MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 7 वृक्ष निभाता रिश्ता-नाता

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MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 7 वृक्ष निभाता रिश्ता-नाता

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 7 प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ी मिलाइए
1. देवदार, इमली – (क) माम-मामी
2. पीपल, तुलसी – (ख) दादा-दादी
3. आम, खिरनी – (ग) पिता-माता
4. महुआ, मेंहदी – (घ) मामा-मामी
उत्तर
1. (ख), 2. (ग), 3. (घ), 4. (क)

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प्रश्न (ख)
दिए गए शब्दों में से उपयुक्त शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. नीम…..सा लेकिन रोगों का त्राता। (ननद-ननदोइ/सास-ससुर)
2. गुलमोहर…….सा जिसकी रंगत हरे उदासी। (नाना/चाचा)
3. अशोक…….सा रिश्तों की नैया खेता। (भ्राता/परनाना)
4. वृक्ष निभाता आज भी…….रिश्ता नाता। (सामाजिक पारिवारिक)
उत्तर
1. ननद-ननदोई
2. चाचा
3. परनाना
4. पारिवारिक

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 7 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए

(क) कवि तुलसी को किस रूप में स्मरण करता है?
उत्तर
कवि तुलसी को माता के रूप में स्मरण करता

(ख) आम से हमारा कौन-सा रिश्ता है?
उत्तर
आम हमारे नाना सदृश है।

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(ग) जामुन किस रोग की दवा है?
उत्तर
जामुन मधुमेह की दवा है।

(घ) अशोक के वृक्ष को परनाना क्यों कहा है?
उत्तर
अशोक के वृक्ष को परनाना इसलिए कहा गया है क्योंकि वह काफी पुराना वृक्ष होता है।

(ङ) पौधों के प्रति हमारे क्या कर्त्तव्य हैं?
उत्तर
हमें पौधों की रखवाली करनी चाहिए। समय-समय पर पानी और खाद देते रहना चाहिए।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 7 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन-से-पाँच वाक्यों में दें

(क) किन्हीं दो वृक्षों की उपमा किन-किन रिश्तों से की गई है? बताइए।
उत्तर
ये दो वृक्ष हैं-पीपल और तुलसी । पीपल हमारे पिता के समान है और तुलसी हमारी माता के सदृश ।

(ख) किन-किन वृक्षों से औषधियाँ बनती हैं?
उत्तर
निम्न वृक्षों से औषधियाँ बनती हैं-त्रिफला, जामुन, तुलसी।

(ग) वृक्ष न हों तो पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर
वृक्षों की अनुपस्थिति में पर्यावरण में असंतुलन आ जाएगा। कार्बन की अधिकता और ऑक्सीजन की कमी हो जाएगी। ऐसी स्थिति में मानव जीवन का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा। वृक्ष बादल लाते हैं, जिससे वर्षा होती है। वृक्षों के नहीं रहने से वर्षा नहीं होगी। पृथ्वी पर विद्यमान सभी नदी-नाले सूख जाएँगे।।

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(घ) ‘आओ आनंद उलीचें से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर
‘आओ आनंद उलीचें’ से कवि का तात्पर्य है पेड़ लगाकर खुशियाँ बाटें। पेड़-पौधे हमारे जीवन को आनंदमय बनाते हैं। हमें पेड़ लगाने चाहिए, क्योंकि तभी हमारा जीवन आनंदित होगा।

(ङ) कविता के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर
कविता के माध्यम से कवि यह बताना चाहता है कि पेड़-पौधे हमारे जीवन के अति महत्त्वपूर्ण अंग हैं। पेड़-पौधों से हमारा पारिवारिक नाता है। अतः ज्यादा से ज्यादा पौधों को लगाना चाहिए। उनकी कटाई नहीं करनी चाहिए। पेड़-पौधे जीवनदायी होते हैं। उनको बचाने में हमारी भलाई है।

भाषा की बात

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध उच्चारण कीजिए
त्रिफला, औषधियाँ, पारिवारिक, जीवनदायी, नाता, वैद्य।
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी पर गोला लगाइए
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 7 वृक्ष निभाता रिश्ता-नाता 1

प्रश्न 6.
उदाहरण के अनुसार स्त्रीलिंग रूप लिखिए
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 7 वृक्ष निभाता रिश्ता-नाता 2

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प्रश्न 7.
वाक्यों को शुद्ध कीजिए
नदियाँ में बढ़ा आ गई है।
आप क्या काम करेगा?
बच्चों काम कर रहे हैं।
कइयों लोगों ने कोशिश की है
तुम कब आया?
उत्तर

नदियों में बाढ़ आ गई है।
आप क्या काम करेंगे।
बच्चे काम कर रहे हैं।
कई लोगों ने कोशिश की है।
तुम कब आए?

प्रश्न 8.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए
पिता, माता, आम, ससुर
उत्तर
पितृ, मातृ, आम्र, श्वसुर

वृक्ष निभाता रिश्ता-नाता प्रसंग सहित व्याख्या

1. पीपल पावन पिता सरीखा, तुलसी जैसे माता
‘त्रिफला’ वहन-बहू-विटिया-सा, बेर सरीखा भ्राता,
महुआ मामा जैसा लगता, बन उपवन महकाता
आम-वृक्ष नाना-सा वत्सल, मीठे फल बरसाता
पोषक, रक्षक, जीवनदायी औषधियों का दाता।
वृक्ष निमाता आज भी पारिवारिक रिश्ता-नाता।
पौधों को रो-सींचें।।
आओ! आनन्द उलीचें।

शब्दार्थ-पावन पवित्र । सरीखा=समान । भ्राता=भाई। उपवन-बाग=बगीचा । महकता = सुगंध फैलाता । वत्सल= पुत्रवत् प्रेम करने वाला। औषधि =दवा।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक सुगम भारती-6 में संकलित कविता ‘वृक्ष निर्माता रिश्ता-नातासे ली गई हैं।

ब्याख्या-पीपल पिता के समान और तुलसी माता के समान है। त्रिफला बहन, बहू या बिटिया जैसी है जबकि बेर भाई के समान है। महुआ बिल्कुल मामा जैसा है, जिसकी सुगंध चारों तरफ फैली होती है। आम का पेड़ विल्कुल नाना की तरह है जो मीठे फल के रूप में आम बाँटकर अपना प्रेम दिखाता है। इन वृक्षों में कई तरह के पोषक तत्त्व और जीवनरक्षक तत्त्व मिले हैं। ये हमें जीवन देते हैं। अतः कवि कहता है कि हमें ज्यादा-से-ज्यादा पेड़ लगना चाहिए। क्योंकि तभी हमारा जीवन आनंदित होगा।
इस प्रकार इन पंक्तियों में पेड़-पौधों की महत्ता को उजागर किया गया है। हम इनकी महत्ता समझनी चाहिए और पेड़-पौधे लगाकर जीवन को आनंदित बनाना चाहिए।

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2. मौलसिरी यानी ज्यों मौसी मोहक ममता बाली
मेंहदी मामी-सी है किंतु अद्भुत क्षमता वाली
है अशोक परनाना-सा, रिश्तों की नैया खेता
शीशम शगुन श्वसुर-सा देता, नहीं कभी कुछ लेता
मधुमेह का कुशल वैद्य है जामुन ज्यों जामाता।
वृक्ष निभाता आज भी पारिवारिक रिश्ता-नाता।
पौधों को रोपें-सींचें।।
आओ आनन्द उलीचें।।

शब्दार्थ-मोहक = आकर्षक। अद्भुत= विचित्र, विलक्षण । नैया = नाव। कुशल=निपुण । वैद्य = डाक्टर। जमाता = दामाद। मधुमेह एक प्रकार की बीमारी जिसमें शरीर में चीनी की अधिकता हो जाती है।

प्रसंग-पूर्ववत्

व्याख्या-मौलसिरि मौसी की तरह ममतामयी हैमेंहदी अद्भुत गुणों वाली मामी जैसी है। अशोक का पेड़ परनाना की तरह सभी संबंधों को आगे बढ़ाता है। शीशम का पेड़ सब गुणों से भरा हुआ श्वसुर समान है। वह सिर्फ देता है, लेता नहीं है। जामुन का पेड़ वैद्य की तरह है जो मधुमेह का इलाज करता है। कवि उसकी तुलना जामाता (दामाद) से करता है। इस प्रकार पेड़-पौधों से हमें कुछ न कुछ मिलता |ही है। वे हमसे लेते कुछ नहीं हैं, सिर्फ देते हैं। वे जीवनदायी हैं। हमारे जीवन को आनंदमय बनाते हैं। अतः हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए।

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 15 माटी वाली

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Chapter 15 माटी वाली (विद्यासागर नौटियाल)

माटी वाली पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

माटी वाली  लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
माटी वाली के भरण-पोषण का आधार क्या था?
उत्तर
माटी वाली के भरण-पोषण का आधार घर-घर में लाल मिट्टी देते रहना था।

प्रश्न 2.
माटी वाली को लोग क्यों पहचानते थे?
उत्तर
घर-घर में लाल मिट्टी देते रहने के उस काम को करने वाली माटी वाली अकेली थी। इसलिए उसको लोग पहचानते थे।

प्रश्न 3.
माटी वाली के पास अच्छे या बुरे भाग्य के बारे में ज्यादा सोचने का समय क्यों नहीं था?
उत्तर
माटी वाली के पास अच्छे या बुरे भाग्य के बारे में ज्यादा सोचने का समय नहीं था। यह इसलिए कि वह अपने काम में बहुत ही व्यस्त रहती थी।

प्रश्न 4.
टिहरी शहर में आपाधापी क्यों मची थी?
उत्तर
टिहरी शहर में आपाधापी मची थी। यह इसलिए कि टिहरी बाँध की दो सुरंगों को बंद कर दिया गया है। शहर में पानी भरने लगा है।

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माटी वाली  लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘भूख मीठी कि भोजन मीठा’ से लेखक का क्या आशय है?
उत्तर
भूख मीठी कि भोजन मीठा’ से लेखक का आशय है-अगर भूख तेज हो तो सामान्य भोजन भी अत्यधिक स्वादिष्ट और सरस लगता है।

प्रश्न 2.
टिहरी गाँव में माटी वाली का रहना जरूरी क्यों था?
उत्तर
टिहरी गाँव में माटी वाली का रहना जरूरी था। यह इसलिए कि उसकी झोपड़ी गाँव के एक ठाकुमार की जमीन पर खड़ी थी। उसकी एवज में उसे कई तरह के कामों की बेगार करनी होती थी।

प्रश्न 3.
‘गरीब आदमी का श्मशान नहीं उजड़ना चाहिए’ यह बात किस संदर्भ में कही गई है?
उत्तर
‘गरीब आदमी का श्मशान नहीं उजड़ना चाहिए’ यह बात उस संदर्भ में कही गई है जब टिहरी बाँध की दो सुरंगों को बंद कर दिया गया। शहर में पानी भरने लगा। शहर में आपाधापी मची थी। और माटी वाली अपनी झोपड़ी के बारह बैठी थी।

प्रश्न 4.
माटी वाली का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर
देखिए कहानी का सारांश।

माटी वाली भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सामासिक शब्दों का समास विग्रह कर नामोल्लेख कीजिए।
चौमासा, जमीन-जायजाद, शहरवासी, बेकाम।
उत्तर
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 15 माटी वाली img-1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से तत्सम, तद्भव, देशज और आगत शब्द छाँटिए
मुश्किल, माटी, कंकर, टेम, स्वादिष्ट, बक्त, बाँध।
उत्तर
तत्सम शब्द – स्वादिष्ट
तद्भव शब्द – माटी, कंकर
देशज शब्द – टेम, बाँध
आगत शब्द – मुश्किल, वक्त।

प्रश्न 3.
दिए गए वाक्यों को प्रश्नवाचक और निषेधावचक वाक्यों में परिवर्तित कीजिए
(क) तू बहुत भाग्यवान है।
(ख) कामिनी दौड़ती हुई वहाँ पहुँची।
उत्तर
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 15 माटी वाली img-2

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखिए
पीने योग्य, जो पढ़ा न गया हो, जिसे कोई न जानता हो, बिना इच्छा के कराया गया काम, जहाँ पर भोजन पकाया जाता है।
उत्तर
वाक्यांश – एक शब्द
पीने योग्य – पेय
जो पढ़ा न गया हो। – अपठित
जिसे कोई न जानता हो – अज्ञेय
बिना इच्छा के कराया गया काम – अवांछित
जहाँ पर भोजन पकाया जाता है – पाकशाला।

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प्रश्न 5.
उचित विराम चिहों का प्रयोग कीजिए
ठकुराइन जी जो जमीन जायजादों के मालिक हैं वे तो कहीं न कहीं ठिकानों पर जायेंगे ही पर में सोचती हूँ मेरा क्या होगा मेरी तरफ देखने वाला तो कोई भी नहीं।
उत्तर
“ठकुराइन जी! जो जमीन-जायदादों के मालिक हैं। वे तो कहीं-न-कहीं ठिकानों पर जायेंगे ही, पर मैं सोचती हूँ। मेरा या होगा? मेरी तरफ़ देखने वाला तो कोई भी नहीं है।”

प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध कीजिए
(क) हमको वहाँ जाना है।
(ख) घर में वह सिर्फ अकेला है।
(ग) पाँच रुपया की जरूरत है।
(घ) हल्ला सुनते-सुनते कान पक गया।
उत्तर
(क) मुझे वहाँ जाना है।
(ख) घर में वह अकेला है।
(ग) पाँच रुपये की जरूरत है।
(घ) हल्ला सुनते-सुनते कान पक गए।

माटी वाली योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
बाँध बनाने जैसे जनहितैषी कार्यों से भी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इन्हें किस तरह से दूर किया जा सकता है? चर्चा कीजिए।

प्रश्न 2.
किसी बाँप का अनुमानित चित्र बनाइए और शिक्षक की सहमति से कक्षा में लगाइए।

प्रश्न 3.
पुरखों की गाढ़ी कमाई से हासिल की गई चीजों को हराम के भाव बेचने को मेरा दिल गवाही नहीं देता। मालकिन के इस कवन के आलोक में विरासत के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

माटी वाली परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘माटी बाली’ कहानी का प्रतिपाय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
प्रस्तुत कहानी ‘माटी वाली’ में लेखक विद्यासागर नौटियाल ने मिट्टी बेचकर अपना भरण-पोषण करने वाली निर्धन और अभावग्रस्त स्त्री की जीवन-यापन पद्धति को अत्यंत मार्मिक ढंग से चित्रित किया है। माटी और कंटर ही मानो गाँव में उसकी पहचान बन गए हैं।

कहानी में वर्णित स्त्री अपने अच्छे या बरे भाग्य के बारे में ज्यादा नहीं सोचती। पुरुषार्थी भावना से जीते हुए परिवार चलाना, कभी अपनी दरिद्रता की बात या दुखड़ा किसी से न कहना उस स्त्री का स्वभाव है। वह अपने जीवन की विषम परिस्थितियों का सामना बड़ी हिम्मत से करती है। विस्थापित (बेघर) होने का भय भी उसे किसी प्रकार विचलित नहीं कर पाता। कहानी मर्मस्पर्शी है।

प्रश्न 2.
टिहरी शहर के लोग ‘माटी वाली’ क्यों जानते हैं?
उत्तर
टिहरी शहर के लोग माटी वाली को जानते हैं। इसके कई कारण हैं। उदाहरण के लिए टिहरी शहर में शायद कोई घर नहीं होगा जिसे वह न जानती हो या जहाँ उसे न जानते हों, घर के कुल निवासी, बरसों से वहाँ रहते आ रहे किराएदार, उनके बच्चे तलक। घर-घर में लाल मिट्टी देते रहने के उस काम को करने वाली वह अकेली है। उसका कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं। उसके बगैर तो लगता है, टिहरी शहर के कई एक घरों में चूल्हों का जलना तक मुश्किल हो जाएगा।

प्रश्न 3.
माटी बेचने से हुई आमदनी से माटी वाली क्या सोचती हुई अपने घर पहुँच गई?
उत्तर
माटी बेचने से हुई आमदनी से उसने एक पाव प्याज खरीद लिया। प्याज को कूटकर वह उन्हें जल्दी-जल्दी तल लेगी। बुढे को पहले रोटियाँ दिखाएगी ही नहीं। सब्जी तैयार होते ही परोस देगी उसके सामने दो रोटियाँ। अब वह दो रोटियाँ भी नहीं खा सकता। एक ही रोटी खा पाएगा या हद से हद डेढ़ । अब उसे ज्यादा नहीं पचता। बाकी बची डेढ़ रोटियों से माटी वाली अपना काम चला लेगी। एक रोटी तो उसके पेट में पहले ही जमा हो चुकी है। मन में यह सब सोचती. हिसाब लगाती हुई वह अपने घर पहुँच गई।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित कथनों के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए
1. माटी बाली है
1. कहानी
2. उपन्यास
3. कविता
4. एकांकी।
उत्तर
1. कहानी

2. ‘माटी वाली’ में उल्लेख है
1. गढ़वाल शहर का
2. नैनीताल शहर का
3. अल्मोड़ा शहर का
4. टिहरी शहर का।
उत्तर
4. टिहरी शहर का।

3. माटी वाली है
1. एक लाचार युवती
2. एक लाचार बुढ़िया
3. एक मेहनती-सम्पन्न औरत
4. एक बीमार बुढ़िया।
उत्तर
2. एक लाचार बुढ़िया

4. माटी वाली के पास था
1. एक थैला
2. एक कंटर
3. एक बोरा
4. एक गटूठर
उत्तर
2. एक कंटर

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5. माटी वाली रोटियाँ ले जाती थी
1. अपने बच्चों के लिए
2. अपने लिए
3. अपने बुड्ढे के लिए
4. गरीबों के लिए।
उत्तर
3. अपने बुड्ढे के लिए

प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्दों के चयन से कीजिए।
1. वह न रहे तो लोगों के सामने रोज की एक ………….. पैदा हो जाएगी। (उलझन, समस्या)
2. शहरवासी सिर्फ माटी वाली को नहीं, उसके ………….. को भी अच्छी तरह पहचानते हैं। (कंटर, बुड्ढे)
3. उसे घर पहुंचने में एक …………… तो लग ही जाता है। (दिन, घण्टा)
4. उसका बुड्ढा अपनी …………… को छोड़कर जा चुका था। (पत्नी, मोटी)
5. माटी वाली …………… से माटी लाती थी। (नदी, माटाखान)
उत्तर

  1. समस्या
  2. कंटर
  3. घण्टा
  4. मोटी
  5. माटाखान।

प्रश्न 6.
सही जोड़ी का मिलान किजिए
आस्था के स्वर – डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल
फूल और काँटे – उषा वर्मा
तुम्हारी विरासत – डॉ. एन.ई. विश्वनाथ
कल्पवृक्ष – मीराबाई
राग-सोरठा – दिवाकर वर्मा।
उत्तर
आस्था के स्वर – दिवाकर वर्मा
फूल और काँटे – डॉ. एन. ई. विश्वनाथ
तुम्हारी विरासत – उषा वर्मा
कल्पवृक्ष – डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल
राग-सोरठा – मीराबाई।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. शहर के अंदर कहीं माटाखान है नहीं।
2. घर-घर जाकर माटी बेचने वाली नाटे कद की एक लाचार बुढ़िया-माटी वाली।
3. अपनी चीज का मोह बहुत अच्छा होता है।
4. माटी वाली को जमीन का एक टुकड़ा है।
5. माटी वाली की जिंदगी शहर के तमाम घरों में माटी देते गुजर गई।
उत्तर

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए
1. भूख तो अपने में क्या होती है?
2. रोटियों को देखते ही किसका चेहरा खिल उठेगा?
3. माटी वाली किसमें गुजारा करती है?
4. माटी बेचने से हुई आमदनी से उसने एक पाव क्या खरीद लिया?
5. माटी वाली माटी कहाँ से लाती है?
उत्तर

  1. साग
  2. बुड्ढे का
  3. झोपड़ी में
  4. प्याज
  5. माटाखान से।

माटी वाली लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
माटी वाली न रहे, तो क्या पैदा हो जाएगी?
उत्तर
माटी वाली न रहे तो लोगों के सामने रसोई और भोजन कर लेने के बाद अपने चूल्हे-चौके की लिपाई करने की समस्या पैदा हो जायेगी।

प्रश्न 2.
माटी वाली को क्या चिंता थी?
उत्तर
माटी वाली को यह चिंता थी कि जो जमीन-जायदादों के मालिक हैं, वे तो कहीं-न-कहीं ठिकाने पर जायेंगे ही, लेकिन उसका क्या होगा? उसकी तरफ़ देखने वाला तो कोई भी नहीं है।

प्रश्न 3.
टिहरी बाँध पुनर्वास के साहब ने माटी वाली से क्या पूछा?
उत्तर
टिहरी बाँध के पुनर्वास के साहब ने माटी वाली से पूछा कि वह रहती कहाँ है?

प्रश्न 4.
गाँव के हर आने-जाने वाले से माटी वाली क्या कह रही थी?
उत्तर
गाँव के हर आने-जाने वाले से माटी वाली एक ही बात कह रही थी-“गरीब आदमी का श्मशान नहीं उजड़ना चाहिए।”

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माटी वाली  लेखक-परिचय

जीवन-परिचय-श्री विद्यासागर नौटियाल का हिन्दी के आधुनिक गधकारों में एक जाना-पहचाना नाम है। आपका हिन्दी कहानी के क्षेत्र में अधिक महत्त्वपूर्ण स्थान है। विद्यालयी और विश्वविद्यालयी शिक्षा समाप्त करके आपने अपने लेखन-क्षेत्र का विस्तार किया। यों तो आपने अपने शिक्षा के आरंभिक दौर में ही लेखन-कर्म के प्रति अपने को समर्पित करना शुरू कर दिया है। परिणामस्वरूप उसमें क्रमशः विस्तार होता गया।

रचनाएँ-विद्यासागर नौटियाल की अनेक कहानियाँ और निबंध प्रकाशित हो चुके हैं। ‘माटी वाली’ आपकी अत्यधिक चर्चित कहानी है।

भाषा-शैली-विद्यासागर नौटियाल के साहित्य की भाषा-शैली में किसी प्रकार की कृत्रिमता नहीं है। वह बिना लागलपेट के तथ्यों को प्रस्तुत करने में समर्थ दिखाई देती है। आपकी भाषा की शब्दावली में तत्सम और तद्भव हैं तो देशज शब्द भी कम नहीं हैं। आपकी भाषा में आए हुए शब्दों में खासतौर से जो देशज शब्द आए हैं, वे किसी विशेष अंचल के हैं। आपकी शैली मुख्य रूप से वर्णनात्मक और भावात्मक है। कहीं-कहीं वह चित्रमयी और अलंकृत भी हो गई है। इस प्रकार आपकी शैली के कई रूप हैं। उनसे आपने अपने कथ्य के तथ्य को सामने लाने में सफलता काफी हद तक हासिल की है।

साहित्य में स्थान-विद्यासागर नौटियाल का हिन्दी के आधुनिक कथाकारों-गद्यकारों में लोकप्रिय स्थान है। आपका स्थान समकालीन रचनाकारों में जहाँ सम्मानपूर्ण है, वहीं आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरक स्वरूप भी है।

माटी वाली कहानी का सारांश

‘माटी वाली विद्यासागर नौटियाल की एक मर्मस्पर्शी कहानी है। इसमें ‘माटी वाली’ नामक एक विस्थापित (बेघर) स्त्री की कथा कही गई है। हिन्दी शहर में ऐसा कोई नहीं है जो उसे नहीं जानता है। उसके बिना तो मानो टिहरी शहर के कई एक घरों में चूल्हे का जलना तक कठिन हो जाएगा। घरों की सफाई के लिए वही घर-घर माटी वेचती है। वह नाटे कद की एक लाचार बुढ़िया है। उसके पास अपने अच्छे-बुरे के बारे में सोचने का समय नहीं है। एक बार किसी घर की मालकिन में माटी वाली को अपने कंटर की माटी कच्चे आँगन के एक कोने में उड़ेल देने को कहा। इसके बाद उसे दो रोटियाँ दे दी। उसने चुपके से अपने हाथ में थामी उन दो रोटियों में से एक को मोड़कर कपड़े में लपेटकर बाँध लिया। दूसरे को खाने का दिखावा करने लगी। मालकिन द्वारा दी गई चाय को वह सूसू करके रोटी के टुकड़ों के साथ सुड़कने लगी। फिर उसने चाय की खूब तारीफ़ की। फिर उसने आधुनिक जमाने में स्टील के बढ़ते हुए बर्तनों के बारे में मालकिन से कुछ देर बात करती रही। दूसरे दिन भी उसे मिट्टी ले आने के आदेश से दो रोटियाँ मिल गई। उन्हें भी उसने अपने कपड़े में बाँध लिया कि लोग जानें कि वह ये रोटियाँ अपने बुड्ढे के लिए ले जा रही है।

उसका गाँव शहर से दूर है। इसलिए घंटा भर पहुँचने में लग जाता है। पूरा दिन माटाखान में मिट्टी खोदकर अलग-अलग स्थानों में ले जाने में बीत जाता है। उसके पास जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं है। उसकी झोपड़ी एक ठाकुमर की जमीन पर खड़ी है। इसके लिए उसे बेगार करनी पड़ती है। माटी बेचने से हुई आमदनी से उसने एक पाव प्याज खरीद उसे तलने को सोचने लगी। फिर उसने सोचा उसका एक ही रोटी खा पाएगा या डेढ। ऐसी सोचती हुई वह घर पहुँची तो उसने देखा कि उसका बुड्ढा अब नहीं रहा। टिहरी बाँध की दो सुरंगों को बंद कर दिया गया है। शहर में पानी भरने लगा हैं शहर में आपाधापी मची हैं। शहरवासी घरों को छोड़कर भागने लगे हैं। पानी भर जाने से सबसे पहले कुछ श्मशान घाट डूब गए हैं। माटी वाली अपनी झोपड़ी के बाहर बैठी है। गाँव के हर आने-जाने वाले से एक ही बात कहती जा रही है-“गरीब आदमी का श्मशान नहीं उजड़ना चाहिए।”

माटी वाली संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

(1) उसका गाँव शहर के इतना पास भी नहीं है। कितना ही तेज चलो फिर भी घर पहुँचने में एक घण्टा तो लग ही जाता है। रोज सुबह निकल जाती है वह अपने घर से। पूरा दिन माटाखान में मिट्टी खोदने, फिर विभिन्न स्थानों में फैले घरों तक उसे ढोने में बीत जाता है। घर पहुंचने से पहले रात घिरने लगती है। उसके पास अपना कोई खेत नहीं। जमीन का एक भी टुकड़ा नहीं। झोपड़ी, जिसमें वह गुजारा करती है, गाँव के एक ठाकुमर की जमीन पर खड़ी है। उसकी जमीन पर रहने की एवज में उस भले आदमी के घर पर भी माटी वाली को कई तरह के कामों की बेगार करनी होती है।

शब्दार्थ-एवज-बदले। बेगार-बेगारी।

संदर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिंदी सामान्य’ 10वीं में संकलित कहानीकार विद्यासागर नौटियाल लिखित कहानी ‘माटी वाली’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में कहानीकार ने ‘माटी वाली’ एक बड़ढी औरत के दैनिक जीवन के विषय में यह बतलाना चाहा है कि

व्याख्या-माटी वाली का गाँव शहर से दूर था। जब वह अपने गाँव से पैदल चलकर शहर आती थी तो वह बहुत तेज चलती थी ताकि जल्दी से पहुँचकर काम कर सके। फिर भी उसे लगभग एक घण्टा लग ही जाता था। इस प्रकार वह रोज ही सुबह-सुबह अपने घर से निकल जाती थी। फिर शहर आकर वह दिन भर माटाखान में मिट्टी खोदती थी। इसके बाद वह अलग-अलग स्थानों पर उसे ढो-ढोकर पहुँचाती थी। उससे लोगों की जरूरतें पूरी होती थीं। शाम होने पर वह घर लीटने लगती थी। उसके जीवन का दुखद पक्ष यह भी था कि उसकी अपने कोई जमीन नहीं थी। वह जिस झोपड़ी में रहती थी, वह भी उसकी अपनी नहीं थी। वह किसी एक ठाकुमर की थी। उस पर अपना गुजर-बसर करने के लिए उस ठाकुमार के घर पर उसे कई प्रकार छोटे-बड़े बेगार करने पड़ते थे।

विशेष-

  1. माटी वाली की जीवन-दशा पर प्रकाश है।
  2. वाक्य-गठन अर्थपूर्ण है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘माटी वाली’ का दैनिक जीवन कैसा था?
उत्तर
‘माटी वाली’ का दैनिक जीवन बड़ा ही संघर्षपूर्ण था। उसे घोर परिश्रम करना पड़ता था। फिर भी वह विस्थापित थी। इसके लिए वह बेगार करती थी।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गधांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त गद्यांश के द्वारा लेखक ने ‘माटी वाली’ के दैनिक जीवन-स्वरूप को प्रेरक रूप में प्रस्तुत किया है। इससे कड़ी मेहनत करने और आत्मनिर्भर होने की सीख मिलती है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व

p-ब्लॉक के तत्त्व NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ट्राइहैलाइडों की अपेक्षा पेंटाहैलाइड अधिक सहसंयोजी क्यों होते हैं ?
उत्तर
केन्द्रीय परमाणु की जितनी अधिक धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था होगी उसकी ध्रुवण क्षमता उतनी ही अधिक होगी। जिसके कारण केन्द्रीय परमाणु और हैलोजन परमाणु के मध्य बने बन्ध का सहसंयोजी लक्षण बढ़ जाता है। पेन्टाहैलाइड में केन्द्रीय परमणु +5 ऑक्सीकरण अवस्था में है जबकि ट्राइहैलाइड में यह +3 ऑक्सीकरण अवस्था में है। अतः ट्राइहैलाइडों की अपेक्षा पेन्टाहैलाइड अधिक सहसंयोजी होते हैं।

प्रश्न 2.
वर्ग-15 के तत्वों के हाइड्राइडों में BiH3 सबसे प्रबल अपचायक क्यों है ?
उत्तर
वर्ग-15 के सभी तत्वों में Bi परमाणु सबसे बड़ा है। अत: Bi-H आबन्ध दूरी सबसे अधिक और Bi-H बन्ध वियोजन एन्थैल्पी सबसे कम है। यही कारण है कि Bi-H बन्ध, वर्ग के दूसरे हाइड्राइडों की तुलना में आसानी से वियोजित (टूट) हो जाता है जिसके कारण BiH3 सबसे प्रबलतम अपचायक है।

प्रश्न 3.
N2 कमरे के ताप पर कम क्रियाशील क्यों है ?
उत्तर
N ≡ N में आबंध एन्थैल्पी उच्च होती है ऐसा pπ-pπ आबंध के कारण है अत: N2 कम क्रियाशील है। यह केवल उच्च ताप पर क्रियाशील होता है।

प्रश्न 4.
अमोनिया की लब्धि को बढ़ाने के लिये आवश्यक स्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
व्यापक स्तर पर अमोनिया हैबर प्रक्रम द्वारा बनाई जाती है।

N2(g) +3H2(g) ⇌ 2NH3(g)fH°= -92.4 kJ mol-1

ली-शातेलिए नियम के अनुसार, उच्च दाब अमोनिया निर्मित करने के लिए अनुकूल होता है। अमोनिया उत्पादन के लिए अन्य अनुकूलतम परिस्थितिया निम्न प्रकार हैं –

  • ताप- लगभग 700 K
  • दाब- 200 वायुमण्डलीय दाब या 200 x 105Pa
  • उत्प्रेरक-आयरन ऑक्साइड
  • वर्धक-मॉलिब्डेनम, MO या K2O तथा Al2O3

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प्रश्न 5.
Cu2+ विलयन के साथ अमोनिया कैसे क्रिया करती है ?
उत्तर
अमोनिया Cu2+ आयन के नीले रंग के विलयन से क्रिया करता है तथा गहरे नीले रंग का विलयन बनाता है।

Cu+2(aq) +4NH3(aq) ⇌ [Cu(NH3)4]2+(aq)

प्रश्न 6.
N2O5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता क्या है ? ।
उत्तर
N2O5 की संरचना से ज्ञात होता है कि N2O5 में N की सहसंयोजकता चार है।
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प्रश्न 7.
PH3 से PH+4 का आबंध कोण अधिक है, क्यों ?
उत्तर
PH3 व PH+4 में P की संकरण अवस्था sp3 है। PH4+ आयन में चारों उपकक्षक आबंधित है। जबकि PH3 में फॉस्फोरस पर इलेक्ट्रॉन युग्म होता है जो कोण के मान को प्रतिकर्षण के कारण कम करते हैं। सामान्यतया 109°2s’. से कम होता है।
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प्रश्न 8.
क्या होता है जब श्वेत फॉस्फोरस को CO2के अक्रिय वातावरण में सान्द्र कॉस्टिक सोडा विलयन के साथ गर्म करते हैं ?
उत्तर
श्वेत फॉस्फोरस को CO2 के अक्रिय वातावरण में सान्द्र कॉस्टिक सोडा विलयन के साथ गर्म करने पर PH3 (फॉस्फीन)उत्पन्न होती है।
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प्रश्न 9.
क्या होता है जब PCl5 को गर्म करते हैं ?
उत्तर
PCl5 में 5P-Cl बन्ध है जिसमें तीन निरक्षीय P-Cl आबन्ध (लम्बे) तथा दो अक्षीय आबन्ध छोटे हैं। दोनों अक्षीय आबन्ध, निरक्षीय आबन्धों से बड़े होते हैं क्योंकि निरक्षीय आबन्ध युग्मों की तुलना में अक्षीय आबन्ध युग्मों पर अधिक प्रतिकर्षण होता है। जब PCl5 को गर्म किया जाता है तो कम स्थायी दोनों अक्षीय आबन्ध टूट जाते हैं तथा PCl3 बनता है।
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हल्का गर्म करने पर PCl5 उर्ध्वपातित हो जाता है परन्तु अधिक गर्म करने से वियोजित हो जाता है।

प्रश्न 10.
PCl5 की भारी पानी में जल अपघटन अभिक्रिया का संतुलित समीकरण लिखिए।
उत्तर
PCl5 + D2O → POCl3 + 2DCl.

प्रश्न 11.
H3PO4 की क्षारकता क्या है ?
उत्तर
H3PO4 अणु में P-OH तीन आबंध होते हैं। इसलिए यह तीन क्षारकता दर्शाता है।
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प्रश्न 12.
क्या होता है जब H3PO3 को गरम करते हैं ?
उत्तर
गरम करने पर H3PO4 असमानुपातिक गुण दर्शाता है तथा यह असमानुपातिक होकर आर्थोफॉस्फोरिक अम्ल तथा फॉस्फीन देता है।
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प्रश्न 13.
सल्फर के महत्वपूर्ण स्रोतों को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर-
सल्फर की उपलब्धता तथा स्रोत भूपर्पटी में सल्फर की उपलब्धता केवल 0.03 से 0.1% है। संयुक्त अवस्था में निम्न रूपों में पाई जाती हैं –

(i) सल्फेटों के रूप में-उदाहरण- जिप्सम (CaSO4. 2H2O), एप्सम लवण (MgSO4.7H2O), बेराइट (BaSO4).
(ii) सल्फाइड़ों के रूप में- उदाहरण- गेलेना (PbS), यशद ब्लैंड (ZnS), कॉपर पाइराइट (CuFeS2)
सल्फर की सूक्ष्म मात्रा ज्वालामुखी में हाइड्रोजन सल्फाइड के रूप में पाई जाती है। कार्बनिक पदार्थों जैसे –
अंडे, प्रोटीन, लहसुन, प्याज, सरसों, बाल तथा ऊन में सल्फर होती है।

प्रश्न 14.
वर्ग-16 के तत्वों के हाइड्राइडों के तापीय स्थायित्व के क्रम को लिखिये।
उत्तर
वर्ग-16 के तत्वों के हाइड्राइडों का तापीय स्थायित्व H-E आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी के अनुक्रमानुपाती होता है। वर्ग में नीचे जाने पर, आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी घटती है क्योंकि आबन्ध लम्बाई बढ़ती है। अतः आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी का घटता हुआ क्रम निम्न है

H2O > H2S > H2Se > H2Te > H2Po.

तापीय स्थायित्व का क्रम भी इसी प्रकार है।

प्रश्न 15.
H2O एक द्रव तथा H2S गैस क्यों है ?
उत्तर
H2O के अणुओं के मध्य प्रबल हाइड्रोजन बंध उपलब्ध होता है जबकि H2S अणुओं के मध्य हाइड्रोजन आबंध नहीं होता अतः जल द्रव है तथा H2S गैस।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व ऑक्सीजन के साथ सीधे अभिक्रिया नहीं करता –
Zn, Ti, Pt, Fe.
उत्तर
Pt नोबल धातु होने के कारण ऑक्सीजन से सीधे क्रिया नहीं करता। Zn, Ti तथा Fe सक्रिय धातु होने के कारण ऑक्सीजन से सीधे क्रिया करते हैं।
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प्रश्न 17.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए –
(i) C2H4 + O2
(ii) 4Al + 3O2
उत्तर
(i) C2H4 + 3O2 → 2CO2(g) + 2H2O
(ii) 4Al + 3O2 → 2Al2O3

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प्रश्न 18.
O3 एक प्रबल ऑक्सीकारक की तरह क्रिया क्यों करती है ?
उत्तर
O3 एक प्रबल ऑक्सीकारक है क्योंकि यह आसानी से नवजात ऑक्सीजन मुक्त करती है।
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प्रश्न 19.
O3 का मात्रात्मक आकलन कैसे किया जाता है ?
उत्तर
जब ओजोन को पोटैशियम आयोडाइड विलयन की अधिकता में क्रियाशील किया जाता है तब आयोडीन उत्पन्न होती है । जब उत्पन्न आयोडीन I2 को सोडियम थायोसल्फेट से क्रियाशील किया जाता है तब मात्रात्मक रूप से O3 गैस की गणना करता है।

2I+H2O(l) + O3(g) → 2OH(aq) + I2(s) + O2(g)

प्रश्न 20.
तब क्या होता है जब सल्फर डाइऑक्साइड को Fe(III) लवण के जलीय विलयन में से प्रवाहित करते हैं ?
उत्तर
Fe (III) आयन विलयन से SO2 गैस को गुजारा जाता है तब Fe (III) आयन अपचयित होकर Fe (II) आयन में बदल जाते हैं।

2Fe+3 + SO2 + 2H2O → 2Fe+2 + SO42- + 4H+

प्रश्न 21.
दो S-O आबन्धों की प्रकृति पर टिप्पणी कीजिए जो SO2 अणु बनाते हैं क्या SO2 अणु के ये दोनों S-O आबन्ध समतुल्य हैं ?
उत्तर
SO2 अणु में दोनों S-O बन्धों की प्रकृति सहसंयोजी है। दोनों की आबन्ध लम्बाई (143 pm) समान है। यह दो विहित रूपों का अनुनाद संकर है। (संरचना के लिये पाठ्यपुस्तक देखें)

प्रश्न 22.
SO2 की उपस्थिति का पता कैसे लगाया जाता है ?
उत्तर
यह तीखी गंध वाली रंगहीन गैस है। इसकी उपस्थिति का पता निम्न दो परीक्षणों द्वारा किया जाता है –
(a) यह अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट (VII) विलयन को रंगहीन कर देती है।
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(b) यह अम्लीय पोटैशियम डाइक्रोमेट विलयन का रंग नारंगी से हरा कर देती है।
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प्रश्न 23.
उन तीन क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए जिनमें H2SO4 महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उत्तर
H2SO4 के उपयोग –

  • इसका उपयोग वर्णकों, प्रलेपों तथा रंजकों के मध्यवर्तियों के उत्पादन में किया जाता है।
  • यह पेट्रोलियम के शोधन में प्रयोग किया जाता है।
  • इसका उपयोग उर्वरकों के उत्पादन में किया जाता है।

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प्रश्न 24.
संस्पर्श प्रक्रम द्वारा H2SO4 की मात्रा में वृद्धि करने के लिए आवश्यक परिस्थितियों को लिखिए।
उत्तर
सम्पर्क विधि द्वारा H2SO4 उत्पादन की मुख्य रासायनिक समीकरण निम्न है –

2SO2(g)+ O2(g) ⇌ 2SO3(g)fH°= -1966kJmol-1)

अभिक्रिया उत्क्रमणीय, ऊष्माक्षेपी तथा आयतन के घटते क्रम में प्रेरित होती है।
∴ कम, ताप व उच्च दाब, प्रभावी कारक है H2SO4 के उत्पादन में लेकिन ताप बहुत कम नहीं होना चाहिए। नहीं तो अभिक्रिया धीमी हो जाएगी।
अतः 720 K ताप व 2 बार वायुदाब तथा V2O5 उत्प्रेरक अभिक्रिया को यदि प्रदान करता है।

प्रश्न 25.
जल में H2SO2 के लिए \(K_{a_{2}}<<K_{a_{1}}\) क्यों है ?
उत्तर
जल में H2SO4 प्रबल अम्ल है क्योंकि आयनित होकर H3O+ तथा HSO4 आयन बनाता है। HSO4(aq); से H3O+ बनने की आयतन मान कम है जब अत: \(K_{a_{2}}<<K_{a_{1}}\)
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प्रश्न 26.
आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी तथा जलयोजन एन्थैल्पी जैसे प्राचलों को महत्व देते हुए F2 तथ Cl2 की ऑक्सीकारक क्षमता की तुलना कीजिए।
उत्तर
F2 तथा Cl2 के तुलनात्मक परमाण्विक गुण
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उपरोक्त आँकड़ों से स्पष्ट है कि आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के मान क्लोरीन के लिए उच्च हैं लेकिन जलयोजन एन्थैल्पी का मान फ्लुओरीन के लिए बहुत उच्च है। उन दोनों के प्रभावों की क्षतिपूर्ति करता है। यह मान ही फ्लुओरीन को क्लोरीन की तुलना में प्रबल ऑक्सीकारक बनाता है।
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हैलोजनों की तुलनात्मक ऑक्सीकारक सामर्थ्य को उनकी जल के साथ अभिक्रिया से और अधिक समझा जा सकता है।

2F2(g) +2H2O(l) → 4H+(aq) + 4F(aq) + O2(g)
Cl2(g) +H2O (l) → HCl (aq) + HOCl(aq)

प्रश्न 27.
दो उदाहरणों द्वारा फ्लुओरीन के असामान्य व्यवहार को दर्शाइये।
उत्तर
फ्लुओरीन के दो असामान्य व्यवहार इस प्रकार हैं –
(i) यह केवल एकमात्र ऑक्सी-अम्ल बनाती है जबकि अन्य हैलोजन अनेक ऑक्सी-अम्ल बनाते हैं।
(ii) प्रबल हाइड्रोजन बन्ध के कारण हाइड्रोजन फ्लुओराइड (HF) द्रव है (क्वथनांक 293 K) जबकि दूसरे हाइड्रोजन हैलाइड गैस हैं।

प्रश्न 28.
समुद्र कुछ हैलोजन का मुख्य स्रोत है। टिप्पणी कीजिए।
उत्तर
हैलोजन के लिए महासागर प्रमुख स्रोत है समुद्री जल में क्लोराइड, ब्रोमाइड और आयोडीन के लवण मिलते हैं। जब पानी को सुखाया जाता है तब लवणों को प्राप्त करते हैं।
KCl, MgCl2. 6H2O. तथा 0.5% मात्रा में आयोडीन।

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प्रश्न 29.
Cl2 की विरंजक क्रिया का कारण बताइये।
उत्तर
क्लोरीन की विरंजन क्रिया ऑक्सीकरण के कारण है। जब क्लोरीन जल से क्रिया करती है तो यह नवजात ऑक्सीजन देती है जो रंगीन पदार्थों को विरंजित करती है।

Cl2 +H2O → 2HCl + [O]
रंगीन पदार्थ + [O] → रंगहीन पदार्थ

लोरीन का विरंजक प्रभाव स्थायी होता है। यह नमी की उपस्थिति में वानस्पतिक अथवा कार्बनिक पदार्थों को विरंजित करती है।

प्रश्न 30.
उन कुछ विषैली गैसों के नाम बताइये जो क्लोरीन गैस से बनाई जाती है।
उत्तर
(i) फॉस्जीन (COCl2)
(ii) अश्रुगैस (CCl3.NO2)
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प्रश्न 31.
I2 की अपेक्षा ICl अधिक क्रियाशील क्यों है ?
उत्तर
ICl में उपस्थित, I-Cl आबन्ध, I2 में उपस्थित I-Iआबन्ध की तुलना में दुर्बल होते हैं। अतः ICl, I2 की तुलना में अधिक क्रियाशील है।

प्रश्न 32.
हीलियम को गोताखोरी के उपकरणों में उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर
रक्त में बहुत कम विलेयता के कारण हीलियम का उपयोग गोताखोरी के उपकरणों में किया जाता है।

प्रश्न 33.
निम्नलिखित समीकरण को संतुलित कीजिए –

XeF6 + H2O →XeO2F2 + HF
उत्तर
XeF6 + 2H2O →XeO2F2 + 4HF.

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प्रश्न 34.
रेडॉन के रसायन का अध्ययन करना कठिन क्यों था?
उत्तर
रेडॉन एक रेडियोधर्मी तत्व है जिनकी अर्धआयु बहुत कम है अत: इनकी रासायनिक शास्त्र को समझना कठिन है।

p-ब्लॉक के तत्त्व NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वर्ग 15 के तत्वों के सामान्य गुणधर्मों को उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्था, परमाण्विक आकार, आयनन एन्थैल्पी तथा विद्युत्ऋणात्मकता के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
उत्तर
आवर्त सारणी के समूह 15 में पाँच तत्वों-नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), आर्सेनिक (As), एण्टीमनी (Sb) तथा बिस्मथ (Bi) का समावेश है। इन तत्वों को सम्मिलित रूप से ‘प्रिकोजन’ कहा जाता है तथा उनके यौगिकों को ‘प्रिकोनाइड’ कहते हैं। इसका ग्रीक में अर्थ होता है-दम घुटने वाला (क्योंकि वायुमंडल की आयतनानुसार 21% ऑक्सीजन को हटा दिया जाए तो शेष बची नाइट्रोजन में दम तो घुटेगा ही)।

निम्न बिन्दुओं पर इनकी विवेचना इस प्रकार है –

1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic configuration)-इनके संयोजकता कक्ष में पाँच इलेक्ट्रॉन होते हैं तथा इस कक्ष का सामान्य विन्यास ns2np3 से प्रदर्शित होता है। जहाँ, n= 2 से 6 तक होता है। अंतिम से पहले वाले कक्ष में N में 2, फॉस्फोरस में 8 तथा अन्य में 18 इलेक्ट्रॉन होते हैं। np3 में स्थित तीन इलेक्ट्रॉन हुंड के नियम के अनुसार, npx1npy1npz1 के रूप में वितरित होते हैं। यह विन्यास अर्द्धपूरित अवस्था में होने के कारण स्थायित्व प्रदर्शित करता है। यही कारण है कि ये तत्व अधिक क्रियाशीलता प्रदर्शित नहीं करते।

2. आयनन एन्थैल्पी (Ionization enthalpy)-(a) समूह 14 (कार्बन परिवार) के तत्वों की तुलना में समूह 15 (नाइट्रोजन परिवार) के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी अपेक्षा से अधिक होती है।
(b) उसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटती है।

3. विद्युत् ऋणविद्युतता (Electronegativity)-समूह 14 के तत्वों की तुलना में समूह 15 के तत्वों की ऋणविद्युतता अधिक होती है। इसका कारण परमाण्विक त्रिज्या का घटना तथा नाभिकीय आवेश का बढ़ना है।

4. परमाण्विक आकार (Atomic shape)-समूह 15 में ऊपर से नीचे जाने पर विद्युत्ऋणता में कमी होती जाती है, इसका कारण परमाणु त्रिज्या का बढ़ना तथा आवरण प्रभाव का बढ़ना है। .

5. ऑक्सीकरण अवस्था (Oxidation state)-समूह 15 के तत्वों का संयोजकता कक्ष का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np3 होने के कारण इन तत्वों की संभावित ऑक्सीकरण अवस्थाएँ -3, +3 तथा +5 हो सकती हैं।
N तथा P अपने यौगिकों में -3 ऑक्सीकरण अवस्था में होते हैं। इनकी उच्च विद्युत्ऋणता तथा छोटा आकार इसका कारण है। अधिक विद्युत्धनी तत्वों से संयोगकर, ये नाइट्राइड तथा फॉस्फाइड बनाते हैं । जैसे Mg3N2 तथा Mg3P2, जिसमें N तथा P की ऑक्सीकरण अवस्था -3 है।

किंतु समूह में नीचे जाने पर यह प्रवृत्ति कम होती जाती है क्योंकि परमाणु का आकार भी बढ़ता है तथा विद्युत्ऋणता भी घटती हैं अपने से अधिक विद्युत्ऋणी तत्वों से जब ये संयोग करते है, तो धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करने लगते हैं।

फॉस्फोरस तथा आगे के तत्व +3 एवं +5 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं। +3 ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी होती है। समूह में नीचे जाने पर +5 ऑक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व घटता जाता है।

+5 ऑक्सीकरण अवस्था के लिये ns2np3 के सभी पाँचों इलेक्ट्रॉन निकलना आवश्यक है किंतु समूह में नीचे जाने पर ns2 इलेक्ट्रॉनों की अक्रियता बढ़ती जाती है। यह इलेक्ट्रॉन युग्म अलग नहीं होता, इसलिए इसे

“अक्रिय इलेक्ट्रॉन युग्म” (Inert electron pair) कहते हैं। इसके प्रभाव से मात्र ns3 के तीन इलेक्ट्रॉन निकल पाते हैं जो +3 ऑक्सीकरण अवस्था के लिए जिम्मेदार हैं। जिस प्रभाव के कारण +5 ऑक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व समाप्त हो जाता है, उसे अक्रिय युग्म प्रभाव (Inert pair effect) कहते हैं। इसीलिए BiCl3 का अस्तित्व है, BiCl5 का नहीं।

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प्रश्न 2.
नाइट्रोजन की क्रियाशीलता फॉस्फोरस से भिन्न क्यों है ?
उत्तर
नाइट्रोजन द्विपरमाणुक रूप में पाया जाता है। नाइट्रोजन के दो परमाणुओं के बीच त्रिबन्ध (N≡N) की उपस्थिति के कारण इसकी आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी (941.4 kJ mol-1) अधिक है। इस प्रकार नाइट्रोजन अपने तत्व रूप में अक्रिय है।

इसके विपरीत फॉस्फोरस (श्वेत या पीला) P4 अणु से बना होता है, क्योंकि N≡N त्रिबन्ध की अपेक्षा (941.4 kJ mol-1), P-P एकल बन्ध काफी दुर्बल (213 kJ mol-1) होता है। अतः फॉस्फोरस, नाइट्रोजन की अपेक्षा बहुत अधिक क्रियाशील है।

प्रश्न 3.
वर्ग 15 के तत्वों की रासायनिक क्रियाशीलता की प्रवृत्ति की विवेचना कीजिए।
उत्तर
रासायनिक क्रियाशीलता (Multiple bonding and Chemical reactivity) –
(a) समूह 15 के तत्व क्रियाशीलता के मामले में बहुत भिन्नता रखते हैं। अधिक विद्युत्ऋणी होने के बावजूद नाइट्रोजन अक्रिय है। N2 की अक्रियता का कारण अणु में त्रिबंध का होना तथा अत्यधिक बंधन ऊर्जा (941.4 kJ mol-1) का होना है।

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फॉस्फोरस की परमाणुकता 4 है। चारों P परमाणु एक चतुष्फलक के शीर्षों पर स्थित होते हैं तथा आपस में जुड़े होते हैं। इस प्रकार से फॉस्फोरस की तीन सहसंयोजकताएँ पूर्ण होती हैं।

sp3 संकरण में बनने वाला 109°28′ का कोण इसमें लुप्त रहता है तथा 60° का कोण होता है। इस वजह से श्वेत रंग का P4 एक अत्यंत ‘तनाव’ युक्त अणु होता है जो इसे सक्रिय बनाता है। दूसरी ओर लाल रंग का फॉस्फोरस खुली श्रृंखला में होने के कारण अपेक्षाकृत निष्क्रिय होता है। As, Sb तथा Bi भी क्रियाशील नहीं है।।

(b) दो नाइट्रोजन परमाणुओं के बीच Pπ-Pπ बंध के कारण त्रिबंध होता है। फॉस्फोरस में Pπ-Pπ बंध संभव है। ऐसे बंधन मुक्त यौगिकों के उदाहरण – POX3,RN = PX3,R3P = O,R3P = CR2 (R = एल्किल समूह)।

फॉस्फोरस तथा आर्सेनिक में Pπ-Pπ बंध भी बनाने की क्षमता है। ऐसा ये संक्रमण तत्वों के साथ करते हैं। :P(C2H5), तथा :As(C6H5)3 लिगेण्ड के रूप में रहकर संक्रमण धातु के साथ यह बंध बनाते हैं। अभी हाल में P = C, P≡ C, P = N, P = P तथा As = As समूहों से युक्त यौगिकों का भी संश्लेषण किया गया है।

प्रश्न 4.
NH3 हाइड्रोजन बंध बनाती है। परंतु PH3नहीं बनाती क्यों ?
उत्तर
नाइट्रोजन और हाइड्रोजन की विद्युत्ऋणात्मकताओं में अपेक्षाकृत अधिक अन्तर होने से इनके बीच बने सहसंयोजी बन्ध की प्रकृति ध्रुवीय है। यही कारण है कि NH3 अणुओं के बीच H-आबन्ध बनाता है।

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फॉस्फोरस तथा हाइड्रोजन की विद्युतऋणात्मकताएँ समान हैं यही कारण है कि P-H सहसंयोजी बन्ध अध्रुवीय होता है। अतः PH3 अणुओं के बीच H-आबन्ध नहीं बनते हैं।

प्रश्न 5.
प्रयोगशाला में नाइट्रोजन कैसे बनाते हैं ? संपन्न होने वाली अभिक्रिया के रासायनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर
(i) N2 के विरचन की प्रयोगशाला विधि – जलीय अवस्था में अमोनियम क्लोराइड और सोडियम नाइट्राइट क्रिया कर N2 बनाते हैं। अभिक्रिया में थोड़ी मात्रा में NO और HNO3 बनाता है जिन्हें H2SO4 और K2Cr2O7 की क्रिया से हटाया जाता है।
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प्रश्न 6
अमोनिया का औद्योगिक उत्पादन कैसे किया जाता है?
उत्तर
अमोनिया निर्माण की हैबर विधि
(a) सिद्धान्त – एक आयतन नाइट्रोजन गैस और तीन आयतन हाइड्रोजन गैस आपस में क्रिया करके अमोनिया बनाती है। यह एक ऊष्माक्षेपी क्रिया है। इसमें अमोनिया के बनने से आयतन में कमी होती है, क्योंकि कुल चार आयतन अभिकारक से दो आयतन क्रियाफल प्राप्त होते हैं । अतः ली-शातेलिये के सिद्धान्त के अनुसार अमोनिया के अधिक उत्पादन हेतु N2 तथा H2 का अधिक सान्द्रण कम ताप एवं उच्च दाब ही उपयुक्त परिस्थिति होगी।
(b) अभिक्रिया का समीकरण –
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(c) विधि-वायु को, शुद्ध N2 तथा वॉटर गैस से प्राप्त H2 को क्रमशः 1 : 3 अनुपात में मिलाकर 200 वायुमण्डलीय दाब से संपीडक में प्रवेश कराते हैं । इसमें Fe चूर्ण एवं उत्प्रेरक वर्धक Mo रखा होता है। इस कक्ष का ताप 450-500°C तक नियंत्रित रखते हैं। उत्प्रेरक कक्ष से निकलने वाली गैसों में 10% से 15% तक NH3 रहती है। इसे संघनित्र की सहायता से ठंडा करके अलग कर लेते हैं। शेष अनुपयुक्त गैस को पम्प की सहायता से पुनः उत्प्रेरक कक्ष में पहुँचा दिया जाता है।

(d) सावधानियाँ-(1) N2 और H2 शुद्ध अवस्था एवं शुष्क अवस्था में होनी चाहिए, क्योंकि अशुद्धियाँ उत्प्रेरक को विषाक्त कर देती हैं । (2) ताप एवं दाब नियन्त्रित होने चाहिए।

(e) क्लोरीन की अधिकता में क्रिया
3Cl2 +8NH3 → N2 + 6NH4Cl.

प्रश्न 7.
उदाहरण देकर समझाइए कि कॉपर धातु HNO3 के साथ अभिक्रिया करके किस प्रकार भिन्न उत्पाद दे सकती है ?
उत्तर-
कॉपर धातु की HNO3 के साथ अभिक्रिया के उत्पाद, प्रयुक्त HNO3 की प्रयोग की जाने वाली सान्द्रता पर निर्भर करते हैं।
(i) कॉपर धातु, तनु HNO3 के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रोजन (II) ऑक्साइड देता है।

3Cu + 8HNO3 (तनु) → 3Cu(NO3)2+4H2O + 2NO

(ii) कॉपर धातु, सान्द्र HNO, के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रोजन (IV) ऑक्साइड या नाइट्रोजन डाइऑक्साइड NO2 देता है।
Cu + 4HNO3 (सान्द्र) →Cu(NO3)2+ 2H2O + 2NO2

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प्रश्न 8.
NO2 तथा N2O5 के अनुनादी संरचनाओं को लिखिए।
उत्तर-
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 19

प्रश्न 9.
HNH कोण का मान, HPH, HAsH तथा HSbH कोणों की अपेक्षा अधिक क्यों है ?
(संकेत-NH3 में sp3संकरण के आधार तथा हाइड्रोजन ओर वर्ग के दूसरे तत्वों के बीच केवल s-p आबंधन के द्वारा व्याख्या की जा सकती है।)
उत्तर
वर्ग-15 के हाइड्राइडों में केन्द्रीय परमाणु E (जहाँ E = N, P, As, Sb, Bi)sp3 संकरित है। वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर इसकी विद्युत्ऋणात्मकता घटती है परन्तु आकार बढ़ता है। जिससे केन्द्रीय परमाणु के चारों ओर बन्धन इलेक्ट्रॉन युग्मों के मध्य प्रतिकर्षण बलों में निरन्तर कमी आती है। इस प्रकार वर्ग के नीचे जाने पर आबन्ध कोण घटता जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 78

प्रश्न 10.
R3P = O पाया जाता है जबकि R3N= O नहीं क्यों ( R = ऐल्किल समूह)?
उत्तर- नाइट्रोजन ऑक्सीजन के साथ dπ-pπ बन्ध नहीं बना पाता है क्योंकि इसके संयोजकता कोश में d-कक्षक अनुपस्थित होते हैं। अतः इसकी सहसंयोजकता 3 तक सीमित है। परन्तु, R3N = O में नाइट्रोजन की संयोजकता 5 होनी चाहिये। अतः यह यौगिक नहीं पाया जाता। फॉस्फोरस में d-कक्षक उपस्थिति होता है जिसके कारण यह dπ-pπ बन्ध बना सकता है तथा अपनी सहसंयोजकता 4 से अधिक दिखा सकता है। अतः फॉस्फोरस R3P = O बनाता है जिसमें इसकी सहसंयोजकता 5 है।

प्रश्न 11.
समझाइए कि क्यों NH3 क्षारकीय है जबकि BiH3 केवल दुर्बल क्षारक है।
उत्तर
NH3 और BiH3 में केन्द्रीय परमाणु पर इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होता है जिस कारण से लुईस क्षार की भांति व्यवहार करते हैं। NH3 से BiH3 तक क्षार गुण का होता है क्योंकि परमाणु आकार बढ़ने से इलेक्ट्रॉन घनत्व कम होता जाता है। अतः इलेक्ट्रॉन युग्म त्यागने की प्रवृत्ति कम होती है। इसलिए क्षारक गुण घटता है।

प्रश्न 12.
नाइट्रोजन द्विपरमाणुक अणु के रूप में पाया जाता है तथा फॉस्फोरस P4 के रूप में क्यों?
उत्तर
नाइट्रोजन का छोटा आकार होता है तथा वैद्युत्ऋणात्मकता प्रबल है जिससे pπ-pπ बहुआबंध बनाता है । अतः नाइट्रोजन अपने ही परमाणु के साथ त्रिआबंध बनाता है। फॉस्फोरस परमाणु का आकार बड़ा है तथा नाइट्रोजन की तुलना में वैद्यत्ऋणात्मकता कम है। अतः pπ-pπ आबंध बनाने की क्षमता कम है। इसलिए फॉस्फोरस व फॉस्फोरस परमाणु के मध्य एकल आबंध बनते हैं। अत: P, के रूप में होता है।

प्रश्न 13.
लाल फॉस्फोरस तथा श्वेत फॉस्फोरस के गुणों की मुख्य भिन्नताओं को लिखिए।
उत्तर
लाल फॉस्फोरस तथा सफेद फॉस्फोरस के गुणों में तुलना –

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प्रश्न 14.
फॉस्फोरस की तुलना में नाइट्रोजन श्रृंखलन गुणों को कम प्रदर्शित करता है, क्यों?
उत्तर
छोटा आकार तथा अनाबंध इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण आबंध युग्म के साथ प्रतिकर्षण दर्शाता है जबकि p-फॉस्फोरस का आकार बड़ा है जिसके कारण अनाबंध इलेक्ट्रॉन युग्म व आबंध इलेक्ट्रॉन युग्म में प्रतिकर्षण कम होता है। परिणामस्वरूप N-N एकल आबंध दुर्बल तथा P-P एकल आबंध प्रबल होता है। अत: N आबंध प्रबलता कम दर्शाता है या शृंखलन गुण कम दर्शाता है।

प्रश्न 15.
H3PO3 की असमानुपातन अभिक्रिया दीजिए।
उत्तर- ऑर्थोफॉस्फोरस अम्ल गर्म करने पर असमानुपातित होकर आर्थोफॉस्फोरिक अम्ल तथा फॉस्फीन देता है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 22

प्रश्न 16.
क्या PCI5 ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों कार्य कर सकता है ? तर्क दीजिए।
उत्तर
PCl5 में, P की ऑक्सीकरण संख्या +5 है जो अधिकतम है। इसे यह और नहीं बढ़ा सकता। अत: PCl5, अपचायक का कार्य नहीं कर सकता है। परन्तु यह अपनी ऑक्सीकरण संख्या +5 से घटाकर +3 कर सकता है अतः यह ऑक्सीकारक का कार्य कर सकता है।
उदाहरण –
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प्रश्न 17.
O, S, Se, Te तथा Po को इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्था तथा हाइड्राइड निर्माण के संदर्भ में आवर्त सारणी के एक ही वर्ग में रखने का तर्क दीजिए।
उत्तर-
समूह-16 के तत्वों को समग्र रूप से केल्कोजन कहा जाता है।
(i) समूह-16 के तत्वों में प्रत्येक में 6-संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। इन तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np4 होता है। जहाँ, n का मान 2 से 6 तक बदल सकता है।

(ii) ऑक्सीकरण अवस्था- चूँकि इन तत्वों में 6-संयोजी इलेक्ट्रॉन विद्यमान होते हैं, (ns2, np4) अतः ये -2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं। इस प्रकार केवल ऑक्सीजन ही प्रभावी रूप से -2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते है, अर्थात् ये उच्च विद्युत् ऋणात्मक होते हैं। ये -1 (H2O2), 0 (O2) और +2 (OF2) ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करते हैं । इस प्रकार समूह में नीचे आने पर तत्वों की विद्युत् ऋणात्मकता में निरंतर कमी होने के कारण -2 ऑक्सीजन अवस्था के स्थायित्व में भी कमी आती है। इस समूह के भारी तत्व d-कक्षक की उपस्थिति के अनुसार +2, +4 एवं +6 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं।

(iii) हाइड्राइड्स का निर्माण-ये तत्व H2E प्रकार के हाइड्राइड्स का निर्माण करते हैं। जहाँ, E= O, S, Se, Te, PO होता है। ऑक्सीजन तथा सल्फर को H2E2 प्रकार के हाइड्राइड्स का निर्माण करते हैं। ये हाइड्राइड्स पूर्णतया परितवर्तनशील गुण वाले होते हैं।

प्रश्न 18.
क्यों डाइऑक्सीजन एक गैस है जबकि सल्फर एक ठोस है ?
उत्तर
लघु आकार वाले ऑक्सीजन अणु में अन्तरा इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण के कारण O-O आबन्ध, S-S आबन्ध की तुलना में दुर्बल होता है। उच्च विद्युत्ऋणात्मकता और आकार छोटा होने के कारण, ऑक्सीजन pr-pr बहुआबन्ध बनाती है। अतः यह द्विपरमाणुक अणु के रूप में विद्यमान है जो एक-दूसरे से दुर्बल वाण्डर वाल्स बलों द्वारा जुड़े होते हैं । इस प्रकार ऑक्सीजन कमरे के ताप पर गैस रूप में उपस्थित है। सल्फर की pπ-pπ बहुआबन्ध बनाने की प्रवृत्ति कम है। परमाणु आकार बड़ा तथा कम विद्युत्ऋणात्मकता होने के कारण यह मजबूत S-S एकल आबन्ध बनाती है। यही कारण है कि सल्फर शृंखलन गुण दर्शाती है तथा बहुपरमाणुक अणु Sg रूप में विद्यमान होती है। अतः सल्फर कमरे के ताप पर ठोस रूप में विद्यमान होती है।

प्रश्न 19.
यदि O → O तथा O → O2- के इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी मान पता हो, जो क्रमश: 141 तथा 702 kJ morl-1है, आप कैसे स्पष्ट कर सकते हैं कि O2- स्पीशीज वाले ऑक्साइड अधिक बनते हैं न कि O वाले ?
(संकेत-यौगिकों के बनने में जालक ऊर्जा कारक को ध्यान में रखिए)
उत्तर
O→ O तथा O → O2- के लिए क्षय इलेक्ट्रॉन लब्धि मान होता है। 141 तथा 702 kJ mol-1 क्रमश: बहुत से ऑक्साइड O2- आयन रखते हैं, न कि O आयन क्योंकि कुल एन्थैल्पी मान ऋणात्मक होता

प्रश्न 20.
कौन-से एरोसोल्स ओजोन हैं ?
उत्तर
क्लोरोफ्लुओरो कार्बन या फ्रियॉन।

प्रश्न 21.
संस्पर्श प्रक्रम द्वारा H2SO4 के उत्पादन का वर्णन कीजिए।
उत्तर
निर्माण-सल्फ्यूरिक अम्ल का औद्योगिक निर्माण अधिकतर संपर्क विधि से किया जाता है जिसके लिए कच्चे माल के रूप में सल्फर अथवा आयरन पायराइटीज को लिया जाता है।
सिद्धांत-शुद्ध एवं शुष्क SO2 तथा वायु के मिश्रण को उत्प्रेरक V2O5 पर प्रवाहित करने से, वह SO3 में ऑक्सीकृत हो जाती है, जो जल से क्रिया करके H2SO4 बनाता है।

2SO2 + O2 → 2SO3 + 45.2 kcal
SO3 + H2O → H2SO4

विधि-विधि का क्रमबद्ध वर्णन निम्नलिखित है –

  • सल्फर बर्नर (Sulphur or pyrite burner)-भट्ठियों (B) में शंधक को जलाकर SO2 बनायी जाती है।
  • धूल कक्ष (Dust chamber)-बनी हुई so2 धूल कक्ष D से गुजरती है। यहाँ आने वाले वाष्पीय मिश्रण पर जल-वाष्प का फुहारा छोड़ा जाता है। भाप द्वारा भीगकर धूल के कण भारी हो जाते हैं और नीचे बैठ जाते हैं।
  • शीतक पाइप (Cooling pipes)-गैसीय मिश्रण अब शीतक पाइपों से गुजरता है, जिससे ताप कम होकर 100°C हो जाता है।
  • धोवन स्तम्भ (Washing tower or scrubber)- इस कक्ष (W) में क्वार्ट्ज के टुकड़े भरे होते हैं और ऊपर से ठण्डे पानी की फुहार चालू रहती है। गैसीय मिश्रण यहाँ से गुजरते समय उसमें बचे धूल के कण और जल में विलेय अशुद्धियाँ हट जाती हैं।
  • शुष्क स्तम्भ (Drying tower)-ऊँचे बने हुए इस कक्ष (D) में क्वार्ट्ज के टुकड़े भरे होते हैं और ऊपर से सान्द्र गंधकाम्ल का फुहारा चलता रहता है। गैसें इस कक्ष में नीचे से प्रवेश करती हैं। गंधकाम्ल के द्वारा गैसें शुष्क होकर आगे बढ़ती हैं।
  • आर्सेनिक शोधक-इस स्तम्भ (P) में फेरिक हाइड्रॉक्साइड रहता है। गैसों में उपस्थित आर्सेनिक के ऑक्साइड यहाँ सोख लिए जाते हैं।

परीक्षण कक्ष (Testing chamber)-इस प्रकार शुद्ध किया हुआ गैसीय मिश्रण सम्पर्क कक्ष में भेजने के पूर्व उसका परीक्षण किया जाता है। परीक्षण कक्ष (T) में प्रकाश की तेज किरण पुंज भेजी जाती है। यदि धूल आदि के कण हों तो वे चमक जाते हैं तब इस गैसीय मिश्रण को पुन:शुद्ध किया जाता है। पूर्ण शुद्ध और परीक्षित गैसीय मिश्रण अब गर्म कर (H द्वारा) सम्पर्क कक्ष (R) में भेजा जाता है।

सम्पर्क कक्ष (Contact chamber)-यह लोहे, का बना एक बड़ा कक्ष (R) होता है जिसमें लोहे के कई पाइप होते हैं। इन पाइपों में उत्प्रेरक वेनेडियम पेण्टॉक्साइड (V2O5) या प्लैटिनम युक्त ऐस्बेस्टॉस या अन्य उपयुक्त उत्प्रेरक भरा रहता है। इनका ताप 450°C रखा जाता है। शुद्ध एवं परीक्षित सल्फर डाइऑक्साइड और हवा का गर्म मिश्रण इन पाइपों में उत्प्रेरक के सम्पर्क में रहकर आगे बढ़ता है और सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO3) बनाता है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 24
कैलोरी क्रिया ऊष्माक्षेपी होने से अब ताप स्वयं ही मिलने लगता है।

अवशोषक स्तम्भ (Absorption tower)- बनी हुई सल्फर ट्राइऑक्साइड को सान्द्र गन्धकाम्ल के फुहारे लगे कक्ष (A) में भेजा जाता है । गन्धकाम्ल SO3 अवशोषित होकर उसे और अधिक सान्द्र बनाती है। यह अम्ल SO3 की अधिकता के कारण कुहरा जैसी धूम्र से कक्ष भर जाता है। प्राप्त हुआ अम्ल सधूम गंधकाम्ल (Fuming sulphuric acid) या ओलियम (Oleum) कहलाता है।

H2SO4 + SO3 → H2S2O7

ओलियम में आवश्यकतानुसार जल मिलाकर उससे वांछित सान्द्रता वाला गन्धकाम्ल प्राप्त कर लिया जाता है।

H2S2O7 + H2O → 2H2SO4

So3 जल में तेजी से और सूं-सूं की आवाज के साथ घुलती है।
उपकरण का नामांकित चित्र –
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नोट-विस्तृत वर्णन हेतु NCERT पाठ्य-पुस्तक देखें।

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प्रश्न 22.
SO2 किस प्रकार से एक वायु प्रदूषक है?
उत्तर-

  • कम सान्द्रता में भी यह पौधों के लिए हानिकारक है। यह क्लोरोफिल बनने की प्रक्रिया को मंद करती है। पत्तियों का कटना-फटना तथा हरे रंग का क्षय (क्लोरोसिस) इसके कारण है।
  • SO2 वायु में उपस्थित नमी से क्रिया करके सल्फ्यूरस अम्ल बनाती है जो अम्ल वर्षा का कारण है। यह इमारतों के संगमरमर को नष्ट करती है तथा पौधों, जानवरों तथा मनुष्यों में अनेक रोग उत्पन्न करती है।
    SO2 + \(\frac{1}{2}\) O2 + H2O → H2SO4

प्रश्न 23.
हैलोजन प्रबल ऑक्सीकारक क्यों होते हैं ?
उत्तर
एक इलेक्ट्रॉन तत्काल प्रतिग्रहण कर लेने की प्रवृत्ति के कारण हैलोजनों की प्रबल ऑक्सीकारक प्रकृति होती है। कम आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी, उच्च विद्युत्ऋणात्मकता तथा अधिक ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि के कारण हैलोजन प्रबलता से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति रखते हैं।
x2 +2e → 2x
इस प्रकार ये एक अच्छे ऑक्सीकारक है।

प्रश्न 24.
स्पष्ट कीजिए कि फ्लुओरीन केवल एक ही ऑक्सी-अम्ल, HOF क्यों बनाता है ?
उत्तर
उच्च विद्युत्ऋणात्मकता, छोटे आकार तथा d-कक्षकों की अनुपस्थिति के कारण फ्लुओरीन ऑक्सी-अम्लों में केवल +1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है। यह अन्य सदस्यों की तरह +3, +5 और +7 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करती। यही कारण है कि अन्य हैलोजनों की अपेक्षा यह केवल एकमात्र ऑक्सी-अम्ल HOF बनाती है। HOFO, HOFO2 और HOFO3 नहीं।

प्रश्न 25.
व्याख्या कीजिए कि क्यों लगभग एक समान विद्युत्-ऋणात्मकता होने के पश्चात् भी नाइट्रोजन हाइड्रोजन आबंध निर्मित करता है, जबकि क्लोरीन नहीं ?
उत्तर
ऑक्सीजन परमाणु में केवल दो कक्षक होते हैं 1s22s22p4 जबकि क्लोरीन में तीन कक्षक 1s22s22p63s23p5 अतः ऑक्सीजन परमाणु का आकार छोटा होता है। हाइड्रोजन आबंध के लिए आवश्यक’ शर्त छोटा आकार होता है । छोटा आकार हाइड्रोजन आबंध बनने में सहायक है। अतः ऑक्सीजन हाइड्रोजन से आबंध बनाकर हाइड्रोजन आबंध बनाता है जबकि क्लोरीन नहीं।

प्रश्न 26.
ClO2 के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर
(i) क्लोरीन डाइऑक्साइड ClO2 प्रबल ऑक्सीकारक है।
(ii) यह प्रबल क्लोरीकारक है और इसकी ब्लीच क्षमता Cl2 की तुलना में 30 गुना अधिक है।

प्रश्न 27. हैलोजन रंगीन क्यों होते हैं ?
उत्तर
हैलोजन समूह के समस्त तत्व रंगीन होते हैं, उनका रंग परमाणु संख्या में वृद्धि के साथ गहरा होता जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 26
पीला हरा-पीला भूरा बैंगनी हैलोजनों में रंग उनके अणुओं द्वारा दृश्य प्रकाश (Visible light) के अवशोषण के कारण होता है। अणुओं द्वारा दृश्य प्रकाश के अवशोषण के फलस्वरूप बाह्यतम इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं, जिसके कारण ये तत्व रंगीन दिखाई देते हैं। उदाहरणार्थ-फ्लुओरीन का आकार अत्यन्त छोटा होने के कारण बाह्य इलेक्ट्रॉन पर नाभिक का आकर्षण अधिक होता है तथा बाह्यतम इलेक्ट्रॉन को उत्तेजित करने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। फ्लुओरीन परमाणु अधिक ऊर्जा वाले बैंगनी विकिरणों को अवशोषित करते हैं, अत: वे हल्के पीले दिखाई देते हैं। जबकि आयोडीन परमाणु का आकार बड़ा होता है। बाह्यतम इलेक्ट्रॉन नाभिक से काफी दूर रहते हैं। उन्हें उत्तेजित करने के लिए कम ऊर्जा वाले पीले विकिरणों की आवश्यकता होती है। दृश्य प्रकाश से पीले रंग के विकिरण के अवशोषण के कारण वे बैंगनी दिखाई देते हैं।

प्रश्न 28.
जल के साथ F2 तथा Cl2 की अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर
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प्रश्न 29.
आप HCl से Cl2 तथा Cl2 से HCl को कैसे प्राप्त करेंगे? केवल अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर
(i) Cl2 का HCl से निर्माण
MnO2 +4HCl → MnCl2 + Cl2 + 2H2O
(ii)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 28

प्रश्न 30.
एन-बार्टलेट Xe तथा PtF6 के बीच अभिक्रिया कराने के लिए कैसे प्रेरित हुए ?
उत्तर- एन-बार्टलेट ने निम्न अभिक्रिया द्वारा एक लाल रंग के यौगिक O2+: [PtF6] को बनाने में सफलता प्राप्त की
O2(g) + PtF6(g) → O2+[PtF6]

उन्होंने अनुभव किया कि ऑक्सीजन और जिनॉन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी लगभग समान हैं।
O2 की lE1 = 1175 kJmol-1
Xe की lE1 = 1170 kJmol-1

इससे उन्होंने O2+ [PtF2] जैसा ही जिनॉन का यौगिक बनाने पर विचार किया तथा Xe और PtF6 को मिलाकर लाल रंग के एक-दूसरे यौगिक Xe+PtF6 के विरचन में सफलता प्राप्त की।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 29
प्रश्न 31.
निम्नलिखित में फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्या हैं ?
(i) H3PO3, (ii) PCl3, (iii) Ca3P2, (iv) Na3PO4, (v) POF3.
उत्तर-
(i) माना H3PO3 की ऑक्सीकरण अवस्था
3x (+1) + x + 3x (-2) = 0, x = +3
(ii) PCl3 = x + 3(-1) = 0 or x = +3
(iii) Ca3P2 = 3 x (+2) + 2x = 0 or x = -3
(iv) Na3PO4 = 3 x (+1) + x + 4 x (-2) = 0 x = +5
(v) POF3 = x + (-2) + 3 x (-1) = 0 or x = +5.

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प्रश्न 32.
निम्नलिखित के लिए संतुलित समीकरण दीजिए –
(i) जब NaCl को MnO, की उपस्थिति में सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गरम किया जाता है।
(ii) जब क्लोरीन गैस को Nal के जलीय विलयन में से प्रवाहित किया जाता है।
उत्तर
(i) सम्पूर्ण अभिक्रिया 4NaCl + MnO2 + 4H2SO4 → MnCl2 + 4NaHSO4 + 2H2O + Cl2
(ii) Cl2(g) + 2NaI(aq)→ 2NaCl(aq) + I2(s)

प्रश्न 33.
जीनॉन फ्लु ओराइड, XeF2, XeF4 तथा XeF6 कैसे बनाए जाते हैं ?
उत्तर
जीनॉन फ्लु ओराइड (Xenon Fluoride)-जीनॉन के तीन फ्लुओराइड महत्वपूर्ण है – XeF2, XeF4 तथा XeF6 । ये सभी यौगिक जीनॉन तथा फ्लुओरीन के बीच निकिल की नलिका में उच्च ताप तथा दाब पर बनाए गये हैं –

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 30

प्रश्न 34.
किस उदासीन अणु के साथ ClO समइलेक्ट्रानी है? क्या एक अणु लुइस क्षारक है ?
उत्तर
ClO सहइलेक्ट्रॉन गुण दर्शाता है ClF के साथ क्योंकि दोनों में 26 इलेक्ट्रॉन होते हैं।

प्रश्न 35.
XeO3 और XeOF4 बनाने की प्रक्रिया बताइए।
उत्तर
XeF4 और XeF6 का जल अपघटन करने पर XeO3 बनता है।
6XeF4 +12H20 → 4Xe + 2XeO3 + 24F+3O2
XeF6 +3H2O → XeO3 +6HF
XeF6 के आंशिक अपघटन से XeOF4 बनता है
XeF6 + H2O → XeOF4 +2HF

प्रश्न 36.
निम्नलिखित प्रत्येक समुच्चय को सामने लिखे गुणों के अनुसार सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए
(i) F6, Cl2, Br2, I2 आबंध वियोजन एन्थैल्पी बढ़ते क्रम में
(ii) HF, HCl, HBr, HI अम्ल सामर्थ्य बढ़ते क्रम में।
(iii) NH3, PH3, ASH3, SbH3, BiH3 – क्षारक सामर्थ्य बढ़ते क्रम में।
उत्तर
(i) I2 <F2 < Br2 <Cl2
(ii) HF <HCl< HBr <HI
(iii) BiH3 < SbH3 < ASH3 < PH3 < NH3

प्रश्न 37.
निम्नलिखित में से कौन-सा एक अस्तित्व में नहीं है ?
(i) XeOF4, (ii) NeF2, (iii) XeF2, (iv) XeF6.
उत्तर-
NeF2 नहीं बन सकता।

प्रश्न 38.
उस उत्कृष्ट गैस स्पीशीज का सूत्र देकर संरचना की व्याख्या कीजिए जो कि इनके साथ समसंरचनीय है-.
(i) ICl4, (ii) IBr2 , (iii) BrO3.
उत्तर
(i) XeF4 तथा ICl4 सहइलेक्ट्रॉन गुण दर्शाते हैं दोनों की संरचना वर्ग समतल है।
(ii) XeF2 व IBr2 सहइलेक्ट्रॉन गुण दर्शाते हैं दोनों रेखीय है।
(iii) XeO3 व BrO3, पिरामिड आकृति के हैं तथा सह-इलेक्ट्रॉन दर्शाते हैं। संरचना के लिये पाठ्यपुस्तक देखिए।

प्रश्न 39.
उष्कृष्ट गैसों के परमाण्विक आकार तुलनात्मक रूप से बड़े क्यों होते हैं ?
उत्तर
उत्कृष्ट गैसों के परमाण्विक आकार तुलनात्मक रूप से बड़े होते हैं क्योंकि इनकी त्रिज्याएँ, वाण्डरवाल्स त्रिज्याएँ होती हैं जिनका मान सहसंयोजी त्रिज्याओं तथा धात्विक त्रिज्याओं से अपेक्षाकृत अधिक होता है। जबकि एक ही आवर्त में दूसरे सदस्यों की त्रिज्याएँ सहसंयोजक त्रिज्याएँ या धात्विक त्रिज्याएँ होती हैं जिनका मान कम होता है।

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प्रश्न 40.
निऑन तथा ऑर्गन गैसों के उपयोग सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर
निऑन –

  • 1000 वोल्ट तथा 2 mm दाब पर जब नियॉन की नली से विद्युत् विसर्जन किया जाता है, तो चमकदार नारंगी रंग की प्रतिदीप्ति बनती है। इसलिए इसका उपयोग साइन बोर्ड में किया जाता है। अन्य गैसों के साथ मिलकर विभिन्न रंग मिलते हैं, इसलिए विज्ञापन बोर्डो में इसका भरपूर उपयोग होता है।
  • हरितगृहों में नियॉन लैम्पों का उपयोग होता है, क्योंकि यह क्लोरोफिल निर्माण में तथा पौधों की वृद्धि को बढ़ाता है।
  • विद्युत् उपकरणों में सुरक्षा के तहत इसका उपयोग होता है।

ऑर्गन-

  • विद्युत् बल्बों में लगे टंगस्टन के फिलामेण्ट की आयु बढ़ाने के लिए इसे भरा जाता है।
  • रेडियो वाल्व तथा रेक्टिफायर (Rectifires) में।
  • प्रतिदीप्ति नलिका (जैसे-ट्यूबलाइट) में मयूरी वाष्प के साथ इसे भरा जाता है।
  • कुछ रासायनिक अभिक्रियाओं में अक्रिय वातावरण निर्माण करने में तथा वेल्डिंग में अक्रिय वातावरण निर्माण करने में।

p-ब्लॉक के तत्त्व अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

p-ब्लॉक के तत्त्व वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. (A) सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
किस यौगिक में ऑक्सीजन + 2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है –
(a) H2O
(b) Na2O
(c) OF2
(d) MgO.
उत्तर
(c) OF2

प्रश्न 2.
लाल-भूरे रंग की गैस निर्मित करती है, जब वायु द्वारा नाइट्रिक ऑक्साइड ऑक्सीकृत होती है। वह गैस है –
(a) Na2O2
(b) Na2O4
(c) NO2
(d) N2O3.
उत्तर
(c) NO2

प्रश्न 3.
फॉस्फोरस के एक ऑक्सी अम्ल का सूत्र H3PO4 है, वह है –
(a) द्वि क्षारकीय अम्ल
(b) एक क्षारकीय अम्ल
(c) त्रिक्षारकीय अम्ल
(d) चतुष्क्षारकीय अम्ल।
उत्तर
(c) त्रिक्षारकीय अम्ल

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रारूपिक धातु है –
(a) P
(b) As
(c) Sb
(d) Bi.
उत्तर
(d) Bi.

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में कौन-सा ऑक्साइड अनु चुम्बकीय है –
(a) NO2O4
(b) NO2
(c) P4O6
(d) N2O5
उत्तर
(b) NO2

प्रश्न 6.
अमोनिया को शुष्क बनाया जाता है –
(a) H2SO4 से
(b) P2O5 से
(c) अजलीय CaCl2
(d) कोई नहीं।
उत्तर
(d) कोई नहीं।

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प्रश्न 7.
नाइट्रिक अम्ल, आयोडीन को परिवर्तित करता है –
(a) आयोडिक अम्ल में
(b) हाइड्रोआयोडिक अम्ल में
(c) आयोडीन पेन्टॉक्साइड में
(d) आयोडीन नाइट्रेट में।
उत्तर
(a) आयोडिक अम्ल में

प्रश्न 8.
अमोनिया एक लुइस बेस है यह धनायनों के साथ संकर लवण बनाती है। निम्न धनायनों में कौन NH3 के साथ संकर लवण नहीं बनाता है –
(a) Ag+
(b) Cu2+
(c) Cd2+
(d) Pb2+
उत्तर
(d) Pb2+

प्रश्न 9.
अमोनिया विलयन पर्याप्त घुल जाता है
(a) Hg2Cl2 में
(b) PbCl2 में
(c) AgI में
(d) Cu(OH)2 में।
उत्तर
(d) Cu(OH)2 में।

प्रश्न 10.
P2O5 के एक अणु को ऑर्थो-फॉस्फोरिक अम्ल में परिवर्तित करने के लिए जल के अणुओं की आवश्यकता होती है –
(a) 2
(b) 3
(c) 4
(d) 5.
उत्तर
(b) 3

प्रश्न 11.
So2 के विरंजन क्रिया का कारण है –
(a) अपचयन
(b) ऑक्सीकरण
(c) जल-अपघटन
(d) इसकी अम्लीय प्रकृति।
उत्तर
(a) अपचयन

प्रश्न 12.
जब SO2 अम्लीय K2Cr2O7 विलयन में प्रवाहित की जाती है –
(a) विलयन नीला हो जाता है
(b) विलयन रंगहीन हो जाता है
(c) SO2 अपचयित हो जाती है
(d) हरा क्रोमिक सल्फेट बनता है।
उत्तर
(d) हरा क्रोमिक सल्फेट बनता है।

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प्रश्न 13.
P2O3 से निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल बनता है –
(a) H4P2O7
(b) H3PO4
(c) H3PO3
(d) HPO3.
उत्तर
(c) H3PO3

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में कौन-सा हैलाइड सबसे अधिक अम्लीय है –
(a) PCl5
(b) SbCl3
(c) BrCl3
(d) CCl4.
उत्तर
(a) PCl5

प्रश्न 15.
सल्फ्यूरिक अम्ल के औद्योगिक निर्माण में प्रयुक्त उत्प्रेरक है –
(a) Al2O3
(b) CrO3
(c) V2O5
(d) MnO2.
उत्तर
(c) V2O5

प्रश्न 16.
फॉस्फोरस ट्राइ हैलाइड के जल-अपघटन से प्राप्त होते हैं –
(a) एक एकक्षारकीय अम्ल तथा एक द्विक्षारकीय अम्ल
(b) एक एकक्षारकीय अम्ल तथा एक त्रिक्षारकीय अम्ल
(c) एक एकक्षारकीय अम्ल तथा एक लवण
(d) दो द्विक्षारकीय अम्ल।
उत्तर
(a) एक एकक्षारकीय अम्ल तथा एक द्विक्षारकीय अम्ल

प्रश्न 17.
निम्नलिखित अभिक्रिया में –
P4 + 3NaOH + 3H2O → PH3 + 3NaH2PO2
(a) फॉस्फोरस ऑक्सीकृत हुआ है
(b) फॉस्फोरस ऑक्सीकृत और अवकृत दोनों हुआ है
(c) फॉस्फोरस अवकृत हुआ है
(d) सोडियम ऑक्सीकृत हुआ है।
उत्तर
(b) फॉस्फोरस ऑक्सीकृत और अवकृत दोनों हुआ है

प्रश्न 18.
हास्य गैस है –
(a) NO
(b) N2O
(c) N2O3
(d) N2O5.
उत्तर
(b) N2O

प्रश्न 19.
सफेद फॉस्फोरस (P) में नहीं होता है –
(a) छ: P-P एकल बंध
(b) चार P-P एकल बंध
(c) चार एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म
(d) P-P-P कोण 60° का।
उत्तर
(b) चार P-P एकल बंध

प्रश्न 20.
NH4Cl तथा NaNO2 विलयन को गर्म करने पर प्राप्त होती है –
(a) N2O
(b) N2
(c) NO2
(d) NH3
उत्तर
(b) N2

प्रश्न 21.
मेटा फॉस्फोरिक अम्ल का सूत्र है
(a) H3PO4
(b) HPO3
(c) H3PO3
(d) H2PO2.
उत्तर
(b) HPO3

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प्रश्न 22.
वह गैस जो जल पर एकत्रित नहीं की जा सकती है-
(a) Na
(b) O2
(c) SO2
(d) PH5
उत्तर
(c) SO2

(B) सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
क्लोरीन विरंजन गुण निम्न में से एक की उपस्थिति में ही होता है –
(a) शुष्क वायु
(b) नमी
(c) सूर्य का प्रकाश
(d) शुद्ध ऑक्सीजन।
उत्तर
(b) नमी

प्रश्न 2.
He, Ar, Kr और Xe में से कौन-सा तत्व सबसे कम संख्या में यौगिक बनाता है –
(a) He
(b) Ar
(c) K
(d) Xe.
उत्तर
(a) He

प्रश्न 3.
चमकीले विद्युत् विज्ञापनों में किस गैस का उपयोग होता है –
(a) जेनॉन
(b) आर्गन
(c) निऑन
(d) हीलियम।
उत्तर
(c) निऑन

प्रश्न 4.
मोनाजाइट स्रोत है –
(a) Ne
(b) Ar
(c) Kr
(d) He.
उत्तर
(d) He.

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से कौन-से अवयवों की सीधी अभिक्रिया से प्राप्त नहीं होता –
(a) XeF2
(b) XeF4
(c) XeO3
(d) XeF6.
उत्तर
(a) XeF2

प्रश्न 6.
कौन-सा हैलाइड न्यूनतम स्थायी है, जिसका अस्तित्व सन्देहात्मक है –
(a) CI4 .
(b) GeI4
(c) SnI4
(d) PbI4.
उत्तर
(d) PbI4.

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प्रश्न 7.
निम्न में से तीव्रतम अम्ल कौन-सा है –
(a) HBr
(b) HCl
(c) HF
(d) HI.
उत्तर
(d) HI.

प्रश्न 8.
निम्न में से कौन सबसे अधिक ऋणविद्युती है –
(a) F
(b) Cl
(c) Br
(d) I.
उत्तर
(a) F

प्रश्न 9.
कौन-सा हैलोजन कमरे के ताप पर ठोस अवस्था में रहता है –
(a) F
(b) Cl
(c) Br
(d) I.
उत्तर
(d) I.

प्रश्न 10.
इलेक्ट्रॉन बन्धुता अधिकतम है –
(a) F
(b) Cl
(c) Br
(d) I.
उत्तर
(b) Cl

प्रश्न 11.
हैलोजन परमाणु के बाह्यतम् कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है –
(a) s2p5
(b) s2p3
(c) s2p6
(d) s2p4
उत्तर
(a) s2p5

प्रश्न 12.
निम्न में से सबसे अधिक क्षारीय गुण प्रदर्शित करने वाला तत्व है –
(a) F
(b) Cl
(c) Br
(d) I.
उत्तर
(d) I.

प्रश्न 13.
सबसे प्रबल अपचायक है –
(a) F
(b) Br
(c) I
(d) Cl.
उत्तर
(c) I

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प्रश्न 14.
निम्नलिखित में से सबसे दुर्बल अम्ल है –
(a) HF
(b) HCl
(c) HBr
(d) HI.
उत्तर
(a) HF

प्रश्न 15.
ऑक्सीकारक गुण सबसे अधिक होता है –
(a) I2
(b) Br2
(c) F2
(d) Cl2.
उत्तर
(c) F2

प्रश्न 16.
किस अक्रिय गैस का अष्टक पूर्ण नहीं है
(a) हीलियम
(b) निऑन
(c) आर्गन
(d) क्रिप्टॉन।
उत्तर
(a) हीलियम

प्रश्न 17.
कौन-सा हैलोजन ऊर्ध्वपातित होता है
(a) क्लोरीन
(b) ब्रोमीन
(c) आयोडीन
(d) फ्लुओरीन।
उत्तर
(c) आयोडीन

प्रश्न 18.
निम्न में से कौन-सा उत्कृष्ट गैस जल में सर्वाधिक विलेय है –
(a) He
(b) Ar
(c) Ne
(d) Xe.
उत्तर
(d) Xe.

प्रश्न 19.
KI के घोल में I2 सुगमता से घुलकर बनाती है –
(a) I
(b) KI2
(c) KI
(d) KI3
उत्तर
(d) KI3

प्रश्न 20.
दमा के मरीजों के लिए श्वसन में प्रयुक्त गैस जिसे ऑक्सीजन में मिलाते हैं –
(a) N2
(b) Cl2
(c) He
(d) Ne.
उत्तर
(c) He

प्रश्न 21.
डीकन विधि का उपयोग इसके निर्माण में होता है –
(a) विरजंक चूर्ण
(b) क्लोरीन
(c) नाइट्रिक अम्ल
(d) सल्फ्यूरिक अम्ल।
उत्तर
(b) क्लोरीन

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प्रश्न 22.
समुद्री घास निम्न के औद्योगिक निर्माण का स्रोत है –
(a) क्लोरीन
(b) ब्रोमीन
(c) आयोडीन
(d) फ्लुओरीन।
उत्तर
(c) आयोडीन

प्रश्न 23.
विद्युत् बल्ब में कौन-सी गैस भरना ज्यादा उपयोगी है –
(a) He
(b) Ne
(c) Ar
(d) Kr.
उत्तर
(c) Ar

2. (A) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. N2 O एक ……….. ऑक्साइड है।
  2. कैरो अम्ल का रासायनिक सूत्र ……… होता है।
  3. सान्द्र नाइट्रिक अम्ल जिसमें ……….. घुली रहती है, इसके कारण इसका रंग गहरा भूरा होता है।
  4. नाइट्रोजन के ऑक्साइड में ……….. तथा ………. अनुचुम्बकीय है।
  5. पायरो फॉस्फोरिक अम्ल ………. क्षारकीय अम्ल है।
  6. H2S गैस को सान्द्र H2SO4 द्वारा शुष्क नहीं किया जा सकता, क्योंकि H2S उसे ……… कर देती है।
  7. सधूम सल्फ्यूरिक अम्ल SO3 में घुलकर ………… बनाता है।
  8. H2S2O8 (मार्शल अम्ल)में S की ऑक्सीकरण अवस्था …………..होती है।
  9. NH3 को HCl के साथ संयोग करके ………….. का सफेद धूम्र देता है।
  10. समूह 16 के तत्वों को ………….. कहते हैं।
  11. …………. प्रशीतक के रूप में उपयोग आती है।

उत्तर

  1. उदासीन
  2. H2SO5
  3. NO2
  4. NO; NO2
  5. चतुष्क
  6. अपचयित
  7. ओलियम
  8. + 6
  9. NH4Cl
  10. कैल्कोजन
  11. द्रव NH3 .

(B) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. सर्वोच्च इलेक्ट्रॉन बन्धुता …………. की होती है।
  2. नमी की उपस्थिति में क्लोरीन …………. का कार्य करती है।
  3. ब्लीचिंग पाउडर को ………… भी कहा जाता है।
  4. सामान्य ताप पर ब्रोमीन ………………. है।
  5. AX5 अन्तर हैलोजन यौगिक की आकृति …………. होती है।
  6. क्लोरीन की खोज …………. ने की थी।
  7. नील बर्टलेट ने सर्वप्रथम उत्कृष्ट यौगिक ……….. बनाया है।
  8. सबसे अधिक इलेक्ट्रॉन बन्धुता रखने वाला तत्व ……….. है।
  9. हैलोजन के ऑक्सी अम्लों में ………… संकरण पाया जाता है।
  10. गैस जो हल्की होने की कारण ………… वायुयानों के टायर में भरी जाती है।
  11. विज्ञापनों के लिए अक्रिय गैस ………………का सर्वाधिक उपयोग होता है।
  12. समूह 17 के तत्व सामान्यतया …………….. कहलाते हैं।
  13. ………….. रेडियोऐक्टिव अक्रिय गैस है।

उत्तर

  1. क्लोरीन
  2. विरंजक
  3. कैल्सियम क्लोरोहाइपो क्लोराइड,
  4. द्रव
  5. वर्ग पिरामिडीय
  6. शीले
  7. Xe[PtF6 ],
  8. क्लोरीन,
  9. sp3
  10. हीलियम,
  11. Ne (निऑन),
  12. हैलोजन,
  13. रेडॉन।

3. (A) एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी की रक्षा कौन करती है ?
  2. कसीस का तेल जिसे किंग ऑफ केमिकल कहा जाता है, इसका रासायनिक नाम बताइए।
  3. प्रशीतन में किस गैस का उपयोग किया जाता है ?
  4. जल का घनत्व किस ताप पर सर्वाधिक होता है ?
  5. सल्फ्यूरिक अम्ल में SO3 गैस विलेय करने पर क्या बनता है ?
  6. एक प्रतिक्लोर का नाम लिखिए।
  7. हाथी दाँत, तेल आदि के विरंजन में किस गैस का उपयोग किया जाता है ?
  8. अमोनियम लवण क्षारीय नेसलर अभिकर्मक से क्रिया करके किस रंग का अवक्षेप देता है ?
  9. N से Bi की ओर जाने पर Bi +3 ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी होता है +5 की अपेक्षा, क्यों?
  10. प्रकृति में आयतन के अनुसार N2 का प्रतिशत बताइए।

उत्तर

  1. ओजोन परत
  2. सल्फ्यूरिक अम्ल
  3. NH3
  4. 4°C
  5. ओलियम
  6. SO2
  7. ओजोन
  8. भूरे
  9. अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण
  10. 80%.

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(B) एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. रेडियो एक्टिव हैलोजन का नाम बताइए।
  2. विद्युत् बल्बों में नाइट्रोजन के साथ किस उत्कृष्ट गैस का उपयोग किया जाता है ?
  3. कैन्सर के उपचार में उपयोग आने वाली उत्कृष्ट गैस का नाम लिखिए।
  4. कार्नेलाइट का सूत्र लिखिए।
  5. वायुमण्डल में किस उत्कृष्ट गैस की उपलब्धता सर्वाधिक है ?
  6. XeF6 की आकृति क्या होती है ?
  7. फ्लुओरीन का एक उपयोग लिखिए।
  8. XeO3 में किस प्रकार का संकरण पाया जाता है ?
  9. F की ऑक्सीकरण अवस्था कितनी है ?
  10. प्रयोगशाला में क्लोरीन किस अभिक्रिया से बनाते हैं ? केवल समीकरण लिखिए।
  11. AX3 प्रकार के अन्तर हैलोजन यौगिक की आकृति क्या होती है ?
  12. हैलोजन अम्लों की शक्ति का सही क्रम लिखिए।
  13. कौन-सी उत्कृष्ट गैसें यौगिक नहीं बनाती हैं ?
  14. F किस उत्कृष्ट गैस के साथ यौगिक बनाता है ?
  15. समुद्री शैवाल किस हैलोजन का मुख्य स्रोत है ?

उत्तर-

  1. ऐस्टेटीन
  2. Ar
  3. Rn
  4. KCI.MgCl2.6H2 O
  5. आर्गन
  6. विकृत अष्टफलकीय
  7. फ्लुओरो कार्बन बनाने में, जिसका उपयोग रेफ्रिजरेशन में होता है,
  8. sp3
  9. -1
  10. MnO2 + 4HCl → MnCl2 +2H2 O + Cl2
  11. T आकृति की,
  12. HF < HCI< HBr < HI,
  13. He, Ne एवं Ar,
  14. Xe,
  15. आयोडीन।

4. उचित सम्बन्ध जोड़िए –
I.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 31
उत्तर
1. (d), 2. (c), 3. (a), 4. (b), 5. (1), 6. (g), 7. (e), 8. (i), 9. (j), 10. (h).

II.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 32
उत्तर
1. (e), 2. (c), 3. (b), 4. (a), 5. (d).

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III.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 33
उत्तर
1. (e)
2. (d)
3. (b)
4. (a)
5. (c).

p-ब्लॉक के तत्त्व अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सान्द्र गंधक अम्ल उच्च क्वथनांक वाला तैलीय द्रव क्यों है ?
उत्तर
H2SO4 अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध होने के कारण यह उच्च क्वथनांक वाला तैलीय द्रव है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 34

प्रश्न 2.
डाइनाइट्रोजन (N) कमरे के ताप पर कम क्रियाशील क्यों है ?
उत्तर
N≡N बंध की उच्च बन्ध एन्थैल्पी के कारण डाइनाइट्रोजन कमरे के ताप पर काफी अक्रिय है।

प्रश्न 3.
N2 गैस है जबकि P4 एक वाष्पशील ठोस, क्यों ?
उत्तर
N2 अणु में N≡N के बीच त्रिबंध होता है तथा यह पूर्णत: अध्रुवीय अणु होता है, इसमें वाण्डर वाल्स बल नगण्य होता है इसलिए यह गैसीय अवस्था में होता है एवं P4 अणु की संरचना चतुष्फलकीय होती है। इसमें चतुष्फलकीय अणु दुर्बल वाण्डर वाल्स बंध द्वारा जुड़कर क्रिस्टलीय रूप ले लेता है। .

प्रश्न 4.
HCIO, HBro एवं HIO के अम्लीय प्रबलता का क्रम लिखिए।
उत्तर
HCIO से HIO तक हाइपो हैलस अम्लों की प्रबलता घटती है –
HCIO > HBrO > HIO.

प्रश्न 5.
क्लैथेट यौगिक क्या है ? .
उत्तर
किसी यौगिक के क्रिस्टल जालक के होल या रिक्तिको में छोटे आकार के तत्व जैसे उत्कृष्ट गैसों के समा जाने या प्रवेश करने से क्लैथ्रेट यौगिक प्राप्त होते है। उदाहरण-Kr3 (β क्विनॉल)।

प्रश्न 6.
1 परमाणु की तुलना में F परमाणु की ऋणविद्युत्ता अधिक है फिर भी HF की अम्लीय प्रबलता HI की अपेक्षा कम होती है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
F परमाणु का आकार छोटा होने के कारण H-F बंध की बंध वियोजन H-I बंध की अपेक्षा बहुत उच्च होती है जिसमें । परमाणु का आकार बड़ा होता है।

प्रश्न 7.
कौन-कौन-सी उत्कृष्ट गैसे रासायनिक यौगिक बना सकती हैं ?
उत्तर
Kr एवं Xe अत्यधिक विशिष्ट परिस्थितियों के अन्तर्गत यौगिक बना सकती है।

प्रश्न 8.
फ्लुओरीन, क्लोरीन की तुलना में प्रबल ऑक्सीकारक क्यों है ?
उत्तर
फ्लुओरीन, क्लोरीन से अधिक विद्युत्-ऋणात्मक होने के कारण इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की अधिक क्षमता रखता है, फलस्वरूप फ्लुओरीन, क्लोरीन की तुलना में प्रबल ऑक्सीकारक है।

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प्रश्न 9.
F2O को फ्लुओरीन का ऑक्साइड नहीं माना जाता है, क्यों?
उत्तर-फ्लुओरीन आवर्त सारणी का सर्वाधिक ऋणविद्युती तत्व है। इसकी ऋणविद्युत्ता 0 से अधिक होती है। नामकरण पद्धति में कम ऋणविद्युती तत्व का नाम पहले एवं अधिक ऋणविद्युती तत्व का नाम बाद में लिखते हैं इसलिए F2O या OF2 को ऑक्सीजन डाइफ्लुओराइड कहा जाता है।

प्रश्न 10.
अंतर हैलोजन यौगिक हैलोजन की अपेक्षा अधिक क्रियाशील होते हैं, क्यों ? .
उत्तर-
दो भिन्न हैलोजन के बीच बना बंध (A-B), शुद्ध हैलोजन (एक ही प्रकार के हैलोजन) परमाणु के बीच बने बंध (A-A या B-B) की तुलना में ज्यादा ध्रुवीय और दुर्बल होता है इसलिए अन्तर हैलोजन यौगिक अधिक क्रियाशील होते हैं।

प्रश्न 11.
हीलियम और निऑन फ्लुओरीन के साथ यौगिक नहीं बनाते हैं, क्यों ?
उत्तर
He और Ne के संयोजकता कक्ष में d-ऑर्बिटल नहीं होने के कारण इनके इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर Xe के समान उच्च ऊर्जा के d-कक्षक में नहीं जा सकते इसलिए He और Ne फ्लुओरीन के साथ यौगिक नहीं बनाते हैं।

p-ब्लॉक के तत्त्व लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सामान्य ताप पर H2O द्रव है जबकि H2S गैस है, क्यों ? जल का क्वथनांक उच्च क्यों होता है ?
उत्तर
जल के अणु में Oxygen परमाणु उच्च विद्युत्-ऋणात्मक होता है। जिसके कारण जल के अन्य अणुओं से H- बन्धन (Inter molecular hydrogen bonding) करता है। फलस्वरूप जल के समस्त अणु संगुणित हो जाते हैं, जिससे क्वथनांक उच्च हो जाता है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 35
H2S में हाइड्रोजन बंध नहीं पाये जाने के कारण इसके अणुओं में संगुणन नहीं होता तथा गैसीय अवस्था में रहता है। जबकि H2O द्रव अवस्था में।

प्रश्न 2.
फॉस्फोरस के पाँच ऑक्सी अम्लों के नाम लिखकर उनकी संरचना सूत्र दर्शाइए।
उत्तर
फॉस्फोरस के पाँच ऑक्सी अम्लों के नाम –

  1. हाइपो फॉस्फोरस अम्ल (H3PO2) एक क्षारकीय
  2. हाइपो फॉस्फोरिक अम्ल (H4P2O6) चतुर्भारकीय
  3. फॉस्फोरस अम्ल (H3PO3) द्विक्षारकीय
  4. ऑर्थो-फॉस्फोरिक अम्ल (H3PO4) त्रिक्षारकीय
  5. पायरो फॉस्फोरिक अम्ल (H4P2O7) चतुर्धारकीय।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 36

प्रश्न 3.
ऑक्सीजन का व्यवहार अपने समूह के अन्य तत्त्वों से भिन्न है। कारण लिखिए।
उत्तर
ऑक्सीजन के असंगत व्यवहार के निम्न कारण हैं –

  • परमाणु आकार का छोटा होना।
  • विद्युत्-ऋणात्मकता का मान अधिक होना।
  • d-कक्षक का उपलब्ध न होना।
  • इसकी आयनन ऊर्जा उच्च होती है।

प्रश्न 4.
क्या कारण है कि ऑक्सीजन एक गैस है, जबकि सल्फर एक ठोस है ?
उत्तर
ऑक्सीजन द्वि-परमाणुक अणु O2 बनाता है। इसमें ऑक्सीजन के विभिन्न अणु दुर्बल अन्तरअणुक वाण्डर वाल बल द्वारा बँधे होते हैं। अतः ऑक्सीजन सामान्य ताप पर गैस होती है।
दूसरी ओर सल्फर आठ परमाणुओं की जटिल आण्विक संरचना बनाता है। अतः सल्फर के इस S8 अणु का आण्विक द्रव्यमान अधिक होने के कारण यह ठोस अवस्था में होता है।

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प्रश्न 5.
जल उदासीन होता है किन्तु H2S एक दुर्बल अम्ल है, क्यों ?
उत्तर
जल के अणुओं में प्रबल H-बन्ध पाये जाने के कारण इनके अणु परस्पर संगुणित अवस्था में रहते हैं, जिससे इसके वियोजन स्थिरांक (Ka) का मान कम होता है। अत: जल उदासीन द्रव है। जबकि H2S में S की ऋणविद्युत्ता अधिक नहीं होने के कारण हाइड्रोजन बन्ध नहीं बना पाता तथा सल्फर का परमाणु आकार ऑक्सीजन के परमाणु चित्र-S, अणु की संरचना आकार से बड़ा होता है। जिससे यह हाइड्रोजन का प्रोटॉन के रूप में मुक्त होने के लिए सहायक होता है। अतः H2S दुर्बल अम्ल है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 37

प्रश्न 6.
प्रयोगशाला में अमोनिया गैस को शुष्क करने के लिए अनबुझे चूने का ही प्रयोग किया जाता है। कारण लिखिए।
उत्तर
प्रयोगशाला में अमोनियम क्लोराइड (नौसादर) और क्षार या बुझा हुआ चूना विलयन को कठोर काँच के फ्लास्क में गर्म करने पर अमोनिया गैस बनती है। इसे बिना बुझे हुए चूने द्वारा शुष्क कर हवा के अधोविस्थापन द्वारा एकत्रित कर लिया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 38
अमोनिया को चूने के अलावा अन्य जल शोषक पदार्थों (H2SO4, P2O5, CaCl2) से शुष्क नहीं किया जा सकता क्योंकि वह उनसे क्रिया करती है। अमोनिया के, जल में अत्यधिक विलेय होने से जल के ऊपर भी एकत्रित नहीं किया जा सकता।

2NH3 + H2SO4 → (NH4)2SO4बनता है।
CaCl2 + 8NH3 → CaCl2 . 8NH3 योगात्मक यौगिक बनता है।
6NH3 + P2O5 +3H2O → 2(NH4)3 PO4 बनता है।

प्रश्न 7.
SO2 तथा Cl2 की विरंजन क्रिया में अन्तर लिखिए।
अथवा, क्लोरीन द्वारा फूलों का विरंजन स्थायी होता है जबकि SO2 द्वारा अस्थायी होता है, कारण समझाइए।
उत्तर
SO2 द्वारा विरंजन-नमी की उपस्थिति में SO2 गैस वनस्पतियों के रंगीन पदार्थ को अपचयन द्वारा रंगहीन बना देती है। यह विरंजन अस्थायी होता है, क्योंकि वायुमण्डल की ऑक्सीजन द्वारा रंगहीन पदार्थ का ऑक्सीकरण हो जाता है तथा वह रंगीन पदार्थ में बदल जाता है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 39

Cl2 द्वारा विरंजन-Cl2 द्वारा विरंजन ऑक्सीकरण क्रिया से होता है। नमी की उपस्थिति में यह वनस्पतियों एवं रंगीन वस्तुओं का विरंजन कर देती है । Cl2 और जल की क्रिया से नवजात ऑक्सीजन बनती है, जो रंगीन पदार्थ को ऑक्सीकरण द्वारा रंगहीन पदार्थ में बदल देती है।

Cl2 + H2O →HCl + HClO
HClO→ HCI +O
रंगीन पदार्थ + O → रंगहीन पदार्थ

Cl2 द्वारा किया गया विरंजन स्थायी होता है।

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प्रश्न 8.
सल्फर के किन्हीं पाँच ऑक्सी अम्लों के सूत्र एवं संरचना लिखिए।
उत्तर
सल्फर के प्रमुख ऑक्सी अम्ल तथा उसमें सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था निम्नलिखित हैं –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 40

प्रश्न 9.
H2SO4 के निर्माण की सीस कक्ष विधि के प्रयुक्त ग्लोबर स्तम्भ के कोई चार कार्य लिखिए।
उत्तर
ग्लोबर स्तम्भ के मुख्यत: चार कार्य हैं –

  • सीस कक्ष का अम्ल जिसमें जल की अशुद्धि होती है। SO2 से मिलकर H2SO4 बनाता है जिससे इस अम्ल का सान्द्रण 80% तक हो जाता है।
  • गैलूसैक स्तम्भ से प्राप्त नाइट्रीकृत H2SO4 में से N2 के ऑक्साइड मुक्त हो जाते हैं।
  • बर्नर से प्राप्त SO2 तथा NO2 का मिश्रण 50 से 80°C तक ठण्डा हो जाता है।
  • इस स्तम्भ में कुछ SO2 का SO3 में ऑक्सीकरण हो जाता है।

प्रश्न 10.
अम्लराज क्या है ? इसका उपयोग लिखिए।
उत्तर
अम्लराज (Aqua regia)—यह 1 भाग सान्द्र HNO3 तथा 3 भाग सान्द्र HCl को मिलाने से बनता है।
उपयोग–अम्लराज Au, Pt और Ir को घोलने के लिए प्रयुक्त होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 41

प्रश्न 11.
सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण में संपर्क विधि को सीस कक्ष विधि से अधिक उपयुक्त क्यों माना जाता है ?
उत्तर

  • सम्पर्क विधि से प्राप्त अम्ल शुद्ध होता है किन्तु सीस कक्ष विधि से प्राप्त अम्ल अशुद्ध होता है।
  • सम्पर्क विधि के संयंत्र के लिये कम स्थान लगता है जबकि सीस कक्ष विधि के संयंत्र के लिये अधिक स्थान चाहिए।
  • सम्पर्क विधि में ठोस उत्प्रेरक प्लैटिनीकृत एस्बेस्टस प्रयुक्त होता है जबकि सीस कक्ष विधि में प्रयुक्त उत्प्रेरक गैसीय होता है जिसका प्रवाह नियमित रखना आवश्यक है।
  • सम्पर्क विधि संयंत्र को लगाने में सीस कक्ष संयंत्र की तुलना में कम खर्च आता है।
  • सम्पर्क विधि में प्राप्त अम्ल अधिक सान्द्र होता है किन्तु सीस कक्ष विधि में तनु अम्ल प्राप्त होता है।

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प्रश्न 12.
PH3 का क्वथनांक NH3 से कम होता है, क्यों ?
उत्तर
नाइट्रोजन और फॉस्फोरस दोनों की विद्युत्-ऋणात्मकता में बड़ा अन्तर होने के कारण NH3 अणु अन्तर आण्विक H- बन्ध बनाने में भाग लेता है इसलिए NH3 एक संगुणित अणु के रूप में विद्यमान रहता है। इन हाइड्रोजन बन्धों को तोड़ने के लिए ऊर्जा की अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है।
जबकि PH3 हाइड्रोजन बन्ध बनाने में भाग नहीं लेता है इसलिए यह अखण्डित अणु के स्वरूप में विद्यमान नहीं रह पाता इसलिए PH3 का क्वथनांक NH3 से कम ही पाया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 42

प्रश्न 13.
फॉस्फीन बनाने की प्रयोगशाला विधि का नामांकित चित्र बनाइए तथा रासायनिक समीकरण दीजिए।
उत्तर
प्रयोगशाला में फॉस्फीन गोल पेंदी के फ्लास्क में सफेद फॉस्फोरस और NaOH को CO2 एवं तेल गैस के अक्रिय वातावरण में गर्म करके बनायी जाती है। मुक्त फॉस्फीन में अपद्रव्य के रूप में फॉस्फोरस डाइहाइड्राइड होने के कारण इसमें बड़ी शीघ्रता से आग लग जाती है। गैस के बुलबुले वायु के सम्पर्क में आते ही वलयाकार धुएँ के चक्र बनाते हैं। NaOH के स्थान पर ऐल्कोहॉली KOH भी प्रयुक्त कर सकते हैं।
फॉस्फीन PH3 बनाने की प्रयोगशाला विधि का नामांकित चित्र –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 43
अभिक्रिया समीकरण –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 44

प्रश्न 14.
नाइट्रोजन का अपने समूह 15 से भिन्नता एवं समूह 16 के गन्धक से विकर्ण सम्बन्ध रखती है, समानता एवं भिन्नता का कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
नाइट्रोजन की अन्य तत्वों से भिन्नता के कारण निम्नलिखित हैं –

  • नाइट्रोजन के परमाणु आकार का छोटा होना।
  • उच्च ऋणविद्युत्ता का होना।
  • बहु-बन्ध बनाने की प्रवृत्ति का होना।
  • d-ऑर्बिटलों का अभाव होना।

नाइट्रोजन का गन्धक से विकर्ण सम्बन्ध-नाइट्रोजन समूह 15 का तत्व है जबकी गन्धक समूह 16 का तत्व, परन्तु दोनों समानता प्रदर्शित करते हैं।
इन तत्वों में मुख्य समानताएँ निम्नलिखित हैं –

  • दोनों ही तत्व अधातु हैं।
  • दोनों ही तत्व ऋणविद्युती हैं।
  • दोनों ही तत्वों के ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।
  • दोनों ही तत्व अस्थायी सहसंयोजक ऑक्सी हैलाइड तथा हैलाइड बनाते हैं।

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प्रश्न 15.
पायरो फॉस्फोरिक अम्ल की संरचना लिखिए।
उत्तर
पायरो फॉस्फोरिक अम्ल में फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण संख्या +5
है। यह चतुर्भारकीय अम्ल है। पायरो शब्द ऐसे अम्लों के लिए प्रयुक्त होता है जो दो अणुओं को गर्म करने पर एक जल अणु की कमी से प्राप्त होता है। इसका रासायनिक सूत्र H4P2O7,(P2O5.2H2O) है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 45

प्रश्न 16.
ऑक्सीजन -2 से +2 तक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है, जबकि इस समूह के अन्य तत्व + 2, +4 तथा + 6 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं। इसका कारण लिखिए।
उत्तर
ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था – 2 है, परन्तु H2O2, O2,O2F2 तथा OF2 आदि में यह क्रमशः – 1, 0, +1 तथा +2 ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करता है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s22s22p22p1y2p1z है एवं ऑक्सीजन के पास nd कक्षक रिक्त नहीं होते हैं, जिससे इसकी संयोजकता इससे अधिक नहीं होती। ऑक्सीजन के अतिरिक्त अन्य तत्वों के पास nd कक्षक रिक्त होते हैं, जिससे आवश्यकतानुसार ns तथा np कक्षक के इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरित होकर इनमें आ जाते हैं, किन्तु ऑक्सीजन में ऐसी परिस्थिति नहीं है।

प्रश्न 17.
समझाइए ऑक्सीजन का अणुसूत्र O2 है, जबकि सल्फर का ss है।
उत्तर
ऑक्सीजन परमाणु का आकार छोटा होता है अतः यह स्वयं के साथ स्थायी द्विबन्ध बनाने की क्षमता रखता है। अतः इसका अणु सूत्र O2 है जबकि सल्फर परमाणु का आकार बड़ा होने के कारण यह बहुबन्ध नहीं बनाता है, इसलिए यह S2 के रूप में नहीं रहता है। इसके साथ ही साथ S-S बन्ध ऊर्जा अधिक होने के कारण इसमें श्रृंखलन का गुण ऑक्सीजन से अधिक होता है, इसलिए सल्फर S रूप में रहता है जिसमें प्रत्येक सल्फर परमाणु अन्य सल्फर परमाणुओं से एकल सहसंयोजी बन्ध द्वारा जुड़कर सिकुड़ी हुई रिंग (Puckered ring) जैसी संरचना बनाता है।

प्रश्न 18.
नाइट्रोजन के महत्वपूर्ण ऑक्साइडों की संरचना लिखिए।
उत्तर-
नाइट्रोजन के ऑक्साइडों की संरचना –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 46

प्रश्न 19.
ओजोन के निर्माण की सीमेन-हालस्के ओजोनाइजर विधि को समझाइए तथा नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर
ओजोन की अधिक मात्रा में बनाने के लिए सीमेन और हालस्के का ओजोनाइजर (Siemen’s and Halske’s ozonizer) प्रयुक्त किया जाता है, जो ढलवाँ लोहे का बॉक्स होता है। बक्से में दो-दो की कतारों में लगभग दस-बारह काँच की नलियाँ होती हैं। इन नलियों में ऐल्युमिनियम के इलेक्ट्रोड लगे होते हैं। नली में से शुष्क वायु प्रवाहित करते हैं तथा इलेक्ट्रोडों से 800-1000 वोल्ट विभव पर विद्यत धारा प्रवाहित करते । हैं। उपकरण को ठण्डा रखने के लिए उसके चारों ओर जल प्रवाहित करते हैं। लोहे के पात्र का भू-सम्पर्क कर देते हैं। क्रिया के पश्चात् बाहर आयी हुई वायु ओजोन मिश्रित होती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 47

प्रश्न 20.
H2O की तुलना में H2S प्रबल अपचायक है, क्यों? कोई तीन कारण दीजिए।
उत्तर
H2O की अपेक्षा H2S एक प्रबल अपचायक है क्योंकि H2S अपना हाइड्रोजन आसानी से मुक्त कर देता है H2O नहीं, इसके मुख्य कारण हैं

  • H2O में H-बन्ध होता है जिससे हाइड्रोजन मुक्त करने में अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  • S का आकार ऑक्सीजन से बड़ा होता है।
  • ऑक्सीजन की विद्युत्-ऋणता सल्फर से अधिक होती है।

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प्रश्न 21.
सल्फ्यूरस अम्ल अपचायक क्यों है ?
उत्तर
क्योंकि H2SO3 के सल्फर परमाणु पर अभी भी एक अनाबंधित इलेक्ट्रॉन होता है, इस इलेक्ट्रॉन युग्म को खोकर H,SO, का सल्फर परमाणु अपनी उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में आ सकता है। इसलिए H2SO3 अपचायक की तरह कार्य करता है।

प्रश्न 22.
उत्कृष्ट गैसों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर
उत्कृष्ट गैसों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित हैं –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 48

प्रश्न 23.
कारण स्पष्ट कीजिए –
(a) HF द्रव है, जबकि अन्य हैलोजन के हाइड्राइड सामान्य ताप पर गैस है।
(b) फ्लुओरीन, पॉलीहैलाइड नहीं बनाता ।
उत्तर
(a) फ्लुओरीन की ऋणविद्युत्ता अन्य हैलोजनों से सर्वोच्च होती है। अत: HF अणु H बंध द्वारा संयुग्मित होते हैं। इसके साथ ही साथ HF का क्वथनांक अन्य हैलोजन अम्लों से अधिक होता है, इसलिए HF द्रव होता है, जबकि हैलोजन के हाइड्राइड कमरे के ताप पर गैस होते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 49
(b) फ्लुओरीन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s22s2p5 है। इसके संयोजकता कोश में रिक्त d-कक्षक की अनुपस्थिति के कारण यह उच्च ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करता है और इसीलिए यह पॉलीहैलाइड नहीं बनाता है।
आर्गन

प्रश्न 24.
कारण दीजिए –
(a) उत्कृष्ट गैसें एकपरमाणुक होती हैं।
(b) उत्कृष्ट गैसों की परमाणु त्रिज्याएँ सबसे अधिक होती हैं।
(c) उत्कृष्ट गैसों की आयनन ऊर्जा सर्वोच्च होती है।
उत्तर
(a) उत्कृष्ट गैसों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में एक भी अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं इसलिए वे रासायनिक बन्ध नहीं बनाते हैं और एकपरमाणुक होते हैं।
(b) उत्कृष्ट गैसों के बाह्यतम् कोश पूर्णतः भरे होते हैं तथा उत्कृष्ट गैसों के परमाणुओं की वाण्डर वाल्स त्रिज्या का मान अन्य परमाणुओं के सहसंयोजक त्रिज्या के मान से अधिक होता है।
(c) उत्कृष्ट गैसों के बाह्य कोश में सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं, अतः इन्हें अयुग्मित करने के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे इनकी आयनन ऊर्जा अपने-अपने आवर्गों में सर्वोच्च होती है।

प्रश्न 25.
प्राप्य क्लोरीन से आप क्या समझते हैं ? समीकरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
ब्लीचिंग पाउडर तनु H2SO4 के आधिक्य (अथवा CO2) से क्रिया करके क्लोरीन गैस मुक्त करता है।

CaOCl2 + H2SO4→ CaSO4 + H2O + Cl2
CaOCl2 + CO2 → CaCO3 + Cl2

इस प्रकार मुक्त क्लोरीन “प्राप्य क्लोरीन” कहलाता है। एक अच्छे नमूने में 35-38% प्राप्य क्लोरीन होती है।

प्रश्न 26.
हीलियम के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर
हीलियम के उपयोग- (1) दमा के रोगियों को हीलियम ऑक्सीजन का मिश्रण साँस लेने के लिए दिया जाता है।
(2) वायु की अपेक्षा हीलियम का भार कम होने के कारण इसे वायुयानों के टायरों में भरा जाता है। ,

प्रश्न 27.
XeF2 तथा XeF4 की संरचना समझाइए।
उत्तर
XeF2 की संरचना-XF2 में Xe, sp3d संकरित अवस्था में होता है। इसलिए इसकी संरचना त्रिभुजीय द्विपिरामिडीय होनी चाहिए। लेकिन 3 एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति के कारण XeF2 की संरचना रेखीय होती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 50
XeF2 की संरचना – Xe की उत्तेजित अवस्था में 5p-कक्षक के 2 इलेक्ट्रॉन 54-कक्षक में जाकर sp2d2 संकरण बनाते हैं। इन 6 संकरित कक्षकों में से चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन XeF4 बनाते हैं। दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति के कारण संरचना वर्ग समतलीय होती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 51

प्रश्न 28.
फ्लुओरीन केवल एक ही ऑक्सीकरण अवस्था (-1) प्रदर्शित करता है, क्यों?
उत्तर
फ्लुओरीन की विद्युत्-ऋणात्मकता सबसे अधिक होती है। अत: वह हमेशा -1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है। साथ ही फ्लुओरीन के संयोजकता कोश में d-कक्षक नहीं पाये जाते, अत: उसकी कोई उत्तेजित अवस्था नहीं हो सकती। इसके फलस्वरूप वह कोई उच्च ऑक्सीकरण अवस्था नहीं दर्शाता।

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प्रश्न 29.
क्लोरीन के किन्हीं तीन प्रमुख ऑक्सी अम्लों के सूत्र, संरचना एवं उनकी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ लिखिए।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 52
संरचना-HClO की संरचना-HClO के ClO आयन में केन्द्रीय परमाणु क्लोरीन sp3 संकरण द्वारा चार संकर कक्षक बनाता है, जिनमें से तीन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म और चौथा ऑक्सीजन परमाणु के d-कक्षक से अतिव्यापन करके σ-बन्ध बनाता है। इनकी आकृति रेखीय हो जाती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 53
HClO4 की संरचना-इसके केन्द्रीय परमाणु Cl में sp3 संकरण होता है, इस प्रकार ClO4 आयन की संरचना चतुष्फलकीय होती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 54

प्रश्न 30.
ब्लीचिंग पाउडर की विरंजन क्रिया को समझाइए।
उत्तर
जिस वस्त्र का विरंजन करना होता है, उसे Na2CO3 विलयन के साथ उबालकर चिकनाई हटा लेते हैं। फिर उसे घिर्रियों की सहायता से अनेक बड़े पत्थरों के टबों में ले जाया जाता है। वस्त्र को पहले एक ऐसे पात्र में डुबाया जाता है, जिसमें विरंजक चूर्ण (CaOCl2) का तनु विलयन भरा रहता है । वस्त्र को इस पात्र से निकाल कर दूसरे पात्र में डुबाते हैं, जिसमें तनु H2SO4 भरा रहता है । तनु H2SO4 की विरंजक चूर्ण की क्रिया से क्लोरीन गैस निकलती है, जो वस्त्र का विरंजन कर देती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 55
अब इसे तीसरे पात्र में, जिसमें सोडियम थायो-सल्फेट या हाइपो का विलयन होता है डुबा देते हैं। हाइपो द्वारा क्लोरीन की अधिक मात्रा समाप्त हो जाती है। इसके पश्चात् कपड़े को चौथे टब में ले जाया जाता है, जिससे इसे पानी में खूब धोते हैं । यहाँ कपड़े में लगे सारे रासायनिक पदार्थों को धोकर निकाल दिया जाता है। इसके बाद कपड़े को गर्म रोलरों पर दबाया जाता है, जिससे कपड़ा सूख जाता है तथा इस्तरी करने के बेलनों से कपड़े की सिकुड़न दूर कर दी जाती है। अन्त में रंग उड़े कपड़े को छड़ पर गोल करके लपेट देते हैं।

प्रश्न 31.
उत्कृष्ट गैसें निष्क्रिय क्यों होती हैं ?
उत्तर
उत्कृष्ट गैसें निम्नलिखित कारणों से निष्क्रिय होती हैं –

  • उत्कृष्ट गैसें निष्क्रिय होती हैं, क्योंकि इनका अष्टक पूर्ण होता है, जो तत्व की सबसे अधिक स्थायी अवस्था है। इनके परमाणु में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होता है।
  • उत्कृष्ट गैसों की आयनन ऊर्जा अति उच्च होती है तथा इलेक्ट्रॉन बन्धुता एवं ऋणविद्युत्ता शून्य होती है, अतः ये न तो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं, न त्यागते हैं और न ही साझा करते हैं। अत: ये निष्क्रिय होते हैं।

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प्रश्न 32.
फ्लुओरीन की अन्य हैलोजनों से भिन्नता के कोई तीन कारण दीजिए।
उत्तर
फ्लुओरीन के अन्य हैलोजनों से भिन्नता के निम्न कारण हैं –

  • फ्लुओरीन की बन्ध ऊर्जा अत्यन्त कम 158 kJ मोल-1 है, जिसके कारण F2 से अभिक्रिया हेतु बहुत कम सक्रियण ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  • फ्लुओरीन परमाणु का आकार अन्य हैलोजनों की तुलना में छोटा होता है, फलस्वरूप फ्लुओरीन का अन्य परमाणुओं के साथ बना सहसंयोजी बन्ध प्रबल होता है।
  • फ्लुओरीन की ऋणविद्युत्ता अन्य हैलोजनों से अधिक होती है, अत: यह आसानी से F आयन बना सकता है। ऋणविधुत्ता अधिक होने के कारण यह दूसरे तत्वों को उनके यौगिकों से प्रतिस्थापित कर देता है।

प्रश्न 33.
जीनॉन उत्कृष्ट गैस है, फिर भी यह यौगिक बनाती है, क्यों ? इसके दो यौगिक के संरचना सूत्र दर्शाइए।
उत्तर
सन् 1962 में नील बार्लेट ने देखा कि ऑक्सीजन PtF6 से क्रिया करके O2[PtF6 ] बनाता है। उन्होंने सोचा कि ऑक्सीजन और जीनॉन की प्रथम आयनन ऊर्जा लगभग बराबर होती है। इसी आधार पर उन्होंने Xe व PtF6 की सीधी अभिक्रिया द्वारा प्रथम यौगिक Xe[Ptf6 ] बना लिया, जो नारंगी पीले रंग का ठोस था।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 56
प्रश्न 34.
फ्लुओरीन, क्लोरीन की तुलना में प्रबल ऑक्सीकारक है, कारण दीजिए।
उत्तर
फ्लुओरीन, क्लोरीन की तुलना में निम्नलिखित कारणों से प्रबल ऑक्सीकारक है—

  • F परमाणु का आकार Cl परमाणु से छोटा होता है।
  • F की ऋणविद्युत्ता Cl से अधिक होती है।
  • फ्लुओरीन की वियोजन ऊर्जा क्लोरीन से बहुत कम होती है।
  • फ्लुओरीन का E0 का मान क्लोरीन से अधिक होता है।

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प्रश्न 35.
क्लोरीन गैस बनाने की प्रयोगशाला विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
प्रयोगशाला विधि-हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और MnO2 की क्रिया से-एक फ्लास्क में MnO2 लिया जाता है। थिसिल फनल द्वारा सान्द्र HCI डाला जाता है। HCl की मात्रा इतनी डाली जाती है कि MnO2 पूर्ण रूप से ढंक जाये। फ्लास्क को धीरे-धीरे गर्म करते हैं, जिससे हरे-पीले रंग की Cl2 गैस निकलती है।

MnO2 + 4HCl → MnCl2 + 2H2O+Cl2

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 57
प्राप्त Cl2 गैस में HCl और जल वाष्प की अशुद्धियाँ होती हैं, जो क्रमशः जल और सान्द्र H2SO4 में प्रवाहित करने से दूर हो जाती है।

प्रश्न 36.
उत्कृष्ट गैसों के पाँच भौतिक गुणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
उत्कृष्ट गैसों के भौतिक गुण –

  • परमाणु त्रिज्या उत्कृष्ट गैसों की आयनिक त्रिज्या वाण्डर वाल्स त्रिज्या के संगत है। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर वाण्डर वाल्स त्रिज्या बढ़ती जाती है।
  • आयनन ऊर्जा—इनका स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होने के कारण आयनन ऊर्जा बहुत अधिक होती है। आयनन ऊर्जा का मान परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ घटता जाता है।
  • इलेक्ट्रॉन बन्धुता—इनके स्थायी विन्यास ns2np6 के कारण उत्कृष्ट गैसों में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति नहीं होती है। इस कारण इनकी इलेक्ट्रॉन बन्धुता लगभग शून्य होती है।
  • गलनांक एवं क्वथनांक इनके परमाणुओं में दुर्बल आकर्षण बल होने के कारण इन गैसों के गलनांक एवं क्वथनांक कम होते हैं। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर m.p. और b.p. का मान क्रमशः बढ़ता जाता है।
  • द्रवीकरण-उत्कृष्ट गैसें सुगमता से द्रवीभूत नहीं होती हैं । इसका कारण इनमें दुर्बल वाण्डर वाल्स बलों का होना है।

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प्रश्न 37.
हैलोजन के हाइड्राइडों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर
हैलोजन, हाइड्रोजन से योग करके वाष्पशील हैलाइड बनाते हैं, जिनका सामान्य सूत्र HX है।
x2 + H2 → 2HX
इन हाइड्राइडों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  • भौतिक अवस्था सामान्य परिस्थितियों में HCl, HBr और HI गैस तथा HF द्रव है।
  • स्थायित्व समूह में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर हाइड्राइडों का स्थायित्व घटता है। H सबसे अधिक तथा HI सबसे कम स्थायी है।
  • अपचायक प्रवृत्ति समूह में ऊपर से नीचे जाने पर HF से HI तक अपचायक गुण बढ़ता है।
  • बन्ध की प्रकृति सभी हैलाइड सहसंयोजी प्रकृति के होते हैं, किन्तु कुछ में आयनिक लक्षण भी होते हैं। आयनिक लक्षण HF से HI तक क्रमशः घटता है।
  • अम्लीय शक्ति सभी जल में आयनित होकर अम्ल की तरह व्यवहार करते हैं। इन अम्लों की शक्ति HF से HI की ओर बढ़ती है।

प्रश्न 38.
समूह 17 के तत्व (हैलोजन) रंगीन होते हैं, क्यों?
उत्तर
हैलोजन समूह के समस्त तत्व रंगीन होते हैं, उनका रंग परमाणु संख्या में वृद्धि के साथ गहरा होता जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 58
हैलोजनों में रंग उनके अणुओं द्वारा दृश्य प्रकाश (Visible light) के अवशोषण के कारण होता है। अणुओं द्वारा दृश्य प्रकाश के अवशोषण के फलस्वरूप बाह्यतम् इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं, जिसके कारण ये तत्व रंगीन दिखाई देते हैं। उदाहरणार्थ-फ्लोरीन का आकार अत्यन्त छोटा होने के कारण बाह्य इलेक्ट्रॉन पर नाभिक का आकर्षण अधिक होता है तथा बाह्यतम् इलेक्ट्रॉन को उत्तेजित करने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। फ्लुओरीन परमाणु अधिक ऊर्जा वाले बैंगनी विकिरणों को अवशोषित करते हैं, अत: वे हल्के पीले दिखाई देते हैं जबकि आयोडीन परमाणु का आकार बड़ा होता है । बाह्यतम् इलेक्ट्रॉन नाभिक से काफी दूर रहते हैं। उन्हें उत्तेजित करने के लिए कम ऊर्जा वाले पीले विकिरणों की आवश्यकता होती है। दृश्य प्रकाश से पीले रंग के विकिरण के अवशोषण के कारण वे बैंगनी दिखाई देते हैं।

प्रश्न 39.
फ्लुओरीन केवल +1 या-1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है जबकि अन्य हैलोजन तत्व इसके अतिरिक्त +3, +5 एवं +7 ऑक्सीकरण अवस्था भी दर्शाते हैं, क्यों ?
उत्तर
फ्लुओरीन केवल +1 या-1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है जबकि अन्य हैलोजन तत्व जैसेCl, Br तथा I, +3, +5, +7 ऑक्सीकरण अवस्था भी दर्शाते हैं क्योंकि शेष हैलोजन Cl, Br व I में रिक्त d-कक्षक भी उपस्थित होता है। जिसके फलस्वरूप उत्तेजित अवस्था में इलेक्ट्रॉन d-कक्षक में जाने से क्रमशः 3,5, 7 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हो जाते हैं। यही कारण है कि ये हैलोजन क्रमशः +3, +5 एवं +7 ऑक्सीकरण अवस्था भी दर्शाते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 59

प्रश्न 40.
कारण स्पष्ट कीजिए(a) आयोडीन कुछ धात्विक गुण प्रदर्शित करता है। (b) हैलोजन प्रबल ऑक्सीकारक होते है, क्यों?
उत्तर
(a) आयोडीन की आयनन ऊर्जा कुछ कम होती है, अतः यह अपने संयोजकता कोश के एक इलेक्ट्रॉन को मुक्त कर कुछ अभिक्रियाओं में I आयन देता है। इसलिए यह कुछ धात्विक गुण रखता है।
I → I+ + e
(b) सभी हैलोजनों की इलेक्ट्रॉन बंधुता अधिक होती है, अतः इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रकृति अधिक होती है, इसलिए हैलोजन प्रबल ऑक्सीकारक है। ऑक्सीकारक क्षमता F से I की ओर जाने पर घटती है।

F2> Cl2> Br2 > I2 अतः फ्लुओरीन सबसे प्रबल ऑक्सीकारक है।

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प्रश्न 41.
हैलोजन श्रेणी में फ्लुओरीन अन्य सदस्यों की तुलना में सबसे अधिक सक्रिय है, किन्हीं तीन बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
फ्लुओरीन की क्रियाशीलता के निम्नलिखित कारण हैं –
1. परमाणु त्रिज्या-फ्लुओरीन की परमाणु त्रिज्या छोटी होती है तथा इसके नाभिक पर उच्च धन आवेश होता है। इसलिये यह शीघ्रता से सहसंयोजी बंध बनाते हैं।
2. विद्युत् ऋणात्मकता-इसकी विद्युत् ऋणात्मकता का मान आवर्त सारणी के सभी तत्वों की विद्युत् ऋणात्मकता से अधिक है।
3. ऑक्सीकारक गुण-फ्लोरीन अन्य हैलोजन की तुलना में प्रबल ऑक्सीकारक है। इसलिये यह सरलता से इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋण आयन बना सकता है।

p-ब्लॉक के तत्त्व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ओजोन की निम्नलिखित पर रासायनिक समीकरण दीजिए –
(1) K2MnO4
(2) I2
(3) Ag2O
(4) CH2== CH2
(5) PbS.
उत्तर
(1) पोटैशियम मैंगनेट से पोटैशियम परमैंगनेट बनता है।
2K2MnO4 + H2O + O3 → 2KMnO4 + 2KOH +O2

(2) आयोडीन ऑक्सीजन से क्रिया करके आयोडिक अम्ल देता है।

I2 + H2O + 5O3 → 2HIO3 + 5O2

(3) सिल्वर ऑक्साइड अवकृत होकर सिल्वर देता है।

Ag2O + O3 →2Ag + 2O2

(4) एथिलीन ओजोनॉइड बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 60
(5) Pbs को PbSOA में ऑक्सीकृत कर देता है।

PbS + 4O3 → PbsO4 +4O2

प्रश्न 2.
नाइट्रिक अम्ल के निर्माण की ओस्टवाल्ड विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
ओस्टवाल्ड की विधि-1 आयतन अमोनिया और 8 आयतन वायु का मिश्रण प्लैटिनम की जाली (Platinum-gauze) के ऊपर 800°C ताप पर प्रवाहित किया जाता है तो 90% अमोनिया का नाइट्रिक ऑक्साइड में ऑक्सीकरण हो जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 61
बनी हुई नाइट्रिक ऑक्साइड को बची हुई ऑक्सीजन कक्ष में भेजा जाता है, जिससे वह नाइट्रोजन परॉक्साइड में बदल जाती है।

2NO +O2 → 2NO2

यह NO, शोषक कक्ष में भेज दी जाती है, जहाँ ऊपर से धीरे-धीरे जल गिरता रहता है। जल और NO, के संयोग से तनु नाइट्रिक अम्ल बन जाता है।

2NO2 + H2O → HNO2 + HNO3
3HNO2 → HNO3 + H2O + 2NO.

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प्रश्न 3.
नाइट्रोजन अपने समूह के तत्वों से किन-किन गुणों में भिन्नता प्रदर्शित करता है, और क्यों?
उत्तर
नाइट्रोजन निम्न कारणों से अपने समूह के अन्य तत्वों से भिन्नता प्रदर्शित करता है –

  • परमाणु का छोटा आकार,
  • उच्च विद्युत्-ऋणात्मकता,
  • बहु बन्ध बनाने की प्रवृत्ति
  • संयोजकता में वृद्धि के लिए d-उपकक्ष का उपलब्ध न होना।

गुणों में भिन्नता-

  • नाइट्रोजन निष्क्रिय गैस है जबकि अन्य सदस्य क्रियाशील ठोस हैं ।
  • नाइट्रोजन अणु द्विपरमाणुक (N2) है जबकि अन्य तत्वों के अणु चतुःपरमाणुक (P4, AS4, Sb4) हैं ।
  • नाइट्रोजन जटिल यौगिक नहीं बनाता जबकि अन्य तत्व रिक्त d-कक्षक की उपस्थिति के कारण जटिल यौगिक बनाते हैं।
  • नाइट्रोजन के अनेक ऑक्साइड (N2O, NO, N2O3, N2O4, N2O5) ज्ञात हैं। अन्य तत्वों के इतने ऑक्साइड नहीं बनते।
  • NH2 उच्च क्वथनांक वाला द्रव है जबकि अन्य हाइड्राइड गैस हैं ।
  • नाइट्रोजन अपने यौगिक में श्रृंखलन गुण प्रदर्शित करता है जबकि अन्य तत्वों में शृंखलन गुण नहीं पाया जाता ।
  • नाइट्रोजन अपरूपता प्रदर्शित नहीं करता जबकि अन्य तत्व कई अपरूपों में ज्ञात हैं ।
  • नाइट्रोजन संकुल आयन नहीं बनाता जबकि अन्य तत्व संकुल आयन बनाते हैं जैसे, PF4SbF6आदि।

प्रश्न 4.
ब्रॉडी ओजोनाइजर का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
यह काँच की U आकार की नली होती है। भीतर नली में तनु H2SO4 डालकर Pt का तार डाला जाता है। काँच के सम्पूर्ण उपकरण को काँच के बर्तन में लटका देते हैं। इसमें भी H2SO4 भरा होता है। बाहरी बर्तन में भी Pt का इलेक्ट्रोड लगा देते हैं। U नली से शुष्क O2 प्रवाहित करते हैं। तीव्र विद्युत् विसर्जन से .ओजोनीकृत ऑक्सीजन प्राप्त होती है। इसमें ओजोन की मात्रा 20% होती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 62

प्रश्न 5.
नाइट्रोजन परिवार के हाइड्राइडों का निम्न बिन्दुओं पर वर्णन कीजिए –
(i) नाम व सूत्र, (ii) क्षारीय गुण, (iii) अपचायक गुण, (iv) बंध कोण, (v) गलनांक एवं क्वथनांक।
उत्तर
(i)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 63
(ii) क्षारीय गुण-NH3 से BiH3 की ओर जाने पर क्षारीयता घटती जाती है। क्योंकि नाइट्रोजन के छोटे आकार के कारण एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति से इस पर इलेक्ट्रॉन घनत्व उच्च होता है।
(iii) अपचायक गुण-NH3 से BiH3 की ओर जाने पर अपचायक क्षमता बढ़ती है।
(iv) बंध कोण-समूह में ऊपर से नीचे चलने पर बन्ध कोण घटता जाता है क्योंकि केन्द्रीय परमाणु की विद्युत्-ऋणात्मकता घटती है।
(v) गलनांक तथा क्वथनांक (m.p. and b.p.) – जहाँ तक गलनांक अथवा क्वथनांक का प्रश्न है, समूह 15 के तत्व कोई क्रमिकता प्रदर्शित नहीं करते। N से लेकर As तक गलनांक बढ़ता जाता है, जबकि पुनः Sb तथा Bi तक घटता है। क्वथनांक N से Bi तक लगातार बढ़ता जाता है। . .

प्रश्न 6.
ऑक्सीजन परिवार के हाइड्राइडों का निम्न बिन्दुओं पर वर्णन कीजिए –
(i) नाम व सूत्र, (ii) ऊष्मीय स्थायित्व, (iii) अपचायक गुण, (iv) अम्लीय गुण, (v) सहसंयोजक गुण।
उत्तर
(i)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 64
(ii) ऊष्मीय स्थायित्व-हाइड्राइडों का ऊष्मीय स्थायित्व नीचे की ओर घटता है क्योंकि परमाणु आकार में वृद्धि से बंध शक्ति घटती है।
(iii) अपचायक गुण – H2O अपचायक नहीं है। H2S से H2Te तक अपचायक गुण बढ़ता है क्योंकि बंध शक्ति कम होने से हाइड्रोजन देने की प्रकृति बढ़ती है।
(iv) अम्लीय गुण-सभी दुर्बल अम्लीय प्रकृति के होते हैं। H2O से H2Te तक अम्लीय प्रकृति बढ़ती है क्योंकि हाइड्राइडों द्वारा सरलता से H’ दिया जाता है।
(v) सहसंयोजक गुण-हाइड्रोजन के बाह्यतम् कक्ष में एक इलेक्ट्रॉन होता है इससे वह ऑक्सीजन परिवार के अन्य तत्वों से सहसंयोजक बंध बनाकर अपना बाह्यतम् कक्ष पूर्ण करता है।

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प्रश्न 7.
क्लोरीन निर्माण की विधि का निम्न बिन्दुओं के आधार पर वर्णन कीजिए –
(1) नेल्सन सेल का नामांकित चित्र, (2) सिद्धान्त तथा (3) डीकन विधि।
उत्तर
क्लोरीन का निर्माण ब्राइन NaCl के विद्युत्-अपघटन द्वारा किया जाता है इसमें क्लोरीन उपजात के रूप में प्राप्त होती है। नेल्सन सेल-यह इस्पात की टंकी में बेलनाकार ऐस्बेस्टॉस की तह लगी इस्पात की छिद्र युक्त नली लगाकर चित्र में दिखाये अनुसार बनाया जाता है। इस्पात की यह छिद्र युक्त नली कैथोड का कार्य करती है। इस नली में NaCl का विलयन भरकर इस्पात की टंकी में लटका देते हैं। इस विलयन में कार्बन की छड़ लगाकर उसे ऐनोड बनाया जाता है। विद्युत् प्रवाहित करने पर NaCl का विद्युत्-अपघटन हो जाता है। क्लोरीन ऐनोड पर मुक्त होकर बाहर निकल जाती है और सोडियम आयन ऐस्बेस्टॉस की तह को पार कर कैथोड पर मुक्त होने के बाद टंकी में आने वाली भाप से क्रिया करके NaOH विलयन बनाता है, जो अलग निकाल दिया जाता है। NaCl प्रयुक्त होने वाले सभी विद्युत्-अपघटनी सेलों में अभिक्रिया अग्रानुसार होती है –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 65
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(2) डीकन विधि-क्लोरीन का उत्पादन पहले डीकन विधि द्वारा किया जाता था, जिसमें HCl अम्ल गैस को उत्प्रेरक क्यूप्रिक क्लोराइड (CuCl2) की उपस्थिति में ऑक्सीजन के साथ 450°C पर गर्म किया जाता था।
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प्रश्न 8.
क्लोरीन की निम्न के साथ होने वाली अभिक्रिया का समीकरण दीजिए –
(1) NH3 (2) NaOH, (3) H2O, (4) विरंजन गुण।।
उत्तर
क्लोरीन की अभिक्रिया –
(1) अमोनिया से क्रिया-अभिक्रिया दो प्रकार की होती है –
(a) अमोनिया के आधिक्य में अमोनियम क्लोराइड और नाइट्रोजन बनती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 68
(b) यदि क्लोरीन की अधिकता हो तो एक विस्फोटक पदार्थ नाइट्रोजन ट्राइक्लोराइड बनता है।
NH3 +3Cl2 → NCl3 + 3HCl

(2) NaOH से क्रिया –
(a) ठण्डे और तनु कॉस्टिक सोडा से अभिक्रिया कर क्लोराइड और हाइपोक्लोराइट बनाती है।
Cl2 + 2NaOH → NaCl+NaClO + H2O
(b) गर्म और सान्द्र कॉस्टिक सोडा के साथ क्रिया कर क्लोराइड और क्लोरेट बनाती है।
3Cl2 + 6NaOH → NaClO3 +5NaCl +3H2O

(3) जल से क्रिया-Cl2 जल में घुलकर क्लोरीन जल बनाती है। यह हाइपोक्लोरस अम्ल होता है, जो बाद में HCl में विघटित हो जाता है।
[Cl2 + H2O → HOCl + HCl] x 2
2HOCl→2HCl + O2
2Cl2 + 2H2O → 4HCl + O2

(4) विरंजन गुण-नमी की उपस्थिति में क्लोरीन विरंजन का कार्य करती है तथा वनस्पतियाँ और रंगीन वस्तुओं का रंग उड़ा देती है। यह क्रिया ऑक्सीकरण के कारण होती है। अतः विरंजन स्थायी होती है।
Cl2 +H2 O → HClO + HCl
HCIO → HCl + O
रंगीन पदार्थ +(O) → रंगहीन पदार्थ ।

प्रश्न 9.
उत्कृष्ट गैसों के पृथक्करण की डेवार विधि का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए –
उत्तर
डेवार विधि –
सिद्धांत – नारियल का कोयला या काष्ठ कोयला विभिन्न तापक्रमों पर विभिन्न गैसों का अधिशोषण करता है।

विधि – चित्रानसार उपकरण में उत्कृष्ट गैसों का मिश्रण लिया जाता है। शीत कुण्ड में रखे उपकरण में नारियल का कोयला भरा होता है, इसमें-100°C पर Xe, Kr तथा Ar का अधिशोषण हो जाता है। अनाशोषित He और Ne के मिश्रण को – 180°C पर नारियल के कोयले के सम्पर्क में रखा जाता है, जिससे निऑन पूर्ण रूप से अधिशोषित हो जाती है तथा He मुक्त अवस्था में बची रहती है। इसे चारकोल का ताप
बढ़ाकर Ne पृथक् कर लेते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 69

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Ar, Kr और Xe अधिशोषित चारकोल को द्रव वायु के ताप (- 193°C) पर रखे एक अन्य चारकोल के सम्पर्क में लाने पर Ar इस चारकोल में अधिशोषित हो जाती है। Kr और Xe वाले चारकोल का ताप – 90°C कर देने पर Kr निकल जाती है और Xe चारकोल के साथ बची रहती है। अब विभिन्न गैसें अधिशोषित चारकोल का ताप बढ़ाकर प्राप्त कर ली जाती हैं।

प्रश्न 10.
समूह 17 के तत्वों को हैलोजन क्यों कहते हैं ? हैलोजन के निम्नलिखित गुणों की प्रकृति समझाइए
(1) ऑक्सीकरण अवस्था, (2) विद्युत्-ऋणात्मकता, (3) ऑक्सीकारक गुण, (4) अन्य तत्वों के साथ बन्ध बनाने की प्रकृति।
उत्तर
हैलोजन शब्द का अर्थ है समुद्री लवण बनाने वाला। वर्ग 17 के प्रथम चार सदस्य समुद्री जल में लवण के रूप में पाये जाते हैं । अत: वर्ग 17 के तत्वों को हैलोजन कहते हैं।
हैलोजनों में गुणों की प्रकृति –
(1) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ-हैलोजनों की सामान्य ऑक्सीकरण संख्या – 1 होती है। फ्लुओरीन को छोड़कर अन्य हैलोजनों की ऑक्सीकरण संख्या +7 तक पाई जाती है।
F → -1
Cl → -1, + 1, + 3, +5, +7
Br → -1, + 1, +3,+5
I → -1, +1, + 3, +5, +7

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अन्तिम कोश अष्टक विन्यास प्राप्त करने हेतु एक इलेक्ट्रॉन लेते या साझा करते समय, जब ये अपने से कम ऋणविद्युती तत्व से संयुक्त होते हैं तो इनकी ऑक्सीकरण अवस्था – 1 होती है और यदि अपने से अधिक ऋणविद्युती तत्वों से संयुक्त होते हैं, तो ऑक्सीकरण अवस्था + 1 होती है। HF, HCl व HI में हैलोजन की ऑक्सीकरण अवस्था -1 तथा ClF BrF, IF, HClO, HBrO, HIO में हैलोजन की ऑक्सीकरण अवस्था + 1 है।

फ्लुओरीन सर्वाधिक ऋणविद्युती तत्व है तथा हमेशा – 1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है। F परमाणु के संयोजकता कोश में d-कक्षक नहीं होते, जिससे यह किसी उत्तेजित अवस्था में नहीं आ पाता, जिसके कारण यह कोई उच्च ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करता। _

F को छोड़कर शेष अन्य हैलोजन परमाणुओं के संयोजकता कोश में d-कक्षक होते हैं, जिससे p तथा s कक्षकों के इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर इन कक्षकों में पहुँच सकते हैं, जिसके कारण ये +3, +5, +7 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं । ब्रोमीन परिरक्षण प्रभाव (Screening effect) की अधिकता के कारण +7 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करता।

(2) विद्युत्-ऋणात्मकता-इस समूह के तत्वों की विद्युत्-ऋणात्मकता अन्य समूह के तत्वों से अधिक होती है तथा F से At तक घटती है । ज्ञात तत्वों में फ्लुओरीन की विद्युत्-ऋणात्मकता सर्वाधिक है, जिसका मान 4 दिया गया है।

(3) ऑक्सीकारक गुण-हैलोजन प्रबल ऑक्सीकारक है। इन तत्वों की इलेक्ट्रॉन बन्धुता अधिक होती है। अतः इनमें इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता अधिक है। इस कारण ये प्रबल ऑक्सीकारक होते हैं। ऑक्सीकारक गुण के घटने का क्रम इस प्रकार है- F2> Cl2 > Br2 >I2

(4) अन्य तत्वों के साथ बन्ध बनाने की प्रकृति-हैलोजन, धातु अथवा विद्युत् धनात्मक तत्वों के साथ आयनिक बन्ध बनाते हैं । हैलोजन परमाणु का आकार बढ़ने के साथ-साथ आयनिक बन्ध बनाने की प्रकृति कम होती जाती है। उदाहरण-AIF3 आयनिक है, जबकि AlCl2 सहसंयोजक है। ये अधातुओं के साथ सहसंयोजक बन्ध बनाते हैं।

(a) हाइड्राइड-सभी हैलोजन HX प्रकार के हाइड्राइड बनाते हैं। HF द्रव है, जबकि HCI, HBr व HI गैसें हैं।
(b) हैलोजन ऑक्सीजन से सीधे क्रिया नहीं करते, ये अप्रत्यक्ष रूप से बनाये जाते हैं। उदाहरणऑक्सीजन डाइफ्लुओराइड, OF2 को NaOH पर F2 की क्रिया द्वारा बनाया जाता है।

2F2 + 2NaOH → 2 NaF + OF2 + H2O.

प्रश्न 11:
ब्लीचिंग पाउडर का निम्नलिखित बिन्दुओं पर वर्णन कीजिए –
(i) बनाने की विधि
(ii) गुण
(iii) उपयोग।
उत्तर
(i) बनाने की विधि-बुझे हुए चूने पर क्लोरीन की क्रिया से ब्लीचिंग पाउडर (विरंजक चूर्ण) बनता है।
Ca(OH)2 + Cl2 → CaOCl2 +H2O
ब्लीचिंग पाउडर बनाने के लिए दो प्रकार के संयन्त्र होते हैं।

(1) हेसेनक्लेवर संयन्त्र-इसमें अनेक क्षैतिज बेलन होते हैं जिनमें घूमने वाले शेफ्ट लगे होते हैं। ऊपर से बुझा हुआ चूना डाला जाता है, जो घूमने
वाले शेफ्ट से एक बेलन से दूसरे में होता हुआ नीचे कम पहुँच जाता है। इसमें नीचे की ओर से क्लोरीन प्रवाहित की जाती है। नीचे आता हुआ Ca(OH)2 तथा नीचे से ऊपर जाती हुई क्लोरीन आपस में क्रिया कर ब्लीचिंग पाउडर बनाते हैं। इसे नीचे ग्राही में एकत्र कर लेते हैं।
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(2) बेकमेन संयन्त्र-आजकल विरंजक चूर्ण को बेकमेन संयन्त्र द्वारा बनाया जाता है। यह लोहे का एक ऊर्ध्वाधर स्तम्भ होता है जिसमें नीचे से थोड़ा ऊपर क्लोरीन तथा गर्म वायु के अन्दर जाने का रास्ता होता है तथा ऊपर एक कीप लगी रहती है। ऊपरी सिरे पर अप्रयुक्त क्लोरीन एवं वायु के एक निकास द्वार होता है। स्तम्भ के अन्दर की ओर क्षैतिज खाने के बने होते हैं। प्रत्येक खाने में घूमने वाली रेक लगी होती है तथा नीचे जाने पर यह ऊपर आती क्लोरीन से क्रिया कर ब्लीचिंग पाउडर में परिवर्तित हो जाती है।
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(ii) ब्लीचिंग पाउडर के गुण –

(1) यह सफेद रंग का चूर्ण है, जिसमें क्लोरीन की प्रबल गन्ध होती है।
(2) यह ठण्डे जल में विलेय है। किन्तु चूने की उपस्थिति के कारण स्वच्छ विलयन नहीं बनता है।
चित्र-बेकमेन संयंत्र
(3) ठण्डे पानी में हिलाकर छानने पर ठण्डा छनित विलयन क्लोराइड हाइपोक्लोराइड आयनों की अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करता है, जबकि गर्म करने पर यह क्लोराइड तथा क्लोरेट आयनों की उपस्थिति को प्रदर्शित करता है।
(4) तनु अम्लों की कम मात्रा से क्रिया-तनु अम्लों की अपर्याप्त मात्रा से ब्लीचिंग पाउडर की क्रिया कराने पर हाइपोक्लोरस अम्ल मुक्त होता है, जो नवजात ऑक्सीजन देने के कारण ऑक्सीकारक तथा विरंजक का कार्य करता है।
(5) तनु अम्लों की अधिक मात्रा से क्रिया-ब्लीचिंग पाउडर तनु अम्लों की अधिक मात्रा से क्रिया कर क्लोरीन गैस मुक्त करता है।

CaOCl2 + H2SO4 → CaSO4 + H2O + Cl2

इस प्रकार मुक्त क्लोरीन ‘प्राप्य क्लोरीन’ (Available chlorine) कहलाती है। एक अच्छे नमूने (Sample) में 35 – 38% प्राप्य क्लोरीन होती है।

(6) अपघटन उत्प्रेरक कोबाल्ट क्लोराइड की अल्प मात्रा की उपस्थिति में अपघटित होकर ऑक्सीजन देता है।

2CaOCl2 → 2CaCl2 + O2

अधिक समय तक रखा रहने पर इसका स्वतः ऑक्सीकरण हो जाता है तथा यह कैल्सियम क्लोरेट, कैल्सियम क्लोराइड के मिश्रण में परिवर्तित हो जाता है।

6CaoCl2→ Ca(ClO3)2 +5CaCl2

(iii) उपयोग–(1) जल को कीटाणुओं तथा रोगाणुओं से मुक्त करने में।
(2) क्लोरोफॉर्म के निर्माण में।
(3) ऊन को सिकुड़ने से बचाने के लिए।
(4) कपड़े, कागज के कारखानों में विरंजक के रूप में।

प्रश्न 12.
अन्तर हैलोजन यौगिक किन्हें कहते हैं ? ये कितने प्रकार के होते हैं ? प्रत्येक प्रकार का एक-एक उदाहरण देकर संरचना खींचिए।
उत्तर
हैलोजन परिवार के सदस्यों की ऋणविद्युतता में अन्तर होने के कारण दो भिन्न हैलोजनों का संयोग सम्भव हो जाता है जब दो भिन्न हैलोजन आपस में मिलकर द्विअंगी यौगिक बनाते हैं तो उन्हें अन्तर हैलोजन यौगिक कहते हैं।
ये यौगिक चार प्रकार के होते हैं इसका सामान्य सूत्र AXn होता है। जहाँ n = 1, 3, 5, 7 है।

1. AX – CIF, BrF, BrCI, IBr, ICI
2. AX3 – ClF3, BrF3, ICl3
3. AX5 – BIF5, IF5
4. AX7 – IF7

1. AX प्रकार-जैसे-CIF, BrCl, IBr, ICl.
इनकी आकृति रेखीय (Linear) होती है। चित्र के अनुसार ClF में क्लोरीन का मूल अवस्था (Ground state) में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास दिखाया गया है। इसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है, जो दूसरे हैलोजन परमाणु से सहसंयोजी बन्ध बनाकर अन्तरा-हैलोजन यौगिक बनाता है।
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2. AX3 प्रकार-इनकी T-आकृति होती है। जैसे-ClF3 अणु इनका केन्द्रीय परमाणु X में sp3d संकरण होता है।
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3. AX5 (IF5, BrF5 आदि) प्रकार-इस प्रकार के यौगिकों में sp3d2 संकरण होता है। इनकी संरचना वर्ग पिरामिडीय होती है, जिसमें एक स्थान पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म रहता है। जैसे-चित्र में IF5 अणु का बनना दिखाया गया है।
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4. AX7(IF7) प्रकार-इसकी आकृति पंचभुजीय पिरामिडीय होती है, जो कि sp3d3 संकरण से बनती है। IF7 अणु में होने वाला sp3d3 संकरण
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प्रश्न 13.
अक्रिय गैसों के उपयोग लिखिए।
उत्तर
अक्रिय गैसों के उपयोग (Uses of Noble Gases) –
हीलियम के उपयोग-1. हीलियम का घनत्व बहुत कम है। यह हाइड्रोजन के बाद सबसे हल्की गैस है। मौसम का पता लगाने वाले गुब्बारों में आजकल हाइड्रोजन और हीलियम के मिश्रण का उपयोग किया जाता है।
2. गोताखोरों द्वारा गहरे समुद्र में साँस लेने के लिए हीलियम और ऑक्सीजन के मिश्रण का उपयोग किया जाता है। इसका कारण यह है, कि हीलियम गैस नाइट्रोजन की अपेक्षा अधिक दाब पर रक्त में कम विलेय है।
3. दमा (Asthma) के रोगियों को भी हीलियम-ऑक्सीजन का मिश्रण स्वाँस लेने के लिए दिया जाता है।
4. वायु की अपेक्षा हीलियम का भार कम होता है इसलिए बड़े वायुयानों के टायरों में इसे भरा जाता है।
5. निम्न ताप के मापन में प्रयुक्त गैस थर्मामीटर में इसका उपयोग होता है।’
6. अक्रिय गैस होने के कारण यह सिग्नल लैम्प, निर्वात् नलिकाओं (Vacuum tubes), रेडियो ट्यूब तथा विद्युत-ट्रांसफॉर्मरों में भरने के काम आती है।

आर्गन के उपयोग-

  • हीलियम के समान इसका भी उपयोग ऐल्युमिनियम व स्टेनलेस स्टील के वेल्डिंग के लिए अक्रिय वातावरण उत्पन्न करने के लिए होता है। .
  • विद्युत् बल्बों में 25% नाइट्रोजन के साथ आर्गन गैस भरी जाती है।
  • इसका उपयोग रेडियो वाल्वों में किया जाता है।
  • विभिन्न रंगों का प्रकाश उत्पन्न करने के लिए आर्गन को निऑन के साथ विसर्ग नली में मिश्रित किया जाता है।

निऑन के उपयोग-

  • निऑन प्रकाश का उपयोग विज्ञापनों के लिए किया जाता है। निऑन से हरा प्रकाश उत्पन्न करने के लिए निऑन के साथ पारे की वाष्प मिला देते हैं।
  • निऑन लैम्पों का उपयोग हवाई जहाजों के संकेतक के रूप में होता है। निऑन प्रकाश बहुत दूर तक दिखता है तथा कोहरे का भी उस पर प्रभाव नहीं होता।

क्रिप्टॉन (Kr) और जीनॉन (Xe) के उपयोग-

  • आर्गन के स्थान पर इनका भी उपयोग विद्युत् बल्बों में किया जा सकता है, परन्तु ये महँगी है।
  • इन गैसों का उपयोग क्षणदीप्ति फोटोग्राफी (Flash photography) में किया जाता है।
  • क्रिप्टॉन का उपयोग प्रतिदीप्नि (Fluorescence), तापदीप्ति (Incandescence) तथा विसर्जन लैम्पों में अधिक हो रहा है।
  • क्रिप्टॉन लैम्प का उपयोग हवाई जहाज के उतरने के स्थान पर चिन्ह (Sign) के रूप में होता है। यह लैम्प एक मिनट में 40 बार चमकता है।

रेडॉन (Rn) के उपयोग-1. कैन्सर के उपचार में तथा रेडियोधर्मी सम्बन्धी शोध कार्य में प्रयुक्त होता है।
2.X-किरणों के उपस्थापन (Substitute) के रूप में, प्रौद्योगिकी रेडियोलॉजी में।

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MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 2 जल ही जीवन है

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MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 2 जल ही जीवन है

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 2 प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ी बनाइए
1. देवताओं का – (क) उर्वरा शक्ति
2. धरती की – (ख) पाठ्यक्रम
3. राजेन्द्र सिंह को – (ग) वरदान
4. विश्वविद्यालय – (घ) मैगसेसे सम्मान
उत्तर
1. (ग), 2. (क), 3. (घ), 4. (ख)

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प्रश्न (ख)
सही शब्द छांटकर रिक्त-स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. भूमि के भीतर जो जल है, उसे हम अनेक विधियों द्वारा…कर सकते हैं। (संरक्षित/दोहित)
2. पानी रुकेगा तो धरती में…जाएगा। . (समा/बह)
3. बरसाती पानी का संरक्षण अत्यंत…है। (आवश्यक/अनावश्यक)
4. रिमोट सेंसिंग एक तकनीक है जिसकी सहायता से धरती के…चित्र खींचे जाते हैं। (आंतरिक/बाह्य)
उत्तर
1. दोहित
2. समा
3. आवश्यक
4. आंतरिक।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए

(क) गंगाजल को क्या कहा गया है?
उत्तर
गंगाजल को अमृत कहा गया है।

(ख) जल संरक्षण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर
जल को विभिन्न तरीकों से सुरक्षित रखना एवम् उसका दुरुपयोग नहीं करना ही जल-संरक्षण कहलाता है।

(ग) राजेन्द्र सिंह को कौन-सा सम्मान प्राप्त हुआ?
उत्तर
उन्हें मैगसेसे सम्मान मिला।।

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(घ) जल संरक्षण की दिशा में राजस्थान के अतिरिक्त और कौन-कौन से प्रदेशों में काम प्रारम्भ हुआ है?
उत्तर
अन्य प्रदेशों के नाम हैं-मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और गुजरात।

(ङ) हम जल भंडार को किस प्रकार खाली करते जा रहे हैं?
उत्तर
बोरिंग अथवा नलकूपों के माध्यम से आवश्यकता से अधिक जल निकालकर हम जल भंडार को खाली करते जा रहे हैं।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 2 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन-से पाँच वाक्यों में दीजिए

(क) जल को देवताओं का वरदान क्यों कहा गया है?
उत्तर
जल एक अनुपम प्राकृतिक उपहार है। इसके बिना हम जीवित नहीं रह सकते हैं। हर कदम पर इसकी आवश्यकता होती है। इसकी महत्ता से सभी परिचित हैं। इसीलिए इसे देवताओं का वरदान कहा गया है।

(ख) भू-जल स्रोतों के अंधाधुंध दोहन से क्या हानि हो रही है?
उत्तर
भू-जल स्रोतों के अंधाधुंध दोहन से धीरे-धीरे इनके स्रोत खत्म होने लगे हैं। पानी की किल्लत चारों | तरफ फैल रही है। धरती की हरियाली खत्म होने लगी है। खेती पर भी इनका बुरा असर पड़ रहा है।

(ग) राजस्थान में जल-संरक्षण से होने वाले लाभ बताइए।
उत्तर
राजस्थान में जल-संरक्षण से वहाँ भू-जल का स्तर ऊपर उठ गया है। वहाँ के कंओं में पानी आ गया है। चारो तरफ हरियाली छा गई है। धरती की उर्वरा-शक्ति बढ़ गई है। फसल-चक्र बदल गया है। अरावली की पहाड़ियों पर फिर से पेड़-पौधे उगने लगे हैं।

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(घ) बरसाती पानी का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर
बरसाती पानी का संरक्षण होने से भू-जल का स्तर ऊपर उटेगा, जिससे आसपास के कुंओं में पानी आएगा। सूखी धरती को पानी मिलने से हरियाली होगी और खेती भी लहलहा उठेगी

(ङ) रिमोट-सेंसिंग तकनीक क्या है?
उत्तर
इस तकनीक के माध्या से धरती के किसी भी हिस्से का चित्र लिया जा सकता है। इन चित्रों में धरती की आंतरिक रचना स्पष्ट हो जाती है। आंतरिक रचना जानकर अनुमान लगाया जा सकता है कि कौन-सी जगह पानी जमा किया जा सकता है। इससे यह भी पता  चल जाता है कि ज़मीन के भीतर पानी किस गति से  रिसेगा।

भाषा की बात

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
संरक्षण, वसुन्धरा, प्राकृतिक, अमृत, अंधाधुंध
उत्तर
स्वयं करें।

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखिए
अन्र्तगत, रिण, वेज्ञानिक, हरयाली, स्त्रोत
उत्तर
अन्तर्गत, ऋण, वैज्ञानिक, हरियाली, स्रोत।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
अनुपम, जल-संरक्षण, पतित-पावनी, नल-कूप, जल-भंडार
उत्तर

अनुपम-बरसात में धरती की छटा अनुपम हो जाती है।
जल-संरक्षण- वर्तमान समय में जल-संरक्षण अत्यंत जरूरी है।
पतित-पावनी-गंगा को पतित-पावनी कहा जाता है।
नल-कूप-नलकूपों से सिंचाई की जाती है।
जल-भंडार-हमें जल-भंडार को खाली नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों में से तत्सम एवं तद्भव शब्दों को छांटिए
सूत, दांत, ऊंचा, कर्ण, सूर्य, सत्य, शीतल, आचरण
उत्तर
तत्सम शब्द-कण, सूर्य, सत्य, शीतल, आचरण
तद्भव शब्द-सूत, दांत, ऊंचा।

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प्रश्न 8.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची लिखिए
जल, गंगा, भूमि, पेड़, नदी, पहाड़
उत्तर
जल-पानी, नीर।
गंगा-भागीरथी, देवनदी।
भूमि-धरती, बसुन्धरा
पेड़-वृक्ष, तरु
नदी-सरिता, सलिल।
पहाड-पर्वत, शैल।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित विलोम शब्दों की सही जोड़ी बनाइए
उत्तर
1. अमृत (क) गरीब
2. देवता – (ख) पतन
3. उत्थान – (ग) निर्जीव
4. अमीर – (घ) दानव
5. सजीव – (ङ) विष
उत्तर
1. (ङ), 2. (घ), 3. (ख), 4. (क), 5. (ग)

जल ही जीवन है  प्रसंग सहित व्याख्या

1. जल के बिना जीवन संभव नहीं। प्रकृति द्वारा दिया गया, जीवों को मिला यह अनुपम उपहार है। प्राचीन काल से जल को देवताओं का वरदान माना गया है। गंगा के जल को अमृत और गंगा को पतित-पावनी कहा गया है। इस अमूल्य धरोहर का संरक्षण कर हम वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों को सुखद, समृद्ध और खुशहाल रख सकते हैं।

शब्दार्थ-अनुपम सुंदर, जिसकी कोई उपमा न हो। प्राचीन =पुराना। पतित=पावनी पापियों को पवित्र करने वाली। अमूल्य=अति महत्त्वपूर्ण। वर्तमान =आज का। समृद्ध=संपन्न।

प्रसंग-यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक सुगम भारती-6 में संकलित लेख ‘जल ही जीवन है’ से उद्धृत है। इस लेख मे जल के महत्त्व को उजागर किया गया है।

व्याख्या-जल एक महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा हैं इसके बिना हम जी नहीं सकते। यह एक सुंदर उपहार है, जिसे ईश्वर ने हमें दिया है। प्राचीन काल से इसे देवताओं का वरदान माना गया हैं गंगा का जल तो अमृत के समान है। ऐसा माना जाता कि इसमें स्नान करने से पापियों के सारे पाप धुल जाते हैं। लेकिन आजकल जल का अति दोहन हो रहा है। अतः इसका संरक्षण आवश्यक है। इसका संरक्षण कर हम न केवल अपनी पीढ़ी का उपकार करेंगे। बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भी उपकार करेंगे।

विशेष

  • शैली बोधगम्य है।
  • भाषा सरल और सुगम है।

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2. राजस्थान के जिन क्षेत्रों में पारंपरिक विधियों से जल-संरक्षण का काम हुआ है, वहाँ की स्थिति अब पूरी तरह बदल गई है। भू-जल स्तर के बढ़ने से कुएँ जी उठे हैं, हरियाली वापस आ गई है, धरती की उर्वरा-शक्ति लौट आई है, फसल-चक्र भी ददल गया है, अरावली की पहाड़ियों पर फिर से पेड़-पौधे उगने लगे हैं।

शब्दार्थ-पारंपरिक विधि =सदियों से चला आ रहा तरीका । उर्वरा-शक्ति=उपजाऊ-शक्ति ।
प्रयास =कोशिश। समा जाना=घुस जाना। व्यर्व=बेकार का।

प्रसंग-पूर्ववत्

व्याख्या
वर्तमान समय में जिस तरह से जल की खपत हो रही है। उसे देखकर ऐसा लगता है कि बहुत जल्दी हमें जल-संकट का सामना करना पड़ेगा। अतः जल का संरक्षण आवश्यक है। राजस्थान में परंपरागत ढंग से जल-संरक्षण का काम हुआ है। इसके परिणामस्वरूप कहाँ भू-जल का स्तर उठ गया है। वहाँ के कुंओं में पानी आ गया है। हरियाली वापस लौट आई है। धरती उपजाऊ बन गई है और फसल-चक्र भी बदल गया है। जल-संरक्षण के लिए छोटे-छोटे बाँध बनाए जा सकते हैं। नदियों को आपस में मिलाया जा सकता है। बरसात के पानी को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। इन छोटे-छोटे बाँधों में उन्हें रोक लेना चाहिए। पानी रुकने से धरती के अंदर पानी रिसेगा और कुंओं का जल-स्तर उठेगा। इससे दो-दो लाभ होंगे-हमारी आत्म यानि धरती तृप्त होगी और हमारी खेती लहलहा उठेगी।

विशेष

  • भाषा सरल और बोधगम्य है।
  • शैली सहज है।

MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 10 मजदूरी और प्रेम

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solution Chapter 10 मजदूरी और प्रेम (सरदार पूर्ण सिंह)

मजदूरी और प्रेम पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

मजदूरी और प्रेम लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
स्वभाव से साधु कौन होते हैं?
उत्तर-
हल चलाने और भेड़ चराने वाले प्रायः स्वभाव से ही साधु होते हैं।

प्रश्न 2.
किसान को ब्रह्मा के समान क्यों माना है?
उत्तर-
किसान अन्न में, फूल में, फल में आहुति-सा दिखाई देता है। यह कहा जाता है कि ब्रह्माहुति से संसार पैदा हुआ है। इसलिए किसान को ब्रह्मा के समान माना है।

प्रश्न 3.
घर आए मेहमान का स्वागत किसान किस प्रकार करता है?
उत्तर-
घर आए मेहमान का स्वागत किसान अपनी मीठी बोली, मीठे जल और अन्न से तृप्त करके करता है।

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प्रश्न 4.
किसी भेड़ के अस्वस्थ होने पर गड़ेरिया कैसा अनुभव करता है?
उत्तर-
किसी भेड़ के अस्वस्थ होने पर गड़ेरिया दुख का अनुभव करता है। यह इसलिए कि भेड़ों की सेवा ही इनकी पूजा है। जरा एक भेड़ बीमार हुई, सब परिवार पर विपत्ति आई। दिन-रात उसके पास बैठे काट देते हैं। उसे अधिक पीड़ा हुई तो इन सब की आँखें शून्य आकाश में किसी को देखने लग गईं। पता नहीं ये किसे बुलाती हैं। हाथ जोड़ने तक की इन्हें फुरसत नहीं। पर हाँ, इन सबकी आँखें किसी के आगे शब्द-रहित संकल्प-रहित मौन प्रार्थना में खुली हैं। दो रातें इसी तरह गुजर गईं। इनकी भेड़ अब अच्छी है। इनके घर मंगल हो रहा है। सारा परिवार मिलकर गा रहा है।

प्रश्न 5.
सच्चा आनंद किसमें छिपा रहता है?
उत्तर-
सच्चा आनंद श्रम में छिपा रहता है।

मजदूरी और प्रेम दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गुरुनानक ने किसान के संबंध में क्या-क्या कहा है?
उत्तर-
गुरुनानक ने किसान के संबंध में कहा-“भोले भाव मिलें रघुराई” भोले-भाले किसानों को ईश्वर अपने खुले दीदार का दर्शन देता है। उनकी फूस की छतों में से सूर्य और चन्द्रमा छन-छनकर उनके बिस्तरों पर पड़ते हैं। ये प्रकृति के जवान साधु हैं। जब कभी मैं इन बे-मुकुट के गोपालों के दर्शन करता हूँ, मेरा सिर स्वयं ही झुक जाता है। जब मुझे किसी फकीर के दर्शन होते हैं तब मुझे मालूम होता है कि नंगे सिर, नंगे पाँव, एक टोपी सिर पर, एक लँगोटी कमर में, एक काली कमली कंधे पर, एक लंबी लाठी हाथ में लिये हुए गौवों का मित्र, बैलों का हमजोली, पक्षियों का हमराज, महाराजाओं का अन्नदाता, बादशाहों को ताज पहनाने और सिंहासन पर बिठाने वाला, भूखों और नंगों को पालने वाला, समाज के पुष्पोद्यान का माली और खेतों का वाली जा रहा है।”

प्रश्न 2. किसान को हितैषी क्यों कहा गया है?
उत्तर-
दया, वीरता और प्रेम जैसा किसान में दिखाई देता है, वैसा और कहीं नहीं मिलता है। इसलिए किसान को हितैषी कहा गया है।

प्रश्न 3.
गड़रिया आनंद का अनुभव कब करता है?
उत्तर-
गड़रिया आनंद का अनुभव तब करता है, जब उसकी बीमार भेड़. (भेड़ें) अच्छी हो जाती है (है)।

प्रश्न 4.
‘हाथ की बनी चीज में रस भर आता है।’ समझाइए।
उत्तर-
‘हाथ की बनी चीजें सरस होती हैं। यह इसलिए उसमें प्रेम की सच्चाई और हृदय की पवित्रता का योग होता है। इसलिए सच्चा आनंद तो हाथ की बनी हुई चीजों से आता है। यही जीवन का वास्तविक आनंद है। इस आनंद के सामने स्वर्ग-प्राप्ति की इच्छा नहीं रह जाती है।

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प्रश्न 5.
मनुष्य का साधारण जीवन कब श्रेष्ठता प्राप्त कर सकता है?
उत्तर-
मनुष्य का साधारण जीवन तब श्रेष्ठता प्राप्त कर सकता है, जब वह मजदूरी और हाथ के कला-कौशल में लग जाता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) हल चलाने वाले अपने जीवन का हवन किया करते हैं।
(ख) ये प्रकृति के जवान साधु हैं।
उत्तर-
(क) हल चलाने वाले अपने जीवन का हवन किया करते हैं।
उपर्युक्त वाक्यांश के द्वारा लेखक ने यह भाव प्रकट करना चाहा है कि हल चलाने वाले किसान घोर परिश्रम करते हैं। वे अपना पूरा जीवन इसी में हवन की तरह करके दूसरों को सुख-आनंद देते रहते हैं।

(ख) ये प्रकृति के जवान साधु हैं।
उपर्युक्त वाक्य के द्वारा लेखक ने यह भाव प्रकट करना चाहा है कि किसान अपने घोर परिश्रम से स्वस्थ और तगड़ा रहता है। वह निरोग रहता है। उससे सरलता और पवित्रता टपकती रहती है।

मजदूरी और प्रेम भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों में से तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी शब्द अलग-अलग लिखिए-
भाती, पृथ्वी, फूल, प्रायः, मिट्टी, दिन, नहाना, दीदार, ताज, संकल्प, नेत्र, आर्ट, टीन, दाम, गऊएं।
उत्तर-
तत्सम शब्द – पृथ्वी, संकल्प, नेत्र,
तद्भव शब्द – फूल, मिट्टी, दिन।
देशज शब्द – भाती, प्रायः नहाना, टीन, गऊएं
विदेशी शब्द – दीदार, आर्ट, दाम

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए-
आहूति, ब्रम्हा, केंद्र, अध्यात्मिक, कौशल, निरजीव, ईश्वर।
उत्तर-
आहुति, ब्रह्मा, केंद्र, आध्यात्मिक, कौशल, निर्जीव, ईश्वर।।

प्रश्न 3.
पाठ में सामासिक पद हरी-भरी आया है, जो द्वंद्व समास है। इसी प्रकार के अन्य सामासिक शब्द पाठ से छाँटकर लिखिए।
उत्तर-
हवनशाला, रग-रग, घास-पात, इर्द-गिर्द, प्रेम-धर्म, आनंद-मंगल।

मजदूरी और प्रेम योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
किसान और श्रमिक के जीवन में क्या अंतर आया है? लिखिए।

प्रश्न 2.
हाथ से बनी और मशीन से बनी चीजों में श्रेष्ठ कौन-सी है? इस विषय पर वाद-विवद प्रतियोगिता का आयोजन कीजिए।

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प्रश्न 3.
आप अपने घर में कौन-कौन-से स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करते हैं, उसकी सूची बनाइए।
उत्तर-
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

मजदूरी और प्रेम परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

मजदूरी और प्रेम अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘मजदूरी और प्रेम’ पाठ में लेखक ने परिश्रम को महत्त्व क्यों दिया है?
उत्तर-
‘मजदूरी और प्रेम’ पाठ में लेखक ने परिश्रम को इसलिए महत्त्व दिया है कि इससे जो रस निकलता है वह मशीनों से नहीं। लेखक को विश्वास है कि जिस चीज में मनुष्य के प्यारे हाथ लग जाते हैं। उसमें उसके हृदय का प्रेम और मन की पवित्रता सूक्ष्म रूप से मिल जाती है। उत्तम-से-उत्तम और नीच-से-नीच काम सब मजदूर ही करते हैं, इस प्रकार लेखक का यह मानना है कि बिना मजदूरी बिना हाथ के कला-कौशल के विचार और चिंतन किसी काम के नहीं हैं। इसलिए मजदूरों को महत्त्व देने वाले ही देश उन्नति करते हैं, यही कारण है कि लेखक ने भविष्य में मजदूरों के ही प्रभाव से सुखद जीवन की आशाएँ की हैं।

प्रश्न 2.
भेड़ों और गड़रियों के परस्पर क्या संबंध हैं?
उत्तर-
भेड़ों और गड़रियों के संबंध बहुत ही घनिष्ठ हैं, गड़रिया भेड़ों की सेवा को ही अपनी पूजा समझता है, थोड़ी-सी भी एक भेड़ बीमार हुई तो मानो सारे परिवार पर एक विपत्ति आ गई है। दिन-रात उनके पास बैठे काट देते हैं। उन्हें अधिक पीड़ा हुई तो इन सबकी आँखें शून्य आकाश में किसी को देखते-देखते गल गईं, पता नहीं ये किसे बुलाती हैं, इन्हें और किसी की चिन्ता तब नहीं रहती है, भेड़ों के अच्छी होने पर वे खुशी से फूले नहीं समाते हैं। इस प्रकार भेड़ें ही इनके तन-मन-धन आदि सब कुछ होती हैं।

प्रश्न 3.
लेखक ने बूढ़े गड़रिये से क्या कहा?
उत्तर-
लेखक ने बूढ़े गड़रिये से कहा-“भाई, अब मुझे भी भेड़ें लेने दो, ऐसे ही मूक-जीवन से मेरा भी कल्याण होगा, विद्या को भूल जाऊँ, तो अच्छा है। मेरी पुस्तकें खो जाएँ तो उत्तम है, ऐसा होने से कदाचित् इस वनवासी परिवार की तरह मेरे दिल के नेत्र खुल जाएँ और मैं ईश्वरीय झलक देख सकूँ। चंद और सूर्य की विस्तृत ज्योति में जो वेदगान हो रहा है, इस गड़रिये की कन्याओं की तरह मैं सुन तो न स. परन्तु कदाचित् प्रत्यक्ष देख सकूँ।

प्रश्न 4.
यंत्रों और मनुष्य के हाथ से बने हुए कामों में लेखक ने क्या भेद बताया है?
उत्तर-
मनुष्य के हाथ से बने हुए कामों में उसकी प्रेममय पवित्र आत्मा की सगंध आती है। राफल आदि से विचित्र चित्रों में उसकी कला-कुशलता को देख इतनी सदियों के बाद भी उनके अंतःकरण के सारे भावों का अनुभव होने लगता है। केवल चित्र का ही दर्शन नहीं, किन्तु साथ ही उसमें छिपी हुई चित्रकार की आत्मा तक के दर्शन हो जाते हैं, परंतु यंत्रों की सहायता से बने हुए फोटो निर्जीव से मालूम पड़ते हैं। उनमें और हाथ के चित्रों में उतना भेद है जितना कि बस्ती और श्मशान में।

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प्रश्न 5.
लेखक ने मनुष्य के हाथ का महत्त्व क्यों बतलाया है?
उत्तर-
लेखक के अनुसार मनुष्य के हाथ ही तो ईश्वर के दर्शन कराने वाले होते हैं, इसीलिए मनुष्य और मनुष्य की मजदूरी का तिरस्कार करना नास्तिकता है, इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि बिना. मजदूरी, बिना हाथ के कला-कौशल के विचार और चिंतन किसी काम के नहीं हैं। यही कारण है कि जिन देशों में हाथ और मुँह पर मजदूरी की धूल नहीं पड़ने पाती, वे धर्म और कला-कौशल में कभी उन्नति नहीं कर सकते। इसके विपरीत उन्नति वे ही करते हैं जिनसे जोतने वाले, काटने और मजदूरी का काम लिया जाता है।

प्रश्न 6.
रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्दों के चयन से कीजिए।
1. आचरण की सभ्यता के लेखक हैं-(रामचन्द्र शुक्ल, अध्यापक पूर्णसिंह)
2. हल चलाने वाले स्वभाव से ……………………………… होते हैं। (सीधे, साधु)
3. पशुओं के अज्ञान में गंभीर ………………………… छिपा हुआ है। (ज्ञान, प्राण)
4. आदमियों की तिजारत करना मूों का …………………….. है। (नाम, काम)
5. धन की पूजा करना ……………………………… है।(आस्तिकता, नास्तिकता)
उत्तर-
1. अध्यापक पूर्णसिंह,
2. साधु,
3. ज्ञान,
4. काम,
5. नास्तिकता।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए?
1. मजदूरी और प्रेम पाठ में स्पष्ट किया गया है
(क) गड़रिये का महत्त्व
(ख) मजदूरी और श्रम का महत्त्व
(ग) लेखक का महत्त्व
(घ) भेड़ों का महत्त्व।
उत्तर-
(ख) मजदूरी और श्रम का महत्त्व,

2. मजदूरी और प्रेम के लेखक हैं
(क) विनोवा भावे
(ख) अध्यापक पूर्णसिंह
(ग) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(घ) प्रताप नारायण मिश्र।
उत्तर-
(ख) अध्यापक पूर्णसिंह,

3. अध्यापक पूर्णसिंह का जन्म हुआ था
(क) सन् 1881 ई. में
(ख) सन् 1890 ई में.
(ग) सन् 1882 ई. में
(घ) सन् 1888 ई. में।
उत्तर-
(क) सन् 1881 ई. में,

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4. अध्यापक पूर्णसिंह का निधन हुआ था
(क) 31. जनवरी, 1931 ई. को
(ख) 31 अक्तूबर 1931. ई. को
(ग) 31 मई, 1931 ई. को
(घ) 31 मार्च, 1931 ई. को।
उत्तर-
(घ) 31 मार्च, 1931 ई. को,

5. ‘मजदूरी और प्रेम’ पाठ है-
(क) कहानी
(ख) संस्मरण
(ग) निबन्ध
(घ) आत्मकथा।
उत्तर-
(ग) निबंध।

प्रश्न 4.
सही जोड़ी मिलाकर लिखिए-
विनय पत्रिका – जैनेन्द्र कुमार
काकी – तुलसीदास
मुक्ति गमन – अध्यापक पूर्णसिंह
मजदूरी और प्रेम – पंडित माखन लाल चतुर्वेदी
विज्ञान और साहित्य – सियाराम शरण गुप्त।
उत्तर-
विनय पत्रिका – तुलसीदास
काकी – सियाराम शरण गुप्त
मुक्ति गमन – पंडित माखन लाल चतुर्वेदी
मजदूरी और प्रेम – अध्यापक पूर्णसिंह
विज्ञान और साहित्य – जैनेन्द्र कुमार।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. किसान के खेत उनकी हवनशाला है।
2. वृक्षों की तरह उसका भी जीवन एक प्रकार का मौन जीवन है।
3. मजदूरी करने से हृदय-परिवर्तन होता है।
4. मनुष्य के विकास के लिए फकीरी आवश्यक है।
5. जिस चीज में मनुष्य के प्यारे हाथ लगते हैं, उसमें मुर्दे को जिंदा करने की शक्ति आ जाती है।
उत्तर-
1. सत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. असत्य,
5. सत्य।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित कथनों का उत्तर एक शब्द में दीजिए
1. लेखक को कौन अन्न में, फूल में, फल में आहुति-सा दिखाई देता है?
2. ‘भोले भाव मिलें रघुराई’ किसने कहा?
3. भेड़ों की सेवा किसकी पूजा है?
4. होटल में बने हुए भोजन कैसे होते हैं?
5. गुरुनानक जिस बढ़ई के पास ठहरे, उसका क्या नाम था?
उत्तर-
1. किसान,
2. गुरुनानक ने,
3. गड़रिये की,
4. नीरस,
5. भाई लालो।

मजदूरी और प्रेम लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
लेखक ने बूढ़े गड़रिये को किस रूप में देखा?
उत्तर-
लेखक ने बूढ़े गड़रिये को हरे-हरे वृक्षों के नीचे देखा, उसकी भेड़ों के ऊन सफेद थे, ये कोमल-कोमल पत्तियों को खा रही थी। गड़रिया बैठा हुआ आकाशवाणी की ओर देख रहा था। वह ऊन कात रहा था। उसके बाल सफेद थे, उसकी प्यारी स्त्री उसके पास रोटी पका रही थी, उसकी दो जवान कन्याएँ उसके साथ जंगल में भेड़ चरा रही थीं।

प्रश्न 2.
गड़रियों के परिवार को कुटी की आवश्यकता क्यों नहीं होती है?
उत्तर-
गड़रियों के परिवार को कुटी की आवश्यकता नहीं होती है, यह इसलिए कि ये जहाँ जाते हैं एक घास की झोपड़ी बना लेते हैं। दिन को सूर्य और रात को तारागण इनके मित्र-साथी होते हैं।

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प्रश्न 3.
श्रम के संबंध में लेखक के क्या विचार हैं?
उत्तर-
श्रम के संबंध में लेखक ने कहा है कि श्रम से ही सच्चे आनंद की प्राप्ति होती हैं। इसी से ईश्वर के दर्शन होते हैं। श्रम का तिरस्कार करना नास्तिकता है। श्रम से ही किसी देश की कला-कौशल की उन्नति होती है।

प्रश्न 4.
प्रेम शरीर के कौन-कौन से अंग हैं?
उत्तर-
लकड़ी, ईंट और पत्थर को मूर्तिमान करने वाले लुहार, बढ़ई, चमार तथा किसान आदि वैसे ही पुरुष हैं। जैसे कि कवि, महात्मा और योगी उत्तम-से-उत्तग और नीच-से-नीच काम, सबके सब प्रेम-शरीर के अंग हैं।

प्रश्न 5.
मजदूरों की यथार्थ पूजा होने पर क्या होगा?
उत्तर-
मजदूरों की यथार्थ पूजा होने पर कला-रूपी धर्म की वृद्धि होगी, तभी नए कवि पैदा होंगे, तभी नये औलियों का उदय होगा, ये सबके सब मजदूरों के दूध से पलेंगे। धर्म, योग, शुद्धाचरण, सभ्यता और कविता आदि के फूल इन्हीं मजदूर ऋषियों के उद्यान में खिलेंगे।

प्रश्न 6.
गड़रिये का सखा कौन है और उसका जीवन कैसे बीतता है?
उत्तर-
गड़रिये का सच्चा सखा उसकी भेड़ें ही हैं। गड़रिये का जीवन अपनी भेड़ों को चराने और उनकी सेवा करने में बीतता है। वह उनकी सेवा में ही अपनी पूरी जिंदगी काट लेते हैं भेड़ों का सुख-दुख ही इनकी जिंदगी का समूचा सुख-दुःख है। इस प्रकार गड़रिये की एक-एक जिंदगी बीत जाती है।

मजदूरी और प्रेम लिखक-परिचय

सरदार ‘पूर्णसिंह’ का भारतेन्दु युगीन गद्य लेखकों में विशिष्ट स्थान है। विचारात्मक निबंधकारों में आपका स्थान अत्यधिक चर्चित और सम्मानित है।

जीवन-परिचय- अध्यापक ‘पूर्णसिंह’ का जन्म सन् 1881 ई. में उत्तर-प्रदेश के एबटाबाद जिले के एक गाँव में हुआ था। आपकी प्रारंभिक शिक्षा रावलपिंडी में हुई। आप इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उच्च-शिक्षा प्राप्त करने के लिए जापान गए; जहाँ आपने, व्यावहारिक रसायनशास्त्र की उच्च शिक्षा प्राप्त की। यहीं पर आपातकालीन महान् संत व दार्शनिक स्वामी रामतीर्थ से आपकी भेंट हुई। फलतः आप इनके विचारों से तुरंत ही प्रभावित हुए और इसके परिणामस्वरूप आप उनके शिष्य होकर सुप्रसिद्ध वेदांती बन गए। जापान से लौटकर आप देहरादून के इम्पीरियल फारेस्ट इन्स्टीट्यूट (फारेस्ट रिसर्च इन्स्टीट्यूट) में इम्पीरियल केमिस्ट के पद पर कार्य करने लगे। कुछ समय के बाद विभागीय अधिकारियों से अनबन और मतभेद होने के कारण आपने यहाँ से इस्तीफा दे दिया।

रचनाएँ-अध्यापक ‘पूर्णसिंह’ गद्य-क्षेत्र में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। आपके द्वारा लिखे हुए केवल पाँच ही लेख मिलते हैं। आपके लेख भारतीय संस्कृति और सभ्यता के पोषक और प्रतीक हैं। ‘मजदूरी और प्रेम’ आपका लोकप्रिय लेख है।

भाषा-शैली-अध्यापक ‘पूर्णसिंह’ की भाषा मुख्य रूप से हिंदी है। आपकी मातृभाषा पंजाबी का इस पर अधिक प्रभाव है। हिंदी की प्रकृति की आपको सही पहचान थी। इसकी अभिव्यक्ति को आपने जिस कुशलता और क्षमता के द्वारा प्रकट किया है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। आपकी शैली प्रौढ़ और सजीव होते हुए अत्यंत प्रभावशाली है। आपकी भाषा में उर्दू और अंग्रेजी के शब्दों की प्रमुखता है।

साहित्यिक महत्त्व-अध्यापक पूर्णसिंह जी का हिंदी-साहित्य में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। आप भारतीय संस्कृति और सभ्यता के कुशल चित्रकार होने के कारण अपने साहित्यिक-व्यक्तित्व के द्वारा अत्यंत लोकप्रिय हैं। आपके विचारोत्तेजक साहित्य आपके व्यक्तित्व की पूरी पहचान प्रस्तुत करते हैं।

मजदूरी और प्रेम निबंध का सारांश

‘मजदूरी और प्रेम’ अध्यापक ‘पूर्णसिंह’ द्वारा लिखित एक विचारात्मक निबंध है। इस निबंध के द्वारा अध्यापक पूर्णसिंह ने मानवीय-श्रम और उसके महत्त्व को स्पष्ट किया है।

लेखक कह रहा है कि उसने जिस गड़रिये को श्रम करते हुए देखा है, उससे उसकी श्रमशक्ति का महत्त्व स्पष्ट होता है। वह ऊन कातता हुआ प्रेम-भरी आँखों से अपनी निरोगता का परिचय देते हुए दिखाई देता है। उसकी प्यारी स्त्री उसके पास ही रोटी पका रही है। उसकी दो जवान कन्याएँ जंगल-जंगल भेड़ चरा रही हैं। इस दिव्य-परिवार को किसी की जरूरत नहीं। सर्य और तारे ही उसके साथी हैं भेडों की सेवा ही उसकी एकमात्र सेवा है। भेड़ों की बीमारी से पूरा परिवार विपत्ति में पड़ जाता है। अपनी मौन भाषा के द्वारा ही ये इसके लिए प्रार्थना करते हैं। भेड़ों के अच्छा होने पर पूरा परिवार मंगलगान गाने लगता है। वर्षा के बादल के रिमझिम बरसने और पिता की खुशी से दोनों कन्याएँ खुशी से झूम उठती हैं। वे फूले नहीं समाती हैं।

इस दृश्य को देखकर लेखक अपने पास में खड़े अपने भाई से भेड़ें खरीदने के लिए कहता है कि ऐसे ही सुखी जीवन से उसका कल्याण होगा। इसी से उसके दिल के नेत्र खुल जाएँगे और सूर्य और चंद्रमा की विस्तृत ज्योति के वेदगान को इस गड़रिये की कन्याओं की तरह वह सुन तो न सकेगा परंतु कदाचित् देख सकेगा। इन लोगों के जीवन में अद्भुत आत्मानुभव का भाव भरा हुआ है। वास्तव में गड़रिये की प्रेम-मजदूरी के जीवन में अद्भुत आत्मानुभव का भाव भरा हुआ है। वास्तव में गडरिये की प्रेम-मजदूरी का मूल्य कौन दे सकता है? लेखक मानता है कि उसे मानव के हाथ से बने हुए कामों में उसकी प्रेममय पवित्र आत्मा की सुगंध आती है। यंत्रों से बने हुए फोटो निर्जीव प्रतीत होते हैं। अपने हाथों के चित्रों में उतना ही भेद है, जितना कि बस्ती और श्मशान में। हाथों की चीजों में लोहों की चीजों से अधिक रसानंद प्राप्त होता है। होटल के बने हुए भोजन से कहीं अधिक रसानंद अपनी प्रियतम के हाथों से बने हुए रूखे-सूखे भोजन में प्राप्त होता है। सोने और चाँदी की प्राप्ति से उतना सुखानंद नहीं व्याप्त होता है, जितना अपने काम से मिलता है। मनुष्य की पूजा ही ईश्वर की पूजा है; क्योंकि मनुष्य के हाथ तो ईश्वर के दर्शन कराने वाले होते हैं। इसलिए धर्म और कला-कौशल से किसी देश की उन्नति नहीं होती है अपितु मजदूरों की मजदूरी से ही होती है।

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संसार में जो नया साहित्य निकलेगा, वह मजदूरों के हृदय से निकलेगा। जब ये हाथ में कुल्हाड़ी, सिर पर टोकरी, नंगे सिर और नंगे पाँव धूल से लिपटे और कीचड़ से रंगे हुए जंगल में लकड़ी काटेंगे, तब उनके शब्द वायुयान पर चढ़े हुए चारों दिशाओं में भविष्य के कलाकारों को महान् प्रेरणा देंगे। तब मजदूरों की ही वास्तविक पूजा होगी। तभी धर्म, योग, शुद्धाचरण, सभ्यता, कविता आदि सब कुछ इन्हीं मजदूरों के उद्यान में खिल उठेंगे।

मजदूरी और प्रेम संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

हाथ की मेहनत से चीज में जो रस भर जाता है वह भला लोहे के द्वारा बनाई हुई चीज में कहाँ! जिस आलू को मैं स्वयं बोता हूँ, मैं स्वयं पानी देता हूँ, जिसके इर्द-गिर्द की घास-पात खोदकर मैं साफ करता हूँ, उस आलू में जो रस मुझे आता है वह टीन में बंद किए हुए अचार मुरब्बे में नहीं आता। मेरा विश्वास है कि जिस चीज में मनुष्य के प्यारे हाथ लगते हैं, उसमें उसके हृदय का प्रेम और मन की पवित्रता सूक्ष्म रूप से मिल जाती है और उसमें मुर्दे को जिंदा करने की शक्ति आ जाती है। होटल में बने हुए भोजन यहाँ नीरस होते हैं क्योंकि वहाँ मनुष्य मशीन बना दिया जाता है।

शब्दार्थ-इर्द-गिर्द-आस-पास। मुर्दे-निर्जीव।

संदर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिंदी सामान्य’ में संकलित लेखक सरदार पूर्ण सिंह लिखित निबंध ‘मजदूरी और प्रेम’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने हाथ से बनी हुई चीजों के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-जो वस्तुएँ हाथ से तैयार होती हैं, उनमें अत्यंत जीवन-रस प्राप्त होता है। इसलिए हाथ के अतिरिक्त लोहे से बनी हुई वस्तुओं में ऐसा आनंद नहीं मिलता है। इसको स्पष्ट करने के लिए लेखक एक उदाहरण देकर कह रहा है कि वह जिस आलू को तैयार करता है और जिसे पानी, निराई और जरूरी बातों से अच्छे रूप में तैयार करता है, उसको खाने में उसे जो अत्यंत आनंद प्राप्त होता है, टीन में बंद किए हुए आचार-मुरब्बे में वह आनंद नहीं मिलता है। लेखक का विश्वास है कि उसमें जिस वस्तु को तैयार करने में मनुष्य अपने हाथों को प्रेमपूर्वक लगा देता है उससे उसके हृदय का प्रेम और मन की पवित्रता झलकती है। यही कारण है कि होटल के बने हुए भोजन नीरस होते हैं। क्योंकि उसमें मनुष्य के हाथ स्वतंत्र काम नहीं करते हैं, अपितु उसे तो एक मशीन की तरह लगा देते हैं। लेकिन जब किसी की प्रियतमा के द्वारा कोई रूखा-सूखा भी भोजन बना दिया जाता है, तब उसमें अत्यधिक आनंद-रस प्राप्त होता है।

विशेष-
1. हाथ की बनी हुई वस्तुओं में मशीन से बनी वस्तुओं से अधिक आनंद रस की प्राप्ति होती है।
2. सम्पूर्ण कथन को सरस और भाषा-शैली के द्वारा प्रस्तुत किया गया है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
हाथ की मेहनत से बनी वस्तु को क्यों महत्त्व दिया है?
उत्तर-
हाथ की मेहनत से बनी वस्तु का महत्त्व है। इसलिए कि वह सरस होती है। उसमें स्वयं की मेहनत होती है। उसमें किसी प्रकार का बेगानापन नहीं होता है।

प्रश्न 2. मनुष्य कहाँ मशीन बना दिया जाता है और क्यों?
उत्तर-
मनुष्य वहाँ मशीन बना दिया जाता है, वह स्वयं अपने-आप कोई काम नहीं कर पाता है। उसे नियंत्रित करके काम कराया जाता है। यह इसलिए उसमें प्रेम और मन की पवित्रता नहीं रह जाता है।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश में लेखक ने हाथ से बनी हुई चीजों का महत्त्व मशीन से बनी हुई चीजों से बढ़कर दिया है। यह इसलिए हाथ से बनी हुई चीजों में प्रेम. और पवित्रता होती है। सरसता और अपनापन होता है। उसमें मुर्दे को जिंदा करने की शक्ति आ जाती है। इसके विपरीत मशीन से बनी हुई चीजें नीरस होती हैं।

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2. आदमियों की तिजारत करना मूखों का काम है। सोने और लोहे के बदले मनुष्य को बेचना मना है। आजकल भाप की कलों का दाम तो हजारों रुपया है, परंतु मनुष्य कौड़ी के सौ-सौ बिकते हैं! सोने और चाँदी की प्राप्ति से जीवन का आनंद नहीं मिल सकता। सच्चा आनंद तो मुझे मेरे काम से मिलता है। मुझे अपना काम मिल जाए तो फिर स्वर्ग-प्राप्ति की इच्छा नहीं, मनुष्य-पूजा ही सच्ची ईश्वर-पूजा है।

शब्दार्थ-तिजारत-मूर्खतापूर्ण या व्यर्थपूर्ण बातें।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने मनुष्य के महत्त्व को समझने के लिए प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-मनुष्यों के विषय में व्यर्थ की बातें करना मूर्खता की पहचान है। सोना और लोहे के बदले मनुष्य की कीमत नहीं आँकनी चाहिए अर्थात् सोना और लोहे जैसी कोई भी धातु मनुष्य का महत्त्व नहीं रख सकती है, लेकिन इसे लोग भूल चुके हैं। सोने चाँदी तो बहुमूल्य धातुएँ अवश्य हैं। लेकिन यही मनुष्यता नहीं है। इसलिए इस मनुष्य को मोल नहीं मिल सकता। आजकल समय बहुत बदल गया है। अब तो आपकी कलाओं का दाम हजारों रुपए हो गए हैं लेकिन मनुष्य की कीमत तो एक-एक कौड़ी में सौ-सौ हो गई है। अतएव सोना, चाँदी, पैसे, रुपये, कौड़ी आदि से सच्चा जीवनानंद नहीं मिल सकता है। मनुष्य को जीवन का सच्चा आनंद तो केवल इसके अपने काम से ही मिलता है। लेखक भी इसे स्वयं का अनुभव मानते हुए इसे ही सच्ची ईश्वर-पूजा स्वीकार है।

विशेष-
1. मनुष्य का महत्त्व मनुष्यता से ही है, जो उसके अपने कामों से संभव है। यही ईश्वर-पूजा भी है।
2. भाषा-शैली में प्रवाह है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आदमियों की तिजारत करना क्यों मूों का काम है?
उत्तर-
आदमियों की तिजारत करना मूरों का काम है। यह इसलिए कि इससे किसी प्रकार की समझदारी प्रकट नहीं होती है।

प्रश्न 2. सच्चा आनंद किससे मिलता है?
उत्तर-
सच्चा आनंद अपने काम से मिलता है। इसके सामने स्वर्ग-प्राप्ति की भी इच्छा नहीं रह जाती है।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश में लेखक ने मानवता का महत्त्वांकन करते हुए मनुष्य कौड़ी के सौ-सौ बिकते हुए इसका विरोध किया है। उसका यह मानना है कि सोना-चाँदी से नहीं, अपितु अपने काम से ही जीवन का सच्चा आनंद मिलता है। इस प्रकार मनुष्य मनुष्य की पूजा करे तो यह उसके लिए ईश्वरीय पूजा से कम नहीं है।

3. मजदूरी और फकीरी का महत्त्व थोड़ा नहीं। मजदूरी और फकीरी मनुष्य के विकास के लिए परमावश्यक है। बिना मजदूरी किये फकीरी का उच्च भाव शिथिल हो जाता है, फकीरी भी अपने आसन से गिर जाती है, बुद्धि बासी पड़ जाती है। बासी चीजें अच्छी नहीं होती। कितने ही, उम्र भर बासी बुद्धि और बासी फकीरी में मग्न रहते हैं, परंतु इस तरह मग्न होना किस काम का? हवा चल रही है, जल बह रहा है, बादल बरस रहा है, पक्षी नहा रहे हैं, फूल खिल रहे हैं, घास नई, पेड़ · नये, पत्ते नये-मनुष्य की बुद्धि और फकीरी ही बासी! ऐसा दृश्य तभी तक रहता है जब तक बिस्तर पर पड़े-पड़े मनुष्य प्रभात का आलस्य सुख मनाता है।

शब्दार्थ-शिथिल-ढीला। प्रभात-सबेरा। अंतःकरण-हृदय

संदर्भ-पूर्ववत।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने मजदूरी और फकीरी का महत्त्वांकन करते हुए कहा है कि

व्याख्या-मजदूरी और फकीरी का महत्त्व सर्वाधिक है। अगर मनुष्य अपना परम विकास करना है, तो उसे मजदूरी-फकीरी करनी ही पड़ेगी। यहाँ यह ध्यान देना आवश्यक है कि फकीरी की ऊँचाई मजदूरी की नींव पर ही खड़ी होती है। इस प्रकार मजदूरी के बिना फकीरी का कोई महत्त्व नहीं है। उसके बिना बुद्धि भी मंद पड़ जाती है, जो किसी प्रकार सुखद नहीं है। बासी फकीरी का बने रहना बिल्कुल ही निरर्थक है। चारों ओर से प्रकृति आनंदमग्न हो रही है। हवा मचल रही है, जलतरंगित हो रहा है। पक्षी जल में डूबकी लगा रहे हैं। बादल गरज-बरस रहे हैं। फूल हँस रहे हैं। नई-नई घास लहलहा रही है। पेड़-पौधे नए-नए पत्तों से लद रहे हैं। इसके बावजूद केवल फकीरी ही मंद हो, तो यह चिंता की बात है। इस प्रकार की चिंता की बात तभी होती है, जब मनुष्य बिस्तर पर पड़े-पड़े सवेरे का सुख आलस्य में बीता देता है।

विशेष-
1. मजदूरी और फकीरी के महत्त्व को समझाया गया है।
2. शैली चित्रात्मक है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मजदूरी और फकीरी का महत्त्व क्यों है?
उत्तर-
मजदूरी और फकीरी का महत्त्व है। यह इसलिए कि इसके बिना मनुष्य का पूरा विकास नहीं हो सकता है।

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प्रश्न 2. मजदूरी और फकीरी में श्रेष्ठ कौन है और क्यों?
उत्तर-
मजदूरी और फकीरी में मजदूरी श्रेष्ठ है। यह इसलिए कि बिना मजदूरी किए फकीरी का उच्च भाव शिथिल हो जाता है। फकीरी अपने आसन से गिर जाती है। बुद्धि बासी पड़ जाती हैं।

प्रश्न 3.
बासी बुद्धि का क्या कुपरिणाम होता है?
उत्तर-
बासी बुद्धि का यह कुपरिणाम होता है कि उससे बिस्तर पड़ा हुआ मनुष्य प्रभात का आलस्य सुख मनाता है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश में लेखक ने मजदूरी और फकीरी को मानव जीवन के विकास के लिए परमावश्यक बतलाया है। इन दोनों में मजदूरी को फकीरी से बेहतर माना है। इसलिए कि मजदूरी की बुनियाद पर ही फकीरी का झंडा लहराता है। दूसरी बात यह कि बिना मजदूरी के फकीरी अपने आसन से गिर जाती है। उसकी बुद्धि बासी पड़ जाती है। फिर बासी बुद्धि बिस्तर पर पड़े-पड़े प्रभात का सुख अपने आलस्य के कारण नहीं मना पाती है।

MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 4 बूढ़ी काकी

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 4 बूढ़ी काकी (प्रेमचन्द)

बूढ़ी काकी अभ्यास प्रश्न

बूढ़ी काकी लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बूढ़ी काकी बुद्धिराम के पास क्यों रहती थी?
उत्तर
बूढ़ी काकी का बुद्धिराम के सिवा और कोई नहीं था। इसलिए वह बुद्धिराम के पास रहती थी।

प्रश्न 2.
सुखराम के तिलक पर घर का वातावरण कैसा था?
उत्तर
सुखराम के तिलक पर घर का वातावरण बड़ा ही आनंददायक था। लोगों की भारी भीड़ थी। तरह-तरह के खान-पान तैयार हो रहे थे। मेहमानों का खूब आदर-सत्कार हो रहा था। बुद्धिराम और रूपा कार्यभार संभालने में बहुत व्यस्त थे।

प्रश्न 3.
लाडली और बूढ़ी काकी में परस्पर सहानुभूति क्यों थी?
उत्तर
लाडली को अपने दोनों भाइयों के डर से अपने हिस्से की मिठाई-चबैना खाने के लिए बढ़ी काकी के सिवा और कोई सरक्षित जगह नहीं थी। उससे बढ़ी काकी को कुछ खाने के लिए मिल जाता था। इस तरह दोनों में परस्पर सहानुभूति थी।

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प्रश्न 4.
रूपा का व्यवहार काकी के प्रति किस प्रकार का था?
उत्तर
रूपा का व्यवहार बूढ़ी काकी के प्रति बड़ा ही अन्यायपूर्ण और कठोर था।

प्रश्न 5.
बूढ़ी काकी को भोजन न देने पर लाडली का मन क्यों अधीर हो रहा था?
उत्तर
बूढ़ी काकी को भोजन न देने पर लाडली का मन अधीर हो रहा था। यह इसलिए कि वह अपने माता-पिता द्वारा बूढ़ी काकी के प्रति किए गए दुर्व्यवहार से दुखी
और चिंतित थी।

बूढ़ी काकी दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
“बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है।” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
बुढ़ापा आने पर किसी प्रकार की जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व निभाने की न कोई क्षमता होती है और न कोई सोच-समझ। बुढ़ापा में बच्चों के समान स्वतंत्रता आ जाती है। स्वार्थपरता के कारण अच्छा-बुरा का कुष्ठ भी ख्याल न बुढ़ापा में होता है और न बचपन में। इस प्रकार की और भी कई बातें होती हैं, जो बचपन और बढ़ापा में होती हैं। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि, “बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है।”

प्रश्न 2.
भोजन की वाली अपने सम्मुख देख बूढ़ी काकी की मनोदशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर
भोजन की थाली अपने सामने देखकर बूढ़ी काकी खिल उठी। उसके रोम-रोम में ताजगी आ गई। उस समय वह अपने ऊपर हुए अत्याचार और तिरस्कार को बिल्कुल भूल गई। वह भोजन की थाली पर टूट पड़ी। धड़ाधड़ पूड़ियों को खाने के लिए वह आतुर हो उठी। उसके एक-एक रोएँ रूपा को आशीर्वाद दे रहे थे।

प्रश्न 3.
रूपा का हृदय परिवर्तन कैसे हुआ?
उत्तर
बूढ़ी काकी को जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़े उठा-उठाकर खाते हुए देखकर रूपा का हृदय सन्न हो गया। उसे बूढ़ी काकी के प्रति किए गए अन्याय और अत्याचार का भारी पश्चाताप हुआ। इस प्रकार रूपा का हृदय परिवर्तन हुआ।

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प्रश्न 4.
इस पाठ से आपको क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर
इस पाठ से हमें निम्नलिखित शिक्षा मिलती है

  1. हमें बुजुर्गों की भावनाओं को समझना चाहिए।
  2. हमें बुजुर्गों का मान-सम्मान करना चाहिए।
  3. हमें बुजुर्गों की सेवा सच्ची भावना से करनी चाहिए।
  4. हम भी किसी समय बुजुर्ग होंगे। यह समझकर हमें बुजुर्गों पर होने वाले अत्याचार-अन्याय का विरोध करना चाहिए।

प्रश्न 5.
रूपा की जगह यदि आप होते तो बूढ़ी काकी के प्रति आपका व्यवहार कैसा होता?
उत्तर
रूपा की जगह हम होते तो बूढ़ी काकी के प्रति सहानुभूति रखते। उनकी भावनाओं को समझते। उनकी इच्छाओं को पूरी करने की कोशिश करते। अगर वे कोई अनुचित या अशोभनीय कदम उठातीं, तो हम उन पर क्रोध नहीं करते। उन्हें बड़े प्यार और आदर के साथ समझाते। उनकी कठिन जिद्द को नम्रतापूर्वक दूर करने का प्रयास करते।

प्रश्न 6.
स्पष्ट कीजिए।
(क) नदी में जब कगार का कोई वृहद खंड कटकर गिरता है तो आस पास का जल-समूह चारों ओर से उसी स्थान को पूरा करने के लिए दौड़ता है।
(ख) संतोष का सेतु जब टूट जाता है तब इच्छा का बहाव अपरिमित हो जाता है।
उत्तर
(क) उपर्युक्त वाक्य के कथन का आशय यह है कि जब कहीं कोई अवांछित और अनचाही घटना किसी के जीवन में घटित होती है तो हदय और मस्तिष्क की सारी शक्तियाँ, सारे विचार और सभी भार उसी ओर केंद्रित हो जाते हैं।
(ख) उपर्युक्त वाक्य के कथन का आशय यह है कि संतोष से इच्छाओं का प्रवाह रुक जाता है। इसके विपरीत असंतोष से इच्छाओं का प्रवाह किसी प्रकार की सीमा को तोड़ने में तनिक भी देर नहीं लगाता है।

बूढ़ी काकी भाषा-अध्ययन

1. जिह्वा, कृपाण आदि तत्सम शब्द हैं। पाठ में आए ऐसे ही तत्सम शब्दों की सूची बनाइए।
2. दिए हुए शब्दों में से उपसर्ग-प्रत्या छाँटकर अलग कीजिए
स्वाभाविक, प्रतिकूल, मसालेदार, सुगन्धित, अविश्वास, विनष्ट, लोलुपता, असहाय, निर्दयी।
3. ‘दिन-रात खाती न होती तो न जाने किसकी हाँडी में मुँह डालती।’
उपर्युक्त वाक्य में दिन का विलोम शब्द रात आया है। पाठ में आए ऐसे ही अन्य वाक्य छाँटिए जिनमें विलोम शब्दों का एक साथ प्रयोग हुआ हो।
उत्तर
1. चेष्टा, नेत्र, प्रतिकूल, पूर्ण, परिणाम, कालान्तर, तरुण, आय, वार्षिक, ईश्वर, तीव्र, व्यय, संताप, आर्तनाद, अनुराग, क्षुधावर्द्धक, सम्मुख, उद्विग्न, कार्य, क्रोध, वृहद, दीर्घाहार, व्यर्थ, मिथ्या, वाटिका, वर्षा, क्षुधा, प्रबल, प्रत्यक्ष, वृद्धा, आकाश, निमग्न आदि।
MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 4 बूढ़ी काकी img 1

3. (i) फिर जब माता-पिता का यह रंग देखते, तो बूढ़ी काकी को और भी सताया करते।
(ii) यद्यपि उपद्रव-शांति का यह उपाय रोने से कहीं अधिक उपयुक्त था।
(iii) लाडली अपने दोनों भाइयों के भय से अपने हिस्से की मिठाई-चबैना बूढ़ी काकी के पास बैठकर खाया करती थी।
(iv) आघात ऐसा कठोर था कि हृदय और मस्तिष्क की संपूर्ण शक्तियाँ, संपूर्ण । विचार और संपूर्ण भार उसी ओर आकर्षित हो गए।
(v) अवश्य ही लोग खा-पीकर चले गए।

बूढ़ी काकी योग्यता-विस्तार

1. “वृद्धजन का सम्मान ही परिवार का सम्मान है।” इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।
2. आप अपनी दादी या नानी से कितना प्यार करते हैं। अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

बूढ़ी काकी परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बूढ़ी काकी कब-कब रोती थीं?
उत्तर
जब घरवाले कोई बात उनकी इच्छा के विपरीत करते, भोजन का समय टल जाता या उसका परिणाम पूरा न होता अथवा बाजार से कोई वस्तु आई और उन्हें न मिलती, तो वे रोने लगती थीं।

प्रश्न 2.
बूढ़ी काकी को रोना आया लेकिन वे रो न सकीं। क्यों?
उत्तर
बूढ़ी काकी को रोना आया, लेकिन वे रो न सकीं क्योंकि उन्हें अपशकुन का भय हो गया था।

प्रश्न 3.
बूढ़ी काकी अपनी कोठरी में क्या पश्चाताप कर रही थी?
उत्तर
बूढ़ी काकी अपनी कोठरी में यह पश्चाताप कर रही थीं कि उन्होंने बड़ी जल्दीबाजी की। मेहमानों के खाने तक तो इंतजार करना ही चाहिए था। मेहमानों से पहले घर के लोग कैसे खाएँगे?

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प्रश्न 4.
लाडली ही बूढ़ी काकी के लिए क्यों कुढ़ रही थी?
उत्तर
लाडली ही बूढ़ी काकी के लिए कुढ़ रही थी, क्योंकि उसे ही उनसे अत्यधिक प्रेम था।

प्रश्न 5.
रूपा ने रुद्ध कंठ से क्या कहा?
उत्तर
रूपा ने रुद्ध कंठ से कहा, “काकी उठो, भोजन कर लो। मुझसे आज बड़ी भूल हुई। उसका बुरा न मानना। परमात्मा से प्रार्थना कर दो कि वह मेरा अपराध क्षमा कर दें।”

बूढ़ी काकी दीर्य उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बूढ़ी काकी को भरपेट भोजन बड़ी कठिनाई से क्यों मिलता था?
उत्तर
बूढ़ी काकी ने अपनी सारी सम्पत्ति अपने भतीजे बुद्धिराम को लिख दी। थी। सम्पत्ति लिखाते समय बुद्धिराम ने खूब लंबे-चौड़े वादे किए थे, लेकिन वे खोखले साबित हुए। बुद्धिराम की कृपणता ही इसके मूल में रही। उसी के फलस्वरूप वे बूढ़ी काकी के भोजन में कमी रखने का प्रयास करना नहीं भूलते थे।

प्रश्न 2.
बूढ़ी काकी प्रतीक्षा की घड़ी कैसे बिता रही थीं?
उत्तर
बूढ़ी काकी को एक-एक पल एक-एक युग के समान मालूम होता था। अब पत्तल बिछ गई होंगी। अब मेहमान आ गए होंगे। लोग हाथ-पैर धो रहे हैं. नाई पानी दे रहा है। मालूम होता है लोग खाने बैठ गए। जेवनार गाया जा रहा है, यह विचार कर वह मन को बहलाने के लिए लेट गई। धीरे-धीरे एक गीत गुनगुनाने लगी। उन्हें मालूम हुआ कि मुझे गाते देर हो गई। क्या इतनी देर तक लोग भोजन कर ही रहे होंगे? किसी की आवाज नहीं सुनाई देती। अवश्य ही लोग खा-पीकर चले गए। मुझे कोई बुलाने नहीं आया। रूपा चिढ़ गई। क्या जाने न बुलाए, सोचती हो कि आप ही आवेगी। वह कोई मेहमान तो नहीं जो उन्हें बुलाऊँ। बूढ़ी काकी चलने के लिए तैयार हुई।

प्रश्न 3.
बुद्धिराम ने बूढ़ी काकी के प्रति क्या कठोरता दिखाई?
उत्तर
बुद्धिराम ने जब बूढ़ी काकी को मेहमानों के बीच में देखा तो उनको क्रोध आ गया। वे इससे अपने को संभाल न सके। हाथ में लिए हए पूड़ियों के थाल को उन्होंने जमीन पर पटक दिया। फिर जिस तरह कोई निर्दय महाजन अपने किसी बेईमान और भगोड़े आसामी को देखते ही लपककर उसका टेंटुआ पकड़ लेता है। उसी तरह से उन्होंने भी बुढ़ी काकी के दोनों हाथों को कसकर पकड़ लिया। फिर उन्हें घसीटते हुए उनकी उसी अँधेरी कोठरी में लाकर पटक दिया।

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प्रश्न 4.
रूपा ने अपनी गलती का पञ्चाताप किस प्रकार किया?
उत्तर
रूपा ने अपनी गलती का पश्चाताप इस प्रकार किया
“हाय कितनी निर्दयी हूँ! जिसकी सम्पत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है। उसकी यह दुर्गति! और मेरे कारण! हे दयामय भगवान! मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है। मुझे क्षमा करो। आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन किया। मैं उनके इशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपए व्यय कर दिए, परंतु जिनकी बदौलत हजारों रुपए खाए, उसे इस उत्सव में भरपेट भोजन न दे सकी। केवल इसी कारण कि वह वृद्धा है, असहाय है।”

प्रश्न 5.
रूपा ने बूढ़ी काकी से अपने अपराध के क्षमा के लिए क्या किया?
उत्तर
आधी रात जा चुकी थी। आकाश पर तारों के थाल सजे हुए थे। और उन पर बैठे हुए देवगण स्वर्गीय पदार्थ सजा रहे थे। परंतु उनमें किसी को वह परमानंद प्राप्त न हो सकता था, जो बूढ़ी काकी को अपने सम्मुख थाल देखकर प्राप्त हुआ। रूपा ने कंठावरुद्ध स्वर में कहा, “काकी उठो, भोजन कर लो। मुझसे आज बड़ी भूल हुई, उसका बुरा न मानना। परमात्मा से प्रार्थना कर दो कि वह मेरा अपराध क्षमा कर दें।” भोले-भोले बच्चों की भाँति जो मिठाइयाँ पाकर मार और तिरस्कार सब भूल जाता है, बूढ़ी काकी वैसे सब भुलाकर बैठी हुई खाना खा रही थीं। उनके एक-एक रोएँ से सच्ची सदिच्छाएँ निकल रही थीं और रूपा बैठी इस स्वर्गीय दृश्य का आनंद लूटने में निमग्न थी।

बूढ़ी काकी लेखक-परिचय

प्रश्न
प्रेमचंद का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
जीवन-परिचय-प्रेमचंद का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिले के लमही गाँव में सन् 1880 ई. में हुआ था। उनका वास्तविक नाम धनपतराय था, परन्तु आप साहित्य के क्षेत्र में प्रेमचंद नाम से प्रसिद्ध हुए। छोटी आयु में पिता की मृत्यु हो जाने से उनका जीवन गरीबी में बीता था। मैट्रिक पास करने के पश्चात् आपने स्कूल में अध्यापन कार्य किया। उसके बाद स्वाध्याय से बी.ए. की परीक्षा पास की और शिक्षा विभाग में सब-इंस्पेक्टर पद पर कार्य किया। कुछ समय के बाद वहाँ से भी त्याग-पत्र दे दिया और आजीवन साहित्य-सेवा में लगे रहे। बीमारी के कारण 56 वर्ष की आय में सन् 1936 में आपका देहान्त हो गया।
साहित्यिक सेवा-प्रेमचंद ने सर्वप्रथम नवाबराय के नाम से उर्दू में लिखना आरंभ किया था।

उनका ‘सोजेवतन’ नामक कहानी-संग्रह तत्कालीन अंग्रेजी सरकार ने जब्त कर लिया और नवाबराय पर अनेक प्रतिबंध लगा दिए। इसके बाद आपने हिंदी में प्रेमचंद के नाम से लिखना आरंभ किया। आपके साहित्य का मुख्य स्वर समाज-सुधार है। आपने समाज-सुधार और राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत कई उपन्यास और लगभग तीन सौ कहानियाँ लिखी हैं। उन्होंने अपने साहित्य में किसानों की दशा, सामाजिक बंधनों में तड़पती नारियों की वेदना और वर्ण-व्यवस्था की कठोरता के भीतर संत्रस्त हरिजनों की पीड़ा का मार्मिक चित्रण किया है।

भाषा-शैली-प्रेमचंद की भाषा साधारण बोल-चाल की भाषा है। इसमें उर्द, फारसी. अंग्रेजी तथा तत्सम, तदभव शब्दों के साथ-साथ देशज शब्दों का प्रयोग भी मिलता है। इनकी भाषा मुहावरे-लोकोक्तियों और सूक्तियों से युक्त है। हास्य-व्यंग्य के छींटे भाषा को जीवंत बनाए रखते हैं। उन्होंने वर्णनात्मक, आत्मकथात्मक आदि शैलियों का प्रयोग किया है।

रचनाएँ-उपन्यास-सेवासदन, निर्मला, रंगभूमि, कर्मभूमि, गबन और गोदान आदि प्रसिद्ध उपन्यास हैं।

नाटक-कर्बला, संग्राम और प्रेम की बेदी।

निबंध-संग्रह-कुछ विचार संग्रह। सामाजिक और राजनीतिक निबंधों का संग्रह ‘विविध-प्रसंग’ नाम से तीन भागों में प्रकाशित है।

उन्होंने हंस, मर्यादा और जागरण पत्रिकाओं का संपादन किया।कहानी-प्रेमचंद ने अनेक प्रसिद्ध कहानियों की रचना की। उन्होंने लगभग तीन सौ कहानियाँ लिखीं। उनकी कहानियाँ ‘मानसरोवर’ नाम से आठ भागों में संग्रहीत हैं। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि प्रेमचंद का साहित्यिक महत्त्व बहुत अधिक है। फलस्वरूप वे युग-युग तक आने वाली साहित्यिक पीढ़ी को प्रेरित करते रहेंगे।

बूढ़ी काकी कहानी का सारांश

प्रश्न
प्रेमचंद-लिखित कहानी ‘बूढ़ी काकी’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
प्रेमचंद-लिखित कहानी ‘बूढ़ी काकी’ एक सामाजिक-पारिवारिक कहानी है। इसमें वृद्धों की मानसिक स्थितियों को सामने लाने का प्रयास किया गया है। इस कहानी का सारांश इस प्रकार है बूढ़ी काकी जीभ का स्वाद न पूरा होने पर गला फाड़-फाड़कर रोने लगती थी। उनके पतिदेव और जवान बेटे की मौत के बाद उनका भतीजा बुद्धिराम ही उनका अपना था। उसी के नाम उन्होंने अपनी सारी सम्पत्ति लिख दी। सम्पत्ति लिखाते समय बुद्धिराम ने उनकी देखभाल के लम्बे-चौड़े वादे किए थे, लेकिन बाद में वे वादे खोखले साबित होने लगे। बुद्धिराम इतने सज्जन थे कि उनके कोष पर कोई आंच न आए।

उनकी पत्नी रूप-स्वभाव से तीव्र होने पर भी ईश्वर से डरती थी। बढी काकी अपनी जीभ के स्वाद या अपनी भूख मिटाने के लिए किसी की परवाह किए बिना रोती-चिल्लाती थीं। बच्चों के चिढ़ाने पर वह उन्हें गालियाँ देने लगती थीं। रूपा के आते ही वह शान्त हो जाती थीं। पूरे परिवार में बूढ़ी काकी से बुद्धिराम की छोटी लड़की लाडली ही प्रेम संबंध रखती थी। वह अपने खाने-पीने की चीजों में से कुछ चीजें निकालकर चुपके से बूढ़ी काकी को खिला दिया करती थी।

एक दिन बुद्धिराम के लड़के सुखराम का तिलक आया तो मेहमानों के खाने-पीने के लिए तरह-तरह के पकवान-मिठाइयाँ बनाए गए। उनकी सगन्ध से बढ़ी काकी अपनी कोठरी में बैठी हुई बेचैन हो रही थीं। वह एक-एक घड़ी का अंदाजा लगा रही थीं कि इतने देर बाद उन्हें भी वह भोजन मिलेगा। काफी देर बाद जब उनके लिए भोजन लेकर कोई उनके पास नहीं आया, तब उनके धैर्य का बाँध टूट गया। वह उक. बैठकर हाथों के बल सरकती हुई बड़ी कठिनाई से कड़ाह के पास जा बैठीं। उन्हें इस तरह कड़ाह के पास बैठी हुई देखकर रूपा के क्रोध की सीमा न रही। उसने सबके सामने बूढ़ी काकी को खूब खरी-खोटी सुनाई। उसे सुनकर बूढ़ी काकी चुपचाप रेंगती-सरकती हुई अपनी कोठरी में चली गई। किसी के बुलाने की प्रतीक्षा करने लगीं।

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बूढ़ी काकी ने बहुत इंतजार किया, लेकिन उन्हें कोई बुलाने नहीं आया। उन्होंने शांत वातावरण से यह अनुमान लगा लिया कि मेहमान खा-पीकर चले गए हैं। मुझे कोई बुलाने नहीं आया तो क्या हुआ। वह मेहमान तो नहीं हैं कि उन्हें कोई बुलाने आएगा। इन्हीं बातों को सोच-समझकर वह पहले की तरह सरकती हुई आँगन में खा रहे मेहमानों के बीच में पहुंच गई। उन्हें देखते ही बुद्धिराम क्रोध से उबल पड़े। उन्होंने बूढ़ी काकी को घसीटते हुए अँधेरी कोठरी में लाकर धम्म से पटक दिया। यह देखकर लाडली को क्रोध तो आया, लेकिन डर से वह कुछ कह न सकी। वह अपने हिस्से की पूड़ियों को सबके सोने के बाद बूढ़ी काकी को खिलाने के लिए उस अँधेरी कोठरी में गई। उसने बूढ़ी काकी को उन पूड़ियों को खाने के लिए सामने रख दिया। उन पूड़ियों को उन्होंने पाँच मिनट में खा लिया। इसके बाद उन्होंने उससे और पूड़ियाँ अपनी माँ रूपा से माँगकर लाने के लिए कहा।

लाडली ने जब अपनी अम्मा से अपने डर की बात कही तब उन्होंने उससे कहा, “मेरा हाथ पकड़कर वहाँ ले चलो, जहाँ मेहमानों ने बैठकर भोजन किया है।” लाडली जब उन्हें वहाँ ले गई, तब उन्होंने पूड़ियों के टुकड़े चुन-चुनकर खाना शुरू किया। नींद खुलने पर रूपा लाडली को खोजती हुई वहाँ पहुँच गई, जहाँ बूढ़ी काकी पूड़ियों के टुकड़े उठा-उठाकर खा रही थीं। उन्हें इस तरह देखकर रूपा काँप उठी। उसे ऐसा लगा, मानो आसमान चक्कर खा रहा है। संसार पर कोई नई विपत्ति आने वाली है। करुणा और भय के आँसुओं से उसने हृदय खोलकर आकाश की ओर हाथ उठाते हुए कहा, “परमात्मा, मेरे बच्चों पर दया करो। इस अधर्म का दंड मुझे मत दो, नहीं तो मेरा सत्यानाश हो जाएगा। मुझे क्षमा करो। आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन किया। मैं उनके इशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपए खर्च कर दिए। परन्तु जिनकी बदौलत हजारों रुपए खाए, उसे इस उत्सव में भरपेट भोजन न दे सकी। केवल इसी कारण कि वह वृद्धा है, असहाय है।”

रूपा दिया जलाकर भंडार से थाली में सारी सामग्रियाँ सजाकर काकी के पास गई। उसने रुंधे हुए स्वर में कहा, “काकी उठो, भोजन कर लो। मुझसे आज बड़ी भूल हुई, उसका बुरा न मानना। परमात्मा से प्रार्थना कर दो कि वह मेरा अपराध क्षमा कर दे।”
मिठाइयाँ पाकर मार और तिरस्कार भूल जाने वाले भोले-भाले बच्चों की तरह बूढ़ी काकी सब कुछ भुलाकर वह खाना.खा रही थी। उनके रोम-रोम से सदिच्छाएँ निकल रही थीं। रूपा वहाँ बैठी उस स्वगीय आनंद को लूट रही थी।

बूढ़ी काकी संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या, अर्थग्रहण एवं विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

1. संपूर्ण परिवार में यदि काकी से किसी को अनुराग था, तो वह बुद्धिराम की छोटी लड़की लाडली थी। लाडली अपने दोनों भाइयों के भय से अपने हिस्से की -मिठाई-चबेना बूढ़ी काकी के पास बैठकर खाया करती थी। वह उसका रक्षागार था और यद्यपि काकी की शरण उनकी लोलुपता के कारण बहुत महँगी पड़ती थी, तथापि भाइयों के अन्याय से वहीं सुलभ थी। इसी स्वार्थानुकूलता ने उन दोनों में प्रेम और सहानुभूति का आरोपण कर दिया था।

शब्दार्थ-अनुराग-प्रेम । लोलुपता-लालच । स्वार्थानुकूलता- स्वार्थ के अनुसार। आरोपण-आरोप लगाना।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वासंती-हिंदी सामान्य’ में संकलित तथा मुंशी प्रेमचंद-लिखित कहानी ‘बूढ़ी काकी’ से है। इसमें लेखक ने बूढ़ी काकी और लाडली के विषय में बतलाने का प्रयास किया है।

व्याख्या-लेखक का कहना है कि बूढ़ी काकी के प्रति परिवार में किसी को कोई लगाव नहीं था। बूढ़ी काकी का भतीजा बुद्धिराम, उसकी पत्नी रूपा और उसके बच्चे बूढ़ी काकी के प्रति सहानुभूति नहीं रखते थे। अगर उनके प्रति लगाव या सहानुभूति रखने वाला घर का कोई सदस्य था, तो वह थी बुद्धिराम की छोटी लड़की लाडली। वह अपनी सहानुभूति उनके प्रति बराबर दिखाती थी। वह अपना अधिकांश समय उनके पास ही बिताया करती थी। अपने भाइयों से डरी हुई वह अपने हिस्से की मिठाई-चबैना उनके पास बैठकर खाया करती थी। उन्हें देखकर उनको लालच होने लगता था। उनकी लपलपाती हुई जीभ को शांत करने के लिए उसे अपने हिस्से की मिठाई-चबैना के कुछ भाग को दे देना पड़ता है। इससे उसकी उनके प्रति प्रकट की जाने वाली सहानुभूति दुखद साबित होती थी, फिर भी उसे यह अपने भाइयों के बेईमानी से अच्छी लगती थी। इस प्रकार दोनों की स्वार्थपरता ने उन दोनों में प्रेम और सहानुभूति को पैदा कर दिया था।

विशेष-

  1. भाषा तत्सम और तद्भव शब्दों की है।
  2. बाल-स्वभाव और वृद्ध-स्वभाव की समानता का संकेत है।
  3. शैली वर्णनात्मक है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) बूढ़ी काकी से लाडली को क्यों अनुराग था?
(ii) बूढ़ी काकी लाडली को क्यों चाहती थी?
उत्तर
(i) बूढ़ी काकी से लाडली को अनुराग था। यह इसलिए कि वह अपने भाइयों के भय से अपने हिस्से की मिठाई-चबैना बूढ़ी काकी के पास बैठकर निडर हो खाया करती थी।
(ii) बूढ़ी काकी लाडली को चाहती थी। यह इसलिए कि लाडली ही कुछ खिलाकर उनकी लपलपाती हुई जीभ को शांत करती थी।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) बूढ़ी काकी और लाडली में परस्पर प्रेम क्यों हो गया था?
(ii) उपर्युक्त गयांश का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर
(i) बूढ़ी काकी और लाडली में परस्पर सहानुभूति और प्रेम उन दोनों के परस्पर स्वार्थपूर्ति के फलस्वरूप हो गया था।
(ii) उपर्युक्त गद्यांश का मुख्य भाव है-बाल-स्वभाव और वृद्ध-स्वभाव की समानता को दर्शाना।

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2. जिस प्रकार मेढक कॅचए पर झपटता है, उसी प्रकार वह बड़ी काकी पर झपटी और उन्हें दोनों हाथों से झिंझोड़कर बोली, “ऐसे पेट में आग लगे, पेट है या भाड़? कोठरी में बैठते क्या दम घुटता था? अभी मेहमानों ने नहीं खाया, भगवान का भोग नहीं लगा, तब तक धैर्य न हो सका? आकर छाती पर सवार हो गई। जल जाय ऐसी जीभ । दिन-रात खाती न होती, तो न जाने किसकी हाड़ी में मुँह डालती? गाँव देखेगा तो कहेगा, बुढ़िया भरपेट खाने को नहीं पाती, तभी तो इस तरह मुंह बाये फिरती है। डायन, न मरे न माँचा छोड़े। नाम बेचने पर लगी है। नाक कटवाकर दम लेगी। इतना ढूँसती है, न जाने कहाँ भस्म हो जाता है। लो! भला चाहती हो तो जाकर कोठरी में बैठो, जब घर के लोग खाने लगेंगे तब तुम्हें भी मिलेगा। तुम कोई देवी नहीं हो कि चाहे किसी के मुँह में पानी न जाए, परंतु तुम्हारी पूजा पहले हो ही जाए।”

शब्दार्थ-झिंझोड़-झिड़ककर । डायन-राक्षसी।

प्रसंग-पूर्ववत् इसमें लेखक ने उस समय का उल्लेख किया है, जब बढ़ी काकी खाने के लिए अपने धैर्य की सीमा को तोड़ती हुई सबके सामने कड़ाह के पास जा बैठी। उन्हें इस तरह देखकर रूपा ने बहुत तेज फटकार लगाई। उसे बतलाते हुए लेखक ने कहा है।

व्याख्या-बूढ़ी काकी को कड़ाह के सामने बैठी हुई देखकर रूपा के क्रोध की सीमा न रही। उसने सबके सामने ही बूढ़ी काकी पर वैसे ही झपट पड़ी, जैसे मेढक केंचुए पर झपट पड़ता है। उसने उनके दोनों हाथों को कसकर पकड़कर झकझोर दिया। फिर उसने आगबबूला होकर उन्हें फटकारना शुरू कर दिया, “तुम्हें पेट में आग लगी है। तुम्हारा पेट है या भाड़? चुपचाप कोठरी में बैठी रहती तो क्या मरने लगती। तुम्हें इतनी भी समझ नहीं है कि मेहमानों के लिए अभी तो खाना बन रहा है। न पूरा खाना बना और न भगवान को उसे चढ़ाया ही गया, इससे पहले ही छाती पर आकर सवार हो गई। धिक्कार है, तुम्हारी ऐसी जीभ पर। भरपेट भोजन न पाती तो न जाने कहाँ-कहाँ इस लपलपाती जीभ को लिए फिरती। लोग तुम्हें इस तरह देखकर यह अवश्य मान जाएँगे, तुम्हें हम भरपेट नहीं खिलाते हैं। सच ही कहा है-‘डायन, न मरे, न माँचा छोड़े।

3. अब समझ में आ गया कि हम लोगों को बदनाम करने के लिए ऐसा कर रही हो। इसलिए हम लोगों की नाक जब तक नहीं कटवा लेगी, तब तक चुप नहीं बैठेगी। बड़ा अचरज होता है कि लूंस-ठूसकर खाने पर भी खाने के लिए मरती है। अब कान खोलकर सुनो अपनी भलाई चाहती है तो चुपचाप अपनी कोठरी में जाकर बैठ जाओ। घर के लोगों के खाने के समय तुम्हें खिलाया जाएगा। यह अच्छी तरह समझ वह उसका रेंटुआ पकड़कर उससे अपना बकाया वसूल लेने की कोशिश करता है। कुछ इसी प्रकार का कठोर दुर्व्यवहार बुद्धिराम ने बूढ़ी काकी के प्रति किया। उसने बढ़ी काकी के दोनों हाथों को कसकर पकड़ लिया। फिर उन्हें वह घसीटते हुए उनकी उसी अँधेरी कोठरी में लाकर पटक दिया। उसके इस प्रकार के कठोर दुर्व्यवहार से बूढ़ी काकी की आशामयी वाटिका वैसे ही सूख गई, जैसे लू से हरियाली समाप्त हो जाती है।

विशेष-

  1. बुद्धिराम की मनोदशा का स्वाभाविक चित्रण है।
  2. संपूर्ण उल्लेख विश्वसनीय है।
  3. ‘आशा रूपी वाटिका’ में रूपक अलंकार है तो बुद्धिराम की तुलना निर्दय महाजन से किए जाने से उपमा अलंकार है।
  4. शैली दृष्टांत है।
  5. करुण रस का संचार है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) बुद्धिराम काकी को देखते ही क्रोध से क्यों तिलमिला गए?
(ii) बुद्धिराम ने पूड़ियों के चाल को क्यों पटक दिया?
उत्तर-
(i) बुद्धिराम बूढ़ी काकी को देखते ही क्रोध से तिलमिला गए। यह इसलिए कि उन्हें उस समय खाना खा रहे मेहमानों के बीच बूढ़ी काकी का आना एकदम सहन नहीं हुआ।
(ii) बुद्धिराम ने पूड़ियों के.थाल को पटक दिया। यह इसलिए कि उनका अपने क्रोध पर नियंत्रण न रहा। उन्हें उचित-अनुचित का ध्यान बिल्कुल नहीं रहा।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) बुद्धिराम ने बूढ़ी काकी के प्रति किस प्रकार का व्यवहार किया?
(ii) बुद्धिराम की जगह आप होते तो क्या करते?
उत्तर
(i) बुद्धिराम ने बूढ़ी काकी के प्रति बड़ा ही कठोर और बेगानापन का व्यवहार किया। उसके द्वारा किया गया व्यवहार वैसे ही कठोर था जैसे किसी निर्दय महाजन का अपने बेईमान और भगोड़े आसामी के प्रति होता है।
(ii) बुद्धिराम की जगह अगर हम होते तो बूढ़ी काकी के प्रति शिष्ट और उदार व्यवहार करते। उन्हें समझा-बुझाकर उन्हें उनकी कोठरी में वापस ले जाते।

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4. रूपा का हृदय सन्न हो गया। किसी गाय के गर्दन पर छुरी चलते देखकर जो अवस्था उसकी होती वही उस समय हुई। एक ब्राह्मणी दूसरों की जूठी पत्तल टटोले, इससे अधिक शोकमय दृश्य असंभव था। पूड़ियों के कुछ ग्रासों के लिए उनकी चचेरी सासं ऐसा पतित और निकृष्ट कर्म कर रही है। यह वह दृश्य था जिसे देखकर देखने वालों के हृदय काँप उठते हैं। ऐसा प्रतीत होता था मानो जमीन रुक गई, आसमान चक्कर खा रहा है, संसार पर कोई नई विपत्ति आने वाली है। रूपा को क्रोध न आया। शोक के सम्मुख क्रोध कहाँ? करुणा और भय से उसकी आँखें भर आईं। इस अधर्म के पाप का भागी कौन है? उसने सच्चे हृदय से गगनमंडल की ओर हाथ उठाकर कहा-“परमात्मा, मेरे बच्चों पर दया करो। इस अधर्म का दंड मुझे मत दो, नहीं तो हमारा सत्यानाश हो जावेगा।”

शब्दार्च-ग्रास-टुकड़ा। पतित-पापपूर्ण। निकृष्ट-अधम, तुच्छ । प्रतीत होना-जानना ज्ञात होना। सम्मुख-सामने।

प्रसंग-पूर्ववत् । इसमें लेखक ने रूपा की शोकमय दशा का उल्लेख करते हुए कहा है कि

व्याख्या-बूढ़ी काकी को जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़ों को उठा-उठाकर खाते हुए देखकर रूपा का कलेजा धक् से रह गया। उसकी उस समय ऐसी अवस्था हो गई थी। जैसे मानों किसी गाय के गर्दन पर कोई छुरी चला रहा है और वह उसे देखकर बिल्कुल हकबक हो रही है। एक ऐसी असहाय और दुखी वृद्धा को जूठी पत्तलों से पूड़ियों के टुकड़ों को टटोल-टटोलकर अपनी भूख मिटाने के लिए ऐसा नीच कर्म करे, इस प्रकार का दृश्य उसके लिए शोकमय और हार्दिक दुखद होने के अतिरिक्त और क्या हो सकता है। उसे स्वयं पर इस बात की ग्लानि हुई कि उसकी चचेरी सास उसकी संपन्नता के बावजूद जूठी पत्तलों के पूड़ियों के कुछ टुकड़ों के लिए इतना नीच और अधम काम कर रही है।

इस प्रकार का दृश्य उसके लिए ही नहीं, अपितु किसी के लिए भी ग्लानिपूर्ण हो सकता है। किसी के लिए दुखद और शोकमय हो सकता है। उस समय रूपा को ऐसा लग रहा था, मानो उसके नीचे की जमीन रुक गई है। आसमान चकरा रहा है। यही नहीं शायद अब कोई नई मुसीबत आने वाली है। इससे उसे क्रोध नहीं आया। उसे तो उस समय शोक ही नहीं अपितु भय और करुणा ने घेर लिया। इससे उसकी आँखें छलछला उठीं। उसे यह नहीं समझ में आ रहा था कि इस अधम पाप का कौन दोषी है? फलस्वरूप उसने बड़ी असहाय होकर आकाश की ओर हाथ उठाकर सच्चे हदय से कहा, “हे प्रभु! आप इस अधम पाप के लिए मुझे क्षमा कर देना। मेरे परिवार पर दया करना। मुझे अगर आप क्षमा नहीं करोगे तो मेरा सारा परिवार बर्बाद हो जाएगा।”

विशेष-

  1. भाषा सरल शब्दों की है।
  2. शैली चित्रमयी है।
  3. मुहावरों के सटीक प्रयोग हैं।
  4. यह अंश मार्मिक है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) रूपा का हृदय सन्न क्यों हो गया?
(ii)-बूढ़ी काकी जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़े उठाकर क्यों खा रही थी?
उत्तर
0रूपा का हृदय सन्न हो गया। यह इसलिए कि उसने बूढ़ी काकी को जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़े उठाकर खाते हुए देखा। इससे उसे भारी ग्लानि और शोक हुआ कि उसकी ही चचेरी सास इतना अधम काम कर रही है।
(i) बूढ़ी काकी जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़े उठाकर खा रही थी। यह इसलिए कि उसका भोजन के लिए बुलाए जाने के लिए और इंतजार करने का धैर्य नहीं रहा। फलस्वरूप उसे इसके सिवा और कोई चारा नहीं दिखाई पड़ा था।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) रूपा को क्रोध क्यों नहीं आया?
(ii) रूपा ने परमात्मा से क्यों प्रार्थना की?
उत्तर
(i) रूपा को क्रोध नहीं आया। यह इसलिए कि बूढ़ी काकी का जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़ों को उठा-उठाकर खाने का दृश्य उसके लिए ग्लानिपूर्ण और शोकजनक दृश्य था।
(ii) रूपा ने परमात्मा से प्रार्थना की। यह इसलिए कि उसे यह पूरा भरोसा हो गया था कि उसे परमात्मा ही क्षमा कर सकता है और कोई नहीं।

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5. रूपा को अपनी स्वार्थपरता और अन्याय इस प्रकार प्रत्यक्ष रूप से कभी न देख पड़े थे। वह सोचने लगी, हाय! कितनी निर्दयी हूँ! जिसकी संपत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है उसकी यह दुर्गति! और मेरे कारण! हे दयामय भगवान! मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है, मुझे क्षमा करो। आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन पाया। मैं उनके इशारों की दासी बनी रही, अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपए व्यय कर दिए, परंतु जिनकी बदौलत हजारों रुपए खाए उसे इस उत्सव में भरपेट भोजन न दे सकी। केवल इसी कारण तो कि वह वृद्धा है, असहाय है।

शब्दार्थ-निर्दयी-कठोर । दुर्गति-दुर्दशा। चूक-भूल । व्यय-खर्च । बदौलत-कारण।

प्रसंग-पूर्ववत्। इसमें लेखक ने रूपा को किस प्रकार अपनी स्वार्थपरता और अन्याय का बोध हुआ, उस पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-बूढ़ी काकी को जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़े उठाकर खाते हुए देखकर रूपा ने अपना अन्याय और अपना स्वार्थ ही माना। उसने इस प्रकार कभी नहीं देखा था। इसका अनुमान भी उसे नहीं था। उसने इसे गंभीरतापूर्वक सोचा-समझा तो यह पाया कि इस अन्याय और स्वार्थ के लिए वही दोषी है। उसकी ही कठोरता से यह हुआ है। उसने हदय से यह स्वीकार किया कि बूढ़ी काकी की ही दी हुई संपत्ति से उसे जो दो सौ रुपए की सालाना आमदनी हो रही है, उसी की इस प्रकार की दुर्दशा हो रही है। उसके लिए वही अपराधी है। इस प्रकार दुखी होकर उसने ईश्वर से अपनी इस कठोरता और अन्याय के लिए क्षमा माँगी। उसने यह पश्चाताप कि उसके बेटे के तिलक के सुअवसर पर अनेक लोगों ने तरह-तरह के भोजन किए। सैकड़ों रुपए उसने अनेक लिए खर्च भी किए। लेकिन यह बड़ी अफसोस की बात है कि जिसके कारण उसने खर्च किए और जिसके दिए-किए से आज वह सुखी-संपन्न है, उसी को इस दुर्दशा में डाल रही है। क्या इसलिए कि वह एक ऐसी वृद्धा है, जिसका कोई सहारा नहीं है।

विशेष

  1. संपूर्ण कथन मार्मिक है।
  2. करुण रस का संचार है।
  3. भाव यथार्थपूर्ण और विश्वसनीय है।
  4. भावात्मक शैली है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) रूपा की स्वापरता और अन्याय क्या वा?
(ii) रूपा से बड़ी भारी चूक क्या हुई?
उत्तर
(i) रूपा की स्वार्थपरता और अन्याय यही था कि वह बूढ़ी काकी की संपत्ति से पल-बढ़ रही थी, फिर भी वह बूढ़ी काकी को जूठे पत्तलों से पूड़ियों के टुकड़े खाने के लिए मजबूर दुर्दशा में डाल रही थी।
(ii) रूपा से बड़ी भारी यह चूक हुई कि बूढ़ी काकी की संपत्ति से दो सौ रुपए की सालाना आमदनी पाकर भी उन्हें दाने-दाने के लिए लाचार बना रही थी।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) रूपा ने भगवान से क्या क्षमा माँगी?
(ii) रूपा को किस बात का सबसे अधिक अफसोस हुआ?
उत्तर
(i) रूपा ने भगवान से यह कहा कि बूढ़ी काकी की दुर्गति कर उससे बड़ी भारी चूक हुई। वह इसके लिए उसे क्षमा कर दे।
(ii) रूपा को इस बात का सबसे अधिक अफसोस हुआ कि जिनकी बदौलत हजारों रुपए खाये, उसे ही वह इस उत्सव में भरपेट भोजन न दे सकी। केवल इसलिए कि वह वृद्धा है और बेसहारा है।

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 2 मित्रता

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 2 मित्रता (रामचन्द्र शुक्ल)

मित्रता अभ्यास-प्रश्न

मित्रता लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वर्तमान समय में व्यक्ति के किस व्यवहार को देखकर हम शीघ्र ही अपना मित्र बना लेते हैं?
उत्तर
वर्तमान समय में व्यक्ति का हँसमुख चेहरा, बातचीत के ढंग, थोड़ी चतुराई या साहस ये दो-चार व्यवहार देखकर हम उसे शीघ्र अपना मित्र बना लेते हैं।

प्रश्न 2.
लेखक ने कुसंग के ज्वर को सबसे भयानक क्यों कहा है?
उत्तर
लेखक ने कुसंग के ज्वर को सबसे भयानक इसलिए कहा है कि वह नीति, सद्वृत्ति और बुद्धि का नाश करता है।

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प्रश्न 3.
राजदरबार में जगह न मिलने पर इंग्लैंड का बिद्वान अपने भाग्य को क्यों सराहता रहा?
उत्तर
राजदरबार में जगह न मिलने पर इंग्लैंड का विद्वान अपने भाग्य को इसलिए सराहता रहा कि वह अपनी आध्यात्मिक उन्नति में बाधक बुरे संगति से दूर रहा।

प्रश्न 4.
लेखक ने हमें किन बातों से दूर रहने को कहा है?
उत्तर
लेखक ने हमें अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातों से दूर रहने को कहा है।

मित्रता दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अच्छे मित्र के गुण लिखिए।
उत्तर
अच्छे मित्र के गुण निम्नलिखित हैं :

  1. वह प्रतिष्ठित हो।
  2. वह दृढ़चित्त और सत्य-संकल्प का हो।
  3. उसमें आत्मविश्वास हो।
  4. वह भरोसमंद हो।

प्रश्न 2.
दृढ़चित्त और सत्य संकल्पित व्यक्ति से मित्रता करने के क्या लाभ हैं?
उत्तर
दृढ़चित्त और सत्य संकल्पित व्यक्ति से मित्रता करने से अनेक लाभ हैं। उससे हमें दृढ़ता प्राप्त होती है। हम दोषों और त्रुटियों से बच जाते हैं। हमारे सत्य, पवित्रता और मर्यादा के प्रेम पुष्ट होते हैं। हम कुमार्ग से सचेत हो जाते हैं। हतोत्साहित होने पर हमें उत्साह मिलता है।

प्रश्न 3.
विवेक को कुंठा से बचाने के लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए?
उत्तर
विवेक को कुंठा से बचाने के लिए हमें अत्यधिक दृढ़ संकल्प के लोगों के साथ नहीं रहना चाहिए। दूसरी बात यह है कि हमें मनमाने और दबाव डालने वाले लोगों से बचना चाहिए। तीसरी बात यह कि अपनी ही बात को ऊपर रखने वालों से सावधान रहना चाहिए।

प्रश्न 4.
जीवन की अलग-अलग अवस्थाओं में होनी वाली मित्रता की सार्थकता लिखिए।
उत्तर
बचपनावस्था की मित्रता बड़ी आनंदमयी होती है। उसमें हदय को बेधने वाली ईर्ष्या और खिन्नता नहीं होती है। उसमें अत्यधिक मधुरता और प्रेम की ऊँची तरंगें होती हैं। यही नहीं अपार विश्वासमयी कल्पनाएँ होती हैं। उसमें वर्तमान के प्रति आनंदयम दृष्टि और भविष्य के प्रति आकर्षक विचार भरे होते हैं। छात्रावास या सहपाठी की मित्रता में भावों का भारी उथल-पुथल होता है।

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प्रश्न 5.
भिन्न प्रकृति और स्वभाव के लोगों में मित्रता कैसे बनी रहती है?
उत्तर
भिन्न प्रकृति और स्वभाव के लोगों में मित्रता परस्पर अत्यधिक प्रगाढ़ प्रेम के कारण बनी रहती है। जो गुण जिसमें नहीं, वह चाहता है कि उसे ऐसा कोई मित्र मिले, जिसमें वे गुण हों। फलस्वरूप चिंतनशील मनुष्य प्रसन्नचित्त का साथ ढूँढ़ता है। निर्बल बली का और धीर उत्साही का।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए
(अ) ‘लेखक ने विश्वासपात्र मित्र को खजाना, औषधि और माता जैसा कहा है।” स्पष्ट कीजिए।
(ब) “संगति का गुप्त प्रभाव हमारे आचरण पर भारी पड़ता है।”
(स) “ऐसे नवयुवकों से बढ़कर शून्य, निःसार और शोचनीय जीवन और किसका है?”
उत्तर
(अ) “लेखक ने विश्वापात्र मित्र को खजाना, औषधि और माता जैसा कहा है।” लेखक के ऐसा कहने का आशय यह है कि विश्वासपात्र मित्र का महत्त्व असाधारण होता है। जो विश्वासपात्र मित्र होता है, वह हमारे लिए रक्षा-कवच के समान होता है। इसलिए ऐसे मित्र तो बड़े ही भाग्यशाली व्यक्ति को ही प्राप्त होते हैं। वास्तव में ऐसे मित्र एक खजाने की तरह अपने मित्र की प्रत्येक दशा में सहायता करते हैं।

(ब) संगति का गुप्त प्रभाव हमारे आचरण पर भारी पड़ता है। लेखक के इस कथन का आशय यह है कि अगर हम सुसंगति में रहते हैं, हम दिनोंदिन उन्नति के शिखर पर चढ़ते जाते हैं। इसके विपरीत अगर हम कुसंगति में रहते हैं, तो हम दिनोंदिन अवनति के गड्ढे में गिरते जाएँगे।

(स) “ऐसे नवयुवकों से बढ़कर शून्य, निःसार और शोचनीय जीवन और किसका है?” लेखक के इस वाक्य का आशय यह है कि मनचले युवक हर प्रकार से उद्दण्ड और अशिष्ट होते हैं। वे अपने जीवन की सार्थकता केवल ऐशो-आराम करना समझते हैं। फलस्वरूप वे अपने जीवन को नरक बनाकर न केवल स्वयं के लिए दुःखद साबित होते हैं, अपितु अपने संपूर्ण समाज और वातावरण के लिए भी। इसलिए ऐसे शून्य, निःसार और शोचनीय युवकों से सावधान होकर दूर ही रहना चाहिए।

मित्रता भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
(क) उत्साह में ‘इत’ प्रत्यय जोड़ने से ‘उत्साहित’ बना है। इसी प्रकार पाठ से छाँटकर प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द बनाइए।
(ख) दिए गए शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए।
मीत्रता – मित्रता
अपरीमार्जित – ……………….
आशचर्य – ………………..
चतुरायी – …………………
प्रतीष्टित – ………………..
सहानूभूति – ………………
दरबारीयों – ……………
कठिंत – ……………….

(ग) निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए।
कोमल, शुद्ध, विश्वास, भारी, सत्य, मर्यादित, लाभ, परिपक्व, असफलता, उपयुक्त, गुप्त, बुरा।

(घ) दिए गए वाक्यांशों के लिए एक-एक शब्द लिखिए
(i) जिस पर विश्वास किया जा सके-विश्वासपात्र
(ii) जो पका हुआ न हो।
(iii) चित्त में दृढ़ता हो।
(iv) जिसका उत्साह नष्ट हो गया हो।
(v) जो पवित्र न हो।
(vi) सत्य में निष्ठा रखने वाला।
उत्तर
MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 2 मित्रता img 1

(ख) शब्द – शुद्ध शब्द
मीत्रता – मित्रता
अपरीमार्जित – अपरिमार्जित
आशचर्य – आश्चर्य
चतुरायी – चतुराई
प्रतीष्ठित – प्रतिष्ठित
दरबारीयों – दरबारियों
कुंठित – कुंठित।

(ग) शब्द – विलोम शब्द
कोमल – कठोर
शुद्ध – अशुद्ध
विश्वास – अविश्वास
भारी – हल्का
सत्य – असत्य
मर्यादित – अमर्यादित
लाभ – हानि
परिपक्व – अपरिपक्व
असफलता – सफलता
उपयुक्त – अनपयुक्त
गुप्त – प्रकट
बुरा- भला।

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(घ) वाक्यांश – एक शब्द
(i) जिस पर विश्वास किया जा सके – विश्वासपात्र
(ii) जो पका हुआ न हो – अपरिपक्व
(iii) चित्त में दृढ़ता हो – दृढ़चित्त
(iv) जिसका उत्साह नष्ट हो गया हो – हतोत्साहित
(v) जो पवित्र न हो – अपवित्र
(vi) सत्य में निष्ठा रखने वाला – सत्यनिष्ठ

मित्रता योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
सुसंग और कुसंग संबंधी दोहों को संकलित कर चार्ट बनाकर कक्षा में लगाइए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

प्रश्न 2.
जो रहीम उत्तम प्रकृति का करि सकत कुसंग।
चंदन विष व्यापत नहीं लिपटे रहत भुजंग॥

रहीम के इस दोहे का आशय यह है कि सज्जन पर बुरी संगति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। क्या आप इस बात से सहमत हैं? इस तरह के अन्य दोहों का संकलन कर हस्तलिखित पुस्तिका तैयार कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

मित्रता परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
युवा पुरुष को मित्र चुनने में कठिनाई कब पड़ती है?
उत्तर
जब कोई युवापुरुष अपने घर से बाहर निकलकर बाहरी संसार में अपनी स्थिति जमाता है, तब पहली कठिनाई उसे मित्र चुनने में होती है।

प्रश्न 2.
विश्वासपात्र मित्र के विषय में एक प्राचीन विद्वान ने क्या कहा है?
उत्तर
विश्वासपात्र मित्र के विषय में एक प्राचीन विद्वान ने कहा है-“विश्वासपात्र मित्र से बड़ी भारी रक्षा रहती है। जिसको ऐसा मित्र मिल जाए, उसे समझना चाहिए कि खजाना मिल गया।”

प्रश्न 3.
मित्र किसे कहते हैं?
उत्तर
मित्र उसे कहते हैं, जो एक सच्चे पथ-प्रदर्शक के समान होता है. जिस पर हम पूरा विश्वास कर सकें।

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प्रश्न 4.
सच्चे मित्र की चार विशेषताएँ लिखिए
उत्तर
सच्चे मित्र की चार विशेषताएँ इस प्रकार हैं

  1. वह प्रतिष्ठित हो।
  2. वह दृढ़चित्त और सत्य-संकल्प का हो।
  3. उसमें आत्मविश्वास हो।
  4. वह भरोसेमंद होना चाहिए।

प्रश्न 5.
प्रस्तुत पाठ से अच्छे मित्रों के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर
प्रस्तुत पाठ से अच्छे मित्रों के तीन उदाहरण इस प्रकार हैं

  1. राम और लक्ष्मण।
  2. चन्द्रगुप्त और चाणक्य।
  3. राम और सुग्रीव।

प्रश्न 6.
मित्र का कर्त्तव्य क्या बतलाया गया है?
उत्तर
मित्र का कर्त्तव्य इस प्रकार बतलाया गया है, “उच्च और महान, कार्यों में इस प्रकार सहायता देना, मन बढ़ाना, और साहस दिलाना कि हम अपनी-अपनी सामर्थ्य के बाहर काम करते जाएं।”

मित्रता दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘मित्रता’ पाठ का भाव उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘मित्रता’ निबंध आचार्य रामचंद्र शक्ल का एक विचारात्मक निबंध है। इस निबंध के द्वारा निबंधकार ने मित्रता के अर्थ, इससे सावधानी, लाभ, आदर्श और आवश्यकता को बतलाने का सफल प्रयास किया है। इस निबंध के द्वारा लेखक ने यह स्पष्ट करना चाहा है कि मित्रता की धुन सभी को होती है और सभी मित्र बनाते हैं लेकिन बहुत कम श्रेष्ठ, लाभकारी और योग्य मित्र सिद्ध होते हैं। अधिकतर तो मित्र ही होते हैं। इसलिए लेखक ने यह सुझाव दिया है कि अच्छी मित्रता करनी चाहिए। सोच-समझकर मित्रता करनी चाहिए। ऐसा इसलिए कि श्रेष्ठ मित्रों के योगदान से जीवन निश्चय ही महान् बनता जाता है।

प्रश्न 2.
‘मित्रता’ निबंध के आधार पर मित्रता से लाभ बतलाइए।
उत्तर
‘मित्रता’ निबंध में आचार्य शुक्ल ने मित्रता से लाभ पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि विश्वासपात्र मित्र जीवन की औषधि और खजाना होता है। मित्र हमारे संकल्पों को दृढ़ और दोषों को दूर, सद्गुणों का विकास करता है। हृदय में सत्य, प्रेम और पवित्रता के भावों को उत्पन्न करता है। वह कुमार्ग से हटाकर सुमार्ग पर ले जाता है। वह निराशा में आशा की ज्योति जलाता है। सच्चे मित्र में एक कशल वैद्य के सभी गुण होते हैं।

प्रश्न 3.
कुसंग का ज्वर भयानक क्यों होता है? सोदाहरण बताइए।
उत्तर
कसंग का ज्वर भयानक इसलिए होता है कि यह केवल नीति और सद्वृत्ति का ही नाश नहीं करता अपितु बुद्धि का भी विनाश करता है। उदाहरण के लिए, किसी युवा पुरुष की संगति यदि बुरी होगी तो वह उसके पैरों में बँधी चक्की के समान होगी जो उसे दिन-रात अवनति के गड्ढे में गिराती जाएगी और यदि अच्छी होगी तो सहारा देने वाली बाहू के समान होगी जो उसे निरन्तर उन्नति की ओर उठाती जाएगी।

प्रश्न 4.
‘विश्वासपात्र मित्र से बड़ी भारी रक्षा रहती है’ इस कथन के आधार पर मित्र की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर
व्यक्ति का परिचय एक से अधिक व्यक्ति से संभव है, पर मित्र उनमें कोई बिरला ही होता है और मित्रों में भी विश्वासपात्र मित्र तो बड़ी कठिनाई से प्राप्त होता है। विश्वासपात्र मित्र ही जीवन में उपयोगी सिद्ध होता है। वह प्रत्येक कठिनाई से हमें उबार सकता है। अपने हितकारी तथा उपदेशों से वह अपने मित्र की कुरीतियों को दूर कर सकता है। इस तरह विश्वासपात्र मित्र से जीवन निश्चय ही सफल हो जाता है।

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प्रश्न 5.
मित्र का चुनाव करने में क्या-क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
उत्तर
मित्र बनाते समय सर्वप्रथम उसके आचरण तथा स्वभाव पर ध्यान देना चाहिए। मित्र बनाते समय प्रायः उसकी कुछ अच्छी बातों को देखकर ही, उसे मित्र बना लेते हैं। जबकि हमें जिसे मित्र बनाना हो, उसके सम्बन्ध में पूरी तरह जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए। इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि जीवन-पथ पर कितने मित्र हमें आगे बढ़ा सकते हैं। अच्छा मित्र जहाँ हमारे जीवन की दिशा ही बदल देता है वहाँ बुरा मित्र हमें गर्त में भी ढकेल सकता है।

प्रश्न 6.
लेखक ने मित्र का क्या कर्त्तव्य बतलाया है?
उत्तर
लेखक ने मित्र के कर्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अपने मित्र में साहस, बुद्धि और एकता का भाव उत्पन्न करे। वह जीवन और मरण में अपने मित्र का सहारा बने। वह सत्यशील, न्यायी और पराक्रमी बना रहे। वह अपने मित्र का हर कदम पर सहारा बना रहे। जो अपनी सामर्थ्य से बाहर काम कर जाए। मित्र का कर्तव्य है कि वह अपने मित्र पर पूरा विश्वास करे और उसे धोखा न दे।

प्रश्न 7.
अच्छे मित्र में कौन-कौन से गुण होने चाहिए?
उत्तर
अच्छे मित्र में निम्नलिखित गुण होने चाहिए

  1. अच्छे मित्र पथ-प्रदर्शक के समान होना चाहिए।
  2. मित्र पर पूरा विश्वास करे।
  3. सच्चा मित्र भाई के समान होता है।
  4. उसमें सच्ची सहानुभूति होती है।
  5. सच्चा मित्र एक के हानि-लाभ को अपना हानि-लाभ समझता है।
  6. सच्चा मित्र जीवन व मरण में सहायक होता है।

मित्रता लेखक-परिचय

प्रश्न 1.
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
जीवन-परिचय-आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी के श्रेष्ठ निबंधकार तथा समीक्षक हैं। आपका जन्म बस्ती जिले के अगोना नामक गाँव में सन् 1884 में हुआ था। इनकी आरम्भिक शिक्षा उर्दू तथा अंग्रेजी में हुई। विधिवत् शिक्षा तो वे इंटरमीडिएट तक ही प्राप्त कर सके। शुक्ल जी ने आरंभ में मिर्जापुर के मिशन स्कूल में पढ़ाया। जब काशी में नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा ‘हिंदी शब्द सागर’ का सम्पादन आरंभ हुआ, तो शुक्ल जी को वहाँ कार्य करने का मौका मिला। फिर हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्राध्यापक नियुक्त हुए तथा विभागाध्यक्ष बने। शुक्ल जी ने अंग्रेजी, बंगला, संस्कृत तथा हिंदी के प्राचीन साहित्य का गंभीर अध्ययन किया।

शुक्ल जी का पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश ‘आनंद-कादम्बिनी’ पत्रिका के संपादन से हुआ। उसका सम्पादन उन्होंने कई वर्षों तक कुशलतापूर्वक किया था। इसके बाद वे नागरी प्रचारिणी सभा में हिंदी शब्द-सागर’ के सहयोगी संपादक नियुक्त हुए थे। इसके बाद आपने ‘नागरी प्रचारिणी’ पत्रिका का कई वर्षों तक कशलता के साथ संपादन किया। साहित्य-सेवा करते हुए शुक्ल जी ने 8 फरवरी 1941 को अंतिम साँस ली।नाएँ-यों तो शुक्ल जी प्रमुख रूप से निबंधकार और समालोचक के रूप में ही सुविख्यात हैं लेकिन इसके साथ ही कवि भी रहे हैं। यह बहुत कम चर्चा में हैं। उनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं

1. निबंध-संग्रह-

  • विचार-वीथि
  • चिन्तामणि भाग 1-2
  • त्रिवेणी।

2. समालोचना

  • जायसी, सूर और तुलसी पर श्रेष्ठ आलोचनाएँ।

3. इतिहास-

  • हिंदी-साहित्य का इतिहास
  • काव्य में रहस्यवाद।

4. कविता-संग्रह-

  • वसंत
  • पथिक
  • शिशिर-पथिक
  • हृदय का मधुर भार,
  • अभिमन्यु-वध।

5. संपादन-

  • हिंदी शब्द-सागर
  • नागरी-प्रचारिणी पत्रिका
  • तुलसी
  • जायसी।

6. अनुवाद-

  • शशांक
  • बुद्ध-चरित
  • कल्पना का आनन
  • आदर्श-जीवन,

5. मेगास्थनीज का भारतीयवर्षीय वर्णन,
6. राज्य प्रबंध-शिक्षा,
7. विश्वप्रपंच।

भाषा-शैली-शुक्ल जी की भाषा संस्कृतनिष्ठ साहित्यिक भाषा है। उसमें कहीं-कहीं तद्भव शब्द भी आए हैं। मुख्य रूप से आपकी भाषा गम्भीर, संयत, भावपूर्ण और सारगर्भित है। आपके शब्द चयन ठोस, संस्कृत और उच्च-स्तरीय हैं। उर्दू, अंग्रेजी और फारसी शब्दों के प्रयोग कहीं-कहीं हुए हैं। अधिकतर संस्कृत और प्रचलित शब्द ही आए हैं। शक्ल जी की शैली गवेषणात्मक, मुहावरेदार और हास्य-व्यंग्यात्मक है। इससे विषय का प्रतिपादन सुंदर ढंग से हुआ है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि शुक्ल जी की भाषा-शैली विषयानुकूल होकर सफल है।

व्यक्तित्व-शक्ल जी का व्यक्तित्व सर्वप्रथम कविमय व्यक्तित्व था। वह धीरे-धीरे समीक्षक और निबंधकार सहित इतिहासकार के रूप में बदलता गया। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि शुक्ल जी का व्यक्तित्व विविध है। इसीलिए वे एक साथ कई रूपों में देखे जाते हैं। अगर हम संक्षेप में उनके व्यक्तित्व का मूल्यांकन करना चाहें तो कह सकते हैं कि शुक्ल जी युग-प्रवर्तक प्रधान व्यक्तित्व के धनी साहित्यकार हैं।

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प्रश्न 2.
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल-लिखित निबंध ‘मित्रता’ का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
यह निबंध आचार्य रामचंद्र शुक्ल का विवरण प्रधान निबंध है। इसमें मित्र के विषय में अच्छा उल्लेख हुआ है। मित्र-कुमित्र का परिचय देते हुए लेखक ने मित्रता की परिभाषा और महत्त्व को बतलाया है। लेखक के अनुसार जब कोई युवक बाहरी संसार में प्रवेश करता है तो उसे सबसे पहले अपना मित्र चुनने में कठिनाई होती है। जरा-सी असावधानी के कारण कुछ लोगों से उसकी मित्रता हो जाती है। इसकी सफलता उसकी जीवन की सफलता पर निर्भर होती है। ऐसा इसलिए कि जब हम समाज में प्रवेश करते हैं तब हमारा चित्त बहुत ही कच्चा होता है। इसलिए ऐसे लोगों का साथ एकदम बुरा होता है जो हमें नियंत्रित रखते हैं। विवेक के कारण इस बात का डर नहीं रहता लेकिन युवा मन में विवेक बहुत कम होता है।

यह आश्चर्य की बात है कि घोड़े के गुण-दोष को तो लोग परखते हैं, लेकिन मित्र के नहीं। ऐसे लोग मित्रता के उद्देश्य को भूल जाते हैं। एक प्राचीन विद्वान के अनुसार-“विश्वासपात्र मित्र से बड़ी भारी रक्षा होती है। जिसे ऐसा मित्र मिल गया हो, मानो उसे खजाना मिल गया हो। इसलिए हमें अपने मित्रों से यही आशा रखनी चाहिए कि वे हमारे उत्तम संकल्पों को दृढ़ करेंगे। दोषों और त्रुटियों से बचाएँगे और हममें सत्य, पवित्रता और मर्यादा को पुष्ट करेंगे। हमें कुमार्ग से बचाएँगे-यही नहीं हमें हतोत्साह से उत्साह की ओर ले जाएंगे।छात्रावस्था में मित्रता की धुन इतनी सवार रहती है कि मित्र बनाने में आनंद का ओर-छोर नहीं होता है। उस समय मित्रता के आदर्शों को भूल जाते हैं। थोड़ी-सी बातें देखकर झट मित्र बना लेते हैं। ऐसे मित्र जीवन-संग्राम में साथ नहीं देते। वास्तव में मित्र तो एक विश्वासपात्र पथ-प्रदर्शक होता है।

दो मित्रों के बीच में परस्पर सहानुभूति होनी आवश्यक है न कि प्रकृति और आचरण आवश्यक है। इसीलिए राम और लक्ष्मण के परस्पर स्वभाव भिन्न तो रहे लेकिन मित्रता खूब निभी थी। हमें ऐसे मित्रों की खोज करनी चाहिए जिनमें हमसे कहीं अधिक आत्मबल हो। हमें उनका पल्ला उसी प्रकार पकड़ना चाहिए जैसे सुग्रीव ने राम का पकड़ा था। शिष्ट और सत्यनिष्ठ, मृदुल, पुरुषार्थी और शुद्ध बुद्धि वाले ही मित्र भरोसेमंद होते हैं। यही बातें जान-पहचान वालों के भी संबंध में लागू हैं। ऐसे लोगों से ही हम अपने जीवन को आनंदमय और उत्तम बना सकते हैं। जान-पहचान बढ़ा लेना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन जीवन-पथ पर सच्चे प्रेम का सुख और शान्ति प्रदान करने वालों का साथ मिलना निश्चय ही कठिन है।

कुसंग का असर सबसे बढ़कर भयानक होता है, क्योंकि इससे न केवल नीति और सद्वृत्ति का ही अपितु सद्बुद्धि का भी नाश होता है। इसलिए कुसंगति तो पैरों में बँधी हुई चक्की और सुसंगति सहारा देने वाली भुजा के समान होती है। यही कारण है कि कुछ ऐसी ही न पड़ने वाली बुरी बातें कुसंगति से कानों में कुछ ही समय में पड़ जाती हैं जिनसे पवित्रता नष्ट हो जाती है। इतनी जल्दी तो कोई भी अच्छी बात प्रभावित नहीं करती है। इसीलिए हमें ऐसी पूरी कोशिश करनी चाहिए कि हम किसी प्रकार की कुसंगति न करें। यह ध्यान देना चाहिए कि हम किसी प्रकार की बुरी बातों के अभ्यस्त न होवें। शुरू-शुरू में ही आने वाली हर बुरी बातों की छूत से हम बच जावें, एक पुरानी कहावत है

‘काजल की कोठरी में कैसो ही सयानो जाय,
एक लीक काजल की लागि है पै लागि है।”

मित्रता संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

गयांशों की सप्रसंग व्याख्या, अर्वग्रहण संबंधी एवं विषय-वस्त पर आधारित प्रश्नोत्तर

1. हम लोग ऐसे समय में समाज में प्रवेश करके अपना कार्य आरंभ करते हैं, जब कि हमारा चित्त कोमल और हर तरह का संस्कार ग्रहण करने योग्य रहता है। हमारे भाव अपरिमार्जित और हमारी प्रवृत्ति अपरिपक्व रहती हैं। हम लोग कच्ची मिट्टी की मूर्ति के समान रहते हैं, जिसे जो जिस रूप में चाहे, उस रूप में ढाले-चाहे राक्षस बनाए, चाहे देवता।

शब्दार्थ-चित्त-हदय। संस्कार-आदत, स्वभाव। अपरिमार्जित-मलीन। अपरिपक्व-कच्चा।

प्रसंग-यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘बाल-भारती’ में संकलित और आचार्य श्री रामचन्द्र शुक्ल द्वारा लिखित ‘मित्रता’ निबंध से है। इसमें लेखक ने नए-नए

व्यक्ति के अनुभवहीनता के स्वरूप को प्रकाश में लाते हुए कहा है कि

व्याख्या-समाज में प्रवेश करने वाले व्यक्ति लगभग जीवन-क्षेत्र के अनुभव से कोसों दूर रहते हैं। इस प्रकार के व्यक्ति अपनी अनुभवहीनता को लेकर अपना कार्य आरंभ करते हैं। उस समय ऐसे व्यक्ति अपने हृदय के बहुत ही कोमल, सरस और सरल होते हैं। यही कारण है कि उनकी योग्यता सभी प्रकार की आदतों और प्रभावों को अपनाने में सफल दिखाई पड़ती है। इस प्रकार के व्यक्ति अपने स्वभाव और स्वरूप से मलिन और असुन्दर दिखाई देते हैं। उनकी सभी प्रकार की आदतें भी पूरी कच्ची-ही-कच्ची होती हैं। इसे यों समझा जा सकता है जिस प्रकार कच्ची मिट्टी मूर्ति के समान चुपचाप और सरल होती है और जिसे चाहे जो चाहे वह बना ले। ठीक उसी प्रकार समाज में नया-नया प्रवेश करने वाला व्यक्ति भी स्वयं पर निर्भर न होकर समाज के दूसरे अनुभवी और पुराने लोगों पर ही निर्भर होता है। ऐसे लोगों के हाथ में उस नए व्यक्ति का भाग्य होता है। इसे वे देवता, राक्षस आदि जिसमें चाहें उसे बदल दें।

विशेष-

  1. भाषा में प्रवाह है।
  2. शैली बोधगम्य है।
  3. सभी तथ्य सुझावपूर्ण है।
  4. इस अंश से प्रेरणा मिलती है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) कार्य आरंभ करने के लिए लेखक ने क्या आवश्यक बतलाया है?
(ii) कार्य आरंभ करते समय हमारी प्रवृत्ति कैसी रहती है?
उत्तर
(i) कार्य आरंभ करने के लिए लेखक ने चित्त को अत्यधिक सरस, सरल और कोमल होना आवश्यक बतलाया है। इसके साथ ही उसे यह भी होना आवश्यक बतलाया है कि वह हर प्रकार के संस्कारों को ग्रहण करने योग्य हो।
(ii) कार्य आरंभ करते समय हमारी प्रवृत्ति बहुत ही कच्ची रहती है। उसे किसी प्रकार का अनुभव प्राप्त नहीं हुआ होता है। इस प्रकार वह किसी प्रकार के संस्कारों को तुरंत ही ग्रहण करने लगती है।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) कच्ची मिट्टी की मूर्ति की क्या विशेषता होती है?
(ii) ‘चाहे राक्षस बनाए, चाहे देवता’ का आशय क्या है?
उत्तर
(i) कच्ची मिट्टी की मूर्ति की यह विशेषता होती है कि वह दूसरे के अधीन होती है। वह इतनी सरल, सीधी और शान्त होती है कि उसे कोई कुछ भी रूप या आकार दे दे, वह उसका तनिक भी विरोध न करके उसे चुपचाप स्वीकार कर लेती है।
(ii) ‘चाहे राक्षस बनाए, चाहे देवता’ का आशय यह है कि समाज में प्रवेश करनेवाला हर प्रकार से अनुभवरहित होता है। वह इसीलिए आत्मनिर्भर होकर कोई काम करने में असमर्थ होता है। वह तो अनुभवी लोगों पर पूरी तरह से निर्भर होता है। वह अपने को उन्हीं लोगों को सौंप देता है। अब उनके ऊपर निर्भर होता है कि वे उसे बुरा बनाते हैं या अच्छा।

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2. मित्र भाई के समान होना चाहिए जिसे हम अपना प्रीतिपात्र बना सकें। हमारे और हमारे मित्र के बीच सच्ची सहानुभूति होनी चाहिए। ऐसी सहानुभूति जिससे एक के हानि-लाभ समझे। मित्रता के लिए यह आवश्यक नहीं कि दो मित्र एक ही प्रकार के कार्य करते हों या एक ही रुचि के हों। दो भिन्न प्रकृति के मनुष्यों में बराबर प्रीति और मित्रता रही है।

शब्दार्थ-प्रीति-प्रेम। सहानुभूति-दुःख-सुख समझने का अनुभव। रुचि-इच्छा।

प्रसंग-यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘बाल-भारती’ में संकलित आचार्य श्री रामचन्द्र शुक्ल-लिखित ‘मित्रता’ निबंध से है। इसमें लेखक ने मित्र के अच्छे स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-मित्र कल्याणकारी और उपकारी होना चाहिए। उसका किया हुआ कल्याण और उपकार निश्चित रूप से सगे भाई के समान होना चाहिए। ऐसा इसलिए कि सगे भाई का कल्याण और उपकार हर प्रकार से प्रीतिकारक सिद्ध होता है। इससे – हमारे और हमारे बने हुए मित्र के बीच परस्पर सही और वास्तविक सहानुभूति का होना परम आवश्यक होता है। इस प्रकार की सहानुभूति के द्वारा ही एक दूसरा अपनी-अपनी हानि-लाभ के विषय में सोच-समझ सकता है अन्यथा नहीं। मित्रता के विषय में यह निश्चित रूप से समझ लेना चाहिए कि परस्पर दोनों एक ही प्रकार के कार्य-व्यापार करते हों। यह भी आवश्यक नहीं कि परस्पर दोनों एक ही विचारधारा के हों। मित्र तो एक-दूसरे के विपरीत विचारधारा के होकर भी परस्पर अधिक प्रीतिकारक और कल्याणकारक सिद्ध होते हैं।

विशेष-

  1. भाव सरल और स्पष्ट है।
  2. मित्र के सच्चे स्वरूप का उल्लेख हुआ है।
  3. मित्रता के लिए आवश्यक गुणों का वर्णन हुआ है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) मित्र को भाई के समान क्यों होना चाहिए?
(ii) मित्र के बीच कैसी सहानुभूति होनी चाहिए?
उत्तर
(i) मित्र को भाई के समान होना चाहिए। यह इसलिए कि उससे हम अपना दुःख-सुख कहकर उसमें उसे भागीदार बना सकें।
(ii) मित्र के बीच वह सच्ची सहानुभूति होनी चाहिए, जो हानि-लाभ का पूरा-पूरा ध्यान रखे।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) उपर्युक्त गद्यांश में किसका उल्लेख हुआ है?
(ii) मित्रता के लिए मुख्य रूप से क्या आवश्यक है?
उत्तर
(i) उपर्युक्त गद्यांश में सच्चे मित्र के स्वरूप का उल्लेख हुआ है।
(ii) मित्रता के लिए मुख्य रूप से प्रीतिकारक और कल्याणकारक होना आवश्यक है।

3. कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। यह केवल नीति और सद्वृत्ति का ही नाश नहीं करता, बल्कि युद्ध का भी क्षय करता है। किसी युवा पुरुष की संगति यदि बुरी होगी तो वह उसके पैरों में बँधी चक्की के समान होगी, जो उसे दिन-रात अवनति के गहे में गिराती जाएगी और यदि अच्छी होगी तो सहारा देने वाली बाह के समान होगी, जो उसे निरंतर उन्नति की ओर उठाती जाएगी।

शब्दार्थ-कुसंग-बुरा संग। सद्वृत्ति-अच्छाई। क्षय-नाश। अवनति-अविकास। बाहु-भुजा। निरन्तर-हमेशा।

प्रसंग-यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘बाल-भारती’ में संकलित लेखक आचार्य श्री रामचन्द्र शुक्ल द्वारा लिखित ‘मित्रता’ निबंध से है। इसमें लेखक ने कुसंगति के भयानक फल को बतलाते हुए कहा है कि
व्याख्या-जो भी व्यक्ति एक बार भी कुसंगति में पड़ जाता है उसके भयानक फलों को भोगने के लिए मजबूर हो जाता है। ऐसा इसलिए कि कुसंगति सभी प्रकार की अच्छाइयों को ही नष्ट करने में लग जाती है। इसलिए इससे, अच्छे-अच्छे सिद्धांतों-संस्कारों और अच्छे उद्देश्यों का विनाश तो होता ही है, इसके साथ-ही-साथ सद्बुद्धि का भी पूरा विनाश होने में तनिक भी देर नहीं लगती है। इसलिए यह कहना बहुत ही उचित है कि किसी भी बुरी संगति वाले अनुभव से ही युवक की कुसंगति बहुत ही दुःखद होती है। यह तो ठीक उसी प्रकार की होती है जिस प्रकार से किसी के पैरों में बंधी हुई चक्की होती है। और वह उसे विकास और सुख की ओर न ले जाकर बार-बार दुःख के गड्ढे में ही गिराती जाती है। लेखक का पुनः कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को अच्छी संगति मिल गई है तो इससे उसको निरंतर भला और सुख ही मिलता जाएगा। इस प्रकार की संगति तो उस भुजा के समान ही होती है जो उसे हर प्रकार से सुख और कल्याण के शिखर पर बैठाने में सहायक होगी।

विशेष-

  1. भाव हृदयस्पर्शी है।
  2. उपदेशात्मक शैली है।
  3. तत्सम शब्दावली की प्रधानता है।
  4. संपूर्ण अंश प्रेरणादायक है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) कुसंगति का असर कैसा होता है?
(ii) कुसंगति का असर सबसे अधिक किस पर होता है और क्यों?
उत्तर
(i) कुसंगति का असर बहुत ही भयानक होने के कारण दुखद होता है। जिस पर कुसंगति का असर पड़ जाता है, उसके नियम-सिद्धान्त समाप्त हो जाते हैं। इससे उसकी सद्वृत्तियाँ विनष्ट हो जाती हैं। इस तरह कुसंगति से बुद्धि-विवेक देखते-देखते समाप्त हो जाते हैं।
(ii) कुसंगति का असर युवा-पीढ़ी पर सबसे अधिक पड़ता है। ऐसा इसलिए कि उसकी समझ बहुत कम होती है। उसका चित्त बिल्कुल अविकसित होता है। उसका अनुभव बिल्कुल न के बराबर होता है।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) कुसंग क्या होता है?
(ii) कुसंग का क्या फल होता है?
उत्तर-
(i) कुसंग एक भयंकर ज्वर के समान होता है, जिसकी चपेट में आने वालों को केवल हानि उठानी पड़ती है।
(ii) कुसंग का फल बड़ा ही भयानक होता है। इसकी चपेट में प्रायः युवावर्ग आता है। वह कुसंग में पड़कर हानि ही उठाता रहता है। उससे उसका बाहर निकलना असंभव-सा हो जाता है।

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4. बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिनके घड़ी भर के साथ से भी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है क्योंकि उतने ही बीच में ऐसी-ऐसी बातें कही जाती हैं जो कानों में न पड़नी चाहिए। चित्त पर ऐसे प्रभाव पड़ते हैं जिनसे उसकी पवित्रता का नाश होता है। बुराई अटल भाव से धारण करके बैठती है। बुरी बातें हमारी धारणा में बहुत दिनों तक टिकती हैं। इस बात को प्रायः सभी लोग जानते हैं कि भद्दे-फूहड़ गीत जितनी जल्दी ध्यान पर चढ़ते हैं उतनी जल्दी कोई गंभीर या अच्छी बात नहीं।

शब्दार्थ-भ्रष्ट-नष्ट। चित्त-हदय। पवित्रता-सच्चाई। अटल-स्थिर। धारणा-विचार। गंभीर-ठोस।

प्रसंग-यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘बाल-भारती’ में संकलित लेखक आचार्य श्री रामचंद्र शुक्ल-लिखित ‘मित्रता’ निबंध से है। इसमें लेखक ने अच्छी-बुरी बातों के प्रभाव के विषय में बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या-संसार में अधिकांश लोग ऐसे अवश्य ही मिल जाएँगे जिनका थोड़ा-सा भी साथ अनेक प्रकार के विनाश का कारण बन जाता है। ऐसे लोगों का साथ निश्चय ही सद्बुद्धि को विनष्ट करने में देर नहीं लगाता है। ऐसा इसलिए कि इस थोड़े से ही समय में कुछ ऐसी उलजलूल बातें अवश्य हो जाती हैं जो हर प्रकार से अनुचित और अहितकर ही होती हैं। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि बुराई का प्रभाव हृदय-स्थल पर इस तरह से पड़ता है कि इससे कहीं कुछ भी सच्चाई-अच्छाई का नामोनिशान नहीं रह जाता है। यह सब कुछ इसलिए होता है कि जो एक बार भी बुरी बातें हमारे हृदय में प्रवेश कर जाती हैं वे स्थिर और अटल भाव से होती हैं। वे बहुत दिनों तक ज्यों-की-त्यों पड़ी रहती हैं। इसलिए इस बात को सभी मानते और समझते हैं कि भद्दे और गन्दे गीतों के असर इतनी जल्दी और देर तक होते हैं कि ऐसे असर सुंदर और अच्छे गीतों के भी नहीं होते हैं।

विशेष-

  1. अच्छी और बुरी बातों के प्रभाव का आकर्षक उल्लेख है।
  2. तत्सम शब्दों की अधिकता है।
  3. शैली बोधगम्य है।
  4. सारा अंश उपदेशात्मक है।
  5. उपमा अलंकार है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i)कुसंग का असर किस प्रकार होता है?
(ii) बुराई और अच्छाई में क्या अंतर है?
उत्तर
(i) कुसंग का असर तुरंत पड़ने लगता है। यहाँ तक कि घड़ी भर में ही कुसंग अपना दुष्प्रभाव दिखाने लगता है।
(ii) बुराई और अच्छाई में बहुत बड़ा अंतर है। बुराई में अटलता होती है, जबकि अच्छाई में नहीं। बुराई तुरंत अपना प्रभाव डालती है, जबकि अच्छाई धीरे-धीरे।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) बुराई से सबसे पहले क्या हानि होती है?
(ii) उपर्युक्त गांश का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर
(i) बुराई से सबसे पहले बुद्धि की हानि होती है। इससे अच्छाई की पवित्रता विनष्ट हो जाती है। इससे हमारा सोच-समझ मलिन हो जाती है।
(ii) उपर्युक्त गद्यांश का मुख्य भाव है-कुसंगति और सत्संगति क्या होती है। इसे समझाते हुए सत्संगति का महत्त्व बतलाना।

MP Board Class 9th Hindi Solutions

MP Board Class 9th General English Essay Writing

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MP Board Class 9th General English Essay Writing

1. My Hobby

Introduction :
Hobby means some work done in free time. When a man gets time after doing his r routine work, he wants to enjoy. At this time if he does some different work, it is called his hobby. Hobbies are many such as painting, playing on some instruments, photography, stamp-collecting, gardening etc.

My Hobby—My hobby is gardening. I think it is the best hobby. Plants and trees are very useful for our life. They not only provide us food to eat, but also serve us in many ways. They make the air fresh and cool for us. They check the air pollution also. Plants give us flowers. Trees give-us fruits to eat and wood to bum. So I like trees and plants very much.

My Garden—There is no ground around our house. So I have planted several kinds of flowers in flower pots. I love flowers very much. I water the plants and care for them. I bring small plants from the nursery. I prepare the flower pots and then cultivate the plants. I give fertilizer to them. When buds appear, it gives me great pleasure. I wait for their blossoming into beautiful flowers. Sometimes when I get up in the morning and see the flowers my joy knows no bounds. My parents and other family members too become very happy to see them. Guests coming to our home appreciate my hobby.

Conclusion—Sometimes we sit in our small garden and do our home work or take tea and breakfast. It gives us great joy. My mind becomes sharp and my memory is increased in the company of flowers. Sometimes I see flowers in my dream and my
heart is filled with pleasure.

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2. An Indian Festival
Or
Diwali

Introduction—Diwali is an important festival of the Hindus. It often comes in the month of October or November every year. It is celebrated in the memory of Lord Ram’s return to Ayodhya after 14 years of exile. The people of Ayodhya welcomed Lord Ram graciously. They decorated their homes with flowers and lighted earthen lamps before their houses. Diwali is a remembrance of that day.

Preparations—Several days before people start preparing for this festival. They clean their houses and whitewash them. The merchants paint their shops and set them. The market gets a new look.

How Celebrated—People buy new clothes and new dresses. They buy many things for this festival. Children buy crackers. Ladies buy sarees and material for preparing sweets. People give presents to friends and relatives. Main days of celebration of Diwali are three—‘Dhan Teras’, ‘Roop Chaudas’ and ‘Diwali’ on Amavasya day. In the evening ladies and children bum candle and lamps. Many electric bulbs of several colours are also lighted.

Worship of Goddess Laxmi—On Diwali day people worship goddess Laxmi. They pray her for health, wealth and happiness for the whole year. The rich and the poor enjoy Diwali. Diwali also marks the end of the year.

Importance—Diwali is an all India festival. People of all parts of India and all communities celebrate’it. It is a festival of national importance. It promotes national unity also.

For AH People—All age groups of people enjoy celebration of Diwali. The rich and the poor all celebrate it as per their capacity.

Conclusion—Some people gamble and drink wine. Some are injured at the time of bursting crackers due to carelessness. However, Diwali brings happiness to every home in India.

3. Importance of Newspapers
Newspapers are the world’s mirrors.

—James Ellis

Introduction—The word News is made up of four letters N, E, W and S. Each letter symbolises one direction. N stands for North, E for East; W for West and S for South. Hence, a newspaper is a paper that contains news of all directions—North, South, East and West.

A newspaper collects information about happenings in the world through news agencies and prints them on a paper.

Contents of a Newspaper—A newspaper contains political, social, economical, religious and several other kinds of news. Everybody finds something of his/her interest in it. Children, young persons as well as old persons find newspaper interesting. There is a column for market report exhibiting wholesale prices of a lot of articles of daily use and quoting market value of shares and stocks of leading concerns. So a man of business is also interested in it. Art, music, entertainment, games, general knowledge and all such things are there in a newspaper.

There are advertisements of various kinds in the newspapers. They inform us about new and useful inventions. They are a source of income for the newspaper. Advertisements concerning matrimonial alliance provide immense relief to parents in choosing consorts for their sons or daughters. Assorted advertisements provide an unfathomable relief to people of different sorts. Only because of these advertisements we get a newspaper within our reach price.

Importance of Newspapers—Newspapers guide and teach us. They try to educate and shape public opinion. They are necessary for a democratic society. They express the views of the public in a free and fearless manner. Most of us are too busy to think of the great problems of our country, so we rely upon- the newspaper and accept the view they present to us. We can also express our views under the column ‘Letters to the Editor’.

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Conclusion—Newspaper is a powerful weapon. It is a measuring rod to determine the length of democracy in a country. And as such it should be handled carefully. Rumours and sensational news create a nasty atmosphere. Newspapers must present constructive and objective matter before their readers. They should not misuse freedom given to the press. Their criticism should not be biased. They should be impartial in their news and views.

4. Wonders of Science Or
Science is a Good Servant but a Bad Master

Introduction—It is the age of science. Science plays an important role in our life. It has made our life easier and comfortable. Science is a systematic way of knowledge and living.

Scientific Wonders—Science has given us many wonderful gifts. The various inventions of science are its wonders. We cannot imagine our life without them.

Various Inventions—Electricity is the most useful gift of science. It gives us light. Heaters, fans, coolers, refrigerators, computers etc., all work by electricity. It also runs machines and trains.

Medicine and Surgery—Science has given wonderful medicines. Vaccination helps us in preventing diseases like polio, cholera, small pox etc. It has brought down the death rate. Modem surgical equipment have made operations less painful.

Means of Communication—Today we amuse ourselves by watching television and listening to music on radio and tape recorder. Television has become a powerful medium of education and knowledge. U.G.C. and IGNOU lessons on television are very useful. Fast means of transport and communication help us to reach distant places in a short time.

Computers—Scientists have invented computers. These are wonderful inventions. Computers can do complex calculations and work quickly. They have solved a lot of problems of man.

Disadvantages of Science—-Everything has two sides. Science too has a dark side. The invention and production of atom bombs and other dangerous weapons are a great threat to the existence of humanity. They can destroy the world in seconds. Secondly, big factories, mills and other machines have polluted the atmosphere.

Conclusion—Science is a great help to modem man. If properly used it can make the life of man healthier and happier.

5. My Best Friend

Introduction— ‘No man is an island entire of itself’. We need someone to share our sorrows and joys. I have several friends but Pinki is my best friend. She studies in my class and is my neighbor.

Details—Pinki’s father is a businessman. He is a simple man. Her mother is a teacher. She is a virtuous lady. Qualities of her parents are present in Pinki also.

Her qualities—Pinki is an intelligent girl. She always stands first in class. But she is not proud. She is kind and cooperative. She helps her classmates. She is a ‘friend in need’ and thus ‘a friend indeed’. We go to school together and come home together.

Her love for games—She is good at sports and games too. Last year she won the badminton championship.

Why I like her—I like her because she has a very good nature. She is cheerful, kind, honest and truthful. She faces problems boldly. She always helps me. Everybody praises her. She bears a good moral character. She believes in simple living and high thinking.

Conclusion—A good person inspires others to be good. There is a saying that a person is known by the company he keeps. Thus her company inspires me to be good and become like her. I am proud of my friend.

6. My Mother

Introduction—‘A hand that rocks the cradle rules the world1. The above saying holds true as a child is only a mother’s reflection. ‘Mother, or mama’ the first word spoken by a child holds in itself the essence of love and care.

We can’t compare the relation of a mother with any other relation. Mother not only gives us birth but she brings us up as well, looks after us and gives all her attention to our well-being. She does many sacrifices for us.

My mother—My mother Mrs. Pramila Devi is an ideal mother. She is a symbol of love and sacrifice. She gets up early in the morning and works late till night. She keeps the home neat and clean. When I get up she gives me warm water to wash my mouth. She gives me hot tea to drink. She prepares food with keen interest. The food is tasty to eat. She pays attention to all my needs.

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Education and other qualities—My mother is B.A. She has a good knowledge of several subjects especially of Hindi and English. She possesses a great experience of many arts. She knows knitting and sewing well. She instructs us in other fields too. My mother is religious minded. She worships God daily without fail.

Social side of my mother—My mother has good relations with our neighbours. She helps them at the time of their troubles. My mother helps the poor and the needy. She takes part in various social activities. She is a member of the Woman Organisation for helping the weaker sections of the society.

7. An Ideal Teacher

Introduction—I study in Modem Public School, Bhopal. It is a very good school. It has forty teachers. All the teachers are good but Mr. S. K. Gupta is my favorite teacher.

His personality and qualities—He is about thirty-five years old. He teaches us English. He is our class teacher too. He is smart and handsome.

He believes in ‘simple living and high thinking’. He works hard with his students. He takes extra classes on his student’s demand. He helps weak students. Mr. Gupta loves us as his younger brothers. We also respect him as our elder brother.

His method of teaching—He is very punctual. His teaching method is very good. He uses simple language in teaching, so we easily understand his lessons. His examination results are always very good. He’is both strict and kind. We obey him.

His love for sports—He is good at games. He plays cricket well. He is a good sportsman. He has created an interest for cricket among the boys.

Conclusion—Mr. Gupta, therefore, possesses all the qualities of an ideal teacher. I have great respect for him in my heart. I like him a lot.

8. The Books I Like Most

Introduction—Books are our best friends. They are treasures of knowledge. No one can feel lonely in their company. They also act as our guide and teacher.

My favorite book—My favorite book is the Ramayana written by the great poet Tulsidas. The book is full of conceptions of Indian philosophy. The greatest secrets of divine knowledge are explained in simple verse. Doubts shatter, pride melts away, evil thoughts escape and greed gallops away after its study.

About the theme—The story is too well-known to be narrated in details. The deep knowledge of Hindu culture over the book is quite clear. Ram represents all that is good. Ravan stands for the evil. Ram’s victory over Ravan means the victory of truth over falsehood, or good over evil.

Conclusion—The biggest number of commentaries have been written over it. It has been translated in more than 100 languages of the world and foreigners know India through it. When they read Ramayana, they know about India’s glory. They bow their heads in honor to India.

MP Board Class 9th Sanskrit व्याकरण शब्द रूप

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MP Board Class 9th Sanskrit व्याकरण शब्द रूप

संस्कृत में तीन लिंग होते हैं-पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग। ये लिंग सदा अर्थ के अनुसार नहीं होते अपितु पहले से ही निश्चिय हैं।

उदाहरणार्थ-
पत्नी, अर्थ में ‘भार्या’ शब्द स्त्रीलिंग है तो उसी अर्थ में ‘दार’ शब्द पुल्लिंग और ‘कलत्र’ शब्द नपुंसकलिंग है। यद्यपि तीनों का अर्थ एक ही है तो भी उनके लिंग भिन्न हैं। ऐसे ही ‘काय’ और ‘देह’ शब्द पुल्लिंग हैं किन्तु ‘शरीर’ शब्द नपुंसकलिंग है।

संस्कृत में सात विभक्तियां होती हैं। (प्रथमा से सप्तमी तक)। प्रत्येक विभक्ति में तीन वचन होने के कारण प्रत्येक शब्द के इक्कीस रूप बनते हैं। इसके अतिरिक्त एक वचन में सम्बोधन के रूप भिन्न होते हैं। तीनों वचनों में मूल शब्द से चिह्न जोड़े जाते हैं। विभक्ति चिह्रों को सुप् भी कहते हैं। जिस शब्द के आगे कोई विभक्ति चिह्न लगा रहता है उसे सुबन्त या पद कहते हैं। नीचे कुछ महत्त्वपूर्ण शब्दों के रूप दिए जाते हैं।

अकारान्त पुल्लिंग शब्द
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टिप्पणी-जिन शब्दों का उच्चारण करने पर अन्त में ‘अ’ की ध्वनि आती है। वे आकारान्त शब्द कहलाते हैं।

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अकारान्त पुल्लिंग शब्दों जैसे देव, नर, नृप, बालक, विद्यालय आदि के रूप राम शब्द की तरह चलते हैं।

इकारान्त पुल्लिंग शब्द
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टिप्पणी-जिन शब्दों का उच्चारण करने पर अन्त में ‘इ’ की ध्वनि आती है, उन्हें इकारान्त शब्द कहते हैं। इकारान्त पुल्लिंग शब्दों, जैसे-कवि, कपि, गिरि, आदि के रूप रवि शब्द की तरह चलेंगे।

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उकारान्त पुल्लिंग शब्द
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टिप्पणी-जिन शब्दों के अन्त में ‘उ’ की ध्वनि आती है वे उकारान्त शब्द कहलाते हैं। उकारान्त पुल्लिंग शब्दों जैसे-साधु, शिशु आदि के रूप भानु शब्द की तरह चलते हैं।

ऋकारान्त पुल्लिंग शब्द
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नकारान्त पुल्लिंग शब्द
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स्त्रीलिंग शब्द
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टिप्पणी-इसी प्रकार रमा, बालिका, प्रभा आदि आकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के रूप चलेंगे।
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इलन्त स्त्रीलिंग वाच = वाणी
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दिश = दिशा
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ऋकारान्त मातृ (माता)
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नपुंसकलिंग शब्द
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इकारान्त नपुंसकलिंग
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उकारान्त नपुंसकलिंग
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सकारान्त नपुंसकलिंग
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तकारान्त नपुंसकलिंग
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सर्वनाम शब्द रूप
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संख्यावाचक शब्दों के रूप
‘एक’ (केवल एकवचन में)
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द्वि (दो) (द्वि शब्दों के रूप केवल द्विवचन में तीनों लिंगों में होते हैं। नंपुसकलिंग तथा स्त्रीलिंग के रूप एक से ही होते हैं।)
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पञ्चन शब्द के आगे के संख्यावाचक शब्दों के रूप तीनों लिंगों में समान होते हैं।
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संख्यावाचक शब्द
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इनमें एक केवल एकवचन में वि द्विचन में तथा शेष अष्टादशन तक बहुवचन में होते हैं। उसके बाद की संख्याएं में आती हैं। यदि द्विवचन में आई तो उनके दूने का बोध होगा और बहुवचन में कई गुने का।
यथा-शते = दो सौ। शतानि = कई सौ।

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MP Board Class 12th General English Letter Writing

MP Board Class 12th General English Letter Writing

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नोट-Letter writing में बोर्ड द्वारा निम्नलिखित प्रकार के Letters पाठ्यक्रम के लिए निर्धारित हैं
(A) Personal/Informal letters
(B) Applications for job/formal letters
(C) Business or official letters
(D) Letters to the editor पत्र दो प्रकार के होते हैं

(1) अनौपचारिक पत्र (Informal Letters)—ये पत्र रिश्तेदारों, अति निकट के लोगों तथा मित्रों के लिए लिखे जाते हैं। .
(2) औपचारिक पत्र (Formal Letters) ये वे पत्र हैं जो ऑफिसों के लिए व व्यापार सम्बन्धी कार्यों के लिए लिखे जाते हैं। ये निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

(1) Applications,
(ii) Business or official letters,
(iii) Letters to the editor. अच्छे पत्र की विशेषताएँ

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1. भाषा (Language)-पत्र की भाषा सरल तथा स्पष्ट होनी चाहिए।
2. स्पष्ट विचार (Clear views)-विचार स्पष्ट और संक्षिप्त होने चाहिए।
3. नम्र स्वभाव (Polite nature)—पत्र में नम्रतापूर्वक अपनी बात कहनी चाहिए। कठोर भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
4.लिखावट (Handwriting)-पत्र लिखावट सुन्दर होनी चाहिए, ताकि उसे सभी लोग पढ़ सकें।
5. संक्षिप्तता (Brevity)—पत्र संक्षिप्त होना चाहिए। अनावश्यक बातों को पत्र में नहीं लिखना चाहिए।

Some Examples

A. Formal Letters

I. Applications
1. You are the monitor of the class. Your classroom is not cleaned regularly. Write an application to the principal of your school requesting him to look into the matter. [2012]
Answer:
Class Monitor
Xll-B
August 25, 20
The Principal, .
Govt. H. S. School,
Ujjain

Sir,
With due respect I beg to draw your kind attention towards our dirty class-room. It has been quite some time that our classrooms are not cleaned. When we enter the room in the morning, the room, the tables and the chairs are dirty. We cannot sit on them. The floor is full of dirt. We have to clean the room and the tables before the teacher enters the classroom. This is causing bed effect on the health of the students.
I request you to look into the matter and ask the sweeper to clean the room regularly.

Yours Obediently
Deepak Kumar

2. You are Sheetal Verma, have passed XII class. Write an application to the Principal of S. N. P. W. H. S. School, Dewas, M.P. to issue you School Leaving Certificate as you have to join for higher studies in other cities. [2015,17]
Answer:
Ratan Nagar,
Dewas
October 24, 20……..

To,
The Principal,
S.N.P.W.H.S. School Dewas, M.P.

Sir,
With due respect, I want to state that 1 have passed Xllth standard from your school in this session. I have got selection in police department as constable. I need my School Leaving Certificate to join higher studies.

Therefore, I request you to kindly issue me a School Leaving Certificate. I shall be thankful.

Yours Obediently
Sheetal Verma

3. Write an application to your principal requesting him to issue a character certificate. [2016]
Answer:
45, Anand Nagar
M. G. Road
Raipur ’
June 18,20.,…
The Principal
Govt. H. S. School
Raipur

Sir,
With due respect I want to say that I have passed Xllth standard from your school in this session. I have been selected in Electricity Department as a clerk. I have been asked by the Department to submit character certificate issued by the Principal of the college last attended.

I, therefore, request you to please issue me a character certificate. I shall be thankful.

Yours obediently,
Anil Kumar

4. Write an application to the Manager, State Bank of India, Bhopal for the post of a clerk.
Answer:
123, Ashok Nagar
Bhopal
May 20,20….
The Manager,
State Bank of India,
Bhopal.

Sir,
In response to your advertisement ¡n ‘The Hindustan Times’, Thursday, dated 18. 5. 20…, for the post of a clerk, I wish to offer my candidature for it. So far as my academic qualifications are concerned, I am to submit as follows:
MP Board Class 12th General English Letter Writing img 1

My typing speed in Hindi is 30 w. p. m. My date of birth is July 23, 19 I am a young man of strong physique. I was a member of the cricket team of my college during the years 20…. – 20 ……… .

I am enclosing herewith, the attested copies of certificates, degrees and testimonials which will testify to my’ conduct and ability. I may be permitted to submit that if given a chance, J shall leave no stone unturned in serving your reputed organisation.

Yours faithfully,
Sharad Bharadwaj

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5. Write an application to the Director of Education, M. P. Bhopal, asking for a job as a teacher in an educational institution.
Answer:
C/o Ram Gopal Rastogi 100,
Civil Lines,
Muzaffar Nagar,
Ratlam [M. P.]
March 12,20
The Director of Education,
M. P.,
Bhopal

Sir,
With reference to your advertisement in The Times of India, dated March 11, 20…., for the post of teachers in trained graduate grade, I beg to offer myself as a candidate.

As regards my academic qualifications, I beg to state that I passed my B. A. examination in 20…. from Meerut University, Meerut with English Literature, Economics and Geography as my subjects. I took my B. Ed. degree from Aligarh Muslim University, Aligarh in 20 I have been teaching in a local High School for about one year with full satisfaction to all.

I am a young man of about 25 years. I am a good player of cricket and football. I may assure you, sir, that if I am given an opportunity, I shall do my utmost to prove myself worthy of the job.

Yours faithfully,
Ajay

Encl. : Xerox copies of all certificates.

II. Letters to the Editor

1. Write a letter to the Editor of a newspaper against the practice of begging in your city.
Answer:
96, Chandan Nagar,
Indore
October, 15, 20….
The Editor,
Dainik Bhaskar,
Indore

Dear Sir,
I shall be grateful to you if you permit me to express my views on street begging in our city through the columns of your esteemed daily. I wish to draw the attention of the public as well as the Government against this menance.

Begging in Ranikhet has become a common sight. Turn where you may, you will always find one or two beggars with their begging bowls asking to spare a few coins for them. Some of these beggars are quite hale and hearty and can jolly well earn their living but they seem to have taken to easy money out of the pockets of others. Let me tell you that these beggars do not spare even the tourists to this area. It is indeed a reflection of our culture and country. I would therefore, appeal to the public not to encourage these beggars and to the Government that the Anti-Beggary Law should be stringently implemented to uproot this social evil.

Yours truly,
R. K. Luthra

2. Write a letter to the Editor of a newspaper drawing attention towards acute shortage of water in your city.
Answer:
3, Laxmi Nagar,
Ujjajn
Sept. 6, 20….
The Editor, .
Dainik Jagran,
Bhopal

Dear Sir,
I wish to draw the attention of the concerned authorities towards the acute shortage of drinking water in our city causing unavoidable inconvenience to the public.

For the last one month a very serious problem has come out about drinking water in this city. A month or so ago the Water Works of this town got the tanks cleaned. Now we get water but when we keep it still for an hour or so, a great deal of dust particles collect in the bottom of our vessels.
Our verbal request to the municipal authorities have gone unheeded to so far. The existing water supply which is polluted, will also lead to spread of diseases. In the interest of health of the public, I once again request the municipal authorities to pay heed to the genuine problem of drinking-water of this city at the earliest. It is needless to say that all the citizens are paying their municipal taxes and are entitled to the minimum civic facilities like drinking water.

Yours faithfully,
Dinesh Kumar

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3. Write a letter to the Editor, The Dainik Bhaskar, Rewa drawing attention of the authorities towards the repairs of the road.
Answer:
233, Nehru Nagar,
Rewa
October 10,20….

To,
The Editor,
The Dainik Bhaskar,
Rewa

Sir,
Through the columns of your esteemed daily, we wish to draw the attention of the authorities of Nagar Mahapalika towards the bad condition of the roads of Kaiju Nagar. It has been impossible for us to move on this road for the last four months. In dark nights, it is dangerous for four-wheelers to pass this road. Pregnant women cry with pain while moving through this road. Many children have broken their legs due to big holes on the road. I make an appeal to the concerned authorities to immediately look into this matter and order for immediate repairs of the road.

Yours etc.
Avinash Mehta

III. Business or Official Letters

एक अच्छे व्यापारिक पत्र (Business letter) में बात पूर्णतः स्पष्ट होनी चाहिए। ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जाये जिससे कि पाठक को Dictionary का सहारा न लेना पड़े।
पत्र यथासम्भव संक्षिप्त होना चाहिए। आज के व्यस्त युग में व्यापारी के पास अधिक समय नहीं होता। अनावश्यक पत्र व्यवहार से बचने के लिए पूर्ण बातें लिखनी चाहिए ताकि लेखक का मन्तव्य स्पष्ट हो सके। ऐसा न हो कि पाठक को पत्र लिखकर पूछना पड़े कि लेखक क्या चाहता है अथवा जो पत्र लेखक जानकारी देना/लेना चाहता था वो अधूरी हो और पुनः पत्र लिखना पड़े और अनावश्यक देरी हो।

  1. जिस फर्म को पत्र लिखा जाता है उसका पता बायीं ओर लिखा जाता है। यदि किसी व्यक्ति को पत्र लिखा जाता है तो नाम के पहले Mr. या Shri लिखा जाता है। फर्म के नाम के पहले M/s या Messers लिखा जाता है। अच्छे व्यापारिक पत्र में संक्षेप में वह विषय दिया जाता है जिस सम्बन्ध में पत्र लिखा जा रहा है।
  2. फर्म के लिए Dear Sirs तथा व्यक्ति के लिए Dear Sir लिखा जाता है।
  3. किसी पत्र के जवाब में उस पत्र का Reference (सन्दर्भ) दिनांक सहित दिया जाता है और भविष्य के पत्र व्यवहार के लिए अपने पत्र का Ref. No. दिया जा सकता है। ताकि यदि पत्र का जवाब मिले तो पता चल सके कि किस पत्र का जवाब है।
  4. पत्र की समाप्ति Your faithfully और हस्ताक्षर से करते हैं। फर्म के नाम से पहले For लिखते हैं और हस्ताक्षर करने वाले का नाम व पद लिखते हैं।

Making Enquiries

1. Write a letter on behalf of M/s Gupta & Sons, 14, Hauz Qazi, Delhi to M/s Sita Ram Om Prakash, L. I. G. Colony, Jabalpur asking quotations for woollen clothes and their rate of discount and terms regarding payment.
Answer:
Gupta & Sons
14, Hauz Qazi,
Delhi
November 11,20

M/s Sita Ram Om Prakash,
L. I. G. Colony,
Jabalpur

Dear Sirs,
Please send us your price-list and quotations for woollen clothes within a week after the receipt of this letter.

We also request you to kindly let us know the rate of discount and terms regarding payment and delivery.

Hoping to receive an early reply.

Yours faithfully,
For Gupta & Sons,
Ramesh Gupta Manager

2. Write a letter to M/s Deepali Stationery Mart New Market, Ratlam asking them to send their rates and terms of supply of stationery items.
Answer:
28, Civil Lines,
Ratlam
10 June, 20…..

M/s Deepali Stationery Mart,
New Market,
Ratlam
Sub.: Quotation for supply of Stationery Items.

Sir,
We intend to place an order for supply of stationery items like registers, paper rims, carbon sheets, staplers, pens and other stationery items. We would also like to have your terms and conditions for the supply of these items. Thq details to required items are:
MP Board Class 12th General English Letter Writing img 2
Please let us know the mode of payment. Defective and substandard items will not be accepted. Kindly reply at the earliest.

Yours faithfully
Inder Verma
Office Superintendent

Complaints

1. Last month you bought a digital camera from Shan Electronics, Bhopal. Now you find something wrong with it. Write a letter to the dealer complaining about the problem. [2014]
Answer:
L.I.G. Colony,
Gwalior
April 12,20

The Manager,
Shan Electronics,
Bhopal

Dear Sir,
I purchased a Sony digital camera WX 501D from your shop on March 25,20…. I am facing some problems with it. The flash does not work and the camera hangs in the middle while processing the photo.

I would like to claim the warranty on my camera and, therefore, request you to get the defective parts replaced. A photostat copy of the invoice and warranty card are attached with this letter.

With thanks,

Yours faithfully,
Abhay Verma.

2. Write a letter to the Manager, Agarwal Cycle Company, Jabalpur complaining about a Cycle you bought last week.
Answer:
L. I. G. Colony,
Jabalpur March 5, 20..
The Manager,
Agarwal Cycle Co.,
Jabalpur

Dear Sir,
I purchased one cycle no. X-216879 Hercules MTB from you on March 1, 20 I regret to inform you that some of its parts are defective. The handle
has lost the polish and the saddle has given way.

I, therefore, request you to take this defective cycle back and deliver me a new cycle.

With thanks.
Yours faithfully,
Pranjal

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3. Write a letter to the Post Master of your area complaining against the postman of your area. [2016]
Answer:
19, Rajmahal Colony
Rewa ‘
July 17, 20

Subject : Complaint against postman

Dear Sir,
I regret to lodge a complaint against the postman of our area Mr. Satish Charan. He is very careless and irregular in discharging his duties. Usually he brings the dak very late. He often delivers our private letters to wrong persons. Letters are many a time tom owing to his careless handling. He demands tips for delivering money orders and insured articles. It causes us great difficulty.

Hence I request you to warn him to mend his ways and be careful and responsible or to transfer him to some other area.

A quick action is solicited.

Yours faithful
Dinesh Kumar Singh

Orders And Replies

1. Write a letter to a sports dealer placing an order.
Answer:
42, Anand Nagar,
Raipur.
July 18,200…
M/s Sportsman,
Railway Road,
Bareilly.

Dear Sirs,
Please send me the following games material by railway parcel to my address and send the receipt for payment :

Thanking you for early compliance.

Yours faithfully,
Alok Jain

2. Write a letter to the General Electrical Co., Ujjain placing an order for the supply of fans.
Answer:
Connaught Place,
New Delhi.
August 25, 20
The General Electrical Co. Ltd.,
Ujjain

Dear Sir,
Please supply us by goods train the following items within a fortnight:
2 dozen Ceiling Fans 48″
1 dozen Ceiling Fans 56″
4 dozen Table Fans 16″

R/R may please be sent through the Central Bank of India, New Delhi.

Yours faithfully,
For the Northern Electrical Stores,
R. L. Agarwal,
Manager

Reply to the above
Answer:
The General Electrical Company Limited
Khajuri Bazar
Ujjain
August 30, 20

The Northern Electrical Stores,
Connaught Place,
New Delhi.

Dear Sirs,
We thank you very much for your esteemed order of the 25th instant. We have despatched the articles this day by goods train.

The invoice for the articles amounting to Rs. 12,547/- is enclosed. This includes all incidental charges.

R/R No. A 000153 dated the 30th Aug. 20…….. is being sent through the Central Bank of India, New Delhi.

Assuring you always of our best services.

Yours faithfully,
For the General Electrical Co. Ltd.,
R. Ranjan,
Manager
Enel. 1

3. Write a letter to the Manager, Central Bank, Indore to allow over-draft facilities.
Answer:
Indore
Sept. 12,20
The Manager,
The Central Bank of India,
Indore.

Dear Sir,

We propose to keep a good stock of woollen cloth for the season. We shall, therefore, need adequate funds during October and November.

We shall feel obliged if you please allow us overdraft facilities up to Rs. 40,000/- for these two months. We are prepared to entrust you Government Securities to the value of Rs. 40,000/-.

We hope this will satisfy you.
Soliciting the favour of an early reply.

Yours faithfully,
For Khanna Brothers,
Signature and Designation

Official Letters

1. Write a letter to the Superintendent of Police/SDM about the nuisance of loudspeakers and requesting him to ban the use of them during
the examination days. [2013, 15, 18]
Answer:
B-l 1, Chanakyapuri,
Jabalpur
Oct. 20,20
The. Superintendent of Police/SDM,
Jabalpur

Sir,
I want to draw your kind attention to the nuisance caused by the use of loud-speakers. I am a student of class XII appearing at the Board examinations. It is a time when all the students are busy day and night preparing for the coming examinations. Their success depends much on the proper use of their time and the concentration of their minds. It is regrettable that majority of citizens do not realise the importance of this time for students. They enjoy full liberty to use loud-speakers at their highest pitch to celebrate every occasion that comes to their hands. The result is that we are unable to make preparations in the right way.

I, therefore, request you to kindly impose a ban on the use of loud-speakers for the period of Examinations and punish those who are found guilty.

Thanking you,

Yours faithfully,
Rohil,

MP Board Solutions

2. Write a letter to the Collector of your District about the lack of facilities and malfunctioning of the government hospital of your area.
[2011, 14, 18]
Answer:
31, Malviya Nagar Itarsi
June 30,20
The District Magistrate Itarsi.

Sir,
I wish to draw your kind attention towards the lack of facilities and malfunctioning of the government hospital of our area. The hospital has reached a sony state of affairs. The doctors and the staff are never in time and leave the hospital premises much before the hospital hours. The wards are not cleaned by the sweepers. The operation theatre wears a worse look. It is neglected by the doctors and the staff. Patients’ are forced to purchase medicines from medical stores in the market. Even serious patients are not properly attended by the doctors on duty.

As a result of this, unrest is growing among the residents of the locality. They have made several complaints against all this to the incharge of the hospital but no action has been taken so far.

I, therefore, request you to look into this matter immediately so that the government hospital of the area comes back on the track.

Yours faithfully
K. K. Bhardwaj

3. Write a letter to the SSP, Rewa about increasing goondaism in your locality.
Answer:
19, Rajmahal Colony,
Rewa
August, 18, 20
The Senior Supdt. of Police
Rewa.

Sir,
I have the honour to draw your kind attention to the increasing ‘goonda’ activity in our locality. It has become a normal practice of the goonda elements to assemble at the chaurahas of this colony. Several cases of molesting and assaulting girls and women have been registered with the Police in the last two months. It has become very difficult for couples to go for a short walk late in the evening. Many cases of robbing pedestrians, and snatching away of gold chains and ear-rings from women have gone unre ported. There is tremendous fear and a feeling of insecurity among the citizens of this area. Inspite of the repeated complaints, the Police of this area seem to be unconcerned and ineffective as they have failed to take any effective step to curb the activities of ‘goondas’.

May I hope-that you will make seripus efforts to mobilize and activize the Police of this area and keep the undesirable elements under strict vigilance in order to ensure order and peace to the citizens of this area.

Yours faithfully,
Radhey Shyam Bajaj

B. Informal/Personal Letters

Informal Letters के अन्तर्गत Letters to relatives, friends और अन्य सभी friendly (मैत्रीपूर्ण) Letters आते हैं।

ऐसे पत्रों की setting निम्न प्रकार से होनी चाहिए।

1. पत्र लेखक का पता प्रथम पृष्ठ पर ऊपर बायीं ओर लिखा जाना चाहिए।
उदाहरण-
5/77, L. I. G. Colony
Railway Road
Katni.

Note मकान नं. के बाद अर्द्ध-विराम आवश्यक नहीं है। पते की प्रत्येक पंक्ति के बाद अर्द्ध-विराम तथा अन्त में पूर्ण विराम प्रायः लगाया जाता है।

2. तारीख-पते के ठीक नीचे लिखी जानी चाहिए। यह कई प्रकार से लिखी जाती है; जैसे, 31 August 20…..; 31st August, 20……; August 31, 20…..; August 31st, 20……: 31/8/20……: 31.8.20…….

तारीख बिना विरामों के अधिक प्रचलित हो रही है।

Note-पता तथा तारीख की सभी पंक्तियाँ एक ही सीध में लिखी जा सकती हैं।

जैसे-
5/77, L. I. G. Colony,
Railway Road,
Katni
30/8/2008

MP Board Solutions

3. सम्बोधन (Salutation) इसका स्थान पत्र के प्रथम पृष्ठ पर बायीं ओर, तारीख से कुछ नीचे होता है। सम्बोधन के कई प्रकार होते हैं :
Dear Father; My dear Father; Dearest Sister; My dearest Sister; My dear Pankaj; Dearest Pankaj; My dearest Pankaj;
अधिक सुरक्षित ढंग है Dear + वह नाम जिससे आप उस व्यक्ति को पुकारते हैं, जैसे- Dear Pankaj; Dear Papa.
यदि आप किसी को Mr. (या Shri) Saxena कहते हैं तो लिखिए : Dear Mr. Saxena

4. पत्र का मुख्य भाग (Main Body of the Letter) निम्नलिखित बातें इस भाग के लिए किसी भी पत्र के लिए महत्त्वपूर्ण हैं :

  1. यदि पत्र बहुत छोटा न हो तो उसे विषय-भेद के अनुसार Paragraphs में विभाजित कीजिए।
  2. भाषा सरल, स्पष्ट व सीधी होनी चाहिए। वाक्य छोटे और सरल होने चाहिए।
  3. पत्र को बहुत लम्बा न होने दीजिए।
  4. सूक्ष्म होते हुए भी पत्र में पूरी बात होनी चाहिए।
  5. पुनरावृत्ति से बचिए।
  6. शब्दों को रेखांकित न कीजिए।
  7. इस प्रकार लिखिए कि जैसे आप सम्बोधित व्यक्ति से आमने-सामने बात कर रहे हों।।
  8. सम्बोधित व्यक्ति से अपने सम्बन्ध के अनुसार ही Familiar terms का प्रयोग करिए।
  9. Punctuation पर ध्यान दीजिए।
  10. लिखने से पूर्व सोच लीजिए कि क्या लिखना है।

5. पत्र का अन्त (Subscription या Courteous Leave-taking)-दस भाग को पत्र की समाप्ति पर नीचे बायीं ओर लिखा जाता है।

जैसे-
Yours sincerely,
Ram Prakash

पत्र का अन्त कई प्रकार से किया जाता है। परिवार के किसी सदस्य या किसी घनिष्ठ मित्र को लिखे गये पत्र में—Yours affectionately, Yours affectionate friend, Your affectionate (या loving) son, आदि।

अन्य पत्रों में—Yours sincerely, Sincerely yours; Yours cordially; Cordially yours.

Some Examples

1. You are Mohit Verma residing at 15 Abhinav Homes, Raipur. Write a letter to your friend advising him to study English and General Knowledge for competitive exams. [2014]
Answer:
15, Abhinav Homes
Raipur
26 April, 20….

Dear Sachin,
I am fine here and hope the same for you. I am glad to know that you have passed Higher Secondary Examination with very good marks. You are studious and have rightly decided to sit for the competitive exams. I would like to advice you regarding preparations for the exams. Please pay due attention to the study of English along with subjects of General Knowledge and Current Affairs. You will be required to qualify various sections like English, Reasoning and Economy. I wish you all the best for your future. Please pay my regards to your parents and love to your brother.

Yours affectionately,
Mohit Verma

2. You are Bharat Singh residing at 192, Dwaraka Colony, Bhind. Write a letter to your friend Harish, congratulating him on his brilliant success in the Higher Secondary Certificate Examination. [2013, 18]
Or
You are Naina Bhawsar residing at 2/80, Nayapura Colony, Indore. Write a letter to your friend congratulating him/her on his/her grand success in PET exams. [2014,16]
Answer:
192, Dwaraka Colony,
Bhind.
10 April, 20

Dear Harish,
I am glad to learn that you have topped your school with distinction marks in the Higher Secondary Certificate/PET Examination. 1 offer my congratulations to you on your brilliant success.

I wish that you will get better success in future. Give my regards to your parents.

With love,
Bharat Singh

3. You are Vivek. Write a letter to your younger sister advising her to celebrate Diwali without crackers. [2012, 16]
Answer:
L.I.G. Colony,
Jabalpur.
Sept. 09, 20

My Dear Sugandha,
I am quite well here and hope you are all happy and cheerful. Diwali is about 10 days away and you must be preparing for the festival. This year I will advise you to celebrate Diwali without crackers. You know that it is vety risky to fire crackers. One may be injured any time. Sometimes crackers injure eyes also. Not only this, crackers spread noise pollution and harm the environment. Keeping this in view I hope you will not celebrate Diwali with crackers this time.

Please pay me regards to mother and love to younger brother.

Yours affectionately
Vivek.

MP Board Solutions

4. Write a letter to your brother telling him how you spent your last summer vacation. [2015]
Answer:
20, LajpatKunj
Jabalpur
November 10,20…

Dear brother,
I am fine here and hope the same for you. My classes have started and I have started preparing for the up coming first term test. I would like tell you about my visit to Agra. Last summer I got a chance to stay with Uncle and Aunty at Agra. Agra is a historical city. It was the capital of Mughals. There are various historical monuments in Agra. We visited the Sikandra [Akbar’s tomb], Itmaduddaula [the tomb of Noorjahan’s father], the Agra fort, Fatehpur Sikri [the capital of Mughals before Agra] and the Taj Mahal. It was built by Shahjahan in the fond memory of his wife. Twenty thousand artisans took twenty years to complete it. It is made of white marble and studded with coloured stones. It is the pride of not only Agra but also our country. There are four big temples of Lord Shiva on the four comers of the city.

I can never forget my visit to Agra. It was a wonderful experience. I think you should also visit Agra when you get a chance to do so. I hope your studies are going well. Do write to me when you get free time.

Yours lovingly
Vivek

5. Write a letter to your father explaining why you could not get good marks in the half-yearly examination.
Or
Write a letter from a son to his father informing him of his progress at School.
Answer:
17, Saket Colony,
Ratlam.
June 9, 20…

My dear Father,
I received your letter yesterday evening. I am sorry to note that you are not satisfied with my half-yearly examination marks. As I wrote to you, I was ill during the examination days. Therefore, I could not do well. Otherwise my preparation was good. You should not worry about my studies. I shall get much better marks in the next quarterly examination.

With love,

Yours affectionate Son,
Pradeep

6. Write a letter to your father requesting him to send you Rs. 1000/- for school and hostel fee, school uniform and books. [2018]
Answer:
15, Saket Nagar,
Gwalior.
April 7,20….

Dear Father,
I am quite well here. I am studying veiy hard and regularly these days. Next month I have to pay my school and hostel fee. I also need to buy my school uniform and books.

Therefore, I shall need some extra money. I request you to send me one thousand rupees more.

With best regards to dear mother and love to Neera.

Yours affectionately,
Rakesh

7. Your friend is worried about the coming examinations. Write a letter to him giving moral support for success in the examination.
Answer:
21, Civil Lines Katni
10 April, 20….

Dear Aditi,
I am fine here and hope the same for you. I received your letter two days ago. Your performance in the Home examinations is quite satisfactory but you should work hard in Maths and English. You still have two months time to prepare for Final exams. You should make a schedule for study and give some extra time to these two subjects. Fm sure you will do well in your final exams. 1 wish you all the best. Please pay my regards to your parents.

Yours Affectionately.
Rati

MP Board Solutions

8. Write a letter to your father about your future plan.
Answer:
6, L.. I. G. Colony,
Jabalpur.
June 14,20

Dear father,
I couldn’t write to you since long. You might be feeling worried about me. Father, this year I gave my nights and days to my studies. So I didn’t get time. Now my examinations are over and I am feeling very much relaxed. Dear father, you will be glad to know that I have done well in all the papers and expect to get a first and even some position in the university.

Many of my friends are very studious and they have decided to sit for the competitive examinations. 1 have also made up my mind to appear in the I. A. S. examination. I am working’ very hard from right now. I have decided not to waste even a single minute unnecessarily. 1 shall harness my entire time and energy to this great task. I shall not get time to come home during the summer vacations.

Please tell about my thoughts to my mother also.

With love and regards to all,

Yours loving son,
Rajesh

9. Write a letter to your friend Abhinav Solanki describing a recent exciting cricket match in which your team won. Suppose you are Devendra Kumar residing at 15/K Preet Vihar, New Delhi. [2011, 15]
Answer:
15/K, Preet Vihar,
New Delhi April 7,20…

Dear Abhinav,
1 am fine here and hope that my letter will find you in a good health too. I want to share a good news with you. Recently our school cricket team participated in Inter-School Cricket Tournament. Our team won the tournament. The .final match was very exciting. Our captain decided to field first. We were given a target of 151 runs in 20 overs. We lost first wicket on the first ball. Soon we lost two more wickets at a score of 71 runs in 8 overs and we lost all hope of winning the match. But our captain played very well. I supported him with my score of 47 runs not out. Later I was awarded man of the match for making 47 runs and taking 3 important wickets. All the players were given certificates, medals and a cash prize of one thousand rupees. We got praise and appreciation from all the teachers and the principal. I shall neyer forget this match. I am very eager to show you my certificate and medal when we meet.

Please pay my regards to your parents and love to your younger brother.

Your affectionately,
Devendra

MP Board Solutions

Exercises For Practice

  1. Write a letter to your friend inviting him and his parents to a dinner party, you are hosting to celebrate your brother’s success in I. A. S. examination. [Do not write your name].
  2. Write a letter to your friend inviting him/her to attend the marriage
    ceremony of your sister. [2017]
  3. Write a letter to your elder brother telling him why you failed to pass the examination. [Do not write your name].
  4. Write a letter to your father requesting him to send you some more money next month. Give’ reasons for demanding additional money. [Do not write your name].
  5. Write a letter to your elder brother telling how you are struggling hard to maintain your position in the coming examination and some of the difficulties that are coming in your way.
  6. Write an application to the Principal of your college requesting him to issue you a character certificate. [Do not write your name].
  7. Write an application to Manager of a Sugar Mill requesting him to appoint you as a clerk in his staff. [Do not write your name].
  8. Write an application to the Principal of your college requesting him to instruct his office clerk to be prompt and regular in paying stipends to students. State facts about the delay, hardship caused to the students in this regard. [Do not write your name].
  9. Write an application to the District Supply Officer to issue a permit for 50 kg of sugar for the marriage of your sister. [Do not write your name].
  10. Write an application to the Principal of your college requesting him to give you a transfer certificate.
  11. You are the Manager of Bhatia Watch Company, Mumbai. You want to purchase 100 pairs of shoes for the workers of your company. Write a letter to the Liberty Shoe Company inviting quotations.
  12. You are Varsha/Rohan living at 28, Geeta Enclave, Indore. Write a letter to M/s Bajaj & Company, Station Road, Bhopal requesting them to cancel your order for the electric goods. Give reasons for your cancellation.
  13. You are Ashok from M/s Shanker Steel Almirah Company, Station Road, Katni. Write a letter to your customer, M/s Gauri Steel Furniture Company, Hanidia requesting for early payment.
  14. Write a letter to M/s Sharma Bros., 29, Industrial Area, Noida complaining that the sewing machine supplied by them is giving trouble. Sign yourself as Umesh of E-29, Radha Nagar, Rewa.

MP Board Class 12th English Solutions