MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 16 संख्याओं के साथ खेलना Ex 16.1

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 16 संख्याओं के साथ खेलना Ex 16.1

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से प्रत्येक में अक्षरों के मान ज्ञात कीजिए तथा सम्बद्ध चरणों के लिए कारण भी दीजिए –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 16 संख्याओं के साथ खेलना ex 16.1 1
हल:
1. इकाई स्तम्भ को जोड़ने पर अर्थात् A + 5 को जोड़ने पर हम इकाई का अंक 2 प्राप्त करते हैं।
अत: A = 7, (∴ A + 5 = 7 + 5 = 12)
अब दहाई स्तम्भ को जोड़ने पर
1 + 3 + 2 = B या B = 6
अतः अब पहेली इस प्रकार होगी –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 16 संख्याओं के साथ खेलना ex 16.1 2
∴ A = 7, B = 6

2. इकाई स्तम्भ से, A + 8 = 3
अर्थात् इकाई का अंक = 3 होना चाहिए।
अतः A = 5, (∴ A + 8 = 5 + 8 = 13)
अब दहाई स्तम्भ से, 1 + 4 + 9 = B या B = 14
∴ स्पष्ट है, B = 4 और C = 1 अब पहेली इस प्रकार होगी –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 16 संख्याओं के साथ खेलना ex 16.1 3
∴ A = 5, B = 4 तथा C = 1

3. क्योंकि इकाई का अंक A x A = A है।
∴ A = 1, A = 5 या A = 6
जबकि A = 1, तब,
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अत: A ≠ 1
जबकि A = 5, तब,
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 16 संख्याओं के साथ खेलना ex 16.1 17
अत: A ≠ 5
जबकि A = 6, तब,
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 16 संख्याओं के साथ खेलना ex 16.1 5
अतः A = 6

4. दी हुई पहेली से,
B + 7 = A तथा A + 3 = 6
अतः सम्भावित मान
0 + 7 = 7 अर्थात् A = 7 परन्तु 7 + 3 ≠ 6
1 + 7 = 8 अर्थात् A = 8 परन्तु 8 + 3 ≠ 6
2 + 7 = 9 अर्थात् A = 9 परन्तु 9 + 3 ≠ 6
3 + 7 = 10 अर्थात् A = 0 परन्तु 1 + 0 + 3 ≠ 6
4 + 7 = 11 अर्थात् A = 1 परन्तु 1 + 1 + 3 ≠ 6
5 + 7 = 12 अर्थात् A = 2 और 1 + 2 + 3 = 6
B = 5 तथा A = 2
अब पहेली इस प्रकार है –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 16 संख्याओं के साथ खेलना ex 16.1 6
A = 2 और B = 5

5. ∴ इकाई स्तम्भ 3 x B = B, ∴ B = 0
अब पहेली इस प्रकार है –
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अब, 3 x A = A, ∴ A = 5
अब, पहेली इस प्रकार है –
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∴ A = 5, B = 0 और C = 16
6. ∴ इकाई स्तम्भ 5 x B = B अर्थात् B = 0 या 5
यदि B = 0, तब
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अब, 5 x A = A या A = 0 या 5
परन्तु A0, A = 5 के लिए
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∴ A = 5, B = 0 और C = 2
यदि B = 5, तब
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 16 संख्याओं के साथ खेलना ex 16.1 9
अब, 5 x A + 2 = A ⇒ A = 2, ∴ 5 x 2 + 2 = 12
∴ इकाई का अंक = 2 = A
∴ B = 5 के लिए,
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∴ A = 2, B = 5 और C = 1

7.
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BBB के सम्भव मान: 111, 222, 333, आदि
∴ 111 ÷ 6 = 18 और शेषफल = 3 ∴ B ≠ 3
222 ÷ 6 = 37, शेषफल = 0, अतः भागफल 37 ≠ A2
333 ÷ 6 = 55, शेषफल = 3, अतः भागफल 55 ≠ A3
444 + 6 = 74, शेषफल = 4, अतः भागफल 74 ≠ A4
अतः A = 7 और B = 4

8. इकाई स्तम्भ से 1 + B = 0, इकाई स्तम्भ का अंक 0 है।
∴ B = 9 अब
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परन्तु 90 – 19 = 71 अत: A1 = 71 या A = 7
अतः A = 7, B = 9

9. इकाई स्तम्भ से,
B + 1 = 8 अतः इकाई अंक 8 है।
B = 8 – 1 = 7
∴ B स्वयं एक अंक है, ∴ B = 7
अब
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दहाई स्तम्भ से, A + 7 = 1
अतः A का इकाई अंक 1 होना चाहिए।
∴ A स्वयं एक अंक है। अत: A = 4
अब, पहेली
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अतः A = 4, B = 7

10. दहाई के स्तम्भ से,
2 + A = 0
∴ संख्या का इकाई अंक 0 होना चाहिए।
∴ A = 8, तब
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अब, 8 + B = 9, ∴ B = 9 – 8 = 1
अब,
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∴ A = 8 और B = 1

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 268

प्रयास कीजिए (क्रमांक 16.6)

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(पहला प्रश्न आपकी सहायता के लिए किया हुआ है।)
प्रश्न 1.
यदि विभाजन N ÷ 5 से शेषफल, 3 प्राप्त होता है, तो N की इकाई अंक क्या हो सकता है?
हल:
इकाई के अंक को 5 से भाग देने पर शेषफल 3 आना चाहिए। अतः इकाई का अंक 3 या 8 होगा।

प्रश्न 2.
यदि विभाजन N ÷ 5 से शेषफल 1 प्राप्त होता है, तो N का इकाई अंक क्या हो सकता है?
हल:
इकाई के अंक को 5 से भाग देने पर शेषफल 1 आना चाहिए।
अतः इकाई का अंक 1 या 6 होगा।

प्रश्न 3.
यदि विभाजन N 5 से शेषफल 4 प्राप्त होता है, तो N की इकाई का अंक क्या हो सकता है?
हल:
इकाई के अंक को 5 से भाग देने पर शेषफल 4 आना चाहिए।
अतः इकाई का अंक 4 या 9 होगा।

प्रयास कीजिए (क्रमांक 16.7)

(पहला प्रश्न आपकी सहायता के लिए किया हुआ है।)
प्रश्न 1.
यदि विभाजन N ÷ 2 से शेषफल 1 प्राप्त होता है, तो N की इकाई का अंक क्या हो सकता है?
हल:
N विषम है। इसलिए इसकी इकाई का अंक विषम होगा। अतः N की इकाई का अंक 1, 3, 5, 7 या 9 होगा।

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प्रश्न 2.
यदि विभाजन N ÷ 2 से कोई शेष प्राप्त नहीं होता (अर्थात् शेषफल 0 है), तो N की इकाई का अंक क्या हो सकता है?
हल:
N सम होना चाहिए। इसलिए इसकी इकाई का अंक सम होगा। – अंत: N की इकाई का अंक 0, 2, 4, 6 या 8 होगा।

प्रश्न 3.
मान लीजिए कि विभाजन N ÷ 5 से शेषफल 4 और विभाजन N ÷ 2 से 1 प्राप्त होता है। N की इकाई का अंक क्या होना चाहिए?
हल:
क्योंकि N ÷ 5 से शेषफल 4 प्राप्त होता है। अत: N की इकाई का अंक 4 या 9 होगा।
N ÷ 2 से शेषफल 1 प्राप्त होता है। इसलिए इकाई का अंक विषम होना चाहिए।
अतः N की इकाई का अंक 1, 3, 5, 7 या 9 होगा। परन्तु यहाँ 9 दोनों स्थितियों को सन्तुष्ट करेगा।
अतः N की इकाई का अंक 9 होगा।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 270

प्रयास कीजिए (क्रमांक 16.8)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित संख्याओं की 9 से विभाज्यता की जाँच कीजिए –

1. 108
2. 616
3. 294
4. 432
5. 927

हल:
हम जानते हैं कि कोई संख्या 9 से विभाज्य होती है, यदि इसके अंकों का योग 9 से विभाज्य हो।

1. संख्या = 108
संख्या के अंकों का योग = 1 + 0 + 8 = 9, यह 9 से विभाज्य है।
इसलिए 108, 9 से विभाज्य है।

2. संख्या = 616
संख्या के अंकों का योग = 6 + 1 + 6 = 13, यह 9 से विभाज्य नहीं है।
इसलिए 616, 9 से विभाज्य नहीं है।

3. संख्या = 294
संख्या के अंकों का योग = 2 + 9 + 4 = 15, यह 9 से विभाज्य नहीं है।
इसलिए 294, 9 से विभाज्य नहीं है।

4. संख्या = 432
संख्या के अंकों का योग = 4 + 3 + 2 = 9, यह 9 से विभाज्य है।
इसलिए 432, 9 से विभाज्य है।

5. संख्या = 927
संख्या के अंकों का योग = 9 + 2 + 7 = 18, यह 9 से विभाज्य है।
इसलिए 927, 9 से विभाज्य है।

सोचिए, चचों कोजिए और लिखिए।

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प्रश्न 1.
आप देख चुके हैं कि 450, 10 से विभाज्य है। यह 2 और 5 से भी विभाज्य है, जो 10 के गुणनखण्ड हैं। इसी प्रकार संख्या 135, 9 से विभाज्य है। यह 3 से भी विभाज्य है, जो 9 का एक गुणनखण्ड है।
क्या आप कह सकते हैं कि यदि कोई संख्या किसी संख्या m से विभाज्य हो, तो वह m के प्रत्येक गुणनखण्ड से भी विभाज्य होगी?
हल:
हाँ, यदि कोई संख्या m से विभाज्य हो, तो वह m के प्रत्येक गुणनखण्ड से भी विभाज्य होगी।

प्रश्न 2.
1. एक तीन अंकों की संख्या abc की 100 a + 10b + c के रूप में लिखिए। अब 100a + 10b + c = 99a + 11b + (a – b + c)
= 11 (9a + b) + (a – b + c)
यदि संख्या abc, 11 से विभाज्य है, तो आप (a-b+ c) के बारे में क्या कह सकते हैं ? क्या यह आवश्यक है कि (a+c-b), 11 से विभाज्य हो?

2. एक चार अंकों की संख्या abcd को इस प्रकार लिखिए –
1000a + 100b + 10c + d = (1001 a + 99b + 11c) -(a – b + c – d)
= 11 (91a + 9b + c) + [(b + d) – (a + c)]
यदि संख्या abcd, 11 से विभाज्य है, तो (b + d) – (a + c) के बारे में आप क्या कह सकते हैं?

3. उपर्युक्त (i) और (ii) से, क्या आप कह सकते हैं कि कोई संख्या 11 से विभाज्य होगी, यदि इसके विषम स्थानों के अंकों का योग और समस्थानों के अंकों के योग का अन्तर 11 से विभाज्य होगा?

हल:
1. हाँ, यह आवश्यक है कि (a + c – d), 11 से विभाज्य होगी।
2. यदि संख्या abcd, 11 से विभाज्य है, तब (b + d) – (a + c), 11 से विभाज्य होगी।
3. हाँ, हम कह सकते हैं कि यदि कोई संख्या 11 से विभाज्य होगी यदि इसके विषम स्थानों के अंकों का योग और समस्थानों के अंकों का योग का अन्तर 11 से विभाज्य हो।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 271

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प्रयास कीजिए (क्रमांक 16.9)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित संख्याओं की 3 से विभाज्यता की जाँच कीजिए –

1. 108
2. 616
3. 294
4. 432
5. 927.

हल:
हम जानते हैं कि कोई संख्या 3 से विभाज्य होती है, यदि इसके अंकों का योग 3 से विभाज्य हो।
1. संख्या = 108
अंकों का योग = 1 + 0 + 8 = 9, यह 3 से विभाज्य है।
इसलिए 108,3 से विभाज्य है।

2. संख्या = 616
अंकों का योग = 6 + 1 + 6 = 13, यह 3 से विभाज्य नहीं है।
इसलिए 616, 3 से विभाज्य नहीं है।

3. संख्या = 294
अंकों का योग = 2 + 9 + 4 = 15, यह 3 से विभाज्य है।
इसलिए 294, 3 से विभाज्य है।

4. संख्या = 432
अंकों का योग = 4 + 3 + 2 = 9, यह 3 से विभाज्य है।
इसलिए 432, 3 से विभाज्य है।

5. संख्या = 927
अंकों का योग = 9 + 2 + 7 = 18, यह 3 से विभाज्य है।
इसलिए 927, 3 से विभाज्य है।

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MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 22 Gita ka Marm Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 22 Gita ka Marm Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 22 Gita ka Marm Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 22 गीता का मर्म प्रश्न उत्तर

गीता का मर्म बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
विशाल = विस्तृत, बड़ा; मर्मज्ञ ज्ञाता, जानकार; महास्य = महत्व प्रवचन = उपदेशः कटिलता कपटता, चालाकी; वाचालता = बातूनीपन; प्रयास = कोशिश, प्रयत्न; प्रपंच = पाखंड, नाटक; युक्तियुक्त = तर्कपूर्ण; धृष्टता = अशिष्टता, उइंडता; प्रकांड = महान, सर्वश्रेष्ठ; मर्म = सूक्ष्म अर्थ, रहस्य; तारतम्य = क्रम; लिप्सा = लालसा, इच्छा; मन्तव्य = विचार; पार्थ = अर्जुन का एक नाम; मध्यस्थता = बीच-बचाव; चित्त = मन; व्यापक = विशाल; शमन- नाश, शान्त; शास्त्र = पुस्तक, धर्मग्रन्थ; धर्मक्षेत्र = धर्मभूमि।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
(क) राजा ने मंत्रियों के समक्ष कौन-सी इच्छा प्रकट की?
उत्तर
राजा ने मंत्रियों के समक्ष गीता का ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा प्रकट की।

(ख) राजा की घोषणा सुनकर उनके पास कौन-कौन आने लगे?
उत्तर
राजा की घोषणा सुनकर दूर-दूर से बड़े-बड़े विद्वान, पण्डित, ज्ञानीजन राजा के पास आने लगे।

(ग) गौवर्ण राजा के पास क्यों आया था?
उत्तर
गौवर्ण राजा को गीता का मर्म समझाने के लिए राजा के पास आया था।

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(घ) गीता में कुल कितने श्लोक हैं ?
उत्तर
गीता में कुल सात सौ श्लोक हैं।

(ङ) राजा के मन में कौन-सी कुटिलता समाई हुई थी?
उत्तर
राजा के मन में आधा राज्य न देने का लोभ व कुटिलता समाई हुई थी।

(च) दूसरों को उपदेश देने का अधिकारी कौन हो सकता है?
उत्तर
दूसरों को उपदेश देने का अधिकारी वही है जो स्वयं उस पर आचरण करता हो।

(छ) विद्या से हममें कौन-कौन से गुण आते हैं ?
उत्तर
विद्या से हममें विनम्रता आती है और व्यक्ति शालीन बन जाता है। मन शान्त हो जाता है, चित्त एकाग्र हो जाता है और तृष्णाओं का शमन होता है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(क) राजा आनन्द पाल ने अपने मंत्रियों से क्या कहा और क्यों ?
उत्तर
एक बार राजा आनन्द पाल के मन में गीता का ज्ञान अर्जित करने की कामना उत्पन्न हुई, उन्होंने तत्काल अपने मंत्रियों से कहा कि वे श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। अतः पूरे राज्य में यह घोषणा करवा दी जाये कि जो कोई भी विद्वानजन राजा को पूर्णरूप से गीता को समझा देगा, उसे राजा अपने राज्य का आधा हिस्सा प्रदान करेगा। मंत्रियों ने भी राजा के आदेशानुसार पूरे राज्य के समस्त नगरों तथा गाँवों में तथा राज्य के बाहर भी ढिंढोरा पिटवाकर यह घोषणा करवा दी कि राजा गीता का ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। अत: जो कोई भी राजा को पूर्ण रूप से गीता समझा देगा, उसे राजा द्वारा आधा राज्य उपहार स्वरूप प्रदान किया जायेगा।

(ख) गौवर्ण ने राजा को गीता का मर्म समझाने के लिए क्या प्रयास किया ?
उत्तर
गौवर्ण नाम के एक प्रकाण्ड विद्वान ने जब राजा की घोषणा सुनी तो उसने राजा को गीता का मर्म समझाने की ठानी। वह राजा के पास आया और बोला कि वह उन्हें गीता समझायेगा। राजा के ना-नुकर करने पर उसने राजा से एक अवसर प्रदान करने की प्रार्थना की। राजा द्वारा अनुमति प्रदान करने के उपरांत गौवर्ण ने राजा को गीता के एक-एक शब्द, पद, अक्षर व श्लोक का अर्थ व्याख्या सहित समझाया। धर्मक्षेत्रे कुरूक्षेत्रे …” से प्रारम्भ कर यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः’ तक पूरे सात सौ श्लोक राजा को लगभग कण्ठस्थ करा दिए। ‘

(ग) महायोगी विशाख ने दोनों की मध्यस्थता करते हुए क्या कहा?
उत्तर
महायोगी विशाख ने दोनों की मध्यस्थता करते हुए सर्वप्रथम राजा आनन्दपाल से पूछा “राजन्, क्या आप गीता को समझे?” राजा ने कहा-“तपोनिधि ! नहीं, मैं कुछ भी नहीं समझा।” फिर उन्होंने गौवर्ण से पूछा-“श्रीमान् ! आपने राजन् को गीता अच्छी तरह से समझा दी क्या ?” गौवर्ण ने कहा-“हाँ, मुनिवर । एक-एक शब्द, पद व अक्षर की व्याख्या करके समझाया है।” महायोगी विशाख गौवर्ण से बोले-“सच तो यह है कि आपने स्वयं ही गीता का मर्म नहीं समझा अन्यथा आप आधे राज्य के लोभ के कारण इस प्रपंच में नहीं पड़ते क्योंकि गीता तो निष्काम कर्म करने की शिक्षा देती है, फल प्राप्ति की आशा से कर्म करने की नहीं । राजन् ने भी अर्थ नहीं समझा है, अन्यथा विद्वानों का मान-सम्मान करने वाले राजा का व्यवहार इस प्रकार का नहीं होता। वास्तव में दूसरे को उपदेश देने का अधिकारी वही है जो स्वयं उस पर आचरण करता हो। ज्ञान या स्वाध्याय का अर्थ हमें स्वयं को जानना है।

विद्याग्रहण करने के बाद भी जिसने स्वयं को न जाना वह उसी व्यक्ति के समान है जिसके पास नक्शा तो है पर मार्ग नहीं सूझता। ज्ञान हमें रास्ता बताता है। इससे हमारी विचार शक्ति बढ़ती है और देखने की शक्ति व्यापक हो जाती है तथा मनन करने की शक्ति में वृद्धि हो जाती है। हम किसी परिणाम पर युक्तियुक्त ढंग से पहुँचने का प्रयत्न करते हैं। विद्या से विनम्रता आती है और व्यक्ति शालीन बन जाता है। मन शान्त हो जाता है, चित्त एकाग्र हो जाता है और तृष्णाओं का शमन होता है। मात्र विषयों को जानना ही सच्चा ज्ञान नहीं है, पढ़े हुए को चरित्र में डालना ही सच्चा ज्ञान है।

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(घ) अर्जुन ने इन्द्र से अपनी विद्या का उपयोग किन-किन के लिए करने को कहा था ?
उत्तर
अर्जुन ने इन्द्र से अपनी विद्या का उपयोग सत्य व न्याय की रक्षा करने, दुष्टों का दमन करने, असहायों की सहायता करने, नारी की रक्षा करने, निर्बल को सबल बनाने तथा धर्म की रक्षा करने के लिए कहा था।

(ङ) राजा आनन्दपाल के मन में किस प्रसंग को सुनकर हलचल मची और क्यों?
उत्तर
जब महायोगी विशाख के मुँह से राजा आनन्दपाल ने अर्जुन और इन्द्र से सम्बन्धित प्रसंग सुना तो उसके मन में हलचल मच गई। उन्हें लगा कि राजा के रूप में उनका कार्य जन कल्याण होना चाहिए, राज भोग की लिप्सा नहीं। उनके मन में वैराग्य भाव जाग्रत हो गया। उन्होंने अपना सम्पूर्ण राजपाट गीता का मर्म.सुनाने वाले पंडित गौवर्ण को देने की इच्छा व्यक्त की। उधर महाज्ञानी गौवर्ण सोचने लगे कि मैं तो पंडित हूँ, राज भोग अथवा आधे राज्य का लालच मेरे आत्मकल्याण के लिए उचित नहीं। उनके मन में भी विरक्ति पैदा हो गई और वे भी राज-पाट के मोह से मुक्त हो गए।

(च) इस कहानी से आज का विद्यार्थी क्या सीख ले सकता है ? अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर
इस कहानी से आज का विद्यार्थी यह सीख ग्रहण कर सकता है कि उसे सच्ची, अर्थपूर्ण एवं सही शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए। साथ ही उसे यह भी स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि शिक्षा मात्र धनोपार्जन तथा यश प्राप्ति का साधन नहीं है वरन् इसका उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए। यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि यदि विद्यार्थी अपने द्वारा अर्जित ज्ञान (शिक्षा) को अपने चरित्र में भी डाल लेता है तो वह और अधिक सार्थक हो सकता है। साथ ही इस कहानी के द्वारा विद्यार्थियों को यह भी संदेश दिया गया है कि उन्हें लोभ और लालच से सदैव बचना चाहिए।

प्रश्न 4.
किसने, किससे कहा?
(क)”मुझे गीता का ज्ञान प्राप्त करना है।”
उत्तर
राजा आनन्दपाल ने अपने मंत्रियों से कहा।

(ख)”राजन आप लोभवश ऐसा कह रहे हैं।”
उत्तर
गौवर्ण ने राजा आनन्दपाल से कहा।

(ग) “आप अपने दिए हुए वचन से पीछे हट रहे हैं।”
उत्तर
गौवर्ण ने राजा आनन्दपाल से कहा।

(घ) “धृष्टता क्षमा करें देव। विजय, यश और राज्य भोगने के लिए मैंने धनुर्विद्या प्राप्त नहीं की है।”
उत्तर
अर्जुन ने इन्द्र से कहा।

(ङ) “आप दोनों ही गीता के मर्म को भली-भाँति समझ गए हैं।”
उत्तर
महायोगी विशाख ने राजा आनन्दपाल एवं गौवर्ण दोनों से कहा।

गीता का मर्म भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और उन्हें अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए
मर्मज्ञ, ढिंढोरा, महात्म्य, प्रकाण्ड, धनुर्विद्या, स्वाध्याय, तृष्णा ।
उत्तर
विद्यार्थी उपर्युक्त शब्दों को ठीक-ठीक पढ़कर उनका | शुद्ध उच्चारण करने का अभ्यास करें।
वाक्य प्रयोग-

  1. आर्यभट्ट ज्योतिष विद्या के भी मर्मज्ञ थे।
  2. राजा ने अपने राज्य में यह ढिंढोरा पिटवा दिया कि पूर्णमासी को एक विशाल दंगल का आयोजन होगा।
  3. हिन्दू धर्म में गौ-दान का बहुत महात्म्य बताया गया है।
  4. कालिदास संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान थे।
  5. अर्जुन धनुर्विद्या में सर्वाधिक निपुण योद्धा थे।
  6. विद्यार्थी को स्वाध्याय अवश्य करना चाहिए।
  7. मनुष्य को कभी भी पराये धन एवं वैभव की तृष्णा नहीं करनी चाहिए।

प्रश्न 2.
‘वाचाल’शब्द में ता’ प्रत्यय लगाकर नया शब्द ‘वाचालता’ और ‘सत्य’ में ‘अ’ उपसर्ग लगाकर ‘असत्य’
नया शब्द बना है। इसी प्रकार ‘ता’ प्रत्यय और ‘अ’ उपसर्ग लगाकर चार-चार शब्द लिखिए
उत्तर
‘ता’ प्रत्यय से बने शब्द – ‘अ’ उपसर्ग से बने शब्द
(1) आतुर + ता = आतुरता – (1) अ + नाथ = अनाथ
(2) कामुक + ता = कामुकता – (2) अ + धर्म = अधर्म
(3) दृढ़ + ता = दृढ़ता – (3) अ+ ज्ञात = अज्ञात
(4) महान + ता = महानता – (4) अ+ ज्ञानी = अज्ञानी

प्रश्न 3
निम्नलिखित सामासिक पदों का समास विग्रह करते हुए उनमें निहित समास पहचानकर लिखिए
महापण्डित, मान-सम्मान, यथोचित, लोभवश, महाराज, देवलोक, तपोनिधि।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 1
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 2

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का सन्धि-विच्छेद कीजिए और सन्धि का प्रकार भी लिखिए
सम्मान, स्वागत, उत्थान, निराश, परोपकार।।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 3

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वर्ग पहेली में से राजा, इन्द्र, नारी और धनुष के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द खोजकर लिखिए
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 4
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 5
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 6

प्रश्न 6.
उदाहरण के अनुसार ‘नहीं’,’मत’ और ‘न’ का – प्रयोग हुए निषेधवाचक वाक्य (दो-दो) लिखिए।
उत्तर
(क) ‘नहीं’ का प्रयोग
उदाहरण- मेरी समझ में कुछ नहीं आया।

  1. उसने मुझसे कुछ नहीं कहा।
  2. वह मेरे लिए उपहार नहीं लाया।

(ख) ‘मत’ का प्रयोग
उदाहरण-कक्षा में शोर मत करो।

  1. वहाँ मत बैठो।
  2. सड़क के बीचों-बीच मत चलो।

(ग) ‘न’ का प्रयोग
उदाहरण-आप इधर न बैठे।

  1. आप इधर न थूकें।
  2. कृपया मुझे अनावश्यक सलाह न दें।

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प्रश्न 7.
अर्थ के आधार पर निम्नलिखित वाक्यों के भेद – उनके सामने लिखिए
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 7

गीता का मर्म परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) “सच तो यह है कि आपने स्वयं ही गीता का मर्म नहीं समझा अन्यथा आप आधे राज्य के लोभ के कारण इस प्रपंच में नहीं पड़ते क्योंकि गीता तो निष्काम कर्म करने की शिक्षा देती है, फल प्राप्ति की आशा से कर्म करने की नहीं। राजन् ने भी अर्थ नहीं समझा है, अन्यथा विद्वानों का मान-सम्मान करने वाले राजा का व्यवहार इस प्रकार का नहीं होता। वास्तव में दूसरे को उपदेश देने का अधिकारी वही है जो स्वयं उस पर आचरण करता हो। ज्ञान या स्वाध्याय का अर्थ हमें स्वयं को जानना है। विद्याग्रहण करने के बाद भी जिसने स्वयं को न जाना वह उसी व्यक्ति के समान है जिसके पास नक्शा तो है पर’मार्ग नहीं सूझता। ज्ञान हमें रास्ता बताता है। इससे हमारी विचार शक्ति बढ़ती है और देखने की शक्ति व्यापक हो जाती है तथा मनन करने की शक्ति में वृद्धि हो जाती है। हम किसी परिणाम पर युक्तियुक्त ढंग से पहुँचने का प्रयत्न करते हैं। विद्या से विनम्रता आती है और व्यक्ति शालीन बन जाता है। मन शान्त हो जाता है, चित्त एकाग्न हो जाता है और तृष्णाओं का शमन होता है। मात्र विषयों को जानना ही सच्चा ज्ञान नहीं है, पढ़े हुए को चरित्र में डालना ही सच्चा ज्ञान है।”

शब्दार्थ-मर्म = अर्थ, सार; प्रपंच = पाखंड, नाटक; निष्काम = बिना स्वार्थ; व्यापक = दीर्घ; युक्तियुक्त = तर्कपूर्ण; शालीन = सभ्य; तृष्णा = इच्छा; शमन शांत ।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा-भारती’ के पाठ ‘ गीता का मम’ से अवतरित है।

प्रसंग-इस गद्यांश में गीता के गूढ़ रहस्य को बहुत ही । सरल शब्दों में समझाया गया है।

व्याख्या-महायोगी विशाख गौवर्ण को सम्बोधित करते हुए – कहते हैं कि गीता के विद्वान होने के बाद भी गौवर्ण गीता-सार को स्वयं ही नहीं समझ पाये। आधा राज्य प्राप्त करने के स्वार्थ के चलते उन्होंने राजा को गीता समझाने की ठानी थी, जबकि गीता तो निस्वार्थ भाव से कर्म करने की सीख देती है। दूसरी ओर राजा, जो ज्ञानी लोगों का सदैव आदर-सत्कार करता था, वह भी । मीता के ज्ञान को किंचित मात्र भी ग्रहण नहीं कर सका। वास्तवमें, वही व्यक्ति दूसरों को सीख प्रदान कर सकता है, जो स्वयं उस सीख पर अमल करता हो। ज्ञान प्राप्ति का प्रमुख उद्देश्य व्यक्ति के लिए स्वयं को जानना होना चाहिए। ज्ञान हमें हमारे ।

गंतव्य तक का रास्ता सुझाता है। ज्ञान से हमारी विचार शक्ति, दृष्टिकोण एवं मनन करने की शक्ति बढ़ती है। यह ज्ञान ही है कि. । जिसके चलते हम किसी समस्या के समाधान हेतु तर्कपूर्ण ढंग से सोच पाते हैं। विद्या व्यक्ति के अन्दर समस्त उच्च मानवीय गुणों; यथा-विनम्रता, शालीनता इत्यादि को समाहित करती है और उसके मन को शान्त एवं चित्त को एकाग्र कर उसकी समस्त इच्छाओं को शान्त करती है। वास्तव में, ज्ञान का सही अर्थ विभिन्न विषयों का अध्ययन करना ही नहीं है अपितु अर्जित ज्ञान को चरित्र में ढालकर जीवन को उच्चता की ओर ले जाना है।

MP Board Class 8 Hindi Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 10 Pran Jaye Par Vriksh Na Jaye Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 10 Pran Jaye Par Vriksh Na Jaye Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 10 Pran Jaye Par Vriksh Na Jaye Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 10 प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए प्रश्न उत्तर

बोध प्रश्न

MP Board Class 8 Hindi Chapter 10 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
रक्षक = रक्षा करने वाले ताम्रपत्र = ताँबे का पत्तर, स्मृति पत्र; श्रद्धांजलि = मरने के बाद श्रद्धा प्रकट करने हेतु व्यक्त शब्द; संवर्द्धन = वृद्धि, विकास; शहीद = बलिदान; प्रशस्ति = प्रशंसा; उत्कृष्ट = उच्च कोटि का।

Class 8 Hindi Chapter 10 MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप में उत्तर लिखिए

(क) सैनिकों की कुल्हड़ी का सबसे पहले विरोध किसने किया?
उत्तर
सैनिकों की कुल्हाड़ी का सबसे पहले विरोध एक महिला अमृता देवी विश्नोई ने किया। कुल्हाड़ी चलाना आरम्भ किए जाने पर अमृतादेवी विश्नोई पेड़ों से लिपट गई।

(ख) अमृता देवी का नारा क्या था?
उत्तर
पेड़ों से लिपटकर वह कहती रही “सिर साँटे पर  रूख रहे तो भी सस्तो जाण”। यही अमृतादेवी का नारा था।’

(ग) विश्नोई समाज की स्थापना किसने की थी ?
उत्तर
विश्नोई समाज की स्थापना आज से लगभग पाँच सौ वर्ष पहले सन् 1485 ई. में भगवान जम्भेश्वर ने की थी।

(घ) हिरणों की रक्षा में कौन शहीद हुआ था ?
उत्तर
सन् 1996 ई. में अक्टूबर माह में राजस्थान के चुरु जिले में हिरणों की रक्षा करते हुए श्री निहालचन्द विश्नोई शहीद हुए थे।

(ङ) राजा ने पेड़ काटने की क्या सजा घोषित की ?
उत्तर
राजा अभयसिंह ने सैनिकों के दुष्कृत्य के लिए क्षमा माँगी और ताम्रपत्र पर राजा की आज्ञा को जारी किया गया कि विश्नोई गाँवों में कोई भी पेड़ नहीं काटेगा। यदि काटेगा तो राजदण्ड का भागी होगा।

Bhasha Bharti Class 8 Chapter 10 प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए

(क) जोधपुर के राजा अभयसिंह को लकड़ी की आवश्यकता क्यों पड़ी? इसके लिए उन्होंने क्या किया ?
उत्तर
जोधपुर के राजा अभयसिंह ने अपना महल बनवाया। यह भादों का महीना था एवं शुक्ल पक्ष की दशमी का दिन था। इसके निर्माण के लिए राजा अभयसिंह को लकड़ी की आवश्यकता पड़ी। इसके लिए राजा अभयसिंह ने अपनी सेना के कुछ सैनिकों को लकड़ी काटकर लाने का आदेश दिया। इस तरह राजा के सैनिक जोधपुर के पास खेजड़ली गाँव पहुँचे। वहाँ वे पेड़ काटना चाहते थे। यह गाँव विश्नोइयों का था। विश्नोइयों ने कहा, “हम परम्परा से वनों के रक्षक हैं। हमारे रहते पेड़ नहीं कट सकते।” सैनिकों ने उनके विरोध की अनदेखी की। सैनिकों ने कुल्हाड़ी चला दी। अमृता देवी विश्नोई नामक महिला पेड़ों से लिपट गई और कहती रही, “सिर साँटे पर रूख रहे तो भी सस्तो जाण।” राजा की आज्ञा का पालन करना है, इस भाव से सैनिकों ने अमृता देवी को काट डाला।

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(ख) अमृता देवी वृक्षों की रक्षा और किस प्रकार से कर सकती थीं ? सोचकर लिखिए।
उत्तर
राजा के आदेश से उनके सैनिक पेड़ काटने के लिए खेजड़ली गाँव पहुँचे। राजा की आज्ञा का पालन करना उन सैनिकों का धर्म हो गया था। अमृता देवी वृक्षों की रक्षा के लिए उन्हें काटने से रोकने के लिए, सैनिकों से निवेदन कर सकती थीं तथा अपनी बात को राजा के पास जाकर विरोध के रूप में कह सकती थीं और पेड़ों के न काटने के लिए अपनी परम्परा को स्पष्ट रूप से बता सकती थीं।

(ग) अमृतादेवी का नारा इस पाठ में किस तरह सार्थक हुआ?
उत्तर
अमृता देवी का नारा, “सिर साँटे पर रूख रहे तो भी सस्तो जाण” सार्थक हो गया। पेड़ों की आवश्यकता हम लोगों को है, पेड़ों को हमारी आवश्यकता नहीं है। दिन-प्रतिदिन बढ़ते प्रदूषण से अपनी रक्षा के लिए हमें पेड़ लगाने होंगे और उनकी रक्षा करनी होगी। अमृता देवी और तीन सौ बासठ शहीदों के बलिदान की स्मृति में भारत सरकार प्रति वर्ष राष्ट्रीय पर्यावरण पुरस्कार देती है। मध्य प्रदेश का वन विभाग प्रति वर्ष वन-संवर्द्धन एवं वन रक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली ग्राम पंचायत अथवा संस्था को शहीद अमृता देवी विश्नोई पुरस्कार और एक लाख रुपया नकद प्रदान करता है। मध्य प्रदेश सरकार शहीद अमृता देवी विश्नोई के नाम पर दो व्यक्तिगत पुरस्कार भी देती है। पचास हजार रुपया नगद और प्रशस्ति पत्र के पुरस्कार के रूप में वन सम्बर्द्धन और वन्य प्राणियों की रक्षा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति को प्रतिवर्ष दिए जाते हैं।

(घ) राजा अभयसिंह ने पश्चाताप किस प्रकार किया ?
उत्तर
जब जोधपुर के राजा अभयसिंह को विश्नोई समाज द्वारा किए गये बलिदान सम्बन्धी भीषण घटना का समाचार मिला तो उन्हें बड़ा दुःख हुआ। वे स्वयं खेजड़ली गाँव आए। अपनी सेना के द्वारा किए गये दुष्कृत्य के लिए क्षमा माँगी। उन्होंने ताम्रपत्र जारी किया। उसमें राजाज्ञा जारी की गई कि विश्नोई – गाँवों में कोई पेड़ नहीं काटेगा। यदि काटेगा तो राजदण्ड का भागी होगा। इस प्रकार राजा के द्वारा निर्णय लिया गया और पश्चाताप किया गया।

(ङ) अमृता देवी व अन्य शहीदों से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर
अमृता देवी व अन्य शहीदों से यह प्रेरणा मिलती है कि हमें पर्यावरण की सुरक्षा के लिए वृक्षों और वनों को पूर्ण सुरक्षा देनी चाहिए। उनके सम्वर्द्धन और विकास में रुचि लेनी चाहिए। वन्य जीवों की सुरक्षा और उनकी प्रजातियों का विकास करना चाहिए। प्रत्येक राज्य सरकार को वृक्षारोपण और वन सम्पदा के विकास और सुरक्षा के लिए अपनी ओर से प्रोत्साहन पुरस्कार घोषित किये जाने चाहिए। ग्राम पंचायतों को भी वृक्षों का आरोपण करने के अभियान चलाने चाहिए।

Hindi Chapter 10 Class 8 MP Board प्रश्न 4.
सही विकल्प चुनिए
(क) विश्नोई समाज के नियम मुख्यतः आधारित थे
(अ) प्रकृति के पोषण पर
(आ) समाज की परम्परा पर
(इ) धर्म की मान्यता पर
(ई) जीव-जन्तुओं के प्रति करुणा पर,
(उ) इन सबके सम्मिलित प्रभाव वाली प्रथा पर।
उत्तर
उ) इन सबके सम्मिलित प्रभावशाली प्रथा पर

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(ख) म. प्र. सरकार किसके नाम पर दो व्यक्तिगत पुरस्कार देती है?
(अ) विश्नोई समाज
(आ) अमृता देवी विश्नोई
(इ) निहालचन्द विश्नोई
(ई) शहीदों।
उत्तर
(आ) अमृता देवी विश्नोई

(ग) वृक्ष का पर्यायवाची शब्द है
(अ) काननं
(आ) तरु
(इ) गिरि
(ई) चक्षु
उत्तर
(आ) तरु

(घ) अमृता देवी के साथ शहीद विश्नोइयों की संख्या थी
(अ) 362
(आ) 365
(इ) 363
(ई) 364
(ङ) श्री निहाल चन्द विश्नोई को भारत सरकार ने
उत्तर
(अ) 362

(ङ) सम्मानित किया
(अ) पद्मश्री से
(आ) शौर्य चक्र से
(इ) परमवीर चक्र से
(ई) वीर चक्र से।
उत्तर
(आ) शौर्य चक्र से

भाषा-अध्ययन

Class 8 Hindi Chapter 10 Pran Jaye Par Vachan Na Jaye प्रश्न 1.
नीचे लिखे शब्दों के विलोम शब्द उनके नीचे बनी वर्ग पहेली (पाठ्यपुस्तक में) में दिए गए हैं। आप उन्हें खोजकर लिखिए
वाचाल, राजा, अपमानित, भक्षक, हर्ष, क्षम्य, हिंसा, हित, दुःखी, विरोध।
उत्तर

  1. मूक
  2. रंक
  3. सम्मानित
  4. रक्षक
  5. शोक
  6. अक्षम्य
  7. अहिंसा
  8. अहित
  9. सुखी
  10. समर्थन

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 10 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध उच्चारण कीजिए और उन्हें वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
श्रद्धांजलि, संकल्प, शौर्यचक्र, प्रासंगिक, जम्भेश्वर।
उत्तर
विद्यार्थी उपर्युक्त शब्दों को ठीक-ठीक पढ़कर उनका शुद्ध उच्चारण करने का अभ्यास करें।
वाक्यों में प्रयोग-

  1. महापुरुषों के नियमों का पालन करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होती है।
  2. हम देश की सेवा करने का संकल्प लेते हैं।
  3. निहाल चन्द को मरणोपरान्त शौर्य चक्र से सम्मानित किया।
  4. अमृता देवी का वृक्ष संरक्षण कार्यक्रम आज बहुत ही प्रासंगिक है।
  5. जम्भेश्वर भगवान ने प्रकृति के नियमों के पालन का आदेश दिया।

Class 8 Chapter 10 Hindi MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों की सन्धि विच्छेद कीजिए और सन्धि का प्रकार लिखिए
वृक्षारोपण, एकमेव, राजाज्ञा, मरणोपरान्त, वातावरण।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 10 प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए 1
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 10 प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए 2

Class 8th Hindi Chapter 10 MP Board प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का समास विग्रह कीजिए
ताम्रपत्र, राजदण्ड, प्रतिवर्ष, ग्राम पंचायत, शौर्य चक्र।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 10 प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए 3

MP Board Class 8th Hindi Chapter 10 प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग पहचानकर लिखिए
गैर सैनिक, पर्यावरण, सम्मान, प्रशस्ति, प्रदूषण, संवर्द्धन।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 10 प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए 4

Class 8 Hindi Chapter 10 Bhasha Bharti प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों में उद्देश्य और विधेय छाँटकर लिखिए
(क) भगवान जम्भेश्वर द्वारा हरे-भरे वृक्षों को बनाए रखने की प्रेरणा दी गई थी।
(ख) विश्नोई समाज ने वनों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
(ग) भारत शासन प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पुरस्कार देता है।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 10 प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए 45

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प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) इन दिनों वृक्षों की घटती संख्या और बिगड़ते पर्यावरण को देखकर समूचे विश्व में पर्यावरण की रक्षा की चिन्ता की जा रही है। वृक्षों की अंधाधुन्ध कटाई पर रोक लगाई जा रही है। वृक्षारोपण पर जोर दिया जा रहा है। आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व जब चारों ओर वन-ही-वन थे, भगवान जम्भेश्वर द्वारा हरे-भरे वृक्षों की रक्षा करने की प्रेरणा देना सचमुच अद्भुत था। इन दिनों बिगड़ते प्रदूषण को देखते हुए यह प्रेरणा बहुत प्रासंगिक है।

शब्दार्थ-घटती संख्या कम होती संख्या; पर्यावरण = चारों ओर का वातावरण; अंधाधुन्ध = बिना सोचे-विचारे; वृक्षारोपण = पेड़-पौधे लगाना; प्रेरणा = उत्साहपूर्ण तीव्र इच्छा; अद्भुत = अनोखी; बिगड़ते = खराब होते; प्रदूषण = बहुत तीव्रता से फैलते हुए दोष; प्रासंगिक = उचित।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के पाठ ‘प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए’ से अवतरित हैं।

प्रसंग-इसमें वृक्षों की अन्धाधुन्ध कटाई के दोष और पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव को बताया है।

व्याख्या-आजकल लोगों द्वारा वृक्षों को काटा जा रहा है। इससे वृक्षों की संख्या में बहुत कमी आ गई है। इसका सीधा प्रभाव यह हुआ है कि हमारे चारों ओर का वातावरण खराब होता जा रहा है। इसके दोषपूर्ण प्रभाव को देखते हुए विद्वानों को इस बात की चिन्ता लग गई है कि इस बिगड़ते वातावरण को किस तरह बचाया जाए। अत: विभिन्न देशों की सरकारों में वृक्षों की बिना सोचे-विचारे की जा रही कटाई पर रोक लगाने के लिए विचार किया जा रहा है। इसके अलावा नए वृक्ष लगाए जाने के “लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। आज से सैकड़ों वर्ष पहले हमारे चारों ओर घने जंगल बड़ी तादाद में थे। भगवान जम्भेश्वर का आज से लगभग पाँच सौ वर्ष पहले जन्म हुआ था। उन्होंने लोगों को प्रेरित किया कि वे हरे-भरे वृक्षों की रक्षा करें और नये पेड़-पौधे लगाएँ। इस तरह लोगों में उत्साह जागृत करना सभी के लिए एक अनोखी बात थी। आज के पर्यावरण को चारों ओर से प्रदूषित किए जाने के प्रसंग में उनके द्वारा दी गई प्रेरणा व उत्साह बहुत ही महत्वपूर्ण है।

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(2) आज्ञा पालन विवेक के साथ करना है, इस बात का सैनिकों ने ध्यान नहीं रखा। इस बलिदान को देखकर सैकड़ों विश्नोई नर नारी आगे आकर पेड़ों की रक्षा करने के लिए पेड़ों से लिपट गए। पेड़ों को काटने से बचाने के लिए सभी अपना सिर कटवाने को तैयार थे। पेड़ों की रक्षा के लिए आत्म-बलिदान के लिए तत्पर विश्नोई नर-नारी “सिर साँटे पर रूख रहे” का नारा लगा रहे थे। सेना कुल्हाड़ी चलाती रही। एक-एक करके 362 विश्नोई नर-नारी स्वयं कट गए, परन्तु उन्होंने एक भी पेड़ नहीं कटने दिया।

शब्दार्थ-विवेक = अच्छी तरह विचार करके; आज्ञा पालन = आदेश का मानना; बलिदान = त्याग; नर-नारीपुरुष और स्त्री; रक्षा = बचाव; आत्मबलिदान = अपने जीवन का त्याग; तत्पर = तैयार; साँटे = कट जाए; रूख = वृक्ष।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-पेड़ों की रक्षा में विश्नाई समाज ने अपना बलिदान दिया; इस महान त्याग के विषय में बताया जा रहा है।

व्याख्या-जोधपुर के राजा अभयसिंह ने अपने सैनिकों को अपने महल के निर्माण के लिए खेजड़ली गाँव में जाकर पेड़ों को काटने के लिए आदेश दिया। उस गाँव के विश्नोई समाज के लोगों ने उन सैनिकों को पेड़ काटने से रोक दिया। सैनिक राजा की आज्ञा पालन करना ही उचित समझते रहे। उनके द्वारा राजा की आज्ञा का पालन सोच-विचार करके ही करना चाहिए था, लेकिन सैनिकों ने इस बात का ध्यान नहीं रखा। विश्नोई समाज के सैकड़ों लोग पेड़ों को कटने से बचाने के लिए आये और पेड़ों से लिपट गये। वे सभी अपने सिर कटवाने को तैयार थे परन्तु पेड़ नहीं कटने चाहिए। वे पेड़ों को काटे जाने से रोकने के लिए अपना बलिदान देने को तैयार थे। उन्होंने कहा था कि चाहे हमारे सिर कट जाएँ, पर वृक्षों को काटने से रोका जाए। उनकी रक्षा की जानी चाहिए। उनका यही नारा था। सेना अपनी कुल्हाड़ी चला रही थी। उधर एक-एक करके तीन सौ बासठ विश्नोई समाज के स्त्री-पुरुष अपने आप कट गए। उन्होंने इस तरह एक भी वृक्ष नहीं कटने दिया।

(3) स्मरण रहे, हमें पेड़ों की जरूरत है, पेड़ों को हमारी जरूरत नहीं है। वातावरण में दिन-प्रतिदिन बढ़ते प्रदूषण से बचने के लिए हमें पेड़ों की रक्षा करनी ही होगी तथा और पेड़ लगाने होंगे। वृक्ष रक्षा तथा जीवन रक्षा का संकल्प एवं नया वृक्षारोपण कार्य ही वृक्षों की रक्षा में शहीद हुए विश्नोइयों को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

शब्दार्थ-स्मरण रहे = याद रखना होगा; जरूरत = आवश्यकता; दिन-प्रतिदिन = रोजाना; प्रदूषण = बड़ी मात्रा में दोष; बचाने के लिए = रक्षा के लिए; और दूसरे लगाने होंगे रोपने होंगे; संकल्प = प्रतिज्ञा, प्रण; वृक्षारोपण कार्य = वृक्ष लागने का काम; शहीद हुए = अपनी बलि देने वाले।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-बलिदान करने वाले विश्नोइयों को श्रद्धांजलि देने के लिए हमें वृक्ष लगाने होंगे तथा वन के जीवों की रक्षा करनी -होगी।

व्याख्या-हमें यह याद रखना होगा कि हमारी आवश्यकता है कि पेड़ रहें। पेड़ों को हमारी कोई आवश्यकता नहीं है। हमारे चारों ओर के वातावरण में रोजाना प्रदूषण बढ़ रहा है। हमें अपनी रक्षा करनी है, तो हमें पेड़ों की रक्षा करनी होगी। क्योंकि प्रदूषण से हम अनेक तरह के रोगों से ग्रस्त हो जायेंगे। इसके लिए हमें पेड़ लगाने होंगे। वन के जीवों की रक्षा करने से और नये पेड़-पौधे लगाने से ही हम बलिदानी विश्नोइयों को सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।

MP Board Class 8 Hindi Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 9 Hame na Bandho Prachiro Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 9 Hame na Bandho Prachiro Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 9 Hame na Bandho Prachiro Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 9 हमें न बाँघें प्राचीरों में प्रश्न उत्तर

प्रश्न अभ्यास
अनुभव विस्तार

MP Board Class 8 Hindi Chapter 9 प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ी बनाइए
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 9 हमें न बाँघें प्राचीरों में 1
उत्तर
(अ) 2, (ब) 1, (स) 4, (द) 3

(ख) सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. हम पंछी उन्मुक्त …………………. (गगन, चमन)
2. नीड़ ने दो चाहे …………………. का (डाली, टहनी)
3. आश्रय …………………. कर डालो (छिन्न-भिन्न, तहस-नहस)
4. या तो ……………… मिलन बन जाता। (आकाश, क्षितिज)
उत्तर
1. गगन,
2. टहनी,
3. छिन्न-भिन्न,
4. क्षितिज

Class 8 Hindi Chapter 9 MP Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ)पिंजरे में बंद होकर पक्षी क्यों नहीं गा पाएँगे?
(ब) पंछी क्या चाहता है?
(स) पंछी का क्या अरमान है?
(द) पंछी स्वप्न में क्या देखता है?
उत्तर
(अ) पिंजरे में बंद होकर पंक्षी नहीं गा पाएँगे; क्योंकि वे स्वतंत्र आसमान में उड़ने वाले जीव हैं।
(ब) पंछी चाहता है कि उसकी उड़ान में कोई बाधा न डाले।
(स) पंछी का अरमान है कि वह नीले आसमान की सीमा पा ले।
(द) पंछी स्वप्न में तरु (पेड़) की फुनगी पर के झूले को देखता है।

Hindi Chapter 9 Class 8 MP Board प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न

(अ)
पक्षी को सोने की सलाखों के पिंजरे में किस बात का भय बना रहता है और क्यों?
उत्तर
पक्षी को सोने की सलाखों के पिंजरे में इस बात का भय बना रहता है कि वह अपनी गति उड़ान आदि न भूल जाए। चूंकि पिंजरे का जीवन स्वतंत्र नहीं है। पक्षी को स्वतंत्रता चाहिए, जो उन्हें उन्मुक्त गगन में ही मिल सकता है, पिंजरे में नहीं। पक्षी उन्मुक्त गगन में उड़ान भरकर काफी खुश होंगे। पिंजरे की सुख-सुविधा उन्हें नहीं चाहिए।

(ब)
स्वतंत्र जीवन जीने वाले कैसे होते हैं?
उत्तर
स्वतंत्र जीवन जीने वाले स्वाभिमानी होते हैं। उनके बड़े-बड़े अरमान होते हैं। वे इसके लिए कुछ भी कर गुजरने से नहीं रुकते हैं। वे स्वतंत्र जीवन को ही एकमात्र अपना जीवन-लक्ष्य मानकर इसको दृढ़तापूर्वक सिद्ध करने में कोई कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।

(स)
‘कनक-कटोरी की मैदा’ और ‘कटुक-निबौरी’ में से पक्षी को कौन-सी वस्तु भली लगती है और क्यों? लिखिए।
उत्तर
‘कनक-कटोरी की मैदा’ और ‘कटक-निबौरी’ में से पक्षी को ‘कटुक-निबौरी’ ही वस्तु भली लगती है। यह इसलिए कि इसमें उसकी स्वतंत्रता है, परतंत्रता नहीं।

(द)
पिंजरे की सुविधाएँ पंछी को क्यों पसंद नहीं हैं?
उत्तर
पिंजरे की सविधाएं पंछी को पसंद नहीं हैं। यह इसलिए कि इसमें उसकी स्वतंत्रता नहीं परतंत्रता है। चूंकि वह बहता जल पीने वाला है। खुले आकाश में अपनी उड़ान भरने वाला है। मनपसंद फल खाने वाला है। ये स्वतंत्रता (सुख-सुविधाएँ) उसे पिंजरे में नहीं मिल सकती हैं।

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भाषा की बात

MP Board Class 8th Hindi Chapter 9 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों को बोलिए और लिखिए
उन्मुक्त, पिंजरबद्ध, कटुक-निवौरी, श्रृंखला, फुनगी, नीड़, आश्रय, नील-गगन, क्षितिज।
उत्तर
उन्मुक्त, पिंजरबद्ध, कटुक-निबौरी, शृंखला, फुनगी; नीड़ आश्रय, नील-गगन, क्षितिज।

Class 8 Chapter 9 Hindi MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए
(क) पुलकित पंख टूट जाएँगे।
(ख) स्वर्ण-शृंखला के बंधन में, अपनी गति, उड़ान सब भूले।
(ग) नील-गगन से होड़ा-होड़ी।
उत्तर
(क) पुलकित पंख टूट जाएँगे।
इन पंक्तियों में कवि ने यह कहना चाहा है कि परतंत्रता बड़ी कठोर होती है। वह स्वतंत्रता की सरसता के पर को कतर-कतर उसका जीना कठिन कर देती है।

(ख) स्वर्ण-शृंखला के बंधन में अपनी गति उड़ान सब भूले।
इन पंक्तियों में कवि ने यह कहना चाहा है कि परतंत्रता स्वतंत्रता की सभी अच्छाइयों और रूपों को भूल जाने के लिए मजबूर कर देती है। इस तरह परतंत्रता की सुख-सुविधाएँ स्वतंत्रता के महत्त्व को समाप्त नहीं कर सकती हैं।

(ग) इन पंक्तियों में कवि ने यह कहना चाहा है कि स्वतंत्रता बेरोक-टोक होती है। वह बड़े-बड़े अरमानों को पूरा करने के लिए हमेशा कोशिश करती रहती है। इस दिशा में वह किसी से सामना करने से पीछे नहीं हटती है।

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Class 8th Hindi Chapter 9 MP Board प्रश्न 3.
कविता में ‘नील-गगन’ शब्द आया है। इसमें योजक चिह्न (-) का प्रयोग हुआ है।
निम्नलिखित शब्दों को योजक चिह लगाकार लिखिए कनक तीलियों, भूखे प्यासे, कटुक निबौरी, कनक कटोरी, होड़ा होड़ी, भिन्न भिन्न।
उत्तर
कनक-तीलियों, भूखे-प्यासे, कटुक-निबोरी, कनक-कटोरी, होड़ा-होड़ी, भिन्न-भिन्न। विलोम शब्द देश

Class 8 Hindi Chapter 9 Question Answer MP Board प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
उत्तर
शब्द  विलोम शब्द
आकाश –  धरती
स्वाधीन –
पराधीन
सुबह –
शाम
अमृत – विष

Hindi Class 8 Chapter 9 MP Board प्रश्न 5.
नीचे दिए गए शब्दों के लिंग परिवर्तन कीजिए
उत्तर
शब्द लिंग – परिवर्तन
चूहा – चूहिया
बालक –
बालिका
सेवक – सेविका
पापी –
पाप
बंदर –
बंदरिया
घोड़ा –
घोड़ी
लेखक –
लेखिका।

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प्रमुख पद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. हम पंक्षी उन्मुक्त गगन के
पिंजरबद्ध न गा पाएंगे
कनक-तीलियों से टकराकर
पुलकित पंख टूट जाएंगे।
हम बहता जल पीने वाले
मर जाएंगे भूखे-प्यासे’
कहीं भली है कटुक निबोरी
कनक-कटोरी की मैदा से।

शब्दार्थ:
उन्मुक्त-स्वतंत्र। गगन-आसमान । पिंजरबद्ध-पिंजरे में बंद। कनक- तीलियों-सोने की तीलियों। पुलकित-आनंदित। कटुक-तीखा। निबौरी-नीम के फल : कनक-कटोरी-सोने की कटोरी।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियां हमारी पाठ्य पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिन्दी सामान्य) भाग-8 के पाठ-9 ‘हमें न बाँधों प्राचीरों में’ से ली गई हैं। इसके रचयिता हैं शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ ।

प्रसंग- इसमें कवि पंछी के मनोभावों को व्यक्त कर रहा है।

व्याख्या:
स्वतंत्रता सबको प्यारी लगती है। मानव ही नहीं, पशु-पक्षी भी स्वतंत्र वातावरण में रहना चाहते हैं। इन पंक्तियों में पंछियों के मनोभावों को व्यक्त करते हुए कवि कहता है

कि ये स्वतंत्र आसमान में उड़ने वाले जीव हैं। इन्हें पिंजरे में बंद होना कतई अच्छा नहीं लगता। पंछी कहते हैं कि सोने की तीलियों (जिससे पिंजड़ा बना है) से टकराकर उसके पंख टूट जाएंगे। वे उड़ नहीं पाएंगे, क्योंकि पेंजड़े का दायरा काफी छोटा है। उडान भरते हए जब कभी उन्हें प्यास लगती है. वे नदी-तालाबों में से पानी पी लेते हैं। यहां पिंजड़े में वे भखे-प्यासे मः जाएंगे। स्वतंत्र रहते हुए अगर उन्हें नीम के तीखे फल (निया भी मिले तो उन्हें अच्छा लगेगा, किंतु पिंजरे में बंद कर जर कोई उन्हें सोने की कटोरी में स्वादिष्ट भोजन भी ला है । उन्हें वह बिल्कुल रास नहीं आएगा।

विशेष:
स्वतंत्रता मनुष्यों और पशु-पक्षियों का समान रूप स प्रिय है। कनक-तीलियों में रूपक अलंकार और पुलकित पंख एवं . कनक-कटोरी में अनुप्रास अलंकार है।

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2. स्वर्ण-शृंखला के बंधन में
अपनी गति, उड़ान सब भूले,
बस सपनों में देख रहे हैं,
तरु की फुनगी पर के झूले।
ऐसे थे अरमान कि उड़ते
नीले नम की सीमा पाने,
लाल-किरण-सी चोंच खोल
चुगते तारक अनार के दाने।

शब्दार्थ :
स्वर्ण-शृंखला-सोने की कड़ी। तरु-पेड़। फुनगी-पेड़ की चोटी। अरमान-इच्छा, आकांक्षा । नभ-आकाश, आसमान। चुगते-चुगना।

संदर्भ – पूर्ववत्।

प्रसंग – इसमें कवि पिंजड़े में बंद पंछियों की व्यथा को व्यक्त कर रहा है।

व्याख्या
पिंजड़े में बंद पंछी काफी दुःखी हैं। उन्हें डर है कि वे अपनी उड़ान न भूल जाएं। उन्हें लगता है कि पेड़ों के ऊपरी सिरे पर झुलने का उनका सपना यूं ही बेकार हो जाएगा। पंछी नीले आसमान की सीमा पाने का अरमान रखते हैं, जहां वे ताड़ों जैसे अनार के दाने चुग सकें। लेकिन पिंजड़े की स्वर्ण शृंखला ने उनकी सारी इच्छाओं पर पानी फेर दिया है। वे परतंत्र हैं। उन्मुक्त होकर उड़ नहीं सकते। शायद इसीलिए वे दुःखी हैं, व्यथित हैं।

विशेष
लाल किरण-सी चोंच में उपमा अलंकार और तारक-अनार में रूपक अलंकार है।

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3. होती सीमाहीन क्षितिज से
इन पंखों की होड़ा-होड़ी
या तो क्षितिज मिलन बन जाता
या तनती सांसों की डोरी।
नीड़ न दो, चाहे टहनी का
आश्रय छिन्न-भिन्न कर डालो,
लेकिन पंक्ष दिए हैं तो
आकुल उड़ान में विघ्न न डालो।

शब्दार्थ: सीमाहीन
जिसकी कोई सीमा न हो। क्षितिज-वह स्थान जहां पृथ्वी एवं आकाश मिलते दिखाई देते हैं। होड़ा-होड़ी-प्रतियोगिता, होड़ । तनती सांसों की डोरी-सांसें टूट जातीं। नीड़-घोंसला। टहनी-पेड़ का तना। आश्रय-रहने का स्थान। छिन्न-भिन्न-नष्ट। आकुल-बेचैन। विघ्न-बाधा।

संदर्भ – पूर्ववत्।

प्रसंग – प्रथम चार पंक्तियों में कवि पंछियों की सुखद कल्पना को व्यक्त कर रहा है अर्थात अगर वे पिंजरे में बंद नहीं होते तो क्या करते। बाद की चार पंक्तियों में कवि उनके द्वारा मानव के किए गए अनुरोध का जिक्र कर रहा है।

व्याख्या:
उड़ान भरने को व्याकुल पंछी पिंजड़े में पड़े हुए सोचते हैं कि अगर वे स्वतंत्र होते, तो सीमाहीन आसमान में उड़ते रहते। अनंत क्षितिज को छूने के लिए इनमें होड़ लगती जहां या तो क्षितिज से मिलन हो जाता या इनकी सांसें टूट जातीं।
अंत में पंछी हम मानव से अनुरोध करते हैं कि भले ही हम वृक्षों को काटकर उनके आश्रय (घोंसला) को नष्ट कर दें, लेकिन उनकी उड़ान में कोई बाधा न डालें। उनके लिए दो पंख काफी हैं। इन पंखों के सहारे वे खुशी-खुशी अपना जीवन बिता सकते हैं।

विशेष:
होड़ा-होड़ी, तनती सांसों की डोरी, छिन्न-भिन्न कर डालो, जैसे मुहावरों के प्रयोग से कविता की सुंदरता बढ़ गई

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 1 Mera Desh Mahan Bane Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 1 Mera Desh Mahan Bane Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 1 Mera Desh Mahan Bane Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 1 मेरा देश महान् बने प्रश्न उत्तर

प्रश्न-अभ्यास

अनुभव विस्तार

1. वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) मेरा देश – 1. उठान हो
(ब) एक हिमालय-सी – 2. महान् बने
(स) सिंहों से – 3. दुश्मन को
(द) वज्र बने – 4. लड़ने वाले हों
उत्तर-
(अ) 2
(ब) 1
(स) 4
(द) 3

(ख) दिए गए विकल्पों से रिक्त स्थान को पूर्ति कीजिए
(अ) एक ध्येय हो, एक, श्रेय हो एक समान ………………………… बने। (महान्, विधान)
(ब) सिंहों से लड़ने वाले हों, अवसर पर ………………………… वाले हों। (अड़ने, उड़ने)
(स) तन में, मन में यही ………………………… भारत महिमावान बने। (ध्यान, ज्ञान)
(द) मरण एक हो ………………………… एक हो, जीवन एक समान बने। (चरण, वरण)
उत्तर-
(अ) विधान,
(ब) अड़ने,
(स) ध्यान,
(द) वरण।

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MP Board Class 8 Hindi Chapter 1 प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ)देशवासियों का केवल एक ध्येय क्या होना चाहिए?
(ब) देशवासियों को सदैव किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
(स) कवि के अनुसार जीवन कैसा होना चाहिए?
(द) दुश्मन के सामने हमें क्या बन जाना चाहिए?
उत्तर-
(अ) देशवासियों का केवल एक ध्येय यही होना चाहिए कि मेरा देश महान बने।
(ब) देशवासियों को सदैव अपनी गुरुता का ध्यान रखना चाहिए।
(स) कवि के अनुसार जीवन केवल देश-हित के लिए ही होना चाहिए।
(द) दुश्मन के सामने हमें वज्र बन जाना चाहिए।

Class 8 Hindi Chapter 1 MP Board प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न(अ)कवि युवकों को कैसा बनने की प्रेरणा देता है?
(ब) हँसते-हँसते मौत मसलकर आसमान चढ़ने वाले हों से कवि का क्या आशय है?
(स) कवि को देशवासियों से क्या अपेक्षाएँ हैं?
(द) देश की एकता और अखंडता के लिए कवि ने कौन-कौन से सूत्र दिए हैं?
उत्तर-
(अ) कवि युवकों को अपने देश-हित के लिए अपने जीवन को मरण-वरण एक समान बनाने की प्रेरणा देता है।
(ब) ‘हँसते-हँसते मौत मसलकर आसमान चढ़ने वाले हों’ से कवि का आशय यह है कि सच्चे देश-प्रेमी अपने देश के लिए मौत की भी परवाह न करते हुए अपनी देश-भक्ति पर कभी आँच नहीं आने देते हैं।
(स) कवि को अपने देशवासियों से बड़ी-बड़ी अपेक्षाएँ हैं, उसे अपने देशवासियों से अपेक्षाएँ हैं कि वे अपने देश के लिए अपनी गुरुता का ध्यान रखते हुए अपने जीवन को मरण-वरण समान बनाए रहेंगे। वे हँसते-हँसते मौत का सामना करते हुए अपने शत्रुओं के सामने वज्र बन जाएँगे। इस तरह वे अपने देश को महान् बनाने के लिए अपना सब कुछ त्याग-बलिदान कर देंगे।
(द) देश की एकता और अखंडता के लिए कवि ने निम्नलिखित सूत्र दिए हैं-

  1. सभी देशवासियों का केवल यही ध्येय होना चाहिए कि हमारा देश महान् बने।
  2. सब में परस्पर मंगल की भावना होनी चाहिए।
  3. पूरे देश का शासन-विधान एक ही होना चाहिए।

MP Board Class 8th Hindi Chapter 1 प्रश्न 4.
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए(अ)मरण एक हो, वरण एक हो, जीवन एक समान बने। (ब) सिंहों से लड़ने वाले हों, अवसर पर अड़ने वाले हों!
उत्तर-
(अ) उपर्युक्त काव्य-पंक्ति का आशय यह है कि सच्चे देश-भक्त अपने देश के हित के लिए अपने जीवन का मरण-वरण एक समान बना देते हैं। दूसरे शब्दों वे अपने जीवन को केवल अपने देश को महान् बनाने के लिए जीते हैं।
(ब) उपर्युक्त काव्य-पंक्ति का यह आशय है कि सच्चे देश-भक्त बड़े ही अद्भुत होते हैं। वे अपने देश के लिए अपनी अपार वीरता का परिचय देते हैं। वे अपने दृढ़ संकल्पों के साथ आगे बढ़ते ही जाते हैं।

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भाषा की बात

MP Board Hindi Chapter 1 प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिए(अ)ध्येय, वज्र, दुश्मन, मुस्कान, प्रिय
उत्तर-
(अ) ध्येय, वज्र, दुश्मन, मुस्कान, प्रिय।

(ब) अधोलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
गुरुता, सदुद्देश्य, जीवन, विधान, महिमावान्।
उत्तर-
शब्द – वाक्य
गुरुता – हमें अपनी गुरुता का ध्यान रखना चाहिए।
सदुद्देश्यः – सदुद्देश्य से ही सफलता मिलती है।
जीवन – हमें सादा जीवन जीना चाहिए।
विधान – महान् देश का विधान एक समान होता

महिमावान् हम भारतीयों का यही ध्यान रहना चाहिए कि हमारा भारत देश महिमावान बना रहे।

Class 8th MP Board Hindi Chapter 1 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में से शुद्ध शब्द छाँटकर दिए गए स्थान में लिखिए।
(अ) वजर, वर्ज, वज, वज्र …………………………
(ब) अध्येय, ध्यय, धेयय, धयये …………………………
(स) हीमालय, हिमालय, हेमालय, हमालय …………………………
(द) गुरूता, गुरूरता, गूरूता, गुरुता …………………………
उत्तर-
(अ) वज्र,
(ब) ध्येय,
(स) हिमालय,
(द) गुरुता।

Class 8 Chapter 1 Hindi MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में से फूल एवं आसमान के पर्यायवाची शब्द छाँटकर लिखिए-
कुसुम, आकाश, नभ, गगन, पुष्प, सुमन, प्रसून, अम्बर
उत्तर-
फूल-कुसुम, पुष्प, सुमन, प्रसून।
आसमान-आकाश, नभ, गगन।

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ध्यान दीजिए

Hindi Chapter 1 Class 8 MP Board प्रश्न 1.
एक देश हो, एक वेश हो, प्राणवान हो, सदुद्देश्य हो, तन में, मन में यही ध्यान हो, भारत महिमावान् बने।
मूलशब्द + प्रत्यय – नवीन शब्द
प्राण + वान – प्राणवान्
महिमा + वान – महिमावान्

इन पंक्तियों में आए प्राणवान एवं महिमावान् शब्द प्राण एवं महिमा में वान् प्रत्यय को जोड़कर बने हैं जो नवीन अर्थ प्रदान करते हैं।

MP Board Hindi Class 8 Chapter 1 प्रश्न 2.
निम्नांकित शब्दों में ‘वान’ प्रत्यय जोड़कर चार शब्द बनाइए
शब्द
1. गाड़ी + …………………………….
2. धन + …………………………….
3. कोच + …………………………….
4. बल + …………………………….
उत्तर-
1. गाड़ीवान,
2. धनवान,
3. कोचवान,
4. बलवान।

Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 1 प्रश्न 3.
उदाहरण के अनुसार विपरीतर्थी शब्द लिखिए
उत्तर-
शब्द – विपरीतार्थी शब्द
समान – असमान
स्वदेश – विदेश
नूतन – पुरातन
सजीव – निर्जीव
फूल – काँटा
दुश्मन – दोस्त
हँसना – रोना।

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पद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. एक ध्येय हो, एक श्रेय हो, एक समान विधान बने
मेरा देश महान् बने। शब्दार्थ-ध्येय-उद्देश्य, लक्ष्य। श्रेय-कल्याण। विधान-कानून।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियां हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) भाग-8 के पाठ-1 ‘मेरा देश महान् बने’ कविता से ली गई हैं। इसके रचयिता श्री उदयशंकर भट्ट हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने अपने देश को महान् बनने के भाव को व्यक्त किया है।

व्याख्या-हमारा देश महान् तभी बन सकता है-जब सभी देशवासियों का यही एकमात्र उद्देश्य हो। इसी मंगलभावना से सब काम करें। इसके लिए सारा शासन-विधान बनकर लागू हो।

विशेष-

  • भारत देश को महान बनाने के उपाय बताए गए हैं।

2. एक देश हो, एक वेश हो,
प्राणवान हो, सदुद्देश्य हो,
एक ध्यान हो निज गुरूता का
एक हिमालय सी उठान हो,
मरण एक हो, वरण एक हो,
जीवन एक समान बने।
मेरा देश महान् बने।

शब्दार्थ-वेश-स्वरूप। प्राणवान-सजीव। उठान-उमंग।

संदर्भ-पूर्ववत्

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने जीवन को मरण-वरण एक समान बनाकर अपने देश को महान् बनाने की प्रेरणा देते हुए कहा है कि-

व्याख्या-हमारा देश अलग-अलग भागों में बँटा हुआ न होकर एक हो। उसका स्वरूप एक हो। वह सजीव और शक्तिशाली हो। उसका सदुद्देश्य हो। उसमें अपने बड़प्पन का ध्यान हो। उसमें हिमालय पर्वत के समान ऊँचा उठने की उमंग हो। उसका जीवन एक समान मरण-वरण का जीवन बना रहे। इस प्रकार मेरा देश महान् बने।

विशेष-

  • भारत देश की एकता की विशेपता बताई गई है।
  • भारत देश को महान् बनाने के लिए सुझाव दिए गए हैं।

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3. सिहों से लड़ने वाले हों,
अवसर पर अड़ने वाले हों,
हँसते-हँसते मौत मसल कर,
आसमान चढ़ने वाले हों
वन बने दुश्मन को प्रिय को फूलों की मुस्कान बने।
मेरा देश महान् बने।

शब्दार्थ-अवसर-मौका। वज्र-कठोर।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने अपने देश को महान बनाने के लिए देशवासियों को अपनी अद्भुत वीरता का परिचय देने की सीख देते हुए कहा है कि-

व्याख्या-अपने देश को महान् बनाने के लिए देशवासियों को चाहिए कि वे सिंहों से लड़ने वाले हों, वे आवश्यकतानुसार अपने संकल्प को पूरा करने के लिए अड़ने वाले हों, वे खुशी-खुशी मौत को मात देकर अपने आसमानी उत्साह से आगे बढ़ने वाले हों। इस प्रकार वे अपने शत्रुओं के लिए वज्र बनकर अपने प्रिय देश के लिए फूलों की तरह मुस्कराते रहें। ऐसे ही अद्भुत वीरों से मेरा देश महान् बने।

विशेष-

  • भारत देश को महान् बनाने के लिए आवश्यक वातां को बतलाया गया है।

4. उठें, देश के लिए उठें हम,
जिएँ, देश के लिए जिएँ हम,
गलें, देश के लिए गलें हम,
मरें, देश के लिए मरें हम,
तन में, मन में यही ध्यान हो,
भारत महिमावान् बने।
मेरा देश महान् बने।

शब्दार्थ-गलें-मिटें। तन-शरीर।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने अपने देश को महान् बनाने के लिए देशवासियों को अपना सब-कुछ त्याग-बलिदान करने की सीख देते हुए कहा है कि-

व्याख्या-हम जिएँ तो केवल अपने देश-हित के लिए ही जिएँ। हम गलें तो केवल अपने देश-हित के लिए ही गल। हम मरें तो केवल अपने देश-हित के लिए मरें। हमारे तन-मन में इस प्रकार का ध्यान हमेशा बना रहे कि किसी कीमत पर हमारा देश भारत महिमावान् बना रहे। इस प्रकार हमारा देश महान् बने।

विशेष-

  • भारत देश को महान् बनाने के लिए सच्ची देश-भक्ति को आवश्यक बताया गया है।
  • भाषा सरल है।

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 5 Lohpurush Sardar Patel Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 5 Lohpurush Sardar Patel Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 5 Lohpurush Sardar Patel Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 5 लौहपुरुष सरदार पटेल प्रश्न उत्तर

प्रश्न अभ्यास

अनुभव विस्तार

Class 8 Hindi Chapter 5 MP Board प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) लौहपुरुष – 1. बाल गंगाधर तिलक
(ब) महात्मा – 2. चितरंजनदास
(स) देशबंधु – 3. गांधी।
(द) लोकमान्य – 4. सरदार पटेल
उत्तर-
(अ) 4,
(ब) 3,
(स) 2,
(द) 1

MP Board Class 8 Hindi Chapter 5 प्रश्न 2.
दिए गए विकल्पों में से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए(अ) सरदार पटेल को …………………… कहा जाता है। (शलाका पुरुष, लौहपुरुष)
(ब) सरदार पटेल के ………………………. बचपन से ही प्रकट होने लगे थे। (प्रमुख गुण, विशिष्ट गुण)
(स) उनके पास हाजिर-जवाबी तथा विनोदप्रियता का अक्षय और ………………………. कोष था। (असीम, निस्सीम)
(द) हठी विद्रोहियों को ………………………. में लाना उन्हें भली प्रकार आता था। (अनुशासन, विनयानुशासन)
उत्तर-
(अ) लौहपुरुष,
(ब) विशिष्ट गुण,
(स) असीम,
(द) विनयानुशासन।

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Class 8 Chapter 5 Hindi MP Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) सरदार पटेल का स्वभाव कैसा था?
(ब) सहायकों तथा अनुयायियों द्वारा भूल करने पर सरदार पटेल क्या करते थे?
(स) सरदाल पटेल ने गृहमंत्री के रूप में कौन-सा महत्त्वपूर्ण कार्य किया?
(द) सरदार पटेल की प्रबल आकांक्षा क्या थी?
(इ) पटेल को सरदार की उपाधि कैसे मिली?
उत्तर-
(अ) सरदार पटेल का स्वभाव अत्यधिक वीर, निर्भय, दृढ़ निश्चयी, परिश्रमी और लगनशील था।
(ब) अपने सहायकों तथा अनुयायियों द्वारा भूल करने पर सरदार पटेल उन पर कृपा ही करते थे। वे उनकी देखभाल और चिंता पिता के के समान करते थे।
(स) सरदार पटेल ने गृहमंत्री के रूप में देशी रियासतों के एकीकरण का महत्त्वपूर्ण कार्य किया।
(द) सरदार पटेल की यह प्रबल आकांक्षा थी कि भारत अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करने में सबल और सुयोग्य बन जाए।
(इ) स्वतंत्रता-संग्राम के समय में दिए गए उनके महत्त्वपूर्ण योगदानों के कारण पटेल को सरदार की उपाधि मिली।

MP Board Class 8th Hindi Chapter 5 प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न

(अ) सरदार पटेल को लौहपुरुष क्यों कहा जाता है?
उत्तर-
सरदार पटेल का व्यक्तित्व बड़ा ही बेजोड़ था। उनकी प्रतिभा बड़ी ही अद्भुत थी। उनकी बुद्धि अत्यधिक आकर्षक थी। उनकी प्रशासनिक क्षमता प्रशंसनीय थी। वे कठिन परिस्थितियों में भी सफलता को प्राप्त ही कर लेते थे। यही नहीं उनका स्वभाव भी बड़ा अद्भुत था। वे वीर, निर्भय, दृढ़ निश्चयी, मेहनती और उत्साही थे। इन्हीं विशेषताओं के कारण सरदार पटेल को ‘लौह पुरुष’ कहा जाता है।

(ब) सरदार पटेल का अपने अनुयायियों के साथ व्यवहार कैसा था?
उत्तर-
सरदार पटेल का व्यवहार अपने अनुयायियों के प्रति बड़ा ही सरस और उदार था। वे उनके द्वारा कोई गलत कदम उठाए जाने पर भी, उन्हें माफ़ कर देते थे। उन्हें प्रेमपूर्वक समझाते थे। उन पर वे अपनी कृपा हमेशा किया करते थे। इसलिए उनकी देखभाल और चिंता वैसे ही करते थे, जैसे एक पिता अपनी संतान के प्रति किया करता है।

(स) सरदार पटेल किस गुण के कारण अपने विरोधियों को पछाड़ दिया करते थे?
उत्तर-
सरदार पटेल को जिस युद्ध का सेनापति बनाया जाता, उसमें उनकी ही आज्ञा अंतिम होती थी। उसके दाँव-पेंच को भी अच्छी तरह जान लेते थे। इससे युद्ध की कला दिखलाते हुए अंतिम चोट करने में सफल हो जाते थे। उनकी यह भी बहुत बड़ी विशेषता थी कि वे अपने विरोधी व्यक्तियों अथवा अन्य राजनीतिक दलों की कमजोरियों को अच्छी तरह से जानते थे। उन कमजोरियों को अपने दिल-दिमाग में अच्छी तरह से बैठा लेते थे। फिर उसके द्वारा वे अपने विरोधियों को पछाड़ दिया करते थे।

(द) सरदार पटेल हठी विद्रोहियों को कैसे विनयानुशासन में लाते थे?
उत्तर-
सरदार पटेल ने कभी भी शक्तिशाली बनने की बात नहीं सोची। वे तो शक्ति को हथियाकर उसका नियंत्रण करते थे। फिर उसका संचालन किया करते थे। अपने हाथ में लिया हुआ काम जब तक पूरा नहीं हो जाता था, तब तक वे अपने आपको छिपाए रखते थे। इस प्रकार के युद्ध कौशल दिखलाते हुए अपने हठी विद्रोहियों की कमजोरियों पर अंतिम चोट कर उन्हें विनयानुशासन में लाते थे।

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भाषा की बात

Class 8 MP Board Hindi Chapter 5 प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिए-
व्यक्तिगत, यद्यपि, परिलक्षित, तत्कालीन, सार्वजनिक, प्रशासनिक, उल्लेखनीय, कृपालु, विनोदप्रियता।
उत्तर-
व्यक्तिगत, यद्यपि, परिलक्षित, तत्कालीन, सार्वजनिक, प्रशासनिक, उल्लेखनीय, कृपालु, विनोदप्रियता।

Class 8th Hindi Chapter 5 MP Board प्रश्न 2.
सही वर्तनी वाले शब्दों पर गोला लगाइए-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 5 लौहपुरुष सरदार पटेल 1
उत्तर-
सही वर्तनी परिलक्षित, दृढ़ता, ईर्ष्या, व्यक्तिगत, आवश्यकता, निश्चय।

Hindi Chapter 5 Class 8 MP Board प्रश्न 3.
नीचे दिए शब्दों के बहुवचन बनाइए
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 5 लौहपुरुष सरदार पटेल 2

Chapter 5 Hindi Class 8 MP Board प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों में उनके सामने दर्शाए प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए-
उत्तर-
प्रत्यय लगाकर नए शब्द
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 5 लौहपुरुष सरदार पटेल 3

♦ प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

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1. व्यक्तिगत जीवन में सरदार पटेल बड़े ही सहृदयी एवं सच्चे मित्र के रूप में विख्यात थे। विषम परिस्थितियों में किसी भी मित्र के काम आने के लिए वे अपने-आप को वचन-बद्ध मानते थे। सार्वजनिक जीवन में लौहपुरुष की संज्ञा प्राप्त करके भी उनका हृदय नारियल के समान बाहर से कठोर और अंदर से कोमल था। वे किसी भी विषय, भाव या विचार को तत्काल समझ जाते तथा अगले ही क्षण तदनुरूप कार्यवाही करते थे।

शब्दार्थ-सहृदयी-उदार, सरस। विख्यात-प्रसिद्ध। विषय-कठिन। तत्काल-तुरंत, उसी समय। तदनुरूप-उसी के अनुसार। कार्यवाही-कार्य, काम।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) भाग-8 के पाठ-5 ‘लौह पुरुष सरदार पटेल’ से ली गई हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की अद्भुत विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि-

व्याख्या-सरदार का अपना जीवन भी दूसरों के लिए ही था। वे दूसरी की सहायता करने और अपने संपर्क में आने – वालों के लिए सच्चे मित्र की तरह होते थे। अपनी इस विशेषता के कारण वे बहुत ही लोकप्रिय हो गए थे। इस प्रकार वे कठिन परिस्थितियों में भी अपनी इस विशेषता का परिचय देना नहीं भूलते थे। जहाँ तक उनके सार्वजनिक जीवन की बात थी, उसमें भी वे बड़े ही निडर और दृढ़ बने रहते थे। इससे वे लौह-पुरुष के नाम से प्रसिद्ध हो गए। ऐसी संज्ञा पाकर भी वे भीतर से नारियल के समान कोमल और बाहर से ही कठोर दिखाई देते थे। इस प्रकार की विशेषताओं से भरपूर वे किसी विषय व भाव-विचार को अपनी पैनी दृष्टि से तुरंत समझ जाते थे। फिर अपनी तीव्र बुद्धि से उसके लिए यथोचित कदम उठाते थे।

विशेष-

  • सरदार वल्लभ पटेल के असाधारण गुण हृदयस्पर्शी हैं।
  • वाक्य-गठन बड़े हैं।
  • तत्सम शब्दों के प्रयोग हैं।

2. उनकी यह महती आकांक्षा थी कि भारत अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करने में सबल और सुयोग्य बन जाए। उनकी भावना थी कि पूर्व में किया गया श्रम तो स्वराज्य के लिए था; किंतु आज जब हमें स्वराज्य प्राप्त हो गया है, उससे भी अधिक श्रम की आवश्यकता सुराज के लिए है, तभी देश का उत्थान सही अर्थों में हो सकेगा और तभी स्वतंत्रता के लिए किए गए त्याग और बलिदान की सार्थकता होगी।

शब्दार्थ-महती-बड़ी। आकांक्षा-इच्छा। भावना-इच्छा। पूर्व-आजादी से पहले। श्रम-मेहनत। सुराज-सुंदर राज्य (स्वतंत्रता)। उत्थान-विकास। सार्थकता-उपयोगिता।

संदर्भ-पूर्ववत्। –

प्रसंग-इन पंक्तियों में लेखक ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की अपने देश भारत के प्रति सच्ची प्रेम-भावना को बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या-सरदार वल्लभ भाई पटेल की अपने देश भारत के प्रति बहुत बड़ी सच्ची भावना थी। उनकी यह अंतिम इच्छा थी कि भारत देश अपनी स्वतंत्रता को किसी भी दशा में न खोने पाए। इसके लिए वे चाहते थे कि यह पूरा देश हर प्रकार से शक्तिशाली और सुयोग्य बना रहे। उनकी यह भी अंतिम इच्छा थी कि हमने अपने इस देश की आजादी के लिए जो कुछ भी संघर्ष किया, उससे ही हमें आजादी मिले। उस संघर्ष की उपयोगिता आज नहीं है। आज तो उस श्रम-संघर्ष की जरूरत है, जिससे हमें मिली हुई इस आजादी को स्वतंत्र का दर्जा दे सकें। इससे देश का अपेक्षित विकास हो सकेगा। ऐसा होने पर ही आजादी के लिए किए गए हमारे संघर्ष, त्याग, बलिदान आदि की उपयोगिता सही कही जा सकेगी।

विशेष-

  • यह अंश देश-प्रेम के भावों को बढ़ाने वाला है।
  • भाषा-शैली में गति है।

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 16 Pathik Se Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 16 Pathik Se Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 16 Pathik Se Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 16 पथिक से प्रश्न उत्तर

पथिक से बोध प्रश्न 

Class 8 Hindi Chapter 16 MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
पथिक = राहगीर; वापी = बावड़ी; जलकण = जल की बूदें; एकाकीपन = अकेलापन; असमंजस = दुविधा; हवन सामग्री = यज्ञ में आहुति देने की वस्तुएँ; दूर्वादल = दूब घास के कोमल पत्ते; निर्झर = झरने; उन्मन = उदास; कुमकुम थाल = रोली की थाली; आहुति = यज्ञ में डालने की हवन सामग्री।

MP Board Class 8 Hindi Chapter 16 प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
(क) “पथ में काँटे तो होंगे ही” इस पंक्ति में काँटे शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
काँटे शब्द का अर्थ बाधाओं से है। कर्त्तव्य निर्वाह करना कठिनाइयों से भरा होता है।

(ख) नीचे दो खण्डों में कविता की आंशिक पंक्तियाँ दी गई हैं। खण्ड ‘अ’ और खण्ड ‘ब’ से एक सही पंक्ति लेकर पूरी कीजिए
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 पथिक से 1
उत्तर
(अ) → (3), (आ) → (4), (इ) + (1), (ई)→(2)

(ग) स्वतन्त्रता की ज्वाला में माँ आहुति की मांग कर रही है। ‘माँ’ शब्द के प्रयोग द्वारा यहाँ किस माँ की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर
‘माँ’ शब्द के प्रयोग से ‘भारत माँ’ की ओर संकेत किया गया है।

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Class 8 Hindi Chapter 16 Pathik Se प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(क) जीवन पथ पर चलते हुए पथिक को किन बाधाओं का सामना करना पड़ता है ? कविता के आधार पर कोई तीन बाधाओं को लिखिए।
उत्तर
जीवन रूपी मार्ग पर मनु रूपी राहगीर आगे बढ़ता है तो उसे अनेक बाधाएँ आकर घेर लेती हैं। मनुष्य सोचता है कि वह सफलताएँ ही प्राप्त करता जाएगा, विफलता उसके समक्ष आएँगी ही नहीं, ऐसा सोचना उसकी मूर्खता है। विफलता भी आ सकती है। इन विफलताओं (कठिनाइयों) के समय में अपने भी पराये जैसा (अपरिचितों जैसा) व्यवहार करते हैं। मन में दुविधा आ सकती है, यही दुविधा निराशा को जन्म देती है। आशा को काले बादलों में छिपा लेती है। आपत्तिकाल में अकेला व्यक्ति व्याकुल हो सकता है। कविता में कवि ने तीन बाधाओं को दर्शाया है

  1. निराशा में डूबे हुए व्यक्ति का एकाकीपन।
  2. ध्येय प्राप्ति में उलझन कि कार्य शुरू किया जाय या नहीं।
  3. अपनी क्षमताओं पर अविश्वास-असमंजस (दुविधा) की स्थिति का बन जाना।

(ख) किस स्थिति में कदम-कदम पर मनुष्य अपने आपको घोर निराशा में देखता है?
उत्तर
मनुष्य जब सब प्रकार से अपने प्रयास करने पर विफल हो जाता है, तो उस स्थिति में भी उसे अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं हो जाना चाहिए। उस असफलता की घड़ी में हर एक आदमी पराया-सा लगता है और उसके सामने पूर्णत: विरोधी होकर सामने दीख पड़ते हैं। उसे कदम-कदम पर भारी निराशा होती है। कठिनाइयों के काले बादल छा जाते हैं। उस अवस्था में उसे अकेलापन अनुभव करता है। उस व्यक्ति में निराशा और हताशा दोनों स्थितियाँ उसे क्लेश पहुँचाने वाली होती हैं।

(ग) सुन्दरता की मृगतृष्णा का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर
किसी भी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए आदमी को निश्चित उपायों के माध्यम से अपने लक्ष्य (मंजिल) तक पहुँचना होता है, परन्तु उस व्यक्ति को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उस मार्ग पर काँटों रूपी रुकावटें होंगी। साथ ही, कभी-कभी कोमल घास के दलों से पूर्ण सुखदायी मार्ग होगा, नदियाँ और तालाब तथा झरने भी होंगे। उस सौन्दर्य की मृगतृष्णा उस पथिक को भ्रम में डाल देने वाली होती है। सौन्दर्य की मृगतृष्णा में आनन्द और जीवन की सफलता महसूस करना उसे भ्रमित कर सकता है। इसी भ्रम से पथिक अपने कर्तव्य पथ को छोड़ उत्तरदायित्व के निर्वाह करने से विमुख हो जाता है।

(घ) कवि के अनुसार पथिक के सामने कब असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है? . .
उत्तर
कवि का मत है कि मातृभूमि की आजादी के लिए अनेक राष्ट्र भक्तों ने स्वयं का बलिदान फाँसी के तख्ते पर झूल कर दे दिया। उस आजादी को प्राप्त तो कर लिया परन्तु उसकी रक्षा के लिए मातृभूमि अपने राष्ट्रभक्तों से आहुति की माँग कर रही है। इस स्वतन्त्रता की ज्वाला में अपने महात्याग के पथ पर चलते हुए असमंजस (दुविधा) में स्थिति उत्पन्न मत होने देना। नहीं तो हे पथिक ! तू अपने कर्तव्य पथ को भूल जायेगा।

(ङ) कवि ने इस कविता में प्रकृति के कौन-कौन से अंगों-उपांगों का चित्रण किया है जो पथिक को उसके मार्ग में मिलते हैं?
उत्तर
कवि ने उन प्राकृतिक अंगों-उपांगों का वर्णन किया है जिन्हें पथिक कदम-कदम पर देखता है। पथिक को कभी तो दूबघास के कोमल दल, अपने निर्मल जल से भरकर इठलाती चलती नदियाँ, व तालाब दिखेंगे। इनके अतिरिक्त सुन्दर पर्वत, वन-वाटिकाएँ तथा जल की बावडियाँ तथा सुन्दर-सुन्दर झरने भी दिखेंगे जो अपनी कल-कल की मधुर ध्वनि से आकर्षण के केन्द्र बने हुए होंगे। कर्तव्य पथ के पथिक को प्राकृतिक उपादानों की सुन्दरता मृगतृष्णा के विमोह में फंसा लेने वाली सिद्ध न हो जाए, जिससे वह अपने कर्तव्य पालन में विफल होकर उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर सके। कवि तो पथिक को आगाह करता है कि वह अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर होता ही रहे।

पथिक से भाषा-अध्ययन

Kartavya Bodh Class 8 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के चार-चार पर्यायवाची शब्द दिए गए हैं। उनमें से एक-एक शब्द गलत है। गलत ‘शब्द पर गोला लगाएँ
उत्तर
(क) पहाड़-(1) गिरि, (2) अचल, (3) पाषाण, (4) पर्वत।
(ख) वन-(1) अरण्य, (2) जम्बुक , (3) कानन , (4) विपिन।
(ग) तालाब-(1) सर, (2) तड़ाग, (3) सरोवर, (4) तटिनी

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भाषा भारती कक्षा 8 Solutions प्रश्न 2.
नीचे कुछ शब्द और अके विलोम शब्द दिए गए हैं। दोनों को अलग-अलग लिखिए, प्रथम, सम्मुख, विफलता, अन्तिम, मांग, कठिन, विमुख, सफलता, अनुराग, प्रलय, पुष्ट, जर्जर, विराग, सरल, पूर्ति, सृष्टि।
उत्तर
शब्द – विलोम शब्द
प्रथम – अन्तिम
सम्मुख – विमुख
विफलता – सफलता
माँग – पूर्ति
कठिन – सरल
अनुराग – विराग
प्रलय – सृष्टि
पुष्ट – जर्जर

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 8 प्रश्न 3.
कविता में आए पुनरुक्ति शब्दों (जैसेअपना-अपना) को छाँटकर लिखिए।
उत्तर

  1. सुन्दर-सुन्दर
  2. पग-पग
  3. सुन-सुन
  4. विदा-विदा।

Class 8th Hindi Chapter 16 प्रश्न 4.
एकाकीपन शब्द में ‘एकाकी’ में ‘पन’ – प्रत्यय है। इसी प्रकार ‘पन’ प्रत्यय जोड़कर चार शब्द बनाइए।
उत्तर

  1. लड़कपन
  2. बचपन
  3. दुकेलापन
  4. अकेलापन।

पथिक कविता के प्रश्न उत्तर Class 8 प्रश्न 5.
‘सरिता-सर’ में अनुप्रास अलंकार है। अनुप्रास अलंकार के अन्य उदाहरण छाँटकर लिखिए।
उत्तर
वन-वापी, कठिन-कर्म, सैनिक-पुलक।

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 6 प्रश्न 6.
निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर प्रयुक्त अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए
(क) जब कठिन कर्म पगडंडी पर।
राही का मन उन्मन होगा।
(ख) मानो झूम रहे हैं तरु भी, मन्द पवन के झोंकों से।
उत्तर
(क) अनुप्रास अलंकार
(ख) उत्प्रेक्षा अलंकार।

पथिक से सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. पथ भूल न जाना पथिक कहीं
पथ में काँटे तो होंगे ही,
‘दूर्वादल, सरिता, सर होंगे।
.सुन्दर गिरि-वन-वापी होंगे,
सुन्दर-सुन्दर निझर होंगे।
सुन्दरता की मृगतृष्णा में,
पथ भूल न जाना पथिक कहीं।

शब्दार्थ-पथ = मार्ग, राह; पथिक = राहगीर; काँटे = कंटकी रूपी बाधाएँ: दूर्वादल = दूब घास के कोमल पत्ते; सरिता = नदियाँ; सर = तालाब; गिरि = पर्वत; वन = जंगल; वापी = बावड़ियाँ निर्झर = झरने; मृगतृष्णा = (एक प्रकार का भ्रम), रेगिस्तान में रेत पर सूर्य की किरणें पड़ने पर जल का भ्रम होता है।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के पाठ ‘पथिक से’ अवतरित है। इसके रचयिता डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ हैं।

प्रसंग-कवि बता देना चाहता है कि अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के मार्ग में अनेक बाधाएँ आती हैं परन्तु उस मार्ग में बहुत से सुहावने दृश्य भी होते हैं जो हमें अपनी ओर आकर्षित करते हैं लेकिन हमें उनके सौन्दर्य के भुलावे में नहीं आना चाहिए। हमें तो केवल अपने कर्तव्य पथ पर आगे ही आगे बढ़ते जाना चाहिए।
व्याख्या हे पथिक ! तुम अपने मार्ग को मत भूल जाना। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के मार्ग में अनेक बाधाएँ (काँट) अवश्य ही होंगी परन्तु इसके विपरीत वहाँ कोमल दूब घास के पत्ते होंगे, नदियों के अच्छे-अच्छे दृश्य भी होंगे। मनोरम तालाब भी होंगे। पर्वतों, वनों और बावड़ियों के अति सुन्दर जंगल होंगे। -वहाँ अति सुन्दर झरने भी होंगे परन्तु हे राहगीर तुझे यह ध्यान – रखना पड़ेगा कि सुन्दरता का भ्रम, तुझे अपने लक्ष्य प्राप्ति के -सही मार्ग से भटका न दे। तू अपने सही मार्ग को भूल मत जाना।

(2) जब कठिन कर्म पगडंडी पर
राही का मन उन्मन होगा।
जब सपने सब मिट जाएँगे,
कर्तव्य मार्ग सम्मख होगा।

तब अपनी प्रथम विफलता में,
पथ भूल न जाना पथिक कहीं।

शब्दार्थ-कर्म पगडंडी पर = कर्म के कम चौड़े मार्ग पर; राही = राह पर चलने वाला उन्मन = उदास. खिन्न: सपने = कल्पनाएँ; मिट जाएंगे = समाप्त हो जाएँगे; कर्त्तव्य मार्ग = उत्तरदायित्व का निर्वाह करने वाला रास्ता; सम्मुख = समक्ष, सामने प्रथम = पहली; विफलता- असफलता।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि सलाह देता है कि कर्म के मार्ग पर चलते रहने से कल्पनाएँ अपने आप मिट जाती हैं। वे साकार होने लगती हैं।

व्याख्या-अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होने में पथिक के मार्ग में अनेक बाधाएँ आती ही हैं, राही का मन कई बार इनमें घिरकर उदास हो उठता है। जब उसकी कल्पनाएँ मात्र कल्पनाएँ लगने लगती हैं। तब उसके सामने केवल कर्त्तव्य मार्ग ही होता है। यदि किसी कारण से पहली बार उसे असफलता मिलती है तो भी
उस कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने वाले राहगीर को अपना मार्ग नहीं भुला देना चाहिए। वह मार्ग से भटक न जाय अर्थात् उसे अपने कर्तव्य को पूरा करने में जुटा रहना चाहिए।

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3. अपने भी विमुख पराये बन,
आँखों के सम्मुख आएंगे।
पग-पग पर घोर निराशा के,
काले बादल छा जाएंगे।

तब अपने एकाकीपन में,
पथ भूल न जाना पथिक कहीं।

शब्दार्थ-विमुख = विरुद्ध पराये = दूसरे, अन्य; सम्मुख = सामने; निराशा = नाउम्मीद; काले बादल = विपत्ति, कठिनाइयाँ; छा जाएँगे = घिर आएँगे;
एकाकीपन अकेलापन।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कठिनाइयों के आ जाने पर भी अपने कर्त्तव्य मार्ग से पीछे नहीं हटना चाहिए, इस तरह की सलाह कवि देता है।

व्याख्या-कठिनाइयों के काले बादल जब चारों ओर छा जाते हैं तब कदम-कदम पर भयंकर आशाहीनता आ जाती है। उस समय अपने सगे-सम्बन्धी भी अन्य से (पराये से) बन जाते हैं। वे अपरिचित से हो जाते हैं। उस अकेलेपन में भी, हे राहगीर ! तुम्हें अपने कर्त्तव्य मार्ग से नहीं भटक जाना चाहिए।

4. रणभेरी सुन-सुन विदा-विदा
जब सैनिक पुलक रहे होंगे;
हाथों में कुमकुम थाल लिए,
जल कण कुछ डुलक रहे होंगे।

कर्तव्य प्रेम की उलझन में,
पथ भूल न जाना पथिक कहीं।

शब्दार्थ-रणभेरी = युद्ध शुरू करने की ध्वनि पुलक रहे होंगे – प्रसन्न या पुलकायमान हो रहे होंगे;
जलकण = आँसुओं की बूंदें।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कर्त्तव्य निर्वाह किया जाय अथवा प्रेम का निर्वाह इस उलझी हुई पहेली के सुलझाव के लिए अपने कर्तव्य के मार्ग को मत भूल जाना, ऐसी सलाह देकर कवि राहगीर को अपने कर्त्तव्य पथ पर आगे ही आगे बढ़ते रहने का सदुपदेश देता है।

व्याख्या-युद्ध प्रारम्भ होने की ध्वनि सुनते-सुनते, सैनिक रोमांचित हो रहे होंगे। वे युद्ध क्षेत्र के लिए विदा होने की तैयारी कर रहे होंगे। युद्ध (कर्तव्य पथ पर बढ़ने के लिए) को जाते समय वह (प्रियतमा) कुमकुम से सजा हुआ थाल अपने हाथों में लिए हुए अपने नेत्रों से प्रेमाश्रु बहाती हुई हो सकती है। उन प्रेमाश्रुओं को देखकर तथा समक्ष ही कर्तव्य पूरा करने की घड़ी सामने होने पर पैदा हुई उलझन में, हे राहगीर तुम अपने कर्तव्य मार्ग से इधर-उधर भटक मत जाना।

(5) कुछ मस्तक कम पड़ते होंगे,
जब महाकाल की माला में,
माँ माँग रही होगी आहुति,
जब स्वतन्त्रता की ज्वाला में।
पल भर भी पड़ असमंजस में,
पथ भूल न जाना पथिक कहीं।

शब्दार्थ-मस्तक = माथा; आहुति = यज्ञ में डाली जाने वाली हवन सामग्री; असमंजस- दुविधा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-किसी भी प्रकार की दुविधा में पड़े बिना कर्तव्य | का निर्वाह करते रहना चाहिए।

व्याख्या-युद्ध की देवी उन बहादुर वीरों की संख्या कम होने पर अन्य युद्धवीरों के आने की प्रतीक्षा कर रही होगी क्योंकि महाकाल की माला में आजादी की खातिर अपने मस्तक को काटकर चढ़ाने वाले युद्ध वीरों की संख्या कुछ कम पड़ सकती है। वह युद्ध की देवी, नौजवान युवकों की आहुति आजादी को प्राप्त करने की प्रज्ज्वलित आग में देने के लिए, सभी से माँग कर रही है। कर्त्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए, किसी भी असमंजस 1 में नहीं पड़ें। उन्हें तो अपने कर्तव्य मार्ग का ही ध्यान होना चाहिए। कर्त्तव्य मार्ग से हट जाने की भूल न हो जाये।

MP Board Class 8 Hindi Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 6 Bhakti ke Pad Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 6 Bhakti ke Pad Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 6 Bhakti ke Pad Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 6 भक्ति के पद प्रश्न उत्तर

बोध प्रश्न

Class 8 Hindi Chapter 6 Bhakti Ke Pad प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
पंछी = पक्षी; कूप = कुआँ; मधुकर = भौंरा; तजि = छोड़कर; अधम = नीच; दनुज = राक्षस, दानव; घन = बादल; चकोरा = चकोर, चकवा-चकवी; पूँजी = धन; छाँड़ि= छोड़कर; छेरी = बकरी; अम्बुज= कमल; उधारे = उद्धार किया; बास = सुगन्ध।

MP Board Class 8 Hindi Chapter 6 प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए

(क) सूर के मन को सुख कहाँ प्राप्त होता है ?
उत्तर
सूरदास के मन को सुख भगवान श्रीकृष्ण के चरणों की भक्ति में प्राप्त होता है।

(ख) अधम का उद्धारक कौन है ?
उत्तर
अधम के उद्धारक भगवान राम हैं।

(ग) रैदास किसके आराधक थे ?
उत्तर
रैदास ईश्वर के नाम के आराधक थे।

(घ) मीराबाई को कौन-सा रत्न प्राप्त हो गया ?
उत्तर
मीराबाई को राम रत्न प्राप्त हो गया।

Bhasha Bharti Class 8 Chapter 6 प्रश्न 3.
निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए

(क) “प्रभुजी तुम चन्दन हम पानी …………… पंक्ति किस कवि की है ?
(अ) सूर
(आ) तुलसी
(इ) रैदास
(ई) मीराबाई
उत्तर
(इ) रैदास

(ख) तुलसीदास की भक्ति निम्नलिखित में से किस भाव की है ?
(अ) सखाभाव
(आ) दासभाव
(इ) मित्रभाव
(ई) गुरु भाव।
उत्तर
(आ) दासभाव

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(ग) ब्रज भूमि में किसकी झाड़ियाँ (कुंज) अधिक मिलती हैं?
(अ) आम
(आ) जामुन,
(इ) नीम
(ई) करील।
उत्तर
(ई) करील

(घ) निम्नलिखित रचनाकारों में से किसका सम्बन्ध राजस्थान से था?
(अ) सूर
(आ) तुलसी
(इ) मीरा
(ई) बिहारी।
उत्तर
(इ) मीरा।

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 6 प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए

(क) ‘जहाज का पक्षी’ किस बात का प्रतीक है? आशय स्पष्ट कीजिए
उत्तर
‘जहाज का पक्षी’ भगवान कृष्ण रूपी जहाज पर स्थल के दूर या समीप होने की जानकारी देने वाला पक्षी रूप भक्त है। जिस तरह समुद्र से यात्रा करने वाले जहाज से जमीन किधर है और कितनी दूर है, इसकी जानकारी लेने के लिए पक्षियों को छोड़ा जाता था। जब जमीन कहीं नहीं दीखती और जमीन पक्षियों की पहुँच से बाहर होती थी, तो पक्षी लौटकर जहाज पर ही आ जाते थे। यदि जमीन दूर या समीप होती, तो पक्षी उसी दिशा में उड़ते हुए चले जाते थे और वह जमीन ही उनकी शरण स्थल बन जाती थी। नाविक भी जहाज को उसी दिशा में खेने लग जाते थे। उस जमीन पर जाकर जहाज अपना लंगर डाल देता था। यह उस समय होता था जब कुतुबनुमा आदि दिशासूचक यन्त्रों का आविष्कार नहीं हुआ था। इस पद में कवि ने अपने आपको जहाज के पक्षी के (भक्त) रूप में चित्रित किया है जो बार-बार सभी ओर से निराश होकर श्रीकृष्ण के चरणों रूपी जहाज पर शरण प्राप्त करता है।

(ख) तुलसी ने किस-किसके उद्धार का उल्लेख किया है ?
उत्तर
तुलसी ने वर्णन किया है कि खग (जटायु), मृग (मारीच), व्याघ (वाल्मीकि), पषान (शाप से पत्थर बनकर पड़ी हुई गौतम पत्नी अहिल्या); बिटप (यमलार्जुन नामक वृक्ष); जड़ (भरत मुनि); आदि का उद्धार भगवान श्रीराम ने त्रेतायुग में और भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में किया था। जटायु पक्षी सीता हरण के समय, सीता को बचाने के लिए रावण से संघर्ष करते हुए घायल हो गया था। श्रीराम ने उसका उद्धार किया था। मृग (मारीच) रावण का सम्बन्धी था जो रावण की सहायता के ‘लिए कपट-मृग (स्वर्ण मृग) बना था; जिसका राम ने उद्धार किया था। व्याध (वाल्मीकि) पहले डाकू थे। राम शब्द का उल्टा जाप करने से उनका कल्याण हो गया। पषान (अहिल्या) गौतम ऋषि की पत्नी थीं। वे अपने ऋषि पति के द्वारा दिये गये शाप के कारण पत्थर (पाषाण) बन गई थीं। भगवान राम ने अपने चरणों की धूल के प्रताप से उनका उद्धार किया था। यमलार्जुन को श्राप लगा और वे वृक्ष बन गये थे। द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने उनका उद्धार किया। इस तरह विभिन्न रूप में पतित हुए प्राणियों का भगवान ने उचित समय पर उद्धार किया था।

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(ग) रैदास ने भगवान से अपना सम्बन्ध स्थापित करते हुए किस-किससे अपने को जोड़ा है?
उत्तर
रैदास ने भगवान से अपने आपको कई तरह से जोड़ा है। उन्होंने भगवान को चन्दन, धन (बादल), चन्द्रमा, दीपक, मोती के रूप में है और अपने आपको क्रमशः पानी, मोर, चकोर, बत्ती, धागे के रूप में चित्रित किया है। चन्दन पानी के संयोग से घिस जाता है और उसकी गंध फैलने लगती है। बादल की गरजना के साथ ही मोर कूकता है। चन्द्रमा को चकोर एकटक ही देखता है। दीपक में बत्ती होती है, वह दीपक की ज्योति बिखेरती है। मोतियों में धागा पिरोया जाता है, फिर हार (माला) बन जाता है। सोने को सुहागे से चमक प्राप्त होती है। इस तरह ईश्वर से इन जीवों का विभिन्न प्रकार का सम्बन्ध है।

(घ) मीरा की भक्ति भावना पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर
मीरा की भक्ति दास भावना से ओत-प्रोत है। वे भगवान कृष्ण की भक्त दासी हैं। ईश्वर की भक्ति उनके लिए वह रत्न है जिसे कोई चोर चुरा नहीं सकता, खर्च करने पर भी खर्च नहीं होता। भगवान की भक्ति का रत्न तो प्रतिदिन सवाया ही होता जाता है। इस प्रकार ईश-भक्ति से मनुष्य सतगुरु की कृपा प्राप्त कर लेता है और सत पर आधारित मनुष्य की जीवन नौका बड़ी सरलता से संसार सागर को पार कर जाती है। ईश्वर की भक्ति ही मनुष्य को उद्धार प्राप्त कराने का एकमात्र साधन है। ईश्वर की भक्ति तो संसार की विविध वस्तुओं के प्रति मोह त्यागने पर ही प्राप्त होती है।

Class 8 Hindi Chapter 6 Mp Board प्रश्न 5.
निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए
(क) कौन देव बराय बिरद-हित, हठि-हठिअधम उचारे ?
उत्तर
तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान राम ! मैं आपके चरणों की भक्ति को छोड़कर कहाँ जाऊँ ? आपके अतिरिक्त किसका नाम पतितपावन है ? दीनों के प्रति किसे अति प्रेम है ? अन्य कौन-सा देवता है जिसने हठपूर्वक अपने यश के लिए पापियों का उद्धार किया हो ? पक्षी (जटायु), मृग (मारीच), व्याध वाल्मीकि), पाषान (अहिल्या), वृक्ष (यमलार्जुन),जड़ (भरत मुनि) आदि का किस देवता ने संसार-सागर से उद्धार किया है ? देव, राक्षस, मुनि, नाग और मनुष्य आदि सभी माया के वशीभूत होकर दयनीय बने हुए हैं। इसलिए, तुलसीदास अपने आपको समझाते हुए कहते हैं कि इनके समक्ष तू (तुलसी) अपनी दीनता का बखान क्यों करता है ?

(ख) सूरदास प्रभु काम धेनु तजि, छेरी कौन दुहावै ?
उत्तर
मेरा मन दूसरे स्थान पर किस तरह सुख प्राप्त कर सकता है। जिस तरह समुद्री जहाज से जमीन के होने की जानकारी के लिए छोड़ा गया पक्षी लौटकर फिर से जहाज पर ही आ जाता है, क्योंकि स्थल पास में नहीं होता है। उसे उसी जहाज पर शरण प्राप्त होती है। उसी पक्षी की तरह यह मेरा मूर्ख बना मन श्रीकृष्ण को झेड़कर किसी दूसरे देव का ध्यान क्यों धरता है। महान् पुण्यशाली पवित्र गंगा को छोड़कर मूर्ख और कुबुद्धि मनुष्य ही कुआँ खोदने की बात सोचता है। जिस भौरे ने कमल के पराग का ही पान किया हो, वह भौरा करील के फल (टेंटी) क्यों खायेगा ? सूरदास वर्णन करते हैं कि कामधेनु को छोड़कर बकरी दुहने का विचार कौन करता है ? तात्पर्य यह है कि भगवान श्रीकृष्ण को छोड़कर, हे मेरे मन ! तू किस दूसरे देव की आराधना करने का विचार करता है ? यदि तू ऐसा करता है तो निश्चय ही तू बड़ा मूर्ख है, उचित और अनुचित के भेद को तू नहीं जानता है।

Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 6 प्रश्न 6.
निम्नलिखित पंक्तियों का सन्दर्भ सहित भाव स्पष्ट कीजिए
(क) प्रभु जी तुम चन्दन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी।
उत्तर
इस पंक्ति के सन्दर्भ सहित भाव के लिए ‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ शीर्षक के पद्यांश-03 की व्याख्या सन्दर्भ-प्रसंग सहित देखिए।

(ख) पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो।।
जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो।
खरचै नहिकोई चोर नलेवे, दिन-दिन बढ़त सवायो।।
उत्तर
इन पंक्तियों के सन्दर्भ सहित भाव के लिए ‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ शीर्षक के पद्यांश-04 की व्याख्या सन्दर्भ-सहित देखिए।

भाषा-अध्ययन

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 6 प्रश्न 1.
दिये गये विकल्पों में से सही विकल्प छाँटकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) पंछी तद्भव शब्द है। इसका तत्सम रूप …… है। (पक्षी, पक्षि, पंच्छी)
(ख) चरन तद्भव शब्द है। इसका तत्सम रूप ……………… है। (पैर, चारन, चरण)
(ग) कमल का पर्यायवाची ……. शब्द है। (नीरद, जलद, नीरज)
(घ) रात का पर्यायवाची ……… है। (दिननाथ, रजनीपति, रजनी)
उत्तर
(क) पक्षी
(ख) चरण
(ग) नीरज
(घ) रजनी।

Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 6 प्रश्न 2.
निम्नलिखित वर्ग पहेली में रात, पानी, कमल के दो-दो पर्यायवाची शब्द दिए हैं। उन्हें ढूँदिए तथा लिखिए।
उत्तर
शब्द – पर्यायवाची
रात = रात्रि, रजनी।
पानी = तोय, जल।
कमल = नीरज, तोयज।

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Hindi Chapter 6 Class 8 MP Board प्रश्न 3.
तालिका में दिए गए शब्दों की सही जोड़ी बनाइए
उत्तर
तद्भव शब्द – तत्सम शब्द
(क) महातम – (1) दुर्मति
(ख) दुरमति – (2) स्वर्ण
(ग) मानुस – (3) माहात्म्य
(घ) सोना – (4) मनुष्य
उत्तर
(क)-(3),(ख)→(1),(ग)→(4),(घ)→2

Bhakti Ke Pad Class 8 प्रश्न 4.
निम्नलिखित छंदों में प्रयुक्त मात्राएँ गिनकर लक्षण के अनुसार छंद का नाम लिखिए
(क) वृक्ष कबहु नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर।
परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर।।
उत्तर
यह छंद दोहा है। यह मात्रिक छन्द है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके विषम चरणों (पहले और तीसरे) में 13-13 मात्राएँ तथा सम चरणों (दूसरे और चौथे) में 11-11 मात्राएँ हैं।
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद 2
वृक्ष कबहु नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर।
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद 1
परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर।।
अत: यह दोहा छन्द है।

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(ख) कुन्द इन्दु सम देह, उमा रमन करुना अयन।
जाहि दीन पर नेह, करहु कृपा मर्दन मयन।।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद 3
कुन्द इन्दु सम देह, उमा रमन करुना अयन।
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद 4
जाहि दीन पर नेह, करहु कृपा मर्दन मयन।
(11-13 मात्राएँ) अत: यह सोरठा छन्द है।

(ग) जेहि सुमिरत सिधि होय, गन नायक करिवर वदन।
करहु अनुग्रह सोय, बुद्धि रासि सुभ गुन सदन।।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद 5
जेहि सुमिरत सिधि होय, गन नायक करिवर वदन।
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 भक्ति के पद 6 (11-13 मात्राएँ)
करहु अनुग्रह सोय, बुद्धि रासि सुम गुन सदन।।
(11-13 मात्राएँ) अतः यह सोरठा कद है।
खण्ड-ख और ग सोरठा मद के उदाहरण हैं। सोरठा छन्द मात्रिक छन्द होता है। यह दोहे का उल्टा होता है। इसके विषम चरणों में (पहले और तीसरे में) 11-11 मात्राएँ तथा सम चरणों में (दूसरे और चौथे में)
13-13 मात्राएँ होती है।

भक्ति के पद सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) मेरौ मन अनत कहाँ सुख पावै।
जैसे उड़ि जहाज को पंछी, फिरि जहाज पर आवै।
कमल-नैन को छाँड़ि महातम और देव को ध्यावे?
परम गंग को छोड़ि पियासौ, दुरमति कूप खनावै।
जिहिं मधुकर अंबुज-रस चाख्यौ, क्यों करील फल भावै।
सूरदास, प्रभु, कामधेनु तजि, छरी कौन दुहावै ?

शब्दार्थ-मेरौ= मेरा; अनत-अन्यत्र,दूसरी जगह; पावै प्राप्त कर सकता है; पंछी = पक्षी; फिरि = लौटकर आवै = आ-जाता है; कमल-नैन = कमल के समान नेत्र वाले भगवान कृष्ण; छाँड़ि = छोड़कर या अतिरिक्त; महातम = महान् मूर्ख और देव = अन्य देवता को; ध्यावै = ध्यान करता है; परम = महान्; पियासौ = प्यासा व्यक्ति; दुरमति = दुर्बुद्धि; कूप – कुऔं; खनावै = खुदवाता है; जिहि = जिस; मधुकर = भौरे ने; अंबुज-रस = कमल के पराग का; चाख्यौ = आस्वादन किया है; करील फल = टेंटी; भावै = अच्छी लगें; छेरी = बकरी; दुहावै दुहेगा।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती के पाठ’ भक्ति के पद’ से अवतरित है। इसके रचयिता ‘सूरदास हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पद में सूरदास ने अपनी दीनता भरी विनती को स्पष्ट किया है। वे आशा करते हैं कि हे भगवान श्री कृष्ण जी ! आपके ही चरणों में मुझे शरण प्राप्त होगी।

व्याख्या-मेरा मन दूसरे स्थान पर किस तरह सुख प्राप्त कर सकता है। जिस तरह समुद्री जहाज से जमीन के होने की जानकारी के लिए छोड़ा गया पक्षी लौटकर फिर से जहाज पर ही आ जाता है, क्योंकि स्थल पास में नहीं होता है। उसे उसी जहाज पर शरण प्राप्त होती है। उसी पक्षी की तरह यह मेरा मूर्ख बना मन श्रीकृष्ण को झेड़कर किसी दूसरे देव का ध्यान क्यों धरता है। महान् पुण्यशाली पवित्र गंगा को छोड़कर मूर्ख और कुबुद्धि मनुष्य ही कुआँ खोदने की बात सोचता है। जिस भौरे ने कमल के पराग का ही पान किया हो, वह भौरा करील के फल (टेंटी) क्यों खायेगा ? सूरदास वर्णन करते हैं कि कामधेनु को छोड़कर बकरी दुहने का विचार कौन करता है ? तात्पर्य यह है कि भगवान श्रीकृष्ण को छोड़कर, हे मेरे मन ! तू किस दूसरे देव की आराधना करने का विचार करता है ? यदि तू ऐसा करता है तो निश्चय ही तू बड़ा मूर्ख है, उचित और अनुचित के भेद को तू नहीं जानता है।

(2) जाऊँ कहाँ तजि चरन तिहारे ?
काको नाम पतित पावन ? जग केहि अति दीन पियारे ?
कौन देव बराय बिरद-हित, हठि हठि अधम उधारे ?
खग, मृग, व्याघ, पषान, बिटप, जड़, जवन कवन सुर तारे ?
देव, दनुज, मुनि, नाग, मनुज सब, माया-बिबस बिचारे।
तिनके हाथ दास तुलसी प्रभु कहा ‘अपनपी हारे’।।

शब्दार्थ-तजि = छोड़कर; तिहारे = तुम्हारे; काको = किसका; पतित-पावन = नीच व्यक्ति का उद्धार करने वाला; जग = संसार में; केहि = किसको, अति = बहुत अधिक; दीन = गरीब पियारे= प्रिय हैं; बराय = दूसरा; बिरद-हित = यश के लिए: हठि-हठि= हठपूर्वक; अधम = पापियों का; उधारे = उद्धार किया है; खग = जटायु; मृग = मारीच; व्याघ – वाल्मीकि जो पहले डाकू थे; पषान = अहिल्या; बिटप = यमलार्जुन; जड़भरतमुनि; मनुज = मनुष्य; माया-बिबस = माया से भ्रमित होकर; बिचारे = दीन बने हुए हैं। अपनपौ = अपनेपन अर्थात् अपनी दीनता; हारे = हार मान जाये।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के पाठ’ भक्ति के पद’ से अवतरित है। इसके रचयिता गोस्वामी तुलसीदास हैं।

प्रसंग-तुलसीदास भगवान राम के प्रति अपनी अटूट भक्ति और विश्वास को प्रकट करते हैं। वे अपने इष्ट राम के चरणों में ही शरण प्राप्त करते हैं।

व्याख्या-तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान राम ! मैं आपके चरणों की भक्ति को छोड़कर कहाँ जाऊँ ? आपके अतिरिक्त किसका नाम पतितपावन है ? दीनों के प्रति किसे अति प्रेम है ? अन्य कौन-सा देवता है जिसने हठपूर्वक अपने यश के लिए पापियों का उद्धार किया हो ? पक्षी (जटायु), मृग (मारीच), व्याध वाल्मीकि), पाषान (अहिल्या), वृक्ष (यमलार्जुन),जड़ (भरत मुनि) आदि का किस देवता ने संसार-सागर से उद्धार किया है ? देव, राक्षस, मुनि, नाग और मनुष्य आदि सभी माया के वशीभूत होकर दयनीय बने हुए हैं। इसलिए, तुलसीदास अपने आपको समझाते हुए कहते हैं कि इनके समक्ष तू (तुलसी) अपनी दीनता का बखान क्यों करता है ?

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(3) अब कैसे छूटै नाम रट लागी ? प्रभुजी तुम चन्दन हम पानी, जा की अंग-अंग बास समानी ।।
प्रभुजी तुम घनवन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा ।
प्रभुजी तुम दीपक हम बाती,जाकी ज्योति बरे दिन राती ।।
प्रभुजी तुम मोती हम धागा, जैसे सोनहिं मिलत सुहागा ।
प्रभुजी तुम स्वामी हम दासा, ऐसी भक्ति करे रैदासा ।।

शब्दार्थ-छूटै = समाप्त हो; नाम रट = भगवान के नाम की रट: अंग-अंग = शरीर के प्रत्येक अंग में बास = सगन्धः समानी = व्याप्त हो गयी है; घन बादल; वन जंगल (संसार); हम = प्राणी; मोरा = मोर हैं; जैसे = जिस तरह; चितवत = एक टक होकर देखता रहता है; चंद = चन्द्रमा को; चकोरा = चकोर पक्षी; बाती = बत्ती; ज्योति = प्रकाश, उजाला; बरे = जलती है; दिन राती रात और दिन; सोनहि-सोने में।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती के पाठ ‘भक्ति के पद से अवतरित है। इसके रचयिता भक्त कवि रैदास हैं।

प्रसंग-भक्त कवि रैदास ने इस पद में बताया है कि वे ‘दास’ भाव की भक्ति करते हैं।

व्याख्या-हे प्रभो ! तुम्हारे नाम की लगी हुई रट किसी भी तरह नहीं छट सकती। तुम सुगन्धित चन्दन हो, हम (मैं) पानी के समान हैं। चन्दन की सुगन्ध जल के साथ मिलकर उसमें समा जाती है। उसी तरह, हे प्रभो ! तुम्हारी भक्ति में मेरा अंग-अंग डूबा हुआ है। हे प्रभो ! तुम बादल के समान हो, और हम (भक्तगण) मोर के समान है। हम आपकी तरफ ठीक उसी तरह एकटक होकर देखते रहते हैं, जिस तरह चकोर पक्षी चन्द्रमा की ओर देखता रहता है। आगे फिर कवि कहता है कि हे ईश्वर ! तुम दीपक हो और हम उस दीपक की बत्ती के समान हैं, जिसकी लौ की ज्योति रात-दिन जलती रहती है अर्थात् तुम्हारा ही तेज सर्वत्र बिखरा हुआ है। कवि फिर कहता है कि हे ईश्वर ! तुम मोती के समान हो और मोती पिरोये गये धागे के समान हम (भक्त) लोग हैं अर्थात् भक्त ईश्वर से मिलकर अपनी बात बना ले जाता है। रैदास कवि कहते हैं कि हे प्रभो ! मैं आपका दास हूँ और तुम मेरे स्वामी हो। इस तरह मैं दास भाव की भक्ति करता हूँ।

(4) पायो जी मैंने, राम रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो।।
जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो।
खरचै नहिं कोई चोर न लेवै, दिन-दिन बढ़त सबायो।।
सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो।
मीरा,के प्रभु गिरधर नागर, हरख-हरख जस गायो।।

शब्दार्थ-पायो = प्राप्त कर लिया है; अमोलक अमूल्य, बेशकीमती किरपा= कृपा, दया; अपनायो- अपना लिया है, स्वीकार कर लिया है। पूँजी = सम्पत्ति खोवायो – खो दिया है; दिन-दिन-प्रतिदिन, रोजाना; बढ़त = वृद्धि हो रही है; सबायो = सवा गुना; सत = सत्य, खेवटिया = खेने वाला; तर आयो = उद्धार प्राप्त कर लिया; नागर = चतुर: हरख-हरख = हर्षित होकर, प्रसन्न होकर; जस = यश, कीर्ति; गायो = गाया है।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती के पाठ’ भक्ति के पद’ से अवतरित है। इस पद की रचयिता भक्त कवयित्री ‘मीराबाई हैं।

प्रसंग-मीरा भगवान कृष्ण की भक्ति करती हैं। वह उनके यश का गान बहुत ही हर्षपूर्वक करती हैं।

व्याख्या-मीराबाई कहती है कि मैंने राम रूपी रत्न को धन के रूप में प्राप्त कर लिया है। मेरे श्रेष्ठ गुरु ने मुझे एक बेशकीमती वस्तु प्रदान की है। मेरे गुरु ने बड़ी ही कृपा करते हुए मुझे अपना लिया है। इस तरह मैंने प्रत्येक जन्म की पूँजी प्राप्त कर ली है। संसार सम्बन्धी सब कुछ (धन इत्यादि) खो दिया। यह भक्ति रूपी सम्पत्ति बहुत ही अजब है जिसे किसी भी तरह खर्च नहीं किया जा सकता। कोई चोर भी इसे चुरा नहीं सकता। यह भक्ति रूपी धन प्रतिदिन ही सवाया होकर बढ़ता जा रहा है। सत्य की नाव को खेने वाला यदि सतगुरु है तो आसानी से ही संसार रूपी सागर को सहज ही पार किया जा सकता है। मीरा वर्णन करती हैं कि मेरे प्रभु तो गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले हैं; वे अति चतुर हैं। मैंने तो उनके यश का गान हर्षित होकर किया है।

MP Board Class 8 Hindi Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 14 Nav Samvatsar Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 14 Nav Samvatsar Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 14 Nav Samvatsar Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 14 नव संवत्सर प्रश्न उत्तर

नव संवत्सर बोध प्रश्न

Class 8 Hindi Chapter 14 Nav Samvatsar प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
नव संवत्सर = एक वर्ष की अवधि का समय; मत्स्य = मछली; उत्सव = पर्व, त्यौहार; कार्तिकादि = कार्तिक माह से प्रारम्भ होने वाला; अमान्त = अमावस्या को समाप्त होने वाला पक्ष; शृंगार = सजावट, सजना, सजाना; जयन्ती = जन्मदिन पीर=संत, महात्मा; सृष्टि रचना, जन्म देना, बनाना; वध = मार देना, नष्ट कर देना; चैत्रादि चैत्र माह से शुरू होने वाला; पूर्णिमान्त = पूर्णमासी को समाप्त होने वाला पक्ष; ऋतु  = मौसम; सम्वर्द्धन = विकास, वृद्धि, बढ़ोतरी; आततायी = कष्ट पहुँचाने वाला, अत्याचारी।

Class 8 Hindi Chapter 14 MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए

(क) नव संवत्सर से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर
नव संवत्सर से तात्पर्य है-नये वर्ष का प्रारम्भ। यह नव संवत्सर चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है।

(ख) गुड़ी पड़वा नाम का क्या अर्थ है ?
उत्तर
गुड़ी’ का अर्थ है ध्वज या झण्डी। पड़वा का अर्थ है प्रतिपदा। लोक में एक परम्परा व्याप्त है। उसके अनुसार यह माना जाता है कि इसी दिन श्री रामचन्द्रजी ने किष्किधा के राजा बाली का वध किया और उसके स्वेच्छाचारी राज्य का अन्त कर दिया। बाली वध के बाद वहाँ की प्रजा ने पताकाएँ फहराई और उत्सव मनाया। इन पताकाओं को महाराष्ट्र में गुड़ी कहते हैं। आज भी वहाँ इस दिन आँगन में बाँस के सहारे गुड़ी खड़ी की जाती है। इसलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा कहा जाता है।

(ग) विक्रम संवत् किसने प्रारम्भ किया?
उत्तर
उज्जयिनी के महान् सम्राट् विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रमणकारी शकों पर विजय प्राप्त की। इस विजय की खुशी में उन्होंने विक्रम संवत् आरम्भ किया। यह विक्रम संवत् ईसा के ईसवीय सन् से 57 वर्ष पूर्व प्रारम्भ किया गया।

(घ) बसन्त ऋतु का आगमन किस भारतीय माह में होता है ?
उत्तर
बसन्त ऋतु का आगमन चैत्र माह में होता है।

(ङ) दक्षिण भारत में विक्रम संवत् का प्रारम्भ किस भारतीय मास से होता है ?
उत्तर
दक्षिण भारत में विक्रम संवत् का प्रारम्भ कार्तिक मास से होता है।

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MP Board Class 8 Hindi Chapter 14 प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) चैती चाँद पर्व भगवान ……….. की जयन्ती के रूप में मनाते हैं।
(ख) प्रत्येक चार वर्ष बाद अतिरिक्त माह को ……………… माह तथा उसके वर्ष को …………… वर्ष कहते हैं।
(ग) नवरात्रि बासंतीय..”माह में तथा नवरात्रिशारदीय ………… माह में आती है।
उत्तर
(क) झूलेलाल
(ख) अधिक, चन्द्रमास,
(ग) चैत्र, कार्तिक।

Bhasha Bharti Class 8 Chapter 14 प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(क) संवत्सरों का नामकरण किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर
संवत्सर का उपयोग समय की गणना के लिए एक वर्ष की अवधि के अर्थ में किया जाता है। ऋग्वेद और अथर्ववेद आदि प्राचीन ग्रन्थों में भी संवत्सर का एक काल चक्र के रूप में उल्लेख है। इस प्रकार समय की गणना करने की विधि अति प्राचीन है। जिस तरह हमारे यहाँ दिनों और महीनों के नाम दिए गए हैं; उसी तरह संवत्सरों का भी नामकरण किया गया है। ये साठ वर्ष बाद पनः एक चक्र के रूप में आते रहते हैं। विक्रम संवत 2063 का नाम विकारी नामक संवत्सर है। इसके पहले के दो संवत्सरों के नाम ‘हेमलम्ब नाम’ और ‘विलम्ब नाम संवत्सर थे।

(ख) भगवान झूलेलाल की पूजा क्यों की जाती है ?
उत्तर
भगवान झूलेलाल की पूजा इसलिए की जाती है कि वे साम्प्रदायिक सद्भाव और एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए समानता के आधार पर स्थापित धर्म की सराहना की। उन्होंने धर्म के सच्चे स्वरूप का विवेचन कर लोगों को सही आचरण करने की सलाह दी। उन्होंने तत्कालीन मुस्लिम शासकों को कट्टरपंथी रुख न अपनाने के लिए विनती की। उन्होंने साम्प्रदायिक सद्भाव और एकता कायम रखने के लिए लोगों को बताया कि सत्य एक है, ईश्वर एक है, अल्लाह एक है। उसके नाम व रूप अनेक हैं। भगवान झूलेलाल ने सभी लोगों को विनम्रता और अपने कर्त्तव्य धर्म का पालन करने का उपदेश दिया। उन्होंने लोगों में सद्बुद्धि बनी रहे, इसके लिए समय-समय पर सभाएँ की। इनका जन्म संवत् 1007 वि. में नसरपुर में सूर्यवंशी क्षत्रियकुल में हुआ। इनके पिता का नाम रतन राय और माता का नाम देवकी था। कहते हैं कि इनके जन्म के समय से ही प्रत्येक हिन्दू घर में कलश पूजन (वरुण की पूजा) होने लगी। भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना करने से मन की अभिलाषाएँ पूर्ण हो जाती हैं। ऐसा माना जाता है।

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(ग) सौरवर्ष और चन्द्रवर्ष में क्या अन्तर है?
उत्तर
यह पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा लगभग 365 दिन में करती है। यह अवधि एक नक्षत्र सौरवर्ष कहलाती है जबकि चन्द्रवर्ष लगभग 354 दिन का होता है। इसे 360 तिथियों में बाँटते हैं। सौरवर्ष और चन्द्रवर्ष में सामंजस्य बनाने के लिए प्रत्येक 32 या 33 चन्द्रमासों के बाद एक अतिरिक्त चन्द्रमास जोड़ दिया जाता है। इस अतिरिक्त मास को अधिक मास या मलमास या लौंद का महीना कहते हैं। जिस वर्ष लौद का महीना होता है, उस वर्ष चन्द्र वर्ष 13 महीने का होता है।

(घ) सौरवर्ष और चन्द्रवर्ष के सामंजस्य के लिए क्या विधि अपनाते हैं?
उत्तर
चन्द्रवर्ष में लगभग 354 दिन होते हैं। इसे 360 तिथियों में बाँटते हैं। सौरवर्ष और चन्द्रवर्ष में सामंजस्य बनाने के लिए प्रत्येक 32 या 33 चन्द्रमासों के बाद एक अतिरिक्त चन्द्रमास जोड़ दिया जाता है। सौरवर्ष में 365 दिन होते हैं। इस सौर वर्ष के ही कारण ऋतुओं में परिवर्तन होता है। सौरवर्ष में बारह महीने होते हैं जबकि चन्द्रवर्ष में तेरह महीने होते है।

(ङ) विक्रम संवत् के अनुसार वर्ष के महीनों के नाम लिखिए।
उत्तर
विक्रम संवत् के अनुसार वर्ष के महीनों के नाम निम्न प्रकार हैं

  1. चैत्र
  2. बैसाख
  3. ज्येष्ठ
  4. आषाढ़
  5. श्रावण
  6. भाद्रपद
  7. आश्विन (क्वार)
  8. कार्तिक
  9. मार्गशीर्ष
  10. पौष
  11. माघ
  12. फाल्गुन।

(च) विक्रम संवत् की प्रथम तिथि में कौन-कौन से प्रसंग जुड़े हैं ? लिखिए।
उत्तर
विक्रम संवत् को प्रथम तिथि को गुड़ी पड़वा कहते हैं। इस दिन से भारतीय नववर्ष या संवत्सर का प्रारम्भ होता है। इसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भी कहते हैं। प्रजापति ब्रह्मा ने इसी तिथि को सृष्टि का सृजन किया। भगवान विष्णु ने भी इसी तिथि को मत्स्यावतार के रूप में अवतार लिया था। साथ ही यह भी कहा जाता है कि सतयुग का भी प्रारम्भ इसी तिथि को हुआ था। इसी प्रतिपदा के (पड़वा के) दिन भगवान श्री रामचन्द्रजी ने किष्किन्धा के राजा बाली का वध किया और उसके स्वेच्छाचारी राज्य का अन्त किया था। बाली वध के बाद प्रजा ने पताकाएँ बनाई, उन्हें फहराया गया और उत्सव मनाया गया, झण्डियों को गुड़ी कहते हैं। इसलिए इस तिथि को गुड़ी पड़वा कहते हैं। इस तरह इस तिथि से अनेक प्रसंग जुड़े हुए हैं।

नव संवत्सर भाषा-अध्ययन

Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 14 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का उच्चारण कीजिए और अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
चैत्र, पौराणिक, किष्किंधा, ऋग्वेद, अथर्ववेद, पूर्णिमा, विक्रमादित्य, स्वेच्छाचारी।
उत्तर
विद्यार्थी उपर्युक्त शब्दों को ठीक-ठीक पढ़कर उनका शुद्ध उच्चारण करने का अभ्यास करें।
वाक्य प्रयोग-

  1. चैत्र-चैत्र मास में बसन्ती हवाएँ चलती हैं।
  2. पौराणिक-भारतवर्ष में अनेक पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं।
  3. किष्किधा-किष्किधा में बाली का शासन था।
  4. ऋग्वेद-ऋग्वेद सबसे प्राचीन ग्रन्थ है।
  5. अथर्ववेद-अथर्ववेद पर अभी तक अधिक शोध नहीं
  6. पूर्णिमा-पूर्णिमा के दिन हम सभी उपवास करते हैं।
  7. विक्रमादित्य-विक्रमादित्य ने विक्रमी संवत् चलाया।
  8. स्वेच्छाचारी-किष्किंधा राज्य का शासक स्वेच्छाचारी

Class 8 MP Board Hindi Chapter 14 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में ‘इक’ प्रत्यय का प्रयोग करके नए शब्द बनाइए
प्रसंग, समाज, परिवार, नीति, साहित्य, मूल।
उत्तर

  1. प्रसंग + इक = प्रासंगिक
  2. समाज + इक = सामाजिक
  3. परिवार + इक = पारिवारिक
  4. नीति + इक = नैतिक
  5. साहित्य + इक = साहित्यिक
  6. मूल + इक = मौलिक।

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MP Board Class 8th Hindi Chapter 14 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों की संधि विच्छेद कीजिए
स्वेच्छाचारी, विक्रमादित्य, सूर्योदय, पुस्तकालय, नरेन्द्र नीरोग, निष्कपट, प्रात:काल।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 14 नव संवत्सर 1

Class 8th Hindi Chapter 14 MP Board प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए और अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए
पर्व, गणना, मलमास, उपलक्ष्य, प्रस्थान, सम्वर्द्धन।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 14 नव संवत्सर 2
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 14 नव संवत्सर 3

Class 8 Hindi Chapter 14 Bhasha Bharti प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों को वर्णक्रम के अनुसार लिखिए
शेखर, नव, पता, अखिल, चैत्र, उपयोग, ग्रंथों, ऋग्वेद, संवत्, विक्रम, बाद, रोचक, दक्षिण, और, तेरह, माह, कहा, आगमन।
उत्तर
अखिल, आगमन, उपयोग, और, ऋग्वेद, कहा, ग्रन्थों, चैत्र, तेरह, दक्षिण, नव, पता, बाद, माह, रोचक, विक्रम, शेखर, संवत्।

Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 4 प्रश्न 6.
नीचे लिखे वाक्यों में विशेषण और विशेष्य छाँटकर तालिका में लिखिए
(क) नववर्ष बीते तो कितने दिन हो गए।
(ख) प्राचीन ग्रन्थों में भी संवत्सर का एक काल चक्र के रूप में उल्लेख है।
(ग) प्रत्येक माह के दो पक्ष होते हैं।
(घ) यह तो तुमने बड़ी रोचक बात बताई।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 14 नव संवत्सर 4

नव संवत्सर परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) पौराणिक कथाओं के अनुसार प्रजापति ब्रह्मा ने इसी तिथि को सृष्टि का सृजन किया था, भगवान विष्णु भी मत्स्यावतार के रूप में इसी तिथि को प्रकट हुए थे और सतयुग के प्रारम्भ होने की भी यही तिथि है।’

शब्दार्थ-पौराणिक = पुराण सम्बन्धी; सृष्टि = सभी प्राणियों का; सृजन = निर्माण; मत्स्यावतार = मछली के अवतार; प्रकट = अवतरित; प्रारम्भ होने की = शुरू होने की।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा-भारती के पाठ ‘ नव संवत्सर’ से अवतरित है।

प्रसंग-इसमें लेखकगण नव संवत्सर के शुरू होने और उसके महत्त्व को बताते हैं।

व्याख्या-पुराण की अनेक कथाओं में बताया गया है कि विश्व के सभी प्राणियों के स्वामी ब्रह्मा ने इसी तिथि को उनकी रचना की थी। भगवान विष्णु ने भी इसी तिथि (दिनांक) को मत्स्यावतार (मछली के रूप में जन्म लेना) के रूप में अवतरित हुए थे। साथ ही, इसी तिथि को सतयुग का प्रारम्भ हुआ था। यह तिथि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ही है जिस दिन से संवत्सर का प्रारम्भ होता है।

(2) गुडी का अर्थ है ‘ध्वज या झण्डी’ और पड़वा कहते हैं प्रतिपदा को। लोक परम्परा के अनुसार माना जाता है कि इसी दिन श्री रामचन्द्रजी ने किष्किंधा के राजा बाली का वध कर उसके स्वेच्छाचारो राज का अन्त किया था। बाली वध के पश्चात् वहाँ की प्रजा ने पताकाएँ, जिन्हें महाराष्ट्र में गुड़ी कहते हैं, फहराकर उत्सव मनाया था। आज वहाँ आँगन में बांस के सहारे गुड़ी खड़ी की जाती है। इसलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी प्रतिपदा कहते

शब्दार्थ-गुड़ी = झण्डी; परम्परा = रीति; वधकर = बाण से मारकर; स्वेच्छाचारी = अपनी इच्छा के अनुसार अन्त किया समाप्त किया; पताकाएँ = झण्डियाँ; उत्सव = त्योहार; पड़वा = प्रतिपदा

सन्दर्भ-पूर्व की तरह। प्रसंग-इसमें चैत्र प्रतिपदा से जुड़ी बातें बताई गई हैं।

व्याख्या-गुड़ी का अर्थ झण्डी अथवा ध्वज होता है। प्रतिपदा को पड़वा कहते हैं। लोक में प्रचलित एक परम्परा के अनुसार यह बात मानी जाती है कि किष्किन्धा का राजा बाली था। बाली का वध श्री रामचन्द्रजी ने इसी दिन (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को) किया था और इस प्रकार उसके राज्य का अन्त कर दिया था। वह अपने राज्य का संचालन अपनी इच्छा से करता था। जैसे ही राजा बाली का वध कर दिया गया, वैसे ही वहाँ की प्रजा ने खुशी मनाई और घर-घर पताकाएँ फहराई गई। इसी पड़वा या प्रतिपदा के दिन वहाँ उत्सव मनाया गया। महाराष्ट्र में पताकाओं को गुड़ी कहते हैं। वहीं इस प्रतिपदा के दिन आँगन में एक बाँस गाड़ दिया जाता है। उसके सहारे गुड़ी खड़ी की जाती है। इस कारण चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा कहते हैं।

(3) विक्रम संवत् का प्रचलन उज्जयिनी के महान् सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रमणकारी शक राजाओं पर अपनी विजय के उपलक्ष्य में ईसा पूर्व सन् 57 में किया

शब्दार्थ-प्रचलन = प्रारम्भ; उज्जयिनी = उज्जैन; आक्रमणकारी = आक्रमण करने वाले या आक्रान्ता; शक = शक जाति जो विदेशों के आक्रमण करने वाले थे; उपलक्ष्य में = सन्दर्भ में, विषय में; विजय = जीत।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में विक्रम संवत् के प्रारम्भ होने के विषय में बताया जा रहा है।

व्याख्या-उज्जयिनी के एक महान् सम्राट थे। उनका नाम विक्रमादित्य था। शक राजाओं ने विक्रमादित्य के राज्य पर आक्रमण कर दिया था। इन विदेशी आक्रमण करने वाले शक राजाओं को विक्रमादित्य ने परास्त कर दिया। उन पर जीत प्राप्त की। अपनी जीत के सन्दर्भ की खुशी में यह संवत् चलाया। यह संवत् ईसा सन् से सत्तावन बर्ष पूर्व प्रारम्भ किया गया। इस संवत् का नाम उनके नाम के आधार पर विक्रम संवत् किया गया।

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(4) उत्तर भारत में विक्रम संवत् का प्रारम्भ चैत्र प्रतिपदा से होता है, इसे चैत्रादि कहते हैं जबकि दक्षिण भारत में संवत्सर का आरम्भ कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से माना जाता है, इसे कार्तिकादि कहते हैं। व्यापारी लोग भी कार्तिकादि नववर्ष मनाते हैं, इसलिए वे दीवाली पर नया बहीखाता प्रारम्भ करते हैं।

शब्दार्थ-प्रारम्भ = प्रचलन, शुरुआत; प्रतिपदा = पड़वा; चैत्रादि- चैत्र (चैत महीने) का प्रारम्भ; कार्तिकादि = कार्तिक महीने का प्रारम्भ; नववर्ष = नया साल; प्रारम्भ = शुरू।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-नव संवत्सर के प्रचलन के दो रूप बताये गये हैं।

व्याख्या-उत्तरी भारत में नव संवत्सर का प्रारम्भ चैत्र के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पड़वा) से माना जाता है। इसे | चैत्रादि कहते हैं। जबकि दक्षिण भारत में नव संवत्सर का प्रचलन कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होना माना गया है। इसको कार्तिकादि कहते हैं। व्यापारी वर्ग कार्तिकादि नववर्ष का उत्सव मनाते हैं। यही कारण है कि वे दीपावली पर नया बहीखाता बनाते हैं और उसे प्रारम्भ करते हैं।

(5) चैत्र माह में बसन्त ऋतु का आगमन होता है। बसन्त . ऋतु में प्रकृति भी अपना नव श्रृंगार करती है। पेड़ अपने पुराने पत्ते गिराकर नए पत्ते धारण करते हैं। ऋतु परिवर्तन के अवसर पर हमारे यहाँ नवरात्रि पर्व मनाने की परम्परा है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारम्भ होने वाली नवरात्रि वासन्तीय नवरात्रि एवं पितृमोक्ष अमावस्था के पश्चात् प्रारम्भ होने वाली नवरात्रि शारदीय कहलाती हैं। ‘वासन्तीय नवरात्रि’ का समापन रामनवमी और ‘शारदीय नवरात्रि’ का समापन दशहरा पर्व पर होता है।

शब्दार्थ-आगमन = आना या शुरू होना; नव श्रृंगार = नई सजावट, सजधज; धारण करते हैं = निकल आते हैं; परिवर्तन = बदलाव; परम्परा = रीति या रिवाज, प्रथा, प्रारम्भ = शुरू होना; वासन्तीय = वसन्त ऋतु की; समापन = समाप्ति, अन्त; शारदीय = शरद ऋतु की; पर्व = त्यौहार।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-शारदीय नवरात्रि और वासन्तीय नवरात्रि के प्रारम्भ होने की तिथि तथा उनके समापन की तिथि के विषय में बताया जा रहा है।

व्याख्या-चैत्र महीने में बसन्त ऋतु प्रारम्भ हो जाती है। बसन्त ऋतु के आने के साथ ही प्रकृति अपना नया शृंगार करती है। अपनी सजावट करती है। प्रकृति अपने स्वरूप को सजाती है। पेड़ों के पुराने पत्ते झड़ जाते हैं। उन पर नये पत्ते निकल आते हैं। प्रकृति में ऋतु सम्बन्धी परिवर्तन आ जाता है। ऋतु परिवर्तन के साथ ही हमारे यहाँ नवरात्रि का त्यौहार मनाये जाने की यह रीति है, परम्परा है। चैत्र मास की शुक्ल पक्षीय प्रतिपदा के दिन आरम्भ होने वाली नवरात्रि को वासन्तीय नवरात्रि कहा जाता है तथा पितृ पक्ष की समाप्ति पर अमावस्या के अगले – दिन से आरम्भ होने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहते हैं। वासन्तीय नवरात्रि की समाप्ति रामनवमी को होती है तथा शारदीय नवरात्रि का समापन दशहरा के त्यौहार पर होता है।

MP Board Class 8 Hindi Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 2 Vinamrata Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 2 Vinamrata Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 2 Vinamrata Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 2 विनम्रता प्रश्न उत्तर

प्रश्न-अभ्यास

अनुभव विस्तार

MP Board Class 8 Hindi Chapter 2 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) सुसंस्कृत – 1. अभिमान
(ब) सामंजस्य – 2. व्यवहार
(स) दंभ – 3. औचित्य
(द) आचरण – 4. अच्छे संस्कार वाला
उत्तर-
(अ) 4
(ब) 3
(स) 1
(द) 2

(ख) दिए गए विकल्पों से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(अ) दीन याचक होता है जबकि विनम्र …………….। (पाने वाला, दाता)
(ब) ………….. चरित्र का सद्गुण है। (विनम्रता, सुन्दरता)
(स) यदि हमारे लिए कोई कष्ट उठाकर काम करता है तो हमें उसके प्रति …………… प्रकट करना चाहिए। (कृतघ्नता, कृतज्ञता)
(द) विनम्रता ……………. की पोषक है। (निजता, जीवंतता)
उत्तर-
(अ) दाता,
(ब) विनम्रता,
(स) कृतज्ञता,
(द) जीवंतता।

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Class 8 Hindi Chapter 2 MP Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) ‘विनम्रता’ शब्द का अर्थ बताइए।
(ब) ‘विधु’ के व्यवहार से वीरेन्द्र क्यों प्रभावित हुए?
(स) बड़ों के बुलाने पर किस तरह उत्तर देना चाहिए?
(द) सफलता की गारंटी किसे कहा है?
उत्तर-
(अ) ‘विनम्रता’ शब्द का अर्थ है-अच्छा व्यवहार।
(ब) ‘विधु’ के व्यवहार से वीरेन्द्र उसकी विनम्रता से प्रभावित हुए।
(स) बड़ों के बुलाने पर ‘जी हाँ’ ‘जी आया’ इस तरह का उत्तर देना चाहिए।
(द) सफलता की गारंटी विनम्रता को कहा है।

Hindi Chapter 2 Class 8 MP Board प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) विराट और विधु के व्यवहार की तुलना कीजिए।
उत्तर-
(अ) विराट और विधु के व्यवहार एक-दूसरे के विपरीत हैं। विराट के व्यवहार में शिष्टता और विनम्रता नहीं है। वह दंभी है। इसलिए वह प्रशंसा का पात्र नहीं है। इसके विपरीत विधु के व्यवहार में शिष्टता और विनम्रता है। वह दंभी नहीं है। अपने इस सद्गुण के कारण वह प्रशंसनीय है।

(ब) विनम्र व्यक्ति की पहचान कैसे होती है?
उत्तर-
(ब) विनम्र व्यक्ति की पहचान उसके सद्व्यवहार से होती है। वह अपने से बड़ों-छोटों के प्रति यथोचित आदर-सत्कार और प्यार के भावों को प्रकट करता है। इस प्रकार वह बिना किसी भेदभाव के सबकी गरिमा और भावनाओं का समुचित सम्मान करता है।

(स) समुद्र में बाढ़ क्यों नहीं आती? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(स) समुद्र में बाढ़ नहीं आती है। यह इसलिए कि समुद्र अपनी सीमा में ही रहता है। वह अपनी सीमा से कभी भी बाहर नहीं आता है। इस प्रकार अपनी सीमा में ही वह रहकर नदियों के पानी को समा लेता है। यह वह अपनी विनम्र अनुशासन की विशेषता के कारण ही कर लेता है।

(द) ‘दीन याचक होता है, जबकि विनम्र दाता’ इसका आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(द) ‘दीन याचक होता है, जबकि विनम्र दाता’ इसका आशय यह है कि दीन व्यक्ति में अपनापन की भावना नहीं होती है। वह स्वार्थी होता है। इसके विपरीत विनम्र व्यक्ति में अपनापन होता है। वह प्यार बाँटता है। परस्पर मेल-मिलाप का वातावरण तैयार करता है। वह किसी से कुछ माँगता-चाहता नहीं है। वह तो अपने सद्व्यवहार से अपने संपर्क में आने वालों को अपने सद्गुणों को बाँटता ही रहता है।

(इ) विनम्रता कब प्रभाव पैदा करती है?
उत्तर-
(इ) विनम्रता तब प्रभाव पैदा करती है, जब जिस समस्या का समाधान आवेश भरा व्यक्ति नहीं ढूँढ़ पाता, उसे विनम्रता सहज में खोज लेती है।।

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भाषा की बात

Class 8 Chapter 2 Hindi MP Board प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएप्रतीक्षा, प्रशंसा, सुसंस्कृत, पृष्ठभूमि, सामंजस्य, जीवंतता।
उत्तर-
1. प्रतीक्षा, प्रशंसा, सुसंस्कृत, पृष्ठभूमि, सामंजस्य, जीवंतता।

MP Board Class 8th Hindi Chapter 2 प्रश्न 2.
शुद्ध वर्तनी लिखिएसंक्षीप्त, मर्दुल, विनमरता, व्यतित्व, ओपचारिकता।
उत्तर-
शुद्ध वर्तनी-संक्षिप्त, मृदुल, विनम्रता, व्यक्तित्व, औपचारिकता।

Class 8 MP Board Hindi Chapter 2 प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों में से विशेषण और विशेष्य शब्द छाँटिए
(अ) आया शरारती लड़की है।
(ब) बाजार में मीठे आम बिक रहे हैं।
(स) परिश्रमी व्यक्ति सफल होते हैं।
(द) लाल टोपी लेकर आओ।
उत्तर-
विशेषण – विशेष्य
शरारती – लड़की
मीठे – आम
परिश्रमी – व्यक्ति
लाल – टोपी

Class 8 Hindi MP Board Chapter 2 प्रश्न 4.
उदाहरण के अनुसार ‘ता’ प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 2 विनम्रता 1
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 2 विनम्रता 1a
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 2 विनम्रता 2
Class 8th Hindi Chapter 2 MP Board प्रश्न 5.
पाठ में सु उपसर्ग वाले सुमधुर, सुसंस्कृत आदि शब्द आए हैं। निम्नलिखित शब्दों में ‘सु’ उपसर्ग लगाकर नए शब्द बनाइए-
गंध, पुत्र, फल, मुखी, संस्कार, योग।
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 2 विनम्रता 3

MP Board Hindi Class 8 Chapter 2 प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों को उनके उचित विलोम से रेखा खींचकर मिलाइए-
उचित- उपेक्षा
औपचारिक – दुर्गुण
अपेक्षा – अनादर
सद्गुण – अनुचित
आदर – अनौपचारिक
उत्तर-
शब्द – विलोम शब्द
उचित – अनुचित
औपचारिक – अनौपचारिक
अपेक्षा – उपेक्षा
सद्गुण – दुर्गुण
आदर – अनादर

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प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. विनम्रता चरित्र का सद्गुण है। सुसंस्कृत होने का परिचय है। यह एक ऐसा चुंबक है जो सम्पर्क में आने वाले को स्वयं अपनी ओर खींच लेता है। विनम्र व्यक्ति की बोली मृदुल, आचरण शिष्ट, तथा भावना निजता से ओतप्रोत होती

शब्दार्थ-विनम्रता-शिष्टता, अच्छा व्यवहार। सद्गुण-अच्छा गुण। सुसंस्कृत-अच्छा संस्कार। मृदुल-कोमल। शिष्ट-विनम्र। आचरण-व्यवहार। निजता-अपनापन।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियां हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) भाग-8 के पाठ-2 ‘विनम्रता’ से ली गई है।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने विनम्रता की विशेषता बतलाने का प्रयास किया है।

व्याख्या-लेखक का कहना है कि विनम्रता चरित्र का अधिक श्रेष्ठ गुण है। दूसरे शब्दों में विनम्रता से चरित्र अधिक महान बनता है। विनम्रता से अच्छा संस्कार के होने का परिचय मिलता है। विनम्रता की एक यह भी विशेषता होती है कि वह चुंबक की तरह होती है। अपनी इस विशेषता से वह अपने पास आने वालों को तुरंत ही अपनी ओर खींच लेती है। इस प्रकार जिसमें विनम्रता होती है, वह मधुर बोलता है, उसका व्यवहार सभ्य होता है, और उसके भाव-विचार में अपनापन भरा होता है।

विशेष-

  1. विनम्र व्यक्ति पर प्रकाश डाला गया है।
  2. भाषा सरल है।

2. विनम्रता केवल बड़ों के प्रति ही नहीं होती है बराबर वालों के प्रति भी समादर और अपने से छोटों के प्रति स्नेह के रूप में भी प्रकट होती है। व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। यदि हमारे लिए कोई कष्ट उठाकर कुछ काम करता है तो हमें उसके प्रति अपनी कृतज्ञता अवश्य प्रकट करनी चाहिए। यदि बस या रेल में कोई व्यक्ति अपनी जगह हमें बैठने के लिए देता है तो उसे धन्यवाद देना कभी न भूलें। ऐसा करते समय लगना भी चाहिए कि हम उसे हृदय से धन्यवाद दे रहे हैं, केवल औपचारिकता का निर्वाह नहीं।

शब्दार्थ-स्नेह-प्रेम। आकर्षक-मोहक। कृतज्ञता-अहसान। औपचारिकता-दिखावा।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने यह बतलाने का प्रयास किया है कि विनम्रता सबके प्रति होती है।

व्याख्या-विनम्र व्यक्ति अपने से बड़ों-छोटों के प्रति उचित रूप से विनम्र होना नहीं भूलता है। वह अपने से बड़ों के प्रति आदर-सत्कार को प्रकट करता है। इसी प्रकार वह अपने बराबर वालों का भी सत्कार करता है। अपने से छोटों के प्रति प्यार प्रकट करता है। इस प्रकार की विनम्रता से उसका व्यक्तित्व आकर्षक और महान् बनता है। इस आधार पर यह कहना ठीक होगा कि विनम्र व्यक्ति को सहयोग करने वाले के प्रति अपनी कृतज्ञता अवश्य करने चाहिए। उदाहरण के लिए यदि कोई बस, रेल आदि में बैठ आराम करने या कोई सुविधा दे तो विनम्र व्यक्ति को चाहिए कि वह उसे हृदय से धन्यवाद दे। अगर वह दिखावा कर रहा है, तो उससे उसकी विनम्रता नहीं प्रकट होगी।

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विशेष-

  1. विनम्रता से व्यक्तित्व महान् बनता है, इसे समझाया गया है।
  2. विनम्रता में किसी प्रकार का दिखावा नहीं होना चाहिए, इसे स्पष्ट किया गया है।

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer