MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 4 परिवहन, संचार एवं विदेशी व्यापार

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 4 परिवहन, संचार एवं विदेशी व्यापार

MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
भारत में रेलवे जोन की कुल संख्या है
(i) 9
(ii) 16
(iii) 14
(iv) 15
उत्तर:
(ii) 16

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प्रश्न 2.
बड़ी रेलवे लाइन में रेल की दोनों पटरियों के मध्य की दूरी होती है
(i) 1,676 मिमी
(ii) 1000 मिमी
(iii) 792 मिमी
(iv) 1,560 मिमी।
उत्तर:
(i) 1,676 मिमी

प्रश्न 3.
भूमिगत रेलपथ (मेट्रो रेल) से सम्बन्धित है –
(i) बंगलूरू
(ii) कोलकाता
(iii) अहमदाबाद
(iv) भोपाल।
उत्तर:
(ii) कोलकाता

प्रश्न 4.
गैस लाइन है
(i) बरौनी-हल्दिया
(ii) बरौनी-जालंधर
(iii) नाहरकटिया-बरौनी
(iv) हजीरा-जगदीशपुर।
उत्तर:
(iv) हजीरा-जगदीशपुर।

प्रश्न 5.
मुम्बई बन्दरगाह के दबाव को कम करने हेतु विकसित बन्दरगाह है (2017)
(i) पाराद्वीप
(ii) हल्दिया
(iii) न्हावाशेवा
(iv) काण्डला।
उत्तर:
(iii) न्हावाशेवा

प्रश्न 6.
विदेशों में रह रहे लोगों से बात करने हेतु भारत में उपलब्ध दूरसंचार सेवा है (2016)
(i) बी. पी. टी.
(ii) आई. एस. डी.
(iii) एस. टी. डी.
(iv) डब्ल्यु. एल. एल.
उत्तर:
(ii) आई. एस. डी.

प्रश्न 7.
जिन उपभोक्ताओं के पास कम्प्यूटर या इन्टरनेट उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें प्रारम्भ की गई दूरसंचार सेवा
(i) व्यापारिक चैनल
(ii) स्पीड पोस्ट
(iii) ई-पोस्ट
(iv) ई-बिलपोस्ट।
उत्तर:
(iii) ई-पोस्ट

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रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

प्रश्न 1.
आन्ध्र प्रदेश के कोरोमण्डल तट पर सर्वाधिक सुरक्षित व गहरा बन्दरगाह ……. है।
उत्तर:
विशाखापट्टनम

प्रश्न 2.
स्थानीय पत्रों के प्रेषण हेतु बड़े शहरों में लगाई गई पत्र पेटियाँ ……” कहलाती हैं।
उत्तर:
ग्रीन चैनल

प्रश्न 3.
सभी राज्यों की राजधानियों में डाक छाँटने व प्रेषण हेतु उपयोगी चैनल ……. है।
उत्तर:
राजधानी चैनल

प्रश्न 4.
इन्टरनेशनल नेटवर्क का संक्षिप्त नाम है। (2009, 11, 13)
उत्तर:
इण्टरनेट

प्रश्न 5.
विदेशी व्यापार से आशय एक देश का अन्य देशों से वस्तुओं के …….. से है। (2010)
उत्तर:
आदान-प्रदान

प्रश्न 6.
स्वतन्त्रता प्राप्ति के समय भारत का विदेशी व्यापार ……का स्वरूप लिये हुआ था।
उत्तर:
औपनिवेशिक व्यापार

प्रश्न 7.
1992 की घोषित आयात-निर्यात नीति में ……. को काफी उदार बना दिया गया है।
उत्तर:
लाइसेंस प्रणाली।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 4 परिवहन, संचार एवं विदेशी व्यापार 1
उत्तर:

  1. → (ङ)
  2. → (क)
  3. → (ख)
  4. → (ग)
  5. → (घ)

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कोलकाता से 125 किमी. दूर कौन-सा बन्दरगाह विकसित किया गया है ?
उत्तर:
हल्दिया बन्दरगाह।

प्रश्न 2.
इण्डियन एयरलाइन्स का मुख्यालय कहाँ हैं ?
उत्तर:
दिल्ली में।

प्रश्न 3.
भारत में प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना का प्रमुख उद्देश्य क्या है ?
उत्तर:
प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य 500 तक की आबादी वाले सभी गाँवों को बारहमासी सड़कों से जोड़ना है।

प्रश्न 4.
परिवहन व संचार से क्या आशय है ?
उत्तर:
व्यक्तियों या जीव-जन्तुओं को किसी माध्यम द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाने ले जाने की प्रक्रिया परिवहन कहलाती है।
संचार तन्त्र के अन्तर्गत सूचनाओं का आदान-प्रदान या प्रसारण सम्मिलित है।

प्रश्न 5.
दूरदर्शन में विज्ञापन सेवा कब प्रारम्भ की गई थी ?
उत्तर:
1976 में विज्ञापन सेवा प्रारम्भ की गई।

प्रश्न 6.
अन्तर्राष्ट्रीय दर्शकों को भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक क्षेत्रों की जानकारी किस चैनल द्वारा प्रदान की जाती है ?
उत्तर:
डी. डी. इण्डिया चैनल द्वारा।

प्रश्न 7.
वर्तमान में रेडियो प्रसारण सेवा का नाम क्या है ?
उत्तर:
आकाशवाणी।

प्रश्न 8.
भारत में दूरदर्शन के शैक्षिक चैनल को प्रमुखतया किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर:
डी. डी. ज्ञानदर्शन शैक्षिक चैनल नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 9.
भारत के प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय जलमार्गों के नाम बताइए।
उत्तर:
भारत वर्ष से गुजरने वाले प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय जलमार्ग निम्नलिखित हैं –

  1. सिंगापुर मार्ग-कोलकाता से जापान होते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका के तटों तक।
  2. ऑस्ट्रेलिया मार्ग-चेन्नई से सिंगापुर होते हा ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैण्ड तक।
  3. स्वेज मार्ग-मुम्बई से पोर्टसईद तथा लन्दन तक।
  4. उत्तमाशा अन्तरीप मार्ग-मुम्बई, मोम्बासा से यूरोप व अमेरिका तक।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मैट्रो रेल सेवा से क्या तात्पर्य है ? (2009)
उत्तर:
मैट्रो रेल सेवा – जनसंख्या के महानगरों में केन्द्रित होने से घने बसे क्षेत्रों में रेलमार्गों के विकास की सम्भावनाएँ सीमित हैं। इसलिए महानगरों में भूमिगत रेल पथ (मैट्रो रेल) विकसित करने की योजना है। कोलकाता, मुम्बई एवं दिल्ली में यह कार्य पूरा किया जा चुका है।

प्रश्न 2.
आन्तरिक जल परिवहन की प्रमुख बाधाएँ कौन-कौनसी हैं ? (2014)
उत्तर:
आन्तरिक जल परिवहन की प्रमुख बाधाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. देश की अधिकांश नदियाँ मौसमी हैं। कुछ नदियाँ तो शुष्क मौसम में बिल्कुल सूख जाती हैं और कुछ में जलधारा इतनी पतली और उथली होती है कि उसमें नावें या स्टीमर नहीं चलाये जा सकते।
  2. वर्षा ऋतु में जल की अधिकता, विकराल गति एवं बाढ़ की स्थिति के कारण वर्षा ऋतु में नाव्य नदियों का परिवहन के लिए उपभोग नहीं हो पाता।
  3. सदा नीरा नदियों से सिंचाई के लिए जगह-जगह से नहरें निकाली गई हैं, जिससे नदियों में जलस्तर तो कम हो ही जाता है, मार्ग में द्वार या बन्द बनाने से मार्ग बाधायुक्त हो जाता है। अतः जो नदियाँ पहले नौ संचालन के योग्य थीं, अब उपयोगी नहीं रहीं।।
  4. दक्षिण भारत की नदियाँ पथरीले भागों से बहती हुई प्रपात बनाती हैं। प्रपाती नदियों में गति तो तीव्र होती है, साथ ही प्रपातों के साथ-साथ स्वाभाविक रूप से नावों या स्टीमरों को नहीं चलाया जा सकता।

प्रश्न 3.
बन्दरगाह व पत्तन में क्या अन्तर है ? (2013)
उत्तर:
बन्दरगाह व पत्तन में निम्नलिखित अन्तर हैं –

बन्दरगाह

  1. जलयानों व जहाजों के तट पर आने-जाने, ठहरने,विश्राम करने के स्थान को बन्दरगाह कहते हैं।
  2. बन्दरगाह पर सामान्य सुविधाएँ ही होती हैं। नगर जैसी सुविधाएँ नहीं होती हैं।

पत्तन

  1. समुद्रतट का वह अन्त:स्थल जहाँ जहाज में माल लादने एवं उतारने का कार्य होता है, पत्तन कहलाता है।
  2. पत्तन में नगर जैसी सुविधाएँ; जैसे-यात्रियों को ठहरने तथा माल को सुरक्षित रखने की सुविधाएँ होती हैं।

प्रश्न 4.
सेल्युलर फोन क्या है ?
उत्तर:
सेल्युलर फोन या मोबाइल फोन-यह बेतार का तार जैसा फोन है जिसे सेल्युलर फोन या मोबाइल फोन कहते हैं। इस फोन को हम कहीं भी जेब में रखकर ले जा सकते हैं वहीं से फोन कर सकते हैं एवं बाहर से फोन प्राप्त (रिसीव) कर सकते हैं। 2007 तक देश में इस सेवा का उपयोग करने वालों की संख्या 165.09 मिलियन थी जो वर्तमान में बढ़कर 969.54 मिलियन हो गई है।

प्रश्न 5.
तार व फैक्स में क्या अन्तर है ? (2013)
उत्तर:
तार – अमेरिकी वैज्ञानिक थॉमस एडिसन ने टेलीग्राफ का आविष्कार किया। इससे सन्देश शीघ्र भेजे जाने लगे। इसके लिए खम्भों पर टेलीग्राफ के तार स्थाई रूप से बाँधा जाना जरूरी था। इन तारों द्वारा बिजली के माध्यम से सन्देश एक स्थान से दूसरे स्थान तक कोडेंसी मशीन द्वारा भेजे जाते हैं। सभी देश तार भेजने के लिए मोर्सकोड नामक सांकेतिक भाषा का प्रयोग करते हैं।

फैक्स – फैक्स एक प्रकार से लिखित सन्देश प्राप्त करने या भेजने का साधन है। इसके लिए एक मशीन की आवश्यकता होती है जिसे फैक्स मशीन कहते हैं। इस मशीन को टेलीफोन नम्बर से जोड़ देते हैं एवं सन्देश लगा देते हैं। यह मशीन उस सन्देश को कागज पर छाप देती है। साथ ही भेजने वाले का टेलीफोन नम्बर, पता एवं समय लिख देती है।

प्रश्न 6.
इण्टरनेट से क्या तात्पर्य है ? (2009, 11, 14)
उत्तर:
इण्टरनेट-इण्टरनेट इण्टरनेशनल नेटवर्क का संक्षिप्त नाम है। इण्टरनेट कम्प्यूटरों को जोड़ने की सर्वाधिक सक्षम अन्तर्राष्ट्रीय सूचना प्रणाली है जिसने वर्तमान में करोड़ों उपयोगकर्ताओं को आपस में जोड़ रखा है। इस सेवा से कोई भी व्यक्ति घर बैठे देश-विदेश की प्रत्येक घटना को देख सकता है व सम्पर्क कर सकता है। सामान्यतः इण्टरनेट का उपयोग संवादों से सम्बन्धित आँकड़ों के संग्रह या प्रकाशन कार्य के लिए भी होता है। इण्टरनेट के द्वारा व्यक्ति अपने-अपने संवादों को तुरन्त एक-दूसरे के कम्प्यूटर स्क्रीन पर पढ़ और जान सकता है तथा अतिशीघ्र जवाब दे सकता है। जून 2015 तक प्राप्त सूचना के अनुसार भारत में करीब 302 मिलियन इण्टरनेट ग्राहक थे।

प्रश्न 7.
भारतीय दूरदर्शन सेवा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारतीय दूरदर्शन
भारत में टेलीविजन सेवा का नियमित प्रसारण 1965 से प्रारम्भ हुआ। सन् 1976 में इसे आकाशवाणी से पृथक् कर दूरदर्शन नामक अलग संगठन बनाया गया। अब देश की लगभग 87 प्रतिशत से अधिक जनता, 1,402 स्थल ट्रान्समीटरों के माध्यम से दूरदर्शन के कार्यक्रम देख सकती है। कार्यक्रम तैयार करने वाले केन्द्रों की संख्या 20 है। 1976 में विज्ञापन सेवा प्रारम्भ की गई। 1982 से दूरदर्शन ने रंगीन कार्यक्रमों का प्रसारण प्रारम्भ कर दिया। डी. डी. 1 एवं डी. डी. 2 दिल्ली से प्रारम्भ किये गये। तत्पश्चात् 11 क्षेत्रीय भाषाओं के उपग्रह चैनल शुरू किये। फरवरी 1987 से दूरदर्शन की प्रात:कालीन सेवा प्रारम्भ हुई। 26 जनवरी, 1989 से दोपहर की सेवा प्रारम्भ की गई। इस प्रकार दूरदर्शन की तीनों सभाएँ संचालित करके सभी वर्गों के लिए कार्यक्रम प्रसारित हो रहे हैं। खेल सम्बन्धी गतिविधियों के लिए डी. डी. स्पोर्ट्स चैनल, गुणवत्तायुक्त शिक्षा तक पहुँच बनाने हेतु सन् 2000 में डी. डी. ज्ञान दर्शन शैक्षिक चैनल आरम्भ किया गया। दूरदर्शन के अनेक निजी चैनल भी हैं।

प्रश्न 8.
उपग्रह संचार सेवा से क्या आशय है ? (2010)
उत्तर:
उपग्रह संचार-वैज्ञानिकों ने मानव हितों की पूर्ति के लिए मशीनीकृत उपग्रह तैयार कर रॉकेटों की सहायता से अन्तरिक्ष में स्थापित किया है। ये कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए मौसम, प्राकृतिक संसाधनों, सैनिक गतिविधियों आदि की जानकारी चित्र और मानचित्र के माध्यम से पृथ्वी पर भेजते हैं। आर्यभट्ट, एप्पल, इन्सेट, आई. आर. एस. कृत्रिम उपग्रह इसी दिशा में किये गये प्रयास हैं।

प्रश्न 9.
विदेशी या अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से क्या तात्पर्य है ? (2010, 11)
उत्तर:
विदेशी या अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार-प्रत्येक राष्ट्र अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विदेशों से वस्तुएँ खरीदता है और बदले में अपने देश की वस्तुओं को बेचता है। वस्तुओं के इस पारस्परिक विनिमय को ही व्यापार कहा जाता है। दो या अधिक राष्ट्रों के बीच होने वाले विनिमय को अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं। एक देश दूसरे देशों के साथ जो क्रय-विक्रय करता है वह उसका विदेशी व्यापार कहलाता है। उदाहरण के लिए, बांग्लादेश तथा भारत के बीच होने वाला व्यापार विदेशी व्यापार कहलायेगा।

प्रश्न 10.
सांस्कृतिक भिन्नता व्यापार को किस प्रकार प्रभावित करती है ?
उत्तर:
विश्व के सभी राष्ट्र सांस्कृतिक रूप से समान नहीं हैं। विभिन्न राष्ट्रों में सामाजिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण, रहन-सहन, रीति-रिवाज, रुचियाँ भिन्न-भिन्न हैं। इस सांस्कृतिक भिन्नता के कारण उत्पादन एवं माँग भी भिन्न-भिन्न है। इस भिन्नता का प्रभाव अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है।

प्रश्न 11.
विदेशी व्यापार संरचना से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
विदेशी व्यापार संरचना-विदेशी व्यापार की संरचना से आशय आयात-निर्यात के स्वरूप से होता है। दूसरों शब्दों में, इसका आशय इस बात से होता है कि कोई राष्ट्र किस प्रकार की वस्तुओं का आयात-निर्यात करता है। जब एक राष्ट्र से वस्तुओं को दूसरे राष्ट्र को भेजा जाता है तो उसे निर्यात कहते हैं। इसके विपरीत जब अन्य राष्ट्र से वस्तुओं को मँगाया जाता है तो इसे आयात कहते हैं।

प्रश्न 12.
निर्यात संवर्द्धन एवं आयात प्रतिस्थापन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
निर्यात संवर्द्धन – यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें निर्यात वृद्धि के लिए पुराने निर्यातकर्ताओं को तथा नवीन व्यक्तियों को निर्यात में वृद्धि करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
आयात प्रतिस्थापन – यह ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें विदेशों से आयात की जाने वाली वस्तुओं के स्थान पर उन्हें कोई निकट स्थानापन्न देश में ही उत्पादित किया जाता है।

प्रश्न 13.
भारत की पाँच प्रमुख आयात एवं निर्यात वस्तुओं के नाम बताइए। (2009)
उत्तर:
भारत के आयात-भारत के आयात को प्रमुख रूप से तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है –

  1. पूँजीगत वस्तुएँ-इसमें मशीनें, धातुएँ, अलौह धातुएँ एवं परिवहन के सामान शामिल होते हैं।
  2. कच्चा माल-इसमें खनिज तेल, कपास, जूट तथा रासायनिक वस्तुओं का समावेश होता है।
  3. उपभोक्ता वस्तुएँ-इसमें खाद्यान्न, विद्युत उपकरण, औषधियाँ, वस्त्र, कागज इत्यादि का समावेश होता है।

भारत के निर्यात – भारत से निर्यात की जाने वाली वस्तुओं को चार श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है –

  1. खाद्यान्न समूह (या कृषिजन्य वस्तुएँ)- इसमें अनाज, चाय, तम्बाकू, कॉफी, काजू, मसाले आदि का समावेश होता है।
  2. कच्चा माल-इसमें खाल, चमड़ा, ऊन, रुई, कच्चा लोहा, मैंगनीज, खनिज पदार्थ आदि शामिल किये जाते हैं।
  3. निर्मित वस्तुएँ-इसमें जूट का सामान, कपड़े, चमड़े का सामान, सीमेण्ट, खेल का सामान, जूते आदि शामिल होते हैं।
  4. पूँजीगत सामान-इसमें मशीनें, परिवहन उपकरण, लोहा-इस्पात, इन्जीनियरिंग वस्तुएँ सॉफ्टवेयर एवं सिलाई मशीनें आदि को शामिल किया जाता है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
परिवहन के साधन मानव सभ्यता की प्रगति के पथ प्रदर्शक कैसे हैं ? लिखिए। (2016)
उत्तर:
परिवहन का महत्त्व एवं उपयोगिता

आधुनिक औद्योगिक समाज के लिए परिवहन व संचार के साधन आवश्यक आवश्यकता बन गये हैं। जैसे-जैसे मानव सभ्यता की ओर अग्रसर होता गया, परिवहन का इतिहास मानव सभ्यता का इतिहास बनता गया। अत: परिवहन के साधन मानव सभ्यता की प्रगति के पथ प्रदर्शक बन गये हैं जैसा कि निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट है –

  1. दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति-परिवहन के साधन; जैसे-सड़कें, रेलें, जलमार्ग, वायुमार्ग आदि मण्डी के लिए कृषि उपजें, उद्योगों के लिए कच्चा माल, उपभोक्ताओं के लिए तैयार माल तथा व्यापारियों के लिए दूरस्थ माल आदि को सुलभ कराते हैं। हमारी छोटी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति इन साधनों से ही सम्भव होती है।
  2. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्रदान करना-परिवहन के साधन भारतीय राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्रदान करते हुए सद्भाव एवं भाईचारे को जाग्रत कर देश को एकता के सूत्र में बाँधने का कार्य करते हैं।
  3. वैचारिक व भौगोलिक दूरियों को सीमित करना- भारत के विस्तृत विस्तार, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक बहुलता एवं विविधता, भाषायी, सांस्कृतिक तथा वैचारिक एवं भौगोलिक दूरी से राष्ट्रीय एकता को खण्डित होने का खतरा लगातार बना रहता है। परिवहन के साधन वैचारिक व भौगोलिक दूरियों को सीमित करके राष्ट्रीय एकता को विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  4. राष्ट्रीय प्रगति के सूचक-परिवहन के साधन राष्ट्रीय प्रगति व समृद्धि के सूचक हैं। इनसे ही माल व यात्री ढुलाई नियमित, विश्वसनीय व तीव्रगामी होती है।
  5. विश्वव्यापीकरण को बढ़ावा-परिवहन व संचार के द्रुतगामी व सक्षम साधनों के द्वारा दुनियाँ बहुत छोटी हो गयी है। किसी एक देश के बाजारों में हुए परिवर्तन का प्रभाव अन्य देशों के बाजारों पर अवश्य पड़ता है। दुनिया के लोगों की परस्पर निर्भरता को परिवहन के साधन सुलभ बना देते हैं।
  6. प्राकृतिक आपदाओं के समय मददगार-परिवहन के साधन प्राकृतिक आपदाओं; जैसे-अकाल, बाढ़, महामारी, अतिवृष्टि, अनावृष्टि आदि के समय समाज के मददगार होते हैं।

प्रश्न 2.
भारत के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय राजमार्ग
राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रख-रखाव की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की है। सभी राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रख-रखाव का कार्य परिवहन मन्त्रालय, राज्यों के लोक निर्माण विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और सीमा संगठन के माध्यम से करती हैं। ये पक्की सड़कें राष्ट्र के राज्यों की राजधानियों, बड़े औद्योगिक एवं व्यापारिक नगरों, प्रमुख बन्दरगाहों तथा पड़ोसी राष्ट्रों की सड़कों से मिलती है। “भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लम्बाई 1,03,933 किलोमीटर है जो सड़कों की कुल लम्बाई का मात्र 2 प्रतिशत है लेकिन यातायात का 40 प्रतिशत इन्हीं राष्ट्रीय राजमार्गों से गुजरता है।”

देश में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना’ 1999 तैयार की गयी जिसके अनुसार सन् 2007 तक करीब 14 हजार किमी. लम्बे 4/6 लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का लक्ष्य है। देश के कुछ राष्ट्रीय राजमार्ग अनलिखित हैं –
1 भारत 2018; पृष्ठ 499.

राष्ट्रीय राजमार्ग
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 4 परिवहन, संचार एवं विदेशी व्यापार 2

प्रश्न 3.
“रेलमार्गों का वितरण भारत में असमान है।” स्पष्ट कीजिए। (2017)
उत्तर:
भारत में रेलमार्गों का वितरण
भारत में रेलमार्गों का विकास उन्हीं क्षेत्रों में हुआ है जो आर्थिक दृष्टि से अधिक विकसित हैं। यह वितरण अत्यधिक असमान है।

(1) अधिक सघन रेलमार्ग क्षेत्र – यह क्षेत्र उत्तर भारत में सतलज-गंगा के मैदान में पंजाब से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है। इस रेल क्षेत्र के प्रमुख स्टेशन लुधियाना, दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, आसनसोल, हावड़ा आदि हैं।

(2) मध्य सघन रेलमार्ग क्षेत्र-इस मार्ग में प्रायद्वीपीय मैदान एवं दक्षिण के पठार सम्मिलित हैं। अहमदाबाद, बड़ोदरा, चेन्नई प्रमुख स्टेशन हैं।

(3) कम सघन रेलमार्ग क्षेत्र-देश के पर्वतीय, पठारी, मरुस्थलीय, दलदली, जंगली तथा पिछड़ी अर्थव्यवस्था एवं विरल जनसंख्या वाले भूभाग जहाँ परिवहन की सुविधाएँ नगण्य हैं, रेलमार्गों का विकास नहीं हो पाया है। इनमें कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालैण्ड, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, छत्तीसगढ़ का बस्तर एवं उड़ीसा के अधिकांश भाग सम्मिलित हैं।

भारतवर्ष के पर्वी एवं पश्चिमी तटीय भागों में समद्र तट के कटा-फटा व सँकरे होने तथा पहाड़ियों के किनारे के साथ रेलमार्ग पर्याप्त विकसित नहीं हो सके हैं। पूर्वी तट पर समुद्र तट के कन्याकुमारी से हावड़ा तक रेलमार्ग विकसित है। पश्चिमी तटीय क्षेत्र में कोंकण रेल निगम की स्थापना के साथ 837 किमी. का रेलमार्ग विकसित हुआ है।

जनसंख्या के महानगरों में केन्द्रित होने से घने बसे क्षेत्रों में रेलमार्गों के विकास की सम्भावनाएँ सीमित हैं। महानगरों में भमिगत रेल पथ (मैट्रो रेल) विकसित करने की योजना है। भारत में कोलकाता, मुम्बई एवं दिल्ली में यह कार्य पूरा किया जा चुका है।

प्रश्न 4.
संचार के साधन वर्तमान युग में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण व उपयोगी कैसे हैं ? वर्णन कीजिए। (2009)
उत्तर:
संचार के साधनों का महत्त्व

संचार तन्त्र के अन्तर्गत सूचनाओं का आदान-प्रदान या प्रसारण सम्मिलित है। मानव एक सामाजिक प्राणी है। अतः उसे अपने व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में संचार की अत्यन्त आवश्यकता पड़ती है। प्रारम्भ में मानव स्वयं सूचनाओं व सन्देशों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाता था बाद में घोड़ों या ऊँटों की पीठ पर बैठकर वह दूर तक सन्देशों को ले जाता था। इस कार्य के लिए कबूतरों का भी उपयोग होता था। संचार के साधन आज अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हो गये हैं। इसके महत्वपूर्ण होने के निम्नलिखित आधार हैं

  1. राष्ट्र के विकास कार्यक्रम और नीतियों के बारे में जनता में जागरूकता विकसित करने के लिए एवं राष्ट्रनिर्माण में इन साधनों का महत्वपूर्ण योगदान है।
  2. ये विभिन्न राष्ट्रों को परस्पर सम्पर्क सूत्र द्वारा एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य करते हैं तथा सद्भावना बढ़ाते हैं।
  3. संचार के साधनों द्वारा किसी क्षेत्र में माल की आवश्यकता उसकी पूर्ति, वस्तुओं की कीमत आदि सूचनाएँ दूसरे क्षेत्रों को प्राप्त होती हैं।
  4. प्रशासन को अपना कार्य सुचारु रूप से चलाने के लिए संचार के साधनों की बहुत उपयोगिता है।
  5. संचार के साधनों द्वारा परिवहन व्यवस्था को भी द्रुतगामी एवं सुचारु बनाया गया है। यात्रा करने एवं माल भेजने की व्यवस्था के पहले से ही सूचना भेजी जा सकती है।
  6. युद्ध, दुर्घटना, भूकम्प एवं आपातकाल आदि घटनाओं के समय स्थिति का समाचार देना और शीघ्र राहत सामग्री भेजने में मदद करना।
  7. विश्व के किसी भी कोने में अपने मित्र व परिवार वालों से बातचीत करना।
  8. ये साधन देश के आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा ये प्रगति के प्रेरक बन गये हैं।

प्रश्न 5.
“दूरदर्शन संचार का सबसे उपयुक्त माध्यम है।” स्पष्ट कीजिए। (2009)
उत्तर:

  1. दूरदर्शन में ध्वनि एवं चित्रों का साथ-साथ प्रसारण होता है। यह अधिक लोकप्रिय और प्रभावशाली साधन है।
  2. दूरदर्शन द्वारा विश्व में कहीं भी घटित घटनाओं का सजीव चित्रण प्रस्तुत होता है।
  3. दूरदर्शन से समाचारों के अतिरिक्त मौसम, कृषि, उद्योग, विज्ञान, खेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोरंजन, घर-परिवार, बालक, महिलाओं आदि सम्बन्धी विविध जानकारी का प्रसारण होता है।
  4. ज्ञानवर्द्धन के साधनों के रूप में इसकी बहुत विशिष्ट भूमिका है। विश्व के अनेक राष्ट्रों में दूरदर्शन, शिक्षा पद्धति का अभिन्न अंग है।
  5. दूरदर्शन के माध्यम से छात्रों को विभिन्न देशों के महत्वपूर्ण स्थलों को देखने का अवसर मिलता है तथा विभिन्न कलात्मक तथा ऐतिहासिक भवन घर पर ही देखने को मिल जाते हैं।
  6. दूरदर्शन द्वारा जनता को राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं को समझने में भी सरलता रहती है।
  7. इसके माध्यम से लोगों को राष्ट्र की सामाजिक व सांस्कृतिक घटना तथा धार्मिक सद्भाव देखने के अवसर प्राप्त होते हैं। इससे राष्ट्र में जागरूकता उत्पन्न होती है।

इस प्रकार दूरदर्शन संचार का सबसे उपयुक्त माध्यम है।

प्रश्न 6.
विदेशी व्यापार का आर्थिक विकास में योगदान बताते हुए अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
विदेशी व्यापार का आर्थिक विकास में योगदान बताइए। (2016)
अथवा
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाले कौनसे कारक हैं ? कोई चार लिखिए। (2009, 12, 15)
उत्तर:
विदेशी व्यापार का आर्थिक विकास में योगदान
वर्तमान समय में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का बड़ा महत्त्व है। कोई भी राष्ट्र बिना विदेशी व्यापार को बढ़ाये प्रगति नहीं कर सकता। वस्तुतः अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार आज किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति का मापदण्ड है। विदेशी व्यापार का आर्थिक विकास में योगदान अग्रलिखित बातों से स्पष्ट है –

  1. कृषि व उद्योगों का विकास-अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से कृषि व उद्योगों का विकास सम्भव हो सकता है। एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र से आधुनिक मशीनों व यन्त्रों आदि का आयात करके राष्ट्र में उद्योगों का विकास कर सकता है। कृषि क्षेत्र में भी कृषि के उपकरण, उर्वरक तथा उन्नत बीजों का आयात कर कृषि का विकास किया जा सकता है।
  2. विदेशी मुद्रा की प्राप्ति-अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है जिसका उपयोग राष्ट्र के आर्थिक विकास में किया जा सकता है।
  3. रोजगार के अवसर-इससे उद्योग एवं कृषि में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
  4. उपभोक्ता को लाभ-इससे बाहर में वस्तुओं की विविधता देखने को मिलती है। उपभोक्ता अपने जीवनस्तर को उन्नत कर सकता है।
  5. परिवहन व संचार साधनों का विकास-अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण ही यातायात और संचार के साधनों की प्रगति हुई है। व्यापार से परिवहन व संचार साधनों का घनिष्ठ सम्बन्ध है। आयात-निर्यात हेतु परिवहन व संचार साधनों की आवश्यकता पड़ती है।
  6. श्रम विभाजन-इससे श्रम विभाजन को बढ़ावा मिलता है, जो आर्थिक विकास का परिचायक है।

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाले कारक

व्यापार पर अनेक प्राकृतिक, आर्थिक, राजनैतिक एवं सामाजिक परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता है। इसे प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं –

  1. स्थिति-जो राष्ट्र विश्व के व्यापारिक मार्गों पर स्थित होते हैं, उनकी व्यापारिक प्रगति शीघ्र होती है।
  2. प्राकृतिक संसाधन-किसी राष्ट्र का व्यापार वहाँ के प्राकृतिक संसाधनों की भिन्नता से प्रभावित होता है। प्राकृतिक संसाधनों में देश की जलवायु, वन, कृषि योग्य भूमि, कृषि उपजें, खनिज आदि सम्मिलित किये जाते हैं। इन्हीं साधनों पर उत्पादन निर्भर करता है।
  3. समुद्र तट-जिन राष्ट्रों का समुद्र तट बहुत कटा-फटा होता है वहाँ उन्नत बन्दरगाह विकसित होते हैं, लोग साहसी और अच्छे नाविक होते हैं।
  4. आर्थिक विकास-सभी राष्ट्रों के आर्थिक विकास की स्थिति एकसमान नहीं होती। जो राष्ट्र आर्थिक प्रगति में आगे हैं उनका व्यापार अधिक विकसित होगा।
  5. जनसंख्या की भिन्नता-जनसंख्या का असमान वितरण व्यापार को प्रभावित करता है। अधिक जनसंख्या वाले राष्ट्रों में माँग अधिक रहती है।
  6. शान्ति-अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का विकास शान्ति के समय ही हो सकता है। युद्ध एवं अशान्ति से व्यापार में हानि होती है।

प्रश्न 7.
भारत में निर्यात संवर्द्धन के लिए किए गए प्रयासों का वर्णन कीजिए। (2017)
उत्तर:
निर्यात संवर्द्धन वह प्रक्रिया है जिसमें निर्यात वृद्धि के लिए पुराने निर्यातकर्ताओं को तथा नवीन व्यक्तियों को निर्यात में वृद्धि करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

निर्यात संवर्द्धन के प्रयास

निर्यात संवर्द्धन हेतु निम्नलिखित उपाय किये गये हैं –

  1. विभिन्न संगठनों की स्थापना-भारत सरकार ने निर्यात के लिए बाजार खोजने, घरेलू माल का विदेशों में प्रचार करने तथा निर्यातकों को सुविधा देने के लिए विदेशी व्यापार संस्थान, आयात-निर्यात सलाहकार परिषद, राजकीय व्यापार निगम, निर्यात संवर्द्धन परिषद्, सूती वस्त्र निगम, जूट निगम, निर्यात-आयात बैंक की स्थापना की है।
  2. व्यापार विकास संस्था-निर्यात संवर्द्धन के क्षेत्र में कार्यरत् विभिन्न संस्थाओं में समन्वय स्थापित कर आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराने हेतु व्यापार विकास संस्था की स्थापना की गयी।
  3. राजकीय व्यापार निगम की स्थापना-1956 में स्थापित इस निगम को स्थापित करने का उद्देश्य था-निर्यात का विविधीकरण करना, विद्यमान बाजारों का विस्तार करना, निर्यातों को प्रोत्साहन देना तथा आयातित वस्तुओं के वितरण की व्यवस्था करना।
  4. निर्यात गृहों की स्थापना-मान्यता प्राप्त संस्थाओं को निर्यात संवर्द्धन के लिए विपणन विकास विधि से आर्थिक सहायता प्रदान कराने हेतु इसकी स्थापना की गई। भारत में सात निर्यात संसाधन क्षेत्र हैं-काण्डला (गुजरात), सान्ताक्रुज (महाराष्ट्र), कोच्चि (केरल), चेन्नई (तमिलनाडु), नोएडा (उत्तर प्रदेश), फाल्टा (पश्चिम बंगाल), विशाखापट्टनम (आन्ध्र प्रदेश)। यहाँ कस्टम क्लीयरेंस की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।
  5. भारतीय निर्यात-आयात बैंक की स्थापना-1 जनवरी, 1982 को सरकार ने इस बैंक की स्थापना की, जिसके संचालक मण्डल में ‘रिजर्व बैंक’, ‘औद्योगिक विकास बैंक’ एवं ‘निर्यात साख व गारण्टी निगम’ के प्रतिनिधि हैं। इस बैंक का कार्य मुख्यतः निर्यात व्यापार को बढ़ावा देना है।
  6. ग्रीन कार्ड-सरकार ने निर्यात तेजी से बढ़ाने के उद्देश्य से शत-प्रतिशत निर्यात करने वाली संस्थाओं को ‘ग्रीन कार्ड’ जारी किया है, जो उत्पादन से विपणन तक सभी मामलों में ‘ग्रीन कार्ड धारक संस्था’ को उच्च प्राथमिकता प्रदान करता है।
  7. उदार लाइसेंस प्रणाली-सरकार ने 1992 में नई आयात-निर्यात नीति की घोषणा करके लाइसेंस प्रणाली को काफी उदार बना दिया और देश का निर्यात बढ़ाने के लिए मुक्त व्यापार को बढ़ावा दिया है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना’ को किस वर्ष में तैयार किया गया ?
(i) 1991
(ii) 1994
(iii) 1996
(iv) 1999.
उत्तर:
(iv) 1999.

प्रश्न 2.
भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है
(i) ब्रिटेन
(ii) जापान
(iii) संयुक्त राज्य अमेरिका
(iv) रूस।
उत्तर:
(iii) संयुक्त राज्य अमेरिका

प्रश्न 3.
भारत की प्रमुखतम् आयात वस्तु है
(i) खनिज तेल
(ii) मशीनरी
(iii) कम्प्यू टर
(iv) रसायन।
उत्तर:
(i) खनिज तेल

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. दूरदर्शन ने रंगीन कार्यक्रमों का प्रसारण वर्ष …………… में प्रारम्भ किया।
  2. अमृतसर-अम्बाला-जालंधर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग की लम्बाई …………… किमी. है।

उत्तर:

  1. 1982
  2. 456

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
भारत में रेलवे प्रणाली का प्रारम्भ 1837 में हुआ।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 2.
भारतीय रेलमार्गों की लम्बाई एशिया में सबसे अधिक है। (2012)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
विशाखापट्टनम कर्नाटक के समुद्र तट पर स्थित है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
बन्दरगाह जल व थल के मिलन स्थल होते हैं।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
भारत में टेलीविजन सेवा का नियमित प्रसारण 1965 से प्रारम्भ हुआ।
उत्तर:
सत्य।

जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 4 परिवहन, संचार एवं विदेशी व्यापार 3
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (क)
  3. → (घ)
  4. → (ग)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
भारत में रेलमार्गों का विकास किस वर्ष में हुआ ? (2009)
उत्तर:
1853

प्रश्न 2.
पवनहंस की स्थापना कब की गई ?
उत्तर:
15 अक्टूबर, 1985

प्रश्न 3.
सभी देश तार भेजने के लिए कौन-सी सांकेतिक भाषा का प्रयोग करते हैं ?
उत्तर:
मोर्स कोड

प्रश्न 4.
किसी राष्ट्र द्वारा निर्यात से प्राप्त माल को किसी अन्य राष्ट्र के लिए निर्यात को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
पुनः निर्यात

प्रश्न 5.
जब कोई राष्ट्र अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ विदेशों से मँगाता है, तो उसे क्या कहते हैं ?
उत्तर:
आयात।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भीतरी व्यापार क्या है ?
उत्तर:
एक ही तटीय खण्ड में उपस्थित पत्तनों के मध्य परस्पर व्यापार को भीतरी व्यापार कहा जाता है।

प्रश्न 2.
ई-बिल पोस्ट क्या है ?
उत्तर:
जहाँ विभिन्न सेवाओं के भुगतान की सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध होती है, ई-बिल पोस्ट कहलाती है।

प्रश्न 3.
ट्रेम्प किसे कहते हैं ?
उत्तर:
माल वाहक जहाज को ट्रेम्प कहते हैं।

प्रश्न 4.
आयात-निर्यात से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
आयात – जब कोई राष्ट्र अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ विदेशों से मँगाता है, तो उसे आयात कहते हैं।
निर्यात – जब कोई राष्ट्र अपनी आवश्यकता से अधिक की वस्तुओं को अपने देश से बाहर भेजता है, तो उसे निर्यात कहते हैं।

MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पुनः निर्यात व्यापार से क्या आशय है ?
उत्तर:
पुनः निर्यात-विदेशों से वस्तुओं का आयात करके उन्हें पड़ोसी राष्ट्रों को निर्यात करना पुनः निर्यात व्यापार कहलाता है। दसरे शब्दों में, किसी राष्ट द्वारा निर्यात से प्राप्त माल को किसी अन्य रा निर्यात करने को पुनः निर्यात कहा जाता है। उदाहरण के लिए-ब्रिटेन भारत से चाय का आयात करता है तथा विश्व के अन्य राष्ट्रों को निर्यात करता है, यह पुनः निर्यात कहा जायेगा।

प्रश्न 2.
पाइप लाइन परिवहन के महत्त्व बताइए।
उत्तर:
पाइप लाइन परिवहन का महत्व
जिस प्रकार मोटर, रेल, जल, जहाज एवं हवाई जहाज से तरल, ठोस, शुष्क माल का परिवहन होता है उसी प्रकार तरल और गैसीय पदार्थों का परिवहन पाइप लाइनों द्वारा किया जाता है। कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद एवं गैसीय पदार्थों का परिवहन करने के लिए पाइप लाइनों का जाल बिछाया गया है। इसके प्रमुख महत्त्व निम्नलिखित हैं-

  1. पाइप लाइन परिवहन को कठिन एवं ऊबड़-खाबड़ भू-भागों, दुर्गम स्थानों, मरुस्थलों, पर्वतों में एवं पानी के भीतर बिछाया जा सकता है।
  2. इसके संचालन और रख-रखाव की लागत बहुत कम होती है। केवल पाइप लाइन डालने में ही पहले खर्चा हो जाता है।
  3. इसमें माल की पूर्ति निरन्तर होती रहती है तथा दूर-दूर के स्थानों पर खनिज तेल व गैस पहुँचाई जाती है।
  4. पाइप लाइन परिवहन के विकास से गैस आधारित ताप विद्युत संयन्त्रों की स्थापना दूर-दराज़ के क्षेत्रों में भी सम्भव हो सकी है।

प्रश्न 3.
भारत के पश्चिमी तट पर स्थित प्रमुख पत्तनों के नाम बताइए। वहाँ से परिवहन की जाने वाली वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
पश्चिमी भारत के प्रमुख पत्तन निम्नलिखित हैं –
काण्डला – यह गुजरात में स्थित है। यहाँ से कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक, नमक, कपास, सीमेण्ट, चीनी, खाद्य तेल का परिवहन होता है।
मुम्बई – यह एक प्राकृतिक पोताश्रय है तथा भारत का सबसे बड़ा पत्तन है। यहाँ से पेट्रोलियम उत्पाद तथा शुष्क माल का परिवहन होता है।
न्हावाशेवा – नई मुम्बई के पश्चिमी तट पर यह बन्दरगाह विकसित किया गया है। यह भारत का आधुनिकतम बन्दरगाह है जिसका नाम जवाहरलाल नेहरू बन्दरगाह रखा गया है। यह मुम्बई बन्दरगाह के दबाव को कम करने के लिए विकसित किया गया है।
मार्मुगाओ – यह गोवा में स्थित प्रमुख पत्तन है। यहाँ से मुख्यतः लौह-अयस्क निर्यात होता है।
न्यूमंगलौर – यह कर्नाटक राज्य में है। इस पत्तन से उर्वरक, पेट्रोलियम पदार्थ, खाद्य तेल, ग्रेनाइट पत्थर, शीरा तथा सामान्य माल का परिवहन होता है।
कोच्चि – यह पत्तन केरल में स्थित है। इस पत्तन से पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक तथा अन्य कच्चे माल का व्यापार होता है।

प्रश्न 4.
परिवहन के साधन तथा संचार के साधनों में क्या अन्तर है ?
अथवा
यातायात और संचार में कोई दो अन्तर लिखिए।
उत्तर:
परिवहन के साधन तथा संचार के साधनों में अन्तर

परिवहन के साधन

  1. एक स्थान से दूसरे स्थान को माल का लाना व ले जाना तथा सवारियों का आना-जाना परिवहन के साधनों द्वारा होता है।
  2. परिवहन के साधन स्थल मार्ग, जल मार्ग तथा वायु मार्ग हैं। इनमें कार, बस, रेल, जलयान,वायुयान आदि वाहनों का प्रयोग किया जाता है।

संचार के साधन

  1. सन्देश एवं सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान को पहुँचाना संचार कहलाता है।
  2. संचार के साधनों में डाक, तार, टेलीफोन, बे-तार का तार, मोबाइल, रेडियो, दूरदर्शन आदि का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 5.
भारत के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की कोई चार विशेषताएँ लिखिए। (2009)
अथवा
भारत के विदेशी व्यापार की विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर:
भारत के विदेशी व्यापार की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. भारत के विदेशी व्यापार का लगभग 90% समुद्री मार्ग द्वारा और शेष 10% में वायु परिवहन एवं सड़क परिवहन का योगदान रहता है।
  2. भारत का 50% विदेशी व्यापार ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा जापान के साथ होता है।
  3. भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार केवल छः पत्तनों से होता है-कोलकाता, विशाखापट्टनम्, कोच्चि, मुम्बई, काँदला व चेन्नई।
  4. भारत अधिकतर उन वस्तुओं का आयात करता है जो देश के औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक हैं।
  5. भारत में खनिज तेल की माँग निरन्तर बढ़ रही है, अतः आयातित खनिज तेल की मात्रा निरन्तर बढ़ती जा रही है। भारत के सम्पूर्ण आयात का लगभग एक-चौथाई भाग खनिज तेल का होता है।

प्रश्न 6.
उन देशों के नाम लिखिए जिनसे भारत का विदेशी व्यापार होता है।
उत्तर:
भारत के 11 प्रमुख व्यापारिक भागीदार देश निम्नलिखित हैं, जिनसे भारत का 48 प्रतिशत व्यापार होता है-संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, बेल्जियम, जर्मनी, जापान, स्विट्जरलैण्ड, हांगकांग, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, सिंगापुर एवं मलेशिया। संयुक्त राज्य अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है। वर्ष 2005-06 में चीन दूसरे व्यापारिक भागीदार के रूप में उभरा है। चीन के साथ व्यापार में प्रभावशाली वृद्धि अयस्क, धातुएँ एवं इस्पात, जैव-रसायन के निर्यात एवं मशीनरी, रसायन के आयात से हुई है। संयुक्त अरब अमीरात व सिंगापुर अगले प्रमुख भागीदार राष्ट्र हैं।

प्रश्न 7.
आयात प्रतिस्थापन का देश के आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
भारतीय अर्थव्यवस्था विकासशील है। भारत में आयात की जाने वाली वस्तुओं का देशी विकल्प ढूँढ़कर विदेशों पर निर्भरता कम करने के प्रयास किये गये हैं जिससे आयात बिल कम होता है, आयात बिल की कमी से विदेशी मुद्रा की बचत होती है, औद्योगीकरण को बल मिलता है, रोजगार के अवसरों का सृजन होता है एवं बेरोजगारी का दबाव घटता है। इस प्रक्रिया से देश का आर्थिक विकास आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ता है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
“परिवहन तथा संचार के साधन किसी राष्ट्र की जीवन रेखाएँ हैं।” इस कथन की पुष्टि कीजिए। (2009)
उत्तर:
किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति में परिवहन व संचार साधनों का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। परिवहन में रेल परिवहन, सड़क परिवहन, जहाजरानी, जलयान एवं वायुयान आते हैं। संचार के अन्तर्गत डाक सेवाएँ तथा दूरसंचार, तार, टेलीफोन, दूरदर्शन आते हैं।

परिवहन व संचार साधनों के निम्नलिखित महत्त्व हैं –

  1. परिवहन व संचार के साधन उत्पादन के सभी साधनों को गतिशीलता प्रदान करते हैं। इससे न केवल देश में उपलब्ध साधनों का उचित प्रयोग सम्भव हो जाता है बल्कि देश में व्याप्त क्षेत्र विषमताएँ भी कम हो जाती हैं।
  2. परिवहन और संचार के साधन उद्योगों द्वारा निर्मित वस्तुओं को देश के कोने-कोने में पहुँचाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
  3. विकसित तथा सस्ते परिवहन और संचार के साधन उपलब्ध होने पर उत्पादक को अपने पास वस्तुओं के अनावश्यक स्टॉक रखने की आवश्यकता नहीं होती, अपितु वस्तुओं को जल्दी बेचकर उत्पादक अपनी पूँजी का पुनः निवेश कर वस्तुओं का उत्पादन कर सकता है।
  4. इन साधनों द्वारा आर्थिक विकास में योगदान देने वाले सभी साधनों को अधिक से अधिक मात्रा में जुटाया जा सकता है।
  5. इन सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि परिवहन व संचार के साधन परस्पर सम्पर्क स्थापित करने में सहायक होते हैं।

प्रश्न 2.
संचार से क्या आशय है ? इसके साधनों को संक्षेप में समझाइए। (2018)
[संकेत : संचार से आशय अति लघु उत्तरीय प्रश्न 4 देखें।]
अथवा
किन्हीं चार संचार साधनों के बारे में लिखिए। (2012, 15)
उत्तर:
सेल्युलर फोन या मोबाइल फोन-यह बेतार का तार जैसा फोन है जिसे सेल्युलर फोन या मोबाइल फोन कहते हैं। इस फोन को हम कहीं भी जेब में रखकर ले जा सकते हैं वहीं से फोन कर सकते हैं एवं बाहर से फोन प्राप्त (रिसीव) कर सकते हैं। 2007 तक देश में इस सेवा का उपयोग करने वालों की संख्या 165.09 मिलियन थी जो वर्तमान में बढ़कर 969.54 मिलियन हो गई है।

तार – अमेरिकी वैज्ञानिक थॉमस एडिसन ने टेलीग्राफ का आविष्कार किया। इससे सन्देश शीघ्र भेजे जाने लगे। इसके लिए खम्भों पर टेलीग्राफ के तार स्थाई रूप से बाँधा जाना जरूरी था। इन तारों द्वारा बिजली के माध्यम से सन्देश एक स्थान से दूसरे स्थान तक कोडेंसी मशीन द्वारा भेजे जाते हैं। सभी देश तार भेजने के लिए मोर्सकोड नामक सांकेतिक भाषा का प्रयोग करते हैं।

फैक्स – फैक्स एक प्रकार से लिखित सन्देश प्राप्त करने या भेजने का साधन है। इसके लिए एक मशीन की आवश्यकता होती है जिसे फैक्स मशीन कहते हैं। इस मशीन को टेलीफोन नम्बर से जोड़ देते हैं एवं सन्देश लगा देते हैं। यह मशीन उस सन्देश को कागज पर छाप देती है। साथ ही भेजने वाले का टेलीफोन नम्बर, पता एवं समय लिख देती है।

इण्टरनेट-इण्टरनेट इण्टरनेशनल नेटवर्क का संक्षिप्त नाम है। इण्टरनेट कम्प्यूटरों को जोड़ने की सर्वाधिक सक्षम अन्तर्राष्ट्रीय सूचना प्रणाली है जिसने वर्तमान में करोड़ों उपयोगकर्ताओं को आपस में जोड़ रखा है। इस सेवा से कोई भी व्यक्ति घर बैठे देश-विदेश की प्रत्येक घटना को देख सकता है व सम्पर्क कर सकता है। सामान्यतः इण्टरनेट का उपयोग संवादों से सम्बन्धित आँकड़ों के संग्रह या प्रकाशन कार्य के लिए भी होता है। इण्टरनेट के द्वारा व्यक्ति अपने-अपने संवादों को तुरन्त एक-दूसरे के कम्प्यूटर स्क्रीन पर पढ़ और जान सकता है तथा अतिशीघ्र जवाब दे सकता है। जून 2015 तक प्राप्त सूचना के अनुसार भारत में करीब 302 मिलियन इण्टरनेट ग्राहक थे।

उपग्रह संचार-वैज्ञानिकों ने मानव हितों की पूर्ति के लिए मशीनीकृत उपग्रह तैयार कर रॉकेटों की सहायता से अन्तरिक्ष में स्थापित किया है। ये कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए मौसम, प्राकृतिक संसाधनों, सैनिक गतिविधियों आदि की जानकारी चित्र और मानचित्र के माध्यम से पृथ्वी पर भेजते हैं। आर्यभट्ट, एप्पल, इन्सेट, आई. आर. एस. कृत्रिम उपग्रह इसी दिशा में किये गये प्रयास हैं।

प्रश्न 3.
परिवहन से क्या आशय है ? इसके साधनों को संक्षेप में समझाइए। (2018)
उत्तर:
व्यक्तियों या जीव-जन्तुओं को किसी माध्यम द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाने ले जाने की प्रक्रिया परिवहन कहलाती है।
संचार तन्त्र के अन्तर्गत सूचनाओं का आदान-प्रदान या प्रसारण सम्मिलित है।

प्रश्न 4.
भारत में रेल परिवहन के महत्त्व को स्पष्ट करते हुए प्रमुख भारतीय रेलवे जोन व उनके मुख्यालयों के नाम लिखिए।
उत्तर:
रेल परिवहन का महत्त्व

देश में माल ढोने और यात्री परिवहन का मख्य साधन रेलें हैं। देश के कोने-कोने तक के लोगों को आपस में जोड़ने के अलावा इसने कारोबार, देशाटन, तीर्थयात्रा और शिक्षा को सुलभ बनाया है। रेले राष्ट्रीय एकता स्थापित करने की प्रमुख कड़ी साबित हुई हैं। इसने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को एक सूत्र में पिरोया है और साथ ही कृषि तथा औद्योगिक विकास को तीव्र गति प्रदान की है।

भारत में रेलमार्गों का विकास सन् 1853 में आरम्भ हुआ। उस समय मुम्बई से थाणे तक देश में 34 किमी. लम्बी रेल लाइन विकसित की गई थी। आज देश में रेलों का व्यापक जाल बिछा हुआ है। भारतीय रेल नेटवर्क को 17 जोन्स (क्षेत्रों) में बाँटा गया है। इन 17 जोन्स और उनके मुख्यालयों का ब्यौरा नीचे दिया गया है –
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 4 परिवहन, संचार एवं विदेशी व्यापार 4

MP Board Class 12th Special Hindi Sahayak Vachan Solutions Chapter 1 उत्तराखंड की यात्रा

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MP Board Class 12th Special Hindi सहायक वाचन Solutions Chapter 1 उत्तराखंड की यात्रा (यात्रा, सेठ गोविन्द दास)

उत्तराखंड की यात्रा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
उत्तराखंड के अन्तर्गत कौन-कौन से तीर्थ हैं? उत्तराखंड की यात्रा में शारीरिक कष्ट के विपरीत किस प्रकार का आनंद मिलता है और क्यों?
उत्तर:
उत्तराखंड के अन्तर्गत हिन्दुओं के पवित्र चार धाम तीर्थ-यमुनोत्तरी, गंगोत्तरी, केदारनाथ एवं बद्रीनाथ हैं। उत्तराखंड की यात्रा अत्यन्त दुर्गम एवं शारीरिक कष्ट प्रदान करने वाली है, किन्तु इसके विपरीत उत्तराखंड के प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण दश्य एवं धार्मिक महानता एक विशिष्ट प्रकार का मानसिक आनन्द प्रदान करती है, जिससे मार्ग अथवा यात्रा के कष्टों की तीव्रता क्षीण-सी हो जाती है।

प्रश्न 2.
उत्तराखंड के चारों धाम किन चार पवित्र नदियों के किनारे स्थित हैं? (2009, 13, 15, 17)
उत्तर:
उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध चार धाम पवित्र नदियों के तट पर स्थित हैं। यमुनोत्तरी का मार्ग यमुना नदी के किनारे-किनारे,गंगोत्तरी का मार्ग गंगा नदी के किनारे-किनारे, केदारनाथ का मार्ग मन्दाकिनी के किनारे-किनारे तथा बद्रीनाथ का मार्ग अलकनन्दा नामक पवित्र नदी के किनारे-किनारे गया है।

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प्रश्न 3.
उत्तराखंड के प्राकृतिक दृश्य श्रद्धालुओं को क्यों आकर्षित करते हैं?
उत्तर:
उत्तराखंड के प्राकृतिक दृश्यों के सौन्दर्य के सामने न तो काश्मीर के दृश्य ठहरते हैं और न ही स्विट्जरलैण्ड के। स्वच्छ जल समेटे कल-कल करती पवित्र नदियाँ, वर्ष भर बर्फ से आच्छादित रहने वाली पर्वत-चोटियाँ, हरे-भरे वृक्षों से भरे घने जंगल, चारों ओर फैली हरियाली, घाटी की मनोहारी वादियाँ, चीड़ और देवदारु के ऊँचे-ऊँचे वृक्ष, गगनचुम्बी ऊँचाई से गिरते जल-प्रपात और शान्त-मनोरम वातावरण, सब कुछ ऐसा लगता है मानो किसी दूसरे लोक में आ गये हों। यही कारण है कि इस प्रदेश की यात्रा के कष्टकारक होने के बाद भी श्रद्धालु उत्तराखंड के प्राकृतिक दृश्यों के प्रति अत्यधिक आकर्षित हो, अपूर्व मानसिक आनन्द प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 4.
ज्योतिर्मठ के विषय में संक्षिप्त जानकारी लिखिए।
उत्तर:
आज भी उत्तराखंड में शंकराचार्य जी के कार्यों एवं उनके निवास स्थान के प्रत्यक्ष दर्शन किये जा सकते हैं । ज्योतिर्मठ में आज भी वह शहतूत का वृक्ष है, जिसके नीचे बैठकर तपोभूत शंकराचार्य जी को ज्योति के दर्शन हुए। इस स्थान के निकट ही उनकी वह शंकर गुफा भी देखी जा सकती है, जिसमें वे निवास किया करते थे। इसी वृक्ष के नीचे भगवान शंकराचार्य ने तत्त्वज्ञान के महान् ग्रन्थ ‘शांकर भाष्य’ की रचना की थी। ज्योतिर्मठ का सेब, नाशपाती, अखरोट आदि फलों से लदे पौधों का बगीचा, संस्कृत का विद्यालय, आज भी जगत् गुरु शंकराचार्य जी के पवित्र प्रयलों और संकल्पों को दुहरा रहा है, जिसके दर्शन मात्र से संसार ने महान् प्रेरणा पाई थी।

प्रश्न 5.
“हमारे ऋषि-मुनियों ने तपोवनों में भारत की एकता पर चिंतन किया है।” समझाइए।
उत्तर:
हमारे ऋषि-मुनियों ने गाँव-शहर के कोलाहल और आकर्षण से दूर तपोवनों में एकान्त साधना द्वारा सदैव भारत की जो एकता तथा हित की चिन्ता की है, वह उनके कार्यों द्वारा सिद्ध हो जाती है। उपर्युक्त कथन की पुष्टि के लिए मात्र यह उदाहरण पर्याप्त होगा। भारत के उत्तर में स्थित चार धाम में से दो देव मन्दिरों-केदारनाथ और बद्रीनाथ के पुजारी,जिन्हें ‘रावल’ कहा जाता है, उत्तर के न होकर केदारनाथ के कर्नाटक से और बद्रीनाथ के केरल से आते हैं। आज तक उनके द्वारा निर्धारित की गई पूजा-पद्धति और नियम का पूर्णतया पालन हो रहा है। भारत को एकता के सूत्र में बाँध कर रखने की भावना का इससे अच्छा भला क्या उदाहरण होगा?

प्रश्न 6.
लेखक ने उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों के बारे में क्या लिखा है? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लेखक के अनुसार उत्तराखंड में शक्ति और ऊर्जा के अपार स्रोतों के साथ-साथ विशाल प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। जीवन के मूल आधार ‘जल’ की इतनी प्रचुरता एवं शुद्धता में उपस्थिति. इस प्रदेश को दनिया के अन्य किसी भी स्थान से अलग करती है। इस प्रमुख प्राकृतिक संसाधन का उपयोग कृषि कार्यों,बिजली उत्पादन इत्यादि में और प्रभावी और विशाल स्तर पर किया जा सकता है। उत्तराखंड के विशाल भू-भाग में फैले घने जंगल, अपने आप में बहुउपयोगी वृक्षों को समेटे हुए हैं।

विविध प्रकार के इन वृक्षों से प्राप्त होने वाली विभिन्न वस्तुओं का उपयोग भी जन-हित एवं देश-हित में किया जा सकता है। विशाल पर्वतों के अन्दर मौजूद खनिज पदार्थों के अक्षय भण्डारों को खोजने एवं उन्हें बाहर निकालने की दिशा में प्रयास होने चाहिए, जिससे उनका व्यावसायिक रूप से उपयोग कर इस प्रदेश के विकास में योगदान दिया जा सके। पशु-पालन एवं वन आधारित कुटीर उद्योगों से सम्बन्धित परियोजनाओं को बनाने एवं उन्हें सफलतापूर्वक लागू करवाने की दिशा में प्रयास होने चाहिए। अन्ततः, यह कहा जा सकता है कि प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से उत्तराखंड एक सम्पन्न प्रदेश है।

प्रश्न 7.
इस यात्रा-वृत्तांत को पढ़कर आपके मन में कौन-कौन-सी प्रेरणाएँ जागती हैं? लिखिए।
उत्तर:
उत्तराखंड से सम्बन्धित इस यात्रा-वर्णन को पढ़कर सर्वप्रथम उत्तराखंड के शीघ्र-से-शीघ्र भ्रमण की भावना जाग्रत होती है। इस यात्रा वृत्तांत में वर्णित स्थानों,वस्तुओं इत्यादि को जीवंत देखना एवं उनकी उपस्थिति को अनुभव करना,इन सबके सोचने मात्र से ही रोमांच का अनुभव होता है। उत्तराखंड की देवभूमि, जहाँ हमें प्रकृति से तालमेल बनाकर, प्रकृति-प्रदत्त संसाधनों का जन-हित में उपयोग करने की प्रेरणा देती है, वहीं यह हमारी महान् धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत पर अभिमान करने,किन्तु उसके संरक्षण के लिए भी प्रेरित करती है। यह हमें हमारे उस सुन्दर अतीत में झाँकने का अवसर प्रदान करती है,जब हमारे महान् संत-महात्माओं, तपस्वियों एवं विभूतियों ने निःस्वार्थ सेवा-भाव से अनूठे कार्य सम्पादित किये थे।

उत्तराखंड की यात्रा अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
केदारनाथ की हिमानी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
केदारनाथ स्थित हिमानी की शोभा अवर्णनीय है। इस हिमानी की ऊँचाई लगभग तेइस हजार फुट है। इस प्रकार की इतनी विशाल, भव्य और ऊँची हिमानी संभवतया विश्व में कहीं और नहीं है।

प्रश्न 2.
लेखक सेठ गोविन्दास के अनुसार धर्म के विकास का एक बहुत बड़ा साधन क्या है?
उत्तर:
लेखक सेठ गोविन्द दास के अनुसार सगुणोपासना और मन्दिरों की मूर्तियाँ धर्म के विकास का एक बहुत बड़ा साधन हैं।

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उत्तराखंड की यात्रा पाठ का सारांश

‘सेठ गोविन्द दास’ द्वारा लिखित प्रस्तुत यात्रा वर्णन ‘उत्तराखंड की यात्रा’ में उत्तराखंड की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का मनोहारी चित्र अंकित किया गया है।

लेखक के अनुसार, भारत के उत्तर भाग में स्थित उत्तराखंड राज्य को सदियों से ‘देवभूमि’ का स्थान प्राप्त है। हिन्दुओं के सुप्रसिद्ध एवं पवित्र चार धाम तीर्थ-यमुनोत्तरी, गंगोत्तरी, केदारनाथ एवं बद्रीनाथ यहीं पर स्थित हैं। यद्यपि इन तीर्थों तक की यात्रा अत्यन्त दुर्गम एवं कष्टकारी है, किन्तु यहाँ का प्राकृतिक सौन्दर्य एवं धार्मिक महानता सहज ही यात्री को मानसिक आनन्द से भर देती है।

उत्तराखण्ड के चारों धाम,चार पवित्र नदियों-यमुना, गंगा,मन्दाकिनी एवं अलकनन्दा के तट पर स्थित हैं। वर्ष-भर बर्फ से ढंकी ऊँची-ऊँची पर्वत चोटियाँ, चीड़, देवदारु इत्यादि वृक्षों से भरे घने जंगल, ऊँचे-ऊँचे पर्वत-शिखरों से गिरते असंख्य झरने, इस प्रदेश की शोभा को स्वर्ग-सरीखा बनाते हैं।

केदारनाथ एवं बद्रीनाथ के मन्दिरों में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होने वाले धार्मिक अनुष्ठान और विधि-विधान से पूर्ण पूजा-अर्चना, एक विशिष्ट एवं आकर्षक सांस्कृतिक एवं धार्मिक वायुमण्डल का निर्माण करते हैं। महर्षि वेदव्यास और शंकराचार्य आदि की कर्मस्थली रहा यह भू-भाग, आज भी समस्त संसार को प्रेरित-सा करता प्रतीत होता है।

प्राकृतिक सौन्दर्य से भरा-पूरा यह प्रदेश आध्यात्मिक प्रेरक के साथ-साथ औद्योगिक एवं विकास की दृष्टि से भी स्वयं में अपार सम्भावनाएँ समेटे हुए हैं। आवश्यकता मात्र इस बात की है कि इस प्रदेश के भौगोलिक एवं प्राकृतिक स्रोतों का सुनियोजित तरीके से प्रभावी उपयोग प्रदेश-हित एवं देश-हित में किया जाये।

MP Board Class 12th Hindi Solutions

MP Board Class 8th General English Grammar

In this article, we will share MP Board Class 8th English Solutions Grammar Pdf, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 8th General English Grammar

1. Articles
(उपपद):

A,An, The को Articles कहते हैं। Articles दो प्रकार के होते हैं –

(1) Indefinite Articles – ‘A’ and ‘An’ दोनों Indefinite Articles कहलाते हैं क्योंकि ये किसी विशेष व्यक्ति या वस्तु को सूचित नहीं करते।
जैसे – I saw a dog and an ox yesterday.
Note: An’ का प्रयोग उन जातिवाचक संज्ञा के पूर्व किया जाता है जो Vowel (a, e, i, o, u) से आरम्भ होते हैं। जैसे An ox, An eye, an orange.
Note : ‘A’ का प्रयोग consonant से आरम्भ होने वाले एकवचन की जातिवाचक संज्ञा के पूर्व होता है। जैसे a book, a cow, a lion

(2) Definite Articles – ‘The’ definite article है क्योंकि ये किसी विशेष व्यक्ति या वस्तु को सूचित करता है। किसी खास वस्तु, नदी, पहाड़, प्रसिद्ध ग्रन्थ, अखबार आदि के नाम से पहले ‘The’ का प्रयोग करते हैं।
जैसे –

  1. The sun shines brightly.
  2. The Ganga is a holy river.
  3. I saw the Taj Mahal.
  4. My mother met the Principal.

Note: (i) जब ० का उच्चारण wa की तरह और u का उच्चारण yoo की तरह हो तब हम a का प्रयोग करते हैं, an का नहीं जैसे a one rupee note, a useful thing, a university
Note: (ii) जब h बोला नहीं जाता, तब हम an का प्रयोग करते हैं, a का नहीं जैसे – an honest man, in an hour.

Exercise

Fill in the blanks with the correct articles

1. Ramesh is ……….. honest boy.
2. The cow is …….. useful animal.
3. This is …….. umbrella.
4. Sameer brought …….. apple and …….. banana.
5. This is, …….. interesting story.
6. Honesty is …….. best policy.
7. ………. earth is round.
8. Mr. Prasad is ……. teacher.
9. Mr. Harish is ……… M.L.A.
10. Delhi is …………… capital of India.
11. Have you ……. umbrella?
12.  ……… Sun rises in the east.
13. The train is ………… hour late.
14. She is ………. untidy girl.
15. Rajni was ……… blind girl.
16. He is ………. university professor.
17. Reeta reads ……… Gita.

Answers:

1. an
2. a
3. an
4. an
5. an, a
6. the
7. The
8. a
9. an
10. the
11. an
12. The
13. an
14. an
15. a
16. a
17. the.

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2. Pronouns
(सर्वनाम):

परिभाषा – जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किये जाते हैं, सर्वनाम (Pronouns) कहलाते हैं।
जैसे – Ram is a good boy.
He goes to school.
He का प्रयोग ram की जगह हुआ हैं से यह सर्वनाम हैं For example he, it, she, myself.

Kinds of Pronouns

1. Personal Pronoun
(यक्तिवाचक सर्वनाम)
The Pronouns which stands for the names of persons or things are called personal pronouns.
For e.g. – i, we, you, yours, he, she, it, her etc.
जिन सर्वनामों का प्रयोग व्यक्तियों या वस्तुओं के लिए किया जाये उन्हों Personal Pronouns कहते हैं।

2. Reflexive Pronouns
(कर्तासम्बिधित सर्वनाम)
for e.g. – myself, yourself, herself, itself etc.

3. Demonstrative Pronouns
(संकेतवाचक सर्वनाम)
Pronouns which point out things, are called demonstrative pronouns.
For eg. This, that, these, those.

4. Indefinite Pronouns
(अनिशचयवचक सर्वनाम)
Pronouns which. refers to persons or things in a general or vague way are called Indefinite Pronouns. For eg.Some, many, all, others etc.

5. Distributive Pronouns
(प्रत्येक बोधक)
Pronouns which are used for single person or thing. For eg-each, either, neither.

6. Interrogative Pronouns
(प्रश्नवाचक सर्वनाम)
Pronouns which are used for asking questions are called Interrogative pronouns. for eg—who, whom, what, which etc.

7. Relative Pronouns
(सम्बिधित सर्वनाम)
Who, whose, whom, which and that are called relative pronouns when they are used with nouns coming before them.

Exercise

Fill in the blanks with suitable pronouns:

1. Jack’s mother gave …………….. an orange.
2. Niti said that …………… had not done …………..
3. Please tell ……………. a story.
4. …………… went to the market.
5. Mother told …………… to return home early.
6. ……………. book belongs to ……………
7.  ………….. love music.
8. John bought a ball and gave ………… to Jeff.
9. …………… told ………….. to go away.
10. i …………. is a shy boy.
11. Ram did the work. ………………
12. I …………….. shall do it.
13. They …………….. went there.
14. ……………. of us has a’ book.
15.  …………… did this?
16. This is the house in ……………. I live …………..

Answers:

1. him
2. she, it
3. me
4. He
5. us
6. This, me
7. i
8. it
9. He, me
10. He
11. himself
12. myself
13. themselves
14. Each
15. Who
16. which.

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3. The Prepositions
(सम्बन्धसूचक )

परिभाषा – जो शब्द वाक्य में किसी एक वस्तु का दूसरी वस्तु से सम्बन्ध बतलाते हैं Prepositions कहलाते हैं।
A word used to show the relation of one thing to another in a sentence is a preposition.

Relation expressed by Prepositions.
1. Prepositions of Time – कुछ Prepositions समय सूचक होते हैं जैसे –

  • He came at six.
  • I study for seven hours daily.
  • She is absent from class for three days.
  • They work from 10 to 4.

2. Prepositions of Place – कुछ Prepositions स्थान सूचक होते हैं, जैसे –

  • He was born in America.
  • She was in her room.
  • They are coming home from school.
  • I stood before him
  • The ball is out of the circle.

3. Prepositions of Movement – कुछ Prepositions गति सूचक / स्थान सूचक होते हैं, जैसे –

  • He travelled by train.
  • I came by car.
  • He went there on his bike.
  • He travelled in my car.

Use of Some other Prepositions
1. At, In : At, छोटे स्थान के लिए प्रयोग किया जाता है। In, बड़े स्थान के लिए प्रयोग किया जाता है। जैसे

  • He lives at Dholpur.
  • He lives in Madhya Pradesh.

2. In, Into : In स्थिति को बताता है और Into गति का बोध कराता है। जैसे

  • All the boys are in the class.
  • He dived into the river.

3. Why, By : With यन्त्र के साथ प्रयोग होता है और by कार्य करने वाले समय के साथ प्रयोग किया जाता है, जैसे –

  • We cut the apple with the knife.
  • The snake was killed by the farmer.

4. Since, For : Since निश्चित समय के लिए (जैसे दिन का नाम या तिथि आदि) और for का प्रयोग समय की अवधि के लिए किया जाता है। जैसे –

  • He has been ill since Monday.
  • Raj Kumar has been absent for three days.

5. Between, Among : Between दो व्यक्तियों तथा Among दो से अधिक व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है। जैसे –

  • Divide these sweets between Raj and Ravi.
  • He divided his property among his four sons

6. On, Upon : On गतीहीनता upon गतीशीलता के लिए प्रयोग किया जाता है जैसे –

  • The cat is on the mat.
  • The dog jumped upon the table.

7. In, Within : In समय के अवधि की समाप्ति का बोध कराता है और Within समय के अवधि के भीतर का बोध कराता है जैसे

  • I shall come back in a week.
    (सप्ताह की समाप्ति पर)
  • I shall come within a week.
    (एक सप्ताह समाप्ति होने से पूर्व )

8. Below, Beneath : Below पद को सन्दर्भ में और Beneath स्थान के सन्दर्भ में प्रयोग किया जाता है जैसे –

  • Your brother is below my rank.
  • The lion sat beneath a tree.

9. Beside, Besides : Beside का अर्थ है पास और Besides का अर्थ है अतिरिक्त

  • The boys stood beside the teacher’s chair.
  • Besides the Principal, other teachers spoke in the prayer assembly.

10. With, Without : With का अर्थ है साथ और Without का अर्थ है बिना रहित जैसे –

  • Come to me with your brother.
  • Come to the field without anything.

Exercise

Fill in the blanks with the words given in brackets:

1. Hari has been playing …………. two hours. (for, since)
2. He is angry ……………. me. (to, with)
3. The lion jumped ………….. the deer. (on, upon)
4. I live …………….. Kolkata. (in, at)
5. They reached the Bhil village ……………… 9 O’clock. (in, at)
6. The beggar begs …………….. door to door. (from, by)
7. The cat jumped ……………… the rat. (on, upon)
8. Nagpur is famous ……………… oranges. (of, for)
9. The bird is flying …………….. the sky. (in, on)
10. The ball is ……………… the table. (on, at)

Fill in the blanks with suitable prepositions:

11. Lincoln was born ……………. Thursday.
12. He went ……………… the hill.
13. He lives ………………. Bombay.
14. Yesterday Mohan fell ……………… the well.
15. Suman and Rajesh went to see the marble rocks …………….. Jabalpur.
16. The teacher was angry …………….. Rahul.
17. Look …………….. this picture.
18. He met me ……………… 15th August.
19. I don’t want ……………….. take it back.
20. Put your signature …………… ink.
21. Gandhiji was born …………… 2nd Oct. 1869.
22. Once …………. a time, there was a king.
23. I see ………….. my eyes …………..
24. he is afraid ………… snakes.
25. The cat jumped ……….. the river.
26. She’writes ……………. the pen.

Answers:

1. for
2. with
3. upon
4. in
5. at
6. from
7. upon
8. for
9. in
10. on
11. on
12. up
13. in
14. into
15. in
16. with
17. at
18. on
19. to
20. in
21. on
22. upon
23. with
24. of
25. into
26. with.

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4. Numbers: Singular & Plural
(एकवचन, बहुवचन):

वह संज्ञा जो किसी एक व्यक्ति या वस्तु के लिए प्रयुक्त होती है एकवचन संज्ञा कहलाती है। (Singular Noun) जैसे – Boy, chair, man अदि वह संज्ञा जो एक से अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं के लिए प्रयुक्त होती है बहुवचन संज्ञा कहलाती है। (Plural Noun) जैसे – Boys, Chairs, men अदि।

Singular से Plural बनाना –
1. By adding s to the singular nouns as : boy –
boys, girl – girls, dog – dogs, etc.

2. By adding es as : brush brushes, box –
boxes, gas-gases etc.

3. By changing y into ies as : pony ponies, –
lady – ladies, city – cities etc.

4. By changing f into ves as : thief-thieves –
calf – calves, leaf – leaves etc.

5. By change in the vowel as : man-men, –
foot – feet, tooth teeth, mouse – mice etc.

Exercise

Fill in the blanks with suitable words.

1. The police arrested five …………….. (thief, thieves)
2. The ………………. are green. (leaf, leaves)
3. Mr. Prasad has a lovely ………………. (baby, babies)
4. Some ………………… were riding horses. (boy/boys)
5. All the ………………… were ready to go for a picnic. (student, students)
6. When you close your …………………. you cannot see anything. (eye, eyes)
7. I like reading ………………. (book, books)
8. Sardar Patel was one of the great …………….. of India. (leader, leaders)
9. He loved his only …………….. very much.(son, sons)
10. This …………….. is very sharp. (knife, knives)

Answers:

1. thieves
2. leaves
3. baby
4. boys
5. students
6. eyes
7. books
8. leaders
9. son
10. knife.

5. Gender
(परिभाषा):

Noun के जिस रूप से यह पता चले कि Noun पुरुष है, स्त्री है या निर्जीव है उसे Gender कहते हैं।
Kinds of Gender (लिंग के भेद)

1. Masculine Gender
(पुल्लिंग) – इन संज्ञा शब्दों से पुरुषत्व का बोध होता है, जैसे –
Ram, boy, man, father, brother, king etc.

2. Feminine Gender
(स्त्रीलिंग) – इन संज्ञा शब्दों से नारी अथवा स्त्रीत्व का बोध होता है, जैसे –
girl, woman, mother, queen, sister, etc.

3. Neuter Gender (अलिंग) –
इन संज्ञा शब्दों से निर्जीव वस्तुओं का बोध होता है, जैसे –
book, pen, table, room, house, etc.

4. Common Gender (उभयलिंग) –
इन संज्ञा शब्दों से नर व नारी दोनों का बोध होता है, जैसे –
child, teacher, doctor, enemy etc

Change of Gender (लिंग परिवर्तन)
Masculine से feminine बनाने के नियम इस प्रकार हैं –

1.Masculine से बिल्कुल भिन्न शब्द का प्रयोग करके जैसे –

MP Board Class 8th General English Grammar-1.1

2. Masculine के अन्त में ess लगाकर।

MP Board Class 8th General English Grammar-1.3

3. Masculine के प्रथम अथवा अन्तिम शब्द को बदल कर।

MP Board Class 8th General English Grammar-1.4

Some Common Genders:

Baby      –    (बच्चा या बच्ची)
Cousin   –   (चचेरा भाई या बहन)
Pupil      –   (शिष्य या शिष्या)
Child     –   (बच्चा या बच्ची)
Person   –   (पुरुष या स्त्री)
Infant     –   (बच्चा या बच्ची)
Doctor    –   (पुरुष या स्त्री)
Teacher  –   (पुरुष या स्त्री)

Exercise

Write the opposite genders of the following nouns:

  1. Poet, land – lord, lad, God.
  2. Princess, brother, mother, girl, man.
  3. Mistress, aunt, hero, king.

Answer:

  1. Poetess, land – lady, lass, Goddess
  2. Prince, sister, father, boy, woman
  3. Master, uncle, heroine, queen.

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6. Tense
(काल):

परिभाषा – The tense of a verb shows the time of an event or action of a verb.
Verb के tense से किसी घटना या कार्य के समय का ज्ञान होता है।
अंग्रेजी में Tense तीन प्रकार के होते हैं –

  1. Present tense
  2. Past tense
  3. Future tense.

1. Present Tense (वर्तमान काल) –
इस Tense से यह पता चलता है कि कार्य अब या अभी हुआ है। जैसे –
I go to school. (मैं स्कूल जाता हूँ।)

2. Past Tense (भूतकाल) –
इस Tense से यह पता चलता है कि कार्य बीते हुए समय में हुआ है। जैसे –
I went to school. (मैं स्कूल जाता था।)

3.  Future Tense (भविष्य काल) –
इस Tense से यह पता चलता है कि कार्य आने वाले समय में होगा। जैसे –
I shall go to school. (मैं स्कूल जाऊँगा।)

प्रत्येक Tense निम्नलिखित चार प्रकार के होते हैं –

  1. Indefinite
  2. Continuous
  3. Perfect
  4. Perfect Continuous.

Present Tense (वर्तमान काल):
1. Present Indefinite Tense – इस Tense में सदा सत्य बातें, आदतें अथवा बार-बार होने वाले कार्यों का वर्णन किया जाता है। जैसे –

(i) The sun rises in the east.
सूर्य पूर्व में उदय होता है।
(ii) I go to school.
मैं स्कूल जाता हूँ।

पहचान – हिन्दी में वाक्यों के अन्त में ता, ती, ते तथा है, हूँ, हो होता है।

2. Present Continuous Tense –
इस Tense dit प्रयोग तब किया जाता है जब कार्य अभी भी चल रहा हो जैसे –

(i) I am writing a letter.
मैं पत्र लिख रहा हूँ।
(ii) They are playing football.
पे फुटबॉल खेल रहे हैं। पहचान-हिन्दी में वाक्यों के अन्त में रहा हूँ, रहा है, रही है, रहे हैं होता है।

3. Present Perfect Tense –
इस Tense का प्रयोग ऐसे कार्य के लिए होता है जो वर्तमान में पूरा हो चुका है जैसे –
(i) I have done my work.
मैंने अपना काम कर लिया है।
(ii) He has written a letter.
वह एक पत्र लिख चुका है।

इसमें I, You, तथा बहुवचन के साथ have तथा एकवचन के साथ has का प्रयोग किया जाता है।
इसमें Verb की III form का ही प्रयोग होता है।
पहचान – हिन्दी में वाक्यों के अन्त में किया है, दिया है, चुका है, चुके हैं, चुका हूँ आदि होता है।

4. Present Perfect Continuous Tense –
इस Tense में कार्य पहले से हो रहा है तथा वर्तमान में भी जारी है। जैसे

1. I have been writing a letter for an hour.
मैं एक घण्टे से पत्र लिख रहा हूँ।

2. It has been raining since morning.
सुबह से वर्षा हो रही है।
इस Tense में subject के अनुसार has been या have been तथा मुख्य क्रिया में ing लगाते हैं।
समय के लिए for या since का प्रयोग होता है।
पहचान – हिन्दी वाक्यों के अन्त में रहा हूँ, रहे हैं, रही हूँ तथा कार्य शुरू होने का समय दिया जाता है।

Past Tense (भूतकाल):

1. Past Indefinite Tense – इस Tense में बीते हुए समय में कार्य होता है। जैसे –
(i) He went to the market.
वह बाजार गया।
(ii) I bought a pen.
मैंने एक कलम-खरीदी।

इन वाक्यों में Verb की II form का प्रयोग होता है।
पहचान – हिन्दी में वाक्यों के अन्त में गया, आया, दिया, लिया, किया आता है।

2. Past Continuous Tense –
इस Tense का प्रयोग ऐसे कार्यों के लिए किया जाता है जो भूतकाल में कुछ समय तक जारी रहा हो। जैसे –
(i) I was writing a letter.
मैं एक पत्र लिख रहा था।
(ii) They were playing cricket.
वे क्रिकेट खेल रहे थे।

पहचान – हिन्दी वाक्यों में रहा था, रहे थे, रही थी आदि का प्रयोग होता है। एकवचन में संज्ञा में was तथा बहुवचन में were का प्रयोग होता है।

3. Past Perfect Tense –
इस Tense का प्रयोग ऐसे कार्यों के लिए किया जाता है जो बीते समय में पूरा हो चुका है। जैसे –
(i) He had done his work.
उसने अपना काम कर लिया था।
(ii) They had posted their letters in the post office.
उन्होंने अपने पत्र डाकखाने में डाल दिये थे।

इस Tense में had के साथ Verb की III form का प्रयोग होता है।
पहचान – हिन्दी में वाक्यों के अन्त में लिया था, चुका था, चुकी थी, चुके थे आदि आते हैं।

4. Past Perfect Continuous Tense – इस Tense का प्रयोग ऐसे वाक्यों में होता है जहाँ कार्य बीते समय में शुरू होकर कुछ समय तक जारी रहता है। वाक्य शुरू होने के समय ‘से’ का प्रयोग आवश्यक होता है। इसके लिए for व since का प्रयोग होता है। जैसे –
(i) Ram had been reading since morning.
राम सुबह से पढ़ रहा था।
(ii) Ram had been playing for two hours.
राम दो घण्टे से खेल रहा था। इन वाक्यों में had been के साथ Verb की I form + ing का प्रयोग होता है।
पहचान – हिन्दी वाक्यों के अन्त में रहा था, रहे थे, रही थी आदि आते हैं।

Future Tense (भविष्य काल):
1. Future Indefinite Tense –
इस Tense से यह पता चलता है कि कार्य अभी होगा। जैसे –
(i) I shall go to the market.
मैं बाज़ार जाऊँगा।
(ii) We will play.
हम खेलेंगे।

इस Tense में will, shall का प्रयोग होता है।
पहचान – हिन्दी वाक्यों में अन्त में गा, गे, गी आता है।

2. Future Continuous Tense – इस Tense का
प्रयोग उस कार्य को व्यक्त करने के लिए किया जाता है जो घटनाओं के सामान्य क्रम से घटित होता है। इस Tense में will be या shall be के साथ प्रधान क्रिया में ing लगाया जाता है। जैसे –
(i) Hari will be doing his work.
हरि अपना काम कर रहा होगा।
(ii) Meera will not be going to school.
मीरा स्कूल नहीं जा रही होगी।

पहचान हिन्दी के वाक्यों में अन्त में रहा होगा, रहे होंगे,। रही होगी आदि आते हैं।

3. Future perfect Tense –
इस Tense में भविष्य में किसी कार्य के होने की निश्चितता दर्शाई जाती है –
Shall have, will have + verb की III form का प्रयोग होता है। जैसे –
(i) I shall have finished my work before 4 p.m.
शाम चार बजे से पहले मैं अपना काम समाप्त कर चुकूँगा।
(ii) The teacher will have caught the boy before he runs away.
लड़के के भागने से पहले अध्यापक उसे पकड़ चुके होंगे।

पहचान हिन्दी के वाक्यों में अन्त में चुके होंगे, चुका होगा आदि आते हैं।

4. Future Perfect Continuous Tense
इस Tense में भविष्यत काल में कार्य पूरा होने के साथ-साथ उसके चालू रहने के समय का वर्णन होता है।
Will have been, shall have been के साथ प्रधान क्रिया में ing लगाया जाता है। जैसे –
(i) Dogs will have been barking since one o’clock.
कुत्ते एक बजे से भौंक रहे होंगे।
(ii) Ram will have been writing his poem for four days.
राम चार दिन से अपनी कविता लिख रहा होगा।

पहचान हिन्दी के वाक्यों के अन्त में कर रहा होगा, कर रहे होंगे, कर रही होंगी आदि आते हैं।

Simple Present:

Translate into English

  1. सूर्य पूर्व में उगता है।
  2. मैं चाय पीता हूँ।
  3. मैं प्रतिदिन घूमने जाता हूँ।
  4. माला एक अच्छी लड़की है।
  5. पृथ्वी गोल है।
  6. वृक्ष हमें फल देते हैं।
  7. क्या वे गाना गाते हैं ?
  8. मोहन अपना काम क्यों नहीं करता है ?

Answer:

  1. The sun rises in the East.
  2. I take tea.
  3. I go for a walk daily.
  4. Mala is a good girl.
  5. The earth is round.
  6. Trees give us fruits.
  7. Do they sing a song ?
  8. Why does Mohan not do his work? .

Present Perfect:

  1. मैं चाय पी चुका हूँ।
  2. शीला यहाँ आ गयी है।
  3. उसने पत्र नहीं लिखा है।
  4. वह अपना काम नहीं कर चुकी है।
  5. वे कहाँ जा चुके हैं ?
  6. क्या वे खेल चुके हैं ?

Answer:

  1. I have taken tea
  2. Sheela has come here.
  3. He has not written a letter.
  4. She has not done her work.
  5. Where have they gone ?
  6. Have they played ?

Simple Past:

  1. मैंने एक पेन खरीदा।
  2. वह वहाँ गया।
  3. हमने एक गीत नहीं गाया।
  4. मैंने आम नहीं खरीदे।
  5. क्या हमने खेल खेला ?

Answer:

  1. I bought a pen.
  2. He went there
  3. We did not sing a song.
  4. I did not buy mangoes.
  5. Did we play a game ?

Past Continuous:

  1. शिक्षिका कक्षा में पढ़ा रही थी।
  2. वह नाच रहा था।
  3. क्या वह खेल रहा था ?
  4. राम पत्र नहीं लिख रहा था।
  5.  पिताजी जबलपुर जा रहे थे।

Answer:

  1. The teacher was teaching in the class.
  2. He was dancing.
  3. Was he playing ?
  4. Ram was not writing a letter.
  5. Father was going to Jabalpur.

Simple Future:

  1. मैं उसकी मदद करूँगा।
  2. अध्यापक आज हमें पढ़ायेंगे।
  3. मैं स्कूल नहीं जाऊँगा।
  4. वह गाना नहीं गायेगी।
  5. क्या तुम कविता लिखोगे ?

Answer:

  1.  I shall help him.
  2. The teachers will teach us today.
  3. I shall not go to school.
  4. She will not sing a song.
    Will you write a poem ?

Future Continuous:

  1. वह खाना खा रहा होगा।
  2. राम अपना काम कर रहा होगा।

Answer:

  1. He will be having his meals
  2. Ram will be doing his work.

Translate into English:

  1. यह मेरी पुस्तक है।
  2. उसकी माँ डॉक्टर थी।
  3. मै आगरा जाऊँगा।
  4. माँ खाना बना रही है।
  5. तुम कहाँ रहते हो?
  6. क्या तुम क्रिकेट खेलते हो ?
  7. जया गाना गा चुकी है।
  8. कल छुट्टी का दिन था।

Answer:

  1. This is my book.
  2. His mother was a doctor.
  3. I will go to Agra.
  4. Motor is cooking food.
  5. Where do you live?
  6. Do you play cricket ?
  7. Jaya has sung a song.
  8. Yesterday was a holiday.

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7. Three Forms Of Verbs
(क्रियाओं के तीन रूप)।

Group I – ऐसी क्रियाएँ जिनके तीनों रूप अलग हैं –

MP Board Class 8th General English Grammar-1

Group II – वे क्रियाएं जिनके II form a III form तथा d, ed, t लगाकर बनाते हैं।

MP Board Class 8th General English Grammar-3
Group III – वे क्रियाएं जिनके रूप तीनों Forms में एक से होते हैं –

MP Board Class 8th General English Grammar-5

Exercise

Fill in the blanks with the correct form of verb.

  1. Ra-him ……………. Watching T.V. (was, were)
  2. I ………….. a cock there.. (seen, saw)
  3. The bell …………. before we reached the school …………….. (ring) .
  4. The girl, who is …………… a red sweater, is a good singer. (wear)

Answer:

  1. was
  2. saw
  3. had rung
  4. wearing.

8. Adjective And Its Degrees
(विशेषण तथा उसकी डिग्री ):

परिभाषा – An adjective is a word that is used to add something to the meaning of a Noun.
जो शब्द संज्ञा की विशेषता बतलाते हैं, विशेषण कहलाते है। जैसे –

1. Satish ia a tall boy.
सतीश लम्बा लड़का है।

2. She is a clever girl.
वह चतुर लडकी है।

Adjectives कि तीन अवस्थाएँ होती हैं –

  1. Positive degree
  2. Comparative degree
  3. Superlative degree.

MP Board Class 8th General English Grammar-6

Exercise

Fill in the blanks with correct degree of comparison.

1. Bala is …………… than Ravi. (young)
2. Raji Devi is not as …………….. as her husband. (tall)
3. This is the ……………. flower I have ever seen. (beautiful)
4. Raja is not as …………..,.. as his brother. (intelligent)
5. I am ………………. (strong) than he is.
6. Calcutta is the ……………… city in India. (big)
7. Iron is the …………………. (useful) of all metals.
8. Iron is ……………….. (heavy) than wood.
9. Which is the ……………… (high) mountain in India ?
10. He is ………………. (lazy) than his sister.

Answers:

1. younger
2. tall
3. most beautiful
4. intelligent
5. stronger
6. biggest
7. most useful
8. heavier
9. highest
10. lazier.

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9. Adverbs
(क्रिया-विशेषण):

परिभाषा – An adverb is a word which modifies an adjective, verb or another adverb.
जो शब्द किसी विशेषण, क्रिया अथवा अन्य क्रिया विशेषण की विशेषता बतलाते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।

Kinds of Adverbs:

1. Adverb of Time – ये शब्द कार्य के होने का समय। स्पष्ट करते हैं, जैसे –

  • Ram came early.
  • She gets up in the morning daily.
  • Our shop remains closed on Monday.
  • You may go now.

इस प्रकार के adverbs निम्नलिखित हैं –
Now, then, before, since, ago, soon, early, late, afterwards, today, tomorrow, yesterday etc.
Adverb of Time answers the questions: When? i.e. ये verb में ‘कब’ लगाकर ज्ञात होता है।

2. Adverb of Place ये शब्द क्रिया के होने का स्थान बताते हैं, जैसे –

  • Please come here.
  • Come in.
  • Go out.
  • She sits there.

इस प्रकार के adverbs निम्नलिखित हैं –
here, there, in, out, above, below, inside, outside, far, near, every where etc.
Adverb of Place answers the questions : Where? i.e., ये verb में ‘कहाँ’ लगाकर ज्ञात होता है।

3. Adverbs of Reason –
ये शब्द कारण प्रकट करते हैं, जैसे

  • He therefore left the school.
  • He is hence unable to go.

Adverb of Reason answers the question : Why ? i.e., ये verb में क्यों लगाकर ज्ञात होता है।

10. The Conjunctions
(संयोजक):

परिभाषा – A conjunction is a word which joins words or sentences with each other.
वे शब्द जो शब्दों या वाक्यों को आपस में जोड़ते हैं संयोजक कहलात हैं।

निम्नलिखित कुछ conjunctions the हैं, जैसे –
and (और), as (जैसे), but (लेकिन), before (पहले), because (क्योंकि), after (बाद में), if (अगर), or (या), otherwise (अन्यथा ), that (की), though (यद्यपि), then (जबकि), till (तक), unless (जब तक कि), while (जबकि), which (जोकि), when (जब), therefore (अतः), so (इसलिए), as well as (तथा), either-or (या तो या), neither nor (ना तो-ना ही) etc.

1. Rita and Gita are sisters.
2. I live in Bhopal which is the capital of Madhya Pradesh.
3. Anil is rich but Hari is poor.
4. Walk fast or you will miss the bus.
5. He was so tired that he could not walk.
6. He was ill, therefore he could not come to school.

Exercise

Combine the following pairs of sentences into a single one using and or but:

  1. Mala studied well. She won a number of prizes.
  2. Sheela likes red colour. Geeta likes blue colour.
  3. Rani bought some apples. Raju bought oranges.
  4. I have seen the Taj Mahal. I have not seen the Qutub Minar.
  5. Bala likes birds. She does not like monkeys.
  6. I like cricket. I like football.
  7. Sohan went to Delhi during the vacation. Rohan went to Agra.
  8. He is poor. He is honest.

Answers:

  1. Mala studied well and won a number of prizes.
  2. Sheela likes red colour but Geeta likes blue.
  3. Rani bought some apples and Raju bought oranges.
  4. I have seen the Taj Mahal but not the Qutub Minar.
  5. Bala likes birds, but not monkeys.
  6. I like circket and football.
  7. Sohan went to Delhi during the vacation but Rohan went to Agra.
  8. He is poor but honest.

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11. Modals
(सहायक किया):

1. Primary Auxiliaries – Be, have, do.
2. Modal Auxiliaries – will, shall, can, may, must etc.
नोट – यहाँ केवल वही Auxiliaries दी जा रही हैं जो पाठ्यक्रम में निर्धारित हैं –

Have का main verb के रूप में प्रयोग:

1. I have a car. (अधिकार)
2. He has a pen (अधिकार)
3. We had an old car. (अधिकार)
4. We had our meal early today. (ate)
5. I had tea not coffee. (drank)
6. She had a packet from the postman.(received)
7. He has fever. (suffering from)

Use of ‘Shall’ and ‘Should’
Shall –
1. Promise
(वचन) के लिए, जैसे –

  • I shall help you.
  • We shall go to cinema today.

2. Suggestion या advice
(सुझाव) दिखाने के लिए जैसे –

  • Shall we go to school today?
  • Shall I close the door ?

3.  Determination
(दृढ़ निश्चय) के लिए, जैसे –

  • I shall turn you out of the room.
  • He shall reach there by evening.

4. Command
(आदेश) के लिए, जैसे –

  • You shall have to do this work.
  • He shall be punished again.

Should –
(i) Obligation or advisability
(कर्तव्य, सुझाव) के लिए, जैसे –

  • We should respect our elders.
  • You should study the subject first then give your views.
  • You should be punctual.

(ii) Assumption
(पूर्ण धारणा) के लिए

  • That should be Mohan’s cycle.
  • You should be Ram’s brother.

(iii) Lest at ang should ait beim
(a) Walk carefully lest you should fall. Use of ‘Can’ and ‘Could’

Can –
(i) Ability
(योग्यता) दिखाने के लिए, जैसे –

  • I can swim.
  • He can speak English.

(ii) Permission
(आज्ञा), जैसे –

  • You can go home now.
  • You can park your car here.

(iii) Possibility
(संभावना) दिखाने के लिए, जैसे –

  • The students can be notorious.
  • He can come today.

(iv) Power
(शक्ति) प्रकट करने के लिए, जैसे –

  • We can walk so long.
  • Can he bear this pressure ?

Could—
(i) Ability is past
(भूतकाल में क्षमता) दिखाने के लिए, जैसे

  • She could speak English well.
  • He could not pass as he did not work hard.
  • He could swim, when he was a child.

(ii) Possibility
(सम्भावना) व्यक्त करने के लिए। जैसे –
(a) When I was the principal, teachers could meet the girl students in the open.

(iii) Request (प्रार्थना) के लिए, जैसे –

  • Could you give me your pen ?
  • Could you tell your residence ?

Use of ‘May’ and ‘Might’
May –
(i) Permission
(अनुमति) माँगने/देने के लिए –

  • May I come in Sir ? (माँगना)
  • You may go now. (देना)।

(ii) Possibility (सम्भावना) के लिए, जैसे –

  • It may rain today.
  • The principal may not grant me leave.

(iii) Purpose (उद्देश्य) व्यक्त करने के लिए, जैसे –

  • We eat so that we may live.
  • We save so that we may use in future.

(iv) Wish (इच्छा) प्रकट करने के लिए, जैसे –

  • May you live long !
  • May God help you !

Might –
(i) Possibility (सम्भावना) व्यक्त करने के लिए, जैसे –

  • The principal might grant me leave.
  • She might be Suman.

(ii) Permission (अनुमति) माँगने के लिए
(a) Might I borrow your car for a day?

Use of ‘Must

(i) Necessity (आवश्यकता) व्यक्त करने के लिए –

  • We must obey our elders.
  • We must get up early.

(ii) Prohibition (रोकने) के लिए –
(a) You must not leave home before 6 p.m.

(iii) Certainty or belief (पक्का विश्वास) व्यक्त करने के लिए, जैसे –

  • I must finish this book today.
  • He must have gone.

Exercise

Fill in the blanks with suitable modals:

1. We ………….. get up early in the morning.
2. The sky is clear now, it ………….. rain in the evening.
3. He promised me that he …………… preside over our function.
4. …………… you switch the fan off?
5. We …………….do our duty.
6. ……………… I come in Sir ?
7. My friend ……………. arrive at 8 p.m.
8. My son ………….. drive a car.
9. The news ………….. be false.
10. If you disobey, you ………….. be punished.

Answers:

1. should
2. can
3. would
4. Would
5. must
6. May
7. will
8. can
9. may
10. shall.

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12. Punctuation
(विराम चिन्ह)।

Punctuation का अर्थ होता है किसी वाक्य में Full stop, comma आदि विराम चिह्न का प्रयोग करना। इनके प्रयोग इस प्रकार हैं।
1. Full stop (.) – हिन्दी के पूर्ण विराम (।) के स्थान पर अंग्रेजी में full stop (.) प्रयोग होता है।

(a) Affirmative, Negative site Imperative वाक्यों के अन्त में –

  1. She is a girl.
  2. She is not coming.
  3. Please come here.

(b) Abbreviations
(संक्षिप्त शब्दों) तथा नामों के प्रारम्भ में। जैसे –
M. A., A.P.J. Abdul Kalam.

2. Comma (.) – Comma (अर्द्ध विराम) का प्रयोग निम्न दशाओं में होता है –

(i) एक ही Part of Speech के कई शब्दों को अलग करने के लिए. जैसे –
He can read, write and sing well.

(ii)And से जोड़े गये एक से अधिक शब्द समूहों को अलग करने के लिए, जैसे –
The minister addressed all, men and women, old and young.

(iii) Yes और No के बाद, जैसे –

  1. Yes, I shall do it.
  2. No, I can’t go there.

(iv) Reported Speech के शेष वाक्य को अलग करने के लिए, जैसे –
He said, “The sun rises in the East.”.

(v) Noun और Phrase in apposition को अलग करने के लिए, जैसे –
Milton, the great poet,,was blind.

(vi) दिन, दिनांक या वर्ष को पृथक् करने के लिए, जैसे –
Monday, 6th June, 2006.

3. Question Mark (?)
प्रश्नवाचक वाक्यों के अन्त में लगाया जाता है, जैसे –
What is your name?

4. Exclamation mark (!) – इस चिह्न का प्रयोग
(i) Interjection
(विस्मयादिबोधक) शब्दों के बाद होता है, जैसे
Oh! Alas ! Hurrah !

(ii) उन वाक्यों के अन्त में भी होता है जो गहन संवेग व्यक्त करते हैं, जैसे
What a beautiful picture !

5. Inverted Commas (“….”) – Direct speech में किसी के द्वारा कहे गये यथार्थ शब्दों को शेष वाक्य से अलग करने के लिए Inverted commas का प्रयोग होता है, जैसे –
He said, “I shall win.”

6. Apostrophe (‘) इनका प्रयोग होता हैं जैसे –

  • अक्षर के लोप को को प्रकट करने को लिए – Don’t, can’t, won’t, didn’t.
  • Possessive case बनाने के लिए Sita’s doll.
  • अक्षर तथा संख्याओं का बहुवचन बनने को लिए And three 4’s and two 3’s.

7. Capital Letters – इनका प्रयोग निम्न होता है –
(i) वाक्य के प्रथम शब्द का प्रथम अक्षर लिखने के लिए –
He is my brother.
(ii) Proper Nouns और उससे बने हुए Adjectives के प्रथम अक्षर को लिखने के लिए –
Asha, Delhi, Indian.
(iii) Pronoun Ion frana forte I am a teacher.
(iv) God, Almighty, Lord शब्दों के प्रथम अक्षर लिखने के लिए।

Exercise

Punctuate the following sentences:

  1. he sits next to his friend sonu his father teaches geography.
  2. Come here Sonam i have a rupee for you said rajan.
  3. is this your final decision asked ramesh.
  4. during our journey to delhi we slept read and played cards.
  5. don’t worry said akash i will give the pen to him.

Answer:

  1. He sits next to his friend, Sonu. His father teaches Geography.
  2.  “Come here, Sonam. I have a rupee for you.” said Rajan.
  3. “Is this your final decision ?” asked Ramesh.
  4. During our journey to Delhi, we slept, read and played cards.
  5. “Don’t worry”, said Akash, “I will give the pen to him.”

13. Compound Word
(सयुक्त शब्द)

परिभाषा – दो शब्दों को मिलाकर जब एक शब्द बनता है,

  • Base +ball → Baseball
  • Post + man → Postman
  • Milk + maid Milkmaid
  • Pocket + money → Pocket money
  • Water + melon → Watermelon
  • Friend + ship → Friendship

कभी-कभी hyphen (-) से भी compound words बनते हैं, जैसे –

  • Bell + like → Bell – like
  • Re + create → Re – create
  • Day + dream → Day – dream
  • Bus + conductor – Bus – conductor
  • Dark + haired → Dark – haired

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14. Interrogative Sentences
(प्रश्नवाचक वाक्य):

वाक्यों को Interrogative बनाने के लिए. सहायक क्रिया (Auxiliary verb), (Main verb) प्रश्नवाचक शब्दों की सहायता ली जाती है जैसे –
1. उसके पास नई कार है।
She has a new car. (Simple)
Has she a new car? (Interrogative)

2. वह एक अच्छा लड़का है।
He is a good boy. (Simple)
Is he a good boy ? (Interrogative)

Exercise

Change the following sentences into interrogative –
1. Seema is going to Delhi.
सीमा दिल्ली जा रही है।

2. He can come here
वह यहाँ आ सकता है।

3. Ram has written a letter.
राम एक पत्र लिख चुका है।

4. She writes a letter.
वह एक पत्र लिखती है।

5. She sang a song.
उसने एक गीत गाया।

6. This is a book.
यह एक पुस्तक है।

7. She is playing hockey.
वह हॉकी खेल रही है।

8. He is driving a car.
वह एक कार चाल रहा है ।

9. I love my brother.
मैं अपने भाई से प्यार करता हूँ।

10. I gave a book to Lata.
मैंने लता को एक पुस्तक दी।

11. I like to live in Agra.
मुझे आगरा में रहना पसन्द है।

12. Shahjahan built the Taj.
शाहजहाँ ने ताजमहल बनवाया।

Answers:

1. Is Seema going to Delhi?
2. Can he come here ?
3. Has Ram written a letter ?
4. Does she write a letter ?
5. Did she sing a song ?
6. Is this a book ?
7. Is she playing hockey ?
8. Is he driving a car ?
9. Do you love your brother ?
10. Did you give a book to Lata ?
11. Do you like to live in Agra ?
12. Did Shahjahan build the Taj ?

Exercise

Change the following sentences into interrogatives:

  1. Nehru was honored every where.
  2. Time and tide wait for none.
  3. No man is mightier than God.
  4. ‘Everybody loves his motherland.
  5. He would like to be free.
  6. They played a hockey match.
  7. Girls were dancing.

Answer:

  1. Was Nehru honored everywhere ?
  2. Do time and tide wait for anyone ?
  3. Is any man mightier than God ?
  4. Does anybody not love his motherland ?
  5. Would he not like to be free ?
  6. Did they play a hockey match ?
  7. Were girls dancing ?

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15. Negative Sentences
(नाकारात्मक वाक्य):

How to change affirmative sentences into negative sentences:
1. जब स्वीकारात्मक वाक्य में verb “to be के रूप 1619 is, am, are, was, were तथा verb ‘have os के रूप have, has, had का प्रयोग Full verb की तरह हो तो negative sentence बनाते समय इनके बाद not लगाते हैं। जैसे –
(a) He is a good boy.
He is not a good boy.

(b) They were players.
They were not players.

2. जब स्वीकारात्मक वाक्य में Primary Auxiliary (be, do, have) और Modal Auxiliary का प्रयोग एक साथ हो तो Negative sentence बनाते समय इनके बीच में not लगाते हैं जैसे –
(a) He may be a good boy.
He may not be a good boy.

(b) I can do this work.
I can not do this work.

3. Interrogative Sentences को negative में बदलते समय Subject (कर्ता) के बाद not लगा देते हैं। जैसे –
(a) Is he a good man ?
Is he not a good man ?

(b) Will you go home ?
Will you not go home ?

4. Imperative को negative में बदलते समय verb से । पहले don’t लगा देते हैं। जैसे –
(a) Go there.
Don’t go there.

(b) Bring water.
Don’t bring water.

Exercise

  1. You play cricket daily.
  2. This is a cow.
  3. I have seen the Taj.
  4. I lost my cycle.
  5. She lives in a good house.

Answer:

  1. You don’t play cricket daily.
  2. This is not a cow.
  3. I have not seen the Taj.
  4. I did not lose my cycle.
  5. She does not live in a good house.

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16. Active And Passive Voice

अंग्रेजी भाषा में दो प्रकार की voice होती हैं –
Active and Passive voice. We drink milk. (Active voice)
हम दूध पीते हैं।

Milk is drunk by us. (Passive voice)
दूध हमारे द्वारा पिया जाता है।

मुख्य बातें:

1. केवल कर्म (object) वाले वाक्यों को Passive voices में बदला जा सकता है। बिना कर्म वाले वाक्यों को Passive voice में नहीं बदला जा सकता है जैसे-He sleeps, Radha is weeping, इन वक्यों में object नहीं है इसलिए इन्हें Passive में नहीं बदला जा सकता है।
2. Perfect Continuous वाक्यों को Passive वाक्यों में नहीं बदला जता जैसे – She has been waiting for me.
3. Future continuous वाक्यों को passive में नहीं बदला जा सकता है। – I shall be going to Delhi.
4. Passive Voice में Past participle (Third form of the verb) प्रयोग होता है।
I sing a song (Active)
A song is sung by me. (Passive)

Tense wise Change of Voice:

1. Simple Present Tense:
I water Plants. (Active)
Plants are watered by me. (Passive)
Hint – is, am ,are + III form of verb

2. Present Continuous Tense:
I am singing a song. (Active)
A song is being sung by me. (Passive)
Hint – is, am, are + being + III form of verb

3. Present Perfect Tense:
I have watered the plants. (Active)
The plants have been watered by me. (Passive)
Hint – has, have + been + III form of verb.

4. Simple Past Tense:
I watered plants. (Active)
Plants were watered by me. (Passive)
Hints – was, were + III form of verb

5. Past Continuous Tense:
I was singing a song. (Active)
A song was being sung by me. (Passive)
Hint – was, were + being + III form of verb.

6. Past Perfect Tense:
He had drunk milk. (Active)
Milk had been drunk by him. (Passive)
Hint – had been + III form of verb

7. Simple Future Tense:
I shall drink milk. (Active)
Milk will be drunk by me. (Passive)
Hint – will be / shall be + III form of verb

How to Change Interrogative Sentences into Passive Voice

1. Sentences starting with Helping verbs
(सहायक क्रिया से आरम्भ होने वाले वाक्य)
Did you water plants ? (Active)
Were plants watered by you ? (Passive)
Hint – Helping verb + Object + III form of verb and question mark.

2. Sentences Starting with “Why’ (‘Why’ से आरम्भ होने वाले वाक्य)
Why did you leave the room? (Active)
Why was the room left by you? (Passive)
Hint – Why + helping verb + object + III form of verb and question mark.

3. Sentences starting with ‘Who’ (‘Who’से आरम्भ होने वाले वाक्य)
Who watered the plants ? (Active)
By whom were the plants watered ? (Passive)
Hint-By Whom + helping verb + object + III form of verb and question mark.

How to Change the Sentences with can, should, must etc., into Passive Voice
1. I can help you. (Active)
You can be helped by me. (Passive)

2. You should obey your elders. (Active)
Your elders should be obeyed by you. (Passive)

3. You must drink milk. (Active)
Milk must be drunk by you. (Passive)
Hint-Can, should, must + be + III form of verb.

How to Change Imperative Sentences into Passive Voice
1. Open the door. (Active)
Let the door be opened. (Passive)

2. Clean the glass. (Active)
Let the glass be cleaned. (Passive)
Hint-Let + object + Be + III form of verb.

3. Please bring me a glass of water. (Active)
You are requested to bring me a glass of water. (Passive)
Hint-You are requested + to + sentence.

Exercise

Change the Voice:

1. My father brought a new car.
2. He was writing a letter.
3. You are eating oranges.
4. He called them.
5. She is making tea.
6. Do it.
7. Mala sold the books.
8. Flowers are liked by me.
9. People do not play cricket in America.
10. Sona sings a song.
11. A letter was written by Amit.
12. A car was driven by Ramu.

Answers:

1. A new car was bought by my father.
2. A letter was being written by him.
3. Oranges are being eaten by you.
4. They were called by him.
5. Tea is being made by her.
6. Let it be done.
7. The books were sold by Mala.
8. I like flowers.
9. Cricket is not played in America.
10. A song is sung by Sona.
11. Amit wrote a letter.
12. Ramu drove a car.

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17. Direct & Indirect Narration

अंग्रेजी में किसी के कहे हुए वचन को दो प्रकार से प्रकट कर सकते हैं –
1. यदि किसी व्यक्ति के वही शब्द लिखे जायें जो उसने कहे हैं और उनमें किसी प्रकार की तब्दीली न की जाये तो उसे Direct Speech कहते हैं। जैसे –
“Rama said, “She is a good girl.” यहाँ बोलने वाले के ठीक-ठीक वही शब्द दिये गये हैं। Direct Speech में निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए –
(a) बोलने वाले के असली शब्दों को inverted Commas (“….”) में लिखते हैं।
(b) बोलने वाले के असली शब्दों को Reported Speech कहते हैं।
(c) जो Verb (क्रिया) ‘Reported Speech’ के सम्बन्ध में कुछ बताता है उसे Reporting verb कहते हैं।

2. जब हम बोलने वाले के असली शब्दों का प्रयोग नहीं करते परन्तु उनका तात्पर्य या अर्थ लिखते हैं तो उसे Indirect Speech कहते हैं। जैसे –
Rama said that she was a good girl. “Indirect speech में निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए –

  • इसमें कोई inverted commas नहीं होते। बोलने वाले के ठीक वही शब्द नहीं लिखे जाते। उनमें कुछ परिवर्तन किया जाता है।
  • Reporting verb के बाद कोई comma नहीं लगाया जाता।
  • Reported Speech से पहले Conjunction that’ का प्रयोग होता है।
  • Reported speech की क्रिया को बदलते हैं।

जब हम Direct Speech को Indirect speech में बदलते हैं तो निम्न बातों का ध्यान रखते हैं जैसे –
(1) Said को told में बदल देते हैं। Persons में परिवर्तन निम्न रूप में करते हैं। I person के Pronoun (I, we, us, our) का परिवर्तन Direct Speech के Subject (कर्ता) के Person के अनुसार होता है। II Person के Pronoun (You, Your) का परिवर्तन Object के अनुसार होता है तथा III Person के Pronoun (he, she, it, her) में कोई भी परिवर्तन नहीं होता है।

(2) निकटता प्रकट करने वाले शब्दों में परिवर्तन निम्नलिखित रूप से किया जाता है –

MP Board Class 8th General English Grammar-8

(3) Tense (काल) के परिवर्तन –

  • Reporting Verb के Present या future Tense में होने पर Reported verb के Tense में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  • Reporting verb के Past Tense में होने पर Reported Verb के Tense में परिवर्तन होता है –

(i) Simple Present का Simple Past हो जाता है।
He said, “She works hard.”
He said that she worked hard.

(ii) Present Continuous at Past Continuous हो जाता है। जैसे –
He said, “She is reading a book”.
He said that she was reading a book.

(iii) Present Perfect at Past Perfect हो जाता है। जैसे –
Hema said, “Ram has done his work.”
Hema said that Ram had done his work.

(iv) Present Perfect Continuous cat Past Perfect Continuous हो जाता है। जैसे –
Sham said, “Ram has been working for two hours.”.
Sham said that Ram had been working for two hours.

(v) Simple Past का Past Perfect हो जाता है। –
Sita said, “Rita read a book.”
Sita said that Rita read a book.”

(vi) Past Continuous cft Past Perfect Continuous हो जाता है। जैसे –
Gopal said, “Govind was singing a song.”
Gopal said that Govind had been singing a song.
Shall का should, may, का might, can का could हो जाता है तसदा सत्य व ऐतिहासिक तथ्यों का Tense नही बदलता।

Interrogative Sentences:
Direct – Rahul said to Rama, “Is it easy to ride a bicycle ?”
Indirect – Rahul asked Rama if it was easy to ride a bicycle.
Direct – The bird said to the Prince, “Why are you weeping ?
Indirect – The bird asked the Prince why he was weeping.

Command and Orders:
Direct – Father said, “Get Some sleep.”
Indirect – Father told him to get some sleep.
Direct – Hari said to me, “Please help me.”
Indirect – Hari requested me to help him.

Exercise

I. Rewrite the following sentences in indirect form of narration:

1. Amit says, “I like travelling.”
2. The teacher said, “The earth is round.”
3. The teacher said to the boy, “Shut the door”
4. He asked me, “Where is the bus stand ?”
5. Savita’s mother says, “I think it is good to travel.”
6. Sita says, “I went to the cinema.”
7. The teacher said, “What is your name ?”
8. “Who is your father ?” The policeman asked the girl.
9. He said to me, “I live in Delhi.”
10. He said, “Two and two make four.”

Answers:

1. Amit says that he likes travelling.
2. The teacher told that the earth is round.
3. The teacher asked the boy to shut the door.
4. He asked me where the bus stand was.
5. Savita’s mother says that she thinks that it is good to travel.
6. Sita says that she went to the cinema.
7. The teacher asked me what my name was.
8. The policeman asked the girl who her father was.
9. He told me that he lived in Delhi.
10. He said that two and two make four.

Exercise

II. Change the following into Indirect Narration:

1. Savita said, “I am going to Delhi today.”
2. Mohit said, “I can’t come. I have to stay with my brother.”
3. Seema said, “I am going home.”
4. Teacher said, “The sun rises in the east.”
5. Vivek said, “I am busy.”
6. Ramesh said, “I cannot drive scooter.”

Answers:

1. Savita said that she was going to Delhi that day.
2. Mohit said that he couldn’t come, he had to stay with his brother.
3. Seema said that she was going home.
4. Teacher said that the sun rises in the east.
5. Vivek said that he was busy.
6. Ramesh said that he could not drive scooter.

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18. Antonyms
(विपरीतार्थक शब्द):

विपरीत अर्थ वाले शब्द विपरीतार्थक शब्द कहलाते है

MP Board Class 8th General English Grammar-9

19. Synonyms
(समानार्थक शब्द):

समानार्थक शब्दों का अर्थ है समान अर्थ वाले शब्द

MP Board Class 8th General English Grammar-12

20. Homophones
(समोच्चारित शब्द):
Homophones are words that sound alike but have completely different meaning. –
(Homophone शब्द उच्चारण में समान लगते हैं परन्तुअर्थ में भिन्न होते हैं।)
I use
1. Sea, See –
Sea -The ship is sailing on the sea.
See – I see with my eyes.

2. Sale, Sail –
Sale – Bachoomal has the largest sale.
Sail – Children sail boats in a pond.

3. Sell, Cell –
Sell – He sells vegetables.
Cell – He lives in a small cell.

4. Knew, new –
Knew – He knew my name.
New – We wear new clothes on Diwali.

5. There, their –
There – There are four students in the class.
Their – They do their work.

6. Peace, Piece –
Peace – There was peace in the forest.
Piece – He gave me a piece of cake.

7. Blue, Blew –
Blue – The sky is blue.
Blew – He blew a whistle.

8. Heard, herd –
Heard – I heard a great noise.
Herd – A herd of cows was grazing.

9. Right, write –
Right – He knew the right answer.
Write – I write with my left hand.

10. Hare, hair –
Hare – Hare runs very fast.
Hair – have long and smooth hair.

11. Fair, Fare –
Fair – I went to a fair with my family.
Fare – Train fare is increasing rapidly.

12. Quiet, Quite –
Quiet – You must be quiet in the class.
Quite – He waited for quite a long period.

13. Plain, Plane –
Plain – He is wearing a plain blue shirt.
Plane – I flied by a plane to Delhi.

14. Hear, Here –
Hear – We hear with our ears.
Here – Please come here.

15. Ate, Eight
Ate – He ate two ice creams.
Eight – Octopus has eight legs.

16. Bye, Buy –
Bye – He bade good bye to his friends.
Buy – I went to market to buy books.

17. Weak, Week –
Weak – He is a weak boy.
Week – There are seven days in a week.

18. One, Won –
One – One comes before two.
Won – He won a prize in academics.

19. I, Eye
I – I am a beautiful girl.
Eye – We see with our eyes.

20. Hour, Our
Hour – He is a late by one hour.
Our – The name of our country is India.

MP Board Class 8th General English Grammar-15

21. One Word Substitution
(अनेक शब्दों को लिए एक शब्द):

1. One who takes care of your teeth. Dentist
2. A person who uses a type writer. Typist
3. One who flies a plane. Pilot
4. A person who sells medicines. Chemist
5. One who travels in public transport like bus, train or plane. Passenger
6. A person who pays rent for the use of a house. Tenant
7. One who sells goods for his company. Agent
8. One who makes wooden furniture. Carpenter
9. A woman expecting to give birth to a baby. Pregnant
10. Place where you were born. Motherland
11. A person who fights cases in court. Lawyer
12. An official letter to make an arrest or search. Warrant
13. A person in an officer or shop who is in-charge of money. Cashier
14. One who teaches. Teacher
15. The flight of birds from one part of the world to another. Migration
16. A person who makes breads, cakes etc. Baker
17. One who is in-charge of a part of a news paper and magazine. Editor
18. A person who cuts hair. Barber
19. A cook in a hotel, restaurant. Chef
20. A person who writes poems. Poet
21. A person who grows or sells flowers. Florist
22. Animals that live in water. Aquatic
23. A person who believes that there is no God. Atheist
24. A disease which spreads by contact. Contagious
25. A disease which spreads rapidly among many people in the same place for a time. Epidemic

22. Prefix:

It is a letter or a group of letters placed at the beginning of a word to alter its meaning. (वे शब्दांश जो किसी शब्द से पहले जोड़े जाते हैं उन्हें उपसर्ग कहते हैं। ये शब्द का अर्थ बदल देते हैं।)
Dis + agree = Disagree

MP Board Class 8th General English Grammar-16

23. Suffix:

A letter or group of letters added at the end of a word to form a derivative.
जो शब्दों श primary word के अन्त में जोड़े जायें उसे Suffix कहत है।

MP Board Class 8th General English Grammar-19
24. Silent Latter:

वे शब्दांश जो लिखे तो जाते हैं पर बोले नहीं जाते, मूक शब्दांश कहलाते हैं। जैसे –

MP Board Class 8th General English Grammar-21

25. Sound of Animals:

MP Board Class 8th General English Grammar-23

MP Board Class 12th Hindi Swati Solutions गद्य Chapter 6 तात्या टोपे

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MP Board Class 12th Hindi Swati Solutions गद्य Chapter 6 तात्या टोपे (एकांकी, डॉ. सुरेश शुक्ल ‘चन्द्र’)

तात्या टोपे अभ्यास

तात्या टोपे अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मेजर मीड ने तात्या टोपे को पकड़ने के लिए क्या सुझाव दिया?
उत्तर:
मेजर मीड ने नेपियर को तात्या टोपे को पकड़ने के लिए सुझाव दिया कि “हमें अपनी सैनिक शक्ति में वृद्धि करनी होगी।”

प्रश्न 2.
एकांकी में तात्या की वाणी का क्या प्रभाव बताया गया है?
उत्तर:
एकांकी में बताया गया है कि तात्या की वाणी में महान शक्ति है। वह जहाँ बोलता है,क्रान्ति की आग फूंक देता है।

प्रश्न 3.
तात्या नरवर के राजा मानसिंह के संरक्षण में क्यों आये?
उत्तर:
मानसिंह तात्या के विश्वसनीय मित्र थे,एक वर्ष से दौड़ते-दौड़ते थक गये थे तथा उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ चुका था। इस कारण वे मानसिंह के संरक्षण में आये।

प्रश्न 4.
तात्या को किस गुप्त स्थान पर रखा गया था? (2010)
उत्तर:
तात्या को पाडौन के जंगल में एक गुप्त स्थान पर रखा गया था।

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तात्या टोपे लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मीड के शब्दों में तात्या टोपे के युद्ध-कौशल का वर्णन कीजिये?
उत्तर:
मीड ने कहा था-तात्या टोपे में कमाल का हुनर है। वह अपने में असीम है। उसमें जादू की-सी करामात है। उसके पास हजारों सैनिक हैं, भयंकर तोपें और शस्त्र हैं,शत्रु के सामने आने से भी नहीं चूकता। उसकी वाणी क्रान्ति की आग फैंक देती है। शारीरिक शक्ति और बुद्धि से भी वह अपराजेय है। उसकी सैन्य-संचालन शक्ति आश्चर्य में डाल देती है। उसमें बिजली की सी फुर्ती है।

प्रश्न 2.
राज-महिलाओं को किस प्रकार बन्धक बनाया गया?
उत्तर:
मानसिंह के एक सगे सम्बन्धी नारायण देव ने विश्वासघात किया। जिस समय मेजर मीड मानसिंह के पास आये थे,नारायण देव मे महल में घुसकर प्रहरियों को हटा दिया तथा सरकारी सैनिक वेश बदलकर तैनात कर दिये गये। मेजर मीड के दरबार से निकलते ही गुप्तचरों को इशारा किया गया। पलक झपकते ही सैकड़ों सैनिक महल में घुस गये। मानसिंह के सैनिकों के पहुंचने से पहले महल खाली हो चुका था। इस प्रकार राज-महिलाओं को बन्धक बनाया गया।

प्रश्न 3.
विक्रमसिंह ने तात्या को संरक्षण में सुरक्षित रखने के लिए किस प्रकार की व्यवस्था की थी?
उत्तर:
विक्रमसिंह ने पाडौन के जंगल में एक गुप्त स्थान पर तात्या टोपे के निवास की व्यवस्था की थी तथा सुरक्षा के लिए गुप्तचर और सैनिक भी नियुक्त कर दिये थे। सरकार की पकड़ से सुरक्षित रखने के लिए पाडौन के जंगल में पर्याप्त सैनिक पहुँचा दिये थे। विक्रमसिंह स्वयं भी उनकी रक्षा के लिए प्रयत्नशील थे।

प्रश्न 4.
तात्या को सौंपने के लिए मीड ने मानसिंह को कौन-कौन से प्रलोभन दिये?
उत्तर:
तात्या को सरकार को सौंपने के लिए समझाते हुए मेजर मीड ने कहा, “मानसिंह जी, कोरी भावुकता में मत बहिए। मैं आपके हित में कह रहा हूँ, तात्या को मेरे हवाले कर दीजिये। इससे सरकार आपको बहुत-सा पारितोषिक देगी। राजकर से आप मुक्त कर दिये जायेंगे, आपका राज्य भी एक स्वतन्त्र स्थायी राज्य बना दिया जायेगा।” इस प्रकार, जनरल मीड द्वारा मानसिंह को अनेक प्रलोभन दिये गये।

प्रश्न 5.
राज-महिलाओं को छुड़ाने के लिए, विक्रमसिंह का “जैसे को तैसा” सिद्धान्त क्या था?
उत्तर:
राज-महिलाओं को दुश्मनों के चंगुल से छुड़ाने का “जैसे को तैसा” सिद्धान्त था-एक वीर सैनिक जिसने सहर्ष अपनी बलि स्वीकार की थी, उसे तात्या टोपे के स्थान पर सरकार के हवाले कर दिया गया। सरकार उस जाली वीर को ही तात्या समझ बैठी, क्योंकि अंग्रेजों को तात्या की दैहिक पहचान नहीं थी,फलतः राज-महिलाओं को छोड़ दिया गया तथा उस वीर को तुरन्त फाँसी दे दी गई।

तात्या टोपे दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एकांकी के तत्त्वों के नाम लिखते हुए ‘तात्या टोपे’ एकांकी के किसी एक तत्त्व पर विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
डॉ. सुरेश शुक्ल ‘चन्द्र’ द्वारा लिखित ऐतिहासिक एकांकी ‘तात्या टोपे’ में तात्या टोपे के जीवन की उस घटना को लिया गया है जिसमें तात्या, महाराज मानसिंह के संरक्षण में रह रहे थे और अंग्रेज उन्हें पकड़ना चाहते थे। एकांकी की समीक्षा हेतु एकांकी के निम्नलिखित तत्त्वों को ध्यान में रखना होता है-
(1) कथानक :
प्रस्तुत नाटक का कथानक ऐतिहासिक है, जिसमें प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम (1857) के सेनानायक तात्या टोपे के जीवन की एक घटना को लिया गया है। देशभक्ति, सच्ची मित्रता, जैसे को तैसा सिद्धान्त, आत्म बलिदान जैसे गुणों को साकार किया है। कथानक में आरम्भ, मध्य, चरम सीमा तथा उद्देश्य को बड़े सुन्दर ढंग से बताया गया है। कथानक को चार दृश्यों में रखा गया है। कथानक में जिज्ञासा बराबर बनी रही है। शिथिलता कहीं भी नहीं आने पायी है।

(2) पात्र या चरित्र :
चित्रण-एकांकी का नायक तात्या टोपे है। सम्पूर्ण कथानक उसी के चारों ओर घूमता है। यद्यपि एकांकी में वह बहुत कम दिखायी देते हैं। नायक देशभक्त,सच्चा वीर, रणकुशल, साहसी, परिश्रमी योद्धा, सहृदयी, भावुक आदि गुणों से सुशोभित है। दूसरा प्रमुख पात्र मानसिंह है जो तात्या का मित्र है। मानसिंह राष्ट्र के प्रति समर्पित, प्रणपालक, निडर, साहसी और आदर्श मित्र है। तीसरा पात्र विक्रम सिंह है जो कर्त्तव्यपालक के साथ ‘शठे शाठ्यं समाचरेत्’ की नीति में विश्वास रखते हैं। अंग्रेज सेना के अधिकारी ‘नेपियर’ और ‘मीड’ का चरित्र दमनकारी और षड्यन्त्रकारी है। एक अन्य महत्त्वपूर्ण पात्र है जो मंच पर नहीं है। वह है तात्या के स्थान पर बलि होने वाला युवक।

(3) संवाद या कथोपकथन :
एकांकी के संवाद संप्रेषणीय हैं। छोटे-छोटे वाक्यों में गहन अर्थ का समायोजन है, जैसे-
मानसिंह – क्या! राज-महिलाओं को सरकारी सैनिक पकड़ ले गये?
प्रतिहारी – हाँ,महाराज।।
मानसिह – यह कैसे हुआ? क्या वहाँ सैनिक नहीं थे?
प्रतिहारी – थे, पर धोखा दिया गया।
मानसिंह – कैसा धोखा?
दो-तीन स्थान पर कथन अति विस्तृत हो गये हैं, परन्तु उनमें शिथिलता कहीं नहीं है।

(4) भाषा-शैली :
सम्पूर्ण एकांकी की भाषा सहज और सुबोध है परन्तु भाषा का रूप संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली है। लोकोक्तियों व मुहावरों का प्रयोग भाषा में सजीवता ले आया है, जैसे-आस्तीन का साँप, मृत्यु के घाट उतारना आदि। कमाल और हुनर, फर्ज, करामात, फुरती, इनाम, शोहरत जैसे-प्रचलित उर्दू के शब्दों से भाषा में चंचलता है। प्रतिहारी के मुख से संस्कृत के शब्द बड़े अटपटे लगते हैं।

(5) देशकाल और वातावरण :
एकांकी में भारत के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के समय की घटना को लिया गया है, जिस समय एक ओर भारतीयों में देशभक्ति तथा त्याग था तो शासक वर्ग दमन और षड्यन्त्र रचना में लगा था। भारतीयों को लालच देकर कर्त्तव्य-पथ से विचलित किया जा रहा था। कुछ भारतीय देश के प्रति गद्दारी कर रहे थे।

(6) उद्देश्य :
प्रस्तुत एकांकी ‘तात्या टोपे’ ऐतिहासिक एकांकी है, जिसमें 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानायक के माध्यम से देशभक्ति, सत्य, ईमानदारी, स्वदेश-रक्षा, मानवीय गुणों की स्थापना, नारी के प्रति सम्मान आदि गुणों को उजागर करने का प्रयत्न किया गया है। तत्कालीन भारत की राजनैतिक दशा से पाठकों को परिचित कराकर बताया गया है कि स्वतन्त्रता हेतु कितने लोगों के प्राण गये हैं। उस समय देश में गद्दार लोग भी थे उनके दुर्गुणों को स्पष्ट करना है। व्यक्ति से देश अधिक महत्त्वपूर्ण है। संगठन से ही शत्रु को जीता जा सकता है।

(7) अभिनेयता या रंगमंचीयता :
यह एकांकी मंचीय दृष्टि से सफल एकांकी है। चारों दृश्य में स्थान व समय मंच पर अच्छी प्रकार से दिखाये जा सकते हैं। समस्त घटनाएँ मंचनीय हैं। पात्रों के वार्तालाप से ही घटनाओं का ज्ञान हो जाता है। साथ ही, पात्र भी उचित संख्या में है। वन, राजसभा और उद्यान के सैट लगाने में कोई असुविधा नहीं होगी। वेशभूषा भी कोई विशेष प्रकार की निर्देशित नहीं है। भाषा सरल, वाक्य अधिकतर छोटे तथा तकनीकी व्यवस्था उचित है।

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प्रश्न 2.
वीर सैनिक की बलि से तात्या टोपे के भावुक हृदय पर क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर:
वीर सैनिक की बलि से तात्या टोपे का भावुक हृदय विचलित हो गया और वह कह उठे कि उनके प्राणों की रक्षा के लिए एक निर्दोष का खून। तात्या कायर नहीं है। युद्ध क्षेत्र में लड़ते-लड़ते मर जाना तात्या को स्वीकार है। पर वीर के बलिदान ने तात्या को कलंकित कर दिया। तात्या के सम्पूर्ण जीवन का शौर्य तथा त्याग निरीह हत्या के खून में बह गया। वह कहते हैं कि यह कलंक धोना ही होगा। खून का बदला चुकाना आसान नहीं है। सेना संगठित कर दूंगा और जब तक उस वीर के खून की एक-एक बूंद का बदला नहीं चुका लूँगा तब तक शान्ति नहीं लूँगा।

तात्या भगवान से प्रार्थना करते हैं, “हे प्रभु! अब मुझे शक्ति दो, जिससे उस वीर के खून का बदला ले सकूँ। अब मुझे फिर से रणचण्डी का आह्वान करना है और अपने को गुप्त रखते हुए उस अमरात्मा को शान्ति प्रदान करनी है! जब तक बदला नहीं चुका लूँगा तब तक संन्यासी वेश में रहकर जीवन-पर्यन्त दुःखों का ही वरण करते हुए इस गुरुतर कार्य को निभाऊँगा। अब तक मैं अपने लिए जीता रहा हूँ, अब उसके और देश के लिए जीऊँगा।

इस कार्य को वह विश्वासघात मानते हैं। इस प्रकार हम पाते हैं कि तात्या का भावुक हृदय विचलित हो उठा और उन्होंने उस कलंक को धोने का प्रण लिया।

प्रश्न 3.
“तात्या टोपे का जीवन राष्ट्रभक्ति का पर्याय था” विवेचना कीजिये।
उत्तर:
डॉ. सुरेश शुक्ल ‘चन्द्र’ ने अपने ऐतिहासिक एकांकी ‘तात्या टोपे’ में तात्या टोपे के जीवन को राष्ट्रभक्ति का पर्याय स्वीकारा है। तात्या टोपे प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के प्रमुख सेनानायक थे। उनकी वीरता और देशभक्ति ने अंग्रेजों को हिला दिया था। अंग्रेज सैनिक बल तथा षड्यन्त्रों के द्वारा भी उन्हें बन्दी नहीं बना सके। अंग्रेजों की षड्यन्त्रकारी दमन नीति के संदर्भ में तात्या टोपे की राष्ट्रभक्ति का व्यापक रूप दर्शनीय है। उनके मित्र मानसिंह तात्या से कहते हैं कि देश के लिए तात्या जैसे वीरव्रती राष्ट्रभक्त की आवश्यकता है।

अंग्रेजी सेना के सर राबर्ट्स नेपियर जनरल मीट से तात्या की देशभक्ति के विषय में कहते हैं, “तात्या सच्चा देशभक्त है, मीड साहब। वह जिधर से निकल जाता है, वहीं से लोग उसके सहायक बन जाते हैं। सुना है,उसकी वाणी में महान शक्ति है। वह जहाँ बोलता है,क्रान्ति की आग फूंक देता है।” इसी प्रकार मीड आगे कहते हैं, भारत का बच्चा-बच्चा तात्या की क्रान्ति से परिचित है।”

तात्या की राष्ट्रभक्ति की चरम भावना एकांकी के अन्तिम कथन में मिलती है। तात्या कहते हैं, “देश को एकता के सूत्र में बाँधना है। क्रान्ति के बीज बोते हुए राष्ट्र प्रेम को रग-रग में प्रवाहित करना है। ……. अब तक मैं अपने लिए जीता रहा हूँ, अब उसके और देश के लिए जीऊँगा।

यह उदाहरण तात्या की देशभक्ति का सच्चा पर्याय है। अतः हम यह कह सकते हैं कि तात्या टोपे का जीवन राष्ट्रभक्ति का पर्याय था।

प्रश्न 4.
मानसिंह के चरित्र की कौन-कौन सी विशेषताएँ आपको प्रभावित करती हैं और क्यों?
अथवा
मानसिंह के चरित्र की चार विशेषताएँ बताइए। (2014)
उत्तर:
डॉ.सुरेश शुक्ल ‘चन्द्र’ के प्रसिद्ध एकांकी ‘तात्या टोपे’ में मानसिंह तात्या टोपे का सच्चा मित्र है। नायक न होते हुए भी वह सम्पूर्ण एकांकी में छाया हुआ है। तात्या भी उनके कहे अनुसार कार्य करते हैं। उनके चरित्र की अग्रलिखित विशेषताएँ हमें प्रभावित करती हैं-
(1) सच्चा मित्र :
मानसिंह तात्या का विश्वसनीय मित्र है। वह थके व अस्वस्थ मित्र को संरक्षण देना अपना कर्त्तव्य समझता है। अंग्रेजों से उसकी रक्षा करने के लिए उसे पाडौन के जंगल में गुप्त स्थान पर छिपाकर रखता है तथा रक्षा हेतु पर्याप्त सैनिक व गुप्तचर नियुक्त करता है। दूसरी ओर, जब तात्या प्राण त्यागने के लिए कहते हैं तो सच्चे मित्र के समान उन्हें मार्ग निर्देशित करते हैं।

(2) वीरों का पूजक :
मानसिंह वीरों का सम्मान करना जानता है,तभी तो वह विक्रमसिंह से कहता है, “इस वीर सैनानी की रक्षा तन, मन, धन की बाजी लगाकर करनी होगी।” तात्या की वीरता, साहस और कौशल सराहनीय है।

(3) निडर व साहसी :
मानसिंह जनरल मीड को निडरता से उत्तर देते हैं कि तात्या उनके संरक्षण में नहीं आतिथ्य में है। उन्हें कोई नहीं पकड़ सकता। अतिथि के लिए मैं सब कुछ उत्सर्ग कर सकता हूँ। मैं अपने सम्पूर्ण राज्य को विनष्ट होता देख सकता हूँ। देशभक्त की रक्षा करना स्वाभिमान का विषय है। क्षत्रिय मृत्यु से नहीं डरते।

(4) प्रलोभनों से दूर :
मीड का कथन है कि तात्या को अंग्रेजों के हवाले करने पर सरकार आपको पारितोषिक देगी,राज्य कर से मुक्त कर देगी तथा एक स्वतन्त्र स्थायी राज्य का मालिक बना देगी। इस पर मानसिंह उत्तर देते हैं, प्रलोभन से कर्तव्य ऊँचा है। तात्या को कभी आपके हवाले नहीं कर सकता।”

(5) नारी का सम्मान करने वाला :
जब राज-महिलाओं को सरकारी सैनिक पकड़कर ले जाते हैं, तो मानसिंह कहते हैं, “यह घटना मेरी राजमर्यादा पर अमिट कलंक है। प्राणों की बाजी लगाकर महिलाओं को आजाद कराना होगा।”

(6) कर्त्तव्यपरायण व प्रणपालक :
तात्या की रक्षा करना मानसिंह अपना परम कर्त्तव्य समझते हैं यही उनका प्रण है। वह सेनापति से कहते हैं कि तात्या की रक्षा करना अपना प्रथम कर्तव्य है। तात्या भारत माँ का सच्चा सपूत है। उससे भारत को बहुत-सी आशाएँ हैं। इस वीर की रक्षा हमें सब कुछ देकर करनी है। मानसिंह तात्या से कहते हैं, “मित्र की रक्षा करना मित्र का कर्तव्य है।”

(7) सलाहकार :
वीर के बलिदान को सुनकर तात्या विचलित हो जाते हैं, तो मानसिंह तात्या को सलाह देते हैं, “आप केवल सैनिकों को युद्ध शिक्षा दीजिए और उनका मार्ग-प्रशस्त कीजिये। यह बदला भी कुछ कम नहीं है। इससे भी देश की सेवा होगी।

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तात्या टोपे भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
दिये गये सामासिक शब्दों का विग्रह कर समास का नाम लिखिए
मान-रक्षा, राज-मर्यादा, सैन्य-शक्ति, युद्ध-शिक्षा, लंबोदर, नवरत्न, हँसी-खेल।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Swati Solutions गद्य Chapter 6 तात्या टोपे 1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्यों में से सरल, मिश्र एवं संयुक्त वाक्य छाँटकर लिखिए

  1. राज-महिलाओं का अपहरण केवल इसलिए हुआ कि महाराज घबड़ाकर और अपनी मान-रक्षा के लिए तात्या को सरकार के हवाले कर दें।
  2. धैर्य से काम लेना होगा,महाराज!
  3. युद्ध-क्षेत्र में लड़ते-लड़ते मर जाना तात्या को स्वीकार है, पर एक वीर के बलिदान द्वारा स्थायी रहना स्वीकार नहीं।
  4. मैं इस राज को छिपा नहीं सकता।
  5. जब तक देश स्वतन्त्र नहीं हो जाता तब तक हमारे कार्यों की इतिश्री नहीं।
  6. अभी तो देश को एकता के सूत्र में बाँधना है और क्रान्ति के बीज बोते हुए राष्ट्रप्रेम को रग-रग में प्रवाहित करना है।

उत्तर:

  1. मिश्र वाक्य
  2. सरल वाक्य
  3. संयुक्त वाक्य
  4. सरल वाक्य
  5. मिश्र वाक्य
  6. संयुक्त वाक्य।

तात्या टोपे पाठ का साराश

प्रतिभासम्पन्न लेखक ‘डॉ. सुरेश शुक्ल ‘चन्द्र’ द्वारा लिखित एकांकी ‘तात्या टोपे’ एक ऐतिहासिक एकांकी है। इस एकांकी में लेखक की ऐतिहासिक और राजनैतिक दृष्टि सक्रिय है। एकांकी का कथानक तात्या टोपे के जीवन से सम्बन्धित एक विशेष घटना की ओर इंगित करता है।

तात्या टोपे ने अपने रण-कौशल से अंग्रेजों को आश्चर्यचकित तथा भयभीत कर दिया था। जिस कारण अंग्रेज उन्हें व्यूह-रचना के द्वारा कैद करना चाहते थे। सात सेनाओं के द्वारा पीछा किया जाने पर भी अंग्रेजों को सफलता नहीं मिली । एक वर्ष तक भागते-भागते तात्या बीमार पड़ गये तब वह अपने मित्र मानसिंह के संरक्षण में पाडौन के जंगल में एक गुप्त स्थान पर रहे। अंग्रेज सैनिक मीड मानसिंह से तात्या को माँगता है तथा अनेक प्रलोभन भी देता है परन्तु मानसिंह कहते हैं, वे मेरे अतिथि हैं अतिथि की रक्षा करना परम कर्त्तव्य है, अतः तात्या को नहीं दे सकता।” इस पर अंग्रेज नारायण देव की सहायता से मानसिंह के राजभवन के अन्तःपुर की महिलाओं का अपहरण कर लेते हैं और बदले में तात्या को माँगते हैं।

महामन्त्री विक्रमसिंह तात्या के बजाय एक अन्य देशभक्त को भेज कर महिलाओं को मुक्त करा लेते हैं। अंग्रेज तात्या को शारीरिक रूप से नहीं पहचानते थे इस कारण उसे ही तात्या समझ कर फाँसी दे देते हैं। तात्या को जब उस वीर के उत्सर्ग का पता चलता है तो वे भावुक हो उठते हैं। अंग्रेजों के सामने प्रस्तुत हो अपने कलंक को धोना चाहते हैं परन्तु मानसिंह तात्या को ऐसा नहीं करने देते। तात्या को समझाते हैं कि तात्या जैसे वीर, बुद्धिमान, देशभक्त, निडर, साहसी आदि गुणों से युक्त व्यक्ति की देश को आवश्यकता है। अतः वे नवयुवकों को युद्ध का प्रशिक्षण देने के लिए तैयार हो जाते हैं, आजीवन संन्यासी रहकर राष्ट्र को समर्पित हो जाते हैं। समस्त घटनाएँ तात्या के चारों ओर घटित होती हैं परन्तु पट पर उनका अवतरण बहुत थोड़े समय के लिए हुआ है। वही एकांकी के नायक हैं। एकांकी का शीर्षक भी विषयानुकूल है।

तात्या टोपे कठिन शब्दार्थ

हुनर = गुण। फर्ज = कर्त्तव्य। असीम = व्यापक। करामात = कारगुजारी। अपराजेय = जिसे जीता न जा सके। निर्दिष्ट = बताया हुआ। शोहरत = प्रसिद्ध, यश। राजद्रोही = देश के प्रति गद्दार। सहज = सरलता। सपूत = सुपुत्र। स्वतः = स्वयं। अस्थि-पंजर = हड्डियों का ढाँचा। लाचार = मजबूर। सराहनीय = प्रशंसा के योग्य। अनुरोध = प्रार्थना। लोहा लेना = टकराना। उत्सर्ग = बलिदान। हवाले = सुपुर्द। पारितोषिक = इनाम। प्रलोभन = लालच। नश्वर = नाशवान। मुक्ति = आजादी। विनष्ट = बरबाद। आवेश = जोश। समुचित = उचित प्रकार से। प्रहरियों = पहरेदारों। निरर्थक = बेकार। निः प्रयोजन = बिना उद्देश्य। उपयुक्त = उचित। सहस्त्र = हजार। अनुचर = नौकर चिकमा = धोखा। राज = रहस्य। निरीह = निर्दोष। सहर्ष = खुशी से। प्रवृत्त = लग जाना। इतिश्री = पूर्ण,समाप्त। समर्पण = त्याग। विसर्जित = त्यागना। कटिबद्ध = तैयार। गुरुतर = महान। जीवन पर्यन्त = जीवन भर। वरण = ग्रहण।

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तात्या टोपे संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

(1) है, पर तात्या छोटा होता हुआ भी अपने में असीम है। हम लोग पीछा करते-करते निराश हो गये हैं। उसमें जादू की-सी करामात है। कभी तो उसके पास हजारों सैनिक रहते हैं, क्रान्तिकारियों की सेनाएँ अचानक आ जाती हैं; तोपों और शस्त्रों की गड़गड़ाहट से हम लोग भयभीत हो जाते हैं। कभी एक छोटी-सी टुकड़ी लिए ही सामने से निकल जाता है।

सन्दर्भ :
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘तात्या टोपे’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक डॉ. सुरेश शुक्ल ‘चन्द्र’ हैं।

प्रसंग :
सर राबर्ट्स नेपियर मेजर मीड से कहते हैं कि एक छोटे से भारतीय क्रान्तिकारी को पकड़ने के लिए सात सेनाएँ लगी हैं फिर भी वह पकड़ में नहीं आता है। यह आश्चर्य का विषय है। तब मीड कहते हैं यह एक आश्चर्य की ही तो बात है।

व्याख्या :
मीड नेपियर के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहते हैं कि कितने आश्चर्य की बात है कि तात्या जो एक छोटा-सा क्रान्तिकारी है परन्तु उसमें सीमा रहित शक्ति है, वह अपने में बहुत ही व्यापक है। अंग्रेजी सेना की सात टुकड़ियाँ उसका पीछा कर रही हैं,एक वर्ष हो गया पर वह पकड़ में नहीं आता क्योंकि उसमें जादूगर जैसी कारगुजारी है। कभी उसकी सेना में हजारों सैनिक रहते हैं, तात्या की सेना अचानक आकर उपस्थित हो अंग्रेजी सेनाओं पर हमला कर देती है, जिससे अंग्रेजी सैनिक भयातुर हो जाते हैं। वे अपने को कमजोर महसूस करने लगते हैं। तात्या की तोपें आग उगलने लगती हैं,भयंकर आवाज से शत्रुओं को डरा देती हैं। यहाँ तक कि स्वयं तात्या थोड़े से सैनिकों के साथ अंग्रेजी सेना के सामने से धोखा देकर निकल जाता है, क्योंकि अंग्रेजों को तात्या की दैहिक पहचान नहीं है। इस अनभिज्ञता का पूरा-पूरा लाभ उठाना वह जानता है। अंग्रेज भी तात्या की इस चतुराई से आश्चर्यचकित तथा अपनी असफलता पर निराश होते हैं।

विशेष :

  1. तात्या की चतुराई, रण-कौशल के साथ अंग्रेजी सेना की असमर्थता और निराशा का परिचय मिलता है।
  2. भाषा सरल तथा बोधगम्य बोलचाल की है।
  3. संस्कृत की तत्सम शब्दावली के साथ उर्दू के शब्दों का प्रयोग।
  4. शैली व्याख्यात्मक।

(2) हे प्रभु! अब मुझे शक्ति दो, जिससे उस वीर के खून का बदला ले सकूँ। अब मुझे फिर से रणचण्डी का आह्वान करना है और अपने को गुप्त रखते हुए उस अमरात्मा को शान्ति प्रदान करनी है। अतः जब तक बदला नहीं चुका दूँगा तब तक संन्यासी वेश में रहूँगा और जीवनपर्यन्त दुःखों का ही वरण करते हुए इस गुरुतर कार्य को निभाऊँगा। अब तक मैं अपने लिए जीता रहा हूँ, अब उसके और देश के लिए जीऊँगा। (2009, 11)

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
एकांकी के अन्तिम गद्यांश में तात्या टोपे अपने मित्र मानसिंह से कहते हैं कि तात्या के स्थान पर फाँसी चढ़े उस आदमी के बलिदान का बदला वह अवश्य लेंगे और देश को भी आजाद करायेंगे।

व्याख्या :
तात्या भगवान से प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि हे भगवान्! उन्हें उस बलिदानी युवक, जो तात्या के रूप में फाँसी पर चढ़ गया था, के खून का बदला लेने की शक्ति प्रदान करें। फिर से अंग्रेजों से युद्ध करना है और निर्दोष की हत्या का बदला लेना है। बदला पूरा न होने तक तात्या अपने को गुप्त व वेश बदल कर रखेंगे। बदला पूरा होने पर ही उस अमर आत्मा को शान्ति मिलेगी। इस बदले को वह एक पवित्र और महान कार्य मानते हैं। इस महान कार्य को करने के लिए वे संन्यासी के रूप में जीवन भर रहने का प्रण करते हैं। साथ ही वे जीवन भर कष्ट को सहन करने के लिए तैयार हैं। वे सच्चे देशभक्त और वीर के समान जीवन व्यतीत करते रहे व भविष्य में भी इसी प्रकार के बने रहने का प्रण करते हैं। अन्त में,वे कहते हैं कि अभी तक वह अपने लिए जीवित रहे परन्तु अब वह उस देशभक्त बलिदानी युवक का बदला लेने तथा देश की सेवा के लिए जीवित रहेंगे। तात्या एक सच्चे देश भक्त थे। ऐसे देशप्रेमियों ने ही भारत को स्वतन्त्र कराया था।

विशेष :

  1. तात्या टोपे की देशभक्ति व भावुकता का ज्ञान होता है।
  2. संस्कृत शब्दों से युक्त खड़ी बोली ओजपूर्ण है।
  3. शैली ओजपूर्ण तथा साहित्यिक है।

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 4 रहिमन विलास

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 4 रहिमन विलास (कविता, रहीम)

रहिमन विलास पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

रहिमन विलास लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आँखों से बहने वाले आँसू क्या व्यक्त कर देते हैं? (M.P. 2010)
उत्तर:
आँखों से बहने वाले आँसू मनुष्य के मन का दुख व्यक्त कर देते हैं।

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प्रश्न 2.
बिन पानी के कौन महत्त्वहीन हो जाते हैं? (M.P. 2009)
उत्तर:
बिन पानी के मोती, मनुष्य और चून महत्त्वहीन हो जाते हैं।

प्रश्न 3.
कवि ने सच्चा मित्र किसे कहा है? (M.P. 2011)
उत्तर:
कवि में सच्चा मित्र उसे कहा है, जो संकटकाल या विषम परिस्थिति में भी मित्र के साथ रहता है।

प्रश्न 4.
छोटों के प्रति बड़ों का क्या कर्तव्य है?
उत्तर:
छोटों के प्रति बड़ों का कर्तव्य है कि वे छोटों के उपद्रव (गलतियों) को क्षमा कर दें।

प्रश्न 5.
कवि ने जीवन की सार्थकता के संबंध में क्या कहा है?
उत्तर:
कवि ने कहा है कि जीवन की सार्थकता देने के भाव में ही है।

रहिमन विलास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
समुद्र के जल की अपेक्षा कुएँ के जल की प्रशंसा क्यों की है? (M.P. 2010; 2012)
उत्तर:
कुएँ के जल को पीकर प्यासे की प्यास बुझती है। उसके हृदय को संतोष का अनुभव होता है जबकि समुद्र के जल से प्यासा प्यास नहीं बुझा पाता है। वह प्यासा ही रह जाता है। अतः कुएँ का जल संतोषदायक है इसीलिए उसकी प्रशंसा की है।

प्रश्न 2.
कुशलता की कामना कब निष्फल हो जाती है?
उत्तर:
कुशलता की कामना उस समय निष्फल हो जाती है, जब मनुष्य कुसंगति में पड़ जाता है। कुसंगति के कारण मनुष्य की कुशलता में बाधा उत्पन्न होती है। कुसंगत और कुशलता दोनों साथ-साथ नहीं हो सकते।

प्रश्न 3.
कवि रहीम ने किसे समझाना उचित नहीं माना है?
उत्तर:
कवि रहीम ने ऐसे व्यक्ति को समझाना उचित नहीं माना है, जो रात-दिन, सोते-जागते अनकही अर्थात् बिना सर-पैर की निरर्थक बातें करता रहता है।

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प्रश्न 4.
कवि मोतियों के हार के माध्यम से क्या संदेश देना चाहता है? (M.P. 2009)
उत्तर:
कवि मोतियों के हार के माध्यम से संदेश देना चाहता है कि श्रेष्ठ लोगों अथवा अपने लोगों के रूठ जाने पर उन्हें बार-बार मना लेना चाहिए। प्रेम से साथ रहने पर ही शोभा होती है।

प्रश्न 5.
रहीम ने धन को महत्त्व क्यों दिया है?
उत्तर:
रहीम ने धन को इसलिए महत्त्व दिया है क्योंकि धन से मित्र बनते हैं। धन में ही मित्र बनाने की शक्ति होती है। निर्धन के कम मित्र बनते हैं।

प्रश्न 6.
“लोग भरम हम पै.धरें, याते नीचे नैन”क्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस पंक्ति का आशय है-लोग भ्रमवश रहीम को दाता मानकर उनकी जय-जयकार करते हैं। इसी कारण कवि के मन में संकोच उत्पन्न होता है। उसे लज्जा आती है कि देने वाला तो ईश्वर है। मैं तो एक साधारण व्यक्ति हूँ। यह सोचकर ही दान देने वाले कवि रहीम सदा अपनी आँखें नीची किए रहते हैं।

रहिमन विलास भाव-पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव-पल्लवन कीजिए।

प्रश्न 1.
“जाहि निकारो गेह ते, कस न भेद कहि देई।”
उत्तर:
जब किसी को घर से निकाला जाएगा, तो वह घर का भेद दूसरों से क्यों नहीं कहेगा। इस प्रकार घर के सारे भेद दूसरों तक पहुँच जाएँगे। घर का भेदी कभी अच्छा नहीं होता। जब तक वह घर में रहता है तो सारे भेद घर तक सीमित रहते हैं, लेकिन उसको घर से निकालते ही सारे भेद दूसरों तक पहुँच जाते हैं। रामायण में रावण अपने छोटे भाई विभीषण को लंका से निकाल देता है। विभीषण घर से निकाले जाने के बाद राम से आ मिलता है। उसी ने राम को लंका के सारे भेद तथा रावण की मृत्यु का रहस्य भी बता दिया, इसी से जनता में कहावत भी प्रचलित है-घर का भेदी लंका ढावै।

प्रश्न 2.
“खग मृग बसत आरोग्य वन, हरि अनाथ के नाथ।” (M.P. 2011)
उत्तर:
समस्त पशु और पक्षी वन में प्राकृतिक वातावरण में रहते हैं। वन में उन्हें शुद्ध जल और वायु मिलती है। वे साफ पानी पीते हैं और शुद्ध साँस लेते हैं। वन के ही फल-फूल और पत्तियाँ खाकर अपना पेट भरते हैं। वे कभी रोगग्रसित नहीं होते। सदा निरोग रहते हैं। उन्हें औषधियों की आवश्यकता नहीं होती। प्राकृतिक जीवन स्वास्थ्यवर्धक होता है। वन में कोई चिकित्सक नहीं होता। उनके स्वास्थ्य की रक्षा तो ईश्वर ही करता है। अतः स्वस्थ व निरोग रहने के लिए प्राकृतिक वातावरण से ज्यादा से ज्यादा जुड़े रहना चाहिए।

रहिमन विलास भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के हिंदी मानक रूप लिखिएछिमा, गेह, माखन, मीत, रावन।
उत्तर:
क्षमा, गृह, मक्खन, मित्र, रावण।

प्रश्न 2.
समानार्थी शब्दों की सही जोड़ियाँ बनाइए –

  • खग – कमल
  • उदधि – जल
  • अंबु – समुद्र
  • अंबुज – पक्षी

उत्तर :

  • खग – पक्षी
  • उदधि – समुद्र
  • अंबु – जल
  • अंबुज – कमल

प्रश्न 3.
उदाहरण के अनुसार दिए गए शब्द युग्मों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
दिन-दीन:
आज का दिन सुहावना है।
दीन व्यक्ति दया का पात्र है।
कुल-कूल, अंक-अंक, हंस-हँस, वात-बात, खल-खाल।
उत्तर:

  • कुल – ऊँचे कुल में जन्म लेने से ही मनुष्य उच्च नहीं बन जाता।
    कूल – यमुना कूल पर मेला लगा हुआ है।
  • अंक – प्रसन्नता से उसने मुझो अंक में भर लिया।
    अंक – अंक से अंक मिलाकर एक बड़ी विषम संख्या बनाओ।
  • हंस – पक्षियों का राजा होता है।
    हँस – उसने मेरी बात हँस कर उड़ा दी।
  • वात – वह वात रोग से पीड़ित है।
    बात – वह बात करने योग्य नहीं है।
  • खल – खल के साथ न मित्रता अच्छी होती है और न शत्रुता।
    खाल – पशुओं की तो खाल भी काम में आ जाती है।

रहिमन विलास योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
नीति से संबंधित काव्य लिखने वाले कवियों के चित्रों को संकलन कर उनके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 2.
अन्य कवियों के नीति सम्बन्धी दोहों का संकलन कीजिए।
उत्तर:
छात्र अपने विद्यालय के पुस्तकालय से पुस्तकें लेकर स्वयं संकलन करें।

प्रश्न 3.
यदि आपके पड़ोस में कोई कवि हिंदी में काव्य रचना करता हो तो उससे रचना प्राप्त कर पढ़िए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 4.
यदि आपके कुटुम्बीजन आपसे रूठ गए हों तो आप क्या करेंगे? लिखिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

रहिमन विलास परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर –

प्रश्न 1.
आरोग्य बनाने की शक्ति होती है –
(क) नगरीय जीवन में
(ख) प्राकृतिक जीवन में
(ग) ग्रामीण जीवन में
(घ) कृत्रिम जीवन में
उत्तर:
(ख) प्राकृतिक जीवन में।

प्रश्न 2.
कुसंग से कौन-सी अभिलाषा पूरी नहीं होती –
(क) धन-संपत्ति प्राप्ति की
(ख) सुख-शांति प्राप्ति की
(ग) कुशलता प्राप्ति की
(घ) ईश्वर प्राप्ति की
उत्तर:
(ग) कुशलता प्राप्ति की।

प्रश्न 3.
‘देनहार कोउ और है’ के द्वारा संकेत किया गया है – (M.P. 2009)
(क) ईश्वर की ओर
(ख) सम्राट अकबर की ओर
(ग) जनता की ओर
(घ) संसार की ओर
उत्तर:
(क) ईश्वर की ओर।

प्रश्न 4.
रहीम ने किसके जल को धन्य कहा है –
(क) समुद्र के
(ख) तालाब के
(ग) नदी के
(घ) कुएँ के
उत्तर:
(घ) कुएँ के।

प्रश्न 5.
घर की बात घर में ही रखने का संकेत निम्नलिखित दोहे में किया है –
(क) रहिमन अँसुआ नैन गरि
(ख) देनहार कोउ और है
(ग) तौ ही लो जीवो भलो
(घ) छिमा बड़ेन को चाहिए
उत्तर:
(क) रहिमन अँसुआ नैन ढरि।

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प्रश्न 6.
खग मृग बसत आरोग बन, हरि अनाथ के नाथ में अलंकार है –
(क) अनुप्रास अलंकार
(ख) उत्प्रेक्षा अलंकार
(ग) उपमा अलंकार
(घ) दृष्टांत अलंकार
उत्तर:
(घ) दृष्टांत अलंकार।

प्रश्न 7.
रहिमन अंबुज अंबु बिनु में प्रयुक्त अलंकार कौन-सा है?
(क) रूपक अलंकार
(ख) वक्रोक्ति अलंकार
(ग) उदाहरण अलंकार
(घ) अनुप्रास अलंकार
उत्तर:
(घ) अनुप्रास अलंकार।

प्रश्न 8.
सूर्य भी रक्षा नहीं कर सकता किसकी?
(क) जलहीन कमल की
(ख) कर्महीन व्यक्ति की
(ग) कुसंगी व्यक्ति की
(घ) धोखेबाज मित्र की
उत्तर:
(क) जलहीन कमल की।

प्रश्न 9.
श्रेष्ठ मनुष्यों की समानता की गई है –
(क) मोतियों से
(ख) फूलों से
(ग) सीपियों से
(घ) रत्नों से
उत्तर:
(क) मोतियों से।

प्रश्न 10.
बड़े लोगों के व्यक्तित्व शोभा होती है –
(क) दया
(ख) क्षमा
(ग) उत्पात
(घ) अभिमान
उत्तर:
(ख) क्षमा।

प्रश्न 11.
‘देनहार कोउ और है’ के द्वारा रहीमदास ने संकेत किया है – (M.P. 2009)
(क) ईश्वर की ओर
(ख) सम्राट की ओर
(ग) जनता की ओर
(घ) संसार की ओर
उत्तर:
(क) ईश्वर की ओर।

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर करें –

  1. खग-मृग बसत ……… हरि अनाथ के नाथ। (नंदनवन, आरोग्यवन)
  2. महिमा घटी समुद्र की ………. वस्यो पड़ोस। (राक्षस, रावन)
  3. रहीम का पूरा नाम ………. था। (अर्द्धरहीम खानखाना, रहीमदास)
  4. रहीम का जन्म सन् ………. में हुआ था। (1556 ई, 1456 ई.)
  5. रहीम की मृत्यु सन् ………. में हुई। (1620 ई०, 1626 ई०)

उत्तर:

  1. आरोग्य वन
  2. रावन
  3. अर्दुरहीम खानखाना
  4. 1556 ई.
  5. 1626 ई०

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III. निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए – (M.P.2009)

  1. आँखों से बहने वाले आँसू सुख व्यक्त कर देते हैं।
  2. मथते-मथते दही और मठा एक हो जाते हैं।
  3. समुद्र के जल से कुएँ का जल श्रेष्ठ है।
  4. धन में मित्र बनाने की शक्ति नहीं होती है।
  5. भगवान अनाथ के नाथ हैं।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

IV. निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए –

प्रश्न 1.
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 4 रहिमन विलास img-1
उत्तर:

(i) (ङ)
(ii) (ग)
(iii) (घ)
(iv) (ख)
(v) (क)

V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

प्रश्न 1.
कौन निरोग रहते हैं?
उत्तर:
पशु-पक्षी निरोग रहते हैं।

प्रश्न 2.
समुद्र और कुएँ में से किसका जल धन्य है?
उत्तर:
कुएँ का।

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प्रश्न 3.
समुद्र की महिमा क्यों घटी?
उत्तर:
समुद्र की महिमा पड़ोस में रावण के होने से घटी।

प्रश्न 4.
बिनु पानी के कौन महत्त्वहीन हो जाते हैं? (M.P.2009)
उत्तर:
मोती, मनुष्य और चूना।

प्रश्न 5.
कवि ने सच्चा मित्र किसे कहा है?
उत्तर:
संकट के समय सहायता करने वाले को।

रहिमन विलास लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अनेक इलाज करने पर भी व्याधि साथ क्यों नहीं छोड़ती?
उत्तर:
क्योंकि आज के युग में मनुष्य प्राकृतिक वातावरण को छोड़कर कृत्रिम वातावरण में रहना ज्यादा पसंद करता है। इसलिए अनेक इलाज करते हुए भी व्याधि मनुष्य का साथ नहीं छोड़ती।

प्रश्न 2.
मन के दुख को कौन व्यक्त कर देते हैं?
उत्तर:
आँख से निकले आँसू मन के दुख को व्यक्त कर देते हैं।

प्रश्न 3.
‘टूटे सुजन मनाइए, जौ टूटें सौ बार’ में कवि ने किस बात पर बल दिया है?
उत्तर:
इसमें कवि ने इस बात पर बल दिया है कि सज्जनों (श्रेष्ठ व्यक्तियों) तथा अपने आत्मीयजनों के रूठ जाने पर उन्हें बार-बार मनाना चाहिए।

प्रश्न 4.
समुद्र की महिमा किसके कारण घटी?
उत्तर:
समुद्र की महिमा कुसंग के कारण घटी। उसके पड़ोस में अन्यायी और अहंकारी रावण के बसने (रहने) के कारण ही समुद्र को बँधना पड़ा।

प्रश्न 5.
पशु-पक्षी क्यों निरोग रहते हैं?
उत्तर:
पशु-पक्षी निरोग रहते हैं, क्योंकि उनके स्वामी स्वयं ईश्वर हैं तथा वे प्राकृतिक वातावरण के बीच रहते हैं।

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प्रश्न 6.
अपने लोगों के नाराज होने पर हमें क्या करना चाहिए?
उत्तर:
अपने लोगों के नाराज होने पर हमें उन्हें मना लेना चाहिए।

प्रश्न 7.
इस संसार में जीवित रहना कब अनुचित है?
उत्तर:
इस संसार में जीवित रहना तब अनुचित है, जब देने का भाव धीमा पड़ने लगता है या समाप्त होने लगता है।

रहिमन विलास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आत्मसम्मान की रक्षा क्यों की जानी चाहिए?
उत्तर:
मनुष्य को अपने आत्मसम्मान की रक्षा करनी चाहिए क्योंकि सम्मान के बिना समाज में व्यक्ति का कोई महत्त्व नहीं रहता। सम्मानहीन होने पर मनुष्य का महत्त्व समाप्त हो जाता है।

प्रश्न 2.
अच्छे मित्र की क्या पहचान है?
उत्तर:
अच्छे मित्र की पहचान यह है कि विपत्ति के समय भी अपने मित्र का साथ नहीं छोड़ता। वह विपत्ति में अपने मित्र का साथ देता है। जबकि अन्य उसका साथ छोड़कर चले जाते हैं।

प्रश्न 3.
रहीम ने कुएँ और समुद्र में से किसके जल को धन्य कहा है और क्यों? (M.P. 2010, 2012)
उत्तर:
रहीम ने कुएँ और समुद्र में से कुएँ के जल को धन्य कहा है क्योंकि यद्यपि कुआँ आकार में छोटा होता है लेकिन प्यासा व्यक्ति उसके जल को पीकर हृदय में तृप्ति का अनुभव करता है जबकि सेमुद्र आकार में विशाल होता है, परंतु व्यक्ति उसका जल पीकर प्यास नहीं बुझा पाता। वह प्यासा ही रह जाता है।

प्रश्न 4.
कवि मोतियों के हार के माध्यम से क्या संदेश देना चाहता है?
उत्तर:
कवि मोतियों के हार के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि जिस प्रकार कीमती मोतियों का हार टूट जाता है, तो उसे फिर दूसरे धागे में गूंथकर पहनने योग्य बना लिया जाता है, ठीक उसी प्रकार सच्चे मित्रों से, सज्जनों से सम्बन्ध-विच्छेद हो जाने पर उन्हें मनाने का प्रयास करना चाहिए।

प्रश्न 5.
कवि की दृष्टि में धन का महत्त्व क्यों है?
उत्तर:
कवि की दृष्टि में धन का महत्त्व इसलिए है कि धन में बड़ी शक्ति होती है। उससे मित्र बनते हैं। इस प्रकार धन के बिना मित्र भी नहीं बनते हैं। इसलिए धन ही बहुत उपयोगी है।

रहिमन विलास कवि-परिचय

प्रश्न 1.
कवि रहीम का संक्षिप्त परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
कवि रहीम का जन्म लाहौर (वर्तमान पाकिस्तान) में सन् 1556 ई० में हुआ था। पाँच वर्ष की आयु में इनके पिता की मृत्यु हो गई। इनका पालन-पोषण सम्राट अकबर की देख-रेख में हुआ। इनकी कार्यक्षमता से प्रभावित होकर अकबर ने 1572 ई० इन्हें पाटननगर की जागीर और सन् 1576 ई० में गुजरात विजय के बाद गुजरात की सूबेदारी प्रदान की। सन् 1579 ई० में इन्हें ‘मीरअर्ज’ का पद दिया गया। सन् 1583 ई० में इन्होंने जब गुजरात के उपद्रव का दमन किया, तब सम्राट अकबर ने प्रसन्न होकर इन्हें ‘खानखाना’ की उपाधि से नवाजा और पाँच हज़ारी का मनसब बना दिया। सन् 1589 ई० में इन्हें ‘वकील’ की पदवी से सम्मानित किया गया। सन् 1626 ई० में इनका निधन हो गया।

साहित्यिक विशेषताएँ;
रहीम, सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक थे। वे अरबी, तुर्की, फारसी, संस्कृत और हिंदी के अच्छे ज्ञाता थे, हिन्दुओं के परिचित थे। शास्त्र, लोक संस्कृति और लोक व्यवहार में उन्हें दक्षता प्राप्त थी। वे.कलम के साथ-साथ तलवार के धनी भी थे। वे कवि, योद्धा और दानवीर थे। उनके व्यक्तित्व और काव्य में उदारता, सच्चरित्रता, सहजता और विनम्रता के गुण थे। उनके काव्य का मुख्य विषय श्रृंगार, नीति और भक्ति है। उनकी नीति और शृंगार परक रचनाएँ दरबारी वातावरण के अनुकूल थीं। उन्होंने अपने जीवन के उतार-चढ़ावों से प्राप्त भावों और विचारों को बड़ी सहजता से अपने काव्य में प्रस्तुत किया है।

रचनाएँ:
उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – ‘दोहावली’, ‘नगर शोभा’, ‘बरवै नायिका भेद’ और ‘शृंगार सोरण’।

भाषा-शैली:
रहीम ने अरबी, फारसी के विद्वान होते हुए भी ब्रज और अवधी में काव्य रचना की। अवधी भाषा में लिखा गया ‘बरवै नायिका भेद’ उनका सर्वोत्तम ग्रंथ है। उन्होंने दोहा, सोरठा शैली को अपनाया। इनके नीति पर लिखे दोहे बहुत प्रसिद्ध हैं।

महत्त्व:
मुसलमान होते हुए ब्रज और अवधी भाषा में काव्य-रचना करने के कारण हिंदी साहित्य में इन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।

रहिमन विलासपाठ का सारांश

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प्रश्न 1.
रहीम के दोहों का सार संक्षेप में अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
रहीम द्वारा रचित नीतिगत दोहे व्यावहारिक पक्ष से संबंधित हैं। पहले दोहे में बताया गया है कि प्राकृतिक जीवन आरोग्यवर्द्धक है। दूसरे दोहे में संदेश दिया गया है कि तृप्ति प्रदान करने वाली वस्तु ही महत्त्वपूर्ण होती है। तीसरे दोहे में संदेश दिया गया है कि कुसंग से बदनामी होती। चौथे दोहे के अनुसार घर का भेदी कभी अच्छा नहीं होता। पाँचवें दोहे में कहा गया है कि संपत्ति में मित्र बनाने की क्षमता होती है।

छठे दोहे में अनुचित बातें करने वाले व्यक्ति को ठीक नहीं बताया गया है। सातवें दोहे में ईश्वर को दानी कहा गया है। आठवें दोहे में बड़े लोगों के व्यक्तित्व की शोभा को क्षमा कहा गया है। नौवें दोहे में सज्जनों के प्रेम व्यवहार की महिमा का वर्णन किया गया है। दसवें दोहे में आत्मसम्मान के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है। ग्यारहवें दोहे में सच्चे मित्र की पहचान बताई गई है। सच्चा मित्र वही है, जो विपत्ति में भी सहयोग देता है। इस प्रकार कवि ने अपने दोहों में सत्संगति, मित्रता, सज्जनता आदि के महत्त्व को दर्शाया है।

रहिमन विलास संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1.
रहिमन बह भेषज करत, व्याधि न छाँड़त साथ।
खग मृग बसत आरोग्य बन, हरि अनाथ के नाथ॥ (M.P. 2011)

शब्दार्थ:

  • बहु – विभिन्न प्रकार की।
  • भेषज – औषधि, दवाई।
  • व्याधि – रोग।
  • खग – पक्षी।
  • मृगं – हिरण।
  • बसत – रहते हैं।
  • आरोग्य – निरोग।
  • हरि – ईश्वर।
  • नाथ – स्वामी।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा कवि रहीम द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इस दोहे में रहीम प्राकृतिक वातावरण में रहने के महत्त्व को बताते हुए कहते हैं –

व्याख्या:
रहीमजी जीवन के व्यावहारिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि मनुष्य अनेक प्रकार की दवाइयों का प्रयोग स्वस्थ रहने के लिए करता है; फिर भी वह अस्वस्थ ही रहता है। रोग साथ नहीं छोड़ते हैं। पक्षी, हिरण आदि पशु-पक्षी वन में रहते हैं। वे सदा निरोग रहते हैं। रोग उनके निकट नहीं आते; क्योंकि उन अनाथों के स्वामी स्वयं ईश्वर हैं। कहने का अभिप्राय यह है कि प्राकृतिक वातावरण में रहने से स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। अतः मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए प्राकृतिक वातावरण में रहना चाहिए।

विशेष:

  1. कवि ने मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए प्राकृतिक वातावरण में रहने का परामर्श दिया है।
  2. अवधी भाषा का प्रयोग हुआ है।
  3. बहु भेषज, व्याधि, खग, मृग, हीर आदि तत्सम शब्द हैं।
  4. दोहा, छंद का प्रयोग हुआ है।
  5. दृष्टांत अलंकार है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
इस दोहे में कवि ने क्या संदेश दिया है?
उत्तर:
इस दोहे में कवि ने प्राकृतिक वातावरण में रहने का संदेश दिया है; क्योंकि ऐसा करने से स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। अतः मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए प्रकृति के निकट रहना चाहिए।

प्रश्न (ii)
पशु-पक्षी बीमार क्यों नहीं पड़ते हैं?
उत्तर:
पशु-पक्षी बीमार इसलिए नहीं पड़ते हैं कि वे प्राकृतिक वातावरण में रहते हैं। इससे वे सदा निरोग रहते हैं।

प्रश्न (iii)
मनुष्य इतनी दवाइयों के सेवन के बाद भी रोगी क्यों बना रहता है?
उत्तर:
मनुष्य इतनी अधिक दवाइयों के सेवने के बाद भी रोगी बना रहता है; क्योंकि वह प्राकृतिक वातावरण से दूर रहता है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
इस दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
इस दोहे का भाव-सौंदर्य यह है कि प्राकृतिक वातावरण में रहने से आरोग्य में वृद्धि होती है। इसलिए मनुष्य को प्राकृतिक वातावरण में रहना चाहिए। पशु-पक्षी प्राकृतिक वातावरण में रहने के कारण स्वस्थ रहते हैं, जबकि मनुष्य कृत्रिम वातावरण में रहता है और बीमार रहता है। बहुत अधिक दवाइयों के सेवन पर भी बीमारियाँ उसका पीछा नहीं छोड़तीं।

प्रश्न (ii)
इस दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
कवि ने मनुष्य को निरोग रहने के लिए प्राकृतिक वातावरण में रहने का परामर्श दिया है। यह दोहा अवधी भाषा और तत्सम शब्दों से युक्त है। दृष्टांत अलंकार का प्रयोग हुआ है। गेयता का गुण है। दोहा छंद है।

प्रश्न 2.
धन रहीम जल कूप को, लघु जिय पियत अपाय।
उदधि बड़ाई कौन है, जगत् पिआसो जाय॥ (Page 2)

शब्दार्थ:

  • धन – धन्य।
  • कूप – कुआँ।
  • लघु – छोटा।
  • पियत – पीकर।
  • अपाय – तृप्त।
  • उदधि – समुद्र।
  • जगत् – संसार, दुनिया।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। रहीमजी कहते हैं कि छोटा होने से किसी का महत्त्व कम नहीं हो जाता। मनुष्य को तृप्ति प्रदान करने वाली वस्तु ही महत्त्वपूर्ण होती है।

व्याख्या:
रहीमजी कह रहे हैं कि एक छोटे-से कुएँ का जल धन्य है क्योंकि उस छोटे आकार के कुएँ का जल पीने से प्राणी अपनी प्यास बुझाकर संतुष्ट हो जाते हैं। इसलिए उसका अपना महत्त्व है। इसके विपरीत सागर चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो, वह संसार की प्यास नहीं बुझा पाता है। इसलिए उसका कोई महत्त्व नहीं है। इस प्रकार जो दूसरों के काम आता है, वही बड़ा होता है। संतुष्ट करने वाली वस्तु ही महत्त्वपूर्ण होती है। अतः बड़े समुद्र की अपेक्षा छोटे कुएँ के जल का अधिक महत्त्व है।

विशेष:

  1. प्यासे को तृप्ति प्रदान करने वाले कुएँ का महत्त्व समुद्र से अधिक है।
  2. उदधि बड़ाई कौन में कथन की भंगिमा दर्शनीय है।
  3. अवधी भाषा है। दोहा, छंद है।
  4. वक्रोति और दृष्टांत अलंकार है।
  5. नीतिं संबंधी बातों को अत्यंत सहजता से कहां गया है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि ने कुएँ के जल को धन्य क्यों कहा है?
उत्तर:
कवि ने कुएँ के जल को धन्य कहा है, क्योंकि उसके जल को पीने से प्यासा तृप्त हो जाता है।

प्रश्न (ii)
सागर और कुएँ में से बड़ा कौन है?
उत्तर:
सागर और कुएँ में आकार की दृष्टि से सागर बड़ा है किंतु महत्त्व और उपयोगिता की दृष्टिं से कुआँ बड़ा है। जो दूसरों के काम आता है, वही बड़ा होता है। कुएँ का जल पीने से प्यासा संतोष का अनुभव करता है इसलिए कुआँ बना है।

प्रश्न (iii)
सागर बड़ा होने पर भी व्यक्ति की प्यास क्यों नहीं बुझा पाता?
उत्तर:
सागर बड़ा होता है। उसमें अथाह जल होता है, किंतु उसका जल खारा होता है और उस खारे जल से प्यास नहीं वुझाई जा सकती।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
कवि ने इसमें बताया है कि छोटा होने से कोई कम महत्त्वपूर्ण नहीं हो जाता। कुआँ छोटे आकार का होता है, किंतु उसका जल पीने से प्यासे को संतोष का अनुभव होता है। अतः सागर की तुलना में कुएँ का महत्त्व अधिक है।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्यासे को संतोष का अनुभव करने वाले कुएँ का महत्त्व सागर से अधिक है। ‘उदधि-बड़ाई कौन’ में कथन की भंगिमा देखने योग्य है। वक्रोति और दृष्टांत अलंकार है। अवधी भाषा है। दोहा, छंद है। नीति संबंधी बात को अत्यंत सहजता से व्यक्त किया गया है। पद में गेयता का गुण है।

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प्रश्न 3.
बसि कुसंग चाहत कुसल, यह रहीम जिय सोस।
महिमा घटी समुद्र की, रावन बस्यो परोस॥ (Page 16) (M.P. 2010)

शब्दार्थ:

  • बसि – बसना, रहना।
  • कुसंग – बुरी संगति।
  • कुसल – हित चाहना, कुशलता चाहना।
  • जिय – हृदय।
  • सोस – अफसोस।
  • महिमा – गर्व।
  • रावन – रावण।
  • परोस – पड़ोस में।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इसमें कवि ने कुसंगति के प्रभाव का वर्णन किया है। उनका कहना है कि कुसंग से यश में वृद्धि नहीं होती।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि मनुष्य, दुर्जन लोगों की संगति करता है। वह बुरे लोगों के साथ रहने पर भी हृदय से अपनी कुशलता चाहता है, यह बड़े अफसोस अर्थात् दुख की बात है। लंका में रावण के रहने के कारण ही समुद्र की महिमा कम हुई; अर्थात् दुराचारी रावण के पास बसने पर ही समुद्र का बड़प्पन घटा। लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र में पुल बनाया गया। कहने का भाव यह है कि कुसंग से यश में वृद्धि नहीं होती, अपितु यश कम होता है। अतः कुसंगति से बचना चाहिए।

विशेष:

  1. कुसंगति के प्रभाव का वर्णन किया गया है।
  2. दोहा, छंद है और अवधी भाषा है।
  3. दृष्टांत अलंकार का प्रयोग किया गया है।
  4. नीति-रीति की बात को अत्यंत सहजता से व्यक्त करने की क्षमता देखने योग्य है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे में किसके प्रभाव का वर्णन किया गया है?
उत्तर:
प्रस्तुत दोहे में कुसंगति के प्रभाव का वर्णन किया गया है। कुसंग के प्रभाव से यश में वृद्धि नहीं होती है।

प्रश्न (ii)
कवि ने किस बात पर दुख व्यक्त किया है?
उत्तर:
कवि इस बात पर दुख व्यक्त किया है कि मनुष्य बुरे लोगों की संगति करता है और हृदय से अपनी कुशलता चाहता है, जो असंभव है।

प्रश्न (iii)
रावण के पड़ोस में बसने का दंड किसे भोगना पड़ा था?
उत्तर:
रावण के पड़ोस में लसने का दंड समुद्र को भोगना पड़ा था। श्रीराम ने लंका पर आक्रमण के लिए समुद्र में पुल बनाया था।

प्रश्न (iv)
कवि ने किससे बचने का परामर्श दिया है?
उत्तर:
कवि ने कुसंगति से बचने का परामर्श दिया है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
मनुष्य को कुसंगति से बचना चाहिए, क्योंकि कुसंग में रहने से व्यक्ति के यश में कमी आती है। बुरे लोगों के साथ रहने वाले का कल्याण नहीं हो सकता। रावण के पड़ोस में रहने से समुद्र को दंड भुगतना पड़ा।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कवि ने कुसंगति के प्रभाव का वर्णन किया है। दृष्टांत अलंकार है। नीति-रीति की बात को अत्यंत सहज ढंग से व्यक्त किया है। गेयता का गुण है। अवधी भापाहै।

प्रश्न 4.
रहिमन अँसुआ नैन ढरि, जिय दुख प्रगट करेइ।
जाहि निकारो गेह ते, कस न भेद कहि देइ॥ (Page 16)

शब्दार्थ:

  • अँसुआ – आँसू।
  • नैन – नेत्र, आँखें।
  • ढर – दुलकंकर।
  • जिय – हृदय।
  • गेह – गृह, घर।
  • कस – क्यों।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। रहीमजी ने इस दोहे में आँसुओं के द्वारा मन का दुख प्रकट होने की बात से घर की बात घर के अंदर ही रखने का संदेश दिया है। घर का भेदी कभी अच्छा नहीं होता।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि जिस प्रकार आँखों से आँसू निकलकर व्यक्ति के हृदय की पीड़ा को (दुख को) व्यक्त कर देते हैं। उसी प्रकार जब किसी को घर से निकाला जाता है, तो वह अपने घर के भेद को दूसरों को बता देता है।

विशेष:

  1. रामकथा में रावण द्वारा अपने छोटे भाई विभीषण को लंका से निकाल देने के प्रसंग की ओर संकेत किया गया है। विभीपण ने ही राम को लंका के सारे भेद और राटण की मृत्यु का भेद बताया था। इसी कारण यह कहावत प्रचलित हो गई-घर का भेदी लंका ढाए।
  2. दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
  3. नीति संबंधी बात को अत्यंत सहजता से व्यक्त करने की क्षमता दर्शनीय है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे में कवि ने क्या संदेश दिया है?
उत्तर:
प्रस्तुत दोहे में कवि ने आँसुओं को आँखों में रोकने का संदेश देकर घर की बात घर में ही रखने का संदेश दिया है। घर का भेदी कभी अच्छा नहीं होता।

प्रश्न (ii)
इस दोहे में किस प्रसंग की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर:
इस दोहे में कवि ने रावण द्वारा विभीषण को घर से निकाल देने के प्रसंग की ओर संकेत किया है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
कवि ने आँसुओं को आँखों में ही रोकने का परामर्श दिया है; क्योंकि जिस प्रकार आँखों के आँसू हृदय की वेदना को प्रदर्शित करते हैं उसी प्रकार घर से निकाला हुआ व्यक्ति घर की गोपनीय बातें दूसरों के समक्ष प्रकट कर देता है, इसलिए घर का भेदी कभी अच्छा नहीं होता।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
‘घर का भेदी लंका ढाए’ कहावत को चरितार्थ किया गया है। नीति संबंधी बातों को अत्यंत सहजता,से व्यक्त करने की क्षमता दर्शनीय है। गेयता का गुण है। दोहा, छंद है और अवधी भाषा है। रामायण के प्रसंग का सदुपयोग किया गया है।

प्रश्न 5.
जब लगि वित्त न आपने, तब लगि मित्र न कोय।
रहिमन अंबुज अंबु बिनु, रवि नाहिन हित होय॥ (Page 16)

शब्दार्थ:

  • लगि – तक।
  • वित्त – धन।
  • कोय – कोई भी।
  • अंबुज – कमल।
  • अंबु – पानी।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इस दोहे में कवि ने कहा है कि धन में ही मित्र बनाने की शक्ति होती है, किंतु क्या सभी मित्र, मित्रता की कसौटी पर खरे उतरते हैं ऐसा संभव नहीं।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि जब तक व्यक्ति के पास न नहीं होता, तब तक कोई मित्र नहीं होता। अर्थात् जब व्यक्ति के पास धन आता है, तो अनेक लोग उसके मित्र बन जाते हैं, परंतु सभी मित्र, मित्रता पर खरे नहीं उतरते। जिस. प्रकार कमल पानी में उत्पन्न होता है किंतु पानी के बिना कमल उत्पन्न नहीं होता। पानी के बिना सूर्य भी उसकी भलाई नहीं कर सकता; अर्थात् जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी नहीं कर पाता। उसी प्रकार धनहीन का कोई मित्र नहीं होता।

विशेष:

  1. कवि ने धन के महत्त्व को प्रतिपादित किया है। उसे मित्र बनाने में सहायक बताया है।
  2. दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
  3. अंबुज अंबु, हित होय में अनुप्रास अलंकार है।
  4. दृष्टांत अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है।
  5. नीति संबंधी बातों को अत्यंत सहजता से कह देने की क्षमता देखने योग्य है।
  6. साम्यभाव पंक्तियाँ:
    रहिमन संपति के सगे, बनत बहत बहरीत।
    विपत कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत॥

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि ने मित्र बनाने की शक्ति किसमें बताई है?
उत्तर:
कवि ने मित्र बनाने की शक्ति धन में बताई है क्योंकि धन आने पर मित्र बन जाते हैं। धन की महत्ता को प्रतिपादित किया गया है।

प्रश्न (ii)
जलहीन कमल की रक्षा कौन और क्यों नहीं कर पाता?
उत्तर:
कमल जल में उत्पन्न होता है, किंतु पानी के बिना कमल की रक्षा सूर्य भी नहीं कर पाता। ऐसा इसलिए कि जल ही कमल का जीवन है। वह तो पानी के बिना कमल मुरझाकर समाप्त हो जाएगा।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोतर

प्रश्न (i)
दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
कवि ने धन के महत्त्व को स्पष्ट किया है। व्यक्ति के पास धन आने पर अनेक मित्र बन जाते हैं, किंतु हर मित्र मित्रता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। धनविहीन व्यक्ति का कोई मित्र नहीं होता। जलहीन कमल की तो सूर्य भी रक्षा नहीं कर सकता।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
कवि ने धन के महत्त्व को प्रतिपादित किया है। अंवुज, अंबु, हित होय में अनुप्रास अलंकार है। दृष्टांत अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है। अवधी भाषा है। दोहा, छंद है। नीति संबंधी बातों को अत्यंत सहजता से प्रकट किया गया है।

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प्रश्न 6.
अन कीन्ही बातें करै, सोवंत जागै जोय।
ताहि सिखाय जगायबो, रहिमन उचित न होय ॥ (Page 16)

शब्दार्थ:

  • अन कीन्ही – बिना कही हुई, बिना मतलब की, निरर्थक बातें।
  • सोवत-जागै – सोते-जागते हुए।
  • जोय – देखता है (जानता है)।
  • सिखाय – सिखाना।
  • जगायबो – सोते से उठाना, जागने को प्रेरित करना।
  • होय – होता है।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। रहीमजी कहते हैं कि सोते-जागते हुए निरर्थक बातें करने वाला व्यक्ति को समझाना उचित नहीं है। यही नीति सम्मत बात उन्होंने इस दोहे में व्यक्त की है।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि जो व्यक्ति सोते और जागते हुए अनकही अर्थात् निरर्थक बातें करता है, उस व्यक्ति को समझाना उचित नहीं होता है; क्योंकि ऐसे व्यक्ति को किसी भी प्रकार से समझाया नहीं जा सकता है।

विशेष:

  1. निरर्थक बातें करने वाले व्यक्ति को समझाना मुश्किल है। यह बात कवि ने इस दोहे में व्यक्त की है।
  2. दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
  3. ‘जागे-जोय’ में अनुप्रास अलंकार है।
  4. नीति सम्मत बात को अत्यंत सहजता से अभिव्यक्ति दी गई है।

काव्यांश पर आधा विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि कैसे व्यक्ति को समझाना उचित नहीं समझता?
उत्तर:
कवि सोते-जागते, बिना सर-पैर की निरर्थक बातें करने वाले व्यक्ति को समझाना उचित नहीं मानता; क्योंकि ऐसे व्यक्ति को समझाना बड़ा कठिन होता है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
कवि ने नीति संबंधी विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि सोते-जागते हुए निरर्थक बातें करने वाले व्यक्ति को समझाना सच में ही कठिन है।

प्रश्न (ii)
दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
नीति संबंधी गंभीर बातों को सहजता से व्यक्त किया गया है। ‘जागे-जोय’ में अनुप्रास अलंकार है। अवधी भाषा है। दोहा, छंद है। गेयता है।

प्रश्न 7.
देनहार कोउ और है, भेजत सो दिन-रैन।
लोग भरम हम पै धरै, याते नीचे नैन॥ (Page 16) (M.P. 2012)

शब्दार्थ:

  • देनहार – देने वाला।
  • कोउ – कोई।
  • और है – दूसरा है।
  • भेजत – भेजता है।
  • दिन-रैन – दिन-रात।
  • भरम – संदेह।
  • याते – इसी कारण।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। रहीमजी बड़े दानी थे। वे गरीबों को दान देते रहते थे। लोग भ्रमवश यह समझते थे कि रहीमजी ही देते हैं। इसी कारण उनकी आँखें सदा झुकी रहती थीं।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि धन-संपत्ति देने वाला कोई दूसरा है; अर्थात् ईश्वर ही धन-संपत्ति देने वाले हैं और वह रात-दिन देते ही रहते हैं। रहीम उस धन-संपत्ति को दान में बाँटते रहते हैं। दान प्राप्त करने वाले भ्रमवश यह समझते हैं कि रहीमजी ही हमें देने वाले हैं। इसी कारण उनके नेत्र सदा नीचे झुके रहते हैं अर्थात् उनको ही अपना सब कुछ मानते थे।

विशेष:

  1. कवि ने अपनी आँखें झुके रहने का कारण स्पष्ट किया है। वह ईश्वर को ही देने वाला मानता है।
  2. दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
  3. ‘नीचे. नैन’ में अनुप्रास अलंकार है।
  4. दोहे में गेयता का गुण विद्यमान है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
रहीमजी ने ‘देनहार कोउ और है’ के द्वारा किसकी ओर संकेत किया है?
उत्तर:
रहीमजी ने इसके द्वारा ईश्वर की ओर संकेत किया है। उनके अनुसार धन-सम्पत्ति देने वाले ईश्वर हैं, जो दिन-रात देते रहते हैं।

प्रश्न (ii)
रहीमजी के नेत्र नीचे क्यों झुके रहते थे?
उत्तर:
रहीमजी गरीबों को दान देते रहते थे। दान प्राप्त करने वाले भ्रमवश यह समझते थे कि रहीम ही हमें देने वाले हैं इसीलिए उनके नेत्र झुके रहते थे।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
रहीमजी दानी थे। वे गरीबों को दान देते रहते थे। उनका मानना था कि ईश्वर ही देने वाले हैं, जबकि दान लेने वाले यह समझते थे कि रहीमजी ही दे रहे हैं। इस शर्म से उनके नेत्र झके रहते हैं।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कवि ने आँखें झुके रहने का कारण स्पष्ट किया है। ‘नीचे नैन’ में अनुप्रास अलंकार है। दोहा, छंद है। अवधी भाषा है। सरल भाषा में कवि ने गंभीर भावों को व्यक्त किया है।

प्रश्न 8.
छिमा बड़ेन को चाहिए, छोटन को उत्पात।
का रहीम हरि को घट्यो, जो भृगु मारी लात॥ (Page 17)

शब्दार्थ:

  • छिमा – क्षमा करना।
  • बड़ेन – बड़े लोग।
  • छोटन – छोटे लोगों।
  • उत्पात – उपद्रव, ऊधम।
  • का – क्या।
  • घट्यो – कम हो गया।
  • हरि – भगवान विष्णु।
  • भृगु – एक षि जो ब्रह्मा के पुत्र माने जाते हैं।
  • लात – पैर।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। कवि ने बड़े लोगों की क्षमा करने की प्रवृत्ति को ही उनके व्यक्तित्व की शोभा बताया –

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि बड़े लोगों के व्यक्तित्व की शोभा क्षमा से होती है, और छोटों अर्थात् बच्चों की ऊधम (उपद्रव) करने में होती है। बड़े लोगों को छोटों के उपद्रव को क्षमा कर देना चाहिए। इसमें उनका बड़प्पन है। इसमें उनकी शोभा है। रहीमजी कहते हैं कि भगवान विष्णु की कौन-सी कीर्ति कम हो गई जब भृगु ऋषि ने उन पर पैर से आघात किया। भृगु ऋषि भगवान विष्णु से छोटे थे, उनके ऊधम (गलती) भगवान ने उन्हें क्षमा कर दिया क्योंकि बड़े लोगों को क्षमा ही शोभा देती है।

विशेष:

  1. बड़े लोगों को छोटों को क्षमा करना ही शोभा देता है। यही भाव व्यक्त किया गया है।
  2. दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
  3. नीति संबंधी बातों को सहजता से कहने की क्षमता दर्शनीय है।
  4. उदाहरण अलंकार है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
बड़े, लोगों के व्यक्तित्व की शोभा किससे होती है?
उत्तर:
बड़े लोगों के व्यक्तित्व की शोभा छोटे के उपद्रव को क्षमा करने से ही होती है।

प्रश्न (ii)
छोटों के प्रति बड़ों का क्या कर्तव्य है?
उत्तर:
छोटों के प्रति बड़ों का कर्तव्य है कि वे उनके ऊधम (गलती) को क्षमा कर दें। उनकी बातों को गंभीरता से न लें।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
बड़े लोगों को छोटों को क्षमा करना ही शोभा देता है। यही उनके व्यक्तित्व की शोभा है और यही उनका कर्तव्य है।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कवि ने बड़े सहज ढंग से बड़ों के प्रति कर्तव्य को समझाया है। उदाहरण अलंकार है। दोहा, छंद है। अवधी भाषा है। गेयता का गुण है।

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प्रश्न 9.
टूटे सुजन मनाइए, जौ टूटे सौ बार।
रहिमन फिरि-फिरि पोइए, टूटे मुक्ताहार॥ (Page 17)

शब्दार्थ:

  • सुजन – स्वजन (अच्छे लोग)।
  • पोइए – पिरोइए (पिरोते हैं)।
  • मुक्ताहार – मोतियों का हार।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इस दोहे में रहीम ने सज्जनों तथा अपने लोगों के रूठ जाने पर बार-बार मनाने पखल दिया है।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि जिस प्रकार मोतियों के हार के टूट जाने पर मोतियों को फेंका नहीं जाता, बल्कि उन्हें बार-बार धागे में पिरोकर फिर से हार बना लिया जाता है, उसी प्रकारं श्रेष्ठ लोगों तथा अपने लोगों (कुटुम्बी, संबंधी, मित्र आदि) के रूठने या नाराज होने पर उन्हें हर बार मना लेना चाहिए। क्योंकि वे ही हमारे मार्गदर्शक तथा सुख-दुख के साथी होते हैं।

विशेष:

  1. बहुत सादा और सरल तरीके से लोक-व्यवहार की नीति को व्यक्त किया गया है।
  2. ‘सुजन’ में श्लेष अलंकार है।
  3. श्रेष्ठ मनुष्यों की मोतियों से उपमां सुंदर है। यहाँ उपमा अलंकार है। ‘फिरि-फिरि’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
  4. दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि ने सज्जनों के प्रेम की क्या विशेषता बताई है?
उत्तर:
कवि ने सज्जनों के प्रेम की यह विशेषता बताई है कि उनका प्रेम टूटकर भी जुड़ जाता है।

प्रश्न (ii)
रहीमजी ने मनुष्य को क्या सलाह दी है?
उत्तर:
रहीमजी ने मनुष्य को सलाह दी है कि सज्जनों तथा अपने लोगों के रूट जाने पर उन्हें बार-बार मना लेना चाहिए।

प्रश्न (iii)
कवि ने सज्जनों के प्रेम की तुलना किससे और क्यों की है?
उत्तर:
कवि ने सज्जनों के प्रेम की तुलना मोतियों के हार से की है। जिस प्रकार मोतियों के हार के टूटने पर मोती फेंके नहीं जाते, उन्हें बार-बार धागे में पिरोकर फिर से हार बना लिया जाता है, उसी प्रकार श्रेष्ठ तथा अपने लोगों को नाराज होने पर मना लेना चाहिए।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
रहीम ने सज्जनों तथा अपने कुटुंबी, संवंधी, मित्र आदि के नाराज होने पर उन्हें बार-बार मना लेने की सलाह दी है; क्योंकि सज्जनों का प्रेम टूटकर भी जुड़ जाता है।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य लिखिए।
उत्तर:
‘सुजन’ में श्लेष अलंकार है। श्रेष्ट व्यक्तियों का मोतियों से उपमा सुंदर है। उपमा अलंकार है। ‘फिरि-फिरि’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। दोहा, छंद है। अवधी भाषा है। गेयता का गुण है।

प्रश्न 10.
रहिमन पानी राखिए, बिनु पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून॥ (Page 17)

शब्दार्थ:

  • पानी – चमक, सम्मान, जल।
  • सून – सूना।
  • मानुष – मनुष्य।
  • चून – चूना।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इस दोहे में रहीम ने कहा है कि व्यक्ति को अपना आत्मसम्मान सदैव बनाए रखना चाहिए।

व्याख्या:
रहीमजी ने यहाँ पानी की तुलना चभक, सम्मान तथा जल से की है। पानी के बिना सब सूना है। पानी के बिना मोती, मनुष्य तथा चूना किसी काम के नहीं हैं। बिना चमक के मोती की कोई कीमत नहीं। चमकहीन माती को कोई नहीं पूछता। बिना सम्मान के मनुष्य जीवन का कोई महत्त्व नहीं है तथा बिना पानी के चूने का उपयोग नहीं किया जा सकता। अतः मनुष्य को सदा अपना आत्मसम्मान बनाए रखना चाहिए। सम्मानरहित मनुष्य का समाज में कोई महत्त्व नहीं होता।

विशेष:

  1. बहुत सहज ढंग से कवि ने आत्मसम्मान के महत्त्व को व्यक्त किया है।
  2. ‘पानी’ में श्लेष अलंकार है।
  3. ‘सब सून, मोती मानुष’ में अनुप्रास अलंकार है।
  4. दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे में कवि ने मनुष्य को क्या संदेश दिया?
उत्तर:
प्रस्तुत दोहे में कवि ने मनुष्य को सदैव आत्मसम्मान बनाए रखने का संदेश दिया है; क्योंकि आत्मसम्मान रहित मनुष्य का समाज में कोई महत्त्व नहीं रह जाता। बिना आत्मसम्मान के मुनष्य समाज में नहीं जी सकता है।

प्रश्न (ii)
मोती, मनुष्य और चून के संबंध में पानी के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पानी का प्रयोग तीन अर्थों में प्रयोग किया गया है। मोती के संबंध में, आत्मसम्मान और चूने के संबंध में जल, मोती चमक के अभाव में, मनुष्य आत्मसम्मान के बिना तथा जल के बिना चूना अपना महत्त्व खो देते हैं। तीनों के लिए पानी का बड़ा महत्त्व है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
मनुष्य को अपना आत्मसम्मान सदैव बनाए रखना चाहिए। आत्मसम्मान के बिना मनुष्य का समाज में वैसे ही महत्त्व घट जाता है, जिस प्रकार चमक के अभाव में मोती का और पानी के बिना चूने का। ये तीनों पानी के बिना व्यर्थ हैं।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
कवि ने अत्यंत सहज ढंग से आत्मसम्मान के महत्त्व को स्पष्ट किया है। ‘पानी’ में श्लेष अलंकार है। ‘सव सून, मोती मानुष’ में अनुप्रास अलंकार है। दोहा, छंद है। अवधी भाषा है। गेयता का गुण है। मुक्तक शैली है।

प्रश्न 11.
मथत-मथत माखन रहै, दही मही बिलगाय।
रहिमान सोई मीत है, भीर परे ठहराय॥ (Page 17)

शब्दार्थ:

  • मथत-मथत – मथ-मथकर।
  • मही – छाछ, मट्ठा, गोरस।
  • बिलगाय – अलग करना।
  • सोई – वही।
  • मीत – मित्र।
  • भीर – संकटकाल में।
  • ठहराय – ठहरता है।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इस दोहे में रहीम सच्चे मित्र की पहचान बता रहे हैं।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि जिस प्रकार दही को मथ-मथकर छाछ या मट्ठे में से मक्खन निकालकर अलग कर लिया जाता है, उसी प्रकार अनेक मित्रों के मध्य सच्चे मित्र की अलग पहचान हो जाती है। जो मित्र संकट के समय मित्र के साथ खड़ा रहता है, उसका साथ नहीं छोड़ता, वही सच्चा मित्र होता है।

विशेष:

  1. कवि ने अत्यंत सहज ढंग से सच्चे मित्र की पहचान बताई है।
  2. मथत-मथत में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
  3. ‘मथत-मथत माखन’ में अनुप्रास अलंकार है।
  4. दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि ने सच्चे मित्र की क्या पहचान बताई है?
उत्तर:
कवि ने सच्चे मित्र की यह पहचान बताई है कि सच्चा मित्र संकट के समय में भी मित्र के साथ खड़ा रहता है। संकट में मित्र को छोड़कर नहीं जाता है।

प्रश्न (ii)
सच्चे मित्र की तलना किससे की गई है?
उत्तर:
सच्चे मित्र की तुलना मक्खन से की गई है। जिस प्रकार दही को मथकर उसके बीच से मक्खन निकाल लिया जाता है, उसी प्रकार मित्रों के मध्य से सच्चे मित्र की भी अलग पहचान हो जाती है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य-दोहे में सच्चे मित्र की पहचान बताई गई है। सच्चा मित्र वही होता है जो संकट के समय में भी मित्र को नहीं छोड़ता, मित्र के साथ खड़ा रहता है।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कवि ने अत्यंत सहज ढंग से सच्चे मित्र की पहचान बताई है। ‘मथत-मथत’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। ‘मथत-मथत माखन’ में अनुप्रास अलंकार है। दोहा, छंद है। अवधी भाषा है। गेयता का गुण है।

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प्रश्न 12.
तौ ही लौ जीबोभलौ, दीबो होय न धीम।
जग में रहिबो कुचित गति, उचित न होय रहीम॥ (Page 17)

शब्दार्थ:

  • तों ही – जब तक ही।
  • जीबो -ज ीवित रहना।
  • भलौ – अच्छा है।
  • दीबो – देने की क्रिया या भाव।
  • धीम – धीमा, लुप्त।
  • जग – दुनिया, संसार।
  • कुचित – अनुचित।
  • होय – होता है।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इस दोहे में कवि ने जीवन की सार्थकता के संबंध में उचित-अनुचित को स्पष्ट किया है।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि इस संसार में जीवित रहना तभी तक सार्थक रहता है जब तक देने का भाव बना रहता है। देने का भाव धीमा पड़ने या लुप्त हो जाने पर जीवित रहना अनुचित है। क्योंकि देने के भाव में ही जीवन की सार्थकता छिपी रहती है।

विशेष:

  1. कवि ने अपने जीवन अनुभव को बड़ी सरलता से व्यक्त किया है।
  2. जीवन की सार्थकता देते रहने में ही है।
  3. दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
इस संसार में जीवित रहना कब तक उचित है?
उत्तर:
इस संसार में जीवित रहना तभी तक सार्थक रहता है जब तक व्यक्ति में देने का भाव बना रहता है। देने का भाव धीमा पड़ने या लुप्त हो जाने पर जीवित रहना अनुचित है। क्योंकि बिना इसके जीवन जीना पशु के जीवन जीने के समान है।

प्रश्न (ii)
जीवन की सार्थकता किसमें है?
उत्तर:
जीवन की सार्थकता देने के भाव में है, लेने के भाव में नहीं है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (iii)
प्रस्तत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
इस दोहे में कवि ने जीवित रहने की सार्थकता तभी तक बताई है जब तक व्यक्ति में देने का भाव बना रहे। देने का भाव समाप्त होने पर जीवित रहना अनुचित है।

प्रश्न (iii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
कवि ने अपने जीवन के अनुभव को बड़ी सरलता से व्यक्त किया है। सरल अवधी भाषा है। दोहा, छंद है। गेयता का गुण है। मुक्तक शैली है।

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 12 हिमालय और हम

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 12 हिमालय और हम (कविता, गोपाल सिंह ‘नेपाली’)

हिमालय और हम पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

हिमालय और हम लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हिमालय को धरती का ताज क्यों कहा है?
उत्तर:
क्योंकि हिमालय की संसार में सबसे ऊँची चोटी है। उसकी चोटी धरती पर ताज की तरह सुशोभित है।

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प्रश्न 2.
कवि ने गंगाजल की क्या विशेषता बताई है?
उत्तर:
गंगाजल बचपन की भाँति पवित्र और निर्मल है।

प्रश्न 3.
“इसका पद-सल छूनेवाला वेदों की गाथा गाता है” इस पंक्ति से कवि का क्या आशय है?
उत्तर:
आशय-हिमालय पर्वत की तलहटी में वेदों की ऋचाएँ रची गईं और उच्चरित हुईं।

हिमालय और हम दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि ने हिमालय से हमारे कई संबंध बताए हैं, उनमें से किन्हीं तीन का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. हिमालय पर्वत पर जिस प्रकार प्रभात और संध्या की लालिमा समान होती, दूसरे शब्दों में, हिमालय का सौंदर्य दोनों समय एक समान होता है, उसी प्रकार भारतीय सुख-दुख हो समान भाव से ग्रहण करते हैं।
  2. हिमालय पर्वत की भाँसि भारतवासी भी अटल, अडिग और अविचल हैं।
  3. हिमालय तूफानों से लड़ने में समर्थ है, तो लड़ने की यह शक्ति प्रत्येक भारतीय के पास है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए –
जब-जब जनता को विपदा दी
तब-तब निकले लाखों गाँधी
तलवारों-सी टूटी आँधी।
उत्तर:
जब भी किसी शासन-व्यवस्था ने भारत की जनता पर अन्याय और अत्याचार कर उसे संकट में डाला और उसे दुःख दिए, तब-तब ही जनता की विपत्तियों को दूर करने के लिए और दुःखों से मुक्ति दिलाने के लिए लाखों सत्याग्रही घर-बार की चिंता छोड़कर निकल पड़े।

हिमालय और हम भाव-पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्ति का भाव-विस्तार कीजिए”है अमर हिमालय धरती पर, तो भारतवासी अविनाशी”। (M.P. 2010)
उत्तर:
जिस प्रकार पृथ्वी पर हिमालय पर्वत अमर है, उसी प्रकार भारत में रहने वाले भारतीय भी अमर हैं, शाश्वत हैं। हिमालय पर्वत कभी नष्ट होने वाला नहीं है, इस तरह भारतीयों का भी कभी नाश नहीं हो सकता। जब तक हिमालय पर्वत का अस्तित्व है, तब तक भारतीयों का भी अस्तित्व बना रहेगा।

हिमालय और हम भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
‘बच्चा’ मूल शब्द में ‘पन’ प्रत्यय लगाकर ‘बचपन’ शब्द बना है। इसी प्रकार ‘पन’ प्रत्यय लगाकर तीन शब्द बनाइए –
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 12 हिमालय और हम img-1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्ग छाँटकर लिखिए –
परदेश, संदेश, अविनाशी, अविचल, प्रभात।
उत्तर:
पर, सम्, अ, अ, प्र।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए –
पर्वत, सागर, बांदल, पानी।
उत्तर:

  • पर्वत – पहाड़, भूधर।
  • सागर – समुद्र, जलधि।
  • बादल – मेघ, नीरद।
  • पानी – जल, नीर।

हिमालय और हम योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
हिमालय के संदर्भ में अन्य जानकारी एकत्रित कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 2.
गोपालसिंह नेपाली की अन्य रचनाएँ खोजकर पढ़िए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 3.
हिमालय और भारतवासियों के गौरव गाथा से संबंधित अन्य कवियों की ओजस्वी कविताओं का संकलन कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 4.
आप अपने गाँव/शहर अथवा जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जानकारी एकत्रित कीजिए तथा सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

हिमालय और हम परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न 1.
‘हिमालय और हम’ कविता के कवि हैं – (M.P.2009; 2010)
(क) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ख) गोपालसिंह ‘नेपाली’
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) माखन लाल चतुर्वेदी
उत्तर:
(ख) गोपालसिंह ‘नेपाली’।

प्रश्न 2.
‘पर्वतराज’ किसे बताया गया है? (M.P. 2012)
(क) हिमालय पर्वत को
(ख) अरावली पर्वत को
(ग) आबू पर्वत को
(घ) विंध्याचल पर्वत को
उत्तर:
(क) हिमालय पर्वत को।

प्रश्न 3.
‘इस धरती का हर लाल खुशी से उदय-अस्त अपनाता है’ इस पंक्ति में उदय-अस्त का अर्थ है –
(क) दुखों का आना-जाना
(ख) खुशियों का आना-जाना
(ग) धन का आना-जाना
(घ) मित्रों का आना-जाना
उत्तर:
(ख) खुशियों का आना-जाना।

प्रश्न 4.
‘हिमालय और हम’ कविता में कवि की भावना व्यक्त हुई है –
(क) राष्ट्रीय चेतना
(ख) सामाजिक चेतना
(ग) आर्थिक चेतना
(घ) सांस्कृतिक चेतना
उत्तर:
(क) राष्ट्रीय चेतना।

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प्रश्न 5.
हिमालय पर्वत को पर्वतराज कहने का कारण है –
(क) यह विश्व का सबसे नया पर्वत है।
(ख) यह विश्व का सबसे विशाल पर्वत है।
(ग) यह विश्व का सबसे ऊंचीपर्वत है।
(घ) यह विश्व का सबसे सुंदर पर्वत है।
उत्तर:
(ग) यह विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत है।

प्रश्न 6.
‘हिमालय और हम’ कविता के कवि हैं – (M.P. 2009)
(क) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ख) गोपालसिंह ‘नेपाली’
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) माखनलाल चतुर्वेदी
उत्तर:
(ख) गोपालसिंह ‘नेपाली’।

II. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर कीजिए –

  1. गोपालसिंह ‘नेपाली’ …….. कवि हैं। (राष्ट्रीय/आंचलिक)
  2. गोपालसिंह ‘नेपाली’ ………. युग के हैं। (द्विवेदी/छायावाद)
  3. ‘हिमालय और हम’ कविता में हिमालय का ………. किया गया है। (मूर्तिकरण/मानवीकरण)
  4. हिमालय के आँगन में ………. की परम्परा ने जन्म लिया था। (ज्ञान/धर्म)
  5. हिमालय ……… है। (दीर्घजीवी/मृत्युंजयी)

उत्तर:

  1. राष्ट्रीय
  2. छायावाद
  3. मानवीकरण
  4. ज्ञान
  5. मृत्युंजयी।

III. निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए –

  1. ‘हिमालय का पदतल छूने वाला वेदों की गाथा गाता है।
  2. हिमालय भारतीयों की तपस्या भूमि और आध्यात्मिक केन्द्र है।
  3. हिमालय के आँगन में धर्म की परम्परा ने जन्म लिया।
  4. हिमालय की तलहटी में ही वेदों की ऋचाएँ गूंजी।
  5. हिमालय भारत का ही ताज है।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. असत्य।

IV. निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए –

प्रश्न 1.
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 12 हिमालय और हम img-2
उत्तर:

(i) (ग)
(ii) (घ)
(iii) (ङ)
(iv) (ख)
(v) (क)।

V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

प्रश्न 1.
हिमालय की प्राकृतिक छटा की क्या विशेषता है?
उत्तर:
हिमालय की प्राकृतिक छटा भारत के बाहरी और आंतरिक सौन्दर्य को व्यक्त करने में समर्थ है।

प्रश्न 2.
भारतीय चिंतन की क्या विशेषता है?
उत्तर:
“भारतीय चिंतन में सुख और दुख धोनों ही समान भाव से ग्रहण किया जाता है।

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प्रश्न 3.
हिमालय के पद-तल छूने वाला क्या करता है?
उत्तर:
हिमालय के पद-तल छूने वाला वेदों की गाथा गाता है।

प्रश्न 4.
हिमालय से किसकी तुलना की गयी?
उत्तर:
हिमालय से भारतीयों की तुलना की गयी है।

प्रश्न 5.
हिमालय से बादल टकराकर क्या करते हैं?
उत्तर:
हिमालय से बादल टकराकर पानी बरसाते हैं।

हिमालय और हम लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हिमालय की तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
हिमालय अटल, अडिग और अविचल है।

प्रश्न 2.
हिमालय पर्वत से कौन-सी पवित्र नदी निकलती है?
उत्तर:
हिमालय पर्वत से पवित्र गंगा नदी निकलती है।

प्रश्न 3.
टकराते हैं बादल इससे बादल, तो खुद पानी हो जाते हैं इस पंक्ति का क्या आशय है?
उत्तर:
बादल हिमालय पर्वत से टकराकर भारत में वर्षा करते हैं।

प्रश्न 4.
‘हिमालय और हम’ कविता में ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
उत्तर:
‘हम’ शब्द भारतवासियों के लिए प्रयुक्त हुआ है।

प्रश्न 5.
भारत की मनीषा कहाँ प्रसारित हुई?
उत्तर:
भारत की मनीषा हिमालय की छाया में प्रसारित हुई।

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प्रश्न 6.
हिमालय अविनाशी क्यों है?
उत्तर:
हिमालय अविनाशी है; क्योंकि वह तूफानों से लड़ते अपना अस्तित्व बनाए हुए है।

प्रश्न 7.
हिमालय के माध्यम से किसको प्रकट किया गया है?
उत्तर:
हिमालय के माध्यम से भारतीय जीवनी शक्ति को प्रकट किया गया है।

हिमालय और हम दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘इसका पदतल छूने वाला वेदों की गाथा गाता है।’ इस पंक्ति से कवि का क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
हिमालय ऋषि-मुनियों की तपस्या भूमि और अध्यात्म का केंद्र है। हिमालय के आँगन में ही ज्ञान की परंपरा ने जन्म लिया और वेदों की ऋचाएँ तलहटी में हीगूंजी।

प्रश्न 2.
हिमालय की चार विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (M.P. 2012)
उत्तर:

  1. हिमालय पर्वत पर्वतों का राजा है; क्योंकि हिमालय संसार भर में सबसे ऊँचा पर्वत है।
  2. हिमालय पर सूर्योदय और सूर्यास्त का प्राकृतिक सौंदर्य एक समान होता है।
  3. यह अटल, अडिग, अविचल है।
  4. यह बादलों को रोककर भारत में वर्षा करता है।

प्रश्न 3.
हिमालय पर सुबह-शाम का क्या प्रभाव पाता है?
उत्तर:
हिमालय पर सुबह-शाम का आकर्षक प्रभाव पड़ता है। सुबह-सुबह सूर्य की किरणें जब हिमालय पर पड़ती हैं, तो वे इसे छुकर और चूमकर और अधिक सुन्दर हो जाती हैं। इसी प्रकार जब शाम को सूर्य की किरणें हिमालय पर पड़ती हैं, तो वे झोंका खाते हुए बिखर जाती हैं।

प्रश्न 4.
गंगाजल की क्या विशेषता है?
उत्तर:
गंगाजल की बहुत बड़ी विशेषता है कि वह बहुत ही पवित्र है। उसको पीने वाला दुख में भी मुस्कराता रहता है। यही नहीं इसे पीने वाला तो हर प्रकार के दुखों को हँसते-हँसते सहन कर जाता है।

हिमालय और हम कवि-परिचय

प्रश्न 1.
गोपालसिंह ‘नेपाली’ का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
गोपालसिंह ‘नेपाली का जन्म सैन् 1902 ई० में हआ। उन्होंने एक पत्रकार के रूप में जीवन प्रारंभ किया। उन्होंने मालवा से प्रकाशित होने वाले ‘रतलाम टाइम्स’, दिल्ली से प्रकाशित ‘चित्रपट’, लखनऊ से प्रकाशित होने वाली ‘सुधा’ और पटना से प्रकाशित होने वाली साप्ताहिक पत्रिका ‘योगी’ के संपादन विभाग में कार्य किया। सन् 1929 में आपने साहित्य काव्य-जगत् में प्रवेश किया।

आपके काव्य स्वर राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत हैं और संस्कृति के प्रति गौरव-भाव हैं। आप मानवता को स्वर देने वाले कवि हैं। प्रकृति और मानवीय अनुभूतियों का अंतःसंबंध आपके गीतों में लोकचेतना का संस्पर्श पाकर सहज हो गया है। राष्ट्रीय भावों के जागरण में उनके काव्य का महत्त्वपूर्ण योगदान है। सन् 1963 में आपका देहांत हो गया।

साहित्यिक विशेषताएँ:
‘नेपाली’ जी राष्ट्रीय भावना और भारतीय संस्कृति के कवि हैं। उनकी राष्ट्रीय भावपरक रचनाएँ उनकी अद्वितीय प्रतिभा की परिचायक हैं। अनुभूति की सहजतम अभिव्यक्ति इनके गीतों की अन्यतम विशेषता है। उन्होंने फिल्मों के गीत भी लिखे हैं और फिल्मी गीतकार के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की।

रचनाएँ:
काव्य-संग्रह-पंछी, रागिनी, टुकही विद्रोही, नीलिमा आदि आपके प्रभावी काव्य-संग्रह हैं।

भाषा-शैली:
इनकी भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है। इनकी काव्य-शैली गीत-शैली है। इनके गीतों में लय, संगीतमय छंद, सहज कोमल प्रतीक एवं सुकुमार, भाव भंगिमा इनके काव्य को वैशिष्ट्य प्रदान करता है। आंतरिक भावोन्मेप, कल्पना प्रवणता और सांस्कृतिक भावों के रचनाकार के रूप आप सदैव स्मरणीय रहेंगे।

हिमालय और हम पाठ का सारांश

प्रश्न 1.
‘हिमालय और हम’ कविता का सार लिखिए।
उत्तर:
‘हिमालय और हम’ कविता के रचयिता गोपालसिंह ‘नेपाली’ हैं। इस कविता में उन्होंने हिमालय के साथ भारतीयों के संबंधों को स्वर दिया है। भारतीय अस्मिता का प्रतीक हिमालय भारत के गौरव का चिह्न है। हिमालय पर्वत इस पृथ्वी पर सबसे ऊँचा पर्वत है। यह धरती का ताज है। यह भारतीयों के स्वाभिमान का प्रतीक है। यह जितना उच्च स्वाभिमान का परिचायक है, उतना ही सांस्कृतिक चेतना का भी है।

हिमालय की प्राकृतिक छटा भारत के बाह्य व आंतरिक सौंदर्य को व्यक्त करने में भी समर्थ है। प्रभात और संध्या की लालिमा हिमालय के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ भारतीय चिंतन के उस पक्ष को भी व्यक्त करती है, जिसमें सुख-दुख को समान भाव से ग्रहण किया जाता है।

हिमालय के आँगन में ही सबसे पहले बान का उदय हुआ और यहीं वेदों की ऋचाएँ गूंजी। भारत की मनीषा हिमालय की छाया में प्रसारित होती है। हिमालय की अडिगता और हिमालय का निश्चय ही प्रत्येक भारतवासी के स्वभाव में निहित है इसलिए, वह मृत्युंजयी है। हिमालय तूफानों से लड़ने में समर्थ है। यह कविता हिमालय के माध्यम से भारतीय जीवन-शक्ति को प्रकट करती है।

हिमालय और हम संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

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प्रश्न 1.
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है
इतनी ऊँची इसकी चोटी कि सकल धुरती का ताज यही
पर्वत-पहाड़ से भरी धरा पर केवल पर्वतराज यही
अंबर में सर, पाताल चरन
मन इसका गंगा का बचपन
तन वरन-वरन मुख निरावरन
इसकी छाया में जो भी है, वह मस्तक नहीं झुकाता है।
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है। (Pages 53-54)

शब्दार्थ:

  • गिरिराज – पर्वतों का राजा हिमालय।
  • नाता – रिश्ता, संबंध।
  • संकल – समस्त, सारे।
  • धरती – पृथ्वी।
  • ताज – मुकुट।
  • अंबर – आकाश।
  • मस्तक – सर, माथा।

प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यखण्ड गोपालसिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित कविता ‘हिमालय और हम’ से लिया गया है। कवि ने इस कविता में हिमालय और भारतवासियों की समान विशेषताओं पर प्रकाश डाला है। इस काव्यखण्ड में पर्वतराज हिमालय और भारतवासियों के अटूट संबंधों की अभिव्यक्ति दी गई है।

व्याख्या:
हिमालय पर्वत और भारतीयों के संबंधों का वर्णन करते हुए कवि कहता है कि पर्वतों के राजा हिमालय का भारतीयों के साथ कुछ ऐसा ही संबंध है, हिमालय और भारतीयों का परस्पर अटूट रिश्ता है। इसकी ऊँची चोटी एवरेस्ट सारी पृथ्वी पर सबसे ऊँची है। यह संसार की सबसे ऊँची चोटी है इसीलिए जिस प्रकार व्यक्ति के सर पर ताज (मुकुट) सुशोभित होता है, उसी प्रकार धरती पर हिमालय की चोटी. मुकुट की भाँति शोभायमान है। पर्वत और पहाड़ों से भरी इस पृथ्वी पर केवल हिमालय ही पर्वतों का राजा है।

हिमालय पर्वत की ऊँचाई बहुत अधिक होने के कारण ऐसा लगता है मानो उसका सर आसमान को छू रहा है और उसके चरण पाताल की गहराई में समाए हुए हैं। भाव यह है कि हिमालय पर्वत आकाश-पाताल दोनों की सीमाओं को अपने में समेटे हुए है। हिमालय पर्वत का मन गंगा के बचपन की भाँति पवित्र और निर्मल है। पवित्र गंगा का उद्गम ही हिमालय से हुआ है।

हिमालय पर्वत का तन विभिन्न रंग और आकार वाली वनस्पतियों से ढका हुआ है। मुख अत्यधिक ऊँचाई पर होने के कारण वनस्पतियों से रहित है और केवल बर्फ से ढका हुआ है। जो भी हिमालय के आश्रय में आता है उसमें भी हिमालय की भाँति दृढ़ता – और विशालता आ जाती है। इसी कारण वह भी अपना मस्तक किसी के सामने नहीं झुकाता। ऐसे पर्वतराज हिमालय से हम भारतीयों का रिश्ता भी कुछ ऐसी ही है।

विशेष:

  1. हिमालय को पर्वतराज और धरती का ताज कहकर उसकी महानता का वर्णन किया गया है।
  2. हिमालय से ही गंगा का उद्गम हुआ है और हिमालय के समान ही भारतवासी भी अडिग और अटल हैं।
  3. ‘वरन-वरन’ में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।
  4. काव्यांश में मानवीकरण अलंकार है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि ने ‘हिमालय और हम’ कविता में किसका वर्णन किया है?
उत्तर:
कवि ने इस कविता में हिमालय की प्राकृतिक छटा का वर्णन करते हुए हिमालय और भारतीयों की एक जैसी विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उनके अटूट संबंधों का वर्णन किया है।

प्रश्न (ii)
हिमालय को सबल धरती का ताज कहने का कारण क्या है?
उत्तर:
हिमालय को सबल धरती का ताज कहने का कारण यह है कि हिमालय पर्वत की चोटी एवरेस्ट, विश्व के सभी पर्वतों की चोटियों से ऊँची है।

प्रश्न (iii)
‘मन इसका गंगा का बचपन
तन वरन-वरन मुख निरावन’
का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आशय:
हिमालय पर्वत से परम पवित्र गंगा नदी का उद्गम होता है तथा हिमालय पर्वत विभिन्न रंग और आकार वाली हरी-भरी वनस्पतियों से ढका हुआ है। इसका मुँह निरावरण है अर्थात् वहाँ वनस्पतियाँ नहीं हैं।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
हिमालय पर्वत संसार का सबसे ऊँचा पर्वत होने के कारण पर्वतराज है। यह अत्यधिक ऊँचा होने के कारण आसमान को छूता हुआ प्रतीत होता है। इसके चरण पाताल की गहराई में समाए हुए हैं। इससे पवित्र गंगा निकलती है। इस पर विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ उत्पन्न होती हैं। यह सदा बर्फ से ढक रहता है। यह दृढ़, विशाल है। यह किसी के आगे नहीं झुकता। इसी प्रकार भारतीय भी दृढ़ता में हिमालय की तरह हैं। वे भी किसी के आगे नतमस्तक नहीं होते हैं।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
हिमालय को पर्वतराज और धरती का ताज कहकर उसकी महानता का वर्णन किया गया है। हिमालय की तरह भारतवासी भी अडिग, अष्टल, दृढ़ हैं। (पर्वत-पहाड़) में अनुप्रास अलंकार है। वरन-वरन में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार तथा काव्यांश में मानवीकरण अलंकार है विशेषणों का सटीक प्रयोग हुआ है। तत्सम शब्दावलीयुक्त खड़ी बोली है। लय और तुक का समावेश है।

प्रश्न 2.
अरुणोदय की पहली लाली इसको ही चूम निखर जाती,
फिर संध्या की अंतिम लाली इस पर ही झूम बिखर जाती।
इन शिखरों की माया ऐसी
जैसा प्रभात, संध्या वैसी
अमरों को फिर चिंता कैसी
इस धरती का हर लाल खुशी से ‘उदय-अस्त अपनाता है।
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है॥ (Page 54)

शब्दार्थ:

  • अरुणोदय – सूर्य का उदय होना।
  • निखर जाना – सुंदर हो जाना।
  • उदय-अस्त – उदय होना और अस्त होना अर्थात् सुख-दुख।

प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश गोपालसिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित कविता ‘हिमालय और हम’ से लिया गया है। इस काव्यांश में कवि ने बताया है कि हिमालय पर जिस प्रकार उदय और संध्या की लालिमा समान रूप से दिखाई देती है, उसी प्रकार हम भारतीय भी दुख और सुख को समान भाव से ग्रहण करते हैं।

व्याख्या:
हिमालय की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कवि कहता है कि उदयकाल अर्थात् प्रातःकाल में जब सूर्य की किरणें हिमालय पर्वत की हिम-सतह पर पड़ती हैं तो वे इसका स्पर्श पाकर, इसको चूमकर और भी अधिक सुंदरता में प्रकट होती हैं। इसी प्रकार सायंकाल में सूर्यास्त के समय की अंतिम किरणों की लालिमा भी हिमालय की सतह पर झोंका खाते हुए मंद गति से बिखर जाती हैं।

हिमालय की चोटियों में ऐसी विलक्षण अलौकिक शक्ति है कि यहाँ पर जैसा प्रातःकाल का दृश्य दिखाई देता है, वैसा ही सायंकाल का भी। दूसरे शब्दों में, जिस प्रकार हिमालय पर्वत का प्राकृतिक सौंदर्य प्रातःकाल और सायंकाल दोनों में समान होता है उसी प्रकार भारतीय भी समान भाव से सुख और दुख को ग्रहण करते हैं। भारतवर्ष की धरती का हर जवान भी जीवन व मृत्यु को समान भाव से अपनाता है।

देश की रक्षा में तत्पर हर जवान मृत्यु का वरण कर अमर हो जाता है। हिमालय की तरह भारतीय जवान भी अमर है क्योंकि वह जीवन-मृत्यु पर सोच-विचार या चिंतन नहीं करते। भारत का प्रत्येक निवासी सुख-दुख और उत्थान-पतन को समरसता से अपनाता है। पर्वतों के राजा हिमालय से भारतीयों का ऐसा ही अटूट संबंध और रिश्ता है।

विशेष:

  1. हमें जीवन के उत्थान-पतन, सुख-दुख दोनों स्थितियों को समान भाव से भोग करना चाहिए।
  2. भारतीय संस्कृति की विशेषताओं का गुणगान किया गया है।
  3. ‘लाल’ में श्लेष अलंकार है।
  4. भाषा अत्यंत मधुर, सरस एवं कोमल है।
  5. संगीतात्मकता एवं तुकांतात्मकता है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
हिमालय पर प्रातः और संध्या की क्या विशेषता है?
उत्तर:
हिमालय पर जैसा प्रातःकाल होता है, वैसा ही सायंकाल होता है। यहाँ प्राकृतिक सौंदर्य प्रातः और संध्या में एक समान होता है?

प्रश्न (ii)
इस धरती के लाल की क्या विशेषता है?
उत्तर:
इस धरती के लाल (सुपुत्र) उत्थान-पतन और सुख-दुख दोनों को समान भाव से अपनाते हैं।

प्रश्न (iii)
हिमालय पर्वत और भारतीय जवान में क्या समानता बताई गई है?
उत्तर:
हिमालय पर्वत अमर है और भारतीय जवान भी अमर है। दोनों में अमर होने की समानता है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
हिमालय पर्वत का प्राकृति सौंदर्य सुबह-शाम एक जैसा होता है। हिमालय सदा बर्फ से ढका रहता है। इसके शिखरों में अलौकिक शक्ति है। हिमालय पर्वत की भाँति प्रत्येक भारतीय भी सुख-दुख, जीवन-मृत्यु के समान भाव से ग्रहण करते हैं। हिमालय और भारतीय दोनों ही अमर हैं। इस प्रकार हिमालय के साथ भारतीयों के अटूट संबंधों का वर्णन किया गया है।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
भारतीय संस्कृति की विशेषताओं का गुणगान किया गया है। “लाल’ में श्लेष अलंकार है। ‘उदय-अस्त’ और उत्थान-पतन, सुख-दुख के प्रतीक हैं। भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है। संगीतात्मकता एवं तुकांतात्मता है। शब्द चयन सटीक है।

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प्रश्न 3.
हर संध्या को इसकी छाया सागर-सी लंबी होती है
हर सुबह वही फिर गंगा की चादर-सी लंबी होती है।
इसकी छाया में रंग गहरा
है देश हरा, परदेश हरा
हर मौसम है, संदेश-भरा
इसका पद-तल छूनेवाला वेदों की गाथा गाता है।
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है। (Page 54)

शब्दार्थ’:

  • सागर-सी – समुद्र के समान।
  • चादर-सी – चादर की भाँति।
  • पद-तल – तलहटी।
  • संदेश-भरा – सूचना से भरपूर।

प्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश गोपालसिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित कविता ‘हिमालय और हम’ से उद्धृत है। कवि हिमालय और भारतीयों के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहता है।

व्याख्या:
हिमालय पर्वत की संध्या के समय छाया सागर के समान लंबी होती है और वह हर सुबह गंगा की चादर की तरह लंबी होती है; अर्थात् हिमालय पर्वत अत्यंत विशाल और विस्तृत है। इसके मैदान अत्यंत विशाल और विस्तृत हैं जिनमें से हिमालय से निकलने वाली गंगा नदी बहती है। गंगा के मैदान अत्यंत उपजाऊ हैं। गंगा नदी के मैदानों के खेत हरे-भरे हैं। फसलें लहलहाती हैं।

हिमालय की गोद में बसा भारत और दूसरे देश भी इससे निकलने वाली नदियों के कारण हरे-भरे हैं। इस देश का प्रत्येक मौसम (ऋतु) संदेश से भरा होता है; अर्थात् प्रत्येक ऋतु में भारतीयों को कोई-न-कोई संदेश मिलता है। वेदों की रचना भी इसकी गोद में हुई थी और आज भी लोग ज्ञान की साधना के लिए हिमालय की ओर जाते हैं। दूसरे शब्दों में, वेदों की रचना हिमालय के चरणों में बैठकर ही हुई थी। पर्वतराज हिमालय से हम भारतीयों का कुछ ऐसा संबंध है।

विशेष:

  1. सागर-सी लंबी, चादर-सी लंबी में उपमा अलंकार है।
  2. हिमालय की इस विशेषतां को प्रकट किया गया है कि इसी की गोद में भारतीय ग्रंथ वेदों की रचना हुई है।  हिमालय पर्वत अत्यंत विस्तृत और विशाल है।
  3. भाषा सरल, सरस खड़ी बोली है।
  4. काव्यांश में संगीतात्मकता और तुकांतात्मकता है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
‘हर संध्या…लंबी होती’ का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
हिमालय पर्वत अत्यंत विशाल और विस्तृत है। इसके मैदान अत्यंत विशाल और विस्तृत हैं। उन मैदानों में हिमालय से निकलने वाली गंगा नदी बहती है। गंगा के मैदानों के खेत हरे-भरे हैं। जिनमें फसलें लहलहाती हैं।

प्रश्न (ii)
‘इसका पद-तल छूने वाला वेदों की गाथा गाता है’-से कवि का क्या आशय है?
उत्तर:
इसका आशय है कि वेदों की रचना हिमालय की गोद में हुई थी और आज भी लोग ज्ञान की साधना के लिए हिमालय की ओर जाते हैं।

काठ्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत काव्यांश का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
काव्य-सौंदर्य:
हिमालय की विशेषताओं को व्यक्त किया गया है। यह अत्यंत विस्तृत और विशाल है। वेदों की रचना भी यहीं हुई थी। ‘सागर-सी’, ‘चादर-सी’ में उपमा अलंकार है। ‘गाथा-गाता’ में अनुप्रास अलंकार है। भाषा तत्सम शब्दावलीयुक्त खड़ी बोली है। काव्यांश में संगीतात्मकता और एकांतात्मकता है।

प्रश्न 4.
जैसा यह अटल, अडिग-अविचल, वैसे ही हैं भारतवासी (M.P. 2009)
है अमर हिमालय धरती पर, तो भारतवासी अविनाशी
कोई क्या हमको ललकारे
हम कभी न हिंसा से हारे
दुःख देकर हमको क्या मारे
गंगा का जल जो भी पी ले, वह दुःख में भी मुसकाता है।
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है। (Page 54)

शब्दार्थ:

  • अटल – न टलने वाला।
  • अडिग – न डिगने वाला।
  • अविचल – स्थिर।
  • अविनाशी – जिसका नाश न हो, जो नष्ट न हो।

प्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश में ‘नेपाली’ जी ने बताया है कि हिमालय की तरह हम भी अविचल और अमर हैं। उन्होंने हिमालय और भारतवासियों के संबंध का वर्णन करते हुए हिमालय और भारतीयों के समान गुणों का भी वर्णन किया है। अतिपावन गंगाजल का महत्त्व भी कवि ने प्रस्तुत पद्यांश में स्पष्ट किया है।

व्याख्या:
जिस प्रकार हिमालय पर्वत अटल, अडिग और निश्चल है उसी प्रकार भारतवासी भी अपने प्रण व अपने निश्चय पर अडिग रहते हैं। भारतीय एक बार जिस बात को करने की ठान लेते हैं, तो फिर जान देकर भी उस प्रतिज्ञा को पूर्ण करते हैं। उनका तो मूल मंत्र है-‘प्राण जाइ पर वचन न जाई।’ जिस प्रकार धरती पर हिमालय अमर है, उसी प्रकार भारत में रहने वाले भारतीय भी अमर हैं, शाश्वत हैं। भारतीयों की इसी विशेषता के कारण कवि इकबाल ने भी कहा है, कि –

“कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी,
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा।”

अनेक हिंसक आक्रमणकारियों (मुसलमानों और अंग्रेजों) ने हम पर हमले किए किंतु दुख-यातनाएँ देकर, हमारे तन को लहूलुहान करके भी वे हमारे मन को मार न सके; अर्थात् भारतीय कभी भी हिंसा के दम पर पराजित नहीं हुए। तन पर अत्याचार सहने के बावजूद मन से नहीं हारे। कवि कहता है कि इसका मुख्य कारण हमारी अति पावनी नदी गंगा है, जिसका गंगाजल पीकर भारतीय हर दुख-दर्द को हँसकर झेल लेते हैं। हिमालय पर्वत से निकलने वाली गंगा नदी का जल जो भी पी लेता है, वह दुख में भी हँसता है। इस प्रकार गंगा नदी के कारण हिमालय के साथ हमारा अटूट संबंध है, जो अपने अमृत तुल्य जल का पान करा भारतवासियों को भी अमर बना देती है।

विशेष:

  1. भारतीय संस्कृति संसार की प्राचीनतम संस्कृति है, जो प्राचीनकाल से लेकर आज तक शाश्वत है, अविनाशी है। कवि ने इस लक्ष्य की ओर भी संकेत किया है।
  2. हिमालय के लिए अटल, अडिग, अविचल विशेषणों का सार्थक प्रयोग किया है।
  3. अटल, अडिग, अविचल, अमर-अविनाशी में अनुप्रास अलंकार की छटा द्रष्टव्य है।
  4. ‘दुःख में भी मुसकाता है’-पंक्ति में विरोधाभास है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
हिमालय की किन विशेषताओं का वर्णन किया गया है?
उत्तर:
हिमालय की अटल, अडिग, अविचल तथा अविनाशी होने की विशेषताओं का वर्णन किया गया है।

प्रश्न (ii)
गंगा के जल के प्रभाव का काव्यांश के आधार पर वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हिमालय से निकलने वाली गंगा अत्यंत पवित्र है। इसका जल जो भी पी लेता है। वह दुख में भी मुस्कराता रहता है। गंगा का जल पीने वाला प्रत्येक दुख को हँसते-हँसते सहन कर जाता है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
कवि ने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं का वर्णन किया है। वह प्राचीनकाल से लेकर अब तक शाश्वत है, अविनाशी है। जिस प्रकार हिमालय अटल, अडिग, अविचल और अविनाशी है उसी प्रकार भारतीय भी। गंगा नदी भारत की परम पवित्र नदी है। हिमालय और भारतीयों का परस्पर अटूट संबंध है।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
हिमालय और भारतीयों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है। अटल, अडिग, अविचल, कोई क्या, दुःख देकर में अनुप्रास अलंकार है। हिमालय के लिए अटल, अडिग, अविचल, अविनाशी विशेषणों का सार्थक प्रयोग किया है। ‘दुःख में भी मुस्काता है, में विरोधाभास अलंकार है। भाषा तत्सम शब्दावलीयुक्त खड़ी बोली है। काव्यांश में संगीतात्मकता और तुकांतात्मकता है। शब्द चयन सटीक है।

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प्रश्न 5.
टकराते हैं, इससे बादल, तो खुद पानी हो जाते हैं।
तूफ़ान चले आते हैं, तो ठोकर खाकर सो जाते हैं।
जब-जब जनता को विपदा दी
तब-तब निकले लाखों गाँधी
तलवारों-सी टूटी आँधी
इसकी छाया में तूफान, चिरागों से शरमाता है।
गिरिराज, हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है। (Page 54)

शब्दार्थ:

  • तूफान – आँधी, संकट।
  • ठोकर खाना – इधर-उधर भटकना।
  • विपदा – संकटा।

प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश गोपालसिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित कविता ‘हिमालय और हम’ से उद्धृत है। हिमालय और भारतीयों के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए ‘नेपाली’ जी हिमालय और भारतीयों की सामाजिक विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं –

व्याख्या:
हिमालय पर्वत अत्यंत ऊँचा है। इसकी चोटियों से मानसून के बादल टकराते हैं और स्वयं ही वर्षा के रूप में बरस पड़ते हैं। भाव यह कि हिमालय बादलों को रोककर भारतवर्ष में वर्षा करता है। इसी प्रकार जो हमसे टकराता है चूर-चूर हो जाता है। हिमालय से टकराकर तूफान भी शाब हो जाते हैं। उनमें इतनी शक्ति भी नहीं रहती कि वे दीपक को भी बुझा पाएँ। दूसरे शब्दों में, हिमालय की छत्र-छाया में रहने वालों का कोई भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह हिमालय सदैव आक्रमणकारियों से हमारी रक्षा करता है।

जब-जब भी शासन ने भारत की जनता को विपत्ति में डाला और दुख दिए, तब-तब ही जनता की विपत्तियों को दूर करने के लिए और दुःखों से छुटकारा दिलाने के लिए लाखों सत्याग्रही घर-बार की चिंता छोड़कर निकल पड़े। हिमालय पर्वत की छाया में आकर बड़े से बड़े तूफान भी कमजोर पड़ जाते हैं। उनमें – चिरागों अर्थात् दीपकों को भी बुझाने की शक्ति नहीं रहती। हम भारतवासियों का हिमालय पर्वत से ऐसा ही कुछ संबंध है।

विशेष:

  1. कवि ने हिमालय के लाभों का वर्णन किया है।
  2. ‘तलवारों-सी’ में उपमा अलंकार है।
  3. ‘जब-जब, तब-तब’ में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।
  4. ‘पानी हो जाना, ठोकर खाना’ मुहावरों से पद अलंकृत है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
हिमालय के दो लाभ बताइए।
उत्तर:

  1. हिमालय पर्वत बादलों को रोककर भारत में वर्षा कराता है।
  2. हिमालय पर्वत से टकराकर तूफान भी शांत हो जाते हैं।

प्रश्न (ii)
जब-जब जनता को विपदा दी
तब-तब निकले लाखों गाँधी
– उपर्युक्त पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आशय:
जब-जब भी शासन ने भारतीय जनता को विपत्ति में डाला, उस पर अन्याय, अत्याचार किए तब-तब जनता को दुखों, अन्याय, अत्याचार से छुटकारा दिलाने में लाखों सत्याग्रही हर प्रकार की चिंता त्यागकर निकल पड़ते हैं।

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MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 4 पितृसेवा परं ज्ञानम्

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MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 4 पितृसेवा परं ज्ञानम् (कथा)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 4 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिख-(एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(क) मदन विनोदः कस्य पुत्रः आसीत्? (मदन, विनोद किसके पुत्र थे?)
उत्तर:
हरिदत्तस्य। (हरिदत्त के)

(ख) मदनं विनोदेन स्वर्णपञ्जरस्थः शुकः कुत्र स्थापितः? (मदन विनोद ने सोने के पिंजरे में स्थित शुक को कहाँ रखा?)
उत्तर:
शयनेन कक्षे। (सोने वाले कमरे)

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(ग) त्रिविक्रमनामा द्विजः कस्य सखा आसीत्? (विक्रम नाम का ब्राह्मण किसका मित्र था?)
उत्तर:
हरिदत्तस्य (हरिदत्त का)।

(घ) देवशर्मा कुत्र तपः अकरोत्? (देवशर्मा ने कहाँ तपस्या किया?)
उत्तर:
गंगातीरे (गंगा के किनारे)।

(ङ) देवशर्मोपरि केन पुरीषोत्सर्ग कृतः? (देवशर्मा के ऊपर किसने टट्टी किया?)
उत्तर:
बलाकि (बगुली)।

प्रश्न 2.
अधोलिखित प्रश्नां एकवाक्येन उत्तरं लिखत (नीचे लिखे प्रश्नों का एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) मदनविनोद पितुः शिक्षा केन कारणेन न शृणोति? (मदनविनोद पिता की शिक्षा किस कारण से नहीं सुनता था?)
उत्तर:
मदन विनोद पितुः शिक्षा दुखश्यनेनो कारणेन न शृणोति। (मदन विनोद पिता की शिक्षा दुख के कारण नहीं सुनता था।)

(ख) मदन विनोदस्य आसक्तिः केषु आसीत्? (मदन विनोद का लगाव किसमें था?)
उत्तर:
मदनविनोदस्य आसक्तिः द्यूतमृगयवेश्यामद्यादिषु आसीत्। (मदन विनोद का लगाव जुआ खेलने, वेश्यावृत्ति और मदिरापान आदि में था।)

(ग) द्विजपत्नी देवशर्माणं किम उक्तवती? (ब्राह्मण की पत्नी ने देवशर्मा से क्या बोली?)
उत्तर:
द्विजपत्नी देवशर्माणं नाहं बलाकेव त्वत्कोपस्थानम् उक्तवती। (ब्राह्मण की पत्नी देव शर्मा से बोली, मैं तुम्हारे बालक को स्थापित नहीं की हूँ।)

(घ) देवशर्मा विस्मितः कथं सजातः? (देवशर्मा किस तरह से विस्मित हो गए?)
उत्तर:
देवशर्मा विस्मितः प्रच्छन्नपातकज्ञानादीत सञ्जातः। (देव शर्मा छुपे हुए पापी ज्ञान के कारण विस्मित हो गए।)

(ङ) देवशर्मा व्याधं कीदृशम् अपश्यत्? (देवशर्मा ने बहेलिया को किस तरह से देखा?)
उत्तर:
देवशर्मा व्याधं रक्ताक्तहस्तं यम प्रतिमं मांसविक्रयं विद्धानं अपश्यत्। (देवशर्मा ने बहेलिए को रक्तरंजित हाथ तथा मांस बेचते हुए देखा।)

प्रश्न 3.
अधोलिखित प्रश्नां उत्तराणि लिखत (निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखो)
(क) शुको देवशर्मणः पतनाय किं कारणमवोचत्? (तोते ने देवशर्मा के पतन के लिए क्या कारण बताया?)
उत्तर:
शुको देवशर्मणः पतनाय पित्रोस्ते दुःखिनोर्दुः खात्पतत्यश्रुचयो भूवि कारणमवोचत्। (तोते ने देव शर्मा के पतन का कारण बताया कि तुम्हारे पिता दुख से दुखी थे और उनके अश्रु भूमि पर गिर रहे थे।)

(ख) बलाका कथं भस्मीभूता जाता? (बगुला किस तरह से भस्म हुआ?)
उत्तर:
बलाका तपस्वी क्रोधाग्निना भष्मीभूता जाता। (बगुला तपस्वी के क्रोध के कारण भस्म हुआ।)

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(ग) के जनाः निन्द्यमानाः जीवन्ति? (कौन लोग निन्दनीय जीवन जीते हैं?)
उत्तर:
स गृही मुनिः साधु स योगी स च धार्मिकः पितृशुश्रूषको नित्यं जन्तुः साधारणश्च य। (वही व्यक्ति गृहस्थ है, वही मुनि साधु योगी है, जो पिता की सेवा में नित्य लगा हुआ है, ऐसे व्यक्ति साधारण होते हुए भी श्रेष्ठ हैं।)

(घ) व्याधः स्वज्ञानस्य कारणम् किम् उत्कवान? बहेलिया ने अपने ज्ञान का क्या कारण बताया?
उत्तर:
न पूजयन्ति ये पूज्यान्मान्यान्न मानयन्ति ये। जीवन्ति निन्द्यमानास्ते मताः स्वर्ग न यान्ति च। (जो पूजा योग्य की पूजा नहीं करते, मानने योग्य को नहीं मानते, निन्द्य होकर वह इस जीवन में जीते तथा मरने पर उन्हें स्वर्ग नहीं मिलता ऐसे लोग निन्दनीय जीवन जीते हैं।)

(ङ) अस्य पाठस्य आशयः कः? (इस पाठ का क्या आशय है?)
उत्तर:
अस्य पाठस्य आशयः-पितरौ सेवा। (इस पाठ का आशय है-माता-पिता की सेवा करना)

प्रश्न 4.
अधोलिखत वाक्येषु पदपूर्ति कुरुत
(क) हरिदत्तः कुपुत्रं दृष्ट्वा दुखितः सञ्जातः।
(ख) शुकं सपत्नीकं पुत्रवत्वं परिपालय।
(ग) तपस्वी गङ्गातीरे जपार्थमुपविष्टः।
(घ) ब्राह्मण ज्ञानकारणं व्याध प्रप्रच्छ।
(ङ) नाहं बलाकेय त्वत्कोपस्थानम्
(च) क्रोधाग्निना भस्भीभूतां बलाकां भूमौ पतिताम्।

प्रश्न 5.
‘अ’ ‘ब’ स्तम्भयों यथायोग्यं मेलनम् कुरुत-
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उत्तर:
क. 5
ख. 3
ग. 1
घ. 2
ड. 4

प्रश्न 6.
अधोलिखित संधीनां विच्छेदं कुरुत
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 4 पितृसेवा परं ज्ञानम् img-2

प्रश्न 7.
अधोलिखित समासानां विग्रहं कुरुत
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 4 पितृसेवा परं ज्ञानम् img-3

प्रश्न 8.
अधोलिखिताव्ययाना वाक्येषु प्रयोगं कुरुत
(उपरि, च, तत्र, एवम, न, ऊर्ध्वम, इव, कथम्)
उपरि – वायुयानमः उपरि-उपरि उड्डयति।
च – राम-लक्ष्मणसीताश्च वनं आगच्छत्।
तत्र – तत्र वायु प्रवहति।
एवम् – सः एवम् कथाम् अकथयत्।
न – वृष्टिः न भविष्यति।
ऊर्ध्वम् – खगाः ऊर्ध्वम् उड्डयन्ति।
इव – गीता वाक्देवि इव पठति।
कथम – कथम् सः शीघ्रम संस्कृतं पठति।

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प्रश्न 9.
अधोलिखित वाक्यानि कः कम् कथयति
(क) एनं शुकं सपत्नीक पुत्रत्व परिपालय।
उत्तर:
त्रिविक्रमाः हरिदत्तं कथयति।

(ख) अस्ति पञ्चपुरं नाम नगरम्।
उतर:
शुकः मदनविनोदम् कथयति।

(ग) नाहं बलाकेव त्वत्कोपस्थानम्।
उत्तर:
नारायणस्य पनि देवशर्माणम् कथयति।

(घ) कथं सती ज्ञानवती, कथं च त्वं ज्ञानवान।
उत्तर:
देवशर्मा व्याधम् कथयति।।

(ङ) ये मान्यान न मानयन्ति ते मृताः स्वर्गं न यान्ति।
उत्तर:
व्याधाः ब्राह्मणं कथयति।

प्रश्न 10.
अधोलिखित शब्दानां प्रकृति प्रत्ययम् च पृथक कुरुत
(क) गृहीत्वा
उत्तर:
गृह्+क्त्वा

(ख) दत्तम्
उत्तर:
दा+क्त

(ग) ज्ञानवान
उत्तर:
ज्ञान+मतुप

(घ) परित्यज्य
उत्तर:
परि+त्यज क्त्वा (ल्यप)

(ङ) निन्द्यमानाः
उत्तर:
निन्द्य+शानच्।

प्रश्न 11.
अधोलिखित शब्दानां मूलशब्दं विभक्ति वचनञ्च लिखत
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पितृसेवा परं ज्ञानम् पाठ-सन्दर्भ/प्रतिपाद्य

संस्कृत साहित्य में कथा (आख्यान) साहित्य की दो विधाएँ उपलब्ध हैं। पहली विधा में उपदेशात्मक नीति-कथात्मक साहित्य है जिसमें ‘पंचतंत्र’ पशु-पक्षियों के माध्यम से (प्रेरक एवं ज्ञानवर्द्धक कथाएँ) रोचक ढंग से कही गई हैं। दूसरी विधा में लोककथात्मक मनोरंजक साहित्य आता है। उपदेशात्मक नीति कथा साहित्य में ‘शुक सप्ततिः’ प्रसिद्ध ग्रंथ है। नीति-कथा में उपदेश की प्रवृत्ति तथा लोक-कथा साहित्य में मनोरंजन की वृत्ति प्रमुख रूप से होती है। शुक सप्ततिः उपदेशात्मक कथा का एक उत्तम ग्रंथ है। इस (ग्रंथ के) लेखक के विषय में अथवा इसके रचना काल में निश्चय नहीं है किंतु इस समय शुक नाम से उपलब्ध है। सन् 1400 ई. का मध्य इस कथा-ग्रंथ का रचना काल अनुमानित है। अतः उसी में से एक मातृ-पितृ भक्ति परक कथा शिक्षण के दृष्टिकोण से उपलब्ध है।

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पितृसेवा परं ज्ञानम् पाठ का हिन्दी अर्थ

1. चन्द्रपुरनाम्नि नगरे श्रेष्ठिनः हरदत्तस्य पुत्रः मदनविनोदस्तु अतीवविषयासक्तः कुपुत्रः पितुः शिक्षा न शृणोति स्म। तस्य द्यूतमृगयावेश्यामद्यादिषु अतीव आसक्तिः। कुमार्गचारिणं तं कुपुत्रं दृष्ट्वा तत्पिता हरिदत्तः सपत्नीकः अतीव दुःखितः सञ्जातः। तं हरिदत्तं कुपुत्रदुःखेन पीडितं दृष्ट्वा। तस्य सखा त्रिविक्रमनामा द्विजः स्वगृहतो नीतिनिपुणं शुकं सारिकां च गृहीत्वा तद्गृहे गत्वा प्राह-‘सखे हरिदत्त! एनं शुकं पुत्रवत्त्वं सपत्नीकं परिपालय। एतत्संरक्षणेन तव दुःखं दूरीभविष्यति।’ हरिदत्तस्तु शुकंगृहीत्वा पुत्राया समर्पयामास। मदनविनीदेन शयनमन्दिरे स्वर्णपञ्जरस्थः स्थापितः परिपोषितश्च। अथैकदा रहसि शुको मदनं प्राह-हे सखे!

पित्रोस्ते दुःखिनोर्दुःखात्पतत्यश्रुचयो भुवि।
तेन पापेन ते वत्स पतनं देवशर्मवत्॥2॥

शब्दार्थ :
श्रेष्ठिनः-सम्पन्न व्यापारी का-Talented Businessman or Rich Businessman; मदनविनोदस्तु-मदन और विनोद–Madan and Vinod ; विषयासक्तः-विषयों में आसक्त-Strongly attached in bad habit; न शृणोत स्म-नहीं सुनते थे-did not listen; दृष्ट्वा -देखकर-to see , to look; तत्पिता-उसके पिता-his father; हरिदत्तं-हरिदत्त को-to Hari datt; स्वगृहतो-अपने घर में-in his oun house. नीतिनिपुणं-नीति में निपुणं-talented in policy; मद्गृहे-उस घर में-In its house. एतत्संरक्षणेन-इसके संरक्षण से –By his patronage; समर्पयामास-समर्पित किया-dedicated; शयनमन्दिर-शयन मन्दिर में-in sleeping room. स्वर्णपञ्जरथः-सोने के पिंजरे-cage of gold;अथैकदा-इस प्रकार एक दिन-inthis type one day;रहसि-अकेले में-inalone; पित्तोश्ते-तुम्हारे पिता-your father; भुवि-संसार में-inworld; देवशर्मवत्-देव शर्मा के सामन-like Dev Sharma.

हिन्दी अर्थ :
चन्द्रपुर नामक नगर में हरिदत्त का पुत्र मदन विनोद अत्यधिक विषयासक्त होने के कारण कुपुत्रों (की भांति) पिता की शिक्षा को नहीं सुनता था। उसमें जुआ, मृगया, वेश्यागमन आदि में विशेष आसक्ति थी। कुपुत्र के कुमार्ग गामी होने को देखकर उसका पिता हरिदत्त पत्नी सहित बहुत दुखी रहता था। उस हरिदत्त को कुपुत्र की कुआदतों से दुखी देखकर उसका मित्र त्रिविक्रम नामक ब्राह्मण अपने घर से नीति निपुण तोता-मैना लेकर हरिदत्त के घर जाकर बोला-‘हे मित्र हरिदत्त! इस तोते का सपत्नीक पुत्रवत पालन करो। इसका संरक्षण करने से तुम्हारा दुःख दूर होगा। हरिदत्त ने तोते को लेकर अपने पुत्र को दे दिया। तोता मदन विनोद के शयनकक्ष में स्वर्ण निर्मित पिंजरे में रहता एवं पोषित होता हुआ तोता एक दिन अकेले में उससे बोला-हे मित्र!

तुम्हारे पिता के कष्ट में होने के कारण उनका आँसू भूमि पर गिर गया। हे वत्स! उस पाप से तुम्हारा भी पतन देवशर्मा के समान होगा।

2. स प्राह-‘कथमेतत?’
शुक आह-अस्ति पञ्चपुरं नाम नगरम्। तत्र सत्यशर्मा ब्राह्मणः। तद्भार्या धर्मशीलानाम्नी। पुत्रस्तु देवशर्मा। स च अधीतविद्यः पितृप्रच्छन्नवृत्या देशान्तरं गत्वा भागीरथीतीरे तपः कृतवान्।

एकदा स तपस्वी गङ्गातीरे जपार्थमुपविष्टः। तस्मिन्काले कयाचित् बलाकया उड्डीयमानया तदङ्गोपरि पुरीषोत्सर्गः कृतः। स च तपस्वी क्रोधाकुलितनेत्रः यावदूर्ध्वं पश्यति तावत्तत्क्रोधग्निना भस्मीभूतां बालकं भूमौ पतितां दृष्ट्वा (बलाकां दग्ध्वा) नारायणद्विजगृहे भिक्षार्थ ययौ। स्वभर्तृशुश्रूषापरया तत्पत्न्या कोपाभिविष्टो निर्भर्त्सतः सत्पक्षिहायमुक्तश्च –

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‘नाहं बलाकेव त्वत्कोपस्थानम्।’-
स च प्रच्छन्नपातकज्ञानादीतो विस्मितश्च, प्रेषितश्च तया धर्मव्याधपार्वे वाराणसी नगरी ययौ। तत्र रक्ताक्तहस्तं यमप्रतिभं मांसविक्रयं विद्धानं तं दृष्टवा दृशामन्तः स्थितः। व्याधेन स्वागतप्रश्नपूर्वकं स्वगृहं नीत्वा निजपितरी सभक्तिकं भोजयित्वा पश्चातस्य भोजनं दत्तम्। तदनन्तरं स च व्याधं ज्ञानकारणं पप्रच्छ-‘कथं सती ज्ञानवती, कथं च त्वं ज्ञानवान्।’

शब्दार्थ :
कथमेतत्-यह कैसे-How titis; धर्मशीलानाम्नी-धर्म शीला नाम की-Name of Dharmsheela; पितृपृच्छत्तवृत्या-पिता के द्वारा बताये गए, मार्ग पर-obey by father’s way; देशान्तरं-दूसरे देश को-to other country. भागीरथीतीरे-गंगा के किनारे-Bank ofGanga;जापार्शमुपविष्टः-जप करने के लिए बैठा-reading meettering of prayers; तस्मिन्काले-उसी समय-that time; उड्डीयमानथा-उठते हुए-flies; तदङ्गोपरि-उसके ऊपर-on thepartofhis body;पुरीषोत्सर्गः-उसके ऊपर मल (टट्टी)-onhis body;क्रोधाकुलित-क्रोध पूर,-forcefull; यावदूर्ध्वं-जब ऊपर-when on; पश्यति-देखता है-looks, sees; क्रोधाग्निना-क्रोध की अग्नि में-in the fire of angry.

भस्मीभूतां-जल गया-burnt; सत्पक्षिहायमुक्तश्च-निर्दोष पक्षी को मारने वाला-innocent birdkiller; ज्ञानावदीतो-ज्ञान से डरा हुआ-afraid of knowledge; विस्मित्-आश्चर्य चकित-wonderfull; प्रेषितश्च-भेजा-send; रक्ताक्तहस्तं-जिसके हाथ रक्त से रंगे हुए हों वह-red handed; यमप्रतिभं-यमराज के समान भयंकर-Horrible like Yamraj;ब्याधेन-बेहलिया ने-Hunter; दृशामन्तः स्थितः-गांव के कुछ दूर में स्थिति-few far of village in situated; स्वागतप्रश्नपूर्वक-स्वागत प्रश्न पूर्वक-wellcomed with question/ happyness: स्वगृह-अपने घर को-his own house; सभक्तिक-भक्ति पूर्वक-full of worship; तदनन्तरं-उसके बाद-often that; ज्ञानकारणं-ज्ञान का कारण-reasonof knowledge; पप्रच्छ-पूछा-asked.

हिन्दी अर्थ :
तब वह बोला-वह कैसे?
तोता बोला-पञ्चपुर नामक एक नगर था। वहाँ सत्य शर्मा नामक ब्राह्मण था। धर्मशीला नाम की उसकी पत्नी थी। उसका पुत्र देवशर्मा था। वह सभी विद्याओं में पारंगत होकर पिता के द्वारा निर्दिष्ट मार्ग पर चलते हुए देशान्तर जाकर गंगा के तट पर तप करने लगा।

एक बार वह तपस्वी गंगा के तट पर तप के उद्देश्य से बैठा था। उसी समय कोई बगुली ऊपर से उड़ती हुई उसके ऊपर विष्ठा कर दी। तब वह तपस्वी क्रोध में ज्यों ही ऊपर की ओर देखा, उसकी क्रोधाग्नि से वह बगुली भस्म होकर भूमि पर आ गिरी। बगुली को जला देखकर वह नारायण नामक ब्राह्मण के घर भिक्षा के उद्देश्य से गया। अपने पति की सेवा में परायण नारायण की पत्नी ने निरीह पक्षी के हत्यारे उस ब्राह्मण की भर्त्सना करते हुए कहा-बगुली के समान मैं तुम्हारे कोप का स्थान नहीं हूँ।

और इस पाप कृत्य के परिणाम से भयभीत वह ब्राह्मण उस द्वारा भेजा गया वाराणसी में धर्म व्याध नामक बहेलिए के पास गया। वहाँ उसने रक्त से सने हुए दोनों हाथों से मांस बेचते हुए यम के सदृश भयंकर रूप वाले उस व्याध को देखा और कुछ दूर खड़ा हो गया। व्याध ने स्वागत करते हुए आने का कारण पूछते हुए उसे अपने घर ले जाकर आदरपूर्वक अपने माता-पिता को भोजन कराने के पश्चात् भोजन कराया इसके बाद उसने ब्याध के ज्ञानी होने का कारण पूछा साथ ही उस सती स्त्री ज्ञानवती के विषय में पूछा, और तुम केसे ज्ञानवान हुए? यह भी बताने को कहा।

3. तेन व्याधेनोक्तम्
निजान्वयप्रणीतं यः सम्यग्धर्म निषेवते।
उत्तमाधममध्येषु विकारेषु पराङ्मुखः॥3॥
स गृही स मुनिः साधुः स योगी स च धार्मिकः।।
पितृशुश्रूषको नित्यं जन्तुः साधरणश्च यः॥4॥

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अहं सापि च एवं ज्ञानिनौ त्वं च निजपतिरौ परित्यज्य भ्रमन्मादृशां न सम्भाषणार्हः। परमतिथिं मत्वा जल्पितः। एवमुक्तः स ब्राह्मणो विनयपरं व्याधं पप्रच्छ। तेनोक्तम् –

न पूजयन्ति ये पूज्यान्मान्यान्न मानयन्ति ये।
जीवन्ति निन्द्यमानास्ते मृताः स्वर्गं न यान्ति च ॥5॥
व्याधेन बोधितस्तेन स ययौ गृहमात्मनः।
अभवत्कीर्तिमाल्लोके परतः कीर्तिभाजनम ॥6॥

तस्माद्वणिग्धर्मं स्वकुलोद्भवं स्मर पित्रोश्च विनयपरो भव।

एवमुक्ताः स मदनः विनयपरः सदाचारी च, अभवत् पितरौ नमस्कृत्य तदनुज्ञातो भार्याञ्चापृच्छय प्रवहणधिरूढवान् गाते देशान्तरम्।

शब्दार्थ :
निजान्वयप्रणीतम्-कुल द्वारा किया हुआ-it was done by family; पराङ्मुख-विमुख-separate; पितृशुश्रूषक-पिता की सेवा में लीन-serve in father; सम्भाषणहिः- संवादयोग्य-able of conversation; निजपतिरो-अपने माता पिता-his own parents; परित्यज्य-छोड़कर-leave; तेनोक्तम्-उसने कहा-he said; न पूजयन्ति-जो नहीं पूजते-who not worshipped; ये पूज्यान्मान्यान्न-जो पूजे जाने योग्य है-who is able to worshiped; ग्रहमात्मनः-अपने घर में-his won house.

हिन्दी अर्थ :
तब व्याध ने कहा-अपने कुलोचार का श्रद्धापूर्वक पालन करते हुए उत्तम, अधम, मध्यम आदि विकार से रहित होकर कार्य करना चाहिए। (जो ऐसा करता है) वही गृही है, वही मुनि है, वही सच्चा साधु है, वही सच्चा योगी व धार्मिक है जो माता-पिता की सेवा में नित्यप्रति लगा रहता है। वह व्यक्ति साधारण होने पर भी श्रेष्ट
है।

इस प्रकार मैं और वह स्त्री ज्ञानवती ज्ञानी हैं। तुम अपने माता-पिता को त्यागकर भ्रमित होकर कुछ भी कहने के योग्य नहीं हो-इस प्रकार वह परम अतिथि जानकर उस ब्राह्मण से विनयपूर्वक कहा ऐसा कहा.

जो पूजनीय व्यक्ति की पूजा नहीं करते, जो मानने योगय को नहीं मानते, ऐसे लोग निन्द्य होकर जीवन जीते हैं और मरने पर स्वर्गगामी नहीं होते। व्याध द्वारा बोधि पूर्ण शिक्षा पाकर वह देवशर्मा अपने घर गया और इस लोक में कीर्तिमान होकर अपना जीवन-यापन करने लगा। इसलिए तुम बनिए का धर्म अपने कुल के अनुसार स्मरण करके माता-पिता के प्रति विनम्र हो। यह सुनकर मदन विनोद विनय युक्त हो सदाचार का अनुसरण करने लगा। वह माता-पिता को नमस्कर करके उनकी आज्ञा ले, अपनी धर्मपत्नी से पूछ वाहन पर सवार होकर दूसरे देश को गमन किया।

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 5 लघु कथाएँ

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 5 लघु कथाएँ (लघुकथा, संकलित)

लघु कथाएँ पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

लघु कथाएँ लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बालक ने दयालु महिला से क्या सवाल किया?
उत्तर:
बालक ने दयालु महिला से सवाल किया कि “इस दूध का मूल्य कैसे चुका पाऊँगा।”

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प्रश्न 2.
रोगग्रस्त महिला को देखकर डॉक्टर की आँख में चमक-सी क्यों आ गई?
उत्तर:
रोगग्रस्त महिला को डॉक्टर ने पहचान लिया था। ‘दूध का मूल्य’ चुकाने का समय आया देखकर डॉक्टर की आँखों में चमक-सी आ गई।

प्रश्न 3.
रवींद्रनाथ टैगोर क्या जानने के लिए उत्सुक थे?
उत्तर:
रवींद्रनाथ टैगोर ‘सौंदर्य क्या है?’ यह जानने के लिए उत्सुक थे।

प्रश्न 4.
मोमबत्ती बुझाने पर चाँदनी कहाँ-कहाँ फैल गई?
उत्तर:
मोमबत्ती बुझाने पर चाँदनी दरवाजे और खिड़की से होती हुई कमरे में फैल गई।

लघु कथाएँ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दयालु महिला ने बालक को क्या उत्तर दिया?
उत्तर:
बालक ने दयालु महिला से सवाल किया था कि वह इस दूध का मूल्य कैसे चुका पाएगा। इस पर महिला ने बालक को उत्तर दिया कि इस दूध के लिए उसे कुछ भी नहीं चुकाना होगा; क्योंकि सद्भाव से किए गए काम से कीमत की अपेक्षा नहीं की जाती।

प्रश्न 2.
डॉक्टर ने महिला को पत्र में क्या लिखा?
उत्तर:
डॉक्टर ने महिला को पत्र में लिखा-“बिल का भुगतान वर्षों पहले हो चुका, एक गिलास दूध ।” नीचे हस्ताक्षर थे-आपका दूधवाला बच्चा, जो आज डॉक्टर है।

प्रश्न 3.
मोमबत्ती बुझाने के बाद परिवेश में क्या परिवर्तन हुआ?
उत्तर:
मोमबत्ती बुझाने के बाद पूर्णिमा के चाँद की चाँदनी दरवाजे और खिड़की से झाँकती हुई पूरे कमरे में फैल गई। सारा परिवेश प्रकाशमय हो गया। चाँद यह कहता जान पड़ा कि “मैं बहुत देर से तुम्हें याद कर रहा था।” चाँदनी की दूधिया रोशनी में सारा परिवेश जगमगा उठा था।

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प्रश्न 4.
रवींद्रनाथ टैगोर को सौंदर्य की अनुभूति कैसे हुई?
उत्तर:
ठंडी हवा का झोंका आया और रवींद्रनाथ टैगोर का पूरा शरीर चंद्रमा की चाँदनी में नहा गया। वे प्राकृतिक सौंदर्य में इतने डूब गए कि उनके मुख से निकल पड़ा कि “यह है सौंदर्य!” इस प्रकार से उन्हें सौंदर्य की अनुभूति हुई।

लघु कथाएँ भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों का भाव पल्लवन कीजिए

प्रश्न 1.
सदाशयता किसी कीमत की अपेक्षा नहीं करती।
उत्तर:
भारतीय संस्कृति की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है कि सद्भाव के लिए किए गए किसी कार्य के लिए किसी प्रकार के मूल्य की अपेक्षा नहीं की जाती है। यह जीवन का आदर्श मूल्य है। मानव की प्रवृत्ति है कि वह इस प्रकार के कार्य करता रहता है। दीन-दुखियों की सेवा करना, भूखे को रोटी खिलाना आदि कार्य इसी श्रेणी में आते हैं। परोपकार के लिए किए गए कार्यों के पीछे भी यही भावना सक्रिय रहती है।

प्रश्न 2.
केवल शब्द पर ठहरकर अनुभूति नहीं होती।
उत्तर:
केवल शब्दों में लिखित सौंदर्य को पढ़कर सुंदरता की अनुभूति संभव नहीं है। शब्द तो सौंदर्य को व्यक्त करने के साधन मात्र हैं। शब्द अनुभूति कराने में असमर्थ हैं। सौंदर्य की अनुभूति तो अनुभव करने से होती है। मनःस्थिति बदलकर यह अनुभव प्राप्त किया जा सकता है।

लघु कथाएँ भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित अनेकार्थी शब्दों के वाक्य बनाइए –
अंक, मूल्य, कर, वर्ण, रस।
उत्तर:

  • अंक – परीक्षा में तुम्हें कुल कितने अंक प्राप्त हुए?
    इस नाटक में पाँच अंक हैं।
  • मूल्य – इस रेडियो का मूल्य कितना है?
    सत्य बोलना आदर्श जीवन का मूल्य है।
  • कर – हमें समय पर कर चुकाना चाहिए।
    श्रीकृष्ण के कर में मुरली शोभायमान है।
  • वर्ण – पहले भारतीय सामाजिक व्यवस्था चार वर्णों पर आधारित थी।
    हिंदी में वर्ण दो प्रकार के होते हैं-स्वर और व्यंजन।
  • रस – भारतीय काव्य-शास्त्र में नौ रस माने गए हैं।
    मौसमी का रस रोगी के लिए लाभप्रद होता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित भिन्नार्थक समोच्चरित शब्दों का अंतर स्पष्ट कीजिए।
दिन-दीन, उतर-उत्तर, शांत-श्रांत, नींद-निन्द्य।
उत्तर:

  • दिन – दिन में तारे दिखाई नहीं देते।
    दीन – हमें दीन-दुखियों की सेवा करनी चाहिए।
  • उतर – स्टेशन आने पर सवारियाँ गाड़ी से उतर गयीं।
    उत्तर – भारत की उत्तर दिशा में हिमालय पर्वत है।
  • शांत – कृपया शांत होकर नाटक का आनंद लीजिए।
    श्रांत – श्रमिक श्रांत होकर आराम कर रहा है।
  • नींद – चिंता में नींद नहीं आती।
    निन्द्य – दुराचार निन्य कर्म होता है।

प्रश्न 3.
अहा! यह है सौंदर्य’ यह विस्मयादिबोधक वाक्य है। इस वाक्य को निषेधवाचक और प्रश्नवाचक वाक्यों में परिवर्तित कीजिए।
उत्तर:
निषेधवाचक – यह सौंदर्य नहीं है।
प्रश्नवाचक – क्या यही सौंदर्य है?

लघु कथाएँ योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
ऐसे महापुरुषों की सूची बनाइए जो अभावों में पलकर महान् बने। उनके आदर्शों पर चलने का प्रयत्न कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
लघुकथाओं की प्रायोजना पुस्तिका बनाइए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 3.
किसी घटना को आधार मानकर एक लघुकथा लिखिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

लघु कथाएँ परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
असहाय बालक छोटी-मोटी चीजें बेचता था ताकि वह ………………
(क) घर का खर्च चला सके
(ख) अपनी पढ़ाई जारी रख सके
(ग) अपनी बीमार माँ का इलाज करा सके
(घ) अपने शौक पूरे कर सके
उत्तर:
(ख) अपनी पढ़ाई जारी कर सके।

प्रश्न 2.
घर का दरवाजा खोला था –
(क) नौकर ने
(ख) लड़की ने
(ग) महिला ने
(घ) गृह स्वामी ने
उत्तर:
(ग) महिला ने।

प्रश्न 3.
महिला को सामने देखकर बालक का जाग उठा …………..
(क) आत्मसम्मान
(ख) लालच
(ग) क्रोध
(घ) भय
उत्तर:
(क) आत्मसम्मान।

प्रश्न 4.
महिला ने बालक को दिया –
(क) एक गिलास दुध
(ख) एक गिलास पानी
(ग) एक गिलास पानी और दूध
(घ) एक गिलास लस्सी
उत्तर:
(क) एक गिलास दूध।

प्रश्न 5.
बालक ने महिला से क्या सवाल किया?
(क) इस दया का मूल्य कैसे चुका पाऊँगा?
(ख) इस दूध का मूल्य कैसे चुका पाऊँगा?
(ग) इस रोटी का मूल्य कैसे चुका पाऊँगा?
(घ) इस ममता का मूल्य कैसे चुका पाऊँगा?
उत्तर:
(ख) इस दूध का मूल्य कैसे चुका पाऊँगा?

प्रश्न 6.
रवींद्रनाथ टैगोर किस विषय पर पुस्तक पढ़ रहे थे?
(क) काव्यशास्त्र पर
(ख) नाट्यशास्त्र पर
(ग) तर्कशास्त्र पर
(घ) सौंदर्यशास्त्र पर
उत्तर:
(घ) सौंदर्यशास्त्र पर

प्रश्न 7.
रवींद्रनाथ टैगोर ने मोमबत्ती क्यों बुझा दी?
(क) वे श्रांत हो गए थे
(ख) वे ऊब गए थे
(ग) उन्हें नींद आने लगी थी
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी।

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प्रश्न 8.
कौन-सा सिद्धांत जीवन के हर क्षेत्र में लागू होता है?
(क) अध्ययन का
(ख) अनुभव का
(ग) शब्द का
(घ) बुद्धिमानी का
उत्तर:
(ख) अनुभव का

प्रश्न 9.
‘दूध का मूल्य’ का उद्देश्य है –
(क) नई पीढ़ी में मानवीय भावनाओं का विकास करना
(ख) नई पीढ़ी में कृतज्ञता का भाव उत्पन्न करना
(ग) नई पीढ़ी में अपने ऊपर उपकार को याद रखने का
(घ) नई पीढ़ी में आदर्श जीवन-मूल्यों को स्थापित करना
उत्तर:
(क) नई पीढ़ी में मानवीय भावनाओं का विकास करना।

प्रश्न 10.
‘शब्द और अनुभूति’ कहानी से लेखक का मानना है कि –
(क) सौंदर्य देखने की वस्तु है
(ख) सौंदर्य अनुभव की वस्तु है
(ग) सौंदर्य नष्ट होने वाली वस्तु है
(घ) सौंदर्य बेकार की वस्तु है
उत्तर:
(ख) सौंदर्य अनुभव की वस्तु है।

प्रश्न 11.
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कब फूंक मारकर मोमबत्ती की रोशनी बुझा दी?
(क) जब चाँदनी झाँकती हुई उनके कमरे में घुस गई।
(ख) जब उन्हें नींद आने लगी थी।
(ग) जब सारा वातावरण ज्योतिर्मय हो उठा।
(घ) जब वे यह जानने को उत्सुक हो उठे कि सौन्दर्य क्या है?
उत्तर:
(ख) जब उन्हें नींद आने लगी थी।

II. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर कीजिए –

  1. ………. बालक ने सोचा कि अगर जीना है तो अगले घर से रोटी माँगकर खांनी होगी। (समझदार लाचार)
  2. महिला भीतर गई और बालक को पीने के लिए एक गिलास – ………. दे दिया। (पानी, दूध)
  3. ………. जीवन पाकर महिला बहुत खुश थी। (स्वस्थ, नया)
  4. रवीन्द्रनाथ टैगोर ………. पर एक पुस्तक पढ़ रहे थे। (सौन्दर्यशास्त्र, तर्कशास्त्र)
  5. अंत में ………. काम आता है। (वल, अनुभव)

उत्तर:

  1. लाचार
  2. दूध
  3. नया
  4. सौन्दर्यशास्त्र
  5. अनुभव।

III. निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए –

  1. असहाय बालक अपनी नौकरी जारी रखने के लिए गली-गलियारों 5 में घूमता।
  2. गृहिणी ने दरवाजा खोला और सवाल किया, “तुम कौन हो?”
  3. बालक की बात सुनकर महिला ने कहा, “इस दूध के लिए तुम्हें कुछ भी नहीं चुकाना होगा।”
  4. चिट्ठी में लिखा था-“बिल का भुगतान बरसों पहले हो चुका, एक गिलास दूध।”
  5. यात्रा के आरंभ में अनुभव अवश्य हैं, पर अंत नहीं हो सकते।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. सत्य
  5. असत्य।

IV. निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए –

प्रश्न 1.
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 5 लघु कथाएँ img-1
उत्तर:

(i) (ग)
(ii) (घ)
(iii) (ङ)
(iv) (ख)
(v) (क)।

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V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

प्रश्न 1.
लाचार बालक ने क्या सोचा?
उत्तर:
लाचार बालक ने सोचा कि जीना है तो अगले घर से रोटी माँगकर खानी होगी।

प्रश्न 2.
गृहिणी ने बालक से क्या सवाश किया?
उत्तर:
गृहिणी ने बालक से सवाल किया, “क्या है?”

प्रश्न 3.
बालक ने महिला से क्या सवाल किया?
उत्तर:
बालक ने महिला से सवाल किया, “इस दूध का मूल्य कैसे चुका पाऊँगा?”

प्रश्न 4.
महिला किसकी शिकार हो गई?
उत्तर:
महिला एक गंभीर बीमारी की शिकार हो गई।

प्रश्न 5.
रवीन्द्रनाथ टैगोर क्या पढ़ रहे थे?
उत्तर:
रवीन्द्रनाथ टैगोर सौन्दर्यशास्त्र पर एक पुस्तक पढ़ रहे थे।

लघु कथाएँ लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बालक छोटी-मोटी चीजें क्यों वेचता था?
उत्तर:
बालक अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए छोटी-मोटी चीजें वेचता था।

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प्रश्न 2.
बालक ने रोटी माँगकर खाने का निर्णय क्यों किया?
उत्तर:
बालक भूखा-प्यासा था। भूख मिटाने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे। इसलिए जीने के लिए उसने रोटी माँगकर खाने का निर्णय किया।

प्रश्न 3.
बालक ने घर का दरवाजा क्यों खटखटाया था?
उत्तर:
वालक ने रोटी माँगने के लिए घर का दरवाजा खटखटाया था।

प्रश्न 4.
सौंदर्य ग्रहण करने की क्षमता का विकास कैसे होता है?
उत्तर:
सौंदर्य ग्रहण करने की क्षमता का विकास स्वयं के अनुभव के द्वारा होता है।

प्रश्न 5.
रवींद्रनाथ टैगोर ‘सौंदर्य क्या है?’ का उत्तर किसमें खोज रहे थे?
उत्तर:
रवींद्रनाथ टैगोर ‘सौंदर्य क्या है’ का उत्तर पुस्तक में खोज रहे थे।

प्रश्न 6.
डॉक्टर ने महिला को कैसे पुनः जीवन प्रदान किया?
उत्तर:
डॉक्टर ने महिला का ऑपरेशन किया और उसकी देखभाल करके उसे पुनः जीवन प्रदान किया।

लघु कथाएँ परिचय प्रश्न

प्रश्न 1.
लघुकथा के स्वरूप और विकास का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
लघुकथा हिंदी साहित्य की सबसे नई विधा है। यह विधा बड़ी तेजी से विकसित हो रही है। आज छोटी और बड़ी अनेक पत्र-पत्रिकाएँ लघुकथाओं को प्रकाशित कर रही हैं। बड़े-बड़े स्थापित कहानीकार भी लघुकथा लेख के प्रति अपनी अभिरुचि व्यक्त कर रहे हैं। आज के व्यस्तताभरे युग में पाठक को लंबी कहानी पढ़ने का न तो समय है और न उनमें वैसी मानसिकता। इसीलिए कम समय में जीवन का संदेश या निष्कर्ष देने वाली लघुकथा अति अनुकूल होने के कारण आज बड़ी तेजी से विकसित हो रही हैं। उनमें भाषा और शिल्प की नवीनता एवं सरसता दिखाई देती है।

लघुकथा का उद्भव और विकास-लघुकथा का उद्भव 1901 में माधवराव सप्रेम द्वारा लिखित ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ से माना जा सकता है। यह हिंदी की पहली लघुकथा के रूप में चर्चित हुई। तब से लेकर आज तक सैकड़ों रचनाकारों ने लघुकथा की रचनात्मक शक्ति को उभारने का प्रयत्न किया है। वरिष्ठ कहानीकार विष्णु नागर के तीन लघुकथा-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी भूमिका में नागरजी ने स्वीकार किया है कि जयशंकर प्रसाद, सुदर्शन, उपेंद्रनाथ अश्क आदि जैसे कथाकार पहले से ही लघुकथा लिख रहे थे। यह अलग बात है कि उस समय लघुकथा का नामकरण नहीं हुआ था। सन् 1972-73 में कई प्रांतों से लघुकथाओं के संकलन प्रकाशित हुए, जिनके माध्यम से लघुकथा के स्वरूप को निर्धारित करने का प्रयास हुआ।

लघुकथा का स्वरूप-विगत तीन-चार दशकों में विभिन्न पत्रिकाओं के लघुकथा विशेषांक प्रकाशित हुए। इन पत्रिकाओं में इस विधा को नए कथ्य और शिल्प से मंडित किया गया। भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित चित्रा मुद्गल का लघुकथा-संग्रह ‘बयान’ बहुचर्चित हुआ। आज हिंदी की प्रतिष्ठित लघुकथा के मर्म और धर्म रूपांतरित हो रहे हैं। अभी उसके स्वरूप का निर्धारण होना शेष है।

चूँकि लघुकथा साहित्य की नवीनतम विधा है इसलिए इसके लिए एक नए आलोचना-शास्त्र की आवश्यकता है। अभी तक लघुकथाकार ही अपनी रचनाओं की समीक्षा करते थे, किंतु अब इस विधा के लिए आलोचना दृष्टियाँ निश्चित हो रही हैं। समीक्षकों ने लघुकथाओं को दो भागों में विभाजित कर दिया है-(1) व्यावसायिक, (2) अव्यावसायिक। व्यावसायिक लघुकथाओं में व्यंग्यात्मकता मुख्य होती है। जबकि अव्यावसायिक लघुकथाओं में समसामयिक विषयानुभूति और कलात्मक यथार्थता होती है। लघुकथा में प्रभावात्मकता और अभिव्यंजना होना वांछनीय है।

लघु कथाएँ पाठ का सारांश

प्रश्न 2.
‘दूध का मूल्य’ और ‘शब्द और अनुभूति’ लघुकथाओं का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
‘दूध का मूल्य’ का सार-एक असहाय बालक अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए घूम-घूमकर छोटी-मोटी चीजें बेचता है। एक दिन वह भूख-प्यास और तेज गर्मी से व्याकुल होकर एक पेड़ के नीचे बैटकर सोचने लगता है कि यदि जीना है, तो रोटी माँगकर खानी होगी। उसने एक दरवाजा खटखटाया। एक स्त्री ने दरवाजा खोला और पूछा-“क्या है?” – स्त्री को सामने देखकर उसका आत्मसम्मान जाग उठा। उसने उससे केवल पानी माँगा। महिला ने उसे एक गिलास दूध दे दिया दूध पीकर बोला, “इस दूध का मूल्य कैसे चुका पाऊँगा।”

बहुत वर्षों के बाद वह महिला बीमार होकर राजधानी के बड़े अस्पताल में इलाज के लिए पहुँची। डॉक्टर के सामने उस महिला रोगी के कागजात लाए गए। डॉक्टर को उसके शहर का नाम बताया गया। कुछ दिन के बाद वह महिला ठीक हो गई। ठीक होने के बाद उसने बिल माँगा, तो उसे एक लिफाफा दिया गया। उसमें एक चिट्ठी थी। उसमें लिखा था-“बिल का भुगतान बरसों पहले हो चुका एक गिलास दूध।” नीचे हस्ताक्षर थे-आपका दूधवाला बच्चा, जो आज डॉक्टर है।

शब्द और अनुभूति का सार-रवींद्रनाथ टैगोर यह जानने के लिए पुस्तक पढ़ रहे थे कि सौंदर्य क्या है? आधी रात बीत जाने पर भी वे समझ नहीं पा रहे थे कि सौंदर्य क्या है। ऊबकर मोमबत्ती की रोशनी बुझा दी। मोमबत्ती बुझाते ही चंद्रमा की चाँदनी दरवाजे और खिड़की से कमरे में घुस गई। सारा वातावरण प्रकाशमय हो उठा। खिड़की से बाहर देखा तो उन्हें लगा कि चाँद जैसे कह रहा हो, “मैं बहुत देर से तुम्हें याद कर रहा था।”

ठंडी हवा का झोंका आया और उनका तन-बदन चाँदनी में नहा गया। टैगोर इस प्राकृतिक दृश्य को देखकर इतने अभिभूत हो गए कि उनके मुख से निकल पड़ा कि-‘यह है सौन्दर्य ।’ वे कमरे से बाहर निकलकर चाँदनी की झील में उतर पड़े। उनकी समझ में आया कि सौंदर्य अनुभव की वस्तु है। मनःस्थिति बदलकर ही उसे पाया जा सकता है।

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लघु कथाएँ संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1.
महिला को सामने देखकर भूख से जूझ रहे बालक का आत्मसम्मान जाग उठा। उसने रोटी माँगने की बजाय सिर्फ प्यास बुझाने के लिए पानी माँगा। भूखे-प्यासे बालक की दशा देखकर महिला घर के भीतर गई और बालक को पीने के लिए एक गिलास दूध दे दिया। चकित बालक ने उस दयालु महिला का चेहरा देखा और बिना कुछ कहे धीरे-धीरे दूध पी लिया। उसकी आँखों में आदर और कृतज्ञता का भाव भर आया था। उसने विनम्रता से उस महिला से सवाल किया-“इस दूध का मूल्य कैसे चुका पाऊँगा?” बालक की बात को सुनकर महिला ने कहा- “इस दूध के लिए तुम्हें कुछ भी नहीं चुकाना होगा।” हमारे बुजुर्गों ने सिखाया है कि सदाशयता के किसी काम के लिए किसी भी तरह की कीमत की अपेक्षा नहीं करना चाहिए। कृतज्ञ बालक उस महिला को सश्रद्ध निहारता चला गया। (Page20)

शब्दार्थ:

  • जूझना – संघर्ष करना।
  • आत्मसम्मान – अपनी प्रतिष्ठा का ध्यान।
  • दशा – स्थिति।
  • चकित – हैरान।
  • कृतज्ञता – उपकार मानने का।
  • विनम्रता – नम्रता के साथ।
  • सदाशयता – सद्भाव।
  • कीमत – मूल्य, दाम।
  • सश्रद्ध – श्रद्धा के साथ।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश ‘दूध का मूल्य’ लघुकथा से लिया गया है। इसमें एक ऐसे बालक का उल्लेख है कि भूख-प्यास और गर्मी से व्याकुल बालक ने जीने के लिए रोटी माँगकर खाने का निर्णय कर, एक घर का दरवाजा खटखटाया। एक महिला ने दरवाजा खोला, तो बालक का आत्मसम्मान जाग उठा। इससे उसका रोटी माँगकर । खाने का विचार बदल जाता है। उसके बदले हुए विचार को इस गद्यांश में व्यक्त किया गया है।

व्याख्या:
महिला को सामने देखकर भूख की व्याकुलता से संघर्षरत बालक का आत्मसम्मान जाग उठा। इससे माँगकर रोटी खाने का उसका इरादा बदल गया। उसने महिला से रोटी माँगने की अपेक्षा केवल अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी माँगा। भूख-प्यास से व्याकुल बालक की दयनीय स्थिति देखकर वह महिला घर के अंदर गई और बालक को देने के लिए एक गिलास दूध ले आई। उसने वह दूध से भरा गिलास बालक को दे दिया। चकित बालक ने दूध से भरा गिलास हाथ में लेकर उस दयालु स्त्री का मुख देखा और बिना कुछ बोले धीरे-धीरे दूध पी लिया।

उसकी आँखों में उस महिला के प्रति सम्मान और कृतज्ञता के भाव भर गए। उस बालक ने उस महिला से अत्यंत विनयपूर्वक प्रश्न किया कि मैं इस दूध का मूल्य कैसे चुका पाऊँगा? बालक की बात सुनकर महिला ने उससे कहा कि इस दूध के लिए तुम्हें कुछ भी नहीं देना पड़ेगा। हमारे बड़े-बूढ़ों ने हमें सिखाया है कि सद्भाव से किए गए किसी भी काम के लिए किसी भी प्रकार की मूल्य की आशा नहीं की जाती और न ही करनी चाहिए। क्योंकि सद्भाव के लिए किया गया काम सेवाभाव से किया जाता है। उस महिला के उपकार को मानता हुआ वह बालक उसे श्रद्धा के साथ देखता हुआ वापस चला गया।

विशेष:

  1. बालक के स्वाभिमान के साथ-साथ महिला की दयालुता का भी वर्णन हुआ है।
  2. इससे यह संदेश भी मिलता है कि मनुष्य को कृतज्ञ होना चाहिए।
  3. भाषा सरल, स्पष्ट और सुबोध है।
  4. भाषा पात्रानुकूल और भावानुकूल है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
महिला को सामने देखकर बालक में क्या परिवर्तन आया और क्यों?
उत्तर:
असहाय बालक भूख से जूझ रहा था। उसने रोटी माँगकर खाने का निर्णय करके एक घर के दरवाजे पर दस्तक दी। एक महिला ने दरवाजा खोला। महिला को देखकर बालक का निर्णय बदल गया। उसने रोटी माँगकर खाने का विचार छोड़ लघुकथाएँ दिया; क्योंकि उसका आत्मसम्मान जाग उठा। शायद उसने सोचा कि यदि उसने एक बार माँगकर रोटी खा ली, तो वह जीवन में कुछ नहीं बन पाएगा।

प्रश्न (ii)
हमारे बुजुर्गों ने हमें क्या सिखाया है?
उत्तर:
हमारे बुजुर्गों ने हमें सिखाया है कि सदाशयता के लिए किए गए किसी भी काम की किसी भी तरह की कीमत की आशा नहीं करनी चाहिए।

प्रश्न (iii)
बालक की आँखों में आवर और कृतज्ञता का भाव क्यों उभर आया?
उत्तर:
बालक भूख-प्यास से व्याकुल था। उसने गृहिणी से प्यास बुझाने के लिए एक गिलास पानी माँगा था, लेकिन गृहिणी ने उसकी दशा देखकर उसे पीने के लिए एक गिलास दूध दिया। दूध पीकर बालक ने पूछा- “मैं इसका कर्ज कैसे चुकाऊँगा?” तो महिला ने उत्तर में कहा कि तुम्हें इसका कर्ज चुकाने की आवश्यकता नहीं है। इसी कारण बालक की आँखों में महिला के प्रति आदर और कृतज्ञता का भाव उभर आया।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
बालक ने महिला से रोटी माँगने की अपेक्षा पानी का गिलास क्यों माँगा?
उत्तर:
यद्यपि बालक भूख-प्यास से व्याकुल था, किंतु महिला को सामने देखकर उसका आत्मसम्मान जाग उठा। इसलिए उसने रोटी माँगने की बजाय, सिर्फ प्यास बुझाने के लिए एक गिलास पानी माँगा।

प्रश्न (ii)
महिला ने बालक को दूध का गिलास क्यों दिया?
उत्तर:
महिला दयालु स्वभाव की थी। उसको भूखे-प्यासे बालक की दशा देखकर दया आ गई। इसलिए उसने बालक को पीने के लिए एक गिलास दूध दे दिया।

प्रश्न (iii)
बालक ने दूध पीकर महिला से क्या पूछा?
उत्तर:
बालक ने दूध पीकर महिला से पूछा कि “इस दूध का मूल्य कैसे चुका पाऊँगा?”

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प्रश्न 2.
नया जीवन पाकर महिला बहुत खुश थी। उसने अस्पताल के स्टाफ से भुगतान के लिए बिल माँगा। तो कुछ देर बाद उसके हाथ में एक लिफाफा आया। भारी बिल की आशंका से महिला का दिल धड़क-सा रहा था। लिफाफा खोलते ही उसमें एक चिट्ठी मिली जिसमें लिखा था-“बिल का भुगतान बरसों पहले हो चुका, एक गिलास दूध।” नीचे हस्ताक्षर थे-आपका दूधवाला बच्चा, जो आज डॉक्टर है। (Page 20)

शब्दार्थ:

  • स्टाफ – कर्मचारी।
  • भारी बिल – भुगतान हेतु बड़ी राशि।
  • दिल धड़कना – हृदय का तेज गति से चलना।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश ‘दूध का मूल्य’ लघुकथा से लिया गया है। वह महिला एक गंभीर रोग से पीड़ित होकर राजधानी के एक अस्पताल में उपचार कराने पहुंची। डॉक्टर ने महिला को स्वस्थ कर दिया। वह महिला नया जीवन पाकर प्रसन्न थी। उसने अस्पताल से बिल माँगा। इसके बाद की घटना का उल्लेख इस गद्यांश में किया गया है।

व्याख्या:
गंभीर रोग से पीड़ित महिला डॉक्टर के समुचित उपचार से. एकदम स्वस्थ हो गई। नया जीवन पाकर वह बहुत खुश थी। अस्पताल से घर लौटते समय उसने अस्पताल के कर्मचारी से हिसाब-किताब का ब्यौरा माँगा ताकि उसका भुगतान किया जा सके। कुछ देर के बाद अस्पताल के कर्मचारी ने उसके हाथ में एक लिफ़ाफा दे दिया। अत्यधिक देयराशि की आशंका से महिला का हृदय तेजी से धड़कने लगा था। उसने लिफ़ाफा खोला, तो उसे बिल के स्थान पर एक पत्र मिला। उस पत्र में लिखा था-“बिल का भुगतान तो बरसों पहले हो चुका, एक गिलास दूध।” “अर्थात् वर्षों पहले आपने एक भूखे-प्यासे बालक को एक गिलास दूध पिलाकर इस बिल का भुगतान कर दिया था। उस पत्र के नीचे हस्ताक्षर था आपका दूधवाला बच्चा, जो आज डॉक्टर है।” इस प्रकार उस बालक ने एक गिलास दूध का मूल्य चुकाया।

विशेष:

  1. मनुष्य को अपने ऊपर किए गए छोटे-से उपकार को नहीं भूलना चाहिए। अवसर प्राप्त होते ही उपकारी के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना सच्ची मानवता है।
  2. भाषा सरल, स्पष्ट और सुबोध है। भाषा में कसावट है।
  3. भाषा पात्रानुकूल व भावानुकूल है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
‘दूध का मूल्य’ कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर:
“दूध का मूल्य’ कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को अपने ऊपर किए गए छोटे-से उपकार को भी नहीं भूलना चाहिए। अवसर प्राप्त होते ही उपकारी के प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट करना ही सच्ची मानवता है।

प्रश्न (ii)
बालक ने ‘दूध का मूल्य’ किस प्रकार चुकाया?
उत्तर:
बालक को दूध का गिलास पिलाने वाली महिला गंभीर रोग से पीड़ित होकर, उस अस्पताल में पहँची, जहाँ वह बालक डॉक्टर था। उसने महिला को पहचान लिया। उसने उस महिला का ऑपरेशन करके नया जीवन दिया। उस डॉक्टर बने बालक ने उस महिला से अस्पताल का बिल नहीं लिया। इस प्रकार उसने ‘दूध का मूल्य’ चुकाया।

प्रश्न (iii)
महिला के खुश होने का कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
महिला गंभीर रोग से पीड़ित थी। स्थानीय डॉक्टरों ने राजधानी के विशेषज्ञ डॉक्टर से इलाज एवं ऑपरेशन कराने का परामर्श दिया। उसे बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने उस महिला का ऑपरेशन करके उसे स्वस्थ कर दिया। वह नया जीवन पाकर अत्यंत खुश थी।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
महिला का दिल किस आशंका से धड़क-सा रहा था?
उत्तर:
महिला को अस्पताल में नया जीवन मिला था। वह बहुत खुश थी। उसने अस्पताल के स्टाफ से भुगतान करने के लिए बिल माँगा, तो भारी बिल की आशंका से महिला का दिल धड़क रहा था।

प्रश्न (ii)
महिला को हाथ में बिल के स्थान पर क्या मिला था?
उत्तर:
महिला के हाथ में बिल के स्थान पर एक लिफाफा दिया गया था। उस लिफाफे में एक पत्र था, जिसमें लिखा था कि ‘बिल का भुगतान बरसों पहले हो चुका, एक गिलास दूध।’ नीचे हस्ताक्षर थे, आपका दूधवाला बच्चा, जो आज एक डॉक्टर है।

प्रश्न 3.
ठंडी हवा का झोंका आया और उनका तन-बदन चाँदनी में नहा गया। इस प्राकृतिक मनोहारी सौंदर्य को देख वे इतने अभिभूत हो गए कि उनके मुख से अकस्मात् निकल पड़ा कि-‘यह है सौंदर्य!’ वे कक्ष से बाहर निकल छत पर आ गए। उन्हें लगा जैसे वे चाँदनी की झील में उतर गए हों। अब समझ में आया कि शब्द तो माध्यम हैं मुख्य बात तो अनुभव की है, जिससे गुजरना होता है। केवल शब्द पर ठहरकर अनुभूति नहीं होती। इसलिए यात्रा के आरंभ में शब्द अवश्य हैं, पर अंत नहीं हो सकते। अंत में अनुभव काम आएगा और यही सिद्धांत जीवन के हर क्षेत्र में लागू होता है। (Page 20)

शब्दार्थ:

  • मनोहारी सौंदर्य – मन को हरने वाली सुंदरता।
  • अभिभूत – डूबना, संलग्नता।
  • अकस्मात् – अचानक।
  • कक्ष – कमरा।
  • अनुभूति – अनुभव, परिज्ञान।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश ‘शब्द और अनुभूति’ लघुकथा से लिया गया है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जानना चाहते थे कि सौंदर्य क्या है? इसके लिए वे बहुत देर तक पुस्तक पढ़ते रहे, लेकिन उन्हें यह ज्ञात नहीं हो सका कि सौंदर्य क्या है। उन्होंने मोमबत्ती बुझा दी, तो पूर्णिमा के चंद्रमा की चाँदनी कमरे में घुस गई। उन्हें ज्ञात हुआ कि सौंदर्य क्या है। इस सौंदर्य के ज्ञात होने की प्रक्रिया का वर्णन ही इस गद्यांश में किया गया है।

व्याख्या:
ठंडी हवा का एक झोंका आया और टैगोर का पूरा शरीर पूर्णिमा के चाँद की चाँदनी में सराबोर हो गया। वे मन को हरने वाली प्रकृति की इस सुंदरता को देखकर, उसकी सुंदरता में इतने डूब गए कि अचानक उनके मुँह से निकल गया कि यही सौंदर्य है। उन्हें लगा कि यही वह सौंदर्य है, जिसे वे जानने के लिए व्याकुल थे। वे इस प्राकृतिक सौंदर्य को देखने के लिए अपने कमरे से निकलकर खुली छत पर आ गए। छत पर आने पर उन्हें अनुभव हुआ जैसे, वे चाँदनी की झील में उतर गए हों। अब उनकी समझ में आया कि सौंदर्य को व्यक्त करने के लिए शब्द तो साधन मात्र हैं।

मुख्य बात तो सौंदर्य को अनुभव करने की होती है। विना अनुभव के सौंदर्य को नहीं जाना जा सकता। केवल शब्दों में पड़कर सौंदर्य का अनुभव नहीं हो सकता। अतः सौंदर्य को जानने की यात्रा के प्रारंभ शब्द अवश्य हैं, किंतु वे इसका अंत नहीं बन सकते। अंत में तो केवल अनुभव ही काम आता है। अनुभव के अभाव में सौंदर्य को नहीं जाना जा सकता और यही सिद्धांत जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में लागू होता है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में भी अनुभव ही काम आता है।

विशेष:

  1. सौंदर्य अनुभव की वस्तु है और प्रकृति से तादात्म्य हुए बिना उसे नहीं जाना जा सकता। कथाकार ने यह तथ्य बड़े तार्किक ढंग से समझाया है।
  2. सौंदर्य को मनःस्थिति बदलकर ही पाया जा सकता है।
  3. भाषा परिमार्जित और कसावट लिये हुए है।
  4. भाषा भावानुकूल है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
रवींद्रनाथ टैगोर किस सौंदर्य को देखकर अभिभूत हो गए?
उत्तर:
रवींद्रनाथ टैगोर यह जानना चाहते थे कि सौंदर्य क्या है। चाँदनी रात में जब वे खिड़की से बाहर झाँक रहे थे तभी एक ठंडी हवा का झोंका आया और उनका तन-बदन चंद्रमा की चाँदनी में नहा गया। इस प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर वे बड़े अभिभूत हुए और उनके मुख से अकस्मात् निकल पड़ा कि यह है सौंदर्य।

प्रश्न (ii)
शब्दों के संबंध में रवींद्रनाथ टैगोर के क्या विचार हैं?
उत्तर:
शब्दों के संबंध में रवींद्रनाथ टैगोर के विचार हैं कि शब्द तो केवल माध्यम हैं। शब्दों से सौंदर्य की अनुभूति नहीं हो सकती। यात्रा के आरंभ में शब्द अवश्य होते हैं, परंतु सौंदर्य तो अनुभव की वस्तु है, शब्दों की नहीं।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कक्ष से बाहर छत पर आने पर रवींद्रनाथ टैगोर को क्या अनुभव हुआ?
उत्तर:
कक्ष से बाहर छत पर आने पर रवींद्रनाथ टैगोर को अनुभव हुआ जैसे वे चाँदनी की झील में उतर आए हैं। उनके चारों ओर प्राकृतिक मनोहारी सौंदर्य फैला हुआ था। उन्हें सौंदर्य का अनुभव हुआ।

प्रश्न (ii)
रवींद्रनाथ को सौंदर्य की अनुभूति कब हुई?
उत्तर:
रवींद्रनाथ को सौंदर्य की अनुभूति उस समय हुई जब वे चाँदनी रात में छत पर आए। छत पर ठंडी हवा के झोंके का स्पर्श तथा चाँदनी में तन-बदन का नहाना उन्हें सौंदर्य की अनुभूति करा गया।

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तयः

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MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 21 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

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प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) पठतो किं नास्ति? (पढ़ते हुए का क्या नहीं है?)
उत्तर:
मूर्खत्वम् (मूर्खता)

(ख) देवतानां दैवतं का? (देवताओं का देवता कौन है?)
उत्तर:
माता (माता)

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(ग) नभसि क्षिप्तः पङ्क कुत्र पतति? (आकाश पर फेंका हुआ कीचड़ कहाँ गिरता है?)
उत्तर:
मूर्द्धनि (सिर पर)

(घ) प्राणैः कण्ठगतैरपि किं कर्त्तव्यः? (प्राणों के कण्ठ में पहुंचने पर भी क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
परोपकारः (परोपकार)

(ङ) केन सर्वं जगद्विजीयते? (किसके द्वारा सारा जगत जीता जाता है।)
उत्तर:
जितक्रोधेन (क्रोध को जीतने वाले के द्वारा)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) कः धीरः? (कौन धीर है?)
उत्तर:
यस्य प्रज्ञा आपदि स्फुरति सः एव धीरः। (जिसकी बुद्धि आपत्ति में सर्जित (कार्यशील) होती है, वही धीर है।)

(ख) वाग्मिता का? (वाक्पटुता क्या है?)
उत्तर:
मितं च सारं च वयः हि वाग्मिता। (थोड़ा और संक्षेप में बोलना वाक्पटुता है।)

(ग) जनाः कदा शिष्टाः भवन्ति? (लोग कब शिष्ट होते हैं?)
उत्तर:
परोपदेशवेलायां जनाः शिष्टाः भवन्ति। (दूसरों के उपदेश के समय लोग शिष्ट होते हैं।)

(घ) सन्तः किं कुर्वाणाः प्रतिक्रियां न अवेक्षन्ते? (सज्जन लोग क्या करते हुए बदला नहीं देखते?)
उत्तर:
सन्तः परार्थं कुर्वाणाः प्रतिक्रियां न अवेक्षन्ते। (सज्जन लोग परोपकार करते हुए बदला नहीं देखते।)

(ङ) मानी किं सहते? (सम्मान वाले लोग क्या सहन करते हैं?)
उत्तर:
मानी विपत्सहस्रं सहते।। (सम्मान वाले लोग हजारों मुश्किलें सह सकते हैं।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) कः स्वयं भ्रमति? (कौन स्वयं घूमता है?)
उत्तर:
यस्य निश्चयः स्वधियः नास्ति सः स्वयं भ्रमति। (जिसका फैंसला अपनी बुद्धि का नहीं होता वह खुद घूमता है।)

(ख) कः कस्मात् क्रूरतरः? (कौन किससे अधिक क्रूर है?)
उत्तर:
खलः सात् क्रूरतरः। (दुष्ट व्यक्ति साँप से अधिक भयंकर है।)

(ग) मतिमान नरः किं करोति? (बुद्धिमान व्यक्ति क्या करता है?)
उत्तर:
मतिमान् नरः स्वल्पस्य कृते भूरिं न नाशयेत्। (बुद्धिमान् लोग थोड़े के लिए अधिक को नष्ट नहीं करते।)

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प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः सूक्तिपूर्तिं कुरुत (दिए गए शब्दों से सूक्ति की पूर्ति करो।)
(लघुत्वं, स्वल्पस्य, जितक्रोधेन, स्फुरति, निश्चयो)
(क) न …………… कृते भूरि नाशयेन्मतिमान् नरः।
(ख) …………… सर्वं हि जगदेतद्विजीयते।
(ग) परसदननिविष्टः को …………… न याति।
(घ) स्वधियो …………… नास्ति यस्य स भ्रमति स्वयम्।
(ङ) आपदि …………… प्रज्ञा यस्य धीरः स एव हि।
उत्तर:
(क) स्वल्पस्य
(ख) जितक्रोधेन
(ग) लघुत्वं
(घ) निश्चयो
(ङ) स्फुरति।

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत (उचित क्रम से जोडिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तयः img 1
उत्तर:
(क) 5
(ख) 4
(ग) 2
(घ) 1
(ङ) 3

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘न’ इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) धीरपुरुषाणां प्रज्ञा आपदि स्फुरति।
(ख) स्वर्णकांस्ययोः ध्वनिः सममेव भवति।
(ग) खलसर्पयोः मध्ये सर्पः क्रूरतरः अस्ति।
(घ) माता देवतानां दैवतम् नास्ति।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) न

प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानां समासविग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के समास विग्रह करके समास का नाम लिखिए-)
(क) परोपकारः
(ख) जितक्रोधेन
(ग) कण्ठगतैः
(घ) स्वधियः
(ङ) परार्थम्
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तयः img 2

प्रश्न 8.
उदाहरणानुसारं पर्यायशब्दान् लिखत
(उदाहरण के अनुसार पर्यायवाची शब्द लिखिए-)
यथा- मितम् – स्वल्पम्
(क) सुवर्णे
(ख) देवतानाम्
(ग) प्रज्ञा
(घ) सर्पः
(ङ) सन्तः
उत्तर:
(क) सवर्णे – कनके
(ख) देवतानाम् – सुराणाम्
(ग) प्रज्ञा – धीः
(घ) सर्पः – भुजङ्गः
(ङ) सन्तः – सज्जनाः

प्रश्न 9.
विलोमशब्दान् लिखत- (विलोमशब्द लिखिए)
यथा- खलः – साधुः
(क) धीरः
(ख) सारम्
(ग) शिष्टाः
(घ) स्वल्पस्य
(ङ) क्रूरः
उत्तर:
(क) धीरः – अधीरः
(ख) सारम् – विस्तारम्
(ग) शिष्टाः – अशिष्टाः
(घ) स्वल्पस्य – अधिकस्य
(ङ) क्रूर – अक्रूरः, नम्रः, सौम्यः

प्रश्न 10.
रेखाकितपदान्याधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत (रखाङ्कित पदों के आधार पर प्रश्न बनाइए-)
(क) सर्वे शिष्टाः भवन्ति। (सब शिष्ट होते हैं।)
(ख) पङ्क पतति। (कीचड़ गिरता है।)
(ग) सर्पः क्रूरः भवति। (साँप क्रूर होता है।)
(घ) माता देवतानां दैवतम् भवति। (माता देवताओं का देवता होती है।)
(ङ) खलः सात् क्रूरतरः भवति? (दुष्ट व्यक्ति किससे अधिक क्रूर है?)
उत्तर:
(क) के शिष्टाः भवन्ति? (कौन शिष्ट होते हैं?)
(ख) कः पतति? (क्या गिरता है?)
(ग) कः क्रूरः भवति? (कौन भयानव. होता है?)
(घ) का देवतानां दैवतम् भवति? (कौन देवताओं का देवता है?)
(ङ) खलः कस्मात् क्रूरतरः भवति? (दुष्ट व्यक्ति किससे अधिक क्रूर है?)

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योग्यताविस्तार –

पाठे आगताः सूक्तीः विहाय दशसूक्तीः चित्वा लिखत।
(पाठ में आई सूक्तियों को छोड़कर दरा सूक्तियाँ चुनकर लिखिए।)

सूक्तीः कण्ठस्थं कुरुत।
सूक्तियों को कण्ठस्थ कीजिए।

सूक्तयः पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में कुछ सूक्तियाँ दी गई हैं, जिनसे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों का ज्ञान तथा सदाचारण की प्रेरणा प्राप्त होती है। इन सूक्तियों में कम अक्षरों के द्वारा रहस्थमय और गंभीर विषय सरल रूप में समझाए गए हैं। थोड़े प्रयत्न से तत्त्व को बोध कराने में इनका अनुपम योगदान है। इसलिए हमें इन्हें पढ़ना चाहिए और उनका अनुसरण करना चाहिए।

सूक्तयः पाठ का अनुवाद

1. पठतो नास्ति मूर्खत्वम

शब्दार्थाः :
नास्ति (न + अस्ति)-नहीं हैं- does not exist; मूर्खत्वम्-मूर्खत्वfoolishness.

अनुवाद :
पढ़ने वाले का मूर्खत्व नहीं है।

English :
A studious fellow does not remain foolish.

2. मितं च सारं च वचो हि वग्मिता

शब्दार्थाः :
मितम्-थोड़ा- little; सारम्:-संक्षेप-brief; वाग्मिता-बोलने की चतुरता/वाक्पटुता-wisdom in speech.

अनुवाद :
थोड़ा और संक्षेप में बोलना ही वाक्पटुता है।

English :
Brevity (Brief expression) is the soul of wit (sign of wisdom.)

3. न सुवर्णे ध्वनिस्तादृग् यादृक्कांस्ये प्रजायते।

शब्दार्थाः :
सुवर्णे-सोने में-in Gold; तादृक्-वैसी-such; यादृक्-जैसी- as; प्रजायते-होती है-is produced.

अनुवाद :
सोने (स्वर्ण) में वैसी आवाज़ नहीं होती, जैसी कांसे में होती है।

English :
Gold is not as resounding (resonant) as bronze.

4. परसदननिविष्टः को लघुत्वं न याति।

शब्दार्थाः :
परसदननिविष्ट-दूसरे के सदन (घर)-Sitting in others’ house; लघुत्वम्-छोटेपन का-lowliness; याति-जाता (प्राप्त होता) है।

अनुवाद :
दूसरे के घर में बैठा हुआ (वैठने पर) कौन छोटा नहीं हो जाता। दूसरे के घर पर गया हुआ अथवा कौन घटिया नहीं समझा जाता है।

English :
One loses dignity by visiting others’ places or who does not become low on entering others’ houses?

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5. परोपदेशवेलायां शिष्टाः सर्वे भवन्ति वै।

शब्दार्थाः :
वेलायाम्-समय पर-at the time of; वैः-निश्चयपूर्वक-really; शिष्टाः-अच्छे आचरण वाला-of noble conduct (supreme).

अनुवाद :
दूसरों के उपदेश के समय हम सब सदाचरण वाले बन जाते हैं।

English :
Everyone is a good adviser while advising others.

6. माता किल मनुष्याणां देवतानां च दैवतम्।

शब्दार्थाः :
किल-निश्चयपूर्वक-virtually; दैवतम्-देवता-god.

अनुवाद :
मनुष्यों की माता निश्चित रूप से देवताओं के देवता के समान है।

English :
One’s mother is the supreme god/goddess (like the mother of gods/goddesses)

7. आपदि स्फुरति प्रज्ञा यस्य धीरः स एवहि

शब्दार्थाः :
आपदि-मुसीबत में-introuble; स्फुरति-फड़कती है/सर्जित होती (क्रियाशील होती) है- throbs; प्रज्ञाः-बुद्धि, ज्ञान-Wisdom (cool).

अनुवाद :
आपत्ति में जिसका ज्ञान सर्जित होता (दमकता) है, वही धैर्यवान् है।

English :
One who (does not lose) wisdom/during troubles alone is considered forbearing retains contentment is more than a kingdom.

8. पको हि नभसि क्षिप्तः क्षेप्तुः पतति मूर्द्धनि।

शब्दार्थाः :
पक-कीचड़-mud; नभसि-आकाश पर-towards the sky; क्षिप्तः-फेंका गया-thrown; क्षेप्तु-फेंकने वाले के-thrower’s; मूर्द्धनि-सिर पर-on the head.

अनुवाद :
आकाश पर फेंका गया कीचड़ सिर पर ही गिरता है।

English :
Puff not against the wind.

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9. परोपकारः कर्त्तव्य प्राणैः कण्ठगतैरपि।

शब्दार्थाः :
प्राणैः-प्राणों से-with life (breath); कण्टगतैः-कण्ठ में अटके हुए (मरते दम तक)-sticking in the throat.

अनुवाद :
कण्ठ में पहुँचे हुए प्राणों से भी परोपकार करना चाहिए। (मरते दम तक परोपकार करना चाहिए।)

English :
Do good until there is the last breath.

10. न स्वल्पस्य कृते भूरि नाशयेन्मतिमान् नरः।

शब्दार्थाः :
स्वल्पस्य-थोड़े का-of little; भूरि-अधिक-much; नाशयेत्ः-नष्ट करें-sacrifice.

अनुवाद :
बुद्धिमान लोग थोड़े के लिए अधिक को नष्ट न करें।

English :
Quit not certainty for hope.

11. जितक्रोधेन सर्वं हि जगदेतद्विजीयते।

शब्दार्थाः :
जितक्रोधेन-क्रोध को जीतने से-To conquer anger; विजीयते-जीता जाता है-is conquered.

अनुवाद :
क्रोध को जीतने से इस संसार में सबको जीता जाता है।

English :
Control anger and you will control the entire world.

12. सन्तः परार्थं कुर्वाणा नावेक्षन्ते प्रतिक्रियाम्।

शब्दार्थाः :
परार्थम्-दूसरों की भलाई-welfare of others; कुर्वाणा-करते हुए-doing; नावेक्षन्तेः-नहीं देखते हैं-do not count; प्रतिक्रिया-बदला-reaction.

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अनुवाद :
सज्जन लोग दूसरों के लिए भलाई का कार्य करते हुए उसकी प्रतिक्रिया (बदला) नहीं देखते हैं।

English :
Do good and forget.

13. सहते विपत्सहस्त्रं मानी नैवापमानलेशमपि।

शब्दार्थाः :
सहते-सहन करते हैं-bears; विपत्सहस्त्रम्-हजारो मुश्किलें-thousands of troubles; लेशमपिः-थोड़ा-सा भी-evena bit;मानी-सम्मानीय लोग-Menof honour (respectable persons).

अनुवाद :
सम्मानीय लोग हजारों मुश्किलें सहन करते हैं। पर थोड़ा-सा भी अपमान नहीं (सह सकते हैं)।

English :
Men of honour might undergo a series of troubles. However, they do not tolerate even a bit of insult.

14. सर्पः क्रूरः खलः क्रूरः सात्क्रूरतरः खलः।

शब्दार्थाः :
क्रूरः-भयंकर-crooked, fearful;खलः-दुष्ट व्यक्ति-wicked (vicious) fellow.

अनुवाद :
साँप भयंकर होता है, दुष्ट व्यक्ति भी भयंकर होता है। साँप से दुष्ट व्यक्ति अधिक भयंकर होता है।

English :
Both of the serpent and the wicked person are dreadful. However, the wicked person is more dreadful than the serpent.

15. स्वधियो निश्चयो नास्ति यस्य स भ्रमति स्वयम्।

शब्दार्थाः :
स्वधियः-अपनी बुद्धि का-of own mind; भ्रमति-घूमता है-wanders.

अनुवाद :
जिसका निश्चय (फैसला) अपनी बुद्धि का नहीं होता, वह खुद घूमता (भटकता) रहता है।

English-One who lacks independent decision, wavers around.

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 16 South America-Economic Features

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MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 16 South America-Economic Features

MP Board Class 8th Social Science Chapter 16 Text Book Exercise

Choose the correct option of the following.

Question 1.
Quinine medition is made of –
(a) Chickil tree
(b) Sin kana tree
(c) Neem tree
(d) Date tree
Answer:
(b) Sinkana tree

Question 2.
Balparizo harbor is
(a) In Chile
(b) In Brazil
(c) In Surinam
(d) In Peru
Answer:
(a) In Chile

Question 3.
Total number of countries in South America is:
(a) 20
(b) 18
(c) 15
(d) 12
Answer:
(c) 15

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Fill in the blanks:

  1.  In South America ………… is the largest producer of Copper.
  2.  In South America ………… is the largest producer of Banana.
  3.  The largest Sugarcane in world is produced in ………… .
  4.  ……….. and are main food grains of South America.
  5.  In South America Hindi is spoken in ……….. .

Answer:

  1.  Chile
  2.  Ecuador
  3.  Brazil
  4.  Wheat and Maize
  5.  Surinam.

MP Board Class 8th Social Science Chapter 16 Very Short Answer Type Questions

Question 1.
What are cash crops? Write with examples?
Answer:
Cash Crops:
Besides food grain, such grains which provide cash income are called cash crops. These are also called trade crops.
For example:
Coffee, Sugarcane, Coco and Banana. Besides these cotton, tobacco, rubber, fruits and potato are other cash crops.

Question 2.
Write the four major maize producing nations of South America?
Answer:
Major maize producing nation of South America are Brazil, Argentina, Bolivia, Ecuador and Paraguay. Brazil has third place in the world in maize production and Argentina stands fourth.

Question 3.
What is the utility of Car nova tree in South America?
Answer:
The wax is derived from the date tree of Car nova specie in Brazil which is used in shoe polish, furniture polish and in candle making.

Question 4.
Which four languages are spoken most in South America?
Answer:
The people of South America continent speak Portuguese, German, Spanish, Italian and English languages. In Surinam Hindi is spoken.

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 16 Short Answer Type Questions

Question 1.
Write the specialty of fishery in South America?
Answer:
The South American continent having coasts all around have immense deposits of fishes. Fishes are found in big quantity on the coasts of Pacific Ocean in the west. Fishing is a developed industry in Peru.

Peru is the leading and big fish producing country in the world. The one fifty production of fish of the world is met from South America continent. Having no consumption of so much fishes here, these are exported to foreign countries. Besides sea coasts, fishes are also caught from rivers also.

Question 2.
Mention about two major crops in South America?
Answer:
Wheat and Maize are the important cereals of the South America. Wheat is produced in the temperate climate. Argentina and Chile are the major wheat producers. Maize is produced in hot climate and areas that get sufficient rains.

Brazil and Argentina are the major maize producers. The maize is the basically South American crop which later on reached in other countries of the world. Brazil has third place in the world in maize production and Argentina stands fourth.

Question 3.
What are the specialties of the South American population?
Answer:
Total population of the continent is 37 crore, 18 lakh. Half of population live in Brazil. The average density is 21 persons per square Km. The dense populated areas in the coastal regions, most people live in villages.

The rich are less than poor labor class. There are people of American, Indian, Black and European species in the continent. The mix species made of these species also more. The Mastigo species made of Indians and Europeans are in large number. Others are Mulatto’s and Zambos.

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MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 16 Long Answer Type Questions

Question 1.
Describe the forest and forest industry of South America?
Answer:
The Amazon Basin has tropical forest of hard woods. Several kinds of woods are found at one place in these forests, labor and time both are needed and carrying of woods costs more expenses. Wax from Car nova species in Brazil which is used for shoe polish, furniture polish and in candle making.

From the bark of Sinkona tree Quinine is made. Chewing Gum is mode from Chikil tree. The Amazon Basin is producer of rubber tree.

The central Chile’s Mediterranean evergreen forests have trees of Oak, Wall nut, Chestnut, Fig and there are light wood forest which are used in furniture making. Pine and Birch trees are found in South Chile.

Question 2.
Describe the major minerals of South America?
Answer:
South America has different sorts of minerals deposits. Huge raw iron deposits are in Brazil and iron is produced in Chile, Peru and Venezuela.

Chile is the biggest producer and exporting country of copper in the world. Argentina, Brazil, Ecuador, Peru and Venezuela also produce Copper. Brazil is the fourth largest Bauxite producer in the world.

  • Coal: Argentina, Brazil, Columbia
  • Gold: Argentina, Chile, Brazil, Columbia, Ecuador
  • Silver: Peru, Argentina, Chile, Ecuador, Peru
  • Bauxite: Brazil, Argentina, Surinam, Guyana
  • Diamond: Guyana, Venezuela
  • Petroleum: Argentina, Venezuela, Chile, Brazil, Ecuador, Peru
  • Tin: Bolivia, Venezuela
  • Manganese: Brazil, Venezuela

Besides above minerals Lead, Zinc, Emerald, Uranium and Platinum are also produced.

Question 3.
Mention about cash crops in South America with the names of producing countries?
Answer:
Cash crops of South America are Coffee, Sugarcane, coco, banana,cotton, tobacco, rubber, fruits and potato. Brazil is called the coffee pot of the world for its largest production.

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 16 South America-Economic Features 2

Question 4.
Write about the causes of less growth of transport and trade in South America?
Answer:
There is very little roads and railway lines in Andes Mountain range due to large tropical forests and high mountains. Same situation is in plateau and grassland regions. Having no land transports there is no growth of big industries.

The big and developed country Brazil has road and rail facilities only in eastern side and so there are big industries. Argentina has long rail routes. The other countries too have no transport facilities in this continent.

The trade has not developed due to the lack of transport. The coastal areas being the longest waterways are the important sources of trade. Barring Bolivia and Paraguay almost all the countries have useful ports.

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Project Work:

Show the following on the outline map of South America-

  1. Wheat and maize producing countries
  2. Grasslands of cattle rearing
  3. Brasilia, Santiao, Lima and Quetto cities,
  4. Trans-Andean Rail route,
  5. Coffee, banana and sugarcane producing areas,
  6. Copper, bauxite, manganese producing areas,
  7.  Buenos Aires, Balparizo, Salvador, Rio DeJanerio and Montevideo harbors.

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 16 South America-Economic Features 1