MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 1 भारत में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना और विस्तार

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MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 1 भारत में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना और विस्तार

MP Board Class 8th Social Science Chapter 1 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए
(1) इलाहाबाद की सन्धि निम्न में से किसके साथ की गई ?
(क) मीर कासिम
(ख) नवाब नजमुद्दौला
(ग) शुजाउद्दौला
(घ) बहादुरशाह जफर।
उत्तर:
(ग) शुजाउद्दौला

(2) निम्नलिखित में से कौन-सी व्यापारिक कम्पनी भारत नहीं आई थी ?
(क) पुर्तगाली
(ख) डच
(ग) फ्रांसीसी
(घ) अमेरिकन।
उत्तर:
(घ) अमेरिकन

(3) डचों द्वारा भारत में बनाई गई प्रमुख फैक्ट्री कहाँ थी?
(क) गोवा
(ख) दमन
(ग) पुलीकट
(घ) दीव।
उत्तर:
(ग) पुलीकट

(4) 1615 ई. में सर टॉमस रो को राजदूत बनाकर कहाँ भेजा गया था ?
(क) इंग्लैण्ड
(ख) अमेरिका
(ग) भारत
(घ) फ्रांस।
उत्तर:
(ग) भारत

(5) प्रथम दो कर्नाटक युद्धों के समय भारत में फ्रांसीसी गवर्नर कौन था ?
(क) डूप्ले
(ख) क्लाइव
(ग) कार्नवालिस
(घ) कोल्बार्ट।
उत्तर:
(क) डूप्ले

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) भारत में सर्वप्रथम ………. यूरोपीय जाति का आगमन हुआ।
(2) 1498 ई. में भारत आने वाला यूरोपीय था।
(3) ………..”का गोवा, दमन और दीव पर अधिकार था।
(4) ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना ……….. के लिए की गई।
(5) प्लासी के युद्ध के समय बंगाल का नवाब ………..था।
(6) वेलेजली की सहायक सन्धि द्वारा …………. और हैदराबाद को कम्पनी के अधीन लाया गया।
(7) लॉर्ड डलहौजी ने …………… नीति का अनुसरण किया।
उत्तर:

  1. पुर्तगाली
  2. वास्कोडिगामा
  3. पुर्तगालियों
  4. व्यापार
  5. सिराजुद्दौला
  6. मैसूर
  7. फूट डालो और राज्य करो।

MP Board Class 8th Social Science Chapter 1 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) भारत में यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों का आगमन क्यों हुआ?
उत्तर:
भारत में यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों का आगमन भारत के साथ व्यापार करने के लिए हुआ।

(2) पुर्तगाल की व्यापारिक कम्पनी ने भारत में कहाँ-कहाँ अपने व्यापारिक केन्द्र स्थापित किए ?
उत्तर:
पुर्तगाल की व्यापारिक कम्पनी ने भारत में कालीकट, गोवा, दमन, दीव एवं हुगली के किनारे अपने व्यापारिक केन्द्र स्थापित किये।

(3) भारत में डचों ने किस नाम की स्वर्ण मुदा चलाई थी?
उत्तर:
भारत में डचों ने ‘पगोडा’ नाम की स्वर्ण मुद्रा चलाई। थी।

(4) सहायक सन्धि की नीति किस गवर्नर जनरल द्वारा। अपनाई गई?
उत्तर:
सहायक सन्धिकी नीति लॉर्ड वेलेजली गवर्नर। जनरल द्वारा अपनाई गई।

(5) भारत में अंग्रेजों की विजय के दो कारण लिखिए।
उत्तर:

  • उस समय भारत में राजनीतिक अराजकता, राजनीतिक बिखराव व केन्द्र का कमजोर होना।
  • अंग्रेजों पर हल्के और छोटे हथियार तथा प्रशिक्षित सेना का होना।

MP Board Class 8th Social Science Chapter 1  लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) डच कम्पनी के द्वारा भारत में किए गए व्यापारिक कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
डचों ने गुजरात में कोरोमण्डल समुद्र तट, बंगाल, ! बिहार तथा उड़ीसा (ओडिशा) में व्यापारिक कोठियाँ स्थापित की। इन्होंने अपना पहला कारखाना मछलीपट्टम में खोला। डचों ने भारत के साथ मुख्यतः मसालों, नील, कच्चे रेशम, शीशा, चावल एवं अफीम का व्यापार किया। डचों की प्रमुख फैक्ट्री पुलीकट में थी, जहाँ वे स्वर्ण मुद्रा ‘पगोडा’ को ढालते थे।

(2) यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों के मध्य प्रतिस्पर्धा के क्या कारण थे ?
उत्तर:
यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों के मध्य प्रतिस्पर्धा के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे –

  • अधिक मुनाफा अर्जित करना और राजनीतिक प्रभुत्व में वृद्धि करने की नीति।
  • एक-दूसरे को मात देने के लिए कम से कम मूल्य पर भारतीय माल क्रय करने का प्रयास करना।
  • बाजार पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने की इच्छा।
  • व्यापार पर नियन्त्रण स्थापित करने के लिए राजनीतिक सत्ता स्थापित करने का सपना देखना। .

(3) सहायक सन्धि की शर्ते लिखिए।
उत्तर:
सहायक सन्धि की शर्ते इस प्रकार थीं –

  • सहायक सन्धि अपनाने वाले भारतीय राज्य को अपनी सुरक्षा के लिए ब्रिटिश सेना की एक टुकड़ी को अपने राज्य की सीमाओं में रखना होता था।
  • ब्रिटिश सेना के खर्चे के लिए सन्धि स्वीकार करने वाले राज्य को एक निश्चित धनराशि अथवा अपने राज्य का एक भू-भाग कम्पनी को देना होता था।
  • भारतीय शासक को अपने दरबार में एक अंग्रेज अफसर को भी रखना होता था, जो भारतीय शासक के कार्यों में हस्तक्षेप किया करता था।

MP Board Class 8th Social Science Chapter 1  दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 5.
(1) कर्नाटक युद्धों के कारण लिखिए।
उत्तर:
कर्नाटक युद्धों के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

  • ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी और फ्रांसीसी कम्पनी में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा थी।
  • दोनों ही अधिक बाजार तथा सुविधाएँ पाने के लिए व्यापार पर अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहती थीं।
  • फ्रांसीसी कम्पनी का प्रधान कार्यालय दक्षिण-पूर्वी समुद्र तट पर पाण्डिचेरी में था, जबकि ब्रिटिश कम्पनी का प्रमुख केन्द्र, फोर्ट सेण्ट जॉर्ज (मद्रास) में था, जो कि पाण्डिचेरी से अधिक दूर नहीं था।
  • दोनों ही कम्पनियाँ अति महत्वाकांक्षी थीं।
  • दोनों का ही कार्यक्षेत्र (पश्चिमी और पूर्वी भारत) लगभग एक ही था।

(2) प्लासी युद्ध के कारण लिखिए।
उत्तर:
प्लासी युद्ध के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे –

  • अंग्रेज समस्त बंगाल पर अपना अधिकार करना चाहते थे यद्यपि अंग्रेजों को पहले से ही काफी सुविधाएँ प्राप्त थीं।
  • क्लाइव ने फ्रांसीसी बस्ती चन्द्रनगर पर अपना अधिकार कर लिया तथा वहाँ का नवाब सिराजुद्दौला इसके खिलाफ कुछ न कर सका।
  • क्लाइव ने नवाब के दुश्मनों को अपना संरक्षण दे रखा था।
  • क्लाइव ने सेनापति मीर जाफर और राय दुर्लभ आदि के साथ एक गुप्त समझौता कर नवाब को गद्दी से हटाने के लिए एक षड्यन्त्र रचा था।
  • क्लाइव सिराजुद्दौला को गद्दी से हटाकर अपने समर्थक मीरजाफर को बंगाल का नवाब बनाना चाहता था।
  • युद्ध करने के लिए क्लाइव ने नवाब सिराजुद्दौला पर अलीनगर की सन्धि भंग करने का आरोप लगाया।

(3) इलाहाबाद की सन्धि की शर्ते लिखिए।
उत्तर:
मुगल सम्राट शाह आलम, नवाब मीर कासिम व शुजाउद्दौला अंग्रेजों से युद्ध में पराजित हो गये। अतः 1765 ई. में शुजाउद्दौला तथा शाह आलम को रॉबर्ट क्लाइव से सन्धि करनी पड़ी। यही सन्धि इलाहाबाद की सन्धि कहलाती है।
इसकी शर्ते इस प्रकार थीं –

  • अवध के नवाब से ₹ 50 लाख युद्ध के हर्जाने के रूप में लेकर अंग्रेज उसे अवध का राज्य लौटा देंगे।
  • कड़ा और इलाहाबाद तथा उसके आस-पास का क्षेत्र अवध से अलग कर मुगल बादशाह शाह आलम को दिया जायेगा।
  • चुनार का दुर्ग अंग्रेजों को मिलेगा।
  • अंग्रेजों को अवध की सीमाओं के भीतर बिना कर दिये व्यापार की सुविधा मिलेगी।

(4) लॉर्ड डलहौजी की विलय नीति को समझाइए।
उत्तर:
भारतीय राज्यों को प्रत्यक्ष रूप से कम्पनी के अधीन करने के लिए गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी ने विलय नीति (हड़प नीति) का अनुसरण किया। सबसे पहले उसने भारतीय राजाओं द्वारा दत्तक पुत्र लेने की प्रथा पर रोक लगा दी जो शासक बिना पुत्र के मर गये, उनके राज्यों को ब्रिटिश साम्राज्य का अंग बना लिया गया। ऐसे राज्यों में झाँसी, नागपुर और संतारा प्रमुख थे। मैसूर और पंजाब के विस्तृत राज्यों को युद्ध द्वारा ब्रिटिश शासन का अंग बना लिया गया। 1856 ई. में अवध के नवाब पर कुशासन का आरोप लगाकर अवध को ब्रिटिश शासन का अंग बना लिया गया।

(5) व्यापारिक एवं राजनैतिक प्रतिस्पर्धा में अंग्रेजों की सफलता के कारण लिखिए।
उत्तर:
अंग्रेजों की सहायता के प्रमुख कारण इस प्रकार थे –

  • भारत में अनेक छोटे-छोटे राज्य थे, जिनकी सैनिक शक्ति भी अधिक न थी।
  • उस समय के शासक विलासिता और अहंकार का जीवन जी रहे थे तथा उनकी सेनाएँ कमजोर, पथ भ्रष्ट और अनुशासनहीन थीं।
  • नाममात्र के मुगल सम्राट शक्तिहीन, वैभवहीन, कमजोर और साधनहीन थे।
  • उस समय के अराजकता के माहौल में मराठे भी (जो एक शक्तिशाली संगठन था) आपसी संघर्ष में उलझे थे।
  • अंग्रेजों के पास हल्के और छोटे हथियार तथा प्रशिक्षित एवं अनुशासित सेनाएँ थीं।
  • सर्वोपरि उनकी फूट डालो और राज्य करो की नीति सफल रही।

(6) अंग्रेजों और मराठों के बीच हुए विभिन्न युद्धों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अंग्रेजों और मराठों के बीच मुख्यतः तीन युद्ध हुए। जिनका वर्णन निम्न प्रकार है –
1. अंग्रेजों – मराठों के बीच पहला युद्ध सन् 1775 ई. में शुरू हुआ। इस युद्ध में मराठा सरदार एक साथ होने के कारण युद्ध अनिर्णित रहा और आने वाले लगभग 20 वर्ष तक दोनों में ही शान्ति बनी रही।

2. दूसरा अंग्रेज – मराठा युद्ध लॉर्ड वेलेजली के समय में लड़ा गया। शक्तिशाली मराठा सरदारों, भोंसले तथा सिंधिया ने मराठा राज्य की स्वतन्त्रता बनाये रखने के लिये अंग्रेजों के विरुद्ध सन् 1803 में युद्ध छेड़ दिया। एक होकर महत्वपूर्ण युद्ध लड़े गये किन्तु अंग्रेजी सेना के सामने वे टिक न सके।

3. तीसरा और अन्तिम अंग्रेज – मराठा युद्ध सन् 17171718 ई. में लॉर्ड हेस्टिंग्ज के शासन काल में हुआ। पेशवा बाजीराव द्वितीय ने अंग्रेजों के निरन्तर हस्तक्षेप से क्रोधित होकर युद्ध शुरू कर दिया। भोंसले तथा होल्कर ने भी युद्ध की घोषणा कर दी। भिन्न-भिन्न लड़ाइयों में अंग्रेजों की सेना ने भोंसले, होल्कर और पेशवा को पराजित किया। इस प्रकार, मराठा शक्ति को नष्ट करके अंग्रेज भारत के प्रमुख सत्ताधारी बन गए।

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 3 Kingdoms of the North India

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 3 Kingdoms of the North India

MP Board Class 7th Social Science Chapter 3 Text Book Questions

Choose the correct alternatives from the following:

Question 1.
The Palas belonged to
(a) Kanauj
(b) Jodhpur
(c) Gwalior
(d) Bengal
Answer:
(d) Bengal

Question 2.
King Mihir Bhoj was the most powerful ruler of
(a) Pala dynasty
(b) Guijar Pratihara dynasty
(c) Rashtrakuta dynasty
(d) Rajput dynasty
Answer:
(b) Guijar Pratihara dynasty

Fill in the blanks.

  1. The famous temples of Khajuraho was built by ………….. rulers. (Pala, Chandelas, Guijar Pratiharas).
  2. The city of Delhi was founded by the king of …………. dynasty. (Tomar, Pala, Guijar Pratiharas).
  3. The main center of learning during 8th – 12th century was ………….. (Vikramshila, Delhi, Ajmer).

Answers:

  1. Chandela rulers
  2. Tomar
  3. Vikramshila.

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Match the following:

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 3 Kingdoms of the North India-1
Answer:
1. (c) founder of Guijar Pratihara dynasty
2. (a) Prithvirajraso
3. (b) Rajtarangini
4. (e) Rugvinishchaya
5. (d) Jain Statue of Gomteshwara

MP Board Class 7th Social Science Chapter 3 Short Answer Type Questions

Question 1.
Name the three dynasties which were in constant conflict for control over Kanauj.
Answer:
The Pratiharas, the Palas and the Rashtrakutas of the South were in constant conflict for control over Kanauj.

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Question 2.
What were the main reasons for Mahmud Ghaznavi’s invasion of India?
Answer:
The main reasons for Mahmud Ghaznavi’s invasion of India were that he wanted to secure and plunder the unlimited wealth of India and that he was extremely ambitious. To satisfy his ambition he invaded India.

Question 3.
Give any four examples of the excellent architecture of this period.
Answer:
Four examples of the excellent architecture of this period are:

  • The famous temples of Orissa, especially those of Bhubaneswar, Konark and Puri.
  • The Khajuraho temples of Madhya Pradesh.
  • The Kendariya Mahadeva temple.
  • The Jain temples at Mount Abu in Rajasthan.

MP Board Class 7th Social Science Chapter 3 Long Answer Type Questions

Question 1.
Describe the contributions of the famous ruler Rajabhojdev of the Parmara dynasty.
Answer:
Rajabhojdev was a powerful king belonging to the Parmara dynasty. He was a great conqueror, a writer par excellence, a poet and an extraordinary scholar. He himself had written many books. He had many scholars and poets in his court He built many palaces, temples and lakes. He built the famous Bhojpur temple in Bhojpur 35 km. Southeast of Bhopal.

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Map Work:
1. Show the following on the outline map of India:

  1. Tomars, Chouhans, Pratiharas, Chandellas, Palas, utkal, Rashtrakutas, Solankis, Kamroop, Pawars.
  2. Nalanda, Kanauj, Delhi, Indore, Malkhed.

Answer:

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 3 Kingdoms of the North India

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 9 स्वतन्त्रता आन्दोलन से सम्बन्धित घटनाएँ

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 9 स्वतन्त्रता आन्दोलन से सम्बन्धित घटनाएँ

MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
बंगाल विभाजन का मूल उद्देश्य था (2011)
(i) बंगाल में प्रशासनिक व्यवस्था लागू करना
(ii) राष्ट्रवादी भावनाओं को दबाना
(iii) राष्ट्रवादी भावनाओं को बढ़ाना
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ii) राष्ट्रवादी भावनाओं को दबाना

प्रश्न 2.
कांग्रेस का विभाजन हुआ (2011)
(i) नागपुर अधिवेशन में
(ii) सूरत अधिवेशन में
(iii) लाहौर अधिवेशन में
(iv) बम्बई अधिवेशन में
उत्तर:
(ii) सूरत अधिवेशन में

प्रश्न 3.
गांधीजी ने ‘खिलाफत आन्दोलन’ का समर्थन क्यों किया ?
(i) क्योंकि खलीफा भारतीय स्वतन्त्रता संघर्ष का समर्थक था
(ii) क्योंकि गाँधीजी अंग्रेजों के विरुद्ध मुसलमानों का समर्थन चाहते थे
(iii) क्योंकि खलीफा भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के प्रेमी थे
(iv) क्योंकि टर्की ने भारतीय स्वतन्त्रता का समर्थन किया।
उत्तर:
(ii) क्योंकि गाँधीजी अंग्रेजों के विरुद्ध मुसलमानों का समर्थन चाहते थे

प्रश्न 4.
रॉलेट एक्ट का उद्देश्य था (2011)
(i) सभी हड़तालों को गैर-कानूनी घोषित करना
(ii) आन्दोलनकारियों का दमन करना
(iii) सभी के मध्य समानता स्थापित करना
(iv) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(ii) आन्दोलनकारियों का दमन करना

प्रश्न 5.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कार्यक्रम में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं है ?
(i) देशवासियों को नमक बनाना चाहिए
(ii) विदेशी वस्त्रों की होली जलाई जाए
(iii) हिंसात्मक साधनों से कानूनों का उल्लंघन किया जाए
(iv) शराब की दुकानों पर ध्यान दिया जाए।
उत्तर:
(iii) हिंसात्मक साधनों से कानूनों का उल्लंघन किया जाए

प्रश्न 6.
फारवर्ड ब्लॉक की स्थापना किसने की ? (2009,11)
(i) भगतसिंह
(ii) रास बिहारी बोस
(iii) चन्द्रशेखर आजाद
(iv) सुभाष चन्द्र बोस।
उत्तर:
(iv) सुभाष चन्द्र बोस।

प्रश्न 7.
जुलाई 1947 में ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम पारित किया जिसके अनुसार दो निम्न स्वतन्त्र देशों का निर्माण हुआ (2011, 12)
(i) भारत-बांग्लादेश
(ii) भारत-पाकिस्तान
(iii) भारत-श्रीलंका
(iv) भारत-नेपाल।
उत्तर:
(ii) भारत-पाकिस्तान

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. 1905 में बंगाल प्रान्त में बंगाल, ………………., उड़ीसा सम्मिलित थे।
  2. ‘करो या मरो’ का नारा ………………. आन्दोलन में दिया गया।
  3. 1928 में क्रान्तिकारियों ने ………………. का गठन किया।
  4. भारत की स्वाधीनता के समय ………………. भारत के वाइसराय थे। (2009, 10)
  5. ………………. के नेतृत्व में भारत की रियासतों के विलीनीकरण का कार्य सम्पन्न हुआ।

उत्तर:

  1. बिहार, असम
  2. भारत छोड़ो
  3. हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातान्त्रिक सेना
  4. माउण्टबेटन
  5. सरदार बल्लभभाई पटेल।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बंगाल विभाजन कब और क्यों किया गया था ?
उत्तर:
बंगाल विभाजन 16 अक्टूबर, 1905 को प्रभावी रूप से लागू किया गया। लार्ड कर्जन का विचार था कि प्रशासनिक दृष्टि से एक लैफ्टीनेंट गवर्नर द्वारा इतने विशाल प्रान्त पर कुशलतापूर्वक शासन करना सम्भव ‘नहीं है, अतः कर्जन ने बंगाल को दो भागों में विभाजित करने की योजना बनाई। परन्तु बंगाल का यह विभाजन प्रशासनिक कारणों से नहीं बल्कि राजनैतिक कारणों से किया गया था। लार्ड कर्जन राष्ट्रीय चेतना के केन्द्र बंगाल पर आघात कर इसे कमजोर बनाना चाहता था। लार्ड कर्जन का एक उद्देश्य हिन्दू और मुसलमानों की संगठित शक्ति को तोड़कर उसे बाँटना था।

प्रश्न 2.
असहयोग आन्दोलन अचानक क्यों स्थगित हो गया ?
उत्तर:
असहयोग आन्दोलन का स्थगन-5 फरवरी, सन् 1922 को गोरखपुर के निकट चौरी-चौरा गाँव में पुलिस ने भीड़ पर गोली चलायी। जब उसका गोला-बारूद समाप्त हो गया तो पुलिसजनों ने अपने को थाने में बन्द कर लिया। भीड़ ने थाने में आग लगा दी, जिससे 22 सिपाही जलकर मर गये। गांधीजी अहिंसात्मक आन्दोलन में विश्वास करते थे। अतः इस हिंसात्मक घटना से उन्हें आघात लगा तो उन्होंने असहयोग आन्दोलन को स्थगित कर दिया।

प्रश्न 3.
खिलाफत और असहयोग आन्दोलन के क्या लक्ष्य थे ?
उत्तर:
खिलाफत आन्दोलन – प्रथम विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद टर्की के साथ जो अन्यायपूर्ण व्यवहार किया गया था, उस पर वहाँ खिलाफत आन्दोलन प्रारम्भ हुआ। इसके समर्थन में भारत के अली भाइयों (मोहम्मद अली और शौकत अली) ने खिलाफत आन्दोलन आरम्भ किया।

असहयोग आन्दोलन – कांग्रेस ने 1920 में गांधीजी के नेतृत्व में असहयोग का नया कार्यक्रम अपनाया। जलियाँवाला बाग का हत्याकाण्ड, रॉलेट एक्ट का विरोध, ब्रिटिश सरकार की वादा खिलाफी का विरोध और स्वराज की प्राप्ति, ये असहयोग आन्दोलन के उद्देश्य थे।

प्रश्न 4.
आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर आक्रमण कर किन स्थानों को अंग्रेजों से मुक्त कराया ?
उत्तर:
सुभाषचन्द्र बोस ने भारत-बर्मा सीमा पर युद्ध आरम्भ किया। फरवरी 1944 में आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर आक्रमण कर रामू, कोहिया, पलेम, तिद्विम आदि को अंग्रजों से मुक्त कराया। अप्रैल 1944 में आजाद हिन्द फौज ने इम्फाल को घेर लिया परन्तु वर्षा के आधिक्य और रसद की कमी के कारण उन्हें लौटना पड़ा।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बंगाल विभाजन के पीछे ब्रिटिश शासन के क्या उद्देश्य थे ?
अथवा
बंगाल विभाजन का क्या उद्देश्य था ? लिखिए। (2009)
उत्तर:
बंगाल विभाजन के पीछे अंग्रेजों के निम्नलिखित उद्देश्य थे –

  1. ब्रिटिश सरकार के अनुसार बंगाल विभाजन का प्रमुख उद्देश्य बंगाल के प्रशासन को सुधारना था। लार्ड कर्जन के मत में बंगाल एक विशाल प्रान्त था, अतः समुचित प्रशासनिक संचालन के लिए उसका विभाजन करना आवश्यक था।
  2. बंगाल विभाजन का अन्य उद्देश्य बंगाल की संगठित राजनीतिक भावना को समाप्त करना तथा राष्ट्रीयता के वेग को कम करना था।
  3. इतिहासकारों के अनुसार बंगाल विभाजन का प्रमुख उद्देश्य जनता में फूट डालना था। पूर्वी बंगाल में मुसलमानों का बहुमत तथा पश्चिमी भाग में हिन्दुओं का बहुमत रखना जिससे हिन्दू-मुस्लिम एकता समाप्त हो जाए।

प्रश्न 2.
कांग्रेस का विभाजन भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की दृष्टि से विनाशकारी सिद्ध हुआ। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
1907 ई. में सूरत में कांग्रेस के अधिवेशन में कांग्रेस के उग्रराष्ट्रवादियों तथा उदारवादियों के मध्य खुलकर संघर्ष हुआ। उग्रराष्ट्रवादियों ने लाला लाजपतराय को अध्यक्ष पद पर खड़ा किया जिसका उदारवादियों ने विरोध किया। उदारवादी डॉ. रासबिहारी को अध्यक्ष बनाना चाहते थे।

सूरत अधिवेशन की घटना ने कांग्रेस के उदार और उग्रराष्ट्रवादी नेताओं को सोचने पर विवश किया किन्तु दोनों पक्षों के कुछ नेता मतभेदों को समाप्त करने पर एकमत नहीं हुए जिसके कारण अन्ततः कांग्रेस में विभाजन हो गया, जिसे ‘सूरत की फूट’ कहा जाता है। कांग्रेस का यह विभाजन भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की दृष्टि से विनाशकारी सिद्ध हुआ। ब्रिटिश सरकार ने इसे अपनी जीत के रूप में लिया। वस्तुतः सूरत अधिवेशन से स्वाधीनता का नया अध्याय आरम्भ होता है।

प्रश्न 3.
स्वतन्त्रता संग्राम के इतिहास में 1929 के लाहौर अधिवेशन का क्या महत्त्व है ? (2014)
उत्तर:
कांग्रेस का 44वाँ अधिवेशन 1929 में लाहौर में हुआ। इस अधिवेशन के अध्यक्ष पं. जवाहर लाल नेहरू थे। अपने इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य की माँग का प्रस्ताव पास किया। स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू करने का निर्णय भी लिया गया। यह भी निर्णय लिया गया कि हर वर्ष 26 जनवरी का दिन सम्पूर्ण भारत में स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाया जाए। इस प्रकार 26 जनवरी, 1930 को स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाया गया। इसके मनाये जाने से जन-साधारण में एक बड़ा जोश पैदा हो गया और पूर्ण स्वराज्य का सन्देश घर-घर पहुँच गया। इसी कारण लाहौर अधिवेशन का भारतीय इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान है।

प्रश्न 4.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाए जाने के क्या कारण थे? (2009, 10, 14, 15, 18)
उत्तर:
दिसम्बर 1929 के लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में कांग्रेस कार्यसमिति को सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ करने की स्वीकृति दी गई थी। वायसराय लार्ड इरविन ने लाहौर अधिवेशन के पूर्ण स्वाधीनता प्रस्ताव को मानने से इन्कार कर दिया था परन्तु गांधीजी अभी भी समझौते की आशा रखते थे। अतः उन्होंने 30 जनवरी, 1930 को लार्ड इरविन के समक्ष 11 माँगें प्रस्तुत की। गांधीजी ने यह भी घोषित किया कि माँगें स्वीकार न होने की स्थिति में सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ किया जायेगा।

गांधीजी चाहते थे कि सरकार विनिमय की दर घटाए, भू-स्वराज कम करे, पूर्ण नशाबन्दी लागू हो, बन्दूकों को रखने का लाइसेंस दिया जाये, नमक पर कर समाप्त हो, हिंसा से दूर रहने वाले राजनीतिक बन्दी छोड़े जाएँ, गुप्तचर विभाग पर नियन्त्रण स्थापित हो, सैनिक व्यय में पचास प्रतिशत कमी हो, कपड़ों का आयात कम हो आदि। वायसराय ने इन माँगों को अस्वीकार कर दिया। अत: गांधीजी ने योजनानुसार सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ किया।

प्रश्न 5.
गांधीजी के आरम्भिक आन्दोलनों की तुलना में भारत छोड़ो आन्दोलन किस प्रकार भिन्न है ? स्पष्ट कीजिए। (2009)
उत्तर:
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 8 अगस्त, 1942 को ‘भारत छोड़ो’ का प्रस्ताव मुम्बई में पारित किया। गांधीजी ने इस अवसर पर कहा कि “प्रत्येक भारतवासी को चाहिए कि वह अपने आपको स्वाधीन मनुष्य समझे। उसे स्वाधीनता की यथार्थतापूर्ण प्राप्ति या उसके हेतु किए गए प्रयत्न में मर मिटने को तत्पर रहना चाहिए।”

महाजन दम्पत्ति के अनुसार, “1942 का राष्ट्रीय आन्दोलन 1921 और 1930 के आन्दोलनों से अनेक बातों में भिन्न तथा विशेष था। पहले आन्दोलन इसलिए किये गये थे, ताकि भारत के लोगों को ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध अन्तिम संग्राम के लिए तैयार किया जाए। उनका ध्येय देश में जागृति उत्पन्न करना था। वे लोग जो शताब्दियों से विदेशियों के नीचे पिस रहे थे उनके हृदय से भय दूर करना था और देश-प्रेम को भरना था। उनके सम्मुख स्वराज्य की स्थापना का ध्येय तो था परन्तु बहुत दूर था। 1942 के आन्दोलन करने वालों का यह निश्चय था कि यह आन्दोलन आजादी के लिए अन्तिम संग्राम है और इसलिए वे अपने ध्येय की पूर्ति के लिए सब कुछ बलिदान करने के लिए उद्यत थे।”

प्रश्न 6.
स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान गांधीजी ने किन तरीकों को अपनाने के लिए कहा ?
उत्तर:
स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान गांधीजी ने निम्न तरीकों को अपनाने को कहा –

(1) आन्दोलन में अहिंसा को अपनाना – प्रारम्भ से ही महात्मा गांधी के राजनीतिक विचारों का आधारभूत सिद्धान्त अहिंसा था। उन्होंने यह समझ लिया था कि भारत में शस्त्र की शक्ति अथवा हिंसा द्वारा अंग्रेजी राज्य को नहीं हटाया जा सकता। अत: उन्होंने कांग्रेस के क्रान्तिकारी विचार के कार्यकर्ताओं को समझाया कि वे अपने हिंसा के मार्ग के छोड़कर जनजागृति एवं संगठन को महत्त्व देकर ही संघर्ष करें। गांधीजी अहिंसा को कायरों का नहीं वरन् शक्तिशाली लोगों का हथियार मानते थे। गांधीजी के अनुसार, “अहिंसा एक ऐसा सच्चा हथियार है जिसमें सभी को जीतने की शक्ति होती है।”

(2) आन्दोलन में नैतिक साधनों के प्रयोग पर बल देना – अहिंसा के अतिरिक्त गांधीजी ने सत्य, नैतिकता, न्याय, पवित्रता तथा निर्भयता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, “सत्य तथा अहिंसा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।” उनके मत में आदर्श आन्दोलनकारी वह है जो सत्य में भी निष्ठा रखता है। वे नैतिकता पर भी बल देते थे। उनके अनुसार नैतिकता से ही मनुष्य में आत्मबल का विकास होता है तथा आत्मबल वाला व्यक्ति निहत्था होकर भी बड़ी-से-बड़ी शक्ति को अपने अनुकूल बना सकता है। वे राजनीति तथा नैतिकता को अलग-अलग नहीं मानते थे।

(3) महात्मा गांधी द्वारा चलाये आन्दोलनों के साधन – महात्मा गांधी के आन्दोलन पूर्णतया अहिंसात्मक थे तथा उनके प्रमुख साधन थे-व्यक्तिगत सत्याग्रह, सामूहिक सत्याग्रह, विदेशी माल का बहिष्कार, शराब की दुकानों पर धरना तथा सरकारी नौकरियों का बहिष्कार।

ये विधियाँ अहिंसक तो थीं, पर कुछ कम क्रान्तिकारी न थीं, इनके कारण समाज के सभी वर्गों के लाखों लोग प्रभावित हुए। उनके अन्दर वीरता और आत्मविश्वास की भावना जागी। लाखों लोग निर्भय होकर सरकार का दमन झेलने लगे, जेल जाने लगे तथा लाठी-गोली का सामना करने लगे।

प्रश्न 7.
क्रान्तिकारी आन्दोलन का भारत के इतिहास में महत्त्व स्पष्ट कीजिए। (2010, 17)
उत्तर:
क्रान्तिकारियों ने राष्ट्रीय आन्दोलन को एक नई दिशा प्रदान की। अब ब्रिटिश सरकार के प्रति सहयोग की नीति से हटकर विरोध की नीति अपनाई गई। इसके लिए उन्हें पुलिस की लाठियों का शिकार होना पड़ा और अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी। इससे जन-आन्दोलन भड़क उठा और कई क्रान्तिकारी युवकों ने बदला लेने की कसम खाई। भगतसिंह, खुदीराम बोस, चन्द्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, बटुकेश्वर दत्त, वीर सावरकर जैसे अनेक क्रान्तिकारी युवकों ने ब्रिटिश अफसरों की हत्या करने तथा हथियारों को प्राप्त करने के लिए सरकारी खजाने एवं मालगोदामों को लूटने तक में भी संकोच नहीं किया। इन सबका उद्देश्य था, हर सम्भव प्रयत्न से अंग्रेजों को देश के बाहर खदेड़ना तथा देश को गुलामी की बेड़ियों से छुटकारा दिलाना। भगतसिंह ने फाँसी के तख्ते को चूमा, राम प्रसाद बिस्मिल तथा खुदीराम बोस ने यह कहते हुए हँसते-हँसते फाँसी का फन्दा अपने गले में डाल दिया –

“सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।”

इसी तरह पुलिस के साथ मुठभेड़ में चन्द्रशेखर आजाद इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद हो गये।

इन क्रान्तिकारियों का बलिदान निष्फल नहीं गया। ब्रिटिश शासन डगमगाने लगा और उन्होंने सोच लिया कि भारत की धरती पर रहने के उनके कुछ ही दिन बाकी रह गये हैं।

प्रश्न 8.
कैबिनेट मिशन का क्या उद्देश्य था ? वह उन उद्देश्यों में कहाँ तक सफल रहा ?
उत्तर:
कैबिनेट मिशन – शिमला सम्मेलन की असफलता के बाद इंग्लैण्ड की नयी मजदूर दल की सरकार ने भारत की स्थिति की जानकारी लेने के लिए एक शिष्टमण्डल भारत भेजा। ब्रिटिश संसदीय शिष्टमण्डल ने अपनी रिपोर्ट में भारत में सत्ता को तुरन्त हस्तान्तरित किये जाने की अनुशंसा की। इस स्थिति में ब्रिटिश प्रधानमन्त्री लार्ड एटली ने कैबिनेट मिशन भारत भेजा।

कैबिनेट मिशन ने भारत के भावी स्वरूप को निश्चित करने वाली एक योजना 16 मई, 1946 को प्रस्तुत की। योजना के दो मुख्य भाग थे – अन्तरिम सरकार की स्थापना की तात्कालिक योजना तथा संविधान निर्माण की दीर्घकालीन योजना।

यह सत्य है कि कैबिनेट मिशन योजना में अनेक दोष थे फिर भी यह योजना अब तक प्रस्तुत की गयी योजनाओं से कहीं अधिक सारगर्भित तथा पर्याप्त सीमा तक व्यावहारिक थी। महात्मा गांधी के अनुसार, “यह उन परिस्थितियों में ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रस्तुत की जा सकने वाली सर्वश्रेष्ठ योजना थी।”

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत छोड़ो आन्दोलन का क्या अर्थ है एवं यह कब शुरू हुआ ? भारतीय स्वतन्त्रता के इतिहास में इसके महत्त्व को लिखिए।
अथवा
भारत छोड़ो आन्दोलन कब शुरू हुआ था ? भारतीय स्वतन्त्रता के इतिहास में इसका महत्व लिखिए। (2018)
उत्तर:
भारत छोड़ो आन्दोलन

1942 के वर्ष में देश के राजनीतिक मंच पर एक ऐसा ऐतिहासिक आन्दोलन आरम्भ हुआ, जिसे ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ के नाम से जाना जाता है। यह यथार्थत: जन-आन्दोलन था। यह एक ऐसा अन्त:प्रेरित और स्वेच्छासूचक सामूहिक आन्दोलन था, जिसका जन्म राष्ट्र की स्वाधीनता के लिए स्व-प्रेरणा के फलस्वरूप हुआ था। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 8 अगस्त, 1942 को ‘भारत छोड़ो’ का प्रसिद्ध प्रस्ताव पास किया।

भारत छोड़ो आन्दोलन के अवसर पर महात्मा गांधी ने अपने उत्साहपूर्ण तथा जोशीले भाषण में भारतवासियों को ‘करो या मरो’ का ऐतिहासिक सन्देश दिया। इस सन्देश का आशय था कि स्वतन्त्रता की प्राप्ति के लिए भारतवासियों को अहिंसक ढंग से हर सम्भव उपाय करना चाहिए।

आन्दोलन का प्रारम्भ – भारत छोड़ो प्रस्ताव के पारित होने के दूसरे दिन ही ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी को गिरफ्तार कर लिया। परिणामस्वरूप ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन की आग सारे देश में फैल गयी। . प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं को गिरफ्तार कर लेने के कारण इस आन्दोलन ने हिंसात्मक रूप ले लिया। जगह-जगह पर उग्र प्रदर्शन हुए। नगरों तथा गाँवों में विशाल जुलूस निकाले गये। स्थान-स्थान पर रेलवे स्टेशन, डाकखाने, तारघर तथा थानों को जला दिया गया।

बलिया, सतारा, बंगात तथा बिहार के कुछ स्थानों पर तो कुछ काल के लिए ब्रिटिश शासन का नामोनिशान ही मिटा दिया गया। इन स्थानों पर आन्दोलनकारियों ने स्वतन्त्र शासन की स्थापना कर दी, परन्तु ब्रिटिश सरकार ने भी कठोरता से अपना दमन चक्र चलाया। यह आन्दोलन 1945 तक किसी-न-किसी रूप में चलता रहा। यह सत्य है कि ब्रिटिश सरकार ने इस आन्दोलन का दमन कर दिया था, परन्तु इस जनजागृति ने ऐसे वातावरण का निर्माण किया कि कुछ वर्षों के बाद ही ब्रिटिश सरकार को भारत छोड़कर जाना पड़ा।

भारत छोड़ो आन्दोलन का महत्त्व – भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन के इतिहास में भारत छोड़ो आन्दोलन’ का अपना विशेष महत्त्व है। यह सत्य है कि जिस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आन्दोलन को प्रारम्भ किया गया था, वह तुरन्त प्राप्त नहीं हो सका, परन्तु इसके प्रभाव व्यापक रहे। इस आन्दोलन के कारण अमेरिका, चीन आदि विशाल राष्ट्रों को भारत के जन असन्तोष का ध्यान हुआ जिससे उन्होंने ब्रिटेन पर दबाव डाला कि वह भारत को स्वतन्त्र कर दे। साथ ही ब्रिटेन को भी यह ज्ञात हो गया कि वह अधिक दिनों तक भारत को पराधीन नहीं रख सकता। अन्य शब्दों में, इस आन्दोलन ने भारत की स्वतन्त्रता की पृष्ठभूमि तैयार कर दी थी।

प्रश्न 2.
क्रान्तिकारियों के बारे में आप क्या जानते हैं ? ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उन्होंने कौनसे तरीके अपनाए ? (2011, 13)
उत्तर:
ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रियावादी नीति के फलस्वरूप 19वीं शताब्दी के अन्तिम दशक में भारत में क्रान्तिकारी राष्ट्रीयता का विकास हुआ। बंगाल विभाजन के बाद भारतीयों में क्रान्तिकारी भावना का तेजी से प्रसार हुआ। क्रान्तिकारी विचारधारा के अनुयायियों का विश्वास था कि अहिंसा और वैधानिक साधनों द्वारा राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं किये जा सकते हैं। क्रान्तिकारी मानते थे कि हिंसा और भय दिखाकर स्वराज व स्वशासन प्राप्त किया जा सकता है। वे मातृभूमि को तत्काल विदेशी बन्धन से मुक्त करना चाहते थे। अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए क्रान्तिकारियों ने गुप्त समितियों का गठन किया, युवकों को सैनिक प्रशिक्षण दिया, अस्त्र-शस्त्र एकत्र किये तथा समाचार-पत्रों और अन्य माध्यमों से क्रान्तिकारी विचारों का प्रसार किया। अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए क्रान्तिकारियों ने बंगाल में अनुशीलन समितियों की स्थापना की। ये समितियाँ युवकों को भारतीय इतिहास और संस्कृति से अवगत कराती थीं तथा उनमें स्वतन्त्रता की भावना जागृत करती थीं। वे युवकों में त्याग और बलिदान की भावना उत्पन्न कर उन्हें मातृभूमि को विदेशी बन्धनों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए तैयार करती थीं। इस कार्य के लिए क्रान्तिकारियों ने पिस्तौल, बन्दूक और गोला-बारूद का रास्ता चुना।

प्रमुख क्रान्तिकारी व घटनाएँ – इस विचारधारा के प्रमुख समर्थक थे-चापेकर बन्धु, रामप्रसाद बिस्मिल, खुदीराम बोस, अशफाक उल्ला खाँ, सावरकर बन्धु, चन्द्रशेखर आजाद तथा सरदार भगतसिंह ये सभी क्रान्तिकारी भीख माँगकर स्वराज्य प्राप्त करने में विश्वास नहीं करते थे। 1928 में दिल्ली में क्रान्तिकारियों की बैठक आयोजित की गई और ‘हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातान्त्रिक सेना’ का गठन किया गया। पंजाब में भगवती चरण व भगतसिंह ने ‘नौजवान भारत सभा’ का गठन किया।

ब्रिटिश सरकार ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’ पास कराना चाहती थी। क्रान्तिकारियों ने इस बिल को रुकवाने के लिए केन्द्रीय असेम्बली में बम फेंकने की योजना बनाई। इस कार्य को सरकार भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त को सौंपा गया। जब 9 अप्रैल, 1929 को इस बिल पर असेम्बली में चर्चा चल रही थी, भगतसिंह ने असेम्बली में बम फेंक दिया। क्रान्तिकारियों का उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं था अपितु वे अपनी आवाज सरकार तक पहुँचाना चाहते थे। बाद में भगतसिंह तथा बटुकेश्वर दत्त पर मुकदमा चलाया गया। 23 मार्च, 1931 को ब्रिटिश सरकार द्वारा भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी के तख्ते पर लटका दिया गया।

1928 में लाहौर में ‘साइमन वापस जाओ’ आन्दोलन लाला लाजपतराय के नेतृत्व में शुरू हुआ। पुलिस में हुई झड़प के दौरान लाजपतराय की मृत्यु हो गई जिससे क्रान्तिकारियों भड़क उठे और पुलिस अधिकारी साण्डर्स की हत्या कर दी गई।

जतीन्द्रनाथ दास द्वारा भगतसिंह व अन्य क्रान्तिकारियों को जेल में सुविधाएँ दिए जाने की माँग को लेकर भूख हड़ताल की गयी और अन्ततः उन्होंने प्राणों की आहुति दे दी।

इधर ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीति के कारण और अनेक क्रान्तिकारियों नेताओं की मृत्यु से क्रान्तिकारी आन्दोलन को बहुत हानि हुई। चन्द्रशेखर आजाद ने इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में क्रान्ति की योजना बनाने के लिए 27 फरवरी, 1931 में क्रान्तिकारियों की एक बैठक बुलाई किन्तु दुर्भाग्य से ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें घेर लिया। आजाद ने अन्तिम क्षण तक ब्रिटिश सिपाहियों से लोहा लिया किन्तु जब उन्हें लगा कि वे बच नहीं पाएंगे तो उन्होंने स्वयं को गोली मार ली और अन्तत: वे वीरगति को प्राप्त हुए। क्रान्तिकारी आन्दोलन में भारतीय वीरांगनाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। श्रीमती सुशीला देवी, श्रीमती दुर्गा देवी, प्रेमवती आदि महिलाओं ने आन्दोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

प्रश्न 3.
आजाद हिन्द फौज की स्थापना क्यों की गई थी एवं भारत की स्वतन्त्रता के लिए उसके योगदान को लिखिए। (2009, 18)
अथवा
आजाद हिन्द फौज का स्वतन्त्रता आन्दोलन में क्या योगदान था ? (2009)
उत्तर:
आजाद हिन्द फौज

जापानियों द्वारा ब्रिटिश सेना के अनेक सैनिक युद्धबन्दी बना लिये गये थे। उनमें एक सैनिक अधिकारी कैप्टन मोहन सिंह थे जिन्होंने भारतीय युद्धबन्दियों को संगठित करके फरवरी 1942 ई. में आजाद हिन्द फौज की स्थापना की। इस फौज की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य भारत की मुक्ति के लिए संघर्ष करना था। सुभाष चन्द्र बोस 1943 ई. में जापान पहुँचे तो रास बिहारी बोस ने आजाद हिन्द फौज के संचालन का कार्य उनको सौंपा। सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिन्द फौज का नेतृत्व सँभालने के पश्चात् घोषणा की कि, “ईश्वर के नाम पर मैं पवित्र शपथ लेता हूँ कि मैं भारत और उसके 38 करोड़ लोगों को स्वतन्त्र कराऊँगा और मैं इस पवित्र युद्ध को अपने जीवन की अन्तिम साँस तक जारी रखेंगा।” इसके अतिरिक्त सुभाष चन्द्र बोस ने “दिल्ली चलो” का नारा भी लगाया।

1944 ई. को रंगून (यंगून) से प्रस्थान कर बर्मा (म्यांमार) में अंग्रेजों को पराजित करने के पश्चात् भारत में प्रवेश किया। भारत की भूमि पर आजाद हिन्द फौज ने युद्ध किये तथा अनेक बार ब्रिटिश सेनाओं को परास्त किया। बर्मा (म्यांमार) भारत सीमा पार कर प्रथम बार 1944 ई. में आजाद हिन्द फौज ने भारत की स्वतन्त्र भूमि पर तिरंगा झण्डा फहराया। इसके पश्चात् नागालैण्ड तथा कोहिमा पर भी अधिकार कर लिया, परन्तु आगे उसे पराजय का मुख देखना पड़ा। 1945 ई. में एक वायुयान दुर्घटना में सुभाषचन्द्र बोस का स्वर्गवास हो गया। इसी वर्ष अंग्रेजी सरकार ने आजाद हिन्द फौज के सैनिकों पर जिनमें प्रमुख थे-सहगल, ढिल्लन तथा शाहनवाज खाँ आदि पर मुकदमा चलाया। देश भर में उनकी रक्षा के लिए आवाज उठी, अतः ब्रिटिश सरकार को मजबूर होकर आजाद हिन्द के सभी सैनिकों को मुक्त करना पड़ा जिससे भारतीय जनता में आजाद हिन्द फौज के प्रति एक अपार निष्ठा की भावना बढ़ी तथा भारत की नौ-सेना तथा वायुसेना को शासन के विरुद्ध विद्रोह करने की प्रेरणा मिली। वास्तव में आजाद हिन्द फौज ने ब्रिटिश साम्राज्य के पतन की क्रिया को और अधिक तीव्र कर दिया।

प्रश्न 4.
मुस्लिम लीग के कार्यों ने पाकिस्तान के निर्माण की पृष्ठभूमि कैसे तैयार की ? समझाइए।
उत्तर:
मुस्लिम लीग

20वीं शताब्दी के आरम्भ में साम्प्रदायिकता की भावना ने जोर पकड़ा। मुसलमानों का एक वर्ग कांग्रेस को मुस्लिम विरोधी मानने लगा था। अंग्रेज शासक भी कांग्रेस के आन्दोलनों को विद्रोह के रूप में देखते थे। इसलिए वे कांग्रेस की एक प्रतिद्वन्द्वी संस्था की स्थापना करना चाहते थे। ब्रिटिश सरकार के संकेतों को देखते हुए मुसलमानों का एक शिष्टमण्डल अक्टूबर. 1906 में आगा खाँ के नेतृत्व में भारत में भारत के वायसराय लार्ड मिण्टो से मिला और एक माँग-पत्र प्रस्तुत किया। माँगों में मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र, विधानमण्डलों में मुसलमानों को अधिक स्थान, सरकारी नौकरियों और विश्वविद्यालयों की स्थापना में रियायतें और गवर्नर जनरल की परिषद् में मुसलमान प्रतिनिधि की नियुक्ति का आग्रह था।

अन्ततः लार्ड मिण्टो भारत में मुस्लिम साम्प्रदायिकता का जनक बना। इस प्रकार अंग्रेज सरकार से प्रोत्साहन प्राप्त करके आगा खाँ तथा अन्य मुस्लिम नेताओं ने 30 दिसम्बर, 1906 ई. में मुस्लिम लीग की स्थापना की। उन्होंने 1907 के लखनऊ अधिवेशन में लीग के संविधान को लागू किया।

मुस्लिम लीग के उद्देश्य –

  1. भारतीय मुसलमानों में ब्रिटिश राज के प्रति भक्ति भावना उत्पन्न करना।
  2. ब्रिटिश शासन के समक्ष मुसलमानों के राजनीतिक अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए माँग करना।
  3. लीग के उद्देश्यों को हानि पहुँचाये बिना मुसलमानों एवं अन्य जातियों में यथासम्भव मेल-जोल रखना।

लीग के उद्देश्यों से स्पष्ट हो जाता है कि वह एक साम्प्रदायिक संस्था थी अतः राष्ट्रवादी मुसलमानों ने लीग की स्थापना का विरोध किया और वे कांग्रेस में ही बने रहे।

लीग द्वारा पाकिस्तान निर्माण की पृष्ठभूमि – मुस्लिम नेताओं के मन में पाकिस्तान की स्थापना का विचार अचानक नहीं हुआ अपितु यह धीरे-धीरे विकसित हुआ। 1930 में मुस्लिम लीग के इलाहाबाद अधिवेशन में डॉ. मोहम्मद इकबाल ने ‘सर्व इस्लाम’ की भावना से प्रेरित होकर पाकिस्तान की स्थापना के विचार को प्रस्तुत किया। अंग्रेजी विश्वकोष के अनुसार पाकिस्तान की सबसे पहली परिकल्पना एक पंजाबी मुसलमान रहमतअली के दिमाग की उपज थी। पूर्व में राष्ट्रवादी मुसलमान रहे मोहम्मद अली जिन्ना भी अन्ततः साम्प्रदायिक बन गये और अक्टूबर 1938 में उन्होंने द्विराष्ट्र सिद्धान्त’ की माँग की। 1941 में मुस्लिम लीग ने मद्रास अधिवेशन में पाकिस्तान के निर्माण को अपना मुख्य लक्ष्य बनाया। 1942 में क्रिप्स मिशन ने आग में घी का काम करते हुए पाकिस्तान की माँग को प्रोत्साहित किया और इस तरह अन्ततः भारत विभाजन पर कांग्रेस को आम सहमति बनानी पड़ी।

प्रश्न 5.
किन परिस्थितियों में भारत का विभाजन किया गया ? कांग्रेस ने भारत विभाजन क्यों स्वीकार किया ? (2011)
उत्तर:
माउण्टबेटन योजना और भारत का विभाजन

23 मार्च, 1947 को लार्ड वैवेल के स्थान पर लार्ड माउण्टबेटन नया गवर्नर जनरल बनकर भारत आया। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें पूर्ण अधिकार देकर भारत भेजा था, जिससे वे कैबिनेट योजना के अनुसार गठित . संविधान सभा के माध्यम से भारतीयों को शासन सत्ता सौंप सकें। माण्उटबेटन ने भारतीय राजनीति का गहनता से अध्ययन किया। अनेक विभिन्न दलों के नेताओं से विचार-विमर्श करने के पश्चात् वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि भारत में स्थायी शान्ति के लिए पाकिस्तान की योजना को स्वीकार करना आवश्यक है।

कांग्रेस के नेता विभाजन नहीं चाहते थे परन्तु लीग विभाजन के अलावा और कोई बात करने को तैयार नहीं थी। अन्ततः साम्प्रदायिकता पागलपन के ज्वार के समक्ष विवश होकर कांग्रेस को भारत विभाजन की सहमति देनी पड़ी। अन्तरिम सरकार की अपंगता, साम्प्रदायिक हिंसा का ज्वार, मुस्लिम लीग की हठधर्मिता, कांग्रेस नेताओं की विवशता तथा ब्रिटिश कूटनीति के परिणामस्वरूप भारत का विभाजन हुआ। माण्उटबेटन ने जो योजना प्रस्तुत की उसके अनुसार भारत को दो भागों, भारत तथा पाकिस्तान में विभाजित किये जाने तथा सत्ता का हस्तान्तरण 15 अगस्त, 1947 को करने सम्बन्धी प्रावधान किया गया। योजना में पंजाब, बंगाल, सिन्ध, असम, बलूचिस्तान के विषय में स्पष्ट नीति निर्धारित की गयी।

माउण्टबेटन की योजना को कांग्रेस ने स्वीकृति प्रदान की। मुस्लिम लीग समस्त बंगाल, असम, पंजाब, उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त तथा बलूचिस्तान को पाकिस्तान में मिलाना चाहती थी परन्तु माउण्टबेटन के दबाव के आगे उसे योजना को स्वीकार करना पड़ा।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 वस्तुनिष्ट प्रश्न

बहु-विकल्पीय

प्रश्न 1.
बंगाल विभाजन किसने किया? (2012)
(i) विलियम बैंटिंक
(ii) लार्ड रिपन
(iii) लॉर्ड कर्जन
(iv) महारानी विक्टोरिया।
उत्तर:
(iii)

प्रश्न 2.
साइमन कमीशन का विरोध करते हुए लाहौर में किस नेता का स्वर्गवास हो गया था ?
(i) विपिनचन्द्र पाल
(ii) लाला लाजपतराय
(iii) बाल गंगाधर तिलक
(iv) केशवदेव।
उत्तर:
(ii)

प्रश्न 3.
गांधीवादी के नेतृत्व में असहयोग का कार्यक्रम अपनाया गया
(i) 1908 में
(ii) 1912 में
(iii) 1918 में
(iv) 1920 में
उत्तर:
(iv)

प्रश्न 4.
दिसम्बर 1929 में हुए लाहौर अधिवेशन के अध्यक्ष थे
(i) मोतीलाल नेहरू
(ii) पं. जवाहरलाल नेहरू
(iii) महात्मा गांधी
(iv) मौलाना आजाद
उत्तर:
(ii)

प्रश्न 5.
स्वराज्य दल की स्थापना की
(i) चितरंजनदास ने
(ii) ऊधमसिंह ने
(iii) चन्द्रशेखर आजाद ने
(iv) अरविन्द घोष ने।
उत्तर:
(ii)

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. 1942 में …………….. मिशन भारत आया। (2009)
  2. बंगाल विभाजन का विरोध लोगों ने सड़कों पर …………….. गीत गाते हुए किया। (2012)
  3. ‘जय हिन्द’ का नारा …………….. ने दिया था। (2009, 17)
  4. 9 अगस्त, 1925 को क्रान्तिकारियों ने लखनऊ के निकट …………….. नामक स्थान पर गाड़ी रोककर सरकारी खजाना लूट लिया था। (2012)

उत्तर:

  1. क्रिप्स
  2. वंदेमातरम्
  3. सुभाष चन्द्र बोस
  4. काकोरी।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
1938 में सुभाषचन्द्र बोस कांग्रेस के अध्यक्ष बने। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
1929 के लाहौर अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज्य’ का प्रस्ताव किया गया। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
‘करो या मरो’ का नारा असहयोग आन्दोलन में दिया गया। (2013)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
कांग्रेस का विभाजन सूरत अधिवेशन में हुआ। (2010, 18)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
भारत 15 अगस्त, 1947 को आजाद नहीं हुआ। (2009)
उत्तर:
असत्य

जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 9 स्वतन्त्रता आन्दोलन से सम्बन्धित घटनाएँ 1
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (क)
  3. → (घ)
  4. → (ङ)
  5. → (ग)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
रोलेट अधिनियम कब लागू हुआ ? (2009)
उत्तर:
मार्च 1919 में
उत्तर:

प्रश्न 2.
राष्ट्रीय आन्दोलन में पूर्ण स्वाधीनता दिवस किस दिन मनाया गया था ?
उत्तर:
26 जनवरी, 1930

प्रश्न 3.
‘साइमन कमीशन’ के अध्यक्ष कौन थे ?
उत्तर:
सर जॉन साइमन

प्रश्न 4.
किस क्रान्तिकारी ने पंजाब के पूर्व गवर्नर की गोली मारकर हत्या कर दी थी ? (2009)
उत्तर:
ऊधम सिंह

प्रश्न 5.
मोहम्मडन एंग्लो-ओरियण्टल कॉलेज की स्थापना किसने की थी ? (2009)
उत्तर:
सर सैयद अहमद खाँ

प्रश्न 6.
क्रिप्स मिशन भारत कब आया ? (2012)
उत्तर:
22 मार्च, 1942

प्रश्न 7.
फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना किसने की ? (2013)
उत्तर:
सुभाषचन्द्र बोस

प्रश्न 8.
भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम कब पारित हुआ था ?
उत्तर:
4 जुलाई, 1947.

प्रश्न 9.
रोलेट एक्ट का कोई एक उद्देश्य लिखिए। (2010)
उत्तर:
आन्दोलनकारियों का दमन करना।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
साइमन कमीशन का बहिष्कार क्यों किया गया ?
उत्तर:
साइमन कमीशन का बहिष्कार इसलिए किया गया, क्योंकि इसमें सभी सदस्य अंग्रेज थे और भारतीयों का इसमें कोई प्रतिनिधि नहीं था।

प्रश्न 2.
पूर्ण स्वराज्य के लक्ष्य को कब और कहाँ स्वीकार किया गया ?
अथवा
1929 के लाहौर कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी ? इसमें कौन-सा महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया ?
उत्तर:
दिसम्बर, 1929 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन में जो कि लाहौर में हुआ। इसके अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे। यहाँ कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य को अपना लक्ष्य स्वीकार किया और इसकी प्राप्ति के लिए गांधीजी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाने का फैसला किया।

प्रश्न 3.
रॉलेट एक्ट क्या था ? समझाइए। (2014, 16)
उत्तर:
यह एक ऐसा कानून था जिसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को बिना अभियोग चलाये अनिश्चित समय तक जेल में डाला जा सकता था। यह सन् 1919 में पारित हुआ था। रॉलेट एक्ट का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय आन्दोलनों को कुचलना था। अत: गांधीजी ने इस एक्ट का व्यापक विरोध किया।

प्रश्न 4.
“गांधीजी साधारण नागरिक थे। फिर भी सारी दुनिया उन्हें सम्मान देती है,” क्यों ? समझाइए।
उत्तर:
गांधी जी जनसाधारण के प्रतीक थे। वे सादा जीवन उच्च विचार में विश्वास रखते थे तथा जनता से उसी भाषा में बात करते थे जो भ्वह समझती थी। इसी कारण दुनिया उन्हें सम्मान देती है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड की घटना को लिखिए। (2012, 14)
अथवा
जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड क्यों हुआ? इसके क्या परिणाम हुए ?
उत्तर:
जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड-रॉलेट अधिनियम मार्च 1919 में लागू किया गया। विरोध में पूरे देश से आवाज उठी। पंजाब में भी रॉलेट अधिनियम का विरोध हुआ। पंजाब में ब्रिटिश सरकार ने अनेक जगहों पर लाठी-गोली चलवाई। 10 अप्रैल को कांग्रेस के दो प्रभावशाली नेता डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू गिरफ्तार किए गए और उन्हें जेल भेज दिया गया। इन गिरफ्तारियों के विरोध में अमृतसर के जलियाँवाला बाग में 13 अप्रैल बैशाखी के दिन विरोध सभा हुई। जैसे ही सभा प्रारम्भ हुई जनरल डायर नामक एक सैनिक अधिकारी ने सभा को किसी भी प्रकार की चेतावनी दिये बिना अपने सैनिकों को सभा की भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया। सैनिकों ने भीड़ पर गोली चलायी जिसके परिणामस्वरूप लगभग 800 से अधिक व्यक्ति मारे गये तथा 2000 के लगभग घायल हो गये। जलियाँवाला काण्ड से जनता में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध व्यापक असन्तोष की भावना जागृत हुई। इसके बाद असहयोग आन्दोलन प्रारम्भ हो गया।

प्रश्न 2.
गांधीजी ने असहयोग आन्दोलन क्यों प्रारम्भ किया ? इसके क्या सिद्धान्त थे ?
अथवा
असहयोग आन्दोलन का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। (2015)
उत्तर:
गांधीजी के नेतृत्व में 1920 में असहयोग आन्दोलन का नया कार्यक्रम अपनाया गया। जलियाँवाला बाग का हत्याकाण्ड एवं रॉलेट एक्ट का विरोध, अंग्रेजी सरकार की वादाखिलाफी का विरोध और स्वराज्य की प्राप्ति असहयोग आन्दोलन के उद्देश्य थे। असहयोग आन्दोलन के तीन आधारभूत सूत्र थे-कौंसिलों का बहिष्कार, न्यायालयों का बहिष्कार और विद्यालयों का बहिष्कार। इस आन्दोलन के निम्नलिखित कार्यक्रम थे –

  1. सरकारी उपाधियों का त्याग व अवैतनिक पदों का बहिष्कार।
  2. वकीलों और बैरिस्टरों द्वारा न्यायालयों का बहिष्कार।
  3. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।
  4. स्थानीय संस्थाओं के मनोनीत सदस्यों द्वारा अपने पदों का त्याग।
  5. सरकारी उत्सवों का बहिष्कार।

प्रश्न 3.
असहयोग आन्दोलन के परिणाम बताइए।
उत्तर:
असहयोग आन्दोलन के परिणाम-इस आन्दोलन के निम्नलिखित परिणाम सामने आये –

  1. देश-भर में एक-सी विचारधारा व राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार हुआ व विभिन्न सम्प्रदायों और प्रान्तों के लोग कांग्रेस के झण्डे के नीचे आ गये।
  2. हिन्दू-मुस्लिम एकता स्थापित हुई। गांधीजी ने सभी वर्गों के लोगों पर जादू-सा कर दिया था और सबको एक दिशा में चलने वाला एक पचरंगी दल बना लिया था।
  3. इस आन्दोलन ने ब्रिटिश शासन-व्यवस्था के ढाँचे को झकझोर दिया। अंग्रेजों को लगने लगा कि बिना उदारवादियों के सहयोग के वे आगे नहीं बढ़ पायेंगे।
  4. लोगों में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तथा स्वदेशी वस्तुओं के प्रति लगाव की प्रवृत्ति जाग्रत हुई। परिणामस्वरूप कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन मिला।
  5. अंग्रेजी भाषा का महत्त्व जाता रहा और कांग्रेस ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार कर लिया।

प्रश्न 4.
साइमन कमीशन कब और क्यों भेजा गया था ? इसका भारतीयों द्वारा विरोध क्यों किया गया? (2016)
उत्तर:
साइमन कमीशन-1927 में ब्रिटिश सरकार ने सर जॉन साइमन की अध्यक्षता में 7 सदस्यों का एक कमीशन नियुक्त किया जिसका काम सरकार ने सामने यह रिपोर्ट प्रस्तुत करना था कि 1919 ई. का एक्ट कहाँ तक सफल रहा है। इस कमीशन का बहिष्कार इसलिए किया गया, क्योंकि इसमें सभी सदस्य अंग्रेज थे और भारतीयों का इसमें कोई प्रतिनिधि नहीं था। जहाँ यह कमीशन जाता था वहाँ हड़तालें होती थीं, काली झण्डियाँ दिखायी जाती थीं और ‘साइमन लौट जाओ’ का नारा लगाया जाता था। इसी आन्दोलन का नेतृत्व करते हुए पुलिस की लाठियों के प्रहार से लाला लाजपतराय का निधन हो गया।

प्रश्न 5.
‘स्वराज्य दल’ की स्थापना कब व किसने की थी ? इसके मुख्य उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
कांग्रेस के कुछ नेताओं, जिनमें प्रमुख थे-चितरंजन दास, मोतीलाल नेहरू, ने मार्च 1923 ई. में ‘स्वराज्य दल’ की स्थापना की। स्वराज्य दल के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित थे –

  1. असहयोग की नीति का त्याग कर नवीन नीतियों पर चलना।
  2. नौकरशाही के कार्यों में कौंसिल में प्रवेश करके रुकावट डालना।
  3. विधान परिषद् का चुनाव लड़कर उसमें अपना पक्ष रखना।
  4. सरकारी अनुचित कार्यवाहियों के साथ असहयोग की भावना रखना।
  5. विधान परिषद् के चुनाव जीतकर संविधान को असफल तथा खोखला सिद्ध करना।

प्रश्न 6.
खिलाफत आन्दोलन क्या था ? इसके महत्त्व को बताइए।
उत्तर:
खिलाफत आन्दोलन असहयोग की एक महत्त्वपूर्ण घटना थी। इस आन्दोलन का प्रारम्भ प्रथम विश्व-युद्ध के बाद हुआ। खिलाफत आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य इस्लाम के खलीफा सुल्तान को फिर से शक्ति दिलाना था। इसके समर्थन में भारत से अली बन्धुओं (मुहम्मद अली और शौकत अली) ने खिलाफत आन्दोलन प्रारम्भ किया। खिलाफत आन्दोलन में कांग्रेस के नेता भी सम्मिलित हुए और आन्दोलन को पूरे भारत में फैलाने में उन्होंने सहायता दी। किन्तु टर्की में इस आन्दोलन के समाप्त होते ही भारत के मुसलमानों ने भी इसे समाप्त कर दिया। खिलाफत आन्दोलन का महत्त्व-भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन में खिलाफ तथा असहयोग आन्दोलन का विशेष महत्व रहा है। इसके कारण हिन्दू और मुस्लिम एकता को बल मिला जिससे स्वतन्त्रता आन्दोलन सबल बना।

प्रश्न 7.
क्रिप्स प्रस्ताव क्या थे ? सरकार ने इन प्रस्तावों को वापस क्यों लिया ??
उत्तर:
क्रिप्स 22 मार्च, 1942 को भारत आया। उसने पर्याप्त काल तक भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों तथा सम्प्रदायों के नेताओं से वार्ता की तथा अपनी योजना प्रस्तुत की, परन्तु उसकी योजना को सभी राजनीतिक दलों द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया। कांग्रेस ने इसे निम्नलिखित कारणों से अस्वीकृत कर दिया था –

  1. कांग्रेस मुख्यतया क्रिप्स योजना से इस कारण असन्तुष्ट थी, क्योंकि इसमें उसकी पूर्ण स्वाधीनता की माँग को स्वीकार नहीं किया गया था।
  2. क्रिप्स योजना में मुस्लिम लीग की भारत विभाजन की माँग को स्वीकार कर लिया गया था जिसके कांग्रेस पूर्णतया विरुद्ध थी।
  3. सम्पूर्ण प्रशासनिक शक्ति देशी नरेशों को प्रदान करके राज्यों की प्रजा के हितों की अवहेलना की गयी थी।
  4. कांग्रेस चाहती थी कि युद्धकाल में ही भारत में संसदीय शासन प्रणाली की स्थापना हो, परन्तु युद्धकाल में ब्रिटेन तनिक भी शक्ति का परित्याग नहीं करना चाहता था।

प्रश्न 8.
शिमला सम्मेलन क्यों बुलाया गया था ? यह क्यों असफल रहा ?
उत्तर:
शिमला सम्मेलन-लार्ड वैवेल ने घोषणा की कि 25 जन, 1945 को शिमला में एक सम्मेलन होगा। सम्मेलन में तय हुआ कि केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल मिला-जुला होगा तथा उसमें 14 मन्त्री होंगे। इसमें 5 कांग्रेस, 5 लीग तथा 4 वायसराय द्वारा मनोनीत होंगे। वायसराय ने कांग्रेस तथा लीग को 8 से 12 नाम देने को कहा। कांग्रेस ने जो सूची वायसराय को भेजी, उसमें दो सदस्य मुस्लिम थे। परन्तु जिन्ना चाहते थे कि मुसलमान प्रतिनिधि लीग के सदस्यों में से ही लिये जायें। इसका कारण यह था कि जिन्ना कांग्रेस को हिन्दू संस्था सिद्ध करके, लीग को भारतीय मुसलमानों की एकमात्र प्रतिनिधि संस्था होने का दावा करना था।

लीग के असहयोग के कारण शिमला सम्मेलन असफल हुआ। सम्मेलन की असफलता का कारण जिन्ना का हठधर्मी होना था।

प्रश्न 9.
भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता के कारणों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता के कारण-भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता के कारण निम्नलिखित थे –

  1. ब्रिटिश सरकार ने राष्ट्रीय नेताओं को अचानक गिरफ्तार कर लिया था।
  2. भारत छोड़ो आन्दोलन में योजना तथा संगठन का भी अभाव था।
  3. इस आन्दोलन की रूपरेखा तथा स्वरूप भी स्पष्ट नहीं था।
  4. ब्रिटिश सरकार की दमन नीति अत्यधिक कठोर थी।
  5. आन्दोलनकारियों के पास समुचित हथियारों तथा धन का भी अभाव था।

प्रश्न 10.
भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सुभाषचन्द्र बोस एक निर्भीक योद्धा थे और उनका स्थान विश्व के महानतम देश भक्तों में है। दिसम्बर 1940 में वे गुप्त रूप से देश छोड़कर निकल गये। वे मार्च 1941 में वायुयान द्वारा काबुल से बर्लिन पहुँच गये। देश से भाग निकलने तथा पेशावर और काबुल होकर जर्मनी जा पहुँचने की कहानी उनके साहसपूर्ण कार्य की वीरगाथा है। जून 1943 में बोस जापान जा पहुँचे। 5 जुलाई, 1943 को उन्होंने आजाद हिन्द फौज के गठन की घोषणा की। उस समय उसमें 60 हजार से कुछ अधिक भारतीय शामिल थे। उनका युद्ध-घोष था ‘दिल्ली चलो’। 21 अक्टूबर, 1943 को बोस ने स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार की स्थापना की। सुभाषचन्द्र बोस ने ही हिन्दुस्तान को ‘जय हिन्द’ का जयघोष दिया। उनके राजनीतिक जीवन में यह कथन अत्यधिक रोचक है, ‘जो व्यक्ति एक समय स्वराज दल का सक्रिय सदस्य था वह देश की स्वाधीनता के लिए आजाद हिन्द फौज का महासेनानायक बन गया।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय स्वाधीनता अधिनियम क्या है ? इसके प्रमुख प्रावधानों को लिखिए। (2009, 17)
उत्तर:
भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947

माउण्टबेटन की योजनानुसार सरकार ने हस्तान्तरण की कार्यवाही को पूर्ण करने के लिए भारतीय स्वाधीनता अधिनियम’ का प्रारूप तैयार किया। प्रारूप को कांग्रेस और लीग के अनुमोदन के लिए भेजा गया। अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात् विधेयक को ब्रिटिश संसद ने पारित किया गया। 18 जुलाई, 1947 को इसने अधिनियम का रूप लिया।

प्रमुख प्रावधान – भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम में कुल 20 धाराएँ तथा दो परिशिष्ट थे। इसके प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित थे –

  1. 15 अगस्त, 1947 ई. को भारत तथा पाकिस्तान नामक दो स्वतन्त्र राज्यों की स्थापना की जायेगी। ब्रिटिश सरकार द्वारा उन्हें सत्ता भी सौंप दी जायेगी।
  2. सिन्ध, उत्तर-पूर्वी सीमा प्रान्त, पश्चिमी पंजाब, बलूचिस्तान तथा असम का सिलहट जिला पाकिस्तान में तथा शेष भाग भारत में रहेगा।
  3. दोनों राज्यों की विधान सभाएँ अपने-अपने संविधानों का निर्माण करेंगी।
  4. दोनों राज्यों में नवीन संविधानों के निर्माण तक शासन 1935 ई. के अधिनियम के अनुसार चलता रहेगा।
  5. भारत तथा पाकिस्तान दोनों को राष्ट्र-मण्डल के सदस्य बने रहने या छोड़ने की भी स्वतन्त्रता होगी।
  6. 15 अगस्त, 1947 ई. से भारत सचिव का पद समाप्त कर दिया जायेगा।
  7. 15 अगस्त, 1947 ई. के पश्चात् ब्रिटिश शासन का दोनों राज्यों पर कोई अधिकार तथा नियन्त्रण नहीं रहेगा।
  8. भारतीय रियासतों को भारत अथवा पाकिस्तान दोनों में से किसी भी देश में सम्मिलित होने का अधिकार होगा।
  9. भारत तथा पाकिस्तान दोनों के लिए एक-एक गवर्नर जनरल होगा। गवर्नर जनरल की नियुक्ति उनके मन्त्रिमण्डल के परामर्श से की जायेगी।

प्रश्न 2.
बंगाल विभाजन के पीछे अंग्रेजों के क्या उद्देश्य थे? बंगाल विभाजन का राष्ट्रीय आन्दोलन पर क्या प्रभाव पड़ा?
अथवा
‘बंग-भंग’ आन्दोलन के प्रभाव लिखिए। (2009)
उत्तर:

बंगाल विभाजन के पीछे अंग्रेजों के निम्नलिखित उद्देश्य थे –

  1. ब्रिटिश सरकार के अनुसार बंगाल विभाजन का प्रमुख उद्देश्य बंगाल के प्रशासन को सुधारना था। लार्ड कर्जन के मत में बंगाल एक विशाल प्रान्त था, अतः समुचित प्रशासनिक संचालन के लिए उसका विभाजन करना आवश्यक था।
  2. बंगाल विभाजन का अन्य उद्देश्य बंगाल की संगठित राजनीतिक भावना को समाप्त करना तथा राष्ट्रीयता के वेग को कम करना था।
  3. इतिहासकारों के अनुसार बंगाल विभाजन का प्रमुख उद्देश्य जनता में फूट डालना था। पूर्वी बंगाल में मुसलमानों का बहुमत तथा पश्चिमी भाग में हिन्दुओं का बहुमत रखना जिससे हिन्दू-मुस्लिम एकता समाप्त हो जाए।

बंग-भंग और स्वदेशी आन्दोलन के प्रभाव

1905 के बंगाल विभाजन के दूरगामी परिणाम सामने आये जिनके कारण भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन को एक नई दिशा मिली। इसक प्रमुख प्रभाव इस प्रकार थे –
(1) बंगाल विभाजन से न केवल बंगालियों में रोष उत्पन्न हुआ वरन् सम्पूर्ण राष्ट्र ने इसे अपना अपमान समझा। 16 अक्टूबर, 1905 ई. में बंगाल का विभाजन जब सरकारी रूप में मनाया गया तो राष्ट्रीय नेताओं ने सशक्त शब्दों में इसका विरोध किया। सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने कहा, “बंगाल का विभाजन हमारे ऊपर बम की तरह गिरा। हमने समझा कि हमारा घोर अपमान किया गया है।”

(2) भारतीय जनता ने बंगाल के विभाजन के विरोध में देश भर में अनेक सभाओं का आयोजन किया। सरकार ने भी क्रूरतापूर्वक दमन चक्र चलाया जिसका उत्तर जनता ने विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करके तथा स्वदेशी आन्दोलन चलाकर दिया। स्थान-स्थान पर विदेशी कपड़ों की होली जलायी गयी।

(3) राष्ट्रीय शिक्षा के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया तथा सरकारी शिक्षा संस्थाओं का बहिष्कार किया गया। इसके अतिरिक्त स्वतन्त्र राष्ट्रीय शिक्षा संस्थाओं की स्थापना की गयी।

(4) बंगला विरोधी आन्दोलन ने शिक्षा संस्थाओं के अतिरिक्त शिक्षा स्वदेशी उद्योगों की स्थापना के भी प्रयत्न किये जिससे व्यापारिक जनता तथा श्रमिकों में भी राष्ट्रीयता की भावना का विकास हुआ।

(5) बंगाल के विभाजन से बौद्धिक वर्ग में जागृति उत्पन्न हुई। कांग्रेस के बुद्धिजीवियों में उग्रता की भावना तीव्र हुई तथा वे पूर्णतया सरकार विरोधी हो गये। लाल-बाल-पाल राष्ट्रीय जन-नेता के रूप में उभरे।

(6) बंगाल के विभाजन के पश्चात् ही कांग्रेस उदारवादियों तथा उग्रराष्ट्रवादियों में विभाजित हो गयी। इसके अतिरिक्त देश में उग्रराष्ट्रवादी आन्दोलन भी प्रारम्भ हो गये। ब्रिटिश शासन के अत्याचारों के विरोध में देश के नवयुवकों ने संगठित होकर क्रांतिकारी गतिविधियाँ प्रारम्भ कर दी।

(7) बंग-भंग विरोधी आन्दोलन को मिले व्यापक जन-समर्थन से ब्रिटिश सरकार घबरा गयी, अतः हिन्दू और मुसलमानों को लड़ाने के लिए मुस्लिम साम्प्रदायिकता को प्रोत्साहन देना आरम्भ कर दिया। अन्य शब्दों में, “फूट डालो तथा राज्य करो” की नीति को प्रारम्भ किया।

(8) बंगाल-विभाजन के विरुद्ध तीव्र प्रतिक्रिया होने के कारण ब्रिटिश सरकार को इसे 1911 ई. में रद्द करना पड़ा जिससे कांग्रेस के उग्रराष्ट्रवादियों की प्रतिष्ठा बढ़ी।

कर्जन के छ: वर्ष के लम्बे शासनकाल में स्वाधीनता आन्दोलन की दिशा वास्तविक रूप में बदल दी।

स्वदेशी आन्दोलन उपनिवेशवाद के विरुद्ध भारतीयों का पहला सशक्त राष्ट्रीय आन्दोलन था। इसी के साथ भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की नई चेतना का विकास हुआ।

प्रश्न 3.
‘सविनय अवज्ञा आन्दोलन’ का वर्णन कीजिए।
अथवा
सविनय अवज्ञा आन्दोलन का क्या अभिप्राय है ? इसके कार्यक्रम एवं महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
सन् 1930 ई. में लाहौर में हुए अधिवेशन में पूर्ण स्वाधीनता को अपना लक्ष्य घोषित किया और गांधीजी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ करने का निश्चय किया गया। गांधीजी ने इस आन्दोलन में निम्न प्रमुख कार्यक्रम रखे –

  1. जगह-जगह नमक कानून तोड़कर नमक बनाया जाए।
  2. सरकारी कर्मचारी सरकारी नौकरियाँ को त्याग दें और छात्र सरकारी स्कूल-कॉलेजों का बहिष्कार करें।
  3. विदेशी वस्त्रों को त्याग कर उनकी होली जलायी जाए।
  4. स्त्रियाँ शराब, अफीम और विदेशी कपड़े की दुकानों पर धरना दें।
  5. जनता सरकार को कर न दे।

गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन का शुभारम्भ कानून का उल्लंघन कर किया। 12 मार्च, 1930 को गांधीजी ने डाण्डी के लिए प्रस्थान किया और वहाँ 5 अप्रैल को पहँचे। यह घटना ‘डाण्डी-यात्रा’ के नाम से प्रसिद्ध है। मार्ग में जनता ने सत्याग्रहियों का अभूतपूर्व स्वागत किया। वहाँ उन्होंने नमक कानून तोड़ा। इस प्रकार देश में नमक कानून भंग करने का आन्दोलन चल पड़ा। आम जनता ने भी नमक कानून का उल्लंघन किया। यह सविनय अवज्ञा आन्दोलन का प्रारम्भ था। हिन्दुस्तान के सभी भागों में लोगों ने सरकारी कानूनों को भंग करना शुरू किया। स्त्रियों ने भी पर्दा छोड़कर इस आन्दोलन में भाग लिया। किसानों में भी सरकार को कर देने से इन्कार कर दिया। विदेशी कपड़े का बहिष्कार हुआ।

5 मार्च, 1931 को गांधीजी का वायसराय इरविन से समझौता हो गया और गांधीजी ने आन्दोलन स्थगित कर दिया। नवम्बर, 1931 ई. में गांधीजी ने कांग्रेस की ओर से लन्दन में द्वितीय गोलमेल सम्मेलन में भाग लिया और भारत के लिए पूर्ण स्वाधीनता की माँग की, परन्तु ब्रिटिश शासन ने उनकी माँग को स्वीकार नहीं किया। अत: 1932 ई. में कांग्रेस ने गांधीजी के नेतृत्व में पुनः सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया। सरकार ने दमन-चक्र तेज किया। एक लाख से अधिक व्यक्ति गिरफ्तार हुए। 1934 ई. में गांधीजी ने आन्दोलन को समाप्त कर दिया।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन का महत्त्व

यह सत्य है कि असहयोग आन्दोलन की तरह सविनय अवज्ञा आन्दोलन भी बीच में ही स्थगित कर दिया गया था जिससे जनता में कुछ निराशा फैली, परन्तु इस आन्दोलन ने कांग्रेस की शक्ति को भी बढ़ाया। जनता ने गांधीजी के नेतृत्व में अपार कष्टों को सहन किया तथा उनके आदेशों का पालन आँख मींचकर किया। ब्रिटिश सरकार को भी इस बार गांधीजी के व्यक्तित्व ने प्रभावित किया और वह समझ गयी कि उनके पीछे एक अपार जन बल है। इस आन्दोलन ने गांधीजी को एक विश्वविख्यात राजनीतिज्ञ बना दिया।

प्रश्न 4.
भारत छोड़ो आन्दोलन क्यों प्रारम्भ हुआ ? यह असफल क्यों हुआ ?
अथवा
भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता के क्या कारण थे? कोई पाँच कारण लिखिए। (2017)
उत्तर:
क्रिप्स मिशन के असफल हो जाने से तथा क्रिप्स के द्वारा कांग्रेस को असफलता के लिए उत्तरदायी ठहराये जाने के कारण भारतीय जनता में अत्यन्त असन्तोष तथा निराशा की भावना उत्पन्न हुई। क्रिप्स मिशन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ब्रिटिश सरकार साम्प्रदायिकता के पक्ष को लेकर भारत को स्वतन्त्रता प्रदान नहीं करेगी। अन्य शब्दों में क्रिप्स मिशन का उद्देश्य भारत को स्वतन्त्रता प्रदान करना नहीं था, अत: भारत की स्वतन्त्रता के लिए भारत छोड़ो आन्दोलन चलाना आवश्यक हो गया।

आन्दोलन की असफलता के कारण

भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता के निम्न कारण थे –

  1. संगठन तथा निश्चित योजना का अभाव-भारत छोड़ो आन्दोलन आरम्भ करने से पूर्व महात्मा गांधी ने इसकी कोई स्पष्ट योजना नहीं बनायी थी कि इसे किस प्रकार संचालित किया जायेगा। अन्य शब्दों में किसी भी आन्दोलनकारी को यह ज्ञात नहीं था कि उन्हें क्या करना है ?
  2. ब्रिटिश शासन का शक्तिशाली होना-भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता का अन्य प्रमुख कारण ब्रिटिश शासन का आन्दोलनकारियों की अपेक्षा अत्यधिक शक्तिशाली होना था। आन्दोलनकारियों के पास धन तथा अस्त्र-शस्त्रों का अभाव था, अतः उन्हें बिन अस्त्र-शस्त्र के पुलिस तथा सेना का सामना करना पड़ता था।
  3. राष्ट्रीय नेताओं को बन्दी बनाया जाना–भारत छोड़ो आन्दोलन के प्रारम्भ होते ही ब्रिटिश सरकार ने प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं को अचानक गिरफ्तार कर लिया था जिससे जनता समुचित मार्ग-दर्शन प्राप्त नहीं कर सकी तथा आन्दोलन को गहरा आघात लगा।
  4. मुस्लिम लीग की राजनीति-मुस्लिम लीग ने मुसलमानों को आन्दोलन से पृथक् रहने का परामर्श दिया जिससे मुसलमानों ने आन्दोलन में भाग नहीं लिया। इससे भी आन्दोलन पर गहरा आघात लगा।
  5. कठोर दमन चक्र-ब्रिटिश शासन ने भारत छोड़ो आन्दोलन का अत्यन्त क्रूरता तथा कठोरता के साथ दमन किया। पुलिस तथा सेना ने लाखों व्यक्तियों को बन्दी बनाया तथा हजारों व्यक्तियों को गोली से भून दिया। महिलाओं को अपमानित किया गया तथा सामूहिक जुर्माने का कर कठोरतापूर्वक वसूल किया गया।
  6. साम्यवादी दल का अलग रहना-साम्यवादी दल ने इस आन्दोलन से अपने को पूर्णतया पृथक् रखा क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध में इंग्लैण्ड तथा रूस दोनों ने मिलकर जर्मनी तथा जापान की फासिस्ट शक्तियों के विरुद्ध संघर्ष किया था। ऐसी दशा में भारतीय कम्युनिस्ट रूस के मित्र ब्रिटेन का विरोध नहीं करना चाहते थे। अतः उन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन से अपने को दूर रखा।
  7. राजकीय सेवाओं तथा उच्च वर्गका ब्रिटिश शासन के प्रति निष्ठावान होना-भारत छोड़ो आन्दोलन के समय ब्रिटिश शासन के राजकीय कर्मचारियों तथा पदाधिकारियों ने पूर्णतया वफादारी के साथ इस आन्दोलन को कुचलने में सहयोग दिया था। देशी राजाओं तथा जमींदार वर्ग ने भी इस आन्दोलन का विरोध किया था।

प्रश्न 5.
स्वतन्त्रता आन्दोलन में गांधीजी के योगदान का वर्णन कीजिए।
अथवा
महात्मा गांधी का राष्ट्रीय आन्दोलन में क्या योगदान था ?
उत्तर:
भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में महात्मा गांधी का योगदान भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में महात्मा गांधी का स्थान सर्वोच्च है। गांधीजी ने भारत के स्वाधीनता संघर्ष को अहिंसा व सत्याग्रह के आधार पर चलाया। उनका कहना था कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही स्वराज हासिल किया जा सकता है। अंग्रेजों के प्रति असन्तोष प्रकट करने के लिए उन्होंने असहयोग आन्दोलन और सविनय अवज्ञा आन्दोलन आदि शुरू किये। इन आन्दोलनों ने भारत में अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिला दी।

1914 में गांधीजी भारत लौटे और आते ही भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन में कूद पड़े। अहमदाबाद में साबरमती के किनारे एक आश्रम की स्थापना की और बिहार के चम्पारन जिले से किसानों की रक्षा के लिए गोरे कोठीवालों के अत्याचारों के विरुद्ध छोटे पैमाने पर सत्याग्रह किया। इसमें उन्हें पर्याप्त सफलता मिली। उन्होंने गाँव-गाँव जाकर लोगों के सामने पराधीन भारत की करुणावस्था का चित्र खींचा और देश के उत्थान हेतु कमर कसने के लिए लोगों को प्रेरित किया। भयभीत जनता को उन्होंने निर्भय बनाया। उन्हीं के प्रयासों से राष्ट्रीय आन्दोलन एक जन-आन्दोलन बन सका।

प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात् 1919 ई. में ब्रिटिश सरकार ने रॉलेट एक्ट पास किया जिसका उद्देश्य भारतीयों को दबाना था। गांधीजी के आह्वान पर हिन्दू-मुसलमान इस एक्ट के विरोध में एकजुट हो गये। गांधीजी ने खिलाफत आन्दोलन में पूर्ण सहयोग दिया। खिलाफत कमेटी ने भी 31 अगस्त, 1920 को असहयोग आन्दोलन छेड़ दिया। इसके नेतृत्व की बागडोर गांधीजी के हाथों में दे दी गयी। साइमन कमीशन के विरोध में 1930 ई. में सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ किया गया। 12 मार्च, 1930 को डाण्डी यात्रा से गांधीजी ने दूसरे सविनय अवज्ञा आन्दोलन का सूत्रपात किया। दूसरी गोलमेज परिषद में गांधीजी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया और वहाँ यह दावा किया कि कांग्रेस सम्पूर्ण देश और समस्त हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है।

कांग्रेस ने गांधी के नेतृत्व में बम्बई में 8 अगस्त को ‘भारत छोड़ो’ के ऐतिहासिक प्रस्ताव को पारित किया। गांधीजी ने इस प्रस्ताव पर बोलते हुए भारतीय जनता को ‘करो या मरो’ का सन्देश दिया। 9 अगस्त, 1942 को गांधीजी तथा कार्य-समिति के सभी नेताओं को गिरफ्तार कर किसी अज्ञात स्थान पर भेज दिया गया। इन आन्दोलनों ने भारत में अंग्रेजी राज्य की नींव हिला दी और अन्त में 15 अगस्त, 1947 को भारत आजाद हो गया।

MP Board Class 12th Maths Solutions Chapter 5 Continuity and Differentiability Miscellaneous Exercise

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MP Board Class 12th Maths Solutions Chapter 5 Continuity and Differentiability Ex 5.3

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MP Board Class 12th Maths Solutions Chapter 6 Application of Derivatives Ex 6.4

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 7 बल-बहादुरी

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 7 बल-बहादुरी (निबन्ध, कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’)

बल-बहादुरी पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

बल-बहादुरी लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बल और सहृदयता में क्या अंतर है?
उत्तर:
बल में पौरुष होने का भाव होता है, जबकि सहृदयता में देवत्व होने का भाव होता है।

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प्रश्न 2.
मानवता के विकास की पुण्य-भूमि किसे कहा गया है?
उत्तर:
अभय और शांति के सुंदर मिलन को मानवता के विकास की पुण्य-भूमि कहा गया है।

प्रश्न 3.
बल का उपयोग विवेक के साथ क्यों करना चाहिए?
उत्तर:
बल का उपयोग विवेक के साथ करने से व्यक्ति स्वर्ग की सीमा तक पहुँच जाता है।

प्रश्न 4.
लेखक ने बल के किन दो रूपों का वर्णन किया है?
उत्तर:
लेखक ने बल के सदुपयोग और दुरुपयोग दो रूपों का प्रयोग किया है।

प्रश्न 5.
सम्राट अकबर ने किन वीरों का सम्मान किया था?
उत्तर:
सम्राट अकबर ने जयमल और फत्ता नामक वीरों का सम्मान किया था।

प्रश्न 6.
अंग्रेज सेनापति द्वारा झाँसी की रानी की वीरता की प्रशंसा को लेखक ने क्यों महत्त्वपूर्ण माना है?
उत्तर:
लेखक अंग्रेज सेनापति ह्यूरोज द्वारा झाँसी की रानी की वीरता की प्रशंसा को इसलिए महत्त्वपूर्ण माना है क्योंकि एक प्रतिद्वंद्वी वीर ने उसकी वीरता की प्रशंसा की थी।

बल-बहादुरी दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘सबल के बल का सदुपयोग ही सफलता की कुंजी है।’ इस कथन को कीजिए। (M.P. 2009, 2012)
उत्तर:
शक्तिशाली व्यक्ति यदि बल का सदुपयोग करे तो सफलता उसके कदम चूमती है। उसे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है। राम और कृष्ण इसके उदाहरण हैं। उन्होंने बल का सदुपयोग किया था इसीलिए उनकी जयंती मनाई जाती है। रावण और कंस दोनों ने बल का दुरुपयोग किया था। यही कारण है कि उनके स्मरण मात्र से मन में घृणा उत्पन्न होती है।

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प्रश्न 2.
सात्त्विक सहयोग को राष्ट्रों के निर्माण की मूलशिला क्यों कहा गया है?
उत्तर:
सात्त्विक सहयोग को राष्ट्रों के निर्माण की मूलशिला कहा गया है क्योंकि उसमें बल और प्रेम का सहयोग होता है। सात्त्विक सहयोग में अभिमान एवं कर्मण्यता, त्याग और ईमानदारी आदि मानवीय गुण सम्मिलित होते हैं।

प्रश्न 3.
बल और बुद्धि में पारस्परिक संबंध है-उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
बल और बुद्धि में पारस्परिक संबंध है क्योंकि बुद्धि के बिना बल व्यर्थ है। बल के अभाव में बुद्धि अपंग के समान है। उदाहरणार्थ-राजदूतों में वल था लेकिन बुद्धि का अभाव था। वे युद्ध-भूमि में शत्रुओं से सिंह की भाँति लड़े। उनकी वीरता की शत्रु व मित्र सभी ने प्रशंसा की। इतनी वीरता दिखाने के बाद भी वे पराजित हुए। यदि उनमें बल के साथ बुद्धि होती, तो उनका इतिहास कुछ और ही होता।

प्रश्न 4.
लेखक के बल की चरम सीमा कहाँ तक बतलाई है?
उत्तर:
लेखक ने बल की चरम सीमा शत्रुओं के समूह-गर्जन में, केसरी के साथ खेलने में या फिर देश और धर्म के लिए हँसते-हँसते अपने प्राणों का बलिदान देने में बताई है।

प्रश्न 5.
बल की दृष्टि से पश्चिम और भारत में क्या अंतर है? (M.P. 2010)
उत्तर:
बल की दृष्टि से पश्चिम और भारत की दृष्टि में पर्याप्त अंतर है। पश्चिम शारीरिक बल का उपासक है और भारत आत्मबल अर्थात् बुद्धि के बल को महत्त्व देता है।

प्रश्न 6.
शरीर-बल और आत्म-बल में लेखक ने किसे श्रेष्ठ माना है? आज विश्व कल्याण के लिए दोनों में से कौन-सा अधिक उपयोगी है?
उत्तर:
लेखक ने शरीर-बल और आत्मवल में से आत्मबल को श्रेष्ठ माना है। आज विश्व कल्याण के लिए दोनों में से आत्मबल सर्वाधिक उपयोगी है।

बल-बहादुरी भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
“पुरुषत्व, अभय का जनक है और देवत्व शान्ति का।”
उत्तर:
पुरुषत्व अर्थात् वीरता और पराक्रम का भाव मनुष्य में निडरता का भाव उत्पन्न करता है। इस प्रकार पुरुपत्व निर्भयता का जनक है। इस प्रकार जब व्यक्ति में कल्याण चाहने वाले देवता होने का भाव उत्पन्न होता है, तो उसमें शांति उत्पन्न होती है। इस तरह देवत्व शांति का जनक है। जब अभय ओर शांति दोनों मिल जाते हैं, तो मानवता के विकास की पुण्य भूमि उत्पन्न हो जाती है। निर्भयता और शांति की स्थिति में ही मानवता का विकास होता है।

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प्रश्न 2.
“बल अंधा है और उसकी गति पथ-प्रदर्शक के अधीन है।”
उत्तर:
निश्चय ही बल अंधा होता है। उसमें अच्छा-बुरा सोचने, उचित-अनुचित के संबंध में विचार करने की शक्ति नहीं होती। बल के वशीभूत होकर ही व्यक्ति उसका दुरुपयोग कर अन्याय और अत्याचार करता है। वल को सही दिशा देने का कार्य मार्ग दिखाने वाले का होता है। वह बल को सदुपयोग के मार्ग पर भी चला सकता है और दुरुपयोग के मार्ग पर भी। बल का सदुपयोग उसकी सफलता है और दुरुपयोग उसकी असफलता है।

बल-बहादुरी भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
नीचे कुछ शब्द दिए जा रहे हैं, उनमें से ‘प्रत्यय’ पृथक् कर लिखिए –
पुरुषत्व, मानवता, वीरता, कर्मण्यता, दूधवाला, चरितार्थता।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 7 बल-बहादुरी img-1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह कर समास का नाम लिखिए –
इतिहास-उपवन, वीरता-वल्लरी, परागमाला।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 7 बल-बहादुरी img-2

प्रश्न 3.
दिए गए वाक्यों को निर्देशानुसार रूपांतरित कीजिए –

  1. मोहन पुस्तक खरीदकर पढ़ता है। (मिथ वाक्य में)
  2. समय बहुत खराब है, इसलिए देखभाल कर चलना चाहिए। (सरल वाक्य में)
  3. विद्वानों का सभी आदर करते हैं। (मिश्र वाक्य में)
  4. तुम परिश्रम करो और परीक्षा में सफल हो जाओ। (सरल वाक्य में)
  5. राम पुस्तकें पढ़ता है जिससे उसे ज्ञान प्राप्त होता है। (संयुक्त वाक्य में)

उत्तर:

  1. मोहन ने कहा कि वह पुस्तक खरीदकर पढ़ता है।
    या
    जब मोहन पुस्तक खरीदता है, तब पढ़ता है।
  2. देखभाल कर चलो समय बहुत खराब है।
  3. जो विद्वान हैं, उनका सभी आदर करते हैं।
  4. तुम परिश्रम करके परीक्षा में सफल हो सकते हो।
  5. राम पुस्तकें पढ़ता है और उसे ज्ञान प्राप्त होता हैं।

बल-बहादुरी योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
वीर पुरुषों और वीरांगनाओं के चित्रों का संग्रह कर अलबम बनाइए।
उत्तर:
छात्र राम, कृष्ण, अर्जुन, महाराणा प्रताप, शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई आदि के चित्र एकत्र कर अलबम बना सकते हैं।

प्रश्न 2.
किसी बलिदानी वीर के बारे में 10 पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई, भगतसिंह आदि किसी पर भी छात्र स्वयं दस पंक्तियाँ लिखें।

प्रश्न 3.
किसी देश-भक्त का रेखाचित्र बनाइए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 4.
‘बल और बुद्धि में कौन श्रेष्ठ है’ विषय पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

बल-बहादुरी परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न 1.
‘बल-बहादुरी’ निबंध के लेखक हैं –
(क) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
(ख) कन्हैयालाल नंदन
(ग) भगीरथ मिश्र
(घ) यतीन्द्र मिश्र
उत्तर:
(क) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’।

प्रश्न 2.
कौन-सी बहादुरी सात्विक और ग्रहणीय है –
(क) अपनी स्वार्थवृत्ति को पूरा करने वाली
(ख) जनकल्याण करने वाली
(ग) लोगों को भयभीत कर कायर बनाने वाली
(घ) निर्दोष जनता को सताने वाली
उत्तर:
(ख) जनकल्याण करने वाली।

प्रश्न 3.
अज्ञान का पुत्र बताया गया है –
(क) लोभ को
(ख) मोहमाया को
(ग) अहंकार को
(घ) क्रूरता को
उत्तर:
(ग) अहंकार को।

प्रश्न 4.
राष्ट्र एवं जातियों के गौरव की स्थिति किसके शिशुओं जैसी है?
(क) कोकिल के
(ख) मनुष्य के
(ग) जानवरों के
(घ) राक्षसों के
उत्तर:
(क) कोकिल के।

प्रश्न 5.
बल और बुद्धि का संबंध वही है जो –
(क) देह और आँख का
(ख) बुद्धि और बल का
(ग) त्याग और तपस्या का
(घ) स्वार्थ और भोग का
उत्तर:
(क) देह और आँख का।

प्रश्न 6.
औरंगजेब कम बल राशि का स्वामी होते हुए भी साम्राज्य का स्वामी किसके प्रभाव से बन सका –
(क) बुद्धि कौशल से
(ख) रण-कौशल से
(ग) इच्छा शक्ति से
(घ) भाग्य-कौशल से
उत्तर:
(क) बुद्धि कौशल से।

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प्रश्न 7.
बल ………….. होता है।
(क) अंधा
(ख) कान का कच्चा
(ग) अभिमानी
(घ) स्वार्थी
उत्तर:
(क) अंधा।

प्रश्न 8.
पश्चिम …… उपासक है।
(क) शरीर बल का
(ख) आत्मबल का
(ग) सैन्य बल का
(घ) धन-बल का
उत्तर:
(क) शरीर बल का।

प्रश्न 9.
भारत ………. उपासक है।
(क) आत्मबल का
(ख) शरीर-बल का
(ग) धन-बल का
(घ) पशु-वल का
उत्तर:
(क) आत्मबल का।

प्रश्न 10.
इतिहास-रत्न जयमल और वीर शिरोमणि फत्ता का हम कितना ही गुणगान करें, पर उसका सच्चा सम्मान तो –
(क) झाँसी की वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई ही कर सकती थी।
(ख) मुगल सम्राट वीर अकबर ही कर सकता था।
(ग) मुगल सम्राट महान् शाहजहाँ ही कर सकता था।
(घ) उसके होठ जरा बाहर निकल जाते थे।
(ङ) औरंगजेब ही कर सकता था।
उत्तर:
(ख) मुगल सम्राट वीर अकबर ही कर सकता था।

II. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर करें –

  1. शाहजहाँ का उत्तराधिकारी अत्यन्त ………. था। (चतुर बलवान)
  2. कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ के निबंध का नाम ………. है। (बल बहादुरी मेरे सपनों का भारत)
  3. भारत ………. का उपासक है। (आत्मवल शक्तिबल)
  4. प्रकृति ने गाँधी की ………. की। (महावृष्टि, महासृष्टि)
  5. वे जहाँ लड़े ………. की भाँति लड़े। (सिंह/शेर)

उत्तर:

  1. बलवान
  2. बल-बहादुरी
  3. आत्मबल
  4. महासृष्टि
  5. सिंह।

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III. निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए –

  1. ‘बल-बहादुरी’ निबंध के लेखक यतीन्द्र मिश्र हैं। (M.P. 2009)
  2. शाहजहाँ का उत्तराधिकारी दारा था।
  3. बल में देवत्व का निवास है।
  4. बल की चरम सीमा नहीं है।
  5. गुरुनानक के आत्मज दीवार में चुने गए।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. असत्य।

IV. निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए –

प्रश्न 1.
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उत्तर:

(i) शिरोमणि
(ii) ताण्डव
(iii) वल्लरी
(iv) परागमाला
(v) उपवन

V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

  1. सौभाग्य-श्री का पुनीत वरदान क्या है?
  2. आकर्षण का केन्द्र क्या है?
  3. वीरता का सार किसमें है?
  4. गाँधी की महासृप्टि किसने की?
  5. स्वर्ग की सीमा में कौन ले जाता है?

उत्तर:

  1. बल के साथ बुद्धि का एकमात्र संयोग।
  2. बल।
  3. न्यौछावर करने में।
  4. प्रकृति ने।
  5. विवेक का साहचर्य।

बल-बहादुरी लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कायरता का पिता और उसकी परी किसे बताया गया है?
उत्तर:
भय को कायरता का पिता और दीनता को उसकी सहचरी बताया गया है।

प्रश्न 2.
पैशाचिकता की सखी कौन है?
उत्तर:
पैशाचिकता की सखी क्रूरता है।

प्रश्न 3.
राम और कृष्ण की जयंती मनाने का कारण क्या बताया गया है?
उत्तर:
राम और कृष्ण की जयंती मनाने का कारण उनके द्वारा बल का सदुपयोग करना बताया गया है।

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प्रश्न 4.
शाहजहाँ का उत्तराधिकारी दारा, कितने हाथियों की बलराशि का स्वामी था?
उत्तर:
शाहजहाँ का उत्तराधिकारी दारा, साठ हजार हाथियों से भी अधिक बलराशि का स्वामी था।

प्रश्न 5.
कवि की कविता की सच्ची प्रशंसा करने का अधिकारी किसे बताया गया है?
उत्तर:
एक कवि की कविता की सच्ची प्रशंसा का अधिकारी दूसरे कवि को बताया गया है।

प्रश्न 6.
बल के अभाव में क्या दिखाई देता है?
उत्तर:
बल के अभाव में कायरता का दयनीय दर्शन दिखाई देता है।

प्रश्न 7.
क्रूरता क्या करती है?
उत्तर:
क्रूरता अज्ञान के पुत्र अहंकार का पोषण करती है।

प्रश्न 8.
बल और बुद्धि का संबंध किस तरह का है?
उत्तर:
बल और बुद्धि का संबंध देह और आँख की तरह है।

बल-बहादुरी दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किनका पारस्परिक विरोध विश्व के विशाल राष्ट्रों और जातियों को हृदयबेधी इतिहास में बदल देता है?
उत्तर:
बल और प्रेम का पारस्परिक विरोध विश्व के विशाल राष्ट्रों और जातियों को हृदयबेधी इतिहास में बदल देता है। इनमें परस्पर विरोध के कारण विशाल राष्ट्रों और जातियों को नष्ट-भ्रष्ट कर देता है।

प्रश्न 2.
बल का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
बल का बड़ा महत्त्व है। जो मनुष्य शक्तिशाली होता है, उसका व्यक्तित्व सबको अपनी ओर आकर्षित करता है। उसको सभी प्रेम और श्रद्धा के साथ प्रेम का उपहार देते हैं और स्वयं को सौभाग्यशाली समझते हैं। शक्तिशाली व्यक्ति सभी में लोकप्रिय हो जाता है।

प्रश्न 3.
किस वरदान को पुनीत कहा गया है और क्यों?
उत्तर:
बल और बुद्धि के संयोग को सौभाग्य श्री का वरदान कहा गया है; क्योंकि जिस मनुष्य जाति और राष्ट्र के लोगों को यह वरदान प्राप्त हो जाता है, सफलता उनके सामने हाथ वाँधे खड़ी होने में ही अपनी सार्थकता समझती है। वल-बुद्धि के संयोग से ही प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

प्रश्न 4.
एक की जयंती मनाई जाती है और दूसरे की नहीं। क्यों?
उत्तर:
एक की जयंती मनाई जाती है और दूसरे की नहीं। ऐसा इसलिए कि एक ने अपनी शक्ति का उपयोग जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए किया था। उसने अन्यायी, अत्याचारी और दुराचारी प्रवृत्ति के लोगों में फंसी जनता को मुक्ति बीमार का इलाज दिलाने के लिए उनका संहार किया था। दूसरे ने जनता के अधिकारों का बलपूर्वक हनन किया था। उसके अधिकारों को छीना और उसे खूब सताया था।

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प्रश्न 5.
बल की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
बल में आकर्षण होता है। इसलिए वह अपनों को ही नहीं, अपितु दूसरों को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। फलस्वरूप उसे सभी ललचाई हुई दृष्टि से देखते हैं। उसके प्रति प्रेम और श्रद्धा के उपहार समर्पित करते हैं। फिर उसे प्रशंसा के एक-एक वाक्य सुनाने लगते हैं।

बल-बहादुरी लेखक-परिचय

प्रश्न 1.
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जन्म सन् 1906 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले में देवबंद नामक स्थान में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूलों में हुई। उनकी रुचि प्रारंभ से ही राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यों में थी। उच्च शिक्षा ग्रहण करते समय ही वे स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। फलस्वरूप उनकी शिक्षा पूर्ण न हो सकी। ‘प्रभाकर’ जी समय-समय पर राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलनों में सक्रिय भाग लेने के कारण कई बार जेल गए। छोटी आयु से ही वे अखबारों में लिखने लगे। उन्होंने कलकत्ता (अब कोलकाता) से प्रकाशित होने वाले ‘ज्ञानोदय’ नामक पत्र का अनेक वर्षों तक सफल संपादन किया।

सहारनपुर में अपना छापाखाना (प्रेस) स्थापित किया और ‘नया जीवन’ नामक पत्रिका का प्रकाशन किया। संरमरण और रेखाचित्र के क्षेत्र में यह पत्रिका बेजोड़ थी। इसके कारण इन्हें विशेष ख्याति मिली। सन् 1990 में हिन्दी सेवाओं के लिए उन्हें ‘पद्मश्री’ की उपाधि से अलंकृत किया गया। ‘प्रभाकर’ जी.की रचनाओं में गाँधीवादी विचारधारा का स्पष्ट प्रभाव है। उनकी प्रत्येक रचना में समाज एवं परिवार को सुखी बनाने का उद्देश्य दिखाई पड़ता है। उनकी रचनाओं में राष्ट्रीय भावना का भी समावेश है। सन् 1995 में उनका स्वर्गवास हो गया।

साहित्यिक विशेषताएँ:
‘प्रभाकर’ जी ने अपनी साहित्यिक यात्रा का प्रारंभ एक पत्रकार के रूप में किया। उन्होंने लघु कहानियाँ. संस्मरण, रेखाचित्र तथा निबन्धों की रचना की। वे हिन्दी के रेखाचित्र, संस्मरण एवं ललित निबंधों के श्रेष्ट रचनाकारों में गिने जाते हैं।

रचनाएँ:
नई पीढ़ी नए विचार, जिंदगी मुस्कराई, माटी हो गई सोना, आकाश के तारे, धरती के फूल, दीप जले : शंख बजे, बाजे पायलिया के घुघरू, क्षण बोले : कण मुसकाए, महके आँगन चहके द्वार, जिएँ तो ऐसे जिएँ आदि।

भाषा-शैली:
‘प्रभाकर’ जी की भाषा-शैली सजीव, प्रवाहपूर्ण, आत्मीय एवं मर्मस्पर्शी है। वे छोटी-से-छोटी एवं वड़ी-से-बड़ी बात को सहजता से कह जाने में सिद्धहस्त थे। उनकी समस्त रचनाओं में नवीनता एवं ताजगी है, जो पाठकों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। उनकी भाषा-शैली में उदाहरणों व सूक्तियों का पर्याप्त मात्रा में समावेश है। वे अपनी बात की पुष्टि में उदाहरण का प्रयोग करते हैं। उनकी भाषा विषयानुकूल है।

बल-बहादुरी पाठ का सारांश

प्रश्न 2.
‘बल-बहादुरी’ निबंध का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
‘बल-बहादुरी’ कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ द्वारा रचित एक विवेचनात्मक निबंध है। इसमें लेखक ने बल के सदुपयोग करने पर बल दिया है। लेखक बल और सहदय में अंतर स्पष्ट करते हुए कहता है कि बल में पौरुष होता है और सहृदयता में देवत्व। बल का अभाव कायरता है और सहृदयता का अभाव पाप और दानवता है। कायरता भय का पिता और हीनता उसकी सहचरी है।

पौरुष से निडरता आती है और सहदयता से शांति। जब निडरता और का समन्वय होता है तो मानवता का विकास होता है। रावण, कंस, राम और कृष्ण सभी बलशाली थे। परंतु दो की ही जयंती मनाई जाती है और दो की नहीं। ग़म और कृष्ण ने अपने बल का सदुपयोग जनता के हित के लिए किए। जबकि रावण और कंस ने अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए बल का दुरुपयोग किया। सबल के बल का सदुपयोग करना उसकी सफलता की कुंजी है। यद्यपि वल एक होता है किंतु सदुपयोग ओर दुरुपयोग के आधार पर दो रूपों में दिखाई देता है।

वल और विवेक का साहचर्य मनुष्य को स्वर्ग में ले जाता है, तो अविवेक का नरक में ले जाता है। सामान्य रूप से बल अंधा होता है और उसकी गति पथ-प्रदर्शक के अधीन होती है। बल और प्रेम का सात्विक सहयोग राष्ट्रों के निर्माण का आधार है, तो विरोध उनके विनाश का इतिहास। बल आकर्षण का केंद्र होता है। वह सभी को अपनी ओर खींचता है। वीर अपने विरोधी वीर के एक प्रशंसाभरे वाक्य को अधिक महत्त्व देता है। वास्तव में एक वीर ही दूसरे वीर का सच्चा सम्मान कर सकता है। झाँसी की रानी का वास्तविक सम्मान ब्रिटिश सेना के वीर सेनापति ह्यूरोज के शब्दों में ही मिलता है।

बल और बुद्धि का वही संबंध है जो शरीर और आँख का है। बुद्धि कौशल के अभाव में बल निरर्थक है और बल के बिना बुद्धि व्यर्थ है। इसी कारण तो राजपूतों को हार का मुंह देखना पड़ा। दाराशिकोह शक्तिशाली था परन्तु औरंगजेब बुद्धिमान। वह अपने बुद्धि-कौशल से ही शाहजहाँ के साम्राज्य का सम्राट बन बैठा। – जिस मनुष्य, जाति या राष्ट्र में बल और बुद्धि एकत्र हो जाते हैं वहाँ सफलता और विजय निश्चित होती है। बल-बुद्धि का संयोग सुख पर आधारित होने पर सौंदर्य एवं प्रेम के सम्मिलन की भाँति सुंदर, प्रकृति एवं पुरुष के सम्मिलन की तरह पवित्र और काव्य एवं संगीत के सम्मिलन के समान अजेय हो जाता है।

बल की चरम-सीमा वीर की अविचल मुस्कान में है, जो संकटों की स्थिति में भी उसके मुख पर बनी रहती है। विश्व का इतिहास ऐसे वीरों से भरा पड़ा है, जो धर्म देश और मानव के हित में अपने प्राणों को न्यौछावर करने से पीछे नहीं हटे। पाश्चात्य देशों और भारत में यही अंतर है कि पाश्चात्य देश बल को महत्त्व देते हैं और भारत आत्मबल को। महात्मा बुद्ध और महात्मा गाँधी ने संसार में आत्मबल की महासृष्टि की और भारतीय संस्कृति के इतिहास में अहिंसा को प्रतिष्ठित कर एक नया अध्याय जोड़ा। अतः जनकल्याण करने वाली बहादुरी सात्विक और ग्रहणीयहै।

बल-बहादुरी संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1.
बल में पुरुषत्व का निवास है और सहृदयतो में देवत्व का। बल के अभाव में परिलक्षित होता है क्लीबत्व का दयनीय दर्शन और सहृदयता की शून्यता में तांडव करती है, पापपुंज-प्रोज्ज्वलित पैशाचिकता! क्लीबत्व भय का पिता है और उसकी सहचरी है दीनता, पर पैशाचिकता की सखी है क्रूरता और वह अज्ञान के पुत्र अहंकार का पोषण करती है। पुरुषत्व अभय का जनक है और देवत्व शांति का। अभय और शांति का यह सुंदर सम्मेलन ही मानवता के विकास की पुण्य-भूमि है। (Page 26)

शब्दार्थ:

  • पुरुषत्व – पौरुष, वीरता।
  • क्लीबत्व – नपुंसकता, कायरता, अपुरुषत्व।
  • सहृदयता – दयालुता, करुणा, चित की कोमलता।
  • देवत्व – परमात्मा होने का भाव।
  • परिलक्षित – अच्छी तरह दिखाई देना।
  • सहचरी – साथिन, साथी।
  • पैशाचिकता – राक्षस जैसा व्यवहार।
  • सखी – सहेली।
  • क्रूरता – निर्दयता, कठोरता।
  • अहंकार – अभिमान।
  • पोषण – पालना, बड़ा करना।
  • अभय – निडर, निर्भय।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश कन्हैयाताल मित्र ‘प्रभाकर’ द्वारा रचित निबंध ‘वल-बहादुरी’ से लिया गया है। इसमें लेखक ने बल और सहृदयता के अंतर को स्पष्ट करने के लिए साथ-साथ निडरता और शांति के समन्वय को मानवता के विकास की आधारभूमि बताया है।

व्याख्या:
लेखक बल और सहृदयता का अंतर स्पष्ट करते हुए कह रहा है कि बल अर्थात् शक्ति, पराक्रम में वीरता का निवास होता है, जबकि मन की कोमलता अथवा दयालुता में देवता होने का भाव रहता है। शक्ति अथवा पौरुष के अभाव में अच्छी तरह से कायरता, नपुंसकता के दयनीय दर्शन होते हैं। दूसरे शब्दों में वीरता के अभाव में मनुष्य में कायरता आ जाती है। कायरता के कारण ही उसका व्यवहार दयनीय हो जाता है। शक्ति और दयालुता की कमी के कारण ही पुरुष का उग्र रूप दिखाई देता है। इससे वह निर्दयतापूर्वक अपनी शक्ति का दुरुपयोग करता है। इससे उसमें राक्षसी प्रवृत्ति उत्पन्न हो जाती है।

कायरता या नपुंसकता भय से पैदा होती है। इसीलिए कायरता भय (डर) का पिता है और हीनता उसकी साथिन हैं। दूसरे शब्दों में कायरता से मनुष्य के मन में भय उत्पन्न होता है और भय से हीनता आती है। राक्षसी व्यवहार की सहेली निर्दयता है और वह अज्ञान के पुत्र अभिमान को पालती है। दूसरे शब्दों में मनुष्य में अज्ञानता के कारण अभिमान और घमंड आता है और उसी के वशीभूत होकर वह राक्षसों जैसा व्यवहार करता है।

वीरता का भाव निर्भयता को जन्म देता है और दयालुता या श्रद्धा का भाव शांति की भावना उत्पन्न करता है। जब निडरता और शांति मिल जाते हैं, तो यह सुंदर सम्मिलन ही मानवता के विकास की पवित्र भूमि है। दूसरे शब्दों में निडरता और शांति जब मिल जाते. हैं, तो मानवता के विकास की पुण्य भूमि तैयार हो जाती है।

विशेष:

  1. बल और सहृदयता का अंतर स्पष्ट किया गया है। कायरता और भय तथा अज्ञान और अहंकार का संबंध भी स्पष्ट किया गया है।
  2. भाषा कठिन है। समास शैली का प्रयोग किया गया है।
  3. लेखक ने गागर में सागर भरने का प्रयास किया है।
  4. भाषा सूक्ति समान वाक्यों से बोझिल है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
बल और सहृदयता का अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बल और सहृदयता में यह अंतर है कि बल अर्थात् शक्ति और पराक्रम में वीरता का निवास होता जबकि सहृदयता में देवत्व का निवास होता है।

प्रश्न (ii)
मानवता का विकास कैसे होता है?
उत्तर:
मनुष्य में पौरुष से निडरता उत्पन्न होती है। सहृदयता की कोमलता और दयालुता की भावना आती है। उस समय उसमें शांति उत्पन्न होती है। जब मनुष्य में अभय और शान्ति का सुन्दर और संतुलित सम्मिश्रण हो जाता है तो उसमें मानवता का विकास होता है।

प्रश्न (iii)
मनुष्य में कायरता कैसे उत्पन्न होती है?
उत्तर:
मनुष्य में कायरता भय से उत्पन्न होती है और भय से हीनता की भावना उत्पन्न होती है। इस प्रकार भय और हीनता से कायरता आती है।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
मनुष्य राक्षसी व्यवहार क्यों करता है?
उत्तर:
मनुष्य में अज्ञानता के कारण अहंकार उत्पन्न होता है और अहंकार के वशीभूत होकर ही मनुष्य राक्षसी व्यवहार करता है।

प्रश्न (ii)
सहृदयता का अभाव मनुष्य को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर:
सहदयता के अभाव में पुरुष उग्र रूप धारण कर लेता है। वह निर्दयतापूर्वक वल का दुरुपयोग करता है। उसमें राक्षसी प्रवृत्ति उत्पन्न हो जाती है। मनुष्य इससे प्रभावित होकर अन्याय व अत्याचार जैसे पाप कर्म करने लगता है।

प्रश्न (iii)
राक्षसी व्यवहार की सखी और अज्ञान का पुत्र किसे कहा गया है?
उत्तर:
राक्षसी व्यवहार की सखी क्रूरता को ओर अज्ञान का पुत्र अहंकार को कहा गया है।

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प्रश्न 2.
रावण भी बली था और राम भी, कृष्ण में भी बल का अधिष्ठान था और कंस में भी, पर एक की आज जयंती मनाई जाती है और दूसरे का स्मरण हमारे हृदयों में घृणा के उद्रेक का कारण होता है। बात क्या है? एक ने अपने बल का उपयोग किया जनता के अधिकारों की रक्षा में और दूसरे ने उनके अपहरण में, एक के बल का पथ-प्रदर्शक था प्रेम और दूसरे का स्वार्थ, बस दोनों का यही अंतर है। इसका अर्थ यह हुआ कि सबल के बल का सदुप्रयोग की उसकी सफलता की एकमात्र कुंजी है। (Page 26) (M.P. 2010)

शब्दार्थ:

  • बली – बलवान, शक्तिशाली।
  • अधिष्ठान – संस्था, वासस्थान।
  • जयंती – जन्मदिन।
  • स्मरण – यादगार।
  • उद्रेक – वृद्धि, अधिकता।
  • पथ-प्रदर्शक – मार्ग दिखाने वाला।
  • अपहरण – छीन लेना, स्वार्थसिद्ध के लिए किसी को बलपूर्वक उठा ले जाना।
  • सबल – सशक्त, बलवान।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ द्वारा रचित निबंध ‘वल-बहादुरी’ से लिया गया है। इस गद्यांश में लेखक ने वल के सेदुपयोग और दुरुपयोग में अंतर स्पष्ट किया है।

व्याख्या:
लेखक कहता है कि रावण भी शक्तिशाली था और राम भी शक्तिशाली थे। इसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण भी शक्ति के पुंज थे और कंस भी बलशाली था। जब ये चारों बलशाली और शक्तिशाली थे तो भी इनमें से एक का जन्मदिन बड़ी – धूमधाम से मनाया जाता है जबकि दूसरे की याद आते ही हमारे हृदयों में घृणा की वृद्धि होती है। इसका कारण है एक ने अपनी शक्ति का उपयोग जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए किया था।

उसने अन्याय, अत्याचारी, दुराचारी, राक्षस प्रवृत्ति के लोगों के चंगुल में फँसी जनता को मुक्ति दिलाने के लिए उनका संहार किया। दूसरे ने जनता के अधिकारों का बलपूर्वक हनन किया। उनके अधिकारों को छीना और जनता को सताया। एक ने शक्ति का मार्ग दिखाने का कार्य प्रेम से किया। उसने प्रेम के द्वारा जनता को अपना बनाया जबकि दूसरे ने अपनी ताकत का प्रयोग अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए किया। दोनों में अपनी शक्ति के प्रयोग में यही अंतर था।

एक ने दूसरों के हित के लिए प्रेम का मार्ग अपनाकर शक्ति का सदुपयोग किया, तो दूसरे ने अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया। इसका आशय यह हुआ कि शक्तिशाली की ताकत का सदुपयोग ही उसकी सफलता का आधार है। अपनी शक्ति का सदुपयोग करने वालों का जन्मदिन मनाया जाता है और दुरुपयोग करने वालों के स्मरण मात्र से घृणा उत्पन्न होती है। अतः शक्ति के सदुपयोग में ही जीवन की सफलता है।

विशेष:

  1. लेखक ने शक्ति (बल) के सदुपयोग और दुरुपयोग का अंतर उदाहरण देकर किया है।
  2. भापा तत्सम शब्दावली प्रधान है और शैली सामासिक है।
  3. प्रत्येक वाक्य नपा-तुला सूक्ति समान है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
राम और कृष्ण की जयंती मनाई जाती है, क्यों?
उत्तर:
राम और कृष्ण दोनों ही शक्तिशाली थे। इन दोनों बलशालियों के जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं; क्योंकि इन्होंने अपने बल का सदुपयोग जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए किया था। उन्होंने अन्यायी, अत्याचारी और दुराचारी राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों से मुक्ति दिलाने के लिए उनका संहार किया था।

प्रश्न (ii)
रावण और कंस के स्मरण मात्र से हमारे हृदयों में घृणा क्यों उत्पन्न होती है?
उत्तर:
रावण और कंस शक्तिशाली थे, किन्तु उन्होंने अपनी शक्ति का दुरुपयोग जनता के अधिकारों का हनन करने में, जनता को सताने के लिए, अन्याय, अत्याचार और अपहरण आदि जघन्य कार्यों में किया। अतः उनके स्मरण मात्र से हमारे हृदय में घृणा उत्पन्न हो जाती है।

प्रश्न 3.
राम और कृष्ण के बल की पथ-प्रदर्शक कौन था?
उत्तर:
राम और कृष्ण के बल का पथ-प्रदर्शक प्रेम था। इसी प्रेम के कारण वे अपने बल का सदुपयोग करने में सफल रहे।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
राम और कृष्ण तथा रावण और कंस के शक्ति प्रयोग में क्या अन्तरथा?
उत्तर:
राम और कृष्ण ने अपनी शक्ति का सदुपयोग प्रेम के द्वारा जनता को अपना बनाने के लिए किया, जबकि रावण और कंस ने अपनी ताकत का दुरुपयोग अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए किया। दोनों के अपनी शक्ति के प्रयोग का यही अंतर था।

प्रश्न (ii)
राम व कृष्ण और रावण-कंस के पथ व प्रदर्शक कौन थे?
उत्तर:
राम व कृष्ण का पथ प्रदर्शक प्रेम था। उन्होंने परहित के लिए प्रेम का मार्ग अपनाकर शक्ति का सदुपयोग किया। रावण व कंस का पथ-प्रदर्शक स्वार्थ था। उन दोनों ने अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया।

प्रश्न 3.
राष्ट्र एवं जातियों के गौरव की स्थिति पूर्णतः कोकिल के शिशुओं जैसी है। उसका जन्म होता है, शक्ति की कल्याणमयी गोद में पर वह पलता है प्रेम के पवित्रपालने में। बल उसकी नसों में अभिमान एवं कर्मण्यता के रक्त का संचार करता है और प्रेम उसे त्याग का अमृत पिलाकर अमर करने का प्रयत्न । बल एवं प्रेम का यह सात्त्विक सहयोग ही राष्ट्रों के निर्माण की मूल शिला और इन दोनों का पारस्परिक विरोध ही विश्व के विशाल राष्ट्रों एवं जातियों के खंडहरों का सच्चा एवं हृदयबेधी इतिहास है। (Page 27)

शब्दार्थ:

  • गौरव – गर्व, महत्त्व, प्रतिष्ठा, बड़प्पन।
  • कोकिल – कोयल। कल्याणमयीसौभाग्यशाली, मंगलकारी।
  • पवित्र – शुद्ध, निर्मल, निश्छल।
  • पालना – भरण-पोषण करना, भोजन-वस्त्र आदि देकर बड़ा करना।
  • अभिमान – घमंड, गर्व।
  • नसों – रुधिर वाहिनी नलिकाएँ।
  • कर्मण्यता – कर्तव्यपरायणता, संचार-गमन, मार्गदर्शन, संदेशवाहक साधन का प्रकार।
  • अमृत – सुधा, वह वस्तु जिसके पीने से मुर्दा जी उठे।
  • अमर – अविनाशी, न मरने वाला।
  • सात्त्विक – सत्वगुणयुक्त, ईमानदार, नेक, शक्तिशाली।
  • हृदयबेधी – हृदय को बेधने वाला, हृदय को छलनी करने वाला।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ द्वारा रचित निबंध ‘बल-बहादुरी’ से लिया गया है। इस गद्यांश में लेखक ने राष्ट्र एवं जातियों के उत्थान तथा पतन को रेखांकित किया है।

व्याख्या:
लेखक कहता है कि राष्ट्र (देश) और जातियों की प्रतिष्ठा की स्थिति संपूर्ण रूप से कोयल के शिशुओं (बच्चों) की भाँति होती है। राष्ट्र और जातियों का उदय होता है और वे शक्ति की मंगलकारी गोद में प्रेम के निश्छल पालने में उनका भरण-पोषण होता है। यही कारण है कि उसकी खून वाहिनी नलिकाओं में गर्व एवं कर्तव्य पालने का भाव भरा होता है। अर्थात् देश और जातियों के लोगों में अपने देश व जातियों के प्रति गर्व और कर्तव्य की भावना भरी होती है।

वह निश्छल प्रेम उसे अपने देश व जाति के लिए सर्वस्व बलिदान करने का अमृत पिलाकर अमर वना देता है। शक्ति (ताकत) और स्नेह का यह सत्वगुणयुक्त सहयोग ही राष्ट्र के उत्थान की आधारशिला है और यदि बल और प्रेम में परस्पर विरोध हो तो संसार के विशाल (बड़े) राष्ट्रों एवं जातियों का पतन हो जाता है। विश्व में विभिन्न राष्ट्रों एवं जातियों के अवशेष इसी सच्चाई एवं हृदय को बेधने वाला इतिहास इसका साक्षी है।

विशेष:

  1. राष्ट्रों एवं जातियों के उत्थान व पतन के कारणों को स्पष्ट किया गया है। प्रेम एवं बल का सहयोग राष्ट्रों का उत्थान करता है, तो इनका विरोध उनका पतन।
  2. भाषा तत्सम प्रधान एवं दुरूह है किन्तु सुगठित है।
  3. समासयुक्त शैली है।
  4. प्रत्येक वाक्य सूक्ति लगता है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
राष्ट्र एवं जातियों के गौरव की स्थिति कैसी होती है?
उत्तर:
राष्ट्र एवं जातियों के गौरव की स्थिति कोकिल के बच्चों जैसी होती है। राष्ट्र और जातियों का जन्म होता है किन्तु उनका पालन-पोषण शक्ति और प्रेम के द्वारा होता है। इससे ही उन्हें गौरव प्राप्त होता है।

प्रश्न (ii)
राष्ट्रों एवं जातियों का उत्थान-पतन कैसे होता है?
उत्तर:
प्रेम और बल का सहयोग राष्ट्रों का उत्थान करता है तो इनका विरोध उनका पतन करता है।

प्रश्न (iii)
विश्व के विशाल राष्ट्रों एवं जातियों का हृदयवेधी इतिहास कैसे बनताहै?
उत्तर:
प्रेम और बल का पारस्परिक विरोध ही विश्व के विशाल राष्ट्रों एवं जातियों का हृदयवेधी इतिहास बनता है। उन दोनों के पारस्परिक विरोध और संघर्ष से राष्ट्र और जातियाँ नष्ट हो जाती हैं और इतिहास का भाग बन जाती हैं।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
राष्ट्रों के निर्माण की आधारशिला क्या है?
उत्तर:
बल और प्रेम का सात्त्विक सहयोग राष्ट्रों के निर्माण की आधारशिला है।

प्रश्न (ii)
राष्ट्रों एवं जातियों के रक्त में बल और त्याग किसका संचार करते हैं?
उत्तर:
राष्ट्रों एवं जातियों के रक्त में बल अभियान एवं कर्मण्यता का संचार करता है। प्रेम उसमें त्याग की भावना उत्पन्न कर अमर बनाने का प्रयास करता है।

प्रश्न 4.
बल आकर्षण का केंद्र है। बल का उपयुक्त प्रदर्शन अपनों और बिगानों, सभी को अपनी ओर आकर्षित करता है। सबल को सभी मुग्ध दृष्टि से देखते हैं, प्रेम और श्रद्धा का स्नेहोपहार उसके चरणों में समर्पित कर सभी अपने को धन्य समझते हैं, पर वीर अपने प्रतिद्वंद्वी वीर के एक प्रशंसा-वाक्य को जनसाधारण के अतिशयोक्तिपूर्ण अपने भाषणों से अधिक महत्त्व देता है। वास्तव में एक कवि ही दूसरे कवि की सच्ची प्रशंसा करने का अधिकारी है और एक वीर ही दूसरे वीर का सच्चा सम्मान कर सकता है।

इतिहास-रत्न जयमल और वीर शिरोमणि फत्ता का हम कितना ही गुण-गान करें। पर उनका सच्चा सम्मान तो मुगल सम्राट वीर अकबर ही कर सकता था। झाँसी की वीर महारानी लक्ष्मीबाई के सम्मान में हम कितने ही काव्यों का निर्माण क्यों न करें, उस देवी का वास्तविक सम्मान ब्रिटिश सेना के वीर सेनापति ह्यू रोज के वे शब्द हैं, जो आज भी इतिहास के स्वर्ण-पृष्ठों में अपनी दिव्य-प्रकाश-माला के साथ जगमगा रहे हैं। (Page 27)

शब्दार्थ:

  • आकर्षण – अपनी ओर खींचना।
  • प्रदर्शन – दिखावा।
  • बेगानों – परायों, दूसरों।
  • मुग्ध – मोहित, सुंदर।
  • स्नेहोपहार – प्रेम का उपहार।
  • प्रतिद्वंद्वी – विरोधी, विपक्षी।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ द्वारा रचित निबंध ‘बल-बहादुरी’ से लिया गया है। इस गद्यांश में लेखक ने बल के महत्व को व्यक्त किया है।

व्याख्या:
बल अर्थात् शक्तिशाली व्यक्ति सभी का ध्यान अपनी ओर खींचता है। वह सभी के आकर्षण का केंद्र होता है। शक्ति का उपयुक्त प्रदर्शन अपने आत्मीयजनों, सगे-संबंधियों एवं मित्रों के साथ-साथ परायों को भी अपनी ओर खींचता है। सशक्त व्यक्ति को सभी मोहित करने वाली दृष्टि से देखते हैं। इतना ही नहीं वे प्रेम (स्नेह) और श्रंद्धा का प्रेममयी उपहार (भेंट) भी उसके चरणों में समर्पित कर स्वयं को सौभाग्यशाली समझते हैं। दूसरे शब्दों में, शक्तिशाली, बलशाली व्यक्ति को अपने तथा परायों का स्नेह प्राप्त होता है।

सभी उसके प्रति प्रेम व श्रद्धा रखते हैं। परन्तु जो सच्चा वीर होता है बहादुर होता है, वह अपने प्रबल विरोधी वीर के एक प्रशंसाभरे वाक्य को अधिक महत्त्व देता है। वह जन-सामान्य के द्वारा बढ़ा-चढ़ाकर की गई प्रशंसा के भाषणों को अधिक महत्त्व नहीं देता। सत्य तो यह है कि एक कवि ही दूसरे कवि की कविताओं की वास्तविक प्रशंसा कर सकता है क्योंकि उसे कविता के गुण-दोषों का ज्ञान होता है।

इसी प्रकार एक सच्चा वीर ही दूसरे वीर की बहादुरी का सच्चा आदर कर सकताहै। इतिहास में रत्न माने जाने वाले वीर जयमल और वीरों में श्रेष्ठ समझे जाने वाले फत्ता का हम लोग कितना ही गुणगान करें, परंतु उनका सच्चा सम्मान तो मुगल सम्राट अकबर ही कर सकता है। यह इसलिए कि उन दोनों ने मुगल सम्राट अकबर की विशाल सेना का सामना किया था। सम्राट ने इनकी बहादुरी को देखा-परखा था।

लेखक कहता है कि इसी प्रकार झाँसी की वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के सम्मान में हम कितने ही काव्य-ग्रंथों का निर्माण क्यों न कर लें किंतु उस वीरांगना का उचित सम्मान तो ब्रिटिश सेना के बहादुर सेनापति ह्यूरोज द्वारा रानी के संबंध में कहे वे शब्द हैं जो इतिहास के सुनहरे पृष्ठों में आज भी अपनी दिव्य-प्रकाश-माला के साथ चमक रहे हैं। कहने का भाव यह है कि रानी के संबंध में सेनापति ह्यूरोज द्वारा कहे गए शब्द ही सर्वाधिक रूप में अपना महत्त्व रखते हैं। वही उनकी बहादुरी के प्रमाण हैं। एक वीर ही दूसरे वीर का सर्वोच्च सम्मान कर सकता है।

विशेष:

  1. बल और बहादुरी के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है।
  2. भाषा तत्सम प्रधान है। सामासिक शैली है।
  3. प्रत्येक वाक्य सूक्ति का कार्य कर रहा है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
बल आकर्षण का केन्द्र कैसे है?
उत्तर:
बल आकर्षण का केन्द्र होता है। शक्तिशाली व्यक्ति की ओर सभी ध्यान देते हैं। यह इसलिए कि वह अपनी शक्ति-प्रदर्शन के द्वारा अपने आत्मीयजनों, सगे-संबंधियों, मित्रों एवं दूसरों का ध्यान आकर्षित कर लेता है। उसे सभी मुग्ध दृष्टि से देखते हैं।

प्रश्न (ii)
वीर अपने प्रतिद्वंद्वी की बात को अधिक महत्त्व क्यों देते हैं?
उत्तर:
वीर अपने प्रतिद्वंद्वी वीर की बात को इसलिए महत्त्व देते हैं क्योंकि प्रतिद्वंद्वी . वीर ही उसकी वीरता का सच्चा मूल्यांकन कर सकता है। उसके द्वारा की गई प्रशंसा ही उसकी वास्तविक प्रशंसा होती है।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
वीर जनसामान्य की प्रशंसा को महत्त्व क्यों नहीं देता?
उत्तर:
वीर जनसामान्य की प्रशंसा को महत्त्व नहीं देता क्योंकि जनसामान्य उसकी प्रशंसा का बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन करते हैं। एक सच्चा वीर ही दूसरे वीर की बहादुरी की प्रशंसा कर सकता है, जनसामान्य नहीं।

प्रश्न (ii)
वीर जयमल और फत्ता का सच्चा सम्मान कौन कर सकता था औरक्यों?
उत्तर:
वीर जयमल और फत्ता का सच्चा सम्मान अकबर ही कर सकता था; क्योंकि उसने उनकी वीरता को देखा-परखा था।

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प्रश्न 5.
पश्चिम शरीर बल का उपासक है और भारत आत्मबल का। अपने-अपने क्षेत्र और समय में दोनों ही बल खूब फले-फूले और विकास की चरम सीमा तक पहुँचे। प्राचीनतम अतीत के अनंतर भी बुद्ध के रूप में भारत ने एक बार फिर अपने पक्ष की उज्ज्वलता घोषित की, पर अभी विश्व के विशाल प्रांगण में उसके पक्ष की सर्वोत्कृष्टता प्रमाणित होनी अवशिष्ट थी कि प्रकृति ने गाँधी की महासृष्टि की, जो युद्ध की पाशविकता की अहिंसा के साथ सफलतापूर्वक जोड़ एक सांस्कृतिक अनुष्ठान का रूप दे सका और यों भारतीय संस्कृति के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने में सफल हुआ। (Page 28)

शब्दार्थ:

  • उपासक – उपासना करने वाला, आराधक।
  • आत्मबल – आत्मा का बल, मन का बल।
  • अनंतर – तुरंत बाद।
  • उज्ज्वलता – कांति, चमकता हुआ।
  • अवशिष्ट – शेष, बचा हुआ।
  • पाशविकता – पशु प्रवृत्ति।
  • अनुष्ठान – धार्मिक कृत्य।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ द्वारा रचित निबंध ‘बल-बहादुरी’ से लिया गया है। इस गद्यांश में लेखक ने बल के संबंध पश्चिमी और भारतीय दृष्टिकोण के अंतर को स्पष्ट किया है।

व्याख्या:
पश्चिमी सभ्यता अथवा पश्चिम के राष्ट्र शारीरिक-शक्ति की उपासना करने वाले हैं। वे शारीरिक बल को महत्त्व देते हैं जबकि भारतीय सभ्यता के लोग आत्मिक शक्ति को महत्त्व देते हैं। बल के संबंध में भारतीय और पश्चिम के दृष्टिकोण में पर्याप्त अंतर है। पश्चिम में शारीरिक बल और भारत में आत्मिक बल दोनों ही खूब विकसित हुए और अपने विकास की अंतिम सीमा तक पहुँचे। प्राचीनतम काल के तुरंत बाद भी महात्मा बुद्ध के रूप में भारत ने एक बार पुनः अपने आत्मबल की चमक बिखेरी। उनकी कांति चारों ओर फैलायी।

परंतु अभी तक संसार के विस्तृत क्षेत्र में उनके पक्ष की सर्वोत्कृष्टता सिद्ध होनी बाकी थी कि प्रकृति ने महात्मा गाँधी की महासृष्टि की अर्थात् जब तक संसार महात्मा बुद्ध के आत्मबल को सर्वश्रेष्ठ मानता तब तक संसार में महात्मा गाँधी उत्पन्न नहीं हुए। वे ऐसे समय में उत्पन्न हुए जब संसार युद्धग्रस्त था और हिंसा, अन्याय, अत्वाच्यर के रूप में मनुष्य की पशु प्रवृत्ति उजागर हो रही थी। उन्होंने युद्ध की पाशविकता का अहिंसा के साथ सामना किया। उन्होंने पाशविकता को अहिंसा के साथ सफलतापूर्वक जोड़कर एक सांस्कृतिक अनुष्ठान का रूप दिया। दूसरे शब्दों में उन्होंने हिंसा के स्थान पर अहिंसा को महत्त्व दिया।

वे अहिंसा का सहारा लेकर बिना युद्ध के स्वतंत्रता प्राप्त करने में सफलता अर्जित कर भारतीय संस्कृति के इतिहास में एक नवीन अध्याय को जोड़ने में सफल हुए। महात्मा गाँधी ने अपने आत्मवल के द्वारा संसार में अहिंसा के महत्त्व को स्थापित किया। उन्होंने विशाल शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य को भारत को स्वतंत्र करने के लिए विवश कर भारतीय संस्कृति के नए अध्याय का प्रारंभ किया।

विशेष:

  1. बल के संबंध में भारतीय दृष्टिकोण की महत्ता को स्थापित किया है। भारतीय संस्कृति में अहिंसा के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है।
  2. भाषा तत्सम प्रधान है। सामासिक शैली है।
  3. प्रत्येक वाक्य सूक्ति प्रतीत होता है। वाक्य सुसंगठित हैं।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
बल के संबंध में पश्चिम और भारत के क्या विचार हैं?
उत्तर:
बल के संबंध में पश्चिम और भारत के विचारों में पर्याप्त अंतर है। पश्चिम शारीरिक बल का उपासक है, तो भारत आत्मबल का उपासक है। भारत ने प्राचीनकाल से लेकर आधुनिक काल तक आत्मबल की श्रेष्ठता सिद्ध की है।

प्रश्न (ii)
महात्मा गाँधी ने आत्मबल के द्वारा किस नए अध्याय का प्रारंभ किया?
उत्तर:
महात्मा गाँधी ने अपने आत्मबल के द्वारा संसार में अहिंसा के महत्त्व को स्थापित किया। उन्होंने इसके द्वारा विशाल शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य को भारत को स्वतंत्र करने के लिए विवश कर भारतीय संस्कृति में आत्मबल और अहिंसा के नए अध्याय का प्रारंभ किया।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कौन-कौन से बल अपने विकास की चरम सीमा तक पहुँचे?
उत्तर:
शारीरिक बल तथा आत्मबल दोनों ही बल अपने-अपने क्षेत्र और समय में खूब, फले-फूले और विकास की चरम सीमा तक पहुँचे। पशिप में शारीरिक बल और भारत में आत्मिक बल विकास की चरम तक पहुँचे।

प्रश्न (ii)
महात्मा गाँधी की प्रवृति ने कैसे समय में महासृष्टि की?
उत्तर:
महात्मा गाँधी की प्रवृत्ति ने ऐसे समय में महासृष्टि की जब पूरा संसार युद्धग्रस्त था। चारों ओर हिंसा, अन्याय और अत्याचार के रूप में मनुष्य की पशु-प्रवृत्ति प्रकट हो रही थी। उन्होंने युद्ध की पाशविकता का आत्मबल और अहिंसा से सामना किया।

MP Board Class 12th Maths Solutions Chapter 6 Application of Derivatives Ex 6.1

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MP Board Class 12th Maths Solutions Chapter 6 Application of Derivatives Ex 6.1

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MP Board Class 12th Maths Solutions Chapter 5 Continuity and Differentiability Ex 5.6

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MP Board Class 12th Maths Solutions Chapter 5 Continuity and Differentiability Ex 5.6

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MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem

MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem

Binomial Theorem Important Questions

Binomial Theorem Objective Type Questions

(A) Choose the correct option :

Question 1.
The total number of terms in the expansion of
(a) 7
(b) 12
(c) 13
(d) 6.
Answer:
(c) 13

Question 2.
If y = 3x + 6x2 + 10x3 + …………… ∞, then the correct relation will be :
(a) x = 1 – (1 + y)–\(\frac { 1 }{ 3 }\)
(b) x = (1 + y)–\(\frac { 1 }{ 3 }\)
(c) y = 1 – (1 – x)-3
(d) x = 1 + (1 + y)–\(\frac { 1 }{ 3 }\)
Answer:
(a) x = 1 – (1 + y)–\(\frac { 1 }{ 3 }\)

Question 3.
The total number of terms in the expansion of (1+ x)-1 will be :
(a) 0
(b) ∞
(c) 2
(d) It can not be expand
Answer:
(b) ∞

MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem

Question 4.
The mid – term in the expansion of (x – \(\frac { 1 }{ x }\))10 will be :
(a) – 10C5
(b) 10C5
(c) 251
(d) 252
Answer:
(a) – 10C5

An online remainder theorem calculator allows you to determine the remainder of given polynomial expressions by remainder theorem.

Question 5.
For all positive integer of n, n(n – 1) is :
(a) Integer
(b) Natural number
(c) Even positive integer
(d) Odd positive integer.
Answer:
(c) Even positive integer

Question 6.
Expansion of (a + x)n is :
(a) an + nC1an-1x + nC2an-2x2 + ……….. + nCran-rxr + ………… + an
(b) xn + nC1xn-1a +nC2xn-2a2 + ……….. + nCrxn-rar + ………… + an
(c) annC1an-1x + nC2an-2x2 + ……….. + (-1)rnCran-rxr + ………… + (-1)nan
(d) xnnC1an-1a + nC2an-2a2 + ……….. + (-1)rnCran-rxr + ………… + (-1)nxn
Answer:
(a) an + nC1an-1x +nC2an-2x2 + ……….. + nCran-rxr + ………… + an

Question 7.
The fifth term in the expansion of ( x – \(\frac { 1 }{ x }\) )10 from the end, will be :
(a) \(\frac { ^{ 10 }{ C }_{ 6 } }{ x }\)
(b) \(\frac { 105 }{ 32{ x }^{ 2 } }\)
(c) \(\frac { ^{ 10 }{ C }_{ 6 } }{ { x }^{ 2 } }\)
(d) \(\frac { ^{ 10 }{ C }_{ 6 } }{ { x }^{ 10 } }\)
Answer:
(a) \(\frac { ^{ 10 }{ C }_{ 6 } }{ x }\)
[Hint: The total number of terms be 11 in the expansion of it.
∵ The 5th term from end = (11 – 5)th = 7th term from the beginning.]

Question 8.
The number of mid – terms in the expansion of ( x – \(\frac { 1 }{ x }\) )10
(a) 1
(b) 2
(c) – \(\frac { ^{ 13 }{ C }_{ 7 } }{ x }\)
(d) 1716x
Answer:
(b) 2

Question 9.
The value of nC0 + nC1 + nC2 + …………….. + nCn :
(a) 2n + 1
(b) 2n – 1
(c) 2n – 1
(d) 2n
Answer:
(d) 2n

Question 10.
The value of nC0 + nC2 + nC4 + …………….. = nC1 + nC3 + ……………. will be :
(a) 2n + 1
(b) 2n – 1
(c) 2n – 1
(d) 2n
Answer:
(b) 2n – 1

The Chebyshev’s Theorem calculator, above, will allow you to enter any value of k greater than 1.

Question 11.
The total number of terms in the expansion of (a + b + c + d)n will be :
(a) \(\frac { (n+1)(n+2) }{ 2 }\)
(b) \(\frac { n(n+1) }{ 2 }\)
(c) \(\frac { (n+1)(n+2)(n+3) }{ 6 }\)
(d) \(\frac { (n+1)(n+2) }{ 6 }\)
Answer:
(c) \(\frac { (n+1)(n+2)(n+3) }{ 6 }\)

Question 12.
The necessary condition for expansion of (1 + x)-1 is :
(a) | x | < 1
(b) | x | > 1
(c) | x | = 1
(d) | x | = – 1.
Answer:
(a) | x | < 1

Question 13.
The general term in the expansion of (x + a)n will be :
(a) rth
(b) (r+1)thterm
(c) (r-1)th
(d) (r+2)thterm
Answer:
(b) (r+1)thterm

Question 14.
In the expansion of ( 2x + \(\frac { 1 }{ { 3x }^{ 2 } }\) )9, then term independent of x will be :
(a) \(\frac { 8 }{ 127 }\)
(b) \(\frac { 124 }{ 81 }\)
(c) \(\frac { 1792 }{ 9 }\)
(d) \(\frac { 256 }{ 243 }\)
Answer:
(c) \(\frac { 1792 }{ 9 }\)

Question 15.
The coefficient of x3 in the expansion of ( x – \(\frac { 1 }{ x }\) )15 is :
(a) 14
(b) 21
(c) 28
(d) 35
Answer:
(b) 21

Question 16.
The independent term in the expansion of (x2 – \(\frac { 2 }{ { x }^{ 3 } }\))15 is :
(a) 5th
(b) 6th
(c) 7th
(d) 8th
Answer:
(c) 7th

MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem

Question 17.
The value of nC0 + nC1 + nC2 + …………….. = nCn the expansion of (l + x)n is :
(a) 2n – 1
(b) 2n – 2
(c) 2n
(d) 2n-1
Answer:
(c) 2n

Question 18.
The value of 15C0 + 15C2 + 15C4 + 15C6 + …………….. = 15C14 is :
(a) 214
(b) 215
(c) 215 – 1
(d) None of these
Answer:
(a) 214

(B) Match the following :
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 1
Answer:

  1. (d)
  2. (a)
  3. (e)
  4. (c)
  5. (b)
  6. (g)
  7. (f)
  8. (i)
  9. (b)

(C) Fill in the blanks :

  1. By binomial theorem the value of (102)4 is ……………..
  2. The value of second term in the expansion of (1 – x)-3/2 is ……………..
  3. The 5th term from the end in the expansion of (x – \(\frac { 1 }{ 2x }\) )10 is ……………..
  4. The constant term will be …………….. in the expansion of ( x2 – 2 + \(\frac { 1 }{ { x }^{ 2 } }\) )6
  5. The value of C1 + 2C2 + 3C3 + ………….. + nCn will be ……………..
  6. The value of nC0nC1 + nC2nC3 + ………….. will be ……………..
  7. The value of MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 2is ……………..
  8. The value of MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 3is ……………..
  9. The value of MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 4is ……………..
  10. (2x + 3y)5 = …………….. up to three terms.
  11. The coefficient of x7 in the expansion of (x2 + \(\frac { 1 }{ x }\) )11 will be …………….
  12. In the expansion of (1 – x)10 the value of middle term is ……………..
  13. Third (3rd) term in the expansion of e-3x will be ……………..
  14. If n is odd, in the expansion of (x + a)n, then number of middle terms are ……………..
  15. The middle term in the expansion of (\(\frac { x }{ a }\) + \(\frac { a }{ x }\) )10
  16. The coefficient of xn in the expansion of (1 + x) (1 – x)n will be ……………..

Answer:

  1. 08243216
  2. \(\frac { { x }^{ 3 } }{ 16 }\)
  3. \(\frac { 105 }{ 32{ x }^{ 2 } }\)
  4. 924
  5. n.2n-1
  6. 0
  7. \(\frac { n(n+1) }{ 2 }\)
  8. \(\frac { n(n+1)(2n+1) }{ 6 }\)
  9. [ \(\frac { n(n+1) }{ 2 }\) ]2
  10. 32x5 + 240x4y + 720x3y2
  11. 462
  12. – 252 x-5
  13. \(\frac { 1 }{ 2 }\)
  14. Two
  15. 252
  16. (- 1)n(1 – n)

(D) Write true / false :

  1. The expansion of (1 + x)-3 is 1 – 3x + 6x2 – 10x3 + ………….. + \(\frac { (- 1)(r + 1)(r +2) }{ 2! }\)xr + ……………..
  2. The expansion of (1 – x)-3 is 1 + 3x + 6x2 + 10x3 + ………….. + \(\frac { (- 1)r(r + 1)(r +2) }{ 2! }\)xr + ……………..
  3. The expansion of (1 – x)-2 is 1 + 2x + 3x2 + (r + 1) xr+ ………….. +
  4. The (r + 1 )th term in the expansion of (1 – x)-2 is (- 1)r(r + 1) xr+ ………….. +
  5. The (r + 1 )th term in the expansion of (1 – x)n will be xr
  6. The total number of terms in the expansion of (a + b + c)n is \(\frac { (n + 1)(n + 1) }{ 2 }\)
  7. In the expansion of ( 3x – \(\frac { { x }^{ 3 } }{ 9 } \) )9, No . of terms is 9.
  8. The number of term in the expansion of ( 3x – \(\frac { { x }^{ 3 } }{ 9 } \) )9 is 8.
  9. In the expansion of (x + a)n then sum of powers of x and α in any term is n.
  10. The coefficient of x in the expansion of (1 – 2x)-3 is 6.
  11. The second term in the expansion of (2x + 3y)5 is 240x4y.
  12. The value of second term in the expansion of (1 – x)-3/2 is \(\frac { 3 }{ 2 }\)x.

Answer:

  1. True
  2. True
  3. True
  4. True
  5. False
  6. True
  7. False
  8. False
  9. True
  10. False
  11. True
  12. True.

(E) Write answer in one word / sentence :

  1. Find the value of 9993 by the binomial theorem
  2. Find the middle term in expansion of (x2 – \(\frac { 1 }{ x }\))6
  3. General term in the expansion of (x + a)n will be.
  4. If in the expansion of (1+x)51 the coefficient of xr and xr – 5 are equal, then the value of r will be.
  5. Find the coefficient of xn in the expansion of (1 + x + x2 + …………… ∞)2, if | x | < 1.
  6. In the expansion of (\(\frac { x }{ 3 }\) – \(\frac { 2 }{ { x }^{ 2 } }\))10, x4 comes in rth term, then the value of r will be.
  7. The 5th term in the expansion of (1 – 2x)– 1 will be.

Answer:

  1. 997002999
  2. – 20 x5
  3. nCr xn – r ar
  4. 28
  5. (n + 1)
  6. 3
  7. 16x2

Binomial Theorem Long Answer Type Questions

Question 1.
Expand : (\(\frac { 2 }{ x }\) – \(\frac { x }{ 2 }\))5 (NCERT)
Solution:
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 5

Question 2.
Expand : (2x – 3)6 (NCERT)
Solution:
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 6

Question 3.
Expand : (\(\frac { x }{ 3 }\) + \(\frac { 1 }{ x }\))5 (NCERT)
Solution:
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 7

Question 4.
Expand : (x + \(\frac { 1 }{ x }\))6. (NCERT)
Solution:
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 8

Question 5.
find 13th term in the expansion of ( 9x – \(\frac { 1 }{ 3\sqrt { x } }\) )18. (NCERT)
Solution:
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 9

Question 6.
Find the middle term of (3 – \(\frac { { x }^{ 3 } }{ 6 }\))7
Solution:
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 10

Question 7.
Find the middle term in the expansion of (\(\frac { x }{ 3 }\) + 9y)10
Solution:
Here n =10
Total number of terms = n + 1 = 10 + 1 = 11 (odd)
Here, the term will be middle term.
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 11

Question 8.
If coefficient of x2 and x3 in the expansion of (3 + ax)9 are equal, the value of a.
Solution:
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 12

Question 9.
Find the coefficient of x5 in the expansion of (x + 3)8
Solution:
Suppose x5 appears in (r + 1)th term Tr+1 = nC1xn-rar
Here n = 8, x = x, a = 3
Tr+1 = 8Cr(x)8 – r(3)r
For the coefficient of x5,
8 – r = 5
=> r = 3
T3+1 = 8C3(3)3
= \(\frac { 8 × 7 × 6 }{ 3 × 2 × 1}\) × 3 × 3 × 3 × x5
= 1512 × x5
Hence coefficient of x5 is 1512.

MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem

Question 10.
Find the coefficient of a5b7 in the expansion of (a – 2b)12.
Solution:
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 13

Question 11.
If the 17th and 18th terms in the expansion of (2 + a)50 are equal, then find the value of a. (NCERT)
Solution:
In the expansion of (x + a)n
Tr+1 = nCr xn – r ar
Here n = 50, x = 2, a = a
T17 = T16 + 1 = 50C16 (2)50 – 16 (a)16
⇒ T17 = 50C16 (2)34 (a)16
and T18 = T17 + 1 = 50C17 (2)50 – 17 (a)17
= 50C17 (2)33 (a)17
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 14

Question 12.
Prove that the value of the middle term in the expansion of (1+x)2n is \(\frac { { 1.3.5 …….. (2n – 1)} }{ n! }\).2n xn
Solution:
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 15

Question 13.
In the expansion of (x + 1)n, the coefficient of the (r – 1)th, rth and (r + 1)th terms are in the ratio 1 : 3 : 5, then find the value of n and r.
Solution:
In the expansion of (x + 1)n,
Tr + 1 = nCrxn – r(1)r
Tr – 1 = Tr – 2 + 1 = nCr – 2(x)n – (r – 2)(1)r – 2
Coefficient of Tr – 1th term = nCr – 2
Tr = Tr – 1 + 1 = nCr – 1(x)n – (r – 1)(1)r – 1
Coefficient of Trthterm = nCr – 1
Tr + 1 = nCr xn – r (1)r
Coefficient of Tr+1th term = nCr
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 16
Put n = 4r – 5 from equation (1) in equation (2),
3(4r – 5) – 8r = – 3
⇒ 12r – 15 – 8r = – 3
⇒ 4r = 12
∴ r = 3
Put r = 3 in equation (2),
n – 4 x 3 = – 5
⇒ n = 12 – 5
⇒ n = l
n = 7, r = 3

Question 14.
Prove that the coefficient of xn in the expansion of (1 + x)2n of in the expansion of (1 + x)2n – 1.
Solution:
In the expansion of (x + a)n
Tr+1 = nCr xn – r ar
Here x = 1, a = x, n = 2n
Tr+1 = 2nCr(1)2n – r(x)r
For the coefficient of xn, put r = n,
Tn+1 = 2nCn(a)2n – n(x)n
and T18 = T17 + 1 = 50C17 (2)50 – 17 (a)17
= (2nCn) xn
∴ In the expansion of (1 + x)2n, the coefficient of xn = 2nCn …. (1)
and in the expansion of (1 + x)2n – 1, x = 1, a = x, n = 2n – 1
∴ Tr+1 = 2nCr (1)2n – 1  -r (x)n
For the coefficient of xn, put r = n, ‘
We get Tn+1 = 2n – 1Cn xn
The coefficient of xn in the expansion of (1 + x)2n – 1 = n – 1Cn
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 17
∴ The coefficient of xn in the expansion of (1 + x)2n
= 2 x The coefficient of xn in the expansion of (1 + x)2n, [from equation (1) and (2)]

Question 15.
Find the constant term in the expansion of (\(\frac { 3 }{ 2 }\)x2 – \(\frac { 1 }{ 3x }\))6
Solution:
MP Board Class 11th Maths Important Questions Chapter 8 Binomial Theorem 18

MP Board Class 11th Maths Important Questions