MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द

प्रश्न 1.
समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द से क्या समझते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर-
हिन्दी में ऐसे अनेक शब्द प्रयुक्त होते हैं जिनका उच्चारण मात्रा या वर्ण के हल्के हेर-फेर के सिवा प्रायः समान होते हैं, किन्तु अर्थ में भिन्नता होती है, उन्हें समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द या युग्म शब्द कहा जाता है।

MP Board Solutions

इनके उदाहरण इस प्रकार हैं-

1. अंस = कंधा
अंश = भाग

2. अग = जड़, अगतिशील
अघ = पाप

3. अनल = आग
अनिल = वायु

4. अन्न = अनाज
अन्य = दूसरा

5. अपेक्षा = तुलना में, आवश्यकता
उपेक्षा = अवहेलना

6. अलि = भौंरा
आली = सखी

7. अवलम्ब = सहारा
अविलम्ब = शीघ्र

8. अविराम = निरंतर
अभिराम = सुन्दर

9. आकर = खान
आकार = रूप

10. आदि = आरंभ
आदी = अभ्यस्त

11. आवरण = ढकना
आभरण = अलंकरण

12. आहत = घायल
आहट = आवाज

13. आहुत = हवन किया गया
आहूत = निमंत्रित

14. उद्योत = प्रकाश
उद्योग = प्रयत्न

15. उद्धार = मुक्ति
उधार = ऋण

16. कर्म = काम
क्रम = बारी, सिलसिला

17. कलि = कलयुग
कली = फूल की कली

18. कन = वंश
कुल = किनारा

19. कोप = खजाना
कोस = दूरी का माप (दो मील)

20. क्षति = हानि
क्षिति = पृथ्वी

21. गृह = घर
ग्रह = तारे (बुध, शुक्र आदि)

22. चरम = अंतिग।
चर्म = खाल

23. चीर = वस्त्र
चीड़ = एक वृक्ष का नाम

MP Board Solutions

24. छात्र = विद्यार्थी.
क्षात्र = क्षत्रिय-संबंधी

25. जलज = कमल
जलद = बादल

26. तरणि = सूर्य
तरणी = नाव

27. दूत = संदेश पहुँचाने वाला
द्यूत = जुआ

28. नगर = शहर
नाग = सर्प हाधी

29. निर्वाण = मुक्ति
निर्माण = रचन

30. नीड़ = घोंसला
नीर = पानी

31. पानी = जल
पाणि = हाथ

32. पालतू = पाला हुआ
फालतू = व्यर्थ

33. पुरुष = आदमी
परुष = कठोर

34. प्रणाम = नमस्कार
प्रमाण = सबूत

35. प्रवाह = बहाव
प्रभाव = असर

36. प्रसाद = देवता को चढ़ाया भोग, कृपा
प्रासाद = महल

37. बात = कथन
वात = वायु

38. बेर = एक फल
बैर = शत्रुभाव

39. मध्य = बीच
मद्य = शराब

40. मनोज = कामदेव
मनोज्ञ = सुन्दर

41. मूल = जड़
मूल्य = कीमत

42. याम = पहर
जाम = प्याला

43. रीति = प्रथा
रीती = खाली

44. रेखा = पंक्ति
लेखा = हिसाब

45. लक्ष्य = निशाना
लक्ष = लाख

46. वसन = वस्त्र
व्यसन = कुटेव

47. शुक्ल = स्वच्छ, सफेद
शुल्क = फीस

MP Board Solutions

48. शूर = योद्धा
सूर = सूरदास, अंधा

49. संकर = मिश्रित
शंकर = शिव

50. सकल = पूरा
शकल = टुकड़ा

51. सर = तालाब
शर = बाण

52. सुत = बेटा
सूत = सारथी, कच्चा धागा

53. स्वेद = पसीना
श्वेत = सफेद

54. हर = शिव
हरि = विष्णु

समरूपी भिन्नार्थक शब्द-
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द img-1
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द img-2
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द img-3

MP Board Class 12th Hindi Solutions

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण प्रत्यय

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण प्रत्यय

जो शब्दांश किसी शब्द या धातु के अन्त में जुड़कर नए अर्थ का ज्ञान कराते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। जैसे–कड़वाहट, लकड़पन, सज्जनता। ‘हट’, ‘पन’, ‘ता’ ये सभी प्रत्यय के रूप हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि शब्द के अंत में प्रत्यय लगने से उनके अर्थ में विशेषता एवं भिन्नता उत्पन्न हो जाती है।

प्रत्यय के दो प्रकार हैं–

  1. कृदन्त,
  2. तद्धित।

1. कृदन्त प्रत्यय
कृदन्त प्रत्यय वे प्रत्यय होते हैं, जो धातुओं (क्रियाओं) के अन्त में लगाए जाते हैं। हिन्दी में कृदन्त प्रत्यय पाँच प्रकार के होते हैं।

1. कृतवाचक कृदन्त–जो प्रत्यय कर्ता का बोध कराते हैं, वे कृतवाचक कृदन्त होते हैं।
जैसे
(क) राखन + हारा = राखनहारा।
(ख) पालन + हारा = पालनहारा।
(ग) मिलन + सार = मिलनसार।

MP Board Solutions

उदाहरण के लिए कुछ कृदन्त प्रत्यय इस प्रकार हैं
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण प्रत्यय img-1
2. कर्मवाचक–ये वे कृदन्त हैं, जो सकर्मक क्रिया में ना, नी, प्रत्यय लगाने से बनते हैं।

जैसे –
नि – चाटना–चटनी, सूंघनी, ओढ़नी।
ना – ओढ़ना–ओढ़ना।
हुआ – लिखना–लिखा

3. क्रिया बोधक–जो क्रिया के अर्थ का बोध कराते हैं, वे क्रिया बोधक कृदन्त कहलाते हैं।
जैसे-
सोता + हुआ = सोता हुआ।
पंच + आयत = पंचायत।
गाता + हुआ = गाता हुआ।
आढ़त + इया = आढ़तिया।

4. करण वाचक–जो क्रिया के साधन का बोध कराते हैं, वे करण वाचक कृदन्त कहलाते हैं। जैसे
कूट + नी = कूटनी।।
चास + नी = चासनी।

उदाहरण के लिए कुछ करण वाचक प्रत्यय–
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण प्रत्यय img-2

5. भाववाचक कृदंत–वे कृदंत हैं जो किसी भाव या क्रिया के व्यापार का व्रोध कराते हैं।

जैसे–
थक + आवट = थकावट।
मिल + आवट = मिलावट ।
धुल + आई = धुलाई।

उदाहरण के लिए कुछ भाववाचक कृदन्त
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण प्रत्यय img-3

2. तद्धित प्रत्यय

तद्धित प्रत्यय वे होते हैं, जो संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और अव्यय के पीछे लगाए जाते हैं। तद्धित प्रत्यय पाँच प्रकार के होते हैं, जैसे–..
1. कृतवाचक–तद्धित जो कर्ता का बोध कराते हैं, कृतवाचक तद्धित कहलाते हैं,
जैसे –
सोना + आर = सुनार
तेल + इया = तेलिया
गाड़ी + वाला = गाड़ीवाला
माला + ई = माली
घोड़ा + वाला = घोड़ावाला
लकड़ + हारा = लकड़हारा
लोहा + आर = लुहार
भाँग + एड़ी = भँगेड़ी

MP Board Solutions

2. भाववाचक–जिनसे किसी प्रकार का भाव प्रकट होता है, उसे भाववाचक प्रत्यय कहते हैं,

जैसे–
ममता + त्व = ममत्व
बुनाई + वट = बुनावट
बूढ़ा + पा = बुढ़ापा
लड़का + पन = लकड़पन
कड़वा + हट = कड़वाहट
मीठा + स = मिठास

3. अपत्य वाचक–वे तद्धित जो सन्तान के अर्थ का बोध कराते हैं, उन्हें अपत्य वाचक तद्धित कहतें हैं।
जैसे–
अ – वसुदेव, मनु–मानव, रघु–राघव।
इ – मारुत–मारुति।
ई – रामानन्द–समानन्दी, दयानंद–दयानंदी, आयन–नर–नारायण, रामा–रामायण, एव–गंगा–गांगेय, राधा–राधेय।

4. गुण वाचक–जिससे किसी का गुण मालूम हो, उसे गुंण वाचक तद्धित कहते हैं।

जैसे–
गुण + वान = गुणवान
भूख + आ = भूखा
बुद्धि + वान = बुद्धिवान
भ + ई = लोभी
प्यास + आ = प्यासा
चचा + एरा = चचेरा
घर + ऊ = घरू.

MP Board Solutions

5. ऊन वाचक–ऊन वाचक संज्ञाओं में वस्तु की लघुता, ओछापन, हीनता आदि का भाव व्यक्त किया जाता है

जैसे–
लोटा + इया = लुटिया
पहाड़ + ई = पहाड़ी
खाट + इया = खटिया
कोठ + री = कोठरी

MP Board Class 12th Hindi Solutions

MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 9 वित्तीय प्रबन्ध

MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 9 वित्तीय प्रबन्ध

वित्तीय प्रबन्ध Important Questions

वित्तीय प्रबन्ध वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
वित्तीय-प्रबंध के मुख्य कार्य हैं –
(a) वित्तीय नियोजन
(b) कोषों को प्राप्त करना
(c) शुद्ध लाभ का आबंटन
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 2.
वित्त का सबसे सस्ता स्रोत है –
(a) ऋण पत्र
(b) समता अंश पूँजी
(c) पूर्वाधिकार अंश
(d) प्रतिधारित उपार्जन।
उत्तर:
(a) ऋण पत्र

प्रश्न 3.
स्थायी संपत्तियों की वित्त व्यवस्था होनी चाहिए –
(a) दीर्घकालीन दायित्वों से
(b) अल्पकालीन दायित्वों से
(c) दीर्घकालीन तथा अल्पकालीन दायित्वों के मिश्रण से
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(a) दीर्घकालीन दायित्वों से

प्रश्न 4.
एक व्यवसाय की चालू संपत्तियों की वित्त व्यवस्था होनी चाहिए –
(a) केवल चालू दायित्वों से
(b) केवल दीर्घकालीन दायित्वों से
(c) दीर्घकालीन तथा अल्पकालीन दोनों से अंशत
(d) (a) व (b) दोनों।
उत्तर:
(c) दीर्घकालीन तथा अल्पकालीन दोनों से अंशत

प्रश्न 5.
यदि अन्य बातें समान रहें तो कर की दर में निगमित लाभ पर वृद्धि होगी –
(a) ऋण अपेक्षाकृत सस्ते होंगे ।
(b)ऋण अपेक्षाकृत कम सस्ते होंगे
(c) ऋणों की लागत पर कोई प्रभाव नहीं होगा
(d) हम कुछ नहीं कर सकते।
उत्तर:
a) ऋण अपेक्षाकृत सस्ते होंगे ।

प्रश्न 6.
निम्न में से कौन-सा समता पर व्यापार का प्रकार है –
(a) अल्प समता पर व्यापार
(b) उच्च समता पर व्यापार
(c) उपरोक्त (a) व (b) दोनों
(d) उपरोक्त (a) व (b) दोनों नहीं।
उत्तर:
(c) उपरोक्त (a) व (b) दोनों

प्रश्न 7.
पूँजी ढाँचा निर्णय क्यों महत्वपूर्ण है –
(a) पूँजी लागत प्रभावित होती है
(b) अंशों का बाजार मूल्य प्रभावित होता है
(c) उपरोक्त (a) व (6) दोनों
(d) उपरोक्त (a) व (b) दोनों नहीं।
उत्तर:
(c) उपरोक्त (a) व (6) दोनों

प्रश्न 8.
कार्यशील पूँजी का स्रोत है –
(a) देनदार
(b) बैंक अधिविकर्ष
(c) रोकड़ विक्रय
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 9.
कार्यशील पूँजी का निर्धारक है –
(a) संस्था का आकार
(b) निर्माण प्रक्रिया की अवधि
(c) कच्चे माल की उपलब्धता
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 10.
बोनस निर्णय के निर्धारक हैं –
(a) लाभों की मात्रा
(b) कोषों में तरलता
(c) कंपनी की आयु
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 11.
संयुक्त पूँजी वाली कंपनी के लिए लाभांश देना है –
(a) ऐच्छिक
(b) अनिवार्य
(c) आवश्यक
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) ऐच्छिक

प्रश्न 12.
निम्न में से कौन-सा पूँजी संरचना को निर्धारित करने वाला तत्व है –
(a) रोकड़ प्रवाह स्थिति
(b) ब्याज आवरण अनुपात
(c) ऋण भुगतान आवरण अनुपात
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 13.
निम्न में से कौन-सा समता पर व्यापार का प्रकार है –
(a) अल्प समता पर व्यापार
(b) उच्च समता पर व्यापार
(c) उपरोक्त (a) व (b) दोनों
(d) उपरोक्त न (a) और न (b)
उत्तर:
(c) उपरोक्त (a) व (b) दोनों

प्रश्न 14.
चालू संपत्तियाँ वे संपत्तियाँ होती हैं जो रोकड़ में परिवर्तित होती है –
(a) छ: महीन के अंदर
(b) एक साल के अंदर
(c) एक से तीन साल के अंदर
(d) तीन से पाँच साल के अंदर।
उत्तर:
(b) एक साल के अंदर

प्रश्न 15.
प्रति अंश उच्चतम लाभांश संबंधित है –
(a) ऊँची आय, ऊँचा रोकड़ प्रवाह, अनुप्रयोग आय तथा उच्चतम विकास अवसर
(b) ऊँची आय, ऊँचा रोकड़ प्रवाह, स्थिर आय तथा ऊँचे विकास अवसर
(c) ऊँची आय, ऊँचा रोकड़ प्रवाह, स्थिर आय तथा निम्नतम विकास अवसर
(d) ऊँची आय, निम्न रोकड़ प्रवाह, स्थिर आय तथा निम्नतम विकास अवसर।
उत्तर:
(c) ऊँची आय, ऊँचा रोकड़ प्रवाह, स्थिर आय तथा निम्नतम विकास अवसर

प्रश्न 16.
पुराने संयंत्र को उन्नतिशील बनाने के लिए एक नये तथा आधुनिक संयंत्र के अधिग्रहण कानिर्णय है –
(a) वित्तीय निर्णय
(b) कार्यशील पूँजी निर्णय
(c) निवेश निर्णय
(d) लाभांश निर्णय।
उत्तर:
(c) निवेश निर्णय

प्रश्न 17.
पितृसुलभ उच्च विकसित कंपनियाँ पसंद करती हैं –
(a) कम लाभांश देना
(b) अधिक लाभांश देना
(c) लाभांश पर विकास विचार का कोई प्रभाव नहीं होता है
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) कम लाभांश देना

प्रश्न 18.
अति-पूँजीकरण के कारणों में से क्या कारण उत्तरदायी नहीं है –
(a) अधिक प्रवर्तन व्यय
(b) अधिक पूँजी निर्गमन
(c) स्फीतिकाल में निर्माण
(d) आय का कम अनुमान
उत्तर:
(c) स्फीतिकाल में निर्माण

प्रश्न 19.
अल्प-पूँजीकरण के कारणों में क्या शामिल नहीं है –
(a) मंदी काल में स्थापना
(b) कम पूँजी की आवश्यकता
(c) उदार लाभांश नीति
(d) उच्च कार्यक्षमता।
उत्तर:
(c) उदार लाभांश नीति

प्रश्न 20.
स्थायी संपत्ति में क्या शामिल नहीं है –
(a) मशीन
(b) भवन
(c) फर्नीचर
(d) स्टॉक
उत्तर:
(d) स्टॉक

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. व्यवसाय में पूँजी-मिश्रण के स्वरूप को ………… कहते हैं।
  2. व्यवसाय हेतु आवश्यक पूँजी की मात्रा निर्धारण की क्रिया ………. कहलाती है।
  3. व्यवसाय के दैनिक संचालन व रख-रखाव हेतु आवश्यक पूँजी को ……… कहते हैं।
  4. वित्तीय प्रबन्धन का उद्देश्य अनावश्यक तथा अधिक मात्रा के …………. से बचना होता है।
  5. वित्तीय नियोजन का प्रारंभिक बिन्दु …………. का पूर्वानुमान लगाना होता है।
  6. जब कंपनी की आय अनिश्चित हो तथा उसका पूर्वानुमान लगाना कठिन हो तो केवल …………. ____ अंशों का ही निर्गमन करना चाहिए।
  7. लाभ का जो भाग व्यवसाय हेतु बचा लिया जाता है वह स्वामियों के कोष का ………. कहलाता है।
  8. ………… के अनुसार “पूँजी संरचना प्रायः एक व्यापारिक उपक्रम में प्रयुक्त वित्त के दीर्घकालीन ___स्रोतों को इंगित करता है।”
  9. “……….. व्यवसाय के संचालन में प्रयुक्त अपेक्षाकृत स्थायी प्रकृति की संपत्तियाँ होती हैं जो किविक्रय के लिए नहीं होती है।”
  10.  “चालू सम्पत्ति का योग ही व्यवसाय की ……….. है।”
  11. “………… का अभिप्राय वित्तीय क्रियाओं के पूर्व निर्धारण से हैं।”
  12.  शुद्ध कार्यशील पूँजी = चालू संपत्ति + ………….।
  13.  समता अंशों पर, ऊँची दर से लाभांश का वितरण कम्पनी के ……….. का परिचायक है।
  14.  भूमि तथा भवन में विनियोग ……….. पूँजी का प्रतिनिधित्व करता है।
  15.  वित्तीय प्रबंध ……. के अपव्यय को न्यूनतम करता है।
  16.  समता अंशधारियों को कंपनी में ……….. का अधिकार होता है।
  17.  दीर्घकालीन पूँजी की मात्रा का निर्धारण ……… कहलाता है।
  18.  सार्वजनिक उपयोग के उपक्रमों में ………… कार्यशील पूँजी की आवश्यकता होती है।
  19. व्यापारिक संस्था के स्थायी पूँजी की आवश्यकता, निर्माणी उद्योग की तुलना में ………. होती है।
  20.  किसी कंपनी की संपत्तियों का वास्तविक मूल्य, पुस्तकीय मूल्य से कम होना…………का प्रतीक है।

उत्तर:

  1. पूँजी संरचना
  2. पूँजीकरण
  3. कार्यशील पूँजी
  4. जोखिमों
  5.  बिक्री
  6. साधारण
  7. पुनर्विनियोग,
  8. आर. एच. वेसिल
  9. स्थायी संपत्तियाँ
  10. कार्यशील पूँजी
  11. वित्तीय नियोजन
  12. चालू दायित्व
  13. अल्प-पूँजीकरण
  14.  स्थायी
  15. साधनों
  16. मतदान
  17. पूँजीकरण
  18. कम
  19. कम
  20. अति-पूँजीकरण।

प्रश्न 3.
एक शब्द या वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. न्यूनतम लागत में वित्त की उपलब्धता तथा वित्त का लाभकारी प्रयोग सुनिश्चित करना क्या कहलाता है ?
  2. अत्यधिक प्रवर्तन व्यय का क्या परिणाम होता है ?
  3. पूँजी की मात्रा का कम अनुमान लगाने पर कंपनी को किस स्थिति का सामना करना पड़ सकता है ?
  4. श्रमिकों द्वारा किस स्थिति में अधिक पारिश्रमिक की माँग की जाती है ?
  5. संस्था के दीर्घकालीन वित्त के विभिन्न स्रोतों के पारस्परिक आनुपातिक संबंध को क्या कहते हैं ?
  6. व्यवसाय का जीवन रक्त किसे कहते हैं ?
  7. ऋणपत्रों का निर्गमन कब लाभप्रद होता है ?
  8. वित्तीय नियोजन का हृदय किसे कहा जाता है ?
  9. उपक्रम के संपदा मूल्य अधिकतम कब होते हैं ?
  10. विभिन्न दीर्घकालीन कोषों के संघटक की बनावट किसका निर्माण करती है ?
  11. पाँच या अधिक वर्षों के लिए की गई वित्त योजना क्या कहलाती है ?
  12. साधारण अंशों पर अधिक लाभ प्राप्त करने की प्रकृति क्या कहलाती है ?
  13. पूँजी की मात्रा का प्रतिनिधित्व कौन करता है ?
  14. कच्चा माल क्रय करने के लिए किस पूँजी का प्रयोग किया जाता है ?
  15.  चालू संपत्ति एवं चालू दायित्व के अंतर को क्या कहते हैं ?
  16. वित्तीय विवरणों से विभिन्न अनुपातों की गणना क्या कहलाता है ?
  17. प्रतिभूतियों का देय मूल्य जब संपत्तियों के चालू मूल्य से अधिक हो तो कौन-सी स्थिति कहलाती है ?
  18. मुद्रास्फीति में विनियोक्ता अधिक जोखिम उठाकर पूँजी संरचना में कौन-से अंगों को प्राथमिकता देते हैं ?
  19. वित्तीय योजना में पूँजी का उपयोग कैसा होना चाहिए?
  20. किसी उपक्रम के वित्त कार्यों पर नियंत्रण किसके द्वारा किया जाता है ?

उत्तर:

  1. वित्तीय नियोजन
  2. अति-पूँजीकरण
  3. अल्प-पूँजीकरण
  4. अल्प-पूँजीकरण
  5. पूँजी संरचना,
  6. वित्त को
  7. मंदी में
  8. लाभ-हानि खाता एवं प्रोफार्मा का
  9. अंशों के बाजार मूल्य अधिकतम हो
  10. पूँजी संरचना
  11. दीर्घकालीन वित्तीय उद्देश्य
  12. इक्विटी बाजार
  13. पूँजीकरण
  14. कार्यशील पूँजी
  15. कार्यशील पूँजी
  16. अनुपात विश्लेषण
  17. अति-पूँजीकरण
  18. इक्विटी अंश
  19. दीर्घकालीन वित्तीय उद्देश्य
  20. वित्तीय प्रबंधन द्वारा।।

प्रश्न 4.
सत्य या असत्य बताइये

  1. वस्तु की प्रकृति स्थायी पूँजी की आवश्यकता को प्रभावित करती है।
  2. वित्तीय नियोजन वित्तीय प्रबन्ध का मुख्य कार्य है।
  3. वित्तीय प्रबन्ध व्यावसायिक प्रबन्ध का अंग है।
  4. वित्तीय प्रबन्ध के अध्ययन की उपयोगिता अंशधारियों के लिए नहीं हैं। .
  5. पूँजीकरण शब्द का उपयोग सभी व्यावसायिक इकाईयों में होता है।
  6. कार्यशील पूँजी की आवश्यकता दीर्घकालीन अवधि के लिए होती है।
  7. वृहद् उपक्रम में स्थायी पूँजी की अधिक आवश्यकता होती है।
  8. पूँजी संरचना का संबंध कोषों की किस्म से होता है।
  9. पूँजी संरचना में कार्यशील पूँजी को सम्मिलित किया जाता है।
  10. पूँजी संरचना का आशय स्थायी पूँजी से है।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. असत्य
  5. असत्य
  6. असत्य
  7. सत्य
  8. सत्य
  9. असत्य
  10. सत्य

प्रश्न 5.
सही जोड़ी बनाइये –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 9 वित्तीय प्रबन्ध IMAGE - 1
उत्तर:

  1. (b)
  2. (d)
  3. (c)
  4. (e)
  5. (a
  6. (g)
  7. (f)
  8. (i)
  9. (h)
  10. (j)

वित्तीय प्रबन्ध लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पूँजी संरचना से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
किसी भी संस्था (कंपनी)के आर्थिक चिट्ठे का विश्लेषण करें तो विदित होता हैं कि उसकी कुल पूँजी का कुछ भाग समता अंशों में, कुछ पूर्वाधिकार अंशों में और ऋणपत्रों एवं बंधपत्रों में वितरित किया गया है। विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियों के बीच निर्धारित अनुपात को ही पूँजी ढाँचा कह सकते हैं। अन्य शब्दों में, पूँजी ढाँचा यह दर्शाता है कि पूँजीकरण की कुल राशि का विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियों में किस अनुपात के आशय पर वितरण किया गया है। इस प्रकार पूँजी ढाँचा का आशय पूँजी के दीर्घकालीन साधनों के पारस्परिक अनुपात से है और इनमें स्वामी पूँजी, पूर्वाधिकार अंशपूँजी एवं दीर्घकालीन ऋण पूँजी को शामिल करते हैं। इसे पूँजी संगठन, पूँजी कलेवर, पूँजी स्वरूप आदि नामों से पुकारा जाता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
वित्तीय नियोजन के दो उद्देश्यों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वित्तीय नियोजन का प्रमुख उद्देश्य पूँजी की इस प्रकार व्यवस्था करना है कि व्यवसाय के संचालन के सभी साधन उपलब्ध हो सकें। उपार्जित आय में से समस्त व्यय घटाने के बाद जो शुद्ध लाभ बचे वह अंशधारियों की विनियोजित पूँजी का उचित प्रव्याय (Return) हो।
वित्तीय नियोजन के दो उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. कोषों की आवश्यकतानुसार उनकी उपलब्धता का आश्वासन देना-वित्तीय नियोजन का प्रमुख उद्देश्य है कि विभिन्न उद्देश्यों, जैसे कि दीर्घावधि संपत्तियों के क्रय के लिए दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए इत्यादि, के लिए कंपनी में पर्याप्त कोष उपलब्ध होना चाहिए।
  2. लोच-वित्तीय नियोजन इस प्रकार किया जाना चाहिए ताकि उनमें व्यापार के विस्तार एवं संकुचन अपने आप में समेटने में दिक्कत न आवे।

प्रश्न 3.
वित्तीय प्रबंधन तीन विस्तृत वित्तीय निर्णयों पर आधारित होता है, ये क्या हैं ?
उत्तर:
लगातार बदलते हुए आर्थिक परिवेश में वित्तीय प्रबंधक को निर्णय लेने ही पड़ते हैं । इस प्रकार के निर्णय ऐसे लेने चाहिए कि व्यवसाय का निरंतर विकास होता रहे । यदि ऐसा नहीं होता है तो व्यवसाय का विकास तो दूर उसका अस्तित्व बनाये रखना भी कठिन होगा। वित्तीय प्रबंधन मुख्य रूप से तीन विस्तृत वित्तीय निर्णयों पर आधारित होता है। ये तीन निर्णय निम्नलिखित हैं

  • विनियोग निर्णय
  • वित्त व्यवस्था संबंधी निर्णय
  • लाभांश संबंधी निर्णय

(1) विनियोग निर्णय – यह निर्णय उन संपत्तियों के ध्यानपूर्वक चयन से संबंधित होता है जिनमें फर्मों द्वारा अपने फंड में निवेश किया जाएगा। एक फर्म के पास अपने फंड में निवेश करने के कई विकल्प होते हैं परंतु फर्म को अधिक उपयुक्त विकल्प का चयन करना पड़ता है जिससे फर्म को अधिकतम लाभ होगा। इसी विकल्प का निश्चय करना ही विनियोग या निवेश संबंधी निर्णय होता है।

(2) वित्त व्यवस्था संबंधी निर्णय – वित्तीय निर्णय से आशय यह निर्धारित करने से है कि पूँजी ढाँचे में स्वामी के कोषों तथा ऋण कोषों का क्या अनुपात रहना चाहिए। स्वामी के कोषों में समता अंश पूँजी, पूर्वाधिकार अंश पूँजी, संचय कोष, संगृहीत लाभ, अंश प्रीमियम को शामिल किया जाता हैं।

(3) लाभांश संबंधी निर्णय – यह निर्णय आधिक्य कोषों के वितरण से संबंधित है। फर्म के लाभ को विभिन्न पक्षों जैसे कि लेनदारों, कर्मचारियों, ऋणपत्रधारियों, अंशधारियों इत्यादि के बीच वितरित किया जाता है।

प्रश्न 4.
वित्तीय प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य क्या है ? संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
वित्तीय प्रबन्ध के उद्देश्य –

1. अधिकतम लाभ की प्राप्ति – कुछ विद्वानों का मानना है कि वित्तीय प्रबन्ध का प्रमुख उद्देश्य अधिकतम लाभ प्राप्त करना है, किन्तु अधिकतम लाभ का आशय एवं सीमा की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है, अतः अधिकतम लाभ के उद्देश्य हेतु निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिये

  • लाभ न्यायसंगत होना चाहिये।
  • लाभ व उपयोगिता में सामन्जस्य होना चाहिये।
  • लाभ प्राप्ति हेतु एक मानक (Standard) तैयार करना चाहिये।
  • लाभ का अधिकांश भाग जनहित में वितरित होना चाहिये।

2. अधिकतम प्रतिफल की प्राप्ति – वित्तीय प्रबन्ध का दूसरा उद्देश्य लागत व विनियोग द्वारा अधिकतम प्रतिफल की प्राप्ति करना है, जिससे प्रबन्ध के स्वामी (अंशधारी), ऋणपत्रधारी, प्रबन्धक, कर्मचारी व श्रमिकों को अधिकतम आर्थिक लाभ दिया जा सके। चूँकि ये सभी वर्ग समाज के अंग हैं, अतः कम्पनी से सम्बन्धित इन सभी वर्गों का आर्थिक विकास करना कम्पनी का दायित्व है, इस हेतु अधिकतम प्रतिफल प्राप्त करना आवश्यक होगा।

3. सम्पत्ति के मूल्य को अधिकतम करना वर्तमान में लाभ को अधिकतम बढ़ाने के स्थान पर सम्पत्ति को बढ़ाना वित्तीय प्रबन्ध का उद्देश्य माना जाने लगा है । वित्तीय प्रबन्ध के अन्तर्गत ऐसे कार्य किये जाने चाहिये, जिससे उपक्रम की सम्पदा (सम्पत्ति) के मूल्य में वृद्धि हो जाये। चूँकि सम्पत्ति के मूल्य में वृद्धि से कम्पनी सशक्त व मजबूत होगी जिससे कम्पनी की साख में वृद्धि होगी और इससे सर्वांगीण लाभ प्राप्त होगा, अतः वित्तीय प्रबन्ध व्यवस्था का उद्देश्य कम्पनी की सम्पत्तियों को बढ़ाना होना चाहिये।

MP Board Solutions

प्रश्न 5.
वित्तीय प्रबंध के कार्य लिखिए।
उत्तर:
वित्तीय प्रबंध के कार्य –

(अ) प्रशासकीय कार्य :

  1. वित्तीय पूर्वानुमान लगाना
  2. वित्तीय नियोजन, संपत्तियों की प्रबंध नीतियों का निर्माण करना
  3. वित्तीय क्रियाओं का संगठन
  4. अन्य विभागों से समन्वय
  5. वित्तीय नियन्त्रण का प्रबंध करना।

(ब) क्रियात्मक कार्य –

  1. वित्त व्यवस्था करना
  2. कोषों का आबंटन
  3. आय का प्रबन्ध करना
  4. रोकड़ प्रबंध
  5. पूँजी उत्पादकता में वृद्धि
  6. लाभ नियोजन
  7. प्रतिवेदन प्रस्तुत करना
  8. अभिलेख रखना
  9. विनियोग संबंधी निर्णय लेना
  10. संपत्तियों की प्रबंध नीतियों का निर्माण करना
  11. वित्तीय निर्णय लेना
  12. वित्तीय साधनों से संपर्क
  13. वित्तीय निष्पादन का विश्लेषण
  14. उच्च प्रबंधक को परामर्श।

(स) दैनिक एवं सलाहकारी कार्य-

  1. सम्पत्तियों का प्रबन्ध
  2. रोकड़ का प्रबन्ध
  3. वित्तीय लेखा रखना
  4. वित्तीय प्रतिवेदन
  5. अन्य कार्य।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.
वित्तीय प्रबंध के कोई चार प्रशासनिक कार्य लिखिए।
उत्तर:
वित्तीय प्रबंध के चार प्रशासनिक कार्य निम्न हैं

1. वित्तीय पूर्वानुसार-वित्तीय प्रबंधक को अपने उपक्रम में लक्ष्यों, विकास, योजनाओं एवं कार्यों की प्रकृति के अनुरूप वित्तीय आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाना होता है।

2. वित्तीय नियोजन-वित्तीय पूर्वानुमानों के आधार पर वित्तीय प्रबंधक वित्तीय नियोजन का कार्य करता है। इसके अंतर्गत पूँजी की मात्रा व अवधि, वित्त के स्रोत, ऋण-अंशपूँजी अनुपात, लेखांकन का प्रारूप आदि के संबंध में निर्णय लिये जाते हैं।

3. वित्तीय नियंत्रण-वित्त प्रबंधक वित्त विभाग का प्रमुख अधिकारी होता है। किस विभाग को कितनी राशि स्वीकृत करना तथा कुल राशि का अनुमान लगाना आदि वित्त नियंत्रण संबंधी कार्य वित्त प्रबंधक को करना पड़ता है।

4. विभागों में समन्वय-उत्पादन की प्रत्येक क्रिया व विभाग से वित्त का प्रत्यक्ष संबंध रहता है। अतः वित्त प्रबंधक अन्य विभागों में वित्त के संबंध में एक समन्वयक का कार्य करता है ताकि प्रत्येक विभाग का बजट, सुदृढ़ ढंग से बनाया जा सके।

प्रश्न 7. वित्तीय नियोजन का महत्व लिखिए।
उत्तर:
एक उपक्रम एवं व्यवसाय के लिये वित्तीय नियोजन के महत्त्व को निम्नानुसार व्यक्त किया जा सकता है

1. व्यवसाय का सफल प्रवर्तन- किसी भी व्यवसाय की सफलता के लिये यह आवश्यक है कि, व्यवसाय को प्रारम्भ करने के पूर्व उसकी वित्तीय योजना उचित ढंग से बना ली जाये। व्यवसाय के प्रारम्भ के पूर्व ही व्यवसाय के आकार एवं सम्भावित विस्तार की योजना को ध्यान में रखकर वित्तीय नियोजन किया जाता है। इसके बिना अन्य योजनायें अधूरी रह सकती हैं।

2. व्यवसाय का कुशल संचालन व्यवसाय की प्रत्येक गतिविधियों के लिये वित्त की आवश्यकता पड़ती है। पर्याप्त वित्त के बिना किसी भी व्यवसाय का सफल संचालन नहीं किया जा सकता। व्यवसाय की स्थापना, विभिन्न सम्पत्तियों एवं सामग्रियों का क्रय, पारिश्रमिक का वितरण आदि कार्यों में वित्त की आवश्यकता पड़ती है। इन सभी की उचित व्यवस्था के लिये वित्तीय प्रबन्ध आवश्यक है।

3. व्यवसाय का विकास एवं विस्तार–व्यवसाय में अधिक से अधिक लाभ कमाने के लिये अनेक प्रकार की विकास योजनायें बनानी पड़ती हैं। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये व्यवसाय का अनुकूलतम स्तर तक विस्तार किया जाता है। सम्भावित विस्तार को ध्यान में रखकर वित्तीय योजनायें बनाई जा सकती हैं। इससे व्यवसाय के विकास एवं विस्तार के समय वित्तीय कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता है।

4. व्यावसायिक तरलता सफल वित्तीय नियोजन के माध्यम से व्यवसाय में पर्याप्त मात्रा में तरल कोष (Liquid Fund) रखा जा सकता है। इससे अति व्यापार की स्थिति को दूर कर व्यवसाय की देनदारियों का समय-समय पर भुगतान कर अपनी शोधन क्षमता को बनाये रखा जा सकता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 8.
वित्तीय प्रबंध का महत्व बताइए।
उत्तर:
वित्तीय प्रबंध का महत्व निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट होता है।

1. उपक्रम की सफलता का आधार-उपक्रम का स्तर छोटा हो या बड़ा, निर्माणी संस्था हो या सेवा देने वाली संस्था सभी की सफलता का मूल आधार वित्तीय प्रबंध का उचित नियोजन है। एक लाभ में चलने वाले उपक्रम को अकुशल वित्तीय प्रबंध चौपट कर सकता है।

2. विनियोक्ताओं के लिए महत्व-देश के आम लोग अपनी छोटी-छोटी बचतों को किसी कम्पनी या संस्थाओं में विनियोग करते हैं इस हेतु उन्हें वित्तीय प्रबंध का ज्ञान आवश्यक है, अन्यथा दलालों व, बिचौलियों की मदद लेकर कभी-कभी विनियोक्तागण परेशानी में पड़ जाते हैं।

3. वित्तीय संस्थाओं के लिये महत्व-वित्तीय संस्थाओं के लिये वित्तीय प्रबंध का विशेष महत्व है, क्योंकि किसी संस्था या व्यक्ति को ऋण देना या न देना इसके निर्णय हेतु वित्तीय प्रबंध का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है ताकि-धन की सुरक्षा व तरलता में सामन्जस्य बना रहे।

4. कर्मचारियों के लिये महत्व वित्तीय प्रबंध का कर्मचारियों के लिये प्रत्यक्ष महत्व है वित्तीय प्रबंध से संस्था का विकास होगा, जिसमें कर्मचारी भी अपने विकास की इच्छा रखते हैं, अत: अच्छे वित्तीय प्रबंध से कर्मचारियों को अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय लाभ मिलते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 9.
वित्तीय प्रबंध के उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
वित्तीय प्रबंध के निम्नलिखित उद्देश्य हैं

1. अधिकतम लाभ की प्राप्ति – वित्तीय प्रबंध का प्रमुख उद्देश्य अधिकतम लाभ प्राप्त करना है किन्तु लाभ के उद्देश्य के लिए यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि लाभ न्याय संगत हो, लाभ और उपयोगिता में सामंजस्य होना चाहिए तथा इसका मानक तैयार करना चाहिए।

2. अधिकतम प्रतिफल की प्राप्ति – इसका दूसरा उद्देश्य लागत तथा विनियोग द्वारा अधिकतम प्रतिफल की प्रप्ति करना है। जिससे प्रबंध के स्वामी, अंशधारी प्रबंधक कर्मचारी तथा श्रमिकों को अधिकतम लाभ दिया जा सके।

3. संपत्ति के मूल्य में वृद्धि – वर्तमान युग में लाभ को अधिक करने के स्थान पर संपत्ति को बढ़ाना वित्तीय प्रबंध का उद्देश्य माना जाता है।

4. न्यूनतम लागत पर वित्त का अंतरण – वित्तीय प्रबंध का मुख्य उद्देश्य न्यूनतम लागत पर संस्था को पर्याप्त वित्त दिलवाने से है। कोई भी संस्था वित्त के अभाव में तरक्की नहीं कर सकती है।

प्रश्न 10.
स्थायी पूँजी को प्रभावित करने वाले घटकों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
स्थायी पूँजी की मात्रा को निर्धारित करने वाले निम्न तत्व हैं

1. व्यवसाय की प्रकृति-स्थायी पूँजी की मात्रा व्यवसाय की प्रकृति से प्रभावित होती है। इसमें दो तत्व निहित होते हैं। प्रथम, उपक्रम निर्माण कार्य में लगा है अथवा वितरण कार्य में। निर्माण कार्य में लगे व्यवसाय में अधिक स्थायी पूँजी की आवश्यकता होती है जबकि वितरण में लगे व्यवसाय में कम स्थायी पूँजी की आवश्यकता होती है।

2. उपक्रम का आधार एवं संगठन-स्थायी पूँजी की मात्रा को निर्धारित करने में उपक्रम का आकार एवं संगठन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि उपक्रम बड़े पैमाने पर उत्पादन अथवा विक्रय का कार्य करता है तो अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है अन्यथा कम।

3. उत्पादन प्रक्रिया की जटिलता-जिस उपक्रम में जितनी अधिक जटिल उत्पादन प्रक्रिया का प्रयोग होता है वह व्यवसाय उतना ही अधिक स्थायी पूँजी चाहता है, जबकि सरल उत्पादन प्रक्रिया की स्थिति में कम स्थायी पूँजी की आवश्यकता होती है।

4. प्रारम्भिक व्यय-यदि कम्पनी की स्थापना के समय प्रवर्तकों के पारिश्रमिक, स्थापना, व्यय, पेटेण्ट आदि के क्रय पर अधिक व्यय किया जाता है तो इससे स्थायी पूँजी की आवश्यकता बढ़ जाती है।

प्रश्न 11.
कार्यशील पूँजी को प्रभावित करने वाले घटकों (कारकों) को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कार्यशील पूँजी की मात्रा को निम्न घटक प्रभावित करते हैं

1. व्यवसाय की प्रकृति–नियमित एवं निश्चित माँग वाले व्यवसायों में अनियमित एवं अनिश्चित माँग वाले व्यवसायों की अपेक्षाकृत कम कार्यशील पूँजी से काम चल जाता है। क्योंकि नियमित एवं निश्चित माँग होने से नगद प्रवाह बना रहता है तथा निश्चितता होने से स्कंध इत्यादि में अधिक विनियोग नहीं करना पड़ता है।

जिन व्यवसायों में मशीनीकरण की मात्रा कम व मानव श्रम की मात्रा अधिक होती है उन उद्योगों या व्यवसायों की अपेक्षा उन व्यवसायों में अधिक कार्यशील पूँजी की आवश्यकता होती है जहाँ मशीनीकरण की मात्रा अधिक तथा मानवश्रम से कम काम लिया जाता है।

2. व्यवसाय का आकार–व्यवसाय या फर्म के आकार पर भी कार्यशील पूँजी की मात्रा निर्भर करती है। व्यवसाय का आकार जितना ही बड़ा होगा उतनी ही अधिक कार्यशील पूँजी की आवश्यकता होगी क्योंकि बड़े व्यवसायों में स्थायी पूँजी अधिक होती है, जिसके लाभदायक उपयोग के लिए अधिक कार्यशील पूँजी का होना आवश्यक है।

3. उत्पादन प्रक्रिया यदि उत्पादन प्रक्रिया की सामान्य अवधि लम्बी है या उत्पादन प्रक्रिया जटिल है तो स्वाभाविक रूप से अधिक कार्यशील पूँजी की आवश्यकता होगी क्योंकि उत्पादन प्रक्रिया जटिल या लम्बी होने पर कच्चे माल को निर्मित माल में बदलने में अधिक समय, अधिक भण्डारण व्यय, अधिक उपरिव्यय तथा अंततोगत्वा अधिक कार्यशील पूँजी की आवश्यकता होगी।

4. रोकड़ की आवश्यकता रोकड़ शेष चालू सम्पत्तियों का एक भाग होता है अतः रोकड़ की आवश्यकता कार्यशील पूँजी की मात्रा को प्रभावित करती है। रोकड़ की आवश्यकता प्रायः मजदूरी, वेतन, कर, किराया, विविध व्यय तथा लेनदार इत्यादि को भुगतान के लिए पड़ती है। इन भुगतानों की राशि जितनी अधिक होगी कार्यशील पूँजी की राशि उतनी ही अधिक होगी।

MP Board Solutions

प्रश्न 12.
श्रेष्ठ वित्तीय योजना के चार लक्षणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
एक सुदृढ़ वित्तीय योजना में निम्नलिखित लक्षण होना चाहिए

1. सरलता-वित्तीय योजनाएँ सरलता के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए बनायी जानी चाहिए। लेकिन सरलता के कारण कार्यक्षमता को समाप्त नहीं होने देना चाहिए।

2. पूर्णता-यह भी वित्तीय नियोजन की एक विशेषता है कि वित्तीय नियोजन में पूर्णता का गुण होना चाहिए।

3. मितव्ययिता-वित्तीय योजना में पूँजी प्राप्त करने व प्रतिभूतियों के निर्गमन के संबंध में किये जाने वाले व्ययों को न्यूनतम रखा जाना चाहिये।

4. लोचशीलता-किसी भी उद्योग को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए यह आवश्यक है कि उसके पूँजी ढाँचे में किसी भी प्रकार की कठोरता न हो बल्कि वह इस प्रकार का हो कि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर सफलतापूर्वक संचालन किया जा सके।

प्रश्न 13.
कार्यशील पूँजी की पर्याप्तता के पाँच लाभ लिखिए।
उत्तर:
कार्यशील पूंजी की पर्याप्तता के कुछ प्रमुख लाभ निम्न हैं

1. नगद छूट – पर्याप्त कार्यशील पूँजी के बल पर कम्पनी क्रय किये गये माल का भुगतान कर नगद छूट प्राप्त कर सकती है। इससे उत्पादन लागत में कमी आती है।

2. विक्रेताओं को तत्काल भुगतान संस्था अपने विक्रेताओं को समय पर भुगतान कर सकती है, जिससे उनसे नियमित रूप से कच्चा माल उचित मूल्य तथा सही समय पर प्राप्त करने में कोई कठिनाई नहीं होती।

3. ऋण क्षमता एवं साख में वृद्धि – पर्याप्त कार्यशील पूँजी सुदृढ़ वित्तीय स्थिति का प्रतीक मानी जाती है। तीसरे पक्ष की दृष्टि में पर्याप्त कार्यशील पूँजी अच्छी शोधन क्षमता का प्रतीक होती है, अतः आवश्यकता पड़ने पर संस्था को तत्काल ऋण प्राप्त करने में कठिनाई नहीं होती। तुरन्त ऋण प्राप्त करने की क्षमता तथा अच्छी साख के कारण संस्था का उत्पादन एवं व्यापारिक कार्य निरन्तर बिना किसी रुकावट के चलता रहता है।

4. पर्याप्त लाभों का वितरण – जब कम्पनी या संस्था में कार्यशील पूँजी की कमी रहती है तो पर्याप्त लाभ होने पर भी लाभांश का वितरण नहीं कर पाती। क्योंकि उस समय संचालकों की नीति लाभों के पुनर्विनियोग की होती है। अगर कम्पनी के पास कार्यशील पूँजी पर्याप्त मात्रा में होती है तो कम्पनी लाभ होने की स्थिति में अंशधारियों को अच्छे लाभांशों का वितरण कर सकती है।

5. बैंकों से ऋण प्राप्ति में सुविधा – पर्याप्त कार्यशील पूँजी ही वास्तव में व्यापारिक ऋणों के लिए एक उत्तम प्रतिभूति होती है। इस प्रकार कार्यशील पूँजी की पर्याप्तता के कारण बैंक ऋणों की प्राप्ति में भी सुविधा होती है।

प्रश्न 14.
लाभांश के निर्णय लेते समय किन-किन घटकों का प्रभाव पड़ता है ? कोई चार घटकों को बताइए।
उत्तर:
किसी भी व्यवसाय में उनके स्वामियों के लिये वहाँ की लाभांश नीति अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है। सामान्यतः लाभांश नीति को संचालक निर्धारित करते हैं। किन्तु लाभांश नीति का निर्णय लेने के पूर्व वे कुछ वैधानिक प्रतिबंधों तथा अंशधारियों के दबाव से घिरे रहते हैं। क्योंकि लाभांश का निर्णय लेने के पूर्व संस्था की आर्थिक, सामाजिक स्थिति तथा राजनैतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। किसी उपक्रम में लाभांश का निर्णय (लाभांश नीति) को निम्न घटक प्रभावित करते हैं।

1. लाभ की मात्रा (Profit Volume) – किसी कंपनी में लाभांश की मात्रा को सर्वाधिक प्रभाव डालने वाला घटक लाभ की मात्रा है अर्थात अधिक लाभ लेने पर अधिक लाभांश तथा कम लाभ होने पर कम लाभांश का निर्णय लेना संचालकों की मजबूरी होगी। अतः लाभांश के निर्णय को लाभ की मात्रा सर्वाधिक प्रभावित करती है।

2. लाभांश की प्रवृत्ति (Trend of dividend) – लाभांश का निर्णय लेने के पूर्व यह देखना आवश्यक है कि गत वर्षों में कितना प्रतिशत लाभ दिया जाता रहा है क्योंकि अचानक कम दर पर लाभांश घोषित करने का अर्थ अंशधारियों को नाराज करना होगा। इसी के साथ समान स्तर के अन्य प्रतिस्पर्धी व्यवसाय द्वारा लाभांश की दर क्या घोषित की गई है। इसका ध्यान रखकर भी लाभांश की दर घोषित की जाती है क्योंकि अन्य समकक्ष व्यवसाय से कम लाभांश देने का आशय है व्यवसाय की कमजोरी या कम लाभ अर्जन करना, इससे व्यवसाय की ख्याति (Goodwill) पर विपरीत असर पड़ता है।

3. भावी वित्तीय आवश्यकताएँ (Financial needs in future)-लाभांश निर्णय को निर्धारित करने के पूर्व यह विचार करना आवश्यक होगा कि उपक्रम को अपने विस्तार एवं विकास के लिये कितनी पूँजी की आवश्यकता होगी तथा लाभ का कितना भाग पुनर्विनियोजित किया जायेगा। अन्य शब्दों में भविष्य में अधिक नवीन पूँजी की आवश्यकता होगी तब लाभांश दर कम तथा आवश्यकता कम रहने पर ऊँचे दर पर लाभांश दिया जा सकता है।

प्रश्न 15.
एक अच्छी पूँजी संरचना में क्या – क्या गुण होने चाहिए ?
उत्तर:
एक कम्पनी को इस प्रकार की पूँजी संरचना का निर्माण करना चाहिए जिससे कम्पनी के उद्देश्यों की सफलतापूर्वक पूर्ति हो सके। इसलिए कम्पनी को आदर्श पूँजी संरचना की स्थिति को चुनना चाहिए। एक पूँजी संरचना सभी कम्पनियों के लिए सभी समयों में आदर्श नहीं हो सकती। सामान्य तथा आदर्श पूँजी-संरचना में निम्न गुण होने चाहिए

1.सरलता-कम्पनी का पूँजी ढाँचा प्रारम्भ में एकदम सरल होना चाहिए। सरलता का तात्पर्य यह है कि प्रारम्भ में कम प्रकार की प्रतिभूतियों से धन संग्रह किया जाए। यदि प्रारम्भ में ही अनेक प्रकार से धन एकत्र किया जाता है तो उसमें नये प्रस्तावों के प्रति विनियोक्ताओं के मन में संदेह पैदा हो जाता है।

2. लोचपूर्ण-पूँजी ढाँचा इस प्रकार का होना चाहिए जिससे व्यवसाय की बढ़ती हुई आवश्यकताओं के लिये भविष्य में भी वित्त प्राप्त किया जा सके । कम पूँजी की आवश्यकता होने पर पूँजी अथवा कोषों को कम करना भी संभव होना चाहिये।

3. पूर्ण उपयोग-संस्था में उचित पूँजीकरण की स्थिति होनी चाहिये न तो अल्प-पूँजीकरण हो और न अति-पूँजीकरण । जब संस्था में उचित पूँजीकरण होता है तब संस्था के पास पूँजी साधन बेकार नहीं पड़े रहते हैं तथा उनका अच्छा उपयोग होता है।

4. पर्याप्त तरलता-उपक्रम को स्थिर एवं तरल सम्पत्तियों का एक उचित अनुपात निर्धारित करना चाहिये। तरल सम्पत्तियों से तात्पर्य चल सम्पत्तियों से है, जैसे-रोकड़, बैंक, चालू विनियोग तथा प्राप्तियाँ आदि। कम्पनी की सम्पत्तियों का मिश्रण इस प्रकार होना चाहिये जिससे संस्था के पास सदैव तरलता बनी रहे। किसी भी संस्था को अपनी पूँजी का कुछ भाग तरल रूप में अवश्य रखना चाहिये।

MP Board Solutions

प्रश्न 16.
अल्प-पूँजीकरण से अंशधारियों पर क्या प्रभाव पड़ता है ? कोई तीन प्रभावों को बताइए।
उत्तर:
कम्पनी के अंशधारियों पर निम्न प्रभाव पड़ते हैं

  1. अधिक लाभांश (High dividend) – अल्प-पूँजीकृत कम्पनी के अंशधारियों को नियमित रूप से ऊँचे लाभांश प्राप्त होते हैं।
  2. पूँजीगत लाभ (Capital gains)- अंशधारियों के अंशों का बाजार मूल्य बढ़ जाता है अत: अंशों को बेचने पर उन्हें पूँजीगत लाभ प्राप्त होता है।
  3. ऋण प्राप्ति में सुविधा (Easy in getting loan) – यदि अंशधारियों को ऋण लेने की आवश्यकता होती है तो इन अंशों की जमानत पर ऋण प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 17
पूँजी संरचना निर्णय निश्चित रूप से जोखिम आय का आशावादी संबंध है। टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
पूँजी संरचना निश्चित रूप से जोखिम आय का आशावादी संबंध है उसके निम्न कारण हैं

1. ऋण समता की तुलना में सस्ता स्रोत-ऋण पूँजी की लागत समता पूँजी से कम होती है। इसका कारण है ऋणदाताओं द्वारा व्यवसाय में किए गए विनियोग का कम जोखिम होना। दूसरी ओर, समता अंश पूँजी पर लाभांश की दर निश्चित न होते हुए भी यह सर्वाधिक महँगी पूँजी होती है।

2. समता की तुलना में ऋण जोखिमपूर्ण होता है-ऋण पूँजी व्यवसाय के लिए सर्वाधिक जोखिमपूर्ण होती है क्योंकि ऋणदाता ब्याज व मूल राशि की वापसी न होने पर न्यायालय में कंपनी के समापन के लिए प्रार्थना दायर कर सकते हैं । समता अंशधारियों को ऐसा अधिकार प्राप्त नहीं है इसलिए इनसे कंपनी को कोई जोखिम नहीं होता है।

3. ऋण एक उधार कोष है जबकि समता स्वामित्व कोष है-ऋण एक दायित्व है जिस पर ब्याज का भुगतान करना ही पड़ता है चाहे कंपनी को लाभ हो या न हो। दूसरी तरफ, समता स्वामित्व कोष है जिस पर लाभांश का भुगतान कंपनी के लाभों पर निर्भर करता है।

प्रश्न 18.
पूँजी बजटिंग निर्णय एक व्यवसाय के वित्तीय भाग्य को बदलने में सामर्थ्यवान होता है। क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर:
पूँजी बजटिंग निर्णय कंपनी का भाग्य बदल सकता है। यह निर्णय उन संपत्तियों के ध्यानपूर्वक चयन से संबंधित होता है जिसमें फर्मों द्वारा अपने कोषों का निवेश किया जायेगा। एक फर्म के पास कोषों को निवेश करने के लिए कई विकल्प होते हैं, परंतु फर्म को अधिक उपयुक्त विकल्प का चयन करना पड़ता है जिससे फर्म को अधिकतम लाभ होगा। पूँजी बजटिंग एक व्यवसाय के वित्तीय भाग्य को निम्न तरीकों से बदल सकता है और इसका जवाब भी हाँ है

1. जोखिम-स्थायी पूँजी निर्णयों में एक बड़ी राशि लगी होती है जो कंपनी के लिए एक बहुत बड़ा जोखिम भी होता है क्योंकि लाभ लंबे समय के बाद मिलेगा। अतः कंपनी का जोखिम भी लंबे समय तक रहेगा जब तक लाभ आना शुरू न हो जाय।

2. दीर्घावधि विकास-पूँजी बजटिंग निर्णय कंपनी के दीर्घावधि विकास को प्रभावित करती है। जो पूँजी दीर्घ अवधि वाली संपत्तियों में निवेश की गई है उसे भविष्य में वापस लाती है एवं कंपनी की भविष्य की योजनाएँ तथा विकास केवल इसी निर्णय पर निर्भर करती है।

3. अपरिवर्तित निर्णय-पूँजी बजटिंग निर्णय रात भर में परिवर्तित नहीं हो सकता। इस निर्णय में बहुत बड़ी राशि लगी होती है, और अगर हम कोई परिवर्तन करते हैं तो इस परिवर्ततन का परिणाम होगा बड़ा नुकसान जिसे हम कोष की बर्बादी कह सकते हैं । अतः ऐसे निर्णय सोच-विचारकर सुनियोजित तथा सभी दृष्टिकोणों से इनका मूल्यांकन करने के पश्चात् लेने चाहिए अन्यथा इसके बहुत घातक परिणाम होंगे।

MP Board Solutions

प्रश्न 19.
स्थायी पूँजी की आवश्यकता क्यों होती है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
स्थायी पूँजी की आवश्यकता निम्न कारणों से होती है –

1. व्यवसाय की प्रकृति (Nature of business) – स्थायी पूँजी की मात्रा व्यवसाय की प्रकृति से प्रभावित होती है। इसमें दो तत्त्व निहित होते हैं। प्रथम, उपक्रम निर्माण कार्य में लगा है अथवा वितरण कार्य में। निर्माण कार्य में लगे व्यवसाय में अधिक स्थायी पूँजी की आवश्यकता होती है जबकि वितरण में लगे व्यवसाय में कम स्थायी पूँजी की आवश्यकता होती है। द्वितीय, उत्पादन अथवा वितरण सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं का किया जाता है तो कम स्थायी पूँजी की आवश्यकता होती है और उद्योगों से संबंधित वस्तुओं का उत्पादन अथवा वितरण किया जाता है तो अधिक स्थायी पूँजी की आवश्यकता होती है।

2. उपक्रम का आधार एवं संगठन (Size and organization of the business) – स्थायी पूंजी की मात्रा को निर्धारित करने में उपक्रम का आकार एवं संगठन अत्यंत महत्त्वपूर्ण होता है। यदि उपक्रम बड़े पैमाने पर उत्पादन अथवा विक्रय का कार्य करता है तो अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है अन्यथा कम। उपक्रम निगम पद्धति पर संगठित होता है तो अधिक स्थायी पूँजी की आवश्यकता होगी अन्यथा कम।

3. उत्पादन प्रक्रिया की जटिलता (Complexity of process of production) – जिस उपक्रम में जितनी अधिक जटिल उत्पादन प्रक्रिया का प्रयोग होता है वह व्यवसाय उतना ही अधिक स्थायी पूँजी चाहता है, जबकि सरल उत्पादन प्रक्रिया की स्थिति में कम स्थायी पूँजी की आवश्यकता होती है।

4. प्रारम्भिक व्यय (Preliminary expenses) – यदि कम्पनी की स्थापना के समय प्रवर्तकों के पारिश्रमिक, स्थापना, व्यय, पेटेण्ट आदि के क्रय पर अधिक व्यय किया जाता है तो इससे स्थायी पूँजी की आवश्यकता बढ़ जाती है।

प्रश्न 20.
पूँजी बजटिंग से क्या आशय है ? उसकी विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
पूँजी बजटिंग से आशय – स्थायी संपत्तियों में विनियोग संबंधी निर्णय लेना ही पूँजी बजटिंग . कहलाता हैं। इन्हें पूँजीगत व्यय निर्णय भी कहा जाता है। पूँजी बजटिंग निर्णय अधिक जोखिमपूर्ण होते हैं क्योंकि एक तो ये निर्णय दीर्घ अवधि के लिए होते हैं इसलिए इनके अंतर्गत कई वर्षों के संभावित लाभों का पूर्वानुमान लगाना पड़ता है। जो कि गलत भी हो सकता है। दूसरा, इनमें बड़ी मात्रा में विनियोग होने के कारण एक बार लिए गए निर्णय में परिवर्तन करना कठिन हो जाता है।रिचर्ड्स एवं ग्रीनला के अनुसार – “पूँजी बजटिंग का अभिप्राय साधारणतः ऐसे विनियोग करने से है जिनसे लंबे समय तक आय प्राप्त होती है।”
पूँजी बजटिंग की विशेषताएँ-पूँजी बजटिंग की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं

  1. पूँजी बजटिंग निर्णयों की प्रकृति भारी विनियोग की होती है।
  2. दीर्घकालीन लाभदायकता में वृद्धि होती है।
  3. निर्णयों में जोखिम की मात्रा अधिक रहती है।
  4. लिए गए निर्णयों को बदलने में कठिनाई आती है।

प्रश्न 21.
स्थायी पूँजी तथा कार्यशील पूँजी में अंतर बताइए।
उत्तर:
स्थायी पूँजी तथा कार्यशील पूँजी में अंतर –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 9 वित्तीय प्रबन्ध IMAGE - 2

प्रश्न 22.
स्थायी पूँजी को प्रभावित करने वाले तत्व लिखिए।
उत्तर:
स्थायी पूँजी की मात्रा को निर्धारित करने वाले निम्न तत्व हैं

1. व्यवसाय की प्रकृति (Nature of business) – स्थायी पूँजी की मात्रा व्यवसाय की प्रकृति से प्रभावित होती है। इसमें दो तत्व निहित होते हैं । प्रथम, उपक्रम निर्माण कार्य में लगा है अथवा वितरण कार्य में। निर्माण कार्य में लगे व्यवसाय में अधिक स्थायी पूँजी की आवश्यकता होती है जबकि वितरण में लगे व्यवसाय में कम स्थायी पूँजी की आवश्यकता होती है। द्वितीय, उत्पादन अथवा वितरण सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं का किया जाता है तो कम स्थायी पूँजी की आवश्यकता होती है और उद्योगों से संबंधित वस्तुओं का उत्पादन अथवा वितरण किया जाता है तो अधिक स्थायी पूँजी की आवश्यकता होती है

2. उपक्रम का आधार एवं संगठन (Size and organization of the business)- स्थायी पूँजी की मात्रा को निर्धारित करने में उपक्रम का आकार एवं संगठन अत्यंत महत्त्वपूर्ण होता है। यदि उपक्रम बड़े पैमाने पर उत्पादन अथवा विक्रय का कार्य करता है तो अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है अन्यथा कम। उपक्रम निगम पद्धति पर संगठित होता है तो अधिक स्थायी पूँजी की आवश्यकता होगी अन्यथा कम।

3. उत्पादन प्रक्रिया की जटिलता (Complexity of process of production)- जिस उपक्रम में जितनी अधिक जटिल उत्पादन प्रक्रिया का प्रयोग होता है वह व्यवसाय उतना ही अधिक स्थायी पूँजी चाहता है, जबकि सरल उत्पादन प्रक्रिया की स्थिति में कम स्थायी पूँजी की आवश्यकता होती है।

4. प्रारम्भिक व्यय (Preliminary expenses)- यदि कम्पनी की स्थापना के समय प्रवर्तकों के पारिश्रमिक, स्थापना, व्यय, पेटेण्ट आदि के क्रय पर अधिक व्यय किया जाता है तो इससे स्थायी पूँजी की आवश्यकता बढ़ जाती है।

प्रश्न 23.
अति पूँजीकरण एवं अल्प-पूँजीकरण में अंतर बताइए।
उत्तर:
अति-पूँजीकरण एवं अल्प-पूँजीकरण में अंतरक्र –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 9 वित्तीय प्रबन्ध IMAGE - 3
प्रश्न 24.
जलयुक्त पूँजी किसे कहते हैं ? यह क्यों उत्पन्न होती है ? इसे समाप्त करने के लिए आप क्या कदम उठाएँगे?
उत्तर:
आशय (Meaning) – “जब कम्पनी की सम्पत्तियों का वास्तविक मूल्य उसके पुस्त मूल्य (Book value) से कम हो जाता है तो उसे जलयुक्त पूँजी कहते हैं।”
कभी-कभी प्रवर्तन के समय प्रवर्तकों एवं अन्य विक्रेताओं के द्वारा अंशों के बदले ऐसी सम्पत्ति हस्तांतरित कर दी जाती है जिसका उत्पादक मूल्य काफी कम रहता है। फलतः कम्पनी में पुस्त मूल्य तो रहता है किन्तु वास्तविक सम्पत्ति कम हो जाती है। स्थायी सम्पत्ति के अतिरिक्त दोषपूर्ण पेटेण्ट, साख प्रवर्तन एवं सेवाओं के कारण भी यह स्थिति निर्मित हो जाती है।

जैसे किसी कम्पनी की सम्पत्ति का पुस्त मूल्य 1,00,000 रु. है तथा उस सम्पत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य या उत्पादकता 70,000 रु. है तब ऐसी स्थिति को जलयुक्त पूँजी कहा जायेगा।द्रवित पूँजी के कारण (Causes of Watered Capital) – किसी कम्पनी में द्रवित पूँजी निम्न कारणों से हो जाती है

1. ऊँची दरों पर सम्पत्तियों का क्रय (Purchase of assets at high rates) व्यापार में यदि सम्पत्तियों का क्रय ऊँची दर पर किया जाये तो इससे द्रवित पूँजी का उत्पन्न होना स्वाभाविक होता है।

2. दोषपूर्ण ह्रास नीति (Defective depreciation policy) – यदि कम्पनी की ह्रास कोष नीति दोषपूर्ण है तथा आवश्यकता से कम ह्रास कोष की व्यवस्था की जाती है तब द्रवित पूँजी उत्पन्न हो जाती है ।

3.प्रवर्तकों को अधिक पारिश्रमिक (More remuneration to promotors) – कम्पनी के समामेलन के समय यदि प्रवर्तकों द्वारा अधिक पारिश्रमिक की माँग की जाती है या अधिक पारिश्रमिक का भुगतान कर दिया जाता है तो इससे द्रवित पूँजी उत्पन्न हो जाती है।

4. अमूर्त सम्पत्तियाँ (Intangible assets)- अमूर्त सम्पत्तियाँ जैसे-ख्याति, कॉपीराइट्स, पेटेण्ट, ट्रेडमार्क आदि की उपयोगिता कभी-कभी बाद में कम हो जाती है जबकि चिट्ठे में उसका मूल्य पूर्व की भाँति रहता है इससे भी द्रवित पूँजी की मात्रा बढ़ जाती है।

प्रश्न 25.
अति-पूँजीकरण के प्रमुख कारण बतलाइए।
उत्तर:
अति-पूँजीकरण के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं
1. अधिक प्रवर्तन व्यय-यदि किसी कम्पनी के निर्माण के समय अत्यधिक अथवा अनुचित प्रवर्तन व्यय किये जाते हैं तो वे आगे चलकर अति-पूँजीकरण को जन्म देते हैं। प्रवर्तन व्यय कम्पनी के व्यापार के अनुकूल होना चाहिए। जब पूँजी की राशि अनुमानित आय (अर्जित होने वाली) से अधिक निर्धारित कर ली जाती है तो ऐसी स्थिति अति-पूँजीकरण की होती है।
2. अधिक पूँजी का निर्गमन—जब किसी कम्पनी में आवश्यकता से अधिक पूँजी का निर्गमन किया जाता है तब कम्पनी के पास आवश्यकता से अधिक रकम एकत्रित हो जाती है तथा उसका लाभपूर्ण उपयोग न करने पर अति-पूँजीकरण की स्थिति निर्मित हो जाती है।
3. प्रवर्तन के समय आय का अधिक अनुमान–यदि किसी कम्पनी के प्रवर्तन के समय कम्पनी द्वारा अर्जित की जाने वाली आय का अधिक अनुमान लगाया जाता है तो कम्पनी में अति-पूँजीकरण का कारण बनता है। जब पूँजीकरण की राशि अधिक निर्धारित कर ली जाती है तथा संस्था उनके अनुरूप आय अर्जित नहीं करती तो यह स्थिति अति-पूँजीकरण की होती है।
4. स्फीति काल में कम्पनी का निर्माण यदि किसी कम्पनी का निर्माण स्फीति काल में किया जाता है तो उस कम्पनी में अति-पूँजीकरण की स्थिति पैदा हो सकती है। स्फीति काल में सभी सम्पत्तियों को खरीदना महँगा पड़ता है। जबकि वे भविष्य में अधिक लाभप्रद नहीं होती हैं कि उनके मूल्य की तुलना में वे लाभ कम देती हैं अतः जैसे ही स्फीति काल समाप्त होता है उपक्रम में अति-पूँजीकरण की स्थिति निर्मित हो जाती है।

MP Board Solutions

प्रश्न 26.
कार्यशील पूँजी के प्रकारों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
कार्यशील पूँजी मुख्यतः दो प्रकार की होती है.
1. नियमित अथवा स्थायी कार्यशील पूंजी (Regular or fixed working capital)-कुछ कार्यशील पूँजी होती है जिसकी आवश्यकता संपूर्ण वर्ष भर लगातार होती है। ऐसी पूँजी की व्यवस्था स्थायी रूप से दीर्घकालीन ऋण से की जाती है। नियमित कार्यशील पूंजी की आवश्यकता न्यूनतम स्टॉक बनाये रखने, बैंक में न्यूनतम राशि रखने, व्यापार की मरम्मत, रख-रखाव, बिजली, वेतन, शक्ति आदि के व्ययों को करने के लिए पड़ती है। व्यवसाय के सामान्य संचालन के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। इसी पूँजी से व्यवसाय का संचालन तथा व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाता है।

2. मौसमी अथवा परिवर्तनशील कार्यशील पूंजी (Seasonal or variable working capital)-यह एक ऐसी पूँजी है जिसका उपयोग वर्ष में किसी निश्चित मौसम में ही किया जाता है। साथ ही यह व्यय परिवर्तनशील होता है। इसलिए इसे मौसमी या परिवर्तनशील कार्यशील पूँजी कहा जाता है। जैसे-सर्दी के पूर्व गर्म कपड़े या ऊन खरीदने के लिए, बरसात के पूर्व छाता या बरसाती खरीदने के लिए आदि।

जिस वर्ष अधिक बरसात होती है उस वर्ष बरसाती या छाता अधिक बिकता है अतः पूँजी इसी अनुपात में परिवर्तनशील होती है। मौसमी कार्यशील पूँजी अल्पकालीन होती है। अतः इसकी व्यवस्था अल्पकालीन ऋणों द्वारा पूरी की जा सकती है।

प्रश्न 27.
वित्तीय नियोजन की सीमाएँ बताइए।
उत्तर:
वित्तीय नियोजन व्यवसाय की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है किन्तु विभिन्न कारणों से वित्तीय नियोजन की सफलता में बाधा पहुँचता है। वित्तीय नियोजन की प्रमुख सीमायें निम्नांकित हैं

1. पूर्वानुमानों पर आधारित (Based on forecasts) वित्तीय नियोजन प्रायः भविष्य की गर्त में देखता है भविष्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर पूर्वानुमान लगाया जाता है। भविष्य सदैव अनिश्चित रहता है अतः इस अनिश्चितता के कारण कभी-कभी पूर्वानुसार मान असफल हो जाते हैं जिससे वित्तीय नियोजन असफल हो जाता है।

2. समन्वय का अभाव (Lack of coordination) – वित्तीय नियोजन में संस्था के बाहर के अधिकारियों में समन्वय का होना आवश्यक है। किन्तु कभी-कभी अच्छा समन्वय न रहने से अच्छी-अच्छी वित्तीय योजना भी असफल हो जाती है तथापित यह दोष अधिकारियों का है।

3. परिवर्तित दशाएँ (Changed conditions) – प्रत्येक दिन कुछ न कुछ नया हो जाता है अर्थात् आज जो स्थिति है व कल रहेंगे या नहीं आवश्यक नहीं जबकि वित्तीय नियोजन आज की स्थिति को आधार मानकर किया जाता है। परिस्थितियाँ बदल जाने पर अच्छा से अच्छा वित्तीय नियोजन असफल हो जाता है।

4. मानसिक सीमाएँ (Mental limitations) – वित्तीय योजना बौद्धिक श्रेष्ठता पर निर्भर करती है। अतः वित्तीय प्रबंधकों में अपेक्षित योग्यता न रहने पर भी वित्तीय योजना का सही रूपांकन नहीं हो पाता।

प्रश्न 28.
पूँजी बजटिंग क्या है ? इसके तीन महत्व बताइए।
उत्तर:
पूँजी बजटिंग का अर्थ-स्थायी संपत्तियों में विनियोग संबंधी सभी निर्णय पूँजी बजटिंग
कहलाते हैं।
पूँजी बजटिंग का महत्व-

  1. लाभप्रदत्ता को निर्धारित करना।
  2. भारी विनियोगों से संबंधित।
  3. जोखिम के स्वरूप को प्रभावित करना।
  4. दीर्घ अवधि विकास एवं प्रभाव अर्थात् यह ऐसे निर्णय हैं जिनका दीर्घ अवधि विकास पर प्रभाव पड़ता है। दीर्घ अवधि संपत्ति में लगाई गई पूँजी पर भविष्य में लाभ प्राप्त होगा। इसका व्यवसाय में आने वाले समय की संभावनाओं एवं भविष्य पर प्रभाव पड़ता है।
  5. लाभों के पूर्वानुमान पर आधारित।
  6. स्थायी निर्णय अर्थात् एक बार लिए गए निर्णयों को पलटने से भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है।

प्रश्न 29.
वर्णन कीजिए कि क्या निम्नलिखित वस्तुओं का निर्माण करने वाले व्यवसाय की कार्यशील पूँजी आवश्यकता कम है या अधिक उत्तर स्पष्ट कीजिए

  1. चीनी
  2. मोटरकार
  3. लोकोमोटिव
  4. ब्रेड
  5. कूलर
  6. फर्नीचर।

उत्तर:

  1. चीनी-कार्यशील पूँजी की आवश्यकता अधिक होगी क्योंकि परिचालन चक्र लंबा होता है।
  2. मोटरकार-कार्यशील पूँजी की आवश्यकता अधिक होगी क्योंकि परिचालन चक्र लंबा होगा।
  3. लोकोमोटिव- कार्यशील पूँजी की आवश्यकता कम होगी क्योंकि परिचालन चक्र छोटा होता है।
  4. ब्रेड-कार्यशील पूँजी की आवश्यकता कम होगी क्योंकि इसमें शीघ्र नगद प्रवाह होता है।
  5. कूलर- कार्यशील पूँजी की आवश्यकता अधिक होती है क्योंकि यह मौसमी उत्पादन है।
  6. फर्नीचर-कार्यशील पूँजी की आवश्यकता कम होती है क्योंकि स्टॉक का अनुरक्षण नहीं करना पड़ता।

MP Board Solutions

प्रश्न 30.
अति-पूँजीकरण से कम्पनी पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
अतिपूँजीकरण से कम्पनी पर निम्न प्रभाव पड़ता है

1. ख्याति की हानि–अति-पूँजीकृत कम्पनी के अंशों का वास्तविक मूल्य उनके पुस्तकीय मूल्य से कम हो जाता है तथा लाभांश की दर कम हो जाती है जिससे कम्पनी की ख्याति को हानि पहुँचती है।

2. पूँजी प्राप्ति में कठिनाई अति-पूँजीकृत कम्पनी के बाजार में साख कम हो जाती है तथा लाभांश की मात्रा कम हो जाती है। इससे कोई भी विनियोक्ता ऐसी कम्पनी में विनियोग नहीं करना चाहता है। परिणामस्वरूप पूँजी प्राप्त करने में कठिनाई होती है।

3. ऋण प्राप्ति में कठिनाई अति-पूँजीकरण की स्थिति में कम्पनी की आय कम हो जाने से इनके कोष कम हो जाते हैं जिससे अन्य वित्तीय संस्थाएँ भी इन कम्पनियों को ऋण देने में संकोच करती हैं। इस प्रकार अति-पूँजीकरण की स्थिति में कम्पनियों को ऋण प्राप्ति में कठिनाई होती है।

4. कृत्रिम ऊँची लाभ दर-अति-पूँजीकृत कम्पनी अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को प्राप्त करने के लिए हिसाब-किताब में गड़बड़ी करके ऊँचे लाभांश की घोषणा करती है। लाभांश पूँजी में से भी दे दिया जाता है। यह गलत नीति आगे चलकर अधिक घातक सिद्ध होती है।

प्रश्न 31.
एक कम्पनी के पूँजी ढाँचे के चयन को निर्धारित करने वाले किन्हीं चार घटकों को समझाइए।
अथवा
पूँजी ढाँचे को प्रभावित करने वाले घटकों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
अथवा
एक कम्पनी के पूँजी ढाँचे को प्रभावित करने वाले कोई दो घटक लिखिए।
उत्तर:
पूँजी ढाँचे को निर्धारित करने वाले तत्व (Factors determining the Capital Structure of a Company) – एक कम्पनी की पूँजी संरचना को निर्धारित करने वाले तत्व निम्नलिखित हैं

1. आय की स्थिरता (Stability of Earnings) – जिन कंपनियों की आय में लगातार स्थिरता बनी रहती है वे स्थायी वित्तीय व्ययों (जैसे ब्याज का भुगतान) का भुगतान आसानी से कर सकती है। अतः ऐसी कंपनियों को सस्ते वित्त स्रोत का लाभ उठाते हुए वित्त की व्यवस्था ऋण पूँजी से करनी चाहिए। इसके विपरीत, जिन कंपनियों की आय में अस्थिरता रहती है उन्हें ऋण पूँजी निर्गमित करने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए। ऐसी स्थिति में ब्याज व मूलधन के भुगतान में कठिनाई आ सकती है जिसके परिणामस्वरूप कम्पनी का समापन भी हो सकता है अतः कहा जा सकता है कि आय कि स्थिरता एवं ऋण पूँजी के प्रयोग में धनात्मक संबंध (Positive relation) है।

2. संपत्ति ढाँचा (Assets Structure) – संपत्ति ढाँचे का अभिप्राय कुल संपत्तियों में स्थायी एवं अस्थायी संपत्तियों के अनुपात से है। जिन कंपनियों में स्थायी संपत्तियाँ अधिक होती हैं वे अधिक ऋण पूँजी प्राप्त कर सकती हैं। इसका कारण यह है कि स्थायी संपत्तियों को प्रतिभूति (Security) के रूप में रखकर ऋण आसानी से लिया जा सकता है। अतः कहा जा सकता है कि पूँजी ढाँचे के निर्माण में संपत्ति का महत्वपूर्ण स्थान है।

3. व्यवसाय का आकार (Size of Business) – जिन कंपनियों के व्यवसाय का आकार बड़ा होता है वे प्रायः अनेक वस्तुओं का उत्पादन करने वाली (Diversified) होती हैं जिसके कारण वे लाभ की स्थिति में रहती है। यही कारण है कि बड़ी कंपनियाँ अपेक्षाकृत आसान शर्तों पर दीर्घकालीन ऋण प्राप्त करने में समर्थ रहती है। इसके विपरीत, छोटे आकार वाली कंपनियों को दीर्घकालीन ऋण लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

4. ऋण भुगतान क्षमता (Debt Service Capacity) – एक कंपनी की ऋण भुगतान क्षमता जितनी अधिक होती है वह उतनी ही अधिक ऋण पूँजी का प्रयोग करने में सक्षम होती है। ऋण भुगतान क्षमता का अनुमान ब्याज व कर से पूर्व आय (Earning Before Interest and Taxes-EBIT) व ऋणों पर ब्याज के अनुपात से लगाया जाता है। अतः ऋण भुगतान क्षमता एवं पूँजी के प्रयोग में सीधा संबंध है।

MP Board Solutions

प्रश्न 32.
अति-पूँजीकरण को ठीक करने के उपाय लिखिए।
उत्तर:
अति-पूँजीकरण को ठीक करने के उपाय (Remedial Measures for Over capitalization)
जब किसी भी व्यावसायिक कंपनी में अति-पूँजीकरण की स्थिति उत्पन्न हो जाती है तो उसे ठीक करना बड़ा कठिन होता है। जिन कंपनियों का निर्माण ही प्रवर्तकों के छल-कपट पूर्ण व्यवहार से होता है, उनमें अतिपूँजीकरण की स्थिति को ठीक करना अधिक कठिन होता है। अति-पूँजीकरण की स्थिति को ठीक करने के लिए निम्न उपाय बताये जाते हैं
1. बन्धक ऋणों में कमी (Reduction in bonded debts) – अति-पूँजीकरण की समस्या का एक उपचार यह है कि पूँजी कम करने के लिए बंधक ऋणों को कम किया जाना चाहिए। ऐसा करने से ब्याज का खर्च कम हो जाता है और लाभों में वृद्धि हो जाती है।

2. ऋणपत्रों पर दिये जाने वाले ब्याज में कमी (Reduction in the Interest rate payable on debentures) – इस समस्या से ग्रसित कम्पनी की आय बढ़ाने का एक सुझाव यह भी है कि ऋणपत्रों की ब्याज दर में कमी की जानी चाहिए तथा ऊँची ब्याज दर वाले ऋणपत्रों में परिवर्तित कर देना चाहिए। यदि ऋणपत्रधारी तैयार हों तो बट्टे पर नये ऋणपत्र भी जारी किये जा सकते हैं।

3. ऊँची लाभांश दर वाले पूर्वाधिकार अंशों का विमोचन (Reduction of high dividend preference shares)….जो कम्पनियाँ अति-पूँजीकरण की समस्या से ग्रसित हैं अगर उनमें ऊँची लाभांश दर वाले संचयी पूर्वाधिकार अंश हों तो उनका विमोचन कर देना चाहिए। ऐसा करने से समता अंशधारियों को मिलने वाली आय बढ़ जायेगी और समता अंशों का वास्तविक मूल्य पुस्तकीय मूल्य के बराबर या अधिक हो जायेगा।

4. अंशों की संख्या कम करना (Reducing number of shares) अनेक बार अति-पूँजीकरण को समस्या कम्पनी के अंशों की संख्या कम करके भी ठीक की जा सकती है। इससे प्रति अंश आय बढ़ने से बाजार में मनोवैज्ञानिक आधार पर कम्पनी की साख बढ़ती है और अंशों के मूल्य में सुधार होता है तथा अति-पूँजीकरण की समस्या ठीक हो जाती है।

प्रश्न 33.
वित्तीय नियोजन के प्रकारों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
वित्तीय नियोजन विभिन्न अवधि के लिए उनकी आवश्यकता के अनुरूप तैयार किये जाते हैं। सामान्य नियोजन की भाँति वित्तीय नियोजन भी निम्न तीन प्रकार के (तीन अवधियों के लिए) होते हैं

1. अल्पकालीन वित्तीय नियोजन (Short-term financial planning) – सामान्यतया एक व्यवसाय में एक वर्ष की अवधि के लिए जो वित्तीय योजना बनाई जाती है, वह अल्पकालीन वित्तीय नियोजन कहलाती है। अल्पकालीन वित्तीय योजनाएँ, मध्यमकालीन तथा दीर्घकालीन योजनाओं के ही भाग होते हैं। अल्पकालीन वित्तीय योजना में प्रमुख रूप से कार्यशील पूँजी के प्रबंध की योजना बनाई जाती है तथा उसको विभिन्न अल्पकालीन साधनों से वित्तीय व्यवस्था करने का कार्य किया जाता है। विभिन्न प्रकार के बजट एवं प्रक्षेपित (Project) लाभ-हानि विवरण कोषों की प्राप्ति एवं उपयोग का विवरण तथा चिट्ठा बनाये जाते हैं।

2. मध्यमकालीन वित्तीय नियोजन (Medium-term financial planning) – एक व्यवसाय में वर्ष से अधिक तथा पाँच वर्ष से कम अवधि के लिए जो वित्तीय योजना बनाई जाती है, उसे मध्यमकालीन वित्तीय नियोजन कहते हैं।

मध्यमकालीन वित्तीय योजना संपत्तियों के प्रतिस्थापन, रख-रखाव, शोध एवं विकास कार्यों को चलाने, अल्पकालीन उत्पादन कार्यों की व्यवस्था करने तथा बढ़ी हुई कार्यशील पूँजी की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाई जाती है।

3. दीर्घकालीन वित्तीय नियोजन (Long-term financial planning) – एक व्यवसाय में पाँच अथवा अधिक अवधि के लिए बनाई गई वित्तीय योजना दीर्घकालीन वित्तीय योजना कहलाती है। दीर्घकालीन वित्तीय योजना विस्तृत दृष्टिकोण पर आधारित योजना होती है जिसमें संस्था के सामने आने वाली दीर्घकालीन समस्याओं के समाधान हेतु कार्य किया जाता है।

इस योजना में संस्था के दीर्घकालीन वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु पूँजी की मात्रा, पूँजी ढाँचे, स्थायी संपत्तियों के प्रतिस्थापना, विकास एवं विस्तार हेतु अतिरिक्त पूँजी प्राप्त करने आदि को शामिल किया जाता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 34.
कार्यशील पूँजी का क्या आशय है ? इसकी गणना कैसे की जाती है ? कार्यशील पूँजी की आवश्यकता को निर्धारित करने वाले पाँच महत्वपूर्ण निर्धारकों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कार्यशील पूँजी का अर्थ-जिस प्रकार वित्तीय प्रबंध में पूँजी शब्द का प्रयोग भिन्न-भिन्न लिया जाता है उसी प्रकार कार्यशील पूँजी का प्रयोग व्यावसायिक जगत में भिन्न-भिन्न तरह से करते हैं।

व्यवसाय के संचालन एवं रख-रखाव में जिस पूँजी का प्रयोग किया जाता है उसे सामान्यतः कार्यशील पूँजी कहा जाता है।
मीड,मैल्ट एवं फील्ड के अनुसार-“कार्यशील पूँजी से आशय चल-संपत्ति के योग से है।’ जे.एस.मिल के अनुसार-“चल संपत्तियों का योग ही व्यवसाय की कार्यशील पूँजी है।”

कार्यशील की गणना –

1. सकल कार्यशील पूँजी- इसका अभिप्राय सभी चालू संपत्तियों जैसे नगद, प्राप्य बिल, पूर्वदत्त व्यय स्टॉक इत्यादि में निवेश करने से है। इन चालू संपत्तियों को एक लेखांकन वर्ष के अंदर नगद में परिवर्तित किया जाता है।

2. शुद्ध कार्यशील पूँजी – इसका अभिप्राय चालू दायित्वों की तुलना में चालू परिसंपत्तियों के आधिक्य से है। चालू दायित्वों का भुगतान लेखांकन वर्ष के अंदर किया जाता है, उदाहरण के लिए, देय बिल, लेनदार इत्यादि।

कार्यशील पूंजी की आवश्यकता को निर्धारित करने वाले महत्वपूर्ण निर्धारक-किसी भी व्यवसाय के लिये मात्र स्थायी सम्पत्ति की व्यवस्था कर लेने से उसकी संचालन व्यवस्था नहीं की जा सकती है। व्यवसाय की सामान्य प्रगति के लिये समय-समय पर आवश्यक क्रय करने पड़ते हैं । इसके लिये कार्यशील पूँजी आवश्यक ही नहीं अत्यधिक महत्त्वपूर्ण होती है। सामान्यतः एक उपक्रम में कार्यशील पूँजी की आवश्यकता निम्न कार्यों के लिये होती है

  1. कच्चा माल खरीदने के लिये
  2. माल को उपयोगी बनाने के लिये
  3. कच्चे माल को निर्मित माल के रूप में परिवर्तित करने के लिये
  4. वेतन एवं मजदूरी का भुगतान करने के लिये
  5. दैनिक व्ययों को पूरा करने, ईंधन, बिजली व्ययों का भुगतान करने के लिये
  6. विक्रय एवं वितरण के व्ययों के लिये
  7. कार्यालय एवं फैक्ट्री के फुटकर व्ययों की पूर्ति के लिये
  8. अन्य आकस्मिक व्ययों जैसे-दुर्घटना, मरम्मत आदि की पूर्ति के लिये।

MP Board Class 12 Business Studies Important Questions

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण उपसर्ग

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण उपसर्ग

वे शब्दांश जो किसी शब्द में जुड़कर उसका अर्थ परिवर्तित कर देते हैं। उपसर्गों का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता; फिर भी वे अन्य शब्दों के साथ मिलकर एक विशेष अर्थ का बोध कराते हैं। उपसर्ग सदैव शब्द के पहले आता है, जैसे-‘परा’ उपसर्ग को ‘जय’ के पहले रखने से एक नया शब्द ‘पराजय’ बन जाता है। जिसका अर्थ होता है-हार।

उपसर्ग के शब्द में तीन प्रकार की स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं।

MP Board Solutions

जैसे-
1. शब्द के अर्थ में विपरीतता आ जाती है।
2. शब्द के अर्थ में नूतनता आ जाती है।
3. शब्द के अर्थ में कोई नया परिवर्तन नहीं होता।
उत्तर-
हिन्दी भाषा में उपसर्ग तीन भाषाओं के हैं
(a) संस्कृत उपसर्ग
(b) हिन्दी उपसर्ग
(c) उर्दू उपसर्ग।

(a) संस्कृत उपसर्ग
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण उपसर्ग img-1
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण उपसर्ग img-2
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण उपसर्ग img-3
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण उपसर्ग img-4

उपसर्ग के समान प्रयुक्त होने वाले कुछ अन्य शब्द
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण उपसर्ग img-5
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण उपसर्ग img-6

MP Board Solutions

(b) हिन्दी उपसर्ग
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण उपसर्ग img-7

(c) उर्दू उपसर्ग
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण उपसर्ग img-8
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण उपसर्ग img-9

MP Board Class 12th Hindi Solutions

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें

वैद्युत चुम्बकीय तरंगें NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न: 1.
चित्र 8.1 में एक संधारित्र दर्शाया गया है जो 12 सेमी त्रिज्या की दो वृत्ताकार प्लेटों को 5.0 सेमी की दूरी पर रखकर बनाया गया है। संधारित्र को एक बाह्य स्त्रोत (जो चित्र में नहीं दर्शाया गया है) द्वारा आवेशित किया जा रहा है। आवेशकारी धारा नियत है और इसका मान 0.15 ऐम्पियर है।
(a) धारिता एवं प्लेटों के बीच विभवान्तर परिवर्तन की दर का परिकलन कीजिए।
(b) प्लेटों के बीच विस्थापन धारा ज्ञात कीजिए।
(c) क्या किरचॉफ का प्रथम नियम संधारित्र की प्रत्येक प्लेट पर लागू होता है? स्पष्ट कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 1
हल :
दिया है : प्लेट की त्रिज्या r = 0.12 मीटर, बीच की दूरी d = 0.05 मीटर
आवेशन धारा i= 0.15 ऐम्पियर
(a) संधारित्र की धारिता \(C=\frac{\varepsilon_{0} A}{d}\)
[∵ A =πr2 = 3.14 × (0.12)2]
\(=\frac{8.854 \times 10^{-12} \times 3.14 \times(0.12)^{2}}{0.05}\)
= 8.01 × 10-12F= 8.01 pF.
किसी क्षण संधारित्र पर आवेश q= CV ⇒ V=\(\frac { q }{ C }\)
∴\(\frac{d V}{d t}=\frac{1}{C} \frac{d q}{d t}=\frac{1}{C} i\)    ( ∵ \(\frac{d q}{d t}=i\) )
∴ विभवान्तर परिवर्तन की दर \(\frac{d V}{d t}=\frac{0.15}{8.01 \times 10^{-12}}\)
= 1.87 × 1010 वोल्ट सेकण्ड-1.

(b). प्लेटों पर विस्थापन धारा \(i_{D}=\varepsilon_{0} \frac{d \phi_{E}}{d t}\)
जहाँ कै ΦE प्लेटों के बीच स्थित किसी बन्द लूप से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स है।
∵ प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र \(E=\frac{q}{\varepsilon_{0} A}\)
∴ यदि लूप का क्षेत्रफल A है तो
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 2
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 10

(c) हाँ, किरचॉफ का प्रथम नियम संधारित्र की प्रत्येक प्लेट पर भी लागू होता है क्योंकि
प्लेट तक आने वाली चालन धारा = प्लेट से आगे जाने वाली विस्थापन धारा

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र (चित्र 8.2), R = 6.0 सेमी त्रिज्या की दो वृत्ताकार प्लेटों से बना है और इसकी धारिता C = 100 pF है। संधारित्र को 230 वोल्ट, 300 रेडियन सेकण्ड-1 की (कोणीय) आवृत्ति के किसी स्त्रोत से जोड़ा गया है।
(a) चालन धारा का r.m.s. मान क्या है?
(b) क्या चालन धारा विस्थापन धारा के बराबर है?
(c) प्लेटों के बीच, अक्ष से 3.0 सेमी की दूरी पर स्थित बिन्दु पर B का आयाम ज्ञात कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 3
हल :
दिया है : Vrms = 230 वोल्ट, ω = 300 रेडियन सेकण्ड-1, C = 100 × 10-12F. ..
त्रिज्या R = 0.06 मीटर
(a) चालनं धारा का rms मान \(i_{r m s}=\frac{V_{r m s}}{1 / \omega C}=V_{r m s} \omega C\)
= 230 × 300 × 100 × 10-12
= 6.9 × 10-6 ऐम्पियर
= 6.9 माइक्रोऐम्पियर।
(b) हाँ, संधारित्र के लिए सदैव ही चालन धारा विस्थापन धारा के बराबर होती है, भले ही धारा दिष्ट हो अथवा प्रत्यावर्ती।
(c) प्लेटों के बीच r= 0.03 मीटर त्रिज्या के बन्द लूप पर विचार कीजिए जिसका तल प्लेटों के तल के समान्तर है। इस लूप के प्रत्येक बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र B का परिमाण समान तथा दिशा स्पर्शरेखीय होगी जबकि वैद्युत क्षेत्र E लूप के तल के प्रत्येक बिन्दु पर समान तथा इसकी दिशा लूप के तल के लम्बवत् होगी।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 4
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 5

प्रश्न 3.
10-10 मीटर तरंगदैर्घ्य की x-किरणों, 6800 A तरंगदैर्घ्य के प्रकाश तथा 500 मीटर की रेडियो तरंगों के लिए किस भौतिक राशि का मान समान है?
हल :
उक्त तीनों प्रकार की तरंगों की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्तियाँ भिन्न-भिन्न हैं परन्तु ये सभी वैद्युतचुम्बकीय तरंगें हैं, अत: इन सबकी निर्वात में चाल (c = 3 x 108 मीटर सेकण्ड-1) समान है। .

प्रश्न 4.
एक समतल वैद्युतचुम्बकीय तरंग निर्वात में Z-अक्ष के अनुदिश चल रही है। इसके वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्रों के सदिश की दिशा के बारे में आप क्या कहेंगे? यदि तरंग की आवृत्ति 30 मेगाहर्ट्स हो तो उसकी तरंगदैर्घ्य कितनी होगी?
हल :
वैद्यत तथा चुम्बकीय क्षेत्रों के सदिशों की दिशाएँ तरंग संचरण की दिशा (Z-अक्ष) के लम्बवत् अर्थात् :समतल के समान्तर होंगी तथा परस्पर भी लम्बवत् होंगी। ::
∵ आवृत्ति υ = 30 × 106 हर्ट्स
तथा चाल c = 3 × 108 मीटर सेकण्ड-1
∴ तरंगदैर्घ्य \(\lambda=\frac{c}{v}=\frac{3 \times 10^{8}}{30 \times 10^{6}}\) = 10 मीटर।

प्रश्न 5.
एक रेडियो 7.5 मेगाहर्ट्स से 12 मेगाहर्ट्स बैण्ड के किसी स्टेशन से समस्वरित हो सकता है। संगत तरंदैर्घ्य बैण्ड क्या होगा?
हल :
दिया है, आवृत्ति बैण्ड υ1 = 7.5 × 106 हर्ट्स से υ2 = 12 × 106 हर्ट्स ।
चाल c = 3 × 108 मीटर सेकण्ड-1
∴ \(\lambda_{1}=\frac{c}{v_{1}}=\frac{3 \times 10^{8}}{7.5 \times 10^{6}}\) = 40 मीटर
तथा \(\lambda_{2}=\frac{c}{v_{2}}=\frac{3 \times 10^{8}}{12 \times 10^{6}}\) = 25 मीटर
∴ संगत तरंगदैर्घ्य बैण्ड 25 मीटर – 40 मीटर होगा।

प्रश्न 6.
एक आवेशित कण अपनी माध्य साम्यावस्था के दोनों ओर 109 हर्ट्स आवृत्ति से दोलन करता है। दोलक द्वारा जनित वैद्युतचुम्बकीय तरंगों की आवृत्ति कितनी है?
हल :
हम जानते हैं कि त्वरित अथवा कम्पित आवेशित कण कम्पित वैद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। यह वैद्युत क्षेत्र, कम्पित चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। ये दोनों क्षेत्र मिलकर वैद्युतचुम्बकीय तरंग उत्पन्न करते हैं; जिसकी आवृत्ति, कम्पित कण के दोलनों की आवृत्ति के बराबर होती है। ..
∴ तरंगों की आवृत्ति υ = 109 हौ।

प्रश्न 7.
निर्वात में एक आवर्त वैद्युतचुम्बकीय तरंग के चुम्बकीय क्षेत्र वाले भाग का आयाम B0 = 510 नैनो टेस्ला है। तरंग के वैद्युत क्षेत्र वाले भाग का आयाम क्या है?
हल :
निर्वात में, B0 = 510 नैनोटेस्ला ।
= 510 × 10-9 टेस्ला
यदि निर्वात में वैद्युत क्षेत्र वाले भाग का आयाम = Eo
तब \(c=\frac{E_{0}}{B_{0}}\) ⇒ Eo = cBo
Eo = 3 × 108 × 510 × 10-9
= 153 वोल्ट मीटर-1

MP Board Solutions

प्रश्न 8.
कल्पना कीजिए कि एक वैद्युतचुम्बकीय तरंग के वैद्युत क्षेत्र का आयाम E0 = 120 न्यूटन/कूलॉम है तथा इसकी आवृत्ति υ = 50.0 मेगाहर्ट्स है। (a) Bo , ω , k तथा λ ज्ञात कीजिए, (b) E तथा B के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। .
हल :
दिया है : E0 = 120 न्यूटन कूलॉम-1,
υ = 50.0 × 106 हर्ट्स .
तरंग वेग c= 3 × 108 मीटर सेकण्ड-1
(a) सूत्र \(c=\frac{E_{0}}{B_{0}}\) से,
\(B_{0}=\frac{E_{0}}{c}=\frac{120}{3 \times 10^{8}}\) = 4.0 × 10-7 टेस्ला
= 400 नैनोटेस्ला ।
ω = 2 πυ = 2 × 3.14 × 50 × 106
= 3.14 × 108 रेडियन सेकण्ड-1
Eok= Bo ω से,
\(k=\frac{B_{0} \omega}{E_{0}}=\frac{400 \times 10^{-9} \times 3.14 \times 10^{8}}{120}\)
= 1.05 रेडियन मीटर-1
\(\lambda=\frac{c}{v}=\frac{3 \times 10^{8}}{50 \times 10^{6}}\)= 6 मीटर।

(b) माना तरंग X-अक्ष की दिशा में गतिशील है, तब वैद्युत क्षेत्र तथा चुम्बकीय क्षेत्र क्रमश: Y. तथा Z-अक्ष की दिशाओं में माने जा सकते हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 6

प्रश्न 9.
वैद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम के विभिन्न भागों की पारिभाषिकी पाठ्यपुस्तक में दी गई है। सूत्र E = hυ (विकिरण के एक क्वांटम की ऊर्जा के लिए : फोटॉन) का उपयोग कीजिए तथा em (वैद्युतचुम्बकीय) वर्णक्रम (वैद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम) के विभिन्न भागों के लिए इलेक्ट्रॉन वोल्ट (ev) के मात्रक में फोटॉन की ऊर्जा निकालिए। फोटॉन ऊर्जा के जो विभिन्न परिमाण आप पाते हैं वे वैद्युतचुम्बकीय विकिरण के स्रोतों से किस प्रकार सम्बन्धित हैं?
हल :
सूत्र E = hυ जूल = \(\frac{h c}{\lambda}\) जूल = \(\frac{h c}{e \lambda} \mathrm{e} \mathrm{V}\)
∵ h = 6.62 × 10-34 जूल सेकण्ड-1, c= 3 × 108 मीटर सेकण्ड-1
e = 1.6 × 10-19C
∴ \(E=\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^{8}}{1.6 \times 10^{-19} \times \lambda}=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{\lambda}\) इलेक्ट्रॉन वोल्ट (ev)

(1) γ-किरणें-इन किरणों का माध्य तरंगदैर्घ्य 10-12 मीटर है। अत:
\(E_{1}=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{10^{-12}}=1.24 \times 10^{6} \mathrm{eV}\)
≈ 106 इलेक्ट्रॉन वोल्ट।
अत: γ -किरणों की माध्य ऊर्जा 106 इलेक्ट्रॉन वोल्ट होती है।

(2) x-किरणें-इनकी माध्य तरंगदैर्घ्य 10-9 मीटर है।
∴ \(E=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{10^{-9}} \approx 10^{3} \text { setagity alteel }\)
≈ 10 इलेक्ट्रॉन वोल्ट।
इनकी माध्य ऊर्जा 103 इलेक्ट्रॉन वोल्ट होती है।

(3) पराबैंगनी विकिरण–इनकी माध्य तरंगदैर्घ्य 10-8 मीटर होती है।
∴ \(E=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{10^{-8}}=1.24 \times 10^{2} \mathrm{eV}\)
≈102 इलेक्ट्रॉन वोल्ट।

(4) दृश्य-प्रकाश–इनकी माध्य तरंगदैर्ध्य 10-6 मीटर होती है।
∴ \(E=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{10^{-6}}\)
= 1.24 इलेक्ट्रॉन वोल्ट।

(5) सूक्ष्म तरंगें-इनकी माध्य तरंगदैर्ध्य 10-2 मीटर है जिसके लिए .
\(E=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{10^{-2}}\)
= 1.24 × 10-4 इलेक्ट्रॉन वोल्ट।

(6) रेडियो तरंगें—इनकी माध्य तरंगदैर्घ्य 103 मीटर है। .
∴ \(E=\frac{12.41 \times 10^{-7}}{10^{3}}\)
= 1.24 × 10-9 इलेक्ट्रॉन वोल्ट।

उक्त ऊर्जा परिणामों से स्पष्ट होता है कि γ-किरणें नाभिक के संक्रमण से निकलती हैं, X-किरणें पराबैंगनी विकिरण तथा दृश्य प्रकाश परमाणुओं के संक्रमण के कारण उत्सर्जित होते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 10.
एक समतल em (वैद्युतचुम्बकीय) तरंग में वैद्युत क्षेत्र, 2.0 × 1010 हर्ट्स आवृत्ति तथा 48 वोल्ट मीटर-1 आयाम से ज्या वक्रीय रूप से दोलन करता है।
(a) तरंग की तरंगदैर्घ्य कितनी है?
(b) दोलनशील चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम क्या है?
(c) यह दर्शाइए कि \(\overrightarrow{\mathbf{E}}\) क्षेत्र का औसत ऊर्जा घनत्व, \(\overrightarrow{\mathbf{B}}\) क्षेत्र के औसत ऊर्जा घनत्व के बराबर है। [c= 3 × 108 मीटर सेकण्ड-1]
हल :
दिया है : E0 = 48 वोल्ट मीटर-1, वैद्युत क्षेत्र की आवृत्ति = 2.0 × 1010 हर्ट्स
(a) ∵ तरंग की आवृत्ति υ = वैद्युत क्षेत्र की आवृत्ति = 2 × 1010 हर्ट्स
∴ तरंग की तरंगदैर्घ्य \(\lambda=\frac{c}{v}=\frac{3 \times 10^{8}}{2 \times 10^{10}}\)
= 1.5 × 10-2 मीटर।

(b) \(c=\frac{E_{0}}{B_{0}}\) से, चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम \(B_{0}=\frac{E_{0}}{c}=\frac{48}{3 \times 10^{8}}\)
= 1.6 × 10-7 टेस्ला ।

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 7

प्रश्न 11.
कल्पना कीजिए कि निर्वात में एक वैद्युतचुम्बकीय तरंग का वैद्युत क्षेत्र E = {(3.1 न्यूटन/कूलॉम) cos [(1.8 रेडियन मीटर-1) y+ (5.4 × 106 रेडियन सेकण्ड-1)t}}\(\hat{\mathbf{i}}\)
(a) तरंग संचरण की दिशा क्या है?
(b) तरंगदैर्घ्य λ कितनी है?
(c) आवृत्ति υ कितनी है?
(d) तरंग के चुम्बकीय क्षेत्र सदिश का आयाम कितना है?
(e) तरंग के चुम्बकीय क्षेत्र के लिए व्यंजक लिखिए। .
हल’:
दिया है, E = {(3.1) cos [1.8y+ 5.4 × 106 t]}\(\hat{\hat{\mathbf{\imath}}}\).
जहाँ E न्यूटन/कूलॉम में, दूरी मीटर में तथा समय सेकण्ड में है।
इसकी तुलना E = Eo cos (ky + ωt) \(\hat{\hat{\mathbf{\imath}}}\) से करने पर,
k = 1.8 रेडियन मीटर-1, ω = 5.4 × 106 रेडियन सेकण्ड-1
E0 = 3.1 न्यूटन कूलॉम-1
(a) पद ky में गुणांक y से स्पष्ट है कि यह तरंग ऋणात्मक Y-अक्ष के अनुदिश गतिशील है।
(b)
∵ \(k=\frac{2 \pi}{\lambda} \)
∴ \(\lambda=\frac{2 \pi}{k}\)
या  तरगदध्य तरंगदैर्घ्य \lambda=\frac{2 \times 3.14}{1.8}= 3.48 मीटर ≈ 3.5 मीटर।
= 1.8

(c) ω = 2 πυ से, \(\nu=\frac{\omega}{2 \pi}\)
∴ आवृत्ति \(v=\frac{5.4 \times 10^{6}}{2 \times 3.14}\)
= 8.6 × 105 हर्ट्स
= 0.86 मेगाहर्ट्स।

(d) ∵ E0 = 3.1 न्यूटन कूलॉम-1, c = 3 × 108 मीटर सेकण्ड-1
∴ \(c=\frac{E_{0}}{B_{0}}\) से, चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम \(B_{0}=\frac{E_{0}}{c}=\frac{3.1}{3 \times 10^{8}}\)
= 10 × 10-8 टेस्ला
= 10 नैनोटेस्ला।

(e) ∵ तरंग ऋणात्मक Y-अक्ष की दिशा में गतिशील है तथा वैद्युत क्षेत्र के कम्पन X-अक्ष की दिशा में हैं, अत: चुम्बकीय क्षेत्र के कम्पन Z-अक्ष की दिशा में होंगे। ∴ चुम्बकीय क्षेत्र के लिए व्यंजक ।
B= Bo cos (ky + ωt) \(\hat{\mathbf{k}}\)
= 10 नैनोटेस्ला cos (1. 8 रेडियन मीटर-1 y+ 5.4 x 106 रेडियन सेकण्ड-1t) \(\hat{\mathbf{k}}\)

प्रश्न 12.
100 वाट वैद्युत बल्ब की शक्ति का लगभग 5% दृश्य विकिरण में बदल जाता है।
(a) बल्ब से 1 मीटर की दूरी पर
(b) 10 मीटर की दूरी पर दृश्य विकिरण की औसत तीव्रता कितनी है?
यह मानिए कि विकिरण समदैशिकतः उत्सर्जित होता है और परावर्तन की उपेक्षा कीजिए।
हल:
दृश्य विकिरण में उत्सर्जित शक्ति = \(\frac{5}{100} \times 100\) = 5 वाट
(a)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 8
\(=\frac{5}{4 \times 3.14 \times 1}\) = 0.4 वाट मीटर2

(b) r = 10 मीटर की दूरी पर औसत शक्ति = \(\frac{5}{4 \times 3.14 \times(10)^{2}}\)
= 0.004 वाट मीटर2

प्रश्न 13.
em वर्णक्रम (वैद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम) के विभिन्न भागों के लिए लाक्षणिक ताप परिसरों को ज्ञात करने के लिए λm T= 0.29 सेमी K सूत्र का उपयोग कीजिए। जो संख्याएँ आपको मिलती हैं, वे क्या बतलाती हैं?
हल :
λmT = 0.29 सेमी K सूत्र से स्पष्ट है कि 22 को सेमी में प्रयोग किया गया है,
अतः λm = λm ×10-8Å
∴ λmT = 0.29 सेमी K
⇒ λm x 10-8 × T = 0.29
\(T=\frac{29 \times 10^{6}}{\lambda_{m}(\hat{A})} K\)
(a) λm = 10-12 मीटर = 10-2Å के लिए, (-किरणे)
T = 2.9 × 109 K.
(b) λm = 10-10 मीटर = 1Å के लिए, (x-किरणे)
T = 2.9 × 107 K.
(c) λm = 10-6 मीटर = 104Å के लिए, (दृश्य प्रकाश)
T = 29 × 102 = 2900 K.
(d) λm = 1 मीटर = 1010 Å के लिए,
T = 2.9 × 10-3 K आदि।
उक्त परिणाम स्पेक्ट्रम के विभिन्न तरंगदैर्घ्य परास प्राप्त करने हेतु आवश्यक परम ताप प्रदर्शित करते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 14.
वैद्युतचुम्बकीय विकिरण से सम्बन्धित नीचे कुछ प्रसिद्ध अंक, भौतिकी में किसी अन्य प्रसंग में वैद्युतचुम्बकीय दिए गए हैं। स्पेक्ट्रम के उस भाग का उल्लेख कीजिए जिससे इनमें से प्रत्येक सम्बन्धित है।
(a) 21 सेमी (अन्तरातारकीय आकाश में परमाण्वीय हाइड्रोजन द्वारा उत्सर्जित तरंगदैर्ध्य)
(b) 1057 मेगाहर्ट्स (लैंब-विचलन नाम से प्रसिद्ध, हाइड्रोजन में, पास जाने वाले दो समीपस्थ ऊर्जा स्तरों से उत्पन्न विकिरण की आवृत्ति)
(c) 2.7 K (सम्पूर्ण अन्तरिक्ष को भरने वाले समदैशिक विकिरण से सम्बन्धित ताप-ऐसा विचार जो विश्व में बड़े धमाके ‘बिग बैंग’ के उद्भव का अवशेष माना जाता है।)
(d) 5890 Å – 5896 Å (सोडियम की द्विक रेखाएँ) ।
(e) 14.4 keV [57 Fe नाभिक के एक विशिष्ट संक्रमण की ऊर्जा जो प्रसिद्ध उच्च विभेदन की स्पेक्ट्रमी विधि से सम्बन्धित है (मॉसबौर स्पेक्ट्रोस्कॉपी)।
हल :
(a) दी गई तरंगदैर्घ्य 10-2 मीटर क्रम की है, जो लघु रेडियो तरंग क्षेत्र में पड़ती है।
(b) यह आवृत्ति 109 हर्ट्स की कोटि की है, जो लघु रेडियो तरंग क्षेत्र में पड़ती है।
(c) λm T = 0.29 सेमी K से, T= 2.7 कूलॉम के लिए,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 8 वैद्युत चुम्बकीय तरंगें img 9
यह तरंगदैर्घ्य माइक्रो तरंगों के क्षेत्र में पड़ती है।
(d) दी गई तरंगदैर्ध्य 10-6 मीटर की कोटि की हैं जो दृश्य विकिरण क्षेत्र में पड़ती हैं।
(e) E = 14.4 kev = 14.4 × 103 eV
परन्तु \(E=\frac{h c}{\lambda e} \mathrm{eV}\)
∴ संगत तरंगदैर्घ्य \(\lambda=\frac{h c}{e E}=\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^{8}}{1.6 \times 10^{-19} \times 14.4 \times 10^{3}}\)
= 8.6 × 10-11 मीटर
⇒ λ≈ 10-10 मीटर = 1 Å
यह तरंगदैर्घ्य x-किरण क्षेत्र में पड़ती है।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दीजिए
(a) लम्बी दूरी के रेडियो प्रेषित्र लघु-तरंग बैण्ड का उपयोग करते हैं। क्यों?
(b) लम्बी दूरी के TV प्रेषण के लिए उपग्रहों का उपयोग आवश्यक है। क्यों?
(c) प्रकाशीय तथा रेडियो दूरदर्शी पृथ्वी पर निर्मित किए जाते हैं किन्तु x-किरण खगोल विज्ञान का अध्ययन पृथ्वी का परिभ्रमण कर रहे उपग्रहों द्वारा ही सम्भव है। क्यों?
(d) समतापमण्डल के ऊपरी छोर पर छोटी-सी ओजोन की परत मानव जीवन के लिए निर्णायक है। क्यों?
(e) यदि पृथ्वी पर वायुमण्डल नहीं होता तो उसके धरातल का औसत ताप वर्तमान ताप से अधिक होता है या
कम?
(f) कुछ वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि पृथ्वी पर नाभिकीय विश्व युद्ध के बाद ‘प्रचण्ड नाभिकीय शीतकाल’ होगा जिसका पृथ्वी के जीवों पर विध्वंसकारी प्रभाव पड़ेगा। इस भविष्यवाणी का क्या आधार है?
उत्तर :
(a) ये तरंगें पृथ्वी के आयनमण्डल से परावर्तित होकर वापस पृथ्वी तल की ओर लौट आती हैं और इसी कारण बिना ऊर्जा खोए पृथ्वी पर लम्बी दूरियाँ तय कर पाती हैं।
(b) बहुत लम्बी दूरी के सम्प्रेषण के लिए अति उच्च आवृत्ति की तरंगों की आवश्यकता होती है। आयनमण्डल इन तरंगों को पृथ्वी की ओर परावर्तित नहीं कर पाता। अतः ये तरंगें आयनमण्डल से पार निकल जाती हैं। इन्हें वापस पृथ्वी पर भेजने के लिए उपग्रह की आवश्यकता होती है।
(c) चूँकि पृथ्वी का वायुमण्डल x-किरणों को अवशोषित कर लेता है। अत: x-किरण खगोलविज्ञान का अध्ययन वायुमण्डल से ऊपर उपग्रहों द्वारा ही सम्भव है।
(d) यह ओजोन परत सूर्य से पृथ्वी पर आने वाली मानव जीवन के लिए हानिकारक पराबैंगनी तरंगों को अवशोषित कर लेती है। अतः ओजोन परत, पृथ्वी पर मानव जीवन की सुरक्षा के लिए अति महत्त्वपूर्ण है।
(e) यदि पृथ्वी पर वायुमण्डल नहीं होता तो हरित गृह प्रभाव नहीं होता। इससे पृथ्वी का ताप वर्तमान ताप की तुलना में कम होता।
(f) प्रचण्ड नाभिकीय युद्ध के बाद पृथ्वी धूल तथा गैसों के विशाल बादल से घिर जाएगी जिसके कारण सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाएगी ओर पृथ्वी बहुत अधिक ठण्डी हो जाएगी।

वैद्युत चुम्बकीय तरंगें NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

वैद्युत चुम्बकीय तरंगें बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कार्बन मोनोक्साइड के एक अणु को कार्बन एवं ऑक्सीजन परमाणुओं में विघटित करने के लिए 11 eV ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस विघटन के लिए उपयुक्त वैद्युतचुम्बकीय विकिरण की न्यूनतम आवृत्ति होती है –
(a) दृश्य क्षेत्र में
(b) अवरक्त क्षेत्र में
(c) पराबैंगनी क्षेत्र में
(d) माइक्रोतरंग क्षेत्र में।
उत्तर :
(c) पराबैंगनी क्षेत्र में

प्रश्न 2.
ऊर्जा फ्लक्स 20 W/सेमी2 का प्रकाश एक अपरावर्ती पृष्ठ पर अभिलम्बवत् आपतित होता है। यदि पृष्ठ का क्षेत्रफल 30 सेमी2 हो तो 30 मिनट में (पूर्ण अवशोषण के लिए) प्रदत्त कुल संवेग होगा –
(a) 36 × 10-5 किग्रा मीटर/सेकण्ड
(b) 36 × 10-4 किग्रा मीटर/सेकण्ड
(c) 108 × 104 किग्रा मीटर/सेकण्ड
(d) 1.08 × 107 किग्रा मीटर/सेकण्ड।
उत्तर :
(b) 36 × 10-4 किग्रा मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 3.
100 W के बल्ब से 3 मीटर की दूरी पर पहुँचने वाले विकिरणों से उत्पन्न वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता E है। उतनी ही दूरी पर 50 W के बल्ब से आने वाले प्रकार के विकिरणों के कारण उत्पन्न वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता होगी
(a) \(\frac{E}{2}\)
(b) 2E
(c) \(\frac{E}{\sqrt{2}}\)
(d) √2E
उत्तर :
(d) √2E.

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
यदि E एवं B क्रमशः वैद्युतचुम्बकीय तरंगों के वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र (सदिश) हों तो . वैद्युतचुम्बकीय तरंगों की संचरण दिशा है –
(a) E के अनुदिश
(b) B के अनुदिश
(c) B × E के अनुदिश
(d) E × B के अनुदिश ।
उत्तर :
(d) E × B के अनुदिश ।

प्रश्न 5.
वैद्युतचुम्बकीय तरंग की तीव्रता में वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र घटकों के योगदानों का अनुपात होता है
(a) c : 1
(b) c2 : 1
(c) 1  :1
(d) √c : 1.
उत्तर :
(c) 1 : 1

प्रश्न 6.
एक द्विध्रुव ऐन्टिना से वैद्युत चुम्बकीय तरंगें बाहर की ओर विकिरित होती हैं जिनके वैद्युत क्षेत्र सदिश का आयाम E0 है। वैद्युत क्षेत्र Eo, जो ऊर्जा संचार का प्रमुख वाहक है, स्रोत से दूरी के साथ इसका परिमाण –
(a) \(\frac{1}{r^{3}}\) के अनुसार घटता है …
(b) \(\frac{1}{r^{2}}\) के अनुसार घटता है ..
(c) \(\frac{1}{r}\) के अनुसार घटता है
(d) अचर बना रहता है। [
उत्तर :
(c) \(\frac{1}{r}\) के अनुसार घटता है

वैद्युत चुम्बकीय तरंगें अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसी सुवाह्य रेडियो का प्रसारक स्टेशन के सापेक्ष अभिविन्यास महत्त्वपूर्ण क्यों होता है?
उत्तर :
वैद्युतचुम्बकीय तरंगें समतल ध्रुवित होती हैं, अत: अभिग्राही ऐन्टिना इन तरंगों के वैद्युतचुम्बकीय भाग के समान्तर होना चाहिए।

प्रश्न 2.
माइक्रोवेव ओवन जल अणु युक्त खाद्य पदार्थ का ऊष्मन सर्वाधिक प्रभावी ढंग से क्यों करता है?
उत्तर :
माइक्रोवेव ओवन जल अणुयुक्त खाद्य पदार्थ का ऊष्मन सर्वाधिक प्रभावी ढंग से करता है क्योंकि माइक्रोवेव की आवृत्ति, जल के अणुओं की अनुनाद आवृत्ति के बराबर होती है।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
किसी समान्तर प्लेट संधारित्र पर आवेश q= qo cos 2πυt के अनुसार परिवर्तित होता है। इसकी प्लेटें बहुत विशाल (क्षेत्रफल = A) हैं और एक-दूसरे के बहुत पास-पास रखी हैं (पृथकन = d)। कोर प्रभावों को नगण्य मानते हुए संधारित्र में विस्थापन धारा की गणना कीजिए।
उत्तर :
संधारित्र में विस्थापन धारा ID = IC = \(\frac{d}{d t}\left(q_{0} \cos 2 \pi v t\right)\)
= qo (- sin 2πυ t) × 2πυ
= -qo 2 πυ.sin 2 πυ t

प्रश्न 4.
परिवर्तनीय आवृत्ति का एक ac स्रोत एक संधारित्र से जुड़ा है। आवृत्ति में कमी करने पर विस्थापन धारा किस प्रकार प्रभावित होगी?
उत्तर :
संधारित्र का धारितीय प्रतिघात \(\left(X_{C}\right)=\frac{1}{\omega C}=\frac{1}{2 \pi f C}\)
आवृत्ति f कम करने पर, धारितीय प्रतिघात XC बढ़ेगा जिसके परिणामस्वरूप चालन धारा (IC) घटेगी। परन्तु IC = ID, अत: विस्थापन धारा कम हो जाएगी।

वैद्युत चुम्बकीय तरंगें लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वैद्युतचुम्बकीय तरंगें जिनकी तरंगदैर्ध्य –
(i) λ1 है, उपग्रह संचार में प्रयुक्त होती हैं। .
(ii) λ2 है, जलशोधित्रों में जीवाणुनाश के लिए प्रयुक्त होती हैं।
(iii) λ3 है, भूमिगत पाइप लाइनों में तेल के रिसाव के संसूचन के लिए उपयोग में लायी जाती हैं।
(iv) λ4 है, धुंध और कोहरे की स्थिति में वायुयान उड़ान पथ पर दृश्यता में सुधार लाने के लिए उपयोग में लायी जाती हैं।
(a) इन वैद्युतचुम्बकीय विकिरणों को पहचानिए और बताइए कि ये वैद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम के किस भाग से सम्बन्धित हैं।
(b) इन तरंगदैर्यों को परिमाण के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(c) प्रत्येक की एक अन्य उपयोगिता लिखिए।
उत्तर :
(a) λ1 → सूक्ष्म तरंगें या माइक्रोवेव
λ2 → पराबैंगनी तरंगें
λ3 → x-किरणें
λ4 → अवरक्त किरणें
(b) λ3 < λ2 < λ4 < λ1
(c) सूक्ष्म तरंगें → रेडार
पराबैंगनी तरंगें → नेत्र शल्यता
x-किरणें → अस्थिभंग क्रमवीक्ष्ण
अवरक्त किरणें → प्रकाशीय संचार

MP Board Solutions

वैद्युत चुम्बकीय तरंगें आंकिक प्रस्नोत्तर

प्रश्न 1.
आपको एक 2 μF का समान्तर प्लेट संधारित्र दिया गया है। आप इसकी प्लेटों के बीच के अन्तराल में 1 मिलीऐम्पियर की तात्क्षणिक विस्थापन धारा कैसे स्थापित करेंगे?
हल :
दिया हैं, C = 2 μF = 2 × 10-6F, ID = 10-3 मिलीऐम्पियर
विस्थापन धारा (ID) = C \(\frac{d V}{d t}\) × 1 × 10-3 = 2 × 10-6 \(\frac{d V}{d t}\)
∴ \(\frac{d V}{d t}\) = \(\frac{1}{2}\) × 103 = 500 वोल्ट/सेकण्ड
अत: 500 वोल्ट/सेकण्ड की दर से परिवर्तित विभवान्तर लगाकर लक्षित विस्थापन धारा उत्पन्न सकेगी।

MP Board Class 12th Physics Solutions

MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 विपणन (वित्तीय) बाजार

MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 विपणन (वित्तीय) बाजार

विपणन (वित्तीय) बाजार Important Questions

विपणन (वित्तीय) बाजार वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
प्राथमिक एवं द्वितीयक बाजार –
(a) एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं
(b)एक दूसरे को सहयोग देते (संपूरक) हैं
(c) स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं
(d) एक दूसरे को नियंत्रित करते हैं।
उत्तर:
(b)एक दूसरे को सहयोग देते (संपूरक) हैं

प्रश्न 2.
भारत में कुल स्टॉक एक्सचेंज (शेयर बाजारों) की संख्या है –
(a) 20
(b) 21
(c) 24
(d) 23
उत्तर:
(d) 23

प्रश्न 3.
रेपो (Repo) है –
(a) पुनर्खरीद समझौता (विलेख)
(b) रिलायंस पेट्रोलियम
(c) रीड एंड प्रोसेस (पढ़ो और प्रक्रम करो)
(d) उपर्युक्त कुछ भी नहीं।
उत्तर:
(a) पुनर्खरीद समझौता (विलेख)

प्रश्न 4.
एन.एस.ई. (NSE) के भावी व्यापार की शुरुआत किस वर्ष में हुई –
(a) 1999
(b)2000
(c) 2001
(d) 2002
उत्तर:
(b)2000

प्रश्न 5.
राष्ट्रीय शेयर बाजार (NSE) का निपटान (उधार चुकता) चक्र है –
(a) टी+5
(b) टी+3
(c) टी+2
(d) टी+11
उत्तर:
(c) टी+2

प्रश्न 6.
तरलता का निर्माण करता है –
(a) संगठित बाजार
(b) असंगठित बाजार
(c) प्राथमिक बाजार
(d) गौण बाजारे।
उत्तर:
(d) गौण बाजारे।

प्रश्न 7.
सेबी का मुख्य कार्यालय है –
(a) दिल्ली
(b) मुंबई
(c) कोलकाता
(d) चेन्नई।
उत्तर:
(b) मुंबई

प्रश्न 8.
विश्व में सबसे पहले स्कन्ध विपणि की स्थापना हुई थी –
(a) दिल्ली
(b) लंदन
(c) अमेरिका
(d) जापान।
उत्तर:
(b) लंदन

प्रश्न 9.
भारत में असंगठित मुद्रा बाजार का अंग है –
(a) देशी बैंकर
(b) महाजन व साहूकार
(c) दोनों (a) और (b)
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) दोनों (a) और (b)

प्रश्न 10.
मुद्रा बाजार की मुख्य धुरी होती है –
(a) केन्द्रीय बैंक
(b) व्यापारिक बैंक
(c) सहकारी बैंक
(d) देशी बैंक।
उत्तर:
(a) केन्द्रीय बैंक

प्रश्न 11.
NSEI की स्थापना कब हुई –
(a) सन् 1990
(b) सन् 1991
(c) सन् 1992
(d) सन् 1994
उत्तर:
(c) सन् 1992

प्रश्न 12.
पूँजी बाजार की प्रतिभूति नहीं है –
(a) समता अंश
(b) पूर्वाधिकार अंश
(c) ऋणपत्र
(d) वाणिज्यिक बिल।
उत्तर:
(d) वाणिज्यिक बिल।

प्रश्न 13.
भारत में पहली स्कंध विपणि स्थापित हुई –
(a) 1857 में
(b) 1877 में
(c) 1887 में
(d) 1987 में।
उत्तर:
(c) 1887 में

प्रश्न 14.
राजकोष बिल मूलतः होते हैं –
(a) अल्पकालीन फंड उधार के प्रपत्र
(b) दीर्घकालीन फंड उधार के प्रपत्र
(c) पूँजी बाजार के एक प्रपत्र
(d) उपर्युक्त कुछ भी नहीं।
उत्तर:
(a) अल्पकालीन फंड उधार के प्रपत्र

प्रश्न 15.
स्कन्ध विपणियों के लिए सेबी की सेवाएँ हैं –
(a) ऐच्छिक
(b) आवश्यक
(c) अनावश्यक
(d) अनिवार्य।
उत्तर:
(d) अनिवार्य।

प्रश्न 16.
सन् 2004 में भारत में स्कन्ध विपणियों की संख्या थी –
(a) 25
(b) 21
(c) 23
(d) 24.
उत्तर:
(d) 24.

प्रश्न 17.
नवीन निर्गमित अंशों में व्यवहार करता है –
(a) गौण बाजार
(b) प्राथमिक बाजार
(c) गौण बाजार तथा प्राथमिक बाजार दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) प्राथमिक बाजार

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. NSEI की दत्त पूँजी ………….. है।
  2. OTCEI की दत्त पूँजी ………… है।
  3. OTCEI की स्थापना ………… में हुई।
  4. NSEI की स्थापना ………….. में हुई।
  5. छोटी कम्पनियों की प्रतिभूतियों में तरलता निर्माण हेतु ……… की स्थापना की गई।
  6. पूँजी बाजार …………. व्यवहार करना है।
  7.  कोषागार विपत्र की अधिकतम अवधि …………. होती है।
  8. मुद्रा बाजार ……….. व्यवहार करता है।
  9. वाणिज्यिक विपत्र …………. लिखा जाता है।
  10. मध्यम व दीर्घ अवधि वाली प्रतिभूतियों का संबंध …………. से होता हैं।
  11. NSEI एक ………….. स्तर का बाजार है।
  12. सेबी की स्थापना ………….. में हुई थी।
  13. द्वितीयक बाजार को …………. भी कहते हैं।
  14. अंशो, ऋणपत्रों आदि में व्यवहार करने वाले बाजार को …………. कहा जाता हैं।
  15. सामान्यतया …………. वित्त से संबंधित बाजार को पूँजी बाजार कहा जाता है।
  16. माँग मुद्रा, व्यापार बिल आदि …………. के प्रमुख उपकरण होते हैं।
  17. तरलता का निर्माण …………. करता है।

उत्तर:

  1. 3 करोड़ रु
  2. 30 लाख रु
  3. 1990
  4. 1992
  5. OTCEI
  6. दीर्घकालीन कोष में
  7. वर्ष
  8. अल्पकालीन कोष में
  9. विक्रेता द्वारा
  10.  पूँजी बाजार
  11. सुसंगठित
  12. 1992
  13. स्टॉक विनिमय
  14. पूँजी बाजार
  15. दीर्घकालीन
  16. मुद्रा बाजार
  17. गौण बाजार

प्रश्न 3.
एक शब्द या वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. दीर्घकालीन वित्त व्यवस्था से संबंधित बाजार को क्या कहते हैं ?
  2. पूर्व निर्गमित प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय कहाँ होता है ?
  3. अल्पकालीन वित्त व्यवस्था हेतु किस बाजार का प्रयोग होता है ?
  4. विनियोजकों के हितों की रक्षा हेतु किसकी स्थापना की गई ?
  5. राष्ट्रीय स्तर के स्कन्ध विपणि का क्या नाम है ?
  6. ट्रेजरी बिल, वाणिज्यिक बिल आदि किस बाजार के प्रलेख हैं ?
  7. कौन सा पूँजी बाजार नई प्रतिभूतियों के निर्गमन से संबंधित होता है ?
  8. महाजन व साहूकार कौन-से मुद्रा बाजार के प्रमुख अंग हैं ?
  9. प्राथमिक पूँजी बाजार में मध्यस्थ के माध्यम से प्रतिभूति निर्गमन की विधि क्या कहलाती है ?
  10. किस बाजार में अल्पकालीन कोषों का क्रय-विक्रय होता है ?
  11. पूँजी बाजार के दो खण्ड कौन-कौन से हैं ?
  12. मुद्रा बाजार का नियंत्रण किस संस्था द्वारा होता है ?
  13. बट्टे पर निर्गमित होने वाली प्रतिभूति क्या है ?
  14. सेबी किस बाजार का नियमन एवं संवर्धन करता है ?
  15. किस पूँजी बाजार का संबंध नए निर्गमनों से होता है ?
  16. देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज कौन-सा है ?

उत्तर:

  1. पूँजी बाजार
  2. स्कंध विपणि
  3. मुद्रा बाजार
  4. सेबी
  5. NSEI
  6. मुद्रा बाजार
  7. प्राथमिक
  8. असंगठित
  9. निजी स्थानन
  10. मुद्रा बाजार
  11. प्राथमिक व गौण बाजार
  12. केन्द्रीय बैंक
  13. ट्रेजरी बिल
  14. स्टॉक एक्सचेंज/द्वितीयक बाजार
  15. प्राथमिक बाजार
  16. मुंबई स्टॉक एक्सचेंज।

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
सत्य या असत्य बताइये

  1. सेबी एक सार्वमुद्रा रखने वाला निगम-निकाय है।
  2. भारत में 24 स्कन्ध निर्माण है।
  3. सेबी का मुख्यालय मुंबई में है।
  4. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड को सेबी के नाम से भी जाना जाता है।
  5. प्रतिभूतियों के आदान-प्रदान का स्थान इलेक्ट्रॉनिक बुक प्रविष्ट ने ले लिया है।
  6. म्यूचुअल फंड पर सेबी का नियंत्रण नहीं होता है।
  7. मुद्रा बाजार दीर्घकालीन कोषों में व्यवहार करता है।
  8. मुद्रा बाजार में सेबी का नियंत्रण है।
  9. देश के औद्योगिक विकास के लिए स्वस्थ पूँजी बाजार आवश्यक है।
  10. प्राथमिक बाजार तथा गौण बाजार में अन्तर है।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. सत्य
  5. सत्य
  6. असत्य
  7. असत्य
  8. असत्य
  9. सत्य
  10. सत्य।

प्रश्न 5.
सही जोड़ी बनाइये –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 विपणन (वित्तीय) बाजार IMAGE - 1
उत्तर:

  1. (d)
  2. (e)
  3. (b)
  4. (a)
  5. (c)
  6. (f)
  7. (g)
  8. (i)
  9. (h)

विपणन (वित्तीय) बाजार दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक वित्त बाजार के क्या प्रकार्य हैं ?
उत्तर:
वित्त बाजार के प्रमुख प्रकार्य निम्नलिखित हैं

1. कीमत खोज को सुगम बनाना-किसी वस्तु की कीमत माँग और पूर्ति कारकों पर निर्भर करती है। वित्तीय बाजारों में वित्तीय संपत्तियों और प्रतिभूतियों की माँग और पूर्ति विभिन्न वित्तीय प्रतिभूतियों के मूल्य को निश्चित करने में सहायता करती है।

2. लेन-देन की लागत को कम करना-वित्तीय बाजार विभिन्न वित्तीय प्रतिभूतियों की लागत. उपलब्धता और मूल्य से संबंधित पूर्ण सूचना प्रदान करता है। इसीलिए निवेशकों और कंपनियों को इस सूचना को प्राप्त करने के लिए अधिक खर्च नहीं करना पड़ता है क्योंकि यह वित्तीय बाजारों में पहले से उपलब्ध होती है।

3. बचत राशियों को गतिशील बनाना और उन्हें अधिक उत्पादक प्रयोग में स्थानांतरित करनावित्तीय बाजार बचतकर्ताओं और निवेशकों के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करता है। वित्तीय बाजार बचतकर्ताओं की बचत को अधिक उपयुक्त निवेश अवसरों में स्थानांतरण करता है।

4. वित्तीय संपत्तियों को तरलता प्रदान करना-वित्तीय बाजार में वित्तीय प्रतिभूतियों को आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है इसीलिए वित्तीय बाजार प्रतिभूतियों को नगद में परिवर्तित करने के लिए एक आधार प्रदान करता है।

प्रश्न 2.
पूँजी बाजार का क्या अर्थ होता है ? भारत के संगठित व असंगठित पूँजी बाजारों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
पूँजी बाजार का अर्थ – “पूँजी बाजार वह स्थान या प्रबंध व्यवस्था है जहाँ व्यवसाय व उद्योगों के लिए दीर्घकालीन ऋणों की व्यवस्था होती है।” –
भारत में पूँजी बाजार दो प्रकार के हैं

1. संगठित पूँजी बाजार (Formal or Organised Capital Market) – संगठित पूँजी बाजार के अन्तर्गत वित्त संबंधी कार्य पंजीबद्ध (Registered) विभिन्न वित्तीय संस्थायें करती हैं जो विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्रों से निजी बचतों को एकत्र कर दीर्घकालीन पूँजी की व्यवस्था करती है। जैसे –

भारतीय यूनिट ट्रस्ट (UTI), जीवन बीमा निगम (LIC), भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI), वाणिज्यिक बैंक, औद्योगिक वित्त निगम (IFC), भारतीय औद्योगिक साख एवं विनियोग निगम (ICICI), भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI), राष्ट्रीय औद्योगिक विकास निगम (NIDC), भारतीय औद्योगिक पुनर्निर्माण बैंक (IRBI), सामान्य बीमा निगम (GIC), राज्य वित्तीय संस्थाएँ (SFCs), आवासीय वित्त बैंक (RFB) आदि प्रमुख हैं। इन सभी का नियन्त्रण व नियमन भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा किया जाता है। –

2. असंगठित या गैर संगठित बाजार (Internal or Unorganised Market) – इसे अनौपचारिक बाजार भी कहा जाता है। इनमें देशी बैंकर्स, साहूकार, महाजन आदि प्रमुख होते हैं। काले धन का बहुत बड़ा भाग गैर संगठित क्षेत्र में वित्त व्यवस्था करता है। ये उद्योग, व्यापार तथा कृषि क्षेत्रों में पूँजी का विनियोजन करते हैं। इनकी ब्याज दरें व वित्तीय नीति कभी भी एकसमान नहीं होती हैं।

इन पर विनिमय सम्बन्धी नियंत्रण भी नहीं होती है। जिसके परिणामस्वरूप ये साहूकार कभी-कभी ऊँची दर पर ऋण देकर अधिक लाभ कमाने का प्रयास करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक इन पर नियंत्रण करने के लिये प्रयासरत् है।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
पूंजी बाजार तथा मुद्रा बाजार के बीच अंतर करें।
उत्तर:
मुद्रा बाजार एवं पूंजी बाजार में अंतर (Distinction Between Money Market and Capital Market)
जैसा कि पूर्व में ही बताया जा चुका है कि मुद्रा बाजार व पूँजी बाजार दोनों आकार व स्वभाव के दृष्टिकोण से भिन्न-भिन्न होते हैं। प्रमुख अन्तर इस प्रकार हैं

1. मुद्रा बाजार अल्पकालीन ऋणों में लेनदेन करता है जबकि पूँजी बाजार दीर्घकालीन ऋणों में लेनदेन करता है।

2. अल्पकाल का आशय एक वर्ष तक की अवधि से है जबकि दीर्घकाल की अवधि का आशय 15 वर्ष से 25 वर्ष या उसके ऊपर की अवधि से होता है।

3. मुद्रा बाजार में केन्द्रीय बैंक, वाणिज्यिक बैंक, गैरवित्तीय संस्थायें आदि मुद्रा में लेनदेन करते हैं जबकि पूँजी बाजार का लेनदेन स्कन्ध विपणियों, म्यूचुअल फन्ड, लीजिंग कम्पनियाँ, यू.टी.आई. बीमा कम्पनियाँ, निवेशक बैंक, वित्तीय निगम आदि के माध्यम से किया जाता है। इस प्रकार दोनों की संस्थायें अलग-अलग होती हैं

4. मुद्रा बाजार बचत पत्र, विनिमय बिल, राजकोषीय बिल, जमा प्रमाण-पत्र आदि उपकरणों (Instruments) के द्वारा लेनदेन करता है जबकि पूँजी बाजार में बड़ी कम्पनियों, औद्योगिक संस्थाओं के अंश व ऋणपत्र, सरकारी एवं गैर सरकारी बाण्ड्स तथा प्रतिभूतियों जैसे उपकरणों से लेनदेन किया जाता है।

5. मुद्रा बाजार में मुद्रा की मात्रा अपेक्षाकृत कम रहती है, क्योंकि किसी बड़े कारखाने या उद्योग को प्रारम्भ करने के लिये मुद्रा बाजार से वित्त प्राप्त नहीं किया जाता। जबकि पूंजी बाजार में मुद्रा की मात्रा अपेक्षाकृत काफी अधिक रहती है।

6. मुद्रा बाजार में दिये गये ऋण के बदले ब्याज प्राप्त होता है जो पूर्व निर्धारित रहता है। पूँजी बाजार में दिये गये ऋण के बदले लाभांश प्राप्त होता है, जो लाभ के अनुसार कम या अधिक होते रहता है।

7.मुद्रा बाजार का नियंत्रण सामान्य होता है जबकि पूँजी बाजार का नियंत्रण ‘सेबी’ द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 4.
जमा प्रमाण पत्र (CD) तथा सावधि/मुद्दती जमा (FD) में अंतर बताइए।
उत्तर:
तथा सावधि जमा में अंतरजमा प्रमाण पत्र
जमा प्रमाण पत्र

  1. ये स्वतंत्र रूप से विनिमय साध्य होते हैं।
  2. ये वास्तविक जमा राशि पर कटौती काटकर जाते हैं।
  3. ये प्रमाण पत्र 91 दिनों से 1 वर्ष की अवधि

सावधि जमा

  1. ये स्वतंत्र रूप से विनिमय साध्य नहीं होते हैं।
  2. ये वास्तव में जमा की गई राशि पर जारी किये जारी किये जाते हैं।
  3. ये 14 दिनों की न्यूनतम अवधि के लिए

प्रश्न 5.
SEBI के सुरक्षात्मक कार्य क्या हैं ?
उत्तर:
SEBI के सुरक्षात्मक कार्य – SEBI द्वारा ये कार्य निवेशक के हित की सुरक्षा और निवेश की सुविधा प्रदान करने के लिए निष्पादित किए जाते हैं। SEBI के सुरक्षात्मक कार्य निम्न हैं

1. यह भाव बढ़ाने व घटाने का निरीक्षण करता है। इसका अर्थ प्रतिभूतियों के बाजार मूल्य को बढ़ाने या कम करने के मुख्य उद्देश्य के साथ प्रतिभूतियों के मूल्यों में हेर – फेर करने से है।

2. SEBI कपटपूर्ण और अनुचित व्यापारिक कार्यवाहियों को प्रतिबंधित करता है।

3. SEBI निवेशकों को शिक्षित करने के लिए कई उपाय करता है ताकि वे विभिन्न कंपनियों की प्रतिभूतियों का मूल्यांकन करने के योग्य हो अधिक लाभप्रद प्रतिभूति का चयन करें।

प्रश्न 6.
प्राथमिक बाजार एवं गौण बाजार में अंतर बताइए।
उत्तर:
प्राथमिक बाजार एवं गौण बाजार में अंतर –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 विपणन (वित्तीय) बाजार IMAGE - 2

प्रश्न 7.
भारत में कितनी स्कन्ध विपणियाँ हैं ?
उत्तर:
भारत में कुल 24 स्कन्ध विपणियाँ हैं। ये निम्नलिखित स्थानों पर है

  1. चेन्नई
  2. अहमदाबाद
  3. बैंगलोर
  4. भुवनेश्वर
  5. कोचीन
  6. कटक
  7. कोयम्बटूर
  8. दिल्ली
  9. गुवाहाटी
  10.  इंदौर
  11.  हैदराबाद
  12. जयपुर
  13.  कानपुर
  14. मंगलौर
  15. कोलकाता
  16. लुधियाना
  17. मुंबई
  18. OTCEI
  19. पटना
  20. पुणे
  21. NSEI
  22. बड़ोदरा
  23.  राजकोट
  24. सिक्किम।

प्रश्न 8.
NSEI की विशेषताओं और उद्देश्यों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
NSEI की विशेषताएँ – NSEI की मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं

1. व्यापार की जाने वाली प्रतिभूतियाँ – NSEI प्रतिभूतियों के दो प्रखंडों के साथ लेन-देन करना है। ये इस प्रकार हैं-

  • पूँजी बाजार प्रखण्ड
  • मुद्रा बाजार प्रतिभूतियाँ ।

2. NSEI पर भुगतान और सुपुर्दगी लेन – देन के 15 दिनों के अंदर पूर्ण की जाती है। NSEI के उद्देश्य-

  1. एक उपयुक्त संप्रेषण नेटवर्क द्वारा देशभर में निवेशकों की आसान पहुँच सुनिश्चित करना।
  2. अंतर्राष्ट्रीय मानकों से मिलान करना।
  3. सभी प्रकार की प्रतिभूतियों के लिए एक राष्ट्रव्यापी व्यापारिक सुविधा की स्थापना करना।
  4. इलेक्ट्रॉनिक व्यापारिक पद्धति का प्रयोग करके एक उचित कुशल और पारदर्शी प्रतिभूतियों का बाजार प्रदान करना।
  5. छोटे निबटान का चक्र बनाना।

प्रश्न 9.
प्राथमिक पूँजी बाजार की पाँच विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
प्राथमिक पूँजी बाजार का आशय – प्राथमिक बाजार का आशय उस बाजार से है, जिसमें नवीन प्रतिभूतियों (जैसे-अंश, ऋणपत्र, बॉण्ड्स आदि) का निर्गमन किया जाता है। इसे नवीन निर्गमन बाजार भी कहा जाता है। जिस बाजार में प्रतिभूतियाँ कम्पनियों द्वारा प्रथम बार बेची जाती है। उसे प्राथमिक बाजार कहा जाता है।
विशेषताएँ-

  1. नवीन प्रतिभूतियाँ – प्राथमिक बाजार में नवीन प्रतिभूतियों के व्यवहार का निर्गमन होता है।
  2. कीमत का निर्धारण – प्रतिभूतियों की कीमत-कम्पनी के प्रबंधकों द्वारा निर्धारित की जाती है।
  3. प्रत्यक्ष निर्माण – प्राथमिक बाजार में कम्पनी सीधे या बिचौलिये के माध्यम से विनियोजकों को प्रतिभूतियों का निर्गमन करती है।
  4. स्थान – प्राथमिक बाजार के लिये कोई विशेष स्थान नहीं होता है।
  5. पूँजी निर्माण प्राथमिक बाजार प्रत्यक्ष रूप से पूँजी निर्माण में वृद्धि करता है, क्योंकि कोषों का प्रवाह, बचत करने वाली से विनियोगकर्ताओं को जाता है, जो यंत्र, मशीनरी, भवन आदि के लिये उनका उपयोग करते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 10.
पूँजी बाजार के महत्व की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पूँजी बाजार राष्ट्रीय पूँजी निर्माण तथा विकास में सहायता करता है। पूँजी बाजार के महत्व को हम निम्नांकित ढंग से स्पष्ट कर सकते हैं

  1. पूँजी बाजार पूँजी निवेशकों एवं बचत धारियों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बचतकर्ता निधि के स्रोत व ऋणदाता होते हैं तथा निवेशक निधि के ऋणी होते हैं। इन दोनों के मध्य पूँजी बाजार एक कड़ी का कार्य करता है।
  2. अपनी समस्त आय खर्च न करने वाले बचतकर्ताओं के लिए विनियोग करने का सरल साधन पूँजी बाजार होता है।
  3. आम जनता की छोटी-छोटी बचतों के लाभकारी विनियोग के लिए पूँजी बाजार एक अच्छा क्षेत्र प्रदान करता है।
  4. इसी प्रकार कम दर पर अधिक समय के लिए पूँजी प्राप्त करने का एक अच्छा मार्ग पूँजी बाजार होता है।
  5. पूँजी बाजार में माँग व पूर्ति के मध्य सन्तुलन बनाये रखने का कार्य पूँजी बाजार अपने उपकरणों के माध्यम से करता है।

प्रश्न 11.
प्राथमिक व द्वितीयक बाजार अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्राथमिक बाजार (Primary market) – ऐसा स्थल या व्यवस्था जहाँ से पूँजी सीधे प्रथम बार जनता द्वारा प्राप्त की जाती है उसे प्राथमिक बाजार (Primary Market) कहा जाता है। इस व्यवस्था में कम्पनियों द्वारा नये अंशों व ऋणपत्रों का निर्गमन कर जनता से सीधे पूँजी प्राप्त की जाती है। इसी प्रकार सरकार व निगमित संस्थायें अपने बॉण्ड्स एवं प्रतिभूतियों का विक्रय कर सीधे जनता से पूँजी प्राप्त कर सकती हैं। कम्पनियों की स्थापना के समय भी अंशों का निर्गमन कर जनता से जो अंशपूँजी आमन्त्रित की जाती है वह भी प्राथमिक पूँजी कहलाती है। व्यापारिक बैंकर्स द्वारा प्राप्त जमायें, म्यूचुअल फन्ड व अन्य बचत प्रमाण-पत्रों से प्राप्त पूँजी भी प्राथमिक पूँजी के रूप में मानी जाती है। संक्षिप्त में “ऐसी पूँजी जिसे प्रथम बार जनता से सीधे किसी भी माध्यम से प्राप्त किया जाता है उसे प्राथमिक पूँजी कहते हैं।”

द्वितीयक बाजार (Secondary market) – द्वितीयक बाजार के अन्तर्गत विभिन्न स्रोतों से पूँजी प्राप्त की जाती है उसका पुनः विनियोग करने की क्रिया द्वितीयक बाजार कहलाती है। सामान्यतः स्कन्ध विपणि (Stock Exchange) में व्यवहार किये जाने वाले समस्त लेनदेन द्वितीय पूँजी बाजार के अन्तर्गत आते हैं क्योंकि स्कन्ध विपणियों में अंशों व प्रतिभूतियों का ही क्रय-विक्रय होता है। दलालों द्वारा, म्यूचुअल फन्ड द्वारा, यूनिट ट्रस्ट द्वारा, सामान्य बीमा कम्पनियों व गैर बैंकिंग वित्त से सम्बन्धित समस्त कार्य द्वितीय पूँजी बाजार की श्रेणी में आता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 12.
स्टॉक एक्सचेंज (शेयर बाजार) के प्रकार्य लिखिए।
उत्तर:
स्टॉक एक्सचेंज के प्रकार्य – स्टॉक एक्सचेंज के निम्नलिखित प्रकार्य हैं-

1. दलाल-एक दलाल स्टॉक एक्सचेंज का सदस्य होता है। वह बाह्य व्यक्तियों, जो कि सदस्य नहीं होते, की ओर से प्रतिभूतियों को खरीदता और बेचता है।

2. आढ़तिया – आढ़तिया स्टॉक एक्सचेंज का सदस्य होता है। वह अपनी ओर से प्रतिभूतियों को खरीदता और बेचता है। वह एक प्रकार की प्रतिभूति में विशिष्ट होता है और वह उच्च कीमत पर प्रतिभूतियाँ बेचकर लाभ कमाता है। मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में उसे तरावनीवाला कहा जाता है।

3. तेजड़िया – तेजड़िया एक सटोरिया होता है जो मूल्य में वृद्धि की आशा करता है। वह उच्च कीमत पर भविष्य में प्रतिभूतियों को बेचने और उनसे लाभ कमाने के दृष्टिकोण से प्रतिभूतियों को खरीदता है। मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में उसे तेजीवाला के नाम से जाना जाता है।

4. मंदड़िया – मंदड़िया एक सटोरिया होता है जो मूल्य में कमी की आशा करता है। वह ऐसी प्रतिभूतियों को बेचता है जो उसके पास नहीं होती स्टॉक एक्सचेंज में उसे मंडीवाला के नाम से जाना जाता है।

5.स्टैग – स्टैग भी एक सटोरिया है जो इस आशा के साथ कि आबंटन के समय मूल्यों में उछाल होगा, नई प्रतिभूतियों के लिए आवेदन करता है और वह उन्हें प्रीमियम पर बेच सकता है।

प्रश्न 13.
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के क्या उद्देश्य हैं ?
उत्तर:
NSE के उद्देश्य – NSE की स्थापना के निम्नांकित उद्देश्य हैं

  1. सामान्य अंशों, ऋणपत्रों एवं मिश्रित (Hybrid) प्रतिभूतियों में राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार की सुविधा प्रदान करना।
  2. सम्पूर्ण राष्ट्र के विनियोजकों की बाजार तक पहुंच आसान करना।
  3. प्रतिभूतियों के व्यापार में स्वच्छता,पारदर्शिता व कुशलता लाना।
  4. सौदों के निपटारा की प्रक्रिया को कम करना
  5. अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार के मानकों (Standard) का पालन करना।

प्रश्न 14.
प्राथमिक बाजार की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
प्राथमिक बाजार की विशेषताएँ (Features of Primary Market)- प्राथमिक बाजार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

1. इसका संबंध नये निर्गमनों से हैं (It is related with new issues) – प्राथमिक बाजार की प्रथम विशेषता इसका नये निर्गमनों से संबंधित होना है। जब भी कोई कम्पनी नये अंश अथवा ऋणपत्र जारी करती है तो यह प्राथमिक बाजार की ही क्रिया होती है।

2. इसका कोई विशेष स्थान नहीं होता है (It has no particular place) –  प्राथमिक बाजार किसी विशेष स्थान का नाम नहीं है बल्कि नये निर्गमन लाने को ही प्राथमिक बाजार की क्रिया कहा जाता है।

3. इसमें पूँजी एकत्रित करने की कई विधियाँ हैं (It has various methods of Raising Capital)प्राथमिक बाजार में पूँजी एकत्रित करने की पाँच विधियाँ होती हैं

  1. विवरण पत्रिका के माध्यम से प्रस्ताव
  2. विक्रय के लिए प्रस्ताव
  3. निजी नियोजन या विनियोग
  4. अधिकार निर्गम तथा
  5. इलेक्ट्रॉनिक आरंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव।

4. यह गौण बाजार से पहले आता है (It comes before secondary market) – प्राथमिक बाजार में व्यवहार पहले होते हैं और उसके बाद गौण बाजार की बारी आती है।

5. कीमतों का निर्धारण (Determination of prices) – प्रतिभूतियों की कीमतों का निर्धारण कंपनी के प्रबन्ध द्वारा किया जाता है।

6. निधि का प्रवाह (Flow of funds) – निधियों का प्रवाह बचतकर्ताओं से निवेशकों की ओर होता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 15.
द्वितीय बाजार की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
द्वितीय या गौण बाजार की विशेषताएँ (Fetures of Secondary Market) – गौण बाजार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

1. यह तरलता उत्पन्न करता है (It Creates Liquidity) – गौण बाजार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता प्रतिभूतियों में तरलता उत्पन्न करना है। तरलता का अभिप्राय प्रतिभूतियों को अतिशीघ्र नकदी में बदलने से है। यह काम गौण बाजार द्वारा किया जाता है।

2. यह प्राथमिक बाजार के बाद आता है (It comes after Primary Market) – किसी भी नई प्रतिभूति को पहली बार गौण बाजार में नहीं बेचा जा सकता है। नई प्रतिभूतियों को पहले प्राथमिक बाजार में बेचा जाता है उसके बाद गौण बाजार की बारी आती है।

3. इसका एक विशेष स्थान होता है (It has a Particular Place) – गौण बाजार का एक विशेष स्थान होता है जिसे एक्सचेंज कहते हैं। ध्यान रहे कि यह जरूरी नहीं है कि प्रतिभूतियों के सभी क्रय-विक्रय स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से ही किये जाएँ । दो व्यक्ति आपस में भी इनका क्रय-विक्रय कर सकते हैं। यह भी गौण बाजार का व्यवहार ही कहलायेगा। प्रायः अधिकतर व्यवहार एक्सचेंज के माध्यम से ही होते हैं।

4. यह नये निवेश को प्रोत्साहित करता है-शेयर बाजार के अंशों व अन्य प्रतिभूतियों के भाव कम या अधिक होते रहते हैं। इस स्थिति का लाभ उठाने के उद्देश्य से अनेक नये निवेशक इस बाजार में प्रवेश करते हैं। इसे औद्योगिक क्षेत्र के विनियोग में वृद्धि होती है।

प्रश्न 16.
मुद्रा बाजार प्रपत्रों की विशेषतायें लिखिए।
उत्तर:
मुद्रा बाजार प्रपत्रों की सामान्य विशेषताएँ (General Feature of Money Instruments)मुद्रा बाजार में व्यवहार किये जाने वाले प्रपत्रों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. अल्पकालीन (Short-term) – ये अल्पकाल के लिए जारी किये जाते हैं। इनकी अवधि कम-सेकम दिन और अधिकतम 364 दिन होती है।
  2. अधिक सुरक्षा (High Safety)-इनको जारी करने वाली संस्थाएँ वित्तीय दृष्टि से मजबूत होती हैं। अतः इनमें अधिक सुरक्षा रहती हैं।
  3. अधिक तरलता (High Liquidity) – इन प्रपत्रों में अतिशीघ्र नकदी में बदलने का गुण होता है।
  4. अधिक राशि (Large Amount)-ये प्रपत्रक अधिक राशि के होते हैं।
  5. कम निवेशक (Lower Investos)-इनमें निवेश करने वाली संस्थाओं व व्यक्तियों की संख्या सीमित होती है।

प्रश्न 17.
राजकोषीय बाजार प्रपत्रों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
राजकोषीय प्रपत्र की विशेषताएँ (Features of Treasury Bills) – राजकोषीय प्रपत्र की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. यह एक अल्पकालीन प्रपत्र है।
  2. इसे केन्द्रीय सरकार अपनी अल्पकालीन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जारी रहती है।
  3. इसका निर्गमन केन्द्रीय सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किया जाता है।
  4. यह एक वर्ष से कम अवधि में परिपक्व होने वाला प्रपत्र है।
  5. इसे शून्य कूपन बंधक पत्र के नाम से भी जाना जाता है।
  6. इसे अंकित मूल्य से कम मूल्य पर जारी किया जाता है और इसका भुगतान अंकित मूल्य पर होता है।
  7. यह प्रपत्र एक वचन के स्वरूप में जारी किया जाता है।
  8. इसमें उच्च तरलता पायी जाती है।
  9. इसमें अदायगी का जोखिम नगण्य होता है।

प्रश्न 18.
माँग मुद्रा/अल्प सूचना ऋण की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
माँग मुद्रा की विशेषताएँ (Features of Call Money) – माँग मुद्रा की मुख्य विशेषताएँ . निम्नलिखित हैं

  1. यह एक लघुकालिक माँग पर पुनः भुगतान वित्त है।
  2. इसकी परिपक्वता अवधि एक दिन से 15 दिन तक की होती है।
  3. यह अंतःबैंक अंतरण के लिए प्रयोग में लायी जाती है अर्थात् इसका प्रयोग बैंकों द्वारा किया जाता है। निम्न कारण से बैंक इसका प्रयोग करते हैं-
    • वैधानिक तरलता अनुपात बनाये रखना।
    • आवश्यकता से अधिक नकदी को अल्पकाल निवेश के लिए रखना।
  4. माँग मुद्रा का व्यवहार प्रायः टेलीफोन पर ही होता है, कागजी कार्यवाही बाद में पूरी की जाती है।
  5. माँग मुद्रा पर चुकाए जाने वाले ब्याज को शीघ्रावधि दर कहते हैं। यह दर बहुत ही चंचल (अस्थिर) होती है। यह दिन-प्रतिदिन और कभी-कभी घंटों के अनुसार बदलती है।

प्रश्न 19.
मुद्रा बाजार की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
मुद्रा बाजार की विशेषताएँ (Features of Money Market) – मुद्रा बाजार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

1.वित्तीय बाजार का मुख्य अंग (Important Component of Financial Market) – मुद्रा बाजार वित्तीय बाजार का एक मुख्य अंग है। इसके माध्यम से व्यापारियों, उद्योगपतियों तथा सरकार की अल्पकालीन वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है।

2. अत्यधिक तरलता (More Liquidity) – मुद्रा बाजार की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसमें अत्यधिक तरलता का पाया जाना है।

3. कम व्यवहार लागत (Low Transaction Cost) – मुद्रा बाजार में किये जाने वाले व्यवहारों के लिए प्रायः दलालों की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए यहाँ किये जाने वाले क्रय-विक्रय पर कम खर्चे सहन करने पड़ते हैं।

4. अल्पकालीन वित्तीय संपत्तियाँ (Short-term Financial Assets) – इस बाजार में व्यवहार की जाने वाली संपत्तियों की अवधि अधिकतम एक वर्ष होती है। वित्तीय संपत्तियों का अर्थ वित्तीय प्रलेखों (Financial Instruments) से है।

5. वित्तीय बाजार के दो स्वरूप (Two Forms)
– इस बाजार के दो स्वरूप हैं –

  1. संगठित तथा
  2. असंगठित।

संगठित मुद्रा बाजार में रिजर्व बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी क्षेत्र के बैंक तथा सहकारी बैंकों को सम्मिलित किया जाता है। असंगठित मुद्रा बाजार के अंतर्गत साहूकार (Moneylender), देशी बैंक (Indigenous Banks), चिट फंड (Chit Fund), निधियाँ (Nidhis) आदि को सम्मिलित किया जाता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 20.
सेबी (SEBI) के कोई चार सुरक्षात्मक कार्य बताइये।
उत्तर:
SEBI के चार सुरक्षात्मक कार्य निम्नलिखित हैं –

  1. सेबी निवेशकों को शिक्षित करने के लिए कदम उठाती है।
  2. यह भीतरी कार्य पर रोक लगाती है।
  3. यह बाजार में उचित कार्यों एवं आचार संहिता को बढ़ावा देती है।
  4. यह बाजार में नई प्रतिभूतियाँ जारी करने जा रही है कंपनियों के कपटपूर्ण व्यवहारों पर रोक लगाती है।

प्रश्न 21.
सेबी (SEBI) के कोई चार नियामक कार्य लिखिए।
उत्तर:
SEBI के चार नियामक कार्य (Regulatory functions) निम्नलिखित हैं

  1. SEBI दलालों एवं उप दलालों तथा प्रतिभूति बाजार से किसी भी रूप में जुड़े बिचौलियों का पंजीकरण करती है।
  2. यह सामूहिक निवेश योजनाओं तथा म्युचुअल फंडों का पंजीकरण करती है।
  3. यह धोखेबाजी एवं अनुचित व्यापारों की रोकथाम करती है।
  4. यह अधिनियम के उद्देश्यों से बाहर किये जाने वाली गतिविधियों पर अधि-शुल्क या कोई अन्य प्रभार लगाती है।

प्रश्न 22.
वित्तीय बाजार के कार्यों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
वित्तीय बाजार के कार्य-देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में वित्तीय बाजार का मुख्य स्थान है। इरके मुख्य कार्य निम्न हैं

1. मूल्य खोज में सहायक-किसी भी वस्तु या सेवा का मूल्य माँग व पूर्ति की शक्तियों द्वारा निर्धारित होता है। वित्तीय बाजार में वित्तीय संपत्तियों और प्रतिभूतियों की माँग और पूर्ति विभिन्न प्रतिभूतियों के मूल्य को निश्चित करता है।

2. लेन-देन की लागतों को कम करना वित्तीय बाजार विभिन्न प्रतिभूतियों की लागत उपलब्धता और मूल्य से संबंधित पूर्ण सूचना प्रदान करता है। इसीलिए निवेशक और कंपनी को इन सूचनाओं को प्राप्त करने के लिए अधिक खर्च नहीं करना पड़ता अर्थात् वित्तीय बाजार लेन-देनों की लागत को कम करता है।

3. बचतों को गति प्रदान करना एवं अत्यधिक उत्पादकीय प्रयोगों की ओर ले जाना-वित्तीय बाजार बचतकर्ताओं को विभिन्न विनियोग विकल्प प्रदान कर लोगों की बचतों को गति प्रदान करता है।

4.वित्तीय संपत्तियों को तरलता प्रदान करता है-वित्तीय बाजारों में प्रतिभूतियों को सरलता से खरीदा और बेचा जा सकता है। यहाँ प्रत्येक प्रतिभूति के क्रेता व विक्रेता हर समय उपलब्ध होते हैं। इसलिए वित्तीय बाजार वित्तीय संपत्तियों को तरलता प्रदान करता है क्योंकि निवेशक जब चाहे निवेश को रोकड़ में बदल सकते हैं तथा जब चाहे अपने रोकड़ को प्रतिभूतियों में निवेश कर सकते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 23.
शेयर बाजार की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
शेयर बाजार की विशेषताएँ – शेयर बाजार की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं –

1.संगठित बाजार – शेयर बाजार एक संगठित बाजार होता है। इसके संगठित होने का अभिप्राय यह है कि प्रत्येक शेयर बाजार की एक प्रबंध समिति होती है जिसको प्रबंधक एवं नियंत्रण संबंधी सभी अधिकार प्राप्त होते हैं।

2. केवल अधिकृत सदस्यों द्वारा व्यवहार – शेयर बाजार में निवेशकों के लिए प्रतिभूतियों का क्रयविक्रय केवल अधिकृत सदस्यों के माध्यम से ही किया जा सकता है। शेयर बाजार एक विशेष बाजार-स्थान होता है जहाँ केवल अधिकृत सदस्य ही जा सकते हैं। लोगों की प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय करने के लिए इनकी सहायता लेनी पड़ती है।

3.नियमों एवं उपनियमों का पालन करना आवश्यक – शेयर बाजार में किए जाने वाले समस्त लेन देनों के लिए उसके द्वारा निर्धारित नियमों व उपनियमों का पालन करना आवश्यक होता है।

4. गौण बाजार – शेयर बाजार को द्वितीयक या गौण भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ उन प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय किया जाता है जो पहले से निर्गमित की गई हो।

5. विभिन्न संस्थाओं द्वारा निर्गमित प्रतिभूतियों में व्यवहार- शेयर बाजार में प्रायः उन संस्थाओं की प्रतिभूतियों में ही व्यवहार होता है जो वहाँ पर सूचीबद्ध होती है। एक संस्था कुछ विशेष शर्तों का पालन करके अपनी प्रतिभूति को एक शेयर बाजार पर सूचीबद्ध करवा सकती है।

प्रश्न 24.
प्राथमिक पूँजी बाजार का अर्थ एवं इसमें प्रतिभूतियों के निर्गमन की क्या विधियाँ हैं ?
उत्तर:
प्राथमिक पूँजी बाजार का अर्थ – ऐसा स्थल या व्यवस्था जहाँ से पूँजी सीधे प्रथम बार जनता द्वारा प्राप्त की जाती है उसे प्राथमिक बाजार कहा जाता है।
प्रतिभूतियों के निर्गमन की विधियाँ

1. प्रविवरण – इस विधि में निजी क्षेत्र एवं सार्वजनिक क्षेत्र अपनी वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु प्रविवरण जारी करता है। यह एक प्रकार का जनसाधारण को प्रस्ताव होता है कि वे कंपनी व संस्थाओं की प्रतिभूतियों अर्थात् अंशों व ऋण पत्रों के लिए अभिदान करें।

2. बिक्री प्रस्तावना – इस विधि के अंतर्गत साधारण जनता को नई प्रतिभूतियाँ प्रस्तावित की जाती हैं परंतु प्रत्यक्ष रूप से कंपनी द्वारा नहीं, बल्कि बिचौलियों द्वारा जो कंपनी से प्रतिभूतियों का सारा समूह खरीदता है। इसीलिए प्रतिभूतियों की बिक्री दो चरणों में होती है-पहला चरण जब कंपनी अंकित मूल्य पर बिचौलिए को प्रतिभूतियाँ निर्गमित करती है और दूसरा चरण जब लाभ कमाने के लिए बिचौलिए साधारण जनता को उच्च कीमत पर प्रतिभूतियाँ निर्गमित करते हैं।

3. अधिकार निर्गमन – यह विद्यमान शेयरधारकों को नए अंशों का निर्गमन है। इसे अधिकार निर्गमन कहा जाता है। क्योंकि यह अंशधारकों का पूर्व क्रय अधिकार होता है कि कंपनी को बाह्य व्यक्तियों को निर्गमन करने से पहले नए अंश इन्हें प्रस्तावित करने चाहिए। प्रत्येक अंशधारक को उसके द्वारा धारित मौजूदा शेयरों के अनुपात में अतिरिक्त शेयर खरीदने का अधिकार होता है।

4. इलेक्ट्रॉनिक – प्राथमिक सार्वजनिक प्रस्ताव-इस विधि के अंतर्गत कंपनियां अपनी प्रतिभूतियों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम द्वारा जारी करती है। इस माध्यम से प्रतिभूति जारी करने वाली कंपनी एक शेयर बाजार से समझौता करती है। शेयर बाजार में काम करने वाले सेबी द्वारा अधिकृत किसी दलाल को ऑन लाइन प्रार्थना पत्र प्राप्त करने के लिए नियुक्त किया जाता है। इसकी सूचना कंपनी को भेजता है।

5.स्वत्व निर्गमन – इस विधि का प्रयोग वह पुरानी कंपनी करती है जिसने पहले अंश निर्गमित कर रखे हों। जब कोई पुरानी कंपनी नए अंश निर्गमित करती है तो नए अंश बेचने के लिए पहले पुराने अंशधारियों को आमंत्रित करना होता है। इस निर्गमन को स्वत्व निर्गमन कहते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 25.
अंश विपणि पर सौदा करने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्टॉक एक्सचेंज में प्रतिभूतियों के क्रय एवं विक्रय की कार्यविधि इस प्रकार है

(1) दलाल का चुनाव-कोई भी व्यक्ति जो प्रतिभूतियाँ खरीदना अथवा बेचना चाहता है, उसे एक दलाल को चुनना होता है जो स्टॉक एक्सचेंज का सदस्य होता है। प्रतिभूतियाँ केवल दलालों के माध्यम से क्रय-विक्रय किया जाता है। ये दलाल व्यक्ति, साझेदारी फर्मे अथवा निगमित संस्थाएँ व कंपनियाँ हो सकती हैं। पहले दलाल स्वयं स्टॉक एक्सचेंज के स्वामी या प्रबंधक होते थे जिससे दलाल व ग्राहकों के बीच टकराव होता रहता था। लेकिन अब स्टॉक एक्सचेंज में सदस्यों के स्वामित्व अधिकारों को सौदा करने के अधिकारों से पृथक कर दिया गया है।

(2) डिपॉजिटरी के पास डीमेट खाता खोलना-आजकल प्रतिभूतियों में होने वाले सभी व्यवहार ऑनलाइन होते हैं। इसे संभव बनाने के लिए एक डीमेट खाते का खोला जाना ज़रूरी है। डीमेट खाता डिपॉजिटरी सेवा के एक पक्षकार डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट के माध्यम से खोला जाता है। इस समय भारत में डिपॉजिटरी संस्थान दो हैं, जो निम्नलिखित हैं

  • National Securities Depository Limited (NSDL)
  • Central Depository services Limited (CDSL)

(3) आदेश देना-दलाल का चयन करने के बाद व्यक्ति उसे प्रतिभूतियों के क्रय अथवा विक्रय के लिए आदेश दे सकता है। आदेश देने से पहले वह अपने मित्रों (दलाल) से सलाह कर सकता है। दलाल को व्यक्तिगत रूप से या टेलीफोन, ई-मेल इत्यादि के माध्यम से भी आदेश दिया जा सकता है। आदेश देते समय विनियोगकर्ता क्रय या विक्रय की जाने वाली प्रतिभूतियों का विस्तृत विवरण देता है तथा बताता है कि सौदा किस मूल्य तक किया जाना है। साथ में प्रतिभूतियों के मूल्य तथा संख्या का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। उदाहरण के लिए, “रिलायंस के 100 समता अंश ₹ 250 पर खरीदो।”

(4) आदेश पूरा करना-आदेश प्राप्त करने के पश्चात् दलाल उसे अपनी डायरी में नोट कर लेगा जहाँ से यह आदेश पुस्तिका में हस्तांतरित किया जाएगा। इसके तुरंत बाद दलाल निवेशक के पास सूचना भेजने के लिए प्रसंविदा नोट तैयार करता है। प्रसंविदा नोट में क्रय-विक्रय की गई प्रतिभूतियों का नाम, संख्या व मूल्य लिखा जाता है। यह दलाल द्वारा हस्तांतरित किया जाता है तथा ग्राहक के पास सौदे के प्रमाण के रूप में रहता है।

(5) निबटारा-दलालों द्वारा अपने ग्राहकों की तरफ से किए जाने वाले सौदों का यह अंतिम चरण है। निपटारे की विधि सौदों की प्रकृति पर निर्भर करती है। निबटारा दो प्रकार के हो सकते हैं-

  • मौके पर निबटारा
  • अग्रिम निबटारा।

प्रश्न 26.
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के कोई पाँच रक्षात्मक कार्य बताइए।
उत्तर:
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के रक्षात्मक कार्य

(1) प्रतिभूति बाजार से संबंधित धोखा-धड़ी तथा अनुचित व्यवहारों (उदाहरण के लिए निवेशकों को धोखा देने के लिए मिथ्या विवरण जारी करना) को रोकना।

(2) आंतरिक व्यापार पर रोक लगाना। कंपनी में कुछ व्यक्ति (जैसे-संचालक तथा प्रवर्तक) ऐसे होते हैं जो कंपनी से निकटतम रूप से जुड़े होते हैं एवं जिन्हें कंपनी की आंतरिक स्थिति का पता होता है। अपनी इस स्थिति का लाभ उठाकर कंपनी की प्रतिभूतियों में क्रय-विक्रय करते हैं और भारी मात्रा में लाभ कमाते हैं।

(3) प्रतिभूति बाजार से संबंधित आचार संहिता लागू करना।

(4) SEBI निवेशकों को शिक्षित करने के लिए कई उपाय करता है ताकि वे विभिन्न कंपनियों की प्रतिभूतियों का मूल्यांकन करने योग्य हों और अधिक लाभप्रद प्रतिभूति का चयन करें।

(5) प्रतिभूतियों में आंतरिक ट्रेडिंग को रोकना (आंतरिक ट्रेडिंग का आशय कंपनी की गुप्त जानकारी रखने वाले व्यक्तियों द्वारा गुप्त सूचनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रतिभूतियों का कम क्रय-विक्रय करना है

MP Board Solutions

प्रश्न 27.
विभिन्न द्रव्य बाजार प्रपत्रों की व्याख्या कीजिए
उत्तर:
द्रव्य बाजार के प्रमुख प्रपत्र निम्नलिखित हैं
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 विपणन (वित्तीय) बाजार IMAGE - 3

1. खजाना बिल – खजाना बिलों (Treasury Bill) को रिजर्व बैंक द्वारा भारत सरकार की ओर से अल्प अवधि की देयता के रूप में निर्गमित किया जा सकता है। इन्हें बैंक एवं जनसाधारण में बेचा जा सकता है। इसकी अवधि एक वर्ष से अधिक नहीं हो सकती। इसका निर्गमन RBI के द्वारा सरकार की ओर से किया जाता है। सामान्यतः इसकी अवधि 14 दिन, 91 दिन, 182 दिन एवं 364 दिन की होती है।

2. वाणिज्यिक पत्र – वाणिज्यिक पेपर एक गैर-जमानती प्रतिज्ञा पत्र है जिसे निगम एक निश्चित अवधि, जो 12 महीने तक की होती है, के लिए जारी करता है। क्योंकि ये गैर-जमानती होते हैं अत: इसे केवल उच्च साख फर्मों के द्वारा ही निर्गमित किया जाता है। यह अल्पकालीन असुरक्षित प्रतिज्ञा पत्र होते हैं। इससे प्रायः कार्यशील पूँजी के लिए ही राशि प्राप्त की जाती है।

3. माँग मुद्रा – अधिकांश बैंकों के दिन-प्रतिदिन के आधिक्य कोषों का मुद्रा के रूप में व्यापार होता है। ऋण प्राप्तकर्ता वे बैंक होते हैं जिनके पास नगद की अस्थायी कमी होती है। इसका कारण संचय की आवश्यकता एवं कोषों की आकस्मिक माँग है।

4. जमा प्रमाण पत्र – यह सावधि जमा है जिसे गौण बाजार में बेचा जा सकता है। केवल एक बैंक ही जमा प्रमाण पत्र जारी कर सकता है। यह एक वाहक पत्र या आगाम दस्तावेज होता है। यह भी एक विनिमय साध्य विलेख है और आसानी से हस्तांतरित किया जा सकता है।

5. वाणिज्यिक बिल – वाणिज्यिक बिल एक व्यावसायिक फर्म द्वारा दूसरी फर्म पर लिखा जाने वाला बिल होता है। ये उधार क्रय और विक्रय में प्रयोग किये जाने वाले सामान्य उपकरण होते हैं इनकी परिपक्वता अवधि छोटी होती है सामान्यतया 90 दिन और परिपक्वता अवधि से पहले इन्हें बैंक में भुनाया जा सकता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 28.
प्राथमिक बाजार में फ्लोटेशन (अस्थिर पूँजी) की क्या विधियाँ हैं ?
उत्तर:
प्राथमिक बाजार में अस्थिर पूँजी की निम्नलिखित विधियाँ हैं

1. प्रविवरण पत्रों के माध्यम से सार्वजनिक निर्गमन-इस विधि के अंतर्गत कंपनी, साधारण जनता को सूचित और आकर्षित करने के लिए प्रविवरण जारी करती है। प्रविवरण में कंपनी उस उद्देश्य के बारे में विवरण देती है जिसके लिए कोष प्राप्त किये जाते हैं, कंपनी के पिछले वित्तीय निष्पादन,कंपनी की पृष्ठभूमि और भावी प्रत्याशाओं के बारे में भी विवरण प्रदान करती है।

2. बिक्री की प्रस्तावना – इस विधि के अंतर्गत साधारण जनता को नई प्रतिभूतियाँ प्रस्तावित की जाती हैं परंतु प्रत्यक्ष रूप से कंपनी द्वारा नहीं बल्कि बिचौलिए द्वारा जो कंपनी से प्रतिभूतियों का सारा समूह खरीदता है, इसीलिए प्रतिभूतियों की बिक्री दो चरणों में होती है-पहला चरण जब कंपनी अंकित मूल्य पर बिचौलिए को प्रतिभूतियाँ निर्गमित करती है और दूसरा – चरण जब लाभ कमाने के लिए बिचौलिए साधारण जनता को उच्च कीमत पर प्रतिभूतियाँ निर्गमित करते हैं।

3. निजी व्यवस्था – इस विधि के अंतर्गत कंपनी द्वारा बिचौलिए को एक निश्चित कीमत पर प्रतिभूतियाँ बेची जाती हैं और दूसरे चिरण में बिचौलिए इन प्रतिभूतियों को साधारण जनता को नहीं बेचते अपितु उच्च कीमत पर चुने हुए ग्राहकों को बेचते हैं। निर्गमित करने वाली कंपनी, अपने उद्देश्यों, भावी संभावनाओं के बारे में विवरण देने के लिए प्रविवरण निर्गमित करती है ताकि प्रसिद्ध ग्राहक बिचौलिए से प्रतिभूति क्रय करने को प्राथमिकता दें।

4. अधिकार निर्गमन – यह विद्यमान शेयरधारकों को नए अंशों का निर्गमन है। इसे अधिकार निर्गमन कहा जाता है। क्योंकि यह अंशधारियों का पूर्वक्रय अधिकार होता है कि कंपनी को बाह्य व्यक्तियों को निर्गमन करने से पहले नए अंश इन्हें प्रस्तावित करने चाहिए। प्रत्येक अंशधारक को उसके द्वारा धारित मौजूदा शेयरों के अनुपात में अतिरिक्त शेयर खरीदने का अधिकार होता है कि कंपनी को बाह्य व्यक्तियों को निर्गमन करने से पहले नए अंश इन्हें प्रस्तावित करने चाहिए।

5. ईप्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्तावना – यह स्टॉक एक्सचेंज/शेयर बाजार की प्रतिभूतियों को आनॅलाइन पद्धति द्वारा निर्गमित करने की नई विधि है। इसमें कंपनी को आवेदनों को स्वीकार करने और ऑर्डर देने के प्रयोजन के लिए पंजीकृत दलालों को नियुक्त करना पड़ता है।

प्रश्न 29.
भारत में पूंजी बाजार के सुधार की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भारत में पूंजी बाजार में सुधार-भारत में पूंजी बाजार में निम्नलिखित सुधार किए गये हैं

(i) पूँजी बाजार में निगमों के स्कन्ध, अंश व ऋणपत्रों (Stock, Share and Debentures) तथा सरकारी बॉण्ड, प्रतिभूतियों आदि में लेनदेन करता है।

(ii) पूँजी बाजार में कार्य करने वाले व्यक्तियों, व्यापारिक बैंक, वाणिज्यिक बैंक, बीमा कम्पनियाँ, विभिन्न औद्योगिक बैंक, औद्योगिक वित्त निगम, यूनिट ट्रस्ट, निवेश ट्रस्ट लीजिंग वित्त, भवन समितियाँ आदि प्रमुख होते हैं।

(iii) कुछ संस्थाएं ऐसी हैं जो प्रत्यक्षतः ऋण प्रदान नहीं करते हैं किन्तु ऋण प्रदान करने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करती हैं। जिनमें अंशों व ऋणपत्रों के अभिगोपक (Underwriter) महत्वपूर्ण होते हैं। इन अभिगोपकों को ‘हामीदार’ (Underwriter) भी कहा जाता है।

(iv) सम्पूर्ण पूँजी का लेनदेन या क्रय – विक्रय स्कन्ध विपणि (Stock Exchange) के माध्यम से किया जाता है इसलिये इन बाजारों को स्कन्ध बाजार भी कहा जाता है। स्कन्ध बाजार में अंश, ऋणपत्र, बॉण्ड्स, प्रतिभूतियाँ आदि का लेनदेन होता है।

(v) स्कन्ध विपणि में नई एवं पुरानी सभी प्रकार की प्रतिभूतियों का क्रय – विक्रय होता है।

(vi) पूँजी बाजार में लेनदेन सामान्यतः दलालों के माध्यम से ही किया जाता है क्योंकि पूँजी बाजार के स्वभाव से ये अच्छी तरह परिचित रहते हैं।
इस प्रकार पूँजी बाजार में स्कन्ध विपणि के माध्यम से नई पूँजी प्राप्त करने के लिये विभिन्न उपाय किये जाते हैं । पूँजी बाजार के द्वारा दीर्घकालीन व मध्यकालीन वित्त (पूँजी) की व्यवस्था की जाती है वर्तमान में पूँजी प्राप्त करने के लिये अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्था प्रारम्भ हो चुकी है।

प्रश्न 30.
सेबी (SEBI) के प्रकार्यों एवं उददेश्यों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सेबी के कार्य (Functions of ‘SEBI’) सेबी के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं

  1. प्रतिभूति बाजार (Security market) में विनियोजकों के हितों की रक्षा करना तथा प्रतिभूति बाजार को उचित ढंग से विकसित कर उसे नियमित करना।
  2. स्कन्ध विपणि तथा अन्य प्रतिभूति बाजार के व्यवसाय का नियमन करना।
  3. स्कन्ध दलाल (Stock brokers), अंश हस्तान्तरण एजेण्ट (Share transfer agent), प्रन्यासी (Trustees), मर्चेण्ट बैंकर्स, अभिगोपक पोर्टफोलियो मैनेजर, सब-ब्रोकर्स आदि के कार्यों को देखना, उनका पंजीयन करना व उसका नियमन करना।
  4. म्यूचुअल फन्ड सहित समस्त सामूहिक निवेश की योजना को विधिवार पंजीकृत कर उसका नियमन करना।
  5. स्वयं नियमित संगठनों का नियमन व नियन्त्रण करना। . 6. प्रतिभूतियों का अनियमित व अनुचित व्यापार व्यवहार पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगाना।
  6. प्रतिभूति से सम्बन्धित व्यक्तियों के लिये आवश्यक प्रशिक्षण की व्यवस्था करना।
  7. निवेशकों के लिये आवश्यक शिक्षा की व्यवस्था करना।
  8. प्रतिभूतियों के अन्दरुनी व्यापार पर रोक लगाना।।
  9. प्रतिभूति बाजार से सम्बन्धित आवश्यक शोध करना।

प्रश्न 31.
प्राथमिक बाजार एवं द्वितीयक बाजार में अंतर बताइए।
उत्तर:
प्राथमिक बाजार एवं द्वितीयक बाजार में अंतर –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 विपणन (वित्तीय) बाजार IMAGE - 4

प्रश्न 32.
पूँजी बाजार के महत्व की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पूँजी बाजार राष्ट्रीय पूँजी निर्माण तथा विकास में सहायक करता है । पूँजी बाजार के महत्व को हम निम्नांकित ढंग से स्पष्ट कर सकते हैं

  1. पूँजी बाजार पूँजी निवेशकों एवं बचत धारियों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बचतकर्ता निधि के स्रोत व ऋणदाता होते हैं तथा निवेशक निधि के ऋणी होते हैं । इन दोनों के मध्य पूँजी बाजार एक कड़ी का कार्य करता है।
  2. अपनी समस्त आय खर्च न करने वाले बचतकर्ताओं के लिए विनियोग करने का सरल साधन पूँजी बाजार होता है।
  3. आम जनता की छोटी-छोटी बचतों के लाभकारी विनियोग के लिए पूँजी बाजार एक अच्छा क्षेत्र प्रदान करता है।
  4. इसी प्रकार कम दर पर अधिक समय के लिए पूँजी प्राप्त करने का एक अच्छा मार्ग पूँजी बाजार होता है।
  5. पूँजी बाजार में माँग व पूर्ति के मध्य सन्तुलन बनाये रखने का कार्य पूँजी बाजार अपने उपकरणों के माध्यम से करता है।

प्रश्न 33.
पूँजी बाजार और मुद्रा बाजार में निम्नलिखित आधारों पर अंतर्भेद कीजिए

  1. प्रतिभागी
  2. व्यापारिक साख
  3. प्रतिभूतियों की व्यापारिक अवधि
  4. अपेक्षित प्रतिफल
  5. सुरक्षा।

उत्तर:
पूँजी बाजार और मुद्रा बाजार में अंतर –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 विपणन (वित्तीय) बाजार IMAGE - 5

प्रश्न 34.
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSEI) तथा ओवर दि काउंटर एक्सचेंज ऑफ इंडिया (OTCET) में निम्नलिखित आधारों पर अंतर्भेद कीजिए

  1. स्थापना वर्ष
  2. चुकता पूँजी
  3. व्यापारित प्रतिभूतियाँ
  4. निपटान की अवधि
  5. उद्देश्य।

उत्तर:
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया तथा ओवर दि काउंटर एक्सचेंज ऑफ इंडिया में अंतर –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 विपणन (वित्तीय) बाजार IMAGE - 6

MP Board Class 12 Business Studies Important Questions

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन

भाषा का शुद्ध और स्पष्ट लेखन उस समय तक सम्भव नहीं है, जब तक कि शब्दों और उनके अर्थ के विषय में पूर्ण ज्ञान न हो। शुद्ध वाक्य रचना के लिए अशुद्धियों पर ध्यान देना बड़ा आवश्यक है। अशुद्ध वाक्य उतना ही भद्दा और अरुचिपूर्ण लगता है जितना कि बेतरतीब बनाया हुआ भोजन। अतः अशुद्धियों का विवरण नीचे दिया जा रहा है-

MP Board Solutions

1. लिंग सम्बन्धी अशुद्धियाँ – संज्ञा शब्दों में लिंग – परिवर्तन होता है; जैसे –
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन img-1

2. वचन सम्बन्धी अशुद्ध याँ
1. वह किसके कलम है – वह किसकी कलम है।
2. उसका भाग्य फूट गया – उसके भाग्य फूट गए।
3. मेरे बटुआ उड़ गया – मेरा बटुआ उड़ गया।
4. क्या तेरा प्राण निकल रहा है क्या तेरे प्राण निकल रहे हैं।

3. समाज सम्बन्धी अशुद्धियाँ
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन img-2
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन img-3

4. संधि समास अशुद्धियाँ
1. निरस – नीरस (निः + उक्त)।
2. उपरोक्त – उपर्युक्त (उपरि + उक्त)।
3. सदोपदेश – सदुपदेश (सद् + उपदेश)।

5. कर्ता और क्रिया का समान न होना – कर्ता और क्रिया के वचन, लिंग और पुरुष समान होने चाहिए। यदि ऐसा न हुआ तो वाक्य अः शुद्ध हो जाता है। उदाहरण के लिए –
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन img-4

6. शब्दों को यथा स्थान रखना – वाक्य में कर्ता, कर्म, करण, विशेषण, विशेष्य, क्रिया – विशेषण आदि के स्थान निश्चित होते हैं। यदि वे निश्चित स्थान पर न रखे
गए अथवा उनका स्थान बदल दिया गया तो वाक्य अशुद्ध हो जाता है।
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन img-5

7. अनावश्यक शब्दों का प्रयोग
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन img-6

8. वर्ण और मात्रा संबंधी अशुद्धियाँ
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन img-7

MP Board Solutions

महत्त्वपूर्ण परीक्षोपयोगी प्रश्न

निम्नलिखित वाक्यों के शुद्ध रूप लिखिए
1. इन्दिरा गाँधी की मृत्यु पर भारत में दुःख छा गया।
2. मैं कल आगरा से वापस लौटूंगा।
3. तुमने यह काम करना है।
4. कोप ही दण्ड का एक विधान है।
5, आग में कई लोगों के जल जाने की आशा है।
उत्तर –
1. इन्दिरा गाँधी की मृत्यु पर भारत में शोक छा गया।
2. मैं कल आगरा से लौटूंगा।
3. तुम्हें यह काम करना है।
4. दण्ड ही कोप का एक विधान है।
5. आग में कई लोगों के जल जाने की आशंका है।

निम्नलिखित अशुद्ध शब्दों को शुद्ध कीजिए-
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन img-8

अभ्यास के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण प्रश्न
(i) अभ्यास के लिए शुद्ध – अशुद्ध वाक्य।

1. संग्रहित
(क) संघरित (ख) संगृहीत (ग) संग्रहीत (घ) संघह्वीत
उत्तर –
(ख) संगृहीत।।

2. प्रथक
(क) पृथक् (ख) पिरथक (ग) परथिक (घ) पिर्थक
उत्तर –
(क) पृथक्।

MP Board Solutions

3. उज्जवल
(क) उजवल (ख) उज्ज्वल (ग) उजवल्य (घ) उज्जवल
उत्तर –
(ख) उज्ज्वल

4. प्रनाम
(क) पिरणाम (ख) पिरनाम (ग) पृणाम (घ) प्रणाम
उत्तर –
(घ) प्रणाम।।

5. भैंस और बैल खड़े हैं
(क) भैंस खड़ा और बैल खड़ी है। (ख) भैंस और बैल दोनों खड़ी हैं। (ग) भैंस और बैल खड़ा हुआ है। (घ) भैंस और बैल दोनों खड़े हैं।
उत्तर –
(घ) भैंस और बैल दोनों खड़े हैं।

6. आगरा के अन्दर हैजा का जोर है
(क) आगरा के अन्दर हैजा (ख) हैजा का जोर है आगरा में। का प्रकोप है। (ग) हैजा का प्रकोप है आगरा में। (घ) आगरा में प्रकोप है हैजा का।
उत्तर –
(घ) आगरा में प्रकोप है हैजा का।

7. उसे अनुत्तीर्ण होने की आशा है
(क) आशा है उसे अनुत्तीर्ण (ख) अनुत्तीर्ण होने की उसे आशंका होने की। (ग) उसे आशंका है अनुत्तीर्ण (घ) उसे अनुत्तीर्ण होने की आशंका होने की।
उत्तर –
(घ) उसे अनुत्तीर्ण होने की आशंका है।

(ii) शब्दों के क्रम संबंधी अशुद्धियों को शुद्ध कीजिए
अशुद्ध – राम, जो कल भूखा था, ने अभी तक कोई भोजन नहीं किया।
शुद्ध – राम, जो कल भूखा था अभी तक भोजन नहीं किया।
अशुद्ध – राम बाजार से फूलों की माला एक लाई।।
शुद्ध – राम बाजार से एक फूलों की माला लाया।
अशुद्ध – सब लड़कियाँ अपनी किताब और कल से लिख और पढ़ रहे थे।
शुद्ध – सब लड़कियाँ अपनी किताब और कलम से पढ़ ओर लिख रही थीं।

MP Board Solutions

(iii) प्रत्यय संबंधी अशुद्धियाँ दूर कीजिए
अशुद्ध – राम यह कार्य आवश्यकीय है।
शुद्ध – राम यह कार्य आवश्यक है।
अशुद्ध – आपकी सौजन्यता से मेरे पुत्र को नौकरी मिल गई।
शुद्ध – आपके सौजन्य से मेरे पुत्र को नौकरी मिल गई।
अशुद्ध – साधु के माथे पर रामानन्द तिलक है।
शुद्ध – साधु के माथे पर रामानन्दी तिलक है।

(iv) अनुस्वार एवं चन्द्र बिन्दु संबंधी अशुद्धियाँ शुद्ध कीजिए–
MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अशुद्ध गद्यांश की भाषा का परिमार्जन img-9

MP Board Class 12th Hindi Solutions

MP Board Class 12th Special English Model Question Paper

MP Board Class 12th Special English Model Question Paper

Time : 3 Hours
Maximum Marks : 100

Instructions:

  1. Attempt all the questions.
  2. Read the questions carefully and do accordingly.
  3. Marks allotted to each question are indicated against it.

Unit 1

1. Read the passage carefully and answer the questions given below it:
Human beings are made up mostly of water, in roughly the same percentage as water is to the surface of the earth. Our tissues and membranes, our brains and hearts, our sweat and tears-all reflect the same recipe for life, in which efficient use is made of those ingredients available on the surface of the earth. We are 23 percent carbon, 2.6 percent nitrogen, 1.4 percent calcium, 1.1 percent phosphorus, with tiny amounts of roughly three dozen other elements. But above all we have oxygen (61 percent) and hydrogen (10 percent), fused together in the unique molecular combination known as water, which makes up 71 percent of the human body.

MP Board Solutions

Questions:
(i) What are the contents of a human body? [2]
(ii) The word ‘efficient’ means: [1]
(a) Capable (b) difficult (c) noteworthy (d) Easy.
(iii) Give opposite word for ‘roughly’. [1]
(iv) Give noun form of the word ‘reflected’. [1]
Answers:
(i) The contents of human body are water, carbon, oxygen, nitrogen, calcium, phosphorous, hydrogen and some other elements.
(ii) (a) Capable.
(iii) exactly.
(iv) reflection.

2. Read the following extract carefully and answer the questions given below it.
An intellectual hatred is the worst,
So let her think opinions are accursed
Have I not seen the loveliest woman born
Out of the mouth of Plenty’s horn
Because of another opinionated mind
Barter other horn and every good
By quiet.natures.understood
For an old bellows full of angry wind.

Questions:
(i) What is the worst kind in poet’s eyes? [1]
(a) angry wind (b) quiet nature (c) opinions (d) intellectual hatred.
(ii) ‘Opinionated’ means [1]
(iii) Make noun from the word intellectual. [1]
(iv) What are the evil effects of ‘Horn of plenty’? [2]
Answers:
(i) (d) intellectual hatred.
(ii) ‘Opinionated means-having very strong opinions that you are not willing to change.’
(iii) Intellect.
(iv) It gives birth to hatred to mankind as it gives abundance so who do not have it becomes jealous of others.

3. Answer any six of the following questions in about 30 words each. [6×2 = 12]

(i) How did Madam Forestier react when Mathilde returned the necklace?
Answer:
When Mathilde returned the necklace Madame Forestier reacted that she (Mathilde) should have returned it sooner. She (Forestier) might have needed it.

(ii) What threat do rising sea levels pose to human population?
Answer:
Rising sea levels will lead to loss of low-lying coastal areas around the world which will further give rise in number of refugees as one-third of population live within sixty kilometers of coastline.

(iii) Why should the youth form the vanguard in all activities?
Answer:
Theyouths should form the vanguara in all activities for they have the capacity to resist aggression and at this critical juncture its power must be mobilized.

(iv) What does Albert mean by civilized human beings?

(v) What was Netaji’s proposal during the annual session of the Indian National Congress?
Answer:
Netaji proposed that the congress should at once send an ultimatum to the British government demanding independence within six months or prepare immediately for a national struggle.

(vi) Why has Surat been mentioned in the poem ‘Goodbye Party for Miss Pushpa T.S.’
Answer:
Surat has been mentioned in the poem because the poet is confused about the place Pushpa’s father belonged to and also the poet remembers his stay at Surat once.

(vii) What helps the poet balancing his weight on the ladder round?
Answer:
The instep arch helps the poet in balancing his weight on the ladder-round.

4. Answer any two of the following questions in about 75-100 words. [2 x 4 = 8]

(i) How has the Casuarina tree been personified in the poem?
Answer:
‘Our Casuarina Tree’ is a poem written to express the feeling of the poetess. It is not merely the description of a tree but it is a tribute to the tree. The poetess presonifies the tree. She bestoWs alihuman feelings to the tree. The generous attitude of the tree is great. The tree comforts all. It also shares the joys and sorrows of the human beings. The poetess feels the tree shedding tears and lamenting at the death of her brother and sister. The tree is also destined to die like human being. Thus, it has been personified. It is not unaffected from human curses as well.

(ii) Analyse the poem ‘On this Being Arrived at the age of Twenty Three’ as a Petrachan Sonnet.
Answer:
Sonnet is a short poem of fourteen lines expressing a single thought or emotion at a time. It owes its popularisation to the 14th century Italian poet Francsco Petrarch who used this poetic form to express his love for his idealised lady love, Laura. John Milton uses the original Italian (Petrarchan) form to express his devotion to God or sublime feelings. hi this form, the poem is divided into two parts—the octave (a stanza of eight lines) and the sestet (a stanza of six lines). The first part makes a statement or puts up a question while the second part illustrates or serves the answer to it. On Being Arrived at the Age of Twenty-three is a devotional sonnet in Petrarchan form. It is a striking example of the Renaissance ethos and Reformation zeal. It is an assertion of faith and a wish to be guided by the divine will.

(iii) Justify the statement that ‘Dream Children: A Reverie’ is a lyric in prose.
Answer:
Dream Children: A Reverie is an outburst of a flow of imagination of Charles Lamb. Lamb was said to be the Prince of English essayists. He wrote this essay when he was nearing his fifties. As his life was not at all happy and comfortable, he towards the end of his life, has expressed his dreams which couldn’t be fulfilled during his lifetime. He had suffered a lot in his life. He himself was lame. His elder brother whom he loved so much died in great pain. He missed him because he usually carried him on his back when he could not walk. In his youth, Lamb had a disappointing love-affair with a girl who afterwards married another man. He was a bachelor. He lived in utter loneliness. Though he wanted a family and children but they were denied to him in his actual life. In this essay he is dreaming for having two children, on both of his sides behaving like real children. Although the story has created a moving life situation which has all the elements of a lyric. This is a flow which makes one completely engrossed with the story

Unit 2: Grammar

5. Do as directed (any Five). [5 x 1 = 5]
(i) Rewrite the following sentence by using ‘it’: To see you is a real pleasure.
Answer:
It is a real pleasure to see you.

(ii) People expect better results this time. (Change the voice)
Answer:
Better results are expected this time.

(iii) Ronak does his work properly. (Make a negative sentence)
Answer:
Ronak does not do his work properly.

(iv) The teacher said, “Man is Moral”. (Change the narration)
Answer:
The teacher told that man is moral.

(v) The toys are very expensive. We can’t afford to buy them. (use ‘so that’ and rewrite the sentence)
Answer:
The toys are so expensive that we can’t afford.to buy them.

MP Board Solutions

(vi) Use the proper determiner (Are there letters for me.) (some/any/much)
Answer:
Any.

(vii) The book is lost that you gave me yesterday.(Combine the sentence to make a complex sentence)
Answer:
The book you gave me yesterday is lost.

6. Do as directed. [5 x 1 = 5]
(i) Give syllable division of the word ‘department’.
(ii) How many syllables does the word ‘examination’ have?
(iii) Head, bend, cattle, men. (Pick out the odd one)
(iv) Write down the word which has (VC syllable)
(v) Mother Teresa won many international (award/awards)
Answer:
(i) department,
(ii) 4 syllables,
(iii) bend,
(iv) pen,
(v) awards.

Unit 3: Fiction

7. Answer any one of the following questions (120 words) [5]
(i) Describe how Swaminathan passed Monday in his school.
Answer:
Swami is a student of the First Form (Section A). It is Monday morning and Swami hates Mondays, for it means activity, discipline and work, after his enjoyment on Saturday and Sunday. As Swami sits on the table in his ‘room’—which is merely a table in the dressing- room of his father—he finds that he has a lot of home work to do, and only two hours for doing it. He feels bored and tired, and is in no mood for work.

He reaches the class on time and we are introduced to the fire-eyed teacher Vedanayagantie class-teacher and also arithmetic teacher. Swami does not like hini and we get a taste of Narayan’s verbal humour when we are told that Swami’s “çriticism of the teacher’s face was that his eyes were too near each other, that there was more hair on his chin than one saw from the bench, and that he was very very bad-looking.” All the sums done by Swami are wrong, they are crossed out, the remark ‘very bad’ is given, he is very severely pinched over his left ear, and told to go back to his seat.

Then comes the History period, and the teacher is Dr Pillai. His method of teaching is interesting, but it does not conform to any known principles of education. It is followed by the scripture period and the teacher, Ebenczar, is a fanatic Christian. He constantly criticises and abuses 1-lindu Gods who, for him, are merely pieces of stone.

(ii) Imagine yourself as Swaminathan and narrate the following incident: Encounter between Mani and Rajam near Nallapp’s grove.
Answer:
Mani was my best friend. He had a good personality. He never cared for study. He never brought any book to the class and never bothered about homework. He always bullied all strangers who came his way, be they big or small but, one day, a new entrant, Rajam, came as ¿i challenge for him. Rajam was the son of the Superintendent of Police. He was well-mannered, well-dressed and also a brilliant student. He became a rival to Mani. Mani challenged him and invited him at Nallappa’s grove on the river side to decide who was superior. They reached there—Mani with his club and Rajam with his airgun. Mani was thinking, now he woutd teach Rajam a lesson. He would break his neck and kill him. Then Rajam came and each of them blamed each other. Mani said that Rajam shouldn’t have brought gun and Rajam said that Mani shouldn’t have brought his club. However, after a long discussion, they withdrew. Raam and Mani became friends. Rajam offered chocolate. I was happy for I had managed for all these.

8. Answer ‘any five’ of the following questions in 30 words. [5 x 2 = 10]
(i) What were the similarities between Swaminathan and Samuel, the Pea?
Answer:
(Md’. Board 2009)
Swami’s another bosom friend was Samuel, the Pea. He was called the Pea as he was very small in size. There is nothing uncommon about him, for he is neither a good student nor physically remarkable. The only similarity between them was laughter. They were ab1eo see together the same absurdities and incongruities in things. The most trivial and unnoticeable things to others would tickle them to death.

(ii) What did Mani decide to do with Rajam?
Answer:
Mani didn’t like Rajam. Rajam made a good impact in class and also in school. Mani grew jealous of him. So, Mani wanted to bundle him into the river or to crack his shoulders with his club. Mani wanted to have a duel with Rajam. He was raging in anger and wanted to break his bones.

(iii) Describe Swaminathan’s state of mind when Sankar, Somu and others stopped talking to him.
Answer:
Swami was feeling restless when Sankar, Somu, and others stopped talking to him. He was feeling lonely His friends were also hostile to him. It was very painful for poor Swami but he could not help it. He wanted to talk to them and crack jokes but he was helpless. He was feeling uncomfortable.

(iv) What did the Headmaster ask the students to do during the vacation?
Answer:

The headmastét came and announced the closure of school for the vacation. He also hoped that the boys would not waste their time but read story-books and keep glancing through the books prescribed for their next classes to which it was hoped they would be promoted.

(v) Why was Swaminathan cold and reserve to his mother when he was taken to her room?
Answer:
Swammatban’s mother was in labour pain. She had been in bed for two days. Swami didn’t see her in kitchen. He felt uncomfortable in her absence. When he was taken to her room, he found her lying weak and pale on the bed. She called him closer to her. As Swami was not so mature, he couldn’t understand what was going on. He was cold and reserved when he came in the room.

(vi) How did Mani contemplate taking revenge on Somu, Sankar and the Pea?
Answer:
Mani contemplated taking revenge on Somu, Sankar and the Pea by breaking Somu’s waist, then he will get Pea under his heel and press him to earth and finally he will hang Sankar by his neck over Sarayu from Peepul branch.

Unit 4: Drama

9. Answer any one of the following questions in (120 words) [5]

(i) Give an account of the way the Silver Box was recovered from the residence of Jones.
Answer:
When Mrs Jones detects the stolen purse, she thinks to return it to he; employet So, when Jones is out she shakes out his coat. The silver box falls down from the coat pocket. She looks hard at it but Jones snatches it from her hands with a promise that he would throw it away into the river along with the purse. On the other hand, when Barthwick finds the box missing, he asks Snow, a detective, to search it. Snow, out of doubt, comes to Jones house just at the time when Jones is trying to take the box from his wife who takes it to go to return it to Borthwick. Snow detects the letters J.B. carried on it and is sure it was the stolen one from Barthwick’s house.

(ii) What shortcomings of the British Judicial System emerge out of the play ‘The Silver Box’.
Answer:
The Silver Box may be regarded as a problematic play. It is a social tragedy. The victims are poor Jones, his wife and children. The victimizer in the case is not so much the wealthy liberal, Mr. Barthwick as law itself. Galsworthy indicts the established institution of law courts which is held in the highest ešteem for its fairness. The ground reality is that the scales of justice are tilted in favour of men of position and wealth. The principle of equality before law is a paper tiger, a legal fiction. Jack and Jones are equally wicked. Both are eqùally guilty of misconduct, moral degradation and stealing but the law treats them differently. Jack is able to get the support and protection provided by his father, the advocate, and the constable. His offence of stealing is ignored and the Magistrate acquits hjm. However poor Jones who pleads his case himself, is silenced and sent to prison. The clear message conveyed by the play is that Justice is not blind, she is just ashamed to watch.

MP Board Solutions

10. Attempt any five of the following questions [30 words each] [5×2 = 10]

(i) What would the members of the. Labour Party do, according to Mr. Barthwick, once they came to power?
Answer:
Acording to tr Barthwick, the Members of the Labour Party would deprive the upper classes of their rights and property once they came to power.

(ii) What makes the unknown lady meet young Jack so early in the morning?
Answer:
She met young Jack so early in the morning because her crimson silk purse had been stolen and she had seen Jack Barthwick stealing it.

(iii) What excuse did Jones provide for picking up the Silver Box?
Answer:
He said that he was not a thief. Whatever he did was because of his drunken state.

(iv) What questions did Jones ask Jack when the case was in progress before the magistrate?
Answer:
jons asked Jack, “Don’t yoù remèmber you said you were a Liberal, same as your father, and you asked mc what I was?”

(v) why does Jones give a blow to snow?
Answer:
Because Jones knows that he was innocent.

(vi) Describe in your own words the room in which the Jones lived.
Answer:
The room in which the Jones lived was a base one with tattered oilcloth and damp, distempered walls. It has an air of tidy wretchedness.

Unit 5: Reading Unseen
11. Read the following passage carefully and answer the questions that follow. [4 + 6 = 10]
Twin top rankings reflect rise of Women in Indian Sports: Saina Nehwal After reclaiming the top spot in badminton Singles rankings, Saina Nehwal is doubly delighted at fellow Hyderabadi tennis ace Sania Mirza’s rise to the summit of the Womens’ Doubles rankings and says the twin achievements reflect the rise of women power in the domain of Indian sports.

“Sania Mirza is a big name in the world of tennis, she is the number one in her game. I wish her all the best in her future endeavors” Saina said on Sunday.

“Women in sports have come up in a big way in recent past and I congratulate all of them, including Mary Kom, Krishna Poonia, Geeta Phogat, Babita Kumari, Heena Sidhu and Sania Mirza,” she said.

“It is good that women power is visible in sports,” she said, crediting the central government’s sports policies for the success stories. Sania was elevated to the No. 1 spot in the Women’s Doubles rankings, according to the latest Women’s Tennis Association (WTA) list released on April 13.
Saina became the first Indian women to be crowned World No.l on March 29 after her Indian Open Grand Prix triumph. But she dropped to the second place, overtaken by China’s Li Xuerui, following her semi-finals exit in the Malaysia Open Super series. But she regained the top slot after Li pulled out of Singapore Open Super Series.

Sania, on the other hand, leap frogged to the top spot after winning her third consecutive Women’s Tennis Association (WTA) title-The Family Circle Cup-with new partner Martina Hingis.

“I am proud to be World No. 1 in badminton. It is really tough to reach the pinnacle in badminton… it took me five years to realise my dream as I became World No. 2 in 2010”, The right-handed shuttler said.

The 25-year-old Saina is the only non-Chinese to get tire top billing since 2010 when Denmark’s Tine Raun ruled the rankings. The 2012 Olympic Games bronze medalist dedicated her recent feat to her parents, coaches and well-wishers.

When asked what makes a Chinese player so tough to beat, she said: “May be these players are trained on best infrastructure they have created for each sport and the availability of best coaches compared to India and other countries where hardly a few best coaches are available.”

“The number of players (in China) is also very high compared to us where there is a shortage of players.”

“Luckily I started my career on best infrastructure created in India at Gopi’s (Pullela Gopichand) Academy at Hyderabad in 2004 and continued till 2014 during which I won national Championships, Junior World Cup and some of Super Series and Gold Grand Prix Tournaments,” she added.

Saina has clinched gold in the 2010 Commonwealth Games and bronze in the 2006 edition, besides picking up a bronze at the Incheon Asian Games last year.

In 2014, she became the first Indian woman to win the China Open Super Series Premier beating Japan’s Akane Yamaguchi in the final.
In another first for Indian women shuttlers, Saina reached the All England open Badminton final last month, but lost to Spain’s Carolina Marin recently.

In 2014, Saina shifted to Prakash Padukone s academy in Bangalore. Since then she has been under the tutelage of Vimal Kumar. Former men’s No. 1 player Padukone also gave her valuable tips.

Saina credited ex-coach Gopichand and incumbent Vimal Kumar for her success. “Both of them are the best of badminton coaches in India. With Gopi sir, I won a number of tournaments and now with Vimal sir my progress is visible in the last seven months,” she said.

With expectations climbing high with each day, Saina said her ultimate aim is the Olympics games.

“I, as a badminton player, will give my 100 percent for my sport. I have to show better results in the World Cup. Many Super Series are lined up” the star said.

MP Board Solutions

Questions:
(i) Delighted mean. [1]
Answer:
Very happy.

(ii) Elevated means [1]
Answer:
High in rank.

(iii) Give a word similar in meaning to ‘triumph’. [1]
Answer:
Victory.

(iv) Clinched means (in a word). [1]
Answer:
Succeeded.

(v) Explain: she is the number one in her game. [2]
Answer:
Sania Mirza is number one in her game i.e. tennis.

(vi) What did Saina tell when asked what makes a Chinese player so tough to beat? [2]
Answer:
She said that there is a possibility that Chinese players were trained on best infrastructure they had created for each sport and the availability of best coaches compared to India and other countries where hardly a few best coaches were available.

(vii) Name the women sports persons whom Saina congratulated. [2]
Answer:
Name of the women sports persons whom Saina congratulated are-Mary Kom, Krishna Poonia, Geeta Phogat, Babita Kumari, Heena Sidhu and Sania Mirza. Read the following poem carefully and answer the questions that follow. [5]

12. Read the following poem carefully and answer the questions that tollow.
Happiness is like a crystal,
Fari and exquisite and clean,
Broken in a million pieces,
Shattered, scattered far and near.
Nov and then along life’s pathway.
Like, some showing fragments fall;
But these are so many pieces
No one ever finds them all

Questions :
(i) The poet compares happiness with. [1]
Answer:
Crystal.

(ii) No one ever finds them all meAnswer: [1]
Answer:
It means ‘no one gets complete happiness’.

(iii) Give opposite word for ‘exquisite’? [1]
Answer:
Ugly.

(iv) What dees the poet want to say here? [2]
Answer:
The poet here wants to say that happiness is scattered here and there in man’s pathway. Now it is upto man how much happiness he manages to get.

Unit 6: Writing/Essay

13. Write an essay on any one of the following topics in about 250 words: [7]
(i) Pollution: A Treat to our Life.
(ii) Politics of Coalition in India.
(iii) My Favourite Game.
(iv) A Visit to a Historical Place.
Answer:
(ii) Politics of Coalition in India
At present Indian politics is under the process of development. Although right from the time of freedom movement the process is on but during the last twenty years there have been a lot of changes. Due to selfish motto of political parties, the aim of getting power to rule things has gone the worst.

Indian politics has lost the real component of fair practice in politics. The means should be right and pure to achieve the object but in our country now the attraction of power is so much that nobody cares for the meAnswer: For example, for winning the election they adopt all those malpractices which are immoral in our society. After election horse-trading goes on to capture power. Ministers, officials and leader of political parties adopt immoral ways and means to earn money.

After 2000, many cases of corruption were detected in public life in which leaders, Government officials, servants, contractors, brokers and anti-social elements were involved. The fashion and tradition of commission increased the corruption in all walks of life. During the last ten years, there were a lot of scandals in which so many, ministers, secretaries, directors, government officers and servants are found involved. The cases of share scandal, hawala, 2G and Coal are the worst which have opened the new chapter of corruption in public life. Though these scandals are mere examples, there are a lot of such scandals which are still to be brought into light. Indeed there is a lot of corruption in our public life. Bribery has become a courtesy. No work is done without it. Almost all the measures adopted to control it have failed head long, because most of our leaders, political workers, government officers, public servants, contractors, brokers, businessmen, traders, industrialists are directly or indirectly involved in the cases of corruption. Some of them have been caught while the others are still beyond reach.

At present even the representatives of people such as some of the MLAs, MPs and ministers, government officers and servants are following the path of corruption and they are making hay while the sun shines. The whole system has become so spoiled and corrupt that it needs well planned serious efforts.

MP Board Solutions

As now-a-days no party is getting absolute majority at the centre so the politics of coalition is going on. It is giving us weak governments. Moreover, the country has to fall to mid term polls due to coalition politics. This new trend now seems to be the way of Indian politics. In coalition form of govt, it becomes very critical for one to run the of govt, and control the parties of different ideas. For example two successive govt, had ruled India-one the NDA and now the UPA. This trend is not at all good for the nation.

But a change in this trend has been seen during the 2014 Lok Sabha Election. Though still a coalition, BJP could get itself 285 seats in Lok Sabha which is sufficient enough to form the government. So the coalition era may end if the unstability and policy created continues in politics.

14. You are Gaurav. You have read the following news article. (4)
At the heart of the literacy campaign is the volunteer, who as instructor, resource person or local organizer, gives freely his/her time and puts in enormous effort to make the campaign succeed.

You have decided to speak at the school assembly on the experience of students who volunteer to take literacy classes. Prepare the speech taking help from the news article and your own view. (50 words)

Or

Write a report on the Annual Day celebration in your school. You are Sukhbir of New Bhopal Academy.
Answer:
Illiteracy is one of the major problems that confront our country. This problem assumes alarming proportions because of the democratic rule in our country. Democracy, which postulates enlightenment, is by and large a blessing, and illiteracy, which implies ignorance, is therefore a curse.

To eradicate illiteracy to some extent, various students volunteets to take literacy classes and feel proud to help their unfortunate countrymen who have been deprived of the privilege of being educated. These voluntary workers, after receiving certain incentives and being provided with the requisite facilities ensure better results in the social arena. They have adopted new paths and motivated a large section of masses towards their literacy classes. This voluntary service on the part of students, has proven to be an effective measure for reaching out to the uneducated masses and thereby further helped the illiterate persons to eradicate their constant exploitation and humiliation at the hands of society. The students have helped these people to become aware of the benefits of being literate/ educated. They have also helped the illiterate persons to move towards a positive change.

By undertaking this creditable, but herculean task, these students feel a sense of pride in being able to make their contribution to take their country on the path of fast growth and progress.

MP Board Class 11th English Solutions

MP Board Class 12th Special English Writing Short Composition

MP Board Class 12th Special English Writing Short Composition

1. Robert of Class XII is not coming to school because he is suffering from fever. He wants you to write an application to the Principal to excuse his absence from school for a week: Write this letter on his behalf. (M.P. Board 2009)
Answer:
The Principal
Sr. Sec. School
XYZ Block
New Delhi
19th December, 20xx

Subject: Leave application due to fever.

Sir,
I am David of Class XII. I am, on behalf of Robert writing this letter to you g. to inform you that he will be unable to attend the school from 17 Dec. 20xx as he has been suffering from typhoid fever. He is taking strong medicines to relieve himself of the disease but it will still take him about one more week to get well. At present he is unable to even write, so I am writing this application on his behalf. Please grant him one week’s leave. He will make up for the classes. I am sure you will understand his plight and grant him leave.

Thanking you.

Yours sincerely
‘David,
XII-A

MP Board Solutions

2. Abhishek of 8, Indira Nagar, Bhopal is not happy with the sanitary conditions of his locality. He decides to write a letter to the local sanitary Inspector of the town to look into the sorry state of affairs. Write a letter on his behalf. (M.P. Board 2009)
Answer:
The Sanitary Inspector
Bhopal Municipal Corporation
Bhopal
27th November, 20xx ,

Subject: Complaint regarding poor sanitary conditions.

Sir,
I am Abhishek, a local resident of 8, Indira Nagar, Bhopal. It is unfortunate that the local civic bodies have remained indifferent towards the cleaning of Indira Nagar locality. Our area presently is in a sorry state of affairs. There are no sweepers to clear the heaps of garbage that lie unattended and start emitting foul smell. The garbage also attracts street dogs and pigs who are keen on rolling over there. The drains of our locality are perpetually blocked and this creates totally insanitary and unhygienic conditions. Installation of dust-bins in the locality has not really helped to improve the situation because even if people make use of these dustbins to dispose of garbage, these dustbins are rarely emptied. It is advisable to supply big polythene litter bags, instead of dustbins, which make the disposition of garbage easier. The water-logging in the locality has proved an ideal breeding place for mosquitoes. The need of the hour is to have regular visits of officials from your department to inspect the locality and to have meetings with the residents of the locality in order to make our locality a better and hygienic place to live in.

I hope you will personally supervise this situation and we hope to hear from you soon.

Yours sincerely
Abhishek

3. Srishti has been asked to write an information brochure for her classmates who plan an excursion to Fatehgarh in summer. She has made the following notes. Use these notes together with your own ideas and write the brochure.

What to see : Palaces, waterfalls, gardens
Palaces galleries : Maharani’s Palace includes Wax Palace—540 AD—Whispering Sculptures—ancient rulers—limbs missing in a few.
Waterfalls : Varsha—500 feet, stream on the outskirts
Gardens : Rose gardens—Orchards—Vineyards

Answer:
This summer, as usual, we have planned an excursion for the class—a visit to FATEHGARH which is not only beautiful but also has a historical significance. Fatehgarh lies in the State of Uttar Pradesh. It is an eight-hour journey by bus; On reaching Fatehgarh we will be lounged in a Government Guest House. From there we shall proceed to visit the most famous place in Fatehgarh, the Maharani’s Palace, which includes the Wax Palace. It was built in 540 A.D. and it is known for its whispering galleries and the beautiful sculptures of ancient rulers. These sculptures are ancient, so it is not surprising that the limbs of a few rulers in some of these sculptures may be found missing. This palace is indeed one of the few examples of ancient Indian art and gives us a peep into the glorious and rich cultural art of ancient Indian history.

To cool you in the summers, we shall visit the Varsha waterfalls which fall from a height of 500 feet. It is a splendour to watch the water as it lashes down on to the ground and presents the most delightful sight. We also plan a visit to a stream which lies on the outskirts of Fatehgarh. Besides this, our excursion will include a visit to the beautiful rose gardens, fruit orchards and vineyards to view the flowers and the fruits in their full bloom. It promises to be an excursion which should not be missed and I can assure you that Our visit to Fatehgarh will be the most exciting and informative.

4. Sumit lives in a village. The entire village is worried about the degradation of Nila Lake in the village. He writes an article for publication in the local newspaper highlighting various factors responsible for the degradation of the lake. Use the information given below and write the article.

Construction of roads and bridges Deforestation of catchment area Illegal occupation Pollution
1. Flooding 1. decrease in water level 1. blockage of canals 1. loss of water organisms
2. Disturbing the natural drainage 2. increase in the growth of weeds 2. flooding 2. fewer visiting birds
3. shortage of drinking water 3. reduction cf fish

Answer:
I am being compelled to write this article to voice the concern of our entire village, Rampur, regarding the degradation of Nila Lake. This lake has been a part and parcel of our lives for numerous years and so it is very natural that our entire village is concerned about its degradation.

To provide an easy access to our village the construction of numerous roads and bridges has been taken up in recent years. Unfortunately, this has led to flooding almost every year during the rainy season and has also disturbed the natural drainage system. Due to deforestation of a large portion of the catchment area around the lake, the water level of the lake has decreased and there has been an increase in ’ the growth of weeds. There is also a considerable amount of reduction of fish in the lake. Illegal occupation of land around the lake has led to blockage of canals and shortage of drinking water. The lake water has become very polluted and there is a loss of water organisms. The number of migratory birds visiting the area has also decreased. So, it is indeed pathetic to see this slow but sure degeneration of Nila Lake which has been a major source of sustenance of our entire village.

We sincerely hope that after going through this article in your esteemed newspaper, concerned environmentalists will surely come forward to save Nila Lake from total degradation and effective measures will be taken up to improvise upon the present situation.

5. You are required to write an article for your school magazine on ‘Importance of Music in Life.’ Write it with the help of these notes in about 150-175 words.
Answer:
Music, be it vocal or instrumental, has indeed assumed a place of importance in , our complicated and hectic lives. It acts as a stimulant which activates our body ’ and mind. Music is also regarded as a fine art which attracts people of all age groups to pursue it not only as a hobby but also as a profession. A person endowed with musical capabilities regards this attribute as a natural gift which provides food for his soul. Some of the great musicians are held in very high esteem irrespective of the kind of music they propagate, whether Western, Oriental, Classical, Pop or Light. These musicians organise their concerts which attract people from all walks of life. These concerts can also be of great benefit to the children, who are interested in pursuing music as a hobby or career in their lives and receive musical training at the school level itself. By receiving training in music from a very young age, the basics of music will be instilled in a child and he will be able to relate to music very easily at a later stage in life. Therefore, each school should have the facilities needed .to give proper musical training to children. It is true that life these days is full of tensions and worries at every age. If there is no stimulating diversion in the form of music for a person, his life will become dismal and monotonous.

MP Board Solutions

6. John writes a page of his diary recording his first experience of a public exami-nation. Below are listed his experiences. Write out a page of his diary.
Answer:
5th March, 20xx, 2 p.m.
On entering the examination hall/1 was appearing for my first public examination, the Science Olympiad, I had an extremely nervous feeling. The examination hall presented a rather dreary look. The only saving grace, in my opinion, Was a beautiful and enchanting portrait of Virgin Mary With Baby Jesus in her arms, hung inside the examination hall, to invoke a sense of confidence in the students and to remind us that we had the guidance and blessings of the Lord. I prayed to God fervently uncaring about the noise around me. The other students were rushing towards the examination hall and were busy in finding the correct seats in a hall that looked huge and overwhelmingly frightening. Once everyone had been seated, the examiner gave us some instructions regarding what we were required to do and what we were strictly prohibited from doing.

Then I received the Question Paper and I sat thoughtfully reading and reflecting on it. After I had giveh a thorough reading to the Question Paper, I began to answer it keeping in mind the fact that I had three hours to complete the paper. I managed to complete the paper fifteen minutes before the stipulated time and then began revising my paper. I spotted and corrected the few silly mistakes and errors that I had made and re-wrote some lines. After being totally satisfied with all that I had written, I finished my paper, took God’s name for yet another time and finally submitted it to the examiner.

Yours sincerely,
John

7. Gopal of 12, Raja Ki Mandi, Agra, wants to express his displeasure to the Newspaper Editor regarding the news that the bus stand near the railway station is being shifted to a new location. He feels that this would cause great hardship to the passengers. He made these notes for writing a letter to the Editor, The Times of India, New Delhi.Write that letter with the help of given notes.
Answer:
The Editor
The Times of India
New Delhi
19th December, 20xx ,
Subject: Regarding the news of bus stand near railway, station.

Sir,
Through the medium of this letter I wish to express my displeasure at the news that the bus stand, which is near the railway station, is being shifted to a new location. This will indeed be a cause of great hardship to the passengers who are commuting daily by bus and train. The present location of the bus stand is very convenient for the people who have to travel by train from their homes to their place of work. These daily commuters find it extremely easy to board a bus from the near by railway station where they disembark from the train. If the bus stand is shifted, the common « man will be forced to waste his time, energy, and money unnecessarily. Many shops have also come up in the vicinity of the bus stand. These shopkeepers will also lose their earnings if the bus stand is shifted because their regular customers are those people who commute daily by bus and the tourists who come to visit Agra in order to see one of the seven wonders of the world, The Taj Mahal. Even the commuters have An easy access to the market from where they can purchase the goods for their daily needs easily.

I suggest a solution to this problem. If the urgency is felt, it is advisable to add one more bus stand at a distance instead of shifting the present bus stand to a new location and causing a great deal of inconvenience to all.

Yours sincerely
Gopal

8. Special repairs are required in your rented house. You have to write a letter to your landlord asking him to undertake the repair work immediately. Take the help of these notes and write a letter in not more than 100-125 words. (M.P. Board 2014,16)
Answer:
A-394, XYZ Colony .
ABC Block
11th June, 20xx –

Dear Mr. Dev,
I had written to you earlier also to get some repair work done in your house, which you have rented me.

Now since the rainy season is at the onset, I reiterate my request to you to undertake this repair work immediately. The roof is leaking at various places and the wall’s ‘ plaster has also come off. Not only this, the floor has pot-holes, which cause a lot of inconvenience. The window panes of three windows are broken making the house an easy prey to the warm winds and dust from outside. The switches too are loose and there is a danger of short circuit. The premises also needs white-wash and paint on the doors and windows. The house is indeed in a pathetic and appalling state and requires urgent repairs. I am willing to share the cost of the repairs with . you. With your permission I can get the repairs done myself and the expenditure can be later deducted in the rent in monthly instalments.
I request you to give priority attention to this matter and hope to hear from you at \ the earliest.

Yours sincerely
ABC

MP Board Solutions

9. You had sent a Money Order of ? 100 to M/s Subroto Publishing House, 36, Tagore Gardens, Kolkata as per the details given below. But it has not reached them till date. The details are: Money Order Registration No. 119 dated 2-l-20xx. Your address is 11, Teachers’ Colony, Naraingarh, (Punjab).
Write a letter of complaint to the Post Master in about 100-125 words.
Answer:
The Post Master
Naraingarh (Punjab)
31th January, 20xx

Subject: Complaint regarding delay of money order.

I would like to give in a written complaint regarding a misplaced Money Order that I had sent from your Post Office to Kolkata.

The Money Order Registration No. is 119 dated 2nd January 20xx. I had sent this Money Order of ₹100 to M/s Subroto Publishing House, 36, Tagore Gardens, Kolkata for a book that I needed urgently. On enquiring from them yesterday I found out that they had not dispatched the book because they have not received the required payment yet, whereas I have already sent ₹100 through a Money Order to them almost one month ago. Due to some negligence on the part of the Post Office Department, my Money Order has not yet reached them. I need the book urgently to prepare for my exams scheduled to start in the middle of March. So, it is my earnest request to you to look personally into the matter and make sure that my Money Order is received in Kolkata as soon as possible.

I hope you will ensure that my complaint is attended to at the earliest.

Thanking you.

Yours sincerely,
XYZ.

a sincere effort to keep our city clean, as a beautiful and clean city beckons the tourists.
By making these simple, but significant things possible, I am sure, tourism in our city can be improved.

Yours faithfully,
XYZ.

12. In an inter-school debate you have to speak in favour of the motion ‘Modem Gadgets have made us slaves tp machines’. Write a speech in favour of this motion,
Answer:
‘Modern Gadgets have made us slaves to machines’. Respected Principal, dear – teachers and my dear friends, today I am here to speak in favour of the topic ‘Modern Gadgets’ have made us slaves to machines’. I am endorsing the following points in favour of the given topic.

Modem gadgets have made us slaves to machines, without which it is as if our lives will undoubtedly come to a standstill. They have made the world jump forward with a leap, built up a glittering civilization, opened up innumerable avenues for the growth of knowledge, and added to the power of man to such an extent that it is possible to conceive that man could triumph over and shape his physical ! environment. Through the astonishing discoveries of these modern gadgets, man has been able to give a definite form to his imagination. It is indeed a fact that as a result of the invention of modern gadgets the tone and temper of life has changed beyond recognition. Through wireless telegraphs and fax machines messages can now be easily sent to any part of the world.

Modem gadgets incorporate all fhe comforts and highest standards in engineering innovation and reliability that have greatly contributed tp man’s welfare. New equipment for navigation, data-processing, computer-controlled radar system providing information on a variety of new products for use at construction sites are only some of the advantages of the modern gadgets. They have also greatly contributed’to our entertainment as radios, televisions, compact discs both audio and visual—are now no longer considered as luxury items but have assumed the status of being referred to as necessities. Indeed the advantages of these gadgets ate so many that they appear to have revolutionised every phase of life.

13. Anite johri of class X has just returned from a visit to Ooty which is in the grip of a severe water crisis. She finds that her hometown is also facing the same problem. She had picketl up th e following pamphlet from her hotel room and wants it tp be publicised.
WATER IS LIFE

DOs DON’ts
Washinghamd and face Half fill basin-2 litres Wash under running tap for 3- minutes-27 litres
Brushing teeth Use a glass of water-reuse-1/2 litre Let tap for 5 minutes-45 litres
Showering Turn off tap before soaping, then rinse down-20 litres Let tap run while soaping-90 litres
Bathing Leaky tap Take a shower instead Get it repaired Fill bath tub-110 litres Let it drip
Slow drip-400 litres a day
Fast drip-3000 litres a day

She decides to write a letter to the editor of the local newspaper highlighting ways and means of saving water.
Answer:
13, Baird Road
Pune, Maharashtra
The Editor
National Herald
Pune
11th June, 20xx ‘

Subject: Pamphlet publication regarding water crisis.

Sir,
I have returned from a visit to Ooty recently, which was in the grip of a severe water crisis. On returning to Pune, I found that the water problem is equally pathetic here. So, I would like to sugges* certain measures to save water. I had picked up a pamphlet from the hotel where I was staying at Ooty which highlighted the ways to save water and I want it to be publicised through your esteemed newspaper. Washing our hands and face under a running tap for only two minutes wastes about 27 litres of water whereas a half filled basin can do this work with only 2 litres of water. While brushing our teeth, if we let the tap run for five minutes, we waste 45 litres of water but if we use a glass of water, we consume only half a litre of water. If we turn off the tap while soaping our body before bathing, we use only f. 20 litres of water, whereas if we let it run we waste about 90 litres. We should avoid using bath-tubs as a filled bath tub wastes 110 litres of water. A leaky tap must be j repaired immediately because if the tap is allowed to leak slowly, it wastes 400 litres of water a day and a fast drip wastes 3,000 litres of water a day.

If each and every one of us understands it and decides to follow this simple but very important rule, we are sure to remedy our present water crisis to a great extent.

Yours sincerely
Anita Johri

14. Read the following extract from an article in a magazine and then using your own ideas as well, write an article for your school magazine on the Delights and Usefulness of Walking.
Answer:
The saying aptly goes, ‘A healthy body has a healthy mind’. So, it is imperative for each one of us to keep good health if we want our mind to be alert. In today’s hectic and busy life, it may, at times seem difficult to devote time for activities that keep us fit. This is where walking proves to be the most useful and easy activity.

Walking not only keeps our body healthy by the circulation of blood but also provides a delightful respite for us by the sheer delight it gitves. However, it is indeed a pity that some people who are most interested in walking refrain from it because in India walking is associated with deprivation and poverty. The false pride and wrong thinking then make them travel by car for even the shortest of distance. They would prefer to miss out on the delights of walking and prefer not to care about the good it would do to their health so as not to endanger their false prestige. It is high time that the educated lots of Indians put aside these petty notions and live their life for themselves and live it according to what they feel i s the best for them. Walking does not indicate deprivation and poverty and it is only the thinking of certain narrowminded people who have categorised the people walking or pedestrians as second class people.

Walking should be enjoyed as it gives pleasure and provides a wonderful opportunity for us to be in direct contact with nature, unlike at times the irksome ahd suffocating journey in a closed vehicle.

MP Board Solutions

15. Read the following summary of a study conducted titled, ‘The Impact of Television Advertising on Children’. Write an article for the school magazine titled ‘Children and TV Advertising’.
Answer:

Children and TV Advertising

Television has become a very popular mode of entertainment which is unfortunately also making children more and more addicted to watching it. The television programmes pose to dominate their daily routine and many a time children do not even hesitate to ignore their studies because of their passion to stay glued to the television sets.

Almost seventy-five per cent of the children, who watch television most eagerly, are essentially interested in seeing various types of advertisements on the television. Children in the younger age group, below ten years of age, view the advertisements with more interest and enthusiasm than they watch any other programme on television. This is so because they see these advertisements as wonderful and short pictures with story lines and their inquisitive nature is so impatient that they can easily endure these short ad films with a lot of patience. These young children are totally taken in by the vibrant and glorious world shown in the various ad films. Also sometimes the content of an advertisement is not apt for children which further takes a toll their innocent minds.

It is only the older and mature children who understand that the ad films’ mere intention is to lure the consumer into buying their products by elevating their goods to a high scale where they appear most appealing and attractive. So, it is our moral responsibility to make sure that the young children’s innocent and ignorant minds are not impressed by what the ad films have to offer, but they view them solely for their entertainment.

16. Maria of 7, Gandhi Road, Jaipur, is very interested in sports and concerned about the state of sports in the country. She decides to write a letter to the editor of The Herald, Jaipur, on Why can’t we win an Olympic Gold? Write out the letter on her behalf.
Answer:
The Editor
The Herald
Jaipur
12th September, 20xx

Subject: Letter regarding India’s poor performance in Olympic Games.

Sir,
I write this letter to you as a concerned sports enthusiast to express my anguish at the poor state of sports in our country, as a result of which we have been unable to win only a gold medal in the Olympic Games held so far.

I feel that there is no sports culture in our country, in general, and so we are not able to nurture and groom the plenty of talent that our nation has. When the sportspersons of our country have to play and compete with international players in the World Olympics, their training and coaching should also match to that of their international counterparts, whereas in ctur country, the facilities for training and coaching are lacking and to a certain extent expenditure to enhance these fa cilities is sometimes considered as not necessary., We may fail to realize the importance of coaching centres in our day-to-day life but our inability to win a gold medal at the Olympic Games so far should make us realize the importance, of trainirig centres. It is also very unfortunate that the funds and sports scholarships available to budding sportspersons are very few. Political intervention at the time of selection also at times prevents the selectors in selecting the better players to play at the international level. Last but not the least, the public in general and the selectors and trainers in particular, do not seem to be affected by the lack of this’sports culture’in our country. Through your esteemed newspaper, I wish to appeal to the sports enthusiasts as well as people in general to boost up the sports culture in our country.

Yours sincerely
Maria

17. Vi jay witnessed an accident near theschool gate where a child fell down and was hurt quite badly. Many people were standing around but did not knoVift what to do. Finally, , someone who had a car quickly took him to hospital. However, Vijay felt that at least some of the students should have been able to render first-aid. He decided to write a letter to the editor about the importance of knowing first-aid. Using your own ideas write out Vijay’s letter in not more than 100-125 words.
Answer:
The Editor
News Week
17th October, 20xx

Subject: Indias regarding importance of knowing first-aid.

Sir,
Last week, I witnessed an accident near the school gate where a child fell down and hurt himself badly. The people standing around were unable to do anything except look on helplessly. It was at this moment that I realized the importance of knowing first-aid.

I feel that it is imperative for students specially and the people in general to at least ’ have the basic knowledge of rendering first-aid in case of an emergency. The use of first-aid often helps us to sustain a life till proper medical aid is available. The knowledge of first-aid will prove helpful not only in case of an accident but also to treat a burntictim, help a drowned casualty, and at times just to stop one from bleeding. The importance of first-aid should be instilled into the minds of children : at the school stage itself so that they do not panic in an accidental situation but cautiously and sensibly put their knowledge about rendering first-aid to the person who requires it into practice. Nothing is more precious to a person than his life and if timely use of first-aid can help someone till the time professional medical help is : available, it can prove to be the life-saving remedy.

Hence, everyone must have the knowledge of first-aid.

Yours sincerely
veerendra

18. Gaurav read the following in a newspaper article:
At the heart of the literacy campaign is the volunteer, who as instructor, resource person or local organiser, gives freely of her or bis time and puts in enormous effort to make the campaign succeed. He decided to speak at the school assembly on the experience of students who volunteer to take literacy classes. Write out his speech.
Answer:
Respected principal, dear teachers and my dear friends, today I wish speak on the problem of illiteracy in our country and the role of volunteers, organisers, who put their enormus efforts to eradicate this problem. You all are humbly advised to contribute your spare time to make this literacy mission a success.

Illiteracy is one of the major problems that confront our country. This problem assumes alarming proportions because of the democratic rule in our country. Democracy, which postulates enlightenment, is by and large a blessing, and illiteracy, which implies ignorance is therefore a curse.

To eradicate illiteracy to some extent, various students volunteer to take literacy classes and feel proud to help their unfortunate countrymen who have been deprived of the privilege of being educated. These voluntary workers, after receiving certain incentives and being provided with the requisite facilities ensure better results in the social arena. They have adopted new paths and motivated a large section of – masses towards their literacy classes. This voluntary service on the part of students has proven to be an effective measure for reaching out to the uneducated masses and thereby, further helped the illiterate persons to eradicate their constant exploitation and humiliation at the hands of society. The students have helped these people to become aware of the benefits of being literate/educated. They have also helped the illiterate people to move towards a positive change.

By undertaking this creditable but herculean task, these students feel a sense of pride in being able to make their contribution to take their country on the path of fast growth and progress.

MP Board Solutions

19. You are required to speak on the subject ‘Pollution’ in the school morning assembly.
You may use ideas contained in the unit ‘Environment’. Write your speech.
Answer:
Environment
Environmental pollution is one of the major hazards that are threatening the ecological balance. The air that we inhale is polluted, the water we drink is contaminated and noise pollution has managed to take away the calmness and serenity from our otherwise hectic and tense lives. One of the main of pollution is the heavy and congested traffic which causes concentration of smoke and harmful particles in the atmosphere which is a permanent or chronic cause of various respiratory disorders. The incessant felling of trees, building of dams and the upcoming unplanned congested localities have disturbed the ecological balance to an alarmingly high level. To remedy this situation the urgent need of the hour is to plant as many trees wherever possible and to shift the factories and mills to places where their effect of pollution of the environment is minimum. To control traffic, car pools must be made so that the emission-levels from vehicular traffic can be reduced to the desired levels.

20. Write a letter to your friend inviting him to spend his vacation with you.
Answer:
56/4, Nehru Nagar,
New Delhi.
26th April, 20xx

Dear Ramesh,
Hope your examinations are over by now. What do you plan to do during the coming summer holidays? If you are hot going anywhere else, why don’t you come and . stay with us duringihese holidays? It shall indeed be of great fun. My Mummy and Daddy have been insisting me to invite you. Now, that you will be free, you must plan to visit Delhi. We shall move about and see various historical places in the capital. You would love to see the Red Fort, the Qutab Minar, Jama Masjid, and other places which attract numerous foreign tourists. You must be interested in watching these tall buildings. Don’t disappoint us this time. Do come down.

Your best friend,
Prakash

21. Write a letter to your father requesting him to allow you to go on an educational tour.
School Hostel
Govt. Boys Sr. Sec. School
Bhopal, Madhya Pradesh
8th May, 20xx

Respected Father,
I am fine here and hope you all to be well. You will be glad to know that I have done very well in the First Terminal Test which was held last week. I hope to get very good marks in all the subjects. Our school is organizing an educational tour to South India during the coming Autumn Break. Most of the students of my class are joining this tour. I, too, wish to join it. I am a student of history, so this tour will be of great practical advantage to me. This tour will be of about two weeks duration. We shall travel by a special railway boogie which is being reserved for us. Two senior teachers of the school will go with us on the tour. Each participant is to contribute ₹ 2,000 to meet the tour expenses.

With respect to mother and grandfather and love to Diplo.

Yours affectionately
Aakash

MP Board Solutions

22. Write a letter to the Editor of a local daily complaining about loudspeakers’ nuisance in yoUr area.
E-49, Model Town
Bhopal
27th February, 20xx
The Editor
The Hindustan Times,
Bhopal.

Subject: Complaint regarding nuisance caused by loudspeakers.

Sir,
I shall feel grateful if you kindly publish the following few lines in the columns of your esteemed daily. I wish to draw the attention of the public through your daily about the nuisance of loudspeakers in the city. Loudspeakers have become great nuisance in the city of late. I wonder why some people do not bother about other’s convenience. They have no right to disturb our peace by constant noise made by loudspeakers. The Police – authorities appear to be silent about this nuisance. Not>ody can play loudspeakers after 10 pm but the loudspeakers fitted on the religious places continue to disturb the public throughout the night. In the interest of studies of- students, I pray to the public not to play loudspeakers at a high pitch during the night and early in the morning so that the students can prepare for their examinations well.

Yours faithfully
K.S. Bains.

MP Board Class 12th English Solutions

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य

चुम्बकत्व एवं द्रव्य NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भू-चुम्बकत्व सम्बन्धी निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(a) एक सदिश को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए तीन राशियों की आवश्यकता होती है। उन तीन स्वतन्त्र राशियों के नाम लिखिए जो परम्परागत रूप से पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होती हैं।
(b) दक्षिण भारत में किसी स्थान पर नति कोण का मान लगभग 18° है। ब्रिटेन में आप इससे अधिक नति कोण की अपेक्षा करेंगे या कम की?
(c) यदि आप ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न शहर में भू-चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं का नक्शा बनाएँ तो ये रेखाएँ पृथ्वी के अन्दर जाएँगी या इससे बाहर आएँगी?
(d) एक चुम्बकीय सुई जो ऊर्ध्वाधर तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र है, यदि भू-चुम्बकीय उत्तर या दक्षिण ध्रुव पर रखी हो तो यह किस दिशा में संकेत करेगी?
(e) यह माना जाता है कि पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र लगभग एक चुम्बकीय द्विध्रुव के क्षेत्र जैसा है जो पृथ्वी के केन्द्र पर रखा है और जिसका द्विध्रुव आघूर्ण 8 × 10225 जूल टेस्ला-1 है। कोई ढंग सुझाइए जिससे इस संख्या के परिमाण की कोटि जाँची जा सके।
(f) भूगर्भशास्त्रियों का मानना है कि मुख्य N-S चुम्बकीय ध्रुवों के अतिरिक्त, पृथ्वी की सतह पर कई अन्य स्थानीय ध्रुव भी हैं, जो विभिन्न दिशाओं में विन्यस्त हैं। ऐसा होना कैसे सम्भव है?
उत्तर :
(a) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होने वाली तीन राशियाँ निम्नलिखित हैं-

  • नति कोण अथवा नमन कोण δ
  • दिक्पात का कोण θ
  • पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज अवयव BH

(b) चूँकि ब्रिटेन, दक्षिण भारत की तुलना में पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के अधिक समीप है, अतः यहाँ नति कोण अधिक होगा। वास्तव में ब्रिटेन में नति कोण लगभग 70° है।।
(c) ऑस्ट्रेलिया, पृथ्वी के दक्षिण गोलार्द्ध में स्थित है। चूंकि पृथ्वी के दक्षिण ध्रुव से चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ बाहर निकलती हैं, अत: ये पृथ्वी से बाहर निकलती प्रतीत होंगी।
(d) चूँकि ध्रुवों पर पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र ऊर्ध्वाधर होता है, अतः ध्रुवों पर लटकी चुम्बकीय सुई (जो ऊर्ध्वाधर तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र है) ऊर्ध्वाधर दिशा की ओर इंगित करेगी।

(e) यदि हम मान लें कि पृथ्वी के केन्द्र पर M चुम्बकीय-आघूर्ण का चुम्बकीय द्विध्रुव रखा है तो पृथ्वी के चुम्बकीय निरक्ष पर स्थित बिन्दुओं की इस द्विध्रुव के केन्द्र से दूरी पृथ्वी की त्रिज्या के बराबर होगी।
निरक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र \(B=\frac{\mu_{0}}{4 \pi} \cdot \frac{M}{r^{3}}\)
∴ \(M=\frac{4 \pi B r^{3}}{\mu_{0}} \)
प्रयोगों द्वारा पृथ्वी के चुम्बकीय निरक्ष पर B = 0.4 गॉस = 0.4 × 10-4 टेस्ला तथा
r = RE = 6.4 × 106 मीटर
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 1
= 10.5 × 1022
ऐम्पियर-मीटर 2 स्पष्ट है कि पृथ्वी के चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण का यह मान 8 × 1022 जूल टेस्ला-1 के अत्यन्त निकट है। इस प्रकार पृथ्वी के चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण के परिमाण की कोटि की जाँच की जा सकती है।
(f) यद्यपि पृथ्वी का सम्पूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र, एकल चुम्बकीय द्विध्रुव के कारण माना जाता है अपितु स्थानीय स्तर पर चुम्बकित पदार्थों के भण्डार अन्य चुम्बकीय ध्रुवों का निर्माण करते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(a) एक जगह से दूसरी जगह जाने पर पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र बदलता है। क्या यह समय के साथ भी
साथ भी बदलता है? यदि हाँ, तो कितने समय अन्तराल पर इसमें पर्याप्त परिवर्तन होते हैं?
(b) पृथ्वी के क्रोड में लोहा है, यह ज्ञात है। फिर भी भूगर्भशास्त्री इसको पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का स्रोत नहीं मानते। क्यों?
(c) पृथ्वी के क्रोड के बाहरी चालक भाग में प्रवाहित होने वाली आवेश धाराएँ भू-चुम्बकीय क्षेत्र के लिए उत्तरदायी समझी जाती हैं। इन धाराओं को बनाए रखने वाली बैटरी (ऊर्जा स्रोत) क्या हो सकती है?
(d) अपने 4-5 अरब वर्षों के इतिहास में पृथ्वी अपने चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा कई बार उलट चुकी होगी। भूगर्भशास्त्री, इतने सुदूर अतीत के पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के बारे में कैसे जान पाते हैं?
(e) बहुत अधिक दरियों पर (30,000 किमी से अधिक) पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र अपनी द्विध्रुवीय आकृति से काफी भिन्न हो जाता है। कौन-से कारक इस विकृति के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं?
(1) अन्तरातारकीय अन्तरिक्ष में 10-12 टेस्ला की कोटि का बहुत ही क्षीण चुम्बकीय क्षेत्र होता है। क्या इस क्षीण चुम्बकीय क्षेत्र के भी कुछ प्रभावी परिणाम हो सकते हैं? समझाइए।
उत्तर :
(a) यद्यपि यह सत्य है कि पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र समय के साथ बदलता है, परन्तु चुम्बकीय-क्षेत्र में प्रेक्षण योग्य परिवर्तन के लिए कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती। इसमें सैकड़ों वर्ष का समय भी लग सकता है।
(b) यह सुज्ञात तथ्य है कि पृथ्वी के क्रोड में पिघला हुआ लोहा है परन्तु इसका ताप लोहे के क्यूरी ताप से कहीं अधिक है। इतने उच्च ताप पर यह (लौहचुम्बकीय नहीं हो सकता) कोई चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न नहीं कर सकता।
(c) यह माना जाता है कि पृथ्वी के गर्भ में उपस्थित रेडियोऐक्टिव पदार्थों के विघटन से प्राप्त ऊर्जा ही आवेश धाराओं की ऊर्जा का स्रोत है।

(d) प्रारम्भ में पृथ्वी के गर्भ में अनेकों पिघली हुई चट्टानें थीं जो समय के साथ धीरे-धीरे ठोस होती चली गईं। इन चट्टानों में मौजूद लौह-चुम्बकीय पदार्थ उस समय के पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के अनुरूप संरेखित हो गए। इस प्रकार भूतकाल का पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र इन चट्टानों में चुम्बकीय पदार्थों के अनुरूपण में अभिलेखित है। इन चट्टानों का भूचुम्बकीय अध्ययन उस समय के पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ज्ञान प्रदान करता है।

(e) पृथ्वी के आयनमण्डल में अनेकों आवेशित कण विद्यमान रहते हैं जिनकी गति एक अलग चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। यही चुम्बकीय क्षेत्र, पृथ्वी तल से अधिक दूरी पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र को विकृत कर देता है। आयनों के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र सौर पवन पर निर्भर करता है।

(f) सूत्र R = \(\frac{m v}{q B}\) से, \(R \propto \frac{1}{B}\)
इससे स्पष्ट है कि अत्यन्त क्षीण चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण अति विशाल त्रिज्या का मार्ग अपनाता है जो कि थोड़ी दूरी में लगभग सरल रेखीय प्रतीत होता है, अत: छोटी दूरियों के लिए सूक्ष्म चुम्बकीय क्षेत्र अप्रभावी प्रतीत होते हैं परन्तु बड़ी दूरियों में ये प्रभावी विक्षेपण उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न 3.
एक छोटा छड़ चुम्बक जो एकसमान बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र 0.25 टेस्ला के साथ 30° का कोण बनाता है, पर 4.5 × 10-2 जूल का बल आघूर्ण लगता है। चुम्बक के चुम्बकीय-आघूर्ण का परिमाण क्या है?
हल :
दिया है : B= 0.25 टेस्ला, θ = 30°, r = 4.5 × 10-2 जूल, M = ?
t= MB sin θ से,
\(M=\frac{\tau}{B \sin \theta}=\frac{4.5 \times 10^{-2}}{0.25 \times 0.5}\) (∵ sin 30° = 0.5)
∴ चुम्बकीय-आघूर्ण M = 0.36 जूल टेस्ला-1

प्रश्न 4.
चुम्बकीय-आघूर्ण m = 0.32 जूल टेस्ला-1 वाला एक छोटा छड़ चुम्बक, 0.15 टेस्ला के एकसमान बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखा है। यदि यह छड़ क्षेत्र के तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र हो तो क्षेत्र के किस विन्यास में यह (i) स्थायी सन्तुलन और (ii) अस्थायी सन्तुलन में होगा? प्रत्येक स्थिति में चुम्बक की स्थितिज ऊर्जा का मान बताइए।
हल :
दिया है : m = 0.32 जूल टेस्ला-1
B= 0.15 टेस्ला ।
(i) जब चुम्बक का चुम्बकीय-आघूर्ण क्षेत्र की दिशा में संरेखित होगा तो चुम्बक स्थायी सन्तुलन की स्थिति में होगा।
इस स्थिति में स्थितिज ऊर्जा U0 = – MB cos 0° [∵ Uθe = – MB cos θ]
= – 0.32 × 0.15 × 1
= – 0.048 जूल
या = 4.8×10-2 जूल।

(ii) जब चुम्बकीय-आघूर्ण, क्षेत्र के विपरीत दिशा में संरेखित होगा (θ = 180°) तो चुम्बक अस्थायी सन्तुलन की स्थिति में होगा। इस स्थिति में स्थितिज ऊर्जा U180° = – MB cos 180°
= – 0.32 × 0.15 × (-1)
= + 0.048 जूल
= 4.8 × 10-2 जूल।

प्रश्न 5.
एक परिनालिका में पास-पास लपेटे गए 800 फेरे हैं तथा इसकी अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 2.5 × 10-4 मीटर2 है और इसमें 3.0 ऐम्पियर धारा प्रवाहित हो रही है। समझाइए कि किस अर्थ में यह परिनालिका एक छड़ चुम्बक की तरह व्यवहार करती है? इसके साथ जुड़ा हुआ चुम्बकीय-आघूर्ण कितना है?
हल :
दिया है : N = 800, i = 3.0 ऐम्पियर, A = 2.5 × 10-4 मीटर2
∴ चुम्बकीय-आघूर्ण M = NiA = 800 × 3.0 × 2.5 × 10-4
= 0.60 जूल टेस्ला-1
∵ परिनालिका को किसी चुम्बकीय क्षेत्र में लटकाने पर दण्ड चुम्बक के समान ही इस पर भी एक बल-युग्म कार्य करता है, अत: यह दण्ड-चुम्बक के समान व्यवहार करती है।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.
यदि प्रश्न 5 में बताई गई परिनालिका ऊर्ध्वाधर दिशा के परितः घूमने के लिए स्वतन्त्र हो और इस पर क्षैतिज दिशा में एक 0.25 टेस्ला का एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र लगाया जाए, तो इस परिनालिका पर लगने वाले बल आघूर्ण का परिमाण उस समय क्या होगा, जब इसकी अक्ष आरोपित क्षेत्र की दिशा से 30° का कोण बना रही हो?
हल :
दिया है : B= 0.25 टेस्ला
पूर्व प्रश्न में,. M = 0.60 जूल टेस्ला-1
θ = 30°
∴ परिनालिका पर बल-आघूर्ण t = MB sin θ = 0.60 × 0.25 × \(\frac { 1 }{ 2 }\)
= 0.075 जूल = 7.5 × 10-2 जूल।

प्रश्न 7.
एक छड़ चुम्बक जिसका चुम्बकीय-आघूर्ण 1.5 जूल टेस्ला-1 है, 0.22 टेस्ला के एक एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र के अनुदिश रखा है।
(a) एक बाह्य बल आघूर्ण कितना कार्य करेगा यदि यह चुम्बक को चुम्बकीय क्षेत्र के (i) लम्बवत्, (ii) विपरीत दिशा में संरेखित करने के लिए घुमा दें।
(b) स्थिति (i) एवं (ii) में चुम्बक पर कितना बल आघूर्ण होता है?
हल :
दिया है : M = 1.5 जूल टेस्ला-1,
B= 0.22 टेस्ला ।
(a) सूत्र W = – MB (cosθ2 – cosθ1) से,
(i) चुम्बक को θ1 = 0° से θ2 = 90° तक घुमाने में बल-आघूर्ण द्वारा कृत कार्य
W = – 1.5 × 0.22 [cos 90° – cos 0°]
= – 0.33 × (0- 1)= 0.33 जूल। (ii) चुम्बक को 01 = 0° से 02 = 180° तक घुमाने में बल आघूर्ण द्वारा कृत कार्य
W = – 1.5 × 0.22 [cos 180° – cos 0°]
= – 0.33 [ – 1 – 1] = 0.66 जूल।

(b) (i) स्थिति (i) में चुम्बक पर कार्यरत बल आघूर्ण
t= MB sin 90°
= 1.5 × 0.22 × 1 = 0.33 जूल।
(ii) स्थिति (ii) में चुम्बक पर कार्यरत बल-आघूर्ण
T= MB sin 180° = 0

प्रश्न 8.
एक परिनालिका जिसमें पास-पास 2000 फेरे लपेटे गए हैं तथा जिसके अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 1.6 × 10-4 मीटर2 है और जिसमें 4.0 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है, इसके केन्द्र से इस प्रकार लटकाई गई है कि यह एक क्षैतिज तल में घूम सके।
(a) परिनालिका के चुम्बकीय-आघूर्ण का मान क्या है?
(b) परिनालिका पर लगने वाला बल एवं बल आघूर्ण क्या है, यदि इस पर, इसकी अक्ष से 30° का कोण बनाता हुआ 7.5 × 10-2 टेस्ला का एकसमान क्षैतिज चुम्बकीय क्षेत्र लगाया जाए?
हल :
दिया है : कुल फेरे
N = 2000,
A = 1.6 × 10-4 मीटर2
i = 4.0 ऐम्पियर
B = 7.5 × 10-2 टेस्ला

(a) परिनालिका का चुम्बकीय-आघूर्ण
M = NiA = 2000 × 4.0 × 1.6 × 10-4
= 1.28 ऐम्पियर-मीटर2

MP Board Solutions

(b) सूत्र t = MB sin θ से,
अक्ष से θ = 30° के कोण पर लगे चुम्बकीय क्षेत्र के कारण बल आघूर्ण
t = 1.28 × 7.5 × 10-2 × \(\frac { 1 }{ 2 }\)
= 4.8 × 10-2 न्यूटन-मीटर
= 0.048 न्यूटन-मीटर। :: क्षेत्र एकसमान है, अत: परिनालिका पर कार्यरत बल शून्य होगा।

प्रश्न 9.
एक वृत्ताकार कुंडली जिसमें 16 फेरे हैं, जिसकी त्रिज्या 10 सेमी है और जिसमें 0.75 ऐम्पियर धारा प्रवाहित हो रही है, इस प्रकार रखी है कि इसका तल 5.0 × 10-2 टेस्ला परिमाण वाले बाह्य क्षेत्र के लम्बवत् है। कुंडली, चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् और इसके अपने तल में स्थित एक अक्ष के चारों तरफ घूमने के लिए स्वतन्त्र है। यदि कुंडली को जरा-सा घुमा कर छोड़ दिया जाए तो यह अपनी स्थायी सन्तुलनावस्था के इधर-उधर 2.0 सेकण्ड-1 की आवृत्ति से दोलन करती है। कुंडली का अपने घूर्णन अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण क्या है?
हल :
दिया है : N = 16, r = 0.10 मीटर, i = 0.75 ऐम्पियर, B= 5.0 × 10-2 टेस्ला
घूर्णन आवृत्ति γ = 2.0 सेकण्ड-1, जड़त्व-आघूर्ण I = ?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 2
कुंडली का चुम्बकीय-आघूर्ण
M = NiA = Ni × πr2
= 16 × 0.75 × 3.14 × (0.10)2
= 0.377 ऐम्पियर-मीटर2
∴ जड़त्व-आघूर्ण \(I=\frac{0.377 \times 5.0 \times 10^{-2}}{4 \times(3.14)^{2} \times(2.0)^{2}}\)
= 1.2 × 10-4 किग्रा-मीटर।

प्रश्न 10.
एक चुम्बकीय सुई चुम्बकीय याम्योत्तर के समान्तर एक ऊर्ध्वाधर तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र है। इसका उत्तरी ध्रुव क्षैतिज से 22° के कोण पर नीचे की ओर झुका है। इस स्थान पर चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज अवयव का मान 0.35 गाउस है। इस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र का परिमाण ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज अवयव
BH = 0.35 गाउस
जबकि नति कोण δ = 22°
यदि पृथ्वी का सम्पूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र B है तो BH = B cos δ से,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 3
\(B=\frac{B_{H}}{\cos \delta}=\frac{0.35}{\cos 22^{\circ}}\)
\(=\frac{0.35}{0.9272}\) = 0.38 गाउस।

प्रश्न 11.
दक्षिण अफ्रीका में किसी स्थान पर एक चुम्बकीय सुई भौगोलिक उत्तर से 12° पश्चिम की ओर संकेत करती है। चुम्बकीय याम्योत्तर में संरेखित नति-वृत्त की चुम्बकीय सुई का उत्तरी ध्रुव क्षैतिज से 60° उत्तर की
ओर संकेत करता है। पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज अवयव मापने पर 0.16 गाउस पाया जाता है। इस स्थान पर पृथ्वी के क्षेत्र का परिमाण और दिशा बताइए।
हल :
दिया है : नति कोण 6 = 60° जबकि दिक्पात का कोण θ = 12° उत्तर से पश्चिम की ओर BH = 0.16 गाउस
BH = B cos δ से,
\(B=\frac{B_{H}}{\cos \delta}=\frac{0.16}{\cos 60^{\circ}}\)
\(=\frac{0.16}{0.5}\) = 0.32 गाउस
अत: इस स्थान पर पृथ्वी का सम्पूर्ण क्षेत्र 0.32 गाउस है जिसकी दिशा भौगोलिक याम्योत्तर से 12° पश्चिम की ओर क्षैतिज से 60° के कोण पर ऊपर की ओर है।

प्रश्न 12.
किसी छोटे छड़ चुम्बक का चुम्बकीय-आघूर्ण 0.48 जूल टेस्ला-1 है। चुम्बक के केन्द्र से 10 सेमी की दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर इसके चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण एवं दिशा बताइए यदि यह बिन्दु (i) चुम्बक के अक्ष पर स्थित हो, (ii) चुम्बक के अभिलम्ब समद्विभाजक पर स्थित हो।
हल :
दिया है : M = 0.48 जूल टेस्ला-1, r = 0.10 मीटर, B= ?
(i) जब बिन्दु चुम्बक के अक्ष पर है तब चुम्बकीय क्षेत्र
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 4
= 0.96 × 10-4 टेस्ला ।
अथवा Bax = 0.96 गाउस दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर
(ii) जब बिन्दु चुम्बक के लम्ब समद्विभाजक पर है तो चुम्बकीय क्षेत्र
Beq= \(\frac { 1 }{ 2 }\)Bax = \(\frac { 1 }{ 2 }\) × 0.96
= 0.48 गाउस ( उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर)।

MP Board Solutions

प्रश्न 13.
क्षैतिज तल में रखे एक छोटे छड़ चुम्बक का अक्ष, चुम्बकीय उत्तर-दक्षिण दिशा के अनुदिश है। सन्तुलन बिन्दु चुम्बक के अक्ष पर, इसके केन्द्र से 14 सेमी दूर स्थित है। इस स्थान पर पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र 0.36 गाउस एवं नति कोण शून्य है। चुम्बक के अभिलम्ब समद्विभाजक पर इसके केन्द्र से उतनी ही दूर (14 सेमी) स्थित किसी बिन्दु पर परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र क्या होगा?
हल :
दिया है : पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र B= 0.36 गाउस, नति कोण δ = 0°
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 5
अक्ष पर सन्तुलन बिन्दु की दूरी r = 0.14 मीटर
माना सन्तुलन बिन्दु पर चुम्बक के कारण चुम्बकीय क्षेत्र Bax है
तब सन्तुलन की अवस्था में ,
Bax = BH⇒ Bax = B cos δ = B
ये क्षेत्र परस्पर विपरीत होंगे।
अभिलम्ब समद्विभाजक पर, इतनी ही दूरी पर चुम्बक के कारण चुम्बकीय क्षेत्र
Beq = \(\frac { 1 }{ 2 }\)Bax⇒ Beq= \(\frac { 1 }{ 2 }\)B
परन्तु यहाँ पृथ्वी का क्षेत्र BH = B तथा चुम्बक का क्षेत्र दोनों एक ही दिशा में हैं, अतः यहाँ परिणामी क्षेत्र
B1 = Beq + B = \(\frac { 1 }{ 2 }\)B + B
= \(\frac { 3 }{ 2 }\)B = \(\frac { 3 }{ 2 }\) × 0.36 = 0.54 गाउस।
इसकी दिशा पृथ्वी के क्षेत्र के अनुदिश होगी।

प्रश्न 14.
यदि प्रश्न 13 में वर्णित चुम्बक को 180° से घुमा दिया जाए तो सन्तुलन बिन्दुओं की नई स्थिति क्या होगी?
हल :
इस स्थिति में, सन्तुलन बिन्दु अभिलम्ब समद्विभाजक पर प्राप्त होगा।
अक्षीय स्थिति में सन्तुलन बिन्दु हेतु
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 6
अन्तिम स्थिति में, प्रश्न के अनुसार rax = 0.14 मीटर
req = \(\frac{0.14}{(2)^{1 / 3}}\) × 2-1/3
= 0.111 मीटर = 11.1 सेमी।
अत: सन्तुलन बिन्दु निरक्षीय स्थिति में केन्द्र से 11.1 सेमी की दूरी पर मिलेगा।

प्रश्न 15.
एक छोटा छड़ चुम्बक जिसका चुम्बकीय-आघूर्ण 5.25 × 10-2 जूल टेस्ला-1 है, इस प्रकार रखा है कि इसका अक्ष पृथ्वी के क्षेत्र की दिशा के लम्बवत् है। चुम्बक के केन्द्र से कितनी दूरी पर, परिणामी क्षेत्र पृथ्वी के क्षेत्र की दिशा से 45° का कोण बनाएगा, यदि हम (a) अभिलम्ब समद्विभाजक पर देखें, (b) अक्ष पर देखें? इस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण 0.42 गाउस है। प्रयुक्त दूरियों की तुलना में चुम्बक की लम्बाई की उपेक्षा कर सकते हैं।
हल :
दिया है : M = 5.25 × 10-2जूल टेस्ला-1
पृथ्वी का क्षेत्र BH = 0.42 गाउस
(a) माना ऐसा, चुम्बक के निरक्ष पर उसके केन्द्र से req दूरी पर होता है।
इस बिन्दु पर चुम्बक के कारण क्षेत्र
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 7

MP Board Solutions

प्रश्न 16.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(a) ठण्डा करने पर किसी अनुचुम्बकीय पदार्थ का नमूना अधिक चुम्बकन क्यों प्रदर्शित करता है? ( एक ही चुम्बककारी क्षेत्र के लिए)
(b) अनुचुम्बकत्व के विपरीत, प्रतिचुम्बकत्व पर ताप का प्रभाव लगभग नहीं होता। क्यों?
(c) यदि एक टोरॉइड में बिस्मथ का क्रोड लगाया जाए तो इसके अन्दर चुम्बकीय क्षेत्र उस स्थिति की तुलना में (किंचित) कम होगा या (किंचित) ज्यादा होगा, जबकि क्रोड खाली हो?
(d) क्या किसी लौहचुम्बकीय पदार्थ की चुम्बकशीलता चुम्बकीय क्षेत्र पर निर्भर करती है? यदि हाँ, तो उच्च चुम्बकीय क्षेत्रों के लिए इसका मान कम होगा या अधिक? . (e) किसी लौह चुम्बक की सतह के प्रत्येक बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ सदैव लम्बवत् होती हैं [यह तथ्य उन स्थिरविद्युत क्षेत्र रेखाओं के सदृश है जो कि चालक की सतह.के प्रत्येक बिन्दु पर लम्बवत् होती हैं। क्यों?
(f) क्या किसी अनुचुम्बकीय नमूने का अधिकतम सम्भव चुम्बकन, लौहचुम्बक के चुम्बकन के परिमाण की कोटि का होगा?
उत्तर :
(a) ताप के घटने पर पदार्थ के परमाण्वीय चुम्बकों का ऊष्मीय विक्षोभ कम हो जाता है जिसके कारण इन चुम्बकों के बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में संरेखित होने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। –
(b) प्रतिचुम्बकीय पदार्थ के परमाणु ऊष्मीय विक्षोभ के कारण, भले ही किसी भी स्थिति में हों, उनमें बाह्य
चुम्बकीय क्षेत्र के कारण, प्रेरित चुम्बकीय-आघूर्ण सदैव ही बाह्य क्षेत्र के विपरीत दिशा में प्रेरित होता है। इस प्रकार प्रतिचुम्बकत्व पर ताप का कोई प्रभाव नहीं होता।
(c) चूँकि बिस्मथ एक प्रतिचुम्बकीय पदार्थ है, अत: चुम्बकीय क्षेत्र अपेक्षाकृत कुछ कम हो जाएगा।
(d) लौहचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकशीलता बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र पर निर्भर करती है तथा तीव्र चुम्बकीय, क्षेत्र के लिए इसका मान कम होता है।
(e) जब दो माध्यम किसी स्थान पर मिलते हैं जिनमें से एक के लिए µ >>1 हो तो इनके सीमा पृष्ठ पर क्षेत्र रेखाएँ लम्बवत् हो जाती हैं।
(1) हाँ, किसी अनुचुम्बकीय पदार्थ का अधिकतम सम्भव चुम्बकत्व, लौहचुम्बकीय पदार्थ के चुम्बकन के परिमाण की कोटि का हो सकता है। परन्तु किसी अनुचुम्बकीय पदार्थ को इस कोटि तक चुम्बकित करने के लिए अति उच्च चुम्बकीय क्षेत्र की आवश्यकता होती है जिसे प्राप्त करना व्यवहार में सम्भव नहीं है।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(a) लौहचुम्बकीय पदार्थ के चुम्बकन वक्र की अनुत्क्रमणीयता, डोमेनों के आधार पर गुणात्मक दृष्टिकोण से समझाइए।
(b) नर्म लोहे के एक टुकड़े के शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल, कार्बन-स्टील के टुकड़े के शैथिल्य लप के क्षेत्रफल से कम होता है। यदि पदार्थ को बार-बार चुम्बकन चक्र से गुजारा जाए तो कौन-सा टुकड़ा अधिक ऊष्मा ऊर्जा का क्षय करेगार
(c) लौह चुम्बक जैसा शैथिल्य लूप प्रदर्शित करने वाली कोई प्रणाली स्मृति संग्रहण की युक्ति है। इस कथन की व्याख्या कीजिए।
(d) कैसेट के.चुम्बकीय फीतों पर परत चढ़ाने के लिए या आधुनिक कम्प्यूटर में स्मृति संग्रहण के लिए, किस तरह के लौहचुम्बकीय पदार्थों का इस्तेमाल होता है? ।
(e) किसी स्थान को चुम्बकीय क्षेत्र से परिरक्षित करना है। कोई विधि सुझाइए।
उत्तर :
(a) जब बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र को शून्य कर दिया जाता है तो भी लौहचुम्बकीय पदार्थ के डोमेन अपनी प्रारम्भिक स्थिति में नहीं लौट पाते अपितु उनमें कुछ चुम्बकन शेष रह जाता है। यही कारण है कि लौहचुम्बकीय पदार्थों का चुम्बकन वक्र अनुत्क्रमणीय होता है।
(b) किसी पदार्थ के शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल एक पूर्ण चुम्बकन चक्र में होने वाली ऊर्जा-हानि को प्रदर्शित करता है। यह ऊर्जा-हानि ही पदार्थ में ऊष्मा के रूप में उत्पन्न होती है। चूंकि कार्बन-स्टील के शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल अधिक है, अत: इसमें अधिक ऊष्मा उत्पन्न होगी अर्थात् कार्बन-स्टील का टुकड़ा अधिक ऊष्मा क्षय करेगा।
(c) किसी लौहचुम्बकीय पदार्थ का चुम्बकन उस पर लगाए गए बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र के चक्रों की संख्या पर निर्भर करता है। इस प्रकार किसी लौह चुम्बकीय पदार्थ का चुम्बकन उस पर लगाए गए चुम्बकन चक्र की सूचना दे सकता है। इस प्रकार चुम्बकन चक्र की स्मृति, चुम्बकित पदार्थ के नमूने में एकत्र हो जाती है।
(d) इस कार्य के लिए सिरेमिक पदार्थों का प्रयोग किया जाता है।
(e) किसी स्थान को चुम्बकीय क्षेत्र से परिरक्षित करने के लिए उस स्थान को नर्म लोहे के रिंग से घेर देना चाहिए। इससे चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ, नर्म लोहे के रिंग से होकर गुजर जाती हैं तथा रिंग के भीतर प्रवेश नहीं कर पातीं।

प्रश्न 18.
एक लम्बे, सीधे, क्षैतिज केबल में 2.5 ऐम्पियर धारा, 10° दक्षिण-पश्चिम से 10° उत्तर-पूर्व की ओर प्रवाहित हो रही है। इस स्थान पर चुम्बकीय याम्योत्तर भौगोलिक याम्योत्तर के 10° पश्चिम में है। यहाँ पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र 0.33 गाउस एवं नति कोण शून्य है। उदासीन बिन्दुओं की रेखा निर्धारित कीजिए। (केबल की मोटाई की उपेक्षा कर सकते हैं।)
(उदासीन बिन्दुओं पर, धारावाही केबल द्वारा चुम्बकीय क्षेत्र, पृथ्वी के क्षैतिज घटक के चुम्बकीय क्षेत्र के समान एवं विपरीत दिशा में होता है।)
हल :
दिया है : पृथ्वी का क्षेत्र B= 0.33 × 10-4 टेस्ला, नति कोण δ = 0°
∴ पृथ्वी के क्षेत्र का क्षैतिज घटक BH = B cos δ = 0.33 × 10-4 टेस्ला
माना उदासीन बिन्दु तार से a दूरी पर है, तब
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 8
इस प्रकार, उदासीन बिन्दु रेखा केबल के समान्तर ऊपर की ओर केबल से 1.5 सेमी की दूरी पर होगी।

MP Board Solutions

प्रश्न 19.
किसी स्थान पर एक टेलीफोन केबल में चार लम्बे, सीधे, क्षैतिज तार हैं जिनमें से प्रत्येक में 1.0 ऐम्पियर की धारा पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित हो रही है। इस स्थान पर पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र 0.39 गाउस एवं नति कोण 35° है। दिक्पात कोण लगभग शून्य है। केबल के 4.0 सेमी नीचे और 4.0 सेमी ऊपर परिणामी चुम्बकीय क्षेत्रों के मान क्या होंगे?
हल :
पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र
B = 0.39 × 10-4 टेस्ला, δ = 35°, i= 1.0 ऐम्पियर
पृथ्वी के क्षेत्र का क्षैतिज अवयव
BH = B cos δ = 0.39 × cos 35°
= 0.39 × 0.819
= 0.319 गाउस (दक्षिण से उत्तर)
तथा ऊर्ध्वाधर अवयव
BV = B sin δ = 0.39 × sin 35° = 0.39 × 0.573
= 0.224 गाउस
चार केबलों के कारण उनसे a = 4.0x 10-2 मीटर की दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 9
= 0.2 × 10-4 टेस्ला = 0.2 गाउस
केबल के ऊपर चुम्बकीय क्षेत्र B’ क्षैतिजतः दक्षिण से उत्तर की ओर तथा केबल के नीचे यह क्षेत्र क्षैतिजतः उत्तर से दक्षिण की ओर होगा।
केबल के नीचे चुम्बकीय क्षेत्र
यहाँ BH व B’ परस्पर विपरीत हैं।
∴ क्षैतिज अवयव
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 10
अत: केबल के नीचे नेट चुम्बकीय क्षेत्र 0.254 गाउस है जो क्षैतिज से 62° के कोण पर है।
केबल के ऊपर चुम्बकीय क्षेत्र
यहाँ BH व B’ एक ही दिशा में हैं।
∴ क्षैतिज अवयव
B’H = BH + B’ = 0.319 + 0.2 = 0.519 गाउस
जबकि BV = 0.224 गाउस
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 11
अत: नेट चुम्बकीय क्षेत्र 0.57 गाउस है जो क्षैतिज से 23° के कोण पर है।

प्रश्न 20.
एक चुम्बकीय सुई जो क्षैतिज तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र है, 30 फेरों एवं 12 सेमी त्रिज्या वाली एक कुंडली के केन्द्र पर रखी है। कुंडली एक ऊर्ध्वाधर तल में है और चुम्बकीय याम्योत्तर से 45° का कोण बनाती है। जब कुंडली में 0.35 ऐम्पियर धारा प्रवाहित होती है, चुम्बकीय सुई पश्चिम से पूर्व की ओर संकेत करती है।
(a) इस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज अवयव का मान ज्ञात कीजिए।
(b) कुंडली में धारा की दिशा उलट दी जाती है और इसको अपनी ऊर्ध्वाधर अक्ष पर वामावर्त दिशा में (ऊपर से देखने पर ) 90° के कोण पर घुमा दिया जाता है। चुम्बकीय सुई किस दिशा में ठहरेगी? इस स्थान पर चुम्बकीय दिक्पात शून्य लीजिए।
हल :
(a) दिया है : कुंडली में फेरों की संख्या N = 30
धारा i = 0.35 ऐम्पियर, त्रिज्या a = 0.12 मीटर
कंडली के केन्द्र पर चम्बकीय क्षेत्र \(B=\frac{\mu_{0} N i}{2 a}=\frac{4 \pi \times 10^{-7} \times 30 \times 0.35}{2 \times 0.12}\)
= 0.55 गाउस
यह क्षेत्र कुंडली के तल के लम्बवत् है।
∵ चुम्बकीय सुई पूर्व-पश्चिम दिशा में ठहरती है, अतः इस स्थान पर नेट चुम्बकीय क्षेत्र पूर्व पश्चिम दिशा में होगा।
यह तभी सम्भव है जबकि क्षेत्र B का उत्तर-दक्षिण दिशा में अवयव BH को सन्तुलित कर ले।
अर्थात् BH = B cos 45° = 0.55 × \(\frac{1}{\sqrt{2}}\)
पृथ्वी के क्षेत्र का क्षैतिज अवयव BH = 0.39 गाउस।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 12
(b) चित्र-5.4 (b) से स्पष्ट है कि इस बार नेट चुम्बकीय क्षेत्र पूर्व से पश्चिम की ओर होगा। अतः चुम्बकीय सुई पूर्व से पश्चिम की ओर संकेत करेगी।

प्रश्न 21.
एक चुम्बकीय द्विध्रुव दो चुम्बकीय क्षेत्रों के प्रभाव में है। ये क्षेत्र एक-दूसरे से 60° का कोण बनाते हैं और उनमें से एक क्षेत्र का परिमाण 1.2 × 10-2 टेस्ला है। यदि द्विध्रुव स्थायी सन्तुलन में इस क्षेत्र से 15° का कोण बनाए, तो दूसरे क्षेत्र का परिमाण क्या होगा?
हल :
दिया है : B1 = 1.2 × 10-2 टेस्ला, B2 = ?
∵ द्विध्रुव एक क्षेत्र से 15° का कोण बनाता है, अत: दूसरे क्षेत्र से 45° का कोण बनाएगा।
सन्तुलन की स्थिति में दोनों के कारण द्विध्रुव पर कार्यरत बल-युग्म के आघूर्ण परस्पर सन्तुलित हो जाएँगे।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 13
∴ MB1 sin 15o = MB2 sin 45°
B2= \(\frac{B_{1} \sin 15^{\circ}}{\sin 45^{\circ}}\)
= \(\frac{1.2 \times 10^{-2} \times 0.2588}{0.707}\)
450
150
= 4.39 × 10-3 टेस्ला
= 4.4 x 10-3 टेस्ला ।

MP Board Solutions

प्रश्न 22.
एक समोर्जी 18 किलो इलेक्ट्रॉन-वोल्ट वाले इलेक्ट्रॉनों के किरण पुंज पर जो शुरू में क्षैतिज दिशा में गतिमान हैं, 0.04 गाउस का एक क्षैतिज चुम्बकीय क्षेत्र, जो किरण पुंज की प्रारम्भिक दिशा के लम्बवत् है, लगाया गया है। आकलन कीजिए 30 सेमी की क्षैतिज दूरी चलने में किरण पुंज कितनी दूरी ऊपर या नीचे विस्थापित होगा? (me = 9.11 × 10-31 किग्रा, e= 1.60 × 10-19 कूलॉम)।
[नोट : इस प्रश्न में आँकड़े इस प्रकार चुने गए हैं कि उत्तर से आपको यह अनुमान हो कि T.V. सेट में इलेक्ट्रॉन गन से पर्दे तक इलेक्ट्रॉन किरण पुंज की गति भू-चुम्बकीय क्षेत्र से किस प्रकार प्रभावित होती है।
हल :
दिया है : B= 0.04 गाउस = 4 x 10-6 टेस्ला ।

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 14
माना इलेक्ट्रॉनों का वेग υ x है, तब \(\frac { 1 }{ 2 }\)meυ x2 = K ⇒ υ x = \(\sqrt{\frac{2 K}{m_{e}}}[latex]
इलेक्ट्रॉन, चुम्बकीय क्षेत्र के कारण वृत्तीय मार्ग पर गति करते हैं जिसकी त्रिज्या । निम्नलिखित है –
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 15
माना इलेक्ट्रॉन-पुंज बिन्दु A पर चुम्बकीय क्षेत्र में क्षैतिज दिशा में प्रवेश करते हैं तथा क्षैतिज दिशा में x = 0.30 मीटर दूरी तय करने तक बिन्दु B पर पहुँच जाते हैं, तब (चित्र से),
sin θ = [latex]\frac{x}{R}=\frac{0.30}{11.3}\)= 0.0265
θ = sin-1(0.0265) = 1.52°
∴ इलेक्ट्रॉनों का ऊपर अथवा नीचे की ओर विस्थापन
y= OA – OC = R – R cos θ = R (1 – cosθ) = 11.3 (1 – 0.9996)
= 4.0 × 10-3 मीटर अथवा
y = 4 मिमी।

प्रश्न 23.
अनुचुम्बकीय लवण के एक नमूने में 2.0 × 1024 परमाणु द्विध्रुव हैं जिनमें से प्रत्येक का द्विध्रुव आघूर्ण 1.5 × 10-23 जूल टेस्ला-1 है। इस नमूने को 0.64 टेस्ला के एक एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखा गया है और 4.2 K ताप तक ठण्डा किया गया। इसमें 15% चुम्बकीय संतृप्तता आ गई। यदि इस नमूने को 0.98 टेस्ला के चुम्बकीय क्षेत्र में 2.8 K ताप पर रखा हो तो इसका कुल द्विध्रुव आघूर्ण कितना होगा? (यह मान सकते हैं कि क्यूरी नियम लागू होता है।)
हल :
दिया है : N = 2.0 × 1024, m = 1.5 × 10-23 जूल टेस्ला -1, B1 = 0.64 टेस्ला, T1= 4.2 K, चुम्बकीय संतृप्तता M1 = 15%, B2 = 0.98 टेस्ला, T2 = 2.8 K,
चुम्बकीय संतृप्तता M2 = ?
चुम्बकीय संतृप्तता की स्थिति में,
पदार्थ का चुम्बकीय-आघूर्ण M = Nm = 2.0 × 1024 × 1.5 × 10-23 = 30 जूल टेस्ला-1
प्रथम स्थिति में,
चम्बकीय-आघूर्ण M1 = M का 15% = \(\frac{15 M}{100}=\frac{15 \times 30}{100}\) = 4.5 जल टेस्ला-1
∵ क्यूरी नियम लागू होता है। अतः
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 16

प्रश्न 24.
एक रोलैंड रिंग की औसत त्रिज्या 15 सेमी है और इसमें 800 आपेक्षिक चुम्बकशीलता के लौह चुम्बकीय क्रोड पर 3500 फेरे लिपटे हुए हैं। 1.2 ऐम्पियर की चुम्बककारी धारा के कारण इसके क्रोड में कितना घुम्बकीय क्षेत्र (\(\overrightarrow{\mathbf{B}}\)) होगा?
हल :
दिया है : औसत त्रिज्या a = 0.15 मीटर, μr = 800, N = 3500, i = 1.2 ऐम्पियर, B= ?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 17

MP Board Solutions

प्रश्न 25.
किसी इलेक्ट्रॉन के नैज चक्रणी कोणीय संवेग \(\overrightarrow{\mathbf{s}}\) एवं कक्षीय कोणीय संवेग \(\overrightarrow{1}\) के साथ जुड़े चुम्बकीय-आघूर्ण क्रमशः \(\overrightarrow{\mu_{\mathrm{S}}}\) और \(\overrightarrow{\mu_{1}}\) हैं। क्वाण्टम सिद्धान्त के आधार पर (और प्रयोगात्मक रूप से अत्यन्त परिशुद्धतापूर्वक पुष्ट) इनके मान क्रमशः निम्न प्रकार दिए जाते हैं –
μs = – \(\left(\frac{e}{2 m}\right) \overrightarrow{\mathrm{i}}\) एवं μl= – \left(\frac{e}{2 m}\right) \overrightarrow{\mathbf{1}}
इनमें से कौन-सा व्यंजक चिरसम्मत सिद्धान्तों के आधार पर प्राप्त करने की आशा की जा सकती है? उस चिरसम्मत आधार पर प्राप्त होने वाले व्यंजक को व्युत्पन्न कीजिए।
हल :
व्यंजक \(\vec{\mu}_{1}=-\left(\frac{e}{2 m}\right) \overrightarrow{1}\), चिरसम्मत सिद्धान्तों के आधार पर प्राप्त किया जा सकता है।
माना इलेक्ट्रॉन r त्रिज्या की वृत्तीय कक्षा में चक्कर लगा रहा है तथा इसका परिक्रमण काल T है, तब
परिक्रमण के कारण कक्षा में धारा i = \(\frac{e}{T}\)
∴ परिक्रमण के कारण उत्पन्न चुम्बकीय-आघूर्ण का परिमाण
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 18
जबकि कक्षा में घूमते इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 19
∵ इलेक्ट्रॉन का आवेश e ऋणात्मक है, अतः \(\vec{\mu}_{1} व \overrightarrow{1}\) सदिशों की दिशाएँ परस्पर विपरीत होंगी। . :
∴ सदिश रूप में लिखने पर, = \(\overrightarrow{\mu_{1}}=-\left(\frac{e}{2 m}\right) \overrightarrow{1}\)

चुम्बकत्व एवं द्रव्य NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar LO Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

चुम्बकत्व एवं द्रव्य बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र को पृथ्वी के केन्द्र पर स्थित बिन्दु द्विध्रुव के क्षेत्र का प्रतिरूप माना जा सकता है। इस द्विध्रुव का अक्ष पृथ्वी के अक्ष से 11.3° का कोण बनाता है। मुम्बई में द्विक्पात लगभग शून्य है, तब –
(a) पृथ्वी पर दिक्पात का मान 11.3° पश्चिम से 11.3° पूर्व के बीच परिवर्तित होता है।
(b) निम्नतम दिक्पात शून्य अंश (0°) है।
(c) द्विध्रुव अक्ष तथा पृथ्ट के अक्ष को धारण करने वाला तल ग्रीनविच से गुजरता है।
(d) समस्त पृथ्वी पर दिक्पात सदैव ऋणात्मक होना चाहिए।
उत्तर :
(a) पृथ्वी पर दिक्पात का मान 11.3° पश्चिम से 11.3° पूर्व के बीच परिवर्तित होता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
कमरे के ताप पर किसी स्थायी चुम्बक में –
(a) प्रत्येक अणु का चुम्बकीय-आघूर्ण शून्य होता है
(b) सभी अलग-अलग अणुओं के शून्येतर चुम्बकीय-आघूर्ण होते हैं जो पूर्णत: संरेखित होते हैं।
(c) कुछ डोमेन अंशत: संरेखित होते हैं
(d) सभी डोमेन पूर्णत: संरेखित होते हैं।
उत्तर :
(c) कुछ डोमेन अंशत: संरेखित होते हैं

चुम्बकत्व एवं द्रव्य अतिं लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इलेक्ट्रॉन की भाँति प्रोटॉन में भी चक्रण तथा चुम्बकीय-आघूर्ण होता है, तब पदार्थों के चुम्बकत्व में इसमें प्रभाव की उपेक्षा क्यों की जाती है?
उत्तर :
इलेक्ट्रॉन का चुम्बकीय-आघूर्ण \(\left(\mu_{e}\right)=\frac{e h}{4 \pi m_{e}}\)
इसी प्रकार, प्रोटॉन का चुम्बकीय-आघूर्ण \(\left(\mu_{p}\right)=\frac{e h}{4 \pi m_{p}}\)
परन्तु mp >> me अतः μe >> μp
अतः पदार्थों के चुम्बकत्व में इलेक्ट्रॉन की तुलना में प्रोटॉन के चुम्बकीय-आघूर्ण की उपेक्षा की जाती है।

प्रश्न 2.
आण्विक दृष्टिकोण से प्रतिचुम्बकत्व, अनुचुम्बकत्व तथा लौहचुम्बकत्व की चुम्बकीय प्रवृत्तियों की ताप निर्भरता की विवेचना कीजिए।
उत्तर :
प्रतिचुम्बकत्व इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति के कारण उत्पन्न होता है, अतः यह ताप से अधिक प्रभावित नहीं होता है। अनुचुम्बकीय तथा लौहचुम्बकीय पदार्थों के अणुओं में अपना परिणामी । चुम्बकीय-आघूर्ण होता है तथा प्रत्येक अणु स्वयं एक चुम्बकीय द्विध्रुव होता है। इन पदार्थों में चुम्बकत्व इन चुम्बकीय द्विध्रुवों के बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र के अनुदिश संरेखण के कारण उत्पन्न होता है। ताप वृद्धि पर संरेखण विक्षोभित होता है जिसके परिणामस्वरूप इन पदार्थों की चुम्बकशीलता ताप वृद्धि पर घट जाती है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 20

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
चित्र में दर्शाए अनुसार तीन सर्वसम छड़ चुम्बकों को समान तल में केन्द्र पर रिवट द्वारा जड़ दिया गया है। इस निकाय को विराम अवस्था में किसी धीरे-धीरे परिवर्तित होने वाले चुम्बकीय क्षेत्र में रखा गया है। यह पाया गया है कि चुम्बकों के निकाय में कोई गति नहीं हुई। एक चुम्बक के उत्तर-दक्षिण ध्रुवों को चित्र में दर्शाया गया है। अन्य दो चुम्बकों के ध्रुव निर्धारित कीजिए।
उत्तर :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 5 चुम्बकत्व एवं द्रव्य img 21
चुम्बकों के निकाय में कोई गति नहीं हुई है, अत: परिणामी चुम्बकीय-आघूर्ण m = 0.
इसके लिए एकमात्र सम्भव स्थिति चित्र में दर्शायी गई है।

MP Board Class 12th Physics Solutions