MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 12 Administration and Life of the People during the Sultanate Period

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 12 Administration and Life of the People during the Sultanate Period

MP Board Class 7th Social Science Chapter 12 Text Book Questions

Choose the correct alternatives from the following:

Question 1.
The number of departments in the administration during the Sultanate period were.
(a) two
(b) five
(c) four
(d) seven
Answer:
(c) four

Question 2.
The main center of trade where goods from all over the country was brought was.
(a) Delhi
(b) Bengal
(c) Gujarat
(d) Multan
Answer:
(d) Multan

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Fill in the blanks from the words given in the brackets:

  1. A new language ……………. developed by mixing Hindi and Persian. (Tamil, Urdu, Kannada).
  2. The famous philosopher, thinker and writer of this period ……………. wrote in Urdu, Persian and Hindi.(Amir Khusro, Kabirdas, Nahak, Chisti)
  3. In the field of surgery …………….. and …………… were famous. (Sadruddin and Aimuddin, Machendra and Jog, Vaduruddin and Bami).

Answer:

  1. Urdu
  2. Amir Khusro
  3.  Machendra and Jog

Match the following column A and B L
img
Answer:
1. (b) Delhi
2. (a) Bijapur
3. (d) Tried to remove the diffrences between Hindus and Muslims.
4. (c) Founder of Sikhism

MP Board Class 7th Social Science Chapter 12 Short Answer Type Questions

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Question 1.
Write any two points regarding the social system during the Sultanate period.
Answer:

  • The caste rules were strictly followed. The women did not enjoy much freedom and the purdah system became very common.
  • The practice of child marriage, polygamy and sati stystem was prevalent in the society.

Question 2.
What were the main sources of income during the Sultanate Period?
Answer:
The main sources of income during the Sultanate period was tax on land which was 1/2, or 1/3 rd of the total produce. The other source of income was tax on irrigation, toll tax, mineral extraction, property tax and tax on pilgrimage.

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Question 3.
Write two features of the architecture during the Sultanate period with examples.
Answer:
Pointed arches, domes and lean miners are the main features of architecture of the period.

Question 4.
What were the main teachings of the Bhakti Saints?
Answer:
All the saints of the Bhakti movement preached universal brotherhood and love. They- preached oneness of God for all religions. The couplets of do has of Kabirdas preached Hindu- Muslim unity and denounced all forms of rituals, sacrifices and religious fanaticism.

MP Board Class 7th Social Science Chapter 12 Long Answer Type Questions

Question 1.
Describe the language, literature and scientific progress during the Sultanate period.
Answer:
Language, literature and scientific progress during the Sultanate period are:

  • The temples and mosques were the primary educational centers. In some places, primary schools were also established.
  • There were provisions for higher education.
  • The main language was Persian. Many Persian words began to be used in Indian languages.
  • A new language Urdu developed during this period, which was a mixture of Hindi and Persian language.
  • During Sultanate period the regional languages flourished and excellent literary work was created.
  • In some Hindu Kingdoms like Vijayanagar Sanskrit was the court language. Various Sanskrit books were translated in various Indian as w ell as Arabic and Persian languages also.
  • With the introduction of paper, the oldest available texts were reproduced during fins period throughout the country.

Medicines:
During the Sultanate period Maulana Badmddin, Maulana Sadruddin and Azimuddin were famous physicians. Machandra and Jog were famous surgeons.

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 13 भारतीय प्रजातन्त्र की कार्यप्रणाली

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 13 भारतीय प्रजातन्त्र की कार्यप्रणाली

MP Board Class 10th Social Science Chapter 13 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 10th Social Science Chapter 13 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
मध्य प्रदेश की विधानसभा की सदस्य संख्या कितनी है ? (2009, 12)
(i) 320
(ii) 270
(iii) 250
(iv) 230
उत्तर:
(iv) 230

प्रश्न 2.
राज्य सभा के सदस्यों को नामजद करने का अधिकार किसे है ?
(i) राष्ट्रपति को
(ii) प्रधानमन्त्री को
(iii) राज्यपाल को
(iv) सर्वोच्च न्यायालय को।
उत्तर:
(i) राष्ट्रपति को

प्रश्न 3.
राज्य में अध्यादेश जारी करने का अधिकार इनमें से किसे है ?
(i) राज्यपाल
(ii) गृह मन्त्री
(iii) मुख्यमन्त्री
(iv) राष्ट्रपति
उत्तर:
(i) राज्यपाल

प्रश्न 4.
किसी राज्य का राज्यपाल किसका अनिवार्य अंग रहता है ?
(i) संसद
(ii) विधान सभा
(iii) न्यायपालिका
(iv) राज्य सभा।
उत्तर:
(ii) विधान सभा

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 13 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सर्वोच्च न्यायालय (उच्चतम न्यायालय) के न्यायाधीश किस आयु में सेवानिवृत्त होते हैं ? (2009, 11)
उत्तर:
सर्वाच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर कार्य कर सकते हैं।

प्रश्न 2.
लोकसभा की सदस्य संख्या मध्य प्रदेश में कितनी है ?(2011)
उत्तर:
लोकसभा में मध्य प्रदेश से 19 सदस्य निर्वाचित होकर जाते हैं।

प्रश्न 3.
लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव कौन करता है ? (2013)
उत्तर:
लोकसभा सदस्य।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 13 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकसभा के सदस्य की योग्यताएँ लिखिए। (2009)
उत्तर:
लोकसभा सदस्य की योग्यताएँ – लोकसभा सदस्य के लिए निर्धारित योग्यताएँ निम्न प्रकार हैं –

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. उसकी आयु 25 वर्ष या उससे अधिक हो।
  3. वह केन्द्र या प्रान्त सरकारों ने अधीन किसी लाभ के पद पर न हो।
  4. उसे किसी सक्षम न्यायालय में पागल या दिवालिया घोषित न किया हो।
  5. उसे संसद के किसी कानून द्वारा चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित न किया गया हो।

प्रश्न 2.
जिला पंचायत के कार्य लिखिए। (2009, 13)
उत्तर:
जिला पंचायत के कार्य-जिला पंचायत के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –

  1. जिले की आन्तरिक जनपद पंचायतों तथा ग्राम पंचायतों पर नियन्त्रण रखना तथा उनका मार्गदर्शन करना।
  2. जनपद पंचायत की योजनाओं का उचित ढंग से समन्वय करना।
  3. जिले की उन योजनाओं को जो दो अथवा अनेक जनपद पंचायतों के अन्तर्गत विचाराधीन हैं उन्हें व्यावहारिक रूप देना।
  4. प्रमुख प्रयोजनों के लिए पंचायतों द्वारा की गयी अनुदान की माँग को राज्य सरकार तक पहुँचाना।
  5. राज्य सरकार द्वारा दिए गए कार्यों को व्यावहारिक रूप देना।
  6. परिवार कल्याण, बाल-कल्याण तथा खेलकूद व विकास सम्बन्धी क्रियाकलापों में राज्य सरकारों को सलाह देना।

प्रश्न 3.
प्रधानमन्त्री के कार्य लिखिए। (2009, 13)
उत्तर:
प्रधानमन्त्री के प्रमुख कार्य अग्रलिखित हैं –

  1. प्रधानमन्त्री का सर्वप्रथम कार्य मन्त्रिपरिषद् का गठन करना होता है।
  2. मन्त्रियों के बीच विभागों का वितरण।
  3. मन्त्रिपरिषद् की बैठकों की अध्यक्षता करना।
  4. मन्त्रियों के विभागों तथा कार्यों की देख-भाल करना।
  5. प्रधानमन्त्री, राष्ट्रपति तथा मन्त्रिमण्डल के बीच कड़ी का काम करता है।
  6. विदेशों के साथ सम्बन्धों की स्थापना, सन्धियाँ तथा समझौते करना प्रधानमन्त्री का ही उत्तरदायित्व है।
  7. राष्ट्रपति के संकटकालीन अधिकारों का प्रयोग करना।

प्रश्न 4.
राज्यसभा के कार्य लिखिए। (2011)
उत्तर:
राज्यसभा के कार्य –

  1. राज्यसभा को लोकसभा के समान विधि निर्माण की शक्ति प्राप्त है।
  2. राज्यसभा के सदस्य प्रश्न पूछकर, सार्वजनिक महत्त्व के विषयों पर बहस करके मन्त्रिमण्डल पर नियन्त्रण रखते हैं।
  3. राज्यसभा के सदस्य राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं।
  4. राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति, उच्च न्यायपालिका तथा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के विरुद्ध महाभियोग लगाने तथा उन्हें हटाने का प्रस्ताव पारित करने का अधिकार ।
  5. राष्ट्रपति द्वारा जारी की गयी आपातकालीन उद्घोषणा का राज्यसभा द्वारा भी स्वीकृत किया जाना आवश्यक है।

प्रश्न 5.
राज्यपाल के चार कार्य लिखिए। (2010,11,15)
उत्तर:
राज्यपाल के कार्य-राज्यपाल के प्रमुख कार्य निमनलिखित हैं –

  1. राज्यपाल विधानसभा के बहुमत दल के नेता को मुख्यमन्त्री बनाता है।
  2. मुख्यमंत्री के परामर्श के आधार पर वह अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
  3. राज्य के महाधिवक्ता तथा राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष की नियुक्ति भी राज्यपाल करता है।
  4. विधानमण्डल द्वारा पारित कोई भी विधेयक राज्यपाल के हस्ताक्षर के बिना कानून का रूप नहीं ले सकता।
  5. राज्यपाल अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है।
  6. राज्यपाल राज्य विधानमण्डल के अधिवेशन बुलाता है और उनका सत्रावसान करता है।
  7. मुख्यमन्त्री के परामर्श से वह विधानसभा भंग भी कर सकता है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 13 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संघात्मक शासन की विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (2009, 16)
उत्तर:
संघात्मक शासन प्रणाली का आशय

शासन की वह प्रणाली जिसमें शासन की शक्ति संविधान द्वारा केन्द्रीय सरकार अर्थात् संघ की सरकार और प्रान्तीय अर्थात् राज्य सरकारों के मध्य विभाजित कर दी जाती है। दोनों सरकारों की शक्ति का स्रोत संविधान होता है। संविधान सर्वोच्च होता है। संविधान संशोधन की प्रक्रिया प्रायः कठोर होती है और न्यायपालिका की सर्वोच्चता अनिवार्य होती है। संविधान का लिखित एवं कठोर होना आवश्यक है। शासन की यह प्रणाली संघात्मक शासन प्रणाली होती है।

संविधान में भारत को ‘राज्यों का संघ’ कहा गया है। संघात्मक शासन के लक्षण भारतीय संविधान में मौजूद हैं। संघात्मक पद्धति में संघ और राज्य संविधान द्वारा उन्हें सौंपे गये अधिकारों (शक्तियों) का पालन अपनी-अपनी सीमा में करते हैं। भारतीय शासन प्रणाली के संघात्मक लक्षण निम्नलिखित हैं –

(1) लिखित तथा कठोर संविधान – भारत का संविधान लिखित एवं कठोर है। इस दृष्टि से भारत का संविधान संघात्मक है।

(2) शक्तियों का विभाजन – भारत में केन्द्र व राज्यों के बीच संविधान द्वारा शक्तियों का विभाजन स्पष्ट रूप से किया गया है। भारत में केन्द्र तथा राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों के अन्तर्गत किया गया है –

  1. संघ सूची
  2. राज्य सूची
  3. समवर्ती सूची।

(3) न्यायपालिका की स्वतन्त्रता – संघात्मक शासन के लिए न्यायपालिका का स्वतन्त्र होना भी अनिवार्य है। भारत में सर्वोच्च न्यायालय इस आवश्यकता की पूर्ति करता है। संविधान की रक्षा का भार इसी पर है।

(4) दुहरा प्रतिनिधित्व – दोहरा प्रतिनिधित्व संघीय शासन की प्रमुख विशेषता है। भारत में संसद का निम्न सदन (लोकसभा) नागरिकों का प्रतिनिधित्व करता है और उच्च सदन (राज्य सभा) राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है। अतः भारत में संघीय सरकार की व्यवस्था की गयी है।

(5) दोहरी सरकारें – भारत में संघ और राज्य दोनों में सरकार होती है। संघ में कार्यपालिका होती है जिसमें राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री के नेतृत्व में मन्त्रिपरिषद् है तथा जनप्रतिनिधियों की व्यवस्थापिका (संसद) है। इसी प्रकार राज्यों में कार्यपालिका और व्यवस्थापिका है जिसमें राज्यपाल और मुख्यमन्त्री के नेतृत्व में मन्त्रिपरिषद् तथा जनप्रतिनिधियों की विधानसभा है। यह व्यवस्था दोहरी शासन प्रणाली कहलाती है।

प्रश्न 2.
केन्द्र व राज्य सरकार के मध्य प्रशासनिक शक्तियों का विभाजन किस प्रकार किया गया है ? समझाइए।
उत्तर:
केन्द्र व राज्य सरकार के मध्य प्रशासनिक शक्तियों का विभाजन

भारतीय संघात्मक प्रणाली में संघात्मक व्यवस्था के अनेक लक्षण हैं फिर भी उसमें कुछ लक्षण संघ को शक्तिशाली बनाते हैं। शक्ति विभाजन से यह स्पष्ट है जहाँ महत्त्वपूर्ण विषयों पर तो उसे शक्तियाँ दी गई हैं, साथ ही समवर्ती सूची के विषयों पर भी उसके द्वारा बनाये गये कानूनों की प्रधानता दी जाती है। इसके अतिरिक्त जिन विषयों का उल्लेख इन सूचियों में नहीं किया गया है वे सब विषय संघ सरकार को सौंपे गये हैं। संघ की ये शक्तियाँ अवशिष्ट शक्तियों के नाम से जानी जाती हैं।

संविधान के कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिनके द्वारा संघ सरकार राज्यों पर नियन्त्रण एवं प्रभाव रखती है।

(1) राज्य सरकारों को निर्देश – राष्ट्रीय महत्त्व के विषयों में केन्द्र सरकार राज्य सरकारों को निर्देश देती है। इन निर्देशों का पालन राज्यों द्वारा किया जाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशों से राजनयिक सम्पर्क आदि इस श्रेणी में आते हैं।

(2) संघीय कार्यों को राज्य सरकारों को सौंपना – संघीय कार्यपालिका कुछ कार्य राज्य सरकारों को सौंप सकती है। किसी अन्तर्राष्ट्रीय सन्धि या समझौते के पालन के लिए संघ राज्यों को आदेश दे सकता है। रेलवे मार्गों की सुरक्षा आदि विषयों से सम्बन्धित ऐसे ही आदेश दिए जा सकते हैं।

(3) आर्थिक सहायता – राज्य सरकारों को जो राशि करों से प्राप्त होती है वह अपर्याप्त होती है। आय के महत्वपूर्ण साधन केन्द्र के पास हैं। केन्द्र सरकार राज्यों को समय-समय पर अनुदान देती है।

(4) संसद के अधिकार – संसद को यह अधिकार है कि वह कानून बनाकर एक राज्य को विभाजित कर दे या दो राज्यों या उनके भागों को मिलाकर एक नये राज्य का गठन कर दे। इस प्रकार किसी राज्य का क्षेत्र बढ़ाने, घटाने उसकी सीमाओं में परिवर्तन करने का अधिकार संसद को प्राप्त है।

(5) अखिल भारतीय सेवाएँ – भारत में कुछ सेवाएँ अखिल भारतीय सेवाएँ हैं; जैसे-आई. ए. एस. (भारतीय प्रशासनिक सेवा), आई. पी. एस. (भारतीय पुलिस सेवा) आदि इन सेवाओं में चयन संघीय लोक सेवा आयोग करता है। इन पदों की सेवा शर्तों का निर्धारण केन्द्रीय सरकार करती है।

(6) राज्य सची में वर्णित विषयों पर कानून बनाना – राज्यों को यह अधिकार है कि वह राज्य सूची के विषयों पर कानून बना सके तथा प्रशासन कर सके, परन्तु राज्यों का यह अधिकार अन्तिम नहीं है। निम्न परिस्थितियों में संसद, राज्य सूची के विषयों पर कानून बना सकती है

  1. राज्यसभा द्वारा किसी प्रान्तीय सूची के विषय को राष्ट्रीय महत्व का विषय घोषित करने पर।
  2. राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल की घोषणा किए जाने पर।
  3. राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने पर राष्ट्रपति के द्वारा राज्य की विधायनी शक्ति संसद को सौंपने पर।
  4. यदि राज्य विधानमण्डल स्वयं इस आशय का प्रस्ताव पारित कर दे कि किसी विषय विशेष पर संसद कानून बनाए।

भारतीय संविधान के उपर्युक्त लक्षण यह स्पष्ट करते हैं कि संघ सरकार अधिक शक्तिशाली है।

प्रश्न 3.
संसद में विधेयक पारित होने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। (2018)
अथवा
साधारण विधेयक और वित्त विधेयक में क्या अन्तर है ? (2012)
[संकेत – ‘साधारण विधेयक’ शीर्षक देखें।]
उत्तर:
कानून बनाने के लिए विधेयक संसद में प्रस्तुत किए जाते हैं। विधेयक दो प्रकार के होते हैं I. साधारण विधेयक, II. धन विधेयक।

I. साधारण विधेयक-साधारण विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किए जा सकते हैं किन्तु वित्त विधेयक राष्ट्रपति की अनुमति से लोकसभा में ही प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

विधेयक पारित होने की प्रक्रिया
संसद में एक साधारण विधेयक को पास होने के लिए निम्नलिखित अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है –

(1) प्रथम वाचन या विधेयक का प्रस्तुतीकरण – संसद का कोई भी सदस्य एक माह की पूर्व सूचना पर लोकसभा/राज्यसभा अध्यक्ष की अनुमति मिलने पर विधेयक को प्रस्तुत करता है। प्रथम वाचन के समय केवल शीर्षक को पढ़कर सुनाया जाता है। साधारणतः प्रथम वाचन पर कोई वाद-विवाद नहीं होता अर्थात् विधेयक का प्रस्तुतीकरण प्रथम वाचन है।

(2) दूसरा वाचन – दूसरा वाचन शुरू होने के पूर्व विधेयक की प्रतियाँ सभी सदस्यों को वितरित की जाती हैं। इस स्तर पर विधेयक के प्रत्येक अनुच्छेद पर विस्तार से विचार नहीं होता केवल मूल अवधारणा पर विचार होता है। इस अवसर पर कोई संशोधन भी प्रस्तुत नहीं किया जाता। यदि आवश्यक समझा जाता है तो विधेयक को संयुक्त प्रवर समिति को भेजा जाता है।

(3) समिति स्तर – सदन में दूसरे वाचन में पास होने के पश्चात् बिल को विस्तृत विचार-विमर्श के लिए बिल से सम्बन्धित समिति के पास भेज दिया जाता है। बिल पर विचार करने के पश्चात् समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करती है, जो सदन के पास भेज दी जाती है।

(4) प्रतिवेदन स्तर – समिति प्रतिवेदन तथा समिति द्वारा विधेयक में जो संशोधन किया जाता है उसकी प्रतियाँ सदन के सदस्यों को दी जाती हैं। सदन में विधेयक पर चर्चा होती है। सदस्य अपनी ओर से संशोधन प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं। संशोधन से सम्बन्धित प्रत्येक धारा पर विचार-विमर्श तथा वाद-विवाद होता है। अन्त में विधेयक पर मतदान होता है। यदि मतदान उपरान्त विधेयक को स्वीकार कर लिया जाता है तो यह चरण पूर्ण हो जाता है।

(5) तृतीय वाचन – प्रतिवेदन स्तर के उपरान्त विधेयक पारित होने की व्यवस्था अन्तिम अवस्था या तृतीय वाचन कहलाता है। उस स्तर पर विधेयक की प्रत्येक धारा पर विचार न होकर मूल भावना पर विचार होता है। इस अवस्था में विधेयक में कोई परिवर्तन नहीं होता। यदि विधेयक को सदन पारित कर देता है तो सदन के अध्यक्ष या सभापति के हस्ताक्षर से विधेयक को प्रमाणित कर उसे दूसरे सदन में भेज दिया जाता है।

(6) विधेयक का दूसरे सदन में जाना – किसी भी एक सदन में जब विधेयक स्वीकृत हो जाता है तो उसे दूसरे सदन में भेजा जाता है। दूसरे सदन में विधेयक उपर्युक्त प्रक्रिया से ही गुजरता है।

(7) राष्ट्रपति की स्वीकृति – संसद के दोनों सदनों में जब विधेयक पारित हो जाता है तब उसे राष्ट्रपति की स्वीकृति हेतु भेजा जाता है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के उपरान्त वह विधेयक कानून बन जाता है, तब उसे सरकारी गजट में प्रकाशित कर दिया जाता है।

II.धन विधेयक – आय-व्यय से सम्बन्धित सभी विधेयक धन विधेयक कहे जाते हैं। व्यवहार में केवल मन्त्री ही लोकसभा में धन विधेयक प्रस्तुत करते हैं। धन विधेयक सर्वप्रथम लोकसभा में प्रस्तुत किये जाते हैं। लोकसभा द्वारा पारित होने पर धन विधेयक राज्यसभा में प्रस्तुत किये जाते हैं। राज्यसभा को 14 दिन के अन्दर धन विधेयक पर अपना विचार प्रकट करने का अधिकार होता है। यदि राज्यसभा इस अवधि में अपना विचार प्रस्तुत नहीं करती तो वह धन विधेयक दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है और उसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेज दिया जाता है। राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर किये जाने पर कानून बन जाता है।

प्रश्न 4.
राष्ट्रपति के संकटकालीन अधिकारों का वर्णन कीजिए। (2010, 14)
अथवा
राष्ट्रपति की संकटकालीन शक्तियों का वर्णन कीजिए। (2009)
उत्तर:
राष्ट्रपति के संकटकालीन अधिकार
संकट का सामना करने के लिए राष्ट्रपति को संकटकालीन अधिकार दिये गये हैं। संकटकाल की घोषणा निम्नलिखित परिस्थितियों में की जा सकती है –

(1) देश में बाह्य आक्रमण, देश में होने वाले सशस्त्र विद्रोह, राज्यों में संवैधानिक व्यवस्था विफल होने पर या वित्तीय संकट आने पर राष्ट्रपति आपातकाल लागू कर सकते हैं। मन्त्रिमण्डल की सलाह पर ही राष्ट्रपति आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं-ऐसी किसी भी घोषणा पर दो माह के भीतर संसद के दोनों सदनों की पुष्टि आवश्यक है। इस अवस्था में संसद को सम्पूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए विधि निर्माण का अधिकार प्राप्त हो जाता है। संघ सरकार ऐसी स्थिति में राज्य सरकारों को आवश्यक आदेश दे सकती है।

(2) राज्यपाल के प्रतिवेदन से या अन्य तरीके से राष्ट्रपति को यदि विश्वास हो जाता है कि किसी राज्य का प्रशासन, संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चल पा रहा है, तब राष्ट्रपति केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल की स्वीकृति से राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकते हैं। ऐसी अधिसूचना पर दो माह के भीतर संसद के दोनों सदनों की पुष्टि आवश्यक है। घोषणा अवधि में सम्बन्धित राज्य का सम्पूर्ण या आंशिक शासन राष्ट्रपति के हाथ में आ जाता है। राज्य के शासन संचालन का अधिकार वह राज्यपाल को सौंप सकता है। इस अवधि में प्रान्तों की विधि निर्माण की शक्ति संसद को प्राप्त हो जाती है। इस अवधि में राज्यपाल उच्च न्यायालयों की शक्ति को छोड़कर राज्य की सम्पूर्ण प्रशासकीय शक्तियों का प्रयोग कर सकता है।

(3) जब राष्ट्रपति को यह विश्वास हो जाता है कि देश में गम्भीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है तो वह आर्थिक आपातकाल लागू कर सकता है।

प्रश्न 5.
मन्त्रिपरिषद के कार्यों का वर्णन कीजिए। (2017)
उत्तर:
मन्त्रिपरिषद् के कार्य

सर जॉन मेरिएट का कहना है, “मन्त्रिपरिषद् वह धुरी है जिस पर प्रशासन का चक्र घूमता है।” मन्त्रिपरिषद् के कार्यों की विवेचना हम निम्न प्रकार कर सकते हैं –

  1. नीति निर्धारित करना – देश की आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, वैदेशिक आदि समस्याओं का हल करने के लिए मन्त्रिपरिषद् समस्त पहलुओं पर विचार करके नीति निर्धारित करती है।
  2. नियुक्ति सम्बन्धी कार्य – देश के भीतर एवं बाह्य महत्त्वपूर्ण पदों पर की जाने वाली महत्त्वपूर्ण नियुक्तियाँ; जैसे-राजदूत, राज्यपाल, विभिन्न आयोगों के सदस्य एवं अध्यक्ष, महान्यायवादी आदि की नियुक्ति मन्त्रिमण्डल द्वारा की जाती है।
  3. विधायी कार्य – यद्यपि कानून बनाने का कार्य संसद का है, लेकिन हमारे देश में संसदीय प्रणाली है। इसलिए मन्त्रिपरिषद् तथा संसद का घनिष्ठ सम्बन्ध रहता है। संसद में कानून बनाने के लिए जितने विधेयक प्रस्तुत किये जाते हैं, उनमें लगभग सभी का प्रारूप मन्त्रिपरिषद् तैयार करता है।
  4. विदेशों से सम्बन्धित कार्य – विदेश नीति का निर्धारण मन्त्रिपरिषद करता है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सन्धियाँ तथा समझौते करना, दूसरे राष्ट्रों के साथ राजनयिक सम्बन्धों की स्थापना करना, उनको मान्यता देने आदि का कार्य करता है। युद्ध तथा शान्ति का निर्णय करने का कार्य भी मन्त्रिपरिषद् का ही है।
  5. वित्त सम्बन्धी कार्य – देश के आय-व्यय पर मन्त्रिमण्डल का नियन्त्रण रहता है। वित्तमन्त्री बजट तैयार करता है, मन्त्रिमण्डल में प्रस्तुत करता है। मन्त्रिमण्डल की स्वीकृति के बाद उसे सदन में प्रस्तुत करता है। यदि बजट को लोकसभा स्वीकृति नहीं देती तो सम्पूर्ण मन्त्रिमण्डल को त्यागपत्र देना होता है।
  6. राष्ट्रपति को परामर्श – मन्त्रिपरिषद् समय-समय पर राष्ट्रपति को परामर्श देता है। राष्ट्रपति मन्त्रिमण्डल की सलाह को मानने के लिए बाध्य है।

उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि मन्त्रिमण्डल ही देश की वास्तविक कार्यपालिका है।

प्रश्न 6.
सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों का वर्णन कीजिए। (2018)
उत्तर:
सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियाँ

भारत के सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियाँ निम्नानुसार हैं –

(1) प्रारम्भिक क्षेत्राधिकार-ऐसे विवाद जो देश के अन्य न्यायालयों में नहीं जाते केवल सर्वोच्च न्यायालय में ही प्रस्तुत होते हैं।

(i) राज्यों के मध्य विवाद

  1. जब केन्द्रीय सरकार तथा एक राज्य या अधिक राज्यों के मध्य विवाद हो।
  2. जिस विवाद में एक ओर केन्द्रीय सरकार तथा दूसरी ओर एक या कुछ राज्य हों। केन्द्रीय सरकार तथा एक राज्य या अधिक राज्यों के मध्य विवाद हो।
  3. यदि विवाद दो राज्यों के मध्य हो।

(ii) मौलिक अधिकारों से सम्बन्धित विवाद
नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय को समुचित कार्यवाही करने की शक्ति प्राप्त है।

(2) अपीलीय क्षेत्राधिकार – सर्वोच्च न्यायालय भारत का अन्तिम अपीलीय न्यायालय है। सर्वोच्च न्यायालय के अपील सम्बन्धी क्षेत्राधिकार को तीन भागों में बाँटा जा सकता है

  1. संवैधानिक अपील – यदि किसी मामले में संविधान की व्याख्या का प्रश्न निहित है, तो उसकी अपील सर्वोच्च न्यायालय में की जा सकती है।
  2. दीवानी अपीलें – सर्वोच्च न्यायालय में उस दीवानी मुकदमे की अपील की जा सकती है। जब वही उच्च न्यायालय यह प्रमाणित कर दे कि मुकदमा सर्वोच्च न्यायालय में अपील के योग्य है।
  3. फौजदारी की अपीलें – सर्वोच्च न्यायालय में निम्नलिखित फौजदारी की अपीलें की जा सकती हैं

(क) यदि उच्च न्यायालय ने निम्न न्यायालय के निर्णय को बदलकर किसी व्यक्ति को मृत्यु-दण्ड, आजन्म कारावास या 10 वर्ष का कारावास का दण्ड दिया हो।
(ख) यदि उच्च न्यायालय इस प्रकार का प्रमाणपत्र दे दे कि यह मामला उच्चतम न्यायालय में अपील करने योग्य है।
(ग) यदि उच्च न्यायालय ने किसी मुकदमे को अपने पास मँगाकर किसी व्यक्ति को दण्ड दिया हो।

(3) परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार-संविधान की धारा 143 के अनुसार यदि राष्ट्रपति किसी संवैधानिक या कानूनी प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श लेना चाहे तो राष्ट्रपति को परामर्श दे सकता है।

(4) न्यायिक पुनरावलोकन सम्बन्धी क्षेत्राधिकार-सर्वोच्च न्यायालय को न्यायिक पुनर्निरीक्षण का अधिकार भी प्राप्त है। इस अधिकार के प्रयोग से वह संसद या राज्य विधान-मण्डल द्वारा पारित किये गये किसी भी ऐसे कानून को अवैध घोषित कर सकता है जो संविधान के विरुद्ध हो। संविधान की व्याख्या करने का अन्तिम अधिकार सर्वोच्च न्यायालय के पास है। इस प्रकार संघीय शासन व्यवस्था में सर्वोच्च न्यायालय की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

(5) अभिलेख न्यायालय-उच्चतम न्यायालय देश का सबसे बड़ा न्यायालय है। यह अभिलेख न्यायालय के रूप में कार्य करता है। इसका अर्थ यह है कि इसके निर्णयों का रिकॉर्ड रखा जाता है तथा अन्य वैसे मुकदमे आने पर उनका हवाला दिया जाता है। अभिलेख न्यायालय के दो अर्थ हैं –

  1. इस न्यायालय के निर्णय सब जगह साक्षी के रूप में स्वीकार किये जाएँगे और इन्हें भी किसी भी न्यायालय में प्रस्तुत किये जाने पर उनकी प्रामाणिकता के विषय में प्रश्न नहीं उठाया जाएगा।
  2. इस न्यायालय के द्वारा ‘न्यायालय अवमानना’ के लिए किसी भी प्रकार का दण्ड दिया जा सकता है।

(6) अन्य कार्य-सर्वोच्च न्यायालय उपरोक्त अधिकारों के अतिरिक्त निम्न कार्य भी करता है –

  1. अपने अधीनस्थ न्यायालयों का निरीक्षण एवं जाँच।
  2. अपने तथा अपने अधीनस्थ कर्मचारियों व अधिकारियों की सेवा शर्तों का निर्धारण।
  3. न्यायालय की अवमानना करने वाले किसी भी व्यक्ति को दण्डित करने की शक्ति।

सर्वोच्च न्यायालय के कार्य एवं व्यवहार से हमारे देश में लोकतन्त्र की जड़ें मजबूत हुई हैं तथा नागरिकों के मौलिक अधिकार सुरक्षित हुए हैं।

प्रश्न 7.
पंचायती राज व्यवस्था को समझाते हुए स्थानीय संस्थाओं के कार्यों का वर्णन कीजिए। (2017)
उत्तर:
पंचायती राज्य व्यवस्था

भारत के समस्त ग्रामीण प्रदेशों में सफाई व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, जल व्यवस्था तथा स्वास्थ्य सेवाओं आदि की व्यवस्था करने के लिए ग्राम पंचायतों की व्यवस्था की गई है। यदि गाँव छोटे हैं तो वहाँ दो या दो से अधिक गाँवों को मिलाकर पंचायत बनती है। ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी अपने गाँवों का प्रबन्ध स्वयं करते हैं। गाँव के लिए यह व्यवस्था पंचायत राज व्यवस्था के नाम से विख्यात है। गांधी जी पंचायती राज व्यवस्था के बड़े पक्षधर थे। उनका मत था कि जब तक भारत के ग्रामों में जीवन का आधार लोकतान्त्रिक नहीं होगा तब तक भारत में वास्तविक प्रजातन्त्र की स्थापना नहीं होगी। देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय शासन की स्थापना उन राज्यों के विधानमण्डलों द्वारा निर्मित कानूनों के अनुसार की गई है। इस कारण सभी राज्यों के स्थानीय शासन समान न होकर भिन्न-भिन्न प्रकार के हैं। मध्य प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था का ढाँचा निम्न प्रकार का है –

  1. ग्रामों के लिए ग्राम सभा और ग्राम पंचायत।
  2. प्रत्येक विकास खण्ड के लिए जनपद पंचायत।
  3. प्रत्येक जिले के लिए जिला पंचायत।

इस प्रकार पंचायतों के तीन स्तर हैं।

स्थानीय संस्थाओं के कार्य
नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम के कार्य समान ही हैं। तीनों संस्थाएँ अपने-अपने क्षेत्र में निम्नलिखित कार्य करती हैं –

  1. आवश्यकता के अनुसार सड़कें बनवाना तथा उनकी मरम्मत व सफाई की व्यवस्था करना।
  2. सार्वजनिक सड़कों तथा भवनों के लिए प्रकाश की व्यवस्था करना।
  3. मकानों में आग लगने पर उन्हें बुझाने की व्यवस्था करना।
  4. असुविधाजनक या खतरनाक भवनों को हटाना।
  5. आपत्तिजनक या समाज विरोधी व्यापार का विनिमयन करना।
  6. नगर की स्वच्छता की व्यवस्था करना।
  7. संक्रामक रोगों पर नियन्त्रण रखना।
  8. कांजी हाउस खोलना तथा उनका प्रबन्ध करना।
  9. जन्म-मृत्यु तथा विवाह का पंजीयन करना।

स्थानीय शहरी विकास नागरिकों को अनेक प्रकार की सुविधाएँ देता है। यह नागरिकों की स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 13 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 10th Social Science Chapter 13 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकसभा में सदस्यों की अधिकतम संख्या है (2009)
(i) 538
(ii) 540
(iii) 545
(iv) 552
उत्तर:
(iv) 552

प्रश्न 2.
राज्यसभा की सदस्य संख्या है (2009)
(i) 300
(ii) 275
(iii) 250
(iv) 350
उत्तर:
(iii) 250

प्रश्न 3.
राज्यसभा की सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु है -(2009)
(i) 21 वर्ष
(ii) 25 वर्ष
(iii) 30 वर्ष
(iv) 35 वर्ष
उत्तर:
(iii) 30 वर्ष

प्रश्न 4.
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए न्यूनतम आयु सीमा है (2009)
(i) 45 वर्ष
(ii) 35 वर्ष
(iii) 40 वर्ष
(iv) 21 वर्ष
उत्तर:
(ii) 35 वर्ष

प्रश्न 5.
वित्त विधेयक का निर्णय करता है -(2009)
(i) वित्त मन्त्री
(ii) प्रधानमन्त्री
(iii) लोकसभा अध्यक्ष
(iv) राष्ट्रपति।
उत्तर:
(iv) राष्ट्रपति।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. संसदीय शासन प्रणाली में राष्ट्रपति …………………… का शासक होता है। (2012)
  2. संसद के दो सदन हैं …………………… और ……………………। (2012)
  3. लोक सभा में बहुमत दल के नेता को …………………… कहते हैं। (2018)
  4. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश …………………… की आयु तक अपने पद पर कार्य कर सकते हैं।
  5. स्थानीय प्रशासन की सबसे छोटी इकाई …………………… है।

उत्तर:

  1. नाममात्र
  2. लोकसभा और राज्य सभा
  3. प्रधानमत्री
  4. 65 वर्ष
  5. ग्राम पंचायत।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
सर्वोच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश एवं 30 अन्य न्यायाधीश होते हैं।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत होता है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति प्रधानमन्त्री करते हैं।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
पंचायत का कार्यकाल सात वर्ष का होता है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 5.
प्रधानमन्त्री की सलाह पर राष्ट्रपति लोकसभा को कभी भी भंग कर सकता है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 6.
राज्यसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 7.
लोकसभा को उच्च सदन कहा जाता है।
उत्तर:
असत्य

जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 13 भारतीय प्रजातन्त्र की कार्यप्रणाली 1
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (घ)
  3. → (ङ)
  4. → (ग)
  5. → (क)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
लोकसभा की सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु क्या है ? (2009, 17)
उत्तर:
25 वर्ष

प्रश्न 2.
भारत में मौलिक अधिकारों का संरक्षक कौन है ? (2014)
उत्तर:
सर्वोच्च न्यायालय

प्रश्न 3.
लोकसभा में सदस्य संख्या कितनी है ? (2011)
उत्तर:
552

प्रश्न 4.
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु क्या है ? (2009, 11)
उत्तर:
65 वर्ष

प्रश्न 5.
राज्यपाल को पद की शपथ कौन दिलाता है ? (2012)
उत्तर:
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

प्रश्न 6.
राज्यसभा सदस्य के निर्वाचन के लिए न्यूनतम आयु कितनी है ? (2012)
उत्तर:
30 वर्ष

प्रश्न 7.
मध्य प्रदेश की विधानसभा की सदस्य संख्या क्या है ? (2011)
उत्तर:
230

प्रश्न 8.
राज्य की कार्यपालिका का प्रधान कौन होता है ? (2009)
उत्तर:
मुख्यमंत्री

प्रश्न 9.
नगरपालिका और नगर निगम के विभिन्न क्षेत्रों के निर्वाचित प्रतिनिधि को क्या कहते हैं ? (2014)
उत्तर:
पार्षद।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 13 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
केन्द्रीय मन्त्रिपरिषद् में किन-किन स्तर के मन्त्री होते हैं ?
उत्तर:
केन्द्रीय मंत्रिपरिषद् में तीन प्रकार के मन्त्री होते हैं –

  1. कैबिनेट मन्त्री
  2. राज्यमन्त्री
  3. उपमन्त्री।

प्रश्न 2.
किस प्रक्रिया के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पदच्युत किया जा सकता है ?
उत्तर:
संसद के प्रत्येक सदन की समस्त संख्या के बहुमत द्वारा तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के विरुद्ध उसे दुराचारी होने का प्रस्ताव पारित होने पर राष्ट्रपति द्वारा उसे उसके पद से अपदस्थ किया जा सकता है। अभी तक महाभियोग लगाकर किसी भी न्यायाधीश को नहीं हटाया गया है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 13 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राज्यपाल की नियुक्ति किस प्रकार होती है ? राज्यपाल पद की योग्यताएँ बताइए।
उत्तर:
राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। व्यवहार में राज्यपाल की नियुक्ति संघीय मन्त्रिपरिषद् की सलाह पर राष्ट्रपति करते हैं। राज्यपाल की अनुपस्थिति में राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राज्यपाल का पद संभालते हैं।

राज्यपाल पद की योग्यताएँ –

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. उसकी आयु 35 वर्ष पूरी हो चुकी है।
  3. वह संघ या राज्य में कहीं लाभ के पद पर न हो।
  4. वह संसद या राज्य विधानमण्डल का सदस्य न हो।

प्रश्न 2.
राज्यपाल की प्रमुख विधायी शक्तियाँ लिखिए। (2009)
उत्तर:
राज्यपाल की प्रमुख विधायी शक्तियाँ –

  1. राज्यपाल विधानसभा का अनिवार्य अंग होता है। वह विधानसभा की बैठकों को बुलाता है, बैठकों को स्थगित करता है तथा उन्हें विसर्जित करता है। मुख्यमन्त्री के परामर्श पर विधासभा को भंग कर सकता है। आवश्यकतानुसार विधानमण्डलों को अपना सन्देश भेज सकता है।
  2. विधान मण्डलों द्वारा स्वीकृति विधेयकों पर राज्यपाल की स्वीकृति अनिवार्य है। वित्त विधेयकों के अतिरिक्त राज्यपाल विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को पुनः विचार के लिए वापस भेज सकता है।
  3. जब विधानसभा का अधिवेशन न चल रहा हो तो राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है।
  4. जब राज्यपाल को यह अनुभव होता है कि राज्य का प्रशासन संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार चलना सम्भव नहीं हो रहा हो तब वह राज्य में संविधान तंत्र की विफलता की सूचना राष्ट्रपति को देता है। राज्यपाल पोर्ट के आधार पर ही राष्ट्रपति राज्य में संकटकाल लागू करता है। ऐसी स्थिति में वह राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।

प्रश्न 3.
व्यवस्थापिका के कोई पाँच कार्य लिखिए। (2016)
उत्तर:
व्यवस्थापिका के प्रमुख कार्य निम्न हैं –

  1. कानून निर्माण-देश के शासन को संचालित करने के लिए कानूनों के निर्माण का कार्य व्यवस्थापिका करती है।
  2. संविधान संशोधन आवश्यकतानुसार संविधान में व्यवस्थापिका आवश्यक संशोधन करने का कार्य करती है।
  3. प्रशासनिक कार्य-व्यवस्थापिका कार्यपालिका पर नियन्त्रण करने का महत्वपूर्ण कार्य करती है।
  4. राज्य व शासन की नीति का निर्धारण-राज्य को दिशा देने एवं नीति-निर्धारण का कार्य व्यवस्थापिका करती है।
  5. वित्त सम्बन्धी कार्य-सरकार द्वारा निर्धारित करों को लगाने और करों को कम या समाप्त करने तथा शासन के व्ययों को स्वीकृति प्रदान करने का कार्य व्यवस्थापिका द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 4.
कार्यपालिका क्या है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कार्यपालिका – कार्यपालिका सरकार का दूसरा महत्वपूर्ण अंग है। सरकार के समस्त अंगों की कार्यकुशलता के लिए अन्तिम रूप से कार्यपालिका ही उत्तरदायी है। हमारे देश में संघीय व्यवस्था होने के कारण कार्यपालिका के दो स्वरूप हैं-सम्पूर्ण देश का शासन चलाने के लिए केन्द्रीय कार्यपालिका होती है जबकि राज्यों का शासन चलाने के लिए प्रान्तीय कार्यपालिका होती है। केन्द्रीय कार्यपालिका में राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद् सम्मिलित हैं। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद तथा प्रथम प्रधानमन्त्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू थे।

प्रश्न 5.
लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव कैसे किया जाता है ? उसकी शक्तियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
लोकसभा अध्यक्ष के कार्य लिखिए। (2009, 12, 15)
उत्तर:
लोकसभा अपने सदस्यों में से एक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का निर्वाचन करती है।

कार्य और शक्तियाँ –

  1. अध्यक्ष के द्वारा लोकसभा की सभी बैठकों की अध्यक्षता की जाती है और अध्यक्ष होने के नाते उसके द्वारा सदन में शान्ति व्यवस्था और अनुशासन बनाये रखने का कार्य किया जाता है।
  2. लोकसभा का समसत कार्यक्रम और कार्यवाही अध्यक्ष के द्वारा ही निश्चित की जाती है। वह सदन के नेता के परामर्श से विभिन्न विषयों के सम्बन्ध में वाद-विवाद का समय निश्चित करता है।
  3. अध्यक्ष ही यह निश्चय करता है कि कोई विधेयक वित्त विधेयक है या नहीं।
  4. संसद और राष्ट्रपति के बीच सारा पत्र व्यवहार उसके द्वारा ही होता है।
  5. कार्यपालिका व शासन की अन्य सत्ताओं से सदन के सदस्यों के अधिकारों की रक्षा का कार्य अध्यक्ष के द्वारा ही किया जाता है।

इस प्रकार लोकसभा के अध्यक्ष की शक्तियाँ काफी विस्तृत हैं। वस्तुतः वह सदन की शक्ति, प्रतिष्ठा तथा गौरव का प्रतीक होता है।

प्रश्न 6.
राष्ट्रपति पद के लिए निर्धारित योग्यताएँ बताइए एवं उसका कार्यकाल क्या है ?
उत्तर:
राष्ट्रपति पद के लिए निर्धारित योग्यताएँ निम्न प्रकार हैं –

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. उसकी आयु 35 वर्ष से कम न हो।
  3. उसमें वे सभी योग्यताएँ हों, जो लोकसभा के सदस्यों के लिए निर्धारित की गई हैं।
  4. वह केन्द्र सरकार या राज्य सरकार के अधीन आर्थिक लाभ वाले पद पर कार्य न करता हो

कार्यकाल – राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष निश्चित किया गया है।

प्रश्न 7.
भारत के राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियाँ लिखिए।
उत्तर:
भारत के राष्ट्रपति की कार्यपालिका सम्बन्धी शक्तियाँ निम्न प्रकार हैं –

  1. राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री की नियुक्ति करता है तथा उसके परामर्श पर अन्य मन्त्रियों को नियुक्त करता है।
  2. राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्त तथा नियन्त्रक व महालेखा परीक्षक की शक्तियों से सम्बन्धित नियमों का निर्माण करता है।
  3. राज्यों के राज्यपाल, सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य, विदेशों के लिए राजदूतों आदि की नियुक्ति वही करता है।
  4. अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में वह अपने देश का प्रतिनिधित्व करता है।
  5. वह भारत की जल, थल और वायु तीनों प्रकार की सेनाओं का प्रधान सेनापति होता है। उसी के नाम से युद्ध या युद्धबन्दी की घोषणा होती है।
  6. राष्ट्रपति यह देखता है कि राज्यों का शासन प्रबन्ध संविधान के अनुसार चल रहा है या नहीं।

प्रश्न 8.
भारत के राष्ट्रपति की विधायी शक्तियाँ क्या हैं ?
उत्तर:
भारत के राष्ट्रपति की विधायी शक्तियाँ निम्न प्रकार हैं –

  1. राष्ट्रपति संसद के अधिवेशन को बुलाता है और अधिवेशन समाप्ति की घोषणा करता है।
  2. राष्ट्रपति को राज्यसभा के 12 सदस्यों को मनोनीत करने का अधिकार है।
  3. संसद द्वारा पास किया गया विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षरों से कानून बनता है।
  4. अध्यादेश जारी करके आवश्यकता पड़ने पर संसद का अधिवेशन बुलाता है।
  5. राष्ट्रपति को लोकसभा भंग करने का अधिकार है लेकिन इस अधिकार का प्रयोग राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री की सलाह से करता है।

प्रश्न 9.
मुख्यमन्त्री के कोई पाँच कार्य लिखिए। (2016)
उत्तर:
मुख्यमन्त्री के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –

  1. मुख्यमन्त्री का कार्य मन्त्रिपरिषद् का गठन करना होता है।
  2. मन्त्रियों के बीच विभागों का वितरण करता है।
  3. मुख्यमन्त्री ही मन्त्रिपरिषद् की बैठकों की अध्यक्षता करता है।
  4. आवश्यकता पड़ने पर मन्त्रियों को उनके विभाग से सम्बन्धित कार्य के लिए निर्देश दे सकता है।
  5. मुख्यमन्त्री राज्यपाल एवं मन्त्रिपरिषद् के बीच की कड़ी के रूप में कार्य करता है। वह मन्त्रिपरिषद् के निर्णयों के सम्बन्ध में राज्यपाल को सूचना देता है।

प्रश्न 10.
प्रधानमन्त्री शासन का केन्द्रबिन्दु है। स्पष्ट कीजिए।
अथवा
प्रधानमन्त्री के पद का महत्व लिखिए।
उत्तर:
भारत में प्रधानमन्त्री का पद विशेष महत्त्व का होता है। वह प्रशासनिक व्यवस्था का आधार होता है। वह मन्त्रिमण्डल का अध्यक्ष, राष्ट्रपति का प्रमुख परामर्शदाता तथा लोकसभा का नेता होता है। मन्त्रिमण्डल के सदस्यों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमन्त्री की सिफारिश के अनुसार की जाती है। वह अपने मन्त्रिमण्डल के सहयोग से राष्ट्र की प्रशासनिक तथा आर्थिक नीतियों का निर्माण करता है। वह शासन के विभिन्न विभागों में समन्वय स्थापित करता है। अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में प्रधानमन्त्री राष्ट्र का नेतृत्व करता है। इस प्रकार संसद, देश तथा विदेश में प्रधानमन्त्री शासन-सम्बन्धी नीति का प्रमुख अधिकृत प्रवक्ता होता है।

प्रश्न 11.
प्रधानमन्त्री और मन्त्रिपरिषद के आपसी सम्बन्धों की चर्चा कीजिए।
उत्तर:

  1. प्रधानमन्त्री, मन्त्रिपरिषद् की बैठकों की अध्यक्षता करता है और मन्त्रिमण्डल की समस्त कार्यविधि पर उसका पूर्ण नियन्त्रण होता है।
  2. मन्त्रिपरिषद् के सदस्यों में विभागों का वितरण प्रधानमन्त्री के द्वारा ही किया जाता है।
  3. प्रधानमन्त्री मन्त्रियों के विभागों में परिवर्तन कर सकता है और उनसे त्यागपत्र की माँग कर सकता है।

प्रश्न 12.
‘केन्द्रीय मन्त्रिपरिषद्’ का गठन किस तरह किया जाता है ?
उत्तर:
लोकसभा के बहुमत दल वाले नेता को राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री नियुक्त करता है और प्रधानमन्त्री की सलाह से अन्य मन्त्रियों को नियुक्त करता है। राष्ट्रपति के लिए यह आवश्यक है कि वह लोकसभा के बहुमत प्राप्त दल के नेता को ही प्रधानमन्त्री चुने। अन्य मन्त्रियों के चुनाव में भी राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री का परामर्श मानने के लिए बाध्य है। संविधान में यह निश्चित नहीं किया गया है कि मन्त्रिमण्डल में कितने मन्त्री होंगे। इनकी संख्या आवश्यकतानुसार प्रधानमन्त्री निश्चित करता है। प्रत्येक मन्त्री को प्रायः एक या अधिक विभागों का अध्यक्ष बनाया जाता है।

प्रश्न 13.
सामूहिक उत्तरदायित्व से क्या आशय है ?
अथवा
“मन्त्रिपरिषद् एक साथ तैरती है और एक साथ डूबती है।” इस कथन का सत्यापन कीजिए।
उत्तर:
संयुक्त उत्तरदायित्व से आशय यह है कि मन्त्री अपने कार्यों के लिए संसद के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी हैं। मन्त्रिमण्डल द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय समस्त मन्त्रिमण्डल का निर्णय माना जाता है और संसद यदि किसी एक भी मन्त्री या प्रधानमन्त्री के विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव पास कर दे तो सम्पूर्ण मन्त्रिमण्डल को अपना त्याग-पत्र देना पड़ता है। भारत में मन्त्रिपरिषद् केवल लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है।

प्रश्न 14.
उच्चतम न्यायालय गठन किस तरह होता है ? समझाइए।
उत्तर:
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्त राष्ट्रपति करता है। मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में वह उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों से परामर्श ले सकता है। अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का परामर्श लेता है। इस समय उच्चतम न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश तथा 30 अन्य न्यायाधीश हैं।

प्रश्न 15.
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए क्या योग्यताएँ होनी चाहिए ?
उत्तर:
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की योग्यताएँ-सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए निम्न योग्यताएँ होनी चाहिए

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. वह किसी उच्च न्यायालय या दो या दो से अधिक न्यायालयों में लगातार कम-से -कम 5 वर्ष तक न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुका हो अथवा किसी एक या एक से अधिक उच्च न्यायालय में कम-से-कम 10 वर्ष अधिवक्ता रह चुका हो।
  3. राष्ट्रपति की दृष्टि में वह कोई उत्कृष्ट विधिवेत्ता हो।

प्रश्न 16.
किस प्रक्रिया के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पदच्युत किया जा सकता है ?
उत्तर:
संसद के प्रत्येक सदन की समस्त संख्या के बहुमत द्वारा तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के विरुद्ध उसे दुराचारी होने का प्रस्ताव पारित होने पर राष्ट्रपति द्वारा उसे उसके पद से अपदस्थ किया जा सकता है। अभी तक महाभियोग लगाकर किसी भी न्यायाधीश को नहीं हटाया गया है।

प्रश्न 17.
राज्य की विधानसभा की रचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राज्य की विधानसभा विधानमण्डल का निम्न सदन है। इसके सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा सम्पन्न होता है। राज्य के सभी स्त्री-पुरुषों को जिनकी आयु 18 वर्ष या इससे अधिक है, मतदान करने का अधिकार होता है।

कार्यकाल – राज्य विधानसभा का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है परन्तु इस अवधि से पूर्व भी राज्यपाल द्वारा इसे भंग किया जा सकता है।

सदस्य संख्या – भारतीय संविधान के अनुसार किसी भी राज्य की विधानसभा में 500 से अधिक तथा 60 से कम सदस्य नहीं हो सकते हैं।

सदस्यों की योग्यताएँ

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. कम से कम 25 वर्ष की आयु का हो।
  3. वह सरकार के अधीन लाभ के पद पर न हो।
  4. वह संसद द्वारा निर्धारित योग्यताएँ पूरी करता हो।

प्रश्न 18.
ग्राम पंचायत के कोई पाँच कार्य लिखिए।
उत्तर:
ग्राम पंचायत के निम्नलिखित पाँच कार्य हैं –

  1. गाँवों में सफाई की व्यवस्था करना तथा सड़कों, कुओं, तालाबों आदि का निर्माण करना।
  2. ग्रामीण सड़कों पर प्रकाश की व्यवस्था करना।
  3. सड़कों के किनारे नालियों का निर्माण करना।
  4. मृत्यु और जन्म का लेखा रखना।
  5. संक्रामक रोगों की रोकथाम की व्यवस्था करना।

प्रश्न 19.
जिला पंचायत का गठन कैसे होता है ?
उत्तर:
जिला पंचायत का गठन राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा करती है। इस अधिसूचना द्वारा सम्पूर्ण जिले को इतनी संख्या में विभाजित किया जाता है कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र की जनसंख्या यथासम्भव 50,000 हो। एक निर्वाचन क्षेत्र से एक सदस्य निर्वाचित किया जाता है। किसी भी जिला पंचायत के सदस्यों की संख्या कम-से-कम 10 और अधिक-से-अधिक 35 हो सकती है। जिला पंचायतों में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए उनके जिले में स्थान जनसंख्या के अनुपात में आरक्षित रखे जाएँगे।

प्रत्येक जिला पंचायत का निर्माण निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर होता है –

  1. निर्वाचन क्षेत्र से चुने गये सदस्य।
  2. जिला सहकारी बैंक तथा विकास बैंक का अध्यक्ष।
  3. लोकसभा के वे समस्त सदस्य जो संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो पूर्णरूप में या अल्परूप में जिले का भाग है।
  4. मध्य प्रदेश राज्यसभा से निर्वाचित राज्यसभा के वे समस्त सदस्य जिनका नाम उस जिले में किसी भी ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में हो।
  5. राज्य विधानसभा के वे सदस्य जो उस जिले से चुने गये हों।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 13 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकसभा की किन्हीं पाँच शक्तियों का वर्णन कीजिए। (2014)
उत्तर:
लोकसभा की शक्तियाँ निम्न प्रकार हैं –
(1) विधायी शक्ति – लोकसभा का प्रमुख कार्य विधि निर्माण है। संविधान के अनुसार विधि निर्माण में लोकसभा एवं राज्यसभा की शक्तियाँ बराबर हैं परन्तु व्यवहार में लोकसभा ज्यादा शक्तिशाली है। साधारण रूप से समस्त महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में ही प्रस्तुत किए जाते हैं।

(2) कार्यपालिका पर नियन्त्रण – संविधान के अनुसार मन्त्रिमण्डल लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। मन्त्रिमण्डल तब तक ही क्रियाशील रह सकता है जब तक लोकसभा का उसमें विश्वास है। लोकसभा के सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछकर, शासकीय नीतियों पर कार्यस्थगन प्रस्ताव तथा अविश्वास प्रस्ताव रखकर सरकार पर नियन्त्रण रखते हैं।

(3) वित्तीय शक्ति – संविधान के द्वारा वित्तीय मामलों में लोकसभा को शक्तिशाली बनाया गया है। वित्त विधेयक लोकसभा में ही पारित किए जाते हैं- यद्यपि वित्त विधेयक लोकसभा से पारित होने के बाद राज्यसभा में जाते हैं किन्तु राज्यसभा के द्वारा धन विधेयको पर 14 दिनों के अन्दर स्वीकृति देनी होती है।

(4) संविधान में संशोधन – लोकसभा राज्यसभा के साथ मिलकर संविधान में संशोधन कर सकती है।

(5) विविध कार्य – लोकसभा राष्ट्रपति पर महाभियोग भी लगा सकती है, उपराष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए राज्यसभा के पारित प्रस्ताव पर चर्चा करती है, उच्च एवं उच्चतम न्यायालयों के न्यायाधीशों के विरुद्ध महाभियोग प्रस्तावों पर चर्चा करती है। राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए संकटकाल की पुष्टि एक माह के भीतर लोकसभा द्वारा होना अनिवार्य है। अन्यथा ऐसी घोषणा अपने आप निरस्त हो जायेगी।

प्रश्न 2.
उच्च न्यायालय की रचना का संक्षिप्त विवेचन कीजिए।
अथवा
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति किस प्रकार होती है ?
उत्तर:
प्रत्येक राज्य में एक उच्च न्यायालय होता है जिसके अधीन अन्य न्यायालय कार्य करते हैं, परन्तु संसद दो से अधिक राज्यों के लिए भी एक ही उच्च न्यायालय की स्थापन कर सकती है। उच्च न्यायालय के मुख्य तथा कुछ अन्य न्यायाधीश होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

नियुक्ति – उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करते समय राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा राज्य के राज्यपाल से सलाह लेता है। अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय वह सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा राज्यपाल के अतिरिक्त राज्य के मुख्य न्यायाधीश से भी सलाह लेता है।

योग्यताएँ – उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए भारत का नागरिक होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त वह कम-से-कम दस वर्ष तक किसी अधीनस्थ न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुका हो अथवा कम-से-कम दस वर्ष तक उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में कार्य कर चुका हो।

कार्यकाल – उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु होने पर अवकाश ग्रहण कर सकते हैं। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का कार्यकाल 62 वर्ष की आयु तक ही निश्चित किया गया है।

प्रश्न 3.
उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उच्च न्यायालय प्रत्येक राज्य का उच्चतम न्यायालय होता है। अन्य शब्दों में, प्रत्येक राज्य में वहाँ की न्यायपालिका के शिखर पर एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था है। उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है –

  1. आरम्भिक क्षेत्राधिकार
  2. अपील सम्बन्धी क्षेत्राधिकार
  3. प्रशासकीय क्षेत्राधिकार

(1) आरम्भिक क्षेत्राधिकार – आरम्भिक क्षेत्राधिकारों में निम्नलिखित तथ्य आते हैं –

  1. संविधान की व्याख्या करना।
  2. नागरिकों के अधिकारों के सुरक्षा सम्बन्धी मामले। यदि कोई अधिकारी या सरकारी संस्था नागरिकों के मौलिक अधिकारों का अपहरण करता है, तो उच्च न्यायालय उसके विरुद्ध लेख जारी कर सकता है; जैसे-परमादेश, अधिकार पृच्छा आदि
  3. कम्पनी कानून से सम्बन्धित मामले उच्च न्यायालय में आरम्भ किये जा सकते हैं।
  4. वसीयत, विवाह-विच्छेद आदि के मामले भी उच्च न्यायालय सुनता है।

(2) अपील सम्बन्धी क्षेत्राधिकार – उच्च न्यायालय अपने अधीन न्यायालयों के निर्णयों की अपीलें सुनता है। इसमें दीवानी, फौजदारी तथा राजस्व सम्बन्धी सभी प्रकार के मुकदमे हो सकते हैं। फौजदारी मुकदमों में सत्र न्यायालय द्वारा दिये गये मृत्युदण्ड आदेश पर उच्च न्यायालय की पुष्टि आवश्यक है।

(3) प्रशासकीय क्षेत्राधिकार – प्रशासकीय अधिकार के अन्तर्गत राज्यपाल, उच्च न्यायालय के परामर्श से ही जिला न्यायाधीश की नियुक्ति करता है। इसके अतिरिक्त उच्च न्यायालय को अपने अधीन न्यायालयों का निरीक्षण करने तथा उनको नियन्त्रण में रखने का भी अधिकार है। यदि अधीन न्यायालय में कोई ऐसा अभियोग चल रहा है, जिसमें भारतीय संविधान की व्याख्या का मामला निहित हो, तो ऐसे मुकदमे को उच्च न्यायालय अपने पास मँगा सकता है।

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना

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MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना

MP Board Class 9th Science Chapter 4 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

प्रश्न शृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 53

प्रश्न 1.
कैनाल किरणें क्या हैं ?
उत्तर:
कैनाल किरणें:
गोल्डस्टीन ने विशिष्ट धनावेशित विकिरण की खोज की, जिसे कैनाल किरणें कहा जाता है।

प्रश्न 2.
यदि किसी परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन है, तो इसमें कोई आवेश होगा या नहीं ?
उत्तर:
नहीं। इसमें धनावेश एवं ऋणावेश समान है।

प्रश्न शृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 56

प्रश्न 1.
परमाणु उदासीन है, इस तथ्य को टॉमसन के मॉडल के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
टॉमसन के मॉडल के अनुसार परमाणु धनावेशित गोला है जिसमें इलेक्ट्रॉन (ऋणावेश) फँसे होते हैं। चूँकि दोनों प्रकार के आवेशों की संख्या समान होती है अतः परमाणु विद्युतीय रूप से उदासीन है।

प्रश्न 2.
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के अनुसार परमाणु के नाभिक में कौन-सा अवपरमाणुक कण विद्यमान है ?
उत्तर:
प्रोटॉन।

प्रश्न 3.
तीन कक्षाओं वाले बोर के परमाणु मॉडल का चित्र बनाइए।(2019)
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 1

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प्रश्न 4.
क्या अल्फा कणों का प्रकीर्णन प्रयोग सोने के अतिरिक्त दूसरी धातु की पन्नी से सम्भव होगा?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 56

प्रश्न 1.
परमाणु के तीन अवपरमाणुक कणों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. इलेक्ट्रॉन
  2. प्रोटॉन
  3. न्यूट्रॉन।

प्रश्न 2.
हीलियम परमाणु का परमाणु द्रव्यमान 4u और उसके नाभिक में 2 प्रोटॉन होते हैं। इसमें कितने न्यूट्रॉन होंगे ?
उत्तर:
किसी तत्व का परमाणु द्रव्यमान उसकी द्रव्यमान संख्या के (संख्यात्मक रूप से) बराबर होता है।
∵ A =p + n ⇒ 4 = 2 + n ⇒ n = 4-2 = 2
अतः न्यूट्रॉनों की अभीष्ट संख्या = 2

प्रश्न श्रृंखला-4 # पृष्ठ संख्या 57

प्रश्न 1.
कार्बन और सोडियम के परमाणुओं के लिए इलेक्ट्रॉन वितरण लिखिए।(2019)
उत्तर:
कार्बन – 6e = 2, 4
सोडियम – 11e = 2, 8, 1

प्रश्न 2.
यदि किसी परमाणु का K और L कोश भरा है, तो उस परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्या होगी?
उत्तर:
2 + 8 = 10

प्रश्न श्रृंखला-5 # पृष्ठ संख्या 58

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प्रश्न 1.
क्लोरीन, सल्फर और मैग्नीशियम की परमाणु संख्या से इसकी संयोजकता कैसे प्राप्त करेंगे?
उत्तर:
क्लोरीन की परमाणु संख्या = 17 = 2, 8, 7
बाह्य (संयोजकता) कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं। इसलिये इसकी संयोजकता (8-7) = 1 होगी।
सल्फर की परमाणु संख्या = 16 = 2, 8, 6
बाह्य कोश में 6 इलेक्ट्रॉन हैं। इसलिए इसकी संयोजकता (8 – 6) = 2 होगी।

क्लोरीन एवं सल्फर की परमाणु संख्या क्रमश:
17 एवं 16 है। इनके इलेक्ट्रॉन वितरण 2, 8, 7 एवं 2, 8, 6 में बाह्यतम (संयोजकता) कोश में क्रमश: 7 एवं 6 इलेक्ट्रॉन हैं जो 4 से अधिक हैं। इसलिए इनको अष्टक (8) में से घटाकर इनकी संयोजकता ज्ञात करेंगे।

मैग्नीशियम की परमाणु संख्या 12 है जिसका वितरण 2, 8, 2 है। अतः बाह्य कोश के इलेक्ट्रॉन ही इसकी संयोजकता होगी।

प्रश्न श्रृंखला-6 # पृष्ठ संख्या 59

प्रश्न 1.
यदि किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 8 है और प्रोटॉनों की संख्या भी 8 है, तब – (2019)

  1. परमाणु की परमाणुक संख्या क्या है?
  2. परमाणु का क्या आवेश है?

उत्तर:

  1. परमाणु की परमाणुक संख्या = 8
  2. परमाणु का आवेश = 0 (शून्य)

प्रश्न 2.
सारणी की सहायता से ऑक्सीजन और सल्फर परमाणु की द्रव्यमान संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
सारणी के अनुसार ऑक्सीजन में प्रोटॉनों की संख्या 8 तथा न्यूट्रॉनों की संख्या भी 8 है।
इसलिए
ऑक्सीजन की द्रव्यमान संख्या = 8 + 8 = 16
सारणी के अनुसार सल्फर में प्रोटॉनों की संख्या 16 एवं न्यूट्रॉनों की संख्या 16 है।
इसलिए
सल्फर की द्रव्यमान संख्या = 16 + 16 = 32
अतः ऑक्सीजन एवं सल्फर की अभीष्ट द्रव्यमान संख्या क्रमश: 16 एवं 32 है।

प्रश्न श्रृंखला-7 # पृष्ठ संख्या 60

प्रश्न 1.
चिह्न H, D एवं T के लिए प्रत्येक में पाए जाने वाले तीन अवपरमाणुक कणों को सारणीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 2

प्रश्न 2.
समस्थानिक और समभारिक के किसी एक युग्म का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:
समस्थानिक युग्म – 1735Cl एवं 1735Cl है।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्रमश: 2,8,7 एवं 2, 8,7
समभारिक युग्म – 1840Ar एवं 2040Ca है।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्रमश – 2, 8, 8 एवं 2, 8,8, 2

MP Board Class 9th Science Chapter 4 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन के गुणों की तुलना कीजिए।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन के गुणों की तुलना:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 3

प्रश्न 2.
जे. जे. टॉमसन के परमाणु मॉडल की क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर:
जे. जे. टॉमसन के परमाणु मॉडल की सीमाएँ:
जे. जे. टॉमसन के परमाणु मॉडल से केवल परमाणु में उदासीन होने की व्याख्या हो सकी। बाकी वैज्ञानिकों द्वारा किए गए प्रयोगों के परिणामों की व्याख्या इसके द्वारा नहीं की जा सकी।

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प्रश्न 3.
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की क्या सीमाएँ (कमियाँ) हैं?
उत्तर:
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की सीमाएँ (कमियाँ)-वर्तुलाकार मार्ग में चक्रण करता हुआ इलेक्ट्रॉन (आवेशित कण) त्वरित होगा और त्वरण के समय आवेशित कणों से ऊर्जा विकरित होगी। इस प्रकार स्थायी कक्षा में घूमता हुआ इलेक्ट्रॉन अपनी ऊर्जा विकरित करते हुए केन्द्रक से टकरा जाता और परमाणु अस्थिर होता, लेकिन ऐसा नहीं है।

प्रश्न 4.
बोर के परमाणु मॉडल की व्याख्या कीजिए। (2018)
उत्तर:
बोर का परमाणु मॉडल-बोर के परमाणु मॉडल की निम्निलिखित अवधारणाएँ हैं –

  1. इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित कक्षाओं में ही चक्कर लगा सकते हैं जिन्हें इलेक्ट्रॉन की विविक्त कक्षा कहते हैं। इन कक्षाओं (कोशों) को ऊर्जा स्तर कहते हैं।
  2. जब इलेक्ट्रॉन इस विविक्त कक्षा (ऊर्जा स्तर) में चक्कर लगाते हैं, तो उनकी ऊर्जा का विकिरण नहीं होता है।

प्रश्न 5.
इस अध्याय में दिए गए सभी परमाणु मॉडलों की तुलना कीजिए।
उत्तर:
जे. जे. टॉमसन, रदरफोर्ड एवं बोर के परमाणु मॉडलों की तुलना-जे. जे. टॉमसन का मॉडल केवल परमाणु की उदासीनता की व्याख्या कर पाता है लेकिन विभिन्न प्रायोगिक परिणामों की व्याख्या करने में सर्वथा असफल रहता है। रदरफोर्ड के मॉडल के अनुसार परमाणु अस्थिर होना चाहिए परन्तु ऐसा वास्तव में नहीं है। बोर का मॉडल सर्वमान्य मॉडल है। इससे परमाणु की स्थिरता की भी व्याख्या होती है।

प्रश्न 6.
पहले अट्ठारह तत्वों के विभिन्न कक्षों में इलेक्ट्रॉन वितरण के नियम को लिखिए।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन वितरण के नियम:

  1. किसी कक्षा में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 2n2 सूत्र से दर्शायी जा सकती है जहाँ n कक्षा की संख्या या ऊर्जा स्तर का क्रमांक है जिसका आकलन हम केन्द्रक से बाहर की ओर करते हैं।
  2. सबसे बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 8 होती है।

प्रश्न 7.
सिलिकॉन और ऑक्सीजन का उदाहरण देते हुए संयोजकता की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
संयोजकता-“किसी परमाणु द्वारा अपनी बाह्यतम कक्ष को पूर्णरूप से भरने के लिए इलेक्ट्रॉनों का परस्पर साझा करने या उनको ग्रहण करने अथवा उन्हें त्यागने की आवश्यकता होती है। इस प्रकार अष्टक बनाने के लिए साझा किए गये या ग्रहण किए गए या त्यागे गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या उस परमाणु की संयोजकता कहलाती है।”

उदाहरण:

  1. ऑक्सीजन (o) – 8 = 2, 6 के बाह्यतम कोश में 6 इलेक्ट्रॉन हैं। यह अष्टक बनाने के लिए 2 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करेगा। अत: इसकी संयोजकता 2 हुई।
  2. सिलिकॉन (Si) – 14 = 2, 8, 4 के बाह्यतम कोश में 4 इलेक्ट्रॉन हैं। यह अष्टक पूर्ण करने के लिए यह 4 इलेक्ट्रॉन त्यागेगा या 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करेगा। इस प्रकार इसकी संयोजकता 4 हुई।

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प्रश्न 8.
उदाहरण के साथ व्याख्या कीजिए-परमाणु संख्या (2018, 19), द्रव्यमान संख्या (2018, 19), समस्थानिक (2018, 19) और समभारिक (2019)। समस्थानिकों के कोई तीन उपयोग लिखिए (2018)।
उत्तर:
1. परमाणु संख्या:
“किसी तत्व के परमाणु के केन्द्रक में उपस्थित धनावेशित प्रोटॉनों की संख्या उस तत्व की परमाणु संख्या कहलाती है।”

2. द्रव्यमान संख्या:
“किसी तत्व के परमाणु के केन्द्रक में उपस्थित न्यूक्लियॉनों (प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉनों) की संख्या को उस तत्व की द्रव्यमान संख्या कहते हैं।”

3. समस्थानिक:
“एक ही तत्व के परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान होती है परन्तु द्रव्यमान संख्या पृथक् होती है, समस्थानिक कहलाते हैं।”

उदाहरण:
1735Cl एवं 1735Cl समस्थानिक हैं।

समभारिक:
“दो भिन्न तत्वों के युग्म को जिनकी परमाणु संख्या तो भिन्न होती है लेकिन द्रव्यमान संख्या समान हो, समभारिक कहते हैं।”
उदाहरण:
1840Ar एवं 2040Ca समभारिक हैं।

समस्थानिकों के उपयोग:

  1. कैंसर के उपचार में कोबाल्ट के समस्थानिक का उपयोग होता है।
  2. घेघा रोग के उपचार में आयोडीन के समस्थानिक का उपयोग होता है।
  3. रक्त संचरण के अध्ययन में सोडियम के समस्थानिक का उपयोग होता है।

प्रश्न 9.
“Na के पूरी तरह से भरे हुए K व L कोश होते हैं।” व्याख्या दीजिए।
उत्तर:
Na में 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं जिनका विन्यास 2, 8 है और प्रथम कोश K में अधिकतम 2 एवं L में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं। इस प्रकार Na+ के कोश K एवं L पूरी तरह भरे हुए होते हैं।

प्रश्न 10.
अगर ब्रोमीन परमाणु दो समस्थानिकों [7935Br (49.7%)] तथा [8135Br (50-3%)] के रूप में है, तो ब्रोमीन परमाणु के औसत परमाणु द्रव्यमान की गणना कीजिए।
हल:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 4
अतः ब्रोमीन का अभीष्ट औसत परमाणु द्रव्यमान = 40.006

प्रश्न 11.
एक तत्व X का परमाणु द्रव्यमान 16.2u है तो इसके किसी एक नमूने में समस्थानिक x और x का प्रतिशत क्या होगा?
हल:
माना 816x का प्रतिशत a % है तो 818x का प्रतिशत (100 – a)% होगा।
औसत परमाण भार 16.2 = \(\frac{16 \times a+18(100-a)}{100}\)

⇒ 1620 = 16a + 1800 – 18a
⇒ 18a – 16a = 1800 – 1620
⇒ 2a = 180 ⇒ a = 90%
एवं (100 – a) = 100 – 90 = 10%
अतः समस्थानिकों के अभीष्ट प्रतिशत क्रमशः 90% एवं 10% हैं।

प्रश्न 12.
यदि तत्व का Z = 3 हो, तो तत्व की संयोजकता क्या होगी? तत्व का नाम भी लिखिए।
हल:
तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3 = 2, 1
अतः तत्व की अभीष्ट संयोजकता = 1 एवं नाम लीथियम है।

प्रश्न 13.
दो परमाणु स्पीशीज के केन्द्रकों का संघटन नीचे दिया है –
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 5
x और y की द्रव्यमान संख्या ज्ञात कीजिए। इन दोनों स्पीशीज में क्या सम्बन्ध है?
हल:
x की द्रव्यमान संख्या = 6 + 6 = 12
y की द्रव्यमान संख्या = 6 + 8 = 14
अतः अभीष्ट द्रव्यमान संख्या x = 12 तथा y = 14 है और ये दोनों स्पीशीज समस्थानिक हैं।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित वक्तव्यों में गलत के लिए F और सही के लिए T लिखिए –
(a) जे. जे. टॉमसन ने यह प्रतिपादित किया था कि परमाणु के केन्द्रक में केवल न्यूक्लिऑन होते हैं।
(b) एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन मिलकर न्यूट्रॉन का निर्माण करते हैं। इसलिए यह धनावेशित होता है।
(c) इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन से लगभग \(\frac{1}{2000}\) गुना होता है।
(d) आयोडीन के समस्थानिक का इस्तेमाल टिंचर आयोडीन बनाने में होता है। इसका उपयोग दवा के रूप में होता है।
उत्तर:
(a) F, (b) F, (c) T, (d) E.

प्रश्न 15.
रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग किसकी खोज के लिए उत्तरदायी था?
(a) परमाणु केन्द्रक
(b) इलेक्ट्रॉन
(c) प्रोटॉन
(d) न्यूट्रॉन
उत्तर:
(a) परमाणु केन्द्रक।

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प्रश्न 16.
एक तत्व के समस्थानिक में होते हैं –
(a) समान भौतिक गुण
(b) भिन्न रासायनिक गुण
(c) न्यूट्रॉनों की अलग-अलग संख्या
(d) भिन्न परमाणु संख्या
उत्तर:
(c) न्यूट्रॉनों की अलग-अलग संख्या।

प्रश्न 17.
Cl आयन में संयोजकता इलेक्ट्रॉन की संख्या है –
(a) 16
(b) 8
(c) 17
(d) 18
उत्तर:
(b) 8

प्रश्न 18.
सोडियम का सही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न में कौन-सा है?
(a) 2, 8
(b) 8, 2, 1
(c) 2, 1, 8
(d) 2, 8, 1
उत्तर:
(d) 2, 8, 1

प्रश्न 19.
निम्नलिखित सारणी को पूरा कीजिए –
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 6
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 7

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MP Board Class 9th Science Chapter 4 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 9th Science Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में कौन-सा Mg परमाणु में इलेक्ट्रॉनिक वितरण को सही प्रदर्शित करता है?
(a) 3, 8, 1
(b) 2, 8, 2
(c) 1, 8, 3
(d) 8, 2, 2
उत्तर:
(b) 2, 8, 2

प्रश्न 2.
रदरफोर्ड के अल्फा (α) कण प्रकीर्णन प्रयोग के परिणामस्वरूप खोज किया गया –
(a) इलेक्ट्रॉन
(b) प्रोटॉन
(c) परमाणु में नाभिक
(d) परमाण्वीय द्रव्यमान
उत्तर:
(c) परमाणु में नाभिक

प्रश्न 3.
एक तत्व X में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 15 और न्यूट्रॉनों की संख्या 16 है। निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व का सही प्रदर्शन है?
(a) 1531x
(b) 1631x
(c) 1615x
(d) 1615x
उत्तर:
(a) 1531x

प्रश्न 4.
डाल्टन के परमाणु सिद्धान्त ने सफलतापूर्वक समझाया –
(i) द्रव्यमान संरक्षण का नियम
(ii) स्थिर अनुपात का नियम
(iii) रेडियोएक्टिवता का नियम
(iv) गुणित अनुपात का नियम

(a) (i), (ii) और (iii)
(b) (i), (iii) और (iv)
(c) (ii), (iii) और (iv)
(d) (i), (ii) और (iv)
उत्तर:
(d) (i), (ii) और (iv)

प्रश्न 5.
रदरफोर्ड के नाभिकीय प्रतिरूप के सम्बन्ध में कौन – से कथन सही हैं?
(i) नाभिक को धन आवेशित माना।
(ii) प्रमाणित किया कि a-कण हाइड्रोजन परमाणु से चार गुना भारी है।
(iii) सौर परिवार से तुलना की जा सकती है।
(iv) टॉमसन मॉडल से सहमति दर्शाता है।

(a) (i) और (iii)
(b) (ii) और (iii)
(c) (i) और (iv)
(d) केवल (i)
उत्तर:
(a) (i) और (iii)

प्रश्न 6.
एक तत्व के लिए निम्नलिखित में से कौन से विकल्प सही हैं?
(i) परमाणु संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + इलेक्ट्रॉनों की संख्या
(ii) द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या
(iii) परमाणु द्रव्यमान = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या
(iv) परमाणु संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या

(a) (i) और (ii)
(b) (i) और (iii)
(c) (ii) और (iii)
(d) (ii) और (iv)
उत्तर:
(c) (ii) और (iii)

प्रश्न 7.
टॉमसन के परमाणु मॉडल हेतु निम्नलिखित में से कौन से कथन सत्य हैं?
(i) यह परमाणु में परमाणु द्रव्यमान को समान रूप से वितरित मानता है।
(ii) परमाणु में धनावेश समान रूप से वितरित माना गया।
(iii) धनावेशित गोले में इलेक्ट्रॉनों का वितरण समान रूप से होता है।
(iv) परमाणु के स्थायित्व के लिए इलेक्ट्रॉन परस्पर एक – दूसरे को आकर्षित करते हैं।

(a) (i), (ii) और (iii)
(b) (i) और (iii)
(c) (i) और (iv)
(d) (i), (iii) और (iv)
उत्तर:
(a) (i), (ii) और (iii)

प्रश्न 8.
रदरफोर्ड के 4 – कण प्रकीर्णन प्रयोग ने दर्शाया कि –
(i) इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित होते हैं।
(ii) नाभिक में परमाणु का द्रव्यमान और धनावेश केन्द्रित रहता है।
(iii) नाभिक में न्यूट्रॉन होते हैं।
(iv) परमाणु का अधिकांश स्थान रिक्त होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन से सही हैं?
(a) (i) और (iii)
(b) (ii) और (iv)
(c) (i) और (iv)
(d) (iii) और (iv)
उत्तर:
(b) (ii) और (iv)

प्रश्न 9.
एक तत्व के आयन पर 3 धनावेश हैं। परमाणु की द्रव्यमान संख्या 27 और न्यूट्रॉनों की संख्या 14 है। आयन में कितने इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं?
(a) 13
(b) 10
(c) 14
(d) 16
उत्तर:
(b) 10

प्रश्न 10.
निम्न चित्र में Mg2+ आयन को पहचानिए जहाँ n और p क्रमशः न्यूट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या प्रदर्शित करते हैं –
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 8
उत्तर:
(d)

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प्रश्न 11.
एथिल एथेनॉइट (CHCOOC2H5) के एक नमूने में दो ऑक्सीजन परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान है परन्तु न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न है। इसके लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारण है?
(a) इनमें से एक ऑक्सीजन परमाणु ने इलेक्ट्रॉन प्राप्त किए हैं।
(b) इनमें से एक ऑक्सीजन परमाणु ने दो न्यूट्रॉन प्राप्त किए हैं।
(c) दोनों ऑक्सीजन परमाणु समस्थानिक हैं।
(d) दोनों ऑक्सीजन परमाणु समभारिक हैं।
उत्तर:
(c) दोनों ऑक्सीजन परमाणु समस्थानिक हैं।

प्रश्न 12.
1 संयोजकता वाले तत्व होते हैं –
(a) सदैव धातु
(b) सदैव उपधातु
(c) धातु या अधातु
(d) सदैव अधातु
उत्तर:
(c) धातु या अधातु

प्रश्न 13.
परमाणु का प्रथम मॉडल देने वाले का नाम है –
(a) एन बोर
(b) ई. गोल्डस्टीन
(c) रदरफोर्ड
(d) जे. जे. टॉमसन
उत्तर:
(d) जे. जे. टॉमसन

प्रश्न 14.
3 प्रोटॉन और 4 न्यूट्रॉन युक्त परमाणु की संयोजकता होगी –
(a) 3
(b) 7
(c) 1
(d) 4
उत्तर:
(c) 1

प्रश्न 15.
ऐलुमिनियम के एक परमाणु में इलेक्ट्रॉनों का वितरण होता है –
(a) 2, 8, 3
(b) 2, 8, 2
(c) 8, 2,3
(d) 2, 3, 8
उत्तर:
(a) 2, 8, 3

प्रश्न 16.
निम्न चित्र में कौन-सा परमाणु के बोर मॉडल का सही प्रदर्शन नहीं करता –
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 9
(a) (i) और (ii)
(b) (ii) और (iii)
(c) (ii) और (iv)
(d) (i) और (iv)
उत्तर:
(c) (ii) और (iv)

प्रश्न 17.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वदा सही है?
(a) एक परमाणु में इलेक्ट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या समान होती है।
(b) एक परमाणु में इलेक्ट्रॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है।
(c) एक परमाणु में प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है।
(d) एक परमाणु में इलेक्ट्रॉनों, प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है।
उत्तर:
(a) एक परमाणु में इलेक्ट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या समान होती है।

प्रश्न 18.
परमाणु मॉडलों का समय के साथ सुधार होता रहा है। निम्नलिखित परमाणु मॉडलों को उनके कालानुक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए –
(i) रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल
(ii) टॉमसन का परमाणु मॉडल
(iii) बोर का परमाणु मॉडल।

(a) (i), (ii) और (iii)
(b) (ii), (iii) और (i)
(c) (ii), (i) और (iii)
(d) (iii), (ii) और (i)
उत्तर:
(c) (ii), (i) और (iii)

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. रदरफोर्ड के 4-कण प्रकीर्णन प्रयोग से ………….. की खोज हुई।
2. समस्थानिकों में समान …………….. परन्तु भिन्न …………… होते हैं।
3. निऑन और क्लोरीन के परमाणु क्रमांक क्रमशः 10 और 17 हैं। इनकी संयोजकताएँ क्रमशः …………. और …………. होंगी।
4. सिलिकॉन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ……………’ है और सल्फर का …………… है।
उत्तर:

  1. परमाण्वीय नाभिक
  2. परमाणु क्रमांक परमाणु भार,
  3. 0, 1,
  4. (2, 8, 4), (2, 8, 6).

सही जोड़ी बनाना
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 10
उत्तर:

  1. → (iii)
  2. → (iv)
  3. → (i)
  4. → (ii)
  5. → (vi)
  6. → (vii)
  7.  → (v)

सत्य/असत्य कथन

1. समस्थानिकों में न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है।
2. समभारिकों में द्रव्यमान संख्या समान होती है तथा परमाणु संख्या भिन्न।
3. समस्थानिकों के रासायनिक गुण भिन्न होते हैं।
4. समभारिकों के रासायनिक गुण भिन्न होते हैं।
5. समस्थानिकों में परमाणु संख्या असमान होती है।
उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. असत्य

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
इलेक्ट्रॉन का आवेश कितना होता है?
– 1.6 x 10-19 कूलॉम।

प्रश्न 2.
एक तत्व X के बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन उपस्थित है। यदि बाह्यतम कोश से वह इलेक्ट्रॉन हटा दिया जाय तो बनने वाले आयन पर कितना आवेश होगा?
1+.

प्रश्न 3.
एक तत्व X के बाह्यतम कोश में 6 इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं। यदि यह आवश्यक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर उत्कृष्ट गैस का विन्यास प्राप्त करता है तो इस प्रकार बने आयन पर कितना आवेश होगा?
2.

प्रश्न 4.
एक तत्व X की द्रव्यमान संख्या 4 और परमाणु क्रमांक 2 है। इस तत्व की संयोजकता लिखिए।
0 शून्य।

प्रश्न 5.
कैल्सियम और आर्गन के परमाणु क्रमांक क्रमशः 20 और 18 हैं। परन्तु दोनों तत्वों की द्रव्यमान संख्या 40 है। इस प्रकार के तत्वों के युगल को क्या नाम दिया जाता है?
उत्तर:
समभारिक।

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MP Board Class 9th Science Chapter 4 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्या यह सम्भव है कि किसी तत्व के एक परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन, एक प्रोटॉन हो और कोई भी न्यूट्रॉन न हो? यदि ऐसा है तो उस तत्व का नाम बताइए।
उत्तर:
हाँ, सम्भव है। तत्व का नाम-हाइड्रोजन (प्रोटोनियम)।

प्रश्न 2.
क्या 35Cl एवं 37Cl की संयोजकताएँ भिन्न होंगी? अपने उत्तर का औचित्य बताइए।
उत्तर:
नहीं, क्योंकि ये एक ही तत्व के समस्थानिक हैं।

प्रश्न 3.
रदरफोर्ड ने अपने -किरण प्रकीर्णन प्रयोग में सोने की पन्नी का चयन क्यों किया?
उत्तर:
रदरफोर्ड ने अपने -किरण प्रकीर्णन प्रयोग में सोने की पन्नी इसलिए चुनी क्योंकि वे बहुत पतली परत चाहते थे। सोने की यह पन्नी 1000 परमाणुओं के बराबर मोटी थी।

प्रश्न 4.
क्लोरीन परमाणु के लिए इलेक्ट्रॉनिक वितरण लिखें। इसके L कोश में कितने इलेक्ट्रॉन हैं? (क्लोरीन का परमाणु क्रमांक 17 है।)
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन वितरण: 17 = 2, 8,7
इसके L कोश में 8 इलेक्ट्रॉन हैं।

प्रश्न 5.
एक प्रश्न के उत्तर में एक विद्यार्थी ने कहा कि एक परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या न्यूट्रॉनों की संख्या से अधिक है और इसी प्रकार न्यूट्रॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या से अधिक है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।
उत्तर:
हम सहमत नहीं हैं क्योंकि किसी भी परमाणु में प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है जबकि उक्त कथन में प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या से अधिक बतायी गई है।

प्रश्न 6.
एक तत्व X है, जिसे 1531x द्वारा प्रदर्शित किया गया है, के नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या को परिकलित कीजिए।
हल:
न्यूट्रॉनों की संख्या = A – Z = 31 – 15 = 16
अतः न्यूट्रॉनों की अभीष्ट संख्या = 16

प्रश्न 7.
हीलियम के संयोजकता कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं परन्तु इसकी संयोजकता 2 नहीं है। समझाइए।
उत्तर:
हीलियम की संयोजकता कोश प्रथम कोश K है जिसकी अधिकतम इलेक्ट्रॉन धारिता 2 है इसलिए यह कोश पूर्ण है इसलिए इसकी संयोजकता 2 नहीं, 0 (शून्य) है।

प्रश्न 8.
हीलियम, निऑन और आर्गन की संयोजकता शून्य क्यों होती है?
उत्तर:
हीलियम का संयोजकता कोश K का द्विक् पूर्ण है तथा निऑन एवं आर्गन के संयोजकता कोश के अष्टक पूर्ण हैं, इसलिए इनकी संयोजकता शून्य (0) होती है।

प्रश्न 9.
निम्न चित्रों द्वारा प्रदर्शित परमाणुओं की संयोजकता ज्ञात कीजिए।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 11
हल:
परमाणु (a) के संयोजकता कोश में अष्टक पूर्ण है, अतः
इसकी संयोजकता = 0 (शून्य)
परमाणु (b) के संयोजकता कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं।
इसलिए
इसकी संयोजकता = 8 – 7 = 1 है।
अतः अभीष्ट संयोजकताएँ (a) = 0 (शून्य), (b) = 1.

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प्रश्न 10.
समस्थानिक किसे कहते हैं ? हाइड्रोजन के तीन समस्थानिकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
समस्थानिक:
“एक ही तत्व के वे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान होती है परन्तु द्रव्यमान संख्या पृथक् होती है, समस्थानिक कहलाते हैं।”

हाइड्रोजन के समस्थानिकों के नाम:

  1. प्रोटोनियम
  2. ड्यूटीरियम
  3. ट्राइटियम।

प्रश्न 11.
कैथोड किरणों के कोई दो प्रमुख गुण लिखिए। (2019)
उत्तर:
कैथोड किरणों के प्रमुख गुण:

  1. ये किरणें ऋणावेशित होती हैं जो सीधी रेखा में ऋणाग्र से धनान की ओर चलती हैं।
  2. इनमें अत्यधिक गतिज ऊर्जा होती है।

प्रश्न 12.
1. क्लोरीन, एवं
2. सोडियम तत्वों की परमाणु संख्या एवं द्रव्यमान संख्या लिखिए। (2019)
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 12

MP Board Class 9th Science Chapter 4 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
टॉमसन के परमाणु मॉडल को समझाइए।
उत्तर:
टॉमसन का परमाणु मॉडल-टॉमसन ने अपने परमाणु मॉडल में प्रस्तावित किया कि –

  1. परमाणु धन आवेशित गोले का बना होता है और इलेक्ट्रॉन उसमें फँसे होते हैं।
  2. ऋणात्मक और धनात्मक आवेश परिमाण में समान होते हैं। इसलिए परमाणु वैद्युतीय रूप से उदासीन होते हैं।

प्रश्न 2.
रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग से क्या प्रेक्षण मिले?
उत्तर:
रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग से प्राप्त प्रेक्षण:

  1. तेज गति से चल रहे अधिकतर अल्फा कण सोने की पन्नी से सीधे निकल गए।
  2. कुछ अल्फा कण पन्नी के द्वारा बहुत छोटे कोण से विक्षेपित हुए।
  3. आश्चर्यजनक रूप से प्रत्येक 12000 कणों में से एक कण वापस गया।

प्रश्न 3.
रदरफोर्ड ने अपने अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग से क्या निष्कर्ष निकाले?
अथवा
रदरफोर्ड के अल्फा कण (a-विकिरण) प्रकीर्णन प्रयोग से निकाले गए निष्कर्षों की सूची बनाइए।
उत्तर:
रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के निष्कर्ष:

  1. परमाणु के भीतर का अधिकतर भाग खाली है क्योंकि अधिकतर अल्फा कण बिना विक्षेपित हुए बाहर निकल गए।
  2. बहुत कम कण अपने मार्ग से विक्षेपित होते हैं जिससे यह ज्ञात होता है कि परमाणु में धनावेशित भाग बहुत कम है।
  3. बहुत कम अल्फा कण 180° पर विक्षेपित हुए थे जिससे यह संकेत मिलता है कि सोने के परमाणु का पूर्ण धनावेशित भाग और द्रव्यमान परमाणु के भीतर बहुत कम आयतन में सीमित है।

प्रश्न 4.
रदरफोर्ड द्वारा प्रस्तुत परमाणु के नाभिकीय मॉडल की व्याख्या कीजिए। (2019)
अथवा
रदरफोर्ड के “परमाणु के नाभिकीय मॉडलं” के लक्षण लिखिए। (2019)
उत्तर:
रदरफोर्ड द्वारा प्रस्तुत परमाणु का नाभिकीय मॉडल-रदरफोर्ड ने परमाणु का नाभिकीय मॉडल प्रस्तुत किया, जिसके लक्षण निम्न हैं –

  1. परमाणु का केन्द्र धनावेशित होता है जिसे नाभिक (केन्द्रक) कहा जाता है। एक परमाणु का लगभग सम्पूर्ण द्रव्यमान इस नाभिक में होता है।
  2. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वर्तुलाकार मार्ग में चक्कर लगाते हैं।
  3. नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में काफी कम होता है।

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प्रश्न 5.
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल में क्या कमियाँ/सीमाएँ थीं ?
उत्तर:
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की सीमाएँ (कमियाँ):
वर्तुलाकार मार्ग में चक्रण करता हुआ इलेक्ट्रॉन (आवेशित कण) त्वरित होगा और त्वरण के समय आवेशित कणों से ऊर्जा विकरित होगी। इस प्रकार स्थायी कक्षा में घूमता हुआ इलेक्ट्रॉन अपनी ऊर्जा विकरित करते हुए केन्द्रक से टकरा जाता और परमाणु अस्थिर होता, लेकिन ऐसा नहीं है।

प्रश्न 6.
बोर के परमाणु मॉडल के अभिग्रहीत क्या हैं?
अथवा
बोर के परमाणु मॉडल की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
बोर का परमाणु मॉडल:
बोर के परमाणु मॉडल की निम्निलिखित अवधारणाएँ हैं –

  1. इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित कक्षाओं में ही चक्कर लगा सकते हैं जिन्हें इलेक्ट्रॉन की विविक्त कक्षा कहते हैं। इन कक्षाओं (कोशों) को ऊर्जा स्तर कहते हैं।
  2. जब इलेक्ट्रॉन इस विविक्त कक्षा (ऊर्जा स्तर) में चक्कर लगाते हैं, तो उनकी ऊर्जा का विकिरण नहीं होता है।

प्रश्न 7.
निम्न चित्र से आप x,y और z परमाणुओं के परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या और संयोजकता सम्बन्धी क्या जानकारी प्राप्त करते हैं? अपना उत्तर एक सारणी के रूप में दीजिए।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 13
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 14
प्रश्न 8.
नीचे दिए गए प्रतीकों में उपलब्ध सूचना के आधार पर निम्न सारणी को पूर्ण कीजिए –
(a) 1735Cl
(b) 612C
(c) 1835Br
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 15
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 16

प्रश्न 9.
किस प्रकार रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल, टॉमसन के परमाणु मॉडल से भिन्न है?
उत्तर:
रदरफोर्ड परमाणु मॉडल एवं टॉमसन परमाणु मॉडल में भिन्नता:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 17

प्रश्न 10.
सोडियम परमाणु एवं सोडियम आयन के इलेक्ट्रॉन वितरण को चित्र द्वारा दर्शाइए और उनके परमाणु क्रमांक (परमाणु संख्या) भी दीजिए।
उत्तर:

  1. सोडियम परमाणु
  2. सोडियम आयन।

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 18
दोनों में परमाणु क्रमांक समान अर्थात् प्रत्येक का 11 है।

प्रश्न 11.
गीगार और मार्सडेन के सोने की पन्नी वाले प्रयोग में, जिसने रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की राह दिखाई ~ 1:00% अल्फा कण 50° से अधिक कोणों पर विक्षेपित होते पाये गए। यदि सोने की पन्नी पर एक मोल अल्फा कणों की बौछार की गई तो 50° से कम के कोणों पर विक्षेपित हुए अल्फा कणों की संख्या परिकलित कीजिए।
हल:
∵ 50° से अधिक कोण पर विक्षेपित अल्फा कण = 1% अल्फा कण
∵ 50° से कम पर विक्षेपित अल्फा कण = 100 – 1 = 99% अल्फा कण
बौछार किए गए अल्फा कणों की संख्या = 1 मोल = 6.022 x 1023 कण
50° से कम पर विक्षेपित कणों की संख्या = 1 मोल का 99%
\(=\frac{99}{100} \times 6 \cdot 022 \times 10^{23}\)
\(=\frac{596 \cdot 178 \times 10^{23}}{100}\)
अतः = 5.96 x 1023 कण
अभीष्ट कणों की संख्या = 5.96 x 1023 कण

MP Board Class 9th Science Chapter 4 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
समस्थानिक एवं समभारिक में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2019)
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 19

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प्रश्न 2.
हाइड्रोजन परमाणु और उसकी नाभिक की त्रिज्याओं का अनुपात ~105 है। परमाणु और , नाभिक को गोलाकार मानते हुए –

  1. उनके आकारों का अनुपात क्या होगा?
  2. यदि परमाणु को पृथ्वी ग्रह (R, = 64 x 10 m) से दर्शाया जाता है तो नाभिक के आकार की गणना कीजिए।

हल:
मान लीजिए कि हाइड्रोजन परमाणु की त्रिज्या = R मात्रक
एवं उसके केन्द्रक (नाभिक) की त्रिज्या = r मात्रक है।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 20
(i) हाइड्रोजन परमाणु के आकार (आयतन) एवं उसके नाभिक के आकार (आयतन) का अनुपात
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 21
[समीकरण (i) एवं (ii) से]
अत: परमाणु एवं नाभिक के आकारों का अभीष्ट अनुपात = 1015
(ii) पृथ्वी की त्रिज्या R. = 6.4 x 106 m से परमाणु को दर्शाया जाता है। अर्थात्
R = Re = 6.4 x 106 m …(iv)
समीकरण (i) एवं (iv) से
\(r=\frac{\mathrm{R}_{e}}{10^{5}}\)
\(=\frac{6 \cdot 4 \times 10^{6}}{10^{5}} \mathrm{m}\)
= 64m
अतः नाभिक की अभीष्ट त्रिज्या = 64 m

प्रश्न 3.
दिए गए तत्वों के इलेक्ट्रॉन विन्यास को पूर्ण कीजिए – (2019)
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 22
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 23

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MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

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MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाए

रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाए NCERT अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित के लिए मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए –

  1. H2O
  2. CO2
  3. CH4

उत्तर:

  1. H2O का अणुभार = 2 (1.008 amu) + 16.00 amu = 18.016 amu.
  2. CO2 का अणुभार = 12.01 amu + 2 x 16.00 amu = 44.01 amu.
  3. CH4 का अणुभार = 12.01 amu + 4(1.008 amu) = 16.042 amu.

प्रश्न 2.
सोडियम सल्फेट (Na2SO4) में उपस्थित विभिन्न तत्वों के द्रव्यमान प्रतिशत की गणना कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 1

प्रश्न 3.
आयरन के एक ऑक्साइड का मूलानुपाती सूत्र ज्ञात कीजिए जिसमें 69.9% आयरन तथा 30.1% डाइऑक्सीजन भारानुसार हो।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 2
∴ मूलानुपाती सूत्र = Fe2O3.

प्रश्न 4.
बनने वाले कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा की गणना कीजिए जब –

  1. हवा में 1 मोल कार्बन जलती है।
  2. 16g डाइऑक्सीजन में 1 मोल कार्बन जलती है।
  3. 16g डाइऑक्सीजन में 2 मोल कार्बन जलती है।

उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 3

  1. कार्बन का 1 मोल CO2 के 44 ग्राम देता है।
  2. डाइऑक्सीजन के केवल 16g उपलब्ध है ये कार्बन के केवल 0.5 मोल से संयोग करती है। अतः डाइऑक्सीजन सीमान्त अभिकारक है। अतः बना हुआ CO2 = 22g.
  3. यहाँ O2 सीमान्त अभिकारक है, O2 के 0.5 मोल CO2 के 22g देता है।

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प्रश्न 5.
सोडियम ऐसीटेट (CH3COONa) का 500 ml, 0.375 मोलर जलीय विलयन बनाने के लिए, उसके कितने द्रव्यमान की आवश्यकता होगी? सोडियम ऐसीटेट का मोलर द्रव्यमान 82-0245 g mor’ है।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 4
जहाँ, WB = विलेय का द्रव्यमान, MB = विलेय का मोलर द्रव्यमान प्रश्नानुसार
विलयन की मोलरता, M = 0.375 M
विलेय का मोलर द्रव्यमान, MB = 82.0245g mol-1
विलयन का आयतन = 500 ml
विलेय का द्रव्यमान, WB = ?
विलेय का द्रव्यमान, WB = \(\frac { MxM_{ B }xV }{ 1000 } \)
= \(\frac{0.375×82.0245×500}{1000}\)
= 15.379g ≅ 15.38g.

प्रश्न 6.
सान्द्र नाइट्रिक अम्ल के उस प्रतिदर्श की मोल प्रति लीटर में सान्द्रता का परिकलन कीजिए, जिसमें उसका द्रव्यमान प्रतिशत 69% हो और घनत्व 1.41gm-1 हो।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 5
प्रश्नानुसार d = 1.41 gmL-1, HNO3 का द्रव्यमान प्रतिशत = 69%
69% HNO3 का अर्थ है नाइट्रिक अम्ल के 100g विलयन में 69g HNO3 उपस्थित है,
अत: HNO3 (विलेय) का द्रव्यमान WB = 69g
HNO3 का मोलर द्रव्यमान = 1.0079 + 14.0067 + (3 x 16.00)
= 63.0146 gmol-1
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 6

प्रश्न 7.
100 g CuSO4(कॉपर सल्फेट) से कितना कॉपर प्राप्त होता है?
हल:
CuSO 4के 1 मोल में Cu के 1 मोल (1g परमाणु) होते हैं।
CuSO4 अणुभार = 63.5 + 32+4 x 16 = 159.5 g मोल-1
∴ 159.5g CuSO4 से प्राप्त Cu= 63.5g
100g CuSO4 से प्राप्त Cu = \(\frac{63.5}{159.5}\) x 100g = 39.81g.

प्रश्न 8.
आयरन के एक ऑक्साइड के आण्विक सूत्र की गणना कीजिये जिसमें आयरन तथा ऑक्सीजन का भार प्रतिशत क्रमशः 69.9 तथा 30.1 है।
हल:
प्रश्न 3 से मूलानुपाती सूत्र FeO3 है।
FeO3 का मूलानुपाती सूत्र भार = 2 x 55.85 + 3 x 16
= 159.7
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 7
अतः आयरन ऑक्साइड का अणुसूत्र = Fe2O3.

प्रश्न 9.
क्लोरीन के परमाणु भार की गणना नीचे दिये गये आँकड़ों का उपयोग करके कीजिए –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 8
हल:
औसत परमाणु द्रव्यमान \(\overline { A } \), समस्थानिकों की आंशिक बाहुल्यता (Fi) तथा उनके संगत मोलर द्रव्यमान Ai के गुणनफल के योग के बराबर होता है।
औसत परमाणु द्रव्यमान \(\overline { A } \) = Σ Fi.Ai = F1 x A1 + F2 x A2 + ………….
अतः क्लोरीन का औसत द्रव्यमान, \(\overline { A } \) = 0.7577 x 34.9689 + 0. 2423 x 36.9659
= 26.4959 + 8.9568
= 35.4527µ = 35.5µ

प्रश्न 10.
एथेन के तीन मोल में निम्नलिखित की गणना कीजिए –

  1. कार्बन परमाणु के मोलों की संख्या
  2. हाइड्रोजन परमाणु के मोलों की संख्या
  3. एथेन के अणुओं की संख्या।

उत्तर:
C2H6 के 3 मोल में है –

  1. कार्बन परमाणु के 6 मोल।
  2. हाइड्रोजन परमाणु के 18 मोल।
  3. अणुओं की संख्या = 3 x 6.07 x 1023 = 18.21 x 1023.

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प्रश्न 11.
शर्करा की सान्द्रता मोल लीटर में क्या होगी यदि इसके 20g को पर्याप्त मात्रा में जल में घोलकर अंतिम आयतन 2L बनाया जाये?
हल:
शर्करा का अणुभार = 12 x 12 + 1 x 22 + 16x 11 = 342
मोलर सांद्रता अर्थात्
M = \(\frac{\mathrm{W}}{\mathrm{M}_{\mathrm{B}} \mathrm{V}_{(\mathrm{L})}}\) = \(\frac{20}{342×2}\) = 0.0292

प्रश्न 12.
यदि मेथेनॉल का घनत्व 0.793 kg L-1 है, तो 0.25M विलयन 2.5 L में बनाने के लिये इसका कितना आयतन आवश्यक होगा?
हल:
M = \(\frac { W_{ B } }{ M_{ B }xV } \)
M= 0.25 g
V = 2.5 L
MB = 32g मोल-1
0.25 = \(\frac { W_{ B } }{ 32×2.5 } \)
या wB = 20g
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 9
(यहाँ घनत्व = 0.793kg L-1 या 0.793 g ml-1)

प्रश्न 13.
दाब को पृष्ठ के बल प्रति इकाई क्षेत्रफल के रूप में ज्ञात कीजिए।दाब की S.I. इकाई पास्कल नीचे दिखाई गई है –
1Pa = 1Nm-2
यदि समुद्र सतह पर हवा का भार 1034 gcm है, तो पास्कल में दाब निकालिये।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 10
= 1.01 x 105kg m-1s-2
= 1.01 x 105Nm-2 = 1.01 x 105Pa,
(न्यूटन (N) = kg m s-2; Pa = \(\frac { N }{ m^{ 2 } } \) = kg m-1s-2)

प्रश्न 14.
द्रव्यमान की S.I. इकाई क्या है ? इसे किस तरह परिभाषित करते हैं?
उत्तर:
द्रव्यमान की S.I. इकाई किलोग्राम (kg) है, इसका मान अन्तर्राष्ट्रीय मानक किलोग्राम के समान है। किसी पदार्थ का द्रव्यमान उसमें उपस्थित द्रव्य की मात्रा है। किसी वस्तु का द्रव्यमान स्थिर रहता है।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित पूर्वलग्न को उनके गुणक से मिलान कीजिए –
पूर्वलग्न(उपसर्ग)     गुणक
(i) माइक्रो             106
(ii) डेका               109
(iii) मेगा               10-6
(iv) गीगा              10-15
(v) फेम्टो              10
उत्तर:
माइक्रो = 10-6, डेका = 10, मेगा = 106, गीगा = 109, फेम्टो = 10-15.

प्रश्न 16.
सार्थक अंकों का क्या अर्थ होता है?
उत्तर:
परिभाषा (Definition)-किसी मापन के परिणाम को पूर्ण रूप से दर्शाने के लिए शन्य से नौ तक के अंकों में से न्यूनतम संख्या में जिन अंकों का प्रयोग आवश्यक होता है उन अंकों को सार्थक अंक कहते हैं। अथवा, किसी संख्या के उन अंकों (0 से लेकर 9 तक) को जिनके द्वारा किसी भौतिक राशि के परिमाण को पूर्णतः उसके यथार्थ मान तक व्यक्त करते हैं, सार्थक अंक (Significant figures) कहलाते हैं।

ये वे अंक हैं जो किसी मापन की परिशुद्धता को व्यक्त करने के लिए आवश्यक होते हैं। सार्थक अंकों की संख्या मापन के लिए प्रयुक्त उपकरण की परिशुद्धता पर निर्भर होती है। यदि मापन के लिए प्रयुक्त स्केल/ उपकरण की परिशुद्धता अधिक है तो मापन में अनिश्चितता भी कम होगी। किसी संख्या का अन्तिम अंक अनिश्चित होता है।
यदि किसी संख्यात्मक माप को 125.47 m3 दर्शाते हैं तो उसमें पाँच सार्थक अंक हैं तथा अन्तिम अंक 7 अनिश्चित है।

प्रश्न 17.
पीने के पानी का एक नमूना क्लोरोफॉर्म CHCl3 से दूषित हो गया जो अति कैंसरकारी प्रकृति का होता है। प्रदूषण का स्तर 15ppm (भार द्वारा) है।

  1. इसे प्रतिशत में दर्शाइये भार द्वारा।
  2. क्लोरोफॉर्म की मोललता पानी के नमूने में ज्ञात कीजिए।

हल:
15 ppm दूषित अर्थात् 15g क्लोरोफॉर्म 106g विलयन में घुला हुआ है।
अर्थात् , WB = 15g, WA = 106 – 15 ≅ 106g
विलेय का अणुभार (MB) = 119.5
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 11

प्रश्न 18.
निम्नलिखित को वैज्ञानिक अंकन में प्रदर्शित कीजिए –

  1. 0.0048
  2. 234,000
  3. 8008
  4. 500.0
  5. 6.0012.

उत्तर:

  1. 48 x 10-3
  2. 2.34 x 105
  3. 8.008 x 103
  4. 5.000 x 102
  5. 6.0012 x 100

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प्रश्न 19.
निम्न में कितने सार्थक अंक उपस्थित हैं –

  1. 0.0025
  2. 208
  3. 5005
  4. 126,000
  5. 500.0
  6. 2.0034.

उत्तर:

  1. 2
  2. 3
  3. 4
  4. 6
  5. 4
  6. 5.

प्रश्न 20.
निम्न को तीन सार्थक अंकों तक व्यवस्थित कीजिए –

  1. 34.216
  2. 10.4107
  3. 0.04597
  4. 2808

उत्तर:

  1. 34.2
  2. 10.4
  3. 0.0460
  4. 2.80 x 102.

प्रश्न 21.
डाइनाइट्रोजन तथा डाइऑक्सीजन की क्रिया द्वारा विभिन्न यौगिक बनते हैं तथा निम्नलिखित आँकड़े प्राप्त होते हैं –
डाइनाइट्रोजन   डाइऑक्सीजन
का भार                का भार
(i) 14g                  16g
(ii) 14g                32g
(iii) 28g                32g
(iv) 28g                80g

(a) ऊपर दिये प्रायोगिक आँकड़ों में कौन-सा रासायनिक संयोजन के नियम का पालन होता है इसका विवरण दीजिए।
(b) निम्नलिखित परिवर्तन में खाली स्थान भरिए –

  1. 1 km = …………… mm = …………… pm
  2. 1 mg = …………… kg = …………… ng
  3. 1 ml = ………….. L = …………… dm3.

उत्तर:
(a) यहाँ गुणित अनुपात के नियम का पालन हो रहा है, इसके अनुसार, जब दो तत्त्व संयोग करके दो या दो से अधिक यौगिक बनाते हैं तो एक तत्त्व के भिन्न-भिन्न भार जो कि दूसरे तत्त्व के निश्चित भार से संयोग करते हैं; परस्पर सरल अनुपात में होते हैं। यहाँ आँकड़ों से ज्ञात होता है कि ऑक्सीजन के भिन्न-भिन्न द्रव्यमान 16, 32, 40 जो नाइट्रोजन के एक निश्चित द्रव्यमान 14 से संयुक्त होते हैं, जो 2 : 4 : 5 के सरल अनुपात में हैं।
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प्रश्न 22.
यदि प्रकाश की गति 3.0 x 108 ms-1 है, तो प्रकाश द्वारा 2.00 ns में तय की गई दूरी की गणना कीजिए।
हल:
दूरी = गति x समय
= 3 x 108 x 2 x 10-9
= 6 x 10-1 = 0.6m.

प्रश्न 23.
अभिक्रिया में A + B2 → AB2 सीमांत अभिकर्मक की पहचान कीजिये यदि कोई निम्नांकित अभिक्रिया मिश्रण में हो –

  1. A के 300 परमाणु + B के 200 अणु
  2. A के 2 मोल + Bके 3 मोल
  3. A के 100 परमाणु + B के 100 अणु
  4. 5 मोल A + 2.5 मोल B
  5. 2.5 मोल A +5 मोल B.

उत्तर:
सीमांत अभिकर्मक अभिक्रिया में सबसे पहले खत्म होता है। अतः इस अभिकर्मक को ज्ञात करने के लिए A और B की मात्रा का तुलना करते हैं।
A + B2 → AB2

1. उपर्युक्त समी. के अनुसार A का 1 परमाणु, B के 1 अणु के साथ क्रिया करता है।
अत: A का 200 परमाणु B के 200 अणु से क्रिया करेंगे।
अत: B सीमांत अभिकर्मक है तथा A अधिकता में होगा।

2. उपर्युक्त समी. के अनुसार A के 1 मोल, B के 1 के साथ क्रिया करते हैं।
अतः A के 2 मोल, B के 2 मोल से क्रिया करेंगे।
इस दशा में A सीमांत अभिकर्मक होगा। B अधिकता में रहेगा।

3. उपर्युक्त समी. के अनुसार A के 1 परमाणु, B के 1 अणु से क्रिया करते हैं।
अतः A के 100 परमाणु, B के 100 अणु से क्रिया करेंगे।
अत: यह एक स्टाइकियोमेट्री मिश्रण है।
अतः कोई सीमान्त अभिकर्मक नहीं है, न A और न B।

4. इस दशा में A के 2.5 मोल, B के 2.5 मोल से क्रिया करेंगे।
अत: B सीमान्त अभिकर्मक है। A अधिकता में रहेगा।

5. इस दशा में A सीमान्त अभिकर्मक होगा। B अधिकता में रहेगा।

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प्रश्न 24.
डाइनाइट्रोजन तथा डाइहाइड्रोजन एक-दूसरे के साथ क्रिया करके निम्न रासायनिक क्रिया के अनुसार अमोनिया
बनाती है –
N2(g) + 3H2(g) → 2NH3(g)

  1. बने अमोनिया के भार की गणना कीजिए यदि 2.00 x 103g डाइनाइट्रोजन 1.00 x 103g डाइहाइड्रोजन के साथ क्रिया करता है।
  2. क्या कोई दो अभिकारक अक्रियाशील है?
  3. यदि हाँ तो कौन-सा है तथा उसका भार क्या होगा?

हल:
1.
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28g N2 अमोनिया बनाती है = 34g
2 x 103g N2 अमोनिया बनायेगी
= \(\frac{34 \times 2 \times 10^{3}}{28}\) = 2.43 x 103g
फिर ∴ 6g H2 अमोनिया बनाती है = 34g
∴ 1 x 103g H, अमोनिया बनाती है
= \(\frac{34 \times 1 \times 10^{3}}{6}\) = 5.66 x 103g.

2. N2 से प्राप्त अमोनिया कम है अतः N2 सीमान्त अभिकर्मक है। H2 अप्रभावित रहता है।

3. ∴ 28g N2, H2 से क्रिया करता है = 6g
∴ 2 x 103g N2 क्रिया करता है।
\(\frac{6 \times 2 \times 10^{3}}{28}\)
बची H = 1 x 103 – 4.286 x 102 = 571.4 g.

प्रश्न 25.
0.50 मोल Na2CO3 तथा 0-50 M NaCO3 में क्या अंतर है?
हल:
Na2CO3 का मोलर द्रव्यमान = (2 x 23) + 12 + (3 x 16)
= 106 g mol-1
0.50 मोल Na2CO3, का द्रव्यमान = मोलों की संख्या – मोलर द्रव्यमान
= 0.50 x 106 = 53g Na2CO3
अत: 0.50 M Nayco का तात्पर्य है कि 1 लीटर विलयन में Narco के 53g उपस्थित है।

प्रश्न 26.
डाइहाइड्रोजन के दस आयतन डाइऑक्सीजन के पाँच आयतन से क्रिया करके जलवाष्य के कितने आयतन बनायेंगे?
उत्तर:
H2(g) + \(\frac{1}{2}\)O2(g) → H2O(g)
1 मोल \(\frac{1}{2}\)मोल 1 मोल
1 आयतन \(\frac{1}{2}\)आयतन 1 आयतन
10 आयतन 5 आयतन 10 आयतन
अतः जलवाष्प के 10 आयतन प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित को आधारभूत इकाई में बदलिये –

  1. 28.7 pm
  2. 15.15 µs,
  3. 25365 mg.

हल:
1. 28.7pm = 28.7pm x \(\frac { 10^{ -12 }m }{ 1pm } \) = 287 x 10-11m.
2. 15.15µs = 15.15µs x \(\frac { 10^{ -6 }m }{ 1µs } \) = 1.515 x 10-5s.
= 2.5365×10-2kg.
3.25365 mg = 25365 mg x \(\frac{1g}{1000mg}\) x \(\frac{1kg}{1000g}\)

प्रश्न 28.
निम्न में से किस एक में अधिकतम परमाणुओं की संख्या होगी –

  1. 1g Au(s)
  2. 1g Na(s)
  3. 1g Li(s)
  4. 1g Cl2(g)

हल:
1. 1g Au = \(\frac{1}{197}\)mol = \(\frac{1}{197}\) x 6.02 x 1023 परमाणु
2. 1g Na = \(\frac{1}{23}\)mol = \(\frac{1}{27}\) x 6.02 x 1023 परमाणु
3. 1g Li = \(\frac{1}{7}\)mol = \(\frac{1}{7}\) x 6.02 x 1023 परमाणु
4. 1g Cl2 = \(\frac{1}{71}\)mol = 4 x 6.02 x 1023 अणु = \(\frac{2}{71}\) x 6.02 x 1023 परमाणु
अत: 1g Li में परमाणुओं की अधिकतम संख्या होती है।

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प्रश्न 29.
एथेनॉल का जल में बने विलयन की मोलरता की गणना कीजिए जिसमें एथेनॉल का मोल प्रभाज 0.040 है।
हल:
1 लीटर विलयन में उपस्थित विलेय (एथेनॉल) के मोलों की संख्या मोलरता होगी।
1L एथेनॉल विलयन (तनु विलयन) = 1L जल
1L जल में H2O की मोलों की संख्या = \(\frac{1000g}{18}\) = 55.55 मोल
द्विअंगी विलयन में दो घटक होते हैं।
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प्रश्न 30.
एक C परमाणु का भार (द्रव्यमान) क्या होगा?
हल:
कार्बन के एक परमाणु का भार
= \(\frac { 12 }{ 6.02×10^{ 23 } } \) = 1.9933 x 10-23g.

प्रश्न 31.
निम्नलिखित गणना के उत्तर में उपस्थित सार्थक अंक कितना होगा –

  1. \(\frac{0.02856×298.15×0.112}{0.5785}\)
  2. 5 x 5.364
  3. 0.0125 + 0.7864 + 0.0215.

उत्तर:

  1. सबसे कम यथार्थ पद 0.112 में 3 सार्थक अंक है। अतः उत्तर 3 है।
  2. 5 सही संख्या है। दूसरा पद 5.364 में 4 सार्थक अंक है। अतः उत्तर 4 है।
  3. प्रत्येक पद में 4 सार्थक अंक है। अतः उत्तर 4 है।

प्रश्न 32.
नीचे दिये गये सारणी के आँकड़ों का उपयोग करके प्राकृतिक रूप से प्राप्त (उत्पन्न) आर्गन समस्थानिक के मोलर भार की गणना कीजिए –
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हल:
औसत आण्विक भार
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प्रश्न 33.
निम्नलिखित में प्रत्येक में परमाणुओं की संख्या की गणना कीजिए –

  1. He के 52 मोल
  2. He के 52 u
  3. He के 52 g

हल:
1. ∴ He के 1 मोल = 6.02 x 1023 परमाणु
∴ He में 52 मोल = 52 x 6.02 x 1023
= 313.04 x 1023 परमाणु

2. ∴ He के 4u = He का एक परमाणु
∴ He में 52u = \(\frac{1×52}{4}\) = 13 परमाणु

3. He के 1 मोल = 4g = 6.02 x 1023 परमाणु
∴ 52g He = \(\frac { 6.02×10^{ 23 }x52 }{ 4 } \)

प्रश्न 34.
एक वेल्डिंग ईंधन गैस में केवल कार्बन तथा हाइड्रोजन है। इसके छोटे से नमूने के ऑक्सीजन में जलने पर ये 3-38 g कार्बन डाइऑक्साइड, 0.690 g पानी तथा कोई दूसरा उत्पाद नहीं देता। इस वेल्डिंग गैस के 10.0 L आयतन (STP पर मापा गया) का भार 11.6g है, तो गणना कीजिए –

  1. मूलानुपाती सूत्र
  2. गैस का अणुभार
  3. आण्विक सूत्र।

हल:
1. ∴ 44g CO2 = 12g कार्बन
∴ 3.38g CO2 = \(\frac{12}{44}\) x 338g = 0.9218g कार्बन
18g H2O = 2g हाइड्रोजन
∴ 0.690g H2O = \(\frac{2}{18}\) x 0.690g = 0.0767g हाइड्रोजन
यौगिक का द्रव्यमान = 0.9218 + 0.0767 = 0.9985g
(चूँकि यौगिक में केवल कार्बन तथा हाइड्रोजन है)
यौगिक में C की % मात्रा = \(\frac{0.9218}{0.9985}\) x 100 = 92.32%
यौगिक में H की % मात्रा = \(\frac{0.0767}{0.9985}\) x 100 = 7.68%
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अतः मूलानुपाती सूत्र = CH.

2. गैस के अणु द्रव्यमान की गणना:
∴ STP पर, गैस के 10.0L का भार = 11.6g
∴ STP पर, गैस के 22.4L का भार = \(\frac{116×22.4}{10.0}\) = 25.984g ≅ 26g mol-1.

3. अणुसूत्र की गणना:
मूलानुपाती सूत्रभार (CH) = 12 + 1 =13
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= (मूलानुपाती सूत्र)n [n = 2]
= (CH)2 = C2H2

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प्रश्न 35.
कैल्सियम कार्बोनेट जलीय HCl के साथ क्रिया करके CaCl2 तथा CO2 निम्न अभिक्रिया के अनुसार देता है –
CaCO3(s) + 2HCl(aq) → CaCl2(aq) + CO2(g) + H2O(l).
0.75 M HCl के 25 ml के साथ पूर्ण क्रिया के लिये CaCO3 की आवश्यक मात्रा क्या होगी?
हल:
HCl के मोल = मोलरता x V(L)
= 0.75 x 25 x 10-3 = 0.01875
HCl का भार = मोल x HCl का अणुभार (36.5)
= 0.01875 x 36.5 = 0.684g
CaCO3 + 2HCl → CaCl2 +H2O + CO2
100g 2 x 36.5 = 73g
∴ 73g HCl के लिये आवश्यक CaCO3 = 100g
∴ 0.684g HCl के लिये आवश्यक CaCO3 = \(\frac{100×0.684}{73}\) = 0.937g.

प्रश्न 36.
प्रयोगशाला में क्लोरीन को मैंगनीज डाइऑक्साइड की जलीय हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ क्रिया द्वारा निम्नांकित अभिक्रिया के अनुसार बनाया जाता है –
4HCl(aq) + MnO2(s) → 2H3O(l) + MnCl2(aq) + Cl2(l).
5.0g मैंगनीज डाइऑक्साइड के साथ HCl के कितने ग्राम क्रिया करेंगे?
हल:
4HCl + MnO2 → MnCl + Cl + 2H2O
146g 87g
87g MnO2 HCl के साथ क्रिया करता है = 146g
5g MnO2 HCl के साथ क्रिया करता है = \(\frac{146×5}{87}\) = 8.39g.

रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाए अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाए वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
2.0 ग्राम हाइड्रोजन का N.T.P. आयतन होता है –
(a) 224 लिटर
(b) 22.4 लिटर
(c) 2.24 लिटर
(d) 112 लिटर
उत्तर:
(b) 22.4 लिटर

प्रश्न 2.
शुद्ध जल की मोलरता –
(a) 18
(b) 50
(c) 556
(d) 100
उत्तर:
(c) 556

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प्रश्न 3.
12 gm CR में परमाणुओं की संख्या –
(a) 6
(b) 12
(c) 6.02 x 1023
(d) 12 x 6.02 x 1023
उत्तर:
(c) 6.02 x 1023

प्रश्न 4.
नाइट्रोजन के पाँच ऑक्साइड N2O NO, N2O3, N2O4 व N2O5 रासायनिक संयोग के किस नियम का पालन करते हैं –
(a) स्थिर अनुपात नियम
(b) तुल्य अनुपात नियम
(c) गे-लुसाक का गैस आयतन संबंधी नियम
(d) गुणित अनुपात नियम।
उत्तर:
(d) गुणित अनुपात नियम।

प्रश्न 5.
एक कार्बनिक यौगिक का मूलानुपाती सूत्र CH2 है। यौगिक के एक मोल का द्रव्यमान 42 ग्राम है। इसका अणुसूत्र होगा –
(a) CH2
(b) C3H6
(c) CH2
(d) C3Hg
उत्तर:
(b) C3H6

प्रश्न 6.
ZnSO4.7H2O में ऑक्सीजन की प्रतिशत मात्रा होगी –
(a) 22.65%
(b) 11.15%
(c) 22.30%
(d) 43.90%.
उत्तर:
(c) 22.30%

प्रश्न 7.
एक मोलल विलयन वह है, जिसमें एक मोल विलेय उपस्थित हो –
(a) 1000 ग्राम विलायक में
(b) 1 लिटर विलयन में
(c) 1 लिटर विलायक में
(d) 224 लिटर विलयन में
उत्तर:
(a) 1000 ग्राम विलायक में

प्रश्न 8.
क्यूप्रिक ऑक्साइड में कॉपर का भार प्रतिशत क्या होगा –
(a) 22.2%
(b) 79.8%
(c) 63.5%
(d) 16%.
उत्तर:
(b) 79.8%

प्रश्न 9.
112 cm3 CH4 का S.T.P. पर द्रव्यमान होगा –
(a) 0.16 ग्राम
(b) 0.8 ग्राम
(c) 0.08 ग्राम
(d) 1.6 ग्राम
उत्तर:
(d) 1.6 ग्राम

प्रश्न 10.
दो पदार्थों को पृथक करने की प्रभाजी क्रिस्टलन विधि इनके अन्तर पर निर्भर करती है –
(a) घनत्व
(b) वाष्पशीलता
(c) विलेयता
(d) क्रिस्टलीय आकार
उत्तर:
(c) विलेयता

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प्रश्न 11.
O2 व SO2 के अणु द्रव्यमान क्रमशः 32 व 64 हैं। यदि एक लिटर O2, में 13°C व 750 mm दाब पर N अणु हैं तो दो लिटर SO2 में समान ताप व दाब पर अणुओं की संख्या होगी –
(a) N/2
(b) N
(c) 2N
(d) 4N
उत्तर:
(c) 2N

प्रश्न 12.
यदि सामान्य ताप और दाब पर दो समान आयतन के पात्र में दो गैसें रखी गई हैं तो उनमें –
(a) अणुओं की संख्या समान होगी
(b) परमाणुओं की संख्या समान होगी
(c) उनके द्रव्यमान समान होंगे
(d) उनके घनत्व समान होंगे
उत्तर:
(a) अणुओं की संख्या समान होगी

प्रश्न 13.
3.4 ग्राम H2O2 के विघटन से N.T.P. पर O2 का निम्न आयतन प्राप्त होगा –
(a) 0.56 लिटर
(b) 1.12 लिटर
(c) 2.24 लिटर
(d) 3.36 लिटर
उत्तर:
(b) 1.12 लिटर

प्रश्न 14.
2 मोल C2H5OH को वायु के आधिक्य में जलाने पर CO2 प्राप्त होगा –
(a) 88 ग्राम
(b) 176 ग्राम
(c) 44 ग्राम
(d) 22 ग्राम
उत्तर:
(b) 176 ग्राम

प्रश्न 15.
12 ग्राम Mg (परमाणु द्रव्यमान = 24) अम्ल से पूर्णतया क्रिया करने पर H2 उत्पन्न करता है जिसका आयतन N.T.P. पर होगा –
(a) 22.4 लिटर
(b) 11.2 लिटर
(c) 44.8 लिटर
(d) 6.4 लिटर
उत्तर:
(c) 44.8 लिटर

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. बेंजीन का मूलानुपाती सूत्र …………. होगा।
  2. समान ताप तथा दाब पर समस्त गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है। इसे …………. ने पारित किया था।
  3. 180 ग्राम जल में मोलों की संख्या …………. होगी।
  4. किलोग्राम मीटर …………. की मात्रा है।
  5. 1 मोल CO2 में …………. कार्बन परमाणु हैं।
  6. यदि सामान्य ताप तथा दाब पर दो समान आयतन के पात्र में दो गैसें रखी गई हैं तो उनमें अणुओं की संख्या …………. होगी।
  7. 2 मोल C2H5OH को वायु के आधिक्य में जलाने पर …………. CO2 प्राप्त होगी।
  8. एक रासायनिक अभिक्रिया के अन्त में अभिकारक का कुल द्रव्यमान …………. नहीं होता है।
  9. बेंजीन अणुसूत्र वाले यौगिक का सरल सूत्र …………. है।
  10. एक यौगिक में C = 40.6%, H = 6.5%, O = 52.8% का मूलानुपाती सूत्र ………… होगा।

उत्तर:

  1. CH
  2. एवोगेड्रो
  3. 10 मोल
  4. घनत्व
  5. 6.023 x 1023
  6. समान
  7. 176 ग्राम
  8. परिवर्तित
  9. CH
  10. CH2O.

प्रश्न 3.
उचित संबंध जोडिए –
(A)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 19
उत्तर:

  1. (c)
  2. (e)
  3. (a)
  4. (b)
  5. (d).

(B).
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 20
उत्तर:

  1. (d)
  2. (a)
  3. (b)
  4. (e)
  5. (c).

प्रश्न 4.
एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. परमाणु द्रव्यमान की मानक इकाई है।
  2. O2 का ग्राम अणु द्रव्यमान है।
  3. विभिन्न स्रोतों से प्राप्त NaCl के तत्व Na तथा Cl के मध्य सभी में भार की दृष्टि से अनुपात 23 : 35.5 प्राप्त हुआ। इस नियम से पुष्टि होती है।
  4. ऑक्सीजन के क्रमशः 16 और 32 ग्राम भार N2 के 28 ग्राम भार से अलग-अलग संयोग कर दो ऑक्साइड N2O एवं N2O2 बनाते हैं। इससे किस नियम की पुष्टि होती है?
  5. 6.023 x 1023 किसी भी द्रव्य के एक ग्राम अणुभार में उपस्थित अणुओं की संख्या को कहा जाता है।

उत्तर:

  1. परमाणु द्रव्यमान इकाई (amu) (1amu = \(\frac{1}{12}\))
  2. 32 ग्राम
  3. स्थिर अनुपात
  4. गुणित अनुपात,
  5. मोल या एवोगेड्रो संख्या।

रसायन विज्ञान की कुछ मूल अति लघु उत्तरीय प्रश्न

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प्रश्न 1.
स्थिर अनुपात का नियम क्या है?
उत्तर:
रासायनिक यौगिकों में उनके अवयवी तत्व भार की दृष्टि से हमेशा एक निश्चित अनुपात में रहते हैं।
उदाहरण:
विभिन्न स्थानों से प्राप्त जल से शुद्ध करने के पश्चात् विश्लेषित करने पर ज्ञात हुआ कि जल के प्रत्येक नमूने में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन द्रव्यमान के अनुसार 2 : 16 या 1 : 8 में है।

प्रश्न 2.
गे-लुसाक का गैस आयतन संबंधी नियम लिखिए।
अथवा
N2 और H2 परस्पर संयुक्त होकर NH3 गैस का निर्माण करती है। समान ताप व दाब पर इनके आयतनों में 1 : 3 : 2 का अनुपात है। इससे जिस नियम की पुष्टि होती है, उस नियम को लिखिए।
उत्तर:
गैस आयतन सम्बन्धी नियम या गे-लुसाक का गैस आयतन सम्बन्धी नियम-इसके अनुसार, “जब गैसें आपस में संयोग करती हैं, तो उनके आयतनों में सरल अनुपात होता है और यदि उनके संयोग से बना हुआ पदार्थ भी गैस ही हो तो उसका आयतन भी अभिकारी गैसों के आयतनों के सरल अनुपात में होता है (जब सभी आयतन समान ताप और दाब पर मापे जाएँ)।”
उदाहरण:
N2 + 3H2 → 2NH3
1आयतन 3 आयतन 2 आयतन
इनके आयतनों में 1 : 3 : 2 का सरल अनुपात है।
अत: उपर्युक्त उदाहरणों से गे-लुसाक के गैस आयतन सम्बन्धी नियम की पुष्टि होती है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित की परिभाषा लिखिए –

  1. ग्राम परमाणु द्रव्यमान
  2. ग्राम आण्विक द्रव्यमान।

उत्तर:

1. ग्राम परमाणु द्रव्यमान-किसी तत्व का ग्राम परमाणु द्रव्यमान उसका ग्रामों में दर्शाया गया वह द्रव्यमान है जो संख्यात्मक रूप से परमाणु द्रव्यमान के बराबर है, उसे ग्राम परमाणु द्रव्यमान कहते हैं।

2. ग्राम आण्विक द्रव्यमान-ग्रामों में प्रदर्शित वह द्रव्यमान जो संख्यात्मक रूप से आण्विक द्रव्यमान के बराबर हो, ग्राम आण्विक द्रव्यमान कहलाता है।

प्रश्न 4.
मूलानुपाती सूत्र क्या है?
उत्तर:
वह सूत्र जो किसी यौगिक के अणु में विद्यमान विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के सरल अनुपात को दर्शाता है मूलानुपाती सूत्र (Empirical formula) कहलाता है। जैसे:
ऐसीटिक अम्ल का मूलानुपाती सूत्र = CH2O
ग्लूकोज का मूलानुपाती सूत्र = CH2O.

प्रश्न 5.
किसी विलयन की मोललता को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी विलयन की मोललता प्रति 1000 ग्राम विलायक में उपस्थित विलेय पदार्थ के मोलों की संख्या है। इसे m द्वारा प्रदर्शित करते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 21

प्रश्न 6.
मोल क्या है? स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
एक मोल वह संख्या है जिसका मान कार्बन-12 के 0.012 कि.ग्रा. में उपस्थित परमाणु के संख्या के बराबर होता है। इस संख्या का मान 6.023 x 1023 होता है।

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प्रश्न 7.
सीमांत अभिकर्मक क्या है?
उत्तर:
संतुलित समीकरण में जो क्रियाकारक कम मात्रा में उपस्थित रहता है, वह पहले समाप्त हो जाता है। ऐसे क्रियाकारक को सीमांत अभिकर्मक कहते हैं क्योंकि वह उत्पाद की मात्रा को सीमित कर देता है।

प्रश्न 8.
सार्थक अंक का निकटन कैसे किया जाता है?
उत्तर:
किसी संख्या को तीन सार्थक अंकों तक निकटित करने के लिए, यदि चौथा अंक 5 से छोटा है तो उसे छोड़ देते हैं परन्तु यदि चौथा अंक 5 या 5 से अधिक है तो तीसरे सार्थक अंक में 1 जोड़ देते हैं।

प्रश्न 9.
द्रव्यमान, लम्बाई, समय, तापक्रम एवं पदार्थ की मात्रा का SI मात्रक क्या है?
उत्तर:
द्रव्यमान का-किलोग्राम (kg), लंबाई का-मीटर (m), समय का-सेकण्ड (s), तापक्रम काकेल्विन (K) एवं पदार्थ की मात्रा का-मोल (mol) है।

रसायन विज्ञान की कुछ मूल लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यदि डाइ हाइड्रोजन गैस के 10 आयतन डाइऑक्साइड गैस के 5 आयतनों के साथ अभिक्रिया करे तो जल वाष्प के कितने आयतन प्राप्त होंगे?
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 22
गे-लुसाक के गैसीय आयतन के नियमानुसार,
आयतन अनुपात 2 : 1 : 2
प्रश्नानुसार 10 : 5 : 10
अत: 10 आयतन H2, 5 आयतन O2 से क्रिया करके 10 आयतन जल वाष्प बनाएगा।

प्रश्न 2.
द्रव्यमान संरक्षण का नियम क्या है? इस नियम की आधुनिक स्थिति क्या है?
उत्तर:
द्रव्यमान संरक्षण का नियम-इस नियम को लेवोजियर ने सन् 1744 में प्रतिपादित किया था। इस नियम के अनुसार, “रासायनिक परिवर्तन में भाग लेने वाले पदार्थों का कुल द्रव्यमान परिवर्तन के पश्चात् बने हुए पदार्थों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है अर्थात् रासायनिक परिवर्तन में द्रव्य न तो उत्पन्न होता है और न ही नष्ट होता है, उसके केवल रूप या अवस्था में परिवर्तन हो सकता है।”
उदाहरण:
C + O2 → CO2
12 ग्राम कार्बन 32 ग्राम ऑक्सीजन से संयोग करता है, तो 44 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड प्राप्त होता है।
आधुनिक स्थिति:
आइन्स्टीन के अनुसार द्रव्यमान को ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है।
E = mc2
जहाँ E = ऊर्जा, m = द्रव्यमान और c = प्रकाश का वेग।
किन्तु जो रासायनिक क्रियाएँ हम प्रयोगशाला में करते हैं उनमें बहुत कम ऊर्जा उत्पन्न या अवशोषित होती है, इसलिये द्रव्य की मात्रा में बहुत कमी या वृद्धि होती है। अतः साधारण परिस्थितियों में द्रव्यमान संरक्षण नियम को सत्य माना जा सकता है।

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प्रश्न 3.
गे-लुसाक का आयतन संबंधी नियम क्या है?
अथवा
N2 और H2 परस्पर संयुक्त होकर NH3 गैस का निर्माण करते हैं। समान ताप व दाब पर इनके आयतनों में 1:3:2 का अनुपात है। इससे जिस नियम की पुष्टि होती है, उस नियम को लिखिये।
उत्तर:
जब गैसें आपस में संयोग करती हैं, तो उनके आयतनों में सरल अनुपात होता है और यदि उनके संयोग से बना हुआ पदार्थ भी गैस ही हो, तो उसका आयतन भी अभिकारी गैसों के आयतनों के सरल अनुपात में होता है, जब सभी समान आयतन समान ताप और दाब पर नापे जायें।
उदाहरण:
एक आयतन N2 तीन आयतन H2 के साथ संयोग करके दो आयतन अमोनिया बनाता है। अभिकारी गैस N2, H2 तथा अमोनिया में परस्पर 1 : 3 : 2 का सरल अनुपात है। इससे इस नियम की पुष्टि होती है।
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प्रश्न 4.
तुल्य अनुपात का नियम क्या है ? उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
यह नियम सर्वप्रथम रिचर द्वारा सन् 1792 में दिया गया तथा सन् 1810 में बर्जीलियस ने इसकी पुष्टि की। इस नियम के अनुसार, “यदि दो भिन्न-भिन्न तत्व किसी तीसरे तत्व के निश्चित भार से संयोग करते हैं तो पहले दोनों तत्वों के भार या तो उस अनुपात में होंगे जिससे वे दोनों आपस में संयोग करते हैं अथवा यह अनुपात उनके संयोग करने के भारों का सरल गुणांक होगा।
उदाहरण:
दो तत्व कार्बन और ऑक्सीजन अलग-अलग हाइड्रोजन के एक निश्चित भार से संयोग करते हैं।
मेथेन में H : C = 4 : 12
H2O में H : 0 = 2 : 16
या 4:32
हाइड्रोजन के एक निश्चित भार से संयुक्त होने वाले ये तत्व कार्बन और ऑक्सीजन आपस में संयुक्त होकर CO2 बनाते हैं।
CO2 में C : O = 12 : 32
यह अनुपात 12 : 32 वही है जो CH4 और H2O में C और O का अनुपात है, इससे तुल्य अनुपात नियम की पुष्टि होती है।

प्रश्न 5.
किसी पदार्थ का अणुसूत्र उनके मूलानुपाती सूत्र से किस प्रकार संबंधित होता है?
उत्तर:
अणुसूत्र व मूलानुपाती सूत्र में संबंध-अणुसूत्र यह किसी यौगिक में उपस्थित तत्वों के परमाणुओं में उपस्थित वास्तविक संख्या को प्रकट करता है। यह या तो मूलानुपाती सूत्र के समान होती है या इसका एक सरल गुणक होता है।
अणुसूत्र = n x (मूलानुपाती सूत्र)
या
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 24
उदाहरण:
एक यौगिक का जिसका मूलानुपाती सूत्र CH2O है तथा अणुभार 180 है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 25
अतः अणु सूत्र = n x मूलानुपाती सूत्र = 6(CH2O)
= C6H12O6.

प्रश्न 6.
गुणित अनुपात का नियम क्या है ? एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:]
गुणित अनुपात का नियम-“जब दो तत्व परस्पर संयोग करके दो या दो से अधिक यौगिक बनाते हैं, तो एक तत्व के भिन्न-भिन्न भार, जो दूसरे तत्वों के निश्चित भार से संयोग करते हैं, सदैव सरल गुणित अनुपात में होते हैं।”
उदाहरण:
भार अनुसार, CO में 12 भाग C और 16 भाग O तथा CO2 में 12 भाग C और 32 भाग O.
यहाँ पर C के निश्चित भार (12 भाग) से संयुक्त होने वाले O के विभिन्न भार क्रमश: 16 और 32 सरल अनुपात 1 : 2 में हैं।

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प्रश्न 7.
स्थिर अनुपात का नियम क्या है ? समस्थानिक की खोज ने इसे किस प्रकार प्रभावित किया?
उत्तर:
स्थिर अनुपात का नियम-प्राऊस्ट के अनुसार, “प्रत्येक रासायनिक यौगिक में चाहे वह कहीं से प्राप्त किया गया हो अथवा किसी भी विधि से बनाया गया हो उसके अवयवी तत्व भार की दृष्टि से सदैव एक निश्चित अनुपात में रहते हैं।”
जैसे:
शुद्ध जल जिसे नदी, वर्षा, कुँआ, समुद्र आदि कहीं से प्राप्त किया जा सकता है अथवा किसी भी रासायनिक विधि से बनाया जा सकता है, परन्तु हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन के भारों का अनुपात सदैव 1 : 8 होता है।

वर्तमान परिवेश में स्थिर अनुपात का नियम:
समस्थानिकों की खोज ने यह सिद्ध कर दिया है कि एक ही तत्व के भिन्न-भिन्न परमाणु भार वाले परमाणु सम्भव हैं। अतः किसी भी यौगिक का संघटन निश्चित नहीं होगा। जैसे-जल का संघटन अग्रलिखित सारणी से स्पष्ट है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 26
उपर्युक्त आँकड़े इस नियम के विपरीत हैं, परन्तु नियम सर्वमान्य है, क्योंकि प्रकृति में पाये जाने वाले तत्व के प्रत्येक भाग में समस्थानिकों का वितरण समान है।

प्रश्न 8.
प्रकृति में उपलब्ध ऑर्गन के मोलर द्रव्यमान की गणना के लिए निम्नलिखित तालिका में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 27
हल:
Ar का औसत मोलर द्रव्यमान Σ fi x Ai
= (0.00337 x 35.96755) + (0.00063 x 37.96272) + (0.99600 x 39.9624)
= 0.121 + 0.024 + 39.803
= 39.948g mol-1.

प्रश्न 9.
डॉल्टन के परमाणु सिद्धान्त का आधुनिक स्वरूप संक्षिप्त में समझाइये।
उत्तर:
डॉल्टन के परमाणु सिद्धान्त का आधुनिक स्वरूप –

  1. परमाणु अब अविभाज्य कण नहीं है, परमाणु का विखण्डन संभव है।
  2. परमाणु रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाला सूक्ष्मतम कण है।
  3. डॉल्टन के अनुसार एक ही तत्व के समस्त परमाणु एक समान होते हैं, किन्तु अब ऐसे परमाणु भी ज्ञात हैं, जिनके रासायनिक गुण समान होते हैं किन्तु भार भिन्न-भिन्न होते हैं।
  4. डॉल्टन के अनुसार भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु भार भिन्न-भिन्न होते हैं। परन्तु समभारी की खोज से स्पष्ट है कि भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणुओं के परमाणु भार समान हो सकते हैं।
  5. आधुनिक अनुसंधानों से स्पष्ट है कि परमाणु के द्रव्यमान को ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है।
  6. अन्य अणुभार वाले कार्बनिक यौगिकों के अणुओं में परमाणुओं की संख्या सरल अनुपात में हो, यह जरूरी नहीं है।

प्रश्न 10.
अणु और परमाणु में अंतर लिखिये।
उत्तर:
अण और परमाण में अंतर:
अणु

  1. यह द्रव्य का सूक्ष्मतम कण है जो स्वतंत्र अवस्था में रहता है।
  2. यह रासायनिक अभिक्रिया में भाग नहीं लेता।
  3. यह रासायनिक अभिक्रिया में प्रायः परमाणु में विभाजित हो जाता है।
  4. यह एक या एक से अधिक परमाणुओं से मिलकर बना होता है।

परमाणु

  1. यह किसी तत्व का सूक्ष्मतम कण है जो स्वतंत्र अवस्था में नहीं रह सकता है।
  2. यह रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेता है।
  3. यह रासायनिक अभिक्रिया में विभाजित नहीं होता है।
  4. यह रासायनिक क्रिया में भाग लेने वाले तत्व का सूक्ष्मतम कण है।

रसायन विज्ञान की कुछ मूल दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रासायनिक समीकरण क्या है? उसे संतुलित करने के नियम उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों तथा बनने वाले पदार्थों को रासायनिक सूत्रों द्वारा समीकरण के रूप में दर्शाया जाता है। रासायनिक अभिक्रिया को रासायनिक सूत्रों द्वारा समीकरण के रूप में दर्शाने की विधि को रासायनिक समीकरण कहते हैं। रासायनिक समीकरण को सन्तुलित करने के नियम:

  1. अनुमान विधि (Hit and trial method)
  2. आंशिक समीकरण विधि (Partial equation method)।

1. अनुमान विधि:
(i) सबसे पहले उस तत्व के परमाणुओं को जो सबसे कम स्थान में आते हैं, उन्हें समीकरण के दोनों ओर बराबर कर लेते हैं।

(ii) जिन समीकरणों में ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन आदि तात्विक गैसें बनती हैं, उन्हें पहले परमाण्विक अवस्था में ही रखा जाता है। इस प्रकार प्राप्त समीकरण परमाण्विक समीकरण कहलाता है। परमाण्विक समीकरण को दो से गुणा करके आण्विक समीकरण (Molecular equation) में बदला जाता है।

उदाहरण:
(i) पोटैशियम क्लोरेट को गर्म करने से पोटैशियम क्लोराइड और ऑक्सीजन बनते हैं। अतः

(a) पोटैशियम क्लोरेट → पोटैशियम क्लोराइड + ऑक्सीजन।
KClO3 → KCl + O(ढाँचा)

(b) ऊपर के समीकरण में ऑक्सीजन परमाणु दोनों ओर बराबर नहीं हैं। दायीं ओर के ऑक्सीजन परमाणु को 3 से गुणा करने पर दोनों ओर ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या बराबर हो जाती है।
KClO3 → KCI + 3O

(c) परन्तु ऊपर के समीकरण में ऑक्सीजन परमाणु के रूप में है। उसे अणु के रूप में परिवर्तित करने के लिए समीकरण को दो से गुणा करना पड़ेगा। अतः
2KClO3 → 2KCl + 3O, (संतुलित)

(ii) (a) कॉपर को सान्द्र H2SO के साथ गर्म करने से कॉपर सल्फेट, सल्फर डाइऑक्साइड और जल बनता है। अतः
Cu + H2SO4 → CuSO4 + SO2 + H2O (ढाँचा)

(b) सल्फर परमाणुओं को दोनों ओर बराबर करने के लिएH,SO, को दो से गुणा कर देते हैं।
Cu + 2H2SO4 → CuSO4 + SO2 + H2O

(c) अब हाइड्रोजन के परमाणुओं को दोनों ओर बराबर करने के लिए HO को दो से गुणा कर देते हैं।
Cu + 2H2SO4 → CuSO4 + SO2 + 2H2O (संतुलित)

2. आंशिक समीकरण विधि:
जटिल समीकरणों को प्रायः अनुमान विधि द्वारा सन्तुलित करना कठिन होता है। यह माना जाता है कि जटिल समीकरण दो या दो से अधिक पदों में सम्पन्न होता है। इन समीकरणों को सन्तुलित कर लेते हैं। यदि आवश्यक हुआ तो आंशिक समीकरण को किसी पूर्णांक से गुणा कर देते हैं। इसके पश्चात् सभी आंशिक समीकरणों को इस प्रकार से जोड़ा जाता है कि माध्यमिक उत्पाद जो अन्तिम अभिक्रिया में प्राप्त नहीं होते, कट जायें। इस प्रकार प्राप्त अन्तिम समीकरण सही एवं सन्तुलित होता है।
उदाहरण:
Cu को सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म करने पर कॉपर सल्फेट, सल्फर डाइऑक्साइड और जल बनता है। इस समीकरण को निम्नलिखित आंशिक समीकरणों के योग के रूप में दर्शाया जा सकता है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 28
माध्यमिक क्रियाफल 26 और O आंशिक समीकरणों में दोनों ओर स्थित होने के कारण काट दिये गये हैं।

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प्रश्न 2.
मोल तथा ऐवोगैड्रो संख्या को समझाइये। मोल संकल्पना के आधार पर परमाणु द्रव्यमान तथा आण्विक द्रव्यमान की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
मोल संकल्पना-परमाणु तथा अणु अत्यन्त सूक्ष्ण कण है। किसी पदार्थ की अति अल्प मात्रा में भी परमाणुओं तथा अणुओं की संख्या बहुत अधिक होती है। उदाहरणार्थ, कार्बन के 1 मिलीग्राम (0.001 ग्राम) में कुल 5-019 x 1019 परमाणु होते हैं। प्रायः रासायनिक अध्ययनों में पदार्थ की काफी मात्राएँ प्रयुक्त होती है, जिनमें परमाणु या अणुओं की अत्यधिक बड़ी संख्या होती है। इन परमाणुओं को गिनना असम्भव है, किन्तु इनकी संख्या का ज्ञान होना आवश्यक है। जिस प्रकार 12

पेन को एक दर्जन पेन तथा 1000 मीटर को एक किलोमीटर कहते हैं उसी प्रकार 6.023 x 1023 कणों के समूह को हम एक मोल कहते हैं। ये कण अणु, परमाणु अथवा आयन हो सकते हैं।

अत: मोल एक इकाई है, जो 6.023 x 1023 कणों (अणु, परमाणु या आयन) को व्यक्त करती है।
एक मोल अणु में अणुओं की संख्या = 6.023 x 1023 होती है।
एक मोल परमाणु में परमाणुओं की संख्या = 6.023 x 1023 होती है। एक मोल आयन में आयनों की संख्या = 6.023 x 1023 होती है। मोल भार को भी दर्शाता है –

एक ग्राम मोल ऑक्सीजन अर्थात् 32 ग्राम ऑक्सीजन में ऑक्सीजन के कुल 6.023 x 1023 अणु होंगे। एक ग्राम मोल सोडियम अर्थात् 23 ग्राम सोडियम में सोडियम के 6.023 x 1023 परमाणु होंगे।

सोडियम क्लोराइड का सूत्र भार 58.5 है। अतः सोडियम क्लोराइड के 58.5 ग्राम में एक मोल सोडियम आयन तथा एक मोल क्लोराइड आयन होंगे।

“समान ताप और समान दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है।” इस नियम के अनुसार N.T.P. पर प्रत्येक गैस के एक ग्राम मोल में अणुओं की संख्या 6.023 x 1023 होती है। इस संख्या को ऐवोगैड्रो संख्या (Avogadro Number) कहते हैं तथा इसे N से प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 3.
स्टॉइकियोमेट्री क्या है? रासायनिक समीकरणों पर आधारित समस्याओं का हल इससे किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर:
‘स्टॉइकियोमेट्री’ यूनानी भाषा से (‘स्टॉकियोन’ का अर्थ, तत्व तथा मेट्रोन’ (Metron) का अर्थ मापन) लिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ है तत्व या यौगिकों की मात्रा का मापन।

एक संतुलित रासायनिक समीकरण में रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले अभिकारकों तथा उत्पादों के मध्य अणुओं, द्रव्यमानों, मोलों और आयतनों के संदर्भ में मात्रात्मक संबंध होता है। इन गणनाओं से सम्बन्धित समस्याएँ तीन प्रकार की होती हैं –

(a) द्रव्यमान-द्रव्यमान संबंधित (Involving mass – mass relationship):
इस प्रकार की समस्याओं में एक उत्पाद या अभिकारक का द्रव्यमान दिया जाता है तथा दूसरे की गणना की जाती है। .

(b) द्रव्यमान-आयतन संबंधित (Involving mass – volume relationship):
इस प्रकार के प्रश्नों में एक अभिकारक अथवा उत्पाद का द्रव्यमान/आयतन दिया जाता है तथा दूसरे की गणना की जाती है।

(c) आयतन-आयतन संबंधित (Involving volume – volume relationship):
इस प्रकार की समस्याओं में एक अभिकारक या उत्पाद का आयतन दिया जाता है तथा दूसरे की गणना की जाती है।

उपर्युक्त प्रकार के प्रश्नों (समस्याओं) को हल करने के लिए निम्न प्रक्रिया अपनाई जाती है –

  1. संतुलित रासायनिक समीकरण को उसके आण्विक रूप में लिखते हैं।
  2. उन स्पीशीज (परमाणुओं या अणुओं) के संकेतों एवं सूत्रों को चुनिए जिनके भार/आयतन या तो दिये गये हैं अथवा गणना द्वारा निकाले गये हैं।
  3. गणना में शामिल अणुओं तथा परमाणुओं का परमाणु द्रव्यमान/आण्विक द्रव्यमान/मोल/मोलर आयतन लिखते हैं।
  4. सामान्य गणितीय गणनाओं द्वारा इच्छित पदार्थ की मात्रा की गणना करते हैं। निम्न संतुलित समीकरण पर विचार करें –

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ - 29
अणु की संख्या (मोल) ही स्टॉइकियोमेट्रिक गुणांक कहलाता है।

प्रश्न 4.
रासायनिक समीकरण क्या है? उसकी सीमाएँ क्या हैं? उसे और अधिक सूचनाप्रद किस प्रकार बनाया जा सकता है ? रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों (अभिकारकों तथा बनने वाले पदार्थों (उत्पादकों) को रासायनिक सूत्रों द्वारा समीकरण के रूप में दर्शाने की विधि रासायनिक समीकरण कहलाती है। रासायनिक समीकरण से निम्नलिखित बातों की जानकारी नहीं होती –

  1. अभिकारकों तथा उत्पादकों की भौतिक अवस्था।
  2. अभिकारकों तथा उत्पादकों का सान्द्रण।
  3. यह रासायनिक अभिक्रिया की परिस्थितियाँ जैसे-ताप, दाब, उत्प्रेरक आदि की जानकारी नहीं देता।
  4. अभिक्रिया के वेग का ज्ञान नहीं होता।
  5. अभिक्रिया में होने वाले ऊष्मीय परिवर्तन का ज्ञान नहीं होता।
  6. अभिक्रिया में सावधानियों का ज्ञान नहीं होता।
  7. अभिक्रिया की क्रिया-विधि का ज्ञान नहीं होता।
  8. यह ज्ञात नहीं होता कि अभिक्रिया उत्क्रमणीय है या अनुत्क्रमणीय।
  9. अभिक्रिया के पूर्ण होने का समय नहीं बतलाता।
  10. रासायनिक समीकरण से अभिक्रिया में प्रकाश का उत्पन्न होना, विस्फोटक पदार्थों का बनना आदि के बारे में मालूम नहीं होता।

रासायनिक समीकरणों को संतुलित करके तथा उचित निर्देश चिन्हों का प्रयोग करके इसे ज्यादा स्पष्ट, जानकारीपूर्ण तथा लाभदायक बनाया जा सकता है। इससे होने वाले फायदे निम्नानुसार हैं –

  • अभिक्रिया में भाग लेने वाली अभिकारकों तथा उत्पादकों की संख्या।
  • यदि तत्वों के परमाणु द्रव्यमान ज्ञात हो तो अभिकारकों एवं उत्पादकों के आण्विक द्रव्यमान भी ज्ञात किये जा सकते हैं।
  • यदि क्रियाकारक व क्रियाफल पदार्थ गैसीय हो, तो उनका आयतन भी ज्ञात किया जा सकता है।
  • इससे द्रव्य की अनिश्चिता के नियम की पुष्टि होती है।
  • तत्वों की संयोजकता व तुल्यांकी द्रव्यमान के गणना भी की जा सकती है।

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 6 Government at the Center

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 6 Government at the Center

MP Board Class 7th Social Science Chapter 6 Text Book Questions

Choose the correct alternative from the following

Question 1.
The minimum age to become the member of Rajya Sabha is:
(a) 35 years
(b) 30 years
(c) 40 years
(d) 25 years
Answer:
(b) 30 years

Question 2.
The minimum number of the members of the Lok Sabha are:
(a) 230
(b) 545
(c) 250
(d) 552
Answer:
(b) 545

Question 3.
The maximum difference between the two sittings of the Lok Sabha is:
(a) 1 year
(b) 3 months
(c) 6 months
(d) 9 months
Answer:
(c) 6 months

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Fill in the blanks:

  1. In India ……………… is the age for adult franchise.
  2. ……………… presides over the sittings in Lok Sabha.
  3. The number of members decided by the Indian constitution for Rajya Sabha is
  4. The term of a Rajya Sabha member is ………… years.
  5. The President has the power to nominate ……… number of members in die Rajya Sabha.
  6. …………. is the ex-office member of the Rajya Sabha.

Answer:

  1. 18 years
  2. Speaker
  3. 250
  4. six years
  5. 12
  6. Vice President

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 6 Short Answer Type Questions

Question 1.
Mention three qualifications to become the member of Lok Sabha.
Answer:
Three qualifications to become the member of Lok Sabha:

  • He / She should be a citizen of India and his / hername should beinthe elctoralroll
  • He should have acquired the age of 25 years.
  • He should not be proclaimed bankrupt or insolvent by the court

Question 2.
Mention the three qualifications for a voter.
Answer:
Three qualifications for a voter are:

  • He / She must be a citizen of India and must have completed the age of 18 years.
  • His / Her name must be in the voters list of the constituency to which he / she belongs.
  • He must not be insolvent, bankrupt and must be sane.

Question 3.
What do you understand by First Reading?
Answer:
In it, copies of the bill are given to the members. The person or minister who introduces the bill in the House, gives a speech explaining the purpose of the bill The proposal of this bill is published in the government gazette of the central government.

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Question 4.
Mention five subjects given in the Central List
Answer:
Among 97 subjects, 5 subjects given the Central List are:

  • Army
  • Bank
  • Currency
  • Railways
  • Post & telegraphs.

Question 5.
What is concurrent list?
Answer:
Concurrent list consists of 52 subjects on which both the Parliament and State Legislatures have the power to make laws.

MP Board Class 7th Social Science Chapter 6 Long Answer Type Questions

Question 1.
The Rajya Sabha is a Permanent body. Explain how?
Answer:
Rajya Sabha is a permanent body, it is never dissolved. The term of a Rajya Sabha member is six years. One third of its members retire every two years after the completion of their term of six years. In their place a set of new members are elected by the members of the legislative assembly. In the same way one third of its nominated members are also replaced after six years by the President

Question 2.
Describe any two functions of the Parliament.
Answer:
The Parliament has a number of functions of which two are given below:

1. To make laws – The Parliament makes laws on all the 97 subjects given in the central list It also makes laws on the 52 subjects mentioned in the concurrent list. It also makes laws on the subjects given in the residuary list from time to time.

2. Control over the executive – The central executive is formed from among-st the members of the Parliament The Parliament controls this executive. This is done by various methods like asking questions and supplementary questions, agreements over bills and non – agreement over passing of a bill, calling attention motion and passing no – confidence motion.

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Question 3.
Describe in brief how a bill is made a law.
Answer:
Every bill has to go through three stages in the Parliament. These stages are:

  • The first reading of the bill – In it, copies of the bill are given to the members. The person or minister who introduces the bill in the House, gives a speech explaining die purpose of die bill.
  • The second reading – In the second reading, a clause / by – clause discussion takes place on the bill.
  • The third reading – in the third reading the bill as a whole is finally discussed and put to vote.

If the majority of the members are in its favor, the bill is passed. Now the bill is sent to the other House. After the bill is sent to the other House, it goes through all the three stages as mentioned above. After toe other House passes toe bill, it is sent to toe President for his assent The bill becomes a law after it is signed by toe President.

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम्

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् (गद्यम्) (सङ्कलितम्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 13 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) महाभारतस्य प्रणयनं केन कृतम्? (महाभारत की रचना किसने की?)
उत्तर:
वेदव्यासेन (वेदव्यास के द्वारा)

(ख) जलं बिना किं न सम्भवम्? (जल के बिना क्या सम्भव नहीं?)
उत्तर:
जीवनम् (जीवन)

(ग) खगोलशास्त्रं कस्मिन् क्षेत्र प्रसिद्धम्? (खगोलशास्त्र किस क्षेत्र में प्रसिद्ध है?)
उत्तर:
कालगणनाक्षेत्रे (कालगणना के क्षेत्र में)

(घ) राजप्रासादादीनां निर्माणे कस्य उपयोगः भवति स्म? (राजमहल आदि के निर्माण में किसका उपयोग होता था?)
उत्तर:
अयसः (लोहे का)

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(ङ) केन दर्शनेन सूक्ष्मवस्तु बृहद् इव भासते? (किसके द्वारा देखने से छोटी वस्तु बड़ी लगती थी?)
उत्तर:
काचकेन (शीशे से)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) शिष्यान् कथं परीक्षेत? (शियों की कैसे परीक्षा ली जानी चाहिए?)
उत्तर:
यथा शुद्धं कनकं तापच्छेदनिघर्षणैः परीक्ष्येत तथा शिष्यान् परीक्षेत।

(जैसे शुद्ध सोने को तपाकर, काटकर और घिसकर परखा जाता है वैसे ही शिष्यों की परीक्षा ली जानी चाहिए।)

(ख) आभरणस्वरूपेण कयोः उपयोगिता महाभारते वर्णितम्? (आभूषण रूप में किन की उपयोगिता महाभारत में वर्णित है?)
उत्तर:
आभरणस्वरूपेण सुवर्णरजतयोः उपयोगिता महाभारते वर्णितम्। (आभूषण के रूप में सोने और चाँदी का उपयोग महाभारत में वर्णित है।)

(ग) जनाः सुगन्धद्रव्याणां निर्माणार्थं कस्य उपयोगः कुर्वन्ति स्म? (लोग सुगन्ध द्रव्यों को बनाने के लिए किसका उपयोग करते थे?)
उत्तर:
जनाः सुगन्ध द्रव्याणां निर्माणार्थं पुष्पाणां तैलस्य उपयोगः कुर्वन्ति स्म। (लोग सुगन्धित द्रव्यों को बनाने के लिए फूलों के तेल का उपयोग करते थे।)

(घ) वेदव्यासेन महाभारतस्य प्रणयनं किमर्थं कृतम्? (वेदव्यास के द्वारा महाभारत को रचना किस लिए की गई?)
उत्तर:
वेदव्यासेन महाभारतस्य प्रणयनं लोकोपकाराय कृतम्। (वेदव्यास ने महाभारत की रचना लोकोपकार के लिए की।)

(ङ) महाभारतं कस्याः परिचायकग्रन्थः? (महाभारत किसका परिचायक ग्रन्थ है?)
उत्तर:
महाभारतं भारतीयसनातन वैदिक संस्कृतेः परिचायक ग्रन्थः। (महाभारत भारतीय सनातन वैदिक संस्कृति का परिचायक ग्रन्थ है।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए-)
(क) मानवस्य स्वभावः कः? (मानव का स्वभाव क्या है?)
उत्तर:
मानवस्य स्वभावः अयम् अस्ति यत् सः लज्जया स्वकीयं नश्वरम् अपि शरीरम् वस्त्रेण आच्छादितुम् इच्छति। (मानव का स्वभाव है कि वह लज्जा ने अपने नश्वर शरीर को भी वस्त्र से ढंकना चाहता है।)

(ख) रसायनशास्त्रविषये व्यासदेवः किं कथयति? (रसायनशास्त्र के विषय में व्यासदेव क्या कहते हैं?)
उत्तर:
रसायन शास्त्र विषये व्यासदेवः कथयति यत्-रसायन विदः सुप्रयुक्त रसायनाः च एव जरया भग्नाः दृश्यन्ते, उतमैः नागैः नगा इव।

(रसायन शास्त्र के विषय में व्यासदेव कहते हैं कि रसायन शास्त्र के जानकारों को उत्तम सापों द्वारा पर्वत के सभान ठीक प्रकार से प्रयुक्त रसायन पुराने होने के कारण व्यर्थ दिखाई देते हैं।)

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(ग) भौतिकशास्त्रे अतीव प्रसिद्धः कः विचारः? (भौतिकशास्त्र में बहुत प्रसिद्ध विचार क्या है?)
उत्तर:
भौतिकशास्त्रे अतीव प्रसिद्धः विचारः यत् “वस्तूनाम् अन्यसापेक्षं चलनम्” इति। (भौतिकशास्त्र का अधिक प्रसिद्ध विचार है कि ‘वस्तुएँ अन्यों के साथ चलती हैं।”)

प्रश्न 4.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से जोडिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 1
उत्तर:
(क) 2
(ख) 3
(ग) 1
(घ) 5
(ङ) 4

प्रश्न 5.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्धवाक्यानां समक्षं “न” इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) महाभारते सर्षपतैलस्य बहुशः उल्लेखो वर्तते।
(ख) राजरोगाणां शमनाय पञ्चसप्तविविधा चिकित्सा करणीया।
(ग) महाभारतं लक्षैकपद्यात्मकं महाकाव्यम् अस्ति।
(घ) यत् महाभारते अस्ति तदन्यत्र नास्ति।
(ङ) वस्तूनाम् अन्यसापेक्षं चलनम् भौतिकशास्त्रस्य सिद्धान्तः।।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) आम्
(घ) न
(ङ) आम्।

प्रश्न 6.
अधोलिखितशब्दानां विभक्तिं वचनञ्च लिखत
(नीचे लिखे शब्दों की विभक्ति और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 3

प्रश्न 7.
अधोलिखतपदानां धातुं लकारं वचनं च लिखत
(नीचे लिखे पदों के धातु, लकार और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 5

प्रश्न 8.
अधोलिखितशब्दानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के सन्धि-विच्छेद करके सन्धि का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 6
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 13 महाभारते विज्ञानम् img 7

प्रश्न 9.
अधोलिखितपदानां पर्यायवाचिशब्दान् लिखत
(नीचे लिखे शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए-)
यथा- जलम् – वारि
(क) वेदव्यासः
(ख) कालः
(ग) सुवर्णम्
(घ) मनुष्यः
उत्तर:
(क) वेदव्यासः – कृष्णद्वैपायनः
(ख) कालः – समयः
(ग) सुवर्णम् – कनकम्
(घ) मनुष्यः – मानवः

प्रश्न 10.
अधोलिखितव्ययानां वाक्यप्रयोगं कुरुत
(नीचे लिखे अव्ययों के वाक्य बनाइए)
यथा- अत्र – अहम् अत्र अस्मि
(क) अपि
(ख) इदानीम्
(ग) बिना
(घ) यथा
(ङ) एव
उत्तर:
(क) अपि – अहम् अपि गच्छामि ।(मैं भी जाती हूँ।)
(ख) इदानीम् – इदानीम् शयनं कुरु। (अब सो जाओ।)
(ग) बिना – त्वाम् विना अहम् न गमिष्यामि। (तुम्हारे बिना मैं नहीं जाऊँगी।)
(घ) यथा – यथा करिष्यति तथा प्राप्तं करिष्यति। (जैसा करोगे वैसा पाओगे।)
(ङ) एव – रामः एव प्रथमम् आगमिष्यति। (राम ही प्रथम आएगा।)

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योग्यताविस्तार –

कृष्णद्वैपायनवेदव्यासविषये निबन्धो लिखत।
कृष्णद्वैपायनवेदव्यास जी के विषय पर निबन्ध लिखो।

महाभारते कति पर्वाणि सन्ति तेषां नामानि लिखत।
महाभारत में कितने पर्व है, नाम लिखो।

महाभारते विज्ञानम् पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में श्री वेदव्यास जी द्वारा रचित ‘महाभारत’ के विषय पर चर्चा की गई है तथा इस ग्रन्थ की वैज्ञानिक दृष्टि से व्याख्या की गई है, जिससे यह पता चलता है कि महाभारत में विज्ञान के सभी विषय-भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, खगोलशास्त्र, कृषि सम्बन्धी व्यवस्था, वैद्यशास्त्र, लौहशास्त्र आदि अनेक विषय सम्मिलित हैं।

महाभारते विज्ञानम् पाठ का अनुवाद

1. भारतीयसनातनवैदिकसंस्कृतेः परिचायकः, आकरग्रन्थः ‘श्रीमन्महाभारतम्। यस्य प्रणयनं भगवता वेदव्यासेन लोकोपकाराय कृतम् अस्ति। एतस्य महत्ताविषये स्वयमेव कृष्णद्वैपायनोमुनिः प्रकाशयति –
“धर्मे चार्थे च कामे च मोक्षे च भरतर्षभ।
यदिहास्ति तदन्यत्र यन्नेहास्ति न तत् क्वचित्।।”

‘महाभारतम्’ न केवलं विश्वकोशत्वेन विद्यते पुराणेतिहासादीनाम् अपित्वत्र वैज्ञानिकदृष्टया भौतिकशास्त्र-खगोलशास्त्र-कृषि-जलबन्ध-जलसेचनादिव्यवस्था-रसायनशास्त्र वैद्यकशास्त्र-लौहशास्त्र-वस्त्रनिर्माण-शस्त्रास्त्रनिर्माणञ्चालन-विधिरित्यादयः बहवः विषयाः ज्ञान-विज्ञानोपेताः वर्णिताः सन्ति। तेषु केचनविषयाः अत्र उदाह्रियन्ते

अन्वयः :
(धर्मे चार्थे …………… तत् वचित्) हे भरतर्षभ! धर्मे च, अर्थे च, कामे च, मोक्षे च यद् इह अस्ति, तद् अन्यत्र (अस्ति), यद् इह न अस्ति, तत् क्वचित् न (अस्ति)

शब्दार्थाः :
परिचायकः-परिचय कराने वाला-Introducer; आकरग्रन्थः-खान रूपी ग्रन्ध-Storehouse; प्रणयनम्-लिखना-writing, composition; इह-यहाँ (इस संसार में)-here (in this world); क्वचित्-कहीं-somewhere; न क्वचित्-कहीं नहीं-nowhere

अनुवाद :
भारतीय सनातन वैदिक संस्कृति का परिचय कराने वाला खान रूपी ग्रन्थ ‘श्रीमन्महाभारत’ है। जिसकी रचना भगवान वेदव्यास के द्वारा लोकोपकार के लिए की गई है। इसकी महानता के विषय में स्वयं ही कृष्णद्वैपायन मुनि प्रकाशित करते हैं। हे भरतर्षभ! धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में जो यहाँ है, वह सब जगह है, जो यहाँ नहीं है, वह कहीं नहीं है।

‘महाभारत’ न केवल विश्वकोश के रूप में पुराण-इतिहास आदि है, बल्कि यहाँ वैज्ञानिक दृष्टि से भौतिकशास्त्र, खगोलशास्त्र, कृषि, जलबन्ध, जलसेचन आदि व्यवस्थाएँ, रसायनशास्त्र, वैद्यकशास्त्र, लौहशास्त्र, वस्त्रनिर्माण, अस्त्र-शस्त्र निर्माण तथा सञ्चालन की विधि आदि बहुत से विषय ज्ञान और विज्ञान से युक्त वर्णित हैं। उनमें से कुछ पियों के यहाँ उदाहरण दिए जा रहे हैं –

English :
Mahabharat-introducer of vedic culture-Enshrines knowledge of religion, wealth, love and redemption-encyclopediafull of scientific knowledge-full of knowledge and wisdom.

2. भौतिकशास्त्रम्-‘वस्तूनाम् अन्यसापेक्षं चलनम्’ इत्येषः विचारः भौतिकशास्त्रे अतीव प्रसिद्धः। महतः आश्चर्यस्य विषयोऽयम् अस्ति यत् इमं मतं भगवान बादरायणः संस्थापयति महाभारते –
“चलं यथा दृष्टिपथं परैति सूक्ष्म महद्पमिवाभिभाति।
स्वपमालोचयते च रूपं परं तथा बुद्धिपथं परैति॥”

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अस्य पद्यस्य प्रथमे पादे तेन स एव विचारः प्रकटितः अस्ति। अत्रैव अन्यौ अपि द्वौ भौतिकशास्त्रसम्बद्धौ विचारौ कथितौ स्तः। तौ च-‘काचकेन दर्शनेन सूक्ष्मम् अपि वस्तु बृहद् इव भासते’ इति स्वच्छे दर्पणे वस्तुनः रूपस्य तादृशमेव प्रतिबिम्बं दृश्यते’ इति च।

अन्वयः :
(चलं यथा दृष्टि …………. बुद्धिपथं परैति॥’)
यथा चलं दृष्टिपथं परैति, सूक्ष्म महद् रूपम् इव अभिभाति, रूपं स्वरूपं च आलोचयते, तथा परं बुद्धिपथं परैति॥

शब्दार्थाः :
संस्थापयति-स्थापित करता है-establishes-sets up; अभिभाति-दिखाई देता है-Appears;आलोचयते-दिखलाता है-shows, displays; परैति-आती है-comes.
अनुवाद-भौतिकशास्त्रम्-‘वस्तुएं दूसरों पर निर्भर होकर चलती हैं’ यह विचार भौतिक शास्त्र में बहुत प्रसिद्ध है। अधिक आश्चर्य की बात यह है कि यही मत भगवान बादरायण ने महाभारत में स्थापित किया है-

जिस प्रकार चलते हुए दृष्टिपथ पर आती हुई, छोटी वस्तु बड़े के समान दिखाई देती है, वैसे ही दूसरे की बुद्धिपथ पर आई हुई वस्तु का रूप और स्वरूप दिखाई पड़ता है। इस पद्य के प्रथम पाद में उसके द्वारा वही विचार प्रकट किया गया है। यहीं और भी दो भौतिक शास्त्र संबंधी विचारों को कहा गया है। वे हैं-“शीशे में देखने से छोटी सी वस्तु भी बहुत बड़ी लगती है” और “साफ शीशे में वस्तु के रूप की वैसी ही परछाई दिखाई देती है’।

English :
Physics: Material depends on other items for motionsame principle found in Mahabharata-Lens enlarge the size of an object-Clear glass reflects the original shape of the objects.

3. खगोलशास्त्रम्-कालगणनाक्षेत्रे भारतीयं खगोलशास्त्रं विश्वस्मिन् प्रसिद्धम् अस्ति। खगोलस्य भावार्थः भवति यद् आकाशः अपि पृथिवीव गोलः अस्ति। महाभारते तु, विपलं ‘सेकेण्ड’ इति आङ्ग्लीयनाम्ना प्रसिद्धम्, इत्यस्यापि विभागः कृतः दृश्यते।
यथा –
“काष्ठा निमेषा दश पञ्च चैव त्रिशत्तु काष्ठा गणयेत् कलां ताम्।
त्रिंशत्कलाश्चापि भवेन्मुहूर्तो भागः कतायाः दशमश्च यः स्यात्॥

एवमेव सूर्यचन्द्रग्रहणविषयिण्याः खगोलीयघटनायाः वर्णनम् अपि महाभारतकारः करोति।

अन्वयः :
(काष्ठा निमेषा ……………….. यः स्यात्।)

दशः काष्ठाः निमेषाः पञ्च च एव त्रिंशत् तु काष्ठा तां कलां गणयेत् मूहूर्तो भागः त्रिंशत् कलाः च अपि भवेत् यः कलायाः दशमः च स्यात्।

शब्दार्थाः :
विपलम्-क्षण-Moment; आङ्ग्लीयनाम्ना-अंग्रेजी नाम से-by English name; काष्ठा-18 निमेष की संख्या-number of 18 moments; निमेषा-नेत्रों की पलक गिरने का समय-blinking (winking) time of eyes.

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अनुवाद :
खगोलशास्त्रम्-कालगणना के क्षेत्र में भारतीय खगोल शास्त्र इस विश्व में प्रसिद्ध है। खगोल का भावार्थ होता है कि आकाश भी पृथिवी की तरह गोल है। महाभारत में तो, क्षण ‘सैकेण्ड’ इस अंग्रेजी नाम से प्रसिद्ध है, इसके भी छोटे-छोटे भाग किए हुए दिखते हैं। जैसे

दस काष्ठा (18 निमेष का एक काष्ठा), निमेष पाँच ही है, तो 30 काष्ठा, उसको एक कला (खण्ड) गिनते हैं। और एक क्षण का भाग भी 30 कलाएँ होती हैं, जो कला का दसवां भाग होती हैं।

इस प्रकार ही सूर्य और चन्द्र ग्रहण के विषयों का, तथा खगोलीय घटनाओं का वर्णन भी महाभारत लिखने वाला करता है।

English :
Geography-Measurement of time-sky also round like earth-parts of seconds mentioned in Mahabharata. Kashtha, Kala and Muharta are mentioned in Mahabharata. Divisions of Kala.

Solar and lunar eclipses also mentioned in Mahabharata.

4. कृषि-जलबन्ध-जलसेचनादिव्यवस्था-‘जलमेव जीवनम्’ इत्युक्त्या सिद्धयति यत् जलं बिना जीवनं कथमपि न सम्भवम्। जलं न भविष्यति चेत्तदा धान्योत्पत्तिः कथं भविष्यति? अतः जलबन्धपूर्वकं विशालजलराशिं सकलय्य तस्य सम्यक् रूपेण सेचनादि व्यवस्था करणीया। एतदर्थं सत्यवतीसुतः महाभारते उल्लिखति –
“क्षेत्रं हि रसवत् शुद्धं कर्षकेणोपपादितम्।
ऋते वर्ष न कौन्तेय!, जातु निर्वतयेत् फलम्।

तत्र वै पौरुषं ब्रूयुः आसेकं यत्नकारितम्। सस्यानां जलसेचनाय नदीषु जलबन्धाः स्थापयितुम अपि निर्दिशति।।

श्लोक का अन्वयः :
(क्षेत्रं हि रसवत् …………. निर्वर्तयेत् फलम्।।)
हि कर्षकेण उपपादितं क्षेत्रं रसवत् शुद्धम् कौन्तेय। वर्षम् ऋते न जातु फलं निवर्तयेत्।

शब्दार्थाः :
सङ्कलय्य-एकत्रित करके-storing; कर्षकेण-किसान के द्वारा-by the farmer; उपपादितम्-उत्पादित-produce; ऋते-बिना-without; आसेकम्-गीला करना-to nmoisten; सस्यानाम्-फसलों की-of crops/foodgrains;

अनुवाद :
कृषि-जलबन्ध (बाँध)-जल सेचन सिंचाई आदि की व्यवस्था-‘जल ही जीवन है’ यह कहकर सिद्ध होता है कि जल के बिना जीवन किसी भी प्रकार से सम्भव नहीं है। यदि जल नहीं होगा तो धान आदि की उत्पत्ति कैसे होगी? इसलिए बाँध बनाने से पहले बहुत सारा जल एकत्रित कर उसकी ठीक प्रकार से सिंचाई की व्यवस्था करनी चाहिए। इसलिए सत्यवती पुत्र ने महाभारत में उल्लेख किया है कि हे कौन्तेय किसानों के द्वारा उत्पादित क्षेत्र रसवान् और शुद्ध है। पर वर्षा के बिना उनके फल नहीं हो पाएँगे।

तब उनके द्वारा मेहनत के साथ जल देने का (गीला रखने का प्रयत्न करने को भी कहना चाहिए। फसलों की जल से सिंचाई के लिए नदियों पर बाँध बनाने का भी निर्देश दिया है।

English :
Agriculture, dams and irrigation-water is life-source of agricultural produce-dams or rivers for irrigation-rain water a must for irrigation.

5. रसायनशास्त्रम्-महाभारतकाले रसायनशास्त्रस्य पर्याप्तः विकासः अभवत्। तस्माद् एव औषधिविज्ञानं, धातुशास्त्रं च विकसितम्। व्यासदेवः कथयति –
‘रसायनविदश्चैव सुप्रयुक्तरसायनाः।
दृश्यन्ते जरया भग्ना नगा नागैरिवोत्तमैः॥’

नानाविधानां सुगन्धद्रव्याणां निर्माणार्थं पुष्पाणां तैलस्य च उपयोगः तदानीन्तनाः जनाः कुर्वन्ति स्म। तिल-सर्षपतैलस्य बहुशः उल्लेखो वर्तते।

अन्वयः :
(रसायनविदश्चैव ………… इवोत्तमैः) रसानविदः, सप्रयक्तरसायनाः च एव जरया भग्ना दृश्यन्ते, उतमैः नागैः नगा इव।

शब्दार्थाः :
पर्याप्तः-काफी-enough, sufficient; सुप्रयुक्त-ठीक प्रकार प्रयोग किए गए-well utilised ; भग्ना-टूटा हुआ, व्यर्थ-broken, useless; दृश्यन्ते-दिखाई देते हैं-appear; तदानीन्तनाः-उस समय के-of those times; सर्षप-सरसों-mustard.

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अनुवाद :
रसायनशास्त्र-महाभारत के समय में रसायनशास्त्र का काफी विकास हुआ। वहीं से औषध विज्ञान और धातु शास्त्र का विकास हुआ। व्यासदेव कहते हैं

‘रसायनशास्त्र के जानकार को उत्तम साँपों के द्वारा पर्वत के समान अच्छे प्रकार से प्रयोग किए गए रसायन पुराने होने के कारण व्यर्थ दिखाई देते हैं।

अनेक प्रकार के सुगन्धित द्रव्यों को बनाने के लिए फूलों के तेल का उपयोग उस समय के लोग करते थे। तिल और सरसों के तेल का बहुत उल्लेख है।

English :
Chemistry, medical service and metallurgy are offshoot of Chemistry.

Sap of plants was used to produce scent. Sesamum and mustard oil is widely mentioned.

6. वैद्यकशास्त्रम्-मनुष्य सदा नीरोगः भवेत्। अत एव स्वस्थशरीरार्थं बहवः उपायाः वर्णिताः सन्ति। वैद्यकशास्त्रम् आरोग्यशास्त्रम् अपि कथ्यते। स्वास्थ्यघातकाः ये राजरोगादयः सन्ति। तेषां सर्वथा शमनाय द्विसप्ततिविधाः चिकित्साः करणीयाः। उल्लेख एवं विधः विद्यते –
‘द्वासप्ततिविधा चैव शरीरस्य प्रतिक्रिया।
देशजातिकुलानां च धर्माः समनुवर्णिताः ॥7॥

शान्तिपर्वणि59’ श्लोक का अन्वयः-(द्वासप्तति ………… समानुवर्णिताः॥)

शरीरस्य प्रतिक्रिया द्वासप्ततिविधा च एव। देश, जाति, कुलानां च धर्माः समनुवर्णिताः (सन्ति)

शब्दार्थाः :
घातका-नष्ट करने वाले-destroyers;शमनाय-शान्ति/रोकने के लिए-to pacify; द्विसप्ततिविधाः-72 प्रकार की-of 72 types.

अनुवाद :
वैद्यशास्त्र-मनुष्य सदा नीरोगी रहे। इसलिए स्वस्थ शरीर के लिए बहुत से उपायों का वर्णन है। वैद्यशास्त्र को आरोग्यशास्त्र भी कहते हैं। जो स्वास्थ्य को नष्ट करने वाले राजरोग आदि है। उनकी हमेशा की शान्ति के लिए 72 इलाज करने चाहिएं। उनका उल्लेख इस प्रकार है-

‘शरीर की प्रतिक्रिया बहत्तर (72) प्रकार की ही है। देश, जाति और कुलों के धर्म का इसमें वर्णन हैं।’

English :
Medical science-Science of healthy living-72 treatments are known to cure diseases. Physical process-of 72 types-according to location (climate) race, and nature of families.

7. लौहशास्त्रम्-वयं जानीमः यत् सुवर्ण, रजतं, ताळं, सीसं, नपुः, अयः इति नाम्ना धातवः प्रसिद्धाः सन्ति। आभग्णस्वरूपेण, क्रयविक्रयव्यवहारसाधनत्वेन च सुवर्णरजतयोः उपयोगिता महाभारते वर्णिता अस्ति। राजप्रासादादीनां निर्माणे अयसः उपयोगः भवति स्म। सुवर्णस्य अग्नौ तापनेन शुद्धीकरणक्रमः तदानीन्तनस्य व्यवहारस्य प्रमाणम् उपस्थापयति –
‘यथा हि कनकं शुद्धं तापच्छेदनिघर्षणैः।
परीक्ष्येत तथा शिष्यान ईक्षेत्शीलगुणदिभिः॥४६॥शान्तिपर्वणि329

श्लोक का अन्वयः :
(यथा हि कनकं ………… शीतगुणादिभिः।।)
यथा हि शुद्धं कनकं तापच्छेद निघर्षणैः परीक्ष्येत तथा शिष्यान् शीलगुणादिभिः ईक्षेत्॥

शब्दार्थाः :
त्रपुः-रांगा-tin pewter; आभरण-आभूषण-ornament; अयः-लोहा -iron; राजप्रासादादिनाम्-राजमहल आदि के-of royal palaces etc; तापनेन-तपाने से-heating; तापच्छेदनिघर्षणैः-तपाकर, काटकर; घिसकर-heating, cutting and rubbing; परीक्ष्येत-परीक्षा करनी चाहिए-to be tested; ईक्षेत्-देखना चाहिए-to be seen.

अनुवाद :
लोहशास्त्र-हम जानते हैं कि सोना, चाँदी, ताँबा, सीसा, राँगा, लोहा आदि धातुएं संसार में प्रसिद्ध हैं। आभूषण बनाने में तथा खरीदने-बेचने के व्यवहार के साधन में सोना और चाँदी का उपयंग महाभारत में वर्णित है। राजमहल आदि के निर्माण में लोहे का प्रयोग होता था। सोने को अग्नि में तपा कर शुद्धीकरण का क्रम उस समय के व्यवहार का प्रमाण स्थापित करता है

‘जैसे शुद्ध सोना तपा कर, काट कर और घिसकर परखा जाता है, वैसे ही शिष्यों के शीलगुण आदि भी देखने चाहिएं।’

English :
Various metals-Silver and Gold were used in making ornaments and as means of exchange-Iron was very useful as building material. Gold was purified by heating in fire-It was tested in fire, by cutting and rubbing

8. वस्त्रनिर्माणम्-मानवस्य स्वभावोऽयम् अस्ति, यत् सा लज्जया चकीयं नश्वरम् अपि शरीरं वस्त्रेण आच्छादितुम् इच्छति। वैदिककालाद् एव वस्त्रनिर्माण-परम्परा वर्तते। महाभारते ऊर्ण-कापसि-कौशेयादिवस्त्राणां निर्माणस्य, तत्र तु स्वापेक्षितस्य वर्णस्य संयोजनस्प च वर्णनं मिलति।
यथा –
“यादृशेन हि वर्णेन भाव्यते शुक्लमम्बरम्।
तादृशं कुरुते रुपम् एतदेवमवेहि में॥५॥ शान्तिपर्वणणि २६३”

अनेन ज्ञायते यद् इदं लक्षैकपद्यात्मकं महाकाव्यं महाभारतं एकतः पुरुषार्थचतुष्टयप्रकाशकं वर्तते, ततो अपि अधिकं ज्ञानविज्ञानयोः वैशा च समुपदिशति।

श्लोक का अन्वयः :
(यादृशेन हि ………… एतदेवमवेहि मे॥) हि यादृशेन वर्णेन शुक्लम् अम्बरं भाव्यते तादृशं रूपं कुरुते, एतद् एवम् एव मे (मतम्) अवेहि।

शब्दार्थाः :
आच्छादितुम्-ढंकने के लिए-to cover, to hide;कौशेयम्-रेशमी-silken; संयोजनस्य-मिलाने का-mixing; स्वापेक्षितस्य-अपनी अपेक्षा, इच्छा के-at sweet will; अम्बरम्-वस्त्र-clothes; वैशधम्-विस्तार पूर्वक-in detail; समुपदिशति-ठीक प्रकार सेinstruct; अवेहि-उपदेश करता है- advises.

अनुवाद :
वस्त्रनिर्माण-मानव का यह स्वभाव है कि वह लज्जा से अपने नश्वर शरीर को वस्त्र से ढंकने की इच्छा करता है। वैदिक काल से ही वस्त्र बनाने की परम्परा है। महाभारत में ऊन, कपास, रेशम आदि के वस्त्रों के निर्माण का और उनमें अपनी इच्छा के रंग मिलाने का वर्णन मिलता है। जैसे –

‘जैसे रंग से सफेद वस्त्र सुन्दर लगता है, वैसे ही रूप हो जाता है। यह ऐसे ही मेरा ‘विचार’ है।

इससे ज्ञात होता है कि यह एक लाख पद्यों वाला महाकाव्य ‘महाभारत’ एक ओर चार प्रकार के पुरुषार्थों का प्रकाशक है, इससे भी अधिक ज्ञान और विज्ञान, के विषयों का ठीक प्रकार से उपदेश करता है।

English :
Cloth manufacturing (texturing cloth manufacturing prevalent through the ages-coloured woollen, cotton and silken clothes were manufactured in the period of Mahabharata.

Mahabharata deals with four types of manliness. It also deals with topics of knowledge and science.

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MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन

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MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन

हाइड्रोजन NCERT अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
हाइड्रोजन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में इसकी स्थिति को युक्तिसंगत ठहराइए।
उत्तर:
हाइड्रोजन आवर्त सारणी में स्थित प्रथम तत्व है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s1  है। यह क्षार धातुओं की भाँति, एक इलेक्ट्रॉन का त्याग करके H+ आयन बना सकता है। यह हैलोजनों की भाँति, एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके H आयन भी बना सकता है। क्षारीय धातुओं की भाँति यह ऑक्साइड, हैलाइड तथा सल्फाइड बनाता हैं। यद्यपि क्षारीय धातुओं के विपरीत इसकी आयनन एन्थैल्पी उच्च होती है तथा सामान्य स्थितियों में यह धात्विक व्यवहार प्रदर्शित नहीं करता है। वास्तव में आयनन एन्थैल्पी के पदों में यह हैलोजनों से अधिक समानता प्रदर्शित करता है।

हैलोजनों के समान, यह द्विपरमाणुक अणु बनाता है, तत्वों से क्रिया करके हाइड्राइड तथा अनेक सहसंयोजी यौगिक बनाता है। यद्यपि हैलोजनों के विपरीत इसकी क्रियाशीलता बहुत कम होती हैं। अतः उपरोक्त गुणों के आधार पर, आवर्त सारणी में हाइड्रोजन को क्षार धातुओं के साथ वर्ग-1 तथा प्रथम आवर्त अथवा हैलोजन के साथ वर्ग-17 तथा प्रथम आवर्त में रखना चाहिए। यद्यपि क्षार धातुओं तथा हैलोजनों के साथ गुणों में समानता के साथ-साथ, यह क्षार धातुओं तथा हैलोजनों के साथ गुणों में विभिन्नता भी दर्शाता है। अत: इसे आवर्त सारणी में पृथक स्थान दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 2.
हाइड्रोजन के समस्थानिकों के नाम लिखिए तथा बताइए कि इन समस्थानिकों का दव्यमान अनुपात क्या है ? ।
उत्तर:
हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक है-प्रोटियम \(\left(_{1}^{1} \mathrm{H}\right)\), ड्यूटीरियम (\(\left(_{1}^{2} \mathrm{H}\right)\) या D) और ट्रीटियम (\(\left(_{1}^{3} \mathrm{H}\right)\)या T)। तीनों समस्थानिकों का द्रव्यमान अनुपात है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 2

प्रश्न 3.
सामान्य परिस्थितियों में हाइड्रोजन एक परमाण्विक की अपेक्षा द्विपरमाण्विक रूप में क्यों पाया जाता है ?
उत्तर:
एक परमाणुक रूप में हाइड्रोजन के प्रथम कोश में एक इलेक्ट्रॉन (1s1) होता है जबकि द्विपरमाणुक अवस्था का प्रथम कोश पूर्ण (1s2)होता है। इसका तात्पर्य है कि द्विपरमाणुक रूप में हाइड्रोजन (H2) उत्कृष्ट गैस हीलियम का विन्यास प्राप्त कर लेता है। अतः यह काफी स्थायी होती है।

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प्रश्न 4.
कोल गैसीकरण से प्राप्त डाइ-हाइड्रोजन का उत्पादन कैसे बढ़ाया जा सकता है ?
उत्तर:
कोल गैसीकरण अभिक्रिया में, जल की वाष्प को प्रवाहित करके CO और H2 का मिश्रण बनाया जाता है जिसे सिन गैस भी कहा जाता है
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कोल भाप सिन गैस डाइहाइड्रोजन का उत्पादन सिन गैस में उपस्थित CO(g) की आयरन क्रोमेट उत्प्रेरक की उपस्थिति में भाप के साथ क्रिया द्वारा बढ़ाया जा सकता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 4
CO(g) या CO2(g) के निकलने के साथ ही अभिक्रिया अग्र दिशा में विस्थापित हो जाती है।

प्रश्न 5.
विद्युत् – अपघटन विधि द्वारा डाइहाइड्रोजन वृहत् स्तर पर किस प्रकार बनाई जा सकती है? इस प्रक्रम में वैद्युत-अपघट्य की क्या भूमिका है ?
उत्तर:
अम्लीकृत जल का प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों द्वारा वैद्युत – अपघटन करने पर हाइड्रोजन प्राप्त होती है।
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वैद्युत अपघट्य की भूमिका जल का चालन करना है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित समीकरणों को पूरा कीजिए –
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उत्तर:
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प्रश्न 7.
डाइहाइड्रोजन की अभिक्रियाशीलता के पदों में H – H बन्ध की उच्च एन्थैल्पी के परिणामों की विवेचना कीजिए?
उत्तर:
H – H आबन्ध की उच्च आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी के कारण, हाइड्रोजन कमरे के तापमान पर अपेक्षाकृत अक्रियाशील रहती है । यद्यपि उच्च तापों पर अथवा उत्प्रेरक की उपस्थिति में, यह अनेक धातुओं तथा अधातुओं के साथ क्रिया करके हाइड्राइड बनाती है।

प्रश्न 8.
हाइड्रोजन के –

  1. इलेक्ट्रॉन न्यून
  2. इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध तथा
  3. इलेक्ट्रॉन समृद्ध यौगिकों से आप क्या समझते हैं? उदाहरणों द्वारा समझाइए।

उत्तर:
1. इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइड:
इन हाइड्राइड्स की लुईस संरचना लिखने पर, इनमें इलेक्ट्रॉन की संख्या अपर्याप्त है, इसका उदाहरण डाइबोरेन [B2H6] है। अतः आवर्त सारणी के 13वें वर्ग के सभी तत्वों के हाइड्राइड इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक बनाते हैं, BH3, AIH3, GaH3, InH3, TIH3 से लुईस अम्ल की भाँति कार्य करते हैं।

2. इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध हाइड्राइड:
इन हाइड्राइड की लुईस संरचना में इनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर्याप्त होती है। [8es] आवर्त सारणी के वर्ग 14 के तत्वों के हाइड्राइड इसके अन्तर्गत आते हैं। इनकी आकृति चतुष्फलकीय होती है।
उदाहरण – CH4, SiH4, GeH4, SnH4, PbH4

3. इलेक्ट्रॉन समृद्ध हाइड्राइड:

  • इन हाइड्राइड्स में उपस्थित केन्द्रीय परमाणु पर इलेक्ट्रॉन आधिक्य एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होते हैं।
  • आवर्त सारणी के वर्ग 15, वर्ग 16 व वर्ग 17 के तत्वों के हाइड्राइड इलेक्ट्रॉन समृद्ध हाइड्राइड्स कहलाते हैं।
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प्रश्न 9.
संरचना एवं रासायनिक अभिक्रिया के आधार पर बताइए कि इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइड के कौन-कौन से अभिलक्षण होते हैं ?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइडों में सामान्य सहसंयोजी आबंधों के निर्माण हेतु इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर्याप्त नहीं होती है। उदाहरण के लिए, BF3, में B (F : \(\overset { F }{ \underset { B }{ ¨ } } \) : F) के संयोजी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इन हाइड्राइडों का आकार त्रिकोणीय समतलीय होता है।
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ये हाइड्राइड लुईस अम्ल अर्थात् इलेक्ट्रॉन ग्राही के भाँति कार्य करते हैं। जैसे –
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इलेक्ट्रॉनों की कमी पूरा करने के लिए, ये हाइड्राइड बहुलक के रुप में पाये जाते हैं। जैसे – B2H4 B4H10, (AlH3)n आदि। ये हाइड्राइड अत्यधिक क्रियाशील होते हैं। ये धातुओं, अधातुओं तथा उनके यौगिकों के साथ सुगमतापूर्वक क्रिया करते हैं। उदाहरण के लिए –
B2H6(g) + 3O6(g) → B2O6(s) + 3H2O(g)

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प्रश्न 10.
क्या आप आशा करते हैं कि (CnH2n+2) कार्बनिक हाइड्राइड्स लुईस अम्ल या क्षार की भाँति कार्य करेंगे ? अपने उत्तर को युक्तिसंगत ठइराइए।
उत्तर:
(CnH2n+2) प्रकार के कार्बन हाइड्राइड, इलेक्ट्रॉन समृद्ध हाइड्राइड है। इनके पास सहसंयोजी आबंध बनाने हेतु पर्याप्त इलेक्ट्रॉन हैं। अतः ये न तो लुईस अम्ल और न ही लुईस क्षार की भाँति व्यवहार करेंगे।

प्रश्न 11.
अरससमीकरणमितीय हाइड्राइड (Non stoichiometric hydride) से आप क्या समझते हैं ? क्या आप क्षारीय धातुओं से ऐसे यौगिकों की आशा करते हैं ? अपने उत्तर को न्यायसंगत ठहराइए।
उत्तर:
ये हाइड्राइड अनेक d – ब्लॉक के तत्वों (वर्ग – 7, 8 तथा 9 की धातुओं को छोड़कर) तथा fब्लॉक के तत्वों द्वारा बनते हैं। हाइड्राइड सदैव अरससमीकरणमितीय अर्थात् हाइड्रोजन की कमी वाले होते हैं। इन हाइड्राइडों में हाइड्रोजन परमाणु अंतरकाशी स्थानों को घेरता है।
उदाहरण – LaH2.87, YbH2.55, TiH15-1.8, PdH0.6-0.8आदि।

इस प्रकार के हाइड्राइड क्षारीय धातुओं द्वारा नहीं प्राप्त किए जा सकतें हैं। क्षारीय धातुओं द्वारा आयनिक अथवा लवणीय हाइड्राइड प्राप्त होते हैं। जो रससमीकरणमितीय होते है। क्षारीय धातुएँ अत्यधिक धनविद्युती होती है अतः ये इलेक्ट्रॉन H-परमाणु को स्थानांतरित करके H आयन बनाती है। ये H आयन जालक की रिक्तियों में समा जाते हैं।

प्रश्न 12.
हाइड्रोजन भण्डारण के लिए धात्विक हाइड्राइड किस प्रकार उपयोगी है ? समझाइए।
उत्तर:
कुछ धातुएँ जैसे पैलेडियम (Pd), प्लेटिनम (Pt) आदि अपनी हाइड्राइड बनाने वाली सतह पर हाइड्रोजन के विशाल आयतन को अवशोषित करने की क्षमता रखती हैं। वास्तव में हाइड्रोजन (H) परमाणुओं के रूप में धातु के पृष्ठ पर वियोजित हो जाता है। इन परमाणुओं को समायोजित करने के लिए धातु जालक फैल जाता है और गर्म करने पर अधिक अस्थायी हो जाता है।

हाइड्राइड हाइड्रोजन मुक्त करके पुनः धात्विक अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। इसी तरीके से उत्पन्न हाइड्रोजन ईंधन की तरह प्रयुक्त हाइड्रोजन के संग्रहण एवं परिवहन में प्रयुक्त की जा सकती है। अतः धातु हाइड्राइड हाइड्रोजन अर्थ-व्यवस्था में बहुत उपयोगी भूमिका निभाता है।

प्रश्न 13.
बर्तन और वेल्डिंग में परमाण्विय हाइड्रोजन अथवा ऑक्सी हाइड्रोजन टॉर्च किस प्रकार कार्य करती है ? समझाइए।
उत्तर:
धात्विक हाइड्राइडों में हाइड्रोजन, H-परमाणु के रुप में अधिशोषित हो जाती है। संक्रमण धातुओं में हाइड्रोजन परमाणु के इस अधिशोषण का प्रयोग हाइड्रोजन भंडारण के रुप में होता हैं । Pd, Pt जैसी धातुएँ हाइड्रोजन के वृहत् आयतन को समायोजित कर सकती हैं । इस गुण की हाइड्रोजन भंडारण तथा ऊर्जा स्रोत के रुप में प्रयोग की प्रबल संभावना है। धात्विक हाइड्राइड गर्म करने पर अपघटित होकर हाइड्रोजन तथा अंतिम धातु देते हैं।

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प्रश्न 14.
NH3, H2O तथा HF में से किसका हाइड्रोजन बन्ध का परिमाण उच्चतम अपेक्षित है और क्यों ?
उत्तर:
चूँकि F की वैद्युतऋणात्मकता का मान अधिकतम है। अत: HF में हाइड्रोजन पर धनावेश तथा फ्लुओरीन पर ऋणावेश का परिमाण सर्वाधिक होगा जिसके कारण H आबंधन का स्थिर वैद्युत आकर्षण बल H-F में अधिकतम होगा।

प्रश्न 15.
लवणीय हाइड्राइड, जल के साथ प्रबल अभिक्रिया करके झाग उत्पन्न करती है। क्या इसमें CO2 (जो एक सुपरिचित अग्निशामक है) का उपयोग हम कर सकते हैं ? समझाइए।
उत्तर:
लवणीय हाइड्राइड (NaH या CaH2) जल के साथ क्रिया करता है तो अभिक्रिया इतनी ज्यादा ऊष्माक्षेपी होती है कि उत्पन्न हाइड्रोजन आग पकड़ लेती है।
उदाहरण के लिए –

  • NaH(s) + H2O(aq) → NaOH(aq) + H2(g) + ऊष्मा
  • CaH2(s) + 2H2O(aq) → Ca(OH)2(aq) + 2H2(g)

प्रायः अग्निशामक के रूप में प्रयोग की जाने वाली CO2 को इस स्थिति में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह अभिक्रिया में निर्मित हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करके कार्बोनेट बनाएगी। इससे अग्र अभिक्रिया की दर बढ़ जाएगी।
2NaOH(aq) + CO2(g) → Na2CO3(aq) + H2O(aq)

प्रश्न 16.
निम्नलिखित को व्यवस्थित कीजिए –

  1. CaH2, BeH2, तथा TiH2, को उनकी बढ़ती हुई विद्युत् चालकता के क्रम में
  2. LiH, NaH तथा CSH आयनिक गुण के बढ़ते हुए क्रम में
  3. H-H, D-D तथा F_F को उनके बन्ध – वियोजन एन्थैल्पी के बढ़ते हुए क्रम में
  4. NaH, MgH2, तथा H2O को बढ़ते हुए अपचायंक गुण के क्रम में।

उत्तर:
1. BeH2 < CaH2 < TiH2
2. बढ़ता हुआ आयनिक गुण LiH < NaH < CsH
बढ़ता हुआ आयनिक गुण LiH < NaH < CsH क्रम में घटता है। यह आयनिक गुण पर विपरीत प्रभाव डालता है अर्थात् उपर्युक्त के अनुसार बढ़ जाता है।

3. बढ़ती हुई बन्ध वियोजन एन्थैल्पी – F – F < H – H < D – D
कारण:
फ्लुओरीन की बन्ध-वियोजन एन्थैल्पी दो F परमाणुओं पर उपस्थित इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्मों में प्रतिकर्षण के कारण बहुत कम (242.6 kJ mol-1) होता है। H2 और D2 में से H-H की बन्धवियोजन एन्थैल्पी (435.88 kJ mol-1) D-D (443:35 kJ mol-1) की अपेक्षा कम होती है।

4. बढ़ता हुआ अपचायक गुण H2O < MgH2 < NaH
कारण – NaH आयनिक प्रकृति का होता है। अतः यह प्रबल अपचायक होता है। H2O और MgH2 सहसंयोजी प्रकृति के होते हैं। परन्तु H2O की आबन्ध वियोजन ऊर्जा अत्यधिक होती है। अत: यह MgH2 से अधिक दुर्बल अपचायक है।

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प्रश्न 17.
H2O तथा H2O2 की संरचनाओं की तुलना कीजिए।
उत्तर:
जल में ऑक्सीजन sp3 – संकरित है।
आबंध युग्म:
आबंध युग्म प्रतिकर्षण की अपेक्षा एकाकी युग्म प्रतिकर्षण की प्रबलता के कारण, HOH आबंध कोण 109.5° से 104.5° तक घट जाता है। जिसके कारण जल की संरचना बंधित होती है।
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यह एक प्रबल ध्रुवीय अणु है। हाइड्रोजन परॉक्साइड की संरचना अध्रुवीय होती है। H2O2 के द्विध्रुव आघूर्ण का मान दर्शाता है कि H2O2के चारों परमाणु एक ही तल में स्थित नहीं होते हैं। H2O2 की संरचना की तुलना 94° कोण पर खुली हुई किताब से कर सकते हैं। इसमें H – O – H आबंध कोण 97° का होता है।
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प्रश्न 18.
जल के स्वतः प्रोटोनीकरण से आप क्या समझते हैं ? इसका क्या महत्व है ?
उत्तर:
जल के स्वतः प्रोटोनीकरण का तात्पर्य जल का स्वतः आयनीकरण होता है –
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स्वतः प्रोटोनीकरण के कारण, जल की प्रकृति उभयधर्मी होती है। अतः यह अम्लों तथा क्षारों दोनों से क्रिया करता है। उदाहरण के लिए –
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प्रश्न 19.
F2 के साथ जल की अभिक्रिया से ऑक्सीकरण तथा अपचयन के पदों पर विचार कीजिए एवं बताइए कि कौन-सी स्पीशीज ऑक्सीकृत/अपचयित होती है ?
उत्तर:
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इन अभिक्रियाओं में, जल अपचायक का कार्य करता है। अतः यह स्वयं ऑक्सीजन अथवा ओजोन में ऑक्सीकृत हो जाता है। क्लोरीन ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करती है तथा स्वयं F आयन में अपचयित हो जाती है।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए –

  1. Pb(s) + H202(aq)
  2. MnO4(aq) + H202(aq)) →
  3. Ca0(s) + H2O(g)
  4. AlCl3(g) + H2O(l)
  5. Ca3N2(s) + H2O(l)

उपर्युक्त को –

  • जल – अपघटन
  • अपचयोपचय (Redox) तथा
  • जलयोजन अभिक्रियाओं में वर्गीकृत कीजिए।

उत्तर:

  1. PbS(s) + 4H2O2(aq) → PbSO4(s)+ 4H2O(l)(अपचयोपचय अभिक्रिया)
  2. 2MnO4(aq) + 6H+(aq) + 5H2O2(aq) → 2Mn 2+(aq) + 8H2O(l) + 5O2(g) (अपचयोपचय अभिक्रिया)
  3. CaO(s) + H2O(g) → Ca(OH)2(aq) (जलयोजन अभिक्रिया)
  4. AlCl3(g) + 3H2O(l) → Al(OH)3(s) + 3HCl(l) (जल-अपघटन अभिक्रिया)
  5. Ca3N2(s) + 6H2O(l) → 3Ca(OH)2(aq) + 2NH3(aq) (जल-अपघटन अभिक्रिया)

प्रश्न 21.
बर्फ के साधारण रूप की संरचना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
वायुमण्डलीय दाब पर बर्फ एक त्रिविम हाइड्रोजन आबंधित संरचना है। बर्फ में प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु चतुष्फलकीय रुप में चार ऑक्सीजन परमाणुओं से जुड़ा है अर्थात् प्रत्येक ऑक्सीजन युग्म में एक हाइड्रोजन परमाणु होता है। इस कारण बर्फ एक खुले पिंजरे की आकृति बनाती है। प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु चार हाइड्रोजन परमाणु से घिरा रहता है। इनमें से दो हाइड्रोजन परमाणु सहसंयोजी आबंध से व दो हाइड्रोजन परमाणु हाइड्रोजन आबंध से जुड़े होते हैं। क्रिस्टल जालक में खाली जगह होती है अत: बर्फ का घनत्व जल से कम होता है।
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प्रश्न 22.
जल की अस्थायी एवं स्थायी कठोरता के क्या कारण है ? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जल में कैल्सियम बाइकार्बोनेट तथा मैग्नीशियम बाइकार्बोनेट की उपस्थिति के कारण अस्थायी कठोरता उत्पन्न होती है। जल में विलेय लवणों कैल्सियम क्लोराइड, मैग्नीशियम क्लोराइड, कैल्सियम सल्फेट तथा मैग्नीशियम सल्फेट आदि के कारण स्थायी कठोरता उत्पन्न होती है।

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प्रश्न 23.
संश्लेषित आयन विनिमयक विधि द्वारा कठोर जल के मृदुकरण के सिद्धान्त एवं विधि की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
संश्लेषित आयन विनिमयक रेजिन विधि निम्नलिखित दो प्रकार की होती है –
(1) धनायन:
विनिमयक रेजिन ये रेजिन – SO3H समूह युक्त वृह्द कार्बनिक अणु होते हैं तथा जल में अविलेय होते हैं। इनकी NaCl से क्रिया कराकर R-Na में परिवर्तित किया जाता है। रेजिन R-Na, कठोर जल में उपस्थित Mg2+(aq) तथा Ca2+ आयनों से विनिमय करके इसे मृदुजल बना देता है।
2RNa(s) + Ma2+(aq) → R2M(s) + 2Na+(aq) (M = Ca2+ या Mg2+)

रेजिन में NaCl का जलीय विलयन मिलाने पर इसका पुनर्जनन कर लिया जाता है। शुद्ध विरवणिजित तथा विआयनित जल को प्राप्त करने के लिए उपयुक्त प्राप्त जल को क्रमशः धनायन विनिमयक तथा ऋणायन विनिमयक रेजिन में प्रवाहित करते हैं।

धनायन:
विनिमयक प्रक्रम में, H का विनिमय जल में उपस्थित Na+, Ca2+, Mg2+ आदि आयनों से हो जाता है।
2RH(s) + M2+(aq) ⥨ MR2(s) + 2H+(aq) (H+ के रूप में धनायन विनिमय रेजिन) इस प्रक्रम में प्रोटानों का निर्माण होता है तथा जल अम्लीय हो जाता है।

(2) ऋणायन:
विनिमयक प्रक्रम में OH का विनिमय जल में उपस्थित Cr, HCO3, SO2-4 आयनों द्वारा होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 19
R\(\stackrel{+}{\mathrm{N}}\)H2(s) OH विस्थापित अमोनियम हाइड्रॉक्साइड ऋणायन रेजिन है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 19
इस प्रकार मुक्त OH आयन, H+ आयनों को उदासीन कर देते हैं। अंत में उत्पन्न धनायन तथा ऋणायन विनिमयक रेजिन को क्रमशः तनु अम्ल तथा तनु क्षारीय विलयनों से क्रिया कराके पुर्नजनित कर लिया जाता है।

प्रश्न 24.
जल के उभयधर्मी स्वभाव को दर्शाने वाले रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
जल का स्वभाव उभयधर्मी होता है। यह अम्ल तथा क्षार दोनों की भाँति कार्य करता है। स्वयं से प्रबल अम्लों के साथ यह क्षार की भाँति व्यवहार करता हैं। जबकि स्वयं से प्रबल क्षारों के प्रति यह अम्ल की भाँति व्यवहार करता है।
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प्रश्न 25.
हाइड्रोजन परॉक्साइड के ऑक्सीकारक एवं अपचायक रूप को अभिक्रियाओं द्वारा समझाइए।
उत्तर:
H2O2 अम्लीय तथा क्षारीय माध्यमों में ऑक्सीकारक तथा अपचायक, दोनों की भाँति कार्य कर सकता है। उदाहरण –

(1) अम्लीय माध्यम में ऑक्सीकारक –
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(2) क्षारीय माध्यम में ऑक्सीकारक –
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(3) अम्लीय माध्यम में अपचायक –
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(4) क्षारीय माध्यम में अपचायक –
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प्रश्न 26.
विखनिजित जल से क्या तात्पर्य है? यह कैसे प्राप्त किया जा सकता है ?
उत्तर:
जो जल सभी विलेय खनिज लवणों से मुक्त होता है, विखनिजित जल कहलाता है। विखनिजित जल को प्राप्त करने के लिए जल को क्रमशः धनायन-विनिमयक रेजिन तथा ऋणायन-विनिमयक रेजिन से प्रवाहित करते हैं। धनायन – विनिमयक में जल में उपस्थित Ca2+, Mg2+, Na+ तथा अन्य धनायन, H+ आयनों द्वारा विनियमित होकर दूर जाते है जबकि ऋणायन-विनिमयक में जल में उपस्थित Cl, SO42-
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प्रश्न 27.
क्या विखनिजित या आसुत जल पेय-प्रयोजनों में उपयोगी है ? यदि नहीं, तो इसे उपयोगी कैसे बनाया जा सकता है ?
उत्तर:
विखनिजित या आसुत जल पेय-प्रयोजनों में उपयोगी नहीं है। इनमें कुछ उपयोगी लवणों को उचित मात्रा में मिलाकर पेय योग्य बनाया जा सकता है।

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प्रश्न 28.
जीवमण्डल एवं जैव प्रणालियों में जल की उपादेयता को समझाइए ?
उत्तर:
सभी सजीवों के शरीर का मुख्य भाग जल द्वारा निर्मित होता है। मानव शरीर में लगभग 65% तथा कुछ पौधों में लगभग 95% भाग जल होता है। सभी सजीवों को जीवित रखने के लिए जल एक महत्वपूर्ण यौगिक है। अन्य द्रवों की तुलना में, जल को विशिष्ट ऊष्मा, तापीय चालकता, पृष्ठ तनाव, द्विध्रुव आघूर्ण तथा परावैद्युतांक के मान उच्च होते हैं।

इन्हीं गुणों के कारण जीवमंडल में जल की भूमिका अति महत्वपूर्ण होती है। जीवों के शरीर तथा जलवायु के सामान्य ताप को बनाए रखने के लिए, जल की वाष्पन ऊष्मा तथा उच्च ऊष्मा धारिता ही उत्तरदायी होती है। यह वनस्पत्तियों तथा प्राणियों के उपापचय में अणुओं के अभिगमन के लिए उत्तम विलायक का कार्य करता है। जल पौधों में प्रकाश संश्लेषण क्रिया के लिए भी आवश्यक है। जो कि वातावरण में O2 मुक्त करती है।
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प्रश्न 29.
जल का कौन-सा गुण इसे विलायक के रूप में उपयोगी बनाता है ? यह किस प्रकार के यौगिक –

  1. घोल सकता है और
  2. जल- अपघटन कर सकता है ?

उत्तर:
उच्च द्विध्रुव आघूर्ण तथा उच्च परावैद्युतांक के कारण जल विलायक के रुप में उपयोगी होता है।

  1. यह आयनिक यौगिकों तथा उन सहसंयोजी यौगिकों जिनमें जल के साथ H-आबंध पाया जाता है। (जैसे-एथेनॉल, चीनी, ग्लूकोस आदि)को घोल सकता है।
  2. जल अनेक धात्वीय तथा अधात्वीय ऑक्साइडों, हाइड्राइड, कार्बाइड, फॉस्फाइड तथा अन्य लवणों का जल-अपघटन कर सकता है।

उदाहरणार्थ –
P4O10(s) + 6H2O(l) →4H3PO4(aq)
CaH2(s) + 2H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + 2H2(g)
Al4C3(s) + 12H2O(l) → 4AI(OH)3 + 3CH4

प्रश्न 30.
H2O एवं D2O के गुणों को जानते हुए क्या आप मानते हैं कि D2O का उपयोग पेयप्रयोजनों के रूप में लाया जा सकता है ?
उत्तर:
भारी जल (D2O) जीवित प्राणी, पादप तथा जन्तुओं के लिए काफी हानिकारक होता है, क्योंकि यह उनमें होने वाली अभिक्रियाओं की दरों को मन्द कर देता है। यह जीवन का समर्थन करने में असफल होता है तथा इसकी जैवमण्डल में कोई उपयोगिता नहीं होती है।

प्रश्न 31.
जल-अपघटन (Hydrolysis) तथा जलयोजन (Hydration) पदों में क्या अन्तर है ?
उत्तर:
जल के H+ आयन तथा OH आयनों का किसी लवण के क्रमशः ऋणायन तथा धनायन के साथ स्वतः क्रिया करके मूल अम्ल तथा क्षार बनाने की क्रिया जल – अपघटन कहलाती है।
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दूसरी ओर, जलयोजन का अर्थ आयनों तथा अणुओं में H2O के योग द्वारा जलयोजित आयन अथवा जलयोजित लवणों का निर्माण होता है।
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प्रश्न 32.
लवणीय हाइड्राइड किस प्रकार कार्बनिक यौगिकों से अति सूक्ष्म जल की मात्रा को हटा सकते हैं?
उत्तर:
लवणीय हाइड्राइड जैसे NaH, CaH2 आदि कार्बनिक यौगिकों में उपस्थित अति सूक्ष्म जल से क्रिया करते हैं तथा संगत धातु हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं तथा हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं।
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वास्तव में लवणीय हाइड्राइड M+H में, H प्रबल ब्रॉन्स्टेड क्षार होते हैं अतः ये जल से सुगमतापूर्वक क्रिया करते हैं।

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प्रश्न 33.
परमाणु क्रमांक 15, 19, 23 तथा 44 वाले तत्व यदि हाइड्रोजन से अभिक्रिया कर हाइड्राइड बनाते हैं, तो उनकी प्रकृति से आप क्या आशा करेंगे? जल के प्रति इनके व्यवहार की तुलना कीजिए।
उत्तर:

  • परमाणु क्रमांक (Z) = 15 वाला तत्व, फॉस्फोरस, p – ब्लॉक का सदस्य है अतः यह सहसंयोजक हाइड्राइड, बनाता है।
  • परमाणु क्रमांक (Z) = 19 वाला तत्व, पोटैशियम, s – ब्लॉक सदस्य है अत: यह आयनिक हाइड्राइड बनाता है।
  • परमाणु क्रमांक (Z) = 23 वाला तत्व वैनेडियम, d – ब्लॉक तथा वर्ग-5 का सदस्य है। यह अन्तराकाशी हाइड्राइड (VHI6) बनाता है। यह अरससमीकरणमितीय हाइड्राइड है।
  • परमाणु क्रमांक (Z) = 44 वाला तत्व रुथेनियम, d – ब्लॉक तथा वर्ग-8 का सदस्य है। यह कोई हाइड्राइड नहीं बनाता है क्योंकि वर्ग-7, 8 तथा 9 के तत्व हाइड्राइड नहीं बनाते हैं (हाइड्राइड रिक्ति)। जल के साथ,केवल आयनिक हाइड्राइड, KH क्रिया करके डाइहाइड्रोजन गैस मुक्त करता है।

प्रश्न 34.
जब ऐल्युमिनियम (III) क्लोराइड एवं पोटैशियम क्लोराइड को अलग-अलग –

  1. सामान्य जल
  2. अम्लीय जल एवं
  3. क्षारीय जल से अभिकृत कराया जाएगा, तो आप किन-किन विभिन्न उत्पादों की आशा करेंगे? जहाँ आवश्यक हो, वहाँ रासायनिक समीकरण दीजिए।

उत्तर:
AlCl3, दुर्बल क्षार, Al(OH)3, तथा प्रबल अम्ल, HCl का लवण है। अतः सामान्य जल से क्रिया कराने पर इसका जल-अपघटन हो जाता है।
AlCl3(s) + 3H2O(l) → Al(OH3(s) + 3H+(aq)+ 3Cl(aq)
इसका जलीय विलयन अम्लीय प्रकृति का होता है। अम्लीय जल में उपस्थित H+ आयन AI(OH)3 से क्रिया करके Alt+(aq) आयन तथा HO उत्पन्न करते हैं। अतः अम्लीय जल में, AlCl3(s), Al3+ तथा CITaa) आयनों के रूप में रहता है। क्षारीय जल में AlCl3 अग्र उत्पाद उत्पन्न करता है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 36
KCl प्रबल अम्ल, HCl तथा प्रबल क्षार, KOH का लवण है। यह सामान्य जल में जल-अपघटित नहीं होता है। यह जल में केवल अपघटित होकर K+(aq) तथा Cr(aq) आयन देता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 32
का जलीय विलयन उदासीन होता है। अतः अम्लीय जल में अथवा क्षारीय जल में, इसके आयन और कोई क्रिया नहीं करते हैं।

प्रश्न 35.
H2O2 विरंजन कारक के रूप में कैसे व्यवहार करता है ? लिखिए।
उत्तर:
H2O2 नवजात ऑक्सीजन उत्पन्न करने के कारण विरंजक की भाँति कार्य करता है।
H2O2 → H2O + O
रंगीन पदार्थ + [O] → रंगहीन पदार्थ
यह रेशम, बाल, वस्त्र, कागज की लुग्दी, ऊन, तेल, वसा आदि का विरंजन करता है।

प्रश्न 36.
निम्नलिखित पदों से आप क्या समझते हैं –

  1. हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था
  2. हाइड्रोजनीकरण
  3. सिन-गैस
  4. भाप अंगारगैस सृति अभिक्रिया तथा
  5. ईंधन सेल।

उत्तर:
1. हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था:
हाइड्रोजन का मुख्य उपयोग एवं संभावनाएँ निकट भविष्य में इसका प्रदूषण रहित (स्वच्छ) ईंधन के रूप में उपयोग है। हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था का मूल सिद्धांत ऊर्जा का द्रव हाइड्रोजन अथवा गैसीय हाइड्रोजन के रूप में अभिगमन तथा भंडारण है।

2. हाइड्रोजनीकरण:
किसी द्विबंध या त्रिबंध युक्त कार्बनिक यौगिकों में उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन का संयोग हाइड्रोजनीकरण कहलाता है। वनस्पति तेलों को निकिल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजनीकरण कराने पर खाद्य वसा (मार्गेरीन तथा वनस्पति घी) प्राप्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 33

3. सिन-गैस:
CO तथा H2 का मिश्रण सिन-गैस अथवा संश्लेषित गैस अथवा जल गैस कहलाता है। हाइड्रोकार्बन अथवा कोक की उच्च ताप पर एवं उत्प्रेरक की उपस्थिति में भाप से अभिक्रिया कराने पर सिन-गैस प्राप्त होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 34
आजकल सिन-गैस को वाहितमल, अखबार, लकड़ी का बुरादा एवं छीलन आदि से भी प्राप्त किया जाता है। कोल से सिन-गैस के उत्पादन को, कोल-गैसीकरण प्रक्रम कहते है।

4. भाप अंगार गैस सृति अभिक्रिया:
जल गैस में डाइहाइड्रोजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए CO को 500°C पर आयरन क्रोमेट उत्प्रेरक की उपस्थिति में भाप से क्रिया कराते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 35
सिन-गैस / जल गैस उपरोक्त क्रिया को भाप अंगार गैस सृति अभिक्रिया कहते हैं।

5. ईंधन सेल:
ईंधन सेल में ईंधन के दहन से उत्पन्न ऊर्जा को सीधे वैद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। इस प्रकार के ईंधन सेल का उदाहरण हाइड्रोजन ऑक्सीजन ईंधन सेल है। यह किसी प्रकार का प्रदूषण उत्पन्न नहीं करता है। ईंधन सेल, 70-85% रूपान्तरण क्षमता के साथ वैद्युत उत्पन्न करता है।

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हाइड्रोजन अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

हाइड्रोजन वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –
1. निम्न में से कौन – सी धातु H2 का अधिशोषण करती है –
(a) Zn
(b) Pb
(c) AI
(d) K.
उत्तर:
(b) Pb

प्रश्न 2.
हाइड्रोजन का रेडियोऐक्टिव समस्थानिक कहलाता है –
(a) प्रोटियम
(b) ड्यूटीरियम
(c) भारी हाइड्रोजन
(d) ट्राइटियम।
उत्तर:
(d) ट्राइटियम।

प्रश्न 3.
H2O2 का 1 ml N.T.P. पर 10 mlo, देता है, यह है
(a) 10 आयतन HO2
(b) 20 आयतन H2O2
(c) 30 आयतन H2O2
(d) 40 आयतन H202
उत्तर:
(a) 10 आयतन HO2

प्रश्न 4.
भारी जल प्राप्त किया जाता है –
(a) जल को उबालकर
(b) जल के प्रभावी आयतन द्वारा
(c) जल के निरंतर विद्युत् विच्छेद द्वारा
(d) H2O2 को गर्म करके।
उत्तर:
(c) जल के निरंतर विद्युत् विच्छेद द्वारा

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प्रश्न 5.
ऑर्थो तथा पैरा हाइड्रोजन में किस बात का अंतर है –
(a) परमाणु क्रमांक
(b) द्रव्यमान संख्या
(c) इलेक्ट्रॉन चक्रण
(d) नाभिकीय चक्रण।
उत्तर:
(d) नाभिकीय चक्रण।

प्रश्न 6.
कौन-से हाइड्राइड सामान्यतः सरल अनुपात में नहीं होते हैं –
(a) आयनिक
(b) आण्विक
(c) अंतराकाशीय
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(c) अंतराकाशीय

प्रश्न 7.
आयनिक हाइड्राइड का उदाहरण नहीं है –
(a) LiH
(b) CaH2
(c) CsH
(d) GeH2.
उत्तर:
(d) GeH2.

प्रश्न 8.
H2O2के अणु में H-0 0 बंध कोण होता है –
(a) 99.5°
(b) 95.9°
(c) 97°
(d) 100.5°
उत्तर:
(c) 97°

प्रश्न 9.
रॉकेट के लिये नोदक का कार्य करता है –
(a) N2 + O2
(b) H2 + O2
(c) O2 + Ar
(d) H2 + N2.
उत्तर:
(b) H2 + O2

प्रश्न 10.
कैलगॉन प्रक्रम में, निम्न में कौन सा उपयोग होता है –
(a) सोडियम बहु मेटाफॉस्फेट
(b) जलयुक्त सोडियम ऐल्युमिनियम सिलिकेट
(c) धनायन विनिमय रेजिन
(d) ऋणायन विनिमय रेजिन।
उत्तर:
(a) सोडियम बहु मेटाफॉस्फेट

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प्रश्न 11.
अभिकारक जो जल की कठोरता ज्ञात करने में प्रयोग किया जाता है –
(a) ऑक्जेलिक अम्ल
(b) डाइसोडियम लवण EDTA
(c) सोडियम सिट्रेट
(d) सोडियम थायोसल्फेट।
उत्तर:
(b) डाइसोडियम लवण EDTA

प्रश्न 12.
‘CO2, H20 तथा H,0, को उनके अम्लीयता के बढ़ते क्रम में लिखिए –
(a) CO2 <H2O2 < H2O
(b) H2O< H2O2<CO2.
(c) H2O< H2O2> CO2
(d) H2O2> CO2 > H2O
उत्तर:
(b) H2O< H2O2 <CO2.

प्रश्न 2.

  1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिये –
  2. गलित NaH के विद्युत् – विच्छेदन से ऐनोड पर ………….. गैस मुक्त होती है।
  3. कैलगॉन …………….. का व्यापारिक नाम है।
  4. कैल्सियम फॉस्फाइड पर जल की क्रिया से …………….. बनती है।
  5. ……………… जल साबुन के साथ कम झाग देता है।
  6. जल की कठोरता ……………… और ……………… के लवणों के कारण होती है।
  7. ……………… जीवधारियों में होने वाली क्रियाओं के अध्ययन में ट्रेसर का कार्य करता है।
  8. Al या …………. के सान्द्र विलयन की क्रिया से हाइड्रोजन मुक्त होती है।
  9. CO + H2 का मिश्रण ……………….. कहलाती है।
  10. 2N H2O2 का आयतन क्षमता ……………….. होगी।
  11. पैलेडियम द्वारा हाइड्रोजन का अवशोषण ……………….. कहलाता है।

उत्तर:

  1. H2
  2. सोडियम हेक्सा मेटाफॉस्फेट
  3. फॉस्फीन
  4. कठोर
  5. Ca, Mg
  6. भारी जल
  7. NaOH
  8. जल गैस
  9. 11.2 आयतन
  10. अधिशोषण

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प्रश्न 3.
उचित संबंध जोडिए –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 1
उत्तर:

  1. (d) अम्लीय
  2. (f) क्षारीय
  3. (a) ड्यूटिरो फॉस्फीन
  4. (b) तेल गैस
  5. (c) H2O2
  6. (e) अम्लीय
  7. (i) जीवाणुनाशक
  8. (g) मंदक
  9. (h) रॉकेट ईंधन

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प्रश्न 4.
एक शब्द / वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. किस यौगिक में हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था ऋणात्मक होती है ?
  2. H2O2 का विरंजक गुण ऑक्सीकरण के कारण है अथवा अपचयन के कारण।
  3. हाइड्रोजन की खोज किसने की ?
  4. परमाणु भट्टियों में मंदक के रूप में किसका उपयोग किया जाता है ?
  5. H2O2 Cl2 को किसमें अपचयित कर देता है ?
  6. H2O2 का विरंजक गुण निर्भर करता है।
  7. कौन-सा ऑक्साइड तनु अम्ल से क्रिया करके H2O2 देता है ?
  8. जल की तुलना में एथेनॉल का वाष्पन तेजी से होता है। क्यों ?
  9. किस प्रकार के तत्व जालक हाइड्राइड बनाते हैं ?
  10. जालक हाइड्राइड का क्या उपयोग है ?

उत्तर:

  1. CaH2
  2. H2O2 सरलता से ऑक्सीजन देने के कारण यह विरंजक पदार्थ है। अत: H2O2 का विरंजक गुण ऑक्सीकरण के कारण है। H2O2
  3. H2O + [O]
  4. हेनरी केवेण्डिस
  5. भारी जल (D2O)
  6. HCl में
  7. नवजात ऑक्सीजन के कारण
  8. Na2CO2, BaC2
  9. दुर्बल हाइड्रोजन बंध के कारण
  10. d – तथा f – ब्लॉक के तत्व
  11. H2के भण्डारण एवं हाइड्रोजनीकरण क्रियाओं को उत्प्रेरित करने में।

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हाइड्रोजन अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जल की अस्थायी एवं स्थायी कठोरता के क्या कारण हैं ? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जल में कैल्सियम बाइकार्बोनेट तथा मैग्नीशियम बाइकार्बोनेट की उपस्थिति के कारण अस्थायी कठोरता उत्पन्न होती है। जल में विलेय लवणों कैल्सियम क्लोराइड, मैग्नीशियम क्लोराइड, कैल्सियम सल्फेट तथा मैग्नीशियम सल्फेट आदि के कारण स्थायी कठोरता उत्पन्न होती है।

प्रश्न 2.
बेरीलियम सहसंयोजी हाइड्राइड बनाता है जबकि कैल्सियम आयनिक हाइड्राइड क्यों?
उत्तर:
उच्च विद्युत् ऋणात्मकता के कारण Be (1.5) सहसंयोजी हाइड्राइड बनाता है। जबकि Ca की विद्युत् ऋणात्मकता कम होती है।

प्रश्न 3.
हाइड्रोजन बनाने की यूनो विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ऐल्युमिनियम की अभिक्रिया गर्म कास्टिक सोडा के साथ गर्म करने पर ऐल्युमिनियम कास्टिक सोडा में विलेय हो जाती है और हाइड्रोजन गैस प्राप्त होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 37

प्रश्न 4.
अशुद्ध हाइड्रोजन का शुद्धिकरण किस प्रकार होता है ?
उत्तर:
प्लेटिनम ब्लैक या पैलेडियम धातु पर हाइड्रोजन गैस प्रवाहित करने पर धातु द्वारा हाइड्रोजन का अधिशोषण हो जाता है। इसे अधिधारण कहते हैं। अशुद्ध हाइड्रोजन का इस प्रकार शुद्धिकरण किया जा सकता है क्योंकि पैलेडियम द्वारा केवल शुद्ध हाइड्रोजन का अधिशोषण होता है।

प्रश्न 5.
कठोर जल से होने वाली हानियाँ लिखिए।
उत्तर:
कठोर जल से होने वाली हानियाँ –

  • कपड़े धोने से झाग उत्पन्न करने के लिये अधिक साबुन खर्च होता है।
  • कठोर जल का उपयोग प्रयोगशाला में तथा दवाइयों में इंजेक्शन के लिये नहीं किया जा सकता है।
  • इसका सेवन संधिवात, गठिया आदि से पीड़ित व्यक्तियों के लिये हानिकारक होता है।

प्रश्न 6.
हाइड्रोजन बनाने की तीन विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पानी की भाप को 600 – 900°C पर तप्त लोहे पर प्रवाहित करने पर हाइड्रोजन गैस बनती है। यह अभिक्रिया उत्क्रमणीय है। अतः हाइड्रोजन को क्रिया क्षेत्र से हटाते रहना आवश्यक है।
3Fe + 4H2O ⥨ Fe3O4 + 4H2

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प्रश्न 7.
उस विधि का वर्णन कीजिए जो जल की अस्थायी तथा स्थायी दोनों प्रकार की कठोरता दूर कर देता है।
उत्तर:
रासायनिक विधि-इस विधि से जल की अस्थायी तथा स्थायी दोनों प्रकार की कठोरता समाप्त हो जाती है। इस विधि में NaOH या Na2CO3 में से कोई पदार्थ मिलाने पर Ca या Mg अविलेय लवण बनाकर पृथक् हो जाता है।

  • CaCl2 + Na2Co3 → CaCO3 + 2NaCl
  • MgCl2 + Na2CO3 → MgCO3 + 2NaCl
  • MgSO4 + Nal2CO3 → sMgCO3 + Na2SO4

प्रश्न 8.
H2O2 की सान्द्रता किस प्रकार व्यक्त करते हैं ?
उत्तर:
H2O2विलयन की सान्द्रता ऑक्सीजन के N. T. P. पर उस आयतन के बराबर होती है जो उस विलयन के एकांक आयतन को गर्म करने पर उत्पन्न होती है। जैसे 10 आयतन H2O2का तात्पर्य है कि 1 ml H2O2 को गर्म करने से N.T.P. पर 10 ml O2 प्राप्त होती है।

प्रश्न 9.
हाइड्रोजन के उपयोग लिखिए।
उत्तर:
हाइड्रोजन के उपयोग –

  • अपचायक के रूप में
  • तेल के हाइड्रोजनीकरण से वसा बनाने के लिये
  • कोल चूर्ण के साथ-साथ अभिकृत करके कृत्रिम पेट्रोल बनाने के लिये
  • काँच उद्योग में काँच को धीरे-धीरे ठण्डा करने में।

प्रश्न 10.
तेल गैस क्या है तथा इसे कैसे प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर:
यह गैस मिट्टी के तेल के भंजन से बनायी जाती है। मिट्टी के तेल की पतली धार लोहे के रक्त तप्त रिटार्ट में डाली जाती है जिससे बड़े अणु टूटकर मेथेन, एथिलीन, एसीटिलीन में टूट जाती है। इसका उपयोग बर्नरों को जलाने में किया जाता है।

प्रश्न 11.
कोल गैस क्या है ? इसका रासायनिक संघटन लिखिए।
उत्तर:
कोल गैस कई गैसों का मिश्रण है जिनमें हाइड्रोजन भी एक अवयवी गैस है। कोल गैस का प्रतिशत संगठन निम्न प्रकार से है

  • H2 = 43.55%,
  • CH4 = 25.35%
  • CO2 = 0.3%
  • CO = 4.11%
  • N2= 2 – 12%
  • O2 = 0 – 1.5% कोल गैस का उपयोग ईंधन के अतिरिक्त प्रकाश उत्पन्न करने के लिये प्रयुक्त होता है।

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प्रश्न 12.
सोडियम पर जल की अभिक्रिया कराने पर गैस उत्पन्न होती है। उसका नाम व सूत्र लिखिए।
उत्तर:
अत्यधिक क्रियाशील धातु जैसे-सोडियम, पोटैशियम, कैल्सियम पर साधारण ताप पर जल की अभिक्रिया कराने पर हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है।

  • 2Na +2H2O → 2NaOH + H2
  • Ca + 2H2 O → Ca(OH)2 + H2

प्रश्न 13.
मृदु जल और कठोर जल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
मृदु जल:
साबुन के साथ रगड़ने पर शीघ्रता से और अधिक झाग देने वाला जल मृदु जल कहलाता है।
उदाहरण-आसुत जल, वर्षा का जल आदि।

कठोर जल:
साबुन के साथ रगड़ने पर देर से तथा कम झाग देने वाला जल कठोर जल कहलाता है। और साबुन फटकर थक्के बनाता है।
उदाहरण – समुद्र का जल।

प्रश्न 14.
आसुत जल क्या है ? इसका एक उपयोग लिखिए।
उत्तर:
आसवन विधि से प्राप्त शुद्ध जल आसुत जल कहलाता है। इसका उपयोग औषधि बनाने में एवं प्रयोगशाला में विलयन बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 15.
भारी जल की क्या उपयोगिता है ?
उत्तर:

  • भारी जल मुख्य रूप से नाभिकीय रिएक्टरों में मंदक के रूप में प्रयुक्त होता है।
  • यह अभिक्रियाओं की क्रियाविधि के अध्ययन में ट्रेसर यौगिक के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • अन्य ड्यूटीरियम यौगिकों जैसे – CD4 , D2SO4 आदि के निर्माण में इसका प्रयोग करते हैं।

प्रश्न 16.
हाइड्रोजन परॉक्साइड का तनु विलयन गर्म करके सान्द्र क्यों नहीं किया जा सकता इसका सान्द्र विलयन किस प्रकार कर सकते हैं ?
उत्तर:
H2O2 का तनु विलयन गर्म करके सान्द्रित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह अपने गलनांक से काफी नीचे ही अपघटित हो जाता है।
2H2O2 → 2H2O + O2
जल से निष्कर्षित 1% H2O2का कम दाब पर आसवन करके 30%(द्रव्यमानानुसार) तक सान्द्रित करते हैं। पुनः इसका सावधानीपूर्वक कम दाब पर आसवन करके 85% तक सान्द्रण किया जाता है। अवशेष जल को हिमशीतित करके शुद्ध हाइड्रोजन परॉक्साइड प्राप्त की जाती है।

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प्रश्न 17.
परॉक्साइडों से हाइड्रोजन परॉक्साइड के निर्माण हेतु सल्फ्यूरिक अम्ल की अपेक्षा, फॉस्फोरिक अम्ल अधिक उपयुक्त होता है। क्यों ?
उत्तर:
H2SO4, H2O2 के अपघटन में उत्प्रेरक की भाँति व्यवहार करता है। अत: परॉक्साइडों से H2O2 के निर्माण में H2SO4 की अपेक्षा दुर्बल अम्ल जैसे – H3PO4, H2CO3 आदि उपयुक्त रहते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 38

प्रश्न 18.
किसी क्षारीय धातु का आयनिक हाइड्राइड प्रभावी सहसंयोजक व्यवहार प्रदर्शित करता है तथा यह ऑक्सीजन तथा क्लोरीन के प्रति लगभग अक्रियाशील होता है। इसका प्रयोग अन्य उपयोगी हाइड्राइडों के संश्लेषण में करते हैं। इस हाइड्राइड का सूत्र लिखिये।इसकी AlCl के साथ अभिक्रिया भी लिखिए।
उत्तर:
यह आयनिक हाइड्राइड LiH है। सबसे छोटी Li धातु के कारण इसका व्यवहार सहसंयोजी भी होता है। LiH अत्यधिक स्थायी है। यह ऑक्सीजन तथा क्लोरीन के प्रति अत्यधिक अक्रियाशील है। यह Al2Cl6 के साथ अभिक्रिया करके लीथियम ऐल्युमिनियम हाइड्राइड बनाता है।
8LiH + Al2Cl6 → 2LiAlH4 + 6LiCl

प्रश्न 19.
कठोर जल साबुन के साथ शीघ्रता से झाग क्यों नहीं देता?
उत्तर:
कठोर जल में Ca तथा Mg के बाइ कार्बोनेट, सल्फेट तथा क्लोराइड में से कोई भी लवण विलेय रहता है। साबुन उच्च कार्बनिक वसा अम्ल के सोडियम लवण होते हैं जो Ca एवं Mg के लवणों से क्रिया करके अवक्षेप देते हैं।
2C17H35COONa + MgSO4 → (C17H35COO)2 Mg + Na2SO4
जल में से जब तक ये लवण पूरी तरह से अवक्षेपित नहीं हो जाते तब तक साबुन से झाग नहीं बनता और साबुन व्यर्थ हो जाता है।

प्रश्न 20.
H2O2 के कोई चार उपयोग लिखिए।
उत्तर:
H2O2 के उपयोग –

  • यह जीवाणुनाशी के रूप में कान, दाँत आदि धोने के काम आता है।
  • प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में।
  • रॉकेटों में ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • पुराने तैल चित्रों को ठीक करने में इसका उपयोग किया जाता है।

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प्रश्न 21.
भाप अंगार गैस से हाइड्रोजन के औद्योगिक निर्माण की विधि लिखिए।
उत्तर:
गर्म भाप को रक्त तप्त कोक पर प्रवाहित करके वाटर गैस बनाते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 39
इस प्रकार प्राप्त H2 व CO2 के मिश्रण को वायुमण्डलीय दाब पर पानी में प्रवाहित करने पर CO2 शोषित हो जाती है तथा H2 शेष रहती है।

प्रश्न 22.
चालकता जल किसे कहते हैं ? इसके उपयोग लिखिए।
उत्तर:
कोलरॉश ने जल का निम्न दाब पर क्वार्ट्स के बने उपकरण में 42 बार आसवन करके अत्यन्त शुद्ध जल प्राप्त किया। यह चालकता जल कहलाता है। आसुत जल में कुछ पोटैशियम परमैंगनेट मिलाकर मजबूत काँच के बने रिटार्ट में उसका एक बार पुनः आसवन कर लेते हैं। इसका उपयोग चालकता निर्धारण में होता है।

प्रश्न 23.
ड्यूटीरियम क्या है ? इसके दो उपयोग लिखिए।
उत्तर:
ड्यूटीरियम हाइड्रोजन का समस्थानिक है। इसे भारी हाइड्रोजन भी कहते हैं। इसके नाभिक में एक प्रोटॉन एवं एक न्यूट्रॉन होता है तथा नाभिक के चारों ओर एक इलेक्ट्रॉन घूमता रहता है। अर्थात् इसकी द्रव्यमान संख्या दो तथा परमाणु क्रमांक 1 है। इसे \(_{1}^{2} \mathrm{H}\) या D से दर्शाते हैं। भारी जल के वैद्युत् अपघटन से कैथोड पर ड्यूटीरियम प्राप्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 40
उपयोग:

  • इसका उपयोग कृत्रिम तत्वान्तरण में प्रक्षेपक कण ड्यूट्रॉन के रूप में।
  • रासायनिक एवं जैव रासायनिक अभिक्रियाओं की क्रियाविधि ज्ञात करने पर।

प्रश्न 24.
सोडियम डाइहाइड्रोजन के साथ क्रिया करके क्रिस्टलीय आयनिक ठोस बनाता है। यह यौगिक अवाष्पशील तथा अचालक प्रकृति का होता है। यह जल के साथ शीघ्रता से क्रिया करके डाइहाड्रोजन गैस बनाता है। इस यौगिक का सूत्र लिखिए तथा इसकी जल के साथ क्रिया लिखिए। इस ठोस के गलित का वैद्युत-अपघटन कराने पर क्या होगा?
उत्तर:
सोडियम डाइहाइड्रोजन के साथ क्रिया करके सोडियम हाइड्राइड बनाता है जो कि एक क्रिस्टलीय आयनिक ठोस है।
2Na + H2 → 2Na+ H
यह जल के साथ शीघ्रता से क्रिया करके H, गैस बनाता है।
2NaH + 2H2O → 2NaOH + 2H2
ठोस अवस्था में NaH में वैद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती है। परन्तु गलित अवस्था में यह एनोड पर H, तथा कैथोड पर Na मुक्त करता है।

प्रश्न 25.
फ्लुओरीन तथा जल के मध्य रेडॉक्स अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
फ्लुओरीन प्रबल ऑक्सीकारक है। यह HO को O2 तथा O2 में ऑक्सीकृत करता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 61
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प्रश्न 26.
समझाइये कि HCl गैस तथा HF द्रव क्यों है ?
उत्तर:
Cl की अपेक्षा F का आकार छोटा तथा वैद्युत ऋणात्मकता अधिक है। अतः यह Cl की अपेक्षा अधिक प्रबल H – आबंध बनायेगा। यही कारण है कि HF द्रव है तथा HCl गैस है।

प्रश्न 27.
D2O2 के निर्माण की एक रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
जल में विलेय D2SO4 की क्रिया BaO2 से कराने पर D2O2 प्राप्त होता है।
BaO2 +D2SO4 → BaSO4 +D2O2

प्रश्न 28.
H,O, को अधिक समय तक संचित क्यों नहीं किया जा सकता है ?
उत्तर:
H2O2 में परॉक्साइड बंध होता है। इस बंध की उपस्थिति के कारण यह अस्थायी होता है और अपघटित होने लगता है।
2H2O2 → 2H2O + O2 फलस्वरूप H2O2 को अधिक समय तक संचित नहीं किया जा सकता है । यह अपघटन की क्रिया काँच से उत्प्रेरित हो जाती है। इसलिये काँच की बोतल में अपघटन क्रिया और तीव्र हो जाती है। इसे रोकने या मंद करने के लिये मोम व अस्तर लगी रंगीन बोतल में संचित किया जाता है।

प्रश्न 29.
H2O2 प्रति क्लोर कहलाती है, क्यों?
उत्तर:
उन रंगीन पदार्थों में जिनमें विरंजन क्लोरीन द्वारा किया जाता है क्लोरीन की कुछ मात्रा शेष रह जाती है। इस प्रकार शेष क्लोरीन को दूर करने के लिये H2O2का उपयोग किया जाता है इस गुण के कारण इसे प्रति क्लोर कहते हैं।
Cl2 + H2O2 →2HCl + O2

प्रश्न 30.
अस्थायी कठोर जल को बुझे हुये चूने के साथ उबालने पर वह मृदु हो जाता है, क्यों?
उत्तर:
जब अस्थायी कठोर जल को बुझे हुये चूने के साथ उबाला जाता है तब अस्थायी कठोर जल में उपस्थित Ca व Mg के बाइ कार्बोनेट अघुलनशील कार्बोनेट में बदल जाता है जिन्हें छानकर दूर कर देते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 41

प्रश्न 31.
लवणीय हाइड्राइड जल के साथ प्रबल अभिक्रिया करके आग उत्पन्न करती है। क्या इसमें CO2(जो एक सुपरिचित अग्निशामक है) का उपयोग हम कर सकते हैं? समझाइए।
उत्तर:
लवणीय हाइड्राइड (NaH, CaH2 आदि) जल के साथ प्रबल अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड तथा डाइहाइड्रोजन उत्पन्न करते हैं।

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प्रश्न 32.
कारण दीजिए –

  1. झीलों के पानी का तली की अपेक्षा सतह की ओर गमन।
  2. बर्फ जल पर तैरती है।

उत्तर:
1. द्रव (Liquid water) जल की अपेक्षा बर्फ का घनत्व अधिक होता है। शीतकाल में, झील के पानी का तापमान घटने लगता है। चूँकि ठंडा पानी भारी होता है। अत: यह पानी की तली की ओर गति करता है तथा तली का गर्म पानी सतह की ओर गति करता है। यह प्रक्रिया चलती रहती है। 277 K पर जल का घनत्व अधिकतम होता है।

अतः सतह जल के तापमान में कमी से घनत्व में कमी होगी। सतह से जल का तापमान घटता रहता है और अन्त में जल जम जाता है। अतः निम्न तापमान पर बर्फ की सतह जल के ऊपर तैरती है। इसी कारण सतह से तली की ओर जल लगातार बर्फ के रूप में जमता रहता है।

2. द्रव जल (Liquid water) की अपेक्षा, बर्फ का घनत्व कम होता है अत: बर्फ जल पर तैरती है।

प्रश्न 33.
यदि द्रव जल तथा बर्फ के टुकड़े के समान द्रव्यमान लिये जायें तो द्रव जल की अपेक्षा बर्फ का घनत्व कम होता है ?
उत्तर:
बर्फ में H2O अणु द्रव जल की भाँति सघन नहीं होते हैं। बर्फ की जालक संरचना में रिक्त अवकाश होते हैं। जिसके कारण इसका आयतन अधिक तथा घनत्व कम होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 42

हाइड्रोजन लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
H2O2 पुराने तैलचित्रों को ठीक करने में प्रयुक्त होता है, उचित तर्क द्वारा समझाइये।
उत्तर:
पुरानी तैलचित्र जो बेसिक लेड कार्बोनेट से बनी हुई होती है। समय के साथ धीरे-धीरे काली पड़ जाती है क्योंकि वायुमण्डल में उपस्थित HS गैस तैलचित्र के सफेद लेड ऑक्साइड को काले लेड सल्फाइड में बदल देती है।
PbO+ H2S → PbS + H2O
ऐसे तैलचित्रों को H2O2 से धोने पर काला लेड सल्फाइड ऑक्सीकृत होकर PbSO4 में बदल जाता है और तस्वीर में पुनः चमक आ जाती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 43

प्रश्न 2.
हाइड्रोजन के सभी समस्थानिकों के आरेख बनाकर उनके नाम लिखिये।
उत्तर:
हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं –

  • साधारण हाइड्रोजन या प्रोटियम – \(_{1}^{1} \mathrm{H}\)
  • भारी हाइड्रोजन या ड्यूटीरियम – \(_{1}^{2} \mathrm{H}\) या D
  • ट्राइटियम – \(_{1}^{3} \mathrm{H}\)

संरचना आरेख:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 44
तुलना:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 45

प्रश्न 3.
ऑर्थो तथा पैराहाइड्रोजन को समझाइये।
उत्तर:
सन् 1927 में हाइजेनबर्ग ने बताया कि हाइड्रोजन अणु दो प्रकार के होते हैं। प्रत्येक हाइड्रोजन अणु में दो हाइड्रोजन परमाणु होते हैं। इसके इलेक्ट्रॉन के चक्रण सदैव विपरीत दिशा में होता है। लेकिन इलेक्ट्रॉन की भाँति नाभिक भी अपनी दूरी पर चक्रण करते हैं। हाइड्रोजन अणु में जब दोनों हाइड्रोजन परमाणु के नाभिकों का चक्रण एक ही दिशा में होता है तो उसे ऑर्थो हाइड्रोजन कहते हैं और जब नाभिकों का चक्रण विपरीत दिशा में होता है तो उसे पैरा हाइड्रोजन कहते हैं। आर्थो तथा पैरा हाइड्रोजन के रासायनिक गुणों में कोई अंतर नहीं होता है। लेकिन उनके भौतिक गुणों में अंतर होता है। यह अंतर उनके अणुओं की आंतरिक ऊर्जा में अंतर के कारण होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 46

प्रश्न 4.
बॉयलर में कठोर जल का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता है ?
उत्तर:
उद्योगों में बॉयलर का उपयोग भाप बनाने में किया जाता है। बॉयलरों में कठोर जल का उपयोग नहीं किया जाता। यदि कठोर जल को बॉयलर में प्रयोग किया जाता है तो Ca और Mg के लवण बॉयलर के अंदर की सतह पर पपड़ी के रूप में जम जाते हैं। यह पपड़ी ऊष्मा की कुचालक होती है जिससे ईंधन का अपव्यय होता है। इस कुचालक पपड़ी के कारण बॉयलर को बहुत अधिक गर्म करना पड़ता है जिससे पानी गर्म हो सके। उच्च ताप पर बाहरी सतह का Fe वायु की O2 से अभिक्रिया करके Fe3O4 बना लेता है।

कभी-कभी अंदर की पपड़ी में दरार हो जाती है जिससे गर्म जल की Fe की सतह से सीधी अभिक्रिया हो सकती है तथा Fe3O4 व H2 बनते हैं। हाइड्रोजन एक ज्वलनशील गैस है जिससे विस्फोट का भय रहता है। कठोर जल में यदि MgCl2 हो, तो वह पानी से अभिक्रिया करके HCl बनाता है। यह अम्ल बॉयलर का संक्षारण करता रहता है।
MgCl2 +H2O → Mg(OH)Cl+ HCl

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प्रश्न 5.
क्या होता है जबकि –

  1. कैल्सियम हाइड्राइड की पानी से क्रिया कराते हैं।
  2. H2O2 को अम्लीय KMnO2 विलयन में मिलाते हैं।
  3. पोटैशियम फेरीसायनाइड के क्षारीय विलयन को H2O2 से क्रिया कराते हैं।
  4. उच्च ताप तथा उच्च दाब पर Fe की उपस्थिति में H2की अभिक्रिया N2 के साथ कराते हैं।

उत्तर:
1. कैल्सियम हाइड्राइड की पानी से क्रिया कराने पर H2 बनता है।
CaH2 + 2H2O →Ca(OH)2 + 2H2

2. H2O2 को अम्लीय KMnO4 में मिलाने पर KMnO4का गुलाबी रंग उड़ जाता है।
2KMnO4 + 3H2SO4 + 5H2O2 → K2SO4 + 2MnSO4 + 8H2O + 5O2

3. पोटैशियम फेरीसायनाइड के क्षारीय विलयन में H,O, मिलाने पर पोटैशियम फेरोसायनाइड में अपचयित हो जाता है।
2K3[Fe(CN)6] + 2KOH + H2O2 → 2K4[Fe(CN)6] +2H2O + O2

4. उच्च ताप तथा उच्च दाब पर Fe उत्प्रेरक तथा Mo उत्प्रेरक वर्धक की उपस्थिति में हाइड्रोजन की अभिक्रिया N, से कराने पर अमोनिया प्राप्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 47MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 47

प्रश्न 6.
हाइड्रोजन परॉक्साइड की निम्नलिखित से अभिक्रिया लिखिये –

  1.  O2
  2. PbS
  3. KI
  4. Cl2
  5. H2S.

उत्तर:

  1. हाइड्रोजन परॉक्साइड ओजोन से क्रिया कर ऑक्सीजन देता है।
    H2O2 + O3 →H2O + 2O2
  2. हाइड्रोजन परॉक्साइड PbS को PbSO4 में ऑक्सीकृत कर देता है।
    PbS + 4H2O2 → PbSO4 + 4H2O
  3. हाइड्रोजन परॉक्साइड KI को आयोडीन में ऑक्सीकृत कर देता है।
    2KI + H2O2 2KOH + I2
  4. हाइड्रोजन परॉक्साइड Cl, को HCl में अपचयित कर देती है।
    Cl + H2O2 → 2HCl + O2
  5. हाइड्रोजन परॉक्साइड HS को सल्फर में ऑक्सीकृत कर देती है।
    H2S + H2O2 → 2H2O + S

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प्रश्न 7.
क्या आप आशा करते हैं कि (C,Han+2) कार्बनिक हाइड्राइड्स लुईस अम्ल या क्षार की भाँति कार्य करेंगे? अपने उत्तर को युक्ति संगत ठहराइए।
उत्तर:
(CnH2n+2) प्रकार के कार्बन हाइड्राइड्स, इलेक्ट्रॉन समृद्ध हाइड्राइड है। इनके पास सहसंयोजी आबंध बनाने हेतु पर्याप्त इलेक्ट्रॉन हैं । अतः ये न तो लुईस अम्ल और न ही लुईस क्षार की भाँति व्यवहार करेंगे।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित समीकरणों को पूरा कीजिए –
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उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 49

प्रश्न 9.
भाप अंगार गैस क्या है ? इसका संघटन लिखते हुये इसके उपयोग लिखिये।
उत्तर:
भाप अंगार गैस:
यह गैस कार्बन मोनोऑक्साइड तथा हाइड्रोजन का मिश्रण है। रक्त तप्त कोक पर जलवाष्प प्रवाहित करने पर कार्बन मोनोऑक्साइड तथा हाइड्रोजन का मिश्रण (भाप अंगार गैस) प्राप्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 50
संगठन –

  • H2 = 49%
  • N2 = 4%,
  • CO = 44%
  • CO2 = 2.7%
  • CH4 = 0.3%

उपयोग –

  • भट्टियों में ईंधन के रूप में
  • कार्बोरेटेड भाप अंगार गैस बनाने में
  • अमोनिया के निर्माण में
  • असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों के साथ प्रकाश देने में।

प्रश्न 10.
जल की अस्थायी कठोरता कैसे दूर करते हैं ?
उत्तर:
अस्थायी कठोरता दूर करने की दो विधियाँ हैं –
(1) उबालकर:
उबालने पर Ca और Mg के विलेय बाइ कार्बोनेट अविलेय कार्बोनेट में बदल जाते हैं और अवक्षेपित हो जाते हैं।

  • Ca(HCO3)2 + CaCO3 + H2O+CO2
  • Mg(HCO3)2 + MgCO3 + H2O+CO2

(2) क्लार्क विधि-अस्थायी कठोर जल में चूने के पानी की निश्चित मात्रा मिलाने पर विलेय बाइ कार्बोनेट अविलेय कार्बोनेट बना लेते हैं जो अवक्षेपित हो जाते हैं।

  • Ca(HCO3)2 + Ca(OH)2 →2CaCO3 +2H2O
  • Mg(HCO3)2 + Ca(OH)2 →MgCO3 +CaCO3 + 2H2O.

प्रश्न 11.
हाइड्रोजन परॉक्साइड की लुईस संरचना बताइए।
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 51

प्रश्न 12.
हाइड्रोजन परॉक्साइड की संरचना को समझाइये।
उत्तर:
H2O2 का द्विध्रुव आघूर्ण 2.1 D है। इससे स्पष्ट होता है कि संरचना असमतलीय है। X – किरणे एवं अन्य भौतिक विधियों से विदित होता है कि H,O, की संरचना खुली पुस्तक के समान होती है। H2O2 अणु को दो OH के रूप में लिखते हैं। H – O – O – H परन्तु दोनों OH समूह एक ही तल में नहीं हैं । गैसीय स्थिति में तल 111.5° का कोण बनाते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 11
0-0 परमाणु दोनों तलों के संधि स्थल पर और परमाणु दोनों तलों पर 94.8° का O – O – H कोण बनाते हैं। बंध दूरी H – O = 0.95A और 0 – 0 = 1-47 A होती है। क्रिस्टलीय स्थिति में H बंध के कारण थोड़ा अंतर होता है। तलों के बीच का कोण 90.2°, कोण O – O – H = 101.9° बंध दूरी O – H = 0.994 होती है। और O-O= 1.46वें होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 12
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प्रश्न 13.
समझाइये H2O2 ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों प्रकार का कार्य करता है।
उत्तर:
H2O2 सरलता से अपघटित होकर ऑक्सीजन परमाणु मुक्त करता है इसलिये यह प्रबल ऑक्सीकारक है। परन्तु जब यह अन्य ऑक्सीकारक के साथ क्रिया करता है तो ऑक्सीकारकों से सक्रिय ऑक्सीजन का एक परमाणु आसानी से पृथक् कर देता है।

ऑक्सीकारक प्रकृति –

  • 2Kl + H2O2 → 2KOH + I2
  • Na2SO3 + H2O2 → Na2SO4 + H2O
  • H2S + H2O2 → 2H2O + S

अपचायक प्रकृति –

  • H2O2+ O2 → H2O2 + 2O2
  • PbO2 + H2O2 → PbO+ H2O + O2
  • Cl2 + H2O2 → 2HCl + O2

प्रश्न 14.
कैलगॉन क्या है ? इसकी सहायता से जल की कठोरता कैसे दूर की जा सकती है ?
उत्तर:
पॉली हेक्सा मेटाफॉस्फेट को कैलगॉन कहते हैं । इसका रासायनिक संगठन Na2 [Na4 (PO4)6] होता है । कठोर जल में कैलगॉन की थोड़ी मात्रा डालने पर कैलगॉन कठोर जल में उपस्थित Ca और Mg लवणों से क्रिया कर उनके विलेय संकुल यौगिक बना लेता है। यह संकर यौगिक आयनन पर Ca2+और Mg2+ आयन नहीं देता है जिससे जल इन आयनों से मुक्त रहता है।
Na2[Na4 (PO3)6] + CaSO4 → Na2[CaNa2 (PO3)6] + Na2SO4

Na2 [CaNa2 (PO3)6] + CaSO4 → Na2[Ca(PO3)6] + Na2SO2

प्रश्न 15.
हाइड्रेट कितने प्रकार के होते हैं ? उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
जल अनेक धातु लवणों के साथ संयुक्त होकर हाइड्रेट बनाता है। ये तीन प्रकार के होते हैं –
1. जटिल आयन कैटायन जल – जटिल आयन में केन्द्रीय धातु के साथ लिगैण्ड बनाकर कैटायन में उपस्थित रहता है।

उदाहरण-हेक्सा एक्वा क्रोमियम (III) क्लोराइड [Cr(H2O6)]Cl3

2. जटिल आयन ऑक्सीऐनायन जल-जटिल आयन में ऑक्सी ऐनायन के साथ जल अणु उपस्थित रहता है।
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3. क्रिस्टलीय जल – क्रिस्टल जालक में अणु के भीतर खाली जगह में अणु उपस्थित रहते हैं जिसे क्रिस्टलन जल कहते हैं। कुछ धातु लवण रखा रहने पर संयुक्त जल को खो देते हैं। इसको उत्फुलन कहते हैं तथा अनेक पदार्थ वायु में रखे रहने पर वायु से जल सोख लेते हैं। इस क्रिया को प्रस्वेदन कहते हैं।
उदाहरण – Na2SO4 , 10H2O,MgSO4, 7H2O

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प्रश्न 16.
जल की कठोरता दूर करने की परम्यूटिट विधि को समझाइये।
उत्तर:
इस विधि में कठोर जल को मृदु करने के लिये परम्यूटिट नामक पदार्थ का उपयोग करते हैं। ये पदार्थ जियोलाइट भी कहलाते हैं। जियोलाइट, सोडियम तथा ऐल्युमिनियम के मिश्रित जलयोजित सिलिकेट हैं। इनका सूत्र Na2 Al2 Si2O8 xH2O है। इसे संक्षिप्त में Na2Z द्वारा दर्शाते हैं। कठोर जल को जब जियोलाइट के ऊपर प्रवाहित करते हैं तो Ca और Mg जियोलाइट प्राप्त होते हैं जो अवक्षेपित होकर नीचे बैठ जाते हैं। इस प्रकार जल मृदु हो जाता है।

  • Na2Z + CaCl2 → Ca2 + 2 NaCl
  • Na2Z + MgSO4 → Na2SO4 + MgZ

अधिक समय तक जियोलाइट का उपयोग करने पर जियोलाइट की क्षमता कम हो जाती है। इसे पुनः सक्रिय करने के लिये 10% NaCl विलयन मिलाते हैं।
CaZ + 2NaCl → Na2Z + CaCl2
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प्रश्न 17.
जल अणु की संरचना दर्शाइये तथा उसके अच्छे विलायक होने का कारण दीजिये।
उत्तर:
जल के अणु में दो H परमाणु तथा एक 0 परमाणु आपस में सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़े होते हैं। जल की संरचना उल्टे V के आकार की होती है। जिसमें H – 0 – H बंध 104°28′ होता है। जिसमें केन्द्रीय परमाणु ऑक्सीजन 3 संकरित अवस्था में होता है। इस प्रकार H2O अणुओं में दो sp3σ बंध होते हैं। तथा ऑक्सीजन पर 2 एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं। तथा एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म – एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म प्रतिकर्षण के कारण बंध कोण 109°28′ से गिरकर 104°28′ होता है।

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जल का विलायक गुण:
जल एक उत्तम विलायक है। क्योंकि जल का अणु ध्रुवीय है तथा इसके अणुओं के मध्य H बंध होता है। ध्रुवीय तथा उच्च परावैद्युतांक स्थिरांक होने के कारण जल में आयनिक यौगिक तथा ध्रुवीय सह-संयोजी यौगिक विलेय हो जाते हैं। H बंध के कारण वे यौगिक भी जल में विलेय हैं जो जल के साथ हाइड्रोजन बंध बना सकते हैं।
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प्रश्न 18.
भारी जल का निर्माण किस प्रकार करते हैं ? इसके गुण लिखिए।
उत्तर:
साधारण जल के प्रभाजी आसवन से-साधारण जल के 6000 भाग में लगभग 1 भाग भारी जल होता है साधारण जल में से भारी जल को प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् किया जाता है। भारी जल का क्वथनांक साधारण जल के क्वथनांक से अधिक होता है। इसलिये साधारण जल का प्रभाजी आसवन करने पर साधारण जल पहले आसवित होता है तथा भारी जल अवशेष के रूप में रह जाता है।

भौतिक गुण:
भारी जल रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन द्रव है। इसका हिमांक 3.8°C तथा क्वथनांक 101-4°C होता है। रासायनिक गुण –

(1) वैद्युत अपघटन:
किसी वैद्युत अपघट्य की उपस्थिति में भारी जल का वैद्युत अपघटन कराने पर कैथोड पर ड्यूटीरियम तथा एनोड पर O2 गैस प्राप्त होती है।
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(2) नाइट्राइडों के साथ अभिक्रिया – भारी जल की अभिक्रिया नाइट्राइडों के साथ कराने पर भारी अमोनिया बनता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 53

प्रश्न 19.
जल का घनत्व 4°C पर अधिकतम होता है, क्यों ?
उत्तर:
जब बर्फ पिघलकर द्रव अवस्था में आती है तो बर्फ में उपस्थित पिंजरानुमा संरचना टूट जाती है। हाइड्रोजन बंध की संख्या में कमी आती है तथा H बंध टूटने के कारण बर्फ की संरचना के खाली स्थान में जल के अणुओं के व्यवस्थित होने के कारण जल के अणु अत्यधिक निकट आने लगते हैं जिससे जल का घनत्व बढ़ने लगता है तथा 4°C पर यह घनत्व अधिकतम हो जाता है लेकिन 4°C के पश्चात् ताप में वृद्धि करने पर जल के अणुओं की गतिज ऊर्जा में वृद्धि के कारण जल के अणु दूर-दूर जाने लगते हैं। जिसके फलस्वरूप इसके आयतन में वृद्धि हो जाती है और घनत्व में कमी आने लगती है।

प्रश्न 20.
उन हाइड्राइड वर्गों का नाम बताइए जिनसे H2O2, B2H6तथा NaH संबंधित है।
उत्तर:
H2O – सहसंयोजक या आण्विक हाइड्राइड(इलेक्ट्रॉन समृद्ध हाइड्राइड)
B2H6 – सहसंयोजक या आण्विक हाइड्राइड(इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइड)
NaH – आयनिक या लवणीय हाइड्राइड।

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हाइड्रोजन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संश्लेषित आयन विनिमयक विधि द्वारा कठोर जल के मृदुकरण के सिद्धान्त एवं विधि की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
संश्लेषित आयन विनिमय रेजिन विधि निम्नलिखित दो प्रकार की होती है –
1. धनायन – विनिमयक रेजिन- ये रेजिन, – SO3H समूह युक्त वृहद् कार्बनिक अणु होते हैं तथा जल में अविलेय होते हैं। इनकी NaCI से क्रिया कराकर R-Na में परिवर्तित किया जाता है। रेजिन R – Na, कठोर जल में उपस्थित Mg2+ तथा Ca2+ आयनों से विनिमय करके इसे मृदु जल बना देता है।
2RNa(s)+ M2+(aq) → R2M(s) + 2Na2+(aq)  (M = Ca2+ या Mg2+)

रेजिन में NaCl का जलीय विलयन मिलाने पर इसका पुनर्जनन कर लिया जाता है। शुद्ध विखनिजित तथा विआयनित जल को प्राप्त करने के लिए उपरोक्त प्राप्त जल को क्रमश: धनायन-विनिमयक तथा ऋणायन विनिमयक रेजिन में प्रवाहित करते हैं। धनायन-विनिमयक प्रक्रम में, H’ का विनिमय जल में उपस्थित Nat, Cat, Mg2+ आदि आयनों से हो जाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 55
(H’ के रूप में धनायन विनिमय रेजिन) इस प्रक्रम में प्रोटॉनों का निर्माण होता है तथा जल अम्लीय हो जाता है।

2. ऋणायन-विनिमयक प्रक्रम में, OH का विनिमय जल में उपस्थित Cl, HCO3, SO2-4 आयनों द्वारा होता है।MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 63
R\(\stackrel{+}{\mathrm{N}}\)H3 OH विस्थापित अमोनियम हाइड्रॉक्साइड ऋणायन रेजिन है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 62
इस प्रकार मुक्त OH आयन, H+ आयनों को उदासीन कर देते हैं। अंत में उत्पन्न धनायन तथा ऋणायन विनिमयक रेजिन को क्रमशः तनु अम्ल तथा तनु क्षारीय विलयनों से क्रिया कराके पुनर्जनित कर लिया जाता है।

प्रश्न 2.
प्रयोगशाला में हाइड्रोजन बनाने की विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रयोगशाला विधि-दानेदार जस्ते पर तनु H2SO4 की अभिक्रिया कराने पर हाइड्रोजन गैस प्राप्त होती है। वुल्फ बोतल में जस्ता लेकर थिसिल फनल द्वारा उसमें तनु H2SO4मिलाते हैं। साधारण ताप पर हाइड्रोजन गैस प्राप्त होती है जिसे गैस जार में जल के ऊपर एकत्रित कर लेते हैं।
शोधन – इस प्रकार प्राप्त हाइड्रोजन में आर्सीन, फॉस्फीन, H2S, SO2,CO2,NO2, जलवाष्प की अशुद्धि होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 56
इन अशुद्धियों को दूर करने के लिये हाइड्रोजन को विभिन्न पदार्थों से भरी U नली में क्रम से प्रवाहित करते हैं।

  • AgNO3विलयन से भरी नली में जिसमें ASH3 और PH3 अवशोषित हो जाते हैं।
  • PbNO3 विलयन से भरी U नली में H2S अवशोषित हो जाता है।
  • KOH विलयन से भरी U नली में SO2,CO2 और NO2 अवशोषित हो जाती है।
  • निर्जल CaCl2 या P2O5 से भरी U नली जो जलवाष्प को अवशोषित कर लेती है।

प्रश्न 3.
डिमिनरलाइज्ड पानी क्या है ? इसे कैसे प्राप्त किया जाता है ? अथवा, कठोर जल के मृदुकरण की आयन विनिमय विधि का चित्र सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पानी में उपस्थित धनायन और ऋणायन को दूर करने के बाद प्राप्त जल को डिमिनरलाइज़्ड पानी कहते हैं, यह आसुत जल की तरह अच्छा होता है। इसके लिये दो प्रकार के आयन विनिमय रेजिन प्रयोग में लाए जाते हैं।
1. धनायन विनिमय रेजिन-यह अम्लीय रेजिन है इसे RSO3H से दर्शाते हैं। कठोर जल को इनके ऊपर प्रवाहित करने से कठोर जल में उपस्थित Ca+ और Mg+2 सभी धनायन रेजिन की हाइड्रोजन को विस्थापित करके उनका स्थान लेते हैं।

  • 2RSO3H + CaCl2 → (RSO3)2Ca + 2H + 2Cl
  • 2RSO3H + MgSO4 → (RSO3)2Mg + 2H+ + SO42-

यह H+ आयन जल को अम्लीय कर देता है।

2. ऋणायन विनिमय रेजिन:
यह क्षारकीय रेजिन होता है इन्हें RNH2 सूत्र से दर्शाते हैं। यह जल से क्रिया करके RNH+3OH बनाता है।
R – NH2 + H2O → RNH+3OH

थनायन विनिमय रेजिन के बाद जब इस रेजिन के ऊपर जल प्रवाहित करते हैं तो जल में उपस्थित क्लोराइड, सल्फेट आदि ऋण आयन रेजिन के OH आयन को मुक्त कर देते हैं।
RNH3OH + Cl → RNH3Cl + OH
2RNH3OH + SO42- → (RNH3)2SO4 + 2OH
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 57
यह OH जल में मिलाकर उसमें अधिकता में उपस्थित H+ को उदासीन कर देता है।
H+ + OH → H2O
इस प्रकार दूसरे कक्ष से निकलने वाला जल सभी प्रकार धनायन, ऋणायन, अम्लीयता एवं क्षारीयता से युक्त होता है।

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प्रश्न 4.
हाइड्राइड किसे कहते हैं ? विभिन्न प्रकार के हाइड्राइड को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
जब हाइड्रोजन अक्रिय गैसों को छोड़कर किसी धातु या अधातुओं से संयोग करती है तो बनने वाले यौगिक हाइड्राइड कहलाते हैं। ये हाइड्राइड बनने वाले रासायनिक बंध की प्रकृति के अनुसार तीन प्रकार के होते हैं –
1.  आयनिक हाइड्राइड:
जब हाइड्रोजन प्रबल धन विद्युती तत्वों के साथ संयोग करता है तो इस प्रकार के हाइड्राइड आयनिक प्रकृति के होते हैं।
2Li + H2 → 2LiH
2 Na + H2 → 2NaH
इन्हें सेलाइन हाइड्राइड भी कहते हैं।
गुण –

  • ये प्रायः अवाष्पशील ठोस पदार्थ हैं।
  • ये सफेद क्रिस्टलीय ठोस हैं। इनके क्रिस्टल की संरचनात्मक इकाई आयन है।
  • इनके गलनांक तथा क्वथनांक उच्च होते हैं।
  • इन हाइड्राइड के घनत्व बनने वाली धातुओं की तुलना में कम होते हैं।
  • ये विद्युत् के सुचालक हैं।
  • आयनिक हाइड्राइडों के जलीय विलयन क्षारीय होते हैं।
    NaH + H2O → NaOH + H2
  • वायुमण्डलीय ऑक्सीजन ऑक्सीकृत होकर ये ऑक्साइड में बदल जाते हैं।
    CaH2 + O2 → Cao + H2O

उपयोग:

  1. अपचायक के रूप में
  2. ठोस ईंधन के रूप में।

2. सहसंयोजी हाइड्राइड:
जब हाइड्रोजन p – ब्लॉक तत्वों तथा s – ब्लॉक तत्वों में Be व Mg के साथ संयोग करता है तो सहसंयोजी हाइड्राइड बनाता है क्योंकि इनकी ऋणविद्युता में कम अंतर होता है। इन्हें आण्विक हाइड्राइड भी कहते हैं।

गुण –

  • कम गलनांक व क्वथनांक वाले वाष्पशील यौगिक हैं।
  • विद्युत् के दुर्बल चालक या कुचालक होते हैं।
  • इनके अणुओं के मध्य दुर्बल वाण्डर वाल्स होता है।
  • विद्युत् ऋणता के अंतर के अनुसार इनके जलीय विलयन अम्लीय या क्षारीय होते हैं।
  • ये इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक होते हैं।
  • एक समूह में ऊपर से नीचे आने पर हाइड्राइडों का स्थायित्व कम होता है।

3. धात्विक हाइड्राइड;
d – ब्लॉक के तत्व तथा s – ब्लॉक के Be, Mg हाइड्रोजन से संयोग करके धात्विक हाइड्राइड बनाते हैं। इन्हें अंतराकाशीय हाइड्राइड भी कहते हैं। क्योंकि हाइड्रोजन धात्विक परमाणुओं के बीच अंतराकाश में व्यवस्थित हो जाते हैं।
गुण:

  • ये कठोर, धात्विक चमक वाले होते हैं।
  • ये विद्युत् व ऊष्मा के सुचालक होते हैं।
  • इनका घनत्व उन धातुओं से कम होता है जिससे ये बनते हैं।
  • ये असममित होते हैं।
  • ये अपनी सतह पर हाइड्रोजन की पर्याप्त मात्रा को अधिशोषित करते हैं। इसे हाइड्रोजन का अधिधारण कहते हैं।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित समीकरणों को पूरा कीजिए –
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उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 59

प्रश्न 6.
D2O को जल से किस प्रकार प्राप्त करते हैं ? D2O तथा H2O के भिन्न-भिन्न भौतिक गुणों का वर्णन कीजिए।D,O की न्यूनतम तीन अभिक्रियाएँ दीजिए जिनमें हाइड्रोजन का ड्यूटीरियम से विनिमय होता है।
उत्तर:
(a) भारी जल, D2O का उत्पादन जल के वैद्युत – अपघटन द्वारा करते हैं।

(b) भौतिक गुण –

  • D2O रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन द्रव है। 11.6°C पर इसका घनत्व अधिकतम -1.1071 gml है (जल का 4°C पर)।
  • सामान्य जल की अपेक्षा भारी जल में लवणों की विलेयता कम होती है क्योंकि यह सामान्य जल की अपेक्षा अधिक श्यान होता है।
  • (i) D2O के लगभग सभी भौतिक स्थिरांकों के मान H2O की अपेक्षा अधिक होते हैं। यह H – परमाणु की अपेक्षा D – परमाणु के उच्च नाभिकीय द्रव्यमान H2O की अपेक्षा D2O में प्रबल H – आबंध के कारण होता है।

(c) हाइड्रोजन की ड्यूटीरियम से विनिमय अभिक्रियाएँ

  • NaOH + D2O → NaOD + HOD
  • HCl + D2O → DCl+ HOD
  • NH4Cl + D2O → NH2DCl + HOD

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प्रश्न 7.
पाँच आयतन H2O2 विलयन की सांद्रता की गणना कीजिए।
उत्तर:
5 आयतन H2O2विलयन का अर्थ है कि NTP पर, 5 आयतन H2O2विलयन के IL के अपघटन पर 5 L2O2 प्राप्त होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन - 60
NTP पर 22.4 O2 प्राप्त होती है = 68g H2O2 से
∴ NTP पर 5L, O2 प्राप्त होगी = \(\frac { 68 × 5. }{ 22.4 }\)15.17g = 15gH2O2 से
परन्तु NTP पर, 5L, O2 उत्पन्न होती है = 5 आयतन H2O2 विलयन के 1L से।
∴ H2O2 विलयन की सांद्रता = 15 g L-1
अथवा H2O2 विलयन की प्रतिशत सांद्रता = \(\frac { 15 }{ 100 }\) × 100 = 15%

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 13 The Foundation of the Mughal Empire and its Rise

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 13 The Foundation of the Mughal Empire and its Rise

MP Board Class 7th Social Science Chapter 13 Text Book Questions

Choose the correct alternatives from the following

Question 1.
The first battle of Panipat was fought between:
(a) Akbar and Shershah
(b) Babar and Ibrahim Lodi
(c) Humayun and Shershah
(d) Bairam Kham and Hemu
Answer:
(b) Babar and Ibrahim Lodi

Question 2.
The founder of Mughal dynasty was:
(a) Humayun
(b) Akbar
(c) Shershah
(d) Babar
Answer:
(d) Babar

Question 3.
The battle of Khanua took palce in:
(a) 1526 AD
(b) 1556 AD
(c) 1527 AD
(d) 1529 AD
Answer:
(c) 1527 AD

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Fill in the blanks:

  1. The autobiography of Babar is known as …………
  2. The second battle of Panipat was fought in …………..
  3. ……………. was made the guardian of Akbar.
  4. Shershah’s real name was ……………
  5. The battle of Ghagra was foughtbetween Babar and …………..

Answer:

  1. Tuzuk-i-Babri
  2. 1556 AD
  3. Bairam Khan
  4. Farid Khan
  5. Afghans

MP Board Class 7th Social Science Chapter 13 Short Answer Type Questions

Question 1.
Name the road, which was repaired by Shershah.
Answer:
Grand Trunk Road.

Question 2.
When and where was a son born to Humayun?
Answer:
A son (Akbar) was bom to Humayun on 23rd November 1542 at die palace of the king of Amarkot, Veerpal.

Question 3.
When and between whom was the battle of Haldighati fought?
Answer:
The battle of Haldighati was fought between Rajput king Maharana pratap and the Mughal army in 1576 AD.

Question 4.
What were the main sources of income during Akbar’s regime?
Answer:
During Akbar’s regime there were two main sources of income of the state. One was revenue from land and the other was taxes on trade.

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Question 5.
Write down the names of the nine gems of Akbar’s court.
Answer:
The names of the nine gems of Akbar’s court:

  1.  Abulfazal
  2. Raja Mansingh
  3. Raja Todannal
  4. Tansen
  5. Birbal
  6. Hakim Hokum
  7. Abdurrahim Khan-Khana
  8. Fajzi
  9. Mulla-do-Pyaja

MP Board Class 7th Social Science Chapter 13 Long Answer Type Questions

Question 1.
Describe the administrative system of Shershah.
Answer:
Shershah was an officient administrator. The interest of the people ranked above everything. He started many reforms in military administration, land revenue etc that was followed by Akbar. Shershah divided his empire into Sarkars, which were again subdivided into parganas.

Officer in charge of sarkars and panganas were periodically transferred. He enforced equal law for justice and introduced a reformed system of currency. The silver coin known as the Rupee which lasted throughout the Mughal period and was maintained by the East India company down to 1835 AD.

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Question 2.
Describe the buildings made by Akbar.
Answer:
Akbar was the first ruler who had time and means to undertake the construction work on a large Scale. He built the forts of Allahabad, Agra and Lahore. He built the city of Fatehpur Sikri near Agra. He built many beautiful buildings among which Diwan – i – Aaam, Dewan – i – Khas, Panchmahal, Jaodhabi palace, Palace of Birbal, Jama Masjid, the Dargah of Sheikh Salim chisti and the Buland Darwaza are very prominent

Question 3.
Explain in detail the Rajput of Akbar.
Answer:
Akbar realized well that for ruling India he should have support and co-operation of both the Hindus and the Muslims. So he embarked on a definite policy towards the Rajputs. Akbar’s Rajput Policy:

  1. Akbar entered into matrimonial relation with a number of other Rajput kingdom.
  2. Akbar appointed Rajputs on high position.
  3. Akbar’s attitude towards his subordinate rulers and officers was liberal and he never hurt the religious sentiments of the Rajputs.
  4. He gave all respect to the Hindu kings in his court.

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MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण

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MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण

आय एवं रोजगार का निर्धारण Important Questions

आय एवं रोजगार का निर्धारण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न (a)
आय तथा रोजगार का निर्धारण होता है –
(a) कुल माँग द्वारा
(b) कुल पूर्ति द्वारा
(C) कुल माँग तथा कुल पूर्ति दोनों के द्वारा
(d) बाजार माँग द्वारा।
उत्तर:
(C) कुल माँग तथा कुल पूर्ति दोनों के द्वारा

प्रश्न (b)
बचत तथा उपभोग के बीच संबंध होता है –
(a) विपरीत
(b) प्रत्यक्ष
(c) विपरीत तथा प्रत्यक्ष दोनों
(d) न तो विपरीत न ही प्रत्यक्ष।
उत्तर:
(a) विपरीत

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प्रश्न (c)
जब अर्थव्यवस्था अपनी सारी अतिरिक्त आय बचाने का फैसला करता है तो विनियोग गुणक होगा –
(a) 1
(b) अनिश्चित
(c) 0
(d) अपरिमित।
उत्तर:
(a) 1

प्रश्न (d)
“पूर्ति अपना माँग स्वयं उत्पन्न कर लेती है।” कथन देने वाले अर्थशास्त्री हैं –
(a) कीन्स
(b) पीगू
(c) जे. बी. से
(d) एडम स्मिथ।
उत्तर:
(c) जे. बी. से

प्रश्न (e)
क्लासिकल विचारधारा निम्न में से किस तथ्य पर आधारित है –
(a) से’ का बाजार नियम
(b) मजदूरी दर की पूर्ण लोचशीलता
(c) ब्याज दर की पूर्ण लोचशीलता
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. अतिरिक्त विनियोग की प्रत्याशित लाभप्रदता …………………………….. कहलाती है।
  2. अवस्फीतिक अन्तराल …………………………… माँग की माप है।
  3. न्यून माँग …………………………………. अंतराल को बताती है।
  4. माँग आधिक्य की दशा में बैंक दर में ………………………………. करनी चाहिए।
  5. गुणक उल्टी दिशा में कार्य ………………………………… सकता है।
  6. जिस बिन्दु पर समग्र माँग एवं समग्र आपूर्ति बराबर होती है, उसे …………………………………. कहा जाता है।
  7. अपूर्ण रोजगार …………………………………….. माँग का परिणाम है।
  8. उपभोग प्रवृत्ति विवरण योग्य आय तथा ……………………………………. में संबंध दर्शाती है।

उत्तर:

  1. पूँजी की सीमान्त क्षमता
  2. न्यून
  3. अवस्फीतिक
  4. वृद्धि
  5. कर
  6. प्रभावपूर्ण माँग
  7. अभावी
  8. उपभोग।

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प्रश्न 3.
सत्य /असत्य बताइये –

  1. पूर्ण रोजगार का आशय शून्य बेरोजगारी नहीं होता है।
  2. भविष्य में ब्याज दर में वृद्धि, बचतों को कम कर देती है।
  3. जिस अनुपात में आय बढ़ती है उसी अनुपात में उपभोग व्यय नहीं बढ़ता है।
  4. रोजगार के सिद्धांत का प्रतिपादन सर्वप्रथम मार्शल ने किया था।
  5. अपूर्ण रोजगार न्यून माँग का परिणाम है।
  6. अर्द्धविकसित देशों में कीन्स का सिद्धांत लागू होता है।
  7. कीन्स का सिद्धान्त पूर्ण प्रतियोगिता पर आधारित है।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. असत्य
  6. असत्य
  7. सत्य।

प्रश्न 4.
सही जोड़ियाँ बनाइये –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 1
उत्तर:

  1. (d)
  2. (a)
  3. (c)
  4. (f)
  5. (b)
  6. (e).

प्रश्न 5.
एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिये –

  1. गुणक के रिसाव अधिक होने पर गुणक का प्रभाव कैसा होगा?
  2. माँग आधिक्य किसे जन्म देता है?
  3. अभावी माँग को संतुलित करने का सर्वोत्तम उपाय क्या है?
  4. बेरोजगारी का न्यून माँग सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया?
  5. प्रो. कीन्स द्वारा प्रतिपादित ब्याज के सिद्धांत का नाम बताइए?
  6. अभावी माँग को संतुलित करने का सर्वोत्तम उपाय क्या है?

उत्तर:

  1. कम
  2. मुद्रा स्फीति
  3. सार्वजनिक व्यय में वृद्धि
  4. कीन्स
  5. तरलता पसंदगी
  6. निर्यात में वृद्धि करना।

आय एवं रोजगार का निर्धारण लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आय व रोजगार के परम्परावादी सिद्धान्त की विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर:
आय व रोजगार के परम्परावादी सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

1. माँग एवं पूर्ति में स्वतः
सन्तुलन – प्रो. जे. बी. से का विचार था कि, यदि अर्थशास्त्र में अनावश्यक सरकारी या अर्द्ध-सरकारी हस्तक्षेप न हो, तो माँग व पूर्ति का स्वतः सन्तुलन हो जाता है।

2. बेरोजगारी की कल्पना निराधार:
परम्परावादी अर्थशास्त्री बेरोजगारी की समस्या से भयभीत नहीं थे। चूँकि अति – उत्पादन असम्भव है, अतः सामान्य बेरोजगारी भी असंभव होगी।

3. हस्तक्षेप रहित आर्थिक समाज:
परम्परावादी अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अर्थव्यवस्था में एक ऐसी लोच होती है, जो बाह्य हस्तक्षेप को किसी दशा में स्वीकार नहीं करती है। यदि अर्थव्यवस्था में सरकारी या अर्द्धसरकारी हस्तक्षेप किया गया तो अवश्य बेरोजगारी उत्पन्न होगी।

4. रोजगार दिलाने वाली लागत का स्वतः
प्रकट होना – परम्परावादी अर्थशास्त्रियों की धारणा है कि, जब बेकार पड़े साधनों को काम पर लगाया जाता है, तब इनसे वस्तुओं का उत्पादन बढ़ जाता है। नये साधनों को विशेषकर श्रमिक को आय प्राप्त होती है, नये – नये साधनों को रोजगार प्राप्त होता है। इस क्रिया से रोजगार तथा आय-स्तर में वृद्धि होने लगती है।

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प्रश्न 2.
कीन्स के अनुसार बेरोजगारी क्यों होती है?
उत्त:
कीन्स के अनुसार कुल माँग तथा पूर्ण रोजगार में स्वतः साम्य स्थापित नहीं हो सकता है। इसलिए पूर्ण रोजगार की स्थिति कभी-कभी मुश्किल से पाई जाती है। यह संभव है कि कुल माँग कुल पूर्ति से कम रहे और इस कारण पूर्ण रोजगार की स्थिति गड़बड़ा जाये । कीन्स का विचार है कि अर्थव्यवस्था में अनैच्छिक बेरोजगारी की स्थिति रहती है। कीन्स का कहना है कि बेरोजगारी प्रभावपूर्ण माँग की कमी तथा उपभोग एवं विनियोग पर व्यय की कमी के कारण होती है।

प्रश्न 3.
आय एवं रोजगार के परम्परावादी सिद्धांत की मान्यताएँ लिखिए?
उत्तर:
आय व रोजगार के परंपरावादी सिद्धांत की प्रमुख मान्यताएँ निम्न हैं –

  1. स्वतंत्र प्रतियोगिता तथा स्वतंत्र व्यापार की दशा उपस्थित हो।
  2. बाजार के विस्तार की पूर्ण संभावना हो।
  3. सरकारी व गैर – सरकारी हस्तक्षेप को समाप्त कर दिया गया है तथा संरक्षण नहीं दिया जाता है।
  4. बंद अर्थव्यवस्था का होना।
  5. मुद्रा का न होना । समाज द्वारा अर्जित संपूर्ण आय को उपभोग में व्यय कर देना।

प्रश्न 4.
समग्र माँग के कोई चार घटक बताइये?
उत्तर:
समग्र माँग – समग्र माँग से तात्पर्य एक अर्थव्यवस्था में एक वर्ष में वस्तुओं एवं सेवाओं की माँगी गई कुल मात्रा से है, अर्थात् समग्र माँग से तात्पर्य उस राशि से होता है जो उत्पादक रोजगार के निश्चित स्तर पर उत्पादित वस्तुओं की बिक्री से प्राप्त होने की आशा करते हैं।
घटक – समग्र माँग के घटक निम्नलिखित हैं –

1. निजी उपभोग की माँग:
एक देश के सभी परिवारों द्वारा अपने निजी उपभोग पर जो कुछ व्यय किया जाता है उसे निजी उपभोग व्यय कहा जाता है। चूँकि व्यय ही माँग को जन्म देता है अत: निजी उपभोग व्यय ही उस देश की निजी उपभोग माँग बन जाती है।

2. निजी विनियोग की माँग:
निजी विनियोग माँग से तात्पर्य निजी विनियोग कर्ताओं के द्वारा की जाने वाली पूँजीगत वस्तुओं की माँग से है। निजी विनियोग की माँग दो तत्वों पर निर्भर करती है –

  1. पूँजी की सीमान्त कुशलता एवं
  2. ब्याज की दर।

3. सरकार द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं की माँग:
सरकार के द्वारा भी विभिन्न प्रकार की वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीदी की जाती है। अतः सरकार द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुएँ एवं सेवाएँ ही सरकारी माँग कहलाती हैं।

4. विशुद्ध निर्यात माँग:
जब एक देश दूसरे देश को वस्तुओं का निर्यात करता है तो यह विदेशियों द्वारा उस देश में उत्पादित वस्तुओं की माँग को बतलाता है। अतः निर्यात से देश में आय, उत्पादन एवं रोजगार को प्रोत्साहन मिलता है। इसके विपरीत जब देश दूसरे देशों से आयात करता है तो इससे देश की आय विदेशों को चली जाती है। अतः आयात देश में रोजगार बढ़ाने में सहायक नहीं होते हैं। अत: देश की समग्र माँग को ज्ञात करने के लिए विशुद्ध निर्यात माँग को शामिल किया जाता है, अर्थात् निर्यातों में आयातों को घटाया जाता है।

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प्रश्न 5.
संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए” –

  1. पूर्ण रोजगार से क्या आशय है?
  2. अपूर्ण रोजगार से क्या आशय है?

उत्तर:

  1. किसी अर्थव्यवस्था में कार्य करने के इच्छुक व्यक्ति को समर्थ प्रचलित मजदूरी दरों पर काम मिलना ही पूर्ण रोजगार है।
  2. अर्थव्यवस्था में कार्य करने के इच्छुक व्यक्ति को प्रचलित मजदूरी दरों पर कार्य न मिलना ही अपूर्ण रोजगार है।

प्रश्न 6.
अत्यधिक माँग को ठीक करने के उपाय बताइए?
उत्तर:
अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं –

  1. मुद्रा निर्गम सम्बन्धी नियमों को कठोर बनाना: अत्यधिक माँग की मात्रा कम करने के लिए यह आवश्यक है कि सरकार मुद्रा निकालने सम्बन्धी नियमों को कड़ा करे ताकि केन्द्रीय बैंक को अतिरिक्त मुद्रा निकालने में अधिक कठिनाई हो।
  2. पुरानी मुद्रा वापस लेकर नई मुद्रा देना: अत्यधिक माँग की दशा में साधारण उपचार उपयोगी नहीं हो सकते, अतः पुरानी सब मुद्राएँ समाप्त कर उनके बदले में नई मुद्राएँ दे दी जाती हैं।
  3. साख – स्फीति को कम करना: अत्यधिक माँग अथवा स्फीति को कम करने के लिए साख – स्फीति को कम करना आवश्यक है।
  4. बचत का बजट बनाना: अत्यधिक माँग की स्थिति में सरकार को बचत का बजट बनाना चाहिए। बचत का बजट उसे कहते हैं, जिससे सार्वजनिक व्यय की तुलना में सार्वजनिक आय अधिक होती है।
  5. सार्वजनिक व्यय पर नियंत्रण: अत्यधिक माँग की दशा में सरकार को सड़कें बनाने, नहर व बाँधों का निर्माण करने, स्कूल, अस्पताल एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे कामों पर सार्वजनिक व्यय को कम कर देना चाहिए तथा साथ ही सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों में भी विनियोग को कम ही रखना चाहिए।

प्रश्न 7.
समग्र माँग तथा समग्र पूर्ति में अंतर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
समग्र माँग तथा समग्र पूर्ति में अंतर –

समग्र माँग:

  1. समग्र पूर्ति से अभिप्राय एक लेखा वर्ष के दौरान देश में उत्पादित समस्त वस्तुओं पर किए जाने वाले व्यय के योग से है।
  2. समग्र माँग का मापन वस्तुओं और सेवाओं पर समुदाय द्वारा कुल व्यय पर किया जाता है।
  3. इनमें निम्न दरें शामिल होती हैं –
    • परिवार द्वारा उपभोग पर नियोजित व्यय
    • फर्म के निवेश व्यय
    • सरकार का नियोजित व्यय।

समग्र पूर्ति:

  1. समग्र पूर्ति से अभिप्राय अर्थव्यवस्था में दिए हुए समय में खरीदने के लिए उपलब्ध उत्पाद से है।
  2. समग्र पूर्ति वस्तुओं और सेवाओं के कुल उत्पादन को भी कहते हैं।
  3. इसमें केवल उपभोग तथा पूर्ति शामिल होते हैं।

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प्रश्न 8.
प्रेरित निवेश तथा स्वतंत्र निवेश में अंतर स्पष्ट्र कीजिए?
उत्तर:
प्रेरित निवेश तथा स्वतंत्र निवेश में अंतर –
प्रेरित निवेश:

  1. यह आय पर निर्भर होता है।
  2. यह आय लोच होता है।
  3. यह सामान्यतया निजी क्षेत्र के द्वारा किया जाता है।
  4. प्रेरित निवेश वक्र बायें से दायें ऊपर की ओर जाता है।

स्वतंत्र निवेश:

  1. इसका आय से संबंध नहीं होता है अर्थात् स्वतंत्र होता है।
  2. यह आय लोच नहीं होता है।
  3. यह सामान्यतया सरकार द्वारा किया जाता है।
  4. स्वतंत्र निवेश वक्र OX वक्र के समान्तर ही बनता है।

प्रश्न 9.
मितव्ययिता के विरोधाभास की व्याख्या कीजिए?
उत्तर:
बचत (मितव्ययिता) का विरोधाभास यह बताता है कि यदि एक अर्थव्यवस्था में सभी लोग अपनी आय का अधिक भाग बचत करना आरंभ कर देते हैं तो कुल बचत का स्तर या तो स्थिर रहेगा या कम हो जायेगा। दूसरे शब्दों में, यदि अर्थव्यवस्था में सभी लोग अपनी आय का कम बचाना आरंभ कर देते हैं तो अर्थव्यवस्था में कुल बचत का स्तर बढ़ जायेगा। इस बात को इस प्रकार भी कह सकते हैं कि यदि लोग ज्यादा मित्तव्ययी हो जाते हैं तो या तो वे अपने आय का पूर्व स्तर रखेंगे या उनकी आय का स्तर गिर जायेगा।

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प्रश्न 10.
‘प्रभावी माँग’ क्या है? जब अंतिम वस्तुओं की कीमत और ब्याज की दर दी हुई हो, तब आप स्वायत्त व्यय गुणक कैसे प्राप्त करेंगे?
उत्तर:
प्रभावी माँग का आशय:
यदि आपूर्ति लोच पूर्णतया लोचदार है तो दी गई कीमत पर उत्पाद का निर्धारण पूर्णतः सामूहिक माँग पर निर्भर करता है। इसे प्रभावी माँग कहते हैं। दी गई कीमत पर साम्य उत्पाद, सामूहिक माँग और ब्याज की दर का निर्धारण निम्न समीकरण द्वारा किया जा सकता है –
स्वायत्त व्यय गुणक = \(\frac { \triangle Y }{ \triangle \bar { A } } \) = \(\frac{1}{1 – C}\)
यहाँ ∆Y = अन्तिम वस्तु उत्पाद की कुल वृद्धि
∆\(\bar { A } \) = स्वायत्त व्यय में वृद्धि
C = सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति।

प्रश्न 11.
जब स्वायत्त निवेश और उपभोग व्यय (A) ₹ 50 करोड़ हो और सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) 0.2 तथा आय (Y) का स्तर ₹ 4,000 – 00 करोड़ हो, तो प्रत्याशित समस्त माँग ज्ञात कीजिए। यह भी बताएँ कि अर्थव्यवस्था संतुलन में है या नहीं। कारण भी बताएँ?
हलः
दिया है –
स्वायत्त उपभोग (A) = ₹ 50 करोड़
MPS = 0.2
AS/ (आय) Y = ₹ 4,000 करोड़
AD = A + CY
C = 1 – MPS तथा Y का मान रखने पर,
AD = 50 + (1 – 0.2) 4,000
= 50 + 0.8 x 4,000
= 50 + 3,200 = ₹ 3,250 करोड़
अत: AD < AS ( ∵ 3,250 < 4,000)
अर्थव्यवस्था संतुलन की स्थिति में तब होती है जब AD तथा AS बराबर होते हैं, क्योंकि यहाँ AD < AS अतः अर्थव्यवस्था संतुलन में नहीं है।

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प्रश्न 12.
सीमांत उपभोग प्रवृत्ति किसे कहते हैं? यह किस प्रकार सीमांत बचत प्रवृत्ति से संबंधित है?
उत्तर:
आय में परिवर्तन व उपभोग में परिवर्तन के अनुपात को सीमांत उपभोग प्रवृत्ति कहा जाता है। जिसे निम्न सूत्र द्वारा प्रदर्शित किया जाता है –
उत्तर:
MPC = \(\frac{∆C}{∆Y}\)
जहाँ MPC = सीमांत उपभोग प्रवृत्ति
∆C = उपभोग में परिवर्तन
∆Y = आय में परिवर्तन
सीमांत उपभोग प्रवृत्ति तथा सीमांत प्रवृत्ति में संबंध:
बचत में परिवर्तन तथा आय में परिवर्तन का अनुपात सीमांत बचत प्रवृत्ति कहलाता है। जिसे निम्न सूत्र द्वारा प्रदर्शित किया जाता है –
MPS = \(\frac{∆S}{∆Y}\)
जहाँ MPS = सीमांत बचत प्रवृत्ति
∆S = बचत में परिवर्तन
∆Y = आय में परिवर्तन।
सीमांत उपभोग प्रवृत्ति तथा सीमान्त बचत प्रवृत्ति का योग सदैव इकाई – (1) के बराबर होता है। अर्थात् –
MPC + MPS = 1
यदि MPC या MPS में किसी एक का मूल्य घटता है तो दूसरे के मूल्य में वृद्धि होती है।

आय एवं रोजगार का निर्धारण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आय एवं रोजगार के सिद्धान्त के बारे में परम्परावादी अर्थशास्त्रियों एवं कीन्स के विचारों की तुलना कीजिए?
उत्तर:
परम्परावादी सिद्धान्त तथा कीन्स के सिद्धान्त में अंतर –
परम्परावादी सिद्धान्त:

  1. इस सिद्धान्त के अनुसार, आय तथा रोजगार का निर्धारण केवल पूर्ण रोजगार स्तर पर होता है।
  2. यह सिद्धांत प्रो. जे. बी. से के बाजार नियम की मान्यताओं पर आधारित है।
  3. इस सिद्धांत के अनुसार, बचत और विनियोग में समानता ब्याज की दर में परिवर्तन द्वारा स्थापित की जाती है।
  4. यह सिद्धांत दीर्घकालीन मान्यता पर आधारित है।
  5. इस सिद्धांत के अनुसार, अर्थव्यवस्था में सामान्य, अति उत्पादन तथा सामान्य बेरोजगारी की कोई संभावना नहीं हो सकती।

कीन्स का सिद्धान्त:

  1. इस सिद्धान्त के अनुसार, आय तथा रोजगार स्तर का निर्धारण उस बिन्दु पर होगा, जहाँ पर सामूहिक माँग, सामूहिक पूर्ति के बराबर होती है। इसके लिए पूर्ण रोजगार स्तर का होना आवश्यक नहीं है।
  2. यह सिद्धांत उपभोग के मनोवैज्ञानिक नियम पर आधारित है। इस सिद्धांत के अनुसार, बचत और विनियोग में समानता आय में परिवर्तन द्वारा स्थापित होती है।
  3. यह सिद्धान्त अल्पकालीन मान्यता पर आधारित है।
  4. यह सिद्धांत अल्पकालीन मान्यता पर आधारित है।
  5. इस सिद्धांत के अनुसार, अपूर्ण रोजगार संतुलन की एक सामान्य स्थिति है। पूर्ण रोजगार की स्थिति तो एक आदर्श एवं विशेष स्थिति है।
  6. इस सिद्धांत के अनुसार, सामान्य, अति उत्पादन तथा सामान्य बेरोजगारी संभव है।

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प्रश्न 2.
गुणक की धारणा को समझाइए?
उत्तर:
गुणक का सिद्धांत:
कीन्स के रोजगार सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण अंग गुणक है, लेकिन कीन्स का गुणक ‘विनियोग गुणक’ है। गुणक विनियोग की प्रारंभिक वृद्धि तथा आय की कुल अंतिम वृद्धि के बीच आनुपातिक संबंध को बताता है। कीन्स का विचार है कि जब किसी देश की अर्थव्यवस्था में विनियोग की मात्रा में वृद्धि की जाती है तो उस देश की आय में केवल विनियोग की मात्रा की तुलना में जितने गुना वृद्धि होती है, उसे ही कीन्स ने ‘गुणक’ कहा है।
सूत्र के रूप में,
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 2
K = \(\frac { \triangle Y }{ \triangle I } \)
यदि गुणक का मूल्य दिया है तो विनियोग में वृद्धि किये जाने से आय में कितनी वृद्धि होगी? यह सरलतापूर्वक निकाली जा सकती है। इसका सूत्र है –
∆Y = K . ∆I
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 3
सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति का आकार जितना बड़ा होगा गुणक का मूल्य भी अधिक होगा। गुणक के गुणक द्वारा कीन्स ने यह बलताया है कि सरकार विनियोग में जिस अनुपात में वृद्धि करती है। गुणक के कारण आय कई गुना बढ़ जाती है। इससे अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी को दूर किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
पूँजी की सीमांत कुशलता को निर्धारित करने वाले तत्वों को लिखिए?
उत्तर:
पूँजी की सीमांत कुशलता को निर्धारित करने वाले तत्व निम्नलिखित हैं –

1. माँग की प्रवृत्ति:
यदि किसी वस्तु की माँग की आशंका भविष्य में अधिक बढ़ने की है तो पूँजी की सीमांत कुशलता भी ऊँची होगी। जिसके परिणामस्वरूप विनियोग बढ़ जायेगा। इसके विपरीत अगर भविष्य में वस्तुओं की माँग घटने की आशंका है तो पूँजी की सीमांत कुशलता भी घट जायेगा और विनियोग भी कम हो जाएगा।

2. लागतें एवं कीमतें:
यदि भविष्य में वस्तु की उत्पादन लागत बढ़ने की तथा उनकी कीमतों में गिरावट.की सम्भावना है तो पूँजी की सीमांत कुशलता गिर जायेगी। इससे विनियोग की मात्रा भी कम हो जायेगी। इसके विपरीत भविष्य में वस्तु की लागतों में कमी और कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है तो पूँजी की सीमांत कुशलता भी बढ़ेगी और विनियोग भी बढ़ेगा।

3. तरल परिसम्पत्तियों में परिवर्तन:
जब एक साहसी के पास विभिन्न प्रकार की परिसम्पत्तियाँ बड़ी मात्रा में नगदी (तरल) के रूप में रहती है तब वह नये-नये विनियोग से लाभ उठाना चाहता है। ऐसी परिस्थिति में पूँजी की सीमांत कुशलता में वृद्धि होगी। इसके विपरीत जब परिसम्पत्तियाँ नगदी के रूप में नहीं होती हैं, तब नये विनियोग अवसरों का लाभ उठाने में कठिनाइयाँ आती हैं। इससे पूँजी की सीमांत कुशलता घट जाती है।

4. आय में परिवर्तन:
अप्रत्याशित लाभ अथवा हानियों के कारण हुए आय में आकस्मिक परिवर्तन तथा भारी कराधान अथवा कर रियायतों के कारणों से आय में जो परिवर्तन होता है उसका भी पूँजी की सीमांत कुशलता पर प्रभाव पड़ता है।

5. उपभोग प्रवृत्ति:
यदि उपभोग प्रवृत्ति अल्पकाल में ऊँची है तो इससे पूँजी की सीमांत कुशलता बढ़ जायेगी। इसके विपरीत उपभोग की प्रवृत्ति कम है तो पूँजी की सीमांत कुशलता घट जाएगी।

प्रश्न 4.
समग्र माँग एवं समग्र पूर्ति द्वारा आय व रोजगार के संतुलन स्तर को तालिका व रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
कीन्स के अनुसार, आय तथा रोजगार के संतुलन स्तर का निर्धारण वहाँ होता है, जहाँ पर सामूहिक माँग तथा सामूहिक पूर्ति बराबर होते हैं। यहाँ सामूहिक माँग तथा सामूहिक पूर्ति का तात्पर्य समग्र माँग एवं समग्र पूर्ति से है। आय के संतुलन – स्तर के निर्धारण की व्याख्या समग्र माँग तथा समग्र पूर्ति की एक काल्पनिक तालिका की सहायता से की जा सकती है।
तालिका के द्वारा स्पष्टीकरण (र करोड़ में) आय उपभोग विनियोग। बचत समग्र माँग समग्र पर्ति विवरण (C)
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 4
उपर्युक्त तालिका में राष्ट्रीय आय के ₹ 400 करोड़ के स्तर पर समग्र माँग तथा समग्र पूर्ति बराबर हैं। दोनों ₹400 करोड़ के स्तर पर हैं। इस संतुलन – स्तर पर बचत भी विनियोग के बराबर है। इस संतुलन – स्तर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन स्थायी नहीं होगा। उदाहरणस्वरूप, ₹ 400 करोड़ के आय – स्तर से पूर्व कोई भी आय – स्तर है, तो समग्र माँग, समग्र पूर्ति से अधिक होगी। जिसका अर्थ यह है कि उद्यमी अधिक लाभ प्राप्त करने हेतु उत्पादन के साधनों को अधिक रोजगार देंगे तथा उत्पादन का स्तर बढ़ायेंगे, जिसके फलस्वरूप राष्ट्रीय आय बढ़ेगी।

यह तब तक बढ़ेगी, जब तक कि आय के संतुलन बिन्दु तक न पहुँच जाएँ। इसके विपरीत, यदि आयस्तर ₹ 400 करोड़ से अधिक है तो लोग उद्यमियों को प्राप्त होने वाली न्यूनतम राशि से कम व्यय करने को तैयार हैं अर्थात् माँग समस्त पूर्ति से कम होगी। इस स्थिति में उद्यमियों को हानि उठानी होगी, क्योंकि उनका पूरा उत्पादन नहीं बिक सकेगा। ऐसी स्थिति में आय तथा रोजगार का संतुलन उस बिन्दु पर आधारित होगा, जहाँ पर समग्र माँग तथा समग्र पूर्ति एक – दूसरे के बराबर होगी।
रेखाचित्र द्वारा स्पष्टीकरण –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 5
प्रस्तुत रेखाचित्र में समग्र माँग वक्र, समग्र पूर्ति वक्र को बिन्दु E पर काटता है। इस बिन्दु पर आय का। संतुलन स्तर ₹ 400 करोड़ निर्धारित होता है। आय में हुए किसी प्रकार के परिवर्तन की आय के संतुलन स्तर की ओर आने की प्रवृत्ति होगी। रेखाचित्र का निचला भाग (भाग – B) आय के इसी स्तर पर बचत और विनियोग को प्रदर्शित करता है। आय के संतुलन – स्तर पर समग्र माँग की मात्रा को कीन्स ने प्रभावपूर्ण माँग कहा है। कीन्स के अनुसार “सामूहिक माँग या समग्र माँग वक्र के जिस बिन्दु पर सामूहिक पूर्ति या समग्र पूर्ति वक्र उसे काटता है, उस बिन्दु का मूल्य ही प्रभावपूर्ण माँग कहलायेगा।”

प्रश्न 5.
उपभोग प्रवृत्ति को निर्धारित करने वाले पाँच तत्व लिखिए?
उत्तर:
उपभोग प्रवृत्ति को निर्धारित करने वाले तत्व निम्नलिखित हैं –

  1. मौद्रिक आय: समाज में रहने वाले व्यक्तियों की जब मौद्रिक आय बढ़ जाती है, तो उपभोग प्रवृत्ति भी बढ़ जाती है। इसके विपरीत मौद्रिक आय में कमी होने पर उपभोग प्रवृत्ति भी घट जायेगी।
  2. राजस्व नीति: यदि सरकार करों की दरों में वृद्धि करती है तो उपभोग प्रवृत्ति घट जाएगी और यदि कल्याणकारी योजनाओं पर अधिक व्यय करती है तो उपभोग प्रवृत्ति में वृद्धि हो जायेगी।
  3. ब्याज की दर: ब्याज की दर में वृद्धि होने पर लोग उपभोग में कमी करेंगे और बचत में वृद्धि करेंगे। इसके विपरीत ब्याज की दर में कमी आने पर बचत कम होगी और उपभोग प्रवृत्ति में वृद्धि होगी।
  4. आय का वितरण: समाज में आय का वितरण असमान होने पर उपभोग प्रवृत्ति कम होती है और समाज में यदि आय का वितरण समान है तो उपभोग प्रवृत्ति में वृद्धि होगी।
  5. प्रदर्शन प्रभाव: जिन राष्ट्रों में समाज में प्रदर्शन प्रभाव या दिखावा अधिक होता है वहाँ के लोगों में उपभोग प्रवृत्ति अधिक होता है।

प्रश्न 6.
पूर्ण रोजगार एवं अनैच्छिक बेरोजगारी की धारणा पर प्रकाश डालिए?
उत्तर:
1. पूर्ण रोजगार से आशय:
साधारण अर्थों में पूर्ण रोजगार से आशय, उस स्थिति से है, जिसमें कोई भी व्यक्ति बेरोजगार न हो, श्रम की माँग और पूर्ति बराबर हो। समष्टि अर्थशास्त्र के आधार पर, पूर्ण रोजगार से आशय है, किसी दिए हुए वास्तविक मजदूरी स्तर पर श्रम की माँग, श्रम की उपलब्ध पूर्ति के बराबर होती है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 6

परंपरावादी परिभाषा:
लर्नर के अनुसार “पूर्ण रोजगार वह अवस्था है जिसमें वे सब लोग जो मजदूरी की वर्तमान दरों पर काम करने के है योग्य तथा इच्छुक हैं, बिना किसी कठिनाई के काम प्राप्त करते हैं।”

आधुनिक परिभाषा:
स्पेन्सर के अनुसार, “पूर्ण रोजगार वह स्थिति है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति जो काम करना चाहता है, काम कर रहा है सिवाय उनके जो संघर्षात्मक तथा संरचनात्मक बेरोजगार हैं।” उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि पूर्ण रोजगार की स्थिति शून्य बेरोजगारी की स्थिति नहीं है। यह बेरोजगारी की प्राकृतिक दर की स्थिति है।

2. अनैच्छिक बेरोजगारी:
अनैच्छिक बेरोजगारी वह स्थिति है, जिसमें लोगों को रोजगार के अवसर के अभाव में बेरोजगार रहना पड़ता है। जब लोग मजदूरी की वर्तमान दर पर काम करने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें काम नहीं मिलता तो उसे अनैच्छिक बेरोजगारी कहा जाता है।

प्रस्तुत रेखाचित्र में E बिन्दु पूर्ण रोजगार की बिन्दु है। इस बिन्दु पर श्रम की माँग व पूर्ति दोनों बराबर हैं। किन्तु ON2, मजदूरी पर ON, श्रमिक काम करने को इच्छुक हैं । जबकि उत्पादकों द्वारा केवल ON2, श्रमिकों की माँग की जाएगी। इस प्रकार N,N2, श्रम की मात्रा अनैच्छिक रूप से बेरोजगार कहलाएगी।

प्रश्न 7.
अभावी माँग का देश के उत्पादन, रोजगार एवं मूल्यों पर प्रभाव बताइए?
उत्तर:
1. अभावी माँग का उत्पादन पर प्रभाव:
यदि अर्थव्यवस्था में कुल पूर्ति की तुलना में कुल माँग कम हो तो इसका आशय यह होगा कि देश में वस्तुओं एवं सेवाओं की जितनी मात्रा उपलब्ध है, उतनी माँग नहीं है। इससे अर्थव्यवस्था में कुल उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव निम्न हैं –

  1. माँग की कमी के कारण उत्पादक वस्तुओं का उत्पादन घटाने के लिए बाध्य होंगे।
  2. इस कारण वे अपनी वर्तमान उत्पादन क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं कर पायेंगे।
  3. इसका प्रभाव यह होगा कि देश की उत्पत्ति के साधनों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पायेगा।
  4. इसके कारण कुछ वर्तमान फर्मे अपना कार्यकी बन्द करना शुरू कर देगी तथा कई फर्मे बाजार में प्रवेश नहीं कर पायेंगी –
  5. परिणामस्वरूप उत्पादन की लागत में वृद्धि हो जायेगी।

2. अभावी माँग का रोजगार पर प्रभाव:
जब किसी अर्थव्यवस्था में अभावी माँग (माँग की कमी) की स्थिति होती है, तो उसका देश के रोजगार स्तर पर निम्न प्रभाव पड़ता है –

  1. माँग की कमी के कारण उत्पादकों को वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन में कमी करनी पड़ेगी, जिससे देश में रोजगार स्तर में कमी आ जायेगी, क्योंकि उन्हें आवश्यक मात्रा में उत्पादन करने के लिए पहले से कम श्रमिकों की आवश्यकता पड़ेगी।
  2. यदि देश में अपूर्ण रोजगार की स्थिति है तो इसका प्रभाव यह होगा कि कुछ लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ेगा।
  3. यदि देश में पहले से ही अल्प रोजगार की स्थिति है तो इसका अर्थ यह होगा कि यह स्थिति और विकट हो जायेगी।

3. अभावी माँग का मूल्यों पर प्रभाव:
जब किसी अर्थव्यवस्था में अभावी माँग की स्थिति होती है तो उसका अर्थव्यवस्था की कीमतों पर निम्न प्रभाव पड़ता है –

  1. यदि देश कुल माँग, कुल पूर्ति की तुलना में कम है तो इसका सामान्य प्रभाव यह होगा कि देश में मूल्य – स्तर में कमी आ जायेगी।
  2. मूल्य – स्तर में कमी आने से उत्पादकों के लाभ के अन्तर में कमी आ जायेगी।
  3. इस स्थिति का लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा, क्योंकि उन्हें कम मूल्य पर वस्तुएँ एवं सेवाएँ प्राप्त हो सकेंगी।

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प्रश्न 8.
प्रभावपूर्ण माँग के निर्धारण को समझाइए?
उत्तर:
किसी अर्थव्यवस्था में एक वर्ष में आम जनता द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं पर किया जाने वाला कुल व्यय जो उपभोग की मात्रा को प्रदर्शित करता है प्रभावपूर्ण समग्र माँग कहलाती है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 7
प्रभावपूर्ण समग्र माँग दो तत्वों पर निर्भर करती है –

  1. उपभोग माँग
  2. निवेश माँग।

उपभोग माँग वक्र आय के बढ़ने से ऊपर की ओर चढ़ता है और आय के घटने से गिरता है लेकिन इसे प्रवृत्ति के स्थिर रहने की दशा में सीमांत उपभोग प्रवृत्ति घटने से उपभोग माँग गिरता हुआ दिखाई देता है। इसी प्रकार विनियोग माँग ब्याज की दर एवं पूँजी की सीमांत उत्पादकता पर निर्भर करती है। ब्याज दर कम है तो निवेश की माँग अधिक होगी एवं ब्याज दर अधिक है तो निवेश की माँग कम होगी।

प्रश्न 9.
प्रभावपूर्ण माँग का महत्व बताइये? (कोई चार बिन्दु)
उत्तर:
प्रभावपूर्ण माँग का महत्व
1. रोजगार का निर्धारण:
कीन्स के अनुसार, रोजगार की मात्रा प्रभावपूर्ण माँग पर निर्भर करती है और कुल माँग, कुल आय के बराबर होती है, अतः रोजगार की मात्रा एक ओर उत्पादन की मात्रा को निर्धारित करती है तथा दूसरी ओर उत्पन्न होने वाली आय को भी निर्धारित करती है।

2. आय की प्राप्ति:
प्रभावपूर्ण माँग आय का भी निर्धारण करता है। प्रभावपूर्ण माँग से श्रमिकों को रोजगार की प्राप्ति होती है। रोजगार प्राप्ति से श्रमिकों को आय की प्राप्ति होती है वह प्रभावपूर्ण माँग का ही परिणाम है।

3. विनियोग का महत्व:
प्रभावपूर्ण माँग विनियोग का भी निर्धारण करता है। प्रभावपूर्ण माँग के कारण उत्पादकों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। उत्पादन में वृद्धि करने के लिए विनियोगकर्ता या उत्पादक नये – नये पूँजीगत संसाधनों में विनियोग करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।

4. पूर्ण रोजगार की मान्यता का खण्डन:
प्रभावपूर्ण माँग पूर्ण रोजगार की मान्यता का भी खण्डन करता है। पूर्ण रोजगार का तात्पर्य है कार्य करने योग्य सभी व्यक्तियों को प्रचलित मजदूरी पर रोजगार की प्राप्ति होना। लेकिन वास्तव में व्यावहारिक जीवन में रोजगार की प्राप्ति प्रभावपूर्ण माँग पर निर्भर करता है।

प्रभावपूर्ण माँग बढने पर रोजगार में वृद्धि होती है, लोगों को रोजगार प्राप्त होता है जिससे धीरे – धीरे बेरोजगारी कम होती है। इसके विपरीत प्रभावपूर्ण माँग में कमी होने से रोजगार का स्तर घटने लगता है। समाज में बेरोजगारी फैलती है। तब इन परिस्थितियों में चाहे कितना भी योग्य व्यक्ति या श्रमिक हो उसकी छटनी होने लगती है और वे बेरोजगार हो जाते हैं। वैसे भी व्यावहारिक जीवन में पूर्ण रोजगार की मान्यता नहीं पायी जाती।

प्रश्न 10.
अभावी माँग का क्या आशय है तथा अभावी माँग के उत्पन्न होने के क्या कारण हैं?
उत्तर:
अभावी माँग का अर्थ:
अभावी माँग से अभिप्राय, उस स्थिति से है, जब पूर्ण रोजगार स्तर पर कुल माँग, कुल पूर्ति से कम होती है। अर्थात् जब अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार स्तर बनाये रखने के लिए जितना व्यय आवश्यक होता है, उतना नहीं होता तो इसे अभावी माँग की स्थिति कहेंगे। ऐसी स्थिति में, कुल माँग व कुल पूर्ति रोजगार स्तर से पूर्व ही बराबर (संतुलन) होती है अर्थात् कुल माँग पूर्ण रोजगार स्तर बनाये रखने के लिए कम होती है। अभावी माँग के कारण – किसी भी अर्थव्यवस्था में अभावी माँग की स्थिति निम्नलिखित कारणों से उत्पन्न हो सकती है –

1. सरकार द्वारा करेंसी की पूर्ति में कमी या बैंकों द्वारा साख निर्माण को घटाना:
जब देश का केन्द्रीय बैंक चलन में मुद्रा की मात्रा कम कर देता है तो इसके कारण मुद्रा व साख की मात्रा कम हो जाती है। अतः इसके कारण कुल व्यय, कुल आय से कम हो जाती है, जिसके कारण अभावी माँग उत्पन्न हो जाती है।

2. बचत प्रवृत्ति में वृद्धि के कारण उपभोग माँग में कमी:
सामूहिक माँग (समग्र माँग) के कम होने के कारण वस्तुओं व सेवाओं की कीमत में कमी आने लगती है जिसके कारण मुद्रा का मूल्य बढ़ जाता है। अत: व्यक्ति मुद्रा का संचय अधिक करते हैं और व्यय कम करते हैं।

3. करारोपण नीति:
जब सरकार अपने कर नीति में कर की दर वस्तुओं व व्यक्तियों पर अत्यधिक लगाती है तो स्वाभाविक है कि लोगों की उपभोग व्यय की प्रवृत्ति कम हो जाती है और अभावी माँग उत्पन्न हो जाती है।

4. सार्वजनिक व्यय में कमी:
जब सरकार अपने व्ययों में कटौती करती है और योजनागत व्यय या उत्पादकीय कार्यों को भी कम करना प्रारंभ कर देती है, तो सामूहिक माँग कम हो जाती है और अभावी माँग की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

5. मुद्रा के चलन वेग में कमी:
व्यक्तियों की उपभोग प्रवृत्ति घटने और लाभ की आशा कम होने के कारण मुद्रा का चलन वेग घट जाता है और समस्त माँग कम हो जाती है जिसके कारण अभावी माँग उत्पन्न हो जाती है।

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प्रश्न 11.
अत्यधिक माँग से क्या आशय है? इसके कारणों पर प्रकाश डालिए?
उत्तर:
किसी भी अर्थव्यवस्था में रोजगार एवं आय का संतुलन उस पर होता है, जहाँ पर कुल माँग एवं कुल पूर्ति बराबर हो। अर्थात् यह आवश्यक नहीं है कि कुल माँग व कुल पूर्ति सदैव बराबर हो। कभी कुल माँग अधिक होती है तो कभी कुल पूर्ति। जब कुल पूर्ति माँग अधिक होती और कुल पूर्ति कम होती है तो इस स्थिति को अत्यधिक माँग कहते हैं।

उदाहरणार्थ, मान लीजिए कि किसी अर्थव्यवस्था में एक निश्चित समयावधि पर कुल माँग ₹ 500 करोड़ है। अब यदि इसकी कुल पूर्ति भी ₹ 500 करोड़ है तो यह कहा जाएगा कि अर्थव्यवस्था संतुलन की स्थिति में है। अब कल्पना कीजिए कि कुल पूर्ति केवल ₹ 400 करोड़ है तो इसका अर्थ यह होगा कि कुल माँग, कुल पूर्ति की तुलना में ₹ 100 करोड़ अधिक है। इसी को अत्यधिक माँग कहते हैं। कीन्स के शब्दों में “अत्यधिक माँग वह स्थिति है जबकि वर्तमान कीमतों पर वस्तुओं और सेवाओं की कुल माँग उपलब्ध कुल पूर्ति से बढ़ जाती है।”

अत्यधिक माँग के कारण:
अत्यधिक माँग के निम्नलिखित कारण हैं –

1. मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि:
अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि होने से और उत्पादन की मात्रा में वृद्धि न होने के कारण देश में माँग प्रेरित मुद्रा स्फीति उत्पन्न होती है।

2. प्रयोज्य आय में वृद्धि:
जब लोगों की प्रयोज्य आय में वूद्धि होती है तो भी उपभोग व्यय में वृद्धि हो जाती है। परिणामस्वरूप मुद्रा स्फीति की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

3. घाटे की वित्त व्यवस्था:
वर्तमान समय में कल्याणकारी सरकारें घाटे की वित्त व्यवस्था अपनाकर सार्वजनिक व्यय में वृद्धि करती है, तो लोगों के पास एक ओर उपभोग आय में वृद्धि हो जाती है और दूसरी ओर वस्तुओं के न होने के
कारण अत्यधिक माँग की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और मूल्य में वृद्धि हो जाती है।

4. विनियोग में वृद्धि:
व्यावसायिक फर्मे ऋण प्राप्त करके नये उपकरणों, मशीनों तथा अन्य क्षेत्रों में विनियोग में वृद्धि करती हैं जिसके परिणामस्वरूप माँग में वृद्धि होती है।

5. वस्तुओं का विदेशों में निर्यात:
वस्तुओं का विदेशों में निर्यात के कारण भी अर्थव्यवस्था में पूर्ति की कमी और माँग में अतिरेक की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, परिणामस्वरूप मूल्य – स्तर में वृद्धि होती है।

प्रश्न 12.
अत्यधिक माँग में सुधार के उपायों का वर्णन कीजिए?
उत्तर:
अत्यधिक माँग में सुधार के उपाय:
जव अर्थव्यवस्था में अत्यधिक माँग की दशा उत्पन्न हो जाती है तो उसे निम्नलिखित उपायों से ठीक किया जा सकता है –

(अ) मौद्रिक उपाय
(ब) राजकोषीय उपाय एवं
(स) अन्य उपाय।

(अ) मौद्रिक उपाय:
अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए कुल मुद्रा पूर्ति को कम करना चाहिए। इस दृष्टिकोण से निम्नलिखित उपाय हैं –

1. मुद्रा निर्गम संबंधी नियमों को कठोर बनाना:
अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए यह आवश्यक है कि सरकार मुद्रा निकालने संबंधी नियमों को कड़ा करें ताकि केन्द्रीय बैंक को अतिरिक्त मुद्रा निकालने में अधिक कठिनाई हो।

2. पुरानी मुद्रा वापस लेकर नई मुद्रा देना:
अत्यधिक माँग की दशा में साधारण उपचार उपयोगी नहीं हो सकते, अतः पुरानी सब मुद्राएँ समाप्त कर उनके बदले में नई मुद्राएँ दे दी जाती हैं। प्रथम महायुद्ध के पश्चात् 1924 में जर्मनी की अनियंत्रित मुद्रा – स्फीति को समाप्त करने के लिये 10 खरब मुद्राओं के बदले में एक नयी मुद्रा दी गयी थी।

3. साख स्फीति को कम करना:
अत्यधिक माँग अथवा स्फीति को कम करने के लिए साख स्फीति को कम करना आवश्यक है इसके लिए केन्द्रीय बैंक द्वारा बैंक दर बढ़ाकर, प्रतिभूतियाँ बेचकर तथा बैंकों से अधिक कोष माँगकर, साख कम की
जा सकती है।

(ब) राजकोषीय उपाय:
इसमें निम्नलिखित उपाय हैं –

1. बचत का बजट बनाना:
अत्यधिक माँग की स्थिति में सरकार को बजट, बचत का बनाना चाहिए। इसका तात्पर्य है, जिससे सार्वजनिक व्यय की तुलना में सार्वजनिक आय अधिक होती है।

2. ऋण प्राप्ति:
अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए सरकार को ऋण पत्र बेचनी चाहिए और जनता को यह ऋण – पत्र खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

3. बचतों को प्रोत्साहन:
अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए सरकार को बैंकों एवं डाकघरों के माध्यम से ऐसी नीतियाँ कार्यान्वित करनी चाहिए जिससे लोग बचत के लिए प्रोत्साहित हो। इसके लिए आकर्षक ब्याज की दर अपनानी चाहिए।

(स) अन्य उपाय:
अन्य उपाय इस प्रकार हैं –

  1. अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए आयात में वृद्धि और निर्यात में कमी करनी चाहिए।
  2. अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए उद्योगों में उचित विनियोग नीति अपनायी जानी चाहिए।
  3. सरकार को मूल्यों में सहायता करनी चाहिए।

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प्रश्न 13.
“किसी रेखा में पैरामेट्रिक शिफ्ट” से आप क्या समझते हैं? रेखा में किस प्रकार शिफ्ट होता है जब इसकी

  1. ढाल घटती है और
  2. इसके अंतः खंड में वृद्धि होती है।

उत्तर:
हम दो सरल रेखाएँ लेते हैं, जो एक – दूसरे की अपेक्षा अधिक खड़े ढाल वाली हैं। सत्ताएँ: और m को आरेख का पैरामीटर कहते हैं। जैसे – जैसे m बढ़ता है सरल रेखा ऊपर की ओर बढ़ती है। इसे सरल रेखा में पैरामैट्रिक शिफ्ट कहते हैं।

1. ढाल घटती है:
y = mx + ε के रूप में ε सरल रेखीय समीकरण को दर्शाने वाले आरेख पर क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर अक्षों पर x और y दो परिवर्तों को रेखाचित्र में दर्शाया गया है। यहाँ m सरल रेखा की प्रवणता (ढाल) है और Σ ऊर्ध्वाधर अक्ष पर अन्तः खण्ड है। जब x में एक इकाई की वृद्धि होती है, तो y के मूल्य 10 में m इकाइयों की वृद्धि हो जाती है। जब रेखा की 5प्रवणता (ढाल) घटती है, तो सरल रेखा में ऋणात्मक शिफ्ट होता है। निम्नांकित चित्र से स्पष्ट हो रहा है कि जैसे – जैसे m का। मूल्य घट रहा है अर्थात् m का मूल्य 1 से कम करके 0.5 करने पर। सरल रेखा नीचे की ओर शिफ्ट हो रही है जिससे इसकी ढाल घट जाती है। इसे पैरामैट्रिक शिफ्ट कहते हैं।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 8

2. रेखा के अन्तः खण्ड में वृद्धि होती है:
जब सरल रेखा के अंत:खण्ड में वृद्धि होती है तब सरल रेखा समान्तर रूप से शिफ्ट होती है। यदि समीकरण y = 0.5 x + Σ में का मान 2 से बढ़ाकर 3 कर दिया जाये तो सरल रेखा समान्तर रूप से ऊपर की ओर शिफ्ट हो जायेगी। इसे निम्न चित्र में दर्शाया गया है –

रेखाचित्र में Σ के अंत:खण्ड में 2 से 3 तक वृद्धि करने पर सरल रेखा समान्तर रूप से ऊपर की ओर शिफ्ट हो जाती है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 9

प्रश्न 14.
कीन्स के रोजगार सिद्धांत को समझाइये?
उत्तर:
कीन्स का रोजगार सिद्धांत:
कोन्स ने अपनी सुप्रसिद्ध पुस्तक ‘सामान्य सिद्धांत’ में आय एवं रोजगार के सामान्य सिद्धांत का क्रमबद्ध एवं वैज्ञानिक विश्लेषण किया है। तीसा को महामन्दी (सन् 1930) में इन्होंने अपने सिद्धांत का प्रतिपादन किया था। उनके अनुसार एक अर्थव्यवस्था में आय एवं रोजगार का स्तर मुख्य रूप से प्रभावपूर्ण माँग’ के द्वारा निर्धारित होता है। प्रभावपूर्ण माँग में कमी ही बेरोजगारी का कारण होता है किन्तु प्रभावपूर्ण माँग का निर्धारण दो तत्वों के द्वारा होता है –

  1. सामूहिक माँग और
  2. सामूहिक पूर्ति।

सामूहिक पूर्ति और सामूहिक माँग जहाँ एक – दूसरे के बराबर होते हैं, वहीं साम्य बिन्दु प्रभावपूर्ण माँग का बिन्दु भी होता है। इसी प्रभावपूर्ण माँग के बिन्दु पर अर्थव्यवस्था में उत्पादन की मात्रा तथा रोजगार की कुल संख्या का निर्धारण होता है। अत: कीन्स का रोजगार का सिद्धांत समझने के लिए निम्न रेखाचित्र को समझना होगा –
प्रभावपूर्ण माँग = कुल उत्पादन = कुल आय = रोजगार
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 10
उक्त अनुसार उत्पादन प्रभावपूर्ण माँग के कारण होता है, माँगें कुल माँग द्वारा शासित होती हैं।

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MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

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MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

परमाणु की संरचना NCERT अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.

  1. एक ग्राम में इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
  2. एक मोल इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान एवं आवेश की गणना कीजिए।

हल:
1. एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.11 x 10-31 kg, इलेक्ट्रॉन का कुल द्रव्यमान = 1g = 1 x 10-3kg
∴ 9.11 x 10-31 kg द्रव्यमान एक इलेक्ट्रॉन का है।
∴ 1 x 10-3 kg द्रव्यमान एक इलेक्ट्रॉन का है = \(\frac { 1×10^{ -3 } }{ 9.11×10^{ -31 } } \) = 1.09×1027 इलेक्ट्रॉन।

2. इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.1×10-28 ग्राम
1 मोल इलेक्ट्रॉन = 6.023 x 103 इलेक्ट्रॉन
1 मोल इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.1 x 10-28 x 6.023 x 1023
= 5.47 x 10-4 ग्राम।
इलेक्ट्रॉन का आवेश = 1.6 x 10-19 कूलॉम
1 मोल इलेक्ट्रॉन = 6.023 x 1023
1 मोल इलेक्ट्रॉन का आवेश = 1.6 x 10-19 x 6.023 x 1023
= 9.63 x 104 कूलॉम।

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प्रश्न 2.

  1. एक मोल मेथेन में उपस्थित कुल इलेक्ट्रॉनों की गणना कीजिए।
  2. 7mg C14 में कुल न्यूट्रॉनों की संख्या एवं कुल द्रव्यमान की गणना कीजिए।
  3. STP पर NH3 के 34 mg में कुल प्रोटॉनों की संख्या एवं प्रोटॉनों का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।

हल:
1. CH4 के एक मोल में इलेक्ट्रॉन = 6 + 4 = 10
CH4 के एक मोल = 6.02 x 1023 अणु
कुल इलेक्ट्रॉन = 10 x 6.02 x 1023 = 6.02 x 1024.

2. एक C14 परमाणु में न्यूट्रॉनों की संख्या = 14 – 6 = 8
एक मोल C14 अथवा 6.02 x 1023 परमाणु अथवा 14g
एक मोल C14 में न्यूट्रॉन है = 8 x 6.02 x 1023
= 4.816 x 1024
C14 के 7 mg = C14 के 7 x 10-3
∴ 14 ग्राम C14 में न्यूट्रॉन्स है = 4.816 x 1024
∴ 7 x 10 C14 में न्यटॉन्स है = \(\frac { 4.816×10^{ 24 }x7x10^{ -3 } }{ 14 } \)
= 2.408 x 1021 न्यूट्रॉन्स।
एक न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = 1.675 x 10-27 kg
∴ कुल न्यूट्रॉनों का द्रव्यमान = 1.675 x 10-27-27 x 2.408 x 1021 = 4.03 x 10-6 kg.

3. NH3 का मोलर द्रव्यमान = 17,
NH3 के एक अणु में प्रोटॉनों की संख्या = 7 + 3 = 10
34 mg NH3 = 34 x 10-3 kg
∴ 17 g NH3 में प्रोटॉन = 10 x 6.02 x 1023
34 x 10-3 g NH3 प्रोटॉन है = \(\frac { 10×6.02×10^{ 23 }x34x10^{ -3 } }{ 17 } \)
= 1.2044 x 1022 प्रोटॉन।
एक प्रोटॉन का द्रव्यमान = 1.675 x 10-7 kg
∴ कुल प्रोटॉनों का द्रव्यमान = 1.675 x 10-27 x 1.2044 x 1022
= 2.01 x 10-5 kg.

प्रश्न 3.
निम्न तत्वों के नाभिकों में उपस्थित प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए –

  1. \(_{ 6 }^{ 13 }{ C }\)
  2. \(_{ 16 }^{ 8 }{ O }\)
  3. \(_{ 24 }^{ 12 }{ Mg }\)
  4. \(_{ 56 }^{ 26 }{ Fe }\)
  5. \(_{ 88 }^{ 38 }{ Sr }\).

उत्तर:

  1. \(_{ 6 }^{ 13 }{ C }\) में न्यूट्रॉनों की संख्या – 13 – 6 = 7; \(_{ 6 }^{ 13 }{ C }\) में प्रोटॉनों की संख्या = 6.
  2. \(_{ 16 }^{ 8 }{ O }\) में न्यूट्रॉनों की संख्या = 16 – 8 = 8; \(_{ 16 }^{ 8 }{ O }\) में प्रोटॉनों की संख्या = 8.
  3. \(_{ 24 }^{ 12 }{ Mg }\) में न्यूट्रॉनों की संख्या = 24 – 12 = 12; \(_{ 24 }^{ 12 }{ Mg }\) में प्रोटॉनों की संख्या = 12.
  4. \(_{ 56 }^{ 26 }{ Fe }\), में न्यूट्रॉनों की संख्या = 56 – 26 = 30; \(_{ 56 }^{ 26 }{ Fe }\) में प्रोटॉनों की संख्या = 26.
  5. \(_{ 88 }^{ 38 }{ Sr }\) में न्यूट्रॉनों की संख्या = 88 – 38 = 50; \(_{ 88 }^{ 38 }{ Sr }\) में प्रोटॉनों की संख्या = 38.

प्रश्न 4.
दिए गए परमाणु क्रमांक (Z) एवं परमाणु दव्यमान (A) वाले परमाणु का पूर्ण संकेत लिखिए –

  1. Z = 17, A = 35
  2. Z = 92, A = 233
  3. Z=4, A = 9.

उत्तर:

  1. \(_{ 35 }^{ 17 }{ Cl }\)
  2. \(_{ 233 }^{ 92 }{ U }\)
  3. \(_{ 9 }^{ 4 }{ C }\)Be

प्रश्न 5.
सोडियम लैम्प से 580 nm तरंगदैर्घ्य (λ) वाली पीला प्रकाश उत्सर्जित होता है, पीले प्रकाश की आवृत्ति (ν) एवं तरंग संख्या (\(\overline { ν } \)) की गणना कीजिए।
हल:
λ = 580 nm = 580 x 10-9 m, c = 3 x 108 m/s
आवृत्ति, ν = \(\frac{c}{λ}\) = \(\frac { 3×10^{ 8 } }{ 580×10^{ -9 } } \)
तरंग संख्या, \(\overline { ν } \) = \(\frac{1}{λ}\) = \(\frac { 1 } { 580×10^{ -9 } } \) = 1.72 x 106m-1.

प्रश्न 6.
प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा ज्ञात कीजिए, जो –

  1. प्रकाश की आवृत्ति 3 x 105 Hz से संबंधित है
  2. जिसका तरंगदैर्घ्य 0.50 Å है।

हल:
1. ν = 3 x 1015 Hz, h = 6.626 x 10-34 Js
E = hν = 6.626 x 10-34 x 3 x 1015 = 1.988 x 10-18 J.

2. λ = 0.50 x 10-10m, E = hν = h\(\frac{c}{λ}\)
= \(\frac { 6.626×10^{ -34 }x3x10^{ 8 } }{ o.50×10^{ -10 } } \) = 3.98 x 10-15

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प्रश्न 7.
एक प्रकाश तरंग, जिसका आवर्तकाल 2.0 x 10-10 है के लिए तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति एवं तरंग संख्या की गणना कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 1

प्रश्न 8.
4000 pm वाले तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश के फोटॉनों की संख्या की गणना कीजिए, जो 1J ऊर्जा वाले होते हैं।
हल:
λ = 4000 pm = 4 x 10-9 m
h = 6.626 x 10-34 Js
c = 3 x 108 m/s
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 2

प्रश्न 9.
एक फोटॉन जिसका तरंगदैर्घ्य 4 x 10-7m है, धातु सतह पर डाला जाता है, धातु का कार्य फलन 2.13ev है। गणना कीजिए –

  1. फोटॉन की ऊर्जा
  2. उत्सर्जन की गतिज ऊर्जा एवं
  3. फोटो इलेक्ट्रॉन का वेग। (1eV = 1.602 x 10-19)

हल:

1. एक फोटॉन की कर्ज = E = \(\frac{hc}{λ}\)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 3
2. उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा, KE = hν – hν0
hν = 3.10ev (टकराने वाले फोटॉन की ऊर्जा)
0 = W0 = 2.13eV (धातु का कार्य फलन)
KE = 3.10 – 2.13 = 0.97eV.

3. KE = \(\frac{1}{2}\) = mv2 = 0.97e v
[∴ 1eV = 1.602 x 10-12]
\(\frac{1}{2}\) mv2 = 0.97 x 1.602 x 10-19J
\(\frac{1}{2}\) x 10-31kg x v2 = 0.97 x 1.602 x 10-19 J
[ 1e का द्रव्यमान = 9.11 x 10-31 kg]
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 4
v = 5.84 x 105ms-1

प्रश्न 10.
242 nm तरंगदैर्घ्य का वैद्युत चुम्बकीय विकिरण सोडियम परमाणु को आयनीकृत करने के लिए पर्याप्त है। सोडियम की आयनन ऊर्जा की गणना kJ mol-1 में कीजिए।
हल:
तरंगदैर्घ्य λ = 242 x 10-9 m
[∴ 1 nm = 10-9 m]
ऊर्जा E = hν = \(\frac{hc}{λ}\)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 5
E = 0.0821 x 10-17 J/atom
उपर्युक्त ऊर्जा 1 Na परमाणु के आयनन के लिए पर्याप्त है। एक मोल Na हेतु ऊर्जा की Na की आयनन ऊर्जा होगी।
Na के 1 मोल के लिए ऊर्जा (आयनन ऊर्जा)
E = 6.02 x 1023 x 0.0821 x 10-17 J/mol
= 4.945 x 105J/mol [∴ 1 kJ = 1000J]
\(\frac { 4.945×10^{ 2 } }{ 1000 } \) J/mol
= 4.945 x 10 kJ/mol.

प्रश्न 11.
25 वाट का बल्ब 0.57 pm तरंगदैर्घ्य की मोनोक्रोमेटिक पीला उत्सर्जित करता है, तब प्रति सेकण्ड उत्सर्जित क्वाण्टम की दर की गणना कीजिए।
हल:
तरंगदैर्घ्य λ = 0.57um = 0.57 x 10-6m, [∴ l µm = 10-6m]
फाटान का ऊजा E = hν = \(\frac{hc}{λ}\)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 6
E = 34.84 x 10-20J
25 वॉट = 25Js-1 [∴ 1वॉट = 1Js-1]
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 7
= 0.7169 x 1020 फोटॉन/सेकण्ड
= 7.169 x 1019 फोटॉन/सेकण्ड।

प्रश्न 12.
जब धातु को 6800Å तरंगदैर्घ्य वाले विकिरण में लाया जाता है, तब धातु सतह से शून्य वेग के इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। धातु की देहली आवृत्ति (ν0) एवं कार्यफलन की गणना कीजिए।
हल:
देहली तरंगदैर्घ्य, λ0 = 6800Å = 6800 x 10-10 m [∴ 1A = 10-10m]
देहली आवृत्ति ν0 = C = \(\frac { c }{ \lambda _{ 0 } } \) = \(\frac { 3.0×10^{ 8 }ms^{ -1 } }{ 6800×10^{ -10 }m } \) = 4.41 x 1014s-1
कार्य फलन W = hν0
= 6.626 x 10-34 Js x 4.41 x 1014s-1
= 29.22 x 10-20 J = 2.922 x 10-19 J.

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प्रश्न 13.
जब हाइड्रोजन परमाणु के इलेक्ट्रॉन ऊर्जा स्तर n = 4 से ऊर्जा स्तर n = 2 पर संक्रमण करते हैं, तब उत्सर्जित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य क्या होगी?
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 8
इस तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश का रंग नीला होता है।

प्रश्न 14.
H – परमाणु को आयनीकृत करने के लिए कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होगी, जब इलेक्ट्रॉन n = 5 कक्ष ग्रहण करेगा? H – परमाणु के आयनन एन्थैल्पी से अपने उत्तर की तुलना कीजिए। (n = 1 कक्ष से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा)
हल:
ऊर्जा परिवर्तन, ∆E = Ef – Ei
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 9
अतः प्रथम कक्षक से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा पाँचवें कक्ष से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा की 25 गुना होगी।

प्रश्न 15.
जब हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन n = 6 से उत्तेजित होकर आद्य अवस्था में पहुँचता है, तब उत्सर्जित रेखाओं की अधिकतम संख्या क्या होगी?
हल:
संभावित संक्रमण है –
6 → 5, 6 → 4, 6 → 3, 6 → 2, 6 → 1 (5)
5 → 4, 5 → 3, 5 → 2, 5 → 1 (4)
4 → 3, 4 → 2, 4 → 1 (3)
3 → 2, 3 → 11 (2)
2 → 1 (1)
कुल रेखा = 15
रेखाओं की संख्या को सरल सूत्र द्वारा भी गणना कर सकते हैं –
\(\frac{n(n-1)}{2}\) = \(\frac{6(6-1)}{2}\) = 15.

प्रश्न 16.
1. हाइड्रोजन परमाणु के प्रथम कक्ष से संलग्न ऊर्जा -2.8 x 10-18J atom-1 है। पाँचवें कक्ष की संलग्न ऊर्जा क्या होगी?
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 10
2. हाइड्रोजन परमाणु के लिए बोर के पाँचवें कक्ष के लिए त्रिज्या की गणना कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 11

प्रश्न 17.
परमाण्विक हाइड्रोजन के बामर श्रेणी में संक्रमण के लिए सबसे लम्बी तरंगदैर्घ्य की तरंग संख्या की गणना कीजिए।
हल:
\(\overline { ν } \) = 1097 x 1o7 [ \(\left[\frac{1}{n_{1}^{2}}-\frac{1}{n_{2}^{2}}\right]\)
n1 = 2 बामर श्रेणी के लिए n1 = 2 लम्बी तरंगदैर्घ्य के लिए \(\overline { ν } \) कम होता है, n2 = 3.
\(\overline { ν } \) = 1097 x 107(\(\frac{1}{4}\) – \(\frac{1}{9}\) ) = 152 x 106m.

प्रश्न 18.
हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन प्रथम बोर कक्ष से पाँचवें बोर कक्ष में जाने के लिए आवश्यक जूल में ऊर्जा क्या होगी एवं इलेक्ट्रॉन के वापस आद्य अवस्था में लौटने पर उत्सर्जित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य क्या होगी? आद्य अवस्था में इलेक्ट्रॉन ऊर्जा -2.18 x 10-1111 अर्ग है।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 12

प्रश्न 19.
हाइड्रोजन परमाणु की इलेक्ट्रॉन ऊर्जा En = (-2.18 x 10-18)n2J दी गई है। n = 2 कक्ष इलेक्ट्रॉन को पूर्ण रूप से निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा की गणना कीजिए। इस संक्रमण में प्रयुक्त की लम्बी तरंगदैर्घ्य cm में क्या होगी?
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 13

प्रश्न 20.
2.05 x 10 ms-1 वेग से घूम रहे इलेक्ट्रॉन के तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए।
हल:
h = 6.62 x 10-34 Js,
v = 2.05 x 10 ms-1
m = 9.11 x 10-31 kg
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 14

प्रश्न 21.
एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.1 x 10-31 kg है, यदि इसकी गतिज ऊर्जा (K.E.) 3 x 10-25 J हो, तब इसकी तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए।
हल:
K.E. = 3.0 x 10-25 J,
m = 9.1 x 10-31-31 kg,
1J = 1 kg ms-2
K.E. = \(\frac{1}{2}\) mv2
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 15

प्रश्न 22.
निम्न में से कौन-सी समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज हैं अर्थात् जिनमें समान संख्या में इलेक्ट्रॉन हो –
Na+, K+, Mg+2, Ca+22+, s-2, Ar.
उत्तर:
Na+ = 11 – 1 = 10
K+ = 19 – 1 = 18
Mg+2 = 12 – 2 = 10
Ca2+ = 20 – 2 = 18
s2- = 16 + 2 = 18,
Ar= 18.
अतः समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज Na+ एवं Mg+2 तथा Ca+2, K+, Ar, एवं S2- हैं।

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प्रश्न 23.
(i) निम्न आयनों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए –

  1. H+
  2. Na+
  3. O2-
  4. F

(ii) उन तत्वों के परमाणु क्रमांक क्या होंगे, जिनके बाहरी कक्ष में इलेक्ट्रॉनों को दर्शाते हैं –

  1. 3s1
  2. 2p एवं
  3. 3p5

(iii) निम्न विन्यासों द्वारा कौन-से परमाणुओं को दर्शाया जाता है –

  1. [He]2s1
  2. [Ne]3s2, 3p3
  3. [Ar]4s2, 3d1.

उत्तर:
(i)

  1. 1H = 1s1 ∴ H = 1s0
  2. 11Na = 1s2 2s22p63s1 ∴ Na+ = 1s22s22p6
  3. 8O = 1s2 2s2 2p4 ∴ O2- = 1s2 2s2 2p6
  4. 9F = 1s2 2s2 2p5 ∴ F = 1s2 2s2 2p6

(ii)

  1. 1s2 2s2 2p6 3s1 (Z = 11)
  2. 1s2 2s2 2p3 (Z = 7)
  3. 1s2 2s2 2p6 3s2 3p5 (Z = 17)

(iii)

  1. 2Li
  2. 1515P
  3. 21Sc.

प्रश्न 24.
‘g’ कक्षक रखने वाले n का निम्नतम मान क्या होगा?
उत्तर:
l = 4,
‘g’ उपकक्षक दर्शाता है एवं हमें ज्ञात है कि n = 1 एवं l = 0 से (n – 1) निम्नतम मान n = 5 है।

प्रश्न 25.
एक इलेक्ट्रॉन 3d कक्षकों में से एक में है, तब इस इलेक्ट्रॉन की n, I एवं m के संभावित मान दीजिए।
उत्तर:
3d कक्षक के लिए n = 3, l = 2, m = -2, -1, 0, +1, 2.

प्रश्न 26.
एक तत्व के परमाणु में 29 इलेक्ट्रॉन एवं 35 न्यूट्रॉन है। तब

  1. प्रोटॉनों की संख्या एवं
  2. तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निकालिए।

उत्तर:

  1. उदासीन परमाणु के लिए, प्रोटॉनों की संख्या = इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 29 अत: Z = 29.
  2. Z = 29 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Ar] 3d10, 4s1 है।

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प्रश्न 27.
H2+ एवं O2+ स्पीशीज में इलेक्ट्रॉनों की संख्या दीजिए।
उत्तर:
H2 = 1H + 1H = 2e ∴ H2+ = 2 – 1 = 1e है।
O2 = O8 + O8 = 16e ∴ O2+ = 16 – 1 = 15e है।

प्रश्न 28.

  1. एक परमाणु कक्षक में n = 3 के लिए। एवं m के संभावित मान क्या होंगे?
  2. 3d कक्षक के इलेक्ट्रॉनों के लिए क्वाण्टम संख्याओं (m1 एवं।) की लिस्ट दीजिए।
  3. निम्न में से कौन-सी कक्षक संभव है – 1p, 2s, 2p एवं 3f.

उत्तर:

1. n = 3, l = 0, 1, 2
जब l = 0, m = 0
जब l = 1, m = +1, 0, -1
जब l = 2, m = +2, +1, 0, -1, -2.

2. 3d – कक्षक के लिए n = 3, l = 2, m = +2, +1, 0, -1,-2.

3. n = 1, l = 0, एक कक्षक i.e., यह संभव है। 1p संभव नहीं है।
n = 2, l = 0 एवं 1, अत: 25 एवं 2p दोनों संभव है।
n = 3, l = 0, 1, 2, अत: 3s, 3p एवं 3d संभव है 3f संभव नहीं है।

प्रश्न 29.
s, p, d नोटेशन का उपयोग करते हुए कक्षक का निम्न क्वाण्टम संख्याओं की व्याख्या कीजिए –

  1. n = 1, l = 0
  2. n = 3, l = 1
  3. n = 4, l = 2
  4. n = 4, l = 3

उत्तर:

  1. n = 1; l = 0 : 15
  2. n = 3; l = 1 : 3p
  3. n = 4; l = 2 : 4d
  4. n = 4; l = 3 : 4f.

प्रश्न 30.
निम्न की व्याख्या करते हुए कारण दीजिए, कि निम्न क्वाण्टम संख्याओं के सेट संभव नहीं है –

  1. n = 0, l = 0, m1 = 0, ms = +1/2
  2. n = 1, l = 0, m1 = 0, ms = -1/2
  3. n = 1, l = 1, m1 = 0, ms = +1/2
  4. n = 3, l = 3, m1 = 0, ms = -1/2
  5. n = 3, l = 3, m1 = -3, ms = +1/2
  6. n = 3, l = 1, m1 = 0, ms = +1/2.

उत्तर:

  1. संभव नहीं है, क्योंकि n शून्य नहीं होता,
  2. संभव है,
  3. संभव नहीं है, क्यों कि n = 1, का मान 1 नहीं होता,
  4. संभव है,
  5. संभव नहीं है, क्योंकि n = 3 के लिए। का मान 3 नहीं होता,
  6. संभव है।

प्रश्न 31.
एक परमाणु में कितने इलेक्ट्रॉन होंगे, जिनकी निम्न क्वाण्टम संख्यायें होंगी –

  1. n = 4, ms \(\frac{1}{2}\)
  2. n = 3, l = 0.

उत्तर:

  1. कुल इलेक्ट्रॉन- 2n2 = 2 x 42 = 32. इसके आधे इलेक्ट्रॉन 16 जिनके s = +1/2 या s = -1/2 होंगे।
  2. n = 3 एवं l = 0, तब यह ‘3s’ उपकक्ष है, जिसमें अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन होंगे।

प्रश्न 32.
दर्शाइये कि हाइड्रोजन परमाणु के लिए कक्ष में घूमने वाले इलेक्ट्रॉन के लिए बोर कक्ष डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य के इन्टीग्रल मल्टीपल होती है।
उत्तर:
mvr = \(\frac{nh}{2π}\)
या 2πr = \(\frac{nh}{mv}\) …(i)
डी ब्रॉग्ली समीकरण के अनुसार λ = \(\frac{h}{mv}\), इस मान \(\frac{h}{mv}\) को समीकरण (i) में रखने पर,
2πr = nλ
अतः r तरंगदैर्घ्य (λ) के इन्टीग्रल मल्टीपल होती है।

प्रश्न 33.
He स्पेक्ट्रम के लिए बामर संक्रमण n = 4 से n = 2 के तरंगदैर्घ्य के समान हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में क्या संक्रमण होगा?
उत्तर:
H – के समान कण के लिए सामान्यतः \(\overline { ν } \) = RZ2(\(\left[\frac{1}{n_{1}^{2}}-\frac{1}{n_{2}^{2}}\right]\))
∴ He+ स्पेक्ट्रम में बामर संक्रमण के लिए n2 = 4 से n1 = 2
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 16
यह दर्शाता है कि n1 = 1 एवं n2 = 2 के लिए संक्रमण n = 2 से n = 1 होता है।

प्रश्न 34.
प्रक्रम के लिए आवश्यक ऊर्जा की गणना कीजिए – He(g)+ → He(g)2+ + e आद्य अवस्था में H – परमाणु की आयनन ऊर्जा 2.18 x 10-18-18 J atom-1 है।
हल:
एक इलेक्ट्रॉन परमाणुक निकाय में, इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 17
= 4 x 2.18 x 10-18 J atom-1 = 8.72 x 10-8 J atom-1
अत: He+ → He2+ + e, के लिए आवश्यक ऊर्जा = 8.72 x 10-18 J atom-1

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प्रश्न 35.
कार्बन परमाणु का व्यास यदि 0.15 nm है, तब कार्बन परमाणुओं की संख्या की गणना कीजिए, जो 20 cm लम्बी स्केल पर सीधी रेखा में खिसकती है।
हल:
कार्बन परमाणु का व्यास = 0.15 nm = 1.5 x 10-10 m
लम्बाई के सापेक्ष कार्बन परमाणुओं की संख्या जो रखी गई है = \(\frac { 0.2 }{ 1.5×10^{ -10 } } \) = 1.33 x 109.

प्रश्न 36.
2 x 108 कार्बन परमाणुओं को व्यवस्थित करने के लिए 2.4 cm लम्बाई में व्यवस्थित करने के लिए कार्बन परमाणु की त्रिज्या की गणना कीजिए।
हल:
कुल लंबाई = 2.4 cm
कतार में व्यवस्थित कार्बन परमाणुओं की संख्या = 2 x 108
1 कार्बन परमाणु का व्यास = \(\frac { 2.4cm }{ 2×10^{ 8 } } \) = 1.2 x 10-8 cm
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 18
= 0.60 x 10-7 cm
= 0.060 x 10-9 cm = 0.060 x 10-9 m
= 0.060 nm.

प्रश्न 37.
जिंक परमाणु का व्यास 2.6 Å है।

  1. जिंक परमाणु की त्रिज्या pm में तथा
  2. 1.6 cm की लंबाई में कतार में लगातार उपस्थित परमाणुओं की संख्या की गणना कीजिए।

हल:
1. Zn परमाणु का व्यास = 2.6Å = 2.6 x 10-10 m
Zn परमाणु की त्रिज्या \(\frac { 2.6×10^{ -10 }m }{ 2 } \)
= 1.3 x 10-10 m
= 130 x 10-12m = 130 pm.

2. प्रश्नानुसार, लंबाई = 1.6 cm = 1.6 x 10-2 m
1.6 x 10-2 m लम्बी कतार में Zn परमाणुओं की संख्या
\(\frac { 1.6×10^{ -2 }m }{ 2.6×10^{ -10 }m } \) = 0.6154 x 108
= 6.154 x 107.

प्रश्न 38.
कुछ कण 2.5 x 10-16C स्टेटिक विद्युत् आवेश रखते हैं, इनमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
हल:
एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश = 1.6 x 10-19 कूलॉम, कुल आवेश = 2.5 x 10-16
कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या = \(\frac { 2.5×10^{ -16 } }{ 1.6×10^{ -19 } } \) = 1562.5 = 1.5625 x 103.

प्रश्न 39.
मिलिकन प्रयोग में तेल बूंद पर स्टेटिक विद्युत् आवेश x-किरण की चमक से प्राप्त करते हैं। यदि तेल बूंद पर स्टेटिक विद्युत् आवेश -1-282 x 10-18 C है, तब इसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
हल:
तेल की बूंद पर स्थिर विद्युत् आवेश = – 1.282 x 10-18 C
इलेक्ट्रॉन पर आवेश = -1.602 x 10-19 C
तेल की बूंद में उपस्थित इलेक्ट्रॉन = \(\frac { -1.282×10^{ -18 } }{ -1.602×10^{ -19 } } \)

प्रश्न 40.
रदरफोर्ड प्रयोग में सामान्यतः भारी परमाणु जैसे-गोल्ड, प्लेटिनम आदि की पतली पत्ती पर -कणों के आक्रमण के लिए उपयोग करते हैं। यदि पतली पत्ती हल्के परमाणुओं जैसेऐल्युमिनियम आदि का उपयोग करें, तब उपरोक्त परिणामों से प्रेक्षित में क्या अन्तर होगा?
उत्तर:
हल्के परमाणुओं में नाभिक में कम संख्या में धन आवेश होते हैं, इसके कारण ही -कणों की संख्या विपरीत विचलित नगण्य होती है एवं कम कोण से विचलित -कणों की संख्या भी नगण्य होती है।

प्रश्न 41.
प्रतीक \(_{ 79 }^{ 35 }{ Br }\)Br एवं 79Br लिख सकते हैं, जबकिं संकेत \(_{ 35 }^{ 79 }{ Br }\)Br एवं 35Br स्वीकार्य योग्य नहीं है, उत्तर समझाइये।
उत्तर:
तत्व की परमाणु संख्या निश्चित स्थायी होती है। द्रव्यमान संख्या समस्थानिक पर निर्भर होता है। अतः एक तत्व की परमाणु संख्या एवं द्रव्यमान संख्या को दर्शाते हैं। \(_{ 35 }^{ 79 }{ Br }\)Br संभावना नहीं है, क्योंकि Br का परमाणु क्रमांक 35 है 79 नहीं। 35Br संभव नहीं है, क्योंकि Br की द्रव्यमान संख्या 35 नहीं है।

प्रश्न 42.
एक तत्व की द्रव्यमान संख्या 81 है, तथा प्रोटॉन की तुलना में 31.7% अधिक न्यूट्रॉन है, तब परमाण्विक संकेत निकालिये।
हल:
द्रव्यमान संख्या = 81, i.e., p + n = 81
यदि प्रोटॉन की संख्या = x है, तब
न्यूट्रॉनों की संख्या = x + \(\frac{31.7x}{100}\) = 1.317x
∴ x + 1.317x = 81
या 2.317 x = 81
या x = \(\frac{81}{2.317}\) = 35
अतः प्रोटॉन = 35, i.e., परमाणु संख्या = 35
∴ संकेत Br है।

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प्रश्न 43.
एक आयन की द्रव्यमान संख्या 37 है, जिस पर एक इकाई ऋण आवेश है। यदि आयन में इलेक्ट्रॉन की तुलना में 11.1% अधिक न्यूट्रॉन है, तो आयन का संकेत ज्ञात कीजिए।
हल:
यदि आयन में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = x, तब
न्यूट्रॉनों की संख्या = x + \(\frac{11.1x}{100}\) = 1.111 x
∴ प्रोटॉनों की संख्या = x – 1
द्रव्यमान संख्या = n + p
या 37 = 1.111 x + x – 1
या 2.11 x = 38
x = 8
प्रोटॉनों की संख्या = परमाणु संख्या
= x – 1 = 18 – 1 = 17
∴ आयन का संकेत \(_{17}^{37} \mathrm{Cl}^{-1}\).

प्रश्न 44.
एक आयन की द्रव्यमान 56 है, जिस पर 3 इकाई धन आवेश है एवं इलेक्ट्रॉन की तुलना में 30.4% अधिक न्यूट्रॉन है। आयन का संकेत ज्ञात कीजिए।
हल:
यदि आयन में इलेक्ट्रॉनों की संख्या M3+ = x
न्यूट्रॉनों की संख्या = x + \(\frac{30.4}{100}\)x = 1.304 x
∴ प्रोटॉनों की संख्या = x + 3
द्रव्यमान संख्या = n + p
या 56 = x + 3 + 1.304 x
या 2.304 x = 53
x = 23
∴ प्रोटॉनों की संख्या = परमाणु संख्या
= x + 3 = 23 + 3 = 26
∴ आयन का संकेत \(_{56}^{26} \mathrm{Cl}^{+3}\) है।

प्रश्न 45.
निम्न प्रकार के विकिरणों को उसके आवृत्ति के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए –

  1. माइक्रोवेव ओवन के विकिरण
  2. ट्रैफिक सिग्नल का अम्बर प्रकाश
  3. FM रेडियो के विकिरण
  4. बाह्य आकाश से कास्मिक किरणें
  5. x-किरणें।

उत्तर:
FM रेडियो के विकिरण < माइक्रोवेव < अम्बर प्रकाश < x – किरणे < कास्मिक किरणें।

प्रश्न 46.
नाइट्रोजन लेजर 337.1 nm तरंगदैर्घ्य के विकिरण उत्पादित करता है। यदि उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या 5.6 x 1024 है, इस लेजर की शक्ति की गणना कीजिए।
हल:
h = 6.626 x 10-34 J
λ = 337.1 x 10-9 m
c = 3 x 108 m/s
n = 5.6 x 1024
E = nhν
E = nh\(\frac{c}{λ}\)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 19
= 3.3 x 106 J.

प्रश्न 47.
निऑन गैस का सामान्यतः उपयोग साइनबोर्ड में किया जाता है। यह प्रभावी रूप से 616 nm पर उत्सर्जित करता है। गणना कीजिए –

(a) उत्सर्जन की आवृत्ति
(b) 30s में विकिरण द्वारा चली गई दूरी
(c) क्वाण्टम की ऊर्जा
(d) 2Jऊर्जा उत्पादित करने के लिए उपस्थित क्वाण्टम की संख्या।

हल:
λ = 616 nm = 616 x 10-9 m
h = 6.626 x 10-34 Js,
c = 3 x 10 m/s
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प्रश्न 48.
खगोल प्रेक्षणों में दूर स्थित ग्रहों से प्रेक्षित सिग्नल सामान्यतः कमजोर होते हैं। यदि फोटॉन डिटेक्टर कुल 3.15 x 10-18J 600 nm वाले विकिरणों से प्राप्त करता है। डिटेक्टर द्वारा प्राप्त फोटॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
हल:
c = 3 x 108 m/s
h = 6.626 x 10-34 JS,
λ = 600 x 10-9 m
एक फोटॉन की ऊर्जा = hν = h\(\frac{c}{λ}\)
= \(\frac{6 \cdot 626 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^{8}}{600 \times 10^{-9}}\)
= 3.313 x 10-19 J
कुल प्राप्त ऊर्जा = n x एक क्वाण्टा की ऊर्जा
n (फोटॉनों की संख्या) = \(\frac { 3.15×10^{ -18 } }{ 3.31×10^{ -19 } } \) = 9.5 = 10 फोटॉनों की संख्या जो प्रभाजों में नहीं।

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प्रश्न 49.
अणुओं को जीवनपर्यन्त उत्तेजित अवस्था में रहने पर नैनो सेकण्ड के नजदीक में पल्स विकिरण स्त्रोत द्वारा मापा गया। यदि विकिरण स्रोत का समय 2 ns है, एवं पल्स स्त्रोत 2.5 x 1015 में फोटॉनों की संख्या उत्सर्जित होती है। स्त्रोत की ऊर्जा की गणना कीजिए।
हल:
ν = \(\frac { 1 }{ 2×10^{ -9 } } \)
E = nhν
= 2.5 x 1015 x 6.626 x 10-34 x 0.5 x 109
= 8.28 x 10-10 J.

प्रश्न 50.
लम्बी तरंगदैर्घ्य द्विक अवशोषण संक्रमण 589 एवं 589.6 nm पर प्रेक्षित किया गया। तब प्रत्येक संक्रमण की आवृत्ति एवं दो उत्तेजित स्थितियों के बीच ऊर्जा के अन्तर की गणना कीजिए।
हल:
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प्रश्न 51.
सीजियम परमाणु का कार्यफलन 1.9 ev है। तब विकिरण की (a) देहली तरंगदैर्घ्य एवं (b) विकिरण की देहली आवृत्ति की गणना कीजिए। यदि सीजियम तत्व तरंगदैर्घ्य 500 m द्वारा पुनः विकिरित किया जाता है। तब निकले फोटो इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा एवं वेग की गणना कीजिए।
हल:
W0 (तरंग फलन) = hν0
देहली आवृत्ति ν0 = \(\frac { c }{ W _{ 0 } } \)
W0 = 1.9 x 1.602 x 10W-19 J,
h = 6.626 x 10W-34 Js
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प्रश्न 52.
जब सोडियम धातु विभिन्न तरंगदैर्ध्य में विकिरित (Irradiated) किया जाता है, तो निम्न परिणाम प्रेक्षित किए गए –
h(nm) = 500, 400, 450, v x 105 (cm s-1) = 2.55, 4.35, 5.35. तो

  1. देहली तरंगदैर्घ्य एवं
  2. प्लांक स्थिरांक की गणना कीजिए।

हल:
हम जानते हैं किअवशोषित ऊर्जा – देहली ऊर्जा = फोटो इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा –
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प्रश्न 53.
सिल्वर धातु को प्रकाश-विद्युत् प्रभाव प्रयोग में रखने पर सिल्वर धातु पर 0.35 V (वोल्टेज) लागू करने पर निष्कासित फोटो इलेक्ट्रॉन रूक जाते हैं, जब विकिरण 256.7 nm का विकिरण प्रयोग किया गया। सिल्वर धातु के कार्यफलन की गणना कीजिए।
हल:
λ = 256.7 nm = 256.7 x 10-9 m,
K.E. = 0.35 eV
h = 6.626 x 10-34 Js,
c = 3 x 108 m/s
E = h\(\frac{c}{λ}\)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 24
E = E0 + K.E.
4.83 = E0 + 0.35
E0 = 4.83 – 0.35 = 4.48 eV.

प्रश्न 54.
यदि 150 pm तरंगदैर्घ्य वाले फोटॉन को परमाणु पर डाला जाता है, एवं भीतर जुड़े हुए में से एक इलेक्ट्रॉन 1.5 x 107 ms-1 के वेग से बाहर निकलता है। यदि यह नाभिक से जुड़ा हुआ है, तब ऊर्जा की गणना कीजिए।
हल:
λ = 150 pm = 150 x 10-12 m = 1.5 x 10-10 m,
ν = 1.5 x 10 ms-1
m = 9.1 x 10-31 kg
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प्रश्न 55.
पाश्चन श्रेणी में उत्सर्जन संक्रमण कक्ष n = 3 पर समाप्त होता है एवं कक्षn पर शुरू होते हैं, जिसे ν = 3.29 x 10-15 (Hz) \(\left[\frac{1}{3^{2}}-\frac{1}{n^{2}}\right]\) द्वारा दर्शाते हैं।
n के मान की गणना कीजिए यदि संक्रमण 1285 nm पर होता है। स्पेक्ट्रम का क्षेत्र बताइए।
हल:
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प्रश्न 56.
उस उत्सर्जन संक्रमण की तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए, जो 1-3225 nm त्रिज्या वाले कक्ष से प्रारम्भ होकर 211.6 pm पर अन्त होती है। उस श्रेणी का नाम, जिसमें संक्रमण होता है एवं स्पेक्ट्रम का क्षेत्र बताइए।
हल:
H – जैसे आयनों के लिए,
r = \(\frac { 52.9^{ 2 } }{ Z } \)pm
r1 = 1.3225 nm = 1322.5 pm = 52.9 n12 = 25 or n = 5
r2 = 211.6 pm = 52.9 x 4 n22 = 4 or n1 = 2
अतः संक्रमण 5वें कक्ष से 2वें कक्ष में होता है। यह बामर श्रेणी में आता है।
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यह दृश्य क्षेत्र में रहता है।

प्रश्न 57.
डी-ब्रॉग्ली ने पदार्थ की द्वैत प्रकृति को प्रस्तावित किया इसके बाद इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की खोज के बाद उपयोग जैसे अणुओं एवं अन्य इस प्रकार के पदार्थों की उच्च मैग्नीफाइड इमेज के लिए किया गया। यदि इस सूक्ष्मदर्शी में इलेक्ट्रॉन का वेग 1.6 x 106 ms-1 हो, तब इस इलेक्ट्रॉन से संलग्न डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए।
हल:
λ = \(\frac{h}{mv}\),
h = 6.626 x 10-34 Js,
m = 9.1 x 10-31 kg
v = 1.6 x 106 ms-1
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= 4.45 x 10-10m = 455 pm

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प्रश्न 58.
इलेक्ट्रॉन विवर्तन के समान, न्यूट्रॉन विवर्तन सूक्ष्मदर्शी का उपयोग अणुओं की संरचना ज्ञात करने में करते हैं। यदि प्रयुक्त तरंगदैर्घ्य 800 pm की है, तब न्यूट्रॉन से संलग्न वेग की गणना कीजिए।
हल:
λ = 800 pm = 800 x 10-12 m = 8 x 10-10 m,
m = 1.675 x 10-27 kg
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 29
= 4.94 x 102 ms-1.

प्रश्न 59.
बोर के प्रथम कक्ष के इलेक्ट्रॉन का वेग 2.19 x 106 ms-1 है। इससे संलग्न डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए।
हल:
v = 2.19 x 106 ms-1
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= 3.3243 x 10-10
m = 332.43 pm.

प्रश्न 60.
विभवान्तर 1000 V वाले घूमते प्रोटॉन से संलग्न वेग 4.37 x 105 ms-1 है, यदि 0.1 kg द्रव्यमान वाली हॉकी बॉल इस वेग से घूमती है, तो इस वेग से संलग्न तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए।
हल:
v = 437 x 109 ms-1,
m = 0.1 kg 2
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प्रश्न 61.
यदि इलेक्ट्रॉन की स्थिति का मापन + 0.002 am की शुद्धता के साथ किया गया, इलेक्ट्रॉन की संवेग में अनिश्चितता का मापन कीजिए। माना इलेक्ट्रॉन का संवेग h/4πm x 0.05 nm है, तब इस मान की व्याख्या करने में क्या समस्या होगी?
हल:
∆x = 0.002 nm = 2 x 10-12 m,
h = 6.626 x 10-34 Js (kg m2s-1)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 32
चूँकि वास्तविक संवेग मापन किए गए संवेग में अनिश्चितता से कम है, इसलिए इलेक्ट्रॉन के संवेग की व्याख्या नहीं की जा सकती है।

प्रश्न 62.
छ: इलेक्ट्रॉनों की क्वाण्टम संख्या नीचे दी गई है। इन्हें ऊर्जा के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए। इनमें से किसी भी संयोग में समान ऊर्जा हो, तो बताइये –

  1. n = 4, l = 2, m1 = – 2, ms = -1/2
  2. n = 3, l = 2, m1 = 1, ms = +1/2
  3. n = 4, l = 1, m1 = 0, ms= +1/2
  4. n = 3, l = 2, m1 = -2, ms = -1/2
  5. n = 3, l = 1, m1 = -1, ms = +1/2
  6. n = 4, l = 1, m1 = 0, ms = +1/2.

हल:
बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु की ऊर्जा (n + 1) के योग पर निर्भर करती है।

  1. सेट हेतु उपकोश 4d = (n + 1) = 4 + 2 = 6
  2. सेट हेतु उपकोश 3d = (n + 1) = 3 + 2 = 5
  3. सेट हेतु उपकोश 4p = (n + 1) = 4 + 1 = 5
  4. सेट हेतु उपकोश 3d = (n + 1) = 3 + 2 = 5
  5. सेट हेतु उपकोश 3p = (n + 1) = 3 + 1 = 4
  6. सेट हेतु उपकोश 4p = (n + 1) = 4 + 1 = 5

अतः (5) < (2) = (4) < (3) = (6) < (1)
3p < 3d = 3d < 4p = 4p < 4d (कक्षकों की ऊर्जा का बढ़ता क्रम)

प्रश्न 63.
ब्रोमीन परमाणु में 35 इलेक्ट्रॉन होते हैं, यह 6 इलेक्ट्रॉन 2p कक्ष, 6 इलेक्ट्रॉन 3p कक्ष एवं 5 इलेक्ट्रॉन 4p कक्षक में रहते हैं, इन इलेक्ट्रॉन में से किसका प्रभावी नाभिकीय आवेश कम होगा?
उत्तर:
अनुभव के आधार पर 4p इलेक्ट्रॉन का प्रभावी नाभिकीय आवेश कम हो गया क्योंकि परिरक्षण प्रभाव की तीव्रता अधिकतम होती है, यह नाभिक से दूर होता है।

प्रश्न 64.
निम्न कक्षकों के जोड़ो में से किसका अधिकतम प्रभावी नाभिकीय आवेश होगा –

  1. 25 एवं 3s
  2. 4d एवं 4f
  3. 3d एवं 3p.

उत्तर:
प्रभावी नाभिकीय आवेश विभिन्न कक्षक भेदन प्रभाव पर निर्भर करता है। भेदन अधिक होने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश की तीव्रता अधिक होती है। अत:

  1. 2s
  2. 4d
  3. 3p

कक्षक अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश रखते हैं।

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प्रश्न 65.
AI एवं Si में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन 3p-कक्षक में उपस्थित होते हैं। इनमें से कौन-से इलेक्ट्रॉन नाभिक से अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश रखते हैं?
हल:
13Al = 1s2, 2s2 2p6, 3s2 3p1
14Si = 1s2, 2s2 2p6, 3s2 3p2
दोनों में कक्षकों की संख्या समान है। Si (+ 4) पर Al (+3) की अपेक्षा अधिक नाभिकीय आवेश होने के कारण Si में नाभिकीय आवेश अधिक प्रभावी होता है।

प्रश्न 66.
अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या को दर्शाइए –

  1. P
  2. Si
  3. Cr
  4. Fe
  5. Kr

उत्तर:

  1. P1515 = 1s2, 2s2, 2p6, 3s2 3px1 3py1 3pz1 (3p में 3 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन)
  2. Si14 = 1s2, 2s2, 2p6, 3s2 3px1 3py1 (3p में 2 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन)
  3. Cr24 = 1s2, 2s2, 2p6, 3s2 3p6 3d5, 4s1 (3d एवं 35 में 6 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन )
  4. Fe26 = 1s2, 2s2 2p6, 3s2 3p6 3d6, 4s2 (3d में 4 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन)
  5. Kr36 = 1s2, 2s2 2p2, 3s2 3p6 3d10, 4s2 4p6 (अयुग्मित इलेक्ट्रॉन 0)

प्रश्न 67.

  1. n = 4 से कितनी उपकक्ष संलग्न होती है?
  2. उपकक्ष, जिसके m, का मान n = 4 के लिए -1/2 होता है, में कितने इलेक्ट्रॉन उपस्थित होंगे?

हल:
1. n = 4 के लिए lmax = (n – 1)
= (4 – 1) = 3
l = 0, 1, 2, 3
उपकोश 4s, 4p, 4d, 4f चार उपकोश।

2. n = 4 के लिए कक्षकों की संख्या = n2 = 42 = 16
किसी कक्षक में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 2
प्रत्येक कक्षक में ms = \(\frac{1}{2}\) चक्रण वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 1
अत: 16 कक्षकों में ms = \(\frac{1}{2}\) चक्रण वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 16

परमाणु की संरचना अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

परमाणु की संरचना वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
किसी तत्व का परमाणु क्रमांक 27 और उसके परमाणु में न्यूट्रॉनों की संख्या 14 है, तो इलेक्ट्रॉनों की संख्या होगी –
(a) 14
(b) 27
(c) 13
(d) 41
उत्तर:
(c) 13

प्रश्न 2.
हुण्ड के नियम के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (1s2, 2s2, 2px1, 2py1, 2pz1) किस तत्व की होगी –
(a) ऑक्सीजन की
(b) नाइट्रोजन की
(c) फ्लुओरीन की
(d) बोरॉन की।
उत्तर:
(b) नाइट्रोजन की

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प्रश्न 3.
नाइट्रोजन के सातवें इलेक्ट्रॉन की चारों क्वाण्टम संख्याएँ हैं –
(a) n = 2, l = 1, m = 1, s = –\(\frac{1}{2}\)
(b) n = 2, l = 2, m = -1, s = +\(\frac{1}{2}\)
(c) n = 2, l = 1, m = +1, s = +\(\frac{1}{2}\)
(d) n = 2, l = 2, m = 2, s = +\(\frac{1}{2}\)
उत्तर:
(d) n = 2, l = 2, m = 2, s = +\(\frac{1}{2}\)

प्रश्न 4.
दिगंशी क्वाण्टम संख्या l वाले उपकोश में कुल कक्षकों की संख्या होगी –
(a) 2l + 1
(b) 3l + 1
(c) 4l + 1
(d) 2l + 1
उत्तर:
(a) 2l + 1

प्रश्न 5.
समस्थानिक में इनकी संख्या समान होती है –
(a) प्रोटॉन
(b) न्यूट्रॉन
(c) प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन
(d) न्यूक्लिऑन
उत्तर:
(a) प्रोटॉन

प्रश्न 6.
रदरफोर्ड के प्रयोग में किस धातु पर a-कणों की बौछार की गयी –
(a) ऐल्युमिनियम
(b) सिल्वर
(c) लोहा
(d) सोना
उत्तर:
(d) सोना

प्रश्न 7.
CO2 के एक अणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या निम्न में से क्या होगी –
(a) 22
(b) 44
(c) 11
(d) 38.
उत्तर:
(a) 22

प्रश्न 8.
किसी तत्व के उदासीन परमाणु में दो K, आठ L, नौ M तथा दो N इलेक्ट्रॉन हैं, तो इनमें कुल d – इलेक्ट्रॉन की संख्या होगी –
(a) 2
(b) 3
(c) 1
(d) 4.
उत्तर:
(c) 1

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प्रश्न 9.
हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार –
(a) ∆x.∆p ≥ \(\frac{h}{4π}\)
(b) ∆x.∆ν ≥ \(\frac{h}{4π}\)
(c) ∆x \(\frac{c}{λ}\) ≥ \(\frac{h}{4π}\)
(d) ∆x.∆m ≥ \(\frac{h}{4p}\)
उत्तर:
(a) ∆x.∆p ≥ \(\frac{h}{4π}\)

प्रश्न 10.
एक परमाणु के लिए n = 3, l = 2 हो तो m के मान होंगे –
(a) – 2, – 1, 0, + 1, +2
(b) -1, 0, +1
(c) -3, -1, 0, + 1, +3
(d) -2, 0 + 1.
उत्तर:
(a) – 2, – 1, 0, + 1, +2

प्रश्न 11.
Cl आयन में इलेक्ट्रॉनों की संख्या होगी –
(a) 17
(b) 18
(c) 35
(d) 37
उत्तर:
(b) 18

प्रश्न 12.
निम्न में से कौन-सा विन्यास ऑफबाऊ सिद्धांत के अनुकूल नहीं है –
(a) 1s2, 2s2 p1
(b) [Kr]4d10, 5s2
(c) [Ar]3a10, 4s1
(d) [Ar]3d4, 4s2
उत्तर:
(c) [Ar]3a10, 4s1

प्रश्न 13.
f उपकोश में कक्षकों की संख्या होगी –
(a) 3
(b) 4
(c) 5
(d) 7
उत्तर:
(d) 7

प्रश्न 14.
रदरफोर्ड के प्रयोग में किस धातु पर a. -कणों की बौछार की गयी –
(a) Al
(b) Ag
(c) Fe
(d) Au
उत्तर:
(d) Au

प्रश्न 15.
n = 3 के लिए। के मान होंगे –
(a) 1, 2, 3
(b) 0, 1, 2
(c) 0, 1,3
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) 0, 1, 2

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प्रश्न 16.
बोर का परमाणु मॉडल व्याख्या कर सकता है –
(a) केवल हाइड्रोजन परमाणु का स्पेक्ट्रम
(b) एक परमाणु या आयन का स्पेक्ट्रम जिसमें केवल एक इलेक्ट्रॉन हो
(c) हाइड्रोजन अणु का स्पेक्ट्रम
(d) सूर्य का स्पेक्ट्रम
उत्तर:
(b) एक परमाणु या आयन का स्पेक्ट्रम जिसमें केवल एक इलेक्ट्रॉन हो

प्रश्न 17.
न्यूट्रॉन के भार की कोटि (Order) है –
(a) 10-23 kg
(b) 10-24 kg
(c) 10-26 kg
(d)10-27 kg
उत्तर:
(d)10-27 kg

प्रश्न 18.
K – शैल (कक्ष) के दो इलेक्ट्रॉनों में भिन्नता होगी –
(a) मुख्य क्वाण्टम संख्या में
(b) दिगंशी क्वाटम संख्या में
(c) चुम्बकीय क्वाण्टम संख्या में
(d) स्पिन (घूर्णन)क्वाण्टम संख्या में
उत्तर:
(d) स्पिन (घूर्णन)क्वाण्टम संख्या में।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. क्लोरीन गैस का परमाणु क्रमांक 17 है। इसके बाह्यतम कक्ष में …………. इलेक्ट्रॉन होंगे।
  2. यदि सम्पूर्ण चुम्बकीय क्वाण्टम संख्याओं का योग 7 हो, तो दिगंशी क्वाण्टम संख्या का मान …… होगा।
  3. परमाणु के नाभिक में …………. और …………. होते हैं।
  4. न्यूट्रॉन की खोज ……….. ने की थी।
  5. उच्चतम तरंगदैर्घ्य वाला विकिरण …………. है।
  6. दिगंशी क्वाण्टम संख्या का मान एक होने पर कक्षक का आकार …………. होगा।
  7. नाभिक के चारों ओर का वह स्थान जहाँ इलेक्ट्रॉनों के पाये जाने की प्रायिकता अधिकतम होती है, को . …………. कहते हैं।
  8. एक तत्व का परमाणु क्रमांक 30 है और उसकी द्रव्यमान संख्या 66 है। इसके परमाणु में प्रोटॉन …………. न्यूट्रॉन ………… होंगे।
  9. चुम्बकीय क्वाण्टम संख्या …………. से संबंधित है।

उत्तर:

  1. 7
  2. 3
  3. प्रोटॉन, न्यूट्रॉन
  4. चैडविक
  5. रेडियो तरंग
  6. डम्बल
  7. कक्षक
  8. 30, 36,
  9. अभिविन्यास।

प्रश्न 3.
उचित संबंध जोड़िए –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 33
उत्तर:

  1. (c)
  2. (e)
  3. (a)
  4. (d)
  5. (b)
  6. (h)
  7. (f)
  8. (g)

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प्रश्न 4.
एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की थी?
  2. डी-ब्रॉग्ली समीकरण क्या है?
  3. दिगंशी क्वाण्टम संख्या को किससे दर्शाते हैं?
  4. हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता के सिद्धान्त का क्या सूत्र है?
  5. न्यूट्रॉन की खोज किसने की?

उत्तर:

  1. जे.जे.थॉमसन,
  2. λ = \(\frac{h}{mv}\)
  3. l
  4. (∆x) x (∆p) ≥ \(\frac{h}{4π}\)
  5. चैडविक।

परमाणु की संरचना अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
देहली आवृत्ति क्या है?
उत्तर:
प्रत्येक धातु के लिए, विशिष्ट न्यूनतम आवृत्ति न होती है। जिसे देहली आवृत्ति कहते हैं। इस आवृत्ति से कम मान पर प्रकाश विद्युत् प्रभाव प्रेक्षित नहीं है।

प्रश्न 2.
कार्यफलन किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी इलेक्ट्रॉन को उत्सर्जित करने के लिए आवश्यक न्यूनतम आवृत्ति hvo होती है। इसे कार्य फलन (wo) भी कहते हैं।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित विकिरणों के प्रकारों को आवृत्ति के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए –

(a) माइक्रोवेव ओवन (Oven) से विकिरण
(b) यातायात संकेत से त्रणमणि (Amber) प्रकाश
(c) एफ. एम. रेडियो से प्राप्त विकिरण
(d) बाहरी दिक् से कॉस्मिक किरणें
(e) x-किरणें।

हल:
विकिरणों की आवृत्ति का बढ़ता क्रम निम्न है –
c < a< b < e < d

प्रश्न 4.
कैथोड किरणों की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
विशेषताएँ:

  1. कैथोड किरणें सरल रेखा में गमन करती हैं। यदि इनके मार्ग में कोई अपारदर्शी ठोस पदार्थ रख दिया जाये तो ग्लास ट्यूब के दूसरी ओर उसकी छाया पड़ती है।
  2. ये किरणें धातुओं से टकराकर एक्स किरणें उत्पन्न करती हैं।

प्रश्न 5.
न्यूट्रॉन की खोज किस प्रकार हुई ? इसके दो लक्षण लिखिए।
उत्तर:
सन् 1932 में चैडविक ने बतलाया कि जब बेरीलियम पर a कणों की बमबारी की जाती है तो एक नया कण प्राप्त होता है, यह कण उदासीन होता है अर्थात् इस पर कोई आवेश नहीं होता है। इसका द्रव्यमान प्रोटॉन के बराबर होता है। इसे न्यूट्रॉन कहते हैं।

लक्षण:

  1. नाभिक में उपस्थित आवेशहीन कण है।
  2. न्यूट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान के बराबर 1.6749 x 10-27 kg या 1.00893 a.m.u. है।

प्रश्न 6.
परमाणु क्रमांक एवं द्रव्यमान संख्या में अंतर लिखिये।
उत्तर:
परमाणु क्रमांक एवं द्रव्यमान संख्या में अंतर –
परमाणु क्रमांक

  1. परमाणु क्रमांक परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या है।
  2. इसे Z से दर्शाते हैं।

द्रव्यमान संख्या

  1. द्रव्यमान संख्या परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉनों की संख्या का योग है।
  2. इसे A से दर्शाते हैं।

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प्रश्न 7.
परमाणु कक्षक किसे कहते हैं?
उत्तर:
नाभिक के चारों ओर का वह त्रिविम क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉनों के पाये जाने की प्रायिकता अधिकतम रहती है, परमाणु कक्षक कहलाता है।

प्रश्न 8.
α – कण किसे कहते हैं?
उत्तर:
α – कण को 2He4 से दर्शाते हैं क्योंकि α – कण हीलियम नाभिक है जिस पर 2 इकाई धन आवेश होता है तथा इसका द्रव्यमान He नाभिक के बराबर 4 इकाई होता है।

प्रश्न 9.
रदरफोर्ड.परमाणु मॉडल में a-कण के प्रत्यावर्तन से क्या निष्कर्ष है?
उत्तर:

  1. अधिकांश α – कण स्वर्णपत्र के आर-पार सीधी रेखा से निकल जाते हैं। अतः परमाणु में नाभिक तथा इलेक्ट्रॉनों के बीच का स्थान लगभग रिक्त रहता है।
  2. कुछ α – कण स्वर्णपत्र से टकराने के पश्चात् विचलित हो जाते हैं क्योंकि परमाणु के भीतर एक धनावेशित केन्द्र होता है।
  3. 20,000 α – कण में एक a-कण नाभिक से टकराकर वापस आता है क्योंकि परमाणु के आकार की तुलना में नाभिक बहुत छोटा एवं दृढ़ होता है।

प्रश्न 10.
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल में कौन-सी कमियाँ हैं?
उत्तर:
सन् 1913 में नील्स बोर ने रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल को निम्नांकित कारणों से दोषपूर्ण बताया –

1. विद्युत् चुम्बकीय सिद्धान्त के अनुसार जब कोई आवेशित कण किसी परिपथ में भ्रमण करता है तो वह विकिरणों के रूप में कुछ ऊर्जा मुक्त करता है। इसी प्रकार इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कक्षीय गति करेगा तो उसकी ऊर्जा धीरे-धीरे विकिरणों के रूप में मुक्त होगी और इलेक्ट्रॉन धीरे-धीरे नाभिक के समीप आ जायेगा और अंत में यह नाभिक में समाहित हो जायेगा। इस प्रकार परमाणु अस्थायी होगा जबकि वास्तव में ऐसा नहीं होता।

2. इस मॉडल के अनुसार परमाण्वीय स्पेक्ट्रम सतत् होना चाहिये जबकि प्रयोगों द्वारा स्पष्ट है कि रेखाएँ प्राप्त होती हैं।

3. इस मॉडल के आधार पर विभिन्न कोशों में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या को नहीं दर्शाया जा सकता है।

प्रश्न 11.
विद्युत् चुम्बकीय तरंगें क्या हैं?
उत्तर:
किसी उच्च आवृत्ति वाली प्रत्यावर्ती धारा में से विकिरणों के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित होती है जो एक प्रकार के तरंगों के समान होती है तथा इसका वेग प्रकाश के वेग के समान होता है। ये तरंगें विद्युत् तथा चुम्बकीय क्षेत्रों के दोलन के कारण उत्पन्न होती हैं। इसलिये इन्हें विद्युत् चुम्बकीय तरंगें कहते हैं।

प्रश्न 12.
परमाणु का नाभिक α – कणों को प्रतिकर्षित करता है, क्यों?
उत्तर:
प्रत्येक α – कण पर 2 इकाई धन आवेश होता है। प्रत्येक परमाणु के केन्द्र में धन आवेशित नाभिक होता है। हम जानते हैं कि समान आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं इसलिए परमाणु का नाभिक α – कणों को प्रतिकर्षित करते हैं।

प्रश्न 13.
ऐनोड किरणों तथा कैथोड किरणों में अंतर लिखिए।
उत्तर:
ऐनोड किरणों तथा कैथोड किरणों में अंतर –
ऐनोड किरणे:

  1. यह धन आवेशित कणों से मिलकर बनी होती है।
  2. ऐनोड किरणों की प्रकृति विसर्जन नली में ली गई गैस की प्रकृति पर निर्भर करती है।
  3. ऐनोड किरणों में उपस्थित कणों का द्रव्यमान – विसर्जन नली में ली गई गैस के परमाणु के द्रव्यमान के बराबर होता है।

कैथोड किरणें:

  1. यह ऋण आवेशित कणों से मिलकर बनी होती है।
  2. कैथोड किरणों की प्रकृति विसर्जन नली में ली गई गैस की प्रकृति पर निर्भर नहीं करती।
  3. कैथोड किरणों में उपस्थित कणों का द्रव्यमान नगण्य होता है।

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प्रश्न 14.
निम्नलिखित में से कौन-सा कक्षक उच्च प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा –

  1. 25 और 3s
  2. 4d और 4f
  3. 3d और 3p

उत्तर:

  1. 2s कक्ष के अधिक समीप है अत: यह कक्षक उच्च प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा।
  2. 4d कक्षक उच्च प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा।
  3. 3p कक्षक उच्च प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा।

प्रश्न 15.
3p कक्षक में उपस्थित कोणीय नोड तथा त्रिज्य नोडों की कुल संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
3p कक्षक के लिए-मुख्य क्वाण्टम संख्या n = 3 तथा
दिगंशी क्वाण्टम संख्या l = 1
कोणीय नोड की संख्या = l = 1
त्रिज्य नोडों की संख्या = n – l – 1 = 3 – 1 – 1 = 1

प्रश्न 16.
परमाणु और आयन में क्या अंतर है?
उत्तर:
परमाणु और आयन में अंतर –
परमाणु:

  1. यह पूर्णतः उदासीन होता है।
  2. इसमें प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।
  3. परमाणु अस्थायी होता है तथा रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेता है।

आयन:

  1. यह धन आवेशित या ऋण आवेशित होता है।
  2. इसमें प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान नहीं होती है।
  3. आयन विलयन अवस्था में स्थायी होता है।

प्रश्न 17.
विद्युत् चुम्बकीय स्पेक्ट्रम क्या है?
उत्तर:
विभिन्न प्रकार के विद्युत् चुम्बकीय विकिरणों को उनकी आवृत्ति या तरंगदैर्घ्य के बढ़ते या घटते क्रम में व्यवस्थित करने से जो ग्राफ प्राप्त होता है उसे विद्युत् चुम्बकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं ।

प्रश्न 18.
द्रव्य तरंगें विद्युत् चुम्बकीय तरंगों से भिन्न हैं। समझाइये।
उत्तर:
द्रव्य तरंगें विद्युत् चुम्बकीय तरंगों से निम्न प्रकार भिन्न हैं –

  1. इनके तरंगदैर्घ्य का मान विद्युत् चुम्बकीय तरंगों की तुलना में कम होता है।
  2. इनका वेग विद्युत् चुम्बकीय तरंगों की तुलना में कम है।
  3. द्रव्य तरंगें किसी कण से उत्सर्जित नहीं होतीं बल्कि कण के साथ सम्बद्ध होती हैं।

प्रश्न 19.
इलेक्ट्रॉन अपने निश्चित कक्षाओं में ही घूमते हैं। क्यों?
उत्तर:
गतिशील एवं आवेशयुक्त इलेक्ट्रॉन एक ऊर्जा स्तर से दूसरे ऊर्जा स्तर में जाने पर ऊर्जा का विकिरण या अवशोषण करते हैं जिसके फलस्वरूप परमाणु अस्थिर हो जाता है। परमाणु को स्थायित्व देने हेतु इलेक्ट्रॉन विशिष्ट कक्षाओं में घूमते हैं।

प्रश्न 20.
एक गतिशील इलेक्ट्रॉन के द्वारा कण एवं तरंग, दोनों की प्रकृति दर्शाई जाती है। कारण स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन की कणीय प्रकृति के कारण इसका एक निश्चित संवेग होता है तथा गतिशील होने के कारण यह तरंग गुण दर्शाता है। इस प्रकार इलेक्ट्रॉन दोनों गुण एक साथ दर्शाता है।

प्रश्न 21.
तीव्र गतिशील इलेक्ट्रॉन की स्थिति और वेग को एक साथ ज्ञात करना असंभव है, क्यों?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन एक अतिसूक्ष्म कण है। अतः उसे कम तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश जैसे, किरण या एक्स किरणों से ही देखा जा सकता है। इलेक्ट्रॉनों को देखने के लिये यह आवश्यक है कि फोटॉन इलेक्ट्रॉन से टकराकर वापिस आये। लेकिन इलेक्ट्रॉन का फोटॉन से टकराने के पश्चात् वेग बदल जाता है। इसलिये इलेक्ट्रॉन की स्थिति और वेग को एक साथ ज्ञात करना संभव नहीं है।

प्रश्न 22.
क्रोमियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 4s23d4 के स्थान पर 4s13d5 लिखा जाता है, क्यों?
उत्तर:
क्रोमियम का सामान्य अवस्था में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 4s23d4 होना चाहिये परन्तु 3d4 के.यदि 4 इलेक्ट्रॉन हों तो यह 3d कक्षक अपूर्ण कक्षक के रूप में होगा तथा अस्थायित्व को दर्शाता है। यदि 4s का एक इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर 3d कक्षक में चला जाता है तो 4s तथा 3d कक्षक दोनों कक्षक अर्धपूर्ण कक्षक है जो स्थायित्व को दर्शाते हैं इसलिये क्रोमियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 4s23d4 के स्थान पर 4s13d5 लिखा जाता है।

प्रश्न 23.
कॉपर का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 4s23d1 सही क्यों नहीं है?
उत्तर:
कॉपर का सामान्य अवस्था में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 4s23d9 है। d कक्षक में 9 इलेक्ट्रॉन हैं जो अपूर्ण कक्षक है तथा अस्थायी है। यदि 4s का एक इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर 3d कक्षक में चला जाता है तो 4s अर्धपूर्ण तथा 3d कक्षक पूर्णकक्षक है जो अधिक स्थायी है इसलिये कॉपर का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 4s23d9 के स्थान पर 4s13d10 लिखा जाता है।

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प्रश्न 24.
मैक्स प्लांक का क्वाण्टम सिद्धान्त लिखिए।
उत्तर:
मैक्स प्लांक का क्वाण्टम सिद्धान्त –
1. किसी परमाणु या अणु द्वारा विकरित ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन सतत् न होकर निश्चित ऊर्जा के बण्डलों या पैकेटों से होता है जिन्हें क्वाण्टम कहते हैं।

2. प्रत्येक क्वाण्टम से सम्बद्ध ऊर्जा विकिरण की आवृत्ति के समानुपाती होती है।
Ε ∝ ν
E = hν, जहाँ h = प्लांक स्थिरांक है।

3. कोई भी अणु या परमाणु क्वाण्टम के सरल गुणांकों में ही ऊर्जा अवशोषित या उत्सर्जित करती है।

प्रश्न 25.
परमाणु के मौलिक कण क्या हैं? इनके नाम, द्रव्यमान आवेश सहित लिखिये।
उत्तर:
परमाणु तीन प्रकार के कणों से मिलकर बना है, जिन्हें मूलभूत कण या मौलिक कण कहते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 34

प्रश्न 26.
फोटॉन किसे कहते हैं?
उत्तर:
विकरित ऊर्जा कणिकाओं को फोटॉन कहते हैं अर्थात् प्रकाश के लिये विकिरण का क्वाण्टम hν एक फोटॉन कहलाता है। ये द्रव्यमान रहित कणिकाओं के पैकेट या बण्डल होते हैं।

प्रश्न 27.
समरफील्ड के परमाणु मॉडल की प्रमुख विशेषताएँ लिखिये।
उत्तर:
समरफील्ड के परमाणु मॉडल की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. इलेक्ट्रॉन वृत्तीय कक्षाओं के साथ-साथ दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में घूमते हैं जहाँ दो त्रिज्यायें होती हैं।
  2. कक्षाएँ उप कक्षाओं से मिलकर बनी होती हैं।
  3. किसी कक्षा में उप-कक्षाओं की संख्या क्वाण्टम संख्या n के बराबर होती है।

प्रश्न 28.
क्वाण्टम किसे कहते हैं?
उत्तर:
मैक्स प्लांक के क्वाण्टम सिद्धांत के अनुसार किसी परमाणु या अणु से ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन सतत् रूप से न होकर सूक्ष्म पैकेट या क्वाण्टा के रूप में ऊर्जा का संचरण होता है और इस ऊर्जा के अवशोषण या उत्सर्जन 1s , का मात्रक क्वाण्टम कहलाता है।

प्रश्न 29.
ऑफबाऊ का नियम लिखिये।
उत्तर:
ऑफबाऊ एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ क्रमिक रचना या रचना करना है। इस नियम के अनुसार, किसी बहु – ‘इलेक्ट्रॉन वाले परमाणु के विभिन्न कक्षकों में इलेक्ट्रॉन बढ़ती हुई ऊर्जा या घटते हुये स्थायित्व के क्रम में प्रवेश करते हैं। अर्थात् इलेक्ट्रॉन पहले निम्न ऊर्जा वाले कक्षक में जाता है फिर उपयुक्त ऊर्जा स्तर द्वारा उच्च ऊर्जा स्तर वाले कक्षक में चला जाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 35
विभिन्न उपकोशों के लिये बढ़ती हुई ऊर्जा का क्रम निम्नलिखित है –
is 2s < 2p < 3s < 3p < 4s < 3d < 4p < 5s < 4d < 5p < 6s < 4f < 5d < 6p < 7s < 5f < 6d < 7p

प्रश्न 30.
जीमेन प्रभाव क्या है?
उत्तर:
जीमेन के अनुसार स्पेक्ट्रमी रेखाएँ उत्सर्जित करने वाले स्रोत पर चुम्बकीय क्षेत्र लगाने पर स्पेक्ट्रम की रेखाएँ अनेक सूक्ष्म रेखाओं में विभाजित हो जाती हैं, इस घटना को जीमेन प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 31.
क्लोरीन के अंतिम इलेक्ट्रॉन व अयुग्मित इलेक्ट्रॉन के लिये चारों क्वाण्टम संख्याओं के मान लिखिये।
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 36
Cl17, = 1s2 2s2 2p6 3s2 3p5
अंतिम इलेक्ट्रॉन हेतु, n = 3, l = 1, m = 0, s = –\(\frac{1}{2}\)
अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हेतु,
n = 3, l = 1, m = +1, s = +\(\frac{1}{2}\)

परमाणु की संरचना लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पॉउली का अपवर्जन नियम उदाहरण सहित लिखिए। इसकी उपयोगिता भी लिखिए।
उत्तर:
पॉउली का अपवर्जन नियम-“किसी भी परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वाण्टम संख्याएँ समान नहीं हो सकती। दूसरे शब्दों में, एक ही परमाणु के किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों की तीन क्वाण्टम संख्याएँ समान हो सकती हैं परन्तु चौथी चक्रण क्वाण्टम संख्या अवश्य भिन्न होगी। अर्थात् किसी भी कक्षक में विपरीत चक्रण वाले केवल दो इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं।”
उदाहरण:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 52
महत्व:

  1. परमाणु के विभिन्न मुख्य ऊर्जा स्तरों, उप ऊर्जा स्तरों में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या और विभिन्न इलेक्ट्रॉनों की क्वाण्टम संख्याओं की गणना कर सकते हैं।
  2. इस नियम से परमाणु संरचना को काफी स्पष्ट रूप से समझाया जा सकता है।

प्रश्न 2.
हुण्ड के अधिकतम बहुलता के नियम को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
हुण्ड के नियम के अनुसार, “किसी भी उपकोश के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों के जोड़े तब तक नहीं बनते हैं जब तक कि उस उपकोश के समस्त कक्षकों में एक-एक इलेक्ट्रॉन नहीं चला जाता है।” दूसरे शब्दों में, समान ऊर्जा के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तभी होता है जब आने वाले इलेक्ट्रॉन के लिये कोई रिक्त कक्षक न मिले। अर्थात् किसी भी उपकोश के कक्षक में इलेक्ट्रॉन इस प्रकार से भरते हैं कि समान चक्रण के अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या अधिकतम हो।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 38

प्रश्न 3.
डी-ब्रॉग्ली की संकल्पना लिखिए।
उत्तर:
डी-ब्रॉग्ली ने इलेक्ट्रॉन के तरंग स्वरूप को प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार “प्रत्येक गतिशील सूक्ष्म कण तरंग के गुण प्रदर्शित करता है।” प्लांक के क्वाण्टम सिद्धान्त के अनुसार,
E = hν …(1)
आइन्स्टीन के द्रव्यमान ऊर्जा संबंध से,
∴ E = mc2 …..(2)
समी. (1) और (2) से,
mc2 = hν
⇒ mc = h\(\frac{c}{λ}\)
⇒ mc = \(\frac{h}{λ}\)
⇒ λ = \(\frac{h}{mc}\)
कण की प्रकृति तरंग जैसी है इसलिये c को v से प्रतिस्थापित किया जा सकता है। यदि m संहति वाला कण v वेग से गतिमान है तो
λ = \(\frac{h}{mv}\) …(3)
अतः λ = \(\frac{h}{p}\) [mv = p] …(4)
अतः समी. (4) से स्पष्ट है किसी गतिशील कण का तरंगदैर्घ्य उसके संवेग पर निर्भर करता है।

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प्रश्न 4.
आप कैसे सिद्ध करोगे कि अतिसूक्ष्म कण जैसे इलेक्ट्रॉन द्वैती प्रकृति दर्शाते हैं?
उत्तर:
कणीय प्रकृति:
जब कोई अतिसूक्ष्म कण जैसे इलेक्ट्रॉन जिंक सल्फाइड के पर्दे पर टकराता है, तो उसका एक धब्बा बन जाता है, इस प्रकार जितने इलेक्ट्रॉन पर्दे पर टकराते हैं उतने धब्बे पर्दे पर बन जाते हैं तथा ये धब्बे स्थानीकृत होते हैं और तरंग के समान पूरे क्षेत्र में फैलते नहीं हैं।

तरंग प्रकृति:
डेविसन और जर्मर ने अपने प्रयोग में निकिल के क्रिस्टल पर इलेक्ट्रॉनों के एक किरण पुंज को भेजा और यह देखा कि ये किरणें क्रिस्टल से ठीक उस प्रकार उस कोण पर विवर्तित होती है जिस पर ब्रैग समीकरण के अनुसार प्रकाश की किरणें होती हैं।

इससे सिद्ध होता है कि इलेक्ट्रॉन कणीय एवं तरंग दोनों प्रकृति दर्शाता है, इसे पदार्थ की द्वैती प्रकृति कहते हैं।

प्रश्न 5.
कैथोड किरणों के प्रमुख गुण लिखिए।
उत्तर:
कैथोड किरणों के गुण:

  1. कैथोड किरणें प्रकाश के वेग से सरल रेखा में गमन करती हैं।
  2. कैथोड किरणों के मार्ग में यदि विद्युत् क्षेत्र लगाया जाये तो ये धनावेशित क्षेत्र की ओर विक्षेपित हो जाती हैं।
  3. इनके मार्ग में हल्का पैडल चक्र रख दिया जाये तो वह घूमने लगता है जो किरणों में उपस्थित तीव्र गतिज ‘ऊर्जा वाले कणों के कारण होता है।
  4. ये किरणें गैसों को आयनित कर देती हैं।
  5. ये किरणें धातुओं जैसे, टंगस्टन से टकराकर X-किरणें उत्पन्न करती हैं।
  6. ये किरणें फोटोग्राफिक प्लेट को प्रभावित करती हैं।

प्रश्न 6.
इलेक्ट्रॉन के प्रमुख गुण लिखिये।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन के गुण:

  1. सभी गैसों में ऋण आवेश युक्त कण उपस्थित हैं जो विसर्जन नली में 10-4 वायुमण्डलीय दाब पर गैस पर उच्च वोल्टता पर कैथोड से उत्पन्न होते हैं।
  2. इलेक्ट्रॉन को -1e0 से दर्शाते हैं।
  3. इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान हाइड्रोजन के द्रव्यमान का \(\frac{1}{1837}\) वाँ भाग होता है तथा प्रत्येक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.1 x 10-28 gm या 9.1 x 10-31 kg है।
  4. प्रत्येक इलेक्ट्रॉन का आवेश 1.60 x 10-19 कूलॉम होता है।

प्रश्न 7.
ऐनोड किरणें कैसे उत्पन्न होती हैं? उसके गुण लिखिए।
उत्तर:
गोल्डस्टीन:
गोल्डस्टीन ने सन् 1886 में क्रुक्स नली में छिद्रित कैथोड लगाकर न्यून दाब पर गैस में विद्युत् विसर्जन करने पर पाया कि कैथोड किरणें निकलने के कुछ समय पश्चात् ऐनोड से अदृश्य किरणें निकलकर छिद्रित कैथोड की ओर गमन करती हैं। इन किरणों को ऐनोड किरणें या केनाल किरणें कहते हैं।

ऐनोड किरणों के गुण:

  1. ऐनोड किरणें सरल रेखा में गमन करती हैं।
  2. ऐनोड किरणों के मार्ग में यदि विद्युत् क्षेत्र लगाया जाये तो ये ऋण आवेशित क्षेत्र की ओर मुड़ जाती हैं।
  3. ऐनोड किरणें अपने पथ में रखे हुए पैडल चक्र में यांत्रिक गति उत्पन्न करती हैं।
  4. विसर्जन नली में अलग-अलग गैस ली जाये तो प्रत्येक दशा में प्राप्त ऐनोड कणों की संहति अलग-अलग होती है।

प्रश्न 8.
प्रोटॉन के लक्षण लिखिए।
उत्तर:
प्रोटॉन के लक्षण:

  1. विसर्जन नली में अलग-अलग गैसें लेने पर अलग-अलग द्रव्यमान वाले धनात्मक कण मिलते हैं। हाइड्रोजन गैस से मिलने वाले धनात्मक कण प्रोटॉन कहलाते हैं। इनका द्रव्यमान सबसे कम है।
  2. प्रोटॉन को 1H1 से दर्शाते हैं।
  3. प्रोटॉन का द्रव्यमान 1.67 x 10-24 gm या 1.67 x 10-27 kg होता है।
  4. प्रोटॉन पर आवेश 1.6 x 10-19 कूलॉम होता है।

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प्रश्न 9.
परमाणु के विभिन्न कोशों में इलेक्ट्रॉन भरे जाने की बोर-बरी व्यवस्था लिखिए।
उत्तर:
परमाणु के कोशों में इलेक्ट्रॉनों के भरे जाने की क्रमिक व्यवस्था बोर-बरी वैज्ञानिक द्वारा दी गई है –

  1. किसी कक्षा n में इलेक्ट्रॉनों की संख्या अधिकतम 2n होगी।
  2. अंतिम कक्षा में 8 और अंतिम से दूसरी कक्षा में 18 से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं होंगे।
  3. अंतिम कक्षा में 2 से अधिक और अंतिम से दूसरी कक्षा में 9 से अधिक इलेक्ट्रॉन उसी समय हो सकते हैं जब पहले की कक्षायें नियमानुसार भर चुकी हों।
  4. अंतिम कक्षा में 8 इलेक्ट्रॉन हो जाने पर अगली कक्षा में इलेक्ट्रॉन भरे जाते हैं।
  5. यह आवश्यक नहीं कि किसी कक्षा में जब तक 2n के नियम के अनुसार इलेक्ट्रॉन पूरे न हो जाये तभी अगली कक्षा में इलेक्ट्रॉन प्रवेश करेंगे।

प्रश्न 10.
कक्षकों के स्थायित्व से क्या समझते हैं?
उत्तर:
अर्धपूर्ण एवं पूर्ण कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का वितरण सममित होता है और यह सममिति कक्षकों को अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करती है। किसी परमाणु के समान ऊर्जा वाले कक्षकों के मध्य इलेक्ट्रॉनों का विनिमय होता रहता है तथा इस प्रक्रम के दौरान ऊर्जा मुक्त होती है जिसके फलस्वरूप कक्षक स्थायित्व प्राप्त कर लेता है। कक्षक के अर्धपूर्ण या पूर्ण भरे होने पर इलेक्ट्रॉनों के विनिमय की सम्भावना अधिकतम रहती है। इसलिये ये कक्षक अधिक स्थायी होते हैं।

प्रश्न 11.
समस्थानिक तथा समभारिक में अंतर लिखिये।
उत्तर:
समस्थानिक तथा समभारिक में अंतर –
समस्थानिक

  1. एक ही तत्व के विभिन्न परमाणु जिनके परमाणु क्रमांक समान किन्तु परमाणु भार भिन्न हैं, समस्थानिक कहलाते हैं।
  2. नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या समान किन्तु न्यूट्रॉन की संख्या भिन्न होती है।
  3. रासायनिक गुणों में समानता होती है।
  4. बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है।

समभारिक:

  1. विभिन्न तत्वों के विभिन्न परमाणु जिनके परमाणु भार समान किन्तु परमाणु क्रमांक भिन्न हैं, समभारिक कहलाते हैं।
  2. नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या तथा न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है।
  3. रासायनिक गुणों में भिन्नता होती है।
  4. बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।

प्रश्न 12.
बोर के परमाणु मॉडल के प्रमुख अभिगृहीत लिखिए।
उत्तर:
बोर के परमाणु मॉडल के प्रमुख अभिगृहीत निम्नलिखित हैं –

1. परमाणु एक अतिसूक्ष्म कण है, जिसके केन्द्र में नाभिक स्थित है और नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉन बंद वृत्तीय कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते हैं, जिन्हें कोश भी कहते हैं।

2. परमाणु नाभिक के चारों ओर अनेक वृत्ताकार कक्षाएँ संभव हैं किन्तु इलेक्ट्रॉन कुछ विशिष्ट कक्षाओं में ही घूम सकते हैं जिनमें घूमने से इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा में कोई हानि नहीं होती।

3. ईलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में घूमते हैं जिनमें उनका कोणीय संवेग \(\frac{h}{2π}\) या उनका सरल गुणांक होता है। इन कक्षाओं को स्थायी कक्षक कहते हैं। यदि इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान m, कक्षा की त्रिज्या r तथा इलेक्ट्रॉन का वेग v हो तो –
mvr = \(\frac{nh}{2π}\) जहाँ n = 1, 2, 3

4. इलेक्ट्रॉन सामान्यतः अपनी ऊर्जा के अनुरूप वाली कक्षा में ही चक्कर लगाता रहता है, किन्तु जब यह बाहर से ऊर्जा अवशोषित कर लेता है तो यह कूदकर उच्च ऊर्जा वाली कक्षा में चला जाता है। यहाँ 10-8 सेकण्ड ठहरकर तुरन्त निम्न ऊर्जा वाली कक्षा में आ जाता है तथा वापस लौटते समय इलेक्ट्रॉन विद्युत् चुम्बकीय तरंगों के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित करता है।

5. स्थायी कक्षाओं की ऊर्जा निश्चित होती है। इन कक्षाओं को ऊर्जा स्तर कहते हैं तथा नाभिक से बाहर की ओर इनका क्रम रहता है। इन ऊर्जा स्तरों में घूमने वाले इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का उत्सर्जन नहीं करते।

प्रश्न 13.
कक्ष और कक्षक में अंतर लिखिए।
उत्तर:
कक्ष और कक्षक में अंतर:
कक्ष:

  1. नाभिक के चारों ओर निश्चित वृत्ताकार पथ जिस पर इलेक्ट्रॉन गमन करता है कक्ष कहलाता है।
  2. सभी कक्ष वृत्ताकार होते हैं।
  3. कक्ष अदिशात्मक होते हैं।
  4. यह इलेक्ट्रॉन की द्विविमीय गति को दर्शाता है।
  5. कोश के इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 2n2 होती है।

कक्षक:

  1. नाभिक के चारों ओर त्रिविमीय क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉन के पाये जाने की प्रायिकता अधिकतम होती है।
  2. s कक्षक के अलावा विभिन्न कक्षकों का आकार अलग-अलग होता है।
  3. s कक्षक को छोड़कर सभी दिशात्मक होते हैं।
  4. यह इलेक्ट्रॉन की त्रिविमीय गति को दर्शाता है।
  5. किसी कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं।

प्रश्न 14.
(n + 1) नियम क्या है?
उत्तर:

1. विभिन्न कक्षकों में इलेक्ट्रॉन (n + 1) नियम के अनुसार भरते हैं जहाँ n मुख्य क्वाण्टम संख्या तथा l दिगंशी क्वाण्टम संख्या है। इस नियम के अनुसार नया इलेक्ट्रॉन उस कक्षक में पहले प्रवेश करता है जिसके लिये n + 1 का मान सबसे कम होता है।
उदाहरण:
2s और 2p के लिये n + 1 के मान क्रमशः 2 और 3 हैं। अतः इलेक्ट्रॉन पहले 25 उपकोश में प्रवेश करेगा।

2. यदि दो या दो से अधिक कक्षकों के लिये n + 1 का मान समान हो तो नया आने वाला इलेक्ट्रॉन उस कक्षक में प्रवेश करता है जिसके लिये n का मान न्यूनतम होता है।
उदाहरण:
4p और 3d दोनों उपकोशों के लिये n + 1 का मान 5 है। लेकिन 3d के लिये n का मान कम है। इसलिये 3d उपकोश में इलेक्ट्रॉन पहले प्रवेश करेगा।

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प्रश्न 15.
बोर सिद्धान्त के मुख्य दोष क्या हैं?
उत्तर:
बोर सिद्धान्त के मुख्य दोष निम्नलिखित हैं –

  1. बोर के सिद्धान्त के द्वारा एक से अधिक इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं के स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं की जा सकती है।
  2. बोर के सिद्धान्त के अनुसार इलेक्ट्रॉन की कक्षाओं को वृत्ताकार माना गया है जबकि कक्षाएँ दीर्घ वृत्ताकार भी होती हैं।
  3. यह हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धान्त की व्याख्या नहीं करता।
  4. यह इलेक्ट्रॉन की द्वैती प्रकृति का स्पष्टीकरण नहीं करता है।

प्रश्न 16.
हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धान्त क्या है? इसका गणितीय रूप लिखिए।
उत्तर:
इस सिद्धान्त के अनुसार इलेक्ट्रॉन जैसे गतिमान अति सूक्ष्म कण की स्थिति तथा संवेग का एक साथ सही निर्धारण करना संभव नहीं है। यदि एक को निश्चितता के साथ निर्धारित कर लिया जाये तो दूसरे का निर्धारण करना अनिश्चित हो जाता है।
गणितीय रूप:
∆x × ∆p ≥ \(\frac{h}{4π}\)
∆x × m∆v ≥ \(\frac{h}{4π}\)
जहाँ ∆x = स्थिति में अनिश्चितता
∆p = संवेग में अनिश्चितता
h = प्लांक स्थिरांक है।

इस समीकरण के अनुसार गतिशील सूक्ष्म कण की स्थिति की अनिश्चितता और संवेग की अनिश्चितता विपरीत अनुपात में होते हैं। यदि एक का मान कम हो तो दूसरे का मान अधिक होगा।

प्रश्न 17.
ऑफबाऊ सिद्धान्त के आधार पर निम्नलिखित परमाणुओं की मूल अवस्था में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए –

  1. निऑन (Z = 10)
  2. फॉस्फोरस (Z = 15)
  3. क्लोरीन (Z = 17)
  4. पोटैशियम (Z = 19)

उत्तर:

  1. निऑन (Z = 10) – 1s2 2s2 2px2, 2py2, 2pz2
  2. फॉस्फोरस (Z = 15) – 1s2 2s2 2p6 3s2 3px1 3py1, 3pz1
  3. क्लोरीन (Z = 17) – 1s2 2s2 2p6 3s2 3px2 3py2 3pz2
  4. पोटैशियम (Z = 19) – 1s2 2s2 2p6 3s2 3p6 4s1.

प्रश्न 18.
निम्न इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों में हुण्ड का नियम प्रदर्शित कीजिए –

1. 8O+2
2. 7N-3
3. 6C-1

उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 39

प्रश्न 19.
3px, 4py तथा 5pz कक्षक में यदि एक-एक इलेक्ट्रॉन हो तो उनके लिये चारों क्वाण्टम संख्या के मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 40

प्रश्न 20.
क्लोरीन परमाणु के 17वें तथा Fe के 26 वें इलेक्ट्रॉन के लिये चारों क्वाण्टम संख्याओं के मान लिखिये।
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 41

प्रश्न 21.
इलेक्ट्रॉन का – मान किसने ज्ञात किया तथा कैसे ज्ञात किया?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन के \(\frac{e}{m}\) मान का निर्धारण सर जे.जे थॉमसन द्वारा किया गया। सर थॉमसन द्वारा इलेक्ट्रॉन के आवेश (e) तथा द्रव्यमान (m) का निर्धारण करने के लिये ऐनोड से आगे पहुँचने पर सीधी रेखाओं में चलने वाली किरण पुंज का चुनाव करने के लिये किरणों को एक गोल डिस्क से गुजरने दिया जाता है। किरणों पर आरोपित चुम्बकीय क्षेत्र एवं विद्युत् क्षेत्र की दिशाएँ एक-दूसरे के लम्बरूप तथा किरणों की गति की दिशा के भी लम्बरूप होती हैं तथा किरणों के विक्षेपण को मापकर कण के आवेश (e) तथा द्रव्यमान (m) का अनुपात ज्ञात किया जाता है। \(\frac{e}{m}\) का मान 1.76 x 108 कूलॉम/ग्राम प्राप्त होता है।

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प्रश्न 22.
प्राकृतिक रेडियो ऐक्टिवता क्या है? समझाइये।
उत्तर:
प्रो. हेनरी बेकरल ने सन् 1898 में पाया कि यूरेनियम तथा उनके यौगिकों में एक विशिष्ट गुण होता है। इन पदार्थों से लगातार अदृश्य किरणों का उत्सर्जन होता है, जो जिंक सल्फाइड की प्लेट पर टकराकर प्रतिदीप्ति उत्पन्न करती है तथा x-किरणों की तरह फोटोग्राफिक प्लेट को प्रभावित करती है व गैसों को आयनित कर देती है तथा ये किरणें पतले धातु की चादरों को बेधने की क्षमता रखते हैं। इन किरणों को बेकरल किरणें कहा गया। मैडम क्यूरी ने इन किरणों को रेडियोएक्टिव किरणें तथा इस गुण को रेडियो ऐक्टिवता कहा। अतः “वह पदार्थ जिनमें इस प्रकार सक्रिय अदृश्य किरणों को उत्सर्जित करने का गुण होता है रेडियो ऐक्टिव पदार्थ कहलाते हैं तथा यह गुण रेडियो ऐक्टिवता कहलाता है।”

प्रश्न 23.
कोश, उपकोश व कक्षक में अंतर समझाइये।
उत्तर:
कोश:
किसी परमाणु में नाभिक के चारों ओर वह निश्चित वृत्ताकार पथ जिस,पर इलेक्ट्रॉन गमन करते हैं कक्ष या कोश कहलाते हैं। बोर के सिद्धान्त के अनुसार इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में गमन करते हैं जिनका कोणीय संवेग (mvr) का मान \(\frac{h}{2π}\) या उसके सरल गुणांक के बराबर होता है। इसे मुख्य क्वाण्टम संख्या द्वारा दर्शाया जाता है तथा प्रत्येक कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 2n होती है।

उपकोश:
प्रत्येक कोश में कई उप ऊर्जा स्तर या उपकोश होते हैं जिन्हें s, p, d, fद्वारा दर्शाया जाता है। किसी भी कोश में उपकोशों की संख्या 2n2 के बराबर होती है। इन्हें दिगंशी क्वाण्टम संख्या द्वारा निर्धारित किया जाता है। विभिन्न उपकोशों के लिये के मान निश्चित हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 42
कक्षक:
नाभिक के चारों ओर वह त्रिविम क्षेत्र जहाँ इलेक्ट्रॉनों के मिलने की प्रायिकता अधिकतम होती है, कक्षक कहलाते हैं। इनका निर्धारण चुम्बकीय क्वाण्टम संख्याओं की सहायता से किया जाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 43

प्रश्न 24.
स्पष्ट कीजिये, क्यों?

  1. कैथोड किरणों में उपस्थित कणों पर ऋण आवेश है।
  2. कैथोड किरणें उनके मार्ग में रखे पहिये को घुमा देती है।

उत्तर:

1. यदि कैथोड किरणों को विद्युत् क्षेत्र से गुजरने दिया जाये तो कैथोड किरणें धनात्मक प्लेटों की ओर विक्षेपित होने लगती हैं जो यह दर्शाती हैं कि कैथोड किरणों में उपस्थित कणों पर ऋण आवेश उपस्थित है।

2. कैथोड किरणों के मार्ग में यदि हल्का पैडल चक्र रख दिया जाये तो वह घूमने लगता है जो यह दर्शाती है कि कैथोड किरणें उच्च गतिज ऊर्जा वाले कणों से मिलकर बनी होती हैं अर्थात् कैथोड किरणे पदार्थ कणों से मिलकर बनी हैं।

प्रश्न 25.
इलेक्ट्रॉन जैसे सूक्ष्म कण की द्वैती प्रकृति से क्या तात्पर्य है?
अथवा
एक गतिशील इलेक्ट्रॉन द्वारा कण एवं तरंग दोनों की समान प्रकृति प्रदर्शित की जाती है। कारण स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन एक सूक्ष्म कण है तथा इलेक्ट्रॉन की कणीय प्रकृति होने के कारण इसका विशिष्ट संवेग होता है तथा गतिशील होने के कारण तरंग के समान व्यवहार प्रदर्शित करता है, जिससे विवर्तन प्रभाव प्राप्त होता है तथा इलेक्ट्रॉन दोनों प्रभाव एक साथ दर्शाता है। अन्य सूक्ष्म कण प्रोटॉन और न्यूट्रॉन यहाँ तक परमाणु भी तीव्र गतिमान किये जाने पर द्वैती प्रकृति दर्शाता है। गतिशील कण द्वारा उत्पन्न तरंग के तरंगदैर्ध्य को डी-ब्रॉग्ली समीकरण द्वारा दर्शाया जाता है। उनके अनुसार किसी भी गतिशील कण का तरंगदैर्घ्य उसके संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होता है तथा इसे निम्न समीकरण द्वारा दर्शाया जाता है
λ = \(\frac{h}{mv}\)
या λ = \(\frac{h}{p}\) λ ∝ \(\frac{1}{p}\) [my = p]
जहाँ 2 = अतिसूक्ष्म कण जैसे इलेक्ट्रॉन का तरंगदैर्घ्य, m = कण का द्रव्यमान, v = कण का वेग, p= कण का संवेग, h = प्लांक स्थिरांक। .

प्रश्न 26.
बामर सूत्र क्या है? यह हाइड्रोजन वर्णक्रम की व्याख्या कैसे करता है?
उत्तर:
जे.जे. बामर के अनुसार हाइड्रोजन परमाणु के दृश्य क्षेत्र के स्पेक्ट्रम की रेखाओं की आवृत्ति को निम्नलिखित सूत्र द्वारा दर्शाया जा सकता है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 44
जहाँ RH = रिडबर्ग स्थिरांक है तथा n = 3, 4, 5, 6, ……
यह रेखाओं की श्रेणी दृश्य क्षेत्र में होती है तथा बामर श्रेणी कहलाती है। इसके पश्चात् चार अन्य श्रेणियों का पता चला। पराबैंगनी क्षेत्र में लाइमन श्रेणी तथा अवरक्त क्षेत्र में पाश्चन श्रेणी, ब्रेकेट श्रेणी तथा फुण्ड श्रेणी की रेखायें प्राप्त होती हैं । इनकी व्याख्या करने के लिये बामर सूत्र को निम्न सूत्र के रूप में संशोधित किया गया।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 45

प्रश्न 27.
परमाणु वर्णक्रम को रेखिल वर्णक्रम कहा जाता है, क्यों?
उत्तर:
इस प्रकार का स्पेक्ट्रम समस्त तत्वों के परमाणुओं द्वारा दिया जाता है। इसमें विशिष्ट रंग के अनेक श्रेणीबद्ध पतली चमकीली रेखायें होती हैं जो काली रेखाओं द्वारा पृथक् रहती हैं। प्रत्येक तत्व विशिष्ट प्रकार के रेखिल स्पेक्ट्रम देते हैं तथा ये स्पेक्ट्रम उन तत्वों की विशिष्ट पहचान होती हैं। उदाहरण-सोडियम के स्पेक्ट्रम में 5890 Å और 5896 Å तरंगदैर्घ्य पर दो स्पष्ट पीली रेखाएँ प्राप्त होती हैं।

यदि एक विसर्जन नली में कम दाब पर हाइड्रोजन गैस भरकर उसमें विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है तो एक लाल रंग का प्रकाश दिखाई देगा। इस प्रकार उत्सर्जित प्रकाश का स्पेक्ट्रोस्कोप की सहायता से विश्लेषण किया जाता है तो एक असतत् स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है जिसमें चार प्रमुख रेखाएँ प्राप्त होती हैं जिन्हें Hαa, Hβg, Hγ, तथा Hδ कहते हैं । इस प्रकार का स्पेक्ट्रम जिसमें केवल रेखाएँ होती हैं, रेखिल स्पेक्ट्रम कहलाती हैं।

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प्रश्न 28.
रदरफोर्ड के प्रकीर्णन प्रयोग के प्रमुख निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर:

1. अधिकांश a कण स्वर्णपत्र के आर-पार सीधी रेखाओं में निकल जाते हैं जिससे यह निष्कर्ष निकलता है कि परमाणु का अधिकांश भाग खोखला एवं आवेशहीन होता है।

2. कुछ α कण स्वर्णपत्र से टकराने के पश्चात् विभिन्न कोणों पर विचलित हो जाते हैं क्योंकि α कण धनावेशित हैं। अतः परमाणु के भीतर एक धनावेशित केन्द्र होना चाहिये जिससे धनावेशित α कण प्रतिकर्षित होकर विभिन्न कोणों में विक्षेपित हो जाते हैं। इस भारी धनावेशित केन्द्र को नाभिक कहते हैं।

3. लगभग 20,000 में से एक α कण स्वर्णपत्र से टकराकर अपने पूर्व मार्ग में ही वापिस लौट आता है। क्योंकि परमाणु के आकार की तुलना में नाभिक बहुत छोटा एवं दृढ़ होता है। रदरफोर्ड के अनुसार परमाणु की त्रिज्या 10-8 cm तथा नाभिक की त्रिज्या 10-13 cm होती है।

4. नाभिक के चारों ओर खाली स्थान होता है जिनमें ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमते रहते हैं। इस गति के कारण कार्य करने वाला अपकेन्द्र बल, इलेक्ट्रॉनों तथा धनावेशित नाभिक के मध्य स्थिर वैद्युत आकर्षण बल को संतुलित करता है। इस संतुलन के कारण इलेक्ट्रॉन नाभिक में नहीं गिरते।

परमाणु की संरचना दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बोर की त्रिज्या की गणना कीजिये।
उत्तर:
हाइड्रोजन परमाणु का एकाकी इलेक्ट्रॉन जब नाभिक के चारों ओर गमन करता है तो उस पर दो बल कार्य करते हैं।

  1. नाभिक द्वारा लगाया गया आकर्षण बल = \(\frac { Ze^{ 2 } }{ r^{ 2 } } \)
  2. अपकेन्द्री बल जो बाहर की ओर कार्य करता है = \(\frac { mv^{ 2 } }{ 2 } \)

जहाँ Z = परमाणु संख्या, m = इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, v = इलेक्ट्रॉन का वेग, e = आवेश, r= परमाणु त्रिज्या।
गतिशील इलेक्ट्रॉन पर कार्यरत् अभिकेन्द्री बल एवं अपकेन्द्री बल बराबर और विपरीत दिशा में कार्य करते हैं तथा दोनों का परिमाण समान हो तो एक-दूसरे को संतुलित करते हैं और इलेक्ट्रॉन अपनी स्थिति पर घूमता रहता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 46

प्रश्न 2.
प्रकाश पुंज का प्रिज्म द्वारा अवयवी घटकों में पृथक्करण किस प्रकार होता है? सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
श्वेत प्रकाश को किसी प्रिज्म में से गुजरने दिया जाए तो उसके अवयवी विभिन्न तरंगदैर्घ्य वाली अलग-अलग रंगों वाली किरणों से विक्षेपित हो जाती हैं। यदि प्रिज्म के इस ओर फोटोग्रॉफिक प्लेट लगा दी जाये तो प्रकाश के सात रंग, सात पट्टियों के रूप में आ जाते हैं जिसे सतत् वर्णक्रम कहते हैं। इसमें एक रंग की पट्टी दूसरे रंग की पट्टी में आंशिक रूप से समायी रहती है। इनमें बैंगनी रंग का तरंगदैर्ध्य सबसे कम लेकिन अपवर्तनांक अधिकतम होने के कारण अधिक झुककर अपवर्तित होता है तथा इसकी आवृत्ति सबसे अधिक होती है। लाल रंग का तरंगदैर्ध्य अधिक किन्तु आवृत्ति सबसे कम होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 47

प्रश्न 3.
हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धान्त समझाइये। इसका गणितीय व्यंजक लिखिए।
उत्तर:
इस सिद्धान्त के अनुसार, “इलेक्ट्रॉन जैसे सूक्ष्म और गतिशील कण की सही स्थिति और संवेग का एक साथ निर्धारण करना असंभव है।”
यदि Δ x = स्थिति में अनिश्चितता, Δ p = संवेग में अनिश्चितता हो, तो
Δx × Δp ≥ \(\frac{h}{4π}\)
⇒ Δx × mΔv ≥ \(\frac{h}{4π}\)
⇒ Δx ∝ \(\frac { 1 }{ \Delta p }\)
Δp यदि इलेक्ट्रॉन जैसे सूक्ष्म कण की स्थिति के निर्धारण की अनिश्चितता Δ x का मान कम हो तो संवेग की अनिश्चितता Δ p का मान अधिक होगा।

मान लो यदि किसी इलेक्ट्रॉन की स्थिति ज्ञात करनी हो तो यह आवश्यक है कि हम उसे देख सकें। इलेक्ट्रॉन को देखने के लिये दृश्य प्रकाश का उपयोग नहीं कर सकते हैं क्योंकि उसका तरंगदैर्घ्य 5000Å इलेक्ट्रॉन के व्यास से बहुत अधिक है। अतः इसके लिये कम तरंगदैर्घ्य वाले विकिरण X-किरण का उपयोग करते हैं। परन्तु X-किरण द्वारा इलेक्ट्रॉन की स्थिति का निर्धारण तब तक नहीं होगा जब वह इलेक्ट्रॉन से न टकराये तथा टकराकर प्रकीर्णित न हो।

X-किरण के फोटॉन के इलेक्ट्रॉन से टकराने से कॉम्पटन प्रभाव उत्पन्न होगा जिससे इलेक्ट्रॉन के वेग में अत्यधिक वृद्धि होगी। इस प्रभाव के कारण इलेक्ट्रॉन का वेग तथा संवेग अनिश्चित हो जायेगा। इलेक्ट्रॉन की सही स्थिति ज्ञात करने के लिये यदि हम और कम तरंगदैर्घ्य के विकिरण का उपयोग करें तो संवेग की अनिश्चितता का मान और बढ़ेगा।

हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धान्त का निष्कर्ष बोहर सिद्धान्त के निष्कर्ष के विपरीत है। बोर सिद्धान्त के अनुसार किसी कोश में इलेक्ट्रॉन की स्थिति एवं वेग का सही-सही निर्धारण किया जा सकता है। किन्तु हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धान्त के अनुसार इलेक्ट्रॉन की स्थिति और वेग का सही-सही निर्धारण एक साथ नहीं किया जा सकता है।

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प्रश्न 4.
क्वाण्टम संख्या क्या है? क्वाण्टम संख्या कितने प्रकार की होती है ? तथा प्रत्येक से प्राप्त होने वाली जानकारी का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
परमाणु में किसी इलेक्ट्रॉन को पूर्ण रूप से अभिव्यक्त करने के लिये जिन संख्याओं की सहायता ली जाती है उन्हें क्वाण्टम संख्या कहते हैं। क्वाण्टम संख्याएँ निम्नलिखित चार प्रकार की होती हैं –

  1. मुख्य क्वाण्टम संख्या (n)
  2. दिगंशी क्वाण्टम संख्या (1)
  3. चुम्बकीय क्वाण्टम संख्या (m)
  4. चक्रण क्वाण्टम संख्या (s)।

1. मुख्य क्वाण्टम संख्या:
इसे n से दर्शाते हैं। यह इलेक्ट्रॉन के मुख्य कोश को प्रदर्शित करती है। इसकी सहायता से नाभिक से इलेक्ट्रॉन की औसत दूरी, इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा, इलेक्ट्रॉन अभ्र के प्रभावी आयतन का निर्धारण किया जा सकता है।n का मान शून्य के अतिरिक्त कोई भी पूर्ण संख्या होती है।

2. दिगंशी क्वाण्टम संख्या:
इसे ! से दर्शाते हैं। यह उपकोशों को प्रदर्शित करता है। इससे इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग, उपकोशों की आकृति, किसी कोश में उपस्थित उपकोशों की संख्या का निर्धारण करते हैं। के मान मुख्य क्वाण्टम संख्या पर निर्भर करते हैं। किसी n के लिये l के मान 0 से लेकर n – 1 तक होते हैं। l के अधिक-से-अधिक चार मान 0, 1, 2 अथवा 3 होते हैं जो क्रमशः s, p, d एवं f उपकोशों को प्रकट करते हैं।
यदि n = 1 l = 0 अर्थात् s उपकोश
n = 2 l = 0, 1 अर्थात् s व p उपकोश
n = 3 l = 0, 1, 2 अर्थात् s, p, d उपकोश
n = 4 l = 0, 1, 2, 3 अर्थात् s, p, d वf उपकोश

3. चुम्बकीय क्वाण्टम संख्या:
इसे m से दर्शाते हैं। यह परमाणु स्पेक्ट्रम के स्रोत को चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर प्राप्त स्पेक्ट्रमी रेखाओं के विघटन अथवा जीमन प्रभाव को दर्शाता है। यह किसी उपकोश में उपस्थित कक्षकों की संख्या को दर्शाता है। किसी l के लिये m के मान -l से +l तक होते हैं। यदि l = 0, m = 0, l = 1 तो m = -1, 0 + 1 तथा l = 2, m = -2, -1, 0, +1, +2 और l = 3 तो m = -3, -2, -1, 0, +1, +2, +3 होता है, इस प्रकार m के संपूर्ण मानों की संख्या 2l + 1 होती है।

4. चक्रण क्वाण्टम संख्या:
इसे 5 से दर्शाते हैं । कोणीय संवेग या स्पिन ऊर्जा को व्यक्त करने के लिये चक्रण क्वाण्टम संख्या s का प्रयोग किया जाता है। s के 2 मान होते हैं। दक्षिणावर्त तथा वामावर्त घूर्णन के अनुसार चक्रण क्वाण्टम संख्या के दो मान +\(\frac{1}{2}\) तथा –\(\frac{1}{2}\) होते हैं।

प्रश्न 5.
बोर का परमाणु सिद्धान्त हाइड्रोजन परमाणु के रेखिल वर्णक्रम की व्याख्या करने के किस प्रकार सहायक सिद्ध हुआ? समझाइए।
अथवा
हाइड्रोजन वर्णक्रम की विभिन्न वर्णक्रम रेखाओं से बोर मॉडल का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हाइड्रोजन परमाणु के रेखिल स्पेक्ट्रम में अनेक रेखाओं की पाँच श्रेणियाँ प्राप्त होती हैं। ये श्रेणियाँ अलग-अलग तरंगदैर्घ्य के क्षेत्र में होती हैं। जैसे-लाइमन श्रेणी पराबैंगनी क्षेत्र में, बामर श्रेणी दृश्य क्षेत्र में पाश्चन, ब्रेकेट एवं फुण्ड श्रेणियाँ अवरक्त क्षेत्र में होती हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 48
हाइड्रोजन परमाणु में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है, लेकिन इसके स्पेक्ट्रम में अनेक रेखाएँ प्राप्त होती हैं, बोर ने इसका स्पष्टीकरण किया। उनके अनुसार प्रत्येक परमाणु में कुछ निश्चित ऊर्जा स्तर होते हैं जिनमें अनुरूप ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाते रहते हैं। हाइड्रोजन गैस में असंख्य हाइड्रोजन परमाणु होते. हैं जिनकी सामान्य अवस्था में इलेक्ट्रॉन निम्नतर प्रथम ऊर्जा स्तर में रहता है। जब हाइड्रोजन परमाणु को बाहर से उपयुक्त ऊर्जा मिलती है तो विभिन्न परमाणु ऊर्जा का अवशोषण करके विभिन्न ऊर्जा स्तरों में चले जाते हैं।

ये इलेक्ट्रॉन उच्चतम ऊर्जा स्तर में 10-8 सेकण्ड रहकर तुरन्त ही ऊर्जा का उत्सर्जन करके किसी भी निम्नतम ऊर्जा स्तर में आ जाता है। इस प्रक्रिया को संक्रमण कहते हैं। इस ऊर्जा का उत्सर्जन प्रकाश के फोटॉन के रूप में होता है। प्रत्येक फोटॉन की आवृत्ति तथा तरंगदैर्घ्य निश्चित होती है जिसके फलस्वरूप ही वर्णक्रम में विभिन्न रेखाएँ प्राप्त होती हैं। परमाणु की विभिन्न ऊर्जा स्तरों में सबसे अंदर की ऊर्जा स्तर n = 1 में इलेक्ट्रॉनों के वापिस आने से लाइमन श्रेणी प्राप्त होती है। इसी प्रकार जब ऊर्जा स्तर 3, 4, 5 से इलेक्ट्रॉन दूसरी कक्षा में आता है तो बामर श्रेणी प्राप्त होती है। इसी प्रकार जब इलेक्ट्रॉन विभिन्न उच्च ऊर्जा स्तरों में क्रमशः तीसरे, चौथे और पाँचवें कोश में आता है तो पाश्चन, ब्रेकेट तथा फुण्ड श्रेणी प्राप्त होती है।

माना एक इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर n1 से जिसमें उसकी ऊर्जा E1 है से निम्न ऊर्जा स्तर n2 जिसमें उसकी ऊर्जा E2 में आता है तथा प्राप्त रेखा की आवृत्ति ν हो तो।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 49
जहाँ RH रिडबर्ग स्थिरांक है। उपर्युक्त समीकरण की सहायता से बामर ने R के प्रायोगिक मान की गणना की। R के मान की गणना करने पर R का मान 109677.8 cm-1 प्राप्त होता है। स्पष्ट है कि n = 1, 2, 3, 4, 5 तथा n2 के विभिन्न मान रखने पर क्रमशः लाइमन, बामर, पाश्चन, ब्रेकेट तथा फुण्ड श्रेणियाँ प्राप्त होती हैं।

प्रश्न 6.
कक्षक s, p तथा d आकृति कैसी होती है?
उत्तर:
कक्षक का आकार:
द्विगंशी क्वाण्टम संख्या किसी ऑर्बिटल का आकार निर्धारित करती है। यदि l = 0 हो तो कक्षक कोणीय संवेग का मान शून्य होता है। अतः s आर्बिटल अदैशिक तथा गोलतः सममित होता है अर्थात् नाभिक से किसी निश्चित दूरी पर इलेक्ट्रॉन के पाये जाने की संभावना सभी दिशाओं में समान होती है। मुख्य क्वाण्टम संख्या में वृद्धि के साथ-साथ s कक्षक का आकार भी बढ़ता जाता है। यदि मुख्य क्वाण्टम संख्या का मान n है तो s कक्षक में n समकेन्द्रिक गोले होंगे तथा n के मान में वृद्धि के साथ s कक्षक की ऊर्जा में भी वृद्धि होती है तथा मुख्य क्वाण्टम संख्या का मान n होने पर नोडल तलों की संख्या n – 1 होती है।

p कक्षक का आकार:
यदि n = 2 हो तो l = 0, 1 होता है। l = 1 के लिये m के तीन मान -1, 0, +1 होते हैं। इसका अर्थ यह है कि p उपकोश में तीन कक्षक होते हैं जिन्हें P., P, तथा p. से दर्शाते हैं। इन तीनों p कक्षकों की ऊर्जाएँ समान होती हैं। परन्तु उनके दिक्विन्यास भिन्न होते हैं। Px, Py, Pz, कक्षक क्रमशः x, y तथा : अक्ष की दिशाओं में सममित होते हैं। p कक्षक का आकार डम्बल होता है। प्रत्येक कक्षक की दोनों पालियाँ एक तल द्वारा पृथक् होती हैं जहाँ इलेक्ट्रॉन घनत्व शून्य होता है, यह तल नोडल तल कहलाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 50
d कक्षक का आकार:
d कक्षक के लिये l = 2 होता है अतः चुम्बकीय क्वाण्टम संख्या m के पाँच विभिन्न मान -2, -1, 0, +1, +2 होते हैं। इन्हें क्रमश: dxy, dyz, dxzx dx2y2, dzx से दर्शाते हैं। इनके आकार अलग-अलग किन्तु ऊर्जा समान होती है। तीन कक्षक dy,dy,du के आकार समान होते हैं, परन्तु इनकी चारों पालियाँ जो उच्च इलेक्ट्रॉन घनत्व दर्शाती हैं xy, yz तथा zx के तल पर स्थित होती हैं। ये दोहरे डम्बल आकृति के होते हैं। dx2y2 कक्षक dxy कक्षक के समान होता है लेकिन पालियाँ x – अक्ष और Y – अक्ष पर स्थित होती हैं। dz2 कक्षक की दोनों पालियाँ अक्ष Z – अक्ष पर स्थित होती हैं। इसमें उच्च इलेक्ट्रॉन घनत्व दर्शाने वाली रिंग होती है जो xy – तल पर स्थित रहती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना - 51

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