= \(\frac { \pi r^{ 2 } }{ 4 } \).v
= \(\frac { \pi }{ 4 } \) × ( 2 × 10-3)2 × 0.98
= 3.08 × 10-6 मीटर 3 प्रति सेकण्ड

प्रश्न 10.27.
कोई वायुयान किसी निश्चित ऊँचाई पर किसी नियत चाल से आकाश में उड़ रहा है तथा इसके दोनों पंखों में प्रत्येक का क्षेत्रफल 25 m2 है। यदि वायु की चाल पंख के निचले पृष्ठ पर 180 kmh-1 तथा ऊपरी पृष्ठ पर 234 kmh-1 है, तो वायुयान की संहति ज्ञात कीजिए। (वायु का घनत्व 1kgm-3 लीजिए)।
उत्तर:
माना पंख के ऊपरी व निचले पृष्ठ पर वायु का वेग क्रमश: v1 व v2 है।
v1 = 234 kmh-1 = 234 × \(\frac{5}{18}\)
= 50 ms-1
प्रत्येक पंख का क्षेत्रफल = 25 m2
पंख का कुल क्षेत्रफल,
A = 25 + 25 = 50 m2
अतः बर्नूली प्रमेय से दोनों पंखों के वायु का घनत्व
ρ = 1 kg m-3
पृष्ठों के बीच दाबान्तर,
∆P = \(\frac{1}{2}\) ρ (v12 – v22)
= \(\frac{1}{2}\) × 1 × (652 – 502)
= \(\frac{1}{2}\) (4225 – 2500)
बल, F = ∆P × A = \(\frac{1725}{2}\) × 50N

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प्रश्न 10.28.
मिलिकन तेल बूंद प्रयोग में, 2.0 × 10-5m त्रिज्या तथा 1.2 × 103 kgm-3 घनत्व की किसी बूंद की सीमांत चाल क्या है? प्रयोग के ताप पर वायु की श्यानता 1.8 × 10-5 Pas लीजिए। इस चाल पर बूंद पर श्यान बल कितना है? (वायु के कारण बूंद पर उत्प्लावन बल की उपेक्षा कीजिए)।
उत्तर:
दिया है:
r = 2.0 × 10-5 m,
ρ = 1.2 × 103kgm-3
η = 1.8 × 10-5 Nsm-2,
vT = ?, F = ?
सीमान्त वेग v = \(\frac{2}{9}\) r2 \(\frac { (\rho -\rho _{ 0 })g }{ \eta } \)
चूँकि वायु के कारण बूंद का घनत्व नगण्य है।
वायु के लिए P0 = 0
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण img 8
= 5.8 × 10-2 ms-1
= 5.8 cms-1
स्टोक्स के नियम से बिंदु पर सायं बल
F = 6πηrvT
= 6 × 3.142 × (1.8 × 10-5) × ( 2 × 10-5) × (5.8 × 10-2)
= 3.93 × 10-10 N

प्रश्न 10.29.
सोडा काँच के साथ पारे का स्पर्श कोण 140° है। यदि पारे से भरी द्रोणिका में 1.00 mm त्रिज्या की काँच की किसी नली का एक सिरा डुबोया जाता है, तो पारे के बाहरी पृष्ठ के स्तर की तुलना में नली के भीतर पारे का स्तर कितना नीचे चला जाता है? (पारे का घनत्व = 13.6 × 103 kgm-3)
उत्तर:
दिया है: स्पर्श कोण, θ = 140°, r = 1 मिमी = 10-3 मीटर
पृष्ठ तनाव T = 0.465 न्यूटन प्रति मीटर,
पारे का घनत्व ρ = 13.6 × 103 किग्रा प्रति मीटर 3
h = ?
cos θ = cos 140°
= – cos 40°
= – 0.7660
सत्र
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण img 9
यहाँ ऋणात्मक चिन्ह को छोड़ने पर यह प्रदर्शित करता है कि बाहर के पारे के स्तम्भ के सापेक्ष नली के स्तम्भ में अवनमन होता है।
अवनमन = 5.34 मिमी।

प्रश्न 10.30.
3.0 mm तथा 6.0 mm व्यास की दो संकीर्ण नलियों को एक साथ जोड़कर दोनों सिरों से खुली एक U – आकार की नली बनाई जाती है। यदि इस नली में जल भरा है, तो इस नली की दोनों भुजाओं में भरे जल के स्तरों में क्या अंतर है। प्रयोग के ताप पर जल का पृष्ठ तनाव 7.3 × 10-2 Nm-1 है। स्पर्श कोण शून्य लीजिए तथा जल का घनत्व 1.0 × 10 3kgm-3 लीजिए। (g = 9.8 ms-2)
उत्तर:
दिया है:
जल का पृष्ठ घनत्व,
T = 7.3 × 10-2 Nm-1
जल का घनत्व ρ = 1 × 103kg m-3
स्पर्श कोण, θ = 0°, g = 9.8 ms-2
माना दो संकीर्ण नलिकाओं के छिद्रों के व्यास D1 व D2 हैं।
अतः D1 = 3.0 mm तथा D2 = 6.0 mm
∴त्रिज्याएँ, r1 = \(\frac { D_{ 1 } }{ 2 } \) = \(\frac{3}{2}\) = 1.5mm
= 1.5mm = 1.5 × 10-3m
तथा
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण img 10
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण img 10a
= 4.97 mm
= 5.00 मिमी

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प्रश्न 10.31.
(a) यह ज्ञात है कि वायु का घनत्वp ऊँचाई y(मीटरों में) के साथ इस संबंध के अनुसार घटता है –
ρ = ρ0e-y/y0
यहाँ समुद्र तल पर वायु का घनत्व ρ0 = 1.25 kg m-3 तथा Y0, एक नियतांक है। घनत्व में इस परिवर्तन को वायुमंडल का नियम कहते हैं। यह संकल्पना करते हुए कि वायुमंडल का ताप नियत रहता है (समतापी अवस्था) इस नियम को प्राप्त कीजिए। यह भी मानिए किg का मान नियत रहता है।

(b) 1425 m3 आयतन का हीलियम से भरा कोई बड़ा गुब्बारा 400 kg के किसी पेलोड को उठाने के काम में लाया जाता है। यह मानते हुए कि ऊपर उठते समय गुब्बारे की त्रिज्या नियत रहती है, गुब्बारा कितनी अधिकतम ऊँचाई तक ऊपर उठेगा?
[yo = 8000 m तथा ρHe = 0.18 kg m-3 लीजिए।]
उत्तर:
(a) माना कि एक दूसरे से ऊर्ध्वाधर दूरी dy पर दो बिन्दु A व B हैं।
माना Y = बिन्दु A की समुद्र तल से ऊँचाई
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण img 11
(i) P = A पर दाब
dp = A से B तक दाब में परिवर्तन
जैसे – जैसे हम समुद्र तल से ऊँचाई की ओर चलते हैं, दाब तथा घनत्व दोनों ही ऊँचाई के साथ बढ़ते हैं।
p – dp = B पर दाब
माना A तथा B पर घनत्व क्रमशः ρ व ρ – dρ हैं।
अत: A से B तक दाब में कमी = – dp
बल/क्षेत्रफल = \(\frac{mg}{a}\) = \(\frac{mg}{V.a}\) V
= (\(\frac{m}{V}\)) g . \(\frac{a}{a}\) dy
= pgdy ……… (i)
चूँकि ताप नियत रहता है।
∴ P ∝ρ
(∴ बॉयल के नियम से P ∝\(\frac{1}{v}\) ∝ \(\frac { 1 }{ (\frac { M }{ \rho } ) } \) या \(\frac{P}{M}\) ∝ P)
या p = kp ……. (ii)
जहाँ K नियतांक है।
समी० (i) व (ii) से,
– d(kp) = pgdy
या – kdp = pgdy
या \(\frac { d\rho }{ \rho } \) = \(\frac{g}{k}\) dy
या \(\frac { d\rho }{ \rho } \) + \(\frac{g}{k}\) dy = 0 ………. (iii)
समी (iii) का समाकलन करने पर,
\(\int { \frac { d\rho }{ \rho } } \) + \(\int { \frac { g }{ k } } \) dy = C
या logeρ + \(\int { \frac { g }{ k } } \) y = C ……………. (iv)
जहाँ C समाकलन नियतांक है।
माना Y = 0 पर ρ = ρ0
समी० (iv) से, logeρ0 = C ……….. (v)
समी० (iv) व (v) से
(ii) log eρ + \(\int { \frac { g }{ k } } \) y = logeρ0
या logeρ – logeρ0ρ = \(\int { \frac { -g }{ k } } \) y
या loge \(\frac { \rho }{ \rho _{ 0 } } \) = \(\int { \frac { -g }{ k } } \) y
∴\(\frac { \rho }{ \rho _{ 0 } } \) = e-g/k y = e-y/y0
या ρ = ρ0 e -y/y0
या ρ = ρ0e -y/y0
जो कि अभीष्ट नियम है।
दिया है:
Y0 = \(\frac{k}{g}\) नियतांक है।

(b) माना हीलियम का गुब्बारा Y ऊँचाई तक उड़ता है।
गुब्बारे का आयतन, V = 1425 मीटर3
पेलोड = 400 gN
PHe = 0.18 × 1425 = 256.5 kg
लिफ्ट से अलग कुल लोड
= 400 + 256.5 = 656.5 N
माना h ऊँचाई पर वायु का घनत्व p है। साम्यावस्था में, लिफ्ट से अलग किया लोड = He के गुब्बारे का भार
या 656.5g = V × p × g
या
ρ = \(\frac{656.5}{V}\) = \(\frac{656.5}{1425}\)
= 0.461 kg m-3
सूत्र ρ = ρ0e-y/y0 से
0.461 = 1.25e-y/8
e-y/8 = \(\frac{1.25}{0.461}\) = 2.71
\(\frac{y}{8}\) = ln 2.71 = 0.997
या y = 0.997 × 8 = 7.98 km
~ 8 km
यदि ऊँचाई के साथ 8 में परिवर्तन माना जाए तब ऊँचाई लगभग 8.2 किमी० होगी।

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 11 मेरे सपनों का भारत

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 11 मेरे सपनों का भारत (निबन्ध, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम)

मेरे सपनों का भारत पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

मेरे सपनों का भारत लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बौद्धिक पुनर्जागरण की प्रक्रिया में किस-किसका योगदान था?
उत्तर:
बौद्धिक पुनर्जागरण की प्रक्रिया में धार्मिक संतों, दार्शनिकों, कवियों, वैज्ञानिकों, खगोलविदों और गणितज्ञों का योगदान था।

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प्रश्न 2.
शिक्षा के क्षेत्र में कौन-कौन से आचार्य प्रसिद्ध हुए हैं? (M.P. 2010)
उत्तर:
शिक्षा के क्षेत्र में कौटिल्य, पाणिनि, जीवक, अभिनव गुप्त और पतंजलि आदि आचार्य प्रसिद्ध हुए हैं।

प्रश्न 3.
स्वतंत्रता के पश्चात् भारत के विकास के लिए किस प्रकार की योजनाएँ बनाई गईं?
उत्तर:
स्वतंत्रता के पश्चात् भारत विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ बनाई गईं।

प्रश्न 4.
भारत विकसित देशों की श्रेणी में वैसे आ सकेगा?
उत्तर:
भारत बौद्धिक समाज के रूप में बदलकर ही विकसित देशों की श्रेणी में आ सकेगा।

प्रश्न 5.
भारतीय सेना में कौन-कौन सी स्वदेशी मिसाइलें शामिल की गई हैं?
उत्तर:
भारतीय सेना में ‘पृथ्वी’ और ‘अग्नि’ स्वदेशी मिसाइलें शामिल की गई हैं।

मेरे सपनों का भारत दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अतीत में शिक्षा के क्षेत्र में भारत को बहुत उन्नत क्यों कहा गया है?
उत्तर:
अतीत में भारत में तक्षशिला और नालंदा जैसे महान् विश्वविद्यालय थे, जिनमें भारत के अतिरिक्त सुदूर देशों के विद्यार्थी भी भाषा, व्याकरण, दर्शनशास्त्र, औषधि, विज्ञान, सर्जरी, धनुर्विद्या, एकाउंट्स, वाणिज्य, भविष्य-विज्ञान, दस्तावेजीकरण, तंत्रविद्या, संगीत, नृत्य तथा छिपे खजानों की शिक्षा प्राप्त करने आते थे। इसीलिए अतीत में शिक्षा के क्षेत्र में भारत को बहुत उन्नत कहा गया है।

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प्रश्न 2.
शून्य के आविष्कार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (M.P. 2011)
उत्तर:
गणित के क्षेत्र में भारत ने शून्य का आविष्कार किया जिससे गणना करने की दोहरी प्रणाली विकसित हुई। इसी दोहरी प्रणाली पर आधुनिक कंप्यूटर निर्भर हैं। प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने विश्व को गणना सिखाने का श्रेय भारतीयों को दिया। शून्य के आविष्कार से अनेक महत्त्वूपर्ण वैज्ञानिक खोज संभव हो सकीं।

प्रश्न 3.
आर्यभट्ट की क्या देन है? (M.P. 2009, 2012)
उत्तर:
आर्यभट्ट ने हमें बताया कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है। उन्होंने रेखागणित के क्षेत्र में वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपात को पाई के रूप में परिभाषित किया था और दशमलव के चार अंकों तक इसका शुद्ध मान बतलाया था। इस प्रकार रेखागणित के क्षेत्र में आर्यभट्ट की महत्त्वपूर्ण देन है। दशमलव पद्धति भी उनकी देन है।

प्रश्न 4.
भारत के आधारभूत ढाँचे के निर्माण के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए गए?
उत्तर:
भारत ने आधारभूत ढाँचे के निर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण उद्योगों की स्थापना की। अनुसंधान व विकास और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संस्थानों की स्थापना की। इनका नेतृत्व योग्य व्यक्तियों के हाथों में दिया गया।

प्रश्न 5.
“स्वतंत्रता से पूर्व भी भारतीयों ने विश्वस्तरीय उपलब्धियाँ प्राप्त की थीं।” इस कथन का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए। (M.P. 2012)
उत्तर:
इस कथन का तात्पर्य है कि स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व भी भारत में प्रत्येक क्षेत्र से जुड़े प्रतिभाशाली वैज्ञानिक, कवि, दार्शनिक, इंजीनियर, चिकित्सक आदि थे। वैज्ञानिकों ने अपनी खोजों के द्वारा विदेशों में भारत का नाम रोशन किया। टैगोर ने साहित्य के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार प्राप्त किया। सी.वी. रमन, के.एस. कृष्णन को उनकी वैज्ञानिक खोजों के लिए ‘सर’ उपाधि से सम्मानित किया गया। दार्शनिक क्षेत्र में स्वामी विवेकानंद ने अपने व्याख्यानों से विश्व के लोगों को प्रभावित किया।

प्रश्न 6.
अंतर्राष्ट्रीय व्यावसायिक बाजार में भारतीय सॉफ़्टवेयर की अच्छी साखक्यों है?
उत्तर:
अंतर्राष्ट्रीय व्यावसायिक बाजार में भारतीय सॉफ्टवेयर की अच्छी साख है, क्योंकि इस क्षेत्र में सक्रिय भारतीय इंजीनियरों ने अपनी कुशलता का परिचय दिया है। हमारा कुशल- जन-संसाधन विश्व में सर्वोपरि है। इसमें युवा उद्यमियों का कुशल प्रबंधन प्रशंसनीय है।

प्रश्न 7.
सही जोड़ियाँ बनाइए –
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 11 मेरे सपनों का भारत img-1
उत्तर:

  1. (ग)
  2. (ङ)
  3. (क)
  4. (ख)
  5. (घ)।

मेरे सपनों का भारत भाव-विस्तार/पल्लवन

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प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्ति का भाव-विस्तार कीजिए- “विश्व एक बौद्धिक समाज में परिवर्तित हो रहा है।”
उत्तर:
21वीं शताब्दी ज्ञान युग और बौद्धिक युग से सम्बन्धित है। जहाँ ज्ञान की प्राप्ति, उपलब्धि और प्रयोग को महत्त्वपूर्ण संसाधन माना जाता है। आज संसार में प्रत्येक व्यक्ति विविध विषयों का ज्ञान अर्जित करना चाहता है। ज्ञान बुद्धि का विषय है। इसीलिए समाज के लिए अपना बौद्धिक विकास करने में संलग्न है और विश्व एक बौद्धिक समाज में परिवर्तित हो रहा है। जहाँ अज्ञान और अंधविश्वास के लिए कोई स्थान नहीं है।

मेरे सपनों का भारत भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह करते हुए उनके नाम भी लिखिए –
विश्वविद्यालय, दर्शनशास्त्र, औषधि विज्ञान, तंत्र विद्या, आधारशिला।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 11 मेरे सपनों का भारत img-2

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए –

  1. हम इसका श्रेय भारतीयों को देते हैं, जिन्होंने हमें गणना करना सिखाया। (सरल वाक्य में)
  2. भारत ने महत्त्वपूर्ण उद्योगों की स्थापना और आधारभूत ढाँचे के निर्माण को प्रेरित किया। (मिश्र वाक्य में)
  3. बालक रो-रोकर चुप हो गया। (संयुक्तं वाक्य में)

उत्तर:

  1. हमें गणना करना सिखाने का श्रेय भारतीयों को देना चाहिए।
  2. जब भारत ने महत्त्वपूर्ण उद्योगों की स्थापना की, तब उसने आधारभूत ढाँचे का भी निर्माण किया।
  3. बालकं रो रहा था और वह रोकर चुप हो गया।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध रूप में लिखिए –

  1. खिड़की खुलने से प्रकाश आएगा।
  2. तुम तुम्हारे घर जाओ।
  3. हमारे को अपनी उपलब्धियों पर गर्व करना चाहिए।

उत्तर:

  1. खिड़की खुलने से प्रकाश आता है।
  2. तुम अपने घर जाओ।
  3. हमें अपनी उपलब्धि पर गर्व करना चाहिए।

मेरे सपनों का भारत योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
भारत ने शून्य का आविष्कार किया, ऐसे ही भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में और क्या-क्या उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं? सूची बनाइए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
भारतीय मिसाइल का मॉडल तैयार कर उसका प्रदर्शन कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 3.
आपके सपनों में भारत कैसा है, विषय पर परिचर्चा का आयोजन कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 4.
गाँव/शहर का विकास ही भारत का विकास है, अतः आप अपने गाँव/शहर के विकास के लिए स्वयं क्या करना चाहते हैं, लेखबद्ध करें।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

मेरे सपनों का भारत परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न 1.
विश्व को शून्य की देन ……….. है।
(क) इंग्लैंड की
(ख) अमेरिका की
(ग) जापान की
(घ) भारत की
उत्तर:
(घ) भारत की।

प्रश्न 2.
रामानुजम प्रसिद्ध ……….. थे।
(क) वैज्ञानिक
(ख) गणितज्ञ
(ग) दार्शनिक
(घ) शिक्षा शास्त्री
उत्तर:
(ख) गणितज्ञ।

प्रश्न 3.
भारत ने ………… का आविष्कार किया।
(क) दशमलव प्रणाली
(ख) कंप्यूटर
(ग) शिक्षा प्रणाली
(घ) मिसाइल प्रणाली
उत्तर:
(क) दशमलव प्रणाली।

प्रश्न 4.
‘हम इसका श्रेय भारतीयों को देते हैं’ किसने कहा?
(क) अल्बर्ट आइंस्टाइन ने
(ख) अल्बर्ट डिसूजा ने
(ग) अल्बर्ट मारकोनी ने
(घ) सी.वी. रमन ने
उत्तर:
(क) अल्बर्ट आइंस्टाइन ने।

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प्रश्न 5.
वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपात को पाई के रूप में ……….. परिभाषित किया।
(क) आर्यभट्ट ने
(ख) भास्कराचार्य ने
(ग) मिहिर वराह ने
घ) नागार्जुन ने
उत्तर:
(क) आर्यभट्ट ने।

प्रश्न 6.
भारतीय सेना में शामिल की जा चुकी मिसाइलें हैं –
(क) सूर्य और आकाश
(ख) पृथ्वी और अग्नि
(ग) क्रूज और नाग
(घ) गौरी और हल्फ
उत्तर:
(ख) पृथ्वी और अग्नि।

प्रश्न 7.
विश्व किस समाज में परिवर्तित हो रहा है –
(क) बौद्धिक
(ख) धार्मिक
(ग) वैज्ञानिक
(घ) आध्यात्मिक
उत्तर:
(क) बौद्धिक।

प्रश्न 8.
‘मेरे सपनों का भारत’ के लेखक हैं……….। (M.P. 2012)
(क) अब्दुल कलाम आजाद
(ख) डॉ. अब्दुल कलाम
(ग) अब्दुल कादिर
(घ) अब्दुल रहमान
उत्तर:
(ख) डॉ. अब्दुल कलाम।

प्रश्न 9.
सुश्रुत ने कब जटिल शल्य क्रिया की थी?
(क) 15,000 वर्ष पहले
(ख) 1,000 वर्ष पहले
(ग) 2,500 वर्ष पहले
(घ) 2,000 वर्ष पहले
उत्तर:
(ग) 2,500 वर्ष पहले।

II. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर कीजिए –

  1. भारत पिछली शताब्दी में एक ………. राष्ट्र था। (प्रबल उन्नत)
  2. भारत ने ………. का आविष्कार किया। (गुरुत्वाकर्षण/शून्य)
  3. इक्कीसवीं सदी ………. से संबंधित है। (बौद्धिक युग/धार्मिक युग)
  4. स्वतंत्रता के बाद भारत ने ………. शुरू की। (पंचवर्षीय योजना/राजनीतिक योजना)
  5. 70 के दशक में पहले ………. क्रान्ति के परिणाम देखने को मिले। (समग्र/हरित)

उत्तर:

  1. उन्नत
  2. शून्य
  3. बौद्धिक युग
  4. पंचवर्षीय योजना
  5. हरित।

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III. निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए –

  1. ‘मेरे सपनों का भारत’ निबंध के लेखक पंडित नेहरू हैं।
  2. हमें अपने उल्लेखनीय उपलब्धियों पर गर्व होना चाहिए।
  3. भारतीय सेना में ‘पृथ्वी’ और ‘अग्नि’ को शामिल किया गया।
  4. परमाणु ऊर्जा उत्पत्ति तथा अस्त्र विकास में हमारी उपलब्धियाँ विकसित विश्व के मुकाबले की नहीं हैं।
  5. विश्व एक बौद्धिक समाज में परिवर्तित हो रहा है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

IV. निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए – (M.P. 2009)

प्रश्न 1.
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 11 मेरे सपनों का भारत img-3
उत्तर:

(i) (ङ)
(ii) (ग)
(iii) (घ)
(iv) (ख)
(v) (क)।

V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

प्रश्न 1.
किस दशक में पहले हरित क्रांति के परिणाम देखने को मिले?
उत्तर:
70 के दशक में।

प्रश्न 2.
भारत किस अवसर का लाभ एक विकसित देश बनने के लिए उठा सकता हैं।
उत्तर:
दो दशकों के भीतर का।

प्रश्न 3.
भास्कराचार्य ने किस सिद्धान्त की स्थापना की?
उत्तर:
‘सूर्य-सिद्धान्त’ की।

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प्रश्न 4.
‘सूर्य सिद्धान्त’ में भास्कराचार्य ने किसके नियम को पहचाना था?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण के नियम को।

प्रश्न 5.
शिक्षकों के पैनल में कौन-कौन से प्रसिद्ध आचार्य थे?
उत्तर:
कौटिल्य, पाणिनि, जीवक, अभिनव गुप्त और पतंजति।

मेरे सपनों का भारत लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अतीत में भारत के दो महान् विश्वविद्यालय कौन-कौन से थे? (M.P. 2012)
उत्तर:
अतीत में भारत में तक्षशिला. और नालंदा दो महान् विश्वविद्यालय थे।

प्रश्न 2.
2500 वर्ष पहले किस चिकित्सक ने जटिलशल्य क्रियाएँ की थीं?
उत्तर:
2500 वर्ष पहले सुश्रुत ने जटिलशल्य क्रियाएँ की थीं।

प्रश्न 3.
आज़ादी से पूर्व के प्रसिद्ध कवि कौन थे?
उत्तर:
आज़ादी से पूर्व रवींद्रनाथ टैगोर प्रसिद्ध कवि थे।

प्रश्न 4.
ऑपरेशन फ्लड से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
ऑपरेशन फ्लड से तात्पर्य है-दूध उत्पादन में क्रांति होना।

प्रश्न 5.
पी.एस.एल.वी. सी.-5 की सातवीं सफल उड़ान ने क्या प्रदर्शिताकिया?
उत्तर:
उपग्रह को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने की स्वदेशी योग्यता को।

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प्रश्न 6.
आर्यभट्ट कौन थे?
उत्तर:
आर्यभट्ट एक महान भारतीय वैज्ञानिक थे। उन्होंने किसी वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपातको पाई के रूप में परिवर्तित किया था।

प्रश्न 7.
लेखक ने शल्य-क्रिया के क्षेत्र में किसका नाम लिया है?
उत्तर:
लेखक ने शल्य-क्रिया के क्षेत्र में सुश्रुत का नाम लिया है।

प्रश्न 8.
स्वतंत्रता के बाद भारत ने क्या शुरू की?
उत्तर:
पहली पंचवर्षीय योजना।

मेरे सपनों का भारत दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हरित क्रांति से क्या लाभ हुआ?
उत्तर:
कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति के कारण भारत खाद्यान्नों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना। खाद्यान्नों के आयात पर उसकी निर्भरता समाप्त हो गई।

प्रश्न 2.
अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने क्या प्रगति की?
उत्तर:
अंतरिक्ष-विज्ञान के क्षेत्र में हर प्रकार उपग्रह डिजाइन तथा विकसित करने और उन्हें अपने प्रक्षेपण यानों द्वारा अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने के साथ ही स्वदेशी तकनीक विकसित करने की योग्यता प्राप्त कर ली है।

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प्रश्न 3.
मिसाइल क्षेत्र में भारत की क्या उपलब्धि है?
उत्तर:
मिसाइल के क्षेत्र में भारत ने किसी भी प्रकार की मिसाइल या मुखाग्र को डिजाइन करने, विकसित करने तथा उसे उत्पादित करने की स्वदेशी क्षमता प्राप्त कर ली है।

प्रश्न 4.
आजादी से पहले हमारे पास विस-किस क्षेत्र के कौन-कौन-से लोग जुड़े हुए थे?
उत्तर:
आजादी से पहले हमारे पास विश्वस्तरीय वैज्ञानिक, कवि, दार्शनिक, इंजीनियर, चिकित्सक और लगभग हरेक क्षेत्र से लोग जुड़े हुए थे। हमारे पास एस. एन. बोस, मेघनाद साहा, जे.सी. बोस., सर सी.वी. रमन, सर के.एस. कृष्णन, होमी जहाँगीर भाभा, विक्रम साराभाई, वी.एस. राय जैसे वैज्ञानिक, रामानुजम् जैसे गणितज्ञ, रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि, विवेकानंद जैसे दार्शनिक जुड़े हुए थे।

प्रश्न 5.
व्यावसायिक बाजार में भारत किस प्रकार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है?
उत्तर:
हमारा कुशल जन-संसाधन संसार में सबसे इच्छित संसाधनों में से एक है। यह विकसित संसार के आर्थिक विकास में भारतीय वैज्ञानिकों और उद्यमियों के बड़े योगदान से स्पष्ट है। इसके अलावा अपनी जनसंख्या और शिक्षित जनशक्ति की उपलब्धता के कारण भारत तुरन्त बौद्धिक कर्मियों की विशाल संख्या कर सकने में सक्षम है। ऐसा कर सकने में बहुत कम विकसित देश सक्षम हैं।

मेरे सपनों का भारत लेखक-परिचय

प्रश्न 1.
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का संक्षिप्त जीवन-परिचय और साहित्यिक परिचय दीजिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
भारतरत्न और भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम का जन्म सन् 1931 में तमिलनाडु के रामेश्वरम जिले के धनुष कोटि नगर के एक साधारण परिवार में हुआ। उनका पूरा नाम डॉ. चंबुल पाकिर जैनुल आवदीन अब्दुल कलाम था। उनका जीवन सादगी की अनूठी मिसाल था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रामेश्वरम में हुई। उच्चशिक्षा के लिए आप तिरुचिरापल्ली चले गए और वहाँ के सेंट जोसफल कॉलेज में उच्च शिक्षा प्राप्त की।

ईश्वर में आपकी पूर्ण आस्था थी। आप सच्चे धर्मनिरपेक्ष थे। आप जिस प्रकार कुरान का पाठ करते थे, उसी प्रकार गीता के दर्शन में भी आपकी आस्था थी। उनका कहना था कि जब में विज्ञान विपय से संबंधित अनेक सूक्ष्म कणों से मिलकर बने कणों का अध्ययन करता था, तो उससे प्रभु की सत्ता में मेरा विश्वास और भी दृढ़ हो जाता।

आपकी परिकल्पना थी कि सन् 2020 तक भारत विकसित राष्ट्र बने। इस कल्पना को साकार करने के लिए आपने विज्ञान के क्षेत्र में गहन अनुसंधान किया तथा देश को उपग्रह प्रणाली में आत्मनिर्भर बनाया। सर्वप्रथम मिसाइल कार्यक्रम को भारत में एक पहचान दी। इसी कारण उन्हें ‘मिसाइलमैन’ भी कहा जाता है। आपके प्रयासों से भारतीय सेना को पृथ्वी और अग्नि जैसी मिसाइलों से सुसज्जित किया गया है तथा अनेक मिसाइलों के निर्माण का कार्य प्रगति पर है। डॉ. कलाम ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भी अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। इन्हीं विशिष्ट उपलब्धियों एवं वैज्ञानिक परिकल्पना के लिए उनको राष्ट्र का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत-रत्न’ प्रदान किया गया। 28 जुलाई, 2015 को इनका निधन हो गया।

साहित्यिक उपलब्धियाँ:
विज्ञान के अतिरिक्त साहित्य के क्षेत्र में डॉ. कलाम ने उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। आपकी रचनात्मक प्रतिभा का लाभ साहित्य जगत् को भी मिलता रहा है। आपके बहुमूल्य विचार, कल्पना शक्ति एवं दूर-दृष्टि आपकी बहुमूल्य रचनाओं में भी झलकती हैं। आपमें देश के भावी कर्णधारों को सँवारने की अद्वितीय परिकल्पनाएँ थीं।

रचनाएँ:
मेरे सपनों का भारत।

महत्त्व:
आप बच्चों को राष्ट्र की धरोहर मानते थे। आप भारत के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति पद पर आसीन थे। आप वैज्ञानिक क्षेत्र के साथ-साथ शिक्षण और साहित्य-सृजन में भी संलग्न थे।

मेरे सपनों का भारत पाठ का सारांश

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प्रश्न 1.
डॉ. अब्दुल कलाम के द्वारा रचित ‘मेरे सपनों का भारत’ लेख का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
‘मेरे सपनों का भारत’ पाठ के रचयिता डॉ. अब्दुल कलाम हैं। इसमें लेखक ने भारत जैसे विकासशील देश के लिए एक बौद्धिक समाज के रूप में विकसित होने और स्वयं को एक बौद्धिक अर्थव्यवस्था में परिवर्तित होने के तरीकों व उपायों पर विचार किया है। लेखक का कहना है कि भारतीय सभ्यता की प्रभावशाली उपलब्धियों को देखने पर स्पष्ट हो जाता है कि विगत सहस्राब्दी में भारत एक उन्नत समाज था। यहाँ धार्मिक संतों, दार्शनिकों, कवियों, वैज्ञानिकों, खगोलविदों और गणितज्ञों के प्रेरक योगदानों से बौद्धिक पुनर्जागरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रही है। उनके मौलिक विचारों, सिद्धांतों और व्यवहारों ने बौद्धिक समाजका ठोस आधारशिला रखी।

तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय जिनमें अन्य देशों के विद्यार्थी भी अनेक विषयों की शिक्षा ग्रहण करने आते थे। इस बात के प्रमाण हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में भारत बहुत उन्नत था। कौटिल्य, पाणिर्णाने, जीवक, अभिनव गुप्त तथा पतंजलि जैसे योग्य शिक्षाविद् थे। गणित के क्षेत्र में भारतीयों ने विश्व को शून्य और दशमलव पद्धति दी, जिसक कारण वर्तमान कम्प्यूटर और महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज संभव हो सकी। यूकलिड से बहुत पहले भारत में ज्यामिति’ के नाम से रेखागणित का प्रयोग किया जाता था। आर्यभट्ट ने किसी वृत्त की परिधि और अनुपात को पाई के रूप में परिभाषित किया था और दशमलव के चार अंकों तक शुद्ध मान बतलाया था।

इसी प्रकार भास्कराचार्य ने सूर्य सिद्धांत की स्थापना की। उन्होंने बताया था। कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है। भास्कराचार्य ने गुरुत्वाकर्षण को पहचाना था। चरक ने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को दिया, तो सुश्रुत ने जटिल शल्य क्रियाएँ की थीं। हमें अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों पर गर्व है। भारत में आजादी से पूर्व भी भारत में एस.एन. बोस, मेघनाथ साहा, जे.सी. बोस, सर सी.वी. रमन, सर के.एस. कृष्णन, होमी जहाँगीर भाभा, विक्रम सारा भाई जैसे वैज्ञानिक, रामानुजम जैसे गणितज्ञ, रवींद्रनाथ जैसे कवि, विवेकानंद जैसे दार्शनिक थे।

स्वतंत्रता के बाद भारत में पंचवर्षीय योजना प्रारंभ की गई। उद्योगों के लिए आधारभूत ढाँचा बना। 1970 में हरित क्रांति हुई। देश खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर बना। ऑपरेशन फ्लड के द्वारा देश विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में काफी विकास हुआ। भारत ने उपग्रह डिजाइन तथा विकसित करने, अपनी धरती से प्रक्षेपण यानों द्वारा कक्षा में प्रक्षेपित करने की क्षमता प्राप्त की। इसी प्रकार मिसाइल या मुखाग्र को डिजाइन करने की क्षमता प्राप्त की है। भारतीय सेना में पृथ्वी और अग्नि को शामिल किया जाना स्वदेशी क्षमता का ही प्रमाण है।

परमाणु ऊर्जा उत्पत्ति तथा अस्त्र विकास में हम विश्व के समकक्ष हैं। भारतीय सॉफ्टवेयर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय वैज्ञानिकों व उद्यमियों ने विश्व आर्थिक व्यवस्था में बड़ा महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। भारत तुरंत बौद्धिक कर्मियों की विशाल संख्या तैयार करने में सक्षम है। आज विश्व बौद्धिक समाज में बदल रहा है, जहाँ समन्वित ज्ञान-शक्ति तथा धन का स्रोत होगा। अतः भारत को विकसित देश बनने के लिए अवसर का लाभ उठाना चाहिए। इसके लिए यह जानना आवश्यक है कि हम प्रतिस्पर्धात्मकता के मामले में कहाँ हैं, जो यह एक बौद्धिक शक्ति बनने के लिए आवश्यक है।

मेरे सपनों का भारत संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1.
भारतीय सभ्यता की प्रभावशाली उपलब्धियों को देखने पर यह विश्वास प्रबल हो जाता है कि भारत पिछली सहस्राब्दी में एक उन्नत समाज था। कई धर्मों के संतों, दार्शनिकों, कवियों, वैज्ञानिकों, खगोलविदों और गणितज्ञों के प्रेरक योगदानों के द्वारा बौद्धिक पुनर्जागरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रही। उनके भए तथा मौलिक विचारोंसिद्धांतों और व्यवहारों ने हमारे अपने बौद्धिक समाज के लिए एक ठोस आधार प्रदान किया। (Page 49)

शब्दार्थ:

  • प्रबल – दृढ़।
  • सहस्राब्दी – हजारों वर्ष।
  • उपलब्धियों – प्राप्तियों।
  • बौद्धिक – बुद्धि से संबंधित।
  • पुनर्जागरण – फिर जागृत होने की प्रक्रिया।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा लिखित लेख ‘मेरे सपनों का भारत’ से लिया गया है। लेखक प्राचीन भारत की उपलब्धियों के आधार पर बौद्धिक पुनर्जागरण की प्रक्रिया के निरंतर चलते रहने की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

व्याख्या:
भारत विगत एक हजार वर्षों के दौरान एक उन्नत समाज था, यह बात प्राचीन भारतीय सभ्यता की विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावशाली देनों को देखने से प्रमाणित हो जाता है। यह विश्वास भी दृढ़ हो जाता है कि भारत एक प्रगतिशील देश था। भारत में प्रचलित विभिन्न धर्मों के साधु-सं, ऋषि-महर्षियों, दर्शन-शास्त्र के तत्त्ववेत्ताओं, कवियों, वैज्ञानिकों, आकाशमंडल के ग्रह-नक्षत्रों के जानकारों और गणित के विद्वानों के प्रेरित करने वाले योगदानों के द्वारा बुद्धि संबंधी पुनजागरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती थी। इससे फिर जागृत होने की प्रक्रिया में कभी बाधा उत्पन्न नहीं होती थी। उनके नवीन और मौलिक विचारों, सिद्धांतों और व्यवहारों ने हमारे अधुिनिक बौद्धिक समाज के लिए ठोस आधार प्रदान किया है।

विशेष:

  1. लेखक ने प्राचीन भारत की उपलब्धियों को प्रेरक बताया है। यह भी बताया है कि उस काल में बौद्धिक पुनजांगरण की निरंतर चलने वाली प्रक्रिया ने समाज को ठोस आधार प्रदान किया है।
  2. भाषा तत्सम शब्दावली युक्त है।
  3. विचारात्मक शैली है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
भारत एक उन्नत समाज था, यह कैसे प्रमाणित होता है?
उत्तर:
भारतीय सभ्यता की विगत एक हजार वर्षों की प्रभावशाली उपलब्धियों को देखने पर यह बात प्रमाणित हो जाती है कि भारत एक उन्नत समाज था।

प्रश्न (ii)
प्राचीन काल में समाज को ठोस आधार किसने प्रदान किया है?
उत्तर:
प्राचीन काल में बौद्धिक पुनर्जागरण की निरंतर चलने वाली प्रक्रिया ने समाज को ठोस आधार प्रदान किया है।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने किस ओर ध्यान आकर्षित किया है?
उत्तर:
प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने प्राचीन भारत की उपलब्धियों और निरंतर चलने वाली बौद्धिक प्रक्रिया की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

प्रश्न (ii)
किन लोगों के योगदान से पुनर्जागरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रही?
उत्तर:
धार्मिक संतों, दार्शनिकों, कवियों, वैज्ञानिकों, खगोलविदों और गणितज्ञों के प्रेरक योगदानों से भारत में पुनर्जागरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रही।

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प्रश्न 2.
भारत ने शून्य का आविष्कार किया, जिसने गणना की दोहरी प्रणाली की आधारशिला रखी, जिस पर वर्तमान कंप्यूटर निर्भर हैं। अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था, “हम इसका श्रेय भारतीयों को देते हैं, जिन्होंने हमें गणना करना सिखाया, जिसके बिना कोई भी महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज नहीं की जा सकती थी।” इसी प्रकार, भारत ने दशमलवे पद्धति (डेसिमल सिस्म) का आविष्कार किया। यूकलिड से काफी पहले भारत में ज्यामिति के नाम से रेखागणित का प्रयोग किया जाता था। आर्यभट्ट ने किसी वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपात को पाई के रूप में परिभाषित किया था और दशमलव के चार अंकों तक इसका शुद्ध मान बतलाया था। (Page 50)

शब्दार्थ:

  • शून्य – जीरो।
  • आविष्कार-खोजगणना – गिनने की प्रक्रिया आधारशिलानींव का रह पत्थर, जिसके ऊपर मकान की दीवार बनाई जाती है।

प्रसंग:
प्नत गद्यांश डॉ. अब्दुल कलाम द्वारा लिखित लेख ‘मेरे सपनों के भारत’ में लिया गया है। खक प्राचीन भारत के गणित के क्षेत्र में योगदान का उल्लेख किया है।

व्याख्या:
लेखक कहता है कि गणित के क्षेत्र में भारत का महत्त्वपूर्ण योगदान है। इस क्षेत्र में भारत ने शून्य (जीरो) का आविष्कार किया, जिसने गिनती करने की दोहरी पद्धति की नींव रखी। गणना की इसी दोहरी पद्धति पर वर्तमान कंप्यूटर आश्रित है। आधुनिक कंप्यूटर दोहरी प्रणाली से ही संचालित है। सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टाइन ने जीरो के आविष्कार का श्रेय भारतीयों को देते हुए कहा कि भारतीयों ने ही हमें गिनती करना सिखाया। विश्व के लिए उनका यह बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान है। समुचित गणना के अभाव में कोई भी महत्त्वपूर्ण खोज नहीं की जा सकती थी; अर्थात् गणित के क्षेत्र में भारतीयों द्वारा शून्य की विश्व को देन के पश्चात् ही महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज और आविष्कार संभव हो सके हैं।

दशमलव प्रणाली भी विश्व को भारतीयों की ही देन है। इतना ही नहीं यूकलिड से बहुत पहले भारत में ज्यामिति के नाम से रेखागणित का प्रयोग किया जाता था। दूसरे शब्दों में, यूकलिड से पहले ही भारतीयों ने रेखागणित का आविष्कार कर लिया था। आर्यभट्ट ने वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपात को पाई के रूप में परिभाषित किया था। इसके साथ ही दशमलव के चार अंकों तक इसका शुद्ध मान निकालकर बताया था।

विशेष:

  1. गणित के क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियों और विश्व में उनके – योगदान के महत्त्व को स्पष्ट किया गया है।
  2. भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है।
  3. गणित की पारिभाषिक शब्दावली का प्रयोग किया गया है।
  4. शैली वर्णनात्मक है।

मयांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्राचीन भारत की गणित के क्षेत्र में विश्व को क्या देन है?
उत्तर:
प्राचीन भारत की गणित के क्षेत्र में विश्व को महत्त्वपूर्ण देन है-शून्य (जीरो)। इस देन से गिनती करने की दोहरी पद्धति की नींव पड़ी, जिससे अनेक वैज्ञानिक आविष्कार संभव हो सके।

प्रश्न (ii)
भारत में यूकलिड से पूर्व किस नाम से रेखागणित का प्रयोग होता था।
उत्तर:
यूकलिड से पूर्व ही भारत में ‘ज्यामिति’ के नाम से रेखागणित का प्रयोग होता था।

प्रश्न (iii)
अल्बर्ट आइंस्टाइन ने भारतीयों को किस बात का श्रेय दिया?
उत्तर:
अल्बर्ट आइंस्टाइन ने भारतीयों को विश्व को गणना सिखाने का श्रेय दिया।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
गणित के क्षेत्र में जीरो के अतिरिक्त भारतीयों ने क्या आविष्कार किया?
उत्तर:
गणित के क्षेत्र में जीरो के अतिरिक्त भारतीयों के दशमलव पद्धति का आविष्कार किया। आधुनिक दशमलव पद्धति विश्व को भारतीयों की ही देन है।

प्रश्न (ii)
आर्यभट्ट ने पाई के रूप में किसे परिभाषित किया था?
उत्तर:
आर्यभट्ट ने किसी वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपात को पाई के रूप में परिभाषित किया था।

प्रश्न 3.
ऐसा नहीं है कि उल्लेखनीय उपलब्धियाँ केवल हमारे अतीत तक सीमित हैं। भारत की आजादी से पहले, हमारे पास विश्व स्तरीय वैज्ञानिक, कवि, दार्शनिक, इंजीनियर, चिकित्सक और लगभग प्रत्येक क्षेत्र से जुड़े लोग थे। हमारे पास एस.एन. बोस, मेघनाद साहा, जे.सी. बोस, सर सी.वी. रमन, सर के.एस. कृष्णन, होमी जहाँगीर भाभा, विक्रम साराभाई, बी.सी. राय जैसे वैज्ञानिक, रामानुजम जैसे गणितज्ञ; रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि; विवेकानंद जैसे दार्शनिक संत रहे हैं। स्वतंत्रता के बाद के काल में भी उतनी ही महान् उपलब्धियाँ देखने को मिली हैं। (Page 50)

शब्दार्थ:

  • आजादी – स्वतंत्रता।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश डॉ. अब्दुल कलाम द्वारा लिखित लेख ‘मेरे सपनों का भारत’ से लिया गया है। इस गद्यांश में लेखक अतीत की उपलब्धियों की चर्चा करने के पश्चात् स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व के विद्वानों की चर्चा किया है।

व्याख्या:
लेखक का कहना है कि ऐसा नहीं है कि भारत ने केवल अतीत (प्राचीनकाल) में ही विभिन्न क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ प्राप्त की हों, अपितु भारत में स्वतत्रता प्राप्ति से पहले भी विश्व-स्तरीय अर्थात् उच्चकोटि के वैज्ञानिक, कवि, दार्शनिक, इंजीनियर, डॉक्टर और लगभग प्रत्येक क्षेत्र के जुड़े लोग थे।

हमारे देश में एस.एन बोस, मेघनाद साहा, जे.सी. बोस, सर सी.वी. रमन, सर के.एस. कृष्णन, होमी जहाँगीर भाभा, विक्रम साराभाई और बी.सी. राय जैसे योग्य वैज्ञानिक, गणित के क्षेत्र में रामानुजम जैसे गणितज्ञ, साहित्य के क्षेत्र में रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान् कवि और आध्यात्मिक संसार में विवेकानंद जैसे संत रहे हैं। हमारे देश में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के समय में भी उतनी ही योग्य और उच्चकोटि की महान् प्राप्तियाँ देखने को मिली हैं। इस प्रकार हमारे देश ने अतीत में, स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले और बाद में वैज्ञानिक, दार्शनिक, साहित्यिक, इंजीनियरिंग, गणित आदि सभी क्षेत्रों में महान् उपलब्धियाँ अर्जित की हैं।

विशेष:

  1. स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महान् लोगों की गणना करवाई गई है।
  2. भाषा सरल, सुबोध खड़ी बोली है।
  3. वर्णनात्मक शैली है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
आजादी से पहले भारत के पास कौन-सा विश्व स्तर कवि रहा है?
उत्तर:
आज़ादी से पहले भारत के पास कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसा विश्वस्तरीय कवि रहा है।

प्रश्न (ii)
स्वतंत्रता से पहले भारत में कौन-कौन से क्षेत्रों से जुड़े उच्चकोटि के लोग रहे हैं?
उत्तर:
स्वतत्रता प्राप्ति से पहले भारत में वैज्ञानिक, कवि, दार्शनिक, इंजीनियर, डॉक्टर आदि प्रत्येक क्षेत्र से जुड़े विश्वस्तरीय लोग रहे हैं।

प्रश्न (iii)
लेखक ने गणित के क्षेत्र में किस गणितज्ञ का नाम लिया है?
उत्तर:
लेखक ने गणित के क्षेत्र में सुप्रसिद्ध गणितज्ञ रामानुजम का नाम लिया है।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
लेखक ने प्रस्तुत गद्यांश में किस काल की चर्चा की है?
उत्तर:
लेखक ने प्रस्तुत गद्यांश में स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व काल की चर्चा की है।

प्रश्न (ii)
लेखक ने किन वैज्ञानिकों के नाम गिनाए हैं, जिनका स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद महान् उपलब्धियों में योगदान रहा है?
उत्तर:
होमी जहाँगीर भाभा, विक्रम सारा भाई, और बी.सी. राय जैसे वैज्ञानिकों की स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद भी महान वैज्ञानिक उपलब्धियों में योगदान रहा है।

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प्रश्न 4.
स्वतंत्रता के बाद भारत ने अपनी पहली पंचवर्षीय योजना शुरू की। इसने महत्त्वपूर्ण उद्योगों की स्थापना और आधारभूत ढाँचे के निर्माण को प्रेरित किया। ’70 के दशक में पहले हरित क्रांति के परिणाम देखने को मिले, जिसने भारत को खाद्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया। ऑपरेशन फ्लड ने भारत को निश्चित समयावधि में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक बनाया। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में भी काफी विकास देखने को मिला और कई अनुसंधान व विकास और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संस्थानों की स्थापना हुई, जिनका नेतृत्व विभिन्न क्षेत्रों के योग्य नेता कर रहे थे। इसने उच्च प्रौद्योगिकी मिशनों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया। (Page 50)

शब्दार्थ:

  • पंचवर्षीय – पाँच वर्ष की।
  • निर्माण – बनाने की प्रक्रिया।
  • प्रेरित – प्रेरणा देना।
  • प्रौद्योगिकी – किसी विशेष क्षेत्र या व्यवसाय-संबंधी तकनीक।
  • अनुसंधान – अन्वेषण, जाँच-पड़ताल द्वारा वस्तुस्थिति का पता लगाना।
  • मिशन – लक्ष्य।
  • मजबूत – दृढ़ आधार-नींव।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश डॉ. अब्दुल कलाम द्वारा लिखित लेख ‘मेरे सपनों का भारत’ से लिया गया है। लेखक स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद अर्जित की गई उपलब्धियों का वर्णन किया है।

व्याख्या:
लेखक का कहना है कि भारत ने 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त की। उसके बाद भारत ने अपने चहुंमुखी विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ शुरू की। भारत में स्वतंत्रता के बाद पहली पाँच साल की योजना आरंभ की गई। पहली पंचवर्षीय योजना में महत्त्वपूर्ण जनोपयोगी माल या सामान बनाने के लिए कल-कारखानों की स्थापना और उनके विकास के लिए मुख्य नींव के रूप में ढाँचा खड़ा करने के लिए प्रेरित किया गया। दूसरे शब्दों में, इस पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत देश के औद्योगिक विकास के लिए आधारभूत ढाँचा तैयार किया गया।

1970 के दशक (दस वर्षों) में सबसे पहले कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति के परिणाम सामने आए। इस हरित क्रांति ने देश को खाद्यान्नों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया। इसके बाद ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम के अंतर्गत भारत एक निश्चित समय सीमा में विश्व का सबसे बड़ा उत्पादन करने वाला देश बना। विज्ञान और तकनीकी में भी इस अवधि में पर्याप्त बड़ा दूध उत्पादन करने वाला देश बना। विज्ञान और तकनीकी में भी इस अवधि में इसमें पर्याप्त विकास देखने को मिला उस समय अनुसंधान व विकास के लिए अनेक विज्ञान तथा तकनीकी संस्थानों की स्थापना की गई। इन संस्थानों का नेतृत्व विभिन्न क्षेत्रों के योग्य वैज्ञानिक, इंजीनियर आदि कर रहे थे। इसने उच्च तकनीक प्राप्त करने के लिए एक सुदृढ़ आधार भी तैयार किया।

विशेष:

  1. लेखक ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हरित क्रांति और ऑपरेशन फ्लड की सफलता का उल्लेख किया है, जिससे देश खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर बना और दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश बना।
  2. भाषा पारिभाषिक शब्दावली से युक्त खड़ी बोली है।
  3. वर्णनात्मक शैली है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
भारत ने स्वतंत्रता प्राप्ति के वाद विकास के लिए क्या तरीका अपनाया है?
उत्तर:
भारत ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाओं का तरीका अपनाया है।

प्रश्न (ii)
लेखक ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद की किन उपलब्धियों का वर्णन किया है?
उत्तर:
लेखक ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाढ़ की हरित क्रांति और ऑपरेशन फ्लड का वर्णन किया है। सन् 1970 के पहले दशक में हरित क्रांति हुई, जिसके कारण देश खाद्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना। ऑपरेशन फ्लड के अंतर्गत भारत एक निश्चित समय में विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना।

प्रश्न (iii)
भारत ने वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिक क्षेत्र में क्या प्रगति की है?
उत्तर:
भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिक के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। यहाँ • कई अनुसंधान व विकास और विज्ञान प्रौद्योगिकी संस्थाओं की स्थापना हुई है। इससे उच्च प्रौद्योगिकी लक्ष्यों की प्राप्ति का आधार तैयार हुआ।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत गद्यांश में किन उपलब्धियों का वर्णन किया गया है?
उत्तर:
प्रस्तुत गद्यांश में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद की उपलब्धियों का वर्णन किया गया है।

प्रश्न (ii)
कृषि के क्षेत्र में कौन-सी क्रांति हुई? उसका क्या लाभ हुआ?
उत्तर:
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति हुई। इस क्रांति के कारण देश खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर बना।

प्रश्न 5.
भारत के उपग्रह तथा उपग्रह प्रक्षेपण यान कार्यक्रमों द्वारा रखे गए ठोस आधार ने देश को किसी प्रकार का उपग्रह डिजाइन तथा विकसित करने और उसे अपनी ही धरती से अपने प्रक्षेपण यानों द्वारा कक्षा में प्रक्षेपित करने की क्षमता प्रदान की है। पी. एस.एल.वी. सी-5 की सातवीं सफल उड़ान ने, जिसमें रिसोर्स सेट-1 को सन सिंक्रोनस ऑरबिट में स्थापित किया गया, ने स्वदेशी योग्यता में भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया है। इसी प्रकार, भारत किसी भी प्रकार की मिसाइल या मुखाग्र को डिजाइन करने, विकसित करने तथा उत्पादित करने में सक्षम है। भारतीय सेना में ‘पृथ्वी’ तथा ‘अग्नि’ को शामिल किया जाना इस स्वदेशी क्षमता का प्रमाण है। परमाणु ऊर्जा उत्पत्ति तथा अस्त्र विकास में हमारी उपलब्धियाँ विकसित विश्व के मुकाबले की हैं। (Page 50)

शब्दार्थ:

  • उपग्रह – कृत्रिम ग्रह, अंतरिक्ष में राकेट द्वारा भेजे गए कृत्रिम ग्रह।
  • प्रक्षेपण – दूर फेंकना।
  • ठोस – सुदृढ़।
  • आधार – नींव।
  • डिजाइन – रूपांकन, आकृति।
  • क्षमता – शक्ति, योग्यता।
  • स्वदेशी – अपने देश में विकसित।
  • प्रदर्शित – दिखाना।
  • मुखाग्र – मुख का अगला भाग।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश डॉ. अब्दुल कलाम द्वारा रचित लेख ‘मेरे सपनों का भारत’ से लिया गया है। लेखक भारत की आंतरिक तथा रक्षा के क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियों का वर्णन किया है।

व्याख्या:
भारत ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आशातीत उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। भारत के उपग्रह तथा उपग्रह प्रक्षेपण यान कार्यक्रमों के द्वारा रखी गई सुदृढ़ नींव ने देश को किसी भी तरह के उपग्रह (कृत्रिम ग्रह) को आकार देने तथा उसे विकसित करने और अपने ही प्रक्षेपण यानों द्वारा अंतरिक्ष की किसी भी कक्षा में स्थापित करने अथवा फेंकने की योग्यता से संपन्न किया। भारत उपग्रह बनाने तथा उन्हें अपने प्रक्षेपण यानों के द्वारा अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है। पी.एस.एल.वी. सी-5 की सातवीं सफल उड़ान के द्वारा रिसोर्स सेट-1 को सन सिंक्रोनस ऑर बिट में स्थापित किया गया।

इसके द्वारा भारत ने अपनी स्वदेशी योग्यता तथा क्षमता को प्रदर्शित किया है। इसी प्रकार रक्षा-अनुसंधान के क्षेत्र में भारत किसी भी तरह की मिसाइल अथवा उसके अग्रभाग को डिजाइन करने, उसे विकसित करने के साथ ही साथ उसका उत्पादन करने में भी सक्षम है। भाव यह कि भारत किसी भी प्रकार की मिसाइल बनाने और उसका उत्पादन करने में सक्षम है। भारतीय सेना में सम्मिलित की गई पृथ्वी और अग्नि नामक मिसाइलें इस स्वदेशी प्रौद्योगिकी क्षमता का जीवंत उदाहरण है। परमाणु ऊर्जा तथा परमाणु अस्त्र विकसित करने की भारतीय प्राप्तियाँ विकसित विश्व के स्तर की हैं। दूसरे शब्दों में भारत ने उपग्रह प्रक्षेपण, मिसाइल निर्माण और परमाणु अस्त्र निर्माण की जो स्वदेशी तकनीक विकसित की है, वह विकसित राष्ट्रों की तकनीक के स्तर की है।

विशेष:

  1. लेखक ने विज्ञान के क्षेत्र में भारत की आधुनिक उपलब्धियों से परिचित कराया है।
  2. भाषा पारिभाषिक शब्दावली से युक्त खड़ी बोली है।
  3. वर्णनात्मक शैली है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
भारत ने उपग्रह तथा उपग्रह प्रक्षेपण में कौन-सी क्षमता प्राप्त की है?
उत्तर:
भारत ने उपग्रह के क्षेत्र में किसी भी प्रकार का उपग्रह डिजाइन करने और उसे विकसित करने की स्वदेशी तकनीक विकसित की है। वह हर प्रकार के उपग्रह बनाने में समर्थ है। भारत ने उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में भी आशातीत क्षमता प्राप्त की है। वह प्रक्षेपण यान बनाने और उनसे अपनी ही धरती से उपग्रहों को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है।

प्रश्न (ii)
भारत ने उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में अपनी स्वदेशी योग्यता कैसे प्रमाणित की है?
उत्तर:
भारत ने पी.एस.एल.वी., सी-5 प्रक्षेपण यान की सातवीं सफल उड़ान के द्वारा रिसोर्स सेट-1 को सन सिंक्रोनस ऑरबिट में स्थापित कर अपनी प्रक्षेपण की स्वदेशी योग्यता और क्षमता को प्रमाणित किया है।

प्रश्न (iii)
भारत की मिसाइल निर्माण की क्षमता का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारत ने मिसाइल निर्माण के क्षेत्र में पर्याप्त प्रगति की है। वह किसी भी प्रकार की मिसाइल अथवा उसका मुखाग्र डिजाइन करने, विकसित करने और उत्पादित करने की क्षमता रखता है।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
मिसाइल के क्षेत्र में भारत की स्वदेश क्षमता का प्रमाण क्या है?
उत्तर:
भारतीय सेना में भारत द्वारा निर्मित ‘पृथ्वी’ और ‘अग्नि’ मिसाइलों का सम्मिलित किया जाना ही मिसाइल के क्षेत्र में उसकी स्वदेशी क्षमता का प्रमाण है।

प्रश्न (ii)
भारत की कौन-सी उपलब्धियाँ विश्वस्तर की हैं?
उत्तर:
भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता तथा परमाणु अस्त्र निर्माण की क्षमता विकसित विश्व के स्तर की हैं।

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प्रश्न 6.
भारत के पास कुछ ऐसी संपदाएँ तथा लाभ हैं, जिनके बारे में विश्व के कुछ देश गर्व से दावा कर सकते हैं। हमें अपने गौरवशाली अतीत और वर्तमान योगदानों तथा अपने भविष्य की रूपरेखा बनाने के लिए प्राप्त प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को पहचानना चाहिए। विश्व एक बौद्धिक समाज में परिवर्तित हो रहा है, जहाँ समन्वित ज्ञानशक्ति तथा धन का स्रोत होगा। यही समय है, जब भारत खुद को एक बौद्धिक शक्ति में बदलने और फिर अगले दो दशकों के भीतर एक विकसित देश बनने के लिए इस अवसर का लाभ उठा सकता है। इस रूपांतरण के लिए यह जानना आवश्यक है कि हम प्रतिस्पर्धात्मकता के मामले में कहाँ हैं, जो एक बौद्धिक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर होने के लिए वास्तविक इंजन है। (Page 51) (M.P. 2009)

शब्दार्थ:

  • संपदाएँ – संपत्तियाँ, कोश, खजाना।
  • गर्व – घमंड, अभिमान।
  • दावा – किसी वस्तु को अपनी बताने का अधिकार प्रतिस्पर्धात्मक-होड़, प्रतियोगिता।
  • समन्वित – संतुलित।
  • रूपांतरण – रूप में परिवर्तन।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश डॉ. अब्दुल कलाम द्वारा लिखित लेख ‘मेरे सपनों का भारत’ से लिया गया है। लेखक कहता है कि भारत को विकसित राष्ट्र बनने के लिए स्वयं को एक बौद्धिक अर्थव्यवस्था में बदलने की आवश्यकता है। इसके लिए उसे तरीकों और उपायों को जानना होगा।

व्याख्या:
लेखक का मत है कि भारत के पास कुछ ऐसी खनिज संपदाएँ और प्राकृतिक लाभ हैं, जिनके संबंध में संसार के कुछ देश अभिमान के साथ अधिकार जता सकते हैं। दूसरे शब्दों में भारत खनिज संपदाओं से संपन्न देश है और इससे वह लाभ उठा सकता है। इन संपदाओं के होने का दावा वह गर्व के साथ कर सकता है। लेखक का मत है कि हमें अपने गौरवशाली अतीत और वर्तमान के विविध क्षेत्रों में योगदान तथा भविष्य की योजना बनाने के लिए प्राप्त उपलब्धियों के प्रतियोगितात्मक लाभ को पहचानकर लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। वर्तमान में विश्व बौद्धिक समाज में बदल रहा है, जहाँ संतुलित ज्ञान शक्ति तथा धन का स्रोत होगा।

आज संसार बौद्धिक अर्थव्यवस्था में बदल रहा है। धन का स्रोत वहीं होगा, जहाँ बौद्धिक ज्ञान का संतुलित रूप से उपयोग किया जाएगा। इसलिए भारत जैसे विकासशील देश के लिए स्वयं का एक बौद्धिक समाज के रूप में विकसित होना है, तो उसे एक बौद्धिक अर्थ-व्यवस्था में बदलना होगा। अतः भारत को स्वयं को एक बौद्धिक शक्ति में बदलने और फिर आगामी बीस वर्षों में एक विकसित देश बनने के अवसर का लाभ उठाना चाहिए।

किंतु स्वयं को विकसित देश में परिवर्तित करने के लिए यह जानना आवश्यक है कि हम प्रतियोगितात्मक के दृष्टिकोण से कहाँ हैं? इसके लिए हमें बौद्धिक अर्थव्यवस्था में बदलने के तरीकों और उपायों की जाँच-पड़ताल करनी पड़ेगी। उसी के आधार पर हम एक बौद्धिक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं और विकसित देशों में सम्मिलित हो सकते हैं।

विशेष:

  1. लेखक ने भारत के विकसित देश बनने की रूपरेखा प्रस्तुत की है।
  2. भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है।
  3. विचारत्मक तार्किक शैली है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए क्या किया जाना आवश्यक है?
उत्तर:
भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए स्वयं को एक द्धिक अर्थव्यवस्था में बदलना आवश्यक है। इसके लिए उसे तरीकों और उपायों को जानना आवश्यक है।

प्रश्न (ii)
लेखक के अनुसार हमें कौन-सा लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए?
उत्तर:
लेखक के अनुसार हमें अपने गौरवशाली अतीत और वर्तमान के विविध क्षेत्रों में योगदान और भविष्य की योजना बनाने के लिए प्राप्त उपलब्धियों के प्रतियोगितात्मक लाभ को पहचानकर अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
विश्व किस प्रकार की अर्थव्यवस्था में बदल रहा है?
उत्तर:
विश्व आज बौद्धिक अर्थव्यवस्था में बदल रहा है।

प्रश्न (ii)
हम किस आधार पर बौद्धिक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं?
उत्तर:
हम बौद्धिक अर्थव्यवस्था में बदलने के तरीकों और उपायों की जाँच-पड़ताल के आधार पर ही एक बौद्धिक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते है।

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 13 तीन बच्चे

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 13 तीन बच्चे (कहानी, सुभद्राकुमारी चौहान)

तीन बच्चे पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

तीन बच्चे लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बच्चों में किस बात पर बहस छिड़ी थी?
उत्तर:
बच्चों में अपनी-अपनी क्यारियों में फूल अधिक सुंदर होने को लेकर बहस छिड़ी थी।

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प्रश्न 2.
माँ को अपने बच्चों के प्रति न्याय करने में कठिनाई क्यों आ रही थी?
उत्तर:
माँ के लिए सभी बच्चे एक समान होते हैं इसीलिए उसे न्याय करने में कठिनाई आ रही थी।

प्रश्न 3.
लड़की ने अपने पिता के संबंध में क्या बताया?
उत्तर:
लड़की ने बताया कि उसका पिता शराब पीकर दंगा करता था और माँ को मारता था।

प्रश्न 4.
लड़की की माँ को जेल क्यों हुई थी?
उत्तर:
लड़की की माँ ने उन पुलिसवालों को मारा था, जो उसके बाप को पकड़कर ले जा रहे थे।

तीन बच्चे दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तीनों बच्चों की दशा कैसी थी? (M.P. 2009)
उत्तर:
तीनों बच्चों की दशा दयनीय थी। उन्होंने चिथड़े पहन रखे थे। शरीर पर मैल की परत जम गई थी। वे भूखे और असहाय थे। जेल के पास नाले पर बने पुल के नीचे रहते थे। वे भीख माँगकर पेट भरते थे।

प्रश्न 2.
चौके का काम निपटाकर बाहर आने पर लेखिका ने क्या देखा? (M.P. 2009)
उत्तर:
चौके का काम निपटाकर लेखिका घर से बाहर गई, तो उसने देखा-तीन भिखारी बच्चे बड़े मजे में पूरियाँ खा रहे थे और उसके बच्चे भी बड़े उत्साह से उन्हें पूरियाँ परस रहे थे।

प्रश्न 3.
लेखिका को सबसे छोटे लड़के पर दया क्यों आई?
उत्तर:
लड़का उन तीनों में सबसे छोटा था। वह मुश्किल से पाँच वर्ष का था। उसने फटे-पुराने कपड़े पहने हुए थे। उसके बाल रूखे-सूखे थे। कई दिनों से न नहाने के कारण उसके शरीर पर मैल की परत जम गई थी। उसके गालों पर आँसुओं के निशान बने हुए थे। लड़के की असहाय स्थिति को देखकर लेखिका को बड़ी दया आई।

प्रश्न 4.
जबलपुर की जेल में लेखिका को किस प्रकार रखा गया था?
उत्तर:
लेखिका को जबलपुर की जेल में रखने की जगह अस्पताल में रखा था। उसकी सेवा के लिए दो महिला कैदियों को नियुक्त किया गया था।

प्रश्न 5.
अखबार में जबलपुर की कौन-सी घटना छपी थी?
उत्तर:
अखबार में जबलपुर की निम्नलिखित घटना छपी थी कल रात एकाएक पानी बरसा और खूब बरसा। जेल के पास के नाले में तीन गरीब बच्चे बह गए। उन तीनों की लाशें मिलीं। बहुत कोशिश करने पर भी इनकी शिनाख्त नहीं हो सकी। दो लड़कियाँ हैं और एक लड़का। ऐसा सुना गया है कि वे गाना गाकर भीख माँगा करते थे।

तीन बच्चे भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथनों का भाव-विस्तार कीजिए – (M.P. 2010)

प्रश्न 1.
“जज के पथ-प्रदर्शन के लिए कानून होते हैं और नज़ीर भी।”
उत्तर:
न्यायालय में न्याय करने के लिए न्यायाधीश को न्याय का रास्ता दिखाने के लिए लिखित कानून हैं और उसके सामने उदाहरण भी होते हैं। न्यायाधीश उन कानूनों के अंतर्गत, वकीलों के तर्क, गवाहों और उदाहरणों की रोशनी में न्याय करते हैं। कभी-कभी आँख मूंदकर कानूनों को मानने से न्याय करने में अन्याय भी हो जाताहै।

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प्रश्न 2.
“कैदखाने की दुनिया भी एक विचित्र ही है।”
उत्तर:
कैदखाने अर्थात् जेल का संसार भी अद्भुत ही होता है। जेल में विभिन्न प्रकार के अपराध करने वाले अपराधी होते हैं। इन अपराधियों में स्त्री-पुरुष दोनों होते हैं। कोई चोर है, तो कोई हत्यारा और कोई चरस बेचने का अवैध धंधा करता है। कोई अपने ही बच्चे की जान लेने वाली होती है तो कोई पुलिस की पिटाई करने वाले/वाली है। कैदियों में जवान से लेकर बूढ़े तक होते हैं। सब अलग-अलग धर्म और जाति के होते हुए पुलिस की दृष्टि में सब अपराधी और कैदी हैं।

तीन बच्चे भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्द-युग्मों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
अपनी-अपनी, खाली-खाली, दो-दो, ठहरो-ठहरो, रोज-रोज।
उत्तर:

  1. अपनी-अपनी-वर्तमान में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी ढपली बजा रहे हैं।
  2. खाली-खाली-भिखारियों की झोली खाली-खाली लग रही थी।
  3. दो-दो-पहलवान दो-दो हाथ करने को तैयार हैं।
  4. ठहरो-ठहरो-ठहरो, ठहरो! कहाँ जाते हो? पुलिस आ रही है।
  5. रोज-रोज़-तुम रोज़-रोज़ यहाँ खाने आ जाते हो। इसे क्या धर्मशाला समझ रखा है।

प्रश्न 2.
मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
लकीर का फकीर होना, माथा टेकना, पेट दिखाना, बाँह पकड़ना।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 13 तीन बच्चे img-1

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह कीजिए –
पथ-प्रदर्शक, सत्याग्रह, दशानन, भरपेट, चौराहा।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 13 तीन बच्चे img-2

प्रश्न 4.
दिए गए गद्यांश को पढ़कर यथास्थान उचित विराम-चिह्नों का प्रयोग कीजिए –
मैं बहत सोचती थी कि लखिया कौन है वह जेल क्यों आई एक दिन अचानक मैंने मेट्रन से पूछा जिसका उत्तर मिला ओह यह बड़ी खतरनाक औरत है इसने पुलिस को मारा है पुलिस को पर हमने इसका दिमाग ठीक कर दिया है आपको कोई तकलीफ तो नहीं देती।
उत्तर:
मैं बहुत सोचती थी कि लखिया कौन है। वह जेल क्यों आई? एक दिन अचानक मैंने मेट्रन से पूछा, जिसका उत्तर मिला- ‘ओह! यह बड़ी खतरनाक औरत है। इसने पुलिस को मारा है-पुलिस को। पर हमने उसका दिमाग ठीक कर दिया है। आपको कोई तकलीफ तो नहीं देती?”

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए –

  1. आपको चुप रहना चाहिए। (आज्ञा वाचक)
  2. क्या तुम खेलोगे? (इच्छा वाचक)
  3. अहा! कैसा सुंदर दृश्य है। (विधिवाचक)

उत्तर:

  1. आप चुप रहिए।
  2. ईश्वर करे! तुम खेलो।
  3. बहुत सुंदर दृश्य है।

तीन बच्चे योग्यता विस्तार

प्रश्न 1.
आपने सड़क पर भजन गाते हुए छोटे बच्चों को देखा होगा, उन्हें देखकर आपके मन में क्या विचार आते हैं?
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 2.
न्यायालय, न्यायाधीश और जेल पर चार-चार वाक्य लिखिए।
उत्तर:
न्यायालय:

  1. देश में अपराधों की रोकथाम के लिए न्यायालयों की स्थापना की गई है।
  2. न्यायालय दो प्रकार के होते हैं-दीवानी और फौजदारी न्यायालय।
  3. देश में कनिष्ठ न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक की न्याय व्यवस्था है।
  4. सुप्रीम कोर्ट देश का सर्वोच्च न्यायालय है।

न्यायाधीश:

  1. न्यायाधीश का कार्य न्याय करना होता है।
  2. न्यायाधीश के अदालतों के स्तर पर अपने-अपने अधिकार क्षेत्र होते हैं।
  3. न्यायाधीश मुकदमों की सुनवाई करते हैं।
  4. न्यायाधीश अपराधियों को सजा सुनाते हैं।

जेल:

  1. जेल न्यायालय से सजा-प्राप्त कैदियों को रखने का स्थान होता है।
  2. जेल में विभिन्न प्रकार के अपराधी रखे जाते हैं।
  3. जेल में यातनाएँ दी जाती हैं।
  4. जेल एक भयावह स्थान है। हमें जेल जाने योग्य कर्म नहीं करने चाहिए।

प्रश्न 3.
बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए क्या योजनाएँ चलाई जा रही हैं? इन योजनाओं की जानकारी स्थानीय निकायों से प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 4.
बाल-सुधार गृह व बाल न्यायालय के बारे में जानकारी एकत्रित करके जानकारी प्राप्त करें।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

तीन बच्चे परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न 1.
बच्चों के काकाजी को किसी का ………… के ऊपर बोलना पसंदनहीं था।
(क) सप्तम स्वर
(ख) पंचम स्वर
(ग) अष्टम स्वर
(घ) द्वितीय स्वर
उत्तर:
(ख) पंचम स्वर।

प्रश्न 2.
बड़ी लड़की की आयु दस वर्ष और छोटी की आयु सात-आठ वर्ष और लड़के की आयु थी ……..।
(क) छह वर्ष
(ख) चार वर्ष
(ग) पाँच वर्ष
(घ) एक वर्ष
उत्तर:
(ग) पाँच वर्ष।

प्रश्न 3.
लेखिका के जेल में जाने का कारण था –
(क) भारत छोड़ो आंदोलन में सत्याग्रह करना
(ख) नमक तोड़ो आंदोलन में सत्याग्रह करना
(ग) युद्ध विरोधी आंदोलन में सत्याग्रह करना
(घ) बहिष्कार आंदोलन में भाग लेना।
उत्तर:
(ग) युद्ध विरोधी आंदोलन में सत्याग्रह करना।

प्रश्न 4.
भिखारी बच्चों का बाप अमरावती जेल में था और माँ …….. थी।
(क) अमरावती जेल में
(ख) जबलपुर जेल में
(ग) थाणे जेल में
(घ) तिहाड़ जेल में
उत्तर:
(ख) जबलपुर जेल में।

प्रश्न 5.
भिखारी बच्चों ने अपने न नहाने का कारण बताया था कि …..।
(क) हमारे पास दूसरे कपड़े नहीं हैं।
(ख) हमारे पास नहाने के लिए साबुन नहीं है।
(ग) हमारे पास पानी नहीं है।
(घ) हमारे पास घर नहीं है।
उत्तर:
(क) हमारे पास दूसरे कपड़े नहीं हैं।

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प्रश्न 6.
भिखारी बच्चे जेल के पास के एक ……….. में रहते थे।
(क) झोंपड़ी
(ख) नाले
(ग) मकान
(घ) छप्पर
उत्तर:
(ख) नाले।

प्रश्न 7.
जेल में मिनू किससे हिल गई थी?
(क) लेखिका से
(ख) लखिया से
(ग) जेलर से
(घ) मेट्रन से
उत्तर:
(ख) लखिया से।

प्रश्न 8.
तीन भिखारी बच्चों की मौत हुई थी …….।
(क) बरसात के पानी में बहने से
(ख) बीमारी लग जाने से
(ग) भूख के कारण से
(घ) दुर्भाग्य से
उत्तर:
(क) बरसात के पानी में बहने से।

प्रश्न 9.
हर एक का कहना था कि –
(क) उसकी क्यारी के पौधे सबसे अधिक सुन्दर हैं।
(ख) उसकी क्यारी के फूल सबसे सुन्दर हैं।
(ग) उसकी क्यारी की मिट्टी सबसे अच्छी है।
(घ) उसकी क्यारी सबसे अधिक सुन्दर है।
उत्तर:
(ख) उसकी क्यारी. के फूल सबसे सुन्दर हैं।

II. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पस्कीजिए –

  1. तीन बच्चे ………. है। (एकांकी/कहानी) (M.P. 2012)
  2. सुभद्राकुमारी का जन्म सन् ………. में हुआ था। (1804/1904)
  3. तीन बच्चे के रचनाकार हैं ……….। (मनमोहन मदारिया/सुभद्राकुमारी चौहान)
  4. बिखरे मोती सुभद्रा कुमारी चौहान का ………. है। (काव्य-संग्रह/कहानी-संग्रह)
  5. सत्याग्रह के दौरान सुभद्राकुमारी ………. गईं। (जेल/जेल नहीं)

उत्तर:

  1. कहानी
  2. 1904
  3. सुभद्राकुमारी चौहान
  4. कहानी-संग्रह
  5. जेल।

III. निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए –

  1. जज के पथ-प्रदर्शन के लिए कानून होते हैं।
  2. लेखिका के सामने कानून और नज़ीर थीं।
  3. गाना कोरस में था और स्वर बच्चों का-सा।
  4. लेखिका ने बाहर आकर देखा-चार बच्चे।
  5. लेखिका की सेवा के लिए दो औरतें तैनात थीं।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

IV. निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए –

प्रश्न 1.
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 13 तीन बच्चे img-3
उत्तर:

(i) (ग)
(ii) (घ)
(iii) (ङ)
(iv) (ख)
(v) (क)।

V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

प्रश्न 1.
तीन बच्चे कौन थे?
उत्तर:
दो लड़कियाँ और एक लड़का।

प्रश्न 2.
लड़की ने गोद से लड़के को उतारकर क्या किया?
उत्तर:
लड़की ने गोद से लड़के को उतारकर जमीन से माथा टेककर लेखिका को प्रणाम किया।

प्रश्न 3.
बच्चों ने लेखिका को क्या बतलाया?
उत्तर:
बच्चों ने लेखिका को बतलाया कि वे भूखे हैं।

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प्रश्न 4.
बाहर से कौन-से गाने की आवाज आई?
उत्तर:
बाहर से निम्नलिखित गाने की आवाज आई “भगवान दया करके मेरी नैया को पार लगा देना।”

प्रश्न 5.
लड़की की माँ जेल में क्यों थी?
उत्तर:
पुलिस की पिटाई करने के कारण लड़की की माँ जेल में थी।

तीन बच्चे लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखिका ने किन्हें हिटलर और मुसोलिनी कहा है?
उत्तर:
लेखिका ने अपने बच्चों को हिटलर और मुसोलिनी कहा है।

प्रश्न 2.
काका ने बच्चों का झगड़ा कैसे समाप्त किया?
उत्तर:
काका ने कहा, यदि तुम लड़े-भिड़े तो मैं तुम्हारी माँ को सत्याग्रह नहीं करने दूंगा। यह सुनकर बच्चों ने अपना झगड़ा समाप्त कर दिया।

प्रश्न 3.
तीन बच्चे किस प्रकार भीख माँग रहे थे?
उत्तर:
तीन बच्चे गाना गाकर भीख माँग रहे थे।

प्रश्न 4.
लेखिका ने अपने बच्चों को क्या निर्देश दिया?
उत्तर:
लेखिका ने अपने बच्चों को भीख माँगने वालों को दो-दो पूरियाँ देने का निर्देश दिया।

प्रश्न 5.
तीनों बच्चों के क्या नाम थे?
उत्तर:
बड़ी लड़की का ईठी, छोटी लड़की का सीठी और लड़के का प्रेम नाम था।

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प्रश्न 6.
बच्चों का बाप कहाँ था?
उत्तर:
अमरावती जेल में।

प्रश्न 7.
लेखिका की सेवा के लिए दोनों औरतें कैसी थीं?
उत्तर:
लेखिका की दोनों औरतें अलग-अलग विशेषताओं की थीं। उनमें एक अल्लड़-सी थी, जिसे कुछ काम-काज नहीं आता था। दूसरी समझदार थी जो हर काम को मन लगाकर करती थी।

तीन बच्चे दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बच्चे कौन-सा गाना गाकर भीख माँग रहे थे?
उत्तर:
बच्चे निम्नलिखित गाना गाकर भीख माँग रहे थे –
“भगवान दया करना इतनी,
मेरी नैया को पार लगा देना।”
“मैं तो डूबत हूँ मँझधार पड़ीं.
मेरी बैयाँ पकड़ के उठा लेना।”

प्रश्न 2.
दूसरे दिन लेखिका के बच्चों ने क्या तर्क देकर भिखारी बच्चों को पूरियाँ खिलाईं?
उत्तर:
बच्चों ने कहा पूरियाँ तो धरी हैं। बेचारे छोटे-छोटे बच्चे हैं। जाने अकी माँ है या नहीं। वे भला कहाँ पकायेंगे। इससे तो अच्छा यह है कि उन्हें कुछ न दिया जाए। आप माँ होकर ऐसा क्यों कहती हो। उन बेचारों को भी भूख लगी होगी। हमारे हिस्से की ही दें दो। हम शाम को नाश्ता नहीं करेंगे। ये तर्क देकर लेखिका के बच्चों ने दूसरे दिन भिखारी बच्चों को पूरियाँ खिलाईं।

प्रश्न 3.
लेखिका जेल क्यों गई?
उत्तर:
लेखिका युद्ध-विरोध के आंदोलन में सत्याग्रह करके जेल गई। उसके बच्चे चाहते थे कि उनकी माँ सत्याग्रह करके जेल जाएँ।

प्रश्न 4.
लड़की ने अपने माता-पिता के संबंध में क्या बताया?
उत्तर:
लड़की ने बताया कि उसका बाप शराब पीकर दंगा करता था। माँ को मारता था और गाली बकता था। इसलिए पुलिसवाले पकड़कर ले गए और माँ ने पुलिसवालों को मारा था क्योंकि उसने हमारे बाप को पकड़ा था। इसलिए पुलिस उसे भी साथ ले गई। अब माँ-बाप दोनों जेल में हैं।

प्रश्न 5.
नाले में तीनों बच्चे क्यों बह गए?
उत्तर:
नाले में तीनों बच्चे बह गए क्योंकि उस दिन खूब पानी बरसा था। खूब बादल गरजे थे और कड़क-कड़क कर बिजली चमकी थी। अधिक पानी बरसने से बच्चों को बचने की कोई गुंजाइश नहीं रही। वे उस पानी में बह गए।

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प्रश्न 6.
लेखिका को लखिया के बारे में मेट्रन से क्या जानकारी मिली?
उत्तर:
लेखिका को लखिया के बारे में मेट्रन से यह जानकारी मिली कि वह बड़ी खतरनाक औरत है। उसने पुलिस को मारा है लेकिन पुलिस ने जेल में उसके दिमाग को ठीक कर दिया है।

तीन बच्चे लेखिका-परिचय

प्रश्न 1.
सुभद्राकुमारी चौहान का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी. साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान का जन्म 16 अगस्त, 1904 ई० को निहालपुर, इलाहाबाद में हुआ था। इनका परिवार एक प्रगतिशील परिवार था। इन्होंने प्रयाग के क्रास्थवेस्ट स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। इनकी पहली रचना ‘नीम’ 1913 ई० में ‘मर्यादा’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई। उस समय इनकी आयु मात्र 9 वर्ष की थी। इनका विवाह 1919 में श्री लक्ष्मणसिंह के साथ हुआ। 1921 में गाँधी जी के असहयोग आंदोलन का प्रभाव इन पर भी पड़ा। इन्होंने अपने पति के साथ पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।

इसके पश्चात् आप दोनों ने स्वाधीनता संग्राम में भाग लिया। 1923 में इनको सत्याग्रह के सिलसिले में पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 1942 में भी इनको दस मास का कारावास मिला। देश के स्वाधीन होने पर आप मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्य बनीं। 15 फरवरी, 1948 में एक मोटर-दुर्घटना में इनकी दिमाग की नस फट गई और सिवनी में ही इनका देहावसान हो गया।

साहित्यिक विशेषताएँ:
श्रीमती सुभद्राकुमारी की साहित्य और राजनीति में आरंभं से ही रुचि थी। स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने के कारण आप अधिक साहित्य रचना नहीं कर पाईं। फिर भी कविता, कहानी और निबंध के क्षेत्र में इनका महत्त्वपूर्ण योगदान है। इनकी रचनाएँ पत्र-पत्रिकाओं में बिखरी हुई हैं। इनकी सुप्रसिद्ध कविता ‘झाँसी की रानी’ है, जिसे अंग्रेजों ने जब्त कर लिया था। इनकी कविताओं के दो विषय रहे-राष्ट्रीयता तथा सामाजिक जीवन की समस्याएँ। राष्ट्रीय रचनाओं का मूल स्वर स्वाधीनता आंदोलन और देशभक्ति रहा।

इन कविताओं में अपने देश के प्रति अपनी भक्ति-भावना को प्रदर्शित किया है। इन कविताओं में राष्ट्रभक्ति के साथ-साथ निर्भीकता और ओजस्विता का गुण मुख्य है। सुभद्राजी हिंदी काव्य जगत् में अकेली ऐसी कवयित्री हैं, जिन्होंने अपने कंठ की पुकार से लाखों भारतीय युवक-युवतियों को युग-युग की अकर्मण्य उदासी को त्याग, स्वतंत्रता संग्राम में अपने को समर्पित कर देने के लिए प्रेरित किया। सामाजिक जीवन से संबंधित कविताओं में दाम्पत्य-प्रेम और वात्सल्य भाव की कविताएँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इनके काव्य में एक ओर नारी सुलभ ममता तथा सुकुमारता है तो दूसरी ओर पद्मिनी के जौहर की भीषण ज्वाला है।

रचनाएँ:
काव्य-संग्रह-त्रिधारा और मुकुल।

कहानी-संग्रह:
सीधे-सादे चित्र, बिखरे मोती और उन्मादिनी।

इनकी कविताओं की भाषा सरल तथा बोलचाल के निकट है। वर्ण्य-विषय के अनुरूप उसमें प्रसाद और ओजगुण मिलता है। आपकी कविताओं में मानक जीवन की सहज अनुभूति हुई है। इन कविताओं में अलंकारों का प्रयोग भी सहज ढंग से ही हुआ है; अर्थात् इन रचनाओं में अलंकारों का प्रयोग प्रयत्नपूर्ण नहीं किया गया है।

तीन बच्चे पाठ का सारांश

प्रश्न 1.
‘तीन बच्चे’ कहानी का सार लिखिए।
उत्तर:
लेखिका के बच्चों ने घर की क्यारियों में फूलों के पौधे लगाए थे। थोड़े दिन बाद क्यारियों में फूल खिल आए। बच्चे आपस में झगड़ने लगे कि उसकी क्यारी के फूल सबसे सुंदर हैं। उनके झगड़े की आवाज सुनकर लेखिका को रसोईघर छोड़कर बगीचे में जाना पड़ा। लेखिका को बच्चों की लड़ाई को न्यायपूर्वक समाप्त करना था। इतने में बच्चों के काकाजी आ गए। उन्होंने बच्चों से कहा कि यदि तुम लड़े-भिड़े तो मैं तुम्हारी माँ को सत्याग्रह न करने दूंगा। लेखिका के बच्चे चाहते थे कि मैं (लेखिका) सत्याग्रह करूँ और जेल जाऊँ। बच्चों ने झगड़ना बंद कर दिया और कहा सभी क्यारियों के फूल सुंदर हैं।

सब घर के अंदर जा रहे थे कि बाहर से बच्चों के गाने की आवाज आई, “भगवान दया करना इतनी, मेरी नैया को पार लगा देना।” हम दरवाजे की और दौड़ पड़े। बाहर आकर देखा तीन बच्चे थे। दो लड़कियाँ और एक लड़का। बड़ी लड़की 10 साल की तथा छोटी 8 साल की होगी। लड़का 5 साल के लगभग होगा, जो बड़ी लड़की की गोद में था। उनके कपड़े फटे-पुराने थे। उन्होंने बताया कि वे भूखे हैं। कल से कुछ नहीं खाया है। लेखिका ने अपने बच्चों से उन्हें दो-दो पूरी लाकर देने को कहकर, अंदर चली गई। बच्चों ने उन्हें भरपेट पूरियां खिलाईं।

दूसरे दिन जब वे लोग चाय पी ही रहे थे कि उन बच्चों की टोली फिर आ पहुँची। लेखिका ने अपने बच्चों से कहा कि कल तुमने खूब पूरियाँ खिलाई थीं न, अब वे सब फिर आ गए। जैसे उनके लिए यहाँ रोज पूरियाँ रखी हैं। बच्चों ने एक साथ कहा, ‘धरी तो हैं माँ! इसके साथ ही उनके हाथ पूरी के डिब्बे की ओर बढ़े। एक बच्चे ने कहा, ‘न जाने उनकी माँ भी है या नहीं।’ बच्चों ने उन तीनों को पूरियाँ खिलाईं।

लेखिका भी दरवाजे पर पहुँच गई। लेखिका ने उनके संबंध में जानना चाहा। उसे पता लगा कि वे तीनों भाई-बहन हैं। उनमें से बड़ी लड़की का नाम ‘ईठी’, छोटी बहन का नाम ‘सीठी’ और भाई का नाम ‘प्रेम’ था। उनके माँ-बाप जेल में थे। उनका बाप शराब पीकर दंगा मचाता था और उनकी माँ को पीटता था। पुलिस ने उसके बापू को पकड़ा, तो माँ ने पुलिसवालों को मारा था इसलिए पुलिसवाले उसे भी ले गए। उनकी माँ के साथ उनका एक छोटा भाई भी था।

लेखिका को बड़ा दुख हुआ कि माँ-बाप जेल में और ये अनाथ सड़क पर भीख माँगते फिरते हैं। उन्हें देखकर लेखिका को लगा कि इन बच्चों को नहाये हुए भी काफी दिन हो गए हैं। लेखिका ने बड़ी लड़की से पूछा कि तुम अपनी माँ से मिलने जेल नहीं जातीं। इस पर उसने बताया कि तीन महीने में एक बार मुलाकात होती है। एक बार मुलाकात करने गए थे। दूसरी बार तीन महीने बाद गए, तो पता चला कि माँ को यहाँ की जेल में भेज दिया गया है। इसलिए हम काली माँ के साथ यहाँ आ गए।

काली माँ भीख माँगती है। वे तीनों बच्चे जेल के पास बने नाले के पुल के नीचे रहते हैं। कभी-कभी काली माँ आ जाती है। बड़ी लड़की कहती है-जब माँ जेल से छूटेगी तो हम उसको साथ लेकर देश जाएँगे। बालिका का मुँह इस विचार से खुशी से भर उठा। बच्चों ने लेखिका को बताया कि उनके पास दूसरे कपड़े नहीं हैं। इस पर लेखिका के बच्चों ने अपने ढेर सारे कपड़े उन्हें लाकर दिए।

लेखिका भी युद्ध-विरोधी सत्याग्रह करके जेल की अतिथि बनी। उनकी सबसे छोटी बेटी मिनू उनके साथ ही गई; क्योंकि वह बहुत छोटी थी। उन्हें जेल की बजाय, अस्पताल में रखा गया और उनकी सेवा के लिए दो साधारण कैदी स्त्रियों को लगा दिया गया था। लेखिका की सेवा में तैनात औरतों में से एक अल्हड़-सी थी। उसे कुछ काम-काज नहीं आता था और दूसरी प्रौढ़ा थी। उसकी गोद में एक बच्चा था। वह बड़ी फिक्र से सब काम करती थी। मिनू को तो उसने अपनी बच्ची की तरह हिला लिया था। उस औरत का नाम लखिया था। लेखिका लखिया के संबंध में सोचती थी कि लखिया कौन है? यह जेल क्यों आई? एक दिन लेखिका ने मेट्रन से पूछा तो उसने बताया कि इसने पुलिस को मारा था।

इस पर लेखिका को उन तीन बच्चों की याद आई। उनकी माँ भी तो पुलिस को मारने के कारण जेल में थी और उसके साथ भी एक बच्चा था लेकिन लेखिका लखिया से कुछ पूछने का साहस न जुटा पाई। एक दिन खूब मूसलाधार बरसात हुई। बादल जोर-जोर से गरजे। लेखिका ने ईश्वर से सब बच्चों को अच्छी तरह रखने की प्रार्थना की। लेखिका के पास जेल में अखबार आता था। उसमें एक खबर थी। कल रात, एकाएक बहुत पानी बरसा। जेल के पास के नाले में तीन गरीब बच्चे बह गए। उनकी लाशें मिलीं।

वे गाकर भीख माँगा करते थे। लेखिका के सामने उन तीनों बच्चों के चित्र खिंच गए। उसने जबरदस्ती अपने आँसुओं को रोका। उसके मुख से निकला-बेचारे बच्चे। लेखिका ने लखिया से पूछा कि जेल के बाहर उसके कितने बच्चे हैं? लखिया ने गहरी साँस लेकर कहा-“जेल के बाहर बाई साहब! वो तो भगवान के हैं-अपने कैसे कहूँ।” उसके बाद वह अखबार की खबर पूछती ही रह गई लेकिन उसे कुछ नहीं बता सकी।

तीन बच्चे संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

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प्रश्न 1.
संग्राम में विषैले वाक्यों का प्रयोग होते सुनकर मुझे चौके का काम छोड़, बगीचे की ओर जाना पड़ा। मुझे देखते ही सब एक साथ अपने-अपने पक्ष का समर्थन कर न्याय की दुहाई देने लगे। न्याय का कार्य उतना आसान न था, जितना एक अदालत के जज का होता है। जज के पथ-प्रदर्शन के लिए कानून होते हैं और नजीरें भी। चाहे लकीर की फकीरी में अन्याय ही क्यों न हो जाए; पर उसका मार्ग स्पष्ट रहता है। मेरे सामने न कानून था, न नज़ीर-फिर भी मुझे यह लड़ाई समाप्त करनी थी और न्यायपूर्वक। (Page 57)

शब्दार्थ:

  • संग्राम – युद्ध, लड़ाई।
  • विषैले – जहर में बुझे।
  • आसान – सरल।
  • अदालत – न्यायपालिका।
  • जज – न्यायाधीश।
  • नज़ीरें – अनेक उदाहरण।
  • प्रदर्शन – दिखावा।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश सुभद्राकुमारी चौहान द्वारा लिखित कहानी ‘तीन बच्चे’ से , उद्धृत है। लेखिका इस गद्यांश में अपने बच्चों के परस्पर हो रही लड़ाई का वर्णन करते हुए और उनकी लड़ाई समाप्त करने के लिए न्यायाधीश की भूमिका निभाने की अपनी स्थिति का वर्णन कर रही है।

व्याख्या:
लेखिका के बच्चों ने घर की क्यारियों में एक-एक फूलों का बगीचा लगाया था। उन क्यारियों में फूल खिल आए थे और बच्चे अपनी-अपनी क्यारियों के फूलों को एक-दूसरे से सुंदर बताते हुए परस्पर लड़ने लगे थे। बच्चों की लड़ाई में प्रयुक्त हो रहे, विष की तरह वाक्यों को सुनकर लेखिका को रसोईघर का काम बीच में ही छोड़कर बगीचे में जाना पड़ा। लेखिका को बगीचे में देखकर बच्चे परस्पर लड़ना छोड़कर, लेखिका से अपने-अपने पक्ष का समर्थन कर न्याय की माँग करने लगे। बच्चे चाहते थे कि वह न्याय करे कि किसकी क्यारी के फूल सुंदर हैं।

लेखिका कहती हैं कि बच्चों में न्याय करना सरल नहीं था। यदि एक का पक्ष लेकर उसकी क्यारी के फूलों को सुंदर बताया तो दूसरा नाराज. हो जाएगा और यदि दूसरे के फूलों को सुंदर बताया तो पहला नाराज हो जाएगा। न्यायालय में बैठे न्यायाधीश के लिए न्याय करना अधिक आसान होता है, क्योंकि न्याय के लिए न्यायालय के न्यायाधीश के सामने कानून होता है, जो उसको मार्ग दिखाते हैं।

इतना ही नहीं उसके सामने उदाहरण होते हैं और वकीलों के तर्क होते हैं। यह दूसरी बात है कि कानूनों का अक्षरशः पालन करने में अन्याय ही क्यों न हो जाए, किंतु उसका न्याय करने का रास्ता एकदम साफ होता है। लेखिका कहती है कि उसके सामने न तो कोई कानून था और न ही कोई उदाहरण था। ऐसी स्थिति में भी उसे बच्चों की इस लड़ाई को.समाप्त करना था और वह भी बिना किसी का पक्ष लिए हुए। उसे निष्पक्ष रहकर न्याय करनाथा।

विशेष:

  1. लेखिका ने इस तथ्य को उजागर किया है कि बच्चों की लड़ाई का निर्णय करना आसान नहीं होता है।
  2. न्याय के रास्ते की कठिनाइयों का वर्णन किया गया है।
  3. भाषा उर्दू शब्दावली युक्तखड़ी बोली है।
  4. मुहावरों का भी प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 2.
हम लोगों को देखते ही उन्होंने गाना बंद कर दिया। लड़के को गोद से उतारकर, बड़ी ने जमीन से माथा टेककर हमें प्रणाम किया। उसकी देखा-देखी छोटी लड़की और लड़के ने जमीन से माथा टेका और तीनों ने अपने चीथड़ों से छिपे हुए पेट को दिखाकर यह बतलाया कि वे भूखे हैं। बड़ी के हाथ में एक झोली थी और छोटी के हाथ में एक टीन का डिब्बा। उन्होंने एक बार झोली की ओर देखा जो बिलकुल खाली जान पड़ती थी फिर हमारी ओर याचना की दृष्टि से देखने लगे। मैंने उनसे कहा-“तुम गाती तो बहुत अच्छा हो, और भी कोई गाना. जानती हो?” (Page 57)

शब्दार्थ:

  • जमीन – धरती, पृथ्वी।
  • चीथड़ों – फटे-पुराने कपड़े।
  • माथा टेकना – भूमि से सर लगाकर प्रणाम करना।
  • याचना – प्रार्थना करना, माँगना।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश सुभद्राकुमारी चौहान द्वारा रचित कहानी ‘तीन बच्चे’ से उद्धृत है। लेखिका तीन भीख माँगने वाले बच्चों की दुर्दशा का वर्णन करती हुई कहती है।

व्याख्या:
बच्चों की लड़ाई समाप्त होने के बाद लेखिका घर के अंदर जा रही थी कि बाहर से बच्चों के गाने की आवाज सुनकर सब दरवाजे की ओर दौड़ पड़े और बाहर आकर उन्होंने देखा कि तीन बच्चे दो लड़कियाँ और एक लड़का गाकर भीख माँग रहे हैं। लेखिका कहती है कि हमें बाहर आया देखकर उन तीनों बच्चों ने गाना बंद कर दिया। उनमें से बड़ी लड़की ने लड़के को गोद से उतार दिया और भूमि से सर लगाकर उसे प्रणाम किया।

उस बड़ी लड़की का अनुसरण करते हुए छोटी लड़की और लड़के ने भी भूमि से माथा टेककर उसे प्रणाम किया। उन तीनों ने अपने फटे-पुराने, मैल से भरे हुए कपड़ों में छिपे पेट को दिखलाते हुए बताया कि वे भूखे हैं। बड़ी लड़की के हाथ में एक झोली थी और छोटी के हाथ में टीन का डिब्बा था। उनकी झोली बिलकुल खाली थी। उन तीनों में माँगने की दृष्टि से हमारी ओर देखा। लेखिका कहती है कि मैंने उन तीनों से कहा कि तुम तीनों बहुत अच्छा गाते हो। क्या और भी कोई गाना जानती हो?

विशेष:

  1. भीख माँगने वाले बच्चों की स्थिति का हृदयस्पर्शी वर्णन किया गया हैं।
  2. भाषा सरल, स्पष्ट, सुबोध खड़ी बोली है।
  3. मुहावरों का भी प्रयोग हुआ है।

प्रश्न 3.
हमारी माँ ने पुलिस वालों को मारा था-जिसने हमारे बाप को पकड़ा था न, उसी को। और फिर वे हमारी माँ को भी पकड़ कर ले गए। बड़े बुरे होते हैं पुलिस वाले-“हमारी माँ को भी ले गए। माँ के बिना हमको भी बुरा लगता है, पर यह प्रेमा तो रात-दिन रोता ही रहता है।” मैंने लड़के की ओर देखा-बेचारा छोटा-सा बच्चा; मुश्किल से पाँच बरस का फटे चीथड़ों में लिपटा हुआ, सर में महीनों से तेल का नाम नहीं, रूखे-बिखरे बाल न जाने कब से नहाया नहीं था; शरीर पर एक मैल की तह-सी जम गई थी, गालों पर आँसुओं के निशान बने हुए थे, आँसुओं के साथ-साथ उस स्थान की मैल जो धुल गई थी। मुझे उस बच्चे पर बड़ी दया आई। (Pages 59-60)

शब्दार्थ:

  • मुश्किल – कठिनाई।
  • तह जमना – परत जमना।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश सुभद्राकुमारी चौहान द्वारा रचित कहानी ‘तीन बच्चे’ से उद्धृत है। भीख माँगने वाली लड़की अपनी माँ के जेल जाने का कारण लेखिका को बता रही है, तो लेखिका उनके साथ छोटे लड़के की दुर्दशा का चित्रण कर रही है।

व्याख्या:
भीख माँगने वाले तीन बच्चों में से बड़ी लड़की बताती है कि हमारी माँ ने उन पुलिसवालों को मारा था, जिन्होंने हमारे बाप को पकड़ा था। पुलिसवालों को पीटने के अपराध में पुलिस हमारी माँ को भी पकड़कर ले गई थी। लड़की कहती है कि पुलिसवाले बहुत बुरे होते हैं। वे हमारी माँ को पकड़कर ले गए। उसे भी जेल में डाल दिया। माँ के बिना हम बच्चों को बुरा लगता है। माँ का अभाव हमें खलता है। यह मेरा भाई प्रेम तो रात-दिन माँ को याद करके रोता ही रहता है।

लेखिका कहती है कि मैंने उस लड़के की ओर देखा-बेचारा (असहाय, विवश) छोटा-सा बच्चा है। वह मुश्किल से पाँच वर्ष का होगा। फटे-पुराने मैले कपड़ों में लिपटा हुआ है। उसके बाल रूखे-सूखे हैं, लगता है उसे नहाये हुए बहुत दिन हो गए थे। उसके शरीर पर मैल की एक तह-सी जम गई थी। उसके गालों पर आँसुओं के बहने के निशान बन गए थे। गालों पर आँसुओं के बहने से उस छोटे-से बच्चे के गालों से मैल भी धुल गई थी। लेखिका कहती है कि मुझे उसकी दुर्दशा देखकर बड़ी दया आई। लेखिका के मन में उस अबोध बालक के प्रति दया का भाव जागृत हो उठा।

विशेष:

  1. लड़की ने अपनी माँ के जेल जाने के कारण को स्पष्ट किया है।
  2. लेखिका ने छोटे लड़के की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डाला गया
  3. भाषा सरल, स्पष्ट खड़ी बोली है।

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प्रश्न 4.
मेरी सेवा के लिए जो दो औरतें तैनात थीं, उनमें एक तो अल्हड़-सी थी, जिसे कुछ काम-काज न आता था पर दूसरी समझदार थी। वह प्रौढ़ा थी। उसकी गोद में भी एक बच्चा था। वह बड़ी फिक्र से सब काम करती थी। वह अधिकतर चुप रहती थी, जैसे सदा मन ही मन कुछ सोचा करती हो। मिनू को तो उसने इस प्रकार हिला लिया था जैसे वह उसकी बच्ची हो। उसका खुद का बच्चा पाँव-पाँव चलता और मिनू उसकी गोदी पर। पानी भरती, तो मिनू उसके साथ होती; दाल दलती, तो मिनू उसके साथ और बर्तन मलती तो मिनू भी उसके साथ छोटी-छोटी कटोरियाँ और गिलास मलती दीख पड़ती। अंत को बात इतनी बढ़ी कि वह मिनू को अपनी पीठ से बाँधकर झाडू देने लगी। उसका नाम का लखिया’। (Page 61)

शब्दार्थ:

  • तैनात – नियुक्त।
  • अल्हड़ – बालोचित सरलता के साथ मस्त और लापरवाह।
  • प्रौढ़ा – वह स्त्री जिसकी आयु अधिक हो चली हो।
  • फिक्र – चिंता।
  • हिला लेना – घुल-मिल जाना।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश सुभद्राकुमारी चौहान द्वारा रचित कहानी ‘तीन बच्चे – उद्धृत है। इस गद्यांश में लेखिका उनकी सेवा में नियुक्त दोनों स्त्रियों की विशेषताओं पर प्रकाश डाल रही है।

व्याख्या:
लेखिका युद्ध-विरोधी आंदोलन में सत्याग्रह करके जेल चली गई, तो उसे जबलपुर जेल में रखने की अपेक्षा अस्पताल में आ गया और दो महिला कैदियों को उसकी देखभाल के लिए नियुक्त कर दिया था था। उन दोनों महिलाओं में से एक बातूनी सरसता के साथ मस्त और लापरवाह थी। उसे कोई काम-काज नहीं आता था किंतु दूसरी समझदार थी। वह अधिक आयु की थी। उसकी गोद में भी एक बच्चा था। वह प्रत्येक काम में निपुण थी और बड़ी चिंता के साथ सब काम करती थी। वह अधिक नहीं बोलती थी। अधिकांश समय चुप ही रहती थी। उसे देखकर लगता था जैसे वह मन ही मन सोचती रहती हो।

लेखिका कहती कि उस औरत ने मेरी लड़की मिनू को अपने साथ इस प्रकार घुला मिला लिया था जैसे वह उसकी लड़की हो। उसका स्वयं का लड़का पैदल चलता था और मीनू उसकी गोदी में रहती। जब वह पानी भरती तो भी मिनू उसके साथ ही रहती, दाल दलती तो भी मिनू उसके साथ ही रहती और वह बर्तन साफ करती तो मिनू भी उसके काम में हाथ बँटाती। वह छोटी-छोटी कटोरियाँ और गिलास मलती दिखाई पड़ती। भाव यह कि मिनू उस औरत के ही साथ रहती। आखिर में बात इतनी बढ़ गई कि वह मिनू को अपनी पीठ से बाँधकर सफाई का काम करने लगी। उस औरत का नाम लखिया था। लखिया के साथ मीनू बहुत अधिक घुल-मिल गई थी।

विशेष:

  1. लेखिका ने लखिया नामक महिला कैदी और अपनी सेविका के चरित्र पर प्रकाश डाला है।
  2. भाषा चित्रात्मक है।
  3. भाषा खड़ी बोली है।

प्रश्न 5.
मैं बहुत सोचती थी कि लखिया कौन है। वह जेल क्यों आई? एक दिन अचानक मैंने मेट्रन से पूछा, जिसका उत्तर मिला-“ओह! यह बड़ी खतरनाक औरत है। इसने पुलिस को मारा है-पुलिस को। पर हमने उसका दिमाग ठीक कर दिया है। आपको कोई तकलीफ तो नहीं देती?” अचानक मुझे उन बच्चों का ख्याल में गया। उनकी माँ भी तो पुलिस को मारने के कारण जेल भेजी गई थी और उसके साथ भी तो एक छोटा बच्चा था। पूछना मैंने कई बार चाहा, पर लखिया की गंभीर और उदास मुद्रा देखकर, हिम्मत मेरी एक बार भी न हुई। (Page 61)

शब्दार्थ:

  • अचानक – एकाएक, अकस्मात।
  • दिमाग – मस्तिष्क।
  • तकलीफ – कष्ट, दुख।
  • ख्याल – ध्यान।
  • मुद्रा – आकृति।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश सुभद्राकुमारी चौहान द्वारा रचित कहानी ‘तीन बच्चे’ से उद्धृत है। लेखिका लखिया के संबंध में बता रही है।

व्याख्या:
लेखिका कहती है कि मैं लखिया के संबंध में बहुत सोचती थी कि यह कौन है और किस अपराध में जेल आई है? एक दिन एकाएक मैंने मेट्रन से लखिया के संबंध में पूछा, तो उसने बताया कि यह बहुत खतरनाक स्त्री है। इसने पुलिसवालों की पिटाई की है किंतु हमने इसका दिमाग ठीक कर दिया है। यह आपको कोई कष्ट तो नहीं देती। लेखिका कहती है कि यह सुनकर कि इसने पुलिसवालों को पीटा है, मुझे उन तीन भीख माँगने वाले बच्चों का ध्यान आ गया।

उनकी माँ भी तो पुलिसवालों को मारने के अपराध में जेल में थी। उसके साथ भी एक बच्चा था। लेखिका कहती है कि मैंने इस संबंध में लखिया से कई बार पूछना चाहा लेकिन उसका गंभीर और उदास मुख देखकर, एक बार भी साहस नहीं हुआ। कहने का भाव यह है कि लेखिका लखिया से चाहते हुए भी कुछ नहीं पूछ सकी।

विशेष:

  1. लेखिका लखिया के संबंध में जिज्ञासा होते हुए उससे कुछ भी पूछने का साहस नहीं जुटा सकी। लेखिका की मनःस्थिति पर प्रकाश डाला गया है।
  2. भाषा सरल, स्पष्ट खड़ी बोली है।

MP Board Class 12th Hindi Solutions

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 12 ऊष्मागतिकी

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 12 ऊष्मागतिकी

ऊष्मागतिकी अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 12.1.
कोई गीजर 3.0 लीटर प्रति मिनट की दर से बहते हुए जल को 27°C से 77°C तक गर्म करता है। यदि गीजर का परिचालन गैस बर्नर द्वारा किया जाए तो ईंधन के व्यय की क्या दर होगी? बर्नर के ईंधन की दहन-ऊष्मा 4.0 × 104 + Jg-1 है?
उत्तर:
दिया है: ताप में वृद्धि
∆T = (77 – 27)°C = 50°C
SH2O = 4.2 × 103 Jkg-1 °C-1
ईंधन की दहन ऊष्मा
HC = 4 × 104Jg-1 प्रति मिनट प्रवाहित जल का द्रव्यमान, m = 3 ली
3 किग्रा (∴ 1 ली० = 1kg)
जल द्वारा गर्म होने के लिए ली गई ऊष्मा,
θ = ms ∆T
माना ईंधन के जलने की दर m’ g प्रति मिनट है। … (i)
अतः ईंधन द्वारा 1 मिनट में दी गई ऊष्मा
θ = m’ HC
ईंधन द्वारा प्रति मिनट दी गई ऊष्मा = प्रति मिनट ली गई ऊष्मा।
∴ m’ Hc = ms ∆T
∴ m’ = \(\frac { ms\Delta t }{ H_{ C } } \)
= \(\frac { 3\times 4.2\times 10^{ 3 }\times 50 }{ 4\times 10^{ 4 } } \)
= 15.75 g = 16 gm
अतः ईंधन 16 gm / मिनट की दर से जलता है।

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प्रश्न 12.2.
स्थिर दाब पर 2.0 × 10-2kg नाइट्रोजन (कमरे के ताप पर) के ताप में 45°C वृद्धि करने के लिए कितनी ऊष्मा की आपूर्ति की जानी चाहिए?
(N2 का अणुभार 28; R = 8.3 J mol-1K-1)।
उत्तर:
दिया है:
N2 का अणु भार = 28
गैस का द्रव्यमान, m = 2 × 10-2 किग्रा
ताप वृद्धि T = 45°C
R = 8.3 जूल प्रति मोल प्रति K
आवश्यक ऊष्मा θ = ?
दी गई गैस द्रव्यमान में, ग्राम मोलों की संख्या,
µ = \(\frac { m }{ 28gm } \) = \(\frac{20}{28}\) = 0.714
R = 8.3 mol -1 K-1
माना नियत दाब पर गैस की मोलर विशिष्ट ऊष्मा Cp है।
Cp = \(\frac{7}{2}\) R = \(\frac{7}{2}\) × 8.3 × 45 J
= 933.75 J = 934 J

प्रश्न 12.3.
व्याख्या कीजिए कि ऐसा क्यों होता है?

  1. भिन्न-भिन्न तापों T1 व T2 के दो पिण्डों को यदि ऊष्मीय संपर्क में लाया जाए तो यह आवश्यक नहीं कि उनका अंतिम ताप (T1 + T2)/2 ही हो।
  2. रासायनिक या नाभिकीय संयंत्रों में शीतलक (अर्थात् द्रव जो संयंत्र के भिन्न-भिन्न भागों को अधिक गर्म होने से रोकता है) की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होनी चाहिए।
  3. कार को चलाते – चलाते उसके टायरों में वायुदाब बढ़ जाता है।
  4. किसी बंदरगाह के समीप के शहर की जलवायु, समान अक्षांश के किसी रेगिस्तानी शहर की जलवायु से अधिक शीतोष्ण होती है।

उत्तर:

  1. इसका कारण यह है कि अन्तिम ताप वस्तुओं को अलग-अलग तापों के अतिरिक्त उनकी. ऊष्मा धारिताओं पर भी निर्भर करता है।
  2. चूँकि शीतलक संयन्त्र से अभिक्रिया जनित ऊष्मा को हटाता है अतः शीतलक की विशिष्ट ऊष्मा धारिता अधिक होनी चाहिए ताकि कम ताप-वृद्धि के लिए अधिक ऊष्मा शोषित कर सके।
  3. कार को चलाते-चलाते, सड़क के साथ घर्षण के कारण टायर का ताप बढ़ता है। इस कारण टायर में भरी हवा का दाब बढ़ जाता है।
  4. बन्दरगाह के समीप के शहरों की आपेक्षिक आर्द्रता समान अक्षांश के रेगिस्तानी शहर की तुलना में अधिक रहती है। इस कारण बन्दरगाह के समीप शहर की जलवायु रेगिस्तानी शहर की अपेक्षा शीतोष्ण बनी रहती है।

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प्रश्न 12.4.
गतिशील पिस्टन लगे किसी सिलिंडर में मानक ताप व दाब पर 3 मोल हाइड्रोजन भरी है। सिलिंडर की दीवारें ऊष्मारोधी पदार्थ की बनी हैं तथा पिस्टन को उस पर बालू की परत लगाकर ऊष्मारोधी बनाया गया है। यदि गैस को उसके आरंभिक आयतन के आधे आयतन तक संपीडित किया जाए तो गैस का दाब कितना बढ़ेगा?
उत्तर:
माना V1 = x
द्विपरमाणुक गैस का हाइड्रोजन के लिए
V2 = \(\frac { V_{ 1 } }{ 2 } \) = \(\frac{x}{2}\)
γ = \(\frac { C_{ p } }{ C_{ v } } \)
∴dQ = 0 + dw’ or dw’ = dQ
= 9.35 × 4.19 J
दिया है:
dQ = 9.35 cal (1 cal = 4.19J) … (iii)
समी (ii) व (iii) से
dw’ = 9.35 × 4.19 J = 38.97 J
माना निकाय पर कृत कार्य W’ है।
W’ = dw’ – dW = 38.97 – 22.3
= 16.67
= 16.7J

प्रश्न 12.6.
समान धारिता वाले दो सिलिंडर A तथा B एक-दूसरे से स्टॉपकॉक के द्वारा जुड़े हैं। A में मानक ताप व दाब पर गैस भरी है जबकि B पूर्णतः निर्वातित है। स्टॉपकॉक यकायक खोल दी जाती है। निम्नलिखित का उत्तर दीजिए:

  1. सिलिंडर A तथा B में अंतिम दाब क्या होगा?
  2. गैस की आंतरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा?
  3. गैस के ताप में क्या परिवर्तन होगा?
  4. क्या निकाय की माध्यमिक अवस्थाएँ ( अंतिम साम्यावस्था प्राप्त करने के पूर्व) इसके P – V – T पृष्ठ पर होंगी?

उत्तर:
1. दिया है: मानक दाब
= P1 = 1 atm, V1 = V
P2 = ? तथा V2 = 27
चूँकि सिलिंडर B निर्वातित है अतः स्टॉपकॉक खोलने पर गैस का निर्वात में मुक्त प्रसार होगा। अतः गैस न तो कोई कार्य करेगी और न ही ऊष्मा का आदान-प्रदान होगा। अर्थात् गैस की आन्तरिक ऊर्जा व ताप स्थिर रहेंगे।
पुनः बॉयल के नियम से,
P1V1 = P2V2
∴P2 = \(\frac { P_{ 1 }V_{ 1 } }{ V_{ 2 } } \) = \(\frac { 1\times V }{ 2v } \) = 0.5 atm

2. चूँकि ω = 0 व θ = 0
∴ ∆V = 0
अर्थात् गैस की आन्तरिक ऊर्जा अपरिवर्तित रहेगी।

3. चूँकि आन्तरिक ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है। अतः गैस का ताप भी अपरिवर्तित रहेगा।

4. चूँकि गैस का मुक्त प्रसार हुआ है। इस कारण माध्यमिक अवस्थाएँ साम्य अवस्थाएँ नहीं हैं। अतः ये अवस्थाएँ दाब-आयतन-ताप पृष्ठ पर नहीं होगी।

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प्रश्न 12.7.
एक वाष्प इंजन अपने बॉयलर से प्रति मिनट 3.6 × 109 J ऊर्जा प्रदान करता है जो प्रति मिनट 5.4 × 108 J कार्य देता है। इंजन की दक्षता कितनी है? प्रति मिनट कितनी ऊष्मा अपशिष्ट होगी?
उत्तर:
दिया है: प्रति मिनट बॉयलर द्वारा अवशोषित ऊष्मा
Q1 = 3.6 × 109 J
भाप इंजन द्वारा प्रति मिनट कृत कार्य
= 5.4 × 108 J
प्रति मिनट व्यय/उत्सर्जित ऊष्मा = Q2 = ?
इंजन की प्रतिशत दक्षता n% = ?
हम जानते हैं कि n% = \(\frac { W }{ Q_{ 1 } } \) × 100
= \(\frac{3}{20}\) × 100 = 15%
सूत्र, Q1 = W + Q2 से,
Q2 = Q1 – W
= 36 × 108 – 5.4 × 108
= 30.6 × 108 J/min
= 3.06 × 109 J/min
= 3.1 × 109 J/min

प्रश्न 12.8.
एक हीटर किसी निकाय को 100 W की दर से ऊष्मा प्रदान करता है। यदि निकाय 75 Js-1 की दर से कार्य करता है, तो आंतरिक ऊर्जा की वृद्धि किस दर से होगी? उत्तर:
दिया है: θ = 100
W = 100 Js-1
∴∆V = θ – W
= 100 – 75 = 25 Js-1
अत: निकाय की आन्तरिक ऊर्जा वृद्धि दर 25 Js-1 है।

प्रश्न 12.9.
किसी ऊष्मागतिकीय निकाय को मूल अवस्था से मध्यवर्ती अवस्था तक (चित्र) में दर्शाये अनुसार एक रेखीय प्रक्रम द्वारा ले जाया गया है।एक समदाबी प्रक्रम द्वारा इसके आयतन को E से F तक ले जाकर मूल मान तक कम कर देते हैं। गैस द्वारा D से E तथा वहाँ से F तक कुल किए गये कार्य का आंकलन कीजिए।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 12 ऊष्मागतिकी image 1
उत्तर:
माना गैस D से E व E से F तक कृत कार्य = W
अतःW = W1 + W2 …. (i)
माना W1 = D से E तक प्रसार में कृत कार्य
= DEHGD का क्षेत्रफल = ∆DEF का क्षे० + आयत EHGF का क्षे०
= \(\frac{1}{2}\) EF × DF + GH × FG … (ii)
दिया है:
EF = 5 – 2 = 3 litre = 3 × 10-3 m3
DF = 600 – 300 = 300 Nm-2
FG = 300 – 0 = 300 Nm2
GH = 5 – 2 = 3 × 10-3 m3
समीकरण (ii) से,
∴W1 = \(\frac{1}{2}\) × 3 × 10-3 × 300 + 3 × 10-3 × 300] J …….. (iii)
माना E से F (संपीडन) तक कृत कार्य = W2 = EHGF का क्षे०
= – FG × GH
= – (300 – 0) × (5 – 2) × 10-3
= – 300 × 3 × 10-3 J …. (iv)
∴समी० (i). (iii) व (iv) से,
w = \(\frac{1}{2}\) × 3 × 10-3 × 300 + 3 × 10-3 × 300 + 3 × 10-3
= 3 × 103 × 150J = 450 × 10-3 J
= 0.450 J

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प्रश्न 12.10.
खाद्य पदार्थ को एक प्रशीतक के अंदर रखने पर उसे 9°C पर बनाए रखता है। यदि कमरे का ताप 36°C है तो प्रशीतक के निष्पादन गुणांक का आंकलन कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
T1 = 273 + 36 = 309 K
T2 = 9°C = 282 K
β = ?
सूत्र β = \(\frac { T_{ 2 } }{ T_{ 1 }-T_{ 2 } } \) से
β = \(\frac { 283 }{ 309-282 } \) = \(\frac{282}{27}\) = 10.4

MP Board Class 11 Physics Solutions

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 17 Stars and The Solar System

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 17 Stars and The Solar System

MP Board Class 8th Science Stars and The Solar System NCERT Textbook Exercises

Choose the correct answer in question 1 – 3:

Question 1.
Which of the following is NOT a member of the solar system?
(a) An asteroid
(b) A satellite
(c) A constellation
(d) A comet.
Answer:
(c) A constellation.

Question 2.
Which of the following is NOT a planet of the sun?
(a) Sirius
(b) Mercury
(c) Saturn
(d) Earth.
Answer:
(a) Sirius.

Question 3.
Phases of the moon occur because
(a) we can see only that part of the moon which reflects light towards us.
(b) our distance from the moon keeps changing.
(c) the shadow of the earth covers only a part of moon’s surface.
(d) the thickness of the moon’s atmosphere is not constant.
Answer:
(a) We can see only that part of the moon which reflects light towards us.

Question 4.
Fill in the blanks:
(a) The planet which is farthest from the sun is ………… .
(b) The planet which appears reddish in colour is ……………….. .
(c) A group of stars that appear to form a pattern in the sky is known as a …………. .
(d) A celestial body that revolves around a planet is known as ……………… .
(e) Shooting stars are actually not …………….. .
(f) Asteroids are found between the orbits of ………… and…………..
Answer:
(a) neptune
(b) mars
(c) constellation
(d) satellite
(e) meteors
(f) mars, jupiter.

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Question 5.
Mark the following statements as true (T) or false (F):

  1. Pole star is a member of the solar system.
  2. Mercury is the smallest planet of the solar system.
  3. Uranus is the farthest planet in the solar system.
  4. INSAT is an artificial satellite.
  5. There are nine planets in the solar system.
  6. Constellation Orion can be seen only with a telescope.

Answer:

  1. False
  2. True
  3. False
  4. True
  5. False
  6. False.

Question 6.
Match items in column A with one or more items in column B:
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 17 Stars and The Solar System 1
Answer:
(i) (g), (ii) (e), (iii) (c), (f), (iv) (d).

Question 7.
In which part of the sky can you find Venus if it is visible as an evening star?
Answer:
Venus is seen as an evening star in western

Question 8.
Name the largest planet of the solar system.
Answer:
Jupiter is the largest planet of the solar system.

Question 9.
What is a constellation? Name any two constellations.
Answer:
Constellation is a group of stars that appears to form some recognizable shape. For example, Ursa Major and Orion.

Question 10.
Draw sketches to show the relative positions of prominent stars in:
(a) Ursa Major, (b) Orion
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 17 Stars and The Solar System 2
Fig. 17.1: Relative position of stars in Ursa Major and Ursa Minor stars in Orion.
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 17 Stars and The Solar System 3
Fig. 17.2: Relative position of stars in Orion.

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Question 11.
Name two objects other than planets which are members of the solar system.
Answer:
Asteroids and Comets.

Question 12.
Explain how you can locate the Pole Star with the help of Ursa Major?
Answer:
Pole Star can be located with the help of the two stars at the end- of Ursa Major. Imagine a straight line passing through these stars as shown in Fig 17.3. Extend this imaginary line towards the north direction. (About five times the distance between the two stars). This line will lead to a star which is not too bright. This is the Pole Star. Observe the pole star for some time. Note that it does not move at’ all as other stars drift from east to west.
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 17 Stars and The Solar System 4

Question 13.
Do all the stars in the sky move? Explain.
Answer:
No, stars actually do not move but they only appear to move from east to west, as the earth from where we see them, rotates from west to east. However pole star, which is situated in the direction of the earth’s axis. It does not appear to move.

Question 14.
Why is the distance between stars expressed in light years? What do you understand by the statement that a star is eight light years away from the Earth.
Answer:
The sun is about 150,000.00 kilometres (150 million km) away from the earth. It is not convenient to express such large distances in kilometres. Therefore, large distances between stars are expressed in another unit known as light near. A light year is the distance ‘r travelled by light in a year.
1 light year = speed of light x number of seconds in a year
= 300,000 x 365 x 24 x 60 x 60km.
= 95,00,00,00,00,000 km = 95 x 1011
= 9.5 x 10 x 1011
= 9.5 x 1012 km (Approximately)
∴ 8 light year
= 8 x 9.5 x 1012 km
= 76 x 1012 km
Thus, by the statement that a star is eight light years away from the earth means that the star is about 76 x 1012 km away from the earth.

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Question 15.
The radius of Jupiter is 11 times the radius of the Earth. Calculate the ratio of the volumes of Jupiter and the Earth. How many Earths can Jupiter accommodate?
Answer:
If the radius of the Earth is r.
Then, radius of the Jupiter is Ur.
So, ratio of the volumes of Jupiter and Earth is
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 17 Stars and The Solar System 5
Thus, 1331 Earths can be accommodated within the Jupiter.

Question 16.
Boojho made the following sketch (Fig. 17.4) of the solar system. Is the sketch connect? If not, correct it.
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 17 Stars and The Solar System 6
Answer:
This sketch is not correct. The correct sketch of solar system is given is Fig. 17.5.
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MP Board Class 8th Science Stars and The Solar System Extended Learning – Activities and Projects

Question 1.
The North-South line at your place.
Let us learn to draw the north-south line with the help of the shadow of a stick. Fix a straight stick vertically in the ground where the Sun can be seen for most of the day. Call the foot of the stick as point O. Sometime in the morning, mark the tip of the shadow of the stick. Say this point is A. With OA as radius draw a circle on the ground. Wait till the shadow becomes shorter and then starts increasing in size. When the shadow again touches the circle, mark it as point B. Draw the bisector of the angle AOB. This is your North-South line. To decide which side
of this line shows North, use a magnetic compass.

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 17 Stars and The Solar System 8
Answer:
Do yourself.

Question 2.
If possible, visit a planetarium. There are planetariums in many cities. In a planetarium you can see the motion of the stars, constellations and planets on a large dome.
Answer:
Do yourself.

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Question 3
On a moonless night observe the sky for a few hours. Look out for a meteor, which appears as a streak of light. September-November is a good time for observing meteors.
Answer:
Do yourself.

Question 4
Learn to identify the planets visible to the naked eye and some prominent constellations such as Great Bear (Saptarishi) and Orion. Also try to locate the Pole Star and the star Sirius.
Answer:
Do yourself.

Question 5.
Position of the rising Sun – Uttarayan and Dakshinayan :
This activity may last for several weeks. Choose a place from where eastern horizon is clearly visible. Choose also a marker, such as a tree or an electric pole, to mark the position of the rising Sun. It will be sufficient if you take the observation once every week. On any day, note down the direction of the rising Sun. Repeat this observation every week. What do you find? You would have noted that the point of sunrise changes continuously. From summer solstice (around 21 June), the point of sunrise gradually shifts towards the south. The Sun is then said to be in dakshinayan (moving south). It keeps doing so till winter solstice (around 22 December). Thereafter, the point of sunrise changes direction and starts moving towards north. The Sun is now said to be in uttarayan the equinoxes (around 21 March and 23 September) the Sun rises in the east. On all other days, it rises either north of east or south of east. So, the direction of the rising Sun is not a good guide to determine directions. The Pole Star, which defines North,‘is a much better indicator of directions.
Answer:
Do yourself.

Question 6.
Form a group of students. Prepare a model of the solar system showing the planets, and their relative sizes. For this take a large chart paper. Make spheres representing different planets according to their relative size (Use Table 17.1). Y6u may use newspaper, clay or plasticine to make spheres. You can cover these spheres with paper of different colours. Exhibit your models in the class.
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 17 Stars and The Solar System 9
Answer:
Do yourself.

Question 7.
Try to make a scale model of the solar system showing distances of the planets from the Sun (Use Table 17.1). Did you face any difficulty? Explain it.
Answer:
Do yourself.

Question 8.
Solve the following riddle and try to make similar riddles yourself.
My first is in VAN but not in PAN
My second is in EARTH and also in HEAVEN
My third is’ in ONE and not in TWO
My fourth is in BUN and also in FUN
My last is in STAR but not in RADAR
I am a planet that moves round the Sun.
Answer:
It is the planet venus.

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MP Board Class 8th Science Stars and The Solar System Additional Important Questions

A. Short Answer Type Questions

Question 1.
What is Universe?
Answer:
Universe is the space surrounding the earth. It contains all the heavenly objects like stars, comets, planets, asteroids, etc.

Question 2.
Name two constellations which are visible in summer.
Answer:
Scorpio and Ursa Major.

Question 3.
What are comets?
Answer:
Heavenly bodies, composed of dust and gas, revolving around the sun with long bright tail are called comets. Their period of revolution around the sun is very large. They are particularly seen, after the pretty number of years.

Question 4.
Which is the brightest planet of our solar system?
Answer:
Venus is the brightest planet of our solar system.

Question 5.
What is the most significant feature of remote sensing technology?
Answer:
The most significant feature of remote sensing technology is that it makes possible the repetitive surveys of vast areas in a very short time. It is applicable even to inaccessible areas.

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B. Long Answer Type Questions

Question 6.
Define light year. What is the approximate distance of the sun from the earth?
Answer:
One light year is the distance travelled by light in one year at a speed of light which is about 300000 km/sec. Light year is a unit of distance and is equal to 9.46 x 1012 km.
The approximate distance of the sun from the earth is 150,000,000 km, which means that light takes about 8 minutes 20 seconds to reach the earth from the sun.

Question 7.
The stars twinkle and the planets do not twinkle. Account for the observation.
Answer:
Owing to the atmospheric disturbances in the atmosphere the position of the stars appears to vibrate, so they apear to be twinkling. Due to the fact that the planets are very close to each other, their disc position does not vibrate, owing to the atmospheric conditions, hence the planets do not appear to be twinkling.

Question 8.
Give three reasons why life cannot survive on Venus.
Answer:
All the above conditions are present on the earth. Hence, life is possible there.

  1. Being nearer to the sun Venus it is extremely hot.
  2. There is no water on the planet
  3. The planet does not contain sufficient oxygen.

Question 9.
Expand the term INSAT. What three things are expected from INSAT?
Answer:
The term INSAT stands for Indian National Satellite. This satellite series expected to carry out three tasks. These tasks are:

  1. communication
  2. television and radio broadcasting and
  3. meteorological observations.

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Akbar and Birbal – Reunion Question Answer Class 9 General English The Spring Blossom Chapter 10 MP Board Solutions

Class 9th General English The Spring Blossom Chapter 10 Akbar and Birbal – Reunion Question Answers

Akbar and Birbal – Reunion Class 9 Questions and Answers

Akbar and Birbal – Reunion Textual Exercises

Word Power

(1) Rearrange the letters to make meaningful words occurring in the text.
(अक्षरों को व्यवस्थित कर अर्थपूर्ण शब्द बनाइए।)
Answer:

  1. marciles – miracles
  2. sestscup – suspect
  3. flou – foul
  4. terchn – trench
  5. eegar – eager

(II) Write down antonyms of the following words:
(विलोम शब्द लिखो।)
Answer:

  1. wisdom – foolishness
  2. terrible – attractive
  3. ignorance – awareness
  4. suspect – believe
  5. best – worst

(III) Make new words from those given.
(नये शब्द बनाओ।)
Answer:
(a) manifest – fest, man, ant, nest, fit, mist, ten, net, set, fat, fan, sin, tin, sit, fin, mat, fine, mine, fast, main, mane, mate, met, safe, fame, tame, same, time, sane, tan.
(b) gravest – grave, rave, rest, get, rat, are, sat, set, vest, at, stare, stag, grate, tear, tag, great, ear, stear, save, gave.
(c) regret – great, tree, get.
(d) embrace – race, brace, beer, beam, cream. came, care, bare, ream, mare, bear.

(IV) Find out the words from the text which mean the following:
(पाठ में से निम्न अर्थ के शब्द ढूँढ़ो।)
Answer:

  1. to cut off someone’s head – behead
  2. follower – disciple
  3. pleasant to listen to – melodious
  4. very unpleasant – foul
  5. curious to know – eager
  6. shining – sparkling
  7. a long deep hole dog in the ground – trench
  8. very serious and important – gravest

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How Much Have I Understood?

(a) Choose the correct option
(सही विकल्प चुनो।)

(1) Akbar regretted-
(a) banishing Birbal from the court
(b) meeting Birbal in the court
(c) banishing Tansen from the palace
(d) seeing Tansen in the court.
Answer:
(a) banishing Birbal from the court

(2) The eyes of the saint were-
(a) sparkling
(b) dull
(c) full of tears
(d) dry.
Answer:
(a) sparkling

(3) In the opinion of the wise saint a best friend on the earth is –
(a) his own good sense
(b) his courage
(c) his physical power
(d) his smartness.
Answer:
(a) his own good sense

(4) Akbar was ……….. to meet Birbal again.
(a) happy
(b) sad
(c) angry
(d) disappointed.
Answer:
(a) happy.

(b) Answer the following questions in one or two sentences.
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Who was Birbal?
(हू वॉज़ बीरबल?)
बीरबल कौन था?
Answer:
Birbal was court jester, friend and confidant of Akbar.
(बीरबल वॉज़ कोर्ट जेस्टर, फ्रेन्ड एण्ड कॉन्फिडेन्ट ऑफ अकबर।)
बीरबल अकबर का दरबारी विदूषक, मित्र व विश्वासपात्र था।

Question 2.
What was the question asked by Abdul Fazal?
(व्हॉट वॉज़ द क्वेश्चन आस्क्ड बाइ अब्दुल फज़ल?)
अब्दुल फज़ल ने क्या प्रश्न पूछा?
Answer:
Abdul Fazal asked what was the deepest trench in the world?
(अब्दुल फज़ल आस्कड व्हॉट वॉज़ द डीपेस्ट ट्रेन्च इन द वर्ल्ड?)
अब्दुल फज़ल ने पूछा कि संसार की सबसे गहरी खाई कौन-सी है?

Question 3.
Which question do you like the most?
(व्हिच क्वैश्चन डू यू लाइक द मोस्ट?)
तुम्हें कौन-सा प्रश्न सबसे ज्यादा पसन्द आया?
Answer:
The question that I liked is “Which is the topmost thing on the earth?”
(द क्वैश्चन दैट आइ लाइक्ड इज़- “व्हिच इज़ द टॉपमोस्ट थिंग ऑन द अर्थ?”)
प्रश्न जो मुझे पसन्द आया-“पृथ्वी पर सबसे ऊँची वस्तु कौन-सी है?”

Question 4.
Who was the wise saint?
(हू वॉज़ द वाईज सेन्ट?)
बुद्धिमान साधू कौन था?
Answer:
The wise saint was Birbal.
(द वाईज सेन्ट वॉज़ बीरबल।)
बुद्धिमान साधू बीरबल था।

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(c) Answer the following questions in three to four sentences.
(निम्न प्रश्नों का उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Why did Akbar order Birbal to leave the city of Agra?
(व्हाय डिड अकबर ऑर्डर बीरबल टू लीव द सिटी ऑफ आगरा?)
अकबर ने बीरबल को आगरा छोड़ने का आदेश क्यों दिया?
Answer:
One day Birbal happened to pass a harmless comment about Akbar’s sense of humour. But emperor Akbar was in a foul mood and took great offense to this remark. So he asked Birbal to leave Agra.
(वन डे बीरबल हैपन्ड टू पास अ हार्मलेस कमेन्ट अबाउट अकबर्स सेन्स ऑफ हूमर बट एम्परर अकबर वॉज़ इन अ फाउल मूड एण्ड टुक ग्रेट ऑफेन्स टू दिस रिमार्क। सो ही आस्कड् बीरबल टू लीव आगरा।)
एक दिन बीरबल ने अकबर के हास्य बोध पर एक टिप्पणी की। अकबर ने उसे अपना अपमान समझा व उसे आगरा छोड़ने का आदेश दिया।

Question 2.
Why did Akbar want to appoint a wise man in his court?
(व्हाय डिड अकबर वॉन्ट टू एपॉइन्ट अ वाइज मैन इन हिज़ कोर्ट?)
अकबर एक बुद्धिमान व्यक्ति को दरबार में नियुक्त क्यों करना चाहते थे?
Answer:
Akbar had banished Birbal from his court in anger. But after some time he repented his ded and began to miss him. So he wanted to appoint a wise man in his court to keep him company.
(अकबर हैड बैनिश्ड बीरबल फ्रॉम हिज़ कोर्ट इन एंगर। बट आफ्टर सम टाइम ही रिपेन्टिड हिज़ डीड एण्ड बिगैन टू मिस हिम। सो ही वॉन्टेड टू एपॉइन्ट अ वाईज़ मैन इन हिज़ कोर्ट ट्र कीप हिम कम्पनी।)
अकबर ने बीरबल को गुस्से में निष्कासित कर दिया था। मगर कुछ समय बाद उसे अफसोस होने लगा और उसे बीरबल की कमी खलने लगी। इसीलिए वह एक बुद्धिमान व्यक्ति को नियुक्त करना चाहता था जो उसकी कमी को पूरा कर सके।

Question 3.
What was the condition put forth before the saint?
(व्हॉट वॉज़ द कन्डीशन पुट फोर्थ बिफोर द सेन्ट?)
सन्त के सामने क्या शर्त रखी गई?
Answer:
The condition that was put forth before the saint was that all the ministers would ask him a question and if his answers were satisfactory he would be made a minister. But if he could not he would be beheaded.
(द कन्डीशन दैट वॉज़ पुट फोर्थ बिफोर द सेन्ट वॉज़ दैट ऑल द मिनिस्टर्स वुड आस्क हिम अक्वैश्चन एण्ड इफ हिज़ आन्सर्स वर सैटिस्फैक्ट्री ही वुड बी मेड अ मिनिस्टर। बट इफ ही कुड नॉट ही वुड बी बिहेडेड।)
सन्त के सामने यह शर्त रखी गई कि सभी मन्त्री उससे प्रश्न पूछेगे। सभी प्रश्नों का सन्तोषजनक उत्तर देने पर उसे मन्त्री बनाया जायेगा, यदि नहीं तो उसका सिर काट दिया जायेगा।

Question 4.
What was the questions asked by Tansen?
(व्हॉट वाज़ द क्वैश्चन्स आस्कड बाइ तानसेन?)
तानसेन ने कौन-सा प्रश्न पूछा?
Answer:
Tansen asked-What is undying in music? What is the sweatest and most melodious voice at night time?
(तानसेन आस्क्ड-व्हॉट इज अनडाइंग इन म्यूजिक? व्हॉट इज़ द स्वीटेस्ट एण्ड मोस्ट मेलोडिअस वॉइस एट नाईट टाइम?)
तानसेन ने पूछा-संगीत में अमर क्या है? रात्रि में सबसे मधुर ध्वनि कौन-सी होती है?

Question 5.
Which miracle was performed by the wise saint?
(व्हिच मिरेकल वॉज़ परफॉर्ड बाइ द वाईज़ सेन्ट?)
बुद्धिमान सन्त ने क्या चमत्कार किया?
Answer:
The miracle performed by the wise saint was that he presented Birbal before the emperor that is, the person he wanted to meet.
(द मिरैकल परफॉर्ड बाइ द वाईज़ सेन्ट वॉज़ दैट ही प्रेजेन्टिड बीरबल बिफोर द एम्परर दैट इज़, द पर्सन ही वॉन्टेड टू मीट।)
चमत्कार यह था कि सन्त ने बीरबल को सम्राट के समक्ष पेश कर दिया जिससे वे मिलना चाहते थे।

Language Practice

Rewrite the following as reported questions
(निम्न प्रश्नों को रिपोर्टेड प्रश्न के रूप में लिखिए।)

Question 1.
He said to me, “Will you take part in the debate?”
Answer:
He asked me if I would take part in the debate.

Question 2.
Leela said to Dinesh, “Can I borrow your book for a day?”
Answer:
Leela asked Dinesh if she could borrow his book for a day.

Question 3.
He asked me, “When do you intend to go to Mumbai?”
Answer:
He asked me when I intended to go to Mumbai.

Question 4.
The guest asked me, “When did you purchase the hosue?”
Answer:
The guest asked me when I purchased the house.

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Rewrite the given sentences in indirect speech.
(अप्रत्यक्ष कथन लिखो।)

Question 1.
The doctor said to the patient, “Don’t eat too much sweet.”
Answer:
The doctor told the patient not to eat too much sweet.

Question 2.
The teacher said to the students, “Work word if you want to score good marks”.
Answer:
The teacher told the students to work hard if they wanted to score good marks.

Question 3.
The stranger said to me, “Please give me a lift in your car.”
Answer:
The stranger requested me to give him a lift in my car.

Question 4.
The officer said to his soldiers, “Capture that hill at any cost.”
Answer:
The officer ordered his soldiers to capture the hill at any cost.

Write the given interview in reported speech.
(साक्षात्कार को रिपोर्टेड कथन में लिखो।)
Answer:

  1. The interviewer asked Devanshi what her qualifications were.
  2. She replied that she was M.A., B.Ed.
  3. The interviewer asked her which school had she taught in.
  4. She replied that she had taught in Model School and Kendriya Vidyalaya.
  5. The interviewer, asked her why she wanted to leave a secure job of Kendriya Vidyalaya.
  6. She replied that it was a transferable job and she wanted to settle there with her family.
  7. The interviewer asked her what her present salary was.
  8. She replied that she was getting Rs. 7,000 per month.

Convert the given queries into indirect speech.
(दिए गए प्रश्नों को अप्रत्यक्ष कथन में लिखो।)
Answer:

  1. She wants to know what the most interesting sights are.
  2. He wants to know if we’ve got a town map.
  3. He wants to know how could he find out about the area.
  4. He wants to know where they can stay.
  5. She wants to know what shows are on there.

Listening Time

Listen to your teacher carefully and tick the number of words which do not rhyme with others.
(उन शब्दों को चिह्नित करो जो दूसरे शब्दों से तुकान्त न हों।)
Answer:
Students should do themselves with the help of their teacher.
(छात्र शिक्षक की मदद से स्वयं करें।)

Speaking Time

Imagine that you are a coach who coaches some players. You hear about Atul’s behaviour. You call him and advise him about the nasty way in which he treated Mukul. Complete this dialogue between the two.
(अतुल ब मुकुल के बीच वार्तालाप पूरा करो।)
Answer:
Coach : I have heard that you insulted Mukul.
Atul : Where did you hear about this, sir?
Coach : Is that true or not?
Atul : Yes, sir, it’s true.
Coach : You should not hurt anybody.
Atul : I did not mean to hurt him. I just felt that a sixth standard boy did not deserve a place in the team.
Coach: But you have done a wrong deed and you should realize it.
Atul : I realize I was wrong.
Coach : There should be team spirit in sports.
Atul : Yes, sir I have understood the importance of team spirit in sports.

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Writing Time

Write a letter to your friend telling him/her how Akbar and Birbal were reunited.
(अपने मित्र को अकबर व बीरबल का पुनर्मिलन कैसे हुआ यह बताते हुए पत्र लिखो।)
Answer:
52, Ravindra Nagar
Ujjain (M. P.)
12 July 20….

Dear Sanjay,

Hope you are fine there, I am also fine here. Today I am writing to you to tell you about a very interesting story of Akbar and Birbal that I have read in my text book.

The story was about the reunion of Akbar and Birbal. Once Akbar got annoyed with Birbal as he gave a harmless remark on Akbar’s sense of humour. But Akbar took it seriously and banished Birbal from his kingdom. But after a few days he began to miss him and regret his decision. Then one day a wise saint came to his court. Since, Akbar was missing a wise person in his court he thought to keep the saint in his court if his wisdom is proved.

He asks the saint that his courtiers would ask him certain questions if he is able to answer them properly he would keep him as his courtier, otherwise he would be beheaded. The saint answers all the questions wisely. Then Akbar asks him if he can do some magic. The saint said that he can present any person before him. Akbar asks him to present Birbal. The saint removes his beard and moustaches as he himself was Birbal. Akbar becomes very happy and in this way they get reunited.

I hope you had liked the story as I also liked it very much. Now I am stopping to write. More in next. Rest is fine.

Yours truely
Mahesh

Things to do

(1) Read any other play story on Akbar and Birbal, then enact it in your classroom with your classmates.
(अकबर और बीरबल का कोई और नाट्य पढ़ो व उसको अपनी कक्षा में अभिनीत करो।)
Answer:
Students can do themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

Akbar and Birbal – Reunion Difficult Word-Meanings

MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 10 Akbar and Birbal - Reunion 1

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Akbar and Birbal – Reunion Summary, Pronunciation & Translation

[1] One day, when Akbar and Birbal were in discussion, Birbal happened to pass a harmless comment about Akbar’s sense of humour. But Emperor Akbar was in a foul mood and took great offense to this remark. He asked Birbal, his court jester, friend and confidant to not only leave the palace but also to leave the walls of the city of Agra. Birbal was terribly hurt at being banished.

(वन डे, व्हेन अकबर एण्ड बीरबल वर इन डिस्कशन, बीरबल, हैपन्ड टु पास ए हार्मलेस कमेन्ट अबाउट अकबर्स सेन्स ऑफ ह्यूमर बट एम्परर अकबर वाज़ इन अ फाउल मूड एण्ड टुक ग्रेट आफेन्स टु दिस रिमार्क। ही आस्क्ड बीरबल, हिज़ कोर्ट जेस्टर, फ्रेंड एण्ड कान्फिडेन्ट टु नाट ओनली लीव द पेलेस बट अल्सो टु लीव द वाल्स ऑफ द सिटी ऑफ आगरा। बीरबल वाज़ टेरिबली हर्ट एट बीइंग बेनिश्ड।)

हिन्दी अनुवाद :
एक दिन जब अकबर व बीरबल बातचीत कर रहे थे तो बीरबल ने उनकी विनोदप्रियता पर एक हानिरहित टिप्पणी कर दी। किन्तु सम्राट अकबर जरा बुरे मूड में थे और उनकी टिप्पणी का बहुत बुरा माना। उन्होंने बीरबल, उनके दरबार के विदूषक, परम मित्र एवं विश्वास पात्र को न केवल राजमहल से बल्कि आगरा शहर की सीमा से निकल जाने को कहा। बीरबल उनके निकाले जाने पर बहुत ही दुःखी हुए।

[2] A couple of days later. Akbar began to miss his best friend. He regretted his earlier decision of banishing him from the courts. He just could not do without Birbal and so sent out a search party to look for him. But Birbal had left town without lefting anybody know of his destination. The soldiers searched high and low but were unable to find him anywhere.

(अ. कपल ऑफ डेज़ लेटर, अकबर विगेन टु मिस हिज बेस्ट फ्रेंड। ही रिग्रेटेड हिज अलियर डिसिजन ऑफ बेनिशिंग हिम फ्राम द कोर्टस। ही जस्ट कुड नाट डू विदाउट बीरबल एण्ड सो सेन्ट आउट अ सर्च पार्टी टु लुक फोर हिम। बट बीरबल हैड लेफ्ट टाउन विदाउट लेफ्टिंग एनीबडी नो ऑफ हिज़ डेस्टिनेशन। द सोल्जर्स सर्ल्ड हाय एण्ड लो बट वर अनेबल टु फाइन्ड हिम एनीव्हेयर।)

हिन्दी अनुवाद :
दो दिन बाद ही अकबर को अपने परम मित्र की याद आने लगी। अकबर को उसे दरबार से निकाले जाने के अपने निर्णय पर पछतावा होने लगा। वह बिना बीरबल के रह ही नहीं सकता और इसीलिए उसने उसे ढूँढ़ने के लिये एक खोजी पार्टी भेजी। किन्तु बीरबल किसी को अपना पता बताये बिना शहर छोड़कर जा चुका था। सिपाहियों ने उसे यहाँ वहाँ सब जगह ढूँढ़ा पर वे उसे कहीं भी मिले नहीं।

[3] Then, one day a wise saint came to visit the palace accompanied by two of his disciples. The disciples claimed that their teacher was the wisest man to walk the earth. Since Akbar was missing Birbal terribly, he thought it would be a good idea to have a wise man that could keep him company. But he decided that he would first test the holy man’s wisdom.

The saint had bright sparkling eyes, a thick beard and long hair. The next day, then they came to visit the court.Akbar informed the holy man that, since he was. the wisest man on the earth, he would like to test him.

(देन वन डे अ वाइज़ सेण्ट केम टु विजिट द पेलेस एकम्पनीड बाय टू ऑफ हिज डिसाइपल्स। द डिसाइपल्स क्लेम्ड दैट देयर टीचर वाज़ द वाइजेस्ट मैन टु वाक द अर्थ सिन्स अकबर वाज़ मिसिंग बीरबल टेरिबली, ही थाट इट वुड बी अ गुड आइडिया टु हैव अ वाइज़मैन दैट कुड कीप हिम कम्पनी। बट ही डिसाइडेड दैट ही वुड फर्स्ट टेस्ट द होलीमेन्स विसडम।

द सेण्ट हैड ब्राइट स्पार्कलिंग आइज़, अथिक बीअर्ड एण्ड लांग हेअर द नेक्स्ट डे व्हेन दे केम टु विजिट द कोर्ट। अकबर इन्फार्ड द होली मैन दैट, सिन्स ही वाज़ द वाइजेस्टमैन आन अर्थ, ही वुड लाइक टू टेस्ट हिम।)

हिन्दी अनुवाद :
फिर, एक दिन एक बुद्धिमान सन्त अपने दो शिष्यों के साथ राजमहल की सैर करने आया। शिष्यों ने दावा किया कि उनके गुरु दुनिया के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति हैं। चूंकि अकबर बुरी तरह से बीरबल की गैर हाजिरी से परेशान था, उसने सोचा कि ऐसे बुद्धिमान व्यक्ति को पाना एक अच्छा काम होगा, जो उसे संगति दे। किन्तु पहले उसे उस साधु की बुद्धिमत्ता की परीक्षा लेनी होगी।

साधु की चमकीली आँखें, घनी दाढ़ी व लम्बे बाल थे। अगले दिन जब वे दरबार में आये तो अकबर ने उस साधु को सूचित किया कि चूंकि वह धरती पर सबसे बुद्धिमान व्यक्ति है। वह उनकी परीक्षा लेना चाहता है।

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[4] All his ministers would put forward questions and if his answers were satisfactory he would be made a minister. But if he could not, then he would be beheaded. The saint answered that he had never claimed to be the wisest man on the earth, even though other people seemed to think so, nor was he eager to display his cleverness, but as he enjoyed answering questions, he was ready for the test.

(ऑल हिज़ मिनिस्टर वुड पुट फारवर्ड कवेश्चन्स एण्ड इफ हिज़ आन्सर्स वर सेटिसफेक्टरी ही वुड बी मेड अ मिनिस्टर। बट इफ ही कुड नाट, देन ही वुड बी बिहेडेड। द सेण्ट आन्सर्स दैट ही हेड नेवर क्लेम्ड टु बी द वाइज़ेस्ट मैन ऑन अर्थ, इवन दो आदर पीपुल सीम्ड टु थिंक सो, नॉर बाज़ ही ईगर टु डिस्प्ले हिज़ क्लेवरनैस, बट एज़ ही इन्जॉइड आन्सरिंग क्वेश्चन्स, ही वाज रेडी फोर द टेस्ट।)

हिन्दी अनुवाद :
उसके सभी मंत्री उससे प्रश्न पूछेगे और यदि, उसके उत्तर सन्तोषजनक हुए तो उसे एक मंत्री बना दिया जायेगा। परन्तु यदि वह ऐसा नहीं कर सका तो उसका सिर कलम कर दिया जाएगा। सन्त ने उत्तर दिया कि वह इस धरती पर सबसे बुद्धिमान होने का दावा नहीं करता, ये अलग बात है कि दूसरे व्यक्ति ऐसा सोचते होंगे, न ही वह अपनी चतुराई का प्रदर्शन करना चाहता था पर चूँकि उसे प्रश्नों के उत्तर देने में मजा आता है, इसलिये वह इस परीक्षा के लिए तैयार है।

[5] One of the ministers, Raja Todarmal, began the round of questioning.
He asked : Who is man’s best friend on the earth?
The saint replied : His own good sense.
Fazal asked : Which is the topmost thing on the earth?
The saint answered : Knowledge,
Abdul Fazal : Which is the deepest trench in the world?
The saint answered : A woman’s heart.
Another courtier questioned : What is that which can not be regained after it is lost?
The saint answered : Life.
The court musician Tansen asked : What is undying in music?
The saint replied : Notes.
And then he asked : Which is the sweetest and most melodious voice at night time?
The saint answered : The voice that prays to God.

(वन ऑफ द मिनिस्टर्स, राजा टोडरमल बिगेन द राउण्ड ऑफ क्वेश्चनिंग
ही आस्क्ड : हू इज मेन्स बेस्ट फ्रैंड ऑन अर्थ?
द सेन्ट रिप्लाईड : हिज़ ओन गुड सेन्स। फैजी
आस्कड : विच इज़ द टापमोस्ट थिंग ऑन द अर्थ?
द सेंट आनई : नॉलेज।।
अब्दुल फैजल : विच इज़ द डीपेस्ट ट्रेन्च इन द वर्ल्ड?
द सेंट आन्सर्ड : अ वुमेन्स हार्ट।
अनादर कोर्टियर क्वेश्चन्ड : व्हॉट इज़ दैट विच केन नाट रिगेन्डआफ्टर इट इज़ लॉस्ट?
सेंट आन्सर्ड : लाइफ।
द कोर्ट म्यूजिशियन तानसेन आस्कड : व्हाट इज़ अन डाईंग इन म्यूजिक?
द सेंट रिप्लाईड : नोट्स।
एण्ड देन ही आस्क्ड : विच इज़ द स्वीटेस्ट एण्ड मोस्ट मेलोडियस वाईस एट नाइट टाइम।
द सेंट आन्सर्ड : दे वाईस दैट प्रेज टू गॉड।)

हिन्दी अनुवाद :
मंत्रियों में से एक राजा टोडरमल ने प्रश्नों को पूछना शुरू किया
उन्होंने पूछा : धरती पर मनुष्य का सबसे अच्छा मित्र कौन है?
सन्त ने उत्तर दिया : उसकी खुद की समझदारी। फैजी ने पूछा-दुनिया में सबसे ऊँची वस्तु क्या है?
सन्त का उत्तर था : ज्ञान।।
अब्दुल फजल : दुनिया में सबसे गहरी खाई क्या है?
सन्त ने उत्तर दिया : किसी स्त्री का हृदय।
दूसरे दरबारी ने पूछा : कौन सी ऐसी वस्तु है जो खो जाने के बाद नहीं मिलती?
सन्त ने उत्तर दिया : जीवन।
दरबारी संगीतज्ञ तानसेन ने पूछा : संगीत में कौन सी चीज अमर है?
सन्त ने कहा : सुर (आवाज)
फिर उसने पूछा : रात्रि के समय अत्यन्त मधुर व संगीतमय आवाज कौन-सी है?
सन्त ने जवाब दिया-वह आवाज़ जो ईश्वर की प्रार्थना करती है।

[6] Maharaj Man Singh of Jaipur, a guest at the palace, asked : What travels more speedily than wind?
The saint replied : It is man’s thought.
He then asked : Which is the sweetest thing on the earth?
The saint said : It is a baby’s smile.
The Emperor Akbar and all his courtiers were very impressed with his answers but wanted to test the saint himself.
Firstly, he asked : What are the necessary requirements to rule over a kingdom?
The saint answered : Cleverness.
Then he asked : What is the gravest enemy of a king?
The saint replied : It is selfishness

(महाराज मानसिंह ऑफ जयपुर, अ गेस्ट एट द पैलेस आस्कड-व्हाट ट्रेवेल्स मोर. स्पीडिली देन विन्ड?
द सेण्ट रिप्लाइड : इट इज मेन्स थॉट। ही देन आस्कड-व्हिच इज द स्वीटेस्ट थिंग ऑन अर्थ?
द सेण्ट सेड : इट इज़ अ बेबीज स्माइल।
द एम्परर अकबर एण्ड ऑल हिज कोर्टियर्स वर वेरी इम्प्रेस्ड विद हिज़ आन्सर्स बट वान्टेड टु टेस्ट द सेंट हिमसेल्फ।
‘फर्स्टली, ही आस्क्ड : व्हाट आर नेसेसरी रिक्वायरमेण्ट टु रूल ओवर अ किंगडम?
द सेंट आन्सर्ड : क्लेवरनेस।
देन ही आस्कड : व्हाट इज द ग्रेवेस्ट एनिमी ऑफ ए किंग?
द सेंट रिप्लाइड : इट इज़ सेलिफिशनेस।)

हिन्दी अनुवाद :
जयपुर के महाराज मानसिंह, जो कि राजमहल में एक मेहमान थे, ने पूछ-हवा से तेज कौन सी चीज़ चलती है?
सन्त ने उत्तर दिया : मनुष्य का मन। उन्होंने फिर पूछा-धरती पर सबसे मधुर चीज कौन सी है?
सन्त ने उत्तर दिया : एक शिशु (बालक) की मुस्कान।
सम्राट अकबर और उनके दरबारी सन्त के उत्तरों से बहुत प्रभावित हुए। पर अकबर सन्त की खुद परीक्षा लेना चाहते थे।
सबसे पहले उन्होंने पूछा : एक राज्य पर शासन करने के लिए राजा के लिए कौन-सी आवश्यक चीजें हैं?
सन्त ने उत्तर दिया : चतुराई।
फिर उन्होंने पूछा : किसी राजा का भयंकर शत्रु कौन है?
सन्त ने उत्तर दिया : स्वार्थ।

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[7] The emperor was so pleased that he offered the saint a seat of honour and asked him whether he could perform any miracles. The saint said that he could produce any person the king wished to meet. Akbar was thrilled and immediately asked to meet .his minister and best friend Birbal.

(द एम्परर वाज़ सो प्लीज्ड दैट ही आफर्ड द सेन्ट अ सीट ऑफ हॉनर एण्ड आस्कड हिम वेदर ही कुड परफार्म एनी मिरेकल्स। द सेन्ट सैड दैट ही कुड प्रोड्यूस एनी पर्सन द किंग विश्ड टु मीट। अकबर वाज़ थ्रिल्ड एण्ड इमीजिएटली आस्कड टु मीट द मिनिस्टर एण्ड बेस्ट फ्रेन्ड बीरबल।)

हिन्दी अनुवाद :
सम्राट इतना प्रसन्न हुआ कि उसने सन्त को अपने दरबार में एक सम्मानीय पद देने की पेशकश की और उससे पूछा कि क्या सन्त कोई चमत्कार कर सकता है? सन्त ने कहा कि वह ऐसे किसी व्यक्ति को पेश कर सकता है जिससे राजा मिलने की इच्छा रखता हो। अकबर रोमांचित हुआ और उसने अपने परम मित्र बीरबल से मिलने की इच्छा जताई।

[8] The saint simply pulled off his artificial beard urprise of the other courtiers. Akbar was stunned and could not believe his eyes. He stepped down to embrace the saint because he was none other than Birbal.

Akbar had tears in his eyes as he told Birbal that he had suspected it to be him and had therefore asked him whether he could perform miralces. He showered Birbal with many valuable gifts to show him how happy he was at his return.

(द सेण्ट सिम्पली पुल्ड ऑफ हिज़ आर्टिफिशियल बीयर्ड एण्ड हेयर टु द सरप्राइज़ ऑफ द आदर कोर्टियर्स। अकबर वाज़ स्टन्ड एण्ड कुड नॉट विलीव हिज़ आईज। ही स्टेप्ड डाउन टु इम्ब्रेस द सेंट बिकाज़ ही वाज़ नन आदर देन बीरबल।

अकबर हैड टीअर्स इन हिज़ आईज़ एज़ ही टोल्ड बीरबल दैट ही हैंड सस्पेक्टेड इट टु बी हिम एण्ड हैड देअरफोर आस्कड हिम वेदर ही कुड परफार्म मिरेकल्स। ही शावर्ड बीरबल विद मेनी वेल्युएबल गिफ्ट्स टु शो हिज हाउ हैप्पी ही वाज़ एट हिज़ रिटर्न।)

हिन्दी अनुवाद :
सन्त ने सहजता से अपनी नकली दाढ़ी एवं बाल खोल लिये। सारे दरबारी अचम्भित थे। अकबर उसे देखकर स्तब्ध था और अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। सिंहासन से नीचे उतरकर उसने सन्त को गले से लगा लिया क्योंकि वह सन्त और कोई नहीं बल्कि बीरबल था।

अकबर की आँखों में यह कहते हुए आँसू आ गये कि वह उसके प्रति शंकालु था और इसलिए उसने कहा कि क्या वह कोई चमत्कार कर सकता है। उसने बीरबल पर कई कीमती उपहारों की बौछार कर दी और यह बताया कि उसकी वापसी से वह कितना खुश था।

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 1 सूर के बालकृष्ण

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 1 सूर के बालकृष्ण (कविता, सूरदास)

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सूर के बालकृष्ण पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

सूर के बालकृष्ण लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बालक कृष्ण वृंदावन जाने को लालायित क्यों हैं?
उत्तर:
बालक कृष्ण वृंदावन जाने के लिए इसलिए लालायित हैं क्योंकि वह वृंदावन में अनेक प्रकार के फलों को अपने हाथों से तोड़कर खाना चाहते हैं।

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प्रश्न 2.
गोचारण हेतु जाने के लिए कृष्ण क्या तर्क देते हैं?
उत्तर:
गोचारण हेतु जाने के लिए कृष्ण तर्क देते हैं कि माँ मुझे तेरी सौगंध कि मुझे न तो गर्मी लगती है, न ही भूख-प्यास सताती है। मैं तो गोचारण के लिए अवश्य जाऊँगा।

प्रश्न 3.
यशोदा अपने आपको कृष्ण की धाय क्यों कहती हैं?
उत्तर:
यशोदा ने कृष्ण को जन्म नहीं दिया था। उन्होंने केवल उनका पालन-पोषण किया था इसलिए वह स्वयं को कृष्ण की धारा कहती हैं।

सूर के बालकृष्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यशोदा ने कृष्ण को वन की क्या-क्या कठिनाइयाँ बताईं? (M.P. 2010)
उत्तर:
यशोदा ने कृष्ण को वन की निम्नलिखित कठिनाइयाँ बताईं –

  1. वन बहुत दूर है। तुम छोटे-छोटे पाँवों से चलकर कैसे जाओगे।
  2. वन से घर लौटते हुए रात हो जाती है।
  3. अतः घर से जाओगे और रात को घर लौटोगे। भूख-प्यास से व्याकुल्हो जाओगे।
  4. धूप में गायों के पीछे-पीछे घूमते रहने के कारण तुम्हारा कमल के समान कोमल शरीर मुरझा जाएगा।

प्रश्न 2.
बालकृष्ण को देखकर माता यशोदा के हृदय में कौन-कौन-सी अभिलाषाएँ जागती हैं?
उत्तर:
बालकृष्ण को देखकर माता यशोदा के हृदय में कई अभिलाषाएँ जगती हैं, जैसे-कृष्ण घुटनों के बल चलें, उनके दूध के दो दाँत निकलें, तोतली बोली में वे नंद को बाबा और उन्हें माता कहकर पुकारें, आँचल पकड़कर बालहठ करें, अपने हाथों से थोड़ा-थोड़ा खाकर अपना मुख भरें, सभी दुखों को दूर करने वाली अपनी मधुर हँसी बिखेरें।

प्रश्न 3.
यशोदा ने देवकी को क्या संदेश भेजा? (M.P. 2009, 2012)
उत्तर:
यशोदा ने देवकी से संदेश में कहा कि मैं तो कृष्ण का पालन-पोषण करने वाली धाय हूँ। मैं तमसे विनती करती हैं कि तुम बालक कृष्ण पर ममता, दया करती रहना। उसके प्रति कठोरता का व्यवहार मत करना। श्रीकृष्ण को प्रातःकाल माखन-रोटी अच्छी लगती है इसलिए उसे प्रातःकाल माखन रोटी ही देना। वह बड़ी मुश्किल से स्नान करता है। तुम उसकी सभी फरमाइशों को पूरा करके उसे स्नान के लिए मनाना, तभी वह तेल, उबटन और गर्म पानी से स्नान करेगा अर्थात् उसकी रुचियों और आदतों का ध्यान रखना। कृष्ण संकोची स्वभाव का है, अतः वह अपने मुख से कुछ नहीं कहेगा। देवकी तुम्हें ही उसकी रुचियों और आदतों का ध्यान रखना पड़ेगा।

सूर के बालकृष्ण भाव-विस्तार/पल्लवन

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प्रश्न 1.
निम्नलिखित हाव्य-पंक्तियों की व्याख्या कीजिए –

संदेसौ देवकी सौं कहियौ।
हौं तो धाइ तिहारे सुत की, मया करत ही रहियौ॥
जदपि टेव तुम जानति उनकी, तऊ मोहिं कहि आवै।
प्रात होत मेरे लाड़ लडैते, माखन रोटी भावै॥

प्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश भक्तिकालीन सगुण कृष्णभक्ति धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि सूरदास द्वारा रचित ‘सूरसागर’ के मथुरागमन प्रसंग से लिया गया है। उद्धव जब वृंदावन से मथुरा वापस जाते समय यशोदा से मिलने जाते हैं तो यशोदा उन्हें देवकी के नाम संदेश भेजती हैं। यशोदा उद्धव से कहती हैं –

व्याख्या:
हे. राहगीर! कृष्ण की जननी देवकी को मेरा यह संदेश देना कि मैं तो कृष्ण का पालन-पोषण करने वाली धाय मात्र हूँ, कृष्ण की माता तो तुम ही हो। धाय, बच्चे के संबंध में उसकी माँ से कुछ कहे यह उचित नहीं लगता। परंतु फिर भी मैं यह विनती करती हूँ कि तुम बालक पर ममता, दया करती रहना। अर्थात् उसके प्रति कठोरता का व्यवहार मत करना। यद्यपि मैं जानती हूँ कि तुम कृष्ण की सभी रुचियों-आदतों से भली-भाँति परिचित हो, परंतु फिर भी मुझसे रहा नहीं जाता, इसलिए कह रही हूँ कि प्रातःकाल मेरे लाड़ले बालक कृष्ण को माखन-रोटी का नाश्ता ही अच्छा लगता है। अतः प्रातःकाल नाश्ते में उसे माखन-रोटी ही देना।

विशेष:

  1. यशोदा मातृ हृदय का अत्यंत मनोवैज्ञानिक चित्रण हुआ है।
  2. लाड़ लडैतें में अनुप्रास अलंकार है।
  3. पद्यांश में ब्रजभाषा तथा गेयता है।

सूर के बालकृष्ण भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन समानार्थी शब्द लिखिए –
पग, कमल, जननी, गगन।
उत्तर:

  • पग – पैर, पाद, चरण।
  • कमल – राजीव, जलज, पंकज।
  • जननी – माता, माँ, अम्बा।
  • गगन – आकाश, नभ, अम्बर।

प्रश्न 2.
दिए गए मुहावरों के अर्थ लिखते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
बाल-बाल बचना, सर धुनना, कान का कच्चा, नाक में दम करना, मुँह की. खाना, पेट में चूहे दौड़ना, पाँचों अंगुली घी में होना। (M.P. 2011)
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 1 सूर के बालकृष्ण img-1

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में से तत्सम, तद्भव और देशज शब्दों को छाँटिए –
मुख, दाँत, दूध, घर, जननी, साँझ, जनि, तनक, कमल, पथिक, गैया, टेव।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 1 सूर के बालकृष्ण img-2

सूर के बालकृष्ण योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
गाय चराते हुए कृष्ण का एक सुन्दर चित्र बनाने का प्रयास कीजिए तथा उसे चित्र प्रदर्शनी में प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 2.
वात्सल्य विषयक अन्य कवियों की रचनाओं का संकलन कीजिए।
उत्तर:
छात्र तुलसीदास, सुभद्रा कुमारी चौहान आदि की कविताओं का संकलन कर सकते हैं।

प्रश्न 3.
कृष्ण की बाल लीलाओं से संबंधित चित्रों का संकलन कर एलबम बनाइए।
उत्तर:
कृष्ण की बाल लीलाओं के चित्र बाजार में उपलब्ध हैं। छात्र उनको प्राप्त कर एलबम स्वयं बना सकते हैं।

प्रश्न 4.
आधुनिक काल के उन कवियों की सूची बनाइए जिन्होंने कृष्ण-चरित्र को अपने काव्य का विषय बनाया।
उत्तर:
छात्र अपने विषय अध्यापक की सहायता से सूची स्वयं बनाएँ।

सूर के बालकृष्ण परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘आजु मैं गाइ चरावन जैहौं’ पद के रचयिता हैं –
(क) नन्ददास
(ख) मीराबाई
(ग) सूरदास
(घ) तुलसीदास
उत्तर:
(ग) सूरदास।

(घ) चौक में
प्रश्न 2.
ब्रज के लोग अत्यंत भयभीत क्यों हो गए?
(क) कंस की ललकार सुनकर
(ख) श्रीकृष्ण की चीख सुनकर
(ग) वादलों की गर्जना सुनकर
(घ) कालिया नाग की फुफकार सुनकर
उत्तर:
(ग) बादलों की गर्जना सुनकर।

प्रश्न 3.
सूरदास किसके अनन्य भक्त थे?
(क) श्रीकृष्ण के
(ख) श्रीराम के
(ग) भगवान विष्णु के
(घ) भगवान महादेव के
उत्तर:
(क) श्रीकृष्ण के।

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प्रश्न 4.
यशोदा श्रीकृष्ण को अकेला कहाँ छोड़कर गईं?
(क) आँगन में
(ख) णलने में
(ग) नंद के पास
उत्तर:
(क) ऑगन में।

प्रश्न 5.
‘पर्यो आपनी टेक’ में ‘टेक’ शब्द का अर्थ है –
(क) टिकना
(ख) ठिकाः
(ग) हठ
(घ) हटा
उत्तर:
(ग) हठ।

प्रश्न 6.
‘लाड़ लडैतें’ का अर्थ है –
(क) प्यार से लड़ना
(ख) लाड़ला बालक
(ग) लाड़-प्यार करना
(घ) लाड़ लड़ाना
उत्तर:
(ख) लाड़ला बालक।

प्रश्न 7.
यशोदा श्रीकृष्ण को नहाने के लिए कैसे मनाती हैं?
(क) माखन-रोटी देकर
(ख) जो कुछ माँगते उसे देकर
(ग) लाड़-प्यार से पुचकारकर
(घ) जबरदस्ती पकड़कर
उत्तर:
(ख) जो कुछ माँगते उसे देकर।

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:

  1. सूरदास ने श्रीकृष्ण के ………. का वर्णन किया है। (बालरूप/यौवनरूप)
  2. माँ ……… ने श्रीकृष्ण का पालन-पोषण किया था। (देवकी/यशोदा)
  3. बड़े होने पर श्रीकृष्ण ………. के राजा बन गए। (बनारस/मथुरा)
  4. श्रीकृष्ण को खाने में ………. पसंद था। (माखन-रोटी/दही-रोटी)
  5. सूरदास ने अपनी कविता में …….. भाषा का प्रयोग किया है। (अवधी/ब्रज)
  6. सूरदास ………. अनन्य भक्त थे। (श्रीराम के/श्रीकृष्ण के)

उत्तर:

  1. बालरूप
  2. यशोदा
  3. मथुरा
  4. माखन-रोटी
  5. ब्रज
  6. श्रीकृष्ण के।

III. निम्न कथनों में सत्य/असत्य छाँटिए:

  1. श्रीकृष्ण स्नान करने के बड़े शौकीन थे।
  2. माँ देवकी, उद्धव के माध्यम से यशोदा को संदेश भेजती हैं।
  3. माँ यशोदा श्रीकृष्ण को बहुत प्यार करती थीं।
  4. श्रीकृष्ण इतने संकोची थे कि माँ यशोदा की हर बात चुपचाप मान – लेते थे।
  5. श्रीकृष्ण गाय चराने के लिए बन जाने को लालायित थे।
  6. सोइ-सोइ, क्रम-क्रम में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
  7. ब्रज के लोग बादलों की गर्जना सुनकर अत्यंत भयभीत हो गए। (M.P. 2009)

उत्तर:

  1. असत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य
  6. सत्य
  7. सत्य।

IV. निम्न के सही जोड़े मिलाइए:

प्रश्न 1.
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 1 सूर के बालकृष्ण img-3
उत्तर:

  1. (घ)
  2. (ग)
  3. (क)
  4. (ङ)
  5. (ख)।

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V. निम्न प्रश्नों के उत्तर एक शब्द अथवा एक वाक्य में दीजिए:

  1. श्रीकृष्ण की असली माँ कौन थीं?
  2. श्रीकृष्ण का स्वभाव कैसा था?
  3. माँ यशोदा किसके माध्यम से देवकी के पास संदेश भेजती हैं?
  4. ‘कमल बदन’ में कौन-सा अलंकार है?
  5. श्रीकृष्ण ने क्या निश्चय कर लिया है?

उत्तर:

  1. श्रीकृष्ण की असली माँ देवकी थीं।
  2. श्रीकृष्ण का स्वभाव संकोची था।
  3. उद्धव के माध्यम से।
  4. रूपक अलंकार।
  5. श्रीकृष्ण ने वन जाकर गाय चराने का निश्चय कर लिया है।

VI. निम्न कथन के लिए सही विकल्प चुनिए:

प्रश्न 1.
श्रीकृष्ण ने माता यशोदा को अपनी गाय चराने के लिए वन में जाने का निश्चय सुनाया ताकि –
(क) अपने साथियों के साथ खेलकूद सकें।
(ख) अपनी मनमानी कर सकें।
(ग) अनेक प्रकार के फल अपने हाथों से तोड़कर खा सकें।
(घ) उन्हें किसी प्रकार की चिन्ता न हो सके।
उत्तर:
(ग) अनेक प्रकार के फल अपने हाथों से तोड़कर खा सकें।

सूर के बालकृष्ण लघु उत्तरीय प्रश्न.

प्रश्न 1.
सूरदास ने श्रीकृष्ण के किस रूप का वर्णन किया है?
उत्तर:
सूरदास ने श्रीकृष्ण के बाल-रूप का वर्णन किया है।

प्रश्न 2.
‘जसुमति मन अभिलाष करै’ पद में यशोदा की किन अभिलाषाओं का चित्रण किया गया है?
उत्तर:
इस पद में यशोदा की शिशुपरकी अभिलाषाओं का चित्रण किया है।

प्रश्न 3.
यशोदा किसके द्वारा किसे संदेश भेजती हैं?
उत्तर:
यशोदा कृष्ण के अनन्य मित्र उद्धव के द्वारा देवकी को संदेश भेजती हैं।

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प्रश्न 4.
कृष्ण अपनी किस बात पर अड़े हुए हैं?
उत्तर:
कृष्ण गाय चराने के लिए जाने की बात पर अड़े हुए हैं।

प्रश्न 5.
माता यशोदा कृष्ण की किस प्रकार की हँसी की अभिलाषा करती हैं?
उत्तर:
माता यशोदा कृष्ण के समस्त दुखों को दूर करने वाली मधुर हँसी की अभिलाषा करती हैं।

प्रश्न 6.
श्रीकृष्ण की हँसीयुक्त छवि की क्या विशेषता है?
उत्तर:
श्रीकृष्ण की हँसीयुक्त छवि की यह विशेषता है कि उससे सारे दुख दूर हो जाते हैं।

प्रश्न 7.
श्रीकृष्ण क्या देखकर भाग जाया करते थे और क्यों?
उत्तर:
श्रीकृष्ण तेल, उबटन और गर्म पानी देखकर भाग जाया करते थे ताकि नहाना न पड़े।

प्रश्न 8.
यशोदा ने श्रीकृष्ण का निश्चय सुनकर क्या किया?
उत्तर:
यशोदा ने श्रीकृष्ण का निश्चय सुनकर उन्हें समझाने का प्रयास किया।

सूर के बालकृष्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मथुरा जाकर कृष्ण राजा हो गए, फिर भी. माता का हृदय उन्हें किस रूप में अनुभव करता है?
उत्तर:
मथुरा जाकर कृष्ण राजा बन गए। निस्संदेह वे बड़े हो गए। पूरी मथुरा की जिम्मेदारी उन्होंने अपने कंधों पर उठा ली लेकिन माता का हृदय उन्हें कभी भी बड़ा स्वीकार नहीं करता। उनका हृदय तो सदैव अपने पुत्र को शिशु रूप में ही अनुभव करता है। माता यशोदा के लिए तो वे सदैव बच्चे ही रहते हैं।

प्रश्न 2.
यशोदा और देवकी में से कृष्ण पर किसका अधिकार अधिक है औरक्यों?
उत्तर:
यशोदा और देवकी में से कृष्ण पर यशोदा का अधिकार अधिक है। देवकी ने कृष्ण को जन्म दिया था, परंतु उनका पालन-पोषण करने के लिए उन्हें यशोदा नर से नारायण के पास भेज दिया था। यशोदा ने बड़े लाड़-प्यार से कृष्ण का पालन-पोषण किया। इस कारणं कृष्ण पर उनका अधिकार अधिक है, न कि देवकी का।

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प्रश्न 3.
यशोदा ने देवकी को क्या संदेश भेजा? (M.P. 2009, 2012)
उत्तर:
यशोदा ने देवकी को यह संदेश भेजा कि मैं तो कृष्ण का पालन-पोषण करने वाली धाय थी, लेकिन तुम तो वास्तविक माँ हो इसलिए उस पर दया करते रहना। कृष्ण को मक्खन-रोटी बहुत पसंद है। वह गर्म जल से स्नान नहीं करना चाहता है। वह तेल-उबटन देखकर भागने लगता है। मैं तो उसकी इच्छानुसार उसे सारी चीजें देती थी। तुम भी उसकी इच्छाओं का ध्यान रखना।

प्रश्न 4.
श्रीकृष्ण ने माता यशोदा से क्या हठ किया?
उत्तर:
श्रीकृष्ण ने माता यशोदा से यह हठ किया कि वह वन में अवश्य जाएँगे। उन्होंने तर्क देकर कहा-माँ! तेरी कसम, वंन में मुझे न गरमी, न भूख, न प्यास और न ही कोई चीज परेशान करेगी। इसलिए मैं वन में अवश्य जाऊँगा।

सूर के बालकृष्ण कवि-परिचय

प्रश्न 1.
सूरदास का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
सूरदासजी भक्तिकाल की सगुण भक्तिधारा के प्रमुख कवि थे। वे कृष्ण भक्त थे। उनका जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी को विक्रम संवत 1535 (सन् 1478 ई०) रुनकता नामक गाँव में हुआ था। कुछ विद्वानों का मत है कि सूर का जन्म दिल्ली के पास सीही नामक ग्राम में एक निर्धन सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। सूरदासजी विट्ठलनाथ द्वारा स्थापित अष्टछाप के अग्रणी कवि थे। वे वृंदावन के गऊघाट पर जाकर रहने लगे थे। वहाँ वे भक्तिमय विनय के पद गाते थे, जिनमें दैन्य भाव की प्रधानता थी। वल्लभाचार्य ने इन्हें पुष्टिमार्ग में दीक्षित किया और भगवद्लीला से परिचित कराया। उनके आदेश से आप ‘गोकुल में श्रीनाथजी के मंदिर में कीर्तन करने लगे और आजन्म वहीं रहे। उनका देहावसान विक्रम संवत 1642 में हो गया।

साहित्यिक विशेषताएँ:
कहा जाता है कि सूरदास जन्मांध थे। वे बहुश्रुत, अनुभव संपन्न, विवेकशील और संवेदनशील व्यक्तित्व के स्वामी थे। परंतु उनके काव्य में प्रकृति और श्रीकृष्ण की लीलाओं आदि का वर्णन देखकर ऐसा प्रतीत नहीं होता कि वे जन्मांध थे। उन्होंने कृष्ण के जन्म से लेकर मथुरा जाने तक की कथा और कृष्ण की विभिन्न लीलाओं से संबंधित अत्यंत मनोहर पदों की रचना की है। श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का वर्णन उनकी सहजता, मनोवैज्ञानिकता और स्वाभाविकता के कारण अद्वितीय है। वे मुख्यतः वात्सल्य एवं शृंगार के कवि थे। उनके काव्य में वात्सल्य, माधुर्य एवं सख्य भाव की धारा सतत प्रवाहमान रही है।

रचनाएँ:
सूरसागर, सूर सारावली और साहित्य लहरी।

1. भाषा-शैली:
कवि सूरदास की भाषा ब्रजभाषा है। साधारण बोलचाल की भाषा को परिष्कृत कर उन्होंने उसे साहित्यिक रूप प्रदान किया है। उनके काव्य में ब्रजभाषा का स्वाभाविक, सजीव एवं भावानुकूल प्रयोग है।

2. अलंकार विधान:
सूर का अलंकार विधान उत्कृष्ट है। उसमें शब्द चित्र उपस्थित . करने एवं प्रसंगों की वास्तविक अनुभूति कराने को पूर्ण क्षमता है। उनके काव्य में अन्य अनेक अलंकारों के साथ उपमा, उत्प्रेक्षा और रूपक का कुशल प्रयोग हुआ है। उनकी भाषा में मुहावरों और लोकोक्तियों का सहज प्रयोग हुआ है।

3. शैली:
सूर के सभी पद गेय हैं और किसी न किसी राग से संबंधित हैं। उनके पदों में काव्य और संगीत का अपूर्व संगम है।

4. महत्त्व:
हिंदी साहित्य में सूरदास का महत्त्वपूर्ण स्थान है। वे सगुण कृष्ण भक्ति-धारा के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कवि थे। उनके काव्य में भक्ति, काव्य और संगीत की त्रिवेणी के दर्शन होते हैं। उन्होंने कृष्ण की बाल छवि, स्वभाव, बाल क्रीड़ाओं आदि का सरल, सहज, माधुर्यपूर्ण वर्णन किया है। उनके काव्य में बालक कृष्ण के प्रति नन्द-यशोदा के स्नेह का हृदयग्राही चित्रण दृष्टिगोचर होता है। उनका वात्सल्य वर्णन विश्व साहित्य की अमूल्य निधि है। हिंदी साहित्यजगत् में सूरदासजी सदा सूर्य की भाँति प्रकाशमान रहेंगे।

सूर के बालकृष्ण’ पाठ का सारांश

प्रश्न 1.
‘सूरदास के बालकृष्ण’ पदों का सार लिखिए।
उत्तर:
पहले पद में माँ यशोदा की शिशुपरक अभिलाषा का वर्णन किया गया है। माँ यशोदा की अभिलाषा है कि कब कृष्ण घुटनों के बल चलेंगे, कब उनके दूध के दाँत दिखेंगे, कब वे तोतली बोली में बोलेंगे और नंदजी को बाबा कहकर और उन्हें माँ कहकर संबोधित करेंगे, कब वे आँचल खींचकर झगड़ा करेंगे, हठ ठानेंगे, कब अपनी मधुर हँसी बिखेरेंगे और कब अपने मुँह को अपने हाथों से भरेंगे। इस बीच यशोदाजी श्रीकृष्ण को आँगन में अकेला छोड़कर कुछ काम करने चली गईं और आकाश में बादल गरजने लगे। सूरदासजी कहते हैं कि गर्जना सुनकर ब्रज के सभी लोग बहुत भयभीत हो गए।

दूसरे पद में श्रीकृष्ण थोड़े बड़े हो जाते हैं और अपनी माँ से वन में गाय चराने के लिए जाने की हठ करते हैं। माँ उन्हें समझाती हैं कि तुम छोटे-छोटे पैरों से कैसे चलोगे, सुबह जाओगे और शाम को घर लौटोगे। धूप-गर्मी में तुम्हारा कोमल शरीर कुम्हला जाएगा। लेकिन श्रीकृष्ण के भी अपने तर्क हैं। वे उन तर्कों का हवाला देकर गाय चराने के लिए वन जाने की बात दोहराते हैं।

तीसरे पद में माँ यशोदा, उद्धव के माध्यम से देवकी को संदेश भेजती हैं। यद्यपि कृष्ण अब राजा हैं किंतु माँ का हृदय तो सदैव अपने पुत्र को शिशु रूप में अनुभव करता है। वे संदेश भेजती हैं कि कृष्ण को सुबह माखन-रोटी अच्छी लगती है। उबटन करके, उसे गर्म पानी से नहाना अच्छा नहीं लगता। वे जो कुछ माँगते हैं, उन्हें देती हैं। इसमें माँ का वात्सल्य भाव प्रकट हुआ है।

सूर के बालकृष्ण संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1.
जसुमति मन अभिलाष करै।
कब मेरो लाल घुटुरुवनि रेंगै, कब धरनी पग द्वैक धरै॥
कब द्वै दाँत दूध के देखों, कब तोतरै मुख बचन झरे।
कब नंदहिं बाबा कहि बोलें, कब जननी कहि मोहि ररै॥
कब मेरो अँचरा गहि मोहन, जोइ-सोइ कहि मोसौं झगरे।
कब धौं तनक-तनक कछु खैहैं, अपने कर सौं मुखहिं भरै।
कब हँसि बात कहैगौ मोसौं, जा छबि तैं दुख दूर हरै।
स्याम अकेले आँगन छाँडै, आपु गई कछु काजु धरै॥
इहि अंतर अँधवाइ उठ्यो इक, गरजत गगन सहित घहरै।
सूरदास ब्रज-लोग सुनत धुनि, जो जहँ-तहँ सब अतिहि डरै॥ (Page 1)

शब्दार्थ:

  • जसुमति – माता यशोदा।
  • अभिलाष – इच्छा, चाहना।
  • लाल – पुत्र (श्रीकृष्ण)।
  • घुटुरुवनि – घुटनों के बल।
  • धरनी – पृथ्वी।
  • पग – पैर।
  • द्वैक – दो, एक।
  • तोतरें – तोतला।
  • झरै – निकलें।
  • अँचरा गहि – आँचल पकड़कर।
  • मोसौं – मुझसे।
  • तनक-तनक – छोटे-छोटे।
  • कर – हाथ।
  • काजु – काम।
  • अंतर – बीच।
  • अँधवाइ – आँधी।
  • गगन – आकाश।
  • सुनत – सुनना।
  • अतिहि – अत्यधिक।

प्रसंग:
प्रस्तुत पद भक्तिकाल के कृष्णभक्त कवि सूरदास द्वारा रचित ‘सूरसागर’ से लिया गया है। इस पद में माता यशोदा की शिशुपरक अभिलाषा का चित्रण किया है। माता यशोदा चाहती हैं कि श्रीकृष्ण घुटनों के बल चलें और वे बोलना सीखकर उन्हें तोतली भाषा में संबोधित करें। अपनी मधुर हँसी बिखेरें। माँ की इन आकांक्षाओं, शिशु की भाव-भंगिमाओं और चेष्टाओं में वात्सल्य भाव व्यक्त हुआ है।

व्याख्या:
श्रीकृष्ण की आयु सात-आठ मास की होगी। माता यशोदा उन्हें देखकर अपने मन में अभिलाषा करती हैं, वह चाहती हैं कि कब उनका पुत्र कृष्ण घुटनों के बल रेंगना सीखेगा और कब पृथ्वी पर अपने दो-एक पग धर कर चलेगा। अर्थात्! माता यशोदा की आकांक्षा है कि श्रीकृष्ण जल्दी से घुटनों के बल चलें फिर खड़े होकर अपने पैरों से चलें। माता यशोदा चाहती हैं कि बालकृष्ण के मुख में दूध के दो दाँत दिखाई दें अर्थात् श्रीकृष्ण के दूध के दाँत निकलें और उनके मुख से तोतली भाषा में शब्द निकलें। वे अपनी तोतली भाषा में नंद को बाबा कहकर पुकारें और उन्हें तोतली बोली में माता कहकर संबोधित करें।

कब वे मेरा आँचल पकड़कर, जोइ-सोइ कहकर मुझसे झगड़ा करेंगे अर्थात् माता यशोदा की इच्छा है कि श्रीकृष्ण अपनी तोतली बोली में नंद को बाबा और मुझे माता कहकर पुकारें तथा मेरा आँचल पकड़कर मुझसे झगड़ा करें, बाल-हठ करें। कब वे हँसकर मुझसे अपनी बात कहेंगे अर्थात् कब अपनी मधुर हँसी बिखेरेंगे, उनकी हँसीयुक्त छवि को देखकर मेरे समस्त दुख दूर हो जाएंगे। यह अभिलाषा करती हुई माता यशोदा श्रीकृष्ण को घर के आँगन में खेलता हुआ छोड़कर, घर का कुछ काम करने के लिए अंदर चली गईं। इसी बीच एक आँधी उठी और आकाश में गर्जना करते हुए बादल छा गए। कवि सूरदास कहते हैं कि ब्रज के लोग बादलों की गर्जना को सुनकर, जो जहाँ था वहीं सब अत्यंत भयभीत हो उठे।

विशेष:

  1. इस पद में माँ की शिशुपरक अभिलाषाओं का बड़ा यथार्थ चित्र हुआ है। प्रत्येक माता चाहती है कि उसका बाल अथवा पुत्र जल्दी से घुटनों के बल चले, फिर पैदल चले। उसके दूध के दाँत निकलें और वह तोतली बोली में उसे पुकारे, आँचल पकड़कर बालहठ करे तथा अपने हाथों से अपना मुँह । यहाँ माता के हृदय का यथार्थ
    वर्णन हआ है।
  2. मनोविज्ञान की सुंदर अवधारणा हुई है।
  3. अंतिम पंक्तियों में प्रकृति की कठोरता का भी चित्रण हुआ है।
  4. द्वै दाँत दूध के देखों, दुख दूर, अकेले आँगन, कछु काजु, अंतर अँधवाइ, गरजत गगन में अनुप्रास अलंकार है।
  5. ‘तनक-तनक’ में पुनरुक्ति अलंकार है।
  6. ब्रजभाषा की सरसता, सरलता तथा पद में गेयता है।
  7. माँ की आकांक्षाओं, शिशु की भाव-भंगिमाओं और चेष्टाओं में वात्सल्य भाव का चित्रण है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i) यशोदा अपने मन में क्या-क्या अभिलाषा करती हैं?
उत्तर:
यशोदा की उत्कट अभिलाषा है कि उनका पुत्र घुटनों के बल चले, फिर अपने पैरों के बल। उसके दूध के दाँत निकलें और वह अपने मुख से तोतली भापा बोले और नंद को बाबा कहकर तथा मुझे माता कहकर पुकारे।

प्रश्न (ii)
श्रीकृष्ण की हँसीयुक्त छवि का क्या प्रभाव होता है?
उत्तर:
श्रीकृष्ण की हँसीयुक्त छवि से सारे दुख दूर हो जाते हैं।

प्रश्न (iii)
आकाश में बादल गरजने का ब्रज के लोगों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
आकाश में बादल गरजने से ब्रज के सभी लोग बहुत भयभीत हो गए।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस पद में माता यशोदा की शिशुपरक अभिलाषा का चित्रण किया गया है। माँ यशोदा चाहती हैं कि उनका कृष्ण जल्दी से जल्दी घुटनों के बल चले, तोतली बोली में उन्हें माँ कहकर और नंद को बाबा कहकर संबोधित करे, और अपना बाल सुलभ हठ दिखाए। दुखों को दूर करने वाली हँसी बिखेरे। माँ की इन आकांक्षाओं, शिशु की भाव-भंगिमाओं, चेष्टाओं द्वारा वात्सल्य भाव व्यक्त हुआ है।

प्रश्न (ii)
पद का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस पद में माँ यशोदा की शिशुपरक इच्छा तथा अंतिम पंक्तियों में प्रकृति के कठोर रूप का चित्रण हुआ है। द्वै दाँत दूध के देखों, दुख दूर, अकेले आँगन, कछ काजु, अंतर अँधवाइ, गरजत गगन में अनुप्रास अलंकार है। ‘तनक-तनक’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। सरल, सरस तथा स्वाभाविक ब्रजभाषा है। पद में गेयता, लय और तुक का प्रयोग किया गया है।

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प्रश्न 2.
आजु मैं गाइ चरावन जैहौं।
वृंदावन के भाँति-भाँति फल अपने कर मैं खैहौं।
ऐसी बात कहौ जनि बारे, देखो अपनी भाँति।
तनक-तनक पग चलिहौं कैसें, आवत है है राति।
प्रात जात गैया लै चारन, घर आवत हैं साँझ।
तुम्हरौ कमल बदन कुम्हिलैहैं, रेंगति घामहिं माँझ।
तेरी सौं मोहि धाम न लागत, भूख नहीं कछु नेक।
सूरदास प्रभु को न मानत पर्यो आपनी टेक। (Page 2)

शब्दार्थ:

  • आजु – आज।
  • गाइ – गाय।
  • चरावन – चराने के लिए।
  • जैही – जाऊँगा।
  • कर – हाथ।
  • खैहौं – खाऊँगा।
  • जनि – मत।
  • बारे – बालक।
  • भाँति – तरह।
  • तनक – छोटे, लघु।
  • पग – पैर।
  • आवत – आना।
  • कमल बदन – कमल के समान कोमल शरीर।
  • कुम्हिलैहैं – मुरझाना, थक जाना।
  • रेंगति – धीरे-धीरे चलना।
  • माँझ – मध्य।
  • सौं – शपथ, सौगंध, कसम।
  • घाम – धूप, गर्मी।
  • टेक – हट।

प्रसंग:
प्रस्तुत पद भक्तिकाल के कृष्णभक्त कवि सूरदास द्वारा रचित ‘सूरसागर’ से लिया गया है। इस पद में कवि ने श्रीकृष्ण की बालसुलभ इच्छा का, माँ की ममता और बच्चे को समझाकर रोकने के प्रयास के साथ-साथ बालहठ का भी सुन्दर चित्रण किया है। श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा से ‘अपनी इच्छा एवं निश्चय व्यक्त करते हुए कहते हैं –

व्याख्या:
माँ, मैंने निश्चय कर लिया है कि आज मैं वन में गौएँ चराने जाऊँगा। आज मुझे वह अवसर उपलब्ध होगा जिससे मैं वृंदावन के अनेक प्रकार के फल अपने हाथ से तोड़कर खाऊँगा। श्रीकृष्ण के उक्त निश्चय को सुनते ही यशोदा बोलीं-मेरे लाड़ले! तुम अभी बच्चे हो, अपनी उम्र देखो। बड़ों की देखा-देखी करने की अभी मत सोचो। वन के कष्टों का वर्णन करती हुई यशोदा बोलीं-तुम्हारे पैर छोटे-छोटे हैं और वन बहुत दूर तुम चलकर कैसे जा पाओगे? फिर आने के समय काफी गहरी रात और घना अँधेरा छा चुका होता है। ऐसा कभी-कभार नहीं होता, अपितु प्रतिदिन होता है।

प्रतिदिन ही ग्वाल-बाल प्रातःकाल गायों को लेकर जाते हैं और सायंकाल बहुत देर से लौटते हैं। जिस प्रकार ग्वाल-बाल प्रतिदिन गायों के पीछे-पीछे धूप-गर्मी में चलते हैं, उस प्रकार चलने से तो तुम्हारा कमल जैसा कोमल शरीर एक ही दिन में कुम्हला जाएगा। यशोदा द्वारा वर्णित कठिनाइयों को सुनकर श्रीकृष्ण बोले-माँ, मुझे तेरी कसम, मुझे गर्मी, भूख, प्यास, कुछ भी परेशान नहीं करेगी। मैं तो आज गोचारण के लिए वन में अवश्य जाऊँगा। सूरदासजी कहते हैं कि भगवान् कृष्ण माँ का कहना नहीं मानते। वे अपने हठ पर अडिग भाव से टिके हुए हैं।

विशेष:

  1. इस पद में बाल मनोविज्ञान का बड़ा ही यथार्थ वर्णन हुआ है। बच्चे बड़ों की नकल करने अथवा उसकी देखा-देखी करने को उत्सुक रहते हैं। ग्वाल-बाल जब सायंकाल घर लौटने पर दिनभर के वन-विहार के अनुभव सुनाते होंगे तो श्रीकृष्ण का मन भी उन्मुक्त विहार के लिए मचलता होगा। इसकी प्रतिध्वनि इस पंक्ति में हुई है-“वृंदावन के भाँति-भाँति फल अपने कर मैं खैहौं।” इसके साथ ही मातृ हृदय का भी यथार्थ वर्णन हुआ है। माँ की दृष्टि में बच्चा कितना ही बड़ा हो जाए, वह बच्चा ही रहता है। इस प्रकार बाल मनोविज्ञान और मातृ मनोविज्ञान दोनों का ही सुंदर चित्रण हुआ है।
  2. पद में माँ-बेटे के मध्य संवादात्मकता ने कथ्य को सजीव एवं चित्रात्मक बना दिया है।
  3. ‘तेरी सौं’ के द्वारा तत्कालीन समाज में माँ की कसम की महत्ता को अंतिम निर्णय की सूचना के रूप में चित्रित किया गया है।
  4. ‘कमल बदन’ में रूपक अलंकार है।
  5. भाँति-भाँति, तनक-तनक में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
  6. पद में ब्रजभाषा की मधुरता एवं गेयता है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
श्रीकृष्ण ने अपना कौन-सा निश्चय माता यशोदा को बताया और क्यों?
उत्तर:
श्रीकृष्ण ने माता यशोदा को गाय चराने के लिए वन में जाने का अपना निश्चय बताया ताकि वे वन में जाकर वृंदावन के अनेक प्रकार के फल अपने हाथ से तोड़कर खा सकें।

प्रश्न (ii)
श्रीकृष्ण का निश्चय सुनकर यशोदा की क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर:
श्रीकृष्ण का गाय चराने के लिए वन में जाने का निश्चय सुनकर माँ यशोदा की चिंतायुक्त प्रतिक्रिया हुई। उन्होंने श्रीकृष्ण को वन में जाने से रोकने के लिए उनकी कोमलता और प्रकृति की कठोरता की बात बता उन्हें समझाने का प्रयास किया।

प्रश्न (iii)
कवि ने श्रीकृष्ण की किस हठ का वर्णन किया है?
उत्तर:
कवि ने श्रीकृष्ण की बालहठ का वर्णन किया है। वे गायें चराने के लिए वन में जाने की जिद पर अड़े हुए हैं।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
श्रीकृष्ण थोड़े बड़े होने पर गाय चराने के लिए वन में जाना चाहते हैं। वे वन में जाकर अपने हाथों से फल तोड़कर खाना चाहते हैं। वे अपना निश्चय माँ यशोदा को बताते हैं। माँ यशोदा उन्हें रोकने के लिए उनकी कोमलता और प्रकृति कठोरता का तर्क देती हैं तो श्रीकृष्ण अपने तर्क देते हैं कि उन्हें धूप, भूख कुछ नहीं लगेगी। वे वन अवश्य जाएँगे।

प्रश्न (ii)
काव्यांश के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
पद में बाल मनोविज्ञान और मातृ-स्नेह का सुंदर चित्रण हुआ है। बालहठ का सजीव एवं आकर्षक चित्रण हुआ है। माँ-बेटे के मध्य हुए संवाद ने कथ्य को सजीव एवं चित्रात्मक बना दिया है। ‘तेरी सौं’ के द्वारा तत्कालीन समाज में माँ की कसम के महत्त्व को रेखांकित किया गया है। ‘कमल बदन’ में रूपक अलंकार है। भाँति-भाँति और तनक-तनक में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। ब्रजभाषा माधुर्य गुण संपन्न सरल एवं सरस है। पद में गेयता, लय और तुक का समावेश है।

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प्रश्न 3.
संदेसौ देवकी सौं कहियौ। (M.P. 2011)
हौं तो धाइ तिहारे सुत की, मया करत ही रहियौ॥
जदपि टेव तुम जानति उनकी, तऊ मोहिं कहि आवै।
प्रात होत मेरे लाड़ लडैतें, माखन रोटी भावै॥
तेल उबटनौ अरु तातौ जल, ताहि देखि भजि जाते।
जोइ-जोइ माँगत सोइ-सोइ देती, क्रम-क्रम करि कै न्हाते॥
सूर पथिक सुनि मोहि रैन-दिन, बढ्यो रहत उर सोच।
मेरौ अलक लडेतो मोहन, है हैं करत संकोच ॥ (Page 2)

शब्दार्थ:

  • संदेसौ – संदेश।
  • सौं – से।
  • हौं – मैं।
  • धाइ-(धाय) – पालन-पोषण करने वाली दासी।
  • तिहारे – तुम्हारे।
  • मया – ममता, दया।
  • टेव – आदत, स्वभाव, पसंद-नापसंद।
  • लाड़ लडैतें – लाड़ले, प्यार से पले बालक कृष्ण।
  • भावै – अच्छी लगती है।
  • तातो – गर्म।
  • भजि जाते – भाग जाना।
  • क्रम-क्रम करि कै – नखरे करते हुए।
  • पथिक – राहगीर।
  • रैन-दिन – रात-दिन।
  • उर – हृदय।
  • सोच – चिंता।
  • संकोच – हिचकिचाहट।

प्रसंग:
प्रस्तुत पद भक्तिकाल के कृष्णभक्त कवि सूरदास द्वारा रचित ‘सूरसागर’ के मथुरागमन प्रसंग से लिया गया है। श्रीकृष्ण मथुरा जाने के बाद अपने अनन्य मित्र उद्धव को गोपियों तथा नंद-यशोदा को समझाने, उन्हें ढाढ़स बँधाने के लिए ब्रज भेजते हैं। उद्धव ब्रज से वापस मथुरा जाते समय यशोदा से मिलने जाते हैं तो यशोदा उन्हें देवकी के नाम जो संदेश देती हैं, उसमें मातृ हृदय के ममत्व का अत्यंत सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक चित्रण कवि ने किया है। यशोदा उद्धव से कहती हैं –

व्याख्या:
हे राहगीर! कृष्ण की जननी देवकी को यशोदा का यह संदेश देना कि मैं तुम्हारे पुत्र पर अपना अधिकार नहीं जता रही हूँ। मैं यह स्वीकार करती हूँ कि. कृष्ण की माँ तुम ही हो, मैं तो केवल उसका पालन-पोषण करने वाली धाय हूँ। धाय, बच्चे के संबंध में उसकी माँ से कुछ कहे यह सर्वथा अनुचित ही लगेगा। फिर भी मैं यह विनती करती हूँ कि तुम बालक पर ममता, दया करती रहना अर्थात् उसके प्रति कठोरता का व्यवहार मत करना। यद्यपि मैं यह जानती हूँ कि तुम कृष्ण की सभी रुचियों-आदतों से भली प्रकार परिचित हो परंतु फिर भी मुझसे रहा नहीं जाता, इसलिए कह रही हूँ कि प्रातःकाल मेरे लाड़ले बालक कृष्ण को माखन-रोटी का नाश्ता ही अच्छा लगता है। अतः उसे प्रातःकाल माखन-रोटी ही देना।

यहाँ मैं यह भी बता दूँ कि तेल, उबटन और गरम पानी आदि स्नान करने की चीज़ों को देखकर वह दूर भाग जाता है। अर्थात् वह मुश्किल से ही स्नान करता है। फिर अपनी फरमाइशें रखता है। वह जो कुछ माँगता है, उसे वह सब देती हूँ। इस प्रकार अनेक नखरे करने के बाद तेल, उबटना लगवाता है और नहाता है। अतः यदि वह स्नान करने से इनकार करे तो तुम खीझना नहीं अपितु उसको मनाना, उसकी माँगों को पूरा करके उसे नहाने के लिए तैयार करना।

सूरदास कहते हैं कि यशोदा उद्धव को संबोधित करती हुई कहती हैं-हे राहगीर! रात-दिन मेरे हृदय में यही चिंता रहती है कि मेरा लाड़ला पुत्र कृष्ण अत्यंत संकोचशील स्वभाव का है। वह अपने मुँह से कुछ नहीं कहेगा। वह देवकी की रुचि-प्रवृत्ति के अनुसार अपने मन को मारकर चलेगा। यह उचित नहीं होगा। इसी कारण मैं रात-दिन चिंता में रहती हूँ। चिंता के कारण न तो मुझे नींद आती है और न ही दिन में मुझे चैन पड़ता है।

विशेष:

  1. यशोदा के मातृ हृदय का अत्यंत मनोवैज्ञानिक चित्रण हुआ है अपने को धाय कहना और अधिकार न जताते हुए भी उसके प्रति चिंतित होना मातृ-स्नेह का बड़ा गहन, सूक्ष्म और यथार्थ चित्रण सूरदास ने किया है।
  2. लाड़ लडैतें, क्रम-क्रम करि कै, है हैं’ में अनुप्रास अलंकार है।
  3. जोइ-जोइ, सोइ-सोइ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
  4. पद में प्रवाहपूर्ण ब्रजभाषा तथा गेयता है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
माता यशोदा किसके माध्यम से किसे संदेश भेजती हैं और क्यों?
उत्तर:
माता यशोदा श्रीकृष्ण के मित्र उद्धव के माध्यम से देवकी को संदेश भेजती हैं क्योंकि माता यशोदा ने श्रीकृष्ण का पालन-पोषण कर बड़ा किया है और अब वे अपनी माता देवकी के पास मथुरा में रहने लगे हैं। माता यशोदा को श्रीकृष्ण की सभी आदतों का पता है इसीलिए वे उद्धव के माध्यम से श्रीकृष्ण की आदतों के बारे में जानकारी देने के लिए संदेश भेजती हैं।

प्रश्न (ii)
श्रीकृष्ण को प्रातःकाल खाने में क्या अच्छा लगता है?
उत्तर:
श्रीकृष्ण को प्रातःकाल माखन-रोटी खाना अच्छा लगता है।

प्रश्न (iii)
यशोदा देवकी को श्रीकृष्ण की कौन-कौन-सी आदतों से परिचित कराती है?
उत्तर:
यशोदा देवकी को श्रीकृष्ण की खाने, स्नान करने, रूठने और मनाने की आदतों से परिचित कराती हैं।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यद्यपि कृष्ण अब मथुरा के राजा हैं किंतु माता का हृदय तो अपने पुत्र को सदैव शिशु रूप में ही अनुभव करता है। वे अपने संदेश में कृष्ण के खाने-पीने, स्नान करने, रूठने-मनाने की आदतों से देवकी को परिचित कराती हैं। इस पद में माँ का वात्सल्य भाव व्यक्त हुआ है।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यशोदा के मातृ हृदय का अत्यंत प्रभावपूर्ण एवं मनोवैज्ञानिक चित्रण हुआ है, कवि ने मातृ-विज्ञान का गहन, सुक्ष्य और यथार्थ चित्रण कर अपनी सूक्ष्म निरीक्षण शक्ति का परिचय दिया है। लाड़-लडैतें, क्रम-क्रम करि कै, है हैं, में अनुप्रास अलंकार है। जोइ-जोइ, सोइ-सोइ, क्रम-क्रम में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार हैं, ब्रजभाषा माधुर्य गुण संपन्न है। पद में गेयता, लय और तुक समाहित है।

MP Board Class 12th Hindi Solutions

O Light! Question Answer Class 9 General English The Spring Blossom Chapter 1 MP Board Solutions

Class 9th General English The Spring Blossom Chapter 1 O Light! Question Answers

O Light! Class 9 Questions and Answers

O Light! Textual Exercises

Word Power

(i) Encircle the odd one among the similar sounding words:
(असमान शब्द छाँटिए)
Answer:
MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 1 O Light! 1

(ii) Match the words with their meanings given as under:
(सुमेलित कीजिए)
MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 1 O Light! 2
Answer:
(1) → (c)
(2) → (d)
(3) → (e)
(4) → (b)
(5) → (a)

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How Much Have I Understood?

(A) Answer these questions in one or two sentences
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
What is the sun?
(व्हॉट इज़ द सन?)
सूर्य क्या है?
Answer:
The sun is the source of light.
(द सन इज़ द सोर्स ऑफ लाईट।)
सूर्य प्रकाश का स्रोत है।

Question 2.
Who is the poem addressed to?
(हू इज द पोऍम अड्रेस्ड टू?)
कविता किसको सम्बोधित है?
Answer:
The poem is addressed to light.
(द पोऍम इज़ एड्रेस्ड टू लाईट।)
कविता प्रकाश को सम्बोधित है।

Question 3.
Whose life and soul is the light?
(हूज़ लाइफ एण्ड सोल इज़ द लाईट?)
प्रकाश किसका जीवन व आत्मा है?
Answer:
The light is the life and soul of sun.
(द लाइट इज द लाइफ एण्ड सोल ऑफ सन)
प्रकाश सूर्य का जीवन व आत्मा है।

Question 4.
Is the light wisdom’s daughter?
(इज़ द लाइट विज़डम्स डॉटर?)
क्या रोशनी (प्रकाश) विवेक की पुत्री है?
Answer:
No, light is not wisdom’s daughter.
(नो, लाईट इज़ नॉट विजडम्स डॉटर।)
नहीं, रोशनी (प्रकाश) विवेक की पुत्री नहीं है।

(B) Answer these questions in three or four sentences.
(निम्न प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
‘Light is the form of knowledge.’ Elaborate.
(‘लाईट इज़ द फॉर्म नॉलेज’ इलैबोरेट।)
‘प्रकाश ज्ञान का स्वरूप है।’ विस्तार से बताइये।
Answer:
When a man sleeps he only sees darkness. He cannot do anything. But when light comes he wakes up. He can do anything. An ignorant person is like a sleeping person. When he gets knowledge, he becomes powerful. So’we can say that light is the form of knowledge

(व्हेन अ मैन स्लीप्स ही ओनली सीज़ डार्कनेस। ही कैन नॉट डू एनीथिंग। बट व्हेन लाईट कम्स ही. वेक्स अप। ही कैन डू एनीथिंग। एन इगनोरेन्ट पर्सन इज़ लाइक अ स्लीपिंग पर्सन। व्हेन ही गेट्स नॉलेज, ही बिकम्स पावरफुल। सो वी कैन से दैट लाईट इज द फॉर्म ऑफ नॉलेज।)

जब कोई व्यक्ति सोता है तो उसे सिर्फ अन्धकार दिखाई देता है। वह कुछ भी करने में सक्षम नहीं होता। परन्तु जब सूर्य का प्रकाश फैलता है तो वह जाग उठता है। तब वह कुछ भी कर सकता है। एक अज्ञानी व्यक्ति भी सोए हुए व्यक्ति की तरह होता है। जब ज्ञान का प्रकाश उसके अज्ञान रूपी अन्धकार को दूर करता है तब वह प्रबुद्ध हो जाता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि ज्ञान प्रकाश का स्वरूप है।

Question 2.
Why does the poet long for the light? Give some references from the poem.
(व्हॉय डज द पोएट लाँग फोर द लाईट? गिव सम रेफरेन्सेस फ्रॉम द पोऍम।)
कवि प्रकाश की इच्छा क्यों करता है? कविता से कुछ सन्दर्भ दीजिए।
Answer:
The poet longs for light because he wants to know from the light, the following things :
(a) When was it born?
(b) Who made it?
(c) What is it?
(d) What is its nature?

“(द पोऍट लॉग्स फॉर लाईट बिकॉज़ ही वॉन्ट्स टू नो फ्रॉम द लाईट, द फॉलोइंग थिंग्स:
(a) व्हेन वॉज़ इट बॉर्न?
(b) हू मेड इट?
(c) व्हॉट इज़ इट?
(a) व्हॉट इज़ इट्स नेचर?)

कवि प्रकाश की कामना इसलिए करता है क्योंकि वह उससे यह जानना चाहता है कि वह कबं पैदा हुआ, उसे किसने बनाया, वह क्या है तथा उसकी प्रकृति क्या है?

Question 3.
The poet has used the word ‘she’. Who has this word been referred to?
(द पोऍट हैज यूज्ड द वर्ड ‘शी’। हू हैज दिस वर्ड वीन रैफर्ड टू?)
कवि ने स्त्री सूचक ‘वह’ शब्द का प्रयोग किया है। इस शब्द.का इशारा किसकी ओर है?
Answer:
‘She’ refers to mother nature.
(‘शी’ रैफर्स टू मदर नेचर।)
उसका इशारा प्रकृति माता की ओर है।

Question 4.
Find out the lines of the poem where the poet praises the light.
(फाइन्ड आउट द लाइन्स ऑफ द पोऍम व्हेअर द पोऍट प्रेज़ेज़ द लाईट।)
वे पंक्तियाँ ढूँढ निकालिए जिनमें कवि ने उजाले की प्रशंसा की है।
Answer:
The lines are-
The sun is the body, you are its life-spark.
Perhaps you are wisdom’s clarity.
Perhaps you are the form of knowledge.

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Listening Time

Complete the following stanza.
(निम्नलिखित पद्यांश को पूरा करिए।)
Answer:
O Light, who are you?
Daughter of the sun?
No, you are the sun’s life, his soul,
We praise you in the sun.
The sun is the body, you are its life-spark.

Speaking Time

(1) The sun is the source of light. Think for other sources of light and talk about those sources.
(प्रकाश के स्रोतों के बारे में लिखिए।)
Answer:

  1. Fire is the source of light.
  2. Electricity is the source of light.
  3. Moon is the source of light at night.
  4. Candle is the source of light.
  5. Stars are the source of light.

(2) In the morning when light spreads, darkness disappears. Discuss in groups and describe what happens when light fades?
(जब रोशनी कम हो जाती है तो क्या होता है वर्णन कीजिए)
Answer:

  1. When light fades sun disappears.
  2. When light fades it becomes dark.
  3. When light fades moon and stars appear.
  4. When light fades sky. becomes black.

Writing Time

Write the poem “O Light!” in prose form.
(कविता ‘ओ उजाले’ गद्यांश के रूप में लिखिए।)
Answer:
Students should do themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

Things to do

(1) Make a list of the different planets of the solar system and draw a diagram in proper order.
(विभिन्न ग्रहों के नाम लिखो व चित्र बनाओ।)
Answer:
Different planets of the solar system are:

  1. Mercury
  2. Venus
  3. Earth
  4. Mars
  5. Jupiter
  6. Saturn
  7. Uranus
  8. Neptune.

Students can draw the diagram of the solar system themselves placing the planets in the above order.

(2) Light is the source of energy. Write at-least five different uses of light in our day to day life.
(प्रकाश के पाँच उपयोग लिखिए।)
Answer:
Uses of light:

  1. Light makes things visible.
  2. Light is the source of heat.
  3. Light kills harmful germs in the atmosphere.
  4. Light in the form of solar energy can be used to cook food.
  5. Solar energy is used to obtain electricity through solar cells.

O Light! Central Idea of the Poem

The poet says that light is the soul of the sun. Later on he calls this light as wisdom and knowledge. The poet says that the nature is the enchanter, for it has created light. In the end the poet praises the light to prosper and bring the light of knowledge in this world.

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O Light! Difficult Word Meanings

soul (सोल)-spirit of a person आत्मा; Praise (प्रेज़)-to express admiration प्रशंसा करना; life spark (लाइफ स्पाक)-life giving light जीवनदायी प्रकाश; clarity (क्लैरिटी)-the quality of being expressed clearly स्पष्टता; merge (मज)-combine मिलना; she (शी)-mother nature (symbolical use) प्रकृति; bewitcher (बिवियर)-one who puts a magical spell (जादू करने वाला); prosper (प्रॉस्पर)-to be successful, समृद्ध होना।

O Light! Summary, Pronunciation & Translation

[1] O Light, who are you?
Daughter of the sun?
No, you are the sun’s life, his soul
We praise you in the sun.
The sun is the body, you are its life-spark
When were you born, O Light?
Who made you?

(ओ लाइट हू आर यू?
डॉटर आफ द सन?
नो, यू आर द सन्स लाइफ, हिज़ सोल!
वी प्रेज़ यू इन द सन द सन
इज़ द बॉडी, यू आर इट्स लाइफ स्पार्क
व्हेन वर यू बॉर्न, ओ लाइट?
हू मेड यू?)

हिन्दी अनुवाद :
हे रोशनी, तुम कौन हो?
सूर्य की पुत्री?
नहीं, तुम सूर्य का जीवन हो, उसकी आत्मा हो,
हम तुम्हारी सूर्य में स्तुति करते हैं।
सूर्य शरीर है, तुम उसके जीवन की चिंगारी हो
तुम कब पैदा हुईं, हे रोशनी?
तुम्हें किसने बनाया?

[2] O Light, what are you?
What is you nature?
Are you wisdom’s daughter?
But Wisdom sleeps.

(ओ लाइट, व्हॉट आर यू?
व्हॉट इज यूअर नेचर?
आर यू बिस्डम्स डॉटर?
बट विस्डम स्लीप्स।)

हिन्दी अनुवाद :
हे रोशनी, तुम क्या हो?
तुम्हारा स्वभाव कैसा है?
क्या तुम बुद्धि की पुत्री हो?
किन्तु बुद्धि तो सोई रहती है।

[3] Perhaps you are its clarity
Perhaps you are the form of knowledge.
O Light, for how long have you
befriended the sky?
And wherefore this love of it?
How do you completely merge in it?

(परहेप्स यू आर इट्स क्लैरिटी
परहेप्स यू आर द फॉर्म आफ नॉलेज
ओ लाइट फोर हाउ लांग हेव यू
बिफ्रेन्डड द स्काय?
एण्ड व्हेअर फोर दिस लव आफ इट?
हाउ डू यू कम्प्लीटली मर्ज इन इट?)

हिन्दी अनुवाद :
शायद तुम उसकी स्पष्टता हो।
शायद तुम ज्ञान का प्रकट रूप हो।
हे रोशनी, तुमने कब से
आकाश को अपना मित्र बनाये हुए हो?
किस तरह तुम उसमें पूर्णतः समा जाती हो?

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[4] She who made you all is a magician
She is enchanter, the bewitcher
We praise her
Prosper O Light. – Subramania Bharti

(शी हू मेड यू ऑल इज़ ए मेजिशियन
शी इज़ इन्चान्टर, द बिविचर
वी प्रेज़ हर
प्रॉस्पर ओ लाइट)

हिन्दी अनुवाद :
वह जिसने तुम्हें बनाया पूरी तरह जादूगरनी है
वह मायावी मोहिनी शक्ति है।
हम उसकी स्तुति करते हैं
हे रोशनी, तुम खूब फलो फूलो।

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