MP Board Class 10th Sanskrit निबन्ध-लेखन प्रकरण

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MP Board Class 10th Sanskrit निबन्ध-लेखन प्रकरण

१. सदाचारः
(आचारः परमो धर्म:/आचारस्य महत्त्वम्)

अस्माकं भारतीया संस्कृतिः आचार-प्रधाना अस्ति। आचारः द्विविधः भवति-दुराचारः सदाचारः च। सताम् आचारः सदाचारः इत्युच्यते। सज्जनाः विद्वांसो च यथा आचरन्ति तथैव आचरणं। सदाचारो भवति। सज्जनाः स्वकीयानि इन्द्रियाणि वशे कृत्वा सर्वैः सह शिष्टतापूर्वकं व्यवहारं कुर्वन्ति। ते सत्यं वदन्ति, मातुः पितुः गुरुजनां वृद्धानां ज्येष्ठानां च आदरं कुर्वन्ति, तेषाम् आज्ञां पालयन्ति, सत्कर्मणि प्रवृत्ता भवन्ति।

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जनस्य समाजस्य राष्ट्रस्य च उन्नत्यै सदाचारस्य महती आवश्यकता वर्तते। सदाचारस्याभ्यासो बाल्यकालादेव भवति। सदाचारेण बुद्धिः वर्तते नरः धार्मिकः, शिष्टो, विनीतो, बुद्धिमान् च भवति। संसारे सदाचारस्यैव महत्त्वं दृश्यते। ये सदाचारिणः भवन्ति, ते एव सर्वत्र आदरं लभन्ते। यस्मिन् देशे जनाः सदाचारिणो भवन्ति तस्यैव सर्वतः उन्नतिर्भवति। अतएव महार्षिभिः “आचारः परमो धर्मः” इत्युच्यते। सदाचारी जनः परदारेषुमातृवत् परधनेषु लोष्ठवत्, सर्वभूतेषु च आत्मवत् पश्यति। सदाचारीजनस्य शीलम् एव परमं भूषणम् अस्ति। हिन्दी अनुवाद- सदाचार (आचार परम धर्म है/आचार का महत्व) हमारी भारतीय संस्कृति आचार (व्यवहार) प्रधान है। आचार दो प्रकार का होता है-दुराचार और सदाचार। सज्जनों का आचार, सदाचार’ कहा जाता है। सज्जन और विद्वान जैसा व्यवहार करते हैं वैसा ही आचरण सदाचार होता है। सज्जन अपनी इन्द्रियों को वश में करके सभी के साथ शिष्टतापूर्वक व्यवहार करते हैं। वे सत्य बोलते हैं, माता, पिता, गुरुजन, वृद्धों और बड़ों का आदर करते हैं, उनकी आज्ञा का पालन करते हैं, अच्छे कार्यों में लगते हैं। – व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की उन्नति के लिए सदाचार की बहुत आवश्यकता है। सदाचार की आदत बचपन से ही होती है। सदाचार से बुद्धि बढ़ती है, मनुष्य धार्मिक, सभ्य, नम्र और बुद्धिमान होता है। संसार में सदाचार का ही महत्व दिखाई देता है। जो सदाचारी होते हैं, वे ही सब जगह सम्मान पाते हैं। जिस देश में लोग सदाचारी होते हैं उसकी ही सब प्रकार से उन्नति होती है। इसलिए ही महर्षियों के द्वारा “आचार परम धर्म है” यह कहा गया है। सदाचारी व्यक्ति दूसरे की स्त्रियों को माता के समान, दूसरे के धन को मिट्टी के ढेले के समान और सभी प्राणियों को अपने समान देखता है। सदाचारी व्यक्ति का व्यवहार ही सबसे बड़ा आभूषण होता है।

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२. महाकवि कालिदासः
(मम प्रियः कविः)

महाकविः कालिदासः मम प्रियः कविः अस्ति। सः संस्कृत भाषायाः श्रेष्ठतमः कविः अस्ति। यादृशः रस-प्रवाहः कालिदासस्य काव्येषु विद्यते तादृशः अन्यत्र नास्ति। सः कविकुलशिरोमणिः अस्ति। कालिदासेन त्राणीनाटकानि, (मालविकाग्निमित्रम्, विक्रमोर्वशीयम्, अभिज्ञानशाकुन्तलम् च) द्वे महाकाव्ये (रघुवंशम् कुमारसम्भव च) द्वि गीतिकाव्ये (मेघदूतम् ऋतुसंहारम् च) च रचितानि।

कालिदासस्य लोकप्रियतायाः कारणं तस्य प्रसादगुणयुक्ता ललिता शैली अस्ति। कालिदासस्य प्रकृतिचित्रणं अतीवरम्यम् अस्ति। चरित्रचित्रणे कालिदासः अतीव पटुः अस्ति।

कालिदासः महाराजविक्रमादित्यस्य सभाकविः आसीत्। अनुमीयते यत्तस्य जन्मभूमिः उज्जीयनी आसीत्। मेघदूते उज्जयिन्याः भव्यं वर्णनं विद्यते। कालिदासस्य कृतिषु कृत्रिमतायाः अभावः अस्ति। कालिदासस्य उपमा प्रयोगः अपूर्वः अतः साधूच्यते-‘उपमा कालिदासस्य।’ हिन्दी अनुवाद- महाकवि कालिदास (मेरा प्रिय कवि) महाकवि कालिदास मेरे प्रिय कवि हैं। वह संस्कृत भाषा के श्रेष्ठतम् कवि हैं। जैसा रस का प्रवाह कालिदास के काव्यों में है वैसा दूसरे स्थान पर नहीं है। यह कवियों के कुल के शिरोमणि हैं। कालिदास ने तीन नाटक (मालविकाग्निमित्र, विक्रमोर्वशीय और अभिज्ञानशाकुन्तलम्) दो महाकाव्य (रघुवंश और कुमारसम्भव) और दो गीतिकाव्य रचे हैं। ___कालिदास की लोकप्रियता का कारण उनकी प्रसादगुण युक्त ललित शैली है। कालिदास का प्रकृति चित्रण बहुत सुन्दर है। चरित्र-चित्रण में कालिदास बहुत चतुर हैं। .. … कालिदास महाराज विक्रमादित्य के सभाकवि थे। माना जाता है कि इनकी जन्मभूमि उज्जयिनी थी। मेघदूत में उज्जयिनी का भव्य वर्णन है। कालिदास की रचनाओं में कृत्रिमता का अभाव है। कालिदास की उपमा का प्रयोग अनोखा है। इसलिए ठीक ही कहा गया है कि-“उपमा कालिदास की (सर्वश्रेष्ठ है)।”

३. विद्या-महिमा
(विद्याधनं सर्वधन-प्रधानम्/विद्या ददाति विनयम्/विद्या विहीनः – पशुः/विद्या सर्वस्य भूषणम्)

कस्यापि विषयस्य सम्यग् ज्ञानं यया भवति या विद्या कथ्यते।

अतः विद्यया एव मनुष्यः सत्य-असत्यं च जानाति। विद्या विनयं ददाति। पुरुषः विनयात् पात्रताम् आयाति। पात्रतया सः धनं प्राप्नोति, धनेन धर्म, धर्मेण च सुखं लभते। एतेन कारणेन सुखस्य आधारः विद्या एव अस्ति। . विद्या धनंव्यये कृते वृद्धिमायाति परन्तु संचये कृते क्षयमायाति। अतः विद्या अपूर्वं धनमस्ति। इदम् धनं चौरः हत्तुं न शक्नोति भ्राता विभाजयितुं न समर्थोऽअस्ति। विद्यावान् पुरुषः सर्वत्र उच्च स्थान प्राप्नोति। राजा केवलं स्वदेशेपूज्यते परन्तु विद्वान् सर्वत्र पूज्यते। विद्या अज्ञानस्य तिमिरं दूरीकरोति ज्ञानस्य प्रकाशं प्रसारयति च।

विद्या एव जगति मनुष्यस्य उन्नतिं करोति। विद्या एव कीर्तिं धनं च ददाति। विद्या वस्तुतः कल्पलता इव विद्यते। विदेशगमने विद्या परमसहायिका भवति। यस्य समीपे विद्या नास्ति सः नेत्रयुक्तः अपि अन्धः एव। विद्या माता इव रक्षति पिता इव हिते नियुङ्क्ते। हिन्दी अनुवाद- विद्या-महिमा (विद्या धन सभी धनों में प्रधान है/विद्या विनय देती है/विद्यो से विहीन पशु है/विद्या सभी का आभूषण है) – किसी भी विषय का उचित ज्ञान विद्या से होता है। अतः विद्या से ही मनुष्य सत्य और असत्य को जानता है। विद्या विनय देती है। पुरुष में विनय से पात्रता आती है। पात्रता से वह धन पाता है, धन से धर्म और धर्म से सुख प्राप्त करता है। इस कारण से सुख का आधार विद्या ही है। – विद्या धन व्यय करने पर वृद्धि को प्राप्त होता है किन्तु संचय करने पर कम होता जाता है। इसलिए विद्या धन अद्भुत धन है। इस धन को चोर चुरा नहीं सकता और भाई विभाजित नहीं कर सकता। विद्यावान् पुरुष सर्वत्र ऊँचा स्थान प्राप्त करता है। राजा केवल अपने देश में ही पूजा जाता है, किन्तु विद्वान् की पूजा (आदर) सर्वत्र होती है। विद्या अज्ञान के अन्धकार को दूर करती है तथा ज्ञान का प्रकाश. फैलाती है।

विद्या ही संसार में मनुष्य की उन्नति करती है। विद्या ही कीर्ति और धन देती है। विद्या वास्तव में कल्पलता के समान है। विदेश जाने पर विद्या परम सहायिका है। जिसके पास विद्या नहीं है वह आँखों वाला होता हुआ भी अन्धा ही है। विद्या माता के समान रक्षा करती है और पिता के समान हित के कार्यों में लगाती है।

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४. दीपावलिः

भारतवर्षे अनेके उत्सवाः भवन्ति। तेषु उत्सवेषु दीपावलिः एकः मुख्यः धार्मिकः उत्सवः अस्ति। दीपावलिः कार्तिकमासे कृष्णपक्षे अमावस्यायां भवति। मनुष्याः गृहाणि सुधया अङ्गनं च गोमयेन लिम्पन्ति। जनाः रात्रौ तैलैः वर्तिकाभिः च पूर्णान् दीपान् प्रज्वालयन्ति। ते धनदेव्याः लक्ष्म्याः पूजनं कुर्वन्ति। दीपैः नगरं प्रकाशितं भवति। बालाः बहुप्रकारकैः सफोटकैः मनोविनोदयन्ति। दीपावलीसमये वणिजोऽपि स्वान् आपणान् बहुविधं सज्जयन्ति। विद्युद्दीपकानां प्रकाशः आपणेषु नितरां शोभते। नानाविधानि वस्तूनि क्रयविक्रयार्थं प्रसारितानि भवन्ति। अयं कालः नात्युष्णो नाप्यतिशीतो भवति। तेन मोदन्तेऽस्मिन् महोत्सवे नराः नार्यश्च।

हिन्दी अनुवाद- दीपावली
भारतवर्ष में अनेकों उत्सव होते हैं। उन उत्सवों में दीपावली एक मुख्य धार्मिक उत्सव है। दीपावली कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में अमावस्या को होती है। मनुष्य घरों को सफेदी से और आँगन को गोबर से लीपते हैं। लोग रात में तेल और बत्तियों से भरे दीपकों को जलाते हैं। वे धन की देवी लक्ष्मी का पूजन करते हैं। दीपकों के द्वारा नगर प्रकाशित होता है। बच्चे अनेक प्रकार पटाखों से मनोरंजन करते हैं। दीपावली के समय व्यापारी भी अपनी दुकानों को अनेक प्रकार से सजाते हैं। बिजली के बल्बों की रोशनी बाजारों में बहुत शोभित होती है। अनेकों प्रकार की वस्तुएँ क्रय-विक्रय के लिए सजी होती हैं। यह समय न अधिक गर्म और न अधिक ठण्डा होता है। उससे स्त्री-पुरुष इस उत्सव में प्रसन्न होते हैं।

५. अस्माकं देशः

भारतवर्षः अस्माकं देशः अस्ति। अस्य भूमिः विविधरत्नानां जननी अस्ति। अस्य प्राकृतिकी शोभा अनुपमा अस्ति। हिमालयः अस्य प्रहरी अस्ति। एषः उत्तरे मुकुटमणिः इव शोभते। सागरः। अस्य चरणौ प्रक्षालयति। अनेकाः पवित्रतमाः नद्यः अत्र वहन्ति। गङ्गा, गोदावरी, सरस्वती, यमुना प्रभृतयः नद्यः अस्य शोभां वर्द्धयति। अथं देशः सर्वासां विद्यानां केन्द्रम् अस्ति। अयं अनेकप्रदेशेषु विभक्त। अत्र विविधधर्मावलम्बिनः सम्प्रदायिनः जनाः निवसन्ति। अस्य संस्कृतिः धर्मपरम्परा च श्रेष्ठा अस्ति। अयं भू-स्वर्गः अपि वर्तते। ईश्वरस्य अवताराः अस्मिन् देशे सञ्जाताः। सङ्कटकाले वयं क्षुद्रभेदान् परित्यज्य देशहितं चिन्तयामः।

विशालं भूमण्डलं व्याप्य अयं देशः एशियामहाद्वीपस्य अन्यतमः राष्ट्रः सञ्जताः।
वयं सदा स्वराष्ट्रस्य रक्षां कर्तुम् उद्यताः स्याम।
कथितमस्ति-“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।”

हिन्दी अनुवाद- हमारा देश
भारतवर्ष हमारा देश है। इसकी भूमि विभिन्न रत्नों की जननी है। इसकी प्राकृतिक शोभा अनुपम है। हिमालय इसका प्रहरी है। यह उत्तर में मुकुटमणि के समान सुशोभित होता है। सागर इसके चरणों को धोता है। अनेको पवित्र नदियाँ यहाँ बहती हैं। गंगा, गोदावरी, सरस्वती तथा यमुना नदियाँ इसकी शोभा बढ़ाती हैं। यह देश सभी विद्याओं का केन्द्र है। यह अनेक प्रदेशों में विभक्त है। यहाँ अनेक धर्मों तथा सम्प्रदाय के लोग निवास करते हैं। इसकी संस्कृति और धर्म, परम्परा श्रेष्ठ है। यह पृथ्वी का स्वर्ग भी है। ईश्वर के अवतार इसी देश में हुए। संकट के समय हम छोटी-छोटी बातों को छोड़कर देश का हित सोचें। विशाल भूमि से परिपूर्ण यह देश एशिया महाद्वीप का एक राष्ट्र हो गया है। हम सदा अपने राष्ट्र की रक्षा करने के लिए तैयार हों। कहा गया है-“जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।”

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६. विद्यार्थी जीवनम्

छात्रजीवनमेव मानवजीवनस्य प्रभातवेला आधारशिला च वर्तते। समस्तजीवनस्य विकासस्य हासस्य वा कारणम् एतज्जीवनमेवास्ति। वस्तुतः विद्यार्थिजीवनं साधनामयं जीवनम्। अध्ययनं परमं तप उच्यते।

छात्रजीवने परिश्रमस्य महती आवश्यकता वर्तते। यः छात्रः आलस्यं त्यक्त्वा परिश्रमेण विद्याध्ययन करोति स एव साफल्यं लभते। अतएव छात्रैः प्रातःकाले ब्रह्ममुहूर्ते एव उत्थातव्यम्। कस्मैचित् कालाय भ्रमणाये अनिवार्यम्। ततः प्रतिनिवृत्य स्नानसन्ध्योपासनादिकं विधाय अध्ययनं कर्त्तव्यम्। तदान्तरं च लघुसात्विक भोजनं दुग्ध च महीत्वा विद्यालयं गन्तव्यम्। तत्र गत्वा गुरून् नत्वा अध्ययनं कर्त्तव्यम्। छात्रैः असत्यवादं न कदापि कर्त्तव्यम्।

छात्रजीवनं पूर्णतः अनुशासनबद्धं भवति। विद्यार्थिजीवने एव समस्तानां मानवोचितगुणानां विकास भवति। छात्र एव राष्ट्रस्ययानुपमा निधिरस्ति। अतः छात्राणां शारीरिकं चारित्रिकंच विकासं अत्यन्तानिवार्यम् विद्यार्थिजीवनमेव सम्पूर्णााँमिजीवनस्य आधारशिला। अतः तेषां सम्यक् रक्षणं, पोषणम् च कर्त्तव्यम्।

हिन्दी अनुवाद- विद्यार्थी जीवन
छात्र जीवन ही मानव की प्रभातवेला और आधारशिला है। समस्त जीवन के विकास या ह्रास का कारण यही जीवन है। वास्तव में विद्यार्थी जीवन साधनामय जीवन है। अध्ययन सबसे बड़ा तप कहा गया है।

छात्र जीवन में परिश्रम की बहुत आवश्यकता है। जो छात्र आलस्य को छोड़कर परिश्रम से विद्या का अध्ययन करता है वह ही सफलता पाता है। इसलिए ही छात्रों को प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त। में ही उठना चाहिए। कुछ समय के लिए घूमना भी अनिवार्य है।

वहाँ से लौटकर स्नान, सन्ध्या उपासना आदि करके अध्ययन करना चाहिए। उसके बाद थोड़ा-सा भोजन और दूध पीकर विद्यालय जाना चाहिए। वहाँ जाकर गुरुजनों को प्रणाम करके अध्ययन करना चाहिए। छात्रों को झूठ कभी नहीं बोलना चाहिए।

अत्र जीवन पूर्णरूप से अनुशासनबद्ध होता है। विद्यार्थी जीवन में ही समस्त मानवोचित गुणों का विकास होता है। छात्र ही राष्ट्र की अनुपम निधि है। इसलिए छात्रों का शारीरिक और चारित्रिक विकास अत्यन्त आवश्यक है। विद्यार्थी जीवन ही सम्पूर्ण आगे के जीवन की आधारशिला है। इसलिए उनकी अच्छी तरह से रक्षा और पोषण करना चाहिए।

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७. सत्सङ्गति।

ये मनसा सद् विचारयन्ति, वचसा सद् वदन्ति वपुषा च सद् आचरन्ति ते सज्जनाः कथ्यन्ते। सतां सज्जनानां सङ्गतिः ‘सत्सङ्गतिः’ कथ्यते। ये सज्जनाः साधवः पवित्र-आत्मानाः सन्ति, तेषां संगत्या मनुष्यः, सज्जनः साधुः शिष्टश्व भवति। ये दुर्जनाः सन्ति तेषां संगत्या मनुष्यो दुर्जनो भवति, पतनं विनाशं च प्राप्नोति। मनुष्यस्योपरि सङ्गतेः महान् प्रभावो भवति। यादृशैः पुरुषैः सह सः निवसति, तादृशः एव स भवति। तथा चोक्तम्

“संसर्गजा दोषगुणा भवन्ति।”
सज्जानानां संगत्या मनुष्य उन्नतिं प्राप्नोति। तस्य विद्या कीर्तिश्च वर्धते। सङ्गत्याः प्रबलः प्रभावो वर्तते। बालकस्य कोमलं शरीरम् अपरिपक्वं च मस्तिष्कं भवति। सः यादृशैः बालकैः सह पठति, क्रीडति, गच्छति तादृशः एव जायते। अत एव विद्यायशोबलसुखवृद्धये सत्सङ्गः करणीयः।

हिन्दी अनुवाद- सत्संगति
जो मन से अच्छा सोचते हैं, वाणी से अच्छा बोलते हैं और शरीर से अच्छा आचरण करते हैं, वे सज्जन कहे जाते हैं। सज्जनों की संगति सत्संगति’ कही जाती है। जो सज्जन, साधु और पवित्र आत्मा वाले होते हैं, उनकी संगति से मनुष्य सज्जन, साधु और शिष्ट होता है। जो दुर्जन हैं उनकी संगति से मनुष्य दुर्ग होता है और उसका पतन और विनाश होता है। मनुष्य के ऊपर संगति का बड़ा प्रभाव होता है। जैसे मनुष्यों के साथ वह रहता है, वैसा ही हो जाता है। कहा गया है

“दोष और गुण साथ में रहने से होते हैं।”
सज्जनों की संगति से मनुष्य उन्नति प्राप्त करता है। उसकी विद्या और कीर्ति बढ़ती है। संगति का बहुत प्रभाव होता है। बालक का कोमल शरीर और कच्चा मस्तिष्क होता है। वह जैसे बालकों के साथ पढ़ता है, खेलता है, जाता है, वैसा ही हो जाता है। इसलिए ही विद्या, यश, बल और सुख की वृद्धि के लिए सत्संग करना चाहिए।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

दैनिक जीवन में रसायन NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अनिद्राग्रस्त रोगियों को चिकित्सक नींद लाने वाली गोलियाँ लेने का परामर्श देते हैं, परन्तु बिना चिकित्सक से परामर्श लिये इनकी खुराक लेना उचित क्यों नहीं है?
उत्तर
नींद वाली गोलियाँ प्रशांतक या प्रतिअवसादक होती हैं। ये तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव डालती है। ये चिंता, तनाव, चिड़चिड़ापन या उत्तेजना से मुक्ति दिलाती है। परन्तु इन्हें डॉक्टर के देख-रेख में व अनुशासित मात्रा में लेना चाहिये। यदि नहीं, तो इनकी अनियंत्रित व अधिक मात्रा शरीर व दिमाग को नुकसान पहुँचाती है, क्योंकि इसकी अधिक मात्रा लेने पर यह विष का कार्य करती है।

प्रश्न 2.
किस वर्गीकरण के आधार पर वक्तव्य “रैनिटिडीन प्रति-अम्ल है”, दिया गया है ?
उत्तर
औषधि का भेषजगुणविज्ञान संबंधी (Pharmacological) प्रभाव के अनुसार वर्गीकरण की ओर यह वक्तव्य संकेत करता है। क्योंकि कोई भी औषधि जो आमाशय में उपस्थित अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करने के लिये उपयोग की जाती है, प्रतिअम्ल (एण्टासिड) कहलाती है तथा रैनीटिडीन आमाशय की दीवार पर उपस्थित ग्राही का हिस्टामिन के साथ अन्तक्रिया को रोकती है। हिस्टामिन आमाशय में पेप्सिन व HCI के स्रावण को उत्तेजित करती है।

प्रश्न 3.
हमें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता क्यों पड़ती है ?
उत्तर
ग्रहण की गई कैलोरी को कम करने तथा दाँतों को सड़ने से रोकने के लिये हमें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता पड़ती है।

प्रश्न 4.
ग्लिसरिल ओलिएट तथा ग्लिसरिल पॉमिटेट से सोडियम साबुन बनाने के लिये रासायनिक समीकरण लिखिये। इनके संरचनात्मक सूत्र नीचे दिये गये हैं

  1. (C15H31C00)3)C3)H5 (ग्लिसरिल पॉमिटेट)
  2. (C17H32C00)3)C3)H5 (ग्लिसरिल ओलिएट)

उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन - 2

प्रश्न 5.
निम्न प्रकार के अनायनिक अपमार्जक द्रव अपमार्जकों, इमल्सीकारकों और क्लेदन कारकों (Wetting agents) में उपस्थित होते हैं। अणु में जलरागी तथा जलविरागी हिस्सों को दर्शाइये। अणु में उपस्थित प्रकार्यात्मक समूह की पहचान कीजिए।MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन - 3
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन - 3
अध्रुवीय भाग (जलविरागी) ध्रुवीय भाग (जलरागी)
अपमार्जक अणुओं में उपस्थित क्रियात्मक समूह है –

  1. ईथर तथा
  2. 1° ऐल्कोहॉलीय समूह।

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दैनिक जीवन में रसायन NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
हमें औषधियों को विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत करने की आवश्यकता क्यों है ?
उत्तर
औषधि को विभिन्न प्रकारों से वर्गीकृत किया जा सकता है, जो निर्भर करता है

  • उनके भेषजगुणविज्ञान संबंधी प्रभाव पर
  • किसी विशेष जैवरासायनिक प्रक्रिया पर उनके प्रभाव पर
  • उनकी रासायनिक संरचना के आधार पर
  • उनके आण्विक लक्ष्य के आधार पर।

उदाहरण- औषधि का भेषजगुणविज्ञान संबंधी प्रभाव पर आधारित वर्गीकरण डॉक्टरों के लिये बहुत उपयोगी होता है। औषधि का आण्विक लक्ष्य पर आधारित वर्गीकरण औषधीय रसायनविज्ञानियों (रसानज्ञों) के लिये उपयोगी होता है। अतः औषधि विभिन्न उद्देश्यों के लिये विभिन्न तरीकों में वर्गीकृत की जाती है।

प्रश्न 2.
औषध रसायन के पारिभाषिक शब्द, लक्ष्य-अणु अथवा औषधि-लक्ष्य को समझाइए।
उत्तर
रोगी द्वारा ली गई औषधि वृहद् अणुओं जैसे-प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड तथा न्यूक्लिक अम्लों के साथ अत- क्रिया करते हैं तथा ये औषधि लक्ष्य (Drug targets) कहलाते हैं। ये वृहद् अणु या औषधि-लक्ष्य शरीर में नाना प्रकार की भूमिका अदा करते हैं।

औषधि की बनावट (आकार) विशिष्ट लक्ष्यों के साथ अन्तक्रिया करने के लिये इस प्रकार की जाती है कि इनके पास दूसरे लक्ष्यों पर प्रभाव डालने की सबसे कम संभावना हो। ये पार्श्व प्रभाव को कम करती है तथा औषधि के प्रभाव को सीमित रखती है।

प्रश्न 3.
उन वृहद् अणुओं के नाम लिखिए जिन्हें औषध-लक्ष्य चुना जाता है।
उत्तर
वृहद् अणु जिन्हें औषध-लक्ष्य के लिये चुना गया है- ये हैं- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड तथा न्यूक्लिक अम्ल।

प्रश्न 4.
बिना डॉक्टर से परामर्श लिए दवाइयाँ क्यों नहीं लेनी चाहिए?
उत्तर
औषधि या ड्रग का पार्श्व प्रभाव भी पड़ता है। यह प्रभाव इसलिये होता है, क्योंकि औषधि एक से ज्यादा प्रकार से ग्राही से बंध जाती है। इनकी अधिक मात्रा या गलत चुनाव अत्यंत नुकसानदायक होता है तथा कभी-कभी मृत्यु का कारण भी बन जाते हैं।
अतः बिना डॉक्टर के परामर्श के दवाइयाँ नहीं लेनी चाहिये।

प्रश्न 5.
रसायन चिकित्सा (Chemotherapy) शब्द की परिभाषा दीजिए।
उत्तर
रसायन की वह शाखा जो बीमारियों या रोगों के उपचार से संबंधित होती है, रसायन चिकित्सा (Chemotherapy) कहलाती है।

प्रश्न 6.
एन्जाइम की सतह पर औषध को थामने के लिए कौन-से बल कार्य करते हैं ?
उत्तर
एन्जाइम की सतह पर औषध को थामने के लिये कार्य करने वाले बल हैं- हाइड्रोजन बंध, आयनिक बंध, द्विध्रुव- द्विध्रुव अन्तक्रिया या वाण्डर-वाल्स बल।

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प्रश्न 7.
प्रति- अम्ल एवं प्रति-एलर्जी औषध हिस्टैमिन के कार्य में बाधा डालती हैं परन्तु यह एकदूसरे के कार्य में बाधक क्यों नहीं होती?
उत्तर
ये एक- दूसरे के कार्य में बाधा इसलिये नहीं डालते क्योंकि ये विभिन्न ग्राही पर कार्य करते हैं। हिस्टैमिन के स्रावण के कारण शरीर में एलर्जी व अम्लीयता उत्पन्न होती है जबकि प्रति-अम्ल केवल अम्लीयता को दूर करता है।

प्रश्न 8.
नॉरएड्रिनेलिन का कम स्तर अवसाद का कारण होता है। इस समस्या के निदान के किस प्रकार की औषध की आवश्यकता होती है ? दो औषधों के नाम लिखिए।
उत्तर
नॉरएड्रिनेलिन सुख का आभास कराती है व मनोदशा के परिवर्तन में सहायक होती है। यदि नॉरएड्रिनेलिन का स्तर कम हो जाता है, तो हॉर्मोन की सक्रियता के लिये भेजे जाने वाले संकेत कम हो जाते हैं तथा व्यक्ति अवसाद में चला जाता है। इस अवस्था में रोगी को प्रति अवसादक दवाइयों की आवश्यकता पड़ती है जो नॉरएड्रिनेलिन के निम्नीकरण को उत्तेजित करने वाले एन्जाइम को रोकता है। प्रति- अवसाद के लिये उपयोग की जाने वाली सामान्य दवाइयाँ- इप्रोनाइजिड व फीनल्जिन हैं।

प्रश्न 9.
‘वृहद्-स्पेक्ट्रम जीवाणुनाशी’ शब्द से आप क्या समझते हैं ? समझाइए।
उत्तर
बैक्टीरिया की परास या दूसरे सूक्ष्मजीवी जो निश्चित प्रतिजैविक द्वारा प्रभावित होते हैं, उनकी क्रियाएँ स्पेक्ट्रम की तरह प्रदर्शित की जाती हैं।

“वृहद् स्पेक्ट्रम जीवाणुनाशी” का अर्थ है, प्रतिजैविक जो ग्राम-ऋणात्मक व ग्राम- धनात्मक बैक्टीरिया के लम्बी परास को रोकता या मारता है।

प्रश्न 10.
पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी किस प्रकार से भिन्न हैं ? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
पूतिरोधी- ये जीवित ऊतकों पर उपयोग किये जाते हैं, जैसे-घाव, चोट इत्यादि पर सूक्ष्मजैविकों की वृद्धि रोकने या मारने के लिये।
उदाहरण- 0.2% फीनॉल, आयोडीन का टिंक्चर, डेटॉल इत्यादि।

संक्रमणहारी- ये अजीवित वस्तुओं पर उपयोग किये जाते हैं। जैसे–फर्श, उपकरणों, निकासी तंत्रों इत्यादि पर।
उदाहरण- 1% फीनॉल का विलयन, क्लोरीन (0-2 से 0-4ppm), कम सान्द्रता में SO2.

प्रश्न 11.
सिमेटिडीन तथा रैनिटिडीन सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट अथवा मैग्नीशियम या ऐल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड की तुलना में श्रेष्ठ प्रति-अम्ल क्यों है ? ;
उत्तर
प्रति- अम्ल NaHCO3, Mg(OH)2 या AI(OH)3, आमाशय में बनने वाले अतिरिक्त (अधिक मात्रा में) अम्ल को उदासीन करते हैं परन्तु लम्बे समय तक इनके उपयोग से आमाशय में अधिक मात्रा में अम्ल का उत्पादन होता है, जो हानिकारक होता है तथा परिणामस्वरूप अल्सर हो सकता है। इसका अर्थ है कि औषधि केवल लक्षणों को नियंत्रित करते हैं।

सिमेटिडीन व रैनिटिडीन इस प्रकार पार्श्व प्रभाव के बिना कार्य करते हैं (क्योंकि ये कारण को नियंत्रित करते हैं) जैसे-ये आमाशय की दीवार के ग्राही के साथ हिस्टैमिन की अन्तक्रिया को रोकते व हिस्टैमिन अम्ल के स्रावण को उत्तेजित करते हैं। अत: ये NaHCO3, Mg(OH)2 या AI(OH)3, से श्रेष्ठ प्रति-अम्ल है।

प्रश्न 12.
एक ऐसे पदार्थ का उदाहरण दीजिए जिसे पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी, दोनों प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है।
उत्तर
फीनॉल एक ऐसा पदार्थ है जो एण्टीसेप्टिक की तरह (0.2% विलयन) उपयोग किया जाता है : तथा संक्रमणहारी की भी तरह (1% विलयन) कार्य करता है।

प्रश्न 13.
डेटॉल के प्रमुख संघटक कौन-कौन से हैं ?
उत्तर
डेटॉल क्लोरोजाइलेनॉल तथा टर्मिनोल का एक मिश्रण है।

प्रश्न 14. आयोडीन का टिंक्चर क्या होता है ? इसके क्या उपयोग हैं ?
उत्तर
रसायन में टिंक्चर एक विलयन होता है जिनमें एल्कोहॉल विलायक होता है। टिंक्चर आयोडीन एल्कोहॉल-जल मिश्रण में आयोडीन का 2-3% विलयन है। यह घाव में सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकने या मारने के लिये उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 15.
खाद्य पदार्थ परिरक्षक क्या होते हैं ?
उत्तर
रासायनिक पदार्थ जो भोज्य पदार्थों को बैक्टीरिया, यीस्ट व फफूंद से रक्षा करने के लिए उपयोग किये जाते हैं, ये खाद्य पदार्थ परिरक्षक कहलाते हैं। उदाहरण-सोडियम मेटाबाइसल्फेट, सोडियम बेन्जोएट।

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प्रश्न 16.
एस्पार्टेम का प्रयोग केवल ठंडे खाद्य एवं पेय पदार्थों तक सीमित क्यों हैं ?
उत्तर
एस्पार्टेम का प्रयोग केवल ठंडे खाद्य व पेय पदार्थों तक सीमित होता है, क्योंकि यह खाना बनाने के ताप (Cooking temperature) पर अस्थायी होता है।

प्रश्न 17.
कृत्रिम मधुरक क्या हैं ? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
कृत्रिम मधुरक वे पदार्थ हैं, जिनका संश्लेषण पूर्णतः या आंशिक रूप से रासायनिक संश्लेषण द्वारा होता है तथा ये खाद्य में मिठास लाने के लिये डाले जाते हैं।
उदाहरण-

  1. सुक्रोस,
  2. सैकेरीन।

प्रश्न 18.
मधुमेह के रोगियों के लिए मिठाई बनाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले मधुरकों के क्या नाम हैं?
उत्तर
कृत्रिम मिठास वाले एजेन्ट जैसे-सैकेरीन, एस्पार्टेम या एलिटेम मिलाये जाते हैं।

प्रश्न 19.
ऐलिटेम को कृत्रिम मधुरक की तरह उपयोग में लाने पर क्या समस्याएँ होती हैं ?
उत्तर
ऐलिटेम उच्च प्रबलता वाला कृत्रिम मधुरक है जिसकी मिठास शक्कर की तुलना में 2000 गुना होती है। अत: इनका उपयोग कर भोजन की मिठास नियंत्रित करना कठिन होता है।

प्रश्न 20.
साबुनों की अपेक्षा संश्लेषित अपमार्जक किस प्रकार से श्रेष्ठ हैं ?
उत्तर

  1. साबुन कठोर पानी में उपयोग नहीं किये जाते, जबकि अपमार्जक किये जा सकते हैं।
  2. साबुन अम्लीय जल में प्रयोग नहीं किये जाते, जबकि अपमार्जक किये जा सकते हैं।

प्रश्न 21.
निम्नलिखित शब्दों को उपयुक्त उदाहरणों द्वारा समझाइए

  1. धनात्मक अपमार्जक,
  2. ऋणात्मक अपमार्जक,
  3. अनआयनिक अपमार्जक।

उत्तर
1. धनात्मक अपमार्जक- ये वे अपमार्जक हैं जिनमें धनात्मक (केटायनिक) जलरोधी समूह होता है। ये सामान्यतः एसीटेट, क्लोराइड या ब्रोमाइड के चतुष्क अमोनियम लवण होते हैं । उदाहरण-इथाइल ट्राइ-मिथाइल अमोनियम क्लोराइड है
[CH3(CH2)15N(CH3)3]+Cl

2. ऋणात्मक अपमार्जक-ये वे अपमार्जक हैं जिनमें ऐनायनिक जलरोधी समूह होता है। ये दो प्रकार के होते हैं

  1. सोडियम एल्काइल सल्फेट, उदाहरण-सोडियम लॉराइल सल्फेट formula
  2. सोडियम एल्काइल बेंजीन सल्फोनेट, उदाहरण-सोडियम 4-(1-डेकाडाइल बेंजीन सल्फोनेट (SDS))

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3. अनआयनिक या उदासीन अपमार्जक-ये वसा अम्लों के साथ उच्चतर आण्विक भार वाले एल्कोहॉलों के एस्टर होते हैं। उदाहरण-पॉलीएथिलीन ग्लाइकॉल स्टीयरेट
CH3(CH2)16COO(CH2CH2O)nCH2CH2OH
पॉलीएथीलीन ग्लाइकॉल स्टीयरेट

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प्रश्न 22.
जैव-निम्नीकृत होने वाले और जैव-निम्नीकृत न होने वाले अपमार्जक क्या हैं ? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
जैव-निम्नीकृत अपमार्जक- ये बैक्टीरिया द्वारा निम्नीकृत हो जाते हैं। इसमें हाइड्रोकार्बन श्रृंखला अशाखित होती है। ये जल प्रदूषण नहीं करते हैं तथा अच्छे होते हैं। उदाहरण-सोडियम लॉराइल सल्फेट।।

अजैव-निम्नीकृत अपमार्जक- इनमें उच्चतम शाखित हाइड्रोकार्बन श्रृंखला होती है, जिससे वे बैक्टीरिया द्वारा सरलता से निम्नीकृत नहीं होते हैं और ये जल प्रदूषण करते हैं।
उदाहरण- सोडियम 4-(1, 3, 5, 7 ट्रेटामिथाइलएसी-टाइल) बेंजीन सल्फोनेट।

प्रश्न 23.
साबुन कठोर जल में कार्य क्यों नहीं करता?
उत्तर
कठोर जल में कैल्सियम व मैग्नीशियम लवण होते हैं । अतः कठोर जल में पदार्थ अघुलनशील कैल्सियम व मैग्नीशियम साबुन में अवक्षेपित हो जाता है। ये अघुलनशील कपड़े में चिपचिपे या गोंद जैसे समूह की तरह चिपक जाते हैं तथा साबुन की कपड़े से तेल व ग्रीस निकालने की क्षमता को खत्म कर देते हैं।

प्रश्न 24.
क्या आप साबुन तथा संश्लेषित अपमार्जकों का प्रयोग जल की कठोरता जानने के लिए कर सकते हैं ?
उत्तर
हाँ, साबुन का प्रयोग जल की कठोरता को जानने के लिये किया जा सकता है, क्योंकि ये कठोर जल के साथ अघुलनशील कैल्सियम व मैग्नीशियम साबुन का अवक्षेप देते हैं, परन्तु संश्लेषित अपमार्जक नहीं देते हैं । अतः संश्लेषित अपमार्जकों से जल की कठोरता नहीं जानी जा सकती है।

प्रश्न 25.
साबुन की शोधन क्रिया समझाइए।
उत्तर
रसायन की वह शाखा जो बीमारियों या रोगों के उपचार से संबंधित होती है, रसायन चिकित्सा (Chemotherapy) कहलाती है।
कृत्रिम मिठास वाले एजेन्ट जैसे-सैकेरीन, एस्पार्टेम या एलिटेम मिलाये जाते हैं।

प्रश्न 26.
यदि जल में कैल्सियम हाइड्रोजनकार्बोनेट घुला हो तो आप कपड़े धोने के लिए साबुन एवं संश्लेषित अपमार्जकों में से किसका प्रयोग करेंगे?
उत्तर
कैल्सियम बाइकार्बोनेट जल को कठोर बनाता है। साबुन इस कठोर जल के साथ अवक्षेप देता है। अतः कपड़े धोने के लिये प्रयोग नहीं किये जाते हैं। दूसरी तरफ संश्लेषित अपमार्जक कठोर जल के साथ अवक्षेप नहीं देते हैं क्योंकि उनके कैल्सियम लवण भी जल में घुलनशील होते हैं । अतः संश्लेषित अपमार्जकों का प्रयोग कठोर जल में कपड़े धोने के लिये किया जाता है।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित यौगिकों में जलरागी एवं जलविरागी भाग दर्शाइए।
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उत्तर
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दैनिक जीवन में रसायन अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

दैनिक जीवन में रसायन वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
साइक्लोहेक्सेन के हेक्साक्लोराइड का कौन-सा समावयवी एक प्रबल कीटनाशक है
(a) α
(b) β γ
(c) γ
(d) δ
उत्तर
(c) γ

प्रश्न 2.
विकृतीकृत स्पिरिट विशेष रूप से प्रयुक्त होती है –
(a) औषधि में
(b) ईंधन में
(c) वार्निश में
(d) द्रावक तैयार करने में।
उत्तर
(a) औषधि में

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से कौन-सा उदाहरण पीड़ाहारी औषधि का नहीं है –
(a) फिनेसिटीन .
(b) पैरासिटामॉल
(c) क्लोरैम्फेनिकॉल
(d) मार्फीन।
उत्तर
(c) क्लोरैम्फेनिकॉल

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से किस औषधि की खोज ऐलेक्जैण्डर फ्लेमिंग ने की थी –
(a) पेनिसिलिन
(b) स्ट्रेप्टोमाइसिन
(c) क्लोरोमाइसेटिन
(d) ऐस्पिरिन।
उत्तर
(a) पेनिसिलिन

प्रश्न 5.
किस औषधि का उपयोग क्षय रोग के इलाज में किया जाता है –
(a) पेनिसिलीन
(b) स्ट्रेप्टोमाइसिन
(c) क्लोरोमाइसिटिन
(d) सल्फाडायजिन।
उत्तर
(b) स्ट्रेप्टोमाइसिन

प्रश्न 6.
ट्यूबरकुलोसिस के उपचार में किसका प्रयोग किया जाता हैं –
(a) पेनिसिलीन
(b) ऐस्प्रिन
(c) क्लोरैमफिनिकॉल
(d) स्ट्रेप्टोमाइसिन।
उत्तर
(d) स्ट्रेप्टोमाइसिन।

प्रश्न 7.
सैक्रीन ………… गुना ज्यादा गन्ने से मीठा होता है –
(a) 10
(b) 600
(c) 4000
(d) 40.
उत्तर
(b) 600

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प्रश्न 8.
वह रासायनिक पदार्थ जो रॉल्फिया सरपेन्टिना पौधे से निकाला जाता है –
(a) एस्प्रिन
(b) क्वीनोन
(c) विथियॉन
(d) रेसरपाइन
उत्तर
(d) रेसरपाइन

प्रश्न 9.
वह यौगिक जिसका एण्टीबायोटिक्स, एण्टीपायरेटिक्स दोनों रूपों में उपयोग होता है –
(a) फिनेसेटिन
(b) सल्फा औषधि
(c) पैरासिटामॉल
(d) ऐस्प्रिन।
उत्तर
(d) ऐस्प्रिन।

प्रश्न 10.
निम्न में से कौन-सा समूह डिटर्जेन्ट की सर्वाधिक संख्या को व्यक्त करता है –
(a) केटायनिक
(b) एनायनिक
(c) नॉन-आयनिक
(d) हाइड्रोफोबिक।
उत्तर
(b) एनायनिक

प्रश्न 11.
निम्न में से कौन प्रशान्तक है –
(a) सैकोनॉल
(b) स्ट्रेप्टोमाइसिन
(c) मार्फीन
(d) फिनेसिटिन।
उत्तर
(a) सैकोनॉल

प्रश्न 12.
निम्न में से कौन एण्टीबायोटिक नहीं है –
(a) टेरामाइसिन
(b) क्लोरोमाइसिटिन
(c) मार्फीन
(d) D- पेनीसीलेमाइन।
उत्तर
(c) मार्फीन

प्रश्न 13.
सैलाल का उपयोग होता है –
(a) एण्टीसेप्टिक
(b) एण्टीपायरेटिक
(c) (a) और (b) दोनों
(d) उपयुक्त में से कोई नहीं।
उत्तर
(c) (a) और (b) दोनों

प्रश्न 14.
क्लोरोक्वीन एक उदाहरण है –
(a) एण्टीपायरेटिक
(b) एण्टीमलेरिया
(c) एण्टीबैक्टीरिया
(d) एण्टी ट्यूबरकुलर।
उत्तर
(b) एण्टीमलेरिया

प्रश्न 15.
निम्न में कौन वृहद स्पेक्ट्रम एण्टीबायोटिक है –
(a) ट्रिप्टोमाइसिन
(b) पेनिसिलीन
(c) ऐम्पिसिलीन
(d) क्लोरैम्फेनिकॉल।
उत्तर
(d) क्लोरैम्फेनिकॉल।

प्रश्न 16.
निम्न में से कौन-सा एण्टीबायोटिक नहीं है –
(a) टेट्रामाइसिन
(b) क्लोरोमाइसिटिन
(c) मार्फिन
(d) पेनिसिलीन।
उत्तर
(c) मार्फिन

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प्रश्न 17.
वेरोनल का उपयोग होता है –
(a) एनेस्थेटिक
(b) सेडेटिव
(c) एण्टीसेप्टिक
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर
(b) सेडेटिव

प्रश्न 18.
निम्न में से कौन निद्राकारी है –
(a) ल्युमिनॉल
(b) सेलॉल
(c) कैटेकॉल
(d) फीनॉल।
उत्तर
(a) ल्युमिनॉल

प्रश्न 19.
फेरोमोन्स किनसे स्त्रावित होते हैं –
(a) अन्त: स्रावी ग्रन्थियों से
(b) आमाशय से
(c) बहि: स्रावी ग्रन्थियों से
(d) सेक्स ग्रन्थियों से।
उत्तर
(c) बहि: स्रावी ग्रन्थियों से

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. सिनोलिक अम्ल युक्त वसा या तेल …………………. औषधि पौधे का सक्रिय अवयव है।
  2. सोडियम बेंजोएट तथा पोटैशियम मेटा बाइसल्फेट अच्छे …………………. हैं।
  3. सोडियम डोलोसिल बेंजीन सल्फोनेट तथा सोडियम लॉरिल सारकोसिनेट एक महत्वपूर्ण ..है।
  4. आयोडीन एक प्रबल …………………………. है।
  5. प्रशान्तर औषधि का एक उदाहरण …………………….. है।
  6. सिन्कोना बार्क से ……………………… प्राप्त होता है।
  7. क्लोरोक्वीन ………………………………. औषधि है।
  8. ……………………….. को शल्यक्रिया का जनक कहते हैं।
  9. एलेक्जेन्डर फ्लेमिंग ने ………………………………. एन्टीबायोटिक औषधि का आविष्कार किया था।
  10. ऐसा पदार्थ जो आमाशय की अम्लीयता को कम करता है ………………………… कहलाता है।

उत्तर

  1. उलटकमल
  2. परिरक्षक
  3. डिटर्जेन्ट
  4. एन्टीसेप्टिक
  5. सेकोनाल
  6. कुनाइन
  7. एण्टी मलेरियल
  8. सुश्रुत
  9. पेनिसिलीन
  10. एण्टा एसिड।

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3. उचित संबंध जोडिए

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उत्तर

  1. (e)
  2. (c)
  3. (b)
  4. (a)
  5. (d).

4. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. दर्द निवारक औषधि को क्या कहते हैं ?
  2. दो पीड़ाहारी औषधियों के नाम लिखिए।
  3. अत्यधिक तनाव तथा मानसिक अवसाद के लिए प्रयुक्त रसायन का नाम है।
  4. स्ट्रेप्टोमाइसिन दवा किस रोग के निवारण में प्रयुक्त किया जाता है ?
  5. एण्टीफर्टीलिटी ड्रग्स का उपयोग क्यों किया जाता है ?

उत्तर

  1. एनाल्जेसिक
  2. ऐस्प्रिन और मार्फीन
  3. इक्वेनिल
  4. मलेरिया
  5. जनन क्षमता को कम करने या बर्थ कन्ट्रोल में।

दैनिक जीवन में रसायन लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रोगाणुनाशी क्या है ?
उत्तर
रोगाणुनाशी (Germicides)- रोगाणुनाशी वे पदार्थ हैं, जिनमें रोगाणुओं (Germs) को नष्ट करने की शक्ति होती है। रोगाणुनाशी के रूप में सल्फर यौगिक, मर्करी यौगिक (मरक्यूरिक आयोडाइड) तथा फोनॉलिक यौगिक प्रयुक्त किया जाता है।

साबुन में उपस्थित सल्फर यौगिक मुँहासे (Pimples), रूसी (Dandruff) तथा त्वचा संक्रमण (Skin infection) से त्वचा की रक्षा करते हैं।

रोगाणुनाशी के रूप में फीनॉलिक यौगिकों का प्रयोग अधिक होता है।
क्रेसाइकलिक अम्ल (Cresyclic acid) जो m-क्रिसॉल तथा p-क्रिसॉल का मिश्रण है, रोगाणुनाशी के रूप में साबुन में डाला जाता है।

प्रश्न 2.
क्लोरोएम्फिनिकॉल की संरचना लिखिए तथा बताइए यह किस काम में आता है ?
उत्तर
क्लोरोएम्फिनिकॉल एक प्रभावकारी एण्टीबायोटिक औषधि है। इसका मुख्य उपयोग टाइफाइड, ज्वर, पेचिश, खाँसी, मैनिन्जाइटिस तथा मूत्र रोगों में होता है।
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प्रश्न 3.
ज्वरनाशी से क्या तात्पर्य है ? क्लोरोएम्फिनिकॉल
उत्तर–
शरीर का ताप अधिक हो जाने (ज्वर) पर लिये जाने वाले रसायन ज्वरनाशी कहलाते हैं । ये शरीर के केन्द्रीय संवहन तंत्र पर प्रभाव ‘ डालते हैं, जैसे—पैरासिटामॉल, ऐस्प्रिन, ऐनाल्जिन।
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प्रश्न 4.
एण्टीबायोटिक क्या हैं ? किन्हीं दो एण्टीबायोटिक के नाम लिखिए।
उत्तर
एण्टीबायोटिक या प्रतिजैविक (Antibiotic)–ये वे रासायनिक पदार्थ हैं, जो सूक्ष्म जीवों जीवाणु, कवक, ऐक्टिनोमाइसेज द्वारा उत्पन्न होते हैं व अन्य सूक्ष्म जीवों, जीवाणु, कुछ वायरस, कवक तथा रिकेटीसिया को नष्ट कर देते हैं या उनके विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं।’
उदाहरण-पेनिसिलीन, स्ट्रेप्टोमाइसिन आदि।

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प्रश्न 5.
प्रतिरक्षी तंत्र क्या है ? यह किस प्रकार विकसित होता है ?
उत्तर
शरीर में विभिन्न प्रकार के विषाणुओं या ऐण्टीजन को नष्ट करने के लिए लिम्फोसाइट निर्मित हो जाते हैं जो प्रतिरक्षी कहलाते हैं। ये प्रतिरक्षी विशेष प्रकार की श्वेत रक्त कणिकाएँ होती हैं। ये आक्रमणकारी जीव या विष को नष्ट करने हेतु एक विशेष प्रकार की ग्लोब्युलिन प्रोटीन बनाकर मुक्त करती हैं, ये प्रोटीन रक्त तथा ऊतक द्रव में संचरित होकर आक्रमणकारी विषाणु, जीवाणुओं तथा विष पदार्थों को नष्ट कर देती हैं। लिम्फोसाइट ऐण्टीजन को बाँध लेते हैं और स्वयं तेजी से विभाजित होते हैं। जिससे रक्त में प्रतिरक्षी की संख्या बढ़ जाती है जिससे ऐण्टीजन का प्रभाव नष्ट हो जाता है।

प्रश्न 6.
पूतिरोधी (Antiseptic) किसे कहते हैं ?
उत्तर
वे औषधियाँ जो सूक्ष्म जीवों की वृद्धि तथा गुणन को रोकती हैं, म पूतिरोधी कहलाती हैं। ये मानव के स्वस्थ ऊतकों को हानि नहीं पहुँचाती हैं। ये । घावों, अल्सरों तथा रोगग्रस्त त्वचा पर उपयोग की जाती हैं। ऐल्कोहॉल, बोरिक अम्ल, आयोडीन, क्लोरीन आदि पूतिरोध OCOOH3 प्रयोग बैक्टीरिया के क्षय से उत्पन्न दुर्गन्ध के लिए किया जाता है।
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उदाहरण-डेटॉल (Dettol)—ये क्लोरो जाइलेनोल व टरपीनियोल का मिश्रण होता है । त्वचा पर उपयोग के लिए प्रयुक्त होता है

प्रश्न 7.
प्रतिजैविक (Antibiotics) से क्या समझते हैं ? प्रथम प्रतिजैविक का नाम बताइए।
उत्तर
प्रतिजैविक-सूक्ष्म जीवों (बैक्टीरिया, फफूंदी) से बने वे पदार्थ जो अन्य सूक्ष्म जीवों को नष्ट कर दें; प्रतिजैविक कहलाते हैं। शरीर में पहुँचने के बाद ये उन सूक्ष्म जीवों को जो रोग के कारण हैं, की वृद्धि रोक देते हैं तथा शनैः शनैः उन्हें नष्ट कर देते हैं या उनके विकास में बाधा डालते हैं । ऐलेक्जेण्डर फ्लेमिंग ने प्रथम प्रतिजैविक पेनिसिलिन की खोज की। इसका सामान्य सूत्र C9H12N2O4SR है, इसकी सामान्य संरचना निम्न है-
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प्रश्न 8.
कुछ प्रमुख ज्वरनाशक औषधियों के नाम व सूत्र लिखिए।
उत्तर
ज्वरनाशक ( Antipyretic) शरीर का ताप अधिक हो जाने (ज्वर) पर लिये जाने वाले रसायन ज्वरनाशक कहलाते हैं। ये शरीर के केन्द्रीय संवहन तन्त्र पर प्रभाव डालते हैं, जैसे-पैरासिटामॉल। कुछ रसायन ज्वरनाशक और दर्दनाशक दोनों कार्य करते हैं, जैसे-ऐस्प्रिन, पैरासिटामॉल, ऐनाल्जिन आदि। इनके सेवन से अक्सर पसीना निकलता है।
प्रमुख ज्वरनाशक औषधियों के संरचना सूत्र निम्नांकित हैं
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प्रश्न 9.
किसी एण्टीहिस्टामिन औषधि का नाम एवं उपयोग, परिभाषा सहित लिखिए।
उत्तर
एण्टीहिस्टामिन-मनुष्य में हिस्टामिन पेशियों में संकुचन, धमनियों व कोशिकाओं में शिथिलन, लार ग्रंथियों को उत्तेजित आदि प्रभाव उत्पन्न करता है।
अतः एण्टीहिस्टामिन वे औषधियाँ हैं, जो इन प्रभावों को समाप्त या नियंत्रित करते हैं।
उदाहरण-
1. एण्टरगन-यह प्रबल एलर्जिक परिस्थितियों में प्रयुक्त होती है।
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2. बेनाड्रिल
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प्रश्न 10.
साबुन और अपमार्जक में प्रमुख अंतर क्या है ?
उत्तर
साबुन और अपमार्जक में अन्तर-
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प्रश्न 11.
प्रत्येक को उदाहरण सहित समझाइये(अ) प्रतिजैविक, (ब) दर्दनाशी ( पीड़ाहारी )।
उत्तर
(अ) प्रतिजैविक- ऐसे रासायनिक पदार्थ जो सूक्ष्मजीवों से उत्पन्न होते है तथा अन्य सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर बीमारियों की रोकथाम करते हैं, प्रतिजैविक कहलाते हैं।
ये दो प्रकार के होते हैं

  1. वृहद् स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक-उदाहरण- टेट्रासाइक्लीन क्लोरेम्फेनिकॉल, पेनेसिलिन
  2. सूक्ष्म स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक-उदाहरण-नियास्टेटिन, बैसिट्रेसिन, पेनेसिलिन प्रतिजैविक औषधियाँ विभिन्न रोगों, जैसे- टायफाइड, वूफिंग कफ, न्यूमोनिया तथा तपेदिक के उपचार में प्रयुक्त होती है।

(ब) दर्दनाशी (पीड़ाहारी)- वे औषधियाँ जो शरीर के दर्द या पीड़ा को कम करने में प्रयुक्त होती है, दर्दनाशी या पीड़ाहारी औषधियाँ कहलाती है।
प्रकार तथा उदाहरण-

  1. नार्कोटिक-मार्फीन, कोडीन।
  2. नॉन-नार्कोटिक-ऐस्प्रिन, पैरासिटामॉल, ऐनाल्जिन।

प्रश्न 12.
परिरक्षक किन्हें कहते हैं ? किन्हीं दो परिरक्षकों के नाम व सूत्र लिखिए।
उत्तर
परिरक्षक वे भौतिक तथा रासायनिक पदार्थ हैं जो खाद्य पदार्थ की रंग, गंध, संघटन तथा पौष्टिक मान नष्ट किये बिना अधिक समय तक भण्डारण में सहायक होते हैं।
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दैनिक जीवन में रसायन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए

  1. एण्टीफर्टिलिटी ड्रग्स
  2. एण्टासिड
  3. डिटर्जेन्ट (अपमार्जक)
  4. शामक औषधि
  5. सल्फा ड्रग।

उत्तर
1. एण्टीफर्टिलिटी ड्रग्स-वे रासायनिक पदार्थ जिनका उपयोग प्रजनन क्षमता को नियंत्रित करने में किया जाता है एण्टीफर्टिलिटी औषधियाँ कहलाती हैं। एण्टीफर्टिलिटी के प्रयोग से महिलाओं में मासिक स्राव चक्र तथा अण्ड विर्सजन को नियंत्रित करते हैं। आजकल जिन उर्वरता निरोधक का सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा रहा है वे हैं–मेस्ट्रेनाल, नॉन-एथिनड्रॉन आदि।
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2. एण्टासिड (Antacid)—वे रासायनिक पदार्थजो अमाशय में उत्पन्न अम्ल की अधिकता (Acidity) को कम या उदासीन कर देते हैं और द्रव के pH मान में वृद्धि कर उपयुक्त स्तर पर ले जाते हैं। अमाशय में अम्ल की मात्रा बढ़ने से उत्तेजना तथा पीड़ा देती है जो अमाशय में HCl की अधिक मात्रा उत्पन्न होने से होता है तथा पेट में अल्सर (घाव) जैसे बीमारियों को उत्पन्न करता है। सामान्य रूप से उपयोग में लाये जाने वाले एण्टासिड Mg(OH)2, MgCO3,NaHCO3 आदि हैं। जो केवल रोगों को नियंत्रित करते हैं। रोगों के कारण को नहीं।
आजकल ओमेप्रेजॉल, लैन्सो प्रेजॉल आदि एण्टासिड के रूप में उपयोग किये जाते हैं।
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3. डिटर्जेन्ट (अपमार्जक)- ये सल्फोनिल अम्लों के लवण या ऐल्किल हाइड्रोजन सल्फेट होते हैं। यदि एथिलीन प्रकार के 10 से 18 कार्बन वाले असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों की सल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया कराई जाती है जो कुछ कार्बनिक अम्ल बनते हैं। कार्बनिक अम्लों के ये सोडियम लवण हैं। ऐसे यौगिकों को संश्लेषित डिटर्जेन्ट कहते हैं। जैसे-सोडियम n-डोडेसिल बेंजीन सल्फोनेट, सोडियम n-डोडेसिल सल्फेट।
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संश्लेषित डिटर्जेन्ट में दो भाग होते हैं

  1.  हाइड्रोकार्बन की लम्बी श्रृंखला जो हाइड्रोफोलिक (जल प्रतिकर्षी) होती है।
  2. छोटी आयनिक श्रृंखला जो हाइड्रोफिलिक (जल-आकर्षक) होती है। आयनिक श्रृंखला सामान्यतया सोडियम सल्फोनेट (SO3Na+)अथवा सोडियम सल्फेट (SO4Na+) की होती है।

डिटर्जेन्ट पृष्ठ सक्रिय यौगिक (Surface active compound) हैं, जो जल के पृष्ठ तनाव को कम कर देते हैं। जब ऐसे यौगिकों को पानी में विलेय किया जाता है, तो ये धूल कणों को पानी में वितरित कर पृष्ठ को साफ कर देते हैं।

डिटर्जेन्ट के उपयोग-डिटर्जेन्ट निर्मलक (Cleaning agents) होते हैं। इनका उपयोग साबुन की तरह सूती, ऊनी, रेशमी तथा कृत्रिम रेशों से बने हुए वस्त्रों, बर्तन एवं अन्य घरेलू वस्तुओं को साफ करने में किया जाता है।
डिटर्जेन्ट के गुण-डिटर्जेन्ट निम्नलिखित गुणों के कारण साबुन से अधिक अच्छा है-

  1. डिटर्जेन्ट मृदु तथा कठोर दोनों प्रकार के जल में प्रयुक्त किये जा सकते हैं।
  2. डिटर्जेन्ट का जलीय विलयन उदासीन होता है। अत: डिटर्जेन्ट बिना किसी हानि के कोमल रेशों से बने वस्त्रों को साफ करने में प्रयुक्त किये जा सकते हैं।

4. शामक औषधि-ये उन मरीजों को दिया जाता है जो मानसिक रूप से अस्वस्थ तथा उत्तेजित होते हैं। उदाहरण- इक्वैनिल, ल्यूमिनल, बार्बिट्यूरिक अम्ल, सैकोनॉल आदि।
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5. सल्फा ड्रग-ये रसोचिकित्सा औषधि है, ये ऐन्टीबायोटिक के समान क्रियाशील है किन्तु प्रयोगशाला में संश्लेषित किये जाते हैं। जैसे-सल्फाडाइजीन, सल्फापिरीडीन।

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प्रश्न 2.
निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए

  1. प्रशान्तक तथा सम्मोहक,
  2. प्रतिशमक।

उत्तर
1. प्रशान्तक (Tranquilizers) तथा सम्मोहक (Hypnotics) -ये औषधियाँ केन्द्रीय स्नायु तन्त्र के मुख्य केन्द्रों पर कार्य करती हैं तथा चिन्ता को कम करने में सहायता करती हैं। ये नींद लाने वाली गोलियों (Sleeping pills) के अवयव हैं। इनका उपयोग प्रायः बिना उचित कारणों के किया जाता है। इन
औषधियों का अधिक सेवन करने से इनकी आदत पड़ जाती है इसलिए इनको किसी चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिये। इनमें से कुछ, जैसे—ल्यूमिनेल तथा सैकोनॉल, बार्बिट्यूरिक अम्ल के व्युत्पन्न हैं। एक्वैनिल विभिन्न प्रकार की औषधि हैं।
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2. प्रतिशमक (Antidepressant)—ये भी केन्द्रीय स्नायु तन्त्र पर कार्य करते हैं। इन्हें लेने पर मनुष्य स्वस्थ रहता है तथा उसमें आत्मविश्वास की भावना जाग्रत होती है और ये उदास मनोदशा में मनुष्यों की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं। अतः इनको मनोदशा उत्थापक (Mood elevators) कहते हैं। इनको सभी प्रकार की पेप गोलियों (Pep pills) में डाला जाता है। इन्हें उचित सलाह के बिना नहीं लेना चाहिये। टॉफ्रेनिल ऐसी ही एक दवा है। मनोदशा का उत्थापन बेंजेडीन (ऐम्फेटेमीन) औषधियों के एम्फेटेमीन समूह के द्वारा भी उत्पन्न होता है। इनका प्रारूपिक उदाहरण बेंजेडीन है।
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प्रश्न 3.
निम्नलिखित रसायनों के उदाहरण लिखिए

  1. दो पीडाहारी,
  2. दो प्रतिरोधी,
  3. दो प्रतिरोधी रसायन,
  4. दो प्रतिजैविक,
  5. दो निश्चेतक,
  6. दो सल्फा औषधि,
  7. दो रॉकेट प्रक्षेपक,
  8. क्लोरेम्फेनिकॉल प्रतिजैविक के दो उपयोग।

उत्तर

  1. दो पीड़ाहारी- (i) मार्फीन, (ii) ऐस्प्रिन।
  2. दो प्रतिरोधी- (i) डेटॉल, (ii) बाइथायोनॉल।
  3. दो प्रतिरोधी रसायन– (i) बोरिक एसिड, (ii) जेन्शन वायलेट।
  4. दो प्रतिजैविक- (i) टेरामाइसिन, (ii) स्ट्रेप्टोमाइसिन ।
  5. दो निश्चेतक- (i) साइक्लोप्रोपेन, (ii) पेलेडाइन।
  6. दो सल्फा औषधि- (i) सल्फोनाइड, (ii) सल्फाइडीन।
  7. दो रॉकेट प्रक्षेपक- (i) पालीयूरेथेन, (ii) अमोनियम परक्लोरेट ।
  8. क्लोरेम्फेनिकॉल प्रतिजैविक के दो उपयोग-(i) टाइफाइड में, (ii) तीव्र बुखार व दस्त में।

प्रश्न 4.
रंजक एवं वर्णक में दो अंतर लिखिए।
उत्तर
रंजक एवं वर्णक में अंतररंजक
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प्रश्न 5.
अम्लीय रंजक तथा क्षारीय रंजक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
अम्लीय रंजक-इनमें अम्लीय समूह जैसे-फोनॉलिक, सल्फोनिक (-SO3H) आदि सोडियम लवण के रूप में रहते हैं। ये ऊन, रेशम आदि जान्तव तंतु को रंगते हैं। उदाहरण- ऑरेंज-I व II
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अम्लीय रंजक – मेथिल ऑरेंज, मेथिल रेड।
क्षारीय रंजक – मैलेकाइट ग्रीन, एनीलीन यलो।

MP Board Class 10th Hindi Navneet कवि परिचय

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MP Board Class 10th Hindi Navneet कवि परिचय

1. सूरदास [2009, 11, 15, 17]

जीवन परिचय-महाकवि सूरदास हिन्दी की कृष्ण-भक्ति शाखा के सबसे प्रथम एवं सर्वोत्तम कवि हैं। सूरदास पहले भक्त एवं बाद में कवि हैं। भक्ति की सूरदास जैसी तन्मयता अन्य कवियों में मिलना दुर्लभ है। सूरदास ने अपने बचपन की आँखें दिल्ली के निकट सीही नामक ग्राम में सन् 1478 ई. में खोलीं। सूरदास जन्मांध थे,परन्तु उनके काव्य की सरलता एवं मधुरता को निहार कर उनके जन्मांध होने में शंका होती है। सन् 1583 ई. के लगभग,वे मृत्यु की गोद में सो गये।

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रचनाएँ

  • सूरसागर,
  • साहित्य लहरी,
  • सूर सारावली। काव्यगत विशेषताएँ

(अ) भावपक्ष-गीत परम्परा का विकास-सूरदास ने विद्यापति की गीत परम्परा को विकसित किया,उनके पद गेय हैं तथा राग-रागिनी में खरे उतरते हैं।

  1. बाल-वर्णन-सूर का बाल-वर्णन इतना मोहक तथा मधुर है, जिसके आधार पर उन्हें वात्सल्य रस का सम्राट माना जाता है।
  2. रस योजना-सूरदास का श्रृंगार वर्णन उत्कृष्ट कोटि का है। गोपियों के प्रति प्रेम, रासलीला तथा विभिन्न प्रकार की क्रीड़ाओं का सरस तथा आकर्षक वर्णन किया है। ऐसा वर्णन संयोग श्रृंगार का है। कृष्ण का मथुरा गमन करने के पश्चात् गोपियों तथा बृजवासियों का व्यथित होना विरह का वर्णन है। इसके अतिरिक्त सूर के काव्य में शान्त, अद्भुत तथा वात्सल्य रस की धारा भी प्रवाहित है।
  3. भक्ति पद्धति-सूरदास की भक्ति, तुलसी के समान दास भाव की न होकर सखा भाव की है। इसमें भक्त भगवान के समक्ष दास भाव से प्रार्थना न करके सखा भाव से उन्हें अपना उद्धार करने की चुनौती देता है।
  4. ज्ञान और भक्ति-साधारण मनुष्य ज्ञान भक्ति का अनुसरण नहीं कर सकता। अतः सूरदास ने ज्ञान की अपेक्षा भक्ति को सुगम ठहराया है।

(ब) कलापक्ष-

  1. भाषा-सूरदास को ब्रजभाषा का निर्माता स्वीकारा गया है। सूरदास ने जन सामान्य में प्रचलित ब्रजभाषा को अपनाया है। भाषा सरस तथा माधुर्य से आपूरित है। संस्कृत शब्दों का भी प्रयोग है,जो जनसामान्य की समझ से परे नहीं है। लोकोक्तियों तथा मुहावरों के प्रयोग से भाषा में चार चाँद लग गए हैं। भाषा मर्मस्पर्शी तथा मोहक है। प्रचलित अरबी, फारसी शब्दों के साथ गुजराती,खड़ी बोली आदि भाषा के शब्द भी प्रयुक्त हैं।
  2. शैली-सूरदास ने मुक्तक शैली में मर्मस्पर्शी काव्य रचना की है। शैली की दृष्टि से गीतों की पद शैली को अपनाया है।
  3. अलंकार योजना-सूरदास ने अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग किया है। त्रियमक, श्लेष,उपमा, रूपक,व्यतिरेक, उत्प्रेक्षा आदि अलंकारों का बड़ा ही सुन्दर तथा सटीक प्रयोग है। संक्षेप में सूर की भाषा शैली प्रवाहमयी, सजीव तथा सरस है। सूर के काव्य में भावपक्ष तथा कलापक्ष का मणिकांचन योग है।

साहित्य में स्थान—सूर गीत काव्य के अमर गायक हैं। हिन्दी की भ्रमरगीत परम्परा के प्रवर्तक तथा उन्नायक हैं। उनकी कुछ रचनाएँ विश्व साहित्य की धरोहर हैं।

2. मलिक मुहम्मद जायसी [2009, 14]

जीवन परिचय-मलिक मुहम्मद जायसी प्रेममार्ग के जगमगाते रत्न हैं। वे प्रेम के अमर गायक तथा पुरोधा हे। इनका जन्म संवत् 1549 अर्थात् 900 हिजरी (सन् 1492) के आस-पास हुआ था। ‘आखिरी कलाम’ नामक ग्रन्थ में कवि ने इस तथ्य को उजागर किया है। अन्य विद्वानों ने इनका जन्म जायस अथवा गाजीपुर में स्वीकारा है। बाल्यकाल में चेचक के प्रकोप से इनकी बांयी आँख तथा कान चले गये थे। इस वजह से इनका चेहरा कुरूप हो गया था। वे भोजपुर तथा गाजीपुर के नृप (राजा) के आश्रय में निवास करते थे। संवत् 1599 अर्थात् सन् 1542 के लगभग मृत्यु की गोद में सदा-सदा के लिए सो गये।

रचनाएँ-

  1. पद्मावत-जायसी ने पद्मावत महाकाव्य की रचना की है। इसके अन्तर्गत चित्तौड़ के राजा रत्नसेन तथा सिंहद्वीप के राजा गन्धर्व सेन की बेटी पद्मावती की प्रेम कथा उल्लेख है।
  2. आखिरी कलाम इसमें कयामत (प्रलय) की चर्चा है।
  3. अखरावट-इस काव्य ग्रन्थ में ईश्वर, जीव एवं सृष्टि के संदर्भ में उनके गहन विचारों तथा सिद्धान्तों का पुट है। काव्यगत विशेषताएँ

(अ) भावपक्ष

  1. प्रेम एवं अध्यात्म विवेचन—जायसी ने अपनी कविता में प्रेम एवं आत्मा के सन्दर्भ में गहन चिन्तन के माध्यम से उनके सम्बन्ध को उजागर किया है।।
  2. विरह वर्णन—जायसी का विरह वर्णन हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि है। जायसी का विरह वर्णन प्रकृति के परिवर्तित रूपों के अनुसार बदला हुआ है। शरदकालीन ठण्डी चाँदनी यदि नायिका को जलाती है, तो अगहन की रातें बिताने में कष्ट का अनुभव होता है। बैसाख माह में चाँदनी एवं गर्मी अंगारों के समान झुलसाने वाली प्रतीत होती है।
  3. रहस्यवाद—जायसी का रहस्यवाद भावना प्रधान है। समस्त प्रकृति में कवि को अलौकिक सत्ता की अनुभूति होती है।
  4. श्रृंगार वर्णन—जायसी का श्रृंगार वर्णन उच्चकोटि का है। पद्मावती की सुन्दरता एवं लावण्य विवेचन में एक अभूतपूर्व बुद्धि कौशल का परिचय मिलता है।
  5. भक्ति भावना—जायसी ने ब्रह्म को निराकार स्वीकारा है तथा इस तक पहुँचने का एकमात्र साधन प्रेम है।
  6. प्रकृति चित्रण-शृंगार वर्णन के अन्तर्गत प्रकृति का बारहमासी विवेचन प्रशंसनीय है।
  7. सूफी प्रभाव-जायसी ने पद्मावत का सृजन भारतीय प्रेम परम्परा के अनुरूप किया है,लेकिन उस पर सूफी प्रभाव है।
  8. लोक संस्कृति चित्रण-पद्मावत काव्य में लोकजीवन तथा संस्कृति का मनभावन चित्रण किया है। कवि ने पद्मावती की सुन्दरता का अतिश्योक्तिपूर्ण चित्रण किया है।

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(ब) कलापक्ष
जायसी के काव्य में भावपक्ष एवं कलापक्ष का मणिकांचन योग है।

1. भाषा-जायसी के काव्य में ग्रामीण अवधी भाषा का प्रयोग है। अवधी के दोनों पक्ष पूर्वी एवं अवधी भाषा के शब्दों का विशेष रूप से अधिकांश मात्रा में प्रयोग है। समग्र रूप में कवि जायसी की भाषा बोधगम्य एवं सरस है।

2. शैली—जायसी का पद्मावत काव्य विश्व साहित्य की धरोहर है। शैली का प्रयोग भी भारतीयता के प्रभाव से अछूता नहीं है। “जायसी का क्षेत्र सीमित है, पर उनकी प्रेम वेदना अत्यन्त गूढ़ है। निःसन्देह पद्मावत हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि है।”

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के शब्दों में, “जायसी की भाषा देशी सांचे में ढली हुई है।”

जायसी का काव्य हिन्दू परिवारों से सम्बन्धित है। इस हेतु प्रबन्ध शैली में अपने काव्य की रचना की है। हिन्दी काव्यों में एक विशिष्ट शैली का प्रयोग है। इस प्रकार दोनों शैलियों के समन्वय से एक नूतन शैली अवलोकनीय है।

3. अलंकार-अलंकारों का जायसी ने स्वाभाविक प्रयोग किया है। रूपक,उपमा का प्रयोग विशेष रूप से उल्लेखनीय है। छन्द, चौपाई तथा दोहा छन्दों का प्रयोग है। साहित्य में स्थान-सूफी काव्य परम्परा के जायसी सर्वश्रेष्ठ एवं प्रशंसनीय कवि हैं। उनके विरह तथा प्रेम के स्वर आज भी काव्य रसिकों के हृदय को रससिक्त कर रहे हैं। मीरा एवं महादेवी काव्य में भी इनकी सदृश प्रेम एवं विरह की पीड़ा गुंजित है। हिन्दी साहित्य ऐसे साहित्य मनीषी के प्रति सदैव आभारी रहेगा।

3. गास्वामी तुलसादास [2009, 12, 13, 16]

जीवन परिचय-गोस्वामी तुलसीदास हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ कवि स्वीकारे गये हैं। उनकी रामचरितमानस की गणना विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय ग्रन्थों में की जाती है।

तुलसीदास के जन्म के सम्बन्धों में विद्वान एक मत नहीं हैं, किन्तु तथ्यों के आधार पर इनका जन्म सम्वत् 1554 में श्रावण शुक्ल सप्तमी को राजापुर नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था। दीनबन्धु पाठक की सुन्दर सुशील बेटी रत्नावली से इनका विवाह संस्कार हुआ था। इनकी मृत्यु के सन्दर्भ में निम्नलिखित दोहा प्रचलित है

संवत् सोलह सौ असी, असी गंग के तीर
श्रावण शुक्ला तीज शनि, तुलसी तज्यौ शरीर॥

संवत् 1680 में इनकी मृत्यु हुई।

रचनाएँ-

  • रामचरितमानस,
  • रामलाल नहछू,
  • वैराग्य सन्दीपनी,
  • वरवै रामायण,
  • पार्वती मंगल,
  • जानकी मंगल,
  • दोहावली,
  • गीतावली,
  • कवितावली,
  • रामाज्ञा प्रश्न,
  • विनय पत्रिका,
  • कृष्ण गीतावली। काव्यगत विशेषताएँ

(अ) भावपक्ष-तुलसीदास का भावपक्ष सरस तथा प्रभावोत्पादक है। काव्य में जीवन की अनेक अनुभूतियों का अंकुर है।।

  1. भक्ति भावना-तुलसीदास भगवान राम के अनन्य भक्त हैं। उन्होंने ‘एक राम घनश्याम हित चातक तुलसीदास’ कहकर चातक को स्वयं की भक्ति का आदर्श माना है।
  2. समन्वयकारी-तुलसीदास की कविता में सगुण एवं निराकार के प्रति एक समान आस्था व्यक्त की गई है।
  3. रस-योजना-तुलसी के काव्य में सभी रसों का सुन्दर परिपाक है। श्रृंगार के दोनों पक्ष संयोग तथा वियोग का सुन्दर अंकन है। दशरथ मरण में करुण रस की झाँकी है। धनुष यज्ञ में वीर रस का परिपाक है। तुलसी के काव्य में नवोरसों की अविरल धारा प्रवाहित है।
  4. युग चित्रण-तुलसी ने अपने ‘रामचरितमानस’ महाकाव्य में अपने युग के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा धार्मिक जीवन का मार्मिक एवं सफल चित्र अंकित किया है।
  5. प्रकृति-चित्रण-तुलसीदास जी ने अपनी रचनाओं में प्रकृति के मनोहर दृश्यों के साथ उसके भयंकर रूपों का भी आकर्षक तथा प्रभावपूर्ण चित्रण किया है।

(ब) कलापक्ष

  1. भाषा-तुलसीदास ने अपने काव्य में ब्रज एवं अवधी दोनों भाषाओं का प्रयोग किया है। संस्कृत के तत्सम शब्द भी प्रयुक्त हैं। लोकोक्ति तथा मुहावरों का भी प्रयोग है। भाषा अर्थ सम्पन्न एवं प्रवाहपूर्ण है।
  2. अलंकार योजना-तुलसी ने अपने काव्य में अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग किया है। रूपक, उत्प्रेक्षा, अनुप्रास, अन्योक्ति, उपमा एवं अन्वय अलंकारों का अत्यन्त ही सरस तथा स्वाभाविक प्रयोग है।
  3. छन्द-योजना-तुलसीदास के काव्य में चौपाई,कवित्त, सवैया दोहा आदि छन्दों का उचित प्रयोग है।
  4. शैली-तुलसी ने प्रबन्ध एवं मुक्तक दोनों शैलियों में काव्य रचना की है।

साहित्य में स्थान-आज सैकड़ों वर्ष बाद भी तुलसी जनता के सबसे अधिक लोकप्रिय और पथ-प्रदर्शक बने हुए हैं। समस्त विश्व उन्हें एक स्वर से महान कवि स्वीकार कर रहा है। यही तुलसी की महानता है।

4. बिहारीलाल [2010]

महाकवि बिहारी एक रस सिद्ध कवि हैं। रीतिकाल कवियों में उनका प्रमुख स्थान है।

जीवन परिचय–इनका जन्म सन् 1595 ई. में ग्वालियर के निकट बसुआ गोविन्दपुर नामक ग्राम में हुआ था। आप चतुर्वेदी ब्राह्मण थे। वे रीतिकालीन वैभव के अमर गायक हैं। नीति, शृंगार एवं भक्ति का इनके काव्य में अपूर्व समन्वय है। सन् 1663 में इनकी मृत्यु स्वीकारी गई है। इनकी ससुराल मथुरा में थी। इन्होंने अपनी युवावस्था ससुराल में ही बिताई। सन् में आप जयपुर के राजा के दरबार में चले गये। वहाँ का राजा जयसिंह अपनी छोटी रानी के प्रेम में आकण्ठ निमग्न था। बिहारी ने एक दोहा लिखकर अन्त:पुर में भेजा। उस दोहे को पढ़कर राजा की आँखें खुलीं। यहीं से बिहारी का मान बढ़ गया। जयपुर में ही बिहारी ने अपनी एकमात्र रचना ‘बिहारी सतसई’ की रचना की।

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रचनाएँ–
‘बिहारी सतसई’। बिहारी ने केवल एक काव्यग्रन्थ की रचना की जो ‘बिहारी सतसई’ नाम से विख्यात हुई। इसमें 719 दोहे संगृहीत हैं। काव्यगत विशेषताएँ

(अ) भावपक्ष

  1. भक्ति भावना-बिहारी राधा तथा कृष्ण के अनन्य भक्त हैं। अपने ग्रन्थ ‘सतसई’ के मंगलाचरण में इसी युगल रूप की प्रार्थना की है।
  2. सौन्दर्य चित्रण-बिहारी सौन्दर्य के कुशल चितेरे हैं। काव्य में बाह्य एवं आन्तरिक सौन्दर्य को भव्य तथा मनोरम रूप में अंकित किया गया है।
  3. प्रकृति चित्रण बिहारी ने प्रकृति की छटा को निकट से निहारा है। प्रकृति को कवि ने स्वतन्त्र सत्ता के रूप में स्वीकारा है। कवि का बसन्त एवं ग्रीष्मकालीन प्रकृति वर्णन सजीव तथा मनमोहक है।
  4. नीति-काव्य–बिहारी ने नीति विषयक दोहों की भी रचना की है। ये दोहे मानव को प्रकाश तथा ज्ञान प्रदान करने वाले हैं।
  5. श्रृंगार रस का परिचय–बिहारी प्रमुख रूप से श्रृंगार रस के चितेरे हैं। काव्य में शृंगार रस का सांगोपाग वर्णन है। संयोग-श्रृंगार के साथ ही विप्रलम्भ श्रृंगार का भी मार्मिक तथा प्रभावोत्पादक चित्रण है। श्रृंगार के अतिरिक्त शान्ति एवं हास्य रस का प्रवाह भी देखा जा सकता है, परन्तु कवि का मन शृंगार में ही रमा है।

(ब) कलापक्ष

  1. भाषा-बिहारी के काव्य में ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ है। उनकी भाषा परिमार्जित तथा व्याकरण सम्मत है। विषय के अनुरूप भाषा का परिवर्तित रूप देखा जा सकता है। उनकी भाषा में खड़ी बोली, संस्कृत, बुन्देली, अरबी-फारसी तथा अवधी भाषा के शब्दों का भी प्रयोग दृष्टिगोचर होता है।
  2. अलंकार योजना-अलंकारों के प्रयोग के सम्बन्ध में बिहारी बहुत ही कुशल तथा सक्षम हैं। हर दोहे में कोई न कोई अलंकार आवश्यक रूप से प्रयुक्त है। श्लेष, यमक, उत्प्रेक्षा, अन्योक्ति, विरोधाभास, उपमा तथा रूपक अलंकारों का प्रसंगानुकूल बहुत ही सफल एवं सराहनीय प्रयोग अवलोकनीय है।
  3. छन्द योजना-बिहारी का प्रिय छन्द ‘दोहा’ है। इन दो पंक्तियों के छन्द में कवि ने भावों का अथाह सागर लहरा दिया है। यत्र-तत्र सोरठा छन्द का भी प्रयोग है।

साहित्य में स्थान-बिहारी एक उच्चकोटि के रचनाकार थे। वे बहुज्ञ एवं प्रतिभा सम्पन्न थे। उन्होंने गागर में सागर भर दिया है। आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। उनकी उक्ति-वैचित्र्य को देखकर विद्वान दंग रह जाते थे। उनके काव्य में लोक-ज्ञान की छाप विद्यमान है। भाषा में ध्वन्यात्मकता है। उनकी अनुभूति गहन है। अभिव्यक्ति बेजोड़ है।

5. जयशंकर प्रसाद [2009, 15]

जीवन परिचय-जयशंकर प्रसाद बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। वे महान् कवि हैं,सफल उपन्यासकार एवं नाटककार हैं। छायावादी काव्य के आधार स्तम्भ हैं। रचनाकार के रूप में उनका व्यक्तित्व बेजोड़ है। आपने मानव जीवन की यथार्थ झाँकी प्रस्तुत की है। जीवन को भौतिकता की शिला से ऊपर उठाकर आध्यात्मिकता के गौरव शिखर पर आरूढ़ किया है।

वाराणसी के जाने-माने सुँघनी साहू परिवार में सन् 1889 ई.(वि.स. 1946) में जयशंकर प्रसाद ने अपनी शैशवावस्था की आँखें खोलीं। बाल्यकाल में सिर से माता-पिता का साया उठ गया। घर पर मन-चिन्तन एवं स्वाध्याय से विभिन्न भाषाओं का ज्ञान अर्जित किया। सन् 1937 ई.में वह 48 साल की अल्पायु में ही काल के गाल में समा गये।

रचनाएँ

  • कामायनी (महाकाव्य),
  • लहर,
  • करुणालय,
  • आँसू,
  • झरना,
  • महाराणा का महत्त्व,
  • लहर,
  • प्रेम पथिक,
  • कानन कुसुम। काव्यगत विशेषताएँ

(अ) भावपक्ष–प्रसाद जी छायावाद के प्रतिनिधि कवि तथा प्रमुख स्तम्भ हैं। इनके काव्य के भावपक्ष की विशेषताएँ निम्नवत् हैं :

  1. समरसता का संदेश प्रसाद ने अपने महाकाव्य ‘कामायनी’ में समरसता का सन्देश दिया है। जैसे-जैसे मानव,जगत एवं जीवन के अखण्ड रूप से परिचित होने लगेगा,वैसे ही मनु की तरह विषमता समाप्त होने लगेगी तथा समरसता का संचार प्रारम्भ होगा।
  2. छायावाद के जनक-हिन्दी काव्य में छायावाद का शुभारम्भ करने का श्रेय प्रसाद को ही जाता है। उनकी कविता में छायावाद की सम्पूर्ण विशेषताएँ तथा चरमोत्कर्ष विद्यमान है।
  3. प्रेम-वेदना की मर्मस्पर्शी झाँकी प्रसाद के काव्य में प्रेम एवं वेदना के मार्मिक चित्र अंकित किये गये हैं। प्रिय के विरह में जिन्दगी की वाटिका नष्ट हो चुकी है। कलियाँ बिखर गई हैं तथा पराग चारों ओर फैल रहा है। अनुराग-सरोज शुष्क हो रहा है।
  4. दार्शनिकता का पुट–प्रसाद के काव्य में दार्शनिकता का पुट भी देखा जा सकता है। प्रसाद मूलतः एक दार्शनिक कवि हैं। काव्य में आनन्दवाद की बहुत ही सशक्त अभिव्यक्ति है। दार्शनिकता की वजह से काव्य में रहस्यात्मकता का स्वाभाविक ही सामंजस्य हो गया है।
  5. प्रकृति चित्रण-प्रसाद जी ने अपने काव्य में प्रकृति के मृदु एवं कर्कश (कठोर) दोनों रूपों का जीवन्त वर्णन प्रस्तुत किया है।
  6. राष्ट्रीय भावों का चित्रण प्रसाद जी ने राष्ट्र के प्रति भी अपने कर्त्तव्य का निर्वाह किया है। वे प्रेम की मदिरा का पान करके भी राष्ट्र के प्रति उदासीन नहीं हुए हैं।

(ब) कलापक्ष

  1. भाषा-प्रसाद जी की भाषा परिमार्जित,व्याकरण सम्मत,संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली है। भाषा में माधुर्य,ओज एवं प्रसाद गुण कूट-कूट कर भरा हुआ है। भाषा भावानुकूल एवं सरस है। शब्द-चयन अनूठा है। लाक्षणिकता उनकी कविता का श्रृंगार है।
  2. अलंकार योजना प्रसाद का काव्य अनेक प्रकार के प्राचीन एवं नवीन अलंकारों से मंडित है। सभी अलंकार भाव प्रकाशन में सहयोगी हैं। परम्परागत अलंकारों के अलावा प्रसाद जी ने ‘विशेषण विपर्यय’ तथा ‘मानवीकरण’ नामक पाश्चात्य अलंकारों का भी अपने काव्य में सफल प्रयोग किया है।
  3. छन्द योजना–प्रसाद जी ने नवीन छन्दों को अपने काव्य में स्थान दिया है। ये उनकी कल्पना की उर्वरता तथा मौलिकता का प्रमाण हैं। आँसू में अपनाये गये छन्द को ‘ऑस’ छन्द के नाम से सम्बोधित करते हैं। नाद तथा तान में इनके छन्दों की तुलना संस्कृत में ‘मेघदूत’ से की जा सकती है।

साहित्य में स्थान प्रसाद जी का आधुनिक हिन्दी साहित्य में प्रमुख स्थान है। उनकी कविता में नई अभिव्यंजना शैली का मादक बसन्त अपनी शोभा बिखेर रहा है। यत्र-तत्र संगीत का मधुर नाद उल्लास की हिलोरें उत्पन्न कर रहा है। लय-तान युक्त कोमलकान्त पदावली में पीड़ा की वंशी निनादित है। समस्त प्राणियों के प्रति स्नेह एवं करुणा व्यक्त करने का आह्वान है। एक कवि, नाटककार, उपन्यासकार तथा कहानीकार के रूप में वे सदैव स्मरण किये जाते रहेंगे।

6. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

जीवन परिचय-आधुनिक युग के प्रणेता भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जन्म काशी में सन् 1850 में हुआ था। इनके पिता गोपालचन्द्र गिरिधरदास’ थे। वह भी एक सफल कवि थे। पारिवारिक दायित्व के फलस्वरूप इनकी शिक्षा-दीक्षा विधिवत् नहीं हो सकी। स्वाध्याय अध्ययन के माध्यम से अनेक विषयों का ज्ञान ग्रहण किया। आपको कविता करने का चाव बचपन से ही था। उन्होंने पाँच वर्ष की अल्पायु में ही एक कविता की रचना की। इनके सिर पर सरस्वती एवं लक्ष्मी दोनों का वरदान था। सन् 1885 में लगभग 35 वर्ष की अल्पायु में मृत्यु को प्राप्त हो गये।

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रचनाएँ-

  • भारत दर्शन,
  • दान लीला,
  • विजय पताका,
  • भारत वीर,
  • प्रेम माधुरी,
  • बकरी विलाप,
  • प्रेमाशास्त्र वर्णन,
  • विजयिनी,
  • कृष्ण चरित्र,
  • प्रेम सरोवर,
  • प्रेम मलिका,
  • बन्दर सभा,
  • भारत दुर्दशा,
  • नीलदेवी,
  • प्रेमयोगिनी,
  • सती प्रताप,
  • अंधेर नगरी,
  • सत्य हरिश्चन्द्र, आदि। काव्यगत विशेषताएँ

(अ) भावपक्ष

  1. भक्ति प्रधान काव्य-भारतेन्दु कृष्ण के अनन्य भक्त थे। उनमें भक्ति के पदों तथा भक्ति का अथाह सागर लहरा रहा है।
  2. राष्ट्र भक्ति का संचार–भारत दुर्दशा में देश की दुर्दशा का ज्वलन्त विवेचन है। भारत के पूर्व गौरव का निम्न पंक्तियों में स्वर मुखरित है :
    “भारत हे जगत विस्तार भारतभय कंपित संसार।”
  3. सामाजिक समस्या प्रधान-भारतेन्दु का हिन्दी साहित्य में पदार्पण करने का युग, नवीन एवं पुरातन का संगम था। विदेशी शासकों के अत्याचार से जन सामान्य त्राहि-त्राहि कर रहा था। समाज की अत्यन्त दयनीय दशा थी। अपने साहित्य के माध्यम से आपने जागृति का संदेश दिया।
  4. वर्णन की परिधि-भारतेन्दु जी ने नीति एवं श्रृंगार के सन्दर्भ में प्राचीन ढंग से कविता की रचना में राजनीति, समाज सुधार, राष्ट्र भक्ति आदि पर भी कविता की रचना की। उनके काव्य में विषयानुकूल तथा प्रेरणादायी क्षमता है।
  5. श्रृंगार प्रधान-शृंगार के संयोग एवं वियोग का मर्मस्पर्शी चित्रण है।
  6. प्रकृति चित्रण-प्रकृति का मानवीकरण सफलता से किया गया है।

(ब) कलापक्ष

  1. भाषा-भारतेन्दु जी ने गद्य एवं पद्य दोनों विधाओं की अभूतपूर्व प्रगति की। उन्होंने खड़ी बोली में गद्य एवं पद्य की रचना खड़ी बोली एवं ब्रजभाषा में की है। अप्रचलित शब्दों के प्रयोग करते समय शब्दों के स्थान पर युगानुरूप परिवर्तन किया। भाषा में अंग्रेजी एवं उर्दू दोनों भाषाओं का प्रयोग अवलोकनीय है। मुहावरों तथा कहावतों के प्रयोग से भाषा में चार चाँद लगाये गये हैं। भाषा की सरसता एवं सुषमा देखिए “पगन में छाले पड़े लाघने को लाले पड़े।”
  2. शैली-भारतेन्दु जी के काव्य में विभिन्न शैलियों का प्रयोग है। समाज सुधार में वर्णनात्मक शैली का प्रयोग है। शृंगार के पदों में रीतिकालीन शैली अपनायी है। काव्य में राष्ट्र प्रेम-उद्बोधनात्मक शैली का प्रयोग है। छन्द,कवित्त,रोला,सवैया,गजल, छप्पय, गीत, कवित्त, कुण्डलियाँ तथा दोहा आदि छन्दों का सफल प्रयोग है।
  3. अलंकार-उपमा, सन्देह, उत्प्रेक्षा तथा रूपक आदि अलंकारों की छटा विद्यमान है। साहित्य में स्थान-भारतेन्दु जी ने अपनी प्रतिभा एवं बुद्धिकौशल के माध्यम से भाषा को परिमार्जित एवं सर्वथा नूतन कलेवर प्रदान किया है। वे आधुनिक काल के जन्मदाता तथा जानेमाने साहित्यकार हैं।

7. सुभद्राकुमारी चौहान [2012, 16, 18]

जीवन परिचय–श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान का जन्म सन् 1904 में प्रयाग की निहालपुर नामक बस्ती में नाग पंचमी वाले दिन हुआ। आपके पिता का नाम ठाकुर रामनाथ सिंह था,जो अत्यन्त साहित्य-प्रेमी थे। सुभद्रा जी ने बाल्यकाल से ही कविता रचना प्रारम्भ कर दी थी। आपकी पढ़ाई प्रयाग के क्रास्थवेस्ट नामक स्कूल में हुई। आपके पति का नाम लक्ष्मणसिंह था, जो मध्य प्रदेश में ‘खण्डवा’ के निवासी थे। आपने भारत के स्वाधीनता आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया तथा अनेक बार जेल में रहीं। आपका निधन सन् 1948 को एक मोटर दुर्घटना में हुआ।

रचनाएँ-

  • नक्षत्र,
  • झाँसी की रानी,
  • चित्रधारा,
  • सीधे सादे चित्र,
  • उन्मादिनी। काव्यगत विशेषताएँ

(अ) भावपक्ष-
सुभद्राकुमारी चौहान का काव्य देश-प्रेम तथा राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत है।

वे वीर रस की कवयित्री हैं। उनकी देश-प्रेम से सम्बन्धित कविताओं में वीर रस की निर्झरिणी प्रवाहित है। सूर की तरह आपने भी वात्सल्य-रस का मार्मिक तथा हृदयस्पर्शी वर्णन किया है। शौर्य,तेज एवं वीरता का आपके काव्य में संगम देखने को मिलता है। दाम्पत्य जीवन का भी साकार चित्रण है। साहस तथा बलिदान की भावना भी मुखरित है। राष्ट्रीय जागरण का अलख भी ध्वनित है। सात्विक अनुभूतियों का सफल चित्रण भी द्रष्टव्य है। पारिवारिक जीवन के माधुर्य भाव का भी अंकन है।

(ब) कलापक्ष-
आपकी भाषा शुद्ध खड़ी बोली है। ओज उनकी भाषा का प्रधान गुण है। संस्कृत भाषा के शब्दों का प्रयोग भी देखने को मिलता है। भाषा में कोमलता, सरसता एवं सजीवता है।

आपकी शैली ओज तथा प्रवाह के गुण से सम्पन्न है। ये नारियों को सतीत्व एवं बलिदान की प्रेरणा देने वाली है। राष्ट्रीय भावनाओं का जागरण,जीवन की अनुभूतियों का सफल अंकन तथा जीवन की नैसर्गिक अभिव्यक्ति आपकी कविता के विशेष गुण हैं। निराशा को कविता में कोई स्थान नहीं है। सर्वत्र आशा का नाद मुखरित है।

रचनाएँ सरस हैं तथा मनोवैज्ञानिक धरातल पर प्रतिपादित हैं। हास्य, करुण, रौद्र तथा शृंगार रस का सफल चित्रण देखते ही बनता है। कविता के सौन्दर्य को निखारने के लिए दृष्टान्त, उल्लेख,उत्प्रेक्षा तथा अनुप्रास अलंकारों का प्रयोग दर्शनीय है।

साहित्य में स्थान-आप साहित्य के क्षेत्र में नारी जाति के गौरव का प्रतिनिधित्व करने वाली हैं। आपकी देश-प्रेम की कविताएँ नौजवानों को साहस तथा बलिदान की प्रेरणा देने वाली हैं। आप राष्ट्रीय कवयित्री के गौरव से गौरवान्वित हैं। आपकी कविताओं को पढ़कर आनन्द की अनुभूति होती है। प्रकृति के उद्दीपन रूप का चित्रण मनोहारी है। भावुकता, वात्सल्य तथा ओजगुण से ओत-प्रोत आपकी कविताएँ साहित्य जगत को अनुपम भेंट हैं। वे साहित्य-निधि को भरने में अपूर्व योगदान देने वाली हैं।

8. रामधारीसिंह ‘दिनकर’ [2009, 13]

जीवन परिचय श्री रामधारीसिंह ‘दिनकर’ जन-जागरण की काव्यधारा को प्रखर करने वाले हैं। उनकी कविताओं में योद्धा की गहन ललकार है। अनल का प्रखर ताप है। सूर्य-सा प्रचण्ड तेज है। देश-प्रेम की भावना के स्वर गुंजित हैं।

श्री रामधारीसिंह ‘दिनकर’ का जन्म बिहार राज्य के मुंगेर जनपद के अन्तर्गत सिमरिया घाट गाँव में सन् 1908 ई. में हुआ था। इनके पिता एक साधारण किसान थे। ‘उर्वशी’ काव्य ग्रन्थ पर उन्हें पुरस्कार मिला। सन् 1952 में राज्यसभा के सदस्य मनोनीत हुए। सन् 1954 ई.में राष्ट्रपति ने ‘पद्म भूषण’ की उपाधि प्रदान की। 24 अप्रैल,सन् 1974 ई. में मद्रास में ये काल के गाल में समा गये।

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रचनाएँ-
‘दिनकर’ जी की काव्य रचनाएँ निम्नवत् हैं-

  • परशुराम की प्रतीक्षा,
  • संचायिता,
  • बापू,
  • रेणुका,
  • रसवन्ती,
  • दिल्ली,
  • हुँकार,
  • सोमधेनी,
  • धूप और धुआँ,
  • इतिहास के आँसू,
  • चक्रवाल,
  • द्वन्द्वगीत,
  • नीम के पत्ते,
  • सीपी और शंख,
  • नील कुसुम,
  • रश्मिरथी,
  • कुरुक्षेत्र आदि।

काव्यगत विशेषताएँ
(अ) भावपक्ष-आधुनिक हिन्दी के कविता क्षेत्र में ‘दिनकर’ जी का गौरवपूर्ण स्थान है। कविता में छायावादी काव्य के मादक पुष्प विकसित हैं, वहीं प्रेम की गूंज है तथा राष्ट्रीय भावना के प्रखर स्वर भी गुंजित हैं।

  1. प्रगतिवादी स्वर-‘दिनकर’ के काव्य में प्रगतिवादी विचारधारा के स्वर तीव्र रूप में मुखरित हैं। समाज में व्याप्त विषमता के प्रति तीव्र आक्रोश है। ‘हुंकार’ तथा ‘रेणुका’ में मानवतावादी अनुगूंज है। वे जन-जीवन से जुड़े हैं।
  2. प्रेम एवं सौन्दर्य-कवि ने प्रेम तथा सौन्दर्य के भी मादक चित्र उतारे हैं। ‘रेणुका’ नामक काव्य रचना इसका प्रबल प्रमाण है। ‘रसवन्ती’ में कवि, अनुराग में तिरोहित हैं। कवि का प्रेम के प्रति लगाव है। यौवन के प्रति ललक है।
  3. देश-प्रेम-कवि ने अपनी कविता में देश-प्रेम के स्वर गुंजित किये हैं। भारत के स्वर्णिम अतीत का गुणगान किया है। वर्तमान की दुर्दशा पर अश्रु प्रवाहित किये हैं। साथ ही विप्लव का आह्वान भी है।
  4. श्रृंगार वर्णन-विप्लव तथा विद्रोह की ज्वाला बरसाने वाला कवि ‘रसवन्ती’ में आकर रस से ओत-प्रोत हो गया। ‘उर्वशी’ काव्य कृति में श्रृंगार रस का पूर्ण परिपाक हुआ है।
  5. प्रकृति चित्रण-कवि ‘दिनकर’ ने प्रकृति सुन्दरी के अनेक सौन्दर्यपूर्ण चित्र अंकित किये हैं।
  6. रस योजना–’दिनकर’ के काव्य में विविध रसों का पूर्ण परिपाक देखा जा सकता है। ‘कुरुक्षेत्र’ में वीर रस की जीवन्त झाँकी मिलती है। ‘रसवन्ती’ काव्य कृति श्रृंगार रस से प्रवाहित है।

(ब) कलापक्ष

  1. भाषा-‘दिनकर’ जी की भाषा परिमार्जित, शुद्ध खड़ी बोली है। आंचलिक तथा विदेशी शब्दों का भी प्रयोग किया है। मुहावरों तथा लोकोक्तियों के प्रयोग से भाषा जीवन्त हो उठी है। ओज के साथ प्रसाद गुण भी भाषा में विद्यमान है। संस्कृत पदावली का भी प्रयोग है। कोमल भावों का जहाँ प्रकाशन हुआ है,वहाँ भाषा कोमलकान्त पदावली से सुसज्जित है।
  2. अलंकार योजना-‘दिनकर’ जी का अलंकारों के प्रति विशेष झुकाव नहीं है। भावों तथा विचारों के पल्लवन हेतु उनके काव्य में अलंकारों का स्वतः ही आगमन निश्चय ही सराहनीय है। उत्प्रेक्षा, दृष्टान्त, उपमा तथा रूपक अलंकारों का कवि ने सफल प्रयोग किया है।

शैली-‘दिनकर’ जी के काव्य में गीति-नाट्य प्रबन्धक एवं मुक्तक शैलियों का बहुत ही सफल तथा काव्योचित प्रयोग है। शैली ओज,प्रसाद तथा माधुर्य गुण से ओत-प्रोत है।।

साहित्य में स्थान–’दिनकर’ आधुनिक हिन्दी काव्य के प्रमुख कवि हैं। उनकी कविता में महर्षि दयानन्द की सी निडरता, भगतसिंह-सा बलिदान,गाँधीजी की सी निष्ठा एवं कबीर की सी सुधार भावना एवं स्वच्छन्दता विद्यमान है। वे आधुनिक हिन्दी काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि हैं।

9. कबीरदास [2009, 10]

जीवन परिचय कबीर का हिन्दी के निर्गुणमार्गी सन्त कवियों में शीर्षस्थ स्थान है। वे सारग्राही महात्मा थे। पढ़े-लिखे न होने पर भी बहुश्रुत थे। कबीर उन महापुरुषों में से थे,जो युग में परिवर्तन कर देते हैं। युग के प्रवाह को बदल देते हैं। उन्होंने अन्धकार में भटकते हुए मानवों को तर्क तथा उपदेश के माध्यम से जाग्रत किया। महात्मा कबीरदास हिन्दी के भक्तिकाल की निर्गुणोपासक ज्ञानाश्रयी शाखा के सर्वश्रेष्ठ और प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं। कबीर ने उच्चवर्गीय हिन्दू-मुसलमानों के धार्मिक तथा सामाजिक आडम्बरों का विरोध कर एक ऐसे लोकधर्म की स्थापना करने का प्रयल किया था जिसे साधारण जनता अपना कर सुखी जीवन व्यतीत कर सकती थी। जुलाहा जाति के नीमा तथा नीरू दम्पत्ति ने इन्हें पाला-पोसा। आयु बढ़ने पर कबीर ने भी जुलाहे का व्यवसाय अपनाया। अधिकांश विद्वानों की धारणानुसार कबीर का जन्म सन् 1398 ई. में वाराणसी में हुआ था तथा सम्भवतः सन् 1518 ई. में मृत्यु की गोद में सदा-सदा के लिए सो गये।

रचनाएँ-
कबीर अशिक्षित थे। उन्होंने स्वयं किसी भी काव्य ग्रन्थ का सृजन नहीं किया। शिष्यों ने ही उनके उपदेशों तथा दर्शन का आकलन किया। वह संकलन ‘बीजक’ के रूप में जाना जाता है।

  • साखी,
  • सबद,
  • रमैनी। काव्यगत विशेषताएँ

(अ) भावपक्ष
कबीर का भावपक्ष अनेक विशेषताओं से मंडित है।

  1. विलक्षण व्यक्तित्व-कबीर का व्यक्तित्व विलक्षण था। यथार्थ में वे स्वभाव से सन्त थे। उनके समाज सुधार की अनूठी लगन थी। कवि बनना उनकी लाचारी थी।
  2. धार्मिक भावना-सूफियों के प्रेमवाद का कबीर पर गहरा प्रभाव है। उनका ब्रह्म-वर्णन सौन्दर्यमय है। कबीर ने गौतम बुद्ध के समान ही विश्वव्यापी दुःख का कारण तृष्णा को ठहराया है। उन्होंने चित्त शुद्धि,सहज मन निरोध तथा आत्म-निग्रह पर विशेष बल दिया है। तीर्थाटन तथा मूर्ति पूजा का विरोध किया है।
  3. रहस्यवाद-कबीर निर्गुण एवं निराकार ब्रह्म के उपासक हैं तथा ब्रह्म की अनुभूति ही उनके रहस्यवाद का मुख्य आधार है। रहस्यवाद के अन्तर्गत प्रेम की धारा पूर्णरूप से प्रवाहित है। कबीर के रहस्यवाद का क्षेत्र व्यापक है।
  4. समाज सुधार की भावना कबीर के काव्य में समाज सुधार की भावना प्रमुख रूप से मुखरित है। उन्होंने धार्मिक पाखण्डों का विरोध किया। समाज में बन्धुत्व के भाव विकसित किये। बाहरी आडम्बर,तीर्थ,स्नानादि को व्यर्थ माना है। हिन्दू तथा मुसलमानों के आडम्बरपूर्ण व्यवहार का विरोध किया है। सरल जीवन, सत्यता तथा स्पष्ट व्यवहार की कबीर के काव्य में सर्वत्र गूंज है। उन्होंने समाजगत दोषों का उन्मूलन किया। रूढ़ियों में बँधे हुए समाज को मुक्त किया।
  5. समन्वयवादी दृष्टिकोण-कबीर का काव्य समन्वयवादी भावना से ओत-प्रोत है। उसमें भारतीय अद्वैतवाद तथा इस्लाम का एकेश्वरवाद की गूंज है। हठयोगियों का साधनात्मक रहस्यवाद एवं सूफियों का भावात्मक रहस्यवाद कबीर के काव्य में समान रूप से मुखरित है।
  6. भक्ति-भावना कबीर की भक्ति में सन्यासियों की सी भक्ति दृष्टिगोचर होती है। जो गृह त्यागकर निकम्मे बन जाते हैं, वे सहजमार्गी हैं।

(ब) कलापक्ष-

  1. भाषा-कबीर शिक्षित नहीं थे। उन्होंने भ्रमण तथा सत्संग के माध्यम से ज्ञान अर्जन किया था। इसी वजह से उनके काव्य की भाषा में अरबी, फारसी,खड़ी बोली,ब्रज,पूर्वी,अवधी,राजस्थानी तथा पंजाबी आदि भाषाओं के शब्दों का प्रचुर मात्रा में प्रयोग देखा जा सकता है। उनकी भाषा अपरिमार्जित है। शब्दों को तोड़ा-मरोड़ा भी है। उनकी भाषा में गिरि कानन का सौन्दर्य है। उपवन जैसी काट-छाँट नहीं और न बनाव सिंगार है। भाषा में ओज है,जो सीधे वार करने में सक्षम है।
  2. शैली-कबीर ने मुक्तक काव्य शैली को अपनाया है। पदों में लम्बे काव्य रूपक प्रयुक्त हैं।
  3. अलंकार-कबीर के काव्य में अलंकारों का स्वाभाविक रूप में प्रयोग हुआ है। उपमा,रूपक,उत्प्रेक्षा एवं स्वभावोक्ति अलंकारों के प्रयोग से उनकी अभिव्यक्ति कलात्मक रूप में परिवर्तित हो गई है।

साहित्य में स्थान-कबीर ने अशिक्षित होते हुए भी जनता पर जितना गहरा प्रभाव डाला है.उतना अनेक बड़े-बड़े विद्वान भी नहीं डाल सके हैं। साधारण जनता में लोकप्रियता की दृष्टि से तुलसी के बाद कबीर का दूसरा स्थान माना जा सकता है।

10. रामनरेश त्रिपाठी [2017]

जीवन-परिचय–पं.रामनरेश त्रिपाठी का जन्म सन् 1889 ई.को जौनपुर जिले के कोइरीपुर नामक ग्राम में हुआ था। आपके पिता पंडित रामदत्त त्रिपाठी धार्मिक एवं कर्मनिष्ठ ब्राह्मण थे। इनकी स्कूली शिक्षा नवीं कक्षा तक ही चल सकी। इन्होंने स्वाध्याय से ज्ञानार्जन किया। जीवन के प्रारम्भिक काल से ही ये हिन्दी की सेवा करने लगे थे। उन्होंने साहित्य सेवा को ही जीवन का लक्ष्य बनाया। त्रिपाठी जी का काव्य आदर्शवाद की ओर उन्मुख है। छायावादी काव्य के सौन्दर्य की सूक्ष्म झलक भी यत्र-तत्र कविता में विद्यमान हैं देश-प्रेम आपके काव्य का मूल आधार है। ग्राम्य-गीतों का संकलन आपके श्रम तथा निष्ठा का प्रतीक है। मानव प्रेम के आप पक्षधर हैं। प्रकृति चित्रण के कुशल चितेरे हैं। त्रिपाठी जी ने लोकगीतों का संग्रह किया था।

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रचनाएँ–
त्रिपाठी जी प्रतिभासम्पन्न साहित्यकार थे। उन्होंने काव्य,नाटक,कहानी, निबन्ध और आलोचना सम्बन्धी अनेक कृतियाँ लिखीं। इनकी रचनाएँ निम्नांकित हैं

  • खण्डकाव्य-‘पथिक’,’मिलन’, ‘स्वप्न’।
  • कविताओं का संग्रह-मानसी’।
  • सम्पादित–’कविता कौमुदी’ (छ: भाग), ग्राम गीतों का संग्रह’। काव्यगत विशेषताएँ.

(अ) भावापक्ष (भाव तथा विचार) -रामनरेश त्रिपाठी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। देशभक्ति, माधुर्य, ग्राम्य जीवन, त्याग, बलिदान,प्रकृति, मानवता आदि आपके काव्य-विषय रहे हैं। उन्होंने आदर्शवादी काव्य की रचना करके देश को उत्थान की ओर प्रेरित किया है। वे रचनात्मक विचारधारा के पोषक कवि थे।

(ब) कलापक्ष (भाषा तथा शैली) -रामनरेश त्रिपाठी की भाषा शुद्ध, साहित्यिक खड़ी बोली है। इसमें व्याकरण सम्बन्धी त्रुटियों का अभाव ही है। इनकी भाषा विषयानुरूप बदलती रहती है। संस्कृत की तत्सम शब्दावली का पर्याप्त प्रयोग किया है। आपकी शैली में माधुर्य एवं प्रवाह का अद्भुत संयोग है। वर्णनात्मकता एवं उपदेशात्मकता आपकी शैली की विशेषताएँ हैं। अलंकारों,प्रतीकों का स्वाभाविक प्रयोग आपके काव्य की प्रमुख विशेषता है।

साहित्य में स्थान-भ्रमण तथा स्वाध्याय में संलग्न रहने वाले रामनरेश त्रिपाठी आधुनिक हिन्दी कवियों में विशिष्ट स्थान रखते हैं। इन्होंने देश प्रेम, संस्कृति, भारतीयता, ग्राम जीवन पर दुर्लभ साहित्य उपलब्ध कराया है। हिन्दी साहित्य को सम्पन्न बनाने में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। राष्ट्रीयता के पोषक साहित्यकार के रूप में उन्हें चिरकाल तक स्मरण किया जायेगा।

11. महादेवी वर्मा [2009, 11, 14]

जीवन परिचय-मीरा की सुमधुर वेदना को छायावादी काव्य में व्यक्त करने वाली कवयित्री महादेवी वर्मा काव्य जगत में विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इनका जन्म सन् 1907 में हुआ था। इनके पिताजी का नाम गोविन्दाचार्य था,जो प्रधानाचार्य पद पर प्रतिष्ठित थे। इनकी माता काव्य में विशेष रुचि रखती थीं। महादेवी पर इनका अत्यधिक प्रभाव पड़ा। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा इन्दौर में हुई। सन् 1933 में इन्होंने संस्कृत में एम.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की।

इनका दाम्पत्य जीवन सुखद नहीं रहा। उत्तर प्रदेश सरकार ने आपको विधान परिषद का सदस्य बनाया। 11 सितम्बर,1987 को काव्य जगत् की अमर गायिका इस नश्वर जगत से विदा लेते हुए सदैव के लिए अमर हो गईं।

रचनाएँ-

  • कविता संग्रह-नीरजा,दीपशिखा, यामा, नीहार,रश्मि आदि।
  • रेखाचित्र-पथ के साथी, अतीत के चलचित्र।
  • नारी साहित्य-श्रृंखला की कड़ियाँ।
  • आलोचना-हिन्दी का विवेचनात्मक गद्य।

काव्यगत विशेषताएँ-
(अ) भावपक्ष इसके अन्तर्गत छायावादी काव्य की समस्त विशेषताएँ उल्लेखनीय हैं।

  1. प्रकृति-वर्णन-प्रकृति के माध्यम से अपनी रहस्यवादी भावनाओं को व्यक्त किया है। अलंकार के रूप में प्रकृति वर्णन किया है। मानवीकरण, रूपक, उत्प्रेक्षा, अनुप्रास, रूपकातिश्योक्ति आदि अलंकार प्रयोग किये हैं। रस योजना-काव्य में शृंगार,करुण एवं शान्त रसों की मन्दाकिनी प्रवाहित है।
  2. रहस्यवादी भावनाएँ-रहस्यवाद में आध्यात्मिकता एवं वेदना का समन्वय है।

(ब) कलापक्ष

  1. भाषा-महादेवी के काव्य में खड़ी बोली का प्रयोग है। भाषा में संस्कृत शब्दों का आधिक्य है। भाषा सरस एवं कोमल-संस्कृत शब्दों के प्रयोग होने पर भी भाषा दुरूह न होकर सरस एवं कोमल है। इनके अलावा भाषा प्रवाह,मधुर एवं परिष्कृत है।
  2. शैली-वेदना एवं माधुर्य-काव्य में मीरा सदृश वेदना के स्वर मुखरित हैं। ससीम की असीम के प्रति विरह भावना हृदयस्पर्शी है।
  3. गीतात्मकता-महादेवी जी ने अपनी कविताओं को गीत शैली में रचा है। गीत मधुर, कर्णप्रिय एवं मनोहर हैं।
  4. अलंकार योजना-उत्प्रेक्षा,मानवीकरण एवं सांगरूपक अलंकारों का विशेष रूप से प्रयोग है। साहित्य में स्थान-वेदना एवं करुणा का राग अलापने वाली महादेवी वर्मा विश्वस्तरीय महान् कवयित्री हैं। इन्होंने भाषा को माधुर्य एवं लाक्षणिकता प्रदान की। छायावादी एवं रहस्यवाद का अद्भुत समन्वय प्रशंसनीय है।

12. सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

जीवन परिचय-प्रयोगवाद के क्षेत्र में ‘अज्ञेय’ को प्रतिनिधि कवि स्वीकारा गया है। इन्होंने अपनी बचपन की आँखें देवरिया जिले के अन्तर्गत कसिया नामक जिले में सन 1911 में खोलीं। इनके पिता हीरानन्द शास्त्री पुरातत्त्व विभाग में एक उच्च अधिकारी के रूप में प्रतिष्ठित थे; अतः उन्हें विभिन्न स्थान देखने तथा निवास करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बी. एस-सी. की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् क्रान्तिकारी आन्दोलन में सक्रिय भाग लेने के कारण उनकी अध्ययन व्यवस्था पर विराम लग गया। आपने अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया जिनमें दिनमान, सैनिक, विशाल भारत आदि का नाम उल्लेखनीय है। आकाशवाणी में भी कुछ समय तक कार्यभार संभाला। 4 अप्रैल, 1987 को हिन्दी प्रयोगवादी पुरोधा सदा-सदा के लिए मौत के आगोश में समा गया।

रचनाएँ-
रचना क्षेत्र में अज्ञेय’ जी का क्षेत्र बहु आयामी है। आपने कविता, गद्य, निबन्ध, कहानी,संस्करण तथा उपन्यास भी लिखे हैं।

  • कविता-संग्रह-सागर मुद्रा,अरी ओ करुणा प्रभामय,हरी घास पर क्षण भर, इन्द्रधनुष रौंदे हुए ये, भग्नदूत, आँगन के पार द्वार आदि।
  • निबन्ध-आत्मनेपद।
  • उपन्यास-अपने-अपने अजनबी, नदी के द्वीप,शेखर की जीवनी। काव्यगत विशेषताएँ

(अ) भावपक्ष-प्रेम एवं सौन्दर्य का मर्मस्पर्शी चिन्तन-अज्ञेय जी ने अपनी कविता में प्रेम एवं सौन्दर्य, मनुष्य के प्रति लगाव को मानव की सहज प्रवृत्ति के अन्तर्गत स्वीकारा है। यदि प्रेमानुभूति अपूर्ण रहती है तो उसका मन दुःखी तथा उदास हो जाता है।

  • रहस्यवादी अनुभूतियाँ-संसार में परिवर्तन के सदृश जैसे संहार, कोलाहल,प्रेम एवं घृणा विराट सत्ता का उपहार ही है। कवि उस विराट के प्रति एकाकार होने का भाव मन-मानस में सँजोए हुए है।
  • रस योजना-अज्ञेय जी की कविता में श्रृंगार के दोनों पक्षों-संयोग तथा वियोग का मनोरम तथा सजीव चित्रण है। वीर, करुण तथा रौद्ररस प्रयोग तो किया है,लेकिन उसमें नीरसता न होकर सरसता का पुट है।
  • प्रकृति-चित्रण-प्रकृति के प्रति अज्ञेय जी का विशेष लगाव है। उन्होंने आसमान, बादल, समुद्र, लहरें, तारागण, नक्षत्र एवं चाँदनी आदि का वर्णन अपनी कविता में किया है। मानव कल्याण की महत्ता—इनकी कविता में मानव कल्याण की भावना विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वही मनुष्य आदर्श एवं महान है,जो सच्चे मन से मानव कल्याण में रत है।

(ब) कलापक्ष

  1. भाषा-अज्ञेय ने अपने काव्य में भाषा का भावों के अनुरूप प्रयोग किया है। इसके लिए उन्होंने तत्सम प्रधान व संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली का प्रयोग किया है। इन्होंने अपनी भाषा में कहीं भी कठिन शब्दावली का प्रयोग नहीं किया है। यथास्थान इन्होंने अंग्रेजी व फारसी शब्दों का भी प्रयोग किया है।
  2. शैली-प्रयोगवादी धारा के प्रतिनिधि कवि होने के कारण इन्होंने अपने काव्य को नवीन शैली व नये बिम्बों और उपमानों से सजाया-सँवारा है।
    उन्होंने प्राचीन रूढ़ियुक्त शैली का कहीं भी प्रयोग न करके भावों के अनुरूप शैली का प्रयोग करके कविता को नये साँचे में ढाला है।
  3. अलंकार-अलंकार ही काव्य का प्राण है तथा आत्मा है। इस तथ्य को स्वीकार करते हुए इन्होंने अपने काव्य में उपमा, रूपक, श्लेष एवं मानवीकरण अलंकारों का प्रयोग कर अपने काव्य को अलंकृत किया है।
  4. छन्द-अज्ञेय जी ने नये प्रयोग और नये आयाम काव्य जगत को प्रदान किये। इसी कारण इन्होंने छन्दों के बन्धन को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने मुक्त छन्द का प्रयोग किया है। ध्वनियों का पर्याप्त ज्ञान होने के कारण अनेक गीतों की रचना की है।

साहित्य में स्थान-अज्ञेय हिन्दी साहित्य के नक्षत्र के सदृश हैं। इन्होंने काव्य गद्य, निबन्ध, उपन्यास आदि की प्रस्तुति नवीन ढंग से करके हिन्दी साहित्य में अद्वितीय स्थान प्राप्त किया। इन्होंने ‘तारसप्तक’ का प्रकाशन करके प्रयोगवादी काव्य में चार चाँद लगा दिये।

13. नागार्जुन

जीवन परिचय-नागार्जुन का जन्म दरभंगा जिले के सतलखा ग्राम में सन् 1911 में हुआ था। आपका नाम श्री वैद्यनाथ मिश्र था। प्रारम्भ में आप ‘यात्री’ नाम से लिखा करते थे। बाद में बौद्ध धर्म से प्रभावित होकर महात्मा बुद्ध के प्रसिद्ध शिष्य के नाम पर अपना नाम ‘नागार्जुन’ रख लिया।

नागार्जुन का जीवन अभावों से ग्रस्त रहा था। इन अभावों ने ही आप में शोषण के प्रति विद्रोह की भावना भर दी। व्यक्तिगत दुःख ने ही आपको मानव-मात्र के दुःख को समझने की क्षमता प्रदान की। नागार्जुन की आरम्भिक शिक्षा संस्कृत पाठशाला में हुई। देश-विदेश घूमते हुए वे श्रीलंका जा पहुँचे। वहाँ आप संस्कृत के आचार्य बन गए। स्वाध्याय से ही आपने कई भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया। आप सन् 1941 में भारत लौट आए। नागार्जुन ने कई बार जेल-यात्रा की। स्वतन्त्र भारत में ही आपको अपनी विद्रोही प्रवृत्ति के कारण जेल जाना पड़ा। आप में शोषण के प्रति विद्रोह का भाव विद्यमान था। वे अपनी अनुभूति को निःसंकोच अभिव्यक्ति देते थे।

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रचनाएँ-
नागार्जुन की रचनाओं में विविधता है। उनमें जीवन की कठोर, यथार्थ तथा स्निग्ध कल्पना का अद्भुत समन्वय हुआ है। आपकी प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार हैं

  1. काव्य संग्रह–’युगाधार’, ‘प्यासी-पथराई आँखें’, ‘सतरंगे पंखों वाली’, ‘खून और शोले’ तथा ‘प्रेत का बयान’ आदि आपके काव्य-संग्रह हैं। इनमें वर्ग-संघर्ष, शोषण, विद्रोह के अतिरिक्त प्रेम, सौन्दर्य एवं प्रकृति का प्रभावी अंकन हुआ है।
  2. भस्मांकुर-यह एक खण्डकाव्य है, जिसमें भस्मासुर और शिव की पौराणिक कथा को नवीन सन्दर्भ में प्रस्तुत करने का सफल प्रयास किया है।
  3. ‘रतिनाथ की चाची’, ‘बलचनमा’, ‘नई पौध’, ‘बाबा बटेसरनाथ’, ‘दुखमोचन’, वरुण के बेटे’ आपके प्रसिद्ध उपन्यास हैं। इनमें आंचलिक प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।

इस प्रकार नागार्जुन ने काव्य तथा गद्य दोनों ही रूपों में श्रेष्ठ साहित्य का सृजन किया है।

काव्यगत विशेषताएँ-
(अ) भावपक्ष (भाव तथा विचार)-विविध विषयक काव्य रचना करने वाले नागार्जुन की दृष्टि यथार्थवादी रही है। आपने शोषितों के प्रति सहानुभूति एवं शोषण के प्रति विद्रोह का स्वर व्यक्त किया है। यायावरी स्वभाव वाले नागार्जुन के काव्य में प्रकृति साकार हो उठी है। सहजता नागार्जुन के काव्य की प्रमुख विशेषता है। स्वाधीन भारत के कसमसाते भारतीय जनजीवन की वेदना को आपने कविता के माध्यम से उजागार किया है। प्रेम-सौन्दर्य,राष्ट्रीयता आदि के पुट ने आपके काव्य को बहुआयामी बना दिया है। समसामयिक गतिविधियों, भ्रष्टाचार, उत्पीड़न,नेताओं की स्वार्थपरता आदि पर आपने करारे प्रहार किए हैं।

(आ) कलापक्ष (भाषा तथा शैली)-नागार्जुन ने सामान्य बोलचाल की खड़ी बोली में पूर्ण साहित्यिकता का संचार कर दिखाया है। सरलता, सुबोधता, स्पष्टता एवं मार्मिकता आपकी भाषा की प्रमुख विशेषताएँ हैं। नागार्जुन के काव्य में अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग हुआ है। आपने छन्दबद्ध एवं छन्द मुक्त दोनों प्रकार के काव्य की रचना की है। आपके काव्य के कलापक्ष में सरलता,स्पष्टता के साथ सरसता का अद्भुत संयोग है।

साहित्य में स्थान-जनसामान्य की आशाओं, आकांक्षाओं को वाणी प्रदान करने वाले नागार्जुन के काव्य में नवचेतना का भाव भरा है। बिना किसी भय, द्वन्द्व, संकोच से अपनी बात को दमदारी से रखने वाले नागार्जुन का आधुनिक हिन्दी कवियों में महत्त्वपूर्ण स्थान है। अपनी सपाट बयानी के लिए वे निरन्तर याद किए जायेंगे।

महत्त्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

1. सूर के पदों की भाषा है [2013, 17]
(i) ब्रज
(ii) अवधी
(iii) हिन्दी
(iv) बुन्देलखण्डी।
उत्तर-
(i) ब्रज

2. मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा लिखित है
(i) पद्मावत
(ii) कामायनी
(iii) कवितावली
(iv) मृग और तृष्णा।
उत्तर-
(i) पद्मावत

3. तुलसीदास का अति लोकप्रिय ग्रन्थ है
(i) पार्वती मंगल
(ii) रामचरितमानस
(iii) प्रतिध्वनि
(iv) आकाशद्वीप।
उत्तर-
(ii) रामचरितमानस

4. ‘सतसैया’ किस कवि की रचना है?
(i) जयशंकर प्रसाद
(ii) गिरधर
(iii) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(iv) बिहारी।
उत्तर-
(iv) बिहारी।

5. कवि गिरिधर की गणना की जाती है [2010].
(i) वात्सल्य रस के कवि
(ii) युगान्तरकारी कवि
(iii) हास्य गीत के कवि
(iv) नीति काव्य के रचयिता।
उत्तर-
(iv) नीति काव्य के रचयिता।

6. रामनरेश त्रिपाठी का जन्म स्थान है
(i) कोइरीपुर (उ.प्र)
(ii) सोरों (उ.प्र)
(iii) बिलासपुर (म.प्र)
(iv) शाजापुर (म.प्र)।
उत्तर-
(i) कोइरीपुर (उ.प्र)

7. नरेश मेहता का जन्म प्रदेश है
(i) उत्तर प्रदेश
(ii) मध्य प्रदेश
(iii) हिमाचल प्रदेश
(iv) आन्ध्र प्रदेश।
उत्तर-
(ii) मध्य प्रदेश

8. हरिवंशराय बच्चन’ की रचना है
(i) मधुप्याला
(ii) प्रेम-पथिक
(iii) मधुशाला
(iv) प्रेम-माधुरी।
उत्तर-
(iii) मधुशाला

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9. त्रिलोचन के जन्म का वर्ष है
(i) सन् 1911
(ii) सन् 1907
(ii) सन् 1913
(iv) सन् 1917.
उत्तर-
(iv) सन् 1917.

10. अभिमन्यु अनंत निवासी हैं
(i) वियतनाम
(ii) नेपाल
(iii) मॉरीशस
(iv) सूरीनाम।
उत्तर-
(iii) मॉरीशस

11. मैथिलीशरण गुप्त की रचना है [2010]
(i) सुमन
(ii) पंचवटी
(ii) समर्पण
(iv) मंजूषा।।
उत्तर-
(ii) पंचवटी

12. सुभद्राकुमारी चौहान मूलत: कवयित्री हैं [2010]
(i) भक्ति रस
(ii) वीर रस
(iii) श्रृंगार रस
(iv) हास्य रस।
उत्तर-
(ii) वीर रस

13. आधुनिक मीरा के नाम से प्रसिद्ध हैं [2014, 17]
(i) महादेवी वर्मा,
(ii) उषा प्रियंवदा,
(iii) सुभद्रा कुमारी चौहान,
(iv) रजनी पनिकर।
उत्तर-
(i) महादेवी वर्मा,

14. जायसी किस काव्यधारा के कवि हैं? [2018]
(i) रामभक्ति मार्गी,
(ii) कृष्णभक्ति मार्गी,
(iii) ज्ञान मार्गी,
(iv) प्रेम मार्गी।
उत्तर-
(ii) कृष्णभक्ति मार्गी,

15. ‘षड-ऋतु वर्णन में प्रसिद्ध कवि का नाम है
(i) गिरिधर,
(ii) रहीम,
(iii) पद्माकर,
(iv) नागार्जुन।
उत्तर-
(iii) पद्माकर,

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. बिहारी की रचना …………………………. “है। [2010]
2. रीतिसिद्ध परम्परा के कवि …………………………. हैं। [2018]
3. रामधारीसिंह दिनकर को ‘उर्वशी’ रचना के लिए …………………………. पुरस्कार मिला।
4. कबीर भक्तिकालीन निर्गुण धारा की …………………………. शाखा के कवि माने जाते हैं।
5. रामनरेश त्रिपाठी की प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा …………………………. में ही हुई।
6. हरिनारायण व्यास का जन्म सन् …………………………. में हुआ था।
7. जयशंकर प्रसाद की रचना …………………………. है। [2010]
8. गिरिधर द्वारा प्रयुक्त छन्द ………………………….” है। [2013, 17]
9. गिरिधर की अधिकतर कुण्डलियाँ …………………………. भाषा में रचित हैं।
10. महादेवी वर्मा ‘आधुनिक युग की …………………………. के नाम से प्रसिद्ध हैं।
11. ‘अज्ञेय’ का जन्म पंजाब के …………………………. नगर में हुआ।
12. अंधेर नगरी ………………………….” का प्रसिद्ध नाटक है। [2011]
13. विरह और वेदना की कवयित्री …………………………. हैं। [2012]
14. हरिवंशराय बच्चन की प्रसिद्ध कृति …………………………. है। [2012]
15. मलिक मुहम्मद जायसी की रचना …………………………. है। [2015]
उत्तर-
1. बिहारी सतसई,
2. बिहारी,
3. ज्ञानपीठ,
4. ज्ञानाश्रयी,
5. जौनपुर,
6. 1923 ई.,
7. कामायनी,
8. कुण्डलियाँ,
9. अवधी,
10. मीरा,
11. करतारपुर,
12. भारतेन्दु,
13. महादेवी वर्मा,
14. मधुशाला,
15. पद्मावत।

सत्य/असत्य

1. डॉ. हरिवंश राय बच्चन का जन्म बनारस में हुआ था।
2. जायसी की भाषा ठेठ अवधी है। [2010]
3. महादेवी वर्मा की प्रारम्भिक शिक्षा इन्दौर और उच्च शिक्षा प्रयाग में हुई।
4. अज्ञेय का पूरा नाम सर्वेश्वर हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है।
5. ‘ताप के तापे हुए दिन’ कविता संग्रह के लिए त्रिलोचन जी को ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।
6. तुलसी ने लोकमंगलकारी काव्य की रचना की है।
7. पद्माकर रीतिकाल के प्रमुख कवि हैं। [2010]
8. बिहारी रीतिकाल के प्रतिनिधि कवि हैं।
9. जयशंकर प्रसाद जी का बचपन दुःखों में व्यतीत हुआ।
10. नरेश मेहता नई कविता के कवि हैं।
11. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ राष्ट्रीय भावना के ओजस्वी कवि हैं। [2010]
12. ‘सूरसागर’ की रचना सूरदास ने की है। [2014]
13. ‘लोकायतन’ के रचयिता सूरदास हैं। [2017]
14. ‘विनयपत्रिका’ तुलसीदास की रचना है। [2018]
उत्तर-
1. असत्य,
2. सत्य,
3. सत्य,
4. असत्य,
5. असत्य,
6. असत्य,
7. असत्य,
8. सत्य,
9. सत्य,
10. सत्य,
11 सत्य,
12. सत्य,
13. असत्य,
14. सत्य।।

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सही जोड़ी मिलाइए

I. ‘अ’ – ‘ब’
1. सूरदास – (अ) प्रेम पथिक
2. हरिनारायण व्यास – (ब) बादल को घिरते देखा है
3. जयशंकर प्रसाद – (स) साहित्य लहरी
4. नागार्जुन – (द) वीरों का कैसा हो वसन्त?
5. सुभद्राकुमारी चौहान – (इ) सोये हुए बच्चे से
उत्तर-
1. → (स),
2. → (इ),
3. → (अ),
4. → (ब),
5. → (द)।

II. ‘अ’ – ‘ब’
1. यामा – (अ) पद्माकर
2. ऋतु वर्णन – (ब) नरेश मेहता
3. पथ की पहचान – (स) त्रिलोचन
4. चरैवेति जनगरबा – (द) महादेवी वर्मा
5. चाँदनी चमकती है, गंगा बहती जाती है – (इ) हरिवंशराय बच्चन
उत्तर-
1. → (द),
2. → (अ),
3. → (इ),
4. → (ब),
5. → (स)।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. सूरदास ने किस भाषा में काव्य की रचना की है?
2. जायसी की भक्ति किस प्रकार की है?
3. बिहारी के काव्य की भाषा कौन-सी है?
4. प्रारम्भ में नागार्जुन किस नाम से लिखा करते थे?
5. रामधारीसिंह ने अपना उपनाम ‘दिनकर’ किसके आधार पर रखा?
6. कबीर की मृत्यु कहाँ हुई?
7. रामनरेश त्रिपाठी के पिता का क्या नाम था?
8. हरिवंशराय बच्चन को राज्यसभा का सदस्य कब बनाया गया?
9. महाप्रस्थान किसकी रचना है?
10. अभिमन्यु अनन्त ने किस पत्रिका का सम्पादन किया?
उत्तर-
1. ब्रजभाषा,
2. प्रेममार्गी निर्गुण भक्ति,
3. ब्रजभाषा,
4. यात्री,
5. अपने पिता के नाम के आधार पर,
6. मगहर,
7. पं. रामदत्त त्रिपाठी,
8. सन् 1966,
9. नरेश मेहता,
10. ‘बसन्त’ पत्रिका।

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 14 शबरी

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 14 शबरी (डॉ. प्रेम भारती)

शबरी  पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

शबरी लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
शबरी की कुटिया में कौन आया?
उत्तर
शबरी की कुटिया में राम-लक्ष्मण आये।

प्रश्न 2.
स्वागत का सुविधान से क्या आशय है?
उत्तर
स्वागत का सुविधान से आशय है-स्वागतहित हेतु उपयुक्त भौतिक संसाधन का होना।

प्रश्न 3.
द्विजगण क्या सुनाते हैं और क्यों?
उत्तर
द्विजगण शाखोच्चार सुनाते हैं क्योंकि उस समय वहाँ राम-लक्ष्मण उपस्थित थे।

प्रश्न 4.
शबरी का किस भाव को देखकर श्रीराम हँस पड़े?
उत्तर
शबरी के मन की विहलता को देखकर श्रीराम हँस पड़े?

प्रश्न 5.
शबरी ने राम-लक्ष्मण को खाने के लिए क्या दिए?
उत्तर
शबरी ने राम-लक्ष्मण को खाने के लिए मीठे-मीठे बेर दिए।

शबरी  दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
प्रस्तुत कविता में श्रीराम की छवि का वर्णन किस रूप में किया गया है?
उत्तर
प्रस्तुत कविता में श्रीराम की सरस, सरल और भक्तवत्सल छवि का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 2.
राम-लक्ष्मण को अपनी कुटिया पर आया हुआ देखकर शबरी की दशा कैसी हो गई?
उत्तर
राम-लक्ष्मण को अपनी कुटिया पर आया हुआ देखकर शबरी की दशा विह्वल (गदगद) हो गई।

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प्रश्न 3.
शबरी ने श्रीराम-लक्ष्मण का सत्कार कैसे किया?
उत्तर
शबरी ने श्रीराम-लक्ष्मण का सत्कार उन्हें मीठे-मीठे बेर खिलाकर किया।

प्रश्न 4.
‘किंतु आज जो तृप्ति…कहा नहीं जाता।’ इस पंक्ति का केंद्रीय भाव लिखिए।
उत्तर
‘किंतु आज जो तृप्ति…कहा नहीं जाता।’
उपर्युक्त पंक्ति के द्वारा कवि ने श्रीराम की भक्तवत्सलता को चित्रित किया है। इसके द्वारा उसने यह सुस्पष्ट करना चाहा है कि श्रीराम दीनबंधु हैं। वे थोडी-सी भी भक्ति से रीझ जाते हैं।

शबरी  भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के समास विग्रह कीजिए
कमल-नयन, जड़-चेतन, कृपा-सिंधु, बनमाली।
उत्तर
शब्द – समास-विग्रह
कमल-नयन – कमल के समान नयन
जड़-चेतन – जड़ और चेतन
कृपा-सिन्धु – कृपा का सिन्धु
वनमाली – वन का माली।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए
गगन, कमल, जननी, दृग, वसंत।
उत्तर
शब्द – पर्यायवाची शब्द
गगन – आकाश आसमान
कमल – नीरज, जलज
दृग – आँख, नेत्र
वसंत – ऋतुराज, ऋतुपति।

प्रश्न 3.
कविता में ‘भोजन-भोजन’, ‘बेर-बेर’ जैसे पुनरुक्त शब्दों का प्रयोग हुआ है। पाठ में आए इसी प्रकार के पुनरुक्त शब्दों को छाँटिए।
उत्तर
‘पुनि-पुनि’, ‘चुन-चुन’, ‘नहीं-नहीं’, ‘युगों-युगों’, ‘खाते-खाते’ और ‘ला-ला’

प्रश्न 4.
“बेर-बेर में इन बेरों की
शबरी करता मृदुल सराह।” इन पंक्ति में बेर शब्द के कौन-कौन से अर्थ निकल रहे हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपयुक्त में ‘बेर’ शब्द से दो अर्थ निकल रहे हैं

  1. बेर = एक फल, और
  2. बेर = देर।

शबरी  योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
श्रीराम अपनी बन-यात्रा में सामाजिक समरसता के भाव को प्रकट करने वाले किन-किन पात्रों से मिले? खोजकर लिखिए।

प्रश्न 2. ‘शबरी-प्रसंग’ का नाट्य रूपांतरण कर विद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

शबरी  परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘शबरी’ कविता में कवि ने किन नयी उदभावनाओं को प्रकट किया है?
उत्तर
‘शवरी’ कविता में कविवर डॉ. प्रेम भारती की लोकप्रिय कृति ‘शबरी’ से उद्धृत है। ‘शबरी’ के प्रख्यात पौराणिक प्रसंग में कवि ने कतिपय मौलिक और एकदम नयी उद्भावनाओं को प्रकट किया है। शबरी का हृदय श्रीराम के स्वागत हेतु प्रफुल्लता से परिपूर्ण हो उठता है। कवि ने शबरी के हृदय की उदारता और वात्सल्यता को संपूर्ण वन-प्रांतर तक विस्तारित कर दिया है। उन्होंने शबरी के भीतर जागते द्वंद्व का चित्रण करते हुए उसकी स्वाभाविक आत्म-गरिमा का एक साथ चित्रण किया है।

प्रश्न 2.
शबरी का मन विहल (आत्म-विभोर) क्यों हो गया?
उत्तर
शबरी का मन विह्वल (आत्म-विभोर) हो गया। यह इसलिए उसकी कुटिया पर स्वयं राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ आए थे। दूसरी बात यह है कि श्रीराम का रूप-सौंदर्य अनोखा था। वे साँवले थे। सोने के समान उनका शरीर चमक रहा था। उनकी आँखें कमल के समान थीं। उनके सिर पर सुंदर जटा-मुकुट था। वे धनुष-बाण और तरकश लिये हुए थे। इस प्रकार अपनी शारीरिक सुंदरता से अत्यधिक मन को मोह रहे थे।

प्रश्न 3.
‘शबरी’ कविता के माध्यम से कवि ने कौन-सा संदेश प्रकट किया है?
उत्तर
‘शबरी’ कविता के माध्यम से कवि ने यह संदेश प्रकट करना चाहा है कि यद्यपि श्रीराम के स्वागतहित शबरी के पास उपयुक्त भौतिक संसाधन नहीं है, किंतु प्रेम से भरा हृदय तो है। कवि ने इस प्रसंग में राम की आँखों में आँसुओं की छलछलाहट लाकर उसे एक नाम स्मृति विधान प्रदान किया है। श्रीराम के आह्लाद उनकी तृप्ति और प्रेम प्रबलता को कवि ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। इस प्रकार कवि ने प्रस्तुत कविता में शबरी और राम के मिलन के माध्यम से कवि ने वनवासी बंधुओं के साथ राम की अनुरक्ति का चित्रण कर सामाजिक समरसता के संदेश को प्रकट किया है।

प्रश्न 4.
रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्दों के चयन से कीजिए।
1. राम ………….. से पता लगाते हुए शबरी की कुटिया पर आए। . (वनवासियों, मुनियों)
2. स्वागत के ………….. वहाँ था। (सुविधान, अविधान)
3. सूर्य आकाश का …………… लिए हुए खड़ा था। (दीप, प्रकाश)
4. द्विजगण …………… सुना रहे थे। (वेदोच्चार, शोस्त्रोच्चार)
5. श्रीराम के सिर पर …………… मुकुट थे। (स्वर्ण, जटा)
उत्तर
1. मुनियों
2. सुविधान
3. दीप
4. शाखोच्चार
5. जटा

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प्रश्न 5.
दिए गए कथनों के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।
1. डॉ. प्रेम भारती का जन्म हुआ था
1. उत्तर-प्रदेश में
2. आन्ध्र-प्रदेश में
3. मध्य-प्रदेश में
4. हिमाचल प्रदेश में।
उत्तर
3. मध्य-प्रदेश में

2. डॉ. प्रेम भारती ने पी-एच. डी. की
1. लघु पत्रिकाओं पर
2. कहानियों पर
3. उपन्यासों पर
4. कविताओं पर।
उत्तर
1. लघु पत्रिकाओं पर

3. डॉ. प्रेम भारती इस समय सदस्य हैं
1. मध्य-प्रदेश शिक्षा मण्डल के
2. राज्य स्तरीय साधारण सभा के
3.कार्यकारिणी मध्य-प्रदेश सर्वशिक्षा अभियान के
4. उपर्युक्त दोनों के।
उत्तर
4. उपर्युक्त दोनों के।

4. डॉ. प्रेम भारती पैदा हुए थे.
1.1930 में
2. 1932 में
3. 1933 में
4. 1931 में।
उत्तर
3. 1933 में

5. डॉ. प्रेम भारती की कृतियों में स्वर है
1. समाजवादी
2. अध्यात्मवादी
3. व्यक्तिवादी
4. मानवतावादी
उत्तर

प्रश्न 6.
सही जोड़ी का मिलान किजिए।
जलते हुए वन का वंसत – आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी
भगवान महावीर – तुलसीदास
साहित्य लहरी – दुष्यंत कुमार
कवितावली – डॉ. प्रेम भारती
कालिदास की समालोचना – सूरदास।
उत्तर
जलते हुए वन का वंसत – दुष्यंत कुमार
भगवान महावीर – डॉ. प्रेम भारती
साहित्य लहरी – सूरदास
कवितावली – तुलसीदास
कालिदास की समालोचना – आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

प्रश्न 7.
निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. शबरी राम की अकचक देख रही थी।
2. राम ने शबरी के द्वारा दिए हुए राजभोग को खाया।
3. शबरी की कुटिया पर राम आये।
4. शबरी के प्रति राम की भक्तवत्सल धारा बहने लगी थी।
5. राम ने कहा कि वे इस कुटिया पर आकर आयोध्या को भूल गए हैं।
उत्तर

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. सत्य।

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प्रश्न 6.
एक शब्द में उत्तर दीजिए।
1. श्रीराम के रूप-सौंदर्य को देखकर कौन सब भूल गया था?
2. किसके फूल अलक्षित थे?
3. शबरी की कुटिया कहाँ थी?
4. राम को कुटिया का वातावरण कैसा लगा?
5. राम शबरी की बेर खाकर क्या हो गए?
उत्तर

  1. जड़-चेतन
  2. तारों के
  3. दण्डकवन में
  4. घर-सा
  5. अघा गए।

शबरी  लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
राम शबरी की कुटिया तक कैसे आए?
उत्तर
राम शबरी की कुटिया तक मुनियों से पता लगाकर आए।’

प्रश्न 2.
शबरी को आत्मविभोर हुए देखकर राम ने क्या किया?
उत्तर
शबरी को आत्मविभोर हुए देखकर राम हँस दिए।

प्रश्न 3.
शबरी ने किस पर क्या रखी।
उत्तर
शबरी ने बेल-पत्र पर राम-लक्ष्मण के लिए थोड़े बेर रखे।

प्रश्न 4.
अन्त में श्रीराम ने शबरी से क्या कहा?
उत्तर
अंत में श्रीराम ने शबरी से कहा कि आज सचमुच में इस कुटिया पर मनुष्य के सभी प्रकार के विषाद मिट गए।

शबरी  कवि-परिचय

जीवन-परिचय-मध्य-प्रदेश के हिन्दी रचनाकारों में डॉ. प्रेम भारती अत्यधिक प्रसिद्ध हैं। आपका जन्म 14 मार्च, 1933 को मध्य-प्रदेश के (राजगढ़-व्यावरा) के खुजनेर कस्बे में हुआ था। आपने अपनी आरंभिक शिक्षा समाप्ति के बाद विक्रम विश्वविद्यालय से हिन्दी, और अर्थशास्त्र में एम.ए. और एम.एड. करने के बाद लघु पत्रिकाओं पर केंद्रित विषय पर पीएच.डी. किया है।

रचनाएँ-डॉ. प्रेम भारती की रचनाएँ निम्नलिखित हैं

‘शबरी’, ‘तुलसी के राम’, ‘वीरांगना दुर्गावती’, ‘भगवान महावीर’, ‘बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ और समास भारत के आधार स्तंभ।
भावपक्ष-डॉ. प्रेमभारती का साहित्य में भावपक्ष और कलापक्ष दोनों ही समान रूप से अलंकृत-मण्डित है। जहाँ तक आपके भावपक्ष का प्रश्न है, वहाँ तक आपका साहित्य अधिक सरस और रोचक है। इस दृष्टि से आपके काव्य का भावपक्षीय विशेषताओं में मानवतावादी स्वर की प्रधानता, सामाजिक समरसता और निश्छल कर्म की चेतना है। यही नहीं उसमें राष्ट्रीय गौरव की सुंदर झाँकी दिखाई देती है।

कलापक्ष-डॉ. भारती का कलापक्ष में उनकी आत्माभिव्यक्ति को प्रस्तुत करने वाली सटीक, संयत और अनुकूल भाषा-शैली है। अपनी सहज, सरल और आत्मकथन में काव्य-मूल्यों की रक्षा करते हुए डॉ. भारती ने साहित्य के शिल्प-सौंदर्य को हृदयस्पर्शी रूप में प्रस्तुत किया है। शिल्प-सौंदर्य को पुष्ट और प्रभावशाली बनाने के लिए आए हुए बिंब, प्रतीक-योजना बहुत ही सटीक और आकर्षक हैं।

साहित्य में स्थान-डॉ. प्रेम भारती का हिंदी साहित्य के महान रचनाकारों में चर्चित स्थान है। आपके लेखन में भारतीय मूल्य तत्त्वों का समावेश है। अध्यात्म, शिक्षा तथा साहित्य के अनेक आयामों को अभिव्यक्त करने वाले डॉ. भारती ने अपने साहित्य में भारतीय संस्कृति और इतिहास के उज्ज्वल चरित्रों को अपने काव्य में प्रस्तुत किया है।

शबरी  कविता का सारांश

प्रस्तुत कविता ‘शबरी’ डॉ. प्रेम भारती की चर्चित काव्य-रचना ‘शबरी’ से ली गई है। इसमें शबरी को पौराणिक संदर्भ में प्रस्तुत करते हुए उसे नये भाव-चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। कवि के अनुसार मुनियों से पता लगाते हुए श्री राय शबरी की कुटिया पर आए तो शबरी के पास उनके स्वागत के लिए उपयुक्त भौतिक साधन मौजूद नहीं थे। श्री राय के रूप-सौंदर्य को देखकर जड़-चेतन उसी में खो गए थे। सूर्य, तारे आदि उनकी आरती उतार रहे थे। द्विजगण शाखोच्चार सुना रहे थे। शबरी उन्हें चकित होकर देख रही थी। वह घबड़ा गई कि वह श्रीराम के लिए वंदना गीत क्या सुनाए। उसे इस तरह देखकर राम-लक्ष्मण हँसने लगे। फिर उसने श्रीराम के चरण को पकड़कर उन्हें बार-बार देखने लगी।

इसके बाद वह राम और लक्ष्मण को मीठे बेरों को चुन-चुनकर प्रेमपूर्वक उन्हें खाने के लिए देने लगी। फिर वह श्रीराम से कहने लगी-भगवन्! अनजाने में जो अपराध हुआ उसे क्षमा करें। आपको बेर भेंट करने की मेरी साध तो युगों-युगों से थी। श्रीराम को बेर चखने में राजभोग की तरह आनंद आ रहा था। इसलिए वे बार-बार उससे खाने के लिए बेर माँगने लगे थे। इस प्रकार राम-लक्ष्मण ने अमृत के समान शबरी के बेर को चखे। श्रीराम ने शबरी से कहा कि आज मुझे यहाँ पर बहुत बड़ीतृप्ति मिली है। इसलिए मैं यह कह रहा हूँ कि इस कुटिया पर मनुष्य को होने वाले सभी प्रकार के विषाद मिट जाएं।

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शबरी  संदर्भ, प्रसंग सहित व्याख्या

1. और सत्य ही राम वहाँ पर,
पता लगाते मुनिगण से।
शबरी की कुटिया तक आये,
प्रेम रूप के मधुवन से॥

स्वागत का सुविधान वहाँ था,
स्वयं प्रकृति का उपमागार।
जड़ चेतन सब भूल गया था,
देख प्रभु का रूप-प्रसार॥

पीत पाँबड़े पड़े हुए थे,
वृक्ष के मधु बंदनवार ।
उससे चल कर ही कौशल-सुत,
आये. वे कुटिया के द्वार।

खड़ा गगन का दीपं स्वयं ही,
लिये सूर्य की ज्योति महान।
ताराओं के पुष्प अलक्षित,
धूप-आरती का भगवान।।

द्विजगण शाखोच्चार, सुनाते,
शुभागमन में रघुवर के।
शबरी अकचक देख रही थी,
आज उन्हें जी भर-भर के।

शब्दार्च-मधुवन-उद्यान, बगीचा। सुविधान-संदर व्यवस्था। उपमागार-समानता या तुलना का भण्डार । पीत-पाँवड़े, पीले पैर । कौशल-सुत-दशरथ-पुत्र । अलक्षित-अक्षात, अदृश्य।

संदर्भ-प्रस्तुत पयांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य 10वीं में संकलित कवि डॉ. प्रेम भारती विरचित कविता ‘शबरी’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने शबरी की कटिया पर श्रीराम के पहँचने और वहाँ के वातावरण का चित्र खींचते हुए कहा है कि

व्याख्या-मुनिगण से पता लगाते हुए श्रीराम शबरी की कुटिया पर आ गए। यों तो वहाँ पर उनके स्वागत की अच्छी व्यवस्था नहीं थी, फिर भी आकाश सूर्य की ज्योति को लिए हुए दीपक के समान स्वयं खड़ा था। तारों के अदृश्य फूल खिले हुए थे। धूप आरती स्वरूप थी। द्विजगण उस समय शाखोच्चार सुना रहे थे। यह सब कुछ शबरी चकित होकर देख रही थी।

विशेष-

  1. शबरी की कुटिया के आस-पास का प्रकृति-चित्रण है।
  2. सारा चित्रण मनमोहक है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर
(क) भाव-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश के भाव-सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भाव-योजना सरल किंतु स्वाभाविक है। वन-प्रदेश के वातावरण को सटीक और अनुकूल रूप में ढालने का प्रयास प्रशंसनीय है। इस प्रकार मूल पद्यांश का भाव-सौंदर्य आकर्षक और रोचक बन गया है।

(ख) शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की शिल्प-योजना भावों पर आधारित है। भाषा की शब्दावली तत्सम, तद्भव और देशज शब्दों से पुष्ट हुई है। शैली वर्णनात्मक, भावात्मक और चित्रात्मक तीनों ही है। प्रतीकों का यथास्थान होना आकर्षक बन गया है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का मुख्य भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश के द्वारा कवि ने शबरी की कुटिया पर श्रीराम के पहुँचने के उल्लेख से भक्त, भक्ति और भगवान के.विषय में प्रकाश डालना चाहा है। इससे भगवान राम की कृपालुता को उजागर कर कवि ने अपनी भक्ति-भावना प्रकट की है।

2. स्याम स्वर्ण तन कमल नयन थे,
जटा-मुकुट सिर पर अभिराम।
धनुष-बाण तरकश को धारे,
सुंदरता के कोटि ललाम।

दीर्घ नेत्र, कर सुभाग सलोने,
हाँ ये ही हैं अवध-भुवाल ।
लेशमात्र संदेह नहीं है,
आज हुई मैं अरे निहाल।

बंदन में क्या गीत सुनाऊँ,
कहाँ आरती का सामान।
उसकी मन विहलता पा कर,
हँसे तभी सानुज भगवान।

वाणी थी अवरुद्ध प्रेम में,
परम शांत थी हर्ष विभोर।
चरण पकड़ कर निरख रही थी,
पुनि-पुनि कृपा सिंधु की ओर।।

मृगच्छला का आसन देती,
शुद्ध स्वच्छ तब दोनों को,
और भोग हित बेर भेंट को,
लगी देखने कोनों को।

शब्दार्थ-स्याम-साँवला । स्वर्ण-सोना। तन-शरीर । नयन-आँख । अभिराम-सुंदर। कोटि-करोड़। दीर्घ नेत्र-बड़ी आँखें। सुभग-सुंदर। कर-हाथ । अवध-भुवाल-अयोध्या के राजकुमार। लेशमात्र-थोड़ा-सा। विहलता-व्याकुलता। अवरुद्ध-बंद। पुनि-पुनि-फिर-फिर।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने श्रीराम के अद्भुत रूप-सौंदर्य का चित्रांकन करते हुए कहा है कि

व्याख्या-श्रीराम का शरीर सोने के समान और साँवला था। उनकी आँखें कमल सी थीं, उनके सिर पर जटाओं का मुकुट शोभा दे रहा था। वे धनुष-बाण और तरकश को लिये करोड़ों सुंदरता को लजा रहे थे। उनकी आँखें बड़ी-बड़ी थीं। वे ही अयोध्या के राजकुमार हैं। उस समय शबरी यह नहीं समझ पा रही थी कि श्रीराम के स्वागत में कौन-सा गीत सुनाए। कहाँ आरती उतारे। उसे व्याकुल देखकर श्रीराम हँसने लगे। शबरी कुछ नहीं बोल पा रही थी। वह तो केवल श्रीराम के चरणों को निरख रही थी। वह उन्हें मृगछाला का आसन देकर राम और लक्ष्मण को बेर भेंट करने लगी थी।

विशेष

  1. भाषा में गति है।
  2. शैली वर्णनात्मक है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

(क) भाव-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भावधारा सरस और प्रवाहयुक्त है। उसमें ओज, प्रभाव, गति, और क्रम है। श्रीराम के रूप-सौंदर्य का चित्रण आकर्षक है, तो शबरी की भक्ति की स्थिरता कम सराहनीय नहीं है।

(ख) शिल्प-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की शिल्प-योजना सटीक भाषा और शैली की है। भाषा की शब्दावली में एकरूपता नहीं है, अपितु विविधता है। दूसरे शब्दों में भाषा के लिए प्रयुक्त हुए शब्द स्वरूप तत्सम, तद्भव और देशज तीनों ही हैं। शैली वर्णनात्मक और चित्रात्मक दोनों ही है।

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विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश में कवि ने एक ओर श्रीराम की शारीरिक संदरता के अद्भुत पक्ष को रखा है, तो दूसरी ओर शबरी की उनके प्रति भक्ति-भावना को दर्शाया है। ये दोनों ही पक्ष बड़े ही सटीक और उपयुक्त रूप में हैं। यही कवि का लक्ष्य है, जिसमें उसे सफलता मिली है।

3. उनसे चुन चुन कर जो मीठे
बेर नित्य वह लाई थी,
बड़े प्रेम से उनकों देने,
मन ही मन ललचाई थी।

कभी सोचती राज-भोग को,
किंतु अरे लेते हैं वे ।
नहीं-नहीं बनवासी होकर,
कंद मूल लेते हैं वे॥

अरे बेर में बेर न होवे,
स्वामी को थोड़ा अवकाश।
शीघ्र चलूँ मैं कुटिया में से,
आतुरता में देखे पास।

कहने लगी-‘क्षमा हो भगवान,
हुआ आगम में जो अपराध।
बेर भेंट को भोजन लाई,
युगों-युगों से मेरी साध’।

केल-पत्र पर दोनों को ही,
थोड़े उसने बेर रखे।
भक्त बछल ने खूब प्रेम से,
तभी उन्हें सानंद चखे॥

शब्दार्व-नित्य-रोज। आतुरता-उत्सुकता संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने शबरी की श्रीराम के प्रति प्रदर्शित भक्ति-भावना का चित्र खींचते हुए कहा है कि

व्याख्या-शबरी ने चुन-चुनकर मीठी-मीठी बेर श्रीराम को देने के लिए मन-ही-मन खुश होने लगी। वह यह सोचती और प्रयास करती कि श्रीराम राज-भोग को लेते रहे हैं तो वनवासी होकर कंदमूल को भी ले लेते हैं। इसलिए उन्हें बेर मिलने में कोई देर नहीं होनी चाहिए। यही सोच-समझकर वह अपनी कुटिया में आकर श्री राम से कहने लगी-भगवन् ! मुझसे अनजाने में जो अपराध हुआ है, उसे आप क्षमा कर दें। मैंने अपने युगों की साध को पूरा करने के लिए आपको ये बेर भेंट की। इस प्रकार कहकर शबरी ने केले के पत्ते पर राम-लक्ष्मण को थोड़ी-सी बेर रख दी। भक्तवत्सल भगवान् राम ने उन्हें बड़े आनंद के साथ खाया।

विशेष-

  1. शबरी की भक्ति भावना पर सीधा प्रकाश है।
  2. श्रीराम की भक्तवत्सलता को सामने लाया गया है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

(क) भाव-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भावधारा सरस और स्वाभाविक है। शबरी की भक्तिभावना को इस दृष्टि से देखा जा सकता है। संपूर्ण मन को छू लेने वाले हैं, तो हृदय को जगा देने वाले भी हैं।

(ख) शिल्प-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश का शिल्प-सौंदर्य सहज बिंबों, प्रतीकों व योजनाओं पर आधारित होने का फलस्वरूप मन को छू रहा है। भक्ति रस का सुंदर संचार है जिसे तुकांत शब्दावली से पुष्ट करने का प्रयास किया गया है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश का प्रतिपाय लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश में शबरी की भक्तिभावना को कवि ने समर्पित रूप में चित्रित किया है। दूसरे श्रीराम की भक्त-वत्सलता को आदर्शस्वरूप में अंकित किया गया है। कवि के ये दोनों प्रयास प्रेरक रूप में हैं, जो कवि का मुख्य अभिप्राय कहा जा सकता है।

4. आज उन्हें कुछ वर्ष बाद पुनि,
माता की सुधि घिर आई।
प्रेममयी जननी ही मानों,
भोजन ले कानन आई।

परम स्वाद आनंद उन्हें जो
राज-भोग में मिलता था।
उससे भी बढ़कर बेरों में,
स्वयं रसाम्बुज खिलता था।

स्मृति-बादल प्रेम अश्रु में,
प्रकट हुए दृग में आ कर!
शबरी काँप उठी यह देख
पूछ उसी हो भय बाहर।

‘क्या अच्छा हे नाथ न लगता,
बेर आप को यह वन का।’
‘चिंतित मत हो माता शबरी,
यह तो है जीवन तन का॥

‘फिर क्यों नाथ अश्रु को लाये,’
हँस कर कहते रघुराई।
‘तेरे बेरों के सुस्वादु से,
याद मुझे माँ की आई।

शब्दार्य-सुधि-याद। जननी-माता। कानन-जंगल। स्मृति-याद । दृग-आँख। अश्रु-आँसू।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने श्रीराम का शबरी द्वारा दी गई बेर को आनंदपूर्वक खाने का उल्लेख करते हुए कहा है कि

व्याख्या-श्रीराम को कुछ वर्षों बाद अपनी माता की याद ताजी हो आई। उस प्रेममयी माँ की ही याद ने मानो भोजन लेकर जंगल में आ गई। शबरी द्वारा दी गई बेरों को खाते हुए श्रीराम को राज-भोग के समान सुख और आनंद आ रहा था। इससे उनके प्रेमाश्रु छलकने लगे थे। उन्हें देखकर शबरी भयभीत हो गई थी। उसने श्रीराम से कहा कि क्या यह अच्छा होता कि आपका वनवास जल्दी ही समाप्त हो जाता। इसे सुनकर श्रीराम ने उसे संतुष्ट और निश्चिंत करते हुए कहा कि यह चिंतित न होवे; क्योंकि यही जीवन तन की स्थिति होती है। फिर उन्होंने कहा कि उसके सुस्वादिष्ट बेरों को खाने से उन्हें अपनी माता द्वारा राजभोग खिलाने की याद ताजी हो आई।

विशेष-

  1. श्रीराम के सहज और मधुर स्वभाव का चित्रण है।
  2. भाषा-शैली बोधगम्य है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

(क) भाव-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश के भाव-सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भाव-रूपरेखा सहज और बोधगम्य है। भाव-धारा में न केवल गति है, अपितु क्रमबद्धता भी है। ये भाव स्वाभाविक हैं। इसके साथ ही चित्ताकर्षक और मन को मोह लेने वाले हैं।

(ख) शिल्प-सौंदर्य
प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश का शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश में प्रयुक्त हुई भाषा अधिक सरल और सपाट है। सामाजिक और अलंकृत शब्दावली इसके विशेष आकर्षण हैं। लय और संगीत का पुट देकर भक्तिरस में प्रवाहित करने का कवि प्रयास प्रशंसनीय है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश के द्वारा कवि ने श्रीराम के सहज स्वभाव का चित्रण आकर्षक रूप में किया है। उनके स्वभाव को कवि ने विश्वसनीय रूप में प्रस्तुत किया है। इसके साथ ही कवि ने शबरी की भक्ति-भावना को भी कवि ने सहज ही रूप दिया है। शबरी की अनन्य भक्ति-भावना से श्रीराम की भक्तवत्सलता को छलकाना मुख्य रूप से कवि का यह प्रयास सफल कहा जा सकता है।

5. भोजन-भोजन सभी एक है,
किंतु वही है वर भोजन।
जहाँ प्रेम की धारा बहती,
और शांति का आयोजन।।

बेर-बेर मैं इन बेरों की,
शबरी करता मृदुल सराह।
और बेर मुझको दो सत्वर,
खाते-खाते बढ़ती चाह॥

इस कुटिया के द्वारा सभी में,
राज मार्ग को भूला हूँ।
गृह-सा वातावरण देखकर,
नववसंत सा फूला हूँ॥

बेर-बेर देती है शबरी,
बेर-बेर ही उनको बेर।
तो भी रघुवर बेर-बेर ही,
कहते हैं लाने को बेर॥

वह भी राघव को ला-ला कर,
खिला रही थी उन्हें हुलास ।
वन माली की सेवा करती,
पूर्ण भक्ति का पा विश्वास।

शब्दार्थ-वर-श्रेष्ठ। आयोजन-प्रबंध। मृदुल-कोमल। सराह-सराहना। सत्वर-निरंतर। चाह-इच्छा। राघव-श्रीराम।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने शबरी द्वारा श्रीराम को किस प्रकार बेर खिलायी जा रही थी, इसका चित्र इस प्रकार खींचते हुए कहा है कि

व्याख्या-यों तो भोजन तो भोजन होता है। लेकिन कौन-सा भोजन श्रेष्ठ है। इसे यों कहा जा सकता है कि जिस भोजन में प्रेम की धारा बहती है और जहाँ शांति का आयोजन होता है। वही भोजन श्रेष्ठ है। इसलिए शबरी द्वारा दी जा रही प्रेमरसीले बेरों को प्रशंसा करते श्रीराम चख रहे थे। उन्हें खाने से उनकी चाह बढ़ रही थी। वे इस प्रकार शबरी की कुटिया के द्वार के सामने सभी राजमार्ग को भूल चुके थे। उन्हें तो वहाँ का वातावरण घर के वातावरण की तरह ही नए वसंत के समान मन को छूने वाला लग रहा था। उन्हें इस प्रकार देखकर शबरी बार-बार बेर चखने के लिए दे रही थी। उधर श्रीराम उन्हें बहुत जल्दी-जल्दी चख-चखकर और बेर लाने के लिए कहने लगे थे। उनके आदेश के अनुसार शबरी उन्हें बड़े ही प्रेमपूर्वक बेर लाकर खिला रही थी। इस प्रकार वह श्रीराम के प्रति अपनी सच्ची भक्ति-भावना समर्पित कर रही थी।

विशेष

  1. श्रीराम की भक्तवत्सलता का स्पष्ट चित्रण है।
  2. भाषा-शैली वर्णनात्मक और चित्रात्मक दोनों ही है।

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सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

(क) भाव-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश की भाव-धारा सहज रूप में है। श्रीराम की भक्त-वत्सलता का जहाँ निखरा हुआ रूप यहाँ प्रस्तुत हुआ है। वहीं शबरी की अनन्य और समर्पित भक्तिधारा पूरे प्रवाह में है। इस प्रकार ये दोनों चित्र मन को गदगद कर रहे हैं।

(ख) शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पयांश का शिल्प-सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश का शिल्प-सौंदर्य तत्सम, तद्भव और देशज शब्दों से निर्मित भाषा और भावात्मक-चित्रण शैली से मण्डित है। पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार और उपमा अलंकार के योग आकर्षक हैं। भक्ति रस से पूरा पद्यांश उमड़ रहा है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का मुख्य भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त पद्यांश का मुख्य भाव श्रीराम की भक्तवत्सलता और शबरी की समर्पित भक्ति-भावना को प्रकट करने का है। इसे कवि ने अपनी विशेषता का परिचय देते हुए प्रस्तुत किया है। कवि की यह प्रस्तुति प्रेरक रूप में है।

6. तभी लखन से बोले भ्राता,
“लेहु बेर यह मीठा चाख ।
लो यह है उससे भी अच्छा,”
पुनः बन्यु को देते, भाख॥

दोनों ने ही सुधा समाने,
खाये बेर उदर भर के।
रामचंद्र तब शबरी से यों,
बोले मुदित बदन करके।।

“मुनियों के आश्रम होता मैं,
दण्डक वन में आया हूँ।
अमित भाँति के सत्कारों से,
मैं परितृप्त अपाया हूँ”।

किंतु आज जो तृप्ति यहाँ पर,
मुझे मिली है, हे! माता।
नयन मौन हैं, कण्ठ अलेखा,
कुछ भी कहा नहीं जाता।

देकर उसे प्रेरक बनाने का प्रयास किया है। इसके लिए कवि ने भाव और शिल्प के सौंदर्य को ऊँचाई देना उपयुक्त समझा है। हम देखते हैं कि कवि का यह प्रयास सफल और प्रभावशाली है।

MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4

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MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4

प्रश्न 1.
बताइए कि निम्नलिखित प्रायिकता बंटनों में कौन-से एक यादृच्छिक चर के लिए संभव नहीं है। अपना उत्तर कारण सहित लिखिए।
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 1
हल:
(i) प्रायिकताओं का योग
= 0.4 + 0.4 + 0.2 = 1
यह बंटन प्रायिकता बंटन है।
(ii) एक की प्रायिकता – 0.1 ऋणात्मक है।
∴ यह प्रायिकता बंटन नहीं है।
(iii) प्रायिकताओं का योग
= 0.6 + 0.1+ 0.2 = 0.9 ≠ 1 है।
∴ दिया गया बंटन, प्रायिकता बंटन नहीं है।
(iv) प्रायिकताओं का योग
= 0.3 + 0.2 + 0.4 + 0.1 + 0.05
= 1.05 >1
∴ यह प्रायिकता बंटन नहीं है।

प्रश्न 2.
एक कलश में 5 लाल और 2 काली गेंद हैं। दो गेंद यादृच्छया निकाली गईं। मान लीजिए x काली गेंदों की संख्या को व्यक्त करता है। X के संभावित मान क्या हैं? क्या x यादृच्छिक चर है?
हल:
एक कलश से, दो गेंदें निकाली गईं RR, RB, BR, BB जहाँ लाल गेंद को R से तथा काली गेंद को B से व्यक्त करते है।
X चर के मान 0, 1, 2
यहाँ कोई काली गेंद नहीं, एक काली गेंद या दोनों गेंदें काली है।
∴ हाँ, X यादृच्छिक है।

प्रश्न 3.
मान लीजिए x चितों की संख्या और पटों की संख्या में अन्तर को व्यक्त करता है, जब एक सिक्के को 6 बार उछाला जाता है। X के संभावित मूल्य क्या हैं?
हल:
जब एक सिक्के को 6 बार उछाला जाता है, हम चित और पटों की संख्या निम्न प्रकार व्यक्त करते हैं-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 2

प्रश्न 4.
निम्नलिखित के प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए-
(i) एक सिक्के की दो उछालों में चितों की संख्या का
(ii) तीन सिक्कों को एक साथ एक बार उछालने पर पटों की संख्या का
(iii) एक सिक्के की चार उछालों में चितों की संख्या का
हल :
(i) जब एक सिक्के की दो उछालों में चितों की संख्या
S = {IT, TH, HT, HH}
X एक यादृच्छिक चर है जो 0, 1 या 2 मानते हैं।
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 3
∴ X का प्रायिकता बंटन निम्नवत् है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 4
(ii) तीन सिक्कों को एक साथ एक-बार उछालने पर पटों की संख्या
S = {TIT, TTH, THT, HTT, THH, HTH, HHT, HHH}
X एक यादृच्छिक चर है जो 0, 1, 2 3 मानते हैं। अब, P(X = 0) = P (पट नहीं) = सभी चित [HHH]
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 5
∴ X का प्रायिकता बंटन निम्नवत् है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 6
(iii) जब एक सिक्के को चार बार उछाला जायX एक यादृच्छिक चर है, जो 0, 1, 2, 3, 4 मानते हैं।
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 7
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 8

प्रश्न 5.
एक पासा दो बार उछालने पर सफलता की संख्या का प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए जहाँ
(i) ‘4’ से बड़ी संख्या’ को एक सफलता माना गया है
(ii) ‘पासे पर संख्या 6 का प्रकट होना’ को एक सफलता माना गया है।
हल:
(i) यदि प्रत्येक पासे पर 1, 2, 3, 4 संख्या है
∴ सम्भव परिणाम = {(1,1), (1,2)…(2,1), (2, 2) …(4,4)} = 16 परिणाम
तथा प्रतिदर्श समष्टि में परिणामों की कुल संख्या
= 6 x 6 =36
P(X = 0) = \(\frac{16}{36}=\frac{4}{9}\)
P(X = 1) = \(\frac{16}{36}=\frac{4}{9}\)
P(X = 2) = दोनों पासे 5 या 6
= (5, 6),(6,5), (5,5), (6,6)
= \(\frac{4}{36}=\frac{1}{9}\)
∴ X का प्रायिकता बंटन निम्नवत् है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 9
(ii) पासे पर 6 अंक आने की प्रायिकता = \(\frac{1}{6}\)
तथा पासे पर 6 अंक न आने की प्रायिकता = \(1-\frac{1}{6}=\frac{5}{6}\)
0
तथा दो पासों पर 6 न आने की प्रायिकता = \(\frac{5}{6} \times \frac{5}{6}=\frac{25}{36}\)
इसलिए दो पासों पर कम-से-कम एक 6 आने की प्रायिकता
= \(1-\frac{25}{36}=\frac{11}{36}\)
अतः X का प्रायिकता बंटन निम्नवत् है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 10

प्रश्न 6.
30 बल्बों के एक ढेर से जिसमें 6 बल्ब खराब हैं। 4 बल्बों का एक नमूना (प्रतिदर्श) यादृच्छया बिना प्रतिस्थापना के निकाला जाता है। खराब बल्बों की संख्या का प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए।
हल:
30 बल्बों के एक ढेर से जिसमें 6 बल्ब खराब हैं। खराब बल्ब निकालने की प्रायिकता = \(\frac{6}{30}=\frac{1}{5}\)
अच्छे बल्ब निकालने की प्रायिकता = \(1-\frac{1}{5}=\frac{4}{5}\)
माना 4 बल्बों के नमूने में खराब बल्बों का बंटन x से व्यक्त करते हैं।
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 11
∴ खराब बल्बों की प्रायिकता बंटन निम्नवत् है।
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 12

प्रश्न 7.
एक सिक्का समसर्वय सन्तुलित नहीं है जिसमें चित प्रकट होने की संभावना पट प्रकट होने की संभावना की तीन गुनी है। यदि सिक्का दो बार उछाला जाता है तो पटों की संख्या का प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए।
हल:
जब सिक्का उछाला जाता है, जिसमें चित प्रकट होने की संभावना पट प्रकट होने की संभावना की तीन गुनी है।
माना पट x बार आए।
∴ चित 3x बार आएगा।
परिणामों की कुल संख्या = x + 3x = 4x
∴ चित प्रकट होने की प्रायिकता = \(\frac{3 x}{4 x}=\frac{3}{4}\)
∴ पट प्रकट होने की प्रायिकता = \(\frac{x}{4 x}=\frac{1}{4}\)
जब पट की सम्भावना नहीं है तब प्रायिकता होगी
{HH} = \(\frac{3}{4} \times \frac{3}{4}=\frac{9}{16}\)
∴ P(X = 0) = \(\frac{9}{16}\)
जब एक पट और 1 चित की संभावना हो–
p (X =1) = P (H) P (T) + P (T) P (H)
= \(\frac{3}{4} \times \frac{1}{4}+\frac{1}{4} \times \frac{3}{4}\)
दोनों पटों की प्रायिकता
P(X = 2) = \(\frac{1}{4} \times \frac{1}{4}=\frac{1}{16}\)
∴ प्रायिकता बंटन निम्नवत् है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 13

प्रश्न 8.
एक यादृच्छिक चर x का प्रायिकता बंटन नीचे दिया गया है।
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 14
ज्ञात कीजिए–
(i) k
(ii) P (X <3) (iii) P(X >6)
(iv) P(0 < X <3)
हल:
(i) प्रायिकताओं का योग =1
0 + k + 2k + 2k + 3k + k2 + 2x2 + 7k2 + k =1
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 15
∴ प्रायिकता बंटन निम्नवत् है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 16
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 17

प्रश्न 9.
एक यादृच्छिक चर X का प्रायिकता फलन (x) निम्न प्रकार से है जहाँ k कोई संख्या है।
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 18
(b) (i) P(X < 2) = P(0) + P(1)
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 19

प्रश्न 10.
एक न्याय्य सिक्के की तीन उछालों पर प्राप्त चितों की संख्या का माध्य ज्ञात कीजिए।
हल:
एक न्याय्य सिक्के को तीन बार उछालने पर प्रतिदर्श समष्टि
= [TTT, TTH, THT, HTT, THH, HTH, HHT, HHH]
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 20
∴ प्रायिकता बंटन निम्नवत् है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 21
= \(\frac{3}{2}=1 \frac{1}{2}\)

प्रश्न 11.
दो पासों को युग्मत उछाला गया है। यदि x छक्कों की संख्या को व्यक्त करता है तो X की प्रत्याशा ज्ञात कीजिए।
हल:
छक्कों की संख्या को X से व्यक्त करते हैं। एक पासा उछालने से प्रतिदर्श समष्टि = [1, 2, 3, 4, 5, 6]
एक पासे पर छक्का प्राप्त होने की प्रायिकता = \(\frac{1}{6}\)
एक पासे पर 1, 2, 3, 4, 5 प्रकट होने की प्रायिकता = \(\frac{5}{6}\)
जब दो पासे उछाले जाते हैं n(s) =36.
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 22
∴ प्रायिकता बंटन निम्नवत् है
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 23

प्रश्न 12.
प्रथम छः धन पूर्णांकों में से दो संख्याएँ यादृच्छया (बिना प्रतिस्थापन) चुनी गईं। मान लें X दोनों संख्याओं में से बड़ी संख्या को व्यक्त करता है। E(X) ज्ञात कीजिए।
हल:
यहाँ छ: धन पूर्णांक संख्याएँ 1, 2, 3, 4, 5, 6 हैं।
एक अंक 6 तरीकों से चुना जा सकता है।
जब 1 संख्या को चुना जाता है तब 5 संख्याएँ छोड़ते हैं।
प्रथम छ: धन पूर्णांकों में से दो संख्याएँ यादृच्छया या (बिना प्रतिस्थापन) चुनी गई संख्या = 6 x 5 = 30
अब, P(X = 2)
= P {(1, 2), (2, 1}} = \(\frac{2}{30}\)
P(X = 3)
= P {(1, 3), (2, 3), (3, 1), (3, 2)} = \(\frac{4}{30}\)
P(X = 4)
=P {(1, 4), (2, 4), (3, 4), (4, 1), (4, 2), (4, 3)} = \(\frac{6}{30}\)
= P(X = 5)
=P {(1, 5), (2, 5), (3, 5), (4, 5), (5, 1, (5, 2), (5, 3), (5, 4)} = \(\frac{8}{30}\)
P(X = 6)
= P {(1, 6), (2, 6), (3, 6), (4, 6), (5, 6), (6, 1), (6, 2), (6, 3), (6, 4), (6, 5)}= \(\frac{10}{30}\)
x का प्रायिकता बंटन निम्नवत् है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 24

प्रश्न 13.
मान लीजिए दो पासों को फेंकने पर प्राप्त संख्याओं के योग को x से व्यक्त किया गया है। x का प्रसारण और मानक विचलन ज्ञात कीजिए।
हल: जब दो पासे फेंके जाते हैं, तब परिणामों की संख्या
= 6 x 6 = 36
P(X = 2) = P {(1,1)} = \(\frac{1}{36}\)
P(X = 3) = P {(1, 2), (2,1)} = \(\frac{2}{36}\)
P(X = 4) = P {(1, 3), (2, 2), (3, 1)} = \(\frac{3}{36}\)
P(X = 5) = P {(1, 4), (2, 3), (3, 2), (4,1)} = \(\frac{4}{36}\)
P(X = 6) = P {(1, 5), (2, 4), (3, 3),(4, 2), (5, 1) = \(\frac{5}{36}\)
P(X = 7) = P {{1, 6), (2, 5), (3, 4), (4, 3), (5, 2), (6,1)} = \(\frac{6}{36}\)
P(X =8). = P {(2, 6), (3, 5), (4, 4), (5, 3), (6, 2)} = \(\frac{5}{36}\)
P(X =9) = P {(3, 6) (4, 5), (5, 4), (6, 3)} = \(\frac{4}{36}\)
P(X =10) = P {(4, 6), (5, 5), (6, 4)} = \(\frac{3}{36}\)
P(X =11) = P {(5, 6), (6, 5)} = \(\frac{2}{36}\)
P(X =12) = P(6, 6) = \(\frac{1}{36}\)
अतः प्रायिकता बंटन निम्नवत् है-
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MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 26
X का मानक विचलन = \(\sqrt{5.83}\) = 2.4 (लगभग)

प्रश्न 14.
एक कक्षा में 15 छात्र हैं जिनकी आयु 14, 17, 15, 14, 21, 17, 19, 20, 16, 18, 20, 17, 16, 19 और 20 वर्ष है। एक छात्र को इस प्रकार चुना गया कि प्रत्येक छात्र के चुने जाने की संभावना समान है और चुने गए छात्र की आयु (X) को लिखा गया। यादृच्छिक चर x का प्रायिकता बंटन ज्ञात कीजिए। X का माध्य, प्रसरण व मानक विचलन भी ज्ञात कीजिए।
हल:
एक कक्षा में 15 छात्र हैं। एक छात्र को इस प्रकार चुना गया कि प्रत्येक छात्र के चुने जाने की संभावना समान है।
प्रत्येक छात्र के चुने जाने की प्रायिकता = \(\frac{1}{15}\)
प्रायिकता बंटन निम्नवत् है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 27
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 28
मालक विचलन = \(\sqrt{4.78}\) = 2.19

प्रश्न 15.
एक बैठक में 70% सदस्यों ने किसी प्रस्ताव का अनुमोदन किया और 30% सदस्यों ने विरोध किया। एक सदस्य को यादृच्छया चुना गया और, यदि उस सदस्य ने प्रस्ताव का विरोध किया हो तो x = 0लिया गया, जबकि यदि उसने प्रस्ताव का अनुमोदन किया हो तो x = 1 लिया गया। E(X) और var (X)ज्ञात कीजिए।
हल:
यहाँ चर मान 1 और 0 है।
किसी प्रस्ताव का अनुमोदन करने वाले सदस्यों की प्रायिकता
=70% = 0.70
किसी प्रस्ताव का विरोध करने वाले सदस्यों की प्रायिकता
=30% = 0.30
∴ प्रायिकता बंटन निम्नवत् है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 29

निम्नलिखित में से प्रत्येक में सही उत्तर चुनें।
प्रश्न 16.
ऐसे पासे, जिनके तीन फलकों पर 1 अन्य तीन पर 2 और एक फलक पर 5 लिखा गया है, को उछालने पर प्राप्त संख्याओं का माध्य है-
(A) 1
(B) 2
(C) 5
(D) \(\frac{8}{3}\)
हल:
चर राशि 2 और 5 है।
3 फलक पर 1 लिखा गया है।
∴ 1 प्राप्त करने की प्रायिकता P(1) = \(\frac{3}{6}=\frac{1}{2}\)
दो फलक पर 2 लिखा गया है।
∴ 2 प्राप्त करने की प्रायिकता P(2) = \(\frac{2}{6}=\frac{1}{3}\)
1 फलक पर 5 लिखा गया है।
∴ 5 प्राप्त करने की प्रायिकता P(5) = \(\frac{1}{6}\)
∴ प्रायिकता बंटन निम्नवत् है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 30
अतः विकल्प (B) सही है।

प्रश्न 17.
मान लीजिए ताश की एक गड्डी से यादृच्छया दो पत्ते निकाले जाते हैं। मान लीजिए X इक्कों की संख्या प्रकट करता है। तब E(X) का मान है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 31
हल :
(i) जब दो पत्ते खींचे जाते हैं।
दो पत्ते इक्के नहीं खींचे जा सकते हैं।
= \(^{48} C_{2}=\frac{48 \times 47}{2}\) =1128
दो पत्ते खींचे जा सकते हैं 52 पत्तों में से = 52C2
= \(\frac{52 \times 51}{2}\) = 26 x 51 =1326
∴ इक्का न खींचने की प्रायिकता = \(\frac{1128}{1326}\)
(ii) \(^{4} C_{1} \times^{48} C_{1}\) में एक इक्का और एक इक्का न खींचे जा सकते हैं
= 4 x 48 = 192
एक इक्का और एक इक्का न होने की प्रायिकता = \(\frac{192}{1326}\)
(iii) दो इक्कों को खींचने की संख्या = 6
2 इक्कों की संख्या प्रकट होने की प्रायिकता = \(\frac{6}{1326}\)
∴ प्रायिकता बंटन निम्नवत् है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.4 img 32
अतः विकल्प (D) सही है।

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 9 Some Applications of Trigonometry Ex 9.1

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MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 9 Some Applications of Trigonometry Ex 9.1

Question 1.
A circus artist is climbing a 20 m long rope, which is tightly stretched and tied from the top of a vertical pole to the ground. Find the height of the pole, if the angle by the rope with the ground level is 30° (see figure).
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Solution:
In right ∆ABC,
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Thus, the required height of the pole is 10 m.

Question 2.
A tree breaks due to storm and the broken part bends so that the top of the tree touches the ground making an angle 30° with it. The distance between the foot of the tree to the point where the top touches the ground is 8 m. Find the height of the tree.
Solution:
Let the tree is broken at A and its top is touching the ground at B.
Now, in right ∆AOB, we have
\(\frac{A O}{O B}\) = tan 30°
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MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 9 Some Applications of Trigonometry Ex 9.1

Question 3.
A contractor plans to install two slides for the children to play in a park. For the children below the age of 5 years, she prefers to have a slide whose top is at a height of 1.5 m, and is inclined at an angle of 30° to the ground, whereas for elder children, she wants to have a steep slide at a height of 3 m, and inclined at angle of 60° to the ground. What should be the length of the slide in each case?
Solution:
In the figure, DE is the slide for younger children, whereas AC is the slide for elder children.
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In right ∆ABC, AB = 3m
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Question 4.
The angle of elevation of the top of a tower from a point on the ground, which is 30 m away from the foot of the tower, is 30°. Find the height of the tower.
Solution:
In right ∆ABC, AB = height of the tower and point C is 30 m away from the foot of the tower,
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Question 5.
A kite is flying at a height of 60 m above the ground. The string attached to the kite is temporarily tied to a point on the ground. The inclination of the string with the ground is 60°. Find the length of the string, assuming that there is no slack in the string.
Solution:
Let OB = Length of the string
AB = 60 m = Height of the kite.
In the right ∆AOB,
∴ \(\frac{O B}{A B}\) = cosec 60° = \(\frac{2}{\sqrt{3}}\)
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Question 6.
A 1.5 m tall boy is standing at some distance from a 30 m tall building.The angle of elevation from his eyes to the top of the building increases from 30° to 60° as he walks towards the building. Find the distance he walked towards the building.
Solution:
Here, OA is the building.
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Question 7.
From a point on the ground, the angles of elevation of the bottom and the top of a transmission tower fixed at the top of a 20 m high building are 45° and 60° respectively. Find the height of the tower.
Solution:
Let the height of the building be BC
∴ BC = 20 m and height of the tower be CD.
Let the point A be at a distance y metres from the foot of the building.
Now, in right ∆ABC,
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Thus, the height of the tower is 14.64 m.

Question 8.
A statue, 1.6 m tall, stands on the top of a pedestal. From a point on the ground, the angle of elevation of the top of the statue is 60° and from the same point the angle of elevation of the top of the pedestal is 45°. Find the height of the pedestal.
Solution:
In the figure, DC represents the statue and BC represents the pedestal.
Now, in right ∆ABC, we have
\(\frac{A B}{B C}\) = cot 45° = 1
⇒ \(\frac{A B}{h}\) = 1 ⇒ AB = h metres.
Now in right ∆ABD,
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Question 9.
The angle of elevation of the top of a building from the foot of the tower is 30° and the angle of elevation of the top of the tower from the foot of the building is 60°. If the tower is 50 m high, find the height of the building.
Solution:
In the figure, let height of the building = AB = h m
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Question 10.
Two poles of equal heights are standing opposite each other on either side of the road, which is 80 m wide. From a point between them on the road, the angles of elevation of the top of the poles are 60° and 30° respectively. Find the height of the poles and the distances of the point from the poles.
Solution:
Let AB = h metres = CD
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and AP = x m
∴ CP = (80 – x) m
Now, in right ∆APB,
we have
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Thus, the required point is 20 m away from the first pole and 60 m away from the second pole.
Height of each pole = 34.64 m.

Question 11.
A TV tower stands vertically on a bank of a canal. From a point on the other bank directly opposite the tower, the angle of elevation of the top of the tower is 60°. From another point 20 m away from this point on the line joining this point to the foot of the tower, the angle of elevation of the top of tower is 30° (see figure). Find the height of the tower and the width of the canal.
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Solution:
Let the TV tower be AB = h m.
Let the point ‘C be such that BC = x m and CD = 20 m.
Now, in right ∆ABC, we have
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Thus, the height of the tower = 17.32 m.
Also width of the canal = 10 m.

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Question 12.
From the top of a 7 m high building, the angle of elevation of the top of a cable tower is 60° and the angle of depression of its foot is 45°. Determine the height of the tower.
Solution:
In the figure, let AB be the height of the building.
∴ AB = 7 metres.
Let BC = X m = AE
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Let CD be the height of the cable tower and DE = h m
∴ In right ∆DAE, we have
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Question 13.
As observed from the top of a 75 m high light house from the sea-level, the angles of depression of two ships are 30° and 45°. If one ship is exactly behind the other on the same side of the light house, find the distance between the two ships.
Solution:
In the figure, let AB represent the light house.
∴ AB = 75 m.
Let the positions of two ships be C and D such that angle of depression from A are 45° and 30° respectively.
Now, in right ∆ABC,
we have
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Thus, the required distance between the ships is 54.9 m.

Question 14.
A 1.2 m tall girl spots a balloon moving with the wind in a horizontal line at a height of 88.2 m from the ground. The angle of elevation of the balloon from the eyes of the girl at any instant is 60°. After some time, the angle of elevation reduces to 30° (see figure). Find the distance travelled by the balloon during the interval.
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Solution:
In the figure, let C be the position of the observer (the girl).
A and P are two positions of the balloon.
CD is the horizontal line from the eyes of the observer (girl).
Here PD = AB = 88.2 m – 1.2 m = 87 m
In right ∆ABC, we have
\(\frac{A B}{B C}\) = tan 60°
⇒ \(\frac{87}{B C}=\sqrt{3}\) ⇒ BC = \(\frac{87}{\sqrt{3}}\) m
In right ∆PDC, we have
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Thus, the required distance between the two positions of the balloon = \(58 \sqrt{3}\) m.

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Question 15.
A straight highway leads to the foot of a tower. A man standing at the top of the tower observes a car at an angle of depression of 30°, which is approaching the foot of the tower with a uniform speed. Six seconds later, the angle of depression of the car is found to be 60°. Find the time taken by the car to reach the foot of the tower from this point.
Solution:
In the figure, let AB be the height of the tower and C, D be the two positions of the car.
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⇒ AC = \(\sqrt{3} \times \sqrt{3}\) × AD = 3 AD
Now, CD = AC – AD = BAD – AD = 2AD
Since the distance 2 AD is covered in 6 seconds,
∴ The distance AD will be covered in \(\frac{6}{2}\) i.e., 3 seconds,
Thus, the time taken by the car to reach the tower from D is 3 seconds.

Question 16.
The angles of elevation of the top of a tower from two points at a distance of 4 m and 9 m from the base of the tower and in the same straight line with it are complementary. Prove that the height of the tower is 6 m.
Solution:
Let the height of the tower be represented by AB in the figure.
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⇒ h = ± 6 m
∴ h = 6 m [∵ Height is can be only positive]
Thus, the height of the tower is 6 m.

MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 11 प्रायिकता Ex 11.1

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MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 11 प्रायिकता Ex 11.1

प्रश्न 1.
यदि एक रेखा x, y और अक्ष के साथ क्रमश: 90°, 135°, 45° के कोण बनाती है तो इसकी दिक् कोसाइन ज्ञात कीजिए
हल:
माना x, y और 2 के साथ रेखा के दिक् कोसाइन l, m, n हैं तथा दिया है α = 90°, β=135° तथा γ = 45° तब
l = cos α = cos 90° = 0
m = cos β = cos 135° = – \(\frac{1}{\sqrt{2}}\)
n = cos γ = cos 45° = \(\frac{1}{\sqrt{2}}\)

प्रश्न 2.
एक रेखा की दिक् कोसाइन ज्ञात कीजिए जो निर्देशांकों के साथ समान कोण बनाती है। हल : माना रेखा अक्षों के साथ समान कोण ए बनाती है
α = β = γ = 0 (माना)
अतः दिक् कोसाइन cos α , cos β, cos γ होंगे
परन्तु cos2α + cos2β +cos2γ = 1
⇒ cos2θ + cos2q + cos2θ = 1 (∵ α = β = γ = θ)
⇒ 3 cos2θ = \(\frac{1}{3}\)
⇒ cos2θ = \(\pm \frac{1}{\sqrt{3}}\)
∴ अभीष्ट दिक् कोसाइन \(\pm \frac{1}{\sqrt{3}}\) . \(\pm \frac{1}{\sqrt{3}}\) . \(\pm \frac{1}{\sqrt{3}}\) है।

प्रश्न 3.
यदि एक रेखा के दिक्-अनुपात- 18, 12, – 4 हैं तो इसके दिक् कोसाइन क्या हैं?
हल:
माना दिक् कोसाइन l, m तथा n हैं, तथा a = – 18, b = 12, c = – 4 तब
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प्रश्न 4.
दर्शाइए कि बिन्दु (2, 3, 4), (-1, -2, 1), 5, 8,7) संरेख हैं।
हल:
माना बिन्दु A(2, 3, 4) B (-1, -2, 1), C (5, 8, 7) हैं।
∴ A और B को मिलाने वाली रेखा के दिक् अनुपात
– 1 – 2, – 2 – 3, 1 – 4 हैं।
या – 3, – 5, – 3 हैं।
तथा B और C को मिलाने वाली रेखा के दिक् अनुपात 5 + 1, 8 + 2, 7 – 1 अर्थात् 6, 10, 6 हैं।
स्पष्ट है कि AB और BC के दिक् अनुपात समानुपाती हैं,
अत: AB और BC समान्तर हैं परन्तु AB और BC दोनों में B उभयनिष्ठ हैं। अतः A, B, C संरेख बिन्दु हैं।

प्रश्न 5.
एक त्रिभुज की भुजाओं की दिक् कोसाइन ज्ञात कीजिए यदि त्रिभुज के शीर्ष बिन्दु (3, 5, – 4), (- 1, 1, 2) और (- 5, – 5, – 2) हैं।
हल:
माना त्रिभुज के शीर्ष बिन्दु (3, 5, – 4), B (- 1, 1, 2) था C (- 5, – 5, 2) हैं।
AB के दिक् अनुपात – 1 – 3, 1 – 5, 2 + 4 या – 4, – 4, 6
∴ AB के दिक् कोसाइन
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MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.5

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MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.5

प्रश्न 1.
एक पासे को 6 बार उछाला जाता है। यदि ‘पासे पर सम संख्या प्राप्त होना एक सफलता है तो निम्नलिखित की प्रायिकताएँ क्या होंगी?
(i) तथ्यतः 5 सफलताएँ?
(ii) न्यूनतम 5 सफलताएँ?
(iii) अधिकतम 5 सफलताएँ?
हल:
एक पासे पर 3 सम संख्या हैं।
∴ एक पासे पर सम संख्या प्राप्त होने की प्रायिकता
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.5 img 1
= \(\left(\frac{1}{2}\right)^{6}\) = (6 + 1)
= \(\frac{7}{64}\)
(iii) P (अधिकतम 5 सफलताएँ)
= P(0) + P(1) + P(2) + P(3) + P(4) + P(5)
= [P(O) + P(1) + P(2) + P(3) + P(4) + P(5) + P(6)] – P(6)
= 1 – P(6) =1 – \(\left(\frac{1}{2}\right)^{6}\)
=1 – \(\frac{1}{64}=\frac{63}{64}\)

प्रश्न 2.
पासों के एक जोड़े को 4 बार उछाला जाता है। यदि ‘पासों पर प्राप्त अंकों का दिक होना’ एक सफलता मानी जाती है तो 2 सफलताओं की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
जब पासे के एक जोड़े को उछाला जाता है, तब n(s) =36
पासों पर प्राप्त अंकों का दिक् प्राप्त होने की प्रायिकता
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प्रश्न 3.
वस्तुओं के एक ढेर से 5%त्रुटियुक्त वस्तुएँ हैं। इसकी क्या प्रायिकता है कि 10 वस्तुओं के एक प्रतिदर्श में एक से अधिक त्रुटियुक्त वस्तुएँ नहीं होंगी?
हल:
एक त्रुटियुक्त वस्तु प्राप्त होने की प्रायिकता
= 5% = \(\frac{5}{100}=\frac{1}{20}\)
एक अच्छी वस्तु प्राप्त होने की प्रायिकता
= \(1-\frac{1}{20}=\frac{19}{20}\)
10 वस्तुओं के एक प्रतिदर्श में एक से अधिक त्रुटियुक्त वस्तुएँ नहीं होंगी।
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प्रश्न 4.
52 ताश के पत्तों की एक भली-भाँति फेंटी गई गड्डी में से 5 पत्ते उत्तरोतर प्रतिस्थापना सहित निकाले जाते हैं। इनकी क्या प्रायिकता है कि–
(i) सभी 5 पत्ते हुकुम के हों?
(ii) केवल 3 पत्ते हुकुम के हों?
(iii) एक भी पत्ता हुकुम का नहीं हो?
हल:
ताश की गड्डी में कुल पत्तों की संख्या =52
तथा हुकुम के पत्तों की संख्या =13
∴ 1 पत्ता खींचने पर हुकुम का पत्ता आने की प्रायिकता
= \(\frac{13}{52}=\frac{1}{4}\)
∴ हुकुम का पत्ता न आने की प्रायिकता = \(1-\frac{1}{4}=\frac{3}{4}\)
(i) पाँच पत्ते खींचने पर सभी हुकुम के पत्ते आने की | प्रायिकता = \(\left(\frac{1}{4}\right)^{5}=\frac{1}{1024}\)
(ii) पाँच पत्तों में से 3 पत्ते हुकुम के आने की प्रायिकता
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प्रश्न 5.
किसी फैक्टरी में बने एक बल्ब की 150 दिनों के उपयोग के बाद फ्यूज होने की प्रायिकता 0.05 है। इसकी प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि इस प्रकार के 5 बल्बों में से
(i) एक भी नहीं
(ii) एक से अधिक नहीं
(iii) एक से अधिक
(iv) कम-से-कम एक, 150 दिनों के उपयोग के बाद फ्यूज हो जाएँगें।
हल:
∵ 150 दिनों के उपयोग होने के बाद फ्यूज की प्रायिकता = 0.05
∴ फ्यूज न होने की प्रायिकता =1 – 0.05 = 0.95
(i) 5 बल्बों में से 150 दिनों के उपयोग होने के बाद फ्यूज न होने की प्रायिकता
= (0.95)5 = 0.7738 = 0.77
(ii) एक से अधिक बल्ब फ्यूज नहीं होने की प्रायिकता
= P(0) + P(1)
= (0.95)5 + 5C1 x (0.95)4 x (0.05)
= (0.95)4 (0.95 + 5 x 0.05)
= (0.95)4 (0.95 + 0.25)
=(0.95)4 x 1.2 = 9.5
(iii) एक से अधिक फ्यूज होने की प्रायिकता
= P(2) + P(3) + P(4) + P(5)
= [P(0) + P(1) + P(2) + P(3) + P(4) + P(5) – P(O) + P(1)]
= 1 – [P(0) + P(1)]
= 1 – (0.95)4 x 1.2
= 1 – 0.52 = 0.43
(iv) कम से कम 1 बल्ब फ्यूज होने की प्रायिकता
= P(1) + P(2) + P(3) + P(4) + P(5)
= P(0) + P(1) + P(2) + P(3) + P(4) + P(5) – P(0)
=1 – P(0)
=1 – (0.95)5 = 1 – 0.77
= 0.23

प्रश्न 6.
एक थैले में 10 गेंदें हैं जिनमें से प्रत्येक पर 0 से 9 तक के अंकों में से एक अंक लिखा है। यदि थैले से 4 गेंदे उत्तरोत्तर पुन: वापस रखते हुए निकाली जाती हैं तो इसकी क्या प्रायिकता है कि उनमें से किसी भी गेंद पर अंक 0 न लिखा हो?
हल:
एक थैले में 10 गेंदें हैं जिन पर 0 से 9 तक के अंकों में से एक अंक लिखा है।
0 अंक वाली एक गेंद प्राप्त होने की प्रायिकता
= \(\frac{1}{10}\) = 0.1
गेंद पर 0 न लिखा होने की प्रायिकता
= 1 – 0.1 = 0.9
अब 4 गेंदें निकाली गईं।
उनमें से किसी भी गेंद पर अंक 0 न लिखा होने की प्रायिकता
=(0.9)4 = \(\left(\frac{9}{10}\right)^{4}\)

प्रश्न 7.
एक सत्य-असत्य प्रकार के 20 प्रश्नों वाली परीक्षा में मान लें कि एक विद्यार्थी एक न्याय्य सिक्के को उछाल कर प्रत्येक प्रश्न का उत्तर निर्धारित करता है। यदि पासे पर चित प्रकट हो तो वह प्रश्न का उत्तर ‘सत्य’ देता है और यदि पट प्रकट हो तो ‘असत्य’ लिखता है। इसकी प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि वह कम-से-कम 2 प्रश्नों का सही उत्तर देता है।
हल:
P (सिक्का उछालने पर चित आता है) = \(\frac{1}{2}\)
P (सिक्का उछालने पर चित नहीं आता है)
= \(1-\frac{1}{2}=\frac{1}{2}\)
सत्य उत्तर लिखने की प्रायिकता = \(\frac{1}{2}\)
असत्य उत्तर लिखने की प्रायिकता = \(\frac{1}{2}\)
P (कम-से-कम 2 प्रश्नों के उत्तर सत्य हैं)
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प्रश्न 8.
मान लीजिए कि x का बंटन बंटन है। दर्शाइए कि x =3 अधिकतम प्रायिकता वाला परिणाम है।
हल:
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MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.5 img 7
अतः X = 3 पर अधिकतम प्रायिकता वाला परिणाम है।

प्रश्न 9.
एक बहुविकल्पीय परीक्षा में 5 प्रश्न हैं जिनमें प्रत्येक के तीन संभावित उत्तर हैं। इसकी क्या प्रायिकता है कि एक विद्यार्थी केवल अनुमान लगाकर चार या अधिक प्रश्नों का सही उत्तर दे देगा।
हल:
∵ 1 प्रश्न के तीन सम्भावित उत्तर हैं।
∴ सही उत्तर की प्रायिकता = \(\frac{1}{3}\)
P = \(\frac{1}{3}\)
तथा गलत उत्तर देने की प्रायिकता = \(1-\frac{1}{3}=\frac{2}{3}\)
q = \(\frac{2}{3}\)
इसलिए पाँच प्रश्नों में से चार या अधिक सही उत्तरों की प्रायिकता
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प्रश्न 10.
एक व्यक्ति एक लॉटरी के 50 टिकट खरीदता है, जिसमें उसके प्रत्येक में जीतने की प्रायिकता है। इसकी क्या प्रायिकता है कि वह
(a) न्यूनतम एक बार
(b) तथ्यतः एक बार
(c) न्यूनतम दो बार, इनाम जीत लेगा।
हल:
1 टिकट पर जीतने की प्रायिकता = \(\frac{1}{100}\)
न जीतने की प्रायिकता = 1 – \(\frac{1}{100}\) = \(\frac{99}{100}\)
(a) ∴ 50 मिनट लेने पर न्यूनतम 1 बार इनाम जीतने की
प्रायिकता = 1 – \(\left(\frac{99}{100}\right)^{50}\)
= 1 – (0.99),sup>50
(b) तथ्यतः एक बार इनाम जीतने की प्रायिकता
= \(^{50} C_{1}\left(\frac{99}{100}\right)^{49}\left(\frac{1}{100}\right)^{1}\)
= \(\frac{1}{2}\left(\frac{99}{100}\right)^{49}\)
(c) न्यूनतम दो बार, इनाम जीतने की प्रायिकता
= P(2) + P(3) +…P(50)
= P(0) + P(1) +…P(50) – [P(0) + P(1)] = 1 – [P(O) + P(1)]
=1 – [P(0) + P(1)]
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प्रश्न 11.
एक पासे को सात बार उछालने पर तथ्यतः दो बार 5 आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
पासे को 1 बार उछालने पर 5 आने की प्रायिकता = \(\frac{1}{6}\)
तथा 5 न आने की प्रायिकता = \(1-\frac{1}{6}=\frac{5}{6}\)
इसलिए पासे को सात बार उछालने पर दो बार 5 आने की प्रायिकता
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प्रश्न 12.
एक पासे को छः बार उछालने पर अधिकतम 2 बार 6 आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल:
पासे को 1 बार उछालने पर 6 आने की प्रायिकता = \(\frac{1}{6}\)
तथा 6 न आने की प्रायिकता = \(1-\frac{1}{6}=\frac{5}{6}\)
अत: पासे को 6 बार उछालने पर अधिकतम दो बार 6 आने की प्रायिकता
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प्रश्न 13.
यह ज्ञात है कि किसी विशेष प्रकार की निर्मित वस्तुओं की संख्या में 10% खराब हैं। इसकी क्या प्रायिकता है कि इस प्रकार की 12 वस्तुओं के यादृच्छिक प्रतिदर्श में से 9 खराब हों?
हल:
निर्मित वस्तुओं में खराब वस्तुओं के चुनने की प्रायिकता
= 10% = \(\frac{1}{10}\)
अच्छी वस्तुओं को चुनने की प्रायिकता
= \(1-\frac{1}{10}=\frac{9}{10}\)
12 वस्तुओं के यादृच्छिक प्रतिदर्श में से 9 खराब होने की प्रायिकता
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प्रश्न 14.
एक बॉक्स में 100 बल्ब हैं। जिसमें 10 त्रुटियुक्त हैं। 5 बल्ब के नमूने में से, किसी भी बल्ब के त्रुटियुक्त न होने की प्रायिकता है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.5 img 13
हल:
बॉक्स में बल्बों की संख्या =100
खराब बल्बों की संख्या =10
खराब बल्ब होने की प्रायिकता = \(\frac{10}{100}=\frac{1}{10}\)
अच्छे बल्ब होने की प्रायिकता = \(1-\frac{1}{10}=\frac{9}{10}\)
अतः 5 बल्बों के नमूने में से, किसी भी बल्ब की त्रुटि युक्त न होने की प्रायिकता = \(\left(\frac{9}{10}\right)^{5}\)
अतः विकल्प (C) सही है।

प्रश्न 15.
एक छात्र की तैराक न होने की प्रायिकता है। तब 5 छात्रों में से 4 छात्रों की तैराक होने की प्रायिकता है-
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 13 प्रायिकता Ex 13.5 img 14
हल: छात्रों की कुल संख्या = 5
एक छात्र की तैराक न होने की प्रायिकता = \(\frac{1}{5}\)
∴ एक छात्र की तैराक होने की प्रायिकता = \(1-\frac{1}{5}=\frac{4}{5}\)
∴ छात्रों का प्रायिकता बंटन जो तैराक है = \(\left(\frac{1}{4}+\frac{4}{5}\right)^{5}\)
इसलिए 5 छात्रों में से 4 छात्रों की तैराक होने की प्रायिकता
= \(^{5} C_{4}\left(\frac{4}{5}\right)^{4} \frac{1}{5}\)
अतः विकल्प (A) सही है।

MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 12 प्रायिकता Ex 12.2

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MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 12 प्रायिकता Ex 12.2

प्रश्न 1.
रेशमा दो प्रकार के भोज्य P और Q को इस प्रकार मिलाना चाहती है कि मिश्रण में विटामिन अवयवों में 8 मात्रक विटामिन A तथा 11 मात्रक विटामिन B हों। भोज्य P की लागत Rs 60/kg और भोज्य ए की लागत Rs 80/kg है। भोज्य P में 3 मात्रक/kg विटामिन A और 5 मात्रक/kg विटामिन B है जबकि भोज्य में 4 मात्रक/kg विटामिन A और 2 मात्रक/kg विटामिन है। मिश्रण की न्यूनतम लागत ज्ञात कीजिए।
हल:
माना मिश्रण में भोज्य पदार्थ P की मात्रा x kg और Q की मात्रा y kg है।
स्पष्टतः x ≥ 0, y ≥ 0
प्रदत्त आंकड़ों से निम्नलिखित सारणी बनाते हैं।
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 12 प्रायिकता Ex 12.2 img 1
∴ मिश्रण में विटामिन A के 8 मात्रक और विटामिन B के 11 मात्रक होने चाहिए अतः निम्न अवरोध प्राप्त होते हैं।
3x + 4 ≤ 8
5x + 2y ≥ 11
भोज्य P के x kg और Q के y kg खरीदने का कुल मूल्य z है तब
Z = 60x + 80y
अतः समस्या का गणितीय समीकरण निम्नलिखित है।
निम्न व्यवरोधों के अन्तर्गत
3x + 4y ≥ 8 …(i)
5x + 2y ≥ 11 …(ii)
x, y ≥ 0 …(iii)
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असमीकरणों
(i) व
(iii) तक के आलेखों द्वारा निर्धारित सुसंगत क्षेत्र X APDY हैं तथा सुसंगत क्षेत्र अपरिवद्ध है।
P\(\left(2, \frac{1}{2}\right)\) प्रतिच्छेदत बिन्दु हैं।
AB: 3x + 4y = 8
और 5x + 2y = 11
Z के मान की गणना प्रत्येक कोणीय बिन्दु पर करने पर
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स्पष्ट है कि 2 का न्यूनतम मान 160 है। परन्तु सुसंगत क्षेत्र अपरिवद्ध है।
अब हमें असमीकरण का आलेख खींचना पड़ेगा।
60x + 80y < 160
या 3x + 4y < 8
यह रेखा के बीच का क्षेत्र प्रदर्शित करता है।
AB: 3x + 4y = 8
आलेख से ज्ञात होता है कि यह क्षेत्र तथा सुसंगत क्षेत्रों के बीच कोई बिन्दु उभयनिष्ठ नहीं है।
अतः z का न्यूनतम मूल्य 160 रु० है, जो कि \(\left(\frac{8}{3}, 0\right)\) और \(\left(2, \frac{1}{2}\right)\) को मिलाने वाली रेखाखण्ड के सभी बिन्दुओं पर न्यूनतम

प्रश्न 2:
एक प्रकार के केक को 200 g आटा तथा 25g वसा (fat) की आवश्यकता होती है तथा दूसरी प्रकार के केक के लिए 100 g आटा तथा 50g वसा की आवश्यकता होती है। केकों की अधिकतम संख्या बताओ जो 5 किलो आटे तथा 1 किलो वसा से बन सकते हैं, यह मान लिया गया है कि केकों को बनाने के लिए अन्य पदार्थों की कमी नहीं रहेगी।
हल:
माना पहली प्रकार के केक x तथा दूसरी प्रकार के केक y हैं।
∴ कुल केकों की संख्या z =x+y
St 200x + 100y ≤ 5000 (आटा)
25x + 50y ≤ 1000 (वसा)
अतः समस्या का गणितीय सूत्रीकरण निम्न हैं-
उच्च अवरोधों के अन्तर्गत
z = x + y
या 2x + y ≤ 50
x + 2y ≤ 40 और x,y ≥ 0
असमीकरणों का आलेख बनाने पर सुसंगत क्षेत्र OAEB प्राप्त होता है।
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रेखाओं AB: 2x + y = 50 और CD: x +2y = 40 के प्रतिच्छेद बिन्दु E (20,10) हैं।
अब z की गणना प्रत्येक कोणीय बिन्दु पर करने पर
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अतः केकों की अधिकतम संस्था = 30 एक प्रकार की तथा 10 अन्य प्रकार की हैं।

प्रश्न 3.
एक कारखाने में टेनिस के रैकेट तथा क्रिकेट के बल्ले बनते हैं। एक टेनिस रैकेट बनाने के लिए 1.5 घंटा यांत्रिक समय तथा 3 घंटे शिल्पकार का समय लगता है। एक क्रिकेट बल्ले को तैयार करने में 3 घंटे यांत्रिक समय तथा 1 घंटा शिल्पकार का समय लगता है। एक दिन में कारखाने में विभिन्न यंत्रों पर उपलब्ध यांत्रिक समय के 42 घंटे और शिल्पकार समय के 24 घंटे से अधिक नहीं हैं।
(i) रैकेटों और बल्लों को कितनी संख्या में बनाया जाए ताकि कारखाना पूरी क्षमता से कार्य करे?
(ii) यदि रैकेट और बल्ले पर लाभ क्रमश: Rs 20 तथा Rs 10 हों तो कारखाने का अधिकतम लाभ ज्ञात कीजिए यदि कारखाना पूरी क्षमता से कार्य करे।
हल:
माना रैकेटों की संख्या = x तथा बल्लों की संख्या = y
(i) अधिकतम
z = x + y
St 15x + 3y ≤ 42
3x + y ≤ 24
x, y ≥ 0
असमीकरणों का आलेख बनाने पर सुसंगत क्षेत्र OABC है तथा रेखाओं x +2y = 28 तथा 3x +y = 24 का प्रतिच्छेद बिन्दु B(4,12) है।
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अब र की प्रत्येक कोणीय बिन्दु पर गणना करने पर
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∵ 2 का अधिकतम मात्रा 16 है,
∵ 4 रैकेट तथा 12 बल्ले।
(ii) लाभ z = 20x + 10y
At D(0, 0), z = 0
At A(8, 0), z = 160
At B(4, 12), z = 200
At C(0, 14), z = 14
∴ अधिकतम लाभ 200 रु० हैं।

प्रश्न 4.
एक निर्माणकर्ता नट और बोल्ट का निर्माण करता है। एक पैकेट नटों के निर्माण में मशीन A पर एक घंटा और मशीन B पर 3 घंटे काम करना पड़ता है, जबकि एक पैकेट बोल्ट के निर्माण में 3 घंटे मशीन A पर और 1 घंटा मशीन B पर काम करना पड़ता है। वह नटों से Rs 17.50 प्रति पैकेट और बोल्टों पर Rs 7.00 प्रति पैकेट लाभ कमाता है। यदि प्रतिदिन मशीनों का अधिकतम उपयोग 12 घंटे किया जाए तो प्रत्येक (नट और बोल्ट) के कितने पैकेट उत्पादित किए जाएँ ताकि अधिकतम लाभ कमाया जा सके।
हल:
माना बोल्ट के पैकिट = x तथा y पैकेट नटों का निर्माण हुआ
तब दिये गये अवरोध का गणितीय सूत्रीकरण निम्नलिखित है-
अधिकतम z = 17.50x + 7y
या x + 3y ≤ 12
3x + y ≤ 12
x, y ≥ 0
अब असमीकरणों का आलेख बनाने पर सुसंगत क्षेत्र OABC प्राप्त होता है
रेखाओं x + 3y = 12 और 3x + y = 12 का प्रतिच्छेद बिन्दु B(3,3) हैं।
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 12 प्रायिकता Ex 12.2 img 8
अब z की गणना प्रत्येक कोणीय बिन्दु पर करने पर
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 12 प्रायिकता Ex 12.2 img 9
अतः नट के तीन पैकेट तथा बोल्ट के तीन पैकेट और अधिकतम लाभः = 73.50 रु० हैं।

प्रश्न 5.
एक कारखाने में दो प्रकार के पेंच A और B बनते हैं। प्रत्येक के निर्माण में दो मशीनों के प्रयोग की आवश्यकता होती है, जिसमें एक स्वचालित और दूसरी हस्तचालित है। एक पैकेट पेंच A के निर्माण में 4 मिनट स्वचालित और 6 मिनट हस्तचालित मशीन, तथा एक पैकेट पेंच B के निर्माण में 6 मिनट स्वचालित और 3 मिनट हस्तचालित मशीन का कार्य होता है। प्रत्येक मशीन किसी भी दिन के लिए अधिकतम 4घंटे काम के लिए उपलब्ध है। निर्माता पेंच के प्रत्येक पैकेट पर Rs7 और पेंच B के प्रत्येक पैकेट पर Rs 10 का लाभ कमाता है। यह मानते हुए कि कारखाने में निर्मित सभी पेंचों के पैकेट बिक जाते हैं, ज्ञात कीजिए कि प्रतिदिन कितने पैकेट विभिन्न पेंचों के बनाए जाएँ जिससे लाभ अधिकतम हो तथा
अधिकतम लाभ ज्ञात कीजिए।
हल:
माना x पैकेट पेंच A के तथा y पैकेट पेंच B के उत्पादित होने चाहिए।
इसलिए गणितीय सूत्रीकरण निम्नलिखित होगा-
अधिकतम : z = 7x + 10y (लाभ)
St 4x + 6y ≤ 240 (स्वचालित मशीन)
2x + 3y ≤ 120
6x + 3y ≤ 240 (हस्तचालित मशीन)
x, y ≥ 0
2x + y ≤ 80
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 12 प्रायिकता Ex 12.2 img 10
अब असमीकरणों का आलेख बनाने पर सुसंगत क्षेत्र OABC प्राप्त होता है।
रेखाओं 2x + 3y = 120 और 2x + y = 80 का प्रतिच्छेद बिन्दु B (30, 20) है।
अब z की गणना प्रत्येक कोणीय बिन्दु पर करने पर
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 12 प्रायिकता Ex 12.2 img 11
इसलिए 30 पैकिट A प्रकार के पेंच तथा 20 पैकेट B प्रकार के पेंचों के तथा अधिकतम लाभ = 410 रु० है।

प्रश्न 6.
एक कुटीर उद्योग निर्माता पैडेस्टल लैंप और लकड़ी के शेड बनाता है। प्रत्येक के निर्माण में एक रगड़ने/काटने और एक स्प्रेयर की आवश्यकता पड़ती है। एक लैंप के निर्माण में 2 घंटे रगड़ने/काटने और 3 घंटे स्प्रेयर की आवश्यकता होती है, जबकि एक शेड के निर्माण में 1 घंटा रगड़ने/काटने और 2 घंटे स्प्रेयर की आवश्यकता होती है। स्प्रेयर की मशीन प्रतिदिन अधिकतम 20 घंटे और रंगड़ने/काटने की मशीन प्रतिदिन अधिकतम 12 घंटे के लिए उपलब्ध है। एक लैंप की बिक्री पर Rs 5 और एक शेड की बिक्री पर Rs 3 का लाभ होता है। यह मानते हुए कि सभी निर्मित लैंप और शेड बिक जाते हैं, तो बताइए वह निर्माण की प्रतिदिन कैसी योजना बनाए कि लाभ अधिकतम हो?
हल:
माना x लैंप तथा y लकड़ी के शेड उत्पादित होते हैं। इस समस्या को गणितीय सूत्रीकरण करने पर अधिकतम
लाभ
z = 5x + 3y
St 2x + y ≤ 12 (रगड़ना/काटना)
3x + 2y ≤ 20 (स्प्रेयर)
x, y ≥ 20
अब आलेख बनाने पर सुसंगत क्षेत्र OAPD प्राप्त होता है।
रेखाओं 2x + y = 12 तथा 3x + 2y = 20 का प्रतिच्छेद बिन्दु P(4,4) है।
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 12 प्रायिकता Ex 12.2 img 12
अब z की गणना प्रत्येक कोणीय बिन्दु पर करने पर कोणीय बिन्दु
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 12 प्रायिकता Ex 12.2 img 13
इसलिए 4 लैंप तथा 4 लकड़ी के शेड तथा अधिकतम लाभ = 32 रु० है।

प्रश्न 7.
एक कंपनी प्लाईवुड के अनूठे स्मृति चिह्न का निर्माण करती है। A प्रकार के प्रति स्मृति चिह्न के निर्माण में 5 मिनट काटने और 10 मिनट जोड़ने में लगते हैं। B प्रकार के प्रति स्मृति चिह्न के लिए 8 मिनट काटने और 8 मिनट जोड़ने में लगते हैं। दिया गया है कि काटने के लिए कुल समय 3 घंटे 20 मिनट तथा जोड़ने के लिए 4 घंटे उपलब्ध हैं। प्रत्येक A प्रकार के स्मृति चिह्न पर Rs 5 और प्रत्येक B प्रकार के स्मृति चिह्न पर Rs 6 का लाभ होना है। ज्ञात कीजिए कि लाभ के अधिकतमीकरण के लिए प्रत्येक प्रकार के कितने-कितने स्मृति चिह्नों का कंपनी द्वारा निर्माण होना चाहिए?
हल:
माना A प्रकार के स्मृति चिह्नों की संख्या x तथा B प्रकार के स्मृति चिह्नों की संख्या y हैं।
दी गई समस्या का गणितीय समीकरण करने पर
अधिकतम = 5x + 6y (लाभ)
St 5x + 8y ≤ 200 (कटिंग)
10x + 8y ≤ 240 (जोड़ना)
x, y ≥ 0
अब आलेख बनाने पर सुसंगत क्षेत्र OABC प्राप्त होते हैं।
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 12 प्रायिकता Ex 12.2 img 15
अब z की गणना प्रत्येक कोणीय बिन्दु पर करने पर
MP Board Class 12th Maths Book Solutions Chapter 12 प्रायिकता Ex 12.2 img 14
क्योंकि B(8, 20) पर 2 का मान अधिकतम है अत: A प्रकार के स्मृति चिह्नों की संख्या 8 तथा B प्रकार के स्मृति चिह्नों की संख्या 20 है तथा अधिकतम लाभ 160 रु० है।

प्रश्न 8.
एक सौदागर दो प्रकार के निजी कंप्यूटर-एक डेस्कटॉप नमूना और दूसरा पोर्टेबल नमूना, जिनकी कीमतें क्रमश: Rs 25,000 और Rs 40,000 होगी, बेचने की योजना बनाता है। वह अनुमान लगाता है कि कंप्यूटरों की कुल मासिक माँग 250 नगों से अधिक नहीं होगी। प्रत्येक प्रकार के कंप्यूटरों के नगों की संख्या ज्ञात कीजिए जिसे सौदागर अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए संग्रह करें यदि उसके पास निवेश के लिए Rs 70 लाख से अधिक नहीं है और यदिडेस्कटॉप नमूने पर उसका लाभ Rs 4500 और पोर्टेबल नमूने पर Rs 5000 लाभ हो।
हल:
माना डेस्कटॉप की संख्या x तथा पोर्टेबल की संख्या y है। तब समस्या का गणितीय समीकरण करने पर
अधिकतम z = 4500x + 5000y (लाभ)
25000x + 40000y ≤ 70,00,000 (लागत मूल्य)
5x + 8y ≤ 1400
x + y ≤ 250 (माँग)
x, y ≥ 0
अब समस्या का आलेख बनाने पर सुसंगत क्षेत्र OABC प्राप्त होता है जहाँ कोणीय बिन्दुओं 0,A, B, C के निर्देशांक
क्रमशः (0,0), (250,0), (200,50) और (0,175) हैं।
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अब z की गणना प्रत्येक कोणीय बिन्दु पर करने पर
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अत: डेस्कटोंपों के नमूनों की संख्या 200 तथा पोर्टेबल नमूनों की संख्या 50 है तथा अधिकतम लाभ = 1150,000 रु० हैं।

प्रश्न 9.
एक भोज्य पदार्थ में कम से कम 80 मात्रक विटामिन A और 100 मात्रक खनिज होना चाहिए। दो प्रकार के भोज्य F1 और F2 उपलब्ध हैं। भोज्य F1 की लागत Rs 4 प्रति मात्रक और F2 की लागत Rs 5 प्रति मात्रक है। भोज्य F1 की एक इकाई में कम से कम 3 मात्रक विटामिन A और 4 मात्रक खनिज है। F2की प्रति इकाई में कम से कम 6 मात्रक विटामिन A और 3 मात्रक खनिज हैं। इसको एक रैखिक प्रोग्रामन समस्या के रूप में सूत्रबद्ध कीजिए। उस आहार का न्यूनतम मूल्य ज्ञात कीजिए, जिसमें इन दो भोज्यों का मिश्रण है और उसमें न्यूनतम पोषक तत्त्व हैं।
हल:
माना x मात्रक भोज्य पदार्थ F1 के तथा y मात्रक भोज्य पदार्थ F2 के हैं। तब गणितीय सूत्रीकरण करने पर
न्यूनतम z = 4x + 6y
St 3x + 6y ≥ 80 (लागत)
4x + 3y ≥ 100 (विटामिन A)
x, y ≥ 0 (विटामिन B)
अब आलेख बनाने पर सुसंगत क्षेत्र X AEDY प्राप्त होता है जो कि अपरिवद्ध है।
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कोणीय बिन्दु A, E तथा D के निर्देशांक क्रमशः
\(\left(\frac{80}{3}, 0\right)\left(24, \frac{4}{3}\right)\) तथा \(\left(0, \frac{100}{3}\right)\) हैं।
अब z की गणना प्रत्येक कोणीय बिन्दु पर करने पर
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सारणी से स्पष्ट है कि – का न्यूनतम मान 104 है अतः न्यूनतम मूल्य = 104 रु०।

प्रश्न 10.
दो प्रकार के उर्वरक F1 और F2 हैं। F1 में 10% नाइट्रोजन और 6% फास्फोरिक अम्ल है। तथा F2 में 5% नाइट्रोजन तथा 10% फास्फोरिक अम्ल है। मिट्टी की स्थितियों का परीक्षण करने के पश्चात् एक किसान पाता है कि उसे अपनी फसल के लिए 14 kg नाइट्रोजन और 14 kg फास्फोरिक अम्ल की आवश्यकता है। यदि F1 की कीमत Rs. 6/kg और F2 की कीमत Rs. 5/kg है, प्रत्येक प्रकार का कितना उर्वरक उपयोग के लिए चाहिए ताकि न्यूनतम मूल्य पर वांछित पोषक तत्व मिल सके। न्यूनतम लागत क्या है?
हल:
माना मिश्रण में x kg F1 के तथा y kg F2 के मिश्रित है।
तब न्यूनतम z = 6x + 5y (लागत)
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x, y ≥ 0 या न्यूनतम z = 6x +5y
St 2x + y ≥ 280
3x + 5y ≥ 2700
x, y ≥ 0
अब असमीकरणों का आलेख बनाने पर सुसंगत क्षेत्र Y ABCX प्राप्त है जो अपरिबद्ध है।
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अब z की गणना प्रत्येक कोणीय बिन्दु पर करने पर कोणीय बिन्दु
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इसलिए सारणी से z का निम्नतम मान 1000 है तथा बिन्दु B(100, 80) पर है, परन्तु सुसंगत क्षेत्र अपरिबद्ध है इसलिए असमीकरण 6x + 5y < 1000 लेने पर।
क्योंकि यहाँ पर कोई बिन्दु उभयनिष्ठ नहीं है। अतः उर्वरक F1 के 100 kg तथा उर्वरक F2 के 80 kg मात्रा है, और न्यूनतम मूल्य 1000 रु० है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित असमीकरण निकाय : 2x + y ≤ 10, x+3y ≤ 15, x, y ≥ 0 से निर्धारित सुसंगत क्षेत्र के कोणीय बिन्दु (0,0), (5,0), (3,4) और (0, 5) हैं। माना कि Z = px + qy, जहाँ p, q>0, p तथा q के लिए निम्नलिखित में कौन प्रतिबन्ध उचित है ताकि Z का अधिकतम (3, 4) और (0, 5) दोनों पर घटित होता है।
(A) p = q
(B) p = 2q
(C) p = 3q
(D) q = 3p
हल:
दिया है : Z = px + qy
बिन्दु (3, 4) पर, Z = 3p + 4q
बिन्दु (0, 5) पर, Z = 0 + 5q = 5q
∴ 3p + 4q=5q
⇒ 3p = 5q – 4q
⇒ 3p = q
अतः विकल्प (D) सही है।

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 4 Quadratic Equations Ex 4.2

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MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 4 Quadratic Equations Ex 4.2

Question 1.
Find the roots of the following quadratic equations by factorisation:
(i) x2 – 3x – 10 = 0
(ii) 2x2 + x – 6 = 0
(iii) \(\sqrt{2} x^{2}+7 x+5 \sqrt{2}\) = 0
(iv) 2x2 – x + \(\frac{1}{8}\) = 0
(v) 100x2 – 20x + 1 =0
Solution:
(i) We have, x2 – 3x – 10 = 0
⇒ x2 – 5x + 2x – 10 = 0
⇒ x(x – 5) + 2(x – 5) = 0 (x – 5)(x + 2) = 0
Either x – 5 = 0 or x + 2 = 0
x = 5 or x = – 2
Thus, the required roots are 5 and -2.

(ii) We have, 2x2 + x – 6 = 0
⇒ 2x2 + 4x – 3x – 6 = 0
⇒ 2x(x + 2) – 3(x + 2) = 0
⇒ (x + 2)(2x – 3) = 0
Either x + 2 = 0 or 2x – 3 = 0
⇒ x = -2 or x = \(\frac{3}{2}\)
Thus, the required roots are -2 and \(\frac{3}{2}\)

(iii)
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 4 Quadratic Equations Ex 4.2 1

(iv) We have, 2x2 – x + \(\frac{1}{8}\) = 0
⇒ 16x2 – 8x + 1 = 0
⇒ 16x2 – 4x – 4x + 1 = 0
⇒ 4x(4x – 1) -1(4x – 1) = 0
⇒ 4x – 1 = 0
⇒ x = \(\frac{1}{4}\)
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 4 Quadratic Equations Ex 4.2 2

(v) We have 100x2 – 20x + 1 = 0
⇒ 100x2 – 10x – 10x + 1 = 0
⇒ 10x(10x – 1) -1(10x – 1) = 0
⇒ (10x – 1)(10x – 1) = 0
⇒ (10x – 1) = 0
⇒ x = \(\frac{1}{10}\)
Thus the required roots are \(\frac{1}{10}, \frac{1}{10}\)

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 4 Quadratic Equations Ex 4.2

Question 2.
Solve the problems:
(i) John and Jivanti together have 45 marbles. Both of them lost 5 marbles each, and the product of the number of marbles they now have is 124. We would like to find out how many marbles they had to start with.
(ii) A cottage industry produces a certain number of toys in a day. The cost of production of each toy (in rupees) was found to be 55 minus the number of toys produced in a day. On a particular day, the total cost of production was ₹ 750. We would like to find out the number of toys produced on that day.
Solution:
(i) Let John had x marbles and Jivanti had (45 – x) marbles.
When both of them lost 5 marbles then equation becomes (x – 5) × (45 – x – 5) = 124
⇒ (x – 5) × (40 – x) = 124
⇒ x2 – 45x + 324 = 0
⇒ x2 – 9x – 36x + 324 = 0
⇒ x(x – 9) – 36(x – 9) = 0
⇒ (x – 9)(x – 36) = 0
Either x – 9 = 0 or x – 36 = 0
Thus, x = 9 or x = 36
∴ If John had 9 marbles, then Jivanti had 45 – 9 = 36 marbles.
If John had 36 marbles, then Jivanti had 45 – 36 = 9 marbles.

(ii) Let the number of toys produced in a day be x.
Then cost of 1 toy = \(\frac{750}{x}\)
⇒ \(\frac{750}{x}\) = 55 – x
⇒ 750 = 55x – x2
⇒ x2 – 55x + 750 = 0
⇒ x2 – 30x – 25x + 750 = 0
⇒ x(x – 30) – 25(x – 30) = 0
⇒ (x – 30)(x – 25) = 0
Either x – 30 = 0 or x – 25 = 0
x = 30 or x = 25

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Question 3.
Find two numbers whose sum is 27 and product is 182.
Solution:
Let one of the numbers be x.
∴ Other number = 27 – x
According to the condition,
x(27 – x) = 182
⇒ 21x – x2 = 182
⇒ x2 – 27x + 182 = 0
⇒ x2 – 13x – 14x +182 = 0
⇒ x(x – 13) – 14(x – 13) = 0
⇒ (x – 13)(x – 14) = 0
Either x – 13 = 0 or x -14 = 0
⇒ x = 13 or x = 14
Thus, the required numbers are 13 and 14.

Question 4.
Find two consecutive positive integers, sum of whose squares is 365.
Solution:
Let the two consecutive positive integers be x and (x + 1).
Since, the sum of the square of the numbers is 365.
∴ x2 + (x + 1)2 = 365
⇒ x2 + (x2 + 2x + 1) = 365
⇒ x2 + x2 + 2x + 1 = 365
⇒ 2x2 + 2x + 1 – 365 = 0
⇒ 2x2 + 2x – 364 = 0
⇒ x2 + x – 182 = 0
⇒ x2 + 14x – 13x – 182 = 0
⇒ x(x + 14) – 13(x + 14) = 0
⇒ (x + 14)(x -13) = 0
Either x + 14 = 0 or x – 13 = 0
⇒ x = -14 or x = 13
Since, x has to be a positive integer
⇒ x = -14 is rejected.
∴ x = 13 ⇒ x + 1 = 13 + 1 = 14
Thus, the required consecutive positive integers are 13 and 14.

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Question 5.
The altitude of a right triangle is 7 cm less than its base. If the hypotenuse is 13 cm, find the other two sides.
Solution:
Let the base of the given right triangle be x cm.
∴ Its height = (x – 7) cm
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 4 Quadratic Equations Ex 4.2 3
Squaring both sides, we get
169 = x2 + (x – 7)2
⇒ 169 = x2 + x2 – 14x + 49
⇒ 2x2 – 14x + 49 – 169 = 0
⇒ 2x2 – 14x – 120 = 0
⇒ x2 – 7x- 60 = 0
⇒ x2 – 12x + 5x – 60 = 0
⇒ x(x – 12) + 5(x – 12) = 0
⇒ (x – 12)(x + 5) = 0
Either x – 12 = 0 or x + 5 = 0
⇒ x = 12 or x = -5
But the sides of a triangle can never be negative
⇒ x = -5 is rejected.
∴ x = 12
∴ Length of base = 12 cm
⇒ Length of altitude = (12 – 7)cm = 5 cm
Thus, the required base = 12 cm and altitude = 5 cm

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Question 6.
A cottage industry produces a certain number of pottery articles in a day. It was observed on a particular day that the cost of production of each article (in rupees) was 3 more than twice the number of articles produced on that day. If the total cost of production on that day was ₹ 90, find the number of articles produced and the cost of each article.
Solution:
Let the number of articles produced in a day = x
∴ Cost of production of each article = ₹ (2x + 3)
According to the condition,
Total cost = ₹ 90
⇒ x × (2x + 3) = 90
⇒ 2x2 + 3x = 90
⇒ 2x2 + 3x – 90 = 0
⇒ 2x2 – 12x + 15x – 90 = 0
⇒ 2x(x – 6) + 15(x – 6) = 0
⇒ (x – 6)(2x + 15) = 0
Either x – 6 = 0 or 2x + 15 = 0
⇒ x= 6 or x = \(\frac{-15}{2}\)
But the number of articles produced can never be negative.
⇒ x = \(\frac{-15}{2}\) is rejected
∴ Cost of production of each article = ₹ (2 × 6 + 3) = ₹ 15
Thus, the required number of articles produced is 6 and the cost of each article is ₹ 15.