MP Board Class 12th Special Hindi बोली, विभाषा, मातृभाषा, राजभाषा एवं राष्ट्रभाषा

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1. भाषा

‘भाषा’ शब्द की मूल क्रिया भाष’ है। भाष का अर्थ ‘बोलना’ या ‘कहना’ होता है। जिन ध्वनियों द्वारा मनुष्य परस्पर विचार-विनिमय करता है,उसकी समष्टि को भाषा कहते हैं। बोलते समय हमारे विचारों की पूर्ण अभिव्यक्ति ध्वनि-चिह्नों से नहीं होती, मदद के लिए हम इंगित का भी प्रयोग करते हैं; जैसे-मुखाकृति, नयनों के भाव, हाथों का संचालन आदि। इंगित की सहायता के बिना वाणी अभिव्यक्ति में अपूर्ण रह जाती है।

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परिभाषा-उच्चरित ध्वनि-संकेतों की सहायता से भाव या विचार की पूर्ण अभिव्यक्ति भाषा है। भाषा के मुख के कण्ठ,तालु आदि उच्चारण अवयवों से बोली गयी वह ध्वनि है जिसके द्वारा किसी समाज के लोग आपस में विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। भाषा के तीन पक्ष होते हैं-

(1) व्यक्तिगत,
(2) सामाजिक,
(3) सामान्य या सर्वव्यापक।

भाषा के उपयोग का सबसे व्यापक क्षेत्र व्यक्ति और समाज के सम्पर्क से उत्पन्न होता है। मनुष्य का अपने आप से या किसी दूसरे व्यक्ति से भाषा की दृष्टि से जो सम्बन्ध है, वह अपेक्षाकृत सीमित होता है। जिस प्रकार कोई कार्य करने के लिए अपने अंगों में समन्वय की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार व्यक्ति भी समाज के अंग होते हैं और परस्पर समन्वय तथा संगठन बनाये रखने के लिए भाषा का उपयोग अपेक्षित है। सामाजिक दृष्टि से भाषा के चार उपयोग हैं :
(1) सूचन,
(2) प्रेरण,
(3) रसन,
(4) चिन्तन।

(1) भाषा का बहुलांश सूचनात्मक होता है। तकनीकी विषय, विज्ञान, इतिहास, भूगोल और समाचार-पत्र का उद्देश्य किसी न किसी प्रकार की सूचना देना होता है।
(2) प्रेरण को भाषा का गत्यात्मक उपयोग,कह सकते हैं। इस प्रकार की भाषा का प्रयोग जनमत के निर्माण या किसी वस्तु के पक्ष-विपक्ष में धारणा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
(3) सामाजिक दृष्टि से भाषा का तीसरा उपयोग रचनात्मक या रसास्वादन है, जिसमें भाषा का रमणीय पक्ष सामने आता है। इसका मुख्य लक्षण भावों को उद्दीपन करना है। जैसे—युद्ध आदि के अवसर पर वीर रस की कविताएँ या चुनाव-प्रचार के समय जोशीले भाषण जन-भावना को जगाने की दृष्टि से होते हैं। इसका प्रधान उद्देश्य सौन्दर्यबोध भी है।
(4) भाषा का अन्यतम सामाजिक उपयोग चिन्तन से सम्बद्ध है। हम अपनी कोई वैयक्तिक समस्या सुलझाने के लिए जो चिन्तन करते हैं, वह समाज-निरपेक्ष होता है। इसके विपरीत धर्म,दर्शन, अर्थनीति, राजनीति आदि का सैद्धान्तिक निरूपण समाज-सापेक्ष चिन्तन के अन्तर्गत आता है।

भाषा के इन उपयोगों में परस्पर संकीर्णता नहीं है, क्योंकि एक की सीमा दूसरे से मिल जाती है।

भाषा का प्रयोग कई अर्थों में होता है। भाषा शब्द का प्रयोग कभी व्यापक अर्थ में होता है तो कभी संकुचित। जैसे—मूक भाषा,पशु-पक्षियों की भाषा आदि। व्यक्त वाणी का अर्थ यह भी है कि स्पष्ट और पूर्ण अभिव्यंजना हो जो वाचिक भाषा के सूक्ष्म अर्थ की बोधक है।

2. बोली

शिक्षा, संस्कार, पालन-पोषण, व्यवसाय, सामाजिक स्थिति, वातावरण आदि के भेद से व्यक्ति की भाषा का निर्धारण होता है। प्रत्येक व्यक्ति की भाषा दूसरे से भिन्न होती है या प्रत्येक व्यक्ति की भाषा स्वतन्त्र बोली जाती है। उसकी अपनी भाषा की विशेषता दूसरों से भिन्न होती है। किन्तु एक व्यक्ति की भाषा सदा एकरूप नहीं होती।

एक भाषा-क्षेत्र में कई उप-बोलियाँ होती हैं। प्रकृति की दृष्टि से भाषा और बोली में अन्तर करना बहुत कठिन है। ‘बोली’ किसी भाषा के एक ऐसे सीमित क्षेत्रीय रूप को कहते हैं जो ध्वनि, रूप, वाक्य-गठन, अर्थ,शब्द-समूह तथा मुहावरों आदि की दृष्टि से उस भाषा के अन्य क्षेत्रीय रूपों से भिन्न होती है।

जब बोली किन्हीं कारणों से महत्त्व प्राप्त कर लेती है तो भाषा कहलाने लगती है।

  • मध्य प्रदेश की मुख्य बोलियाँ –
  • मालवी – देवास,इन्दौर, धार, उज्जैन,रतलाम। [2009]
  • निमाड़ी – खरगौन, बड़वानी, खंडवा,झाबुआ।
  • ब्रज – भिण्ड,मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना।
  • बुन्देली – दतिया, टीकमगढ़, सागर, छतरपुर, जबलपुर। [2009]
  • छत्तीसगढ़ी – सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग।
  • बघेली – रीवा, सतना, सीधी, बालाघाट, शहडोल।
  • खड़ी बोली–प्रायः पूरे प्रदेश में पढ़े – लिखे सुसंस्कृत लोगों की बोली है। इसमें संस्कृत के साथ अरबी, फारसी, अंग्रेजी के तद्भव शब्दों के रूप मिलते हैं।

3. विभाषा (उप-भाषा)

इसे उप-भाषा भी कहा जाता है। विभाषा का क्षेत्र भाषा से कम व्यापक एकं बोली से अधिक विस्तृत होता है। एक प्रदेश में अथवा प्रदेश के भाग में सामान्य बोल-चाल, साहित्य आदि के लिए प्रयुक्त होने वाली भाषा को विभाषा कहते हैं। इसे क्षेत्रीय भाषा भी कहते हैं। पूर्वी हिन्दी, पश्चिमी हिन्दी,राजस्थानी, बिहारी एवं गढ़वाली आदि विभाषाएँ हैं।

हिन्दी की पाँच उप-भाषाएँ हैं और प्रत्येक उप-भाषा की निम्नलिखित बोलियाँ हैं
(1) शौरसेनी-पश्चिमी हिन्दी (ब्रजभाषा,खड़ी बोली,बाँगरू, कन्नौजी,बुन्देली)। राजस्थानी (मेवाती,मारवाड़ी,मालवी,जयपुरी)। गुजराती (सौराष्ट्री)।
(2) अर्द्धमागधी-पूर्वी हिन्दी (अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी) मागधी, भोजपुरी, मगही, मैथिली,बंगला,असमी,उड़िया।
(3) खस–पहाड़ी (गढ़वाली, कुमाऊँनी, गोरखाली)।
(4) ब्राचड़-पंजाबी, सिन्धी।
(5) महाराष्ट्री-मराठी,कोंकणी।

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4. मातृभाषा

जो जिस प्रान्त का होता है और उसके माता-पिता,विशेषकर माता जो बोली बोलती हैं,वह मातृभाषा कहलाती है। भारत में बोलियों के अलावा 15 भाषाएँ प्रमुख हैं,जो वहाँ के सम्बन्धित निवासियों की मातृभाषा है। हिन्दी,मराठी, गुजराती,बंगला, असमिया,तेलुगू, तमिल,मलयालम, कन्नड़,पंजाबी,सिन्धी,उड़िया,उर्दू-ये प्रमुख मातृभाषाएँ हैं। इनको संविधान में भी स्थान प्राप्त है। प्रायः इन सभी भाषाओं में साहित्य की रचना की गयी है। इसलिए इन्हें भाषा का दर्जा प्राप्त है।

5. राजभाषा

राजभाषा और राष्ट्रभाषा ये दोनों शब्द मिलते-जुलते हैं,पर इनमें सामान्य और पारिभाषिक शब्द भिन्न हैं। अंग्रेजी में इनको ‘ऑफिशियल लेंग्वेज’ और ‘नेशनल लेंग्वेज’ कहते हैं।

राजभाषा यानी सरकारी कामकाज की भाषा अथवा भारतीय संघ की भाषा है। भारत का संविधान बनाते समय हिन्दी को राजभाषा माना गया। सात राज्यों में हिन्दी राजभाषा है, शेष राज्यों में अपनी-अपनी प्रदेशों की भाषाएँ हैं। सिन्धी, संस्कृत, कश्मीरी किसी भी राज्य की राजभाषा नहीं है।

राजभाषा बनाने के लिए सरकारी कामकाज इसी भाषा में होना चाहिए। शिक्षा का माध्यम, कार्य के निर्णय,रेडियो और दूरदर्शन में राजभाषा का प्रयोग होना चाहिए। लेकिन अहिन्दी भाषी राज्यों की सुविधा को ध्यान कर भारतीय संविधान में अंग्रेजी का प्रयोग सीमित समय तक के लिए रखा गया है।

6. राष्ट्रभाषा

प्रत्येक स्वतन्त्र राष्ट्र की एक सर्वसम्मत राष्ट्रभाषा होती है। राष्ट्रभाषा में राष्ट्र की संस्कृति, साहित्य और इतिहास की प्रेरणाएँ निहित होती हैं,जो जनजीवन को प्रभावित करती हैं। बहुभाषी देशों में सभी भाषाओं को समान सम्मान मिलता है,लेकिन वहाँ सम्पर्क की एक ही भाषा होती है जो राष्ट्रभाषा कहलाती है। देश के विभिन्न प्रदेश अपने प्रदेश में अपनी भाषा का प्रयोग कर सकते हैं, किन्तु जहाँ सम्पूर्ण राष्ट्र का प्रश्न आता है, वहाँ वे अपनी राष्ट्र भाषा का ही प्रयोग करते हैं। स्वतन्त्रता-प्राप्ति के पश्चात् भारतीय संविधान में हिन्दी को राष्ट्र भाषा का पद दिया गया है।

राष्ट्रभाषा उसी तरह महत्त्वपूर्ण होती है,जैसे-राष्ट्रगान, राष्ट्रध्वज अथवा राष्ट्र चिह्नी वह पूरे राष्ट्र की संस्कृति की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी भाषा से उस व्यक्ति,समाज, देश का व्यक्तित्व झलकता है।

राष्ट्रभाषा के लिए सम्पर्क भाषा शब्द भी प्रयुक्त होता है।

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हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का प्रमुख कारण यह है कि देश में इसके बोलने वाले 52 प्रतिशत से अधिक हैं। यही एकमात्र ऐसी भाषा है जो सभी प्रान्तों में किसी न किसी रूप में समझी जा सकती है। देश के सात हिन्दी राज्यों में हिन्दी मातृभाषा के रूप में प्रयुक्त होती है। हिन्दी का उद्भव संस्कृत परम्परा से जुड़े होने के कारण समस्त आर्य-परिवार की प्रान्तीय भाषा-शब्दावली हिन्दी से जुड़ी प्रतीत होती है।

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MP Board Class 12th Special Hindi वाक्य-परिवर्तन

MP Board Class 12th Special Hindi वाक्य-परिवर्तन

किसी वाक्य को दूसरे प्रकार के वाक्यों में, अर्थ का परिवर्तन किये बिना परिवर्तित करने की प्रक्रिया को वाक्य-रूपान्तरण या वाक्य-परिवर्तन कहते हैं। किसी भी वाक्य को दूसरे वाक्यों में बदला जा सकता है, किन्तु उसके मूल भाव या अर्थ में कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए।

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वाक्य-रूपान्तरण के कुछ उदाहरण यहाँ दिये जा रहे हैं :
1. साधारण या सरल वाक्य से मिश्रित वाक्य में
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2. सरल वाक्य से संयुक्त वाक्य
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3. मिश्रित वाक्य से सरल वाक्य में
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4. मिश्रित वाक्य से संयुक्त वाक्य में
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5. संयुक्त वाक्य से मिश्रित वाक्य में
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6. कर्तृवाचक वाक्य से कर्मवाच्य वाक्य में
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7. विधिवाचक वाक्य से निषेधवाचक वाक्य में
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8. विधिवाचक वाक्य से प्रश्नवाचक वाक्य में
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9. विधिवाचक वाक्य से आज्ञावाचक वाक्य में
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निम्नलिखित वाक्यों को कोष्ठक में दिये गये निर्देश के अनुसार रूपान्तरित कीजिये
1. वह मेरा मित्र है। (बिना भाव बदले निषेधात्मक)
[वह मेरा शत्रु नहीं है।

2. राम घर पर है। (सन्देहवाचक)
[शायद राम घर पर है।

3. आलसी व्यक्ति उन्नति नहीं कर सकता। (मिश्रित वाक्य)
[जो व्यक्ति आलसी होता है,वह उन्नति नहीं कर सकता।]

4. भाग्यवादी होने से काम नहीं चलता। (प्रश्नवाचक)
क्या भाग्यवादी होने से काम नहीं चलता?]

5. उसने ताजमहल देखा है। (प्रश्नवाचक) (2012, 14)
क्या उसने ताजमहल देखा है?]

6. मैं यहाँ के प्राचार्य को नहीं जानता हूँ। (मिश्रित वाक्य)
मैं नहीं जानता हूँ कि यहाँ के प्राचार्य कौन हैं?

7. देशभक्त देश की रक्षा करते हैं। (आदेशात्मक)
देशभक्तो ! देश की रक्षा करो।

8. मैंने वह मकान खरीदा, जो मोहन का था। (साधारण वाक्य)
मैंने मोहन का मकान खरीदा।]

9. राम मूर्ख नहीं है। (बिना भाव बदले विधिवाचक वाक्य)
राम चतुर है।

10. मेरा विचार है कि आज घूमने चलें। (साधारण वाक्य)
मेरा आज घूमने जाने का विचार है।]

11. मैं गीता के रचयिता को नहीं जानता। (मिश्रित वाक्य) [2011]
मैं नहीं जानता कि गीता का रचयिता कौन है?]

12. कितना अद्भुत दृश्य है। (विस्मयवाचक) (2010, 11)
[वाह ! कितना अद्भुत दृश्य है।]

13. राम बुद्धिमान है। (बिना भाव बदले नकारात्मक) [2010]
[राम मूर्ख नहीं है।

14. तुम कल जाओगे। (प्रश्नवाचक) [2010]
क्या तुम कल जाओगे?]

15. जो छात्र परिश्रम करेंगे, उन्हें सफलता अवश्य मिलेगी। (सरल वाक्य) [2009]
[परिश्रमी छात्रों को सफलता अवश्य मिलती है।।

16. मोहन पुस्तक पढ़ रहा है। (प्रश्नवाचक) (2015)
क्या मोहन पुस्तक पढ़ रहा है?]

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17. वर्षा होने पर हम बाहर नहीं जाते। मिश्रित वाक्य) [2009]
(जब वर्षा होती है, तब हम बाहर नहीं जाते हैं।

18. अच्छे विद्यार्थी परिश्रमी होते हैं। (मिश्रित वाक्य) [2009]
जो विद्यार्थी अच्छे होते हैं,वे परिश्रम करते हैं।

19. सूर्योदय होने पर पक्षी चहकने लगते हैं। (मिश्रित वाक्य) [2009]
[जब सूर्योदय होता है, तब पक्षी चहकने लगते हैं।]

20. गरीब (दरिद्र) होने पर भी वह ईमानदार है। (मिश्र वाक्य) [2009]
यद्यपि वह गरीब (दरिद्र) है,किन्तु ईमानदार है।

21. सत्य की सदा जीत होती है। (प्रश्नवाचक वाक्य) [2009]
क्या सत्य की सदा जीत होती है?]

22. यह काम कर दीजिए। (निषेधवाचक वाक्य) [2009]
यह काम मत कीजिए।

23. वह भोजन करके विद्यालय जाता है। (संयुक्त वाक्य) [2016]
वह भोजन करता है और विद्यालय जाता है।

24. कठोर बनकर भी सहदय बनो। (संयुक्त वाक्य) [2017]
कठोर बनें किन्तु सहृदय रहें।।

25. मयूर वन में नाचता है। (संदेहवाचक वाक्य) [2017]
[शायद मयूर वन में नाचता है।।

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MP Board Class 12th General Hindi Model Question Paper

MP Board Class 12th General Hindi Model Question Paper

Time : 3 Hours
Maximum Marks: 100

निर्देशः

  • सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
  • प्रश्न क्रमांक 1 से 5 तक वस्तुनिष्ठ प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के लिए 5 अंक आवंटित हैं। उपप्रश्न पर 1 अंक आवंटित है।
  • प्रश्न क्रमांक 6 से 15 तक प्रत्येक प्रश्न के लिए 2-2 अंक आवंटित हैं। प्रत्येक का उत्तर लगभग 30 शब्दों में लिखिए।
  • प्रश्न क्रमांक 16 से 21 तक प्रत्येक प्रश्न के लिए 3-3 अंक आवंटित हैं। प्रत्येक का उत्तर लगभग 75 शब्दों में लिखिए।
  • प्रश्न क्रमांक 22 से 24 तक प्रत्येक प्रश्न के लिए 4-4 अंक आवंटित हैं। प्रत्येक का उत्तर लगभग 120 शब्दों में लिखिए।
  • प्रश्न क्रमांक 25 से 27 तक के लिए 5-5 अंक आवंटित हैं। प्रत्येक का उत्तर लगभग 150 शब्दों में लिखिए।
  • प्रश्न क्रमांक 28 के लिए 10 अंक आवंटित हैं। शब्द सीमा लगभग 200-250 शब्द है।

1. उचित शब्दों का चयन कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: [1 x 5 = 5]
(i) सूरदास की भक्ति ____________ भाव की है। (दास्य/साख्य)
(ii) नगर शोभा में दोहों की संख्या ____________ है। (142/152)
(iii) सुभद्रा कुमारी चौहान का काव्य संग्रह ह ____________ (त्रिधारा/पंचधारा)
(iv) हिन्दी निबन्ध का उद्भव काल ____________ युग है। (भारतेन्दु/द्विवेदी)
(v) एक से अधिक अर्थ देने वाले शब्द ____________ कहलाते हैं। (एकार्थी/अनेकार्थी)
उत्तर-
(i) साख्य
(ii) 142
(iii) त्रिधारा
(iv) भारतेन्दु
(v) अनेकार्थी

2. सही विकल्प चुनकर लिखिए: [1 x 5 = 5]
(i) गोपालसिंह नेपाली का जन्म सन् है
(अ) 1932 (ब) 1902 (स) 1904 (द) 1911
(ii) सवा-सवा लाख पर एक को चढ़ाने की घोषणा की
(अ) गुरु नानक (ब) अर्जुन सिंह (स) गोविन्द सिंह (द) तेग बहादुर
(iii) साठ हजार हाथियों से अधिक बलराशि का स्वामी
(अ) दारा (ब) शाहजहाँ (स) औरंगजेब (द) हुमायू
(iv) कर्मधारय समास का उदाहरण है
(अ) अष्टांग (ब) दोराहा (स) माता-पिता (द) कनकलता
(v) ‘बाल बाँका न होना’ का अर्थ है
(अ) हानि होते होते बचना (ब) कुछ भी हानि न होना (स) कुछ भी असर न होना (द) कम असर होना
उत्तर-
(i) 1902
(ii) गोविन्द सिंह
(iii) दारा
(iv) कनकलता
(v) कुछ भी हानि न होना

3. सत्य/असत्य का चयन कर लिखिए: [1 x 5 = 5]
(i) ‘प्रभावती’ निराला का काव्य संकलन है।
(ii) मेषमाता बकरी को कहते हैं।
(iii) निष्ठामूर्ति कस्तूरबा संस्मरण विधा है।
(iv) निबन्ध मन की सहज और उन्मुक्त उड़ान है।
(v) अड्यार पुस्तकालय केरल में है।
उत्तर-
(i) असत्य
(ii) असत्य
(ii) सत्य
(iv) सत्य
(v) सत्य

4. सही जोड़ी बनाइये: [1 x 5 = 5]

5. एक वाक्य में उत्तर दीजिए: [1 x 5 = 5]
(i) धरती का ताज किसे कहा है
(ii) देवेन्द्र दीपक का जन्म किस सन् में हुआ?
(iii) प्रक्रिया सामग्री का तकनीकी शब्द क्या है?
(iv) अर्थ की दृष्टि से वाक्य के कितने भेद होते हैं?
(v) ‘दक्षिण भारत की एक झलक’ के लेखक कौन हैं?
उत्तर-
(i) हिमालय
(ii) 31 जुलाई 1934
(iii) सॉफ्टवेयर
(iv) आठ
(v) आचार्य विनय मोहन शर्मा

6. निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए:
चंद्रमा, बादल, हवा, पानी
उत्तर-
पर्यायवाची शब्द
(i) चंद्रमा → निशाकर, मयंक।
(ii) बादल → मेघ, नीरद।
(iii) हवा → पवन, वायु।
(iv) पानी → नीर, जल।
अथवा

निर्देशानुसार वाक्य परिवर्तन कीजिए:
(i) वह फल खरीदने के लिए बाजार गया। (संयुक्त वाक्य)
(ii) स्वावलंबी व्यक्ति सदा सुखी रहते हैं। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर-
(i) उसे फल खरीदने थे, इसलिए वह बाजार गया।
(ii) जो व्यक्ति स्वावलंबी होते हैं, वे सदा सुखी रहते हैं।

7. समास विग्रह कर नाम लिखिए: (कोई दो)
(i) सत्यग्रह
(ii) कमलचयन
(iii) माता-पिता
(iv) नवरत्न
उत्तर-
(i) सत्याग्रह = सत्य के लिए आग्रह (तत्पुरुष समास)
(ii) कमलनयन = कमल के समान नयन (कर्मधारय समास)
(iii) माता-पिता = माता और पिता (द्वन्द्व समास)
(iv) नवरत्न = नौ रत्नों का समूह (द्विगु समास)
अथवा

मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए: (कोई दो)
(i) गज भर की छाती होना
(ii) सूरज को दीपक दिखाना
(ii) सिर धुनना
उत्तर-
(i) गज भर की छाती होना = बलवान होना।
वाक्य प्रयोग-रमेश की गज भर की छाती है।

(ii) सूरज को दीपक दिखाना = मूर्खतापूर्ण व्यवहार करना।
वाक्य प्रयोग-विश्वविख्यात कथावाचक के सम्मुख मुकेश ने कुछ तर्क
किया, जो सूरज को दीपक दिखाने जैसा हुआ

(iii) सिर धुनना = पश्चाताप करना।
वाक्य प्रयोग-हायर सेकेण्ड्री की परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर अरुण ने अपना सिर धुन लिया।
मकरंद : हिंदी सामान्य

8. संक्षेपण किसे कहते हैं?
उत्तर-
संक्षेपण की परिभाषा-संक्षेपण वह कला है जिसके द्वारा किसी वक्तव्य को, किसी विषय को कम-से-कम शब्दों में प्रस्तुत किया जाए तो भी वह स्वयं में पूर्ण हो। उसमें मूल का न कोई अंश छूटता है और न ही उसक
अनिवार्य आशय के समझने में कोई न्यूनता आती है।
अथवा
भाव पल्लवन कीजिए:
“दूर के ढोल सुहावने होते हैं”
उत्तर-
भाव पल्लवनः आज के परिवेश में आधुनिकता की मानसिकता, फैशन, बनावटी दिखावा से घिरे हुए व्यक्ति की वास्तविकता का सम्यक् पता नहीं चल पाता। हम उसके बाह्य स्वरूप को देखकर आकर्षित हो जाते हैं। उसके मौलिक, विचारों, गुणों से पूर्णतः अनभिज्ञ रहते हैं।

9. अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध कीजिए:
(i) रानी पन्द्रह अगस्त में भाषण बोलेगी।
(ii) मैं गीता पढ़ा हूँ
उत्तर-
(i) रानी पन्द्रह अगस्त को भाषण देगी।
(ii) मैंने गीता पढ़ी है।

अथवा
रचना के आधार पर वाक्य के कितने भेद होते हैं नाम लिखिए।
उत्तर-
रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं
(i) साधारण वाक्य
(ii) संयुक्त वाक्य
(iii) मिश्र वाक्य

10. कोई चार तकनीकी शब्द लिखिए।
उत्तर-
(i) अनुवांशिकी
(ii) पारिस्थितिकी
(iii) जीवाश्म
(iv) विकिरण।
अथवा
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए:
(i) आवश्यक
(ii) परिष्कृत
(iii) स्वाधीन
(iv) प्रशंसा
उत्तर-
विलोम शब्दः
(i) आवश्यक = अनावश्यक
(ii) परिष्कृत = दूषित
(iii) स्वाधीन = पराधीन
(iv) प्रशंसा = निंदा।

11. अनेकार्थी शब्दों के अलग-अलग अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए:
(i) घटा (ii) अंक
उत्तर-
(i) घटा = बादल
वाक्य प्रयोग- आकाश में घटा छाई है।
घटा = कम हुआ
वाक्य प्रयोग- अब जाके दाल का मूल्य घटा।

(ii) अंक = गोद
वाक्य प्रयोग- माँ शिशु को अंक में बिठाए हुए है।

अंक = अध्याय
वाक्य प्रयोग- इस नाटक के सात अंक हैं।
अथवा
समोच्चारित शब्दों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए: –
(i) अवधि – अवधी
(ii) अविराम – अभिराम
उत्तर-
(i) अवधि = समय
वाक्य प्रयोग- प्रश्न पत्र हल करने की अवधि 3 घंटे की है।

अवधी = एक भाषा
वाक्य प्रयोग- तुलसीदास अवधी भाषा के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं।

अविराम = लगातार
वाक्य प्रयोग- मोहन ने अविराम चलकर अल्प समय में अपने गन्तव्य पर पहुँच गया।

अभिराम = सुंदर
वाक्य प्रयोग- कमलों से युक्त यह सरोवर अभिराम लग रहा है।

12. सिरचन कौन सी वस्तुएँ बनाना जानता था?
उत्तर-
सिरचन मोथी घास और पटेर की रंगीन शीतलपाटी, बाँस की तीलियों की झिलमिलाती चिक, मोढ़े, मूंज की रस्सी के बड़े-बड़े जाले, ताल के पत्तों की छतरी-टोपी आदि बनाना जानता था।
अगवा
बाबू गुलाबराय ने किन परिस्थितियों में स्वयं को नारायण कहा है?
उत्तर-
नारायण का निवास स्थान जल में है और बाबू गुलाबराय का घर भी वर्षा के कारण जल में डूबा हुआ था, ऐसी स्थिति में लेखक स्वयं को नारायण समझने लगा था।

13. चन्द्रकांत किस सभ्यता व रहन-सहन का प्रेमी था?
उत्तर-
चंद्रकांत अंग्रेजी सभ्यता व रहन-सहन का प्रेमी था।
अथवा
मंत्री जी उदास क्यों थे?
उत्तर-
देश के राजा नि:संतान चल बसे थे। तब राजा किसे चुना जाए, इसी फ़िक्र में मंत्री जी उदास थे।

14. विषय के आधार पर निबन्ध को कितने भागों में बाँटा गया है? नाम लि खिए।
2 उत्तर-
निबंध के प्रकार
(i) साहित्यिक (ii) सांस्कृतिक (iii) सामाजिक (iv) ऐतिहासिक (v) व्यक्तिनिष्ठ (vi) वस्तुनिष्ठ
अथवा
हिन्दी निबन्ध का विकास क्रम लिखिए।
उत्तर-
हिन्दी निबंध का विकास क्रम
(i) भारतेंदुयुगीन निबंध
(ii) द्विवेदीयुगीन निबंध
(iii) शुक्लयुगीन निबंध
(iv) शुक्लयुगोत्तर निबंध
(v) सामयिक निबंध – 1940 से अब तक।

15. व्यास शैली से क्या आशय है?
उत्तर-
व्यास शैली में लेखक निबंधों के तथ्यों को खोलता हुआ चला जाता है। उन्हें विभिन्न तर्को उदाहरणों के द्वारा व्याख्यायित करता चला जाता है। वर्णनात्मक और तुलनात्मक तथा विवरणात्मक निबंधों में निबंधकार इसी प्रकार की शैली का प्रयोग करता है।
अथवा
किन्हीं चार अप्रवासी हिन्दी निबन्धकारों के नाम लिखिए।
उत्तर-
निबंधकारों के नाम
(i) प्रभाकर श्रोत्रिय
(ii) प्रदीप मांडव
(iii) चंद्रकांत वांदिवडेकर
(iv) सुधीश पचौरी

16. यशोदा ने देवकी को क्या संदेशा भेजा?
उत्तर-
यशोदा ने देवकी को संदेश भेजा कि मैं तो कृष्ण का पालन-पोषण करने वाली धाय हूँ। मेरी आपसे विनती है कि आप कृष्ण पर ममता, दया करती रहना। उसके प्रति कठोरता का व्यवहार कभी न करना। कृष्ण को उसका प्रिय माखन-रोटी ही खाने को देना। वह बड़ी मुश्किल से स्नान करता है, अतः उसकी सभी फरमाइशों को पूरा करके स्नान कराना। कृष्ण संकोची स्वभाव का है। वह कुछ नहीं बोलेगा, अतः उसकी मनोवृत्ति व आदतों का ध्यान रखना।

अथवा
रहीम ने समुद्र के जल की अपेक्षा कुएँ के जल को श्रेष्ठ क्यों बताया है?
उत्तर-
रहीम ने समुद्र और कुएँ के जल में कुएँ के जल को श्रेष्ठ बताया है। उन्होंने कहा- यद्यपि कुआँ आकार में छोटा होता है, लेकिन प्यासा कुएँ के पास ही जाकर अपनी प्यास बुझाता है। समुद्र आकार में बड़ा है, लेकिन प्यासा उसके जल से प्यास नहीं बुझा सकता है, वह प्यासा ही रह जाता है। अतः कवि ने समुद्र जल की अपेक्षा कुएँ को श्रेष्ठ बताया है।

17. छत्रसाल की बरछी की विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर-
विशेषताएँ-छत्रसाल की बरछी नागिन के समान है। वह अपने शत्रुओं की चुन-चुनकर मारती है। वह अपने शत्रुओं के बख्तर को फाड़कर उनके शरीर में इस प्रकार घुस जाती है, जैसे मछली जल की धारा को चीरकर आगे बढ़ जाती है।
अथवा
“हम कहाँ जा रहे हैं” कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहते हैं? उत्तर ‘हम कहाँ जा रहे हैं’ से कवि संदेश देना चाहता है कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, उसकी परंपराएँ, व्यवहार, उपलब्धियाँ और जीवन मूल्य सर्वश्रेष्ठ हैं। हमें पाश्चात्य जीवन-शैली और वस्तुओं को नहीं अपनाना चाहिए। हमें भारतीय ही बने रहना चाहिए, क्योंकि इसी में हमारा कल्याण है।

18. कवि गोपालसिंह नेपाली ने गंगाजल की क्या विशेषताएँ बतलाई हैं?
उत्तर-
गंगाजल की बहत बडी विशेषता है कि वह बहत ही पवित्र है। उसको पीने वाला दुःख में भी मुस्कुराता रहता है। यही नहीं, इसको पीने वाला तो हर प्रकार के दुःखों को हँसते-हँसते सहन कर जाता है।
अथवा
पंचतत्व के किन गुणों को माँ धारण किए हुए है?
उत्तर-
पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल और वायु पाँच तत्व होते हैं। माँ इन सभी गुणों को धारण किए हुए है। माँ पृथ्वी का गुण धैर्य, आकाश के गुण चैतन्य अथवा प्रकाश को, अग्नि के गुण तीव्रता, पवन की गतिमयी व्यापकता तथा जल के गुण गंभीरता को धारण किए हुए हैं।

19. मोमबत्ती बुझने के बाद परिवेश में क्या-क्या परिवर्तन हुआ?
उत्तर-
मोमबत्ती बुझने के बाद पूर्णिमा के चाँद की चाँदनी दरवाजे और खिड़की से झाँकती हुई पूरे कमरे में फैल गई। सारा परिवेश प्रकाशमय हो गया।
अथवा
दुनिया में कौन सी दो अमोघ शक्तियाँ मानी गई हैं? कस्तूरबा की निष्ठा किसमें अधिक थी?
उत्तर-
दुनिया में शब्द और कृति दो अमोघ शक्तियाँ मानी गई हैं। शब्दों ने तो सारी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। किंतु अंतिम शक्ति तो ‘कृति’ की है। कस्तूरबा ने इन दोनों शक्तियों से ही अधिक श्रेष्ठ शक्ति कृति की नम्रता के साथ उपासना करके संतोष माना और जीवन सिद्धि प्राप्त की।

20. अखबार में जबलपुर की कौन सी घटना छपी थी?
उत्तर-
अखबार में जबलपुर की घटना छपी थी कि कल रात एकाएक खूब पानी बरसा। जेल के पास के नाले में तीन गरीब बच्चे बह गए। उन तीनों की लाशें मिलीं। बहुत कोशिश करने पर भी इनकी शिनाख्त नहीं हो सकी दो लड़कियाँ हैं और एक लड़का। ऐसा सुना गया है कि वे गाना गाकर भीख माँगा करते थे।
अथवा
देवेन्द्र दीपक के अनुसार पुस्तक की समीक्षा किस प्रकार की जाती है?
उत्तर-
लेखक देवेन्द्र दीपक के अनुसार पुस्तक की समीक्षा बेबाक होती है और प्रायः – प्रायोजित होती है। समीक्षा में अक्सर एक अनावश्यक लंबी भूमिका होती है। इसमें पुस्तक के अंदर जो कुछ भी है, उसकी चर्चा कम होती है तथा जो नहीं है उसकी चर्चा अधिक होती है। दूसरे शब्दों में पुस्तक की समीक्षा ठीक प्रकार से नहीं होती है।

21. गाँधीजी का शिक्षा के प्रति क्या दृष्टिकोण था?
उत्तर-
गाँधी जी का शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण था कि जो शिक्षा चरित्र निर्माण की भावना और कर्तव्य की भावना उत्पन्न करे, वही सर्वश्रेष्ठ है। केवल अक्षर ज्ञान शिक्षा नहीं है। सच्ची शिक्षा तो चरित्र-निर्माण और कर्त्तव्य-बोध है।
अथवा
स्थितप्रज्ञता कैसे प्राप्त होती है?
उत्तर-
मन को किसी परम उच्च में लगा देने से स्थिर प्रज्ञता प्राप्त होती है। जैसे लोक-संग्रह के कार्य में, राष्ट्रभक्ति में, दीन-दु:खियों की सेवा में।

22. शरीरबल और आत्मबल में लेखक ने किसे श्रेष्ठ माना है आज विश्व कल्याण के लिए दोनों में से कौन सा अधिक उपयोगी है
उत्तर-
शरीरबल और आत्मबल में से आत्मबल को लेखक ने श्रेष्ठ माना है। आज विश्वकल्याण के लिए दोनों में से आत्मबल सर्वाधिक उपयोगी है।
अथवा
केरल के गाँवों की कौन सी विशेषताएँ हैं उत्तर-केरल के गाँव की विशेषताएँ-केरल के गाँव की गलियाँ साफ-सुथरी रहती हैं। केरल के गाँवों में बिजली की पूर्ण व्यवस्था है। गाँव बिजली की रोशनी से चमचमाते रहते हैं। केरल के गाँवों में डाकखाना, दवाखाना, और स्कूल की समुचित व्यवस्था है। केरल के गाँवों में हिन्दी का प्रचार और प्रसार बहुत है। यहाँ हिन्दी परीक्षा की अनिवार्य भाषा है।

23. “माँ बस यह वरदान चाहिए” कविता में देश की जय के लिए कवि किस भाव के आकांक्षी हैं?
उत्तर-
‘माँ बस यह वरदान चाहिए’ कविता में कवि देश की जय के लिए अपनी हार, स्वार्थ, त्याग, और बलिदान के भाव का आकांक्षी है।
अथवा
कवि जागो फिर एक बार में क्या उद्बोधन देते हैं?
उत्तर-
कवि ने ‘जागो फिर एक बार’ कविता में भारतीयों को उद्बोधन दिया है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के महासंग्राम में योद्धा की तरह संघर्ष करो। अपनी परिवर्ती परंपरा को अक्षुण्ण रखने वाले भारतीय को अपनी संपूर्ण कायरता को त्यागकर अपने पराक्रमी और पुरुषार्थी स्वरूप को जाग्रत करो। अपनी दासता के सम्पूर्ण बंधनों को तोड़ने के लिए उसे जागृत करना आवश्यक है।

24. निम्नलिखित पद्यांश की सन्दर्भ, प्रसंग सहित व्याख्या कीजिए:
साजि चतुरंग सैन अंग मैं उमंग धारि,
सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत हैं।
भूषन भनत नाद विहद नगारन के,
नदी नद मद गैबरन के रलत हैं।
ऐलफैल खैलभैल खलक में गैलगैल,
गजन की छैलपैल सैल उलसत हैं।
तारा सो तरनि धूरिधारा में लगत जिमि,
थारा पर पारा पारावार यों हलत है ॥
उत्तर-
इसी पुस्तक का पृष्ठ संख्या 89-90 देखें।
अथवा
तप मेरे मोहन का उद्धव धूल उड़ाता आया,
हाय विभूति रमाने का भी मैंने योग न पाया,
सूखा कण्ठ, पसीना छूटा मृग-तृष्णा की माया,
झुलसी दृष्टि, अँधेरा दीखा, टूट गई वह छाया,
मेरा ताप और तप उनका
जलती है यह जठर मही॥
उत्तर-
इसी पुस्तक का पृष्ठ संख्या 218-219 देखें।

25. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए: [1 + 1 + 1 + 235]
समय एक अमूल्य निधि है, जीवन संग्राम में सफल होने के लिए समय का सदुपयोग परम आवश्यक है। अक्सर लोग समय की तुलना धन से करते हैं, लेकिन समय धन से अधिक मूल्यवान है। धन तो एक साधन मात्र है, परन्तु समय सब कुछ है। धन नष्ट भी हो जाये तो पुनः प्राप्त किया जा सकता है, किन्तु नष्ट किए समय को प्राप्त करना असंभव है। जो मनुष्य समय नष्ट करता है समय उसे नष्ट कर देता है।
(i) उपर्युक्त गद्यांश का सार्थक शीर्षक लिखिए।
(ii) जीवन में सफल होने के लिए क्या आवश्यक है
(iii) सबसे अधिक मूल्यवान क्या है
(iv) उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
उत्तर-
(i) गद्यांश का शीर्षक – समय का सदुपयोग।
(ii) जीवन में सफल होने के लिए समय का सदुपयोग परम आवश्यक है।
(iii) सबसे अधिक मूल्यवान धन नहीं समय है।
(iv) सारांश-समय अमूल्यनिधि है। समय की तुलना धन से नहीं की जा सकती। नष्ट धन की तो दुबारा प्राप्त कर सकते हैं, समय को नहीं। अतः समय का सदुपयोग करना परमावश्यक हैं।

26. निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए: [2 + 1 + 2 = 5]
रवि जग में शोभा सरसाता,
सोम सुधा बरसाता,
सब हैं जग कर्म में कोई,
निष्क्रिय दृष्टि न आता,
है उद्देश्य नितान्त तुच्छ,
तृण के भी लघु जीवन का
उसी पूर्ति में वह करता है,
अंत कर्ममय तन का।
(i) उपर्युक्त पद्यांश का शीर्षक लिखिए।
(ii) तृण का जीवन कैसा है
(iii) उपर्युक्त पद्यांश का सारांश लिखिए।
उत्तर-
(i) पद्यांश का शीर्षक-कर्म की प्रधानता।
(ii) तृण का जीवन तुच्छ है।
(iii) सारांश-संसार में छोटा-बड़ा सभी प्राणी कर्मरत है। प्रकृति भी कर्मरत – है। कोई कहीं खाली नहीं बैठा। सब अपने कार्य का निर्वाह करते हैं, मरते दम तक।

27. थाना प्रभारी को पत्र लिखकर ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर रोक लगाने का अनुरोध कीजिए।
उत्तर-
सेवा में,
थाना प्रभारी, सदर बाजार
जबलपुर (म.प्र.)
विषय-ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर रोक लगाने हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,
निवेदन है कि मैं सदर बाजार जबलपुर का निवासी महेश चंद्र आपसे अनुरोध करता हूँ कि मैं आई.ए.एस. परीक्षा की तैयारी कर रहा हूँ, साथ ही अन्य छात्र भी अपनी-अपनी कक्षाओं की पढ़ाई में लगे हैं। ऐसे में आए दिन प्रचार-प्रसार की गाड़ियाँ, जगह-जगह पर होने वाले कार्यक्रमों में बजने वाले ध्वनि विस्तारक यंत्रों की तेज आवाज हमारी पढ़ाई में व्यवधान डालते हैं, अत: इन पर कुछ रोक लगाने की कृपा करें, ताकि हम अपनी पढ़ाई कर सकें। अति कृपा होगी।

भवदीय
महेश चंद्र
निवास-ए-120 सदर बाजार
जबलपुर (म.प्र.)

दिनांक: 02. 04. 20xx

अथवा

परीक्षा की तैयारी की सूचना हेतु मित्र को पत्र लिखिए।
उत्तर-
175, शिवाजी मार्ग
भोपाल (म.प्र.)
05. 06. 20xx
प्रिय मित्र अंकुर

सप्रेम नमस्कार!
आपका पत्र मुझे दिनांक 25. 05. 20xx को प्राप्त हुआ। पढ़कर मन प्रसन्न हुआ। मैं यहाँ सकुशल हूँ। आशा है आप भी ईश्वर की कृपा से प्रसन्न होंगे। मित्रवर! आजकल मैं अपनी परीक्षा की तैयारी में व्यस्त हूँ। मेरी सी.ए. की मकरंद हिंदी सामान्य परीक्षा जुलाई मास में होने वाली है। मैंने पाठ्यक्रम की सम्यक् तैयारी कर ली है। इस आधार पर मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि मैं प्रथम श्रेणी में अच्छे अंक लेकर उत्तीर्ण होऊँगा। आशा है कि इससे आप भी प्रसन्न होंगे।
आपके माता-पिता को मेरा सादर प्रणाम।

आपका मित्र
सौरभ
वर्मा 28.

(अ) किसी एक विषय पर लगभग 200 से 250 शब्दों में निबन्ध लिखिए: [7 + 3 = 10]
(i) पर्यावरण संरक्षण : हमारा दायित्व
(ii) स्वच्छ भारत अभियान
(iii) स्वदेश प्रेम
(iv) स्वावलंबन
(v) राष्ट्र निर्माण में युवकों का योगदान
उत्तर-
इसी पुस्तक का निबंध वाला भाग देखें।
(ब) किसी एक विषय की रूपरेखा लिखिए :
(i) मेरे सपनों का भारत
(ii) राष्ट्रीय त्यौहार
(iii) जल ही जीवन है
(iv) महिला सशक्तिकरण
(v) विद्यार्थी और अनुशासन
उत्तर-
इसी पुस्तक का निबंध वाला भाग देखें।

MP Board Class 12th Hindi Solutions

The Poet and the Pauper Question Answer Class 9 English The Rainbow Workbook Chapter 12 MP Board Solutions

Class 9th English The Rainbow Workbook Chapter 12 The Poet and the Pauper Question Answers

The Poet and the Pauper Class 9 Questions and Answers

The Poet and the Pauper Vocabulary and Pronunciation

A. Point out the difference in meaning and use the words/phrases in your sentences.
See workbook page 88.
Answer:
Do yourself.

B. Point out the difference.
e.g. Have you got a car? / Do you have a car?
(First one is American English and the other is British English) He lives on the second floor. / He lives on the third story. What colour is this? / What color is this?
There is no petrol in my car. / There is no gas in my car.
I like biscuits. / I like cookies.
Answer:
Do yourself.

C. Complete the sentence by choosing the second half . The first one is done for you as
1. What sort of philistine are you,
esquir?
respected sir?
Mr.?
sir?

2. His teeth-
shiver.
ctter.
loiter.
bitter.

3. I set out job-
haunting,
hunting
discovering
inventing.

MP Board Solutions

4. Why stay indoors when there’s such a lovely garden to walkout.
walkon.
walk in.
walk up.
Answer:

  1. sir
  2. chatter
  3. hunting
  4. walk-up.

Listening Skill

A. Listen to the story of a greedy doctor how once he missed, a good offer, unfortunately.

See workbook page 90.

Make response to the following querries orally.
1. What might the doctor have felt looking at the wallet
2. Why did the lady feel humiliated?
3. How many notes were there in the wallet?
4. Who was in loss, the doctor or the lady?
5. What would he have thought later on?
6. If you. were a doctor what would have you done? Share your views with your classmates.
Answer:
Do yourself.

Speaking Skill

The following is an example of a conversation on telephone, use it for a mock talk on telephone. Arrange yourself in pairs: See workbook pages 90-91.
Answer:
Do yourself.

Reading Skill

Question 1.
Read the following passage carefully and answer the questions given below it.

See workbook page 91.

(i) ‘the recipient of the Nobel Prize for literature’ implies that:
(a) Rabindranath Tagore owned a prize for his nobal deeds.
(b) He was awarded Nobal Prize, the highest form of international recognition in the field of literature.
(c) He won an award for his honesty.
Answer:
(b) He was awarded Nobal Prize, the highest form of international recognition in the field of literature.

(ii) ‘an opponent of colonialism’ refers to :
(a) Rabindranath Tagore’s struggle against the policy of acquiring . colonies and keeping them dependent.
(b) his fight with those who developed agricultural land into . colonies.
(c) his struggle for the rights of labourers living in unauthorized colonies.
Answer:
(a) Rabindranath Tagore’s struggle against the policy of acquiring . colonies and keeping them dependent.

MP Board Solutions

(iii) ‘Self-imposed trial’ signifies :
(a) a hard and difficult task performed for a big gain.
(b) a task taken up to impress people.
(c) a challenging duty or task imposed upon oneself of one’s own volition without being forced.
Answer:
(c) a challenging duty or task imposed upon oneself of one’s own volition without being forced.

(iv) Rabindranath Tagore ranks with Gandhiji as one of the great heroes of India because
(a) He opposed colonialism.
(b) He was a man of strong determination and indomitable courage.
(c) All of the above.
Answer:
(c) All of the above.

Question 2.
Complete the following statements with relevant information given in the passage.

1. Rabindranath Tagore received the Noble Prize for………
Answer:
literature.

2. He devoted his own funds for the establishment of………..
Answer:
Shantiniketan School for peace at Bolpur.

3. Despite his sorrows and misfortunes, he moved courageously forward
Answer:
along the path of his mission for peace and happiness of mankind.

4. A person awakened to his own great mission can overcome grief and use
Answer:
expedience as a springboard to the next stage in a reatine life.

MP Board Solutions

Question 3.
With the help of the information given in the passage, describe Rabindranath Tagore as :

(a) a literary figure
Answer:
He was awardee Noble Prize for literature, and highest intenation award.

(b) a nationalist
Answer:
He was an opponent of colonialism.

(c) an educationist
Answer:
He established Shantiniketan School for peace at Bolpur.

Language Practice (Grammar)
Study these sentences.

See workbook pages 93-95.

Rewrite the following sentences in indirect speech.

Question 1.
He said, “I have done my best and can do no more.”
Answer:
He said that he had done his best and could do no more.

Question 2.
The old man said, “My sons, I am dying, I wish you to get all my wealth.”
Answer:
The old man addressed his sons and said that he was dying and he wished them to get all his wealth.

Question 3.
She said to me, “I thank you for the help you have given me.”
Answer:
She thanked me for the help I had given her.

MP Board Solutions

Question 4.
“Do as I tell you at once”, said the teacher angrily.
Answer:
The teacher angrily ordered me to»do at as he told.

Question 5.
He said, ’Time is tip, you can go now.” .
Answer:
He said that time was up and he could go them.

Question 6.
I said to him. “I was doing my duty.”
Answer:
I told him that I had been doing my duty.

Question 7.
He said, “I shall go there.”
Answer:
He said that he should go there.

Writing Skill

A. Write a story for your school magazine. (50 words)
Answer:
Once two friends were passing through a jungle. One said that he was a true friend and believe in the theory a friend in need is a friend indeed. Suddenly a bear came. The first ran away and climbed a tree while the other lied on the ground holding his breath. The bear sniffed him and went away. The first who was on the tree came down and asked what did the bear do with him. The other, replied that the bear had advised him not to live with a friend who runs away in dagger.

MP Board Solutions

B. Write about the peculiar traits of Kunja Bihari’s personality. (150 words)
Answer:
Kunj Babu was an idealist. He was not a practical man. He asked the pauper not to use the word hunger’. He advised him not to make a fuss so his hunger. He bade him go away and satisfy his hunger there. Though it was the time for dinner yet he was not ready to feed an actually hungry person. He told the pauper that the spring breeze would suffice,for all his needs. Soon after he scolds the servant for preparing the dinner late. He lacked coordination in his thoughts, words and actions.

MP Board Class 9th English Solutions

The Rainbow Workbook Special English Class 9th Solutions

Past and Present Question Answer Class 9 English The Rainbow Chapter 4 MP Board Solutions

Class 9th English The Rainbow Chapter 4 Past and Present Question Answers

Past and Present Class 9 Questions and Answers

Past and Present Textual Exercises

Past and Present A Vocabulary

A. Infer the meanings of the following words from the context.
remember, peeping, light, spirit, heavy.
Answer:
Word – Meanings
Remember – to keep in the mind
Peeping – looking quickly and secretly
light- sunshine
Spirit – inner part of body which never dies.
Heavy – laden with worries and anxieties.

B. Make a list of words where V is not used as a prefix.
Answer:
Some words where V is not used as prefix :
Recent, recruit, reduce, refer, recur, refuge, refuse, regard, region, register, regret, regular, reign, reject, relate, relieve, religion, remain, remedy, remote, reptile, require, resist, respond, result.

C. Distinguish between the following words :
1. house – home
2. little – small
3. too – very
4. heavy – light
5. hard – hardly
Answer:

  1. ‘A nouse’ is a building in which people live.
    ‘A home’ is a place where people live with love and peace.
  2. ‘little’ means a short amount. ‘
    Small means ‘not large in size’.
  3. ‘Too’ means ‘more than what is wanted or needed’.
    ‘very’ means ‘beyond a certain limit’.
  4. ‘Heavy’ means ‘which weighs a lot’.
    ‘light’ means ‘easy to lift’.
  5. ‘Hard’ means which is ‘firm when touched’.
    ‘Hardly’ means ‘almost not at all’.

MP Board Solutions

D. Pronounce the following words :
living – leaving
born – barn-borne
farther – father
pulls – pools
where – were
Answer:
MP Board Class 9th English The Rainbow Solutions Chapter 4 Past and Present 1

Comprehension

A. Read the first stanza given below and answer the questions.

remember, I remember
The house where I was born,
The little window where the sun
Came peeping in at mom;
He never came a wink too soon Nor brought too long a day;
But now, I often wish the night
Had borne my breath away.

Questions :
1. Why does the poet remember ‘the house’?
2. What does ‘too soon’ and ‘too long’ refer to?
3. What does the poet desire?
4. Find out the lines which express the beauty of the sun-shine.
Answers :
1. The poet remembers the house because he was born there.
It was spacious and sun-facing.
2. ‘Too soon’ means ‘momentarily’. ‘Too long’ refer to a long while (long period of time).
3. The poet desires to die.
4. He never came a wink too soon. This line expresses the beauty of the sun-shine.

B. Read the second stanza given below and answer the questions.

I remember, I remember
The roses, red and white.
The violets, and the lily-cups-
Those flowers made of light!
The lilacs where the ribbon built,
And where my brother set
The laburnum on his birth-day,-
The tree is living yell

Questions.
1. Describe the beauty of flowers as depicted by the poet.
2. What objects of nature attract the poet most?
3. Find out the rhyming words in the second stanza.
Answers.
1. There are red and white roses, violets and lily cups. They seem to be made of light.
2. The flowers, the lilacs, the robin and the laburnum attract the poet most.
3. White—light Set—yet.

MP Board Solutions

C. Read the third stanza given below and answer the questions.

I remember, I remember
Where I was used to swing,
And thought the air must rush as fresh
To swallows on the wing;
My spirit flew in feathers then That is so heavy now, .
And summer pools could hardly cool The fever on my brow.

Questions.
1. How did the poet enjoy the freshness of air?
2. Highlight the difference between past and present spirit of the poet.
3. What made the past pleasant?
4. Why is the present heavy for the poet?
Answers.
1. He wanted to enjoy the freshness of air on the swing.
2. The poet’s spirit in the past was joyful. His present spirit is full of tension and stress.
3. The surroundings made the poet’s past pleasant. He found joy all around.
4. Present in full of worries, despair, stress and aspirations. Therefore, the present is heavy for him.

D. Read the last stanza given below and answer the questions.

I remember, I remember The fir trees dark and high,
I used to think their slender tops Were close against the sky.
It was a childish ignorance,
But now it is little joy
To know I’m farther off from Heaven
Than when I was a boy.

Questions.
1. Which lines tell about the height of thin fir trees?
2. How does the poet compare childhood with manhood?
Answers.
1. The fir trees dark and high.
I used to think their slender fops .
Were close against the sky.
The above lines tell about the height of thin fir trees.

2. How does the poet compare childhood with manhood?

Childhood Manhood
Childhood is the best period of one’s life. Every member of the house loves him. He gets all his needs fulfilled. He has least cares and worries. It is the period of learning,  innocence and enjoyment: Manhood is the period of earning one’s livelihood. Both the older people and the younger children depend on him. He fulfills the needs of his parents, wife and children. Manhood is full of worries, anxieties, aspirations and frustrations.

Speaking Activity

A. Tell the correct responses :
1. The poet remembers :

  • the car he travelled in
  • the house he was born in
  • the morning he spent

Answer:
1. the house he was born in.

2. The poet’s brother set the laburnum:

  • on his birthday
  • on Good Friday
  • on Christmas.

Answer:
on his birthday.

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3. T. Hood says :

  • the air must stop
  • the air must blow
  • the air must rush.

Answer:
the air must rush.

4. It was little joy for the poet to think that :
the fir trees were dark and high
the ups of the trees were close against the sky .
he was farther off from heaven than when he was a boy.
Answer:
he was farther off from heaven than when he was a boy.

B. Narrate your own past experiences of an event which you do not forget even today. You can begin as :
When I was ………….. years old.
When I was living with my ………. at ………….
or
It was the month of ………………
Answer:
I was fifteen years old. I was living with my uncle at Ulak ‘ Nagar. It was the month of August. I bought a ticket for the day’s ricle in a tourist bus. All through the day; the buses gave me good rides. I had a glimpse of beautiful spots. The lady guide in the bus was telling the passengers about various places Just then, our driver took a sharp and sudden turn. The bus hit into a scooter. The driver lost the balance. The bus fell into a five feet deep trench. However, a big stone prevented the bus from a complete overturn. The passengers got minor injury but the scooter-born had died on the spot. The event is still green in my mind.

Writing Activity

A. We owe a lot to the nature. Write about the things you observe in the company of the nature. (50 words)
Answer:
Nature comprises the whole universe and every created, not artificial thing. Natural environment consists of all physical factors bestowed by the nature. It includes land, climate, minerals all such endowments without which the life on earth could have not been possible. It is thus the sum total of all non-living and inorganic matter such as land, air and water. We owe a lot to nature. We observe ‘ forests, rivers, valleys, mountains, fields etc. in the company of the nature.

B. Describe the activities you used to do as a little child.(150 words)
Answer:
The happiest period of my life was when I used to be a little child. I was the first issue of my parents. I was born after twenty years of my parents’ marriage. Naturally, I was a pampered child. Everybody in my house showered utmost affection on me. I used to touch the feet of my grand parents, parents, uncle, aunt and paternal aunts. I sought their blessings everyday. I used to go put for a daily morning walk with my uncle and aunt. I took my breakfast with my grandparents. I used to go to the nearby temple every morning.

I used to climb up my father; shoulders and dangled my legs. I used to play with toys or enjoyed the swing in the park. I used to say ‘Namaskar’ to everyone, I met. I used to play with small children of my age.

Think it over

(i) It is a general notion that childhood is the most memorable period of one’s life. Why is it so? Is it the carefree sporting or the love and care one receives or something else?
Answer:
There is no denying the fact that childhood is the most memorable period of one’s life. It is due to the careless sporting and the love and care one receives. Above all, it is due to the need of the parents. A childless couple is considered a cursed couple. Therefore every couple needs a child at the earliest. If the childbirth is delayed every family gets anxious. The parents shower their utmost love on the children. They pamper them. They give them the best food, clothing and shelter. They are treated like princes even in their huts. They are protected like a treasure at every step. Children are thought to be the support of one’s old age.

MP Board Solutions

(ii) What lessons can we learn in the lap of nature?
Answer:
According to Wordsworth, nature is a great teacher. The rivers flow and the winds blow for the benefit of mankind. The trees and plants blossom not for the sake of themselves but for the benefit of others. The sunset, the rising moon and the twinkling stars have no selfish motive behind their activities. They teach us a sound lesson to be regular, benevolent, merciful, cooperative and friendly to others. They also teach us to be humble because human life is mortal. The falling meteors, leaves and flowers teach us the same lesson.

Things to do
Observe your natural surroundings. Make an entry of your observations in your diary. For example :

July, 07, 2007
New Delhi
Today when I went to the garden. I saw a butterfly, sitting on a flower. It kept on opening and closing its wings as if it was a book and the flower was reading it
Answer:
I went to the fields. I saw yellow mustard plants. They were blossoming and giving out sweet smell Bumble bees were humming sweet notes. The birds were chirping in the trees. The cuckoos / were warbling. Cool breeze was blowing. There were eye-catching ripples in the water of the river. The farmers were busy working ‘ in their fields. Bees were sitting on flowers.

Past and Present Additional Questions

Short Answer Questions (in about 25 words)

Question 1.
What is the main difference.between the present age and the old age?
Answer:
The old days were days of faith, blind and unquestioning faith. The present age is an age of disillusion, of doubt, uncertainty and questioning. Sometimes, injustice, unhappiness and global crucity oppress us. There is no love of family or friends.

Question 2.
Why is it not right to judge past events from the standards of the present?
Answer:
It is not right to judge past events from the standards of the present. It is because, to understand a person who lived long ago, we must understand

  1. his environment
  2. the conditions under which he lived and
  3. the ideas that filled his mind.

Question 3.
Give the disadvantages of living in a small village.
Answer:
We have often heard that one can find heaven in the small villages. There is greenery all around. There is purity of life and the atmosphere is peaceful and healthy. I happened to live in a small village for six months. I found life full of disadvantages. There was a lack of medical facilities. There was not a single good school. The houses lack proper ventilation and they are dark and dingy. Opportunities of recreation and employment are nil. The civic amenities are not for them. Mud, mosquitoes, flies, furies of weather are in store for a villager. Life in a village is a great ordeal.

Question 4.
Give a brief account of the memories of your childhood.
Answer:
I remember my childhood days with love. We had a big farm. There were many trees full of fruits in it. I enjoyed eating mangoes in my own-orchard. Then I used to swim in a nearby canal. I took body-building exercises in the akhara (arena). I used to drink the cow milk in the evening and the butter-milk in the morning. I had a carefree life. My parents pardoned all my mischiefs and mistakes.

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Long-Answer Type Question (In about 50 words)

Question 1.
‘Living in a big city is a Curse’ Elaborate.
Answer:
The villagers think that living in a big city is a blessing on earth. We should not ignore the importance of city life especially its facilities. Inspite of the glowing and golden life, life is very fast in a city. People suffer from tension and mental diseases. The din and noise rob the mental peace of all. There is pollution all around. Huge population turns the city into a big slum. There is a great shortage of housing. There is crowd even on the open spaces. It is very difficult to move on the roads. Water and air are contaminated. Life in a city is costly, artificial, unhealthy, meaningless and unsocial. Corruption and exploitation engulf fall. Nothing is fresh in a city. There is no fellow feeling or sense of cooperation and shame among the people.

Past and Present Summary in English

The poet remembers his house where the pretty flowers blossomed. The robin built its nest in the lilacs. The laburnum tree, which his brother set is still there.The poet used to swing. The fresh air, the summer pools and the very tall fir trees gladdened his spirit. He was ignored in childhood. His spirit no longer finds heavenly atmosphere there.

Past and Present Summary in Hindi

कवि अपने घर को याद करता है जहाँ सुन्दर फूल खिलते थे। गायक पक्षी, फूलों वाली झाड़ियों में अपना घोंसला बनाता था। उसके भाई द्वारा उगाया हुआ अमलतास का पेड़ अभी तक वहाँ है। कवि झूला-झूला करता था। स्वच्छ हवा, गर्मी के पोखर और अत्यधिक ऊँचे देवदार उसकी आत्मा को झकझोर दिया करते थे। वह बचपन में अज्ञान था। उसकी आत्मा को अब वहाँ स्वर्गीय वातावरण नहीं मिलता है।

Past and Present Word-Meaning

MP Board Class 9th English The Rainbow Solutions Chapter 4 Past and Present 2

MP Board Class 9th English Solutions

The Rainbow Textbook Special English Class 9th Solutions

The Never-Never Nest Class 9 Questions And Answers

MP Board Class 12th Special Hindi वाक्य-बोध, वाक्य-भेद

MP Board Class 12th Special Hindi वाक्य – बोध, वाक्य – भेद

1. वाक्य – बोध।

मनुष्य के भावों और अर्थों को भाषा के माध्यम से व्यक्त और स्पष्ट करना ही वाक्य का मुख्य प्रयोजन है। भाषा का सौन्दर्य और चमत्कार सुन्दर और सुगठित सुवाक्य रचना में होता है। वाक्य के तीन गुण प्रमुख होते हैं –
(i) आकांक्षा,
(ii) योग्यता और
(iii) सन्निधि।

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(i) आकांक्षा – वाक्य के एक पद को सुनकर आगे जानने की जिज्ञासा आकांक्षा है।
(ii) योग्यता – अन्वय करने के बाद वाक्य के अर्थबोध में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती है,उसे योग्यता कहते हैं।
(iii) सन्निधि – योग्यता और आकांक्षा के साथ ही वाक्य के शब्दों में परस्पर सन्निधि आवश्यक है।

  • शुद्ध वाक्य के गुण
  1. स्पष्टता – वाक्य सरल और स्पष्ट होना चाहिए। उन्हें पढ़ते या सुनते समय बराबर विचारों का उद्रेक हो।
  2. समर्थता – पाठक या श्रोता की भावनाओं को जाग्रत करने में सुगठित वाक्य ठीक माना जाता है।
  3. अति मधुरता – रचना को प्रभावशाली बनाने के लिए उसमें ऐसे वाक्य होने चाहिए जो सुनने में मधुर लगें। ऐसे वाक्यों से युक्त रचना को पढ़ने से पाठक आनन्द का अनुभव करता है।
  • वाक्य – रचना में होने वाली सामान्य अशुद्धियाँ

लिखते और बोलते समय स्पष्ट बात कहने की बड़ी आवश्यकता होती है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि बोला कुछ जाय, लिखा कुछ जाय और समझा कुछ और जाय। इन सब दोषों का मूल कारण होता है – वाक्य में भाषा का निर्वाह न करना। कभी – कभी असावधानी के कारण वाक्य – रचना में भ्रामकता का दोष आ जाता है। कभी – कभी दूसरी भाषा से प्रभावित होने के कारण लेखक शिथिल और अनावश्यक वाक्यों की रचना कर जाते हैं।
इन गुण – दोषों को ध्यान में रखकर बड़ी सावधानी से वाक्यों की शुद्ध रचना करनी चाहिए। वाक्य रचना में होने वाली सामान्य अशुद्धियाँ प्रायः इस प्रकार हैं

1. वचन सम्बन्धी अशुद्धियाँ – आदि, अनेक अथवा बहुवचन संज्ञा की क्रियाओं में प्रायः वचन सम्बन्धी त्रुटियाँ होती हैं। जैसे
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2. लिंग सम्बन्धी अशुद्धियाँ – विशेषण और विशेष्य का लिंग एक जैसा हो,समस्त पदों के सर्वनाम का लिंग एवं क्रिया का लिंग अन्तिम पद के अनुसार होना चाहिए। उदाहरण
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3. अर्थ सम्बन्धी अशुद्धियाँ
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4. काल सम्बन्धी अशुद्धियाँ
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5. पुनरुक्ति सम्बन्धी अशुद्धियाँ
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6. मात्रा सम्बन्धी अशुद्धियाँ
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7. अन्य अशुद्धियाँ
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1. वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्दों का प्रयोग

वर्तनी (Spelling) का तात्पर्य अक्षर – विन्यास से है। पहले इसके लिए ‘हिज्जे’ या ‘अक्षरी’ नाम प्रचलित थे। उच्चारण की शुद्धता के अनुसार एवं व्याकरण की दृष्टि के अनुरूप शब्दों को लिखना ही, वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्दों का प्रयोग कहलाता है।

इन अशुद्धियों के कारण होते हैं—अज्ञान, भ्रान्ति, असावधानी,बनकर बोलने की दुष्प्रवृत्ति और विदेशी प्रभाव।

शुद्ध लेखन के लिए शुद्ध वर्तनी अपेक्षित होती है। वर्तनी ही भाषा की प्रभाव – क्षमता बढ़ाती है। अतः वर्तनी के सुधार या शब्द – शुद्धिकरण के लिए नीचे कुछ अशुद्ध शब्दों के शुद्ध रूप दिये हैं-
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2. अर्थ की दृष्टि से सही शब्दों का चयन

हिन्दी में कतिपय ऐसे शब्द हैं जिन्हें ऊपर से देखने पर कोई अर्थ – भेद नहीं दिखाई देता है,पर सूक्ष्मतः उनमें अन्तर होता है। ऐसे शब्दों का ज्ञान आवश्यक है।
कुछ शब्दों का अर्थ तो एक ही रहता है, पर उनके प्रयोग में कुछ अन्तर रहता है। कभी – कभी सम्बद्ध शब्दों के प्रयोग से भी वाक्य अशुद्ध हो जाता है। जैसे
अशुद्ध वाक्य – शुद्ध वाक्य
(1) उसे व्यापार में हानि होने की आशा है। (1) उसे व्यापार में हानि होने की आशंका
(2) विनय को परीक्षा में उत्तीर्ण होने की आशंका है। (2) विनय को परीक्षा में उत्तीर्ण होने की आशा है।
(3) राम बुरी तरह प्रसिद्ध है। – (3) राम बुरी तरह बदनाम है।
(4) शोक है कि आपने मेरे पत्रों का उत्तर नहीं दिया। – (4) खेद है कि आपने मेरे पत्रों का उत्तर नहीं दिया।
(5) मैंने एक वर्ष तक उसकी प्रतीक्षा देखी। – (5) मैंने एक वर्ष तक उसकी प्रतीक्षा की।
(6) रमा एक मोतियों का हार गले में पहने – (6) रमा मोतियों का एक हार गले में पहने
(7) मीना चाचाजी के ऊपर विश्वास करती – (7) मीना चाचाजी पर विश्वास करती है।
(8) शब्द केवल संकेत मात्र होते हैं। – (8) शब्द संकेत मात्र होते हैं।
(9) आपके एक – एक शब्द तुले हुए होते – (9) आपका एक – एक शब्द तुला हुआ होता
(10) उसे अनेकों व्यक्तियों ने आर्शीवाद दिया। – (10) उसे अनेक व्यक्तियों ने आशीर्वाद दिया।

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(11) विंध्याचल पर्वत के दक्खिन में नर्मदा स्थित है। – (11) विंध्याचल के दक्षिण में नर्मदा स्थित
(12) मैं अपनी बात का स्पष्टीकरण करने के लिए तैयार हूँ। – (12) मैं अपनी बात का स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार हूँ।
(13) मैं अपने गुरु के ऊपर बहुत श्रद्धा करता – (13) मैं अपने गुरु पर बहुत श्रद्धा रखता हूँ।
(14) सौन्दर्यता सबको मोह लेती है। – (14) सुन्दरता सबको मोह लेती है।
(15) हवा चल रही है। – (15) हवा बह रही है।
(16) महादेवी वर्मा विद्वान महिला थी। – (16) महादेवी वर्मा एक विदुषी महिला थीं।
(17) श्रीकृष्ण के अनेकों नाम हैं। – (17) श्रीकृष्ण के अनेक नाम हैं।
(18) यह घी की शुद्ध दुकान है। – (18) यह शुद्ध घी की दुकान है।
(19) मोहन आटा पिसाकर लाया। – (19) मोहन अनाज पिसाकर लाया।
(20) वे सज्जन पुरुष कौन हैं? – (20) वे सज्जन कौन हैं?
(21) प्रत्येक वृक्ष फल देते हैं। – (21) प्रत्येक वृक्ष फल देता है।

अर्थ की दृष्टि से सही शब्दों का चयन करने के लिए सूक्ष्म अन्तर वाले शब्दों को जान लेना चाहिए जिससे सही अर्थ का ज्ञान हो तो हम सभी जगह उसका उपयोग कर सकें। जैसे

(1) अनुराग = स्त्री – पुरुष के बीच होने वाला स्नेह। प्रेम = स्नेह सम्बन्ध मात्र। वात्सल्य = छोटों के प्रति बड़ों का स्नेह। भक्ति = बड़ों के प्रति छोटों का श्रद्धायुक्त स्नेह।
(2) अस्त्र = जो फेंक कर मारा जाय; जैसे – तीर, भाला, बम। शस्त्र = जिससे काटा जाय; जैसे – तलवार, छुरा। आयुध = लड़ाई के सभी साधन आयुध कहलाते हैं। इसमें अस्त्र – शस्त्र के अतिरिक्त लाठी,गदा,छड़ आदि को भी ले सकते हैं। हथियार = हाथ से चलाये जाने वाले आयुध।
(3) अशुद्धि = अपवित्रता, मिलावट, लिखने अथवा बोलने में कमी, इन सभी को अशुद्धि कहते हैं। भूल = विस्मृति, जिसमें कर्ता की असावधानी प्रकट होती है। त्रुटि = वस्तु में किसी कमी का होना।
(4) अमूल्य = वस्तु जो मूल्य देकर प्राप्त न की जा सके। जैसे – विद्या, ज्ञान, प्रेम, सफलता, सुख, विश्वास। बहुमूल्य = जिसका अधिक मूल्य देना पड़े,जो वस्तु साधारण मूल्य की न हो। जैसे—सोना,प्लेटिनम,हीरा। महँगा = जिस वस्तु को बदलते बाजार भाव के कारण अधिक मूल्य देकर पाया जाये।
(5) अलभ्य = जिसे किसी उपाय से न पाया जाय। दुर्लभ = जिसे अधिक कष्ट उठाकर पाया जाय।
(6) अलौकिक = जो संसार में इन्द्रियों के द्वारा सुलभ न हो। असाधारण = जो सांसारिक होकर भी अधिकता से न मिलता हो। अस्वाभाविक = अप्राकृतिक, जो प्रकृति के नियमों से बाहर का प्रतीत हो।
(7) अर्पण = शरणगति का भाव लिए अर्पण। दान = धार्मिक भावना के साथ दूसरे का स्वत्व स्थापित करना; जैसे – जलदान, दीपदान, विद्यादान, गोदान, अन्नदान। प्रदान = सामान्य रूप से बड़ों के द्वारा छोटों को देना। वितरण = समाज में उत्पादित वस्तुओं के विभाजन की प्रणाली।
(8) अनुग्रह = बड़े की ओर से छोटों के अभीष्ट सम्पादन की स्नेहपूर्ण क्रिया अनुग्रह है। अनुकम्पा = दुःख दूर करने की चेष्टा से युक्त कृपा। दया = दुःख देखकर द्रवित होना। कृपा = दुःख – निवारण के सामर्थ्य से युक्त दया। सहानुभूति = दूसरे के दुःख में समभागी होने का भाव। करुणा = दुःख निवारण की व्याकुलता लिए हुए द्रवित होना। ममता = माता के समान किसी पर वत्सल भाव।
(9) अंग = (अवयव) भौतिक समष्टि का भाग; जैसे – शरीर का अंग, वृक्ष का अंग, शाखा आदि। देह = शरीर। आकृति = रेखाओं से बनी कोई समष्टि, चाहे वह सजीव हो या निर्जीव।
(10) अमर्ष = द्वेष या दुःख जो तिरस्कार करने वाले के कारण होता है। क्रोध = प्रतिकूल आचरण के बदले में प्रतिकूल आचरण की प्रवत्ति। कलह = क्रोध को जब सक्रिय रूप दिया जाता है तो उससे होने वाला वाचिक या शारीरिक आचरण।

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(11) असुर = दैत्य या दानव – एक जाति विशेष, जो देवों के समकक्ष थी। राक्षस = यह अनुचित आचरण के कारण मनुष्य जाति के लिए आता है।
(12) अनुपम = बेजोड़ – जिसकी तुलना न हो सके। अपूर्व = जिसे पहले अनुभव न किया गया हो। अद्भुत = जो विस्मयजनक हो।
(13) आयु = जीवन के सम्पूर्ण समय को आयु कहते हैं। वयस् = जीवन के शरीर विकास सूचक भाग को वयस् कहा जाता है, जैसे – शैशव। अवस्था = दशा – जीवन के प्रसंग में बीते हुए जीवन का भाग। वयस् के अर्थ में भी चलता है, जैसे—युवावस्था, वृद्धावस्था।
(14) अबला = स्त्री की संज्ञा है जिससे उसकी कोमलता एवं निर्बलता का संकेत मिलता है। नारी = केवल नर जाति की स्त्री या मानवी। कान्ता = प्रिया, किसी पुरुष के स्नेह – सम्बन्ध से दिया हुआ स्त्री का नाम – जो चमक को भी प्रकट करता है। भार्या = वह स्त्री जो किसी पुरुष से अपने भरण – पोषण की प्राप्ति का अधिकार रखती हो। पत्नी = पति से सम्बद्ध धार्मिक कार्यों में पति का साथ देने वाली, जिसका धार्मिक रीति से विवाह सम्पन्न हुआ हो। वधू = विवाह के बाद नारी की संज्ञा। अंगना = अंगों की कोमलता तथा सुन्दरता की सूचक स्त्री की संज्ञा।
(15) आनन्द = समस्त मन, प्राण,शरीर, आत्मा के सम्मिलित सुखानुभूति को आनन्द कहते हैं, हर्षित,प्रसन्न। सुख = मन के अनुकूल किसी भी प्रतीति को सुख कहते हैं। हर्ष = सुख या आनन्द के कारण शरीर की रोमांचमयी अवस्था हर्ष है। उल्लास – उमंग = मन में सुख की वेगयुक्त अल्पकालिक क्रिया।

(16) भिज्ञ = विषय के ज्ञान से सम्पन्न। विज्ञ = विषय का विशेष ज्ञान रखने वाला। बहुज्ञ = अनेक विषयों का ज्ञाता।
(17) अंश = मूर्त, अमूर्त तत्त्व का भाग। खण्ड = मूर्त पदार्थ का विभाजन।
(18) अन्न = मुख्य भोजन का धान्य विशेष। दाना = किसी भी वस्तु का गोलाई लिए छोटी इकाई का नाम। जैसे–माला का दाना,मोती का दाना, अनाज का दाना। शस्य = फसल, जो खेत में काटने हेतु लगी हो। खाद्य = सभी प्रकार का भोजन योग्य पदार्थ। पकवान = पका हुआ भोजन।
(19) आज्ञा = बड़ों द्वारा छोटों के प्रति काम की प्रेरणा। अनुज्ञा = श्रोता की इच्छा के समर्थन में स्वीकृतिसूचक कथन। अनुमति = बड़ों द्वारा सहमति अथवा किसी काम करने की इच्छा का समर्थन। आदेश = प्रायः कार्याधिकारी द्वारा दी हुई आज्ञा।
(20) अनुनय = किसी बात पर सहमत होने की प्रार्थना। विनय = निवेदन, शिष्टता. अनुशासन। प्रार्थना = किसी कार्यसिद्धि या वस्तु प्राप्ति के लिए विनययुक्त कथन। निवेदन = अपनी बात विनयपूर्वक रखना। आवेदन = अपनी योग्यता आदि के कथन द्वारा किसी पद या कार्य हेतु प्रस्तुत होना।
(21) आमन्त्रण – किसी अवसर पर सम्मिलित होने का बुलावा। निमन्त्रण = उत्सव के अवसर पर बुलाना। आह्वान = ललकारना, संघर्ष के लिए बुलाना।
(22) इच्छा = किसी वस्तु के प्रति मन का राग। आशा = इच्छा के साथ प्राप्ति की सम्भावना का सुख। उत्कण्ठा = जिज्ञासा। स्पृहा = उत्कृष्ट इच्छा। मनोरथ = अभिलाषा।
(23) उत्साह = बड़े कार्यों के प्रति प्रेरित करने वाला आनन्ददायक भाव। साहस = सहने की शक्ति को साहस कहते हैं।
(24) तेज = बाहरी प्रकाश। कान्ति = चमक। प्रकाश = किरण समूह।
(25) ईर्ष्या = दूसरे की उन्नति न सह पाना। स्पर्धा = दूसरे को उन्नत देखकर स्वयं उन्नति की होड़। असूया = दूसरे के गुणों में दोष ढूँढ़ना। द्वेष = दूसरे की बुराई की कामना।
बैर = बहुत दिनों का संचित क्रोध का रूप।
(26) खेद = अनिष्ट सूचना। अवसाद = मन – शरीर की निश्चेष्टता। क्लेश = मन – शरीर दोनों का पीड़ित होना। कष्ट = दुःखजनक स्थिति। व्यथा = पीड़ा। वेदना = पीड़ा का मानसिक अनुभव। यातना = दुःख भोगने की मनोदशा। यन्त्रणा = दुःख की दीर्घकालिक जकड़न।
(27) ऋतु = छ: ऋतुएँ होती हैं। मौसम = पारिस्थितिक भेद।

यहाँ पर उदाहरण के लिए कुछ अशुद्ध तथा शुद्ध वाक्य दिये गये हैं, जिनका सावधानीपूर्वक अध्ययन करना चाहिए। (पहला वाक्य अशुद्ध है तथा दूसरा वाक्य शुद्ध है।)
1. अनावृष्टि के कारण आगामी वर्ष पशुओं के आहार में भारी कमी की आशंका है।
[अनावृष्टि के कारण आगामी वर्ष में पशुओं के आहार में भारी कमी की सम्भावना है।]

2. अनुराधा ने अपने पति के गले में एक फूल की माला डाल दी।
[अनुराधा ने अपने पति के गले में फूलों की एक माला डाल दी।]

3. अनेकों विद्यार्थी उपाधि – वितरणोत्सव के समारोह में सम्मिलित नहीं हो सके। ”
[अनेक विद्यार्थी उपाधि – वितरण समारोह में सम्मिलित नहीं हो सके।।

4. अपने से बड़ों के प्रति स्नेह और छोटों के प्रति श्रद्धा का भाव व्यक्त करना चाहिए।
[अपने से बड़ों के प्रति श्रद्धा और छोटों के प्रति स्नेह का भाव व्यक्त करना चाहिए।

5. आज का छात्र पढ़ने से अधिक फैशन को महत्व देते हैं।
[आज के छात्र पढ़ने से अधिक महत्त्व फैशन को देते हैं।]

6. आज शनिवार है और कल रविवार की छुट्टी है।
[आज शनिवार है और कल रविवार की छुट्टी होगी।

7. शीला आज्ञाकारी पत्नी है।
[शीला आज्ञाकारिणी पत्नी है।]

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8. हमारी देश की सरकार ईमानदार है।
[हमारे देश की सरकार ईमानदार है।

9. आपका पत्र धन्यवाद सहित मिला।
[आपका पत्र धन्यवादपूर्वक मिला।

10. आपका भवदीय। [2010]
[आपका या भवदीय ]

11. उसकी आँख से आँसू बह रहा है।
[उसकी आँख से आँसू निकल रहे हैं।]

12. हमें पानी दो।
[मुझे पानी दो।

13. आपका लिखावट बड़ा अच्छा है।
[आपकी लिखावट बड़ी अच्छी

14. आपकी सलाह ग्राह्य योग्य है।
[आपकी सलाह ग्राह्य है।)

15. कश्मीर की सौन्दर्यता दर्शनीय है।
कश्मीर का सौन्दर्य दर्शनीय है।।

16. वह लौटकर वापस आ गया।
[वह वापस आ गया। या वह लौटकर आ गया।

17. आपने वह प्रतिज्ञा न भूले होंगे।
[आप वह प्रतिज्ञा न भूले होंगे।

18. रामचरितमानस सबसे श्रेष्ठतम ग्रन्थ है। [2011]
[रामचरितमानस श्रेष्ठतम ग्रन्थ है।।]

19. यद्यपि वे सज्जन है लिन्तु क्रोधी है।
[यद्याचे वह सज्जन है, किन्तु क्रोधी है।]

20. वह धनी व्यक्ति है। (बिना अर्थ बदले नकारात्मक)
वह निर्धन व्यक्ति नहीं है।

21. उसके पास पाँच भूगोल की पुस्तकें हैं।
[उसके पास भूगोल की पाँच पुस्तकें हैं।]

22. सरोवर के अन्दर पानी भरा है। ,
सरोवर में पानी भरा है।।

23. पिता का पुत्र में विश्वास है।
पिता का पुत्र पर विश्वास है।।

24. कई ऑफिस के अधिकारी छुट्टी लेकर चले गए।
[ऑफिस के कई अधिकारी छुट्टी लेकर चले गए।

25. उनका बहुत भारी सम्मान हुआ।
[उनका बहुत सम्मान हुआ।]

26. उनके पूज्यास्पद पूज्य पिता चल बसे।
[उनके पूज्यास्पद (या पूज्य) पिता चल बसे।

27. उनका वहाँ जाने की इच्छा न थी।
उनकी वहाँ जाने की इच्छा न थी।

28. उसे मृत्यु – दण्ड की सजा मिली है।
[उसे मृत्यु – दण्ड मिला है।]

29. गाँधीजी का देश सदा आभारी रहेगा।
देश गाँधीजी का सदा आभारी रहेगा।

30. यह कार्य आवश्यकीय है।
यह कार्य आवश्यक है।।

31. मैं कल दिल्ली से वापस लौटूंगा।
[मैं कल दिल्ली से लौटूंगा।]

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32. उसने मेरे को कुछ नहीं बोला।
[उसने मुझे कुछ नहीं कहा।]

33. मैं आटा पिसवाने जा रहा हूँ।
मैं गेहूँ पिसवाने जा रहा हूँ।

34. वह गुणवान महिला है।
[वह गुणवती महिला है।

35. बन्दूक एक उपयोगी शस्त्र है।
[बन्दूक एक उपयोगी अस्त्र है।]

36. मेरी अंक सूची गुम हो गई है।
मेरी अंक सूची गुम गयी है।]

37. यदि परिश्रम करोगे तो अच्छे अंक प्राप्त करोगे।
[यदि परिश्रम करेंगे तब अच्छे अंक प्राप्त होंगे। [2010]

38. दोनों में यह उत्तमतर है।
दोनों में यह उत्तम है।]

39. उसके बाद फिर क्या हुआ?
[उसके बाद क्या हुआ?]

40. गाय बोलती है।
गाय रम्भाती है।

41. खरगोश को काटकर गाजर खिलाओ।
(खरगोश को गाजर काटकर खिलाओ।

42. बच्चा दूध को रो रहा है।
[बच्चा दूध के लिये रो रहा है।।

43. महान् व्यक्ति सदा पूज्यनीय होते हैं।
[महान् व्यक्ति सदा पूजनीय होते हैं।

44. धातुओं में सोने से अधिक कीमती कोई धातु नहीं है।
सोना सबसे अधिक कीमती धातु है।।

45. वह बुद्धिमान लड़का है। (बिना अर्थ बदले नकारात्मक)
(वह मूर्ख लड़का नहीं है।।

46. यह एक उपयोगी पुस्तक है.उसे खरीद लो।
[यह एक उपयोगी पुस्तक है,इसे खरीद लो।

47. वह प्रतिदिन सबेरे के समय पढ़ता है।
[वह प्रतिदिन सुबह पढ़ता है।

48. भगवान के अनेकों नाम हैं।
भगवान के अनेक नाम हैं।]

49. उसने ऊपर को देखकर हँसा।
[वह ऊपर देखकर हँसा।]

50. रमेश प्रतिदिन हर रोज स्कूल जाता है।
[रमेश प्रतिदिन स्कूल जाता है।]

51. श्रीमती महादेवी वर्मा विद्वान् महिला हैं।
[श्रीमती महादेवी वर्मा विदुषी हैं।]

52. उसकी टाँग टूट गया।
[उसकी टाँग टूट गई।

53. उसके सामने एक गहरी समस्या है।
[उसके सामने एक गम्भीर समस्या है।

54. लक्ष्मीबाई एक तेजस्वी नारी थीं।
लक्ष्मीबाई एक तेजस्विनी नारी थीं।

55. वह सन्तान को लेकर दुःखी है।
वह सन्तान के कारण दुःखी है।] [2011]

56. जो कल आएगा सो पुरस्कार पाएगा।
जो कल आएगा वह पुरस्कार पाएगा।

57. गाँधी जी पक्के ईश्वर भक्त थे।
गाँधी जी सच्चे ईश्वर भक्त थे।

58. जंगल में शेर चिंघाड़ने लगा।
जंगल में शेर दहाड़ने लगा।

59. वह खाना खाकर के जाएगा।
वह खाना खाकर जाएगा।।

60. वे सज्जन पुरुष कौन हैं?
वे सज्जन कौन हैं?]

61. आप अपने मन से सोचें।
आप अपने मन में सोचें।।

62. भारत की बढ़ती हुई जनसंख्या वृद्धि के कारण लिखिए।
भारत की जनसंख्या वृद्धि के कारण लिखिए।]

63. राम – श्याम के झगड़े का हेतु क्या हो सकता है?
[राम – श्याम के झगड़े का कारण क्या हो सकता है?]

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  • विराम चिह्नों का उपयोग

बोलना एक विशिष्ट कला है, जिसका आवश्यक गुण यह है कि सुनने वाला या सुनने वाले बोलने वाले के भाव को अच्छी तरह समझ सकें। इसके लिए यह अनिवार्य है कि बोलने वाला बीच – बीच में आवश्यकतानुसार कुछ – कुछ ठहरकर बोले। यही क्रम बोलने में होता भी है। वह किसी पद,वाक्यांश या वाक्य को बोलते समय ठहरता जाता है ! इस विश्राम को व्याकरण में ‘विराम’ कहते हैं। लिखते समय ऐसे स्थानों पर कुछ चिह्न लगा दिये जाते हैं। इन चिह्नों को ‘विराम चिह्न’ कहते हैं। शाब्दिक अर्थ के अनुसार विराम’ का अर्थ है रुकाव, ठहराव अथवा विश्राम। बोलने में कहीं कम समय लगता है और कहीं ज्यादा। इसी दृष्टि से चिह्न भी कम समय और अधिक समय के अनुसार अलग – अलग होते हैं। इनके अतिरिक्त कुछ और भी चिह्न होते हैं, जिनका अध्ययन साहित्य के विद्यार्थी के लिए अत्यन्त अनिवार्य है।

चिह्नों का महत्त्व इतना अधिक है कि भूल से गलत स्थान पर चिह्न लगा देने से वाक्य का अर्थ बदल जाता है, अत: चिह्न लगाने में पूर्ण सावधानी रखना आवश्यक है,जैसे – –
रुको मत जाओ। (कोई चिह्न नहीं)
रुको मत जाओ। (जाने का निषेध)
रुको मत,जाओ। (रुकने का निषेध)

राष्ट्र भाषा हिन्दी में आजकल उसके विकास के साथ – साथ विराम चिह्नों की संख्या और प्रयोग बढ़ता जा रहा है। प्रमुख विराम चिह्न जिनका आजकल प्रयोग बहुतायत से होता है, निम्नानुसार हैं
1. अल्प विराम ( , )
2. अर्द्ध विराम (;)
3. पूर्ण विराम (।)
4. प्रश्न चिह्न (?)
5. विस्मयादि बोधक (!)
6. संयोजक चिह्न ( – )
7. निर्देशक चिह्न ( – )
8. कोष्ठक () []
9. उद्धरण या अवतरण चिह्न ‘ ‘ ” ”
10. लोप निर्देशक xxx …..
11. आदेश चिह्न : –
12. लाघव चिह्न °
13. हंस पद ^
14. बराबर सूचक चिह्न =
15. पुनरुक्ति बोध चिह्न (,,)
16. समाप्ति सूचक चिह्न – : x : –

(1) अल्प विराम (,)
यह चिह्न उस स्थान पर लगाया जाता है, जहाँ वक्ता बहुत ही थोड़े समय के लिए रुके।
जैसे –
हेमलता,शारदा, वेदश्री और जयश्री उज्जैन, देवास और महू होकर आज ही लौटी हैं। वह आयेगा, परन्तु रुकेगा नहीं।

(2) अर्द्ध विराम ( ; )
अर्द्ध विराम के चिह्न का प्रयोग उस समय किया जाता है, जबकि अल्प विराम से कुछ अधिक समय तक रुकना हो। इसका प्रयोग प्रायःदो स्वतन्त्र उपवाक्यों को अलग करने के लिए किया जाता है।

जैसे
मैंने गोली चलने की आवाज सुनी;
चार पक्षी फड़फड़ाकर जमीन पर गिर पड़े।

(3) पूर्ण विराम (।)
वाक्य पूरा होने पर कुछ अधिक समय के लिए रुकना होता है, इसलिए प्रत्येक वाक्य की पूर्णता पर इस चिह्न का प्रयोग करते हैं। जैसे
बांग्लादेश आजाद हो गया।

संकेत – कुछ लोग इस चिह्न को पूर्ण विराम के स्थान पर केवल ‘विराम’ कहते हैं और पूर्ण विराम के चिह्न दो खड़ी लकीर ( ॥) को मानते हैं। साधारणत: दो खड़ी लकीर वाले इस चिह्न
का प्रयोग पद्य की पूर्णता पर किया जाता है। जैसे

देख्यो रूप अपार, मोहन सुन्दर श्याम को।
वह ब्रज राजकुमार,हिय – जिय नैनन में बस्यो।

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(4) प्रश्न चिह्न (?)
प्रश्नवाचक चिह्न, प्रश्न सूचक वाक्यों के अन्त में पूर्ण विराम के स्थान पर आता है। जैसे
1. यह किसका घर है?
2. वह कहाँ जा रहा है?

(5) विस्मयादिबोधक चिह्न (!)
इस चिह्न का प्रयोग विस्मयादि सूचक शब्दों या वाक्यों के अन्त में किया जाता है। सम्बोधन कारक की संज्ञा के अन्त में भी इसे लगाया जाता है। जैसे
1. अरे ! वहाँ कौन खड़ा है।
2. हाय ! इसका बुरा हुआ।
3. हे ईश्वर ! उसकी रक्षा करो।

(6) संयोजक चिह्न ( – )
इसे सामासिक चिह्न भी कहते हैं। इस चिह्न का प्रयोग सामासिक शब्दों के मध्य में होता है। जैसे
हे ! हर – हार – अहार – सुत,मैं विनवत हूँ तोय।

(7) निर्देशक चिह्न ( – ) (: – )
इस चिह्न का दूसरा नाम विवरण चिह्न भी है। इसका प्रयोग उस स्थिति में किया जाता है, जबकि किसी वाक्य के आगे कई बातें क्रम से लिखी जाती हैं। इसे आदेश चिह्न भी कहते हैं।
निम्नलिखित शब्दों की परिभाषा लिखो संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया। कभी – कभी (: – ) इस चिह्न के स्थान पर डेश ( – ) का भी प्रयोग कर लिया जाता है।

(8) कोष्ठक () [ ]
कोष्ठक का प्रयोग निम्न प्रकार से किया जाता है—
1. किसी विषय के क्रम बतलाने के लिए अक्षरों या अंकों के साथ इसका प्रयोग होता है। जैसे
(क) व्यक्ति वाचक संख्या। (ख) जाति वाचक संख्या।
(1) एशिया
(2) यूरोप

2. वाक्य के मध्य में किसी शब्द के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए इसका प्रयोग होता है। जैसे
हे कोन्तेय,(अर्जुन) तू क्लेव्यता (कायरता) को प्राप्त न हो।

3. नाटकों में अभिनय को प्रकट करने के लिए भी कोष्ठकों का प्रयोग किया जाता है। जैसे
महाराणा प्रताप – क्रोध से) नहीं, ऐसा कदापि नहीं हो सकता।
मानसिंह – (नम्रता से) राणा ! हठ न करो। बात के मान लेने में तुम्हारा हित है।

(9) अधरण या अवतरण चिह्न (‘) (” “)
हिन्दी में इस चिह्न के अन्य नाम भी हैं। जैसे – उल्टा विराम,युगल – पाश,आदि। इस चिह्न का प्रयोग उस समय किया जाता है जबकि किसी व्यक्ति की बात या कथन को उसी के शब्दों में लिखना होता है। यह चिह्न वाक्य के आदि और अन्त में लगाया जाता है। इकहरे और दोहरे चिह्नों में यह अन्तर है कि जब किसी उद्धरण को लिखना होता है तो दोहरे चिह्न लगाये जाते हैं, किन्तु वाक्य के मध्य में यदि आवश्यकता हुई तो इकहरे उद्धरण चिह्न को लगाया जाता है।

अकबर ने उस दिन प्रार्थना के स्वर में कहा, “हे विश्वनियन्ता ! तू सत्य है; तू ही राम; तू ही रहीम है।” उसने आगे कहा,“दुनिया में सच्चा ईमान ‘मानव धर्म’ है।”

(10) लोप निर्देशक चिह्न (xxx) (……)
इन चिह्नों का प्रयोग तब होता है, जबकि कोई लेखक किसी का उद्धरण देते समय कुछ अंश छोड़ना चाहता है। इनका प्रयोग निम्नांनुसार किया जाता है
1. उस स्थिति में जबकि लेखक किसी लम्बे विवरण को छोड़कर आगे की बात लिखना चाहता है,तब वह चार – पाँच ऐसे निशान लगा देता है। जैसे
आग का वह दृश्य क्या था,सर्वस्व नाश की विभीषिका थी। चारों ओर से लोग दौड़ रहे थे। xxx सम्पूर्ण गाँव जलकर स्वाहा हो गया।
2. जब कुछ शब्द या वाक्य छोड़ने होते हैं, तो ‘ इसका प्रयोग करते हैं। जैसे – बम्बई नगर है। रिक्त स्थान की पूर्ति करो।

(11) आदेश चिह्न (: – )
जब प्रश्न न पूछा जाकर आदेश दिया जाये वहाँ आदेश चिह्न लगाया जाता है, जैसे किन्हीं पाँच चीनी यात्रियों का नाम लिखिए :

(12) लाघव चिह्न (०)।
जब किसी प्रसिद्ध शब्द को पूरा न लिखकर संक्षेप में लिखा जाता है,तब उसका प्रारम्भिक अक्षर लिखकर लाघव चिह्न (०) लगा दिया जाता है। जैसे
हिन्दी साहित्य सम्मेलन – हि. सा. स.
मध्य प्रदेश राज्य – म. प्र. राज्य
नागरी प्रचारिणी सभा,काशी – ना० प्र० स० ,काशी

(13) हंस पद (.)
इस चिह्न का प्रयोग उस समय किया जाता है, जबकि कोई शब्द या बात वाक्य लिखते समय मध्य में छूट जाय। उस स्थिति में नीचे इस चिह्न को लगाकर ऊपर वह शब्द लिख दिया जाता है। जैसे
वह
“मैंने पास जाकर देखा गुलाब का फूल था।”

(14) बराबर सूचक चिह्न (=)
इस चिह्न को तुल्यता सूचक चिह्न भी कहते हैं। इसका प्रयोग समानता दिखलाने के लिए किया जाता है। जैसे –
विद्या + आलय = विद्यालय

(15) पुनरुक्ति बोध चिह्न (,)
उस स्थिति में जबकि ऊपर कही हुई बात अथवा शब्द को नीचे की ओर उसी रूप में लिखना होता है, तो इस चिह्न को लगा देते हैं, जिसका मतलब होता है – यह वही शब्द है जो
ऊपर लिखा हुआ है। जैसे
5 आदमी एक काम 15 दिन में करते हैं
MP Board Class 12th Special Hindi वाक्य-बोध, वाक्य-भेद img-13

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(16) समाप्ति सूचक चिह्न ( – : x : – )
इस चिह्न का प्रयोग उस समय किया जाता है,जबकि कोई लेख अध्याय,परिच्छेद, पुस्तक आदि समाप्त हो गई हो। जैसे
और इस प्रकार भारत देश आजाद हुआ।
( – : x : – )

वाक्य – भेद

(1) रचना के अनुसार वाक्य के तीन भेद होते हैं :

  1. सरल,
  2. मिश्रित और
  3. संयुक्त वाक्य।

(i) जिस वाक्य में एक ही संज्ञा और क्रिया का प्रयोग होता है, उसे सरल या साधारण वाक्य कहते हैं।
(ii) जन मूल वाक्य के साथ एक या अधिक वाक्य और भी मिले होते हैं,तब वह वाक्य मिश्रित वाक्य कहलाता है।
(ii) जब कई सरल और मिश्रित वाक्य – समूह अव्ययों के द्वारा एक ही वाक्य में जुड़े रहते हैं, तब वह वाक्य संयुक्त वाक्य कहलाता है।

(2) अर्थ के अनुसार वाक्यों के प्रकार

  1. विधिवाचक – मधु मेरे घर आयी।
  2. निषेधवाचक – मधु मेरे घर नहीं आयी।
  3. आज्ञार्थक – मधु मेरे घर आये और मिले।
  4. प्रश्नवाचक क्या मधु आयी थी?
  5. विस्मयादिबोधक – हाय मधु आए तो कितना अच्छा !
  6. इच्छाबोध – अच्छा हो कि मधु मेरे घर आए।
  7. सन्देहसूचक – मधु जरूर मेरे घर आयी होगी।
  8. संकेतार्थक – यदि मधु जानती तो जरूर मेरे घर आती।

(3) क्रिया के अनुसार वाक्यों के भेद

  1. कर्तृ प्रधान,
  2. कर्म प्रधान,
  3. भाव प्रधान।

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Polonious Advice Question Answer Class 9 English The Rainbow Chapter 10 MP Board Solutions

Class 9th English The Rainbow Chapter 10 Polonious Advice Question Answers

Polonious Advice Class 9 Questions and Answers

Polonious Advice Textual Exercises

Polonious Advice Vocabulary

A. Match the following :
1. beware – (a) credit
2. generous – (b) rules of behaviour
3. precepts – (c) careful
4. loan – (d) showy
5. gaudy – (e) willing to give freely.
Answer:
1. (c), 2. (e), 3. (b), 4. (a), 5. (d).

B. Explain the meaning of the following words in the poem.
oft, thee, thou, thy.
Answer:
Oft means often at short intervals, many times; frequently
The means ‘you’
Thou means ‘you
They means yours.

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C. Pronounce the following words.
here, Shame, sail, steel, day, hear, same, sale, still, they
Answer:
MP Board Class 9th English The Rainbow Solutions Chapter 10 Polonious Advice 1

Comprehension

A. Read the following lines from ‘Give thy thoughts may beware of thee’ and answer the following questions.

Give thy thoughts no tongue,
Nor any unproportion’d thought his act.
Be thou familiar, but by no means vulgar.
The friends thou hast, and their adoption tried,
Grapple them to thy soul with hoops of steel,
But do not dull thy palm with entertainment
Of each new hatch’d unfledg’d courage. Beware
Of entrance to a quairel; but, being in,
Bear’t that the opposed may beware of thee.

Questions
1. What advice has been given about a friend?
2. What should the young men do before materialising the thoughts?
Answers :
1. It has been advised that laertes should be familiar, firm and refined with his tested friends.
2. The young men should not express their thoughts. They should ’act thoughtfully.

B. Read the poem from ‘beware….. generous choice in that’ given below and answer the following questions :

Beware cf entrance to a quarrel, but, being in,
Bear’t that the opposed may beware of thee.
Give every man thy ear, but few thy voice;
Take each man’s censure, but reserve thy judgment.
Costly thy habit as thy purse can buy,
But not expressed in fancy; rich, not gaudy;
For the apparel oft proclaims the man;
Are of a most select and generous choice in that
Neither a borrower nor a lender be;
For loan oft loses both itself and friend,
And borrowing dulls the edge of husbandry.
This above all-to thine own self be true,
And it must follow, as the night the day,
Thou canst not then be false to any man.
Farewell; my blessing season this in thee !

Questions :
1. What does the poet say about the dress?
2. Discuss the disadvantages of borrowing and lending.
3. What has been said about night and day?
Answers :
1. The poet advises Laertes not to wear fancy, rich and gaudy clothes.
2. Both the loans and friends of the borrowers and lenders are lost.
3. As the night and day follow each other unfailingly, so also one must be true to one’s conscience unerringly.

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Speaking Activity

A. Following are the two columns. In column ‘A’ we have what Polonious suggested to Laertes and in column ‘B’ the meaning of the suggestions ‘ which are not in order, you have to speak the original version loudly matching it with its proper meaning:

A B
1.  The wind sits in the shoulder of your sail.
2.  Give thy thoughts no tongue.
3.  The friends thou hast and their adoption tried, grapple them to thy soul with hoops of steel;
4.  Give every man thy ear, but few thy voice.
5.  Costly thy habits as thy purse can buy.
6.  rich not gaudy; For the apparel oft proclaims the man;
7. Neither a borrower nor a lender be; For loan oft loses both itself and friend,
8. be thou familiar but by no means vulgar.
(a) Don’t be too vocal to disclose your secrets.
(b) Let familiarity not breed con­tempt.
(c)  Don’t be extravagant.
(d) You have favourable environ­ment.
(e)  Money transaction affects friendship.
(f)  Test the men to whom you are going to keep friendship. Once they are tested keep them dose to you for ever.
(g) Listen more speak less.
(h) Be properly dressed, a man is judged by his dress.

Answer:
1. (d), 2. (a), 3. (f), 4. (g), 5. (c), 6. (h), 7. (e), 8. (b).

Writing Activity

A. Suppose your father had given you the similar piece of advice as given in the text. Convey it in the form of a letter to your friend. (50 words)
Answer:
V&P.O, Garauli Khurd,
Distt. Gurgaon,
Haryana 7th July,
2007 Dear Rakesh,
My father has given me the following pieces of advise. Do not form a false opinion about your school and your school fellows. Never form an opinion about anything without giving it a trial. Never anticipate evils. Never find fault with others. Never think that the other people in the world would dance to your tunes. Learn to live and adjust with others. Always settle your differences in an amicable way with others. Never conceive a prejudice against others. Never find fault in others. Never laugh at the poor and the helpless. Don’t treat yourself to be a king’s son to dictate to others. I am sure they will help me face men and matters successfully in life. Rest when we meet.
Yours sincerely,
Gaurav Bharadwaj

B. Write a letter to your younger brother who is going abroad, suggesting him some precepts. (150 words)
Answer:
V&RO Sadhrana
Distt. Gurgaon,
Haryana
8th July, 2007
Dear Har Narain,
It gave me great joy to learn that you are going to Australia for further studies. I wish you the safest journey and career.
It is-my moral duty to instruct you in the rules of behaviour. A man of loose tongue and loose character is hated in every society. You should ever take a step with due thought. Test the people before befriending them. Be firm and refined in the company of your true friends. Never fall a prey to sensual pleasures. Avoid drinking or smoking. Never involve yourself in avoidable quarrels. Listen to others’ counsels patiently but act wisely. Don’t be wasteful. Fashion breeds passion. Simple living and high thinking alone pay in life. Neither borrow nor lend. Don’t forget your culture.
I hope you will act on my instructions.
Your elder brother
Raghubir Singh Vashishtha

Think it over

A. The elders advise youngsters so that they can minimize their mistakes. Think on the importance of their advice.
Answer:
Importance of Elders’ Advice.Youngsters are prone to making many mistakes. Some serious mistakes land them into trouble. The advice of the elders minimizes their mistakes. Elders have longer experience than youngsters. They have seen life from all angles. Their advice serves as a searchlight in the hours of trouble. Their advice most often serves as guidelines. He, who follows the elders’ advice never falters or suffers.

B. One who learns from his own experiences is definitely prudent, but one who learns from other’s experiences is always wiser. How far do you agree?
Answer:
Experience is a great teacher. The experience of many people is always greater than the experience of an individual, ‘Many minds, many thoughts’ is an apt quotation. One who learns from his own experiences is definitely prudent. Individual suffering sometimes turns one’s direction. But the experience of others always guides one to tread the right path. Even the blind can travel smoothly when they are led by men of eyes. Books are a storehouse of experiences of others. One who reads more books becomes more experienced and wiser.

Things to do

Make a list of advice you receive at home, in school and on the playground.

SI. No. Place Advice
1. Home Rise early in the morning.
Touch your parents’ feet.
Do your home work regularly.
2. School Always come in proper uniform.
Obey the rules of the school.
Be regular in your studies.
3. Playground Don’t injure your rival Don’t play foul.
Obey your referee

Polonious Advice Additional Questions (in about 25 words)

Short Answer Questions

Question 1.
Give the importance of Good Manners in life.
Answer:
Good manners are a, key to success for every individual. . They help to win friends and maintain cordial relations among them.
All people like polite, disciplined and kind persons. Good manners , can make everybody happy and satisfied.

Question 2.
Give the role of fashions in one’s life.
Answer:
Fashions refer to a style of clothes, hair do etc. youngsters 5 are more crazy about fashions than others. Students adopt new fashions instantly. Fashions are a means of spending money for the rich. They become a harassment for the poor. Fashions have a great role in one’s life. They are a status symbol. The clothes often proclaim the man.

Question 3.
Give your views about the saying ‘Better alone than in Bad Company.’
Answer:
Bad company is more dangerous than a fierce enemy. It leads slowly and unawares towards wrong path and destruction.
Bad company spoils one’s life and ruins the career. Most of the drug addicts and criminals are products of bad company. A person is known by the company he keeps. Bad company tarnishes one’s image. It is difficult to resist the influence of bad company. Therefore it is better to be alone than in bad company.

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Question 4.
‘Work is Worship’. Justify.
Answer:
We worship God to seek His blessings for success in our life. However, God helps those who help themselves. Idols worship is a futile practice. Great men are the products of only great works.The best way to pay them respect is to emulate them. Sincere work has magical effects. Man. is the maker of his own destiny.

Long Answer Type Questions (in about 50 words)

Question 1.
‘Honesty is the Best Policy’. Elaborate.
Answer:
Honesty is a godly quality. Honesty in thoughts, words and deeds saves one from scruples of mind. A liar has to tell scores of lies to prove his initial lie. Then there is always, the fear of being caught. Nobody trusts a dishonest man. Nobody would like to be associated with him. A liar is always held in contempt. Material things acquired through dishonest means seldom bring happiness. A dishonest man though rich lives in worries, stress and fears, on the other hand an honest man though poor leads a cheerful and contented life. It justifies that honesty is he best policy.

Question 2.
Uses of Tobacco and alcohol are harmful for health. Justify.
Answer:
One of the most widely spread of bad habits is the use of tobacco. It is smoked or chewed by men, women and even by children, almost all over the world. It is extremely difficult to get rid of the habit once it has been formed. Alcohol is taken in almost all cool and cold climates. Thus it is taken by people who live in the mountains. It is not a necessity for those who live in hot climates and plains of India. Alcohol is not necessary in any way to anybody.

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Millions of people are beginning to do without it entirely. It should be avoided by the people in India altogether. Its regular use even in small quantities tends to create uncurable harm in many ways to various organs of the body. It lessens one’s energy, weakens the mental power and affects the liver. It is a slow but sure harbinger of death.

Polonious Advice Summary in English

Polonious asked Laertes to start sailing because the wind was favourable. He advised him to keep certain rules of behaviour in mind. Maintain your character. Den t express your views or act thoughtlessly: Be familiar, firm and refined with your tested friends. Don’t be pleasure-seeking. Prove heroic during quarrels. Hear others’ counsel but act wisely. Don’t wear gaudy clothes. Neither borrow nor lend. Obey your conscience to prove true to everybody.

Polonious Advice Summary in Hindi

पोलोनियस ने लियार्टेज से कहा कि यात्रा प्रारम्भ करे क्योंकि हवा अनुकूल थी। उसने आचरण के कुछ नियमों को मन में रखने के लिए उसे नसीहत दी। अपने चरित्र को बनाए रखना। न अपने विचारों को प्रकट करो और न ही विवेकहीनता से कार्य करो। अपने आजमाए हुए मित्रों के साथ मिल-जुलकर, दृढ़ तथा शुद्ध रहो। व्यसनी मत बनो। झगड़ों के मध्य वीरता का प्रदर्शन करो। दूसरों की सलाह को सुनो परन्तु बुद्धिमत्ता से काम करो। भड़कीले कपड़े मत पहनो, न उधार लो और न उधार दो। अपनी अन्तरात्मा का आदेश मानना और प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सच्चे सिद्ध होना।

Polonious Advice Word-Meanings
MP Board Class 9th English The Rainbow Solutions Chapter 10 Polonious Advice 2
MP Board Class 9th English The Rainbow Solutions Chapter 10 Polonious Advice 3

MP Board Class 9th English Solutions

The Rainbow Textbook Special English Class 9th Solutions

MP Board Class 12th Special Hindi प्रायोजना कार्य

MP Board Class 12th Special Hindi प्रायोजना कार्य

अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के अभाव में नवीन चिन्तन, नवीन विचार, नवीन धारणाएँ आकार नहीं ले पातीं, न कोई सृजन हो पाता है। छात्र इस स्तर तक आते – आते क्रमश: अपनी भाषा के विकास के क्रम में इतना सक्षम हो जाता है कि वह अपने सबसे प्रभावशाली साधन बोली का उपयोग करे। अपने अनुभव एवं अपने विचार व्यक्त करे। क्षेत्रीय बोली की कहावतें, चुटकुलों और लोकगीतों का संग्रह कर उनका परिचय प्राप्त करे। अपने क्षेत्र की पत्र – पत्रिकाओं का पाठ्य – पुस्तकों के अलावा अध्ययन करे।

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(1) भाषा के विविध क्षेत्रों का परिचय भाषा के चार मुख्य क्षेत्र हैं –

  1. सुनना – श्रवण,
  2. बोलना – भाषण,
  3. पढ़ना – पठन,
  4. लिखना – लेखन।

इस विषय का समावेश पाठ्यक्रम में इसलिए किया गया है कि बालक कक्षा 11वीं के स्तर तक भाषा के इन चारों स्तरों से भली – भाँति परिचित हो जाता है। अब उन्हें शिक्षकों द्वारा अपनी इन भाषायी योग्यता के विस्तार की प्रेरणा देना है। वह अपनी इस योग्यता से पाठ्य – पुस्तक के अतिरिक्त भी कुछ पढ़े लिखे और इस क्रिया में रुचि उत्पन्न करने के लिए शिक्षक छात्रों को यह गृह कार्य दें कि वे अपने – अपने क्षेत्र की बोली की कहावतें,चुटकुले और लोकगीतों का संग्रह करें। इसके अतिरिक्त छात्रों को कक्षा में तथा गृह कार्य के रूप में यह लेखन कार्य दिया जाये कि वे अपने क्षेत्र की पत्र – पत्रिकाओं को पढ़ें और उसमें उन्हें जो भी विवरण रोचक लगे उसे अपने शब्दों में लिखें। इससे उनका पठन – कौशल और लेखन – कौशल विकसित होगा।

छात्र के श्रवण कौशल को विकसित करने के लिए वह दूरदर्शन के रोचक कार्यक्रमों को सुने और उसे जो भी कार्यक्रम रुचिकर लगे उसे लिखे।

इस प्रकार छात्रों को पाठ्य – पुस्तक के अतिरिक्त अपनी भाषायी योग्यता विस्तार का अवसर प्राप्त होगा।

मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा वह राज्य है जिसकी सीमाओं को सात प्रदेश घेरे हैं। अत: मध्य प्रदेश में सर्वाधिक क्षेत्रीय भाषा या बोलियाँ अस्तित्व में हैं।

शिक्षक अपने – अपने क्षेत्र की भाषा के लोकगीतों एवं कहावतों का संग्रह छात्रों से करवायें। हमारे प्रदेश में मुख्य रूप से मालवी, निमाड़ी, बुन्देलखण्डी, बघेलखण्डी, छत्तीसगढ़ी, मराठी, गुजराती,मारवाड़ी बोली जाती हैं, अतएव इनके चुटकुले, गीत,कविता,कहावतें एकत्रित करें। उदाहरण के तौर पर मालवा,निमाड़ क्षेत्र का मुख्य समाचार – पत्र है—’नई दुनियाँ’, जो इन्दौर से प्रकाशित होता है। उसमें प्रत्येक बुधवार को इस तरह की रचनाएँ प्रकाशित होती हैं। इस क्षेत्र के छात्र उनका संग्रह कर सकते हैं।

मध्य प्रदेश में चालीस से अधिक जनजातियाँ निवास करती हैं। जिनकी अलग – अलग बोलियाँ हैं। झाबुआ के निवासी भील हैं और इनकी भीली बोली में मुहावरों का अत्यधिक प्रचलन है। हम यहाँ कुछ भीली मुहावरे और उनका हिन्दी अर्थ दे रहे हैं। छात्र अपने अध्यापकों की सहायता से अपने आस – पास बसने वाले आदिवासियों की लोक कथाएँ, कविता, मुहावरे, कहावतें संकलित कर उनका हिन्दी अनुवाद करें।
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सुबह दोपहर, शाम समय की सूचना वाले मुहावरे
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भीली बोली पर मालवी, राजस्थानी, गुजराती भाषाओं का पर्याप्त प्रभाव है।

  • भीली कहावतें
  1. भूखला तो भूखला सूकला खरी – भूखा ही सही पर सुखी तो हूँ।
  2. भील भोला ने चेला – भील भोले होते हैं।
  3. खारड़ा माँ काँटो,भील माँ आटो – भील में बदले की भावना रहती है।
  4. पाली पपोली मनाव राखवू घणो मसकल है – भील को खुशामद से मनाना बहुत मुश्किल है।
  5. ढोली नौ सौरो गाद्यो नी मरे न भीलनुं सौरो रोद्यो नी मरे – ढोली का लड़का गाने से और भील का लड़का रोने से नहीं मरता – वे अभावों से जूझते रहते हैं।
  6. भील भाई ने डगले दीवो – भील भले ही अभावग्रस्त रहे, वह सदा निश्चिन्त रहता हैं।

कुछ बुन्देली बोली की कहावतें

  1. खीर सों सौजं,महेरी को न्यारे।
  2. पराई पातर को बरा बड़ो।
  3. पराये बघार में जिया मगन।
  4. देवी फिरै बिपत की मारी पण्डा कहै करो सहाय।
  5. रौन कुमरई की कुतिया (लोककथन)।
  6. नौनी के नौ मायके, गली – गली सुसरार।
  7. जौन डुकरिया के मारे न्यारे भए बई हिस्सा में परी।
  8. माँगे को मठा मोल पर गौ।
  9. कानी अपने टेण्ट तो निहारत नईया दूसरे की फुली पर पर के दैखत।
  10. कनबेरी देवो।
  11. मर गई किल्ली काजर खों।

(2) पहेलियाँ

1. भीली भाषा – उत्तर
1. गाय वाकड़ी ने बेटी डाकणी – तीर – कमान
2. धवल्या बुकड़ा ने बारेह खाल – प्याज
3. औंधे बाटके ने दही लटके – कपास
4. भूत्या हेलग्या ने पेटा में दाँत – कद्दू
5. छोटी – सी दड़ी,दगड़ – सी लड़ी – सुपारी

2. बुन्देली
1. थोड़ो सो सोनो,घर भर नोनो – दीपक
2. दीवार पर धरो टका,ऊको तुम उठा पाओ न बाप न कका – चन्द्रमा
3. ठाड़े हैं तो ठाड़े हैं, बैठे हैं तो ठाड़े हैं। – सींग

3. निमाड़ी
1. एक बाई असा कि सरकजड नी – दीवाल
2. काली गाय काँटा खाय,पाणी देखे बिचकी जाय – जूता

4. बघेली
अड़ी हयन,खड़ी हयन, लाख मोती जड़ी हयन बाबा करें बाग में दुशाला ओढ़े पड़ी हयन – भुट्टा मक्के का

5. छत्तीसगढ़ी
पेट चिरहा, पीठ कुबरा – कौड़ी

6. मालवी
नानो सो चुन्नू भाय, लम्बी सारी पूँछ नी चाल्या चुन्नू भाया,पकड़ी लाउ – सुई धागा

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(3) चुटकुले

(1) न्यायाधीश – तुम चार साल पूर्व भी एक ओवर कोट चुराने के अपराध में इस अदालत में आ चुके हो।
अपराधी – आप ठीक कहते हैं। लेकिन ओवर कोट इससे अधिक चलता भी कहाँ है।

(2) मजदूर क्या मालिक ! गधे के समान काम कराया और एक रुपया दे रहे हो। कुछ तो न्याय करना चाहिए।
मालिक – न्याय ! हाँ तुम ठीक कहते हो। मुनीम जी,इसका रुपया छीन लो और बाँध कर इसके सामने थोड़ी – सी घास डाल दो।

(3) पिता हमारा लड़का आजकल बहत तरक्की कर रहा है। पड़ौसी – अच्छा,कैसे?
पिता – पुलिस ने उस पर घोषित इनाम की रकम पाँच हजार से बढ़ाकर दस हजार कर दी है।

(4) लोकगीत

निमाड़ी कवाड़ा
बड़ा – बड़ा तो वई गया
ढोली कय कि पार उतार
वई का वई गया ना
उतरई की उतरई लगी
एकली कुतरी कई भुख
न कई कंसुऱ्या ले
फट्या कपड़ा बुड्डा ढोर
इनका दाम लई गया चोर
ऊँट थारो कई वाको
ऊँच कय सब वाको
थारी बइगण म्हारी छाछ
भली बघार म्हारी माय

प्रस्तुति : हरीश दुबे

साथन : निमाड़ी

‘मँहगई
एको राज ओको राज
हुया मँहगा अनाज।
काँ छे घोटालो,
समझ मज आव नी
उनकी वात।
हम, पाँच बरस तक
देखाँ, रामराज की वाट

– अखिलेश जोशी

विश्वास
आस बाँधी ने
दो कदम
चाल्यौ थो
कि
टाँग घैची लिदी !
पाछै
फरीने देख्यो आपणा वारा पे भी
विश्वास नी करनो कदी!!

– जगदीश सरगरा

वात कई कई
बैल गाड़ी की वात कई कयणुं
खेत वाड़ी की वात कई कयणुं
मीठा लागज जुवार का रोटा
नऽ अमाड़ी की वात कई कयणुं
जे खड़ बुनकर वणा व मयसर का
उनी साड़ी की वात कई कयणुं
दुध – घी की कमी नि होणऽ दे
भैस – पाड़ी की वात कई कयणुं
घर क राखज चगन – मगन केतरो
छोटी लाड़ी की वात कई कयणुं
गाँव मऽ उनको बड़ो नाव वजज
माय माता की वात कई कयणुं
वोली न अपणी जगा सब छे ‘हरिश’
पण निमाड़ी की वात कई कयणं

– हरीश दुबे

गजल हुण रे भाया म्हारी वात।
हद की दी मनखाँ की जात॥
जणीं जण्या पारया पोस्या,
अबे लंगावे वर्ण पे घात।
वा,दर – दर की माँगे भीख
जण के जीवे बेटा हात।
लाड्या की होरयां बारी,
मंगता अशो करयो उत्पाद।
मनखाँ ती वंची ने रो
झूठी कोनी या केवात।

– प्रमोद रामावत

फागुण का दोहा
फागुण का पगल्या पड्या,बदल्या सारा रंग।
ढोलक बजी चौपाल पऽ खडक्या खड़ – खड़ चंग।।
सरसों पीली हुई गई,महुवो वारऽ गन्ध।
फूल – फूल पऽ भैरा दौड़,पीणऽख मकरन्द।।
अम्बा भी बौरइ गया, फूल्या घणा पलास।
कोयलिया की कूक की,प्यारी लाग मिठास॥
अबीर गुलाल का साथ मँऽ,रंग की उड़ी फुहार।
हिली – मिली न मनवाँ, आवो यो तेव्हार ॥

– चन्द्रकान्त सेन

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एल्याँग ……. वोल्याँग
एल्यांग गुरुजी
पकावणऽ लग्या
दलिया न दाल
वोल्याँग हुई
शिक्षा – बे – हाल
शेर की सी उनकी नियति
एकाजऽ लेण
जिन्दगी अकेलीज बीती
वोटर सी पूछो
ईज सरकार रखोगा
कि बदलोगा?
बोल्या अगला
को काई भरोसा?
ऊ एतरी धाँधली
चलऽन दे कि नई?

– ललित नारायण उपाध्याय

ऊँचो मोल को है तमारो पसीनो
साथे लइलाँ हिम्मत ने हेली – मेली ताकत,
तमारा आगे माथो टेकी ऊबी रेगा आफत,
काय को डर धरती रो घर अन से भरया चालो।
चालो भरयां चालो, मरदाँ चालो।
घणो ऊँचों मोल को है तमारो पसीनो
आलसी के समझावो के कसो होय है जीनो
स्वास्थ छोड़ी मजदूरी री पूजा करदाँ चालो।
चलो मरदाँ,चालो, चालो मरदाँ चालो।
गाँवों में कबीर पंथ आज भी तो गावे है
परेम से तो मारा भाई दुनिया जीती जावे है
लड़ता – मरता आदमी ने आपण वरजाँ चालो
चालो मरदाँ चालो, चालो मरदाँ चालो
आदिवासी भाई मारा धणो दुःख पायो
नीचे को यो आदमी भी अपणी माँ को जायो
तो छापर वाली टापरी ने पक्की करदाँ
चालो चालो मरदाँ चालो, चालो मरदाँ चालो।

– मोहन अम्बर

सन्दर्भ : होली

कई हँसो बाबूजी !
यूँ दूर ऊबा
नाक सिकोड़ी के
कई हँसो ओ बाबूजी,
हमारे
कीचड़ का अबीर गुलाल से
होली खेलता देखि के।
हमारो तो
योज बड़ो तीवार है
यो
कीचड़ को जरूर है, बाबूजी
पणे
तमारी जग – मग दीवाली से
घणों अच्छो है,
देखिलो
दोल्यो /धुल्यो
दोड़ी – दोड़ी के
खाँकरा की केशूड़ी को
सन्तरिया रंग के
एक – दुसरा का ऊपर ढोलिरिया
मन का बन्द किमाड़
खोलीरिया
आत्मा से धीरणा को
कीचड़ धुइरिया है
काल तक जो प्यासा था
एक दूसरा का खून का
बाबूजी
आज ऊई पाछा
एक हुइरिया है।

– बंशीधर ‘बन्धु’

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अजगर से बड़ा साँपजी
थोडी – घणी लिखी या पाती.
आखी समजो बाप जी।
यो कई हुई रियो इनी दुनियाँ में,
कई करूँ इको जाप जी।
तम भी पड्या हो ईका चक्कर में
घणा ईमानदार था साबजी।
भेती गंगा में जो हाथ नी धोया तो
जनम भर होयगो भोत संतापजी।
तूज अकेली जेरीलो नी हे धरती पे,
बेठ्या हे, अजगर से बड़ा साँपजी।
घणी देर से सोया हो, अब तो जागो,
जगावा को कद से करि रियो हूँ अलापजी।
कई लाया था ने कई ली जावगा,
आता – जाता को मत करो विलापजी।

– हुकुमचन्द मालवीय

खोटो नरियल होली में !
मन में आदर भाव नी रियो, राम नी रियो बोली में,
नगद माल सब जेब हवाले,खोटो नरियल होली में।

स्वारथ आगे सब कईं भूल्या, कितरा कड़वा हुईग्या हो,
फिर भी थोड़ी तो मिठास है पाकी लीम लिम्बोड़ी में।

कई गावाँ कई ढोल बजावाँ, कई स्वागत सत्कार कराँ,
डण्डा – झण्डा साते लइने,नेता निकले टोली में।

कुरसी मिली तो मोटरगाड़ी से,तम नीचे नी उतरो,
नेताजी वी दन भूलीग्या,रेता था जद खोली में।

खून, पसीना, साँते बईग्यो,पेट पीठ से चोंटीग्यो,
सपनो हुईग्यो धान ने दलियो,टाबर रोवे झोली में।

कुल की लाज बहू ने बेटी, भूल्या सगली मरयादा,
बहू की जगे दहेज बठीग्यो, अब दुल्हन की डोली में।

नारी को सम्मान घणों है, भाषण लम्बा – चौड़ा दो,
पण मौका पे चूको नी तम, भावज बणाओ ठिठोली में।

– ओमप्रकाश पंड्या

तम देखी लेजो
बन्द कोठड़ी म
गरम गोदड़ी ओढ़ेल
सोचतो मनख;
कस लिखी सकग
ठण्ड न क कड़ायलां गीत,
फटेल चादरा का दरद
अन टूटेल झोपड़ा की वारता?
कसा कई सकग
फटेल हाथ – पाँव की
बिवई न में
खोयेल नरमई,
अन सियालां म
बगलेलो
डोलची दाजी को दम !
भई,
तम कोशिश करी न
देखी ले जो;
पन असली वात न क
कभी नी कई सकग ॥

– शरद क्षीरसागर

जीवन कँई हे?
जीवन एक मेंकतो
हुवो फूल हे
हवेरा, खिले अरु हाँजे
मुरजई जावे
समजी नी जिने
जीवन की परिभासा
ऊ कदी रोवे
कदी खिलखिलावे
जीवन पाणी को
ऊठतो हुवो बुलबुलो हे,
देखतां – देखतां
जिको नामो निसान मिटी जावे
फिर बी हम
जीवन को अरथ नी जाणां
तपतो हुवो सूरज बी
हाँजे ठण्डो वई जावे।

– कन्हैयालाल गौड़

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(5) लोक कथाएँ

लोक कथाओं में मानव का सुकोमल एवं हृदय को छू जाने वाला इतिहास अंकित है। आदमी ने जो कुछ किया, उसका लेखा – जोखा तो इतिहास में दर्ज है, लेकिन अपने मनोजगत् में उसने जो कुछ भी सोचा, विचारा, रंगीन कल्पनाओं का ताना – बाना बुना, सुन्दर सपने संजोए उन सबका विवरण इन लोक कथाओं में सुरक्षित है।

सदियों से ये लोक कथाएँ मनुष्य का मनोरंजन करती आयी हैं। इनमें कुछ भी असम्भव नहीं होता है। इनमें शेर और साँप भी दोस्ती निभाते,पक्षी सन्देश पहुँचाते और जरूरत पड़ने पर चित्र भी बोलने लगते हैं। इनमें मनुष्य सोचने के साथ ही सात समुद्र पार पहुँच जाता है,क्षण में पृथ्वी की परिक्रमा कर लेता है और किसी द्वीप की असीम सुन्दरी से शादी करता है।

इनकी जो सबसे बड़ी विशेषता है वह यह है कि ये मानवीय तत्वों से भरपूर हैं। इनमें देवी – देवता के माध्यम से भी मानव जीवन की कहानी कही गयी है। चाहे सूर्य हो या ब्रह्मा, सावित्री, वे सब यहाँ मानवीय स्वरूप लेकर और पारिवारिक प्रतीकों के सहारे सामाजिक जीवन को समृद्ध कर अपना योगदान देते हैं।

इन कथाओं में व्यक्ति, स्थान या समय,का कोई महत्त्व नहीं होता। इनकी उँगली पकड़ कर ही आदमी ने सदियों की दूरी को लाँघा, देश – विदेश की यात्राएँ की और सुदूर रेगिस्तान से लगाकर अपने खेत – खलिहान और घर के आँगन के सहारे सारी रात जागकर बिता दी है। इन्होंने निराशा के क्षणों में मनुष्य के मन में अमिट आशा का संचार किया है।

(क) छत्तीसगढ़ी कहानी
नियाय के गोठ

चैतू ठाकुर बिमार हावे। गाँव के सबो झन झोला देख देख के जावत हैं। तीर तिखार के गाँव के कतको सज्जन अऊ बड़े किसान किसनहा झोला देखे बार आता हे। आखर कावर नइ आही ओखर सुझाव सब झन बर गुरतर हावे दूरिहा दूरिया के मन ऐला जानाथे। चाहे कइसनो मुशकुल बात होय ठाकुर ओला दुइच छिन में निबटा देय। वइसे ओखर तीर कोनो बड़े जइदाद, नइहे नहिं सोना चाँदी के खजाना। ओखर तीर सिरिफ दुठन बांही के भरोसा हावे। एक छोटे असन घर बाड़ी थोरकिन खेत अउ गिनती ढोर डंगर। रात दिन मिहनत करना ओखर नियम है।

एक जमाना रिहिस के वोहा गरीब रिहिस। मजदूरी करके अपन पेट ला चलाय। तब वो हा परम संतोषी रिहिस अऊ आजो भी वोला। चिटिक मात्र घमण्ड नहीं हे यही कारण है कि गाँव ‘भर के मन वोला मानये।

आज वो ही हा बिमार हे त पुरा गाँव दखी है। सबो झन भगवान ले पराथना करत है कि ठाकुर जल्दी बने हो जाय।

ठाकुर परिवार में कुल चार पराणी हावे। ठाकुर ओखर घरवाली ओखर बेटा अउ अनाथ भांचा। हावो तो भांचा फेर ठाकुर बोला अपने बेटा ले चिटिक मात्र कमती नहीं समझे। ऊखर असन बेटा बीस बरस के लगभग अउ भांचा मोहन अठरह बरस के लगभग हावे। बड़ मिहनती हे। बलराम कोनो काम बूता म ओखर आगू नई टिकै।

बलराम के सगई होने। ठाकुर सोचे कि मोहन बर भी कहूँ बात चलाये जाय त दूनो के बिहाव एक संग निपट जाही। ठकुराइन के मन मां घलो यही बिचार उठे।

फेर एकोती बलराम बड़ा उलझन अउ उदंड होगे। न माँ के सुनय न बाप के सुनय। कभू भूले भटके खेत के मेड नहीं बूंदय न खलिहान में बैठय। लोगन कहिये कि बलराम ताश पत्ती खेले बर सीखेगे हे। कोनोन कहाय कि ससुराल वाला मन वोला बहिकाल फुसलात हावे। ससुराल वाला मन डरावत हे कि कहूँ मोहन का बलराम के हिस्सा में बाँटा झन ले लय।

चैतू ठाकुर ये सब चाल ल समझत हावे फिर मोहन ल ये पाय कि नइ भाय कि वा हा भांचा हे फेर ये पाय के चाहे कि ओखर माँ बाप गरगे हे, बल्कि ठाकुर ओखर मिहनत देख खुश होवय। खेती बारी के संगे वो हा घर के चेता सुरता रखथे। ठाकुर ठकुरइन की कतेक सेवा कर थे।

ये बात ठीक है कि बलराम ऊखर बेटा है फेर कतेक मुरुख। काम देखता बोला जर आ जाये। भेजबे उत्तर दिशा त वोहा जाये दक्षिण दिशा। वोहा ठीक से अपने चारों खेत ला छलख नई जानय कालि के दिन वोला खेत दे दिए जाय त का होही?

ठाकुर बीमार हावे। बलराम ला ओखर ससुरार वाला मन बलवा ले हय। अभी तक ले लहुट के नई आये हे। खबर भिजवाय गय हय, फिर ससुराल ले कोनो मनख नइ आये हे।

संझा के बेरा बलराम अपना दलदल के संग ठाकुर के आगु में अइस। राम राम के बाद ससुरार पक्ष के जन विहिस कि ठाकुर अब ये थोरे दिन के मेहमान हावस ऐखर सेती तोला अपन संपत्ति ला बलराम के नाम देना चाही।

ये सनके ठाकर ला कोनो अचंभा नइ होइस। अइसन बात के खियाल ओला आग ले रिहिस। बोलिन – “तुम्हार बात तो ठीक फिर बलराम अभी लइका है। काम धाम के सूझ अभी बने अइसन नइ हे।”

अतका सुनके रिहिस बलराम भड़क गये—बापू के त बुध सठिया गेहे। जब देख बेत मोला लइका समझते अऊ ये सब मोहन के सेती होवत हे। मांहा घलो ओखरे पक्ष ले थे। फेर बापू आज त तोला फइसला करेच बर पड़ ही।

ठाकुरहा जल्दी ले गाँव के पाँच पंच बुलबइस फिर ठकुराइन ले पुछिस मोहन कहाँ है? ठकुरइन बतइस – वो हा मंझनिया के जंगल चल दे हावे। एक ठन बइला बीमार हावे ले तेखर बर जड़ी बुटी लाने बर गये है।

ठाकुर हां पंच मन ला बलराम के मंशा बतलइस। सबला बड़ अचंभा होइस फेर बलराम के संग ओखर ससुरारी मन ला देख के चुप रहिगे। ठाकुर बाते बात में बलराम लातियारिस बेटा थोरकिन खलिहान में जाके देख आतो धान मिजाइ के कुछ उडल हे या नइ। बलराम भागत गइस अउ आके बतइस कि खलिहान म दूनों नौकर बइठे बीड़ी पियत हावे।

ठाकुर फेर विहिस – ऊखर ले पूछ नइ लेतेस बेटा के दौरी कतेक बेर म चल ही। बलराम हा आज्ञाकारी बेटा अइसन फेर गइस अऊ आके खबर दइस कि अभीत सबो बाइला नइ आये हे। ठाकुर पूछिस – “आखिर कतका बइला कमती पड़त हे?”

बलराम गल्ती कबलिस के बाप में तो गिनती करे बार भुला गये। अभीच जाके पता करथ हंव। बलराम लहुटके बड़ा घमण्ड करके बतइस दुबइला कमती है। अऊ तब ठाकुर हा पूछिस – “उहां अभी कुल कतका बइला हे।”
अऊ लोगन देखिन कि बलराम फेर बइका के गिनती करे बर भागिस। ओतकेच बार मोहन आगे। वे हा सब झन के पांव परिस अऊ चले ल धरिस। तब ठाकुर बोलिस – बेटा थोरकिन पता लगा के आ धान वे भिंजइ होही के नई।

तभेच बलराम आके बइला के संख्या बताय लगिस। सब चुप रहिन। थोरिक देर बाद मोहन आके बतइस कि कंगलू अउ मंगलू इनो मिल के पझ डार डाले हावे। ढेर लगा चुके है। दुबइला के कमी रिहिस त बहू झगरू देके गेहे। रात के खां पी के दौरी शुरू हो जाही। फिकर के कोनो बात नइहे।

ऐखर बाद कोनो कुर्छ नई बोलिन। ठाकुर पारी पारी से सबके मुंह ला देखे लगिस। अऊ आखिर में बलराम ले बोलिस कुछ समझ में आइस बेटा, तोर अऊ मोहन में का फरक हे? तें घंकभु ये समझे के कोशिश नई करेस के भुइयां ह मेहनत चाहथे। खेती – बारी करना हंसी – ठट्ठा नोहे। बड़ सूझ के काम हे। मोहन तो ले के छोटे हे फेर कतेक लायक हे अऊ तेहा कतेक नालयक पहिले मोर विचार रिहिस कि तुम दूनो ला संपत्ति के आधा – आधा हिस्सा दे दवं,फेर अब एक अ रास्त ये रही कि तोता ईमानदार किसान बने बर पड़ही जइसे ते मोहन ला देखत हस। तबहि तेहां आधा हिस्सा के हकदार होबे।

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ठाकुर के फइसला सबके समझ में आ गइस। आज ये फेर साबित होंगे कि ठाकुर हमेशा नियाय के ही बात कहिये। खड़ी बोली में अनुवाद न्याय की बात चैतू ठाकुर बीमार है। गाँव के सब लोग उन्हें देखकर जा चुके हैं। आस – पास के गाँवों से भी अनेक प्रतिष्ठित किसान उन्हें देखने आ रहे हैं। आखिर क्यों न हो? उनका व्यवहार सबके लिए इतना नम्र रहा है कि दूर – दूर तक लोग उन्हें जान गए हैं चाहे कैसी भी उलझी समस्या क्यों न हो,चैतू ठाकुर अपनी सूझ – बूझ से उसे आनन – फानन में सुलझा देते हैं। वैसे उनके पास लम्बी चौड़ी जायदाद नहीं हैं,न ही सोने – चाँदी के अनगिनत सिक्के हैं। उन्हें तो केवल अपनी बाँहों का भरोसा है। एक छोटा – सा घर है। बाड़ी है,कुछ खेत हैं और गिनती के ढोर – डांगर हैं। रात – दिन मेहनत करना ही उनका नियम है।

एक समय था कि वे गरीब थे। मजदूरी करके अपना पेट भरते थे। अब भी वे परम संतोषी हैं और आज भी घमण्ड उन्हें छु तक नहीं गया। यही कारण है कि गाँव के लोग उन्हें मानते हैं।

आज वे बीमार हैं, तो सारा गाँव दु:खी है। ईश्वर से सब के सब यही प्रार्थना कर रहे हैं कि वे जल्दी अच्छे हो जायें।

उनके परिवार में कुल चार प्राणी हैं। वे,उनकी पत्नी,उनका बेटा और अनाथ भांजा। है तो भांजा,पर वे उसे अपने बेटे से जरा भी कम नहीं मानते। उनका अपना बेटा बलराम लगभग बीस साल का है। भांजे का नाम है मोहन, यही कोई सत्रह – अठारह वर्ष का होगा। बड़ा मेहनती है। बलराम तो उसके किसी काम में भी नहीं ठहर सकता।

बलराम की सगाई हो चुकी है। ठाकुर सोचते हैं कि मोहन के लिए भी कहीं बात हो जाय तो दोनों का विवाह एक साथ ही निपटा दें। ठकुराइन के मन में भी यही बात है।

परन्तु बलराम इधर बड़ा मनमौजी हो गया है। न माँ की बात मानता है,न बाप की सुनता है। खेत पर कभी भूलकर भी नहीं जाता है और न ही खड़ी भर खलिहान में बैठता है। लोग कहते हैं कि बलराम आजकल ताश खेलने लगा है। कुछ लोगों का यह भी ख्याल है कि उसके ससुराल वाले उसे बहका रहे हैं। ससुराल वालों को शायद यह डर है कि कहीं मोहन बलराम का हिस्सा न बॅटा ले।

चैतू ठाकुर यह सब समझते हैं। वे मोहन को केवल इसलिए नहीं चाहते कि वह उनका भांजा है. उसके माँ – बाप मर गए हैं,बल्कि ठाकुर उसकी मेहनत देखकर खुश हैं। खेती – बारी के साथ – साथ वह घर का भी कितना ध्यान रखता है। उन दोनों की कितनी सेवा करता है।

ठीक है कि बलराम उनका बेटा है किन्तु कितना मूर्ख है। काम के नाम से ही ज्वर आ जाता है। भेजो उत्तर दिशा की ओर तो दक्षिण चला जाता है। उसे तो ठीक से अपने चार खेतों का भी ज्ञान नहीं है और कल यदि उसे सारे खेत दे दिये जाएँ तो क्या होगा?

ठाकुर बीमार है। बलराम को उसकी ससुराल वालों ने बुलवा लिया है। अभी तक वह लौटकर नहीं आया। सूचना भिजवाई गई थी,परन्तु उसकी ससुराल से भी कोई नहीं आया। दूसरे दिन सुबह बलराम आ गया। ठाकुर ने सुना कि उसके साथ कुछ लोग भी आए हैं, पर अभी तक कोई सामने नहीं आया।

शाम के समय बलराम अपने दल के साथ ठाकुर के सामने आया। राम – राम के बाद ससुराल पक्ष के एक आदमी ने कहा कि ठाकुर अब तो थोड़े ही दिन के मेहमान हैं, इसलिए उन्हें अपनी सम्पत्ति बलराम के नाम लिख देनी चाहिए।

यह सुनकर ठाकुर को कोई आश्चर्य नहीं हुआ। इस बात की कल्पना उन्हें पहले से ही थी। बोले – “बात तो ठीक है, किन्तु बलराम अभी बच्चा है। काम – धाम की सूझ अभी उसे नहीं इतना सुनना था कि बलराम उबल पड़ा – “बापू की तो बुद्धि सठिया गई है। जब देखो तब मुझे बच्चाही समझते हैं और यह सब उस मोहन के कारण ही है। माँ भी उसका ही पक्ष लेती है.लेकिन आज तो बाबू को फैसला करना ही पड़ेगा।”

ठाकुर ने शीघ्र ही गाँव के पंच बुलवा लिए। फिर ठकुराइन से पूछा “मोहन कहाँ है?” ठकुराइन बोली – “वह तो दोपहर से ही जंगल चला गया है एक बैल बीमार है,उसी के लिए कुछ जड़ी – बूटी चाहिए थी।”

ठाकुर ने पंचों से बलराम की इच्छा कह सुनाई। सबको बड़ा अचम्भा हुआ,परन्तु बलराम के साथ उसकी ससुराल वालों को देखकर चुप रह गए। ठाकुर ने बात ही बात में बलराम से कहा – “बेटे जरा खलिहान जाकर देख तो आओ धान मिजाई का कुछ डौल है या नहीं।”

बलराम भागकर गया और आकर बताया कि खलिहान में दो नौकर बैठे बीड़ी पी रहे हैं। . ठाकुर ने कहा, “उनसे पूछ नहीं लिया बेटा कि कितनी देर बाद दौरी चलेगी?”

बलराम एक आज्ञाकारी पुत्र की तरह फिर गया और जाकर उसने सूचना दी कि अभी तो पूरे बैल ही नहीं आये।

ठाकुर ने फिर पूछा – “आखिर कितने बैल कम पड़ते हैं?” बलराम ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए कहा – “बापू मैं तो गिनती करना ही भूल गया। अभी जाकर पता लगाता

बलराम ने लौटकर गर्व के साथ बताया कि दो बैल कम पड़ते हैं। तभी ठाकुर ने पूछ लिया – “वहाँ अभी कुल जमा बैल कितने हैं?”

और लोगों ने देखा कि बलराम बैलों की गिनती करने फिर खलिहान की ओर भागा जा रहा है।

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तभी मोहन आ गया। उसने सबके पाँव छुए और चलने लगा। ठाकुर बोले – “बेटे,जरा पता तो लगाओ कि आज धान की मिजाई हो सकेगी या नहीं।”

तभी बलराम आकर बैलों की संख्या बताने लगा। सब चुप रहे। जरा देर बाद मोहन ने आकर बताया कि कंगलू और मंगलू दोनों मिलकर पैर डाल चुके हैं, ढेर लगा चुके हैं, दो बैलों की कमी थी सो अभी झगरू दे गया है। रात को खा – पीकर दौरी शुरू हो जायेगी। चिन्ता की कोई बात नहीं।

इसके बाद कोई कुछ नहीं बोला। ठाकुर बारी – बारी से सबका चेहरा देखने लगे और अन्त में बलराम से बोले कुछ समझ में आया बेटे,तुममें और मोहन में क्या फर्क है? तूने कभी यह समझने की कोशिश ही नहीं कि जमीन मेहनत माँगती है। खेती बारी करना कोई है। बड़ी सूझबूझ का काम है। मोहन तुझसे छोटा है, पर कितना लायक है और तू कितना मागता है। खाता बारा करना काइहसा – ठट्रानहा नालायक है। पहले मेरा विचार था कि तुम दोनों को मैं अपनी सम्पत्ति का आधा – आधा हिस्सा दे दूँ, किन्तु अब एक शर्त यह भी रहेगी कि तुझे ईमानदार किसान बनना होगा, जिस प्रकार तू मोहन को देख रहा है, तभी तू आधे हिस्से का हकदार होगा।

ठाकुर का फैसला सबकी समझ में आ चुका था। आज यह बात पूरी तरह से सिद्ध हो गयी कि ठाकुर हमेशा न्याय की ही बात कहते हैं।।

(ख) निमाड़ी लोक कथा
झूठी मंजरी

एक थी चिड़ई,एक थो कबूतर,एक थो कुत्तो और एक थी मांजरी। सबइ न विचार करयो कि अपुण खीर बणावा।

कोई लायो लक्कड़,कोई लायो पाणी,कोई लायो शक्कर,कोई लायो दूध उन खीर तैयार हुई गई।

कहयो चलो सब खाई लेवां,मांजरी न कहयो – म्हारा तो डोला आई गयाज। उन उ डोला न पर पट्टी बांधी न सोई गई।

सबन अपणे अपणा वाटड की खीर खाई न बचेल का ढाकी न धरी दियो।

सब अपणा, अपणा काम न पर चली गया, तंवज मांजरी उठी उन सबका वाय की खीर खाई न डोला न पर पट्टी बांधी न सोई गई। सांझ ख जंव सबई काम पर सी आया तो देख्यो खीर को बासरण खाली थो।।

एक एक सी पूछयो क्यों भाई तुम न खीर खाई ज। . सबई न न मना करी दियो। मांजरी से पूछयो तो वा बोलो हऊँ काई जाणु म्हारो तो डोला आयाज। हऊ दिन भर सी पट्टी बांधी न पड़ोज। सब न तै करयो कि एक सूखा कुआ पर झूलो बांध्यो सब ओपर बारी – बारी सी बढी न कहे कि मन खीर होय तो झूलो टूटी जाये। जेन खीर खाई हायेगा ओकी बखत झूला टूटी जायेगा। पहल चिड़ी बठी बोली – “ची,ची,मन खीर खाई हो तो झूलो टूटी जाय,झूलो नो टूटयो।”

फिर कबूतर बठ्यो बोल्यो गुटरू गूं – गुटर गूं, मन खीर खाई होय तो झूलो टूटी जाय। झूलो ना टूटयो।

फिरी कुतरो बठ्यो बोल्यो – भों – भों, मन खीर खाई होय तो झूलो टूटी जाय। झूलो ना टूटयो।

फिर मांजरी बठी बोली – म्यांउ म्यांउ मन खीर खाई होय तो झूलो टूटी जाय।

झूलो तो टूटी गयो अन मांजरी सूखा कूआ म पड़ी गई। खेल खतम पैसा हजम।

खड़ी बोली में अनुवाद

झूठी बिल्ली

एक थी चिड़िया, एक था कबूतर, एक था कुत्ता और एक थी बिल्ली। सबने मिलकर विचार किया कि अपनी खीर बनायें।
कोई लाया लकड़ी,कोई लाया पानी,कोई लाया शक्कर,कोई लाया दूध और खीर बनकर तैयार हो गयी।

कहा, चलो सब खा लें।
बिल्ली ने कहा – “मेरी तो आँखें आई हैं” और वह आँखों पर पट्टी बाँध कर सो गई। सबने अपने – अपने हिस्से की खीर खाई और शेष बची हुई खीर को शाम के लिए ढाँक कर रख दिया। सब अपने – अपने काम पर चले गये। तब,बिल्ली उठी और सबके हिस्से की खीर खाकर, फिर आँखों पर पट्टी बाँधकर सो गई। शाम को जब सब काम पर से आये,तो देखा,खीर का बरतन खाली था। हर एक से पूछा – “क्यों भाई तुमने खीर खायी है?” सबने इनकार किया।

बिल्ली से पूछा,वह भी बोली – “मैं क्या जानू? मेरी आँखें आयी हैं,सुबह से पट्टी बाँधे पड़ी हूँ।” तब सबने विचार किया कि एक सूखे कुएँ पर कच्चे धागे से झूला बाँधा जाये। सब बारी – बारी से उस पर बैठे और कहें – “मैंने खीर खायी हो तो झूला टूट जाये।” जिसने खीर खायी होगी,उसकी बार झूला टूट जायेगा।

पहले चिड़िया बैठी – “ची – ची, मैंने खीर खायी हो, तो झूला टूट जाय।”

झूला नहीं टूटा। फिर कबूतर बैठा, बोला – “गुटर गूं – गुटर – गूं, मैंने खीर खायी हो, तो झूला टूट जाय।”

झूला नहीं टूटा। फिर कुत्ता बैठा, बोला – “भौं – भौं,मैंने खीर खायी हो, तो झूला टूट जाय।” झूला नहीं टूटा। फिर बिल्ली बैठी, बोली – “म्याऊँम्याऊँ,मैंने खीर खायी हो तो झूला टूट जाय।”

झूला था सो टूट गया और बिल्ली थी सो सूखे कुएँ में गिर गयी। खेल खतम—पैसा हजम।

(ग) मालवी कहानी
पीपल – तुलसी

कणी गाम माय सासू अर बऊ रेती थी। एक दिन सासू ने बऊ तो कियो के मू तीरथ कारवा सारू जरूरी हूँ,तुम अपणे याँ जो दूध दही होवे है ऊ बेची – बेची के रुपया भेलाकर लीयो। अतरो कइके सासू चलीगी।

चैत – बैसाख को माइनो आयो तो बऊ सगलो दूध – दई लई जई के पीपल अर तुलसी म सीची देती अर फेरी खाली बासन लइके घरे मेली देती। सास तीरथ करी के पीछो घरे अई तो बीने बऊती दूध अर दई का रुप्या मांग्या। बऊ ने क्यो के बई मूं तो सगलो दूध अर दई पीपल तुलसी म सींचती री हूँ,म्हारा कन रुप्या नी है। पण सासू ने कियो कई बी होवे जो – वी हो म्हारे तो रुप्या देणा पड़ेगा। तो बऊ पीपल अर तुलसी का कने जइके बैठीगी, अर वीनती बोलो के म्हारी सासू म्हार ती दूध दही का पइसा मागे है। पीपल – तुलसी ने कियो के बेटी – हम्हारा कन रुप्या – पइसा काँ है? इ भाटा कोंकरिया जरूर पड़िया है इनके भलाई – उठई के लई जा। बऊ सगला कोंकरिया भाटा उठई के घेर लई अर अई घरे लइके अपण कोठा माय मेली दिया। दूसरा दन सास ने फेरी रुप्या मांग्या तो बऊ ने अपणो कोठो खोल्यो। बऊ ने देख्यो कि सगला भले ही ले जाओ। सास कंकड़ – पत्थर लेकर खुशी – खुशी घर आयी और उसने कंकड़ – पत्थर लाकर अपने कमरे में रख दिये। दूसरे दिन जब कमरा खोला गया तो सास क्या देखती है कि सारा कमरा साँप और बिच्छुओं से भरा पड़ा है।

सास ने बहू से पूछा कि बहू, यह क्या बात है? तू जो कंकड़ – पत्थर उठाकर लायी थी। उनके तो हीरे – मोती बन गये और मैं जो कंकड़ – पत्थर उठाकर लायी। उनके साँप – बिच्छू बन गये? बहू ने सहज भाव से उत्तर दिया कि सास जी मैंने पीपल – तुलसी को शुद्ध मन से सींचा था, इसलिए कंकड़ – पत्थर के हीरे – मोती बन गये और आपने लालचवश ऐसा किया था अतः आपके लाये हुए कंकड़ – पत्थरों के साँप – बिच्छू बन गये।

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(6) दूरदर्शन और आकाशवाणी के कार्यक्रम दूरदर्शन

पर आजकल हर समय कोई न कोई कार्यक्रम दिखाया जाता है तथापि प्रमुख व लोकप्रिय कार्यक्रम इस प्रकार हैं –

सुबह सवेरे,समाचार,रंगोली,कृष्ण कथाएँ,मैट्रो समाचार, जय गणेश, चित्रहार, सांई बाबा, खिचड़ी,टॉम एण्ड जैरी,कलश,शांति, कृषि दर्शन,पोकेमॉन,विरासत,कुमकुम,शाका लाका बूम बूम, वाइल्ड डिस्कवरी, करम चन्द, कसौटी जिन्दगी की, कहानी घर – घर की, डिजनी जादू, सारे गा मा, हनुमान, सोनपरी,बूगी बूगी,ग्रेट इंडियन लामटा चेलेंज एवं अंताक्षरी। दूरदर्शन के कार्यक्रमों को देखकर छात्रों को उनका विवरण लिखने की प्रेरणा लिखित भाषा की शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य छात्रों को अपने भाव, विचार तथा अनुभवों को लिखित रूप में प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने योग्य बनाना है –

  1. छात्रों को सुन्दर, परिमार्जित एवं स्पष्टं लेख लिखने की प्रेरणा देना।
  2. छात्रों के शब्द – कोषं को सक्रिय रूप देना।
  3. छात्रों को विराम चिह्नों का उचित प्रयोग सिखाना और अपने भावों को अनुच्छेदों में सजाने का अभ्यास कराना।
  4. छात्रों की अवलोकन (निरीक्षण) शक्ति, कल्पना शक्ति और तर्क शक्ति का विकास करना।
  5. छात्रों की विचारधारा में परिपक्वता लाना।

दूरदर्शन एक ऐसा माध्यम है जिससे छात्रों की श्रवणेन्द्रिय के साथ दृश्येन्द्रियाँ भी क्रियाशील रहती हैं। छात्र दूरदर्शन में वार्ता सुनने के साथ कार्यक्रम में भाग लेने वालों को देख सकते हैं और वे उनके हाव – भाव के साथ बोलना, अभिनय करना,भाषण देना सीख कर स्वरों के उचित उतार – चढ़ाव के द्वारा बात को शीघ्र ग्रहण कर सकते हैं। वे दूरदर्शन के कार्यक्रमों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं। क्योंकि दूरदर्शन ज्ञानवर्धन और मनोरंजन का सबल माध्यम है। वे सब कुछ समझकर अन्त में उस कार्यक्रम के समग्र प्रभाव की चर्चा करें।

शिक्षक छात्रों को दूरदर्शन के किसी विशिष्ट कार्यक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने को कहें। इससे वे लेखन – कौशल में तो पारंगत होंगे ही साथ ही उन्हें विवेचना और समीक्षा करने का भी अवसर मिलेगा। कार्यक्रम के गुण – दोष दोनों पर प्रकाश डालने के लिए छात्रों को स्वतन्त्र अवसर प्रदान करना होगा। इससे उनकी प्रतिभा के विकास के साथ चिन्तन,मनन एवं स्वाध्याय की प्रवृत्ति का पल्लवन तथा उन्नयन भी होगा।

(7) हिन्दी साहित्य का स्वतन्त्र पठन

मनुष्य का सबसे बड़ा अलंकार उसकी वाणी है। वाणी जितनी शुद्ध और परिष्कृत होती है, व्यक्ति उतना ही सुसंस्कृत समझा जाता है। सम्पूर्ण मानव समाज अपने भावों और विचारों को दो रूपों में व्यक्त करता है – मौखिक और लिखित। इन दोनों रूपों में भाषा उसका प्रमुख साधन है। यहाँ मौखिक अभिव्यक्ति सम्बन्धी कुछ महत्त्वपूर्ण प्रकारों पर विचार करने हैं।

(i) टिप्पणियाँ
किसी सुने गए अथवा पढ़े गए भाषण, वार्तालाप, पत्र, लेख, कविता, ग्रंथ आदि देखे गए दृश्य तथा घटना पर अपना मत मौखिक अथवा लिखित रूप में प्रकट करना ही टिप्पणी कही जाती है। अकार की दृष्टि से टिप्पणी की यद्यपि कोई निश्चित सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती, किन्तु संक्षिप्त टिप्पणी अच्छी समझी जाती है।

मोटे तौर पर टिप्पणियाँ तीन प्रकार की हो सकती-

(अ) कार्यालयीय टिप्पणी,
(ब) सम्पादकीय टिप्पणी,
(स) सामान्य टिप्प्णी।

(ii) प्रेरणाएँ
साहित्य में प्रेरणा से आशय उन रचनाओं अथवा कृतियों से है जो पाठक को जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर उनका मार्गदर्शन करती हैं। इसके अन्तर्गत मुख्यतः उन कहानियों आदि को शामिल किया जाता है जो इस उद्देश्य को लेकर लिखी जाती हैं अथवा इस उद्देश्य को पूरा करती हैं। परन्तु इन कहानियों आदि के विषय में यह महत्त्वपूर्ण है कि ये इतनी बड़ी न हों कि पाठक पढ़ते – पढ़ते कहानी के उद्देश्य से भटक जाय। एक ही बैठक में पूरी पढ़ी जाने वाली कहानियाँ ही इसके लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।

(8) हस्तलिखित पत्रिका तैयार करना

छात्र आपस में मिलकर हस्तलिखित पत्रिका तैयार कर सकते हैं जिसमें सर्वप्रथम सभी संकलित अथवा स्वयं के लिखे लेख,कहानियों,कविताओं के अतिरिक्त चुटकुले आदि भी हो सकते हैं,को सूचीबद्ध किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इस सूची में उसके लेखक अथवा उसके संकलनकर्ता का नाम दिया जा सकता है।।

इसके बाद सम्पादक की ओर से अपने साथियों को धन्यवाद ज्ञापन के साथ पाठकों को इस पत्रिका से परिचित कराते हुए इसके लिखित अथवा संकलित लेखों आदि पर प्रकाश डाल सकते हैं। तत्पश्चात् इन लेखों आदि को बड़े रोचक रूप में समग्रता से प्रस्तुत किया जा सकता ध्यान रखने लायक बात है कि कोई भी लेख बहुत छोटा व बहुत ही बड़ा न हो जाय,जो पत्रिका में रोचकता समाप्त करे।

(9) क्षेत्रीय पत्र – पत्रिकाएँ

मालवा अंचल

  • इन्दौर – नई दुनिया,इन्दौर समाचार, नवभारत, दैनिक भास्कर, स्वदेश, भावताव, जागरण।
  • उज्जैन – विक्रम दर्शन, अवन्तिका, अग्नि बाण, भास्कर, प्रजादूत, जलती मशाल।
  • रतलाम – जनवृत,जनमत टाइम्स, प्रसारण, हमदेश।
  • नीमच – नई विधा। देवास – देवास दर्पण, देवास दूत।
  • मंदसौर – दशपुर दर्शन, कीर्तिमान, ध्वज।
  • शाजापुर – नन्दनवन।

बघेलखण्ड अंचल

  • रीवा – बांधवीय समाचार, आलोक, जागरण।
  • सतना – जवान भारत,सतना समाचार।
  • शहडोल – विंध्यवाणी, भारती समय,जनबोध।

बुन्देलखण्ड अंचल

  • कटनी – महाकौशल केशरी, भारती, जनमेजय।
  • सागर – न्यू राकेट टाइम्स, आचरण, राही, जन – जन की पुकार।
  • टीकमगढ़ – ओरछा टाइम्स।
  • छतरपुर – क्रान्ति कृष्ण,प्रचण्ड ज्वाला।
  • जबलपुर – नव भारत, नवीन दुनिया, युगधर्म, दैनिक भास्कर, नर्मदा ज्योति, देशबन्धु, लोकसेवा।

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निमाड़ अंचल

  • खण्डवा – विध्यांचल,लाजवाब।
  • बुरहानपुर – वीर सन्तरी।
  • बड़वानी – निमाड़ एक्सप्रेस।

छत्तीसगढ़ अंचल

  • बिलासपुर – लोकस्वर, नवभारत, भास्कर।
  • दुर्ग – ज्योति जनता, छत्तीसगढ़ टाइम्स।
  • रायपुर – देशबन्धु, नवभारत, भास्कर, स्वदेश।

MP Board Class 12th Hindi Solutions

Little Girls Wiser than Men Question Answer Class 9 English The Rainbow Chapter 3 MP Board Solutions

Class 9th English The Rainbow Chapter 3 Little Girls Wiser than Men Question Answers

Little Girls Wiser than Men Class 9 Questions and Answers

Little Girls Wiser than Men Textual Exercises

Little Girls Wiser than Men Vocabulary

A. Match the words given under ‘A’ with the meanings given under ‘B’
A- B
1. stream – (a) noisy ill-tempered woman
2. catch – (b) understand
3. heads – (c) crowd of people or things all
4. A shrew – (d) moving in one direction barren land
5. fallow – (e) the front side of a coin,which often has the head of a king, queen, president etc on it.
Answer:
1. (c), 2. (b), .3. (e), 4. (a), 5. (d).

B. Use the following words in sentences pf your own. watch, look, except, folly, stains.
Answer:
God is watching you. I have no watch to see the time. Why is he looking at you? .
All the girls except Rajni are present.
It is a folly to backbite others.
Remove the stains from your hands.

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C. Find single words in the lesson which have the meanings given below.
1. a way, course, or passage for liquids.
2. a Christian holy day in March or April when Christians remember the death of Christ and his return to life.
3. only just
4. not obeying a parent, teacher, set of rules etc.
5. close fitting nylon garments covering the foot and leg, worn v especially by women.
Answer:

  1. Channel
  2. Easter
  3. soon
  4. fancy
  5. stocking.

D. If the word ‘’NEVER’ occurs before a pause or before a word beginning with a consonant (as in ‘never better’) then it is pronounced with no/r/ sound. If the immediately following word begins with a vowel, then /r/ is pronounced.
Now say-
better off, here it is, four or five, dark cloud Easter.
Answer:
For self-attempt.

Comprehension
A. Answer each of the following questions in about 25 words.
Who is younger, Malasha or Akoulya? How do you know?
Why did Akoulya run after Malasha?
Why did the girls dig the channel?
What made men laugh at themselves?
Answer:
1. The two girls met in a lane between two farm houses.The dirty water of the farmyards had formed a large puddle there. They were playing there :

2. Malasha is younger than Akoulya. The following lines give us the clue. the smaller one was going to step into the puddle, shoes and all, when the elder checked her ‘Don’t go in so, Malasha, said she.

3. Akoulya and Malasha got near each other. Malasha started splashing water. Akoulya asked her not to do so. Just then, Malasha plumped down her foot. The water splashed right on Akoulya’s frock, eyes and nose. Akoulya saw the stains on her frock. She got angry and desired to strike her. Therefore, Akoulya ran after Malasha.

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4. ‘ Akoulya dug the channel through which the water could run out into the street. Malasha joined her. They dug the channel so that they could run each side of the little stream. They could also float a chip of wood in it.

5. The two mothers were quarrelling with each other. They had also come to blows. TK&men were also beginning to fight. Just then, they saw the water flowing trom the girls’ channel towards them. The men looked at the little girls. They were playing happily together. They had forgotten everything. It made men laugh at themselves.

B. Answer each of the following questions in about 50 words.

Question 1.
Do you agree with the author that girls are wiser than men? Elaborate.
Answer:
There are two girls in this lesson. Akoulya is older than Malasha. Malasha had splashed Akoulya’s frock. Akoulya ran after Malasha to strike her. Just then their mothers and male members of their family started quarrelling. However, the girls forgot everything. They started playing happily together again. The men bore feelings of enmity towards one another. It shows that girls are wiser than men. I fully agree with the author.

Question 2.
What made men forget their quarrel and calm down?
Answer:
The two girls forgot about their quarrel. They made a channel which ran into the street. They stood on opposite sides. Akoulya floated a chip of wood in the channel. She asked Malasha to catch it. The little girls ran straight into the group of men. The old Woman saw them. She asked the, men to be ashamed of themselves. The men felt ashamed on looking at the girls. They also forgot their quarrels, laughed at themselves and calmed down.

Little Girls Wiser than Men Grammar
A. Study the following sentences.

  • They had just come from church when they met.
  • She had hardly said this, when Malasha plumped down her foot so that the water splashed right on to Akouyla’s frock.

The underlined clauses are in past perfect.
Now read the following examples and underline the past perfect clauses in the given sentences.
1. The meeting had ended when we arrived.
2. He had just gone out when his friend called.
3. Long after, he confessed that he had made a fool of himself.
4. When I had read the book I was much wiser.
5. Mary, who had disappeared on her own business, soon rejoined them.
Answer:
The following are the past perfect clauses in the given sentences.

  1. The meeting had ended.
  2. He had just gone out.
  3. that he had made a fool of himself.
  4. When I had read the book.
  5. who had disappeared on her own business.

Speaking Activity

A. Here are the dialogues from the lesson. Divide yourself in a group of five each. Assuming yourselves Malasha, Akoulya, ‘ Malasha’s mother, Akoulya’s mother and the old lady. Now repeat ‘ the related dialogues, in proper sequence.
Your mother will scold you. I will take off my shoes and stocking and you take off yours.

  1. It is deep, Akoulya, I’am afraid !
  2. Come, don’t be frightened.
  3. Mind, don’t splash. Walk carefully.
  4. You naughty dirty girl.
  5. What are you beating my girl for?
  6. Is it right to behave so?
  7. Are you not ashamed of yourselves?

Answer:
Akoulya : Malasha, your mother will scold you. I will take 1 off my shoes and stockings and you take off yours.
Malasha : It’s deep, Akoulya, I’am afraid !
Akoulya : Malasha, come, don’t be frigtened.
Akoulya : Malasha, mind, don’t spla i. Walk carefully
Akoulya’s Mother : Akoulya, you naughty, dirty girl. Y
Malasha’s Mother : Akoulya’s mother, what are you beating my ; girl for?
Akoulya’s old Grandmother : To the gathering of men and women. y Is it right to behave so?
The old woman : Men, are you not ashamed of yourselves?

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B. You are passing with your friend through a forest. You come across a stream. Discuss how you will cross it.
Answer:
Suppose I am passing with my friend through a forest and we come across a stream. It is very difficult to cross a stream without ascertaining its depth. I shall take a long sturdy pole to fathom the depth of water. I shall wade through shallow water and swim where the water is deeper. I shall journey hand-in-hand with my friend. We shall cross the stream with each other’s help.

Writing Activity

A. Write a letter to your friend describing the memorable event you and your grandparents shared- (50 words)
Answer:
610 Dichaon Kalan,
New Delhi-110043 17th July, 2007.
Dear Sham Lai,
Yesterday, I happened to travel to Mumbai along with my grand-parents. This journey was the most interesting and fastest means of transport for me. Everything below us looked like toys. Before landing the air hostess made an announcement. She declared me the winner of fifty thousand rupees for the day’s flight. It removed many problems of my grandparents. It was a memorable event for me. Rest when we meet.

Yours sincerely,
Devinder Kumar

B. Write on ‘Innocence is a bliss’. (150 words)
Answer:
Childhood is a great blessing on earth. It never returns in the life of a man again. It is a period of innocence. There is no care, worry, responsibility, stress or tension. The innocent person does not show any scowl on his forehead. He may be scolded, snubbed or rebuked but he never loses his mental balance or cool. The parents love the innocent children very much. All their mischiefs and mistakes are overlooked. He deserves pity and is is pardoned even for his gross faults. His fun and frolic are appreciated He earns strong affection. The innocent are treated like princes. All their needs are fulfilled. Seeds of his character are sown by his parents. An innocent person has a bundle of good qualities at his disposal. He is tolerant, for giving, forgetful, generous, cooperative and helpful He never picks up quarrels because he is not cunning. Innocence is really a bliss.

Think it over

A. Children play in small groups. They are emotionally attached to one another yet they sometimes quarrel. Try to remember an incident-in which you were involved.
Answer:
We are a group of seven children from our street. One day four of us were playing at cards. We were bosom friends and were emotionally attached to one another. All of a sudden, Rohit my rival blamed me for cheating in vain. I lost my cool and nick-named him. He got irritated and furious. He started abusing me. I caught him by the collar and he gave me a blow. The other players mediated. .We became normal and started playing afresh with the same zeal.

B. many a time the policy of ‘forget and forgive’ helps us. Think.
Answer:
Many persons in the modern age are slaves of ego. They pick up a quarrel at the slightest provocation. A liftman hurled a passenger out of the lift for not saying ‘please’. His action was condemned and he was fined. In the same way many small’ matters assume the shape of quarrels. If we lose temper on small issues, our fists would never be idle. The gutters of the city would also run with blood all day. We should follow Gandhi’s policy of nonviolence. It would avert all tension and mental stress. Many a time the policy of ‘forget and forgive’ helps us.

Things to do

There are five situations given in the chart below. Each situation calls for an action by the people. Write in the blank space what actually happens and what should happen. One is done for you.
Answer:

Situation What generally happens What Should happen
1. There is a road accident at a lonely place. A person is badly injured. He is lying on the road. People avoid him and go away People should help the injured person.
2. The Children of a colony want to play a badminton match. But they do not have money to buy shuttlecocks. Nobody helps them with money. People should help the children with money buy shattlecocks.
3.  A little bey works in a tea shop. He wants to study. He is compelled to work due to poverty. He begs for help. Nobody undertakes to bear his expenditure. People should collect;
money and pay foi
his education.
4. A Small Puppy has fallen into a shallow pit. It is unable to climb out. It howls in anxiety. People ignore the puppy and mind their own business. People should lend a
helping hand for the
small pappy to climb
out.
5.  You have not completed your homework. You have just started doing it. Your friends call you for a friendly match. you leave your home work and accompany your friends.

 

You should complete
your home work first
or after returning
from the friendly
match

Little Girls Wiser than Men Additional Questions

Short Answer Questions (in about 25 words)

Question 1.
What do you understand by co-education? Give its brief history ?
Answer:
‘Co-Education’ means ‘education of boys and girls learning together in the same school or college at the saihe time.’ It has recently become popular in India. However, it is not a new thing for us. In the good days, when ‘Ashrarm’ were the seats of learning, co¬education was in practice. In the Hindu scriptures, old records and legends we find a number of examples which show that co-education was all over the country. The practice continued till the coming of Muslims in India.

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Question 2.
Why are poor girls in rural areas unwilling to go to school?
Answer:
Most of the girls belonging to poor families are unwilling to go to schools. When asked their parents would say that they want their daughters to be educated. They stay at home because their parents believe that the kind of education on offer is hot fruitful. Moreover, the risks are too great and real. Girls are sexually harassed sometimes by their fellow students or teachers or by strangers on the way. Poverty also plays its part.

Question 3.
Why should girls be taught?
Answer:
Education is the birth right of all. Girls are at par with boys in mind and physique. They no longer desire to remain dependent on their parents, brothers or even in-laws. They want to live free life from birth to death. Education is a means of earning one’s livelihood and living a meaningful life. An uneducated girl is a burden on parents, in-laws and the nation. Therefore, girls should also be educated. An educated girl means an educated family. Some girls are showing better result than the boys.

Question 4.
What is the status of women in the present day India?
Answer:
The position of Indian women is far better in present day India when compared with the women of some other countries. They have voting right. They are guaranteed equality with men. They can seek high education. The test which determines the sex of the foetus has been banned. The Sati Pratha and Child marriage do not exist now. Their literary rate is increasing. They can seek employment I and fight elections. Posts have been reserved for them. They can seek justice if they are harassed.

Long-Answer Type Questions (in about 50 words)

Question 1.
What is dowry system? What are its evils?
Answer:
Dowry refers to gifts and presents offered by parents on the eve of marriage to their daughters. Dowry custom has been a curse for India. The birth of girls is said to be a degree of money against the parents. The dowry rates are fixed for boys of different categories doctors, engineers, lecturers, businessman, executives etc. Merits of the girl have nothing to do in the settlement of marriage. Giving and receiving of dowry is a social evil and a gross crime. However, it is widely practised almost in every state and community.

Every eligible boy is for sale to the highest bidder. His parents dictate the terms and demand dowry. Such demands put the poor and helpless father of the girl in a tight corner. He may, borrow or steal but he has to spend over his daughter’s marriage. Sometimes constant demands are repeatedly made even after marriage. The bride is tortured and even burnt alive. This evil practice can be checked only through laws and proper education.

Summary in English

It was an early Easter. Water ran in streams down the village street. The dirty water ran through the farmyards. It had formed a large puddle. A small and a little bigger girl in new frocks met in a lane between two homesteads. The little one wore a blue frock and the other wore a yellow print. Soon they took to splashing about in the water. Akoulya (the older girl) checked Malasha from stepping into the puddle with shoes and stockings.

Both the girls removed their shoes and stockings. Both got near each other. Malasha plumped down her foot into the water. It spoiled Akoulya’s frock. Getting angry, she ran after Malasha to strike her. Malasha tried to run home. Just then Akoulya’s mother, happend to be passing. Akoulya told her about Malasha’s spoiling her frock. The mother struck Malasha hard. Malasha started howling loudly. Her mother came out. She scolded Akoulya’s mother. The two mothers had an angry quarrel and came to blows. They ignored the advice of Akoulya’s old grandmother.

Just then Akoulya wiped the mud off her frock. She returned to the puddle. She made a channel. The water of the puddle ran out in the street. Malasha joined her and helped her in the digging of the channel. The two girls ran towards each other. Then they joined the crowd. All the men and women felt ashamed. They left quarrelling and fighting over the girls playing happily together.

Summary in Hindi

ईस्टर का समय नजदीक था। गाँव की गलियों में पानी बह रहा था। गंदा पानी खेतों में बह रहा था। उससे बड़ा पोखर बन गया था। नई फिराक पहने हुए एक छोटी लड़की और दूसरी थोड़ी-सी बड़ी लड़की, दो घरों के बीच में एक गली में मिलीं। छोटी लड़की ने नीली और दूसरी ने पीले प्रिंट की फिराक पहन रखी थी। थोड़ी देर बाद वे एक दूसरे पर पानी के छींटे फेंकने लगीं। अकूलिया (बड़ी लड़की) ने मलाशा को जूते और जुराबें पहने हुए पोखर में घुसने से मना किया।दोनों लड़कियों ने अपने जूते और मोजे उतारे। दोनों एक-दूसरी के नजदीक आ गईं। मलाशा ने अपना पैर पानी में पटका। इससे अकूलिया की फिराक गंदी हो गई। नाराज होकर, मलाशा के ऊपर प्रहार करने के लिए वह उसके पीछे दौड़ी। मलाशा

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ने भागकर अपने घर पहुँचने की कोशिश की। तभी अकूलिया की माँ वहाँ से गुजर रही थी। अकूलिया ने उसे बताया कि मलाशा ने उसकी फिराक गंदी कर दी है। माँ ने मलाशा के ऊपर जोर का प्रहार किया। मलाशा जोर से रोने लगी। उसकी मम्मी बाहर आ गई। उसने अकूलिया की मम्मी को बुरा-भला कहा। दोनों मम्मियों के बीच क्रोधपूर्ण झगड़ा होने लगा और हाथापाई हो गई। उन्होंने अकूलिया की दादी की नसीहत की भी अवेहलना कर दी।

तभी अकूलिया ने अपनी फिराक की मिट्टी झाड़ दी। वह दोबारा पोखर पर चली गई। उसने एक जलमार्ग बनाया।.पोखर का पानी बाहर निकलकर गली में आ गया। मलाशा उसके साथ जा मिली और उसने जलमार्ग खोदने में उसकी सहायता की। दोनों लड़कियाँ एक-दूसरे की तरफ दौड़ने लगीं। फिर वे भीड़ में शामिल हो गईं। सभी मनुष्य तथा महिलाएँ शर्मिंदा हो गई। खुशी-खुशी, साथ-साथ खेलती हुई अधिक बुद्धिमान लड़कियों की बाबत उन्होंने लड़ना और झगड़ना छोड़ दिया। .

Word-Meanings

MP Board Class 9th English The Rainbow Solutions Chapter 3 Little Girls Wiser than Men 1

MP Board Class 9th English Solutions

The Rainbow Textbook Special English Class 9th Solutions

Bharat Our Land Question Answer Class 9 English The Rainbow Workbook Chapter 1 MP Board Solutions

Class 9th English The Rainbow Workbook Chapter 1 Bharat Our Land Question Answers

Bharat Our Land Class 9 Questions and Answers

Bharat Our Land Vocabulary and Pronunciation

A. New words are formed by joining two words. They are called compound words.
Examples : Policeman, washer man
Now, write some compound words beginning with ‘any—’ Example : anywhere .
(a) anyhow
(b) anytime
(c) anything,
(d) anyone
(e) anybody.

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B. The poet has used words like ‘Himvant’ and ‘Ganga’, make a list of other words which are not English words in the poem.
(a) Upanishads
(b) Buddha
(c) Bharat
(d) Brahma
(e) Aryan.

C. Notice the difference in the pronunciation of these two words- ‘cease’ and ‘sees’.
Now, pronounce the following words :
MP Board Class 9th English The Rainbow Workbook Solutions Chapter 1 Bharat Our Land 1
Answer:
For self attempt.

D. It is not describable to confuse/s/ and /f/ because many words are kept separate only by this difference. You must take special care with these phonemes (sounds). The replacement of /s/ by /f/ gives a bad effect to one’s speech.
Now ,listen,repeat and then write the following words in your notebook
so – show
sock – shock
ass – ash
mess – mesh
sort – short
sigh – shy
see – she
same – shame
Answer:
For self attempt.

Listening Skill

A. Listen to the poem ‘Sun’ by the same poet Subramaniya Bharati.
Answer:
See workbook page 2.

B. After listening to the poem recollect and answer the following questions (keep your book closed).

  • What’s the poem about ?
    The poem is about the Almighty God.
  • What are the last two lines of the poem ?
    You foster, you kill.
    You give water, you blow the wind, all good to you.
    If you find any difficulty in answering the above questions, read the poem again.

C. Listen to the lines of the poem ‘Bharat our Land’ and attention to the rhythm :

  • The mighty Himavant is ours.
  • The generous Ganga is ours.
  • The sacred Upanishads are ours.
  • The sunny golden land is ours.

Now say :

  • What are the major objects highlighted in the lines ?
    Himalayas, Ganga, Upanishads, Land. ;
  • Make a list of some words you recall from the poem.
    The Ganga is a holy river. There are four Upanishads. Great Himalayas lie in the north.

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Speaking Skill

A. In the poem ‘Bharat our Land’ the poet praises our country. Getting inspiration from the same, let’s praise the following:

  • ‘Madhya Pradesh-our state’
  • ‘My sweet home’

You may use the following words/phrases : big/small, beautiful,
unique, specialities, memories, other things about it ‘
Answer:
Do yourself.

B. Life is like a journey. We meet many people in our life. They leave different impressions on us. Speak a few sentences:

  • about a close friend
  • about someone whom you met only once

Answer:
Do yourself.

Reading Skill

Read the poem carefully and answer the questions given below it.

See Workbook page 9.

Question 1.
What has our motherland given us ?
Answer:
Our motherland has given us many things such as the mighty Himalayas, the generous Ganga, sunny golden land etc.

Question 2.
Fill in the blanks using the word., from the poem.
The poem is about our ………………
Which saw father and mother ……………. and ……………..
A large number of ……………. lived their ………. lives and
Our mother …………… their words and …………………
Answer:
(a) country
(b) live, thrive
(c) ancestors, hoary, died
(d) lisped, grew in wisdom.

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Question 3.
Find out words from the poem which mean the following.
(i) grey or white with age/very old ………………..
(ii) absorb ……………….
(iii) speech defect ………………..
(iv) bright/shining ………………….
Answer:
(i) hoary
(ii) suck
(iii) lisped
(iv) lustrous.

Writing Skill

A. Write a short composition, using the adjectives you have learned in the poem praising your city or place.
Answer:
I live in Indore, in Madhya Pradesh. It is the place where I was born and grew. It is a historical place. It has a great history. Many great men were born. They made this land known in the world. I love my city and feel proud.

B. Write the poem in prose form you have read in the text.
Begin like this : (150 words)
The Himalayas are our mountains. There is no equal of it on the earth.
Answer:
It is the source of many rivers such as Ganga, Brahmaputra etc. It is our protector. It protects us from many outer enemies. It also saves us from many unfavourable natural disasters. It brings cloud and rain. It makes the cool breeze blow, rivers and showers flow. We feel proud for having such a grand mountain symbolising our crown. It is the storehouse of a lot of herbs and other resources.

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