MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 14 Nav Samvatsar Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 14 Nav Samvatsar Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 14 Nav Samvatsar Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 14 नव संवत्सर प्रश्न उत्तर

नव संवत्सर बोध प्रश्न

Class 8 Hindi Chapter 14 Nav Samvatsar प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
नव संवत्सर = एक वर्ष की अवधि का समय; मत्स्य = मछली; उत्सव = पर्व, त्यौहार; कार्तिकादि = कार्तिक माह से प्रारम्भ होने वाला; अमान्त = अमावस्या को समाप्त होने वाला पक्ष; शृंगार = सजावट, सजना, सजाना; जयन्ती = जन्मदिन पीर=संत, महात्मा; सृष्टि रचना, जन्म देना, बनाना; वध = मार देना, नष्ट कर देना; चैत्रादि चैत्र माह से शुरू होने वाला; पूर्णिमान्त = पूर्णमासी को समाप्त होने वाला पक्ष; ऋतु  = मौसम; सम्वर्द्धन = विकास, वृद्धि, बढ़ोतरी; आततायी = कष्ट पहुँचाने वाला, अत्याचारी।

Class 8 Hindi Chapter 14 MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए

(क) नव संवत्सर से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर
नव संवत्सर से तात्पर्य है-नये वर्ष का प्रारम्भ। यह नव संवत्सर चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है।

(ख) गुड़ी पड़वा नाम का क्या अर्थ है ?
उत्तर
गुड़ी’ का अर्थ है ध्वज या झण्डी। पड़वा का अर्थ है प्रतिपदा। लोक में एक परम्परा व्याप्त है। उसके अनुसार यह माना जाता है कि इसी दिन श्री रामचन्द्रजी ने किष्किधा के राजा बाली का वध किया और उसके स्वेच्छाचारी राज्य का अन्त कर दिया। बाली वध के बाद वहाँ की प्रजा ने पताकाएँ फहराई और उत्सव मनाया। इन पताकाओं को महाराष्ट्र में गुड़ी कहते हैं। आज भी वहाँ इस दिन आँगन में बाँस के सहारे गुड़ी खड़ी की जाती है। इसलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा कहा जाता है।

(ग) विक्रम संवत् किसने प्रारम्भ किया?
उत्तर
उज्जयिनी के महान् सम्राट् विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रमणकारी शकों पर विजय प्राप्त की। इस विजय की खुशी में उन्होंने विक्रम संवत् आरम्भ किया। यह विक्रम संवत् ईसा के ईसवीय सन् से 57 वर्ष पूर्व प्रारम्भ किया गया।

(घ) बसन्त ऋतु का आगमन किस भारतीय माह में होता है ?
उत्तर
बसन्त ऋतु का आगमन चैत्र माह में होता है।

(ङ) दक्षिण भारत में विक्रम संवत् का प्रारम्भ किस भारतीय मास से होता है ?
उत्तर
दक्षिण भारत में विक्रम संवत् का प्रारम्भ कार्तिक मास से होता है।

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MP Board Class 8 Hindi Chapter 14 प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) चैती चाँद पर्व भगवान ……….. की जयन्ती के रूप में मनाते हैं।
(ख) प्रत्येक चार वर्ष बाद अतिरिक्त माह को ……………… माह तथा उसके वर्ष को …………… वर्ष कहते हैं।
(ग) नवरात्रि बासंतीय..”माह में तथा नवरात्रिशारदीय ………… माह में आती है।
उत्तर
(क) झूलेलाल
(ख) अधिक, चन्द्रमास,
(ग) चैत्र, कार्तिक।

Bhasha Bharti Class 8 Chapter 14 प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(क) संवत्सरों का नामकरण किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर
संवत्सर का उपयोग समय की गणना के लिए एक वर्ष की अवधि के अर्थ में किया जाता है। ऋग्वेद और अथर्ववेद आदि प्राचीन ग्रन्थों में भी संवत्सर का एक काल चक्र के रूप में उल्लेख है। इस प्रकार समय की गणना करने की विधि अति प्राचीन है। जिस तरह हमारे यहाँ दिनों और महीनों के नाम दिए गए हैं; उसी तरह संवत्सरों का भी नामकरण किया गया है। ये साठ वर्ष बाद पनः एक चक्र के रूप में आते रहते हैं। विक्रम संवत 2063 का नाम विकारी नामक संवत्सर है। इसके पहले के दो संवत्सरों के नाम ‘हेमलम्ब नाम’ और ‘विलम्ब नाम संवत्सर थे।

(ख) भगवान झूलेलाल की पूजा क्यों की जाती है ?
उत्तर
भगवान झूलेलाल की पूजा इसलिए की जाती है कि वे साम्प्रदायिक सद्भाव और एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए समानता के आधार पर स्थापित धर्म की सराहना की। उन्होंने धर्म के सच्चे स्वरूप का विवेचन कर लोगों को सही आचरण करने की सलाह दी। उन्होंने तत्कालीन मुस्लिम शासकों को कट्टरपंथी रुख न अपनाने के लिए विनती की। उन्होंने साम्प्रदायिक सद्भाव और एकता कायम रखने के लिए लोगों को बताया कि सत्य एक है, ईश्वर एक है, अल्लाह एक है। उसके नाम व रूप अनेक हैं। भगवान झूलेलाल ने सभी लोगों को विनम्रता और अपने कर्त्तव्य धर्म का पालन करने का उपदेश दिया। उन्होंने लोगों में सद्बुद्धि बनी रहे, इसके लिए समय-समय पर सभाएँ की। इनका जन्म संवत् 1007 वि. में नसरपुर में सूर्यवंशी क्षत्रियकुल में हुआ। इनके पिता का नाम रतन राय और माता का नाम देवकी था। कहते हैं कि इनके जन्म के समय से ही प्रत्येक हिन्दू घर में कलश पूजन (वरुण की पूजा) होने लगी। भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना करने से मन की अभिलाषाएँ पूर्ण हो जाती हैं। ऐसा माना जाता है।

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(ग) सौरवर्ष और चन्द्रवर्ष में क्या अन्तर है?
उत्तर
यह पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा लगभग 365 दिन में करती है। यह अवधि एक नक्षत्र सौरवर्ष कहलाती है जबकि चन्द्रवर्ष लगभग 354 दिन का होता है। इसे 360 तिथियों में बाँटते हैं। सौरवर्ष और चन्द्रवर्ष में सामंजस्य बनाने के लिए प्रत्येक 32 या 33 चन्द्रमासों के बाद एक अतिरिक्त चन्द्रमास जोड़ दिया जाता है। इस अतिरिक्त मास को अधिक मास या मलमास या लौंद का महीना कहते हैं। जिस वर्ष लौद का महीना होता है, उस वर्ष चन्द्र वर्ष 13 महीने का होता है।

(घ) सौरवर्ष और चन्द्रवर्ष के सामंजस्य के लिए क्या विधि अपनाते हैं?
उत्तर
चन्द्रवर्ष में लगभग 354 दिन होते हैं। इसे 360 तिथियों में बाँटते हैं। सौरवर्ष और चन्द्रवर्ष में सामंजस्य बनाने के लिए प्रत्येक 32 या 33 चन्द्रमासों के बाद एक अतिरिक्त चन्द्रमास जोड़ दिया जाता है। सौरवर्ष में 365 दिन होते हैं। इस सौर वर्ष के ही कारण ऋतुओं में परिवर्तन होता है। सौरवर्ष में बारह महीने होते हैं जबकि चन्द्रवर्ष में तेरह महीने होते है।

(ङ) विक्रम संवत् के अनुसार वर्ष के महीनों के नाम लिखिए।
उत्तर
विक्रम संवत् के अनुसार वर्ष के महीनों के नाम निम्न प्रकार हैं

  1. चैत्र
  2. बैसाख
  3. ज्येष्ठ
  4. आषाढ़
  5. श्रावण
  6. भाद्रपद
  7. आश्विन (क्वार)
  8. कार्तिक
  9. मार्गशीर्ष
  10. पौष
  11. माघ
  12. फाल्गुन।

(च) विक्रम संवत् की प्रथम तिथि में कौन-कौन से प्रसंग जुड़े हैं ? लिखिए।
उत्तर
विक्रम संवत् को प्रथम तिथि को गुड़ी पड़वा कहते हैं। इस दिन से भारतीय नववर्ष या संवत्सर का प्रारम्भ होता है। इसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भी कहते हैं। प्रजापति ब्रह्मा ने इसी तिथि को सृष्टि का सृजन किया। भगवान विष्णु ने भी इसी तिथि को मत्स्यावतार के रूप में अवतार लिया था। साथ ही यह भी कहा जाता है कि सतयुग का भी प्रारम्भ इसी तिथि को हुआ था। इसी प्रतिपदा के (पड़वा के) दिन भगवान श्री रामचन्द्रजी ने किष्किन्धा के राजा बाली का वध किया और उसके स्वेच्छाचारी राज्य का अन्त किया था। बाली वध के बाद प्रजा ने पताकाएँ बनाई, उन्हें फहराया गया और उत्सव मनाया गया, झण्डियों को गुड़ी कहते हैं। इसलिए इस तिथि को गुड़ी पड़वा कहते हैं। इस तरह इस तिथि से अनेक प्रसंग जुड़े हुए हैं।

नव संवत्सर भाषा-अध्ययन

Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 14 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का उच्चारण कीजिए और अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
चैत्र, पौराणिक, किष्किंधा, ऋग्वेद, अथर्ववेद, पूर्णिमा, विक्रमादित्य, स्वेच्छाचारी।
उत्तर
विद्यार्थी उपर्युक्त शब्दों को ठीक-ठीक पढ़कर उनका शुद्ध उच्चारण करने का अभ्यास करें।
वाक्य प्रयोग-

  1. चैत्र-चैत्र मास में बसन्ती हवाएँ चलती हैं।
  2. पौराणिक-भारतवर्ष में अनेक पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं।
  3. किष्किधा-किष्किधा में बाली का शासन था।
  4. ऋग्वेद-ऋग्वेद सबसे प्राचीन ग्रन्थ है।
  5. अथर्ववेद-अथर्ववेद पर अभी तक अधिक शोध नहीं
  6. पूर्णिमा-पूर्णिमा के दिन हम सभी उपवास करते हैं।
  7. विक्रमादित्य-विक्रमादित्य ने विक्रमी संवत् चलाया।
  8. स्वेच्छाचारी-किष्किंधा राज्य का शासक स्वेच्छाचारी

Class 8 MP Board Hindi Chapter 14 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में ‘इक’ प्रत्यय का प्रयोग करके नए शब्द बनाइए
प्रसंग, समाज, परिवार, नीति, साहित्य, मूल।
उत्तर

  1. प्रसंग + इक = प्रासंगिक
  2. समाज + इक = सामाजिक
  3. परिवार + इक = पारिवारिक
  4. नीति + इक = नैतिक
  5. साहित्य + इक = साहित्यिक
  6. मूल + इक = मौलिक।

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MP Board Class 8th Hindi Chapter 14 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों की संधि विच्छेद कीजिए
स्वेच्छाचारी, विक्रमादित्य, सूर्योदय, पुस्तकालय, नरेन्द्र नीरोग, निष्कपट, प्रात:काल।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 14 नव संवत्सर 1

Class 8th Hindi Chapter 14 MP Board प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए और अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए
पर्व, गणना, मलमास, उपलक्ष्य, प्रस्थान, सम्वर्द्धन।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 14 नव संवत्सर 2
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 14 नव संवत्सर 3

Class 8 Hindi Chapter 14 Bhasha Bharti प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों को वर्णक्रम के अनुसार लिखिए
शेखर, नव, पता, अखिल, चैत्र, उपयोग, ग्रंथों, ऋग्वेद, संवत्, विक्रम, बाद, रोचक, दक्षिण, और, तेरह, माह, कहा, आगमन।
उत्तर
अखिल, आगमन, उपयोग, और, ऋग्वेद, कहा, ग्रन्थों, चैत्र, तेरह, दक्षिण, नव, पता, बाद, माह, रोचक, विक्रम, शेखर, संवत्।

Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 4 प्रश्न 6.
नीचे लिखे वाक्यों में विशेषण और विशेष्य छाँटकर तालिका में लिखिए
(क) नववर्ष बीते तो कितने दिन हो गए।
(ख) प्राचीन ग्रन्थों में भी संवत्सर का एक काल चक्र के रूप में उल्लेख है।
(ग) प्रत्येक माह के दो पक्ष होते हैं।
(घ) यह तो तुमने बड़ी रोचक बात बताई।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 14 नव संवत्सर 4

नव संवत्सर परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) पौराणिक कथाओं के अनुसार प्रजापति ब्रह्मा ने इसी तिथि को सृष्टि का सृजन किया था, भगवान विष्णु भी मत्स्यावतार के रूप में इसी तिथि को प्रकट हुए थे और सतयुग के प्रारम्भ होने की भी यही तिथि है।’

शब्दार्थ-पौराणिक = पुराण सम्बन्धी; सृष्टि = सभी प्राणियों का; सृजन = निर्माण; मत्स्यावतार = मछली के अवतार; प्रकट = अवतरित; प्रारम्भ होने की = शुरू होने की।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा-भारती के पाठ ‘ नव संवत्सर’ से अवतरित है।

प्रसंग-इसमें लेखकगण नव संवत्सर के शुरू होने और उसके महत्त्व को बताते हैं।

व्याख्या-पुराण की अनेक कथाओं में बताया गया है कि विश्व के सभी प्राणियों के स्वामी ब्रह्मा ने इसी तिथि को उनकी रचना की थी। भगवान विष्णु ने भी इसी तिथि (दिनांक) को मत्स्यावतार (मछली के रूप में जन्म लेना) के रूप में अवतरित हुए थे। साथ ही, इसी तिथि को सतयुग का प्रारम्भ हुआ था। यह तिथि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ही है जिस दिन से संवत्सर का प्रारम्भ होता है।

(2) गुडी का अर्थ है ‘ध्वज या झण्डी’ और पड़वा कहते हैं प्रतिपदा को। लोक परम्परा के अनुसार माना जाता है कि इसी दिन श्री रामचन्द्रजी ने किष्किंधा के राजा बाली का वध कर उसके स्वेच्छाचारो राज का अन्त किया था। बाली वध के पश्चात् वहाँ की प्रजा ने पताकाएँ, जिन्हें महाराष्ट्र में गुड़ी कहते हैं, फहराकर उत्सव मनाया था। आज वहाँ आँगन में बांस के सहारे गुड़ी खड़ी की जाती है। इसलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी प्रतिपदा कहते

शब्दार्थ-गुड़ी = झण्डी; परम्परा = रीति; वधकर = बाण से मारकर; स्वेच्छाचारी = अपनी इच्छा के अनुसार अन्त किया समाप्त किया; पताकाएँ = झण्डियाँ; उत्सव = त्योहार; पड़वा = प्रतिपदा

सन्दर्भ-पूर्व की तरह। प्रसंग-इसमें चैत्र प्रतिपदा से जुड़ी बातें बताई गई हैं।

व्याख्या-गुड़ी का अर्थ झण्डी अथवा ध्वज होता है। प्रतिपदा को पड़वा कहते हैं। लोक में प्रचलित एक परम्परा के अनुसार यह बात मानी जाती है कि किष्किन्धा का राजा बाली था। बाली का वध श्री रामचन्द्रजी ने इसी दिन (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को) किया था और इस प्रकार उसके राज्य का अन्त कर दिया था। वह अपने राज्य का संचालन अपनी इच्छा से करता था। जैसे ही राजा बाली का वध कर दिया गया, वैसे ही वहाँ की प्रजा ने खुशी मनाई और घर-घर पताकाएँ फहराई गई। इसी पड़वा या प्रतिपदा के दिन वहाँ उत्सव मनाया गया। महाराष्ट्र में पताकाओं को गुड़ी कहते हैं। वहीं इस प्रतिपदा के दिन आँगन में एक बाँस गाड़ दिया जाता है। उसके सहारे गुड़ी खड़ी की जाती है। इस कारण चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा कहते हैं।

(3) विक्रम संवत् का प्रचलन उज्जयिनी के महान् सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रमणकारी शक राजाओं पर अपनी विजय के उपलक्ष्य में ईसा पूर्व सन् 57 में किया

शब्दार्थ-प्रचलन = प्रारम्भ; उज्जयिनी = उज्जैन; आक्रमणकारी = आक्रमण करने वाले या आक्रान्ता; शक = शक जाति जो विदेशों के आक्रमण करने वाले थे; उपलक्ष्य में = सन्दर्भ में, विषय में; विजय = जीत।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में विक्रम संवत् के प्रारम्भ होने के विषय में बताया जा रहा है।

व्याख्या-उज्जयिनी के एक महान् सम्राट थे। उनका नाम विक्रमादित्य था। शक राजाओं ने विक्रमादित्य के राज्य पर आक्रमण कर दिया था। इन विदेशी आक्रमण करने वाले शक राजाओं को विक्रमादित्य ने परास्त कर दिया। उन पर जीत प्राप्त की। अपनी जीत के सन्दर्भ की खुशी में यह संवत् चलाया। यह संवत् ईसा सन् से सत्तावन बर्ष पूर्व प्रारम्भ किया गया। इस संवत् का नाम उनके नाम के आधार पर विक्रम संवत् किया गया।

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(4) उत्तर भारत में विक्रम संवत् का प्रारम्भ चैत्र प्रतिपदा से होता है, इसे चैत्रादि कहते हैं जबकि दक्षिण भारत में संवत्सर का आरम्भ कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से माना जाता है, इसे कार्तिकादि कहते हैं। व्यापारी लोग भी कार्तिकादि नववर्ष मनाते हैं, इसलिए वे दीवाली पर नया बहीखाता प्रारम्भ करते हैं।

शब्दार्थ-प्रारम्भ = प्रचलन, शुरुआत; प्रतिपदा = पड़वा; चैत्रादि- चैत्र (चैत महीने) का प्रारम्भ; कार्तिकादि = कार्तिक महीने का प्रारम्भ; नववर्ष = नया साल; प्रारम्भ = शुरू।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-नव संवत्सर के प्रचलन के दो रूप बताये गये हैं।

व्याख्या-उत्तरी भारत में नव संवत्सर का प्रारम्भ चैत्र के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पड़वा) से माना जाता है। इसे | चैत्रादि कहते हैं। जबकि दक्षिण भारत में नव संवत्सर का प्रचलन कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होना माना गया है। इसको कार्तिकादि कहते हैं। व्यापारी वर्ग कार्तिकादि नववर्ष का उत्सव मनाते हैं। यही कारण है कि वे दीपावली पर नया बहीखाता बनाते हैं और उसे प्रारम्भ करते हैं।

(5) चैत्र माह में बसन्त ऋतु का आगमन होता है। बसन्त . ऋतु में प्रकृति भी अपना नव श्रृंगार करती है। पेड़ अपने पुराने पत्ते गिराकर नए पत्ते धारण करते हैं। ऋतु परिवर्तन के अवसर पर हमारे यहाँ नवरात्रि पर्व मनाने की परम्परा है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारम्भ होने वाली नवरात्रि वासन्तीय नवरात्रि एवं पितृमोक्ष अमावस्था के पश्चात् प्रारम्भ होने वाली नवरात्रि शारदीय कहलाती हैं। ‘वासन्तीय नवरात्रि’ का समापन रामनवमी और ‘शारदीय नवरात्रि’ का समापन दशहरा पर्व पर होता है।

शब्दार्थ-आगमन = आना या शुरू होना; नव श्रृंगार = नई सजावट, सजधज; धारण करते हैं = निकल आते हैं; परिवर्तन = बदलाव; परम्परा = रीति या रिवाज, प्रथा, प्रारम्भ = शुरू होना; वासन्तीय = वसन्त ऋतु की; समापन = समाप्ति, अन्त; शारदीय = शरद ऋतु की; पर्व = त्यौहार।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-शारदीय नवरात्रि और वासन्तीय नवरात्रि के प्रारम्भ होने की तिथि तथा उनके समापन की तिथि के विषय में बताया जा रहा है।

व्याख्या-चैत्र महीने में बसन्त ऋतु प्रारम्भ हो जाती है। बसन्त ऋतु के आने के साथ ही प्रकृति अपना नया शृंगार करती है। अपनी सजावट करती है। प्रकृति अपने स्वरूप को सजाती है। पेड़ों के पुराने पत्ते झड़ जाते हैं। उन पर नये पत्ते निकल आते हैं। प्रकृति में ऋतु सम्बन्धी परिवर्तन आ जाता है। ऋतु परिवर्तन के साथ ही हमारे यहाँ नवरात्रि का त्यौहार मनाये जाने की यह रीति है, परम्परा है। चैत्र मास की शुक्ल पक्षीय प्रतिपदा के दिन आरम्भ होने वाली नवरात्रि को वासन्तीय नवरात्रि कहा जाता है तथा पितृ पक्ष की समाप्ति पर अमावस्या के अगले – दिन से आरम्भ होने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहते हैं। वासन्तीय नवरात्रि की समाप्ति रामनवमी को होती है तथा शारदीय नवरात्रि का समापन दशहरा के त्यौहार पर होता है।

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MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 2 Vinamrata Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 2 Vinamrata Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 2 Vinamrata Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 2 विनम्रता प्रश्न उत्तर

प्रश्न-अभ्यास

अनुभव विस्तार

MP Board Class 8 Hindi Chapter 2 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) सुसंस्कृत – 1. अभिमान
(ब) सामंजस्य – 2. व्यवहार
(स) दंभ – 3. औचित्य
(द) आचरण – 4. अच्छे संस्कार वाला
उत्तर-
(अ) 4
(ब) 3
(स) 1
(द) 2

(ख) दिए गए विकल्पों से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(अ) दीन याचक होता है जबकि विनम्र …………….। (पाने वाला, दाता)
(ब) ………….. चरित्र का सद्गुण है। (विनम्रता, सुन्दरता)
(स) यदि हमारे लिए कोई कष्ट उठाकर काम करता है तो हमें उसके प्रति …………… प्रकट करना चाहिए। (कृतघ्नता, कृतज्ञता)
(द) विनम्रता ……………. की पोषक है। (निजता, जीवंतता)
उत्तर-
(अ) दाता,
(ब) विनम्रता,
(स) कृतज्ञता,
(द) जीवंतता।

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Class 8 Hindi Chapter 2 MP Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) ‘विनम्रता’ शब्द का अर्थ बताइए।
(ब) ‘विधु’ के व्यवहार से वीरेन्द्र क्यों प्रभावित हुए?
(स) बड़ों के बुलाने पर किस तरह उत्तर देना चाहिए?
(द) सफलता की गारंटी किसे कहा है?
उत्तर-
(अ) ‘विनम्रता’ शब्द का अर्थ है-अच्छा व्यवहार।
(ब) ‘विधु’ के व्यवहार से वीरेन्द्र उसकी विनम्रता से प्रभावित हुए।
(स) बड़ों के बुलाने पर ‘जी हाँ’ ‘जी आया’ इस तरह का उत्तर देना चाहिए।
(द) सफलता की गारंटी विनम्रता को कहा है।

Hindi Chapter 2 Class 8 MP Board प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) विराट और विधु के व्यवहार की तुलना कीजिए।
उत्तर-
(अ) विराट और विधु के व्यवहार एक-दूसरे के विपरीत हैं। विराट के व्यवहार में शिष्टता और विनम्रता नहीं है। वह दंभी है। इसलिए वह प्रशंसा का पात्र नहीं है। इसके विपरीत विधु के व्यवहार में शिष्टता और विनम्रता है। वह दंभी नहीं है। अपने इस सद्गुण के कारण वह प्रशंसनीय है।

(ब) विनम्र व्यक्ति की पहचान कैसे होती है?
उत्तर-
(ब) विनम्र व्यक्ति की पहचान उसके सद्व्यवहार से होती है। वह अपने से बड़ों-छोटों के प्रति यथोचित आदर-सत्कार और प्यार के भावों को प्रकट करता है। इस प्रकार वह बिना किसी भेदभाव के सबकी गरिमा और भावनाओं का समुचित सम्मान करता है।

(स) समुद्र में बाढ़ क्यों नहीं आती? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(स) समुद्र में बाढ़ नहीं आती है। यह इसलिए कि समुद्र अपनी सीमा में ही रहता है। वह अपनी सीमा से कभी भी बाहर नहीं आता है। इस प्रकार अपनी सीमा में ही वह रहकर नदियों के पानी को समा लेता है। यह वह अपनी विनम्र अनुशासन की विशेषता के कारण ही कर लेता है।

(द) ‘दीन याचक होता है, जबकि विनम्र दाता’ इसका आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(द) ‘दीन याचक होता है, जबकि विनम्र दाता’ इसका आशय यह है कि दीन व्यक्ति में अपनापन की भावना नहीं होती है। वह स्वार्थी होता है। इसके विपरीत विनम्र व्यक्ति में अपनापन होता है। वह प्यार बाँटता है। परस्पर मेल-मिलाप का वातावरण तैयार करता है। वह किसी से कुछ माँगता-चाहता नहीं है। वह तो अपने सद्व्यवहार से अपने संपर्क में आने वालों को अपने सद्गुणों को बाँटता ही रहता है।

(इ) विनम्रता कब प्रभाव पैदा करती है?
उत्तर-
(इ) विनम्रता तब प्रभाव पैदा करती है, जब जिस समस्या का समाधान आवेश भरा व्यक्ति नहीं ढूँढ़ पाता, उसे विनम्रता सहज में खोज लेती है।।

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भाषा की बात

Class 8 Chapter 2 Hindi MP Board प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएप्रतीक्षा, प्रशंसा, सुसंस्कृत, पृष्ठभूमि, सामंजस्य, जीवंतता।
उत्तर-
1. प्रतीक्षा, प्रशंसा, सुसंस्कृत, पृष्ठभूमि, सामंजस्य, जीवंतता।

MP Board Class 8th Hindi Chapter 2 प्रश्न 2.
शुद्ध वर्तनी लिखिएसंक्षीप्त, मर्दुल, विनमरता, व्यतित्व, ओपचारिकता।
उत्तर-
शुद्ध वर्तनी-संक्षिप्त, मृदुल, विनम्रता, व्यक्तित्व, औपचारिकता।

Class 8 MP Board Hindi Chapter 2 प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों में से विशेषण और विशेष्य शब्द छाँटिए
(अ) आया शरारती लड़की है।
(ब) बाजार में मीठे आम बिक रहे हैं।
(स) परिश्रमी व्यक्ति सफल होते हैं।
(द) लाल टोपी लेकर आओ।
उत्तर-
विशेषण – विशेष्य
शरारती – लड़की
मीठे – आम
परिश्रमी – व्यक्ति
लाल – टोपी

Class 8 Hindi MP Board Chapter 2 प्रश्न 4.
उदाहरण के अनुसार ‘ता’ प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 2 विनम्रता 1
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 2 विनम्रता 1a
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 2 विनम्रता 2
Class 8th Hindi Chapter 2 MP Board प्रश्न 5.
पाठ में सु उपसर्ग वाले सुमधुर, सुसंस्कृत आदि शब्द आए हैं। निम्नलिखित शब्दों में ‘सु’ उपसर्ग लगाकर नए शब्द बनाइए-
गंध, पुत्र, फल, मुखी, संस्कार, योग।
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 2 विनम्रता 3

MP Board Hindi Class 8 Chapter 2 प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों को उनके उचित विलोम से रेखा खींचकर मिलाइए-
उचित- उपेक्षा
औपचारिक – दुर्गुण
अपेक्षा – अनादर
सद्गुण – अनुचित
आदर – अनौपचारिक
उत्तर-
शब्द – विलोम शब्द
उचित – अनुचित
औपचारिक – अनौपचारिक
अपेक्षा – उपेक्षा
सद्गुण – दुर्गुण
आदर – अनादर

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प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. विनम्रता चरित्र का सद्गुण है। सुसंस्कृत होने का परिचय है। यह एक ऐसा चुंबक है जो सम्पर्क में आने वाले को स्वयं अपनी ओर खींच लेता है। विनम्र व्यक्ति की बोली मृदुल, आचरण शिष्ट, तथा भावना निजता से ओतप्रोत होती

शब्दार्थ-विनम्रता-शिष्टता, अच्छा व्यवहार। सद्गुण-अच्छा गुण। सुसंस्कृत-अच्छा संस्कार। मृदुल-कोमल। शिष्ट-विनम्र। आचरण-व्यवहार। निजता-अपनापन।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियां हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) भाग-8 के पाठ-2 ‘विनम्रता’ से ली गई है।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने विनम्रता की विशेषता बतलाने का प्रयास किया है।

व्याख्या-लेखक का कहना है कि विनम्रता चरित्र का अधिक श्रेष्ठ गुण है। दूसरे शब्दों में विनम्रता से चरित्र अधिक महान बनता है। विनम्रता से अच्छा संस्कार के होने का परिचय मिलता है। विनम्रता की एक यह भी विशेषता होती है कि वह चुंबक की तरह होती है। अपनी इस विशेषता से वह अपने पास आने वालों को तुरंत ही अपनी ओर खींच लेती है। इस प्रकार जिसमें विनम्रता होती है, वह मधुर बोलता है, उसका व्यवहार सभ्य होता है, और उसके भाव-विचार में अपनापन भरा होता है।

विशेष-

  1. विनम्र व्यक्ति पर प्रकाश डाला गया है।
  2. भाषा सरल है।

2. विनम्रता केवल बड़ों के प्रति ही नहीं होती है बराबर वालों के प्रति भी समादर और अपने से छोटों के प्रति स्नेह के रूप में भी प्रकट होती है। व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। यदि हमारे लिए कोई कष्ट उठाकर कुछ काम करता है तो हमें उसके प्रति अपनी कृतज्ञता अवश्य प्रकट करनी चाहिए। यदि बस या रेल में कोई व्यक्ति अपनी जगह हमें बैठने के लिए देता है तो उसे धन्यवाद देना कभी न भूलें। ऐसा करते समय लगना भी चाहिए कि हम उसे हृदय से धन्यवाद दे रहे हैं, केवल औपचारिकता का निर्वाह नहीं।

शब्दार्थ-स्नेह-प्रेम। आकर्षक-मोहक। कृतज्ञता-अहसान। औपचारिकता-दिखावा।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने यह बतलाने का प्रयास किया है कि विनम्रता सबके प्रति होती है।

व्याख्या-विनम्र व्यक्ति अपने से बड़ों-छोटों के प्रति उचित रूप से विनम्र होना नहीं भूलता है। वह अपने से बड़ों के प्रति आदर-सत्कार को प्रकट करता है। इसी प्रकार वह अपने बराबर वालों का भी सत्कार करता है। अपने से छोटों के प्रति प्यार प्रकट करता है। इस प्रकार की विनम्रता से उसका व्यक्तित्व आकर्षक और महान् बनता है। इस आधार पर यह कहना ठीक होगा कि विनम्र व्यक्ति को सहयोग करने वाले के प्रति अपनी कृतज्ञता अवश्य करने चाहिए। उदाहरण के लिए यदि कोई बस, रेल आदि में बैठ आराम करने या कोई सुविधा दे तो विनम्र व्यक्ति को चाहिए कि वह उसे हृदय से धन्यवाद दे। अगर वह दिखावा कर रहा है, तो उससे उसकी विनम्रता नहीं प्रकट होगी।

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विशेष-

  1. विनम्रता से व्यक्तित्व महान् बनता है, इसे समझाया गया है।
  2. विनम्रता में किसी प्रकार का दिखावा नहीं होना चाहिए, इसे स्पष्ट किया गया है।

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 23 Mahan Vibhuti Danvir Doctor Sir Hari Singh gor Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 23 Mahan Vibhuti Danvir Doctor Sir Hari Singh gor Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 23 Mahan Vibhuti Danvir Doctor Sir Hari Singh gor Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 23 महान विभूति: दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर प्रश्न उत्तर

महान विभूति: दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
अभाव = कमी, अलंकार में स्थायी भावों से रहित; अक्षय = अनश्वर, अपरिवर्तनशील; अद्वितीय = अतुल्य, अकेला; अर्जित = कमाया हुआ; विभूति = शक्ति, धन, सम्पन्नता; विदुषी = शिक्षित स्त्री, विद्वान स्त्री, विधिवेत्ता = विधि विशेषज्ञ, कानून के जानकार; रूढ़िग्रस्त = परम्परावादी।

प्रश्न 2.
पाठ के आधार पर सही जोड़ी बनाइए-.
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 23 महान विभूति दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर 1
उत्तर
(क) → (2), (ख) → (3), (ग) → (4), (घ)→ (1)

प्रश्न 3.
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए(क) डॉ. हरिसिंह गौर का जन्म कब और कहाँ हुआ ?
उत्तर
डॉ. हरिसिंह गौर का जन्म 26 जनवरी, सन् 1870 ई. में शनीचरी टौरी, सागर (म. प्र.) में हुआ था।

(ख) डॉ. गौर कौन-कौन से विश्वविद्यालयों में उपकुलपति रहे?
उत्तर
सन् 1921 ई. से सन् 1936 ई. तक वे दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्थापक उपकुलपति रहे। इसके बाद दो वर्ष तक वे नागपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति रहे।

(ग) डॉ. गौर को ‘सर’ की उपाधि से किसने विभूषित किया है ?
उत्तर
जनवरी, सन् 1925 में अंग्रेज सरकार ने डॉ. गौर को शिक्षा के क्षेत्र में ‘सर’ की उपाधि प्रदान की।

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(घ) उन्होंने किस प्रशासकीय पद से त्याग-पत्र दिया था ?
उत्तर
उन्होंने सेण्ट्रल प्रॉविंस कमीशन में अतिरिक्त सहायक आयुक्त के पद से त्यागपत्र दिया।

(ङ) सागर विश्वविद्यालय की स्थापना कब, क्यों और और किसने की थी ?
उत्तर
18 जुलाई, सन् 1946 को सागर नगर के निकट मकरोनिया की पथरिया पहाड़ी पर डॉ. हरिसिंह गौर ने हजारों व्यक्तियों की उपस्थिति में सागर विश्वविद्यालय की विधिवत् स्थापना की और उन्होंने इस विश्वविद्यालय में प्रथम कुलपति का पद थी सुशोभित किया।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(क) डॉ. गौर के विद्यार्थी जीवन पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उनका बाल्यकाल अभावों में बीता। माँ ने बड़े संघर्ष के साथ उनका पालन-पोषण किया था। उन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा सागर में और इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा पहले जबलपुर, बाद में नागपुर में पूरी की। आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने नागपुर के हिसलप कॉलेज में प्रवेश लिया। उस समय वे अंग्रेजी और अर्थशास्त्र में ऑनर्स करने वाले पहले छात्र थे। अठारह वर्ष की आयु में वे इंग्लैण्ड चले गए, जहाँ उन्होंने डाउनिंग कॉलेज और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में एम. ए. और कानून की उपाधि प्राप्त की।

(ख) डॉ. गौर को कुशल और सफल अधिवक्ता के रूप में क्यों जाना जाता है ?
उत्तर
डॉ. हरिसिंह गौर ने चालीस वर्ष से अधिक समय तक अखिल भारतीय स्तर पर वकालत की। उन्होंने प्रिवी कौंसिल में भी कई मुकद्दमे लड़े और वहाँ भी अपनी सफलता के झण्डे गाड़े। वे हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सभापति और हाईकोर्ट बार कौंसिल के सदस्य भी रहे। अत: डॉ. गौर विधिवेत्ता, प्रसिद्ध अधिवक्ता और दानवीर के रूप में अविस्मरणीय विभूति हैं। वे आज भी हम सबके लिए प्रेरणा पुंज हैं।

(ग) डॉ. गौर भामाशाह क्यों कहलाए?
उत्तर
राष्ट्रहित के लिए जिस प्रकार भामाशाह ने अपना संचित धन महाराणा प्रताप को सहर्ष सौंप दिया था, उसी प्रकार भारत माँ के लाड़ले सपूत डॉ. हरिसिंह गौर ने परिश्रमपूर्वक अर्जित धन विश्वविद्यालय स्थापना के लिए दान कर दिया। इस कार्य के लिए उन्होंने आरम्भ में बीस लाख रुपये दिए। 18 जुलाई, सन् 1946 ई. को सागर नगर के निकट मकरोनिया की पथरिया पहाड़ी पर हजारों व्यक्तियों की उपस्थिति में सागर विश्वविद्यालय की विधिवत स्थापना हुई। डॉ. गौर ने इस विश्वविद्यालय में प्रथम कुलपति का पद भी सुशोभित किया।। उन्होंने अपनी अन्तिम साँस लेने से पूर्व अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई में से लगभग दो करोड़ रुपये की धन-सम्पत्ति सागर विश्वविद्यालय को अर्पित कर दी। सम्पूर्ण एशिया में किसी एक व्यक्ति मात्र के दान से स्थापित यह विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश . का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है। अतः राष्ट्रहित के लिए किये गये इस पुण्य कार्य के लिए डॉ. गौर भामाशाह कहलाए।

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(घ) डॉ. गौर ने शिक्षा जगत में बहुत सेवाएँ की हैं, इस कथन को उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
सन् 1921 ई. से सन् 1936 ई. तक डॉ. गौर दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्थापक उपकुपति रहे। इसके बाद दो वर्ष तक उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति का दायित्व संभाला। दिल्ली एवं नागपुर विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें डी. लिट. की मानद् उपाधि से सम्मानित किया गया। डॉ. गौर ने 18 जुलाई, सन् 1946 ई. को सागर नगर के निकट मकरोनिया की पथरिया पहाड़ी पर हजारों व्यक्तियों की उपस्थिति में सागर विश्वविद्यालय की विधिवत् स्थापना की। डॉ. गौर ने इस विश्वविद्यालय में प्रथम कुलपति का पद भी सुशोभित किया।

वह अपूर्व बुद्धि और अद्भुत वाशक्ति वाले अधिवक्ता के रूप में प्रसिद्ध थे। उनकी अद्वितीय प्रतिभा, मौलिक सूझबूझ, तीव्र स्मरणशक्ति उनके प्रत्येक शब्द में आत्मविश्वास के साथ झलकती थी। न्यायालय में उनका परिवाद प्रस्तुत करने का ढंग ओजस्वी, अनोखा एवं रोचक होता था। डॉ. हरिसिंह गौर का गहन विश्वकोषीय ज्ञान, अनुभव और दूरदर्शिता अपूर्व थी। उनका अंग्रेजी भाषा पर पूर्ण अधिकार था। लेखन प्रतिभा से युक्त उनकी ख्याति में उस समय और भी वृद्धि हुई जब वे कानून की पुस्तकों के लेखक के रूप में सामने आए। मात्र बत्तीस साल की आयु में ही उनकी ‘लॉ ऑफ ट्रांसफर ऑफ प्रापर्टी एक्ट’ पुस्तक प्रकाशित हुई। इसके बाद उन्होंने ‘भारतीय दण्ड संहिता की तुलनात्मक विवेचना’ और ‘हिन्दू लॉ’ पर पुस्तकें लिखी जो आज भी विधि की महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में गिनी जाती हैं। उनके विधि क्षेत्र में अर्जित व्यापक अनुभव को देखते हुए उन्हें भारतीय संविधान सभा का उप सभापति भी चुना गया। डॉ. हरिसिंह गौर ने कानून शिक्षा, साहित्य, समाज सुधार, संस्कृति, राष्ट्रीय आन्दोलन, संविधान निर्माण आदि में स्मरणीय योगदान दिया।

प्रश्न 5.
‘सरस्वती लक्ष्मी दोनों ने दिया तुम्हें सादर जयपत्र’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
डॉ. गौर का बाल्यकाल अभावों में बीता था परन्तु फिर भी उन्होंने 18 वर्ष की आयु में इंग्लैण्ड के डाउनिंग कॉलेज
और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में एम. ए. और कानून की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सन् 1905 ई. में डी. लिट. की पहली उपाधि लंदन विश्वविद्यालय और फिर ‘ट्रिनिटी’ कॉलेज, डब्लिन से प्राप्त की। इस प्रकार माँ सरस्वती’ की महान अनुकम्पा से शिक्षा जगत में महान ख्याति अर्जित हुई। परिणामस्वरूप उन्हें परिश्रमपूर्वक धन भी अर्जित हुआ जिसको उन्होंने राष्ट्रहित में सागर विश्वविद्यालय की स्थापना में दान किया। तब राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने उनकी दानवृत्ति को देखकर बहुत ही सटीक कहा

“सरस्वती-लक्ष्मी दोनों ने दिया, तुम्हें सादर जय-पत्र।
साक्षी है हरिसिंह तुम्हारा, ज्ञान-दान का अक्षय सत्र”।

महान विभूति: दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए
शिक्षाविद्, विभूति, अधिवक्ता, औपचारिक।
उत्तर
शिक्षाविद्-डॉ. हरिसिंह गौर महान शिक्षाविद् थे। . विभूति-डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम भारत की महान । विभूति हैं। – अधिवक्ता-भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पेशे से अधिवक्ता थे। औपचारिक-आज हमारे विद्यालय में क्रिकेट मैदान की औपचारिक घोषणा की गई।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों का समास विग्रह करते हुए उनके समासों के नाम लिखिए
लालन-पालन, कानून-शिक्षा, सरस्वती-लक्ष्मी, सांध्यवेला, देश-विदेश।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 23 महान विभूति दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर 2

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में प्रयुक्त उपसर्ग और प्रत्यय पहचान करके अलग लिखिए-
अक्षय, उपकुलपति, सपूत, सहर्ष, सफलता, दूरदर्शिता, ऐतिहासिक, कार्यक्षमता।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 23 महान विभूति दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर 3

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों के लिए एक-एक शब्द लिखिए।
उत्तर
वाक्य – एक शब्द
वकालत – करने वाला वकील
जो थोड़ा जानता हो – अल्पज्ञ
जो कभी न हो सके – असम्भव
जिसके आर-पार देखा – पारदर्शी या
जा सके – पादर्शक
विद्या अध्ययन करने वाला – विद्यार्थी

प्रश्न 5.
निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए
झण्डा गाड़ देना, लोहा मानना, घी के दीये जलाना, आँख का तारा होना। ….
उत्तर
झण्डा गाड़ देना-अधिकार जमा लेना।
प्रयोग-भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्वकप के फाइनल मैच में भारत का झण्डा गाड़ दिया।
लोहा मानना-प्रभुत्व स्वीकार करना। .
प्रयोग-महाराणा प्रताप की वीरता का मुगल लोहा मानते
घी के दीये जलाना-खुशियाँ मनाना।
प्रयोग-हाईस्कूल की परीक्षा में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने पर गोपाल के घर में घी के दीये जल रहे थे।
आँख का तारा होना-बहुत प्रिय होना।
प्रयोग-रमेश अपने माता-पिता की आँख का तारा है।

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प्रश्न 6.
नीचे लिखे गद्यांश को पढ़कर उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए
इस संसार में सबसे अमूल्य वस्तु है ‘समय’। इस संसार में सभी वस्तुओं को घटाया-बढ़ाया जा सकता है। पर समय नहीं। समय किसी के अधीन नहीं रहता। न रह सकता है और न किसी की प्रतीक्षा करता है। विद्यार्थी जीवन में समय का अपना महत्व है। समय का सदुपयोग करने वाला व्यक्ति सदैव सफल होकर एक श्रेष्ठ नागरिक बनता है। समय का सदुपयोग तो केवल उद्यमी और कर्मठ व्यक्ति कर सकता है। आलस्य समय का सबसे बड़ा शत्रु है। विद्यार्थियों को इस शत्रु से सावधान रहना चाहिए।
(क) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
(ख) समय का सबसे बड़ा शत्रु कौन है ?
(ग) कौन-सा व्यक्ति श्रेष्ठ नागरिक बन सकता है ?
(घ) समय का सदुपयोग कौन-सा व्यक्ति कर सकता
उत्तर
(क) उपयुक्त शीर्षक है ‘समय का महत्व’।
(ख) आलस्य समय का सबसे बड़ा शत्रु है।
(ग) समय का सदुपयोग करने वाला व्यक्ति श्रेष्ठ नागरिक बन सकता है।
(घ) समय का सदुपयोग उद्यमी और कर्मठ व्यक्ति कर सकता है।

महान विभूति: दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) वह अपूर्व बुद्धि और अद्भुत वाकशक्ति वाले अधिवक्ता के रूप में प्रसिद्ध थे। उनकी अद्वितीय प्रतिभा, मौलिक सूझबूझ, तीव्र स्मरणशक्ति उनके प्रत्येक शब्द में आत्मविश्वास के साथ झलकती थी। न्यायालय में उनका परिवाद प्रस्तुत करने का ढंग ओजस्वी, अनोखा एवं रोचक होता था। डॉ. हरिसिंह गौर का गहन विश्वकोषीय ज्ञान, अनुवभव और दूरदर्शिता अपूर्व थी।

शब्दार्थ-अद्वितीय = अतुल्य, अकेला; अपूर्व = अनुपम, अनोखा; परिवाद = दावा; शिकायत; ओजस्वी = प्रभावशाली, शक्तिमान।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के पाठ ‘महान विभूति : दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर’ से अवतरित है।

प्रसंग-इस गद्यांश में डॉ. हरिसिंह गौर के प्रतिभाशाली व्यक्तित्व को समझाया गया है।

व्याख्या-डॉ. हरिसिंह गौर एक विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उनमें तार्किक बुद्धि, सोचने की अद्भुत शक्ति, वाक्पटुता, समरण रखने की असीम क्षमता और आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरे हुए थे। अत: कानून के क्षेत्र को उन्होंने अपना व्यवसाय चुना। न्यायालय में अपने पक्ष को सरल एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत करते थे। इसीलिए डॉ. गौर प्रसिद्ध अधिवक्ता और विधिवेत्ता के रूप में अविस्मरणीय विभूति हैं। शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. गौर को विश्वकोश का ज्ञान, कार्य करने का अनुभव और उसके परिणाम को जानने की अनोखी दूरदर्शिता थी।

MP Board Class 8 Hindi Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 10 Amir Khusro Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 10 Amir Khusro Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 10 Amir Khusro Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 10 अमीर खुसरो प्रश्न उत्तर

प्रश्न अभ्यास

MP Board Class 8 Hindi Chapter 10 प्रश्न 1.
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 10 अमीर खुसरो 1
उत्तर
(अ) 4, (ब) 3, (स) 5, (द) 1, (ई) 2

(ख) सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(अ) खुसरो के पिता ……………. थे। (मालदार, जागीरदार)
(ब) अमीर खुसरो पर ……………. संस्कारों का प्रभाव था। (विदेशी, भारतीय)
(स) पिता की मृत्यु के बाद खुसरो अपने … के घर आकर रहने लगे। (नाना, दादा).
(द) खुसरो ने ……………. में काव्य रचा। (मातृभाषा, लोकभाषा)
(ई) अमीर खुसरो का परिवार …………… देश से आकर भारत में बसा था। (तुर्की, पुर्तगाल)
उत्तर
(अ) खुसरो के पिता जागीरदार थे।
(ब) अमीर खुसरो पर भारतीय संस्कारों का प्रभाव था।
(स) पिता की मृत्यु के बाद खुसरो अपने नाना के घर आकर रहने लगे।
(द) खुसरो ने लोक भाषा में काव्य रचा।
(ई) अमीर खुसरो का परिवार तुर्की देश से आकर भारत में बसा था।

Class 8 Hindi Chapter 10 MP Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न

(अ)अमीर खुसरो का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
(ब) खुसरो के गुरु कौन थे?
(स) अमीर खुसरो के मन को छूने वाले गीत कौन-से हैं?
(द) अमीर खुसरो को वैराग्य कब हुआ?
(ई) सूफी मत के अनुसार ईश्वर-प्राप्ति का क्या मार्ग है?
उत्तर
(अ) जागीरदार
(व) भारतीय
(स) नान
(द) लोकभाषा
(ई) तुर्की।

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Hindi Chapter 10 Class 8 MP Board प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न

(अ) खुसरो की कृतियाँ हमें क्या शिक्षा देती हैं?
उत्तर
खुसरो की कृतियाँ हमें धर्म-निरपेक्षता, देश-प्रेम और इंसानी बराबरी की शिक्षा देती हैं। ते परस्पर नफ़रत नहीं, अपितु मेल-मिलाप और सच्चे हिन्दुस्तानी की तरह रहने की भी शिक्षा देती हैं।

(ब)
भारत देश की प्रशंसा अमीर खुसरो किस रूप में करते हैं?
उत्तर
भारत देश की प्रशंसा अमीर खुसरो ने माँ के रूप में करते हैं। वे भारत को अपने वतन के रूप में वर्णित करते हुए खूब प्रशंसा करते हैं।

(स)
खुसरो की रचनाओं में कौन-कौन से दर्शन समाहित हैं?
उत्तर
खुसरो की रचनाओं में वेदान्त, बौद्ध और इस्लाम दर्शन समाहित हैं।

(द)
‘मुकरी’ का उदाहरण देते हुए उसका अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
मकरी-‘मुकरी’ शब्द मकरना से बना है। मकरना का अर्थ है-कहकर बदल जाना या वादा करके बाद में कही गई बात से इनकार करना। मुकरी ऐसी पद्य रचना है जिसमें ‘हाँ’ कहकर ‘न’ कहा जाता है। जैसे’बह आवे तो शादी होय, उस बिन दूजा ओर न कोय। मीठे लागे बाके बोल, क्यों सखि साजन, ना सखि ढोला’ ऐसा लगता है जैसे सखि के साजन आ रहे हैं, किंतु कवि उसे साजन मानने से इनकार करता है और कहता है ‘साजन नहीं’ ढोल आ रहा है।

(ई)
खुसरो की अंतिम रचना कौन-सी थी, वह किस घटना से संबंधित थी?
उत्तर
खुसरो की अंतिम रचना थी
गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस।
चल खुसरो घर आपने, रेन भई चहुँ देस।।
खुसरो की यह अंतिम रचना उनके गुरु के निधन
से उत्पन्न दुखद घटना से संबंधित थी।

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भाषा की बात

MP Board Class 8th Hindi Chapter 10 प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिए
आत्मीय, कुशात्र, साहित्यिक, समन्वय, धर्मनिरपेक्षता, अश्रुधारा, वैराग्य।
उत्तर:
आत्मीय, कुशाग्र, साहित्यिक, समन्वय, धर्मनिरपेक्षता, अश्रुधारा, वैराग्य।

Class 8 Chapter 10 Hindi MP Board प्रश्न 2.
नीचे दिए शब्दों की वर्तनी सुधारिएप्रसतुत, गुरू क्रपा, ननीहाल, जलवायू, अनुयाई।
उत्तर
प्रस्तुत, गुरुकृपा, ननिहाल, जलवायु, अनुयायी।

Class 8 MP Board Hindi Chapter 10 प्रश्न 3.
नीचे दिए वाक्यों में उपयुक्त विराम चिह लगाइए
(क) गांधी जी ने कहा था सदा सत्य बोलो
(ख) राम मोहन सौरभ और कमल घूमने गए
(ग) झूठ बोलना पाप की जड़ है शिक्षक ने कहा
(घ) बाजार से सब्जी ले आए इन्हें डलिया में रख दो
उत्तर
(क) गांधी जी ने कहा था, “सदा सत्य बोलो।”
(ख) राम, मोहन, सौरभ और कमल घूमने गए
(ग) “झूठ बोलना पाप की जड़ है” शिक्षक ने कहा
(घ) बाजार से सब्जी ले आए। इन्हें इलिया में रख दो।

Class 8th Hindi Chapter 10 MP Board प्रश्न 4.
नीचे दिए विग्रह पदों के साभासिक शब्द बनाइए
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 10 अमीर खुसरो 2

MP Board Solution Class 8 Hindi Chapter 10 प्रश्न 5.
विलोम शब्दों की सही जोड़ी बनाइए
उत्तर-
प्रशंसा – निन्दा
रुचि – अरुचि
प्रेम – घृणा
नारी – पुरुप
प्रभावित – अप्रभावित

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MP Board Class 8 Chapter 10 Hindi प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों में शब्दों को सही क्रम में लिखिए
(क) एक जागीरदार थे पिता के खुसरो।
(ख) खुसरो ने काव्य रचा लोकभाषा में।
(ग) अंतिम रचना थी उनकी यह।
(घ) गुरु के संपर्क में आए वे यहीं।
(ङ) खुसरो भी मत अनुयायी इसी के बन गए।
उत्तर
(क) खुसरो के पिता एक जागीरदार थे।
(ख) खुसरो ने लोकभाषा में काव्य रचा।
(ग) उनकी यह अंतिम रचना थी।
(घ) वे यहीं गुरु के सम्पर्क में आए।
(ङ) खुसरो भी इसी मत के अनुयायी बन गए।

प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएं

1. “परमात्मा जब मुझसे पूछेगा कि तुम मेरे लिए क्या लाए हो, तो मैं खुसरो को पेश कर दूंगा।” ये उद्गार प्रसिद्ध संत हजरत निजामुद्दीन औलिया के अपने शिष्य के प्रति थे। गुरु कहा करते ये-“अगर कब्र में दो लोगों को दफन किया जाता, तो मैं चाहता कि खुसरो को मेरे साथ ही दफन किया जाए। ऐसी आत्मीय गुरुकृपा के पात्र थे अमीर खुसरो।

शब्दार्थ:
पेश-प्रस्तुत। उद्गार विचार। आत्मीय अपने लोग।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिन्दी सामान्य) भाग-8′ के पाठ-10 ‘अमीर खुसरो’ से ली गई हैं।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने अमीर खुसरों की महान्ता को बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या:
अमीर खुसरो के गुरु महान् और प्रसिद्ध सत हजरत निजामुद्दीन औलिया थे। वे खुसरो के प्रति अपार और एकमात्र प्रेमभाव रखते थे। इससे सस्पष्ट करने के लिए उन्होंने एक बार कहा भी था-जब वे परमात्मा के पास जायेंगे और परमात्मा उनसे पूछेगा कि वे उसके लिए क्या लायेंगे, तो वे उससे यही कहेंगे कि वे खुसरो को उसके लिए लाये हैं। गुरु संत हजरत निजामुद्दीन औलिया का प्रेमभाव और अपनापन खुसरो के प्रति एकमात्र भरा हुआ था। वे इसे सुस्पष्ट रूप से कहा करते थे-‘यों तो एक कब्र में एक ही आदमी को ही दफ़न किया जाता है। अगर एक ही जगह दो आदमियों को दफन किया जाना संभव हो तो ये चाहेंगे कि उनके साथ ही खसरो को भी दफ़न कर दिया जाए। इससे यह सिद्ध होता है कि खुसरी अपने गुरु के अनन्य एकमात्र सबसे बड़ा कृपा-पात्र थे।

विशेष:

  • खुसरो की बेजोड़ विशेषता बतलायी गयी है।
  • भाव आकर्षक है।

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 7 Ham bhi Sikhe Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 7 Ham bhi Sikhe Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 7 Ham bhi Sikhe Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 7 हम भी सीखें प्रश्न उत्तर

प्रश्न-अभ्यास

अनुभव विस्तार

MP Board Class 8 Hindi Chapter 7 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) सूरज हमें रोशनी देता – 1. निर्मल जल दिन-रात बहाते
(ब) बिन अभिमान पेड़ देते हैं – 2.अन्न उगाती धरती प्यारी
(स) गहरी नदियाँ, निर्झर नाले – 3. बीज, फल, फूल, ठण्डी छाया
(द) सबका पालन करने वाली – 4. तारे शीतलता बरसाते
उत्तर-
(अ) – 1
(ब) – 2
(स) – 3
(द) – 4

(ख) दिए गए विकल्पों से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए-
(अ) अपने लिए सभी जीते हैं …………………………………. मरना सीखें। (औरों के हित, दूसरों के हित)
(ब) चाँद बाँटता …………………………………. सबको, बादल वर्षा जल दे जाते। (अमृत, चाँदनी)
(स) ऊँचे-नीचे …………………………………. ही तो, इन सोतों के जनक कहाते। (पहाड़, पर्वत)
(द) ऐसे ही त्यागी बनकर हम, बूंद-बूंद कर …………………………………. सीखें। (घटना, झरना।)
उत्तर-
(अ) औरों के हित,
(ब) अमृत,
(स) पर्वत,
(द) झरना।

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Class 8 Hindi Chapter 7 MP Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) कुदरत हमें क्या सिखाती है?
(ब) तारे हमें क्या देते हैं?
(स) धरती क्या कार्य करती है?
उत्तर-
(अ) कुदरत हमें परोपकार करना सिखाती है।
(ब) तारे हमें शीतलता देते हैं।
(स) धरती सबका पालन-पोषण करती है।

MP Board Class 8th Hindi Chapter 7 प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न

(अ) पर्वतों को सोतों का जनक क्यों कहा गया है?
उत्तर-
पर्वतों से बड़ी-बड़ी गहरी नदियाँ निकलती हैं। पर्वतों से कई प्रकार के छोटे-बड़े झरने निकलते हैं। यही नहीं पर्वतों से ही कई प्रकार के छोटे-बड़े नाले निकलते हैं। इन नदियों, झरनों और नालों में रात-दिन स्वच्छ जल बहता रहता है। इस प्रकार पर्वतों से नदियों, झरनों और नालों के निकलने के कारण पर्वतों को इनका जनक कहा गया है।

(ब) पेड़ों को दधीचि क्यों माना गया है?
उत्तर-
पेड़ हर युग में अपना सब कुछ न्यौछावर परोपकार के लिए करते रहते हैं। चाहे कोई मौसम अर्थात् कठिन समय क्यों न हो, वे परोपकार करने से पीछे नहीं हटते हैं। चूँकि इनका त्याग – बलिदान महर्षि दधीचि के ही समान होता है। इसलिए उन्हें महर्षि दधीचि माना गया है।

(स) जुगनू से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर-
यद्यपि जुगनू आकर-प्रकार में बहुत ही छोटा होता है। फिर भी हमें रोशनी थोड़ा-थोड़ा करके ही सही, देने से कभी पीछे नहीं हटता है। इस प्रकार वह अंधकार को दूर करके हमें प्रकाश देने में लगा रहता है। फलस्वरूप हमें उससे यह सीख मिलती है कि परोपकार करने के लिए बड़े-छोटे का महत्त्व नहीं होता है। दूसरी बात यह कि हमें जितना भी हो सके, परोपकार करते ही रहना चाहिए।

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भाषा की बात

Hindi Chapter 7 Class 8 MP Board प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएकुदरत, अमृत, दधीचि, निर्मल, पर्वत, त्यागी।
उत्तर-
कुदरत, अमृत, दधीचि, निर्मल, त्यागी।

Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 7 प्रश्न 2.
सही वर्तनी वाले शब्दों पर गोला लगाइए
1. सिखती, सखाती, सिखाती, सीखाति
2. वरषा, वरीषा, वर्षा, वार्ष
3. जुगनू, जुगन, जुगुन, जूगनू,
4. अंधकर, अंधाकार, अंधकार, अधंकारा।
उत्तर-
सही वर्तनी
1. सिखाती,
2. वर्षा,
3. जुगनू,
4. अंधकार।

Class 8 MP Board Hindi Chapter 7 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में उचित स्थान पर अनुनासिक के चिह्न () का प्रयोग कीजिए

माग, टाग, जाच, तागा, ऊट, नदिया, बाटना।

उत्तर-

माँग, टाँग, जाँच, ताँगा, ऊँट, नदियाँ, बाँटना।

Chapter 7 Hindi Class 8 MP Board प्रश्न 4.
कोष्ठक में दिए गए शब्द की आवृत्ति से शब्द बनाकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
…………………………… चलता भैया। (आगे)
…………………………… आई गया। (पीछे)
…………………………… लो घास खिलाई। (हरी)
…………………………… उसने वह खाई। (खुशी)
उत्तर-
आगे-आगे – चलता भैया।
पीछे-पीछे – आई गैया।
हरी-हरी – लो घास खिलाई।
खुशी-खुशी – उसने वह खाई।

Class 8 Chapter 7 Hindi MP Board प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों के विपरीतार्थी शब्द लिखिएअग्रज, सुगंध, आदि, आदान।
उत्तर-
शब्द – विपरीतार्थी शब्द
अग्रज – अनुज
सुगंध – दुर्गंध
आदि – अंत
आदान – प्रदान

Class 8th Hindi Chapter 7 MP Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों में ‘अभि’ उपसर्ग का प्रयोग करते हुए नए शब्द बनाइए-
ज्ञान, नंदन, यान, रूचि, नेता, मत
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 7 हम भी सीखें 1

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♦ प्रमुख पद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1.

कुदरत हमको रोज सिखाती, जग-हित में कुछ करना सीखें।
अपने लिए सभी जीते हैं, औरों के हित मरना सीखें।

शब्दार्थ-कुदरत-प्रकृति। जगह-हित-संसार की भलाई। औरों-दूसरों। हित के लिए।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) के भाग-8 के पाठ-7 ‘हम भी सीखें से ली गई हैं। इन पंक्तियों के कवि श्री गोपाल कृष्ण कौल हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने प्रकृति से प्रेरणा लेने का उपदेश देते हुए कहा है कि

व्याख्या-प्रकृति हमें यह रोज-ही-रोज पाठ पढ़ाती रहती है कि हम संसार में एक खास उद्देश्य से आए हैं। वह यह कि हम इस संसार के लिए कुछ करना सीखें। यह तो हम जानते हैं कि अपनी भलाई के लिए तो सभी कछ-न-कछ करते रहते हैं। लेकिन दूसरों की भलाई के लिए शायद ही कोई कुछ करता है। इसलिए हमें प्रकृति की तरह दूसरों की भलाई के लिए अपने जीवन को लगाना चाहिए।

विशेष-

  • परोपकार करने की सीख दी गई है।
  • तुकांत शब्दावली है।

2.

सूरज हमें रोशनी देता, तारे शीतलता बरसाते,
चाँद बाँटता अमृत सबको, बादल वर्षा-जल दे जाते।
जुगनू ज्यों थोड़ा-थोड़ा ही, अंधकार हम हरना सीखें।

शब्दार्थ-रोशनी-प्रकाश। शीतलता-ठंढ़क, आनंद। संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने सूरज, तारे, चाँद, बादल और जुगनू से परोपकार करने की प्रेरणा लेने की सीख देते हुए कहा है कि-

व्याख्या-सूरज हमें रोशनी (प्रकाश) देकर जीवन प्रदान करता है, तो तारे हमें शीतलता प्रदान करते हैं। इसी प्रकार चाँद अपनी किरणों से हमें अमृत प्रदान करता है, तो बादल जल की बरसा कर हमारी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। जुगनू भले ही थोड़ी-थोड़ी और कहीं-कहीं रोशनी करता है, फिर भी वह अंधकार को दूर करने में लगा ही रहता है। इस प्रकार प्रकृति के इन स्वरूपों से प्रेरणा लेकर हमें भी परोपकार करना चाहिए।

विशेष-

  • परोपकार करने की सीख आकर्षक रूप में है।
  • उदाहरण शैली है।

3.

बिन अभिमान पेड़ देते हैं, बीज, फूल, फल ठण्डी छाया।
ये दधीचि बनकर हर युग में, न्यौछावर कर देते काया।।
मौसम चाहे कैसा भी हो, तरु की तरह निखरना सीखें।

शब्दार्थ-अभिमान-घमंड। बिन-बिना, अकारण। न्यौछावर -त्याग। काया-शरीर। एक पौराणिक कथा के अनुसार दधीचि ऋषि ने अस्त्र बनाने के लिए अपनी हड्डियाँ तक देवताओं को दान कर दी थीं। इन हड्डियों से वज्र बनाया गया जिससे इंद्र ने राक्षसों को परास्त किया।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने प्रकृति की ही बिना किसी घमंड करके परोपकार करने की सीख देते हुए कहा है कि

व्याख्या-हम यह रोज ही देखते हैं कि पेड़-पौधे बिना किसी घमंड के ही हमें बीज, फूल और फल देते रहते हैं। यही नहीं वे बड़ी सुखद ठंडी छाया भी हमें देते रहते हैं। इसी प्रकार वे महर्षि दधीचि की तरह हरेक समय में अपना सब कुछ परोपकार में लगाते रहते हैं। मौसम चाहे जो कुछ भी बुरा और खराब क्यों न हो हमें तो पेड़ की तरह ही परोपकार करना नहीं भूलना चाहिए।

विशेष-

  • पेड़-पौधों की तुलना महर्षि दधीचि से की गई है।
  • लय और संगीत का सुंदर मेल है।

4.

गहरी नदियाँ, निर्झर, नाले, निर्मल जल दिन-रात बहाते।
ऊँचे-नीचे पर्वत ही तो, इन सातों के जनक कहाते।
ऐसे ही त्यागी बनकर हम, बूंद-बूंद कर झरना सीखें।

शब्दार्थ-निर्झर-झरने। निर्मल-स्वच्छ। स्रोतों-झरनों। जनक-पिता, जन्म देने वाला।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने गहरी नदियों, नालों और झरनों के त्याग को बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या-बड़ी-बड़ी नदियाँ, नाले और झरने रात-दिन दूसरों के लिए ही साफ और सुंदर जल बहाते रहते हैं। इनको जन्म देने वाले बड़े-बड़े ऊँचे-ऊँचे पर्वत ही तो हैं। इनकी तरह त्यागी-बलिदानी बनकर हम दूसरों को सुख और जीवन देने के लिए अपने जीवन-रस की एक-एक बूँद को टपकाते रहना चाहिए।

विशेष-

  • हमेशा ही परोपकार करते रहने की सीख दी गयी है।
  • भाषा सरल है।

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5.

सबका पालन करने वाली, अन्न उगाती धरती प्यारी।
उथल-पुथल खुद ही सह लेती, महकाती जीवन फुलवारी।
जीवन देती प्राणवायु बन, चारों ओर विचरना सीखें।।

शब्दार्थ-उगाती-पैदा करती। उथल-पुथल-उलट-पुलट,. हेर-फेर। महकाती-सुगंध देती। प्राणवायु-संजीवनी। विचरना-घूमना, फिरना।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने धरती को माँ के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा है कि-

व्याख्या-धरती सचमुच में प्यारी माँ की तरह है। यह सबका पालन-पोषण करने के लिए ही तरह-तरह के अनाज को पैदा करती है। जब कभी कोई उलट-फेर अर्थात् कठिन और दुखद घटना होती है, उसे यह स्वयं ही सह लेती है। लेकिन सबके जीवन की फुलवारी को सुगंधित करने से नहीं रुकती है। इस प्रकार यह सबको हमेशा ही संजीवनी देती रहती है। हमें चारों ओर स्वतंत्र रूप से विचरने-घूमने की शिक्षा इससे अवश्य लेनी चाहिए।

विशेष-

  • धरती को प्यारी माँ की तरह महत्त्व दिया गया है।
  • यह अंश उपदेशात्मक है।

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 17 Vasiyatnama Ka Rahasya Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 17 Vasiyatnama Ka Rahasya Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 17 Vasiyatnama Ka Rahasya Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 17 वसीयतनामे का रहस्य प्रश्न उत्तर

 वसीयतनामे का रहस्य बोध प्रश्न

Class 8 Hindi Chapter 17 MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
दूरदर्शी-दूर तक की बात सोचने वाला; न्यायप्रियन्याय (इन्साफ) चाहने वाला; निष्पक्ष = बिना भेदभाव के; विवाद – झगड़ा; जटिल = कठिन; जायदाद = सम्पत्ति; वसीयत = वसीयत सम्बन्धी लिखित आदेश।

MP Board Class 8 Hindi Chapter 17 प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
(क) वसीयतनामे का अर्थ समझाइए।
उत्तर
सम्पत्ति के बँटवारे का लिखित आदेश वसीयतनामा कहा जाता है।

(ख) गाँव का वयोवृद्ध व्यक्ति किस विशिष्ट कार्य के लिए प्रसिद्ध था ?
उत्तर
गाँव का वयोवृद्ध व्यक्ति अपनी बुद्धिमानी, दूरदर्शिता व न्यायप्रियता के लिए प्रसिद्ध था। वह झगड़ों और विवादों का निपटारा निष्पक्षता से करता था। वह एक न्यायप्रिय पंच के रूप में चारों ओर प्रसिद्ध था।

(ग) वसीयतनामे में जायदाद कितने पुत्रों को बाँटने का संकेत था?
उत्तर
वसीयतनामे में जायदाद के तीने हिस्से करके उसे तीन भाइयों (पुत्रों) में बाँट दिया जाय, परन्तु उस वसीयतनामे में यह नहीं लिखा था कि किस भाई को (पुत्र को) हिस्सा न दिया जाए।

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(घ) बँटवारे का अन्तिम निर्णय किसने किया ?
उत्तर
बँटवारे का अन्तिम निर्णय महाराजा ने किया।

(ङ) राजा के प्रथम दो महलों में जो दो लोग मिले, वे कौन थे?
उत्तर
राजा के प्रथम दो महलों में जो दो लोग मिले, उनमें क्रमश: सत्रह-अठारह वर्ष का एक युवक और उन्नीस-बीस वर्षीय अद्वितीय सुन्दर कन्या थी।

(च) पंचों को किस बात की शंका थी?
उत्तर
पंचों को इस बात की शंका थी कि वृद्ध किसान के तीन बेटे असली है व एक बेटा उसका नहीं है। तभी तो उसने अपनी जायदाद के तीन हिस्से करने की बात वसीयत में लिखी है।

(छ) वसीयतनामे में क्या लिखा था ?
उत्तर
वसीयतनामे में दो बातें लिखी हुई थीं। पहली सम्पूर्ण जायदाद के तीन हिस्से कर उसे तीन भाइयों में बाँट दिया जाए, लेकिन यह नहीं लिखा था कि किस भाई को हिस्सा न दिया जाए। दूसरी-जो पंच इस बात का फैसला करे उसके साथ बेटी का विवाह कर दिया जाए।

Bhasha Bharti Class 8 Chapter 7 प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए(क) झगड़े का कारण क्या था?
उत्तर
चारों भाई जायदाद के बँटवारे को लेकर आपस में झगड़ने लगे। जायदाद के तीन हिस्से थे और हिस्सेदार थे चार। तीन हिस्से को चार भाइयों में किस प्रकार विभाजित किया जाए। उन चार भाइयों में से कोई एक भाई अपना हिस्सा छोड़ देता तो न्याय हो जाता परन्तु कोई भी अपना हक छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। बुद्धिमान पिता ने इस तरह की वसीयत क्यों लिखी ? इसमें कोई न कोई रहस्य अवश्य होगा।

(ख) गाँव वालों को वसीयत के बारे में जानकर आश्चर्य क्यों हुआ?
उत्तर
गाँव वालों को जब वसीयतनामे के बारे में जानकारी हुई तो उन्हें आश्चर्य हुआ क्योंकि वसीयतनामे में जायदाद का बँटवारा तीन हिस्सों में किया था जबकि उस वृद्ध किसान के चार पुत्र थे। जायदाद का बँटवारा तो चारों पुत्रों में बराबर ही होना चाहिए था। गाँव वाले लोग सोचने लगे कि इतने बुद्धिमान व्यक्ति ने इस तरह की वसीयत क्यों लिखी अवश्य ही इसमें कोई रहस्य की बात होगी। अत: गाँववासियों ने विवाद को बहुत ही कठिन समझा। इसलिए उन्होंने उन चार भाइयों को वसीयतनामे के रहस्य को समझने के लिए गाँव में पंचायत बुलाने की सलाह दी।

(ग) गाँव के वृद्ध व्यक्ति ने राजा से कौन-सी दो बातें पूछीं?
उत्तर
गाँव के वृद्ध व्यक्ति ने राजा से दो बातें बड़ी विनम्रता से पूर्थी

  1. पहली बात यह कि अब वे महल के पास से गुजर रहे थे तो उन्हें एक युवक मिला था। उस युवक से जब आपके (राजा के) बारे में पूछा तो उस युवक ने उन्हें बताया (गाँव के वृद्ध व्यक्ति को बताया) कि राजा को मरे हुए तीन साल हो गए हैं।
  2. दूसरी बात यह कि जब वे दूसरे महल के पास से गुजर रहे थे तो वहाँ उन्हें एक रूपवती कन्या मिली। उसने उन्हें (गाँव के वृद्ध व्यक्ति को) बताया कि आप (राजा) अन्धे हो गए हैं। उपर्युक्त दोनों की बातों का क्या रहस्य है ?

(घ) राजा ने तीनों भाइयों को अलग-अलग ले जाकर क्या कहा ?
उत्तर
राजा तीनों भाइयों को अलग-अलग ले गये और हर एक को अपनी तलवार देकर कहा कि वह शेष तीनों की हत्या उसकी तलवार से कर सकता है परन्तु इन तीनों ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया। वे अपने-अपने हिस्से की जायदाद छोड़ने के लिए तैयार हो गये।

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(ङ) क्या तीनों भाई राजा के प्रस्ताव से सहमत थे?
उसर
तीनों भाई राजा के प्रस्ताव से सहमत नहीं थे। वे जमीन जायदाद के लालच में अपने भाइयों की हत्या करना नहीं चाहते थे। वे अपने इस फैसले पर अडिग थे। वे सभी अपने हिस्से की जायदाद को अपने अन्य भाइयों के लिए छोड़ने के लिए तैयार थे। उनके अन्दर त्याग की भावना उच्च स्तर की थी और वे अपने भाइयों को आपस में फलता-फूलता देखना चाहते थे।

(च) चौथा भाई राजा के द्वारा दिए गए प्रस्ताव से क्या सोचकर सहमत हो गया ?
उत्तर
महाराजा चौथे भाई को किसी एकान्त कमरे में ले गए। राजा ने उसे अपनी तलवार दे दी और सलाह दी कि वह अपने शेष तीन भाइयों को उनकी तलवार से कत्ल कर दे। वह चौथा भाई अपने तीन भाइयों को कत्ल करने के लिए तैयार हो गया क्योंकि उसने सोच लिया था ऐसा अवसर, जो उसे हाथ लगा है कि उसके लिए बहुत ही शुभ है। वह शीघ्र ही धनवान हो जायेगा। अपने भाइयों का कत्ल करके उसे पूरी जायदाद मिल जाएगी। इसके अतिरिक्त उसका विवाह भी महाराजा की सुन्दर बहन से हो जाएगा। इस तरह के विचारों को सोचकर चौथा भाई राजा के द्वारा दिए गए प्रस्ताव से सहमत हो गया।

(छ) राजा ने समस्या का निदान कैसे किया ?
उत्तर
धनवान होने तथा महाराजा की सुन्दर बहन के साथ विवाह होने के रंगीन सपने देखते हुए उस चौथे भाई को महाराजा | ने जेल में डाल दिया। महाराजा बाहर निकलकर आए। उन्होंने उनके साथियों को पूरी बात बतलाई तथा उन्हें समझा दिया। सभी लोग इस निर्णय से बहुत ही प्रसन्न थे । वे सभी सोचने लगे कि छोटा भाई अपने पिता को इसी तरह कष्ट देता होगा। इसलिए ही उन्होंने (उनके पिता ने) अपनी जायदाद के तीन हिस्से किए थे। तीन भाइयों ने अपने-अपने हिस्से की जायदाद प्राप्त कर ली और समस्या का निदान बड़ी चतुराई से कर दिया।

Class 8 Hindi Chapter 17 प्रश्न 4.
सही विकल्प चिह्नित कीजिएवसीयतनामे के विषय में जानकर पंचों को शक था
(1) वसीयतकर्ता मूर्ख था
(2) भूल से उससे गलती हो गई
(3) तीन बेटे असली हैं और एक बेटा उसका नहीं है।
उत्तर
(3) तीन बेटे असली हैं और एक बेटा उसका नहीं है।

 वसीयतनामे का रहस्य भाषा-अध्ययन

Class 8 Chapter 17 Hindi प्रश्न 1.
जायदाद विदेशी शब्द है, इसके स्थान पर मानक हिन्दी शब्द सम्पत्ति होता है। इसी प्रकार इस पाठ में प्रयुक्त निम्नलिखित शब्दों के मानक हिन्दी शब्द लिखिए
वसीयतनामे, हिस्सा, हिस्सेदार, हक, राहगीर, शानदार, फैसला, मामला, गुजर, राज, होशियार।
उत्तर
वसीयतनामे सम्पत्ति का लिखित आदेश; हिस्सा भाग; हिस्सेदार = भागीदार; हक अधिकार; राहगीर = पथिक शानदार = चमकीला, तेज; फैसला = न्याय; मामला = विषय; गुजर = व्यतीत राजरहस्य होशियार = चतुर, सावधान।

Class 8 Bhasha Bharti प्रश्न 2.
इस पाठ में आने वाले विभिन्न कारकों के उदाहरण छाँटकर लिखिए।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 17 वसीयतनामे का रहस्य 1

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 8 प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों में से साधारण वाक्य, मिश्रित वाक्य और संयुक्त वाक्य अलग करके लिखिए
(क) एक गाँव में एक किसान रहता था।
(ख) जायदाद के तीन हिस्से थे और चार हिस्सेदार थे।
(ग) यदि एक भाई अपना हिस्सा छोड़ देता तो न्याय हो जाता।
(घ) वे सोचने लगे कि इतने बुद्धिमान व्यक्ति ने ऐसी वसीयत क्यों लिखी?
(ङ) एक दिन पंचायत लगी थी।
(च) महाराजा हंसते हुए बोला और उठकर खड़ा हो गया।
उत्तर
(क) साधारण वाक्य
(ख) संयुक्त वाक्य
(ग) मिश्रित वाक्य
(घ) मिश्रित वाक्य
(ङ) साधारण वाक्य
(च) संयुक्त वाक्य।

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 5 प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्द,शब्द युग्म हैं या पुनरुक्त ? उनके सामने लिखिए
(क) दूर-दूर, (ख) तरह-तरह, (ग) राम-राम, (घ) सत्रह-अठारह, (ङ) युवक-युवती, (च) उन्नीस-बीस, (छ) अपना-अपना, (ज) एक-दो।
उत्तर
(क) पुनरुक्त
(ख) पुनरुक्त
(ग) पुनरुक्त
(घ) शब्द युग्म
(ङ) शब्द युग्म
(च) शब्द युग्म
(छ) पुनरुक्त
(ज) शब्द युग्म।

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Vasiyatnama Ka Rahasya प्रश्न 5.
पाठ में दिए गए प्रसंग के अनुसार सही जोड़े (विशेषण-विशेष्य)  बनाइए।
वर्ग (क) – वर्ग (ख)
(1) दूसरा – (अ) मामला
(2) अद्वितीय – (ब) स्वर
(3) शान्त – (स) महल
(4) पूरा – (द) कन्या
(5) रंगीन – (य) सुन्दरी
(6) रूपवती – (२) सपने
उत्तर-(1)→ (स), (2) → (य), (3) + (ब), (4)+ (अ),(5)+ (र),(6)→(द)

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 7 प्रश्न 6.
उदाहरण की तरह शब्दों के रूप परिवर्तित कीजिए
उदाहरण-दुकान-दुकानें, कपड़ा-कपड़े। बहन, भाई, युवक, युवती, महल, सपना, मामला, राहगीर।
उत्तर

  1. बहनें
  2. भाइयों
  3. युवकों
  4. युवतियाँ
  5. महलों
  6. सपने
  7. मामलों
  8. राहगीरों।

कक्षा 8 हिंदी पाठ 17 के प्रश्न उत्तर प्रश्न 7.
शिक्षक की सहयता से इस पाठ के कुछ महत्त्वपूर्ण वाक्यों को अनुतान के साथ (भिन्न-भिन्न ढंग से)
पढ़िए और उनके बोलने से होने वाले अर्थ परिवर्तन को समझिए।
उत्तर
विद्यार्थी आदरणीय गुरुजी की मदद से स्वयं अभ्यास करें।

 वसीयतनामे का रहस्य परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) एक दिन पंचायत लगी हुई थी। तभी वहाँ से एक राहगीर निकला। उसने पंचों से राम-राम की और बैठ गया। पंचों ने राहगीर को पूरा मामला समझाया और सहायता करने को कहा। राहगीर को भी आश्चर्य हुआ। उसने पंचों को समझाया कि मामला इतना जटिल है कि इसका फैसला केवल महाराजा ही कर सकता है। उसने उन्हें महाराजा का पता भी बता दिया।

शब्दार्थ-पंचायत लगी हुई थी = पंचायत जुड़ी हुई थी; तभी = उसी समय; राहगीर = पथिक; राम = राम की = अभिवादन किया; आश्चर्य = अचम्भा; मामला = समस्या; जटिल = कठिन, उलझी हुई; फैसला = न्याय।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘वसीयतनामे का रहस्य से अवतरित है। इसके लेखक डॉ. परशुराम शुक्ल हैं।

प्रसंग-इस गद्यांश में पिता द्वारा की गई वसीयतनामे की कठिन समस्या के विषय में एक राहगीर के द्वारा उपाय बताया गया है।

व्याख्या-वसीयतनामे के रहस्य को (छिपी बात को) समझने के लिए एक दिन पंचायत बुलाई गई थी। पंचायत में सभी पंच उस वसीयतनामे की भाषा के अर्थ को समझ कर निर्णय करने का उपाय कर रहे थे परन्तु उन पंचों की समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था। उसी समय वहाँ से एक पथिक अपने मार्ग से चला जा रहा था। उसने समस्या को सुलझाने के लिए जुटी पंचायत के सदस्यों को राम-राम कहकर अभिवादन किया और इसके बाद वहाँ चुपचाप बैठ गया। पंचायत के सदस्यों ने उस राहगीर को समस्या के विषय में समझाया तथा उससे प्रार्थना की कि वह भी उनकी (पंचायत के सदस्यों की) सहायता करे जिससे वसीयतनामे में लिखी भाषा के अर्थ को पूर्ण रूप से स्पष्ट समझा जा सके और सम्पत्ति का बँटवारा उसके अनुसार किया जा सके।

जब पथिक को भी वसीयतनामे में लिखी भाषा का अर्थ समझाने के लिए सभी पंचों ने कहा तो वह भी अचम्भे में पड़ गया। उसने कोशिश की परन्तु वह भी वसीयतनामे में लिखित भाषा के अर्थ को नहीं समझ पाया, इसलिए उस पथिक ने अपना मत स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका फैसला (न्याय) तो महाराजा ही कर सकते हैं, कोई साधारण आदमी नहीं। उस पथिक ने उन पंचों को महाराजा का पता भी बता दिया कि वे महाराजा के पास उस पते पर मिल सकते हैं।

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(2) महाराजा बड़े निर्भीक, साहसी और निडर थे। उन्होंने अपनी रक्षा के लिए एक भी सैनिक नहीं रखा था। वह हमेशा प्रजा के सुख और आराम के लिए ही कार्य करते थे। उनके पास दूर-दूर से एक से एक जटिल मामले आते जिन्हें वह कुछ ही पलों में इस बुद्धिमानी से हल – कर लेते कि लोग देखते रह जाते।

शब्दार्थ-निर्भीक = निडर, भय रहित; साहसी = हिम्मत वाले; सैनिक = सेना का जवान; प्रजा = अपने राज्य के लोगों के लिए: जटिल-कठिन, उलझी हुई; मामले समस्याएँ कुछ ही पलों में = कुछ ही क्षणों में बुद्धिमानी- समझदारी; हल कर लेते = सुलझा लेते; देखते रह जाते = अचम्भे में रह जाते थे, चकित रह जाते।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-महाराजा की बुद्धिमानी के विषय में बताया जा

व्याख्या-राहगीर पंचायत के सदस्यों को बताने लगा कि महाराजा बहुत ही निडर हैं। उनमें किसी भी समस्या का सामना करने की बड़ी हिम्मत है। वे किसी से भी नहीं डरते थे। वे अपनी सुरक्षा के लिए भी चिन्ता नहीं करते थे, अत: उन्होंने कोई भी सैनिक (सेना का सिपाही) अपनी रक्षा करने के लिए नियुक्त नहीं किया था। वे सदैव अपने राज्य की जनता के सुख की चिन्ता। करते थे। प्रजा के आराम के लिए ही कार्य करते थे। वे सदा उन लोगों से घिरे रहते थे जो अपनी कठिन समस्याओं को लेकर उनको सुलझाने के लिए उनके पास आते थे। उन लोगों की उन समस्याओं को बहुत कम समय में ही सुलझा देते थे। वे बहुत ही चतुर थे। उनके समस्याओं को सुलझाने के तरीके को देखकर सभी लोग अचम्भे में पड़ जाते।

MP Board Class 8 Hindi Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 6 Hira kuni Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 6 Hira kuni Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 6 Hira kuni Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 6 हीरा-कुणी प्रश्न उत्तर

प्रश्न अभ्यास

अनुभव विस्तार

MP Board Class 8 Hindi Chapter 6 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क)सही जोड़ी बनाइए
(अ) बछिया भूखी रह जाती थी
1. दूध के लिए तरसती रहती थी।
(ब) हीरा मन-ही-मन रो-रोकर कहने लगी
2. राजा दूध पीकर मौज मनाता था।
(स) राजा के पत्थर दिल पहरेदार ने द्वार नहीं खोला
3. काश, मुझे पंख मिल जाते।
(द) बछिया अपनी माँ को नहीं पा सकती थी
4. बालक को दूध पिलाने के लिए माँ की छाती फटने लगी।
उत्तर-
(अ) 2
(ब) 3
(स) 4
(द) 1

Class 8 Hindi Chapter 6 MP Board प्रश्न 2.
दिए गए विकल्पों में से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(अ) वह दूध दुहकर बेचने के लिए राजा के ………………….. में चली जाती थी। (घर, किले)
(ब) राजा कुणी ………………….. का दूध पीकर आनंद मनाता था। (गाय, बकरी)
(स) ………………….. का फाटक बंद कर दिया गया। (किले, भवन)
(द) राजा ने हीरा से सारी ………………….. सुनी। (कविता, कहानी)
उत्तर-
(अ) किले,
(ब) गाय,
(स) किले,
(द) कहानी।

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Class 8 Chapter 6 Hindi MP Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) ग्वालिन का नाम क्या था?
(ब) दूध दुहने के समय कुणी गाय रह-रहकर किसे पुकारती थी?
(स) हीरा किले से वापिस कब लौट आती थी?
(द) राजा ने हीरा को जागीर में क्या दिया?
उत्तर-
(अ) ग्वालिन का नाम हीरा था।
(ब) दूध दुहने के समय कुणी गाय रह-रहकर अपनी बछिया को पुकारती थी।
(स) हीरा किले से वापस रात होने से पहले ही लौट आती थी।
(द) राजा ने हीरा को जागीर में एक गाँव दे दिया।

Hindi Chapter 6 Class 8 MP Board प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) दूध दुहते समय हीरा बछिया के साथ कैसा व्यवहार करती थी?
उत्तर-
दूध दुहते समय हीरा बछिया के साथ बड़ा ही कठोर व्यवहार करती थी। बछिया दौड़कर दूध पीने के लिए आती तो हीरा उसे लौटा देती। इससे बछिया अपनी माँ का दूध नहीं पा सकती थी। फलस्वरूप वह अपनी माँ का दूध पीने के लिए तरसती और बिलखती रहती थी। लेकिन हीरा उधर कभी देखती भी नहीं।

(ब) किले का फाटक बंद होने पर हीरा पहरेदार से क्या बोली?
उत्तर-
किले का फाटक बंद होने पर हीरा पहरेदार से बोली-

“द्वार खोलो! मेरा मुन्ना भूखा है, तुम्हारे पैर पड़ती हूँ, फाटक खोल दो। अरे भाई, एक बार द्वार खोल दो।”

(स) राजा का मन क्यों पिघला?
उत्तर-
राजा ने हीरा से यह सारी कहानी सुनी कि किस प्रकार वह स्वयं के जीवन को संकट में डालकर, अपने बच्चे के पास जा पहुंची थी। उससे राजा का मन पिघल गया।

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भाषा की बात

MP Board Class 8th Hindi Chapter 6 प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएमहाराष्ट्र, रायगढ़, कोषाध्यक्ष, पत्थर, चट्टानों।
उत्तर-
महाराष्ट्र, रायगढ़, कोषाध्यक्ष, पत्थर, चट्टानों।

Class 8 MP Board Hindi Chapter 6 प्रश्न 2.
सही वर्तनी वाले शब्दों पर गोला लगाइए
(अ) कुणी, कूणी, कुणि, कूणि
(ब) बछिया, बछीया, बाछिया, बछिय
(स) पेहरदार, पहेरदार, पेहारदार, पहरेदार
(द) ग्वलिन, ग्वालीन, गवालिन, ग्वालिन
उत्तर-
(अ) कुणी,
(ब) बछिया,
(स) पहरेदार
(द) ग्वालिन।

Class 8th Hindi Chapter 6 MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित गंद्याश को ध्यान से पढ़कर व्यक्तिवाचक, जातिवाचक और भाववाचक संज्ञाएँ छाँटकर लिखिए-
“विवेकानंद को कौन नहीं जानता? वे महान् विचारक, दार्शनिक और धार्मिक व्यक्ति थे। उनके विचार समाज का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उनके भाषणों में मधुरता, गंभीरता, मानवीयता और राष्ट्रीयता कूट-कूटकर भरी होती थी। भारत के महान् सपूतों “दयानंद सरस्वती, राजाराम मोहन राय” तथा ‘महात्मा गांधी’ जैसे महापुरुषों की सूची में उनकी गणना होती है।
उत्तर-

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा – विवेकानंद, भारत, दयानंद सरस्वती, राजाराम मोहन राय, महात्मा गाँधी
  • जातिवाचक संज्ञा – सपूत, महापुरुष
  • भाववाचक संज्ञा – मधुरता, गंभीरता, मानवीयता, राष्ट्रीयता।

MP Board Class 8 Chapter 6 Hindi प्रश्न 4.
विलोम शब्दों की सही जोड़ी बनाइए
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 6 हीरा-कुणी 1
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 6 हीरा-कुणी 2

MP Board Solutions Class 8 Hindi Chapter 6 प्रश्न 5.
रेखांकित संज्ञा शब्दों के स्थान पर नीचे दिए गए सर्वनामों में से उचित सर्वनाम शब्द चुनकर भरिए (वह, उसकी, उसके)
(अ) गाय का नाम था कुणी। गाय की एक महीने की बछिया थी।
(ब) हीरा के मन में बछिया के लिए दया नहीं जागती थी।
(स) राजा गाय का दूध पीकर आनंद मनाता था। राजा दयालु नहीं था।
उत्तर-
(अ) गाय का नाम था कुणी। उसकी एक महीने की बछिया थी।
(ब) उसके मन में बछिया के लिए दया नहीं जागती थी।
(स) राजा गाय का दूध पीकर आनंद मनाता था। वह दयालु नहीं था।

Class 8 Hindi MP Board Chapter 6 प्रश्न 6.
निम्नलिखित क्रियाओं के पूर्वकालिक क्रिया रूप बनाइए ण्ढ़ना, लिखना, हँसना, देखना, जागना, पीना, लाना।
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 6 हीरा-कुणी 3

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♦ प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. सूरज छिप गया। पक्षी पंख फैलाकर अपने बसेरों की ओर उड़ चले। किले के मध्य भाग में देव मंदिर के ऊपर साँझ का तारा दिखने लगा। हीरा रोकर मन-ही-मन कहने लगी-“काश, मुझे पंख मिल जाते और मैं अपने लाल के पास पहुँच जाती। वह दूध पिए बिना बिलख रहा होगा।”

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) के भाग-8 के पाठ-6 ‘हीरा-कुणी’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों के लेखक श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने ‘हीरा’ नामक ग्वालिन के वात्सल्य-भाव पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि-

व्याख्या-किले के अंदर बंद ‘हीरा’ अपने बच्चे के लिए तड़पने लगी। उस समय सूरज डूबना था। सभी पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौटने लगे थे। चारों ओर अंधेरा बढ़ने लगा था। हीरा ने किले के बीच में स्थित एक देव मंदिर देखा। उसने यह भी देखा कि उस मंदिर के ऊपर साँझ का तारा चमकने लगा है। इससे उसने यह समझ लिया कि अब रात हो रही है। फलस्वरूप अब अपने घर पहुँचना असंभव-सा है। वह मन-ही-मन यह अफसोस करने लगी कि उसके पास उड़ने के पंख नहीं हैं। यदि वे होते तो वह तुरंत ही यहीं से उड़कर अपने घर पहुँच जाती। फिर दूध पीने के लिए बिलख रहे अपने बेटे को दूध पिलायकर फूले नहीं समाती।

विशेष-

  • हीरा का वात्सल्य-भाव बिल्कुल स्वाभाविक और सही है।
  • भाषा की शब्दावली सरल है।

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 15 Maheshwar Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 15 Maheshwar Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 15 Maheshwar Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 15 महेश्वर प्रश्न उत्तर

महेश्वर बोध प्रश्न

Class 8 Hindi Chapter 15 Maheshwar प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोष से खोजकर लिखिए
उत्तर
संस्कृति = आचरणगत परम्परा, प्राचीन सभ्यता; पुराविद् = प्राचीन इतिहास आदि विषयों की जानकारी रखने वाला; सर्वतोन्मुखी = सभी तरह का प्रागैतिहासिक = इतिहास लिखे जाने से भी पहले के इतिहास से सम्बन्धित फलकपटल, तख्ता; अलंकरण = सजावट, पुरातात्विक = पुरातत्व सम्बन्धी उत्तरदायित्व-जिम्मेदारी; पाषाण पत्थर खननखुदाई: अवशेष = शेष भाग, वह जो बचा रहे।

MP Board Class 8 Hindi Chapter 15 प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
(क) महेश्वर का प्राचीन नाम क्या है?
उत्तर
महेश्वर का प्राचीन नाम माहेश्वरी अथवा माहिष्मती

(ख) महेश्वर मध्य प्रदेश के किस जिले में स्थित है?
उत्तर
महेश्वर मध्य प्रदेश के इन्दौर जिले में स्थित है। यह इन्दौर से लगभग 105 किलोमीटर दूर है।

(ग) महेश्वर की खुदाई में किस प्रकार की वस्तुएँ प्राप्त
उत्तर
महेश्वर की खुदाई में पुरातात्विक महत्त्व की अनेक वस्तुएँ और अवशेष प्राप्त हुए हैं।

(घ) हैहय साम्राज्य की स्थापना किसने की थी?
उत्तर
हैहय साम्राज्य की स्थापना कीर्तिवीर्य सहस्रार्जुन ने की थी।

(ङ) नर्मदा के तट पर किला और शिव का मन्दिर किसने बनवाया था?
उत्तर
नर्मदा के तट पर किला और शिव का मन्दिर महारानी अहिल्याबाई ने बनवाया था।

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Class 8 Hindi Chapter 15 MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(क) सहस्त्रार्जुन के वध का क्या कारण था ?
उत्तर
महेश्वर नगर को सूर्यवंशी राजा मान्धाता ने बसाया था। उनके बाद इस नगर पर कीर्तिवीर्य सहलार्जुन ने अपना आधिपत्य जमा लिया था। उसका साम्राज्य हैहय कहलाया और इस नगर को अपने साम्राज्य की राजधानी बनाया था। सहस्त्रार्जुन ने परशुराम जी के पिता ऋषि जमदग्नि का वध कर दिया। इसका बदला लेने के लिए भगवान परशुराम ने सहस्रार्जुन का अन कर दिया। इसके बाद यह स्थान इतिहास के गर्त में खो गया।

(ख) महारानी अहिल्याबाई के किन-किन कार्यों से । महेश्वर प्रसिद्ध हुआ?
उत्तर
इन्दौर की महारानी अहिल्याबाई ने महेश्वर को एक बार फिर से प्रसिद्धि प्रदान की। उन्हें यह स्थान बहुत ही प्रिय था।
उन्होंने इस स्थान पर नर्मदा के तट पर एक किला और भगवान शिव का विशाल मन्दिर बनवाया। यहाँ स्थित पवित्र शिवलिंग महेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है। मन्दिर में महारानी अहिल्याबाई द्वारा प्रज्वलित अखण्डदीप में यहाँ आने वाला प्रत्येक दर्शनार्थी घी डालकर स्वयं को धन्य समझता है। महेश्वर धार्मिक, पौरानिक, पुरातात्विक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सम्पदा से सम्पन्न है। महारानी अहिल्याबाई ने मराठों के शासनकाल में यहाँ सुन्दर घाटों, मन्दिरों, धर्मशालाओं तथा भवनों का निर्माण कराया। इस काल में महेश्वर का सर्वतोन्मुखी विकास हुआ। यह नगर रेशमी – साड़ियों के निर्माण के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है।

(ग) महारानी अहिल्याबाई को ‘लोकमाता’ के रूप में क्यों याद किया जाता है?
उत्तर
महारानी अहिल्याबाई ने महेश्वर नगर का सर्वतोन्मुखी विकास कराया। उन्होंने ही इसे प्रसिद्धि प्रदान करने के लिए महान् से महान् कार्य किए। नर्मदा के तटों पर सुन्दर घाटों का और मन्दिरों का निर्माण कराया। यहाँ का किला और शिवमन्दिर बहुत ही विशाल है। इस मन्दिर में दीप ज्योति निरनार जलती रहती है। इस दीप को महारानी अहिल्याबाई ने स्वयं प्रज्ज्वलित किया था। यहाँ पर देवदर्शन के लिए आने वाला प्रत्येक दर्शनार्थी परम शान्ति का अनुभव करता है। लोग प्रात: व सायं पवित्र जल वाली नर्मदा में स्नान करके नर नारी आरती की मधुर ध्वनि’ॐ नमः शिवाय:’ के मन्त्र में डूब से जाते हैं। यहाँ का वातावरण पवित्र है। यह प्राकृतिक सौन्दर्य से भरा है एवं मनोहारी है। इस सबके लिए वे महारानी अहिल्याबाई के ऋणी हैं। इसलिए उनें लोग ‘लोकमाता’ के रूप में मानते हैं।

(घ) पाषाणकालीन सभ्यता के लोग अपना जीवन किस प्रकार व्यतीत करते थे?
उत्तर
नर्मदा नदी की घाटी में पाषाणकालीन सभ्यता के पत्थर से निर्मित औजार मिले हैं। प्रागैतिहासिक काल के पुरा-अवशेषों से पता चलता है कि उस समय यहाँ के लोग घास-फूस के झोंपड़ों में या पेड़ों पर बने घरों में रहते थे। उस समय की पाई गई वस्तुओं में लाल और काले रंग के मिट्टी के बर्तनों और घड़ों के टुकड़े प्रमुख हैं। सम्भवतः वे अपनी सुरक्षा की दृष्टि से पेड़ों पर या ऊँची जमीन पर अपने घर बनाते थे। यह भी सत्य है कि पापणकाल के लोग नदियों, तालाबों आदि के किनारे ही असते रहे हैं, क्योंकि इन स्थानों पर उनकी आवश्यकता की सारी वस्तुएँ आसानी से प्राप्त हो जाती थी।

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Bhasha Bharti Class 8 Chapter 15 प्रश्न 4.
रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्दों द्वारा कीजिए
नर्मदा, रेशम, पुरातात्विक, महेश्वर।
(क) महेश्वर की खुदाई में ……. महत्व की वस्तुएँ
(ख) महारानी अहिल्याबाई ने ……… में किला और शिव मन्दिर बनवाया था।
(ग) महेश्वर की बनी ….. की साड़ियाँ प्रसिद्ध हैं।
(घ) महेश्वर ……….. नदी के किनारे बसा है।
उत्तर
(क) पुरातात्विक
(ख) महेश्वर
(ग) रेशमी
(घ) नर्मदा

महेश्वर भाषा-अध्ययन

Hindi Chapter 15 Class 8 MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और वाक्यों में प्रयोग कीजिए
आशीवाद, सहस्रार्जुन, संस्कृति, ऋषि, जमदग्नि, दर्शनार्थी, प्रज्ज्वलित, पुरातात्विक।
उत्तर
विद्यार्थी उपर्युक्त शब्दों को वीक-ठीक पढ़कर उनका शुद्ध उच्चारण करने का अभ्यास करें।
वाक्य-प्रयोग-

  1. देवदर्शन करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
  2. सहस्त्रार्जुन ने ऋषि जमदग्नि का वध कर दिया था।
  3. भारतीय संस्कृति पूरे संसार में अपना प्रभाव जमाए
  4. ऋषि धौम्य महान् त्यागी और लोकरंजक थे।
  5. जमदग्नि, भगवान परशुराम के पिता थे।
  6. शिव मन्दिर में दर्शनार्थियों की भीड़ लगी रहती है।
  7. गाँवों में सायंकाल को घर-घर में दीप प्रज्ज्वलित किए जाते हैं।
  8. महेश्वर पुरातात्विक महत्त्व का नगर है।

Lesson 8 Maheshwar Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह करके, उनके सामने समास का नाम लिखिए.
लोकमाता, मधुर ध्वनि, नर-नारी, विशाल मन्दिर, अखण्ड दीप, महारानी।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 1
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 2

Maheshwar Ka Prachin Naam Kya Hai प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्ग छाँटकर लिखिए
अखण्ड, अवशेष, प्रसिद्ध, अनुशासन, विज्ञान।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 3

भाषा भारती कक्षा 5 Solutions Chapter 15 प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के सन्धि-विच्छेद कीजिए और उनके सामने सन्धि का नाम लिखिए
महेश्वर, मनोहर, आशीर्वाद, दर्शनार्थी।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 4

Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 15 प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों में से उद्देश्य और विधेव छाँटकर लिखिए
(क) इन्दौर की महारानी अहिल्याबाई ने सुन्दर घाटों, मन्दिरों और धर्मशालाओं का निर्माण कराया था।
(ख) पाषाणकालीन सभ्यता के औजार नर्मदा के घाटों को खुदाई में मिले हैं।
(ग) महेश्वर की सिल्क साड़ियाँ बहुत प्रसिद्ध है।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 5
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 6

Class 8th Hindi Chapter 15 प्रश्न 6.
सही जोड़ी बनाइए
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 7
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 महेश्वर 8
उत्तर
(क) → (2), (ख) → (3), (ग) → (5), (घ)→ (1), (ङ)→(4)

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Maheshwar Kis Jile Mein Hai प्रश्न 7.
प्रधानाध्यापक को एक पत्र लिखिए, जिसमें महेश्वर दर्शनीय स्थल पर भ्रमण-दल ले जाने का अनुरोध कीजिए।
उत्तर
विद्यार्थी स्वयं लिखें।

महेश्वर परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या  

(1) महेश्वर धार्मिक, पौराणिक, पुरातात्विक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सम्पदा से सम्पन्न है। यहाँ नर्मदा – घाटी में पाषाणकालीन सभ्यता के औजार मिले हैं। प्रागैतिहासिक काल के पुरा-अवशेषों से पता चलता है कि उस समय यहाँ के लोग घास-फूस के झोंपड़ों में या पेड़ों पर बने घरों में रहते थे। उस समय की पाई गई वस्तुओं में लाल और काले रंग के मिट्टी के बरतनों और घड़ों के टुकड़े प्रमुख हैं। ईसा पूर्व की चौथी सदी से लेकर पहली सदी तक का समय महेश्वर के इतिहास में महत्त्वपूर्ण है। इस समय के भवनों के अवशेष यहाँ मिले हैं। इन भवनों में ईंटों का प्रयोग किया गया

शब्दार्थ-पुरातात्विक पुरातत्व सम्बन्धी ऐतिहासिक इतिहास सम्बन्धी; सम्पदा = सम्पत्ति; सम्पन्न – युक्त, सहित; प्रागैतिहासिक = लिखित इतिहास से पहले के इतिहास से सम्बन्धित काल-युग,समय;पुरा-प्राचीन काल के अवशेष = वह जो बचा रहे, शेष भाग;
प्रमुख = मुख्य भवनों = घरों।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के पाठ ‘महेश्वर’ से अवतरित है।

प्रसंग-नर्मदा घाटी के महेश्वर नगर की प्रागैतिहासिक संस्कृति के विषय में वर्णन किया गया।

व्याख्या-महेश्वर नगर धर्म और पुराण सम्बन्धी सम्पदा से युक्त स्थान है। यह पुरातत्व सम्बन्धी, प्राचीन आचार-विचार सम्बन्धी एवं इतिहास से सम्बन्ध रखने वाली सम्पत्ति से भरपूर स्थान है। यह नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। इस नदी की घाटी में पत्थर के युग (पाषाण युग) की सभ्यता से सम्बन्ध रखने वाले औजार प्राप्त हुए हैं। इतिहास लिखे जाने की पद्धति से भी पूर्व के इतिहास सम्बन्धी समय (युग) के अति प्राचीन शेष भाग से ज्ञात होता है कि उस समय में वहाँ के रहने वाले लोग घास और फंस से बनाए गए झोंपड़ों में रहते थे अथवा वे लोग उन घरों में रहते थे जो पेड़ों पर बनाए जाते थे। ये स्थान वे हैं जब लोग अपनी सुरक्षा के लिए पेड़ों पर अपने निवास बनाते थे। नगरीय सभ्यता या गाँवों में सामूहिक रूप में रहने की सभ्यता का उस समय तक विकास नहीं हुआ था। उस युग की पाई जाने वाली वस्तुओं में लाल और काले रंग के मिट्टी के बरतन तथा घड़ों के टुकड़ें मुख्य हैं। महेश्वर नगर का इतिहास ईसा पूर्व की चौथी सदी से लेकर पहली सदी तक अति महत्त्वपूर्ण है। उस काल के भवनों के खण्डहर अभी तक अवशेष के रूप में प्राप्त हुए हैं। इन भवनों का निर्माण ईंटों से किया गया है। .

(2) मराठों के शासनकाल में महारानी अहिल्याबाई ने यहाँ सुन्दरघाटों, मन्दिरों, धर्मशालाओं तथा भवनों का निर्माण कराया। उनके काल में महेश्वर का सर्वतोन्मुखी विकास हुआ। एक बार तो मैं भूला ही जा रहा था। यहाँ की बनी रेशमी साड़ियाँ महेश्वरी साड़ियों के नाम से प्रसिद्ध हैं। महेश्वर के बारे में जितना भी लिखू कम

शब्दार्थ-निर्माण कराया = बनवाये; सर्वतोन्मुखी = सभी तरह का; विकास = बढ़ोत्तरी।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-महारानी अहिल्याबाई के द्वारा महेश्वर नगर में कराए गए विकास कार्यों के बारे में बताया गया है।

व्याख्या-मराठों के शासन काल में जो निर्माण कार्य यहाँ किया गया है, वह बेजोड़ था। महारानी अहिल्याबाई ने नर्मदा नदी के घाटों, मन्दिरों तथा धर्मशालाओं का निर्माण कराया। इसके अलावा यहाँ बहुत ही अच्छे भवनों का निर्माण किया गया। महेश्वर नगर में अपने शासन काल में सभी तरह के विकास का कार्य किया गया। लेखक यहाँ बताना नहीं भूला है कि यहाँ पर रेशम की बनी साड़ियाँ बहुत अच्छी होती हैं। इन साड़ियों को महेश्वरी साड़ियाँ कहते हैं। महेश्वर नगर के विषय में जितना भी | लिखा जाय, वह कम ही है।

MP Board Class 8 Hindi Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 8 Madhya Pradesh ke Gaurav Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 8 Madhya Pradesh ke Gaurav Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 8 Madhya Pradesh ke Gaurav Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 8 मध्य प्रदेश के गौरव प्रश्न उत्तर

प्रश्न अभ्यास

अनुभव विस्तार

Class 8 Hindi Chapter 8 MP Board प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) मध्यप्रदेश की दो – 1. भोपाल की गुलियादाई गली विभूतियाँ। में जन्में।
(ब) डॉ. शंकर दयाल शर्मा – 2. डॉ. शंकर दयाल शर्मा, अटल का जन्म बिहारी वाजपेयी।
(स) अटल बिहारी वाजपेयी – 3. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से विधि में पी-एच. डी. की।
(द) डॉ. शंकर दयाल – 4. ग्वालियर जिले में हुआ। शर्मा ने
उत्तर-
(अ) – 1
(ब) – 2
(स) – 3
(द) – 4

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MP Board Class 8 Hindi Chapter 8 प्रश्न 2.
दिए गए विकल्पों से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(अ) डॉ. शंकर दयाल शर्मा का जन्म …………………………………. ई. को हुआ था। (19 अगस्त 1918, 29 अगस्त 1928)
(ब) डॉ. शर्मा तैराकी में …………………………………. के चैम्पियन रहे थे। (विक्रम विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय)
(स) अटल बिहारी वाजपेयी की माताजी का नाम …………………………………. था। (कृष्णा देवी, राधा देवी)
(द) अटल जी के विशेष कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें …………………………………. से अलंकृत किया। (पद्मश्री, पद्मभूषण)
उत्तर-
(अ) 19 अगस्त, 1918,
(ब) लखनऊ विश्वविद्यालय,
(स) कृष्ण देवी,
(द) पद्मभूषण।

MP Board Class 8th Hindi Chapter 8 प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) डॉ. शर्मा लोगों से किस प्रकार मिलते थे?
(ब) डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने भारत के किस गरिमामय सर्वोच्च पद को सुशोभित किया था?
(स) अटल जी ने किन-किन पत्रों का संपादन किया?
(द) अटल बिहारी वाजपेयी प्रथम बार प्रधानमंत्री कब बने?
उत्तर-
(अ) डॉ. शर्मा लोगों से अपने परिवार के सदस्य की तरह मिलते थे?
(ब) डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने भारत के राष्ट्रपति गरिमामय सर्वोच्च पद को सुशोभित किया था।
(स) अटल जी ने ‘राष्ट्रधर्म’, ‘स्वदेश’, ‘पाञ्चजन्य’ और ‘वीर अर्जुन’ का संपादन किया।
(द) अटल बिहारी वाजपेयी प्रथम बार 1996 में प्रधान मंत्री बने।

Hindi Chapter 8 Class 8 MP Board प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न(अ)डॉ. शंकर दयाल शर्मा की शिक्षा के बारे में लिखिए।
उत्तर-
डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने अपने यशस्वी जीवन की शैक्षिक यात्रा में स्वयं को मेधावी छात्र के रूप में निरंतर प्रमाणित किया। आपने हिन्दी, अंग्रेजी और संस्कृत साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधियाँ प्रथम श्रेणी में प्राप्त की। लखनऊ विश्वविद्यालय से एल.एल.एम. तथा कैंब्रिज विश्वविद्यालय से कानून में पी-एच. डी. की उपाधि प्राप्त की।

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(ब) डॉ. शर्मा ने किन-किन पुस्तकों की रचना की?
उत्तर-
डॉ. शर्मा ने ‘प्रतिष्ठित भारतीय’, ‘हमारे चिंतन की मूलधारा’ और ‘देश-मणि’ पुस्तकों की रचना की।

(स) डॉ. शंकर दयाल शर्मा जन समान्य से कब मिलते थे?
उत्तर-
डॉ. शंकर दयाल शर्मा जन समान्य से प्रातः 9 बजे से अपराह्न 1:30 तक प्रतिदिन मिलते थे।

(द) अटल जी की काव्य-सृजन में रुचि कैसे जागृत हुई?
उत्तर-
अटल जी के पिता श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी अध्यापक एवं कवि थे। अपने पिता की रचनाएँ पढ़ते-पढ़ते अटल जी तुकबन्दी करने लगे। उनकी रचनाओं की प्रशंसा होने लगी तो हिन्दी साहित्य सभा की गोष्ठियों में जाने लगे। उन दिनों घनाक्षरी और सवैया छंद विशेष पसंद किए जाते थे। अटल ने ब्रजभाषा में रचनाएँ कीं।।

(ई) अटल जी की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर-
‘मेरी इक्यावन कविताएँ’, ‘कैदी कविराय की कुंडलियाँ’, ‘न दैन्यं न पलायनम्’, ‘मेरी संसद यात्रा’ आदि अटल जी की प्रमुख रचनाएँ हैं।

भाषा की बात

Class 8 Chapter 8 Hindi MP Board प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएप्रतिनिधि, विश्वविद्यालय, स्वतंत्रता-संग्राम, सर्वोच्च।
उत्तर-
प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय, स्वतंत्रता-संग्राम, सर्वोच्च।

Class 8 MP Board Hindi Chapter 8 प्रश्न 2.
सही वर्तनी वाले शब्दों पर गोला लगाइए
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 8 मध्य प्रदेश के गौरव 1
उत्तर-
साहित्य, उत्तीर्ण, राष्ट्रपति, ग्वालियर।

Class 8th Hindi Chapter 8 MP Board प्रश्न 3.
नीचे दिए वाक्यों में क्रिया विशेषण के शब्द छाँटकर लिखिए
1. वे धूप में बाहर बैठे थे। ………………………….
2. वह थोड़ा लुढ़क गया। ………………………….
3. लड़की जोर-जोर से चीख रही थी। ………………………….
4. राम अपनी बहन को बहुत सता रहा था। ………………………….
उत्तर-
1. बाहर,
2. थोड़ा,
3. जोर-जोर से,
4. बहुत।

MP Board Class 8 Subject Hindi Chapter 8 प्रश्न 4.
उदाहरण के अनुसार नीचे लिखे शब्दों में से मूल शब्द और प्रत्यय अलग कीजिए।
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 8 मध्य प्रदेश के गौरव 2

♦प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. डॉ. शर्मा देश के स्वाधीनता संग्राम के अग्रणी योद्धा और साक्षी रहे हैं। आपने अपने राजनीतिक जीवन से भारत के महान व्यक्तियों की गौरवशाली परंपरा को सार्थक बनाया। आप जिन सार्वजनिक पदों पर आसीन हुए, आपने उनमें आध्यात्मिक और लौकिक मूल्यों का साहसिक संतुलन बनाए रखा। डॉ. शर्मा ने जब भी जहाँ भी राजनीति में नैतिक मूल्यों का क्षरण होते देखा, वहाँ अपना विवेकपूर्ण हस्तक्षेप अवश्य किया। आपने अवमूल्यित राजनीति के संदर्भ में सदैव वैचारिक जिज्ञासा, सांस्कृतिक आत्मविश्वास तथा सृजनात्मक विमर्श के प्रतिमानों को अनेक मंचों से अभिव्यक्ति प्रदान की।

शब्दार्थ-सर्वोच्च-सबसे ऊँचा। अग्रणी-आगे चलने वाले। साक्षी-गवाह। गौरवशाली-महत्त्वपूर्ण। आसीन-पद पर नियुक्त। संतुलन-मेल। नैतिक-नीति संबंधी। क्षरण-कमजोर। अवमूलित-मूल्य में कमी हुई। जिज्ञासा-जानने की इच्छा। सृजनात्मक-रचनात्मक। विमर्श-विवेचन, तर्क, ज्ञान। अभिव्यक्ति-प्रकाशन।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिन्दी सामान्य) भाग-8 के पाठ-8 ‘मध्य-प्रदेश के गौरव’ से ली गई हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा की महान् विशेषताओं के बारे में कहा है कि-

व्याख्या-डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने देश की आजादी के लिए किए गए संघर्षों में बहुत बड़ी भूमिका निभायी। इसके वे आगे चलने वाले एक महान योद्धा और गवाह थे। यही नहीं उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन से भी अपनी एक अलग ही पहचान कायम की। इसके द्वारा उन्होंने स्वयं को भारत के महान् राजनेताओं की चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाने में अपना महान् योगदान दिया। इसी प्रकार वे सार्वजनिक रूप में भी लोकप्रिय हुए। इसके लिए वे जिन-जिन सार्वजनिक पदों के अधिकारी बने, उनमें आपने आध्यात्मिक और साहसिक संतुलन बनाने में अपनी कोई कसर नहीं छोड़ी। जहाँ-जहाँ उन्होंने राजनीतिक मूल्यों में नैतिक मूल्यों को कमजोर पड़ते हुए देखा, वहाँ-वहाँ उन्होंने अपने बुद्धि-बल से उसे संमुलित बनाने की पूरी-पूरी कोशिश की। इस प्रकार उन्होंने राजनीतिक मूल्यों के घटते स्तर को बड़ी गंभीरता से देखा और समझा। फिर उसे दूर करने के लिए अपने विचारों, सांस्कृतिक आत्मविश्वासों और रचनात्मक ज्ञान-तर्क के द्वारा बार-बार प्रयास किया।

विशेष-

  • डॉ. शंकर दयाल शर्मा को प्रेरक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  • शब्द-प्रयोग कठिन हैं।

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Question Answer

MP Board Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 3 Ahinsa ki Vijay Question and Answer

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Class 8 Hindi Sugam Bharti Chapter 3 Ahinsa ki Vijay Question Answer MP Board

Hindi Sugam Bharti 8 Solutions Chapter 3 Ahinsa ki Vijay Question Answers MP Board

सुगम भारती कक्षा 8 पाठ 3 अहिंसा की विजय प्रश्न उत्तर

प्रश्न-अभ्यास

अनुभव विस्तार

MP Board Class 8 Hindi Chapter 3 प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
(अ) मगध की राजधानी – 1. श्रावस्ती
(ब) कोसल की राजधानी – 2. राजगृह
(स) महात्मा बुद्ध का शिष्य – 3. अंगुलिमाल
(द) डाकू का नाम – 4. प्रसेनजित
उत्तर-
(अ) 2,
(ब) 5,
(स) 4,
(द) 3

(ख) दिए गए विकल्पों से सही शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूरि कीजिए।
(अ) महात्मा बुद्ध ने ……………… को धीरज बँधाया। (राजा, प्रजा)
(ब) अंगुलिमाल ……………. डाकू था। (सीधा-सादा, भयंकर)
(स) महात्मा बुद्ध ने अँगुलिमाल डाकू से ………………. कहा। (प्रेमपूर्वक, शान्तिपूर्वक)
उत्तर-
(अ) राजा,
(ब) भयंकर,
(स) प्रेमपूर्वक।

Class 8 Hindi Chapter 3 MP Board प्रश्न 2.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) राजा प्रसेनजित क्यों चिंतित थे?
(ब) महात्मा बुद्ध ने डाकू को कैसे पहचाना?
(स) ‘ठहर जा’ किसने किससे कहा था?
(द) महात्मा बुद्ध के चेहरे पर सदैव मुस्कान क्यों रहती थी?
उत्तर-
(अ) राजा प्रसेनजित डाकू अँगुलिमाल के अत्याचार से चिंतित थे।
(ब) महात्मा बुद्ध ने डाकू को उसके भयंकर रूप से पहचाना।
(स) ‘ठहरा जा’ डाकू अँगुलिमाल ने महात्मा बुद्ध से कहा था।
(द) महात्मा बुद्ध के चेहरे पर सदैव मुस्कान अपने ज्ञान से रहती थी।

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MP Board Class 8th Hindi Chapter 3 प्रश्न 3.
लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) डाकू का नाम अंगुलिमाल क्यों पड़ा?
उत्तर-
(अ) अंगुलिमाल ने हजार आदमियों की हत्या करने की प्रतिज्ञा कर रखी थी। परंतु वह कितने आदमी मार चुका, इसका हिसाब रखना उसके लिए कठिन काम था। इसके लिए उसने एक युक्ति निकाली। वह जब भी किसी का वध करता तो उसकी एक अँगुली काट लेता। इस प्रकार उसके पास अँगुलियों की एक माला-सी बनती जा रही थी जिसे वह गले में डाले रहता। इसी कारण उसका नाम ‘अँगुलिमाल’ पड़ गया था।

(ब) पहरेदार के रोकने पर भी महात्मा बुद्ध जंगल में क्यों प्रवेश कर गए?
उत्तर-
(ब) पहरेदार के रोकने पर भी महत्मा बुद्ध जंगल में प्रवेश कर गए। यह इसलिए कि

  • उनका हृदय संसार के कष्टों को देखकर दुखी था।
  • उन्हें आत्मज्ञान हो गया। फलस्वरूप उन्हें किसी की चिंता नहीं थी और न उन्हें कोई डर ही था।

(स) महात्मा बुद्ध जंगल में जाते समय क्या विचार कर रहे थे?
उत्तर-
(स) महात्मा बुद्ध जंगल में जाते समय विचार कर रहे थे

“आदमी आदमी को क्यों मारता है? जीव, जीव को देखकर प्रसन्न क्यों नहीं होता?

(द) अँगुलिमाल का हृदय-परिवर्तन कैसे हुआ?
उत्तर-
(द) महात्मा बुद्ध ने अँगुलिमाल को शान्ति, दया और प्रेम का उपदेश दिया। इससे उसकी आँखें खुल गईं। उसके मन का अंधकार दूर हो गया। उसने अँगुलियों की माला तोड़ दी और कटार फेंक दी। उसने हिंसा का जीवन हमेशा के लिए छोड़ दिया। इस तरह उसका हृदय-परिवर्तन हुआ और वह महात्मा बुद्ध का शिष्य बन गया।

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भाषा की बात

Class 8 MP Board Hindi Chapter 3 प्रश्न 1.
बोलिए और लिखिएप्रतिभा, त्रस्त, त्राहि-त्राहि, युक्ति, निशस्त्र।
उत्तर-
प्रतिभा, त्रस्त, त्राहि-त्राहि, युक्ति, निशस्त्र।

Hindi Chapter 3 Class 8 MP Board प्रश्न 2.
सही वर्तनी पर गोला लगाइए
(अ) परसेनजित, प्रसेनजित, प्रसेनजत।
(ब) वर्तमान, वरतमान, वतर्मान।
उत्तर-
(अ) प्रसेनजित,
(स) वर्तमान।

Chapter 3 Hindi Class 8 MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिएधीरज, सावधान, चीख-पुकार, चिंता, दृष्टि, प्रेमपूर्वक
उत्तर-
वाक्य-प्रयोग
शब्द – वाक्य
धीर- हमें विपत्ति में धीरज रखना चाहिए।
सावधान – सावधान होकर पढ़ो।
चीख-पुकार – दुर्घटना में चीख-पुकार होती है।
चिंता – महँगाई ने गरीबों की चिंता बढ़ा दी।
दृष्टि – हमें दया की दृष्टि रखनी चाहिए।
प्रेमपूर्वक – प्रेमपूर्वक रहने में ही आनंद है।

MP Board Hindi Class 8 Chapter 3 प्रश्न 4.
विपरीतार्थी शब्दों की जोड़ी बनाइए-
जन्म – दुखी
सुखी – अशांति
हिंसा – कठिन
सरल – मरण
शांति – अहिंसा
उत्तर-
विपरीतार्थी शब्दों की जोड़ी
जन्म – मरण
सुखी – दुखी
हिंसा – अहिंसा
सरल – कठिन
शांति – अशांति

Class 8th Hindi Chapter 3 MP Board प्रश्न 5.
समानार्थी शब्द पर गोला लगाइए
(1) पेड़ – वृक्ष, पानी, आग, जंगल
(2) राह – राजा, तरू, रास्ता, हवा
(3) आँख – सागर, नदी, नभ, नेत्र।
उत्तर-
समानार्थी शब्द
(1) पेड़ – वृक्ष
(2) राह – रास्ता
(3) आँख – नेत्र।

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Class 8 Hindi MP Board Chapter 3 प्रश्न 6.
निम्नलिखित पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए और संज्ञा, विशेषण और क्रिया छाँटकर तालिका में लिखिए-
महात्मा बुद्ध रुक गए। तुरंत ही घनी झाड़ियाँ चीरती हुई एक विकराल मूर्ति आ खड़ी हुई। ऊँचा कद, काला शरीर, भयानक चेहरा, लाल आँखें, बिखरे बाल, बड़ी-बड़ी मूंछे, लंबी मजबूत भुजाएँ चौड़ा सीना, हाथ में कटार।
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 3 अहिंसा की विजय 1

प्रमुख गद्यांशों की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

1. ‘आदमी आदमी को मारता क्यों है? जीव, जीव को देखकर प्रसन्न क्यों नहीं होता?’ इन्हीं बातों पर विचार करते हुए महात्मा बुद्ध जंगल की राह बढ़े जा रहे थे कि अचानक उन्हें कोई कठोर और भारी आवाज़ सुनाई दी, ‘ठहर जा।’

शब्दार्थ-जीव-प्राणी। राह-रास्ता।

संदर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) भाग-8 के पाठ-3 ‘अहिंसा की विजय’ से ली गई है। इसके लेखक श्री भगवतशरण उपाध्याय हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने हिंसा के प्रति महात्मा बुद्ध के विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-महात्मा बुद्ध को अँगुलिमाल डाकू के अत्याचारों को सुनकर के बड़ी चिंता हुई। वे बार-बार यह सोचने लगे कि एक आदमी दूसरे से मिलकर रहने की बजाय उसे क्यों कष्ट पहुँचाता है। वह उसे क्यों मारता है? एक प्राणी को दूसरे प्राणी को देखकर प्रसन्न होना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होता है, क्यों? इस तरह सोचते-विचारते हुए महात्मा बुद्ध अँगुलिमाल डाकू की ओर जंगल में आगे बढ़ रहे थे। उसी समय उन्हें एक भयंकर और भारी आवाज में रोकते हुए कहा, “ठहर जाओ। अब और आगे न बढ़ो।”

  • सांसारिक कष्टों को बड़े ही सटीक रूप में व्यक्त किया गया है।
  • भाषा-शैली आकर्षक है।

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2. महात्मा बुद्ध ने उस पर अपनी दृष्टि डाली। उनकी नज़र में भय न था, प्यार था। उन्होंने प्रेमपूर्वक उस भयानक डाकू से कहा- “मैं तो ठहर गया, भला तू कब ठहरेगा?”

शब्दार्थ-दृष्टि-नज़र। भय-डर।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-इन पंक्तियों में लेखक ने महात्मा बुद्ध की दया-दृष्टि पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि
व्याख्या-जब अंगुलिमाल डाकू ने महात्मा बुद्ध को अपनी भयंकर और कठोर आवाज़ में रोकते हुए कहा, तब उन्होंने उसे बुरा नहीं माना। उन्होंने तो उसे अपनी दया दृष्टि से ही देखा। दूसरी बात यह कि वे उससे तनिक भी नहीं डरे। इस प्रकार उन्होंने उसे बड़े प्यार से यह प्रश्न किया, “अब तो मैं ठहर गया हूँ, लेकिन अब तुम मुझे यह बतलाओ कि तुम कब ठहरोगे?”

विशेष-

  • यह अंश प्रेरक है।
  • वाक्य प्रभावशाली है।

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